विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA ISSN 2229-547X VIDEHA 'विदेह' ३१३ म अंक ०१ जनवरी २०२१ (वर्ष १४ मास १५७ अंक ३१३) ऐ अंकमे अछि:- १. गजेन्द्र ठाकुर- संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल सेहो] [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] [FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI ALSO] २. गद्य २.१.योगेन्द्र पाठक वियोगी- नरक विजय (धारावाहिक नाटक- ६अम खेप) २.२. रबीन्द्र नारायण मिश्र- धारावाहिक उपन्यास-लजकोटर (१३म खेप) २.३.जगदीश प्रसाद मण्डल- आमक गाछी- धारावाहिक उपन्यास (६अम खेप) २.४.नन्द विलास राय-पत्नीक फरमाइस २.५.जगदीशप्रसाद मण्डल-दुष्टपन २.६.मुन्नाजी-बीहनि कथा-अदौ सँ... २.७.ज्ञानवर्द्धन कंठ- बोंगहा मिठाइ २.८.ज्ञानवर्द्धन कंठ-कुसियारक गाड़ी मैथिली वेब पत्रकारिता विशेषांक २.९.आशीष अनचिन्हार- मैथिली वेब-पत्रकारिताक इतिहास २.१०.उमेश मण्डल- मैथिलीमे ई-पत्रकारिता २.११.गजेन्द्र ठाकुर- भाषा आ प्रौद्योगिकी (संगणक,छायांकन,कुँजी पटल/ टंकणक तकनीक) २.१२. जितेन्द्र झा- रिपोर्ट २.१३.नवेन्दु कुमार झा- रिपोर्ट २.१४.श्याम सुन्दर शशि- कतारक मैथिल भेड़ा चरवाह २.१५.डॉ कैलाश कुमार मिश्र- यायावरी २.१६.डॉ. गंगेश गुंजन- रिपोर्ट २.१७.हितेन्द्र गुप्ता- आब नहि खुलत नवका शराबक दोकान २.१८.सुभाष साह- लन्दनमे नेपाल मेला २००८ (लन्दनसँ श्री सुभाष शाहक रिपोर्ट) २.१९.सुशांत झा- रिपोर्ट २.२०.मनोज झा मुक्ति- निष्कर्षविहीन सम्मेलन ! २.२१.सुमित आनन्द- भारत-नेपालक मिथिला हस्तशिल्प कलामे असीम सम्भावना २.२२.उमेश कुमार महतो- बहादुरगंज स’ रिपोर्ट २.२३.गजेन्द्र ठाकुर- मैथिली सी.डी. एल्बम ३. पद्य ३.१.जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’- २ टा बाल गजल ३.२.आनन्द कुमार झा- दुर्दशावस्था ३.३.आनन्द कुमार झा- एकटा नव कहानी गढबाक अछि ३.४.प्रदीप पुष्प- २ टा रुबाइ ३.५.रमन कुमार झा- केबार(पराती) ३.६.रमन कुमार झा- हमरा आंगन ३.७.रमन कुमार झा- टपटप नोर चुबैय ३.८.रमन कुमार झा- मनभावन मइया मोरी ३.९.अशोक दुलार- परतारब फेर ४.स्त्री कोना (सम्पादक- इरा मल्लिक) ४.१.शशि महेंद्र- स्त्री ४.२. तनुजा दत्ता- नारीक अंनत रूप ४.३.चंदना दत्त- माँ ४.४.चंदना दत्त- फागु ४.५.दीपा झा- मुढ़ी -कच्छ ४.६.दीपा झा-दादी परी (नेन्ना -भुटका लेल) ४.७.आभा झा- कनियें ४.८.आभा झा- जोड़- घटाव ४.९.प्रियम्वदा तारा झा- अजगुत ४.१०.प्रियम्वदा तारा झा-परंपरा मैथिली वेब पत्रकारिता विशेषांक ४.११.मीना झा- मैथिल समाज ऑफ़ यु. के. केर तेसर वार्षिक समारोहसमाचार: ९.४.२०११ ४.१२.पूनम मण्डल- टैगोर साहित्य पुरस्कार २०११ Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Books/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाउ। VIDEHA ARCHIVE विदेह पेटार View Videha googlegroups (since July 2008) view Videha Facebook Official Group (since January 2008)- for announcements १. गजेन्द्र ठाकुर ........................................................................................................................ ........................................................................................................................ [संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री] [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल सेहो] [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] [FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI ALSO] यू. पी. एस. सी. (मेन्स) २०२० ऑप्शनल: मैथिली साहित्य विषयक टेस्ट सीरीज यू.पी.एस.सी. क प्रिलिमिनरी परीक्षा २०२० सम्पन्न भऽ गेल अछि। जे परीक्षार्थी एहि परीक्षामे उत्तीर्ण करताह आ जँ मेन्समे हुनकर ऑप्शनल विषय मैथिली साहित्य हेतन्हि तँ ओ एहि टेस्ट-सीरीजमे सम्मिलित भऽ सकैत छथि। टेस्ट सीरीजक प्रारम्भ प्रिलिम्सक रिजल्टक तत्काल बाद होयत। टेस्ट-सीरीजक उत्तर विद्यार्थी स्कैन कऽ editorial.staff.videha@gmail.com पर पठा सकैत छथि, जँ मेलसँ पठेबामे असोकर्ज होइन्हि तँ ओ हमर ह्वाट्सएप नम्बर 9560960721 पर सेहो प्रश्नोत्तर पठा सकैत छथि। संगमे ओ अपन प्रिलिम्सक एडमिट कार्डक स्कैन कएल कॉपी सेहो वेरीफिकेशन लेल पठाबथि। परीक्षामे सभ प्रश्नक उत्तर नहि देमय पड़ैत छैक मुदा जँ टेस्ट सीरीजमे विद्यार्थी सभ प्रश्नक उत्तर देताह तँ हुनका लेल श्रेयस्कर रहतन्हि। विदेहक सभ स्कीम जेकाँ ईहो पूर्णतः निःशुल्क अछि।- गजेन्द्र ठाकुर संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सर्विसेज (मुख्य) परीक्षा, २०२० मैथिली (ऐच्छिक) लेल टेस्ट सीरीज/ प्रश्न-पत्र- १ आ २ TEST SERIES-1 TEST SERIES-2 [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल/ FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI] NTA_UGC_NET_MAITHILI_01 NTA_UGC_NET_MAITHILI_02 NTA_UGC_NET_MAITHILI_03 (श्री शम्भु कुमार सिंह द्वारा संकलित) Videha e-Learning MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) UPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS BPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. (ऐच्छिक) मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. (अनिवार्य) मैथिली प्रश्नपत्र- बी.पी.एस.सी.(ऐच्छिक) मैथिलीक वर्तनी १ भाषापाक २ मैथिलीक वर्तनीमे पर्याप्त विविधता अछि। मुदा प्रश्नपत्र देखला उत्तर एकर वर्तनी इग्नू BMAF001 सँ प्रेरित बुझाइत अछि, से एकर एकरा एक उखड़ाहामे उनटा-पुनटा दियौ, ततबे धरि पर्याप्त अछि। यू.पी.एस.सी. क मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेल सेहो ई पर्याप्त अछि, से जे विद्यार्थी मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेने छथि से एकर एकटा आर फास्ट-रीडिंग दोसर-उखड़ाहामे करथि| IGNOU इग्नू BMAF-001 ........................................................................................................................ MAITHILI (OPTIONAL) TOPIC 1 [Place of Maithili in Indo-European Language Family/ Origin and development of Maithili language (Sanskrit, Prakrit, Avhatt, Maithili) भारोपीय भाषा परिवार मध्य मैथिलीक स्थान/ मैथिली भाषाक उद्भव ओ विकास (संस्कृत, प्राकृत, अवहट्ट, मैथिली)] TOPIC 2 (Criticism- Different Literary Forms in Modern Era/ test of critical ability of the candidates) TOPIC 3 (ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददास सिलेबसमे छथि आ रसमय कवि चतुर चतुरभुज विद्यापति कालीन कवि छथि। एतय समीक्षा शृंखलाक प्रारम्भ करबासँ पूर्व चारू गोटेक शब्दावली नव शब्दक पर्याय संग देल जा रहल अछि। नव आ पुरान शब्दावलीक ज्ञानसँ ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददासक प्रश्नोत्तरमे धार आओत, संगहि शब्दकोष बढ़लासँ खाँटी मैथिलीमे प्रश्नोत्तर लिखबामे धाख आस्ते-आस्ते खतम होयत, लेखनीमे प्रवाह आयत आ सुच्चा भावक अभिव्यक्ति भय सकत।) TOPIC 4 (बद्रीनाथ झा शब्दावली आ मिथिलाक कृषि-मत्स्य शब्दावली) TOPIC 5 (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोरिक गाथामे समाज ओ संस्कृति) TOPIC 6 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- विद्यापति) TOPIC 7 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- पद्य समीक्षा- बानगी) TOPIC 8 (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोक गाथा नृत्य नाटक संगीत) TOPIC 9 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- यात्री) TOPIC 10 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली रामायण) TOPIC 11 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली उपन्यास) TOPIC 12 (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- शब्द विचार) TOPIC 13 (तिरहुता लिपिक उद्भव ओ विकास) TOPIC 14 (आधुनिक नाटकमे चित्रित निर्धनताक समस्या- शम्भु कुमार सिंह)् TOPIC 15 (स्वातंत्र्योत्तर मैथिली कथामे सामाजिक समरसता- अरुण कुमार सिंह) TOPIC 16 (यू. पी.एस.सी. मैथिली प्रथम पत्रक परीक्षार्थी हेतु उपयोगी संकलन, मैथिलीक प्रमुख उपभाषाक क्षेत्र आ ओकर प्रमुख विशेषता, मैथिली साहित्यक आदिकाल, मैथिली साहित्यक काल-निर्धारण- शम्भु कुमार सिंह) TOPIC 17 (मैथिली आ दोसर पुबरिया भाषाक बीचमे सम्बन्ध (बांग्ला, असमिया आ ओड़िया) [यू.पी.एस.सी. सिलेबस, पत्र-१, भाग-“ए”, क्रम-५]) TOPIC 18 [मैथिली आ हिन्दी/ बांग्ला/ भोजपुरी/ मगही/ संथाली- बिहार लोक सेवा आयोग (बी.पी.एस.सी.) केर सिविल सेवा परीक्षाक मैथिली (ऐच्छिक) विषय लेल] ........................................................................................................................ GENERAL STUDIES (PRELIMINARY & MAINS) GS (Pre) TOPIC 1 GS (Mains) NCERT-ENVIRONMENT CLASS XI-XII NCERT PDF I-XII TN BOARD PDF I-XII ALL INDIA RADIO ENGLISH NEWS ALL INDIA RADIO NEWS ARCHIVE ALL INDIA RADIO TALKS AND CURRENT AFFAIRS RAJYA SABHA TV NEWS DISCUSSIONS ........................................................................................................................ OTHER OPTIONALS ........................................................................................................................ IGNOU eGYANKOSH (अनुवर्तते) -गजेन्द्र ठाकुर २. गद्य २.१.योगेन्द्र पाठक वियोगी- नरक विजय (धारावाहिक नाटक- ६अम खेप) २.२. रबीन्द्र नारायण मिश्र- धारावाहिक उपन्यास-लजकोटर (१३म खेप) २.३.जगदीश प्रसाद मण्डल- आमक गाछी- धारावाहिक उपन्यास (६अम खेप) २.४.नन्द विलास राय-पत्नीक फरमाइस २.५.जगदीशप्रसाद मण्डल-दुष्टपन २.६.मुन्नाजी-बीहनि कथा-अदौ सँ... २.७.ज्ञानवर्द्धन कंठ- बोंगहा मिठाइ २.८.ज्ञानवर्द्धन कंठ-कुसियारक गाड़ी मैथिली वेब पत्रकारिता विशेषांक २.९.आशीष अनचिन्हार- मैथिली वेब-पत्रकारिताक इतिहास २.१०.उमेश मण्डल- मैथिलीमे ई-पत्रकारिता २.११.गजेन्द्र ठाकुर- भाषा आ प्रौद्योगिकी (संगणक,छायांकन,कुँजी पटल/ टंकणक तकनीक) २.१२. जितेन्द्र झा- रिपोर्ट २.१३.नवेन्दु कुमार झा- रिपोर्ट २.१४.श्याम सुन्दर शशि- कतारक मैथिल भेड़ा चरवाह २.१५.डॉ कैलाश कुमार मिश्र- यायावरी २.१६.डॉ. गंगेश गुंजन- रिपोर्ट २.१७.हितेन्द्र गुप्ता- आब नहि खुलत नवका शराबक दोकान २.१८.सुभाष साह- लन्दनमे नेपाल मेला २००८ (लन्दनसँ श्री सुभाष शाहक रिपोर्ट) २.१९.सुशांत झा- रिपोर्ट २.२०.मनोज झा मुक्ति- निष्कर्षविहीन सम्मेलन ! २.२१.सुमित आनन्द- भारत-नेपालक मिथिला हस्तशिल्प कलामे असीम सम्भावना २.२२.उमेश कुमार महतो- बहादुरगंज स’ रिपोर्ट २.२३.गजेन्द्र ठाकुर- मैथिली सी.डी. एल्बम योगेन्द्र पाठक वियोगी (सम्पर्क- 9831037532) नरक विजय (एहि नाटकक एक संस्करण हमर पोथी ‘त्रिनाटकम्’ मे छपि गेल अछि। ओहि मे दृश्यक संख्या बहुत बेसी रहला सँ किछु निर्देशक लोकनि एकर मंचन पर प्रश्न चिन्ह लगौलनि। ओहि आलोचना कें ध्यान मे रखैत एकरा परिवर्धित कएल गेल। एकर बंगला अनुवाद श्री नवीन चौधरी केलनि अछि।- नाटककार) पात्र परिचय मानव पात्र — रमेश, सुरेश, अनुपम अमित (वैज्ञानिक) पौराणिक पात्र — ब्रह्मा, विष्णु, महेश, नारद, यमराज, चित्रगुप्त, दू यमदूत अंक 2 दृश्य 1 मंच सज्जा मे कोनो विशेष अन्तर नहि। एकटा टेबुल आ किछु कुर्सी मंच पर राखल। डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड पर लिखल अछि ‘यमलोक’। यमराज आसन पर बैसल छथि। बगल मे चित्रगुप्त अपन खाता बही पसारने ओहि मे डूबल छथि। प्रकाश पहिने यमराज पर पड़ैत अछि तखन चित्रगुप्त पर। फेर प्रवेश पथ पर, जतए दूनू यमदूत बाहुबली मृतात्मा रमेश आ सुरेश कें लेने आबि रहल छथि। हुनका दूनूक मंचक बीच पहुँचला पर पूरा मंच आलोकित होइत अछि। दूनूक हाथ मे ब्रीफकेस छनि, से मंच पर रखैत छथि। यमराज चित्रगुप्त महराज, इएह दूनू ओ विशिष्ट बाहुबली मृतात्मा छथि रमेश आ सुरेश। हिनकर कर्मक लेखा जोखा देखि लेल जाओ। रमेश (नम्र स्वरें) धृष्टता माफ हो महाराज तऽ निवेदन करी। यदि ब्रीफकेस खोलबाक अनुमति भेटैत तऽ अपने सबहक काज आसान भऽ जाइत। यमराज अहाँ दूनू लेल जखन सब नियम कानून बदलले गेल तखन इहो कइये लिअऽ। (दूनू नीचा झुकि कए अपन ब्रीफकेस खोलि स्मार्टफोन बहार करैत छथि, ओहि मे लीखल विवरणक फाइल निकालि ओकरा चित्रगुप्त कें दैत) सुरेश एहि मे अपने कें हमरा दूनूक सबटा पापक रेकॉर्ड भेटि जाएत। हमरा दूनू द्वारा कएल गेल हत्या, अपहरण, बलात्कार, व्यभिचार आदिक विस्तृत विवरण तारीख, साल आ समय सहित लिखल अछि। रमेश ई विवरण हमरा कम्प्यूटर मे सेहो भेटि जाएत। इंटरनेट आब पूरा ब्रह्माण्ड मे उपलब्ध छैक। यदि एतए कम्प्यूटर उपलब्ध हो तs क्षणे मे सब सूचना हाजिर भs जाएत। चित्रगुप्त इंटरनेट आ कम्प्यूटर की होइत छैक ? छोड़ू ई मुरखाहा गपसप। (स्मार्टफोनक विवरण कें देखैत आ अपना खाता सँ मिलबैत) धर्मराज, विवरण तऽ ठीके नीक सँ लीखल अछि। यमराज ठीक छैक, एखन तऽ हिनका दूनू कें जल्दी अपन स्थान पठेबाक अछि तकर इन्तजाम होअए। चित्रगुप्त हिनकर कर्मक फल देखि तऽ लगैत अछि जे छियासियो नरक कुण्ड कम पड़ि जाएत। हिनका दूनू कें सब नरक कुण्डक बास भोगनाइ छनि तें कतहु सँ शुरू कऽ सकैत छी। यमराज तऽ पहिने अग्निकुण्डे मे जाथु। रमेश अनुमति हो तऽ एकटा तुच्छ निवेदन करी धर्मराज। यमराज आब की ? डराइत छी की ? सुरेश नहि धर्मराज, उखरि मे मुह देलाक बाद मुसराक कोन डर ? यमलोक मे आबि पापी कें यातनाक कोन डर ? डर होइतै तऽ लोक पाप करबे नहि करैत। हमर निवेदन दोसर अछि। रमेश हमरा दूनू कें स्नान करबाक अनुमति देल जाओ महाराज वैवस्वत। यमराज (तमसाइत) पापी नरकभोगी मृतात्मा कें स्नानक कोन काज ? ई कोन नव टाटक ठाढ़ केलहुँ अहाँ सब ? सुरेश धर्मराज, अपनेक न्याय तीनू लोक मे ख्यात अछि। बुझले होएत जे फाँसिओक सजा भेटल कैदी कें अन्तिम इच्छा पूछल जाइत छैक आ पूरा कएल जाइत छैक। रमेश ओतबे नहि, ध्यान दियौक देव जे छागड़ो कें बलि देबा सँ पहिने स्नान करा देल जाइत छैक। हमहूँ सब जखन विभिन्न नरक कुण्ड मे हजारो सालक सजा भोगए जा रहल छी तऽ ओहि सँ पहिने एक बेर नीक जकाँ स्नान कऽ लेब उचिते ने हेतैक न्यायराज। चित्रगुप्त धर्मराज, बहस मे हिनका दूनू सँ जीतब कठिन अछि। अपन चमत्कार तऽ ई सब मर्त्यलोके सँ देखा रहल छथि। तें हमर विचार जे हिनका लेल स्नानक व्यवस्था कइये देल जाए। सुरेश (चित्रगुप्तक पैर पकड़ैत) धन्य छी प्रभो। बस एकटा आर विनय जे स्नान खुला मे नहि बन्द कक्ष मे करबाक व्यवस्था हो आ ब्रीफकेस लऽ जेबाक अनुमति सेहो भेटए। यमराज बन्द कक्षक स्नानघर तऽ मात्र हमरेटा अछि, ताहि मे मृतात्माक प्रवेश सम्भव नहि। (दूनू यमदूत कें सम्बोधित करैत) जाउ कोनटा बला इनार कें घेरेबाक व्यवस्था करू। रमेश धर्मराज, नियम मे मामूली ढिलाइ सँ समयक अमूल्य बचत होइत। जतेक काल मे इनार घेरल जाएत ओतेक काल मे तऽ स्नान कऽ कए हम सब किछु घण्टा अग्निकुण्ड मे बासो कऽ लेब। एहि दृष्टिकोण सँ देखल जाओ सूर्यपुत्र। चित्रगुप्त हमरा लगैत अछि नियम मे ढील देबहि पड़त। जतेक जल्दी हिनका दूनू कें एतए सँ हटाएब ओतेक जल्दी दोसर काज शुरू कऽ सकब। ई सब जतेक काल एतए रहताह, किछु ने किछु टाटक ठाढ़ करितहिं रहताह। यमराज (दूनू यमदूत कें सम्बोधित करैत) बेस, चित्रगुप्त महराजक इच्छानुसार हिनका दूनू कें हमरा स्नानघर मे लेने जइयनु। कड़ा पहरा राखब। चिन्हिते छिएनि केहन मायावी छथि। कतहु एम्हर ओम्हर बहरा जेताह तऽ पूरा यमलोक मे हड़कम्प मचि जाएत। दूनू दूत जे आज्ञा देव। (दूनूक ब्रीफकेसक संग दूनू कें स्नानघर दिस लऽ जाइत छथि।) चित्रगुप्त हमरा लक्षण किछु नीक नहि लागि रहल अछि। ई सब धरती पर पापो केलक अछि, जतेक जे काज केलक से अनायासे नहि, खूब सोचि विचारि कए केलक, ओकर क्रमबद्ध रेकॉर्ड सेहो तैयार केने अछि जे सत्ते मे हमरा खाता सँ नीके छैक, हरदम विचित्र माँग रखैत अछि जकरा एकदम अनुचितो नहि कहि सकैत छिऐक। यमराज अपने तऽ ई खेला एखन देखलियैक अछि, हम तऽ कतेक काल सँ देखि रहल छी। एही खेलाक कारण ने हमरा मर्त्यलोक जाए पड़ल आ फेर दौड़ि कए देवलोक आबए पड़ल मंत्रणा लेल। (किछु खियाल करैत) स्नान मे बहुत देरी लगौलक ई दूनू। (एतबे मे एक यमदूत दौड़ल अबैत अछि एकदम परेशान भेल) दूत-एक जुलुम भऽ गेल धर्मराज, ओ दूनू एकहि संग स्नानघर मे प्रवेश कऽ गेल दूनू ब्रीफकेसक संग। एतेक देरी लागि गेलैक मुदा बहराइते नहि अछि। तें अपन संगी कें पहरा पर राखि हम दौड़ल एलहुँ अपने कें सूचित करै लेल। यमराज चित्रगुप्त महराज, आब की होएत ? एहि मायावी मृतात्माक कोनो ठेकान नहि। चित्रगुप्त कने देखि लेल जाओ, यमलोक सँ भागत कतए ? (ताबत पाछू मे दोसर दूतक संग रमेश आ सुरेश आबि कए ठाढ़ भऽ जाइत छथि, दूनूक हाथ मे एकटा पैकेट छनि।) रमेश अपने सबहक समय बचबै लेल एके बेर स्नानघर मे प्रवेश कएल धर्मराज। कोनो कुण्ड मे पठेबा सँ पूर्व एकटा तुच्छ अनुरोध मानल जाओ देव। यमराज आबहु अहाँ सभक बखेराक अन्त नहि भेल अछि ? सुरेश नहि देव, बखेरा कोनो नहि, मात्र एतबे जे मर्त्यलोकक ई छोटछीन उपहार स्वीकार कएल जाओ जे हम सब अपना ब्रीफकेस मे लेने आएल छलहुँ। (रमेश अपन पैकेट यमराज कें आ सुरेश अपन पैकेट चित्रगुप्त के दैत छनि) यमराज (पैकेट कें निहारैत) एकर की प्रयोजन ? रमेश उपयोग केलाक बाद एकर गुण अपनहि बूझि जेबैक महाराज वैवस्वत। चित्रगुप्त (पैकेट कें चारू कात घुमा कए देखैत) एकरा की करबाक छैक ? सुरेश एकर उपयोग अपने शयनकक्ष मे करबैक देव। पैकेट मे देखियौ एकटा टोंटी छैक। राति मे शयन कक्ष मे विश्राम करबा काल पैकेट सँ वस्तु कें बहार कए ओहि टोंटी कें सेहो खोलि देबैक। किछु काल बाद ओ पसरि जेतैक आ किछु बाजऽ लागत। ध्यान सँ सुनबैक आ जेना कहल जाए तहिना करबैक। यदि कोनो तरहक गड़बड़ी लागए तऽ टोंटी कें मुह बन्द कऽ देबैक। ओ वस्तु फेर अपन पुरान अवस्था मे आबि जाएत। यमराज आर किछु ? रमेश नहि देव, हम सब तैयार छी, पठाउ जाहि कुण्ड मे आदेश हो। सुरेश (रमेशक हाथ धरैत) अग्निकुण्डक आदेश तऽ भइये गेल छैक, चलऽ ने अपनहि पुछैत पुछैत चलि जाएब। बुझले छहु ओतए सौ हाथ उपर धधरा उठैत हेतैक। (विदा हेबाक उपक्रम करए लगैत अछि) चित्रगुप्त आब अहाँ सब किछु बेसिए हड़बड़ाएल लगैत छी। थम्हू, हमरा खाता मे नाम पता लिखऽ दिअऽ, एतए औंठा छाप दियौक। ई आदेशपत्र लऽ कए दूत लोकनि जेता अहाँक संग, ओतुका अधिकारी कें देथिन, ओ फेर औंठा छाप लेताह मिलबै लेल जे कतहु कोनो मृतात्माक अदलाबदली तऽ ने भऽ गेल। तकर बादे कुण्ड मे खसाओल जाएत। रमेश दूटा निवेदन स्वीकार करियौ देव — पहिल जे औंठा छाप नहि लऽ कए दस्तखत लेल जाओ, हम सब तऽ उच्च शिक्षाप्राप्त छी। आब मर्त्यलोक मे सब साक्षर भऽ गेल छैक। दोसर जे हमरा दूनू कें कुण्ड मे खसबैक कोनो काज नहि, हम सब अपनहि खुसी खुसी कूदि जेबै ओहि मे। यमराज दस्तखत तऽ आइ तक कियो करबे नहि केलक, हमरा इहो नहि बूझल अछि जे ओतुका अधिकारी लोकनि कें दस्तखत मिलान करबए अबैत छनि की नहि। सुरेश अपने सब फोटो लेबाक व्यवस्था किएक ने रखैत छी ? कोनो तरहक झंझट नहि, फोटो देखू, मिलाउ। कोनो अदलाबदलीक सम्भावना नहि। चित्रगुप्त (खिसिया कए) ई यमलोक छिऐक, मर्त्यलोक नहि। एतए वैज्ञानिक आविष्कार नहि भऽ रहल छैक, मात्र पापी मृतात्मा कें सजा देल जाइत छैक। रमेश हम सब नीके लेल कहलहुँ देव, कोनो बात नहि, सुरेश, छोड़ह अपन जिद, दऽ दहक औंठा छाप आ आगू बढ़ऽ। (औंठा छाप देबा लेल हाथ बढ़बैत छथि, चित्रगुप्त हुनकर औंठा छाप लैत छथि, तकर बाद दोसर कागत पर सुरेशक औंठा छाप सेहो लैत छथि, दूनू कागत दूतद्वय कें दैत) चित्रगुप्त हिनका दूनू कें सम्हारि कए अग्निकुण्ड तक लेने जइयनु, ओतुका अधिकारी कें सब बात नीक जकाँ बुझाए देबनि नहि तऽ ई दूनू ओतहु कोनो टाटक ठाढ़ करताह। (दूनू यमदूतक संग रमेश आ सुरेशक प्रस्थान) यमराज एक उखराहा मे मात्र दूटा मृतात्मा कें निपटाओल। एना जॅं स्थिति आगुओ भेल तऽ यमलोकक कार्यालय बन्दे भऽ जाएत। चित्रगुप्त आब आइ कोनो काज करबाक मोन नहि अछि। जाइ विश्राम करी, अहूँ विश्राम करू धर्मराज। यमराज आजुक संध्या तऽ ओहुना एहि मायावी पैकेट कें बुझबा मे बीत जाएत। चित्रगुप्त से ठीके। हमरा तऽ डर लगैत अछि जे ई सब कोनो षडयंत्र ने रचने होअए अपना सब कें बुड़िबक बनबै लेल। यमराज की कहू ? ओतए जखन देवलोक सँ मीटिंग के बाद पहुँचलहुँ तऽ देखल जे दूनू दूत ओएह डायरी बला डिब्बा मे किछु देखि रहल अछि। ततेक तल्लीन छल जे हमरा पहुँचबाक कोनो सुधि नहि भेलैक ओकरा दूनू कें। हम ओ डिब्बा छीन कए जे देखल तऽ आश्चर्यचकित रहि गेलहुँ। एतेक छोट डिब्बा मे एकटा अर्धनग्न युवती बन्द आ कूदफान करैत। चित्रगुप्त (किछु नहि बुझबाक भाव चेहरा पर) किछु बुझबा मे नहि आबि रहल अछि एकरा सबहिक खेला। देखियौ राति मे ई डिब्बा कोन करतूत देखबैत अछि। यमराज बेस, आब चलल जाए। (अपन अपन उपहारक डिब्बा सम्हारने दूनू गोटेक प्रस्थान, मंच अन्हार) (अगिला अंकमे जारी) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। रबीन्द्र नारायण मिश्र- सम्पर्क -9968502767 धारावाहिक उपन्यास-लजकोटर लजकोटर (प्रवासीक जीवनपर आधारित) -13- प्रातभेने हम भोरे तैयार भए लताक ओहिठाम बिदा भेलहुँ।ताबे लताक तीनटा एसएमएस आबि गेल छल । भोरक समयमे दिल्लीक बसक भीड़ जगजाहिर अछि । टिकट लेबाक हेतु पाछूसँ चढ़नाइ जरूरी अछि। जँ अहाँ आगाबाटे चढलहुँ आ टिकटचेकींग भए गेल तँ गेलहुँ । जुर्माना दिअ आ फज्जतिओ सुनू ।ई बात हम बुझि रहल छलहुँ मुदा पछिलका गेटपर ततेक लदमलद छल जे हमरा आगूबाटे बसमे घुसिआए पड़ल । जाबे ककरो टिकट हेतु हाक दितिऐक ताबतेमे टिकटचेकींग भए गेलैक। हमरा लाख कहबाक कोनो असर नहि भेलैक । दू-तीनटा मुस्टंड मिलिकए हमरा बससँ उतारि देलक आ लेने-लेने कातमे लए गेल । एक आदमी कानमे कहैत अछि-“एकसए टाका दए दएह,छुटि जेबह नहि तँ जहलो भए सकैत अछि ।" हम जेबीमे हाथ देलहुँ । कुल एकानबेटा टाका छल । ओकरा निकालि कए देखए देलिऐक आआग्रह केलिऐक जे कमसँ कम दसटाका छोड़ि दिअए मुदा कथी लेल किछु सुनत । ओ चट्ट दए सभटा टाका अपन जेबीमे धए लेलक आ दसटाका आओर देबाक जोर देबए लागल । हमरा नहि रहि भेल । ठोह पाड़ि कए कानए लगलहुँ ।एकटा बूढ़बा टिकटचेकर कहलकैक॒ – “छोड़ि दही।” से सुनि कएजानमे जान आएल । जेबीमे एकहुटा पैसा नहि रहए। तैओ मोन हल्लुक लागल । कैटा यात्रीसभ तँ ओतहि रोकि लेल गेल । कैटाकेँ टिकटचेकरसभ गरदनिआ दए बससँ उतारि देलक।बस आगा बढ़ल ।कहुना कए लताक घर लगक बसस्टापपर उतरलहुँ । बसस्टापसँ सटले ओकर घर छलैक । हम आगा बढ़ैत छी। लता घरक गेटेपर भेटि गेलि । गेटसँ अंदर होइते लताक पिताजी, नीरज भेटि गेलाह । हम हुनका प्रणाम केलहुँ । कहए लगलाह-"हम अहींक बाट ताकि रहल छी।" जाढ़क समय छल । रौदेमे लौनमे हम सभ बैसलहुँ । "लता अहाँक बहुत प्रशंसा करैत रहैत अछि ।" "हम हिनका सभटा बात बुझा देने छिअनि । ताही हिसाबे ई आएल छथि ।"-लता बाजलि। " ओ तहन तँ हिनका सभटा बात बूझले छनि । कारखानापर दुनूगोटे संगे चलि जाह । हम मौका पबितहि आबि जाएब । आइएसँ काज शुरु कए देथि । हिनकर रहबाक ओरिआन सेहो कए देलिअनि अछि ।" -से कहि नीरजओहीठाम बामा कातक कोठरीक कुंजी हमरा थम्हा देलाह । लताक घरमे मात्र ओ आ ओकर पिता नीरजरहैत छलाह। घरकसभटा काज नौकर-चाकर करैत छलैक।हमसभ चाह-पान केलहुँ आ लताक संगे कारखानाबिदा भए गेलहुँ । नोएडामे कारखानामे हमर सभक कार जहिना पैसल कि गार्डसभ धराधर लताकेँ सलामी देबए लगलैक । हमसभ उतरिकए सोझे मालिकक कक्षमे गेलहुँ । ओहिठाम पहिनेसँ दरबानसभ मुस्तैद छल । चाह-जलखै सभ किछुक ओरिआन छल । हमसभ चैनसँ चाह-पान करैत गप्प-सप्प करैत रहलहुँ । चाह पीबि बैसले छलहुँ की नीरजकफोन आबि गेल जे ओ किछु झंझटमे फँसि गेलाह आ अखन कारखाना नहि आबि सकताह । हमसभ कारखानाक चारूकात घुमलहुँ ,कर्मचारीसभक संगे गप्प-सप्प केलहुँ । आ भोजनक समय फेर ओहीठाम आबि गेलहुँ। "हमरा तँ एहि तरहक काजक कोनो अनुभव नहि अछि ।" "काज तँ स्टाफसभ करैत छैक । अहाँकेँ तँ बस देखरेख करबाक अछि । फेर हमहुसभ रहबे करब ।" हमसभ दिनबरि ओहीठाम रही । कखनो किछु,कखनो किछु होइते रहलैक । साँझ भए रहल छल । हम आ लता कारसँ आपस ओकर घर बिदा भेलहुँ । ई तय भेल जे दू-तीन दिनमे हम समान सहित नवका डेरामे चलि आएब । लता हमरा बसस्टापधरि छोड़ि आएलि । हम रस्ताभरि आजुक घटनाक्रमपर सोचैत रहि गेलहुँ । विश्वासे नहि होइत छल जे एहनो भए सकैत छैक । रबीन्द्र नारायण मिश्र, पिताक नाम : स्वर्गीय सूर्य नारायण मिश्र, माताक नाम : स्वर्गीया दयाकाशी देवी, बएस : ६६ बर्ख, पैतृक ग्राम : अड़ेर डीह, मातृक : सिन्घिआ ड्योढ़ी, वृति : भारत सरकारक उप सचिव (सेवा निवृत्त)/ स्पेशल मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट, दिल्ली(सेवा निवृत्त), शिक्षा : चन्द्रधारी मिथिला महाविद्यालयसँ बी.एस-सी. भौतिक विज्ञानमे प्रतिष्ठा : दिल्ली विश्वविद्यालयसँ विधि स्नातक प्रकाशित कृति : मैथिलीमे:- १. ‘भोरसँ साँझ धरि’ (आत्म कथा), २. ‘प्रसंगवश’ (निवंध), ३. ‘स्वर्ग एतहि अछि’ (यात्रा प्रसंग), ४. ‘फसाद’ (कथा संग्रह) ५. `नमस्तस्यै’ (उपन्यास) ६. विविध प्रसंग (निवंध ) ७.महराज(उपन्यास) ८.लजकोटर(उपन्यास)९.सीमाक ओहि पार(उपन्यास)१०.समाधान(निवंध संग्रह) ११.मातृभूमि(उपन्यास)१२.स्वप्नलोक(उपन्यास)१३.शंखनाद(उपन्यास)१४.इएह थिक जीवन(संस्मरण) In English:- 1.The Lost House (Collection of short stories), 2.Life is an art हिन्दी में – १.न्याय की गुहार(उपन्यास) (उपरोक्त पोथीसभ pothi.com, amazon.com आओर www.flipkart.com पर सँ कीनल जा सकैत अछि) इमेल : mishrarn@gmail.com ब्लोग : mishrarn.blogspot.com एमजोनक लेखक पृष्ठ : amazon.com/author/rnmishra ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। जगदीशप्रसाद मण्डल आमक गाछी (धारावाहिक उपन्यास) 6. ओना, मोबाइलसँ धीरेन्द्रकेँजगमोहीकहि देने छेलैन जे बीस जूनकेँ प्रेमनगर जरूर पहुँचब। मुदा से प्रेमनगरक सीमामे प्रवेश केलापर जगमोही बिसैर गेल। बिसरबो केना ने करैत? भाय, किछु छी तँ प्रेमनगर ने छी, जैठाम घड़ी-पहरक कोन बात जे जिनगीक-जिनगी लोक बिसैर जाइए। मुदा से सभ जगमोहीकेँ नहि भेल, भेल एतबे जहिना दू समाजक लोकक बीचक सम्बन्ध दू जुगक सीमापर आबि होइतअछि।कोर्टमेजहिना बहस करैत काल वकीलकेँ होइ छैन जे अपन फाइलमे केसक दुनू पक्षकसभ रेकर्डो रहै छैन आ तैसंग न्यायालयकेँ सेहो बुझल रहिते छै जे फैसला दूमुहाँ अछिए तँए जेम्हर बेसी जोड़ देखब तेम्हरे कनी उनारि देब। जगमोहीक संग धीरेन्द्रोकस्थित सएह भऽ गेल अछि। एक दिस मिथिलाक गामक समाज, जैठाम नान्हि-नान्हिटा गप-सप्पमे रूआबक चलैत पैघ-पैघ घटना होइए।कुत्ता-बिलाइक झगड़ामे लोक मारियो-पीट करैए, खूनो-खच्चर होइए आ सालक-साल जहलो तँ कटिते अछि। तही बीच ने जगमोहियो आ धीरेन्द्रोक विचार फँसल अछि। ओना, शहरी-समाजक विचार मनमे नहि छैन सेहो बात नहियेँ अछि। संजोग बनल, मामाक घरपर एला पछाइत जगमोहीकेँ मन भेलै जे धीरेन्द्रकेँ अपन जानकारी दऽ दिऐ। बैसारसँ उठि, मुँह-कान धोइक बहन्ने चापाकल दिस ससैर जगमोही मोबाइलसँ धीरेन्द्रकेँ कहलक- “धीरेन्द्र बाबू, मात्रिक पहुँच गेलौं।” धीरेन्द्र- “गाड़ी-बसक यात्रा बढ़ियाँ रहल किने?” जगमोही- “यात्रा तँ बढ़ियेँ रहल मुदा...।” धीरेन्द्र- “मुदा की?” किछु बजैसँ पहिने जगमोही ठठा कए हँसए लगल। जगमोहीक हँसी सुनि धीरेन्द्र चौंकल। चौंकल ऐ दुआरे जे जाबे जगमोही किछु कमी नहि देखलक ताबे हँसल किए?दोहरा कऽ धीरेन्द्र पूरक प्रश्न पुछैत बाजल- “हँसलौं किए से कनी हमरो कहू। जँ सुधारैबला हएत तँ सुधारि लेब, नहि जँ छोड़ैबला हएत तँ छोड़िए देबआ जँ जोगबैबला हएत तँ जोड़ जोड़ि जोगा लेब।” तहीकाल जगमोहीक मोबाइलमे पटनासँ दोसर फोन आबए लगल जे जगमोहीक एक सहेलीक छल। धीरेन्द्रक गप-सप्पकेँ बिलमबैत जगमोही बाजल- “एकटा संगीक फोन पटनासँ आबि रहल अछि, तँए अखन एतबे जेबस स्टेण्डमे अहाँकेँ नइ देखलौं..!” मोबाइलिक लाइन तँ कटि गेल मुदा जगमोहीक विचारक चोट धीरेन्द्रकेँचोटा देलक। चोटाएल धीरेन्द्रक स्थित ओहिना हुअ लगल जहिनाअकासमे उड़ैत चिड़ैकेँ तीर लगलापरहोइत अछि।छटपटाइत धीरेन्द्रक मनमे विचार उठल- जगमोहीक जे प्रश्न अछि कीओ अनर्गल अछि? सचमुच जँ कनियोँ शुभ चिन्ह मनक कोनो कोणमे रहैत तँ एते तँ विचार करैत किने जे गाड़ी-सवारी सन अनबिसवासू यात्रा केनिहारि जगमोहीकेँ पुछि लैतिऐ जे यात्रा शुभ रहल किने। प्रेमनगरक केते गोरे जगमोहीकेँ चिन्हैए। गामक बुढ़-बुढ़ानुस बिसरिये गेलहेतैथआनवतुरकेँ बुझले नेहेतइ। भलेँकम्मे दिनक परिचय अपन किए नेअछिमुदा समाजक एक प्रवुद्ध विचारक बेकती ने अपनाकेँ बनबए चाहि रहल छी..! विचारमे विचड़ैत धीरेन्द्रकेँ जेना कोनो बोनमे पथार लागल पाकल आमक गाछक निच्चाँमे जगह भेटलै।ओना, ओहूमे खटगरो आ मीठगरोसुआदक आम होइते अछि मुदा से नहि, धीरेन्द्रकेँकरपूरिया सुआदबला आमक गाछ भेटलै। भेटलै ई जे जहिना अपने समाजशास्त्रक विद्यार्थी छी तहिना ने जगमोहियो अछि, तँए प्रायश्चितक रूपमेकिए ने दुनू गोरे मिलि-बॉंटि विचारि कऽ विचरण करैत रस्ता बना ली।हँ, होइले एते भइये सकैए जे अनुचित बुझि समाज अपन ढाठ लगा ढाठि दिअए, मुदा ओइ ढाठकेँ तोड़लो-सुधारलो तँ जाइए सकैए। परोपट्टामे प्रेमनगर सभसँ नमहर गाम। भौगोलिक दृष्टिसँ सम्पन्न गाम। जहिनाप्रेमनगर गामक नाम छी तहिना नामगुण गुणो-धरम अछिए। प्रेम तँ प्रेम छी,प्रेम कि कोनो आम-कटहरक गाछ जकाँएकपुरखियाह होइए, ओ तँ बॉंस-खरही जकाँ सघन होइत अछि। जहिना आमक प्रेमी लोक आमक गाछी लगबै छैथतहिना जामुनक प्रेमी लोक जामुनोक गाछी तँ लगैबते छैथ, माने जे जेकर प्रेमी से तेकरासँ आकर्षित होइते अछि। जखने कोनो वस्तु वा आने कोनो गुणसँ केकरो आकर्षण बढ़ै छै तखने ओइ दिस ओ आकर्षित भऽ अपना जिनगीमे ओकरा समाहित करैक परियास करए लगैए। चाहे ओ निरजीवसँ निरजीव आकि सजीवसँ सजीवे किए ने हुअए। पूर्वमे प्रेमनगर गामक पुबरिया भाग होइत एकटा धार बहैत रहइ, जेकर नाओं छल प्रेमाधार। पहाड़क झरनाकेँ क्षीण भेने प्रेमाधारक प्रवाह धीरे-धीरे क्षीण होइत-होइत रूकि गेल। प्रेमनगरसँ सटले दछिनवरिया गामक लोक सभओइ धारक मुँहकेँ बान्हि महार काटि-काटि भरि कऽ घर सभ बना लेलक। जनसंख्याक हिसाबे गामक रकबा कम रहने बास डीहक समस्यो रहबे करइ। धारक आगूक मुँह बन्हेने प्रेमाधारक रूप सरोवर कहियौ आकि झील आकि पोखैरसदृशबनि गेल। कहब जे पोखैरआझील, सरोवरमे अन्तर नइ होइ छै जे एक्के धार मुइने तीनू बनि गेल?ऐ सम्बन्धमे अखन बेसी नहिमात्र एतबे कहब जेधारक धार घेरेने मात्र प्रवाहेटाने रूकल,मुदा पहाड़सँ धरती धरि दोसरेदिशामे, पाछूए-सँमुदा जुड़लतँ अछिए किने। तँए, सरोवरो आ झीलोभेबे कएल।आ पोखैर होइक कारण भेल जे आगूक गाममे धारक मुँह बन्न भेने बीचमे महारनुमा भऽ गेल,जइमे पैछला गामबला सभपहटा-टौहकी लगा-लगा अपन धारक पानि घेर लेलक, जइसँ प्रेमाधार धीरे-धीरे ‘प्रेमा पोखैर’ बनि गेल। आब तँ ओकर नाम बदैल ‘परमा पोखैर’ भऽ गेल अछि। खाएर जे अछि मुदा एते तँ अछिए जे बिनु जाठियेक पोखैर किए ने हुअए मुदा जलक पवित्रतो आ गामक जलभण्डारो तँ छीहे। पनरह साए बीघाकप्रेमनगर ऊँचाइ-निचाइक हिसाबसँ तीन कोटिक गाम भऽ गेल अछि। माने ऊँचरस, मध्यम आ गहींर तीन श्रेणीक जमीनक बीच बसल गाम प्रेमनगर छी। गामक चारि साए बीघा जमीन ऊँचरस अछि, जइमे नौ साए परिवारो बसल अछि आ गाछी-बिरछी, बाड़ी-झाड़ी सभ सेहो ओहीमे अछि। ओना, आन-आन एहनो बहुत गाम ऐछे जइमे छिट-फुट ढंगसँ ऊँचरस-नीचरस जमीन छै, मुदा प्रेमनगरमे से नहि अछि। भाग लगा-लगा तीनू रंगक जमीन अछि। चारि साए बीघा जे ऊँचरस जमीन अछितइमे बाससँ लऽ कऽ बाड़ी-झाड़ीआगाछी-कलम धरि अछि,ओ देखैमेसोल्हन्नी गाम जकाँ लगैए आ दोसर-तेसर किस्मक जे जमीन अछि, जइमे अन्न-तीमनक उपजा-बाड़ी होइए, ओ बाध जकाँ लगैए। तँए, ओ भेल प्रेमनगरक बाध। मुदा जहिना शरीर आ शरीरी होइए, जेकरा कियो देखैए आ कियो नहियोँ देखैए तेना नहि अछि, गामक सभ बुझबो करैए आ मानबो करिते अछि जे प्रेमनगर सेहो दू भागमे विभाजित अछि। एक भाग भेल प्रेमनगर गाम दोसर भाग भेल प्रेमनगरक बाध। समटल गामक घराड़ी तँए समटल गाम। अनेको जातिक गाम प्रेमनगर छी, से खाली जातिक नामेटा सँ नहि छी, सभ जातिकेँ अपन-अपन देवियो-देवता छैन आ पाबैन-तिहारकसंगबीधो-बेवहार अलग-अलग छैन्हे। तैसंग अनेको रंगक जातिक समाज, अनेको रंगक धर्मस्थल आ अनेको रंगक बोली-चाली गाममे नहि अछि सेहो नहियेँ कहल जा सकैए, सेहो अछिए। मुदा सभ कथूक बावजूदो गाममे कहियो कोनो विघटनकारी काज नहि भेल अछि। ओना, चुनावक समयमे गामक भोँट बँटाइते अछि मुदा से सभ नइ बुझैए। बुझबो किए करत, अपन-अपन जाति देख-देख सभ कियो जतिआरए भोँट बिल्हैए। ने राजनीतिक स्थायी पार्टी अछि आ ने कोनो विचारधाराजइसँ लोक प्रभावित होइत अपन-अपन मतदान करत। उम्मीदवारो सभ तेहने, जइ पार्टीमे टिकट भेटल तही पार्टीक भेलौं, तखन जीवनधाराक निर्माण केना हएत..? राजनीतिक विचारधारा जखन अछिए नहि, चुनावमे जीतैक मतलब मात्र एम.एल.ए; एम.पी. बनब अछि, तखन उम्मीदवार हुअ आकि भोँटर ओकरेकोन विचारधारासँ मतलब रहतै जेजीवनमे उतार-चढ़ाव हएत। किए लोक बुझत जे अपन चेतनशील विचार, चेतनशील जीवनकेँ समरपन करैक अछि किदान करैक अछि जइसँ अपनो जीवनदान भेटत...। बीस साल पूर्व प्रेमनगरबलाक सेहो अपन जीवन पद्धति छेलैनमुदा आब ओहूमे तोड़-जोड़ शुरू भइये गेल अछि।जइसँगामक रूप-रंग बदलल-बदलल सेहो बुझि पड़ैए। बीस बर्ख पूर्व तक जहिना रामपुर, कृष्णपुर आ महमदपुरमे पढ़ल-लिखल लोकक खगता कम छल तहिना प्रेमनगरमे सेहो छेलैहे। पढ़ल-लिखल लोकक ओतबे खगता छल जे रजिष्ट्री ऑफिसमेसनाक[i] बनि दसखत करैक लूरि हुअए। राशनक दोकानपर निशानोसँ काज चलिते अछि। ओझा-वैद गामे-गाम घरे-घर अछिए। एकटा बिमारी हएत, सतरह गोरे सतरह रंगक दवाइयो-बुटीक जानकार आ ओझाइयो-भगताइक गुण रखनहि छैथ। तखन तँ शेष जिनगी वएह ने रहल जे रहैक घर, पहिरैक वस्त्र आ खाइक जोगार हुअए। सेहो तँ अछिए। सालमे तेतेक पाबैन-तिहारक उपास अछि जे सालक चारि माससँ बेसी बिनु खेनौं-पीनौं तँ धर्मदानक नामपर चलिते अछि। कहब से केना? सालमे सिर्फ बाबन-तीरपनटा रबि होइए। जे डेढ़ माससँ बेसीए भेल। तेकर अतिरिक्त जे अछि से सबहक सोझहेमे अछि। दोसर, खेतक उपजा ओहनो तँ अछिए जे पुरना लग्गी-डंटाक हिसाबे बीस मनक कट्ठा अल्हुओ-सुथनी उपैजते अछि। जँ चारियो कट्ठा खेती कऽ लेब तँ पार-घाट लगियेजाएत। भलेँ अल्हुए-सुथनी भोजन किए ने कहबए, मुदा भूखल तँ नइ ने कहौल जाएत। आजुक प्रेमनगर आब ओ नइ रहल जे बीस बर्ख पूर्व छल। आइ लोक गणीतीय पद्धतिसँ अपन जीवन पद्धति बना रहल अछि। पहिने सौंसे गाममे घास-फूसक घर छल, गरमी मासमे आगि-छाइक समस्या सर्वत्र छल मुदा पक्का घर बनने ओइमे कमी एबे कएल अछि, तँए विचारोमे बदलाव एबे करत। आन-आन गामक लोक कनैए जे ‘महिला शिक्षा’ पछुआ गेल अछि। मुदा प्रेमनगरक लोक कनैए जे ‘पुरुखेक शिक्षा’ पछुआ गेल अछि! सभ गामवासीक अपन-अपन सोचो-विचार छैन्हे। ओना, पूर्वक समाजमे सोच-विचारक जेतत्त्व छलतइमे भौगोलिक तत्त्वकस्थान महत्पूर्ण छल। मुदा आइ ओहूमे कमीआबि रहल अछि। सामाजिक सम्बन्धमे आन गामक विचारधारासँ भिन्न विचारधारा प्रेमनगरक अछि। आन गामक दोस्ती आ प्रेमनगरबलाक बीचक दोस्तीमे सेहो अन्तर अछिए। हिन्दूक बीच रूपैआक लेन-देनमे सूदखोरी अछि मुसलमानमे नहि अछि। जखन अपना-अपनामे भलेँ चलि सकए मुदा दुनूक (हिन्दू-मुसलमानक) बीच केना चलत? तहिना खेनाइयो-पीनाइमे अछिए। तैसंग आन गाममे ईहो अछि जे एक जातिक हाथक पानि दोसर जातिक लोक नइ पीबैए, छुअल अन्न नहि खाइए,मुदा प्रेमनगरमे से नहि अछि। बबाजीक झूण्ड जकाँ हरे-हरे करैत सभ एकठाम बैस खाइते छैथ। आन गाममे पहिने पोखैर-इनार रोकल जाइ छल मुदा आब चापाकल भेने बोरिंगक पानि रोकल जा रहल अछि। अदलैत-बदलैत ओहन-ओहन बेवहार अखनो आन-आन गाममे जीवित अछिए जे एक-दोसरक बीच दूरी बनबैए मुदा से प्रेमनगरमे ने पहिने भेल आ ने अखन अछि।हिन्दू-मुसलमानक बीच जे पाइ-कौड़ीक कारोबार अछि ओ एहेन अछि जइमे एकरूपता अछि। एकरूपता भेल एक बेवहारक प्रयोग करब। तहिना पनिचल्ला आ बिनु पनिचल्ला लोकक बीचक बेवहार सेहो अछिए। खाएर जे अछिसे अपन-अपन गामक अछि, तइसँ प्रेमनगरबलाकेँ कोन मतलब छइ। अपन गाम छै, अपन-अपन समाज छै, अपन-अपन विचार छै आअपन-अपन विचारधारा छै, जइमे सभ बहैत अछि। बिआह-दानक बेवहारमे प्रेमनगरबला ऐ बातकेँ नीक जकाँ बुझि रहल अछि, किए तँ ओ भुक्तभोगी अछिजे आइक परिवेशमे बेटा-बेटीक बिआहक रूप एहेन बनि गेल अछि जे बेटाक प्रति लेब अछि आ बेटीक प्रति देब अछि। मुदा एकरो नकारल नहियेँ जा सकैए जे पहिने बेटीक प्रति सेहो लेब छल आ बेटाक प्रति सेहो देब छल। यएह तँ दुनियॉंक खेल छी। एक भेल लेब, एक भेल देब आ एक भेल लेब-देब। जीबेन्द्रकेँ एकटा अछोप जातिक बेकती–मुसनसँ दोसतियारे भेलैन। दुनूक बैसार-उसार, गप-सप्पक सम्बन्ध बनलैन। खाएब-पीबसँ लऽ कऽ आर्थिकलेन-देन इत्यादि सभ तरहक सम्बन्ध बनलैन। एक दिन गप-सप्पक क्रममे मुसन जीबेन्द्रकेँ कहला- “दोस, जेहने कपार हमर अछि, तेहने भगवान अहूँक बना देलैन!” मुसनक इशारा समाजमे जे बेटाक प्रति दहेजक चलैन अछिओइ दिस रहइ। किएक तँ एक्केटा बेटा मुसनकेँ सेहो आ जीबेन्द्रकेँ सेहो छैन बॉंकी तीन-तीनटा बेटीए छैन। मुसनक इशारा जीबेन्द्र नहि बुझि पेलैन, मुदा समझदारी तँ एते शक्ति सृजित कइये देने छैन जे जखन दुनू गोरे एकठाम गप-सप्प करै छी तखन बात भागत केतए। कहुना-ने-कहुना मुसनक मुँहमे एबे करत, जइसँ बजबे करत। तैबीच किए ने मुसनकेँ दोसर दिस टहला दी। गप-सप्पक क्रम बदलने, सएह भेल। बजैत-बजैत मुसन बाजि गेल जे दोस जेकरा पाँचटा बेटा छै, तेकरा दहेजेसँ तेतेक आमदनी भऽ जाइए जे पाँच पुस्त बैसले खाएत। विचारक धारमे भँसैत मुसनकेँ हाथ पकैड़ जमीनपर ठाढ़ करैत जीबेन्द्र बजला- “दोस, तोरा ई नइ बुझल छह जे तोरा जातिक बिआहमे बेटेबलाकेँ रूपैआ गनि कऽ दिअ पड़ै छइ।” ओना, मुसनमे जिनगीक बहुत किछु समझदारी आबि गेल अछि, मुदा जिनगियो तँ महजाले जकाँ ने जलियाएल-सुतियाएल अछि, जइसँ सभ बात लोक अपनो ने बुझि पबैए। मुसनकेँ सेहो सएह भेल अछि। मुसन बाजल- “दोस अहाँक बात नइ बुझलौं?” जीबेन्द्र मने-मन विचारलैन जे मुसन दोस जखन अपनो बात अपने नहि बुझि रहल अछि तखन समाजमे केहेन जाल लगल अछिसे थोड़े बुझि पौत। मुदा जँ काजक विचारसँ पड़ा जाएब तखन दोसतिआरेक अर्थे की आ समाजे की। विचारकेँ गोल-मोल बना जीबेन्द्र बजला- “दोस, हमर-तोहर कपार गाममे सभसँ नीक अछि।” ‘नीक कपार’ सुनि उत्सुक होइत मुसन बजला- “दोस, से केना?” जीबेन्द्र बजला- “दोस, बेटा बिआहमे कि कोनो दहेज लेब अछि, अपना घर एकटा जुआन मनुख आनब तइसँ पैघ की दहेजे अछि।” मुसन जीबेन्द्रक रहस्यकेँ नहि बुझि विचारक प्रवाहमे बाजि देलक- “दोस, हमहूँ अपना बेटाक बिआहमे दहेज नइ लेब!” तहियासँ मुसनकेँ अपन परिवारमे तँ बदलाव एबे कएल जे टोलोक कार्य पद्धतिमे बदलाव आबए लगलै। बीचक समयमे लड़कीकेँ वस्त्राभूषण देब लड़का पक्षक बेवहार भेल आ लड़काकेँ वस्त्राभूषण देब लड़की पक्षक बेवहार भेल। खाइले डालपर चाउर आ दहीक पद्धति चलए लगल। मुदा आब तेसर मोड़पर समाज आबि गेल अछि। एक्कैस जून। भिनसुरका समय। धीरेन्द्र चाह पीब आगूक विचार करए लगल कि मनमे जगमोहीक माए- सुवासिनी एलइ। मने-मन विचारए लगल जे की करब नीक हएत। लोकक नजैर एहेन प्रदूषित भऽ गेल अछि जे अनेरो किछु-सँ-किछु बात उड़बैत रहैए..! समाजक बीच उड़ैत प्रदूषित विचारक बीच धीरेन्द्रक मनमे सुचित विचार जगल। सुचित विचार जगिते धीरेन्द्र उठि कऽ ठाढ़ भेल आ जगमोहीसँ भेँट करए ई सोचि विदा भेल जे जे कोनो प्रश्न सामनेमे औत ओकर सामना करैक अछि। ओना, सुवासिनी चारू माय-धी सेहो चाह-पीलाक पछाइत गाम घुमैक विचार कऽ नेने छेली। धीरेन्द्रक घरसँ श्यामक घर करीब दस मिनटक रस्ता। दू टोलमे दुनू गोरेक घर छैन। जाबे सुवासिनी घरसँ निकलैथ-निकलैथ कि तइ बिच्चेमे धीरेन्द्र पहुँच गेल। आइसँ बीस बर्ख पूर्व प्रेमनगरक लोकक बीचक सम्बन्ध ओहने छल जेहेन अखन आन-आन गामक अछि। माने ई जे गाम-समाजक लोक जातिक बीच विभाजित छैथ जइसँ एक-दोसर जातिक बीच किछु विधो-बेवहार आ जीवन शैलीमे सेहो अन्तर अछिए। ओ अन्तर एक-दोसर जातिक बीच खाधि बनि सोझ बाटकेँ किछु दूरी बनाइये देने अछि, जइसँ जाति-जातिक बीच दूरी बनि गेल अछि। उदाहरण रूपमे श्राद्ध-कर्मकेँ देखै छी। किछु जाति एहेन अछि जइमे मृत्युक पछाइत तेरह दिनक बीच सभ क्रिया सम्पन्न कएल जाइए, तँ किछु जाति एहेन अछि जेकर किरिया-कलाप पनरह दिनमे सम्पन्न होइए। तहिना किछु जाति एहेन अछि जेकर अट्ठारह दिनमे सम्पन्न होइए तँ किछु एहनो जाति तँ अछिए जेकर तीस दिनमे सम्पन्न होइए। तैसंग दोसरबाधा ईहो अछि जे जइ दिन तक नह-केशक किरिया सम्पन्न भेल रहतआ श्राद्ध-कर्म पछुआएल रहत तैबीच जँ अपने परिवार वा दियादवादक बीचक परिवारमे दोसर मृत्यु हएत तँ पैछला मृत्युक हिसाबसँ क्रिया-कर्म अगुआ जाएत जेते दिनमे क्रिया-कर्म सम्पन्न होइए। माने दोबरसँ लऽ कऽ पौन-दोबर धरि समय भेल। प्रश्न अछि जे जखन कोनो परिवारमे मृत्युक घटना होइए तखनेसँ तहिया धरि परिवारक जीवित काज[ii] बाधित होइते अछि। जखने जीवनक संग चलैबला काज बाधित भेल तखने ने जिनगीक गतियो बाधित भइये गेल। तहूमे समय-समैयक समस्या सेहो कम प्रभावितसँ अधिक प्रभावित करिते अछि। माने भेल जे सुभ्यस्त समयमे जे काज असानीसँ चलि जाइए वएह काज गरुगर[iii] समय भेने भारी भइये जाइए। तहूमे आइक समय आ पाछूक बीतल समैयक बीच जीवन क्रिया सेहो अविकसित रहने जटिल छेलैहे। आइ जे समस्या प्राय: समाप्त जकाँ भऽ गेल अछि, माने गाम-गामक महामारी-हैजा, प्लेग-कालाज्वर इत्यादि वएह रोग पहिने घरहंज[iv] कऽ दैत छल! मुदा से आइ समाप्ते जकाँ अछि। आजुक प्रेमनगरक लोकमे जहिना समयानुकूल विचार जगलैन तहिना अपन बेवहार सुधारैत आगू बढ़ि अगुआएल गाम-समाज कहियौ आकि विचारशील समाज कहियौ, से भइये गेल अछि। जहिना अखन आन-आन गामक लोक कतियाइत जाति-जातिक बीच सीमांकन केने छैथ तहिना जातिक बीच कूल-मूलक चलैत सेहो सीमांकन केनहि छैथ, जइसँ बेकती समाजक मुख्यधारा हेबा चाही, ओइसँ स्वयं कतिया गेल छैथ। ओना, गाम-समाजक बीच सभ दिनसँ जहिना ओहन रस्ता बनले आबि रहल अछि जे ने दोस्ती[v] बनैमे देरी लगैए आ ने मेटाइमे देरी लगैए। एहने डेंगी नाहपर समाजक सवारी चलिये रहल अछि। तइमे प्रेमनगरबला सभअपनामे सुधार जरूर केलैन अछि। जेतए गजेरी-भँगेरी एकठाम बैस नॉंहकमे घन्टो-घन्टो समय दुइर करैत जे समाजक कोढ़ बनल छल से बदैल ओइ जगहपर पहुँच गेल जेतए आइक परिवेशपर विचार कएल जाइत अछि। आजुक जे परिवेश दुनियॉंक हवामे विर्ड़ो जकाँ उधिया-भँसिया रहल अछि ओकरा कोन ढंगे समाजक परिवेश बना असान ढंगक जीवन जीबैक क्रियाक बीच क्रियाशील बना समाजक दिशा-निर्देश स्थापित करी। धीरेन्द्रकेँ देखते जगमोही बिना मुँह खोलने मने-मन मुस्कियाएल मुदा सुवासिनी अपन मातृत्वक रक्षा करैत बजली- “बौआधीर, हम तँ गाम छोड़ि चलि गेलियह,आब ई गामतोरे सबहक भेलह। कहियो अबैले कहबह ते आएब नइ तँ मने-मन माता-पिताकेँ गोड़ लगैत नैहर मोन पाड़ैत रहब।मोन पाड़ैत रहब जे केना जन्मसँ लऽ कऽ बिआह-दुरागमन धरि गाममे रहलौं।” सुवासिनीक विचार सुनि, दृष्टिमान युवकमे जे गुण हेबा चाही ओ गुणसँ सम्पन्न धीरेन्द्र मुस्की दैत बाजल- “बहीन, हम समाजक ओहन भाए नइ छी जे बहिनकेँ कातिकक भरदुतियामे कहबैन जे बहिन, अगहनक दुतियाक चान जइ दिन उगतै तइ दिन आएब।” ओना, सुवासिनी पटनाक हवामे बहुत किछु बदैल गेल छेली मुदा प्रेमनगरक माटिपर कहियो नइ रहल छेली सेहो बात नहियेँ अछि। बिआहसँ पूर्व धरि रहल छेलीहे। धीरेन्द्रक विचार सुनि सुवासिनी अपन माथपर बल दैत प्रेमनगरमे अपन बितौल जिनगीमोन पाड़ए लगली। केना फूल तोड़ि दसमीक दुर्गास्थानमे पहुँचबै छेलौं, केना आमक गाछीसँ टिकुला बीछि-बीछि आनि आमील बनबै छेलौं, केना शिवरातिक उपास,कृष्णाष्टमीक उपासक संग समाजमे जेतए-केतौ सत्-नारायण भगवानक पूजामेसेहो उपास करैत रही।तेतबे नहि, जँ बाढ़ि अबैतरहै तँ केना अँगनाकेँघेरैतरही,बाड़ी-झाड़ीक पानि उपछैतरही! इत्यादि-इत्यादिअनेको क्रिया-कलाप सुवासिनीक मनमे एकाएकी जागए लगलैन...। नैहरक विचार जेना-जेना सुवासिनीक मनमे जगैत गेलैन तेना-तेना सासुर बिसरैत गेली। सासु-ससुरकेँ बिसैर माता-पिता लग पहुँच गेली। माता-पिता लग पहुँचते सुवासिनीक मनमे जगलैन- कातिकक दुतियाक संग अगहनक दुतिया सेहो मोन पड़लैन।भरदुतियाक संग धनकटनी समय मनमे अबिते एकाएक सुवासिनीक नजैर आजुक परिवारपर आबि अँटकलैन। अँटैकते दुनू आँखि नोराए लगलैन। नोराएल आँखिये सुवासिनी धीरेन्द्र दिस ताकए लगली...। धीरेन्द्रक मन निष्कपट रहने जिनगीक बीच मोड़पर ठाढ़ छल। सुवासिनी बजली- “बौआधीर, भगवान सभ बिपैत हमरे देलैन..!” विचारक दुनियॉंमे धीरेन्द्र तेना हेरा गेल जे हेराएल बटोही जकाँ मुँहक चुहचुही कमए लगलै। हेराइक कारण भेलै जे विपत्तियोकेँ कि सींग-नॉंगैर अछि जे लोक लगले बुझि जाएत जे ई घोड़ा छी कि हाथीआकि गाए छी कि महींस। बिपैत तँ बिपैत छी, जेकरा घरमे आगि लगै छै ओ बुझैए आ जेकरा घरमे नइ लगै छै ओ किए बुझत। तहिना जेकर घर बाढ़िमे भँसिया जाइए ओ भँसियाएब बुझैए आ जइ गाममे बाढ़िक पानि जाइते ने अछि ओकरा बुझैक कोन खगता छइ। मुदा से तँ बुझला पछाइत ने लोक बुझ़ैए, बिनु बुझलमे की बुझत। छोट भाइक रूपमे धीरेन्द्र बाजल- “से की बहिन?” धीरेन्द्रक बात सुनि सुवासिनीक मन जेना अछींजलसँ धुआ गेल होनि तहिना धुअल मने बजली- “बौआ, जहिना भैयारीक चलैत सासुर उपैट गेल, तहिना भगवान डॉंग मारलैन जे बेटा एकोटा ने देलैन आ तीन-तीनटा बेटीए देलैन। अखन अपने[vi]नोकरी करै छैथ ते बड़बढ़ियॉं, मुदा जखन नोकरी छुटतैन, हाथक काज छिनेतैन तखन केतए रहब आ केना बेटी सबहक पार-घाट लगाएब!” ओना, सुवासिनी एकसूरे सभ बात बाजि गेली मुदा धीरेन्द्रक मन ओहिना थकथका गेल जहिना चारूकात पहाड़सँ घेरल ओ भूमिजे ओहन बनसँ आच्छादित हुअए जइमेमात्र मनुखभक्षी जानवरक बास होइ। मुदा रस्ता पहाड़ी होइ वा जंगली वा समुद्री, मनुख तँ दूटा हाथ-पैरबला जीव छीहेजेजहिना असथिरोसँ चलि सकैए, दौड़ियो सकैए तहिना जानवरकेँ मारियो सकैए आ प्रवोधियो तँ सकिते अछि। तैसंगपैघ-सँ-पैघ पहाड़ोपर चढ़ि-उतैर सकैए आ समुद्रोमे तँ हेलिये सकैए...। तखन तँ भेल जे दूहाथ-दू पैरसँएक्केबेर समुद्रोमे हेललआ जंगलो काटलतँ नइ हएत, मुदा बेरा-बेरी तँ भइये सकैए। तँए, एक-एक प्रश्नकेँ बिहिया-बिहिया, बटोरि-बटोरि जखने बाटपर आनि बटोही बनि हल करए लगब तखनने जिनगी भारसँ भारी रहतआ ने जीवन जीनसँ[vii] दूर रहत। तही बीच प्रेममोही अपनदोसर संगी- रूपमोहीक संग पहुँच गेल। परिवारसँ सम्बन्धित समस्या बाल-बोध लग राखबो उचित छी आ नहियोँ राखब तँ उचित छीहे। मुदा से अखन नहि, अखन एतबे जे भाए-बहिनक बीचक बात छी, तँए निच्चाँक खाढ़ीलग रखने दुनू तरहक प्रभाव–नीको प्रभाव आ अधलो प्रभाव–पड़ैक सम्भावना रहिते अछि। ओना, धीरेन्द्र प्रेममोहीकेँ जनैत जे गाममे एकटा प्रेममोही नामक लड़की अछि जे कौलेजमे पढ़ैए। मुदा सोझा-सोझी आइये भेल। धीरेन्द्र प्रेममोहीपर नजैर देलक मुदा प्रेममोहीक नजैर जगमोहीपर छेलै तँए सामने-सामनी नजरिक भेँट आइयो नहियेँ भेल। धीरेन्द्र जेना जगमोहीकेँ चिन्हैत तेना प्रेममोहीकेँ तँ नहि चिन्हैत मुदा सोल्होअना नहियेँ चिन्हैत सेहो बात नहि। धीरेन्द्रकेँ एते तँ बुझले छै किनेजे प्रेममोही हृदयनाथक बेटी छी, बी.ए.मे पढ़ैए। मुदा ऑनर्स रखने अछि से नहि जनैत रहए। जँ से जनैत रहितए तँ जहिना अपनाकेँ जगमोहीक समकक्ष बुझैएतहिना प्रेममोहीकेँ सेहो बुझितए...। सुवासिनीसँ गप-सप्प करैक विचारसँ धीरेन्द्रक मनमे उठल जे जगमोहियोकेँ आ प्रेममोहियोकेँ कहिऐ जे ‘अहाँ सभ दोसरठाम बैस गप-सप्प करू वा किम्हरो टहैल-बुलि जगमोहीकेँ देखाइये-सुना दियौ। मुदा जगमोही, प्रेममोही आ प्रेममोहीक संग आएल रूपमोहीक बीच धीरेन्द्र अपनाकेँ अनाड़ी बुझैत चुपे रहब नीक बुझिकिछु ने बाजल। एक तरहेँ भाए-बहिनक बीचक गप-सप्पमे सुवासिनी बोहिया-भँसिया लागल छेली तँए बीचमे दोसर गप-सप्पकेँ आबए देबनीक नहि बुझिजगमोहीकेँ कहलखिन- “बुच्ची, हम ऐ गाममे जन्मसँ लऽ कऽ सियान भेल छी, तँए बहुत देखने छी मुदा तोहर जन्म तँ भेलह अही गाममे मुदाजन्मक तीनियेँ मासक पछाइत सासुर चलि गेलौं। सासुर कि जाएब जे पटना गेलौं, तँए तोरा कम देखल-सुनल-बुझल छह, भने संगी-सहेली भेटिये गेलह, जाह गाम घुमि-फिर कऽ देख-सुनि आबह।” ओना, जगमोही माइक मुँहक बात सुनि चुकल छल तँए धीरेन्द्रक उत्तर सुनैक जिज्ञासा छेलैहे। मुदा तइ बिच्चेमे पटनाक परिचयकेँ नजर-अंदाज करैत धीरेन्द्र जगमोही दिस ताकि बाजल- “हँ, हँ! जखन जगमोही प्रेमनगर आएल अछि तखन आमेटा किए खाएत, गाम-घरक रूपो-रंग आ हवो-बसात किए ने देहमे लगा लेत।” जगमोही सेहो धीरेन्द्रक अपन रूप सौन्दर्यक संग परिवारिक जीवन-सौन्दर्य सेहो देखए चाहिते छल, जे धीरेन्द्रक अपेक्षा आन-आनसँ बेसी भेटैक सम्भावनाकेँ देखैत जगमोही उठि कऽ ठाढ़ होइत बाजल- “माए, हमर कोनो ठेकान नहि अछि जे कखन घुमि कऽ आएब। तँए, जँ तोरा केतौ घुमै-फिरैक विचार हौ तँतोहूँ टहैल अबिहेँ।” एकान्त शान्त वातावरण होइते धीरेन्द्र सुवासिनीकेँ कहलक- “बहिन, अखन हम ने समाजक कियो छी आ ने परिवारक, अखन हम मात्र विद्यार्थी छी, जेकरा गुरु-शिष्यक आश्रम सेहो कहल जाइतअछि। तँए जाबे छी ताबे तँ छीहे। ओना, अठारह बर्खसँ अपनाकेँ ऊपर सेहो उठा नेने छी आ स्नातक प्रतिष्ठाक छात्रो तँ छीहे, तँए..?” धीरेन्द्रक सुपुट वाणी सुनिते सुवासिनी ओहिना सुवासी भऽ गेली जेना मानसरोवरमे कमल होइए। ओ जहिना अपन बास स्थानपर अडिग भऽ सरोवरक पानिसँऊपर उठि अपन शुभ रूप देखबैए तहिना धीरेन्द्र सन भाएसुवासिनीकेँ देखा पड़लैन।खुशीसँ सुवासिनी बजली- “बौआ, तोहीं सभ ने बाप-दादाक डीह परहक भाए-वन्धु भेलह, अपन दुख-बेथाक कथा तोरा नइ कहबह तँ केकरा कहबै।” सुवासिनीक डगमगाइत जिनगीक डुमैत नाहकेँ अँकैत धीरेन्द्र जखन अपन आँक देखए लगल कि मनमे भकइजोत जकाँ भेलइ। भकइजोत ई भेलै जे अर्जुन सन योद्धापिता आकृष्ण सन माम जखन अभिमन्युकेँ मृत्युसँ बँचाइये नहि सकला तैठाम हम कोन खेतक मुरै छी। मुदा नहि!डगमगाइत बहिनक जिनगीक नाहकेँजेतए-तक पार लगबैक शक्ति अछि ओते तँ कइये सकै छी। तँए, पहिने सुवासिनीक विचारकेँ मानसपटलपर आनब जरूरी अछि। हरिमोहन बाबू जकाँ नहि, जे समाजक अधिकांश समस्याकेँ एकठाम आनि दोस-दुश्मन दुनूकेँ ठाढ़ कऽ देलैन..! धीरेन्द्र बाजल- “अहिना होइ छै बहिन,जखन बेथाएल मन रहने बजैक क्रममे किछु-ने-किछु झोंक उठिये जाइ छइ। तँए,एक-एकटा समस्याकेँ सामने रखैत विचार करू। छोट भाए होइक नाते जेतए-तक सम्भव हएतओतए-तकजरूर संग देब।” सुवासिनी बजली- “सासुरक बात छोड़ि दइ छिअह। भैयारीमे एहेन अन्याय ओहने गाम-सभमे रहह। मनुख छी जेतए रहैक नीक ठौर भेटत सएह ने हमर स्वर्गक बास भेल।” एकटा नमहर प्रश्नकेँ अपने हल होइत देख धीरेन्द्रक मनमे किछु चपचपी आएल। बाजल- “भैयारी समंगर छैथ किने?” सुवासिनी- “हँ।” धीरेन्द्र- “जाए दियौ, वंश बढ़ै तँ बक्खो हुअए...।” अपन रस्ता अपने देखैत सुवासिनी बजली- “सासु-ससुरक सम्पैतसँ तँ छातीमे मुक्का मारि संतोख केनहि छी।” जहिना खिस्साक कोनो एहेन भाग होइ छैजेकरारसिक खिस्सकर बेर-बेर दोहरा-तेहराकऽ कहैए तहिना सुवासिनी पुन: सासुरेक बात दोहरबैत बजली- “ओइ बइमनमा सभकेँ नीक नइ हेतइ। दियादी सम्पैतक बेइमानी नइ पचतै, पेटमे पनिदूदूर हेतै आ मनमे मनरोग।” मने-मन धीरेन्द्रकेँ हँसियो लगै आ आगू जखन बहिनक बेथापर नजैर जाइ तँ विचलितसेहोहुअ लगए।आगू कोन दिशामे बढ़ब नीक हएत से धीरेन्द्रक मनमे एबे ने करइ, तँए मुहसँ निकलबे ने करइ। मुदा सुवासिनीक मन सासुरक धन-सम्पैतक बीच औना रहल छेलैन। औनाइत सुवासिनीक मनमे अनायास विचारक झोंक उठलैन कि बजली- “जहिना हमरा अपन सम्पैतसँ भैयारी-दुसमन सभ अभोग केलक तहिना ओकरो सभकेँ अभोग हेतइ!” सुवासिनीक मनमे सासुरक धन-सम्पैतकेँ बेर-बेर धधरा जकॉं उठैत देख धीरेन्द्रकेँ विचार जगल जे सभसँ पहिने ऐ धधराकेँ शान्त करब जरूरी अछि। जाधैर विचारकेँ आगू नहि बढ़ाएब ताधैर अहिना सुवासिनीक मनमे सम्पैतिक आगि उठैत रहतैन आ ओइमे ओ झड़कैत रहती। धीरेन्द्र बाजल- “बहिन, आब समय बदैल गेल। पहिने जेना बेटा-बेटीक महत्-मे कमी-बेसी छल से आब नहि रहल। आब तँ जहिना बेटा तहिना बेटियो भऽ गेल अछि।” ओना, विचारकेँ दू ढंगसँ देखल जा सकैए, पहिल ऊपरे-ऊपरे माने सरसरी निगाहसँ आ दोसर गहराइसँ माने जिनगीक सच्चाइक आधारपर। धीरेन्द्रक बात सुनि सुवासिनी बजली- “हँ, से तँ अछिए बौआ! देखै छी जे लोकक बेटा सभ बुढ़ माए-बापकेँ छोड़ि गामक[viii] कोन बात जे देशो-कोस छोड़ि केतए-कहाँ चलि जाइए..!” सुवासिनीक विचार सुनि धीरेन्द्रकेँ भेल जे भरिसक बेचारी जिनगीक अगम धार देख महारेपर उग-डुम कऽ रहली अछि। धारमे[ix] पैस पार करैक हिम्मते नहि भऽ रहल छैन। जखन कि सभकेँ अपन-अपन जीवन अछि आ अपन-अपन जीवनधार छै, जइमे सभकेँ अपने पार करैक अछि। दोसर तँ बेसी-सँ-बेसी एतबे ने कऽ सकैए जे अपना ढंगे पार करैक रस्ता बाट-घाटमे किछु शारीरिको-आर्थिक सहयोग कऽ सकैए। ओना, कियो अपन जिनगीक बाट देखा जँ दोसरकेँ शारीरिके वा आर्थिके सहायता करबो करत तैयो ओतेक उपयोगी ओकरा लेल नहियेँ हेतै जेतेकसँओकर कल्याण हेतइ। तँए, पहिने अपने अपन जिनगीक बाट-घाटक बोध हएब जरूरी अछि, जे अपनो लोक खोजि सकैए आ दोसरोसँ प्राप्त भऽ सकैए। ओना, दोसरसँ प्राप्त दू तरहेँ होइए। पहिल- अनुभवसँ प्राप्त अनुभवीसँ आ दोसर- बिनु अनुभव प्राप्त केनिहार खोजी वा विचारवानसँ...। धीरेन्द्रक मनमे उठलै- अपनो तँ अखन सएह छी। अखन तकक जे अपन जिनगी रहल ओ तँ मात्र स्कूल-कौलेज धरिक रहल। मुदा परिवारिक आ समाजिक जिनगी तँ किछु आओर छी...। तैबीच श्यामक पत्नी- सुचिता चाह नेने पहुँचली। सुवासिनीक आगूमे चाह रखैत सुचिता बजली- “ई सभ तँ बजरूआ लोक भेली, क्षणे-क्षण चाह पीबैक आदैत हेतैन, पहिने चाह पीब लोथु तखन निचेनसँ गप-सप्प करैत रहिहैथ।” कहि सुचिता अपन काज दिस बढ़ि गेली। तस्तरीसँ चाहक कप उठा धीरेन्द्र दिस बढ़बए लगली मुदा तइ बिच्चेमे धीरेन्द्र तस्तरीमे राखल दोसर कप उठबैत बाजल- “बहिन, अखन हम ने अहॉंकेँ आग्रह करब। अपनो परिवारमे बेसी दिनपर जखन लोक अबैए तँ पहिने पाहुने स्वरूप ने रहैए। जे उचितो छी। किए तँ घर-परिवारक जे गतिशीलता अछि ओइसँ ओ अनभुआर रहिते छैथ। जेना-जेना गति-विधिक संग जुड़ैत जाइ छैथ तेना-तेना घरवारी बनैत जाइ छैथ।” धीरेन्द्रक बात सुनि सुवासिनीक मनमे उठलैन- ई घर तँ श्यामक छी, ऐठाम जेहने धीरेन्द्र तेहने ने अपनो भेलौं। बजली- “बौआ, ऐ घरक तँ जेहने हम भेलौं तेहने ने तोंहू भेलह।” समगम विचार देख धीरेन्द्र बाजल- “बहिन, अहाँ लिए तँ जेहने ई घर तेहने गामक आन-आन घर,तँए एक्केरंग भेल किने?” विचारक गहराइमे जाइते सुवासिनीक मनसँ अपन सासुरक बेवहार निकैल नैहराक विचार जागि चुकल छेलैन। बजली- “हँ, से तँ अछिए। मुदा सोझे मानब सेहो भेल आ जिनगीक संग मिलि चलब सेहो तँ अछिए।” स्वीकार करैत धीरेन्द्र बाजल- “हँ, से तँ अछिए। मुदा ओ तँ सम्बन्ध आगू बढ़ौने ने बनत। जँ सम्बन्धकेँ रोकि कऽ राखब तखन तँ अपनो बीरान भऽ जाइते छइ।” सुवासिनी- “हँ, से तँ होइते छै मुदा से होइ छै भरल-पुरलक संग। खगलकेँ ते..?” सुवासिनीक मुहसँ ‘खगल’ सुनि धीरेन्द्रकेँ झटहाक चोट जकाँ लागल। झटहाक चोट भेल इशारामे किछु कहब। मुड़ी डोलबैत धीरेन्द्र बाजब शुरूहे केलक कि बिच्चेमे श्याम पहुँच गेला। झटहाक चोट, इशाराक विचारकेँ अनुभव करैत धीरेन्द्र बाजल- “बहिन, खाली श्यामे भाइक परिवारटा केँ अपन नइ बुझियौ, गामक सभ परिवारकेँ अपन परिवार बुझियौ। अहाँ गामक धी छी, अहॉं लिए सभ बरबैर!