VIDEHA — Issue 324 / अंक ३२४

Publication: VIDEHA · Issue: 324
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विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA ISSN 2229-547X VIDEHA 'विदेह' ३२४ म अंक १५ जून २०२१ (वर्ष १४ मास १६२ अंक ३२४) १. गजेन्द्र ठाकुर- संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल  मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल सेहो] [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] [FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI ALSO] २. गद्य २.१.जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’- आँखिमे चित्र हो मैथिलीकेर (आत्मकथा) २.२.रबीन्द्र नारायण मिश्र- लजकोटर (धारावाहिक उपन्यास) २.३.आशीष अनचिन्हार- लॉकडाउन केर कथा (व्यंग्य) ३. पद्य ३.१.बिनय भूषण- ३ टा कविता ३.२.जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’- गजल ४.स्त्री कोना (सम्पादक- इरा मल्लिक) ४.१.सुचिता कुमारी-ऑनलाइन क्लास ४.२.आभा झा- दू गोट बीहनि कथा ४.३. कंचन कण्ठ- टूटल रिकार्ड ४.४.ममता कर्ण- बरसात ४.५. निर्मला कर्ण- अग्निशिखा (धारावाहिक उपन्यास) ४.६.कंचन कण्ठ- स्त्री सज्जा- परम्परा फैशन Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Books/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाउ। VIDEHA ARCHIVE विदेह पेटार View Videha googlegroups (since July 2008) view Videha Facebook Official Group (since January 2008)- for announcements १. गजेन्द्र ठाकुर ........................................................................................................................ ........................................................................................................................ [संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल  मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री] [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल सेहो] [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] [FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI ALSO] यू. पी. एस. सी. (मेन्स) २०२० ऑप्शनल: मैथिली साहित्य विषयक टेस्ट सीरीज यू.पी.एस.सी. क प्रिलिमिनरी परीक्षा २०२० सम्पन्न भऽ गेल अछि। जे परीक्षार्थी एहि परीक्षामे उत्तीर्ण करताह आ जँ मेन्समे हुनकर ऑप्शनल विषय मैथिली साहित्य हेतन्हि तँ ओ एहि टेस्ट-सीरीजमे सम्मिलित भऽ सकैत छथि। टेस्ट सीरीजक प्रारम्भ प्रिलिम्सक रिजल्टक तत्काल बाद होयत। टेस्ट-सीरीजक उत्तर विद्यार्थी स्कैन कऽ editorial.staff.videha@gmail.com पर पठा सकैत छथि, जँ मेलसँ पठेबामे असोकर्ज होइन्हि तँ ओ हमर ह्वाट्सएप नम्बर 9560960721 पर सेहो प्रश्नोत्तर पठा सकैत छथि। संगमे ओ अपन प्रिलिम्सक एडमिट कार्डक स्कैन कएल कॉपी सेहो वेरीफिकेशन लेल पठाबथि। परीक्षामे सभ प्रश्नक उत्तर नहि देमय पड़ैत छैक मुदा जँ टेस्ट सीरीजमे विद्यार्थी सभ प्रश्नक उत्तर देताह तँ हुनका लेल श्रेयस्कर रहतन्हि। विदेहक सभ स्कीम जेकाँ ईहो पूर्णतः निःशुल्क अछि।- गजेन्द्र ठाकुर संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सर्विसेज (मुख्य) परीक्षा, २०२० मैथिली (ऐच्छिक) लेल टेस्ट सीरीज/ प्रश्न-पत्र- १ आ २ TEST SERIES-1 TEST SERIES-2 [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल/ FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI] NTA_UGC_NET_MAITHILI_01 NTA_UGC_NET_MAITHILI_02 NTA_UGC_NET_MAITHILI_03 (श्री शम्भु कुमार सिंह द्वारा संकलित) Videha e-Learning MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) UPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS BPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. (ऐच्छिक) मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. (अनिवार्य) मैथिली प्रश्नपत्र- बी.पी.एस.सी.(ऐच्छिक) मैथिलीक वर्तनी १ भाषापाक २ मैथिलीक वर्तनीमे पर्याप्त विविधता अछि। मुदा प्रश्नपत्र देखला उत्तर एकर वर्तनी इग्नू BMAF001 सँ प्रेरित बुझाइत अछि, से एकर एकरा एक उखड़ाहामे उनटा-पुनटा दियौ, ततबे धरि पर्याप्त अछि। यू.पी.एस.सी. क मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेल सेहो ई पर्याप्त अछि, से जे विद्यार्थी मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेने छथि से एकर एकटा आर फास्ट-रीडिंग दोसर-उखड़ाहामे करथि| IGNOU  इग्नू       BMAF-001 ........................................................................................................................ MAITHILI (OPTIONAL) TOPIC 1    [Place of Maithili in Indo-European Language Family/ Origin and development of Maithili language (Sanskrit, Prakrit, Avhatt, Maithili) भारोपीय भाषा परिवार मध्य मैथिलीक स्थान/ मैथिली भाषाक उद्भव ओ विकास (संस्कृत, प्राकृत, अवहट्ट, मैथिली)] TOPIC 2    (Criticism- Different Literary Forms in Modern Era/ test of critical ability of the candidates) TOPIC 3    (ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददास सिलेबसमे छथि आ रसमय कवि चतुर चतुरभुज विद्यापति कालीन कवि छथि। एतय समीक्षा शृंखलाक प्रारम्भ करबासँ पूर्व चारू गोटेक शब्दावली नव शब्दक पर्याय संग देल जा रहल अछि। नव आ पुरान शब्दावलीक ज्ञानसँ ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददासक प्रश्नोत्तरमे धार आओत, संगहि शब्दकोष बढ़लासँ खाँटी मैथिलीमे प्रश्नोत्तर लिखबामे धाख आस्ते-आस्ते खतम होयत, लेखनीमे प्रवाह आयत आ सुच्चा भावक अभिव्यक्ति भय सकत।) TOPIC 4                (बद्रीनाथ झा शब्दावली आ मिथिलाक कृषि-मत्स्य शब्दावली) TOPIC 5                (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोरिक गाथामे समाज ओ संस्कृति) TOPIC 6                (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- विद्यापति) TOPIC 7                (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- पद्य समीक्षा- बानगी) TOPIC 8                (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोक गाथा नृत्य नाटक संगीत) TOPIC 9                (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- यात्री) TOPIC 10               (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली रामायण) TOPIC 11               (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली उपन्यास) TOPIC 12               (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- शब्द विचार) TOPIC 13               (तिरहुता लिपिक उद्भव ओ विकास) TOPIC 14                 (आधुनिक नाटकमे चित्रित निर्धनताक समस्या- शम्भु कुमार सिंह)् TOPIC 15                 (स्वातंत्र्योत्तर मैथिली कथामे सामाजिक समरसता- अरुण कुमार सिंह) TOPIC 16                 (यू. पी.एस.सी. मैथिली प्रथम पत्रक परीक्षार्थी हेतु उपयोगी संकलन, मैथिलीक प्रमुख उपभाषाक क्षेत्र आ ओकर प्रमुख विशेषता, मैथिली साहित्यक आदिकाल, मैथिली साहित्यक काल-निर्धारण- शम्भु कुमार सिंह) TOPIC 17                (मैथिली आ दोसर पुबरिया भाषाक बीचमे सम्बन्ध (बांग्ला, असमिया आ ओड़िया) [यू.पी.एस.सी. सिलेबस, पत्र-१, भाग-“ए”, क्रम-५]) TOPIC 18                 [मैथिली आ हिन्दी/ बांग्ला/ भोजपुरी/ मगही/ संथाली- बिहार लोक सेवा आयोग (बी.पी.एस.सी.) केर सिविल सेवा परीक्षाक मैथिली (ऐच्छिक) विषय लेल] ........................................................................................................................ GENERAL STUDIES (PRELIMINARY & MAINS) GS (Pre) TOPIC 1 GS (Mains) NCERT-ENVIRONMENT CLASS XI-XII NCERT PDF I-XII TN BOARD PDF I-XII ALL INDIA RADIO ENGLISH NEWS ALL INDIA RADIO NEWS ARCHIVE ALL INDIA RADIO TALKS AND CURRENT AFFAIRS RAJYA SABHA TV NEWS DISCUSSIONS OTHER OPTIONALS IGNOU eGYANKOSH (अनुवर्तते) -गजेन्द्र ठाकुर २. गद्य २.१.जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’- आँखिमे चित्र हो मैथिलीकेर (आत्मकथा) २.२.रबीन्द्र नारायण मिश्र- लजकोटर (धारावाहिक उपन्यास) २.३.आशीष अनचिन्हार- लॉकडाउन केर कथा (व्यंग्य) जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’ आँखिमे चित्र हो मैथिलीकेर ( आत्मकथा ) 13. कल्पना आ यथार्थ ढोलीसँ  गाम जाइत काल दरभंगामे टैक्सी स्टैंड पर भेटलाह  रामपट्टीक आर के रमण जी | हुनकासँ  किछु गीत सुनने रही आर के कॉलेजमे भेल विद्यापति पर्वमे | बहुत नीक लागल रहय | हुनकासँ गप भेल | हुनको दरभंगासँ मधुबनीबला टैक्सी पकड़बाक रहनि | रस्तामे हुनका जना देलियनि जे हमहूँ लिखै छी | ओ पुछलनि जे कोनो रचना संगमे अछि | हम हुनका एकटा रचना देख’ देलियनि | कविता रहै ‘रूपांतरण’ ओ कहलनि, हम ई राखि लै छी, वैदेहीक अगिला अंकमे छपि जाएत (आदरणीय सोमदेवजी छलाह ‘वैदेही’क सम्पादक)| पुछ्लनि, और की लिखै छी, त कहलियनि जे एखन किछु गीत सेहो  लीखि रहल छी | ओ कहलनि फल्लाँ  तारीक क’ कोइलखमे विद्यापति पर्व मनाओल जेतै, अहूँ आउ, किछु और साहित्यकार सभसँ  परिचय हैत | कोइलख गेलहुँ | नीक लागल | मधुपजी, किरणजी, सोमदेवजीकें  सेहो देखलियनि | पहिल बेर हुनका सभसँ कविता सुनबाक अवसर भेटल छल, से बड्ड नीक लागल | हमरो काव्य पाठ लेल प्रस्तुत कएल गेल | दूटा रचना सुनौलियनि | श्रोता सबहक प्रतिक्रिया आ साहित्यकार लोकनिक आशीषसँ  हमर उत्साहवर्धन भेल | तकर बाद रामपट्टी, कथवार आ रहिका सेहो विद्यापति पर्वमे भाग लेलहुँ | कमलाकान्तजी, ‘अकेला’ जी, शंकपियाजी, प्रदीपजी  आ प्रवासी साहित्यालंकारजीसँ  सेहो परिचय भेल | रहिकामे आदरणीय रवीन्द्रजी आ उदय चन्द्र झा ‘विनोद’जीसँ परिचय भेल | एकठाम एकटा गीत प्रस्तुत केने रही जकर अंतिम पांती ई रहै : ‘दुख केर इ राति बौआ  बीतत अबस्से, असरा गरीबक भगवान् रे, जुनि कान रे बौआ जुनि कान रे |’ आर के रमणजी कहलनि जे ‘असरा गरीबक भगवान रे’ के बदला ‘जहिया तों हेबही जुआन रे’ हमरा बेशी नीक लगैत | पूरा गीत ई अछि : जुनि कान जुनि कान जुनि कान रे बौआ जुनि कान रे | नै तँ कौआ ल’ जेतौ तोहर कान रे || बौआ ....... खा ले जल्दी, सूति रह चुप-चाप नहि  तँ  भकौआँ धरतौ, सुनहिन हे जंगलमे गीदड़ बजै छै टाङ  पकड़ि  ल’ जेतौ एतौ लकड़सुंघा धोकड़ीमे कसिक’ नेने चल जेतौ अपन गाम रे ||...... काल्हि अबै छै बौआके बाबू नेने कते बस्तुनमा हमरा  बौआ ले’ अंगा - टोपी रंग-विरंगक खेलौना सायकिल के घंटी बौआ टुनटुन बजेतै देखि  जुड़ायत  हमर प्राण रे | ..... बुचिया रधिया बड़  बदमास’छि बौआ हमर बुधियार भोरे बौआक बाबाकें कहिक’ मङबा देबै कुसियार काल्हि खन नानीक  गामसँ  अबै छै, चंङेरा भरल पूरी -पकवान रे | ..... भोरे बौआले’ भानस करबै भात- दालि- तरकारी बुचियाकें कनिञो नै देबै बौआकें भरि थारी दुखकेर ई राति बौआ बीतत अबस्से असरा गरीबक भगवान रे | .... 