विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA ISSN 2229-547X VIDEHA 'विदेह' ३२६ म अंक १५ जुलाई २०२१ (वर्ष १४ मास १६३ अंक ३२६) १. गजेन्द्र ठाकुर- संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल सेहो] [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] [FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI ALSO] २. गद्य २.१.रबीन्द्र नारायण मिश्र- लजकोटर (धारावाहिक उपन्यास)- २४म खेप २.२.नन्द विलास राय- लघुकथा- गंगा नहेलौं २.३.मुन्नाजी- बीहनि कथा- दरेग ३. पद्य ३.१.अमर ठाकुर- २टा कविता ३.२.आशीष अनचिन्हार-२ टा गजल ४.स्त्री कोना (सम्पादक- इरा मल्लिक) ४.१.सुचिता कुमारी- पोतीक बियाह Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Books/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाउ। VIDEHA ARCHIVE विदेह पेटार View Videha googlegroups (since July 2008) view Videha Facebook Official Group (since January 2008)- for announcements १. गजेन्द्र ठाकुर ........................................................................................................................ ........................................................................................................................ [संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री] [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल सेहो] [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] [FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI ALSO] यू. पी. एस. सी. (मेन्स) २०२० ऑप्शनल: मैथिली साहित्य विषयक टेस्ट सीरीज यू.पी.एस.सी. क प्रिलिमिनरी परीक्षा २०२० सम्पन्न भऽ गेल अछि। जे परीक्षार्थी एहि परीक्षामे उत्तीर्ण करताह आ जँ मेन्समे हुनकर ऑप्शनल विषय मैथिली साहित्य हेतन्हि तँ ओ एहि टेस्ट-सीरीजमे सम्मिलित भऽ सकैत छथि। टेस्ट सीरीजक प्रारम्भ प्रिलिम्सक रिजल्टक तत्काल बाद होयत। टेस्ट-सीरीजक उत्तर विद्यार्थी स्कैन कऽ editorial.staff.videha@gmail.com पर पठा सकैत छथि, जँ मेलसँ पठेबामे असोकर्ज होइन्हि तँ ओ हमर ह्वाट्सएप नम्बर 9560960721 पर सेहो प्रश्नोत्तर पठा सकैत छथि। संगमे ओ अपन प्रिलिम्सक एडमिट कार्डक स्कैन कएल कॉपी सेहो वेरीफिकेशन लेल पठाबथि। परीक्षामे सभ प्रश्नक उत्तर नहि देमय पड़ैत छैक मुदा जँ टेस्ट सीरीजमे विद्यार्थी सभ प्रश्नक उत्तर देताह तँ हुनका लेल श्रेयस्कर रहतन्हि। विदेहक सभ स्कीम जेकाँ ईहो पूर्णतः निःशुल्क अछि।- गजेन्द्र ठाकुर संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सर्विसेज (मुख्य) परीक्षा, २०२० मैथिली (ऐच्छिक) लेल टेस्ट सीरीज/ प्रश्न-पत्र- १ आ २ TEST SERIES-1 TEST SERIES-2 [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल/ FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI] NTA_UGC_NET_MAITHILI_01 NTA_UGC_NET_MAITHILI_02 NTA_UGC_NET_MAITHILI_03 (श्री शम्भु कुमार सिंह द्वारा संकलित) Videha e-Learning MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) UPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS BPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. (ऐच्छिक) मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. (अनिवार्य) मैथिली प्रश्नपत्र- बी.पी.एस.सी.(ऐच्छिक) मैथिलीक वर्तनी १ भाषापाक २ मैथिलीक वर्तनीमे पर्याप्त विविधता अछि। मुदा प्रश्नपत्र देखला उत्तर एकर वर्तनी इग्नू BMAF001 सँ प्रेरित बुझाइत अछि, से एकर एकरा एक उखड़ाहामे उनटा-पुनटा दियौ, ततबे धरि पर्याप्त अछि। यू.पी.एस.सी. क मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेल सेहो ई पर्याप्त अछि, से जे विद्यार्थी मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेने छथि से एकर एकटा आर फास्ट-रीडिंग दोसर-उखड़ाहामे करथि| IGNOU इग्नू BMAF-001 ........................................................................................................................ MAITHILI (OPTIONAL) TOPIC 1 [Place of Maithili in Indo-European Language Family/ Origin and development of Maithili language (Sanskrit, Prakrit, Avhatt, Maithili) भारोपीय भाषा परिवार मध्य मैथिलीक स्थान/ मैथिली भाषाक उद्भव ओ विकास (संस्कृत, प्राकृत, अवहट्ट, मैथिली)] TOPIC 2 (Criticism- Different Literary Forms in Modern Era/ test of critical ability of the candidates) TOPIC 3 (ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददास सिलेबसमे छथि आ रसमय कवि चतुर चतुरभुज विद्यापति कालीन कवि छथि। एतय समीक्षा शृंखलाक प्रारम्भ करबासँ पूर्व चारू गोटेक शब्दावली नव शब्दक पर्याय संग देल जा रहल अछि। नव आ पुरान शब्दावलीक ज्ञानसँ ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददासक प्रश्नोत्तरमे धार आओत, संगहि शब्दकोष बढ़लासँ खाँटी मैथिलीमे प्रश्नोत्तर लिखबामे धाख आस्ते-आस्ते खतम होयत, लेखनीमे प्रवाह आयत आ सुच्चा भावक अभिव्यक्ति भय सकत।) TOPIC 4 (बद्रीनाथ झा शब्दावली आ मिथिलाक कृषि-मत्स्य शब्दावली) TOPIC 5 (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोरिक गाथामे समाज ओ संस्कृति) TOPIC 6 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- विद्यापति) TOPIC 7 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- पद्य समीक्षा- बानगी) TOPIC 8 (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोक गाथा नृत्य नाटक संगीत) TOPIC 9 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- यात्री) TOPIC 10 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली रामायण) TOPIC 11 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली उपन्यास) TOPIC 12 (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- शब्द विचार) TOPIC 13 (तिरहुता लिपिक उद्भव ओ विकास) TOPIC 14 (आधुनिक नाटकमे चित्रित निर्धनताक समस्या- शम्भु कुमार सिंह)् TOPIC 15 (स्वातंत्र्योत्तर मैथिली कथामे सामाजिक समरसता- अरुण कुमार सिंह) TOPIC 16 (यू. पी.एस.सी. मैथिली प्रथम पत्रक परीक्षार्थी हेतु उपयोगी संकलन, मैथिलीक प्रमुख उपभाषाक क्षेत्र आ ओकर प्रमुख विशेषता, मैथिली साहित्यक आदिकाल, मैथिली साहित्यक काल-निर्धारण- शम्भु कुमार सिंह) TOPIC 17 (मैथिली आ दोसर पुबरिया भाषाक बीचमे सम्बन्ध (बांग्ला, असमिया आ ओड़िया) [यू.पी.एस.सी. सिलेबस, पत्र-१, भाग-“ए”, क्रम-५]) TOPIC 18 [मैथिली आ हिन्दी/ बांग्ला/ भोजपुरी/ मगही/ संथाली- बिहार लोक सेवा आयोग (बी.पी.एस.सी.) केर सिविल सेवा परीक्षाक मैथिली (ऐच्छिक) विषय लेल] ........................................................................................................................ GENERAL STUDIES (PRELIMINARY & MAINS) GS (Pre) TOPIC 1 GS (Mains) NCERT-ENVIRONMENT CLASS XI-XII NCERT PDF I-XII TN BOARD PDF I-XII ALL INDIA RADIO ENGLISH NEWS ALL INDIA RADIO NEWS ARCHIVE ALL INDIA RADIO TALKS AND CURRENT AFFAIRS RAJYA SABHA TV NEWS DISCUSSIONS OTHER OPTIONALS IGNOU eGYANKOSH (अनुवर्तते) -गजेन्द्र ठाकुर २. गद्य २.