VIDEHA — Issue 320 / अंक ३२०

Publication: VIDEHA · Issue: 320
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विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA ISSN 2229-547X VIDEHA 'विदेह' ३२० म अंक १५ अप्रैल २०२१ (वर्ष १४ मास १६० अंक ३२०) १. गजेन्द्र ठाकुर- संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल  मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल सेहो] [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] [FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI ALSO] रामलोचन ठाकुर श्रद्धांजलि विशेषांक २.१.महेन्द्र हजारी- से छथि रामलोचन २.२.नारायणजी- श्रद्धेय रामलोचन ठाकुरकें स्मरण करैत २.३.विनोद कुमार झा- राम लोचन हमर प्रेरणा २.४.बिनय भूषण- रामलोचन ठाकुरक झिझिरकोना आ... २.५.आशीष अनचिन्हार- अनचिन्हार लेल रामलोचन ठाकुर २.६.जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’- राम लोचन ठाकुर प्रसंग ३. गद्य ३.१.जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’- आँखिमे चित्र हो मैथिलीकेर (आत्म-कथा) ३.२.मुन्नाजी- आधुनिक विश्वकथाक बाट पर जाइत- बीहनि कथा ३.३.ज्ञानवर्द्धन कंठ- उषा मैडमक विदागरी ३.४.सुभाष कुमार कामत- बीहनि कथा-रंग ३.५. लालदेव कामत- पानक बरैब ४.स्त्री कोना (सम्पादक- इरा मल्लिक) ४.१.सविता 'सुमन'-उम्मीद ४.२.रागिनी प्रीत- सखी ४.३.चंदना दत्त- रौद(बीहनि कथा) ४.४.कंचन  कंठ-  जय माँ अंबे Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Books/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाउ। VIDEHA ARCHIVE विदेह पेटार View Videha googlegroups (since July 2008) view Videha Facebook Official Group (since January 2008)- for announcements १. गजेन्द्र ठाकुर ........................................................................................................................ ........................................................................................................................ [संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल  मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री] [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल सेहो] [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] [FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI ALSO] यू. पी. एस. सी. (मेन्स) २०२० ऑप्शनल: मैथिली साहित्य विषयक टेस्ट सीरीज यू.पी.एस.सी. क प्रिलिमिनरी परीक्षा २०२० सम्पन्न भऽ गेल अछि। जे परीक्षार्थी एहि परीक्षामे उत्तीर्ण करताह आ जँ मेन्समे हुनकर ऑप्शनल विषय मैथिली साहित्य हेतन्हि तँ ओ एहि टेस्ट-सीरीजमे सम्मिलित भऽ सकैत छथि। टेस्ट सीरीजक प्रारम्भ प्रिलिम्सक रिजल्टक तत्काल बाद होयत। टेस्ट-सीरीजक उत्तर विद्यार्थी स्कैन कऽ editorial.staff.videha@gmail.com पर पठा सकैत छथि, जँ मेलसँ पठेबामे असोकर्ज होइन्हि तँ ओ हमर ह्वाट्सएप नम्बर 9560960721 पर सेहो प्रश्नोत्तर पठा सकैत छथि। संगमे ओ अपन प्रिलिम्सक एडमिट कार्डक स्कैन कएल कॉपी सेहो वेरीफिकेशन लेल पठाबथि। परीक्षामे सभ प्रश्नक उत्तर नहि देमय पड़ैत छैक मुदा जँ टेस्ट सीरीजमे विद्यार्थी सभ प्रश्नक उत्तर देताह तँ हुनका लेल श्रेयस्कर रहतन्हि। विदेहक सभ स्कीम जेकाँ ईहो पूर्णतः निःशुल्क अछि।- गजेन्द्र ठाकुर संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सर्विसेज (मुख्य) परीक्षा, २०२० मैथिली (ऐच्छिक) लेल टेस्ट सीरीज/ प्रश्न-पत्र- १ आ २ TEST SERIES-1 TEST SERIES-2 [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल/ FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI] NTA_UGC_NET_MAITHILI_01 NTA_UGC_NET_MAITHILI_02 NTA_UGC_NET_MAITHILI_03 (श्री शम्भु कुमार सिंह द्वारा संकलित) Videha e-Learning MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) UPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS BPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. (ऐच्छिक) मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. (अनिवार्य) मैथिली प्रश्नपत्र- बी.पी.एस.सी.(ऐच्छिक) मैथिलीक वर्तनी १ भाषापाक २ मैथिलीक वर्तनीमे पर्याप्त विविधता अछि। मुदा प्रश्नपत्र देखला उत्तर एकर वर्तनी इग्नू BMAF001 सँ प्रेरित बुझाइत अछि, से एकर एकरा एक उखड़ाहामे उनटा-पुनटा दियौ, ततबे धरि पर्याप्त अछि। यू.पी.एस.सी. क मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेल सेहो ई पर्याप्त अछि, से जे विद्यार्थी मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेने छथि से एकर एकटा आर फास्ट-रीडिंग दोसर-उखड़ाहामे करथि| IGNOU  इग्नू       BMAF-001 ........................................................................................................................ MAITHILI (OPTIONAL) TOPIC 1    [Place of Maithili in Indo-European Language Family/ Origin and development of Maithili language (Sanskrit, Prakrit, Avhatt, Maithili) भारोपीय भाषा परिवार मध्य मैथिलीक स्थान/ मैथिली भाषाक उद्भव ओ विकास (संस्कृत, प्राकृत, अवहट्ट, मैथिली)] TOPIC 2    (Criticism- Different Literary Forms in Modern Era/ test of critical ability of the candidates) TOPIC 3    (ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददास सिलेबसमे छथि आ रसमय कवि चतुर चतुरभुज विद्यापति कालीन कवि छथि। एतय समीक्षा शृंखलाक प्रारम्भ करबासँ पूर्व चारू गोटेक शब्दावली नव शब्दक पर्याय संग देल जा रहल अछि। नव आ पुरान शब्दावलीक ज्ञानसँ ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददासक प्रश्नोत्तरमे धार आओत, संगहि शब्दकोष बढ़लासँ खाँटी मैथिलीमे प्रश्नोत्तर लिखबामे धाख आस्ते-आस्ते खतम होयत, लेखनीमे प्रवाह आयत आ सुच्चा भावक अभिव्यक्ति भय सकत।) TOPIC 4                (बद्रीनाथ झा शब्दावली आ मिथिलाक कृषि-मत्स्य शब्दावली) TOPIC 5                (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोरिक गाथामे समाज ओ संस्कृति) TOPIC 6                (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- विद्यापति) TOPIC 7                (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- पद्य समीक्षा- बानगी) TOPIC 8                (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोक गाथा नृत्य नाटक संगीत) TOPIC 9                (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- यात्री) TOPIC 10               (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली रामायण) TOPIC 11               (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली उपन्यास) TOPIC 12               (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- शब्द विचार) TOPIC 13               (तिरहुता लिपिक उद्भव ओ विकास) TOPIC 14                 (आधुनिक नाटकमे चित्रित निर्धनताक समस्या- शम्भु कुमार सिंह)् TOPIC 15                 (स्वातंत्र्योत्तर मैथिली कथामे सामाजिक समरसता- अरुण कुमार सिंह) TOPIC 16                 (यू. पी.एस.सी. मैथिली प्रथम पत्रक परीक्षार्थी हेतु उपयोगी संकलन, मैथिलीक प्रमुख उपभाषाक क्षेत्र आ ओकर प्रमुख विशेषता, मैथिली साहित्यक आदिकाल, मैथिली साहित्यक काल-निर्धारण- शम्भु कुमार सिंह) TOPIC 17                (मैथिली आ दोसर पुबरिया भाषाक बीचमे सम्बन्ध (बांग्ला, असमिया आ ओड़िया) [यू.पी.एस.सी. सिलेबस, पत्र-१, भाग-“ए”, क्रम-५]) TOPIC 18                 [मैथिली आ हिन्दी/ बांग्ला/ भोजपुरी/ मगही/ संथाली- बिहार लोक सेवा आयोग (बी.पी.एस.सी.) केर सिविल सेवा परीक्षाक मैथिली (ऐच्छिक) विषय लेल] ........................................................................................................................ GENERAL STUDIES (PRELIMINARY & MAINS) GS (Pre) TOPIC 1 GS (Mains) NCERT-ENVIRONMENT CLASS XI-XII NCERT PDF I-XII TN BOARD PDF I-XII ALL INDIA RADIO ENGLISH NEWS ALL INDIA RADIO NEWS ARCHIVE ALL INDIA RADIO TALKS AND CURRENT AFFAIRS RAJYA SABHA TV NEWS DISCUSSIONS OTHER OPTIONALS IGNOU eGYANKOSH (अनुवर्तते) -गजेन्द्र ठाकुर रामलोचन ठाकुर श्रद्धांजलि विशेषांक २.१.महेन्द्र हजारी- से छथि रामलोचन २.२.नारायणजी- श्रद्धेय रामलोचन ठाकुरकें स्मरण करैत २.३.विनोद कुमार झा- राम लोचन हमर प्रेरणा २.४.बिनय भूषण- रामलोचन ठाकुरक झिझिरकोना आ... २.५.आशीष अनचिन्हार- अनचिन्हार लेल रामलोचन ठाकुर २.६.जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’- राम लोचन ठाकुर प्रसंग महेन्द्र हजारी-संपर्क-9062469848 से छथि रामलोचन सम दृष्टिक भाव जनिक छनि से छथि रामलोचन लोचनमे जनिक कमान छनि से छथि रामलोचन अपन काजमे सहजहि तत्पर समाजक जे राखथि खयाल से छथि रामलोचन मिथिला-मैथिल-मैथिलीक करथि सम्मान से छथि रामलोचन सबहक जे मोनसँ करथि सम्मान से छथि रामलोचन ज्येष्ठ-श्रेष्ठकेँ जे श्रद्धा करथि समवयस्क संग करथि हास्य-विनोद से छथि रामलोचन छोट-छीन लार-प्यार करथि से छथि रामलोचन कवि-लेखक कथा-पिहानीक रचियता छथि रामलोचन मैथिली नाटकमे जे अभियन करथि से छथि रामलोचन पत्र-पत्रिकाक जे करथि संपादन से छथि रामलोचन साम्यवाद जे करथि विश्वा, समाजवादक नहि अविश्वासी जन-जनमे श्रद्धाभाव से छथि रामलोचन मैथिली-बंगला-हिंदीमे रचना करथि से छथि रामलोचन सभ-सोसाइटी, कविगोष्ठीक करथि संचालन मैथिली लिपिक करथि प्रचार मरदनसुमारीमे मैथिली मातृभाषा लिखबाक आग्रह करै छथि मैथिली बजबाक आग्रह करै छथि से छथि रामलोचन नेनपनसँ शिवजीक पूजा-पाठ करैत छथि गीताकेँ धर्मशास्त्र मानै छथि से छथि रामलोचन मिथिलाक प्रसिद्ध गाम बाबू-पालीमे जन्म लेलनि काली क्षेत्र कोलकातामे कर्मक्षेत्र बनौलनि नाम यश जे बेस कमौलनि, महेन्द्रक छथि यार से छथि रामलोचन संप्रति ओ भुतियाय गेल छथि, कोनो पक्षकेँ ताकि रहल छथि घट-घटमे अपन द्रष्ट ताकि रहल छथि से छथि रामलोचन संपादकीय-नोट- ई कविता विदेहक "रामलोचन ठाकुर विशेषांक" केर अंतिम दिनमे आएल छल मुदा ओ विशेषांकमे कविता सभ देबाक विचार नै छल आ तकर बाद रामलोचनजीक मृत्युक समाद आएल। रामलोचनजी मूलतः मैथिलीमे लिखलनि, बंगलासँ मेथिली अनुवाद केलथि आ मिथिला-मैथिलीसँ संबंधित दू-तीन टा रचना हिंदीमे केलाह। मरदनसुमारी मने जनगणना। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। नारायणजी- संपर्क-9431836445 श्रद्धेय रामलोचन ठाकुरकें स्मरण करैत:- मिथिला चिट्ठी आएल अछि दूर देशसं आएल ई चिट्ठी कतेक धार आ पहाड़ आ जंगल पार क' आएल अछि, हम नहि जनैत छी कतेक हाथक स्पर्श अछि एहि चिट्ठी पर (अदृश्य अछि) मुदा,देखाइत अछि डाकखानाक लागल मुहर आ अपन पता जकर निच्चांमे लिखल अछि 'मिथिला'। मिथिला नित्य पुरनाइत एहि देशमे कोनो प्रान्त-नगर आ गाम नहि रहि गेल अछि किएक लिखल गेल अछि हमरा धरि आएल एहि चिट्ठी पर मिथिला? सभसं बेसी मोन पाड़ैत अछि की अपन बीतल युगकें लोक? अपन भौगोलिक अभिव्यक्ति लेल की छटपटाय रहलीह अछि मिथिला? जेना ग्लोब पर अएबाक लेल छटपटाए रहल अछि फिलिस्तीन। कहियोक मिथिलासं बाहर आइ जे गुजर- बसर करैत छथि नाभि-नाल गाड़ल छनि एहि भूखण्डमे जिनकर वैह सपनाइत छथि की मिथिला? मिथिला हुनके सपनामे जाए कनैत छथि कलिंग देवी सन तकैत छथि एकटा खाड़बेल,एकटा योद्धा? भरोस उठि गेलनि अछि की एहि जनपदक बसनिहारसभ परसं मिथिलाक? दूर-देशमे रहैत छथि घाम चुअबैत छथि घरक फाटल आकाश सिबैत छथि जुड़ाइत छथि संसारक बहैत बसातसभसं दृढ़ भ'अएलनि अछि हुनकामे मिथिलाकें साकार करबाक इच्छा हुनके आत्मामे अंकुरित भेलनि अछि मुक्ति-बीज वैह लिखलनि अछि चिटृठीक निच्चांमे-'मिथिला'। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। विनोद कुमार झा-संपर्क-9334108281 राम लोचन हमर प्रेरणा पुरुखा छलाह आदिमानव केलनि कतेको श्रमसाध्य काज भेटल हेतनि कोनो जंगल, पहाड़, जमकल नदी । छोट पाथरके छेनी पैघ पाथरके बनौने हेताह हथौड़ी ठोकि-ठाकि, काटि-छांटि बनौने हेताह शस्त्र-हथियार, कलम गढ़बाक, रचबाक जे छलनि इतिहास । पाथरके रगड़ि- रगड़ि निकालने हेताह आगि भेल हेताह गरम, चूबल हेतनि घाम घमल हैत ठंडा ग्लेशियर बनल हैत धार, बहल हैत नदी व्यग्र नदी पहुंचबे करत सागर धरि । कोरने-कमेने हेताह माटि केने हेताह कदबा बाउग केने हेताह बीज, तखन उपजौने हेताह अन्न भरल हेतैक कतेकोके भूखल पेट आ मोन । लोक-लोकके जोड़ि, बनौलनि परिवार परिवारके जोड़ि समाज प्रवासी समाजके जोड़ि केलनि क्रांति सिखौलनि मातृभाषा लेल संघर्ष केलनि साहित्यक आंदोलन । एतेक काज करबामे लागि गेलनि कतेको बरख सम्पूर्ण जिनगी इतिहास हंता बनल पुनर्जागरणक नव इतिहासक अग्रदूत । राम लोचन ठाकुर केलनि त' बहुतो काज मैथिली साहित्यक विकास यात्रामे बनताह इतिहास-पुरुष हमर सबहक प्रेरणा स्रोत । संपादकीय-नोट- ई कविता विदेहक "रामलोचन ठाकुर विशेषांक" लेल आएल छल मुदा ओ विशेषांकमे कविता सभ देबाक विचार नै छल आ तकर बाद रामलोचनजीक मृत्युक समाद आएल। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। बिनय भूषण-संपर्क-7003286056 1 रामलोचन ठाकुरक झिझिरकोना तीन चारि दिन सँ निपत्ता भ' गेल अछि हमर निन्न चौबीसो घंटा देखैत रहै छी व्हाट्सअप आ फेसबुक । रामलोचन जी हमरा सभक संग खेलताह एतेक झिझिरकोना कहियो नञि सोचल । हुनका मादेँ सोचैत - सोचैत नोरा' जाइत अछि आँखि हुनका सन सचेतन लोक कोना भ' सकैत अछि बिसरभोर ? कहाँ मानैत अछि हमर मोन ? एखनहु दू बजे राति मे जखन कि एखने लागल अछि आँखि ओ जगा रहल छथि हमरा कहि रहल छथि हमरा कतेक सुतबह जाग' - जाग' बड्ड आराम केलह । काज कर' हाथ - पायर मार' मिथिलाक लेल कर' किछु काज मनुक्खक लेल कर' किछु काज । से सत्ते करबाक अछि काज काज बहुत काज मनुक्खताइ केँ बचेबाक काज सामाजिकताक प्रसारक काज संस्कृतिक संरक्षणक काज सत्य आ इमानक अस्तित्व केँ संजीवनी प्रदान करबाक काज काज अनन्त काज । कहि रहल छथि हमरा हमर चिन्ता जुनि कर' बिनय हम स्वस्थ छी सकुशल छी हम तोँ सभ करैत रह' काज पढ़' - गुन' - लिख' इतिहास केँ बूझ' सिरज नवका इतिहास । 