1978 मे प्रकाशित गीत-संग्रह ‘तोरा अंगनामे’क  पृष्ठ चारि आ पाँचपर ई गीत छपल अछि | इन्टरनेट पत्रिका ‘विदेह’क साइटपर पोथी सेहो ई पोथी उपलब्ध अछि | 10.05.2021 क’ यू-ट्युब पर ‘नीलम मैथिली’ द्वारा अशोक चंचल जीक स्वरमे ई गीत प्रस्तुत कयल गेल अछि जाहि मे ‘वस्तुनमा’क स्थानपर ‘वस्तुनामा’ कहल गेल अछि, जे ठीक नै लागि रहल छै | विडियो तैयार करबा काल प्रस्तुतकर्ता आ गायक दुनू गोटेकें मूल गीतक शब्दक शुद्ध उच्चारण सुनिश्चित करबाक चाहियनि | एहि प्रस्तुतिमे एकटा और त्रुटि भेल अछि जे गीतकारक नाम रवीन्द्र नाथ ठाकुर अंकित अछि | हमरा द्वारा सुचित केलापर एकठाम त सुधार कयल गेलै, मुदा फ्रंट पर एखनो सुधार बांकी अछि | आब दुनू नाम आबि रहल अछि | आदरणीय रवीन्द्र नाथ ठाकुर जी मैथिलीक  सर्वश्रेष्ठ गीतकार छथि | लोकप्रियताक लेल हुनक नामक उपयोग हुनक सहमतिक बिना नहि कयल जेबाक चाही | आर के रमणजीक एकटा गीत ‘अहांकेर इजोरिया कहाँ हम मँगै छी, अन्हारोमे हमरो जीब’ त दीय’..... बहुत नीक लागल रहय | प्रवासी साहित्यालंकारजीक  ‘अन्नपूर्णा’ सेहो सभकें बहुत नीक लागल रहनि | प्रदीपजीक  कयटा गीत बहुत लोकप्रिय भेल छलनि | रहिकामे कवि सम्मलेन खूब नीक होइत छलैक  | रवीन्द्रजी पहिने कवि सम्मलेनमे सुन्दर  कविता अथवा गीत  प्रस्तुत करैत छलाह, सांस्कृतिक कार्यक्रममे एसगर अथवा महेन्द्र झा जीक संग रंग-विरंगक मनोरंजक  गीत प्रस्तुत करैत छलाह जे लोककें चारि-चारि घंटा धरि मंत्र मुग्ध केने रहैत छल | रहिकाक कार्यक्रमक विशेषता ई छलै जे सांस्कृतिक कार्यक्रमसँ  कवि-सम्मेलन  प्रभावित नहि होइत छलैक | बड़ी-बड़ी राति धरि लोक कवि सम्मेलनक आनन्द लैत रहैत छल | आदरणीय उदय चन्द्र झा ‘विनोद’ जीक देख-रेखमे  कवि-सम्मेलनक आयोजन होइत छल, जे अपने त खूब सुन्दर कविता प्रस्तुत करिते छलाह, अन्त धरि कवि-सम्मेलनकें  आकर्षक बनबौने रहैत छलाह | आदरणीय सुमनजी, किरणजी,मनिपद्मजी, अमरजी, सोमदेवजी, प्रो. मायानन्द बाबू, विनोदजी, रवीन्द्र जी ,अर्जुन  कविराज आदि कविक कविता लोककें भाव-विभोर क’ दैत छलैक | हमरा एहि मंचसँ बहुत किछु सिखबाक अवसर भेटल | आदरणीय रवीन्द्र जीसँ  नीक जकाँ गप भेल | कहने छलाह जे रचनाकारकें प्रतिदिन कम-सँ -कम एकटा रचना करबाक चाही | यदि कोनो गीतकार प्रतिदिन एकटा गीत लिखैए त सालमे तीन सय पैसठिटा गीत भेलै | एहिमे यदि तीन सय रचनाकें ठीक नै मानैत छी आ ओकरा फाड़िक’ फेकियो  दैत छी तैयो पैसठिटा त नीक रचना अवश्य हैत | जँ  दस साल ई क्रम चलल त छ सय पचासटा रचना त नीक हैत, एतबो पर्याप्त छै | सुझाव त नीक लागल, मुदा एकर क्रियान्वयन नहि कयल भेल | आदरणीय सोमदेवजी, विनोद जीसँ सेहो मार्ग-दर्शन प्राप्त भेल | हमर लेखन कार्य बढल | किछु दिनक बाद सासुर (लदारी)मे कलिगामक मनोजानंद झा जीसँ  भेंट भेल | हुनको सासुर ओतहि छलनि, ओही टोलमे | हमरासँ  पहिने हुनकर विवाह भेल छलनि | ओहि समयमे हुनकर गिनती सभसँ  नीक जमाएक रूपमे होइ छलनि | हमहूँ हुनक बहुत प्रशंसा सुनने रही | भेंट भेल त नीक लागल | सम्बन्धक अनुसार हम सभ साढ़ू नै छलहुँ, किन्तु एकहि ठाम सासुर छल,तें हम सभ साढ़ूएक संबोधन चुनलहुँ | हुनका हमर गीत लेखन द’ बुझल छलनि, हमरा हुनक फिल्म-जगतमे अपन जीवन तलाश करबाक प्रयासक विषयमे सूनल छल | बड़ी काल गप भेल | कय बेर गप भेल | हुनका साहित्यिक विषय पर चर्चा नीक लगैत छलनि, से हमरो नीक लगैत छल | एक दिन दूनू गोटे साइकिलसँ दरभंगा गेलहुँ | बस स्टैंड लग आर के रमण जी भेटि गेलाह, रिक्शासँ  कतहु जा रहल छलाह | झाजीसँ  परिचय करौलियनि | रमणजी कहलनि, सासुर घुरबासँ  पहिने एकटा कविता हमर पत्रिका ( मिथिला टाइम्स ) लेल हमर कार्यालय (अजय छात्रावास)मे छोड़ने जाएब | रमनजी त आगू निकलि गेलाह, हम मुश्किलमे पड़ि गेलहुँ | एकटा कविता तुरन्त लीखू, साफ़ कागजपर उतारू आ अजय छात्रावास जाक’ जमा क’ आउ, ई काज हमरा लेल बहुत कठिन  लागल | पहिनेसँ  कोनो कविता लीखल नहि छल जे वैह द’ दितियंनि आ गीत त हुनका पत्रिका जोगर हमरा लग नहि छल  | झाजी कहलनि, हुनका भरोस छलनि, तें अहाँकें कहलनि, आब एकरा पूरा हेबाक छै, चलू कोनो होटलमे चाह पिबैत छी आ तकर बाद भ’ सकै छै अहाँकें लिखबाक प्रेरणा भेटि जाय | लहेरियासराय टावर चौक लग कोनो होटलमे बैसलहुँ | दू ताव कागज बगलक स्टेशनरी दोकानसँ  अनलहुँ  | एक कोनमे खाली टेबुल छलै | हमरा ओहि कोनमे बैसाक’ झाजी दूरक टेबुल लग चल गेलाह आ दू टा चाहक आदेश द’ देलखिन | हम  कलम नेने कागज दिस थोड़े काल तकैत रहलहुँ | हमर परीक्षा छल | हमरा बूझल छल जे कम्युनिस्ट पार्टीक पत्रिका छै | विषयक लेल मंथन केलहुँ | किछु-किछु लिखाय लागल | आगू बढैत गेलहुँ | थोड़े काल लेल लागल जे हम एसगर ओत’ छी, और कियो नै छै | एक बेर फेर चाह आएल | लिखनाइ  चालू छल | एकठाम आबि रुकल | एक घंटा बीति चुकल छलै | हमरा आब एकरा संक्षिप्त क’ क’ दोसर कागजपर उतरबाक छल | झाजी फेर किछु मंगयबाक लेल पुछलनि | मना क’ देलियनि | हम जहाँ ठाढ़ भेलहुँ  त झाजी कहलनि, आउ हिनकासँ  परिचय कराबी | झाजी एते कालसँ  एक गोटेसँ  गप करैत छलाह जे एकटा हिन्दीक पत्रिका ‘पूर्वांचल’ निकालैत छलाह | ओ अपन परिचय दैत हमरासँ  एकटा हिन्दी कविताक मांग केलनि ‘पूर्वांचल’ लेल | हम कहलियनि जे हम मैथिलीमे लिखैत छी त ओ कहलनि, एकहुटा त अवश्य लिखने हेबै, हमरा केह्नो कविता देब, चलतै | हमरा लागल जे झाजी हमर प्रशंसा क’ देने हेथिन तें हुनका भरोस भ’ गेल छनि जे हम जे देबनि से ठीके हेतै | हम बहुत पहिने एकेटा तुकबन्दी बला कविता हिन्दीमे लिखने रही, सेहो एखन पूरा मोन  नै छल | फेर कनी काल बैसलहुँ |लीख’ लगलहुँ  त  मोन पडैत  गेल | हुनका द’ देलियंनि | हमर ढोली छात्रावास बला पता ल’ क’ ओ प्रस्थान केलनि | हमहूँ सभ बिदा भेलहुँ | अजय छात्रावासमे मिथिला टाइम्सक कोठली बन्द छलै | केबारक नीचाँ  द’ क’ कोठलीमे राखिक’ हम सभ विदा भ’ गेलहुँ | दोसर दिन झाजीक संग फेर बैसार भेल आ आजुक प्रसंगपर बड़ी काल गप भेल | झाजी  फिल्ममे अवसरक तलाशमे छलाह, कहलनि जे फिल्ममे विविध तरहक गीतक उपयोग होइत छै, मैथिलीयोमे एहेन रचना सभ हेबाक चाही जे काल्हि मैथिली फिल्म बन’ लगै त ओहि लेल रचना सभ उपलब्ध होइ, एहि लेल और रवीन्द्र नाथ ठाकुरक आवश्यकता हेतैक | झाजी हमरा कयटा विषय द’ देलनि गीत रचनाक लेल : गीत जेहेन मुकेश गबै छथि, जेहेन  लता आ रफ़ी गबैत छथि, प्रेमक गीत, मिलन आ बिछुड़नक गीत | दुनू गोटे अपन-अपन गामक बाट  धेलहुँ | गाम त आबि गेलहुँ, मुदा मनोज बाबूक देल विषय सब रहि-रहिक’ स्मृतिमे आबि जाइत छल | कालान्तरमे किछु गीत हुनक देल विषय आ परिस्थितिकें ध्यानमे रखैत लिखा गेल, मुदा हुनकासँ व्यक्तिगत रुपमे कोनो नियमित सम्पर्क नहि रहल | हुनकासँ  पहिल भेंट अंतिम भेंट सिद्ध भेल | तीन बरखक बाद एकदिन ई खबरि सूनि बहुत आहत भ’ गेलहुँ जे हमर प्रिय मनोजानंद झाजीक ह्रदय-गति रुकि गेलनि | लदारीसँ कलिगाम धरि शोकक लहरि व्याप्त भ’ गेल छलै | दू बरखक एकटा बेटी आ किछुए दिनक एकटा पुत्र शांतीकें द’ क’ एहि जगतसँ प्रस्थान क’ गेलाह | कोनो रोजगारक खगता छल हमरा, से आंशिक रूपसँ  प्राप्त भेल | प्रशिक्षु-पर्यवेक्षकक रूपमे छओ मासक अवधि लेल डेढ़ सय रूपया स्टाइपेंडपर  पौधा संरक्षण केन्द्र, मधुबनीमे काज करबाक अवसर भेटल | राज्य सरकार द्वारा  बहुत गोटेकें ई अवसर विभिन्न जिलामे देल गेलनि  | जाधरि  बैंकमे भर्तीक विज्ञापन नहि अबैत छै, ताधरि ई हमहूँ स्वीकार क’ लेलहुँ | बादमे  स्टाइपेंड राशि दू सय क’ देल गेलै | मासमे जिला भरिक प्रशिक्षु सबहक मीटिंग होइ छलै दरभंगामे जिला पौधा संरक्षण पदाधिकारीक कार्यालयमे | किछुए मासक बाद एक दिन मीटिंगमे नन्द कुमार झाजी ( मोहना, झंझारपुर ) कहलनि जे टाइम्स ऑफ़ इंडियामे बैंकमे बहालीक विज्ञापन आबि गेलैए, जल्दिए पठा दियौ | दोसर दिन मधुबनी पुस्तकालय जाक’ टाइम्स ऑफ़ इंडियामे छपल विज्ञापन देखि तदनुसार आवेदन पठा देलिऐ | दू मासक बाद लिखित परीक्षा भेलै पटनामे | तीन  मासक बाद परीक्षामे उतीर्ण हेबाक सूचनाक संग साक्षात्कारमे भाग लेबाक आदेश भेटल | बैंकमे आवेदन पठा देलाक बाद साक्षात्कारक अवधि धरि लेखन कार्य एकदम छोडि देलहुँ, कतहु जाएब सेहो बन्द क’ देने छलहुँ | मुख्य काज छल परीक्षाक तैयारी आ तैयारी मात्र | साक्षात्कारक बाद फेर पौधा संरक्षण केन्द्र जाएब, घरक कोनो छोट-मोट काज रहैत छल से करैत, पुस्तकालय होइत घर आबि जाइत छलहुँ आ मिथिला मिहिर अथवा मैथिलीक कोनो किताब पढ़ब, कतहु गोष्ठीमे जाएब, साहित्यकार लोकनिक सम्पर्कमे रहब नीक लगैत छल | हमरा होइत छल जे जीवन जीबाक लेल जहिना नोकरीक आवश्यकता अछि, तहिना साहित्यसँ  लगाव सेहो आवश्यक अछि | हम देखैत छलिऐक जे लोक स्वस्थ जिनगी नहि जीबि रहल अछि, लोककें सामान्य जिनगी जीबाक लेल जे वस्तु सभ हेबाक चाही, तकर अभाव छै | दोसर दिस अस्वस्थ परम्परा सबहक  त्याग करबाक साहसक अभाव सेहो छै | हमरा लगैत