१.रबीन्द्र नारायण मिश्र- लजकोटर (धारावाहिक उपन्यास)- २४म खेप २.२.नन्द विलास राय- लघुकथा- गंगा नहेलौं २.३.मुन्नाजी- बीहनि कथा- दरेग रबीन्द्र नारायण मिश्र लजकोटर (धारावाहिक उपन्यास) २४म खेप सभक जिनगीमे किछु-ने-किछु परिवर्तन होइत रहैत छैक। नीरजोक जिनगिमे से होइत रहलैक । नित्यप्रतिक काजसँ ओ उबि गेलाह । मोन होबए लगलनि जे समाजक हेतु किछु करी। ओना मोनमे ई बात बहुत दिनसँ घुमड़ि रहल छलनि। मुदा सभ किछुक हेतु एकटा समय होइत छैक जखन किछु एहन घटित भए जाइत छैक जे मनुक्खक जीवनक दिशा अप्रत्यासित दिसा धए लैत अछि । ओकरा लोक कहैत अछि संयोग।एहने घटना भगवान बुद्धक जिनगीमे घटलनि जे ओ राजपाट छोड़ि सन्यासी भए गेलाह । लोक तँ नित्य ककरो दुखित देखैत अछि, मृत्यु कोनो नव घठना नहि छैक,होइते रहैत छैक ,बहुत लोकक ओमहर ध्यानो नहि जाइत छैक मुदा भगवान बुद्ध इएह सभ देखलथि आ हुनकर जीवनमे क्रान्ति आबि गेल । एहिना नीरजोकेँ कहि नहि की भेलनि,की देखलथि,की सोचलथि जे ओहिदिन कार्यालय जाइते इस्तिफा दए देलाह । "बहुत भए गेल । "-ओ बजलाह । लोकसभ अपना तरहेँ बहुत बुझाबक प्रयास केलकनि मुदा ओ अड़ि गेलाह आ अड़ले रहि गेलाह । अन्ततोगत्वाहुनकर इस्तिफा मंजूर भए गेल । लताकेँ तँ तखन पता लगलैक जखन सरकारी आवाससँ अपन मकानमे समानसभ पठेबाक हेतु ट्रक लागि गेल । "ई की भेलैक? -लता अपन पितासँ पुछलक । हमसभ आब अपन घरमे रहब ।" लता आओर किछु नहि पुछलकै । नीरज नौकरी छोड़ि देलाह से तँ बादमे अपन घर गेलाक बाद ओकरा पता चललैक,ओहो आनेसँ । नौकरी छोड़ि तँ देलाह मुदा आब की? घरमे बैसल मोन छटपट करैत रहैत छलनि ।सामनेमे लता कतहु चलि जानि आ ओ तकैत रहैत छलाह । ई कोनो आइए नहि शुरु भेल रहैक,सालोसँ होइते रहैत छलैक मुदा हुनका ई बात आब अखरिरहल छलनि । मुदा आब ओ कोनो दुधपीबा नेना नहि छलि । टोकारा देबाक समय गुजरि गेल । कार्यालयसँ घर आ घरसँ कार्यालयक बीचमे जँ कतहु ओ जाइत छलाह तँ ओ छल हुनका लोकनिक दिल्लीक प्रतिष्ठित डिगनिटी क्लबजतए ओ अपन दैहिक आवश्यकतासभक पूर्तिक कृत्रिम जोगाड़ केने छलाह। जाहिठाम झाँपल-तोपल ओ सभ किछु कए लैत छलाह जे केलापर एकटा सामान्य आदमी अपराधीक श्रेणीमे चलि जाइत अछि आ तकर बादो ओ श्रीमान बनल घुमैत रहैत छलाह । ई कम आश्चर्यक गप्प नहि जे एतेक बएस बीत गेलाक बाद हुनकर भक्क टुटल आओर ओ प्रायश्चितस्वरुप नौकरी छोड़ि देलाह। कहि नहि की-की भेल? मुदा एतबा सुनबामे आएल जे ओही कल्बमे एकराति लता पीबिकए ककरोसंग नृत्य करैत हिनका देखा गेलनि।ओएह भए गेल चरमविंदु। इश्वरक इच्छासएह रहल हेतनि जे ओ एहि दृश्यके स्वयं देखथिआ जीविते मृत हेबाक अनुभव करथि । लता एहनठाम कोनो पहिलबेर गेल छलि से बात नहि । ओकरा देखनाहर के छल जे तकर हिसाब करैत ।नीरजक घमंडीआ स्वच्छाचारी स्वभावक आगासभ बेकार छल। आब चललाह समाजसेवा करए । ओहो ककरासभक संगे? प्रातभेने जखन लता भेंट भेलनि तँ ओ की कहलकनि? सुनि सकैत छी तँ हुनके शब्दमे सुनि लिअए- "तोरा एना कल्वमे जेबाक चाही?" "हम कोनो आइ पहिल बेर ओतए गेल छलहुँ जे अहाँक माथामे तनाव भए रहल अछि’’ “अहाँ होशमे छी की?" “अहाँ केँ कहिओ होश रहल जे हमर बेटी कोना अछि, ओकर समय कोना बितैत छैक?मात्र टाका दए देलासँ अभिभावक काज पूर्ण भएजाइछकी?" नीरज अबाक रहि गेलाह । तकरबादे सुनलिऐक जे ओ नौकरीसँ इस्तिफा दए देलथि। नीरज पैघ अधिकारी छलाह । दिल्लीक समाजमे धाख छलनि । बहुतरास लोकसभ अबैत-जाइत रहैत छलनि । ओहीक्रममे प्रवासीसभक संपर्कमे छलाह । मुदा ई अंदाज नहिरहनि जे ईसभ हुनका नहि हुनकर कुर्सीसँ जुड़ल छलाह । आब जखन कुर्सी चलि गेलनि ,किछु करबाक व्योंत ताकि रहल छलाह तँ जकरे फोन करथि सएह किछु भगल कए लेथि । धन कही विजयकेँ जकरा आँखिमे पानि रहैक । अखनो नीकसँ गप्प करनि। कखनो काल हालो-चाल पुछनि । दल्लीक कनस्टीच्युसन कल्बमे बैसार हेबाक रहैक । प्रवासीसभक भविष्य चमकेबाक हेतु आपसी संगठन करबाक चेष्टा।ओहिदिन कारसँ नीरज,किशुन, हुनकर मामा दामोदर ओतहि जा रहल छलाह ।संयोगसँ हुनकर कारमे किछु खराबी आबि गेलनि जे हमर दोकानपर रुकलथि आ हमरा हुनकासभसँ भेट भेल।हमरा ओहिठामसँ आगा बढ़लापर लता आ नीरजमे विवाद होबए लागल । बात ततेक बढ़ि गेल जे लता ठामहि उतरि गेलि । लताकेँ ओतहि छोड़ि नीरज कनस्टीच्युसन कल्बमे बैसार हेतु पहुँचलाह । विजय अपन जीपमे लोकसभकेँ भरिक अनने छल । ओहिमे तँ किछु नैमित्तिक मजदूर छलाह जिनका टाकाक लालचमे आनल गेल रहए ।किछुअपराधीसभसेहोओहिभीड़मेघुसिआगेलछल। किछुगोटे उत्सुकतासँ सेहो आएल रहथि-“ देखा चाही नीरज की चाहैत छथि ?” विजयकक जीप हवा भरबाक हेतु हमर दोकान लग रुकल । हमरा हुनकासँ एहिठाम पहिनो भेंटघाँट होइत रहैत छल। हवाभरैत-भरैत संयोगवश ओकर चक्का भयानक आबाजकसंगे फाटि गेलैक । आब की हएत ? बैसारक समय लगीच चल । हुनकर जीपक मरम्मतिमे समय लगैत । विजयक परेसानी देखि हम अपन कारसँ हुनका सभकेँ लए गेलहुँ । ओहिठाम पहुँचलाक बाद विजय कहए लगलाह -"जखन आबिए गेल छी तँ किछुकाल रहि जाउ ।" हम हुनकर बात मानि कातमे बैसि गेलहुँ जाहिसँ जखन चाही घसकि जाएब ।ओतए कैकटा पुरान परिचितसभ देखेलाह। हमर सीटक बामाकात बैसल महिलाकेँ बेर-बेर अपना दिस उचकैत देखि हमरो ध्यान ओमहर गेल । बेस बनल-ठनल ,गोर-नार आ रमनगर मुँह-कान छलनि । मोनमे होअए जे हिनका कतहुँ देखने छी । हम अखिआसितहि रही की ओएह उठिक हमरे लग बैसि गेलीह । हुनकासंगे एकटा बेस नमगर लोक छलाह । "हमरा चिन्हलहुँ?" " नहि?" "हम छी रचना।बटुकक संगे अहाँक पड़ोसी छलहुँ।" हम गुम्म पड़ि गेलहुँ । ओ एना भेटि जेतीह से हम नहि सोचि सकैत छलहुँ ।हमर मोबाइल नम्बर पुछलथि ।हम अपन कार्ड देलिअनि । ताबे बैसार शुरुभए गेल रहैक । बेसी गप्प-सप्प नहि भए सकल । नहि बुझि सकलिऐक जे हिनकर संगे ओ के छलाह ? अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। नन्द विलास राय लघुकथा गंगा नहेलौं साँझुपहर बाध दिससँ अबै छेलौं। जखन नन्दा भाइक दरबज्जाक सामने एलौं तँ सुनलयैन, नन्दा भाय सोझमतिया भौजीकेँ कहै छला, ‘चलू गंगा नहेलौं।’ हमरा नन्दा भाइक बातक कोनो अर्थे ने लागल। नन्दा भाय कहै छैथ, गंगा नहेलौं! जखन कि हिनका सभ दिन गामेमे देखै छिऐन। तखन सिमरिया कहिया गेला आ गंगा कखन नहेला? सिमरियो कोनो अपना गामसँ दू-कोस-चारि कोसपर थोड़े अछि जे लोक भोरमे जाएत आ स्नान करि जलखै बेरमे आकि कलौ बेरमे घुमि कऽ आबि जाएत। अपनो सवारी, अपन सवारी भेल कोनो टेम्पू आकि चरिचकिया गाड़ी, जेना- जीप, बोलेरो आकि स्कारपिओ। तइसँ गंगा नहाइले सिमरिया जाएत तैयो भरि दिन समय लगिये जाएत। ट्रेनसँ सहजे अठारह-बीस घन्टा जाइ-अबैमे लगत। तखन गंगा कखन नहेला। मन भेल जा कऽ पुछै छिऐन जे भाय सभ दिन गामेमे देखै छी तखन सिमरिया कहिया गेलौं आ गंगा कखन नहेलौं। फेर सोचलौं अखन पति-पत्नीक बीच गप-सप्प भऽ रहल अछि तँए अखन जा कऽ कोनो बात पुछब उचित नइ हएत। अनेरे नन्दा भाय सोचता दालि-भातमे मूसलचन्द बनिकऽ एला हेन। तँए रस्ते-रस्ते अपन घर दिस बढ़ि गेलौं। सोचलौं जखन नन्दा भाय बाध-बोनमे केतौ भेटता तँ पुछि लेबैन। दोसर दिन भनसा घरक ओसारापर बैस कऽ चाह पीबैत रही तँ पत्नी कहलैन- “जलखै आकि कलौ लेल कोनो तरकारी नइ अछि।” अपना सोचलौं जलखैमे गहुमक सोहारी तँ पियौजोक चटनी आकि अचारो सने खा लेब मुदा कलौ बिना तरकारीक केना खाएब। भाइ, चाउर आ दालिक कमी नइ अछि। किएक तँ पैछला साल पैछला साल भेल जे साल बीत रहल अछि, किएक तँ गोटि पंगरा खेत सभमे आब धान फुटि रहल छै, तँए पैछला साल कहलौं। हँ, तँ कहै छेलौं पैछला साल धानक उपजा नीक हाथ लागल छल। तेकर बाद रहल दालिक बात, तँ गोटेक मन मटर, पच्चीस-तीस किलो मौसरी आ पनरह-बीस किलो खेरही सेहो भेल छल। दू क्विन्टल अल्हू सेहो उपजौने रही मुदा अखाढ़ अबैत-अबैत सभ अल्लू सड़ि गेल। हँ, पियौज बाँचल अछि। अखनो घरमे पनरह-बीस किलो पियौज हएत। अपना टाट-फरकपर लत्ती-फत्ती नइ अछि। रोपैले झुमनी, घेरा आ सजमैनो रोपने रही मुदा केतए-सँ ने केतए-सँ हराशंख आकि सभ लत्तीकेँ खा गेल। पत्नीकेँ कहलयैन- “भूतहा हटिया तँ बेरियॉंमे लगत। बेरमे भूतहा हाट जा तरकारी कीनि आनब। मुदा कलौ लेल तँ तरकारी चाही।” मोन पड़ल नन्दा भाय तँ पान-छह कट्ठा खेतमे रामझुमनी आ दू-अढ़ाइ कट्ठा खेतमे घेराक खेती केने छैथ। किए ने हुनकेसँ एक किलो घेरा आ एक किलो रामझुमनी लऽ आनी। कहुना देता तँ हाट-बजारसँ सस्ते देता। फेर मोन पड़ल काल्हि जे नन्दा भाय सोझमतिया भैजीसँ कहै छलाजे गंगा नहेलौं, सेहो पुछि लेबैनजे भाय सभ दिन गामेमे देखै छी तखन गंगा कहिया नहेलौं। चाह पीब पत्नीकेँ कहलयैन- “एकटा झोरा आ पच्चासटा टका दिअ। हम नन्दा भायसँ तरकारी नेने अबै छी।” आब अहाँ कहबै जे टको पत्नीए-सँ मंगलिऐ। यौ भाय, अहाँसँ छाम की घरक सोलहन्नी गारजनी पत्नीए-केँ दऽ देने छिऐ। धान आकि गहुम बेच कऽ जे आमदनी भेल सभ पत्नीकेँ सुमझा देलिऐन। बर-बेगरतामे हुनकेसँ मांगि कऽ खर्च करै छी। पत्नीक मनमे जे होइतैन जे मरदबा पाइकेँ की करै छैथ की नइ, से तँ नइ ने मनमे हेतैन। ओना, पत्नियो पाइ ओरिया कऽ रखै छैथ आ अपना नइ रहलापर दोकानो-दौरीसँ जरूरते भरि समान अनै छैथ। बेलट्ट खर्चा एक्को पाइ नइ करै छथिन। पत्नी झोरा आ पचसटकही दैत बजली- “रामझुमनी जुएलका नहि लेब आ ने बुढ़ाएल घेरे लेब। लौजा रामझुमनीक तरकारी नीक होइए।” “ठीक छै।” कहैत हम झोरा लऽ विदा भऽ गेलौं। जखन नन्दा भाइक बारी लग पहुँचलौं तँ देखलयैन जे नन्दा भाय आ सोझमतिया भौजी रामझुमनी तोड़ि-तोड़ि जमा कऽ रहली हेन। लगधक पनरह-बीस किलो घेरा तोड़िकऽ रखने छला। हम फरिक्केसँ कहलयैन- “भाय साहैब, हमरो हाजरी।” तैपर नन्दा भाय बजला- “आबह! आबहअनिल!! कहहनिक्के ना छह किने?” हम कहलयैन- “हँभाय, अपने सबहक आसिरवादसँ सभ ठीक छी।” नन्दा भाय बजला- “रोप तँ बेसी नइ ने गललह?” हम कहलयैन- “हँ, भाय, दस कट्ठा गहींरका खेतमे चननचूर धान रोपने छी। पैछला साल नीक मंजा आएल रहए। उ धान किछु बेसीए गलि गेल। खोभितौं जे से बीये ने रहए। की करितौं, दू किलो कट्ठा हरितक्रान्ति, एक किलो कट्ठा पोटाँस आ दू किलो कट्ठा यूरिया मिला कऽ ओइ गललाहा धानमे छीटि देलिऐ। आब जे आड़िपर जाइ छी तँ बुझाइते ने अछि जे रोप गलल छेलए।” नन्दा भाय बजला- “नीक केलह। अच्छा केम्हर-केम्हर एलह हेन। तरकारी लेबह आकि ओहिना भेँट-घाँट करए एलह हेन।” हम कहलयैन- “भाय तरकारियो लेब आ अहाँसँ किछु गपो-सप्प करब। से तँ देखै छी जे अहाँ रामझुमनी तोड़ैमे लागल अछि।” नन्दा भाय बजला- “रामझुमनी तोड़ल भऽ गेल हेन आ घेरा पहिनहियेँ तोड़ि नेने छी।” हम कहलयैन- “पच्चीस-तीस किलो रामझुमनी आ पनरह-बीस किलो घेरा हएत।” नन्दा भाय बजला- “ठीक्के ठीकलह हेन।” तैबीच एकटा छिट्टामे पाँच-सात किलो घेरा आ पाँच-सात किलो रामझुमनी लऽ कऽ सोझमतिया भौजी गाम दिस माने घरपर विदा भऽ गेली। हम कहलयैन- “अतेक तरकारी भौजी की करती?” नन्दा भाय बजला- “गामोपर किछु लोक तरकारी कीनए अबै छैथ। तिनका सभ लेल ओ तरकारी लऽ गेली हेन। बाँकी जे बाँचत से तरकारी बेचुआ लऽ जाएत। बेचुआ हाटे-हाटे तरकारी बेचैत अछि। तरकारीए बेचि कऽ पाँच गोरेक परिवर चलबैत अछि। बेचाराकेँ घराड़ीक अलाबे एक धुर खेत नै छै। तखन तँ वएह अछि जे हटिये-हटिये तरकारी बेचि अपन गुजर करैए।” हम कहलयैन- “यौ भाय, भगवान सबहक बेरा पार लगबै छथिन। अच्छा भाय गप-सप्प होइत रहतै, पहिने हमरा एक किलो रामझुमनी आ एक किलो घेरा जोखि कऽ दऽ दिअ।” नन्दा भाय बजला- “बड़बढ़ियाँ।” ‘बड़बढ़ियाँ’कहि नन्दा भाय खोपड़ीसँ तरजू-किलो निकालि रामझुमनी तौलए लगला। हम कहलयैन- “भाय, लौजा रामझुमनी देब आ घेरो अजोहे देब।” तैपर नन्दा भाय बजला- “तोरा जे जुआएल लगै छह से छाँटि दहक।” अपना जनैत हम जुआएल रामझुमनी आ बुढ़ाएल घेरा छाँटि देलिऐ। नन्दा भाय, अदहा किलो रामझुमनी आ अदहा किलो घेरा दैत बजला- “ई हमरा तरफसँ भेलह। खेतपर एलह हेन।” पचासक नेाट दैत नन्दा भायकेँ कहलयैन- “लिअभाय, पाइ काटि लिअ।” नन्दा भाय बटुआ खोलि ओइमे सँ एकटा दसक सिक्का निकालि हमरा देलैथ आ पचसटकही बटुआमे रखैत बजला- “हम गामक लोककेँ पैकारे भाव तरकारी दइ छिऐ।” हम नन्दा भायसँ कहलयैन- “भाय, एकटा उपराग दइ छी।” नन्दा अकचकाइत बजला- “से की अनिल। कथीक उपराग। हमरासँ आकि हमरा धिया-पुतासँ कोन अपराध भऽ गेलह हेन जे तों भोरे-भोर उपराग दइ छह।” तैपर हम कहलयैन- “भाय अहाँ अथबा अहाँक परिवारसँ कोनो अपराध नइ भेल हेन।” नन्दा भाय बजला- “तखन उपराग किए बजलह।” हम कहलयैन- “भाय चुप्पेचाप गंगा नहा एलौं आ हमरा कहबो ने केलौं। हमरा कहितौं तँ संगे हमहूँ जइतौं। सएह उपराग दइ छी।” नन्दा भाय बजला- “हौअनिल, पैछला साल जे कार्तिक पूर्णिमा दिन गंगा नहाइले सिमरिया गेल रही तेकर बाद कहाँ सिमरिया गेलौं हेन।” हम कहलयैन- “तइ बैचमे तँ हमहूँ रही।” नन्दा भाय बजला- “हँ, से तँ तों रहबे करह। जँ नीक्के ना रहब तँ फेर कार्तिक पूर्णिमा दिन गंगा नहाइले सिमरिया जाएब। तहूँ चलिहह।” हम सोचमे पड़ि गेलौं। सोचए लगलौं, काल्हिए साँझमे नन्दा भाय सोझमतिया भौजीसँ कहै छला, चलू गंगा नहेलौं। आ अखन कहै छैथ जे कार्तिक पूर्णमाक बाद सिमरिया गेबे ने केलौं हेन। आखिर नन्दा भाय झूठ किए बजता। गंगे नहाइले गेल हेता तँ कहि दितैथजे गंगा नहाइले गेल छेलौं, ऐमे झूठ बजैक कोन बेगरता छै। हमरा सोचमे पड़ल देख नन्दा भाय बजला- “की सोचए लगलह।” हम कहलयैन- “भाय, जखन काल्हि साँझमे हम बाध दिससँ जाइ छेलौं आ जखन अहाँ दलान सामनमे एलौं तँ सुनलौं, अहाँ भौजीसँ कहै छेलिऐन, चलू गंगा नहेलौं।” नन्दा भाय कहलैन- “अच्छा..! तखुनका बात सुनि तों सोचलह जे नन्दा भाय गंगा नहा एला आ हमरा कहबो ने केलैन।” हम कहलैन- “हँ भाय, हम सएह सोचलौं आ तँए उपरागो देलौं।” नन्दा भाय कनेक काल गुम्म भऽ गेला। अपनो चुप्पे रही। जेबीसँ तमाकुलक डिब्बी निकालि तमाकुल चुना तरहत्थी नन्दा भाय दिस बढ़ेलौं। नन्दा भाय एक जूम तमाकुल ठोरमे लेला। तमाकुलक रस पबिते नन्दा भाय बजला- “बौआ, तों जे गंगा नहाइक बात सुनलह से ठीके सुनलह। हम ठीके तोरा भौजीकेँ कहै छेलिऐ जे चलू गंगा नहेलौं। मुदा तों एकर सोझका अर्थ बूझलह।” हम कहलयैन- “की सोझका अर्थ भाय?