विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA ISSN 2229-547X VIDEHA 'विदेह' ३१६ म अंक १५ फरबरी २०२१ (वर्ष १४ मास १५८ अंक ३१६) ऐ अंकमे अछि:- १. गजेन्द्र ठाकुर- संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल सेहो] [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] [FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI ALSO] २. गद्य २.१.योगेन्द्र पाठक वियोगी- नरक विजय (धारावाहिक नाटक- ९ म खेप) २.२. रबीन्द्र नारायण मिश्र- धारावाहिक उपन्यास-लजकोटर (१६ म खेप) २.३.जगदीश प्रसाद मण्डल- आमक गाछी- धारावाहिक उपन्यास (९ म खेप) २.४.नन्द विलास राय-सरस्वती पूजाक परसाद २.५.जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’- आँखिमे चित्र हो मैथिलीकेर (आत्म-कथा) २.६.मुन्नाजी-बीहनि कथा-रक्षा २.७.ज्ञानवर्द्धन कंठ-खेत २.८.सुभाष कुमार कामत- १ टा बीहनि कथा ३. पद्य ३.१.आशीष अनचिन्हार-दू टा गजल ४.स्त्री कोना (सम्पादक- इरा मल्लिक) ४.१.रागिनी प्रीत- गीत ४.२.पल्लवी सिन्हा- तीसी गुणक खान अछि ४.३.निर्मला कर्ण- सशक्त नारी सशक्त समाज ४.४.विद्या रश्मि- गलतीक बोध( संस्मरण) ४.५.अम्बिका मल्लिक- विरांगना ४.६.प्रीति प्रभा- पंखुड़ी ४.७.डॉ मालती मधु- स्तन कैंसरक शुरूआती लक्षण आ रोकथाम Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Books/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाउ। VIDEHA ARCHIVE विदेह पेटार View Videha googlegroups (since July 2008) view Videha Facebook Official Group (since January 2008)- for announcements १. गजेन्द्र ठाकुर ........................................................................................................................ ........................................................................................................................ [संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री] [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल सेहो] [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] [FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI ALSO] यू. पी. एस. सी. (मेन्स) २०२० ऑप्शनल: मैथिली साहित्य विषयक टेस्ट सीरीज यू.पी.एस.सी. क प्रिलिमिनरी परीक्षा २०२० सम्पन्न भऽ गेल अछि। जे परीक्षार्थी एहि परीक्षामे उत्तीर्ण करताह आ जँ मेन्समे हुनकर ऑप्शनल विषय मैथिली साहित्य हेतन्हि तँ ओ एहि टेस्ट-सीरीजमे सम्मिलित भऽ सकैत छथि। टेस्ट सीरीजक प्रारम्भ प्रिलिम्सक रिजल्टक तत्काल बाद होयत। टेस्ट-सीरीजक उत्तर विद्यार्थी स्कैन कऽ editorial.staff.videha@gmail.com पर पठा सकैत छथि, जँ मेलसँ पठेबामे असोकर्ज होइन्हि तँ ओ हमर ह्वाट्सएप नम्बर 9560960721 पर सेहो प्रश्नोत्तर पठा सकैत छथि। संगमे ओ अपन प्रिलिम्सक एडमिट कार्डक स्कैन कएल कॉपी सेहो वेरीफिकेशन लेल पठाबथि। परीक्षामे सभ प्रश्नक उत्तर नहि देमय पड़ैत छैक मुदा जँ टेस्ट सीरीजमे विद्यार्थी सभ प्रश्नक उत्तर देताह तँ हुनका लेल श्रेयस्कर रहतन्हि। विदेहक सभ स्कीम जेकाँ ईहो पूर्णतः निःशुल्क अछि।- गजेन्द्र ठाकुर संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सर्विसेज (मुख्य) परीक्षा, २०२० मैथिली (ऐच्छिक) लेल टेस्ट सीरीज/ प्रश्न-पत्र- १ आ २ TEST SERIES-1 TEST SERIES-2 [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल/ FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI] NTA_UGC_NET_MAITHILI_01 NTA_UGC_NET_MAITHILI_02 NTA_UGC_NET_MAITHILI_03 (श्री शम्भु कुमार सिंह द्वारा संकलित) Videha e-Learning MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) UPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS BPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. (ऐच्छिक) मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. (अनिवार्य) मैथिली प्रश्नपत्र- बी.पी.एस.सी.(ऐच्छिक) मैथिलीक वर्तनी १ भाषापाक २ मैथिलीक वर्तनीमे पर्याप्त विविधता अछि। मुदा प्रश्नपत्र देखला उत्तर एकर वर्तनी इग्नू BMAF001 सँ प्रेरित बुझाइत अछि, से एकर एकरा एक उखड़ाहामे उनटा-पुनटा दियौ, ततबे धरि पर्याप्त अछि। यू.पी.एस.सी. क मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेल सेहो ई पर्याप्त अछि, से जे विद्यार्थी मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेने छथि से एकर एकटा आर फास्ट-रीडिंग दोसर-उखड़ाहामे करथि| IGNOU इग्नू BMAF-001 ........................................................................................................................ MAITHILI (OPTIONAL) TOPIC 1 [Place of Maithili in Indo-European Language Family/ Origin and development of Maithili language (Sanskrit, Prakrit, Avhatt, Maithili) भारोपीय भाषा परिवार मध्य मैथिलीक स्थान/ मैथिली भाषाक उद्भव ओ विकास (संस्कृत, प्राकृत, अवहट्ट, मैथिली)] TOPIC 2 (Criticism- Different Literary Forms in Modern Era/ test of critical ability of the candidates) TOPIC 3 (ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददास सिलेबसमे छथि आ रसमय कवि चतुर चतुरभुज विद्यापति कालीन कवि छथि। एतय समीक्षा शृंखलाक प्रारम्भ करबासँ पूर्व चारू गोटेक शब्दावली नव शब्दक पर्याय संग देल जा रहल अछि। नव आ पुरान शब्दावलीक ज्ञानसँ ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददासक प्रश्नोत्तरमे धार आओत, संगहि शब्दकोष बढ़लासँ खाँटी मैथिलीमे प्रश्नोत्तर लिखबामे धाख आस्ते-आस्ते खतम होयत, लेखनीमे प्रवाह आयत आ सुच्चा भावक अभिव्यक्ति भय सकत।) TOPIC 4 (बद्रीनाथ झा शब्दावली आ मिथिलाक कृषि-मत्स्य शब्दावली) TOPIC 5 (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोरिक गाथामे समाज ओ संस्कृति) TOPIC 6 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- विद्यापति) TOPIC 7 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- पद्य समीक्षा- बानगी) TOPIC 8 (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोक गाथा नृत्य नाटक संगीत) TOPIC 9 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- यात्री) TOPIC 10 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली रामायण) TOPIC 11 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली उपन्यास) TOPIC 12 (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- शब्द विचार) TOPIC 13 (तिरहुता लिपिक उद्भव ओ विकास) TOPIC 14 (आधुनिक नाटकमे चित्रित निर्धनताक समस्या- शम्भु कुमार सिंह)् TOPIC 15 (स्वातंत्र्योत्तर मैथिली कथामे सामाजिक समरसता- अरुण कुमार सिंह) TOPIC 16 (यू. पी.एस.सी. मैथिली प्रथम पत्रक परीक्षार्थी हेतु उपयोगी संकलन, मैथिलीक प्रमुख उपभाषाक क्षेत्र आ ओकर प्रमुख विशेषता, मैथिली साहित्यक आदिकाल, मैथिली साहित्यक काल-निर्धारण- शम्भु कुमार सिंह) TOPIC 17 (मैथिली आ दोसर पुबरिया भाषाक बीचमे सम्बन्ध (बांग्ला, असमिया आ ओड़िया) [यू.पी.एस.सी. सिलेबस, पत्र-१, भाग-“ए”, क्रम-५]) TOPIC 18 [मैथिली आ हिन्दी/ बांग्ला/ भोजपुरी/ मगही/ संथाली- बिहार लोक सेवा आयोग (बी.पी.एस.सी.) केर सिविल सेवा परीक्षाक मैथिली (ऐच्छिक) विषय लेल] ........................................................................................................................ GENERAL STUDIES (PRELIMINARY & MAINS) GS (Pre) TOPIC 1 GS (Mains) NCERT-ENVIRONMENT CLASS XI-XII NCERT PDF I-XII TN BOARD PDF I-XII ALL INDIA RADIO ENGLISH NEWS ALL INDIA RADIO NEWS ARCHIVE ALL INDIA RADIO TALKS AND CURRENT AFFAIRS RAJYA SABHA TV NEWS DISCUSSIONS ........................................................................................................................ OTHER OPTIONALS ........................................................................................................................ IGNOU eGYANKOSH (अनुवर्तते) -गजेन्द्र ठाकुर २. गद्य २.१.योगेन्द्र पाठक वियोगी- नरक विजय (धारावाहिक नाटक- ९ म खेप) २.२. रबीन्द्र नारायण मिश्र- धारावाहिक उपन्यास-लजकोटर (१६ म खेप) २.३.जगदीश प्रसाद मण्डल- आमक गाछी- धारावाहिक उपन्यास (९ म खेप) २.४.नन्द विलास राय-सरस्वती पूजाक परसाद २.५.जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’- आँखिमे चित्र हो मैथिलीकेर (आत्म-कथा) २.६.मुन्नाजी-बीहनि कथा-रक्षा २.७.ज्ञानवर्द्धन कंठ-खेत २.८.सुभाष कुमार कामत- १ टा बीहनि कथा योगेन्द्र पाठक वियोगी (सम्पर्क- 9831037532) नरक विजय (एहि नाटकक एक संस्करण हमर पोथी ‘त्रिनाटकम्’ मे छपि गेल अछि। ओहि मे दृश्यक संख्या बहुत बेसी रहला सँ किछु निर्देशक लोकनि एकर मंचन पर प्रश्न चिन्ह लगौलनि। ओहि आलोचना कें ध्यान मे रखैत एकरा परिवर्धित कएल गेल। एकर बंगला अनुवाद श्री नवीन चौधरी केलनि अछि।- नाटककार) पात्र परिचय मानव पात्र — रमेश, सुरेश, अनुपम अमित (वैज्ञानिक) पौराणिक पात्र — ब्रह्मा, विष्णु, महेश, नारद, यमराज, चित्रगुप्त, दू यमदूत अंक 2 दृश्य 4 मंच सज्जा मे कोनो परिवर्तन नहि, डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड पर आब ‘यमलोक’ लीखल छैक। यमराज आ चित्रगुप्त कुर्सी पर बैसल छथि। मंच आलोकित होइत अछि। यमराज कालि दरबार मे भेल निर्णय यमलोक आ देवलोकक इतिहास मे अभूतपूर्व रहल महालेखाकार। हमर विचार अछि जे अपन विशेषाधिकारक प्रयोग करैत सबटा मृतात्माक नरक भोग शेष कऽ दी आ हुनका लोकनि कें आगूक योनि मे पठेबाक आदेश दऽ दी। आब एक साल तक कोनो नव मृतात्मा कें यमलोक अबैक काजे नहि, सोझे अगिला जन्म मे चलि जेताह। यमलोक खाली भऽ जाएत। चित्रगुप्त अति सुन्दर विचार, हमरो काज किछु हल्लुक होएत धर्मराज। ओना हमरा फेर नव विधान बनेबा लेल व्यस्त रहहिं पड़त मुदा ओ नव अनुभव होएत तें ओहि कार्यक प्रति हम बहुत उत्सुक छी। यमराज हम अपनेक सफलताक कामना करैत छी देव। (रमेश आ सुरेशक प्रत्यक्ष रूप मे प्रवेश, दूनू यमराज आ चित्रगुप्त कें प्रणाम करैत छथि) चित्रगुप्त (दूनू कें देखि आश्चर्यचकित होइत) हिनका दूनू कें तऽ अग्निकुण्ड पठा देल गेल छल, फेर एतए कोना ? की हिनका सब कें छुट्टी भेटि गेलनि धर्मराज ? यमराज छुट्टी हम तऽ नहि देलिएनि, एखन घोषणा भेलैक कहाँ ? ई तऽ कोनो माया लगैत अछि। सुरेश माया तऽ राक्षस करैत अछि देव। मर्त्यलोकक मानव मात्र वैज्ञानिक अनुसंधान करैत अछि। समय आबि गेलैक जे सबटा रहस्योद्घाटन कऽ दी। रमेश नव आविष्कारक लूरि सँ हम दूनू अपन साइबोर्ग प्रतिरूप तैयार कएल। स्नानघर मे गेलाक बहन्ने हम सब ओहि प्रतिरूप कें बहार कऽ देल जे एखनहुँ अग्निकुण्ड मे पड़ल अछि देव। तकरा बाद एकटा अदृश्य पोशाक पहिरि हम दूनू बहरेलहुँ आ सबतरि घुमैत रहलहुँ। सुरेश बेर कुबेर जे अपने अदृश्य आवाज सुनलियै देव से हमरे दूनूक छल। अदृश्य पोशाक सेहो मर्त्यलोकक वैज्ञानिक आविष्कारे छैक देव। यमराज अच्छा तऽ एही लेल ओ पेटी संग लेने एलियै अहाँ सब ? रमेश ठीके बुझलियै धर्मराज। आब सब बात स्पष्ट भऽ गेल ने देव ? यमराज हँ, बहुत नीक। खुशीक बात जे अन्त मे एहि नाटक सँ यमलोक मे सुधार करबाक काज शुरू भऽ सकल। चित्रगुप्त उचित समय पर रहस्यक सब बात फरिछा गेल से बहुत नीक बात। रमेश महाराज वैवस्वत, हमर निवेदन जे अपन विशेषाधिकारक प्रयोग करैत हमरा दूनू कें मर्त्यलोक आपस पठा देल जाए आ हमर जे प्रतिरूप अछि तकरा एतहि अपना सेवा मे लगा देल जाओ। हमरा सब कें यमलोकक नवनिर्माण करबाक अछि धर्मराज। सुरेश एकदम मॉडर्न क्न्सट्रक्सन महाराज औदुम्बर, जाहि लेल मर्त्यलोक सँ नवका मसीन सब आनए पड़त, विशेष वस्तु सब आनऽ पड़त, रोबोट मजदूर पठबए पड़त। एतए हमर प्रतिरूप सबटा कार्यसंचालन देखत आ मर्त्यलोक सँ सामान सप्लाइक व्यवस्था हम दूनू देखबैक। यमराज एवमस्तु। रमेश एकटा आर सुझावक धृष्टता करैत छी देव, यदि अनुमति हो तऽ कही। यमराज जरूर कहू। सुरेश नव संविधान बनेबा सँ पहिने चित्रगुप्त महराज कम्प्यूटर सीखि लेथि