विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA ISSN 2229-547X VIDEHA 'विदेह' ३२५ म अंक ०१ जुलाई २०२१ (वर्ष १४ मास १६३ अंक ३२५) १. गजेन्द्र ठाकुर- संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल सेहो] [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] [FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI ALSO] २. गद्य २.१.जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’- आँखिमे चित्र हो मैथिलीकेर (आत्मकथा) २.२.रबीन्द्र नारायण मिश्र- लजकोटर (धारावाहिक उपन्यास) २.३.रमा नाथ मिश्र- कहानी-- पुनर्जन्म २.४.नीरज कर्ण- बीहनि कथा- "छुच्छे" ३. पद्य ३.१.जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’- गजल ३.२.आशीष अनचिन्हार- २ टा गजल ३.३.मुन्ना जी- बाल कविता- सुसंस्कार ४.स्त्री कोना (सम्पादक- इरा मल्लिक) ४.१.निर्मला कर्ण- अग्निशिखा (धारावाहिक उपन्यास) ४.२.पूजा झा- उलाहना Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Books/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाउ। VIDEHA ARCHIVE विदेह पेटार View Videha googlegroups (since July 2008) view Videha Facebook Official Group (since January 2008)- for announcements १. गजेन्द्र ठाकुर ........................................................................................................................ ........................................................................................................................ [संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री] [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल सेहो] [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] [FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI ALSO] यू. पी. एस. सी. (मेन्स) २०२० ऑप्शनल: मैथिली साहित्य विषयक टेस्ट सीरीज यू.पी.एस.सी. क प्रिलिमिनरी परीक्षा २०२० सम्पन्न भऽ गेल अछि। जे परीक्षार्थी एहि परीक्षामे उत्तीर्ण करताह आ जँ मेन्समे हुनकर ऑप्शनल विषय मैथिली साहित्य हेतन्हि तँ ओ एहि टेस्ट-सीरीजमे सम्मिलित भऽ सकैत छथि। टेस्ट सीरीजक प्रारम्भ प्रिलिम्सक रिजल्टक तत्काल बाद होयत। टेस्ट-सीरीजक उत्तर विद्यार्थी स्कैन कऽ editorial.staff.videha@gmail.com पर पठा सकैत छथि, जँ मेलसँ पठेबामे असोकर्ज होइन्हि तँ ओ हमर ह्वाट्सएप नम्बर 9560960721 पर सेहो प्रश्नोत्तर पठा सकैत छथि। संगमे ओ अपन प्रिलिम्सक एडमिट कार्डक स्कैन कएल कॉपी सेहो वेरीफिकेशन लेल पठाबथि। परीक्षामे सभ प्रश्नक उत्तर नहि देमय पड़ैत छैक मुदा जँ टेस्ट सीरीजमे विद्यार्थी सभ प्रश्नक उत्तर देताह तँ हुनका लेल श्रेयस्कर रहतन्हि। विदेहक सभ स्कीम जेकाँ ईहो पूर्णतः निःशुल्क अछि।- गजेन्द्र ठाकुर संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सर्विसेज (मुख्य) परीक्षा, २०२० मैथिली (ऐच्छिक) लेल टेस्ट सीरीज/ प्रश्न-पत्र- १ आ २ TEST SERIES-1 TEST SERIES-2 [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल/ FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI] NTA_UGC_NET_MAITHILI_01 NTA_UGC_NET_MAITHILI_02 NTA_UGC_NET_MAITHILI_03 (श्री शम्भु कुमार सिंह द्वारा संकलित) Videha e-Learning MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) UPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS BPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. (ऐच्छिक) मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. (अनिवार्य) मैथिली प्रश्नपत्र- बी.पी.एस.सी.(ऐच्छिक) मैथिलीक वर्तनी १ भाषापाक २ मैथिलीक वर्तनीमे पर्याप्त विविधता अछि। मुदा प्रश्नपत्र देखला उत्तर एकर वर्तनी इग्नू BMAF001 सँ प्रेरित बुझाइत अछि, से एकर एकरा एक उखड़ाहामे उनटा-पुनटा दियौ, ततबे धरि पर्याप्त अछि। यू.पी.एस.सी. क मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेल सेहो ई पर्याप्त अछि, से जे विद्यार्थी मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेने छथि से एकर एकटा आर फास्ट-रीडिंग दोसर-उखड़ाहामे करथि| IGNOU इग्नू BMAF-001 ........................................................................................................................ MAITHILI (OPTIONAL) TOPIC 1 [Place of Maithili in Indo-European Language Family/ Origin and development of Maithili language (Sanskrit, Prakrit, Avhatt, Maithili) भारोपीय भाषा परिवार मध्य मैथिलीक स्थान/ मैथिली भाषाक उद्भव ओ विकास (संस्कृत, प्राकृत, अवहट्ट, मैथिली)] TOPIC 2 (Criticism- Different Literary Forms in Modern Era/ test of critical ability of the candidates) TOPIC 3 (ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददास सिलेबसमे छथि आ रसमय कवि चतुर चतुरभुज विद्यापति कालीन कवि छथि। एतय समीक्षा शृंखलाक प्रारम्भ करबासँ पूर्व चारू गोटेक शब्दावली नव शब्दक पर्याय संग देल जा रहल अछि। नव आ पुरान शब्दावलीक ज्ञानसँ ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददासक प्रश्नोत्तरमे धार आओत, संगहि शब्दकोष बढ़लासँ खाँटी मैथिलीमे प्रश्नोत्तर लिखबामे धाख आस्ते-आस्ते खतम होयत, लेखनीमे प्रवाह आयत आ सुच्चा भावक अभिव्यक्ति भय सकत।) TOPIC 4 (बद्रीनाथ झा शब्दावली आ मिथिलाक कृषि-मत्स्य शब्दावली) TOPIC 5 (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोरिक गाथामे समाज ओ संस्कृति) TOPIC 6 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- विद्यापति) TOPIC 7 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- पद्य समीक्षा- बानगी) TOPIC 8 (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोक गाथा नृत्य नाटक संगीत) TOPIC 9 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- यात्री) TOPIC 10 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली रामायण) TOPIC 11 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली उपन्यास) TOPIC 12 (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- शब्द विचार) TOPIC 13 (तिरहुता लिपिक उद्भव ओ विकास) TOPIC 14 (आधुनिक नाटकमे चित्रित निर्धनताक समस्या- शम्भु कुमार सिंह)् TOPIC 15 (स्वातंत्र्योत्तर मैथिली कथामे सामाजिक समरसता- अरुण कुमार सिंह) TOPIC 16 (यू. पी.एस.सी. मैथिली प्रथम पत्रक परीक्षार्थी हेतु उपयोगी संकलन, मैथिलीक प्रमुख उपभाषाक क्षेत्र आ ओकर प्रमुख विशेषता, मैथिली साहित्यक आदिकाल, मैथिली साहित्यक काल-निर्धारण- शम्भु कुमार सिंह) TOPIC 17 (मैथिली आ दोसर पुबरिया भाषाक बीचमे सम्बन्ध (बांग्ला, असमिया आ ओड़िया) [यू.पी.एस.सी. सिलेबस, पत्र-१, भाग-“ए”, क्रम-५]) TOPIC 18 [मैथिली आ हिन्दी/ बांग्ला/ भोजपुरी/ मगही/ संथाली- बिहार लोक सेवा आयोग (बी.पी.एस.सी.) केर सिविल सेवा परीक्षाक मैथिली (ऐच्छिक) विषय लेल] ........................................................................................................................ GENERAL STUDIES (PRELIMINARY & MAINS) GS (Pre) TOPIC 1 GS (Mains) NCERT-ENVIRONMENT CLASS XI-XII NCERT PDF I-XII TN BOARD PDF I-XII ALL INDIA RADIO ENGLISH NEWS ALL INDIA RADIO NEWS ARCHIVE ALL INDIA RADIO TALKS AND CURRENT AFFAIRS RAJYA SABHA TV NEWS DISCUSSIONS OTHER OPTIONALS IGNOU eGYANKOSH (अनुवर्तते) -गजेन्द्र ठाकुर २. गद्य २.१.जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’- आँखिमे चित्र हो मैथिलीकेर (आत्मकथा) २.