2 खौलैत खुन मे बोरल आंगुर सँ लिखाइत कविता ओ जे महसूसैत अछि भूखल लोकक पेटक अँतड़ीक दर्द । ओ जे दर्द सँ हाकरोस करैत लोकक हृदय मे मारैत रहैत अछि हुलकी अहर्निश । ओ जे उपेक्षित लोकक आँखिक नोरक स्वाद केँ चिखि होइत रहैत छथि मर्माहत अहर्निश । ओ जे रक्तविहीन काया केँ चाम सँ झाँपल ठठरी केँ निहारैत रहैत छथि अनवरत । ओ जिनकर हृदय मे सदिखन उमरैत रहैत अछि दयाक महासमुद्र । ओ जे आक्रोशित कायाक नश मे बहैत खुनक उबाल केँ महसूसैत रहैत अछि अहर्निश । ओ जे कलम छिनायल हाथक मर्म केँ बूझैत हो नीक जकाँ । ओ जे मजूरक खौलैत खुन केँ बना' लैत हो मोसि आ अपन आंगुर केँ बना' लैत हो कलम । ओ जे असीम आशाक संग नवका भोरक संधानक लेल रचैत रहैत हो कविता अहर्निश । ओ जे सामाजिकता आ मनुक्खताइक लेल संवादक सपना केँ जोगने रहैत हो अपन आत्मा मे । ओ अचक्के अपना आप केँ परिवार आ समाज सँ क' लेत दूर से नहि मानैत अछि हमर मोन । 3 अहाँक ई फर्ज़ बनैत अछि रामलोचन जी अहाँ तँ लोकक दुख - दर्द केँ बूझैत छियैक अपन निजी दर्द । रामलोचन जी अहाँ तँ बूझैत छियैक स्त्रीक मोनक पहाड़ सन जीवनक मर्म । रामलोचन जी अहाँ केँ लेबाक चाही ओहि बुढ़ियाक सुधि जे अपन माय - बाप आ अपन समाज केँ छोड़ि अहाँक संग लगौनय छलीह सात - सात फेरा । रामलोचन जी अहाँ ललनजी आ आलोक केँ देनय छियैक केहन दारूण पीड़ा ओ बुच्ची जे सदिखन सटल रहैत छल अहाँक करेज मे हुनका सभक ह्रदय पर पसरल निराशाक घोर अन्हार केँ करबाक चाही अहाँ केँ अनुभव । रामलोचन जी सम्पूर्ण मिथिलाक कोटि - कोटि आँखि अहाँ केँ देखबाक आश मे लगौनय अछि वकदृष्टि । एहन विकट परिस्थिति मे अहाँक बनैत अछि फर्ज़ जे बिना कोनो देरी के एखनहि हँसैत - हँसैत चलि आबू अपन घर सम्पुर्ण मिथिला केँ द' दियौ उलहन - उपराग जे अहाँ सभ कहिया मनायब हमर जन्मदिन हम आबि गेल छी अप्पन घर पालन करू हमर जन्मदिन । अहाँ देखबै विदेह - वैदेहीक पावन धरती पर ज्योतिरीश्वर आ विद्यापतिक मिथिला मे राजकमल आ यात्रीक गाम मे सोमदेवक वाधित कण्ठ मे भ' जेतैक कालध्वनिक संचार अम्बरक भीतरक शून्य सँ बहराब' लगतैक भाषायी चेतनाक अमृत - मंत्र गोबिन्द बाबू टांग मे आबि जेतैक अजस्र ताकति साहित्यक मैदान मे दौड़य लगताह सरपट । अहाँक चेतना मे सदिखन लैत रहैत अछि सांस मिथिलाक संस्कृतिक पवित्र प्राणवायु अहाँक कलमक नोक सँ अनायास टपकय लगैत अछि दुखित आ पीड़ित लोकक घाम आ नोर क्षणहि मे अहाँक शब्द सँ बहराब' लगैत अछि आक्रोशक सार्थक धधरा । से बनैत अछि अहाँक फर्ज़ जे एखनहि अविलंब घूरि अयबाक चाही अहाँ केँ अप्पन घर । 4 फगुआ २०२१ आ रामलोचन ठाकुर रामलोचन जी ! अहाँ कतय छी पता नञि हम सभ सजल आँखि सँ खोजि रहल छी अहाँ केँ सभ बेर जकाँ एहि बेर सेहो अहाँक संग मनाबय चाहै छी हम सभ फगुआ - ठहक्का प्रेम सँ अहाँक कलम के पिचकारी सँ बहराइत कविताक रंग सँ सराबोर होम' चाहै छी हम सभ । रामलोचन जी ! अहाँक अनुपस्थिति मे सुन्न - सपाट लागि रहल अछि कोलकाताक कविताक दलान आजुक बाजारवादी समाज मे जतय धधकि रहल अछि परोपकारक भावना अलोपित भेल जा रहल अछि आपकताक भाव उड़ाओल जा रहल अछि स्वार्थ आ कुटिलताक अबीर अहंकारक पिचकारी सँ बहरा' रहल अछि दमनक कारी रंग ततय अहाँक उपस्थितिक अनिवार्यता कहाँ बिसरि रहल अछि कोलकाताक सुधी समाज । रामलोचन जी ! बर्ख मे एक्के दिन सही प्रेमक रंग सँ सराबोर भ' जाइत अछि लोक जीवन मे नवल वसंतक होम' लगैत अछि संचार सभक ठोर पर थिरक' लगैत अछि मुस्कानक राग आपकताक रंग सँ रंगा' जाइत अछि लोकक मोन अहाँक थिरकैत ठोर देखि अहाँक मुँह सँ बहराइत अमृतवाणीक स्पर्श सँ सभक कान मे गुंज' लगतैक वसंतक राग । रामलोचन जी ! अहाँ कतौ हैब , सकुशल हैब से करै छी हमसभ कामना भींजल आँखि सँ पठा' रहल छी फगुआक शुभकामना सुनैत छियैक जे स्मृतिलोपक बेमारी मे कखनो काल घूरि आबैत अछि स्मृति से शीघ्रे एखनहि घूरि आबय अहाँक स्मृति से करै छी हम सभ कामना कतेक नीक लगतैक हमरा सभ केँ जौं आबि जेबै अहाँ तखन सत्ते हमरा सभक मोन मे भ' जायत नवल वसंतक संचार । रामलोचन जी ! अहाँक प्राणप्रिय माय मैथिलीक असंख्य लव - कुश ताकि रहल छथि अहाँ केँ अपन सचेतन आ ऊर्जावान भाइ केँ अपन धरोहर केँ , अपन इतिहास केँ अहाँक लेल कानि रहल छथि मैथिली अहाँ जानैत छी अहाँक ठोर पर सदिखन उपस्थित रहैत छथि मैथिली अहींक कलम सँ फगुआ मे हँसैत छथि मैथिली से एहि बेरक फगुआ कोलकाताक साहित्यिक फगुआ फगुआ ठहक्काक आयोजन वेकल भ' क' रहल अछि अहाँक इन्तिज़ार । 5 ओ कहैत छथि रामलोचन जी कहैत छथि जे एक दिन अचक्के ओ आंगनक सीमा नांघि बहरा' गेल छलाह वाट पर अपन मोन मे ओ जोगनय छलाह एकटा क्रांतिकारी आ रचनात्मक सपना जन - जनक पीड़ा सँ दग्ध भ' गेल छलैक हुनक आत्मा एहि पिरथी केँ पिरथी विशाल पिरथी केँ सुन्दर सँ सुन्दरतम बनेबाक कामना हुनक हृदय मे बना' लेनय छलैक अप्पन जग्गह हुनकर मोन मे छलन्हि इ अटल विश्वास जे एहि वाट मे हुनका भेटि जेतनि असंख्य समानधर्मा सहयात्री जे कखनो नञि लिखताह उजरा कागत पर करिया मोसि सँ कोनो कपोल - कल्पित निरर्थक कविता कोनो कृत्रिम मनोहारी कथा कोनो अप्रयोजनीय इतिहास । रामलोचन जी कहैत छथि जे ओ अपना हाथ मे एकटा चमकैत पँचकमिया भाला लेनय चलि पड़ल छथि इतिहासक वाट पर एकटा सार्थक कामनाक संग जे लाल टुह- टुह रक्त सँ पिरथीक विशाल वक्ष पर लिखबाक छन्हि हुनका मनुक्खक सुखमय जीवनक लेल एकटा सार्थक कविता एकटा यथार्थ कथा एकटा रचनात्मक इतिहास ओ प्रतिवद्धताक संग कहैत छथि जे हुनका बनबाक छन्हि स्वयं एकटा घटना एकटा नाम एकटा इतिहास । सहजतावादक प्रवर्तक अग्निजीवी कवि सोमदेव केँ ओ कहैत छथि जे आजुक प्रजातंत्री राजतंत्र मे सत्ता प्राप्तिक लेल आयोजित होइत अछि यज्ञ एहि यज्ञ मे देल जाइत अछि निम्मुधन जनताक देल जाइत अछि वलि एहि परम्पराक उपटौनीक लेल हुनका संग मिलि असंख्य अग्निजीवी कवि संग मिलि ओ करताह अग्निकविताक संधान समाजक जमीन पर जनमल विषमता आ ईर्षाक घास केँ जारि केँ सुड्डाह करबाक लेल संगोर' पड़तैक प्रगतिकामी विचारक आगि गाब' पड़तैक विध्वंसक राग निर्माणक लेल आवश्यक अछि विध्वंस कुटिलता आ दमनकारी विचारक विध्वंस एहि विध्वंसक पश्चात हमर समाज मे हमर देश मे गुंज' लगतैक प्रेम आ आपकताक राग । जीवकांत केँ इमानदारीक संग कहैत छथि रामलोचन जी जे ओ लिखि नञि पाबैत छथि हुनकर भाषा हुनकर भाषा मे हुनक पत्रक उतारा देब असम्भव छैक हुनका लेल हुनका पता नञि छन्हि जे केना फुलाइत छैक कमलक फूल ओ बिसरि गेल छथि ओड़हूल फूलक रंग हुनका मोन नञि छन्हि जे केहन होइत छैक खजन चिड़ैया ओ नहि लिखि पाबैत छथि प्रकृतिपरक काव्य वसंतक आशक निरर्थक स्वप्न मे हुनका नहि छन्हि मिसियो भरि विश्वास ओ चाहैत छथि जे आभासी वसंतक स्वप्न यथार्थ मे भ' जाइ परिवर्तित एहि धरतीक कोटि - कोटि पीड़ित - उत्पीड़ित लोकक जीवनक वसंतक जोगार करबा काल हुनका बिसरा' गेल अछि फूल - पत्ती आ प्राकृतिक सौन्दर्य ओ अत्यंत धैर्यक संग कहैत छथि जे जखन एहि धरती पर समस्त मनुक्खक जीवन मे आबि जेतैक वास्तविक वसंत तखन ओ जरूर गौताह प्रसन्नचित्त मुद्रा मे वसंतक गीत । संपादकीय-नोट- ई कविता विदेहक "रामलोचन ठाकुर विशेषांक" लेल आएल छल मुदा ओ विशेषांकमे कविता सभ देबाक विचार नै छल आ तकर बाद रामलोचनजीक मृत्युक समाद आएल। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। आशीष अनचिन्हार-संपर्क-8876162759 अनचिन्हार लेल रामलोचन ठाकुर बर्ख 2000 केर मइ-जूनमे हम पहिल बेर कलकत्ता आएल रही आगूक शिक्षा लेल आ दिसम्बर 2008 मे हम कलकत्ता छोड़ि देने रही नौकरी लेल आ चलि गेल रही दिल्ली। बर्ख 2003 मे हम पहिल बेर अपन कविता पाठ सार्वजनिक मंचपर केने रही। कोन मंचपर केने रही, ओहिमे किनकर-किनकर भूमिका रहै तकर नमहर चर्चा हम अपन पोथी "मैथिली गजलक व्याकरण ओ इतिहास" मे केने छी। आ अही पाठ केर बाद हमरा कलकत्ताक बहुत लेखक, पाठक ओ संगठनकर्ता सभसँ परिचय भेल जाहिमे एकटा रामलोचन ठाकुर छलाह। ओहि दिनक परिचयक बाद ईहो पता लागल जे कलकत्तामे अन्य कवि सम्मेलन केर अतिरिक्त हरेक मासक दोसर रवि दिन कऽ एकटा "संपर्क" नामक गोष्ठी सेहो होइत छै जाहिमे साहित्यकार लोकनि जुटैत अछि। संपर्क गेल रही। पहिल संपर्क। जहाँ धरि हमरा मोन अछि हमर आ प्रसिद्ध विज्ञान कथाकार योगेन्द्र पाठक वियोगीजीक पहिल संपर्क बैसार एकै छल मने ओहो हमरे जकाँ पहिल दिन आएल रहथि। आ तकरा बादसँ प्रायः कलकत्ताक हरेक साहित्यकारक संगत रहल। आ तकरे बाद बुझने रही जे कोन लेखक कोन बाट ओ कोन लक्ष्यक छथि। जाहिमे हमरा रामलोचनजीक बाट ओ लक्ष्य नीक लगैत रहए। हमरा रामलोचनेजीक बाट ओ लक्ष्य किएक नीक लगैत छल से जानब कठिन नै। जे हमरा नीक जकाँ जनैत छथि से हमर स्थिति सेहो जनैत छथि। जे नै जनैत छथि से हमर ओ संस्मरण पढ़थि जे हम फरवरी 2020 मे अपन पिताजीक मृत्युक बाद लिखने रही। कुल मिला सारांश अतबे जे हम अपना गामक महागरीब। किछु अंशमे एखनो छी मुदा स्थिति सम्हरल अछि। आब अहूँ सभ बुझि सकैत छियै जे हमरा रामलोचनेजीक बाट ओ लक्ष्य किएक नीक लगैत छल। दोसर बात ईहो जे हुनका जे कहबाक रहैत छलनि से कहि दैत छलखनि आब लोक जे करए। हुनकर भूमिका हम शिक्षक नै प्रोफेसर जकाँ मानैत छी। शिक्षक हाथ धरा सिखाएत। मुदा प्रोफेसर बाजैत चलि जाएत। आब अहाँपर निर्भर जे ओ नीक चीज पकड़ि सकैत छी की नै। अचानक तँ नै मुदा रामलोचनजीक हरेक बेरक भेंट हमरा किछु एहन सूत्र दऽ जाइत छल जाहिसँ हमरा जीवनमे सहायता भेटैत छल। साहित्यमे सेहो भेटैत छल मुदा बेसी सूत्र हम जीवन बला पकड़लहुँ आ तकर बाद साहित्य बला। एकटा संक्षिप्त नोट दऽ रहल छी-- 1) आर्थिक सूत्र- आर्थिक जीवन मुख्यतः शिक्षापर टिकल छै तँइ ओ युवा कविसँ शिक्षा कालमे मात्र शिक्षे लेल समय देबए कहथिन। ओ जीवनमे अर्थक महत्व सेहो कहथि। एक बेर संपर्कसँ निकलि (किशोरीकांत मिश्रजीक प्रेससँ) जाइत रही हुनके संगे। बाटमे किछुए देरक संग रहैत छल कारण हमर घर मात्र पैदल दस मिनटक दूरीपर आ हुनका बस पकड़बाक रहैत छलनि। चलैत-चलैत अर्थेसँ जुड़ल बात-चीतमे ओ हमरा कवि सभहक सीमा एना कहलाह जे मानू अहाँ नीक कविता लिखैत छी आ हम ओकर प्रसंशक छी मुदा अहाँ लग नौकरी नै अछि वा अछियो तँ ओतेक नीक नै अछि। मुदा अहाँक कविताक प्रसंशक रहितो जँ हमरा अपन बेटी लेल वर ताकए पड़त तँ ओहि काल अहाँक नाम हमर लिस्टमे दूर-दूर धरि नै रहत। बात ओ मात्र उदाहरण लेल कहने छलाह मुदा हम एकरा अपना जीवनमे लेलहुँ आ जहने हो तेहने स्थितिमे अर्थ दिस बेसी फोकस केलहुँ। साहित्य नै छोड़लहुँ। मंचक प्रति रामलोचन जी उदासीन नै छलाह मुदा हम अपना जीवनसँ मंचोकेँ हटा देलहुँ, कारण लगभग ओही भाषामे अर्थक महत्व हमर माँझिल भाए सेहो बजैत छलाह, एखनो बजैत छथि। एकै बात विभिन्न कोण, संदर्भमे सुनलासँ हमरा मंचक प्रति उदासीने नै कठोरो बना देलक। आब हम एकर फायदा बुझि रहल छी। 2) साहित्य सूत्र- हम हुनकर बातसँ दू टा चीज सिखलहुँ पहिल जे हरेक लेखक अपना लेल एकटा केंद्रीय विधा चुनए। ओ बहुविधावादी लेखनकेँ प्रायः संदेहसँ देखैत छलाह। बादमे हम अपना लेल गजल चुनलहुँ। दोसर जे ओ पुरस्कार-सम्मानकेँ लेखनक बाइ-प्रोडक्ट मानै छलखिन। ओ एक बेर कहलाह जे पैखाना घृणित वस्तु छै मुदा जीवन लेल आवश्यक तेनाहिते पुरस्कार लेखन लेल छै। हम पुरस्कार लेल हुनके बात मानै छी। रचनारत लेखककेँ जखन उपेक्षा होइत छै तखन किछु ने किछु दुख अवश्य होइत छै। रामलचोनजीकेँ सेहो कोनो क्षण विशेषमे दुख भेल हेतनि मुदा ओ दुख हुनका लेल अवरोध नै बनलनि से अंतो धरि हुनक सक्रियतासँ बूझि सकैत छी। ओना एहि तरहक दुख हरेक लेखकक जीवनमे अबैत छै। एहन दुख एबाको चाही तखने कोनो लेखक सार्थक रचि सकैए ताहूमे मैथिली भाषामे जाहिमे पुरस्कार भेटिते लेखन बंद भऽ जाइत छै। 3) भाषा सूत्र- आइ हम मात्र मैथिलीमे लीखै छी तँ से गुण हमरा रामलोचन ठाकुरसँ भेटल अछि। एक बेर (प्रायः संपर्केमे) बाजल रहथि जे बंगला छोड़ि आन कोनो उत्तर भारतीय भाषा (मैथिली, हिंदी, उर्दू, नेपाली आदिमे) मे लेखन कऽ अर्थोपार्जन नै कएल जा सकैए। तखन जँ हिंदियोमे पाइ नै भेटत आ मैथिलियोमे पाइ नै भेटत तखन मैथिलिएमे रचना किएक ने लिखी। कुल मिला हम आब भाषा लेल इएह नीति रखने छी। बहुत संभव जे आर बात हम हुनकासँ सिखने होइ मुदा जे मुख्य छल से उपरक तीन अछि। कहबाक लेल तँ हम हुनका साहित्यिक गुरू कहैत छियनि मुदा वस्तुतः ओ हमर जीवनक बहुत रास गुरूमेसँ एकटा सेहो छथि। आब जखन कि रामलोचनजी एहि संसारमे नहि छथि, हम ई बात सभ नहियो लीखि सकैत छलहुँ मुदा से कृतघ्नता होइत आ हम बदमाश, असभ्य, अबंड सभ किछु भऽ सकैत छी मुदा कृतघ्न आ बैमान नहि। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’ सम्पर्क -8789616115 राम लोचन ठाकुर प्रसंग एखन विदेहमे भाइ राम लोचन ठाकुर जी पर जे विशेषांक आएल अछि, ताहिमे वंदना किशोरजी  द्वारा जे साक्षात्कार प्रस्तुत कएल गेल अछि ताहिमे एक प्रश्नक जबाब दैत भाइ कहैत छथि जे हमरा पत्नीकें अक्षरक ज्ञान छलनि, मात्राक नहि | हमरा लगैत अछि जे इहो प्रश्न पूछल जेबाक चाही जे ओहि स्थितिमे परिवर्तनक हेतु अहाँ द्वारा की प्रयास कएल गेलै | मुदा, बड्ड देरी भ’ गेल अछि, आब ई प्रश्न ककरासं पूछब ? ...................................... ....................................................................... ‘विदेह’मे प्रकाशित विशेषांकमे अग्रज राम लोचन ठाकुर जीक मैथिली साहित्य मे योगदानक विषयमे बहुत किछु जनलाक बाद आश्चर्य होइत अछि जे एतेक कर्मठ लोक एतेक जल्दी कोना अदृश्य भ’ गेलाह ? कोन एहेन गलती कोन  स्तरसं भेलै जे स्थिति ककरो नियंत्रणमे नहि रहि सकलै ?   12 मार्चक’ घरसं निकलला आ एके बेर 6 अप्रैलक’ मृत अवस्थामे पाओल गेलाह | बीचक स्थितिक कल्पनासं मोन बेकल भ’ जाइत अछि | भाइ कत’ खसल-पडल हेताह—कोना दीन-हीन अवस्थामे की भेल हेतनि, एहि जिज्ञासाक समाधान कठिन अछि | आदरणीय राम लोचन जी एहेन साहित्यकारकें एहि तरहें जाएब सभकें व्यथित केलकनि | कते गोटे हुनका खोजमे डेढ़ माससं लागल छलाह | मुदा अहू प्रश्नक उत्तर लेल शास्त्रक सुनय पडत : विवाह आ जन्म-मरण ..........| ओना भाइ बहुत किछु मैथिली साहित्य जगतकें द’ गेल छथि जाहिसं ओ  युग-युग धरि चर्चामे सभ ठाम उपस्थित  रहताह | अपन अनुभव यैह कहैत अछि जे बहुत स्थितिक स्पष्टीकरण लोक अपनहु नै द’ सकैत  अछि | गत पन्द्रह मार्च क’ हम अपने बाथरूममे कोना खसि पडलहुँ से नै बुझि सकलिऐ | ने पिच्छर छलै, ने चप्पल स्लिप करबाक कोनो आन कारण बूझ’ मे आएल आ ने बी पीक  दबाइ छोड़ने रही | देबालसं टकरयबाक कारण माथक अगिला भागमे चोट बेशी बुझाएल |...................................... ....................................................................... (आँखिमे चित्र हो मैथिलीकेर- आत्म-कथासँ) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३. गद्य ३.