तऽ उत्तम होइत। कम्प्युटर हम पठा देब, हमर प्रतिरूप हुनका एतहि सब किछु सिखा देतनि। आधुनिक युग मे बिना कम्प्यूटर के लेखाकृतिक कल्पनो नहि कएह जा सकैत छैक देव। रमेश हमरा सबहिक अभिलाषा अछि जे नवका यमलोक अत्याधुनिक तकनीकक प्रदर्शनी स्थल बनए। चित्रगुप्त अभिलाषा जरूर पूर होएत। यमराज कतए सँ कतए हम सब पहुँचि गेलहुँ। धन्य कही मानव जातिक वैज्ञानिक विकास कें। चित्रगुप्त चली हम सब देवलोक मे सब बातक रहस्योद्घाटन कऽ दिएनि। यमराज संगहि ईहो बुझा दिएनि जे एहि सब घटना मे मानव जातिक कोनो द्वेषभाव नहि छलैक। ओ तऽ यमलोक मे सुधार करबा लेल ई व्यूह रचल गेल छल। रमेश आ सुरेश दूनू देव कें प्रणाम करैत छथि, दूनू देवक प्रस्थान। रमेश आ सुरेश विजय मुद्रा मे, अति प्रसन्न भेल हाथ सँ V चिन्हक प्रदर्शन करैत दर्शक दिस मंच पर आगू आबि जाइत छथि। रमेश (दर्शक दिस घुरि) अपने सब बुझिए गेलियै जे हमरा दूनूक एहि विशेष अभियानक उद्येश्य छल नरक विजय। अभियान सफल भेल। आब नरक मे कोनो मृतात्मा नहि रहताह आ ने एखन कियो ओतए जेताह। हम दूनू गोटे धरती पर घुरि रहल छी। ई विज्ञानक चमत्कारे छल जाहि सँ हम सब यमलोक मे सुधार करबा सकलहुँ। सुरेश वैज्ञानिक अनुपम अमितक सहयोग सँ हम दूनू साइबोर्ग प्रतिरूप बनौनाइ आ रोबोट एसेम्ब्ली सीखल। हुनके प्रयासें अदृश्य होइबला कपड़ा लेल। यमराज आ चित्रगुप्त कें जे उपहार देलिएनि से रोबोट अप्सरा छल। बाँकी बात तऽ अपने सब सुनिये लेलियै। (तखनहि वैज्ञानिक अनुपम अमितक प्रवेश) वैज्ञानिक (दर्शक दिस देखि) चमत्कार देखू जे आब हम अपन विशेष यान सँ दूनू शिष्य रमेश आ सुरेश कें अभियानक सफलता पर बधाइ देबा लेल सशरीर यमलोक पहुँचि गेलहुँ। (रमेश, सुरेश हुनका पएर छूबि प्रणाम करैत छनि, ओ दूनू कें छाती सँ लगा पीठ थपथपबैत छथि) हमरा आशा नहि छल जे अहाँ दूनू गोटे एतेक नीक तरहें अभियान कें सफल बनाएब। रमेश सब अपनेक सहयोग सँ सम्भव भेलैक सर। सुरेश अभियानक सफलताक पूरा श्रेय अहीं के अछि सर। रमेश अपने हमरा सब कें बीस सालक पापक प्रायश्चित्तक गप कहने रहियैक से स्मरण होएत सर। सुरेश आब ओ अभिनव योजना बताइये दी। रमेश देवलोक सँ काटि छाँटि कए यमलोक कें बहुत रास नवका जमीन भेटलैक अछि। सबटा पुरना यातनाकुण्ड सब नष्ट कऽ कए रोबोट मजदूर द्वारा पूरा यमलोकक नवनिर्माण हेतैक। सुरेश बुझले अछि प्राकृतिक सौन्दर्यक हिसाबें यमलोक आ स्वर्गलोक समाने छैक। यमलोकक कलंक छैक इएह नरक कुण्ड सब। एकरा नष्ट कऽ कए मानव द्वारा डिजाइन कएल तरीका सँ पुनर्निर्माण केला पर यमलोक स्वर्गलोक सँ बेसी सुन्दर भऽ जेतैक। रमेश एहि निर्माण लेल मर्त्यलोक सँ मसीन आ सामान सप्लाइ कएल जेतैक। ओकरे निर्यात कम्पनी हम सब खोलबैक। सुरेश संगहि यमलोक आब अपना ब्रह्माण्डक नवका टूरिस्ट स्थल बनतैक, ताहि लेल हम सब एकटा ट्रैवेल कम्पनी सेहो खोलबैक। ई दूनू कम्पनी पृथ्वी पर चलैत एखनुक कम्पनी सँ अलग हेतैक। आब एहि मे कोनो बेइमानीक काज नहि हेतैक ने कोनो राजनेता कें हिस्सा देल जेतनि। हम सब आब कोनो नवका पापक भागी नहि बनब। हमरा दूनूक पुनर्जन्म भेल अछि। रमेश बेस पैघ व्यवसाय छैक, बहुत लोक कें नोकरी भेटतैक। एहि मे प्राथमिकता भेटतनि ओहि व्यक्ति कें जिनकर परिवार कें हमरा दूनूक हाथें कोनो तरहक क्षति भेल छलनि। इएह होएत हमरा सबहिक प्रायश्चित्त। वैज्ञानिक नीक विचार। सरकारो एहि सँ बेसी नहिए करितैक। सुरेश आर एकटा नव बात सर। पाप पुण्यक नव व्याख्या हेतु एकटा संविधान सभा बनाओल गेलैक अछि जाहि मे चित्रगुप्त सचिव रहताह आ स्वर्गलोक मे बैसल एतुका भूतपूर्व विधिवेत्ता आ वैज्ञानिक सबके सेवा सेहो लेल जाएत। नवका विधान बनबाक अवधि मे यमलोक मे ताला लगा देल गेलैक अछि। कोनो समय सीमा नहि। रमेश देवता लोकनिक आदेश सँ पृथ्वी पर सेहो वर्तमान शास्त्र–पुराणक चर्चा बन्द करबा देल जाएत। नवका विधान बनलाक बाद मर्त्यलोक मे पंडितगण सबटा शास्त्र पुराण फेर सँ लिखताह। एहि मध्य एखनुक पोथा सब कें कोन-कान दोग-दाग सँ ताकि कए जमा करथु आ जरबैक व्यवस्था करैत जाथु। वैज्ञानिक ई तऽ सबसँ नीक काज होएत। (तखने नारदजीक संग ब्रह्मा, विष्णु, महेश, यमराज, चित्रगुप्त आ दूनू यमदूतक प्रवेश। सुरेश, रमेश देव लोकनि कें प्रणाम करैत छथि।) वैज्ञानिक देखियौ, हम एखनहि देवलोक जेबा लेल तैयार छलहुँ आ एतए देवलोके पहुँचि गेल। नारद (वैज्ञानिक कें सम्बोधित करैत) वैज्ञानिक अनुपम, जरूर अहाँ ब्रह्माण्ड मे कतहु जा सकैत छी। हमरा आब पूर्ण विश्वास अछि। मर्त्यलोकक वैज्ञानिक चमत्कारक कतबो प्रशंसा कएल जाए, कम होएत। हम जरूर पहिल बेर अपनेक कक्ष मे किछु जासूसी करए गेल छलहुँ मुदा धन्य अछि अहाँक तन्त्र जे हमर सब चेष्टाक काट ताकि लेलक। (रमेश, सुरेश दिश घुरि, पीठ थपथपबैत) अहाँ दूनू बहुत साहसिक काज केलहुँ। अगिला चरण लेल हमर आशीर्वाद। विष्णु (वैज्ञानिक सँ हाथ मिलबैत) हम पहिल बेर एहन गुणी सँ भेंट कs रहल छी। समस्त देवलोक अपने सबहिक कार्य पर गौरवान्वित अछि। ब्रह्मा आइ हम अपन अप्रतिम कृति मानव पर गौरवान्वित छी। हमर कामना जे स्वर्ग नरकक भ्रमजाल सँ मुक्त मानव एहिना वैज्ञानिक विकास करैत रहए आ समस्त ब्रह्माण्ड पर राज करए। महेश मर्त्यलोकक विज्ञान विकसित होइत रहए आ हमहूँ सब ओहि सँ लाभान्वित होइत रही सएह हमरा सबहक कामना। जय विज्ञान। महेश जोर सँ डमरू बजबैत छथि। सब देवगण वैज्ञानिक सँ हाथ मिलबैत छथि। वैज्ञानिक बीच मे, हुनक दूनू कात सुरेश आ रमेश, बामा कात नारद, यमराज आ चित्रगुप्त, दहिना कात ब्रह्मा विष्णु महेश ठाढ़ होइत छथि। आगू मे दूनू यमदूत नचैत छथि आ गबैत छथि- यमलोकक काज सँ छुट्टी भेटल दिन राति दौड़ए नहि पड़त मर्त्य लोक आब बिसर रहल छी, बिसरि रहल छी। प्रकाश धीरे धीरे कम होइत अछि, पटाक्षेप अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। रबीन्द्र नारायण मिश्र- सम्पर्क -9968502767 धारावाहिक उपन्यास-लजकोटर लजकोटर (प्रवासीक जीवनपर आधारित) -16- लतासँ भेंटक बाद हम डेरा पहुँचलहुँ ।असगरमे तरह-तरहक बातसभ मोनमे अबैत रहल। लताक बारेमे ,ओकर पिताक बारेमे आ ओकरसभक हमराप्रति सहानुभूतिक बारेमे सोचैत रहि गेलहुँ ।हमरा लताक ओहिठाम रहब आ ओकर काज करब ठीक नहि बुझाएल।भेल जे बादमे कोनो लफड़ा ने भए जाइक । फेर ओतेकटा कारबार हमरा वशक लगितो नहि छल । हम अपन निर्णय लताकेँ बता देबाक हेतु फोन केलहुँ ।मुदा ओ फोन नहि उठओलक ।प्रायः ओ तमसा गेलि । जे भेल,से भेल मुदा हम ओहि घनचक्करमे नहि पड़बाक पक्का निर्णय कए लेने रही ।राति बेसी भए गेल रहैक । बहुत थाकि गेल रही । मुदा भोजनक जोगार तँ करबेक छल। अपनेसँ किछु-किछु बनओलहुँ । भोजन कए सुति रहलहुँ । भोरे उठि नहा सोना कए बिदा भेलहुँ । हम सोचि लेने रही जे आइ कोनो-ने-कोनो काज पकड़ि कए रहब आ एहि बातक प्रयास करब जे ककरो आश्रित नहि रही । एतेक पैघ महानगरमे जतए किओ ककरो नहि अछि ,हमरा कोना काज भेटत ई समस्यासँ मोन आतुर छल मुदा कहबी छैक जे अन्हेर गायक भगवान रखवार। अहिना चलिते-चलिते एकठाम लोकसभक भीड़ देखलिऐक ।विश्वकर्मापूजाक बाद प्रसाद वितरण भएरहल छल । कार मरम्मतक कारबार ओतए होइत छल । हमहु प्रसाद लेलहुँ । थाकि गेल रही । ओतहिबेंचपर बैसि गेलहुँ ।क्रमशः लोकसभ चलि गेल । ओकर मालिक आ दू-तीनटा कर्मचारी रहि गेल रहए । ओकर मालिक बेस रमनगर लोक बुझेलाह । सर्ट-पैंट पहिरने,मोछ-केस रंगनेहुनकरबएसचालीस -पैंतालिससँ बेसी नहि बुझाइनि। हम हुनका प्रणामकेलिअनि ।हम किछु पुछितिअनि ताहिसँ पहिने ओएह कहए लगलाह-"केमहर घुमिरहल छी ?" "काज ताकि रहल छी ।" "केहन काज?" "जएह भेटि जाए?" "कतेक पढ़ल छी " "ओना तँ हम मैट्रिक पास छी मुदा आब तँ पास केलाबहुत दिन भए गेल ।सभ बिसरि गेलिऐक ।" "ई तँ बहुत नीक भेल कारण लोककेँ अबैत रहैत छैक किछु नहि आ दाबी रहैत छैक बहुत। तेहन लोककेँ काज भेटबामे बहुत परेसानी छैक ।" "हम कोनो काज करए लेल तैयार छी?" "ठीक छैक, अहाँ काल्हिसँ एतए आउ, देखैत छी, अहाँ की कए सकैत छी । प्रातभेने हम मिथिलाआटोसेंटर पहुँचलहुँ । ई एकटा सुखद आश्चर्यछल जे दिल्लीमे रहितहुँ ओकर मालिकमदन झुरजार मैथिलीमे बजैत छलाह । ततबे नहि हुनका मैथिलीक पोथीसभ आल्मीरामे धेने सेहो देखलिअनि। हमरा आएलदेखि कए ओ बहुत खुश भेलाह । " हम अहाँक बाटे ताकि रहल छलहुँ ।"-ओ बजलाह । "रस्तामे बस खराप भए गेलैक नहि तँ पहिने आएल रहितहुँ ।" "कोनो बात नहि । अहाँ ई फार्मभरि लिअ।एकटा फोटो अनने छी कि नहि?" "फोटो तँ नहि अछि?" "आओर कोनो पहिचान पत्र अछि तँ ओकर एकटा फोटोकाँपी दए देबैक ।" "हमरा लगमे तँ किछु नहि अछि।"-से कहैत हम किछु परेसान भए गेल रही । "कोनो बात नहि । अहाँ काज शुरु करू, फेर देखल जेतैक।" -से कहि ओ हमरा ओहिठाम काज करैत एकटा कर्मचारीक संग कए देलथि। भुट्ट, चाकर भरिगर देह होइतहुँओ बेस फुर्तिगर लोक बुझाएल । " हिनका अपना संगे राखह आ काजसभ सीखा दहुन । ई एतहि काज करताह।" "ठीक छैक"- से कहि ओ हमरा दिस ताकए लागल । फेर हमरा कहलक-"की नाम भेल? "गोविंद" "आ रहैत कतए छी?" "लक्षमीनगरमे डेरा लेने छी।" " ओ तँ एहिठामसँ बहुत दूर अछि ।" "बदलि लेबै । कोनो आस-पास डेरा होइक तँ कहब ।" "ठीक छैक।" अहाँक की नाम भेल ?" "बटुक ।" बटुक हमरा ओतए काज केनिहार नेपाली कर्मचारी बहादुरसँ भेंट करओलक । " ई ऐहिठाम आइसँ काज पकड़लथि अछि । मदन मालिक हिनका काज सिखाबक हेतु कहलखिन अछि । " " ई काज सिखएमे की राखल छैक? चक्कामे हवा भरि देऔ ,पेंचर साटि दिऔ ,कोनो पेंच ढ़ील होइ तँ कसि दिऔक,भए गेल दसटाका ।"-से कहि बहादुर भभाकए हँसि पड़ल । दिनभरि हमसभ गप्प-सप्प करैत रहलहुँ । कै बेर चाह-पान भेलैक । बटुककेँ पान खेबाक आदति रहैक । बहादुर चीलम पीबैत छल । मालिककेँ एहिसभसँ कोनो मतलबनहि,काज हेबाक चाही । दिन-भरि हँसी-ठठ्ठा होइत रहल ।साँझ भए गेल। बहादुर आ बटुक एकहिठाम रहैत छल । दुनूगोटे एक-एकटा कोठरी लेने छल । दुनूक परिवार संगे रहैत छल।जाइत-जाइत बटुक कहलक -"अहूँ हमरेसभक संगे डेरा लए लिअ । एकठाम रहब तँ मोनो लागत आ सुविधो रहत ।" ' से तँ ठीके कहैत छी। कोनो कोठरी खाली छैक की?" "हमरासभक बगलेमे एकटा कोठरी खाली भेलैक अछि। कही तँ मकान मालिकसँ गप्प करी।" "अवश्य गप्प करब । एकहिठाम डेरा भए जाएत तँ संगे आएब-जाएब । गप्प-सप्प करैत सभगोटे संगे अपन-अपन डेरा दिस बिदा भेल । एहि तरहेँ हमरा फेर एकटा काज भेटि गेल । दरमाहा की भेटत,काज की करए पड़त,किछु तय नहि छल। हमराकिछु पुछबाक साहस नहि भेल ने ओ अपनामोने किछु कहलथि । काज भेटि गेल सएह कोन कम? महानगरमे ककराके पुछैतछैक,ताहिठाम बिना कोनो पूर्वपरिचयकेँ ओ हमरा अपना ओहिठाम काज देलाह ई कहाँकथोड़ छल ? बड़का बात छल। तहन तँ मनुक्खक स्वभावछैक जे ओ नव-नव समस्या ठाढ़ कए लैत अछि । मुदा हम एहि हालतमे नहि रही जे किछु मोलइ करी। जे भेटि गेल सएह बहुत । डेरा पहुँचलहुँ तँ मोन हल्लुक लागए । मकान मालिककेँ कहि देलिऐक जे हमरा काज भेटि गेल आ ओ एहिठामसँ बहुत दूर अछि तेँ हमरा डेरा बदलए पड़त । "आ बाँकी किरायाक की हेतैक?"-मकान मालिक बाजल। " हमरा लगमे अखन पाइ नहि अछि । एकमासक दरमाहा भेटत तँ सभ सँ पहिने अहीँकेँ हिसाब चुकता करब ।" "एहनो कहीं भेलैक अछि? गेलाक बाद के- ककरा तकैत रहत? हिसाब कइए कए एहिठामसँ गेनाइ ठीक होएत। -मकान मालिक बजलाह । मकान मालिक होमिओपैथीक डाक्टर छलाह। पहाड़क रहएबला छलाह । जे किछु कमाथि से पिनाइएमे चलि जानि । तेँ दिन-राति घरबालीसँ खटपट होइत रहनि ।प्रेम विवाह केने रहथि । घरबाली सेहो किछु काज करैक,की करैक से हमरा नहि बूझल रहए । ने ओसभ से कहिओ कहलक,ने हम कहिओ पुछलिऐक । मकान मालिक अपनपरिवारक संग भूतलपर बनल फ्लैटमे रहैत छल । ऊपरका फ्लैटमे हम आ हमरा सन-सन कैगोटे रहैत छलहुँ । हम मकान मालिककेँ बिना किछु जबाब देनहि ओहिठामसँ उठिकए अपन कोठरीमे आबि गेलहुँ ।हम ओहिठाम पहुँचले छलहुँ कि मकान मालिकक घरसँ जोर-जोरसँ हल्ला होइत सुनाएल । दुनूगोटे आपसेमे लड़ैत छल । बुझि नहि सकलिऐक जे कथीलेल झंझट भए रहल छैक ।ओकरा सभकेँ आपसी गप्पमे हमर नाम लैत सुनि आश्चर्यो भेल । फेर की भेलैक जे ओ सभ एकदम गुम्म भए गेल । हम थाकल रहबे करी पता नहि,कखन निन्न पड़ि गेल । रबीन्द्र नारायण मिश्र, पिताक नाम : स्वर्गीय सूर्य नारायण मिश्र, माताक नाम : स्वर्गीया दयाकाशी देवी, बएस : ६६ बर्ख, पैतृक ग्राम : अड़ेर डीह, मातृक : सिन्घिआ ड्योढ़ी, वृति : भारत सरकारक उप सचिव (सेवा निवृत्त)/ स्पेशल मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट, दिल्ली(सेवा निवृत्त), शिक्षा : चन्द्रधारी मिथिला महाविद्यालयसँ बी.