किए तँ बेटी जाति समाजक होइए नहि कि परिवारक।” ओना, सुवासिनीक ऑंखिक आगू बेटीक भ्रुण हत्या नाचि रहल छेलैन। देख रहल छेली आजुक समाजिक परिवेश, जे बेटी जातिक जीवनकेँ समूल नष्ट करए चाहि रहल अछि।जेतए मनुक्खोक सीमापर पहुँचब बेटी-जाति लेल पहाड़ बनि गेल अछि, तैठाम आजुक मनुख बनब तँ आरो असंख्य पहाड़क बीच जीवन बनियेँ गेल अछि किने..! मुदा ईहो तँ सुवासिनी बुझिये रहल छेली जे आइ जइ तरहेँ समाजक बिखण्डन भऽ गेलआ तइसँ जे समाजक बीचक सरोकार-सम्बन्धक टुटान बढ़ि रहल अछि ओतँ धिया-पुताक खेल नहि जेकरा...। मुदा अपनाकेँ समगम बनबैत सुवासिनी बजली- “दुनियाँ केतबो इलैट-बिलैट जाए मुदा हम तँ अखनो अपन जन्मभूमि आ माए-बापक कर्मभूमि बुझिये रहल छी तखन तँ..?” सुवासिनीक बात सुनि श्यामक मनमे जहिना गँथा[x]कऽ बेथेलैन तहिना धीरेन्द्रक मनमे सेहो गँथाएल। सुवासिनीक बात सुनि श्याम मने-मन विचारए लगला जे अपन सहोदर बहिनक आँखिसँ जे जमुनिया धार बहि रहल अछि, की झूठ एकरा कहल जाए?मुदा हम तँ अधिकारी जरूर छिऐ। जे भाए गामसँ बाहर चलि गेला हुनको बहिन छिऐन, तँए हुनको कहब जरूरी अछि, मुदा माए-बापक बासक मूल वासी तँ हमहीं भेलिऐ किने, तँए हम कि बहिनकेँ बोल-भरोस नहि देबैन। एतबे ने जे जे विभव अछि तइमे पाछू नइ घुसकब। ई तँ अपन भार भेल...। नव जुगक उठैत नवजुबक धीरेन्द्रकमनमे अनेको विचारक हिलकोर लगबे केलै जइसँमन विकृत हुअ लगलै। श्यामक मुँह दिस देख धीरेन्द्र सुवासिनीकेँ कहलक- “बहिन, अखन जाइ छी। बेरूपहर टहलै-बुलैले हमरो घर दिस आउ।” धीरेन्द्रक आग्रहसँ सुवासिनीक मनक मिठाँस जगलैन। जगबो केना ने करितैन, एक तँ जगमोहीक कौलेजक संगीछी धीरेन्द्र,तैपर जाबे पटनामे रहत ताबे परिवारक संगी आ तैसंग अपन जन्मभूमिक सेहो भेबे कएल। मुदा परिवारक एते रोच तँ सुवासिनी रखबे केली जे बिनु भाइयक विचारसँ किछु ने बाजब। तँए, चुपे रहली। तैबीच श्याम आश्वासन दैत धीरेन्द्रकेँ कहलैन- “हम कि सुवासिनी बहिनकेँ नैहरक बाट आकि जगमोहीक मातृकक बाट रोकब। हिनको जन्मस्थान छिऐन आ जगमोहियोक मातृक छिऐ।” गमगीन चेहरा धीरेन्द्रक बनि गेल। धीरेन्द्रकेँ कनी दूर हटला पछाइत श्याम सुवासिनीकेँ कहला- “बहिन, बेरूपहर चारू माय-धी धीरेन्द्रक ऐठामसँ टहैल-बुलि आउ। ओना, दुनू गोरेक आमक गाछी सेहो एक्केठाम अछि आ फड़लो बढ़ियाँ अछि। गाम छिऐ किने, पटना नइ ने छी जे सभ दिन जखन सेव-अंगूर खाइ छी तँ अनेरे किए आमसँ मुँह ऐंठाएब।” [i]गवाह [ii]चलायमान काज [iii]कठीन [iv]परिवारमे अधिक-सँ-अधिक लोकक मृत्यु [v]अपेछा-सम्बन्ध [vi]पति [vii]विजेता होइसँ, जीतसँ [viii]माने परिवारक भीन-भिनौज [ix]जीवनकधारमे [x]गरि कऽ अपन प्रभाव ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। नन्द विलास राय पत्नीक फरमाइस निर्मली बजारसँ घर पहुँचले रही कि पत्नी प्रश्न दागली- “पनीर अनलिऐ की नहि?” हम कहलिऐ- “एहनो कहीं नै अनिऐ, हमरा कि कोनो भूखले सुतबाक अछि जे अहाँक आदेशक पालन नै करब।” पत्नी फेरो पुछली- “आ ब्रेड पकौड़ा?” हम कहलयैन- “जी मेम साहैब, ओहो अनलौं हेन। हमरा कि दलानक अखरे चौकीपर सुतबाक अछि आ भरि राति तौनीसँ मच्छर हौंकैत परात करबाक अछि जे अहाँक फरमाइस पूरा नै करब।” ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। जगदीशप्रसाद मण्डल दुष्टपन आने-आन किसान जकाँ रीतलालकेँ सेहोजुआनीए-सँ अपन परिवारकेँ सम्पन्न किसान परिवार बनेबाक विचार मनमे रहलैन। जहिना जीवनक उद्देश्य सभकेँ सम्पन्नता प्राप्त करब होइए तहिना रीतलालकेँ सेहो रहलैन। तेकर कारण छल जे केतेको पुस्तसँ परिवार किसानी-जीवनसँ जुड़ल रहलैन मुदा समैयक फेड़-फाड़क चलैत नहि भऽ पबैत रहैन। समैयोक फेड़-फाड़क अनेको कारण अछि, जेना गाम-गामक भौगौलिक बनावटक दुआरे कोनो गाम धार-धुरसँ अक्रान्त रहैए तँ कोनो गामक माइटिक शक्ति एतेक क्षीण होइए जे नीक उपजा-बाड़ी नहि भऽ पबैत, तहिना कोनो गामक एहेन बनावट होइए जे ऊँचरस जमीन रहने पाइनिक अँटकाउ नहि भऽ पबैत जइसँ समुचित उपजा-बाड़ी सेहो नहि होइए। खाएर जे होइए ओ तँ गाम-गामक बनावटक अपन-अपन गुण-अवगुणककारणे होइए। मुदा रीतलालक गाम- रोहितपुरक अपन बनावट छै। रोहितपुरक भौगोलिक बनावट एहेन अछि जइमे तीन खाड़ीक जमीन अछि। गामक एक-तिहाइसँ किछु कमऊँचरस जमीन अछि, जेकरा भीठ कहै छिऐ, जइमे लोक घरो-दुआर बनबैए, बाड़ियो-झाड़ी बनबैए आ गाछियो-बिरछी लगबैए। तहिना दोसर तरहक माने दोसर खाड़ीक जमीन अछि, जेकरा तीन फसिला सेहो कहै छिऐ आ मध्यम जमीन सेहो कहै छिऐ, ओहन जमीन एक-तिहाइसँ किछु ऊपरे रोहितपुरमे अछि। आ तेसर तरहक माने तेसर खाड़ीक जे एक-तिहाइ करीब अछि, ओ नीचरस अछि, जेकरा चौरी कहै छिऐ। गामक अधिकांश किसान परिवार ओहन छैथ जिनका तीनू तरहक जमीन छैन। ओना, तीनू तरहक जमीन, लग्गी-डन्टासँ नापल, एक्केरंग नहियेँ छैन मुदा कमो-बेश तीनू तरहक जमीन छैन। किनको चौरीए बेसी छैन, तँ किनको मध्यमे जमीन बेसी छैन माने तीन-फसिला, तहिना किनको ऊँचरस, भीठ जमीन बेसी छैन। खाएर जे अछि ओ तँ सभकेँअपन-अपन अछि। सम्पन्न किसान परिवार बनेबाक पाछू रीतलालक संस्कारमे किसानी संस्कार भरपूर छेलैन। ओना, एहेन विचार किसानक सभ परिवारमे रहैए मुदा रीतलालक मनमे पुस्त-पुस्ताइनसँ अबैत विचारधारा छेलैन। बीस बीघा जमीन रीतलालक पिताजीक अमलमे छेलैन मुदा समैयक चढ़ाव-उतारक कारणे सम्पन्नता नहि आबि सकलैन। सम्पन्नतासँ मतलब ई नहि जे बहुत बेसी जमीन रहल जइसँ उपजा-बाड़ी पर्याप्त भेल। सम्पन्नतासँ मतलब ऐठाम ई जे खेबा-पीबाक अन्न-पानिसँ लऽ कऽ फल-फलहरीकगाछी-बिरछीक संग माछ पोसैक पोखैर-झाँखैरसँ लऽ कऽ दूध-दहीक लेल गाए-महींसिक पालन धरि अछि। बच्चेसँ रीतलाल पढ़ै-लिखैमे नीक विद्यार्थी रहला, जइसँ एम.ए. नीक जकाँ पास केलैन। संयोग बनल, रोहितपुर गामसँ पाँच किलो मीटर पर एकटा कौलेज खुजल, जइमे रीतलालकेँ नोकरी सेहो भऽ गेलैन। गामेसँ कौलेज जाइ-अबै छला जइसँ गाममे रहैक अधिक समय भेटै छेलैन। ओना, नव कौलेज रहने दरमाहा सेहो सरकारी कौलेज जकाँतँ नहियेँ छेलैन, मुदा वेतनक रूपमे दू हजार रूपैआ महीना जरूर भेटै छेलैन। घरपर सँ कौलेज गेने-ऐने आ अपनाकेँ रोजगारी भेने रीतलालक मनमे तृप्ति भइये गेल छेलैन। एक स्तरक शिक्षण संस्था रहितो सभ कौलेजमे सभ रंगक वेतनो भेटिये रहल छल। सरकारी कौलेजमे एक स्तरक वेतन छल आ प्राइवेट कौलेजक वेतन अनेको रंगक छेलैहे। जइ कौलेजमे माने प्राइवेट कौलेजमे पर्याप्त विद्यार्थी छल, जइसँ पर्याप्त आमदनी रहने दरमाहा अधिक भेटै छेलै, आ जइ कौलेजमे विद्यार्थीक संख्या कम छल, तइमे शिक्षककेँ दरमाहो कम छेलैन। मुदा सबहक मनमे ई आशा बनले रहैन जे जाधैर कौलेज सरकारीकरण नहि भेल अछि ताधैर वेतनक कोनो ठेकान नहि अछि। जखन सरकारीकरण कौलेज भऽ जाएत, तखन वेतनमे सुधार भेने एकरूपता भइये जाएत। अही आशासँ सभ शिक्षक काज करै छला। दस बरखनोकरी केला-पछाइत रीतलालक मनमे पुन: अपन परिवारिक संस्कार, माने किसानी जिनगीक संस्कार धीरे-धीरे जोर पकड़ए लगलैन। ओना, अनका जकाँ रीतलालक मनमे कहियो एहेन नहि भेलैन जे खेतक आड़िपर केना जाएब वा कोदारि-खुरपीसँ काज केना करब। ओ विद्यार्थीए जीवनसँ करैत आबि रहल छला, तँए कहियो मनमे ई नहि भेलैन जे लोक हँसत। ओना, गामो-समाज तँ गामे-समाज छी, जँ पढ़ल-लिखल लोक कोदारि-खुरपीसँ खेतमे काज करै छैथ तँ रंग-बिरंगक कुटी-चौल लोक करिते अछि। जइसँ अधला-सँ-अधला वृत्ति- चोरी, ठकनाइ-फुसियेनाइआदिछिपल रहैए आ उचित (सही) काज हँसीक विषय बनि जाइए। दस बरख धरि नोकरीक जीवन बितेला-पछाइत रीतलाल अपन मनकेँ असथिर करैत योजनाबद्ध ढंगसँ अपन परिवारकेँ उठेबाक विचार मनमे ठानि लेलैन। सभसँ पहिने अपन खेतक सीमांकन केलैन। सीमांकन ई केलैन जे केते जमीनमे बास अछि आ केते जमीन चास अछि। बास माने भेल घर-आँगनसँ लऽ कऽ दुआर-दरबज्जा, खरिहाँन, बाड़ी-झाड़ी इत्यादि अछि। तहिना चासक केतेक जीमन ऊँचरस अछि माने गाछियो-कलम लगबै-जोकर आ केते जीमन तीन-फसिला अछि आ केतेक जमीन नीचरस अछि माने चर-चाँचर। जइमे रौदी भेने तँ किछु उपजक आशा होइतो अछि बाँकी समय माने अधिक बरखा भेने वा बाढ़ि एने ओकर मालगुजारियो तक नहि ऊपर भऽ पबैत, सभ डुमि जाइए। जइ जमीनक भैल्यू सेहो कम छै। ओना, एहेन संस्कार सेहो किसान परिवारमे सभ दिनसँ आबिये रहल अछि जे अधला-सँ-अधला जमीन किए ने हुअए, मुदा ओकरा बेचब मर्यादासँ हीन अछि। ओहने जँ परिस्थिति परिवारक भऽ गेल जखन कोनो दोसरचारा नहि रहल तखने लोक जमीन बेचै छैथ। ऐ मानेमे बजरूआ संस्कार गाममे नहि प्रवेश केलक। माने खेतक उपज कम भेने ओइ पूँजीकेँ बेचि बैंकमे जमा कऽ अधिक सूदि उपार्जन करी…। दरबज्जापर बैसल रीतलाल एकाग्र भऽ सोचि रहल छला जे अपन जीवनकेँ समृद्धसँ समृद्धतम अवस्थामे केना बढ़ाएब? प्रश्न तँ जटिल अछिये मुदा केहनो जटिल-सँ-जटिलतम प्रश्न किए ने हुअए, ओकर उपाय नहि अछि वा रस्ता नहि अछि सेहो बात नहियेँ अछि। सेहो अछिए। पत्नीकेँ शोर पाड़लैन। लगमे अबिते सुशीला बजली- “किए शोर पाड़लौं?” गम्भीर दृष्टिएँ गम्भीर मुद्रामे रीतलाल बजला- “बैसू, जीवनक किछु गम्भीर विचार करब अछि।” ओना, जीवनक किछु ‘गम्भीर विचार’ सुनि सुशीला अकबका गेली। अकबकाइक कारण भेलैन जे जीवन तँ जीवन छी ओइमे गम्भीर विचार की भेल। रीतलालक लगमे बैसैतसुशीला बजली- “की जीवनक गम्भीर विचार?” साधारण पढ़ल-लिखल सुशीला, माने स्कूली शिक्षा मात्र मिडिल धरिक छेलैन तहूमे सासुर बसला पछाइत परिवारक काजमे तेना उलैझ गेलीजे किछु पढ़ै-लिखैक समैये ने भेटलैन मुदा परिवार चलबैक तँ लूरि,परिवार सम्हारैक ढंग तँ ओतेक भइये गेल छैन जे घर-अँगनाक काज सम्हारि तीनटा बालो-बच्चाकेँ पोसिये रहल छैथ। रीतलाल बजला- “गम्भीर विचार ई जे परिवारकेँ बेसी-सँ-बेसी नीक केना बनाएब। ओना, परिवार छी, नीक कि बेजाए चलिये रहल अछि आ आगूओ चलबे करत।” पतिक मुँहक बात ‘परिवारकेँ बेसी-सँ-बेसी नीक बनाएब’सुनि सुशीलाक मनमे जेना एक नव चेतनाक जागरण भेलैन। जे सोभाविको अछिए। सबहक मनमे ई इच्छा रहिते छै जे अधिक-सँ-अधिक नीक बनि परिवारोकेँ अधिक-सँ-अधिक नीक बनाबी। ओना, सुशीलोक चेतना सुतल नहियेँ छेलैन, जागृतावस्थामे छेलैन्हे मुदा जे जीवन जीब रहल छेली तइ अनुकूल ठमकलो तँ छैन्हे। जागृतावस्थाक माने भेल वर्त्तमानक जिनगीकेँ सम्हारि आगूक लेल सेहो क्रियाशील बनाएब, से नहि छेलैन। जे जीवन छलैन तेकरे पाछू अपन सभटा समय निकैल रहल छेलैन, जइसँ आगूक कोनो नव विचार व नव काज नहि आबि पबैतरहैन। जमीनक जहिना-जहिना सीमांकन रीतलाल मने-मन करए चाहि रहल छला तहिना-तहिना जीवनक सीमांकन करैक विचार सेहो मनमे जगलैन। जीवनक सीमांकन करैक विचार मनमे जगिते विचार उठलैन जे भलेँ पति-पत्नीए किए ने होइ, मुदा जँ पहिने पत्नीक सीमांकन करए लगब तँ हुनका मनमे ईहो उठि सकै छैन जे हमर आलोचना कऽ रहल छैथ, तँए नीक हएत जे पहिने अपने दिससँ सीमांकन शुरू करी। रीतलाल बजला- “अपन परिवारमे पूर्वजक देल बीस बीघा जमीन अछि, आ आइ दस-बारह साल स्थायी नोकरीक आशामे समय सेहो बीत गेल, दू हजार रूपैआ महीना जे शुरूमे भेटब शुरू भेल ओतबे अखनो भेट रहल अछि। जइ आशामे समय बीता रहल छी ओ पूर्ति हएत कि नहि तेकरो कोनो निसचित ठेकान नहियेँ अछि। तहूमे देखते छी जे दस-बर्खक बीच महगाइ सेहो केतेक बढ़ि गेल अछि। जेतेक वस्तु दू हजारमे कीनै छेलौं तेते वस्तुक दाम अखन तीन-चारि हजार भऽ गेल अछि। तैसंग परिवारो बढ़ि रहल अछि आ खरचो बढ़िये रहल अछि।” पतिक विचार सुशीलाकेँ जँचलैन। जँचबो केना ने करितैन। आँखिक सोझमे सभ किछु देख रहल छेली। सुशीला बजली- “हँ, से तँ बढ़िये रहल अछि। तइले ते अपने ने किछु करौ पड़त आ विचारौ पड़त।” रीतलाल बाजल- “अपना जे सम्पैत अछि, माने खेत अछि, जँ ओकरा समुचित ढंगसँ क्रियाशील बनाएब तँ ओही पाछू अपन समैयोक सदुपयोग हएत आ आमदनियोँमे केता गुणा वृद्धि हएत, जइसँ परिवरो चलत आ आगूक लेल पूजियो बनैत जाएत जइसँ श्रमक संग पूजी सेहो सहारा होइत जाएत।” ओना, रीतलालक विचारमे वैज्ञानिक विचार छेलैन, माने आधुनिक सोच रहैन मुदा सुशीला नीक जकाँ नहि बुझि पेब रहल छेली। नहि बुझैक कारण छेलैन जे अखन धरि जे परम्परागत खेती रहल, जे सभ दिनसँ सुशीला देखैत आबि रहल छेली, तही बीच विचार अँटकल छेलैन। आगूक नव दिशा नहि देख सुशीला अपन हीया हारि बजली- “हम कहुना भेलौं तँ स्त्रीगणे ने भेलौं, पुरुख-पात्र तँ अहीं ने छी। बेसी-सँ-बेसी हम अहाँक पीठपर रहब, सहए ने। करब तँ अहीं ने।” पत्नीक बात सुनि रीतलालक मनमे एकटा सहयोगीक सहयोगक आशा जगलैन। जइसँ मनमे भेलैन जे करैबला लोक तँ असगरो किछु-सँ-किछु कऽ सकैए, तैठाम जँ एकटा सहयोगी भेट जाए तखन तँ आरो ने किछु कऽ सकैए। रीतलाल बजला- “आजुक जे दुनियाँ अछि ओइमे एहेन-एहेन तकनीकी साधन आबि गेल अछि जे जइ जमीनमे पाँच मन अन्न उपजैए ओइमे पचीस मन उपजत। जरूरत अछि ओकर समुचित बेवस्था करैक। अपनो देखिये नहि रहल छी बल्कि कइयो वएह रहल छी जे बाप-पुरुखा करइ छला।” अपना जनैत रीतलाल वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखलैन, मुदा सुशीला नीक जकाँ नहि बुझि सकली। असंमजसमे पड़ल सुशीला बजली- “से केना करब?” रीतलाल बजला- “जीवनमे स्वतंत्रसँ किछु करैसँ पहिने मनुष्यकेँ अपनाकेँ स्वतंत्र बनबए पड़तै। जाबे तक अपनाकेँ स्वतंत्र नहि बना लेत ताबे तक अपन काजो आ अपन विचारोकेँ स्वतंत्र रूप सँ आगू नहि बढ़ा सकैए।” ओना, स्वतंत्र हएब केकरा अधला लगै छै जे सुशीलाकेँ लगितैन। मुदा लोके वा आने जीव-जन्तु केना परतंत्र अछि से सुशीला बुझिये ने पेब रहल छेली। अपना जनैत ओ अपनाकेँ स्वतंत्र बुझिये रहल छेली। किएतँ अपना जनैत अपन जे परिवारिक काज छेलैन, ओ स्वतंत्र ढंगसँ करिते आबि रहल छेली। ओना, चिड़ैयो-चुनमुन पिंजराक बाससँ खुला अकासमे भ्रमण करब नीक बुझिते अछि मुदा ओकरामे ओ चेतना नहि छै जे स्वतंत्र-परतंत्रक रूपकेँ बुझत। सुशीला बजली- “की स्वतंत्र आ की परतंत्र?” रीतलाल बजला- “काल्हि जा कऽ कौलेजक सेक्रेट्रीकेँ कहि देबैन जे हम आब कौलेजक काजमे सहयोग नहि करब।” कौलेजक नोकरी छोड़ब सुनि सुशीला बजली- “आजुक परिवेशमे नोकरी भेटब कठिन अछि तैठाम अहाँ भेल नोकरी छोड़ब से अपना सन हएत..!” रीतलाल बजला- “अपना सन तखने हएत जखन अपन विचारानुसार अपन काज बना अपना जीवनकेँ ठाढ़ करब। देखते छी जे दिनक समय ओही पाछू माने कौलेजक पाछू बीत जाइए, रातिमे घरपर रहै छी, जे समय घरसँ बाहर काज करैक छीहे नहि, तखन अपन काज केना करब?” पतिक बात सुनि सुशीला गुम भऽ गेली। किछु समय गुम्म रहला-पछाइत बजली- “अपना जे सोहंतगर लागए सहए करू। मुदा..!” रीतलाल बजला- “मुदा-तुदा किछु ने, बहुतो कौलेजमे देख रहल छी जे नोकरीक लोभमे शिक्षक अपन जिनगी बीता लेलैन मुदा ने कौलेजक स्थिति बदैल सकल आ ने शिक्षकक संग कर्मचारीक जीवन स्तर सुधैर सकल। जीवन-जीवन छी, तहूमे बुधिजीवी मनुखक तँ आरो ओहन छी जे किछु-सँ-किछु कऽ सकैए। केकरो मनुख जीवन एकेबेर भेटै छै, तेकरो जँ पानिमे बहा लेत तखन ओ जीवन की भेल?” सुशीला बजली- “अपन जे मन मानए सहए करू। मुदा हम एते कहबे करब जे मनक उद्वेगमे एहेन विचार उठि रहल अछि।” रीतलाल बजला- “मनक उद्वेग जेकरा कहै छिऐ ओ सभटा अधले थोड़े होइए। मनेक उद्वेगमे ने लोककेँ किछु करैक लालसा सेहो जगैए आ किछु करबो करैए। अपने परिवारमे, आइ हम नोकरीकेँ एते महत् दइ छिऐ, मुदा जे नोकरीक फल भेट रहल अछि ओइसँ परिवार चलि सकैए? जखन परिवार चलि नहि सकैए तखन आगूक उन्नैत तँ मात्र कल्पना हएत। पिताजीक अमलदारी तक जे प्रतिष्ठा परिवारक छल आ जीवन स्तर छल, ओतबो आइ अछि? जखन नहि अछि, तखन अपनो दिस ने देखए पड़त जे अपन श्रमशक्ति केतौ-ने-केतौ हेराएल अछि।” रीतलाल कौलेजक नोकरी छोड़ि देलैन। अपन सम्पैतिकेँ नीक जकाँ सीमांकन केलैन। सीमांकन केला-पछाइत चतुर्दिक उन्नतिक रस्तापर नजैर दौड़ौलैन। आगू नजैर उठिते पहिल चीज देखलैन जे जहिना सभ अपन पदकेँ प्रतिष्ठित रूपमे देखै छैथ तहिना ने अपनो देख रहल छी। की मनुखक प्रतिष्ठा यएह भेल जे उच्च पदपर आसीन भऽ गेलौं, मुदा मनुखक जे गुण अछि, जेना नीक आचरण बना जीवन-जापन करब से रहबे ने कएल, तखन ओ प्रतिष्ठे की भेल। ओना, नव सिरासँ कोनो परिवारकेँ उठैमे साधनक जरूरत, माने पूजीक खगता सेहो पड़ैए, मुदा योजना बना एक्केबेर जँ सभ दिशामे बढ़ए चाहब तखन जँ पूजीक ओरियान कोनो रूपे कैयो लेब तैयो काजक ओत्ते बढ़ोत्तरी भऽ जाएत जेकरा सम्हारब कठिन अछिए। तँए नीक हएत जे एक-एक मुद्दाकेँ पकैड़,बेरा-बेरी सुदृढ़ करैत आगू बढ़ी, जइसँ दुनू लाभ हएत। काजमे सुदृढ़ता एने आमदनी सेहो बढ़ैत जाएत आ काजक बेवहारिक अनुभव सेहो होइत जाएत। मन असथिर करैत रीतलाल विचारए लगला जे जइ काजमे पूजीक ओते आवश्यकतो नहि अछि आ अपनो किछु ओहन पूजी अछिये जे बेकार भेल नष्ट भऽ रहल अछि, पहिने तेकरा जँ उपयोगमे आनि क्रियाशील बनाएब, तँ ओ बेसी नीक हएत। ऐठाम एकटा बात आरो अछि, ओ अछिमनकेँ असथिर करब। मन चेतनहीन अछि जेकरा चित्त (चेतना) चेतनशील बनबैए, तँए चित्तकेँ असथिर करब आवश्यक अछि। जखने चित्त असथिर हएत तखने मनक क्रिया सेहो असथिर हेबे करत। योजनानुसार रीतलाल पहिने अन्नक खेती करैक विचार तँइ केलैन। अन्नक खेतीक योजना बनैबते रीतलालक नजैर खेतपर गेलैनजे अढ़ाइ बीघा खेतमे खरहोरि अछि जेकर कोनो उपयोग आब नहि रहल। ने खढ़क जरूरत लोककेँ रहलै आ ने खरहोरिक खेतसँ समुचित उपजे आबि रहल अछि। अगर ओकरा तोड़ि, माने खरहोरिकेँ उपटा अन्नक खेत बना लइ छी तँ सइयो मनसँ ऊपर अन्नक पैदावार हएत। ऐठाम दूटा प्रश्न विचारणीय अछि। पहिल, जे-जे खेत उपजाउ अछि माने जइमे अन्नक खेती होइए ओकरा सभकेँ समुचित ढंगसँ बढ़ाबी।समुचित ढंग भेल, समयपर ओकरा जोत-कोर करैत समयपर अवादब। अवादैक पाछू सेहो एकटा प्रश्न अछि जे परम्परागत बीजकेँ बदैल, उन्नैतशील बीजक उपयोग करब। चिन्तन क्रियाक बीच रीतलालकेँ जेना नव-नव दृष्टिकोणो आ नव-नव विचारो मनमे जगिये रहल छेलैन...। तैबीच रीतलाल अनायासे पत्नीकेँकहलैन- “अखन धरि जे जिनगी बना जीब रहल छी ओइमे नवीनता आनए पड़त। जखन जिनगीक क्रियामे नवीनता औत तखन ने समैयक संग चलि सकब।” ओना, सुशीला सोल्होअना पतिक काजो आ विचारोपर ओंगठल छेली तँए ‘हँ-हूँ’किछु ने बजली। सुशीलाकेँ चुप देख रीतलालक मनमे उठलैन जे खाली खढ़े-खरहोरिक बात नहि अछि। कहैले बीघा भरि-भरि दूटा पोखैरियो अछि मुदा अइसँ केतेक आमदनी भऽ रहल अछि। तहूमे समय बदलने माने चापाकल भेने ओकर महत् आरो घटि गेल अछि। तहिना गाछी-कलम सेहो अछि। तीन बीघा जे पहिलुका गाछी-कलम छेलैन, जे गाछ सभमे पुरान भेने फड़बो कमि गेल छेलैन आ अधिकांश गाछ बिमरियाह सेहो भऽ गेल छेलैन, ओकरा उपटौने एतेक पूजी भइये जेतैन जे अपन विचारक अनुकूल अपन सम्पैतकेँ क्रियाशील बना लेता। तीन बीघा गाछी-कलमकेँ उपटा जे बीघा भरिक नव सिरासँ कलम लगौलैनओ फड़ब शुरू भेल। दस साल बीतैत-बीतैत रीतलाल गामक एकटा सम्पन्न किसान बनि अपनाकेँ स्थापित कऽ लेलैन। गामो तँ गाम छी, रंग-बिरंगक लोकक बास भूमि सेहो छीहे। रीतलालक गाछी-कलमसँ सटा आन-आन किसान तेना हरोथ बाँस रोपि देलकैन जे गाछक बढ़बाड़ियो रूकि गेल आफड़ब सेहो बन्न भऽ गेल। पत्नीकेँ रीतलाल कहला- “यहएछीसमाज जे दुष्टपनसँ भरल अछि।” अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। मुन्नाजी बीहनि कथा अदौ सँ... --हमरा बेर पर अहाँ सब कें अहिना लेसि दैए।इ बुझियौ ने जे इ एकटा पुरस्कार मात्र नै,हमर बौद्धिक संपति छी।खाली लिखि के नै , अर्जित संपूर्ण धनराशि छोड़ि क' महानता थोपेलौं ऐछ। -- बाउ, तोंही टा लिखै छह की ?तोरा सँ अजोध लेखक सब एत' काहि कटै छथि।की हुनकर रचना निश्शन सन नै? --जकरा देखू तकरा गलथोथरइ, सेहो खाली सिरखारी पोथी पर। पोथी पर चर्चा कहियो नै। --रौ, आबो मूँह चुपकर !हमरा नै बूझल ऐछ जे तोरा कोना भेटलौए पुरस्कार ! -- हें..हें..हें। कक्का " डगरिन सँ कतौ पेट नुकेलैए ?" अहींक डेलवाहि क' त' सिखलौं जोगाड़।जहिना अहाँ पौलहुँ तहिना हम । -- ओह! " जाहि घरक पानिए विषान्हि हो ताहि घर साकट ताक'चललौं।" अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ज्ञानवर्द्धन कंठ बोंगहा मिठाइ पचहीबाली काकी कार्तिक नहाकय घुरैत रहथि।संगे रहथिन झिरिया माय।कहलथिन- "गै मौगी, भुखले छें।पेटमे मुसरी दंड देने हेतौह।चल, कोनो नीक होटलमे कनी पानि पीबि ले।गाम पहुँचैत-पहुँचैत बेरि डुमि जेतौह।तखन कह' लगबें जे कोन धोंछीक संगे गेलहुँ जे पेटमे अगराही ढुकले रहि गेल।चल, झटकारि क'!" सामने एकटा खूब फैशनेबुल रेस्टोरेंट रहैक।दूनू जनी झोरा-झंटा लेने ओहिमे घुसि गेलीह।एकटा बैरा झटकल लग आबि मेनूबला कागत हिनका सभक टेबुल पर राखि देलकनि।काकी बजलीह- "रौ छौंड़ा!ई कोन कागत घुसका घसकल जाइ छें?ई की छियौक?बंगोर?रौ,हमरा सभ ई कागते चिबायब कि?" ओ घुरलनि आ कहलकनि- "उसमें देखिए और बोलिये क्या खाना है? जो आर्डर कीजियेगा सो आ जायेगा?" काकी कहलथिन- "जे की कहेंगे?कोनो लहसुन-पियौज कहेंगे?खाली मधुर-मिठाइ कहेंगे।आन किछ थोड़बे बाजेंगे?" ओ कहलकनि- "कौन-सी मिठाई ला दें?" काकी- "मिठाइ आनेगा त' आनो ने रे बोंगहा मिठाइ जल्दी सनी!" ओ बैरा काउंटर पर गेल।ओकरा सभमे बड़ीकाल धरि हुज्जति होइत रहलैक।मनेजर कहलकैक- "वो जो मिठाई माँग रही है, उसका तो नामो नहीं सुने हैं।बोलेंगे नहीं है,तो रेस्टोरेंट के इमेज पर पड़ेगा।जाओ,संभालो कस्टमर को!" ओहि बैराकेँ अबैत देखि पचहीबाली काकी चिचियेलीह- "छुच्छे हाथ डोलबैत अबै छें एत्तीकाल पर?आना रे बोंगहा मिठाइ तों?" ओ कहलकनि- "दादी,वो मिठाई..." काकी कहलथिन- "तखन त' बड़े गप्प छाँट रहा था जे जे बाजेंगे से आन देगा।आब की हुआ?मिठाइ नैं रखता है बना क'?" ओ कहलकनि- "दादी, बड़ा होटल है।यहाँ सब आइटम मिलता है..." काकी- "तखन आना किए ने?" बैरा- "बोंगहा मिठाई था,लेकिन एगो कस्टमर आर्डर देके ले गया है।इसलिए...." काकी- "चल गे झिरिया माय!एकर मधुरे सठि गेलैक अछि। होटल खोलने अछि नानाक सगाई लेल!" ई कहि दूनू जनी विदा भेलीह।काउंटर लग दुनिया भरिक मिठाइ शीशाक भीतर देखाइ देलकनि।देखितहि काकी बुमकार छोड़लनि- "रौ अन्हराक नाति!एतेक मिठाइ राखि बइला रहल छलें? की बुझाया जे मौगी पाइ ले के पड़ा जाएगा?लो,अगौं पाइ धरो आ खुआओ मिठाइ! थमो, झोरा खोलबाइये दिया त' परसादी-बद्धी भी ल'ए लो।" ई कहि काकी सभ स्टाफ आ उपस्थित ग्राहक लोकनिकेँ परसादी-बद्धी बाँटि मिठाइ खा क' बहरेलीह।पूरा होटल रोड तक अरियातक लेल एलनि।मनेजर चरण छूबि कहलकनि- "माताजी,ये पैसा वापस लीजिए और आशीर्वाद दीजिये।" काकी आँचर सँ नोर पोछि देलथिन।कहलथिन- "पाइ रखो लोक।हमर असिरबादी है।हम फेन आबेंगे त' तोरा सभसे भेँट करेंगे।भगमान हँसी-खुशी राखेंगे!" अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ज्ञानवर्द्धन कंठ कुसियारक गाड़ी दृश्य 1: साठि ईस्वी।गामक सड़क पर कटहीगाड़ी कुसियार लदने चलल जा रहल छैक।चें-एं-चें-ओं-चें....।पाछाँ-पाछाँ लुंगी पहिरने एकटा दढ़ियल हाथमे सटका लेने चलि रहल छैक।बच्चा-सभक झुंड ओकरा पिठियौने चलल जा रहल छैक,नेहोरा करैत- "हौ,एकटा दय ने हौ!कुसियार!" कनी-कनी कालक उपरांत दढ़ियल बाजि उठैत छैक- "चोप्प!" अंततोगत्वा हटियागाछी लग गाड़ीसँ घीचि दू-चारि छड़ द' ओ पिंड छोड़बैत अछि।बच्चा सभ कुदैत घुरैत अछि। दृश्य 2: सतहत्तर ईस्वी। कुसियार-बोझल ट्रक सरपट भागल जा रहल छैक।दुखना दोकान लग घुमान पर ट्रक स्लो कर' पड़ैत छैक।चारिटा छौड़ा झटपट ट्रकक पाछाँ छड़पि पिछलका जालीमे सँ झीकि-झाकि हाइं-हाइं आठ-दस छड़-कुसियार खसा कूदि घुरैत अछि।ट्रक स्पीड ध' आगाँ बढ़ि जाइत छैक।खलासी खिड़की सँ नीचाँ ताकि गरिया रहल छैक। दृश्य 3: दु हजार बीस ईस्वी।हटियागाछी लग ट्रैक्टर पर कुसियार लादल छैक।लोक 'बीस टके छड़' कुसियार कीनि रहल अछि।आब कुसियारक गाड़ी छठियेमे गाम अबैत छैक। अपन मंतव्य editorial।staff।videha@gmail।com पर पठाउ। आशीष अनचिन्हार मैथिली वेब-पत्रकारिताक इतिहास ई कहब उचित नै जे हम इंटरनेटपर एकदम शुरूसँ छी मुदा अतेक तँ जरूर कहब जे जखन इंटरनेटपर मैथिलीक नींव मजगूत करबाक रहै (मने नीँव पड़ि गेल रहै) ताहि समयसँ हम इंटरनेटपर जरूर मैथिलीसँ जुड़ल छी। निश्चित तौरपर ओहि समयक बहुत बात हमरा बूझल अछि एवं आ ओहि समयमे रहल किछुए लोककेँ ई बूझल हेतनि। तँइ नवम्बर 2012 मे हम 'विदेहक वेब पत्रिकारिता विशेषांक' केर घोषणा केने रहियै आ ओकर जे टापिक बनेने रहियै से देशक कोनो विकसित भाषाक समकक्ष रहै। मुदा ओहि समयमे की एखनो एहि टापिकपर लीखए बला नै छथि। बादमे हम अपने एहि लिस्टमेसँ किछु टापिकपर लिखलहुँ आ तकरे नाम "'मैथिली वेब पत्रिकारिताक इतिहास" राखि देलियै। फेर बादमे मोन भेल जे हम अपने लिखलकेँ विदेहक कोनो अंकमे प्रकाशित कऽ दी आ तकरे 'वेब पत्रिकारिता विशेषांक' बूझल जाए। आ संपादक महोदय एहि लेल तैयार भेलाह। हम अपन फेसबुक पोस्टक फोटो सेहो लगा रहल छी एहि लेखक अंतमे। मुदा एहि ठाम देल आलेखक भाषा ओ हमर पोथीक भाषा दूनू मे किछु अंतर छै। तथ्य ओतबे भेटत मुदा एकरा विशेषांक अनुरूपे बनाएल गेल अछि एहिठाम। एहि पोथी केर किछु आलेख विदेह ओ तीरभुक्ति पत्रिकामे प्रकाशित भेल छल। 'मैथिली वेब पत्रिकारिताक इतिहास” इंटरनेटपर मैथिल आ इंटरनेटपर मैथिली ई दूनू बात अलग रहितो एक दोसरक सहायक अछि। इंटरनेटपर पहिने मैथिल एलाह आ संगे-संग मैथिली सेहो एलीह। लेकिन ई घटना अलग-अलग स्थानपर अलग-अलग मैथिल सभ द्वारा भेलै। ई. 2000 मे http://maithili.org/ साइट सक्रिय छल मुदा एकर भाषा अंग्रजी छल। ई साइट प्रवासी अमेरिकन द्वारा संचालित छल (खास कऽ नेपालक मैथिल बेसी) एहि साइटपर किछु मैथिली गीत ओ दूर्वाक्षत मंत्रक आडियो-भीडियो छल। बादमे ई बंद भेल आ संभवतः एकरे दोसर रूप http://maithili.net/ 2002 मे आएल (ओना दूनू साइट केर संचालक अलग सेहो भऽ सकै छथि)। अही क्रममे हम http://maithils.home.att.net/ केँ राखब जे कि 2003 सँ एखन धरि अछि। मुदा एकर सभहक भाषा अंग्रजी मुख्यतः अछि मैथिली नै। मैथिली सेहो ई. 2000 मे इंटरनेटपर आएल 'भालसरिक गाछ' केर रूपमे। गजेन्द्र ठाकुर जी याहूसिटीजपर बहुत रास मैथिलीक साइट बनेने छलाह मुदा ताहिमेसँ "भालसरिक गाछ" केर लिंक (जे सन 2000 सँ याहूसिटीजपर छल) बाँचल अछि। एकर लिंक http://www.geocities.com/bhalsarik-gachh/ अछि। याहूसिटीज पर ई बंद भेलाक बाद 5 जुलाई 2004केँ एही नामसँ ब्लागरपर सेहो गजेन्द्र ठाकुर द्वारा ब्लाग बनाएल गेल आ जनवरी 2009मे एकरा विदेहक संग जोड़ि देल गेलै आ आब ई http://www.videha.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html लिंकपर आर्काइभ सहित अछि। एहिठाम मोन राखब जरूरी जे याहूसिटीज बला ब्लाग केर आर्काइभ उपल्ब्ध नै अछि। किछु लोक ई मानै छथि जे हम जहियासँ शुरू केलहुँ तहिये पहिल भेलै तँइ आब हम विस्तारसँ विवेचना करब। अंतरजाल (इंटरनेट) केर परिचय अंतरजाल (इंटरनेट), एक दोसरसँ जुड़ल संगणकक एकटा विशाल विश्व-व्यापी नेटवर्क वा जाल छै। एहिमे बहुतों संगठन, विश्वविद्यालय, आदिक सरकारी आ प्राइभेट (निजी) संगणक जुड़ल छै। अंतरजालसँ जुड़ल संगणक एक दोसरासँ इंटरनेट नियमावली (Internet Protocol)क माध्यमें सूचनाक आदान-प्रदान करैत छैक। इंटरनेटक माध्यमें भेटए बाल सुविधामे वेबसाइट, ई-मेल सुविधा प्रमुख अछि। एकर अतिरिक्त सिनेमा, गीत-संगीत, खेल आदि सेवाक सुविधा सेहो इंटरनेटक माध्यमसँ प्राप्त कएल जाइत छै। इंटरनेटक संक्षिप्त इतिहास इंटरनेटक इतिहास 1969- इंटरनेट अमेरिकी रक्षा विभाग द्वारा UCLA आ स्टैनफोर्ड अनुसंधान संस्थानक कंप्यूटर्स केर नेटवर्किंग कए कऽ इंटरनेटक संरचना कएल गेलै। 1979- ब्रिटिश डाकघर पहिल अंतरराष्ट्रीय कंप्यूटर नेटवर्क बना कऽ नव प्रौद्योगिकी केर उपयोग केनाइ शुरू केलक। 1980- बिल गेट्स केर आईबीएम कम्पनीक कंप्यूटर्सपर एकटा माइक्रोसॉफ्ट ऑपरेटिंग सिस्टम लगेबाक लेल बातचीत पक्का भेल। 1984- एप्पल पहिल बेर फ़ाइल आ फ़ोल्डर, ड्रॉप डाउन मेनू, माउस, ग्राफिक्स आदिक प्रयोगसँ युक्त "आधुनिक सफल कम्प्यूटर" लांच केलक। 1989- टिम बेर्नर ली इंटरनेटपर संचार माध्यमकेँ सरल बनेबाक लेल ब्राउज़र, पन्ना आ लिंक केर उपयोग कए कऽ वर्ल्ड वाइड वेब बनेलक। 1996- गूगल स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालयमे एकटा अनुसंधान परियोजना शुरू केलक जे कि दू साल बादसँ काज करए लागल। 2009- डॉ स्टीफन वोल्फरैम "वोल्फरैम अल्फा" लांच केलाह। भारतमे इंटरनेट 80क दशकमे एलै (1986), जखन एर्नेट (Educational & Research Network)केँ सरकार, इलेक्ट्रानिक्स विभाग आ संयुक्त राष्ट्र उन्नति कार्यक्रम (UNDP) द्वारा प्रोत्साहन भेटलै। सामान्य उपयोग लेल 15 अगस्त 1995सँ इंटरनेट शुरू भेलै जखन कि विदेश सचांर निगम लिमिटेड (VSNL) द्वारा गेटवे सर्विस शुरू भेलै। वर्तमान भारतमे आब अधिकांश काज जेना बैंकिंग, ट्रेन इंफॉर्मेशन-रिजर्वेशन आदि इंटरनेट द्वारा भऽ रहल छै। इंटरनेट आ मात्र शहरी नै गामोक लोक प्रयोग कऽ रहल छथि जे भविष्यक लेल नीक अछि। इंटरनेटक प्रयोग करबामे एखन भारत विश्वक चारिम आ एशियाक तेसर देश अछि। भारतक 10 सँ 30 सालक उम्र वर्ग बला युवा बेसी इंटरनेट उपयोग कऽ रहल छथि। इंटरनेटक प्रयोगमे आश्चर्यजनक रूपसँ बढ़त देखल गेल अछि। बर्ख 2000सँ 2009 केर मध्य पूरा दुनियाँमे इंटरनेट प्रयोग करए बला लोकक संख्या 394 मिलियनसँ बढ़ि कऽ 1.858 बिलियन भऽ गेल। बर्ख 2010मे दुनियाँक कुल जनसंख्याक 22 फीसदी लोक लग इंटरनेट पहुँचि गेल रहै आ एहि समय धरि 1 बिलियन गूगल सर्च रोज होइत छलै,300 मिलियन प्रयोगकर्ता ब्लाग पढ़ए लागल, आ 2 बिलियन भीडियो रोज यूट्यूबपर देखल जाए लागल। बर्ख 2014मे पूरा दुनियाँमे इंटरनेट प्रयोग करए बलाक संख्या 3 बिलियन (43.6 प्रतिशत) पहुँचि गेल छल मुदा एहिमेसँ लगभग दू-तिहाई हिस्सा धनी ओ विकसित देशक छल। इंटरनेटक बहुत रास फायदा छै ताहिमेसँ किछु प्रमुख फायदा एना अछि-- 1) इंटरनेटक सहायतासँ हम सभ कोनो प्रकारक जानकारी प्राप्त कऽ सकै छी 2) इंटरनेटसँ बिना कोनो लेन देनकेँ चिट्ठी पठा सकै छी (मेल) 3) इंटरनेटक सहयातसँ विभिन्न प्रकारक मनोरंजन जेना फिल्म, संगीत, खेल आदि कऽ सकै छी 4) इंटरनेटक सहायतासँ आब टिकट बुकिंग, बैंकक काज, शिक्षा, दोकानदारी, नौकरी आदि केर सेहो सुविधा लऽ सकै छी 5) आजुक राजनीति सेहो इंटरनेटसँ प्रभावित अछि। मिश्रमे इंटरनेटक सहायतासँ क्रांति सेहो भऽ गेल छै। सोशल नेटवर्किंग केर सहायतासँ समाजक भिन्न भिन्न लोकसँ जुड़ि सकै छी, समाजसेवा कऽ सकै छी। उपरक लाभक अतिरिक्त इंटरनेटक हानियो बहुत छै ताहिमेसँ किछु प्रमुख हानि एना अछि— 1) इंटरनेटक आदति लागि गेलाक बाद एहिसँ समयक नोकसान सेहो होमए लगैत छै। एकर लक्षण इंटरनेट एडिक्शन डिसआर्डर केर रूपमे अबैत छै। इंटरनेटक बिना उदास अनुभव करब, पाँचसँ पंद्रह घंटा धरि आनलाइन रहब, घरसँ कम निकलब, कंप्यूटरक समाने वा मोबाइल लऽ कऽ भोजन करब। वास्तविक समाजिक जीवनसँ कटि जाएब, दिन भरिमे सैकड़ो बेर अपन ई-मेल चेक करब आदि इंटरनेट एडिक्शन डिसआर्डर केर लक्षण अछि। वस्तुतः ई आने नशा जकाँ सेहो नशा अछि। 2) जँ अहाँ आनलाइन काज बेसी करैत छी तँ अहाँक गोपनीय सूचना हैक होबाक बेसी संभावना अछि जाहिसँ अहाँकेँ बड़का नोकसान भऽ सकैए जेना कोनो गलत आदमी द्वारा बैंकसँ पाइ निकालि लेब वा दोकानदारी कऽ लेब आदि। एहि तरहँक धोखाधड़ीसँ बचबाक लेल कुछ काज बरोबरि करैत रहू जेना कि- अपन पिन नम्बर आ पासवर्ड किनको नै कहू। पासवर्ड बरोबरि बदलैत रहू। पासवर्ड वा पिन नम्बर कोनो स्थितिमे फोनमे वा ई-मेलमे सेभ कए कऽ नै राखू। स्पैम बला ई-मेलकेँ बिना जबाबा देने खत्म कए दियौ। सार्वजनिक स्थान बला वाइ-फाइ केर उपयोग नहिए करी तँ नीक। 3) पोर्नोग्राफी ई इंटरनेटक सभसँ बड़का खतरा छै आ बच्चा लेल विशेष रूपें। मात्र बच्चे नै युवा आ विवाहित सेहो एहि जालमे फँसल छथि। पोर्नोग्राफमे दवाइ आ तकनीकक सहायतासँ असंभव सन यौन क्रिया देखाएल जाइ छै जकरा युवा आ विवाहित सेहो प्रयोग करए लागै छथि जाहिमे असफल हेबाक कारणे यौन असंतुष्टि, पारिवारिक विघटन आदि घटना घटै छै। 4) सोशल साइटपर बेसी सक्रिय भेलासँ वास्तविक समाजिकता खत्म भेल जा रहल छै। खास कऽ फेसबुक नामक सोशल साइट मानव जातिक धैर्यकेँ समाप्त कऽ रहल छै जाहिसँ असमाजिकतामे अभूतपूर्व बढ़ोत्तरी भेलैक अछि। फेसबुकक "लाइक" बटन आब आदमीक जीवनक बटखारा बनि चुकल अछि। ई लाइक आब "संपति" जकाँ गिनती होइत अछि। जँ अहाँक पोस्टपर लाइक बेसी अछि तँ अहाँ सेलिब्रेटी भेलहुँ आ जँ लाइक कम अछि तँ साधारण लोक। हमरा मोन पड़ैए 2012- 2013 केर समय जखन हम इंटरनेटपर गजल सिखबैत छलियै। ओहि समयमे एकटा नीक गजल लिखनाहरकेँ जखन हम बहरक गलती दिस धेआन दिआबैत छलिअनि ओ हमरा चट कहैत छलाह जे फेसबुकपर हमर गजलपर एतेक लाइक-कमेंट अबैए जँइ लोककेँ पसीन पड़ै छै तँइ ने। हुनकर बातपर हम चुप भऽ जाइत छलहुँ। फेर एहनो समय एलै जे 2016-2017 मे हमरेसँ सीखि एकटा आरो गजलकार गजल प्रस्तुत करए लगलाह आ नव गजलकारक गजलपर हुनकर गजलसँ दुगुन्ना तिगुन्ना लाइक आबए लागल। आ तकर बादसँ ओ पहिल गजलकार महोदय सदमामे छथि। हुनकर गजल लिखनाइ आब कम भऽ चुकल अछि। ई कोनो एहन खास बात नै भेलै खास बात तँ ओ छै जे "लाइक" बटन केर अविष्कारक Justin Rosenstein किछु दिन पहिने फेसबुक आ अपना द्वारा बनाएल लाइक बटनकेँ समाज लेल घातक मानलथि आ अपनाकेँ एहिसँ दूर कऽ लेलथि। ई पूरा समाद विश्व भरिमे पसरल आ अहाँ सभ एकरा एहि ठाम देखि सकै छी http://www.independent.co.uk/life-style/gadgets-and-tech/facebook-like-inventor-deletes-app-iphone-justin-rosenstein-addiction-fears-a7986566.html 5) इंटरनेट विचार शून्यताकेँ बढ़वा दै छै। साधारण आदमीकेँ इंटरनेटक बड़का मंच देलकै मुदा आब एहि मंचक उपयोग राजनीतिक पार्टी सभ द्वारा खूब भऽ रहल अछि जाहिसँ एहि मंचपर फेक न्यूज, फेक इतिहास, गारि आदिक प्रयोग भऽ रहल अछि आ जनता एहि घटनामे मात्र उपकरण बनि केखनो एहि पार्टीक पक्षमे केखनो ओहि पार्टीक पक्षमे भऽ अपनेमे गारि-मारि कऽ रहल अछि। फेक न्यूज परसबाक लेल आ ओहिपर गारि पढ़बाक लेल अधिकांश राजनीतिक दल द्वारा काल सेंटरसँ पेड सर्भिस लेल जाइत छै आ ई काल सेंटर किछु सही लोकककेँ नौकरी दऽ लाखों फर्जी आ.इ.डी बनबाक कऽ ई काज पसारै छै। फेक न्यूज दंगे टामे नै बिमारी वा आन कोनो घटनासँ सेहो संबंधित रहैत अछि। 6) इंटरनेटसँ दंगा पसरबाक काज सेहो होइत छै। हालमे भरतक यू.पीमे दंगा पसारबाक काजमे इंटरनेटक फेक न्यूजक बड़का योगदान छै। आरो दंगा सभमे एकर भूमिका छै। दंगाक अतिरिक्त साइबर आतंकवाद सेहो होइत छै। साइबर आतंकवादक मतलब भेलै जे कोनो भायरसक माध्यमसँ कोनो देश, राज्य, कोनो कंपनी, कोनो व्यक्ति केर सूचना चोरी कऽ लेब। साइबर आतंकक सबसँ बड़का दिक्कत छै जे एहिमे के आतंकवादी छै मने के भायरस या बग बना कऽ पठा रहल छै तकर पता नै लागै छै। साइबर आतंकवादक संगठित रूप सूचना युद्धमे बदलि जाइ छै आ कोनो एक देश अपन दुश्मन देशपर साइबर हमला करै छै। मोन राखू बम-गोली आदि बलासँ अलग ई साबर आतंकवादी होइ छै आ सभसँ बेसी खतरनाक होइ छै। 7) इंटरनेट ज्ञानीक संग-संग अज्ञानी सेहो बना दै छै। इंटरनेटपर सभ सूचना भेटि जेबाक कारणे लोक आब मोन राखबाक झंझटि नै राखैए। सरल गुणा-भाग धरि सेहो आब मुँहजबानी नै होइ छै। तँइ आजुक युवाक समान्य ज्ञान सेहो कम भेल जा रहल छनि। एकरा दोसर तरहें एना देखू जे इंटरनेटपर सभ सूचना जमा भऽ जाइत छै चाहे अहाँ ई साबित करियौ जे धरती गोल छै वा कियो साबित करै जे धरती वर्गाकार छै। सर्च करए बला जखन सर्च करै छै तखन संबंधित विषय केर दूनू पक्ष सर्च रिजल्टमे आबि जाइत छै। आब सूचना ताकए बला फेरमे पड़ि जाइत छै जे सही कोन छै। आ एहन स्थितिमे अधिकत्तर ओ गलत पक्ष बलाकेँ सही मानि लै छै आ ओकर प्रचार करए लागै छै। एखनुक समाजमे पसरल बेसी अज्ञनता इंटरनेटे बला छै आ से साहित्य, विज्ञान, इतिहास समेत सभ विषयमे छै। इंटरनेटक हानि कम करबाक लेल किछु सुधार प्रस्ताव--- 1) इंटरनेट आ ओहिपर पसरल सामग्रीकेँ नियंत्रित करबाक लेल जिला, राज्य आ केंद्रीय स्तरपर निगरानी टीम बनाएल जाए। पोर्नोग्राफिक सामग्री लेल विशेष टीम गठित कएल जाए। 2) साइबर कानूनकेँ सरल आ फास्ट बनाएल जाए। 3) इंटरनेटपर एकांउट आदि बनएल लेल कानूनी प्रकिया हेबाक चाही मने ओकरा स्कूलक परिचयपत्र, कार्यस्थलक परिचयपत्र वा भोटर आ.डी कार्ड, पैन कार्ड आदिसँ जोड़ि देबाक चाही। 4) एहि सभहँक अतिरिक्त अभिवाभक सेहो अपना स्तरपर रोकथाम कऽ सकै छथि जेना कि बच्चा सभ लेल इंटरनेटक समय नियत कऽ देब, इंटरनेटक खराप पक्षकेँ बच्चाक सामनेमे खुलि कऽ कहब आदि। 2 मैथिलीमे इंटरनेट मैथिलीमे इंटरनेटसँ हमर मतलब अछि जे इंटरनेट मैथिली भाषामे कहिया आ कोना आएल। इंटरनेटसँ मिथिला-मैथिली-मैथिलकेँ कोना प्रभावित केलक आदि-आदि। ओइसँ पहिने एक बेर “मैथिली वेब पत्रिकारिताक प्रारंभिक स्वरूप”केँ हम संक्षिप्त रूपें एहि ठाम राखि रहल छी। आन तथ्य देबासँ पहिने हम याहूसिटीज / ब्लागरसँ संबंधित किछु घोषणा देखा रहल छी जे कि याहूसिटीज / ब्लागर केर आफिसियल पेजसँ लेल गेल अछि आ एकरा कियो गलथोथी वा कुतर्कसँ गलत साबित नै कऽ सकै छथि। तँ देखू निच्चाक तथ्य- 1) 1999मे याहूसिटीज (Yahoo! GeoCities) चालू भेलै आ 2001मे प्रोफिट नै हेबाक कारणे एकरा लगभग बंद कऽ देल गेलै (फ्री एकांउट बला सभकेँ स्टेप बाइ स्टेप बंद कएल गेलै) मैथिलीक पहिल इंटरनेटीय उपस्थिति जे कि भालसरिक गाछ नामसँ सन 2000 सँ याहूसिटीजपर छल तकरो एकांउट बंद भऽ गेलै (जँ कियो चाहता तँ एकर रेकार्ड याहूसँ मँगबा सकै छथि, ओना एकर चांस कम कारण आर्काइभ खत्म भऽ गेल छै)। एकर बादमे 2009सँ याहूसिटीज अमेरिका समेत सभ देशसँ अपन पेड सर्भिस सेहो हटा लेलक आ आब मात्र जापानमे एखन एकर सर्विस बाँचल छै। ई तँ बहुत पहिनेक बात छै हाल-फिलहाल (2014)मे सभ गोटा आरकुटकेँ बंद होइत देखने हेबै। आरकुटपर जिनकर-जिनकर प्रोफाइल रहए से आब नै भेटि सकैए। हँ जे आर्कइभ बना लेने हेता से फाइल रूपमे अपन डाटा रखने हेता। याहूसिटीज केर विकिपीडिया वा आन संदर्भसँ हमर तथ्यकेँ जाँचल जा सकैए। 2) May 01, 2008सँ ब्लागर फ्यूचर पोस्ट केर सुविधा देलकै जकरा एहि लिंकपर देखि सकै छी https://blogger.googleblog.com/2008/05/blogger-now-schedules-future-dated.html एहि सुविधासँ लोक पोस्टकेँ ड्राफ्टमे भविष्यक तारीख संग राखि दै छथिन आ ओ पोस्ट नियत तारीखमे अपने-आप पोस्ट भऽ जाइत छै। एहि फीचरमे जे कैलेंडर देल गेल छै तकरे सहायतासँ आजुक पोस्टकेँ दू साल पाछूक तारीखमे लऽ जा सकै छी तेनाहिते दू साल पहिनुक पोस्टकेँ आजुक तारीखमे आनि सकै छी मुदा ई मात्र पोस्टक तारीख वा सालमे हेड़ा-फेरी कऽ सकै छी कोनो पोस्टक URL केर तारीख,महीना वा सालमे नै। URL बला तारीख,महीना वा साल वएह रहतै जहिया पोस्ट प्रकाशित भेल रहै। 3) December 10, 2008सँ ब्लागर दूटा ब्लाग केर मर्जिंग मने जोड़ि देबाक सुविधा देलकै एकरा एहि लिंकपर देखि सकै छी https://blogger.googleblog.com/2008/12/your-blog-your-data.html एहि सुविधासँ लोक अपन अलग-अलग ब्लागकेँ एकठाम जोड़ि सकै छलाह। 4) February 03, 2010सँ ब्लागर पेज शुरू करबाक सुविधा देलकै एकरा एहि लिंकपर देखि सकै छी https://blogger.googleblog.com/2010/02/create-pages-in-blogger.html एहि सुविधासँ लोक अपन ब्लागक विभिन्न सूचना पाठक लग दै छथि। पेज बनेलापर खाली अक्षर वा अक्षर-अंकक लिंक बनै छै मुदा तारीख,महीना वा सालनै रहै छै। 5) July 17, 2012सँ ब्लागर कस्टम लिंक बनेबाक सुविधा देलकै जकरा एहि लिंकपर देखि सकै छी https://blogger.googleblog.com/2012/07/customize-your-posts-with-permalinks.html कस्टम लिंक मने अहाँ अपना मोनक हिसाबें कोनो पोस्टक URL बना सकै छी मुदा URLमे पोस्टक प्रकाशन दिन बला तारीख,महीना वा साल रहत। पोस्टक ओरिजिनल पोस्ट डेट वा पोस्टक साल नै बदलल जा सकैए जकरा अहाँ सभ एहि लिंकपर देखि सकै छी http://blogger-hints-and-tips.blogspot.in/2009/12/changing-date-for-post.html उपरक तथ्य सभकेँ नीक जकाँ अहाँ सभ मोन राखू आ निच्चा देल गेल मैथिलीक आरंभिक ब्लाग / वेबसाइट सभहँक पहिल पोस्ट आ ओकर तारीख सभकेँ अहाँ अपने जाँचू जाहिसँ ई स्पष्ट हएत जे कोन पत्रिका पहिल अछि आ के दोसर। एहि अंतर्गत हम छह टा ब्लाग / वेबसाइट राखब 1) भालसरिक गाछ (याहू सिटीज आ ब्लागर दूनू बला), 2) पल्लवमिथिला 3) समदिया, 4) अपन मिथिला, 5) प्रकरांतर, 6) कतेक रास बात आगू बढ़बासँ पहिने ई कहि दी जे एहि पाँचो ब्लागमे तीन टा एहन लिंक अछि जकर आर्काइभ उपल्बध नै अछि मुदा चर्चा हम सभ लिंक केर करब चाहे ओकर आर्काइभ हो या नै हो। आर्काइभ नै हेबाक मततलब ई नै छै जे कोनो चीजक अस्तित्वकेँ नकारि देल जाए। भालसरिक गाछ गजेन्द्र ठाकुर जी याहूसिटीजपर बहुत रास मैथिलीक साइट बनेने छलाह मुदा ताहिमेसँ "भालसरिक गाछ" केर लिंक (जे सन 2000 सँ याहूसिटीजपर छल) बाँचल अछि। एकर लिंक http://www.geocities.com/bhalsarik-gachh/ अछि। याहूसिटीज पर ई बंद भेलाक बाद 5 जुलाई 2004केँ एही नामसँ ब्लागरपर सेहो गजेन्द्र ठाकुर द्वारा ब्लाग बनाएल गेल आ जनवरी 2009मे एकरा विदेहक संग जोड़ि देल गेलै आ आब ई http://www.videha.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html लिंकपर आर्काइभ सहित अछि। एहिठाम मोन राखब जरूरी जे याहूसिटीज बला ब्लाग केर आर्काइभ उपल्ब्ध नै अछि। पल्लवमिथिला पल्लवमिथिला नामक वेबसाइट जे कि 2059 माघे संक्रान्ति- (2003 जनवरीमे) धीरेन्द्र प्रेमर्षिजी द्वारा बनाएल गेल। एकर लिंक अछि- www.pallavmithila.mainpage.net वर्तमानमे ई वेबसाइट बंद अछि। एहि वेबसाइट केर मूल पेज www.mainpage.net सेहो याहूजियो सिटीज जकाँ बंद भऽ गेलै। संगे-संग एहू वेबसाइट केर आर्काइभ उपल्बध नै अछि। विनय कुमार कसजू केर नेपाली पोथी "सूचना प्रविधिको शक्ति र नेपालमा यसको उपयोग" जे कि सितंबर 2003 मे प्रकाशित भेलै तकर पृष्ठ 155 पर "पल्लवमिथिलाक चर्चा छै। समदिया ईहो ब्लाग गजेन्द्र ठाकुर जी द्वारा 9 अगस्त 2004मे बनाएल गेल छल समादक वास्ते मुदा पहिल पोस्टक बाद लगभग चारि साल ई बंद रहल फेर 2008सँ एकर प्रकाशन शुरू भेल आ फेर-आस्ते-आस्ते 2015 धरि चलैत रहल। एहि ब्लागक पहिल पोस्टक लिंक अछि- http://esamaad.blogspot.in/2004/08/blog-post.html अपन मिथिला मिथिलासँ संबंधित (साहित्य नै) विवरण लेल प्रणव झा "अपन मिथिला" नामसँ 2004 मे साइट बनेने छलाह मुदा बेवसाइट प्रदाता बंद भऽ गेल। एकर लिंक एना अछि 1asphost.com/aapanmithila ई कोन मासमे शुरू भेल तकर विवरण नै अछि कारण एहू बेवसाइटक आर्काइभ नै बाँचल अछि। एकर भाषा अंग्रेजी रहल हएत कारण प्रणवजी सूचित केलथि जे एहिमे देवनागरी लिपिमे किछु नै छल। प्रकरांतर एहि ब्लागक पहिल पोस्ट 12 फरवरी , 2005 केँ अछि जकर लिंक http://prakarantar.blogspot.in/2005/02/blog-post.html अछि। ई ब्लाग किनका द्वारा बनाएल गेल से अज्ञात अछि मुदा कमेंट सभसँ पता चलैए जे कोनो ठाकुरजी छथि (शायद विजय ठाकुर जिनक मैथिली दर्पण, तात्काल आदि ब्लाग सेहो छनि)। जे हो मुदा एकर लिंकसँ एहि ब्लागक तारीख पता चलि रहल अछि। मात्र दू टा पोस्टक बाद ई ब्लाग बंद भऽ गेल मने ओहिपर पोस्ट एनाइ बंद भऽ गेल। एहि ब्लागक अंतिम पोस्ट 19 फरवरी , 2005मे आएल। कतेक रास बात कतेक रास बातक मूल लिंक http://vidyapati.blogspot.com/ अछि (आब एकर पता http://www.vidyapati.org/ अछि मुदा दूनू लिंकसँ खुजैत छै)। एहि ब्लाग 5टा संचालक छथि--आदि यायावर (मूल नाम: पद्मनाभ मिश्र), केशव कर्ण, राजीव रँजन लाल, कुन्दन कुमार मल्लिक आ सुभाष चन्द्र। कतेक रास बात नामक ब्लाग केर सभसँ पहिल पोस्ट जे देखा रहल अछि (देखू चित्र- 1, चित्र सभ निच्चा अछि) ताहिमे झोल-झाल छै। एकर URLमे http://www.vidyapati.org/2013/07/blog-post_28.html देखा रहल छै (देखू चित्र-1 केर उपर घेरामे) मतलब ई पोस्ट 2013 केर जुलाइ मासमे भेल छै। मुदा एकर प्रकाशन केर तारीख July 01,1999 तारीख देखा रहल छै (देखू चित्र-1 केर नीचा घेरामे)। आ एहि पोस्टसँ पहिने आरो कोनो पोस्ट नै छै से न्यूअर पोस्ट देखलासँ पता चलि जाइत छै। एहि पोस्टक बाद जे पोस्ट अछि से सूचनाक रूपमे अछि आ तकर URL http://www.vidyapati.org/2005/08/blog-post.html अछि (देखू चित्र- 2) मने ई पोस्ट 2005 केर अगस्त मासमे भेल अछि (देखू चित्र-2 केर उपर घेरामे) मुदा फेर एहूक प्रकाशन तिथिमे गड़बड़ी कएल गेल अछि आ प्रकाशन तारीखकेँ November 28, 2004 बना देल गेल अछि (देखू चित्र-1 केर नीचा घेरामे)। एहि पोस्टक बाद बला जे पोस्ट अछि तकर URL http://www.vidyapati.org/2005/09/blog-post.html अछि मने ई पोस्ट 2005 केर सितंबर मासमे प्रकाशित भेल आ एकर प्रकाशन तारीख September 02, 2005 अछि मने एखन धरिमे इएह पोस्ट सही अछि (देखू चित्र- 3)। सितंबर 2005 केर बाद जुलाइ 2006मे पोस्ट भेल जकर URL अछि http://www.vidyapati.org/2006/07/blog-post.html आ एकर प्रकाशन तारीख अछि July 12, 2006 एहि आ एकर बाद बला पोस्टक URL आ प्रकाशन तारीख मीलै छै। जे गड़बड़ी छै से पहिलुक दूटा टामे आ से मात्र इतिहासमे गलत तरीकासँ पहिल स्थान बनेबाक लेल। जँ कतेक रास बातक एहि चारि टा पोस्टक तारीखकेँ सजाएल जाए तँ ई निश्चित भऽ जाइ छै जे एहि ब्लागक पहिल पोस्ट 1 अगस्तसँ लए कऽ 31 अगस्त धरिक बीचमे भेल छै (सुविधा लेल अगस्त-2005 नाम हम देलहुँ)। एकटा आर रोचक तथ्य ई जे कतेक रास बात केर परिचय (पेज रूपमे, देखू चित्र-4)मे एहि ब्लागक संचालक लीखै छथि "प्रिय पाठकगण;एहि ब्लोगऽक शुरुआत हम 2004 मे केलहुँ. ताबय धरि हमरा जानकारी मे मैथिली भाषा इन्टरनेट पर नहि छलए"। ई कोन जानकारीक दाबी भेलै। 2003मे प्रिंट पोथीमे पल्लवमिथिला बारेमे लिखाएल छै तखन आर हिनका कोन जानकारी चाही। भऽ सकैए जे संचालक सभ कहथि जे पल्लवमिथिला नेपालक अछि मुदा मैथिली तँ नेपालोमे छै आ ओनाहुतो इंटरनेटक कोन देश हेतै। इंग्लैंडमे चलि रहल मैथिलीक वेबसाइट वा ब्लागकेँ मैथिली भाषाक कहल जेतै या इंग्लैडक भाषाक। भऽ सकैए जे संचालक सभ कहथि जे हम ब्लाग 2004मे बनेलहुँ मुदा ओकर पहिल पोस्ट अगस्त 2005मे भेल मुदा एहन दाबी तँ कियो कऽ सकैए। सभसँ पहिने तँ हमहीं दाबी करब जे हमर ब्लाग "अनचिन्हार आखर" 1999मे बनल मुदा ओकर पहिल पोस्ट 11 अप्रैल 2008केँ भेल। मुदा वास्तविक रूपें हम जानै छियै जे ई तर्क नै मात्र बकथोथी हेतै। कतेक रास बात दिसम्बर 2013 धरि चलैत रहल ओहि केर बाद ओहिपर कोनो सक्रियता नै अछि। एहि ब्लागक संस्थापक कुमार पद्मनाभजीक प्रोफाइलसँ ज्ञात होइए जे ओ इंटरनेटक माहिर छथि आ हुनकर शिक्षा-दीक्षा ओही क्षेत्रमे भेल छनि तँइ ई मानब असंभव जे कुमार पद्मनाभजी एहन काज केने हेता। तखन बँचल हुनक सहयोगीगण। मुदा एकटा संचालक ओ संपादकक तौरपर नैतिक रूपसँ स्वीकार करहे पड़तिन जे हुनकर सहयोगीगण तथ्यकेँ तो़ड़ि मरोड़ि कऽ गलत काज केलथि। गजेन्द्र ठाकुर अपन पोथी "कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक" (संस्करण 2009)मे एकटा आलेख देला जकर शीर्षक छै " भाषा आ प्रौद्यौगिकी (संगगणक, छायाकंन, कुंजीपटल, टंकण तकनीक) अंतर्जालपर मैथिली आ विश्वव्यापी अंतर्जालपर लेखन आ ई प्रकाशन" जे कि बादमे अंतिका पत्रिकाक अंतर्जाल विशेषांकमे "अंतर्जाल आ मैथिली" नामसँ सेहो प्रकाशित भेलै (संयुक्तांक रूपमे अक्टूबर-दिसम्बर 2009, जनवरी-मार्च 2010)। एहि आलेखमे गजेन्द्रजी "भालसरिक गाछ" संबंधमे चर्चा केने छथि जाहि के बाद भ्रम पोसए बला "पहिल" लोक सभहँक भ्रम टूटल आ तकरे फलस्वरूप ओ सभ गलत तथ्य प्रकाशित केलाह जे हम एतेक सालमे शुरू केने रही तँ हम ओतेक सालमे शुरू केने रही। ठाकुरजीक ई आलेख ओहि समयमे पहिल ओहन आलेख रहै जाहिमे अंतर्जालक संबंधमे विस्तारसँ चर्चा रहै एते धरि जे बिना कोनो सर्टिफिकेट लेने अपनासँ कोना वेबसाइट बना सकै छी तकरो विधि ओहि आलेखमे छै। पाठक ई आलेख हुनक पोथी वा अंतिका पत्रिकाक "अंतर्जाल विशेषांक"मे पढ़ि सकै छथि। मैथिलीमे सभ ई मानै छथि जे हम जहियासँ काज शुरू केलहुँ सएह पहिल भेल। इतिहासमे तकनाइ, अध्ययन केनाइ हुनका पसंद नहि छनि (एकटा टटका उदाहरण हमरा भेटल जे एक वेबसाइट जे कि अगस्त 2012सँ चालू भेल हुनक दावा छनि जे हम अपन वेबसाइटपर पहिल बेर साक्षात्कार शृंखला चालू केलहुँ जे कमसँ कम कोनो वेब पत्रिकामे नै छल। आब देखू जे समदिया अक्टूबर 2011सँ "हम पुछैत छी" नामक साक्षात्कार शृंखला चलेलक आ एहिमे कुल सत्तावनसँ बेसी व्यक्तित्वक साक्षात्कार प्रस्तुत कएल गेल अछि। आब कहू पहिनेसँ के चला रहल अछि। एही ठाम अध्ययनक जरूरति पड़ै छै। बिना पढ़ने आ जनने पहिल केर बीमारी पोसने मैथिलीक सेवक सभ बहुत पसरल छथि)। हम पुछैत छी शीर्षक सभ साक्षात्कार एहि लिंकपर पढ़ि सकै छी- http://esamaad.blogspot.in/p/blog-page_22.html एतेक देखेलाक बाद हम "कतेक रास बात" केर संचालक सभसँ पूछए चाहैत छी जे जँ प्रकाशने तारीखकेँ मानक बूझी तखन मैथिली किएक ओ हिंदी आ भारतक पहिल ब्लाग हेबाक दाबी किए नै कऽ रहल छथि। हिंदीक पहिल ब्लाग "9-2-11" अछि जे कि आलोक कुमार जी 21 अप्रैल 2003 के शुरू केने छलाह। कतेक रास बातक तँ प्रकाशन तिथिक हिसाबसँ "9-2-11"सँ चारि साल पुरान अछि तखन "कतेक रास बात" केर संचालक सभ क्लेम करथु भारतक पहिल ब्लाग हेबाक। मुदा "कतेक रास बात" केर संचालक सभ नै कऽ सकताह कारण हुनका बूझल छनि अपन बैमानीक बारेमे। "कतेक रास बात" केर संचालक सभ किछु ओहन नवसिखुआ सभकेँ बड़गला सकै छथि के मात्र एकांउटिंग उद्येश्यक संग कंप्यूटर चलबै छथि मुदा जे कंप्यूटरसँ नीक जकाँ परिचित छथि तिनका ओ कोना बड़गला सकै छथि। हम एहि लेखक माध्यमे "कतेक रास बात" केर संचालक सभकेँ चुनौती दै छियनि जे प्रकाशन तारीखक हिसाबसँ ओ अपन ब्लागकेँ भारतक पहिल ब्लाग घोषित करबाबथि आ से केलासँ ओ मैथिलिओक पहिल ब्लागर बनि जेता। एहि बीच 2018 मे फेसबुकपर हमरा ओ पद्मनाभजी बीच एही बात लऽ कऽ बहस भेल जकरा एहि लिंकपर देखल जा सकैए-- https://www.facebook.com/sanjeev.mithilakinkar/posts/10214777761532420 एहि बहसमे पद्मनाभजीक कहब रहनि जे जहिया हम ब्लाग चालू केने रही तहिया हमरा नै बूझल छल जे आनो कोनो ब्लाग वा साइट छै तँइ हमरे ब्लागकेँ पहिल मानल जाए। ई तर्क कतेक उचित से तँ पाठके कहता मुदा हम एहिठाम परिशिष्ट-1मे ओहि बहसक मुख्य अंश दऽ रहल छी। उपरक तथ्य सभसँ पता चलल हएत जे इंटरनेटपर -- 1) भालसरिक गाछ (याहू सिटीज) 2000सँ अछि जकर लिंक http://www.geocities.com/bhalsarik-gachh/ अछि। 2) पल्लवमिथिला 2003सँ अछि जकर लिंक www.pallavmithila.mainpage.net अछि। 3) समदिया 2004सँ अछि जकर लिंक http://esamaad.blogspot.in/2004/ अछि। 4) अपन मिथिला 2004 सँ अछि जकर लिंक http://1asphost.com/aapanmithila अछि 5) प्रकरांतर 12 फरवरी, 2005 केँ अछि जकर लिंक http://prakarantar.blogspot.in/2005/02/blog-post.html अछि। 6) कतेक रास बात अगस्त-2005सँ अछि जकर लिंक http://www.vidyapati.org/2005/08/blog-post.html अछि। जँ भाषाक हिसाबें "अपन मिथिला"केँ छोड़ियो दी तैयो ई निश्चित रूपेण कहल जा सकैए जे भालसरिक गाछ (याहू सिटीज) बला इंटरनेटपर मैथिलीक पहिल उपस्थिति अछि। तकर बाद पल्लवमिथिलाक स्थान दोसर अछि। समदियाक स्थान तेसर अछि। प्रकरांतर केर स्थान चारिम अछि। आ अंतमे कतेक रास बात केर पाँचम स्थान अछि। बहुत संभव अछि जे इंटरनेटक अथाह दुनियाँ केर किछु तथ्य हमरासँ छुटि गेल हो तँइ जँ अहाँ सभ ओकर सूचना दऽ एहि लेखकेँ परिमार्जन करेबै तँ ई भविष्य आ इतिहास दूनू लेल नीक रहतै। परिशिष्ट-1 चित्र सभ निच्चा अछि- पद्मनाभजीक संग भेल बहसक मुख्य अंश-- संजीव मिथिलाकिङ्कर 1 October 2018 · 🔴 इंटरनेट पर मैथिली... ■ www.videha.co.in ■ maithili-katha.blogspot.com ■ desilbayna.blogspot.com ■ maithili-haiku.blogspot.com ■ manak-maithili.blogspot.com ■ maithilikavita.blogspot.com ■ maithilifilms.blogspot.com ■ pradhanmaithili.blogspot.com ■ pankajjha23.blogspot.com ■ maithilbhooshan.blogspot.com ■ videha-aggregator.blogspot.com ■ maithilijokes.blogspot.com ■ maithilivideos.blogspot.com ■ maithili-drama.blogspot.com ■ girijanandsinha.blogspot.com ■ adi-maithili-kavita.blogspot.com ■ maithili-kavita.blogspot.com ■ maithili-samalochna.blogspot.com ■ hellomithilaa.blogspot.com ■ mithilasamad.blogspot.com ■ www.samaysaal.com ■ gaam-ghar.blogspot.com ■ www.hellomithila.com ■ maithilicinema.blogspot.com ■ maithilionline.blogspot.com ■ maithili-darpan.blogspot.com ■ maithilipoetry.blogspot.com ■ www.maithili-samalochna.blogspot.in ■ maithilimandan.blogspot.com ■ www.vidyapati.org ■ mithila-mihir.blogspot.com ■ videha-video.blogspot.com ■ mai.wikipedia.org ■ videha-sadeha.blogspot.com ■ mailorang.blogspot.com See Translation Kumar Padmanabh सबसँ पहिल वेबसाइट एतेक पाछु में Ashish Anchinhar कोन सभसँ पहिल साइट अछि Ashish Anchinhar की भेल प्रकाशजी Prakash Jha, जँ तारीखे बदलि लोक अपन साइटकेँ पहिल घोषित कऽ सकै छथि तँ हमहीं किए पाछू रहू। देखियौ मैथिलीक पहिल साइट "अनचिन्हार आखर" जे 1999 सँ शुरू भेल..... Kumar Padmanabh ई त' बहुत नीक गप्प जे 2003 सँ पहिने देवनागरी लिखबाक लेल कोनो टूल बनलो नइँ छल. हिंदीक पहिल ब्लाग 2003क पूर्वार्ध मे आएल छल. नवम्बर 2003 मे हम http://vidyapati.blogspot.com बनेलहुँ. नवम्बर 2003 मे Dhanakar Thakur खड़गपूर आएल छलाह. हुनका लेल दोसर वेबसाइट 2004 मे बनेलहुँ. 2003 सँ 2005 धरि हमर वेबसाइट'क अलावा हमरा कोनो दोसर नइँ देखा पड़ल. भ' सकैत छैक हम ताकि नइँ सकलहुँ. अपने गलती मानैत छी. 2005-2007 धरि एकोटा साहित्यिक वेबसाइट नइँ छल. ओना 10-15 टा आन वेबसाइट सब छल. 2009-2011 धरि बहुत वेबसाइट आएल. ओकर बाद हम अपन हाथ पाएर समेटि लेलहुँ. VIDYAPATI.ORG कतेक रास बात कतेक रास बात Ashish Anchinhar श्रीमान् जी अहाँ ठीके नै ताकि सकलहुँ नै तँ बहुत रास भेटल रहैत लिंक दऽ रहल छी लेख पढ़ि लेब आ तकर बाद हमर तर्क कटबाक प्रयास करब--- https://sites.google.com/.../videha/Home/Videha230.pdf...