१.जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’- आँखिमे चित्र हो मैथिलीकेर (आत्म-कथा) ३.२.मुन्नाजी- आधुनिक विश्वकथाक बाट पर जाइत- बीहनि कथा ३.३.ज्ञानवर्द्धन कंठ- उषा मैडमक विदागरी ३.४.सुभाष कुमार कामत- बीहनि कथा-रंग ३.५. लालदेव कामत- पानक बरैब जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’ सम्पर्क -8789616115 आँखिमे चित्र हो मैथिलीकेर ( आत्म-कथा ) 10. कल्पना-गगनमे वरियातीक  प्रस्थान करबाक समय बाबू हमरा लग आबि कहलनि कनियाँक पढाइक व्यवस्था कएल जेतै | हुनका चलि गेलाक बाद  लागल जे आब एसगरे हमरा अपन समस्याक समाधान ताक’ पडत | हमरा इहो लागल जे मोनसं अथवा बेमोनसं जखन हम पूर्ण सचेत अवस्थामे विवाह स्वीकार क’ लेलहुं त आब अनका ककरो दोख देब उचित नहि, एकर जिम्मेदार हम स्वयं छी | ‘कन्यादान’क सी सी मिश्र जकाँ सासुरसं भागि जाएब उचित नै बुझाएल | हम समाधानक लेल ‘द्विरागमन’क कथाक चिन्तन कर’ लगलहुँ |  बुच्ची दाइकें ठीकसं बुझबाक प्रयास कर’ लगलहुँ |  मोनक बातकें शब्दमे बान्ह्बाक प्रयास केलहुं | गीत कल्पना-गगनमे मधुवन सजा रहल छी दुनियाँमे जीबाक अछि, तें मन लगा रहल छी | अछि आइ ने कोनो सपना अछि आइ ने कोनो धारा मोनो ह्रदयक प्रश्नक नहि दैत अछि उतारा उमड़ल जे बात मनमे, कहितो लजा रहल छी दुनियाँमे जीबाक अछि, तें मन लगा रहल छी | किछु पांती बादमे जोडायल : चोट’छि ह्रदयमे लागल नहि नोर टा बहैए मरियोक’ हम जिबै छी हंसि ठोर टा कहैए रूसल जे  भाव मनमे, तकरे मना रहल छी दुनियाँमे जीबाक अछि,तें मन लगा रहल छी | जिनगीसं सीख भेटल हंसिक’ समय बितायब सुखमे ने मुंह खसायब दर्दमे ने छटपटायब बाजल जे तार तनमे, तकरे बजा रहल छी दुनियाँमे जीबाक अछि तें मन लगा रहल छी | शास्त्र  कहैत अछि जे विवाह, जन्म आ मृत्यु जहिया, जत’ जेना हेबाक रहैत छै तहिना होइत छैक | शास्त्रमे हजारो बरखक अनुभवपर आधारित ज्ञान अछि | ई ज्ञान लोककें निराशासं बंचबैत अछि | अपन स्थितिक समीक्षा केलहुं त लागल जे हमरा जते नहि भेटल अछि ताहिसं बहुत बेशी ओ अछि जे भेटल अछि | हमरा जे भेटल अछि ओहिपर ध्यान केन्द्रित क’ क’ प्रसन्न रहबाक चाही आ जे प्रयास केलासं और नीक भ’ सकैछै,ताहि लेल प्रसन्नतापूर्वक प्रयास करबाक चाही | हमरा सोझां एखन द्वितीय बर्षक परीक्षा अछि, जल्दीए ढोली जाए पडत | सासुरमे सासु छलीह जजुआरक | ससुर छलाह, दू टा जेठ सार छलाह, दुनू सरहोजि छलीह, चारिटा छोट-छोट सरबेटा छलाह | दूटा जेठ सारि छलीह जे नहि आएल छलीह | एकटाक सासुर डुमरा (बेनीपट्टी) छलनि, दोसरक सासुर कोरियाही (सीतामढ़ी ) छलनि | एकटा साढ़ू आएल छलाह जे दरभंगामे बी.ए.मे पढ़ैत छलाह | दिनमे कते गोटे भेंट कर’ अबैत छलाह | अधिक लोक पीसा कहैत छलाह | चारि दिन भरि घर-दरबज्जा भरि रहैत स्त्रीगण सभक मूँहें गीत सुनैत छलहुँ अथवा नव-नव लोक सभसं परिचय होइत छल | गीत सभक भास मनमोहक लगैत छल किन्तु शब्द सभमे सुधारक/परिवर्तनक  आवश्यकता लगैत छल | एहेन एकटा गीत तैयार भेल : घुमा दियनु हे ससुर अंगनामे | नहूँ-नहूं चलियौ दुलहा जोरसं ने चलियौ एखनेसं कनियांकेर हाथ ने छोड़ियौ धरा दियनु हे ससुर अंगनामे | देखब दुलहा कहियो हुए ने गलती अपने चलबै आगाँ कनियाँ पाछाँ-पाछाँ चलती सिखा दियनु हे ससुर अंगनामे | पोथी मे ने भेटत दुलहा एहेन गियान जिनगी भरिमे संगी एहेन भेटत क्यो ने आन लिखा दियनु हे ससुर अंगनामे | देखब दुलहा कहियो ई संगी नहि छुटय सासुरक बान्हल प्रेमक डोरी ने ई टूटय बन्हा दियनु हे ससुर अंगनामे | देलहु अमोल धन राखब जोगाकय बड पछ्तायब एकरा गमाकय बुझा दियनु हे ससुर अंगनामे | वर-कनियाँ होइए एके गाड़ीके दू पहिया हैत बड कचोट बिसरबै ई जहिया रटा दियनु हे ससुर अंगनामे | चारि दिनक बाद  साँझमे हाजीपुर अथवा खिरमा जाइत  छलहुँ | संगमे सार आ  टोलक किछु गोटे रहैत छलाह | सबेरेसं साँझ धरि पान खेबाक अभ्यास जोर पकडलक | बहुत गोटेसं भेंट-घाँट नियमित होइत रहैत छल, मुदा  एक गोटेसं भेंट करक लेल अठारह घंटा प्रतीक्षा कर’ पडैत छल |पूरा वाक्य सुनबाक लेल दस दिन प्रतीक्षा कर’ पडल | ओ वाक्य छल ‘ आब कहिया एबै ?’ भरिसक अही छोट-छीन वाक्यमे छिपल छल जकरासं विवाह हो, तकरासं प्रेम करबाक दर्शन | ढोली पहुंचलाक बाद परीक्षाक तैयारीमे लागि गेलहुँ | किछुए दिनक बाद सासुरसं चिट्ठी आएल | ठाकुरजी सोझांमे छलाह | हम पढ़लिऐ त’ हंसी लागल | ठाकुरजीकें कहलियनि पढ़िक’ अर्थ हमरा बुझा दिय’ | ठाकुरजी पढ़’ लगलाह एके दममे हंसैत पढ़ने जा रहल छलाह, कहलनि पूर्ण विराम त छैहे नै,रुकू कत’ | कनेक ख़ुशी भेल जे अक्षरक ज्ञान त छन्हि | एकर मतलब किछु सुधारक  आशा  कयल जा सकैत अछि | चिट्ठीसं ई बुझबामे आयल जे मधुश्रावणीमे हमर आएब सुनिश्चित करबाक अनुरोध कएल गेल अछि | अनुमान कएल गेल जे ओइ समय तक परीक्षा पूर्ण नै भेल रह्तै तें जाएब संभव नहि अछि | परीक्षा शुरू भ’ गेल त एकटा चिट्ठी पठा देलियंनि | ई जुनि बुझू झूठ कहै छी | कहिया दर्शन हैत अहाँसं आंगुरपर हम दिन गनै छी | सासुर अएबाक होइतछि इच्छा मुदा चलैतछि एखन परीक्षा बितत कोना ई मिलन-प्रतीक्षा कखनो-कखनो खूब सोचै छी, ई जुनि बुझू झूठ कहै छी | हैत परीक्षा-फल जं ने बढ़ियाँ लोक कहत जे अभागलि कनियाँ चुटकी लेत हमरा भरि दुनियाँ मोन मारि तें एखन पढै छी, ई जुनि बुझू झूठ कहै छी | जुनि बूझब जे अहाँकें बिसरलौं ककरहु माया-जालमे फंसलौं हम त अहाँकेर हाथ पकड़लौं अहींकेर प्रेम-गगनमे उडै छी, ई जुनि बुझू झूठ कहै छी | बीतत परीक्षा शीघ्रे आयब तखन अपन हम कुशल सुनायब अहाँ कथू ले’ ने गाल फुलायब चिट्ठी एखन बस एतबे लिखै छी, ई जुनि बुझू झूठ कहै छी | (ii) एखन विदेहमे भाइ राम लोचन ठाकुर जी पर जे विशेषांक आएल अछि, ताहिमे वंदना किशोरजी  द्वारा जे साक्षात्कार प्रस्तुत कएल गेल अछि ताहिमे एक प्रश्नक जबाब दैत भाइ कहैत छथि जे हमरा पत्नीकें अक्षरक ज्ञान छलनि, मात्राक नहि | हमरा लगैत अछि जे इहो प्रश्न पूछल जेबाक चाही जे ओहि स्थितिमे परिवर्तनक हेतु अहाँ द्वारा की प्रयास कएल गेलै | मुदा, बड्ड देरी भ’ गेल अछि, आब ई प्रश्न ककरासं पूछब ? ओहि समयमे ई स्थिति सामान्य रहैक | ‘कन्यादान’क बाद ‘द्विरागमन’ उपन्यासमे हरिमोहन बाबू जे समाधानक एकटा ‘मॉडल’ देने रहथि तकर कतेक उपयोग भेल अथवा ओकर की प्रभाव ओहि समयक लोकपर पडल, से एकटा शोधक विषय भ’ सकैत अछि | शास्त्र  ईहो कहैत अछि जे हमर एकटा निर्णय  हमरा कत’सं  कत’ पहुंचा सकैत अछि तकर ठेकान नहि, तें सभ काज सोचिक’ करक चाही | बहुत काज अज्ञानतावश लोक करैत अछि, जाधरि ज्ञान होइ ताबत बहुत देरी भ’ गेल रहै छै | गलतीसं जे अनुभव होइत छैक से सीढ़ीक काज क’ सकैत अछि | मुदा किछु गलती एहेन होइछ जकर परिणाम ई अवसर नहि दैछ जे ओ सीढ़ीक काज क’ सकय | हमर एकटा कवि-मित्र छलाह आर. के. रवि | हमरा छत्तीसगढ़मे २८ साल पहिने परिचय भेल छल |  हजारीबाग जिलासं गेल छलाह | 6  साल धरि प्रायः प्रतिदिन भेंट होइत छलाह | ओकर बाद मोबाइलसं सम्पर्क बनल छल | सालमे दू-चारि बेर मोबाइल पर गप नीक जकाँ भ’ जाइत छल | हिन्दीमे गीत-गजल लिखैत छलाह | गजलक दू टा पोथी प्रकाशित छनि : ‘सुबह की धूप’ आ ‘धूप और छांव’ | ओ कोलियरीमे काज करैत छलाह | किछु साल पहिने सेवा निवृत भेल छलाह | बिलासपुरमे घर बनौलनि | बेटी-बेटा इंजिनियर छथिन, बंगलोरमे काज करै जाइ  छथि, मुदा किछु माससं घरेसं काज करैत छथिन | पत्नी शिक्षिका छथिन बिलासपुरसं दूर एकटा ग्रामीण विद्यालयमे | संगे रहैत छलाह | दू साल पहिने गप भेल छल त कहलनि जे उच्च-रक्त चापक नियंत्रणक हेतु अंग्रेजी दबाइ जे खाइ छलाह से छोडि देलनि, छओ मास दुनू साँझ दू-दू टा मुक्तावटी खाक’ आब ओहो छोड देलनि आ रक्त-चाप सामान्य रहैत छनि | ओ उच्च रक्त-चापक समस्यासं अपनाकें मुक्त मानैत छलाह | बीस जुलाई 2020  क’ गप भेल त कहलनि जे पत्नीक ट्रान्सफर बिलासपुर करेबाक  प्रयासमे लागल छी, नै भ’ रहल अछि | गत 26  मार्चक’ बाथ रूममे खसि पडलाह, ब्रेन हेमरेज भ’ गेलनि | अपोलो अस्पतालमे भर्ती कएल गेलनि | चारि दिन वेंटीलेटरपर रहलाह | फगुआक प्रात 30  मार्चक’ एहि जगतकें नमस्कार कहि गेलाह | हुनक पुत्र हिमांशुसं सम्पर्क भेल छल | चिरमिरी कोलियरीक अवकाश प्राप्त इंजिनियर आ गायक-मित्र दादा पल्टू मुखर्जी सर्वप्रथम ई सूचना देलनि आ समय-समयपर स्थितिसं अवगत करबैत रहलाह अछि  | दादा सेहो बिलासपुरमे रहैत छथि | दादा रविजीक आ हमर दस-दस टा गीत-गजलकें शास्त्रीय धुनमे संगीतबद्ध क’क’ कैसेट उपलब्ध करौने छलाह जकरा हमसभ एखन धरि सुरक्षित नहि राखि सकलहुँ | दादाकें आब डॉक्टर जोरसं गीत गेबासं मना क’ देने छनि | तें अपने अपन गायनसं संतुष्ट नै होइत छथि | दादा रविजीक बेटी नेहाकें गायनक किछु  अभ्यास करौने छलथिन | नेहा नोकरीमे बंगलोर चलि गेलीह त दादाक प्रशिक्षण छुटि गेलनि | नेहा इंजिनियर छथि मुदा गीत-संगीतसं लगाव आ शौक छनि, स्वर नीक छनि | आब नेहा अपन पिताक गीत-गजलकें स्वर द’ क’ हुनक शब्द सभकें जीवन्त राखि सकैत छथि | ई रविजीक प्रति उचित श्रद्धांजलि हेतनि | लगैत अछि जे उच्च-रक्त चापक नियंत्रण हेतु दबाइ छोड़बाक निर्णय ओत’ पहुंचा देलकनि जत’ हुनका लेल आब किछु नहि कएल जा सकैत छै | हुनकहि दू टा शेरसं हुनका श्रद्धांजलि अर्पित करबाक प्रयास क’ रहल छी : ‘बेखुदी मे जो कभी गीत गुनगुनाते हैं आंसू छलकाते हुए गम भी चले आते हैं’ ‘वक्त बिगड़े, तो बदल जाता है सारा आलम खुद के साये भी खुद से दूर नजर आते हैं’ ‘विदेह’मे प्रकाशित विशेषांकमे अग्रज राम लोचन ठाकुर जीक मैथिली साहित्य मे योगदानक विषयमे बहुत किछु जनलाक बाद आश्चर्य होइत अछि जे एतेक कर्मठ लोक एतेक जल्दी कोना अदृश्य भ’ गेलाह ? कोन एहेन गलती कोन  स्तरसं भेलै जे स्थिति ककरो नियंत्रणमे नहि रहि सकलै ?   12 मार्चक’ घरसं निकलला आ एके बेर 6 अप्रैलक’ मृत अवस्थामे पाओल गेलाह | बीचक स्थितिक कल्पनासं मोन बेकल भ’ जाइत अछि | भाइ कत’ खसल-पडल हेताह—कोना दीन-हीन अवस्थामे की भेल हेतनि, एहि जिज्ञासाक समाधान कठिन अछि | आदरणीय राम लोचन जी एहेन साहित्यकारकें एहि तरहें जाएब सभकें व्यथित केलकनि | कते गोटे हुनका खोजमे डेढ़ माससं लागल छलाह | मुदा अहू प्रश्नक उत्तर लेल शास्त्रक सुनय पडत : विवाह आ जन्म-मरण ..........| ओना भाइ बहुत किछु मैथिली साहित्य जगतकें द’ गेल छथि जाहिसं ओ  युग-युग धरि चर्चामे सभ ठाम उपस्थित  रहताह | अपन अनुभव यैह कहैत अछि जे बहुत स्थितिक स्पष्टीकरण लोक अपनहु नै द’ सकैत  अछि | गत पन्द्रह मार्च क’ हम अपने बाथरूममे कोना खसि पडलहुँ से नै बुझि सकलिऐ | ने पिच्छर छलै, ने चप्पल स्लिप करबाक कोनो आन कारण बूझ’ मे आएल आ ने बी पीक  दबाइ छोड़ने रही | देबालसं टकरयबाक कारण माथक अगिला भागमे चोट बेशी बुझाएल | बेहोश नै भेलहुँ आ ने ब्लीडिंग भेलै | तत्काल बर्फ सं ओहि ठाम थोड़े काल सेकाई क’ क’ बादमे डॉक्टरसं सम्पर्क केलहुं | दस दिनक हेतु  चारि टा दबाइ लिखलनि |दर्द त नै होइ छल तैयो दर्दक दबाइ सेहो कम-सं-कम तीन दिन ल’ लेब’ कहलनि | पाँच दिनक बाद दुपहरमे भोजनक बाद दीवानपर बैसल-बैसल औंघी लागि गेल आ नीचां खसि पडलहुँ | ऐ बेर केहुनीमे बेशी चोट लागल | एम्स गेलहुँ | हड्डी विभागमे सम्पर्क केलहुँ | डॉक्टर  दू सप्ताहक लेल दबाइ लीखि देलनि | जेनरल मेडिसिन विभागमे सेहो सम्पर्क केलहुं | ओहि ठाम बी.पी.क दबाइ बदलि लेबाक सलाह भेटल | पहिने टेलमा  40  लै छलहुँ, आब टेलमा ए एम लेब’ कहलनि | सूगरसं एखन धरि दुनू गोटे बचल छी | आँखिक  ऑपरेशनक स्थिति एखनधरि नै आएल अछि,  समय-समयपर आइ-ड्रापसं काज चलि जाइत अछि | हम डॉक्टरक सलाहक  अनुसार चारि सालसं  हाई बी पी आ चारि माससं  प्रोस्टेटक दबाइ यूरिमक्स-डी ल’ रहल छी | पत्नी  पच्चीस सालसं बी पीक दबाइ ल’ रहल छथि |  दुनू गोटे कोरोनाक टीकाक दुनू डोज ल’ नेने छी | यात्रासं बचैत छी | घरसं बाहर मास्कक उपयोग करैत छी | भोजनमे संयम रखैत छी | तथापि मृत्यु देवताकें जखन एबाक हेतनि, हुनका के मनाक’ सकैत छनि ? मुदा वैज्ञानिक अथवा सरकारी आदेश अथवा सुझावक अवहेलना करैत स्वयं मृत्युकें आमंत्रित करी, ई त कोनो दृष्टिसं उचित नहि कहल जा सकैत अछि | गाममे लोक कोरोनासं नहि डेराइत अछि | एखनहु बहुत लोक एकरा फूसि बुझैत छथि | शहरोमे किछु  लोक सरकारी सुझावक  पालन करब आवश्यक नहि बुझैत छथि | परिणाम चिन्तित करबा योग्य अछि | सौभाग्यसं हमरा सबहक बीच  80-90  बरखसं उपरक  लोक सभ सेहो  छथि जे सक्रिय  छथि | हमरा लगैत अछि जे बेरा-बेरी हुनका सबहक स्वाथ्य-प्रबंधनक  जानकारी सार्वजनिक होइत त नीक बात होइत | हुनका सभक अनुभवसं  बहुत किछु सीखल जा सकैत अछि | दू बरखक दुनू नातिन धीया, यानवी आ तीन बरखक पोता आर्षभ एखन नै जागल अछि, तें लिखबाक काजक लेल भोरक समय हमरा लेल उपयुक्त रहैत अछि | आब जे घडी ने तीनू जागत  | पहिने धीया कि यानवी जगतीह  आ सोझे हमरा लग आबिक’ लैपटॉपक की-बोर्ड पर आक्रमण  करतीह | प्रातसं राति दस बजे धरि तीनू गोटे हमरा सबहक मनोरंजन आ उपयोग करैत रहैत छथि  जे एहि अवस्थामे बहुत ठाम दुर्लभ रहैत अछि | पटना / 14.04.2021 ( क्रमशः ) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। मुन्नाजी आधुनिक विश्वकथाक बाट पर जाइत -- बीहनि कथा ---------------------------------------- मैथिली बीहनि कथा ( Maithili seed story) भारतीय साहित्यक नव विधा थिक. एहेन नव जे कियो कखनो एकर हाथ- पएर तोड़बा लेल, कियो झांटि बाढ़नि क' बैलेबा लेल त' कियो कंठ मोकि प्राण लेबा लेल आतुर, सक्रिय आ उग्र देखल जाइ छथि.समाजिक, आर्थिक, धार्मिक, राजनैतिक आ सबहक सार रूपें साहित्यिक रचनाधर्मिता मे नवताक प्रवेश आगू बढ़बामे सहायक होइ छै. पीढ़ी दर पीढ़ी जेना कोनो परम्परा स्वहस्तान्तरित होइ छै, तहिना सब पीढ़ीमे नव परम्पराक सूत्रपात से हो होइछ.से पुरान परम्पराक संवर्द्धित/ परिष्कृत रूप होइ आकि पूर्णत: नव सृजन.इ नवताक सोझां अबिते दू पीढ़ीक बीच द्वन्द्वता आ तहन अराड़ि,मानवीय स्वभाव सन बुझू.इ बदलाव पहिने नहुंए- नहुंए पएर पसारै जहन संचार तंत्रक अभाव वा शिथिलता छल. मुदा आब.... यांत्रिक पसार भेने लोकक जीवन सेहो यंत्रवत भ' गेल. तें सामाजिक बदलावमे सेहो शीघ्रता देखएत.साहित्य सेहो समाजेक हिस्सा ने!