एस-सी. भौतिक विज्ञानमे प्रतिष्ठा : दिल्ली विश्वविद्यालयसँ विधि स्नातक प्रकाशित कृति : मैथिलीमे:- १. ‘भोरसँ साँझ धरि’ (आत्म कथा), २. ‘प्रसंगवश’ (निवंध), ३. ‘स्वर्ग एतहि अछि’ (यात्रा प्रसंग), ४. ‘फसाद’ (कथा संग्रह) ५. `नमस्तस्यै’ (उपन्यास) ६. विविध प्रसंग (निवंध ) ७.महराज(उपन्यास) ८.लजकोटर(उपन्यास)९.सीमाक ओहि पार(उपन्यास)१०.समाधान(निवंध संग्रह) ११.मातृभूमि(उपन्यास)१२.स्वप्नलोक(उपन्यास)१३.शंखनाद(उपन्यास)१४.इएह थिक जीवन(संस्मरण) In English:- 1.The Lost House (Collection of short stories), 2.Life is an art हिन्दी में – १.न्याय की गुहार(उपन्यास) (उपरोक्त पोथीसभ pothi.com, amazon.com आओर www.flipkart.com पर सँ कीनल जा सकैत अछि) इमेल : mishrarn@gmail.com ब्लोग : mishrarn.blogspot.com एमजोनक लेखक पृष्ठ : amazon.com/author/rnmishra ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। जगदीशप्रसाद मण्डल आमक गाछी (धारावाहिक उपन्यास) 9. कौलेजक छुट्टी काल्हि सम्पन्न भऽ जाएत। रौतुका गाड़ी पकैड़ सभ परिवार सुवासिनियो आ धीरेन्द्रो पटना जाएत। बेरुका समय, सुवासिनी चारू माइ-धी जीबेन्द्रक ऐठाम पहुँचली। तइसँ पहिनहिसँ श्याम पहुँच दरबज्जापर बैस जीबेन्द्रक संग गप-सप्प कऽ रहल छला। दरबज्जापर नहि रूकि सुवासिनी सभ कियो अँगने गेली। सुवासिनीकेँ देखते सुभावी ओसारपर ओछाइन ओछा सभकेँ बैइसैले कहलैन। जीबेन्द्र आ श्याम, आजुक परिवेशमे ‘कन्यादान’ परिवारक केहेन जटिल समस्या भऽ गेल अछि तही सम्बन्धमे गप-सप्प कऽ रहल छला। जीबेन्द्र श्यामकेँ कहलखिन- “बौआ श्याम, तोहर उमेर चालिसक नीचॉं छह मुदा हम तँ साठिसँ ऊपर टपि गेल छी। तँए, केना-केना बेटी बिआहक जटिलता आएल से तँ देखैत आबि रहल छी।” स्वीकार करैत श्याम बाजल- “दुनियॉंक जेते दुखो-सुख आ चढ़ो-उतरी अहॉं देखलिऐ तेते हम थोड़े देखलिये हेन। भलेँ आजुक नव परिवेशमे जे भिन्न-भिन्न सम्पद्रायक भिन्न-भिन्न विद्यालयमे भिन्न-भिन्न रूपक बेवहार पेब अलग बेवहार भऽ जाए मुदा मिथिलोक तँ अपन जीवनो आ दर्शनो रहबे कएल अछि। तैसंग जिनगी अँकैक कसौटी सेहो ऐठामक अप्पन रहले अछि।” ओना, श्यामक जे विचार छेलैन तेकरा आगू नहि बढ़ा जीबेन्द्र अपन विचारकेँऐ दुआरे मोड़ैत बजला जे सुवासिनी चारू माइ-धीकेँ ऑंगनमे प्रवेश करैत देख नेने छला। अँगनेक मुँह ने दरबज्जो छी। बजला- “जगमोहीक बिआहक गप-सप्प चलबै छह किने?” श्याम- “सुवासिनीक परिवारक विचार छैन जे बी.ए. केला पछाइत बिआहक गप-सप्प चलाएब।” जीबेन्द्र- “बढ़ियॉं विचार छह। आगू साल तक धीरेन्द्रोक बिआह कइये लेब।” ओना, जीबेन्द्र पत्नियो आ धीरेन्द्रोक सह पेब चुकल छला तँए अपनो सहैट कऽ आगू सपटिया सेहो गेले छला। ‘बढ़िया विचार’ जे जीबेन्द्रक मुहसँ निकललैन से तँ अपन मनोनूकल निकललैन मुदा श्यामकेँ थोड़ेक कठाइन लगल। किएक तँ आजुक समाजक परिवेश एहेन बनि रहल अछि जे आदिम जुगमे–जहिया मनुख शुरूक अवस्थामे छल–जहिना मनुखकेँ चिन्ह-पहचिन्ह नइ रहने जे जिनगीक गति छल ओहने गतिक परिवेश आइयो बनल जा रहल अछि। बाप-माए बेटाक सेवा लेल कोट-कचहरी जाए, एकरा की कहबै..? श्याम बाजल- “चाचाजी, जखन काल्हि सभ जेबे करत तँ संगे-संग सभ चलि जाएत।” जीबेन्द्र- “यएह सभ ने जिनगीक परीक्षाक घड़ी छी जे अपन परिवार आ दोसरक परिवारक बीच केहेन सम्बन्ध अछि।” ऑंगनमे ओसारपर बैसते सुवासिनी जगमोहीकेँ कहलखिन- “बुच्ची, चाचीकेँ चाह बनबैमे संग दहुन।” सुभावी किछु ने बजली। ओना, चाह बनबैक सभ सरंजाम घरसँ निकालि चुल्हि लग रखि चुकल छली। चाह बनल। जगमोहीक माझिल बहिन फुलकुमारी दू कप चाह नेने दरबज्जापर पहुँचल। ओना, फुलकुमारीकेँ देखते श्याम अपन नजैर निच्चॉं खसा लेलैन मुदा जीबेन्द्र नजैर उठा निहारए लगला। हाइ स्कूलक छात्रा फुलकुमारी। जगमोहीसँ चारि साल उमेरमे छोट। किशोरावस्थाक देहलीपर पहुँच चुकल अछि। फुलकुमारीकेँ देख मने-मन जीबेन्द्र हियासए लगल छला जे ऐ जुगमे ‘बेटीक बिआह’ तेहेन समस्या बनि गेल जे सुवासिनीकेँ एकलखाइत दस-पनरह बर्ख तक कठिन समस्यासँ जुझए पड़त। चाहक चुस्की लैत जीबेन्द्र बजला- “सुवासिनीक ईहो बेटी जगमोहिये जकॉं हड़गर-कटगर अछि।” जीबेन्द्रक बात सुनि श्याम बाजल- “तीनू बहिनक देह-दशा एकरंगाहे छइ।” जीबेन्द्र बजला- “जेकरा गरदैनमे ढोल पड़ै छै ओकरा तँ बजबइ पड़ै छइ। मुदा...।” जिज्ञासा करैत श्याम बाजल- “मुदा की?” चिन्तक जकॉं जीबेन्द्र बजला- “ओना, परिवारो आ समाजोमे एहेन विकरितता आबिये रहल अछि जे जहिना परिवारमे भैयारीक बीच तहिना समाजमे जाति-बेरादरसँ लऽ कऽ हित-अपेछितक बीच एहेन विचारक संग बेवहारो बनियेँ रहल अछि जे केकरो बेथा कथा कियो ने सुनए चाहैए आ ने ओइमे अपन कर्तव्यक भागीदारीए सम्मिलित करए चाहैए।” ओना, जीबेन्द्र अपना जनैत सोझराएले शब्दमे अपन विचार रखलैन मुदा श्यामकेँ नीक जकॉं बुझैमे नइ आएल। तँए बाजल- “से की?” परिवारसँ समाज धरिक रस्ताकेँ सोझरबैत जीबेन्द्र बजला- “यएह जे परिवारोमे[i] देखै छी जे भैयारीक बीच बाल-बच्चाकेँ पढ़बै-लिखबैक हुअए आकि बिआह-दान ओ परिवारक दायित्वसँ उतैर बेकतीगत भऽ जाइए। तहिना समाजोमे अछि जे भोज-काजमे आनो-आन परिवारक सहयोग अपना जकॉं रहैए मुदा पढ़ाइ-लिखाइक सम्बन्ध पतराइते जा रहल अछि। आ बिआहो-दानमे सहयोग केतौ-केतौ पतराइत-पतराइत मेटाइयो गेल अछि।” अपना जनैत जीबेन्द्र सोझ-साझ रूपमे बजै छला मुदा श्यामकेँ बातक विचार ओझराएल-ओझराएल सन बुझि पड़ल। जिज्ञासा करैत श्याम बाजल- “चाचा, नीक जकॉं मनमे स्पष्ट नइ भेल।” श्यामकेँ दोहरा कऽ पुछलासँ जीबेन्द्रकेँ अनका जकॉं मनमे मिसियो भरि तामस नहि लहरलैन, अपन विचारकेँ सोझरबैत बजला- “परिवारक भैयारियोमे आ समाजक भिन्न-भिन्न जे रूप अछि तहूमे एहेन विचार पनैप रहल अछि जे सभ सभकेँ नीच-सँ-नीच नजैरसँ देखए चाहैए। जखन एहेन विचार मनमे घर बना लेत तखन समाजो आ परिवारोक बीचक एकरूपता सेहन्ता बनबे करत किने।” जीबेन्द्रक विचार श्यामकेँ सोहन्तगर बुझि पड़लै। बाजल- “से तँ सेहन्ता लगबे करत किने। मुदा उपाइयो तँ दोसर नहियेँ छइ।” श्यामक बातसँ श्यामक विचारक थाह जीबेन्द्र पाबि गेला। अथाहमे थाह लेब जमीनछुअब होइए। जाबे तक धरतीपर पएर नइ रोपल जाइए ताबे तक डुमै-भँसैक संकट रहिते अछि मुदा जखन धरती पएर छुबैए वा पएर धरती छुबैए तखन ठाढ़ होइक सम्भावना तँ बनिते अछि...। जीबेन्द्र बजला- “बाउ श्याम, दुनियॉंक तड़ियो-घटी आ तड़ियो-फड़ीकेँ दुनियाक सभकेँ चिन्हक चाही मुदा से नइ अछि।” जीबेन्द्रक विचार सुनि श्याम अकबका गेल। बाजल- “से की?” जीबेन्द्र- “परिवारोमे आ समाजोमे समस्याग्रस्त आदमीकेँ चिन्हित करैत ओकर दुख-दर्दकेँ बॉंटि-बॉंटि छोट करैत ओकरा निर्मूल बनाएब अछि। से नइ भऽ पाबि रहल अछि।” श्यामक मन जेना थकथका गेल। बाजल किछु नेमुदा चिन्तकक चिन्तन मनमे जरूर उठलै। बेथासँ बेथित नजैर जीबेन्द्रपर फेकलक। श्यामक कुम्हराएल चेहरा देख जीबेन्द्र बजला- “बौआ, मनुख बानरसँ ने भेल अछितँए अनुकरण करब एकरा संस्कारमे अछिए। अपना ऐठाम जे बेटीक बिआहमे दान-दहेजक एहेन विकराएल रूप बनि गेल अछि तेकर जड़ि केतए अछि से बुझै छहक?” मुड़ी डोलबैत श्याम कहलकैन- “नइ!” ‘नइ’ सुनिते जीबेन्द्र बजला- “रामायणिक अनुसार रामकेँ सेहो जनकपुरमे गाड़ीक-गाड़ी विदाइ देने रहैन। ई तँ भेल पुराणक बात, मुदा इतिहासक कड़ीमे देखबहक जे राजा-रजबार गामक-गाम अपना बेटीकेँ खोंइछ कहक आकि जमाएकेँ देब बुझहक, दइ छला। ओकरे देखा-देखी ओइसँ निच्चाँउतरल। जे उतरैत-उतरैत समाजक अन्तिक सीमा धरि मुँह बना लेलक अछि। ओइ राक्षसी वा दानवी मुँहमे समाजक एका-एकी सभ गिरैत जा रहल अछि जे आइ समाजक कोढ़ बनि कोढ़केँखोखैर-खोखैर लोहियामे दूधक जरल डारही जकॉंखा रहल अछि आ सभ कियो एक-दोसरक तमाशा देख रहल अछि।” आइ तीसम दिन पुरि जाएत परसूसँ पढ़ाइ शुरू भऽ जाएत। ओना, तीन-चारि दिनसँ धीरेन्द्र पटना जाइक तैयारीमे जुटि गेल छल, मुदा सुवासिनीक परिवार मात्र शेष दिन गनि रहल छल। भोरे-भोर, ओछाइनपर सँ उठैसँ पहिने आ नीन टुटला पछाइत धीरेन्द्र आजुक दिनक संग काल्हिकेँ जुटैत सीमापर ठाढ़ भऽ हर्षित मने अपन हिसाब जोड़ए लगल- आठ मासक पछाइत पटना छुटि जाएत। नोकरी करब नहि, तँए फेर गामे आएब। ओना, मात्र पटने छुटत तेतबे नइ अछि, पटनाक संग कौलेजक शिक्षा सेहो सम्पन्न हएत। कौलेजेटा किए, बाहरी शिक्षकक शिक्षा सेहो छुटत। अखन धरि जे सीखपन[ii] भेटल अछि वएह अपन मूल सम्पैत भेल, अही बले ने जिनगीक धारमे कुदि-हेलि चलैक अछि। जँ ज्ञानक बले चलब तँ हेलैत रहब, नहि तँडुमि मरब। भेल तँ आठ मास प्रवासी जीवन बिताएब अछि। फेर यएह रामा आ यएह कठोला रहबे करत। ओना, यएह आठ मासक भीतर विद्यार्थी जीवनक अन्तिम परीक्षा सेहो देब अछि...। जहिना प्रकृति समयानुसार अपन वसन्तसँ शिशिर धरिक गुण-गाण बारहो मास छत्तीसो दिन करैत चलैए तहिना धीरेन्द्रोअपन वसन्तसँ शिशिर धरि देख रहल छल। जीबेन्द्र सेहो बेटाकेँ शिक्षणभूमिमे पठबैक तैयारी कइये नेने छला। तँए मनमे कोनो तरहक क्लेश-बात शिशिर जकॉं नहियेँ छैन, मुदा वसन्तक बहार नहि नाचि रहल छैन, सेहो केना नइ कहल जाएत। बेटाक प्रति दायित्व, जे जिनगीक एक चौथाइक काज (कर्म) भेल माने करीब बीस बर्ख, तइमे ब्रह्म-चर्च जीवनक दायित्वनिमाहि सालोसँ कम आठ मासपर पहुँच गेल अछि, तँए तरे-तर विचारक निमहैत भारक खुशीसँ मन खुशियाएल छैन्हे। भोरे उठि टहलबोक खियालसँ आ ओगरवाहियोक खियालसँ जीबेन्द्र आमक गाछी गेला। रस्ता कातेमे, अपन आमक गाछीसँ पहिने सुवासिनीकेँ श्यामक गाछीमे उदास मन देख अपनो मन माने जीबेन्द्रक मन मन्हुआए लगलैन। मुदा लगले अपन विचारकेँ समेट सुवासिनीक जिनगी दिस नजैर टहलौलैन। बेचारीक उदास मन किए ने रहत?तेहेन जुग-जमाना भऽ गेल अछि जे अपन जिनगी भरिक कमाइसँ जैठाम बेटीक बिआह सम्हारब भारी भऽ गेल अछितैठाम तीन-तीनटा बेटीक भार सम्हारब खेल थोड़े छी, बेचारी चिन्तित किए ने हएत...। मुदा कनैत मुँहक रूप तखन बदलैए जखन हँसैत मुँहक विचारक रूप ओकरा भेटै छइ। जँ कनैतकेँ आरो बेसी कनैत मुँह भेटत तखन तँ ओ हिचैक-हिचैक आरो बेसी कनबे करत किने..! अपन रूप लावण्य स्थापित करैत जीबेन्द्र सुवासिनीकेँ देख बजला- “बुच्ची, आब केते कालक दाना-पानी प्रेमनगरक छह?” ओना, बजैक क्रममे सुवासिनीक मनमे उठि गेल छेलैन जे जेते आमपर हमर नाम लिखल अछि तेते सठला पछाइत ने जाएब, मुदा बजैसँ पहिने अपनाकेँ चेतैत बाजल- “अपन तँ नैहर छी, आइ जँ माए-बाप रहितैथ तँ दोसर जिनगीक गाम रहैत मुदा अखन भाए-भौजाइक बीचक ने अछि। मुदा तैयो गाम तँ गामे भेल। आइ छुट्टीक अन्तिम दिन छी, भरि दिन तँ रहबे करब। सौंझुका बससँ चलि जाएब।” जीबेन्द्र- “धीरेन्द्रोकेँ जाएब छइहे, नीक हेतह जे सभ संगे चलि जइहह। जहिना हँसी-खुशीसँ आम खाइले आएल छेलह तहिना हँसी-खुशीसँ जेबो करिहह। समय-साल नीक रहत ते ऐगलो साल अबिहह। अपन नैहर छिअ, तोरा कोनो केकरोसँ परमीशन लइक काज छह।” तैबीच जगमोही सेहो पहुँचल। जहिना कोनो यज्ञ-जपमे कर्म जखन अन्तिम छोर पकड़ैए तखन उदासीक आगमन होइते छै जे ‘उदासी’ कहियौ कि ‘समदाउन’ कहियौ तइसँ जे समापन करैकाल जेहेन प्रकृतक रूप सजै छै तेहने रूप जगमोहीक छल। भोरे ओछाइनपर सँ उठिते पहिल विचार मनमे यएह उठलै जे आइ चलि जाएब। मुदा जीबेन्द्रक विचारक अन्तिम बात सुनि नेने छल। मनमे उठलै- माइयक नैहर तँ हमरो ने मात्रिके भेल। ठीके ने बाजल छला जे तोरा परमीशनक खगता थोडे छह।मात्रिके ने मातृभूमीए जकॉं अछि। तैठामसँ जाइ-अबैक प्रश्न की भेल...। जीबेन्द्रकेँ पएर छुबि प्रणाम करैत जगमोही बाजल- “नाना, आइ चलि जाएब।” असीरवाद दैत जीबेन्द्र बजला- “मनसँ पढ़िहह। जखन धीरेन्द्रो संगे छह तखन दुनू गोरे मेल-मिलानसँ रहबो करिहह आ एक-दोसरकेँ मदतियो करिहह।” ऊपरक मने आकि भीतरक मने जगमोही सुनलक आकि की, से तँ ओ जानए मुदा रौदाएल-पियासलकेँ जहिना एक गिलास पानि पीने सात गिलास पानिक संतुष्टि होइ छै तहिना जगमोहीकेँ सेहो भेल। एकाएक मन कलैश गेलइ। जहिना कोनो गाछक मुड़ी कलैशते नव सिरासँ नव जिनगीक रूप-गुण पबैए तहिनाश्रेष्ठजनक असीरवादसँ नवजीवन पौनिहारकेँ सेहो जीवनधारक धारा प्रवाहित होइत भेटबे करैए। नव जिनगीक धारमे, माने पढ़ल-लिखलक बीच जगमोही उग-डुम करए लगल। ओना, समाजमे पसरल दहेजक प्रवाह सेहो देख-सुनि रहल छल मुदा विचारक दौड़मे अखन तक धियान नइ गेल छेलइ। कलशैत कलशमे जहिना फूलक कोढ़ी ऑंखि खोलैए तहिना जगमोहीक ऑंखि खुलए लगल। बाजल- “नाना!