लेख केर नाम अछि "कतेक रास बात" इंटरनेटपर मैथिलीक पहिल उपस्थिति नै अछि" उम्मेद अछि पढ़ि कऽ हमर तर्क काटब Kumar Padmanabh 1999 सँ दोसर मैथिलीक वेबसाइट छल, ई त बहुत बढियाँ. मुदा हमर उत्सुकता अछि जे जखन देवनागरीक कोनो टूले नइँ बनल छल तखन देवनागरी मे कोनो पोस्ट होएत छल. ओहि जमाना मे वेबसाइट बनेनाय बहुत कठिन छल. जिनका वेबसाइट बनबए आबैत छलनि लाखोँ मे कमबैत छलाह. गुगल 2003 मे ब्लोगर शुरु केलक. ओहि सँ पहिने नहि छल. Kumar Padmanabh गुगल साइट आ गुगल ब्लाग 2003 सँ पहिने नहि छल. Kumar Padmanabhhttps://en.wikipedia.org/wiki/Blogger_(service) EN.WIKIPEDIA.ORG Blogger (service) - Wikipedia Blogger (service) - Wikipedia Kumar Padmanabh हमरा मानबा मे कोनो आपत्ति नहि जे अहाँक आकि कोनो आन वेबसाइट 2003 सँ पहिने छल. कनि तर्क सँगत जानकारी दैतहुँ त' हमहुँ लोक सबकेँ कहितहुँ. ई त' बहुत नीक गप्प हेतैक जे 1999 सँ मैथिलीक वेबसाइट छल. Ashish Anchinhar श्रीमान् तामसे आन्हर नै होउ। उपर हम लेखक लिंक देने छी से तँ पहिने पढ़ू ने, तकर बाद तर्क करब Ashish Anchinhar Kumar Padmanabh हम पढिए के लिखने छी. मुदा जखन गुगल ब्लाग 2003 मे बनेने अछि आ गुगल . साइट 2008 मे बनेने अछि ओहि सँ पहिने कोना सम्भव अछि. एतबी कहबाक अछि. https://en.wikipedia.org/wiki/Google_Sites EN.WIKIPEDIA.ORG Google Sites - Wikipedia Google Sites - Wikipedia Ashish Anchinhar सिरिमान जी, विदेहक 230म अंकमे जे आलेख हम लिंकमे देने छी से पढ़ू आ तकर बाद अपन तर्क दियौ Kumar Padmanabh 2003-2004 मे हम धनाकर ठाकूर लेल geocities पर बनेने छलहुँ. 1 Ashish Anchinhar बनेने हेबै मुदा ओहिसँ पहिने 2000 कियो आर बना लेने रहै, धीरेन्द्र प्रेमर्षि सेहो 2003 जनवरीमे बनेने रहथि से नेपाली वेब पत्रिकापर लिखाएल पोथीमे सेहो उल्लेख छै, ओ पोथी सेहो 2003 मे प्रकाशित भेलै तखन अहाँक साइट कोना पहिल भेल, पूरा पढ़ू आ तकर बाद तर्क दियौ Kumar Padmanabh वएह त' कहैत छी. भ' सकैत छैक किओ बनौने हेताह. हमर जानकारी मे नइँ होएत. 2003 जनवरी मे तकनीकी रुपेँ सम्भव छलए. यूनिकोड आबि गेल छलए. मुदा 1999 मे तकनीकी रुपेँ सम्भव नहि छल. हँ अग्रेजी मे मैथिलीक बहुत साइट छल. Ashish Anchinhar सरकार लगैए हमर लेख नै पढ़लहुँ आ खाली एहिठामक हमर कमेंट पढ़ि रहल छी। लेख पढ़ू। पूर्ण रूपेन साबित भऽ गेल छै जे अपनेक साइट (कतेक रास बात) मैथिलीक पहिल साइट नै अछि, जँ आगू बात बढ़ेकाक हो तँ ओहि आलेखमे जे हमर आपत्ति अछि तकरा तर्कसँ खारिज करू Kumar Padmanabh अहाँ त' स्क्रीन शाट देने छीयै जे अहाँक ब्लोग 1999 सँ अछि. मुदा गुगल 2003 मे ब्लागर बनेने अछि. गुगल साइट सेहो 2008 मे बनल अछि. कोना मानि ली. हिंदीक पहिल ब्लाग सेहो 2002-2003 मे बनल छल. हमर दिमाग एहि सँ बेसी नहि लागि रहल अछि. मुदा हमरा स्वीकार करबा मे कोनो अशौकर्य नहि अछि. हमरा बड्ड नीक लागत जँ बुझि मे आबए जे 2003 सँ पहिने कोनो वेबसाइट छल. ओना अहाँ पहिल बेर कतेक रास बात केँ 2008 मे डिसकवर केलहुँ. अहाँक टिप्पणी हमर ईमेल मे एखन धरि सुरक्षित अछि. Ashish Anchinhar कतेक बुझाबी अहाँ के..। अहाँ एहि लिंकपर जा कऽ लेख किए ने पढ़ै छी https://sites.google.com/.../videha/Home/Videha230.pdf...
रहलै हमर कमेंटक गप्प तँ भाषा बुझबामे एखन अहाँ अपरिपक्व छी। पहिने देल लिंकपर जा कऽ लेख पढ़ू Kumar Padmanabh जी की करबै, हम ठीके अपरिपक्व छी. नहि बुझि मे आबि रहल अछि. तकनीकी गप्प आओर बेसी नहि बुझि मे आबि रहल अछि. इएह उपसँहार भेल एतेक गप्प आ तर्कक. रहय दियौ. हम पहिने कहि देने छलहुँ जे हमरा स्वीकार करबा मे कोनो आपत्ति नइँ. स्वीकार केलहुँ. Ashish Anchinhar अहाँ लेख पढ़ू तकर बाद तर्क करू आ हमर तर्ककेँ खारिज करू Ashish Anchinhar संजीव सिन्हा संजीव मिथिलाकिङ्कर जी हम अहाँसँ आग्रह करैत छी जे अहाँ एहि लिंकपर जा कऽ लेख पढ़ू आ तकर बाद कुमार साहेबजीकेँ कहियौन https://sites.google.com/.../videha/Home/Videha230.pdf...
कुमार साहेब पता नै लेख पढ़बामे किए संकोच कऽ रहल छथि। Dhanakar Thakur 18.1.2004 Kharagpur W.B. Maithili Padmnabh came at station for making website of AMP Ashish Anchinhar अरे भाइ जे 2000 मे साइट बनलै से पहिल हेतै कि 2004 बला, उपरमे लिंक देल गेल अछि हमर लेखकेँ मात्र तर्कसँ खारिज करू Ashish Anchinhar Dhanakar Thakurhttps://sites.google.com/.../videha/Home/Videha230.pdf... एहि लिंकपर जा कऽ हमर लेख पढ़ू आ ओकर तर्ककेँ काटू Dhanakar Thakur dekhk prayas kayl. sankshep me likak chahee je kee bat. Kono lekh me Introduction aa summary and conclusion hoit chhai- ham kichhu minut me confise bhelanhu. Dhanakar Thakur Padmnabh Maithilipremi chhathi aa mithilavasi b ahut din chalelah . Dhanakar Thakur Maithiliee me hamar 1973 k science artcle(Vishanu: Vish va Nav Jibank nirman) Viruses k oopar BSC(Hons) standard k Ranchi College magzine 1973 m,e chhapal chhal(aab uplabdh nahi) ek prati bhetal achhal se kinko lkag chali gel. Ashish Anchinhar मैथिलीप्रेमी छथि ताहिमे केकरा संदेह छै मुदा तँइ हुनक 2005 मे बनाओल साइट पहिल भऽ जेतै आ 2000 बला नै से कोना मानल जाएत। लेख नीकसँ पढ़बै तँ कोनो दिक्कत नै रहत Dhanakar Thakur Maithileek kaj karait rahu- bi9na sochne je ham pahile. Hamra sab din ee batr uthait achhi_ Mithila rajya sangharsh samiti 8.1.1995 k banaulanhu ham_ aab kiyo claim karit chhathi 1985 me o.. Ashish Anchinhar ई महान उपदेश पद्मनाभ बाबूकेँ दियौन वएह जबरदस्ती आफन तोड़ने छथि Dhanakar Thakur Ham Maithilik kaj me ona 1992 s chee aa CHHOT RAJYA Vikas lel awashyak 20.9.1992 k Ranchee express daily me chhapal achhi. takar baad lagatar chee. Ashish Anchinhar जे क्लेम करै छथि तिनकासँ सबूत माँगू जेना हम पद्मनाभजीसँ माँगि रहल छियनि Dhanakar Thakur Ashish Anchinhar Padmnabh swaym IT expert chhathi. Ashish Anchinhar ई कोन तर्क भेल? मने आइ.टी एक्सपर्ट भेलासँ ई मानि लेल जेतै जे ओ पहिल साइट बनेने छथि। की अहाँ मानै छी जे पद्मनाभजी विश्वक पहिल आ अंतिम आइ.टी एक्सपर्ट छथि उपरक पाँच टा प्रारंभिक ब्लागक अतिरिक्त किछु एहन ब्लागक सेहो अछि जे कि 2006 सँ 2008 क बीचक अछि ताहिमेसँ किछु एना अछि— "हरिमोहन झा के लिखल किछु प्रसिद्ध रचना" एहि नामक ब्लाग राजीव रंजन लाल जी द्वारा जुलाइ 2006 मे बनाएल गेल जाहिपर हरिमोहन झाजीक एकटा कथा देल गेल अछि। एकर लिंक अछि- http://paanch-patra.blogspot.com/ मिथिला मिहिर January 10, 2007 सँ अछि जकर लिंक http://mithila-mihir.blogspot.com/ अछि आ ई अविनाश दास द्वारा संचालित अछि। "गरम छै" एहि नामक ब्लाग इंद्रकांत लालजी द्वारा मार्च 2007 मे बनाएल गेल जाहिपर कुल दस टा पोस्ट अछि। एकर लिंक अछि- http://haasparihaas.blogspot.com/2007/03/ , "मैथिली कविता केर संग्रह" ईहो ब्लाग राजीवे रंजन लाल जी द्वारा मई 2007 मे बनाएल गेल छल जाहिमे कुल तीनटा कविता अछि। एकर लिंक अछि--http://maithilipoetry.blogspot.com/2007/05/ बताह मैथिल नामक ब्लाग September 2007क लगभगसँ अछि। एकर लिंक http://batahmaithil.blogspot.in/ अछि। एकर संचालक पंकज कुमार झा छथि। ई ब्लाग एहि ब्लागपर मिश्रित विषय केर पोस्ट सभ रहैत अछि मने ई ब्लाग कोनो विषयकेँ अनुसरण नै करैत अछि। एहि ब्लागक अंतिम पोस्ट जनवरी दू हजार सोलहमे भेलै। 2009 केर बाद मैथिली वेबपत्रकारितामे रोशन चौधरीजीक आगमन भेल आ ई मैथिली लेल फलदायी भेल। एखन धरि रोशनजी द्वारा मैथिली लेल बहुत रास बेबसाइट बनाओल गेल (साइटक संग ओकर काज सेहो लीखल गेल अछि)। जँ रोशनजी द्वारा कएल गेल काज देखी तँ किछु काज जरूरे महत्वपूर्ण अछि जेना मैथिली लिपि, मैथिली पतरा, mithilahost, मिथिलाफेस आ मिथिला.ओआरजी। एकर सभहँक विवरण आगू सूचीक हिसाबे देल जा रहल अछि। रोशनजीक परिचय हुनकर व्यक्तिगत साइट http://www.roshanchoudhary.in/ पर छनि। मैथिलीक पहिल वेबसंगोष्ठी मैथिलीमे पहिल बेर वेबसंगोष्ठीक रूपमे विदेह द्वारा निर्मलीमे गोष्ठी तीन सालक बीच लगातार करबाएल गेल छल सितम्बर 2008 सँ दिसम्बर 2011 धरिमे जकर समाद एहि लिंकपर देखि सकैत छी http://esamaad.blogspot.in/2012/01/blog-post_08.html ई गोष्ठी मैथिली लेल गूगल ट्रांसलेटर टूलकिट विकीपीडिया मैथिली आदि सभपर छल। एखन बहुत रास लोक कहै छथि जे पहिल वेबसंगोष्ठी दिल्ली कि मुंबइ कि कलकत्तामे भेलै हुनका ई बूझि लेबाक चाही जे पहिल केर घोषणा करबासँ पहिने इतिहास केर जानकारी आवश्यक। बिना जानकारी लेने अपने काजकेँ पहिल मानि लेब अल्पज्ञता थिक। ई भ' सकैए जे बाद बला लोक धूमधामसँ मनौनौ होथि वा हुनक गोष्ठीमे वक्ताक संख्या बहुत बेसी होइन वा हुनकर ओहि गोष्ठीक उद्घाटन प्रधानमंत्री केने होथि मुदा तँइसँ पहिल केर अस्तित्वपर प्रभाव नै पड़तै। हँ ई छूट बाद बला सभ ल' सकै छथि जे ओ अपन गोष्ठीसँ पहिने कोनो विशेषण लगा लेथि जेना "हमर गोष्ठी पहिल एहन गोष्ठी अछि जाहिमे पहिल बेर एक हजार कुर्सी लगाएल गेल छल, हमर गोष्ठी पहिल एहन गोष्ठी अछि जाहिमे पहिल बेर प्रधानमंत्री एलाह, हमर गोष्ठी पहिल एहन गोष्ठी अछि जाहिमे पहिल बेर प्लास्टिक कपमे चाह पिआएल गेलै" आदि आदि। मुदा हुनका बिना अध्य्यन ओ सबूतक ई कहबाक अधिकार नै छनि जे हमर गोष्ठी मैथिलीक पहिल वेबसंगोष्ठी छल। उम्मेद अछि जे प्रारंभिक स्वरूप फड़िछा गेल हएत। तँ आउ आब हम किछु ओहन वेबसाइट, ब्लाग आदिक परिचय करबा रहल छी जे कि अपन-अपन क्षेत्रमे नीक काज केलाह। उपरमे हम जे क्षेत्र देने छी ताही अनुसार हम राखि रहल छी-- भाषा- साहित्य खंड साहित्य खंडमे हम जाहि ब्लाग ओ बेवसाइटकेँ राखि रहल छी ओ अछि-- विदेह, कतेक रास बात, मैथिल आर मिथिला (आब मिथिला दैनिक), अनचिन्हार आखर, ई-मिथिला, बताह मैथिल, मिथिला-विदेह-वज्जि आदि। निच्चा एकर विवरण देल जा रहल अछि--- विदेह (http://www.videha.co.in)-----भालसरिक गाछ- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि, जे कि आब विदेहक नामसँ पाक्षिक रूपमे ई- प्रकाशित होइत अछि। विदेहक रूपमे पहिल अंक 1/1/2008केँ प्रकाशित भेल आ ई हरेक मासक 1 आ 15 तारीखकेँ प्रकाशित होइत अछि। 1/5/2017 धरि विदेहक कुल 225 अंक प्रकाशित भऽ चुकल अछि। भालसरिक गाछक जतेक समाग्री छल से विदेहक प्रारंभिक अंक लेल उपयोग भेल। इंटरनेटक संसारमे विदेहक अलग ओ बेछप स्थान छै। विदेहक किछु काज निच्चा देल जा रहल अछि---- 1) मैथिलीमे एखन अहाँ जाहि विकीपीडियापर लेख सभ पढ़ि रहल छी। तकर श्रेय विदेहेक छै। ओना मैथिली विकीपीडिया केर मंजूरी 2014मे भेटलै मुदा ओहिसँ पहिने एहि लेल जे पेटीशन, जतेक शब्दक अनुवाद आ पृष्ठ जरूरी छलै से विदेहक निर्देशनमे विदेहक उपसंपादक उमेश मंडल द्वारा संपन्न कएल गेल। मैथिली विकीपीडियाक लगभग 70% पृष्ठ Umeshberma (उमेश मंडल) केर नामसँ बनल भेटत। विदेह ई काज 2008सँ लऽ कऽ 2013 धरि केलक तकर बाद ओ मंजूरी लेल आगू बढ़ि सकलै। 2) विदेह बहुत रास साहित्यिक चोरक पर्दाफास केलक। विदेहसँ पहिने सभ कियो साहित्यिक चोरक पक्षमे छलाह या जानि बूझि कऽ अनठा दै छलाह मुदा विदेह एहन-एहन चोर आ ओकर पक्षमे रहए बलाक बहिष्कार केलक। 3) विदेह सम्मान उर्फ समानांतर साहित्य अकादेमी सम्मान केर शुरुआत विदेह केलक। विदेह सम्मान विदेह पत्रिका द्वारा देबए बला वार्षिक सम्मान अछि जकरा समानान्तर साहित्य अकादेमी सम्मान सेहो कहल जाइत छै। विदेह सम्मान मात्र साहित्य लेल नै बल्कि हरेक प्रकारक कला जेना नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला लेल सेहो देल जाइत छै 4) विदेह प्रतिभाशाली लेखक सभकेँ आगू अनलक। एहिमे जगदीश प्रसाद मंडल, ललन कुमार कामत, दुर्गानन्द मण्डल, सन्दीप कुमार साफी, कपिलेश्वर राउत, नंद विलास राय, राजदेव मंडल, रामविलास साहु, उमेश पासवान, रामदेव प्रसाद मण्डल झारूदार, बेचन ठाकुर, उमेश मंडल, विन्देश्वर ठाकुर, मुन्नी कामत, जगदानन्द झा मनु, मुन्नाजी, ओम प्रकाश झा, अमित मिश्र, चन्दन कुमार झा आ एहि पाँतिक लेखक समेत आनो आनो नव लेखककेँ मैथिली साहित्यमे स्थापित करबामे प्रत्यक्ष सहयोग केलक। 5) विदेह एकटा "विदेह आर्काइभ" बना कऽ आनलाइन पुस्तकालय केर निर्माण केलक। "विदेह आर्काइभ" विदेह पत्रिका द्वारा संचालित छै जाहिमे मैथिलीक पोथी-पत्रिका, आडियो, भीडियो, मिथिला चित्रकला/ आधुनिक चित्रकला आ चित्र मिथिलाक वनस्पति एवं जीव-जंतु, मिथिलाक जीवन आदिक क्रमशः पी.डी.एफ फाइल आ फोटो सभ देल गेल छै। एहि अर्काइभकेँ चित्र-शब्दकोश कही तँ गलत नै। एहि आर्काइभ केर किछु खंड केर वर्णन निच्चा अछि….. a) मैथिली पोथी डाउनलोड Maithili Books Download लगभग 400 पोथी एवं पत्रिकाक अंकक पी.डी.एफ फाइल एहिठाम राखल गेल अछि जकरा पाठक बिना कोनो कीमतकेँ डाउनलोड कऽ पढ़ि सकै छथि। ई एकटा विशिष्ट आनलाइन पुस्तकालय अछि। एहि पुस्तकालय केर मुख्य आकर्षण पंजी केर मूल पृष्ठ सभहँक स्पष्ट फोटो अछि। Internet Archive 1996 मे अमेरिाकमे तैयार भेलै जे कि फ्रीमे किताब डाउनलोड करबाक सुविधा दै छै। मैथिलीमे 2008 ई सुविधा विदेह द्वारा देल गेलै मने 12 बर्खक बाद। जँ मैथिली हिसाबसँ देखी तँ आन भाषाक अपेक्षा कम्मे समयमे मैथिलीक पाठककेँ विदेह ई सुविधा देलकै एवं आधिकारिक रूपसँ पहिल एहन सेवा देबए बला बनल। b) मैथिली ऑडियो संकलन Maithili Audio Downloads एहि खंडमे मिथिलाक सभ जाति आ धर्मक संस्कार, लोकगीत आ व्यवहार गीत, ममता गाबय गीत (मैथिली फिल्म), मैथिली लोकगीत एवं अन्यान्य आडियो राखल गेल अछि। c) मैथिली वीडियोक संकलन Maithili Videos एहि खंडमे मिथिलाक वनस्पति स्लाइड शो, मिथिलाक जीव-जन्तु स्लाइड शो, मिथिलाक जिनगी स्लाइड शो, श्वेता झा चौधरी, तुनिशा प्रियम, प्रीति ठाकुर, तूलिका, उमेश कुमार महतो आदिम मिथिला चित्रकला, कैलाश कुमार मिश्र - यायावरी फोटो संगे-संग बहुत रास कर्यक्रमक फोटो सभ राखल गेल अछि। 6) "विदेह मिथिला रत्न" केर निर्माण कए कऽ आनलाइन रूपें मिथिला-मैथिली-मैथिलसँ संबंधित लोकक फोटो वृहत रूपें सार्वजनिक केलक। आधुनिक ऐतिहासिक पुरुष आ महापुरुषक चित्र भेटब संभव मुदा पौराणिक आ प्राचीन नायकक असंभव तँइ विदेह मिथिला रत्न नामक पृष्ठक जन्म भेल आ एहिमे ओहन-ओहन नायक काल्पनिक मुदा सत्यक बेसी लगीच बला चित्र सभकेँ देल गेल जकरा आधुनिक कालक आलोचक सभ उपेक्षित छोड़ि देने छलाह। मैथिल आलोचक सिद्ध सरहपादकेँ मैथिलीक आदि कवि तँ मानै छथि मुदा जखन चित्र बनेबाक समय एलै तखन ओ सरहपादक नै बना विद्यापतिक बनेलथि कारण सरहपाद निम्न जातिक छलाह। तेनाहिते मैथिलीक लोककथाक अनेको पात्रक चित्र जानि बूझि कऽ छोड़ि देल गेल छल। विदेह एकरा एकटा चुनौतीक रूपमे देखलक आ सभ उपेक्षित नायकक चित्र बनबेलक। एहि विदेह (पत्रिका) मिथिला रत्न नामक पृष्ठमे सरहपादसँ लऽ कऽ ज्योतिरिश्वर पूर्व विद्यापति धरि, बंठा चमारसँ लऽ कऽ कारिख पजियार, गोनू झासँ लऽ कऽ छेछन महराज धरिक चित्र भेटत। आधुनिक कालक चित्र सभ तँ सहजहिं भेटत। एहि पृष्ठक एकमात्र उपल्बधि अछि जे ओ ओहन नायकक चित्र उपल्बध करबेलक जकरा उपेक्षित छोड़ि देल गेल छल। 7) "विदेह मिथिलाक खोज" नामक सिरीज प्रकाशित कऽ विदेह ऐतिहासिक आ पुरातात्विक चित्र सभकेँ एकट्ठा कऽ सार्वजनिक केलक। एहि पन्नापर विदेह मिथिलाक ऐतिहासिक आ पुरातात्विक चित्र सभ देल गेल अछि 8) विदेह द्वारा मैथिलीक पहिल ब्लाग एग्रीगेटर केर निर्माण कएल गेल जकर नाम "विदेह सूचना संपर्क अन्वेषण" अछि। एहिमे मैथिलीक अधिकांश वेबसाइट, ब्लाग आ इंटरनेटक विभिन्न साइटक पता (URL) भेटत। ब्लाग एग्रीगेटर एहन स्थान थिक जाहिठाम हरेक ब्लाग-साइट केर पता रहै छै मने एकैठाम सभ ब्लाग-साइट उपल्बध भेटत। संगे-संग फीड बर्नरक सहयातासँ हरेक ब्लाग-साइटपर प्रकाशित सामग्री केर सूचना पाठक लग तुरंत पहुँचि जाइत छै। ब्लाग एग्रीगेटर कियो आ कतेको संख्यामे बना सकै छथि मुदा मैथिलीमे एकर पहिल प्रयास विदेह (पत्रिका) द्वारा भेलै। 9) विदेहक हरेक अंककेँ मिथिलाक्षर (तिरहुत्ता)मे प्रकाशन सेहो विदेहक प्रसंशनीय काज अछि। बहुत लोक लिपि लेल कानै छथि मुदा कोनो प्रयास नै करै छथि मुदा विदेह चुप-चाप बिना कोनो कनने-खिजने अधिकांश अंकक प्रकाशन मिथिलाक्षर (तिरहुत्ता)मे केलक। विदेह-सदेह केर अधिकांश अंक सभ सेहो मिथिलाक्षर (तिरहुत्ता)मे प्रकाशित भेल छै। एकर पूरा विवरण "इंटरनेट आ मिथिलाक्षर" बला खंडमे भेटत। 10) विदेहक हरेक अंककेँ ब्रेल लिपिमे प्रकाशन सेहो विदेहक प्रसंशनीय काज अछि। विदेह-सदेह अधिकांश अंक सभ सेहो ब्रेल लिपिमे प्रकाशित भेल छै। श्रुति प्रकाशनक बहुत पोथी सेहो ब्रेल लिपिमे प्रकाशित छै आ एहि पोथी सभकेँ दरभंगा स्थित नेत्रहीन संस्थानक बच्चा सभहँक बीच पढ़बाक लेल सेहो बाँटल गेल छै। 11) विदेह भारत आ नेपालक मानक व्याकरणक मिलान कए कऽ एकटा उभय मानक भाषा बनेलक जाहिसँ कृत्रिम मानक भाषा खत्म भेल आ मैथिली ओहनो लोक धरि पहुँचल जकरा उच्चवर्ग उपेक्षित कऽ देने छलखनि। विदेहक एहि मानक भाषाकेँ "भाषा पाक" द्वारा अभिहित कएल जाइत छैक। 12) मैथिलीमे रचनाकार केंद्रित विशेषांक प्रायः रचनाकारक मृत्युक बाद प्रकाशित करै छथि विभिन्न पत्रिका मुदा विदेह एहि चलनकेँ तोड़ि जीवित रचनाकारक उपर विशेषांक प्रकाशित कएल जाइत छै। विदेहसँ प्रकाशित विशेषांक केर सूची एना अछि-- 1) हाइकू विशेषांक 12 म अंक, 15 जून 2008 2) गजल विशेषांक 21 म अंक, 1 नवम्बर 2008 3) विहनि कथा विशेषांक 67 म अंक, 1 अक्टूबर 2010 4) बाल साहित्य विशेषांक 70 म अंक, 15 नवम्बर 2010 5) नाटक विशेषांक 72 म अंक 15 दिसम्बर2010 6) नारी विशेषांक 77म अंक 01 मार्च 2011 7) बाल गजल विशेषांक विदेहक अंक 111 म अंक, 1 अगस्त 2012 8) भक्ति गजल विशेषांक 126 म अंक, 15 मार्च 2013 9) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक 142 म, अंक 15 नवम्बर 2013 10) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक 169 म अंक 1 जनवरी 2015 11) अरविन्द ठाकुर विशेषांक 189 म अंक 1 नवम्बर 2015 12) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक 191 म अंक 1 दिसम्बर 2015 13) दू अंकमे विदेह सम्मान विशेषाक- 200म अक 15 अप्रैल 2016/ 205 म अक 1 जुलाई 2016 14) मैथिली सी.डी./ अल्बम गीत संगीत विशेषांक- 217 म अंक 01 जनवरी 2017 13) विदेह सदिखन साहित्यिक प्रयोगमे विश्वास राखै छै। एही प्रयोगकक अंतर्गत विदेह लेखकसँ आमंत्रित रचनापर आमंत्रित आलोचकक टिप्पणीक शृंखला प्रकाशित कऽ रहल अछि जकर विवरण एना अछि-- 1.कामिनीक पांच टा कविता आ ओइपर मधुकान्त झाक टिप्पणी (अंक 209, 1-9-2016) 15) विदेहक विभिन्न अंकक श्रेष्ठ रचना सभकेँ चूनि कऽ एखन धरि दस खंडमे प्रिंट रूप सेहो प्रकाशित कएल गेल अछि जकर विवरण एना अछि-- विदेह:सदेह:1 (विदेह ई-पत्रिकाक बीछल रचनाक संग- मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ रचनाक एकटा समानान्तर संकलन) विदेह:सदेह:2 (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना 2009-10) विदेह:सदेह:3 (मैथिली पद्य 2009-10) विदेह:सदेह:4 (मैथिली कथा 2009-10) विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह 5 ] विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह 6 ] विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह 7 ] विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह 8 ] विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह 9 ] विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह 10 ] मैथिली गजलमे विदेहक (www.videha.co.in) योगदान जखन कोनो विधा विशेष अपन चरमपर पहुँचै छै ताहिसँ पहिने ओकरा पाछाँ कोनो ने कोनो एकटा पत्र-पत्रिकाक सोङर लागल रहै छै। जँ 2008क बाद बला गजलकेँ देखी तँ निश्चित रूपसँ विदेह (पहिल ई पाक्षिक पत्रिका)क खुलल समर्थन देलक आ समय-समयपर गजलसँ सम्बन्धित विशेषांक निकालि गजलकेँ आगू बढ़ेलक। ओना ई कहब कोनो बेजाए नै जे जतेक काज अनचिन्हार आखर द्वारा देखाएल गेल अछि तकर पृष्ठभूमि विदेह छल आ अछि। तँ आउ देखी विदेहक किछु एहन काज जै बिना गजलक उत्थान सम्भव नै छल-- 1) विदेहक 21म अंक (1 नवम्बर 2008) मे राजेन्द्र विमल जीक 2 टा गजल अछि। राम भरोस कापड़ि भ्रमर आ रोशन जनकपुरी जीक 11 टा गजल अछि। संगे-संग धीरेन्द्र प्रेमर्षि जीक 1 टा आलेख मैथिलीमे गजल आ एकर संरचना। अछि संगे-संग ऐ आलेखक संग 1 टा गजल सेहो अछि प्रेमर्षि जीक। विदेहक ऐ अंकमे कतहुँ ई नै फड़िछाएल अछि जे ई गजल विशेषांक थिक मुदा विदेहक ऐसँ पहिनुक अंक सभमे गजलक मादें हम कोनो तेहन विस्तार नै पबै छी तँए हम एही अंककेँ विदेहक गजल विशेषांक मानलहुँ अछि। 2) विदेहक अंक 96 (15 दिसम्बर 2011) मे मुन्नाजी द्वारा गजल पर पहिल परिचर्चा भेल। ऐ परिचर्चाक शीर्षक छल मैथिली गजल: उत्पत्ति आ विकास (स्वरूप आ सम्भावना)। ऐमे भाग लेलथि सियाराम झा सरस, गंगेश गुंजन, प्रेमचंद पंकज, शेफालिका वर्मा, मिहिर झा ओमप्रकाश झा, आशीष अनचिन्हार आ गजेन्द्र ठाकुर भाग लेलथि। ऐकेँ अतिरिक्त राजेन्द्र विमल, मंजर सुलेमान ऐ दूनू गोटाक पूर्वप्रकाशित लेखक भाग, धीरेन्द्र प्रेमर्षिजीक पूर्व प्रकाशित लेख) सेहो अछि। 3) विदेहक अंक 111 (1/8/2012) जे की बाल गजल विशेषांक अछि जाहिमे कुल 16 टा गजलकारक कुल 93 टा बाल गजल आएल। संक्षिप्त विवरण एना अछि-- रूबी झा जीक 13 टा बाल गजल, इरा मल्लिक जीक 2 टा, मुन्ना जीक 3 टा, प्रशांत मैथिल जीक 1 टा, पंकज चौधरी (नवल श्री) जीक 8 टा, जवाहर लाल काश्यप जीक 1 टा, क्रांति कुमार सुदर्शन जीक 1 टा, जगदीश चंद्र ठाकुर अनिल जीक 1 टा, अमित मिश्रा जीक 30टा, ओमप्रकाश जीक 1 टा, शिव कुमार यादव जीक 1 टा, चंदन झा जीक 14 टा, जगदानंद झा मनु जीक 6 टा, राजीव रंजन मिश्रा जीक 4 टा, मिहिर झा जीक 4 टा, गजेन्द्र ठाकुर जीक 1 टा आ ताहि संगे आशीष अनचिन्हारक 2 टा बाल गजल आएल। बाल गजलक आलावे 7 टा बाल गजल पर आलेख आएल। आलेख कारसँ छथि मुन्ना जी, ओमप्रकाश, चंदन झा, जगदानंद झा मनु, अमित मिश्र आ आशीष अनचिन्हार आ मिहिर झा।बाल गजल आ बाल गजल आलेख छोड़ि ऐ अंकमे योगेन्द्र पाठक वियोगी जीक 1 टा लघुकथा, श्री राजक 1 टा आलोचना, मुन्ना जीक 1 टा आलोचना, आशीष अनचिन्हार द्वारा जगदीश प्रसाद मंडल जीक साक्षात्कार, जगदानंद झा मनु आ जवाहर लाल काश्यपक 11 टा विहनि कथा, सुजीत झाक 1 टा रिपोर्ट, जगदीश प्रसाद मंडल जीक 1 टा लघुकथा, मुन्नी कामति जीक 8 टा कविता, जगदीश चंद्र ठाकुर अनिल जीक 1 टा गीतक अगिला भाग, किशन कारीगरक 1 टा कविता, राजेश झाक 2 टा कविता, पंकज चौधरी नवल श्रीक 1 टा कविता आ संगे संग पुनः जगदीश प्रसाद मंडल जीक 5 टा गीत अछि। 4) विदेहक 15 मार्च 2013 बला 126म अंक भक्ति गजल विशेषांक छै। ऐमे आएल रचना सभहँक विवेचन एना अछि-- अमित मिश्र जीक 6 टा भक्ति गजल अछि। श्रीमती इरा मल्लिक जीक 4 टा भक्ति गजल अछि। जगदानंद झा मनु जीक 5 टा भक्ति गजल अछि। पंकज चौधरी नवल श्री जीक 3 टा भक्ति गजल अछि। जगदीश चंद्र ठाकुर अनिल, मिहिर झा आ विंदेश्वर ठाकुर जीक 11 टा भक्ति गजल अछि। आशीष अनचिन्हार द्वारा लिखल एक गोट आलेख भक्ति गजल अछि जैमे कविवर सीताराम झा जीक एकटा भक्ति गजल सेहो अछि। 5) 15 नवम्बर 2013केँ विदेहक 142म अंक “गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा” विशेषांक छल। ऐ विशेषांकमे आन विधाक रचना ओ स्थायी स्तंभ छोड़ि गजलक आलोचना एना आएल-- 1) अमित मिश्रा जीक 2 आलेख अछि। 2) आशीष अनचिन्हारक 10 टा आलेख अछि। 3) ओमप्रकाश जीक 6 टा आलेख अछि। 4) गजेन्द्र ठाकुर जीक 4 टा आलेख अछि (संपादकीय सहित) 5) चंदन झा जीक 1 टा आलेख अछि। 6) जगदीश चंद्र ठाकुर अनिल जीक 2 टा आलेख अछि। 7) जगदानंद झा मनु जीक 1 टा आलेख अछि। 8) धीरेन्द्र प्रेमर्षि जीक 1 टा आलेख अछि। 9) मुन्ना जीक 1 टा आलेख अछि। ऐ रचना सभहँक अलावा विदेहक अन्य स्थायी स्तम्भक रचना सभ सेहो अछि। आब किछु गप्प विदेहक फेसबुक वर्सन लेल। मात्र एतबे कहऽ चाहब जे विदेहक फेसबुक वर्सन फैक्ट्री अछि गजलक आ विदेह पत्रिका वेयरहाउस अछि। फैक्ट्रीमे रचना रचल गेलै आ वेयरहाउसमे जा कऽ पाठक लग पहुँचि गेलै। मैथिली गजलक विकासमे विदेहक फेसबुक भर्सन सेहो अतिसहायक भेल अछि। एकर अतिरिक्तो विदेहक बहुत काज छै मुदा एहिठाम संक्षिप्त रूपमे वर्णन कएल गेल अछि। कतेक रास बात (http://www.vidyapati.org)--- एहि ब्लाग केर माध्यमसँ लगभग 200-250 रचना मैथिलीकेँ भेटि चुकल छै। एहि ब्लागपर मुख्यतः आदि यायावर, आदि यायावर (मूल नाम: पद्मनाभ मिश्र), केशव कर्ण (करण समस्तीपुरी) , राजीव रंजन लाल, कुन्दन कुमार मल्लिक, सुभाष चन्द्र, रोशन कुमार झा, अविनाश, अजित कुमार झा, अल्पना, इंद्र कान्त लाल, ज्योति प्रकाश लाल, मीनू राजीव लाल, विजय ठाकुर सहित अनेको नव-पुरान लेखक केर रचना भेटत। एहि ब्लागपर उपन्यास जलकुम्भी (पहिल किस्त आदि यायावर) एकटा नीक प्रयोग अछि। एकर पहिल किस्त लिखलाक बाद आदि यायावरजी आन लेखककेँ आमंत्रित केला आ बादक किस्त सभ विभिन्न नामसँ भेटैत अछि। जँ एहि उपन्यास आन भाग सभ अलग-अलग लोक लिखने हेता तखन ई नीक प्रयोग हएत मुदा जँ ई नाम सभ संपादके बला अछि तखन एकरा मात्र प्रिंट पत्रिका बला मजबूरी मानल जाए (प्रिंट पत्रिकामे रचना नै एलापर संपादके छद्म नामसँ अपन रचना प्रकाशित करए लागै छथि) एहि ब्लागपर मुख्यतः कथा ओ संस्मरण साहित्य केर बेसी सृजन भेल अछि। मैथिल आर मिथिला (http://maithilaurmithila.blogspot.com/, आब मिथिला दैनिक http://www.mithiladainik.in/)-- जनवरी 2008सँ शुरू भेल जकर संचालक जितमोहन झा जीतू छलाह (मिथिला दैनिक लेल वएह संचालक छथि)। एहि ब्लागपर मैथिली भाषाक सभ विधाक पोस्ट देल जाइत छल। वस्तुतः मैथिल आर मिथिला मैथिलीक भाषाक पहिल ब्लाग अछि जे कि अपन स्वरूप लऽ कऽ सर्वलोकप्रिय भेल आ मैथिली ब्लाग केर इतिहासमे लोकप्रियताक एकटा नव बाट मैथिलीकेँ देखेलक। एहि ब्लागक लोकप्रियता एहीसँ अनुमान कएल जा सकैए जे पहिले सालमे एकरा भिजिट करए बलाक संख्या एक लाख टपि गेल। एहि पाँतिकेँ लिखैत काल धरि एकर दोसर स्वरूप (मिथिला दैनिक)पर 38 लाखसँ बेसी भिजिट भेल अछि। मैथिलीक आरंभिक कालक के एहन ब्लागर हेता जे कि मैथिल आर मिथिलापर अपन रचना नै देने हेता, वा भिजिट नै केने हेता। मैथिल आ मिथिला गीतक संगीतक आडियो भिडियो सेहो अपन ब्लागपर पोस्ट केलक (कुल 400सँ बेसी) आ ईहो एकरा लोकप्रिय हेबामे योगदान केलकै।कुल मिला कऽ ई ब्लाग मैथिलीक ब्लागिंग इतिहासमे मीलक पाथर अछि। एकर दोसर स्वरूप (मिथिला दैनिक) समाचार केंद्रित अछि आ तकरो विवरण आगू चलि समाद बला खंडमे हएत। अनचिन्हार आखर (https://anchinharakharkolkata.blogspot.in)----11/4/2008केँ “अनचिन्हार आखर” नामक ब्लाग इंटरनेटपर आएल। अनचिन्हार आखर केर छोटका नाम " अ-आ " राखल गेल अछि। ई ब्लाग आशीष अनचिन्हार द्वारा शुरू कएल गेल छल आ समय-समयपर आन-आन गजलकार सभकेँ जोड़ल गेल। वर्तमानमे ई ब्लाग आशीष अनचिन्हार आ गजेन्द्र ठाकुर द्वारा संपादित भऽ रहल अछि।एहि ब्लागपर खाली गजल, शेरो-शाइरी ओ एहीसँ संबंधित रचना देल जाइत अछि। इंटरनेटक संसारमे मैथिली गजलकेँ स्थापित आ ओहिसँ बाहर लोकप्रिय करबाक श्रेय अनचिन्हारे आखरकेँ छै। इंटरनेटक संसारमे अनचिन्हार आखरक अलग ओ बेछप स्थान छै। अनचिन्हार आखरकक किछु काज निच्चा देल जा रहल अछि---- 1) अ-आ प्रिंट वा इंटरनेटपर पहिल उपस्थिति अछि जे की मात्र आ मात्र मैथिली गजल एवं गजल अधारित विधापर केन्द्रित अछि। 2) अ-आ केर आग्रहपर श्री गजेन्द्र ठाकुर जी गजलशास्त्र लिखला जे की मैथिलीक पहिल गजलशास्त्र भेल। 3) अ-आ द्वारा "गजल कमला-कोसी-बागमती-महानन्दा सम्मान" केर शुरूआत भेल। जे की स्वतन्त्र रूपें गजल विधा लेल पहिल सम्मान अछि। 4) अ-आ केर ई सौभाग्य छै जे ओ मैथिली बाल गजल नामक नव विधाकेँ जन्म देलक आ ओकर पोषण केलक। मैथिली भक्ति गजल सेहो अ-आ केर देन अछि। विदेहक अङ्क 111 पूर्ण रूपेण बाल-गजल विशेषांक अछि आ अङ्क 126 भक्ति गजल विशेषांक। 5) बर्ख 2008 आ 2015 माँझ करीब 30टासँ बेसी गजलकार मैथिली गजलमे एलाह। ई गजलकार सभ पहिनेसँ गजल नै लिखै छलाह। सङ्गे-सङ्ग करीब 5टा समीक्षक-आलोचक सेहो एलाह। 6) पहिल बेर मैथिली गजलक क्षेत्रमे एकै बेर करीब 16-17 टा आलोचना लिखाएल। 7) अ-आ मैथिली गजलकेँ विश्वविद्यालय ओ यू.पी.एस. सी एवं बी.पी.एस. सीमे स्थान दिएबाक अभियान चलौने अछि आ एकटा माडल सिलेबस सेहो बना कऽ प्रस्तुत केने अछि। 8) अ-आ प. जीवन झा जीक मृत्यु केर अंग्रेजी तारीख पता लगा ओकरा गजल दिवस मनेबाक अभियान चलौने अछि। 9) अ-आ 1905सँ लऽ कऽ 2013 धरिक गजल सङ्ग्रहक सूची एकट्ठा ओ प्रकाशित केलक व्याकरणयुक्त एवं व्याकरणहीन दूनू)। 10) अ-आ अधिकांश गजलकारक (व्याकरण युक्त एवं व्याकरणहीन दूनू) संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत केलक। 11) अ-आ 62 खण्डमे गजलक इस्कूल नामक श्रृखंला चलौलक जे की समान्य पाठकसँ लऽ कऽ गजलकार धरि लेल समान रूपसँ उपयोगी अछि। 12) अ-आ मैथिलीमे पहिल बेर आन-लाइन मोशयाराक आरम्भ केलक आ ई बेस लोकप्रिय भेल। 13) मैथिली गजल आ अन्य भारतीय भाषाक गजल बीच संबंध बनेबाक लेल "विश्व गजलकार परिचय शृखंला" शुरू कएल गेल। अनचिन्हार आखरक एही काज सभकेँ देखैत मैथिली गजलक पहिल अरूजी गजेन्द्र ठाकुर 2008क बाद सँ लऽ कऽ वर्तमान कालखंडकेँ "अनचिन्हार युग" केर नाम देलाह। बताह मैथिल बताह मैथिल नामक साइट केर पता http://bataahmaithil.in/ अछि। एहि साइट केर संचालक धनंजय झा छथि। एहि साइटपर कंप्यूटर ओ इंटरनेटक तकनीकी जानकारीक संग हास्य ओ व्यंग्य मूलक पोस्ट सेहो रहैत अछि। मिथिला-विदेह-वज्जि (http://mithilavidehavajjitirhut.blogspot.in)-- डा. शशिधर कुमर द्वारा संचालित ब्लाग अछि। एहि ब्लागक एकमात्र मुदा मैथिली लेल यूनिक विशेषता ई अछि जे एहिठाम मिथिलामे रहए बला सभ जीव-जंतुक उपर कविता बनाए ओकर सचित्र वर्णन अछि। संगे संग आनो मुद्दा ओ विषयपर ई ब्लाग अपन विचार प्रस्तुत करैत अछि। ई-मिथिला (http://www.emithila.in)-- बालमुकुंद पाठक द्वारा संचलित ब्लाग थिक जे कि मैथिलीसँ संबंधित विभिन्न मुद्दाक पोस्टसँ सजल अछि। समान्यतः एहिठाम बालमुकुन्द, विकाश वत्सनाभ आ मुकुन्द मयंक द्वारा पोस्ट देल जाइत अछि। वर्तमान समयमे एहिपर पोस्टक संख्या कम छै मुदा नीक सभ छै। आगू चलि ई आर झमटगर हएत से विश्वास अछि। मैथिली लिपि https://lipi.maithili.org.in/ (वर्तमानमे एहिपर देवनागरी माध्यमे तिरहुत्ता लिपि देल गेल अछि)। ई साइट रोशन चौधरीजी द्वारा बनाएल गेल अछि। मैथिली सुंदरकांड http://www.sundarkand.maithili.org.in/ (एहिपर चंदा झा विरचित मिथिला भाषा रामायणसँ लेल गेल सुंदरकांड देल गेल अछि, ई साधारणे साइट जकाँ अछि)। ई साइट रोशन चौधरीजी द्वारा बनाएल गेल अछि। मैथिली फकड़ा http://www.fakra.maithili.org.in/ (एहि साइटपर वर्णानुसार बहुत रास मैथिली फकड़ा देल गेल अछि)। ई साइट रोशन चौधरीजी द्वारा बनाएल गेल अछि। उपरमे देल गेल ब्लाग-साइटक अतिरिक्त किछु एहनो ब्लाग-साइट अछि जे कि व्यक्तिगत मैथिली रचनासँ भरल अछि आ पाठक लेल आकर्षण बनल अछि जेना धीरेन्द्र प्रेमर्षिजीक http://hellomithila.blogspot.com/, ओमप्रकाशजीक ब्लाग - http://opjha.blogspot.com/, राजीवरंजन मिश्रजीक ब्लाग http://rajeevranjanmishra.blogspot.in/, अमित मिश्रा ब्लाग http://navanshu.blogspot.in/, सुमित मिश्र गुंजन केर ब्लाग http://sumittarang.blogspot.in/, जगदानंद झा मनुजीक ब्लाग http://maithiliputr.blogspot.in/, कुंदन कुमार कर्णजीक ब्लाग http://www.kundanghazal.com/ आदि। अनचिन्हार आखरक अतिरिक्त विदेहक आरो सहयोगी ब्लाग जेना मैथिली बिहनि कथा, मैथिली हाइकू, मैथिली कविता, खेल-कूद आदिक विवरण आगू फेसबुक बला खंडमे भेटत। एहिठाम ई स्पष्ट करी जे ई अंतिम लिस्ट नै अछि। भऽ सकैए जे बहुतो नीक-नीक ब्लाग-साइट हमरा नजरिसँ छूटि गेल हएत। उम्मेद अछि जे अहाँ सभ ओकर नाम सभ हमर मेल ashish.anchinhar@gmail.com पर पठा देब। हम तुरंत ओकर काज समीक्षा करैत एहि ठाम उचित जगहपर ओकर विवरण देबै। समाद खंड समदिया, हेलो मिथिला, इसमाद, नवमिथिला, मैथिली जिंदाबाद, मिथिला मिरर, मिथिला दर्शन, मिथिला प्राइम, मिथिला दैनिक आदि। निच्चा एकर विवरण देल जा रहल अछि-- समदिया (http://esamaad.blogspot.in/)--- ई ब्लाग गजेन्द्र ठाकुर जी द्वारा 9 अगस्त 2004मे बनाएल गेल छल समादक वास्ते मुदा 2008सँ प्रियंका झा ओ पूनम मंडल संपादित कऽ रहल छथि। एहि ब्लागपर अंतिम पोस्ट 2015 केर अछि। एहि ब्लागपपर मिथिला-मैथिलीसँ संबंधित सभ प्रकारक समाद छपै छलै। एकर तीन टा वैचारिक केंद्र छलै "मिथिला आ मैथिलीक विकासपर आलेख", परिचर्चाःविदेह गोष्ठी, आ "हम पुछैत छी"। हम पुछैत छी साक्षात्कार शृखंला अछि। समादक अलावे। समदियाकेँ प्रोत्साहित करबाक लेल ई ब्लाग अगस्त 2011सँ "ऐ मासक सभसँ नीक समदिया सम्मान" शुरू केलक। ई सम्मान अपना तरहँक पहिल प्रयोग अछि जे कि बादमे आन मैथिली पत्रिकारितामे सेहो शुरू कएल गेल। चूँकि ई प्रारंभिक समाद सेवा छल इंटरनेटपर तँइ एकर संसाधन सीमित छल मुदा कुल मिला कऽ समादक क्षेत्रमे ई पहिल प्रयोग छल। हेलो मिथिला (http://www.hellomithila.com/)-- हेलो मिथिला ब्लाग हितेन्द्र गुप्ताजी द्वारा अगस्त 2007मे शुरू कएल गेल छल। एकर पहिल पोस्ट लिंक http://www.hellomithila.com/2007/08/blog-post.html अछि। शुरूआती दौरक किछु पोस्टमे गुप्ताजी कविता सभ दैत रहला मुदा तुरत ई ब्लाग समादक ब्लागमे बदलि जाइत अछि। ओना समादक ब्लाग बनलाक बाबजूदो एहिमे साहित्य केर स्थान बनले रहलै। इसमाद (http://www.esamaad.com/)-- पहिने इसमाद पी.डी.एफ रूपमे इंटरनेट संस्करण छपैत छल। एकर पहिल अंक 15 जनवरी 2008केँ प्रकाशित भेल। एहि अंकक समदिया दरभंगवी, प्रबंध समदिया ममता शंकर, समदिया कुमुद सिंह छलीह। ई सभ समाचार पहिल अंकक अंतिम पृष्ठपर प्रकाशित अछि। आ अइसँ साफ अछि जे ई प्रिंट रूपमे नै छल। समादक इंटरनेट संस्करण 28 फरवरी 2009 धरि चलल (अंक 24) आ तकर बाद ई इंटरनेट पोर्टल इसमाद (http://www.esamaad.com/)मे बदलि गेल आ एहि ठाम आनलाइन खबरि प्रकाशित करए लागल। दरभंगाक मुद्दापर फोकस करब एहि पोर्टलक मुख्य विशेषता अछि तँ हिंदी समादक मैथिली अनुवाद करैत काल मैथिलीकेँ हिंदियाइन बना देब एहि पोर्टलक कमजोरी अछि। मिथिला प्राइम (http://www.mithilaprime.in) जुलाई 2012सँ मिथिला प्राइम मैथिलीमे समाद देनाइ शुरू केलक। एहि पोर्टलपर आदित्य झा द्वारा बेसी समाद प्रकाशित होइत अछि। मिथिला मिरर (http://www.mithilamirror.com)-- एहि समाद सेवाक पहिल संपादकीय 15 December 2013 केँ लिखल गेल छै। ई वेबसाइट एकटा एहन वेबसाइट अछि जे कि मैथिली समादकेँ प्रोफेशनल बनेबा दिस आगू बढ़ल। एकर संचालक छथि ललित नारायण झा। आगू चलि लगभग 2017 मे एही नामसँ प्रिंट पत्रिका सेहो ललितजी प्रकाशित केलाह। एकर यूट्यूब चैनल सेहो अछि जकर ओहि खंडमे वर्णन हएत। नव मिथिला (http://www.navmithila.com/)-- 21 अक्टूबर 2014 धनतेरसक दिन शुरू भेल नव मिथिला कलकत्ता लेल एकटा प्रमाणिक समाद सेवा अछि। एकर शुरूआत प्रकाश झा द्वारा भेल अछि। एहिसँ पहिले 2007मे प्रकाशजी मिथिला लाइव (www.mithilalive.com) चलबैत छलाह जे कि एखन सक्रिय नै अछि। मैथिली जिंदाबाद (http://www.maithilijindabaad.com/)-- 11 अप्रैल 2015सँ मैथिली जिंदाबाद प्रवीण नारायण चौधरीक अगुआइमे बिराटनगरसँ शुरू भेल। अगस्त 2016मे एकर ई-पेपरक पहिल अंक आएल। मिथिला दर्शन न्यूज (http://maithili.mithiladarshan.news/)---दिल्लीसँ संचालित मिथिला दर्शन न्यूज पिछला बरख 07 अप्रैल 2016केँ अस्तित्वमे आएल। तकरा बादसँ लगातार सक्रिय अछि। एहि न्यूज पोर्टल केर शुरू करबाक विचार सर्वप्रथम मैथिली सिनेमा हाफ मर्डर केर निर्देशक-निर्माता रमानाथ झाक मोन आएल छलन्हि। एहि पोर्टलक सदस्य एना छथि- प्रधान सम्पादक: राहुल राय (मिथिला मिरर केर पूर्व संस्थापक सह उप-संपादक छथि), प्रबंध सम्पादक: रमानाथ झा, संवाददाता- प्रभात झा, अंजू भाटी, सलाहकार: कार्तिकेय मैथिल, सागरनाथ झा, नीरज मिश्रा “मुन्नु “, जटाशंकर मिश्र, मनोज पांडे, मनीष झा, अमित पाठक आदि। कोनो बड़का न्यूज कंपनी जकाँ ईहो पोर्टल दू टा भाषाक चुनावपर आधारित अछि। जँ अहाँ मैथिली चूनब तँ सभ समाद मैथिलीमे आएत आ हिंदी चूनब तँ सभ समाद हिंदीमे आएत। एहि पोर्टलकेँ अहाँ कम्पलीट न्यूज पोर्टल कहि सकै छियै जाहिमे बिहार (मिथिलाक अलावे अन्य राज्यपर बटन दबा कऽ ओहि राज्यक संबंधित समाद पाबि सकै छी। एहि पोर्टलपर कारोबार, आध्यत्म सहित आनो विषयपर समाद भेटत। मैथिली भाषाक हिसाबे सेहो शुद्धता रहैत अछि। नाटक, फिल्म एवं संगीत मैथिली लोक गीत- http://maithilivideos.blogspot.com/2007/-- ई ब्लाग राजीव रंजन लाल ई द्वारा संचालित छल जकर पहिल आ अंतिम पोस्ट रवि, 25 मार्च 2007 के भेल। Maithili Song- http://maithilisong.blogspot.com/ ई ब्लाग 2008 सँ अछि मुदा एकर संचालक के छथि से एहि ब्लागसँ स्पष्ट नै भऽ रहल अछि। मैथिली सांगस हब (Maithili Songs Hub)-- एहि ब्लाग केर पहिल पोस्ट June 2009मे भेलै। एकर लिंक अछि http://maithilisongshub.blogspot.in/2009/06/blog-post.html ई पूर्णतः मैथिली गीत-संगीतपर आधारित अछि आ एहिमे आर कोनो विषय केर पोस्ट नै होइत अछि। ई ब्लाग कोनो कैसेट वा सी.डीक पूराक पूरा ब्लागपर दैत अछि जकरा श्रोता फ्रीमे डाउनलोड कऽ सकै छथि। ई हमरा लेल अफसोचक गप्प जे एहि ब्लागक संचालककेँ छथि से हमरा पता नै लागि सकल। सभ पोस्ट Maithil केर नामसँ पोस्ट होइत छै। एहि ब्लागपर अंतिम पोस्ट अगस्त 2015 केर अछि। नहियो किछु तँ एहि ब्लागपर 1000सँ उपर गीतक संकलन हएत जे कि मैथिलीक हिसाबें एकटा नमहर आ धैर्यपूर्वक कएल काज छै। मैथिली फिल्म्स (http://maithilifilms.blogspot.in/)- ई ब्लाग हमरा द्वारा जून 2011मे शुरू भेल छल जाहिपर खाली मैथिली फिल्म, नाटक ओ गीत-संगीत संबंधित पोस्ट देल जाइत अछि। एकर पहिल पोस्ट 14 जून 2011केँ भेल छल जकर लिंक http://maithilifilms.blogspot.in/2011/06/ अछि। विदेह मैथिली नाट्य उत्सव (http://maithili-drama.blogspot.com/)-- ई ब्लाग अगस्त 2011मे शुरू भेल एकर पहिल पोस्टक लिंक http://maithili-drama.blogspot.in/2011/08/ अछि। मैथिली सांग http://www.song.maithili.org.in/ (मैथिली सांग हब केर बाद ईहो एहन साइट अछि जे कि मैथिली गीत-संगीत डाउनलोड करबाक सुविधा दऽ रहल अछि। किछु अंशमे "मैथिल आर मिथिला" सेहो डाउनलोड सुविधा देने छै)। ई साइट रोशन चौधरीजी द्वारा बनाएल गेल अछि। मैथिली सिनेमा (http://maithilicinema.blogspot.in/)- भाष्कर झा शुरू कएल ब्लाग अछि एकर पहिल पोस्टक लिंक http://maithilicinema.blogspot.in/2011/08/history-of-maithili-films-birds-eye.html अछि। ई ब्लाग अगस्त 2011मे शुरू भेल जकर प्रमाण पहिल पोस्टक लिंक अछि। उपरमे हम सभ देखि चुकल छी जे मैथिली गीत-संगीत अधारित ब्लाग मैथिली गीत-संगीत अधारित ब्लाग "मैथिली लोक गीत" 2007 मे आ "मैथिली सांगस हब" 2009 मे बनि चुकल अछि। प्रस्तुत प्रमाणपर ई मानब उचित जे "मैथिली लोक गीत" मैथिलीक नाटक-फिल्म ओ गीत-संगीतक पहिल पोर्टल अछि। जकर वृहद् विस्तार "मैथिली सांग्स हब" अछि। 2008 मे http://maithili.tv/ नामक साइट छल मुदा ओ आब बंद अछि तँइ एकर सामग्री की छल से अज्ञात अछि। मुदा tv शब्द देखि हम एकरा एही खंडमे राखि रहल छी। ई-कामर्स प्रोफेशनल तरीकाक बात करी तँ सैप्पीमार्ट मैथिलीक एखन धरिक सभसँ नीक ई कार्मसक वेबसाइट अछि। श्रुति प्रकाशन, बिहार लोकमंच, मिथिला हाट आदि मैथिली ई कामर्सक शुरुआती दौरक वेबसाइट अछि। वेबसाइट सभहँक लिंक एना अछि बिहार लोकमंच http://www.biharlokmanch.org/ श्रुति प्रकाशन http://www.shruti-publication.com/ (ई लिंक एखन काज नै क' रहल अछि) मिथिला हाट http://emithilahaat.com/ सैप्पीमार्ट http://www.sappymart.com/ सैप्पीमार्ट केर संचालक मुकुंद मयंक आ बालमुकुंद छथि। बाल संबंधी नेना भुटका नामसँ 2009 मे एकटा ब्लाग बनल जे कि बाल साहित्यपर केंद्रित अछि आ एकर लिंक अछि http://mangan-khabas.blogspot.in/2009/11/111.html ई ब्लाग गजेन्द्र ठाकुरजी द्वारा संचालित अछि। एहिपर बाल साहित्यक लगभग सभ विधा अछि। नेना भुटका नामसँ बहुत बादमे फेसबुकपर देवाशुं वत्स द्वारा फेसबुक ग्रुप बनाएल गेल जकर विवरण आगू देल जाएत। एहि केर अतिरिक्त बाल साहित्य केंद्रित वेबसाइट हमरा नजरिमे नै आएल। फाइन आर्ट एहि खंडमे किछु मिथिला पेटिंग बला वेबसाइट अछि। http://www.mithilaarts.com/ http://mithilaartinstitute.org आदि। धर्म मैथिली पतरा http://www.patra.maithili.org.in/ ("मैथिली पतरा" साइट मैथिलीक एहन पहिल साइट अछि जे कि पतराक आनलाइन केने अछि)। ई साइट रोशन चौधरीजी द्वारा बनाएल गेल अछि। दुर्गासप्तशती http://durgasaptashati.in/ (वर्तमानमे ई साइट एखन नै अछि मुदा नामसँ बुझाइत अछि जे एहिपर दुर्गासप्तशतीक पाठ रहल हेतै) । ई साइट रोशन चौधरीजी द्वारा बनाएल गेल अछि। अन्य मिथिला होस्ट http://www.mithilahost.in/ (2012 मे डोमेन रीसेल लेल ई mithilahost साइट बनेला। एहिठाम अहाँ अपन मोनक साइट केर नाम चूनि बनबा सकैत छी)। ई साइट रोशन चौधरीजी द्वारा बनाएल गेल अछि। मिथिला फेस http://www.mithilaface.in/ (2010 मे ई मिथिलाफेस नामक सोशल नेटवर्किंग साइट बनेलाह मुदा किछु कारणवश ई नै चलि सकल)। ई साइट रोशन चौधरीजी द्वारा बनाएल गेल अछि। मिथिला http://www.mithila.org.in/ (विकी केर तर्जपर वा ओहिसँ किछुए हटि कऽ मात्र मिथिलापर केंद्रित साइट अछि ई। एकर परिचय साइटपर एना अछि "मिथिला नामक इ वेबसाइट मिथिला लेल अछि ! एतय अपने मिथिला सँ संबंधित सब तरहक विषय वस्तु लेल पेज बना सकैत छी, अपन गावँ-घर, पंचायत, ब्लाक, जिला, समुदाय, धर्म, दार्शनिक/धार्मिक स्थल, वयक्ति विशेष सब विषयके लेल पेज बना सकैत छी ! पहिले सँ लिखल गेल पेज के एडिट सेहो कए सकैत छी" )। ई साइट रोशन चौधरीजी द्वारा बनाएल गेल अछि। मैथिली चुटकुला http://maithilijokes.blogspot.com/, सगर राति दीप जरय http://sagarraatideepjaray.blogspot.com/ , विदेह क्विज http://videhaquiz.blogspot.in/ आदि सेहो नीक ब्लाग अछि। विदेहक आन ब्लाग http://mangan-khabas.blogspot.in/ नेना भुटका, 1.विदेह रेडियो:मैथिली कथा-कविता आदिक पहिल पोडकास्ट साइट http://videha123radio.wordpress.com/ 2.Videha Radio http://videha.listen2myradio.com/ 9. सगर राति दीप जरय http://sagarraatideepjaray.blogspot.in/ 10. सगर राति दीप जरय http://sagarraatideepjaray.wordpress.com इंटरनेट आ मिथिलाक्षर: मैथिली भाषाक फॉण्ट: मिथिलाक्षरमे पोथी आ पत्रिका भाषामे पहिने बजनाइ क्रिया भेलै आ तकर बाद लिखनाइ। लिखबाक लेल बहुत तरीका प्रयोगमे भेलै आ तकर बाद समयानुसार लिखबाक लेल सामग्रीक सेहो बदलैत गेलै। लेख प्रतीक/शब्द शैली सेहो समायानुसार बदलैत गेलै। उदाहरण लेल देवनागरीमे आइसँ सत्तर-अस्सी बर्ख पहिने "अ" जेना लिखल जाइत छलै से आब नै लिखल जाइत छै। बहुत संभव जे सौ बर्ख बाद एखनुक लेख प्रतीक/शब्द शैली सेहो बदलि जाए। एकटा ईहो बात जे लेख प्रतीक/शब्द शैली सभ लेल एकै होइ छै मुदा हरेक लोकक लिखावट केर कारण हरेक लोकक अपन लेख प्रतीक/शब्द शैली बनि जाइ छै। देखैत हेबै जे लोक झटसँ कोनो लिखल देखि कहत जे ई फल्लाँ हाथक लिखल छै। फेर कहब लेख प्रतीक/शब्द शैली सभ लेल एकै होइ छै मुदा ओकर लिखावट अलग लोक होइते अलग भऽ जाइत छै। बहुत बेर अवस्था अथवा अन्य कारणसँ एकै लोकक लिखावट अलग-अलग भऽ जाइत छै। आधुनिक कालमे जखन कंप्यूटर एलै तखन लिखबाक झंझट एलै जे कंप्यूटरपर प्रचलित लेख प्रतीक/शब्द शैलीकेँ कोना आनल जाए। आ तकर समाधान फॉण्ट केर रूपमे भेलै। मने फॉण्ट कंप्यूटरपर लिखबाक एकटा साधन भेल। मुदा जे लोकक लिखबाक तरीका एक नै छै तेनाहिते विभिन्न समयमे फॉण्टमे सेहो विविधता आएल मने एकै लेख प्रतीक/शब्द शैली लेल बहुत फॉण्ट। कुल मिला कऽ फॉण्ट लिखबाक स्टाइल भेल। अंग्रेजी लिखबाक लेल ई फॉण्ट सभ अथवा एही समूहक फॉण्ट सभ लोक रोजे देखैए-- 1. Arial 2. Roboto 3. Times New Roman 4. Times 5. Courier New 6. Courier 7. Verdana 8. Georgia तहिना हरेक भाषा लेल अलग-अलग नाम छै। कोन बात लीखि रहल छी ताहि हिसाबसँ फॉण्ट सेहो बदलि जाइत छै। बियाहक कार्ड जाहि फॉण्टमे लिखल जेतै ताहि फॉण्टमे नौकरीक आवेदन लिखबै तँ ओतेक नीक रिजल्ट नै भेटत। किछु उदाहरण-- Calibri (Body) Font—A Cambria (Headings) font – A गौरसँ देखू दूनू फॉण्टमे एकै लेख प्रतीक/शब्द शैली छै मुदा दूनूक स्टाइल अलग भऽ गेल छै। जेना जतेक लोक ततेक लिखावट तेनाहिते जतेक लोक ततेक फॉण्ट। ई अलग बात जे फॉण्ट बनेबा लेल बेसी मेहनति लागै छै तँइ लोक कम्मे फॉण्टसँ गुजर चला लैत अछि। कुल मिला कऽ ई फॉण्ट कोनो भाषाक graphical प्रदर्शन छै से चाहे ओ कोनो माध्यमसँ किएक ने हो। वर्तमान समयमे कम्पयूटर अछि तँ सएह सही। मैथिलीमे कंप्यूटरसँ पहिने छापाखाना लेल फॉण्ट बनलै आ ताहिमे श्रेय छनि जयकांत मिश्रजीकेँ जे Indian Institute of Advanced Study, शिमला लेल बनेलाह। तकर बाद टाइपराइटर लेल फॉण्ट बनलै मुदा मैथिलीक टाइपराइटर तिरहुत्तामे नै बनलै। अधिकांश भारतीय भाषा केर फॉण्ट छापाखान, टाइपराइटर तखन कंप्यूटर धरि आएल छै मुदा तिरहुत्ताक फॉण्ट छापाखानसँ सीधे कम्प्यूटरपर। फॉण्टक फार्मेट बहुत छै मुदा तीन तरहक प्रमुख - 1) TTF TrueType Font (.ttf), 2) OTF format (OpenType .oft) आ 3) WOFF (Web Open Font Format) अछि (ई फॉण्ट सभ कोना काज करैए से एहि लेखक उद्येश्य नहि अछि एहि लेल हमर अन्य आलेख देखल जा सकैए)। एहन फाण्ट जे बिना कोनो दिक्कतकेँ हरेक कंप्यूटर एक समान रूपे देखाइ पड़ए से भेल यूनीकोड फाण्ट। यूनीकोडसँ पहिने अलग-अलग कंप्यूटरमे अलग-अलग फाण्ट रहै छलै आ तँइ दोसर फान्टक सामग्री तखने देखाइ पड़ै छलै जखन कि ओ टार्गेट फाण्ट ओहिमे देल जाए। मानू जे अहाँक कंप्यूटरमे सुशा फाण्ट अछि आ अहाँ ओहिमे टाइप कऽ हमरा पठेलहुँ मुदा हमर कंप्यूटरमे सुशा फाण्ट नै अछि तँइ ओ हमरा नै देखाएत। देखाए लेल हमरा सुशा फण्ट अपना कंप्यूटरमे इंस्टाल करए पड़त। मुदा यूनीकोड एहि समस्याकेँ खत्म कऽ देलकै। आब अहाँ कोनो फाण्टमे लीखू जँ दोसर कंप्यूटरमे यूनीकोड छै तँ ओ देखाइ पड़तै। यूनीकोडक इएह सभसँ बड़का फाइदा छै आ तँइ हरेक समर्थ भाषाक यूनीकोड फाण्ट बनल छै। आ एक बेर कोनो भाषाक यूनीकोड फाण्ट बनि गेलाक बाद ओही आधारपर एकै भाषाक विभिन्न लेख प्रतीक/शब्द शैली बला फाण्ट बनाएल जा सकैए जे कि समान रूपसँ हरेक कंप्यूटरमे देखाइ पड़तै। माइक्रोसाफ्टमे वएह फॉण्ट डिफाल्ट रूपमे आबि सकैए जकर कि यूनीकोड भर्सन हो जेना देवनागरी लेल मंगल फॉण्ट डिफाल्ट रूपमे छै। तँइ यूनीकोड फॉण्टक महत्व बेसी छै। चूँकि मैथिली भाषा वर्तमानमे देवनागरीमे लिखल जाइत छै तँइ भारतक मैथिली लेल हिंदी बला फॉण्ट काज केलकै तँ नेपालक मैथिली लेल नेपाली बला फॉण्ट। मिथिलाक्षर (तिरहुत्ता)मे फॉण्ट बनाएब बाँकी छल आ से सार्वजनिक रूपे नेपालसँ दू लोक बनेलथि। नेपालसँ पहिल दावेदार सी.के.राउत छथि जे की तिरहुता केर नामसँ फॉण्ट 9 मार्च 2003 मे बनेलाह। एकर लिंक आ फोटो एना अछि (ई फाण्ट रोशनजीक एहि वेबसाइटसँ डाउनलोड कऽ सकैत छी http://www.maithilifonts.in)- https://www.scriptsource.org/cms/scripts/page.php?item_id=entry_detail&uid=ytelv8889u नेपालेसँ दोसर दावेदार राजबिराज (नेपाल) केर गंगेश गुंजन झा आ श्रवीण कुमार मिश्रा (Shravin Kumar Mishra) "मैथिली" नामक फॉण्ट बनेलाह जे कि Dec-2004 मे त्रिभुवन विश्वविद्यालय केर सेंट्रल लाइब्रेरीसँ ISBN प्राप्त केलक। आ ताहिमे संतोष कुमार मिश्र, सहित आरो लेखक मिथिलाक्षरमे पोथी प्रकाशित भेल। निच्चामे एहि काजक दूटा फोटो प्रमाण देल जा रहल अछि। ई फाण्ट गुंजनजीक एहि वेबसाइटसँ डाउनलोड कऽ सकैत छी http://gangeshjha.tripod.com/?fbclid=IwAR3zqr0-G6OtObIo5YCx-dlymK_qxpNG94so_s-sv3Mv85jDobCuQmiU0Ds 2019 मे विनय झा दावा केलाह जे ओहो 2003 मे मिथिलाक्षर फॉण्ट 1DevMithila बनेलाह आ तकर समर्थनमे बहुत रास साक्ष्य रखलाह मुदा ओहि साक्ष्य सभमे ओ केखनो 2000 साल कहलाह तँ केखनो 2002, तँ केखेनो 2004 मने एकरूपता नै। निच्चामे हुनक किछु पोस्टक स्क्रीनशाट देल गेल अछि। मुदा हुनके बहुत पोस्टक अधारपर हम ई मानैत छी जे ओ 2004 मे बनेलाह संगे-संग भवनाथ झा जी सेहो ई स्वीकार केलाह (विनयजीक पोस्टपर) जे विनयजी लगभग 2004मे हुनका स्वनिर्मित फॉण्ट देने रहथिन मतलब ई निश्चित भेल जे विनयजी सेहो ओही कालखंडमे फॉण्टक निर्माणमे लागल छलाह। लगभग 2019 मे विनयजीक दावेदारी बला पोस्ट सभपर अनेक कारणसँ आ वर्णक आकार-प्रकार लऽ विनयजी आ भवनाथजीमे घोंघाउज होइत रहल। आ हमरा हिसाबें ई दूनू गोटाक अति छल कारण कोनो भाषाक फॉण्ट मानक लेख प्रतीक/शब्द शैलीक विभिन्न स्टाइल होइत छै। तँइ स्वाभाविक जे गंगेश जी बला फॉण्ट, राउतजी बला फॉण्ट आ विनयजी बला फॉण्ट अलग-अलग हेतै। ओना ई बात निर्विवाद छै जे हरेक चीज आउटडेटेड होइत छै तँइ कोनो फॉण्ट सेहो आउटडेटेड भऽ सकैए। विनयजी एकटा आर बात खटकल हमरा जे जँ हुनका अपना कालखंडमे बनल आन फॉण्टक जानकारी नै छनि तँ एकर ई मतलब नै जे ओ पहिल भऽ जेता। एहन प्रवृति हमरा पद्मनाभोजीमे भेटल अछि जकर वर्णन हम अपन पोथी "मैथिली वेबपत्रकारिताक इतिहास"मे केने छी (ई पोथी समय-समयपर अपडेट होइत रहैए। अतेक तँ निश्चित जे वर्तमानमे (2018सँ लऽ कऽ एखन धरि) विनयजी अपन बनाएल फॉण्टमे बहुत रास परिवर्तन केलथि आ ओकरा बेसी नीक बना कऽ परसलथि। एहि विवाद सभकेँ कात करैत हमरा विचारे 2004 एहन बर्ख अछि जे कि सभ फॉण्ट निर्माताक संधिस्थली बनि सकैए तँइ C.K Raut जीकेँ हम पहिल फॉण्ट निर्माता मानितो (आ जे कि ओ वस्तुतः पहिल छथिहो) हम 2004केँ मिथिलाक्षर फॉण्ट बर्ख कहि संबोधित करब। दोसर बात जे फॉण्टक संधिस्थली बर्ख 2004 लेल हम एकटा सूत्र बनेलहुँ CGSV (चंद्रकांत-गंगेश-श्रवीण-विनय) आ मिथिलाक्षर फॉण्टक पहिल निर्माताक रूपमे हम एहि सूत्र CGSV केँ हम जनताक सामने राखि रहल छी। ओना ई हमरा स्वीकार करबामे कोनो हर्जा नै जे 2019सँ विनयजी लगातार एक्टिभ भेलाह आ मिथिलाक्षर फॉण्ट अलावे कृत्रिम बुद्धि (आर्टिफिशियल इण्टेलिजेन्स) मे विनयजीक योगदान सेहो देलाह जे कि सराहनीय छनि आ एहि काजकेँ http://vedicastrology.wikidot.com/mithilakshara-font#toc8 लिंकपर देखि सकैत छी। एकर अतिरिक्त ईहो उल्लेखनीय जे मोबाइलपर मिथिलाक्षरमे लिखबाक लेल पहिल टूल विनये जी 2019 मे बनेलाह। एहिसँ पहिने लिखबाक सुविधा नै छल मोबाइलमे। विनय झाजी लेखपट्ट नामसँ फॉण्ट बना एकर समाधान केलाह जे http://vedicastrology.wikidot.com/mithilakshara-font#toc0 लिंपर भेटत। विनयजीक लेखपट्टसँ पहिने लोक अक्षरमुख केर साइटपर जा कऽ अपन लिखलकेँ मिथिलाक्षरमे बदलि ओकर फोटो बना मोबाइलपर दैत छल। मोबाइलक फॉण्ट लेल आर बहुत रास काज लेल विनयजीक अभिनंदन। निच्चा विनयजीक पोस्टक स्क्रीनशाट सभ दऽ रहल छी- बर्ख 2007 मे दू टा फाण्ट आएल। नेपालसँ जानकी फाण्ट जे कि मदन पुरस्कार पुस्तकालय (https://madanpuraskar.org) लेल गौरव श्रेष्ठ एवं अंजन अले द्वारा बनाएल गेल छल। एहि फाण्टकेँ एहि लिंकसँ डाउनलोड कऽ सकैत छी https://drive.google.com/uc?export=download&id=0B9xwnNKpRLJ1ZTd6MG9ZaEN5LWs&fbclid=IwAR2UsFK475vBpxDYjkn9xO9Ov9CHiWK50plzTOoKXLVp6WW3q99UdIZbYXk एकर बाद 2007मे अनु झाक मिथिला नामसँ फॉण्ट आएल। 