वर्तमान मे जे भारतीय साहित्यक सिरखारी ( रूप रेखा) देखाइछ ओकर व्याकरणिक आधार संस्कृत आ विधा निरूपणक आधार मूलत: अंग्रेजी साहित्य रहल ऐछ! अंग्रेजी, संस्कृत वा अन्यान्यो भाषामे साहित्य लेखनक शुरुआत काव्य विधा सं प्रारम्भ भेल जे अंग्रेजी मे पोएट्री कहबैछ. मुदा ओकर प्रारूप विभिन्न स्वरूपें/ नामे लिखाइत स्वतंत्र अस्तित्व मे स्थापित भ' चुकल ऐछ. यथा- कविता, गीत, गजल, हाइकु, क्षणिका..... आदि. प्रारम्भ मे कथा लेखन सेहो पद्ये विधा अंग छल. यथा- कथा काव्य!

पद्य( Poetry)के पछाति गद्य( Prose) विधाक जन्म भेल. पद्ये जकां गद्यो विधान्तर्गत रचनाक कतेको प्रकार ऐछ, जे स्वतंत्र नामे स्वतंत्र अस्तित्व मे सर्वविदित ऐछ! यथा - नाटक, उपन्यास- उपन्यासिका,लघुकथा, बीहनि कथा... आदि!

