VIDEHA — Issue 317 / अंक ३१७

Publication: VIDEHA · Issue: 317
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विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA ISSN 2229-547X VIDEHA 'विदेह' ३१७ म अंक ०१ मार्च २०२१ (वर्ष १४ मास १५९ अंक ३१७) ऐ अंकमे अछि:- १. गजेन्द्र ठाकुर- संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल  मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल सेहो] [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] [FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI ALSO] २. गद्य- पद्य २.१.जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’-आँखिमे चित्र हो मैथिलीकेर (आत्म-कथा)-आगाँ २.२. रबीन्द्र नारायण मिश्र- धारावाहिक उपन्यास-लजकोटर (१७ म खेप) २.३.नन्द विलास राय-फोचाइ कक्काक बेमारी २. ४.सुभाष कुमार कामत-हरायल गाम बीहनि कथा विशेषांक ३.१.आभा झा- बीहनि कथाक आजुक परिप्रेक्ष्यमे उपादेयता ३.२.आभा झा- बीछक डंक ३.३.अरुण लाल दास- दू टा बीहनि कथा ३.४.कल्पना झा-बीहनि कथा ३.५.सुभाष कुमार कामत- ३ टा बीहनि कथा ३.६.पूनम झा- २ टा बीहनि कथा ३.७.प्रियंवदा-४ टा बीहनि कथा ३.८.रवि भूषण पाठक- घर ३.९.अमरेश कुमार चौधरी- २ टा बीहनि कथा ३.१०.आशीष अनचिन्हार-४ टा बीहनि कथा ३.११.आशीष अनचिन्हार- बीहनिकथा की छै? ३.१२.सांत्वना मिश्रा- बीहनि कथा-बड़दक घंटी ३.१३.रूचि स्मृति-२ टा बीहनि कथा ३.१४.देवेन्द्र मिश्र-एकता ३.१५.मिन्नी मिश्र-के समाहरत इ गृहस्थीक भार! ३.१६.गौरी शंकर साह- भाव ३.१७.सत्यनारायण झा-लखन बाबू। ३.१८.घनश्याम घनेरो-लैह-लैहे गुलबिया ३.१९.अभिलाष ठाकुर-टकध्यान ३.२०.अखिला नन्द झा 'रमण'-चश्मा ३.२१.सबिता झा 'सोनी'-सेहेन्ता / बेगरता ३.२२.पूनम झा "सुधा"-सेल्फी ३.२३.मनोज मंडल-मां ३.२४.चंदना दत्त-प्रेम दिवस ३.२५.विन्देश्वर ठाकुर-घुस्सा-घुस्सी ३.२६.कुन्दन कर्ण-"आओर छिछियाउ" ३.२७.सोनी नीलू झा-।।अदनाबालीक आंगन।। ३.२८.विनीता ठाकुर-किसान ३.२९.डॉ प्रमोद कुमार-ढ़हलेल छी ३.३०.इरा मल्लिक-बेटीक महिमा ३.३१.सत्येन्द्र कर्ण- बनिया बाबा ३.३२.जवाहर लाल कश्यप-पहिल प्रेम ३.३३.जयंती कुमारी-दू टा बीहनि कथा ३.३४.डा. शिव कुमार प्रसाद-४ टा बीहनि कथा ३.३५.वी.सी.झा "बमबम"-अधलाह बस्तु ३.३६.भावना मिश्रा-गरीब लोक ३.३७.अमर कान्त लाल-उघार ३.३८.अमल कुमार झा-हिरो ३.३९.प्रभात कुमार कर्ण-प्रकृतिक तांडव ३.४०.डाॅ.प्रमोद झा "गोकुल"-२ टा बीहनि कथा ३.४१.निवेदिता झा-दू टा बीहनि कथा ३.४२.ओम चौधरी-सुरज माटि-कादो गिजैत छल ३.४३.कल्पना झा-२ टा बीहनि कथा ३.४४.भुवनेश्वर चौरसिया 'भुनेश'-संजय केर अॅं‌इख ३.४५.जगतरंजन झा-बीहनि कथा ३.४६.शेफालिका वर्मा-हँ एहनो होयत छैक ३.४७.प्रभाष अकिंचन-भरोस ३.४८.मुन्नी कामत-दू टा बीहनि कथा ३.४९.मिसिदा-ट्राय एगेन लैटर ३.५०.मृणाल आशुतोष-आंदोलन ३.५१.ज्ञानवर्द्धन कंठ-दूटा बीहनि कथा ३.५२.राजीव कर्ण-झुठक महत्व ३.५३.जगदानन्द झा 'मनु'-४ टा बीहनि कथा ३.५४.विरेन्द्र कुमार  झा-कोना बुझब ३.५५.विद्या चन्द्र झा "बमबम"-साहित्य मंथन आ बीहनि कथा ३.५६.घनश्याम घनेरो-बीहनिकथा आ  'घनेरो'क अवधारणा ३.५७.मुन्ना जी-बीहनि कथा-- मानकीकरण ओ तुलनात्मक पक्ष ३.५८.विदेह विहनि कथा विशेषांक-१ ३.५९.अनीता मिश्र-२टा बीहनि कथा अनुवाद खण्ड (बीहनि कथा विशेषांक) ४.१.अंजू खरबंदा-मुखिया ४.२.रवि प्रभाकर-अदकल जीह ४.३.सतीश खनगवाल-घुरपेंच ४.४.विजय 'विभोर'-अन्नदाता ४.५.योगराज प्रभाकर-थाल आ कमल ४.६.डा पुष्करराज भट्ट-बहिष्करण ४.७.प्रा. डा. कपिल लामिछाने-सौन्दर्य आ समानता ४.८.हरिप्रसाद भण्डारी क दू टा बीहनि कथा ४.९.तारा केसी-अपन परिचय ४.१०.डॉ. प्रदीप कौड़ा-क्रांति ४.११.निरंजन बोहा-करूगर सत्य ४.१२.जगदीश अरमानी-कथानक ४.१३.जंगबहादुर सिंह घुम्मण-आचरण ४.१४.दीपक बुदकी-जन्नत ४.१५.मुबश्शिर अली ज़ैदी-ईनाम ४.१६.इब्न आसी-फेर मनुक्खक की भेलै? ४.१७.रतन सिंह-बिना शीर्षकक ४.१८.सच्चिदानन्द कर-तितली आ प्रेम ४.१९.प्रज्ञा महान्ति-मेमोरीचिप्स ४.२०.विनय कुमार दास- कर्मफल ४.२१.गायत्री दास-बुझौअलि ४.२२.मिनती प्रधान-संगी Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Books/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाउ। VIDEHA ARCHIVE विदेह पेटार View Videha googlegroups (since July 2008) view Videha Facebook Official Group (since January 2008)- for announcements १. गजेन्द्र ठाकुर ........................................................................................................................ ........................................................................................................................ [संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल  मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री] [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल सेहो] [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] [FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI ALSO] यू. पी. एस. सी. (मेन्स) २०२० ऑप्शनल: मैथिली साहित्य विषयक टेस्ट सीरीज यू.पी.एस.सी. क प्रिलिमिनरी परीक्षा २०२० सम्पन्न भऽ गेल अछि। जे परीक्षार्थी एहि परीक्षामे उत्तीर्ण करताह आ जँ मेन्समे हुनकर ऑप्शनल विषय मैथिली साहित्य हेतन्हि तँ ओ एहि टेस्ट-सीरीजमे सम्मिलित भऽ सकैत छथि। टेस्ट सीरीजक प्रारम्भ प्रिलिम्सक रिजल्टक तत्काल बाद होयत। टेस्ट-सीरीजक उत्तर विद्यार्थी स्कैन कऽ editorial.staff.videha@gmail.com पर पठा सकैत छथि, जँ मेलसँ पठेबामे असोकर्ज होइन्हि तँ ओ हमर ह्वाट्सएप नम्बर 9560960721 पर सेहो प्रश्नोत्तर पठा सकैत छथि। संगमे ओ अपन प्रिलिम्सक एडमिट कार्डक स्कैन कएल कॉपी सेहो वेरीफिकेशन लेल पठाबथि। परीक्षामे सभ प्रश्नक उत्तर नहि देमय पड़ैत छैक मुदा जँ टेस्ट सीरीजमे विद्यार्थी सभ प्रश्नक उत्तर देताह तँ हुनका लेल श्रेयस्कर रहतन्हि। विदेहक सभ स्कीम जेकाँ ईहो पूर्णतः निःशुल्क अछि।- गजेन्द्र ठाकुर संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सर्विसेज (मुख्य) परीक्षा, २०२० मैथिली (ऐच्छिक) लेल टेस्ट सीरीज/ प्रश्न-पत्र- १ आ २ TEST SERIES-1 TEST SERIES-2 [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल/ FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI] NTA_UGC_NET_MAITHILI_01 NTA_UGC_NET_MAITHILI_02 NTA_UGC_NET_MAITHILI_03 (श्री शम्भु कुमार सिंह द्वारा संकलित) Videha e-Learning MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) UPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS BPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. (ऐच्छिक) मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. (अनिवार्य) मैथिली प्रश्नपत्र- बी.पी.एस.सी.(ऐच्छिक) मैथिलीक वर्तनी १ भाषापाक २ मैथिलीक वर्तनीमे पर्याप्त विविधता अछि। मुदा प्रश्नपत्र देखला उत्तर एकर वर्तनी इग्नू BMAF001 सँ प्रेरित बुझाइत अछि, से एकर एकरा एक उखड़ाहामे उनटा-पुनटा दियौ, ततबे धरि पर्याप्त अछि। यू.पी.एस.सी. क मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेल सेहो ई पर्याप्त अछि, से जे विद्यार्थी मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेने छथि से एकर एकटा आर फास्ट-रीडिंग दोसर-उखड़ाहामे करथि| IGNOU  इग्नू       BMAF-001 ........................................................................................................................ MAITHILI (OPTIONAL) TOPIC 1    [Place of Maithili in Indo-European Language Family/ Origin and development of Maithili language (Sanskrit, Prakrit, Avhatt, Maithili) भारोपीय भाषा परिवार मध्य मैथिलीक स्थान/ मैथिली भाषाक उद्भव ओ विकास (संस्कृत, प्राकृत, अवहट्ट, मैथिली)] TOPIC 2    (Criticism- Different Literary Forms in Modern Era/ test of critical ability of the candidates) TOPIC 3    (ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददास सिलेबसमे छथि आ रसमय कवि चतुर चतुरभुज विद्यापति कालीन कवि छथि। एतय समीक्षा शृंखलाक प्रारम्भ करबासँ पूर्व चारू गोटेक शब्दावली नव शब्दक पर्याय संग देल जा रहल अछि। नव आ पुरान शब्दावलीक ज्ञानसँ ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददासक प्रश्नोत्तरमे धार आओत, संगहि शब्दकोष बढ़लासँ खाँटी मैथिलीमे प्रश्नोत्तर लिखबामे धाख आस्ते-आस्ते खतम होयत, लेखनीमे प्रवाह आयत आ सुच्चा भावक अभिव्यक्ति भय सकत।) TOPIC 4                (बद्रीनाथ झा शब्दावली आ मिथिलाक कृषि-मत्स्य शब्दावली) TOPIC 5                (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोरिक गाथामे समाज ओ संस्कृति) TOPIC 6                (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- विद्यापति) TOPIC 7                (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- पद्य समीक्षा- बानगी) TOPIC 8                (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोक गाथा नृत्य नाटक संगीत) TOPIC 9                (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- यात्री) TOPIC 10               (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली रामायण) TOPIC 11               (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली उपन्यास) TOPIC 12               (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- शब्द विचार) TOPIC 13               (तिरहुता लिपिक उद्भव ओ विकास) TOPIC 14                 (आधुनिक नाटकमे चित्रित निर्धनताक समस्या- शम्भु कुमार सिंह)् TOPIC 15                 (स्वातंत्र्योत्तर मैथिली कथामे सामाजिक समरसता- अरुण कुमार सिंह) TOPIC 16                 (यू. पी.एस.सी. मैथिली प्रथम पत्रक परीक्षार्थी हेतु उपयोगी संकलन, मैथिलीक प्रमुख उपभाषाक क्षेत्र आ ओकर प्रमुख विशेषता, मैथिली साहित्यक आदिकाल, मैथिली साहित्यक काल-निर्धारण- शम्भु कुमार सिंह) TOPIC 17                (मैथिली आ दोसर पुबरिया भाषाक बीचमे सम्बन्ध (बांग्ला, असमिया आ ओड़िया) [यू.पी.एस.सी. सिलेबस, पत्र-१, भाग-“ए”, क्रम-५]) TOPIC 18                 [मैथिली आ हिन्दी/ बांग्ला/ भोजपुरी/ मगही/ संथाली- बिहार लोक सेवा आयोग (बी.पी.एस.सी.) केर सिविल सेवा परीक्षाक मैथिली (ऐच्छिक) विषय लेल] ........................................................................................................................ GENERAL STUDIES (PRELIMINARY & MAINS) GS (Pre) TOPIC 1 GS (Mains) NCERT-ENVIRONMENT CLASS XI-XII NCERT PDF I-XII TN BOARD PDF I-XII ALL INDIA RADIO ENGLISH NEWS ALL INDIA RADIO NEWS ARCHIVE ALL INDIA RADIO TALKS AND CURRENT AFFAIRS RAJYA SABHA TV NEWS DISCUSSIONS ........................................................................................................................ OTHER OPTIONALS ........................................................................................................................ IGNOU eGYANKOSH (अनुवर्तते) -गजेन्द्र ठाकुर २. गद्य- पद्य २.१.जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’-आँखिमे चित्र हो मैथिलीकेर (आत्म-कथा)-आगाँ २.२. रबीन्द्र नारायण मिश्र- धारावाहिक उपन्यास-लजकोटर (१७ म खेप) २.३.नन्द विलास राय-फोचाइ कक्काक बेमारी २. ४.सुभाष कुमार कामत-हरायल गाम जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’ सम्पर्क -8789616115 आँखिमे चित्र हो मैथिलीकेर ( आत्म-कथा ) आँखिमे चित्र हो मैथिली केर ( आत्म-कथा ) 7.  गुरुर्विष्णुः परीक्षा शुरू भेलै | हॉलमे भ’ रहल छलै | बडकी टा हॉल, उनचास टा परीक्षार्थी, सभकें एक-एक टा कुर्सी-टेबुल, सबहक बीच पर्याप्त दूरी | मंचपर सिंह साहेब, हुनका सोझां एक-एक छात्रक गतिविधि एकदम साफ़,कतहु कोनो गड़बड़ीक आशंका नहि, परीक्षा-हॉलमे एकदम शान्ति | सिंह साहेब सुनिश्चित केलनि जे सभटा ठीक चलि रहल अछि,अखबार पढ़’ लगलाह | किछु काल बीतल हेतै कि शान्ति भंग भेलै | ‘क्या बात है ?’ ‘हम बाहर जाना चाहते हैं |’ ‘कहाँ ?’ ‘हॉस्टल’ “क्यों?’ ‘किताब लाने के लिए’ ‘क्यों?’ ‘देखकर लिखने के लिए’ ‘क्या बकते हो ?’ ‘सही कह रहा हूँ |’ ‘गेट आउट .......’ ‘हम वृक्ष के सूखे पत्ते नहीं हैं कि हवा के एक झोंके में गिर जाएंगे...’ हॉल गनगना गेलै | प्राचार्य महोदय दौगल एलाह, हुनका संग किछु और प्रोफेसर हल्ला सुनिक’ दौगल एलाह | मंच पर ठाढ़ छलाह सिंह साहेब, नीचांमे ठाढ़ छलाह मिश्र जी, हमर रूम-मेट मिश्र जी | ‘क्या नाम है तुम्हारा ?’ ‘मुझे नारायण कहते हैं,सर |’ ‘क्या बात हुई है नारायण ?’ ‘सर,मैं तो यही चाहता हूँ कि सभी को समान सुविधा मिलनी चाहिए |’ ‘थोडा और स्पष्ट करो |’ ‘सर,इससे ज्यादा मै कह भी नहीं सकता हूँ |’ प्राचार्य महोदय श्रीवास्तवजी दिस ताकि किछु कहलखिन, खोज शुरू भेल | एक-एक क’ सभ छात्रक शर्ट, पैंट, मौजा, जूता सबहक तलाशी भेल, एक ठाम जा क’ सभ रुकि गेलाह | ओ छात्र लजा गेल  छल |एकटा  पन्ना ओकर मौजामे भेटलै | जाहि प्रश्नक उत्तर ओहिमे छलै, तकर मिलान भेलै, ओकरा समझा-बुझाक’ ओ उत्तर कटबा देल गेलै,दोसर कॉपी देल गेलै आ फेर एहेन गलती नै करबाक चेतौनी  देल गेलै | मिश्रजीसं पूछल गेलनि जे हुनका हिसाबसं और की दंड देल जाइ | मिश्रजी कहलखिन ‘मुझे किसी को दंड देने या दिलाने में कोई दिलचस्पी नहीं है,मैं अपने साथी को दंड क्यों दिलाना चाहूँगा,मैं तो सिर्फ यह चाहता था कि सबको समान सुविधा मिले | सभ छात्र चुपचाप ई दृश्य देखि रहल छल | सबहक कलम रुकि गेल छलै | सभ प्राध्यापक चुप छलाह | एकटा अज्ञात भय व्याप्त छलै | वातावरणमे | ‘सभी को पन्द्रह मिनट अतिरिक्त समय दिया जाएगा |’ प्राचार्य महोदय बजलाह | ओ मिश्रजी लग एलाह | ‘ठीक है नारायण अब लिखना शुरू करो |’ ‘हम अब क्या परीक्षा देंगे सर, हम नहीं लिख पाएंगे |’ ‘तुमको अतिरिक्त आधा घंटा समय मिलेगा |’ ‘नहीं सर, मैं बिल्कुल असंतुलित हो गया हूँ, मैं क्या परीक्षा दूंगा |’ ‘ऐसा नहीं कहते, साल बर्बाद नहीं करना है, चलो तुम जितनी देर चाहो लिखो, मगर परीक्षा मत छोडो |’ मिश्रजीक पीठ थपथपबैत प्राचार्य महोदय निकलि गेलाह | फेर मिश्रजी सेहो बैसलाह, सभ शुरू केलक लिखनाइ | परीक्षा हॉल सं निकलैत काल  सभ छत्रक  ठोरपर मिश्रजीक नाम छल | ‘मिश्रजी को ऐसे नहीं बोलना चाहिए |’ ‘अब इनका निकलना तो मुश्किल है |’ ‘प्रोफेसर से ऐसे बात करना बहुत मंहगा पड़ेगा |’ ‘हाँ भाई, प्रैक्टिकल तो इन्हीं लोगों के हाथ में रहता है, ये लोग पास होने देंगे ?’ हम वस्तुस्तितिकें  बुझबाक प्रयास करैत रहलहुँ | मिश्रजी जखन एलाह तखन बुझलियै जे एकटा स्टाफ-सदस्य  आबिक’ चुपचाप ओकरा एकटा कागज़ द’क’ चलि गेलै,सिंह साहेब नै देखलखिन, मिश्र जी देखि लेलखिन आ अपना ढंगसं एकर विरोध केलखिन |एकटा अनुभवी प्राध्यापकक समक्ष फर्स्ट इयरक एकटा छात्रक  एना विरोध प्रगट करब ककरो पचि नै रहल छलै | ककरोमे एतेक साहस नै छलै, जतेक मिश्र जी देखौने छलाह | हमहूँ देखने रहितौं त एना विरोध प्रगट नै क’ सकैत छलहुँ |कियो नै क’ सकैत छल |हम सोचि नै पबैत छलहुँ जे मिश्रजीकें की कहियनि | मिश्र जी सेहो कॉलेज सं एलाक बाद मौन भ’ गेल छलाह | साँझमे हॉस्टलमे ओझाजी एलाह | रुमक सोझां आबि ठाढ़ भेलाह | ‘कौन है नारायण ?’ ‘प्रणाम सर |’ मिश्र जी सोझां एलाह |ओझाजी तेना देखलखिन जेना पहिल बेर देखि रहल होथिन | ‘जो कुछ सुना है, क्या यह सत्य है ?’ हम चुप्प छलहुँ | मिश्र जी सेहो चुप्प छलाह | ‘मै नहीं था, अगर मैं रहता, तो आज या तो तुम रहते इस संस्था में या मैं रहता, मैं तो वर्दाश्त नहीं कर पाता |’ कियो किछु नै बाजल | ओझाजी विदा भेलाह, पाछाँ बहुत छात्र सेहो चलल | हम सेहो ओहि मध्य रही | मिश्र जी रूमेमे रहि गेलाह | छात्र सभ उत्सुक छल जान’ लेल जे कोन दण्ड मिश्र जीकें देल जेतनि |किछु गोटे सिंह साहेबक प्रति अपन आदर प्रदर्शित क’ रहल छल : सर बहुत बुरा हुआ, सिंह साहेब के साथ मिश्र जी को ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए | किछु गोटे चुप्प छल | हमहूँ चुप छलहुँ | हम किछु दूर संगे जाक’ घुरि एलहुँ | मिश्र जी गुम्म छलाह | किछु कालक बाद हॉस्टल मे हल्ला भ’ गेलै जे महाविद्यालयक समस्त स्टाफक  मीटिंग भेलैए जाहिमे मिश्रजी पर अनुशासनिक कारर्बाई करबाक निर्णय लेल गेलैए | ईहो हल्ला भेलै जे ओझाजी स्वयं ई बात कहलखिनहें | किछु गोटे हमरा रूम मे आबिक’ ई बात कहि गेल | किछु गोटे मिश्रजीकें सेहो सलाह देब’ एलनि : अब आपके लिए यहाँ रहना अच्छा नहीं होगा | एक गोटे एलनि : मिश्र जी, आप तो जा रहे हैं, अपना बॉटनी की किताब मुझे दे दीजिए, इसकी क्या जरूरत होगी आपको | ‘चलू, भोजन क’क’ अबै छी |’ हमरा मुंह सं निकलल | जेना-तेना हम सभ भोजनमे सम्मिलित भेलहुँ | ओतहु किछु गोटे यैह सुझाव देलकनि | मिश्र जी मौन छलाह | हमहूँ मौन छलहुँ | किछु फुरा नै रहल छल जे हम की सलाह दीयनि आ हमर सलाह हुनका लेल कतेक उपयोगी हेतनि सेहो स्पष्ट नहि छल | थोड़े काल पडल रहलाक बाद एकाएक मिश्र जी उठलाह, अपन किताब आ कपडा आदि सभ सामान समेटलनि आ हमरा कहलनि ‘ कहल-सुनल माफ़ करब ठाकुरजी, हम जा रहल छी |’ ‘कत ?’ हमरा लागल आब हमरा किछु बाज’ पडत, किछु करब अनिवार्य लागल | ‘कोनो दोसर बाट पकड’ पडत |’ ‘से किए ?’ ‘सुनै नै छिऐ ? आब हमरा या त’ निकालि देत या पास नै कर’ देत, तैसं नीक हमहीं छोडि दी |’ ‘त एखन रातिमे किए ? सोचि-बिचारिक’ काल्हि निर्णय लेब, दोसर विषयक परीक्षा त एक सप्ताहक बाद छै ने ?’ ‘नै,हम सोचि लेलहुँ, हमरा जाए दिय’ |’ ‘की अहाँ सोचैत छी जे अहाँसं  कोनो अपराध भेल अछि ? हमरा त नै लगैए जे अहाँ अपराधी छी | आ अहाँ अपराधी नै छी त दण्ड अहाँ किए भोगब ?’ ‘मुदा, सुनलिऐ नै ओझाजी की कहैत छलाह, सभ प्रतिष्ठाक प्रश्न बना लेलकैए, हमरा पास नै कर’ देत |’ ‘त हमर एकटा बात मानि लिय’, एखन जाएब त’सभ कहत डरसं भागि गेलाह, जेबे करब त काल्हि ओझाजी सं भेंट क’क’ जाउ ?’ ‘की हमरा माफ़ी मांग’ कहै छी ?से हम नै कए सकै छी’ ‘नै, माफ़ी कथीक ? अहांक गलती एतबे ने जे तेज आवाजमे सिंह साहेबसं गप केलहुँ, मुदा एहि लेल जं ओझाजी एतेक नाराज छथि त हुनका कहबनि जे राखू अपन कॉलेज, अहीं सभ रहू, हमहीं जा रहल छी |’ हमर ई प्रस्ताव मिश्रजी मानि लेलनि | बान्हल बेडिंग खोलि आरामसं पड़लाह मिश्र जी, हमरा लागल जेना हमरा  बूते अनायास एकटा नीक काज भ’ गेल अछि | सबेरे स्नान-जलखै क’ क’ दुनू गोटे विदा भेलहुँ ओझाजी ओत’| बहुत गोटे कें भेलै जे मिश्र जी आइ कॉलेज छोडि देताह | हम सभ ओझाजीक डेरा पहुँचलहुँ त पता लागल जे ओ कतहु कोनो काजे निकलल छथि | पता लागल जे कनिएँ दूर पर छनि सिंह साहेबक डेरा | ‘चलू, सिंह साहेब ओत’ चलै छी |’ हमरा मुंहसं निकलल | ‘नै, हम ओत’ नै जाएब, हम माफ़ी सेहो नै मांगि सकै छी |’ ‘अहाँ किछु नै कहबनि, हमहीं कहबनि जे ओझाजी ई बजलखिनहें, तें अहाँ कॉलेजसं जा रहल छी |’ हम सभ पहुँचलहुँ त सिंह साहेब स्नान कर’ जाइ छलाह | हमरा सभकें बैस’ कहलनि आ पाँच मिनट बाद स्नान क’क’ लग मे एलाह | मैडम तीन ठाम प्लेटमे कचौड़ी,तरकारी आ जिलेबी राखि गेलीह | सिंह साहेब हमरा दिस तकलनि | ‘सर, मिश्रजी रात ही कॉलेज छोडकर जा रहे थे, मैंने कहा कि कल सर से भेंट करके प्रस्थान करना ठीक होगा, हमलोग एक ही रूम में रहते हैं |’ हमरा मुंह सं निकलल | ‘इसमें कॉलेज से जाने की बात कहाँ से आ गयी ?’ ‘सर, कल शाम में ओझा जी हॉस्टल पहुंचे थे, कुछ लड़के बता रहे थे कि ओझा जी कह रहे थे, पास नहीं करने देंगे |’ ‘और मैं तुम्हें कहता हूँ कि कोई तुम्हें फेल नहीं करा सकता है, नारायण, मेरी ओर देखो,मैं देखने में काला हूँ, दिल का काला नहीं हूँ |’ मिश्र जी मोम भ’ गेलाह : सर मैंने आपके साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया, आपका तो कसूर था नहीं | ‘तुम्हारा भी कसूर नहीं था, मैं तुम्हारी पीड़ा समझ सकता हूँ |तुम अगर कॉलेज से चले गए तो जिन्दगी भर मेरी आत्मा मुझे कोसती रहेगी कि मेरे  चलते एक लड़के की जिन्दगी खराब हुई |मैं ऐसा होने नहीं दूंगा |’ मिश्र जीक आँखिमे नोर, सिंह साहेबक आँखिमे नोर | ई दृश्य देखि हमरो कना गेल | ‘लो खाओ और मुझे वचन दो कि जाने की बात कभी नहीं करोगे |’ सिंह साहेब अपने हाथसं प्लेट मिश्रजीक आगाँ बढ़ा देलखिन | आइ ओ दृश्य मोन पड़ल त बशीर बद्र साहेबक एकटा शेर मोन पड़ि आएल : ‘पत्थर मुझे कहते हैं मेरे चाहने वाले मैं मोम हूँ उसने मुझे छूकर नहीं देखा’ खाइत-खाइत सिंह साहेब गीताक एकटा श्लोक मिश्रजीकें लक्ष्य क’क’ कहलखिन | गीताक बहुत श्लोक मिश्र जी कें याद छलनि | सिंह साहेब कें ई जानि क’ अतिरिक्त ख़ुशी भेलनि | फेर किछु काल धरि गीताक रसधार बहल | हम मिश्र जी कें हुनका लग नेने गेलियनि, एहि लेल सिंह साहेब हमरा आशीर्वाद देलनि आ कहलनि दू-तीन दिन मिश्रजीक संग  हुनका ओत’ आबक लेल | हम सभ सिंह साहेबक चरण स्पर्श क’क’ हुनका ओत’सं विदा भेलहुँ | हॉस्टल पहुंचिते एकटा छात्र पुछलकनि ‘कब जा रहे हैं मिश्र जी ?’ मिश्र जी मुस्कुराइत पुछलखिन ‘और तुम कब जा रहे हो ?’ आरामसं कुर्सीपर बैसैत मिश्र जी बजलाह, ‘मुझे तो अभी आराम करना है, जिसको जहां जाना हो, जाए |’ बहुत गोटे कें मिश्र जी कें प्रफुल्लित देखि आश्चर्य भ’ रहल छलै | हम ठाकुर जी आ झा जी कें ई बात कहलियनि त हिनको  सभकें नीक लगलनि | एहि घटनामे हमर भूमिका बहुत थोड़ छल, मुदा हमरा जे अनुभव भेल से हमरा लेल महत्वपूर्ण सिद्ध भेल | हमरा समस्याक समाधानक एकटा नीक आ सरल सूत्र हाथ लागि गेल छल जकर उपयोग हम जीवनमे कय बेर केलहुँ आ सभ बेर परिणाम शुभ रहल | (क्रमशः) सम्पर्क :  8789616115, अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। रबीन्द्र नारायण मिश्र- सम्पर्क -9968502767 धारावाहिक उपन्यास-लजकोटर लजकोटर (प्रवासीक जीवनपर आधारित) -17- प्रातभेने  मकान मालिक बजओलक । ओकर  घरबाली सेहो ओतहि रहैक।हम चकुआएल ओतए पहुँचलहुँ । किओ किछु कहैत ताहिसँ पहिने मकान मालिकक घरनी बाजलि-" अहाँकेँ जखन जोगार होएत बाँकी किराया देब । ओहिलेल अपन काज हरमाद नहि करब। ओना अहाँ चाही तँ एतहि रही,हमरा दिस सँ कोनो हर्जा नहि ।" " हमरो कोनो हर्जा नहि होइत मुदा हमरा नव काज एहिठामसँ बहुत दूर छैक । कोनो सोझ बस नहि छैक । कैटा बस बदलि कए हम ओतए जाएब-आएब तँ बहुत परेसानी होएत आ खर्चा तँ हेबे करत ।" "बात तँ ठीके कहैत छथि "-मकान मालिक बाजल । "हम आइ काजपर जाइत छी, देखैत छी जे नव डेरा भेटैत अछि कि नहि, तकरबादे कोनो बात । ताबे तँ छीहे ।" से सभ गप्प भेलाक बाद हमर मोन आश्वस्त भेल । ओहिठामसँ काजपर जाइत रही तँ देखलहुँ जे मकान मालिकक घरनी कोनटा लागल ठाढ़ि छथि। देखबा-सुनबामे पवित्र रहथि। हम बाहरजाइत रही आओरओ एकटक हमरा घुरैत रहलीह। हम ई बात साइत बुझबो नहि करितिऐक मुदा ताबते हुनकाबड़ी जोरसँ छिक्का भेलनिआ अकस्मात हमर ध्यान ओमहर चलि गेल। विलंब भए रहल छल ,तेँ हम झटकि कए आगा बढ़ि गेलहुँ । बससँ उतरि ठामहि मिथिला आटो सेंटर छैक । हम ओतए पहिलदिन काज करए पहुँचल रही । बटुक आ बहादुर पहिनेसँ ओतए हाजिर छल । मदन किछु काज करैत ओतए अओताह से फोन आबि गेल रहैक । हमरा जान-मे-जान आएल जे पहिलेदिन विलंबसँ पहुँचबाक अयशसँ बँचि गेलहुँ । "की भाइ, की हाल?"-बटुक बाजल । बहादुर सेहो ओतहि रहैक । "पहिने चाह, तखन काज”-बहादुर कहलकैक । "हम तँ मकना मालिकसँ मकान खाली करक हेतु कहि देलिऐक । ओकरा दिससँ हर्जा नहि अछि ।बाँकी किरया बादमे दए देबैक सेहो ओ मानि गेल अछि ।" "तखन देरी कथिक छैक?हमरा बगलबला कोठरीखालिए छैक ।ओतहि आबि जाउ।" "किराया कतेक की हेतैक?" "हम मकान मालिकसँ गप्प केने रहिऐक । जतेक हमसभ दैत छिऐक ततबे अहूँ दए देबैक ।" "कतेक दैत छिऐक से तँ बुझिऐक?" " सातसए महिना, बिजली, पानिक पचास टाका अलगसँ।" "कोनो हर्ज नहि, एहिसँ बेसिए किराया अखन दए रहल छिऐक ।" "साँझमे पहिने जा कए मकान मालिकसँ भेंट कए ली आ काल्हि डेरा बदलि लेब ।" "हम सभ टा गप्प कए लेने छी । अहाँ समानसँ लए कए सोझे चल अबैत रहू ।" "ठीक छैक।" साँझमे समानसभ लए कए  जेबाक हेतु तैयार भेलहुँ । मकान मालिकक घरनी आगू आबि कए ठाढ़ि भए गेलि । "अबैत- जाइत रहब ।" " एकबेर तँ किरायाक बकिऔता चुकाबक हेतु आबैक अछि ।" " ई कोनो बात भेलैक? किराया कतहु भागल जाइत छैक जे अहाँ एतेक चिंतित छी "-से कहि ओ हँसि देलथि। हम हुनका दिस तकिते रहि गेलहुँ । कतेको दिन जखन हम भानस नहि करी तँ ओ अपने बिना किछु कहने हमर भोजनक ओरिआन करैत छलीह,जखन हम कखनहुँ परेसान होइ तँ ओ हमरा मदति हेतु आगाआबि जाइत छलीह मुदा ततबे । हम ओहिसँ बेसी किछु बुझबाक स्थितिओमे नहि रही आ ने ओ कहिओ किछु स्पष्ट कहलथि । हमरा इएह होइत छल जे हुनका हमर हालपर दया आबि जाइत हेतनि ।