2013 मे कौशल कुमार सूर्यलक्ष्मी नामसँ फॉण्ट बनेलाह। अनु झा आ कौशलजी बला फाण्ट रोशनजीक एहि वेबसाइटसँ डाउनलोड कऽ सकैत छी http://www.maithilifonts.in) यूनीकोड लेल सभसँ पहिने भारत सरकारक दिससँ ओम विकासजी 2-7-2005 मे मिथिलाक्षरकेँ Minority Scripts खंडमे नामित केलखिन जकरा एहि लिंकपर देखि सकैत छी https://www.unicode.org/L2/L2005/05063-vikas.pdf 2006सँ एहि काज लेल अंशुमान पांडेयजी लगलाह 2006 बला प्रस्ताव केर लिंक अछि http://std.dkuug.dk/jtc1/sc2/wg2/docs/n3312.pdf जाहिमे मिथिलाक्षरक संदर्भ लेल ओ पंडित गोविन्द झाजी कल्याणी कोश ओ पं.जीवनाथ रायजीक पोथीक सहारा लेने छथि। 2007क लिंक अछि https://www.unicode.org/L2/L2007/07139-north-indian-acctg-signs.pdf जे कि लगभग उपरे जकाँ अछि। Oct 2009 में अंशुमान पांडेय फेर मिथिलाक्षरक यूनिकोड लेल आवेदन केलाह https://unicode.org/L2/L2009/09329-maithili.pdf जे की बादमे स्वीकार भेलै। स्वीकार भेल यूनीकोड रूप एहि लिंकपर देखि सकैत छी http://www.unicode.org/charts/PDF/U11480.pdf एहिठाम ई मोन राखब बहुत-बहुत जरूरी अछि जे जखन अंशुमान पांडेय 2009 मे फेरसँ यूनीकोड लेल आवेदन केलखिन तखन ओ प्रमुखतासँ गजेन्द्र ठाकुर ओ विदेहक उल्लेख केलथि कारण विदेहक हरेक अंक 2008 सँ मिथिलाक्षरमे प्रकाशित छल आ ओकर अतिरिक्त श्रुति प्रकाशनक बहुत रास पोथी सेहो मिथिलाक्षरमे उपल्बध छल, यूनीकोड लेल विदेह प्रचुर मात्रामे मिथिलाक्षरक नमूना देलक। अंशुमानजी अपन आभारमे एना लिखैत छथि " Gajendra Thakur of New Delhi graciously met with me and corresponded at length about Maithili, offered valuable specimens of Maithili manuscripts, printed books, and other records, and provided feedback regarding requirements for the encoding of Maithili in the UCS" । रमानंद झा रमण, पं.गोविन्द झा, एवं नेपालक Dr. Dragomir Dimitrov एहन तीन नाम आर अछि जिनका प्रति पांडेयजी आभार व्यक्त नेने छथिन से उपरमे अंशुमानजी द्वारा देल 2009 केर प्रस्तावना लिंकपर जा कऽ देखि सकैत छी। दिनेश यादवजी (नेपालक मैथिली लेखक ओ सजग पत्रकार) सूचित केलथि जे Dr. Dragomir Dimitrov नेपालक नै बुल्गेरियाक नागरिक छथि मुदा नेपाल किछु अनुसंधानक काजमे हुनक नाम नेपाल दिससँ देल जाइत छनि। एकर बाद C-dac, Pune द्वारा सेहो 2014 मे मिथिलाक्षर फॉण्ट बनाएल गेल यूनीकोडक आधारपर। आ C-dac केर इएह फॉण्ट बेर-बेर अपडेट होइत रहल। अंतिम रूपसँ अपडेट करबाक लेल भवनाथ झाजी लगलाह आ ओकर बदलामे गारि-गंजन भोगलाह। ओना भवनाथजी द्वारा कएल गेल अपडेट अंतरिम एप्रूभल केर बाद C-dac सार्वजनिक करत। ई अपडेट करबाक प्रक्रिया एहन छै जे समयक संग चलैत रहतै। एहि लेल ने भवनाथजी दोषी छथि आ ने C-dac । दोषी तँ ओ ओ सभ छथि जे कि एकटा फॉण्टकेँ अंतिम वस्तु मानि बैसल छथि। ओनाहुतो जखन पूरा समाजे जखन अतीतोन्मुख अछि आ बात-बातपर वेदेसँ अपन परिचय शुरू करैए ताहिठाम जँ भवनाथजी जँ पुरान हस्तलेखक (लगभग 1850 केर आसपासक हस्तलेख) आधारपर कोनो फॉण्टकेँ अपडेट केलाह तँ ओहिमे दिक्कत की? हमरा कोनो दिक्कत नै बुझाइए, जहिया बुझाएत तहिया यूनीकोड बला फॉण्ट छैहे ओही आधारपर हम अपन नव फॉण्ट बना लेब। बहुत संभव जे भाषाक बदलैत स्वरूपमे दस बर्खक बाद C-dac के फेर अपडेटकेँ जरूरति पड़तै तँ ओ ओहि समयक मिथिलाक्षर-प्रवीणकेँ ई काज देत। C-dac केर एकटा अन्य फाण्ट "वैदेही फॉण्ट" लेल भवनाथजी अपन सहयोग सेहो देने छथिन जे कि C-dac लग पड़ल अछि जे कि अंतरिम आदेशक बादे सार्वजिनक हएत। आब विदेहक काज मिथिलाक्षरक प्रति की छै से दऽ रहल छी मुदा एकरा हम दू भागमे बाँटब पहिल 2014 धरि आ दोसर 2015 सँ एखन धरि। एहि बाँट-बखराक ई आधार जे फेसबुक ओ ह्वाट्सएप केर माध्यमसँ सेहो बहुत लोक मिथिलाक्षर सिखा रहल छथि आ ओहिमेसँ सभ प्रायः 2015 केर बादे आएल छथि। फेसबुक ओ ह्वाट्सएप केर माध्यम बला चर्चा हम सोशल मीडिया बला खंडमे करब। चंद्रकांतजी बला फॉण्ट ओ विनयजीक प्रारंभिक फॉण्टमे कोनो पोथी ओ पत्रिका नै अछि। गंगेश-श्रवीण जी बलामे विनीत ठाकुरजीक एकटा पोथी प्रकाशित अछि। तकर बाद गंगेश-श्रवीणजी बला फॉण्टमे संतोष कुमार मिश्रजीक पोथी सेहो छपल आ ई पोथी सभ नेपालसँ मँगा सकैत छी। विदेहक पहिल अंक जनवरी 2008 सँ लऽ कऽ 149म अंक 1 मार्च 14 धरि मिथिलाक्षर, देवनागरी आ ब्रेल तीनूमे आनलाइन प्रकाशित भेल। 150म अंक 15 मार्च 2014 सँ लऽ कऽ एखन धरिक अंक देवनागरीमे प्रकाशित छै। विदेह हरेक पचीस अंकक किछु सेलेक्टेड रचना लऽ कऽ "विदेह-सदेह" नामक प्रिंट रूप निकालने छै जे कि कुल 13 भागमे छै जाहिमेसँ दस भाग मिथिलाक्षर, देवनागरी ओ ब्रेल तीनू लिपिमे छै आ शेष तीन भाग देवनागरीमे। विदेहक हरेक अंक आ लेल फ्री डाउनलोड लेल उपल्बध छै। संगे-संग "विदेह-सदेह" केर सभ अंक केर सभ लिपिमे प्रिंट ओ फ्री डाउनलोड सेहो उपल्बध छै। प्रिंट रूप श्रुति प्रकाशन द्वारा प्रकाशित छै आ पाठक एकरा कीनि सकै छथि जकर संपर्क सूत्र हम निच्चा देब। एकर अतिरिक्त बहुत रास पोथी सेहो मिथिलाक्षरमे प्रकाशित भेल जकर लिस्ट एना अछि-- गजेन्द्र ठाकुरजीक किछु पोथी-- 1) कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक 2) Learn Mithilakshar Script तिरहुता (मिथिलाक्षर) सीखू 3) Learn Braille through Mithilakshar Script ब्रेल सीखू 4) Learn International Phonetic Script through Mithilakshar Script अन्तर्राष्ट्रीय ध्वन्यात्मक वर्णमाला सीखू गजेन्द्र ठाकुर, नागेन्द्र कुमार झा आ पञ्जीकार विद्यानन्द झा जीक किछु पोथी-- 1) MAITHILI-ENGLISH DICTIONARIES-Vol.I (एकै पोथीमे अंगरेजी-देवनागरी-मिथिलाक्षर तीनू रूप) 2) MAITHILI-ENGLISH DICTIONARIES-Vol.II (एकै पोथीमे अंगरेजी-देवनागरी-मिथिलाक्षर तीनू रूप) 3) VIDEHA ENGLISH MAITHILI DICTIONARY Vol.I (एकै पोथीमे अंगरेजी-देवनागरी-मिथिलाक्षर तीनू रूप) 4) जीनोम मैपिंग (450 ए.डी.सँ 2009 ए.डी.)--मिथिलाक पञ्जी प्रबन्ध (एकै पोथीमे देवनागरी-मिथिलाक्षर दूनू रूप) एकर अलावे नचिकेताजीक नाटक "नो एण्ट्री : मा प्रविश" केर मिथिलाक्षर भर्सन सेहो अछि। उदयप्रकाशजीक हिंदी उपन्यास "मोहनदास" केर मैथिली अनुवाद विनीत उत्पलजी द्वारा एही नामसँ भेल आ ई मिथिलाक्षर-देवनागरी आ ब्रेल लिपि तीनूमे अछि। ई सभ पोथी-पत्रिका निर्मलीसँ उमेश मंडल द्वारा प्राप्त कऽ सकैत छी। लोक देवनागरीसँ मिथिलाक्षर वा मिथिलाक्षरसँ देवनागरीपर अटकल छथि मुदा गजेन्द्र ठाकुर 2008हि केर आस-पास मिथिलाक्षर द्वारा ब्रेल लिपि ओ International Phonetic Script सिखबाक लेल किताब निकाललाह। विदेह पत्रिका मंगल आ वृंदा फॉण्टपर आधारित रहैत छल। विनीत ठाकुरजीक पोथी "बाँकी अछि हम्मर दूधक कर्ज" जनवरी 2008 मे गंगेश गुंजन झा-श्रवीण मिश्र बला मिथिलाक्षर फॉण्टमे प्रकाशित भेलै। एहि पोथीक एक कात मिथिलाक्षर ओ दोसर कात देवनागरी लिपिमे रचना छै। जँ नेपालक संदर्भमे बात करी तँ विनीत ठाकुर बहुत पहिने लगभग 2003-4 सँ मिथिलाक्षर अभियानमे जुटल छथि से भने पन्ने बला माध्यम किएक ने हो। एखनो हिनकर बहुत रास रचना मिथिलाक्षरमे भेटत। प्रारंभिक कालखंड ओ काजक बाद सोशल मीडियापर अजय नाथ झा शास्त्री मिथिलाक्षर साक्षरता अभियान फेसबुकपर चला रहल छथि। जाहिमे दावा कएल गेल अछि जे लगभग दू लाखसँ बेसी लोक मिथिलाक्षर सीखि लेलक। दूर्वाक्षत संस्था "मिशन मिथिलाक्षर योजना" चला रहल छथि। किछु गोटे एकर मासिक, त्रैमासिक कोर्स सेहो चला रहल छथि। बहुत गोटे तँ ह्वाट्सएपपर सिखबाक-सिखेबाक आह्वान केने छथि। कुल मिला कऽ देखी तँ प्रारंभिक (2003-14) केर बाद ई स्थिति नीक आ उत्साहजनक लगैत छै। नै दू लाख जँ बीसे हजार सिखने हेता तैयो ई एकटा सकारात्मक पक्ष भेलै सोशल मीडियाक। उपरमे जे नाम देल तकर अतिरिक्तो बहुत नाम छथि जे एतए देब संभव नै मुदा ई बात तय जे मिथिलाक्षरक प्रति लोकक रुचि जगलै आ ताहि लेल नेओ केर पाथर सी.के राउत, गंगेश-श्रवीण, विनय झा, गजेन्द्र ठाकुर, अंशुमान पांडेय सहित सोशल मीडियापर एखनुक समयमे सिखा रहल आ अपनाकेँ चमचमाइत शिखर मानि लेने सभ लोक धन्यवादक पात्र छथि। एहिठाम ई कहब उचित जे अधिकांश सिखबए बला ओ सीखए बला या तँ अक्षरमुख साइट केर सहायतासँ फोटो बना दै छथि वा हाथसँ लिखल पन्नाक फोटो। एहि ठाम सोशल मीडियासँ सिखाएल जा रहल मिथिलाक्षरपर किछु एहन गलतीक उल्लेख हम करब जे कि प्रायः सभ सिखबए बला कऽ रहल छथिन आ सीखए बला कऽ रहल छथि। सिखबए आ सीखए बला दूनू वर्तनीक गलती बहुत कऽ रहल छथि। अहाँ भने मिथिलाक्षरेमे किए ने लिखी मुदा जँ वर्तनी गलत रहत तँ ओकर फाइदा की? जाहि लिपिमे लीखू सही लीखू। दोसर गलती बहुत बड़का गलती छै विभक्ति केर संदर्भमे। मैथिलीमे विभक्ति शब्दमे जुड़ि जाइत छै मुदा अधिकांश मिथिलाक्षर बलामे देखि रहल छी विभक्ति हटल, ई तँ मैथिलीक मूल विशेषतापर कुड़हड़ि मारि रहल छियै, जखन मूल विशेषते नै बँचतै भाषाक तखन लिपिए बचा की करब आ एहि प्रकारक गलती लेल सीखए बलासँ बेसी सिखेनहार दोषी छथि। फेसबुकपर एहन गलती बला पोस्ट देखाइ पड़िए जाएत हम जानि बूझि कऽ एहिठाम नै देलहुँ अछि। कहबाक लेल ईहो कहल जा सकैए जे देवनागरीमे जे मैथिली रचनाकार लिखलाह तकरे कियो मिथिलाक्षरमे लिप्यंतरण कऽ देलाह तँइ विभक्ति नै सटल भेटत मुदा ई जानब जरूरी जे मिथिलाक्षरमे विभक्ति सटब अनिवार्य। गीताप्रेस, गोरखपुरक हरेक हिंदी किताबमे विभक्ति सेहो सटल भेटत। जँ ई सिखबए-सिखाबए बला सभ विदेहक मिथिलाक्षर पोथी-पत्रिका, नेपालसँ प्रकाशित मिथिलाक्षर पोथी एवं छापाखाना बला मुद्रित मिथिलाक्षर पोथी पढ़ता ओ तखन लिखता तँ आर बहुत बेसी लाभ हेबाक संभावना रहत। ओना काज भेलै आ काज हेबो करत मुदा एहि लेखक अंत हम ई कहए चाहब जे किछु लोक एहन होइत छथि जे कि हरेक लोक लग प्रश्न करै छथि बिना ई चिंता केने जे उत्तर भेटत कि नै भेटत। कमसँ कम मिथिलाक्षर फॉण्ट एवं कीबोर्ड संबंधमे रौशन चौधरी जी हमरा सभ लग एहने प्रश्नकर्ताक रूपमे छथि जे अपना भरिसक सरकारीसँ लऽ कऽ प्राइभेट साफ्टवेयर कम्पनीक साइटपर 2008 लगातार पुछैत रहलाह जे मैथिली फॉण्ट बनलै की नै बनलै, कहिया बनतै आदि। भऽ सकैए जे फॉण्ट -कीबोर्ड रौशनजी लेल नै बनल हो मुदा सामने वला आदमीकेँ ई बुझाएल जरूर हेतै जे मिथिलाक्षर लेल प्रश्न करए बला कियो छै ओकरो मोन उत्सुक भेल हेतै मिथिलाक्षरक लेल ईहो बड़के काज भेलै। जियोसिटीजक साइटसँ होइत मैथिली इंटरनेटपर सोशल मीडियाक सहारे बढ़ल। ई सोशल मीडिया की थिक आ कतेक प्रकारक होइत छै से जानी-- ओना तँ सोशल मीडियाक बहुत परिभाषा छै मुदा से तकनीकी छै। हम एकरा गामक चंडालचौकड़ी माध्यमे परिभाषित करब। चंडालचौकड़ीमे की होइ छै किछु लोकक समूह अपन-अपन ठेकनाएल जगहपर जाइत छै आ विभिन्न तरहक क्रियाकलाप करै छै। ई क्रियाकलाप ज्ञान, हँसी-मजाक, मारि-पीट सभ तहहक होइत छै। केखनो काल एक-एक काज लेल अलग-अलग चंडालचौकड़ी होइत छै तँ केखनो काल एकै चंडालचौकड़ीमे सभ क्रिया भऽ जाइत छै। गौरसँ देखियौ चंडालचौकड़ी लेल तीन अनिवार्य तत्व छै, लोक, निश्चित जगह आ लोककेँ अएबाक लेल प्रेरक। आधुनिक समयमे "लोककेँ अएबाक लेल प्रेरक" तत्व इंटरनेटमे बदलि गेलै आ इंटरनेटपर सेहो निश्चित जगह बना देल गेलै लोक लेल। लोकक जेहन प्रवृति तेहने-तेहन जगह। कुल मिला कऽ ओहन चंडालचौकड़ी जे कि इंटरनेटक माध्यमसँ कोनो निश्चित साइटपर होमए लागए तँ ओकरा सोशल मीडिया कहल जाइत छै। ओना मैथिलीमे चंडालचौकड़ी निगेटिभ अर्थमे प्रयोग होइत छै मुदा हम जोर दऽ कऽ कहब जे चंडालचौकरीमे किुछए देर सही ज्ञानक बात सेहो होइत छै, समाजक भलाइ केर बात सेहो होइत छै। सोशल मीडियाक किछु विभिन्न रूप निच्चा देल जा रहल अछि-- 1) Social networks - ई विभिन्न तरीकासँ लोककेँ जोड़बाक लेल बनै छै जेना- Facebook, Twitter, LinkedIn एहूमे LinkedIn मात्र प्रोफेशनल लोक सभ लेल छै से चाहे प्रोफेशन बहुत प्रकारक भऽ सकैए। समान्यतः नौकरीपेशा आ बेपारी LinkedIn पर बेसी रहै छथि। Twitter नेता ओ राजनीतिक ओ समाजिक संगठन लेल बेसी प्रयोग होइए तँ Facebook केँ सभ जनता जनार्दन अपना अनुकूल पाबै छथि तँइ अपना देशमे Facebook हदसँ बेसी लोकप्रिय छै। एहि कैटेगरीमे आरो नाम भऽ सकैए। 2) Media sharing networks — ई विभिन्न तरीकासँ फोटो, आडियो ओ भडियो सार्वजनिक करबाक सुविधा दै छै जेना- Instagram, Snapchat, YouTube, soundcloud आदि। एहि कैटेगरीमे आरो नाम भऽ सकैए। 3) Discussion forums — ई विभिन्न तरीकासँ लोकक बीच तर्क करबाक, प्रश्न करबाक, उत्तर देबाक सुविधा दै छै जेना- reddit, Quora, Digg आदि। एहि कैटेगरीमे आरो नाम भऽ सकैए। 4) Bookmarking and content curation networks — ई विभिन्न तरीकासँ कोनो टेकस्ट वा पी.डी.एफकेँ सुरक्षित करबाक सुविधा दै छै जेना - Pinterest, Flipboard आदि। एहि कैटेगरीमे आरो नाम भऽ सकैए। 5) Consumer review networks — ई विभिन्न तरीकासँ बेपार ओ ग्राहकक रुचि-अरुचि जनबाक सुविधा दै छै जेना- Yelp, Zomato, TripAdvisor आदि। एहि कैटेगरीमे आरो नाम भऽ सकैए। 6) Blogging and publishing networks — ई विभिन्न तरीकासँ कोनो टेक्सटकेँ आनलाइन प्रकाशित करबाक सुविधा दै छै जेना- blogger, WordPress, Tumblr, Medium आदि। एहि कैटेगरीमे आरो नाम भऽ सकैए। 7) Interest-based networks — ई विभिन्न तरीकासँ लोककेँ अपन वयक्तिगत रुचि-अरुचिकेँ सार्वजनिक करबाक सुविधा दै छै जेना - Goodreads, Houzz, Last.fm आदि। एहि कैटेगरीमे आरो नाम भऽ सकैए। 8) Social shopping networks—Shop online ई विभिन्न तरीकासँ लोककेँ कोनो वस्तु आनलाइन किनबाक-बेचबाक सुविधा दै छै जेना - Polyvore, Etsy, Fancy आदि। एहि कैटेगरीमे आरो नाम भऽ सकैए। 9) Sharing economy networks—Trade goods and services ई विभिन्न तरीकासँ अर्थव्यवस्था ओ विभिन्न सेवा संबंधी जानकारी देबाक सुविधा दै छै जेना - Airbnb, Uber, Taskrabbit आदि। एहि कैटेगरीमे आरो नाम भऽ सकैए। 10) Anonymous social networks— ई विभिन्न तरीकासँ लोककेँ अपन पहिचान नुका कऽ कोनो विषयपर संवाद करबाक सुविधा दै छै जेना- Whisper, Ask.fm, After School आदि। एहि कैटेगरीमे आरो नाम भऽ सकैए। आब किछु एहम सोशल मीडियाक विवेचना देखी जकर महत्व मैथिली लेल बेसी अछि-- फेसबुक आ मैथिली 2004 मे फेसबुक केर शुरूआत भेल आ लगभग 2008सँ फेसबुकपर मैथिली आएल (आएल मने साहित्य ओ भाषाक रूपमे)। कहबाक मतलब जे लगभग 2008सँ मैथिल सभ खुलि कऽ बिना कोनो संकोचकेँ फेसबुकपर मैथिली भाषाक प्रयोग शुरू केलाह। सभ चीजक दुरूपयोग होइ छै आ फेसबुकक सेहो भेलै। तथापि ओइ दुरूपयोगक अलावे मैथिलीक संदर्भमे बहुत रास उपयोगी बात भेलै फेसबुकपर। प्राप्त जानकारीक अनुसारें 9 February 2008 केँ Videha e Journal फेसबुक चौबटिया कहि कऽ ग्रुप एलै जकर लिंक https://www.facebook.com/groups/7436498043 अछि आ एकर पहिल पोस्ट केर लिंक https://www.facebook.com/groups/7436498043/permalink/10150562846913044 अछि तकर बाद फेर अही नामसँ 7 July 2008 केँ विदेहक फेसबुक भर्सन (फेसबुक ग्रुप केर रूपमे) विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका केर नामसँ एलै जकरा एहि लिंकपर देखि सकै छी-https://www.facebook.com/groups/10299304978/ एहि ग्रुपक पहिल पोस्टक लिंक अछि-https://www.facebook.com/groups/10299304978/permalink/428765254978/ बादमे एहि ग्रुपक सभ पोस्टकेँ विदेहक तेसर आ बेसी उन्नत ग्रुपमे परिवर्तित कऽ देल गेलै जकरा एहि लिंकपर देखि सकै छी-- https://www.facebook.com/groups/videha/ ई बदलाव लगभग 2010-11मे भेलै जाहिमे आनो लोककेँ जुड़बाक सुविधा देल गेलै। ओहि समयमे इएह विदेह ग्रुप छल जे जाहिमे मैथिलीक हिसाबें पहिल बेर १०००० लोकसँ बेसी जुड़ल छल। ओना आब तँ अकड़-बकड़ पोस्टक ग्रुप बलापर लाख-लाखक संख्या छनि मुदा परिणाम सुन्ने भेटत। इंटरनेटपर पहिल उपस्थिति कोन अछि तेहने सन तथ्यहीन बहस फेसबुकपर सेहो चलल जे "फेसबुकपर मैथिलीक पहिल ग्रुप कोन?"। मुदा पहिनेहें जकाँ सभ गोटा अपन-अपन ग्रुपक पहिल हेबाक दाबी बिना कोनो लिंककेँ करैत रहलाह। विदेह सदिखन प्रमाण प्रस्तुत करैत रहल अछि। एहि ठाम सेहो लिंक देल गेल अछि। तँइ एखन धरिक प्रमाणक आधारपर ई मानबामे कोनो संकोच नै जे ग्रुप केर रूपमे विदेहक ग्रुप फेसबुपर मैथिलीक पहिल उपस्थिति अछि। निच्चा किछु एहन तथ्य देल जा रहल अछि जाहिसँ मैथिलीक संदर्भमे फेसबुकक उपयोगिता साबित हएत--- फेसबुक, भाषा आ साहित्य फेसबुक मैथिली भाषा आ साहित्य लेल बहुत योगदान केलक। बिना कोनो स्कूल गेने, बिना कोनो कोंचिंग गेने जतेक लोक एहिठाम मैथिली सिखलाह तकर गिनती नै। जँ सच पूछी तँ मैथिली आंदोलनकारी सभ जे स्कूल वा कालेजमे मैथिली पढ़ाइ लेल अनेरे मारि करै छथि ताहिसँ नीक जे ओ ओतबे समयमे फेसबुकपर मैथिली लिखबा लेल लोककेँ प्रोत्साहत करथि तँ बेसी नीक रिज्लट निकलत। ओना हमरा ई मानबामे संकोच नै जे स्कूल वा कालेजमे कोनो भाषाक पढ़ाइ केर एकटा अलग महत्व होइत छैक।निच्चा किछु एहन तथ्य देल जा रहल अछि जाहिसँ मैथिलीक संदर्भमे फेसबुकक उपयोगिता साबित हएत--- 1) मैथिली भाषाक लिखित प्रयोग--- फेसबुकपर मैथिली लिखनाइ एकटा स्टेटस सिंबल बनि गेल आ शिक्षित-अशिक्षित, नेता-जनता, स्त्री-पुरुष सभ गोटा बिना कोनो वर्तनीकेँ वा कोनो गलतीकेँ चिन्ता केने मैथिली लिखला जाहिसँ मैथिली लिखए बला संख्या बढ़ल आ ई मैथिलीक भविष्य बहुत नीक रहत। फेसबुकपर साहित्य केर संदर्भमे विदेहक फेसबुक भर्सन बहुत रास काज केलक। एहि भर्सन द्वारा नव-नव लेखककेँ प्रोत्साहन भेटल जकर प्रभाव निकट भविष्यमे देखबामे आएत। 2) मैथिलीमे स्त्री लेखिकाक संख्या-- मैथिली लेल ई बहुत नीक जे फेसबुक मैथिली स्त्री लेल ओहन साधन बनि गेल जिनकर बोलकेँ बहुत रास कुच्रकमे फँसा कऽ राखि देने छल ई समाज। आजुक स्त्री कोनो बातक परबाह केने बिना अपन भावनाकेँ फेसबुकपर परसि रहल छथि। आ तइसँ मैथिलीमे नव-नव अध्याय-अनुभव जुड़ि रहल अछि। 3) मैथिली दलित साहित्य केर प्रचारक-- फेसबुकक माध्यमे भारत-नेपाल मिला कऽ जतेक मैथिलीक दलित लेखक, विचारक एलाह ततेक मात्र सिद्ध सरहपादे कालमे छल मने मैथिलीक एकदम शुरूआती समयमे। लगभग हजार सालसँ मैथिलीक समाजिक ताना-बानाकेँ जे तोड़ने छल तकरा फेसबुक तोड़ि देलक आ सही अर्थमे "मैथिल समाज" केर निर्माणमे सहयोग देलक। फेसबुक आ समाज
फेसबुक आ फेसबुक ग्रुपसँ किछु लेखक बंधु तमसाएल रहै छथि। हुनक तामसक कारण ई जे लोक हुनकर कथित गंभीर रचनापर धियान नै दऽ फालतूक फोटो, बात आदिपर बेसी सक्रिय रहै छथि। ताहूमे जखन कियो कोनो घास-पात, तर-तरकारी, गाछ-बिरिछक फोटो दऽ पूछै छै-ई की छै आ ताहिपर हजारो लोकक लाइक-कमेंट आ से देखि लेखक सभ तखने जरि कऽ छाउर भऽ जाइत छथि। हुनका बुझाइ छनि जे हमर एतेक गंभीर विचार नष्ट भेल जा रहल अछि आ लोक सभ फालतू काजमे लागल अछि। मुदा एहन लेखक सभकेँ फेसबुकक उद्येश्ये नै बूझल छनि। वस्तुतः फेसबुकक जन्म एही सभ लेल भेल छै जाहिसँ लोक एक-दोसरसँ जुड़ल रहै। बादमे किछु प्रबुद्ध एकर उपयोग साहित्य-संगीत-राजनीति एवं अन्य काज लेल करए लगलै। लेखक सभकेँ धैर्य राखि एहि माध्यमकेँ लेखन लेल सार्थक बनबए पड़तनि आ तखन संभव जे साहित्यो केर दिन घुरतै। ओना घास-पात, तर-तरकारी, गाछ-बिरिछक फोटो लेल हमर विचार अछि जे ई ओहन लोक सभ लेल उपयोगी जे कि गाम-घरसँ कटि गेल छथि। आ फेसबुकपर एहन संख्या लाखोमें अछि तँइ एहन पोस्ट सभपर बेसी सक्रियता रहै छै। कहियो काल किछु वस्तुक संदर्भमे हमरो जानकारी बढ़ि जाइए एहन-एहन पोस्टसँ से हम स्वीकारै छी। हम मात्र हिंट देलहुँ एहि विषयपर कोनो समाजशास्त्री काज करथि तँ नीक विवेचना भऽ सकैए। फेसबुकसँ समाजिक संगठन हेबामे सुविधा भेलैए से चाहे ओ कोनो पाबनि-तिहारक संदर्भमे हो वा कि बाढ़ि-अकाल वा आन कोनो परस्थितिमे। बहुतो एहनो घटनाक सबूत अछि जाहिमे कोनो हेड़ाएल लोक अपन परिवारक लोक फेसबुकक कारण भेटलै। फेसबुकपर एक मिनटमे कोनो समाद हजार ठाम पसरि जाइत छै। फेसबुक आ धर्म फेसबुक मिथिलाक अपन निज ओ खाँटी पाबनि तिहार लेल अमृतक समान काज केलक अछि। बड़का पाबनि जेना दुर्गापूजा, होली, दिवाली, छठि आदिक शुभकामना तँ प्रचलित छल मुदा एहि माध्यमसँ हैप्पी तिलासंक्रांति, हैप्पी जूड़शीतल, हैप्पी जितिया, हैप्पी चौरचन, हैप्पी भरदुतिया आदि बेसी प्रचलित भेल। एकर अतिरिक्त मिथिलामे पसरल उपासक आगू सेहो हैप्पी लागए लागल। मिथिलाक एकटा बहुत बड़का वर्ग (गैर-ब्राह्मण ओ कायस्थ) सेहो अपन-अपन पूजाक लऽ कऽ फेसबुकक प्रयोग कऽ रहल छथि आ ई आरो नीक बात भेलै। निश्चित तौरपर मिथिलाक पछुआएल पाबनि-तिहार फेसबुक ओ अन्य प्लेटफार्म पाबि मजबूत भेल अछि। किछु एहन पाबनि जे कि व्यक्तिगत होइत छै जेना कोजगरा, मधुश्रावणी, भुँइया बाबाक पूजा आदिक कायाकल्प सेहो भऽ रहल अछि एहि माध्यमसँ। धर्मक एहि रूपसँ मैथिलीक गीत विधा बेसी लाभ उठेलक। जाहि पाबनि सभहक गीत प्राचीने कालसँ नै केर बराबरि होइत छल ताहू पाबनि सभहक गीत आब बहुतक संख्यामे भेटत। अप्रैल 2016 मे फेसबुक लाइभ हेबाक सुविधा देलकै मने अहाँ अपन भीडियो रूपमे कोनो बात सेहो कहि सकैत छी। ई सुविधा आन विषय लेल जेहन हो मुदा मैथिली गीत-संगीत लेल अमृतक समान काज केलक। लोक अपन-अपन लाइभ प्रस्तुति दऽ अपन प्रतिभाकेँ समाजक सामने राखि देलखनि। जकर प्रत्यक्ष लाभ एहि विधाकेँ भेटि रहल छै। ओना ई अलग बात जे बर्ख 2020 मे लाकडाउनक कारणे एहि लाइभ केर दुरुपयोग भेलै। एक दिस जनता भायनक दुख भोगि रहल चल तँ दोसर दिस साहित्यकार लेल 'लाइभ काल' चलि रहल छल। फेसबुक आ राजनीति
जखने समाज छै तहने राजनीति हेबे करतै से चाहे कोनो स्तरक किए ने हो। आइ स्थिति ई छै जे देशक हरेक नेता ओ पार्टीक सोशल मीडिया प्रभारी छै। आ एहि लेल भारी-भरकम खर्च प्रस्तावित करै जाइए एहि प्रोफेशन केर लोक सभ। भारतमे भारतक चुनाव प्रचार जमीनपर कम आ सोशल मीडियापर बेसी होइत छै। आ एहिसँ कोनो नेताक हारि-जीतक समीकरण सेहो तय होइत छै। 2008 मे अमेरिकामे बराक ओबामा अपन चुनाव केर प्रबंधन सोशल मीडियामे सेहो करबेलाह आ जितलाह ताही तर्जपर 2014 मे भारतक प्रधानमंत्री चुनाव भाजपा सोशल मीडिया द्वारा लड़लक आ ओहि चुनावमे जीतल आ तकर बाद भारतक सभ राजनैतिक दल अपन-अपन पक्ष फेसबुकपर राखए लागल ताहूमे एखन धरि भाजपे आगू अछि। एहिसँ पहिने भारतेमे अन्ना हजारे द्वारा 2011 मे कएल गेल अनशन सेहो फेसबुकक कारणे पसरल आ ओहि आंदोलनसँ किछु नीक नेता जेना अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया आदि निकललाह। फेसबुक राजनीतिकेँ पलटियो दैत छै। 2010 मे मिश्र (इजिप्ट) मात्र फेसबुकक सहारासँ अपन भ्रष्ट ओ निरंकुश शासनकेँ खत्म केलक एकरा Egyptian revolution of 2011 केर नामसँ जानल जाइत छै। विश्वक हरेक कोनामे अपन अवाज उठेबाक लेल फेसबुक आ सुलभ साधन छै। फेसबुक आ बेपार
विज्ञापन लेल फेसबुक लेल नीक साधन अछि आ बेपार तँ मुख्यतः विज्ञापनेपर टिकल अछि। जहाँ आन माध्यमसँ विज्ञापन लेल पाइ खर्चा करए पड़ैत छै ततए फेसबुक ओ अन्य सोशल मीडियासँ अपेक्षाकृत नमहर सर्किलमे अहाँ अपन चीजकेँ राखि सकैत छी। प्रायः हरेक कम्पनी केर सोशल मीडिया एकांउट छै जतए ओ अपन नव वस्तु, स्कीम आदिक विवरण दै छै। एकर अतिरिक्त आनो विषयमे फेसबुक सहायक भेल। आ एहने एकटा विषय अछि मजाकिया फोटो, मीम, कार्टून आदि। फेसबुकपर मैथिलीमे लिखल आ मैथिलसँ संबंधित मजाकिया फोटो, मीम, कार्टून बहुत आएल आ आबिए रहल अछि। इंटरनेटपर मैथिली लेखकक उपर पहिल बेर एडिट कएल फोटो (मजाकिया, मीम, कार्टून) एकै संगे तीन टा लेखक गजेन्द्र ठाकुर, आशीष अनचिन्हार ओ उमेश मंडलपर एलै जे विकास ठाकोर नामक एक फेक आइडी 2011 मे बनेने रहै। जे ओहि समयमे फेसबुकपर एक्टिभ रहथि से जनैत हेता जे विकास ठाकोर दू मासमे मिथिला राज्य बना देबाक दावा केने रहै। फोटो दऽ रहल छी। अपनेपर हँसि कऽ अपन नाम इतिहासमे पहिल हेबाक घुसिया रहल छी। ई कार्टून बनबए बला लोक कार्टूने धरि नै रहलाह हरेक पाबनि-तिहारपर ओकर अनुकूल फोटोशाप सेहो करए लगलाह जे कि आकर्षक छल आ पाबनि-तिहारकेँ एकटा नव रंग देलक। ई छल सकारात्मक पक्ष मुदा एकर अतिरिक्त किछु नकारात्मक तत्व सेहो छै आ ई तँ संसारक नियमे छै जे कोनो वस्तुमे गुण-अवगुण दूनू रहैत छै। फेसबुकक दू टा फीचर आ दू टा भ्रम मैथिलीमे बहुत रास भ्रम छै आ ताहूमे लगभग 99% भ्रम व्यक्तिगत भ्रम छै। मुदा मैथिल बहुत चालाक होइत छथि आ ओ अपन व्यक्तिगत भ्रमकेँ सार्वजनिक भ्रम बना देबाक कला जानै छथि। मैथिलीमे सोशल मीडिया तँ एकै मुदा ओकरासँ संबंधित भ्रम सेहो एलै आ लोक ओकरा अपन व्यक्तिगत भ्रम बना पसारहो लगलै। आइ अइ ठाम हम फेसबुकसँ संबंधित दू टा भ्रमपर विचार राखब-- 1) People You May Know--- मैथिल ई भ्रम पोसने रहै छै जे लोक हमर प्रोफाइल नुका कऽ देखैए तँइ हमरा 'People You May Know' मे लोक सभ देखाइए। किछु लोकक ईहो विचार छनि जे जँ हम केकरो प्रोफाइल नुका कऽ देखबै तँ हमरो ई देखाएत। हमरा समझिसँ ई पूर्णतः भ्रम छै। भ्रमसँ बेसी आत्ममुग्धता कहल जेतै। ओना ई भ्रम आनो समाजमे छै आ गूगलपर एकर समर्थनमे सेहो लेख भेटि जाएत मुदा फेसबुकक हिसाबसँ देखल जाए तँ ओहन लोक जे कि अहाँक कोनो मित्रक लिस्टमे छथि तकरा फेसबुक 'People You May Know' मे देखाबै छै तेनाहिते जँ कियो ग्रुपमे छथि तँ ओहि ग्रुपक सभ सदस्यकेँ एक-दोसर 'People You May Know' बला खंडमे समय-समयपर देखाइ पड़तनि। फेसबुक स्थान, शिक्षण संस्थान, रुचि, कार्य आदिक आधारपर सेहो 'People You May Know' मे दै छै। सभसँ बेसी मजा केर बात ई जे 2014 मे फेसबुक ह्वाट्सएपकेँ कीनि लेलकै। आब ह्वाट्सएप कोना काज करै छै से देखियौ। जखन कियो ह्वाट्सएप शुरू करै छै तखन ह्वाट्सएप प्रयोगकर्तासँ पूछै छै जे कि ह्वाट्सएप अहाँक फोटो, कान्टेक्ट, कैमरा आदिक प्रयोग कऽ सकैए आ समान्यतः हम सभ ओकरा एलाउ कऽ दैत छियै। असल खेला एहू ठाम छै। मानू जे अहाँक कान्टेक्ट लिस्टमे एहनो आदमी छथि जे कि अहाँ संग फेसबुकपर नै छथि मुदा फेसबुक ओहि आदमीकेँ 'People You May Know' बला लिस्टमे देखेतै। एहिठाम ई धेआन राखए बला बात ई जे स्थान, शिक्षण संस्थान, रुचि, कार्य आदिक आधारपर फेसबुक लोकक सजेशन दै छै से कियो भऽ सकैए जँ इच्छा अछि तँ जूड़ू अन्यथा ओकरा रीमूभ कऽ दियौ। जुड़बै कोना जखन कि अहाँ ओकर प्रोफाइल चेक करबै आ जँ मनोनुकूल हएत। जँ मनोनुकूल नै भेल तँ अहाँ अपना घर आ लिस्ट बला तँ अपना घरमे अछिए। मुदा ई साक्षात भ्रमे छै जे 'People You May Know' बला लिस्टमे वएह आदमी आएत जे कि अहाँक प्रोफाइल चेक करत। 2) प्रोफाइल रीचमे कमी-- प्रोफाइल रीच केर मतलब भेल जे अहाँक पोस्ट कतेक लोक धरि पहुँचै छै मुदा जँ पोस्टपर कोनो लाइक-कमेंट नै कएल जाए तँ पोस्टकर्ता ई नै बूझि पाबै छथि जे कतेक लोक पोस्ट देखलाह (स्टोरी एवं कोनो प्राइभेट ग्रुपमे के-के देखलाह से आबि जाइत छै, भीडियोमे कतेक लोक देखलाह से आबि जाइत छै) तँइ साधारणतः लोक लाइक-कमेंटमे कमीकेँ "प्रोफाइल रीचमे कमी" मानि लै छथि। समान्यतः फेसबुक शुरूआतमे कोनो आदमीक लिस्टक अधिकाशं लोकक पोस्टकेँ देखाबैत छलै। लोक स्क्रोल करैत छल आ ओकर लिस्टक पोस्ट देखाइत छलै तेनाहिते दोसरो आदमीकेँ हमर वा अहाँक पोस्ट देखाइत छल हेतै। मुदा बादमे फेसबुक लोकक रुचि एंव ओ अपने कतेक दोसर लोकक पोस्टपर जाइत छै ताही अनुरूप रीच दै छै। ई बदलाव लगभग 2015 केर बाद भेलै आ ताहि समयमे वा एखनो भाजपाक सरकार छै। तँइ संभवतः लोककेँ 'प्रोफाइल रीचमे कमी' केर समस्या तकनीकी नै राजनैतिक लागए लगलै। मुदा ई रीच केर समस्या भारतेमे नै आनो देशमे भेलै। ओना सभ सरकार अपना समयमे मीडियाकेँ दबा दै छै तँइ वर्तमान भाजपा सरकार सेहो केने हेतै मुदा जे बदलाव फेसबुक अपने कए रहल छै ताहि लेल राहुल-मोदी-अमित-सोनियाकेँ जिम्मेदार नै ठहराएल जा सकैए। मैथिलीमे ई समस्या ओहने लोक सभ लग छनि जिनका अपन ज्ञानक दाबी छनि आ ओ अपन हरेक पोस्टक अपन लिस्टक हरेक लोकक लाइक-कमेंट चाहै छथि मुदा ओ अपने कहियो गलतियोसँ आन लोकक पोस्टपर नै जाइ छथि। जँ हम लिस्टमे 1000 लोक छथि आ हम सभ लोकक पोस्टपर जइए (भने लाइक-कमेंट करियै कि नै करियै) तँ हमरो पोस्ट ओहि सभ लोक लग पहुँचबे टा करतै। जँ हम हजारमेसँ 200 लोकक पोस्टपर जेबै तँ हमरो पोस्ट ओही 200 लोक लग पहुँचतै आ 800 लग दस-बीस दिनमे एकटा। फेसबुकक ई वर्तमान स्वरूप बेसी व्यावहारिक छै (लोक एकरा राजनैतिक बना देलकै से बात अलग)। तँइ सी फर्स्ट आप्शन रहितो लोक ओहन पोस्टकेँ नै देखि पाबै छै। बहुत लोक अपन लिस्टमे मित्र तँ राखै छथि मुदा ओ मित्र सभ हुनका अनफालो केने रहै छनि। एहनो स्थितिमे पोस्टक रीच कम हेतै। एहिठाम लोक पेड रीच लऽ कऽ सेहो भ्रममे छथि। पेड रीच प्रोडक्ट लेल छै प्रोफाइल लेल नै मुदा बहुत लोक अपनाकेँ प्रोडक्ट बना पेड रीच केर सुविधा लऽ लै छथि। आन लोककेँ बुझाइ छनि जे हुनकर रीच बेसी आ हमर कम अछि। हरेक राजनीतिक दल केर पेज पेड रीच छै ताहूमे जे बेसी दाम देने छै ताहि पेजक रीच बहुत हेतै आ ओकर पोस्ट फेसबुक लेल महत्वपूर्ण हेतै। बहुत संभव जे भाजपा केने हो मुदा सोचियौ जँ कांग्रेसक सरकार बनतै तँ कि ओ ई सुविधा छोड़ि देतै? सोझ बात बुझियौ जे आब प्रोफाइल रीच एहि बातपर निर्भर करैत छै जे अहाँ आन कतेक लोकक पोस्टपर गेलियै एवं आन कतेक लोक अहाँक पोस्टपर आएल। दूनूमेसँ जँ कोनो एकटा शर्त पूरा हेतै तखने रीच बनल रहतै। ओना उपरक दूनू तथ्य सर्वज्ञात छै मुदा तकर बादो भ्रम पसरल छै। फेसबुकपर मैथिलीक किछु प्रसिद्ध ग्रुप आ एकर काज --- 1) विदेहक फेसबुक भर्सन https://www.facebook.com/groups/videha/, एहि ग्रुप मुख्य एडमिन गजेन्द्र ठाकुर छथि। एहिठाम हम विदेहक फेसबुक भर्सन केर किछु काज संक्षिप्त रूपें देखा रहल छी A) विदेह फेसबुक ग्रुपपर सभसँ पहिल काज मैथिली हाइकू केर अछि। गजेन्द्र ठाकुर पहिने हाइकू केर आलेख देलखिन तकर बाद हरेक दिन एकटा गाछक वा कोनो फोटो द' क' हाइकू लिखबाक आग्रह करै छलखिन। एकर प्रभाव तेहन तेहन भेलै जे सभसँ पहिने मैथिलीमे हाइकू केर लेखकमे अभूतपूर्व वृद्धि देखल गेल जाहिमे सुनील कुमार झा, मिहिर झा, ओमप्रकाश झा, इरा मल्लिक, शिव कुमार झा, ज्योति सुनीत चौधरी, अमित मिश्र, चंदन कुमार झा, मुन्नाजी, रामविलास साहु सहित एहि पाँतिक लेखक सेहो सम्मलित छथि। 2008सँ मैथिली हाइकू केर ब्लाग सेहो अछि जाहि ठाम विदेहक फेसबुक भर्सनसँ हाइकू केर संग्रह कएल गेल अछि। ई ब्लाग एहि पतापर देखल जा सकैए http://maithili-haiku.blogspot.in/ B) फेसबुकक माध्यमसँ विदेह मैथिलीक वर्तनी ओ मानकता लेल नीक प्रयास केने अछि आ तही कारणसँ कमसँ कम इंटरनेटपर सुदूर नेपालसँ लए कऽ दरंभगाक मैथिली एकसमान भेल अछि (ईहो धातव्य जे किछु जबरदस्ती बला मानकता बला विद्वान सभ एखनो कृत्रिम मैथिलीकेँ पकड़ने छथि)। विदेहक एहि मानक भाषाक लेखककेँ "विदेह भाषा पाक" नाम देल गेलै जे कि विदेह पोथी डाउनलोडपर सेहो उपल्बध अछि। C) विदेहक फेसबुक भर्सनपर जतेक नाटक संबंधी रचना आएल तकरा विदेह मैथिली नाट्य उत्सव नामक ब्लागपर राखल गेल अछि। विदेह ग्रुपक सहयोगसँ लगातार चनौरागंजमे विदेह नाट्य उत्सवक आयोजन भेल अछि जे कि मैथिलीमे समानांतर नाट्य अवधाणाकेँ मजगूत केलक। D) विदेहक फेसबुक भर्सन मैथिली बीहनि कथाक लगातार सहयोगी बनल रहल। एहि ठाम देल गेल आ प्रोत्साहित भेल बीहनिकथाकारकेँ मैथिली बीहनिकथा ब्लागपर राखल गेल जकरा एहि लिंकपर देखल जा सकैए http://vihanikatha.blogspot.in/ E) विदेह ग्रुपपर आएल प्रमुख कविताकेँ मैथिली कविता नामक ब्लागपर राखल गेल अछि जकरा http://maithili-kavita.blogspot.in/ लिंकपर देखल जा सकैए। लगभग 400सँ उपर कविताक संकलन अछि। F) विदेह ग्रुपपर आएल प्रमुख कथाकेँ मैथिली कथा नामक ब्लागपर राखल गेल अछि जकरा http://maithili-katha.blogspot.in/ लिंकपर जा क' देखि सकै छी। G) विदेह ग्रुपपर आएल प्रमुख आलोचना, समीक्षा आदिकेँ मैथिली कथा नामक ब्लागपर राखल गेल अछि जकरा http://maithili-samalochna.blogspot.in/ लिंकपर जा क' देखि सकै छी। 2) मिनाप MINAP(Mithila Natyakala Parishad) https://www.facebook.com/groups/258380252004/ एडमिन, सुनील कुमार मल्लिक, प्रवेश मल्लिक।, 3) मैथिली गजल भंडार, https://www.facebook.com/groups/mghajal/ एडमिन कुंदन कुमार कर्ण 4) मिथिलांगन ("MITHILANGAN" - A Literary, Social and Cultural Organisation), https://www.facebook.com/groups/mithilangan/, एडमिन आनंद रंजन 5) घटकैती झारखंड मिथिला मंच https://www.facebook.com/groups/226653764434000/, घटकैती झारखण्ड मिथिला मंचक शुरुआत 26 नवम्बर 16 के झारखण्ड मिथिला मंच के स्वयंसेवक भाई सुजीत झा जी केलथि। वर्तमान एडमिन निशा झा एवं सुजीत झा छथि। एहि ग्रुप द्वारा पहिल विवाहक समाचार मई 17 मे प्राप्त भेल जे संपन्न भेल छल बोकारोमे, तकर बादसँ एखन धरि 40 गोटे समाचार देने छथि जे हम्मर पुत्र-पुत्री के विवाह एहि घटकैती ग्रुप द्वारा भेल, विवाह त बहुतो होइ ये ग्रुपक माध्यमे लेकिन ग्रुप मे सुचना बहुतो कम गोटे देइ छैथ, खैर कोनो बात नै हम सब निःस्वार्थ अप्पन कार्य में लागल छी, वर्तमानमे एहि ग्रुपमे 3000 सँ ऊपर बायोडाटा राखल अछि। 6) धूआ धजा https://www.facebook.com/groups/dhuadhaja/ (एडमिन परमेश्वर कापड़ि, कुमार भाष्कर), 7) समदिया https://www.facebook.com/groups/samadiya/ (प्रियंका झा, पूनम मंडल), 8) विदेह नाट्य उत्सव (https://www.facebook.com/groups/136683676426547/?ref=group_browse_new) एडमिन बेचन ठाकुर, 9) मैथिली थियेटर (https://www.facebook.com/groups/MAITHILIRANGMANCH/) एडमिन आशुतोष अभिज्ञ, 10) अछिंजल (https://www.facebook.com/groups/achhinjal/) एडमिन पवन झा, 11) नेना भुटका (https://www.facebook.com/groups/101930576873357/) एडमिन देवाशुं वत्स, एकर अतिरिक्तो बहुत रास ग्रुप अछि जकरा जोड़ल जा सकैए। 2014 केर बादसँ फेसबुक ग्रुपक एकटा ट्रेंड देखबामे आएल जे एडमिन कोनो पोस्ट एप्रूभ करबाक काज अपना हाथमे लऽ लै छथि आ सौंसे हल्ला केने फीरै छथि जे हमर ग्रुपमे साफ-सुथरा पोस्ट अबैए मुदा ई बात निश्चित जे एहन पोस्टमे बेमतलब पोस्ट बेसी अबैत छै। Twitter आ मैथिली Twitter माइक्रोब्लागिंग सोशल साइट छै जे कि अमेरिकन Jack Dorsey, Noah Glass, Biz Stone आ Evan Williams द्वारा मार्च 2006मे बनाएल गेलै आ ओही सालक जुलाइमे सार्वजनिक कएल गेलै। Twitter नेता ओ राजनीतिक ओ समाजिक संगठन लेल बेसी प्रयोग होइए। ओना जे मैथिल फेसबुकपर शुरुआतसँ छथि सएह सभ Twitter पर शुरुआती समयमे (2008-9)मे एलाह आ बादमे आरो बहुत रास लोक सभ जुड़लाह। Twitter पर हैश टैग केर महत्व छै। जँ अहाँ अपन कोनो मुद्दाकेँ सरकार लग जोरगर ढंगसँ राखए चाहैत छी तँ Twitter पर हैशटैग ट्रेंड करबा दियौ, सरकार तुरत एक्टिभ भऽ जाइत छै। विगत किछु समयसँ मिथिला स्टूडेंट यूनियन मिथिला-मैथिलीसँ संबंधित किछु मुद्दाकेँ नीक जकाँ ट्रेंड करबा रहल अछि। आरो संस्था सभ विभिन्न मुद्दापर ट्रेंड करबा रहल अछि जे कि मिथिला-मैथिली लेल बादमे जा कऽ नीक हएत। ह्वाट्सएप आ मैथिली ह्वाट्सएप बातचीत करबाक एकटा नवीनतम आ सुलभ साधन भऽ गेल छै। एकरा माध्यमसँ संदेश आ फोटो पठेनाइ एकदम आसान भऽ गेल छै। वर्तमानमे ह्वाट्सएपसँ फ्री काल केनाइ सेहो संभव छै। जनवरी 2009मे जेन कूम द्वारा जन्मल ह्वाट्सएप आब फेसबुक कीनि लेने छै। ह्वाट्सएप सेहो मैथिली लेल वरदान साबित भेल अछि। ह्वाट्सएप हजारों लोक देवनागरी आ रोमन लिपिक माध्यमें मैथिलीमे लिखित बातचीत कऽ रहल छथि। ह्वाट्सएप ग्रुप बनेबाक सुविधा सेहो देने छै आ मैथिली एकर उपयोग सेहो केलक। ह्वाट्सएपपर मैथिलीक किछु ग्रुप एना अछि-- 1) मैथिली गजल 2) मैथिली बिहनि कथा एकर अलावे हजारो एहन ग्रुप अछि जकर नाम एहिठाम जोड़ल जा सकैए। ह्वाट्सएप सभहँक निजी मोबाइल द्वारा संचालित रहै छै तँइ एहि माध्यममे पहिल के आ दोसर के से तय करब असंभव तँइ एहि चर्चाकेँ कात केलहुँ। एहिठाम जखन ह्वाट्सएप केर चर्चा भइए गेल अछि तखन आन-आन एप्स केर चर्चा सेहो कऽ ली। Apps शब्द application केर छोट रूप छै। कंप्यूटर लेल software ओकर application छै आ एहि application मे Web browsers, e-mail programs, word processors, games आदि अबै छै। ई application सभ inbuilt (पहिनेसँ) रहैत छै जखन कि काज ओ सुविधाक हिसाबसँ अहाँ बाहरी application सेहो डाउनलोड कऽ सकैत छी। विकासक संग-संग मोबाइलकेँ सेहो कंप्यूटर जकाँ बनाएल गेलै। ऐतिहासिक दृष्टिकोणसँ IBM Simon दुनियाँक पहिल स्मार्ट फोन छै जे कि August 1994 मे लांच भेल रहै। स्मार्ट फोन ओ भेल जे बहुउद्येशीय हो मने फोन अलावे आर बहुत रास काज (वर्तमानमे ठीक कंप्यूटरे जकाँ)। एकर बाद क्रममे Nokia 9000 Communicator (1996) एलै आ 1999 मे Qualcomm नामक कम्पनी pdQ Smartphone" नामसँ निकालक जे कि CDMA आ Palm OS (Palm आपरेटिंग सिस्टम)सँ चलै छल ई टचस्क्रीन बला फोन छल आ वस्तुतः आजुक टचस्क्रीनक माए-बाप। 1999 मे जपानक NTT DoCoMo नाम कम्पनी i-mode नामक मोबाइल इंटरनेट लांच केलक जे कि ओहि समयमे सभसँ बेसी स्फडसँ चलैत छल। एकर बाद 2000 मे Ericsson R380, फरवरी 2001 मे Kyocera 6035, जून 2001 मे Nokia 9210 Communicator, 2002 मे Treo 180 नाम स्मार्ट फोन सभ एलै। पहिल बेसी केपिसटी बला टचस्क्रीन फोन LG Prada छल जे कि दिसम्बर 2006 मे आएल। जनवरी 2007 मे एप्पल पहिल iPhone अनलक। जेना कंप्यूटर लेल कोनो ने कोनो आपरेटिंग सिस्टम (अधिकत विंडोज) तेनाहिते स्मार्टफोन लेल सेहो आपरेटिंग सिस्टम चाही। embedded systems, PenPoint OS, Magic Cap OS आदि बहुत OS समेत वर्तमान समय अधिकांशतः दू OS पर सिमटल अछि पहिल iPhone OS (6, March 2008) आ दोसर Android । एप्पल द्वारा पहिल iPhone OS 6, March 2008 मे लांच भेलै जखन कि Android सेहो सितम्बर 2008 मे लांच भेल, Android गूगल द्वारा संचालित अछि । एहि दू केर अतिरिक्त विंडोज मोबाइल आपरेटिंग सिस्टम सेहो नीक अछि जे कि माइक्रोसाफ्ट द्वारा संचालित अछि। भारतक पहिल Android स्मार्ट फोन HTC Magic छल जे कि July 2009 मे लांच भेल। भरतक पहिल iPhone " iPhone 3G" छल जे कि 2008 मे लांच भेल। आ एहि स्मार्टफोन सभ बहुत रास सुविधा तँ छलैहे संगे-संग ओकरा आर स्मार्ट बनेबाक लेल बाहरी application (App) जोड़ए लागल। आ ई App सभ मोबाइल कम्पनी द्वारा सेहो बनाएल जाइत छै आ आन साफ्टवेयर कम्पनी द्वारा सेहो। नीक App भेलासँ कमाइ सेहो नीक होइत छै आ यूजरकेँ सुविधा भेटैत छैक। प्रायः सभ सेवा देबए बला कम्पनी अपन-अपन App बनबेने छै। App सभ तरहक भेटत। स्मार्टफोनक बढ़त मिथिलामे सेहो भेलै आ सभ अपन-अपन काजक हिसाबसँ किछु मिथिला-मैथिल-मैथिलीसँ संबंधित App सेहो बनेलक। उपल्बध आँकड़ासँ देखल जाए तँ 2013 मे पहिल App बनल जे कि मिथिला-मैथिल-मैथिलीसँ संबंधित छल। निच्चामे ई लिस्ट देल जा रहल अछि-- Songs for Mithila (apkdotin, apkdotin@gmail.com) Released Date-18 Feb 2013 Maithili Talking Dictionary (Khandbahale.com, support@ Khandbahale.com) Released Date- 8 Oct 2013 Maithili to English Dictionary ((Khandbahale.com, support@ Khandbahale.com) Released Date- 8 Oct 2013 Mithilanchal Fm ( I tech Nepal, account@itechnepal.com) Released Date-24 Nov 2015 ई Mithilanchal Fm द्वारा बनबाएल गेल छै। Maithili Jindabaad (ACApp studio) Released Date- 10 Jan 2016 English To Maithili Dictionary (VB Nexcod, vbnexcod@gmail.com) Released Date- 18 May 2016 Maithili Patra (JCApp Studio- 1st online Panchang, JCAppStudio.asist@gmail.com) Released Date- 19 August 2016 English to Maithili Dictionary (Best 2017 translator App, rudrap775@gmail.com), Released Date- 16 Sep 2016 English To Maithili Dictionary (Translate app, dp0591240@gmail.com) Released Date- 19 Oct 2016 English to Maithili Dictionary (Live radio Music , manishapandav52@gmail.com) Released Date-20 Oct 2016 Maithili Bible (audio) ( LuongOolong, huuluongvip682@gmail.com) Released Date-1 Nov 2016 English to Maithili Dictionary (XW infotech, piyushmakwana3666@gmail.com) Released Date- 20 Nov 2016 Maithili Dictionary ofline (Daily Apps, dailyapps@yahoo.com) Released Date- 21 Jan 2017 Mithilakshar (JC App) Released Date- 15 March 2017 Maithili Talk (Bright logical) Released Date- 31 March 2017 Maithili Music (Bright logical, florajha@gmail.com) Released Date- 31 May 2017 Maithili Video (SparkZeal Technologies pvt ltd, jksah05@gmail.com) Released Date- 11 July 2017 Maithili Bible (LCI apps, maithilibible@gmail.com), Released Date-25 sep 2017 Maithili Songs-Maithili Videos (Developer- Devaguru Bruhaspati App) Released Date- 10 Dec-2017 Maithili Shadi Vivah (Noblers career Map classes pvt ltd, amitjha07@gmail.com) Released Date-26 Dec 2017 Maithili video songs: Maithili video Gane (full entertainment video, fenil.sharmaa002@gmail.com) Released Date- 7 Feb 2018 Maithili Vivah- Matrimonial App (SKS infotech , contact@mithilavivah.com) Released Date-3 March 2018 Maithili Fakra (Megamaind lab , Megamaindlabworks@gmail.com, Chennai) Released Date-23 March 2018 Maithili Song Video: Maithili Bhajan ( Mihir Nayak – mihirnayak@gmail.com), Released Date-16 May 2018 English to Maithili Dictionary (Best 2018 Apps, best2018apps@gmail.com) Released Date-20 June 2018 Maithili Panchang (Roshan choudhary, roshanchoudhry@hotmail.com) Released Date-9 Sep 2018 Maithili Sundar Kand (Roshan choudhary ) Released Date- 23 Sep 2018 Mithila Jansamvad (WoZoo Technology, editor@mithilajansamvad.com) Released Date-10 Dec 2018 Maithili Video status Songs-2019 (Tradevend, contact@ Tradevend.com) Released Date-12 Dec 2018 Maithili Panchang (Roshan choudhary ) Released Date-12 Dec 2018 Maithili Video Songs HD (Sajeevsapp, sajeevsaapps@Gmail.com) Released Date-23 Jan 2019 Being Maithili (ACApp) Released Date- 6 Feb 2019 Maithili Sangam:Family matchmaking & Matrimony (People Interactive, care@sangam.com) Released Date- 30 March 2019 Maithili Hospitals (MEngage , engage@mengage.in) Released Date-21 May 2019 Maithili status Video (Alisha ,alishaadnan05@gmail.com) Released Date-19 June 2019 Maithil matrimony for maithil brides and grooms (communitymatrimony.com) Released Date-24 June 2019 Maithili Movies (Rameen, rameenraheel918@gmail.com) Released Date-27 June 2019 Maithili Geet (Thegauravmishra,officialgauravmishra@gmail.com) Released Date- 7 Sep 2019 यूट्यूब आ मैथिली फरवरी 2005मे यूट्यूब केर स्थापना भेल आ नवम्बर 2006 एकरा गूगल कीनि लेलकै। T- series भारतक पहिल यूट्यूब चैनल अछि जे कि 13 March 2006 मे शुरू भेल https://www.youtube.com/user/tseries/about मुदा एहिपर पहिल भीडियो 23 Dec 2010 मे देल गेलै। मैथिली हिसाबसँ हिसाबसँ देखी तँ vijay7701 नामसँ 3 Feb 2007 केँ एकटा चैनल शुरू भेलै जाहिमे शारदा सिन्हाजीक गाएल एकै गीतक दूटा भीडियो अछि आ पहिल भीडियो 3 Jun 2007 केँ देल गेलै - https://www.youtube.com/user/vijay7701/about ई गीत मैथिलीक अछि मुदा ओकरापर लेभल भोजपुरीक लागएल गेल छै आ तकर एकमात्र कारण जे ई गीत सभ मैथिल ब्राह्मणक विधि-बेबहारमे नै अबैत छै मुदा आन मैथिल जातिमे बजैत छै। तेनाहिते gopal yadav केर नामसँ एकटा चैनल छै - https://www.youtube.com/user/rustymind1/about जाहिपर 12 Feb 2007 केँ दू टा मैथिली आ 13 Feb 2007 केँ एकटा भोजपुरी भीडयो देल गेलै। अंशुमान सिन्हा (शारदा सिन्हाजीक पुत्र) 11 Jan 2008 मे अपन चैनल लेलाह https://www.youtube.com/user/mranshumansinha/about जाहिमे पहिल भीडियो 2010 मे देल गेलै सेहो आन-आन भाषाक, किछु मैथिली गीत तीन-चारि सालक बाद देल गेलै। गजेन्द्र ठाकुर अपन चैनल 10 Apr 2008 मे लेलाह https://www.youtube.com/user/ggajendra71/about जाहिपर 27 Apr 2008 केँ पहिल भीडियो एलै। एकर तुरंते बाद Jun 2008 केँ रजनी पल्लवीजीक चैनल आएल https://www.youtube.com/user/rajnipallavi/about जाहिपर पहिल भीडियो 20 Jul 2008 केँ एलै। आ एहि तीनक बाद मैथिली चैनलक संख्यामे बहुत वृद्धि भेल हम अपनो चैनल 22 Aug 2009 केँ लेलहुँ https://www.youtube.com/user/ashishanchinhar/about मुदा एहिपर भीडयो हम सात बर्ख बाद देलहुँ। धीरेन्द्र प्रेमर्षि जीक चैनल https://www.youtube.com/user/premarshi/about 8 Jun 2010 केँ आएल आ पहिल भीडियो 1 Sep 2010 केँ देल गेल। वर्तमान समयमे भीडियोक माध्यमसँ काज करबाक यूट्यूब केर बहुत पैघ सहारा छै। भीडियो शूट कए कऽ यूट्यूबपर अपलोड करू आ अपन बात सभ धरि पहुँचाबू। ई हरेक तरहँक भीडियो लेल छै। चाहे राजनीतिक हो कि समाजिक कि साहित्यिक कि कैरियरक। जीवनक हरेक क्षेत्रसँ संबंधित भीडियो भेटि जाएत एहिठाम। बेसी लोकप्रिय भेलापर ओहि भीडियोसँ अर्थोपार्जन सेहो होइत छै। 2010 केर बाद जँ हम मैथिली यूट्यूब चैनल केर गिनती करए लागी तखन सभ काज छोड़ए पड़त। मुदा जे नीक ओ प्रमुख अछि ताहिमेसँ किछु प्रमुख नाम एना अछि (उपरक नाम छोड़ि ई लिस्ट अछि कारण उपर ओकर चर्चा भेले अछि)— 1) मिथिलांचल गीत- https://www.youtube.com/c/Mithilanchal/about 2) मैथिली टी.भी- https://www.youtube.com/c/MaithiliTV/about 3) गंगा मैथिली- https://www.youtube.com/channel/UC41hszq3ex3RFkRD9rAFO-w/about 4) नीलम मैथिली https://www.youtube.com/channel/UClWIHG6uYYnpYprQyGTJfmg/about 5) मिथिला मिरर- https://www.youtube.com/user/MithilaMirror/about 6) मधुर मिथिला- https://www.youtube.com/channel/UCZCpHpF-g9X_pDM_81iJHmA/about 7) मिथिला मचान (Live Baatcheet)- https://www.youtube.com/c/LiveBaatcheetweb/about 8) मिथिला दर्शन- https://www.youtube.com/c/MithilaDarshan/about एहि केर अतिरिक्त JM News केर नामसँ एकटा नीक चैनल आएल अछि- https://www.youtube.com/c/JaiHindMaithiliNews/about जे कि मैथिलीक अतिरिक्त हिंदीमे सेहो मैथिल-मिथिला-मैथिलीसँ संबंधित तथ्य सभ लग पहुँचाबै छथि। JM News एकटा नीक प्रयास अछि। एकर प्रभाव निकट भविष्यमे देखबामे आएत। एकर अतिरिक्त आरो बहुत रास नीक-नीक चैनल सेहो अछि जकर नाम जोड़ल जा सकैए। एहि बीचमे हम फेसबुकपर जानए चाहलहुँ यूट्यूब केर पहिल चैनल सभकेँ बारेमे तँ प्रणव झाजी सूचना देलाह जे ओ 2007मे यूट्यूबपर रजनी पल्लवीजीक चैनलसँ गीत सुनने छलाह बादमे रजनीजी सूचना देलीह जे ओ 2006मे चैनल बनेने छलीह मुदा ओकरा हटा कऽ 2008 मे नव बनेलीह। फेसबुक पोस्टक फोटो देल जा रहल अछि। हमर फेसबुक पोस्ट केर फोटो- उमेश मण्डल मैथिलीमे ई-पत्रकारिता ई-पत्रकारिताक प्रारम्भ भेने लेखक ओ पाठक वर्गमे काफी वृद्धि देखल जाइत अछि। एकर अनेक कारणमे महत्वपूर्ण अछि भौगोलिक दूरीक अंत। जइसँ विश्वमे पसरल मैथिली भाषी, साहित्य प्रेमी सभ सोझा एलाह। ऐठाम अपन विचार व्यक्त करबाक पूर्ण स्वतंत्रा लेखको आ पाठकोकेँ भेटैत छन्हि। रचनापर त्वरित टिप्पणी-समीक्षा-समालोचनाक सुविधा सेहो इन्टरनेटपर अछि। इन्टरनेटपर मैथिलीक पहिल उपस्थितिक रूपमे विदेहक पूर्व-रूप "भालसरिक गाछ" ५ जुलाइ २००४ सँ http://gajendrathakur.blogspot.com/ लिंकपर उपलब्ध अछि। ओना याहू जियोसिटीजपर २००० ईं.सँ ई साइट रहए, जे याहू द्वारा जियोसिटीज बन्द कऽ देलाक बाद आब उपलब्ध नै अछि। मैथिली ई-पत्रकारिताक आरम्भक श्रेय विदेहकेँ छै आ तँए एकर नाओं अछि ‘विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका’ वर्तमानमे १०३ टा अंक ई-प्रकाशित अछि। गूगल एनेलेटिक्स डेटा केर मोताबिक ‘विदेह ई पत्रिका’केँ ५ जुलाइ २००४ई.सँ अखन धरि ११६ देशक १,५०२ ठामसँ ७२,०४३ गोटे द्वारा ३५,४५२ विभिन्न आइ.एस.पी. सँ ३,३६,७०७ बेर देखल गेल अछि। विदेह मैथिली पोथी डाउनलोड http://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi पर उपलब्ध अछि। लगभग २०० सँ बेशी मैथिली पोथी देवनागरी, तिरहुता आ ब्रेल तीनू लिपिमे जे पी.डी.