कनी फरिछा कऽ कहियौ।” नन्दा भाय बजला- “बौआ अनिल, ई बात तूँ बुझिते छहक जे लोक अपन पाप कटबैले गंगा स्नान करैए।” हमरा मुहसँ निकलल- “हँ भाय, बेसी लोक अपन पापे धोइले गंगा स्नान करैए।” नन्दा भाय कहलैन- “हौ बौआ, कर्जा जे छी सेहो पापे छी किने। जाबे धरि केकरो माथपर कर्जा रहैत अछि ताबे धरि ओ बेकती पाप तरे दबल रहैए। जखने कर्जा उतैर जाइ छै माने कर्जा सधि जाइ छै तखने लोक मुक्त भऽ जाइ छै। ई बुझहक जे, पाप तर जे दबल रहैए से पाप उतैर जाइ छै। तँए लोक बजैए, गंगा नहेलों।” आब हमरा नन्दा भाइक गपक अर्थ बुझा गेल। हम बजलौं- “हँभाय, कर्जा ठीके पाप छी आ कर्जा उतरब माने सधब गंगे नहाइ सदृश भेल मुदा अहाँकेँ कर्जा किए भेल आ केकरासँ कर्जा लेलौं। गाममे तँ केकरोसँ कर्जा नइ नेने छेलौं।” नन्दा भाय बजला- “तोरा अगुताइ नइ ने छह।” हम कहलयैन- “नइ अखन तेहेन कोनो काज नइ अछि जे अगुताइ रहत।” नन्दा भाय बजला- “बौआ, तोरा तँ बुझले छह जे हम एक भाय आ एक बहीन छी।” हम कहलयैन- “से कहीं नइ बुझल रहत। अहाँक परिवारसँ हमरा परिवारक बाबूएक अमलदारीसँ दोस्तियारे अछि। की हम अहाँक बहिनक बिआहक मरजादक भोज नइ खेने छी। खेने छी। मरजादक भोजक सकरौड़ीमे जे नारियर, छोहाड़ा, किसमिस सभ देल रहए सेहो मोन अछिए।” नन्दा भाय बजला- “बौआ अनिल, हमर चन्दा बहिनक बिआह कमलपुर गाममे एकटा नीक परिवारमे भेल अछि। सेहो बुझले हेतह?” हम कहलयैन- “हँ भाय, सेहो बुझल अछि। कैक बेर कमलपुरबला पाहुन आ चन्दा दैयासँ सेहो भेँट अछि।” नन्दा भाय बजला- “जइ समयमे चन्दा बहिनक बिआह कमलपुर गौरीकान्त बाबूक बेटासँ भेल ओइ समयमे गौरीकान्त बाबूकेँ बारह बिगहा खेत छेलैन। गौरीकान्त बाबूकेँ तीनटा बेटा छैन जइमे सभसँ छोट बेटा चन्द्रमोहन हमर बहनोइ भेला। बीस-बाइस बर्ख पहिने गौरीकान्त बाबू स्वर्गवास भऽ गेला। बाप मरलाक साले भरिक भीतर तीनू भाँइमे भिनौज भऽ गेलैन। चरि-चरि बिगहा खेत तीनू भाँइकेँ हिस्सा भेलैन जइमे धराड़ी, बाँस, कलम आ पोखैर छल। हमर बहनोइ चन्द्रमोहन बाबू बी.ए. पास छैथ। सरकारी नौकरीक पाछू बहुत हाथ-पैर मारलैथ मुदा नौकरी नहि भेलैन। हारि कऽ दिल्ली चलि गेला। दिल्लीमे किछु दिन काजो केलैथ मुदा डेंगू बोखारक डरसँ दिल्लीसँ पड़ाए कऽ गाम आबि गेला। तही बीच हुनकर पिताजी मरि गेलखिन। पिताजीक मरलाक छबे मासक भीतर भैयारीमे भिनौज भऽ गेलैन आ हमर बहनोइ दिल्ली छोड़ि गामेमे रहए लगला।” हम पुछलयैन- “गाममे कोनेा रोजगार करै छैथ आकि पूर्णरूपेण खेतीएपर निर्भर छैथ?” नन्दा भाय कहलैन- “पहिने अनाजक खरीद-बिक्री करै छला। नीक आमदनी होइ छेलैन। मुदा एक बेर तीसीमे बड़ पैघ घाटा लगलैन जइसँ पूजी टुटि गेलैन। तहियेसँ खरीद-बिक्री छोड़ि देलखिन आ खेतीपर पूर्णतया आश्रित भऽ गेला।” हम पुछलयैन- “चन्दा बहिनकेँ कैकटा सखा-सन्तान छै?” नन्दा भाय कहलैन- “तीनटा बेटी आ एक्केटा बेटा छै।” हम पुछलयैन- “बेटी सभक बिआह भऽ गेल छै किने?” नन्दा भाय बजला- “हँ, भगवानक कृपासँ तीनू बेटीक बिआह भऽ गेल छैन आ हमर तीनू भगिनी सुखी अछि। एकटा भगिन-जमाए सरकारी नौकरीमे छैथ आ दूटाकेँ नीक बिजनेस छैन।” हम कहलयैन- “चलू, ई तँ खुशीक बात भेल।” नन्दा भाय कहलैन- “खुशीक तँ बात छीहे मुदा हमरा बहिन-बहिनोइक बेटीक बिआहमे डेढ़ बिगहा खेत बिका गेलैन।” हम पुछलयैन- “आ भागिन की करैए?” नन्दा भाय बतौलैन- “हमरा बहिनकेँ तीनटा बेटीपर सँ बेटा भेल रहैन। बड़ दुलारू। देखैयोमे बड़ सुन्नर। पढ़ैयोमे बड़ चन्सगर। फर्स्ट डिविजनसँ मैट्रिक आ फर्स्ट डिविजनमे नीक मार्क्ससँ इन्टर केलक। दू बेर आई.आई.टी. आ जे.ई.ई. प्रतियोगिता परीक्षामे बैसल मुदा सफल नइ भेल। बापसँ कहलक जे हम भोपालमे इंजीनियरिंग पढ़ब। बहिनो सभ भाइक बातकेँ समर्थन केलकै। बेटाक बात मानि हमर बहनोइ एक बिगहा खेत बेच भोपालमे इंजीनियरिंग पढ़ा बेटाकेँ इंजीनियर बनौलैथ।” तैपर हम पुछलयैन- “भागिन इंजीनियरिंग पास कऽ कोनो जॉव करैए आकि बेरोजगारे अछि?” नन्दा भाय कहलैन- “हौ हमर भागिन कहलक जे हम प्राइवेट नौकरी नइ करब, सरकारी नौकरीक लेल प्रतियोगिता परीक्षाक तैयारी करब। पाँच कट्ठा खेत बेच हमर बहनोइ फेरो पाइ देलकै। हमर भागिन दिल्लीमे रहि कऽ प्रतियोगिता परीक्षाक तैयारी करै छेलए मुदा तही बीचमे चन्दाकेँ लकबा मारि देलकै आ ब्रेन हेमरेज भऽ गेलइ।” हम कहलयैन- “ई लकबाबला बात तँ हमरो बुझल अछि। लगधक दू साल पहिनुका घटना छी।” नन्दा भाय बजला- “हँ, ठीक्के कहलह। 2018क नवम्बर मासक घटना छी।” हम पुछलयैन- “अखन चन्दा बहिनक की हाल छै?” नन्दा भाय बजला- “सुनहक ने। जखन ब्रेन हेमरेज भऽ गेलै तँ हमर बहनोइ चन्दाकेँ लऽ कऽ पटना गेला आ बी.एन. नरसिंग होममे भरती करौलखिन। भागिनकेँ फोन भेलै ओहो दिल्लीसँ पटना पहुँचल। डॉक्टर हमरा बहनोइसँ कहलकैन, ब्रेन हेमरेज का केश है इसका ब्रेन खोलना पड़ेगा। पाँच लाख रूपये ऑपरेशनमे लगेंगे। दबा में भी दो लाख से ऊपरे खर्च पड़ जाएगा। तत्काल ऑपरेशन के लिए चार लाख यप्ये जमा कीजिए। मेहमान (पाहुन) पटनासँ फोनपर हमरो कहलैनजे कमसँ कम दू लाख रूपया बेवस्था कऽ कए पटना आऊ। हौ बाबू, मेहमानक बात सुनि हमबड़का सोचमे पड़ि गेलौं। अपना लग मात्र पाँच हजार टका रहए जे मेहमानक खातामे जमा कऽ देलिऐ। एक्केटा बहिन, सोचलौं दू-तीन कट्ठा जमीनो बेच कऽ बहिनक इलाजमे ढौआ देब। अपना गाममे तीन गोरे जमीन खरीदैए। सभसँ पहिने अशोक लग गेलौं। सभ बात कहलिऐ। पुछलक, कोन जमीन बेचब। तैपर हम कहलिऐ, नाढ़ी-चौरीक खेत बेचब। तैपर अशोक पुछलक, की रेटमे जमीन देब। हम कहलिऐ, हौ बौआ, हमरे आरिमे तिलेसर पैछला साल नब्बे हजार रूपैए कट्ठा बेचने छेलए। अशोक बाजल, हम पच्चास हजार रूपैए कट्ठा लेब। जँ बेचबाक अछि तँ काल्हिये रजष्ट्री ऑफिस चलू। हम छगुन्तामे पड़ि गेलौं। केतए नब्बे हजार आ केतए पचास हजार।” नन्दा भाय आगाँ बजला- “हौ बौआ, अशोक लगसँ मुँह चूरू भऽ गामपर एलौं। खेनाइयो ने सोहाएल। बहिनक चिन्ता छल। सोचलौं आब केतए जाएब। मोन पड़ल जे विनय सेहो पाइबला हसामी अछि। हुनको बेटा इनकम टेक्सक इंस्पेक्टर छी। ओहो जमीन कीनैए। हम विनय लग गेलौं। कहलयैन यौ विनय बाबू हमरा किछ पाइक बेगरता अछि तँए तीन कट्ठा जमीन बेचब।” तैपर विनय पुछलैन- “कोन खेत बेचब?” हम खेतक ठाम बता देलिऐ। तैपर विनय पुछलैन- “की रेट रखने छिऐ?” हम कहलयैन- “एक लाख रूपैए कट्ठा।” तैपर विनय बजला- “हमरा लग तँ अखन पाइयो नइ अछि। तैयो जँ अहाँ साठि हजार रूपैए कट्ठा बेचब तँ हम पैंचो-पालट करि कऽ लऽ लेब।” सोचलौं सभ मजबूरीसँ फायदा उठा रहल अछि। आब की करब। पत्नी कहलैन जे रफीको भाय जमीन खरीदै छैथ। रफीकसँ भेँट कऽ सभ बात कहलयैन। तँ ओ बजला, ई जमीन हम नइ लेब। चौकपर जे अहाँक खेत अछि से जँ बेचब तँ हम लऽ लेब। चौकपर खेतक रेट पाँच लाख रूपैए कट्ठा अछि। रफीक भाय बजला, तीन लाख रूपैए कट्ठा हम चौकपरबला जमीन लऽ लेब। आबि कऽ पत्नीकेँ कहलयैन। पत्नी बजली, अहाँ अनीताक दुल्हाकेँ फोन कऽ सभ बात कहियौ। हुनको लग पाइ रहै छैन। भगवानक कृपा हिनकापर बनल छैन। माटि छुबै छथिन तँ सोना भऽ जाइ छै। अनीता हमर सारिक नाओं छी। हम तुरन्ते सारहुकेँ (अनीताक दुल्हाकेँ) फोन लगेलौं। पूरा बात सुनलाक बाद ओ कहलैन- “ओत्तेक पाइ तँ अखन नहि अछि तखन एक लाख पच्चीस हजार टका अछि, काल्हिये लऽ जाऊ।” हम भोरे सारहु लगसँ पाइ लऽ अनलौं आ ओही दिन पटना जा कऽ पाहुनकेँ पाइयो दऽ एलिऐन आ बहिनक जिज्ञासा सेहो कऽ लेलौं। नन्दा भाइक सभ बात सुनि बजलौ- “पाइयो खर्चाक बाद चन्दा बहिन ठीक