अहॉं सबहक जँ दया-दृष्टि रहल तँ एक-दोसराक मदैत प्रेमसँ करैत प्रेमसागरमे पहुँच स्वत: कल्याणक बाट पकैड़ लेब।” जगमोहीक विचार सुनि जीबेन्द्रक मन्हुआएल मन, सुवासिनीक विचार सुनि जे मन्हुआएल छेलैन ओ एकाएक कलैश कऽ फुलि-फलि कऽ मुँह बनि मोतीक धारमे स्वत: बाहर निकलए लगलैन। बजला- “हम तँ आब जिनगीक ओइ पारक घाट लग पहुँच गेल छी। आब तँ तोहीं सभ ने आइसँ काल्हि पहुँचैक बीचक ऐपारक घाट छह। जेना पार करए चाहबह ओ तँ तोरे सबहक ने हाथमे अछि।” जहिना एक दिस जीबेन्द्र जगमोहीक विचार सुनि ठमकला तहिना दोसर दिस जगमोही सेहो जीबेन्द्रक विचार सुनि ठमकल। आगू ने किछु जीबेन्द्र बजला आ जगमोही बाजल। तइ बीचमे सुवासिनी ठाढ़ एक दिस जगमोहीकेँ देखैत तँ दोसर दिस जीबेन्द्रकेँ। बीच सीमापर ठाढ़ सुवासिनी हर्ष-विसमयक बीचक भार तर अपनाकेँ दबल देख बकर-बकर दुनू दिस खाली ताकि रहल छेली। पटना पहुँचैत-पहुँचैत भोर भऽ गेल। गंगाक पुल पार होइते सभ सभपर नजैर दौड़ौलक। सबहक चेहराक रूप उतरल मुदा जहिना एक दिस रातिक यात्राक झमारसँ सबहक चेहराक रंग उखड़ल-उखड़ल बुझि पड़ैत तहिना दोसर दिस सबहक मनमे ईहो जगैत जे दुनियॉंक हेराएल लोक सेहो भेटला। समय बीतैत गेल। नव जिनगी जहिना नवयौवनसँ शुरू होइए तहिना नवयौवनक आभास सेहो सबहक मनमे भइये गेल छल, जइसँ नव भारक दाबसँसबहक मन दबाइये लगल। सभ अपन-अपन रूप-रंग सजबए लगल,सबहक मनमे उठए लगल- केहेन बेवहारमे अबैक अछि। आठ मास केना बीत गेल से ने धीरेन्द्रे बुझि सकल आ ने जगमोहीए। हेराएल-हेराएल लोक जहिना कर्ममे हेरा अपन सुधि-बुधि बिसैर काजक सुधि-बुधिमे रमि जाइए तहिना आठ मास रमता जोगीक झोरामे दुनूक समय चलि गेल। बीचमे परीक्षा भेल, रिजल्ट पछुआएल अछि। धीरेन्द्र गाम आबि गेल। जगमोही पटनेमे रहल। रिजल्टक बैसारीमे दुनूक मनमे यएह नचैत जे समाजशास्त्रक विद्यार्थी बनि विद्याध्ययन केलौं आ समाजेमे रहैक अछि तैठाम समाजिक जीवन केहेन बनाएब, यएह ने अपन दायित्व भेल। [i]सम्मिलित परिवारमे [ii]शिक्षण ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। नन्द विलास राय सरस्वती पूजाक परसाद माघक इजोरिया पखक पंचमी तिथि। आइये वसन्त पंचमी छी। वसन्त पंचमीकेँ श्री पंचमी सेहो कहल जाइत अछि। मिथिलांचलक किसानक श्री पंचमी एकटा प्रमुख पाबैन छी। जे किसान हर-बरद रखै छैथ ओ श्री पंचमीक भोरमे हर ठाढ़ करै छैथ। हर ठाढ़ करैसँ पहिने हरक फारकेँ बरही ओइठाम लऽ जा कऽ पिटा अनै छैथ। जे किसान जइ बरहीसँ फार पिटौलक ओ किसान ओइ बरहीक गिरहत भेल। किसान भरि साल अपना बरहीसँ हर सम्बन्धी काज करौत तइ एबजमे किसान बरहीकेँ ऐगला अगहनमे एक मन आकि एक बोरा माने अस्सी किलो धान देत। किसान बरही ओइठामसँ फार पिटा कऽ आनि काठक जे हर बनल रहैत अछि जे हरीस आ लागैनमे ठोकल रहैत अछि ओइ काठक हरमे फार फिट करैत अछि। फेर हर लाधि जोड़ा बरदक संग जा कऽ कोनो खेत आकि परतीमे अढ़ाइ मोड़ हर जोतैत अछि, फेर बरदकेँ खोलि दैत छथिन आ आ लधलाहा हर नेने आँगनमे जे पीठारसँ हरक आकृति बनल रहैत अछि तैपर हरक नास राखि लागैन पकैड़ ठज्ञढ़ रहैत छथिन। घरक मलिकाइनओइ हरक नासकेँ धानसँ झँपै छथिन। जेकरा जेते मन भेल, दू पसेरी (१० किलो), वा आध मन (२०किलो) धानसँ हरक नासकेँ झाँपल जाइत अछि। ओ धान हर ठाढ़ केनिहारक होइत अछि। जँ हर हरबाह ठाढ़ केने रहल तँ ओ धान उठा कऽ अपना घर लऽ गेल। आइसँ पनरह-बीस बर्ख पहिने मिथिलांचलक किसानक श्री पंचमी प्रमुख पाबैन छल। मुदा कृषि यंत्रक विकास भेने लोक बरद पोसनाइ छोड़ि देलक आ खेती ट्रेक्टरसँ होमए लगल। दोसर कारण दिल्ली पंजाबमे रोजगार खुजलासँ मिथिलांचलक बेसी लोक दिल्ली पंजाब जाए लगल जेकर फल भेल जे किसानकेँ हरबाह भेटबे मोशकिल भऽ गेल। अहू कारणसँ किसान बरद पोसनाइ छोड़ि देलक। दोसर कारण लोकक आर्थिक हालतमे सुधार भेलाक कारण, लोक हरबाहि केनाइकेँ गुलामीबला काज बुझि हर जोतब छोड़ि देलक। जे हरबाह जइ गिरहतक हर ठाढ़ केलक ओइ हरबाहकेँ भरि साल ओइ गिरहतक हर जोतए पड़ै छल। हरबाहिक एबजमे गिरहत हरबाहकेँ पाँच वा दस कट्ठा खेत कलियौती दइ छल। जे खेत हरबाहकेँ कलियौती भेटै छल। ओ खेत उपजा कऽ हरबाह दुनू कूर उपज अपना घर लऽ जाइ छल। जे गिरहत हरबाहकेँ कलियौती खेत नै दइ छल ओ दस कट्ठा वा पनरह कट्ठा खेत हरवाहकेँ बँटाइपर दइ छल। अेना, आब तँ खेती केनाइ घाटाक सौदा भऽ गेल आ खेत सहजे भारी भऽ गेल हेन। तँए बेसी गिरहत अपन खेत बटाइ अथबा मनकूतपर लगबैत अछि। खाएर जे से...। आइ सरस्वती पूजा सेहो छी। केतेको पब्लिक स्कूलसँ सरस्वती पूजाक नौत-हकारक कार्ड आएल अछि। हमरो पोती नन्दनी डी.पी.एस. पब्लिक स्कूलमे यू.के.जी क्लासमे पढ़ैत अछि। तीन साए टका सरस्वती पूजाक चन्दा नन्दनीक लागल। डी.पी.एस. पब्लिक स्कूलसँ सेहो निमंत्रण कार्ड आएल अछि। श्री पंचमी दिन आब हर तँ ठाढ़ नै होइए किए तँ ने बरद रखने छी आ ने हरबाहे अछि आ ने अपना हर जोतैक लूरि अछि। तखन बरद रखबे किए करब। मुदा श्री पंचमी दिन घरक गोसाँइकेँ जे गुड़-चाउर आ दुधक खिचड़ी चढ़ै छल से आइयो चढ़िते अछि। आइयो दस बजे दिनसँ पहिने पाबैन भेल जइमे घरक गोसाँइकेँ गुड़खिचड़ी, लड़ू, पान, सुपारी आ केरा चढ़ल। अपनो सबहक खेनाइमे गुड़खिचड़ी आ अल्लू-कोबीक तरकारी बनल। पत्नी हमरासँ पुछली- “सरस्वती पूजाक नोतो-हकार पूरए जेबइ?” हम कहलयैन- “एहनो कहीं नै जाइऐ। केतेको ठामसँ हकारक कार्ड आएल अछि।” तैपर पत्नी बजली- “तँ खेनाइ खा लिअ आ चल जाउ, सरस्वती माताक दर्शनो करब आ परसादो खाएब। भऽ सकए तँ किछु परसाद हमरो-ले नेने आएब। आन स्कूलमे जेहेन परसाद दिअए मुदा जइ स्कूलमे नन्दनी पढ़ैत अछि ओइमे तँ बढ़ियाँ परसाद देबे करत। किए तँ तीन साए टाका नन्दनी पूजाक चन्दा वास्ते लऽ गेल हेन।” हम कहलयैन- “के कहलक, केहेन परसाद देत?” हम खेनाइ खा कपड़ा पहिर साइकिल लऽ सरस्वती पूजाक हकार पूरए विदा भऽ गेलौं। सभसँ पहिने मिथिला पब्लिक स्कूल पड़ैत अछि। ओइ स्कूलमे प्रवेश केलौं। पूजाक आरती भऽ रहल छेलइ। एक मन कहलक जे आगाँ बढ़ि जाइ आ घुरती कालमे एतए परसाद ग्रहण करी। दोसर मन कहलक सरस्वती माताक आरती होइ छै, बिना आरती नेने चल गेलाइ नीक नहि हएत। हमरा सत्य नारायण भगवानक पूजाक कथा मोन पड़ि गेल। हम ओत्तै अँटैक गेलौं। आरतीक बाद सरस्वती बन्दना भेल। हमहूँ सरस्वती बन्दना गउलौं। फेर आरती आएल। जेबी टटोललौं तँ एकटा दूटाबला सिक्का भेटल। ओ सिका आरतीबला प्लेटमे रखि आरती लेलौं। तत्पश्चात एकटा कुर्सीपर बैस गेलौं। पूजा समाप्त भेलाक अदहा घन्टा बाद स्कूलक विद्यार्थी सभमे परसाद बाँटल गेल। जखन विद्यार्थी सभ परसाद लऽ-लऽ गेटसँ निकैल गेल तखन आगन्तुक अतिथि लोकैनकेँ परसाद बाँटल गेल। कागतक छोटका प्लेटमे लगभग पच्चीस ग्राम बुनियाँ आ गहुमक चिक्कसक परसाद मिललहा, दू-तीटा टुकड़ी गार, दूटा टुकड़ी केशौर, एक खण्डी बैरक आ एकटा फाँड़ा समतोलाक रहए। परसाद खा डी.पी.एस. पब्लिक स्कूल, जेतए हमर नातिन पढ़ैत अछि, विदा भेलौं। गेटेपर हमर नातिन नन्दनी भेट गेल। हमरा देखते नन्दनी बाजल- “नाना, पाँचटा टका दिअ।” हम पुछलिऐ- “पाँचटा टका की करबीही?” तैपर नन्दनी बाजल- “ड्रिम लाइट बिस्कुट कीनब। भूख लागल अछि।” हम फेर पुछलिऐ- “आ स्कूलमे जलखै खाइले नै देलकौ?” नन्दनी बाजल- “देलक। कनी मुरही आ कनी बदामक घुघनी। भूख लगले अछि।” हम पुछलिऐ- “आ परसादमे की देलकौ?” नन्दनी कहलक- “एकटा प्लास्टिक कपमे कनीके बुनियाँ, दूटा टुकड़ी केशौर, दूटा टुकड़ी गाजर, एकटा फाँड़ा समतोला आ एकटा बैरक खण्डी।” तामसे हमर टीक ठाढ़ भऽ गेल। हम एकटा दसटकही जेबीसँ निकालि नन्दनीकेँ देलिऐ आ गेटक भीतर गेलौं। पूजाक भव्य पण्डाल बनल छल। माँ सरस्वतीक प्रतिमो भव्य छल। दस-बारहटा हौरन सेहो स्कूलक छतपर फिट केने रहए आ निच्चाँमे चारिटा साउण्ड बॉक्स। हम जा कऽ प्रतिमोकेँ प्रणाम केलौं। प्रतिमाक दर्शन कऽ अबिते रही कि स्कूलक निदेशक हमरा देखलैथ आ बड़ आदरसँ एकटा कोठरीमे लऽ जा कऽ बैसौलैथ। ओइ कोठरीमे पहिनेसँ किछु लोक सभ बैस कऽ परसाद खा रहल छला। हम बैसबे केलौं कि एकटा लड़ा एकटा ट्रेमे परसादक प्लेट लऽ कऽ आएल। स्कूलक दिनेशक एकटा प्लेट लऽ हमरा दिस बढ़ौलक। हम निदेशकक हाथसँ प्लेट लऽ परसाद खाए लगलौं। प्लेटमे करीब पच्चीस ग्राम बुनियाँ आ वएह सभ छल जेना नन्दनी कहलक। परसाद खा हम दोसर स्कूलक लेल विदा भऽ गेलौं। ज्ञानगंगा कोचिंग सेन्टरमे गेलौं। ओतए ध्वनि विस्ताकर यंत्रमे ई छौड़ी, ई छौड़ीबला गीत बजैत रहए। हम सोचए लगलौं आइ सरस्वती पूजा छी। विद्याक देवीक पूजा। आ ऐ पूजामे एहेन गीत बजबैए। जखन कि कोनो धार्मिक गीत बजैबतए। माँ शारदेक प्रतिमाकेँ प्रणाम कऽ एकटा ब्रेचपर बैसलौं। एक विद्यार्थी परसाद नेने आएल। हम ओइ विद्यार्थीकेँ कहलिऐ- “ऐ कोचिंग संस्थाक निदेशक के छैथ, कनेक हुनकासँ भेँट कराउ।” दूइए मिनटक बाद एक आदमी जे शूट-बूटपर टाइ लगौने रहए, हमरा लग एला। हम पुछलयैन- “अपने ऐ संस्थाक निदेशक छी?” ओ बजला- “जी सर, हमहीं ऐ कोचिंग संस्थाक डारेक्टर छी।” तैपर हम कहलयैन- “विद्याक देवी माँ सरस्वतीक पूजाक अवसरपर अपने कोन गीत बजा रहल छिऐतहूपर धियान देलिऐ हेन।” आब निदेशकक धियान गीतपर गेलैन। ओ तुरन्ते जा कऽ गीत बन्द करौलैथ आ हमरा लग आबि अपन गलती कबूल करैत हमरासँ माफी मंगलैथ। ओ परसादक एकटा प्लेट अनलैथ आ हमरा हाथमे देलैथ। परसाद खा हम गाँधी विद्यापीठक लेल विदा भेलौं। गाँधी विद्यापीठ क गेटपर साइकिल खड़ा कऽ साइकिलमे ताला लगबैत रही तखने दूटा सज्जन गप-सप्प करैत निकलला। एक गोरे पैन्ट-कोर्ट आ दोसर बेकती पायजामा कुरतापर बन्डी पहिरने छला। हम हुनका सबहक गप सुनए लगलौं। पायजामा कुरताबला बजला- “कहू तँ चन्दा लेत पँच-पँच साए टाका आ परसादीमे केशौर, गाजर आ बैरक टुकड़ी। मिठाइक नाओंपर पच्चीस-तीस ग्राम बुनियाँ।” तैपर कोट-पैन्टबला बजला- “यौ नेताजी, एकरा सबहक ई धन्धा भऽ गेल हेन। सरस्वती पूजाक नाओंपर, स्वतंत्रता दिवस आ गणतंत्र दिवसक नओंपर विद्यार्थी सभसँ चन्दा उगाही करत आ चन्दाक पाइ अपना सभमे बन्दरबाँट करत।” पायजामा-कुरताबला बजला- “यौ स्कूलो फीस जइ हिसाबे लइ छै तइ हिसाबे पाढ़ाइ कहाँ छै। जँ विद्यार्थीकेँ ट्यूशन नै पढ़ेबै तँ विद्यार्थीक विकासे नै हएत।” कोट-पैन्टबला बजला- “लोके की करत, सरकारी विद्यालय सभमे पढ़ाइ होइते ने छै तँए लोक प्राइवेट स्कूलमे अपन धिया-पुताकेँ पढ़बैत अछि। मुदा एतुक्को सएह हालत छै।” पायजामा-कुरताबला बजला- “सरकारी विद्यालयमे जे पढ़ाइ हएत, से की कोनो शिक्षककेँ किछु अबै छै जे विद्याथ्र्ज्ञीकेँ बतौत।” कोट-पैन्टबला बजला- “नहि से बात नइ छै। सरकारियो विद्यालयमे जे शिक्षक लालूजीक समयमे कम्पीटीशन दऽ कऽ बहाल भेल रहैथ ओ सभ योग्य शिक्षक छैथ। मुदा छैथ सीमित संख्यामे। एम्हर जे परीक्षाक अंकक आधारपर बहाली भेल, चाहे शिक्षा मित्रबला शिक्षक होथि वा पंचायत शिक्षक, तइमे पच्चास प्रतिशत अयोग्य छैथ। हँ, टी.ई.टी. पास केलहा शिक्षक सभ योग्य जरूर छैथ।” पायजामा कुरताबला बजला- “ई जे अंकक आधारपर शिक्षक सबहक नियुक्ति भेल तइमे फर्जी प्रमाण-पत्र कहियौ आकि कीनुआ प्रमाण-पत्र कहियौ तइ प्रमाण-पत्रपर जे बहाली भेल से सभ एकदम बोगस शिक्षक सभ छैथ। हुनका सभकेँ जखन नियुक्ति पत्र प्राप्त करौलक तँ केतेक गोरे लिखलक एक पति पाया।” कोट-पैन्टबला बजला- “हँ से तँ ठीक्के। यौ, एकटा बात आर छै। जइ शिक्षककेँ मैरिटो छै, ओकरो मानसिकता विद्यालयमे बच्चा सभकेँ पढ़ाबी, से नहि छैन।” पायजामा-कुरताबला बजला- “की करबै। जेकरा सरकारी नौकरी भऽ जाइ छै ने ओकर नैतिकतामे ह्रास हुअ लगै छै। अच्छाछोड़ू ऐ गप-सप्पकेँ। गाड़ी स्टार्ट करू। चलू आर.एस. पब्लिक स्कूल नवटोली। ओइ स्कूलक डायरेक्टर अपनेसँ हकारक कार्ड दऽ गेल छला।” दुनू गोरे फटफटियापर चढ़ि विदा भऽ गेला। हमरो आर.एस. पब्लिक स्कूल नवटोलीसँ हकार भेटल छल, हम बिसैर गेल छेलौं, हमरो मोन पड़ि गेल। हम गाँधी विद्यापीठ स्कूलक भीतर जा प्रतिमाक दर्शन करि परसाद लेलौं आ नवटोलीक लेल विदा भऽ गेलौं। पच्चासे लग्गा आएल हएब कि एकटा गीतक अवाज कानमे गुँजल। गीत रहए- डी.जे.