एफ. फाइलमे फ्री डाउनलोड लेल उपलब्ध अछि अनेक रचनाकारक अलाबे जगदीश प्रसाद मंडलक 2टा कथा संग्रह, 2टा एकांकी संग्रह, 3टा नाटक, 2टा कविता संग्रह, पाँचटा उपन्यासक सेहो उपलब्ध अछि। एकर अतिरिक्त ११००० सँ बेशी, तिरहुतामे लिखल, ५०० बर्ख पुरान तालपत्र, विदेह द्वारा स्कैन कऽ ओकर देवनागरी लिप्यंतरणक संग ऐ साइटपर डाउनलोड लेल उपलब्ध अछि। सरकारी आ गएर सरकारी संस्था सभ द्वारा अखन धरि कएल समस्त प्रयाससँ ई लगभग १०० गुणा बेसी अछि। ऐ समस्त कार्यमे लगभग १०,००० घण्टाक श्रम लगाओल गेल अछि आ एतए तिरहुता, ब्रेल आ अन्तर्राष्टीय फोनेटिक अल्फाबेट (आइ्. पी. ए) सिखबाक सेहो बेबस्था कएल गेल छै आ तइ संबंधी पोथी जे श्री गजेन्द्र ठाकुर द्वारा िलखित अछि ओ फ्री डोनलोड लेल सेहो उपलब्ध अछि। विदेह मैथिली ऑडियो संकलन http://sites.google.com/a/videha.com/videha-audio , एतए विविध विधाक ऑडियो जेना कथा, कविता, गजल, हाइकू, टनका, हैबून, हैगा इत्यादि, देल गेल अछि। ऐठामक मुख्य आकर्षण अछि ५० घण्टाक ऑडियो संकलन जे मिथिलाक सभ जाति आ धर्मक संस्कार, लोकगीत आ व्यवहार गीत जे मैथिलीकेँ जाति आधारित भाषा हेबाक अवधारणापर मारक प्रहार सिद्ध कए रहल अछि। मैथिली वीडियोक संकलन http://sites.google.com/a/videha.com/videha-video , एतए नाटक, सेमीनार, वर्षकृत्य, रसनचौकी, सामा-चकेबा, कवि-सम्मेलन, विदेहक नाट्य आ साहित्य उत्सवक वीडियो, मिथिलाक खोज, गीत-ंसंगीत, मैथिली वीडियो, वोकल आर्काइव, सगर राति दीप जरए, साक्षात्कार, विद्यापति पर्व, मैथिली गजल आदिक वीडियो उपलब्ध अछि। ऐठामक मुख्य आकर्षण अछि, मिथिलाक सभ जाति आ धर्मक संस्कार, लोकगीत आ व्यवहार गीतक वीडियो, आ पहिल बेर विदेहक सौजन्यसँ सतमा कक्षाक दीक्षा भारतीक गाओल ‘गोविन्ददास’क गीत। ऐमे लगभग ५००० घण्टाक मेहनति विदेहक सदस्यगण द्वारा लगाओल गेल अछि। विदेह मिथिला चित्रकला/आधुनिक चित्रकला आ चित्र- http://sites.google.com/a/videha.com/videha-paintings-photos/ लिंकपर उपलब्ध अछि ‘मिथिला चित्रकला, आधुनिक चित्रकला, रंगमंच, चौबटिया-सड़क नाटक सहित कएक हजारसँ ऊपर फोटो अछि जइमे २०० सँ ऊपर िमथिलाक वनस्पति, १०० सँ ऊपर मिथिलाक जीव-जन्तु आ १०० सँ ऊपर मिथिलाक जनजीवनक किसानी आ कारीगरी संस्कृतिक फोटो सेहो अछि जइमे ५००० घण्टाक मेहनति विदेह सदस्यगण द्वारा लगाओल गेल अछि। विदेह मैथिली जालवृत्त एग्रीगेटर : http://videha-aggregator.blogspot.com/ पर मैथिलीक सभ वेबसाइटक विवरण सहजताक लेल उपलब्ध अछि। विदेह द्वारा मैथिली साहित्य अंग्रेजीमे अनूदित कए http://madhubani-art.blogspot.com/ साइटपर राखल गेल अछि। एतए सत्तरिटा पोस्ट अछि जकरा माध्यमसँ मैथिलीक श्रेष्ठ साहित्य विश्वक समक्ष राखल गेल अछि। ऐ अनुवादमे लगभग ७०० घण्टासँ बेसी समैक श्रम खर्च कएल गेल अछि। विदेह:सदेह- पहिल तिरहुता (मिथिला़क्षर) जालवृत्त (ब्लॉग) http://videha-sadeha.blogspot.com/ ई मैथिली भाषाक मिथिलाक्षरमे सज्जित पहिल वेबसाइट अछि। विदेह:ब्रेल- मैथिली ब्रेलमे : पहिल बेर विदेह द्वारा http://videha-braille.blogspot.com/ पर मैथिलीक पहिल साइट अछि जे क्रमश: मिथिलाक्षर आ ब्रेलमे अछि जेकारा स्पेशल स्क्रीन टच माॅनिटरसँ संबंधित आदमी पढ़ि सकै छथि तहिना स्पेशल प्रिंटरसँ प्रिंट सेहो निकालि सकै छथि। जइ दुनूमे लगभग हजार-हजार (१०००-१०००) घण्टाक मेहनति लागल अछि। नेना भुटका साइट मैथिलीमे बच्चा सबहक लेल एक मात्र साइट अछि जे संगीतज्ञ माँगनि खबासक नामपर- http://mangan-khabas.blogspot.com/ राखल गेल अछि। बाल साहित्य जेना बाल कथा, प्रेरक कथा, बाल कविता आदि समस्त बाल साहित्यकेँ आधुनिक-वैज्ञानिक दृष्टकोणसँ लिखल श्री जगदीश प्रसाद मण्डलक १२५ गोट प्रेरक कथाक अलाबे विभिन्न लेखक केर साहित्य ऐपर सहजताक संग उपलब्ध अछि जेकरा विश्वमे पसरल नेना, बढ़ैत नेना आ किशोरक लेल फ्री डॉनलोड हेतु उपलब्ध अछि। विदेह रेडियो: मैथिली कथा-कविता आदिक पहिल पोडकास्ट साइट- ऐठामसँ मैथिलीमे गीत-संगीत, कथा-कविता, गजल-हाइकू, टनका-हैबूनक संग अनेक परिचर्चा प्रसारित कएल जाइत अछि। साइटक नाओं अछि- http://videha123radio.wordpress.com/ विदेहक फेसबुक चौबटिया-फरबरी २००८सँ अछि जे पुरान फॉर्मेटमे छल https://www.facebook.com/groups/10299304978/ आ http://www.facebook.com/groups/7436498043/ पर, नव फॉर्मेटमे एतए http://www.facebook.com/groups/videha/ उपलब्ध अछि, आ फेसबुकपर मैथिलीक सभसँ पुरान चौबटिया अछि। ऐ चौबटियापर ८४००सँ बेसी मैथिली भाषी सदस्य द्वारा गत साल १०,००० पोस्ट आ ११०० सँ बेसी फोटो पोस्ट कएल गेल अछि। प्रतिदिन १५० टासँ ऊपर कॉमेट पोस्ट सभपर अबैए जइमे मिथिला-मैथिली विकासपर स्वस्थ्य परिचर्चा होइए। विदेह मैथिली नाट्य उत्सव- मैथिली रंगमंचकेँ वैश्विक स्तर प्रदान केलक अछि जे श्री बेचन ठाकुरजी द्वारा http://maithili-drama.blogspot.com/ पर उपलब्ध अछि। एतए मैथिली आ अंग्रेजीमे मैथिली रंगमंचक चित्र-आ वीडियोक माध्यमसँ विस्तारसँ वर्णन १७५ पोस्टमे देलगेल अछि, ई मैथिलीक अखन धरिक “स्लैपस्टिक ह्यूमर” बला रंगमंचक विरुद्ध विदेह मैथिली समानान्तर रंगमंचक प्रारम्भ केलक अछि। लगभग २००० घण्टाक मेहनति ऐ वेबसाइटपर अखन धरि भऽ चुकल अछि। एतए मिथिलाक गम-गाममे होइत मैथिली रंगमंचक अतिरिक्त, कोलकाता, जनकपुर, राजबिराज, पटना, दिल्ली आदिक रंगमंचक विवरण सेहो उपलब्ध अछि। समदिया- http://esamaad.blogspot.com/ पर पूनम मण्डल आ प्रियंका झा द्वारा २००४ ई.मे शुरू भेल, साहित्यिक पत्रकारिताक लीकसँ हटि कऽ न्यूज पोर्टलक वा ई-पेपरक रूपमे मैथिली पत्रकारिताकेँ एतएसँ प्रारम्भ भेल। अखन धरि ५२५ सँ बेसी पोस्ट ऐठाम भेल अछि। सर्वश्रेष्ठ न्यूजकेँ मासक समदिया पुरस्कार देल जाइत अछि। अगस्त २०१२मे सर्वश्रेष्ठ मैथिली पत्रकारकेँ ‘विदेह मैथिली पत्रकारिता सम्मान’सँ सम्मानित करबाक घोषणा अछि जे आब साले-साल सेहो देल जाएत। ऐ वेबसाइटपर अखन धरि ५५०० घण्टाक मेहनति पूनम मण्डल आ प्रियंका झा टाइपसँ लऽ कऽ समाचार अपलोड करबाक कार्यमे कऽ चुकल छथि आ ई साइट श्री रामभरोस कापड़ि भ्रमरक सीरियल चोरिक भण्डाफोड़क अतिरिक्त ढेर रास उद्घाटन कऽ साहसिक सोद्देश्य मैथिली पत्रकारिताक परिचए दऽ चुकल अछि। मैथिली फिल्म्स http://maithilifilms.blogspot.com/ श्री गजेन्द्र ठाकुर, श्री बेचन ठाकुर, श्री विनीत उत्पल, श्री सुनील कुमार झा आ श्री आशीष अनचिन्हार द्वारा संचालित साइट अछि, ऐपर मैथिली, अंगिका, वज्जिका आ सुरजापुरीक पूर्ण विवरण उपलब्ध अछि। एतए अखन पचाससँ ऊपर पोस्ट उपलब्ध अछि। अनचिन्हार आखर http://anchinharakharkolkata.blogspot.com/ - एेपर ४८१टा गजल, २२टा कता, बन्द, नात, १२४टा रुबाइ, ७०टा करीब आलेखक अलाबे शेरो-शाइरीसँ संबंधित विडियो सेहो उपलब्ध अछि। मैथिली हाइकू http://maithili-haiku.blogspot.com/ - ऐ वेबसाइट मैथिलीक साहित्यिक पत्रकारिताक प्रतिमान प्रस्तुत करैत अछि। मैथिली हाइकू (प्राकृत दृश्यपर ५/७/५) टनका (प्राकृत दृश्यपर ५/७/५/७/७) हैबून (प्राकृत दृश्यपर गद्यक एक-दू या तीन अनुच्छेदक अंतमे ओतबे हाइकू या टनका) हैगा (तत् संबंधी चित्र), शेनर्यू आदिक थ्योरी आ प्रैक्टिस सभ एतए भेट जाएत। मानक मैथिली http://manak-maithili.blogspot.com/ - ऐ वेबसाइटपर मैथिलीक अन्तर्जालपर मानकीकृत स्वरूप नेपाल आ भारतक मैथिली भाषाशास्त्री लोकनिक मतक अनुसार। मैथिलीक साहित्यिक पत्रकारिताक प्रतिमान प्रस्तुत करैत अछि। विहनि कथा http://vihanikatha.blogspot.in/ पर, मैथिली कविता http://maithili-kavita.blogspot.in/ पर, मैथिली कथा http://maithili-katha.blogspot.in/ पर आ मैथिली समालोचना http://maithili-samalochna.blogspot.in/ पर उपलब्ध अछि। विदेह गोष्ठी: (परिचर्चा आ प्रैक्टिकल लैबोरेटरीक प्रदर्शन। किछु विचार डाक आ ई-पत्रसँ सेहो आएल।)- http://esamaad.blogspot.in/p/blog-page_05.html मैथिली नाटक रंगमंच फिल्मपर: २८-२९ जनवरी २०१२ स्थान चनौरागंज,झंझारपुर। निर्मली, जिला सुपौलमे अन्तिम परिचर्चा आधुनिक मैथिली नाटक आ रंगमंचपर: १७-१८ सितम्बर २०११ आ २४-२५ सितम्बर २०११केँ। मैथिली गजल, कता, रुबाइपर निर्मली, जिला सुपौलमे अन्तिम परिचर्चा: २६-२७ नवम्बर २०११ आ ०३ आ ०४ दिसम्बर २०११ मैथिली हाइकू, टनका,शेर्न्यू, हैगा, हैबून पर निर्मली, जिला सुपौलमे अन्तिम परिचर्चा; १२-१३ नवम्बर २०११ आ १९-२० नवम्बर २०११ मैथिली बाल साहित्यपर निर्मली, जिला सुपौलमे अन्तिम परिचर्चा; १५-१६ अक्टूबर २०११ आ २२-२३ अक्टूबर २०११ मैथिली विहनि, लघु, दीर्घ कथा आ उपन्यास पर निर्मली, जिला सुपौलमे अन्तिम परिचर्चा; २९-३० अक्टूबर २०११ आ ०५-०६ नवम्बर २०११ मैथिली प्रबन्ध, निबन्ध, समालोचना, अनुवाद, मानक मैथिली आ शब्दावली पर निर्मली, जिला सुपौलमे अन्तिम परिचर्चा; ०१-०२ अक्टूबर २०११ आ ०८-०९ अक्टूबर २०११ मैथिली महिला आ फेमिनिस्ट लेखन पर निर्मली, जिला सुपौलमे अन्तिम परिचर्चा; ०३-०४ सितम्बर २०११ आ १०-११ सितम्बर २०११ मैथिली कला-शिल्प-संगीत पर निर्मली, जिला सुपौलमे अन्तिम परिचर्चा; २०-२१ अगस्त २०११ आ २७-२८ अगस्त २०११ मैथिली हास्य-व्यंग्य पर निर्मली, जिला सुपौलमे अन्तिम परिचर्चा; ०६-०७ अगस्त २०११ आ १३-१४ अगस्त २०११ मैथिली गूगल ट्रान्सलेटर टूलकिट, गूगल ट्रान्सलेट, गूगल लैंगुएज टूल, मैथिली विकीपीडिया, कैथी आ तिरहुता यूनीकोडक एनकोडिंग पर निर्मली, जिला सुपौलमे अन्तिम परिचर्चा; ०६-०७ दिसम्बर २००८, १३-१४ दिसम्बर २००८, ०५-०६ दिसम्बर २००९, १२-१३ दिसम्बर २००९, ०४-०५ दिसम्बर २०१०, ११-१२ दिसम्बर २०१०, १७-१८ दिसम्बर २०११, २४-२५ दिसम्बर २०११ मैथिली मे प्राथमिक आ मध्य विद्यालयी शिक्षा मैथिली माध्यमसँ मिथिलामे करेबा लेल निर्मली, जिला सुपौलमे परिचर्चा; ०३ फरबरी २०१२-०४-०८ निष्कर्षत: ऐ ई-पत्रकारितामे साहित्यिक आ राजनैतिक दुनू पत्रकारिता शामिल अछि जतए, दृश्य आ श्रव्य माध्यमक प्रचुर प्रयोग कएल गेल अछि। (विदेह पेटारसँ) ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। गजेन्द्र ठाकुर भाषा आ प्रौद्योगिकी (संगणक,छायांकन,कुँजी पटल/ टंकणक तकनीक): भाषा आ प्रौद्योगिकी (संगणक,छायांकन,कुँजी पटल/ टंकणक तकनीक) , अन्तर्जालपर मैथिली आ विश्वव्यापी अन्तर्जालपर लेखन आ ई-प्रकाशन गूगल आ वर्डप्रेस द्वारा जालवृत्त खोलबाक लेल बहुत रास बनल बनाएल परिकल्पित नमूना स्थल निर्माण लेल उपलब्ध अछि आ ओतए लेखन, संदेश आ टिप्पणीक लेल असीमित दत्तांशनिधि उपलब्ध अछि जतए जालोद्वहन मँगनीमे देल जा रहल अछि। ई सभ जालवृत्त निर्माण स्थल उपभोक्ता केन्द्रित अछि आ एतए सरल लेखन-पद्धतिक व्यवस्था सेहो कएल गेल अछि मुदा जे अहाँ संविहित पृच्छन भाषा (एस.क्यू.एल.) आधारित जालस्थलक निर्माण आ प्रबन्धन करए चाहैत छी तँ ओहि लेल ई निबन्ध अहाँक लेल उपयोगी रहत। पहिने मिथिलाक्षर आ देवनागरीक यूनीकोडमे लिखल जएबाक प्रक्रम दए रहल छी आ से अन्तर्जालपर पढ़ल जा सकबा योग्य कोना होएत तकरो चरचा होएत। तकर बाद जालस्थल निर्माण पद्धतिपर विस्तृत चरचा होएत। देवनागरी लिपिकेँ रोमन टाइपराइटरपर कोन टाइप करी- पहिने www.bhashaindia.com पर जा कए हिन्दी IME V.5 अवारोपित (डाउनलोड) करू । एहि विधि (प्रोग्राम) केँ अपना संगणक (कंप्युटर) पर प्रतिष्ठापित (इंस्टॉल) करू । फेर नियन्त्रण पटल (कंट्रोल पैनल) मे क्षेत्रीय आ भाषा (रेजनल आ लंग्वेज) पर जा कए लंग्वेज प्लावक (टैब) केँ दबाऊ । देखू जे कॉम्प्लेक्स स्क्रिप्ट/ राइट टू लेफ्ट लैंगुएज पर सही केर निशान लागल छैक आकि नहि । नहि छैक तँ करू आ संगणक ( कंप्युटर) ताहि लेल जे जे कहैत अछि से करू । एकरा बाद लंग्वेज प्लावक (टैबकेँ) आ डिटेल्स केँ दबाऊ । फेर ओतए ऐड क्लिक करू आ ओतए लंग्वेज मे हिन्दी आ कीबोर्ड मे HINDI INDIC IME 1[V.5.1] सेलेक्ट कए अप्लाइ दबाऊ । कंप्युटरकेँ रीस्टार्ट करू । आब वर्ड डोक्युमेंट खोलू । वाम Alt+Shift केँ सम्मिलित दबेला उत्तर H कुँजीपटल (कीबोर्ड) आओत नहि तँ नीचाँ लंग्वेजक़ेँ क्लिक करू आ हिन्दी चुनि लिअ । कुँजीपटलमे हिन्दी transliteration आ आन तरहक विकल्प जेना रेमिंगटन/ इन्सक्रिप्ट कुँजीपटल उपलब्ध अछि । चुनि कए टाइप शुरू करू । आब transliteration कुँजीपटलपर राम टाइप करबा लए raama टाइप करए पड़त । क् (हलन्त सहित) टाइप करबाक हेतु k दबाऊ आ माउसक लेफ्ट बटन क्लिक करू अन्यथा स्पेस पिञ्जक आकि एंटर पिञ्जक दबेला पर हलंत उड़ि जाएत । विकीपीडिया पर मैथिली पर लेख तँ छल मुदा मैथिलीमे लेख नहि छल,कारण मैथिलीक विकीपीडियाक स्वीकृति नहि भेटल छल । हम बहुत दिनसँ एहिमे लागल रही आ ई सूचित करैत हर्षित छी जे २७.१०.२००८ केँ मैथिली भाषामे विकी शुरू करबाक हेतु स्वीकृति भेटल छैक । एतए संगणक शब्द सभक स्थानीयकरणमे बहुत रास अंग्रेजी शब्दक अनुवाद हम कएने रही आ ताहिसँ एह क्रयमे रुचि बढ़ल आ मदति सेहो भेटल । देवनागरीमे टाइप करबाक हेतु एकटा आर तन्त्रांश साधन (सॉफ्टवेअर टूल) उपलब्ध अछि टूल अछि जे http://www.baraha.com/BarahaIME.htm लिंक पर उपलब्ध अछि । एकर विशेषता अछि एकर संस्कृत कुञ्जी फलक जे आन कोनो तन्त्रांशमे उपलब्ध नहि अछि । एहिमे उदात्त, अनुदात्त स्वरित आ किछु आन संस्कृत अक्षर उपलब्ध अछि मुदा एतहु स्वास्तिक, ग्वाङ, अञ्जी इत्यादि उपलब्ध नहि अछि । स॑ , स॒ , स॓ , सऽ केँ स लिखलाक बाद सिफ्ट ३,२,४ आ ७ दबेलासँ लिखि सकैत छी । तिरहुता लिपि लिखबाक हेतु एहि लिंक पर जाऊ। http://www.tirhutalipi.4t.com/ मुदा एकरा हेतु एहि लिंक पर जे प्रीति फॉंन्ट छैक तकरा सेहो अवारोपित कए प्रतिकृति करू आ दुनू केँ ध्रुववृत्त चालक (हार्डडिस्क ड्राइव) C/windows/fonts मे लेपन करू । एहिमे जे फॉन्ट अछि से Ascii मे अछि । क्रुतदेव , शुशा ई सभ फॉण्ट सेहो एहि तरहक अछि, पहिने उपयोगी छल मुदा आब सर्च इंजिनमे यूनिकोड-यू.टी.एफ.8 केर सर्च होइत छैक आ Ascii मे लिखल देवनागरीक सर्च नहि भए पबैत अछि । विन्डोजमे मंगल वर्णमुख (फॉन्ट) अबैत छैक से यूनीकोडमे छैक आ एहिमे लिखल देवनागरी सर्च भए जाइत अछि । मिथिलाक्षरक यूनीकोड रूपक आवेदन (अंशुमन पाण्डेय द्वारा देल गेल) लंबित अछि जाहिमे बर्कले विश्वविद्यालयक प्रोफेसर डेबोराह एन्डरसन, Project Leader, Script Encoding Initiative, Dept. of Linguistics, UC Berkeley क आग्रहपर हमहुँ योगदान देने रही । आब किछु बात यूनीकोड आ जालस्थल (वेबसाइट) केर संबंधमे । कोनो फाइलकेँ पढ़बाक हेतु कंप्युटरमे आवश्यक फॉंट होएब जरूरी अछि, नहि तँ सभसँ सरल उपाय अछि, शब्द-संसाधकमे बनल लेख (वर्ड डोक्युमेंट) केँ पी.डी.एफ. फाइलमे परिवर्त्तित करू । एहिमे नफा नुकसान दुनू अछि । नफा जे बिना कोनो फांटक झंझटिक पी.डी.एफ.फाइल जाइ काँटा/ वर्णमुख/ लिपिमे लिखल गेल अछि, ताहिमे पढ़ल जा सकैत अछि । एकर नुकसान जे जखने फाइलमे जा कए सेव एज टेक्स्ट करब तँ अंग्रेजीतँ सेव भए जाएत मुदा देवनागरी तेहन सेव होएत जे पढ़ि नहि सकी । दोसर यूनीकोडक मंगलमे टाइप कएल लेखकेँ एडोब अक्रोबेटसँ पी.डी.एफ.मे परिवर्त्तित करबामे दिक्कत होए तँ संपूर्ण फाइलकेँ खोलि कए सभटा चयन करू, यूनीवर्सल यूनीकोड एम.एस.फांट ड्रॉप डाउन मेनूसँ सेलेक्ट करू फेर प्रिंटमे जा कए प्रिंटर (मुद्रक) एडोब एक्रोबेट सेलेक्ट करू । आब ई फाइल परिवर्त्तित भए जाएत पी. डी. एफ.मे । माइक्रोसॉफ्ट वर्डसँ pdf मे परिवर्त्तनक सोझ तरीका अछि, फाइल, प्रिंटमे जाऊ, आ फेर प्रिंटरमे एक्रोबेट डिस्टीलर सेलेक्ट कए प्रिंट कमांड दए दिअ । मुदा एहिमे कखनो काल pdf डॉक्युमेंट नहि बनैत छैक । तखन प्रिंटर एक्रोबेट डिस्टीलर सेलेक्ट कए प्रोपर्टीज मे जाऊ । ओतए अडोब pdfसेटिंग सेलेक्ट करू । ओतए ऑपशन डू नॉट सेंड फॉन्ट्स टू डिस्टिलर मे टिक लगाएल होएत । ओकरा अनचेक करू । आ से कए बाहर आऊ आ प्रिंट कमांड दिअ । आब pdf डॉक्युमेन्ट बनि जाएत । एहि फाइलमे कखनो काल घ हलन्त आ ज कखनो काल चतुर्भुज रूपमे नञि पढ़बा योग्य अबैत अछि । पी.डी.एफ. स्प्लिटर आ’ मर्जर सॉफ्टवेयर ( जेना फ्रीवेयर सॉफ्टवेयर ‘पी.डी.एफ. हेल्पर/ सैम) केर मदतिसँ आसानीसँ पी.डी.एफ. फाइल जोड़ि आ तोड़ि सकैत छी। आब वेबसाइट बनेबाक पूर्व किछु मुख्य बातकेँ देखि लिअ । पाँच तरहक अन्तरजाल गवेषक (इंटरनेट ब्राउजर) अछि, शेष सभटा एकरा सभकेँ आधार बना कए रचित अछि । तखन सभसँ पहिने ई चारू अपना कंप्युटरमे प्रतिष्ठापित (इंस्टॉल) करू- १.ओपेरा , २.मोजिल्ला , ३. माइक्रोसॉफ्टक इंटरनेट एक्सप्लोरर (ई तँ होएबे करत) , ४. गूगल क्रोम आ ५. एपलक,अखन धरि ई मेकिनटोसक लेल छल आब विन्डो लेल सेहो अछि, सफारी । आब जखन जाल पृष्ठ (वेब पेज) उपारोपित (अपलोड) करू वा पहिनहुँ तँ एहि सभपर खोलि कए अवश्य देखि लिअ । देवनागरी लिखबामे बराह आइ.एम.ई. केर योगदान विशिष्ट अछि । एहिमे संस्कृतक उदात्त , अनुदात्त आ स्वरित केर संगे बिकारी, देवनागरी अंक आ किछु संगीतक स्वरलिपि लिखबाक सुविधा अछि । विदेहक संगीत शिक्षा स्तंभ बिना एकर सहयोगक संभव नहि छल । मंद्र सप्तक, तीव्र आ कोमल स्वरक नोटेशन एहिमे अछि । ऋ,ॠ आ ऌ,ॡ आ ऍ, ऎ अ, ~ हलन्तक बाद जोड़क सुविधा एहिमे सुविधा छैक । अनुदात्त क॒ उदात्त क॑ आ स्वरित क॓ सेहो उपलब्ध अछि । ई विस्टामे सेहो कार्य करैत अछि । आ यूनीकोड फॉंटमे रहबाक कारण इंटरनेट पर पठनीय अछि । अ सँ ह तक वर्णमाला अछि । क्ष, त्र ,ज्ञ ओनातँ संयुक्त्त अक्षर अछि मुदा बच्चेसँ हमरा सभ अ सँ ज्ञ तक वर्णमालाक रूपमे पढ़ने छी । श्र सेहो क्ष, त्र, ज्ञ जेकाँ संयुक्त अक्षर अछि । ज्ञ केर उच्चारण ताहि द्वारे हमरा सभ ग आ य केर मिश्रण द्वारा करैत छी से धरि गलत अछि । ई अछि ज आ ञ केर संयुक्त । ऋ केर उच्चारण हमर सभ करैत छी, री । लृ केर उच्चारण करैत छी, ल, र आ ई केर संयुक्त्त । मुदा ऋ आ लृ स्वयं स्वर अछि, संयुक्ताक्षर नहि । विदेहक आर्काइवमे शुद्ध उच्चारणक आवश्यकताकेँ देखि कए अ सँ ज्ञ तक सभ वर्णक उच्चारण देल गेल अछि । भारतीय अंकक अंतर्राष्ट्रीय रूपक प्रयोगक देवनागरीमे चलन भऽ गेल अछि । भारतीय संविधानक अनुच्छेद 343(1) कहैत अछि जे संघक राजकीय प्रयोजनक हेतु प्रयुक्त होमए बला अंकक रूप, भारतीय अंकक अंतर्राष्ट्रीय रूप होएत। मुदा राष्ट्रपति अंकक देवनागरी रूपकेँ सेहो प्राधिकृत कऽ सकैत छथि । http://www.bhashaindia.com पर tbil converter सॉफ्टवेयर डाउनलोड करू । मंगल फॉंटमे आन फॉटसँ परिवर्त्तन करबाक अछि तँ डॉक्युमेन्ट .doc चयन करू इनपुट भाषामे हिन्दी आ ascii फॉन्टमे फॉन्ट चयन करू । आउटपुटमे भाषा हिन्दी आ फॉन्ट Unicode mangal चयन करू । आब ब्राउज कऽ कए फाइल सेलेक्ट करू । अहाँक कम्प्युटर मे ऑफिस २००७ अछि आ वर्ड डॉक्युमेन्ट .docx एक्सटेंशन अछि , तखन एक्सटेंशनकेँ रिनेम करू .docआब ब्राउजमे डॉक्युमेन्ट आबि जाएत । अहाँक कम्प्युटर मे ऑफिस २००७ नहि अछि तखन रिनेम केलासँ कोनो फाएदा नहि । आब कंवर्ट क्लिक करू । नूतन फाइल Unicode Mangal फॉन्टमे बनि जाएत । अहाँक शब्द संसाधक सञ्चिका )(वर्ड डॉक्युमेन्ट फाइल) मे यूनीलोड आ ascii वर्णमुख (फॉन्ट) मिलल अछि, तखन अंदाजीसँ ascii वा बेशी प्रयुक्त होएबला ascii केर चयन करू । कंवर्ट क्लिक करू कन्वर्ट भऽ जाएत यूनीकोड मंगल वर्णमुखमे। जालस्थल निर्माण पहिने कोनो ऑनलाइन प्रतिष्ठित संस्थासँ प्रदेश नाम (डोमेन नेम) कीनू । उदाहरणस्वरूप रिडिफ डॉट कॉम पर जाऊ आ रिडिफ होस्टिंगपर क्लिक करू । ओतए बुक यूअर डोमेन पर जा कए इच्छित नाम ट्कित कए देखू जे ओ उपलब्ध अछि आकि नहि । अहाँ अपन जालस्थलक हेतु उपयुक्त डोमेन नेम क्रेडिट कार्डसँ ऑनलाइन कीनि सकैत छी । ई सस्ता छैक दश डॉलर प्रतिवर्ष एकर अधिकतम मूल्य छैक । तकरा बाद जालोद्वहन सेवा (वेब होस्टिंग सर्विस) केर लिंकपर जाऊ । ५ वा दस साल लेल १०० एम.बी. स्थानक संग जालोद्वहन सेवा लिअ आ एकरा संग माय एस.क्यू.एल. सेवा मुप्त छैक मुदा ओहिमे लाइनक्सपर काज करए पड़त जे कनेक कठिनाह/ तकनीकी भए सकैत अछि से माइक्रोसॉफ्ट एस.क्यू.एल. सेवा किछु आर पाइ लगा कए अहाँ कीनि सकैत छी । आब अहाँ लग २० एम. बी. केर एस.क्यू.एल. दत्तनिधि (डाटाबेस) आ ८० एम.बी.केर साइट लेल जगह बाँचत (माने पूरा १०० एम.बी.) आ से पर्याप्त अछि। आर स्पेसक जोगार मँगनीमे भए जाएत, तकर चरचा आगाँ होएत। माइक्रोसॉफ्ट एस.क्यू.एल. सेवा लेबाक उपरान्त अहाँ अपन माइक्रोसॉफ्ट एक्सेल सञ्चिका ओतए चढ़ा सकैत छी आ तकर उपयोग अपन जालस्थलपर एकटा मध्यस्थ (इन्टरफेस) बना कए अहाँ कए सकैत छी । आब जालस्थल (वेबसाइट) बनेबाक विधिपर विचार करी। माइक्रोसॉफ्ट फ्रन्टपेज ऑफिस एक्स.पी. क संग अबैत अछि । ऑफिस २००३ मे सेहो ई अलग सँ उपलब्ध अछि । प्रन्टपेजमे बनल-बनाओल वेबसाइट विजार्ड चलाऊ । मोटा-मोटी पाँच पृष्ठक जाल-स्थल बनि जाएत। एहिमे वाम कात राइट क्लिक कए पृष्ठक संख्या बढ़ा सकैत छी । ऊपरमे स्थित थीमसँ अपन इच्छा मोताबिक बनल-बनाओल डिजाइन सेहो लए सकैत छी । साइटक कोनो पृष्ठकेँ अहाँ फोटो एलीमेन्ट द्वारा फोटो गैलरीमे परिवर्तित कए सकैत छी आ ३-४-६ स्तम्भमे फोटो सभ सजा सकैत छी । ओहि पृष्ठपर डबल क्लिक कए अपन संगणकसँ फोटोकेँ आनू आ यूनीकोड टाइपराइटर द्वारा वर्णन टंकित करू । पृष्ठ सुरक्षित करबा काल चित्रक गुणवत्ता जे.पी.जी. फोटोमे १ सँ १०० धरि चुनबाक विकल्प छैक । जतेक पैघ फाइल चुनब ततेक बेशी जगह छेकत ।वाम आ नीचाँमे लिक लेल चिल्ड्रेन सेटिंग विकल्प चयन कएला उत्तर जालस्थलक सभ पृष्ठक सूचना ओतए आबि जाएत । बेशी पृष्ठ भेला उत्तर कोनो पृष्ठक भीतर पृष्ठ सभक श्रृंखला दए सकैत छी । आब अहाँक संगणकमे अहाँक जालस्थल माय डोक्युमेन्ट्स/ माय वेबमे सुरक्षित अछि । अपन वेबसाइटक वास्तविक स्वरूप प्रीव्यू विकल्प द्वारा ऊपर वर्णित ५ प्रकारक गवेषकमे देखू । किछु आवश्यक परिवर्तन प्रन्टपेजपर कएला उत्तर एहि साइटकेँ अपन सर्वरपर उपारोपित कए दियौक। एहि लेल फाइलजिला डॉट कॉम पर जाऊ जे मुफ्त तंत्रांश उपलब्ध करबैत अछि । एतए क्लाइन्ट आ सर्वर मे सँ क्लाइन्ट विकल्प चुनू आ तंत्रांश अपन कम्प्यूटरमे प्रतिष्ठापित करू । एकरा बाद यूजर नेम आ पासवर्ड दिअ आ एफ.टी.पी. डॉट डोमेन नेम पर पूर्ण जालस्थल वितरक (सर्वर) केर मूल फोल्डरमे पर उपारोपित कए दिअ। अहाँक जालस्थल अन्तरजालपर नियत जालस्थल पतापर देखाइ पड् लागत। अपन अपन दत्तसङ्ग्रह कोनो तन्त्रांश जेना ई.एम.एस. एस.क्यू.एल.मैनेजर केर माध्यमसँ अपन वितरकपर चढ़ाऊ आ एहि लेल अपन सेवा प्रदातासँ दूरभाषपर गप कए किछु विशेष ओर्टक जानकारी लिअ। सभटा सामग्री चढ़ि गेलाक बाद अपन जालस्थलक पृष्ठपर बनाओल मध्यस्थ पृष्ठपर कोडमे यूजर नेम आ पसवर्ड देनाइ नहि बिसरू। कोनो पृष्ठपर पृष्ठसँ संगीत अन्बाक लेल कम्प्यूटरसँ ओहि पृष्ठपर संगीतक सञ्चिका आयात करू मुदा आइ काल्हि मात्र ओपेरा आ इन्टरनेट एक्सप्लोररपर प्रन्टपेजसँ बनल जालस्थलमे संगीत बजैत अछि। आब किछु गप पृष्ठ शैली (स्टाइल शीट) पर। अहाँ सम्पूर्ण जालस्थलक डिजाइन जे एक्के रंगक राखए चाही तँ एहि लेल सभ पृष्ठमे एकर विधिलेख दए दियौक आ एकटा फोल्डरमे डिजाइन राखि दियौक। एहिमे पृष्ठभूमिमे बाजए बला संगीत सेहो रहि सकैत अछि । एहिसँ ई फायदा अछि जे सभ पृष्ठ खुजबा काल फेरसँ तागति नहि लगबए पड़त मात्र एक बेर डिजाइन आ संगीत खुजबामे जे समय लागत सएह टा। दोसर पृष्ठपर जे लिखित अंश वा फोटो आदि रहत ताहिमे जतेक देरी लागत सएह समय मात्र लागत। माने अहाँक जालस्थल हल्लुक भए जाएत आ जल्दीसँ खुजत। आब आर.एस.एस.फीडक विषयमे जानकारी ली। जालस्थल तँ बनि गेल आब एकर प्रचार प्रसार सेहो होएबाक चाही। आर.एस.एस. फीड अछि रिअल सिम्पल सिन्डिकेशन फीड केर संक्षिप्त रूप। एकटा वा कैक टा .xml फाइल बना कए अहाँ अपन वितरकपर चढ़ा दियौक। अहाँ .css डिजाइन तकर बाद ई एक तरहेँ जालस्थलक नक्शा बना दैत अछि आ जखने एहिमे कोनो परिवर्तन अबैत छैक तँ फीड-रीडर/ एग्रीगेटरकेँ जालस्थलपर नव सामग्री अएबाक सूचना भेटि जाइत छैक। एहिमेमे मुख्य घटनाक/ लेखक सारांश रहैत छैक जे लिंकसँ जुड़ल रहैत अछि। ओहि लिंककेँ क्लिक केला उत्तर अहाँ विस्तृत जानकारी प्राप्त कए सकैत छी। .xml युक्त पृष्ठकेँ जालवृत्त (ब्लॉग) पर ऐड गाडजेट/ फीड/ मे पताक रूपमे लिखि कए ५ सँ २० धरि नूतन सामग्रीक (क्रमशः गूगल आ वर्डप्रेस ब्लॉगमे) अद्यतन जानकारी लेल जालवृत्त (ब्लॉग) पर राखल जा सकैत अछि। एकर आर उपयोग छैक जेना फीडबर्नर केर माध्यमसँ ई-पत्र द्वारा सदस्यकेँ सूचना देब, हेडलाइन एनीमेटर जालस्थल/ जालवृत्तपर लगाएब/ ई-पत्र द्वारा इच्छित सामग्रीक लिंक संगीकेँ पठाएब आ गवेषक वा फीड/ न्यूज रीडरक माध्यमसँ पढ़ब। तकर बाद अपन जालस्थकेँ गूगल, याहूसर्च, लाइव सर्च आ आस्क डॉट कॉमपर सबमिट युअर साइट केर अन्तर्गत दए दियौक जाहिसँ ई सभ अन्वेषण यन्त्र अहाँक साइटकेँ ताकि सकए। .xml फाइलबला विश्वव्यापी अन्तर्जाल पता/ संकेत तकबामे एहि यन्त्र सभकेँ आर सुविधा होएतैक से अहाँ साइटक मुफत प्रचार होएत। .xml फाइल .htm केर स्थान लेत से नहि छैक मुदा एहिसँ फीड एग्रीगेटर/ अन्वेषण यन्त्र सभकेँ जालस्थलपर नव सामग्री तकबामे सुविधा होइत छैक। जखन अहाँक जालस्थलमे परिवर्तन आबए तँ अपन मूल .xml फाइलकेँ परिवर्तित कए वितरकपर चढ़ाऊ, शेष कार्य फीड एग्रीगेटर/ अन्वेषण यन्त्र स्वयं कए लेत। अहाँक अन्तर्जाल गवेषक सेहो साइटमे फीड रहला उत्तर विकल्प चुनलाक बाद जालस्थलक पृष्ठकेँ रिफ्रेश कए लैत अछि, कारण कखनो काल कऽ टेम्परोरी फाइल संगणकमे रहने पुरनके सामग्री इन्टरनेटपर देखाएल जाइत रहैत अछि। मुदा एहि लेल सभ पृष्ठमे एकटा कूटसंकेत देमए पड़त। आब किछु चरचा ४०४ एरर पृष्ठक। अहाँक जालस्थपर कोनो फोटो/ लिंक जे पहिने छल मुदा आब नहि अछि केँ टाइप कएला उत्तर ४०४ एरर संकेत अन्तर्जाल गवेषक दैत अछि। अपन सेवा प्रदातासँ कन्फ्युगरेशन सम्बन्धी जानकारी लऽ कए अपन जालस्थलक स्टाइलसीटक हिसाबसँ एरर पृष्ठ बनाऊ जतए किछु व्यक्तिगत संदेश जेना- अहाँ द्वारा ताकल सामग्री आब उपलब्ध नहि अछि केर संग जालस्थलक दोसर लिंक सभ राखू। मुदा एकर ध्यान राखू जे एहि पृष्ठपर एहन कूटसंकेत रहए जाहिसँ अन्वेषण यन्त्र ओकरा सर्च नहि करए। अपन जालस्थलपर girgit.chitthajagat.in वा google translate गाडजेट राखि सकैत छी जाहिसँ मैथिलीक सामग्री दोसरलिपि सभमे एक क्लिकमे परिवर्तित भए जाए। साइटक प्रचार अपन ब्लॉग/ ग्रुप बना कए आ ऑनलाइन कमेन्ट सबमिशन लेल सेवा प्रदातासँ डॉट नेट सुविधा लए-जाहिसँ वितरक कमेन्ट अहाँक ई-पत्र संकेतपर पाठकक कमेन्ट प्रेषित कए सकए आ फीड एग्रीगेटरमे अपन फीड पंजीकृत कराए पाठकक संख्या बढ़ाओल जा सकैत अछि। कमेन्ट सबमिशन टाइपपैड डॉट कॉम (पेड ब्लॉगर सेवा प्रदाता) सँ सेहो प्राप्त कएल जा सकैत अछि, ई ब्लॉग लेल तँ पाइ लैत अछि मुदा प्रोफाइल बनबए लेल नहि आ ओहि संगे ब्लॉग आ साइट लेल कमेंट फॉर्मक कोड आ सुविधा दुनू उपलब्ध करबैत अछि, एहिमे अहाँ जालस्थलपर कमेंटक एक पृष्ठपर सँख्या, कमेंटपर आपसी वार्तालाप, आ कमेंट मॉडेरेशन विकल्प चुनि सकैत छी। अपन जालस्थलक आर्काइव लेल गूगल साइट आ वर्डप्रेस १० आ ३ जी.बी. क्रमशः स्थान मुफ्त दैत अछि। फाइल ओतए अपलोड करू मुदा अपन साइटपर ओकर लिंक दए दियौक। एहिसँ अहाँ अपन बजट ठीक कए सकैत छी। ब्लॉगक यू.आर.एल. यदि नीक नहि लागए तँ मोनमाफिक यू.आर.एल. सुविधा १० डॉलर सालानापर उपलब्ध अछि, मुदा ब्लॉगक सुविधाक अतिरिक्त कोनो आर सुविधा एहिसँ नहि भेटत। मुदा जे अहाँक बजट बहुत कम अछि तँ एकर उपयोग करू। अहाँ लग जे पूर्ण साइट अछि तँ ओकर एकटा पृष्ठ पर एफ.टी.पी. अपलोडसँ डिसकसन फोरम आदि अपन साइटक ऊपर राखि सकैत छी आ ब्लॉगकेँ अपन साइटमे सम्मिलित कए सकैत छी। ब्लॉगरक भीतर प्रकाशनक अन्तर्गत यू.आर.एल. सुविधा १० डॉलर सालानापर आ एफ.टी.पी. अपलोड ई दुनू सुविधा उपलब्ध छैक। आब चरचा फेव आइकनक। अपन लोगो ब्राउजरक पताक संग देबाक लेल .ico प्रारूपमे लोगोक चित्र बनाऊ आ अपलोड करू, संगमे स्टाइलसीटपर एकर विवरण दए दियौक। अपन ई-पत्रमे सिगनेचर, माय स्पेस, फेसबुक, ओरकुट, ट्विटर,यू ट्यूब, पिकासा, याहूग्रुप आ गूगलग्रुप केर माध्यमसँ, आर.एस.एस.फीड आ हेडलाइन एनीमेटर जे ई-पत्र सिगनेचरमे सेहो राखल जा सकैत अछि केर माध्यमसँ सेहो एकर प्रचार कए सकैत छी। गूगल एनेलेटिक्स आ वेबमास्टर टूलक सेहो उपयोग करू। एनेलेटिक्सक ट्रैकर कोड सभ पृष्ठपर दिअ जाहिसँ प्रतिदिन कतएसँ के आ कोना अहाँक जालस्थलपर अएलाह तकर जानकारी भेटि सकवे आ वेबमास्टर टूलसँ जालस्थल वेरीफाइ करू आ .xml फाइल सबमिट करू। यदि कोनो पृष्ठपर कोनो फोटो/ लिंककेँ दोसर टैब/ गवेषकमे खोलए चाही तँ टारगेट फ्रेम/ न्यू विन्डो-ब्लैंक चुनू। सी-डैक पुणेक अओजार आ फान्ट सेहो छैक मुदा ओहिसँ विशेष लाभ परिलक्षित नहि भए रहल अछि, उनटे बहुत रास दिक्कत जेना “द् ध” आ “ग् र” क्रमशः द्ध आ ग्र केर बदलामे देखबामे आओत। विदेह ई-पत्रिका http://www.videha.co.in/ पर ऑनलाइन यूनीकोड टाइपराइटर उपलब्ध अछि। पी.डी.एफ.सँ सव एज टेक्स्ट केलापर देवनागरी रूप यूनीकोडमे आ कखनो काल आनोमे नहि सेव होइत छैक। यूनीनगरीमे पी.डी.एफ.सँ कॉपी कए पेस्ट केलासँ देवनागरी रूप आबि जाइत छैक। आस्की कन्वर्टरक सहायतासँ पी.डी.एफसँ यूनीकोडमे बदलैत छैक मुदा प्रारूपण खतम भए जाइत छैक। फन्ट कन्वर्टरमे SIL कन्वर्टर एहन टूल अछि जाहिमे प्रारोपण खतम नहि होइत अछि आ ई अछियो फ्री तन्त्रांश। (विदेह पेटारसँ) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। जितेन्द्र झा पताः जनकपुरधाम, नेपाल स्वरक माला गँथती अंशु हम सभ अपने भाषाकेँ हेय दॄष्टिसँ देखैत छी तें हमर भाषासाहित्य, गीतसंगीत आ संस्कृति पछुआ रहल अछि। ई कहब छन्हि अंशुमालाक। अंशु दिल्ली विश्र्वविद्यालयमे संगीतमे एम फ़िल कऽ रहल छथि। मैथिली गीत संगीतकेँ गुणस्तरीय बनएबाक लक्ष्य रखनिहारि अंशु मैथिलकेँ अपन भाषा-संगीत प्रतिक दृष्टिकोण बदलबापर जोड दैत छथि। अंशुमाला संगीतक विद्यार्थी छथि। दिल्ली विश्र्वविद्यालयमे एम. फ़िल.मे अध्ययनरत अंशुक माय हिनक पहिल गुरु छथिन्ह। ई माय शशि किरण झासँ मैथिली लोक संगीतक शिक्षा लेने छथि। तहिना एखन किछु बर्षसं ई रेडियो कलाकार हॄदय नारायण झासँ संगीत शिक्षा ल' रहल छथि। बाल कलाकारक रुपमे सीतायण एलबममे गाबि चुकल अंशु बिभिन्न रेडियो कार्यक्रम आ स्टेज प्रोग्राममे सहभागी भ' क' मैथिली गीत गाबि अपन स्वरसं प्रशंसा बटोरने छथि। एखन दिल्लीमे रहिकऽ संगीत साधनामे जुटल अंशु दिल्लीमे आयोजित विभिन्न कार्यक्रममे मैथिली गीत संगीत परसल करैत छथि। मैथिली भाषीमे अन्य भाषाक गीत संगीतक प्रति बढैत रुचि मैथिली गीतसंगीत लेल हितकर नञि रहल हिनक कहब छन्हि। दिल्लीमे आयोजित एकटा कार्यक्रमकेँ याद करैत ई कहैत छथि जे जाहि कार्यक्रममे लगभग ८ हजार मैथिल रहथि ताहि कार्यक्रममे चाहियोकऽ मैथिली गीत नहि गाबि सकलहुं। ओहि कार्यक्रममे भोजपुरीक डिमाण्ड पुरा करैत अंशुके मैथिली डहकन गेबाक लेल मोन मसोसिक' रह' पडलनि। मुदा अंशु स्वीकारैत छथि जे गायक स्रोताक रुचिक आगु विवश होइत अछि, 'जनता जे सुनऽ' चाहत हमरा सएह गाबऽ पडत अंशु कहलनि। पटनामे मैथिली गीत गाबिक स्रोताक तालिक गडगडाटिसं खुश हएबाक आदति पडि चुकल अंशुकेँ दिल्लीमे आबिकऽ मैथिल भाषीक बदलल सांगीतिक स्वादसं अकच्छ लागि गेल रहनि। मैथिलीमे लोकप्रिय धुनक अभाव रहबाक बात अंशु किन्नहु मान' लेल तैयार नहि छथि। धुन वा लयक अभाव नहि, स्रोता एहिसं अनभिज्ञ रहल हिनक दाबी छन्हि। मैथिली संगीतकर्मी एखनो आर्थिक समस्यासँ लडि रहल छथि, अंशु कहैत छथि। एहिक अभावक कारण प्यारोडी गीतक सहारा लेबालेल संगीतकर्मी बाध्य बनल अछि। मौलिक गीत,संगीतमे लगानीकर्ताक अभाव रहलासँ सेहो प्यारोडी संगीत लोकप्रिय भऽ रहल अछि, हिनक कहब छनि। 'सभसँ पैघ कमजोरी श्रोत छै कलाकार तँ सभ ठाम हारल रहैया' प्यारोडी प्रेमीपर रोष प्रकट करैत अंशु कहैत छथि। मुदा मैथिलीमे स्तरीय गीत संगीत स्रोताकेँ भेटक चाही से अंशुक विचार छन्हि। मैथिली लोकरंग मन्चद्वारा दिल्लीमे आयोजित कार्यक्रममे श्रोता भेटल वाहवाहीक उदाहरण दैत अंशु कहैत छथि जे स्रोताक मनोरन्जनक लेल स्तरीय कार्यक्रम सेहो हएबाक चाही। मैथिली रंगकर्ममे लगनिहारकेँ उचित सम्मान तक नञि भेटि सकल, अंशुमालाक अनुभव छन्हि। मैथिली कलाकारकेँ आब' बला दिनमे बहुत मान सम्मान भेटक चाहि, हम इएह चाहैत छी अंशु कहैत छथि। मैथिली संगीतकेँ एकटा ऊँचाई पर पंहुचएबाक लक्ष्य रखनिहारि अंशु मैथिली रंगकर्ममे एखनो लडकी लेल बहुतो कठिनाई रहल बतबैत छथि। अंशु आगु कहलनि-मैथिल समाजसँ जाधरि कलाकारकेँ सम्मान नञि भेटतै ताऽ धरि एहि क्षेत्रमे लडकी अपन प्रतिभा देखाब' लेल आगु नञि आओत। नेपाल वन आ मधेश स्पेशल टेलिभिजनमे जँ मैथिलीक मादे बात करी त नेपाल वन टेलिभिजनके एकटा अलग स्थान बनि चुकल अछि। नेपाल वन टेलिभिजन राति पौने ८ बजे प्रसारित होब' बला मधेश स्पेशलक माध्यमसं मैथिली बहुतो मैथिल धरि पंहुच रहल अछि। नेपालमे सभसं बेशी बाजल जाए बला दोसर भाषा मैथिली रहितंहु ओत्त ताहि अनुपातमे संचारमाध्यममे मैथिलीके स्थान नई भेट सकल छइ। एहन अवस्थामे पडोसी देश भारतसं सन्चालित नेपाल वन टेलिभिजन मैथिलीमे कार्यक्रम प्रसारण क मैथिलीभाषा भाषी मध्य अपन अलग स्थान बनालेने अछि। नेपालमे सरकारी स्तरपर संचालित नेपाल टेलिभिजन सहित निजी टेलिभिजन च्यानलमे मैथिली एखनो उपेक्षिते अछि। यद्यपि बेर बेरके मधेश आन्दोलन आ संचारमाध्यमपर लाग बला साम्प्रदायिकताक आरोपक कारणे काठमाण्डुकेन्द्रित टेलिभिजनसबमे आब मैथिलीके स्थान भेट लागल छइ। काठमाण्डुसं प्रसारित सगरमाथा टेलिभिजन सेहो सभदिन मैथिलीमे समाचार देल करैत अछि। नेपाल वन टेलिभिजनक मधेश स्पेशल नामक 1 घण्टाक कार्यक्रममे समाचार, नेपालक समसामयिक राजनीति, नेपालक प्रमुख मुद्दापर बातचित आ गीत संगीत समेटल गेल अछि। समसामयिक वस्तुस्थिति पर लोक अपन धारणा द क परिचर्चाके महत्वपूर्ण बना देल करैत अछि। ई कार्यक्रम राति पौने आठ बजेसं पौने नओ बजेधरि प्रसारित होइत अछि। नेपाल केन्द्रित समाचार रहितो नेपाल सं बाहर इ कार्यक्रम देखिनिहार मैथिल कमी नई अछि। नेपालक सीमावर्ती मधुवनी, दरभंगा, सीतामढी, सुपौल, सहरसासहितके जिल्लासभमे सेहो एकर दर्शकके कमी नहि अछि। नेपालक मैथिल जत्त मैथिलीमे समाचार, गीत, आ परिचर्चा सुनि क सुसूचित होइत छैथ ततई भारत आ आन ठामक दर्शक मैथिली गीत आ संचारमाध्यममे मैथिलीक बोली सुनि हर्षित भेल करैत अछि। मधेश स्पेशल नेपालक मधेशीके एकटा अन्तर्राष्ट्रिय संचारमाध्यममे मुंह खोलि क बजबाक अवसर देलकै, सेहो अपने भाषामे। नेपालक संचारमाध्यमसं सेहो कटल कट्ल रहबला मधेशके छोट छिन घटना सेहो प्रमुख समाचार बन लागल। मधेशीक मुद्दापर खुलिक बहस शुरु भ गेल। मधेशक नेता सेहो धोती कुर्ता पहिरिक काठमाण्डुएमे बैसि क कोनो टेलिभिजन पर प्रत्यक्ष रुपेँ जनतासँ बातचित कर लगला। टेलिभिजनमे जत्त मैथिली शुन्यप्राय छल ताहि अबस्थामे एक्कहिबेर एक घण्टा मैथिलीक कार्यक्रमके लोकप्रिय होब मे बेशी समय नइ लगलै। एखन इ कार्यक्रम दू बर्ष पुरा कर लागल अइ। नेपाल 1 टेलिभिजन डिस टिभी आ टाटा स्काइपर उपलब्ध हएबाक कारणे इ देश विदेशमे रह बला मैथिललग सहजहिं पंहुच बनालेने अछि। एहिद्वारे लगभग ७० टा देशमे रहबला मैथिल भाषी मधेश स्पेशलके माध्यमसं मैथिलीमे सुचना आ मनोरन्जन ल रहल छैथ। मधेश स्पेशल मैथिली आ भोजपुरीक मिश्रित कार्यक्रम अछि। एहिमे मैथिली भाषाक गीत नादक अतिरिक्त भोजपुरीक चौकी तोड आ आधुनिक गीत सेहो प्रसारण होइ छै। ई कार्यक्रम तीन भागमे बाटल अछि। पहिलमे नेपाल आ अन्तर्राष्ट्रिय समाचार रहैछै त दोसरमे समसामयिक चर्चा(टक शो) आ तेसरमे मैथिली/भोजपुरी गीत। दृश्य संचारमे मधेश स्पेशल मैथिलीके जगजियार करमे बड पैघ भूमिका निर्वाह क रहल अछि आ क सकैत अछि से कहनाई अतिशयोक्ति नई हएत। डोम कछ आ जट जटिनक नाचसं जं माटिक सुगन्ध लेब चाहैत हुवए त हुनका सभहक लेल मधेश स्पेशल सहायक भ सकैत छै। मेधेश केन्द्रित कार्यक्रम होइतो इ मिथिलान्चलके सर्वाङिण विकासमे कत्तेक सहायक हएत से त आव बला दिने बताओत मुदा एतवा निश्चित जे टेलिभिजनमे मैथिलीक नियमित प्रसारणसं मैथिलके अपन बोली अपन भाषा याद दियबैत रहैतै। नेपालक (किछु भारतक) मिथिला मैथिल मैथिलीक सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक-सांस्कृतिक समाचार भाषा हित कि भोट्क लोभ नयी दिल्लीक मैथिली भोजपुरी एकेडमीक अध्यक्ष एवं दिल्लीक मुख्यमन्त्री शीला दीक्षित मैथिली भोजपुरी एकेडमीकेँ आन एकेडमीसँ आगू बढल देखऽ चाहैत छी, से कहलनि अछि। मैथिली भोजपुरी एकेडमी द्वारा आयोजित भिखारी ठाकुरक विदेशिया नाटक मन्चन कार्यक्रममे दीक्षित ई बात कहलनि। मैथिलीक लेल अलग एकेडमीक माँगक प्रति दीक्षित कहलनि जे हमरा सभकेँ जोड़क बात करक चाही तोडक नञि। एकताक दोहाइ दैत मुख्यमन्त्री भने अलग एकेडमीक् बातसँ कन्नी कटने होथि मुदा मैथिली भाषा साहित्यमे लागल प्रबुद्धबर्ग मानैत छथि जे अलग एकेडमीसँ मात्र मैथिलीक वास्तविक विकास भऽ सकत। ओना एकेडमी भोट बटोरबाक साधन मात्र नञि बनए ताहि दिश सेहो ध्यान देब जरुरी अछि। एकेडमीक आयोजनमे ६ अगस्त मंगलक राति विदेशिया आऽ ७ अगस्त बुधक राति महेन्द्र मलंगियाक काठक लोक मन्चित कएल गेल छल। मैथिली भोजपुरी एकेडमी आन एकेडमीसँ आगू बढय से दीक्षितके कहब रहनि। सरकारी ढिलासुस्तीकेँ स्वीकारैत ओऽ एक दिन सबहक आवाज सुनल जायत, कहलनि। नव दिल्लीमे एकेडमी द्वारा आयोजित कार्यक्रममे भोजपुरी नाटक विदेशिया देखलाक बाद दीक्षित नाटक खेलनिहार रंगकर्मीकेँ प्रशंसा केने रहथि। नाटयशालामे भोजपुरी आऽ मैथिली भाषीक भीड़ लागल छल। तहिना मैथिली भोजपुरी एकेडमीक उपाध्यक्ष अनिल मिश्र, एकेडमी, विहारक समॄद्ध संस्कॄतिकेँ बखानैत एहन प्रस्तुति निरन्तर होइत रहत, से जनतब देलनि। "हमर सिंहासन अटल अछि" मलंगिया 'जाधरि हमर कलम चलैत रहत ताधरि मैथिली नाटककारक रुपमे हमर ऊँचाइ धरि कियो नञि पहुँचि सकैत अछिए। ई सिंहनाद छनि मैथिलीक प्रख्यात नाटककार महेन्द्र मलंगियाक। समकालीन मैथिली साहित्यकारकेँ चुनौती दैत, ओ नाटककार अपन सिंहासन किनको बुते डोलाएल पार नञि लगतए से दाबी करैत छथि। मैथिली नाटककार महेन्द्र मलंगिया एखन मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय आऽ ख्यातिप्राप्त नाटककारमे चिन्हल जाइत छथि। चुनौतीपुर्ण शैलीमे मलंगिया कहैत छथि, हमर हाथमे जाधरि कलम अछि, हम अपन स्थानपर टिकले रहब, हमर सिंहासन अटल अछि। मैथिली नाटकक भीष्मपितामह कहल जाए तँ केहन लगैए, ताहि जिज्ञासामे मलंगिया मुस्कियाइत कहलनि जे हमर नाटक लोककेँ पसिन छञि हमरा ताहि पर गर्व अछि, हम जाहि स्तरक नाटक लिखैत छी, तेहन रचना एखन नञि भऽ रहल छञि। ओऽ जनकपुरक रंगकर्मीक खुलिकऽ प्रशंसा करैत छथि। मैथिली रंगकर्ममे लागल जनकपुरक कलाकारक मलंगिया प्रसंशा करैत कहलनि, जनकपुरक कलाकारसँ बहुत आशा कएल जाऽ सकैत अछि। मैथिली नाटकमे शेक्सपियर कहल जाएबला मलंगिया ४ दशकसँ बेशी समय नेपालमे बिता देने छथि। ओऽ नेपालमे मैथिली साहित्यक संरक्षण लेल सन्तोषप्रद काज नञि भऽ सकल, बतौलनि। नेपालमे दोसर सभसँ बेशी बाजल जाएबला भाषा मैथिलीमे रंगकर्मक समयसापेक्ष बिकास नञि भऽ सकल मलंगियाक कहब छनि। लोकतन्त्र बहालीक बाद सेहो नेपाल सरकार मैथिलीक लेल किछु नञि कऽ सकल हुनक आरोप छन्हि। नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान द्वारा मैथिली भाषा, साहित्यक लेल भेल काजके ओऽ कौराके संज्ञा देलनि। प्रतिष्ठानद्वारा मैथिलीलेल भऽ रहल काज प्रति मलंगिया असन्तुष्टि ब्यक्त कएलनि। मैथिली रंगकर्ममे निरन्तर कार्यरत संस्थाकेँ सरकार दिशसँ कोनो तरहक सहयोग नञि भेट रहल बतबैत, ताहि प्रति खेद ब्यक्त कएलनि। सरकारी उपेक्षाक कारण सेहो मैथिली रंगकर्म ओझराहटिमे पडल, मलंगिया मानैत छैथ। मैथिली साहित्यमे नाटककार आऽ निर्देशकक रुपमे ख्यातिप्राप्त मलंगिया रंगकर्मकेँ रोजीरोटीसेँ जोडल जाए, से कहैत छथि। जाऽ धरि रोजीरोटीसँ रंगकर्म नञि जुटत ताऽ धरि बिकास सम्भव नञि, मलंगिया स्पष्ट कहैत छथि। जनकपुरमे मिथिला नाटय कला परिषदसँ आबद्ध भऽ मैथिली नाटककेँ जन-जन धरि पंहुचएबाक अभियानमे लागल मलंगिया राजतन्त्रमे मैथिली भाषा संस्कृतिक संरक्षणक लेल कोनो काज नञि भेलाक कारणे सेहो मैथिली पछुआएल अछि, से कहलनि। मैथिली भाषामे आम दर्शकक मोनमे गडि जाएबला नाटक लिखिकऽ मैथिली साहित्यक श्री बृद्धिमे योगदान देनिहार मलंगिया नाटककार नाटक लिखैत काल दर्शकक मानसिकता, उमेर , शिक्षा आऽ पेशाकेँ ध्यानमे राखए से सलाह दैत छथि। 'हम दर्शककेँ लक्षित कऽ नाटक लिखैत छी, तेँ हमर लिखल नाटक लोककेँ नीक लगैत छञि, मलंगिया अपन सफ़लताक रहस्य बतबैत कहलनि। बिदेशिया नाटक बिदेशिया घुरि जो विदेश जएवाक बाध्यता समाजक एकटा कटु सत्य अछि। अपन गामघर छोडिकऽ कियो विदेश जाय नञि चाहै-ए, मुदा परिस्थितिक आगू ककरो किछु नञि चलए छञि। किछु एहने परिवेशकेँ पर्दापर देखेबाक प्रयास कएल गेल विदेशिया नाटकमे। मैथिली भोजपुरी एकेडमीद्वारा दिल्लीमे आयोजित विदेशिया नाटकमे किछु एहने देखल गेल। वियाह भेलाक किछुए दिनक बाद विदेशिया गाम छोडि दैत छञि, विदेश जाऽ कऽ पैसा कमाय लेल। गाम संगहि विदेशियाकेँ छुटि जाइत छञि, अपन नवकी कनियाँ, गामक संगी-साथी आऽ याद सेहो। ओ पाईक लोभसँ घर छोडने रहैया, मुदा ओऽ पाई तँ नईहे कमासकल शहरमे अपन जीवनके एकटा आओर साथी बनालैयऽ। एम्हर ओकर पहिल कनियां विदेशियाके बाट जोहैत रहैयऽ। विदेशियाक यादमे ओऽ कखनो बटुवाके पुछैयऽ तँ कखनो बारहमासा गबैयऽ। नाटकक निर्देशक संजय उपाध्याय विदेश जएबाक ग्रामीण प्रबॄतिकेँ सुखान्त बनेलहुँ से कहलनि। गामक सोझ आऽ सुशील कनियाकेँ छोडि विदेशिया विदेशमे रइम जाइयऽ। ओकरा आब शहरिया संगी निक लगै छइ, जे दुगोट बच्चाक माय सेहो अइ। विदेशिया अपना आपके बिसरि जाइयऽ। गामक कनिया नइ शहरक छम्मकछल्लो आब ओकर प्राण भऽ गेल छञि। एहिबीच भिखारी विदेशियाकेँ निन्नसँ जगबैत अछि। नाटकमे भिखारी बनल रंगकर्मी अभिषेक शर्मा नाटकक माध्यमसँ लोक अपन गाम घरके याद करलेल विवश भऽ जाइयऽ, से कहलनि। विहारक सुपौल जिलाक रंगकर्मी शारदा सिंह नाटकमे देखाएल गेल विषय बस्तु समाजक सत्य रुप रहल बतौलनि। विदेशिया गाम तँ घुरैयऽ मुदा असगरे नई चारि गोटेक संगे , दूटा बालगोपाल आऽ तकर माय। किछु झोंटाझोंटी आऽ कलहक बाद दु्नू सौतिन आऽ विदेशिया गामेमे रहऽ लगैयऽ। नाटक अन्ततः सुखान्त भऽ कऽ समाप्त होइत अछि। ई कथा गामसँ बाहर रहनिहार एकटा निम्न मध्यमबर्गीय युवककेँ जिनगीक मात्रे नञि अछि। बहुतो युवक गाम देहात छोडिते अपन माटि पानिकेँ बिसरि जाइत अछि। शरीरसँ मात्र नञि मोनसँ सेहो विदेशिया भेनिहारकेँ ई नाटक अपन गाम अपन वास्तविक पहिचानक याद दियबैत रहत। आब चलू नेपाल दिस सशस्त्रक सनसनी मधेश एखन दू दर्जनसँ बेशीक संख्यामे रहल सशस्त्र समूहसँ आक्रान्त अछि। कहियो सशस्त्रक विरोधमे जनकपुरक जानकी मन्दिरमे पत्रकार रैली निकालैत अछि तँ कहियो सिरहाक कर्मचारी कार्यालयमे ताला लगाकऽ सशस्त्रक विरोध प्रदर्शन करैत अछि। तहिना सर्लाहीमे बस चालकक हत्या भेलासँ शुरु भेल यातायात बन्दसँ जनजीवन कष्टकर भऽ रहल अछि। मधेशक माँगकेँ अपन नारा बनाकऽ खुलल दू दर्जनसँ बेशी संगठनकेँ एखन मधेशमे तीब्र बिरोधक सामना करऽ पड़ि रहल छन्हि। चालकक हत्या सर्लाही। राजमार्गमे एखनो शान्ति सुरक्षाक अबस्था बेहाळे अछि। सर्लाही जिलामे हथियारधारी लुटेरा समुह ७ तारिखक रातिमे एकटा बस चालकक गोली मारि हत्या कऽ देलक। राजधानी काठमाण्डू जाऽ रहल बसक चालक कॄष्ण खवासक गोली लागि मॄत्यु भेल छल। पूर्व पश्चिम राजमार्ग अन्तर्गत सर्लाहीक जंगलमे राति ९ बजे ओऽ समूह बसमे लूटपाटक प्रयास कएने रहए। बस नञि रोकि भागऽ लगलाक बाद लुटेरा समूह गोली चलौने छल। गोली लागि घायल भेनिहार चालक खवासकेँ उपचारक बास्ते लालबन्दी अस्पताल लऽ जाइत अबस्थामे बाटेमे मृत्यु भेल, से स्थानीय प्रहरी जनौलक अछि। चालकक गोली लगलाक बाद खलासी बसकेँ नियन्त्रणमे लऽ कए दुर्घटना होबऽ सँ बचौने छल। प्रहरी घटनामे संलग्न होएबाक आशंकामे सात गोटेकेँ पकडलक अछि। दोसर यातायात व्यवसायी आऽ मजदुर चालक हत्याक बिरोधमे चक्काजाम जारी रखने अछि। सरकार समस्या समाधान लेल आगू नञि आएल, कहैत यातायात मजदूर देशव्यापि आन्दोलनक चेतावनी देलक अछि। मजदूर आऽ व्यवसायी पुर्वान्चलक तीन अन्चल आऽ जनकपुर अन्चलमे चक्काजाम कएलाक बाद जनजीवन प्रभावित भेल अछि। बन्दक कारण उपभोग्य वस्तुक अभाव होबऽ लागल अछि। नेपालक (किछु भारतक) मिथिला मैथिल मैथिलीक सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक-सांस्कृतिक समाचार "रे नोर एना तोँ नञि टपक" कोशी नेपाल आऽ भारतक जनता लेल एकटा अभिशापसँ कम नञि। १८ अगस्तक कोशी नदी पुर्वी तटबन्धकेँ पश्चिम कुशहा लग तीन सय मीटर भत्थन करैत बाट बदलने छल। तञि के बाद नेपालक लगभग १ लाख जनता विस्थापित भेल। वएह पानि जहन बिहारमे आएल तँ आओर विकराल रुप ल लेलक। बिहारमे पानिसं ३० लाखसं बेशी जनता प्रभावित अछि, जाहिमे २० लाख कोशी इलाकाके अछि। मृतकक संख्या हजारोमे हेबाक आशंका कएल जाऽ रहल अछि। बिहार सरकारक तथ्यक अनुसार कोशी बाढिसँ ७ सय ७५ गामक २२ लाख ७५ हजार जनता प्रभावित अछि। कोशीक कोप चीनक तिब्बत उदगमस्थल रहल कोशी नेपाल होइत बिहार कुर्सेला धरि सात सय २० किलमीटर दुरी पार करैत गंगानदीमे मिलैत अछि। कोशी नदी वार्षिक ५० अरब घन लिटर पानि गंगानदीमे पंहुचाबै-ए। कोशी नदीक वर्तमान जलाधर क्षेत्र ९२ हजार ५ सय ३८ वर्ग फ़िट मिटर अछि, जाहिमेसँ ४१ हजार ३ सय ३३ वर्ग किलोमीटर नेपालक भीतर पड़ैत अछि। कोशी योजना संचालनक ४५ वर्ष होइतो कोशी पीडितक समस्या जहिनाक तहिना अछि। नेपाल आऽ भारत दुनु देशकेँ एहि प्रश्नक उत्तर देव आवश्यक अछि- किए टुटल बान्ह ? बाढिसँ गरीब किसान भूमिहीन भऽ गेल अछि, ने लत्ता कपडा ने पेटमे अन्न आऽ ने पीबालेल पानि। किसान टकटक्की लगौने अछि कोशीक पानि पर, जे कखन घटत? जमिनदार पानिदार भऽ गेल, गाय महिष सबटा दहाऽ गेल छैक, आव बाँकी छञि मात्र जीवाक आश,,,,,। दोष ककर नेपाल आऽ भारत दुनु पक्ष एक दोसराके दोषारोपण कऽ रहल अछि। 