जाबे हमर माए ओतए छलि,दिनभरि हिनके संगे गप्प-सप्प कए समय बिताबैत छलि । तैओ ओकरा मोन नहि लगलैक आ एहि दुनियेसँ चलि गेल । संभवतः ओ एकतरफा सभकिछु करैत रहलीह । हाल ई अछि जे अखन धरि ने हमरा हुनकर नाम बूझल अछि आ ने हुनकर फोन नंबर अछि । आब जाइए रहल छी । आगा संपर्क कोना रहत? सेहो चिंता ओएह केलीह आ अपनेसँ अपन मोबाइल नंबर लिखादेलीह।आ बजलीह-" हमरनामकुसुमअछि।” "ओ! केहन सुंदर नाम अछि ।" हमरा बजा गेल । हम समान सभ मुड़ीपर धेने बिदा भए गेलहुँ।आब जखन हम ओहिठामसँ जा रहल छलहुँ तँ तरह-तरहक बातसभ मोन पड़ि रहल छल ।कैटा बीतल बातसभककिछु-किछु अर्थ लागि रहल छल । भने हम नहि बुझलहुँ ,नहि तँ अनर्थ भए सकैत छल। एक राति हम पड़ल छलहुँमुदा रही जगले । अचानक हुनका देखलिअनि । हम आओर घत काढ़ि लेलहुँ जेना कतेक निन्नमे होइ। ओ कै बेर हमर खाटक लगीचधरि अएलीह । एमहर-ओमहर तकैत रहलीह । मुदा हम सभ किछु देखितहुँ निःशब्द रहि गेलहुँ । ताबतेमे नीचाक घरदिस इजोत बड़लैक आओर ओ दबले पैरे घसकि गेल रहथि। हम तैओ एनासन रहि गेल रही जेना किछु भेले नहि रहैक । भोरे दुनूव्यक्तिमे  झगड़ा होइत सुनने रहऐक ।मुदा किछु बुझि नहि सकलिऐक,जे एना किएक भए रहल छलैक। अपनेओहिठामकरहथिमुदापालन-पोषणहुनकरबंगालमेभेलरहनि।ओहिठामहुनकरपितानौकरीकरैतछलाह।गामआबाजाहीकमेहोनि।मुदाघरमेअपनेभाखामे गप्पकरथि।तेँकुसुमकेँमैथिलीनीकसँबुझाजाइक।लटपटाकएबाजिओलेथि। दिल्लिएमे पढ़ाइ करैत काल दुनूगोटेमे  प्रेम भए गेल रहैक । परिवारक लोक एकर सभहक बिआहक हेतु तैयार नहि भेलैक । मुदा ई दुनू आड़ि गेल ।आर्यसमाज मंदिरमे जा कए बिआहकए लेलक । ई बात अपने कुसुम हमर माएकेँ कहने रहैक। एकदिन दूपहरिआमे हम अपन कोठरी असगरे रही तँ कोनो बहाना बना कए ओ हमरा बजओलथि । बाहर मुसराधार बरखा होइत रहए । सड़कपर कतहु किओ नहि । ताबतेमे किओ बाहरसँ खट-खट केलकै। हम मोसकिलमे पड़ि गेल रही । एकबेर कुसुम हमरा नोत देने रहथि । किछु रहल हेतैक। हम साँझमे समयसँ पहिने डेरा लौटि आबि गेल रही । नीचासँ ओ आबाज देलीह- “बिझो भए गेल, आबि जाउ" । हम नीचा उतरलहुँ । “असगरे हमहीटा?” -मोनमे ई प्रश्न उठल ।भेल जे हेतैक कोनो बात । हमरा परेसान देखि ओ कहैत छथि-"बैसू ने ।” हम बैसि गेलहुँ ।आओर की कहू, की-की भेल? । ओ कतेक प्रशन्न छलीह । मुदा हम अपसिआँत भए गेल रही ।जेना चारूकात सभ हमरे देखि रहल हो । हमर मनोदशा देखिकुसुमके नहि रहल गेलनि । बाजि उठलीह- "  एनापरेसाननहिहोउ  ।" हम मुड़ी गाड़नेऊपर चलि अएलहुँ । की खेलहुँ,नहि खेलहुँ किछु ध्यान नहि रहल । कतेक तरहक बात सभ होइत रहल। ई यात्रा जेना एकटा बीताल बातसभ केँ ओदारिकए राखि देलक । जकरे देखू सएह कहि रहल अछि-“ ई महानगर छैक ।” तकर माने की? एहिठामक मनुक्खक कोनो चारिटा टांग होइत छैक की?मोने-मोन  सोचाइत रहल । बसमे बैसल इएहसभ सोचैत- सोचैत हमर बसस्टाप आबि गेल। बस चालक चिकरल -मुनिरका,मुनिरका । हम साकंछ भेलहुँ । कहुना कए समानसभ उतारि अपनो बाहर भेलहुँ । रबीन्द्र नारायण मिश्र, पिताक नाम : स्वर्गीय सूर्य नारायण मिश्र, माताक नाम : स्वर्गीया दयाकाशी देवी, बएस : ६६ बर्ख, पैतृक ग्राम : अड़ेर डीह, मातृक : सिन्घिआ ड्योढ़ी, वृति : भारत सरकारक उप सचिव (सेवा निवृत्त)/ स्पेशल मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट, दिल्ली(सेवा निवृत्त), शिक्षा : चन्द्रधारी मिथिला महाविद्यालयसँ बी.एस-सी. भौतिक विज्ञानमे प्रतिष्ठा : दिल्ली विश्वविद्यालयसँ विधि स्नातक प्रकाशित कृति : मैथिलीमे:- १. ‘भोरसँ साँझ धरि’ (आत्म कथा), २. ‘प्रसंगवश’ (निवंध), ३. ‘स्वर्ग एतहि अछि’ (यात्रा प्रसंग), ४. ‘फसाद’ (कथा संग्रह) ५. `नमस्तस्यै’ (उपन्यास) ६. विविध प्रसंग (निवंध ) ७.महराज(उपन्यास) ८.लजकोटर(उपन्यास)९.सीमाक ओहि पार(उपन्यास)१०.समाधान(निवंध संग्रह) ११.मातृभूमि(उपन्यास)१२.स्वप्नलोक(उपन्यास)१३.शंखनाद(उपन्यास)१४.इएह थिक जीवन(संस्मरण) In English:- 1.The Lost House (Collection of short stories), 2.Life is an art हिन्दी में – १.न्याय की गुहार(उपन्यास) (उपरोक्त पोथीसभ pothi.com, amazon.com आओर www.flipkart.com पर सँ कीनल जा सकैत अछि) इमेल : mishrarn@gmail.com ब्लोग : mishrarn.blogspot.com  एमजोनक लेखक पृष्ठ : amazon.com/author/rnmishra ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। नन्द विलास राय फोचाइ कक्काक बेमारी तेहेन ने करोना वायरस पसैर रहल अछि जे काज-उदेमकेतौ जाएब-आएब सभ बन्न भऽ गेल। प्रधानमंत्रीक एक्कीस दिनक लॉक-डाउन। जे जेतए छैथ ओ ओत्तै फँसल छैथ। अपनो केतौ नहि जाइ-अबै छी। चारिमे दिन ब्लड-प्रेशरक दबाइ सठि गेल। तँए परसू दबाइ कीनए वास्ते निर्मली जाए पड़ल। साइकिलसँ जाइत रही। यौ भाय, अपना ने मोटर साइकिले अछि आ ने चलाएले होइत अछि। आब तँ सहजे साठि बर्खसँ बेसी उमेर भऽ गेल तँए ड्राइवरी लाइशेन्स बनबे ने करत। तँए आब ऐ जनममे अपन मोटर साइकिल नहियेँ हएत। ई तँ भेल नियम-कानूनक बात मुदाअहाँसँ छाम की, अपना ओकाइतो नहियेँ अछि जे मोटर साइकिल कीनब। जँ सेहन्तासँ एक-डेढ़ कट्ठा जमीनों बेच गाड़ी कीन लेब मुदा गाड़ीमे पेट्रोल केतएसँ आउत। खाएर जे से...। हँ तँ कहैत रही परसू दवाइ कीनए साइकिलसँ निर्मली जाइत रही। बेरियर चौकपर गेलौं तँ तीन-चारिटा पुलिसकेँ बैसल देखलिऐ। बाँसक ढढी सेहो लागल रहइ। साइकिलसँ उतैर गेलौं। पुलिसकेँ कहलिऐ- “दबाइ कीनए बजार जाएब।” एकटा पुलिस हाथक इशारासँ जाइ ले कहलक। थोड़ेक दूर साइकिल गुरकौने गेलौं। बेरियर चौकसँ दस लग्गा दच्छिन जा साइकिलपर चढ़लौं। बजार गेलौं। पूरा बजार भकोभन। इक्का-दुक्का लोक बजारमे। दबाइ दोकान आ किराना दोकान खुजल। आपका दवाखानामे जा दवाइ कीनलौं। पत्नी चाह पत्ती आ चीनीक आढ़ैत देने छेली। एकटा किराना दोकानपर गेलौं तँ दोकानदारकेँ दोकान समटैत देखलिऐ। हमरा देखते दोकानदार पुछलक- “की लेब जल्दी बाजू। पोने छह बाजि गेल। छह बजे दोकान बन्न करए पड़त।” हम कहलिऐ- “अदहा किलो चीनी, साए ग्राम निधि चाह पत्नी आ आधा किलो बदामक दालि।” दोकानदार जल्दी-जल्दी समान तौलकऽ दऽ देलक। हम पुछलिऐ- “पाइ केते भेल?” दोकानदार कहलक- “बीस रूपैआ चीनी, छत्तीस रूपैआ चाह पत्नी आ तैंतीस रूपैआ बदामक दालिक, सभ मिला कऽ नब्बासी रूपैआ भेल।” हम एकटा नमरी दैत कहलिऐ- “चाहपत्ती आ बदामक दालिक बेसी पाइ लइ छिऐ।” तैपर दोकानदार बाजल- “खैर मनाऊ जे भेट रहल अछि।” हम समान झोरामे रखि वापसी पाइ लऽ साइकिलपर चढ़ि विदा भेलौं। मन भेल एक राउन्ड पूरा बजार घुमि ली। साएह केलौं। ताबेत छह बाजि गेल। बजारमे दवाइ दोकानक अलावे सभ दोकान बन्न। गमछासँ मुँह-नाक झपने रही। पुलिस डन्टा लऽ कऽ घुमैत रहए। मुदा एकोटा चाहक वा पानक दोकान खुजल नै रहए। साइकिलपर चढ़ि घरमुहाँ भेलौं। बेरियल चौपर साइकिलपर चढ़ले अबैत रही कि पुलिस बजौलक। पुलिस डाँटैत कहलक- “साइकिल से उतरा क्यों नहीं..!” हमअकबकाए गेलौं। मनमे भेल जे कहिऐ ‘साइकिलसँ नहीं उतरने से करोना वायरस लग जाता है क्या?’ मुदा बजलौं किछ ने। सोचलौं के कहलक एक डंटा मारिये दिअए। हम बकर-बकर ओकरा सबहक माने पुलिस सबहक मुँह तकैत रही। एकटा पुलिस बाजल- “जाइये।” हम साइकिल गुड़कौने विदा भेलौं। बीस-पच्चीस लग्गा गुड़कौने आगू बढ़लौं पछाइत साइकिलपर चढ़लौं। गाम पहुँच कऽ समानक झोरा पत्नीकेँ सुमझा चाह बनबैक आढ़ैत देलिऐ। पत्नी पुछली- “बजारमे चाह नहि पीलौं की?” बजलौं- “बजारमे दवाइ दोकान आ किराना दोकानक अलाबे सभ दोकान बन्न छैलै। तहूमे किराना दोकान छह बजे साँझमे बन्न भऽ जाइत अछि।” पत्नी बजली- “ठीक छै, अहाँ हाथ-पएर धोऊ ताबे हम चाह बनबै छी।” जाबे हम कलपर सँ हाथ-पएर धो कऽ एलौं ताबे पत्नियोँ चाह बना नेने छेली। हमरा बैसते पत्नी दू कम चाह नेने एली। दहिना हाथक कप हमरा देली आ बम्मा हाथक कप अपने रखली। दुनू गोरे चाह पीबए लगलौं। हम कहलयैन- “पूरा बजार भको-भन्न छल। इक्का-दुक्का आदमी बजारमे छल। पुलिस सभ मोटरो साइकिलसँ आ पएरो हाथमे डन्टा लऽ कऽ घुमैत रहै।” पत्नी बजली- “बाध दिस गेल रही। मीता काकी भेटल छेली। कहै छेली मीता काका ओछाइन पकड़ने छैथ।” ‘मीता काका ओछाइन पकड़ने छैथ’सुनि चिन्तित भऽ गेलौं। कहीं करोना वायरससँ तँ ने संक्रमित भऽ गेला। हम पत्नीसँ पुछलयैन- “मीता काका किएक ओछाइन पकड़ने छैथ?” तैपर पत्नी बजली- “मीता काकी कहली जे बेमार-तेमार नै छैथ। कोनो बातक आकि कोनो काजक चिन्ता भऽ गेल छैन तँए ओछाइन पकैड़ नेने छैथ।” पत्नीक बात सुनि मनमे सबुर भेल। किए तँ मोबाइलपर जे मैसेज अबैत अछि ओइमे खाँसी, बुखार आ साँस लइमे दिक्कतकेँ करोना वायरससँ संक्रमणक लक्षण बतौल गेल अछि। से सभ तँ मीता काकाकेँ नै छैन। सोचलौं भोरमे जिज्ञासा करए जेबैन। पहिने अगले-बगलसँ भाँज-भूँज लगा लेब तखन लगमे जाएब। मुँहमे गमछा लपेट लेब। रातिमे खेनाइयो नै सोहाएल। जेतए पाँचटा-छहटा गहुमक सोहारी खाइ छेलौं तेतए मात्र तीनटा सोहारी खेलौं। सुतैले ओछाइनपर गेलौं। मुदा नीने ने आबए। सोची मीता काकाकेँ की भऽ गेलैन। किए ओछाइन पकैड़ लेला। रहि-रहि कऽ करोना वायरसक डर हुअए। फेर सोची मीता काका तँ चौको-चौराहापर नै जाइ छैथ। गामपर सँ खेत आ खेतसँ गामपर। खेतेमे परमानेन्ट खोपड़ी आ मचान बनौने छैथ। केतेक दिन तँ बाधेमे जलखैयो आ कल्लौओ खाइ छैथ। खोपड़ीमे चाहक सरमजान रखने रहै छैथ। जखन मन भेलैन अपनहिसँ तुलसी पात दऽ कऽ लाले चह बनौलैथ आ पीलैथ। तखन करोना वायरस केतए लगतैन। फेर शंका भेल जे बेपारी सभ अबैत रहै छै, तरकारी कीनए लेल। भिनसरबामे नीन भेल। तँए अबेर धरि सुतल रहलौं। पत्नी आबि कऽ जगेली। पत्नियेँ भैंसकेँ बाहर निकालि नादिपर बान्हि सानी लगा देने छेली। हम उठि कऽ विदा होइत पत्नीसँ कहलयैन- “हम मीता काकासँ भेँट केने अबै छी।” पत्नी पुछली- “चाह नै पीब?” हम कहलयैन- “चाह-ताह ओम्हरे पीब लेब।” हमर पिताजी दू भैयारी। जेठ हमर पिताजी आ छोट काका, जिनकर नाओ रामवरण राय। मीता कक्काक नाओं सेहो रामवरण मण्डल। मीता काका हमर काकासँ एक मासक छोट। हमर घर पछबरिया टोलमे जखन कि मीता कक्काक घर पुबरिया टोलमे। पुबरिया टोल आ पछबरिया टोलक दूरी लगधक एक-डेढ़ किलोमीटर। दुनू टोलक बीचमे एकटा कनेटा चौक। जेतए दूटा चाहक दोकान, एकटा नास्ताक दोकान, दूटा पानक दोकान, एकटा मोबाइल रिपेयरिंगक दोकान सेहो अछि। हमर काका आ मीता काका बेदरेसँ संगी। दुनूक एक्के नाओं तँए बाले-बोधसँ एक-दोसरकेँ मीत कहैत। संगे-संग नरहिया हाइ स्कूलसँ दुनू गोरे मैट्रिक पास केलैथ। मैट्रिक केला-पछाइत दुनू मीता निर्मली कौलेजमे आई.ए. मे नाओं लिखेलैथ। हमर काका आइ.ए. पासो केलैथ मुदा मीता काका बिच्चेमे पढ़ाइ छोड़ि देलखिन। तेकर कारण भेलै जे मीता कक्काक पिताजीक असमय मृत्यु। हमर काका आई.ए. पास कऽ दिल्ली चल गेला। दिल्लीमे दालि मीलमे मुंशीक काज भेटलैन। दिल्लीएमे बसि गेलाह। साल-उेढ़ सालपर गाम अबै छैथ। काकाकेँ दिल्ली गेलाक बादो मीता काकासँ सम्बन्ध ओहिना रहल जहिना काकाकेँ गाममे रहने छल। सत पुछी तँ मीता काकासँ दोस्तियारे आर प्रगाढ़ भऽ गेलै। पैछला साल हमर पिताजी दिवंगत भऽ गेला, मीता काका कहलैथ- “बौआनन्दु, एक्को पाइ चिन्ता नइ करह। जाबे धरि हम जीबै छी ताबे धरि कोनो बर-बेगरतामे कोनो चिजक बिथुत नै होमए देबह।” मीता काका ई बात बजबेटा नै केलैथ बल्कि निमाहियो रहला हेन। पैछला साल बाढ़िमे अपने खेतक धानक सभ बीरार रांग जकाँ गलि गेल रहए, तखन मीता काका एक कट्ठा बीरार दऽ खेत रोपबा देलैन जखनकि पैछला साल एक कट्ठा धानक बीरार बारह हजार रूपैआमे बिकाइत छेलइ। मीता काका जीवनी किसान छैथ। तहूमे तरकारी खेतीक जीवनी किसान। ई बुझू जे भरि दिनक बारह घन्टामे छह घन्टा हाथमे खुरपी रहबे करै छैन। मीता काकाकेँ दुइेय बिगहा खेत छैन मुदा अपन किसानी जिनगी तेना कऽ ठाढ़ केने छैथ जे जेठका बेटाकेँ बी.एड. करा रहला हेन आ छोटका बेटा इन्टर पास कऽ डी.एल.एड. कऽ रहल छैन। हम चौकसँ पहिने एकटा पोखैरपर नित्यक्रियासँ निवृत्त भऽ गेलौं। चौकपर जा कलपर मुँह-कान धोलौं आ भरि छाँक पानियोँ पीलौं। चौकेपर मीता कक्काक जेठका बेटा दिनेशसँ भेँट भऽ गेल। हमरा देखते दिनेश बाजल- “भाय, समाचार सभ नीक छह किने?” हम बजलौं- “हमरा दिसक समाचार तँ ठीके अछि। तों कहह की हाल-चाल छह, मीता कक्काक की हाल-चाल छैन?सुनलौं जे मीता काका ओछाइन पकैउ़ नेने छैथ?” दिनेश बाजल- “बाबूकेँ कोनो बातक चिन्ता भऽ गेलैन हेन तँए ओछाइन पकड़ने छैथ।” तैपर हम बजलौं- “हौ भाय, हमरा तँ डर भऽ गेल जे मीता काकाकेँ कोनो बेमारी नै तँ भऽ गेलैन।” दिनेश बाजल- “तइ सभक चिन्ता नै करह। तोरा होइ छह जे बाबू करोना वायरससँ संक्रमित भऽ गेला हेन।” हम कहलिऐ- “हौ भाय, हवा तँ अखन सहए छै। जखनसँ पत्नी कहलैन तखनेसँ चिन्तित छी। भरि राति नीन नै भेल। सुति उठि कऽ एम्हरे विदा भेलौं हेन।” दिनेश बाजल- “तइ सभकेँ मिसियो भरि चिन्ता नै करह।” फेर दिनेश बाजल- “चाहो जे दुनू भाँइ पीतौं से तँ दोकाने सभ बन्न छै, जे ने करए करोना बेमारी। चलह गामेपर चाहो पीब। आ गपो-सप्प करब।” गप-सप्प करैत मीता कक्काक घर लग पहुँचलौं। मीता काका चौकीपर बैस कऽ चाह पीबैत रहैथ। हम सड़के परसँ कहलयैन- “काका गोड़ लगै छी..!” मीता काका बजला- “नन्दु, आबह! आबह!! भने गमछासँ मुँह-नाक झँपने छह।” हम कहलयैन- “हँ, काका, की करबै, तेहेन ने करोना वायरस बला बेमारी चलल हेन जे सभ आतंकित भऽ गेल अछि।” मीता काका बजला- “से तँ ठीके। हम तँ बुझह बेरबाद भऽ गेलौं। तीन-चारि मासक मेहनत पानिमे चलि गेल।” मीता काका की कहलैन से तँ बुझबे ने केलौं। बजलौं- “से की काका?” ताबेत दिनेश एकटा प्लेटमे चारिटा ड्रीमलाइट बिस्कुट, एक गिलास पानि आ चाह नेने आएल। तैबीच मीता काका बजला- “हुअ पहिने चाह पीबह नै तँ सेरा जेतह। पछाइत गप-सप्प हेतइ।” हम बिस्कुट खा पानि पीब चाह पीबैत रही कि दिनेश पान नेने आएल। पान खा मीता काका दिस तकलौं। मीता काका पुछलैन- “कोनो औगुताइ नइ ने छह?” हम कहलयैन- “नहि, कोनो खास तेहेन काज नै अछि।” मीता काका बजला- “तखन हमरा संगे चलह।” ई कहैत मीता काका विदा भेला। हमहूँ मीता कक्काक पाछाँ-पाछाँ विदा भेलौं। दुनू गोरे तरकारी खेत पहुँचलौं। कट्ठा पाँचेमे पत्ताकोबीक खेती देखलिऐ। एक किलोसँ दू किलो धरिक गाँठ बन्हने। काका बजला- “ई पात कोबी देखै छहक, जी-तोड़ मेहनत केलौं हेन। पनरह हजार टका खर्च अछि। कपारो बुड़ि जाइत तैयो एक लाख टाकासँ बेसी होइतए। एक दिन सात साए रूपैये  क्विटल दू क्विंटल बेपारी लऽ गेल। तेकर बाद बेपारी एबे ने कएल। अपना ऐठाम तँ अखबार नै अबै छै आ ने अपना नेटबला मोबाइले अछि। सुनलौं हेन जे करोना वायरस बन्धा कोबीमे अड़तालीस घन्टा जीवित रहै छै। तँए बजारमे बन्धा कोबी बेचनाइ बन्न कऽ देलक अछि। अन्न-पानि किछु ने सेाहाइए। भरि-भरि राति नीन नहि होइए, जगले रहै छी।” हमरा मीता कक्काक बेमारीक थाह चलि गेल। हम बजलौं- “काका की करबै, एहेन घाटा की कोनो अहींकेँ भेल हेन। बड़का-बड़का कारखाना सभ बन्न अछि। सुनै छिऐ बिना काजे केने लेबर सभकेँ कम्पनीकेँ दरमाहा देमए पड़तैक।” मीता काका बजला- “हँ, सेहो सुनलौं हेन।” हम बजलौं- “काका, सबुर करू। जे होइ-के छेलै से भेल, आब की करबै।” मीता काका किछु ने बजला। खाली हमरा दिस तकैत रहला। बुझि पड़ल जेना किछु बाजए चाहै छैथ मुदा मुहक बोली गुम्म भऽ गेल छैन। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। सुभाष कुमार कामत हरायल गाम पोखरमे नै अछि जाइठ बूढ़ा पीपर मे रहल नै कोनो ठायर कासक छारल भीतक घर खरही के लागल टाट खरौआ डोरीके बनहन मोथी पटेरक पटिया आंगन चिनवार सभ हारा गेलि भानस घर मे नै अछि चिपरी गोइठा आंगन मे नै अछि उखैर- समाठ, ढेंकी जत्ता सभ भ गेलि निपत्ता असगरे सिलवटा गवाह अछि मंदिर-मस्जिदके भेल खूब तरक्की गामक सरकार जमीन पर दबंग केने अछि अवैध कब्जा भोथे गेलि सबटा इनार भोर सांझ दोपहिया तीनो पहर देश दुनिया क खबर देनहार रेडियो गिन रहल अछि अपन बचल खुचल दिन हिनकर डागदर समय सँ करलक नै अपनेक नवीनीकरण आबि खुद अछि बीमार लाजार आबि कहियौ एक संग भेट नै होएत अछि बचपन क सबटा संगी तुरिया जिंदगी भ गेलि अछि छुटछुटा पेंच लागल भोथहा टेंगारी सँन बढ़ हरास भेलि जखन देखलो टेलीविज़न स्कीन पर गुमशुदा क सूचिमे हरायल अपन गाम। ©सुभाष कुमार कामत, नौआबाखर, घोघरडीहा ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। बीहनि कथा विशेषांक चित्र : श्वेता झा  चौधरी ३.१.आभा झा- बीहनि कथाक आजुक परिप्रेक्ष्यमे उपादेयता ३.२.आभा झा- बीछक डंक ३.३.अरुण लाल दास- दू टा बीहनि कथा ३.४.कल्पना झा-बीहनि कथा ३.५.सुभाष कुमार कामत- ३ टा बीहनि कथा ३.६.पूनम झा- २ टा बीहनि कथा ३.७.प्रियंवदा-४ टा बीहनि कथा ३.८.रवि भूषण पाठक- घर ३.९.अमरेश कुमार चौधरी- २ टा बीहनि कथा ३.१०.आशीष अनचिन्हार-४ टा बीहनि कथा ३.११.आशीष अनचिन्हार- बीहनिकथा की छै? ३.१२.सांत्वना मिश्रा- बीहनि कथा-बड़दक घंटी ३.१३.रूचि स्मृति-२ टा बीहनि कथा ३.१४.देवेन्द्र मिश्र-एकता ३.१५.मिन्नी मिश्र-के समाहरत इ गृहस्थीक भार! ३.१६.गौरी शंकर साह- भाव ३.१७.सत्यनारायण झा-लखन बाबू। ३.१८.घनश्याम घनेरो-लैह-लैहे गुलबिया ३.१९.अभिलाष ठाकुर-टकध्यान ३.२०.अखिला नन्द झा 'रमण'-चश्मा ३.२१.सबिता झा 'सोनी'-सेहेन्ता / बेगरता ३.२२.पूनम झा "सुधा"-सेल्फी ३.२३.मनोज मंडल-मां ३.२४.चंदना दत्त-प्रेम दिवस ३.२५.विन्देश्वर ठाकुर-घुस्सा-घुस्सी ३.२६.कुन्दन कर्ण-"आओर छिछियाउ" ३.२७.सोनी नीलू झा-।।अदनाबालीक आंगन।। ३.२८.विनीता ठाकुर-किसान ३.२९.डॉ प्रमोद कुमार-ढ़हलेल छी ३.३०.इरा मल्लिक-बेटीक महिमा ३.३१.सत्येन्द्र कर्ण- बनिया बाबा ३.३२.जवाहर लाल कश्यप-पहिल प्रेम ३.३३.जयंती कुमारी-दू टा बीहनि कथा ३.३४.डा. शिव कुमार प्रसाद-४ टा बीहनि कथा ३.३५.वी.सी.झा "बमबम"-अधलाह बस्तु ३.३६.भावना मिश्रा-गरीब लोक ३.३७.अमर कान्त लाल-उघार ३.३८.अमल कुमार झा-हिरो ३.३९.प्रभात कुमार कर्ण-प्रकृतिक तांडव ३.४०.डाॅ.प्रमोद झा "गोकुल"-२ टा बीहनि कथा ३.४१.निवेदिता झा-दू टा बीहनि कथा ३.४२.ओम चौधरी-सुरज माटि-कादो गिजैत छल ३.४३.कल्पना झा-२ टा बीहनि कथा ३.४४.भुवनेश्वर चौरसिया 'भुनेश'-संजय केर अॅं‌इख ३.४५.जगतरंजन झा-बीहनि कथा ३.४६.शेफालिका वर्मा-हँ एहनो होयत छैक ३.४७.प्रभाष अकिंचन-भरोस ३.४८.मुन्नी कामत-दू टा बीहनि कथा ३.४९.मिसिदा-ट्राय एगेन लैटर ३.५०.मृणाल आशुतोष-आंदोलन ३.५१.ज्ञानवर्द्धन कंठ-दूटा बीहनि कथा ३.५२.राजीव कर्ण-झुठक महत्व ३.५३.जगदानन्द झा 'मनु'-४ टा बीहनि कथा ३.५४.विरेन्द्र कुमार  झा-कोना बुझब ३.५५.विद्या चन्द्र झा "बमबम"-साहित्य मंथन आ बीहनि कथा ३.५६.घनश्याम घनेरो-बीहनिकथा आ  'घनेरो'क अवधारणा ३.५७.मुन्ना जी-बीहनि कथा-- मानकीकरण ओ तुलनात्मक पक्ष ३.५८.विदेह विहनि कथा विशेषांक-१ ३.५९.अनीता मिश्र-२टा बीहनि कथा चित्र : श्वेता झा  चौधरी आभा झा बीहनि कथाक आजुक परिप्रेक्ष्यमे उपादेयता परिवर्तन संसारक नियम छैक। बदलैत समयक संग लोकक आवश्यकताक स्वरूप बदलैत छैक आ तदनुसार ओकर प्राप्तिक साधन सेहो। ई आवश्यकता मात्र भौतिकेटा नञि, मानसिक, बौद्धिक आ भावनात्मक सेहो होइत छैक आ ओकर पूर्तिक साधन मनुष्य पोथी सभहक मध्य तकैत अछि। विज्ञानक जिज्ञासा वैज्ञानिक ग्रन्थ आ प्रयोग आदिसॅं शमित होइत छैक, राजनीतिक विचारक परिपुष्टि राजनीतिक पुस्तकादिसॅं। अर्थात् कोनो तरहक रुचि आ जिज्ञासाक शमन ओहि विषयक पुस्तकादिक अध्ययन-मननसॅं होइत छैक। मुदा ज्ञानक धाहसॅं तप्त विकल मनक, भौतिक –समृद्धिक प्राप्ति लेल अविराम पड़ाइत लोकक थकित-तृषित हृदयक, संसारक ताप- शापसॅं आहत- व्यथित अन्तर्मनक लेल शान्तिक शीतल- स्निग्ध लेप साहित्ये द' सकैत अछि। साहित्य शब्द आ अभिप्रेत अर्थक समभाव मानल जाइ छैक। ई साहित्य मूलतः गद्य , पद्य आ नाटक तीन रूपमे पाओल जाइत अछि। साहित्यकारक सूक्ष्म दृष्टि, गहन अनुभूति आ विचारक आलोड़न जखन कल्पनाक संग झंकृत होइत छैक, कोनो बंधनक बिना सहज रूपें अभिव्यक्त होइत छैक, तखन गद्य- साहित्यक सृजन होइत छैक। छंद, गति- यति- लयादिक आग्रहसॅं मुक्त हयबाक कारण गद्य- साहित्यक अभिव्यक्ति अधिक स्फुट आ अधिक ग्राह्य होइत छैक। गद्य साहित्यक अनेक भेदमे कथाक विशिष्ट स्थान छैक। बदलैत समयक संग साहित्यक रूपमे परिवर्तन सेहो होइत रहलै अछि, हयबाको चाही। बहैत पानि सदैव निर्मल होइत छैक, यदि ओकरा बान्हि देल जाइ त'  ओ गंदा भ'  जाइत छैक। पाठकक साहित्यसॅं की अपेक्षा छै, ओ साहित्यकारक प्रस्तोव्य विषय बनैत छैक। आजुक समयमे उपदेशात्मकताक अपेक्षा यथार्थपर आधारित कथा बेशी पसिन्न कयल जाइत छैक। विविध सामाजिक- परिस्थिति , समस्याक समाधान तथा जीवन मूल्यक उद्घाटन कथाक उद्देश्य मानल जाइत छैक। अपन आकारक आधारपर कथा, लघुकथा आ बीहनि कथा आदि एकर भेद मानल जाइ छै। आइ हमर विवेच्य विषय अछि-  "बीहनि कथाक आजुक परिप्रेक्ष्यमे उपादेयता"। साहित्यक सभ रससॅं भरल वृहत्कलेवर उपन्यासक जॅं खगता नञि हो, यथार्थ, कल्पना आ रोचकतासॅं संश्लिष्ट कथाक चॅंखिगर उपस्थिति हो, तखन ई छोट सनक  कथाक आवश्यकता कियैक? खेतमे लहलहाइत धानक फसलि छाड़ि ओकर बीहनिक अन्वेषण कियैक कयल जाय? भरल बखारी छाड़ि छोट सनक स्टीलक डिब्बा चुनब कोनो बुद्धिमानी  त'  नञि? एहि सभ तरहक प्रश्नक उत्तरमे हम एतबहि कह' चाहब कि सभ विधाक, साहित्यक सभ उपादानक अपन- अपन महत्त्व छैक। कोनो विधा दोसर विधाक विकल्प नञि भ'  सकैछ। हॅं, आवश्यकतानुसार आ रुचिक अनुरूप ओकर चयन कयल जा सकैत छैक। कोनो समयमे महाकाव्य रचबाक परंपरा छलै, आइ छोट-छोट मुक्तक, क्षणिका आदि अनवरोध लीखल आ पढ़ल जा रहल छैक। तैॅंकी महाकाव्य अर्थहीन भ'  गेलै? जॅं लोकक समक्ष साहित्य पढ़बाक अवसर नञि हो, पेटक आ गिमिझयबा लेल कोल्हुक बड़दबला स्थिति हो, अथवा उच्च महत्वाकांक्षाक प्राप्ति लेल यन्त्रवत जीबाक स्थिति हो, गहूमक उपजाक लिलसामे गुलाबक कलीक बिनु फुटने मुरझयबाक स्थिति हो, एहन स्थितिमे जिम्मेदार लोकक कर्त्तव्य –क्षेत्र बढ़ि जाइत छैक। कियै नञि व्यस्तसॅं व्यस्त लोकक सोझॉं ओकर साहित्यिक पिपासा शान्त करबा लेल एक घोंट ठंढा पानि राखि देल जाइ?  ओकर तृषित-बुभुक्षित मन पूर्णतः आश्वस्त हो वा नञि, किन्तु किछु सीमा तक प्रफुल्लित अवश्य हेतै। एहन स्थितिमे बीहनि- कथा अपन अत्यल्प संक्षिप्त कलेवरक कारण युवा वर्गक लेल उपयोगी आ ग्राह्य अछि। युग –परिवर्तनक संग पाठकक मनोदशामे परिवर्तन भेलै अछि। आब कथाक फैंटैसीसॅं बेशी यथार्थाधारित कथा पसिन्न कयल जाइत छैक। बीहनि- कथा अहू मानदंडपर अपनाकेॅ स्थापित करबाक कारण लोकक मोन छुबै छै, किछु चिंतन करबा लेल प्रेरित करैत छैक, चिंतनक संग किछु प्रतिकारक लेल सन्नद्ध करैत छैक। हॅं, ई गप अवश्य जे कथा- लेखक कथावस्तुक चयन, अपन अभिव्यक्तिक बेधकता आ विषयोपस्थापनक अभिनव शैलीसॅं पाठक वर्गक अपेक्षा पूरा करबाक सामर्थ्य निरन्तर विकसित करैत रहथु। कारण, मात्र छोट हयबाक कारण कोनो चीज ग्राह्य वा मात्र पैघ हयबाक कारण कोनो विधा त्याज्य नञि होइत छैक। अखनहुॅं साहित्यानुरागी पैघ-पैघ उपन्यासकेॅं खूब रुचिसॅं पढ़ैत छथि। हॅं, हुनका छोटसॅं कोनो विरोध नञि,  मुदा शर्त एतबहि जे ओ पाठकक साहित्यिक- क्षुधा शान्त करबाक क्षमतासॅं सम्पन्न हो। साहित्यमे संक्षेपणक अपन चमत्कारिक महत्त्व छैक। कमसॅं कम शब्दमे बहुत किछु कहि सकबाक क्षमताक पाठक समुदायमे अत्यधिक आदर होइत छैक। प्राचीन कालकक विगण एक मात्राक लाघवमे पुत्र जन्मक आनन्दोल्लाससॅं भरि उठैत छलाह। एहि विशिष्टगुणसॅं युक्त बीहनि कथा आइ अवश्य उपादेय अछि। बीहनि कथा लेखक पाठकवर्गकेॅं एकटा प्लाट उपलब्ध करयबाक उद्देश्यसॅं सेहो उपादेय। अहाॅंक सोझाॅं विविध भावभूमिपर आधारित प्लाट अछि , रुच्यनुसार चयन करू आ ओहिपर बनाउ दीर्घकथा वा उपन्यासक भवन! बीहनि-कथाक सर्व- स्वीकार्यता औखन प्रश्नांकित अछि। हमर कहब एतबहि जे कोनो विधामे साहित्यक रस प्रवाहित होमय, सहृदय पाठककेॅं मानस- तोषदैमे सफल हो, त'  ओकरा उदार भय स्वीकार करबाक चाही। अन्हार भगबैमे कखनो –काल भगजोगनीक इजोत सेहो कारण बनै छै। बरगदक अत्यन्त लघु बीआ शाखा- प्रशाखासॅं युक्त बटवृक्षक कारण होइत छैक। माॅं मैथिलीक उपासककेॅं सभ अहंभावतजिहुनक सभ सन्तानकेॅं समुचित समादर देबाक चाही। प्राचीन ऋषि-मनीषी अहम्सॅं मुक्त मन: स्थितिमे एहि तथ्यक साक्षात्कार केलनि अछि- "नाल्पेसुखमस्ति, भूमावैसुखम्"। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। आभा झा बीछक डंक "विकास, कनियां कें सोर पाड़हुन त', सुनैना माय कुम्हरौड़ी पाड़य छै,कने ओकरा संग देथिन।" "मां,... "की भेल', कनियां की करैत छथुन?" "कविता लिखै छथिन,बीच मे टोकारा देबनि त' प्रवाह टूटि जैतनि।" कविता...चारि सौ चालीस वाटक करेंट लगलनि सासु कें आ तुरछि क' बजलीह-" जं ई बूझल रहितय त' संमंधे नञि करितहुं।" राति मे-"हे यौ, कनियां पढ़लि लिखलि छथि, नोकरी करै छथि,से त' बूझल छल,मुदा कविता लिखै छथि,से समधि कहने छलाह अहांकें?" ऐं….जेनाबीछक डंकलागलनि ससुर कें।- "हमरा त' ई कथा पसिन्ने नञि छल,कनी- मनी पढ़नाइ- लिखनाइ त' ठीक,परंच पी एच डी,कओलेजक नोकरी,ताहि पर सं कविता! मुदा विकासक जिद! बसि गेलनि विकासक घर!" माथ पर हाथ देलनि गृहपति! ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। अरुण लाल दास दू टा बीहनि कथा १ बीप्रेक ...धुर जाउ ,केहन हती । ...केहन । ...रसफट्टू आम जाँकित । ...से की । ...सैह कहली य ।टिकुले से अहाँ नजरि खिरबैत रहली । देख देख जाइत रहली य । हम आसा मे धिआन से रहली ।  अब तं आम पाकि के सिनुरिया गेल हय । अहाँ तं खेले बिगाड़ देली । मौसमी पैर के नह खोटैत मूरी झुकौने नहू नहू सोहन स बतिआइत अपन मनक भड़ास निकालि रहल छलै । दरअसल ओकर प्रेम मे दरक्का लागि गेल रहैक । ...से त ठीके । हमरा सँ ओतेक रोकल नै गेलै ,मतलब प्रतीक्षा कैल नै भेलै ।आबे की भेलैए ।हम अखनो तैयार छिकियै ।ई पसिन छै हमरा एखिन्तो। ...हमर हिरदय काठ के हांरी जैसन हय ,जे आगि पर दू बेर नै चढि सकय हय ,बुझली । ई दोसर ताकि सकै हय ...त हम नै । सूरुज भगमान डुमि गेल छलाह।साँझ शिता गेल रहैक आ मौसमी अपन डेग झटकि देने छलै । २ परबतिया परबतिया के हाक दैत झुंझुआइत ओकर माय बजलै ,"आइ तोहर बपहिया घरसूरक मइल छोड़ा देतौ ।भरि दिन ई ससुरी मोबाइलक खेल मे घरक एक टा काज नै करैए ,जाने कोन माहटर सँ बतियाइत रहैए ।की पढैए भगमाने जानय । हम केमहर केमहर की की करु , थारी बाटी ,गाय गोरु ,गोबर करसी ,कलउ  बेरहट आकि दुधपीबा बच्चा के सम्हारु । सामने फांइट पर परल परबतिया के देखिते ओ धुमधुमा देलकै । इस्कुल के टैम भ गेल रहैक । कनैत ,आँखि पोछैत तामसे पित्ते घोर परबतिया साइकिल उठा बिन खेने इस्कुल चलि देने रहैक । वार्षिक समारोह मे आइ सब अभिभावक केँ बजाओल गेल छलैक । डी.एम सैहेब द्वारा  400 मीटर ,100 मीटर एवं 90%उपस्थिति पर पार्वती कुमारी के नाम प्रथम पुरस्कार  उद्घोषित होइत देखि क' परबतिया माय केर आँखि नोरा गेल रहैक । संपर्क 9973937303 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। कल्पना झा बीहनि कथा -----यदु कका के कते वर्ष क बाद तीन टा पुत्र भेलैन।समय स सब सयान भेला।समय रहिते सबके अपन जजात बखरा कैनाय उचित बुझी,गाछी गेला।हाथ में कागज देख रखबार पुछलकैन! ---कि भेल मालिक?बिना बाजयत आंखिक इशारा सं ओकरा बजौलैन।इ बरका क, ओ मांझिल के आ ओ छोटका के! ---रखबार बाजल मालिक अते तरद्दुत सं एकरा बचोलौं आ एखने कोन खगता परी गेल बखरा के! ---रे तों नय बुझबिही हमर बखरा लागय सं पहिले इ हम काज क दी। लग में ठाढ़ पोता बाजि उठल! ---बाबा ओ बड़का आमक गाछ हमर बाबू के नाम कय देब। बाऊ रे ओहि में फल नहि होय छय। ---चट ओ बाजि उठल त ।हमर  बाबू सं कोनो फलक उम्मीद नय करु ! -कल्पना झा बोकारो अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। सुभाष कुमार कामत ३ टा बीहनि कथा १ चॉकलेट - आई दू कप मीठगर चाह बनाऊ - अहाँके तऽ डागदर मीठ से परहेज़ करै लेल कहनै छथि - तें न आई टा कहि छी - किया आई किछ विशेष अछि की? - रेडियो पर नै सुनलिए जे "आई चॉकलेट डे छियै" ।आब दाँत त अछि नै ।कम सँ कम संग बैठ मीठगर चाहो तऽ पीबी। २ नून - हे यै ! काल्हि सँ तिमन मे नून कनि कमे डालब - किया "तिमन बेसी नूनगर भऽ गेल की' - तिमन तँ निमन्न अछि - तखन 'डागदर कहलैथ कि नून कम खाई लऽ' - नै यै - तखन किया कहै छिए "नून" कम - हम अहाँ तऽ किसान छी। अपना सभकेँ दर्दक केय बूझत। "अखन बाजार मे हमर अहाँक फसल सँ बेसी महंग नून बिक रहल छै" । ३ ऑनलाईन - हे ये! कनिया - हँ माँ, कि कहै छथिन - हमर पोती 'नव कनिया बैनि दोसर घर जा रहल अछि' ओतह केना रहत, कखैन खैति कखैन न? - से तऽ माँ ठीके कहै छथिन - एकटा काज करूँ न, मकई के लावा, मुरही, सतूआ बुच्चीक अलग सँ द दियो - मैया अहूँ न। आब ओ समय नै रहल जे आहाँ सोचे छिए। जे मोन करि से खाऊ, आब सब किछु बनल - बनैल आॅनलाईन भेटैंत अछि। -सुभाष कुमार कामत, घोघरडीहा, मधुबनी , 8271282752 अपन मंतव्य editorial।staff।videha@gmail।com पर पठाउ। पूनम झा २ टा बीहनि कथा १ "काकी बजलीह" -- "काकी गोर लगै छी ।" अंगना अबैत विष्णु ( दियोर क बेटा ) बाजल । "नीके रह बौआ । कहिया एलां ?"भनसा घर सं काकी बजलीह  । "काल्हि एलौं काकी । कक्का कत छथीन ?" "अहिठाम छथीन।  अहिठाम आबै आ बैस ।" "काकी ! कक्का सं आब भानस करबै छियैन्ह ?" "बौआ! जखन बाल-बच्चा अपना में व्यस्त रहतै त माय-बाप सेहो एक दोसर के नै देखतै ?" २ 'परवाह' "आई अहां सेब काटि क हमरा नै देलौं न ?" घरवाली दूध क बरतन चुल्हा पर चढाबैत बजलीह। "हैया लिय पहिने सेब खा लिय ।" घरबला सेब काटि क दैत बजलाह । "हूंउउ..  हैया खाय छी ।" "पूरा द दिय की ?" "नै नै आधा सं बेसी हम नहि खा पबै छियै, से अहां के बूझल अछि न ?" "हमरा सेब नीक नै लगै अछि मुदा अहां के दुआरे ई आधा सेब हमरा खाय पड़ैत अछि ।" घरबला सेब क टुकड़ा चबाबैत बजलाह। घरबाली मोनेमोन बुदबुदेली 'हमरे कोन नीक लगैत अछि, मुदा अहांके सेब खुएबाक कोनो दोसर तरीका हमरा नै अबैत अछि।' --पूनम झा कोटा,राजस्थान Mob-Wats  - 9414875654 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। प्रियंवदा ४ टा बीहनि कथा १ अन्नदाता महेश अप्पन खेतमे तन्मयता सऽ खुरपी चलबैत  चलबैत विचारक गहन समुद्रमे सेहो डुबकी लगौने छल। कोबी  , टमाटर, सेम, भाटा , कीनै  छलै ओइ छोट छीन खेतमे। खूब नीक तरकारी सब भेल छैक , मोन कनी प्रसन्न भऽ गेलै। मुदा मोन जोग पाइ कहां भेटि पबै छै ? साहूकारके पाइ लेने छियै , ओतऽ सब टा तरकारी पानिके भाव  लेत आ अपने खूब फैदा कमैत‌। एहि बेर अगहनी फसलि सेहो बड़बढ़ियां भेलै , मुदा सूद चुकबैत , चुकबैत किछु खास बचि नहिं सकलै।कतेक दिनसऽ बुचियाके फोन  गछने ‌छियै , मुदा अहू फसलिपर नहियै भऽ सकलै। महेश अही सब गुनधुनमे लागल छल कि भातिज दौड़ल एलै , कक्का , सुनै छहक , आब अपना सबके दिन बदलि जेतै। से की ? कोनो लाटरी निकलल छौ कीॽ धुर, तों नै बुझै छहक, सरकार हमरा सब लेल नबका कानून बनौने छै , आब छोटका, बड़का सब किसानके बाजिब दाम भेटतै , आब अन्नदाताके धियापुताके सब मनोरथ पुरबे करतै। सरकार अप्पन सबहक जिनगी बदलि देतै। ई कोन नऽब मायाजाल रचने अछि सरकार? अन्नदाताके संबोधनमे भरमि कऽ रहि जाह। ई सब नेता सबहक गप्प छै बौआ। मोन मारि कऽ जिनगी बितैबा लेल एकटा शब्दक छलावा। एतबा बजैत अन्नदाता  लागि गेलाह पुनः अप्पन कर्मक्षेत्रमे। २ उपराग वसुधा भगवतीके सांझ देबाक ओरियानमे लागल रहथि। मोने-मोन रतुका काजक फेहरिस्त सेहो बनि रहल छलैन्ह, जल्दी-जल्दी भानसक सरंजाम कऽ बच्चा सबके पढेबाक अछि। एम्हर सासुके मोन खराब रहबाक कारणे ओकरा सबपर समय नहि दऽ पाबि रहल छियैक, परीक्षा लगिचायल छैक, पिछड़ि नहि जाइ दुन्नू। ओतऽ भगवती सहाय भेलखिन्ह, मोन ठीक छैन्ह आब कनी। सबटा काज समेटि घऽरमे अयलीह तऽ ओछाओनपर पैकेट पड़ल देखि मोन घोर भऽ गेलैन्ह, एक्कहुटा चीज जगहपर कियो नहिं राखि सकैत अछि। खोलि कऽ देखै छथि, तऽ गमकैत गुलाबक बुके, संगहि सुन्दर कार्ड। ई कथी लेल आब, अहिना अनेरे पाइ नाश करैत रहू, उपराग दैत बजलीह वसुधा। मोनेमोन मुसकाइत बजलाह वरुण, हम खूब बुझैत छी अहांक उपरागक भाषा। ३ गणतंत्र दलानपर छब्बीस जनवरीक चर्चा बेश उत्साहसऽ भऽ रहल छल। बिरजू बाबू संविधानक मूलभूत तत्वके व्याख्यामे लागल छलाह। प्रबुद्ध श्रोता लोकनिक खनहुं सहमत होथि, कौखन विरोधोक स्वर आइब जाइत छल। बुधना जे दलान बहारैत छल, ई सब गप्प सुनैत अकबकैल ठाढ़ भेल छल। ओकर ई मुद्रा देखि बिरजू बाबू टोकैत कहलखिन्ह, जल्दी-जल्दी हाथ चलाबह, मुंह खोलने की ठाढ़ छह? तों की बुझबहक गणतंत्र? जी सरकार, सैह तऽ। जखन सब एक्के रंग छै, समानताक अधिकार छैक, तखन फेर ? ४ तिलबाक मर्म कनी एम्हर सुनू। हं अबै छी। फेर कनिये कालमे, सुनै नै छी की? एतेक काल सऽ आवाज दऽ रहल छी , आबि कऽ  कुरता, बंडी निकालि कऽ देब ,से नहिं। ओत्तहि अलमारीमे टांगल अछि , अपने सऽ बाहर कऽ लियऽ नऽ कनी , ओरिया कऽ बजलीह‌ लाल काकी। एहन कोन बड़का काजमे लागल छी अहां , तुरछैत पुछलखिन्ह लाल कक्का। कनी तिलबा बनबै छियै , हाथ लागल अछि , बुझिते नहिं छियै दोसरा के काज अहां सब। ई कोन बड़का काज छै। मौगी सबहक आदति होइछै , राइके पहाड़ बनबैके , एतनी टा काज लऽ कऽ भरि दिन बैसल रहब आ झुट्ठे हल्ला , एत्ते काज , एत्ते काज। देखू , हम केहन झटपट बना दै छी। ई कहि , लाल कक्का तिलबा बनैबाक उपक्रम शुरू कऽ दैलन्हि , लाल काकी मना करिते रहलीह, मुदा ओ कि सुननिहार। जहिना पहिल लड्डू बान्है लेल मिश्रण हाथमे लेलन्हि , हाथ पाकि गेलैन्ह, जल्दीसऽ हाथसऽ फेकबाक कोशिश कैलन्हि , मुदा गुड़क पाक , की हाथ सऽ जल्दीसऽ छूटै भला ?  लाल काकी तिलबा बान्हब छोड़ि , लालक्काके दवाई लगा रहल छथिन्ह आ जेना बिन बाजने पुछै छथिन्ह , बुझलियै तिलबाक मर्म। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। रवि भूषण पाठक घर (एक) डेली शुरू होय 'हमर बाबू एहन ,हमर भैया एहन ' । दुपहर तक  बात पहुंच जाय ' हमर गाम मे एना ' । मुदा उपसंहार होय सांझ तक ' छोटका चौधरी एहन आ मैंझला चौधरी एहन ' । घर (दू) जे थारी आइंठकूठि रहै ,से कतौ गेंटल ,कतौ ओहिना राखल । खाए काल मे एगो दुगो मंजा जाए । बजार सं आनल तरकारी ओहिना झोरा मे नूरियैल । भनसाघर मे कतौ पियाज कऽ छिलका ,कतौ उसनल आलू कऽ छिलका । रौतुका मच्छरदानी केओ खोलनाहर नै । साफ़ आ पहिरल कपड़ालत्ता एके संग अराम करैत । दलान या अगिला रुमक कुनो कंसेप्ट नै ।एना मे जे केओ गेट ठकठकबै , तऽ पहिले ई विचारल जाय कि शायत दोसरक गेट बाजै छै ! दोसर तेसर बेर गेट बाजै ,तखन बाले बच्चे मिलि के अगिला घर कऽ सफाई शुरू भऽ जाइ । सफाई मने अगिला रुमक समान कें जेनातेना पाछू लऽ आननै रहै । ई काज बच्चोऽ सब आटोमेटिक शुरू कऽ दै । कहबासुनबा के जरुरी नै । मुदा सबसं आनंददायक चीज़ रहै कि केओ नै आबै ऐ ठाम ! ने कतौ जेनए ने ककरो एनए । थिर पृथ्वी ! अतिथि हीन ब्रह्माण्ड ! घर (तीन) आनंद जी लिस्ट बनेने छथिन । कनिया कहिया कहिया भानस बनबै छथिन , कहिया कहिया आनंद जी । कहिया कहिया होटल सं आबै छै आ कहिया कहिया मंत्रे सं काज चलै छै । स्थिति जेहन होय , मां के कहल यादि आबै छैन ।नेनपन मे मां कहैत रहथिन 'खा ले वौआ , एको टा दाना नै छोड़ ।जत्ते दाना धोनिधानि बनतौ ,ओत्ते दिन भुक्खे रहबहीं ' । रवि भूषण पाठक 6391710063 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। अमरेश कुमार चौधरी २ टा बीहनि कथा १ व्यथा - कत गेलहुं - आबैत छी - सभटा समान ,राखि देलियै - हं दस जोड़ी मौजा , पांचटा दस्ताना , दु दर्जन रूमाल आ बीसटा छोटकी गमछी बड़का झोड़ामे राखि देलहुं- कने सबेरे एबै ने , बौआके जन्म दिन छै - हमरा पता अछि। - कहैत छल पप्पाके कहिए केक आनिद लेल.पड़ोसमे छसातटा दोस्तके भोरेभोरे कहि एलैया .कपड़ा लऽ लेबै - हं हं। सभटा लऽ लेबै। ------- ---- -- - लेट भऽ गेल -.हां - एना मोन किया मसुआएल अछि . - बौआ कतऽ गेल - बाहरि बच्चा सभ संगे खेलैत‌ अछि - किछु पाई अहां लग अछि कि - नहि , किछो नहि बिकल. -- एक सप्ताहसं लोककतेहन आन्दोलन चलि रहल छै जे पुलिस चारियो घनटा निक सं बैसए नहि दैत छै .   ३०० टकाके बिकलै. के के २५० टकाके भेलै ५०टकाके जिलेबी लऽ लेलियै. - पैरे एलिए एतेक दुरसं - हां. तै देर भऽ गेलै. - कपड़ा नै हेतै एहि बेर बौआके-- आंखि पोछति साड़ीसं बाजए लगली – लोकके कि फरक पड़ैत छै- करैत रहौ आन्दोलन पाईबला सभ –हमरे सभ लेल एहने दिन भगवान देने छथिन। २ अबोध - सुखेसर - जी मालिक -एम्हर आबह। बौआके अंगनामे मोनेने लगैत छै, कने दलान दिश लऽ जाह। दलानपर बच्चा सबके देखि मोन लगतै। -हं मालिक -कने रूकु। बड ठंड छै, स्वेटर पहिरा दैत छियै।---- -- ल जइयौ -- सोगरथा ,रे सोगरथा - कि बाबू - ट्युसन गेल रही - हं हौ - एकरा सने खेलीहने। -बडहावा उठि गेलै, पहिने अंगना जो मलकाइनसं एकर टोपी नेने आबिह ------------------------ - लऽ। - कने हम पहिर कऽ देखियै - मारबौ कि सार। दुटा बुसट पहिरने छी ने रे। - हमरा तऽ ने टोपी दैत छह आ ने स्वेटर। खाली बड़के लोकके जार लागैत छै कि – कहैत आंखि के नीच्चा कऽ लेलकै। सम्पर्क-9623223156 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। आशीष अनचिन्हार ४ टा बीहनि कथा 1 बूझब "बीते-बीत धूर होइ छै आ धूरे-धूर कट्ठा फेर कट्ठे-कट्ठा बिग्घा..." "बुझलियै कि नै........." "की यौ बुझलियै कि नै..." "नै बुझलियै....." "जाह सीधे छै बुझनाइ" "मुदा हमरा जेबीमे पाइ नै अछि।" 2 मजबूरी "ई फेसबुकपर बूढ़ लोक सभ अपन बेटा-पुतहुअक जन्मदिनक बधाइ किए दैत छै" "किए देबाक नै चाही से। एहिमे कोन खरापी छै?" "खरापी होइक वा कि नै होइक मुदा....." "मुदा की?....." "लागै छै जेना ओ सभ सार्वजनिक बधाइ नै देथिन तँ बेटा-पुतहु घरमे रहहो नै देतनि"........ 3 स्थिति "सासुरमे नौकरानी छियै" "तखन नैहरमे तँ मलिकीनी रहल हेबै" "नै ओत्तौ नौकरानिए छलियै" "से कोना" "नैहरमे किछु सुविधा-स्वतंत्रता संग नौकरानी छलियै तँ सासुरमे किछु बंधनक संग" 4 भूत अल्हुआ झा आ सुथनी मिश्र एकै संगे बैसल छलाह कि उम्हरसँ कटहर ठाकुर सेहो पहुँचि गेलाह। अल्हुआ कटहरकेँ देखिते पुछलखनि "बहुत दिन गाएब छलह से कि बात" कटहर झा उत्तर देलखिन "श्मसान साधनामे छलहुँ भूत देखबाक लेल" सुथनी मिश्र पुछलखनि-- "देखलहक" जबाब भेटलनि "नै देखबे नै कएल" अल्हुआ झा कहलखिन-"एहि लेल साधना-फाधनाक कोन जरूरति बस सरकारी विकासक नाम सुनि लएह ओहो एक तरहक भूते छै। खाली सुहबहक मुदा देखेतह नै" अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। आशीष अनचिन्हार बीहनिकथा की छै? बीहनि कथापर किछु लिखबासँ पहिने ई स्पष्ट कऽ दी जे जहियासँ हम बीहनिकथा नामक विधाक प्रति काज देखलहुँ तहियेसँ लागए लागल जे ई मात्र नामक घोंघाउज अछि आ से संभवतः ओहि दुआरे भेल जे एखन धरि बीहनि कथा उपर कोनो तेहन सैद्धांतिक बहस वा आलोचना नै भेल अछि। ओना ईहो मानबामे कोनो दिक्कत नै जे किछु बीहनि कथाकार मात्र नामे बदलबाक लेल लीखै छथि। एहन कथाकार के-के सभ छथि से गनाएब एखन अभीष्ट नै। हमर अभीष्ट अछि एहन तथ्य जाहिसँ बीहनि कथापर किछु प्रकाश पड़ै। बीहनि कथापर आन बात कहबासँ पहिने हम कहि दी जे व्यक्तिगत तौरपर हम मैथिलीमे ओहने लघुकथाक अस्तित्व मानै छियै जकरा हिंदीसँ आनल गेलै। मुदा संगे ईहो जोड़ब जे बीहनिकथा लघुकथाक एडभांस रूप छै। जेना शाइरीमे गजलोसँ बेसी कठिन रुबाइकेँ मानल जाइत छै तेनाहिते हम बीहनिकथाकेँ लघुकथासँ बेसी कठिन मानै छियै। जे हजारक-हजार लघुकथा लीखि अभ्यास करता से कदाचित् कहियो बीहनिकथा लीखि सकै छथि। एकर माने ई भेल जे हरेक बीहनिकथाकार लघुकथा लीखि सकैए मुदा हरेक लघुकथाकार बीहनिकथा नै लीखि सकत आ तकर कारण अभ्यास छै। बीहनिकथा केकरा कही आ कोना लिखल जाए ताहि लेल बहुत चर्चा भेल आ बहुत मंथन भेल। मुदा हमरा जनैत वर्तमानमे जे कियो बीहनिकथा लीखि रहल छथि से बीहनिकथा नै लघुएकथा लीखि रहल छथि भने ओकर शीर्षक बीहनिकथा किए ने हो। आब एहिठाम ई प्रश्न उठै छै जे आखिर बीहनिकथाक कोन एहन मापदंड छै जाहि आधारपर हम बीहनिकथाकेँ लघुकथासँ अलग कऽ रहल छियै तँ हमर उत्तर हएत जे "जँ कोनो कथानक अहाँ संपूर्ण रूपसँ मात्र 60-70 (बेसीसँ बेसी 80-90)मे कहि सकी तँ ओ बीहनिकथा हएत। शब्दक संख्या जतेक कम होइत चलत मुदा कथानक संपूर्ण रहत ओ बीहनिकथा ओतबे उत्कृष्ट हएत। वर्तमानमे दू छोड़ अछि एकटा अनमोल झा जे कि लघुकथापर अनघोल केने छथि तँ दोसर छोड़ मुन्नाजी जे बीहनिकथाक डोर रखने छथि। मुदा अफसोच जे ई दूनू गोटे विधाक मर्म बुझबामे असफल रहि गेलाह। अतेक हम निश्चित रूपसँ कहि सकैत छी जे अनमोल झाक किछु रचना जे कि लघुकथा शीर्षकसँ अछि से वस्तुतः बीहनिकथा अछि उदाहरण लेल हिनक पोथी "समयसाक्षी थिक" केर 'नेत (एक)', 'नेत (तीन)' तेनाहिते मुन्नाजीक बहुत रास रचना जे कि बीहनिकथाक शीर्षकसँ अछि से वस्तुतः लघुकथा अछि उदाहरण लेल हिनक पोथीकि "प्रतीक" केर रचना सभ देखल जा सकैए। हमर कथन- वर्तमान मैथिलीमे बीहनिकथा बहुत कम्म अछि आ ई अभ्यासक चीज छै। जतेक अभ्यास करब ततबे कमांड हएत जे कम शब्दमे पूरा कथानक रचि दी। अनमोल झा लघुकथा लिखैत-लिखैत एक-दू बीहनिकथा लीखि लेने छथि मुदा मुन्नाजीक लघुकथा बीहनिकथा होइत-होइत रहि गेल अछि। उम्मेद अछि जे आबए बला कालखंडमे ई दूनू गोटे आ हिनका संग अनेको नव लेखक नीक बीहनिकथाकार कहेता। एक बात जे भ्रम तँ नै छै मुदा मैथिल सभ एकरा भ्रम बना कऽ प्रस्तुत केलथि-- Seed story आ बीहनिकथा। Seed story अंग्रेजीमे होइक वा कि नै होइक मुदा ई निश्चित तौरपर बीहनिकथा केर अंग्रेजीकरण थिक। मैथिल सभ जँ बीहनिकथाकेँ Seed story कहै छथि ताहिसँ ई साबित नै होइ छै जे ई Seed story अंग्रेजियोमे हेतै। तँइ हम अंग्रजीक विद्वान सभसँ आग्रह करबनि जे ओ अपन उर्जा एहि बातमे नै लगाबथि जे अंग्रेजीमे Seed story नै होइ छै तखन ई गजेन्द्र ठाकुर वा कि मुन्नाजी Seed story किए प्रचलित करै छथिन। ओना देखल जाए तँ अंग्रजीमे Watermelon story नामक शब्दयुग्म छै तँ बहुत संभव जे Seed story नामधारी सेहो होइक। हरेक भाषामे किछु लोक एहन होइते छै जे ओ अपन  स्कूल-कालेजक सिलेबसमे जे पढ़ने रहै छै ताहिसँ आगू जाए नै चाहै छै। एखनो ई कहए बला बहुत लोक भेटताह जे मैथिलीमे हरिमोहन झासँ आगू किछु नै भेलै, हिंदीमे प्रेमचंदसँ आगू किछु नै भेलै......तेनाहिते अंग्रजियोमे हेतै। खएर जे किछु......... मैथिल जखन केकरो पसंद नै करै छै तँ ओकरा हरेबाक लेल पहिल काज नाम बिगाड़ब कऽ दैत छै। जँ कतहुँ अहाँकेँ 'बिहनीकथा', बिढ़नीकथा', मधुमाछीकथा' आदि देखएमे आबए तँ तुरंत बूझि लेब जे ई सभ बीहनिकथासँ डेराएल लोक छथि। आ ई सभ जीवन भरि मात्र नामे बिगाड़ि अपन अहम् संतुष्ट करैत रहता। संगे-संग हम ईहो जोड़ए चाहब जे एहन लोक सभ साहित्यिक रूपसँ अयोग्य होइत छथि। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। सांत्वना मिश्रा ***बीहनि कथा .. बड़दक घंटी*** भोगिया पुआरक बोझ पर हाथमे एकटा सटका लेने चैनसँ सुतल छल। अोम्हर बड़द धान दाउन कऽ रहल छल . ताबत गोपाल जी जे पेशासँ वकील छला ,जा रहल छला। पुआरक बोझ पर भोगिया के बेसुधि पड़ल अा बड़द के अपने मोंने दाउन करैत देखि ठमकि गेला । फेर किछ भांज नए लगलैन तऽ भोगियाकेँ उठेला आ कहला आहिरो बा... ई की छै?? तूँ तऽ सुतल छह आ इ बड़द अपने मोंने दाउन करएमे लागल छै से कोना?? भोगिया कहलक -हे यौ गिरहत बड़द के गरामे बड़का घंटी लागल छैक,जखने घंटीक स्वर नहि सुनाइत अछि तऽ उठिक एक सटका दए छी ,फेर चलए लगए छैक, बुझलौं! गोपाल जी सहमत नहि भेला,आ मुँह बना कऽ बजला...। नए हौ.... जौं एक्के ठाम ठाढ़ भ गर्दनि हिलाबए लगए तऽ??भोगिया बाजल... हे यौ गिरहत अहांँ वकील छी,बड़द नहि!!अहाँ केँ तऽ पेशा अछि संका केनाइ । गोपाल जी भोगियाकेँ देखिते रहला।भोगिया फेरसँ पुआरक़ बोझ पर सुतल! अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। रूचि स्मृति २ टा बीहनि कथा १ खोज """""" उहापोह मे रहथिन ओ.. की अछि जिनगी? इ प्रश्न अनेकानेक बेर हुनक मोन मे ऐलै। वयस भ गेला के बाद केवल विवाह करब? सेहो समय भ गेलै त ककरो सँ  भ' जएत!  आकि जे जल्दी भेट जाए बला छए! तकर बाद की? मन माएर के आपन जिनगी मे लोगक भीड़ मे आपन लोग खोजब, शेष लोक त'अपन स्वार्थ पूर्ति धरि तक मात्र संबंधी अछि। २ आत्मनिर्भर """""""""""""""" हुनकर नाम रहै बबिता। बबिता खेत-पथार मे काज करथिन । खेतक काज हुनका बड्ड सोहाबैत रहै। "बियाक जोगार भ' गेलै यै माय,  बिहाने हम खेत मे बाउग करबै" "बबितिया तौँ घर अंगना के काज देख ,खेती-पथार बाउ देख लेथुन.रौद मे काज करैत कतेक कारी भेलही यै  मुंह देखैत छी.कखनो.. कियो बिआहो नै करतो" माय तामसे कहलकै। बबीता आपन उजरल केस के हाथ से समेटैत कहलकै"हमरा बिआह करबाको नै छए! खूब नीक खेती करै लागल रहै बबीता। एक दिन गामक मुखिया ओकर देहरि पर एलै"बबीता गै बबीता... सुनै..." किसान सम्मान के लेल सरकार तोहर  नामक घोषणा केलक। आब बबीता खेती संगे, सामाजिक कार्य सेहो करैत रहै, पति द्वारा त्यागल औरत सबके ओ अपन खेत दैत रहै खेती करबाक लेल, छोट लड़की सबके पढ़ाई के संगे खेती करैक गुण सेहो सिखाबै। दुआर पर सांझ दै के बाद बबीता के माय बबीता के बाप सँ कहलकै - "जं विवाह क' लैत त ऐतेक काज क' आइ सम्मानक हकदार बनि पबैत? अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। देवेन्द्र मिश्र एकता नहर कातक एकटा चभच्चामे तीनटा सिंहेसरा पाड़ा, तीनूक नाङड़ि तीन दिस, मुह एक्के दिस । एकटाक सिंघ बड़का-बड़का, दाेसरके मझेलबा आ तेसर बिनु सिंघेके । -अपनासभक जीवन बेकार भ' गेल । लाेकसभ अपना स्वार्थे सिंहेसरा बना दैए आ अपनासभकेँ अपना-अपना भागपर छाेड़ि दैए । - हँ, देख ने ! लाेकके खेतमे जाइते देरी हल्ला जे करए लागैए ! स्वार्थीसभ ! -ओतबे कहाँ ! बड़का बरछी ल'  दाैगैए आ कचबाबध क' दैए । सर्वसम्मत निर्णय हाेइत अछि आपसी एकताक आ अपनासबकेँ खेहारनिहारपर आक्रमण करबाक । तखनहिं दछिनबरिया टाेल दिससँ आवाज सुनाइत अछि  - एहैऽऽऽत, एहैऽऽऽऽऽऽत .............!! तीनूक कान ठाढ़ हाेइत अछि । बिनु सिंघबला ठाढ़ हाेइत आवाजकेँ अकानैत अछि ।  मझिलबा सिंघबला ठाढ़ हाेइत ओकरा धकिअाबैत अछि आ दरबर मारैत अछि । एहैत, एहैऽऽऽत ...... जाेरक आवाज । बड़का सिंघबला दाैड़िक'  मझिलबा सिंघबलाकेँ मारैत अछि जाेरसँ पाँजरेमे । थुस्स द' बैसि गेल ओ । बिनु सिंहबला त' पहिनहि हारि मानि लेने अछि । बैसलाहा सेहाे अपन एकताक असफल याेजनापर नाेर चुबा रहल अछि । # देवेन्द्र मिश्र,राजविराज,नेपाल# अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। मिन्नी मिश्र के समाहरत इ गृहस्थीक भार! अपन नव विवाहिता, मास्टरनी कनिया संग,नवका मकान में घुसिते विद्वान प्रोफेसर पति, गर्व सं बजलथि, " सुनु , प्रिय, एहि महल में अहांक सुख भोगक सबटा समान --कपड़ा, गहना , फ्रीज़, एसी .. आदि -आदि, हम कीनि क भरि देने छी । आब अहां अपन इ गृहस्थी के सम्हारि क राखू । मुदा, एहि गृहस्थीक भार सं हमरा फ्री क देब ... बहुत रास रिसर्च वर्कक काज अधुरे पड़ल अछि । सभके प्रकाशन हेतु , हमरा... यथाशीघ्र प्रेस पठेबाक अछि ।" नवकी कनिया, मुस्कुराइत बजलिह, " बुझलौं, हमरो वहए मोन होइए जे अहांके होइत अछि ।" कोयल सन मीठी आवाज के सुनि प्रोफेसर साहब , लजाइत, सकुचाइत बजलाह," कने बता ने दिय, जे कि मोन होइत अछि?" " त, सुनिए लिय, इहे होइए जे भरिदिन हम अहीं जेना खाली पढिते टा रही ।" कनिया के मनसा सुनिते देरी , पति देव कपार ठोकैत बुदबुदेला, " सब कोई सुनै जाउ, प्रोफेसर फेल भऽ गेल आ मास्टरनी पास।" मिन्नी मिश्र / पटना अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। गौरी शंकर साह भाव परीक्षा दियाबय लेल सप्ता आयल  छलथि मास्टर साहेब। संगमे ड्राइवर सेहो छलनि। जखन दोसर सिटिंग एक बजे शुरू भेलनि तऽ किछु समय पछाति खेबाक लेल आरके काॅलेज दिस बिदा भेलाह। गाड़ीकेर अपन स्थान धरा एकटा घरदोकनिया पर पहुँचलथि। सात -आठ आदमी एकसंगे खा सकैत ततेक जगह छलनि। एक आदमी पहिने सँ पाबि रहल छलाह। मास्टर साहेब दू जगह खेनाइक आॅर्डर दऽ सीट धऽ लेलनि। खेनाइमे भात -दालि, अल्लू-कोभीक तरकारी,अल्लूक भुजिया आ पापड़ रहनि।  दोकानदार प्रेमपूर्वक सभगोटेकेर खिया रहल छलाह। हुनक उमैर पैसठसँ कम नहि हेतनि। तखनहि पहिने सँ खायबला आदमी हुनका आवाज देलकनि कि कनेक भुजिया देब यो। मास्टर साहेब बाजि उठलाह-अतेक उमरि भेलाक बावजूद  अहां लोक सब के खिया रहल छी, एक तरहे तऽ देश सेबा कऽ रहल छी। तखनहि ओ दोकानदार मास्टर साहेबक पलेटमे पापड़ द' देलकनि।