२.रबीन्द्र नारायण मिश्र- लजकोटर (धारावाहिक उपन्यास) २.३.रमा नाथ मिश्र- कहानी-- पुनर्जन्म २.४.नीरज कर्ण- बीहनि कथा- "छुच्छे" जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’ आँखिमे चित्र हो मैथिलीकेर ( आत्मकथा ) 14.दर्शन : अग्निदेवक एकटा खुशीक समाचार प्राप्त भेल जे बैंकक प्रतियोगिता परीक्षामे सफल भेलहुँ | मुजफ्फरपुर क्षेत्रमे पन्द्रह गोटेक चयन भेल रहै, पन्द्रहममे हमर नाम रह्य | बहुत हर्षक बात छलै | थोड्बे दिनमे एकटा दुखद समाचार भेटल जे एकटा बेटी जन्म लेलनि आ छठिहारक प्रात देह छोडि देलनि | द्विरागमन नहि भेल छल, विवाहक तेसर साल हेबाक परम्परा छलै | ओहि समय धरि हमरा नोकरी भेटि जेबाक आशा छल | द्विरागमनक दिन तय भ’ गेलैक, मुदा बहालीक चिटठी नहि आयल | हमरासं छोट तीनटा बहिन छथि | दू गोटेक बिदागरी भ’ गेल छलनि,आबि गेल छलीह | सभसं छोट बहिनक द्विरागमन नहि भेल छलनि | किछु और बिदागरी होयब शेष छलैक | द्विरागमन दिन किछु फोटो लेबक हेतु मधुबनीसँ बीस रुपैया भाड़ापर एकटा कैमरा अनलहुँ | हमरा संग हमर अनुज जाएबला छलाह | सासुर जेबासँ पहिने एकटा दसटकही भजेबाक लेल गामक चौक पर गेल छलहुँ | हाइ स्कूल लग चाहक दोकानपर चाह पीबि रहल छलहुँ | संगमे एकटा भाइ साहेब छलाह जे हाइ स्कूलमे शिक्षक छलाह | हम सभ द्विरागमनक विषयमे गप क’ रहल छलहुँ | सडकसं पच्छिम पोखरिक भीड़पर किछु गोटेकें दौड़ैत देखलिऐ | किछु हल्ला सेहो शुरू भेलै | ‘आगि लागि गेलै’ हल्ला करैत लोक भागल जा रहल छल | हम सभ सडकपर आबि देखलिऐ पूब दिस त आगिक प्रचण्ड रूपक आभास भेल | भाइ साहेब कहलनि, हौ,लगैए ई आगि भरिसक ककनामे छै | कहलियनि, हमरा त लगैए जेना लगेमे होइ | भाइ साहेब कहलनि, अपन सबहक भगबती एते कमजोर नै छथि, चलह,चाह पीबह | चाह पीबि जखन सडकपर आबि फेर तकलिऐ पूब दिस त ऐ बेर धधरा बहुत लग स्पष्ट भेल | कहलियनि, भाइ साहेब, ई त बहुत लग बुझाइए | ओम्हरसँ एक आदमी दौड़ैत आबि रहल छल, ओ कहलक, आगि अहीं सबहक टोलमे अछि | भाइ साहेब हमरा साइकिलक पाछाँ कैरियरपर बैसलाह | हम सभ भगलहुँ टोल दिस | पछबाइ टोलमे रही त एक गोटे कहलनि, अहीं सबहक घरमे धेने अछि | साइकिल परसँ उतरि गेलहुँ | कहलियनि भाइ साहेब, आब स्थिर भ’ जाह, आब जखन घरमे आगि पकड़ि लेलकै, त हम सभ की क’ सकैत छी | साइकिल गुड़कबैत हम सभ झटकारने टोलमे पहुँचलहुँ | एक गोटेक दरबज्जापर साइकिल राखि अपन घर दिस तकलहुँ | एहेन दृश्य एतेक लगसँ ऐसँ पहिने कहियो नहि देखने रही | एक पतियानीसँ घर सभ जरि रहल छल | लोक असहाय भेल दूर हटिक’ अपन-अपन घर जरैत देखि रहल छल | जकर घर बाँचल छलै, ओ सभ अपन-अपन चारपर पानि छिटबाक जोगारमे लागल छल | भाइ साहेबक पत्नी नैहर गेल छलथिन | घरमे जंजीर आ ताला लागल छलै, किछु नहि बँचि सकलनि | हुनका दुआरिपर किछु कपड़ा छलै, हुनकर भगिनी कपड़ा समेटिक’ बगलक खेतमे फेकि देलकै | कपड़ामे एकटा बच्चा छलै, से चिचिया उठल तखन देखलकै त चिन्हलकै जे बच्ची( हमर छोट बहिन )क एक बरखक बच्चा अशोक छलै | बच्ची ओहि आंगन बच्चाकें खेलबैत गेल छल, सूति रहलै, त हुनके दुआरिपर कपड़ासं ढँकिक’ अपना आंगन आबि गेल छल | एत’ आगि लगबासँ पहिने घरक सामान सभ निकालिक’ बाहर फेक’ लागल छल, बच्चा मोन पड़लै त भागल ओहि आंगन, हुनका दुआरिपर बच्चाकें नहि देखि बेचैन भेल, मुदा किछुए पलमे खेतमे बच्चाकें पाबि ओकरा नेने भागल अपना आंगन दिस | अपना आंगन जेबाक रस्ता अग्नि देवता बन्द क’ देने छलथिन त घरक सभ गोटेक संग घरक पूब परती खेतमे स्थिर भ’ गेलीह | भाइ साहेब बहुत उद्विग्न छलाह | घरमे की कत’ राखल छलनि,से हुनको नहि बूझल रहनि | आब कोनो उपाय नहि छलनि किछु बचा सकबाक | घरसँ किछु दूर हटिक’ खेते-खेते अपना घरक पूब पहुँचलहुँ त सभ गोटेकें सुरक्षित देखि संतोष भेल | घरपर हमर छोट दू टा अनुज छलाह, एकटा बारह बरखक, दोसर पाँच बरखक | हमरासँ छोट तीनू बहिन छलीह, माए छलीह, बाबू छलाह | ई सभ गोटे बहुत सामानकें घर आ दरबज्जासँ निकालिक’ खेतमे फेकि देने छलाह | टेबुल, कुरसी,पेटी,बाकस, कपड़ा, वर्तन आ किछु अनाज बचा लैत गेल छलाह | सभसँ नीक बात हमरा लागल जे लोक सभ सुरक्षित छल, भागिन सेहो बचि गेल छल | मधुबनीसँ पानिबला टैंकर अयबासँ पहिने घर सभ जरि गेल छल | टैंकर आएल त जरल खाम्ह सबहक आगि मिझौलक | से होइत-होइत साँझ भ’ गेलै | कय टा समस्या ठाढ़ भ’ गेलै | ओकर प्राते द्विरागमन आब संभव नै छलै | बारह दिन बाद एकटा दिन छलै | ओकर बाद दिन नै छलै | मुदा, काल्हि द्विरागमन नै हेतै, ई समाद ल’ क’ ककरा पठाओल जाए लदारी | एक गोटे गेलाह रहिका | मामा रहिका हाइ स्कूलमे सहायक प्रधानाध्यापक छलाह | हुनका सुचित कएल गेलनि | मामा साइकिलसँ गेलाह लदारी | ओत’ गीत-नाद चलि रहल छलै | लोक हमर सबहक प्रतीक्षा क’ रहल छल | मामाकें देखिक’ लोक चिन्तामे पड़ि गेल | मामा सभ समाचार कहलखिन | मामा दोसर दिनक सूचना दैत रहिका घूमि गेलाह | सबेरे किछु बांस, खढ़, साबेक जौर आ किछु खाद्य सामग्री ल’क’ एकटा टायर गाड़ी आएल लदारीसँ | मामा गामसँ सेहो किछु आएल | हमर छोट बहिनक सासुर लखनपट्टीसँ श्रम दान करय किछु गोटे एलाह | अपन बँसबिट्टीसँ सेहो किछु बाँस कटाओल गेल | जल्दी-सँ-जल्दी दूटा घर तैयार करबाक प्रयास भेल | मधुबनीसँ शफीकुल्लाह अंसारी,कांग्रेस पार्टीक विधायक घरक सभ सदस्य लेल हैंडलूमक कपड़ा ल’क’ एलाह | किछु आर्थिक मदति सेहो केलखिन | पुबाइ टोलसँ बलदेव बाबू ओकील साहेब, पछ्बाइ टोलसँ हरी बाबू, मास्टर साहेब आ और लोक सभ ओहि दुरदिनमे मदति करबाक लेल सोझाँ आबि गेलाह | बहुत गोटेक सहयोगसँ दुरदिन काटब आसान भ’ गेल | जत’ पन्द्रह हाथक दरबज्जा छल ओहि ठाम एकटा एकचारी ठाढ़ भेल | जेना-तेना एकटा भनसा घर तैयार भेल | जत’ गठुल्ला छल ओत’ ओतबहि टा कोहबर घर तैयार भेल | बारह दिनक बाद कोठाबला घरसँ आबि बच्चीकें अही कोहबरमे मास दिन बिताब’ पड़लनि | मास दिनक बाद दच्छिन दिस एकटा नमहर घर रहबालेल तैयार भेल आ ओहिमे द्विरागमनमे भेटल पलंग राखल गेल त’ ओहि घरमे जेबाक आ ओहि पलंगपर विश्राम करबाक अवसर भेटलनि | अगिलगीसँ हानि ई भेलै जे छओ मास धरि लोक घरहटमे लागल रहल, लाभ ई भेलै जे पहिल बेर लोक गम्भीरतासँ ईंटाबला घरक कल्पना केलक | आ एकर श्रेयक हकदार वैह अबोध धिया-पूता सभ छल जे चारि घरवासीबला हमर पुरना आंगनक पतोइसँ छाड़ल गठुल्लामे भगवानक पूजा करैत काल सलाइ खरडिक’ अगरबत्ती लेसि रहल छल, जे समयपर कियो देखि नहि सकलै | ओ अबोध सभ नै जनैत छल जे भगवानक पूजा केलासँ आगि पकडि लेतै आ एतेक घर जरि जेतै | सत कही त बहुत चेतन लोक सभ, बहुत पढल-लिखल लोक सभ त सभटा जानियो क’ एकर चिन्ता नहि करैत छथि जे पूजाक नामपर जे प्रदर्शन कएल जा रहल अछि ओइसँ ककरो किछु क्षति त ने भ’ रहल छै | धिया-पूता त जैह देखैत अछि, सैह सिखैत अछि, वैह करैत अछि | ( क्रमशः ) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। रबीन्द्र नारायण मिश्र लजकोटर (धारावाहिक उपन्यास) २३म खेप नीरज दिल्लीमे उच्च अधिकारी छथि । शुरुएसँ दिल्लीमेरहलाह । एहीठाम पढ़ाइ-लिखाइ सेहो भेलनि । प्रतियोगिता परीक्षा पास कए एतहि नौकरी सेहो भए गेलनि । कालेजक समयसँ एकटा सहपाठीक संगे दोस्ती छलनि ।ओ ओतहिडाक्टरी करैत छलीह । दुनूगोटे आपसी सहमतिसँ बिआह करए चाहलथि।प्रस्ताव पिता लग गेलनि । ओ एहि प्रस्तावसँ सहमत नहि रहथि । अपनाभरि बहुत बुझेबाक प्रयास केलथि मुदा नीरज अड़ल रहथि ।नीरज असगरे छलाह । दोसर भाए-वहिन केओ नहि । पिता बहुत आश लगा कए खेत बेचि-बेचि पढ़ओने रहथिन। सोचने रहथि नीक कुल-शील देखिकए बउआक बिआह करब । मुदा भेल उल्टे । बरदास्त नहि कए सकलाह । एहि दुखसँ बृंदावन चलि गेलाह । किछुए दिनक बाद हृदयाघातसँ हुनकर देहावसान भए गेलनि ।