'भारतीय प्राविधिक तटबन्ध मरम्मतिक लेल गेल छल मुदा, ओत्त काज करबाक वातावरण नञि बनलाक बाद तटबन्ध निर्माण नञि भऽ सकल, भारतीय पक्ष कहैत अछि। कोशी नदीक समझौता अनुसार नेपाल किछु नञि कऽ सकैत अछि, तेँ हमसभ मुक दर्शक छी, दोष भारतक अछि नेपाली पक्षके दाबी। भारतीय प्रधानमन्त्री डा मनमोहन सिंह बाढ़िक बिभीषिका देखिते राष्ट्रीय विपत्तिक घोषणा कऽ देलनि। बहुत रास पाई आऽ खाद्यान्न सहयोग करबाक आश्र्वासन सेहो। मुदा कोशी तटबन्ध टुटल किए, एकर सरकारी स्तरपर कोनो तरहक जाँच-बुझक आदेश नञि देल गेल अछि। हँ नेपालसँ एहि बिषयमे बातचीत करबालेल एकटा उच्चस्तरीय कमिटीक गठन कएल गेल अछि। ओऽ समिति की बातचीत करत आऽ की निष्कर्ष निकालत भविष्यक गर्भमे अछि। क्षतिपुर्ति कोशी समझौताक अनुसार कोशी तटबन्धक सभ तरहक काज भारतक जिम्मामे अछि। तटबन्धक मरम्मति मात्रे नञि तटबन्ध टूटलासँ होबऽ बला क्षतिपुर्ति सेहो भारते देत, से सन्धिमे उल्लेख अछि। नेपालक परराष्ट्रमन्त्री उपेन्द्र यादव कोशी समझौता अनुसार भारत सरकारकेँ सभ तरहक क्षतिपुर्ति देबऽ पडतै, से कहैत छथि। सन्धिक अनुसार इलाज, पुनर्वास आऽ खाद्यान्न जेहन सहयोग भारत सरकारकेँ करक चाही। भारतीय प्रधानमन्त्री आऽ विदेशमन्त्रीसँ सहयोगक आग्रह कएल गेल आऽ ओऽ सभ एहि प्रति सकारात्मक रहल, मन्त्री यादव कहलनि। आब देखऽ के बाँकी अछि, कोशी पीडित धरि कहिआ पडोसी देशसँ सहयोग पहुँचैत छञि। नञि रुकल कटान कोशी कटान नियन्त्रणलेल एखन धरि कएल गेल सभ प्रयास असफ़ल भेल अछि। कोशीक सभसँ महत्वपुर्ण मानल जाएबला स्पर बहऽ लागल अछि। नेपाल आऽ भारतीय प्राविधिक टोलीद्वारा कटान नियन्त्रणलेल कएल गेल प्रयास निरर्थक भऽ गेल अछि। संयुक्त प्राविधिक टोलीक निगरानीमे बीस हजार बोरा बालु, गिटी राखि कऽ नदिकेँ पश्चिम दिश घुमएबाक प्रयास निरर्थक भऽ गेल अछि। बर्षाक कारण सेहो बाढि नियन्त्रण दुरुह बनल अछि। नेपाल सरकार कोशी कटानसँ बिस्थापित भेनिहारक प्रति परिवार १५ हजार टका सहयोग देत। ई १५ हजार ब्यथित कोशीपीडितके कत्तेक सहयोग भऽ सकत ओऽ सहजहि अनुमान लगाओल जा सकै-ए। किछु मरल बहुतो निपत्ता सप्तकोशी नदी गामेक बाटसँ बह लगलाक बाद विस्थापित भेनिहारसभ एखनो अपन परिजनक खोजिमे अछि। हरिपुर, श्रीपुर आऽ पश्चिम कुशाहासँ विस्थापित सभ अपन घर परिवारक सदस्यके ढुंढि रहल अछि। सुनसरी प्रशासन एखनधरि ५ गोटेक मृत्युक पुष्टि कएलक अछि। मुदा एखनो चारि सय गोट सम्पर्कविहीन अछि। दोसर दिश कोशी बाढ़िसँ विस्थापित आब पेटझरीक चपेटमे आबि गेल अछि। पानि गन्दा भऽ गेलाक बाद विस्थापित शिविरमे पेटझरी आऽ मुँहपेट जाएव विकराल रुप लऽ लेने अछि। विस्थापित एक बालक सहित दु गोटक पेटझरीसँ मृत्यु भेल अछि। मृत्यु भेनिहारमे श्रीपुर-३ के ५६ वर्षीयय तेजन सदा आऽ ६ वर्षिय रम्बा सदा अछि। सुनसरीक विभिन्न २९ शिविरमे एक हजार ५ सय गोट एखन बिमार अछि। अधिकांशमे पेटझरी, निमोनिया, बोखार आऽ छातीमे इन्फ़ेक्सन देखल गेल अछि। रोगीमेसँ १२ गोटक अवस्था चिन्ताजनक रहल, उपचारमे संलग्न चिकित्सक जनौलक अछि। कत्तेक बिपत्ति ! बाढ़िसंगहि सप्तरी जिलामे सर्पदंश बढि गेल अछि। सर्पदंशसँ शुक्रक राति आओर एक गोटेक मृत्यु भेल अछि। भादव महिनामे सांप कटलासँ मरनिहारक संख्या ६ भऽ गेल स्थानीय जनस्वास्थ्य कार्यालय जनौलक। खेतमे काज कऽ रहल स्थानीय रामकृष्ण यादवकेँ सांप कटने रहन्हि। इलाजक लेल सगरमाथा अंचल अस्पताल लऽ जाइत काल हुनक मृत्यु भेल। एहिसँ पहिने फ़किरा ३ क ४५ बर्षीय रामअशिष यादव, पत्थरगाडा ७ क १४ बर्षिय बमभोला यादव आऽ महादेव ८क १२ बर्षीय घनश्याम इसरक मृत्यु भऽ चुकल अछि। बिहारक बाध्यता कोशीक जलस्तर बढ़लाक बाद बिहारक स्थिति आओर असहज भऽ गेल अछि। बिहार सरकार वायु सेनाक ४ हेलिकप्टर, ८ सय ४० नाव आऽ सेनाक मदतिसँ युद्ध स्तरमे राहत कार्य भऽ रहल बतौलक अछि। मुदा बाढिपीडित लाखो जनता एखनो बाढिमे फ़ंसल अछि। सरकारी सहयोग समेत अपर्याप्त रहल, बाढिपीडितक कहब छञि। बिहार सरकार एखन धरि कोशी क्षेत्रमे २८ आऽ समुचा राज्यमे ७६ गोटेक मृत्यु भेल जनौलक अछि। मुदा प्रभावित इलाकामे स्थानीयवासी बहुतो शव दहाइत देखल गेल कहैत अछि। बिहार सरकारक तथ्यांकमे कोशी बाढ़िसँ ७ सय ७५ गामक २३ लाख जनता प्रभावित भेल कहल गेल अछि। बिछियाक आर्तनाद पेटमे अन्न नईं, राहतलेल आकाशमे टकटकी लगौने आंखि, आङमे लत्ताकपडाक अभाव आ भोक्कासी ...। सभ अपन अपन पीडा सुना रहल अछि। पेटके राक्षस शान्त नई भेलाक बाद ओ त सौंसे आदमीएके खा लेलक। नवजात शिशु कत्तेक काल भुक्खे रहैत, ओकरा कोशीक कोरमे छोडिदेल गेल। कोशी सन बेदर्दी जगमे कोइ नइ लघुनाटकमे किछु एहने देखल गेल। मैलोरंगक आयोजनमे दिल्लीमे सेप्टेम्बर १२ क' मन्चित लघुनाटकमे कोशीक बिभीषिका देखएबाक प्रयास कएल गेल। नाटकमे राहतलेल मारामारी कएनिहार जनता भुखसं मृत्युवरण करबाक बाध्यताके जीवन्त रुपमे प्रस्तुत कएल गेल। पीडितके रोदनसं दर्शक भावविह्वल बनल छल। मैलोरंग सेप्टेम्बर १२ सं १४ तारिखधरि मैथिली लोकरंग महोत्सव स्थगित कएलक अछि। कोशी क्षेत्रमे घुरैत मुस्कानकसंग महोत्सव आयोजन हएत मैलोरंग जनौलक अछि। संघर्षक कठिन बाट मैथिली साहित्यकार व्रजकिशोर बर्मा मणिपद्मक स्मृतिमे नयां दिल्लीमे सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजन कएल गेल। एहि कार्यक्रममे मैथिली नाटक मन्चन हएबाक संगहि मिथिलांगन संस्थाक स्मारिका सेहो विमोचन कएल गेल। मिथिलांगन साहित्यकार मणिपद्मक स्मृतिमे 'उगना हल्ट' नामक मैथिली नाट्क मन्चन कएने छल। ब्रज किशोर बर्मा मणिपद्म मैथिली साहित्यक चर्चित नाम अछि। लोक साहित्यक संरक्षणमे हुनक योगदान उल्लेखनीय मानल जाईत अछि। इएह योगदानक सम्मान करैत हुनका मैथिलीक वाल्टर स्काट सेहो कहल जाईत छन्हि। लोरिक, राजा सल्हेश, नैका बन्जारा जेहन लोकगाथाक संरक्षण करबामे हुनक योगदान सराहनीय रहल कार्यक्रममे कहल गेल। मिथिलांगन एहिसँ पहिने सेहो मणिपद्मक स्मृतिमे विभिन्न कार्यक्रम आयोजन करैत आएल अछि। तहिना त्रैमासिक मिथिलांगन पत्रिका सेहो प्रकाशनके निरन्तरता देल गेल संस्था जनौलक अछि। उगना हॉ/ल्टक लेखक कुमार शैलेन्द्र आ निर्देशक संजय चौधरी छैथ। नाटकमे दिल्लीमे संघर्षरत मैथिली रंगकर्मीक जीवनक कटु सत्य देखएबाक प्रयास कएल गेल अछि। उगना हल्ट बिहारक मधुवनी जिलाक एक रेल्वे स्टेशनक नाम अछि , यद्यपि नाटकके परिवेश नयां दिल्लीक रंगकर्मीक अडडा मण्डी हाउसपर केन्द्रित अछि। स्थानीय पण्डौल आ सकरी बीचक स्टंशन अछि उगना हॉल्ट। नाटकमे मैथिली भाषा संस्कृतिक संरक्षणलेल अपस्यांत नवतुरियाक कथा ब्यथा समेटल गेल अछि। ओएह युवाक संघर्षक इतिबृत मे नाटक घुमैत अछि।। कियो संगीतकार बन' चाहैत अछि त कियो गीतकार, ककरो फ़िल्ममे हिरो बनबाक धुन सबार छइ त ककरो हिरोइन। अन्ततः कठिन संघर्षक बाद सभ अपन लक्ष्य प्राप्त करबामे सफ़ल होइत अछि। नाटकमे संगठने शक्ति अछि आ एहिँस सफ़लता पाबि सकैत छी से पाठ सिखएबाक प्रयास कएने छैथ नाटककार। छिरिआएल आ दिग्भ्रमित जँका बुझाईत पात्रक अभियान अन्तमे सफ़ल होइत अछि। अन्ततः नाटक सुखान्त अछि। (विदेह पेटारसँ) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। नवेन्दु कुमार झा समाचार वाचक सह अनुवादक (मैथिली), प्रादेशिक समाचार एकांश, आकाशवाणी, पटना। विदेह सम्मान- -श्री नवेन्दु कुमार झा केँ पहिल "विदेह मैथिली पत्रकारिता सम्मान भेटल छन्हि। अस्तित्वक लेल संघर्ष करैत पटनाक विद्यापति स्मृति पर्व मिथिलांचलक सांस्कृतिक धरोहर महाकवि विद्यापतिक जयन्तीक प्रतीक्षा मिथिलावासी वर्ष भरि करैत छथि। कार्तिक धवल त्रयोदशीकेँ प्रति वर्ष मनाओल जाएवला एहि वार्षिक उत्सवमे पूरा मनोयोगक संग मिथिलावासी शामिल होइत छथि। एहि क्रममे राजधानी पटनामे आयोजित होमएवाला विद्यापति स्मृति पर्वक प्रतीक्षा सेहो राजधानीक मिथिलावासीकेँ रहैत अछि। मुदा एहि वर्ष एहि आयोजनपर जेना ग्रहण लागि गेल अछि। बढ़ैत संसाधनक बावजूद आयोजक एहि सांस्कृतिक उत्सवक स्वरूप वर्ष-दर-वर्ष छोट कएने जा रहल छथि। ई आयोजन आब इतिहास बनबाक द्वारपर ठाढ़ अछि। पछिला चौबन वर्षसँ प्रति वर्ष आयोजित होमएवाला त्रिदिवसीय कार्यक्रम एहि वर्ष एक दिवसीय होएबाक संवाद अछि। पटनाक हार्डिंग पार्कसँ सचिवालय मैदान आ मिलर हाई स्कूल मैदान होइत ई आयोजन जखन भारत स्काउट मैदान धरि आएल ता धरि ई उम्मीद छल जे ई समारोह अपन पुरान गौरवकेँ फेरसँ प्राप्त करत मुदा जखन एहि समारोहक स्थान परिवर्तित कऽ कापरेटिव फेडरेशन परिसर आबि गेल तऽ स्पष्ट भऽ गेल जे आब आयोजक मात्र खानापूर्ति करबाक लेल एकर आयोजन करैत छथि। आ एहि बेरक सूचनापर गौर करी तऽ स्पष्ट होइत अछि जे आब एहि समारोहक आयोजन मात्र औपचारिकता रहि गेल अछि। कोसी क्षेत्रमे आएल बाढ़ि आयोजक सभकेँ एकटा बहाना बनि गेल अछि आ एहि बहाने एहि समारोहक गौरवपूर्ण इतिहासकेँ समाप्त करबापर लागल छथि। बाढ़ि मिथिलांचलक नियति अछि। शायदे कोनो वर्ष होएत जखन कि एहि प्राकृतिक आपदाक सामना नहि होइत अछि मुदा एहि बेर कोसीमे आएल बाढ़िसँ आयोजक संस्था चेतना समितिक कर्ता धर्ताकेँ अपन गाम-घर दहाएल तँ हुनक दर्द जागि उठल आ कार्यक्रमक समय-सीमा घटा देलनि। दरभंगा, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी आदि मिथिलांचलक कतेको क्षेत्र सभ साल बाढ़िक मारि झेलैत अछि मुदा बिना रुकावट सभ साल तीन दिवसीय विद्यापति स्मृति पर्वक आयोजन होइत रहल अछि। ओहि क्षेत्र सभक चिन्ता समितिकेँ शायद नहि रहैत छल। ज्यो बाढ़िक समस्याक प्रति एतेक गंभीर छलाह तँ पूर्वमे कतेको बेर आएल बाढ़िक बाद एहि आयोजनकेँ छोट कएल जा सकैत छल से आइ धरि नहि भेल। ज्यो अहू बेर आयोजक एहि समस्याक प्रति गंभीर रहितथि तँ एहि समारोहक माध्यमसँ राजधानीक मिथिलावासीक सहयोग बाढ़ि पीड़ितक मदति लेल लऽ सकैत छलाह। एहन रचनात्मक डेग संस्था उठाएत से संस्थाक कर्ता-धर्ताक आदति नहि रहलनि अछि। एहिसँ समितिकेँ सामूहिक श्रेय भेटैत से तऽ संस्थाक महानुभाव लोकनिकेँ कतहु मंजूर नहि छलनि। ओ तँ व्यक्तिगत श्रेय लेबापर विश्वास करैत छथि। दरअसल चेतना समितिक जुझारू पदाधिकारी सभमे आब काज करबाक चेतना नहि बचल अछि। नहि तँ ओ एहिपर जरूर चिन्तन करितथि जे एहि समारोहमे प्रतिवर्ष दर्शकक संख्या किए कम भऽ रहल अछि। जखन संस्थाक स्तरसँ दर्शककेँ जोड़बाक कोनो प्रयास नहि भऽ रहल अछि तँ एहिमे दर्शक दिससँ प्रयास होएबाक बात सोचब निरर्थक अछि। ओना आयोजक कतेको वर्षसँ एहि समारोहकेँ विराम देबाक प्रयासमे छथि। कखनो चुनावक बहाना बना तँ कखनो कानून व्यवस्थाक बहाने एहि कार्यक्रमक स्वरूपकेँ छोट क देलनि। एहि वर्ष तँ कोसीक विभीषिका तँ मानू हुनक सभक मनोनुकूल वातावरण दऽ देलक। प्रारम्भमे त्रिदिवसीय आयोजनक तैयारीक बाद एकाएक एकरा एक दिवसीय करब मात्र औपचारिकता लागि रहल अछि जाहिसँ कि जे किछु मैथिली प्रेमी छथि अगिला वर्शसँ अपनहि एहि कार्यक्रमसँ कटि जाथि आ दर्शकक अनुपस्थितिक बहाना बना कार्यक्रमकेँ बंद कऽ देल जाए। ई विडम्बना कहल जा सकैत अछि जे पटनामे शुरू भेल विद्यापति स्मृति पर्वक देखा-देखी प्रदेश आ देशक आन क्षेत्रमे वर्ष दर वर्ष पूरा उत्साहक संग आयोजित भऽ रहल अछि आ एहि ठामक आयोजनक अस्तित्वपर संकट आबि गेल अछि। वास्तवमे चेतना समिति आब किछु फोटोजेनिक चेहरा सभक अखाड़ा बनि गेल अछि जे एकर कार्यालय विद्यापति भवनकेँ अपन दलान बुझि अपनहिमे कुश्ती करैत रहैत छथि। कोसीक विभीषिकाक दर्द मठाधीश लोकनिक संग-संग सभ मिथिलावासीकेँ अछि। कोसीक बाढ़ि पीड़ितक दर्द एहि आयोजन माध्यमसँ सभ मिथिलावासीकेँ जोड़ि सामूहिक रूपेँ बाटल जा सकैत छल। ज्यो से नहि तऽ बाढ़ि पीड़ितक मदति लेल प्रदेश आ देशक कतेको क्षेत्रमे सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमक कएल गेल आयोजन व्यर्थ छल। मिथिलाक कतेको महान विभूति सभक प्रयासँ शुरू भेल राजधानीक ई सांस्कृतिक उत्सव पूरा देशमे एकटा महत्वपूर्ण स्थान रखैत अछि। एहि आयोजनकेँ इतिहास बनेबाक प्रयास करब चिन्ताक विषय अछि। पहिने कार्यक्रमक स्थान छोट करब आ आब एकर समय सीमा घटएलासँ राजधानीक मिथिलावासी मर्माहत छथि। एकरे परिणाम अछि जे छोटे स्तरपर सही राजधानीसँ सटल दानापुर आ राजीवनगरमे किछु वर्षसँ आयोजित भऽ रहल विद्यापति पर्व आब लोकप्रिय भऽ रहल अछि। आब राजधानीक मिथिलावासी चेतना समितिक बदला एहि दुनू स्थानपर होमएवाला आयोजनक प्रतीक्षा करैत छथि। शायद अहूसँ चेतना समिति सचेत होएत आ विद्यापति स्मृति पर्वक अपन पुरान गौरवकेँ पुनर्स्थापित करबाक प्रयास करत। (विदेह पेटारसँ) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। श्याम सुन्दर शशि कतारक मैथिल भेड़ा चरवाह कतारक सदरमुकाम दोहासँ लगभग एक सय किलोमीटर दूर जमालिया स्थित मरुभूमिक छातीपर बनाओल गेल भेड़ाक गोहियाक आगू ठाढ़ भऽ एक गोट युवक सिटी बजा रहल छल। महाभारतकालीन कृष्ण जकाँ। जनु अपन गोप आ गोपीकेँ लग बजेबाक उपक्रम कऽ रहल हो। मुदा एहि मरुभूमिमे ने गाई अएबाक कोनो सम्भावना छलै आ ने गोपी। मुदा बकरी आ भेड़ा धरि अवश्य आबि गेल ओकर सिसकारी सुनिकए। दिनभरि ५० डिग्रीक ताप छोड़ि स्वयं थकित सुरुज भगवान संध्या रानीसँ रसकेलि करबाक धुनमे पश्चिमाचलगामी वाट पकड़ि लेने छलाह। पश्चिमसँ आवएवला सेनुताएल प्रकाश मरुभूमिक वालुपर पड़ि मलिछाह आकृति बना रहल छल। मरुभूमि पिलिया ग्रस्त रोगी जकाँ बेजान देखना जाऽ रहल छल। पछिया हवा सांय सांय कऽ रहल छल। हावाक गतिसंग वालुक छोट-छोट कण उड़ि-उड़ि राहगीरकेँ घायल बना रहल छल। बूझि पड़ैत छल जे प्रलयकेर पूर्व संकेत हो। चारुकात वियावान मरुभूमि आ एहिमे उगल एक आध बबूरक पौध। हम बेर-बेर सोचैत रहैत छी जे धन्य बबूर, ऊँट आ सार्कदेशक दुखिया मजुरसभ जे एहि भूमिकेँ धरती होएबाक ओहदा प्रदान करैत छैक। अन्यथा...?? मुदा ओऽ युवक शान्त छल। एक क्षणक बाद सुरुज अस्त भऽ जएतै, सगर सन्सार अन्हार भऽ जएतै आ सयौ विगहामे पसरल मरुभूमिपर कारी रंगक चादर ओछा जाएत। ओऽ अन्हार होएबासँ पहिनहि अपना अधकि भेड़ा आ बकरी गोहियामे घुसियावए चाहैत छल। कर्तव्य परायण मनुपुत्रक रूपमे अपन दायित्व निर्वाह करए चाहैत छल। एहि तरहेँ अपन ईसारापर कृष्ण जकाँ भेड़ा-बकड़ीकेँ नचावएवला युवक के नाम छल महेन्द्र कापर। नेपालक सिरहा जिल्लाक कमलाकात भेड़िया गामक ई मैथिल युवक, विजुली, पिवाक पानि, सड़क आ स्वास्थ्यादि सुविधासँ विहीन एहि मरुभूमिमे गत एक वर्षसँ एहिना भेड़ा वकरी चड़वैत अछि। महेन्द्र कापर मात्र नहि, एहि मरुभूमिक विभिन्न भागमे बनाओल गेल विभिन्न भेड़ा, बकड़ी आ ऊट बथान तथा लगाओल गेल वगैचामे हजारौं नेपाली, भारतीय, वंगलादेशी, श्रीलंकन आ सुडियन मजुरसभ काज करैत अछि। अपना सभ दिस एक गोट कहबी नहि छैक जे, “जएवह नेपाल, संगहि जएतह कपार”। तहिना ई युवक सभ अपन करम भोगि रहल अछि। ओऽ सभ अबैत काल जे दोहा देखने छल, चकमक विजुलीवत्ती देखने छल आ चिक्कन चुनमुन फोरलेन सड़क देखने छल से घुरैत काल फेर देखत। ओकरा सभक वास्ते दोहा सहर दिल्ली दूर छैक। महेन्द्र जमालियाक एहि अन्कन्टार मरुभूमिमे गत एक वर्षसँ काज करैत अछि। ओकरा जिम्मामे दू सय भेड़ा आ बकड़ी छैक। हमरा सभकेँ देखिते ओकर आँखिमे विशेष प्रकारक चमक व्याप्त भऽ गेलै, मुखमण्डलपर खुशीक रेखा नाचए लगलैक। साँझ पड़ि रहल छैक ओकरा लालटेम नेसवाक छैक, रातुक खाना बनेवाक छैक आ खुला आकाशक नीचाँ तरेगन गनैत राति बितेवाक छैक। गत एक वर्षसँ महेन्द्रक ई दैनिकी बनि गेल छैक। ईजोरिया रातिक चानकेँ देखि ओऽ अतिशय प्रसन्न होइत अछि, “ई चान हमरो बाऊ आ माय आउर सेहो देखैत होतै नञि”? ओकर निश्चल प्रश्न हमरा भावुक बना देने छल। ओऽ भेड़ा आ बकरीकेँ गोहियामे गोतैत अछि। पठरूसभकेँ दूध पियबैत अछि। चारा रखैत अछि आ चैन भऽ हमरा सभसँ गप्प करवा वास्ते बैसि जाइत अछि। ओऽ एक वर्ष पूर्व कतार आएल छल। मानव तस्करसभ ओकरा कहने रहैक जे वगैचाक काज छैक। ओऽ सोचने रहय जे फलफूलमे पानि पटाएव, रोपव उखारव आ रियाल कमाएव मुदा से भेलै नहि। ओऽ भेड़ा चरवाह बनि कऽ रहि गेल। असलमे महेन्द्र अपने निरक्षर अछि। ओकर कतार आगमनके उद्देश्य छलै गाममे घर बनाएव आ बेटा-बेटीकेँ बोर्डिंग स्कूलमे पढ़ाएव। मुदा ओकर एक वर्षक श्रमसँ ई संभव नहि भऽ पाओल छैक। एक वर्षमे तँ महाजनकेँ ऋणो नहि फरिछाओल छैक। एहि वास्ते ओकरा आओर दू वर्ष एहि मरुभूमिक वालुकेँ फाकय परतैक। अवैत काल दलाल ओकरासँ ७५ हजार रुपैया लेने रहैक। जे ओऽ महाजनसँ ऋण लऽ कऽ चुकता कएने छल। जहन महेन्द्रक गप्पक बखारी खुजलै तँ फेर बन्द होएवाक नामे नहि लैक। ओकरा तँ ओहि गोहियामे राति बितैवाक छलै मुदा हमरा सभकेँ सय किलोमीटर दूर दोहा अएवाक छल। हमरा सभक धरफड़ीकेँ ओऽ अकानि गेल छल। कहलक सर, कहियोकाल अवैत जाइत रहब। भेड़ा बकड़ी संगे रहैत-रहैत ओहने भऽ गेल छी, देखियौ चाहो पानिक लेल नहि पुछलहुँ। आ कपड़ा लपेटल एकगोट पानिक बोतल आगाँ बढ़ा देलक। “हमरा सभक फ्रिज बुझू कि एयर कन्डीशन ईहे अछि”। गर्मीसँ सुखाएल कण्डकेँ पानिसँ भिजाओल आ अपन गन्तव्य दिस आगाँ बढ़ि चललहुँ। लगभग दश किलोमीटर वाट तय कएलाक बाद हमरा लोकनि जमालिया नगरमे पहुँचलहुँ। मुसलमान धर्मावलम्बी सभक रोजा खोलवाक समय भऽ गेल रहै। सड़क कातमे बनाओल गेल चबुतरापर नाना प्रकारक व्यंजन साँठल जाऽ रहल छल। लोक विस्मील्लाह करवालेल तैयार छलाह। हमरा मोन पड़ल महेन्द्रके गोहियामे राखल खवुज (कतार सरकारक सस्ता दरक रोटी) आ प्याउजक धेसर। एसगर महेन्द्र एखन नून, मिरचाई आ तेल प्याउजक संग खवुज दकरि रहल हएत। एतए ओकरेद्वारा पोसल गेल खस्सीक विरयानीक स्वाद लऽ रहल अछि मालिक आउर। दोहा, कतार, जमलिया। (विदेह पेटारसँ) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। डॉ कैलाश कुमार मिश्र यायावरी नॉर्थ कछार हिल्स: धरतीक नुकाएल स्वर्ग –डॉ कैलाश कुमार मिश्र -हमर अंग्रेजीमे लिखल लेख पढ़ि लोक सभ हमरासँ मैथिलीमे लिखबाक हेतु अनुरोध करैत छथि। स्पष्ट कए दी जे अंग्रेजी हमर व्यवसाय केर भाषा थिक। कहियो मिथिलामे नहि रहलहुँ, संस्कृत आ सोतियामी मैथिली नहि तँ पढ़लहुँ आ ने लिखलहुँ। तञि मैथिलीमे लिखक कल्पना जखने करैत छी तँ हाथ काँपय लगैत अछि। तीन वर्ष पूर्व डॉ विश्वनाथ झा अपन त्रैमासिक पत्रिका रचना हेतु लिखबाक लेल भावनात्मक रूपेँ हमरा बाध्य कऽ देलन्हि। डराइत-डराइत हम रचनामे “यायावरी” नामसँ अपन यात्रा-वृत्तान्त लिखनाइ प्रारम्भ केलहुँ। पाँच अंकमे लगातार लिखलाक बाद कार्यक अत्यधिक व्यस्तताक कारणेँ यायावरी लिखनाइ बन्द कऽ देलहुँ। घुमब आ अंग्रेजीमे लिखबसँ समय कहाँ बचैत अछि। एम्हर नौ-दस माससँ गजेन्द्र बाबू अपन पत्रिकाक हेतु पुनः मैथिलीमे लिखबाक हेतु कहि रहलाह अछि। अतेक चेरियेलन्हि जे अन्ततः यात्रा-वृत्तान्तक “यायावरी” प्रारम्भ कऽ रहल छी। पाठक लोकनिसँ नम्र निवेदन जे हमर लेखक विषय आ वर्णनकेँ पढ़थि आ भाषा-विन्यासक गलतीपर बेशी ध्यान नहि देथि। यायावरीक प्रारम्भ हम असम केर एक छोट भव्य, रम्य, आकर्षक, कठिन परन्तु अनेक रंग आ उल्लाससँ भरल भूखण्ड, नार्थ कछार हिल्ससँ कऽ रहल छी। अपन संस्था –इन्दिरा गान्धी राष्ट्रीय कला केन्द्रक सदस्य सचिव डॉ कल्याण कुमार चक्रवर्ती महोदय केर निर्देश एवं कार्यशैलीसँ प्रभावित भऽ हम समस्त उत्तर-पूर्व भारत एवं सिक्किममे विभिन्न क्रियाकलाप प्रारम्भ केलहुँ, जाहिसँ स्थानीय संस्कृति आ विरासत केर रक्षा कएल जा सकय। असममे कार्यक श्रीगणेश हमरा लोकनि “श्रीमंत शंकरदेव कला क्षेत्र” गुआहाटी केर सचिव श्री गौतम शर्माक संग कएल। लगभग ६४ बीघा पहाड़ी धरतीमे बनल श्रीमंत शंकरदेव कलाक्षेत्र बड्ड रमनगर जगह बुझना गेल। जे कियो गुआहाटी घुमए जाथि आ हुनका कलासँ थोरेकबो प्रेम होइन तँ श्रीमंत शंकरदेव कलाक्षेत्र अवश्य जाथि, ई हमर निवेदन। कलाक्षेत्रमे पानिक फब्बारा, फुलबारी, विशाल आ कलात्मक अनेको भवन, दू टा अतिथि गृह, आर्टिस्ट विलेज; कलाकार सभकेँ रहबाक हेतु डॉरमेटरी; संग्रहालय, कला दीर्घा, बच्चा सभक लेल टॉय रेल एवं अन्य व्यवस्था; असम केर इतिहासक सम्बन्धमे “लाइट एण्ड साउंड” कार्यक्रम; पुस्तकालय, शिवसागर जिलाक ऐतिहासिक रंगघर केर रिप्रोडक्शन इत्यादि बरवश कुनो घुमए बलाकेँ मोन मोहि लैत छैक। असम केर अधिकांश ऑफिस आ घरसभमे लोक अपन जुत्ता-चप्पल आदि घरक बाहरे खोलि प्रवेश करैत छथि। हमहूँ एहि परम्पराक पालन जखन-जखन असम जाइत छे, तखन-तखन करैत छी। स्पष्ट कऽ दी जे श्रीमंत शंकरदेव कलाक्षेत्र सोलहम शताब्दीक महान वैष्णव सन्त शंकरदेव केर नामपर असम राज्य सरकार, भारत सरकारक आर्थिक सहायतासँ समस्त उत्तर-पूर्व भारत, विशेषरूपेण असम केर संस्कृति, विरासत तथा गौरवक संरक्षण एवं सम्वर्धन करबाक दृष्टिसँ बनल छैक। शंकरदेव जातिसँ कायस्थ छलाह। श्री बाल्मीकि प्रसाद सिंह जे असम काडर केर आइ.ए.एस.पदाधिकारी छलाह; बादमे भारत सरकारक गृह सचिव भेलाह आ अन्ततः विश्वबैंक केर कार्यकारी निदेशक पदसँ अवकाश प्राप्त कएलन्हि, हमरा कहलाह जे शंकरदेव मैथिल छलाह। हुनकर पितामह मिथिलासँ असम प्रवास कऽ गेलथिन्ह। पञ्जीसँ ईहो पता चलैत छैक, जे शंकरदेव तँ नहि परन्तु हुनकर पिता तीन-चारि बेर मिथिला आयल छलाह। एहि बातक एतय उल्लेख करब केर पर्याय ई जे एहि विषयपर गहन शोध करबाक आवश्यकता थिक। यदि ई बात प्रमाणित भऽ गेल जे शंकरदेव मैथिल छलाह तँ आइ हमरा लोकनि विद्यापतिक मैथिल होएबापर गर्व करैत छी, तहिना शंकरदेवोपर गर्व करब। हमरा हिसाबे तँ प्रबुद्ध मैथिल सभ बिहार सरकारसँ शंकरदेवपर एक गहन शोध करबाक परियोजना प्रारम्भ करबाक हेतु निवेदन करथि। गजेन्द्रजी एहि दिशामे आगाँ बढ़थि तँ नीक बात। संयोगसँ वाल्मीकि बाबू आइ-काल्हि सिक्किम प्रदेशक राज्यपाल थिकाह। हुनकर मदतिसँ परियोजनाक प्रारम्भ कएल जा सकैत अछि। ओऽ हमरा कतेको बेर एहिपर कार्य करक हेतु कहि चुकल छथि। एक समय एहनो छलैक जखन बंगाली सभ विद्यापतिकेँ बंगाली बुझैत छलाह। परन्तु आब प्रमाणित भऽ गेल जे विद्यापति मैथिल छलाह। यदि एहने किछु सबरा परम्परा केर जनक श्रीमंत शंकरदेवक उतेढ़पोथीसँ चलि जाय तँ बुझू जे हमरा लोकनि धन्य भऽ जाएब। श्रीमंत शंकरदेव कलाक्षेत्रक सचिव गौतम शर्मा आ सुलझल व्यक्ति छथि। लगभग पचास वर्षक गौर वर्ण आ मध्यम कद-काठीक आकर्षक व्यक्तित्व। स्थिर चित्त। प्रथम दृष्टिमे लागत जे ओहिना कियो छथि। परन्तु मुदा डायनेमिक लोक। कलाक्षेत्रक १२५ आदमी हुनकर इशारापर नचैत रहैत अछि। सदिखान ओऽ अपन सहयोगी सभकेँ परिवारक सदस्य जेकाँ स्नेह करैत छथि। गौतम शर्माक सहयोगक कारणेँ हमरा लोकनि गुआहाटी आ तेजपुरमे बहुत सफलतापूर्वक अनेक कार्यक्रम कऽ चुकल रही। हमरा लोकनि असम केर किछु एहन क्षेत्रमे ओहि क्षेत्रक संस्कृति आ विरासतपर कार्य करए चाहैत रही, जाहिपर विशेष कार्य नहि भेल हो। शर्माजीसँ पता चलल जे सांस्कृतिक दृष्टिएँ असम प्रदेशकेँ मोटा-मोटी चारि क्षेत्रमे बाँटल जा सकैत अछि: १.अपर असम २.लोअर असम ३.बराक घाटी ४.नॉर्थ कछार घाटी शर्माजीसँ इहो पता चलल जे नॉर्थ कछार हिल्स सांस्कृतिक वैविध्यतासँ भरल अनुपम स्थान थिक, जाहिपर कोनो विशेष कार्य नहि भेलैक अछि। परन्तु ई घाटी उपद्रव, विभिन्न घटना, बन्द आदिक कारणेँ बेशी जानल जाइत अछि। लोक सभ सामान्यतया एतय जाएसँ बचए चाहैत छथि। मुदा सौन्दर्य आ सांस्कृतिक विभिन्नताक कारणे ई थिक असम केर शृंगार-नकमुन्नी। शर्माजीक बात सुनि हमरा मोनमे ई भावना प्रबल भऽ गेल जे नॉर्थ कछार घाटीमे अवश्य कार्य करब। गौतम शर्मा हमर मनोदशाकेँ बुझैत कहलाह: “कैलाशजी, अगर अहाँ एतए कार्य करए चाहैत छी तँ हम व्यवस्था कए देब। एतए केर जिला अधिकारी आ नॉर्थ कछार घाटी ऑटोनोमस काउन्सिल केर प्रिंसिपल सचिव अनिल कुमार बरुआ हमर मित्र छथि। एस.पी.केँ हम सेहो जनैत छियन्हि। ऑटोनोमस काउन्सिल केर संस्कृति विभागक अधिकारीगण हमरा लग बराबर अबैत रहैत छथि। सभ कियो मदति करताह। गौतम शर्माक बातसँ हमर मोन प्रसन्न भऽ गेल। तुरतहि डॉ कल्याण कुमार चक्रवर्तीसँ अनुमति लए २३ नवम्बर २००७ ई. सँ ८ दिनक संस्कृति एवं विरासत केर प्रलेखन केर कार्यक्रम नॉर्थ कछार धारी केर मुख्यालय हाफलौंगमे करबाक प्लान बना लेलहुँ। ई कार्यक्रम गौतम शर्माक सहयोगसँ करक छल। तदनुसार पूर्व निर्धारित् योजनाक अनुसार हम २१ नवम्बरकें साँझे दिल्लीसँ सँझुका हवाई-जहाजसँ गोवाहाटी पहुँचि गेलहुँ। गुआहाटीसँ हाफलोंग केर दूरी सड़कमार्गसँ २६१ किलोमीटर छैक। हमरा लोकनि (हम आ शर्माजीक ३ सहयोगी) टाटा सूमो (जीपसँ) २२ नवम्बरक साढ़े चारि बजे प्रातः गुआहाटीसँ हाफलौंगक लेल प्रस्थान कऽ देलहुँ। शर्माजी बड्ड पारिवारिक व्यक्ति छथि। ओऽ पूरा टीमक लोक सभक लेल भोजन, टेन्ट, जलखै, जेनरेटर आदिक व्यवस्था गुआहाटीसँ कए ट्रकमे लादि हॉफलोंग लऽ गेलाह। समय दुर्गापूजाक छलैक। रास्तामे अनेक ठाम स्थानीय युवक सभ हमरा लोकनिकेँ चन्दा लेल रोकैत रहल। एक ठाम हमरा लोकनि केर राशन-पानि आ करीब २५ आदमीसँ भरल बड़का बसक चक्का सड़कक कात माँटिमे धसि गेल। चारि घन्टाक इन्तजारक बाद सेनाक सहायता लए चक्काकेँ दलदलसँ बाहर निकालल गेल। अन्ततः साढ़े एगारह बजे रातिमे हाफलौंग पहुँचलहुँ। मोनमे डर छल। हेबो किएक नहि करैत! हमरा सभकेँ अएबासँ दू दिन पहिने पाँच आदमीक बीच हाफलौंग शहरमे गोलीसँ मारि देल गेल रहैक। खैर! शर्माजीक प्रयास आ डॉ के.के.चक्रवर्ती जीक असम केर मुख्य सचिव केर नाम लिखल चिट्ठीक कारण हमरा हाफलौंग सर्किट हाउसमे रहबाक व्यवस्था भऽ गेल। सर्किट हाउस शहरक सभसँ ऊँच स्थानपर बनल अंग्रेजी हुकुमतक समयक भव्य मकान छैक। एतएसँ प्रकृति केर अवलोकन तथा समस्त हाफलौंग शहर एवं अगल-बगलक इलाकाकेँ देखल जा सकैत अछि। हमर कोठरी काफी पैघ आ साफ सुथरा छल। हँ, पानिक कनिक दिक्कत अवश्य छलैक। कपड़ा बदलिते सुति रहलहुँ। भेल जे रातिमे भोजन नहि करब। परन्तु गौतम शर्मा कतऽ मानऽ बला छलाह! कनिकबे कालक बाद एक स्थानीय कलाकारकेँ लए आबि गेलाह। हम शिष्टतावश नहिओ चाहैत बैसि रहलहुँ। शर्माजी कहलन्हि, “जल्दी चलू। भोजन तैयार अछि”। नॉर्थ कछार हिल्स ऑटोनोमस काउन्सिल केर कला एवं संस्कृति विभागक निदेशक श्री लंगथासा सेहो शर्माजीक संग छलथिन्ह। हुनके प्रयाससँ संस्कृति भवन केर प्रांगणमे हमरा लोकनिकेँ कार्यक्रम करबाक अनुमति भेटल छल। लंगथासा उदार आ संस्कृति प्रेमी छथि। स्वयं दिमासा जनजातिक छथि। कहलन्हि “हमरा सभ लेल ई गौरव केर बात थीक जे अहाँ लोकनि दिल्लीसँ आबि एहि इलाकामे जतए कियोक नहि आबए चहैत अछि, अयलहुँ अछि आ हमरा लोकनिक संस्कृति एवं धरोहरक रक्षाक प्रति कृतसंकल्पित छी। एतए तँ ओना असम राइफल्स, सैनिक, पुलिस आदिक जमघट लागल रहैत अछि, परन्तु संस्कृति आ विरासतक चिन्ता ककरा छैक? अहाँ सभकेँ केना धन्यवाद दी”। हम लंगथासा महोदय दिस तकैत बजलहुँ: “अहाँ सभ यदि चाही तँ हमरा लोकनि एहि क्षेत्रक सांस्कृतिक धरोहरकेँ संरक्षण एवं संवर्धनक हेतु बेर-बेर आएब”। हमरा बातपर उत्साहित भऽ लंगथासाजी बजलाह: हमरा लोकनि सभ तरहक सहयोग करबाक हेतु तैयार छी। एतय केर तमाम अलगाववादी, सरकार विरोधी जत्था समूह संस्कृति रक्षणक विरोधी नहि थिक। तमाम लोसभ अहाँक निर्णयसँ प्रसन्न अछि। जावत धरि अहाँ सभ एतए रहब तावत धरि अतए कुनो मार-काट नहि हैत। अहाँ जे जाहि तरहक स्थानीय सहयोग चाही, हमरा लोकनि करबाक हेतु तत्पर छी”। एकर बाद हमरा लोकनि रात्रिक भोजन हेतु विदा भेलहुँ। चटगर भोजन-भात, माछ, दालि, सजमनि केर तरकारी, सलाद, मिठाई, चटनी- केलाक बाद पुनः सर्किट हाउस आबि सुतबाक तैयारीमे लागि गेलहुँ। सुतएसँ पहिने अपन पत्नीकेँ दूरभाषसँ आश्वस्त कए देलियन्हि। जे चिन्ताक कोनो बात नञि। हम एतए ठीक छी”। एकर तुरत बाद सुति रहलहुँ। अगिला दिन प्रातः पाँच बजे उठि बाहर अएलहुँ तँ मनोरम दृश्य देखि मोन मस्त भऽ गेल। सर्किट हाऊससँ एना बुझना गेल जेना सुरुज अपन लालिमा लए लाल गेन जकाँ उगैत छथि। हरियर जंगल, कलकल करैत छोट परन्तु घुमावदार नदीक प्रभाव, दूरमे बनल जंगलक मध्य आदिवासी सबहक छोट-छोट घर, सभ किछु मनमोहक लगैत छल। किछु कालक बाद गौतम शर्मा सम्वाद पठओलन्हि जे हमरा लोकनिक कार्यक्रम साँझ ६ बजे प्रारम्भ हैत। किछु कालक बाद सत्यकाम आ कुशा महन्त किछु स्थानीय लोक संग हमरा लग आबि कहलन्हि जे खाली समयमे हॉफलौंग आ अगल-बगलक क्षेत्रकेँ देखबाक चाही। हमरा ई विचार नीक लागल। तुरत तैयार भऽ गेलहुँ। स्थानीय लोकसभसँ पता चलल जे हाफलोंग मूलतः “हंगक्लौंग” सँ बनल छैक जकर अर्थ थीक सम्पन्न आ रत्नगर्भा धरती। बादमे किछु दोसर विद्वान लोकनि कहलन्हि जे “हॉफलौंग” शब्द दिमासा जनजातिक शब्द “हाफलाऊ” (HAFLAU)क विकृत रूप थीक। “हाफलाऊ” शब्दक अर्थ भेल वाल्मीक पहाड़ी (Ante hill)। हाफलौँग शहरक निर्माण अँग्रेज प्रशासन द्वारा १८९५ ई. मे बोराइल रेंजपर एकटा छोट छिन हिल स्टेशनक रूपमे कएल गेलैक। प्रारम्भमे चीर, देवदारक पाँतिसँ लागल गाछ, नौ छेदक गोल्फ कोर्स, छोट परन्तु आकर्षक आ कलात्मक बंगला, हाफलौंग लेक, रेलवेक कर्मचारी सभ लेल स्टाफ क्वार्टर, छोट बजार, रेलवे स्टेशन आदि सुविधाक संग एहि शहरक विकास प्रारम्भ कएल गेलैक। अंग्रेज सबहक हिम्मतिक प्रशंसा करए पड़त। ३६ खोह (tunnels) कऽ बना रेल लाइन लऽ गेनाइ ओहि जमानामे अर्थात् १८९५-९८ मे की छोट बात छैक? रेलवेक निर्माण कार्यक हेतु ठीकेदार, मजदूर, कर्मचारी, व्यापारी आदि सभ उत्तर-प्रदेश, बिहार, बंगाल आ असम केर अन्य स्थानसँ आनल गेल। पुनः आपसमे वार्तालापक हेतु एक नव तरहक बजारु हिन्दी विकसित कएल गेलैक। एहि हिन्दीकेँ हॉफलौंग-हिन्दी कहल जाइत छैक। ई हिन्दी व्याकरणक निअमक पालन स्वतंत्र भऽ करक अधिकार दैत छैक। हाफलौंग हिन्दी रोमन लिपिमे लिखल जाइत छैक। स्थानीय बुद्धिजीवी लोकनिक कठिन संघर्षक फलस्वरूप आइ-काल्हि हॉफलौंग हिन्दीक मान्यता साहित्य अकादमीसँ भऽ गेल छैक। नार्थ कछार हिल्स असम केर बहुरंगी चुनरी थीक। एतए निम्नलिखित एगारह जनजातिक लोक रहैत छथि: १. दीमासा (Dimasa or Cachari) २. ह्मार (Hmar) ३. जेमि नागा (Zeme Naga) ४. कुकी (Kuki) ५. बंइते (Baite) ६. कार्बी (Karbi) ७. खासी अथवा प्नार (Khasi or Pnar) ८. ह्रांगखल (Hrangkhals) ९. वइफी (Vaiphies) १०. खेलमा (Khelma) ११. रोंगमई (Rongmei) एकर अतिरिक्त अन्य समुदाय जेना कि बंगाली, असमी, नेपाली, मणिपुरी, मुसलमान, देसवाली आदि सेहो एतए रहैत छथि। सभ समुदायक बीच हमरा भावनात्मक एकताक कड़ी बुझना गेल। भारतक अनेकतामे एकताक स्वरूप बुझाएल जेना अपन मनिएचर धारण कए एहि छोट धरामे मोडेल बनि “संगे-संगे चली”, “संगे-संगे खाई”, “संगे-संगे रही” केँ चरितार्थ करैत छल। स्वतन्त्रता प्राप्तिक बाद भारतक अन्य शहर जकाँ हॉफलौंग सेहो शनैः-शनैः विकसित भऽ रहल अछि। १९७० ई. मे एकरा जिलाक मुख्यालय बना देल गेलैक। आब नॉर्थ कछार हिल्स ऑटोनोमस काउन्सिल केर मुख्यालय, विभिन्न सरकारी विभागक दफ्तर आ मकान, आवासीय परिसर, पार्क, जेहल, खेल परिसर आ मैदान, दू टा रेलवे स्टेशन, सिविल अस्पताल, प्राइमरीसँ हाइयर सेकेण्डरी स्तर केर विभिन्न विद्यालय, सभ सुविधासँ परिपूर्ण सरकारी महाविद्यालय जाहिमे कला, विज्ञान एवं वाणिज्य संकाय केर अधिकांश विषयक पढ़ाई केर सुविधा सहजतासँ उपलब्ध छैक; पानिक सुविधा, डाक, टेलीग्राम, टेलीफोन आदिक सुविधा, बैंक, चर्च, मन्दिर, मस्जिद, पुस्तकालय अनेक तरहक सामाजिक-सांस्कृतिक क्रिया-कलापमे संलग्न संस्था; सिनेमा हॉल, बस स्टेण्ड आदि सुविधासँ भरल अछि। अगर रेलसँ हाफलौंग आबय चाही तँ गुआहाटीसँ नॉर्थ प्रन्टीयर हिल सेक्शन केर मीटरगेज द्वारा लम्डींगक रस्ते लोअर हाफलौंग स्टेशन आबि सकैत छी। एकर दूरी गुआहाटीसँ २८५ किलोमीटर छैक। सिलचरसँ बदरपुर होइत हिल हाफलौंग स्टेशन केर दूरी ९२ किलोमीटर छैक। रेलक डिब्बामे बैसि नॉर्थ कछार हिल्स केर नील पहाड़ीक अवलोकन केनाई स्वर्ग केर अवलोकनसँ कम नञि छैक। जीग-जैग (टेढ़-मेढ़) रस्ता नगाँवसँ प्रारम्भ भय समस्त नॉर्थ कछार हिल्सक उत्तरसँ दक्षिण दिशामे जिलाक तीन प्रमुख नदी- माहुर, दीयूंग आ जटिंगा- कऽ संग-संग चलैत रहैत छैक। बुझाएत जेना पानि, रेलक पटरी आ मनुक्खक मोन तीनू आपसमे तालसँ ताल मिला गतिमान भेल होए। उपरोक्त तीन नदीक अतिरिक्त एहि धरामे चारि छोट-मोट नदी आरो थीक। एहि नदी सबहक नाम छैक: जीनाम, लंगटींग, कोपिली, डिलेयमा। सभसँ पैघ नदी दीयूंग छैक जकर लम्बाई २४० किलोमीटर छैक। १८६६ मीटर केर ऊँचाई पर अवस्थित थुंगजांग पहाड़ी सभसँ ऊँच स्थान छैक। नॉर्थ कछार हिल्स पूबसँ असम केर पड़ोसी प्रदेश नागालैण्ड आ मणिपुर; पश्चिममे मेघालय आर कार्बी अंगलौंग जिला; उत्तरमे नगांव आ कार्बी अंगलौंग जिला तथा दक्षिणमे बराक घाटीक कछार जिलासँ घेरल अछि। ४८९० वर्ग किलोमीटर क्षेत्रमे पसरल नॉर्थ कछार हिल्स केर सामान्य ऊँचाई समुद्र तलसँ ३११७ फीट छैक। नॉर्थ कछार हिल्स जिलामे ६१९ गाम; पाँच प्रखण्ड, दू सब डिवीजन (हाफलौंग आ मइबांग)मे विभक्त अछि। अतए केर आदिवासी मूल रूपसँ झूम खेती करैत छथि। झूममे एक भागक जंगल-झाड़केँ काटि ओहिमे आगि लगा पुनः खेती कएल जाइत छैक। तीन-चारि वर्षक बादओहि भूमिमे पुनः जंगल झाड़केँ बढ़ए देल जाइत छैक आ जंगल-झाड़सँ भरल जमीनकेँ आगि लगा साफ कय ओहिमे खेती कएल जाइत छैक। एतए १७,२९३ हेक्टेअर जमीन झूम खेतीक रूपमे, टोटल फसल हेतु उपयुक्त जमीन ३६७५८ हेक्टेअर आर बीया रोपए बला समस्त जमीन २९२०५ हेक्टेअर छैक। एहि जनपद केर करीब ४५२९वर्ग किलोमीटर धरती जंगलसँ भरल छैक। ६१०.५१ वर्ग किलोमीटर सुरक्षित आ बाकी हिस्सा राज्य सरकार द्वाराघोषित। तीन सुरक्षित जंगल क्षेत्रक नाम क्रमशः (क) लांगटींग-मूपा सुरक्षित जंगल (४९७.५५ वर्ग कि.मी.) (ख) कूरुंग सुरक्षित जंगल (१२४.४२ वर्ग किलोमीटर) (ग) बोराइल सुरक्षित जंगल (८९.८३ वर्ग किलोमीटर) ओहि दिन लगभग साढ़े बारह बजे भोजन कयल। तत्पश्चात् नॉर्थ कछार हिल्स ऑटोनोमस हिल्स काउन्सिलक कला एवं संस्कृति विभागक निदेशक लंगथासा महोदय, उप-निदेशक श्री संजय जी दूंग एवं किछु अन्य लोकनि हमरा लग अयलाह आ कहलन्हि जे “चलू अहाँकेँ पहाद्ई दिस लऽ चलैत छी। यदि समय बचत तँ जटींगा पहाड़ी आ गाम सेहो चलब”। गुआहाटीमे किछु लोक सभ जानकारी देने छलाह जे जटींगा पहाड़ीपर चिड़ै सभ रातिमे रोशनी देखलापर झुण्डक-झुण्डाअबि रोशनीपर प्रहार करैत छञि तथा सामूहिक रूपेण आत्महत्या कऽ लैत छैक। इहो पता चलल छल जे पक्षीशास्त्री लोकनि एहिपर गहन शोधमे बहुत दिनसँ लागल छथि परन्तु एखन धरि कोनो ठोस निष्कर्षपर नहि आबि सकल छथि जे आखिर एकर रहस्य की छकि? आ एकर सत्यता की थिकैक? गुआहाटीमे मोन बना लेने रही जे जटींगा पहाड़ी अवश्य जायब। आइ ई अवसर हमरा लंगथासाजी देलन्हि तँ मोन गद् गद् भऽ गेल। हम तुरत हुनका लोकनिक संग जटींगा गाम जयबाक लेल तैयार भऽ गेलहुँ। जटींगा पहाड़ी आ गामक रस्तामे विभिन्न प्रकारक बेंतक झाड़ी आ बांस भेटल। नॉर्थ कछार हिल्सक टोटल धरती (४८९००० हेक्टेअर)मे लगभग ३०७९०० हेक्टेअरमे बांस लागल छैक। बांस अनेक प्रकारक अनेक प्रजातिक, असम प्रदेशमे ३३ नस्ल केर बांस होइत छैक, जाहिमे लगभग २० नस्ल वा प्रजाति एहि क्षेत्रमे उपलब्ध छैक। प्रमुख प्रजातिमे काको/ पीछा वा पीछा, जाति, डालू, मूली, हिलजाति, कता, मकालू, काली-सूण्डी, टेराई आदिक नाम सामान्यो मनुक्खक जीभमे रचल-बसल छैक। बांस एहि क्षेत्रक लोकक जीवनक प्रमुख आधार छैक। एकर प्रयोग झोपड़ी, जाफरी, जारनि, पूल आदि बनेबाक लेल कएल जाइत छैक। बांसक कोपड़सँ तरकारी, अचार आदि सेहो बनायल जाइत छैक। बांसकेँ स्थानीय चाऊर, मकई आदिसँ बनल दारु पीबाक हेतु बर्तन (ग्लास-कप)क रूपमे कएल जाइत छैक। जमीनक कटाव रोकबाक हेतु बांसक आधार देल जाइत छैक। एकर अलावे बांसक प्रयोग बर्तन, फर्नीचर, कृषियन्त्र एवं उपकरण, धनुष-वाण, सजेबाक कलात्मक वस्तु, हस्तकला, बत्ती, सीढ़ी इत्यादिमे उपयोग होइत छैक। बादमे हम अनेको वाद्य या लोकवद्य यंत्र देखलहुँ जाहिमे बांसक प्रयोग कएल गेल रहैक। अन्ततः हमरा लोकनि जटींगा गाम पहुँचलहुँ। ई गाम बोराइल रेंज केर पादगिरि (foothills) पर बसल छैक। ई पहाड़ी तरह-तरहक प्रवासी एवं देशी चिड़ै सबहक विश्राम-स्थली थिकैक। एहि स्थानमे अंग्रेजी मास सितम्बर-अक्टूबरमे चिड़ै सभ अन्हरिया पक्षक रातिमे रोशनीक कोनो स्रोत जेना कि टॉर्च, मशाल आदि देखि झुण्डक-झुण्डमे आबि खसि पड़ैत छैक आ आत्महत्या कऽ लैत छैक। जटींगा गाम हॉफलौंग शहरसँ आठ किलोमीटर केर दूरीपर बसल छैक। लोक सभसँ ज्ञात भेल जे चिड़ै सभ अन्हरिया रातिमे रोशनी देखि झलफलाक खसय लगैत छैक; जकर फायदा उठा कऽ चिड़ैमार सभ बांसक लग्गी अथवा बत्तीसँ चोन्हरायल चिड़ै सभपर प्रहार करय लगैत छैक एवं पकड़ि लैत छैक। अन्हरिया रातिक संग-संग एक निश्चित वातावरणक भेनाई चिड़ै सबहक सामूहिक आत्महत्याक लेल सेहो कारण बनैत छैक। ई वातावरण छैक हवाक बहबाक दिशा। हवाक दिशा दक्षिण-पश्चिमसँ उत्तर-पूबमे हेबाक चाही। बोराइल पहाड़ीक अगल-बगलमे धूंध आ शीत लागल रहनाई सेहो जरूरी। धूंधमे कनीक झलफलाईत रोशनी हेबाक चाही। एहन स्थितिमे जखन दक्षिण दिशासँ धूँध चलैत छैक तखने चिद्ऐ सभ जटिंगा दिस आगाँ बढ़ैत अछि। सामूहिक आत्महत्या करय बला चिड़ै सभमे लाली चिड़ै (Indian ruddy), कौड़िल्ला (King fisher), भारतीय नौरंग (Indian pitta), हारिल, ब्लैक ड्रोंगो, उजरा बगुला, चितकबरी पौरकी, बटेर आदि प्रमुख छैक। आश्चर्यक बात ई जे अधिकांश चिड़ै जे कृत्रिम रोशनीक चकाचौंधसँ सामूहिक रूपसँ झुण्डक-झुण्डमे झलफला या चौंधिया कऽ खसैत छैक ओ सभ देशी चिड़ै छैक। प्रवासी चिड़ै सभ संगे ई घटना घटित नहि होइत छैक। स्थानीय लोकसभसँ ईहो पता चलल जे ई प्रवृत्ति समस्त जटींगा पहाड़ीमे नहि भऽ कऽ किछु खास क्षेत्र जे कि मात्र डेढ़ किलोमीटर केर लम्बाई आ २०० मीटर केर चौड़ाईक सीमामे बन्हल छैक। जटींगा गामक एक पच्चासी बर्षक वृद्ध जे प्नार (खासी) जनजातिक छथि सँ पता चलल जे चिड़ै सबहक जटींगामे कृत्रिम रोशनीसँ सामूहिक आत्महत्याक प्रवृत्ति केर जानकारी सर्वप्रथम १९१४ ई.क आसपास चललैक। भेलैक ई जे एक राति ककरो चारि-पांच बरद जंगल दिस भागि गेलैक। बरदक मालिककेँ भेलैक जे अगर बरदकेँ रातियेमे नहि पकड़ल गेलैक तँ बाघ-शेर सभ खाऽ जेतैक। तञि पाँच आदमी एकटा टोली बना बांसक फट्ठीमे कपड़ा बान्हि ओहिमे मटिया तेल डालि ओकर मशाल बना कऽ तथा हाथमे लालटेन लय बरद सभकेँ ताकक लेल जंगल दिस बिदा भेल। कनीक कालक बाद आश्चर्यजनक ढ़ंगसँ चिड़ै सभ झुण्डमे आबि मशाल लग आबि खसय लगलैक। परन्तु ई लोकनि ओहि चिड़ै सभकेँ नहि पकड़लकैक। यद्यपि ओऽ सभ चिड़ै मांसक प्रयोगमे लाबए जोग रहैक। एकर कारण ई छलैक जे स्थानीय जेमि नागा समुदाय (जनजाति) क लोकक बीच ई भ्रान्ति रहैक जे जटींगा क्षेत्रमे रातिक भूत-प्रेत विचरण चिड़ै बनि करैत रहैत छैक। हुनका लोकनिकेँ तञि डर भेलन्हि जे चिड़ै केँ पकड़लासँ कतहु कोनो अनिष्ट ने भऽ जाए। १९१७ ई.क आसपास लाखन-सारा नामक एक व्यक्ति कृत्रिम रोशनीसँ झलफलाएल चिड़ै सभकेँ सर्वप्रथम पकड़ि घर अनलाह एवं ओकर मांसकेँ भुजि पका कऽ खयलन्हि। आ ओकर कोनो दुष्प्रभाव हुनका सभकेँ नञि भेलन्हि। एकर बाद चिड़ै सभपर आफत शुरू भऽ गेलैक। लोकसभ अन्हरिया रातिमे कृत्रिम रोशनीक मदतिसँ चिड़ै सभक संहार प्रारम्भ कऽ देलक। हालाँकि जखन अंग्रेज प्रशासनकेँ एहि बातक जानकारी भेटलैक तँ एहि परम्परापर रोक लगा देल गेलैक। स्वतन्त्रता प्राप्तिक बाद लोक पुनः नुका-चोरा कऽ शिकार करए लगलाह। आब पर्यावरणविद्, पक्षीशास्त्री, पत्रकार एवं अन्य लोकनिक अथक प्रयासक बाद प्रशासन पुनः कृत्रिम रोशनीसँ चिड़ै मारबाक प्रथापर प्रतिबन्ध लगा देलकैक अछि। हम ओहि स्थानपर गेलहुँ। ओतए रंग-बिरंगक चिड़ै सबहक आकर्षक फोटो टांगल रहैक। एक मूल वाक्य नीक लागल। वाक्य ई रहैक: “shoot these birds with your camera, not with bullets:. घड़ी देखलहुँ तँ साँझ भऽ गेल छल। आब हमरा लोकनि जटींगासँ सोझे सर्किट हाउस आबि गेलहुँ। मुँह हाथ धोलाक बाद कार्यक्रम स्थलीपर पहुँचलहुँ। ओतए पाँच हजार लोक सभ आयल छलाह। सभ जनजाति केर स्त्री-पुरुष, बच्चा सीयान सभ कियो अपन समुदायक परम्परागत रंग-बिरंगक वस्त्र पहिरने सुसज्जित भेल पहुँचल छलाह। प्रशासन केर सहयोग तँ छले। डिप्युटी कमिश्नर, नॉर्थ कछार हिल्स ऑटोनोमस काउन्सिल केर चेअरमेन, सदस्य, प्रमुख सचिव, एस.पी., स्थानीय कॉलेजक शिक्षक एवं छात्र सभ कियो पहुँचल छलाह। स्थानीय पत्रकार सभ सेहो उत्साहित छलाह। सभ कियो हमरा माध्यमसँ आ गौतम शर्माक माध्यमसँ इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र केर प्रति धन्यवाद दैत छलाह। हम सोचलहुँ जे केहेन विडम्बना छैक। जे क्षेत्र सांस्कृतिक सम्पन्नताक खान थिक ओकर एहेन अपमान! मुख्यधारासँ एहि क्षेत्रकेँ वंचित किएक कएल गेल छैक! हमरा भेल जे समस्त विश्वमे नॉर्थ कछार हिल्ससँ शान्त आर सांस्कृतिक वैविध्यसँ भरल आर कोनो जगह नञि भऽ सकैत अछि। हम अपन भाषणमे बजलहुँ: “हमरा लोकनि अहाँ सभकेँ सिखाबए नहि अएलहुँ अछि। हमरा लोकनि अएलहुँ अछि अहाँ लोकनिकेँ जाग्रत करक हेतु जे अहाँ सभ अपन सांस्कृतिक वैविध्यता तथा गरिमाकेँ बुझू आ एकरा सास्वत राखू। हमरा लोकनि एतए केर सांस्कृतिक विरासतकेँ जानए आ ओकर डॉक्युमेन्टेशन करए आएल छी। अगर अहाँ सबहक सहयोग रहल तँ बेर-बेर आएब। हमर कार्यक्रममे आ एक्शनमे कौमा (,) वा अर्धविराम भऽ सकैत अछि, पूर्ण विराम कखनहुँ नहि हैत”। लोक सभ हमर बातकेँ सही अर्थमे लेलन्हि। पहिल दिनक कार्यक्रम लगभग साढ़े-नौ बजे राति धरि चललैक। जखन रातिमे भोजनक उपरान्त विश्राम करए गेलहुँ तँ एक आदमीक देल एक पुस्तक पढ़य लगलहुँ। पुस्तक नॉर्थ कछार हिल्सपर छलैक। ओहि पोथीमे रातु हकमओसा नामक स्थानीय कविकेँ नॉर्थ कछार हिल्सपर लिखल किछु पंक्ति बड्ड उपयुक्त बुझना गेल: पंक्ति यथावत अंग्रेजीमे पाठक लेल लिखि रहल छी: A harmonious game of hide and seek Behind the bushes, marshy meadow Under shadow with clouds view, Ever ready for worthwhile, cherish at dawn, The blues make enchanting heart of lovers Midst of covers white Changing scene that lively for romance Beauty and bounty of brooks that flow. Moments of joy, love to cherish Insight the harmony game of hide and seek Behind thick trespasses of white and blue With narrow path of zig-zag. The beauty of hills under cover Orchids, white fall, violet at hills Every moment thrilled with behalf Nature disposal at North Cachar Hills (विदेह पेटारसँ) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। डॉ. गंगेश गुंजन १ भोज परक आँटी- सत्तरिक नव-खाढ़िक युवा नवतुरिआसँ “भोज परक आँटी” अवश्य सुनल हएत बन्धु! हमरा लोकनि ते आब आयु-अवरोहणक प्रक्रियामे छी। मुदा पराभव अछि अपन एहि मैथिल मानक ओ स्वप्न जे मिथिलांचलक समग्र सामाजिक परिवर्तनक अर्थात्- जनपथक निर्माण (राजपथ नहि) आकांक्षामे सौँसे बातपर उत्कट डेगे चलिते रहबा लेल विवश छी। हमर गाम पिलखबारो ताहि से जुटल अछि, जाहिसँ हितेन्द्रजी अहाँक गाम केओटी। हमरा पीढ़ीकेँ तँ इतिहास “भोज परक आँटी” बना लेबाक बेर-बेर उपाय कएलक, जेना-तेना बँचबामे सफल रहलियैक, मुदा भऽ कहाँ कोनो खास सकलैक। तेकरे टा अफसोच। एक बोझक रूपमे फसिलकेँ खरिहानधरि कहाँ पहुँचा सकलियैक। तेकरे टा दुःख! मुदा टिकल रहलियैक अपन जीवन-मूल्य आ समाज दर्शनक भूमिपर। एक टा कवि-लेखक जे संघर्ष असकरो कऽ सकैत छी। से रस्ता चलबाक यत्न। जे से। पूरा बिहार- आन्दोलनक परिणति एहन आ एतए धरि भऽ जेतैक से क्यो सोचियोसकैत छलैक? अवश्ये बुझल हएत जे ताहि आन्दोलनक उपज- आमद भरि देश कैक टा महापद आसीन सी.एम. समेत कतोक एम.पी., एम.एल.ए. महोदय छथि। अहाँक पीढ़ीमे यदि सत्येक (सन्देह नहि सत्तरिक कारवाँक भव से कहि रहल छी जे) सत्ये मिथिलाक दर्द अछि तँ राजनीतिकेँ चिन्हैत जाइ जाऊ। पोलीटिक्स कऽ एहि नव अवतारकेँ। से भाषाक। ताहूमे मैथिलीक नव-नव ब्रांडक नेता आ एहन राजनीतिकेँ चीन्हि जाऊ। कारण जे राजनीतिक ई एकदम नव अवतार ठीक विश्व-बाजारी अवतार! कोनो औसत सुख लेल ककरो “भोज परक आँटी” नहि बनब। एहि वाष्पीकरणक प्रवाहमे एहन लोक नीक समय अर्थात् कोनो प्रतिगामी व्यवस्था रोकि नहि सकैत अछि। स्वयं राजनीतिक विचारधारा-अवधारणामे सेहो युगक अनुसार सकारात्मक पुनर्विचार चलि रहल छैक। जाति, धर्म, सम्प्रदय, क्षेत्रीयता सभसँ ऊपर सोचैत। समग्रतासँ एक होऊ। अपन मिथिलाँचलो तँ देशेमे ने अछि। अपम माँ मैथिली तँ अवश्ये महान। मुदा अन्य लोकक मातृभाषा सेहो तुच्छ नहि। अपना देशक सभ भाषा श्रेष्ठ अछि। मुदा दुर्भाग्यसँ किछु मूढ़ मैथिल मानसिकताक लोक आर तँ आर हिन्दी तककेँ अपमान जेकाँ कऽ देबाकेँ अपन मैथिल प्रेम बुझि लैत छथि, ई नकारात्मक प्रवृत्ति उचित नहि। हम तँ तेहन समयकेँ सहन कएने छी, जे किछु परम् विद्वान् अत्यन्त आदरणीय लोक लिखैत तँ मैथिली नहि तँ इंग्लिश। हिन्दी नहि। ई बहुत विचित्र लागए। आखिर हिन्दी अपन बहुत गौरवशाली लोकतन्त्र राष्ट्र-भाषा थिक। बन्धु! से मानसिकता बदलि जरूर रहल अछि मुदा अहाँ खाढ़िक (पीढ़ीक) युवा नवतुरिआमे आओर तेजीसँ परिवर्तन चाही। बात नहि रुचए तँ बिसरि जाएब, आग्रह! २ मैथिलीक उर्वर क्षेत्रमे कॉरपोरेट-जगत धाप एम्हर आब मैथिलीकेँ ई अष्टम सूचीक मान्यता एकटा आओर नव वादक उपहार-दरभंगा-मधुबनी-सहरसा वादक उपहार बनि रहलए। नव बाजारी प्रवृत्तिक ई प्रच्छन्न बीज-वपन आरम्भ भ’ चुकल अछि। सावधान। जे वर्ग एहि नव प्रयोजन-सिद्धिक बाट पर चलि आ’ चला रहलाह अछि, तनिकासँ संवाद होयबाक चाही। एखनहि-एही काल। अन्यथा मैथिलीक जतेक आ’ जेहन हानि आइ धरि नहि भेल छलैक, ताहिसँ बहुत बेशी आ’ खतरनाक नोकसान भ’ जयतैक। देशमे प्रचलित तुच्छतावादी प्रवृत्तिक विरुद्ध रखबारी कर’ पड़त। पूरवाग्रह मुक्त्त मन-प्राणसँ। अपना-अप्नी क’ क’ सुतारबाक, हथिययबाक अवसरवादी प्रवृत्तिसँ बाज अबै जाथि। मैथिलीक विषयकेँ समग्रतामे -देखि-बूझि क’- जाहिमे सम्पूर्ण मिथिला, मैथिल आ’ मैथिली अछि। छुछे दरभंगा-सहरसा-मधुबनी –ए टा नहि। आ’ ने छुच्छे सोति-ब्राह्मण-ब्राह्म्णेतर मैथिली भाषा-संस्कृति। तहिना साहित्य कथा कि कविता कि उपन्यास कि नाटके टा नहि। ई सभटा समस्त मिथिलांचलक एक जातीय सांस्कृतिक समग्रता तथा लोक गरिमाक, मानवीय गुणवत्ता, जीवनमूल्यक दबाबमे करैत रचनाकर-विचारकक संघर्ष आ’ आदर्शोन्मुख अभिव्यक्त्तिमे समस्त युग-यथार्थ बनैत अछि। ओना अपना-अपना पीढ़ीक प्रति आग्रह-आवेश स्वाभाविक, तेँ सभ दिना यथार्थ। मुदा वैह यदि कट्टरताक रूप ल’ लिअय तँ सामाजिक जहर बनि जाइछ। दुःखद आ’ चिन्तक विषय तँ ई जे एहन प्रवृत्ति मैथिली भाषा आ’ साहित्यमे सृजनरत अधिकांश नव्यतम रचनाकारमे पर्यंत देखाइ पड़’ लागलए। जनिकर लेखनसँ मैथिलीकेँ बड़-बड़ आशा छैक। से लोक सेहो।ई दुश्चिन्तेक विषय। एहन विभाजनकारी, विद्वेषोन्मुखी डेगकेँ रोकबाक चेतना जगाउ। आरम्भेमे-एखने। एहन वेगमे संस्थामूल्य सभक क्षय होयबामे समकालीन लोकक नकारात्मक पहल केर मुख्य भूमिका रहैत आयल छैक। आइ तँ आर। संस्था समेत साहित्यक आकलन-मूल्यांकनसँ ल’ साहित्य-सम्मान धरिक मानदण्ड-निकष-कसौटीक निष्पक्षता आ’ ईमानदारी पर प्रश्न उठि रहल अछि। संस्था मूल्य सभक क्षरण आ’ कठघरामे ठाढ़ कएल जयबाक घटना सभकेँ, हल्लुक क’ नहि, बहुत गंभीरता आ’ जिम्मेदारीसँ स्वीकार करबाक एखनहि अछि- बेर छैक। नहि तँ पछताय लेल तँ सौँसे भविष्य धएल अछि। एहि परिस्थिति तथा एकर खतरनाक प्रवृत्ति पर लोकक ध्यान जयबाक चाही, जे कोना एन.आर.आइ. प्रकारक लोक सभ आइ एक-बएक अचानक मैथिलीक भाषा-सांस्कृतिक आँगनकेँ सेहो कब्जा क’ रहल छथि। तेहन देशी एन.आर.आइ प्रकारक लोककेँ अवश्य चिन्हित कयल जयबाक चाही जे मिथिलांचल-मैथिली भाषा आ’ लोकक प्रसँग कहियो किछु नहि कयलनि। कोनो योगदान नहि। परन्तु आइ मैथिलीक ओहू क्षेत्रक अवसर आ’ संस्थाकेँ अपने अधीन क’ लेबाक प्रबंधमे सक्रिय, लगातार सफल भ’ रहल छथि। विडंबना तँ ई जे मैथिली-मिथिलांचलक विरुद्ध एहि गतिविधिमे बहुत रास तथाकथित मैथिलीक उच्चकोटिक लेखक-समालोचक-कवि ( छद्म प्रातिशील रचनाकार समेत) सेहो कोनो आपत्ति वा विरोध दर्ज नहि क’ रहल छथि। बल्कि मैथिलीक एहि नवोदयक-साम्राज्यवादक परोक्ष सहयोगे क’ रहल छथि। सँभव जे भविष्यमे अपना लेल कोनो उत्पादक अवसरक वास्ते निवेश बुद्धिसँ, ई सभ क’ रहल होथि, एकरे व्यावहारिक बाट मानि क’ चुप बनल छथि। युवा पीढ़ीक सेहो। के पड़य एहि सभमे? अद्यावधि प्राप्त इतिहासक जानकारीमे तत्काल यश-धनक अति-उताहुल , व्यग्र नव पीढ़ी! ई पराभव बजार आ’ भूमंडलीकरण (प्रायः!) मिथिलांचलक एहि नव गणित आ’ समाजशास्त्रकेँ की चीन्हओ? जा रहल लोक चीन्हओ कि आबि रहल लोक? ककर दायित्व। हमरा जनैत अवसर आ’ दूरगामी प्रभाव परिणतिकेँ दृष्टिमे राखि क’, छुच्छे बौद्धिकताक, बुद्धिजीविताक संकीर्णताक नहि, सबजन मैथिल अर्थात् जनसाधारणक मंगलकेँ नजरि पर राखि, स्वच्छ हृदय, पारदर्शी व्य्वहारवादक चलन अनै जाउ। यदि सत्ये मैथिली, मिथिलासँ अनुराग हो। पारम्परिक मैथिल कूटिचालि चोड़ै जाइ जाउ। अंततः मैथिली अपना सभक एकहि टा नाओ अछि। सभ गोटय एही नाओमे सवार छी। पार उतरब तँ सभ क्यो। तेँ नाओमे भूर नहि हो। बीचहिमे डूबय ने कतहु। अन्हारोमे अनका टाटक भूर देखबाक आँखि आ’ नेत बदल’ पड़तैक।(अन्हारोमे अनका टाटक भूर देखबाक बिम्ब पूर्णियाक कवि- प्रशान्तजीक मन पड़ि गेलय ‘सद्य मैथिल छी’) जे ओ’ आकश्ववाणी पटनाक मैथिली कार्यक्रम भारतीमे प्रसारित कयने रहथि)। नकारात्मक-ध्वंसात्मक समझ आ’ बुद्धिसँ परहेज करए जाइ जे क्यो से क’ रह्ल होइ। चन्द्रमा पर नव प्रभुवर्गक प्लॉट-रजिस्ट्री जेकाँ सद्याः उपलब्ध मैथिलीक एहन ऐतिहासिक अवसरक उपयोग सोचै जाउ-उपभोग नहि। दरभंगा बनाम सहरसा बना क’ मैथिलीक क्षेत्रीय रजिस्ट्री जुनि करबै जाउ। मनै छी, कहियो छल हेतै ई मनवाद। मुदा से मैथिलीक नितांत दोसर दौर छलैक। से ध्यान रखबाक थिक। ई(वि)काल प्रायः सभ भाषा-साहित्यक इतिहासमे अबैत रहलैए। साहित्यिक सरोकार समाजसँ रहैत छैक, तथा समाज जीवन-यापन समेत जीवन-शैली आ’ जीवन मूल्यक निर्मिति आ’ निर्वहन तत्कालीन सत्ताक उपज होइत अछि। तेँ जन साधारणे लोकटा नहि, बुद्धिजीवी आ’ नेतृवर्ग सेहो ताही दबाबमे अपन प्राथमिकता तय क’ क’ अपन बाट बनबैत अछि आ’ सुभीता चह’ लगैत अछि। कालांतरमे जल्दीये तकर अभ्यस्त भ’ जाइत अछि। मध्यम वर्ग बेशी आ’ जल्दी। ई सुविधावादी जीवन-शैली आ’ जीवनदर्शन जन्मैत छैक- कहियो धर्म-सत्ता, कहियो राज-सत्ता, कहियो विकलांग लोकतंत्र वा कहियो अपरिपक्व लोक सत्ताक विचार-व्यवहारक संवेदनशील व्यवस्था शासनक अधीनतामे। बहुसंख्यक जनताक अशिक्षा दुआरे। तखन ओहि समयक जे बुधियार वर्ग रहैत अछि से सत्ताक अनुगमन करबाक सुभीतगर निष्कंटक बाट चुनैये। सुभीताकेँ अपन जीवन-मूल्य बना लैत अछि। जे बुधियार नहि अर्थात् जनसाधारण लोक, ताहि परिस्थितिकेँ अपन नियति वा प्रारब्ध मानि लैत अछि। एना अगिला कएक पीढ़ी धरि एहिना ओंघड़ाइत चलैत चलि जाइत छैक। गुलामी खाली कोनो बाहरीये देश वा सम्राट-साम्राज्येक टा नहि होइत अछि। गतानुगतिकता आ’ यथास्थितिवादी मानसिकता आ’ युगक प्रगति-गतिकेँ नहि बूझि, मूड़ी निहुँरैने सभ किछु स्वीकार आ’ सहैत चलि जाइक प्रवृत्ति सेहो गुलामियेक थिक। सत्ता तुष्ट लोकक ताबेदारी सेहो नव भाँग-गाँजाक अभ्यास अर्थात् गुलामिये होइत अछि। से ई सभ प्रकारक गुलामी बहुत युग धरि चलैत रहि जाइत छैक- अगिला कोनो सामाजिक परिवर्त्तन- कोनो महाक्रांति अयबा धरि। एखन धरिक इतिहासक शिक्षा तँ यैह कहैत अछि। उर्वर क्षेत्रक आविष्कारक बाद बजार ओकरा हथियबैत छैक। तेहन लोक से क’ नहि गुजरय। निजी सम्पत्ति ने बना लिअय। एकर रजिस्ट्री-केबाला ने करबा ने करबा लिअय। मैथिलीकेँ मसोमातक जमीन जेकाँ अपना-अपना नामे लिखबाक व्योंतमे लागल तेहन लोक से क’ नहि लिअय। एहि प्रक्रियामे माफियो –घुसपैठियो सभक गतिविधि अचानक तेज भ’ जाइत छैक। कहबाक प्र्योजन नहि जे मैथिली एखन सैह उर्वर क्षेत्र बनल अछि। मैथिली माफियाक कॉरपोरेट सेक्टर जोशमे अछि। गतिविधि तेज केने अछि। मैथिलीक विषयकेँ समग्रतामे -देखि-बूझि क’- जाहिमे सम्पूर्ण मिथिला, मैथिल आ’ मैथिली अछि। छुच्छे दरभंगा-सहरसा-मधुबनी-ए टा नहि। आ’ ने छुच्छे सोति-ब्राह्मण-ब्राह्मणेतर मैथिली भाषा, संस्कृति। तहिना साहित्य कथा कि कविता कि उपन्यास कि नाटके नहि। ई सभटा समस्त मिथिलांचलक एक जातीय सांस्कृतिक समग्रता तथा लोक गरिमा, मानवीय गुणवत्ता, जीवनमूल्यक दबाबमे करैत रचनाकार-विचारकक संघर्ष आ’ तकरे आदर्शोन्मुख अभिव्यक्त्तिमे युग-यथार्थ बनैत अछि। सद्यः उपलब्ध मैथिलीक एहन ऐतिहासिक अवसरक उपयोग सोचै जाइ- उपभोग नहि। दरभंगा बनाम सहरसा बना क’ मैथिलीक रजिस्ट्री-बन्दोबस्त नहि करबै जाइ जाय। ३ किछु एहनो बात विषय यद्यपि एहि बात –‘सगर राति दीप जरय’ पर हम सिद्धांततः प्रभासजीसँ सहमत नहि रहलौँ, परन्तु एम्हर पछिला दशकमे ई तिमाही-कथा गोष्ठी- ‘सगर राति दीप जरय’- आजुक मैथिली कथा-विधामे की योगदान कएलक अछि, से तथ्य आब इतिहासमे दर्ज अछि। ई बात सही छैक जे एहन कोनो कार्य कोनो एक गोटेक नहि होइछ। मुदा सभ वर्त्तमानकेँ ओहि एक संस्थापना-कल्पक व्यक्त्ति-लेखककेँ अवसरोचित रूपेँ कृतज्ञतासँ स्मरण अवश्य कयल जयबाक चाही। से लेखकीय नैतिकता थिक। आ’ हमरा जनतबे, से रहथि- स्व. प्रभास कुमार चौधरी। हमरा तखन दुखद निराशा भेल जखन एहि बेरक मैथिली साहित्य अकादेमी पुरस्कार पओनिहार प्रदीप बिहारीजी साहित्य अकादेमी-सभागारमे लेखक-सम्मिलन-अवसर पर अपना वक्तव्यमे सगर राति दीप्प जरयक उपलब्धिक चर्चा तँ कएलन्हि, मुदा स्व. प्रभास जीक नामोल्लेखो नहि कयलखिन। एकरा हम साधारण घटना नहि मानि सकैत छी। गंभीर बात बुझैत छी। कारण हमरा लोकनि रचनाकार छी। औसत कोटिक कोनो राजनीतिक नहि। संभव हो नाम अनावधानतामे छूटि गेल होनि। मुदा हमरा सभ लेखक छी तेँ एहन असावधानी करबा लेल स्वाधीन नहि छी। यद्यपि अपन खेद हम हुनका प्रकट कयलियनि। हमरा लगैये जे अपन-अपन सकारात्मक इतिहासक प्रति सभ पीढ़ीक मनमे कृतज्ञताक भाव अंततः लेखकक ऊर्जा आ’ प्रेरणे बनैत रहैत छैक। बतौर कवि हम मैथिलीमे जाहि काल-बिन्दु पर ठाढ छी, तकर जड़ि विद्यापतिसँ ल’ सुमन-किरण-मधुप- आ यात्रीएमे। ई सोचि क’ मन कृतज्ञ होइत अछि! बल्कि गौरांवित। ओना, एकटा लेखक रूपमे हम एहिमे सँ क्यो नहि छी। जेना सभ, सभक कारयित्री प्रस्थान छथि, तहिना हमहुँ नागार्जुन-यात्रीक कारयात्री प्रस्थान छी। आ’ ई भाव हमरा रचनाकर्ममे अग्रसर करबाक उत्तरदायित्व द’ गेलय। तर्पण तिल-कुश –अंजलि बला कर्मकाण्डकेँ तँ हम नहि मानैत छी, मुदा पुरखाक तर्पण हमरा प्रिय अछि। अपना शैलीमे। अपन जीवन-मूल्यक एकटा अभिन्न तत्त्व बुझाइत अछि। तकर बाट की हो? अवसर पर कृतज्ञ स्मृति! अवसर पर- तिथि पर नहि। (विदेह पेटारसँ) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। हितेन्द्र गुप्ता आब नहि खुलत नवका शराबक दोकान बिहार मे आब शराबक नवका दोकान नहि खुलत. बिहार सरकारक ई फैसला अछि जे आब शराब दोकानक लेल नवका लाइसेंस जारी नहि कएल जाएत. बिहारक आम लोक लेल ई नीक खबर अछि. लोक सभ कमाई केर एकटा बड़का हिस्सा शराब पर खर्च करि दय छथिन्ह. बिहार मे तं कइटा घर शराबक चक्कर मे बर्बाद भ गेल. कतेक लोक सभ दिन भर मजदूरी कs क अएला के बाद सीधे शराबक दोकान पर चलि जाए छथिन्ह. नून-तेल खरीदय के जगह शराबक बोतल खरीद लैत छथिन्ह. परिवार के संग मारि-पीट करय छथिन्ह. सरकार एहि पर रोक लगाबय लेल शराबक दाम बेसि करि देलक मुदा कोनो खास फर्क नहि पड़ल. बिक्री जारी रहल. ओना सरकारक नवका लाइसेंस जारी नहि करय के फैसला सं खास फर्क नहि पड़त...किएक तं पुरना दोकान तं खुलले रहत. पुरना दोकान पर शराब तं मिलते रहत. अगर सरकार सच मे एहिपर रोक लगाबय चाहैत अछि तं ओकरा गुजरात जकां पूर्णरूप सं शराब पर बंदी लगाएबाक चाही. सरकार के कहनाय अछि कि ओ शराब के दुष्परिणाम के बारे मे लोक के जागरूक करत...