भऽ गेली ने?” नन्दा भाय बजला- “हौ बौआ, सभ मिला कऽ दस लाख टकासँ ऊपर खर्च भऽ गेलैन। मुदा संतोख यएह अछि जे चन्दाकेँ नित्यक्रिया आदि करैमे दिक्कत नइ होइ छै। चलबो-फिरबो करैए। आब बोलियो नइ लटपटाइ छै। भागिन अखनो माइक पाछू अछि।” हम कहलयैन- “आब चलै छी भाय।” तैपर नन्दा भाय बजला- “असल गप तँ रहिए गेल।” हम पुछलयैन- “की असल गप भाय?” नन्दा भाय कहलैन- “सारहु लगसँ पाइक मांग होमए लगल। सारहु तँ कम मुदा हमर सारि अनीता बरबैर फोन करए। केकरोसँ जमीनक बात करिऐ तँ लाख टकाक बदला पच्चास-साठि हजार कट्ठा लगाबए। तहूँमे किछ लोकक मनमे रहै जे चौकपरहक जमीन कहुना लिखा ली। पैछला साल बैसक्खा तरकारीक खेती केलौं। साठि हजार टकाक आमदनी भेल, सारहुकेँ दऽ एलिऐन। ऐ साल फेर भिन्डी, खीरा, घेरा, सजमैन आ करैलाक खेती केलौं। सुतरल, तीन दिन पहिने तक पचहत्तर हजार टकाक आमदनी भेल। काल्हि भोरे पचहत्तरो हजार टका लऽ कऽ सारहु ऐठाम गेलौं। पचहत्तर हजार टका सारहुकेँ दैत कहलयैन, पनरह हजर टका आरो दऽ जाएब। तैपर सारहु दस हजार टका हमरा आपस करैत बजला, हम तँ एक लाख पच्चीसे हजार टका देने छेलौं जइमे अहाँ साठि हजार टका पहिने दऽ गेल छेलौं तँ पैंसैठे हजार टा ने बाँकी रहल छल। ई दस हजार किए दऽ रहल छी। आ कहै छी पनरह हजार आरो दऽ जाएब?” हम कहलयैन- “ई दस हजार सुइद दऽ रहल छी आ आगाँ जे पनरह हजार देब ओहो सुइदे देब।” तैपर हमर सारहु बजला- “अँइ यौ सारहु, चन्दा बहिन अहींटाक बहिन छथिन ओ हमर बहिन नइ भेल की?राखू ई सुइदबला टका आ आब टका नै लएब।” हम की बजितौं। हमर तँ बोलीए बन्न भऽ गेल। हमरा आँखिसँ दहो-बहो नोर जाए लगल। नन्दा भाय बजला- “बौआ आब बुझलह ने जे गंगा केना नहेलौं।” हम कहलयैन- “हँ भाय, सभ बुझि गेलौं।” तखने बेचुआ दुनू परानी तरकारी जोखबए आएल। हम नन्दा भायसँ कहलयैन- “भाय, आब अहाँबेचूकेँ तरकारी जोखि कऽ दियौ। हम जाइ छी।” नन्दा भाय बजला- “तरकारीक बेगरता हुअ तँ लऽ जइहह। पाइ-कौरीक चिन्ता जुनि करिहह। पाइ आगाँ-पाछाँ अबैत रहतै।” हम कहलयैन- “ठीक छै भाय।” अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। मुन्नाजी बीहनि कथा दरेग -- लहालोट भेल चिलका के कोरा मे लैत दादी माँ - ऐँ यै कनिञा, केहेन निर्दयी छी ? -- माँ , फैरेक्स बनेने अबै छी! -- किए ,अपन छाती लगा लैतीयै से नै ? -- माँ , अपन दुध पीएला सँ फीगर खराब भ' जएत ! बजरूओ दुध पर त' पलाइए जेतै ने ! -- धुर ....छी ! " अहाँ सँ नीक त' ओ निमुधन गए , जे अपनो बच्चा पालैए आ अहाँ सनक मायक चिलका सेहो। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३. पद्य ३.१.अमर ठाकुर- २टा कविता ३.२.आशीष अनचिन्हार-२ टा गजल अमर ठाकुर २टा कविता १ आवाहन सुनियौ-सुनियौ हे मैथिल जन आब भरु हुंकार। मिथिला जौँ शिथिला भ’सुततीह दरिद्रा सटले रहत कपार। बाबू भैया यौ! मैया दैया यै!! सिरजु-सिरजु मिथिलो में रोजगार। ■ बूढ़ बाप हक्कन कानयछथि, माय के फाटल साड़ी। आओर नवोढ़ा सिसकि रहल छथि, बेदराक कोन पुछारी। घरक गोसाउनि बन्हक लागल बजितो होयत अछि लाज बाबू भैया यौ! मैया दैया यै!! सिरजु-सिरजु मिथिलो मे रोजगार। ■ अहँक अतीत भरल गौरव सँ, अयाचिक संतोख। अपना माटिक सेवा करब, रहब हँसैत भरि पोख। जे जोगर से काज करू, जुनि करू फुसियाँहिक लाज। बाबू भैया यौ! मैया दैया यै!! सिरजु-सिरजु मिथिलो मेरोजगार। ■ बहुत भेल अधिकार कटौती, बहुत गलेलहुँ चाम। एक-एकटा ओलि सधबियहु, बहुत चुबेलहुँ घाम। शासन के सिंहासन डोलय, तेहेन भरू हुँकार। बाबू भैया यौ! मैया दैया यै!! सिरजु-सिरजु मिथिलो में रोजगार। ०२-०७-२०२१ २ मोमबत्ती जरैत मोमबत्ती पिघलैत मोमबत्ती, घटैत मोमबत्ती मुदा जरैत मोमबत्ती। अनका लए प्रकाश सिरजैत, स्वयं अन्हारमेरहैत, मुँहअप्पनजरबैत मोमबत्ती। घटैत मोमबत्ती मुदा जरैत मोमबत्ती। आलोकित दुनिया केँकरैत, परोपकारक कथा कहैत क्षणभंगुरताक प्रमाण दैत मोमबत्ती। घटैत मोमबत्ती मुदा जरैत मोमबत्ती। ०२- ०७-२०२१ अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। आशीष अनचिन्हार २ टा गजल १
मोन बनलै शांतिवादी पेट बनबै क्रांतिकारी एक राजा एक रानी बाद बाँकी दास दासी ई जमा हमरे जमा अछि आँखि भारी पीठ भारी की कऽ सकतै से तँ कहियौ दोस्त बनलै काठ आरी भाग ओकर एहने छै एकभुक्ते एकचारी सभ पाँतिमे 2122-2122 मात्राक्रम अछि (बहरे रमल मोरब्बा सालिम वा बहरे रमल सालिम चारि रुक्नी)। २
मोनक उप्पर बात बहुत मोनक भित्तर घात बहुत
बिहाड़ि या कोनो कारण गाछक निच्चा पात बहुत
छौंड़ी सन तरसाबैए हमरा सभकेँ भात बहुत
सरकारक मेहरबानी तँइ भेलै उत्पात बहुत
अनचिन्हारक कपारमे नोरक छै खैरात बहुत
सभ पाँतिमे 22-22-22-2 मात्राक्रम अछि। दूटा अलग-अलग लघुकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि। ई बहरे मीर अछि। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ४.स्त्री कोना (सम्पादक- इरा मल्लिक) ४.१.सुचिता कुमारी- पोतीक बियाह सुचिता कुमारी पोतीक बियाह
राम दुलारी काकी के बड़की पोतीक विवाह ठीक भेलनि अछि। बड़का बेटाक फोन आएल रहैन जे छोटका संगे विवाह में आबि जाएब । काकी के दूटा बेटा रहैैन, बेटी नहि देने रहथिन भगवान तैं पोतीक विवाह देखबाक बड़ मोन रहैन हुनका। अपन बियौहती हार ओकरा देबाक वास्ते काकी रखने रहथिन। विवाहक खबरि सुनिते ओ जेबाक ओरिआओन में लागि गेली। काकीक बड़का बेटा कलकत्ता में बड़ पैघ वकील छलैन, मुदा छोटका के नहि कोनो नोकरी भेलै, आ ओ खेतीबारी सअ अपन परिवारक भरणपोषण करैत छल। बाबूक मरलाक बाद माएक देखभालक दायित्व सेहो एकरे छलैक। विवाह में जेबाक तैयारी पूरा भेलाक बाद काकी छोटका सअ पुछलथिन "कहिया जेबहक कलकत्ता? " "से कियैक" "पूजीया के बियाह छैक से बीसरि गेलहक? " "मुदा माए हम बियाह में त नहि जा सकब। " "से कियैक? " "अहा त बुझिते छी जे हमर आर्थिक हाल नीक नहि अछि, आ एहि बेर फसिल बढिया नहि भेल। आ फेर कलकत्ता जाए में त टाका लगतै से कहाँ सअ लाएब। भैया तअ सीधे एबाक लेल कहि देलाह, एको बेर पुछबो नहि केलाह जे टिकटक पाइ छह कि नहि? " "बेटीक बियाह में अपने कतेक खर्च होइत छैक त तोरा ओ पाइ लेल की पुछतह। " "हमरा छोरु मुदा अहां तअ माए छिऐन अहां के त आबि कए लअ जएता, आ नहि त कम स कम टिकटो कटा कअ पठबिताह। हमर हाल तअ बुझले छैन हुनका। " "छोड़ह ई सब गप्प, तु नहि जेबह तअ नहि जा मुदा हम त जाएब, हमरा लग किछु टाका अछि, जाहि से आबए-जाए के टिकट भ जाएत। " "मुदा अहां जाएब ककरा संगे। " "हम एसगरे चलि जाएब, तु गाड़ी पर बैसा दिहअ, आ बडका के फोन कअ दिहक, ओ हमरा कलकत्ता स्टेशन पर आबि क लअ जाएत। " "ठीक छै त अहां काल्हि गाड़ी पकड़ि लिय परसु बियाह छैक ,ओहि दिन भिनसरे पहुंच जाएब। आ फेर जहिया एबाक होएत हमरा फोन कअ देब हम दरभंगा स्टेशन पर स अहां के लअ आएब। " "ठीक छैक। "