पहिनुक खेनिहार बाजल आंय यो मांगने रही हम आओर देलयनि हुनका। मास्टर साहेब सोचि रहल छलाह नीक भाव रहने फल सेहो ओहने कीने ? नाम -गौरी शंकर साह ग्राम+पो०-तुलापत गंज थाना-झंझारपुर जिला-मधुबनी बिहार 847109 8521197323 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। सत्यनारायण झा लखन बाबू। लखन बाबू आइ जॅ जिबैत रहितथि त कतेक प्रसन्न रहितथि।लखन बाबू जखन पन्द्रह बर्खक रहथि त पिताक स्वर्गवास भए गेलनि।जे किछु जमीन जाल रहनि ,दियादवाद हरपि लेलकनि आ भाई बहिन संग अनाथ भए गेलाह,कोनो उपाय नहि बचलनि ,भूखे परिवार विलटि गेलनि आ तखन लखन बाबू एक ग्रामीण संग कलकत्ता गेलाह मुदा हावड़ा ब्रिज पर ओ हिनका छोड़ि भागि गेलनि ,पंद्रह बर्खक लखन बाबू खूब कनला जे आब की करब ,मुदा अपना में धैर्य आ साहश राखि सघर्ष करय लगलाह जे कालांतर में भाग्य पलटि गेलनि आ अपन लग्न , सत्यनिष्ठा के बदौलत एकटा खुशहाल परिवार ठाढ़ केलनि।घरक सभ बाल बच्चा ,बेटा भातिज सभ के पढ़ेबे नहि केलनि वल्कि उच्च शिक्षा तक देलखीन जाहि बदौलत हुनकर परिवार देश विदेश में झंडा गारि देलकै।ओकर एकेटा कारण छै ओ सत्यनिष्ठ छलाह,झुठ नहि ,बैइमानी ,घुसखोरी नहि केलनि।ओ सभ बाल बच्चा के कहने गेलखीन जे सत्यनिष्ठा पर रहै जायब।आइ ओ रहितथि त कतेक प्रसन्न रहितथि मुदा स्वर्गो सॅ अपन सफलता पर मुस्कराइत जरुर हेता। # सत्यनारायण झा # अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। घनश्याम घनेरो लैह-लैहे गुलबिया -हे यै माँ! हम कोन साड़ी पहिरि उपनायनक हँकार पूर' जेबै? -इंजीनियरक बौह आ साड़ीए लेल बेलल्ल! पहिरु ने, जे अनुरधियाक बियाह राति छमकौने रही। ललहोन, छिछलौआ। केहन तँ ललितगर लगैत छल। -हूँ, कहकलकै जे! ओइ दिन तँ लोक सभ यैह साड़ीमे देखने छल, फेर वैह पहिरु? लोक लेल तँ ई पुरान भ' गेलै। जाथु ई अपने हँकार पूरि आबौथ। -अच्छे! आब' दियौ लाल बच्चा केँ, नहि एक गांठ साड़ी कीना क' रखबा देलहुँ तँ फेर... -ठिक्के यै माँ? -ठिक्के नहि तँ की? अहींक संस्कार सन ओकरो  विचार होइक तखन ने? -से की यै माँ? -हमरा तँ हाथ-पैर हेरायल अछि जे लाल बच्चा ई नहि कहि दीए जे पुतौह तोहर पुरान भ' गेलौ, आब संगे रखबै तँ लोक की कहत! # घनश्याम घनेरो # अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। अभिलाष ठाकुर टकध्यान -- माँ आइ हमरा स्कुल जाइ के इक्च्छा नहिं अछि। -- बाबू तमसौता! जल्दी नहा सोना लिअ आ आइ दस टा टको देब स्कुल जाउ नेना! -- मास्टर सहैब जे पढ़बै छथि से हम बुझबे नै करइ छियै त' जाकऽ की लाभ॥ --- अप्पन पोखरि म'न अछि ? --- हाँ त से की ? --- बगुला टकध्यान लगेने रहैत छैक तखने ओकर पेटक अभिलाषा पूर होइ छै। तहिना अहूँ मास्टर सहैबक बात पर टकध्यान लगेबै त हमर अभिलाषा पूर हएत॥ -अभिलाष ठाकुर, लोहना पठशाला, झंझारपुर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। अखिला नन्द झा 'रमण' चश्मा अन्हरोन साँझेमे जे सुलोचना लोटा लय बारी गेली,से घुरि आङन पायर नञि देली।  रातिसँ प्रेम कान्त बाबू एहि खढ़होरिमे बेटी लेल किलहोरि काटि रहलाहै।यै सुलोचना छी यै......, बेटी......, यै सुल्लो.....। फलेरियासं असक पतिकेँ सत्यसँ सोझाँ होमय लेल पत्नी शनैः शनैः तैयार कय रहल छलीह। -- "आब एहिमे हमर बेटीक कोन दोष।एहि बोन झाँकुरमे दू चारि अधमलोक बलजोरी कय दौक तऽ असगर अबला अपनाकेँ कतेक बचाओत।" -- "एहन अर्रदर्र जुनि बाजू।क्यो नै किछु कयने हेतैक हमर बेटीसँ।" बाजय लेल प्रेमकान्त बाबू किछु बाजि दौथ,किन्तु हुनको अन्देसा ओहने अनिष्ट टा पर छैन्ह।कुन मुँह लय लोकक सोझाँ हेता।होइन्ह पृथ्वी फाटि जाय आ ओ ओहिमे समाधि लऽ लैथ।कोनो बिषधर पायरकेँ हबैकि लैन्ह।एक्को क्षण एहन अपजस जीवन जीअब मृत्युसं भारी छलैन्ह।ताबैत खढ़ोरि  लग किछु बात सुगबुगेलै।लोक लपकल।जे देखलक सैह सन्न।प्रेम कान्तो बाबू दुहु बेकती ओतय एला। कोनो हिंसक जन्तु हुनक बेटीक लहासकें चिथड़ी कय देने छलैन्ह।से देखि हुनका जानमे जान एलैन्ह।ओत्तै कने हल्लुक भय, बेटीक वियोगमे कानय लगला। अखिला नन्द झा 'रमण' अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। सबिता झा 'सोनी' सेहेन्ता / बेगरता *************** फुलेसरि के दुतिव'र सँ विवाह भेलैक छल। जोगेसरा के पहिलुक कनियाँ विवाहक किछुए साल भेलैक बीमारी सँ स्वर्गसिधारि गेलैक..! फुलेसरीक टोलक नवविवाहित ननैद "मुनीतिया" बेसी काल भेंटघांट करय अबैत छलैक..हँसी ठहक्का..चौल दुनु मे होईतरहैत छलैक।एकदिन बेरूपहर मुनीतिया फुलेसरी लग एलैक ओकरा उदास देखि पुछलकै.. ~~भौजी भैया खूब मानै छथि ने'.. इन्द्रपुजा मेला खूब घुमौलनि फिरौलनि..ने' हँ ओ नबका सिनेमा सेहो देखौलनि ने..की' सभ खुऔलनि कने कहू ने...! ~~ बौआ छोड़ू ने ... ~~"यै भौजी' भैया त खूब शौखीनदार छथिन..पहिलुक भौजी के ल' क' बड्ड... ~~ फुलेसरी आँखिक कोर सँ टघरैत नोर पोछैत बाजलि.... "यै बौआ अहाँक पहिलुक भौजी छल "सेहेन्ता" आ हम..छी "बेगरता"...! सबिता झा 'सोनी' अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। पूनम झा "सुधा" सेल्फी ओमहर सँ.. हेलो - हेलो ...... एमहर सँ .. हेलो  के ? हेलो ! मामी हम खुशी, हँ बौआ कहु? नानी आब अपना सबहक बिच नै रहलि। मामी यै मामी , नानी कोना हमरा सभकेँ छोड़ि कs चैलि गेलैय यै ।आब हम ककरा नानी कहबैक यैय, मामी । हमरा बड्ड कनाय यै मामी...... बौआ नै कानू आहाँ, नानी बीमार तs छलैथ ने। आ बुढापा सेहो आबि गेल छलन्हि।चुप रहू ........। ओमहर सँ खुशी ...कहलौं हं मामी हमरा एकटा नानी कें फोटो पठा दितौउ। तs हम कनी फेसबुक पर दैतियई। लेकिन बौआ यै नानी हमरा कहलैथ यै कनियाँ.. खुशी जे आयल छल  से अपन मोबाइल सँ धाँयं-धाँयं अपन फोटो खिचै छल आ हम ओकरा लग ठाढ़ भs गेलियै त'कहलक, कनि कातs  भs जाऊ ने हम सेल्फी लै छी । हमरा बड्ड दुख भेल ! बौआ नानी कहि गेलि हं जे हम मरब तs ओकरा ने एकोटा फोटो पठायब आ ने हमर काज में बजायब .। बौआ आहाँ नानी कें भोजभात में जरूर आयब । तखने सभगोटे सेल्फी लेब । -पूनम झा "सुधा",  फरीदाबाद अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। मनोज मंडल मां नारी जीवन मातृत्व प्राप्त केला पछाति पूर्ण भ' जाएत अछि और कोनो नारीक लेल माँ बनव कोनो वरदानसँ कम नहि । अपार वेदनाक सहलावादो मातृत्व प्राप्त केला पछाति जे हर्ष नारी जाति अनुभव करैत छथि ई लीखब संभव नहि। ममता बहिनके ई सौभाग्य विआहक पंद्रहम बरख बितला पछाओ नहि भेटल रहैन जे प्रसवक वेदनासँ बेसी कष्टदायक रहै। ओना मन हिया हारि रहल रहैन मुदा आँखिक कोनो कोणमे मातृत्व ममत्व अखनो दुबकल रहबे करै । विद्यालय जेबा क्रममे अपन स्कूटि रोकने छली तखने एकटा बच्चा मैल झोल कपड़ा पहिरने ममता बहिन लग आबि माँ कहने रहै। ममता बहिन पहिल बेर अबोध बच्चाक मूँहे माँ शब्द सुनि सिहैर उठल छली । ममता बहिन ओहि बच्चाके हृदयसँ लगा लेने रही और आँखिसँ एना नोर गिरैत रहैन जे जन्म-जन्मान्तरसँ ई सुनबा लेल व्याकुल रहैथ। अखन ममता बहिनक ओ बेटा दीपक अपन कमायक अधिकांश हिस्सा गरीब बच्चाक पढाई लिखाई पर खर्च करैत अछि। ममता बहिन तृप्त लगै छथि। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। चंदना दत्त प्रेम दिवस आयं यै प्रेमसुन्नरि, आय कथीके हुलिमालि छैक, धियापुता संग हमर पुतोहुओ बेहाल छथि घरवलासंगै फोटो परफोटो मबाईल पर लगबय लै? से नहि बुझलखिन्ह बहीन, ओ आब त नवका नवका जुगजम्मनाके नवका गप्प, ओ कीदुन कहय छै आई प्रेमदिवस छै, से जे जतेक प्रेम करय ककरो संगै तकर फोटो लगबय छै, नीक नीक समान दै छै, यै बहीन हमहुँ त हिनके  जम्मनाके छी, तखन कनि धियापुता संगै टीवी मबाईल सं सीखि लैत छी, रामनगर वाली बजलीह. धौर जाऊ, ई फोटो खिचौने आ डार घुमा मोटरसाइकिल पर बैसि घुमने बेसी प्रेम भ जैत, बड्ड परेम तें एकटा सं दूटा बाल बच्चा होई छैन्ह परेम त हमरा सभके करैत छलाह भरि घर धियापुतासं भरल. चंदना दत्त, रांटी मधुबनी अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। विन्देश्वर ठाकुर घुस्सा-घुस्सी -जा! जा ई कि भेलै? कार्यक्रम बन्द भऽ गेलै! -हां भाइ! देखलहोग नइँं छौडासब दारु पी क' केना रंगदारी करै छलै? त बन्द नइँ भऽ जाउक...? - सएह त! ईसब केना करैछै सरस्वतीयो पूजा दिन क? -धु! नामके लेल करैछै विद्याक देवी शारदेके पूजा आ खाइछै सब दारु-तारी..लगबैछै अश्लील ड्रेस आ सुनैछै अश्लील गीत... -सच बात भाइ! ई बात एकोरत्ति नीक नइँ भेलै - नइँ त केना नीक भेलै! अच्छा! त दारुए पी' क लडाइ भेलैए हौ? - नइ हौ भाइ! दारु त एकटा बहन्ना छलै।असली झगडाक जरि छलै फुलेसरी.. मोहना कहै छलै हमरासंगे नाँच आ सोहना कहैछलै हमर छे.. हमरासंगे नाँच... तहीमे भऽ गेलैए खूबक' घुस्टा-घुस्टी... विन्देश्वर ठाकुर, धनुषा: नेपाल, प्रवास:दोहा/कतार अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। कुन्दन कर्ण "आओर छिछियाउ" आइ लॉक डाउन के अठारहम दिन छै। सोहन बाबू के घरक लोक बड़ बुझबैत छलैन्ह जे सरकार जखन मना कय रहल अछि त' घरे में कियएक नइ रहैत छी.. मुदा सोहन बाबू सभदिन सँ अपने जुइते चलैत छलाह.. हुनका होइत छलैन्ह जे ककरो बात मानि लेबाक मतलब ओकरा सँ हारि गेलहुँ!! तेहन अहंकारी। कियो टोकैत छलैन्ह त' जवाब दैत छलखिन तोरा सबके अहिना रहैत छौ डरपोकहा सब!! घर पर बैस टीवी पर रामायण आ महाभारत सिरियल देखय में हुनका बुझाइत छलैन्ह जे ओ बिमारी सँ डरा गेलाह तैं भरि दिन बाहर छिछियाइत रहैत छलाह। अपने त' रामायण महाभारत नइ देखलाह मुदा आइ हुनका आंगन में "गरुड़ पुराण" के पाठ भय रहल छन्हि! कुन्दन कर्ण दिल्ली ( तारालाही) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। सोनी नीलू झा ।।अदनाबालीक आंगन।। झलफलाइत साँझ छलैक। डिबिया मे बेसी तेल नहि होबाक कारणे डिबिया सेहो लुकझुक करैत छलैक। अदनाबाली दिने सोहारी पका लैत अछि। बीजली बिल जमा नहि करबाक कारणे काटि देने छैक बिजली, कंपनि बला। चूल्हि लग कात मे सीलौट सेहो राखल छैक। अदनाबाली बेसी क' नोन मरचाइ आ अहगर क' आमक आचार ध' क' चटनी पीस रहल छैक। बौका बेटा घेंट पकरि झूलि रहल छैक अदनाबालीक पीठ पर। मुन्निया दौड़ल एलैक दलान दिस सँ आ मायकेँ कहलकै, गै बुढ़िया तोँ तँ हमरा सभकेँ कहैत छेँ जे खेड़हीक दालि,भात आ तीमन-तरुआ पाबनि दिन क' बनैत छैक, तँ लाल कक्का आंगन रोज्जे रोज्जे पबनी रहए छैक..? आ अपना आंगन....? अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। विनीता ठाकुर किसान रौ फेकुआ आई ई बुशर्ट पैंट आ बाबरी सिट केय फेर कतय के जतरा छै रौ ? बाबू बजलै। फेकुआ-हौ बाबू कते दिन रहबै गाम मे हमरा आउर के गुजर हेतै अहि खेती बाड़ी पर बाबू- एं रौ बिसैर गेलिह ओ दिन जखैन बँबई डिल्ली मे कि दन कहै छै कोरोना एलै त भूखले पेटे सभके ओहे हाकिम सभ भगेलकौ आउर लत्ते पत्ते पैरे भगलैं । तखन त शपथ खेलही आब घुरि कअ नहि एबै परदेश अपने गाम मे खेती करबै किसान कहेबई । एतबे दिन मे सभ बिसरा गेलौ एकरे कहै छै हेहर। फेकुआ - हौ बाबू तुहीं कहअ एते दिन सँ खेती करै छहअ तुं बदला मे कि भेटै छअ सभटा निमन धान चाउर बाहर जाईत छैक बिचौलिया सभटा नफा लैत छ आ तोरा सभके लागतो नहि भेटैत छ । रौ बौआ से त तों ठीके कहैत छैं सरकार त हमरा आउर के सुधिइयो नहि लैत छैक । जाय दही तहियो ओहि परदेश सं नीक छी । जेह नुन सोहारी भेटैये इज्जत के सँग खाई छी आ रहैत छी । विपत्ति मे त फेन अपने गाम काज देलकौ नहि जानि तोरा आउर के ई कोन परदेशक हवा लागि गेलऊ । विनीता ठाकुर  सोनीपत हरियाणा अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। डॉ प्रमोद कुमार ढ़हलेल छी केहन ढ़हलेल छी ! स्नो पाउडर त’ जाय दियौ, साड़ी तक ने ढंग स पहिरय अबैत अछि अहां के ! कहां सऽ हमर कपार मे बथा गेलहुं अहां। निछ्छ छी ! जाउ बाबू केर सेवा टहल करियौन । बाबू के पाइये चहियनि ने ! ठीक छै । हम हुनका रुपैयाक ढ़ेर पर बैसा देबनि ! एतवा कहि मुनी जी घर सऽ निकलि गेलखिन। दरबज्जे पर सुतै छथिन आब। फूलमती के चौदहम चढ़ले रहनि कि सासुर बसऽ लगली। कचहा उमेर! पति-पत्निक ब्यवहार सं अनभिज्ञ! चौबिसो घंटा सब सं पुछि पुछि साड़ी पहिरवाक अभ्यास करय लगली। मास दर मास, बरख दर बरख बितलै। गाछी, बिरछी, खेत खरिहान सबठाम ओ साड़ी पहिरैत रहै छथिन आ पुछै छथिन, “ कहू त’! निक भेलै ने?” लाजो धाखक लेख नहिं छनि। जकरा नहिं बुझल छै ओ हंसि दैत छैक आ जकरा बुझल छै ओ मूरी गोंइत लैत  छैक। पगला गेलखिन फूल सन फूलमती! -डॉ प्रमोद कुमार, पांडिचेरी अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। इरा मल्लिक बेटीक महिमा गै चनचनही! आब चुपो रहबें आ कि बजिते रहबें। बजिते बजिते एकरा बकासी नहिं लगै छै हे भगवान! बाजैत थाकबे नहिं करत‌।कियो एक रती किछ चिढका दैत छैक कि बस!!! भ जायत छै ई बिढ़नी।कहिया बुइध देथिन भगवान एकरा!बजैत,बड़बड़ाइत सोचैत नीरा परेशान छलैथ।हुनकर दूटा संतान में से बड़की इयैह बेटी नीतू छलीह।नीतू संओ एकटा छोट भाई छलखिन जे नीतू के खौंझा दैत छलखिन।नीरा अपने माथ झंटैत ,कोसैत घर में जा क बैसल एखनो भुनभुनाइत छली।सबटा तमाशा नीतू के दाय(दादी) देख रहल छलीह।दाय के अपन पुतहु नीरा के परेशानी बुझाइत छलैन।मुदा पोता- पोती के बाललीला सेहो बड्ड आनंदित करैन।आइ जखन नीरा के बेसी परेशान होएत देखलखिन तखन हुनकर सासु नीरा के कोठली में गेली।पुतहु के बड़ दुलार संओ माथ सहलाबैत कहलखीन ; नीरा एतेक परेशान नहिं होई।ई बच्चा सबके सहज प्रक्रिया छै।हम सब देखू आ ओहि में नीक बेजाए के ज्ञान करबियनु।बेटी के इयैह चनचनाहट,कलरव संओ घर में हर्ष,उल्लास ,उमंग के वातावरण रहैत छैक।ई बेटिये के महिमा अछि।जे एक संग दू -दू टा गृह में खुशी बरसाबैत अछि। आँखि संओ टप टप नोरक धार बहय लगलैन सासु पुतहु दुनु के! -इरा मल्लिक, रिलायंस ग्रीन्स टाउनशिप जामनगर,गुजरात! अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। सत्येन्द्र कर्ण बनिया बाबा गोर- नार , पतरे- छितरे, लम्बा आ छुड़ी सन नाक देखय में बड्ड सुन्नर बनिया बाबा छलाह . एकटा पैघ जमींदार सुखदेव बाबूक कामति छलाह.सलाना तनख्वाह बारह मन धान भेटैत छलनि. एहि एबज में हुनक सब जमीन- जाल, बांस- काठ आ कलम- गाछी देखैत छलाह. टोल में जिनका ओहिठाम सत्यनारायण भगवान पूजा वा अष्टयाम होइत छल, ओतय आरती, चरणामृत आ चौरठ केयो देखा आ परैस लैत छलाह मुदा परसादी परसैक भार बनिया बाबा कें भेटैत छलनि. कारण एकटा पैघ छल जे बनिया बाबा परसादी चुटकी सं  परसैत छलाह.परसादी सवा सेर हो वा अढ़ाइ सेर ओहिमे सभ कें बाटैत,उगारी तक दैत छलाह.इ विशिष्टता छल. बाबा कुमारे छलाह परञ्च सम्पूर्ण परिवारिक विकास हेतु सतत् प्रयत्नशील रहलाह.जवानी में कहियो किराना दोकान केने छलाह तैं बनिया नाम सं प्रसिद्ध भेलाह. अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। जवाहर लाल कश्यप पहिल प्रेम : हम अहा सं प्रेम करै छी | : काहिया स ....? : जहिया रामलीला में रामक अभिनय करैत देखलहू ... : अहा हमरा स नहि राम स' प्रेम करै छी....आ राम त ककरो मन मोहि लेथिन्ह..... : हम अहा स ' प्रेम करै छी । : अगर प्रेम हमरा स होइत त ओहि दिन भ जाईत जहीया पाहिल बेर मंडली के खाना लेल समान मांगय गेल रही । बहुत अंतर अछी हमरा आ अहाके बीच , कियो राजकुमार होयत अहा लेल...... आई बीस बरख बादो हम निश्चय नहि क सकलहू हम्मर पहिल प्रेम ओ कलाकार छल आ की राम ...... # जवाहर लाल कश्यप # ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। जयंती कुमारी दू टा बीहनि कथा १ हीरा एं यौ नुनू बाबू.. बहिन त' फोटो सनक नै देखा परली..! देखासुनी के बाद राम बाबू कहला। बाबुजी...फोटो और सोझा मे किछु त' अन्तर हेबे करै छै। ओना ...बहिन हमर हीरा अछि..हीरा.. बुझलऊँ..पर हम त'आब सोच में ने परि गेलौ! बेटा के नान्हिये टा स गछने छी जे कनियाँ उज्जर गोर क देब !कोना क' हुनका मनेबनि ? ओह ! बाबूजी एना नै कहियौ!  आब त ' कार्डो  बँटा गेल छै , हलुआइया सभ केँ, बैना  द' देने छिये! हमर बहिन बहुत गुनी अछि! नुनु बाबू परेशान भ' कह' लगला! अरे बाऊ.. परेशान जुनि होइ ! हम त' बस ई कह' चाहैत रही जे बहिन लय दुपहिया नै चारिपहियाक इंतजाम क' लेब! बस्स..... बात ई जे रौद बसात नै लागत त' हीराक रङ मंद नै परत। २ नीक लड़की चलू ! कतौ एकांत मे बैसी।  राघव  नेहा केँ कहलक ..। दूनू  एक्कहिं  ऑफिस में कार्य करैत रहय, पारिवारिक सहमति सँ बियाह सेहो  तय रहै ,अगिला लगन मे भ जेतै। चलू.... हमहू.देखै छी, अहाँ कत्त ल' जाय चाहै छी... कहलक नेहा .... ई हमर मित्रक डेरा अछि.. अपने सब लय खाली अछि। नेहा.... आइ हम अहाँक सम्पूर्ण प्रेम कर चाहै छी, अहाँक आपत्ति त नै? नेहा.. ....मुदा आइ हमरा घर जल्दी जेबाक अछि और हे.. कनि दिनक बाद अहाँ करैत रहब सम्पूर्ण प्यार। के रोकत ... हा हा ... राघव .. ओ हो..नेहा!  अहाँ साँचहूँ " नीक लड़की "छी... हम त' अहाँ क जाँच' लय ई सब कहलौ ! नेहा  एक मिनट सोचि क' कहलक......अगर हम अहाँक प्रस्ताव मानि लितौं त' खराब ? हम त अहाँ केँ अपन मोने द' देने छी.. तनक समर्पण त' हमरा लय प्यारक प्रतिदान मात्र छै। .. राघव...हम नीक रही कि नै..अहाँ कथमपि नीक  नै छी! आगा सँ सम्पर्क करै केर कोशिश नै करब! गुड बाय!! -जयंती कुमारी ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। डा. शिव कुमार प्रसाद ४ टा बीहनि कथा १ छौंक हे रौ हरिया, बड़ देखै छियौ दौड़ा- दौड़ी करैत! की बात छै रौ? यौ सरकार,बिन बाते तऽ आब कुकूरो ने भुकै छै,हम तऽ मनुखे छी। कोइ सखे दौड़ैत छैक,छौंक लगे छै तखने दौड़ैत छै! २ जनम रौ कोढिया जीबऽ देमे कि नहि? आब जी तैयो आ कि मर तैयो, हमरा कोनो फेरसँ जनमबाक अहि! ३ फर्मलिटी कनिया ,काकी की भेलैन? कनिया दिनक दोष! कनेक चोट लागि गेल। बड़ दिक्कत भऽ गेलैन। अच्छा की करथिन,ठीक भऽ जेतैन। बेटो देखऽ अबितैन,मुदा भिनसरो गेट बन्दे रहैत छनि आ रातिओकें जखैन अबैत छैन ताबत ई सभ सुति रहैत छथिन। हँ यै कनिया, से तऽ ठीके कहैत छी।एहि जाड़-ठाढ़मे भोरे भोर एहि हालैतमे हमरा सँ एतेक सिरही चैढ़-उतैर कोना गेट खोलल हएत। बौआ सभकें पलखैत नहि छैन तऽ की करबै!काम मे बाँझल रहैत छथि।कतहु रहैथ,आनन्द रहैथ। अच्छा काकी आब जाय छियैन। जाउ,चाहो पियैतौं कि पिबतौं सेहो के बनौत?अबैत रहब। आब बड़ अबेर भऽ गेलै।अखन जाय छियैन। गोर लगै छियैन। सोहागवती रहू! ४ बहीर बाबा,बाबा यौ? की यौ,कहू ने! हमर नानी साफ बहीर छै! कैल्ह अहाँ फौन करियै,फेर करियै,नानी लग फौन राखल आ ओ उठेबे ने करथिन तऽ अन्त मे हम उठेलयै तऽ अहीं फौन करैत रहियै। पुछलयै नानी,तों फोन किएकने उठबै छलही? बहीर छही? कहलकै हँ रौ जेहने तोहर बाबा बतपदौन तेहने तों! हम तऽ साफ बहीर छी। नानी बहीर छै ने? डा. शिव कुमार प्रसाद सिमरा, झंझारपुर, मधुबनी अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। वी.सी.झा "बमबम" अधलाह बस्तु ~ हल्लो ! के ओझहा ? ~ हं हं कहौथ । ~ की कहबनि ? डागदर - - - । ~ की कहलकै डाॅक्टर - - ? प्रिया ठीक त' छनि ने ? ~ हं ओ ठीके छै मुदा , अहु बेर अधलाहे बौस्त छै अल्टासन मेँ, से हम त कहबनि जे सफइया - - - - ~ जे बजलथि से बजलथि फेर एहन गप बजबो नहि करियथि , इ हमर साउस छथि ततबी टा लेल नै त' - - - - ~ हले गै पिरीया बुझबहुन तूं अपने कने ( बेटी केँ हाथ मे फोन दैत ) । माँ ठीके त' कहैत अछि । इ अंतिमे बेर अछि - - - ~ एकर मने की हम अपने सँ अपन संतान केँ  - - - नै नै किन्नहु नै । की हम सभ जानवरो सँ  खतम छी ? ओहो अपन बच्चा केँ - - - ~ लेकिन हम अबाॅर्शन करबै के सोचि लेने छी । ~ तखन अहूं हमरा लेल अधलाहे बस्तु बुझू अपनाकें । -वी.सी.झा "बमबम" कैथिनियाँ अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। भावना मिश्रा गरीब लोक डेकची 1 घंटा सं चुल्ही पर चढल अछि,मुदा एखन धरि भात नहि  बनल अछि। बौआ बजलाह -- " माँ ,माँ  खाएक दे ना, 1 बजैत अछि बड़ भूख लागल अछि।कतेक देर से भात बनि रहल अछि,आबि बनि गेल हेतो।" रीतिया बजलीह -- "कनि देर थम ... कनि आर समय लागतै भात बनै मे।" एतबा मे बौआ भूख सँ हाक मारि के कानय लागल,माँ के आँखि सं नोर झड़य लागल। सोचय लगलीह --  ई बेरि  कोराना के कारण सब किछ बंद छल आ समय पर खेत बाउग नहि भेल।  बाढ़ि के कारण जेँ भी फसल भेल,सब तहस- नहस भए गेल।कोरोना के द्वारा रीतिया  के बाप के घर बैठे पड़ल आ मजदूरी भी नहि मिलल । कुनू विधि से 10% ब्याज पर  उधार लौ के खेत बाउग करलक रीतिया के बाप,आब करजा कैना चुकाएत? दोकान बला से हो बेहाल बन्न क' देलक.एतबा मे बौआ तामस सं चुल्ही पर चढल डेकची के लात लगा देलक.... डेकची निचा खसि पड़ल.. आ ई कि ? भात तेँ अछि नहि ई मे तेँ छुछे पानि अछि .... पेटकुनियां द' देलक! भावना मिश्रा नई- दिल्ली। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। अमर कान्त लाल उघार( बीहनिकथा) ********************** -अजय , कनियाँ के कहुन माथ पर नुआ ल लेथुन, -कतेक गर्मी छै माँ रहs दही ने। - गर्मी छै तऽ की भऽ गेले ? लोक नङ्गटे  रहते ! - नङ्गटे कहां छै माँ,कपड़ा तऽ पहिरनहि छै ! - माँ,की भेलेन्हि? कनियाँ माथ पर नुआ ल' घोघ काढैत                 बजलीह - की कहू कनियाँ ? अहाँ तऽ  बहुत बात बुझियो जाय छिएक, ई अजैया किछु बूझैये नै चाहै छै , लोको लाज किछु छै की नहि ? देखियौ तऽ रामदीरी वाली पुतौहु के ! कखनहुँ, "मुँह उघार भेटत"? तावत केओ घौल केलक जे रामदीरी वाली के पुतौहु "चौकीदरवा" संगे फ़रार भऽ गेले । उघार माथ उघार चरित्र पर मुस्की मारलक| अमर कान्त लाल रघुनन्दनपुर/खड़ौआ मधुबनी/ बिहार   7091529 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। अमल कुमार झा हिरो बाबू ई देखू। अरे वाह! ई तऽ बड सुन्दर चित्र अंकित कएलहु अछि! केकर चित्र बनेलहु अछि? अपन हिरो के!! अहाँ के हिरो के अछि? अहाँ हद्द करैत छी!! बेटी के हिरो ओकर पिता होइत अछि से अहाँ के नहि बुझल अछि? नहि।हमरा नहि बुझल अछि ।हम तऽ बड साधारण लोक छी। से अहाँ बुझैत छी। अहाँ के बेटी अहाँ के हिरो बुझैत अछि। ओ अहाँ सन बनए चाहैत अछि । ढुनढून! की ई हमर चित्र छी? हँ! बाबू! अहाँ हमर हिरो छी! हमरा अहाँ जकाँ सभक आशीर्वाद चाही।हमरा अहाँ जकाँ खूब पढबाक अछि। अरे वाह!ढुनढून अहाँ मोन गद गद कऽ देलहु। गुरुजन के आशीर्वाद से अहाँ अवश्य विदुषी बनब। अमल कुमार झा पाही सरिसब - पाही मधुबनी बिहार पिन - ८४७४२४ अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। प्रभात कुमार कर्ण प्रकृतिक तांडव । हैलो ---! हैलो -----!!  आस्था छैं---हेलो ---!आस्था फोन उठवैत कहैय छथीह ---"गोर लागैय छियौ  श्रृष्टि दीदी" ---! श्रृष्टि -खुश रह --! देख तोहर पाहून प्रकृति आई फेर धर मे तांडव कय रहल छथुन ---! आस्था--गे --तोरो धिया पुता सब तs उडण्डे छोउक , मंदिर कहियो-कदाल आवैय छौक मुदा अप्पन सेल्फी  लs  भागि जेतौ तय एको बेर  उपरको मन सँ प्रणाम नहि करैय छोक । श्रृष्टि--सांचे  कहि रहल छै--मुदा  , अखन ई सब ग़प्प छोड़ , पहिने अप्पन पाहून प्रकृति केँ तांडव शांत करs ! आस्था---हुनका फोन दिहिन -- ,हेलो --!  हेलो-- ! पाहूना गोर लागैय छी ! प्रकृति --खुश रहूँ , कहु सब नीके ! आस्था- हअ ---, एकटा ग़प्प पुछैय छी--,अहाँ अपने घर मे अपने धियापुता संग किआक तांडव कय रहल छी ? प्रकृति -इयै , साँस,इजोत, अन्न,पानि सब के सब हमर खून जेना चूसि रहल अछि आ हमरे ढाहैय अछि ,तोड़ैय अछि , अंग -अंग कटैय अछि । अहाँ स्वयं कहूँ जे हमर जड़ल आत्माक कुहेश किआक नइ आफैद बनि झहरतै ! प्रभात कुमार कर्ण अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। डाॅ.प्रमोद झा "गोकुल" २ टा बीहनि कथा १ सुपक गोपी -------------- कागत केर खेतक आड़ि पर कलमक लागैन पकरने ठाढ़ रही ।समय अपन वेग सं ससरल जा रहल छल ,आ हम  बीहैन तथा गाछक बीच मे बेवस भेल जा रहल छलहुं । एकाएक विपुल फलक भार सं अवनत आमक  गाछ दिस दृष्टि गेल, ते जेना ओत्तै ठमकि के रहि गेल । चकमक गोटगर बोनैल आम ऊपर ,आ आवरण पात भीतर ।प्रकृतिक सुंदर परिहास मोन के गुद गुदा के राखि देलक । तखने धब्ब केर शब्द सं मोन चौंकि उठल ।देखै छी ठनक जमीनक चोट सं सुपक गोपी आम छहोछित भेल बिहुंसि रहल अछि ‌। जेना ओ कहि रहल हो -आउ !हमर छाती सं बलबलैत   माधुर्य रस  चूसि के हमरा सनाथ कय दिय, आ अपनो सुखद अनुभूतिक संग तृप्त भय जाउ !! मोन हुलसि उठल आ नयन हिलसि गेल ,परोपकारी फलक निस्वार्थ प्रेम देखि । २ अनुराग ----------- अधरतिया मे मेघ घटाटोप क' के एलै आ झमाझम वर्ष' लगलै ।रहि रहि के बिजलोकाक चमक पर जोर जोर से तड़कन एसगरि सूतलि सुखेत वालीक हृदय मे कपकपी भैर देलकै ।ओ जोर से घिघियैत बाजलि --- कत' गेलै ?अबौ ने ! हमरा एसगर आइ बड्ड डर होइये !! ओसरा पर मशहरी तर मे सूतल पंचम करोट बदलैत बाजल - बलौ के डर करै छै !