छल जे जाधरि साहित्यसँ  लगाव नहि रह्तै, ताधरि जीवनमे संतुलन नहि आबि सकैत अछि | हमरा होइ छल जे  एहि लेल स्त्री, पुरुष सभकें समान रूपसँ  शिक्षित हेबाक चाही | मुदा हम तँ अपने घरमे हारल छी | हमर पत्नी जँ  शिक्षित नहि भेलीह त हमहूँ स्वस्थ जीवन नहि जीबि सकैत छी | तें हमरा लगैत छल जे एतेक योग्यता त अवश्य भ’ जेबाक चाहियनि जे ओ कोनो पोथी अथवा पत्रिका पढ़ि लेथि | हमरा ई बुझल भ’ गेल छल जे अक्षरक  ज्ञान छन्हि, तें हम जे चाहैत छी, से संभव भ’ सकैत अछि | एहने विश्वास नेने हम एक बेर सासुर गेलहुँ आ रातिमे भेंट भेल त मिथिला मिहिरक एकटा पेज सामने राखि पढबाक लेल कहलियनि | बड़ी काल अनुरोध करैत रहि गेलहुँ, ओ टस-सँ -मस नहि भेलीह | हमरा एकदम ‘कन्यादान’क बुच्ची दाइ जकाँ लाग’ लगलीह | हम कहलियनि, तखन अहाँ बाहर जाउ | ओ बाहर जाक’ माए लग जाक’ सूति रहलीह | हमरा भेल जे काल्हि अवश्य हमर बात मानि लेतीह, मुदा से नहि भेल | हमर सासु सेहो प्रयास केलनि हमरा तरफसँ  मुदा सफल नहि भेलीह | आ लगातार तीन दिन धरि यैह चलैत रहल | ओ अबैत छलीह, हम पढ़’ कहैत छलियनि, ओ ओहिना तकैत रहि जाइत छलीह, फेर हम कहैत छलियनि बाहर जाए लेल, ओ निकलिक’ माए लग जाक’ सुति रहैत छलीह | चारिम दिन सबेरे जलखै क’ क’ अपन बैग ल’ क’ बाहर निकलि गेलहुँ | दरबज्जापर जेठ सार छलाह | ओहो संगे विदा भेलाह | हुनका अपन  स्थिति  नै कहलियनि, एतबे कहलियनि जे जा रहल छी, जाएब जरूरी अछि | सासु रोकने छलीह, हुनकर बात नै मानने छलहुँ | हम सभ किछु-किछु गप करैत जा रहल छलहुँ | हम तय क’ नेने छलहुँ जे आब किन्नहु नहि घूरब | टोलसँ निकलि गाछीक बीच पहुँचल छलहुँ | चौदह-पन्द्रह सालक एकटा लड़की ह्कमैत आबि आगूमे ठाढ़ भ’ गेलि, हुनका पाछू एकटा अधवयसू महिला सेहो छलीह | हम अकबका गेलहुँ | ओ हमरा दूनू गोटेकें झुकिक’ प्रणाम केलनि | पाछाँ हुनकर माए छलथिन | ओ कहलनि जे हम सभ अहींसँ  भेंट कर’ जाइ छलहुँ त पता चलल जे अहाँ जा रहल छी, तें दौडल एलहुँ, अहाँकें आइ नै जाए देब हम सभ | ओ हमरा हाथसँ हमर बैग ल’ लेलनि आ दुनू माइ-धी हमरा सभकें घुरबाक  लेल जिद्द क’ देलनि | हमरा लेल दुनू अपरिचित छलीह | हमर सार जनैत छलखिन | हुनका सबहक बीच जे  गप भेलनि ताहिसँ  पता चलल जे ई बच्ची अपन माए संगे मामा गाम आएल छथि आ हिनकर मामाक घर सटले छैन्हि, ई सभ काल्हि साँझमे एलीह, एखन हमरासँ  भेंट कर’ गेल छलीह, हमर सासुसँ  किछु गप भेलनि आ दौड़लीह  हमरा घुरयबाक लेल | हम किछु बहन्ना बनेलहुँ  गाम जेबाक लेल, मुदा ओ सभ किछु सुनबाक  लेल तैयार नहि भेलीह | कहलनि जे आइ हम सभ नहि मानब, हम सभ अहाँसँ  बिना गीत सुनने अहाँकें नहि छोडि सकैत छी | हुनकर माए कहलनि जे अहूँकें सूनब आ इहो सुनाएत, चलू आइ नै जाउ | हुनका सभकें देखि-सूनि हमरो पयर आगू नै बढ़’ चाहैत छल | लागल जेना हमरे समस्याक समाधानक लेल भगवान हिनका सभकें पठा देलखिनहें | ओ हमर बैग नै द’ रहल छलीह | हमर सार निर्णय सुनौलनि | हमरा कहलनि, आइ यात्रा स्थगित करू, काल्हि देखल जेतै, प्राचीकें कहलखिन दाइ तों बैग नेने जा, हम हिनका चौकपर घुमाक’ नेने आबि रहल छी | अही बातपर सहमति भेल | प्राची हमर बैग ल’क’ माए संगे घुरि गेलीह | हम सभ  हाजीपुर चौकपर पान ख़ाक’ घुरलहुँ | प्राची आ हुनक माएक उपस्थिति वातावरणकें रसमय बना देने छल | वस्तुतः साहित्य आ संगीतक प्रेम जीवनकें आनन्ददायक बना दैत छैक अन्यता लोक ककरो खिधांस करबामे अपन अधिक समय बितबैत रहैत अछि अथवा अपन बड़ाइ करबामे | हिनका दुनू गोटेमे जे ई चेतना छल से हमरा अद्वितीय लागल | प्राची अपन पाठ्य-पुस्तकसँ  सेहो कोनो-कोनो कविता सुनबैत छलीह आ हमरो सूनि खूब आनन्दित होइत छलीह | बच्चन जीक कविता ‘ जो बीत गयी सो बात गयी...’ बहुत नीक जकाँ सुनबैत छलीह | दिनमे भोजनक बाद बड़ी काल आ रातिमे भोजनक बाद थोड़े काल बैसकी चलैत छल : गीत-नाद, कविता-संस्मरण, हंसी-ठहक्का चलैत रहैत छल | एकटा नियमक पालन प्राची करैत छलीह जे ओ कखनो एसगर नै अबैत छलीह, हुनकर माए संगे अबैत छलखिन | कखनो-कखनो हुनकर मामी सभ सेहो अबैत छलखिन, हमर दूनू सरहोजि त रहिते छलीह | किछु पुरुष लोकनि सेहो आबि जाइत छलाह | प्राची बच्चीकें मौसी कहैत छलखिन आ हिनको गोष्ठीमे सम्मिलित करबाक प्रयास करैत छलीह, मुदा बच्चीकें ओहो सभ परिवर्तित नहि क’ सकलीह | एकदिन कहलनि जे द्विरागमनक बाद अहाँक  संग रह’ लगतीह त देखबै सभ बदलि जेतनि, नैहरमे लाज होइ छनि | हुनकर माए पुछ्लनि, ‘अहाँक बहिन सभ तँ  पढल-लिखल हेतीह ने ?’ हम निरुत्तर भ’ गेल रही | हमरो तीनटा छोट बहिन अछि | ओकरो सबहक पढाइक स्थिति त यैह छै | हमर चित्त शांत भ’ गेल रह्य | हमर सभ प्रश्नक जबाब हमरा भेटि गेल छल | चमत्कार भेलै जे बच्चीकें बदलबाक हमर प्रयास बन्द भ’ गेल | हम फेर हुनका पढबाक जिद्द नै       केलियनि, फेर घरसँ  बाहर जेबाक लेल नै कलियनि | हम सोचि नेने रही जे हमरा संग जखन रह’ लगतीह तखन हम प्रयास करब, आ जँ  तैयो संभव नै भेल त अपना बेटीकें खूब पढयबाक लेल बच्चेसँ  प्रयास करब | हमरा लागल जेना अस्तित्व हमरा वैह देलक अछि जे हमरा आ हमरा परिवारक लेल जरूरी अछि, अस्तित्वकें हमरा संग हमर परिवारोक लेल व्यवस्था करबाक छैक | एकदिन जखन एसगर रही त अपनेसँ गप होइत रह्य | ‘जँ बियाहसं पहिने प्राचीकें देखने रहितियनि त ....?’ ‘त की ? वैह होइतै जे भेलैए | बच्चा जे-जे मंगेत छैक से सभटा ओकर माए-बाप नै दै छै, बच्चाकें वैह देल जाइ छै जे माए-बाप ओकरा लेल ठीक बुझैत छै | अहाँ जान’ चाहैत छी त कखनो पुछियौ प्राचीकें जे हुनका सभकें केहेन लड़का पसन्द हेतनि |’ एक दिन हुनका पुछलियनि जे अहाँ लेल केहेन वरक खोज भ’ रहल अछि, त प्राची चुप रहि गेलीह, हुनक माए कहलनि, काल्हि अबिते छथिन, कहबे करताह | प्राचीक पिता कलाकार छथिन, कहलनि जे लड्काक लेल हमरा मोनमे कृष्णक छवि आबि रहल अछि, आँखि, नाक,मूँह,केश सभ एहेन जेना हम सभ कृष्णक फोटोमे देखैत छियनि, इंजिनियर अथवा डॉक्टर होथि, हँसमुख होथि, घर-दुआरि- पक्का मकान होनि, खेत-पथार होइन | हमर सार पुछलखिन जे गनबै कत्ते त कहलखिन, से  हमर स्थिति त जनिते छी अहाँ सभ जे किछु गनबाक ओकादि नै अछि हमरा, तखन भगवाने कोनो उपाय लगेथिन त हेतै | किछु गोटेकें हँसी लागि गेल रहै | हमरा हुनक कल्पना,आस्था आ विश्वासपर आश्चर्य भेल रह्य, मुदा पैंतीस बरखक बाद जखन प्राचीसँ  भेंट भेल त बड़ी राति धरि हम सभ गोटे हुनके मूँहें हुनक पिताक सपना साकार हेबाक कथा सुनैत रहि गेलहुँ आ विश्वास भेल रह्य जे अस्तित्वक लेल सभ संभव छै | ( क्रमशः ) पटना / 14.06.2021 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। रबीन्द्र नारायण मिश्र लजकोटर (धारावाहिक उपन्यास) २२म खेप मिथिला आटो सेंटरक हम क्रमश: सर्वे-सर्वा भए गेल रही। मदनबाबूकेँ दिल्लीमे बहुत तरहक कारबार रहनि। सामाजिक क्षेत्रमे सेहो ओ सक्रिय छलाह । सभसँ बड़का बात रहैक जे ओ अपना लोककेँ आगु करबामे बहुत रुचि रखैत छलाह। क्रमश: हुनका हमरा ऊपर विश्वास बढ़ैत गेलनि ।एकदिन एहिना काजपर आएले रही कि कहए लगलाह॒-"गोविंद! आइसँ अहाँ एहि कारबारक मालिक भेलहुँ ।” "हम अहाँक दोकान कोना लए लेब । ई तँ वाजिब नहि बुझाइत अछि ।" “जे वाजिब बुझाए आ जखन सुविधा होअए अहाँ हमरा दए देब।" “हमर हालत तँ अहाँकेँ बुझले अछि। हम एतेक टाका कहाँसँ देब? " " कोनो ताहिरी नहि छैक, जेना-जेना सुविधा होएत किस्त-किस्त एकर भुगतान कए देब।" हम गुम्म पड़ि गेलहुँ । हम हुनकर एहि उदारतासँ आश्चर्यचकित रही । आखिर ओहो तँ एही महानगरमे रहैत छथि।मुदा एतेक नीक छथि । हम गरीब बेसक रही मुदा ककरो चीजक कोनो लालच नहि रहए । फेर मदनबाबू तँ हमरा बहुत मदति केने रहथि । ओ सोचि कए आएल रहथि आ अपन बातपर अड़ि गेलाह। हम हुनकर बात मानबाक हेतु विवश भए गेलहुँ । ओहिदिनक बाद मदनबाबू ओतए घुरि कए नहि अएलाह। कहिओ काल फोनेपर हालचाल लए लेथि। कहिओ कोनो तकादा नहि केलाह । जहिआ जखन जतबा भेलहुनका टाका दैत छलिअनि । ओ तँ ताहूलेल मना करैत रहैत छलाह । कालन्तरमे हुनकर सभटा हिसाब साफ भए गेल । मिथिला आटो सेंटरक हम मालिक भए गेलहुँ ।  हमरा अंदरमे दसटा मिस्त्री काज करैत छल। सभ अपनेठामक छल । कारबार नित्य बढ़िते जा रहल छल । सौंसे दिल्लीमे काजक गुणवत्ताक हेतु हमर दोकान प्रसिद्ध भए गेल। हमर दोकानक प्रसिद्धि तँ तेहन बढ़ल जे  जकर कार कतहु ठीक नहि होइत ओहो हमरा ओहिठाम संतुष्ट भए जाइत छल । ई कोनो चमत्कार नहि छल । कठोर परिश्रम आ आनुशासनक परिणाम छलजे ई दोकान एतेक आगा बढ़ि गेल । एकदिन एहिना दोकानपर बैसल चाह पीबैत रही कि कारसँ लता आ ओकर पिता नीरज उतरलाह। " एकरे कहैत छैक चमत्कार । देखिते, देखिते अहाँ कमाल कए दलिऐक ।"-नीरज बजलाह । "सभ अहाँसभक आशीर्वादक फल छैक । हम तँ सपनोमे नहि सोचने रहिऐक जे एहनो भए सकैत छैक ।" "मुदा हमरा लगैत छल जे अहाँ किछु करब ।" अपन पिताक मुँहे हमर प्रशंसा सुनि लताकेँ बहुत नीक लगलनि । नीरज बात बढ़बैत कहलाह॒-"हम नौकरीसँ इस्तिफा दए देलहुँ । ” “से किएक?" “नौकरीबहुत केलहुँ। आब सोचलहुँ जे आगुक जीवन लोककल्याणक काजमे बिताबी।" " बहुत नीक बिचार अछि ।" “डेरा कतए रखने छी?"- नीरज पुछलाह । हम किछु कहितहुँ ताहिसँ पहिने लता बातकेँ लोकि लेलथि । "कहिओ समय निकालि कए हमरा ओहिठाम आउ तँ चैनसँ गप्प करब ।" प्रायः हुनका ई नहि बूझल रहनि जे हम हुनके मकानमे किरायेदार छी । ई बात लता अपने धरि रखनेरहि गेलीह । किशुन आ हुनक मामा दामोदरसेहो नीरजक संगे कारेमे बैसल रहथि। एतेक समयबाद हुनकासभकेँ देखलहुँ । हमरा देखितहि किशुन कारसँ उतरि गेल । "भाइ की हालचाल?" "ठीके अछि ।अपन कहू । बहुत दिनपर भेंटलहुँ ।" "ठीके । आइ-काल्हि की भए रहल छै?" “आइ-काल्हि नीरजजीक संगे जनकल्याणमे लागल छी।” " ओ कतए भेटि गेलाह?" "दुनियाँगोल छैक ने ।कखनो चैनसँ बतिआएब ।" किशुनअपन नवका मोबाइल फोनसँ हमरा फोनपर घंटी बजा देलक आ कहलक -"ई हमर नवका नंबर अछि ।” आओर किछु गप्प होइत ताहिसँपहिने कार खुजि गेल । अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। आशीष अनचिन्हार लॅाकडाउन केर कथा (व्यंग्य)