एम्हर कलकत्ता में बियाह दिन सभ गोटे तैयारी में लागल छलाह। बरियातीक एबाक समय भअ गेल छलै। कन्याक पिता अपस्यात भेल काज में लागल छला कि तखने देखैत छैथ जे माए आगु में ठाढ छैथ। "माए अहां, एखन एलहुं, सबेरे किएक नहि एलहुं, आ एसगरे एलहुं, छोटका नहि आएल संगे ? " "छोटका नहि आबि सकल, हमरा गाड़ी में बैसा कअ ओ कहने छल जे तोरा फोन कअ देतह , आ तु स्टेशन आबि जैतह। गाड़ी त भिनसरे पहुँच गेल , कतेक काल तोहर बाट तकलहुं तु नहि एलह दुपहरिया भअ गेल तखन एकटा टैक्सी पकड़ि ओतअ स बिदा भेलहुं, कतेक बौआ क एखन घर पहुँचलहुं। "मुदा हमरा फोन नहि आएल, ऐ यैइ काल्हि छोटकाक फोन आएल छल? " "हं फोन त आएल रहै, मुदा अहां काज में व्यस्त छलहुं, तैं हम नहि कहलहुं। " पत्नीक उत्तर स वकील साहब खीसीया जाइ छैथ, "अहांक कारण माए के कतेक परेशानी भेलैन, आ अहां बादो में नहि कहलहुं जे छोटका फोन केनेे छल। " "जै दहक की भेलै बियाह स पहिने हम आबि त गेलहुं, आ कनिया पूजा कतअ अछि कने देखतियैक "। " ओ अपन रुम में तैयार भ रहल अछि। " "हम ओतहि जा कअ भेंट क अबै छी। " काकी जा कअ पोती के भरि पांज धअ लैत छथिन, आ गर में अपन बला हार पहिरा दैत छथिन, ताबेत पाछु-पाछु पुुतोहु सेहो आबि जाइ छैन। "मम्मी दादी के एतअ कियैक लअ एलियन, ओ हमर सभटा मेकअप खराब क देली, आ ई ओल्ड फैशन हार हमरा पहीरा देली अछि। " "कोनो बात नहि बेटा अहां अपन मेकअप ठीक कअ लिय,आ ई हार लाउ हम राखि लैत छी। आ माए ई चलते किछु जलपान क लेथ। " किछु काल बाद काकी जखन जलपान करैत जलील त हुनक कान में बेटाक स्वर सुनाई देलक, । "हे यै, सुनै छी,माए लेल कोनो घर में ओछैन कअ दियौ बड थाकि गेल हेती, किछु काल अराम क लेती। " "आब हुनका लेल बिछौना कोन घर में करियनि,सभ में त पहिने स गेस्ट सब भरल अछि, पहिने अहां कहलहुं जे माए नहि एती। आब ओ एलीह अछि त आब एखन कतअ व्यवस्था करियनि। " "ई अहां की कहैत छी, कतहुँ व्यवस्था कअ दियौन , माए थाकल छैथ। " ई सुनिते काकी ओतअ आबि जाइ छैथ। "की भेलह बौआ हमरा लेल किएक परेशान होइत छी, हम त बियाह देखबाक लेल एलहुं अछि, राति भरि बियाह देखब आ भोरे चलि जाएब गाम। हमरा लेल बिछौन नहि करु। " "से किएक भोरे चलि जाएब माए, आब एलहुं अछि त किछु दिन रहब ने। " "नहि बौआ हमरा एतअ मोन नहि लगैत अछि,हम त बियाहे देखबाक लेल आएल छलहुं। ओहि के बाद रहि क की करब एतअ। " "ठीक छैक जे अहांक इच्छा। " अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ........................................................................................................................ संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] Videha e-Learning पेटार (रिसोर्स सेन्टर) शब्द-व्याकरण-इतिहास MAITHILI IDIOMS & PHRASES मैथिली मुहावरा एवम् लोकोक्ति प्रकाश- रमाकान्त मिश्र मिहिर (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) डॉ. ललिता झा- मैथिलीक भोजन सम्बन्धी शब्दावली (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) मैथिली शब्द संचय MAITHILI DICTIONARY- RAMDEO JHA (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) ENGLISH MAITHILI COMPUTER DICTIONARY MAITHILI ENGLISH DICTIONARY अणिमा सिंह -Shishu_Geet_Khel_Anima_Singh डॉ. रमण झा मैथिली काव्यमे अलङ्कार अलङ्कार-भास्कर आनन्द मिश्र (सौजन्य श्री रमानन्द झा "रमण")- मिथिला भाषाक सुबोध व्याकरण BHOLALAL DAS मैथिली सुबोध व्याकरण- भोला लाल दास राधाकृष्ण चौधरी- A Survey of Maithili Literature ........................................................................................................................ मूलपाठ तिरहुता लिपिक उद्भव ओ विकास (यू.पी.एस.सी. सिलेबस) राजेश्वर झा- मिथिलाक्षरक उद्भव ओ विकास (मैथिली साहित्य संस्थान आर्काइव) Surendra Jha Suman दत्त-वती (मूल)- श्री सुरेन्द्र झा सुमन (यू.पी.एस.सी. सिलेबस) प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) CIIL SITE ........................................................................................................................ समीक्षा सुभाष चन्द्र यादव-राजकमल चौधरी: मोनोग्राफ शिव कुमार झा "टिल्लू" अंशु-समालोचना डॉ बचेश्वर झा- B_JHA_Nibhand_Nikunj.pdf डॉ. देवशंकर नवीन- Adhunik_Sahityak_Paridrishya डॉ. रमण झा- भिन्न-अभिन्न प्रेमशंकर सिंह- मैथिली भाषा साहित्य:बीसम शताब्दी (आलोचना) डॉ. रमानन्द झा 'रमण' हिआओल अखियासल CIIL SITE दुर्गानन्द मण्डल-चक्षु RAMDEO JHA दत्त-वतीक वस्तु कौशल- डॊ. श्रीरामदेवझा SHAILENDRA MOHAN JHA परिचय निचय- डॊ शैलेन्द्र मोहन झा ........................................................................................................................ अतिरिक्त पाठ पहिने मिथिला मैथिलीक सामान्य जानकारी लेल एहि पोथी केँ पढ़ू:- राधाकृष्ण चौधरी- मिथिलाक इतिहास फेर एहि मनलग्गू फाइल सभकेँ सेहो पढ़ू:- केदारनाथ चौधरी चमेलीरानी माहुर करार कुमार पवन पइठ (मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ कथा) (साभार अंतिका) डायरीक खाली पन्ना (साभार अंतिका) याेगेन्द्र पाठक वियाेगी- विज्ञानक बतकही रामलोचन ठाकुर- मैथिली लोककथा SAHITYA AKADEMI http://sahitya-akademi.gov.in/publications/e-books.jsp http://sahitya-akademi.gov.in/general/Digitalbooks.jsp CIIL http://corpora.ciil.org/maisam.htm अखियासल (रमानन्द झा रमण) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI1.pdf जुआयल कनकनी- महेन्द्र http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI2.pdf प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI3.pdf सृजन केर दीप पर्व- सं केदार कानन आ अरविन्द ठाकुर http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI4.pdf मैथिली गद्य संग्रह- सं शैलेन्द्र मोहन झा http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI5.pdf JNU http://sanskrit.jnu.ac.in/maithili/index.jsp http://sanskrit.jnu.ac.in/student_projects/lexicon.jsp?lexicon=maithili ARCHIVE.ORG https://archive.org/details/%40vijay_deo_jha?&sort=-publicdate&page=2 VIDEHA MAITHILI BOOKS/ PICTURE-AUDIO-VIDEO ARCHIVE http://videha.co.in/new_page_15.htm https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ ALL INDIA RADIO DOORDARSHAN आकाशवाणी दूरदर्शन http://prasarbharati.gov.in/ http://newsonair.com/ https://doordarshan.gov.in/ आकाशवाणी मैथिली पोडकास्ट http://prasarbharati.gov.in/podcast.php?filterlang=Maithili&from=1947-08-15&fromwp=2020-08-29&to=2050-12-31&search=GO आकाशवाणी पटना/ दरभंगा मैथिली रेजनल न्यूज टेक्स्ट डाउनलोड-1 http://newsonair.com/RNU-NSD-Audio-Archive-Search.aspx आकाशवाणी पटना/ दरभंगा मैथिली रेजनल न्यूज टेक्स्ट डाउनलोड-2 http://newsonair.com/Regional-Text.aspx आकाशवाणी दरभंगा http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=282 आकाशवाणी दरभंगा यू ट्यूब चैनल https://www.youtube.com/channel/UCGdNveEFmv4pPolWiTEMxVA आकाशवाणी भागलपुर http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=359 आकाशवाणी पूर्णियाँ http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=256 आकाशवाणी पटना http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=122 IGNCA