बला छौड़ा अनहरियामे पीच देतौ।’ देखलौं तँ ई गीत ज्ञान गंगा शिक्षा निकेतनक पूजामे लगौल ध्वनि विस्तारक यंत्रमे बजि रहल छल। मनमे भेल साइकिल रोकि ज्ञान गंगा शिक्षा निकेतनक निदेशककेँ डाँटी मुदा फेर सोचलौं सभटा ठीकेदारी की हमहीं नेने छी। जँ ज्ञानगंगा शिक्ष निकेतनक निदेशक हमरा कहए- जे हम अपना भैंसकेँ कुरहैरेसँ नाथब तइसँ अहाँकेँ की, तब तँ भऽ गेल झगड़ा। दोसर गप जे ओइ निकेतनक निदेशक हमर मित्रे छैथ मुदा हकार नै देने छैथ तँए जाएब उचित नहि। हम आगाँ बढ़ि गेलौं। नरहियासँ पूब बहुल नदी बहैत अछि। बहुल नदीक पुल टपलौं। पुलसँ साए मीटरक दूरीपर एन.एच.- ५७ सँ बाइ पासे सड़क निकलल अछि जे धनजैया टोल होइत आगाँ फयूल सेन्टर लग जा कऽ एन.एच. ५७ मे मिलैए। जेतएसँ बाइ पास सड़क शुरू होइत अछि, तहीठाम बाइ पास सड़कसँ उत्तर एकटा भव्य पण्डाल छल। वोर्डपर लिखल रहए- शान्ति निकेतन कोचिंग संस्थान। ओइ संस्थानक निदेशक हमर कौलेजक संगी। ओहो हकारक कार्ड भेजने छला। निदेशक महोदय सड़केपर ठाढ़ छला। हम चाहलौं जे आगाँ बढ़ि जाइ, किए तँ अबेर भऽ गेल छल आ नवटोली पहुँचब जरूरी छल। एतए सँ आर.एस. पब्लिक स्कूल नवटोली लगधक दू-अढ़ाइ किलोमीटरसँ कम नै हएत। मुदा से नहि भेल। शान्ति निकेतन कोचिंग संस्थानक निदेशक हमरा देख गेला आ बजला- “आउ, नन्द भाय। केतए पड़ाएल जाइ छी।” हम साइकिलकेँएन.एच. ५७ सँ बाइ पास सड़कपर उतारलौं। एतए प्रतिमाक दर्शन कऽ परसाद ग्रहण केलौं आ बाइ पासे सड़कसँ आर.एस. पब्लिक स्कूल नवटोली विदा भऽ गेलौं। धनजैया टोलपर बाइ पास सड़कक कातेमे एकठाम पूजाक आयोजन छल। कोनो ताम-झाम नहि। एकटा प्लास्टिकबला तिरपाल टाँगि, तही निच्चॉंमे स्नानी चौकीपर मण्डप बला माँ शादेक प्रतिमा बैसा पूजा भेल छल। सड़के कातमे दूटा ब्रेंच आ पान-सातटा प्लास्टिकबला कुर्सी राखल छल। जखन हम ओतए पहुँचलौं तँ साइकिलसँ उतैर माँ शादाकेँ प्रणाम केलौं। सोचलौं एहेन पैघ-पैघ संस्था सभमे तँ केशोर, गाजर आ बैर मिश्रित परसाद भेटल, अतए तँ साधारण ढगे पूजाक आयोजन अछि। बड़ हएत तँ गहुमक चिक्कसक परसाद हएत। प्रतिमाक दर्शनक बाद जखन साइकिलपर चढ़ए लगलौं कि एकटा युवक बजला- “सर, परसाद लऽ लेल जाउ।” हम साइकिल खड़ा करि ब्रेंचपर बैस गेलौं। ओ युवक एकटा प्लास्टिकक कापमे भरि कप बुनियाँ देलैथ। एखन धरि जेतेक ठाम परसाद भेटल छल तइ सभसँ नीक। परसाद देख मन प्रसन्न भऽ गेल। हम बजलौं- “अहाँक परसाद सभसँ नीक अछि। ऐ लेल अहाँकेँ धन्यवाद।” ओ युवक हाथ जोड़ैत बजला- “सर ई अपने सबहक आसिरवाद छिऐ।” युवक विनीत भावे बाजल रहैथ, मन गदगद भऽ गेल। हम युवकसँ पुछलयैन- “अपने..?” ओ युवक बिच्चेमे बजला- “जी हम पहलासँ पाँचमा तक चटिया सभकेँ ट्यूशन पढ़बै छी।” हम बजलौं- “बड़ नीक काज करै छी।” ई कहैत एकबेर पुन: हुनका हृदयसँ धन्यवाद दैत आर.एस. पब्लिक स्कूल नवटोलीक लेल विदा भऽ गेलौं। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’ सम्पर्क -8789616115 आँखिमे चित्र हो मैथिलीकेर ( आत्म-कथा ) आँखिमे चित्र हो मैथिलीकेर ( आत्म कथा ) 6. मृगतृष्णा आ कि पशुपतिनाथक दर्शन उन्हत्तरिमे प्रथम वर्षमे पचास गोटेक नामांकन भेल रहनि | ओहिमे सं दुलार चन्द्र मिस्त्रीकें मेडिकलमे भ’ गेलनि, त ओ चल गेलाह | शेष उनचास गोटे उत्तर बिहारक विभिन्न जिलाक, भिन्न-भिन्न सामाजिक, आर्थिक आ शैक्षणिक पृष्ठभूमिक छलाह | विभिन्न स्वभाव आ संस्कारसं युक्त सभ गोटेक एक अनुशासनमे एकहि छत तर-छात्रावासमे रहब, एक संग भोजन-जलखै करब, एक संग कक्षामे जाएब सभ दिन उत्सव जकाँ लगैत छलै | मोन पडैत छथि नारायण मिश्र,अशोक कुमार ठाकुर, नन्द कुनार झा, रामाधीन ठाकुर, अवधेश प्रसाद, राम नरेश प्रसाद,कंचन साह, कृष्ण मुरारी, कृष्ण कुमार, बृज किशोर सिंह, समरेन्द्र नारायण सिंह, सत्येन्द्र प्रसाद सिंह, ब्रज भूषण शर्मा, प्रेमचन्द केसरी आ और बहुत गोटे जिनकर नाम एखन नहि मोन अछि | अपनामे मैथिलीएमे गप करबाक कारणे नारायण मिश्रजी आशोक कुमार ठाकुरजी नन्द कुमार झाजी आ रामाधीन ठाकुरजीक संग हम बेशी सहज अनुभव करैत छलहुँ | नारायण मिश्र जी बनगाम (सहरसा)क छलाह, अशोक कुमार ठाकुर जी डुमरिया (पूर्णियां) आ नन्द कुमार झा जी मोहना, झंझारपुर ( मधुबनी)क छलाह | हिनका सभसं सम्पर्क बादहुमे रहल | मोन पडैत छथि आदरणीय श्री अयोध्या प्रसाद मिश्र, प्राचार्य आ प्राध्यापकगणमे श्री एन.के.सिन्हा, श्री के.पी.सिंह, श्री एस. श्रीवास्तव, श्री टी. डी. सिंह, श्री एस.एन. ओझा, श्री एन.के. सिंह, श्री बी.डी. सिंह | कॉलेजमे पढ़ाइ नीक होइत छलै | एकोटा क्लास खाली नै जाइ छलै | समय-समयपर नाटक आ अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम सेहो होइ छलै | कॉलेज आ छात्रावास सभ ठाम हम सभ नीक अनुभव क’ रहल छलहु | तैयारी नीक चलि रहल छल | वार्षिक परीक्षाक समय सेहो निकट अबैत जा रहल छल | एकटा अन्हड़ एलै | कॉलेजमे कृषि राज्य मन्त्री एलाह | हॉलमे हुनकर भाषण भेलनि | ओ कहलखिन जे सरकार निर्णय ल’ रहल अछि जे कृषि स्नातक लोकनिकें आब नोकरीक बदलामे १० एकड़ खेत देल जेतनि, बैंकसं जरुरतिक अनुसार कर्ज देल जेतनि | बैज्ञानिक ढंगसं खेती करताह, आनन्दसं जीवन-यापन करताह | भाषण सूनि बहुत गोटे निराश भेलाह | हमहूँ निराश भेलहुँ | हम सभ चाहैत छलहुँ नोकरी जाहिमे रौदी-दाहीक प्रभाव नहि पडैत छलै | बाबा गृहस्थ छलाह | पिता गृहस्थ छलाह | खेतीक अनुभव नीक नहि छलनि |चारि-पांच बीघा खेतक उपजसं घरक आवश्यकतानुसार अन्न नहि प्राप्त होइत छलैक | कर्ज लेब’ पडैत छलै | खेत भरना धर’ पडैत छलै |लोक विपन्नतामे जीवन-यापन करैत छल | कियो नहि चाहैत छल जे ओकर धिया-पूता सभ सेहो अहिना अभावमे जीबए | रातिमे निन्न नहि भेल | आब की करब | इंजीनियरिंग पढ़िक’ लोक बैसल रहैत छल से जानि ओम्हर नहि गेलहुँ | मेडिकलमे नामांकन भेल नै | ई पढ़िक’ नोकरी भेटत नै | त’ आब की करब ? पढ़ाईसं मोन उचटि गेल | अगिला शनि दिन सांझमे गाम पहुँचलहुँ | तेसर दिन एकटा कन्यागत पहुँचलाह | हुनका नेपालक नागरिकता छलनि | बायोलॉजी विषयक संग हमर प्राप्तांकक आधारपर कहलनि जे नेपाल सरकार द्वारा अहांक नामांकन मेडिकलमे कराओल जा सकैत अछि, एहि लेल हमरा हुनक कन्यासं विवाह करबाक स्वीकृति देब’ पडत | हुनक कन्या दस बरखक छलथिन, पाचमामे पढैत छलखिन | ई प्रस्ताव हमरा सभ गोटेकें चिन्तामे ध’ देलक | निर्णय लेब कठिन लगैत छल | कन्यागत एकटा विचार देलनि | विचार भेल जे हुनका संगे काठमांडू जाइ | देखी जे ऐ साल की भ’ सकै छै | तखन जे विचार हो से करी | अपन कन्याकें ओ देखा देलनि | चारि दिनक बाद हम सभ काठमांडूमे रही | हमर मार्क्स शीट ल’ क’ ओ गेलीह | हुनकर निकटक कोनो सम्बन्धी छलखिन नेपाल सरकारमे | हुनकासं भेंट क’ क’ एलीह | दू दिनक बाद परिणाम सुनौलनि जे ऐ साल मेडिकलक कोटा समाप्त भ’ गेल छै, इंजीनियरिंगमे जाए चाही त भ’ सकैए, करांची आ अफ्रीकाक लेल सीट खाली छै | मेडिकलमे जेबाक लेल एक साल प्रतीक्षा कर’ पडत | हमरा निर्णय लेबामे सुविधा भेल | हम निर्णय लेलहुँ | मेडिकल लेल एक साल प्रतीक्षा नहि करब | इंजीनियरिंग पढ़बा लेल करांची आ कि अफ्रीका नहि जाएब | बाबा पशुपतिनाथक दर्शन क’ क’ गाम घुरि एलहुँ | बाबूकें-माएकें सभ बात कहि देलियनि | दू-तीन दिनक बाद ढोलीक लेल प्रस्थान केलहुँ | ढोली अबैत काल अपन अभिभावक स्वयं बनल एलहु : की हेतै, एकठाम पाँच-दस एकड़ खेत रहै आ वैज्ञानिक विधिसं खेती कएल जाइ त किए ने लोक नीक जकाँ जीवन-यापन क’ सकैए ? गामक स्थिति नीक एहि लेल नै छै जे ओत’ सिचाईक उपयुक्त साधनक अभाव छै आ वैज्ञानिक ढंगसं खेती नै भ’ रहल छै | नोकरीमे ट्रान्सफरक झंझट लागल रहै छै, तैसं त बांचल रहब | ढोली पहुँचलाक बाद ई अनुभव भेल जे पन्द्रह दिन कॉलेजसं अनुपस्थित रहिक’ हम बहुत पैघ गलती क’ चुकल छी | आब एहि गलतीक परिणाम सेहो एतैक | मुदा आब हमरा हाथमे की छल, जे संभव भ’ सकैत छैक से करब ठनलहुँ | परीक्षाक तिथिक घोषणा भ’ चुकल छलै | पच्चीस दिन शेष छलैक आ पढाई समाप्त भ’ गेल छलैक |एतबे दिनमे जतेक पढाई भ’ गेल छै, तकर तैयारी कोना करब, से समस्या छल | हमर जे निकटतम संगी सभ छलाह हुनका सबहक नोट बुक देखिक’, हिनका सभसं पूछि-पाछिक’ जे पढाई भ’गेल छलै, तकर तैयारीमे लागि गेलहुँ | ठाकुर जीक तैयारी नीक छलनि, मदति केलनि, क्षतिकें कम-सं-कम करबाक प्रयासमे लागि गेलहुँ | प्रैक्टिकल क्लासमे अनुपस्थित रहबासं भेल क्षतिकें कम करब बहुत कठिन छल | ईहो बूझल छल जे ऐ सालक परीक्षा-परिणामक प्रभाव तीनू सालक औसत परिणामपर पडत | ऐ साल जौं प्रथम श्रेणीमे नै एलहुँ, त अंतिम परिणाम प्रथम श्रेणी नै भ’ सकत | मोनकें मजबूत बनाक’ जे क’ सकैत छलहु, ताहिमे लागि गेलहुँ | एग्रोनोमीक प्रोफेसर एस.एन.ओझाजी कहलनि,’तुम्हारे भाग्य में यही लिखा हुआ है,कहाँ भाग-भाग कर जा रहे हो ?’ एक-दू दिन स्वयंसं लडैत रहलहुँ | एके स्थिति छलै सबहक लेल, मुदा हम किए एतेक प्रभावित भ’ गेलहुँ ? ठाकुर जी एम.एस.सी.(एजी ) करबाक निर्णय केने छलाह | झाजी सेहो विचलित नहि भेलाह | मिश्रजी सेहो स्थिर छलाह | किछु गोटे सोचि नेने छल ‘जे हेतै देखल जेतै |’ हमहीं किए एते चिन्तित भ’ गेलहुँ ? एक गलती पहिने केलहुँ जे एडमिशन ल’क’ फेर नाम कटाक’ बायोलॉजी पढ़’ चल गेलहुँ | दोसर ई जे मेडिकल पढबाक लोभमे एकटा अप्रिय समझौता करबाक लेल तैयार भ’ गेलहुँ आ सलमपुरसं काठमांडू पहुंचि गेलहुँ | एहि निर्णयक लेल हमरापर कोनो दबाब त नहि छल | एहिमे हमर पिता-माताक त कोनो दोख नहि छलनि | ओझाजीक टिप्पणी सोझा आबि जाइत छल ‘ तुम्हारे भाग्य में .......’ त की नेपाल जेबाक निर्णय लेब आ फेर वापस एबाक निर्णय - इहो सभ भाग्यमे लिखल छल हेतै ? भाग्यक बात सही होइ कि नै होइ मुदा हतोत्साहित हेबासं बचबाक लेल ई पैघ मन्त्र जकाँ काज करैत अछि | अहाँ अपन बुद्धि आ विवेकक उपयोग करैत सभ काज करैत चलू आ परिणाम जे आबय तकरा यैह सोचिक’ मोनकें मजबूत बना लिय’ जे यैह हेबाक छलै तें चिन्तामे डूबल रहबाक काज नै छै | एहिमे संगी-साथी सभक सहयोग सेहो महत्वपूर्ण होइत अछि | हमरा संगी-मित्र सबहक सहयोग भेटल जाहिसं जे समय बांचल छलै परीक्षाक लेल, ताहिमे संभावित क्षतिकें कम-सं-कम करबामे दिन-राति लागि गेलहुँ | अपना मोनकें मजबूत बनाक’ राखब सेहो हल्लुक काज नै छै, मुदा जीवनमे कतेक बेर एकर आवश्यकता पडैत छैक | सुनने रही कतेक गोटेक मूँहें ‘नेपाल जाएब, कपार संगे जाएत |’ एहि उक्तिक सकारात्मक पक्षपर विचार केलहुँ | हमर मोन आब मानि गेल रहय जे बाबा पशुपतिनाथ अपन दर्शनसं लाभान्वित करबाक लेल हमरा कोनो लाथे बजा लेलनि आ मोन स्थिर करबाक लेल उचित सलाह दैत घुरा देलनि | ओहि समयमे हम सभ एहि तथ्यसं एकदम अनभिज्ञ रही जे चौदह टा बैंकक राष्ट्रीयकरण भ’ गेल छै आ निकट भविष्यमे कृषि स्नातक सबहक लेल एहि बैंक सभमे भर्ती-अभियान शुरू होइ बला छै | ( क्रमशः ) ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। मुन्नाजी बीहनि कथा रक्षा --एक टा पोसुआ कुकुर अपन मीत सँ-- रौ, घर मे किए घोसिएल छें, निकल.देखही अनेरूआ कुकुर अपन हेंज मे घोसिए चाहैए ! -- ऐं...! एना नै होम' देबै, चल- चल तूँ बढ...! -- आ तोँ ? -- हम चिलका नुकेने अबै छी, अपना सब त' लड़ि खपि लेब, मुदा ओकर की हेतै ? अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ज्ञानवर्द्धन कंठ खेत प्रिंसिपल सेहैब बेलौंचाबला मास्सैबकेँ कहलथिन- "आठमा किलास खाली छैक।कनी अहीं चलि ने जैयौक!" अछता-पछता क' मास्सैब किलास गेलाह।एकटा विद्यार्थी पूछि देलकनि- "मास्सैब,'खेत' त' हमरा सभ बुझैत छियैक,मुदा 'खेत' कहबैक ककरा?कनी बुझा दितहुँ।" मास्सेब भितरे-भीतर बोमछल रहबे करथिन।बमकि क' बाजय लगलथिन-"बूड़ि नहितन!तखन की बुझैत छह, कपार?हौ,खेत खाली वैह भूमि नहि होइ छैक, जाहिमे खाद्य उपजैत छैक!खेतकेँ जोति-कोड़ि आ सिंचित क' कृषक नाना प्रकारक फसिल उपजाबैत छथि,से त' जनिते हेबह।ई खेत समतल भूमिसँ ल' क' ऊँच-ऊँच पहाड़ धरि भेटतह।वैज्ञानिक लोकनि तँ ध्रुवीय हिमक्षेत्रसँ ल' क' अंतरिक्ष धरि उपजा-बारीक विधि-विकासक जोगारमे लागल रहैत छथि।कतेक गोटे अपन घरेक छतकेँ खेत बना किसानी क' रहल छथि।तेँ बूझह तँ जेमहर देखबह,तेमहर खेते- किसान नजरि पड़थुन।नेता लोकनिक लेखे सौंसे देशे खेत थिकनि जाहिमे ओ लोकनि भोटक फसिल उगेबाक घेंटकाट स्पर्द्धामे लागल रहैत छथि।