एकटा गाममे A नामक आदमी छलाह। सभ्य ओ विद्वान। हुनकर बियाह B नामक लड़कीसँ भेलनि आ एहि दूनूक चारि टा बेटा भे;लनि C,  D,  E आ F। चारू बेटा साहित्य केर मर्मज्ञ। रक्ष अतबे रहल जे विधाक मर्मज्ञ नै भेल बस साहित्ये केर भेल। कालक्रमे ई चारू अपन विद्वतासँ पूरा परिसरमे चमकि उठलाह। चारू दिस अही चारुक चर्च। चारू भाए केर काज बाँटल।

पहिल केर काज छलनि साहित्यमे कोना अवनति आबि रहल छै ताहिपर चर्च करब। लोक सभ हिनकर बातपर लहालोट भऽ जाइथि। एकदम तैशमे आबि जाथि जे आउ C बाबू हम अहाँक संग छी। फेकि देबै एहि साहित्यिक गंदगी सभकेँ। दोसर केर काज छलनि अवनति भेल साहित्य केर मीठ समीक्षा करब। बहुत साहित्यकार हिनकर पाछू-पाछू घूमल करनि। जे कनी क्रांतिकारी तिनको मोनमे हिनका प्रति सहानुभूति। ई D बाबू सदिखन गोष्ठीमे उक्ति फेकथि जे साहित्यमे सही आलोचना नै भऽ रहल छै। खाली प्रशंसे-प्रसंशाक भंडार अछि।

तेसर केर काज छलनि अनुवाद केर नामपर छल करब। जाहि भाषाकेँ जनितो नै छलाह ताहि भाषाक पोथी अनुवाद भऽ जाइत छलै। E बाबू अपन भाषाक रचनाकेँ आनो भाषामे लऽ जेबाक लेल कमीशन खाइत छलाह। बहुत लोक ललायित रहैत छल। वरिष्ठ बेसिए। चारिम केर काज छलनि पुरस्कारक जूरी बनब आ पुरस्कार लेब-देब। चारू भाएमे सभसँ बेसी इएह F बाबू केर चलती छल समाजमे। हिनकापर जथा-टका सभ किछु निछाउर होइत छल। जिनकर जेहन विभव। संसारमे सभ किछु होइत छै।

ई चारू भाए अपन-अपन काज कऽ रहल छलाह आ समाजमे कहै छलखनि जे हमरा दोसरसँ मतलब नै अछि। दिनमे चारू भाए अलग मुदा रातिमे ई चारू एक संगे खा कऽ आ पीबियो कऽ अगिला दिनक प्लान करैत छलाह जे अगिला बेर केकरा बेकूफ बनेबाक छै। मैथिली साहित्यमे C,  D,  E आ F केर काज नीकसँ चलि रहल छल। पाइसँ सम्मान धरि। मुदा दुर्योग कोरोना कारण C,  D आ E केर मृत्यु भऽ गेलनि आ F कहुना बाँचि गेलाह (नोट- F लग पुरस्कार बेचलासँ जे पाइ आएल छलनि ताही सभसँ आक्सीजन कीनल गेलनि)। F बहुत हतोत्साहित छलाह। तीनू भाइ केर सहायतासँ हुनकर काज असान भऽ जाइत छलनि। पुरस्कार बेचियो दै छलखिन आ हुनकापर कोनो आँच नै अबैत छलनि मुदा आब असगरे रहि गेलाह।

अंतमे बहुत सोचलाक बाद हिम्मति केलनि आ असगरे सभ काज करबाक भार उठेलनि। आ प्रयास करए लगलाह। आब ओ दिनमे समय नियत कऽ लेने छथि। आठ बजेसँ दस बजे धरि साहित्यिक अवनतिपर भाषण दै छथि। दस बजेसँ बारह बजे धरि मीठ समीक्षा करै छथि आ तकर बाद दू घंटाक ब्रेक लै छथि। दू बजेसँ चारि बजे धरि अनुवाद कर्म (कुकर्म) लेल तैयार रहै छथि आ चारि बजेसँ चह बजे धरि जूरी एवं पुरस्कार वितरणमे रहै छथि। फेर साँझमे तीनू भाए केर फोटो लग जा प्रणाम कए रसरंजन (तरल साहित्य) करै छथि आ अगिला बेर केकर काटल जाए से सोचै छथि। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३. पद्य ३.१.बिनय भूषण- ३ टा कविता ३.२.जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’- गजल बिनय भूषण-संपर्क-7003286056 ३ टा कविता १ यात्रीक यात्रा नहि थमै अछि ***    ***    ***      ***

के अछि भूखल , के अछि मारल अन्यायी सत्ता के भीतर ककर माथ अछि आइ झमारल तकर सुधि मे सतत बढै छथि यात्रीक यात्रा नञि थमै अछि ।

चलल तरौनी  सँ जे यात्रा अन्त  समय धरि चलैत रहल कालीदासक हृदय पैसि ओ बाल्मीकि के मर्म बूझि ओ शब्दक यात्रा करैत रहल पदचिह्नक अंकण वाट- वाट पर यात्रीक यात्रा नञि थमै अछि । के अछि भूखल -----

कविक स्वप्न ओ रचि रहल छल वाचस्पति - उदयन खोजि रहल छल ललकारा लेल औनाअ् रहल छल क्रांतिक सपना देखि रहल छल श्रमजीवी के रक्तक कीमत आइओ तँ ओ गुनि रहल छथि । के अछि भूखल ------

अहिवातक पातिल फोड़ि चलल छल पुरना परिचय केँ तोड़ि चलल छल परिजन - पुरजन केँ छोड़ि चलल छल गरीबक खातिर अन्न - पानि हित यात्रीक यात्रा नञि थमै अछि । के अछि भूखल------  

कमला कातक टूटल पुल सन काव्यक रूदन सुनि रहल छल मिथिलाक तरुणीक अरण्य विलाप केँ सुनि सुनि दग्धित भअ् रहल छल बूढ़ वरक एहि सड़ल रस्म केँ काव्य - वाण सँ भेदि रहल छल रूढि  - ध्वंसक खातिर कखनहुँ यात्रीक यात्रा नञि थमै अछि । के अछि भूखल --------

२ यात्री नहि छथि एहि जगत मे ***    ***    ***      ***

मोन हमर नहि मानि रहल अछि । चिर निद्रा मे सूतल  यात्री   मोन हमर आइ कानि रहल अछि ॥

नवतुरिया के जोशक संवल   क्रांति गीत ओ गावि रहल छल । जन सँ निकसित दर्दक गंगा हुनक शब्द मे आवि रहल छल ॥ इतिहासक पन्ना पर एखनहु क्रांति शब्द ओ लिखि रहल छथि । यात्री नहि छथि,,, ,, , , ,

राजनीति के पर्दा भीतर नाटक जेहन भअ् रहल छल । हुनक शब्द के डोरिक माँदें परदा सभटा खुजि रहल छल । क्रांति खातिर एखनहुँ ओ तँ नवतुरिया केँ जोहि रहल छथि । यात्री नहि -------- --

जन - जन के बनि बाबा ओ तँ स्नेह शब्द ओ लुटाअ् रहल छल । मानवता के रक्षा खातिर काव्य धार मे नहा रहल छल । काव्यक दुनिया मे एखनहुँ ओ दर्द शब्द तँ रचि रहल छथि । यात्री नहि - -

सतरंगी सपनाक दुनिया केँ नीक जँका ओ बूझि रहल छल । पूंजीवाद के शोषण केँ  तँ नीक जँका ओ बूझि रहल छल । जन- जन के सुखमय जीवन खातिर जीवन रस ओ ताकि रहल छथि । यात्री नहि -- - ----

दर्द केर उपटौनी खातिर चप्पा -चप्पा ओ घूमि रहल छल । दर्द  शब्द रचना के खातिर राति-  राति ओ जागि रहल छल । यात्रीक यात्रा कोना केँ ठमकल मोन हमर आइ कानि रहल अछि । यात्री नहि ---:---:---:---:--- ३ वैद्यनाथ  के  धाम  तरौनी ***    ***    ***      *** वैद्यनाथ  के  धाम  तरौनी नागार्जुनक    गाम    तरौनी यात्रीक  जन्म स्थान  तरौनी कविता के अछि गाम  तरौनी चित्राक  अछि  संधान  तरौनी पत्रहीन  जे नग्न  गाछ  अछि तकर  पीड़ाक  नाम   तरौनी ।

त्रेता  के विदेह  जनक  छल आइओ  तँ विदेह  उपस्थित जीवन  काल सदेह विदेह छल आइओ तँ छथि  अमृत रंजित अमर यात्री  देखा रहल छथि मिथिला  के अछि तीर्थ  तरौनी  । वैद्यनाथ  के धाम   ,,,,,,

पारोक  पीड़ा मर्दन खातिर नवतुरिया सम्मानक खातिर मेहनतकश   के मानक खातिर सतयुग के संधानक  खातिर क्रांतिक झंडा  थामि  हाथ मे शहर नगर आ कारावास मे प्रवर्तक  यात्रीक थान  तरौनी । वैद्यनाथ के धाम ,,, , ,

राजनीति परिवर्तन  लेल सत्ता के प्रवर्तन  लेल विद्रोहीक संघर्षक लेल रुढि के  विध्वंसक  लेल साहित्यक  सम्मानक लेल अथक यात्रा लीन यति सन्यासीक  स्थान तरौनी । वैद्यनाथ  के  धाम  ,, ,, , अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’ गजल माछ-दही   जतरालय   की ई  दुनियाँ  ककरालय   की दै   बाला   देबे     करतै नै  सोचत   हमरालय  की किछु बाजत किछु नठि जायत लुच्चा आ लबरालय  की कतहु  बैसि  कय खा लेतै ठाँ-पीढ़ी   बगरालय   की दुनियाँलय   फगुआ-बकरीद मुरगा  आ  बकरालय  की ( मात्रा क्रम :           ) पांचम शेरमे पहिल पाँतिमे अंतिम लघुक मात्राक गिनती नै कएल गेल अछि | ४.स्त्री कोना (सम्पादक- इरा मल्लिक) ४.१.सुचिता कुमारी-ऑनलाइन क्लास ४.२.आभा झा- दू गोट बीहनि कथा ४.३. कंचन कण्ठ- टूटल रिकार्ड ४.४.ममता कर्ण- बरसात ४.५. निर्मला कर्ण- अग्निशिखा (धारावाहिक उपन्यास) ४.६.कंचन कण्ठ- स्त्री सज्जा- परम्परा फैशन सुचिता कुमारी ऑनलाइन क्लास 

