VIDEHA — Issue 318 / अंक ३१८

Publication: VIDEHA · Issue: 318
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विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA ISSN 2229-547X VIDEHA 'विदेह' ३१८ म अंक १५ मार्च २०२१ (वर्ष १४ मास १५९ अंक ३१८) ऐ अंकमे अछि:- १. गजेन्द्र ठाकुर- संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल  मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल सेहो] [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] [FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI ALSO] २. गद्य २.१.जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’-आँखिमे चित्र हो मैथिलीकेर (आत्म-कथा)-आगाँ २.२. रबीन्द्र नारायण मिश्र- धारावाहिक उपन्यास-लजकोटर (१८ म खेप) २.३.नन्द विलास राय-संस्कारी कन्या २.४.मुन्नाजी- विचरण ! २.५.बिटू मिश्र वत्स २.६.मुन्नाजी-बीहनि कथाक  दशा- दिशा २.७.मूल नेपाली कथाकार:रचना शर्मा-अनुवाद: विन्देश्वर ठाकुर-चरित्र २.८.उमेश मण्डल-१०५ म् ‘सगर राति दीप जरय’ कथा चेतना रैली ३. पद्य ३.१.सुभाष कुमार कामत-जनगणनामे ३.२.आशीष अनचिन्हार- गजल ४.स्त्री कोना (सम्पादक- इरा मल्लिक) ४.१.आकांक्षा कर्ण- बेटी हमर अभिमान ४.२.सोनी कर्ण-बेटी ४.३.रागिनी प्रीत-पोथी ४.४.ममता कर्ण- किताब ४.५.चंदना दत्त-मोह ४.६.सविता 'सुमन'-माँ Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Books/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाउ। VIDEHA ARCHIVE विदेह पेटार View Videha googlegroups (since July 2008) view Videha Facebook Official Group (since January 2008)- for announcements १. गजेन्द्र ठाकुर ........................................................................................................................ ........................................................................................................................ [संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल  मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री] [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल सेहो] [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] [FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI ALSO] यू. पी. एस. सी. (मेन्स) २०२० ऑप्शनल: मैथिली साहित्य विषयक टेस्ट सीरीज यू.पी.एस.सी. क प्रिलिमिनरी परीक्षा २०२० सम्पन्न भऽ गेल अछि। जे परीक्षार्थी एहि परीक्षामे उत्तीर्ण करताह आ जँ मेन्समे हुनकर ऑप्शनल विषय मैथिली साहित्य हेतन्हि तँ ओ एहि टेस्ट-सीरीजमे सम्मिलित भऽ सकैत छथि। टेस्ट सीरीजक प्रारम्भ प्रिलिम्सक रिजल्टक तत्काल बाद होयत। टेस्ट-सीरीजक उत्तर विद्यार्थी स्कैन कऽ editorial.staff.videha@gmail.com पर पठा सकैत छथि, जँ मेलसँ पठेबामे असोकर्ज होइन्हि तँ ओ हमर ह्वाट्सएप नम्बर 9560960721 पर सेहो प्रश्नोत्तर पठा सकैत छथि। संगमे ओ अपन प्रिलिम्सक एडमिट कार्डक स्कैन कएल कॉपी सेहो वेरीफिकेशन लेल पठाबथि। परीक्षामे सभ प्रश्नक उत्तर नहि देमय पड़ैत छैक मुदा जँ टेस्ट सीरीजमे विद्यार्थी सभ प्रश्नक उत्तर देताह तँ हुनका लेल श्रेयस्कर रहतन्हि। विदेहक सभ स्कीम जेकाँ ईहो पूर्णतः निःशुल्क अछि।- गजेन्द्र ठाकुर संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सर्विसेज (मुख्य) परीक्षा, २०२० मैथिली (ऐच्छिक) लेल टेस्ट सीरीज/ प्रश्न-पत्र- १ आ २ TEST SERIES-1 TEST SERIES-2 [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल/ FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI] NTA_UGC_NET_MAITHILI_01 NTA_UGC_NET_MAITHILI_02 NTA_UGC_NET_MAITHILI_03 (श्री शम्भु कुमार सिंह द्वारा संकलित) Videha e-Learning MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) UPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS BPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. (ऐच्छिक) मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. (अनिवार्य) मैथिली प्रश्नपत्र- बी.पी.एस.सी.(ऐच्छिक) मैथिलीक वर्तनी १ भाषापाक २ मैथिलीक वर्तनीमे पर्याप्त विविधता अछि। मुदा प्रश्नपत्र देखला उत्तर एकर वर्तनी इग्नू BMAF001 सँ प्रेरित बुझाइत अछि, से एकर एकरा एक उखड़ाहामे उनटा-पुनटा दियौ, ततबे धरि पर्याप्त अछि। यू.पी.एस.सी. क मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेल सेहो ई पर्याप्त अछि, से जे विद्यार्थी मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेने छथि से एकर एकटा आर फास्ट-रीडिंग दोसर-उखड़ाहामे करथि| IGNOU  इग्नू       BMAF-001 ........................................................................................................................ MAITHILI (OPTIONAL) TOPIC 1    [Place of Maithili in Indo-European Language Family/ Origin and development of Maithili language (Sanskrit, Prakrit, Avhatt, Maithili) भारोपीय भाषा परिवार मध्य मैथिलीक स्थान/ मैथिली भाषाक उद्भव ओ विकास (संस्कृत, प्राकृत, अवहट्ट, मैथिली)] TOPIC 2    (Criticism- Different Literary Forms in Modern Era/ test of critical ability of the candidates) TOPIC 3    (ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददास सिलेबसमे छथि आ रसमय कवि चतुर चतुरभुज विद्यापति कालीन कवि छथि। एतय समीक्षा शृंखलाक प्रारम्भ करबासँ पूर्व चारू गोटेक शब्दावली नव शब्दक पर्याय संग देल जा रहल अछि। नव आ पुरान शब्दावलीक ज्ञानसँ ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददासक प्रश्नोत्तरमे धार आओत, संगहि शब्दकोष बढ़लासँ खाँटी मैथिलीमे प्रश्नोत्तर लिखबामे धाख आस्ते-आस्ते खतम होयत, लेखनीमे प्रवाह आयत आ सुच्चा भावक अभिव्यक्ति भय सकत।) TOPIC 4                (बद्रीनाथ झा शब्दावली आ मिथिलाक कृषि-मत्स्य शब्दावली) TOPIC 5                (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोरिक गाथामे समाज ओ संस्कृति) TOPIC 6                (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- विद्यापति) TOPIC 7                (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- पद्य समीक्षा- बानगी) TOPIC 8                (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोक गाथा नृत्य नाटक संगीत) TOPIC 9                (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- यात्री) TOPIC 10               (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली रामायण) TOPIC 11               (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली उपन्यास) TOPIC 12               (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- शब्द विचार) TOPIC 13               (तिरहुता लिपिक उद्भव ओ विकास) TOPIC 14                 (आधुनिक नाटकमे चित्रित निर्धनताक समस्या- शम्भु कुमार सिंह)् TOPIC 15                 (स्वातंत्र्योत्तर मैथिली कथामे सामाजिक समरसता- अरुण कुमार सिंह) TOPIC 16                 (यू. पी.एस.सी. मैथिली प्रथम पत्रक परीक्षार्थी हेतु उपयोगी संकलन, मैथिलीक प्रमुख उपभाषाक क्षेत्र आ ओकर प्रमुख विशेषता, मैथिली साहित्यक आदिकाल, मैथिली साहित्यक काल-निर्धारण- शम्भु कुमार सिंह) TOPIC 17                (मैथिली आ दोसर पुबरिया भाषाक बीचमे सम्बन्ध (बांग्ला, असमिया आ ओड़िया) [यू.पी.एस.सी. सिलेबस, पत्र-१, भाग-“ए”, क्रम-५]) TOPIC 18                 [मैथिली आ हिन्दी/ बांग्ला/ भोजपुरी/ मगही/ संथाली- बिहार लोक सेवा आयोग (बी.पी.एस.