बीहनि कथाक परिभाषा आ खगता? _________________________

पौराणिक स्त्रोतें बहरएल कथाक परिष्कृत, आधुनिक स्वतंत्र विधा थिक बीहनि कथा. जकरा न्यूनतम 20 आ अधिकतम 100 शब्दमे लिखबाक विधान ऐछ! इ ककरो नामान्तरण,कायान्तरण वा विधान्तरण नै, स्वतंत्र रूपमे विद्यमान ऐछ. जे स्पष्ट कथ्य आ गसल शिल्पें लिखल पुष्ट कथा थिक. जाहि मे निष्कर्ष पाठक पर छोइर देल जाइछ.

खगता! सृजनक आधार होइछ.आ खगल लोक ओकर पूर्ति बेर अपन अनुकूल बस्तुकें अंगिकार क' अंगेजैए.कालान्तरें लोक व्यवहार- ओढ़न-पहिरन, पढ़ब- लिखब सबमे स्वाभाविक परिवर्तन होइछ. लोक सदिखन परिवर्तित वा नव स्वरूपकें अंगेजबा लेल उदार होइछ.यांत्रिक युगमे इ इच्छा आओर प्रबल सन! कथाकार आ पाठकक ताहि इच्छापूर्तिक नव साहित्यिक साधन थिक -" बीहनि कथा "

पहिने समादकें कतौ पठेबाक लेल चिट्ठीक प्रयोग होइत छल. ओइ चिट्ठीक प्रारूप मे से हो भिन्नता. क्रममे सर्वप्रथम पोस्टकार्ड तहन अन्तर्देशी आ अन्तिम मे लिफाफे चलन सोझां आयल. आब गौर करू जे चिट्ठी लिखै/ लिखबै बला पर निर्भर छल जे कियो अपन सबटा बात पोस्टकार्ड मे लिखि पठबै छल, ककरो बात पूर करै लेल अन्तर्देशीक खगता त' कियो लिफाफ मे पन्नाक पन्ना भरि बात पूर करै छल. मुदा कालान्तरे लोककें असोकर्ज होम' लगलै ओकर पहुंचबाक नमहर समयान्तराल सं.तहन लोककें कम समयमे समाद पहुंचेबाक खगता पूर' लेल एलै- तार ( टेलिग्राम). जे द्रुत गतियें कम सं कम शब्दमे पास बलाक मगजमे समा क्रियाशील क' दै.त' चिट्ठीक प्रारूप मे 'तार' भेल बीहनि कथा.जे सीमित शब्द( अधिकतम 100) मे अपन बात सं पूर्ण रूपें पाठककें झकझोरवा मे सक्षम हुअए.आब वास्तविकता देखू जे तार बन्न भ' गेल, यांत्रिक विस्तार मे ओ इमेल धरि पहुंचि गेल. मुदा कथामे जहन हम सब तार धरि नै पहुंचि पाबि रहलौं तहन इमेलक कल्पने व्यर्थ! आब दोसर रूपें बुझू भारतक सबसं लोकप्रिय खेल ऐछ -' क्रिकेट ' जकर प्रारम्भ टेस्ट मैच सं शुरू भेल छल. आगू आबि जहन लोककें समयाभाव भेने शीघ्र फलक आश जगलै तहन टेस्टक संग एक दिना( वनडे) खेलक प्रारुप एलै.जकरा झटसं लोक अपन हियामे बसा लेलक.जखन जिनगी आओर व्यस्त , समय शिथिल भेलै तहन आयल -'ट्वेन्टी- ट्वेन्टी! ऐ खेलक प्रारूप मे ट्वेन्टी- ट्वेन्टी बुझू बीहनि कथा !

चलू फेर घुरि चली साहित्यमे.गद्य लेखनक प्रारम्भ उपन्यास सं भेल छल. कालान्तरे पाठकक आ लेखकक व्यस्ततावश जनमल विधा लघुकथा( शॉर्ट स्टोरी) जाहि अन्तर्गत मैथिली मे कथा गल्पक लेखन होइछ.कालक्रमे लोककें अति व्यस्तता सं पलखतिक अभाव आ साहित्यिक नव रूचिएं कथाक परिष्कृत रूप वा लेटेस्ट दर्जन रूपमे सोझां आयल बीहनि कथा(शीड स्टोरी) .

आब गप्प करी विधान वा बन्हनक!पहिने बीहनि कथाकें अंग्रेजीक फ्लैशफिक्सनक टेलब्राक अन्तर्गत राखि अधिकतम 150 शब्दमे लिखबाक प्रावधान सोझां आयल. इ सुनिये मैथिली मनीषी सब छटपटा उठला! कहलनि- ऐं गद्यकें कोना कोनो बन्हनमे बान्ध जा सकैए? बान्ह आ नियम त' पद्य लेल होइछ.तहन हुनकर सबहक इ विचार आ कि हाहाकार! हास्यास्पद लागल.इ प्रत्यक्ष उदाहरण सोझां ऐछ जे उपन्यास सं लघुकथा होइत बीहनि कथा धरि अवरोही क्रममे पहुंचब शब्देक सिकुड़न थिक.कथ्यक सिकुड़न नै होइछ. अहां एकहि कथ्य सं शब्द विस्तार दैत बीहनि कथा सं लघुकथा होइत उपन्यास धरिक सृजन क' सकै छी.आ तें बीहनि कथामे अन्त खुजल रहैछ, बन्न नै.माने निष्कर्ष नै रहैछ.ओ पाठक तय करए.

बीहनि कथा स्थापनाक प्रारम्भिक क्रममे विस्तृत अध्ययनक निष्कर्षत: मैथिली कथा साहित्य संकट ग्रस्त देखएल.भाय- भैय्या री, गोंधिया गोधव्वल आ नकल लात तर दबल.लतखुर्दन सन! जे सब लिखथि हुनके किछु गोटेक समूहमे ढ़ाठल.कियो एकरा ओइ ढ़ाठसं बहराकय राष्ट्रीय पटल पर ल' जेबाक मनोरथ तक नै पोसने. बस! अपन परार मे बान्हि -" हम सुनरी हमर पिया सुनरा,गामक लोक बनरी-बनरा " के चरितार्थ करैत. हमरा जन्म इएह मूल कारण हेतै जे मैथिली साहित्य अन्यान्य भारतीय साहित्यक क्रममे सबसं पाछु नै वरन् क्रम सं कतिएल सन! कतौ हेरएल- बेरएल बुझू.ऐ दुर्दशासं आहत हम, इ मनोरथ वा लौ़ल जे कही, करैत मैथिली कथा साहित्यकें बीहनि कथा माध्यमे राष्ट्रीय, अन्तर्राष्ट्रीय, वैश्विक बनेबाक संकल्प लेलौं.जहन विश्व भरिक विधाकें अंगीकार क' हम सब अंगेजने छी, तहन माय मैथिलीक एकमात्र चिलका/ विधा बीहनि कथाकें विश्व भरिमे पसार कि एक नै करी?

अंग्रेजी साहित्यक विधाक क्रममे-- नोवेल, शॉर्ट स्टोरी होइत सीड स्टोरी पर पहुंचबाक क्रममे हिन्दी लघुकथाक नकल मैथिली मे देखएल. जे भातमे आंकड़ सन लागल.ओइ नकल केर एकटा कारण छल हमर सबहक हिन्दीयाइन भेनाइ.हिन्दी साहित्य जेना अंग्रेजी साहित्य सं प्रभावित तहिना मैथिली साहित्य हिन्दी साहित्य सं आच्छादित! तकर मूल कारण रहल हमरा सबकें हिन्दी पट्टीक अंग रहनाइ.अफन सबहक शिक्षाको माध्यम हिन्दी, जाहि सं पत्र- पत्रिका, पोथी पढ़बामे हिन्दीये ग्राह्य ! फिल्म, समाचार, आ साहित्य देखब, पढ़ब- सूनब सब हिन्दीमे तें ओइसं प्रभावित भ' ओकर कोर्ट चिलका ' लघुकथाकें पोसपुत मानि लेब स्वभाविक सन! निसंतान दंपति द्वारा पोसपुत कोर लेब बेजए नै, मुदा जहन अपना लग मए मैथिलीक चिलका बीहनि ऐछ तहन दोसराक मुंह ताकब कते उचित? कोनो नीकक अनुकरण बेजए नै, मुदा अंधानुकरण अनुचित! किएक त' नकल लेल अकल चाही से देखएल शुन्य उदाहरणार्थ- अंग्रेजीक शॉर्ट स्टोरी क अन्तर्गत मैथिलीक रचना सृजन होइछ- कथा/ गल्प. तें सब कथा संग्रह पर अंग्रेजी मे लिखल भेटत- Collection of Short stories. एत' एकटा हास्यास्पद स्थिति जे हिन्दी बलाक देखांउसे शुरू भेल लघुकथा ताहु संग्रह पर अंग्रेजी मे लिखल ऐछ- Collection of short stories. जहन कि दुनूक प्रकृति/ स्वरूप देखू जे दुनूमे पिता- पुत्र बला स्थिति.तहन त' पहिचानक संकट. एतै नकल लेल अकल केर खगता देखार होइछ.खैर! गौर करबा योगय महत्वपूर्ण बात जे मैथिली मे जे विधा ऐछ- सब कोनो ने कोनो भाषा सं आयातित ऐछ. जहन कि बीहनि कथा मैथिलीक अपन माटि- पानि पर अपन शब्दें जनमल एक मात्र पूर्णत: मैथिली साहित्यक विधा थिक. ककरो कायान्तरण, नामान्तरण, आ कि कोनो आन विधान विधान्तरण नै थिक. बीहनि कथा विधाकें मैथिली मे स्थापित भेलोपरान्त एकरा विश्व कथाक बाट पर आगू बढ़ेबाक क्रममे टेलब्राक अधिन अधिकतम 150 शब्द धरि लिखबाक सीमान राख गेल छल. आगू बढ़ैत विश्व कथा विधायक संशोधने ओ निरस्त भ' गेल.तहन ओकरा अंग्रेजीक माइक्रो स्टोरीज वर्ग में आनि स्थापित आ मान्य भेल. जाहि अन्तर्गत अधिकतम 100 शब्दमे स्पष्ट कथ्य आ गसल शिल्पें लिखल संपुष्ट कथा ' बीहनि कथा ' नामे स्थापित भेल.इ कोनो कथाक छेंट वा फिलर नै थिक.

आब विश्व कथा साहित्यक अध्ययन आ निरुपण करैत आधुनिक कथा साहित्यक भिन्न वर्गीकरण सोझां आयल. जकर विवरण ऐ प्र कारें ऐछ- अंग्रेजी साहित्यमे गद्य लेखनक शुरूआत नोवेल सं भ' शार्ट स्टोरी होइत सीड स्टोरी धरि आबि क्रियशील ऐछ! नोवेलक पछाति 1896 में नव खगता आ पूर्तिक लेल जनमल शार्ट स्टोरी 1930 धरि पुरातन सन भ' गेल.1930 मेछोट कथाक नव खगता- पूर्ति वा खांहिश मे जनमल वेरी शार्ट स्टोरीज केर अवधारणा. मोन पाड़ू 1930 माने मैथिली शार्ट स्टोरीज ( कथा/ गल्प) क शैशव काल! ओइ " वेरी शार्ट स्टोरीज के कथा वर्गीकरण मे फ्लैश फिक्शन श्रेणी में राखल गेल जाहि मे अधिकतम 1000 शब्दकोश कथा रचना निहित छल.

से क्रम 1990 धरि चलल. एकर पछाति फेरो एकर संशोधन परिमार्जनक खगता भेल.आ से परिमार्जन वा संशोधन भ' नव विधान आगमन -1990-1995क बीच भेल .महत्वपूर्ण बात जे ओही 90-95क बीच मैथिलीक तत्कालीन नव पीढ़ीकें मैथिलीमे " बीहनि कथा "(सीड स्टोरी)के खगता आ पूर्तिक संभावना देखएल. पहिने कथा लेखनक शुरुआत संस्कृत, बांग्लाक प्रभावे भेल छल. तें बड्डे पछुएल.इ सुनि गौरव बोध हएत जे " बीहनि कथा विधा" प्रत्यक्षत: अंग्रेजीक आधुनिक कथा विधाक समक्ष अपनाकें ठाढ़ केलक. ककरो आन भाषा/ विधाक बैशाखीक सहारे नै. से किछु मैथिलकें आंखि आ देह दुनूमे गड़ब शुरू भेलनि.मुदा बीहनि कथा ओइ संघर्ष सं पार पाबि बहुत आगां निकलि गेल.

मैथिलीक किछु साहित्यकार बीहनि कथाकें शब्द संख्या द्वारा निरूपण आधारकें विरूद्ध नकारात्मक स्वरें सुगबुगेला.एत' अंग्रेजीक आधुनिक कथा विधाकें फरिछबैत वर्गीकरणक बानगी प्रस्तुत ऐछ! गद्य लेखन नोबेल सं शुरू भ' शार्ट स्टोरी होइत सीड स्टोरी पर आबि ठमकल.1896 सं गति पकड़ल शार्ट स्टोरी 1929 धरि बढ़ैत कछमछए लागल.1930 मे अंग्रेजी साहित्यकारकें शार्ट स्टोरीजक विकल्पक खगता - पूर्ति स्वरूप 1931 मे जनमल नव विधा जे फ्लैश फिक्शन कहएल.ओकरे पर्याय के रूपमे" वेरी शार्ट स्टोरीजकें परिभाषित कएल जाइत रहल. महत्वपूर्ण बात जे कथा विधाक स्वरूपमे जे कालान्तरे परिवर्तन होइत रहल ओकर मूलाधार शब्दे मात्र छल. यथा- 1000 सं1500 शब्द धरिक कथा शार्ट स्टोरीजक अन्तर्गत राखल गेल( अपवाद स्वरूप शार्ट स्टोरी 3500 शब्द धरि लिखएल ऐछ!) 1000 वा ओइ सं कम शब्द धरिक कथा फ्लैश फिक्शन वा वेरी शार्ट स्टोरी कहएल. इ कथा विकासक क्रमे आगां बढ़ैत 750 शब्द धरिक कथा सृजन होम' लगलै जकरा सडेन फिक्शन संज्ञा देल गेल. कालान्तरे आगू जा 280 शब्द धरिक कथा लिखल जए लागल जे ट्वीटरेचर नामे जानल गेल.आओर संशोधन होइत माइक्रो फिक्शन वा क्षीणकाय बला कथा विधा सोझां आयल. जाहिमे आधिकतम 100 शब्दक पूर्ण कथा लिखबाक प्रावधान छै. एकरे अन्तर्गत मैथिलीक बीहनि कथा विधा ( सीड स्टोरी) विद्यमान ऐछ! आ कही मानक ताकें पालन करैत आधुनिक कथाक विश्व पटल पर बैसबाक प्रयास मे लागल ऐछ. 1993-95 मे ब्रायन एल्डिस " मिनी सागा "नामे कथा लेखन- प्रकाशन सोझां अनलनि . जाहिमे पूर्ण 50 शब्दमे लिखबाक बन्धन छलै.49 शब्द आ कि 51 शब्द स्वीकार नै छल. ओही कठोर नियमक चलते लोकप्रिय नै भेलै. अही संग फिफ्टी फाइवर आ सिक्सटी नाइनर कथा विधा सेहो उपकलै.ब्रूस हॉलैण्ड राजर्सक 365 सिक्सटी नाइनर कथाक संग्रह चर्चित रहल. एखन धरिक अद्यतन कथा विधा सिक्स वर्ड स्टोरीज छै.जकर जन्मदाता अर्नेस्ट हेमिंग्वेकें मानल जाइछ. हुनक छ: आखरक पहिल कथा 1992 मे प्रायोगिक तौर पर छपिकें सोझां आयल. ओकर मैथिली भाषान्तर नीचा पढ़ू--- " बिकाऊ ऐछ बेबी शूज, बिनु पहिरल."