पिताक आकस्मिक निधनसँ नीरजकेँ बहुत कष्ट भेलनि । दुनू व्यक्तिमे रहि-रहि कए एहिबात लए विवाद भए जानि। "तोरे चलते हमर पिताक देहान्त भए गेल "-नीरज बेर-बेर बाजथि । आपसी कलह बढ़िते गेल । एही बीचमे हुनकासभकेँ एकटा कन्या भेलनि-लता । किछुदिन तँ ओ सभ लताक पालन-पोषण करैत रहलाह मुदा आंतरिक मतभेद रहि-रहि कए जोर मारैत रहल । अंततोगत्वा ओ सभ आपसी सहमतिसँ फराक भए गेलाह । लता पिता संगे रहि गेलीह आ हुनकर पत्नी विदेश चलि गेलीह । ककरासंगे गेलीह ,कतए गेलीह तकरा बारेमे केओ किछु,केओ किछु अनुमान लगबैत रहल । क्रमशः लोकसभ एहिबातकेँ बिसरि गेल । मुदा लता अपन माए बिना सदरिकाल व्याकुल रहैत छलीह । नीरज बहुत प्रयास करथि जे ओकरा कोनो कष्टनहि होइक मुदा से कोना संभव छल? माएक स्थान केओ कोना लए सकैत छल?अस्तु,लता सदिखन अपनामे एकटा अभावक अनुभव करैत छलीह । हमरा ई गप्प-सप्प बहुत बादमे बुझाएल जखन कि लता हमर डेराकेँ असगर पाबि कए बेर देर-सवेर आबि जाइत छलीह । "अहाँ एना असगर आबि जाइत छी । केओ किछु कहैत नहि अछि की?" " हमरा के अछि जे किछु कहत?" " सेकिएक?" "माए हमरासभकेँ छोड़ि कतहुँ विदेश चलि गेलीह । पिताजीकेँ अपनेसँ फुर्सति नहि छनि ।इसकूल-कालेजमे नाम लिखा देब आ खूबकए जेबीमे पाइ भरि देब कोनो समाधान नहि छैक । बच्चाकेँ तँ माए-बापक सामिप्य चाही, ओकर संस्कार चाही । से बात बुझनाहरि हमर माए नहि भेलीह । हुनको किछु मजबूरी रहल हेतनि ।" से सभ कहैत -कहैत लताक आँखि नोरसँ भरि गेलनि ।हमरा अफसोच होबए लागल जे बेकारे ई गप्प-सप्पकेँ सह देलहुँ। ओहि राति कतबो बुझाबक प्रयास केलहुँ ओ अपन घर वापस नहि गेलीह । हम बहुत परेसान भए गेल रही । लताक पिताकेँ पता लगतनि तँ ओ की सोचताह? कहीं हमरेपर ने बिगड़ि जाथि? ई बात हम लताकेँ कहबो केलिअनि । "अहाँ बेकारे परेसान छी । हुनका होश छनि जे किछु कहताह । आइ कैक दिनसँ कोनो अता-पता नहि अछि । एतेकटा घरमे असगर रहैत-रहैत मोन उबि गेल तँ एतए आबि गेलहुँ ।" आब की बजितहुँ?गुम्म पड़ि गेलहुँ । लताक मनोदशा देखि हम चिंतामे पड़ि गेलहुँ । गाम-घरमे गरीबी जरूर छैक मुदानेनासभ एना अनाथ भेल नहि रहैत अछि।अछैते माए-बापकेँ ई सभ केहन सुन्न जिनगी जीबाक हेतु विवश अछि । गाममे हमसभ केना कबड्डी खेलाइ,गेनखेली करी,जितिआ पाबनिमेभोरहरबामे चुरा-दही खा कए भोरे धिआपूतासभकेँ संगोर कए खेलधूप करी,दसमीक शुरु होइते केना घरे-घर ढ़ोलिआ हकार दैत छल । समय केना बीतए पता नहि चलैत छल ।मुदा ई महानगर थिक । ऐहिठाम ऊपर किछु,भीतर किछु । जँ सतर्क नहि छी तँ आँखि बंद आ डिब्बा गायब । के कतए धक्का दए आगु बढ़ि जाएत तकर कोनो ठेकान नहि । जकर देह भरल छैक तकर मोनमे भम्म पड़ैत छैक ।केओ सोचिओ सकैत छल जे नीरजसन संभ्रान्त व्यक्तिक घरक ई हालत छैक? जे ओकर एक मात्र संतान सिनेह बिना विक्षिप्त भेल बौआ रहल छैक?आओर ओ अपने तँ कहि नहि कोन हालमे अछि? तकरबाद हम लताकेँ किछु नहि सकलिऐक । एकहि खाटपर चुक्कीमाली बैसल हमसभ भोर कए देने रही । भोर होइतहि लता अपन घर दिस चलि गेलीआओरहम अपन काजपर। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। रमा नाथ मिश्र कहानी-- पुनर्जन्म
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ई कहानी आ ऐ कहानी के सबटा पात्र एवं घटना पूर्णत: कल्पित अछि।
********************************* पटना कौलेज मे गरमी छुट्टी से ठीक एक दिन पहिने टीचर्स रूम मे प्रोफेसर सब गप- सप मे लागल छलाह। एक मासक छुट्टीक खुशी सभक चेहरा पर स्पष्ट देखा पड़ै छलनि। गप्पे-गप्पे मे मनोविज्ञान के प्रोफेसर बिन्देश्वरी बाबू बजलाह, " अहाँ सब के बूझल अछि , मनुक्खक पुनर्जन्म होई छै?" केशव राय ,इतिहास के प्रोफेसर बजलाह, " एहेन भ नै सकैये।" बिन्देश्वरी बाबू कहलखिन्ह ," हम एहि विषय पर रिसर्च क रहल छी।" अँग्रेजी के प्रोफेसर दिनेश सिंह कहलखिन," ओना सुनै मे ठीके पुनर्जन्म के बात कपोल कल्पना लगै छै। लेकिन हमरा एकटा सत्य घटना बूझल अछि। सब आश्चर्य से दिनेश सिंह दिश तकैत पुछलखिन, "केहेन सत्य घटना?" दिनेश बाबू कहलखिन," पैंतालीस बर्ष पूर्व अही कौलेज के छात्र - रमेश त्रिपाठी आ छात्रा - कुसुमा फुकन के कहानी। सभक आग्रह पर दिनेश बाबू कहल खिन ठीक छै, सुनू । ******** ***** ******* सब नि:शब्द आ एकाग्र भ के कहानी सुन लगला। आई से पैंतीस बर्ष पहिने कौलेज सब मे एडमिशन के भीड़ लागल रहै। ओई दिन पटना कौलेज मे एडमिशन ले काउन्टर पड़ हम रमेश त्रिपाठी चारिम नम्बर पर रही, लाईन मे हमरा से आगू कल्पित फुकन, ओकर आगू दीपेन्द्र झा आ काउन्टर के मुँह पर देवनाथ सिंह छले। हमर विषय छले अर्थशास्त्र आनर्स । लगभग एक घंटा मे हमर एड मिशन भ गेल। एक सप्ताह के बाद कौलेज के होस्टल सेहो भेट गेल। एहेन संयोग जे हमरा , रमेश त्रिपाठी, दीपेन्द्र झा आ देवनाथ सिंह , चारू गोटा के एके होस्टल के एके रूम मे जगह भेट गेल। कल्पित फुकन हिस्ट्री आनर्स, दीपेन्द्र झा अँग्रेजी आनर्स आ देवनाथ शर्मा हिन्दी आनर्स के छात्र छला। कौलेज सब गरमी छुट्टी के बाद खुजि गेल छलै। अगिला दिन कौलेज जाई काल कल्पित फुकन से परिचय भेल। कल्पित फुकन असम के कोकराझार जिला के छोट- सन शहर गोसाईं गाँव के निवासी छले। ओकर पिता रेलवे मे गार्ड छलखिन्ह आ रेलवे कालोनी मे हुनका रेलवे के क्वार्टर छलैन। तैं कल्पित के होस्टल के आवश्यकता नै रहै|हम सब अपन-अपन पढ़ाई मे लागि गेल रही। रविदिन कल्पित फुकन होस्टल मे हमरा सबसे भेंट करै ले आएल रहे। हमर रूम- मेट सहित सब से खूब गप-सप आ परिचय के आदान-प्रदान भेल। कखैन आ केना ककरो से प्रगाढ़ मित्रता भ जाई छै से बुझनाई कठिन छै। कल्पित हमर बहुत नीक मित्र बनि गेल छल। ऐ बीच कुसुमा के सेहो पटना कालेज मे अँग्रेजी, पोलिटिकल साईन्स और अर्थशास्त्र विषय सब सहित इन्टर मे नाम लिखा गेलै। कल्पित फुकन बहुत सज्जन व्यक्ति छले।हम सब अधिक काल कौलेज संगहिं जाय लगलहुँ। लगभग एक मासक बाद, रविदिन , संध्या काल कल्पित फुकन हमर होस्टल आएल आ आग्रह पूर्बक अपन आवास पर ल गेल। अपन माय आ बहिन से परिचय करौलक। कुसुमा के भगवान बहुत फुर्सैत से गढ़ने छलखिन। ओकर मुँह पर से आँखि हटौनाई मुश्किल छल। ओकर पिता ट्रेन ल के मुगलसराय दिश गेल छलखिन्ह तैं भेंट नै भेला। करीब एक घंटा के बाद हम कहलियै, कल्पित! आब हम जाई छी । लेकिन कल्पित के माय कहलनि," नै बिना भोजन केने नै जाएब।" हम भोजन केलाक बाद होस्टल वापस आबि गेलौं। भरि राति कुसुमा के चेहरा हमर मस्तिष्क मे घूमैत रहल। ओकरबाद गार्ड साहेब के डेरा पर हमर एनाई- गेनाई बढ़ि गेल। दुर्गा पूजा के अवकाश मे हम छ: दिन ले अपन घर मुंगेर गेल रही। ओत माय के कल्पित , कुसुमा सभक चर्चा केलियै । हम कुसुमा से विवाह करै के अपन इच्छा कहलियै। हमर माय कहलक जे हमरो ओकरा देखै के इच्छा होईए। हम कहलियै," हम अखैन त पटना जाई छी , कोनो शनि रवि के एबौ आ तोरा सब के ल जेबौ। पटना एलाक बाद पढ़ाई के प्राथमिकता के देखैत हम अपन माय के पटना नै अनलियै। दू साल देखैत - देखैत बिति गेल छलै ।हमर सभक परीक्षा के बाद रिजल्ट आबि गेल छले। हमरा बि.ए आनर्स मे फर्स्ट क्लास भेल। कल्पित गार्ड के नौकरी करैत सेकेंड क्लास से बी.ए केलक । कुसुमा फर्स्ट डिबीजन से आई. ए. पास क गेल छले। कुसुमा के आगाँ अँग्रेजी पढ़ी आ बैंक मे नौकरी करी से इच्छा रहै। तैं ओ अँग्रेजी आनर्स के संगे बी. ए मे नाम लिखा लेलक। आ हम अर्थशास्त्र मे एम.ए. मे नाम लिखा लेलौं ।सोम दिन हम भिनसर अपन घर मुंगेर से आएले रही आ झट- पट कौलेज जाईले तैयार भेलौहें कि कुसुमा हमर रूम के आगाँ ठाढ़ छले। कहलक , संगे कौलेज जाएब। दुनू गोटा विदा भेलौं, रस्ता मे कहलक ," हमरा सबके बिहू पावनि मे कोकड़ाझार - गोसाईं गाँव जेबाक अछि। दस दिन के बादे वापस आएब। ओत हमर कका सब हमर माँ के दबाब द के हमर वियाह करा देत से कोनो ठीक ने। कौलेज से वापस एलाके बाद हम कुसुमा के संग ओकर घर गेलौं।