हौलमानजी के नाम ल' बम्मा करोटे सूति रहौ !!! - नै••• ई घरे अबौ ! एकरा बिना निन्न आइ नै हेतै !! - एते औनराग आइ कत' से चैल एलैये ? -से ई जे कैह लौ ! हैया हम बिलैया खोइल देलियै !!! केवार खुजैक चरमराहट भरल आवाज सुनि पंचम मुस्कियैत घर गेल आ पुन: बिलैया लगबैक खट सन आवाजक संग नि:शब्द भय गेल आ बाहर ओहिना वर्षाक संग मेघ तड़ैकते रहलै । ---------------_--------- +91 98717 79851: हमर परिचय- डाॅ. प्रमोद झा "गोकुल" ग्राम पोस्ट दीप (पश्चिम) भाया-झंझारपुर (R.S) जिला-मधुनी विहार(मिथिला) फोन नं. 9871779851 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। निवेदिता झा दू टा बीहनि कथा १ मुंहबजना विवाह चारि दिन पहिनें भेल छलैन ,गीता मोन में सोचैत रहथि मिला जुलाके नीके स्वभाव छनि हिनक ,बेकारे डरायत रहि कि केहेन भेटता ,सोचैत लाल भ गेलैन गीताक मुखारविंद , काल्हि चतुर्थी में किछ उपहार सेहो भेटत ,सखी सब हँसैत रहथि मिली जुलीके कतऽ छी गीता धडफडा गेली  ,आँचर माथ पर रखैत ई कि छैक अहाँ हमर एको टा कपड़ा नहि धोलहुँ ,अटैची उल्टा देलखिन नवका ओझा ,ई सब नहि चलत हमरा घर में अहाँ चारि दिनसँ एके कपडा पहिरने छी ,फेर हम अटैची के कोना खोलितौं ....ई शब्द कतौ कँपैत रहि गेल.... चतुर्थी के मुँह बजना भेट गेल छलैन २ स्टेण्डर्ड विवाहक साँठ खुलल ,बहुत रास साड़ी , देखय वला सब बहुत प्रसन्न भेलखिन मुदा घरक लोकक मोन झामरि पडि गेलैन किया त ओ सब साडी वर प़क्ष लौटा देने रहथि जे सब कन्यापक्ष खानपीन में पठौने रहथि एतेक पाई कोडी लेलाक अहेन कृत्य माँ अहाँ मोन छोट नहि करू निर्मला बजलीह पिताक माथक कर्ज हुनका ज्ञात छलैन चारिम दिने  द्विरागमन भ गेलैन सांठके दुसैत सब ननदि मुँह बनब लगलि भोरे भोर ननदि ऐली ,भौजी चिकन नुआ पहिरब बहुत लोग देखैय लेल आओत नवकी कनिया के दाय अहि कहू हम कि पहिरि ? ई ‘ नुआ ‘ जा दाय अहि नुआ के त अहाँ सब लौटेने रहिए कि अहाँ सभक स्टैंडर के नहि अछि निवेदिता झा दिल्ली अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ओम चौधरी सुरज माटि-कादो गिजैत छल. माँ सोरपारलखिन बउआ बरखा मे कि कादो गिजै छि। आबी जाउ नए त मोन खराब भ जैत। सुरज - माँ बरखा स माटि गिल भ कादो बनि गेल हम आमक गाछ रोपि रहल छि जे पैघ भेला पर  माटिकें सब दिन रखबारी करैत रहै । हाँ स्त्रिगणो त माँ होइत छथि मुदा सब पुत कहाँ गाछ बनि ठाढ़ रहैत अछि जीवनकें सम्मानित रखबा हेतु. ओम चौधरी दिल्ली अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। कल्पना झा २ टा बीहनि कथा १ नबका धोती आइ  ओंकारनाथ ठाकुर ततेक उत्साहितछलथि जे पहर रातिये निन्न टूटि गेलन्हि,बेटा आलोक सूति कऽ उठितथिन ताहि सँ पहिनहि स्नान ध्यान कऽ कुर्ता धोती पहिरि तैयार भऽ गेल छलथि।जाहि दिन सँ  पद्म श्रीक लेल नामक घोषणा भेलैक तहिये सँ एहि दिनक प्रतीक्षा छलन्हि।परसूए पटना सँ दिल्ली आबि गेल छलथि बेटा ल'ग ।                    -------हौ आलोक जल्दी करऽ हम तैयार छी , राष्ट्रपति भवन पहुँचहु मे तऽ दू घंटा लागि जेतऽ ?    --------कतेक हड़बड़ाइत छी बाबूजी ,दू घंटा नहि लागत एक डेढ़ घंटा मे पहुँच  जाएब ,अहाँ  तैयार छियै ? एहिना जेबै ? धोती तऽ बड़ पुरान लागैत अछि ,थम्हू हम अपन बला नबका धोती आनैत छी।                                                             --------धुर्र रहऽ ने दहक ,कोनो हमरा धोती पर पुरस्कार भेटि रहल अछि,धोतीए पर भेटितइ  तखन तऽ तोरे ने भेटितऽ ..........आलोक के  एहि बातक कोनो जवाब नहि फुरएलन्हि । २ हेराइत बोली "हैलो.... हँ..काकी गोड़ लागैत छी...... कोना मोन पड़लहुँ आइ  हम ? " "नहि,बस ओहिना मोन पड़ल  जे अहाँ छठि करैत छी , त' सोचल हाल चाल पूछि लैत छी, कोना की ओरिआओन  भ' रहल अछि, आइ त' " नहाय खाय "  होएत ने ? " "की काकी.....अहाँ सभ दिन पटनामे रहैत रहैत ई कोन  बोली बाजए लगलहुँ ,अपना मिथिला मे "नहाय खाय" कहियासँ होमए लागल "नहाय खाय" नहि अरबा अरबाइन कहियौ , हँ....आइ अरबा अरबाइन अछि । अपना मिथिलाक लोक त' बारहो  मास छत्तीसो दिन नहाइए क' खाइत छथि ।" कल्पना झा पटना अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। भुवनेश्वर चौरसिया 'भुनेश' संजय केर अॅं‌इख """"""""""""""""""'" -धृतराष्ट्र बियाकुल छथि युद्ध भूमि केर हाल जानैक लेल। -तखन संजय पान बिड़ि केर लेल पानक गुमटी पर चलि गेल। -अएल त' धृतराष्ट्र खिसियाइत कनअ चैल जाय छी अहां पता नै आय कोन बेटाक नम्बर अछि। - कनि लगाबू तऽ दिव्य दृष्टि आ सुनाबू अहां युद्ध भूमि केर हाल! -संजय एखन महाबली भीम केर रथ दुशासन केर ओर बढि रहल अछि। -उत्सुकता मे आर किछ नया ताजा आय कत्ते सैनिक मरल। - संजय महाराज आय तऽ युद्ध भूमि मे उड़ि रहल धूल मे किछ नै दिखाय य' आ भनभनायल चौसर खेलैत घड़ी आ द्रोपदी केर इज्जत दाव पर छल तऽ कंठ नै फूटल तै ऊपर से भीष्म पितामह सेहो अॅं‌इख मुनले छल। - धृतराष्ट्र संजय जी किछ नै बूझलौं कनि ठीक सं देख केर बाजू। -संजय महाराज हमरा एखन संख केर ध्वनि सुनाय देलक सुर्य आस्त भ' गेल मुंह बला पान थुइक देलक। - अन्हरा तहिनअ निरवंश भ' जैबैं। -भुवनेश्वर चौरसिया 'भुनेश' अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। जगतरंजन झा बीहनि कथा ~मालिक यौ एगो बात बुझलिऐ अमेरिका में जो बाइडेन नवका राष्ट्रपति बनलै ! ~ ऐं रौउ ढेनमा तोरा कहियो गांव सँ दरिभङ्गो जाय केँ जरूरी नय परलौ तँ अमेरिका के राष्ट्रपति कियो बनले से बुझि कऽ तौं की करबही ? ~ यौ मालिक आखिर छी तँ हमहूँ मैथिल नैं? आ सबदिन ब्राह्मणे लग रहलहुं, भरि दिन टीवी देखू समाचार बुझू आ चौक पर चोपैत कऽ गप्प दियौ, लोक बुझत बड्ड काविल छय! ~ ढेनमा चौक पर गप्प देनहार सबहक बपौती कोठी खाली होय दहि तहन पमौजी घोसरतै तौं एही सभमें नय पर अपन हाल रोजगार में लागल रह ! ~ हां हां मालिक से हम बुझय छी तहन ने जीवन भरि अहाँके चाकरी केलहुँ !! -जगतरंजन झा अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। शेफालिका वर्मा हँ एहनो होयत छैक सासु पुतहुक ताना तानी सं परेश हरदम तनाव में रहैत छल।  . घर मे कोनो काज मे गड़बड़ तँ मायक माथे ,  नीक काजक श्रेय रीना अपना पर।  माय दुखी त' रहिते छलीह परञ्च मौन मूक बेसी रह लगलीह। रीना अपन नैहर में अपन माय के जे देखने छलीह  से  हुनको बाल मन में सासुरक रूप एहने बसल छल। एकटा बात सुनैत छी  ?----पतिक प्रेमपूर्ण स्वर सुनि --बाजू ने की कहैत छी! चाह बना रहल छी! माय मंदिर गेल छलीह --चाहक दुनू कप ल' रीना डाइनिंग टेबुल पर बैसैत कहू की कहै छी! अपना सभ ब्याह मे अग्निक सोझा किरिया खेने छलौं -- अपना सब एक दोसराक सुख दुःख में संग रहब , एक दोसराक सहगामिनी रहब ! ---हं हं हमरा मन अछि --से अचक्के अहाँक किएक मन पड़ल ? हम सोचैत छी जे हम कतेको ठाम चुकि जायत छी --अहाँ जाहि ढंग सं हमर माय सं गप्प करैत छी , ओहिना त' हमरो अहाँक माय सं गप्प करवाक चाही -- --की एहनो होयत छैक --परेश ओकर कान्ह  दबवैत बाजल ---हं रीना एहनो होयत छैक ,,,,, A 103, सिग्नेचर व्यू अपार्टमेंट्स डॉ मुखर्जी नगर , दिल्ली 110009, M, 9311661847 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। प्रभाष अकिंचन भरोस ******** एकटा  झुनकूट  वृद्ध  बाप  धड़फराएल  हुलसि क' एटीएम  में  घुसलाह.  एटीएम कार्ड  बेर-बेर  मशीन  में  घुसबैत आ  निकालैत  बड़बड़ाईत  बजलाह.... ऐहन  भइये  नहिं  सकैत  छै.... ... कहीं एटीएम कार्ड  त' नहिं  खराप  भ' गेलै... फेर  कार्ड  के  बेर-बेर  पोछैत  आ  मशीन में  लगाबैत..... वृद्ध  पसीने पसीने  त'र-बतर  आ  परेशान  होइत फुसफुसाइत... ऐहन  त'  भइये  नहिं  सकैत  छै.... बगल  में  बैसल  गार्ड  पुछि  उठल... की भेल  बाबा... वृद्ध  बजलाह... हो  बेटा  कहने  रहय  दवाई  लेल पैसा  पठा  देब...एक  हफ्ता  स'  रोज  एटीएम  में अबै  छी... आई  पूछलियै  त'  कहलक  आई  निश्चित  पठा देब... हमर  बेटा ऐहन  नहिं  अछि.. कहलक  त' जरूर  पठौने  होयत... गार्ड  बाजल... पाई  नहिं  पठौने  होयत... मशीन  ठीक  छै... खाता  में  पाई  रहत  तखने  न  निकलत ... जाऊ  बाबा  घर  जाऊ... वृद्ध  कल्पैत  बाहर  निकललाह... पता  नहिं  की  भेलै... आब  की  हेतई... एक  हफ्ता  स'  दवाई  छुटल  अछि... बजैत  बजैत  दम्म  फुलय  लगलन्हि.... #प्रभाष_अकिंचन अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। मुन्नी कामत दू टा बीहनि कथा १ सिया -माय गे  एक दिन तोरा हम चान पँ ल' जेबौ... - हँ.. हँ... आय बड़ स्नेह झड़ै  छै बाज की चाही.....? - माय गे हम सेना मे भर्ती लेल एनडीए के फार्म भरए चाहिए चियैय  तू बाबू के कहीं न..... ( सिया के बात बिंदेसर सुनैत  गदगद मन सँ बाजल) - सिया तू अपन  पढ़ाई सँ  समाज में हमर प्रतिष्ठा ऊँच केलअं .... हम अहाँक अहिं सपना के पैंख देव... २ दरेग - कक्का ई ककरा बियैह आनलहक.... न पैर सँ चट्टी उतरैं छै आ न कोड़ा स' बेटी.... हूं.... अकरो पोसअ आ अकर  बेटियों क'... ( सिलिया  दोती  बियाहल जोड़ी के देख तनतनैत  बाजल) - गे सिलिया ऐना किया जहर बोकरै छ', बेचारी के घाव अखन ताजा छै किया खोरचै  छ'....? तोहर चाची के मुईला कि हम बउआ के छोइर  दोसर बियाह करी.... नै न...! त' फेर ई कोना अपन बेटी के छोड़थिन.... अपन मनक भाप ठंडा कर आ  हिन्द चाचीये जेका आदर- सम्मान कर। शंकर के बात सुईन फुलिया के दुनू आँईख सँ लोड़ टघैर गेल.... मुन्नी कामत अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। मिसिदा. ट्राय एगेन लैटर गयाराम भाईजी हेडमास्टर छलैथ. पौरकां सोनगढ़ इस्कूल सँ रिटायर भेल छलाह. कहवी छै बूढ़ बरद आओर बूढ़ मनुख केर कोन सम्मान ? ओ भौजी लेल,एगो नवका एंड्रॉयड मोबाइल कीन देलैन. एकबेर गयाराम भाईजी केँ मेरठ जाय पड़लैन्ह. इएह बीच कोरोना कारण लाकडाऊन भ' गेलै, हुनका मेरठ मे रह' पड़ि गेलैन्ह. भौजी, भाईजी केँ फोन केलखिन. गयाराम भाईजी, मोबाइल पर बात करैत बजलाह, "....बांकी सब त' ठीक अछि, लाकडाऊन छै, घ'रे मे रहब....हाँ, मोबाइल नीक जकाँ राखब...." "ऐंह, वैह त' हमर सहारा अछि, फेसबुक पर हमर साढ़े चारि सै सँ उपर दोस बनि गेलै.... जनै छियै, यू-ट्यूब पर नीक-नीक चीज बनौनाय सीख रहल छी....?" भौजी जबाव देलखिन्ह. "सैह कहैत छी, खसि पड़त तखन.... फेसबुक पर जँ केओ आनलाईन नहि देखत त' बूझि जेतै जे एहि कोरोना मे अहाँ....." तखनहि झनाक सँ किछु पटक' केर आवाज एलैन्ह मोबाइल बाज' लागल, "मोबाइल सब्सक्राइबर इज आउट आफ कवरेज एरिया ट्राय एगेन लैटर....." अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। मृणाल आशुतोष आंदोलन 'यौ कक्का, खा लिअ न!" आवाज सुनि के खेतमे हर चलबैत गनेशी हड़बड़ा गेल। ई त मनीषबा के आवाज़ लगैत छै। मुदा ओ एत कथि लेल एतय। मुड़ी के देखलक त सच मे मनिषे छल। "रौ, तौं एत कथि लेल आबि गेलें। पेट काटिके इहे लेल टोन भेजने छलखुन बड़का भइया।" "नय यौ कक्का। मन भेल कि इहे बहाने अपन खेत देख लेब।" "आबि ई अप्पन खेत रखल कहाँ?" "ई कौन बात कहलिये यौ?" "पिछला साल रानीके बियाह मे एकरा बेचअ पड़ल। मालिक नीक आदमी छतिन्ह। बटैया करबाक लेल हमरे द देलाह।" "ओह्ह।सरकार अहाँ सभक कीछ मदद नय करैत छी की?" "हाँ, कीछ मदद त अवैत छै। ओत सँ एक टका अवैत छै तो हाथ मे चारिओ आना नय मिलल।" "अहाँ किसान सब मिलिके आंदोलन किया न करैत अछी?" "आन्दोलन करबाक लेल पेट भरल भेनाय जरूरी छै न। अहिं बताऊ। आब हम आंदोलन करी कि घर-परिवार के पेट भरि। *** मृणाल आशुतोष अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ज्ञानवर्द्धन कंठ दूटा बीहनि कथा १ दाबा लखनकाका बड्ड खिसियायल रहथिन।कहलथिन- "आँय यौ बुचकुन?हमर दाबा पर अहाँक कोन दाबा?कोदारिक छौ सँ हमर दाबा ढाहिक' अहाँ अपन डाबा टाँगि देलियैक,तँ अहींक दाबी भ' गेल? एक्के दाबि अपन दबिया ल' क' अहाँ अनकर हक कपचि लेबैक,से नहि हैत!कथी पर एतेक दाबा अछि यौ?जोरगर छी,तँ कमजोरकेँ दाबि देबैक?चलू,पंचायतमे! दबाड़ पड़त, त' सभटा दाबी घोसरि जायत।चलू,अहाँक दबाइ करबै छी हम!"पंचायतमे दबदबाबला दबंग सभ अयलाह।हिनके पर दबाव पड़ि गेलनि,दाबी छोड़बाक लेल।दाब सँ दबि ओतय सँ विदा भेलाह।साँझमे देखलनि- पंच लोकनि बुचकुनक दोकान पर मधुर दबाक' दाबि रहल छलाह। २ पराश्रित -"आँय यै, आइ अपन बुच्ची कंपनीमे काजो करय लागलि।कोना दिन बीति गेलैक, से पते नहि चलल।आब तँ नीक बर-घर ताकि....." -"से त' छैके!" -"अपन घर चलि जायत बुच्ची।नञ यै?अपना सभक लेल त' ओ पाहुने भ' जायत!आब अहीं अपने सँ मिलान क' क' देखू।अहाँ कतेक दिन अपन माय-बाप लग रहि सेवा करैत छियनि?हुनका लोकनिकेँ कतेक आर्थिक मदति क' पबैत छियनि?तहिना त' अपनो बुच्ची किने?" -"किएक?ओ कोनो हमरे जकाँ पराश्रित छैक?" अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। राजीव कर्ण झुठक महत्व ...माँ हम जाय छी इंटरव्यू दै ले। ... जाऊ, भगवती अहाँ के सफल करैथ। ... हम अंदर आबि सकै छी सर? ....हाँ, आऊ। .... कते पढल छी अहाँ ....सर बी. कॉम. केने छी। ....कतौ काज केने छी। ....जी, किछु दिन अकाउंटक काज केने छी एकटा कंपनी में। (आधा घंटा बातचीत के बाद) .....अहाँ जाऊ, पहिले झूठ बजनाइ सीखू। कियेक त बाजार में झूठ फरेब चलै छै। सच के कोनो भाव नै छै। अहाँ निश्छल आदमी छी तैँ बता देलौं। जाबैत तक झूठ फरेब नै सीखब बौआइते रहब। ( निश्छल आदमी के झूठ फरेब सँ कोन मतलब, उमर बीत गेलैन्ह अखन धरि बौआइते छैथ कहुना गुजर चलै छैन्ह।) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। जगदानन्द झा 'मनु' ४ टा बीहनि कथा १ उचितवक्ता रस्ता कात एकटा सिलाई मसीन लअ क बैसल दर्जी। छोट कपड़ाके पैघ आ पैघ कपड़ाके छोट करैक काजमे लागल। औकर लऽगमे पहिनेसँ एकटा करीब पच्चपन वर्षिय नीक लोक  ठार भय किछु काज कराबैत। दीनानाथ भाई एकटा झोरामे किछु कपड़ा लेने, ओहि दर्जीक दोसर कातमे चुपचाप ठार भ गेला। दर्जी - (मसीन पर हाथ चलबिते दीनानाथ भाई  के दिस देखैत) "हँ भाई।" दीनानाथ भाई हाँके इसारा मे मात्र अप्पन माथ हिला देलकिन्ह, जेना कि ओ कहैत चाहैत हेथिन, पहिने ओई ग्राहक के जेए दियौन। हुनक मोनक ई गप्प बुझि पहिनेसँ ठार दोसर ग्राहक बजला - "कोनो ने अहाँ कहियौन, ई नम्हर काज छै चलिते रहतै।" दीनानाथ भाई एक डेग आगू आबि, अप्पन झोरासँ दूटा फुल पेंट निकलि, सिलाई मसीनक टेबल पर रखैत - "ई एकटा के निच्चासँ तीन ईंच छोट क देबै आ ई दोसर के निच्चासँ तीन ईंच छोट करब संगे डाँड़मे सेहो दू ईंच कम क देबै।" दर्जी- "ठीक छै दू घंटा बाद लय जाएब।" "ठीक" - कहैत दीनानाथ जी ओई ठामसँ बिदा होबाक हेतु जहाँ ने अप्पन डेग, पाछु घूमेलनि कि ठार दोसर नीक लोक बाजि परला- "एहिमे संकोचक कोन गप्प, जखन धिया पुता बापसँ पैघ भ जाई छैक तँ छोट कपड़ा ठीक कय क बापे के ने पहिरअ परै छै।" दीनानाथ जी सुनैत चुपचाप ओहि ठामसँ चलि देला। २ मनुक्खक जीवन “बौआ पैघ भए कऽ अहाँ की बनब ?” “मनुक्ख।” नेनाक एहि उत्तरपर चारूकात ठहाका पसरि गेल। मनुक्ख ! मनुक्ख तँ हम सभ छीहे, मनुक्ख बनक बेगरता की ? मुदा नेनाक आखर ‘मनुक्ख’ हमर हृदयमे तऽर धरि धसि गेल। की आइ काल्हि हम मनुक्ख, मनुक्ख रहि गेलहुँ ? हमर सभक भीतर मनुखताक कोनो अवशेष एखनो बचल अछि ? मनुक्ख की ? खाली मनुक्खक कोखिसँ जन्म लेने भऽ गेलहुँ ? जन्म लेलहुँ, नम्हर भेलहुँ, ब्याहदान भेल, दू चारिटा बच्चा जनमेलहुँ, ओकर लालन-पालन केलहुँ, बुढ़ भेलहुँ, मरि गेलहुँ, इहो जीवन कोनो मनुक्खक जीवन भेलै। आइ मरलहुँ काल्हि दुनियाँ तँ दुनियाँ १३ दिन बाद अप्पनो बिसरि गेल। मनुक्ख जीवन तँ ओ भेल जेकर मृत्यु नहि हुए। मृत्यु देहक होइ छैक, कमसँ कम नामक मृत्यु तँ नहि होइ, नाम जीबैत रहै, ओ भेल मनुक्खक जीवन। ***** ३ अरबाचाउर “गे बौआ कनी काकीसँ अरबाचाउर माँगि कए नेने आ।” “नहि, हम नहि जेबौ, हमरा माँगैमे लाज लगैए।” “दैया ने, की करबै देखी कतेक दिनपर मामा एलैए, की कहतै एकरा घरमे अरबोचाउर नहि रहै जे उसनाचाउरक भात खुएलक।” “मामक ई सोचनाइ बढ़ियाँ, की काकीक ई सुननाइ–आइब गेलहुँ ढकनी लए कऽ माँगै लेल।” ****** ४ छबी ब्याहक पन्द्रह बर्ख बाद सा० हमर पर्स केर तलाशी लैत, “सभ कियो अप्पन अप्पन पर्समे अपन कनियाँक फोटो रखने रहैए मुदा अहाँ.....!” “पर्समे फोटो रखैक बेगरता ओकरा परै छैक जकरा अपन कनियाँक छबी इआद नहि भेल होए, हमरा तँ अहाँक छबी हमर आँखिक रस्ता होइत हमर करेजामे जा बसल अछि। एहनठाम ई कागजक फोटो राखैक की बेगरता।” ***** जगदानन्द झा मनु- मोबाइल न०  9212461006 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। विरेन्द्र कुमार  झा कोना बुझब मयंक के पापा महानगर मे नौकरी करैत छथि । सपरिवार संग रहैत छथि । मयंक एकटा नीक स्कूल में  पढ़ैत  अछि । ओहि  स्कूल में  एकटा  मैथिल  शिक्षक  सेहो  शिक्षण कार्य  करैत  छथि । एक दिन स्कूल मे  कोनो  काज सं  मैथिल शिक्षक लग गेलाह  आ बजलथि ," सर  हमहुं  मिथिलांचल के  रहय वला छी , हमरा पोथी लेबाक अछि से  कतेक टाका  लागत ? शिक्षक  तमसाय गेलाह आ कने  जोर सं  बजलाह,"  अरे तुम यहाँ क्यो हो, जावो  मैडम के  पास , वही  बतायेंगे ? मयंक सोचय  लगलाह  ,"  हमर पापा त कहने  रहैत जे  ओ  मैथिल शिक्षक से  मातृभाषा मे गप करैक लेल , मुदा  ई  हिन्दी मे  हमरा सं गप केलथि । मयंक मैडम लग पहुँचलाह , " मैडम बजलीह," सबटा गप हम एहिठाम सं  सुनल , ओना हमर घर  केरल छी मुदा  हम मिथिलांचल मे  दुई  साल रहल छी , मैथिली हमरा बाजय अबैत अछि, बाजू  कोन काज अछि । मयंक हिनका से  मैथिली मे  बात  केलथि , बद्द  खुशी  भेलैन । अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। विद्या चन्द्र झा "बमबम", साहित्य मंथन आ बीहनि कथा बीहनि कथा'क मादे जखन कखनहु हम सोचैत रही तखन एकटा भिन्ने प्रकारक सूगबुगाहट जकाँ हमरा मोन मे होइत रहैत छल । भिन्न -भिन्न कथाकार लोकनिक बीहनि कथा पहिने पत्र-पत्रिका सभ मे पछाति सोशल मीडिया पर सहो अभर' लागल जकरा हम ओहि समय मेँ एकटा पाठकक रुपे पढ़ैत रही । से हमरा बीहनि कथा खूब रूचैत छल परंच पचैत नै छल । अपना सभ ओतए कहबी छै "जूरब,रूचब आ पचब इ तीनू बड्ड भागे बला'क होए छै" । से जूरै आ रूचै त' छल परंच पचैत नै छल ,  तेँ इ कहब जे ओकर कथानक खराब रहैत छलै तांय आकि विधिपूर्वक तैयार नै कएल गेल छलै अथवा अधखिच्चू रहैत छलै तांय नै पचैत छल सेहो बात नै छलै । एहिमे बात इ छलै जे जखन कखनहु हम बीहनि कथा पढ़ैत रही तखन हमर मोन - मस्तिष्क मे एकटा प्रश्न ठाड़ भ' जाइत छल जे इ कथा साहित्य मे इ बीहनि कत' सँ आबि गेलै ? बीहनि त' किसानक घर आ माटिक तर रहैत छलै परंच इ साहित्यक नगर केँ कोना धकिया लेलकै ? फेर कहिएक जे छोर ने हमरा कोन मतलब अछि, कोनो कथा रहै त' हमरा एकर रसास्वादन सँ मतलब अछि । परंच बीहनि केँ जनबाक उत्कंठा आ जिज्ञासा हिए बीच औँड़ मारए लगए । हम अपन जिज्ञासाक शांति हेतु बीहनिक अन्वेषण प्रारंभ केलहुं,  काल क्रमे जखन विभिन्न प्रकारक बीहनि केँ अबलोकन कएलौ आ तकर उत्तर पौलौं जे इ साहित्यकारक घरक आ पोथी परक बीहनि थिक । जहिना साहित्य मे आन-आन विधा सभक उतपत्ति समयक प्रभाव मे आवि केँ भेल ठीक ओहिना मैथिली मे बीहनि कथा केँ सेहो भेल । हँ एहि मे तत्कालीन बीहनि कथाकार लोकनि कनेक सतर्कता अवस्य देखौलनि समयक परिदृश्य बदलै सँ पहिने यानी अन्हार होइ सँ पहिने सूर्यक रूख देखि पहिल साँझक पूर्व  समूचित प्रकाशक बेबस्था क' लेलनि,  पाठक मूड बदलै सँ पहिनहि बीहनि कथा केँ स्थापित कए देलनि । ओ सभ युगद्रष्टा युगपुरुष छलाहल जे समयक मूव'क भान केलाह , जे अबै बला समय भाग-दौड़ सँ भरल होइ बला छैक जाहि मे लोक लग समयक घोर अभाव रहतैक परंच एहनो स्थिति मे ओकरा साहित्यक बुस्टर भेटैत रहौक ताहि हेतु बीहनि बनौलनि । लोक सभ ( साहित्य पाठक वर्ग ) अपन मनोरंजक/ज्ञान/आत्मतृप्ताक हेतु भविष्य मे महाकाव्य ओ उपन्यासे सदृश्य कथा केँ सेहो अपेक्षाकृत कम पसिन करत । कविता दिस पुनि पाठक केँ मोरब आर कठिनाह अछि , किआक त' कविता सँ ओही दिन लोकक मोह भंग भ' गेलै जाहि दिन काव्य सँ रस ,अलंकार आ छंदक अंतिम संस्कार भए गेलैक । मात्र एकोदिष्ट साले-साले होइत छै सेहो बेसी दिन धरि नहिए हेतैक जे - - - -। तखन त' एहन स्थिति मे मात्र एकहि टा ठोस विक्लप सोंझा एलै बीहनि कथा जे अमृतस्यपुत्र  साबित भेल । जहिना सागरक मंथनक उपरांत अमृत-कलश बहराएल तहिना साहित्य मंथनक पश्चात बीहनि कथा बहराएल । अमृतकलश देवता लोकनि केँ राक्षस सँ रक्षार्थ  हेतु आ बीहनि कथा साहित्यक भस्मासुर सँ साहित्यक रक्षार्थ हेतु साहित्यकार के हस्त गत भेल । बीहनि कथा आखिरकार बीहनि कथा किआक ? एकर पाछू विभिन्न साहित्यिक लोकक भिन्न विचार भए सकैत अछि । परंच हमरा अन्वेषण मेँ जे भेटल ओ एना अछि :- मैथिलीक लोक भाषा परम्परा मे 'बीहनि' शब्दक प्रयोग 'बीया' हिन्दीक 'बीज' आ अंग्रेजीक 'सीड'क लेल होइत रहल अछि । जहिना एकटा बीया सँ परिपूर्ण फलदार वृक्षक निर्माण समय काल परिस्थितिक अनुसार संभव होइत अछि, ठीक ओहिना साहित्य मे 'बीहनि कथा' भेल जाहि सँ पाठकक हृदय मे पाठकक भावानुकूल भावोत्तेजनाक उत्पत्ति होइत अछि आ पाठक केँ हृदय मे बीहनि अंकुरित भए कला'क स्वनिर्मित विधानक अनुसार निर्मित होइत अछि, परंच इ निर्माण परम्परा द्वारा स्वीकृत विधान आ अभिप्रायक अनुसारे होइत अछि । जे अविश्वसनीय रहितो विश्वसनीय होइत अछि । पाठक क्षण भरि मे सम्पूर्ण घटना केँ जीव लैत अछि । जाहि मे ने समय केँ वर्बादी होइत छैक आ ने विचार-विनमयक । विद्या चन्द्र झा "बमबम", शोधार्थी ( पटना विश्वविद्यालय ) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। घनश्याम घनेरो बीहनिकथा आ  'घनेरो'क अवधारणा बीहनिकथा की छैक? एकर संबंध ककरा सँ छैक? एकर प्रारूप केहन होइछ? बस्स! एतबा जानि जाइ, एकटा नव विधाक जानकारी पूर्ण भ' जाइछ। 'बीहनि' शब्द सँ 51% लोक अनभिज्ञ छथि आ 'बीहैन' शब्द सँ 11%। अर्थात शब्द उच्चारणक असरि मष्तिष्क कोना करैत छैक तकर आकलन कयल जा सकैछ। मैथिलीमे शब्दक लिपिबद्ध आ उच्चारण सामान्यतः आम लोक केँ दुविधामे रखै छैक। जखन आम लोक एकरा पढबा लेल उत्सुकता देखबैछ, अपने मातृभाषा  अपनहि क्लिष्टक अवधारणा सँ प्रताड़ित भ' जाइत छैक। तकर कारण अल्प पढ़ब आ मातृभाषा अछि तँ बाजि लैत छी वा मुंह सँ खसि पड़ैत अछि वा भुलचुकमे मैथिली शब्दक उच्चारण भ' जाइए, छैक। 'बीया वा बीज (seed)' केँ अधय्यन एकटा गूढ़ विषय थीक। एकर संबंध मातृत्व सँ सेहो छैक। खाहे मानव हो वा जीव-जंतु आ गाछ बिरिछ। जखन बीया केँ अनुकूल स्थान भेटै छैक तँ किछु सृजन करबा लेल अग्रसर होइत अछि। तखन होइत छैक स्फुटन। पेंपी... दू पतिया.. तखन एकरा कहैछ -'बीहनि'। आब बीहनिकथा पर अवलोकन करी तँ एकर स्वरूप अनमन एहने होबाक चाही। आमक आंठीमे लतामक पेंपी नहि हेतै तहिना जाहि कथामे एक्के कथ्यक बानगी जे स्वर मुखरित हो वैह बीहनिकथा कहौत। तैं आकार छोट हेतैक।बानगी मे100 सं 125क लगीच.निष्कर्षत: पौराणिक स्त्रोत्र जनरल कथाक परिष्कृत रूप वा कथाक लेटेस्ट वर्जन! एहि विधाकेँ जे भाषा अपनाओत तकर भविष्य दीर्घजीवी हेतैक। कारण सभमे ई गुण तुरत नहि होइछ जे अपन उत्कंठा केँ कागजपर उतारि सकय। हँ, तखन अपन उत्कंठाक मूल सिद्धांत केँ लिपिबद्ध क' साहित्यक भंडारण क' सकैत अछि। तकर फलाफली देखल जा सकैछ जे मैथिलीमे नव साहित्य सृजनकर्ताक उजाहि आएल छैक। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। मुन्ना जी बीहनि कथा-- मानकीकरण ओ तुलनात्मक पक्ष """"""""""""""""""'""""""""""""""""""""""""""""""""""""""'''''""""""" मैथिली कथा साहित्य मूलत: संस्कृत भाषा साहित्य सं अनुदित भ'अपन पएर पसारने छल।एकर बीजारोपन चन्दा झा द्वारा विद्यापतिक 'पुरूष परीक्षा' सं भेल छल।कालान्तर मे मैथिली कथाकार बाङला कथा माध्यमे पाश्चात्य कथासाहित्य सं परिचित भेला।तत्पश्चात मैथिली कथा लेखनक कथ्य,शिल्प आ विषय परिमार्जित भ' मैथिली कथा साहित्य के नव दृष्टि देलक आ ओ संस्कृतक शब्द ,कथा/गल्प नामे लिखाइत रहल।पछाति प्रो. रमानाथ झा सदृश्य विद्वान/आलोचक ,अंग्रेजीक प्रभावे एकरा अंग्रेजी मे Short Story आ ओकर अनुवाद ' लघुकथा कहि संबोधित केलनि।तहिया सं इ कथा/ गल्प ,रचना त' ओही नामे होइत रहल मुदा विधागत ' लघुकथा ' (Short Story) विधाक अन्तर्गत मूल्यांकित होइत रहल।आ ताहि परिणामे मैथिलीक सब संग्रह पर अंग्रेजी मे Collection of Short Story अनिवार्य रूपें लिखल भेटत। तकर पछाति मैथिली साहित्यक इतिहासकार लोकनि सेहो कथा/गल्प नामक रचना कें लघुकथा विधाक श्रेणी मे राखि व्याख्या . करैत रहलाह।" संप्रति गल्प वा लघुकथा,उपन्यास सं अधिक लोकप्रिय भेल जा रहल ऐछ।