आब चली बीहनि कथा ( Seed Story) पर. बीसम सदीक अन्तिम दशक! मैथिली कथा साहित्यमे एकटा नव कथा विधाक धमक भेल.ओ विधा छल- " बीहनि कथा "(Seed Story) . ओ एहेन समय छल जहन विश्व कथा समुदायमे सेहो एहेन कथा विधाक खगता आ पूर्ति लेल सीड स्टोरीक प्रादुर्भाव भेल.इ काज सर्वप्रथम 1993 मे अमेरिका मे भेल.एकर शुरुआत " Stories Bite" नामक पत्रिका द्वारा भेल.इ पत्रिका ऐ कथा विधाकें परिभाषित करैत " Seed Stories नामे बानगी वा प्रयोग स्वरूप किछु रचना प्रकाशित आ परिभाषित केलक. एकरा परिभाषित करैत ओहि मे लिखलक- " Seed stories are stone of knowledge, Idea and action. It's Called of small Moment stories. " अर्थात- एकर प्रारम्भिक अवस्थामे लोककें परिचित/ प्रेरित करबा लेल संपूर्ण U. S. A मे रेडियो पर प्रसारण आ टी. वी रिले अनिवार्य क' देल गेल छल. इ महज एकटा सुखद संयोग छल जे कथा विकासक क्रममे विश्व साहित्य पटल पर जाहि आधुनिक कथाक खगता बुझल गेल ओही समकाल भारतीय साहित्यक मैथिली कथा साहित्य मध्य सेहो एहेन कथा विधाक बीजारोपणक खगता आ पूर्तिकें अकानलनि. जे संपूर्ण भारतीय कथा साहित्यक एकटा परिवर्तनकामी आ क्रान्तिकारी डेग छल. ध्यातव्य जे पहिने जे मैथिली कथा साहित्य भारतीय कथा साहित्यक क्रममे पांतिसं बाहर छल, उएह बीसम सदीक अन्तिम दशक मध्य विश्व कथा परिदृश्यक समकक्ष भ' कान्ह उठेलक.आ वर्ष 1995 सं उठैत- बैसैत,ठोकाइत- पिटाइत पूर्ण परिष्कृत रूपमे आविष्कार स्थापित भ' गेल.आब टघरल- सरल नै वरन् दौगैत मोकाम दिस बढ़ि रहल. .....! अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ज्ञानवर्द्धन कंठ उषा मैडमक विदागरी