ओकर माँ के कहलियै, हम कुसुमा के ल के काल्हि मुंगेर जाई छी अपन माँ- बाबूजी के देखा के साँझ तक वापस आबि जाएब। कल्पित कहलक , चल हम और माँ सेहो संगे चलै छी। सब फाईनल कईए के आएब। अगिला दिन भिनसरे हम सब मुंगेर गेलौं। हमर बाबू मिडिल स्कूल के हेडमास्टर छलाह। ओ स्कूल चल गेल छलाह। हमर माँ कुसुमा आ ओकर माय के संगे गप- सप मे लागि गेल। हमर माँ- बाबू के कुसुमा सब तरहे पसिन्न पड़लनि। दोसर दिन हम सब पटना वापस आबि गेलौं। कल्पित के कोकड़ाझार के गोसाईं गाँव स्थित पैतृक घर से बिहू पावनि के बीच मे शुभ दिन मे हमर आ कुसुमा के विवाह संपन्न भ गेल। हमर माँ बाबू जी, हमर आठ साल के बहिन आ हमर दूटा कका के परिवार के ओहिठाम के आदर सत्कार आ लोक सभक स्वभाव बहुत नीक लगलै। विवाहक पाँचम दिन सब पटना आबि गेलौं। हमर आ कुसुमाक विवाह के तीन बरख बीत चुकल छल। हम दु बरख से भागलपुर विश्वविद्यालय मे अर्थशास्त्र के प्राध्यापक के पद पर कार्यरत रही। कुसुमा बी. ए केलाके बाद दोसर प्रयास मे स्टेट बैंक के प्रोबेशनरी आफीसर भ गेल छली आ पटना मे बैंक के मुख्यालय मे नियुक्त छली। कल्पित फुकन के बदली खड़गपुर भ गेल छलै। हम आ कुसुमा पटना मे किराया के डेरा ल के रहैत रही।। छ मासक बाद कुसमा के बदली भागलपुर मेन ब्रान्च मे भ गेलै त हम सब भागलपुर मे डेरा ल लेलौं। लगभग दू बरखक बाद, जून मास रहै। कल्पित फुकन के टेलीग्राम आएल जे ओकर विवाह नौगांव, असम मे फाईनल भ गेलैये। हमरा सबके दू दिन के बाद ट्रेन से संगहिं ल जाएत से तैयार रहै ले। कुसुमा आ हम दुनू गोटा एक सप्ताह के छुट्टी ल लेलौं । कल्पित के संगे हम आ कुसुमा नौगांव चल गेलौं।कल्पित के विवाह धूम- धाम से सम्पन्न भ गेलै ।ओकर दोसरा दिन कुसुमा कहलक, " वापसी मे अपना सब कामाख्या मे दू दिन रहि के माता के दर्शन आ ब्रह्मपुत्र मे स्नान करब , गौहाटी घूमि लेब तेकर बाद भागलपुर जाएब। तेसर दिन हम सब गौहाटी आबि गेलौं। कुसुमा के कहल अनुसार हम सब पहिने गौहाटी घूमि लेलौं । कुसुमा कहलक, " जे कोनो पति- पत्नी संगे- संग माता कामाख्या के दर्शन आ ब्रह्म पुत्र मे स्नान करैये ओ सात जनम तक संगे रहैये। एकदिन गौहाटी मे रुकि के अगिला दिन भिनसरे हम सब कामाख्या आबि गेलौं। स्नान करै से पूर्ब गर्भ- गृह के बाहर से हम दुनू गोटा माता कामाख्या के प्रणाम केलौं।ओकर बाद ब्रह्मपुत्र मे स्नान करै ले उतरलौं। कुसुमा हमर हाथ खूब कसि के पकड़ने रहेठेहुन भरि पानि मे नीचा उतरलहुँ कि नदी मे बहुत जोड़ के लहरि एलै । तत्तेक वेग रहै जे कुसुमा के हाथ हमर हाथ से छूटि गेलै। हम बताह जकाँ ओकरा पकड़ै के कोशिश करैत रहलियै लेकिन नै पकड़ाएल। ओतै के पण्डा सब मे से एकटा नदी मे कूदि के कुसुमा के बचबै के बहुत कोशिश केलक लेकिन सब व्यर्थ । ब्रह्मपुत्र के वेग मे कुसुमा विलीन भ गेली। हम किंकर्तव्यविमूढ़, बिना खेने- पीने मन्दिर के पहाड़ी पर बेहोश भ गेल रही। दू दिनक बाद एकटा देवदासी हमरा कोनो तरहे होश मे अनलक। हमर दुनियाँ उजड़ि गेल छल। पण्डा सब कहलक जे एत अहि तरहे बैस के अहाँक पत्नी वापस नै औती । धैर्य राखू आ अहाँ जत से आएल छी ,वापस जाऊ। देवदासी ,जे हमरा होश मे अनने रहे, कहलक जे एत्त ब्रह्मपुत्र मे डूबि के जेकर मृत्यु होई छै ओकर पुनर्जन्म होई छै। अहाँ अही तिथि के प्रत्येक बर्ष माँ कामाख्या के दरबार मे अबैत रहब त अहाँ के अपन पत्नी जरूर भेट जेती। दुखक पहाड़ लेने हम भागलपुर वापस चल एलौं।देवदासी के कथन के अनुरूप कुसुमा के मृत्यु के तिथि पर हम प्रत्येक बर्ष माँ कामाख्या के दर्शन करै ले जाए लगलौं। हमर मित्र सब हमरा बुझबैत छलाह जे पुनर्जन्म एना नै होई छै। लेकिन हम कामाख्या जाईत रहलहुँ। कुसुमा के मृत्यु के पन्द्रह बर्ष भ गेल छलनि। शारीरिक रूप से हम कमजोर भ गेल रही आ मानसिक रूप से निराश सेहो भ गेल रही। विश्वास भ गेल छल जे आब ऐ जनम मे कुसुमा के नै देखबैन। ओही बर्ष उत्तर- पूर्व राज्य के आर्थिक स्थिति के उत्थान और संभावना पर नौगाँव मे दू दिनक राष्ट्रीय सेमिनार के अध्यक्षता करबाक लेल हमरा आमन्त्रण भेटल।। हम बहुत दुखी मोन से नौगाँव गेलहुँ। दोसर दिन सेमिनार संपन्न भेलाक बाद एकटा लड़की हमरा लग आएल आ पैर छूबि के हमरा प्रणाम केलक। ओकरा देखि के हम एकदम अचम्भित रहि गेलहुँ। एन- मेन कुसुमा के प्रतिरूप। हम पुछलियै," तों के छिएँ?" कहलक, " हम अहाँक बेटी मानसी।"हमरा आश्चर्य के सीमा नै रहल। हम कहलियै," ई केना भ सकैये, कुसुमा के आई से पन्द्रह बर्ष पूर्व कामाख्या मे ब्रह्मपुत्र मे डूबि गेला से मृत्यु भ गेल छलन्हि। हम कत्तेक बर्ष कामाख्या एलौं, कहियो नै देखलियनि"।हम पुछलियै," तों हमरा केना चिन्हलें?" कहलक,माँ के संगे अहाँक वियाहक फोटो हमर घर मे टाँगल अछि। और कहलक ," माँ जखैन कामाख्या मे ब्रह्मपुत्र मे डूबि गेल रहे त हम तीन मासक ओकर पेट मे छलियै। ब्रह्मपुत्र के तेज प्रवाह मे ओकर लाश 180 कि.मी दूर तेजपुर लग ब्रह्म पुत्र के किनार मे लागि गेल रहै। लाश देखि के लोक सभ बाहर निकाललकै आ तुरत ओतै अस्पताल मे ल गेलै। माँ के मृत्यु भ गेल रहै। डाक्टर सब के ताज्जुब लगै छलै जे हम तीन न दिन तक मृत माय के पेट मे केना जीबित रहि गेलियै। कोकड़ाझार पुलिस माँ के लाश के पहचान करबै लेओकर फोटो अखबार मे देलकै। माँ के काका ओकर फोटो देख के चिन्हलकै अस्पताल से लाश ल जा के अन्तिम संस्कार केलकै। डाक्टर सब माँ के पेट के आपरेशन क के हमरा निकाललक आ जार मेसात महीना तक अस्पताल मे रखलक। बाद मे माँ के काकी( हमर नानी) हमरा पोषलक।। मानसी के हम बड़ी काल तक अपन छाती से लगौने कनैत रहलहुँ। मानसी के देखि के हमरा जीबैक आधार भेटि गेल छल।। बेटी के संग भागलपुर आबि गेलहुँ। हमरा देवदासी के बचन पर विश्वास भ गेल जे कोनो रूप मे मनुष्य के पुनर्जन्म भ सकै छै। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। नीरज कर्ण बीहनि कथा- "छुच्छे" "बाप रे बाप भीड़ रहए नेताजी के भासन में, नै पूछू।" लखना उमकैत बाजैत घर में घुसल। "हँ किये नै। और अहाँ के काजे की। मुदा भासन स' पेट नै भ'रत।" घरवाली गुम्हरैत बजली। "अरे एते स्कीम सब आइब रहल छै हमरा सब के काज दै के लेल कि.. छोड़ू अहाँ की बुझबै। बड भूख लागल अइछ। भोजन में की सब बनेलौं।" हाथ-मुँह धोऐत लखना पुछलकै। "की सब ने कहू..। चाउरक रोटी और अहाँकेँ नेताजी के भासनक तरकारी।" भनसाघरसँ आवाज अएल। "आईं.. भासनक तरकारी के की माने!" घरवाली आगू में जखने थारी रखलखिन लखना अपने आप माने बुइझ गेल। आ रोटी चिबबैत सोच' लागल 'नेतासब के भासन ठीके में "छुच्छे" होइछै की।' ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३. पद्य ३.१.जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’- गजल ३.२.आशीष अनचिन्हार- २ टा गजल ३.३.मुन्ना जी- बाल कविता- सुसंस्कार जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’ गजल ककरो पलखति नै छै पोथी पढ़तै के पढियो जँ लै त मुश्किल छै जे गुनतै के भरि घरमे छिडियायल पोथी जहाँ-तहाँ अही लेल त झगड़ा होइए बुझतै के कान मूनि बैसल छी अपन सुनयबालय यैह हाल सबहक छै अनकर सुनतै के नाथू अपन महींस अहाँ कुड़हरिएसँ किछुओ मतलब नै छै ककरो बजतै के अस्पताल ब’न’ चाहय सभ मन्दिर-मस्जिद काज ‘अनिल’ छै कठिन कहू ई ठनतै के ( मात्रा क्रम : 2222 2222 222 ) दू टा अलग-अलग लघुकें एक दीर्घ मानल गेल अछि | चारिम शेरक पहिल पाँतिमे अंतिम लघुक गिनती दीर्घमे भेल अछि | अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। आशीष अनचिन्हार २ टा गजल १ मोन मीलै बात मीलै प्रेम आ उत्पात मीलै बात अतबे भेल बड़का मूँह संगे भात मीलै छै समयकेँ माँग अतबे बीच संगे कात मीलै बेबहारक मोल केहन विश्वमे औकात मीलै छै मिलन दू शराबक घातमे प्रतिघात मीलै सभ पाँतिमे 2122-2122 मात्राक्रम अछि (बहरे रमल मोरब्बा सालिम वा बहरे रमल सालिम चारि रुक्नी)। २ जेहन जेहन भेलै मति तेहन तेहन भेलै गति खाली सम्बन्धे टुटलै जीवनमे छै अतबे क्षति नै छै कियो जनता लेल प्रधानमंत्री राष्ट्रोपति कनियें रस आ बहुते बिख रखने रहला हमरा प्रति हम्मर हिनकर जिनकर हो छै ईहो अति ओहो अति सभ पाँतिमे 22-22-22-2 मात्राक्रम अछि। दू अलग-अलग लघुकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि। ई बहरे मीर अछि। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। मुन्ना जी बाल कविता- सुसंस्कार शुन्य भेल सपन नुका क' राखू अपन संस्कार जगा के राखू अछि शुट-बुट शिक्षो मे लागू मोन के मैथिल बना के राखू कम्प्युटर गेम अछि सुन्नर मगज टटका बना के राखू नेना लक्ष्यहीन नहि हुअए तकर जोगार धरा के राखू ककरो बानि चाहे रहय केहनो हृदय सँ अप्पन बना के राखू ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ४.स्त्री कोना (सम्पादक- इरा मल्लिक) ४.१.निर्मला कर्ण- अग्निशिखा (धारावाहिक उपन्यास) ४.२.पूजा झा- उलाहना निर्मला कर्ण अग्निशिखा (धारावाहिक उपन्यास) २ अग्नि शिखा (भाग-२)
पूर्व कथा - एकगोट व्यथित बेकल पुरुष बरसात में भिजइत कनैत वन में जाइत अछि आ एकटा गुफा लग बैसि सिसैक सिसैक कs कनैत अछि l
आब अगिला भाग कानैत कानैत ओ पुरुष थाकि कs निढाल भs गेल l आब बनक एकपैरिया रस्ता पर निरुद्देश्य फेर सँ विदा भs गेल l किछु देर ओहिना भटकैत रहल तखनि ओ एकटा घनगर झाड़ लँग ठाढ़ भs गेल l ओहि झारक ओहि पार एकटा पोखरि छल जाहि में खूब रास कमलक फूल खिलल छल l ओहि पोखरिक स्वच्छ निर्मल जल में किछु सुन्दर रमणी जलक्रीड़ा में निमग्न स्नान रत छलैथ l ओ सभ एक दोसरा पर आँजुर में भरि भरि पाइन फेकैथ संगही अपन सुकोमल गौर वर्ण शरीरक सफाई से हो करैथ l किछु रमणी मधुर स्वर में गीत सेहो गावैत रहैथ l किछु रमणी स्नान कs जल सँs बाहर निकलि रहल छलीह हुनक सुकोमल गात, अलौकिक सौंदर्य भरल मुखमण्डल, आ रेशमी श्यामवर्णी कुन्तल राशि कोनो ऋषि मुनिक तपस्या भङ्ग करवा में पूर्ण सक्षम छल, मुदा ओ युवा पुरुष हुनकर सौंदर्य सँs अप्रभावित अन्यमनस्क सन झुरमुटक विवर सौं देखैत रहल, जेना ओकरा ओहि जमघट में कोनो एक विशेष व्यक्तित्वक तलाश होइ l ओ पूर्ण शांतचित्त भय अपन खोज पूर्ण दृष्टि ओहि सुन्दरी बाला सभ पर स्थिर केने रहल l ओकर मुखमण्डल पर निराशा व्याप्त होमय लागल l एहन प्रतीत होइत छल ओकर तलाश निष्फल भs गेल छल l ओ कुहुकि उठल l दर्द भरल आह ओकर आत्मा सँ बहरायल l ओकर मुखमण्डल पर निराशा व्याप्त भs गेल l ओ एक प्रस्तर खण्डक सहारा लय अर्ध निमीलित नेत्र सँs एक वन्य पुष्प के निहारैत रहल l ओ नील पुष्प अत्यन्त सुन्दर छल l ओहि पुरुषक मुखमण्डल के देखि बुझाइत छल जेना ओहि पुष्प सँ ओकरा किछु विशेष लगाव होइ l ओहि पुष्प में ओकरा अपन प्रेयसीक दर्शन होमय लागल l ओकरा बुझना गेलैक जेना ओ पुष्प नहि, नील परिधान धारण केने एक सुन्दर रमणी ओकरा समक्ष आबि गेल होइ l ओ आभासी रमणी युवक के देखि विहँसि उठलीह l युवक अपलक दृष्टि सँs निहारैत रहल रमणी के l नील परिधान सँs सुशोभित रमणी एना प्रतीत होइत छलैक जेना श्याम घन कानन में विद्युत् प्रस्फुटित भय गेल होय l कल्पनालोक में विचरण करैत युवकक मोन अधैर्य होमय लागल l अपन प्रेयसीक अँग प्रत्यङ्गक सुमधुर कल्पना करैत निमग्न भs रहल छल l ओ अपन प्रेयसी के अलिंगगनबद्ध करवा हेतु उद्गिन भय अपन दुनू विशाल बाहु पसारने दौड़ परल l ओ प्रमत्त सन दौड़ल जाइत छल मुदा एक शैलखण्ड सँs ठोकर लगला सँ ओ भू-लुण्ठित भय गेल | ओकर कल्पनालोक विच्छिन्न भय गेल छल l ओ विक्षिप्त सन विलाप करय लागल - हा प्रिया अहाँ कतs चलि गेलहुँ, हमरा एना छोड़ि क, हम अहाँ बिनु नहि रहि सकैत छी आबि जाऊl विरह वेदना सँs व्याकुल ओ पुनः उठल मुदा अपना के सम्हारि नहि सकल, मूर्छित भय भू लुण्ठित भय गेल l ओहि युवक के विलाप दूर तक गुञ्जित भेल छल l पुनः ओकर खसवाक तीव्र आवाज पोखरि में जलक्रीड़ा में निमग्न रमणी सभ केँ आकर्षित केलक l ओ सभ एक दोसराके प्रश्नपूर्ण दृष्टि सँ देखs लगलीह l बुझाइत अछि कोनो अभागल प्रेम विदग्ध अछि|
एक सुन्दरी कहलैथि l दोसर सखी कहलखिन - तों सभ एतहि रहs हम देखने अबैत छी| देखs सखी विलम्ब नहि करिह, नहि त हमरा सभ के स्वर्ग लोक जाइ में बहुत विलम्ब भय जायत| एक अन्य रमणी बाजि उठलीह l नहि नहि हम शीघ्र आयब ता धरि तों सभ प्रतीक्षा करह l कहैत ओ रमणी शब्दक उद्गम दिशा दिशि दौड़ गेलीह l हुनकर दृष्टि चेतनाहीन युवक पर परलैन्ह तs ओ फीरि कsपुनः तालाब दिशि दौड़ गेलीह l सेनजित ओतह एकटा पुरुष चेतनाहीन अवस्था में छथि,हम कमल पत्र में जल भरि लs जाइत छी l जलक बून्द ओकरा सचेत करवा में संभवतः सफल होई| लेकिन तों ओकरा सचेत करवा लेल एतेक प्रयासरत किएक छह रम्भे? तों नहि बुझबह| जीव मात्रक कल्याण केनाइ हमर सबहक अपन परम् कर्त्तव्य हेबाक चाही, हम ई मानैत छी, तों सभ ई बात नहि मानैत छह की? कहैत ओ पाइन लsपुनः दौड़ गेली चेतनाहीन युवक दिस l अई सखी कहीं तोहर मोन सेहो त हमर सभक प्रिय सखी उर्वशी सन कोनो युवक के प्रेमपाश में आबद्ध नहि भय गेलह? जाइत जाइत रम्भा के ई वाक्य कर्णगोचर भेलैन्ह मुदा ओ बिनु प्रत्युत्तर देनहि भागति भागति ओहि पुरुष के समीप पहुँचलीह आ आँजुर सँ पाइन ल-ल ओकरा मुख पर छींटs लगलीह l ओ युवक के मुख मण्डल के ध्यान पूर्वक देखलीह आ करुणा विगलित भ गेलीह l की प्रेम में एहेन अवस्था भ जाइत छैक ? सहसा युवक के आँखि फुजल आ ओकर दृष्टि रम्भाक मुखमण्डल पर परल l क्षणिक मुस्कान ओकर मुख पर दृष्टिगोचर भेल, पुनः ओ हरबरायल सन उठि क बैसि गेल आ कहय लागल - नहि नहि अहाँ हमर प्रेयसी नहि थिकहुँ l हम अहाँक विरह में व्याकुल नहि छी l हम अहाँ के नहि चिन्हैत छी l हमर प्रिया त उर्वशी थिकीह l उर्वशी ....उर्वशी.... उर्वशी ....उर्वशी.... स्वर्गक सभ अप्सरा सँ सुन्दर .....विनीता..... आ ... आ ... आ....| किछु सोचैत युवक पुनः मौन धारण कय लेलक l रम्भाक मुख पर मधुर हास्य प्रस्फुटित भय गेलैन्ह l ओ विहुँसैत बजलीह - ओ..... आब हम चिन्हलहुँ अहाँ पुरूरवा छी, सोमवंशक सूर्य राजा, पुरूरवा|
युवक आश्चर्यचकित भय सुन्दर रमणी के देखलक फेर आदरपूर्वक कहल - हँ देवी, अहाँ ठीके चिन्हलहुँ l मुदा अपनेक सत्कार हेतु एतह हमरा लग किछु सामग्री नहि अछि l तथापि हमर विनम्र आग्रह अछि अपने एहि त्रिणाच्छादित भूमि के आसन ग्रहण करु| रम्भा संकोच पूर्वक ओतहि भूमि पर बैसि रहली l रम्भा किछु छण पुरुर्वाक पुरुषोचित सौंदर्य के विमुग्ध भय देखैत रहली, मुदा पुरुर्वाक दृष्टि हिनका दिसि नहि छलैन्हि l ओ रम्भाक सौंदर्य सँ चुटकियो धरि आकृष्ट नहि भेल छलाह l रम्भा उर्वशीक प्रति पुरुर्वाक अप्रतिम प्रेमक प्रशंसिका भs गेलीह, आ मोने मोन ओ उर्वशीक चयन के सेहो प्रशंसा केलथि l स्वर्गलोकक कठोर अनुशासनप्रियता पर हुनका खिन्नता सेहो भेलनि जेहि कारण उर्वशी के पुरुरवा सँs दूर होमय परलनि l रम्भा उर्वशी आ पुरुर्वाक सम्ब्न्ध में सोचैत विचारमग्न छलीह कि पुरूरवा के धीर गम्भीर आवाज सुनि चिंहुकि उठलैथ - अपनेक परिचय सुन्दरी? मान्यवर हमर नाम रम्भा अछि, हम स्वर्ग लोकक अप्सरा थिकहुँ | हम अपन सखी सबहक सँग कुमार वन में स्नान हेतु अयलहुँ अछि| अच्छा ¡ हमर उर्वशी सेहो आयल छथि की ? - प्रसन्नता सँ उताहुल होइत पूछल पुरूरवा l नहि ओ नहि आयल | रम्भाक सँक्षिप्त उत्तर सँs पुरुर्वाक उल्लसित मुखमण्डल पर उदासीक गहन लेपन भs गेल l हमर प्रियतमाक की समाचार अछि? वैह जे अहाँक अछि l भिन्नता एतबहि अछि जे ओ नारी होमय के कारण अपन दुःख केकरो पर प्रकट नहि कs सकैत अछि, संगहि स्वर्गक अनुशासन में निबद्ध नियमपूर्वक सभ काज अन्यमनस्क भय पूरा करैत अछि| नारीक धैर्य हिमालय सन अडिग होइत अछि l हुनकर अन्तःस्थल में दुःखक श्रोत प्रस्फुटित भेल होय, विरहाग्नि सँ हुनक हृदय विदग्ध रहनि, मुदा ओ ऊपर सँs लज्जाक हिम सँ आच्छादित रहैत छैथ l स्वयं लांक्षणा, प्रतारणा,अपमानक उल्कापात के सहैत जीवन पर्यंत दैवक कठोर अनुशासन में अचल अडिग रहैत छैथ l रम्भा आ पुरूरवा दुनू उर्वशी के विषय में सोचि दुखित भ गेलैथ l पुरूरवा तs उर्वशीक समाचार पाबि आरो दुःखित भs गेलाह, आब हुनका किछु पुछबाक साहस नहि रहलैक l मौन भँग करैत रम्भा बाजली - आब अपनेहु प्रेमक ई खेल बन्द करू राजन| हम..... हम ... नहि किन्नहु नहि l हमर मोन आब आन कोनो बात में नहि लागैत अछि l हमर जीवनक उद्देश्य आब मात्र उर्वशीक प्रेम में विदग्ध भs हुनकर अनन्त प्रतीक्षा रहि गेल अछि|