तकर प्रबल कारण पाठक वर्ग मे क्रय शक्तिक क्षीणता वा पलखतिक अभाव, से नै जानि।" --डॉ. जयकान्त मिश्र-मैथिली साहित्यक इतिहास(प्रकाशक- साहित्य अकादमी)ऐ फरिछओठक पछाति अंग्रेजी साहित्यक विधाक पृष्ठभूमि मे ओहि विधा परिवारक अंग भ'  स्थापित भेल। आगू ओकरा आओर फरिछबैत दुर्गानाथ झा श्रीश लिखै छथि--" आइ मैथिली साहित्यक एक मात्र उपलब्घि थिक लघुकथा(Short Story) पूर्वक कथाकार लोकनि गल्प आ उपन्यासक बीच शिल्पगत अन्तर नै बुझैत छलाह।मुदा आब इ स्पष्ट ऐछ।जाहि सं लघुकथा(कथा/गल्प नामे) विधागत स्वतंत्र परिचिति बना पओलक ऐछ।"--मैथिली साहित्यक इतिहास-दुर्गानाथ झा श्रीश।" हमरा मैथिली प्रतिष्ठा वर्गक छात्र रहने मैथिली साहित्यक इतिहासक अध्ययनक अनिवार्यता छल। एहि अध्ययनक क्रमे मैथिली कथा के विधागत ' लघुकथा( Short Story)बुझबाक अवगति भेल। हम आश्चर्य चकित रही अग्रज सबहक हिन्दी लघुकथा विधाक मैथिली अवतरणक रूपें अंधानुकरण पर, ई की ?पहिने सं जे विधा विद्यमान आ स्थापित ऐछ(कथा/गल्प नामे) ' लघुकथा(Short Story)।तहन ओइ विधाक दोहरीकरणक की खगता ?माने पिता आ पुत्रक एकहि नामे पुकार ! जहन की दुनूक चरित्र,प्रकृति आ क्रियाकलाप एक दोसराक विपरीत। फेर नकल वा मिझ्झरक अज्ञानता किएक ? ओही अज्ञानता वा अंधानुकरण सं पार पएबाक आ विधाक शुन्यता के भरवाक लेल अवतरित भेल बीहनि कथा विधा (1995)। सहयात्री मंच ,लोहना(मधुबनी)द्वारा भेल साहित्यिक बैसार मे सामूहिक रूपें सर्वसम्मति सं एहि विधाक अवतरण भेल छल। ऐ विधाक नाम की राखल जए ताहि पर बहसक पछाति श्री राज द्वारा ताकल नाम-" बीहनिकथा" पर  सर्व सम्मति सं स्वीकृति द'आगू बढ़ाओल गेल।आ तहिया सं मैथिली कथा साहित्यक दू गोट विधा-पहिल,लघुकथा(Short Story)आ दोसर " बीहनि कथा(Seed Story)चलन सारि मे रहि गेल। 25 बरख सं कछुआ चालि सं चलैत बीहनि कथा विधा साहित्यिक छद्म  खरहा सं टपि अपना के विजेता कहेबाक पात्रता आब हासिल क' लेने ऐछ।जन्मक पछाति ठेहुनिया मे कतेको के सैद्धांतिक पटकनिया दैत डेगा डेगी बढ़' लागल। तकर पछाति एकरा दबेवा/माटि मे गोड़बा लेल किछु तथाकथित/स्वघोषित विद्वान सक्रिय भ' गेला। फलत:एकर चालि बाधित होइत ठमकि सन गेल। सोझां मे ' एकला चलो रे'  के उघैत करीब एक दशकक यात्रा एकरा हेरेबा लेल वेश रहल।2010 मे पुन: इ कान्ह उठेलक।आ ताहि मे पछिला सं जेरगर समूह नव आँखि-पाँखिक संग अंगेज पुन: सोझां आनि थिर केलनि।' विदेह , इ पाक्षिक' बनल राजपथ आ सारथी  भेलाह संपादक-.गजेन्द्र ठाकुर आ सहायक संपादक-उमेश मण्डल। ऐ एक दशकक भीठ पड़ल साहित्यिक जमीन पर श्री राजक ' बीहनि कथाक साहित्यक बीराड़क बीहनि सं रोपनि भेल।तकरा हरियरी अनलनि गाम-घर, पत्रिकाक संपादक - शःरी रामभरोस कापड़ि भ्रमर।आ ऐ तरहें श्री राज भेलाह' वात्सल्य ' बीहनि कथा(2003)सं एकर पहिल प्रकाशनक स्वामी। बीहनि आ कथा शब्दक उत्पत्ति -------------------- -------------------- संस्कृतक ' ब्रीही ' शब्दक अर्थ होइछ बीज आ मैथिली मे बीहनि/बीहन/बीहैन सेहो ओही शब्दक मूलार्थ मे निहित।--प. भवनाथ झा कथा-संस्कृतक कथ् धातु सं बनल।जकर तात्पर्य होइछ- कहब   वा वर्णन करब। बीहनि कथाक अर्थ आ परिभाषा ---------------------------------------- बीज/बीजम संस्कृत शब्द थिक।यथा-यज बीजै:सहस्त्राक्ष -महाभारत कथा सेहो संस्कृत शब्द थिक।यथा-कथासरित्सागर । कथाक मूलत: छ तत्त्व संग निर्मित होइछ। 01-कथावस्तु-कथाक संरचनात्मक रूप कथानक अथवा कथावस्तु कहाइछ।एकरा मे चारि प्रमुख स्थिति होइछ-आरम्भ, आरोह,चरम आओर अवरोह। 02-चरित्र चित्रण-उपपस्थित पात्रक गुण-दोषक वर्णन।रिजर्व चित्रण कहाइछ। 03-संवाद-पात्रक मनोदशाक वर्णन में प्रयुक्त शब्द। 04-देश काल-स्थितिक वास्तविक विवेचना लेल तैयार वातावरण। 05-उद्देश्य-कथा सृजन में उदघाटित मूल वा सार्थक पक्ष। 06-शैली-प्रस्तुतिकरणक कलात्मक विश्लेषण। अर्थात् बीहनि कथा पूर्णत: संस्कृत शब्दक  उत्पत्ति थिक।जेना- लघुकथा मुदा साहित्यिक विधाक रूपें जाँची त' इ विधा मूलत:स्वतंत्र आ पूर्ण रूपे मैथिली साहित्य मात्रक विधा थिक।आयातित/ नकल नै। बीहनि माने बीज/बीया।जाहि मे विकास करबाक गुण निहित होइछ।मुदा ओ अविकसित रहैत ऐछ।समय अएला पर विकसित होइत ऐछ।ओकरा मे एक सं अनेक होएबाक गुण रहबाक चाही।बीहनि कथा-एहेन कथा,जे अनेक कथा(कथा/उपन्यास)के जन्म देबाक क्षमता राखए ओ बीहनि कथा भेल/हएत।अन्यथा नै। तें बीहनि कथा मे निष्कर्ष नै हेबाक चाही।---डॉ. भवनाथ झा बीहनि कथा विधाक नामकरण कर्ता श्री राजक मतानुसार-- बीहनि कथा,ओइ बीयाक समान ऐछ जकरा मे झमटगर/पूर्ण गाछक संभावना हो।मुदा ओ गाछ पीपर/पाकैड़ नै,पौध रूप मे हो।परञ्च बोनसाइ नै। पौध रूप सं तात्पर्य जे कथ्य/शिल्पें गसल मुदा शब्दक संख्ये सए सं डेढ़ सए धरि हुअए।मुदा बन्हन मे बान्हल नै। रचनान्त निकसगर(निस्तार देने)नै हुअए।निष्कर्ष पाठक पर। बीहनि कथाक चर्चित आ लोक प्रिय कथाकार, संपादक आदरणीय घनश्याम घनेरो ऐ विधा के परिभाषित करैत कहै छथि--- कोना बुझबै जे इ रचना बीहनि कथा भेलै:-- (क)शब्दक मानक औसत सव सौ हो (ख) विषय मारक ,आ सोचबा पर विवश करैत हो। (ग) कथ्य एहेन,जेना लगैत हो कथा/उपन्यास वा कोनो गद्यक सार हो। (घ) कथा मे निष्कर्ष नै हो। कथा साहित्यक सशक्त हस्ताक्षर श्री राजकुमार मिश्र जीक विचारें--- (क) आकारगत छोट सं छोट हो (ख) कथ्ये फरिछएल आ गसल हो (ग) संपूर्ण गद्यक संभावना निहित हो (घ) ऐ सं इतर, अव्यवस्थित रचना फोंक हएत।ओ बीहनि कथा नै। बीहनि कथा विधाक मानकीकरणक आधारभूत इकाइ """""""""""""""""""'"'''''"'"'''''''''"''""'"""""""" गद्य साहित्य, मूलत: कथा विधाक मानकता तयकरणक आधार अंग्रेजी साहित्य ऐछ।अंग्रेजी साहित्यक अनुसार विश्व भरिक कथा ,अंग्रेजीक Flash fictionक अन्तर्गत निहित ऐछ।इ फ्लैश फिक्सन छ: खण्ड मे विभाजित ऐछ जकर तेसर खण्ड टेलब्रा(Tellbra )क अन्तर्गत मैथिलीक बीहनि कथा विधाक नियामकता सन्निहित ऐछ। फ्लैश फिक्सन(टेलब्रा)पर आधारित बीहनि कथा मापनक महत्वपूर्ण बिन्दू :- 01-कथ्य/शिल्पें पुष्ट जाहि कथाक न्यूनतम शब्द स. 20 आ अधिकतम 150 हो। 02-कथा साहित्यिक मानकताट परिपालक  हो।यथा कोनो संस्मरण वा शब्द संग्रह मात्र बीहनि कथाक श्रेणी मे नै राखि सकैछ। 03-कथा,एकटा बीजक कथाक प्रतिदर्श हो।अर्थात एहेन कथा जाहि सं कथा/उपन्यास आदिक सर्जनाक संभावना प्रबल हो। 04कथा, निकस पर जा स्थिर नै हो। अन्त खूजल मुदा भावपूर्ण हो। 05-संपूर्ण कथा कोनो संदेशप्रद वा सकारात्म्क उद्देश्यक हो।शब्दक स्थूलकाय मात्र नै। उपरोक्त मानकता पर ठाढ़ रचना बीहनि कथा विधाक रचनाक रूपें अपन जग्गह पेबा मे सक्षम भ' पाओत।तकर पहिल मूल्यांकन लेखकक,पछाति संपादक ओ आलोचकक हाथ ऐछ। "कोनो नव सफलता हासिल करवा लेल पुरान मे पैस' पड़त।,खंघार'पड़त।तहन परिमार्जित फल सोझां आओत।जे भविष्यक नव बात गढ़ि मोकाम धरि ल' जएबा मे सक्षम बना पाओत।' एहि तरहें मैथिलीक लघुकथा विधा(कथा/गल्प)नामे लिखाइतक पछाइत बीहनि कथा विधा वैश्विक कथा मापदण्डें एकटा नव प्रतिमान गढ़ि,मैथिली साहित्य मे मैथिलीक अपन एक मात्र विधाक रूप मे स्थापित भेल।इ कोनो आन आयातित/नकल,विधाक विधान्तरण वा नामान्तरण नै।स्वयं मे मानक स्वतंत्र विधा हेबाक परिचिति कायम केलक। एहि प्रकारें मैथिली कथा साहित्यक दू टा स्वतंत्र विधा अपन अस्तित्व कायम क' रखने ऐछ।पहिल-लघुकथा (Short story)जे कथा/गल्प नामे लिखाइछ।ठीक ओहिना जेना कि अंग्रेजीक Poetry,मैथिली मे 'काव्य' नामक विधान्तर्गत-गीत,गजल,,कविता, हाइकु,क्षणिका आदि स्वतंत्र नामे/क्रियाकलापें/चारित्रिक गुणे अपन- अपन परिचिति बनौने ऐछ।मुदा विधागत सबटा काव्य परिवारक अंश वा अंग थिक। दोसर-बीहनि कथा(Seed Story) उपरोक्त दुनू विधा मध्यआओर कोनो वैध/अवैध विधाक लेल जग्गह वाँचल नै ऐछ। मुदा लघुकथा नामे बलधकेली मे हिन्दी लघुकथा विधाक नकल मैथिली अवतरण के घोसियेबाक असफल प्रयास ठाम ठीम क' मैथिली साहित्य के उकरू बनेबाक षडयंत्र जारी ऐछ।इ भ्रम वा द्वन्द ऐ द्वारे भेल जे किछु मैथिली रचनाकार लघु कथा माने आकारे छोट कथा बूझि नकल करैत रहलाह।ध्यातव्य महत्वपूर्ण बात जे लघुकथा एकटा शब्द मात्र नै,ओहि नामक एकटा स्वतंत्र विधा थिख।जे मैथिली मे अदौ काल सं कथा/गल्प नामे लीखाइत पहिने सं स्थापित ऐछ।आब तहन विचार करी मैथिली सं इतर हिन्दी भाषा साहित्यक अपन विधा " लघुकथा "क मैथिली अंधानुकरण पर। कोनो व्यक्ति,विषय,बौस्तक गुणक अनुसरण/अनुकरण बेजए नै।मुदा अंधानुकरण कतेक उचित ? मैथिली साहित्य मे विद्यमान " बीहनि कथा " विधा सं इतर सब विधा कोनो ने कोनो अन्य भाषाक विधा सं आयातित ऐछ।मुदा जत' सं आयातित भेल,ओइ मे आ मैथिली मे अपन मानकता वा प्रामाणिकता सिद्ध केने ऐछ। हिन्दीक लघुकथा विधा जे स्वयं मे आइयो मानक वा प्रामाणिक सिद्ध नै भ' पावि घड़ीक पेण्डूलम जकां डोलि रहल ऐछ।ओइ मे आइयो कते शब्दक वा कोन रचना ओइ विधाट रचना ऐछ की नै,तै पर मंथन चलिये रहल ऐछ।एते दशकक लेखनक पछातियो मूल्यांकन मे लघुकथाक जग्गह लघुकहानी सं जोइर व्याख्या होइछ।जतेक मुड़ी ततेक पीरी बला गप्प।एहेन अव्यवस्थित विषय/बौस्तक अंधानुकरण ,हास्यास्पद आ कि उठल्लूपन ? "अपने आँखिगर रहैत, अन्हरा के सहारे बाट ताकब कतेक उत्कीर्णा बला बात।" हिन्दी लघुकथा विधाक अंधानुकरणक प्रबल पक्ष रहल हएत,हमर सबहक सामान्य शिक्षाक हिन्दी माध्यम।हम सब एकेडमिक शिक्षा ग्रहण सामान्यतया हिन्दी भाषा माध्यमे केलहुँ।किताब,पत्र/पत्रिका क पाठनक भाषा हिन्दी रहलाक कारणे हिन्दी साहित्यक विषय-वस्तु पर निर्भर स्वाभाविक छल।तें हिन्दी साहित्यक संतान(विधा)कें पोसपूतक रूप मेअवैध रूपें अंगेज लेब अस्वाभाविक नै।ओही देखाँउसे वा नकल क'मैथिली मे लघुकथा संग्रह नामे 1972  मे आयल पहिल पोथी-" जे की ने से "--डॉ. हँसराजक।आ ,1975 मे तत्कालीन नवतुरिया कथाकार डॉ. अमरनाथक " क्षणिका "।दुनू पोथीक रचनाकार(आमुख मे)ऐ संग्रहक एको टा रचना ,कोनो पत्र/पत्रिका मे प्रकाशित नै हेबाट बात स्वीकारने छथि।ऐ सं इ स्प्ष्ट ऐछ जे मैथिली मे एकर कोनो अस्तित्व नै रहै।इ तहिया के घटना/बात छैक जहिया मैथिली सं इतर अन्य भाषा मे कथ्य/शिल्पें मजगूत मुदा आकारगत छोट रचनाक एकटा स्वतंत्र विधाकरूपें/नामे सृजन भ' रहल छलै।यथा-संस्कृत -लघ्वी,हिन्दी-लघुकथा,पंजाबी-मिन्नी कहाणी/कथावां,उर्दु-अफसांचे,ओड़िया-क्षुद्रकथा......आदि। मैथिली मे हिन्दी विधाक अंधानुकरण क शुभारंभ क' किछु मैथिली कथाकार स्वघोषित विद्वान हेबाक दंभ पोसलनि।तकर करीब पचीस बरख धरि अंधानुकरणित लेखन सेहो सुषुप्त वा शुन्य रहल।पुन: 1997 मे लघुकथा संग्रह नामे दू गोट पोथी,शिलालेख-तारानन्द वियोगी आ खण्ड-खण्ड जिनगी -प्रदीप बिहारीक आयल।से ताहि अवस्था मे जाहि सं दू वर्ष पहिने(1995 मे)मैथिलीक अपन एक मात्र विधा बीहनि कथा अवतरित भ' चूकल छल।ऐ विगत पचीस वर्षक नमहर अन्तराल मे अंधानुकरणित हिन्दी लघुकथा विधाक मैथिली अवतरण पर मैथिली मे कोनो मानकता तय नै भेल छल।(आइ एकैसम सदीक दोसर दशक धरि नै भेल)।जेना पहिने मिथिला मे सत्यनारायण भगवानक पूजन पर सुनता उपासक चलनि छल।तहिना मैथिली रचनाकार लघु कथा शब्द सुनि मात्र लघु कथा लिखबाक नकल करय लगलाह।जहन की हिन्दी मे लघु कथा शब्द मात्र नै,ओहि भाषाक एकटा स्वतंत्र विधा ऐछ।आ मैथिली मे कथा/गल्प नामे लिखाइत लघुकथा विधा पहिने सं विद्यमान छल।आब नकल क' लिखल जाइ बला रचना-जे बीस शब्द सं आठ सौ धरिक ऐछ।तखन प्रश्न उठैत जे कतेक लघु,ककरा सं लघु ?ऐ पर प्रकाशित कोनो तय मानकता नै छल(ऐछियो नै)जाहि सं इ सुनिश्चित कएल जए सकए जे कोन रचना लघुकथा विधान्तर्गत स्वीकार वा अस्वीकार कएल जा सकए।प्रसिद्ध कथाकार ओ इतिहासकार डॉ. मायानन्द मिश्र एकरा नकारैत लिखने छथि--" मैथिली मे लघुकथा नामे एक अन्य कथा लेखनक विकास भेल ऐछ जे समकालीन कथा/गल्प नै,अपितु चुटुक्काक निकट ऐछ।"--मैथिली कथाक विकास(संपादक- बासुकीनाथ झा)साहित्य अकादमी -2003 आधार हीन लेखने मठोमाठ हेबाक/कहेबाक परम्पराक निवहता मे किछु रचनाकार लीन रहलाह।जहन कि बेसुरा तान सं प्रसिद्धि पेनिहार गायक जकां बिना मानकताक लेखन मे लीन रहनिहार अपना के प्रयोगवादी आ प्रतिष्ठित बुझनिहारक रचना आ ओ तथाकथित विधा स्वय: खारिज ऐछ।ताहि लेल अदखोइ-वदखोइ आ माथा पच्चीक खगते कोन? हिन्दी विधाक मैथिली अवतरण लघुकथा नामक रचना आइ धरि बसात मे बौआइत ऐछ।जमीन पर अनबाक कहियो कोनो निश्तुकी प्रयास नै भेल।ओ तथाकथित विधा/रचना स्वत: खारिज होइत चेतना शुन्य भ' गेल।किएक त' जहन जमीन पर उतरबाक प्रयास केलक तहन आधारहीन हेबाक कारणे सूपक भाटा सन ओंघराइत रहल किएक त' स्थिरताक आधार पहिने सं नदारद!किछु स्वघोषित वा परपोषित विद्वान सब--" डाँरि पारि के ओकरा लक्ष्मण रेखा बुझ' लगलखिन,मुदा डाँरि सोझ भेल की वक्र तकरा सं दूर धरि सरोकार नै।"प्रसिद्ध रंगकर्मी श्री कुणाल ,कथा प्रसंग लिखल अपन आलेखक अन्तिम अनुच्छेद मे लिखै छथि--"आब मैथिली मे लघुकथा नामे किछु रचना सेहो देखाइछ,जे मैथिली साहित्य मे आधार हीन ऐछ।तें ओकर चर्च करब व्यर्थ सन।"--अंतिका-रजतजयन्ती अंक(2008)संपादक- अनलकान्त। लघुकथा नामित रचनाक भविष्य ? ''""""""""""""""""""""""''""""'''''''"''''''''"""""""'"'""' जेना अंग्रेज़ी मे पोएट्री,मैथिली मे " काव्य ' विधा ऐछ।आ ऐ काव्य विधान्तर्गत--गीत,कविता ,गजल,क्षणिका, हाइकु आदि स्वतंत्र नामे आ स्वतंत्र अस्तित्वे छैक।मुदा विधागत सब एकहि परिवार "काव्य "क अंग छै।तहिना अंग्रेजी क शॉर्ट स्टोरी विधा छै ,आ कथा/गल्प ओकर अंग। मैथिली मे लघुकथा सं इतर दोसर कथा विधा छै " बीहनि कथा "(Seed Story),हिन्दीक अंधानुकरणे लघुकथा नामे सृजित रचना बीहनि कथा विधान्तर्गत ग्राह्य ऐछ।परञ्च बीहनि कथाक तय मानकता पर ठाढ़ होइ बला रचना मात्र।से ओ लघु कथा नामे होइ वा बीहनि कथा नामे। बानगी स्वरूप देखल जए डॉ. सत्येन्द्र झा जीक लघुकथा नामे दू टा रचना- इसकूल-- ओहि गाम मे एकटा दोकान नै छलै।तीन किलोमीटर जाय पड़ै छलै छोटो छीन चीज किनबा लेल।जे कियो कहियो  दोकान फोलबाक साहस केलक ओकरा दोकान मे दोसरे -तेसरे राति चोरि भ' जाय आ तकर बाद दोकान बन्न भ' जाय।चोरवा गामक नाम सं परोपट्टा मे जानल जाइत छल ओ गाम।मुदा नरेशक साहस कहू वा दु:साहस ओ बाहर सं आबि दोकान फोललक ओहि गाम मे।घर मे पिता आ पत्नी विरोध कयलनि मुदा ओ ककरो नै सुनलक।दोकानक स्टाफक रूप मे सभ सँ सेसर चोर के रखलक।ओ चोर सेहो निश्चिंत छल जे जखने बेशी समान जमा होयत कि चोराक सभ किछु ल' जायब।।नरेश तीन सए टाका ओहि चोरकेँ दै छल।शहर सँ समान अनबाक हेतु नरेश ओही चोरबाकेँ पठबै छल। क्रमशः चोरवा कोन समान मे कते लाभ होइत छल सेहो धरि बुझय लागल। आइ ओहि दोकान मे समान भरल छल।आजुके राति चोरबा अपन संगी सभहक संग चोरिक योजना बनौलक।जखन दोकान बन्नक' नरेश चलि गेल तँ चोरबा अपन संगी सभहक संग दोकान मे घुसल।बोरा मे समान सब कसय लागल।एकटा संगी पुछलकै -" कते दामक समान हाथ लागल ?" दोसर चोर कहलकै-"पांच हजार सँ कम के नै हेतै।" "मुदा एहि पांच हजार मे तँ मालिक के पांच सयसँ बेशीक फयदा नै हेतै।साढ़े चारि हजार तँ मूलधन छै।"--चोरबा बाजल---फेर ओहिमे हमरो तीन सय के हिस्सा हेतै।" चोरबाक म़ोन तीत भ' गेलै।ओ अपन मित्र चोर सभके बुझबय लागल--चोरि त' तखने जायज होइछ जखन हमर हक छीनि क्यो अपन घर भरय,मुदा नरेश बाबू तँ ओतबे कमाइ छथि जतेक उचित अछि।ओ नाजायज लाभ कहाँ लै छथि ?" चोरबा चोरि करबाक विचार बदलि लेने छल।संगी सभ ओकर निर्णय पर सहमति व्यक्त कयलक।बोरा खोलि चोरबा सभ सामान केँ पहिने जकाँ सैंतय लागल।नरेश एकटा कोन मे ठाढ़ भ' ई सभ देखैत रहल।ओकरा बचझना गेलै जे ओ कोनो दोकान नहि,एकटा इसकूल खोलने हो। विश्लेषण--उपरोक्त रचना शब्द संख्ये नमहर ऐछ!माने टेलब्राक निर्धारित शब्द संख्या-150 सँ उपर। कथ्य-प्रेरक,पंचतंत्रक कथा समकक्ष।प्रारम्भिक लेखनक करीब बाझल। शैली- कथा बला,सेहो पूर्ण नै।छेंट सन। तें बीहनिकथाक परिधि सं बाहर ऐछ। दोसर बानगी ---------------- मौअति """""""""" ओ ईमानदार छल।तेँ लोकसभ ओकरा मारय छल।लोकसभ कहलकै- तोरा कुकुरक मौअति मारबौ।ओ चुप्प छल,मुदा प्रसन्न।कारण- ओ मनुक्खक मौअति नहि मरय चाहैत छल। विश्लेषण-इ रचना निर्धारित शब्द संख्या मे बान्हल  ऐछ। मुदा कथ्य - भाषण वा आदेशक हिस्सा मात्र। शैलीगत-निष्कर्ष पर पहुँचा देल गेल छैक। तें इहो बीहनिकथाक हद मे नै रहि रहल। उपरोक्त दुनू रचना--सत्येन्द्र कुमार झाक लघुकथा संग्रह-अहींकेँ कहै छी(2007)।पृष्ठ- 30/31 सँ उद्धृत। आब अही लेखकक इ तेसर कथा क बानगी नीचाँ ऐछ जे हुनकर नवका संग्रह-"जँ अहाँ सुनितहुँ"(2020) सँ ऐछ । भेटब डूबब """"""""""""" " अहाँक जीवन मे सभ सँ नीक की लगैत अछि ?" "अहाँके भेटब...." "आ अहू सँ नीक.....?" " हमरा हेरा जएब...?" उपरोक्त रचना लिखल त' गेल ऐछ लघुकथा नामे मुदा बीहनिकथाक मानकताक करीब ऐछ। यथा-निर्धारित शब्द संख्या(अधिकतम-150)क भीतर कथ्य आ शिल्पें गसल। निस्तार विहीन। तें इ रचना पूर्णत: बीहनि कथा विधाक अंग मानल जा सकैए।शेष निंघेस सदृश्य।ठीक ओहिना जेना कोनो एक कक्षा मे पढ़ैत सब विद्यार्थी परीक्षा समय समान प्रश्न हल करैछ।परिणाम मे न्यूनतम अंक 30% प्राप्ति बला विद्यार्थी मात्र सफल आ शेष असफल घोषित होइत ऐछ। आब एहने बानगी बीहनि कथा नामे लिखल रचना सँ.... डागदर साहेब-- मिथिलेश सिन्हा ------------------   ------------- ------ बड्ड दिन सँ पत्नी कहैत छलीह जे,हमरा पर किछु धियाने नै दैत छी।खाली मोबाइल मे खुटूर-पुटूर करैत कविता-कहानी रचैत रहैत छी.....जखन बेमारी बढ़त,पलंग पकड़ि लेब...तखन सबटा कविगिरि घुसरि जएत। एहेन धमकी पर के नहि डरतै यौ?पत्नी केँ होमियोपैथिक दवाई पर पूर्ण विश्वास छैन्ह।पिछला मंगल दिन शहरक बड्ड पुरान एगो बंगाली डागडर ठाम हुनका ल' गेलहुँ। सांझुक बेर,लगभग आठ-नौ गोट रोगी बैसल छलाह।डागदर साहेब बयस सँ लगभग अस्सी-पचासीक हेताह।एकटा रोगी पर आधा घंटा पूछताछ करैत,अपन डींग डांग सँ रोगी आओर परिजनकेँ अपन बड़प्पनक खिस्सा कहैत समय आगाँ खींचि रहल छलाह।हमर नम्बर दोसरे छल,मुदा घंटा भरि डागदर साहेब लागल रहलाह। अगल-बगल मे बैसल आन रोगी अकछय लागल।आब हमर नम्बर आएल। " किनको देखाना हाय ?" " जी,हमर पत्नी केँ...।" " हूँ,इधर आइए" " हम हरि बाबूक बालक थिकहुँ.." "ओहो,तुम इंजीनियर का बेटा है । ओ हमसे ही अपना इलाज कराता था..कैसा है ओ..?"--आन रोगी दीसन तकैत बजलाह। " जी,ओ मरि गेलाह..." " ओ गॉड...,तोमहारा माई कैसा है?" "जी,ओहो मरि गेलीह...।" हमर जवाब सुनि क' बेंच पर बैसल आन मरीज,बहन्ना बना ससरय लागल....।---डागडर साहेब,आश्चर्यचकित भाव सँ खन हमरा,खन रोगी सबकेँ ससरैत देखय लगलाह। विश्लेषण:- उपरोक्त रचना बीहनि कथाक मानक शब्द स. सँ बाहर ऐछ। कथा मे उप कथाक समावेश। कथ्य-शिल्पें कथाक छेंट सन लघु कथा। ----मिथिलांगन,अंक-38-39 निर्वहन--कल्पना झा "''''''"""''''''''''"""'"'''"""""""""" --माय गे! दादी त' हाथे सँ लपे लप तिल-चाउर परसै छलीह,मुदा तों त' चम्मच सँ परसै छें ? --धुर्र ! ताहि सँ की हेतैक ? --नहि हेतैक की...?हमरो सबकेँ नीक रस्ता भेटल। --से की ? --"इएह जे ' निर्वहन 'मे सेहो 'चम्मच ' लगाओल जा सकैछ। मिथिलांगन---36-37 विश्लेषण:- इ रचना कथ्य-शिल्प आ शब्द स.मादे पूर्ण मुदा कथा सारक संग बन्न भेल।माने निकस पर कसैत।तें इहो कथा विधागत झूस ऐछ। बेटा निगम।                  --घनश्याम घनेरो लावारिस लहास पुछलकै : -- बेटा! नगर निगम? -- हम तोहर बेटा नहि, कर्मचारी छी। -- हमरा लेखा तोहीं बेटा। -- ठिक्के! लोक केँ लोक सँ मतलब नहि रहलै तँ... -- पहिने हमरा घिसिएबह आ की कुकूर केँ? -- तोरा। -- पहिने हमरे किए? -- एत्तेक मनुक्खता अखन छैक, तैं! --  मनुक्खक लहास केँ बादमे आ कुकूर पहिने कहिया सँ घिसिएल जेतै? -- ई काज हमर अगिला पीढ़ी करत। घिसिया क' ठेलापर चढ़बैत काल लहासक आँखि कुकूर दिस छलैक। इ रचना ऐ विधाक सब मानकता यथा- निर्धारित शब्दक भीतर।फरीछएल कथ्य आ गसल शिल्प मे निस्तार रहित पूर्ण ऐछ! अन्तत:मैथिली साहित्यक दू भाग भेल -लघुकथा (SHORT STORY)आ बीहनि कथा ,(SEED STORY )इ दुनू निर्धारित रूपें निरन्तरता बनौने रहत।शेष फोंक मात्र। बीहनि कथाक विकास मे अवरोधक तत्व _--------------------------------------- मैथिली " बीहनि कथा विधा " आब लिखित अवधारणा/शास्त्रीय पक्ष आ निर्धारित मापदण्ड पर ठाढ़ भ' व्यवस्थित रूपें मोकाम दिस बढ़ि रहल. ताहि स्थिति मे लघुकथा नामक अस्तित्व हीन, मौखिक आ तथाकथित विधाक आढ़ मे एकरा धकिएबाक षडयंत्र चलि रहल. केकरो नीक चीज कें अनुकरण करब बेजए बात नै ( मैथिली मे बीहनि कथाक अतिरिक्त सब विधा उधार, पैंचे ऐछ) 1995 मे बीहनि कथा मैथिलीक एकटा स्वतंत्र विधाक रूप मे गोरा पर बैसल.1997 मे नामक नकल मात्र कएल तथाकथित विधा लघुकथाक पहिल संग्रह आयल. मोन पाड़ैत चली जे मैथिलीक अग्रणी विद्वान द्वारा लघुकथा ( Short Story) अदौ काल सं कथा/ गल्प रूपें एकटा व्यवस्थित विधाक रूप मे मैथिली मे विद्यमान ऐछ!  नकल कएल तथाकथित लघुकथाक 1997 सं आइ 21 म सदी धरि कोनो लिखित मापदण्ड नै ऐछ, मौखिक घोंघाउज मात्र. यानी - लघु त' केकरा सं लघु, कतेक लघु , केहन लघु? कोनो प्रकृति, स्वरूप निर्धारित नै.एकर सवालक जवाब मे विद्वान सब कहै छथि- मानि लियय  जे छोट भेल त' लघुकथा, ओइ सं पैघ त'कथा, ताहि सं पैघ दीर्घकथा आओर पैघ त' उपन्यास.....! एकर सत्यता कें लिखित रूपें सोझा रखलनि कथाकार, आलोचक, प्रो. डा. अशोक अविचल.ओ ज्ञानवर्धन कंठ जीक लघुकथा संग्रह " लुखिया"क भूमिका मे लिखै छथि-" इ स्पष्ट क' दी जे कतिपय प्रयासक पश्चातो एकर कोनो शास्त्रीय आधार की नियत मापदण्ड हमरा उपलब्ध नै भ' सकल, जाहि मे लघुकथा परिभाषित हो आकि एकर समीक्षा हेतु विन्दुवार कोनो मापदण्ड निर्धारित भेल हो."-- अशोक अविचल ध्यातव्य इ जे एकैसम सदी मे जकर आधार, अस्तित्व मौखिक आकि फेसबुकिया मात्र रहै तकर तुलना मैथिलीक अपन एकमात्र व्यवस्थित विधा( बीहनि कथा) सं करब मैथिलीक लेल निन्दनीय आ कि घोर अपमान नै थिक? बीहनि कथाक विकास मे लागल समस्त रचनाकार हुनका सं साकांक्ष रही जे दुर्भाग्यपूर्ण दुष्प्रचार करै छथि- बीहनि कथा, लघुकथाक बदलल नाम थिक, लघुकथा छै त' बीहनि कथा किएक....? त' बीहनि कथा अंधानुकरण, नामान्तरण आकि विधान्तरण नै, एकटा निर्धारित मापदण्ड पर ठाढ़ स्वतंत्र विधा थिक. तुलना होइछ बरोबर मे. बीहनि कथा सन मौलिक विधाक तुलना  अस्तित्व हीन, मौखिक विधा सं करब पूर्णत: अनुचित. निष्कर्षत: - लघुकथाक बहन्ने बीहनि कथाक बाट अवरोध करबाक षडयंत्रक अलावे और किछु नै ऐछ!  एहन षडययंत्रकारी सबके चिन्हित क' कतिया/ बेरा मोकाम दिस बढ़ल चली....! # मुन्ना जी # अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। विदेह विहनि कथा विशेषांक-१ https://books.google.co.in/books?id=qIxpnlNN_30C&lpg=PP1&pg=PP1#v=onepage&q&f=false https://books.google.co.in/books?id=I7-Pm-enweIC&lpg=PP1&pg=PP1#v=onepage&q&f=false अनीता मिश्र २टा बीहनि कथा १ " तलाक" जज साहब:-निर्मला देवी! हमरा बहुत आश्चर्य लगि रहल अछि कि साठि वर्षक उम्र में आहाॅं अपन पति सऽ तलाक लेवऽ चाहैत छी।जखन कि अखने आहाॅंक परिवारक विशेष आवश्यकता अछि। निर्मला देवी:-जज साहब! हम अपन फायदा लेल, हमरा पर कोनो पति अत्याचार केलनि अछि, ताही लेल तलाक नहि लेबऽ चाहैत छी। अई विकसित युग में अखनो बहुत पुरुष के दिमाग में ई विचार जड़ सऽ जकड़ल छनि कि घऽरक काजक जिम्मेबारी केवल महिला के छनि चाहे वो बाहरक काज कऽलेथि,हम चाहैत छी कि जीवन के अंत समय में हमर पति सोचथि कि हुनकर ई धारणा गलत छलनि।आगाक पीढ़ी से हो अही बात  के बुझि सकय! २ "एहसास" सुधा चाहक कब टेबुल पर राखि कऽ पिबक लेल फैसले रहथि कि फोनक घंटी टुन-टुनाय लगलनि। दौड़कऽ भन्शा घर सऽ फोन लेलीह। सुधा के माय:-"देख सुधा! बुढ़िया कतबों चिकनी चुपड़ी बनि कऽ देखबौक ओकरा झांसा में नहि अवियांह।जे करबौ से हमही,साऊस कखनौ अपन नहि हेतौक" चुपचाप फोन राखि सुधा चाह पिबऽ लगलीह तखनहि  कान में साऊसक शब्द सुनाई पड़लन्हि। मृणाली (सुधाक ननदि) सऽ फोन पर बात करैत छलीह,"कोनो बात नहि बेटा साउस पैघ आ आदरणीया छथि।हुनकर ताना और डाॅंटो में आशीर्वादें भेटत।आहाॅं जवाब नहि देबनि"। सुधा के एहसास भेलनि जे मृणाली सर्वगुण संपन्ना के संग रूपवती आ उच्च शिक्षित छथि। ताही पर सऽ हमर साऊस एतेक दहेज देलखीन तखन मृणाली के साऊसक लेल सुनकर मन में एतेक आदर!!हमर मायके एकौटा रुपैया ने दहेज देवऽ पड़लनि,तखन हमर साऊसक लेल हरदम जड़ल -भुजल शब्द! अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। अनुवाद खण्ड (बीहनि कथा विशेषांक) चित्र : श्वेता झा चौधरी ४.