सी.) केर सिविल सेवा परीक्षाक मैथिली (ऐच्छिक) विषय लेल] ........................................................................................................................ GENERAL STUDIES (PRELIMINARY & MAINS) GS (Pre) TOPIC 1 GS (Mains) NCERT-ENVIRONMENT CLASS XI-XII NCERT PDF I-XII TN BOARD PDF I-XII ALL INDIA RADIO ENGLISH NEWS ALL INDIA RADIO NEWS ARCHIVE ALL INDIA RADIO TALKS AND CURRENT AFFAIRS RAJYA SABHA TV NEWS DISCUSSIONS ........................................................................................................................ OTHER OPTIONALS ........................................................................................................................ IGNOU eGYANKOSH (अनुवर्तते) -गजेन्द्र ठाकुर २. गद्य २.१.जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’-आँखिमे चित्र हो मैथिलीकेर (आत्म-कथा)-आगाँ २.२. रबीन्द्र नारायण मिश्र- धारावाहिक उपन्यास-लजकोटर (१८ म खेप) २.३.नन्द विलास राय-संस्कारी कन्या २.४.मुन्नाजी- विचरण ! २.५.बिटू मिश्र वत्स २.६.मुन्नाजी-बीहनि कथाक  दशा- दिशा २.७.मूल नेपाली कथाकार:रचना शर्मा-अनुवाद: विन्देश्वर ठाकुर-चरित्र २.८.उमेश मण्डल-१०५ म् ‘सगर राति दीप जरय’ कथा चेतना रैली जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’ सम्पर्क -8789616115 आँखिमे चित्र हो मैथिलीकेर ( आत्म-कथा ) आँखिमे चित्र हो मैथिली केर ( आत्म-कथा ) 8.स्वयंसं साक्षात्कार सिंह साहेबक बात सत्य सिद्ध भेल | मिश्र जी कें कोनो क्षति नै भेलनि | एक मासक बाद रिजल्ट निकललै | सभकें अपन-अपन तपक अनुसार परीक्षा-फल प्राप्त    भेलनि |ठाकुर जी (अशोक कुमार ठाकुर) प्रथम श्रेणी मे प्रथम स्थान पौलनि | झाजी आ मिश्र जीक संग हमहूँ द्वितीय श्रेणीमे उतीर्ण भेलहुँ | हमरा लगभग छप्पन  प्रतिशत अंक प्राप्त भेल | अंतिम वर्षक परिणाम एहिसं अधलाह नहि हो, से ध्यानमे राखि दोसर वर्षमे पढ़ाइ-लिखाइ प्रारंभ भेल | आब मात्र एकटा लक्ष्यपर ध्यान केन्द्रित केलहुं |आब गामो जाएब कम क’ देलहुं |गामसं मासे-मासे आवश्यकतानुसार पाइ मनीआर्डर द्वारा प्राप्त भ’ जाइ छल |किछु मास पछिला सालक छात्रवृतिक पाइ सेहो संग देलक | मुदा ओ पर्याप्त नहि छल, तें गामसं सेहो मनीआर्डरक प्रतीक्षा रहैत छल | गाममे पाइक व्यवस्था कोना होइत छल,से हम नहि बुझि पबैत छलहुँ |पिता नै चाहैत छलाह जे घरक समस्यासं हम अवगत होइ | गाममे छलहुँ त देखने छलहुँ जे समय-समयपर भार-चंगेरा, ब्राह्मण-भोजन चलैत रहैत छलै | मुदा, ओकर व्यवस्था कोना होइत छलै, ताहि तथ्यसं अनभिग्य छलहुँ | एक बेर गामसं मनीआर्डर एबामे बहुत देरी भ’ गेल | मिश्रजीसं तत्काल किछु पैंच ल’ क’ काज चला लेलहुं आ फेर गाम चिट्ठी लिखलहुँ | तकर बादो बहुत देरी भेलै, तखन चिन्ता भेल, पैंच सधाबक छल आ दोसर मासक खर्च लेल सेहो आवश्यकता छल | गाम पहुँचलहुँ | पता चलल जे दू कट्ठा खेत भरना ध’ क’ पाइक व्यवस्थामे लागल छलाह, मुदा नै भ’ रहल छलनि | एहि बेर बाबूकें बहुत असहाय देखलियनि | एक ठाम पाँच कट्ठामे गहुम लागल छलनि | गहूम दू मासमे कटितै, अहीपर साल भरिक खर्च निर्भर करतैक | ई कोना भरना लगा देल जाए | एकरा भरना राख’ चाहथि, त तुरत पाइक व्यवस्था भ’ सकै छनि, मुदा दू मासक बाद फेर सात आदमीक लेल भोजनक व्यवस्थाक प्रश्न छै | पता लागल जे लगभग  अधिक खेत भरना लागल छनि, किछु टाका पाँच प्रतिशत मासिक सूदिपर नेने छथिन माने साठि प्रतिशत सालाना ब्याजपर | हित-अपेक्षितक दू टा गहना सेहो बंधक राखि क’ काज कएल गेल छै | बाबू साँझमे लगमे बैसाक’ कहलनि : हम आब हिम्मत हारि चुकल छी, हमर विचार जे आब बियाह क’ लैह, दोसर कोनो रस्ता नै देखाइए | हम चिन्तित भ’ गेलहुँ | हमरा की करबाक चाही ? बाबू त पहिने बजैत  छलाह जे पढ़ि-लिखिक’ अपना मोने वियाह करता, मुदा हुनका सोझां सात आदमीक परिवार छलनि, हमर पढ़ाइक खर्च छलनि | मूडन,उपनयन,श्राद्ध आ बरखीक भोज देखिक’ ई नहि पता चलैत छलै जे घरमे कोनो आर्थिक समस्या छै, आर्थिक स्थितिक पता पढाइक खर्च जुटयबाकाल  चलैत छलै | भोजक समय सर-कुटुम्ब सभक सेहो सहयोग प्राप्त हेबाक परम्परा छलै, मुदा समुचित शिक्षाक लेल ई परम्परा नै छलै | समुचित शिक्षा अनिवार्य नहि मानल जाइत छल | टोलमे दू-चारि परिवार छोडिक’ सभ परिवारक मोटा-मोटी यैह स्थिति छलै,तें हमरा बयसक कय गोटे पढाइ  छोडि चुकल छलाह आ  गृहस्थ बनि चुकल छलाह, रोजी-रोटीक जोगारमे लागि गेल छलाह | भरिसक एहने स्थितिमे हमर पिता सेहो हाई स्कूलमे पढाइ  छोडिक’ नोकरीक लेल कलकत्ताक बाट पकड़ने छल हेताह | मुदा ओ अपनासं नीक जीवनक सपना देखि रहल छलाह आ ताहि लेल हमर पढाई नहि छोडब’ चाहैत छलाह | तखन यैह एकमात्र समाधान देखाइत छलनि जे हमर विवाह करा देथि | ओहि समय बैंक द्वारा शिक्षा ऋण नहि देल जाइत छलै, तें गरीब परिवारक विद्यार्थीक पढाईक  खर्चक लेल विवाह कराएब एकमात्र लोकप्रिय समाधान छलै | बहुत कन्यागत ई सोचिक’ एहेन कन्यादान करैत छलाह जे लड़का पढ़ि-लिखिक’ नीक नोकरी कर’ लगतै त’ कन्याक जीवन सुखमय भ’ जेतनि | अधिक कन्यागतक मनोकामना पूर्ण होइत छलनि | जिनकर मनोकामना पूर्ण नहि होइत छलनि, हुनका देखिक’ दोसर  कन्यागत सभ एहेन निर्णय लेबासं डेराइत छलाह | हमरा पिताक सलाह मानबाक अतिरिक्त कोनो दोसर उपाय नहि सूझल | तय भ’ गेलै जे हमर विवाह हैत | तत्काल बहुत अधिक ब्याजपर किछु पाइ  ल’क’ हम ढोली विदा भ’ गेलहुँ | रस्तामे चिन्तन चलि रहल छल | ओहि समय कोनो लड़का अपन विवाहक सम्बन्धमे अपने नहि किछु बजैत छल | बाबू-बाबा,कक्का-मामा यैह सभ बजैत छलाह | लड़का ओकर पालन करैत छल | हमरा ई सुविधा छल जे हम अपन विचार प्रगट क’ सकैत छी | हम सोचलहुँ, जखन विवाह करब आब निश्चित भ’ गेल अछि त किएक ने एकर प्रयास करी जे एहेन ठाम हो जतय लड़कीक विषयमे हमरो बूझल हो | हम मोन पाड़’ लगलहुँ एहेन लड़की जकरा देखने होइऐक | समय-समय पर कतहु कोनो गाम जाइत छलहुँ |एक ठाम देखने रही एकटा लड़की, नौमामे  पढ़ि रहल छलीह, देखबामे नीक छलीह | मुदा कहियो ने हुनकासं गप भेल छल ने हुनका घरक कोनो आन लोकसं सम्पर्क छल |तकर कोनो आवश्यकता सेहो नहि बुझाएल छल मुदा, हमरा विषयमे हुनका बूझल हेतनि,से सोचैत रही | ओहि समय यैह अवस्था लड़कीक विवाहक लेल उपयुक्त मानल जाइत छलै | तें हम सोचलहुँ, यदि हुनका सभकें पता चलनि जे हमर विवाह  होम’ जा रहल अछि, त अवश्य ओ सभ हमरा ओत’ प्रस्ताव ल’ क’ जा सकैत छथि | बेटाबलाक  दिससं पहल करबाक चलन नै छलै | बेटाबला गम्भीर रहैत छलाह, एहिसं बेशी लाभ हेबाक आशा रहैत छलनि | हमरा होइत छल जे लड़का दिससं सेहो पहल करबाकें  कोनो अनुचित नै मानल जेबाक चाही | बेटीबलाकें लड़का आ ओकर परिवारक विषयमे जे किछु पता लगाबक रहै छै से सभटा स्पष्ट सुचित करबैत लड़कीक पिताक नामसं एकटा पत्र लिखि हम पठा देलियनि | हुनका लिखलियनि जे जौं अपने हमरा परिवारमे अपन कन्याक विवाह करेबाक हेतु उत्सुक होइ, त एक मासक भीतर हमरा अथवा हमर पिताजीसं सम्पर्क करी | ईहो लिखि देलियनि जे एक मास धरि जौं  अपनेक कोनो सूचना नहि प्राप्त हैत त हम मानि लेब जे अपनेकें ई कथा पसन्द नहि अछि | एक मासक बाद एहि कथाक विषयमे हमर सोचब बन्द भेल | बादमे हम गाम गेलहुँ त पता लागल जे ओतहु दू टा कन्यागत आएल छलाह | एकटा प्रस्ताव आकर्षित केलक | लडकी दसमामे पढैत छलीह | ओहि प्रस्तावक जे अगुआ छलाह, से हमर गामक  हमर एकटा संगीक मित्र छलथिन | ओ हमरा मधुबनीमे भेटलाह |ओ हमर पिताक निर्णयमे किछु संशोधन आ हमरासं अपन  प्रस्ताव आ सलाहपर स्वीकृति मंगलनि | हम स्वीकार क’ लेलियनि | गामपर एलहुँ त बाबूक सोझां हम कन्यागतक आजुक प्रस्तावपर अपन सहमतिक सूचना देलियनि | संयोग सं मामा सेहो ओहि दिन आएल छलाह | बाबू हमर स्वीकृतिक समर्थन क’ देलनि | हमरा नीक लागल | मामा सेहो प्रसन्न भेलाह | दोसर दिन हमरा ढोली घुरबाक रहय | प्रस्तावक अनुसार हमर गामक संगी आ हुनक मित्र सेहो हमरा संगे लहेरियासराय तक एलाह | लडकीवलाक डेरापर हमरा नेने गेलाह | ओत’ लडकीक मा-बाबूजी नै छलखिन | हमरा कहल गेल जे साँझ धरि आबि जेथिन | लड़की हमरा सोझां एलीह | पढाई-लिखाई द’ किछु पुछलियनि | नीक लागल | हम कहि देलियनि जे हम प्रसन्न छी | साँझ धरि घरक अभिभावक नहि एलखिन | हमरा