http://ignca.nic.in/coilnet/mithila.htm http://ignca.nic.in/coilnet/kalyani.htm (MAITHILI ENGLISH DICTIONARY) http://tdil.mit.gov.in/CoilNet/IGNCA/mithila.htm MITHILA DARSHAN https://mithiladarshan.com/ (online pdf of Maithili journal) I LOVE MITHILA https://www.ilovemithila.com/ (online maithili journal) मैथिली साहित्य संस्थान https://www.maithilisahityasansthan.org/ https://www.maithilisahityasansthan.org/resources (online pdf of Reasearch Papers/ books) ........................................................................................................................ VIDEHA e-LEARNING YOUTUBE CHANNEL https://www.youtube.com/channel/UC4abVKqMj2pDWIAkXiOHp7A (अनुवर्तते) -गजेन्द्र ठाकुर विदेहक किछु विशेषांक:- १) हाइकू विशेषांक १२ म अंक, १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf 12.pdf २) गजल विशेषांक २१ म अंक, १ नवम्बर २००८ Videha_01_11_2008.pdf Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf 21.pdf ३) विहनि कथा विशेषांक ६७ म अंक, १ अक्टूबर २०१० Videha_01_10_2010 Videha_01_10_2010_Tirhuta 67 ४) बाल साहित्य विशेषांक ७० म अंक, १५ नवम्बर २०१० Videha_15_11_2010 Videha_15_11_2010_Tirhuta 70 ५) नाटक विशेषांक ७२ म अंक १५ दिसम्बर२०१० Videha_15_12_2010 Videha_15_12_2010_Tirhuta 72 ६) नारी विशेषांक ७७म अंक ०१ मार्च २०११ Videha_01_03_2011 Videha_01_03_2011_Tirhuta 77 ७) अनुवाद विशेषांक (गद्य-पद्य भारती) ९७म अंक Videha_01_01_2012 Videha_01_01_2012_Tirhuta 97 ८) बाल गजल विशेषांक विदेहक अंक १११ म अंक, १ अगस्त २०१२ Videha_01_08_2012 Videha_01_08_2012_Tirhuta 111 ९) भक्ति गजल विशेषांक १२६ म अंक, १५ मार्च २०१३ Videha_15_03_2013 Videha_15_03_2013_Tirhuta 126 १०) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक १४२ म, अंक १५ नवम्बर २०१३ Videha_15_11_2013 Videha_15_11_2013_Tirhuta 142 ११) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 १२) अरविन्द ठाकुर विशेषांक १८९ म अंक १ नवम्बर २०१५ Videha_01_11_2015 १३) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक १९१ म अंक १ दिसम्बर २०१५ Videha_01_12_2015 १४) विदेह सम्मान विशेषाक- २००म अक १५ अप्रैल २०१६/ २०५ म अक १ जुलाई २०१६ Videha_15_04_2016 Videha_01_07_2016 १५) मैथिली सी.डी./ अल्बम गीत संगीत विशेषांक- २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ Videha_01_01_2017 १६) मैथिली वेब पत्रकारिता विशेषांक VIDEHA 313 लेखकसं आमंत्रित रचनापर आमंत्रित आलोचकक टिप्पणीक शृंखला १७) मैथिली बीहनि कथा विशेषांक-२ VIDEHA 317 १८) रामलोचन ठाकुर विशेषांक VIDEHA 319 १९) रामलोचन ठाकुर श्रद्धांजलि विशेषांक VIDEHA 320 १. कामिनीक पांच टा कविता आ ओइपर मधुकान्त झाक टिप्पणी विदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016 एडिटर्स चोइस सीरीज एडिटर्स चोइस सीरीज-१ विदेहक १२३ म (०१ फरबरी २०१३) अंकमे बलात्कारपर मैथिलीमे पहिल कविता प्रकाशित भेल छल। ई दिसम्बर २०१२ क दिल्लीक निर्भया बलात्कार काण्डक बादक समय छल। ओना ई अनूदित रचना छल, तेलुगुमे पसुपुलेटी गीताक एहि कविताक हिन्दी अनुवाद केने छलीह आर. शांता सुन्दरी आ हिन्दीसँ मैथिली अनुवाद केने छलाह विनीत उत्पल। हमर जानकारीमे एहिसँ बेशी सिहराबैबला कविता कोनो भाषामे नहि रचल गेल अछि। सात सालक बादो ई समस्या ओहने अछि। ई कविता सभकेँ पढ़बाक चाही, खास कऽ सभ बेटीक बापकेँ, सभ बहिनक भाएकेँ आ सभ पत्नीक पतिकेँ। आ विचारबाक चाही जे हम सभ अपना बच्चा सभ लेल केहन समाज बनेने छी। एडिटर्स चोइस सीरीज-१ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-२ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच ब्रेस्ट कैसरक समस्यापर विदेह मे मीना झा केर एकटा लघु कथा प्रकाशित भेल। ई मैथिलीक पहिल कथा छल जे ब्रेस्ट कैसर पर लिखल गेल। हिन्दीमे सेहो ताधरि एहि विषयपर कथा नहि लिखल गेल छल, कारण एहि कथाक ई-प्रकाशित भेलाक १-२ सालक बाद हिन्दीमे दू गोटेमे घोंघाउज भऽ रहल छल कि पहिल हम आकि हम, मुदा दुनूक तिथि मैथिलीक कथाक परवर्ती छल। बादमे ई विदेह लघु कथामे सेहो संकलित भेल। एडिटर्स चोइस सीरीज-२ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-३ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिलक किछु बाल कविता प्रकाशित भेल। बादमे हुनकर ३ टा बाल कविता विदेह शिशु उत्सवमे संकलित भेल जाहिमे २ टा कविता बेबी चाइल्डपर छल। पढ़ू ई तीनू कविता, बादक दुनू बेबी चाइल्डपर लिखल कविता पढ़बे टा करू से आग्रह। एडिटर्स चोइस सीरीज-३ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-४ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच जगदानन्द झा मनुक एकटा दीर्घ बाल कथा कहि लिअ बा उपन्यास प्रकाशित भेल, नाम छल चोनहा। बादमे ई रचना विदेह शिशु उत्सवमे संकलित भेल, ई रचना बाल मनोविज्ञानपर आधारित मैथिलीक पहिल रचना छी, मैथिली बाल साहित्य कोना लिखी तकर ट्रेनिंग कोर्समे एहि उपन्यासकेँ राखल जेबाक चाही। कोना मॊडर्न उपन्यास आगाँ बढ़ै छै, स्टेप बाइ स्टेप आ सेहो बाल उपन्यास। पढ़बे टा करू से आग्रह। एडिटर्स चोइस सीरीज-४ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-५ एडिटर्स चोइस ५ मे मैथिलीक "उसने कहा था" माने कुमार पवनक दीर्घकथा "पइठ" (साभार अंतिका) । हिन्दीक पाठक, जे "उसने कहा था" पढ़ने हेता, केँ बुझल छन्हि जे कोना अहि कथाकेँ रचि चन्द्रधर शर्मा ’गुलेरी’ अमर भऽ गेलाह। हम चर्चा कऽ रहल छी, कुमार पवनक "पइठ" दीर्घकथाक। एकरा पढ़लाक बाद अहाँकेँ एकटा विचित्र, सुखद आ मोन हौल करैबला अनुभव भेटत, जे सेक्सपीरिअन ट्रेजेडी सँ मिलितो लागत आ फराको। मुदा एहि रचनाकेँ पढ़लाक बाद तामस, घृणा सभपर नियंत्रणकेँ आ सामाजिक/ पारिवारिक दायित्वकेँ सेहो अहाँ आर गंभीरतासँ लेबै, से धरि पक्का अछि। मुदा एकर एकटा शर्त अछि जे एकरा समै निकालि कऽ एक्के उखड़ाहामे पढ़ि जाइ। एडिटर्स चोइस सीरीज-५ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-६ जगदीश प्रसाद मण्डलक लघुकथा "बिसाँढ़": १९४२-४३ क अकालमे बंगालमे १५ लाख लोक मुइला, मुदा अमर्त्य सेन लिखैत छथि जे हुनकर कोनो सर-सम्बन्धी एहि अकालमे नहि मरलन्हि। मिथिलोमे अकाल आएल १९६७ ई. मे आ इन्दिरा गाँधी जखन एहि क्षेत्र अएली तँ हुनका देखाओल गेल जे कोना मुसहर जातिक लोक बिसाँढ़ खा कऽ एहि अकालकेँ जीति लेलन्हि। मैथिलीमे लेखनक एकभगाह स्थिति विदेहक आगमनसँ पहिने छल। मैथिलीक लेखक लोकनि सेहो अमर्त्य सेन जेकाँ ओहि महाविभीषिकासँ प्रभावित नहि छला आ तेँ बिसाँढ़पर कथा नहि लिखि सकला। जगदीश प्रसाद मण्डल एहिपर कथा लिखलन्हि जे प्रकाशित भेल चेतना समितिक पत्रिकामे, मुदा कार्यकारी सम्पादक द्वारा वर्तनी परिवर्तनक कारण ओ मैथिलीमे नहि वरण् अवहट्ठमे लिखल बुझा पड़ल, आ ओतेक प्रभावी नहि भऽ सकल कारण विषय रहै खाँटी आ वर्तनी कृत्रिम। से एकर पुनः ई-प्रकाशन अपन असली रूपमे भेल विदेहमे आ ई संकलित भेल "गामक जिनगी" लघुकथा