नवका- नवका खेत बनबैक जोगारमे लागल रहैत छथि।बेसी उपज लेल नाना प्रकारक खाद- उर्वरकक प्रयोग करैत रहैत छथि।यथा-जाति-वर्ग-धर्मक भेद, खराँत-अनुदान, विविध वाद-दर्शनादिक सुविधाजनक व्याख्या।हिंसा,आंदोलन, अराजकता आदि हिनका लोकनिक प्रमुख कृषि-विधि आ औजार थिकनि।राष्ट्रवाद,राष्ट्रद्रोह, आतंक,उपद्रव आदि बीयाक विभिन्न उन्नत किसिम थिकनि।गरीबी,बेरोजगारी,दीनता, अशिक्षाक माटिमे हिनक खेती खूब लहलहा उठैत छनि।परिणाम ई भ' रहल छैक जे सौंसे देश उर्वर खेतक रूपमे विकसित भ' उठल अछि।किसान जतहि बैसि जाइत छथि,वैह खेत बनि जाइत अछि।ओत्तहि ट्रेक्टर दौड़य लगैत अछि।दाउन हुअ' लगैत अछि।ओतय विविध भोज्य आ अन्य आवश्यक चीज-वस्तु जुमय लगैत छैक।एहिसँ उल्लसित भ' देशक मूर्धन्य कवि भावुक भ' सुझाव देबय लगैत छथि जे संसद-भवनकेँ खसा खेत बना देल जाय।बुद्धिजीवी लोकनि पक्ष-विपक्षक तार्किक-अतार्किक खेत जोतयमे लागि जाइत छथि।नामी-गिरामी फिलिमकार लोकनि धर्म-संस्कृति पर फूहड़ वितंडा ठाढ़ क' फिलिमक प्रचार क' बेसी-सँ-बेसी अर्थ उगेबाक खेतीमे लागल छथि ।राजनीतिक पक्ष-विपक्ष अपन-अपन खेत तैयार करयमे मनोयोगसँ लागल छथि।जे जतय अछि,ततय खेत कोड़यमे लागल अछि आ ओमहर सीमा पर जवान लोकनि खेत होइत रहैत छथि।एतय अपना इस्कूलमे प्रिंसिपल सेहैबक लेखे हमहूँ एकटा खेते छियह।ओ कखनो खेत परता नहि रखताह।कोनो किलास खाली रहल,बस बेलौंचाबलाकेँ जोति दैत छथि।बस एतबी।घंटी बाजि गेलह।" अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। सुभाष कुमार कामत १ टा बीहनि कथा तनखाह सरकारी इस्कूल मे मास्टर कक्षा क सब बच्चा सँ बेरा बेरी परिचय के संग संग पूछ रहिल छैथि - पढि लिख अहाँ नमहर भऽ के कि बनै चाही छी। सभ बच्चा अलग जबाब देलिक। केइयों डागदर तऽ केइयों इंजीनियर आदि आदि। अंतिम बेंच पर बैठल छात्र खड़ा भेल आओर कहलक - सर! हमर नाम मुन्ना भेल। आओर हम नेता बनब। पूरा कक्षा खिल खिला केँ हँस परल। - मुन्ना 'तू नेता किया बनै चाही छी'। - सर ! ताकि हम अहाँ सभ ले आवाज उठै सedकी। अहाँ सभकेँ उचित तनखाह समय पर भेटि। हम नै चाही छी तनखाह कऽ अभाव मे कालहि फेरो कोनो द्रोणाचार्य कोनो एकल्वय के अँगूठा नै काटि ली। ३. पद्य ३.१.आशीष अनचिन्हार-दू टा गजल आशीष अनचिन्हार (सम्पर्क 8876162759) दू टा गजल 1 चास नै छै बास नै छै गाम नै छै वस्तु नै छै वास्तु नै छै दाम नै छै आबि बैसल मोनमे अपने हिसाबें नेह नै छै सोह नै छै काम नै छै बस खुशीमे अंग बूझू संग बूझू आ दुखीमे काज नै छै नाम नै छै देशमे रावण कुम्भकर्णो मेघनादो केसरी नै लाल लक्ष्मण राम नै छै सर्द इच्छा भाव सर्दे सर्द भेटल चाह नै छै धाह नै छै घाम नै छै सभ पाँतिमे 2122-2122-2122 मात्राक्रम अछि (बहरे रमल मोसद्दस सालिम)। 2 हमरो भेटल सुन्ने सुन्ना हुनको देलक तकरे दुन्ना बेरोजगारीक तीन यार धर्म शर्म भाषण झुनझुन्ना छिड़िआ गेल छलहुँ हम बहुते हमरा बान्हल भूखक जुन्ना संसदमे के सभ पहुँचल छथि सीसी बोतल ठेपी मुन्ना ओ सभ मरलै जिनका कारण से गाबै छथि ता ता तुन्ना सभ पाँतिमे 22-22-22-22 मात्राक्रम अछि। दू अलग-अलग लघुकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि। ई बहरे मीर अछि। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ४.स्त्री कोना (सम्पादक- इरा मल्लिक) ४.१.रागिनी प्रीत- गीत ४.२.पल्लवी सिन्हा- तीसी गुणक खान अछि ४.३.निर्मला कर्ण- सशक्त नारी सशक्त समाज ४.४.विद्या रश्मि- गलतीक बोध( संस्मरण) ४.५.अम्बिका मल्लिक- विरांगना ४.६.प्रीति प्रभा- पंखुड़ी ४.७.डॉ मालती मधु- स्तन कैंसरक शुरूआती लक्षण आ रोकथाम रागिनी प्रीत गीत ==== सखी बरखा के रिमझिम फुहार के सनू, जखैन पुरवा बहैया बयार के सुनू। गीत गावैया कण-कण मगन भs कोना, प्रीत के गीत सभ टा ध्यान सँ सुनू। सन् सनन सन चलैया हवा बावरी, खूब कुहकैया कोयल महके मंजरी। तान झरना के कल-कल मोहित मन करै, राग अद्भुत अछि जीवन के गान के सुनू। भोरे सूरज के कर्म गीत प्रेरित करै, तान मेहनत के साधि दिन सफल हम करी। सांझ शीतल आ राति चैन बंसी बजे, पहर के रागिनी सब सम्मान सँ सुनू। सूनु कंगन के खन-खन में गीत अनुराग, सुनि पायल के छन-छन में अनुपम बहार। गीत गावैया अंचरा मगन मोहिनी, साँस के लय में मोहन के तान सुनू। -रागिनी प्रीत, जयपुर मो. 7206695866 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। पल्लवी सिन्हा तीसी गुणक खान अछि मनुष्यक प्रवृति त यैह अइछ जे ,कोनो वस्तु आसानी सँ उपलब्ध होइए तकर महत्व कम भ जाइत अइछ। हम सब ई त जानवे करइ छी जे तीसी गाँव घर मे बहुतायत में उपलब्ध होइत अइछ आ ओकरा साधारण बुझि कै हमसब,या कही सकइ छि जे जानकारी के अभाव में लोग एकर सेवन पर्याप्त मात्रा में नई क पाबय छथिन। त आउ आई हम एकर गुण स अहाँ सबके अवगत करबै छी। तीसी के अलसी सेहो कहल जाइत अइछ। तीसी के तासीर गरम होइत छइ।अई में मौजूद तत्व महिला सब मे मेनोपॉज के समस्या में मन आ व्यवहार में जे बदलाव अबैत अइछ ओई में बहुत लाभ मिलई छइ। पोषक तत्व-तीसी में एंटीऑक्सीडेंट गुण होइत अइछ। एई में प्रोटीन,ओमेगा-3 ,फैटी एसिड,फाइबर,विटामिन बी ,पोटैशियम आ मैग्नीशियम सेहो मिलैत अइछ। लाभ -- तीसी के प्रयोग स वजन नियंत्रित, पाचन तंदरुस्त,कैंसर, मधुमेह ,कब्ज़ आदि समस्या में लाभ होइत अइछ। तीसी के सउँसे खाय स देह के विषाक्त तत्व निकइल जाइत अइछ। प्रयोग -- रोज एक चम्मच भूजल तीसी खाय सँ सुखल केश,बेजान त्वचा,एलर्जी आ मुँहासा स बचल जा सकई यै। गर्भवती महिला आ स्तनपान करबै वाली महिला चिकित्सक के परामर्श स एकर सेवन कै सकइ छथिन। त आउ तीसी खाक अपन इम्युनिटी मजबूत करई जाई जाऊ।तीसी प्रतिदिन के भोजन में शामिल करू आ स्वस्थ रहू। -पल्लवी सिन्हा मुज़फ़्फ़रपुर, बिहार अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। निर्मला कर्ण सशक्त नारी सशक्त समाज सशक्त नारी, सशक्त समाज | ई मात्र एकटा स्लोगन अछि, अथवा समाजक चाहत | यदि स्लोगन अछि त, बहुत नीक, बड्ड सोहनगर | चलु किछु आर अहिना , सुन्दर सुन्दर स्लोगन रचु | एहि के झुनझुना बना, जोर स बजायल जाऊ | कतेक नीक कर्ण-सुखद, स्वर गूंजि उठल | सुनु मनोरम ध्वनि, सँगहि दर्शन करू | एहि सशक्त नारी के, की ओ सशक्त भेली | सुनु एहि सशक्त नारीक क्रन्दन, ई गृहलक्ष्मी छथि लक्ष्मी विहीन | नहि हिनक अपन पसन्दक भोजन, नहि परिधान | हिनका पर थोपल जाइछ, परिवार-समाजक विधान | हिनक कलेवर आधुनिक, छनि विचार वैह पुरान | ई सरस्वती छथि, वाणी विहीन | नहि अपन अलग सोच, नहि अपन पृथक विचार | ई पार्वती दुर्गा काली छथि, पूर्णतः शक्ति विहीन | पराधीन, पराश्रित, रुग्ण-कलेवर, शस्त्र-विहीन,| जागू स्त्रीगण जागु, अहाँ रचू नव-विधान | महामाया, अन्नपूर्णा, लक्ष्मी अहिं, अहाँ थिकहुँ माँ सरस्वती | नहि कोनो संशय राखू मन में, अहिं थिकहुँ माँ पार्वती | अहाँ प्रेम के करु स्वीकार, सँगहि शोषण के करु प्रतिकार | तखनि होयब अहाँ सशक्त नारी, अहिं स बनत सशक्त समाज | अपन कलेवर मात्र नहि, परिवर्तित करू अपन विचार | आधुनिक सभ्यता सँग, आधुनिक सोच के करु अङ्गीकार | शोषित होउ नहि, शोषण करु बन्द | सृजन करू नव समाजक, रचू जीवनक नव छन्द | अहिं छी सशक्त नारी, अहिं स बनत सशक्त समाज l अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। विद्या रश्मि गलतीक बोध( संस्मरण) बात ओहि समय के छियै जखैन हम आठवां में छलौ आ गरमी छुट्टी में हास्टल स गाम आयल रहौ।सांझ क खेला क आयले रही कि ब्राह्मण टोला स दामोदर कका ऐलखिन आ लालपीसी के कहलखिन जे लालबहिन आई राइत में आयब हमरा अंगना आई हमर बड़की बेटी लालदाई के बियाह छियै राइत में।लालदाई हमरे उमर के रहै आ छोट में जखैन गाम में पढ़ै छलौ त एके क्लास में रहौ। लालपीसी आश्चर्य स पुछलकै जे अखन दूपहरिये में त लालदाई के आम क गाछी में देखने रहियै आ अहुं के त खेत दिस जाईत देखने रहौं त कत चारि घंटा में वर भेट गेल? कहलखिन जे नै राजे कथा लगेने रहियै लड़का बर सम्पन्न छलै घर दुआर सेहो नीक छलै लेकिन बर के माय बहुत पाई मंगै छैलै तै छोड़िए देने छलियै ई कथा लेकिन ओहि लड़का के आई राति में हमर छोटका भाय रामबाबू पकैड़ के आनतै आ चोरौका बियाह हेतै । लालपीसी आश्चर्य भ कहलकै अखने किया करै छियै बियाह अखैन त अठमें में अछि आ चोरौका बियाह किया करै छियै। दामोदर कका ज़बाब देलखिन जे चोरौका बियाह नै करबै त पाई कत स गिनेबै दहेज के आ अखैन नीक लड़का फंसेने छै रमबबूआ ई कहि हरबरैलै चलि गेलखिन ओत स।हम आश्चर्य स लालपीसी के पुछलियै जे चोरौका बियाह की होई छै त लालपीसी दुखी भ कहलकै जे राति में चलिहें बियाह देखै लै त देखिहै।बांकि के चारि घंटा तक हमरा लै बहुत मुश्किल भ गेल बितेनाई कियकि लालदाई संगी जकां छलै हमर आ एक्का अगले तरह के बियाह। लेकिन जखैन राति में मां आ लालपीसी संगे दामोदर कका के अंगना गेलौ बियाह देखै लै त ओत के दृश्य देख क अचंभित रैह गेलौ। बियाह बला के वर जबरदस्ती एते शराब पिया देने रहथिन ई सब जे उ नीचा भूईंया में उंघरायल आ धोती खाली डांर में लपटायल रहैन्ह और नशा के हालत में भरि अंगना के लोक के गारि पढ़ै छलैथ।आ लालदाइ बियौहतलि सारि पहिरने कोबर घर के कोना में डरे डबडबायल आंखि ठार।आ भरि अंगना के लोक जल्दी जल्दी बियाह के ओरियान करै में लागल रहै किया कि अगर बर के होश आइब जैतै त भाइग जेतै।हम ओते पैघ त रहौं नै लेकिन तैयो बहुत डर भ गेल पता नै ई केहन बियाह होई छै।हम लालपीसी के अक्कछ कर लगलीयै जे अंगना चल हमरा नै नीक लागैया तखन कनीये काल बाद हम सब अंगना चलि एलौं।भरि रात्रि ठीक स नींद नहि भेल जहां आंखि लागय कि सपना में बियाह बला अंगना के दृश्य देखाय लागै आ हड़बड़ा कर उठि जाई छलौ।भोरे कमनिहरि कहलक जे राति में जे बियाह भेलै ओहि में त बाद में वर के कनि होश एलै त भाग लगलै तखैन सब डरा धमका क कहुना बियाह करेलकै।भोर में दामोदर कका ऐलखिन तो बड खुश भ क कहै छथिन जे लालबहीन लालदाई के बियाह सम्पन्न भ गेल।आब हमर आधा मन हल्का भ गेल तीन चारि बरख के बाद अपन छोटकी बेटी फूलदाई के सेहो अहिना क क लेबै बियाह।हमरा बहुत आश्चर्य लागल जे हिनका अपने बेटी के ओ तकलीफ भरल चेहरा पर नजैरि नै गेलैन जे ई अखनो एते खुश छथिन। लेकिन बाद में कका बुझलखिन जे हुनका स केहन बड़का गलती भ गेलैन जेकरा सुधारनाई बहुत मुश्किल छै।जखैन चतुर्थी तक तो कहुंना पकरि धकरि के रहलैन बर लेकिन ओकर पराते चुपे चापे भागि गेलैन्ह आधा रात्रि में। बर अपन गाम स कतौ और जा के नुका गेलैन। आ लालदाई त गुम्मी लाईद लेलकै। नै किछ बाजै ने भूकै कतौ चुपचाप बैसल रहय। पढ़ाई सेहो छोड़िए देलकै। एकदम मुरझा गेलै।आब त दामोदर कका के बेटी के हालत देखल नै जानि।कतेको बेर बर के माय स भेंट करथिन्ह जे कहुना बर के खबर पता चलनि लेकिन किच्छ नै पता चलैनि। बहुतों बेर भेंट केला पर बर के माय हुनकर हैसियत से बहुत बेसी दहेज ल क ई बियाह के मानलखिन आ अपन बेटा के सासुर जाय देलखिन्ह आ फेर दुरागमन भेलै। ई सब खबरि जखैन गाम अबियै छुट्टी में त लोक सब दैत रहै छलै। पांच छःसाल बीत गेलै अहि बात के । फेर एक बेर गाम गेल छलौ छुट्टीये में त एक दिन भोरे दामोदर कका हरबरायले एलैथ आ लालपीसी के कहलखिन जे उतरबायर गाम जाई छी फूलदाई के कथा ठीक करै लै।हम त आश्चर्य स तकलियैन कका दिश किया की आब हमहु पैग भ गेल रहौ आ लालदाई के चोरौका बियाह के मतलब बुद्धि गेल रहौं। लेकिन ओहि दिन कका के चेहरा में तकलीफ देखाई दैत छलैन कह लगला नै बुच्ची ऐ बेर फेर स उ गलती नै करबै ए बेर देख सुनि क करबै। ई लड़का बला कहलकै या जे सोनदाई के पढ़ देतै आगू। गरीब परिवार छै लेकिन की करियै तिलक नै द सकै छियै किया की लालदाई के सासु के पाई दै लै सबटा बेच देलियै आ बिना टाका के संभव नै छै सर्वगुणसंपन्न लड़का आ ई लड़का बला बिना तिलके(टाका) के बियाह करै लेल तैयार छै। कका त चलि गेलैथ लेकिन हम बहुत किछ सोचै पर मजबूर भ गेलौ। जेना दामोदर कका बड़की बेटी के धनवान आ सम्पन्न लेकिन लालची, संवेदनहीन लोक के घर में बियाह क क खुश छैथ वा छोटकी बेटी के गरीब आ बुझनुक लोक बला घर में बियाह क क। कि सबटा गलती दामोदर कका के छैन्ह या ई गलती करै पर मजबूर कर बला त बेटा के बाप के , जे ई नै बुझै छै जे आदमी बेचै के वस्तु नै होई छै? दामोदर कका सन लोक त मानि गेलैथ अपन गलती आ सुधारै के कोशिश केलखिन,लेकिन पाई लै बला बेटा के बाप अपन गलती कहिया मानता नहि जानि। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। अम्बिका मल्लिक विरांगना अर्द्धांगिनी छी हम विरांगना छी आधा अंग के संग संग हम सब आधा आबादी पर राज अपन बनेने छी देशक डोर होय या गृहस्थी के सब पर अपन कमान बनेने छी कर्म भूमि होय या रण भूमि पहचान अपन बनेने छी व्योम होय या शिखर आरोही में ध्वज अपन फहरेने छी फायटर होय या पायलट होय हौसला अपन बुलंद बनेने छी अभिनेत्री होय या कवियत्री लोहा अपन मनवेने छी आईएस अफसर होय या क्रिक्रेटर होय रुतबा अपन बनेने छी गायकी होय या तैराकी होय सबहक मन हम मोहने छी साध्वी होय या अभयंत्री होय सब पर अपन पकड़ बनेने छी गणतंत्र दिवस के जय घोष में पहचान विरांगना के बनेने छी -अम्बिका मल्लिक, लहेरियासराय दरभंगा अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। प्रीति प्रभा पंखुड़ी के छी हम,आ कि छी हम, अंगनाक रौनक,सांझक दीया रूनझून पैंजनी चंचलाअबैत करैत बिन शोर, मायक छाया पिता के काया बनी अएलहूं अहांक द्वार कअ लिय हमरा सहज स्वीकार। धानक बाली सन खनकब हर क्षण चहकब सदा घर आ आंगन सजल रहत मड़बा अहांक चढ़ी बैसत दुलरी धीया अहाँक राखत पागक मान-सम्मान देहरी पर नहीं आबत आँच। हम छी जूही, हम छी चम्पा गुलाबक सुवासित पंखुड़ी हम। दमकैत रहै माय के आँचर एहन रूप विभूति सचार छी हम। अंगनाक रौनक विसहथ गामक धीया छी हम। -प्रीति प्रभा, जमशेदपुर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। डॉ मालती मधु स्तन कैंसरक शुरूआती लक्षण आ रोकथाम ब्रेस्ट कैन्सर या स्तन कैन्सर आब बहुत कॉमन भ रहल अछि. पहिले विदेश टा मे बेसी देखल जाई छले लेकिन पिछला किछ साल मे अपनादेश मे एकर केस बढल जा DX रहल अछि. धीरे धीरे स्तन कैन्सर महिला मे होई वला सबस कामन कैन्सर भेल जा रहल छै.अगर शुरु के स्टेज मे बीमारी के पता लगा लेल जाय त बहुत हद तक इलाज सम्भव अएछ. पुरा दुनिया मे स्तन कैन्सर के रोके के लेल उपाय चैल रहल छै और ऑक्टोबर महिना के जागरुकता महिना के रूप मे जानल ज़ाई छै. अहि लेख मे स्तन कैन्सर के शुरुआती लक्षण के बारे मे जानकारी देल जायत. स्तन कैन्सर के शुरुआती लक्षण स्तन के कोनो ऐहेन गाँठ जई मे दर्द नहि हुए ओई पर ध्यान दई के चाहि. निपल स कोनो तरह के डिस्चार्ज विशेष रूप स लाल रंग के डिस्चार्ज आबे त डॉक्टर लग जा क जाँच करबी. स्तन के स्किन मे कोनो फ़रक ( संतरा के छिलका जेका छेद भेला पर ) भेला पर सहो ध्यान देबाक चाही.बगल मे या गर्दन मे भेल गिल्टी शुरुआती लक्षण भ सकेत अछि. निपल के आस पास बहुत जाड़ा खुजली या स्तन मे स्वेलिंग सहो महत्वपूर्ण लक्षण भ सकेत अछि. स्तन कैन्सर स केना बचल जाइय स्तन कैन्सर के लेल बहुत रिस्क फ़ैक्टर होइत अछि जेना वजन बेसी भेनाए ( विशेष रूप स रजोनिवृति के बाद ),डेली दिनचर्या मे व्यायाम के कमी या बिवाहक बाद लेट स बाल बच्चा भेंनाई. संतुलित खानपान आ प्रतिदिन व्ययाम स बहुत बीमारी स बचाव सम्भव अछि. खान पान मे बेसी सब्ज़ी और फल के शामिल करवाके चाहि. वसायुक्त भोजन , धूम्रपान वग़ैरह स परहेज़ कर चाहि. स्तन कैन्सर के केस मे अपना आप स ब्रेस्ट के सेल्फ इग्ज़ैमिनेशन ( अपना आप स जाँच) काफ़ी कारगर साबित भेल अछि. दुनिया भरि मे अलग अलग देश मे स्त्री सब अपना आप स अपन जाँच करे छैथ और कोनो समस्या भेला पर डाक्टर स सम्पर्क करे छैथ. सेल्फ इग्ज़ैमिनेशन मे मासिक के बाद के कोनो दिन फ़िक्स क क हाथेली स हल्का दबा क देखल जाये छै जे कोनो गाँठ या निपल स कोनो मवाद आबी रहल अछि. अगर कोनो दिक़्क़त महसूस हुए त डॉक्टर स भेंट करि. मैमोग्रफ़ी एकटा खास तरह के एक्सरे जाँच होइत अछि जई स बहुत शुरुआती स्टेज मे स्तन कैन्सर के पकरल जा सके छै. मैमॉग्रफ़ी चालीस स पचास वर्ष के बीच हर दु साल मे एक बेर कराएबाक ज़रूरत छै या कम स कम चालीस स पचास साल के बीच एक बेर त ज़रूर कराएबाक चाही.चालीस साल स पहिले स्तन के अल्ट्रसाउंड बेसी बढ़िया रहै छै. अगर कोनो गाँठ हुए त डॉक्टर स परामर्श ली. उपचार स्तन कैन्सर मे जत्ते शुरुआत मे पता चलई छै , मरीज़ लेल ओतबै बढ़िया रहे छै.शुरु के स्टेज मे सर्जरी मे पूरा ब्रेस्ट नहि हटा क खाली गाँठ के हटाब स काज चलि जायत अछि. कखनो कखनो कीमोथेरपी के सहो जरुरत होइत अछि. ई बीमारी के भयावह रूप स डराई के बदला मे अपन जाँच क सही समय पर डॉक्टर स परामर्श ल क एकर उपचार सम्भव अछि.महिला सब अपना आस पास दोस्त, सखी या रिश्तेदार मे सेल्फ़ इग्ज़ैमिनेशन के बारे मे जागरुकता फैला क एक दोसर के मदत क सकैत छथिन. -Dr. Malti Madhu- Gyanaecologist obstraction and IVF specialist Apollo fertility,Noida, madhutmh17@gmail.com अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ........................................................................................................................ संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] Videha e-Learning पेटार (रिसोर्स सेन्टर) शब्द-व्याकरण-इतिहास MAITHILI IDIOMS & PHRASES मैथिली मुहावरा एवम् लोकोक्ति प्रकाश- रमाकान्त मिश्र मिहिर (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) डॉ. ललिता झा- मैथिलीक भोजन सम्बन्धी शब्दावली (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) मैथिली शब्द संचय MAITHILI DICTIONARY- RAMDEO JHA (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) ENGLISH MAITHILI COMPUTER DICTIONARY MAITHILI ENGLISH DICTIONARY अणिमा सिंह -Shishu_Geet_Khel_Anima_Singh डॉ. रमण झा मैथिली काव्यमे अलङ्कार अलङ्कार-भास्कर आनन्द मिश्र (सौजन्य श्री रमानन्द झा "रमण")- मिथिला भाषाक सुबोध व्याकरण BHOLALAL DAS मैथिली सुबोध व्याकरण- भोला लाल दास राधाकृष्ण चौधरी- A Survey of Maithili Literature ........................................................................................................................ मूलपाठ तिरहुता लिपिक उद्भव ओ विकास (यू.पी.एस.सी. सिलेबस) राजेश्वर झा- मिथिलाक्षरक उद्भव ओ विकास (मैथिली साहित्य संस्थान आर्काइव) Surendra Jha Suman दत्त-वती (मूल)- श्री सुरेन्द्र झा सुमन (यू.पी.एस.सी. सिलेबस) प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) CIIL SITE ........................................................................................................................ समीक्षा सुभाष चन्द्र यादव-राजकमल चौधरी: मोनोग्राफ शिव कुमार झा "टिल्लू" अंशु-समालोचना डॉ बचेश्वर झा- B_JHA_Nibhand_Nikunj.pdf डॉ. देवशंकर नवीन- Adhunik_Sahityak_Paridrishya डॉ. रमण झा- भिन्न-अभिन्न प्रेमशंकर सिंह- मैथिली भाषा साहित्य:बीसम शताब्दी (आलोचना) डॉ. रमानन्द झा 'रमण' हिआओल अखियासल CIIL SITE दुर्गानन्द मण्डल-चक्षु RAMDEO JHA दत्त-वतीक वस्तु कौशल- डॊ. श्रीरामदेवझा SHAILENDRA MOHAN JHA परिचय निचय- डॊ शैलेन्द्र मोहन झा ........................................................................................................................ अतिरिक्त पाठ पहिने मिथिला मैथिलीक सामान्य जानकारी लेल एहि पोथी केँ पढ़ू:- राधाकृष्ण चौधरी- मिथिलाक इतिहास फेर एहि मनलग्गू फाइल सभकेँ सेहो पढ़ू:- केदारनाथ चौधरी चमेलीरानी माहुर करार कुमार पवन पइठ (मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ कथा) (साभार अंतिका) डायरीक खाली पन्ना (साभार अंतिका) याेगेन्द्र पाठक वियाेगी- विज्ञानक बतकही रामलोचन ठाकुर- मैथिली लोककथा SAHITYA AKADEMI http://sahitya-akademi.gov.in/publications/e-books.jsp http://sahitya-akademi.gov.in/general/Digitalbooks.jsp CIIL http://corpora.ciil.org/maisam.htm अखियासल (रमानन्द झा रमण) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI1.pdf जुआयल कनकनी- महेन्द्र http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI2.pdf प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI3.pdf सृजन केर दीप पर्व- सं केदार कानन आ अरविन्द ठाकुर http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI4.pdf मैथिली गद्य संग्रह- सं शैलेन्द्र मोहन झा http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI5.pdf JNU http://sanskrit.jnu.ac.in/maithili/index.jsp http://sanskrit.jnu.ac.in/student_projects/lexicon.jsp?lexicon=maithili ARCHIVE.ORG https://archive.org/details/%40vijay_deo_jha?&sort=-publicdate&page=2 VIDEHA MAITHILI BOOKS/ PICTURE-AUDIO-VIDEO ARCHIVE http://videha.co.in/new_page_15.htm https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ ALL INDIA RADIO DOORDARSHAN आकाशवाणी दूरदर्शन http://prasarbharati.gov.in/ http://newsonair.com/ https://doordarshan.gov.in/ आकाशवाणी मैथिली पोडकास्ट http://prasarbharati.gov.in/podcast.php?filterlang=Maithili&from=1947-08-15&fromwp=2020-08-29&to=2050-12-31&search=GO आकाशवाणी पटना/ दरभंगा मैथिली रेजनल न्यूज टेक्स्ट डाउनलोड-1 http://newsonair.com/RNU-NSD-Audio-Archive-Search.aspx आकाशवाणी पटना/ दरभंगा मैथिली रेजनल न्यूज टेक्स्ट डाउनलोड-2 http://newsonair.com/Regional-Text.aspx आकाशवाणी दरभंगा http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=282 आकाशवाणी दरभंगा यू ट्यूब चैनल https://www.youtube.com/channel/UCGdNveEFmv4pPolWiTEMxVA आकाशवाणी भागलपुर http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=359 आकाशवाणी पूर्णियाँ http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=256 आकाशवाणी पटना http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=122 IGNCA http://ignca.nic.in/coilnet/mithila.htm http://ignca.nic.in/coilnet/kalyani.htm (MAITHILI ENGLISH DICTIONARY) http://tdil.mit.gov.in/CoilNet/IGNCA/mithila.htm MITHILA DARSHAN https://mithiladarshan.com/ (online pdf of Maithili journal) I LOVE MITHILA https://www.ilovemithila.com/ (online maithili journal) मैथिली साहित्य संस्थान https://www.maithilisahityasansthan.org/ https://www.maithilisahityasansthan.org/resources (online pdf of Reasearch Papers/ books) ........................................................................................................................ VIDEHA e-LEARNING YOUTUBE CHANNEL https://www.youtube.com/channel/UC4abVKqMj2pDWIAkXiOHp7A (अनुवर्तते) -गजेन्द्र ठाकुर विदेहक किछु विशेषांक:- १) हाइकू विशेषांक १२ म अंक, १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf 12.pdf २) गजल विशेषांक २१ म अंक, १ नवम्बर २००८ Videha_01_11_2008.pdf Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf 21.pdf ३) विहनि कथा विशेषांक ६७ म अंक, १ अक्टूबर २०१० Videha_01_10_2010 Videha_01_10_2010_Tirhuta 67 ४) बाल साहित्य विशेषांक ७० म अंक, १५ नवम्बर २०१० Videha_15_11_2010 Videha_15_11_2010_Tirhuta 70 ५) नाटक विशेषांक ७२ म अंक १५ दिसम्बर२०१० Videha_15_12_2010 Videha_15_12_2010_Tirhuta 72 ६) नारी विशेषांक ७७म अंक ०१ मार्च २०११ Videha_01_03_2011 Videha_01_03_2011_Tirhuta 77 ७) अनुवाद विशेषांक (गद्य-पद्य भारती) ९७म अंक Videha_01_01_2012 Videha_01_01_2012_Tirhuta 97 ८) बाल गजल विशेषांक विदेहक अंक १११ म अंक, १ अगस्त २०१२ Videha_01_08_2012 Videha_01_08_2012_Tirhuta 111 ९) भक्ति गजल विशेषांक १२६ म अंक, १५ मार्च २०१३ Videha_15_03_2013 Videha_15_03_2013_Tirhuta 126 १०) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक १४२ म, अंक १५ नवम्बर २०१३ Videha_15_11_2013 Videha_15_11_2013_Tirhuta 142 ११) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 १२) अरविन्द ठाकुर विशेषांक १८९ म अंक १ नवम्बर २०१५ Videha_01_11_2015 १३) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक १९१ म अंक १ दिसम्बर २०१५ Videha_01_12_2015 १४) विदेह सम्मान विशेषाक- २००म अक १५ अप्रैल २०१६/ २०५ म अक १ जुलाई २०१६ Videha_15_04_2016 Videha_01_07_2016 १५) मैथिली सी.