चिन्ता भेल | हमरा रातिमे रहबाक अनुरोध केलनि हमर संगीक मित्र | रातिमे ओत’ रहब हमरा अनुचित लागल | ओहि समयमे लड़कीकें लड़का द्वारा देखल जाएब सेहो चलनमे नहि छलै, विवाहसं पहिने लड़की ओत’ रहबाक लेल त कियो सोचियो नहि सकैत छल,हमरहु विवेक हमरा अनुमति नहि द’ रहल छल | मुदा, ओ रुकबाक लेल जिद्द कर’ लगलाह | हम कोनो लाथे घरक बाहर सड़कपर आबि रिक्शापर बैसि गेलहुँ, हमर एकटा सम्बन्धीक आवास  छलनि बहुत  दूर, ओतहि चल गेलहुँ | राति भरि ओतहि रहि भोरे हुनका डेरा पर गेलहुँ | अपन बैग लेलहुँ जे  राति ओतहि रहि गेल रहय | हमरा कहल गेल जे घरक अभिभावक लोकनि बेशी रातिक’ एलाह | हम कहलियनि जे हमर स्वीकृति अछि, हम एखन चलैत छी, चिट्ठीसं अथवा व्यक्तिगत रुपें हमरासं अथवा हमर पिताजी सं सम्पर्क कएल जा सकैत अछि | रस्ता भरि हम काल्हिक अपन आ हुनका सबहक कर्मक समीक्षा करैत गेलहुं | स्वयंसं सेहो लडैत गेलहुं | हम एना किए केलिऐ ? ओ हमरा रहबाक लेल जिद्द किए करैत छलाह ? हम राति रहिए जैतिऐ त की भ’ जैतै ? हमरा कथीक डर भेल ? हम लघुशंकाक लाथे सड़क पर आबि रिक्सासं निकलि गेलहुँ, हम स्पष्ट हुनका किए नहि कहलियनि जे हम रातिमे नै रहब ? हमरा विषयमे ओ सभ की सोचने हेताह ? हम हुनका सभकें नीक लगलियनि की नहि, से किए ने पुछलियनि ? हम एहि निष्कर्षपर पहुँचलहुँ जे ईहो हमरा लेल एकटा परीक्षा छल जाहिमे हमर असफलता सुनिश्चित भ’ गेल अछि | किछुए  दिनक बाद पता चलल, हमरा जे लड़की देखब’ अनने छलाह, हुनके सौभाग्य भेलनि ओहिठाम ललका धोती आ पाग पहिरबाक | ( क्रमशः ) पाठकीय: अशोक कुमार ठाकुर- श्री जगदीश चन्द्र ठाकुर 'अनिल' जी केर आत्मकथा केर ई अंश पढ़लहुँ, ई प्रसंग पढ़ि हमहुँ कनि भावुक भ गेलहुँ।किएक कि, ई घटना क समय हमहुँ कक्षा म उपस्थित छलौ।जगदीश जी केर सूझबूझ स मिश्रजी गलत कदम उठाबय स बचि गेलाह।हमरा सभक चारि गोटा क ग्रुप में जगदीश जी केर सौम्य स्वभाव crisis म बड्ड कारगर साबित होइत छल। धन्यवाद। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। रबीन्द्र नारायण मिश्र- सम्पर्क -9968502767 धारावाहिक उपन्यास-लजकोटर लजकोटर (प्रवासीक जीवनपर आधारित) रबीन्द्र नारायण मिश्र, पिताक नाम : स्वर्गीय सूर्य नारायण मिश्र, माताक नाम : स्वर्गीया दयाकाशी देवी, बएस : ६६ बर्ख, पैतृक ग्राम : अड़ेर डीह, मातृक : सिन्घिआ ड्योढ़ी, वृति : भारत सरकारक उप सचिव (सेवा निवृत्त)/ स्पेशल मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट, दिल्ली(सेवा निवृत्त), शिक्षा : चन्द्रधारी मिथिला महाविद्यालयसँ बी.एस-सी. भौतिक विज्ञानमे प्रतिष्ठा : दिल्ली विश्वविद्यालयसँ विधि स्नातक प्रकाशित कृति : मैथिलीमे:- १. ‘भोरसँ साँझ धरि’ (आत्म कथा), २. ‘प्रसंगवश’ (निवंध), ३. ‘स्वर्ग एतहि अछि’ (यात्रा प्रसंग), ४. ‘फसाद’ (कथा संग्रह) ५. `नमस्तस्यै’ (उपन्यास) ६. विविध प्रसंग (निवंध ) ७.महराज(उपन्यास) ८.लजकोटर(उपन्यास)९.सीमाक ओहि पार(उपन्यास)१०.समाधान(निवंध संग्रह) ११.मातृभूमि(उपन्यास)१२.स्वप्नलोक(उपन्यास)१३.शंखनाद(उपन्यास)१४.इएह थिक जीवन(संस्मरण) In English:- -18- समानसभक संगे जखन हम ओतए पहुँचलहुँ तँ बटुक आ बहादुर बाहरे भेटिगेल । ओ सभ घरक समानसभ किनने जा रहल छल । हमरा देखितहि बाजल॒- "एतबे समान?"- "ओहो तँ आब भेल अछि ।" "कोनो बात नहि । हमसभ छी ने, जे किछु काज होइक से निःसंकोच कहब ।" " अहाँ सभकेँ नहि कहब तँ कहबै ककरा?" हमसभ ऊपर अबैत छी । बटुक हमरा कोठरीक कुंजी दैत अछि । हम समानसभ रखैत छी । खाट टुटि गेल रहए,तैँ ओकरा ओतहि छोड़ि देने रहिऐक । ताबे पटिआ ओछा देलिऐक। बटुक,बहादुर आ ओकरसभक घरबाली बड़ीकालधरि बैसल रहल। गप्प-सप्पमे बहुत समय निकलि गेलैक । बटुक बाजल - " भाइ! अहाँक भोजन हमरे ओतए हेतैक ।" " ठीक छैक ।"-हमरा बहुत उसास लागल । हम सोचने रही जे मकान मालिकसँ भेंट होएत । पुछबो केलिऐक -"मकान मालिक कतए छथि?" " ओ तँ बड़का आदमी छथि । हुनका समय नहि रहैत छनि । हमहीसभ जा कए किराया पहुँचा दैत छिअनि । कोनो बात भेल तँ मोबाइलपर गप्प कए लेलहुँ ।" ताबतेमे बटुक फोन लगा देलक । ओमहरसँ कोनो परिचित महिलाक स्वर बुझाएल । " हम छी गोविंद।" "ओ! अहाँ एतए कोना आबि गेलहुँ?" "लता छी की?" "सएह कहू अहाँ हमरा चिन्हिओ नहि रहल छी?" "चिन्हि रहल छी तैँ ने । हम अहिठाम काज धेलहुँ अछि। हमर संगीसभ एतहि रहैत छथि आ ई डेरा बहुत लगीचमे अछि, तैँ एतहि आबि गेलहुँ ।" "बहुत नीक बात । कोनो दिक्कत होइक तँ निःसंकोच कहब ।" से कहि ओ फोन राखि देलथि । हम बहुत असमंजसमे पड़ि गेलहुँ । पता नहि लता की सोचतीह? हुनका ओहिठाम एतेक सुविधा भेटि रहल छल से सभ  छोड़ि कए हम एतए आबि गेल छी । मुदा ओ ताहि तरहक किछु आभास नहि होबए देलीह। फोन रखितहि  बटुक आ बहादुर हमरा दिस छगुन्तासँ देखि रहल छलाह । " अहाँ हिनका पहिनहिसँ चिन्हैत छिअनि की?"-बटुक बजलाह । "चिन्हैत नहि छथिनतँ एतेक गप्प ओहिना केलथि।आब अपनोसभकेँ फएदे रहत।"-से कहि बहादुर कनखी मारलक आ अपन कोठरीमे चलि गेल ।बटुक ओतहि बैसि गेलाह । " हे! ई महानगर छैक । ओ सभ बड़का आदमी छैक । बँचि कए रहब । एहनने होअए जे हमरोसभक डेरा चलि जाइत रहए ।" " की बात करैत छी?" " वाजिब बात कहि रहल छी । पहिने एहन भए चुकल अछि ।" “से की?" “अखन सुस्ता लिअ । चैनसँ कहब ।” से कहि बटुक सेहो अपन कोठरीमे चलि गेलाह । हम एसगर गुनधुनमे पड़ि गेलहुँ । एहि तरहेँ  लतासँ गप्प कए हमरो कोनो प्रशन्नता नहि भेल । कारण  हम जाहि स्वतंत्रताक अपेक्षा करैत छलहुँ से वाधित हेबाक संभावना तँ बनिए रहल छल । तथापि तत्काल किछु नहि कएल जा सकैत छल आ ने तकर प्रयोजने छल । मात्र आशंकासँ भविष्यक निर्णय नहि लेल जा सकैत छल,नहि लेबाक चाहैक छल  से बात मोनमे अबैत छल। भेल जे जखन आबिए गेल छी तँ किछुदिन रहिए कए देखि ली,नहि तँ दुनियाँ बड़ीटा छैक । छगुन्ता एहि बात सँ सेहो लगैत छल जे जकरे देखू सएहबुझबए लागत जे ई महानगर छैक । जेना कोनो भूत होइक महानगर ।एतबा तँ बुझाइत छल जे एतए सभ मतलबपरस्त अछि । जेना सभ कथुक पाछा तीव्र गतिसँभागि रहल अछि , जेना मनुक्ख एकटा यंत्र होअए । मुदा तकर की कएल जा सकैत अछि? तुलसीबाबा ठीके कहने छथिन -" जहहिं बसहु तहि सुंदर देसू ।" गाममे जखन गुजर नहि भेल तखने दिल्ली अएलहुँ । एतए कोहुना-ने-कहुना पेट तँ भरि जाइत अछि । रहल नीक बेजाए, से कतए नहि छैक? जे जेहन रहैत अछि तेहने ओकरा सभ लागए लगैत अछि ।इएह सभ सोचैत- सोचैत अखरे पटिआपर निन्न पड़ि गेल ।हमरा फोंफ कटैत देखि बटुक कै बेर घुरि गेलाह। भोजन बनिकए सेरा रहल छल । अंततोगत्वा कोठरीक जिज्जिर खटखटओलथि । हम अकचकाकए उठि बैसलहुँ । "भोजन सेरा रहल अछि ।" "ओ! हमरा तँ सुता गेल ।" "कोनो बात नहि । थाकल छी । भोजन कए चैनसँ सुति रहब ।” हम ,बटुक आ बहादुर संगे बैसि जाइत छी । बहादुरक घरबाली भोजन परसैत अछि आ बटुकक घरबाली चुल्हापर गरम-गरम सोहारी बना रहल अछि । एहन समन्वय तँ मोसकिलसँ देखल जाइत अछि । भोजनक स्वादक की कहू? एक युगक बाद एहन स्वादिष्ट भोजन पाबि रहल छलहुँ । " की भाइ! खाए जोगर अछि कि नहि ?"- बटुक बजलाह। " अतिस्वादिष्ट । एहन भोजन तँ कतेकोदिनक बाद कए रहल छी ।" "आब रोज एहने भोजन हेतैक ।" हम छगुन्तासँ बकर-बकर तकैत रहि जाइत छी । हमरा ओना तकैत देखि बहादुरक घरबाली हँसि दैत अछि । ओकर हँसीक माधुर्य देखैत बनैत छल ।गोरनार,भुट्ट मुदा कसगर देह बहुत आकर्षक लगैत छलैक । "अहाँक घर कतए भेल?। "जनकपुर।" "ओ तखन तँ हमरासभक लगीचे अछि ।" गप्प-सप्पमे भोजनक समय आनन्दसँ बीति गेल ।सभगोटे अपन-अपन कोठरीमे आपस  अएलहुँ ।भोजन कए जे सुतलहुँ से एकहि निन्ने भोर भए गेल । बटुक आ बहादुर काजपर जेबाक हेतु तैयार भए गेल छलाह । हमरा आगू चाह रखैत कहलथि - " जेबाक समय भए रहल अछि । तैयार भए जाउ तँ संगे निकलि जाएब । "ठीक छैक ।" 1.The Lost House (Collection of short stories), 2.Life is an art हिन्दी में – १.