रम्भा - ई बात उचित नहि अछि नृप श्रेष्ठ l अहाँ राजा छी, प्रजा पालन प्रमुख कर्तव्य होइत छैक कुशल राजाक| पुरूरवा - हम आब राज्य सञ्चालन में असमर्थ भs गेल छी देवी l ई काज आब हम कोनहुना नहि कs सकब| कहि राजा कनिकाल धरि मौन रहलाह l पुनः किछु स्मरण करैत ओ बाजि उठलाह - आब हमरा उर्वशी सौं पुनः कहिया साक्षात्कार होयत l ओ हमर परित्यागक एक वर्ष पश्चात् पुनः भेंट होयबाक बात कहने रहैथ| हाँ राजन आगामी पूर्णिमा के दिन सरस्वती नदीक तट पर ओकरा सँ अहाँक पुनः भेंट होयत| राजा पुरूरवा एहि सुखद सम्वाद के सुनि अत्यन्त प्रसन्न भेलाह l ओ उपहार स्वरुप रम्भा केँ किछु देबाक हेतु अपन दृष्टि हुनका दिशि घुमौलाथि, परंतु महान आश्चर्य स्थान रिक्त छल l ओतह मात्र राजा के अन्य कोई प्राणी नहि छल l पुरूरवा विहँसि उठलाह l विहँसैत स्वतः बाजलैथ - ओह ई अप्सरा सभ कतेक विचित्र होइ छथि, अपन इच्छा भेल तs कतहु प्रकट भय जाइत छथि आ फेर अपन मोन होइतहि अदृश्य भs जाइत छथि|
स्वरचित ©® क्रमशः
निर्मला कर्ण, पता - 310, कृष्णा टॉवर सर्वेश्वरी नगर, होली चाइल्ड पब्लिक स्कूल के निकट, इटकी रोड, राँची, पिन-834005 राँची, झारखण्ड mob - 9431785860 e-mail -karn 10000@gmail.com अनुवर्तते अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। पूजा झा उलाहना अरे नहि होयत आँहा स | छोइर दियौ लाऊ हम क दैत छी | निरंजन जी सरला जी स व्यंग्यात्मक लहजे मे कहलखिन | सरला जी फीकी हँसी बिखेरैत फेर जुटि गेलैथ साईकिल के बोल्ट कस में | 50 वर्ष के सरला जी अपन बच्चा सब के काबिल बनाक ओ अपन सपना के थाह लेब शुरू केने छलैथ | और साईकिल चलेनाई ओहि सपना के एक टा छोर छलैन जेकरा ओ कसि क पकङ के कोशिश क रहल छलैथ | मगर
निरंजन जी हमेशा हुनका कहैथि रहैत छलखिन जे आँहा स ई नहि भ सकैत अछि | आँहा के बस के बात नहि अछि, मूर्ख भ गेल छी कि एतबा समझ में नहि आबैत अछि जे आँहा स ई सब नहि होब बला अछि | काफी देर तक जखन सरला जी स कोनो उत्तर नहि भेटलैन त निरंजन जी पुछलखिन , ' कि त आब नाराज भ गेलौ | सरला जी मिठी मुस्कान लैत कहलखिन अरे नहि नहि .......आँहा के ई उलहन , ताना , व्यंग्यात्मक शब्द , ई ठहाका ईया सब तहमरा आगा बढ के उर्जा दैत अछि | हमरा और मेहनत कर के लेल प्नेरित करैत अछि | और मने मन ठाईन लैत छी जे ई व्यक्ति के गलत साबित कर के अछि | अतेक कहैत ओ पैडल मारैत , साईकिल पर सवार भ क निकलि पङलैथ | -पूजा झा, कोटा अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ........................................................................................................................ संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] Videha e-Learning पेटार (रिसोर्स सेन्टर) शब्द-व्याकरण-इतिहास MAITHILI IDIOMS & PHRASES मैथिली मुहावरा एवम् लोकोक्ति प्रकाश- रमाकान्त मिश्र मिहिर (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) डॉ. ललिता झा- मैथिलीक भोजन सम्बन्धी शब्दावली (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) मैथिली शब्द संचय MAITHILI DICTIONARY- RAMDEO JHA (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) ENGLISH MAITHILI COMPUTER DICTIONARY MAITHILI ENGLISH DICTIONARY अणिमा सिंह -Shishu_Geet_Khel_Anima_Singh डॉ. रमण झा मैथिली काव्यमे अलङ्कार अलङ्कार-भास्कर आनन्द मिश्र (सौजन्य श्री रमानन्द झा "रमण")- मिथिला भाषाक सुबोध व्याकरण BHOLALAL DAS मैथिली सुबोध व्याकरण- भोला लाल दास राधाकृष्ण चौधरी- A Survey of Maithili Literature ........................................................................................................................ मूलपाठ तिरहुता लिपिक उद्भव ओ विकास (यू.पी.एस.सी. सिलेबस) राजेश्वर झा- मिथिलाक्षरक उद्भव ओ विकास (मैथिली साहित्य संस्थान आर्काइव) Surendra Jha Suman दत्त-वती (मूल)- श्री सुरेन्द्र झा सुमन (यू.पी.एस.सी. सिलेबस) प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) CIIL SITE ........................................................................................................................ समीक्षा सुभाष चन्द्र यादव-राजकमल चौधरी: मोनोग्राफ शिव कुमार झा "टिल्लू" अंशु-समालोचना डॉ बचेश्वर झा- B_JHA_Nibhand_Nikunj.pdf डॉ. देवशंकर नवीन- Adhunik_Sahityak_Paridrishya डॉ. रमण झा- भिन्न-अभिन्न प्रेमशंकर सिंह- मैथिली भाषा साहित्य:बीसम शताब्दी (आलोचना) डॉ. रमानन्द झा 'रमण' हिआओल अखियासल CIIL SITE दुर्गानन्द मण्डल-चक्षु RAMDEO JHA दत्त-वतीक वस्तु कौशल- डॊ. श्रीरामदेवझा SHAILENDRA MOHAN JHA परिचय निचय- डॊ शैलेन्द्र मोहन झा ........................................................................................................................ अतिरिक्त पाठ पहिने मिथिला मैथिलीक सामान्य जानकारी लेल एहि पोथी केँ पढ़ू:- राधाकृष्ण चौधरी- मिथिलाक इतिहास फेर एहि मनलग्गू फाइल सभकेँ सेहो पढ़ू:- केदारनाथ चौधरी चमेलीरानी माहुर करार कुमार पवन पइठ (मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ कथा) (साभार अंतिका) डायरीक खाली पन्ना (साभार अंतिका) याेगेन्द्र पाठक वियाेगी- विज्ञानक बतकही रामलोचन ठाकुर- मैथिली लोककथा SAHITYA AKADEMI http://sahitya-akademi.gov.in/publications/e-books.jsp http://sahitya-akademi.gov.in/general/Digitalbooks.jsp CIIL http://corpora.ciil.org/maisam.htm अखियासल (रमानन्द झा रमण) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI1.pdf जुआयल कनकनी- महेन्द्र http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI2.pdf प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI3.pdf सृजन केर दीप पर्व- सं केदार कानन आ अरविन्द ठाकुर http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI4.pdf मैथिली गद्य संग्रह- सं शैलेन्द्र मोहन झा http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI5.pdf JNU http://sanskrit.jnu.ac.in/maithili/index.jsp http://sanskrit.jnu.ac.in/student_projects/lexicon.jsp?lexicon=maithili ARCHIVE.ORG https://archive.org/details/%40vijay_deo_jha?