१.अंजू खरबंदा-मुखिया ४.२.रवि प्रभाकर-अदकल जीह ४.३.सतीश खनगवाल-घुरपेंच ४.४.विजय 'विभोर'-अन्नदाता ४.५.योगराज प्रभाकर-थाल आ कमल ४.६.डा पुष्करराज भट्ट-बहिष्करण ४.७.प्रा. डा. कपिल लामिछाने-सौन्दर्य आ समानता ४.८.हरिप्रसाद भण्डारी क दू टा बीहनि कथा ४.९.तारा केसी-अपन परिचय ४.१०.डॉ. प्रदीप कौड़ा-क्रांति ४.११.निरंजन बोहा-करूगर सत्य ४.१२.जगदीश अरमानी-कथानक ४.१३.जंगबहादुर सिंह घुम्मण-आचरण ४.१४.दीपक बुदकी-जन्नत ४.१५.मुबश्शिर अली ज़ैदी-ईनाम ४.१६.इब्न आसी-फेर मनुक्खक की भेलै? ४.१७.रतन सिंह-बिना शीर्षकक ४.१८.सच्चिदानन्द कर-तितली आ प्रेम ४.१९.प्रज्ञा महान्ति-मेमोरीचिप्स ४.२०.विनय कुमार दास- कर्मफल ४.२१.गायत्री दास-बुझौअलि ४.२२.मिनती प्रधान-संगी हिंदी बीहनि कथा चित्र : श्वेता झा चौधरी अंजू खरबंदा मूल हिन्दी सं मैथिली रूपान्तर-   श्री घनश्याम घनेरो मुखिया रीता चौखटिए पर सँ दगलक प्रश्न - "ओ" टूर सँ आपिस आबि गेलथुन्ह? नहुँए सँ सुलभा उतारा देलकै - "नै गे! अखन धरि तँ नहि।" रीता कुर्सी घीचैत सशंकित भ' पुछलकै - "लाथी नहितन! तँ बाहर गैलरीमे किनकर पुरखाहा कपड़ा सभ सुखाइ छौ?" -आन लोकक नजरि सँ सुरक्षित रही तैं हुनक कपड़ा केँ गैलरीमे टांगि दैत छियै। -से किए? -एहि सँ दोसरा केँ लगै जे पुरुख घरे पर छथि। -तकर माने की? -नहि तँ ओ सभ सोचत जे असगरुआ जनिजाति... नेना-भूटका संग हमर बिगाड़िए की लेत!" अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। रवि प्रभाकर मूल हिन्दी सं मैथिली रूपान्तर-   श्री घनश्याम घनेरो अदकल जीह ओ बिधव अनुनय-विनय करैत अछि अपन पड़ोसिन सँ - "दीदी, जतय हम काज करै छियै ने ततय सँ जे घुरबै तँ मुंहारि सांझ बीति गेल रहतै। तैं अपन मुन्नी केँ हिनका लग छोड़ने जाइ छियन्हि। रखथिन्ह ने?" - हमरा परीक्षा लैत छी अहाँ?आब तँ अहाँक गाम सँ दियोर आबि रहैत छथि तखन...? - यैह तँ बात छै, तैं हिनका लग छोड़ने जाइ छियन्हि। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। सतीश खनगवाल मूल हिन्दी सं मैथिली रूपान्तर-   श्री घनश्याम घनेरो घुरपेंच मंत्रीजी हारल नटुआ जकाँ बड़बड़ाइत छलाह - "आब कोन घुरपेंच बाँचल? सबटा तँ लगाओल- राष्ट्रवाद, राष्ट्रद्रोह, आतंकवाद आ साम्प्रदायिकताक उधबा उठा क' सेहो देखि लेलहुँ। इहो पर्यन्त कयल जे आंदोलन केँ हिंसाक फुलपैंट पहिरा देलियै मुदा वैह स्थिति यथावत।" एतबा सुनतहि सैक्रेटरी टुसलक - तँ एहि बेरि सरकार पाछु घुसकि जेतै की? सरकारक पिट्ठू केँ जेना लेसि देने हो, तरंगति कहलकै - "केहन बात करैत छी यौ! अहाँ एकटा काज करु। पुलिस, सीबीआई, ईडी केँ कहियौ जे आंदोलनी नेता सभक तार विदेश सँ जोड़ि, जाँच करय। शेष काज तँ हमर मीडिया कैए देत।" ई सुनि सैक्रेटरी हिचकिचायल - "जँ अहू सँ बात नहि सुढिएल तखन? "तखन?तखन तँ आंदोलन केँ जतेक नमरा सकै, नमराब' दियौ। आम जनता आ लोकल लोक जतेक फिरसान हेतैक ओतेक सरकारक लेल नीक हेतै। एकदिन यैह जनता आंदोलनक खिलाफ उठि ठाढ़ हेतैक।" अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। विजय 'विभोर' मूल हिन्दी सं मैथिली रूपान्तर-   श्री घनश्याम घनेरो अन्नदाता पीपरक गाछ तर खटियापर बैसल मालिक पुछलथिन - "रौ रमुआ! एहि बेर किनका भोट देबहुन?" रमुआ पटौनीकढेकुल थिर करैत उतारा देलकै - "मालिक! हमर भोट तँ हुनके पड़तै जे हमर अन्नदाता छथि।" मालिक पीत सँ अन्हराइत, ठाढ़ होइत कहलथिन्ह - "आयं रौ स्सार, हरामी! एकर माने तों हमरा भोट नहि देबें।" अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। योगराज प्रभाकर मूल हिन्दी सं मैथिली रूपान्तर-   श्री घनश्याम घनेरो थाल आ कमल -एह! एहि बेर इंद्र महाराज थहि-थहि क'  देलथिन यौ मालिक, कैक साल बाद एहन  थाल-कीच देखबामे एलैए। खेत सभ जल -मगन! -हँ, से तँ ठीक्के छैक मुदा एकरे कारण हमर पोखरि भथाएल जा रहल अछि। गंगेजल किए  नहि बरखो ताहि सँ की, सभक माटिक कटान तँ पोखरिएक पेटमे समाइ छैक ने। थाल तँ थाले ने कहौतै। -बरखामे जे होइत छैक से तँ ऊपरवाला करबै छथिन, एहिमे आम जनताक कोन दोख? -पोखरिक स्थिति देखि लोक नाक बन्न करैत जाइत अछि। नीक-बेजाय के सुनाए? अच्छा! एकरा भरबाए दैत छिऐक। -नै यौ मालिक, लोकक बात केँ माइन नहि राखु। -तँ की कहैत छह जे हम क' सकी? -थोड़ धैरज राखू। हम सभ एहि पोखरि केँ नीक सँ देख-रेख करबै, मेहनति करबै। अहाँ एक दिन देखबै मालिक जे यैह थालमे कमल फूलेतैक आ सभक मुँहपर सपटी लागि जेतैक। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। नेपाली बीहनि कथा चित्र : श्वेता झा  चौधरी नेपाली बीहनि कथा डा पुष्करराज भट्ट बहिष्करण अनुवाद: विन्देश्वर ठाकुर पछिला चौध, पन्ध्र दिन चिन्तेमे बितल । नइँ बितैत सेहो कोना ? कोरोना महामारीक कारण मोन ओहिना बिचलित होइत रहल। “ई रोग लगलहबा बहुतोगोटे ठीक भऽ गेलैक।हमसभ ठीक कोना नइँ हेबै!" चित्त बुझेबाक एकटा इहो नीक उपाय रहैक। बेस सावधानीसंग ई दिन कटलहुँ।एकरबादक दिनसभ केहन हेतै की पता<लोक कोन रुपमे एकरा लेतैक<इएह बिचारसभ मोनभरि अनवरत अबैत रहल। “ओना त अहाँक रिपोर्ट हिसाबे अहाँक बिमारी ठीक भऽ गेल।तथापी किछु दिन आओर घर-परिवारसँ दूरे रहु।” अस्पतालसँ घर पुहुँचलाक किछुए देरमे भाइजी कहल्खिन। घरमे बैसल-बैसल मोन पीडागेल।चौकदिससँ घुरि अएबाक सोचलहुँ कि बाटमे आशिष भेटि गेल। “तोरा कोरोना लागल बात सुनने रहियौ।एखन केना की छौ?" ओ पुछलक। “एखन ठीक छी।समान्य अवस्था छैक।" हम कहलियै।" किछु दिन तोरासंग हमरालोकनिके नजिक नइँ हेबाक चाही।भौतिक दुरी राख' पडतै।" आशिष हमरासँ दूर होइत बाजल। हम किछु कहब उचित नइँ बुझलियै। सोचलहुँ, “यी बिमारी हमरा मात्र लागिक'>दोसरकियो स्वस्थ-तन्द्रुस्त रहतै से जरुरी त नइँ छै<" हम किछुदेर चौकमे अलमलाक' घरदिस घुरि देखैत रहौं,पडोसिया काका कहलनि," U तो त मज्जासँ घुमिरहल छे।कोरोना लागल बात सुनने छलियौ।एना नइँ घुम बाबू रे!हमरालोकनिके बचबाक अछि।" “हमरा नीक भऽ गेल अछि।हम स्वस्थ छी।कोरोना कोनहु कारणे सरि सकैत छै।हम कोरोना बोकिक' थोडे चलैत छी।" एतबे बात जोडसँ कहलियै कि ओतुका सब लोक हमरे टक्क लगा'  देख' लागल। रोग लागल व्यक्ती किछु दिनक बाद अवस्से स्वस्थ होइत छैक।स्वस्थ व्यक्तीकें बहिष्करण करबाक चेष्टा केनिहारसभकसंग लडबाक लेल आब हमरालग आवाजटा मात्र बाँकी अछि। ( पुष्करराज भट्ट नेपाली साहित्य लेखन तथा अनुसन्धानक क्षेत्रमेँ सक्रिय छथि। नेपाली लघुकथामेँ पहिल एमफिल एवम् विद्यावारिधि करबाक सौभाग्य हिनका प्राप्त छनि। तीन एकल तथा एक संयुक्त लघुकथा कृतिक लेखक छथि । पाँच साझा संकलनके सम्पादक छथि । नेपाली लघुकथामेँ पुरस्कारक संस्थापक सेहो छथि। लघुकथा समाजसँ आबद्ध छथि। एकर अतिरिक्त गोरखापत्र संस्थानमेँ डोटेली भाषा पृष्ठ संयोजक, नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानक आख्यानमूलक पत्रिका समकालीन साहित्यके सम्पादक सेहो छथि।अइ तरहे लेखन, सम्पादन, साहित्यिक संगठन परिचालन, फेसबुक समूह सञ्चालन आदिक माध्यमसँ साहित्य क्षेत्रमेँ क्रियाशील । पत्रकार ओ साहित्यकर्मी छथि।) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। नेपाली बीहनि कथा प्रा. डा. कपिल लामिछाने सौन्दर्य आ समानता अनुवाद: विन्देश्वर ठाकुर मूलुकमे समानताक गप्प-सप्प खूब चलैत रहे।जइमे लैङ्गिक समानता सेहो एक रहैक।हरेक गप्पमे समानताक बात उठे।एहन प्रश्न उठब समाज-विकासक दृष्टिसँ स्वागतयोग्य बात छैक। चिकित्सकलोकनि एकर परीक्षण करबाक निर्णय कएलनि। ओ सभ छोट बालबच्चासभकें स्वतन्त्र रुपमे खेल' लेल छोडि देलक। लडकी कनियां बनल,लडका वर बनल।लडका समान जुटौलक,लडकी खाना पकेलक।पहिने लडका खेलक,बादमे लडकि खा'क भाडावर्तन धोएलक।खेल चलैत रहल। तकराबाद ओसभ समान उमेर आ तौलक छौडा-छौडीसबकें छनलक।ओकरासभकें समान तौलक भारी बोकिक' निश्चित स्थानपर पहुँचाब लेल कहलक।दुनू एक्के समयमे भारी बोकिक पहुँचल। – गुड Û चिकित्सकसभ प्रसन्न भेलनि। आ ओसभ समान उमेर आ तौल रहल युवा-युवतीके समान दुरीधरि खाली हाथ दौगबाक लेल कहलनि।दुनू दौग लागल।युवतीकें हिल चप्पल अल्झेलक।ओ जुत्ता लगेलनि।फेर दौग लागल।सारी अल्झेलक।ओ कुर्ता-सुरवाल लगेलक।आ फेर दौग लागल।चुन्नी अल्झेलक।ओ युवकेजकाँ पैन्ट आ टिसर्ट लगेलक।आब त तोरा अल्झाब' बला किछु नइँ छौ ने?<- युवक पुछलक। आब नइँ अछि।- युवती बाजल। तहन आब दौगबै त हेतै? - हेतै। ओसभ दुनू सिट्टीक संकेत अनुसार पुन: एक्कसंग दौग' लागल। कनिए देरबाद लडकी थाक लगली।पाछू होब लगली।लडका रुकल। ओ बाजल– आब की ओझरेलक लडकी बजली– हिलबला चप्पलले ओझरेलक,ओकरा फेकली।आङी ओझरेलक ओकरो फेकली।कुर्ता–सुरुवालले ओझरेलक।ओकरा सेहो हटेली मुदा... की मुदा< –लडका बीच्चेमे पुछलक लडकी कने लजाइत बजली– सबकिछु त फेकब नइँ मिलैछै ने!... चिकित्सकलोकनि खुल्ला कारमे बसिक' फ्लो करैत रहए। ओसभ कहलनि– अच्छा त आब निष्कर्ष इएह निक दृष्टिकोण अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। नेपाली बीहनि कथा हरिप्रसाद भण्डारी क दू टा बीहनि कथा अनुवाद: विन्देश्वर ठाकुर १ सौझका झोलफल चारुदिस रमणगर रहए।टोलक बौवा-बुच्चीसब खुल्ला मैदानमे जम्मा भऽ कऽ खेलैत रहए।चराचुरुङ्गीसब बास बसबाक तरखरमे रहए।एहिबीच प्रहरीक भ्यान आएल,घनश्यामक घर आगु रोकलक आ घरमे बैसल घनश्यामकें गाडीमे राखिक' लऽ गेल। यी सब देखिक' छिमेकीसब प्रतिकृया देलनि- - नेता छी कहैत छलथि, कोनो नइँ नीक काज केलकै कि< - तस्करी करैत छी कहैत छलथि, कोनो केशमे फसिगेलै कि< - सरकारी ओ सार्वजनिक सम्पति हड्पने छै कहैत छलै, अख्तियार पकैर लेलकै कि< - एकर सान देखलाक बाद चालि-चलन ठीक नइँ छै से लागल रहे हमरा.... छिमेकीसब मनेमन घृणा व्यक्त कएलनि। साँझुक पहर सञ्चार माध्यमसँ मन्त्रिमण्डल पुनर्गठन भेल आ घनश्याम मन्त्री भेल खबर प्रशारण भेल। तकराबाद बधाई देबाक लेल ओएह पडोसीसब घनश्यामकें घरमे छोर लागि गेल।ललै कि सबकिछुमे समानता खोजब प्रकृतिसम्मत नइँ छैक।ओकर एकटा सीमा होइत छै। सबगोटे स्वीकृतिमे गर्दन हिलेलक। २ दृष्टिकोण सौझका झोलफल चारुदिस रमणगर रहए।टोलक बौवा-बुच्चीसब खुल्ला मैदानमे जम्मा भऽ कऽ खेलैत रहए।चराचुरुङ्गीसब बास बसबाक तरखरमे रहए।एहिबीच प्रहरीक भ्यान आएल,घनश्यामक घर आगु रोकलक आ घरमे बैसल घनश्यामकें गाडीमे राखिक' लऽ गेल। यी सब देखिक' छिमेकीसब प्रतिकृया देलनि- - नेता छी कहैत छलथि, कोनो नइँ नीक काज केलकै कि< - तस्करी करैत छी कहैत छलथि, कोनो केशमे फसिगेलै कि< - सरकारी ओ सार्वजनिक सम्पति हड्पने छै कहैत छलै, अख्तियार पकैर लेलकै कि< - एकर सान देखलाक बाद चालि-चलन ठीक नइँ छै से लागल रहे हमरा.... छिमेकीसब मनेमन घृणा व्यक्त कएलनि। साँझुक पहर सञ्चार माध्यमसँ मन्त्रिमण्डल पुनर्गठन भेल आ घनश्याम मन्त्री भेल खबर प्रशारण भेल। तकराबाद बधाई देबाक लेल ओएह पडोसीसब घनश्यामकें घरमे छोर लागि गेल। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। नेपाली बीहनि कथा तारा केसी अपन परिचय मैथिली रूपान्तर- बिन्देश्वर ठाकुर भोरे उठिते मातर भन्सा घरमे पडोसनी काकी बाबू-माएके कहैत बात सुनि लेलहुँ।काकी कहैत रहथिन्,"हमर दीपशीखाक लेल नीक घरसँ बात आएल छैक।खन्दानी परिवार।काठमाण्डौमे तीनटा घर छै।दू टा भाडामे लागल छै।भाडा मात्रे तीन लाख अबैत छै।बात चलैतियै त होइतै ने श्याम भैया?? काकीक बातमे समर्थन दैत बाबुजी कहल्खिन्-" नीक घर,वर छै त बात चलाएब उचिते कि! आखिर दीपशिखाक उमेर सेहो विवाह करबाक योग्य भऽ गेलनि।" प्रात भेने भोरे माए हमर घरक टेबुलपर चाह रखैत बजली-" बेटी उठिक' तयार भऽ जाउ कि! आजु अहाँक देखबाक लेल लडका अबैए।की करु बाउ सबदिन अपनेसंगे रखबाक मोन छल मुदा दोसरकें घर जाइ बला जाति राखब असम्भव अछि।" नैनमे नोर भरने माए कहली। माएक बात सुनि हमर मोन द्रवित भऽ गेल।तीनटा कार हमरे घर लग आबिक'  रुकलै।पडोसनी काकी हमर गेटदिसँ पैसबाक इसारा केलनि। "ओएह लील रङ्गबला शूट लगेने हेबाक चाही लडका,देखएमे त सुन्दरे छै नइँ दिपशिखा।" दिदी कहलनि। हम किछु नइँ बजलहुँ।लडका पक्षसँ बातचितक शुरुवात भेला उपरान्त दिदी हमरा आओर सुन्दर बनाक' ओकरासभक आगु लएलनि।हम लगाम लगाएल घोडाजकाँ ओ सब जे जे कहलनि से से करैत गेलहुँ।हमर शिरसँ पाउ तक एक नजरि देखलाक उपरान्त 'ओके' कहल्खिन लडका पक्ष। "लडकाक पढाइ,लिखाइ,इलम की छै?" बाबुजी पुछल्खिन। बाबुजीक प्रश्नक उत्तर दैत लडका पक्षबला उत्तर देलनि,"नोकरी करब,पैसा कमाएब, ओहि लेल पढब,लिखब.. ओ सबकिछु छैक बाबू लगमे।पैसा ओ धनसम्पतिक कोनो कमी नइँ छैक।अपनेक बेटीकें रानी बनाक राखत।ओइसँ बेसी की चाही अपनेके? ओकरासबके बात सुनलाक बाद हमर अन्तरात्मामे दबाक' राखल बोलीसब विस्फोट भऽ गेल।हम पैसामे बिकाइ बला लडकि नइँ छी।पुर्ख्यौली सम्पति आइ छै,काल्हि नहियो भऽ सकैत छै।अपने कमाइ रहल, पढल-लिखल ओ समाजमे अपन अलग पहिचान बनाब मे सफल जीवनसाथी चाही हमरा।उनकामे कहाँ छै अपन परिचय<तें हमरा माफ कएल जाओ बाबुजी।हम विवाह नइँ कऽ सकैत छी। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। पंजाबी मिन्नी कथा चित्र : श्वेता झा चौधरी पंजाबी मिन्नी कथा क्रांति- डॉ. प्रदीप कौड़ा हिन्दी योगराज प्रभाकर मैथिली भाषाण्तर-सांत्वना मिश्रा पहिल: अहाँ एना उदास कियाक बैसल छी? दोसर: हम उदास नहि छी, किछु सोचि रहल छी। पहिल: की सोचि रहल छी? दोसर: यैह कि अपन देशमे क्रांति कोना आबि सकैत अछि। पहिल: एहैंन अपने कहियासँ सोचए लगलहूँ? दोसर: पिछ्ला एक दशकसँ। पहिल:एक दशकसँ? दोसर: शायद अहियोसँ बेसी दिनसँ भ सकैत छैक। पहिल:अपने कृपा कऽ सोचनाइ बन्न क देल जाइ। दोसर: कियाक? पहिल : कियाक की अपने आब अहि देशमे क्रांति नहि ल पाएब! अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। पंजाबी मिन्नी कथा करूगर सत्य-निरंजन बोहा हिन्दी-योगराज प्रभाकर- मैथिली भाषाण्तर-सांत्वना मिश्रा दुर्घटनासँ भेल हुंनकर मृत्युक आइ पाँच दिन बित चूकल छल। शोकसभामे जुड़ल लोक सभ  हिनक इच्छाक संग हिनक नेना अा विधवा पत्नी लेल संवेदना व्यक्त क रहल छल। नीक लोकक खगता अहि लोक अा ओहियो लोकमे अछि। शोक सभा मे एकहि संग कतेको स्वर चहु दिस पसरल। अो सभ त ठीक छैक, परंच ए हैं न असमय मृत्यु केँ दुःख सहनाइ बहुत मुश्किल छैक। बात आगां बढ़ल। एहि अबोध नैनाक की होएत? तेसर स्वरमे सभक धियान नैना दिस पड़ल। राधेश्याम जखन आतंकवादिक हाथसँ मारल गेल छल त सरकार हुंनक पत्नीकेँ पाँच लाख टाका देने रहैंन,अा पुत्र केँ नौकरी। चारिम स्वरमे स्त्रीगण सभक बीच बैसल मृतककेँ पत्नी क स्वर सोचए पर विवश केलक, जाँ हम्मर भाग्य मे यैह लिखल छल त हमरो पतिक मृत्यु आतंकवादिक हाथें होइत!! अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। पंजाबी मिन्नी कथा कथानक -जगदीश अरमानी हिन्दी-योगराज प्रभाकर- मैथिली भाषाण्तर-सांत्वना मिश्रा भोरका समय छल,वर्षाक पश्चात ठरल- ठरल बयार बहि रहल छल। अपन कल्पनामे मग्न लेखक बस्तीसँ बहुतों दूर निकलल छल। अपन नव कथा लेल कथानककेँ तकै मे डुमल होइथि तहिना प्रतित भ रहल छल। एकाएक लेखककेँ चेहरा पर मुस्कि दौड़ गेल। आवेशमे आबि अपन औंठासँ चुटकी बजाबैत बजला, आहहा.... भेंट गेल कथानक किच्छे दूर पर अस्थिरे - अस्थिरे चलि रहल छला की गाड़िक पहिया कादोमे धसि गेल, दुनू स्त्री - पुरुष गाड़ीसँ उतरि कऽ प्रयास करै लागल , पहिया निकालैकेँ, अपना भुत्ते नहि भेल त गाड़ी बला कोनो मदतगारकेँ ताकै लागल। थोड़ बे  दूर पर बाउलक टीहुल्बा पर लेखक देखाइ पड़ल। गाड़ी बला चैनकेँ स्वास लेलक,लेखक सँ जखने आंखि मिलल की लेखक उत्साहित करैत बजला । शाबाश! नवयुवक! शाबाश! आर जोड़ लगाऊ ,हम अहाँ पर कथा लिखब! अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। पंजाबी मिन्नी कथा आचरण-जंगबहादुर सिंह घुम्मण हिन्दी-योगराज प्रभाकर- मैथिली भाषाण्तर-सांत्वना मिश्रा थानाकेँ मुंशीसँ आतंकवादी मारल गेल। शिंगारा सिंहक मृत्युक प्रमाणपत्र हुंनकर अबोध पुत्र अा बुढ़ पिताक हाथ थमहाबैत अपना अा संग बैसल दु गोट सिपाही न्यायोचित अधिकार जमाबैत उपेक्षणिय स्वरमे कहल, बाबा आइ बड्ड ठंढि छै। नैना प्रश्नात्मक दृष्टिसँ अपन बाबाकेँ देखल,अो अपन चिप्पी लागल  कुर्ताक जेबीमे मुद्दतसँ सम्महारि क राखल टाका,मुंशीकेँ द देल। थानासँ बाहर निकललाकेँ उपरांत नैना उत्सुकता व आश्चर्यसँ अपन बाबाक डबडबायल आँखिमे तकैत, व्याकुल स्वरमे पूछलक... बाबा यौ ई एक साय टाका हिंनका सभकेँ  कियाक देलौं? बाबा बजला.... ई सभ हमर अनाथ भेलाकेँ उत्सव मनाबै चाहैत छथि! अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। उर्दू बीहनि कथा चित्र : श्वेता झा चौधरी दीपक बुदकी (उर्दू) जन्नत(स्वर्ग) उर्दू अफसानाक योगराज प्रभाकर जीक हिन्दी अनुवादक मैथिली भाषाण्तरण - डॉ. आभा झा स्वर्गक (जन्नतक ) दरबज्जा पर ओतुक्का दारोग़ा ओकरा रोकि लेलकै आ पुछलकै- “तों  अपन जिनगी मे कोन एहन काज केने छें जे तोरा  स्वर्गक भीतर प्रवेश भेटौ?” ”हुज़ूर, हम जन्नत पैबा लेल की नञि केलहुॅं?.तीस टा विधर्मीक(काफ़िरक) गर्दन उड़ाओल, ओकर कनियाॅं सभकेॅं विधवा आ धिया पुता केॅं अनाथ बनाओल। एहि तरहेॅं बाक़ी लोक सभ केॅं पता चलि गेल हेतै कि भगवानक आक्रोश (ख़ुदाक क़हर) केकरा कहल जाइ छैक। “सत्ते, तोॅं त' बड़ पैघ काज केलें । हम तोरा सभ सन लोकक लेल फराक सॅं एक टा ख़ास जगहक इंतज़ाम केने छियौ। तों सामने बला नदी पार कय सीधा ओम्हर चलि जो जत' स' धुआॉंक बादल उठि रहलैक अछि। ओत' तोरा एहने एकटा दरबज्जा भेटतौ। ओत' तोहर स्वागत लेल सिकंदर, हलाकू ,चंगेज़ ख़ान, तैमूर, हिटलर और मुसोलिनी सन सन पैघ  सूरमा सभ बेचैनी स' बाट तकैत हेतौ (इंतज़ार क' रहल हेतौ)।. अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। मुबश्शिर अली ज़ैदी (उर्दू) उर्दू अफसानाक योगराज प्रभाकर जीक हिन्दी अनुवादक मैथिली भाषाण्तरण - डॉ. आभा झा ईनाम हम जाहि सरकारी कार्यालय मे काज करै छी ओत'  सपना कीनल जाइत छैक। किछु लोक अपन सपना कौड़ीक भाव बेचि दैत छथि, किछु केॅं  सपनाक बदला अशर्फी देल जाइत छनि। पिछला सप्ताह एकटा युवक एकटा सपना सुनौलक,- “हम सपना मे देखलहुॅं जे ज़मींदार सभहक ज़मीन छीनिकय ग़रीब हलवाहा सभ  मे बाँटि देल गेल।” एहि सपना केॅं सर्वश्रेष्ठ घोषित कयल गेल। काल्हि हम अपना अफ़सर सॅं पूछलियनि- “ओहि युवक केॅं की इनाम भेटलै?” अफ़सर बाजल- “पैघ-पैघ सपना देखनिहार केॅं इनाम मे नीक वेतन पर सरकारी नौकरी देल जाइत छैक। फेर ओ कहियो एहन सपना देखबा जोग रहिये नञि जाइ छैक । अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। इब्न आसी (उर्दू) फेर मनुक्खक की भेलै? उर्दू अफसानाक योगराज प्रभाकर जीक हिन्दी अनुवादक मैथिली भाषाण्तरण - डॉ. आभा झा जखन समुद्र पूरा दुनिया केॅं अपना चपेट मे ल'-लेलकै तखन चारू दिस भगदड़ मचि गेलै।सभ जीव-जन्तु अपन-अपन जान बचब' लेल कोनो ऊँच आ सुरक्षित जगह ताकि रहल छलाह कि तखनहिॅं अचानक घोषणा भेलै कि प्रत्येक जीवक एक-एक गोट जोड़ा अमुक पहाड़ पर स्थित नाव पर पहुँचि जाय।सभ ओम्हरे पड़ायल आ  नाव देखितहिॅं जल्दी स' ओहि पर सवार भ' जाइ गेल। जखन नाव चलबा लेल उद्यत भेल तखन एकटा पुरुष आ एकटा महिला ओतय पहुँचलाह। दूनू नाव पर चढ़ैये बला छलाह कि नाव- चालक(नाविक) ई कहि हुनका बरजि देलक  कि  नाव मे कोनो मनुक्ख नञि बैसि सकै अछि। पुरुष आश्चर्यचकित होइत पुछलक- “कियैक?हज़रत नूहक नाव मे त' मनुक्खो  सवारी केने छल। ” बरज' बला उत्तर देलक- “एत' न कियो नूह अछि आ न ई हुनक नाव छनि, तैं तों दूनू गोटे एहि मे बैसि नञि सकै छह।” “जॅं हम सभ एहि पर सवार नञि भेलियै तखन मनुक्खक वंश (नसल) कोना आगाॅं बढ़तै?एना' त'  मनुक्ख दुनिया सॅं समाप्ते भ' जेतै।” बरज' बला कने हॅंसैत उत्तर देलक-, “अही द्वारे त' तोरा सभ केॅं नाव मे नञि बैसाओल जा रहल छह।” अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। रतन सिंह (उर्दू) बिना शीर्षकक उर्दू अफसानाक योगराज प्रभाकर जीक हिन्दी अनुवादक मैथिली भाषाण्तरण - डॉ. आभा झा एकर शीर्षक उल्लू आ मनुक्ख भ' सकै छै। एक दिन पक्षी सभहक सभा मे उल्लू एक टा  सुझाव देलक जे चिड़ियो सभ कें चाही कि ओ थोड़-बहुत भोजन भंडार क' क'  राखथि, जाहि सॅं ख़राब मौसम मे हुनका कोनो तरहक दिक्कत नञि होनि। तोता जे पक्षी सभ मे सब स' बुद्धिमान मानल जाइत अछि, उल्लूक गप सुनिक' बाजल- “भाइ लोकनि! एहन मूर्खता कहियो नञि करिह'I” “एहि गप मे मूर्खता की छैक?” उल्लू पुछलकI “मूर्खता ई कि जहिया सॅं मनुक्ख अन्न, वस्त्र, जारनि- काठी, रुपया-पैसा आदिक भंडार करब शुरू केलनि, तहिया सॅं ज़रूरतिक चीज बौस्त किछु लोक ल'ग त'  एतेक जमा भ' गेलै जे हुनका सूझि नञि पड़ै छनि ओ ओकर की करथि, दोसर दिस  आन लोक सभ  ग़रीबी, भुखमरी आ बिमारीक ग्रास बनि रहल छथि वा एहि कारण रोज़ मरि रहल छथि I” ई सुनिते उल्लू उल्लू होइतो अपन सुझाव तुरत वापस ल' लेलक I (रत्न सिंह अपन बीहनि कथाक क्रमांक लिखैत छलाह, शीर्षक नहि।) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ओड़िआ मिनी गल्प: मैथिली अनुवाद- सोनालिका महान्ति चित्र : श्वेता झा चौधरी ओड़िआ मिनी गल्प: मैथिली अनुवाद- सोनालिका महान्ति नाम—सच्चिदानन्द कर , जन्म—26-06-1962, शिक्षा—एम.ए., पीएच.डी, वृत्ति—अध्यापन प्रकाशित पुस्तक—16, विभिन्न सारस्वत संसथा द्वारा पुरस्कृत एवं सम्मानित तितली आ प्रेम सच्चिदानन्द कर (मैथिली अनुवाद- सोनालिका महान्ति) तितलीक पाछाँ दौड़ैत-दौड़ैत थाकि गेल छलि ओ छौंड़ी। “केओ पकड़ि दितए !”—सोचैत रहए ओ। “हे लिअ’।” एकटा छौंड़ा ओकर लग आबिक’ कहलकै। छौंड़ी हुलसि उठलि—बरिसकालक धार जकाँ। बाजलि—“कतेक  ने दौड़लहुँ हम।” “हमरा दौड़’ नहि पड़ल।” छौंड़ा कहलकै। “बदमास तितली नहितन !” बाजलि छौंड़ी। बिदा भ’ गेल रहए छौंड़ा। छौंड़ी ओकरा पाछाँसँ सोर केलकै—“अहाँ कोना बुझलिऐ जे...?” “किछु गप नहिओ कहलासँ बुझा जाइ छै।” छौड़ा कहलकै। “एकर माने हम अहाँकेँ निश्चय नीक लगै छी?” छौड़ी बाजलि। मुस्किया उठल छौंड़ा। “लगैए जे अहाँ संग रहलासँ हमर मोनक गप बूझि की की ने धरा देब हमरा हाथमे अहाँ।” छौड़ी बाजलि। सम्बन्धक हाथ बढौलक छौंड़ी। मुस्किया उठलि छौंड़ी। प्रेम भेलै। फेर छौड़ीक हीआ हुलसि उठलै—बरिसकालक धार जकाँ। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ओड़िआ मिनी गल्प: मैथिली अनुवाद- सोनालिका महान्ति नाम—प्रज्ञा महान्ति, शिक्षा—स्नातक, वृत्ति—गृहिणी, अनेक कथा आ कविता विभिन्न पत्र-पत्रिकामे प्रकाशित मेमोरीचिप्स प्रज्ञा महान्ति (मैथिली अनुवाद- सोनालिका महान्ति) ई तँ क्लिअर एक्सीडेंटल केस छिऐ। तखन डाक्टर साहेब परीक्षाक उत्तरपुस्तिका जकाँ एतेक गओरसँ जाँच रिपोर्चमे की देखैत छथिन से जानि नहि ! पोस्टमार्टम हाउसमे ठाढ़ भेल भेल अगुता गेल हरि। “साँझ पड़ि गेलै...बॉडी लॉक क दिऔ।” कहलकनि हरि। “नहि...किछु काल आर ठहरह...। एतबा कहि ओ फेर लाश पर झुकि गेलाह। किछु काल धरि किछु देखलाक बाद हरिक हाथसँ तौलिआ ल’ हतास स्वरमे बजलाह, “एतेक बॉडीक पोस्टमार्टम क’ लेलहुँ, मुदा जे तकै छी से भेटि नहि पाबि रहल अछि। आश्चर्य !!” हरि किछु बूझि नहि पओने रहए एहि गपक अर्थ। खाली प्रश्न भरल आँखिएँ डाक्टरक मुह तकैत रहल। “तखन एहि मेद, मांस, रक्त, मज्जाक समष्टि मनुक्खक शरीरक भीतर कत’ नुकाए रहैत छै भाव, भावना, भय, प्रेमकेँ जोगाक’ राखैबाला ओ मेमोरी चिप। गहे-गहे एतेक तकलोपर भेटल ने किएक ? तँ की ठीके मृत्यु ओहि मेमोरी चिपकेँ अपन संग ल क चलि जाइत छै ?” चिन्ताग्रस्त डाक्टर साबेबक ई बेकल अवस्था देखि एकटा अज्ञात आशंकासँ काँपि गेल छल हरि। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ओड़िआ मिनी गल्प: मैथिली अनुवाद- सोनालिका महान्ति नाम—विनय कुमार दास, जन्म—06-11-1949, विविध विधावदी, बाल साहित्य रचनाकार, कवि, कथाकार, नाटककार, गीतकार ओ अनुवादक, विभिन्न संस्था द्वारा पुरस्कृत ओ सम्मानित, पता—अनामिका नीड़, अंगारगडिआ, बालेश्वर—756001, ओडिशा, मो. नं. 7978860363, ईमेल—bimohitd@gmail.com कर्मफल विनय कुमार दास (मैथिली अनुवाद- सोनालिका महान्ति) --बाबू --किएक बाम्बार तोँ हमर सपनामे आबि रहल छेँ ? --अहाँक हाल बुझबाक लेल। कहू कोना छी ? अच्छा नहि कहू, हमरा बूझल अछि...भ्रूणावस्थामे हमरा मारिक’ तीनटा बेटाकेँ पढ़ा-लिखाक’ योग्य बनौलहुँ। अहाँ सोचैत छलहुँ जे अन्तिम अवस्थामे ओ सब अहाँक सेवा करत। मुदा एखन ओ सब अपन-अपन परिवार ल’ विदेशमे अछि। माए सेहो अहाँकेँ छोड़िक’ परलोक चलि गेल। एखन अहाँ बड़ कष्टमे रहै छी। जँ हम बाँचल रहितहुँ तँ अहाँक देखरेख करितहुँ। --बेटासब चलि गेल तकर दुख नहि अछि। एखन तँ इएह नियम भ’ गेलैए। तोहर माए जे हमरा छोड़ि गेलीह हमरा लेल ततबे दुख...