न्याय की गुहार(उपन्यास) (उपरोक्त पोथीसभ pothi.com, amazon.com आओर www.flipkart.com पर सँ कीनल जा सकैत अछि) इमेल : mishrarn@gmail.com ब्लोग : mishrarn.blogspot.com  एमजोनक लेखक पृष्ठ : amazon.com/author/rnmishra ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। नन्द विलास राय संस्कारी कन्या साँझुपहर बाध दिससँ गामपर एलौं। बाध दिससँ की आएब, गहुम खेतक ओगरवाही कए कऽ एलौं। यौ किसान छी। दू बिगहा खेतमे गहुमक खेती केने छी। सभ गहुम निछार भऽ कऽ फुटि गेल अछि। मुदा गहुम खेत सभमे अड़कच-बथुआ तेतेक अछि जे घसवाहनी सभकेँ रहले ने जाइ छै। जँ गिरहत नहि रहल तँ घासक लाटमे गहुमो उखारि कऽ बोरामे कसि लेत। नहियोँ गहुम उखारत तैयो घास उखारैतकाल गहुमक गाछकेँ थौआ कइये देत। तँए सभकेँ घास उखारैसँ मनाही कऽ देने छिऐ। मुदा गिरहत नइ रहत तँ घसवाहनी सभ मानबे ने करत। तँए गहुम खेतक ओगरवाही करए पड़ैए। अहाँ कहबै गहुम फसलमे खढ़ मारैबला दबाइ किए ने दऽ देलिऐ। की कहू सभ गहुममे पच्चीस ग्राम कट्ठा तोरक नीमनका बीआ छीटने छिऐ। तोरो बड़ नीक अछि। जँ खढ़ मारैबला दबाइ दइतिऐ तँ खढ़े संगे तोरोक गाछ मरि जाइतए। तँए गहुमक खेतमे खढ़ मारैक दबाइ नइ देलिऐ। बाध दिससँ आबि कलपर जा पएर-हाथ धो कऽ कुर्रा-आचमन केलौं। चाहक तलक रहए। आँगन गेलौं तँ माएकेँ गोसाँइ-पीतरकेँ दीप लऽ साँझ देखबैत देखलिऐ। हमर पत्नी अपना कोठरीमे टी.वी. देखैमे मगन रहैथ। हम अँगनेसँ पत्नीकेँ हाक दैत कहलिऐ- “यै सुनै छिऐ?” मुदा पत्नी किछु उतारा नहि देली। हम फेरो हाक देलिऐ- “यै रूपौलीवाली सुनै छिऐ ने, अहींकेँ कहै छी।” मुदा तैयो ने किछु बजलीआ ने कोठरीसँ बाहरे एली। तैबीच हमर माए कहली- “हौ टी.वी. चलै छै, ओसारापर जा कऽ हाक देबहक तखन सुनतह।” हम ओसारापर जा कऽ कहलिऐ- “यै मेम साहिबा, हम किछु कहबो करै छी?” तैपर पत्नी कोठरीसँ बाहर निकलैत बजली- “की कहै छिऐ। घरवाली बाहरवाली फिलिम चलि रहल छै। बड़ चहटगर फिलिम छइ।” हम कहलिऐ- “अच्छा फिलिम देखैत रहब। पहिने एक कप चाह बना कऽ पियाउ।” तैपर हमर पत्नी बजली- “माँसँ कहियौ ने बना देती।” हमर मन तँ बुझू घोर-घोर भऽ गेल मुदा पहिनुक साँझमे पत्नीसँ बहस करनाइ नीक नहि बुझलूँ। हम कहलिऐ- “नइ हम माएसँ नै कहबै।” पत्नी बजली- “अच्छा हमहीं माँसँ कहै छिऐन।” ओ माए लग गेली आ माएसँ कहली- “माँ एक कप चाह बना देथुन ने। टी.वी. मे बड़ चहटगर सिनेमा चलि रहल छै। अदहा सिनेमा देख नेने छी।” ई कहैत ओ कोठरीमे जा टी.भी. देखए लगली। माए चाह बनबए विदा भेली। तामसे  हमर टीक ठाढ़ भेल गेल। माए चाह बना कऽ कप हमरा हाथमे दैत बजली- “लएह चाह पीबह।” माए पुन: आगू बजली- “जे ने करए ई टी.वी., साँझो-बाती हमरे देखबए पड़ैए।” हम कहलिऐ- “माए तों पुतोहुकेँ माथपर चढ़ा रहल छीही।” माए बजली- “छोड़ह चाह पीबह।” हम बजलौं- “की चाह पीब, मूड ऑफ भऽ गेल।” हमरा मोन पड़ि गेल। जखन हमर ससुर महराज बिआहक बात करए हमरा ऐठाम आएल रहैथ तँ हमरा पिताजीसँ कहने रहैथ जे यौ गोपी बाबू हम अपनेकेँ एकटा संस्कारी कन्या देब जेकरामे मिथिलाक सभ संस्कार भरल अछि। ओ बात मोन पड़िते हमरा मनमे उठल- यएह छी मिथिलाक संस्कारी कन्या? जे कन्यागोसाँइ-पीतरकेँ साँझो-बाती ने देखौत। अपना भरि-भरि दिन टी.वी. देखत आ 70 बर्खक बुढ़ सासुसँ चाह, जलखै, खेनाइ बनबाऊत। ई सभ सोचैत हम चाह पीबैत रही, तखने हमर छोटकी काकी एकटा अनार माएकेँ दऽ गेली। माए हमरा अनार दैत बजली- “लएह ई अनार तों खा लएह।” तैपर हम माएसँ कहलयैन- “गै माए, तों बुढ़ भेलेँ तँए ई अनार तोहीं खा ले।” माए बजली- “नै तों खा लएह। अखन नइ खेबह तँ रखि लएह भोरमे खा लीहह।” हम कहलयैन- “हमरा की अछि, शहर-बजार जाइ छी तँ रंग-बिरंग चिज सभ खाइत रहै छी। तों तँ घरेमे रहै छेँ। तोहर उमेरो सत्तर टपि गेलौ। तँए ई अनार तोहीं खा ले।” माए बजली- “हम तँ आब चल-चलाउ भेलिऐ। हमरा खा कऽ की हएत। तों तँ जबान-जुआन छह। तोरा अखन बहुत दिन जीवाक छह। तँए ई अनार तोहीं खा लएह।” माएसँ ई गप्प-सप्प होइते रहए तखने बिजलीक लाइन कटि गेल आ टी.वी. बन्न भऽ गेल। पत्नी बाहर निकलली। आ पुछली- “कथीक घंघौज भऽ रहल अछि?” हम कहलिऐ- “छोटकी काकी एकटा अनार दऽ गेली हेन। माए हमरा कहैत अछि ई अनार तों खा लएह आ हम कहै छिऐ जे माए तों बुढ़ भेलेँ तँए ई अनार तों खा ले।” तैपर हमर पत्नी पुछली- “कहाँ अछि अनार।” माए हमरा पत्नीक हाथमे अनार दैत बजली- “यएह अछि अनार। बड़ नीक अनार अछि।” हमर पत्नी अनार देखैत बजली- “ठीके बड़ नीक अनार अछि। एकरे बेदाना कहल जाइ अछि। ठीक छै अहाँ दुनू गोरे नै खाए चाहै छी तँ कोनो बात नहि, रहए दियौ हम खा लेब।” ई कहैत पत्नी अनार नेने कोठरीक भीतर चलि गेली। तखने बिजलीक लाइन आबि गेल आ टी.वी. चलए लगल। हमरा मुहसँ निकलल- “हाय रे मिथिलाक संस्कारी कन्या..!” ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। मुन्नाजी विचरण ! -- अहा....हा ! यै,समुद्रक किछेर मे बैसि केहेन आनन्दक अनुभव होइए ! समुद्र मे रहि रहि उठैत लहरि आ समुद्रक किछेर मे स्वतंत्र भ' लोकक विचरण  ! -- यौ, जेबै नै.....चलू ने ! --अहाँ बढू ने हम पाछाँ सँ अबै छी. " लोक सब विदेश सँ आबि एत' मनोरंजन करैए, स्वीमिंग शुट मे स्वतंत्र विचरण ! अहा की आनन्दक क्षण छै. " --ओ.....त' अहाँ समुद्रक नै, ओइ स्वीमशुट बाली सब के निहारि निहारि आनन्द उठबै छी, नै ? -- नै, नै, मोन मे उठल लहरिक वर्णन करै छलहुँ. -- समुद्र मे जा देहक लहरि सेरा ने लियय, नैत' घुरमा उठत. -- ओहू मे त' लहरिये छै ! -- यौ, समुद्रक लहरि निश्छल छैक, मुदा अहाँक......कामुक. ! ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। बिटू मिश्र वत्स (बाट पर दू गोट बटोहीक गप, जबान छौंरा मोटरसाइकिल पर आ बृद्ध बाबा साइकिल पर l) छौंरा: अहि यौ बाबा, इ गोनरबा गाम कत्ते दूर छै यौ ? बृद्ध बाबा : रौ, तूं मोटरसाइकिल पर छि तोरालखे कोन दूर रौ ? दूर त हमरा लखे छै l छौंरा: नै... नै... हमरा कहेके भावार्थ इ छल जे, गोनरबा कत्ते छै ? बृद्ध बाबा : अहिंरो बा... हेरौ, गाम के कउनु चले आबई छै जे कतहु आनठाम चलिजेतई ? जत्तइ छई ओत्तई हेतई ने l (छौंरा चुप्पे बढ़ीगेल आगाँ ......) -बिटू मिश्र वत्स, तिलाठी नेपाल (घटना; महोत्तरी जिला स्थित हमरे संगे घटल छैठिके प्रातःl) ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। मुन्नाजी बीहनि कथाक  दशा- दिशा ----------------------------------- पौराणिक उत्सें( स्रोतें) बहरएल कथाक ,संशोधित ,संबर्द्धित ओ परिष्कृत आधुनिक संस्करण थिक " बीहनि कथा"! जकरा स्पष्ट कथ्य आ गसल शिल्पें न्यूनतम बीस आ अधिकतम डेढ़ सए शब्द धरि लिखबाक प्रावधान ऐछ! इ आन कोनो विधाक विधान्तरण, नामान्तरण वा कायान्तरण नै, संपुष्ट कथाक एकटा स्वतंत्र विधा थिक!

वर्तमान स्थिति:- गद्य लेखन उपन्यास( नोवेल) सं शुरू भ'  लघुकथा (शॉर्ट स्टोरी) होइत बीहनि कथा ( सीड स्टोरी) धरि पहुंचल. वर्तमान मैथिली कथा साहित्य मध्य पूर्ण प्रासंगिक , सर्व परिचित  आ लोकप्रिय विधा भ' स्थापित भेल.

लघुकथा छल त' बीहनि कथाक खगता  ? :-  समयान्तरे ,विकासक क्रमे खगताक जन्म होइछ. से समयावधिक अनुसारे प्रासंगिक होइछ आ तखने ओकर पूर्ति सेहो आवश्यक. जेना जहन चलनसारि मे समाद लेल चिट्ठी छल त' तार ( टेलिग्राम)किए आयल? चिट्ठी मे लोक अपन मोनक बात खुलि के लिखै छल, कोनो बन्हन आ नियम/ प्रावधान सं मुक्त! मुदा तार? तार( टेलिग्राम) मे अपन बातक निचोड़ किछु सिमित शब्दें कहि पाठक/ पावककें पूर्णत: क्रियाशील बना दै छल. त' ' लघुकथा' चिट्ठी भेल जकरा लिखबाक कोनो सिमाना/ विधान नै, आ बीहनि कथाकें तार बुझू जे अल्प शब्दक स्पष्ट कथ्य आ गसल शिल्पें संपुष्ट कथाक खगतापूर्तिक निश्शन माध्यम भेल. अन्य पक्ष देखू :- भाषण- कोनो बात बजैत चलू... कोनो लगाम नै! मुदा कोनो निश्चित विषय- बस्तु पर विद्वतापूर्ण विचार कहाइछ- बीज भाषण! एहिना संस्कृत मे शुद्धिकरण वा सशक्तिकरण लेल रचल गेल मन्त्र( श्लोक नै) आ तकरो सक्षम वा प्रभावी बनेबाक खगतापूर्तिक लेल आयल बीज मन्त्र! जेना बीहनि कथाक कथ्यकें ( शब्द नै) विस्तार दैत शाॉर्ट स्टोरी सं नॉवेल धरि रचि सकै छी तहिना एकटा बीजमंत्र ( ऊं.. हीं.. क्लीं...) सं अनेको मंत्र जन्म लेने ऐछ! ओहिना बहुत रास कथा रहितो ओकर सशक्त वा परिष्कृत रूपमें उपस्थित ऐछ बीहनि कथा!