&sort=-publicdate&page=2 VIDEHA MAITHILI BOOKS/ PICTURE-AUDIO-VIDEO ARCHIVE http://videha.co.in/new_page_15.htm https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ ALL INDIA RADIO DOORDARSHAN आकाशवाणी दूरदर्शन http://prasarbharati.gov.in/ http://newsonair.com/ https://doordarshan.gov.in/ आकाशवाणी मैथिली पोडकास्ट http://prasarbharati.gov.in/podcast.php?filterlang=Maithili&from=1947-08-15&fromwp=2020-08-29&to=2050-12-31&search=GO आकाशवाणी पटना/ दरभंगा मैथिली रेजनल न्यूज टेक्स्ट डाउनलोड-1 http://newsonair.com/RNU-NSD-Audio-Archive-Search.aspx आकाशवाणी पटना/ दरभंगा मैथिली रेजनल न्यूज टेक्स्ट डाउनलोड-2 http://newsonair.com/Regional-Text.aspx आकाशवाणी दरभंगा http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=282 आकाशवाणी दरभंगा यू ट्यूब चैनल https://www.youtube.com/channel/UCGdNveEFmv4pPolWiTEMxVA आकाशवाणी भागलपुर http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=359 आकाशवाणी पूर्णियाँ http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=256 आकाशवाणी पटना http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=122 IGNCA http://ignca.nic.in/coilnet/mithila.htm http://ignca.nic.in/coilnet/kalyani.htm (MAITHILI ENGLISH DICTIONARY) http://tdil.mit.gov.in/CoilNet/IGNCA/mithila.htm MITHILA DARSHAN https://mithiladarshan.com/ (online pdf of Maithili journal) I LOVE MITHILA https://www.ilovemithila.com/ (online maithili journal) मैथिली साहित्य संस्थान https://www.maithilisahityasansthan.org/ https://www.maithilisahityasansthan.org/resources (online pdf of Reasearch Papers/ books) ........................................................................................................................ VIDEHA e-LEARNING YOUTUBE CHANNEL https://www.youtube.com/channel/UC4abVKqMj2pDWIAkXiOHp7A (अनुवर्तते) -गजेन्द्र ठाकुर विदेहक किछु विशेषांक:- १) हाइकू विशेषांक १२ म अंक, १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf 12.pdf २) गजल विशेषांक २१ म अंक, १ नवम्बर २००८ Videha_01_11_2008.pdf Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf 21.pdf ३) विहनि कथा विशेषांक ६७ म अंक, १ अक्टूबर २०१० Videha_01_10_2010 Videha_01_10_2010_Tirhuta 67 ४) बाल साहित्य विशेषांक ७० म अंक, १५ नवम्बर २०१० Videha_15_11_2010 Videha_15_11_2010_Tirhuta 70 ५) नाटक विशेषांक ७२ म अंक १५ दिसम्बर२०१० Videha_15_12_2010 Videha_15_12_2010_Tirhuta 72 ६) नारी विशेषांक ७७म अंक ०१ मार्च २०११ Videha_01_03_2011 Videha_01_03_2011_Tirhuta 77 ७) अनुवाद विशेषांक (गद्य-पद्य भारती) ९७म अंक Videha_01_01_2012 Videha_01_01_2012_Tirhuta 97 ८) बाल गजल विशेषांक विदेहक अंक १११ म अंक, १ अगस्त २०१२ Videha_01_08_2012 Videha_01_08_2012_Tirhuta 111 ९) भक्ति गजल विशेषांक १२६ म अंक, १५ मार्च २०१३ Videha_15_03_2013 Videha_15_03_2013_Tirhuta 126 १०) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक १४२ म, अंक १५ नवम्बर २०१३ Videha_15_11_2013 Videha_15_11_2013_Tirhuta 142 ११) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 १२) अरविन्द ठाकुर विशेषांक १८९ म अंक १ नवम्बर २०१५ Videha_01_11_2015 १३) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक १९१ म अंक १ दिसम्बर २०१५ Videha_01_12_2015 १४) विदेह सम्मान विशेषाक- २००म अक १५ अप्रैल २०१६/ २०५ म अक १ जुलाई २०१६ Videha_15_04_2016 Videha_01_07_2016 १५) मैथिली सी.डी./ अल्बम गीत संगीत विशेषांक- २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ Videha_01_01_2017 १६) मैथिली वेब पत्रकारिता विशेषांक VIDEHA 313 लेखकसं आमंत्रित रचनापर आमंत्रित आलोचकक टिप्पणीक शृंखला १७) मैथिली बीहनि कथा विशेषांक-२ VIDEHA 317 १८) रामलोचन ठाकुर विशेषांक VIDEHA 319 १९) रामलोचन ठाकुर श्रद्धांजलि विशेषांक VIDEHA 320 १. कामिनीक पांच टा कविता आ ओइपर मधुकान्त झाक टिप्पणी विदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016 एडिटर्स चोइस सीरीज एडिटर्स चोइस सीरीज-१ विदेहक १२३ म (०१ फरबरी २०१३) अंकमे बलात्कारपर मैथिलीमे पहिल कविता प्रकाशित भेल छल। ई दिसम्बर २०१२ क दिल्लीक निर्भया बलात्कार काण्डक बादक समय छल। ओना ई अनूदित रचना छल, तेलुगुमे पसुपुलेटी गीताक एहि कविताक हिन्दी अनुवाद केने छलीह आर. शांता सुन्दरी आ हिन्दीसँ मैथिली अनुवाद केने छलाह विनीत उत्पल। हमर जानकारीमे एहिसँ बेशी सिहराबैबला कविता कोनो भाषामे नहि रचल गेल अछि। सात सालक बादो ई समस्या ओहने अछि। ई कविता सभकेँ पढ़बाक चाही, खास कऽ सभ बेटीक बापकेँ, सभ बहिनक भाएकेँ आ सभ पत्नीक पतिकेँ। आ विचारबाक चाही जे हम सभ अपना बच्चा सभ लेल केहन समाज बनेने छी। एडिटर्स चोइस सीरीज-१ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-२ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच ब्रेस्ट कैसरक समस्यापर विदेह मे मीना झा केर एकटा लघु कथा प्रकाशित भेल। ई मैथिलीक पहिल कथा छल जे ब्रेस्ट कैसर पर लिखल गेल। हिन्दीमे सेहो ताधरि एहि विषयपर कथा नहि लिखल गेल छल, कारण एहि कथाक ई-प्रकाशित भेलाक १-२ सालक बाद हिन्दीमे दू गोटेमे घोंघाउज भऽ रहल छल कि पहिल हम आकि हम, मुदा दुनूक तिथि मैथिलीक कथाक परवर्ती छल। बादमे ई विदेह लघु कथामे सेहो संकलित भेल। एडिटर्स चोइस सीरीज-२ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-३ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिलक किछु बाल कविता प्रकाशित भेल। बादमे हुनकर ३ टा बाल कविता विदेह शिशु उत्सवमे संकलित भेल जाहिमे २ टा कविता बेबी चाइल्डपर छल। पढ़ू ई तीनू कविता, बादक दुनू बेबी चाइल्डपर लिखल कविता पढ़बे टा करू से आग्रह। एडिटर्स चोइस सीरीज-३ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-४ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच जगदानन्द झा मनुक एकटा दीर्घ बाल कथा कहि लिअ बा उपन्यास प्रकाशित भेल, नाम छल चोनहा। बादमे ई रचना विदेह शिशु उत्सवमे संकलित भेल, ई रचना बाल मनोविज्ञानपर आधारित मैथिलीक पहिल रचना छी, मैथिली बाल साहित्य कोना लिखी तकर ट्रेनिंग कोर्समे एहि उपन्यासकेँ राखल जेबाक चाही। कोना मॊडर्न उपन्यास आगाँ बढ़ै छै, स्टेप बाइ स्टेप आ सेहो बाल उपन्यास। पढ़बे टा करू से आग्रह। एडिटर्स चोइस सीरीज-४ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-५ एडिटर्स चोइस ५ मे मैथिलीक "उसने कहा था" माने कुमार पवनक दीर्घकथा "पइठ" (साभार अंतिका) । हिन्दीक पाठक, जे "उसने कहा था" पढ़ने हेता, केँ बुझल छन्हि जे कोना अहि कथाकेँ रचि चन्द्रधर शर्मा ’गुलेरी’ अमर भऽ गेलाह। हम चर्चा कऽ रहल छी, कुमार पवनक "पइठ" दीर्घकथाक। एकरा पढ़लाक बाद अहाँकेँ एकटा विचित्र, सुखद आ मोन हौल करैबला अनुभव भेटत, जे सेक्सपीरिअन ट्रेजेडी सँ मिलितो लागत आ फराको। मुदा एहि रचनाकेँ पढ़लाक बाद तामस, घृणा सभपर नियंत्रणकेँ आ सामाजिक/ पारिवारिक दायित्वकेँ सेहो अहाँ आर गंभीरतासँ लेबै, से धरि पक्का अछि। मुदा एकर एकटा शर्त अछि जे एकरा समै निकालि कऽ एक्के उखड़ाहामे पढ़ि जाइ। एडिटर्स चोइस सीरीज-५ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-६ जगदीश प्रसाद मण्डलक लघुकथा "बिसाँढ़": १९४२-४३ क अकालमे बंगालमे १५ लाख लोक मुइला, मुदा अमर्त्य सेन लिखैत छथि जे हुनकर कोनो सर-सम्बन्धी एहि अकालमे नहि मरलन्हि। मिथिलोमे अकाल आएल १९६७ ई. मे आ इन्दिरा गाँधी जखन एहि क्षेत्र अएली तँ हुनका देखाओल गेल जे कोना मुसहर जातिक लोक बिसाँढ़ खा कऽ एहि अकालकेँ जीति लेलन्हि। मैथिलीमे लेखनक एकभगाह स्थिति विदेहक आगमनसँ पहिने छल। मैथिलीक लेखक लोकनि सेहो अमर्त्य सेन जेकाँ ओहि महाविभीषिकासँ प्रभावित नहि छला आ तेँ बिसाँढ़पर कथा नहि लिखि सकला। जगदीश प्रसाद मण्डल एहिपर कथा लिखलन्हि जे प्रकाशित भेल चेतना