"ऐं रौ भरि दिन अहिना सुतले रहबैं, कि पढबो-लिखबो करबैं। " गणेशी अपन बेटा राजू के देह डोला कअ उठबैत बाजल। " ओह पप्पा सुतअ दिय ने, उठि क करब की स्कूलो बंद छै। " "स्कूल बंद छै त की भेलै, घर में लोक पढै नहि छै। गप्प सुनु एकर  स्कूलो बंद छै। " "घर में पढ़बै ककरा स किछु पुछबाक  हेतै त के बतेतै?" "आ मालिक के बेटा कोना पढै छै, जखन जाइ छी तखन ओ कहै छैथ जे रवि पढ़ि रहल अछि , अगिला साल मैट्रिक क परीक्षा हेतै ने तैं बड मोन लगा क आइ-काल्हि पढैत अछि ओ। त फेर ओकरा किछु पुछबाक रहैत हेतै त ककरा स पुछैत हेतै। मालिक अपने हिन्दी मीडियम स मैट्रिक पास छैथ, हमरा नहि बुझाइत अछि जे एखुनका अंग्रेजी मीडियम के किताब हुनका पढाएल होइत हेतैन। घर में आओर दोसर किओ त पढल छनि ने। "          गणेशी एकटा चूड़ा मील में काज करैत छल आ ओकर मालिक के बेटा एकरे बेटा क तुरिया छलैक, दुनु परुका साल मैट्रिक क परीक्षा में बैसत।एगो सीबीएसई बोर्ड स त दोसर बिहार बोर्ड सअ।   "रवि के बाते दोसर छै ओकर नाम शहरक  सबसअ पैघ स्कूल में छैक। " "पैघ स्कूल में नामे रहला स की हेतै स्कूल त ओकरो बंदे छै ने। " "अहां नहि बुझबै पप्पा ,बड़का पराइवेट  स्कूल  सभ में धिया-पुता सभ बड़की टा मोबाइल जे होइ छै जकरा स्मार्ट फोन कहै छियैक ओहि स घरे बैसल पढै छैक माने ऑनलाइन क्लास करै छै। " "मोबाइल स कोना ऑनलाइन क्लास   कराएल जाइ छै, फरिछा कअ कह ने। "

"स्कूल के सर, मैडम सभ मोबाइले पर पढबै छथिन, सवाल सभक उत्तर सेहो मोबाइलेपर दैत छथिन। " "त पराइवेट स्कूलक विद्यार्थी स्कूल बंदो में पढि सकै छैथ। आ सरकारी स्कूलक विद्यार्थी लेल कोनो व्यवस्था नहि। " "व्यवस्था त सरकारी स्कूल क विद्यार्थी लेल  सेहो छैक मुदा ओहु  सअ अपना सभ के कोनो लाभ नहि। " "एहन की व्यवस्था छैक जे। "

"सरकारी स्कूल क विद्यार्थी सभ के टीवी पर पढाएल जाइ छैक। जेना स्कूल में अलग-अलग विषय के अलग-अलग सर मैडम पढबै छथि , अहिना टीवी के एकटा चैनल पर  सभ क्लासक सभ विषयक पढाई लेल अलग-अलग समय आ टीचर निर्धारित  छैक। मुदा अपना सभ लग ने टीवी अछि ने बड़का मोबाइल त ऑनलाइन क्लास हम करब कोना। तैं भरि दिन सुति कअ हम अपन समय बितबै छी।"

"माने जकरा घर में टीवी नहि छै, बड़का मोबाइल नहि छै ओकर बाल-बच्चा आब  पढतै नहि। "