वैश्विक स्थिति :- जहन हम सब विश्व विधाकें अंगिकार क' अंगेजने छी तहन अपन एकमात्र विधा " बीहनि कथा "कें विश्व भरिमें किए नै पसारि सकै छी? मुदा ताहि लेल पहिने बराबरी त' क' ली! विश्व कथा साहित्य उपन्यास सं चलि- वॉन्डर स्टोरीज, हण्ड्रेड वर्ड स्टोरीज, फिफ्टी फाइव वर्ड स्टोरीज, वन लाइनर होइत सिक्स वर्ड स्टोरीज पर अंटकि प्रकाशन आ विमर्श मे लागल ऐछ आ हम सब एकैसम सदीमे आइयो छी बीहनि कथाकें बढ़बाक- रोकबाक घोंघाउज मे फंसल!

बीहनि कथा मैथिली कथा साहित्यक चर्चित, परिचित आ लोकप्रिय विधाक रूपें भलहिं ख्यात भेल हुअए मुदा वैश्विक परतर मे पांति सं बाहर.से अदौ काल सं!  विश्व साहित्यक  मुकाबले भारतीय साहित्य बड्ड पछुएल, आ भारतीय साहित्य मध्य मैथिली साहित्य मात्र पछुएलटा नै वरन् विकासक क्रम में क्रम सं बाहर हेरएल- भुतिएल!हं मौखिक आ फेसबुक पर वैश्विक सं उपर.  बीहनि कथा भलहिं मैथिली कथा साहित्यक संशोधित, परिमार्जित आ परिष्कृत आधुनिक संस्करण भ' उभरल मुदा आन भाषाक समकक्ष विधा सं बड्ड पछुएल सन! जेना बीस सं एकसए पचास शब्दमे अनबाक कारण लेखककें लघुकथाक मानसिकता सं उबारि मानस पटल पर बीहनि कथाकें समाहित करबाक उद्देश्य छल. एकरामे एखनहु कतेको दोष ऐछ जकरा आओर परिष्करणक खगता ऐछ विश्व साहित्यक धारा मे अनबाक लेल. समवेत प्रयास चलि रहल... सबहक सहयोग सादर अपेक्षितअपेक्षित! (5 मार्च  " बीहनि कथा " दिवसक शुभकामना क संग -मुन्नाजी) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। मूल नेपाली कथाकार:रचना शर्मा अनुवाद: विन्देश्वर ठाकुर चरित्र (बीहनि कथा)(नेपाली) ‘चरित्रबहादुर अष्टबक्र’नामक बेस चरित्रवान् शिक्षक । हमरहि घर लगिचकें क्षेत्रकुमारी मा.वि. कें प्रध्यापक।भारतक प्रसिद्ध उच्च महाविद्यालयसँ विज्ञान आ गणित विषयमे डिग्री हासिल केनिहार।हमर बौवाबुची सेहो ओएह विद्यालयमे अध्यनरत। एकदिन हम विद्यालयकें अतिरिक्त मिटिङ्गमे पुछलियै-“अष्टबक्र सर Û हमर बेटा विज्ञानमे बहुत बेसी कमजोर छै।कोना पास हेतै? अपने जऽ ट्युसन पढबैत छियै त काल्हिसँ बौवोकें पठादेबै, नइँ हेतै?<”हमर बात सुनिक' ओ सम्झबैत हमरा कहलनि- “तेहन बात नइँ छै मैडम, बौवाकें पढाइ ततेक नइँ निमन कहाँ अछि से <नेनामे सबकियो एहने होइत छै,पैघ होइते सबकियो  अपने लाइनपर आबि जाइत छै।हम्हूं कक्षा ७ मे फेल भेल विद्यार्थी छी। एखन हमरे उदाहरण लैत कतेको विद्यार्थी आगु बढि रहल छैक।ट्युसन नइँ पढाउ बौवाकें।बरु अपनेसँ पढबाक व्यवहारके विकास कराउ। आवश्यकता बुझाएत त मेसेन्जरपर सोधपुछ कएल करब।" वाह!Û सर जीक एतेक नीक सुझाब पाबि त हम प्रसन्न भऽ भेलहुँ।घरमे अबिते फेसबूक खोलिक' ‘चरित्रबहादुर अष्टबक्र’नाम सर्च केलहुँ। फ्रेन्ड रिक्वेस्ट पठेलहुँ। ४ घन्टा बाद नोटिफिकेशनमे ‘चरित्रबहादुर अष्टबक्र’ एसेप्ट योर फ्रेन्ड रिक्वेस्ट कहिक' सुचना आएल। सरकें प्रोफाईल पिक्चर देखलहुँ। बेस सुन्दर रहैक।मिलल दाँत देखबैत मनमोहक मुस्की! पिक्चर सँगसँग स्टाटस् सेहो। वाउ! Û शिक्षाक अन्तिम लक्ष्य चरित्र निर्माण होइत छैक। जतबे नीक व्यक्ति, ओतबे नीक स्टाटस । फोटो आ स्टाटस देखिक' मोन थाम्हि नइँ सकलहुँ आ ठोकि देलहुँ लभ रियाक्ट।साथमे कमेन्ट सेहो १०० प्रतिशत राईट सर,कहिक'। काल्हिखन बौवा स्कूलसँ बिधुवाएल मुंह ल' घर आएल। “मम्मी < एकटा स्याड न्युज छै ।  कहू?” ‘क'ह न बेटा की भेलह? <” हम पुछलियै। “दूर की कहूं, आब हमरासबके साईन्स सब्जेक्ट चरित्र सर नइँ पढबै छथिन्।आइसँ विचित्रप्रसाद अधिकारी सर पढाएब शुरु केल्खिन् ग । “ओहो की भेलै चरित्र सरकें से? < नीक लोक आ चरित्रवान व्यक्तित्व त टिकबे नइँ करैछै। कतौ सरुवा भऽ गेलै हुनकर की?<” “नइँ मम्मी < ओ सर अपने स्कूलमे नौ कलासमे पढिरहल दिदीकें होम ट्युसन पढबैत छलै < पता नै काल्हिखन की केलकै ओइ दिदीकें।बहुते प्यारेन्टस् आबिक' स्कुलमे मिटिङ्ग केलकै ।आ तकराबाद हेडसर माईकमे,आइसँ चरित्र सर अपन स्कूलसँ रेस्टिगेट भेल सुचना देल्खिन् ।” अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। उमेश मण्डल १०५ म् ‘सगर राति दीप जरय’ कथा चेतना रैली उद्धघाटनकर्त्ता : प्रो. डॉ. शशिनाथ झा (कुलपति, कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय-दरभंगा) उद्धघाटन समय : संध्या 6 : 30 बजे तिथि : 13 फरवरी 2021 कार्यक्रमक अन्तराल- संध्या 6 : 30 बजे से सॉंझसँ 6 : 00 बजे भिनसर धरि स्थान : सीतायन सभागार, 3 जी.एम. रोड, दरभंगा संयोजक : श्री कमलेश झा अध्यक्ष- डॉ. भीमनाथ झा (उद्घाटन एवं पोथी लोकार्पण सत्र), डॉ. शिव कुमार प्रसाद एवं श्री जगदीश प्रसाद मण्डल (कथा सत्र) मंच संचालन- श्री कमलेश झा (उद्घाटन सत्र), श्री उमेश मण्डल (पोथी लोकार्पण सत्र), श्री नन्द विलास राय एवं श्री राधाकान्त मण्डल (कथा सत्र) स्वागत भाषण- प्रो. डॉ. विद्यानाथ झा दू शब्द- डॉ. योगानन्द झा, श्री शैलैन्द्र आनन्द, डॉ. शिव कुमार प्रसाद मिडिया प्रभारी : श्री गौतम झा ऐ कथा गोष्ठीमे लगभग देढ़ दर्जन नूतन कथा (कहानी)क पाठ (वाचन) एवम् समालोचक द्वारा समालोचना कथा पाठ- 1. अनाथ : श्रीमती लक्ष्मी सिंह ठाकुर (दरभंगा) 2. दरभंगासँ दिल्लीक यात्रा : श्रीमती स्वर्णिम किरण (दरभंगा) 3. धनेसरी : श्री श्याम भास्कर (दरभंगा) 4. भोंटक बधिया : प्रो. प्रीतम निषाद (मुरहद्दी, बाबूबरही) 5. जन आन्दोलन : श्री कपिलेश्वर राउत (बेरमा, झंझारपुर) 6. फकड़ावाली बुढ़िया : श्री अमित मिश्र (करियन, समस्तीपुर) 7. सभ केलहा फुसि : श्री राम विलास साहु (लक्ष्मीनिया, मधुबनी) 8. अट्ठाबज्जर : श्री राम विलास साहु (लक्ष्मीनिया, मधुबनी) 9. सम्प्रदायिक सद्भाव : श्री नारायण यादव (जयनगर) 10. बेचन काकाकेँ चिन्हब : श्री उमेश मण्डल- (निर्मली, सुपौल) 11. कलहक जड़ि : श्री शारदानन्द सिंह (बलथरी, दरभंगा) 12. दूटा भॉंटा गाछ : श्री शारदानन्द सिंह (बलथरी, दरभंगा) 13. दशार्णवक अंश : श्री उमेश नारायण कर्ण ‘कल्पकवि’- (इसहपुर, सरिसवपाही) 14. अनजान दोस : श्री राधाकान्त मण्डल- (धबौली, लौकही) 15. प्रायश्चित : श्री नन्द विलास राय- भपटियाही (घोघरडीहा, मधुबनी) 16. सभसँ पैघ सॉंच : श्री नन्द विलास राय- भपटियाही (घोघरडीहा, मधुबनी) 17. संकल्प : श्री जगदीश प्रसाद मण्डल- (बेरमा, झंझारपुर) समीक्षा- डॉ. शिवकुमार प्रसाद श्री अरविन्द प्रसाद श्री लालदेव कामत श्री प्रदीप पुष्प राधाकान्त मण्डल श्री जगदीश प्रसाद मण्डल श्री कमलेश झा प्रो. प्रीतम निषाद श्री राम विलास साहु श्री कपिलेश्वर राउत श्री चन्द आचार्य पं. बाल गोविन्द आर्य श्री नारायण यादव पुस्तक_लोकार्पण_एवम्_वितरण 1. कृषियोग (कथा संग्रह) ले. जगदीश प्रसाद मण्डल, लो. श्री शैलैन्द्र आनन्द (निविष्ट कथाकार, नाटककार एवं कवि) 2. हारल चेहरा जीतल रूप (कथा संग्रह) ले. जगदीश प्रसाद मण्डल, लो. प्रो. उषा चौधरी (एम.एल.एस.एम. कौलेज, दरभंगा) 3. रहै जोकर परिवार (कथा संग्रह) ले. जगदीश प्रसाद मण्डल, लो. प्रो. शशिनाथ झा (कुलपति, कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय, दरभंगा) 4. कर्ताक रंग कर्मक संग (कथा संग्रह) ले. जगदीश प्रसाद मण्डल, लो. डॉ. योगानन्द झा (मैथिली लोक साहित्यक अध्येता) 5. गामक सूरत बदैल गेल (कथा संग्रह) ले. जगदीश प्रसाद मण्डल, लो. श्री अरविन्द प्रसाद (प्रधान सचिव, मधुबनी ज़िला प्रगतिशील लेखक संघ) 6. अन्तिम परीक्षा (कथा संग्रह) ले. जगदीश प्रसाद मण्डल, लो. डॉ. शिव कुमार प्रसाद (हिन्दी साहित्यक वरेण्य विद्वान एवं मैथिली साहित्यक वहुआयामी रचनाकार) 7. घरक खर्च (कथा संग्रह) ले. जगदीश प्रसाद मण्डल, लो. प्रो. डॉ. विद्यानाथ झा (प्राचार्य, एम.एल.एस.एम. कौलेज, दरभंगा) 8. सरस्वती पूजाक परसाद (कथा संग्रह) ले. नन्द विलास राय, लो. डॉ. भीमनाथ झा (आधुनिक मैथिली साहित्यक मर्मज्ञ विद्वान) 9. वर्ण प्रकरण भाष्य भूमिका (व्याकरण, भाग- 1) ले. बाल गोविन्द आर्य उर्फ बाल गोविन्द यादव, लो. प्रो. शशिनाथ झा (कुलपति, कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय दरभंगा) 10. भाव पुष्पांजलि (काव्य संग्रह) ले. सीताराम मिश्र, लो. प्रो. डॉ. विद्यानाथ झा (प्राचार्य एम.एल.एस.एम. कौलेज, दरभंगा) 11. मोनक देहरिपर (गजल संग्रह) ले. प्रदीप पुष्प, लो. डॉ. उदयचन्द झा ‘विनोद’ (लब्धप्रतिष्ठ कवि) 12. देवाश्रम- 5 (पाम्फलेट संकलन) सं. उमेश मण्डल, लो. डॉ. भीमनाथ झा (आधुनिक मैथिली साहित्यक मर्मज्ञ विद्वान) 13. देवाश्रम- 6 (पाम्फलेट संकलन) सं. उमेश मण्डल, लो. श्री जगदीश प्रसाद मण्डल (आधुनिक मैथिली साहित्यक अनन्य स्तम्भ) धन्यवाद ज्ञापन- श्री कमलेश झा १०६म आयोजन : ग्राम- हटनी, नौआबाखर (मधुबनी), मई 2021 मे होएत भावी संयोजक : श्री लालदेव कामत अपन मंतव्य editorial।staff।videha@gmail।com पर पठाउ। ३. पद्य ३.१.सुभाष कुमार कामत-जनगणनामे ३.२.