---------------------------------------- उषा मैडम स्कूलक लेल विदा भेलीह।बाहर पतिदेव रौनकजी जोर-जोरसँ मोटरसाइकिलक एक्सीलेटर हुरहुरा रहल रहथिन।कनियाँकेँ देखितहि बड़बड़ेलाह-एतेक कहूँ सीट-साट करय लोक?रोजीना लेट क' दैत छी अहाँ।आइ फेर हाजिरी कटले अछि अहाँक।बैसू जल्दी।उषाजी मुस्किया देलथिन -अरे चलू ने,बैसि गेलहुँ।गाड़ी चलि देलकैक।मीटर भाग' लगलैक।एन एच पर तँ सत्तर टपि गेलैक।मुदा टोला पर एगारहटा स्पीड ब्रेकर पार करैत कोन ठाम उचकि क' उषा मैडम खसि पड़लीह,से रौनकजीकेँ सोहे नहि रहलनि।तीन किलोमीटर आगाँ गेला पर कनियाँकेँ पुछलखिन- यै,पानिक बोतल अनने छी?मुदा कनियाँ कोनो सीट पर रहथिन जे जवाब भेटितनि?रौनकजी एक हाथ पाछाँ ल' जा क' टोइयेलाह।गाड़ी रोकलनि।कनियाँक कतहु अता-पता नहि।कंठ सुखायल रहबे करनि, प्राण कंठगत भ' गेलनि।कतय खसि पड़लीह?पता नहि, की भेल हेतनि?अज्ञात आशंकासँ सिहरि उठलाह रौनकजी।मुँहक रौनक कतहु बिला गेलनि।कोंढ़ थरथर कर' लगलनि।गाड़ी घुमेलनि।रस्ते-पएरा सूर-पता लैत आगाँ बढ़ैत गेलाह।एक ठाम चारिटा स्त्रीकेँ झटकारल जाइत देखि पुछलथिन- यै, एतय कोनो स्त्री गाड़ीसँ खसल...? एकटा जवाब देलथिन- हँ यौ,एकटा मौगी गाड़ीसँ फेका गेलैक।घरबला आन्हर-बहीर भेल गाड़ी बढ़बैत चलि गेलैक।अहींक कनियाँ त' नहि छी?यौ केहन बरंबताह छी?अपना बुझायल नहि?यौ मेला लागल अछि,मेला!पचहीबाली काकीक अँगनामे, मड़बा पर। काकीक अँगनामे बड़का जुटान रहैक।स्त्री-पुरखे थाहाथही करैत।एकटा पटिया पर पाया-भरे उषा मैडम ओंगठल बैसल रहथि।काकी माथमे तेल पचा रहल रहथिन।आइ-माइ सभ सेवा-टहलमे लागल रहथिन।काकी बाजि रहल रहथिन- बुच्ची, किछु नहि भेलौक अछि।भगवत्ती सहाय रहथुन जे खाली बामा केहुनी आ बामा घुट्ठी लग चाँछ छौक।कत्त' जाइत रही?ककरा संगे?फोन नहि छौक संगे?उषा मैडम सभ बात कहैत कहलथिन- फोन धरफरीमे घरे पर बिसरा गेलैक।पता नहि, ओ कत्त औनाइत हेथिन!जा,आबिये गेलथिन।रौनकजीकेँ जान मे जान एलनि।एकटा बौआसिन घोघ कढ़ने हुनका हूथ' लगलथिन- केहन भसन्नर छैक?कनियाँ खसलै से किछु बुझबो नहि केलकैक।निसाँमे गाड़ी चलबै छैक की?आइ मास्टरनीकेँ किछु भ'-त' जयतैक त' हाथ मलिते नहि रहि जयतैक?पचहीबाली काकीक पारा गरम भ' गेलैक -गै रामखेतारीबाली! बेसी लुबुर-लुबुर नहि कर'!एक त' बेचारा हको-पियासल अयलाह अछि आ दोसर ई लगलीह अछि बियाम छाँट!ई नहि होइ छौक जे एकटा पीढ़िया दैत छियैक बैस'!जो उठ आ एक लोटा पानि दहीक कल चला क'!बैसू बाबू,चला-फिरा क' देख लेलहुँ,बुच्चीकेँ टूटल-फुटल नहि बुझाइत अछि।से रहितैक त' हम केहन-केहनकेँ अपने हड्डी बैसा दैत छियैक,ससारि क'!मुदा आबक डागदर कोनो ससार- फसार कर' दैत छैक?गै जगदंबा!गै मोकनी-माधव जकाँ ठाढ़ रहबें आकि कनी देहो उसकेबें?जो,भनसा घरसँ चाउरक रन्हुआ सोहारी,नोन-तेल-मरचाइ परसि क' दहीक ने?गै चानदाइ!तोंहू जाही ने संगे। लौ-सग बनेने छियैक।बासनसँ काढ़ि क' नेने ने आ झटपट!एकर बाद काकी सभकेँ यथायोग्य निर्देश करैत भगवती-घर गेलीह।एकटा थारीमे दूबि-धान आ एगारहटा टाका नेने बहरेलीह।उषा मैडमकेँ तेल-सिनुर क' खोंइछ बान्हि देलथिन।रौनकजीकेँ माथमे विभूत लगबैत कहलथिन-बेटा बड़का ग्रह कटि गेलह,से बुझह।मोन मलिन नहि करी।भगवत्ती सहाय रहथुन।अक्खे अमर क' देथुन जुगुल-जोड़ीकेँ।हमर भाग जे हमरे दुरुखा पर खसल बुच्ची हमर।एहीदने रोज जाइत-अबैत छह।कहियो क' काकीक हाल-चाल ल' लेल करिहह।हमरो बेटा-पुतोहु तोरे सभक बतारी हेतह।काकी आँचरसँ आँखि पोछि लेलनि।सभक आँखि नोरा गेलैक।उषा मैडम त' हिचुकय लगलीह।लगलनि मायक घरसँ फेर विदागरी भ' रहल होइन। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। सुभाष कुमार कामत बीहनि कथा रंग मुर्गा - भाई ! आइ कालि अहाँ चितिंत बुझाईत छी बकरा - हँ भाई ! अहूँ आई कालि भोरे-भोर बांग नै दैय छीयै "से कि बात" मुर्गा - हँ यौ भाई ! आब लोक बेसी "शरीफ आओर निर्बलकेँ सतबैत छै' बकरा - बात अहाँ ठिके कहलौ, "जे समाजक लेल जतैक नीक सोचताह आओर करताह , उनटे समाज उकर उतबैह बड़का दुश्मन" मुर्गा - आबि मनुख रंग सँ कम 'हमरा अहाँक सोनित सँ बेसी होरी पसंद करैत अछि'। -सुभाष कुमार कामत, नौआबाखर , घोघरडीहा- 8271282752 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। लालदेब कामत पानक बरैब एकटा गीतकार केँ" खाकय मगहिया पान यौ पाहुन हम्मर,जान किए लै छी। जान किये लै छी, प्राण किए लै छी...... संगीत सुनि मिथिला मेँ पानक चलनसारि आ महौत तकर नियमित उपयोगक मोन सहजे पड़ै य। से ललिचगर पान सर्वत्र चौक - चौड़ाहाक पसल पर सब तरहक भेटि जाइछ।परंच एहनो सौखगर पानखेनिहारक कमि नहिँ जे पानक भरल दोकानमे अपना हिस्सक केर 'मिठगर पत्ता' पान नहिँ भेंटने औनाईत पराइत छैक।पानक महिमा अति प्राचीनकालसँ शास्त्र- पुराणमे सेहो भेटैत अछि। एहि लेल एकर उद्भव आ उत्पादन पर विचार करब परम आवश्यक बुझाय परल। तेँ मुहँक लाली 'पान' आओर तकर जैविक खेती कोना भ' रहल छैक से संतनगर, तमुरिया आ मटरस आदि मधुबनी जिलाक गाममे बेख देखय परिभ्रमण कयलहुँ। वैज्ञानिक दृष्टिकोण सँ पान एकटा वनस्पति थीक। ई आठ वर्षीय सदाबहार लत्तीदार एकलिंग श्रेणिक बेल (लती) छी। पान भारतीय इतिहास आ परम्परा सँ बड लगीच जुटल छै। एहिक उदभव स्थल मलाया द्विप थीक। पानकेँ संस्कृतमे ताम्बूल, तेलगूमे पक्कू, तमील आ मलयालम मेँ वेटिलाई एवं गुजरातीमे नागुरवेल कहल जाईछ। हरियर पानक पत्ताके सेवाद्वारा उजर बनायल जाइछ, तकरा बहुत पाकल वा सफेदपान कहल जाइत छैक। बनारसमे पानक सेवा बढ़ श्रमसँ कयल जाईछ। मगह केर एकटा पानक नश्लके कतेको मासधरि बढ़ जतनसँ ओरियाके पकाउल जाइछ, जकरा मगही पान कहल जाईछ। ओ अत्यंत मूल्यवान आ सुस्वादु कहल गेल हन। एहिक पाँच प्रमुख प्रजातिक नाम थीक बंगला, मगही, साँची, देशावरी, कपुरी आ मिठापता। डांटकी लागल छुट्टापान पूजामे देव-पितर केँ चढावल जाइछ। गृह गोसाईं केँ विशेष अनुष्ठानमे डबल आ ट्रिपल मुड़ीबाला पानक काज पड़ैत छैक से ५गुणा बेसीदाममे बढ़ कठिनाई सँ भेटैत छैक। खैर (कथ) चुन सुपारीक योग सँ बिरा लगातार, पानखिल्ली मुंहक सुन्दरता-सुगन्धि आ शुद्धिक संगे श्रृंगार बढबैत छैक। पान चिबाकऽ कायल जाइछ, जाहिमे सोहनगर जर्दा (तमाकूल) अनेक तरहक मशाला, लौंग-इलाईची, भुजल नारिकेल आ मीठाक लेल रसना-हीरामोती सौंप अवश्य देल जाइछ। चेन्नई दिन बिनु कतेक पान खेबाक प्रचलन बढल छैक। ओना मिथिलामे से हो पाना थोड़ा खिली कल्लामे दबेलाक बाद उपर सँ मिझाईलचून डांटते लगाकय चटैत देखते अबैछ। भोजनोपरान्त पानक बीड़ा वा खिल्ली तथा गछपानक छोट खिलि शोभाकारी मानव गेल ऐ। तम्बाकू (जर्दा) केर संग नियमित पान खाईत-खाईत लोक प्राय:एहिक व्यसनि भ'जाइछ, जे अभ्यास बिनु दांत खराब केयने आ रोग एवं दुर्गन्धक कारणेँ छोड़त नहिँ। ओना पानमे औषधियगुण से हो प्रचुर मात्रामे रहैत छैक। कड़गर मोलाइम छोट पैघ रुखगर आ सागपातसन पानक सुआद कटु कषाय तिक्त आओर मधुर होईछ। पानमे रसायनिक गुण पावर जाईछ। एहिमे वाष्पशील तेलक अतिरिक्त अमीनो अम्ल, कार्बोहाइड्रेट आ किछु विटामिन प्रचुर मात्रामे रहैत छैक। पान औषधिय गुणक बखान तँ चरक संहिता मेँ खुब भेल अछि। देहाती क्षेत्रमे पानक पात्रता सँ घाघौस फोंका केर उपचारमे पुल्टिसक रुपेँ साटल जाइछ। हितोपदेश'क अनुसारे बलगम कफ हटेबाक लेल, मुखसुध्दि, अपच,सांश रोगक निदान हेतु पानमे औषधियगुण देकर गेल छैक। एहिमे विटामिन ए खूब छैक। भोरमे जलखै कयलासन्ता मरीचक संग पानक सेवन सँभुख निकसँ जगैत छैक। ओना यूजिनाॅल अवयबके कारणेँ होईत छैक। रात्रि मेँ सुतै सँ पूर्व पानके नून आ अजवाईनक संग मुँहमे रखला पर नींन नीक जेकाँ होइत छैक। क्योंकि आ दम्मा रोगीकेँ पान सँ लाभ होईछ। भारतमे पानक प्रचलन एकटा प्रथाक रुप समाज मेँकहिया आयल से प्राचीन ग्रंथरघुवंश आ वात्स्यायन कामसूत्र मेँ भेटैत छैक; ताहि सँ अनुमान लगा सकैत छी। ठंडामे उकासी रोकय लेल गर्म हरैदके पानमे द'के चिबाऊ,रातिके उकासी तेज करै तँ हरैदक जगह अजवाइन द'के चिबाऊ। किडनीक रोगी पानमे बिनु किछ फेंटने खाई। पानमे १०ग्राम कर्पुर द केँदिनमे ३-४बेर पान चिबाऊ, सेव नहिं घोटाले; एहि सँ दाँत 'क पैरिया शिकायत दुर होइत छैक। पाकला पर आ छलाउदार पर पानके रस शुसुम कयके लगौनाई हितकर होईछ। पीलिया ज्वर आ कब्जमे पानक व्यवहार लाभकारी होइछ। जुखाममे पानमे लौंग द'के खाऊ, जुकाम झटदय पँकि जायत। मगही, बनारसी, गंगातिरी आ देशीपान दवाईक रुपे वेशीकाल व्यवहारिक होईछ। सुश्रुत संहिता सदृश्य आयुर्वेदिक प्राचिन ग्रंथ मेँ सेहो पानके औषधीये द्रव्यगुणक महिमा वर्णित भेल छैक। सब पुराण, संस्कृत साहित्यक ग्रंथ, स्त्रोत आदिमे तांबूल केर , वादमे ५वीं शताव्दीक अनेकों अभि उत्तरी बिहारमे मुख्यतः बंगला आ दछिण बिहार दिश मगही प्रभेदक पान केर खेती कयल जाइछ। पान उत्पादन उष्ण जलवायुमे छाहदार नमस्थान मेँ कयल जाइछ। गर्मी आ ठंडी सँ बचेबाक लेल कृत्रिम मंडप (छाही) केर भीतर पान उगायल जाइछ, जकरा वरेजा आ वरेठ (बरैब) सेहो कहल जाइछ। ऊंचगर ढरकाह जलनिकास जोकरक बलुई दोमट वा बलूआही मटियारि, कार्वनिक आ पूर्ण जीवांशबाली मांटि पर जाकर pHमान५.७सँ८.२होय,से पानक खेती लेल उपयुक्त होइछ। पोखरिक मुहार पर खत्ताक हत्ता  पर एहिक खेती सुगम होइछ। अप्रील मासक अंतिम हफ्तामे कल्टीहर सँ जोताई करैत जून मासक रौंद लगाकय खरपतवार उन्मूलन कयल जाइत छैक। जूनक तेसर सप्ताहमे चौकियाके फेरों सँ महिन जोताय आ चौकी दैत मांटि भुरभुरी जेकाँबनावल जायत। थोकरा कचरा आदि ओलि लेबाक आ चून सँ डाईर बनाबैत ३०सेमी०धरि ऊँच आ ५०सेमी०धरि चौरगर आड़ाक निर्माण कमल जाइछ। बीच सँ जल निकासी लेल ५०/३०सेमी चौड़गर नालाक निर्माण कयल जाइछ। लाईनमे दूहाथक दुरीपर ३-४ मीटरके बांसक खुटा गारल जाइछ, ताहि पर दू दिस आधाआधी पर सँ करची जोड़िकय नमगर चौड़गर बढाकय उपर छप्पर बनाबैत ओहिपर पुआर खर आदि सँ छारल जाइछ। हवा बिहारिमे उड़य नहिं, ताहि लेल उपर सँ बांसबल्ला आ बत्ती दैत बन्हन कतौह कतौह टांकल जाइछ। तीन सलिया पानक लत्ती सँ दूं गीरह बाला डंटल एक कठामे तीन हजार अलूआ जेकाँ दंगपर रोपल जाइछ। पतियानी सँ पतियानी क'दुरौस ३०सेमी०आ पौध सँ पौधक दुरी १५ सेमी०राखल जाइछ। लत्तीक कटिंग केँ उपचारित करय लेल १०ग्राम ट्राईकोडरमा विरिडि , मालिकों राईजा (वैम) आ स्यूडोमीनस फ्लोरोसेंस केर मिश्रण सँनिरोग लतीकेँ डुमाकय राखल जाईछ। खेती-किसानी तैयारी मेँ ५०किलोधरि प्रतिकठा नीम-सरिसौ बा अण्डीक खैर देल जाईछ। वर्मी कम्पोस्ट सँ सेहो काज चलावल जा सकैछ।जैविक आ सूक्ष्म पोषक तत्व केर अतिरिक्त शालमे एकबेर १००किग्रा० नेत्रजन, १००किलो पोटाश मई -जूनमे माँटि चढबैत काल प्रवन्धन कयल जा सकैत अछि। नवरोपमे एकदिनमे दूबेर हलुक सिंचाई आ फरबरी सँ अप्रैल धरि खूब अधिक पटौनी कयल जाइछ। माटमे पानि भड़िकय संग्रहित करैत घैल सँ छिच्चा दैत पटाओल जाईछ। ठंडिमे 10-15दिन पर सिंचाई कयल जाईछ। करचीआ खरही -सरपत सँ सहारा दैत लत्तीकेँ उपर चढाओल जाइछ। पान रोग पदगलन , सिमांत झूलसा, अंगमारी , पर्णदाग सँ अक्रान्त पौध पर औषधिक प्रयोग करैत सुरक्षित पानक पात तैयार कय बजारमे बेचल जाइत छैक । बरैवमे ललका मोकरा , उज्जर मांछी, मिलीवग आ महुआ कीट सँ सुरक्षा केनाई लाभकारी रहैत छैक। पान हानिकारक जड़गांठ सूत्रकृमि आ रैनीफार्म सुत्रकृमि सेहो पैघ अवघात करैत छैक। पान 200पातक एक ढोली बनाकय वा फीसैकड़ा हिसाब सँ ढोली बनाकय सांस्कृतिक जालीदार छिट्टामे राखि पठावल जाईछ बजार।भीजलपुआर तहेतह द'केँ सैंतल जाइछ। पानक बरैबमे कतौह-कतौह गोबरमे सराईल सांस्कृतिक नोकगर खुँटि जे तैयार कयल जाईछ तकरा एहि तरहें गाड़ल जाईछ जे चोरी सँ पान तोरय बालाकेँ पैरमे गँथि जाईछ जे घातक टेटनश रोगक त्वरित गतिये शिकार भ'जाइछ बरैबमे । -लालदेब कामत, नौआबाखर, घोघरडीहा- 7631390761 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ४.स्त्री कोना (सम्पादक- इरा मल्लिक) ४.१.सविता 'सुमन'-उम्मीद ४.२.रागिनी प्रीत- सखी ४.३.चंदना दत्त- रौद(बीहनि कथा) ४.४.कंचन  कंठ-  जय माँ अंबे सविता 'सुमन' उम्मीद उम्मीदक फसल उपजाबैत किसान राति दिन जोगैत खलिहान देहक पसिना धूपेमे सुखाबैत पेटक आगि सहैत किसान नैना भूटका आस लगौनै रातिदिन अनता बाबा फसल बेची हमरो लई एकटा सोहनगर अंगा किन बुढ़िया माय छैन खाट पड़ल उम्मीद आसमे सांस चढ़ल जौं फसिल होयत भरि खलिहान बेटा लऽ जाइत बाबा केर धाम उम्मीदक आसमे बहुरिया कल जोरि ठाढ़ विनती करैत दिन-दुपहरि सांझ राति अन्हरिया बहुते डराबै उजरल छप्पर सौं भगजौगनि घर आबै सौनभादोके दुख सहलो नहि जाए भरिराति सब बैठि बिताबै टपकैत घरके अहिबेर छराइब जौ नीक होयत फसल सबदुख दूर भगायब उम्मीदक फसल उपजाबैत किसान रातिदिन जोगैत खलिहान -सविता 'सुमन', सहरसा बिहार अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। रागिनी प्रीत सखी ==== सखी चलू पुनः एक बेर बचपन में कुह-कुह कैs आबी। सखी चलू पुनः एक बेर अँगना नेनपन में घुरि आबी। घूमि साथ पोखैर पगडंडी भरल याद के फोड़ू हाँडी ईंखक रस सँन चूसि-चूसि कऽ मिठ्ठ करू मन फेर नेन्ना बनि कऽ। सखी चलू पुनः एक बेर यादक गुल्लक फोड़ी लुटाबी सखी चलू पुनः एक बेर बचपन में कुह-कुह कैs आबी। छुपम-छुपाई खेल मोन अछि गामक कोना बाट तकैत अछि चलू सखी खोजी आँखि मूंदी कऽ संग जगाबी याद नींद सँ। सखी चलू पुनः एक बेर बस्ता सँ किछ याद निकाली सखी चलू पुनः एक बेर बचपन में कुह-कुह कैs आबी। नाव बना कागज़क बहाबी माटी सँ घर फेर बनाबी और उड़ा चुनरी अम्बर में बनी चिड़ै चहकी उपवन में। सखी चलू पुनः एक बेर मिल कऽ प्रेमक गीत सुनाबी सखी चलू पुनः एक बेर बचपन में कुह-कुह कैs आबी। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। चंदना दत्त रौद(बीहनि कथा) भोरूका इस्कुल सं झटकल घ'र घुरैत रहि। तखन मोन पडल माताजी  कहने रहथि एकजोड लहठी  नेने अबय लेल, भोरे नैहर जेबाक छलनि से मामी लेल। हम सविता चुडी केन्द्र पर ठमकलहु। सविता माय नजरि नहि आयल ,तहियो घमायल रही से पंखा के हवा लगबय लगलहु। ता ओ हो हपसैत आयल। कतय छलौ यय, एकजोड लहठी दिय कनि दामी, बड कडगर रौद अछि आय। दीदी,  आय गाडी ल'क नहि एल खिन्ह,भैया जी, कि कहियन्ह तगादा मे गेल छली। सौदा ले जाएत आ पाय दय घड़ी दाँत निपोरै लागत सब। आब हम कोनो धन्ना सेठ जी, जे तगादा नहि करू? हम ओकर दुख बुझलहु, गामघरमे दोकानदारी कोनो हंसी खेल नहि, मुदा छलय सबितियामाए बड उएहगर, छोटछिन दोकान आ सिलाई फराय से हो क लैत छल ,बचिया सबके सिलाई सीखेबो करैत छल। ओ चुडी देखबय लागल  तातक  एकेटा जनानी आबि गेल दोकान पर , 'हे अहां बलु सिलाई हमरा नहिये सीखा देलि जे किने से।' मोन त रौदायल छलै ओकर , लोहैछक'  बाजल , हम ऐहेन काज करय छी, आय यय ,सबजे सीखिये लेत त हमर कसटम्मर के हैत? -चंदना दत्त, रान्टी, मधुबनी अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। कंचन कंठ जय माँ अंबे मैया हे पुरबहु आस हमर अयलहुँ अहींकेँ शरणमे हे जग तारिणी माँ जगदंबे हरु कष्ट नहि करू विम्लबे दुष्ट दलन करु ताप हरण करु दीन दुखी जन के संताप हरू छी जगमाता सभ सुख दाता शरण आब हम ककर धरु हम पड़ल छी अज्ञान कूपमे दय ज्ञान,सुमति बुद्धिक संचार करू नहि करी दुष्कर्म पाप कखनहुँ एतबे टा माँ सदबुद्धि दिय हम छी बालक अहीं केर मैया चरण शरण लगाय लिय अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ........................................................................................................................ संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल  मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] Videha e-Learning पेटार (रिसोर्स सेन्टर) शब्द-व्याकरण-इतिहास MAITHILI IDIOMS & PHRASES मैथिली मुहावरा एवम् लोकोक्ति प्रकाश- रमाकान्त मिश्र मिहिर (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) डॉ. ललिता झा- मैथिलीक भोजन सम्बन्धी शब्दावली (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) मैथिली शब्द संचय MAITHILI DICTIONARY- RAMDEO JHA (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) ENGLISH MAITHILI COMPUTER DICTIONARY MAITHILI ENGLISH DICTIONARY अणिमा सिंह -Shishu_Geet_Khel_Anima_Singh डॉ. रमण झा मैथिली काव्यमे अलङ्कार    अलङ्कार-भास्कर आनन्द मिश्र (सौजन्य श्री रमानन्द झा "रमण")- मिथिला भाषाक सुबोध व्याकरण BHOLALAL DAS मैथिली सुबोध व्याकरण- भोला लाल दास राधाकृष्ण चौधरी- A Survey of Maithili Literature ........................................................................................................................ मूलपाठ तिरहुता लिपिक उद्भव ओ विकास (यू.पी.एस.सी. सिलेबस) राजेश्वर झा- मिथिलाक्षरक उद्भव ओ विकास (मैथिली साहित्य संस्थान आर्काइव) Surendra Jha Suman दत्त-वती (मूल)- श्री सुरेन्द्र झा सुमन (यू.पी.एस.