"पढतै त ओहो मुदा भगवान भरोसे। " अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। आभा झा- दू गोट बीहनि -कथा सोगारथ "मैंयॉं,सुनलियनि सोनदाइक बियाह भेलैनअ'। "हॅं,ई कुलकलंकिनी एहने दिन देखाओत।" "से कियै बोलै छथिन मैंयाॅं?सोनदाइ पढ़ल- लिखल छथिन, नोकरी करैत छथिन,तखन कियै लात- बात सुनितथिन ओइ ठढ़मनसा के?भने केलखिन जे ओकरा छोड़ि न'ब जिनगी शुरू केलखिन। ई अर कामधाम नञि करै रहथिन,तैं पित मारि सभ सहै रहथिन। हमरा अर मे मौगी- मनसा सब काम करै छै,त' अपना मोन स' जीबै छै।मोन मिलल त' घर बसल, नञि त' सगाइ कैलक।चलथु मैंयॅॉं,आब हिनको अर के जिनगी सोगारथ होलनि।" फुरसति "कक्का!ई लिस्ट देखि लियौ,सब ठीक छै न?" "कथीक लिस्ट हौ?" -"भोजक।" "हौ,केओ नञि औत' खाय लेल।कहुना पांच टा विप्र हाथ धो लेत' त' भाग बुझिह'।" " कक्का,दही ढल्ल,मालदह आम आ पचमेर करबै,जकरे कहबै सभ औतै।" " कोन भरम मे छ'। हम त' बुझबे केलियै जखन भगवतीकेॅं नौत पड़ि गेलनि, नञि त' साफे बरजि दितिअह।आब जखन जग अराधि लेलह,तखन कहुना निमहबा दिय', तैं अबै छियह।" कक्का… "हौ सभ बुझै छियै,पड़ुकाॅं कहलियह त' फुरसति नञि छलह,एहि बेर लाकडाउन मे छुट्टी नञि लागतह, तैं सभक प्राण अवग्रह मे देने छहक। तोरा सभ जकाॅं हमरा लेल देवता- पितर खेल नञि छथि, तैं उपनेन धरि संगे छियह। तों सौजनियां आ जयबारी लिस्ट बनबैत छह!" डॉ.आभा झा अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। कंचन कण्ठ टूटल रिकार्ड घूरन बाबू एकटा लटखेनाक ेदोकान चलबैत छलाह। हुनका ओहिसौं नीक आमदनी भs जाइ छलैन्ह। किंतु आमदनीकेँ हिसाबसौं खर्चो छलैन्ह, परिवारमे चारिटा कन्याके बाद एक गोट पुत्र भेलैन्ह। कतेक कोबला, उपास -तिरास केलैथ, बैजनाथ धाम, सिमरिया सभ सेवलाकेँ बाद ओ पुत्र भेल छलैन्ह तs बड्ड आससौं ओकर नाम "आदित्य" रखलाह। जहिना नाम छलैन्ह तहिना ओ बालक बड्ड कुशाग्र छल। तुरत-फुरत किछु सीख जाइ। आन लोक सोचिते रहय आ आदित्यकेँ जवाब फटसौं हाजिर! माय तs दिनमे कतेको बेरि निहुंछथि छलीह , पिता सेहो गर्वित छलाह। लेकिन जेना - जेना ओ बढ़ैत गेलाह, खुराफातो बढ़ैत गेलैन। ते जतs ओ छल तैं स्कूलमे पढाईमे कोनो खास मेहनत लगबेनै करै तs जी भरि उत्पात करैत छलाह। जगह-जगहसौं रोज  उलहन-उपराग आबयसौं आजिज भs गेलाह माता - पिता। किछु फुरेबे नै करै कि-की कयल जाय की नहि। एक दिन समर गामअयलाह ओ सहरमे पढ़ैत छलाह अपने दियादक बेटा छलाह। ओ काक-ाकाकीकेँ भेंट करय ऐलखिन तs हुनका सभकेँ चिंतित देखि सभ बात पुछलाह। समस्या बुझलापर ओ कहलैन्ह "पढ़sमे त होशियार अछि नै।" ई सभ तकर प्रशंसा कयलन्हि तs ओ सुझाव देलखिन्हि जे तखन एकरा  पढ़ाबय लेल ओ किया नै सहर भेजि दैत छथि। ओतय पढाई तs नीक हेबै करतै आ एते जे बदमाशी करैत अछि ताहूपर नियंत्रण रहतै किछु। ई विचारसौं माय तs कन्नारोहटि उठा देलखिन्ह। दुख तs अपनो बड्ड छलैन्ह लेकिन बच्चाके नीक भविष्य लेल कखनो कs तs कठोर निर्णय लेबयै परैत छैक। आखिर दुलार तs ओहो करिते छलाह; किंतु ओहि दुआरे ओकर भविष्य तs बिगड़य नै दs सकैत छलाह। छौंड़ा चंसगर छले, दिमाग तs खूब चलते छलै ओ एक्केबेरमे "रामकृष्ण मिशन स्कूल " के ऐंट्रेंस निकालि लेलक। जहिना बाबासौं बच्चा मंगने छलाह तहिना बाबाशरणमे शिक्षा - दीक्षा लेल चल गेल। भरिपरोपट्टामे घूरन बाबू ओ हुनक खानदान के जय - जय भs गेलैन्ह। सबके छगुंता होइन क िऐहेन निरक्षर परिवारमे ऐहेन होशियार बच्चा भेलैन्ह केना! कियो कहैन पुर्वजन्मकेँ पुण्य छैन्ह, तs कियो भोलाबाबाके परसाद!समरकेँ सेहो बड्ड आशीष आ धन्यवाद देथिन्ह कि एकटा बहसल बच्चाकेँ ओ रस्ता देखेलखिन्ह। किछु लोक तs जैsरकेँ खाक भs  गेलाह "घूरनाके कोनो पाइके कम्मी छैक मास्टरके तरेतर घूस खुऔने हैत, छौंड़ाकेँ तs कखनो एक अच्छर पढ़ैत तs  कियो देखबे नै करै आ छौंड़ा पासो कs गेल परीच्छा। ओहि इसकूल सबमे पढ़ेनाय कोनो ठट्ठा छैक कि।" मायके तs होनि कि केना बच्चा रहत ओतय, के ओकर धियान राखत। आह! गोदीके बालकके केना आँखिसs ओझल करब। कखनो दुलार करथिन कखनो सीख देथिन " ओतs जाकs पढ़ै- लिखैपर मोन देब तखनने बड़का हाकिम बनब। हे ओतय बदमाशी नै करब नै तs मास्साब बड़ खिसियेता।" आई कल्पना कs अपने बुकोरि लागि जानि। खैर जे से , ओहो दिन आयल कि घूरन बाबू बेटाक सँगे विदा भेलाह। मायके तs सम्हार बमोश्किल। बहिनियो सबके भाईसौं फराक रहैके कल्पनासौं नोर थमबे नहि करैन्ह। दुनु-बाप - पूत जखन इसकूल पहुंचलाह तs शोभा सुन्दर देखी तs चकचौन्हि लागि गेलैन्ह। आदित्यके तs मास्साब हाॅस्टल , नवसंगी - साथी सभ खूब नीक लगलैन्ह। बापके बड़ संकोच भs रहल छलैन्ह। प्रिंसिपल सर हुनकर मनोभाव बुझि, हुनका बोल -भरोस देलखिन्ह। आश्वस्त केलैन्हि कि बच्चा सबके पूरा भार स्कूलके अछि आ एतय जे अबै छैथ हुनकर उज्जवल भविष्यके बारेमे तs कोनो संदेह हेबाके नै चाही। स्कूलमे ऐहेन वातावरण होइत छैक कि बच्चा सभ अपने नीक काज करैय लेल संकल्पित भs जाइत छैक। ओ आदित्य के नीकसौं रहय, सबके बात मानबाके सीख दs भारी मोने घsर घूमि गेलाह। आदित्य बाबूके मोन रम गेलैन ओतय।बीच - बीचमे छुट्टीमे अबैत रहलाह। एक दिन अचानक डाकिया आयल आर घूरन बाबूकेँ एकटा चिट्ठी देलक। चिट्ठी पबिते कन्नारोहटि उठि गेल। ई बातसौं आइ हँसी आबि सकैत अछि , किंतु ताहि जमानामे अशिक्षा आर अंधविश्वासके ततेक बोलबाला छलै घर-घरमे कि चिट्ठी अबिते लोक आशंकित भs जाइत छल आर टेलीग्राम तs किनको देहावसानेके खबरि अनलक- लोक सैह बुझैत छलै। जखन डाकिया चिट्ठी दs कs गेल तs आब ओ पढ़ल केना जाए। ग्राम प्रधानसौं लs के सरपंच तक के लिखा - पढिकेँ मामलामे हाथ कनी तंग छलैन। कहुना कs पता लागल जे अमीन बाब ूलग लs जायल जाs ओ तs खाता- खेसराके काजे करैत छथि। तs की दौड़ल गेला आ निहोरा मिनती कs चिट्ठी पढ़बाक अनुरोध केलैन्ह। बेसी पढ़ल- लिखल तs ओहो नै छलाह, किंतु एतेक लोकके अपन खोज करैत देखि मोन प्रसन्न भs गेलैन्ह। ओ चिट्ठी पढs लेल तैयार भs गेलाह। ओ पढय लगलाह " आदित्यके अभिभावकको सूचित किया जाता है कि आपके पुत्र ने पिछले सभी सालों का रिकार्ड तोड़ दिया है। अतः स्कूलके वार्षिकोत्सव पर उसके माता -पिता को आमंत्रित किया जाता है। आपसे अनुरोध है कि इस अवसर पर अवश्य पधारें।" एतबा देरमे तs ओ तामसे- पित्ते घौर भs गेलाह "एकरा कहलकै जे जाएब नेपाल कपार जैत संगे, एते सिखा पढ़ा कय एलहुं रे बौआ! मोन लगा कय सब काज करिहैं किनको सिकैतके मौका नै देबै। लेकिन कुकुरके नांगड़ि! कतहु सोझ भेल जे ई हैत। रौ बौआ नां आदित रखने की हैत रहबे तs रारक रारे।  कहू तs ई हड़ाशंख पढ़s गेल कि ई किदैन 'रेकाट' तोड़ िदेलक।" बुझल-गमल तs किनको किछु छल नै ताहूपर कतेक लोक पहिनेसं खार-खैनेहे रहय हिनकासँ, त दहीमे सही मिलबय लागल "सांचो घूरन बाबू, कहू तs अपने तs अहां बापक फरजमे कोनो किछु उठा नै रखलहुं। कत्ते खरचा-बरचा कs ओहन पैघ इसकूल पठेलिए जकर नावों ने भरि परोपट्टामे कियो सुनने छल तखन एहन काज रिकाडे तोड़ि देलक।" मोने मोन तs बड्ड प्रसन्न छलाह घूरन बाबूके अवस्थापर किंतु उपरसौं सांत्वना दैत बजलाह "बुझू तs किछु त बरकै बदमाशी केने हैत , तखने नै माइयोके बजाहटि छैन्ह।" बेचारे घूरन बाबू भरिमुहें ककरोसौं लाजे बजनाइयो छोड़ि देलैन्ह। दुनु प्राणी जाइ लेल उद्धत भेला तs कनिया डेराइत - डेराइत बजलीह "किच्छो अछि तs , अछि तs अपने बालक।की करबै आब जौं गलती कैये लेलक तs पैघ जकां , जखन माय-बाप छियै तs सुधार तs हमरे सभके करय परत नै। तs अपना संगे मुन्नालाल ओ जे कमरबा छैक तकरो संगे लs लिय ओ जे किदैन तोड़ि देलकै बौआ, तकरा ओ बना देत।" कनियाके तs तामसे ओ मारि-मारि कs छुटलाह। फेर चित्त शांत भेलैन्ह तs लगलैन्ह जे सलाह उचिते देलकै छौड़ा कs माय। तs  तीनू गोटे इसकूल पहुंचलाह। लाजे तs होइन जे फाटह हे धरती मैया! अपना शरणमे लs लिय कोन मुहें मास्साबके सामनामे जाएब ओ कि कहताह, कि नै। भयभीत स्वरमे धखाइते दरबानकेँ कहलखिन "मास्साबके कहिये जे आदितके मां-बाप आया है।" प्रिंसिपल सर जखनहि बुझल कि दौड़ल एलाह "ओ माइ गाॅड, कमाल है आइये - आइये , आप ही का इंतजार कर रहे थे हमलोग।" हुनका सभके बड्ड आदर सौं एकटा सुसज्जित कक्षमे लs एलाह। ओ आदित्यके चर्च केलखिन्ह तs मास्साब सुनबै नहि करथिन्ह। ओतs हिनका सभके एतेक सजल - धजल घरमे जतय लोक सभ खचाखच भरल रहय लs एलाह। बेचारे सोचलाह आई तs एतेक लोक कs आगू सातो पुरखाके उखाहि करताह ई मास्साब! आदितबोके नै देखै छियै कि ओकरो किछु समझैबतियै। हुनका दुनु गोटेके बुकोरि लागय लगलैन। ओ मास्साबके पकड़ि कs कात लs गेलाह आ बड्ड कातर स्वरमे बजलाह "कि करेंगे मास्साब ! कोड़िपछ्छू है  ने ताहि सs कनि बेसिये बदमास हो गया है। दू थापर मारेंगे तs तुरत्ते ठीक भs जाएगा। आपका उ कौन चीज है 'रेकाट,' तोड़ि दिया है तs हम कमार के भी संगे लाया हूं ; देखिए ई बहुते होसियार है  तुरत्ते ठीक करि देगा।" ई सुनि कs प्रिंसीपल सर हँसैत -हँसैत बताह भs गेलाह! हुनका फंक्शनबला रूममे लs गेलाह आ ओतय जतेक मेडल, ट्राॅफी, प्रशस्ति-पत्र सभ राखल छलै तकरा देखा कs बजलाह "इसमें से ज्यादातर आपके आदित्य ने एक साल में जीत कर एक रिकॉर्ड तोड़ा है, एक कीर्तिमान स्थापित किया है। आज का यह समारोह आप सब के सम्मान में रखा गया है और विद्यालय समिती की ओर से आदित्य की सारी फीस माफ की जाती है। यहां पर रिकार्ड तोड़ना मतलब बहुत बढ़िया काम किया है। इसके लिए आपको डरने की जरूरत नही है!" आब ओ सोचय लगलाह "आरौ तोरीके ई रिकार्ड तोड़यपर एते मानदान होई छै आ हम झुट्ठे एतेक परेशान भेलहुं। हमरो जे माय-बाप कनियो पढ़ोने रहितै तs ऐते जे बच्चाके गारि बात कहलियै , एतेक हंसीके पात्र बनलहुं से तs नै बनितहुं। अपन कनियोपर तामस उठलैन्ह जे ई तs आर निप्पट कमरबाके संगे लगा देलक! फेर भेलैन्ह जे जखन हम नै पढ़लहुं - गुनलहुं तs ई तs जानिये कs जनी-जाति एकरा के पढ़ौते! ई सोचिते अपन कनकिरबी सभपर धियान चलि गेलैन जे अपना संग जे अन्याय भेल सैह तs हमहुं अपन बुच्ची सभके नs पढ़ाकs कs रहल छी। आब अपन कोनो बच्चा संगे हम अन्याय नै होमय देब। जहिना चान सुरूजक जोत सभ ठाम पहुंचै छै तहिना शिच्छा सेहो सब ठाम पहुंचायब।" आ अनायासे आदित्यपर ममता उमड़ि परलैनि आ बच्चाके भरि पांजि कय पकड़ि लेलैथ दुनु गोटे! अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ममता कर्ण बरसात पिपहिया जक ाबाट तकैया प्राणी बरसात कहिया हायत मुँहमे फिफड़ी पड़ल अछि बर्तनके लम्म्मबा..... लाइन लागल अछि किनको गर्मीस हाल बेहाल किनको पियासे गला सुखल घंटा भैर बाद नल खुजत बर्तनके लाइन देखि सब चिंतामे अस्त-व्यस्त पुरूष सब परेशान डियूटी छुटि रहल अयछ महिला सब परेशान नेनाके छोड़ि आएल छी किछ बुजुर्गों नजरी आइब रहल छैथ जे चाण्डाल सन धुपमे अस्त-व्यस्त भ रहल छैथ किछ सरकारस शिकायत क रहल छैथ केहन बोरिंग कराक देलक सरकार जे सबटा सुखल पड़ल अयछ आपसी बहस अतेक तेज भय गेल कियो सरकारपर खुन्नस निकालै छैथ कियो भगवानक ेकोसय छैथ कियो पैसाबला बिल्डरके कोसय छैथ कि अतेकदुरमे एकटा तालाब छल जाहिमे हम गरीब नहाई सुनाई छलौं कतेको गरीबक सहारा तकरो इ अमिर लोक पाइट देलैथ उचाँ बिल्डिंग बनाक एक बुजुर्ग बिच बचाव केलैथ सरकार त बोरिंग करा देलैथ गर्मी चरमपर अयछ से सब सुखि गेल कनि इंतजार करु आयत बरसात फेर धरत ीभिजत फेर पानी भेटत आपसमे नय लड़ू कनि धिर धरु लिय नल खुजल सब पानी भरू। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। निर्मला कर्ण अग्निशिखा (धारावाहिक उपन्यास) वसुधाक हरिताभ आँचर अनेकों आकर, प्रकार, रँग, बिरंगक पुष्पसँs सज्जित देखनिहारके विमुग्ध करैत छल l विशाल वृक्ष एवँ लतागुल्मसँ आच्छादित गन्धमादन पर्वतपर स्थित कुमार वनक शोभा ओहुना अद्वितीय छल ताहिपर चन्दनक दीर्घाकार वृक्षक सुगन्धि अलौकिक स्वर्गीय आनंदक अनुभूति करबैत छल l समीपस्थ पर्वतसँ कलकल निनाद करैत वेगसँ उतरैत झरना अपन मधुर संगीतमय आवाजसँ वातावरणके विलक्षणता प्रदान करैत छल l किछुए दूरपर ब्रह्मपुत्र नदीक उद्गम स्थल छल जे आगू गेलाक बाद विशाल जलधारामे परिवर्तित भs गेल छल, ओकर दुग्ध-धवल फेनिल जल क्षीरसागरक भ्रान्ति उत्पन्न करइत छल l ओहि नदीक तटपर एक गोट पुरुष बहुत कालसँ अन्यमनस्क सन  बैसल छल l एहेन  निर्जन स्थानमे ई के थिक ? की कोनो योगी ? सामान्य जन एहेन निर्जन प्रान्तमे कोन प्रयोजन सs अछि l ओ कखनो-कखनो एकटा प्रस्तरक छोट-छोट-खण्ड उठा नदीक पाइनमे फेंकय आ पाइनमे उठल लहरि देखिविंहसै, पुनः गम्भीरताक आवरण ओकर मुख-मण्डलपर व्याप्त भय जाई l ओकर अस्त-व्यस्त केश गुच्छ बढ़ि कs जटाक रूप लय लेने छल l दाढ़ी एवँ मोछ सेहो बढ़ि कs साधु सन बुझना जाइत छल l शरीरक वस्त्र जीर्ण-शीर्ण मलिन अवस्थामे ओहि पुरुषक दुर्भाग्यक गाथा सुनबैत छल l आब ओ पुरुष कंकड़ फेंकि फेंकि श्रान्त भय गेल , तखनि ओ हठात पाइनमे उतरि गेल आ अपन दुनू हाथें पाइनके उछालैत पहिले विहुँसल ......