समितिक पत्रिकामे, मुदा कार्यकारी सम्पादक द्वारा वर्तनी परिवर्तनक कारण ओ मैथिलीमे नहि वरण् अवहट्ठमे लिखल बुझा पड़ल, आ ओतेक प्रभावी नहि भऽ सकल कारण विषय रहै खाँटी आ वर्तनी कृत्रिम। से एकर पुनः ई-प्रकाशन अपन असली रूपमे भेल विदेहमे आ ई संकलित भेल "गामक जिनगी" लघुकथा संग्रहमे। एहि पोथीपर जगदीश प्रसाद मण्डलकेँ टैगोर लिटरेचर अवार्ड भेटलनि। जगदीश प्रसाद मण्डलक लेखनी मैथिली कथाधाराकेँ एकभगाह हेबासँ बचा लेलक, आ मैथिलीक समानान्तर इतिहासमे मैथिली साहित्यकेँ दू कालखण्डमे बाँटि कऽ पढ़ए जाए लागल- जगदीश प्रसाद मण्डलसँ पूर्व आ जगदीश प्रसाद मण्डल आगमनक बाद। तँ प्रस्तुत अछि लघुकथा बिसाँढ़- अपन सुच्चा स्वरूपमे। एडिटर्स चोइस सीरीज-६ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-७ मैथिलीक पहिल आ एकमात्र दलित आत्मकथा: सन्दीप कुमार साफी। सन्दीप कुमार साफीक दलित आत्मकथा जे अहाँकेँ अपन लघु आकाराक अछैत हिलोड़ि देत आ अहाँक ई स्थिति कऽ देत जे समानान्तर मैथिली साहित्य कतबो पढ़ू अहाँकेँ अछौं नहि होयत। ई आत्मकथा विदेहमे ई-प्रकाशित भेलाक बाद लेखकक पोथी "बैशाखमे दलानपर"मे संकलित भेल आ ई मैथिलीक अखन धरिक एकमात्र दलित आत्मकथा थिक। तँ प्रस्तुत अछि मैथिलीक पहिल दलित आत्मकथा: सन्दीप कुमार साफीक कलमसँ। एडिटर्स चोइस सीरीज-७ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-८ नेना भुटकाकेँ रातिमे सुनेबा लेल किछु लोककथा (विदेह पेटारसँ)। एडिटर्स चोइस सीरीज-८ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-९ मैथिली गजलपर परिचर्चा (विदेह पेटारसँ)। एडिटर्स चोइस सीरीज-९ (डाउनलोड लिंक) जगदीश प्रसाद मण्डल जीक ६५ टा पोथीक नव संस्करण विदेहक २३३ सँ २५० धरिक अंकमे धारावाहिक प्रकाशन नीचाँक लिंकपर पढ़ू:- Videha_15_05_2018 Videha_01_05_2018 Videha_15_04_2018 Videha_01_04_2018 Videha_15_03_2018 Videha_01_03_2018 Videha_15_02_2018 Videha_01_02_2018 Videha_15_01_2018 Videha_01_01_2018 Videha_15_12_2017 Videha_01_12_2017 Videha_15_11_2017 Videha_01_11_2017 Videha_15_10_2017 Videha_01_10_2017 Videha_15_09_2017 Videha_01_09_2017 विदेह ई-पत्रिकाक बीछल रचनाक संग- मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ रचनाक एकटा समानान्तर संकलन: विदेह: सदेह: १ (२००८-०९) देवनागरी विदेह: सदेह: १ (२००८-०९) तिरहुता विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) देवनागरी विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) तिरहुता विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०)देवनागरी विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०) तिरहुता विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०)देवनागरी विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०) तिरहुता विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]देवनागरी विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ] तिरहुता विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]- दोसर संस्करण देवनागरी विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ]देवनागरी विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ] तिरहुता विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ]देवनागरी विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ] तिरहुता विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ]देवनागरी विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ] तिरहुता विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ]देवनागरी विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ] तिरहुता विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ]देवनागरी विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ] तिरहुता विदेह:सदेह ११ विदेह:सदेह १२ विदेह:सदेह १३ The readers of English translations of Maithili Novel "sahasrabadhani" and verse collection "sahasrabdik chaupar par" has intimated that the English translation has not been able to grasp the nuances of original Maithili. Therefore the Author has started translating his Maithili works in English himself. After these translations are complete these would be the official translations authorised by the Author of the original works.-Editor Maithili Books can be downloaded from: https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ विदेह सम्मान: सम्मान-सूची (समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार सहित) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। सूचना/ घोषणा १ "विदेह सम्मान" समानान्तर साहित्य अकदेमी पुरस्कारक नामसँ प्रचलित अछि। "समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार" (मैथिली), जे साहित्य अकादेमीक मैथिली विभागक गएर सांवैधानिक काजक विरोधमे शुरु कएल छल, लेल अनुशंसा आमन्त्रित अछि। अनुशंसा २०१९ आ २०२० बर्ख लेल निम्न कोटि सभमे आमन्त्रित अछि: १) फेलो २)मूल पुरस्कार ३)बाल-साहित्य ४)युवा पुरस्कार आ ५) अनुवाद पुरस्कार। अपन अनुशंसा ३१ दिसम्बर २०२० धरि २०१९ पुरस्कारक लेल आ ३१ मार्च २०२१ धरि २०२०क पुरस्कारक लेल पठाबी। पुरस्कारक सभ क्राइटेरिया साहित्य अकादेमी, दिल्लीक समानान्तर पुरस्कारक समक्ष रहत, जे एहि लिंक sahitya-akademi.gov.in पर उपलब्ध अछि। अपन अनुशंसा editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २ “मिथिला मखान” फिल्म देखू मात्र १०१ टाकामे। Android App “BEJOD” download करू वा जाउ www.bejod.in पर, signup करू, एकटा ईमेल जायत, अपन ईमेल खोलू आ ओकरा क्लिक करू अहाँक अकाउंट एक्टीवेट भय जायत। आब मिथिला मखान रेण्ट पर लिअ, डेबिट कार्डसँ १०१ टाका अॉनलाइन पेमेंट करू आ फिल्म देखू। ३ विदेह अपन आगामी अंक (२०२१ क प्रारम्भमे) श्री रामलोचन ठाकुर पर विशेषांक निकालबाक नेयार केने अछि। हुनका सम्बन्धी रचना आमंत्रित अछि (संस्मरण, साक्षात्कार, समीक्षा आदि) जे ३१ दिसम्बर २०२० धरि editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाओल जा सकैत अछि। विदेह पेटारक अन्तर्गत (पोथी डाउनलोड साइट) मे http://www.videha.co.in/new_page_15.htm हुनकर मौलिक, अनूदित आ सम्पादित रचना फ्री पी.डी.एफ. डाउनलोड लेल उपलब्ध अछि। विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम्: VIDEHA: AN IDEA FACTORY (c)२००४-२०२१. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHAसम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: डॉ उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम विलास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक -स्त्री कोना- इरा मल्लिक। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि)editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि। एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै, आ से हानि-लाभ रहित आधारपर छै आ तैँ ऐ लेल कोनो रॊयल्टीक/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै। तेँ रॉयल्टीक/ पारिश्रमिकक इच्छुक विदेहसँ नै जुड़थि, से आग्रह। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-2021 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। ५ जुलाई २००४ केँ http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् 'विदेह' ३२५ म अंक ०१ जुलाई २०२१ (वर्ष १४ मास १६३ अंक ३२५)
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