सी. सिलेबस) प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) CIIL SITE ........................................................................................................................ समीक्षा सुभाष चन्द्र यादव-राजकमल चौधरी: मोनोग्राफ शिव कुमार झा "टिल्लू" अंशु-समालोचना डॉ बचेश्वर झा- B_JHA_Nibhand_Nikunj.pdf डॉ. देवशंकर नवीन- Adhunik_Sahityak_Paridrishya डॉ. रमण झा- भिन्न-अभिन्न प्रेमशंकर सिंह- मैथिली भाषा साहित्य:बीसम शताब्दी (आलोचना) डॉ. रमानन्द झा 'रमण' हिआओल अखियासल     CIIL SITE दुर्गानन्द मण्डल-चक्षु RAMDEO JHA दत्त-वतीक वस्तु कौशल- डॊ. श्रीरामदेवझा SHAILENDRA MOHAN JHA परिचय निचय- डॊ शैलेन्द्र मोहन झा ........................................................................................................................ अतिरिक्त पाठ पहिने मिथिला मैथिलीक सामान्य जानकारी लेल एहि पोथी केँ पढ़ू:- राधाकृष्ण चौधरी- मिथिलाक इतिहास फेर एहि मनलग्गू फाइल सभकेँ सेहो पढ़ू:- केदारनाथ चौधरी चमेलीरानी                         माहुर                          करार कुमार पवन पइठ (मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ कथा) (साभार अंतिका)       डायरीक खाली पन्ना (साभार अंतिका) याेगेन्द्र पाठक वियाेगी- विज्ञानक बतकही रामलोचन ठाकुर- मैथिली लोककथा SAHITYA AKADEMI http://sahitya-akademi.gov.in/publications/e-books.jsp http://sahitya-akademi.gov.in/general/Digitalbooks.jsp CIIL http://corpora.ciil.org/maisam.htm अखियासल (रमानन्द झा रमण) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI1.pdf जुआयल कनकनी- महेन्द्र http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI2.pdf प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI3.pdf सृजन केर दीप पर्व- सं केदार कानन आ अरविन्द ठाकुर http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI4.pdf मैथिली गद्य संग्रह- सं शैलेन्द्र मोहन झा http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI5.pdf JNU http://sanskrit.jnu.ac.in/maithili/index.jsp http://sanskrit.jnu.ac.in/student_projects/lexicon.jsp?lexicon=maithili ARCHIVE.ORG https://archive.org/details/%40vijay_deo_jha?&sort=-publicdate&page=2 VIDEHA MAITHILI BOOKS/ PICTURE-AUDIO-VIDEO ARCHIVE http://videha.co.in/new_page_15.htm https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ ALL INDIA RADIO DOORDARSHAN आकाशवाणी दूरदर्शन http://prasarbharati.gov.in/ http://newsonair.com/ https://doordarshan.gov.in/ आकाशवाणी मैथिली पोडकास्ट http://prasarbharati.gov.in/podcast.php?filterlang=Maithili&from=1947-08-15&fromwp=2020-08-29&to=2050-12-31&search=GO आकाशवाणी पटना/ दरभंगा मैथिली रेजनल न्यूज टेक्स्ट डाउनलोड-1 http://newsonair.com/RNU-NSD-Audio-Archive-Search.aspx आकाशवाणी पटना/ दरभंगा मैथिली रेजनल न्यूज टेक्स्ट डाउनलोड-2 http://newsonair.com/Regional-Text.aspx आकाशवाणी दरभंगा http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=282 आकाशवाणी दरभंगा यू ट्यूब चैनल https://www.youtube.com/channel/UCGdNveEFmv4pPolWiTEMxVA आकाशवाणी भागलपुर http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=359 आकाशवाणी पूर्णियाँ http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=256 आकाशवाणी पटना http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=122 IGNCA http://ignca.nic.in/coilnet/mithila.htm http://ignca.nic.in/coilnet/kalyani.htm (MAITHILI ENGLISH DICTIONARY) http://tdil.mit.gov.in/CoilNet/IGNCA/mithila.htm MITHILA DARSHAN https://mithiladarshan.com/ (online pdf of Maithili journal) I LOVE MITHILA https://www.ilovemithila.com/  (online maithili journal) मैथिली साहित्य संस्थान https://www.maithilisahityasansthan.org/ https://www.maithilisahityasansthan.org/resources (online pdf of Reasearch Papers/ books) ........................................................................................................................ VIDEHA e-LEARNING YOUTUBE CHANNEL https://www.youtube.com/channel/UC4abVKqMj2pDWIAkXiOHp7A (अनुवर्तते) -गजेन्द्र ठाकुर विदेहक किछु विशेषांक:- १) हाइकू विशेषांक १२ म अंक, १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf          Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf       12.pdf २) गजल विशेषांक २१ म अंक,  १ नवम्बर २००८ Videha_01_11_2008.pdf       Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf         21.pdf ३) विहनि कथा विशेषांक ६७ म अंक, १ अक्टूबर २०१० Videha_01_10_2010        Videha_01_10_2010_Tirhuta             67 ४) बाल साहित्य विशेषांक ७० म अंक, १५ नवम्बर २०१० Videha_15_11_2010        Videha_15_11_2010_Tirhuta             70 ५) नाटक विशेषांक ७२ म अंक १५ दिसम्बर२०१० Videha_15_12_2010        Videha_15_12_2010_Tirhuta           72 ६) नारी विशेषांक ७७म अंक ०१ मार्च २०११ Videha_01_03_2011        Videha_01_03_2011_Tirhuta           77 ७) अनुवाद विशेषांक (गद्य-पद्य भारती) ९७म अंक Videha_01_01_2012 Videha_01_01_2012_Tirhuta           97 ८) बाल गजल विशेषांक विदेहक अंक १११ म अंक, १ अगस्त २०१२ Videha_01_08_2012        Videha_01_08_2012_Tirhuta           111 ९) भक्ति गजल विशेषांक १२६ म अंक, १५ मार्च २०१३ Videha_15_03_2013        Videha_15_03_2013_Tirhuta           126 १०) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक १४२ म, अंक १५ नवम्बर २०१३ Videha_15_11_2013        Videha_15_11_2013_Tirhuta           142 ११) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 १२) अरविन्द ठाकुर विशेषांक १८९ म अंक १ नवम्बर २०१५ Videha_01_11_2015 १३) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक १९१ म अंक १ दिसम्बर २०१५ Videha_01_12_2015 १४) विदेह सम्मान विशेषा‍क- २००म अ‍क १५ अप्रैल २०१६/ २०५ म अ‍क १ जुलाई २०१६ Videha_15_04_2016 Videha_01_07_2016 १५) मैथिली सी.डी./ अल्बम गीत संगीत विशेषांक- २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ Videha_01_01_2017 १६) मैथिली वेब पत्रकारिता विशेषांक VIDEHA 313 लेखकसं आमंत्रित रचनापर आम‍ंत्रित आलोचकक टिप्पणीक शृंखला १७) मैथिली बीहनि कथा विशेषांक-२ VIDEHA 317 १८) रामलोचन ठाकुर विशेषांक VIDEHA 319 १९) रामलोचन ठाकुर श्रद्धांजलि विशेषांक VIDEHA 320 १. कामिनीक पांच टा कविता आ ओइपर मधुकान्त झाक टिप्पणी विदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016 एडिटर्स चोइस सीरीज एडिटर्स चोइस सीरीज-१ विदेहक १२३ म (०१ फरबरी २०१३) अंकमे बलात्कारपर मैथिलीमे पहिल कविता प्रकाशित भेल छल। ई दिसम्बर २०१२ क दिल्लीक निर्भया बलात्कार काण्डक बादक समय छल। ओना ई अनूदित रचना छल, तेलुगुमे पसुपुलेटी गीताक एहि कविताक हिन्दी अनुवाद केने छलीह आर. शांता सुन्दरी आ हिन्दीसँ मैथिली अनुवाद केने छलाह विनीत उत्पल। हमर जानकारीमे एहिसँ बेशी सिहराबैबला कविता कोनो भाषामे नहि रचल गेल अछि। सात सालक बादो ई समस्या ओहने अछि। ई कविता सभकेँ पढ़बाक चाही, खास कऽ सभ बेटीक बापकेँ, सभ बहिनक भाएकेँ आ सभ पत्नीक पतिकेँ। आ विचारबाक चाही जे हम सभ अपना बच्चा सभ लेल केहन समाज बनेने छी। एडिटर्स चोइस सीरीज-१ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-२ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच ब्रेस्ट कैसरक समस्यापर विदेह मे मीना झा केर एकटा लघु कथा प्रकाशित भेल। ई मैथिलीक पहिल कथा छल जे ब्रेस्ट कैसर पर लिखल गेल। हिन्दीमे सेहो ताधरि एहि विषयपर कथा नहि लिखल गेल छल, कारण एहि कथाक ई-प्रकाशित भेलाक १-२ सालक बाद हिन्दीमे दू गोटेमे घोंघाउज भऽ रहल छल कि पहिल हम आकि हम, मुदा दुनूक तिथि मैथिलीक कथाक परवर्ती छल। बादमे ई विदेह लघु कथामे सेहो संकलित भेल। एडिटर्स चोइस सीरीज-२ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-३ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिलक किछु बाल कविता प्रकाशित भेल। बादमे हुनकर ३ टा बाल कविता विदेह शिशु उत्सवमे संकलित भेल जाहिमे २ टा कविता बेबी चाइल्डपर छल। पढ़ू ई तीनू कविता, बादक दुनू बेबी चाइल्डपर लिखल कविता पढ़बे टा करू से आग्रह। एडिटर्स चोइस सीरीज-३ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-४ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच जगदानन्द झा मनुक एकटा दीर्घ बाल कथा कहि लिअ बा उपन्यास प्रकाशित भेल, नाम छल चोनहा। बादमे ई रचना विदेह शिशु उत्सवमे संकलित भेल, ई रचना बाल मनोविज्ञानपर आधारित मैथिलीक पहिल रचना छी, मैथिली बाल साहित्य कोना लिखी तकर ट्रेनिंग कोर्समे एहि उपन्यासकेँ राखल जेबाक चाही। कोना मॊडर्न उपन्यास आगाँ बढ़ै छै, स्टेप बाइ स्टेप आ सेहो बाल उपन्यास। पढ़बे टा करू से आग्रह। एडिटर्स चोइस सीरीज-४ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-५ एडिटर्स चोइस ५ मे मैथिलीक "उसने कहा था" माने कुमार पवनक दीर्घकथा "पइठ" (साभार अंतिका) । हिन्दीक पाठक, जे "उसने कहा था" पढ़ने हेता, केँ बुझल छन्हि जे कोना अहि कथाकेँ रचि चन्द्रधर शर्मा ’गुलेरी’ अमर भऽ गेलाह। हम चर्चा कऽ रहल छी, कुमार पवनक "पइठ" दीर्घकथाक। एकरा पढ़लाक बाद अहाँकेँ एकटा विचित्र, सुखद आ मोन हौल करैबला अनुभव भेटत, जे सेक्सपीरिअन ट्रेजेडी सँ मिलितो लागत आ फराको। मुदा एहि रचनाकेँ पढ़लाक बाद तामस, घृणा सभपर नियंत्रणकेँ आ सामाजिक/ पारिवारिक दायित्वकेँ सेहो अहाँ आर गंभीरतासँ लेबै, से धरि पक्का अछि। मुदा एकर एकटा शर्त अछि जे एकरा समै निकालि कऽ एक्के उखड़ाहामे पढ़ि जाइ। एडिटर्स चोइस सीरीज-५ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-६ जगदीश प्रसाद मण्डलक लघुकथा "बिसाँढ़": १९४२-४३ क अकालमे बंगालमे १५ लाख लोक मुइला, मुदा अमर्त्य सेन लिखैत छथि जे हुनकर कोनो सर-सम्बन्धी एहि अकालमे नहि मरलन्हि। मिथिलोमे अकाल आएल १९६७ ई. मे आ इन्दिरा गाँधी जखन एहि क्षेत्र अएली तँ हुनका देखाओल गेल जे कोना मुसहर जातिक लोक बिसाँढ़ खा कऽ एहि अकालकेँ जीति लेलन्हि। मैथिलीमे लेखनक एकभगाह स्थिति विदेहक आगमनसँ पहिने छल। मैथिलीक लेखक लोकनि सेहो अमर्त्य सेन जेकाँ ओहि महाविभीषिकासँ प्रभावित नहि छला आ तेँ बिसाँढ़पर कथा नहि लिखि सकला। जगदीश प्रसाद मण्डल एहिपर कथा लिखलन्हि जे प्रकाशित भेल चेतना समितिक पत्रिकामे, मुदा कार्यकारी सम्पादक द्वारा वर्तनी परिवर्तनक कारण ओ मैथिलीमे नहि वरण् अवहट्ठमे लिखल बुझा पड़ल, आ ओतेक प्रभावी नहि भऽ सकल कारण विषय रहै खाँटी आ वर्तनी कृत्रिम। से एकर पुनः ई-प्रकाशन अपन असली रूपमे भेल विदेहमे आ ई संकलित भेल "गामक जिनगी" लघुकथा संग्रहमे। एहि पोथीपर जगदीश प्रसाद मण्डलकेँ टैगोर लिटरेचर अवार्ड भेटलनि। जगदीश प्रसाद मण्डलक लेखनी मैथिली कथाधाराकेँ एकभगाह हेबासँ बचा लेलक, आ मैथिलीक समानान्तर इतिहासमे मैथिली साहित्यकेँ दू कालखण्डमे बाँटि कऽ पढ़ए जाए लागल- जगदीश प्रसाद मण्डलसँ पूर्व आ जगदीश प्रसाद मण्डल आगमनक बाद। तँ प्रस्तुत अछि लघुकथा बिसाँढ़- अपन सुच्चा स्वरूपमे। एडिटर्स चोइस सीरीज-६ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-७ मैथिलीक पहिल आ एकमात्र दलित आत्मकथा: सन्दीप कुमार साफी। सन्दीप कुमार साफीक दलित आत्मकथा जे अहाँकेँ अपन लघु आकाराक अछैत हिलोड़ि देत आ अहाँक ई स्थिति कऽ देत जे समानान्तर मैथिली साहित्य कतबो पढ़ू अहाँकेँ अछौं नहि होयत। ई आत्मकथा विदेहमे ई-प्रकाशित भेलाक बाद लेखकक पोथी "बैशाखमे दलानपर"मे संकलित भेल आ ई मैथिलीक अखन धरिक एकमात्र दलित आत्मकथा थिक। तँ प्रस्तुत अछि मैथिलीक पहिल दलित आत्मकथा: सन्दीप कुमार साफीक कलमसँ। एडिटर्स चोइस सीरीज-७  (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-८ नेना भुटकाकेँ रातिमे सुनेबा लेल किछु लोककथा (विदेह पेटारसँ)। एडिटर्स चोइस सीरीज-८ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-९ मैथिली गजलपर परिचर्चा (विदेह पेटारसँ)। एडिटर्स चोइस सीरीज-९ (डाउनलोड लिंक) जगदीश प्रसाद मण्डल जीक ६५ टा पोथीक नव संस्करण विदेहक २३३ सँ २५० धरिक अंकमे धारावाहिक प्रकाशन  नीचाँक लिंकपर पढ़ू:- Videha_15_05_2018 Videha_01_05_2018 Videha_15_04_2018 Videha_01_04_2018 Videha_15_03_2018 Videha_01_03_2018 Videha_15_02_2018 Videha_01_02_2018 Videha_15_01_2018 Videha_01_01_2018 Videha_15_12_2017 Videha_01_12_2017 Videha_15_11_2017 Videha_01_11_2017 Videha_15_10_2017 Videha_01_10_2017 Videha_15_09_2017 Videha_01_09_2017 विदेह ई-पत्रिकाक  बीछल रचनाक संग- मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ रचनाक एकटा समानान्तर संकलन: विदेह: सदेह: १ (२००८-०९) देवनागरी विदेह: सदेह: १ (२००८-०९) तिरहुता विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) देवनागरी विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) तिरहुता विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०)देवनागरी विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०) तिरहुता विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०)देवनागरी विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०) तिरहुता विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]देवनागरी विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]  तिरहुता विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]- दोसर संस्करण देवनागरी विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ]देवनागरी विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ] तिरहुता विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ]देवनागरी विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ]  तिरहुता विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ]देवनागरी विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ] तिरहुता विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ]देवनागरी विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ] तिरहुता विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ]देवनागरी विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ] तिरहुता विदेह:सदेह ११ विदेह:सदेह १२ विदेह:सदेह १३ The readers of English translations of Maithili Novel "sahasrabadhani" and verse collection "sahasrabdik chaupar par" has intimated that the English translation has not been able to grasp the nuances of original Maithili. Therefore the Author has started translating his Maithili works in English himself. After these translations are complete these would be the official translations authorised by the Author of the original works.-Editor Maithili Books can be downloaded from: https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ विदेह सम्मान: सम्मान-सूची (समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार सहित) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। सूचना/ घोषणा १ "विदेह सम्मान" समानान्तर साहित्य अकदेमी पुरस्कारक नामसँ प्रचलित अछि। "समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार" (मैथिली), जे साहित्य अकादेमीक मैथिली विभागक गएर सांवैधानिक काजक विरोधमे शुरु कएल छल, लेल अनुशंसा आमन्त्रित अछि। अनुशंसा २०१९ आ २०२० बर्ख लेल निम्न कोटि सभमे आमन्त्रित अछि: १) फेलो २)मूल पुरस्कार ३)बाल-साहित्य ४)युवा पुरस्कार आ ५) अनुवाद पुरस्कार। अपन अनुशंसा ३१ दिसम्बर २०२० धरि २०१९ पुरस्कारक लेल आ ३१ मार्च २०२१ धरि २०२०क पुरस्कारक लेल पठाबी। पुरस्कारक सभ क्राइटेरिया साहित्य अकादेमी, दिल्लीक समानान्तर पुरस्कारक समक्ष रहत, जे एहि लिंक sahitya-akademi.gov.in पर उपलब्ध अछि। अपन अनुशंसा editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २ “मिथिला मखान” फिल्म देखू मात्र १०१ टाकामे। Android App “BEJOD” download करू वा जाउ www.bejod.in पर, signup करू, एकटा ईमेल जायत, अपन ईमेल खोलू आ ओकरा क्लिक करू अहाँक अकाउंट एक्टीवेट भय जायत। आब मिथिला मखान रेण्ट पर लिअ, डेबिट कार्डसँ १०१ टाका अॉनलाइन पेमेंट करू आ फिल्म देखू। ३ विदेह अपन आगामी अंक (२०२१ क प्रारम्भमे) श्री रामलोचन ठाकुर पर विशेषांक निकालबाक नेयार केने अछि। हुनका सम्बन्धी रचना आमंत्रित अछि (संस्मरण, साक्षात्कार, समीक्षा आदि) जे ३१ दिसम्बर २०२० धरि editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाओल जा सकैत अछि। विदेह पेटारक अन्तर्गत (पोथी डाउनलोड साइट) मे http://www.videha.co.in/new_page_15.htm  हुनकर मौलिक, अनूदित आ सम्पादित रचना फ्री पी.डी.एफ. डाउनलोड लेल उपलब्ध अछि। विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम्: VIDEHA: AN IDEA FACTORY (c)२००४-२०२१. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHAसम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: डॉ उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम वि‍लास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक -स्त्री कोना- इरा मल्लिक। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि)editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि। एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै, आ से हानि-लाभ रहित आधारपर छै आ तैँ ऐ लेल कोनो रॊयल्टीक/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै। तेँ रॉयल्टीक/ पारिश्रमिकक इच्छुक विदेहसँ नै जुड़थि, से आग्रह। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत।  एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-2021 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। ५ जुलाई २००४ केँ http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA वि  दे  ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् 'विदेह' ३२० म अंक १५ अप्रैल २०२१ (वर्ष १४ मास १६० अंक ३२०)

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