फेर हँसल........ हँसैत चलि गेल l ओकर हँसी अब भयङ्कर अटटहासमे परिवर्तित भय गेल छल l हँसैत-हँसैत ओ पुरुष नदीसँ बाहर निकलि तीतले कपड़ामे एक दिशामे दौड़ गेल l ओकरा देखि प्रतीत होइत छल जेना ओकरा चिरकालसँs कोनो प्रियजनक प्रतीक्षा छल जेकर आवक सन्देश सुनि ओ स्वागतमे प्रेम-विह्वल भय मिलन हेतु भागल जाइत होय l कतेको काल धरि ओ ओहि वनप्रान्तमे अपसियांत भs दौड़ैत रहल आ फेर एक प्रस्तरशिला सँs चोटिल भय तृणच्छादित भूमिपर खसि परल l कतेको देरतक ओ भू-लुंठित रहल l संभवतः ओ चेतना हीन भय गेल छल l मन्थर गतिसँ बहैत पवन तीव्र-तीव्रसौं तीव्रतर भेल जाइत छल l नभ श्यामवर्णी घनसँ आच्छादित होमय लागल l अनगिनत जलद कुमार नभमे विचरण करय लागल l ओ जलद कुमार सूर्यदेवसँग नुका-छुपी खेलय लागल l आप सूर्यदेवके एहि चञ्चल कुमारसँ हारि-मानि नुकय परलैन l सूर्यदेवके नुकाइते वातावरणमे पूर्ण अन्धकार परिव्याप्त भय गेल l पहिले पृथ्वीक आँचरपर गुलाब जलसँ पाइनक फुहार पड़ल....... फेर मोट-मोट जलकण खसल एकर बाद मूसलाधार वर्षा प्रारम्भ भय गेल l सम्पूर्ण वनप्रान्त जलप्लावित होमय लागल l एतेक बर्षा जलसौं प्लावित होइतो ओ भूलुंठित पुरुष ओहिना भूमिपर परल रहल l बुझाइत छल जेना ओ चिरनिद्रामे लीन होय l आब वर्षा प्रायःसमाप्तिपर छल परञ्च ओहि पुरुषक शरीरपर वृक्षक पातसँs खसि-खसि एखनो वर्षाक जल-पतन चलि रहल छल l हठात ओहि पुरुषक आँखि फुजल ओ किछु क्षण भूमिपर ओहि मुद्रामे रहितहि अपन चारु दिशि आश्चर्यसौं देखलक फेर ओ उठि कs ठाढ़ भेल l ओ विकल भय करुण विलाप करय लागल l ओकर विलापक मध्य किछु अस्पष्ट ध्वनि मुँहसँ बाहर ओहि जन-शून्य वातावरणमे पसरैत रहल l -  "हाप्रिये | अहाँ कतs चलि गेलहुँ, अहाँ कियेक हमरा छोड़ि गेलहुँ l अहाँ घुरिकs त आउ कने, देखू अहाँ बिन हमर हाल केहेन भेल अछि l देखू अहाँक प्रतीक्षा करैत-करैत हम पूरा भींजि गेलहुँ l प्रिये अहाँ आबि जाऊ, अहाँ हमरा छोड़ि कs नहि जा सकैत छी l अहाँ कतs नुकायल छी, हम अहाँके तलाश करैत विकल छी l मुदा हम छोड़ब नहि हम अहाँक तलाश करिये धरि लेब" l एहि भाँति विलाप करैत ओ एम्हर-ओम्हर घुमैत आगाँ बढ़ैत रहल बहुत काल धरि l एक गुफाके बाहर राखल एक विशाल प्रस्तर-खण्डपर ओ बैसि गेल संभवतः आब ओ आर चलबामे असमर्थ छल मुदा ओकर रुदन थमल नहि | चलैत रहल ....चलैत ....रहल l क्रमशः अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। कंचन कंठ स्त्री - सज्जा-परंपरा-फैशन कहल जाइत छैक कि स्त्री के अनाज दियौ ओ छप्पन भोग व्यंजन बना देत, मकान दियौ,स्वर्ग सँ सुंदर घर बना देत! माने कि सुघड़ता, सुंदरताक पर्याय स्त्री! ताहूमे मैथिल ललना के त बाते अद्भुत! ओ त गोबरमाटिसँ बनल घरों के सुंदर सुंदर चित्रकारी कय नवल रुप प्रदान करयमे सक्षम छलीह तँ स्वयं के त जानिए क सुंदर बनबितथि! त ओहि क्रम में ओ अपनहुँ गात के रंग-बिरंगक प्रसाधन सँ सजायब शुरु कयल। दीप सँ करिखा लऽकऽ काजरि, त चानन सँ सुगंधि, फूलसँ रंग आ कि रंग-बिरंगक आभूषण बनेलीह। आ सेनूर बिना त कोनोहु शुभकाज नहि भ सकैत अछि! तऽ ताहि क्रममे ओ पटवासि/पटमासि/धासा बनाएब शुरु केने हएतीह! पटवासि शुभ अवसर पर कपाल पर सीथके केन्द्र बनाकए ओहि के चारुभर सुंदर सुंदर आकृति वा फूल बनाकए ओकरा सुशोभित करैछ। कपाल पर सेनूर ओ विभिन्न घोरुआ रंगक मदति सँ आ केशमे तीसी के पानिक मदति सँ रंरगबिरंगक कागतक फूल बनाकए ताहि पर भूसना सेनूर सँ सजाओल जाइत अछि; नवकनियाँ के विभिन्न पाबनि तिहारमे! ओनाहू मिथिलामे विवाहिता सभ अखरे (मात्र) सेनूर नहि लगबैत छथि, सदिखन तेल आ सेनूर संगहि लगाओल जाइत अछि कि ओ झखरय नहि। ताहिसँ मुखक शोभा बढ़ि जाइत छन्हि। एकटा अलगे तेज ओ सौंदर्य परिलक्षित होमय लगैत अछि। एखने जेना *बेरसाति/वटसावित्री,*मधुश्रावणी/मोसरामनी* पाबनि आओत त नवकनिया संगहि सभ बियाहलि स्त्रीगण माथ पर पटवासि बनबैत छथि आ अपन सौभाग्य पर भगवानक कृपा बनल रहैक आशीष मांगे छथि। पटवासि/पटमासि/धासा मुख्यतः ब्राह्मण ओ कायस्थ महिला सभमे प्रचलित अछि। ब्राह्मण में सीथ सँ सेनूर लगाकए गोल टीका जेकाँ लगाएल जाइछै तँ कायस्थमे सीथसँ लगाकए मेंहीं चित्रकारी जेकाँ कएल जाइत छैक।जाहिसँ मुखमुद्रा देदीप्यमान भऽ उठैत छैक। नवतुरिया महिला सभ फैशनक बयारमे सेनूर लगायब पुरातनपंथी बुझि तियागि रहल छथि। मुदा जे एखनहुँ एकरा महत्वपूर्ण मानय छथि से पूरा सीथ नहितए छोटछीने सेनूर अवश्य लगबय छथि। विदेशमे रहनिहारि महिला सभ घर अयला पर अपन दादी, माँ-पितियाइन सभसँ घोरुआ सेनूर बनबाकए ल जाइत छथि। आब तए लिक्विड सेनूर लिपस्टिक सनके डिबियामे सेहो भेटैत अछि! त ओकरा कतहु पर्समे राखिकए ल जाऊ! कोनो दिकदारीक गप नहि! बहुत महिला सभ आब एम एनसी आ कारपोरेट आफिस सभमे काज करैत छथि त हुनका सभके ड्रेसकोड मेन्टेन करैत सदिखन लगायब संभव नहि होइत छन्हि आउटफिटक हिसाबे! मुदा ओहो सभ पाबनि तिहार आ महत्वपूर्ण दिन सभपर बढ़िया सँ तैयार भ क जाइत छथि। महाराष्ट्र में गणपति उत्सव आ दशहरामे त रंग-बिरंगक कलरकोडके संग मैचिंग मिलाकए हँसैत-खिलखिलाइत बैग उठाकए आत्मविश्वास सँ ओ सौंदर्य सँ भरल ऑफिस जाइत महिला सभक रुप देखिते बनैत छैक। संपूर्ण वातावरणके अपन प्रभासँ ज्योतित क दै छथि जेना! आइक महिलाक आत्मविश्वास ओ सक्षमता देखि लोक छगुंतामे परि जाइत छथि कि जहिना एक हाथे ओ आफिसमे,फील्डमे, हास्पिटलमे, वायुयानमे काज करैत छथि तहिना घरमे अरिपन देब, पकमान बनाएब, पूजा-पाठ करब,अपन घरकेँ सभ सदस्यक साज सम्हारि तहिना कुशलतापूर्वक क रहलीह। कोरोनाकालमे त अपन समझदारी सँ घरक लोक केँ होमकोरेंटाइन करैत घरेसँ घर ओ आफिसक काज सम्हारैत सभकेँ एहि विकराल बीमारी सँ निकालि लएलीह अछि। जरुरति बस एतबे कि हम सभ हुनका पर विश्वास करी, यथासंभव सहयोग दी आ हुनकामे विश्वास राखि। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ........................................................................................................................ संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल  मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] Videha e-Learning पेटार (रिसोर्स सेन्टर) शब्द-व्याकरण-इतिहास MAITHILI IDIOMS & PHRASES मैथिली मुहावरा एवम् लोकोक्ति प्रकाश- रमाकान्त मिश्र मिहिर (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) डॉ. ललिता झा- मैथिलीक भोजन सम्बन्धी शब्दावली (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) मैथिली शब्द संचय MAITHILI DICTIONARY- RAMDEO JHA (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) ENGLISH MAITHILI COMPUTER DICTIONARY MAITHILI ENGLISH DICTIONARY अणिमा सिंह -Shishu_Geet_Khel_Anima_Singh डॉ. रमण झा मैथिली काव्यमे अलङ्कार    अलङ्कार-भास्कर आनन्द मिश्र (सौजन्य श्री रमानन्द झा "रमण")- मिथिला भाषाक सुबोध व्याकरण BHOLALAL DAS मैथिली सुबोध व्याकरण- भोला लाल दास राधाकृष्ण चौधरी- A Survey of Maithili Literature ........................................................................................................................ मूलपाठ तिरहुता लिपिक उद्भव ओ विकास (यू.पी.एस.सी. सिलेबस) राजेश्वर झा- मिथिलाक्षरक उद्भव ओ विकास (मैथिली साहित्य संस्थान आर्काइव) Surendra Jha Suman दत्त-वती (मूल)- श्री सुरेन्द्र झा सुमन (यू.पी.एस.सी. सिलेबस) प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) CIIL SITE ........................................................................................................................ समीक्षा सुभाष चन्द्र यादव-राजकमल चौधरी: मोनोग्राफ शिव कुमार झा "टिल्लू" अंशु-समालोचना डॉ बचेश्वर झा- B_JHA_Nibhand_Nikunj.pdf डॉ. देवशंकर नवीन- Adhunik_Sahityak_Paridrishya डॉ. रमण झा- भिन्न-अभिन्न प्रेमशंकर सिंह- मैथिली भाषा साहित्य:बीसम शताब्दी (आलोचना) डॉ. रमानन्द झा 'रमण' हिआओल अखियासल     CIIL SITE दुर्गानन्द मण्डल-चक्षु RAMDEO JHA दत्त-वतीक वस्तु कौशल- डॊ. श्रीरामदेवझा SHAILENDRA MOHAN JHA परिचय निचय- डॊ शैलेन्द्र मोहन झा ........................................................................................................................ अतिरिक्त पाठ पहिने मिथिला मैथिलीक सामान्य जानकारी लेल एहि पोथी केँ पढ़ू:- राधाकृष्ण चौधरी- मिथिलाक इतिहास फेर एहि मनलग्गू फाइल सभकेँ सेहो पढ़ू:- केदारनाथ चौधरी चमेलीरानी                         माहुर                          करार कुमार पवन पइठ (मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ कथा) (साभार अंतिका)       डायरीक खाली पन्ना (साभार अंतिका) याेगेन्द्र पाठक वियाेगी- विज्ञानक बतकही रामलोचन ठाकुर- मैथिली लोककथा SAHITYA AKADEMI http://sahitya-akademi.gov.in/publications/e-books.jsp http://sahitya-akademi.gov.in/general/Digitalbooks.jsp CIIL http://corpora.ciil.org/maisam.htm अखियासल (रमानन्द झा रमण) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI1.pdf जुआयल कनकनी- महेन्द्र http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI2.pdf प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI3.pdf सृजन केर दीप पर्व- सं केदार कानन आ अरविन्द ठाकुर http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI4.pdf मैथिली गद्य संग्रह- सं शैलेन्द्र मोहन झा http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI5.pdf JNU http://sanskrit.jnu.ac.in/maithili/index.jsp http://sanskrit.jnu.ac.in/student_projects/lexicon.jsp?lexicon=maithili ARCHIVE.ORG https://archive.org/details/%40vijay_deo_jha?&sort=-publicdate&page=2 VIDEHA MAITHILI BOOKS/ PICTURE-AUDIO-VIDEO ARCHIVE http://videha.co.in/new_page_15.htm https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ ALL INDIA RADIO DOORDARSHAN आकाशवाणी दूरदर्शन http://prasarbharati.gov.in/ http://newsonair.com/ https://doordarshan.gov.in/ आकाशवाणी मैथिली 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https://www.ilovemithila.com/  (online maithili journal) मैथिली साहित्य संस्थान https://www.maithilisahityasansthan.org/ https://www.maithilisahityasansthan.org/resources (online pdf of Reasearch Papers/ books) ........................................................................................................................ VIDEHA e-LEARNING YOUTUBE CHANNEL https://www.youtube.com/channel/UC4abVKqMj2pDWIAkXiOHp7A (अनुवर्तते) -गजेन्द्र ठाकुर विदेहक किछु विशेषांक:- १) हाइकू विशेषांक १२ म अंक, १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf          Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf       12.pdf २) गजल विशेषांक २१ म अंक,  १ नवम्बर २००८ Videha_01_11_2008.pdf       Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf         21.pdf ३) विहनि कथा विशेषांक ६७ म अंक, १ अक्टूबर २०१० Videha_01_10_2010        Videha_01_10_2010_Tirhuta             67 ४) बाल साहित्य विशेषांक ७० म अंक, १५ नवम्बर २०१० Videha_15_11_2010        Videha_15_11_2010_Tirhuta             70 ५) नाटक विशेषांक ७२ म अंक १५ दिसम्बर२०१० Videha_15_12_2010        Videha_15_12_2010_Tirhuta           72 ६) नारी विशेषांक ७७म अंक ०१ मार्च २०११ Videha_01_03_2011        Videha_01_03_2011_Tirhuta           77 ७) अनुवाद विशेषांक (गद्य-पद्य भारती) ९७म अंक Videha_01_01_2012 Videha_01_01_2012_Tirhuta           97 ८) बाल गजल विशेषांक विदेहक अंक १११ म अंक, १ अगस्त २०१२ Videha_01_08_2012        Videha_01_08_2012_Tirhuta           111 ९) भक्ति गजल विशेषांक १२६ म अंक, १५ मार्च २०१३ Videha_15_03_2013        Videha_15_03_2013_Tirhuta           126 १०) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक १४२ म, अंक १५ नवम्बर २०१३ Videha_15_11_2013        Videha_15_11_2013_Tirhuta           142 ११) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 १२) अरविन्द ठाकुर विशेषांक १८९ म अंक १ नवम्बर २०१५ Videha_01_11_2015 १३) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक १९१ म अंक १ दिसम्बर २०१५ Videha_01_12_2015 १४) विदेह सम्मान विशेषा‍क- २००म अ‍क १५ अप्रैल २०१६/ २०५ म अ‍क १ जुलाई २०१६ Videha_15_04_2016 Videha_01_07_2016 १५) मैथिली सी.