आशीष अनचिन्हार- गजल सुभाष कुमार कामत जनगणना मे रहूँ देशक कोनो कोण मे बस मैथिली याद राखब मोन मे मैथिली छी हमर मातृभाषा सदखिन धियापुताक संग बाजू गर्व सँ कैरि चाकर सीना कनियो नै एंठेबै वरना बड़का जूलूम भऽ जाएत जनगणना मे एकटा प्रश्न पूछत की थीक अहाँक मातृभाषा ? झट सँ अहाँ कहब मैथिली हमर मातृभाषा शान सँ बाजू मैथिली जुनि बिसरब मातृभाषा । ©सुभाष कुमार कामत नौआबाखर, घोघरडीहा अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। आशीष अनचिन्हार गजल बाजै घंटी सोभै आसन ऊधो पापी लगबै चानन किम्हर किम्हर भागल घूरत रामा ताकै देशक शासन धन्ना सेठक दुन्ना तागति कबिरा जनता ताकै राशन गहुमन शोभित मंचक आगू राधे भाषण देलक धामन देहक सुविधा मोनक दुविधा माधव बूझू सजनी साजन सभ पाँतिमे 22-22-22-22 मात्राक्रम अछि। ई बहरे मीर अछि। सुझाव सादर आमंत्रित अछि। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ४.स्त्री कोना (सम्पादक- इरा मल्लिक) ४.१.आकांक्षा कर्ण- बेटी हमर अभिमान ४.२.सोनी कर्ण-बेटी ४.३.रागिनी प्रीत-पोथी ४.४.ममता कर्ण- किताब ४.५.चंदना दत्त-मोह ४.६.सविता 'सुमन'-माँ आकांक्षा कर्ण बेटी हमर अभिमान अहां बेटी छी ,अभिमान हमर! अहींछी लक्ष्मी, अहींछी दुर्गा, अहींछी नव युग के सीता रावण से नै अहां के डर अहां बेटी छी, अभिमान हमर! आब नै अहां अग्नि परीक्षा देब, आब नै कोनो अत्याचार सहब उठु अहां, आगू बढू ,चढू कामयाबी के शिखर अहां बेटी छी, अभि मान हमर! देखा दियौ विश्वके ,अहां नै छी कमजोर उठु, पोछू आंखि के नोर ज्ञान के बनाउ अपन हथियार, निकलू ज्ञान के गहना संबनि संवर अहां बेटी छी, अभि मान हमर घर के अहां रोशनी छी, आंगन के अहां खुशबू छी अपन महक से सुगंधि त करू समाज के कोना हर अहां बेटी छी, अभिमान हमर अहां बेटी छी, अभि मान हमर! अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। सोनी कर्ण बेटी अाई उ घडी बहुत आस पास छल जखन हम मा के  गर्भ स् बाहर मा के पज्रा धए टुक टुक निहारब सभ बेचैन भ घडी के समय टिक टिक पर नज़र धय हर एक स् पुछैत बौआ के जन्म भेल केहन खुशी हैत हमर अन्तः करण मे हमर जन्म के इंतजार मे सभ क आइख रही रही चमैक रहल मन खुसी स् दमैक रहल हमर कीलकारी स् गुइन्ज गेल पूरा माहौल सब उठल चहईक बेटी आयल बेटी आयल घर क लक्ष्मी बेटी आयल अनायास की भेल सभ क आइख क चमक उडि गेल सभ् क मुह उतैर गेल खुसी मे उदासी छा गेल ई की भेल सम्झैत समझेत बुझ्लौ बेटा के छल इन्तार भ गेल बेटी के कीलकार सभ क उमीद के किरण पर परल अन्धकार किया बेटी के जन्म के नै छल इन्तजार बेटा हि हैत और बेटा हि होबाक चाहिं तेकर की छल आधार हम बेटी  भ जन्म लेंब तेकर नै छल कोनो अधिकार आव जन्म त भ गेल छल आई सब दिल पर पत्थर राइख लेलनी हमरा काखि तर दाईब और प्रवेश केलौ घर क दुआइर लालान पोषण मे मा केलक नै कोनो कमी कमजोरी बचपन स् ई सुइन सुइन जीवन के भागा दौरी बेटी त होइत अाई पराया धन और अहिना बितल हमर बचपन जन्म लेलौह जहिया जखन् नहीं गायल गीत नहीं बाजल बाजा आई बिदा भ जायेव त भ रहल गीत बाजय बाजा।। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। रागिनी प्रीत पोथी पोथी पढ़ैत उमर बीतल पन्ना-पन्ना सभ टा उधरल लेकिन उर ज्ञान बिना सूखल संतोषक भान कहाँ भेटल? आखर रटि रटि सुग्गा भेलौं घिस कऽ स्याही जिनगी रंगलौं हम आब कहाँ ऊ प्राणी छी रट्टा वाला अभिमानी छी। पढ़ि कृष्ण सूरज कहाँ बनलौं मीरा सन प्रीति कहाँ कैलौं आडम्बर माथा पर बैसल ज्ञानक दीपक अंतः सिकुड़ल। भेल दुहरिया देह जरै नेहक बरसा के राह तकै पोथी पांती सब घन बनि कऽ चितवन हर्षावे जल बनि कऽ। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ममता कर्ण किताब कतेक मुश्किल अछि जिनगी के किताब पढ़नाइ जतेक रटैत छि कम पैर जाइय पन्ना दर पन्ना उलटैत जाइ छि जतेक रटैत छि उलैझते जाइ छि मन पड़ैया माय के ओ बात किताब , डिबिया , सलाइ सिरमा के लगे राखिक सुतिहेयाँ भोरुका पहर ब्रम्ह मुहूर्त में किताब के रटिहेयाँ तखन माँ सरस्वती बिचरण करै छथिन जे रटबे सब कण्ठस्थ भ जेत्तौ बात साँच कहैछी अझक्के नीन सुतै छलौं समय पर उठि खुब रट्टा लगबै छलौं परिणाम पुर्णरुपे पबैत छलौं आइ बुझि पड़ैत अछि जिनगी शायद उ किताब नैय जकरा रैट अव्वल आइब जाइ बड़ उतार चढ़ाव कत्तो गहिंर खदिया त कत्तो उंच आइर कखन ढनमना जाएब भरोस नय के डेंग धरत ककरा पर आश करब वयस अपराह्न के सुरुजक जका ढैल रहल अछि अन्हार पसरल जा रहल अछि किछ आर पाब के आश लय तृष्णा बैढ़ते जा रहल अछि बुइझ नय पाबैत छि कहिया बुइझ पाएब एही गुढ़ रहस्य के नय बड़ कठिन अकरा पढ़ब एहि तरहे सब शेष भ जाएत एक दिन शायद कियो नय पैढ़ सकला एहि किताब के कियो नय । अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। चंदना दत्त मोह हमर भाखा मैथिली मोहि लैत अछि परदेसियो के कहैत छथि बेर बेर मधुर मधुर अछि मैथिली मुदा कहाँ मोहि पौलक अपन   मुखिया सरपंचके निकालल गेल अपनहि गाम घरसं इस्कुल आ बालमनसं टि्वंकल टिव्ंकल रटय अछि नेना पढियो क कि करत कतहु कि रोजी रोजगार भेटतै, नाम मे डाक्टर लगौने कि पेट भरत पोथियो के पढत मैथिलीमे बाल बच्चा नाचि गाबि रहल पंजाबी मे मोह नेने ठाढ़े छी पोखरि पर घैलसं भरैत छी जल आसके कहियो त अऔता राम निर्वासित मैथिलीकें उठौता कोर -चंदना दत्त, रांटी अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। सविता 'सुमन' माँ सहस्त्र दीपक के आलोक में खिलैत अहां के मुस्कान जेना अनेकों सूरज के जगमगाहट सौन्दर्य के अप्रतिम गरिमा सौं मण्डित कोमल उद्यान्त अहां हमर मां अहां कतेऽछी हमर हृदय के घाव पर शीतल लेप लगबैत हमर मां कतेऽछी अहां के स्नेह भरल दृष्टि अहां के स्नैहिल आदेश मधुर प्यार सौं भरल झिड़की हमर सुतल आत्मा के जगबैत छला अहां के नोर जेना धिपल धरती पर बारिशक पहिल बौछार हमर दर्द के पीड़ा के सहलाबैत जेना कोनो अदृश्य छुअन हमर खुशी खिलखिलाबैत हमर दुख में कनैत हमर मां अहां कतेऽछी आजु दूर अहां हमरा सौं आशा आ विश्वास सौं रिक्त अन्हार आ अनचिन्हार रास्ता में हे मां हमर विश्वास टुटि रहल अछि हमर प्रर्थना अछि अहां सौं हमरा राह देखाबू हमर डूबैत मिटैत विश्वास के लौटाबू हे हमर मां अहां कतै छी -सविता 'सुमन', सहरसा (बिहार) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ........................................................................................................................ संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल  मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] Videha e-Learning पेटार (रिसोर्स सेन्टर) शब्द-व्याकरण-इतिहास MAITHILI IDIOMS & PHRASES मैथिली मुहावरा एवम् लोकोक्ति प्रकाश- रमाकान्त मिश्र मिहिर (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) डॉ. ललिता झा- मैथिलीक भोजन सम्बन्धी शब्दावली (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) मैथिली शब्द संचय MAITHILI DICTIONARY- RAMDEO JHA (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) ENGLISH MAITHILI COMPUTER DICTIONARY MAITHILI ENGLISH DICTIONARY अणिमा सिंह -Shishu_Geet_Khel_Anima_Singh डॉ. रमण झा मैथिली काव्यमे अलङ्कार    अलङ्कार-भास्कर आनन्द मिश्र (सौजन्य श्री रमानन्द झा "रमण")- मिथिला भाषाक सुबोध व्याकरण BHOLALAL DAS मैथिली सुबोध व्याकरण- भोला लाल दास राधाकृष्ण चौधरी- A Survey of Maithili Literature ........................................................................................................................ मूलपाठ तिरहुता लिपिक उद्भव ओ विकास (यू.पी.एस.सी. सिलेबस) राजेश्वर झा- मिथिलाक्षरक उद्भव ओ विकास (मैथिली साहित्य संस्थान आर्काइव) Surendra Jha Suman दत्त-वती (मूल)- श्री सुरेन्द्र झा सुमन (यू.पी.एस.