डी./ अल्बम गीत संगीत विशेषांक- २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ Videha_01_01_2017 १६) मैथिली वेब पत्रकारिता विशेषांक VIDEHA 313 लेखकसं आमंत्रित रचनापर आमंत्रित आलोचकक टिप्पणीक शृंखला १. कामिनीक पांच टा कविता आ ओइपर मधुकान्त झाक टिप्पणी विदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016 एडिटर्स चोइस सीरीज एडिटर्स चोइस सीरीज-१ विदेहक १२३ म (०१ फरबरी २०१३) अंकमे बलात्कारपर मैथिलीमे पहिल कविता प्रकाशित भेल छल। ई दिसम्बर २०१२ क दिल्लीक निर्भया बलात्कार काण्डक बादक समय छल। ओना ई अनूदित रचना छल, तेलुगुमे पसुपुलेटी गीताक एहि कविताक हिन्दी अनुवाद केने छलीह आर. शांता सुन्दरी आ हिन्दीसँ मैथिली अनुवाद केने छलाह विनीत उत्पल। हमर जानकारीमे एहिसँ बेशी सिहराबैबला कविता कोनो भाषामे नहि रचल गेल अछि। सात सालक बादो ई समस्या ओहने अछि। ई कविता सभकेँ पढ़बाक चाही, खास कऽ सभ बेटीक बापकेँ, सभ बहिनक भाएकेँ आ सभ पत्नीक पतिकेँ। आ विचारबाक चाही जे हम सभ अपना बच्चा सभ लेल केहन समाज बनेने छी। एडिटर्स चोइस सीरीज-१ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-२ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच ब्रेस्ट कैसरक समस्यापर विदेह मे मीना झा केर एकटा लघु कथा प्रकाशित भेल। ई मैथिलीक पहिल कथा छल जे ब्रेस्ट कैसर पर लिखल गेल। हिन्दीमे सेहो ताधरि एहि विषयपर कथा नहि लिखल गेल छल, कारण एहि कथाक ई-प्रकाशित भेलाक १-२ सालक बाद हिन्दीमे दू गोटेमे घोंघाउज भऽ रहल छल कि पहिल हम आकि हम, मुदा दुनूक तिथि मैथिलीक कथाक परवर्ती छल। बादमे ई विदेह लघु कथामे सेहो संकलित भेल। एडिटर्स चोइस सीरीज-२ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-३ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिलक किछु बाल कविता प्रकाशित भेल। बादमे हुनकर ३ टा बाल कविता विदेह शिशु उत्सवमे संकलित भेल जाहिमे २ टा कविता बेबी चाइल्डपर छल। पढ़ू ई तीनू कविता, बादक दुनू बेबी चाइल्डपर लिखल कविता पढ़बे टा करू से आग्रह। एडिटर्स चोइस सीरीज-३ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-४ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच जगदानन्द झा मनुक एकटा दीर्घ बाल कथा कहि लिअ बा उपन्यास प्रकाशित भेल, नाम छल चोनहा। बादमे ई रचना विदेह शिशु उत्सवमे संकलित भेल, ई रचना बाल मनोविज्ञानपर आधारित मैथिलीक पहिल रचना छी, मैथिली बाल साहित्य कोना लिखी तकर ट्रेनिंग कोर्समे एहि उपन्यासकेँ राखल जेबाक चाही। कोना मॊडर्न उपन्यास आगाँ बढ़ै छै, स्टेप बाइ स्टेप आ सेहो बाल उपन्यास। पढ़बे टा करू से आग्रह। एडिटर्स चोइस सीरीज-४ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-५ एडिटर्स चोइस ५ मे मैथिलीक "उसने कहा था" माने कुमार पवनक दीर्घकथा "पइठ" (साभार अंतिका) । हिन्दीक पाठक, जे "उसने कहा था" पढ़ने हेता, केँ बुझल छन्हि जे कोना अहि कथाकेँ रचि चन्द्रधर शर्मा ’गुलेरी’ अमर भऽ गेलाह। हम चर्चा कऽ रहल छी, कुमार पवनक "पइठ" दीर्घकथाक। एकरा पढ़लाक बाद अहाँकेँ एकटा विचित्र, सुखद आ मोन हौल करैबला अनुभव भेटत, जे सेक्सपीरिअन ट्रेजेडी सँ मिलितो लागत आ फराको। मुदा एहि रचनाकेँ पढ़लाक बाद तामस, घृणा सभपर नियंत्रणकेँ आ सामाजिक/ पारिवारिक दायित्वकेँ सेहो अहाँ आर गंभीरतासँ लेबै, से धरि पक्का अछि। मुदा एकर एकटा शर्त अछि जे एकरा समै निकालि कऽ एक्के उखड़ाहामे पढ़ि जाइ। एडिटर्स चोइस सीरीज-५ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-६ जगदीश प्रसाद मण्डलक लघुकथा "बिसाँढ़": १९४२-४३ क अकालमे बंगालमे १५ लाख लोक मुइला, मुदा अमर्त्य सेन लिखैत छथि जे हुनकर कोनो सर-सम्बन्धी एहि अकालमे नहि मरलन्हि। मिथिलोमे अकाल आएल १९६७ ई. मे आ इन्दिरा गाँधी जखन एहि क्षेत्र अएली तँ हुनका देखाओल गेल जे कोना मुसहर जातिक लोक बिसाँढ़ खा कऽ एहि अकालकेँ जीति लेलन्हि। मैथिलीमे लेखनक एकभगाह स्थिति विदेहक आगमनसँ पहिने छल। मैथिलीक लेखक लोकनि सेहो अमर्त्य सेन जेकाँ ओहि महाविभीषिकासँ प्रभावित नहि छला आ तेँ बिसाँढ़पर कथा नहि लिखि सकला। जगदीश प्रसाद मण्डल एहिपर कथा लिखलन्हि जे प्रकाशित भेल चेतना समितिक पत्रिकामे, मुदा कार्यकारी सम्पादक द्वारा वर्तनी परिवर्तनक कारण ओ मैथिलीमे नहि वरण् अवहट्ठमे लिखल बुझा पड़ल, आ ओतेक प्रभावी नहि भऽ सकल कारण विषय रहै खाँटी आ वर्तनी कृत्रिम। से एकर पुनः ई-प्रकाशन अपन असली रूपमे भेल विदेहमे आ ई संकलित भेल "गामक जिनगी" लघुकथा संग्रहमे। एहि पोथीपर जगदीश प्रसाद मण्डलकेँ टैगोर लिटरेचर अवार्ड भेटलनि। जगदीश प्रसाद मण्डलक लेखनी मैथिली कथाधाराकेँ एकभगाह हेबासँ बचा लेलक, आ मैथिलीक समानान्तर इतिहासमे मैथिली साहित्यकेँ दू कालखण्डमे बाँटि कऽ पढ़ए जाए लागल- जगदीश प्रसाद मण्डलसँ पूर्व आ जगदीश प्रसाद मण्डल आगमनक बाद। तँ प्रस्तुत अछि लघुकथा बिसाँढ़- अपन सुच्चा स्वरूपमे। एडिटर्स चोइस सीरीज-६ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-७ मैथिलीक पहिल आ एकमात्र दलित आत्मकथा: सन्दीप कुमार साफी। सन्दीप कुमार साफीक दलित आत्मकथा जे अहाँकेँ अपन लघु आकाराक अछैत हिलोड़ि देत आ अहाँक ई स्थिति कऽ देत जे समानान्तर मैथिली साहित्य कतबो पढ़ू अहाँकेँ अछौं नहि होयत। ई आत्मकथा विदेहमे ई-प्रकाशित भेलाक बाद लेखकक पोथी "बैशाखमे दलानपर"मे संकलित भेल आ ई मैथिलीक अखन धरिक एकमात्र दलित आत्मकथा थिक। तँ प्रस्तुत अछि मैथिलीक पहिल दलित आत्मकथा: सन्दीप कुमार साफीक कलमसँ। एडिटर्स चोइस सीरीज-७ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-८ नेना भुटकाकेँ रातिमे सुनेबा लेल किछु लोककथा (विदेह पेटारसँ)। एडिटर्स चोइस सीरीज-८ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-९ मैथिली गजलपर परिचर्चा (विदेह पेटारसँ)। एडिटर्स चोइस सीरीज-९ (डाउनलोड लिंक) जगदीश प्रसाद मण्डल जीक ६५ टा पोथीक नव संस्करण विदेहक २३३ सँ २५० धरिक अंकमे धारावाहिक प्रकाशन नीचाँक लिंकपर पढ़ू:- Videha_15_05_2018 Videha_01_05_2018 Videha_15_04_2018 Videha_01_04_2018 Videha_15_03_2018 Videha_01_03_2018 Videha_15_02_2018 Videha_01_02_2018 Videha_15_01_2018 Videha_01_01_2018 Videha_15_12_2017 Videha_01_12_2017 Videha_15_11_2017 Videha_01_11_2017 Videha_15_10_2017 Videha_01_10_2017 Videha_15_09_2017 Videha_01_09_2017 विदेह ई-पत्रिकाक बीछल रचनाक संग- मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ रचनाक एकटा समानान्तर संकलन: विदेह: सदेह: १ (२००८-०९) देवनागरी विदेह: सदेह: १ (२००८-०९) तिरहुता विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) देवनागरी विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) तिरहुता विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०)देवनागरी विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०) तिरहुता विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०)देवनागरी विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०) तिरहुता विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]देवनागरी विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ] तिरहुता विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]- दोसर संस्करण देवनागरी विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ]देवनागरी विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ] तिरहुता विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ]देवनागरी विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ] तिरहुता विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ]देवनागरी विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ] तिरहुता विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ]देवनागरी विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ] तिरहुता विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ]देवनागरी विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ] तिरहुता विदेह:सदेह ११ विदेह:सदेह १२ विदेह:सदेह १३ The readers of English translations of Maithili Novel "sahasrabadhani" and verse collection "sahasrabdik chaupar par" has intimated that the English translation has not been able to grasp the nuances of original Maithili. Therefore the Author has started translating his Maithili works in English himself. After these translations are complete these would be the official translations authorised by the Author of the original works.-Editor Maithili Books can be downloaded from: https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ विदेह सम्मान: सम्मान-सूची (समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार सहित) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। सूचना/ घोषणा १ "विदेह सम्मान" समानान्तर साहित्य अकदेमी पुरस्कारक नामसँ प्रचलित अछि। "समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार" (मैथिली), जे साहित्य अकादेमीक मैथिली विभागक गएर सांवैधानिक काजक विरोधमे शुरु कएल छल, लेल अनुशंसा आमन्त्रित अछि। अनुशंसा २०१९ आ २०२० बर्ख लेल निम्न कोटि सभमे आमन्त्रित अछि: १) फेलो २)मूल पुरस्कार ३)बाल-साहित्य ४)युवा पुरस्कार आ ५) अनुवाद पुरस्कार। अपन अनुशंसा ३१ दिसम्बर २०२० धरि २०१९ पुरस्कारक लेल आ ३१ मार्च २०२१ धरि २०२०क पुरस्कारक लेल पठाबी। पुरस्कारक सभ क्राइटेरिया साहित्य अकादेमी, दिल्लीक समानान्तर पुरस्कारक समक्ष रहत, जे एहि लिंक sahitya-akademi.gov.in पर उपलब्ध अछि। अपन अनुशंसा editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २ “मिथिला मखान” फिल्म देखू मात्र १०१ टाकामे। Android App “BEJOD” download करू वा जाउ www.bejod.in पर, signup करू, एकटा ईमेल जायत, अपन ईमेल खोलू आ ओकरा क्लिक करू अहाँक अकाउंट एक्टीवेट भय जायत। आब मिथिला मखान रेण्ट पर लिअ, डेबिट कार्डसँ १०१ टाका अॉनलाइन पेमेंट करू आ फिल्म देखू। ३ विदेह अपन आगामी अंक (२०२१ क प्रारम्भमे) श्री रामलोचन ठाकुर पर विशेषांक निकालबाक नेयार केने अछि। हुनका सम्बन्धी रचना आमंत्रित अछि (संस्मरण, साक्षात्कार, समीक्षा आदि) जे ३१ दिसम्बर २०२० धरि editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाओल जा सकैत अछि। विदेह पेटारक अन्तर्गत (पोथी डाउनलोड साइट) मे http://www.videha.co.in/new_page_15.htm हुनकर मौलिक, अनूदित आ सम्पादित रचना फ्री पी.डी.एफ. डाउनलोड लेल उपलब्ध अछि। विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम्: VIDEHA: AN IDEA FACTORY (c)२००४-२०२१. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHAसम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: डॉ उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम विलास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक -स्त्री कोना- इरा मल्लिक। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि)editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि। एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै, आ से हानि-लाभ रहित आधारपर छै आ तैँ ऐ लेल कोनो रॊयल्टीक/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै। तेँ रॉयल्टीक/ पारिश्रमिकक इच्छुक विदेहसँ नै जुड़थि, से आग्रह। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-2021 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। ५ जुलाई २००४ केँ http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् 'विदेह' ३१६ म अंक १५ फरबरी २०२१ (वर्ष १४ मास १५८ अंक ३१६)
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