हर साल 26 नवंबर के मद्य निषेध दिवस मनाएत. मुदा एकर खास असर नहि पड़त. अगर सरकार सच मे गंभीर अछि तं ओकरा सभ धर्मक धर्मगुरु के संग मिलि कs लोक मे एकर खिलाफ अभियान चलएबाक चाही. लोक सभ के ई बतैनाय जरूरी अछि जे एहि सं सेहत आओर पाई दुनू के नुकसान पहुंचैत अछि. ई लोक के खोखला बना दैत अछि. सरकार के एकटा तय समय सीमा दsक एकर दोकान करय वाला के दोसर बिजनेस करय लेल प्रोत्साहित करबाक चाही. एहि पर दस तरहक टैक्स लगा कs एकरा एतेक महंग करि देल जाए जेहिसं लोक एकरा खरीदय मे दस बेर सोचय. (हितेन्द्र गुप्ता साभार- हेल्लो मिथिला http://www.hellomithilaa.com/2011/06/blog-post_2742.html ) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। सुभाष साह लन्दनमे नेपाल मेला २००८ (लन्दनसँ श्री सुभाष शाहक रिपोर्ट) लन्दन शहरमे पिकाडिली सर्कस नामक स्थान पर नेपाल एमबैशीक सहायता सऽ २१ आऽ २२ सितम्बर २००८ कऽ अहि मेलाक आयोजन कैल गेल छल जाहिमे नेपाल के पर्यटन मंत्री आदरणीया सुश्री हिशिला यामी नेपालक राजदूत श्री मुरारी राज शर्मा खैतान ग्रुपके चेयरमैन एवम् मैनेजिंग प्रेसिडेंट श्री राजेन्द्र खैतान आदि सहित अन्य दिग्गज सब उपस्थित छलैथ।अतऽ इहो घोषणा कैल गेल जे साल २०११ के पर्यटन वर्षक रूपमे मनाओल जायत। सुश्री यामी सऽ हम सब अहू बात पर विचारविमर्श केलहुं जे 'लुम्बिनी' के पर्यटक सबलेल बेसी आकर्षक बनाबऽ लेल की कैल जा सकैत अछि।यामीजी अहि बात लेल प्रतिबद्ध भेली जे ओ सीता मैया एवम् बुद्धदेवक इतिहास सऽ सम्बन्धित स्थानके विकासमे यथाशक्ति योगदान देती। श्री नवीन कुमार एवम् सुश्री सुनीता शाह द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक परिधानक फैशन शो अत्यन्त सफल रहल।हमरा सब अन्मुक (ANMUK- Association of Nepali Madheshis in UK) के सदस्य सबलेल अहि आयोजनक सफलता बहुत पैघप्रोत्साहन अछि। (विदेह पेटारसँ) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। सुशांत झा ग्राम+पत्रालय-खोजपुर, सम्प्रति सुशांत जी इंडिया न्यूजमे कॉपी राईटर छथि, मिथिला विश्वविद्यालयसँ स्नातक (इतिहास), तकर बाद आईआईएमसी (भारतीय जनसंचार संस्थान) जेएनयू कैम्पससँ टेलिविजन पत्रकारितामे डिप्लोमा (2004-05) ओकरबाद किछु पत्र-पत्रिका आ न्यूज वेबसाईटमे काज, दूरदर्शनमे लगभग साल भरि काज। संप्रति इंडिया न्यूजसँ जुड़ल- सम्पादक १ की बलिराज गढ़ मिथिलाक प्राचीन राजधानी अछि? हमर गाम खोजपुरसँ करीब एक किलोमीटर दक्षिण दिस बलिराजपुर नामक एकटा गाम छैक। ई गाम मुधुबनी जिला मुख्यालयसँ करीब 34 किलोमीटर उत्तर-पूब दिसामे छैक। एतय एक टा प्राचीन किला छैक जे 365 बिगहामे पसरल छैक आ एकर देखभाल भारत सरकारक पुरातत्व विभाग क रहल अछि। किलाक खुदाई भेलापर एहिमे सँ मृदभांड आ विभिन्न तरहक बस्तु निकलल आ सोनाक सिक्का सेहो भेटलैक। किलाक बाहर जे बोर्ड लागल छैक ताहि के मुताबिक ई किला मौर्यकालीन हुअक चाही। किला के कात करोटमे जे गाम छैक ओहिमे भाँति-भाँतिक किंवदन्ति पसरल छैक, किलाक विषयमे। जतेक लोक, ततेक तरहक बात। किछु लोकक कथन छन्हि जे ई किला राक्षस राज बलिक राजधानी छलै -आ किछु गोटा तँ राजा बलिकेँ देखबाक सेहो दावा केलन्हि अछि। साँझ भेलाक बाद लोक सभ किला दिस जाइसँ बचए चाहैत छथि। भऽ सकैत अछि जे ई अफवाह सरकारी कर्मचारी लोकन्हि फैलेने हुएआए-कारण जे ओकरा सभकेँ ड्यूटी करएमे कनी आराम भऽ जाइत छैक। लोक सभ राजा बलिक डरे किछु चोरबऽ नञि चाहए छैक। किला अद्भुत छैक। किलाक देबार भग्नावस्थामे रहितहु अपन यौवनक याद दिआ रहल अछि। किलाक देबार एतेक चाकर छैक जे ओदृपर तँ आसानी सँ एकटा रथ निकलिये जाइत हेतैक। देबारमे लागल ईंटा दू-दू फीट नमहर आ लगभग गोटेक फुट चाकर छैक। चीनक देबारसँ कम मोट नहि हेतैक ई अपन यौवन कालमे। किलामे एकटा पोखरि छैक, ककरो नहि बूझल छैक, जे कहिया खुनाएे ई पोखरि। बूढ़-पुरानक कहब छन्हि जे ई पोखरि राक्षसक कोरल अछि। किछु लोकनिक तँ ई मत छन्हि जे एहिमे एकटा सुरंग सेहो छैक-जकर रस्ता कतओ आर निकलैत छैक। सुनैत छियैक जे घ्राज-परिवारक सदस्यकेँ आपातकालमे बाहर निकालैक लेल एहन सुरंग बनायल जाइत छलैक। किलाक कात-करोटमे जे गाम छैक तकर नाम सेहो ऐतिहासिक। किलाक पूब दिस छैक फुलबरिया नामक गाम आ ओकर बगलमे सटल छैक गढ़ी गाम..जे आब अप्रभ्रंश भऽ कऽ गरही भऽ गेलैए। किलाक पच्छीम दिस छैक रमणी पट्टी नामक गाम आ ओहिसँ सटल छैक भुपट्टी। किलाक दक्षिणमे छैक बिक्रमशेर, जतय प्राचीन सूर्य मंदिरक अवशेष भेटलैए। ई बात ध्यान देबाक जोग जे सूर्य मंदिर देशमे बड्ड कम जगह छैक। बलिराज गढ़क खुदाई पहिल बेर 1976 मे भेलैक, जखन केन्द्रमे साइत डॉ0 कर्ण सिंह एहि बिभागक मंत्री छलाह। गढ़क उद्धारक लेल मधुबनीक पूर्व सांसद भोगेन्द्र झा आ कुदाल सेनाक अध्यक्ष सीताराम झाक बड्ड योगदान छन्हि। किछु इतिहासकार लोकनिक कहब छन्हि, जे ई किला बंगालक पालवंशीय राजा लोकनिक किला भ सकैत अछि वा फेर मौर्य सम्राटक उत्तरी सुरक्षा किला भऽ सकैत अछि। ओना किछु गोटेक कहब छन्हि जे एकर बड्ड संभावना- जे ई किला मिथिलाक प्राचीन राजधानी सेहो भऽ सकैत अछि। एकर पाछू ओ ई तर्क दैत छथिन्ह, जे एखुनका जे जनकपुर अछि, ओ नव जगह अछि आ ओतुक्का मंदिर १८हम शताव्दीमे इंदौरक महाराणी दुर्गावतीक द्वारा बनबाएल गेल अछि। विद्वान लोकनि जनकपुरक ऐतिहासिकताक संदिग्ध मानैत छथि। हमरा एहि संबंधमे एकटा घटना मोन पड़ि रहल अछि। १० साल पहिने पटनामे वैशालीक एकटा सज्जन हमरा भेटलाह आ कहलन्हि जे बलिराज गढ़ वास्तबमे मिथिलाक प्राचीन राजधानी अछि। हुनकर कहब छलन्हि जे ह्वेनसांगक एकटा विवरणक मुताबिक पाटलिपुत्रँस एकटा खास दूरी पर वैशाली अछि, वैशालीसँ एतेक दूरीपर काठमांडू (काष्ठमंडप) अछि आ काठमांडूक दच्छिन आ पूब दिशामे मिथिलाक प्राचीन राजधानी छैक। एखुनका जनकपुर ओहि मापदंडपर सही नञि उतरि रहल अछि। पता नञि एहि बातमे कतेक सत्यता छैक। एकर अलावा, रामायणमे सेहो मिथिलाक प्राचीन राजधानीक संदर्भमे किछु संकेत छैक। रामायणक संकेत सेहो बलिराजपुरकेँ मिथिलाक राजधानी होएबाक संकेत कय रहल अछि। सांसद भोगेन्द्र झाक मुताबिक, राजा बलिक राजधानी महाबलीपुरम भर सकैत अछि, जे दच्छिन भारतमे छैक। सभसँ पैघ बात ई जे पूरा मिथिलामे बलिराजपुरसँ पुरान कोनो किला नहि अछि, जे मिथिलाक प्राचीन राजधानी होएबाक दावा कय सकए। किलाक भीतर उबड़-खाबड़ मैदान छैक, जे राजमहलक जमीनक भीतर धँसि जएबाक प्रमाण अछि। एतय एकाध जगह खुदाई भेलैए आ ओहीमे काफी कीमती धातु आ समान भेटलैक अछि। अगर एकर ढ़ंगसँ खुदाई कएल जाय तँ नञि जानि कतेक रहस्य परसँ आवरण उठि जायत। एखन धरि सरकारक तरफसँ कोनो ठोस प्रयास नहि भऽ पाओल अछि, जञिसँ बलिराज गढ़क प्राचीनताकेँ दुनियाक सोझाँ रखबाक कोसीस कएल जाय। बस एकटा कामचलाऊ सड़कसँ एकरा बगलक गाम खोजपुरसँ जोड़ि देल गेलैक आ इतिश्री कय देल गेलैक। यदि बलिराज गढ़क खुदाई ढ़ंगसँ कएल जाय आ एतय एकटा नीक संग्रहालय बना देल जाय तँ बढ़िया काज होयत। मिथिलांचलक हृदयस्थलीमे रहबाक कारणेँ एतय मिथिला पेंटिंगक कोनो संस्थान वा आर्ट गैलरी सेहो खोलल जा सकैत अछि। एकटा नीक(चाकर आ चिक्कन हाईवे) क संग नीक विज्ञापन बलिराजगढ़क पर्यटक सभकेँ निगाहमे आनि सकैत अछि। एहिसँ इलाकाक गरीबी दूर करबामे सेहो मदद भेटत। यदि एकरा बुद्धा सर्किट वा रामायण सर्किटक अंग बना लेल जाय तँ आर उत्तम। २ मिथिला मंथन मिथिलांचल क्षेत्र बिहार मे सबसँ पिछड़ल मानल जाइत अछि, अगर प्रतिव्यक्ति आय, साक्षरता और प्रसवकाल मे जच्चा-बच्चा के मृत्यु के मापदंड बनायल जाय तोप्रँ मिथिलांचल देश के सबस गरीब आ पिछड़ल इलाका अछि। एकर किछु कारण त अहि इलाका के भौगोलिक बनावट अछि लेकिन ओहियो सँ पैघ कारण एहि इलाका मे कोनो नीक नेतृत्व के आगू नै एनाई अछि। आजादी लगभग 60 वर्ष बीत गेलाक बाद देश में जहि हिसाब स आर्थिक असमानता बढ़ि गेलैक अछि ओहि में बिहार आ खासकए मिथिला सामने एकटा बड्ड पैघ संकट छैक जे ई आआंर पाछू नै फेका जाय। उदाहरण के लेल ई आंकड़ा आंखि खोलि दै बला अछि जे एकटा गोआ मे रहय बला औसत आदमी के प्रतिव्यक्ति आमदमी एकटा औसत बिहारी सं सात गुना बेसी छैक आ एकटा पंजाबी के आमदनी पांच गुना बेसी छैक। बिहारो मे अगर क्षेत्रबार आंकड़ा निकालल जाय त बिहार के दक्षिणी( एखुनका गंगा पार मगध आ अंग) एवम पश्चिमी ईलाका बेसी सुखी अछि, आ ओकर जीवनशैली सेहो दू पाई नीक छैक। त एहन में सवाल ई जे फेर रस्ता की छैक। की मिथिलांचल के लोक एहिना दर-दर के ठोकर खाईके लेल दुनियां में बौआईत रहता अथवा हुनको एक दिनि विकास के दर्शन हेतन्हि। मिथिलांचलक ई दुर्भाग्य छैक जे एकर एकटा पैघ हमरा हिसाब सँ आधा सँ बेसी इलाका बाढ़ि में डूबल रहैत छैक। बाढ़ि के समस्या निदान सिर्फ राज्य सरकार के मर्जी सँ नहि भ सकैत बल्कि अहि में केंद्रसरकार के सहयोग चाही। पिछला साठि साल मे बिहार क नेतागण अहिपर कोनो गंभीर ध्यान नहि देलन्हि जकर नतीजा अछि जे बाढ़ एखन तक काबू मे नहि आबि रहल अछि। पछिला कोसी के आपदा एकर पैघ उदाहरण अछि, आब नेतासब के आँखि कनी खुललन्हि अछि, लेकिन एखन सँ मेहनत केल जायत त अहि मे कमस कम 20 साल लागत। बाढ़ि सिर्फ संपत्ति के नाश नहि करैत छैक, बल्कि आधारभूत ढ़ांचा जेना सड़क, रक्षेवे आ पुल के खत्म क दैत छैक। एहन हालत मे कोनो उद्योग के लगनाई सिर्फ दिन मे सपना देखैक बराबर अछि। किछु गोटाके कहब छनि जे बिहार मे उद्योग धंधा कएल जाल बिछाकएकर विकास केल जा सकैछ। लेकिन जखन सड़क आ विजलिये नहि अछि त केना उद्योग आओत। दोसर बात ई जे पछिला अविकासक चक्रक फलस्वरुप आबादीक बोझ एतेक बढ़िगेल अछि जे पूरा इलाका मे कोनो खाली जमीन नहि अछि जतय पैघ उद्योग लगायल जा सकय। सिंगूर के उदाहरण सामने अछि। महाशक्तिशाली वाममोर्चा के सरकार के जखन बंगाल मे 1000 एकड़ जमीन नै ताकल भेलैक त एकर कल्पना व्यर्थ जे दरभंगा आ मधुबनी मे सरकार कोनो पैघ उद्योग के जमीन दै। दोसर बात इहो जे पूरा मिथिला के पट्टी मे, मुजफ्फरपुर सँ ल क कटिहार तक कोनो पैघ संस्था-चाहे ओ शैक्षणिक होई या औद्योगिक- नै छै जे एकमुश्त 3-4 हजार लोक के रोजगार द सकै। हमरा इलाका मे शहरीकरण के घनघोर अभाव अछि। जतेक शहर अछि ओ एकटा पैघ चौक या एकटा विकसित गाँव स बेसी नहि।एकटा ढंग के इंजिनियरिंग या मेडिकल कालेज नहि, एकटा यूनिवर्सिटी नहि। कालेज सब केहन जे 4 साल में डिग्री द रहल अछि। एक जमाना मे प्रसिद्ध दरभंगा मेडिकल कालेज मे टीचर के अभाव छैक आ कालेज जंग खा रहल अछि। हम सब एहन अकर्मण्य समाज छी जे कोसी पर एकटा पुल बनबैक मांग तक नै केलहुँ,हमर नेता हमरा ठेंगा देखबैत रहला। आब जा क रेलवे आ रोड पुल के बात भ रहल अछि।कुल मिलाकरइलाका मे सिर्फ 8-10 प्रतिशत लोक शहर में रहैत छथि, ई ओ लोक छथि जिनका सरकारी नौकरी छन्हि। ई शहर कोनो उद्योग के बल पर नहि विकसित भेल। बाकी आबादी-लगभग 40 प्रतिशत दिल्ली आ पंजाब मे अपन कीमती श्रम औने-पौने दाम मे बेच रहल अछि। मिथिला के श्रम पंजाब मे फ्लाईओवर आ शापिंग माल बनाब मे खर्च भ रहल अछि, कारण कि हमसब एहेन माहौल नहि बनौलिएकि जे ओ श्रम अपन घर मे नहर या सड़क बनब मे खर्च होअए। तखन सवाल ई जे फेर उपाय की अछि। हमरा ओतय पैघ उद्योग नहि लागि सकैछ, रोड नहि अछि बाढ़ि के समस्या विकराल अछि, त हमसब की करी। लेकिन नहि, मिथिला के विकास एतेक पाछू भ गेलाक बाद एखनों कयल जा सकैछ। आ अहि विषय मे कय टा विचार छैक। किछु गोटा के कहब छन्हि जे एखुनका बिहारक सरकार मगध आ भोजपुर के विकास पर बेसी ध्यान द रहल छैक। एकर वजह जे सत्ता मे पैघ नेता ओही इलाका के छथि, लेकिन दोसर कारण इहो जे ओ इलाका बाढ़िग्रस्त नहि छैक। पैघ प्रोजेक्ट के लेल ओ इलाका उपयुक्त छैक। उदाहरणस्वरुप-एनटीपीसी, नालंदा यूनिवर्सिटी आ आयुध फैक्ट्री-ई तमाम चीज मगध मे अछि। दोसर बात ई जे नीक कनेक्टिविटी भेला के कारणे भविष्य मे जे कोनो निवेश बिहार मे हेतैक ओ सीधे एही इलाका मे जेतैक। कुलमिलाक आबै बला समय मे बिहार मे क्षेत्रीय असमानता बढ़य बला अछि। एहि हालत मे किछु गोटा अलग मिथिला राज्यक मांग क रहल छथि, आ हमरा जनैत संस्कृति स बेसी-अपन आर्थिक विकास के लेल ई मांग उचित अछि। मिथिला विकास माडेल की हुअके चाही।मिथिला के जमीन दुनिया के सबस बेसी उपजाऊ जमीन अछि। हमसब पूरा भारत के सागसब्जी आ अनाज सप्लाई क सकैत छी। लेकिन ओ सब्जी दरभंगा सं दिल्ली कोना जायत। एहिलेल फोरलेन हाईवे आ रेलवे के रेफ्रजेरेटर डिब्बा चाही। दोसर गप्प हमर इलाका के एकटा पैघ रकम दोसर राज्य मे इंजिनियरिंग आ मेडिकल कालेज चल जाईत अछि। हमरा इलाका मे 50 टा इंजिनीयरिंग कालेज आ 10 टा मेडिकल कालेज चाही। ई कालेज भविष्य में विकास के रीढ़ साबित होयत। हमरा इलाका मे छोट-छोट उद्योग जेना स़ाफ्टवेयर डेवलपमेंट या पार्टपुर्जा बनबै बला फैक्ट्री चाही जहि मे 100-200 आदमी के रोजगार भेटि जाय। लेकिन एहिलेल 24 घंटा विजली चाही। ई कतेक दुर्भाग्य के बात जे बगल के झारखंडक कोयला के उपयोग त पंजाब में बिजली बनबैक लेल भ जाय छैक लेकिन हमसब एकर कोनो उपयोग नहि क रहल छी। आई अगर हमरा अपन इलाका मे 24 घंटा बिजली भेटि जाय़ त पंजाब जाय बला मजदूर के संख्या में कम सं कम आधा कमी त पहिले साल भ जायत। भारत के दोसर राज्य सिर्फ आ सिर्फ अही इलाका के सस्ता श्रम के बले तरक्की क रहल अछि। हमसब ई जनितो किछु नहि क रहल छी, ई दुर्भाग्य के गप्प। मिथिला मे पढ़ाई लिखाई के प्राचीन परंपरा रहलैक अछि लेकिन सुविधा के अभाव मे ई धारा हाल मे कमजोर भेल अछि। खासकए महिला शिक्षा के दशा-दिशा त आर खराब अछि। एकटा लड़की कतेको तेज कियेक ने रहेए ओ 10 सं बेसी नहि पढ़ि सकैत अछि कारण घरक क्षेत्र कालेज नहि छैक। हमरा अगर तरक्की करय के अछि त इलाका मे एकटा महिला यूनिवर्सिटी त अवश्ये हुअके चाही, संगहि सरकार के ईहो दायित्व छैक जे हरेक ब्लाक में कमस कम एकटा डिग्री कालेज के स्थापना होअए। देश के विकास मे अहि इलाका के संग कतेक भेदभाव कएल गेलैक आ हमर नेतागण कतेक निकम्मा छथि-एकर पैघ उदाहरण त ई जे इलाका मे एकहुटा केंद्रीय संस्थान नहि छैक। एकटा यूनिवर्सिटी नहि, एकटा कारखाना नहि। आब जा क कटिहार मे अलीगढ यूनिवर्सिटी, दरभंगा में आईआईटी आ बरौनी मे फेर सं खाद कारखाना के पुनर्जीवित करैक बात कयल जा रहल अछि। हमरा याद अछि जे साल 1996 तक दरभंगा तक मे बड़ी लाईन नहि छलैक। हमसब कुलमिलाकर, कोनो तरहक संपत्ति के निर्माण नहि करैत छी। हमसब अपन आमदनी दोसर राज्य भेज दै छियैक-बेटा के बंगलोर मे इंजिनीयरिंग करबै सँ ल क दियासलाई तक खरीदै मे। हमर पूंजी अपन राज्य, अपन इलाका के विकास में नहि लागि रहल अछि। एहि स्थिति के जाबत काल तक नहि बदलल जायत हम किछु नहि क सकैत छी। (विदेह पेटारसँ) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। मनोज झा मुक्ति निष्कर्षविहीन सम्मेलन ! १९म् अन्तराष्ट्रिय मैथिली सम्मेलन वितलाहा चैतमासक २९ आ ३० गते नेपालक राजधानी काठमाण्डूमें सम्पन्न भेल । मूदा जाई तरहक उत्साह मोनमें छल, बहुत कचोट लागल सम्मेलनकेँ उद्घाटन आ समापन देखिकऽ । सम्मेलनक जिम्मा पओने वरिष्ट पत्रकार एवं राजनीतिकर्मी रामरिझन यादवक कार्यक्षेत्र काठमाण्डूसँ बाहर भेलाक कारणे आयोजन कठीन होएब निश्चिते छल । अखनधरि देखल जाएबला मैथिली कार्यत्रmम आयोजनाक खराब पक्ष सबसँ अछुत इ सम्मेलन नहि रहऽ सकल । कोनहुँ समिति बनएबाकालमे, समितिमे रहिकऽ जाइ तरहे बहुतोलोक सुति रहैत छथि सैह विडम्बना अहु सम्मेलनमें देखलगेल । अपन—अपन काज गछियोकऽ नई करबाक प्रवृति अखन अपना समाङ्गसँ नई हटल से प्रमाणित केलक अछि ई सम्मेलन । सम्मेलनमे नेपाल आ भारत दूनु देशक मिथिलाञ्चलसँ ३०० सहभागी होएबाक बात छल । सहभागिसब ऐलथि, मूदा निक जकाँ व्यवस्थापन नहि भऽ सकल । सम्मेलनमें मैथिली आ मिथिलाप्रति अनुरागी कम आ कोनो पार्टीक कार्यकर्ता सभक बेसी जमघट बुझाइत छल । २९ गते ९ बजे बसन्तपुरसँ धोती—कुर्ता आ पाग पहिरिकऽ झाँकी निकालबाक कार्यत्रmम छल, मूदा ११ बजेधरि एक डेढसय लोकक उपस्थिति मात्रे छल । मैथिली आ मिथिलासँ सम्वद्ध सँघ—संस्थासब काठमाण्डू उपत्यकामें ३ लाखसँ बेसी मैथिल रहल ठोकुवा दाबी कयल जाएत अछि । अपनाके मैथिलीक योद्धा कहऽबला किछु गोटे त उपराग देबऽमे सेहो पाछा नई परलथि "जे हमरा खबरि किया नई भेल" ? देखिकऽ अजगुत लागल आ दुःख सेहो जे जौ हम अपना आपके मैथिलीके योद्धा कहैत छी त कि व्यत्तिmगतरुपसँ खवरि केनाई जरुरिए छियै ? कोनो माध्यमसँ जानकारी होएब पर्याप्तता नहि छई ? हँ, कहुनाकऽ विलम्बेसँ सही बसन्तपुरसँ जाउलाखेलधरि धोती—कुर्ता त कमसम, मूदा पागक प्रदर्शन करैत जुलुश पहुँचल । जुलुश प्रदर्शन वास्तविकरुपमे एहि सम्मेलनक सबसँ नीक पक्ष रहल । एकरा नेपालमें मिथिला आ मैथिलक स्थानके प्रमाणित करबामे ठोस कदमके रुपमें अवश्य लेल जा सकैय । सम्मेलनके उद्घाटन कयलथि नेपालक प्रधान मन्त्री प्रचण्ड । ओ अपना भाषणसँ सहभागि सभक मोन जितलथि ताइमें कोनहुँ शंका नई । काठमाण्डू उपत्यकामे कवि कोकिल विद्यापतिक शालिक रखबाक बात सहभागि सबहक दवावपर त कहलथि मूदा राखि देताह ताइके बादेमे पतियाओल जाऽसकैय । तहिना सम्मेलनमे उपस्थित अतिथि फोरमक नेता जय प्रकाश प्रसाद गुप्ता त अन्तराष्ट्रिय विमानस्थलक नाम विद्यापति विमान स्थल होएबाक कहिकऽ प्रचण्डसँ भाषणमें एक कदम आगा रहल प्रमाणित कयलथि । ओ कहलथि जे "जौ काठमाण्डूक विमान स्थलक नाम विद्यापति विमान स्थल नई होएत त निजगढमे विद्यापति अन्तराष्ट्रिय विमान स्थल बेगर हमसब मानऽबला नई छी" । जे हुए बहुत निक गप्प जौं हुनक बात मात्र नेताक भाषण जौं नई होए । सम्मेलनमें नेपालक हिन्दी आन्दोलनके अगुवा आ अन्तराष्ट्रिय मैथिली परिषद् नेपालक अध्यक्ष राजेश्वर नेपाली अपनाके आसन ग्रहण नई कराओलगेल कहिकऽ सम्मेलन बहिष्कार करबाक घोषण त कएलथि मूदा किछुएकालकबाद ओ मञ्चपर आसीन भेल नजरि औलथि । पहिलदिनक कार्यत्रmम साँस्कृतिक कार्यत्रmम करैत सम्पन्न भेल । दोसर दिन अर्थात चैत ३० गते ९ बजेसँ विचार गोष्ठीक कार्यत्रmम छल, मूदा कार्यत्रmमक संयोजक बहुभाषाविद् गंगा प्रसाद अकेला अपने १० बजे एलाह । विचार गोष्ठीमे दूगोट कार्यपत्र प्रस्तुतक कार्यत्रmम छल, ताइमे नेपालदिससँ राम रिझन यादव आ भारतदिससँ डा धनाकर ठाकुरक कार्यपत्र रहनि । कोनो सम्मेलनमे विचार गोष्ठीक सत्रके बहुत पैघ महत्व देल जाइत छैक, मूदा एहि सम्मेलनमे विचार गोष्ठीक सत्र सबसँ महत्वहीन बुझि पडल । विचार गोष्ठीमे गन्थन क कऽ कोनो निष्कर्ष निकालि ताइपर कार्य आगु बढएबाक कोनो सम्मेलनके मुख्य उद्देश्य रहल करैत अछि । मूदा एतऽ अपन अपन कार्यपत्र प्रस्तुत कयलाकबाद प्रस्तोतासब आ अधिकाँश मञ्चपर आसिन व्यक्तिसब मञ्च छोडिकऽ निपत्ता भऽ गेलाह । ओना टिप्पणी करबाकलेल कुल २६ गोटे मञ्चपर गेलाह, मूदा कार्यपत्रपर बहुत कम आ प्रायःलोक अपने राग अलापि कऽ विचार गोष्ठीके अपन व्यक्तिगत विचारक मञ्च बनावऽमे सेहो पाछा नई परलाह । सम्मेलन कोन निष्कर्षपर पहुँचल कोनो सहभागिके मालुम नई भऽसकल । सम्मेलनमे विचार गोष्ठीक सत्रकबाद कवि गोष्ठीक आयोजना भेल छल । ताही बीचमे सम्मेलनक संयोजक रहल राम रिझन यादव अन्तराष्ट्रिय मैथिली परिषद् नेपालक समितिके नव कार्यकारिणीक घोषणा कएलथि । जाहिमे प्रमुख पदक अलावा जे जे मञ्चपर आबि बजने छलथि ओ सबगोटे कार्य समितिक सदस्य भेल घोषणा कएलथि । घोषणा कएल पश्चात किछु युवा एहन गलत प्रत्रिmयाके विरोध करैत हो—हल्ला करबाक शुरु कएलथि । ओना सम्भवतः ई पहिल एहन कार्यसमितिक निर्माण होएत जाहिमें मञ्चपर जे जे जाकऽ बजलाह ओ सबगोटे सदस्य बनाओलगेल होई । तहिना कवि गोष्ठीक सत्रमे सेहो तहिना देखलगेल । कवि गोष्ठीमें सोंचसँ बेसी कवि लोकनिकेँ कविता वाचनकलेल आओल मूदा समयक आभावके कारणे सभ कविके मौका नई देबऽ सकलाक कारणे किछु कविके मोनमे दुःख होएब अतिश्योत्तिm नहिं । काठमाण्डूमे सेहो एतेकरास मैथिली कविता आएब बहुत उत्साहक पक्ष कहल जाऽसकैया मैथिलीक लेल । सम्मेलनमें किछु गोटे सम्मेलनकेँ वास्ते अपन काठमाण्डू यात्राके व्यक्तिगत काजमें सेहो प्रयोग करैत देखलगेल । सम्मेलन छोडिकऽ काठमाण्डू घुमबाक वास्ते आएल जकाँ देखनिहार सहभागि सबहक सेहो कमी नई छल । समग्रमे मैथिलक वर्चश्वताके काठमाण्डूमे स्थापित करबाक पक्षमे सफल रहल १९म् अन्तराष्ट्रिय मैथिली सम्मेलन, उद्देश्य आ निष्कर्ष बिहीन बुझाएल ।काठमांडू नेपाल (विदेह पेटारसँ) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। सुमित आनन्द भारत-नेपालक मिथिला हस्तशिल्प कलामे असीम सम्भावना भारत-नेपालक मिथिला हस्तशिल्प कलामे असीम सम्भावनापर संगोष्ठी बी.पी.कोइराला नेपाल-भारत प्रतिष्ठान, नेपाल राजदूतावास, नई दिल्लीक तत्वावधानमे मधुबनी नगर भवनमे भेल। आलेख वाचन सत्र १८.०९.१० केँ आयोजित भेल। उद्घाटन सत्रक प्रारम्भ १८.०९.१० केँ मधुबनीक जिलाधिकारी श्री संजीव हंस (आइ.ए.एस.) द्वारा दीप प्रज्वलितक संग भेल। श्री जयप्रकाश नारायण पाठक, नयन कुमार मांझी, मेधा कुमारी, आरती मिश्रा आ ज्योति द्वारा मंगलाचरण तथा ओडिसी नृत्य प्रस्तुत कयल गेल। अतिथि गण सभक सम्मान एवं स्वागत भाषण अध्यक्ष, विश्वविद्यालय संगीत एवं नाट्य विभाग डॉ. पुष्पम नारायण द्वारा कयल गेल। अंजली श्वेता आ तुलसी द्वारा स्वागतगान गाओल गेल। मंच संचालक डॉ. अमरनाथ सिंह बीजभाषण लेल विश्वविद्यालय इतिहास विभागक अवकाशप्राप्त विभागाध्यक्ष डॉ. रत्नेश्वर मिश्रकेँ आमंत्रित कयलनि। उद्घाटन भाषण जिलाधिकारी श्री संजीव हंस कयलनि। एहि कार्यक्रममे दुनू देशक कलाकारगण उपस्थित छलाह। मुख्य अतिथिक रूपमे श्री उमाकान्त पाराजुली, सांस्कृतिक परामर्शदाता, नेपाल राजदूतावास, नई दिल्ली छलाह। मुख्य अतिथि अधीक्षण पुरातत्वविद् डॉ. संजय कुमार मंजुल छलाह। अध्यक्षीय उद्बोधन विश्वविद्यालय हिन्दी विभागक अवकाश प्राप्त विभागाध्यक्ष डॉ. अजीत कुमार वर्मा कयलनि। कार्यक्रमक संचालन डॉ. अमरनाथ सिंह, अंग्रेजी विभाग, कुंवर सिंह महाविद्यालय, दरभंगा कयलनि। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. शम्भू कुमार साहू, अध्यक्ष, भूगोल विभाग, जे.एम.डी.पी.एल., महिला कॉलेज, मधुबनी कयलनि। प्रथम सत्र आलेख वाचन सत्रक शुभारम्भ अपराह्ण ०४.३० बजे भेल। कार्यक्रमक संयोजिका डॉ. पुष्पम नारायण पाग एवं चादरिसँ विद्वान आलेख वाचक एवं मंचस्थ अतिथि लोकनिक स्वागत कयलनि। एहि सत्रक अध्यक्षता श्री उमाकान्त पाराजुली कयलनि। एहि सत्रक आलेख वाचक लोकनि छलाह- श्री महेन्द्र मलंगिया, श्री कृष्ण कुमार कश्यप, श्रीमति मंजू ठाकुर, श्रीमति रानी झा, डॉ. सुरेन्द्र प्रसाद साहा एवं डॉ. कमलानन्द झा। हिनका लोकनिक व्याख्यानक विषय क्रमसँ छलनि: -भारत की मिथिला हस्तशिल्प कला की प्राचीनता एवं आज का स्वरूप -मिथिला हस्तशिल्प कला में बाजारीकरण की सम्भावना -मिथिला हस्तशिल्प और महिला रोजगार- नेपाल के सम्बन्ध में -मिथिला हस्तशिल्प कला और महिला रोजगार- भारत के सम्बन्ध में - मिथिला हस्तशिल्प कला की कठिनाइयाँ - मिथिला हस्तशिल्प कला में ह्रास- एक चिन्तन सांस्कृतिक कार्यक्रम सत्र १८.०९.१० सांस्कृतिक कार्यक्रमक अन्तर्गत डोमकछ आ पमरियाक प्रस्तुति कलाकार द्वारा कयल गेल। एहि सत्रक संचालक रंगकर्मी डॉ. सुनील कुमार ठाकुरजी रामचरित मानसक प्रथम श्लोकसँ वाणी आ विनायकक आराधना कयलनि। कार्यक्रमक अन्तमे डॉ. सुनील कुमार ठाकुर सत्रावसान “जय हिन्द, जय नेपाल” कहि कऽ कयलनि। द्वितीय सत्र १९.०९.२०१० केँ १०.३० बजे डॉ. नरेन्द्र नारायण सिंह निराला जीक अध्यक्षता तथा श्री सुनील मंजुल एवं श्रीमति रानी झा क मंच संचालनसँ सत्र प्रारम्भ भेल। एहि सत्रमे मुख्य अतिथिक रूपमे नेपाल राजदूतावासक सांस्कृतिक परामर्शदाता श्री उमाकान्त पाराजुली एवं श्रीमति शशिकला देवी छलथिन। हस्तशिल्प एवं वस्त्र मन्त्रालय, भारत सरकारक प्रतिनिधि विपन कुमार दास, चित्रकार कृष्ण कुमार कश्यप, रमेश झा (भारतीय स्टेट बैंक), प्रो. अरुण कुमार मिश्र, प्रो. ब्रज किशोर भंडारी, स्वैच्छिक संस्थाक सुनील कुमार चौधरी, महेन्द्र लाल कर्ण एवं प्रो. गंगा राम झा प्रश्न, समस्या एवं सुझाव प्राप्त कयलनि।। (विदेह पेटारसँ) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। उमेश कुमार महतो (पुत्र श्री केशव महतो, बहादुरगंज स’ रिपोर्ट) बाढक स्थिति बडे खतरनाक रहल, आब कोना के ओ बीत गेल। हमर सभक गाममे कोनो राहत कर्मी नै अएला, नेता सभ चुनाव मे अबै छथ, मुदा रौदी दाही मे नै। गाममे सरकारी स्कूल अछि, सप्ताहमे दू दिन खुजल रहै ये, कशीबारी मे। चारि दिन बन्दे रहै ये। गामक लोक खेती बारी करै ये , धान,गेहूँ परवल खीरा, करैला, कद्दू ,तारबूज ,गोभी, बैगन आ मछली मारै ये। विराटनगर नेपाल मे सेहो लोक सभ सम्बन्धी सभ छथि, 20 किमी दूर बहादुरगंजमे हास्पीटल अछि, गाममे झोलाछाप हास्पीटल अछि जे झोलाछाप डाक्टरक झोरामे रहै ये। पिछला साल एक गोटे के बहादुर गँज हास्पीटल् ले गेलौ, डाक्टर सभ पानी चढा देलकै , तीन दिन तक पानी चढैते रहलै, कियो खेनाइ नै देलकै, ओ पेट फूलि क मरि गेल। घर सभ फूसक आ घासक, धानक पुआरक बनल छै, अगिलग्गेमे से सभ जरैत रहैत छै। एक-एक्अ आदमी के 5-6 टा बच्चा जिबैत रहैत छै, 9-10 बच्चामे। विराटनगर लग गाम मे मौसाक घर गेलौ, ओतए सरकार मैथिली या नेपाली बाजय लेल कहने अछि, सभ गोटे ओत मैथिली बाजै छथि, भारतमे स्थिति खराप। नेपालमे घर फूसोके छै मुदा बेसी लकडी आ टीना के छै। ओत खेती बारी भारते जेका छै। ओतहुओ हास्पीटल दूरे छै। ओते रिक्शा टेम्पू नै चलै छै, खाली बस चलै छै। ओत गाम्मे सेहो बिज्ली छै, गाममे मुदा रोड नै छै, ऊबर खाबर छै, बरसातमे कीचड्क्ष भे जाइ छै। शहरमे रोड ठीक छै। विराटनगर से 20 किलोमीटर दूर नया बजार हटियामे आधा बजार मे बजार आ आधामे दारू बिकाइत छै, जतए छोट से पैघ बच्चा सभी दारू पीबै छै। आर समाचार बाद मे। (विदेह पेटारसँ) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। गजेन्द्र ठाकुर मैथिली सी.डी. एल्बम धनीराम महतो (सल्हेश आदि दरभंगा रेडियो स्टेशन- आब अनुपलब्ध- दरभंगा रेडियो स्टेशन अपन आर्काइवसँ एकरा निकालत तहूपर संदेह) कारिक झूमर- जागे महतो आ जागे राउत (गंगा कैसेट्स) सोखा झूमर- जागे महतो आ जागे राउत (टी सीरीज) गोविन्द झूमर- जागे महतो आ जागे राउत (गंगा कैसेट्स) गहील माता के पूजा- बिरासी सदा (गंगा कैसेट्स) काली माइ के पूजा- बिरासी सदा (गंगा कैसेट्स) भुइंया बाबा के पूजा- बिरासी सदा (गंगा कैसेट्स) गंगा माइ के पूजा- बिरासी सदा (गंगा कैसेट्स) भुइया बाबा -भगैत प्रसंग- रमाकान्त पजियार (गंगा कैसेट्स) बाबा बख्तौर भुइया बाबा- सकलदेव दास आ साथी (सुप्रीम वीडियो) भक्त ज्योति (भगैत प्रसंग)- रंजीत पजियार (नीलम वी.सी.डी.) बैताली यादव- तपेश्वर यादव आ कामेश्वर यादव (गंगा कैसेट्स) कुँवर बृजवान- (गंगा कैसेट्स) [गीत मैथिली संवाद हिन्दी] भुखना-भुखनी- राम खेलावन महतो, नेथल मण्डल, महीन्दर यादव, राम असेश्वर दास, हेमू मुखिया आ बिल्टु मुखिया [गीत मैथिली संवाद मैथिली] रेशमा चूहड़मल- रामवृक्ष ठाकुर एण्ड पार्टी (गंगा कैसेट्स) [गीत मैथिली संवाद मैथिली आ हिन्दी] राजा सल्हेश- विदेशिया नाच पार्टी, देवेन्द्र साहनी आ पार्टी (गंगा कैसेट्स) [गीत मैथिली संवाद हिन्दी] आल्हा रुदल झगरू बध- - विदेशिया नाच पार्टी, देवेन्द्र साहनी आ पार्टी (गंगा कैसेट्स) [गीत मैथिली संवाद हिन्दी] संत बाबा करू खिरहरी- रुदल पजियार (जयश्री कैसेट्स) [गीत मैथिली आ हिन्दी संवाद हिन्दी] (विदेह पेटारसँ) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३. पद्य ३.१.जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’- २ टा बाल गजल ३.२.आनन्द कुमार झा- दुर्दशावस्था ३.३.आनन्द कुमार झा- एकटा नव कहानी गढबाक अछि ३.४.प्रदीप पुष्प- २ टा रुबाइ ३.५.रमन कुमार झा- केबार(पराती) ३.६.रमन कुमार झा- हमरा आंगन ३.७.रमन कुमार झा- टपटप नोर चुबैय ३.८.रमन कुमार झा- मनभावन मइया मोरी ३.९.अशोक दुलार- परतारब फेर जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’ २ टा बाल गजल १ राति सकाले सुतबै हम भोरे-भोरे उठबै हम नमस्कार करबै सभकें सबहक आदर करबै हम आसन-प्राणायाम करब तन-मन निरोग रखबै हम नहि ककरो हम दुख देबै मधुर सत्य टा बजबै हम हम छी सबहक सभ हमर अहिना सभ दिन बुझबै हम मेल-जोल राखब सभसं नहि ककरहुसं लड़बै हम जहिना रहला राम-लखन तहिना सभदिन रहबै हम ( मात्रा-क्रम : 2 2 2 2 2 2 2 ) दू टा लघुकें एक दीर्घ मानल गेल अछि | छठम शेरमे एक-एक टा लघुकें दीर्घ मानल गेल अछि | २. आखर अकानिक’ चलू लक्ष्य संधानिक’ चलू एलहुँ कतयसं कोना पहिने इ जानिक’ चलू खेल थीक जीवन ई आबो त मानिक’ चलू अहूँ छी हनुमानजी सागर इ फानिक’ चलू काज देत बरखामे छत्ता इ तानिक’ चलू ( मात्रा-क्रम : 2 2 2 2 2 2 ) दू टा लघुकें एक दीर्घ मानल गेल अछि | ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। आनन्द कुमार झा दुर्दशावस्था चित्रसॅ मिलबैत आसमानी आसमानकेॅ जखन देखैत देखै छी वर्तमान पीढीकेॅ तॅ चिन्तित हएब स्वभाविक प्रक्रिया थिक आसमानी आकाशक बढि रहलै अछि दिनानुदिन दुर्दिन दुर्दशा चहुॅओरसॅ घेरने जा रहलै अछि ओकरा प्रलयकारी निहारिका जे धुल धुआॅक साम्राज्य थिक सम्पूर्ण आकाशकेॅ छेकने जा रहल अछि ओकर प्रकाशपुंजकेॅ प्रकोपित केने जा रहल भूमण्डलीय आभा-मण्डल छहोछित भेल ओकर बिलएल जा रहल अछि विकार रहित हवा प्रकाश पानि परिवर्तित भेल जा रहल अछि आकाशीय नीलिमा ठीक ओहिना जेना नीलिका मुद्रणकेॅ करिआ मुद्रणक पट्टीसॅ झाॅपल जा रहल हो कि आब नहि देखि सकब निर्मल नील आकाश जे प्रेमक प्रतीक रंग थिक ! कवि - आनन्द कुमार झा मेंहथ , झंझारपुर , मधुबनी पिन - 847404 ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। आनन्द कुमार झा एकटा नव कहानी गढबाक अछि एकटा नव कहानी गढबाक अछि सुरूज दिस डेग बढेबाक अछि नित्य निरन्तर नव खोजसॅ अपन प्रतिभा अपन सोचसॅ जगकेॅ अचम्भित करबाक अछि एकटा नव कहानी गढबाक अछि सुरूज दिस डेग बढेबाक अछि विघ्न - बाधासॅ भयमुक्त भएकेॅ ओस - धोन्हिक सूक्ष्म जलकणसॅ ओसाओन सन पवित्र भएकेॅ आॅगा सत्यभुवन दिस निकलबाक अछि एकटा नव कहानी गढबाक अछि सुरूज दिस डेग बढेबाक अछि सप्तॠषिक चरणकेॅ छूकेॅ नौओ ग्रहक नौ धुरि - रंगधूसर लएकेॅ नव रंगोली सजेबाक अछि एकटा नव कहानी गढबाक अछि सुरूज दिस डेग बढेबाक अछि सी•वी• रमणक काजक आॅगा अब्दुल कलामक खोजक आॅगा कल्पनाक उड़ानक आॅगा हमरा लोकनिकेॅ उड़बाक अछि एकटा नव कहानी गढबाक अछि सुरूज दिस डेग बढेबाक अछि ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। प्रदीप पुष्प २ टा रुबाइ १ कर्म -घटल लोक निज हाथक लकीर दूसैए छैक युगक दोष तें प्यादा वजीर दूसैए जे क' सकल ओरियानो नै कनेक अदहनके' खिच्चड़ि सन लोक से ओ आइ खीर दूसैए ( २११२ २१२२ २१२१ २२२) २ जिनगी मोटका चाउर भेल जा रहल बिन ब्याहेक चिलकाउर भेल जा रहल ओ नै संग छोड़त कहियो भरोस छल सपना सोन सन ई छाउर भेल जा रहल ( 22212 2221212) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। रमन कुमार झा केबार(पराती) मइया उठियौ यइ जग जननी खुजलैइन भैरव के केबार, खुजलैइन भैरव के केबार हम सब सोझा में छी ठार, मइया उठियौ यइ जग जननी खुजलैइन भैरव के केबार।। ककरो हाथ कमंडल मइया ककरो हाथ में हार, हिलमिल सब करय छी मइया आही केऽ जयकार, मइया उठियौ यइ जग जननी खुजलैइन भैरव के केबार।। भोरहरवे सऽ बैसल छी मेऽ अही केऽ दरबार, दरशन दियउ काली मइया सुनियौ हमर पुकार, मइया उठियौ यइ जग जननी खुजलैइन भैरव के केबार।। दीनानाथ उगलखिन मइया मिटलय जग अनहार, अहुँ अपन पट खोलियौ मइया अहुँ अपन पट खोलियौ मइया विनती करू स्वीकार, मइया उठियौ यइ जग जननी खुजलैइन भैरव के केबार।। मनोकामना पुरा करियौ बैसल छी बैसार, रमन पराती गबैयेऽ मेऽ सब पराती गबैयेऽ मेऽ खोलियौ अपन केबार, मइया उठियौ यइ जग जननी खुजलैइन भैरव के केबार।। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। रमन कुमार झा हमरा आंगन कहिया एबय हमरा आंगन कहितउ तऽ रहितउ यइ, नय तऽ हम जाय छी मइया अही के तकय लेल यइ, ताईक हाइर हम थकलउ मइया कहाँ कतउ भेटलउ यइ, तइयो मोऽन नय माने माइ हिया नय हारलउ यइ, दर्शन दुर्लभ भेल भवानी दौड़ धूप बड्ड केलउ यइ, जइयो नय सकय छी माइया तइयो जोड़ लगाबी यइ, जा धैर नय भेटब मइया ता धैर बौएबय यइ, मान अपमान सब सऽहबय मइया अही लग रहबय यइ, अहाँ बिन किछ निक नेऽ लागे टुग्गर भेल घुमय छी यइ, सब पुछैयेऽ मेऽ कतऽ छउ ककरा कि कहियइ यइ, हइया एलउ हौउऐऽ एलउ कहि -कहि खूब ठकय छी यइ, सपना मे अबय छी माइ सोझा नय खटकय छी यइ, कि कहुँ अहां के मइया सबटा अहाँ बुजहय छी यइ, बेटा कुहरैये माइ अहाँ टहलय छी यइ, टुटल जइये आस हमर मेऽ उम्मीद नय छोड़य छी यइ, मेऽ नय तऽ कियो जग में एतबेऽ टा बुजहय छी यइ, अय सऽ बेसी ज्ञान नय देलउ ते अही सऽ कहय छी यइ, कहल सबटा करब माइ कहु कि कहय छी यइ, रमना रमल अय माइ सेऽ कियेऽ नय बुजहय छी यइ, जइन बुइझ कऽ हमरा माइ नटनी नाच नचबय छी यइ अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। रमन कुमार झा टपटप नोर चुबैये टपटप नोर चुबैये यइ मइया किछ कहलो नेऽ जाइये, कहलो नेऽ जाइयेऽ हमरा रहलो नेऽ जाइयेऽ टपटप नोर चुबैयेऽ, यइ मइया किछ कहलो नेऽ जाइयेऽ मोन केनाऽ दइन करैयेऽ यइ मइया किछ कहलो नेऽ जाइयेऽ, काली काली रटैयेऽ यइ मइया किछ कहलो नेऽ जाइयेऽ, टपटप नोर चुबैये यइ मइया किछ कहलो नेऽ जाइयेऽ, कोन कसूर केलउ यइ मइया हमरा बजलो नेऽ होइयेऽ, चिंते माथ फटैये यइ मइया हमरा सहलो नेऽ जाइये, सहलो नेऽ जाइये हमरा बजलो नेऽ होइयेऽ टपटप नोर चुबैयेऽ यइ मइया किछ कहलो नेऽ जाइयेऽ, जीनगी पहाड़ लगैये यइ मइया हमरा उघलोऽ नेऽ होइयेऽ , उघलो नेऽ होइये हमरा छोड़लो नेऽ जाइये टपटप नोर चुबैयेऽ यइ मइया किछ कहलो नेऽ जाइयेऽ, काली काली रटैयेऽ यइ मइया हमरा उठलो नेऽ होइयेऽ, उठलो नेऽ होइयेऽ हमरा बैसलो नेऽ होइये टपटप नोर चुबैयेऽ यइ मइया किछ कहलो नेऽ जाइयेऽ, अही लेल अतमा कनैयेऽ यइ मइया हमरा दनशन नेऽ होइयेऽ , दरशन नेऽ होइयेऽ हमरा मुक्ति नेऽ भेटैयेऽ टपटप नोर चुबैयेऽ यइ मइया किछ कहलो नेऽ जाइयेऽ, अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। रमन कुमार झा मनभावन मइया मोरी मनभावन मइया मोरी मानु हमर बात यइ, हमरे आंगन रहियौ मइया हरदम हमरे संग यइ, पुजा करब आरती करब करब नय मेऽ तंग यइ, अही केऽ कहल मेऽ करब रहब सैदखन संग यइ, छोइर कतउ नय जेब मइया जी हजुरी करब यइ, जे जुरबय सेह खेबय मेऽ कहियो किछ नय मांगब यइ, मनभावन मइया मोरी मानु हमर बात यइ, हमरे आंगन रहियौ मइया हरदम हमरे संग यइ, बड्ड सोहनगर लगतय मइया घर आंगन उमंग यइ, अहाँ के देख देख मइया नचतय अंग अंग यइ, दिन राइत ओगरब मइया सुख दुख सबटा कहब यइ, ससरब नय हम कतउ मइया अही लग रहब यइ, मनभावन मइया मोरी मानुँ हमर बात यइ, हमरे आंगन रहियौ मइया हरदम हमरे संग यइ सबहक सुइध लियउ हमरे घर रहिकऽ यइ, राज काज समहारू मइया अंतरयामी बइनकऽ यइ, रमन केऽ अरहबियौ मइया जे कहब सेऽ करब यइ, रानी बइन कऽ रहियौ मइया रमन नोकर चाकर यइ, मनभावन मइया मोरी मानुँ हमर बात यइ, हमरे आंगन रहियौ मइया हरदम हमरे संग यइ अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। अशोक दुलार परतारब फेर बुझले अछि परतारब फेर, काज ससारब टारब फेर। पहिलुक बेर'क नहि थिक बात मुइले के पुनि मारब फेर। जे घर चूबै तकरे छाड़ि छाड़ल चारे छाड़ब फेर। पौती पेटार उसारल त' बँचलो कैंचा झाड़ब फेर। मिहिया मिहिया कुरहड़ि भाँजि फारल जाड़नि फारब फेर। मुहछी मारय भोजक बेर हमरे मोहल्ला बाड़ब फेर। मेल मिलाप सहन नहिं होय कठिया लाड़नि लाड़ब फेर। गादी चढ़िते बदलै मोन कुनबा अपनहि तारब फेर। सुनगै कनियों धुंआँ-धुकुर घीउ अँहीं ने ढारब फेर। जीते जीत सदा परतीत पुनि पुनि हमहीं हारब फेर। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ४.स्त्री कोना (सम्पादक- इरा मल्लिक) ४.१.शशि महेंद्र- स्त्री ४.२. तनुजा दत्ता- नारीक अंनत रूप ४.३.चंदना दत्त- माँ ४.४.चंदना दत्त- फागु ४.५.दीपा झा- मुढ़ी -कच्छ ४.६.दीपा झा-दादी परी (नेन्ना -भुटका लेल) ४.७.आभा झा- कनियें ४.८.आभा झा- जोड़- घटाव ४.९.प्रियम्वदा तारा झा- अजगुत ४.१०.प्रियम्वदा तारा झा-परंपरा मैथिली वेब पत्रकारिता विशेषांक ४.११.मीना झा- मैथिल समाज ऑफ़ यु. के. केर तेसर वार्षिक समारोहसमाचार: ९.४.२०११ ४.१२.पूनम मण्डल- टैगोर साहित्य पुरस्कार २०११ शशि महेंद्र स्त्री एक स्त्री जे नहिं सिर्फ स्त्री होयत अछि जेकरा में होयत अछि प्रकृति के सब गुण एक स्त्री, पहाड़ जेना अटल जेकर दृढ़निश्चय नहिं डगमगायत एक स्त्री, फूल जेना कोमल प्यार सं सम्हारू,नहिं तऽ मुरझायत एक स्त्री में, चिड़िया जेना हौसला तिनका तिनका जोड़ि नया घर बसायत एक स्त्री, नदी जेना चंचल समय के धार संग बहैत जायत एक स्त्री, गाछ जेना सृजनशील सृष्टि सृजित करैत जायत एक स्त्री, चान जेना शीतल चाँदनी राति जेना शीतलता बरसायत एक स्त्री जे नहिं सिर्फ स्त्री होयत अछि जे होयत अछि प्रकृति के हर गुण सं भरल जे होयत अछि प्रकृति के हर गुण सं भरल|||||||| अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। तनुजा दत्ता नारीक अंनत रूप नारी अहाँ जीवनदात्री , वंश वृक्ष के रोपण छी ! सृष्टि के आधार अहाँ ,मातृ शक्ति के पोषण छी ! संयम,करुणा,दया भाव, वृहत गुण के खान छी ! कोमल हदय,सरल जीवन, ईहै अहाँ के शान छी ! विपदा होय समक्ष त बनलौं माँ दुर्गा अवतार! सहनशीलता,मान मर्यादा,शक्ति के भरमार ! बनि स्वरूप लक्ष्मी बाई करैत छी शत्रु संहार ! त्याग भावना राखि, बनबय छी सुंदर घर संसार ! आँखि में दर्द क सागर, मुख पर रहल मुस्कान! दु:ख नुका लेलौं आँचर में,अहाँ के अछि पहचान! प्रगति होयत समाज देश के,रहथि वृहत योगदान ! सभ क्षेत्र में भेट रहल, पुरूष संग नारी के सम्मान ! साहस अरु प्रेम के मूरत,केने छथि हर मुकाम हासिल ! माँ,बहन,बेटी नारी में हर रंग अछि शामिल ! अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। चंदना दत्त माँ माँ अहांँ हमर अथाह प्रेमक सागर मां अहांँ बिनु नहि हमर कोनो अस्तित्व बनल रहलहुं ढाल सदिखन गर्भ सं भूमि धरि जीवन बनल धरोहरि पाबि अहांँक स्नेह आ प्रीति बनलहुं अहीं हमर ज्योति जखन छल घटाटोप अन्हार माँ अहीं हमर अथाह प्रेमक सागर. जीवन अछि अहींक देल अहाँक कर्मठता आ सीपसन नेह नुका कए रखलक सब अन्हर बिहाडि़ मे नहि पडय देलक रौद बसात हमरा पर रखलहुं अहां सदिखन लगाय ह्दय सं खुऐलहुं हमरा खोआ स्वयं रहि उपास मां सीखेलहुं केनाय नीक कर्म नहि बाजि कटु सत्य राखि सबहक मोन मुदित मां अहां हमर मान हम अहां क गुमान अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। चंदना दत्त फागु आय खेलब हम फागु सखी हे आय खेलब हम फागु. भरि मिथिलामे अनघौल मचल अछि रंग अबीर गुलाल घोरल अछि एकदिस खेलथि रामजी पहुनमा संग सखीके सिया लली छथि घोरल इनारमे भंग सखी हे आय खेलब हम फागु मातु सुनयना रानी पुआ पकाबथि जीमय छथि राम चारु भैया जुडा़ बथि मिथिलानि नयनमा उड़े चहुंओर केसरगुलाल सखी. हे आय खेलब हम फागु. गमगम गमके आमक मज्जरि महमह महके अड़हुल बेली चहुंदिस पसरल मादक सुरभि रमि गेला पहुनमा मिथिला क गली सखि हे आय खेलब हम फागु -चंदना दत्त ,रांटी अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। दीपा झा मुढ़ी -कच्छ बंसबट्टी स सरसराईत, हबा बहैछै साईँ -साईँ, केस सबटा ओझरा जाए छै, हम आइख झाँपैत , धुक्कर स बचाबैत , बसेसर कक्का क मचान पर, बइस ठाट स मुढ़ी-कच्छ छी खाइत । अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। दीपा झा दादी परी (नेन्ना -भुटका लेल) " गे बुचिया ,कक्खन से बजबै छियाऊ , एमहर आ ने। ", बरखा के दाई ओकरा सोर केलखिन। बरखा जल्दी जल्दी अपन कोठली स, अपन झोरा समेटैत बहरेलै । " हैया भा गेल दाई। सब टा चीज ओरिया ब मे समय लागई छै ने। अहा बड हड़बड़ा दई छी।" दाई बरखा संगे बिदा होइत बाजलि ," तोरे दुआरे कहैछियौ। जौं बाबू आइब जैथुन ता फेर सवाल के झड़ी लगा देता। तू ता बुइझते छिहीन की तोहार बाबू के तोहर कन्या सब के मेहँदी लगेनाइ एकदम पसीन नै छ। ओकरा आबा स पहिने बिदा भ जाएब ता पाछाँ हम सम्हाईर सकै छी। " बरखा महेंदी लगाब मे बड कुशल छल्ले। बच्चे स जेना ओक्कर आँगुर मेहँदी के घोल के अपन मन मुताबिक़ घुमा दाई छल्ल। जे डिज़ाइन , जे आकार आर जे कल्पना बरखा कैरथहै , स्याः हाथ पर उभर जाए छल्ल। ओना ता बाबू बड प्रसंसा कराई छेलाह , मुदा दोसर घर जा के ,सादी -बियाह म बरखा ई काज करे , से हुनका नै पसीन छल्ले। एही समय म बरखा के दाई आगू एलखिन। ऊ अपन बेटा के बात स सहमत नै छलाह , मुदा बेहेस करनाइ उचित नई बुझै छेलखिन। कहीं बात के बतंगड़ न बैन जाए -एहि दुआरे। मुदा दाई ता छलखिन दाई ! हुनकर दृढ बिचार छल्ले की बेटा- बेटी एक सामान होइ छै , आर कोनो काज ऊछ नई होइ छई। जाबैत तक बरखा के हाथ मेहँदी लगा ब मे बैइस नई जाए छै , दाई ई जिम्मा अपने पर लेलखिन की बरखा के प्रयास मे कोनो कमी न रहे, सुआइत ऊ कोनो न कोनो बहाने अपन पोती क कला मे बाधा नई उत्पन्न होबा देलखिन। ऊ अपन प्रगतिशील बिचार स आर स्नेहपूर्ण आचार स बरखा क उत्साहित राख्लखिन। बरखा के परी छली ओ ! अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। आभा झा कनियें "बौआ हौ!काल्हि भिनसरे उठिए जैअह!" "से की छै काल्हि?" "तिलासंकराति।" "ओह! हम नञि मानै छी ई सब।अनेरे निन्न नञि तोड़िहें।" "बौआ,उठह न,कनियें ओंठगन क' लैह, काल्हि जितिया छै।" "मां,ई सभ अनेरुआ टिटिंभा तोहीं कर।" "बौआ,एना अगरजित नञि बन'।संझुका अर्घक बेर नेपत्ता छलह,भोरका मे त' उठि जा, दीनानाथ सद्बुद्धि देथुन!" "माॅं,तोरा बूझल छौ न जे हम साइंसक विद्यार्थी जी,एहि सभ पर हमरा आस्था नञि!" "आइं हौ!पीबि क' आयल छह!" "माॅं,क्रिसमसक पार्टी छलै,ओइ मे दोस्त सभ जिद केलकै,त' कनियें….. -आभा झा, ३१.१२.२०२० अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। आभा झा जोड़- घटाव असन्तोष, अलगाव भरल ई वर्ष न किछु उम्मीद बचल व्याल कराल व्याधि-विष व्यापित, विकल विश्व अछि कानि रहल। वृत्ति छिनायल ,क्षुधा - पिपासा केर तम अति घनघोर बनल भेल अधोमुख अर्थ- नीति, हिय चिन्ता केर अछि शूल गड़ल।। एहनो विषम परिस्थिति देखू, शासन- कर्दम -दाॅंव पक्ष वा कि प्रतिपक्ष सभक अछि कुटिल कुमार्गे ठाॅंव सत्ता हित रचइत प्रपंच केर, नञि भारत टा ग्रास "हमहीं ","केवल हमहीं ",स्वार्थक घोष बनल विकराल ।। कोनो मांग बनैछ जिद जॅं, तुमुल विचारक रण अछि भाव्य बाग राजसी वा किसान केर अविश्वास- विप्लव अछि प्राप्य । भूख,गरीबी,व्याधि हटौ वा केन्द्र बनौ समरसता ,हाय! जनहित गौण,प्रेम परिणय पर बन्धन अछि सत्ते सम्भाव्य।। वर्ष ,मास,दिन, ऋतु परिवर्तन ई सभ सहज प्रकृति केर हाथ बीस बीस केर साल जगत पर ,कुलिशोपम क' देलक घात।। करुण गुहार सुनू हे भगवन्! आब न सह्य ई विषम प्रहार करू कृपा छॅंटि जाय कुहेसो,आशा- रवि निज खोलय द्वार।। पुनः उगय नव वर्ष नवल उम्मीदक दिनकर नभ मे वृत्तिहीनता, क्षुधा, विपर्यय न हो विवशता एहि भू मे । सम पर जीवन आबि सकय, हम जुटी समर मे नेने आस जे किछु छूटल, पुनः समेटब ,जागय मन मे ई विश्वास । -आभा झा, ३०.१२.२०२० अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। प्रियम्वदा तारा झा अजगुत देखियौ ,अहांस बनै-बूझै छियै , ई कानून सब कृषि सुधार लेल बड्ड जरूरी छै। ई सरकार किसान सबहक कल्याण लेल कृत संकल्प छै। अहां सबहक फैदा लेल सब टा काज कैल जा रहल छैक आ उनटे अहीं सब विरोध कऽ रहल छी। बुझना जाइत अछि , अपने सब कोनो बड़का साजिश के शिकार भऽ रहल छी, एहि भ्रमके त्यागू आ एहि महत्वाकांक्षी योजनामे सहयोग देल जाउ। नेताजी लागल छलाह , लोक सबके बुझैबामे। ताबते , पूरन जे काज सऽ बाहर जाइत छल , मुदा नेताजीके देखि ठमकि कऽ गप्प सुनबा लेल ठाढ़ भऽ गेल छल , अचकचा कऽ बाजि उठल , ई तऽ बड्ड अजगुत बात भेलै नेताजी। अपने फैदा बला काज करै छियै , लेकिन हिनका फैदा नै चाही। छोड़ि दियौ नऽ फेर, कथी लेल जबरदस्ती उपकार करैपर तुलल छियै ? अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। प्रियम्वदा तारा झा परंपरा समाजमे परिवर्तन हमरे सब सऽ हेतै। पुरनका सड़ल , गलल व्यवस्थाके आब काटि कऽ फेकि देबाक समय आबि गेलै। कतेक लोकक आत्मसम्मान छीनि बैसल छै ई रीति-रिवाज। सबके सम्मान सऽ जीबाक एक्के रंग अधिकार छै। हमरा एहि अमानवीय समाजक परंपराक हिस्सा नहि बनबाक अछि। पितामही केर भगवानक पूजा पर बैसबाक अनुरोध पर बजैत, अग्निश्च , वायश्च होइत घऽ र सऽ बहरा गेला मयंक। मेनरोड पर अबिते परम मित्रके फोन अयलैन्ह , जल्दी पेसिफिक माॅलमे पहुंचि जाह , प्रशांतके जन्मदिन छै , माॅलमे सेलेब्रेशनके अप्पन सबहक ट्रैडिशन बिसरि गेलहक की ? मयंक कैब बलाके जल्दी चलबाके निर्देश देबऽ लगलाह। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। मीना झा मैथिल समाज ऑफ़ यु. के. केर तेसर वार्षिक समारोहसमाचार: ९.४.२०११ आइ लंदनक स्लौवक ४०० वर्ष पुरान ऐतिहासिक किला बेलिस हाउस ( Baylis House , Slough ) लंदनमे मैथिल समाज ऑफ़ यु. के. केर तेसर वार्षिक समारोह भेल। एहि समारोहमे भारतसँ मुख्य अतिथि मैथिलीक सुप्रतिष्ठित लेखिका एवं मैथिलीक महादेवी वर्मा डॉ. शेफालिका वर्मा आयल छलीह। समारोहक आरम्भ बालिका पारुल क गायत्री मंत्रपर भारत नाट्यम नृत्यसँ भेल. डॉ. विभाष मिश्र संबोधन मे मैथिल समाज केर परिचय देलनि ,डॉ.. अरुण कुमार झा (बर्नली ) अध्यक्ष मैथिल समाज , उद्घाटन भाषण केलनि 'हम सब मैथिल समाजक स्थापना संयुक्त राज्य मे बसल मैथिल सब कोना अपन संस्कृतिक रक्षा क सकी. खास कय हमर ब्रिटिश युवा वर्ग अपन देस कोस के नै बिसरैथ, हम की छी से जानैथ, अपन परंपरा अपन संस्कृति के ज्ञान हुनका रहैक ,अपने सब देखैत छी जे कतेक ब्रिटिश युवा एहि मे आय भाग ल रहल छैथ...' . डॉ. कल्पना झा समारोहक विषय मे विस्तार से सब बात कहलनि. . श्रीमती ज्योति झा चौधरी मिथिलाक टूर पर अपन प्रोजेक्ट देखोलनी ,जाहि मे मिथिलाक संस्कार संस्कृतिक झलक छल. डॉ. रीता झा अपन प्रोजेक्ट स्त्रीक स्वास्थ्य एवं स्तिथि भारत मे कोन दयनीय अवस्था मे छैक से अपन प्रोजेक्ट से जाहिर केलनि, लोग के आह्वान केलनि जे एहि स्तिथिक रोक्वाक उपाय कयल जाय..डॉ अरुण कुमार झा (लन्दन ) अपन प्रोजेक्ट मे कन्या महाविद्यालय ,जनकपुर के देखोलनी ,जाहि मे स्कूल कोना चलि रहल अछ,कोना ओहि स्कूल के कंप्यूटर आदिक सुविधा उपलब्ध करोलनी. सब स आग्रह केलनि जे हम सब जे अपन लैपटॉप सब जे कनिको ख़राब होयत छैक टकरा फेकी दैत छी, से नहि क एकठाम जमा करी ओकरा अपन देस कोस मे भेजवाक प्रबंध करी...ठसाठस भरल हॉल मे सब मन्त्र मुग्ध सन सुनि रहल छलाह..डॉ. अरुण झा क पत्नी श्रीमती मीना झा जे स्वयं मैथिली मे लिखैत छैथ पूर्ण सहयोग द रहल छलीह समारोह मे डॉ. रामभद्र झा , डॉ. कौशलेन्द्र कर्ण, डॉ. मिथिलेश झा आदि सबहक सहयोग छल. ..तकर बाद, डॉ.नूतन मिश्र क आग्रह पर डॉ. कलाधर झा मुख्य अतिथि डॉ. शेफालिका वर्मा क परिचय करोलनी-- कोना हिनकर विषय मे केरला सरकार की सब लिखने छैक,कोना हिनक कविता सब यु.के. क पाठ्य क्रम मे छैक. ...' एहि से पहिने बालिका पारुल आ वत्सला ----- राधा कृष्ण पर बड सुन्दर नृत्य नाटिका प्रस्तुत केलनि . समारोहक दोसर सत्र खुलल आकाशक नीचा बासंती उपवन मे मुख्य अतिथि डॉ शेफालिका वर्मा के भाषण स शुरू भेल. ओ अपन भाषण मे मिथिलांचलक अतीत केर परिचय दैत,बजलीह.. विदेशक एहि भावभूमि पर अपन मिथिला देश के देखि रहल छी.मैथिल समाजक ई ओ समारोह अछ जाहि ठाम ह्रदय ह्रदय स जुडैत अछ ,बुध्धि बुध्धि स, चिंतन चिंतन स ..सब स पहिने हम अपन हार्दिक आभार प्रकट करैत छी जे अपने सब ई सम्मान हमरा देलों. हम कत्तो मिथिला मैथिली शब्द देखैत छी ते हमर मोन प्राण अद्भुद रूप स झंकृत होम लगैत अछ. अपने सब विदेश मे रही अपन समाज के नै बिसरल छी..एहि लेल अपने सब के बेर बेर नमन... सौँसे पृथ्वी पर यदी हम घूमी आबि ते सब ठाम कत्तो ने कत्तो एक टा छोट मोट मिथिला अवस्य भेटि जायत. मिथिलाक संस्कृति,मिथिलाक संस्कार हमरा बुझने विश्व मे स्एतते कत्तो होई. वास्तव मे मिथिला आधा बिहार मे छपल अछ,लागले पडोसी देश नेपाल ते मैथिली स महामंवित अछ..पहिने दरभंगा ,समस्तीपुर मुझफरपुर ,भागलपुर स लक सहरसा, सुपौल मधेपुरा कटिहार पुरनिया सब मिथिले थीक..कहल जैत छैक जे चारि कोस पर पानि बदले, पांच कोस पर वाणी ...यानि सब ठाम मैथिलीक उच्चआरण अपन अपन क्षेत्र क अनुसार होइत अछ..जेना विश्व भाषा अंग्रेजी के मानल गेल छैक जाहि मे कतेको स्थान के अंग्रेजी उच्चारण समाहित अछ ..हं, ई आन गप थीक जे मुझफरपुर बज्जिका बनि गेल, ते भागलपुर अंगिका के जन्म द देलक,किन्तु, सबहक ह्रदय मे मैथिलीक संस्कार ओहिना अविरल रूप से प्रवाहित होइत रहैत अछ.. , पुनः ओ विद्यापति क गीत स मैथिलीक कव्यधारक उत्पति कहैत लोकप्रिय साहित्य बनेवा मे प. हरिमोहन झा के साहित्य रचना के बड़का योगदान कहलनि....आजुक वैचारिक क्रांति ,वैज्ञानिक क्रांति क उल्लेख करैत ओ कहलनि जे संचार क्रांतिक एहि युग मे सओनसे विश्व एकटा गाम बनि गेल . हम सब देशक नै वरन विश्वक नागरिक बनि गेल छी. आय दुनियाक एक कोन स दोसर कोन धरि सोझे संवाद क लैत छी..एहि से मैथिली साहित्य के बहुत फायदा भेलैक ..नेट पर मैथिली पत्रिका सब अबी लागल ,मिथिलाक खबर अबए लागल.जाहि मे मिथिला मंथन ,मैथिल मिथिला , अनचिन्हारआखर, विदेह .कॉम आदि बहुतो पत्रिका नेट पर अवैत अछिमुदा, असगरे विदेह पत्रिका जे प्रसिद्ध साहित्यकार गजेन्द्र ठाकुर क सम्पादन मे शिव कुमार झा, उमेश मंडल आदिक संयोजन मे बंगला ,उड़िया, तमिल,तेलगु, कन्नड़, ,मलयालम, गुरुमुखी आदि लिपिमे छपैत अछ. एकटा सर्वेक्षण के अनुसार २००४ स आय धरि विदेह १०७ देश के १०७२६, ठाम स ५७,००० लोग ,२००९४९९० बेर एहि पत्रिका के देख्लनी, सब स पैघ गप छैक जे नव लेखनक प्रतिभा के उजागर कयल गेल ,आ सब जाती पातिक प्रतिभा के उजागर कयल गेल . दिल्ली स मिथिलांगन , अंतिका, कोलकाता स कर्नामृत ,मिथिला दर्शन, बम्बई स मिथिला दर्पण, आसाम स पूर्वोत्तर मैथिल, पटना स समय साल, घर बाहर, झारखंड स पक्षधर आदि आदि कतेको पत्रिका बहराय रहल अछ मुदा सब टा नेट स जुडल अछ.. हम हुनका सब के कहलों जे मैथिली पुस्तक एक से एक प्रकाशित भ रहल अछि मुदा बाज़ार नै छैक. सरकार nai ते विश्व विद्यालय के भरोसे छैक. अहाँ सब पुस्तक एहि ठाम मंगाऊ आ हिन्दीक पोथी पुस्तकालय मे एहिठाम अछिमैथिलीक पोथी किएक नै....मिथिला मैथिली बहुत तरहक समस्या स ग्रस्त अछ ओकर समाधान क सेहो सोचु....