सी. सिलेबस) प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) CIIL SITE ........................................................................................................................ समीक्षा सुभाष चन्द्र यादव-राजकमल चौधरी: मोनोग्राफ शिव कुमार झा "टिल्लू" अंशु-समालोचना डॉ बचेश्वर झा- B_JHA_Nibhand_Nikunj.pdf डॉ. देवशंकर नवीन- Adhunik_Sahityak_Paridrishya डॉ. रमण झा- भिन्न-अभिन्न प्रेमशंकर सिंह- मैथिली भाषा साहित्य:बीसम शताब्दी (आलोचना) डॉ. रमानन्द झा 'रमण' हिआओल अखियासल     CIIL SITE दुर्गानन्द मण्डल-चक्षु RAMDEO JHA दत्त-वतीक वस्तु कौशल- डॊ. श्रीरामदेवझा SHAILENDRA MOHAN JHA परिचय निचय- डॊ शैलेन्द्र मोहन झा ........................................................................................................................ अतिरिक्त पाठ पहिने मिथिला मैथिलीक सामान्य जानकारी लेल एहि पोथी केँ पढ़ू:- राधाकृष्ण चौधरी- मिथिलाक इतिहास फेर एहि मनलग्गू फाइल सभकेँ सेहो पढ़ू:- केदारनाथ चौधरी चमेलीरानी                         माहुर                          करार कुमार पवन पइठ (मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ कथा) (साभार अंतिका)       डायरीक खाली पन्ना (साभार अंतिका) याेगेन्द्र पाठक वियाेगी- विज्ञानक बतकही रामलोचन ठाकुर- मैथिली लोककथा SAHITYA AKADEMI http://sahitya-akademi.gov.in/publications/e-books.jsp http://sahitya-akademi.gov.in/general/Digitalbooks.jsp CIIL http://corpora.ciil.org/maisam.htm अखियासल (रमानन्द झा रमण) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI1.pdf जुआयल कनकनी- महेन्द्र http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI2.pdf प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI3.pdf सृजन केर दीप पर्व- सं केदार कानन आ अरविन्द ठाकुर http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI4.pdf मैथिली गद्य संग्रह- सं शैलेन्द्र मोहन झा http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI5.pdf JNU http://sanskrit.jnu.ac.in/maithili/index.jsp http://sanskrit.jnu.ac.in/student_projects/lexicon.jsp?lexicon=maithili ARCHIVE.ORG https://archive.org/details/%40vijay_deo_jha?&sort=-publicdate&page=2 VIDEHA MAITHILI BOOKS/ PICTURE-AUDIO-VIDEO ARCHIVE http://videha.co.in/new_page_15.htm https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ ALL INDIA RADIO DOORDARSHAN आकाशवाणी दूरदर्शन http://prasarbharati.gov.in/ http://newsonair.com/ https://doordarshan.gov.in/ आकाशवाणी मैथिली पोडकास्ट http://prasarbharati.gov.in/podcast.php?filterlang=Maithili&from=1947-08-15&fromwp=2020-08-29&to=2050-12-31&search=GO आकाशवाणी पटना/ दरभंगा मैथिली रेजनल न्यूज टेक्स्ट डाउनलोड-1 http://newsonair.com/RNU-NSD-Audio-Archive-Search.aspx आकाशवाणी पटना/ दरभंगा मैथिली रेजनल न्यूज टेक्स्ट डाउनलोड-2 http://newsonair.com/Regional-Text.aspx आकाशवाणी दरभंगा http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=282 आकाशवाणी दरभंगा यू ट्यूब चैनल https://www.youtube.com/channel/UCGdNveEFmv4pPolWiTEMxVA आकाशवाणी भागलपुर http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=359 आकाशवाणी पूर्णियाँ http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=256 आकाशवाणी पटना http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=122 IGNCA http://ignca.nic.in/coilnet/mithila.htm http://ignca.nic.in/coilnet/kalyani.htm (MAITHILI ENGLISH DICTIONARY) http://tdil.mit.gov.in/CoilNet/IGNCA/mithila.htm MITHILA DARSHAN https://mithiladarshan.com/ (online pdf of Maithili journal) I LOVE MITHILA https://www.ilovemithila.com/  (online maithili journal) मैथिली साहित्य संस्थान https://www.maithilisahityasansthan.org/ https://www.maithilisahityasansthan.org/resources (online pdf of Reasearch Papers/ books) ........................................................................................................................ VIDEHA e-LEARNING YOUTUBE CHANNEL https://www.youtube.com/channel/UC4abVKqMj2pDWIAkXiOHp7A (अनुवर्तते) -गजेन्द्र ठाकुर विदेहक किछु विशेषांक:- १) हाइकू विशेषांक १२ म अंक, १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf          Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf       12.pdf २) गजल विशेषांक २१ म अंक,  १ नवम्बर २००८ Videha_01_11_2008.pdf       Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf         21.pdf ३) विहनि कथा विशेषांक ६७ म अंक, १ अक्टूबर २०१० Videha_01_10_2010        Videha_01_10_2010_Tirhuta             67 ४) बाल साहित्य विशेषांक ७० म अंक, १५ नवम्बर २०१० Videha_15_11_2010        Videha_15_11_2010_Tirhuta             70 ५) नाटक विशेषांक ७२ म अंक १५ दिसम्बर२०१० Videha_15_12_2010        Videha_15_12_2010_Tirhuta           72 ६) नारी विशेषांक ७७म अंक ०१ मार्च २०११ Videha_01_03_2011        Videha_01_03_2011_Tirhuta           77 ७) अनुवाद विशेषांक (गद्य-पद्य भारती) ९७म अंक Videha_01_01_2012 Videha_01_01_2012_Tirhuta           97 ८) बाल गजल विशेषांक विदेहक अंक १११ म अंक, १ अगस्त २०१२ Videha_01_08_2012        Videha_01_08_2012_Tirhuta           111 ९) भक्ति गजल विशेषांक १२६ म अंक, १५ मार्च २०१३ Videha_15_03_2013        Videha_15_03_2013_Tirhuta           126 १०) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक १४२ म, अंक १५ नवम्बर २०१३ Videha_15_11_2013        Videha_15_11_2013_Tirhuta           142 ११) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 १२) अरविन्द ठाकुर विशेषांक १८९ म अंक १ नवम्बर २०१५ Videha_01_11_2015 १३) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक १९१ म अंक १ दिसम्बर २०१५ Videha_01_12_2015 १४) विदेह सम्मान विशेषा‍क- २००म अ‍क १५ अप्रैल २०१६/ २०५ म अ‍क १ जुलाई २०१६ Videha_15_04_2016 Videha_01_07_2016 १५) मैथिली सी.डी./ अल्बम गीत संगीत विशेषांक- २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ Videha_01_01_2017 १६) मैथिली वेब पत्रकारिता विशेषांक VIDEHA 313 लेखकसं आमंत्रित रचनापर आम‍ंत्रित आलोचकक टिप्पणीक शृंखला १७) मैथिली बीहनि कथा विशेषांक-२ VIDEHA 317 १. कामिनीक पांच टा कविता आ ओइपर मधुकान्त झाक टिप्पणी विदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016 एडिटर्स चोइस सीरीज एडिटर्स चोइस सीरीज-१ विदेहक १२३ म (०१ फरबरी २०१३) अंकमे बलात्कारपर मैथिलीमे पहिल कविता प्रकाशित भेल छल। ई दिसम्बर २०१२ क दिल्लीक निर्भया बलात्कार काण्डक बादक समय छल। ओना ई अनूदित रचना छल, तेलुगुमे पसुपुलेटी गीताक एहि कविताक हिन्दी अनुवाद केने छलीह आर. शांता सुन्दरी आ हिन्दीसँ मैथिली अनुवाद केने छलाह विनीत उत्पल। हमर जानकारीमे एहिसँ बेशी सिहराबैबला कविता कोनो भाषामे नहि रचल गेल अछि। सात सालक बादो ई समस्या ओहने अछि। ई कविता सभकेँ पढ़बाक चाही, खास कऽ सभ बेटीक बापकेँ, सभ बहिनक भाएकेँ आ सभ पत्नीक पतिकेँ। आ विचारबाक चाही जे हम सभ अपना बच्चा सभ लेल केहन समाज बनेने छी। एडिटर्स चोइस सीरीज-१ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-२ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच ब्रेस्ट कैसरक समस्यापर विदेह मे मीना झा केर एकटा लघु कथा प्रकाशित भेल। ई मैथिलीक पहिल कथा छल जे ब्रेस्ट कैसर पर लिखल गेल। हिन्दीमे सेहो ताधरि एहि विषयपर कथा नहि लिखल गेल छल, कारण एहि कथाक ई-प्रकाशित भेलाक १-२ सालक बाद हिन्दीमे दू गोटेमे घोंघाउज भऽ रहल छल कि पहिल हम आकि हम, मुदा दुनूक तिथि मैथिलीक कथाक परवर्ती छल। बादमे ई विदेह लघु कथामे सेहो संकलित भेल। एडिटर्स चोइस सीरीज-२ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-३ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिलक किछु बाल कविता प्रकाशित भेल। बादमे हुनकर ३ टा बाल कविता विदेह शिशु उत्सवमे संकलित भेल जाहिमे २ टा कविता बेबी चाइल्डपर छल। पढ़ू ई तीनू कविता, बादक दुनू बेबी चाइल्डपर लिखल कविता पढ़बे टा करू से आग्रह। एडिटर्स चोइस सीरीज-३ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-४ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच जगदानन्द झा मनुक एकटा दीर्घ बाल कथा कहि लिअ बा उपन्यास प्रकाशित भेल, नाम छल चोनहा। बादमे ई रचना विदेह शिशु उत्सवमे संकलित भेल, ई रचना बाल मनोविज्ञानपर आधारित मैथिलीक पहिल रचना छी, मैथिली बाल साहित्य कोना लिखी तकर ट्रेनिंग कोर्समे एहि उपन्यासकेँ राखल जेबाक चाही। कोना मॊडर्न उपन्यास आगाँ बढ़ै छै, स्टेप बाइ स्टेप आ सेहो बाल उपन्यास। पढ़बे टा करू से आग्रह। एडिटर्स चोइस सीरीज-४ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-५ एडिटर्स चोइस ५ मे मैथिलीक "उसने कहा था" माने कुमार पवनक दीर्घकथा "पइठ" (साभार अंतिका) । हिन्दीक पाठक, जे "उसने कहा था" पढ़ने हेता, केँ बुझल छन्हि जे कोना अहि कथाकेँ रचि चन्द्रधर शर्मा ’गुलेरी’ अमर भऽ गेलाह। हम चर्चा कऽ रहल छी, कुमार पवनक "पइठ" दीर्घकथाक। एकरा पढ़लाक बाद अहाँकेँ एकटा विचित्र, सुखद आ मोन हौल करैबला अनुभव भेटत, जे सेक्सपीरिअन ट्रेजेडी सँ मिलितो लागत आ फराको। मुदा एहि रचनाकेँ पढ़लाक बाद तामस, घृणा सभपर