डी./ अल्बम गीत संगीत विशेषांक- २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ Videha_01_01_2017 १६) मैथिली वेब पत्रकारिता विशेषांक VIDEHA 313 लेखकसं आमंत्रित रचनापर आम‍ंत्रित आलोचकक टिप्पणीक शृंखला १७) मैथिली बीहनि कथा विशेषांक-२ VIDEHA 317 १८) रामलोचन ठाकुर विशेषांक VIDEHA 319 १९) रामलोचन ठाकुर श्रद्धांजलि विशेषांक VIDEHA 320 १. कामिनीक पांच टा कविता आ ओइपर मधुकान्त झाक टिप्पणी विदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016 एडिटर्स चोइस सीरीज एडिटर्स चोइस सीरीज-१ विदेहक १२३ म (०१ फरबरी २०१३) अंकमे बलात्कारपर मैथिलीमे पहिल कविता प्रकाशित भेल छल। ई दिसम्बर २०१२ क दिल्लीक निर्भया बलात्कार काण्डक बादक समय छल। ओना ई अनूदित रचना छल, तेलुगुमे पसुपुलेटी गीताक एहि कविताक हिन्दी अनुवाद केने छलीह आर. शांता सुन्दरी आ हिन्दीसँ मैथिली अनुवाद केने छलाह विनीत उत्पल। हमर जानकारीमे एहिसँ बेशी सिहराबैबला कविता कोनो भाषामे नहि रचल गेल अछि। सात सालक बादो ई समस्या ओहने अछि। ई कविता सभकेँ पढ़बाक चाही, खास कऽ सभ बेटीक बापकेँ, सभ बहिनक भाएकेँ आ सभ पत्नीक पतिकेँ। आ विचारबाक चाही जे हम सभ अपना बच्चा सभ लेल केहन समाज बनेने छी। एडिटर्स चोइस सीरीज-१ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-२ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच ब्रेस्ट कैसरक समस्यापर विदेह मे मीना झा केर एकटा लघु कथा प्रकाशित भेल। ई मैथिलीक पहिल कथा छल जे ब्रेस्ट कैसर पर लिखल गेल। हिन्दीमे सेहो ताधरि एहि विषयपर कथा नहि लिखल गेल छल, कारण एहि कथाक ई-प्रकाशित भेलाक १-२ सालक बाद हिन्दीमे दू गोटेमे घोंघाउज भऽ रहल छल कि पहिल हम आकि हम, मुदा दुनूक तिथि मैथिलीक कथाक परवर्ती छल। बादमे ई विदेह लघु कथामे सेहो संकलित भेल। एडिटर्स चोइस सीरीज-२ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-३ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिलक किछु बाल कविता प्रकाशित भेल। बादमे हुनकर ३ टा बाल कविता विदेह शिशु उत्सवमे संकलित भेल जाहिमे २ टा कविता बेबी चाइल्डपर छल। पढ़ू ई तीनू कविता, बादक दुनू बेबी चाइल्डपर लिखल कविता पढ़बे टा करू से आग्रह। एडिटर्स चोइस सीरीज-३ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-४ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच जगदानन्द झा मनुक एकटा दीर्घ बाल कथा कहि लिअ बा उपन्यास प्रकाशित भेल, नाम छल चोनहा। बादमे ई रचना विदेह शिशु उत्सवमे संकलित भेल, ई रचना बाल मनोविज्ञानपर आधारित मैथिलीक पहिल रचना छी, मैथिली बाल साहित्य कोना लिखी तकर ट्रेनिंग कोर्समे एहि उपन्यासकेँ राखल जेबाक चाही। कोना मॊडर्न उपन्यास आगाँ बढ़ै छै, स्टेप बाइ स्टेप आ सेहो बाल उपन्यास। पढ़बे टा करू से आग्रह। एडिटर्स चोइस सीरीज-४ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-५ एडिटर्स चोइस ५ मे मैथिलीक "उसने कहा था" माने कुमार पवनक दीर्घकथा "पइठ" (साभार अंतिका) । हिन्दीक पाठक, जे "उसने कहा था" पढ़ने हेता, केँ बुझल छन्हि जे कोना अहि कथाकेँ रचि चन्द्रधर शर्मा ’गुलेरी’ अमर भऽ गेलाह। हम चर्चा कऽ रहल छी, कुमार पवनक "पइठ" दीर्घकथाक। एकरा पढ़लाक बाद अहाँकेँ एकटा विचित्र, सुखद आ मोन हौल करैबला अनुभव भेटत, जे सेक्सपीरिअन ट्रेजेडी सँ मिलितो लागत आ फराको। मुदा एहि रचनाकेँ पढ़लाक बाद तामस, घृणा सभपर नियंत्रणकेँ आ सामाजिक/ पारिवारिक दायित्वकेँ सेहो अहाँ आर गंभीरतासँ लेबै, से धरि पक्का अछि। मुदा एकर एकटा शर्त अछि जे एकरा समै निकालि कऽ एक्के उखड़ाहामे पढ़ि जाइ। एडिटर्स चोइस सीरीज-५ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-६ जगदीश प्रसाद मण्डलक लघुकथा "बिसाँढ़": १९४२-४३ क अकालमे बंगालमे १५ लाख लोक मुइला, मुदा अमर्त्य सेन लिखैत छथि जे हुनकर कोनो सर-सम्बन्धी एहि अकालमे नहि मरलन्हि। मिथिलोमे अकाल आएल १९६७ ई. मे आ इन्दिरा गाँधी जखन एहि क्षेत्र अएली तँ हुनका देखाओल गेल जे कोना मुसहर जातिक लोक बिसाँढ़ खा कऽ एहि अकालकेँ जीति लेलन्हि। मैथिलीमे लेखनक एकभगाह स्थिति विदेहक आगमनसँ पहिने छल। मैथिलीक लेखक लोकनि सेहो अमर्त्य सेन जेकाँ ओहि महाविभीषिकासँ प्रभावित नहि छला आ तेँ बिसाँढ़पर कथा नहि लिखि सकला। जगदीश प्रसाद मण्डल एहिपर कथा लिखलन्हि जे प्रकाशित भेल चेतना समितिक पत्रिकामे, मुदा कार्यकारी सम्पादक द्वारा वर्तनी परिवर्तनक कारण ओ मैथिलीमे नहि वरण् अवहट्ठमे लिखल बुझा पड़ल, आ ओतेक प्रभावी नहि भऽ सकल कारण विषय रहै खाँटी आ वर्तनी कृत्रिम। से एकर पुनः ई-प्रकाशन अपन असली रूपमे भेल विदेहमे आ ई संकलित भेल "गामक जिनगी" लघुकथा संग्रहमे। एहि पोथीपर जगदीश प्रसाद मण्डलकेँ टैगोर लिटरेचर अवार्ड भेटलनि। जगदीश प्रसाद मण्डलक लेखनी मैथिली कथाधाराकेँ एकभगाह हेबासँ बचा लेलक, आ मैथिलीक समानान्तर इतिहासमे मैथिली साहित्यकेँ दू कालखण्डमे बाँटि कऽ पढ़ए जाए लागल- जगदीश प्रसाद मण्डलसँ पूर्व आ जगदीश प्रसाद मण्डल आगमनक बाद। तँ प्रस्तुत अछि लघुकथा बिसाँढ़- अपन सुच्चा स्वरूपमे। एडिटर्स चोइस सीरीज-६ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-७ मैथिलीक पहिल आ एकमात्र दलित आत्मकथा: सन्दीप कुमार साफी। सन्दीप कुमार साफीक दलित आत्मकथा जे अहाँकेँ अपन लघु आकाराक अछैत हिलोड़ि देत आ अहाँक ई स्थिति कऽ देत जे समानान्तर मैथिली साहित्य कतबो पढ़ू अहाँकेँ अछौं नहि होयत। ई आत्मकथा विदेहमे ई-प्रकाशित भेलाक बाद लेखकक पोथी "बैशाखमे दलानपर"मे संकलित भेल आ ई मैथिलीक अखन धरिक एकमात्र दलित आत्मकथा थिक। तँ प्रस्तुत अछि मैथिलीक पहिल दलित आत्मकथा: सन्दीप कुमार साफीक कलमसँ। एडिटर्स चोइस सीरीज-७  (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-८ नेना भुटकाकेँ रातिमे सुनेबा लेल किछु लोककथा (विदेह पेटारसँ)। एडिटर्स चोइस सीरीज-८ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-९ मैथिली गजलपर परिचर्चा (विदेह पेटारसँ)। एडिटर्स चोइस सीरीज-९ (डाउनलोड लिंक) जगदीश प्रसाद मण्डल जीक ६५ टा पोथीक नव संस्करण विदेहक २३३ सँ २५० धरिक अंकमे धारावाहिक प्रकाशन  नीचाँक लिंकपर पढ़ू:- Videha_15_05_2018 Videha_01_05_2018 Videha_15_04_2018 Videha_01_04_2018 Videha_15_03_2018 Videha_01_03_2018 Videha_15_02_2018 Videha_01_02_2018 Videha_15_01_2018 Videha_01_01_2018 Videha_15_12_2017 Videha_01_12_2017 Videha_15_11_2017 Videha_01_11_2017 Videha_15_10_2017 Videha_01_10_2017 Videha_15_09_2017 Videha_01_09_2017 विदेह ई-पत्रिकाक  बीछल रचनाक संग- मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ रचनाक एकटा समानान्तर संकलन: विदेह: सदेह: १ (२००८-०९) देवनागरी विदेह: सदेह: १ (२००८-०९) तिरहुता विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) देवनागरी विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) तिरहुता विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०)देवनागरी विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०) तिरहुता विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०)देवनागरी विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०) तिरहुता विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]देवनागरी विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]  तिरहुता विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]- दोसर संस्करण देवनागरी विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ]देवनागरी विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ] तिरहुता विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ]देवनागरी विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ]  तिरहुता विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ]देवनागरी विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ] तिरहुता विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ]देवनागरी विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ] तिरहुता विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ]देवनागरी विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ] तिरहुता विदेह:सदेह ११ विदेह:सदेह १२ विदेह:सदेह १३ The readers of English translations of Maithili Novel "sahasrabadhani" and verse collection "sahasrabdik chaupar par" has intimated that the English translation has not been able to grasp the nuances of original Maithili. Therefore the Author has started translating his Maithili works in English himself. After these translations are complete these would be the official translations authorised by the Author of the original works.-Editor Maithili Books can be downloaded from: https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ विदेह सम्मान: सम्मान-सूची (समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार सहित) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। सूचना/ घोषणा १ "विदेह सम्मान" समानान्तर साहित्य अकदेमी पुरस्कारक नामसँ प्रचलित अछि। "समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार" (मैथिली), जे साहित्य अकादेमीक मैथिली विभागक गएर सांवैधानिक काजक विरोधमे शुरु कएल छल, लेल अनुशंसा आमन्त्रित अछि। अनुशंसा २०१९ आ २०२० बर्ख लेल निम्न कोटि सभमे आमन्त्रित अछि: १) फेलो २)मूल पुरस्कार ३)बाल-साहित्य ४)युवा पुरस्कार आ ५) अनुवाद पुरस्कार। अपन अनुशंसा ३१ दिसम्बर २०२० धरि २०१९ पुरस्कारक लेल आ ३१ मार्च २०२१ धरि २०२०क पुरस्कारक लेल पठाबी। पुरस्कारक सभ क्राइटेरिया साहित्य अकादेमी, दिल्लीक समानान्तर पुरस्कारक समक्ष रहत, जे एहि लिंक sahitya-akademi.gov.in पर उपलब्ध अछि। अपन अनुशंसा editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २ “मिथिला मखान” फिल्म देखू मात्र १०१ टाकामे। Android App “BEJOD” download करू वा जाउ www.bejod.in पर, signup करू, एकटा ईमेल जायत, अपन ईमेल खोलू आ ओकरा क्लिक करू अहाँक अकाउंट एक्टीवेट भय जायत। आब मिथिला मखान रेण्ट पर लिअ, डेबिट कार्डसँ १०१ टाका अॉनलाइन पेमेंट करू आ फिल्म देखू। ३ विदेह अपन आगामी अंक (२०२१ क प्रारम्भमे) श्री रामलोचन ठाकुर पर विशेषांक निकालबाक नेयार केने अछि। हुनका सम्बन्धी रचना आमंत्रित अछि (संस्मरण, साक्षात्कार, समीक्षा आदि) जे ३१ दिसम्बर २०२० धरि editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाओल जा सकैत अछि। विदेह पेटारक अन्तर्गत (पोथी डाउनलोड साइट) मे http://www.videha.co.in/new_page_15.htm  हुनकर मौलिक, अनूदित आ सम्पादित रचना फ्री पी.डी.एफ. डाउनलोड लेल उपलब्ध अछि। विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम्: VIDEHA: AN IDEA FACTORY (c)२००४-२०२१. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHAसम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: डॉ उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम वि‍लास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक -स्त्री कोना- इरा मल्लिक। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि)editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि। एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै, आ से हानि-लाभ रहित आधारपर छै आ तैँ ऐ लेल कोनो रॊयल्टीक/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै। तेँ रॉयल्टीक/ पारिश्रमिकक इच्छुक विदेहसँ नै जुड़थि, से आग्रह। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत।  एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-2021 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। ५ जुलाई २००४ केँ http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA वि  दे  ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् 'विदेह' ३२४ म अंक १५ जून २०२१ (वर्ष १४ मास १६२ अंक ३२४)

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