हम हुनका कहिओ दुख नहि देलिअनि...मुदा... --फूसि नहि बाजू बाबू। गर्भपात नहि करेबा लेल माए कतेक बेकल भ’ क’ अहाँकेँ मना क’ रहल छलि...अहाँ माइक दरेगकेँ नहि बूझलिऐ...ओहि पापक फल केओ आन थोड़े भोगतै ? अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ओड़िआ मिनी गल्प- मैथिली अनुवाद—तन्मया तपस्विनी मुर्मू चित्र : श्वेता झा चौधरी ओड़िआ मिनी गल्प: मैथिली अनुवाद—तन्मया तपस्विनी मुर्मू नाम—गायत्री दास, जन्म—19-08-1978, सतत साहित्य चिन्तन। विभिन्न पत्र-पत्रिकामे रचना प्रकाशित होएबाक कारणेँ पाठकीय स्वीकृति आ आदर पबैत रहलीह अछि।एकटा कविता-संग्रह यन्त्रस्थ। पता—पोपुलर स्टाल्स, दुर्गा विहार, अनुगुल, ओडिशा मो. नं. 8249586443 बुझौअलि गायत्री दास युवककेँ भर्ती कएलाक बाद डाक्टर लगमे ठाढ़ भद्र व्यक्तिकेँ बजाक’ पुछलथिन, “अहाँ एहि युवककअभिभावक छिअनि की ?” “जी, हम एकर पिता छिऐ।” भद्र व्यक्ति मूड़ी झुकौने हाथ जोड़ि कृतार्थ होएबाक भंगिमामे ठाढ़ छलाह। “अहाँक बेटा की करैत छथि?” पुछलथिन डाक्टर साहेब। “हमर बेटा नीक जकाँ पढ़ाइ क’ रहल अछि सर। पूरा पंचायतमे फस्ट आएल छल। तेँ धान, खेरही, उड़ीद बेचिक’ एकरा शहरमे पैघ कओलेजमे पढ़बैत छिऐ। आब एक सालक बाद इंजीनियर भ’ निकलत। एतेक संयमी बच्चाक देह किएक खराप भ’ गेलै सर?” “अहाँ बूझि लिअ...अहाँक बेटा ड्रग एडिक्ट अछि आ एहि लेल ई सिमेन बिक्री करैए... भद्र व्यक्ति ओड़िआमे बुझा देबाक लेल डाक्टरक नेहोरा कर’ लगलथिन। मैथिली अनुवाद—तन्मया तपस्विनी मुर्मू अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ओड़िआ मिनी गल्प: मैथिली अनुवाद—तन्मया तपस्विनी मुर्मू नाम—मिनती प्रधान, जन्म—30 अक्टूबर, शिक्षा—स्नातकोत्तर, कृति—समय (ओड़िआ कविता-संग्रह), A new dawn (English poems), Transformative Harmony (English features) पुरस्कार—इन्दुदेवी स्मृति सम्मान 2013, ओडिशा कथा सम्मान 2014, पता— A.301, Surabhi Apartments, Ranka colony road, Bangalore--76 संगी मिनती प्रधान “मामुनि, सुनलिऐ जे रेणु पछिला सप्ताह गाम एलैए।” माए अबाज देलकै। “हँ, कोरोनाक कारणेँ सबटा कओलेज तँ बन्द छै, ककर क्लास लेतै ओ ?” मामुनि विरक्त भ’ बाजलि। “तोँ ओकरासँ भेट करबाक लेल नहि गेलहीँ आ ने ओएह अपना ओहिठाम एलौए। तोँ आएल छेँ से बूझल छै ने ओकरा ?” “दू दिन पहिने अजूक संग भेट भेल छल। कहलक—मामुनि, ओ दिल्लीक एमएनसीमे काज करै छै। ओकर उठब-बैसब पैघ-पैघ लोकसभक संग छै। हम की ओकरासँ भेट करबै ?” ई सुनिक’ माए छगुन्तामे पड़ि गेल। सोच लागल—ई दुनू अन्तरंग संगी नेनहिसँ सब काज संगे-संग करैत रहए। मुदानोकरी पकड़लाक बाद एखन दुनू संगीकेँ ईर्ष्या आ इगो पूरा-पूरी गछाड़ि लेने छै। मैथिली अनुवाद—तन्मया तपस्विनी मुर्मू मोबाइल नं. 7894824113 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। चित्र : श्वेता झा चौधरी ........................................................................................................................ संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल  मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] Videha e-Learning पेटार (रिसोर्स सेन्टर) शब्द-व्याकरण-इतिहास MAITHILI IDIOMS & PHRASES मैथिली मुहावरा एवम् लोकोक्ति प्रकाश- रमाकान्त मिश्र मिहिर (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) डॉ. ललिता झा- मैथिलीक भोजन सम्बन्धी शब्दावली (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) मैथिली शब्द संचय MAITHILI DICTIONARY- RAMDEO JHA (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) ENGLISH MAITHILI COMPUTER DICTIONARY MAITHILI ENGLISH DICTIONARY अणिमा सिंह -Shishu_Geet_Khel_Anima_Singh डॉ. रमण झा मैथिली काव्यमे अलङ्कार    अलङ्कार-भास्कर आनन्द मिश्र (सौजन्य श्री रमानन्द झा "रमण")- मिथिला भाषाक सुबोध व्याकरण BHOLALAL DAS मैथिली सुबोध व्याकरण- भोला लाल दास राधाकृष्ण चौधरी- A Survey of Maithili Literature ........................................................................................................................ मूलपाठ तिरहुता लिपिक उद्भव ओ विकास (यू.पी.एस.सी. सिलेबस) राजेश्वर झा- मिथिलाक्षरक उद्भव ओ विकास (मैथिली साहित्य संस्थान आर्काइव) Surendra Jha Suman दत्त-वती (मूल)- श्री सुरेन्द्र झा सुमन (यू.पी.एस.सी. सिलेबस) प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) CIIL SITE ........................................................................................................................ समीक्षा सुभाष चन्द्र यादव-राजकमल चौधरी: मोनोग्राफ शिव कुमार झा "टिल्लू" अंशु-समालोचना डॉ बचेश्वर झा- B_JHA_Nibhand_Nikunj.pdf डॉ. देवशंकर नवीन- Adhunik_Sahityak_Paridrishya डॉ. रमण झा- भिन्न-अभिन्न प्रेमशंकर सिंह- मैथिली भाषा साहित्य:बीसम शताब्दी (आलोचना) डॉ. रमानन्द झा 'रमण' हिआओल अखियासल     CIIL SITE दुर्गानन्द मण्डल-चक्षु RAMDEO JHA दत्त-वतीक वस्तु कौशल- डॊ. श्रीरामदेवझा SHAILENDRA MOHAN JHA परिचय निचय- डॊ शैलेन्द्र मोहन झा ........................................................................................................................ अतिरिक्त पाठ पहिने मिथिला मैथिलीक सामान्य जानकारी लेल एहि पोथी केँ पढ़ू:- राधाकृष्ण चौधरी- मिथिलाक इतिहास फेर एहि मनलग्गू फाइल सभकेँ सेहो पढ़ू:- केदारनाथ चौधरी चमेलीरानी                         माहुर                          करार कुमार पवन पइठ (मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ कथा) (साभार अंतिका)       डायरीक खाली पन्ना (साभार अंतिका) याेगेन्द्र पाठक वियाेगी- विज्ञानक बतकही रामलोचन ठाकुर- मैथिली लोककथा SAHITYA AKADEMI http://sahitya-akademi.gov.in/publications/e-books.jsp http://sahitya-akademi.gov.in/general/Digitalbooks.jsp CIIL http://corpora.ciil.org/maisam.htm अखियासल (रमानन्द झा रमण) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI1.pdf जुआयल कनकनी- महेन्द्र http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI2.pdf प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI3.pdf सृजन केर दीप पर्व- सं केदार कानन आ अरविन्द ठाकुर http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI4.pdf मैथिली गद्य संग्रह- सं शैलेन्द्र मोहन झा http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI5.pdf JNU http://sanskrit.jnu.ac.in/maithili/index.jsp http://sanskrit.jnu.ac.in/student_projects/lexicon.jsp?lexicon=maithili ARCHIVE.ORG https://archive.org/details/%40vijay_deo_jha?&sort=-publicdate&page=2 VIDEHA MAITHILI BOOKS/ PICTURE-AUDIO-VIDEO ARCHIVE http://videha.co.in/new_page_15.htm https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ ALL INDIA RADIO DOORDARSHAN आकाशवाणी दूरदर्शन http://prasarbharati.gov.in/ http://newsonair.com/ https://doordarshan.gov.in/ आकाशवाणी मैथिली पोडकास्ट http://prasarbharati.gov.in/podcast.php?filterlang=Maithili&from=1947-08-15&fromwp=2020-08-29&to=2050-12-31&search=GO आकाशवाणी पटना/ दरभंगा मैथिली रेजनल न्यूज टेक्स्ट डाउनलोड-1 http://newsonair.com/RNU-NSD-Audio-Archive-Search.aspx आकाशवाणी पटना/ दरभंगा मैथिली रेजनल न्यूज टेक्स्ट डाउनलोड-2 http://newsonair.com/Regional-Text.aspx आकाशवाणी दरभंगा http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=282 आकाशवाणी दरभंगा यू ट्यूब चैनल https://www.youtube.com/channel/UCGdNveEFmv4pPolWiTEMxVA आकाशवाणी भागलपुर http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=359 आकाशवाणी पूर्णियाँ http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=256 आकाशवाणी पटना http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=122 IGNCA http://ignca.nic.in/coilnet/mithila.htm http://ignca.nic.in/coilnet/kalyani.htm (MAITHILI ENGLISH DICTIONARY) http://tdil.mit.gov.in/CoilNet/IGNCA/mithila.htm MITHILA DARSHAN https://mithiladarshan.com/ (online pdf of Maithili journal) I LOVE MITHILA https://www.ilovemithila.com/  (online maithili journal) मैथिली साहित्य संस्थान https://www.maithilisahityasansthan.org/ https://www.maithilisahityasansthan.org/resources (online pdf of Reasearch Papers/ books) ........................................................................................................................ VIDEHA e-LEARNING YOUTUBE CHANNEL https://www.youtube.com/channel/UC4abVKqMj2pDWIAkXiOHp7A (अनुवर्तते) -गजेन्द्र ठाकुर विदेहक किछु विशेषांक:- १) हाइकू विशेषांक १२ म अंक, १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf          Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf       12.pdf २) गजल विशेषांक २१ म अंक,  १ नवम्बर २००८ Videha_01_11_2008.pdf       Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf         21.pdf ३) विहनि कथा विशेषांक ६७ म अंक, १ अक्टूबर २०१० Videha_01_10_2010        Videha_01_10_2010_Tirhuta             67 ४) बाल साहित्य विशेषांक ७० म अंक, १५ नवम्बर २०१० Videha_15_11_2010        Videha_15_11_2010_Tirhuta             70 ५) नाटक विशेषांक ७२ म अंक १५ दिसम्बर२०१० Videha_15_12_2010        Videha_15_12_2010_Tirhuta           72 ६) नारी विशेषांक ७७म अंक ०१ मार्च २०११ Videha_01_03_2011        Videha_01_03_2011_Tirhuta           77 ७) अनुवाद विशेषांक (गद्य-पद्य भारती) ९७म अंक Videha_01_01_2012 Videha_01_01_2012_Tirhuta           97 ८) बाल गजल विशेषांक विदेहक अंक १११ म अंक, १ अगस्त २०१२ Videha_01_08_2012        Videha_01_08_2012_Tirhuta           111 ९) भक्ति गजल विशेषांक १२६ म अंक, १५ मार्च २०१३ Videha_15_03_2013        Videha_15_03_2013_Tirhuta           126 १०) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक १४२ म, अंक १५ नवम्बर २०१३ Videha_15_11_2013        Videha_15_11_2013_Tirhuta           142 ११) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 १२) अरविन्द ठाकुर विशेषांक १८९ म अंक १ नवम्बर २०१५ Videha_01_11_2015 १३) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक १९१ म अंक १ दिसम्बर २०१५ Videha_01_12_2015 १४) विदेह सम्मान विशेषा‍क- २००म अ‍क १५ अप्रैल २०१६/ २०५ म अ‍क १ जुलाई २०१६ Videha_15_04_2016 Videha_01_07_2016 १५) मैथिली सी.डी./ अल्बम गीत संगीत विशेषांक- २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ Videha_01_01_2017 १६) मैथिली वेब पत्रकारिता विशेषांक VIDEHA 313 लेखकसं आमंत्रित रचनापर आम‍ंत्रित आलोचकक टिप्पणीक शृंखला १७) मैथिली बीहनि कथा विशेषांक-२ VIDEHA 317 १. कामिनीक पांच टा कविता आ ओइपर मधुकान्त झाक टिप्पणी विदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016 एडिटर्स चोइस सीरीज एडिटर्स चोइस सीरीज-१ विदेहक १२३ म (०१ फरबरी २०१३) अंकमे बलात्कारपर मैथिलीमे पहिल कविता प्रकाशित भेल छल। ई दिसम्बर २०१२ क दिल्लीक निर्भया बलात्कार काण्डक बादक समय छल। ओना ई अनूदित रचना छल, तेलुगुमे पसुपुलेटी गीताक एहि कविताक हिन्दी अनुवाद केने छलीह आर. शांता सुन्दरी आ हिन्दीसँ मैथिली अनुवाद केने छलाह विनीत उत्पल। हमर जानकारीमे एहिसँ बेशी सिहराबैबला कविता कोनो भाषामे नहि रचल गेल अछि। सात सालक बादो ई समस्या ओहने अछि। ई कविता सभकेँ पढ़बाक चाही, खास कऽ सभ बेटीक बापकेँ, सभ बहिनक भाएकेँ आ सभ पत्नीक पतिकेँ। आ विचारबाक चाही जे हम सभ अपना बच्चा सभ लेल केहन समाज बनेने छी। एडिटर्स चोइस सीरीज-१ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-२ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच ब्रेस्ट कैसरक समस्यापर विदेह मे मीना झा केर एकटा लघु कथा प्रकाशित भेल। ई मैथिलीक पहिल कथा छल जे ब्रेस्ट कैसर पर लिखल गेल। हिन्दीमे सेहो ताधरि एहि विषयपर कथा नहि लिखल गेल छल, कारण एहि कथाक ई-प्रकाशित भेलाक १-२ सालक बाद हिन्दीमे दू गोटेमे घोंघाउज भऽ रहल छल कि पहिल हम आकि हम, मुदा दुनूक तिथि मैथिलीक कथाक परवर्ती छल। बादमे ई विदेह लघु कथामे सेहो संकलित भेल। एडिटर्स चोइस सीरीज-२ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-३ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिलक किछु बाल कविता प्रकाशित भेल। बादमे हुनकर ३ टा बाल कविता विदेह शिशु उत्सवमे संकलित भेल जाहिमे २ टा कविता बेबी चाइल्डपर छल। पढ़ू ई तीनू कविता, बादक दुनू बेबी चाइल्डपर लिखल कविता पढ़बे टा करू से आग्रह। एडिटर्स चोइस सीरीज-३ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-४ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच जगदानन्द झा मनुक एकटा दीर्घ बाल कथा कहि लिअ बा उपन्यास प्रकाशित भेल, नाम छल चोनहा। बादमे ई रचना विदेह शिशु उत्सवमे संकलित भेल, ई रचना बाल मनोविज्ञानपर आधारित मैथिलीक पहिल रचना छी, मैथिली बाल साहित्य कोना लिखी तकर ट्रेनिंग कोर्समे एहि उपन्यासकेँ राखल जेबाक चाही। कोना मॊडर्न उपन्यास आगाँ बढ़ै छै, स्टेप बाइ स्टेप आ सेहो बाल उपन्यास। पढ़बे टा करू से आग्रह। एडिटर्स चोइस सीरीज-४ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-५ एडिटर्स चोइस ५ मे मैथिलीक "उसने कहा था" माने कुमार पवनक दीर्घकथा "पइठ" (साभार अंतिका) । हिन्दीक पाठक, जे "उसने कहा था" पढ़ने हेता, केँ बुझल छन्हि जे कोना अहि कथाकेँ रचि चन्द्रधर शर्मा ’गुलेरी’ अमर भऽ गेलाह। हम चर्चा कऽ रहल छी, कुमार पवनक "पइठ" दीर्घकथाक। एकरा पढ़लाक बाद अहाँकेँ एकटा विचित्र, सुखद आ मोन हौल करैबला अनुभव भेटत, जे सेक्सपीरिअन ट्रेजेडी सँ मिलितो लागत आ फराको। मुदा एहि रचनाकेँ पढ़लाक बाद तामस, घृणा सभपर नियंत्रणकेँ आ सामाजिक/ पारिवारिक दायित्वकेँ सेहो अहाँ आर गंभीरतासँ लेबै, से धरि पक्का अछि। मुदा एकर एकटा शर्त अछि जे एकरा समै निकालि कऽ एक्के उखड़ाहामे पढ़ि जाइ। एडिटर्स चोइस सीरीज-५ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-६ जगदीश प्रसाद मण्डलक लघुकथा "बिसाँढ़": १९४२-४३ क अकालमे बंगालमे १५ लाख लोक मुइला, मुदा अमर्त्य सेन लिखैत छथि जे हुनकर कोनो सर-सम्बन्धी एहि अकालमे नहि मरलन्हि। मिथिलोमे अकाल आएल १९६७ ई. मे आ इन्दिरा गाँधी जखन एहि क्षेत्र अएली तँ हुनका देखाओल गेल जे कोना मुसहर जातिक लोक बिसाँढ़ खा कऽ एहि अकालकेँ जीति लेलन्हि। मैथिलीमे लेखनक एकभगाह स्थिति विदेहक आगमनसँ पहिने छल। मैथिलीक लेखक लोकनि सेहो अमर्त्य सेन जेकाँ ओहि महाविभीषिकासँ प्रभावित नहि छला आ तेँ बिसाँढ़पर कथा नहि लिखि सकला। जगदीश प्रसाद मण्डल एहिपर कथा लिखलन्हि जे प्रकाशित भेल चेतना समितिक पत्रिकामे, मुदा कार्यकारी सम्पादक द्वारा वर्तनी परिवर्तनक कारण ओ मैथिलीमे नहि वरण् अवहट्ठमे लिखल बुझा पड़ल, आ ओतेक प्रभावी नहि भऽ सकल कारण विषय रहै खाँटी आ वर्तनी कृत्रिम। से एकर पुनः ई-प्रकाशन अपन असली रूपमे भेल विदेहमे आ ई संकलित भेल "गामक जिनगी" लघुकथा संग्रहमे। एहि पोथीपर जगदीश प्रसाद मण्डलकेँ टैगोर लिटरेचर अवार्ड भेटलनि। जगदीश प्रसाद मण्डलक लेखनी मैथिली कथाधाराकेँ एकभगाह हेबासँ बचा लेलक, आ मैथिलीक समानान्तर इतिहासमे मैथिली साहित्यकेँ दू कालखण्डमे बाँटि कऽ पढ़ए जाए लागल- जगदीश प्रसाद मण्डलसँ पूर्व आ जगदीश प्रसाद मण्डल आगमनक बाद। तँ प्रस्तुत अछि लघुकथा बिसाँढ़- अपन सुच्चा स्वरूपमे। एडिटर्स चोइस सीरीज-६ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-७ मैथिलीक पहिल आ एकमात्र दलित आत्मकथा: सन्दीप कुमार साफी। सन्दीप कुमार साफीक दलित आत्मकथा जे अहाँकेँ अपन लघु आकाराक अछैत हिलोड़ि देत आ अहाँक ई स्थिति कऽ देत जे समानान्तर मैथिली साहित्य कतबो पढ़ू अहाँकेँ अछौं नहि होयत। ई आत्मकथा विदेहमे ई-प्रकाशित भेलाक बाद लेखकक पोथी "बैशाखमे दलानपर"मे संकलित भेल आ ई मैथिलीक अखन धरिक एकमात्र दलित आत्मकथा थिक। तँ प्रस्तुत अछि मैथिलीक पहिल दलित आत्मकथा: सन्दीप कुमार साफीक कलमसँ। एडिटर्स चोइस सीरीज-७  (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-८ नेना भुटकाकेँ रातिमे सुनेबा लेल किछु लोककथा (विदेह पेटारसँ)। एडिटर्स चोइस सीरीज-८ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-९ मैथिली गजलपर परिचर्चा (विदेह पेटारसँ)। एडिटर्स चोइस सीरीज-९ (डाउनलोड लिंक) जगदीश प्रसाद मण्डल जीक ६५ टा पोथीक नव संस्करण विदेहक २३३ सँ २५० धरिक अंकमे धारावाहिक प्रकाशन  नीचाँक लिंकपर पढ़ू:- Videha_15_05_2018 Videha_01_05_2018 Videha_15_04_2018 Videha_01_04_2018 Videha_15_03_2018 Videha_01_03_2018 Videha_15_02_2018 Videha_01_02_2018 Videha_15_01_2018 Videha_01_01_2018 Videha_15_12_2017 Videha_01_12_2017 Videha_15_11_2017 Videha_01_11_2017 Videha_15_10_2017 Videha_01_10_2017 Videha_15_09_2017 Videha_01_09_2017 विदेह ई-पत्रिकाक  बीछल रचनाक संग- मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ रचनाक एकटा समानान्तर संकलन: विदेह: सदेह: १ (२००८-०९) देवनागरी विदेह: सदेह: १ (२००८-०९) तिरहुता विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) देवनागरी विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) तिरहुता विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०)देवनागरी विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०) तिरहुता विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०)देवनागरी विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०) तिरहुता विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]देवनागरी विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]  तिरहुता विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]- दोसर संस्करण देवनागरी विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ]देवनागरी विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ] तिरहुता विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ]देवनागरी विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ]  तिरहुता विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ]देवनागरी विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ] तिरहुता विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ]देवनागरी विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ] तिरहुता विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ]देवनागरी विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ] तिरहुता विदेह:सदेह ११ विदेह:सदेह १२ विदेह:सदेह १३ The readers of English translations of Maithili Novel "sahasrabadhani" and verse collection "sahasrabdik chaupar par" has intimated that the English translation has not been able to grasp the nuances of original Maithili. Therefore the Author has started translating his Maithili works in English himself. After these translations are complete these would be the official translations authorised by the Author of the original works.-Editor Maithili Books can be downloaded from: https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ विदेह सम्मान: सम्मान-सूची (समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार सहित) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। सूचना/ घोषणा १ "विदेह सम्मान" समानान्तर साहित्य अकदेमी पुरस्कारक नामसँ प्रचलित अछि। "समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार" (मैथिली), जे साहित्य अकादेमीक मैथिली विभागक गएर सांवैधानिक काजक विरोधमे शुरु कएल छल, लेल अनुशंसा आमन्त्रित अछि। अनुशंसा २०१९ आ २०२० बर्ख लेल निम्न कोटि सभमे आमन्त्रित अछि: १) फेलो २)मूल पुरस्कार ३)बाल-साहित्य ४)युवा पुरस्कार आ ५) अनुवाद पुरस्कार। अपन अनुशंसा ३१ दिसम्बर २०२० धरि २०१९ पुरस्कारक लेल आ ३१ मार्च २०२१ धरि २०२०क पुरस्कारक लेल पठाबी। पुरस्कारक सभ क्राइटेरिया साहित्य अकादेमी, दिल्लीक समानान्तर पुरस्कारक समक्ष रहत, जे एहि लिंक sahitya-akademi.gov.in पर उपलब्ध अछि। अपन अनुशंसा editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २ “मिथिला मखान” फिल्म देखू मात्र १०१ टाकामे। Android App “BEJOD” download करू वा जाउ www.bejod.in पर, signup करू, एकटा ईमेल जायत, अपन ईमेल खोलू आ ओकरा क्लिक करू अहाँक अकाउंट एक्टीवेट भय जायत। आब मिथिला मखान रेण्ट पर लिअ, डेबिट कार्डसँ १०१ टाका अॉनलाइन पेमेंट करू आ फिल्म देखू। ३ विदेह अपन आगामी अंक (२०२१ क प्रारम्भमे) श्री रामलोचन ठाकुर पर विशेषांक निकालबाक नेयार केने अछि। हुनका सम्बन्धी रचना आमंत्रित अछि (संस्मरण, साक्षात्कार, समीक्षा आदि) जे ३१ दिसम्बर २०२० धरि editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाओल जा सकैत अछि। विदेह पेटारक अन्तर्गत (पोथी डाउनलोड साइट) मे http://www.videha.co.in/new_page_15.htm  हुनकर मौलिक, अनूदित आ सम्पादित रचना फ्री पी.डी.एफ. डाउनलोड लेल उपलब्ध अछि। विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम्: VIDEHA: AN IDEA FACTORY (c)२००४-२०२१. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHAसम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: डॉ उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम वि‍लास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक -स्त्री कोना- इरा मल्लिक। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि)editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि। एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै, आ से हानि-लाभ रहित आधारपर छै आ तैँ ऐ लेल कोनो रॊयल्टीक/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै। तेँ रॉयल्टीक/ पारिश्रमिकक इच्छुक विदेहसँ नै जुड़थि, से आग्रह। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत।  एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-2021 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। ५ जुलाई २००४ केँ http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA वि  दे  ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् 'विदेह' ३१७ म अंक ०१ मार्च २०२१ (वर्ष १४ मास १५९ अंक ३१७)

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विंदिह मैथिली foetal ताथा विदेह-सदेह ४, fate www.videha.co.in पेटार (अंक 49-900) सँ, मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ विहनि कथाक एकटा समानान्तर संकलन पट मम ‘ DB कक > ae 7 NES a PIONS iy = AOR = Dee rd DN = ही क्र Ne ves ae Ad ‘Fen कै ae wm oe er. = e a न eh ef pa SKB, 5 () (Ba, Rar / j ne Fe Za bus arn <2 t ao J is Te ; Thy ree hAtes x = a) ) B, > Gee Ea 4 ys 4 C j |) Wye 0 Cray aw fv) Seoen SN x \ Dl [Ney a ees ee m BD ne G 2 pa ue (Df a hea eS ey ¥ ay xe २ YS Ale eae SI a, 5 | Br -_ विंदेह-प्रथम मैथिली cles ई-पत्रिका —_ >> हक ISSN 2229-547X VIDEHA — सम्पादकः गजेन्द्र ठाकुर! सह-सम्पादकः उमेश wet | ; सहायक सम्पादकः शिव कुमार झा आ मुन्नाजी (मनोज कुमार FeAl भाषा-सम्पादन: नागेन्द्र कुमार झा आ पउ्जीकार विद्यानन्द झा। कला-सम्पादन: ज्योति झा चौधरी आ रश्मि रेखा सिन्हा। कक सम्पादक-शोध-अन्वेषण: डॉ. जया वर्मा आ डॉ. राजीव कुमार TAH सम्पादक-नाटक-रंगमंच-चलचित्र: बेचन STR सम्पादक-सूचना-सम्पर्क-समाद: पूनम मंडल आ प्रियंका झा। co —_ ‘ सम्पादक-अनुवाद विभाग: विनीत उत्पल। Ee

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