नियंत्रणकेँ आ सामाजिक/ पारिवारिक दायित्वकेँ सेहो अहाँ आर गंभीरतासँ लेबै, से धरि पक्का अछि। मुदा एकर एकटा शर्त अछि जे एकरा समै निकालि कऽ एक्के उखड़ाहामे पढ़ि जाइ। एडिटर्स चोइस सीरीज-५ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-६ जगदीश प्रसाद मण्डलक लघुकथा "बिसाँढ़": १९४२-४३ क अकालमे बंगालमे १५ लाख लोक मुइला, मुदा अमर्त्य सेन लिखैत छथि जे हुनकर कोनो सर-सम्बन्धी एहि अकालमे नहि मरलन्हि। मिथिलोमे अकाल आएल १९६७ ई. मे आ इन्दिरा गाँधी जखन एहि क्षेत्र अएली तँ हुनका देखाओल गेल जे कोना मुसहर जातिक लोक बिसाँढ़ खा कऽ एहि अकालकेँ जीति लेलन्हि। मैथिलीमे लेखनक एकभगाह स्थिति विदेहक आगमनसँ पहिने छल। मैथिलीक लेखक लोकनि सेहो अमर्त्य सेन जेकाँ ओहि महाविभीषिकासँ प्रभावित नहि छला आ तेँ बिसाँढ़पर कथा नहि लिखि सकला। जगदीश प्रसाद मण्डल एहिपर कथा लिखलन्हि जे प्रकाशित भेल चेतना समितिक पत्रिकामे, मुदा कार्यकारी सम्पादक द्वारा वर्तनी परिवर्तनक कारण ओ मैथिलीमे नहि वरण् अवहट्ठमे लिखल बुझा पड़ल, आ ओतेक प्रभावी नहि भऽ सकल कारण विषय रहै खाँटी आ वर्तनी कृत्रिम। से एकर पुनः ई-प्रकाशन अपन असली रूपमे भेल विदेहमे आ ई संकलित भेल "गामक जिनगी" लघुकथा संग्रहमे। एहि पोथीपर जगदीश प्रसाद मण्डलकेँ टैगोर लिटरेचर अवार्ड भेटलनि। जगदीश प्रसाद मण्डलक लेखनी मैथिली कथाधाराकेँ एकभगाह हेबासँ बचा लेलक, आ मैथिलीक समानान्तर इतिहासमे मैथिली साहित्यकेँ दू कालखण्डमे बाँटि कऽ पढ़ए जाए लागल- जगदीश प्रसाद मण्डलसँ पूर्व आ जगदीश प्रसाद मण्डल आगमनक बाद। तँ प्रस्तुत अछि लघुकथा बिसाँढ़- अपन सुच्चा स्वरूपमे। एडिटर्स चोइस सीरीज-६ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-७ मैथिलीक पहिल आ एकमात्र दलित आत्मकथा: सन्दीप कुमार साफी। सन्दीप कुमार साफीक दलित आत्मकथा जे अहाँकेँ अपन लघु आकाराक अछैत हिलोड़ि देत आ अहाँक ई स्थिति कऽ देत जे समानान्तर मैथिली साहित्य कतबो पढ़ू अहाँकेँ अछौं नहि होयत। ई आत्मकथा विदेहमे ई-प्रकाशित भेलाक बाद लेखकक पोथी "बैशाखमे दलानपर"मे संकलित भेल आ ई मैथिलीक अखन धरिक एकमात्र दलित आत्मकथा थिक। तँ प्रस्तुत अछि मैथिलीक पहिल दलित आत्मकथा: सन्दीप कुमार साफीक कलमसँ। एडिटर्स चोइस सीरीज-७  (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-८ नेना भुटकाकेँ रातिमे सुनेबा लेल किछु लोककथा (विदेह पेटारसँ)। एडिटर्स चोइस सीरीज-८ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-९ मैथिली गजलपर परिचर्चा (विदेह पेटारसँ)। एडिटर्स चोइस सीरीज-९ (डाउनलोड लिंक) जगदीश प्रसाद मण्डल जीक ६५ टा पोथीक नव संस्करण विदेहक २३३ सँ २५० धरिक अंकमे धारावाहिक प्रकाशन  नीचाँक लिंकपर पढ़ू:- Videha_15_05_2018 Videha_01_05_2018 Videha_15_04_2018 Videha_01_04_2018 Videha_15_03_2018 Videha_01_03_2018 Videha_15_02_2018 Videha_01_02_2018 Videha_15_01_2018 Videha_01_01_2018 Videha_15_12_2017 Videha_01_12_2017 Videha_15_11_2017 Videha_01_11_2017 Videha_15_10_2017 Videha_01_10_2017 Videha_15_09_2017 Videha_01_09_2017 विदेह ई-पत्रिकाक  बीछल रचनाक संग- मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ रचनाक एकटा समानान्तर संकलन: विदेह: सदेह: १ (२००८-०९) देवनागरी विदेह: सदेह: १ (२००८-०९) तिरहुता विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) देवनागरी विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) तिरहुता विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०)देवनागरी विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०) तिरहुता विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०)देवनागरी विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०) तिरहुता विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]देवनागरी विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]  तिरहुता विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]- दोसर संस्करण देवनागरी विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ]देवनागरी विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ] तिरहुता विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ]देवनागरी विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ]  तिरहुता विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ]देवनागरी विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ] तिरहुता विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ]देवनागरी विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ] तिरहुता विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ]देवनागरी विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ] तिरहुता विदेह:सदेह ११ विदेह:सदेह १२ विदेह:सदेह १३ The readers of English translations of Maithili Novel "sahasrabadhani" and verse collection "sahasrabdik chaupar par" has intimated that the English translation has not been able to grasp the nuances of original Maithili. Therefore the Author has started translating his Maithili works in English himself. After these translations are complete these would be the official translations authorised by the Author of the original works.-Editor Maithili Books can be downloaded from: https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ विदेह सम्मान: सम्मान-सूची (समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार सहित) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। सूचना/ घोषणा १ "विदेह सम्मान" समानान्तर साहित्य अकदेमी पुरस्कारक नामसँ प्रचलित अछि। "समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार" (मैथिली), जे साहित्य अकादेमीक मैथिली विभागक गएर सांवैधानिक काजक विरोधमे शुरु कएल छल, लेल अनुशंसा आमन्त्रित अछि। अनुशंसा २०१९ आ २०२० बर्ख लेल निम्न कोटि सभमे आमन्त्रित अछि: १) फेलो २)मूल पुरस्कार ३)बाल-साहित्य ४)युवा पुरस्कार आ ५) अनुवाद पुरस्कार। अपन अनुशंसा ३१ दिसम्बर २०२० धरि २०१९ पुरस्कारक लेल आ ३१ मार्च २०२१ धरि २०२०क पुरस्कारक लेल पठाबी। पुरस्कारक सभ क्राइटेरिया साहित्य अकादेमी, दिल्लीक समानान्तर पुरस्कारक समक्ष रहत, जे एहि लिंक sahitya-akademi.gov.in पर उपलब्ध अछि। अपन अनुशंसा editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २ “मिथिला मखान” फिल्म देखू मात्र १०१ टाकामे। Android App “BEJOD” download करू वा जाउ www.bejod.in पर, signup करू, एकटा ईमेल जायत, अपन ईमेल खोलू आ ओकरा क्लिक करू अहाँक अकाउंट एक्टीवेट भय जायत। आब मिथिला मखान रेण्ट पर लिअ, डेबिट कार्डसँ १०१ टाका अॉनलाइन पेमेंट करू आ फिल्म देखू। ३ विदेह अपन आगामी अंक (२०२१ क प्रारम्भमे) श्री रामलोचन ठाकुर पर विशेषांक निकालबाक नेयार केने अछि। हुनका सम्बन्धी रचना आमंत्रित अछि (संस्मरण, साक्षात्कार, समीक्षा आदि) जे ३१ दिसम्बर २०२० धरि editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाओल जा सकैत अछि। विदेह पेटारक अन्तर्गत (पोथी डाउनलोड साइट) मे http://www.videha.co.in/new_page_15.htm  हुनकर मौलिक, अनूदित आ सम्पादित रचना फ्री पी.डी.एफ. डाउनलोड लेल उपलब्ध अछि। विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम्: VIDEHA: AN IDEA FACTORY (c)२००४-२०२१. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHAसम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: डॉ उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम वि‍लास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक -स्त्री कोना- इरा मल्लिक। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि)editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि। एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै, आ से हानि-लाभ रहित आधारपर छै आ तैँ ऐ लेल कोनो रॊयल्टीक/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै। तेँ रॉयल्टीक/ पारिश्रमिकक इच्छुक विदेहसँ नै जुड़थि, से आग्रह। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत।  एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-2021 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। ५ जुलाई २००४ केँ http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA वि  दे  ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् 'विदेह' ३१८ म अंक १५ मार्च २०२१ (वर्ष १४ मास १५९ अंक ३१८)

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