दिल्ली सरकार क मैथिली भोजपुरी अकादेमी से बहुत काज मैथिली लेल भ रहल छैक...यानी मैथिलीक चहुमुखी विकास भ रहल अछ. तैयो मिथिलांचल बाढ़ी,रौदी,दाही , बेरोजगारी आदि समस्या स ग्रस्त अछ..सब स पैघ बात ओ कहलनि जे नबका पीढ़ी अपन भाषा बिसरल जा रहल छथि देश विदेश सब ठाम ,.. ई एकटा गंभीर प्रश्न सभक सोझा मे छैक, एहेन नहि होई जे एकदिन अपन मूल गामो बिसरी जित हवाक वेग मे पानि मे हेलैत जडविहीन भाखन जकां हेलैत रही जाय...मिथिलाक नारी लेल सेहो ओ कहलनि कोना अपन अस्तित्व लेल छटपटा रहल छथि, स्त्री के सुरक्षित नै स्वरक्षित हेवाक चाही ,निर्णय लेवाक क्षमता हेवाक चाही. भाषण क अंत अपन कविता स केलनि..हमर घर कते हेरा गेल ; कतेको श्रोता क आंखी नोरा गेल . एकर सब स मनोरंजक कार्यक्रम रहल विदेश मे रहल मैथिल बच्चा मैथिली कोना बाजत जकर बहुत नीक आ सटीक संचालन डॉ. अरुण झा ( लन्दन) केलनि. एकर आकर्षक पक्ष छल एक दिस पुरान पीढ़ी दोसर दिस नव पीढ़ी.. दुनूक समस्या आ समाधान क चेष्टा...डॉ. विभाष मिश्र ,डॉ. नूतन मिश्र आ श्रीमती ज्योति झा चौधरी तिनु हरिमोहन झा क खट्टर ककाक तरंग पर एकटा छोट सनक स्वर- रूपक प्रस्तुत केलनि ,समूचा हॉल ठाहक्का स गूंजी उठल. एहि समारोहक विशेष आकर्षण रहल मैथिली पुस्तक आ मिथिला पेंटिंग क बिक्री .... गीत संगीत मे श्रीमती अनीता चौधरी आ श्रीमती माला मिश्र ,डॉ. वीणा झा आ डॉ. विभाष मिश्र क गान पर समस्त हाल झूमी उठल , पुनः अंग्रेजी कविता डॉ. सीमा झा ,मैथिली कविता श्रीमती ज्योति झा चौधरी आ डॉ. शेफालिका वर्मा क कविता ,माय विलेज ' क पाठ हुनके नतिनी सुश्री अंकिता कर्ण केलनि . डॉ वंदना कर्ण मुख्य अतिथि डॉ शेफालिका वर्मा के हाथे पुरस्कार वितरण कयल गेल . सबहक समाप्ति डॉ. मिथिलेश झा क धन्यवाद ज्ञापन स भेल ....एहि समारोहक समापन क उपरांत लागले कार्यकारिणी समिति क मीटिंग भेल , जाहि मे समय पूर्ण हेवाक कारन नव कार्यकारिणी क गठन भेल . पुरान कार्यकारिणी अध्यक्ष ..डॉ. अरुण झा ( बर्नली ), सचिव एवं कोषाध्यक्ष - डॉ. मिथिलेश झा , कार्यकारिणी क सदस्य.--डॉ. रामभद्र झा, डॉ. डॉ. वंदना कर्ण , डॉ. पूनम झा , डॉ. कल्पना झा , डॉ. राजीव रंजन दास , वेब साईट रचयिता श्री अखिलेश कुमार
नव समिति .. अध्यक्ष --डॉ. अरुण झा ( लन्दन ) सचिव डॉ वन्दना कर्ण , कोषाध्यक्ष--डॉ. मिथिलेश झा . कार्यकारिणी क सदस्य--डॉ. विभाष मिश्र , डॉ. राहुल ठाकुर , डॉ. आलोक झा , श्री राजेन्द्र चौधरी, श्री राज झा , श्रीमती ज्योति झा चौधरी २०१२ मे ३१ मार्च के तारीख अखन राखल गेल ऐछ अन्नुअल जेनेरल मीटिंग के लेल. बेसी जानवा लेले वेबसाइट www.maithili.co.uk देख सकैत छी (विदेह पेटारसँ) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। पूनम मण्डल टैगोर साहित्य पुरस्कार २०११ जगदीश प्रसाद मण्डल जी केँ हुनकर मैथिली लघुकथा संग्रह "गामक जिनगी" लेल देबाक घोषणा। कार्यक्रम १२ जून २०१२ ई. केँ कोच्चि (केरल) मे। ई पुरस्कार दक्षिण कोरियाक एम्बैसी (स्पॉन्सर सैमसंग इण्डिया लिमिटेड) क आग्रहपर साहित्य अकादेमी द्वारा शुरू कएल गेल अछि। टैगोर साहित्य पुरस्कार गुरुदेव रवीन्द्र नाथ ठाकुरक १५०म जयन्तीक उपलक्ष्यमे शुरू भेल छल। सभ साल ८ टा भाषा आ तीन सालमे साहित्य अकादेमी द्वारा मान्यता प्राप्त सभटा २४ भाषाकेँ ऐमे पुरस्कृत कएल जाइत अछि। मैथिली लेल ई पुरस्कार पहिल बेर देल जा रहल अछि।
गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुरक १५०म जयन्तीक उपलक्ष्यमे साहित्य अकादेमी आ सैमसंग इडिया (सैमसंग होप प्रोजेक्ट) द्वारा २००९ ई. मे स्थापित कएल गेल छल टैगोर साहित्य पुरस्कार। २४ भाषाक श्रेष्ठ पोथीकेँ तीन सालमे पुरस्कार (सभ साल आठ-आठ भाषाक सर्वश्रेष्ठ पोथीकेँ एक सालमे पुरस्कार) देल जाएत। पुरस्कारमे प्रत्येककेँ ९१ हजार टाका आ प्रशस्ति-पत्र देल जाएत। चारिम साल पहिल सालक आठ भाषाक समूहक फेरसँ बेर आएत। टैगोर जयन्तीक लगाति अवसरपर ई पुरस्कार देल जाइत अछि।
टैगोर साहित्य पुरस्कार २००९ बांग्ला, गुजराती, हिन्दी, कन्नड, काश्मीरी, पंजाबी, तेलुगु आ बोडो भाषामे २००५ सँ २००७ मध्य प्रकाशित पोथीपर देल गेल। -बांग्ला (आलोक सरकार, अपापभूमि, कविता) -गुजराती ( भगवान दास पटेल, मारी लोकयात्रा) -हिन्दी (राजी सेठ, गमे हयात ने मारा, कथा संग्रह) -कन्नड (चन्द्रशेखर कांबर, शिकारा सूर्य, उपन्यास) -काश्मीरी (नसीम सफाइ, ना थसे ना आकास, कविता) -पंजाबी (जसवन्त सिंह कँवल, पुण्य दा चानन, आत्मकथा) -तेलुगु (कोवेला सुप्रसन्नाचार्य, अंतरंगम, निबन्ध) -बोडो (ब्रजेन्द्र कुमार ब्रह्मा, रैथाइ हाला, निबन्ध)
टैगोर साहित्य पुरस्कार २०१० असमी, डोगरी, मराठी, ओड़िया, राजस्थानी, संथाली, तमिल आ उर्दू भाषामे २००६ सँ २००८ मध्य प्रकाशित पोथीपर देल गेल।
-असमी (देवव्रत दास, निर्वाचित गल्प) -डोगरी (संतोष खजूरिया, बडलोनदियन बहारां) -मराठी (आर. जी. जाधव, निवादक समीक्षा) -ओड़िया (ब्रजनाथ रथ, सामान्य असामान्य) -राजस्थानी (विजय दान देथा, बातां री फुलवारी) -संथाली (सोमाइ किस्कू, नमालिया) -तमिल (एस. रामकृष्णन, यामम) -उर्दू (चन्दर भान खयाल, सुबह-ए-मश्रिक-की अजान)
टैगोर साहित्य पुरस्कार २०११ टैगोर साहित्य पुरस्कार २०११ मैथिली, अंग्रेजी, कोंकणी, मलयालम, मणीपुरी, नेपाली आ सिंधी लेल २००७ सँ २००९ मध्य प्रकाशित पोथीपर देल गेल। संस्कृत लेल पुरस्कार नै देल जा सकल। -मैथिली (जगदीश प्रसाद मण्डल, "गामक जिनगी") -अंग्रेजी (अमिताव घोष, "सी ऑफ पॉपीज") -कोंकणी (शीला कोलाम्बकर, "गीरा") -मलयालम (अकितम अचुतम नम्बूदरी, "अंतिमहक्कलम") -मणीपुरी (एन. कुंजामोहन सिंह, "एना केंगे केनबा नट्टे") -नेपाली (इन्द्रमणि दरनाल, "कृष्णा-कृष्णा") -संस्कृत- -सिंधी (अर्जुन हसीद, "ना इएन ना") (विदेह पेटारसँ) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ........................................................................................................................ संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] Videha e-Learning पेटार (रिसोर्स सेन्टर) शब्द-व्याकरण-इतिहास MAITHILI IDIOMS & PHRASES मैथिली मुहावरा एवम् लोकोक्ति प्रकाश- रमाकान्त मिश्र मिहिर (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) डॉ. ललिता झा- मैथिलीक भोजन सम्बन्धी शब्दावली (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) मैथिली शब्द संचय MAITHILI DICTIONARY- RAMDEO JHA (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) ENGLISH MAITHILI COMPUTER DICTIONARY MAITHILI ENGLISH DICTIONARY अणिमा सिंह -Shishu_Geet_Khel_Anima_Singh डॉ. रमण झा मैथिली काव्यमे अलङ्कार अलङ्कार-भास्कर आनन्द मिश्र (सौजन्य श्री रमानन्द झा "रमण")- मिथिला भाषाक सुबोध व्याकरण BHOLALAL DAS मैथिली सुबोध व्याकरण- भोला लाल दास राधाकृष्ण चौधरी- A Survey of Maithili Literature ........................................................................................................................ मूलपाठ तिरहुता लिपिक उद्भव ओ विकास (यू.पी.एस.सी. सिलेबस) राजेश्वर झा- मिथिलाक्षरक उद्भव ओ विकास (मैथिली साहित्य संस्थान आर्काइव) Surendra Jha Suman दत्त-वती (मूल)- श्री सुरेन्द्र झा सुमन (यू.पी.एस.सी. सिलेबस) प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) CIIL SITE ........................................................................................................................ समीक्षा सुभाष चन्द्र यादव-राजकमल चौधरी: मोनोग्राफ शिव कुमार झा "टिल्लू" अंशु-समालोचना डॉ बचेश्वर झा- B_JHA_Nibhand_Nikunj.pdf डॉ. देवशंकर नवीन- Adhunik_Sahityak_Paridrishya डॉ. रमण झा- भिन्न-अभिन्न प्रेमशंकर सिंह- मैथिली भाषा साहित्य:बीसम शताब्दी (आलोचना) डॉ. रमानन्द झा 'रमण' हिआओल अखियासल CIIL SITE दुर्गानन्द मण्डल-चक्षु RAMDEO JHA दत्त-वतीक वस्तु कौशल- डॊ. श्रीरामदेवझा SHAILENDRA MOHAN JHA परिचय निचय- डॊ शैलेन्द्र मोहन झा ........................................................................................................................ अतिरिक्त पाठ पहिने मिथिला मैथिलीक सामान्य जानकारी लेल एहि पोथी केँ पढ़ू:- राधाकृष्ण चौधरी- मिथिलाक इतिहास फेर एहि मनलग्गू फाइल सभकेँ सेहो पढ़ू:- केदारनाथ चौधरी चमेलीरानी माहुर करार कुमार पवन पइठ (मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ कथा) (साभार अंतिका) डायरीक खाली पन्ना (साभार अंतिका) याेगेन्द्र पाठक वियाेगी- विज्ञानक बतकही रामलोचन ठाकुर- मैथिली लोककथा SAHITYA AKADEMI http://sahitya-akademi.gov.in/publications/e-books.jsp http://sahitya-akademi.gov.in/general/Digitalbooks.jsp CIIL http://corpora.ciil.org/maisam.htm अखियासल (रमानन्द झा रमण) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI1.pdf जुआयल कनकनी- महेन्द्र http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI2.pdf प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI3.pdf सृजन केर दीप पर्व- सं केदार कानन आ अरविन्द ठाकुर http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI4.pdf मैथिली गद्य संग्रह- सं शैलेन्द्र मोहन झा http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI5.pdf JNU http://sanskrit.jnu.ac.in/maithili/index.jsp http://sanskrit.jnu.ac.in/student_projects/lexicon.jsp?lexicon=maithili ARCHIVE.ORG https://archive.org/details/%40vijay_deo_jha?&sort=-publicdate&page=2 VIDEHA MAITHILI BOOKS/ PICTURE-AUDIO-VIDEO ARCHIVE http://videha.co.in/new_page_15.htm https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ ALL INDIA RADIO DOORDARSHAN आकाशवाणी दूरदर्शन http://prasarbharati.gov.in/ http://newsonair.com/ https://doordarshan.gov.in/ आकाशवाणी मैथिली पोडकास्ट http://prasarbharati.gov.in/podcast.php?filterlang=Maithili&from=1947-08-15&fromwp=2020-08-29&to=2050-12-31&search=GO आकाशवाणी पटना/ दरभंगा मैथिली रेजनल न्यूज टेक्स्ट डाउनलोड-1 http://newsonair.com/RNU-NSD-Audio-Archive-Search.aspx आकाशवाणी पटना/ दरभंगा मैथिली रेजनल न्यूज टेक्स्ट डाउनलोड-2 http://newsonair.com/Regional-Text.aspx आकाशवाणी दरभंगा http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=282 आकाशवाणी दरभंगा यू ट्यूब चैनल https://www.youtube.com/channel/UCGdNveEFmv4pPolWiTEMxVA आकाशवाणी भागलपुर http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=359 आकाशवाणी पूर्णियाँ http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=256 आकाशवाणी पटना http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=122 IGNCA http://ignca.nic.in/coilnet/mithila.htm http://ignca.nic.in/coilnet/kalyani.htm (MAITHILI ENGLISH DICTIONARY) http://tdil.mit.gov.in/CoilNet/IGNCA/mithila.htm MITHILA DARSHAN https://mithiladarshan.com/ (online pdf of Maithili journal) I LOVE MITHILA https://www.ilovemithila.com/ (online maithili journal) मैथिली साहित्य संस्थान https://www.maithilisahityasansthan.org/ https://www.maithilisahityasansthan.org/resources (online pdf of Reasearch Papers/ books) ........................................................................................................................ VIDEHA e-LEARNING YOUTUBE CHANNEL https://www.youtube.com/channel/UC4abVKqMj2pDWIAkXiOHp7A (अनुवर्तते) -गजेन्द्र ठाकुर विदेहक किछु विशेषांक:- १) हाइकू विशेषांक १२ म अंक, १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf 12.pdf २) गजल विशेषांक २१ म अंक, १ नवम्बर २००८ Videha_01_11_2008.pdf Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf 21.pdf ३) विहनि कथा विशेषांक ६७ म अंक, १ अक्टूबर २०१० Videha_01_10_2010 Videha_01_10_2010_Tirhuta 67 ४) बाल साहित्य विशेषांक ७० म अंक, १५ नवम्बर २०१० Videha_15_11_2010 Videha_15_11_2010_Tirhuta 70 ५) नाटक विशेषांक ७२ म अंक १५ दिसम्बर२०१० Videha_15_12_2010 Videha_15_12_2010_Tirhuta 72 ६) नारी विशेषांक ७७म अंक ०१ मार्च २०११ Videha_01_03_2011 Videha_01_03_2011_Tirhuta 77 ७) अनुवाद विशेषांक (गद्य-पद्य भारती) ९७म अंक Videha_01_01_2012 Videha_01_01_2012_Tirhuta 97 ८) बाल गजल विशेषांक विदेहक अंक १११ म अंक, १ अगस्त २०१२ Videha_01_08_2012 Videha_01_08_2012_Tirhuta 111 ९) भक्ति गजल विशेषांक १२६ म अंक, १५ मार्च २०१३ Videha_15_03_2013 Videha_15_03_2013_Tirhuta 126 १०) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक १४२ म, अंक १५ नवम्बर २०१३ Videha_15_11_2013 Videha_15_11_2013_Tirhuta 142 ११) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 १२) अरविन्द ठाकुर विशेषांक १८९ म अंक १ नवम्बर २०१५ Videha_01_11_2015 १३) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक १९१ म अंक १ दिसम्बर २०१५ Videha_01_12_2015 १४) विदेह सम्मान विशेषाक- २००म अक १५ अप्रैल २०१६/ २०५ म अक १ जुलाई २०१६ Videha_15_04_2016 Videha_01_07_2016 १५) मैथिली सी.डी./ अल्बम गीत संगीत विशेषांक- २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ Videha_01_01_2017 लेखकसं आमंत्रित रचनापर आमंत्रित आलोचकक टिप्पणीक शृंखला १. कामिनीक पांच टा कविता आ ओइपर मधुकान्त झाक टिप्पणी विदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016 एडिटर्स चोइस सीरीज एडिटर्स चोइस सीरीज-१ विदेहक १२३ म (०१ फरबरी २०१३) अंकमे बलात्कारपर मैथिलीमे पहिल कविता प्रकाशित भेल छल। ई दिसम्बर २०१२ क दिल्लीक निर्भया बलात्कार काण्डक बादक समय छल। ओना ई अनूदित रचना छल, तेलुगुमे पसुपुलेटी गीताक एहि कविताक हिन्दी अनुवाद केने छलीह आर. शांता सुन्दरी आ हिन्दीसँ मैथिली अनुवाद केने छलाह विनीत उत्पल। हमर जानकारीमे एहिसँ बेशी सिहराबैबला कविता कोनो भाषामे नहि रचल गेल अछि। सात सालक बादो ई समस्या ओहने अछि। ई कविता सभकेँ पढ़बाक चाही, खास कऽ सभ बेटीक बापकेँ, सभ बहिनक भाएकेँ आ सभ पत्नीक पतिकेँ। आ विचारबाक चाही जे हम सभ अपना बच्चा सभ लेल केहन समाज बनेने छी। एडिटर्स चोइस सीरीज-१ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-२ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच ब्रेस्ट कैसरक समस्यापर विदेह मे मीना झा केर एकटा लघु कथा प्रकाशित भेल। ई मैथिलीक पहिल कथा छल जे ब्रेस्ट कैसर पर लिखल गेल। हिन्दीमे सेहो ताधरि एहि विषयपर कथा नहि लिखल गेल छल, कारण एहि कथाक ई-प्रकाशित भेलाक १-२ सालक बाद हिन्दीमे दू गोटेमे घोंघाउज भऽ रहल छल कि पहिल हम आकि हम, मुदा दुनूक तिथि मैथिलीक कथाक परवर्ती छल। बादमे ई विदेह लघु कथामे सेहो संकलित भेल। एडिटर्स चोइस सीरीज-२ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-३ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिलक किछु बाल कविता प्रकाशित भेल। बादमे हुनकर ३ टा बाल कविता विदेह शिशु उत्सवमे संकलित भेल जाहिमे २ टा कविता बेबी चाइल्डपर छल। पढ़ू ई तीनू कविता, बादक दुनू बेबी चाइल्डपर लिखल कविता पढ़बे टा करू से आग्रह। एडिटर्स चोइस सीरीज-३ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-४ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच जगदानन्द झा मनुक एकटा दीर्घ बाल कथा कहि लिअ बा उपन्यास प्रकाशित भेल, नाम छल चोनहा। बादमे ई रचना विदेह शिशु उत्सवमे संकलित भेल, ई रचना बाल मनोविज्ञानपर आधारित मैथिलीक पहिल रचना छी, मैथिली बाल साहित्य कोना लिखी तकर ट्रेनिंग कोर्समे एहि उपन्यासकेँ राखल जेबाक चाही। कोना मॊडर्न उपन्यास आगाँ बढ़ै छै, स्टेप बाइ स्टेप आ सेहो बाल उपन्यास। पढ़बे टा करू से आग्रह। एडिटर्स चोइस सीरीज-४ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-५ एडिटर्स चोइस ५ मे मैथिलीक "उसने कहा था" माने कुमार पवनक दीर्घकथा "पइठ" (साभार अंतिका) । हिन्दीक पाठक, जे "उसने कहा था" पढ़ने हेता, केँ बुझल छन्हि जे कोना अहि कथाकेँ रचि चन्द्रधर शर्मा ’गुलेरी’ अमर भऽ गेलाह। हम चर्चा कऽ रहल छी, कुमार पवनक "पइठ" दीर्घकथाक। एकरा पढ़लाक बाद अहाँकेँ एकटा विचित्र, सुखद आ मोन हौल करैबला अनुभव भेटत, जे सेक्सपीरिअन ट्रेजेडी सँ मिलितो लागत आ फराको। मुदा एहि रचनाकेँ पढ़लाक बाद तामस, घृणा सभपर नियंत्रणकेँ आ सामाजिक/ पारिवारिक दायित्वकेँ सेहो अहाँ आर गंभीरतासँ लेबै, से धरि पक्का अछि। मुदा एकर एकटा शर्त अछि जे एकरा समै निकालि कऽ एक्के उखड़ाहामे पढ़ि जाइ। एडिटर्स चोइस सीरीज-५ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-६ जगदीश प्रसाद मण्डलक लघुकथा "बिसाँढ़": १९४२-४३ क अकालमे बंगालमे १५ लाख लोक मुइला, मुदा अमर्त्य सेन लिखैत छथि जे हुनकर कोनो सर-सम्बन्धी एहि अकालमे नहि मरलन्हि। मिथिलोमे अकाल आएल १९६७ ई. मे आ इन्दिरा गाँधी जखन एहि क्षेत्र अएली तँ हुनका देखाओल गेल जे कोना मुसहर जातिक लोक बिसाँढ़ खा कऽ एहि अकालकेँ जीति लेलन्हि। मैथिलीमे लेखनक एकभगाह स्थिति विदेहक आगमनसँ पहिने छल। मैथिलीक लेखक लोकनि सेहो अमर्त्य सेन जेकाँ ओहि महाविभीषिकासँ प्रभावित नहि छला आ तेँ बिसाँढ़पर कथा नहि लिखि सकला। जगदीश प्रसाद मण्डल एहिपर कथा लिखलन्हि जे प्रकाशित भेल चेतना समितिक पत्रिकामे, मुदा कार्यकारी सम्पादक द्वारा वर्तनी परिवर्तनक कारण ओ मैथिलीमे नहि वरण् अवहट्ठमे लिखल बुझा पड़ल, आ ओतेक प्रभावी नहि भऽ सकल कारण विषय रहै खाँटी आ वर्तनी कृत्रिम। से एकर पुनः ई-प्रकाशन अपन असली रूपमे भेल विदेहमे आ ई संकलित भेल "गामक जिनगी" लघुकथा संग्रहमे। एहि पोथीपर जगदीश प्रसाद मण्डलकेँ टैगोर लिटरेचर अवार्ड भेटलनि। जगदीश प्रसाद मण्डलक लेखनी मैथिली कथाधाराकेँ एकभगाह हेबासँ बचा लेलक, आ मैथिलीक समानान्तर इतिहासमे मैथिली साहित्यकेँ दू कालखण्डमे बाँटि कऽ पढ़ए जाए लागल- जगदीश प्रसाद मण्डलसँ पूर्व आ जगदीश प्रसाद मण्डल आगमनक बाद। तँ प्रस्तुत अछि लघुकथा बिसाँढ़- अपन सुच्चा स्वरूपमे। एडिटर्स चोइस सीरीज-६ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-७ मैथिलीक पहिल आ एकमात्र दलित आत्मकथा: सन्दीप कुमार साफी। सन्दीप कुमार साफीक दलित आत्मकथा जे अहाँकेँ अपन लघु आकाराक अछैत हिलोड़ि देत आ अहाँक ई स्थिति कऽ देत जे समानान्तर मैथिली साहित्य कतबो पढ़ू अहाँकेँ अछौं नहि होयत। ई आत्मकथा विदेहमे ई-प्रकाशित भेलाक बाद लेखकक पोथी "बैशाखमे दलानपर"मे संकलित भेल आ ई मैथिलीक अखन धरिक एकमात्र दलित आत्मकथा थिक। तँ प्रस्तुत अछि मैथिलीक पहिल दलित आत्मकथा: सन्दीप कुमार साफीक कलमसँ। एडिटर्स चोइस सीरीज-७ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-८ नेना भुटकाकेँ रातिमे सुनेबा लेल किछु लोककथा (विदेह पेटारसँ)। एडिटर्स चोइस सीरीज-८ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-९ मैथिली गजलपर परिचर्चा (विदेह पेटारसँ)। एडिटर्स चोइस सीरीज-९ (डाउनलोड लिंक) जगदीश प्रसाद मण्डल जीक ६५ टा पोथीक नव संस्करण विदेहक २३३ सँ २५० धरिक अंकमे धारावाहिक प्रकाशन नीचाँक लिंकपर पढ़ू:- Videha_15_05_2018 Videha_01_05_2018 Videha_15_04_2018 Videha_01_04_2018 Videha_15_03_2018 Videha_01_03_2018 Videha_15_02_2018 Videha_01_02_2018 Videha_15_01_2018 Videha_01_01_2018 Videha_15_12_2017 Videha_01_12_2017 Videha_15_11_2017 Videha_01_11_2017 Videha_15_10_2017 Videha_01_10_2017 Videha_15_09_2017 Videha_01_09_2017 विदेह ई-पत्रिकाक बीछल रचनाक संग- मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ रचनाक एकटा समानान्तर संकलन: विदेह: सदेह: १ (२००८-०९) देवनागरी विदेह: सदेह: १ (२००८-०९) तिरहुता विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) देवनागरी विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) तिरहुता विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०)देवनागरी विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०) तिरहुता विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०)देवनागरी विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०) तिरहुता विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]देवनागरी विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ] तिरहुता विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]- दोसर संस्करण देवनागरी विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ]देवनागरी विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ] तिरहुता विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ]देवनागरी विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ] तिरहुता विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ]देवनागरी विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ] तिरहुता विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ]देवनागरी विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ] तिरहुता विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ]देवनागरी विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ] तिरहुता विदेह:सदेह ११ विदेह:सदेह १२ विदेह:सदेह १३ The readers of English translations of Maithili Novel "sahasrabadhani" and verse collection "sahasrabdik chaupar par" has intimated that the English translation has not been able to grasp the nuances of original Maithili. Therefore the Author has started translating his Maithili works in English himself. After these translations are complete these would be the official translations authorised by the Author of the original works.-Editor Maithili Books can be downloaded from: https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ विदेह सम्मान: सम्मान-सूची (समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार सहित) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। सूचना/ घोषणा १ "विदेह सम्मान" समानान्तर साहित्य अकदेमी पुरस्कारक नामसँ प्रचलित अछि। "समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार" (मैथिली), जे साहित्य अकादेमीक मैथिली विभागक गएर सांवैधानिक काजक विरोधमे शुरु कएल छल, लेल अनुशंसा आमन्त्रित अछि। अनुशंसा २०१९ आ २०२० बर्ख लेल निम्न कोटि सभमे आमन्त्रित अछि: १) फेलो २)मूल पुरस्कार ३)बाल-साहित्य ४)युवा पुरस्कार आ ५) अनुवाद पुरस्कार। अपन अनुशंसा ३१ दिसम्बर २०२० धरि २०१९ पुरस्कारक लेल आ ३१ मार्च २०२१ धरि २०२०क पुरस्कारक लेल पठाबी। पुरस्कारक सभ क्राइटेरिया साहित्य अकादेमी, दिल्लीक समानान्तर पुरस्कारक समक्ष रहत, जे एहि लिंक sahitya-akademi.gov.in पर उपलब्ध अछि। अपन अनुशंसा editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २ “मिथिला मखान” फिल्म देखू मात्र १०१ टाकामे। Android App “BEJOD” download करू वा जाउ www.bejod.in पर, signup करू, एकटा ईमेल जायत, अपन ईमेल खोलू आ ओकरा क्लिक करू अहाँक अकाउंट एक्टीवेट भय जायत। आब मिथिला मखान रेण्ट पर लिअ, डेबिट कार्डसँ १०१ टाका अॉनलाइन पेमेंट करू आ फिल्म देखू। ३ विदेह अपन आगामी अंक (२०२१ क प्रारम्भमे) श्री रामलोचन ठाकुर पर विशेषांक निकालबाक नेयार केने अछि। हुनका सम्बन्धी रचना आमंत्रित अछि (संस्मरण, साक्षात्कार, समीक्षा आदि) जे ३१ दिसम्बर २०२० धरि editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाओल जा सकैत अछि। विदेह पेटारक अन्तर्गत (पोथी डाउनलोड साइट) मे http://www.videha.co.in/new_page_15.htm हुनकर मौलिक, अनूदित आ सम्पादित रचना फ्री पी.डी.एफ. डाउनलोड लेल उपलब्ध अछि। विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम्: VIDEHA: AN IDEA FACTORY (c)२००४-२०२१. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHAसम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम विलास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक -स्त्री कोना- इरा मल्लिक। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि)editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि। एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै, आ से हानि-लाभ रहित आधारपर छै आ तैँ ऐ लेल कोनो रॊयल्टीक/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै। तेँ रॉयल्टीक/ पारिश्रमिकक इच्छुक विदेहसँ नै जुड़थि, से आग्रह। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-2021 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। ५ जुलाई २००४ केँ http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् 'विदेह' ३१३ म अंक ०१ जनवरी २०२१ (वर्ष १४ मास १५७ अंक ३१३)
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'टटका कविता वि ई सुचना प्रौद्योगिकीक युग मे अपन देवनागरी लिपि वा तिरहुता लिपि मे मैथिली भाषाक एहिं जाल-स्थल सँँ (fag त हम करब -किशन कारीगर लि oes —— a =e 2. स्वागत बसंत -करण समस्तीपुरी पु अनुपस्थिति एकटा विषय भ' गेल अछि. हम त सुरु केलहूँ मुदा एकरा आगु बेबाक उत्तरदायित्प io ae a पिन |... अपने सम' लोकनिक थीक. हम ताकि ager ch किक युवा मैथिल्र के जे एहि दिशा में कार्य करथि. 4. कालजयी -विवेकानंद ठाकुर न जे कियो मैथिल बन्धुगण एहिं मे भाग लेबाक इच्छा राखति छथि हुनकर हम करेजाक पेनीक सतह सै स्वागत 4, विवाह'क तेसर सप्ताह -आदि यायावर “टन करैत fete. हमरा एहि ई-मेल पर सम्पर्क काएल जाओ 2. स्टेशन परक हरियर दुबि आ लाल गुसमोहर -आदि. . oe यायावर गन पर eae cen व्यंग न mishrapadmanabh@emall yahoo.com 4 बुढ़क अर्थशास्त्र -खट्टर काका pee a ee ‘You might also like: Tire + | — J | r -. = "a =” >> ले =apm Pl rn ome 22M > ग्टि हि था fo) HOMO Sms Fi () Ashish Anchinhar x) @ कतेक रास बात: मैथिली भाप x VY SI SEx=} S @ |B wwwwidyapati.org/2005/08/blog-post.html w= न“ लि rrue errr ye neg ae er ig ear ene OES ie. |... अपनेसम' लोकतिक थीक. हम ताकि रहत्र छी ag युवा मैथिल्र के जे एहि दिशा में कार्य करथि. 4. कालजयी -विवेकानंद ठाकुर Se fo जेकियो मैथिल बन्धुगण vig मे भाग लेबाक इच्छा राखति छथि हुनकर हम करेजाक पेनीक सतह a स्वागत 4. विवाह'क तैसर सप्ताह -आदिं यायावर SS eee | ata ठिहन्हि. हमरा एहि ई-मेल पर सम्पर्क काएल जाओ. 2. स्टेशन पर'क हरियर दुबि आ लाल गुलमोहर -आदि. SSS | रैत छिहन्हि. हमरा एहि ई-मेल पर सर aa Eee) | mishrapaamanabh@emall yahoo.com (eee Se | ‘You might also like: £ हि >) a a | दि | bad Mh es की, प्रशंसक बनु |... जलकुम्मी भाग-र...... अतुल्य-प्रकाश उफ 0 जलकुम्भी (उपन्यास, eines a (लिखिका-अल्पना) .... बढ्दू (एक कहानी) .... अक-र, TE) दे wih Google Freng Connect | Members (68) More in "= \Gunday, November 28, 2004 4) a ‘6 9! Bi rap) Bw ry) ee Ey A a Sees | Ta a i] O J ais iu ois FY 0... C oa ie ee | Cache. ee थे 2h cl इज हि es 7 comments: bok m | El Ste sree nikhil said... गलत मेतिय td he im) हा शा थे | appreciate the work you want people to do. | will try sending you a link of a software i Bere ERAS Bee which can convert literals in English to that in Devnagri lpi, such that when we type ee *KUCH' it type the corresponding word in Devnagri which means "something). | will Bele send you the link in next comment. टटका टिप्पणी Nee ee 46 July, 2006 00:07 Fag Stim OEE SS ena £2 eee mS http://www vidvapati___— 30 यायावर oka 530 > av) | जज = waa ... | > | GBM © spas Fi Facebook ३ Ge Byombesh Bakshi Episod: x) Oh कतेक रास वात: मैथिली भा" x KY l= |S) ¢€ CD wwwywidyapati.org/2005/08/blog-post.html Y= er] Feige SET : | sandy said... SS | i dont have much idea as to how to write in devnagri on from this keyboard with roman मेल पर सदस्यता लेल जाय oe = | letters ...nikhil .i would really appreciate it if u could provide the software. SSS | 25 February, 2007 00:02 अपन ई-मेल पता are See SI | Rajeev @ Mannheim(germany) till Sth April said... RA aoe | kono gota kani hamra batau ki aahan sab mathili script kona likh payab rehal chhi ata. सहमति | 23 April, 2007 १8:32 | LABELS [3] SFP Ber said... th 3 () Maithili (4) novel (7) roshan (2) Story (2) राजीव जी. sti 0) अनुवाद (2) उपन्यास (7) कथा (4) करण समस्तीदुरी (2) मैथिली लिखबाक लेल अपने एहिं लिंक क प्रयोग as सकैत छी. धन्यवाद दियॉन्ह खट्टर कका कें एहिं =o =e 0) कविता (27) कहाना 6) | महान कार्य करबाक लेल. दिक्कत भेला पर BET लिंक सेहो देल गेल अछि कन्दन (' हा कुन्दन (48) eet nae (yee) we 0 | its 2 पैद्रानाअ (9) rarer (2 मैथिली (8) eames () Se () सेस्सरण (6) | [,.. पसनाम Braid... राजीव जी; दि Poe मैथिली लिखबाक लेल अपने एहिं लिंक क प्रयोग as wha छी. धन्यवाद दियौन्ह खट्टर कका कें एहिं लि डिक महान कार्य करबाक AT. दिक्कत भेला पर हेल्प लिंक सेहो Get गेल अछि a डर ee ee fi. toda Bes | 24 April, 2007 6:20 Vets a3 oe [ee esas pa ES ra ee Abhishek Mishra said... ee ee I have recently made a website for my nanaji, shree Amogh Narayan Jha. It's url is. See दे hitp://amoghnarayanjha blogspot.com BES Please visit the website and also include it in your ink lists. | feel lucky to find your ee website about maithili community and culture. ps ८ Shee Thanking you, eae Abhishek Mishra eee £2 qe er 87 une. 2007 2:05 es CO Eee = = a ome 23M > ग्टि m था fo) HOMO Some Teer XY Ka Byombesn Balch Eps x) Orde रास बात: मैथिली ae x YY la i= eS ¢€ CD wwwywidyapati.org/2005/08/blog-post.html Y= a सस्मरण (छा Sia Saree : | (2) SEF Ber said... ee =] = | राजीव जी; डा Soe | मैथिली लिखबाक लेल अपने एहिं लिंक क प्रयोग as सकैत छी. धन्यवाद दियौन्ह खट्टर कका कें एहिं ene ey | महान कार्य करबाक लेल. दिक्कत भेलरा पर हेल्प लिंक सेहो देन गेल अछि = ae SSS | 24 April, 2007 6:20 Soe ee बट are | Abhishek Mishra said... Hello, | I have recently made a website for my nanaji, shree Amogh Narayan Jha. It's url is hittp://amoghnarayanjha blogspot.com Please visit the website and also include it in your link lists. | feel lucky to find your website about maithili community and culture Thanking you, | ‘Abhishek Mishra 47 June, 2007 205 Post a Comment Eee oe Newer Post Home Older Post ee ee ieee वि | Subscribe to: Post Comments (Atom) po पर कप © सर्वाधिकार सुरक्षित: Template images by johnwoodcock. Powered by Blogger. a a Se [ease : साया SY कक कप Se ins BOURNE Hi CPE NS SSB सर सर . | एक शा a es Sco ला ~ = = rn ~ ome 23M > "e|\ हा. fol fone SM
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Bi Ashish Anchinnar 0) @ ea we are: sie | .................................................................. € © 0 DB wwwwidyapati.org/p/blog-page_27.html w= o More * Next Blog», ~ a a = ashish.anchinhar@gmail cont “Dashboard Sign Out दर ¢ : संपर्क करू पट é editor@vidyapati.org परिचय परिचय पाठक लौकनि सँ आग्रह जै कतैक रास बातंक नव रुप. ¢ . प्रिय पाठकगण,; रेखा केहैन लागल, टिप्पणी द्वारा सुचित करब. 'एहिं ब्लोग'क शुरुआत हम २००४ मे केलहूँ. ताबय धरि हमरा जानकारी मे मैथिली भाषा इन्टरनेट पर नहिं com कविता पर Baw. एत्तेक पढ़ल लिखल समाज मे ई एकटा अपमानजनक वस्तु लागैत छल. लोक सब आबैत गेलाह आई. -किशन कारीगर न ब्लोग सें उमरि के मैथिली साहित्य क आनलाइन प्रकाशन में एकटा सशक्त माध्यम बनि गेल. आई लगभग TIED ges २०० गोट रचना एहिं पर उपस्थित अछि: था अववेकानद ठाकुर es ae ओना त बहुत ब्लोग इन्टरनेट पर उपलब्ध अछि ey हमरा लोकनिक प्रयास अछि जे बिल्कूल अनुशासित — beter तरीका सै गुणवत्ता & मेनटेन काएल जाए. हमरा लोकनि यदि किनको मोन मे मैथिली साहित्य प्रेम जगा. -आदि यायावर veers : सकी as ई हमरा ललोकनिक da एकटा उपल्ब्धि सँ कम ale रहत. mes pote: TEL Di aes मैथिली भाषा'क सबसे बढ़िया, Tae सम्मानित आ सबसे लोकप्रिय मैंच बनब. ia eee a FA | हि = | Atha ६. 704PM > | & BB i SIM © spo.
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TRIBHUVAN UNIVERSITY a \Se/ CENTRAL LIBRARY er ta [EXIT 58५ National Agency cert APPLICATION FORM पड हब ote, जि ISBN National Agency 7540 Tawney Cena सडक ००.5 [९७१ overs, as ISBN Nunta or yb eo ptt Pee ek) he bx Tee [om [0 Se" [oeex] om [ome | com bles | Coo | ए न" चित | Corners [ Coo | font (Manilawer Keon cb Gurya by andin Ke Mish La) कि का Matti Navaysha Sahitya Piggies ८ उस -ठा- Tet 4ueang9 Fax Exmal! $frcKxm @ bats con [sen | oa a या — Pres 499.60 Oe EXE ie “Jo BE COMPLETED BY THE NATIONAL AGENCY तप Gygntey Group kdensier Number: 8904 G Spboudah _ A (, fs $ i zi ‘Sara oft SEN OF pcre s owe Dec. 2, 2004, eee ar
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€ Ashish Anchinhar Q_ € Ashish Anchinhar Q 3) मैथिली भाषाक विकाससंँ जुड़ल तकनीक आ संभावना oy Ashish Anchinhar cee 4.4) प्रौद्योगिकी सापेक्ष विकास यात्रा: मैथिली आ नेट 5 Nov 202 * a 5) ब्लागिंग आ व्यगतिगत पत्रकारिता 6) इंटरनेट ( ब्लाग आ साइट) che माध्यमसँ होइत शोध कार्य विदेह aga किछु करैत एला, बहुत किछु करत मुदा एन हम | 7) मैथिलीक बेब पत्रकारिता जाहि विषयपर विदेहसैँ आसा लगेने छी ओ थिक विदहेक 78) मैथिलीक ब्लाग आ ई पत्रिका कोनो एकटा अंक ( २०१३ केर मार्च-अप्रिलमे, वा feet 9) मैथिलीक अध्ययन आ अध्ययापनमे इंटरनेटक भूमिका पहिने of मगैटर आबि जाइ d) बेब पत्रिकारिता विशेषांक केर 20) मैथिली भाषासँ जुड़ल साफ्टवेयर रूपमे रहए। एखन हम विषय दए रहल छी जिनका जाहिपर 07) मैथिली टाइपिंगसँ जुड़ल साफ्टवेयर आ ओकर संभावना रूचि चढ़ए ताहिपर लीखू on संपादक जीकें पठा दिऔन््ह। 22) बेब मीडिया समाजिक सरोकार आ व्यवसायक रुपमे ओना किछुए आलेख मैथिली बेब पत्रिकारितापर अछि oF 23) सोशल नेटवर्किंग केर इतिहास ore सभ सहयोग करबै a विदेह ऐमे आगू आएत----। ई 24) बेब मीडिया आ अभिव्यक्ति केर दुरुपयोग विषय एना अछि: 25) बेबमीडिया सरकारी नियंत्रणमे 26) बेब मीडिया स्वतंत्रता बनाम स्वच्छंदता ) मीडिया - भेद आ प्रभेद 27) बेब मीडियाक माध्यमे उपल्बध मैथिली पोथी 2) विभिन्न मीडियाक माँझ बेब पत्रकारिता 28) बेब मीडिया आ कापीराइट 3) बदलैत समयमे बेब मीडिया 29) मैथिली बेब मीडिया आ रोजगार 4) बेब मीडिया आ मैथिली 30) मैथिलीकें विश्व भाषा बनेबामे बेबमीडियाक योगदान 5) मैथिलीकैं विकासमे बेब मीडियाक योगदान 37) भारतक बदलैत शिक्षा पद्धति आ इंटरनेट 6) भारतमे इंटरनेटक विकास 32) समाजिक न्याय आ बेबमीडिया 7) बेब मीडिया आ सोशल नेटवर्किंग साइट 33) युवा आ बेबमीडिया 8) लोकतंत्र आ बेबमीडिया 34) बेब मीडियाक सिद्धांत आ बेबहार 9) सर्वहारा बनाम ब्राम्हणवाद: बेबमीडियाक संदर्भमे Ysa STEMS का SAE हे दा peal rk प्रवासी है हि ई विषय सभहँक लेल हम अविनाश वाचास्पति जीक अभारी ब्लागिंग, साइट आ संभावना छी मैथिली लेखकरसँ जेओ 2) इंटरनेरटमे मैथिलीक वर्तमान स्थिति कस tal oan Write a comment... GIF) © Write a comment... GIF) @)
mithilattt- Google Drive =X के atl CG @@ docs.google.com/file/d/OB9xwnNKpRUIT2UzXzhBcDIaRIU/vie G@* ७ @: HE Apps HH Mail / BSNL| Broadband... #2 Apps लि \ @_mnewshuntcomvin, Mithila Regular Version .00 October 30, 2007, initial release True Type Font Creator: ANU JHA Copyright - Mithila version 4.0. This font is free software designed by ANU JHA; you can redistribute it and/or modify it This font is distributed in the hope that it will be useful, but WITHOUT ANY WARRANTY; without even the implied warranty of MERCHANTABILITY or FITNESS FOR A PARTICULAR PURPOSE. ! . # $ % & रे ¢ दे + . - / poe ele le 6७४६ . 6 ५. ole es
= ont Information janaki Regular Version .000 2007 initial release True Type Font Creator: Gaurav Shrestha & Anjan Ale (Madan Puraskar Pustakalaya) Copyright © 2007 by Madan Puraskar Pustakalaya) All rights reserved. Basic Latin in | के IH ON { } \ * NY j HH} न ही a) } \ j रे XX { }
€ CE @ facebook.com/search/top/2q=vinay%20jha%20bhavnath%20jha%202004% 20TENETaI% 20 FIT 205% 20S 208Lepa=SEARCH_BO + @: HE Apps HE Apps Gi YouTube G Google स्क्रीनशॉट है जिसमें MANGAL TTF ive को आपलोग पहचानते होंगे, यह यूनिकोड शिनथ प्रकाशित करने के लिए DevMithila विश्व का सबसे अच्छा फॉण्ट है, डिजाइन में | pir और Feat की प्रचुरता a a, तथा साथ में eter करेक्शन की भी सुविधा | मिथिलाक्षर में अधिक चिहन थे, अतः तीन फॉण्ट बनाने पड़े | मैने जो यूनिकोड | मिथिलाक्षर बनाया उसका 4 हजार रुपया फीस देकर वितरण भी करूँ तो इन्टरनेट के | लिए ही वह अच्छा रहेगा, जैसे कि फेसबुक के लिए | meer प्रकाशन हेतु 2004 Sec शिला मिथिलाक्षर फॉण्ट ही आज भी सर्वोत्तम है, हालाँकि इसमें दो-तीन चिहनों में सुधार |जावस्यक है | किन्तु कुछ लोग हैं जो दूसरों के कार्यो में केवल बुराई ही देखते हैं, आज कहते हैं कि 2004 Sec वाला मेरा फॉण्ट TTF होने के कारण आउट ऑफ़ डेट हो गया (हात्रांकि barat भी माइक्रोसॉफ्ट विंडोज के साथ जितने फॉण्ट आते हैं उनमें 90% TTF ही हैं), किन्तु | 2074 से पहले मिथिलाक्षर हेतु यूनिकोड की मान्यता नहीं थी तब उससे पहले लगातार दस fast cia मेरे Aroma फॉण्ट को आउट ऑफ़ डेट तो नहीं कह सकते थे, अतः आँखों पर | पट्टी बाँध कर areal बने रहे | मैं तो अपने सारे सॉफ्टवेयर मुफ्त में बॉटता हूँ. अतः विज्ञापन [और दक्षिणा पर पैसा क्यों खर्च करूँ ? मैथिली पत्रकारिता के इतिहास पर कोई भी पुस्तक | PT लेख पट लीजिये, सुनियोजित तरीके से मेरे साप्ताहिक पत्र "मिथिला टाइम्स” की | |िनदेखी मिलेगी, कहीं उसका उल्लेख तक नहीं मिलेगा, हालाँकि कम्युनिस्ट पार्टी के | चेंगुल से उसे छुड़ाकर मैंने अपने लिए बहुत बड़ा संकट खड़ा कर लिया था, १984-5 के. at में भी कम्यनिस्ट उम्मीदवारों की पराजय की भ्विष्यवाणियाँ उसमें प्रकाशित करता था || CY 2) >, ३ zz ‘ FS 905 | > & & 5 हा Me) - किए कि
मैथिल नवयुवा साहित्य परिषद ion काठमाण्डू ,रथा.-र0६60 १52 Bate aict_Uusee राजविराज-५, सप्त \ व । AAG /गंगरेश Tord का जी, अपने द्वारा RTA \( ity if Wy क्षर”, जे पहिल बेर F (8 ‘aa शंकर रात | poke G tt et HUSc f a2 ce रामदर्याल राकेश : ; paren f "Gade nt. Ay or rete hs नि Jip | i ee ; ey eee 0 |
(Gi Mail - Guwahati Warehouse - 0० x | [EF Ashish Anchinhar x Drafts (29) - ashishanchinhar@ x हि ScriptSource - Entry -Tirhuta Lipi x | of = lie 25 € CG @ scriptsource.org, @*x ७ ही : नि BSNL | Broadband. HE Apps Gh १. @ > mnewshuntcom/ir । | entRY Tirhuta Lipi MY INFORMATION CONTENT Log in | Register | Reset Password Tirhuta Lipi SUPPORT This is a TrueType Tirhuta font available for free download. The Tirhuta text on the site is not viewable until the font has been installed so we have provided a sample image of the font below, showing the first fifteen consonants. SCRIPTSOURCE Demag 2 पाबातंपड 5. q RS) ee F774 LINKS Daa & This page presents a single entry as a 5 U _ D context, click on the associated script, character and language links. as Tirhuta Lipi Recent published changes Phonemes Chart Needs 6 software . =| © बल |e ie oer ie|s ale ia
y Fi Facebook x b! © 8०9७५ अनचिन्हार आखर x x MM Drafts (224) ashishans x ¥ @) MarTHau cinema size x YG) httpi//maithiicinemable x € > S [O maithiticinema.blogspot.in/20/08/history-of-maithili-flms-birds-eye.html tr) i First Portal of Maithili Films, Artists, Songs, Music, Theater and Entertainment मैथिली फ़िल्म, कलाकार, गीत- संगीत, रंगमंच आ मनोरंजनक पहिल मैथिली पोर्टल Home | MAITHILIFILMHISTORY | FILMSPOSTERS-TRAILER | MAITHILISONGS | MAITHILINEWS | MAITHIL ARTISTS MAITHILI FILMS LIST Sunday, July 24, 2074 हे... अली Ls a story Of Maithili Films: A Bird’s Eye View Seah per 2) Maithili Cineworld ies ry Of Maithili Films: A Bird's Eye View fallin tnguages ofa Maiti is conse to bo the svestest and most cuted. tisneodessto pont | [____] ut that Maithl is spoken by about 6 -7 crores of the people of not only India but abroad also. The most atta significant characteristic feature of this sweet language is that it has its own grammar literature, culture | romwers Reaaeqaatagarr customs, almanac and geographical area Maithili language is known all over the world for its sweetness, जाब अन्यथा कानूनी कार्रवाई classical epics, melodious songs of Poet Vidyapati and what not. In the light of all this riches possessed by Followers (205) Next करन जाएत Maithili that it has been accorded a place in the Constitution of India. Fy ‘Al ii BR e rrorecreo कं cure guesses rem toed eee sommes || Ea a FR Bl COPYSCAPE Popularity y y ia LU | a DO NOT COPY i As far as Maithili cinema is considered, it has remained till date at back foot which is a matter of utter shame B ©: Zz ‘S| he and serious concem for all the Maithils. However, some people have tried their best to heip Maithili cinema get its due. Let us delve deep into the history and milestones whatever of Maithili Cinema. TE [cy Be = नि न 7a aiid ही —_ @ 6 ना false fale sHOeeawK De DEM
EE Vinay Jha - मिथिला के पाप कं (ole) 3 J € > C — @ dharmdhara.com/articles/vinay%20jha/fAFeeT% 20896 20FTUS FertA-FATTE% 208% 20AL% 20FSTA% 20TH TOTAN...t mI * e i Vinay Jha @ 25 sentemver English (UK) Tet” English (US) 3 मिथिला के पाण्डुलिपि-गिरोह ने मेरे जिस मिथिलाक्षर give को सोलह ast से दबाये रखा और हाल मैं हल्ला मचने पर उसे आउटडेटिड घोषित किया, उसी फॉण्ट के यूनिकोड वर्शन Privacy - Terms - Advertising - AdChoices में इन्टरनेट पर टाइपिंग का नमूना प्रस्तुत है जिसे किसी भी कम्प्यूटर या स्मार्टफोन में Cookies - More देख सकते हैं, और यदि HTML जानते हैं तो स्मार्टफ़ोन care भी इन्टरनेट पर मिथिलाक्षर Facebook © 208 टाइपिंग कर सकते हैं :-- hitp:/ivedicastrology.wikidot.com/mithilakshara-font#toc2 इन्टरनेट पर टाइपिंग के लिए यूनिकोड फॉण्ट अनिवार्य नहीं है, पुराने फॉण्ट a att ae सम्भव है किन्तु यूनिकोड का लाभ यह है कि बहुत अधिक संयुक्ताक्षर आदि हों तो एक ही यूनिकोड sive में सबका समावेश हो जाता है | मिथिलाक्षर को ब्राहमी, मिश्र की चित्रलरिपि, आदि वाले प्रागैतिहासिक वर्ग मे यूनिकोड मान्यता मिली | अतः मेरा प्रस्तुत उदहारण सिद्ध करता है कि संसार की समस्त प्रागैतिहासिक लिपियाँ मे इन्टरनेट पर लिखना संभव है, इन्टरनेट अंगरेजी की बपौती नहीं | VEDICASTROLOGY.WWIKIDOT.COM Mithilakshara Font - Vedic Astrology (किन्तु इसके लिए उस वेबसाइट पर HIML कोड की अनुमति रहनी चाहिए | जिस किसी. नौरज सक्सेना, Abhay Trivedl and 335 others 40 Comments 24 shares Like ‘Comment Share Most relevant ‘Write a comment. «Or ns 05 (07) ol (a _— 70:3 PM eS eT लाए
7 WB certs ares आशीष. Vp कतेक रास बात: मिथिला...» रु सा जा ऊन अनचिन्हार आखर आशीष x Y wy कतेक रास बात: मिथिला! x eX € CS | © wwwwidyapatiorg/2005/09/blog-post.htm! @& tr| i 0 More “New Blogs Se ashish-anchinhar@amai.com Dashboard Sign Out Se me = SSS aes = . I a ZS & es by s = Se = Bee ee : पथ दर स्मिथ संपर्क करू. है. | Sees 2 eed 2 री 3 editor@vidyapati.org ; eee FeTTo vas sat कथा/कहानी .. हास्य-व्यंग.. लेखक/ कवि... आमंत्रण. सम सामायिक . संस्मरण = Contact ‘ a Sie ees Sy Se DI GIRS ae Se ee = Rar! अपननिथिला! FOLLOW US ae ee eee ee मिथिला | अपन After! fees CCH रचना — = = ee SS फुइसक घर, सर ee 3 पाठक ahd आगह जे कतेक रास बातक नव व ee कक | 'घरक चार पर लतडल HAA आ सजमईन, रुप रेखा केहेन ल्रागल, टिप्पणी द्वारा सुचित करब. SSS भीतर सीक पर टांगल दही, — ae दलान पड कूट्दी खाइत बडद, Lg त हम करब -किशन कारीगर गणु झाक खीस्सा सुनबैत eT, 2 चारत बस REISER के = ai 3. अंतर --सुभाष चंद्र खठियान मे राखल धानक बोझ, 4. कालजयी -विवेकानंद ठाकुर भीति पर लीखल कोहबर, | — zest कथा | आंगन में लिखल अडिपन, 4 विवाह'क तेसर सप्ताह --आदि यायावर | सामा-चकेबा,बगीया, पुडिकिया, तिलकोड, 2. स्टेशन पर'क हरियर दुबि आ लाल गुलमोहर — ——— ie आदि यायावर ४४८५श०/०020:90/9/909-9506_7072/कघा| | में माछ आ मखान, = a Ih a re सर री 4:29 AM i अनाच्हार आखरः आशीष XV gy कतेक रास a rer) x WY I=) € > & [© wwwvidyapati.org/2005/09/blog-post htm! Sx] i Cee = qe Hille Aralad i 2. - NS ae पोखडि मे ars आ मखान, Ss Pe नम आर कतेक रास बात, pelos = : 4 ee मिथिला, अपन मिथिला, अपन मैथिलि, अपन मैथिल | 2... | PE You might also like: | = Seas = =| rE ax a & ir | Aerated : DV 4 Followers (9) Next 4 a fs Mi कि दफा ता: 4 SS ्स Lai 7 | oy है Se ==2 = See | वि om ये @ Ea 2 ms = i सेखिकाः अल्पना) | बब्तू (एक कहानी) fi Li eames SS ees wae ——— = oe ee | <umar Pac जी द्वारा प्रेषित P=] = = 3 = == के ada a... - Yaswant Mishra eee es | बहुत नौक लागल इ कथा - Yaswant Mishra oe | 5comments: विद्यापति जी की समाधि भूमि विद्यापति धाम leace है | cl..~Shivam Kumar = Sanjay Jha said.. ee ae ES, कथा':क अगिला अंश एतय TE Padmanathji http://www. vidyapati.... - आदि यायावर Excellent poem. It encompassed all the attributes of a Mithila's village. What bance rik Kehaniaknne chhanhee eahanv pak can | say, it could be a poet using words instead of brush and paint on the ~ranjeet kumar | canvas to paint the image of a villagel! Believe me, while seating in the | downtown of Toronto, this poem took me to my villagellt Great efforts as well, please tell me how can | help you in your efforts. | am Aa पर सदस्यता det ST little disappointed, the way Maithil yahoo groups have been marginalised to a a te PF | A 430 AM > [Se w सिन्ड न नहा न कक ina
EMMA Cemestyapstngrmrnig ron मकान 70० | Kwww.vidyapatiorg mi = anne ene — ला 7 oes as Este nse Sor © मर nee Se Z 2 oo डा ध्िस््य SSS eg * —] j <I 2 = संपर्क करू = = | one CNCICN <iti Gici & s = editor@vidyapatl.org | ne See TACIT? NINT SUC T Be = | : S € | 3 2e% . . mh Min |. मुख्य पष्ठ | परिचय... कविता. कथा/कहानी... हास्य-व्यंग.... लेखक/ कवि... आमंत्रण... सम सामायिक © संस्मरण Contact | | जन्मदिनक चिट्ठी कथा किफु टटका रचना | तक, spe मैं ware जे करोक सम बात क नह के ||. जल्मादलक चिट्ी कथा. Saree sey एम car aro ed > romaine £ सैतू जन्मदिनक पंच दिन पहिंनेसैं रमे अनपौल कैने छल जे एहिं बेरका पल w= TTT A जन्म दिन पठिला बरखक तुलनामे नौकरें मनायव। एना करब, औना क or em नि fe ae तैयारी करबामे जूटि गैल ऊल। रहीं रहिं क$ ओ अपना मायक गर्दनि पकरि हद pln, ae ahs कौ माँ कहिं ने एहिं बेर हमरा जन्म दिनपर की सभ बनतै?? देख 7 4. चिवाह'क तैसर सप्ताह ante यायावर पिला बैर बाबुजी जे कपड़ा कीन ne देने रहथिन से हमरा नजि पसिन पढ़ल 2 स्टेशन पर क हरियर GFR आ लाल गुसमौहर -आदि. “55 en of बैर हम अपना ee ea माय ऑकरा बातपर कौनों जवाब नि दे। बस मने मन मुस्किया et El) se Sn OL ere wt met es ee eee eee अकबर et 5 [ MEET रन ie ||. बजायव। ओ steer अपना अपना जन्मदिनमे हमरा बजबैत अछि। तु ऑकरा सभ लैल नीक वस्तु बनेवे ने? 4 पर साय अन्तमे हारि क$ Bey दबारि देलक। जौ तौरा काम धाम A ot ने पाँच दिन पहिनेसें जन्मदिनक बारेमे a me सौचि रहल छड। की जाने गैलीं जे एहिं बेर जन्मदिन हैतीं की नजि। Ne की हू. हि 8 का. HOMO row 7 Ki Facebook CC a en, PS Sree € > © Di wonwvidyapatiorg, i = EEA सौचि रहल छड। की जाने गैलीं जे एहिं बेर जन्मदिन हैतीं की नजि। Se Bx sense सुनि सेतू चुपचाप मन Tans खेल; लेल चलिं मेल। प्लस है. सेतु फला पॉचक छात्र उल। ऑकर पिताजी cate छीन दौकान चला अपन परिवारक पेट चलबैत aT Se ee दोकानसैं एतेक ag aR हौइत छल जे घरक खर्चाक sey आन Tat ee खर्चा निकालल जा सकय। पक 'एहिं लेल सैतू कैर माय अपन घरक टू गौट कौठली भारापर लगा देने छली। सेतू औना तैं सात्र १0 बस्खक छल, .... TT बनु पट: मुदा औकर rw जका बूझल छल जे औकर घरक स्थिति औकर FR सभक तुलनामे बढ़ खराब अछि। हो — दादा ते ऑकरा बढ़ ar a, मुदा दादी, बढ़का कका, छोटका कका आ ef हुलका माय आ बाबुके an Ooms Pon Comet | erat ax a उचिन। Members (46) se 'एतेक बात are Bara Pc ओ उस तें अबोध नेना। re कि | be दे लक | | टाटा दि. ६ RC BS चिन्ता ओकर छलै। कारण i me छल जे सभ बरख सैतू केर जन्मदिन मानायल जाइत अछि। > ms दि | ee ee LF ie = aE >, सेतु आव अपन जल्मदिनक कौनों बात मायक लगमे न्जि बाजैत छल, मुदा अपन बहिन महिमा सगे ऑ. नरम दो ||. जन्मदिनक पूर्ण तैयारी ws TH उल। आई रवि अछि। सेतुक जन्मदिन a रवि। सेतू केर पिता भरे 5 बजे दौकान चलि गेला। कारण शहरमे कोनो..... टटका टिप्पणी es सरकारी emer आयौजल nO हुनका pe विस्वास Gta जे विभिन्न aT आयल aT ae लौकतिं 29. अगला भभ पल गढ़ ae J cram पालन, स्वर आदि कील: लेल अवस्य पता। सेतू कर साय जखन seer aoa” SE eae 3 eae aoe aaa एप = कालमे ओ चिन्तित as लागली। सहसा हुनका मौन ES Tg सेतू केर जन्मदिन अछि। की पता किम नि समन hse हुनका स्मरण छानि की नजि। ओमहर आन दिनक समान सेतू बिछावनसें उठबाक बाद पर-पायलान गेल। Nag Ri Se : eva बाद ओ चुपचाप घरमे जा सुति रहल। माय जानिं गेली जे आई सेतू रसल अछि। ओ ई सौचिये रहल सर कप ee रे dh की एक ae हाथमे एक लीटर दूध नेने आयल। ओ ae सेतू केर सायं कहलक जे महिमाक eng sd roast J rn ants एक लौटर दूध देख सेतू मायफ Rte आरों बढ़ि गेल। कारण आई घरमे एक लीटर दूधसें Wee की होयत। जन्मदिन मनेबा लेस कमसें कम तीन वा चारि ree दूध तें चाहिबे TY एक लीटर दूध ते प्रति मेल पर सदस्यता aa जाय >" mo Fa) 78 ONO ime Ei Facebook 2” GB Byomieth Bakshi Epeod x) @ Tee ca omer x च Sa) € > Di wwwvidyapatiorg i a ~_—— eee ee सेंतू करें जन्म दिन अछि sein st sere 2 : . है. फान करवा लेल ओ मोबाइल दिस दौगली, मुदा निराशा हाथ लागल। कारण मोबाइलमे बैलेस नजि ऊल। आब SS Ssieee a gre किए फूरा नजि हल उलनि जे आखिर ओ करती तें की करती। तखन ओ देखललि जे हुनका घरमे SSS : AR रहल व्यक्ति threats कतीं जेबाक सुरसार es रहल छला। सेतू केर माय धीरसें ऑहिंव्यर््तिसें sent sey पछलनि। की अहा टीरान होइत बजार जायब की? हाँ मैं उत्तर मैटबाक बाद ओ a Tt लक एक गोट पुर्जी लिख कड दै खल ऊचि जेकरा सेतू केर पिताकें देबाक अखि। a ओहि व्यक्तिकें दू लिटर ee Se Saree दूध आना लेल पाइ सेहो देखनि। हुनकर सौच Ga जे किछु होउ वा नजि सैतुक जन्मदिनपर तसमै तें Se eeneeae = |. बनाओ जाये सकेत अछि। oe ee) SUR) a) ST) ] wo रस 00 कविता (27) बहाना 6) हम वक्त दल ang ms grey oe बार धेस निकसि eA EH ऑफ REM | ret ही eae) oe | Sat merits se mre ane लिखल om rat) emery AGT) mee ee धारा तैल-2 Firat, रिफाइल 2 किलो, मटरपनीर /2 किलौ, कटहर- Prat, eT 4/2 किलो, आदि. सस्माण कि Botts अन्तमे दू लाइन समाद सेहों लिखल उलर। tL Conse आई सेतुक ea दिन अछि। सभटा समान कील दूपहर AT APC RT| सेतू भोरेसे ATT अछि। दौकानपरसं निकलबाक बाद ओ भरि दिन सौचैत रहल जे विज्ञान भने कतबो विकसित कियक नजि sts जाय, 3 डक समयपर पुरने वस्तु काज दैत अछि। मौबाइल कैर युग सभ ठाम कियक नजि प्सरि जाय। आई सैतू मायक pret ||. मदति देह ge Ferg era माध्यम केलक। की एहिं सभ लेल oer Nw at दौषी नजि ied 67777 हे You might also like: Bet: | = Bars oe कु, Pie se Sawai Wai =p हि by की लू हि B न पक व SoM Facebook ee पदक am, oy x 4 > @ (0) wwvidyapatiorg mi = weet ear सब अपन. अपन अपन खुश पर | किया सुभाष पत्ता... (att कहानी) | | Se) | ०००८ July OF, १889 Ea} | Oo j | | No comments: ae (© स्वीचिकार सुर्ित: Template images by johmwoodcock. Powered by Blogger. a रस अर रद nas a | ro उ - — ee cen ? "Ee B Fo! -@ pee SM
(0. @ निप्हघ00८८०ा/ बहती, ०9/7पनग%20]02%20नवनाथह203-588२0#_80 x ७ @: HE Apps BE Mail है BSNL| Broadband... HE Apps पद \ @ mnewshuntcomii & Vinay Jha on यह लेख मैथिली भाषा की लिपि से सम्बन्धित है, अतः मैथिली में लिखनी चाहिए थी, 2004 ईस्वी में मैंने देवनागरी और मिथिलाक्षर के फॉण्ट बनाये और वितरित किये मुझे मिले, सबमें यही दोष था, वे सारे sive अखबारी भाषा को ध्यान में रखकर बनाए गए उसे ge झाषा में केवल अपनी संस्था के PDF फाइल हेतु प्रयुक्त किया, फॉण्ट का वितरण फॉण्ट में समाविष्ट करके मैंने {Devwithila.ttt फॉण्ट बनाया, जिसके प्रत्येक चिहन पर मम Ley EEE 35:23
Ei Vinay tha x + कि % J € Cc @@ facebook.com/vinay,jha.906?_ tn_ =%2CdCH-R-R&eid=ARCbOF6-uSde-8KyG8waxhGx2b5SDX-yupMyWCeLYcTbtY300TIWETNBqx2mZxGECoqwpOFhXBQbRRS&hc ref... x & | i हि Vinay una Q (कि ashisn Home Create * | Vinay Jha Timeline ~ | 209 न | January न ‘© Aad Friend | 3 Follow INSTANT GAMES mone | । & a Wee % View more comments 4०62 YOUR GAMES MORE @ Friends - 5 mutual friends A © ®@ Vinay Jha oe a Tas Le , लग a a Gord लेखपड़ में प्रयोगकर्ता के मनचाहे वर्ड आर्ट सेटिंग को भी मनमाने तौर पर बदलना और स्वतः @ हे . eae गे A. & सुरक्षित करना Save Settings आसान बना दिया | xi iia. २००० ईस्वी में मैंने मिथिलाक्षर से ही यह कार्य आरम्भ किया था जो देवनागरी के साथ २००५ @ serps ° 24 ] ईस्वी में समाप्त हुआ, किन्तु मन्त्री महेश शर्मा ने मैथिल्री को गाली पढ़ी तो मैंने कार्य आगे d बढ़ाया और अब अन्य बहुत सी लिपियों सहित Ghats वर्ड प्रोसेसर तैयार है | देवनागरी में Gp 207 wonan . i > भी मुझे सबसे अधिक आसानी इसी सॉफ्टवेयर में होती है । जो भारतीय ल्रिपियाँ आपको नहीं Py Ria cok चि fae आत ी हैं उनमे भी देवनागरी की तरह बटन दबाने से शुद्ध स्वचात्रित संयुक््ताक्षरों सहित G ww न 4 ‘a टाइपिंग की जा सकती है और उनके कल्रात्मक aE आर्ट बनाये जा सकते हैं | मकर संक्रान्ति के अवसर पर मूल कार्य सम्पन्न हो गया | छिटपुट जोड़जाड़ या सुधार तो. ¢ Ajit Kumar Jha . सॉफ्टवेयरों में चलते ही रहते हैं । कि - डाउनलोड लिंक - Ge AitWadnerkar . Pal | ge http://vedicastrology.wikidot.cony..../mithilak.../Lekhapatta.rar om ‘Muttilesh Kumar p ed Aloy Dasgupta . sa खिणिश3 | लेखपड़ में प्राचीन मिसरी लिपि का कलात्मक वर्ड आर्ट - Egyptian Hieroglyphs Word-Art in Lekhpatta = @ ०350 ५3७०: sh Vatsa 5 Engish (UK) - English (US) - हिन्दी aist [ चाइना श Akhila Nand Jha Raman ७. Fates Terms - Advertising - AdChoices [> - Cookies é ASIEN O Facebook © 209 कक ‘ ee 5 a mee 40 छू. € व. ठा छञ
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€ > Cf facebook.com/anchinhar ax @: ह Ashish Anchinhar Q Sm Ashish Home Create * gE [Ashish Anchinhar Timeline ~ | 2020 ~ | March ~ | FB Manage posts | | = Listview | BW Grid view a ‘Ashish Anchinhar Sevara| Sth Uneth amyon Karon kumar devant 35 Oe r4 उपल्बध thas हिंसाबें मैथिलीक sige youtube tare गऊैन्द्र ठाकुर (Gajendra K) जी. ™, दवारा 0 Apr 2008% शुरु Stat ot UR पहिनेक कोनो चैनल छै ते लाम ओ लिंक सहित am \ सूचित करु हू | © प्रदीप पुष्प, Mishra Nabonarayan and 5 others: 6 comments Michael Thongni Anil Ray Rupesh Kr of) Like © comment > Share Mandal S$ Ashish Anchinhar Rajeev Ranjan Lal Ji- @ Lite events create Like - Reply -26 $B Pranaw Ina Rai Patiay जी के चैनल Rr दिन बाद जून 2008 से रिकॉरड के Sal (Sila हमरा मौन SE अछि जे 2007 A सेहो हिंनकर गीत यूट्यूब पर सुनने i e (2) Love Reply 24 oO Travelled to Started studying at © Ashish Anchinnar २००४ बला चैनल केर कोनों खोज-खबरि हो तेँ दि Durgapur, West... uneducated but... Like - Reply - 24 22 December 202 t985 ® Pranaw Jha ठीक © + Like - Reply - 26. sh(Us). हिन्दी afta Ashish Anchinhar Satya Narayan Jha जौ, आयह जे एहिंमे सहायता Eg (०: हाफ US) ET sn [कर © Ashish anchinnar Saya Like - Reply 24 oO: Privacy - Terms - Advertising - AdChoices [> - Cookies More~ @ की Patiavi Ham 2006 me Youtube channe! banene chhalaun Facebook © 2020 Je band kay ke 2008 me naya channel shuru kelaun, je ekhan hari chali rahal achhi A Like - Reply - 7h Oo Chaq Gawe hd दा = | eal Pr ea न =» = छा 2 | कि @ © 5.52000
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EE Vinay Jha XM Inbox (202)-ashishanchinhar@: x | New Tab x| + atl € CG @@ facebook.com/vinay,jha.906?_tn_=%2CdCH-R-R&eid=ARCbOF6-uSde-8kyG8waxhGx2b5SDX-yupMyWCeLYcTbtY300TSWETNBqx2mZxlGECoqwpOFhXBQbRR5&ihc ref... wy @ | @: हि Vinay una Q कि Ashish Home Create * | [Vinay Jha Timeline न | 209 + | February > | ‘S adaFriend | & Follow INSTANT GAMES MORE Gerace a a Foe ox | % ome cote: exe Vinay Jha YOUR GAMES MORE = t9February-@ remanenemienets सरकारी कमिटी ने रिपोर्ट दी है कि मिथिलाक्षर में कोई फॉण्ट नहीं है अतः सरकार को फॉण्ट & © Friends 45 mutual sends बनवाने का कार्य शीघ पूरा कराना चाहिये, अर्थात् कुछ करोड़ रूपये खाने पीने के लिये इन न्ज्) का हा महापुरुषों और इनके मित्रों को देना चाहिये | इस कमिटी को बनवाने वाले नेता ESS: के जा संजय झा जिनको इसबार भाजपा अपनी जीती हुई दरभंगा की सीट दान में दे रही है (जीवन में @ हे . i FA कभी कोई चुनाव नहीं जीते हैं, जेटली जी की तरह; किन्तु उनकी ही तरह सुपर-नेता हैं, और ee ef | N है... उनके aed भी हैं)। @ ‘Abhimanyu Jha . La a ty इस कमिटी के सारे सदस्य और संजय झा Ae अच्छी तरह जानते हैं और यह भी जानते हैं aa cone # कि मिथिलाक्षर का फॉण्ट मैंने २००२ में ही बना दिया था और बाद मैं अन्तर्राष्ट्रीय यूनीकोड 2 Adtya Mohan लि 7 — कॉन्सॉर्टियम द्वारा मिथिलाक्षर को यूनीकोड में रेंज प्राप्त हुआ तो मैंने यूनीकोड फॉण्ट भी , बना दिया | किन्तु इनलोगों के अनुसार मेरा और मेरे सभी कार्यों का कोई अस्तित्व ही नहीं है हक्लि नाना. + था | समाचार पढ़िये > "completing the work affecting Unicode Scripts of Mithilakshar e (४ का by Technology Development of Indian Languages (TDIL) early" -- ry ‘Ajay Khan लि Kafftala Kant Chandran | ujwal Kumar https://www indiatoday in/.../ancient-language-maithili-is-at aha Mishra Jha i At Kumar Jha न INDIATODAY.IN www.indiatoday.in & apis . ere 2 (4 किन OO Avikesh Kk. Jha, Vijay Jha and 409 others 47 comments 76 shares QB ‘Akash Vatsa लि Like © Comment ® Share कि Avnita Nand sna Raman ० Engish (UA) - English (US) - हिन्दी ST [ ost relevant © Seal 2 ही > हि Lekhapattarar a Show all =X ra a — me ey TAG छू. € व. ठा छा उ 6S ie
suyalaxmi-ttf- Google Drive के sig SS CG @ docs.google.com/file/d/OB9xwnNKpRUic3ZYSnp3b3RPOFU/view * © @: HE Apps HH Mail / BSNL| Broadband... #2 Apps लि \ @_mnewshuntcomvin, हा enelameint Suryalaxmi Regular Version .00 October 40, 2043, initial release True Type Font Creator: Kaushal Kumar Copyright - Maithili Corporation CRAPS UGE YO CARH रूम मन शो aT ,नशता orem विश sea वश्रमऊ Sty अंन कवट | wie : | — _ @ थ. . Page । / 3... - Q + व कया | |e | | oe suryalaxmi-t (न “ Show all x (४) SIGINT ., r=) el 7 छह _ € । ब जलन ele] O55 ia