संग्रहमे। एहि पोथीपर जगदीश प्रसाद मण्डलकेँ टैगोर लिटरेचर अवार्ड भेटलनि। जगदीश प्रसाद मण्डलक लेखनी मैथिली कथाधाराकेँ एकभगाह हेबासँ बचा लेलक, आ मैथिलीक समानान्तर इतिहासमे मैथिली साहित्यकेँ दू कालखण्डमे बाँटि कऽ पढ़ए जाए लागल- जगदीश प्रसाद मण्डलसँ पूर्व आ जगदीश प्रसाद मण्डल आगमनक बाद। तँ प्रस्तुत अछि लघुकथा बिसाँढ़- अपन सुच्चा स्वरूपमे। एडिटर्स चोइस सीरीज-६ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-७ मैथिलीक पहिल आ एकमात्र दलित आत्मकथा: सन्दीप कुमार साफी। सन्दीप कुमार साफीक दलित आत्मकथा जे अहाँकेँ अपन लघु आकाराक अछैत हिलोड़ि देत आ अहाँक ई स्थिति कऽ देत जे समानान्तर मैथिली साहित्य कतबो पढ़ू अहाँकेँ अछौं नहि होयत। ई आत्मकथा विदेहमे ई-प्रकाशित भेलाक बाद लेखकक पोथी "बैशाखमे दलानपर"मे संकलित भेल आ ई मैथिलीक अखन धरिक एकमात्र दलित आत्मकथा थिक। तँ प्रस्तुत अछि मैथिलीक पहिल दलित आत्मकथा: सन्दीप कुमार साफीक कलमसँ। एडिटर्स चोइस सीरीज-७ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-८ नेना भुटकाकेँ रातिमे सुनेबा लेल किछु लोककथा (विदेह पेटारसँ)। एडिटर्स चोइस सीरीज-८ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-९ मैथिली गजलपर परिचर्चा (विदेह पेटारसँ)। एडिटर्स चोइस सीरीज-९ (डाउनलोड लिंक) जगदीश प्रसाद मण्डल जीक ६५ टा पोथीक नव संस्करण विदेहक २३३ सँ २५० धरिक अंकमे धारावाहिक प्रकाशन नीचाँक लिंकपर पढ़ू:- Videha_15_05_2018 Videha_01_05_2018 Videha_15_04_2018 Videha_01_04_2018 Videha_15_03_2018 Videha_01_03_2018 Videha_15_02_2018 Videha_01_02_2018 Videha_15_01_2018 Videha_01_01_2018 Videha_15_12_2017 Videha_01_12_2017 Videha_15_11_2017 Videha_01_11_2017 Videha_15_10_2017 Videha_01_10_2017 Videha_15_09_2017 Videha_01_09_2017 विदेह ई-पत्रिकाक बीछल रचनाक संग- मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ रचनाक एकटा समानान्तर संकलन: विदेह: सदेह: १ (२००८-०९) देवनागरी विदेह: सदेह: १ (२००८-०९) तिरहुता विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) देवनागरी विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) तिरहुता विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०)देवनागरी विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०) तिरहुता विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०)देवनागरी विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०) तिरहुता विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]देवनागरी विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ] तिरहुता विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]- दोसर संस्करण देवनागरी विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ]देवनागरी विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ] तिरहुता विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ]देवनागरी विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ] तिरहुता विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ]देवनागरी विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ] तिरहुता विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ]देवनागरी विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ] तिरहुता विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ]देवनागरी विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ] तिरहुता विदेह:सदेह ११ विदेह:सदेह १२ विदेह:सदेह १३ The readers of English translations of Maithili Novel "sahasrabadhani" and verse collection "sahasrabdik chaupar par" has intimated that the English translation has not been able to grasp the nuances of original Maithili. Therefore the Author has started translating his Maithili works in English himself. After these translations are complete these would be the official translations authorised by the Author of the original works.-Editor Maithili Books can be downloaded from: https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ विदेह सम्मान: सम्मान-सूची (समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार सहित) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। सूचना/ घोषणा १ "विदेह सम्मान" समानान्तर साहित्य अकदेमी पुरस्कारक नामसँ प्रचलित अछि। "समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार" (मैथिली), जे साहित्य अकादेमीक मैथिली विभागक गएर सांवैधानिक काजक विरोधमे शुरु कएल छल, लेल अनुशंसा आमन्त्रित अछि। अनुशंसा २०१९ आ २०२० बर्ख लेल निम्न कोटि सभमे आमन्त्रित अछि: १) फेलो २)मूल पुरस्कार ३)बाल-साहित्य ४)युवा पुरस्कार आ ५) अनुवाद पुरस्कार। अपन अनुशंसा ३१ दिसम्बर २०२० धरि २०१९ पुरस्कारक लेल आ ३१ मार्च २०२१ धरि २०२०क पुरस्कारक लेल पठाबी। पुरस्कारक सभ क्राइटेरिया साहित्य अकादेमी, दिल्लीक समानान्तर पुरस्कारक समक्ष रहत, जे एहि लिंक sahitya-akademi.gov.in पर उपलब्ध अछि। अपन अनुशंसा editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २ “मिथिला मखान” फिल्म देखू मात्र १०१ टाकामे। Android App “BEJOD” download करू वा जाउ www.bejod.in पर, signup करू, एकटा ईमेल जायत, अपन ईमेल खोलू आ ओकरा क्लिक करू अहाँक अकाउंट एक्टीवेट भय जायत। आब मिथिला मखान रेण्ट पर लिअ, डेबिट कार्डसँ १०१ टाका अॉनलाइन पेमेंट करू आ फिल्म देखू। ३ विदेह अपन आगामी अंक (२०२१ क प्रारम्भमे) श्री रामलोचन ठाकुर पर विशेषांक निकालबाक नेयार केने अछि। हुनका सम्बन्धी रचना आमंत्रित अछि (संस्मरण, साक्षात्कार, समीक्षा आदि) जे ३१ दिसम्बर २०२० धरि editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाओल जा सकैत अछि। विदेह पेटारक अन्तर्गत (पोथी डाउनलोड साइट) मे http://www.videha.co.in/new_page_15.htm हुनकर मौलिक, अनूदित आ सम्पादित रचना फ्री पी.डी.एफ. डाउनलोड लेल उपलब्ध अछि। विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम्: VIDEHA: AN IDEA FACTORY (c)२००४-२०२१. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHAसम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: डॉ उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम विलास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक -स्त्री कोना- इरा मल्लिक। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि)editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि। एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै, आ से हानि-लाभ रहित आधारपर छै आ तैँ ऐ लेल कोनो रॊयल्टीक/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै। तेँ रॉयल्टीक/ पारिश्रमिकक इच्छुक विदेहसँ नै जुड़थि, से आग्रह। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-2021 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। ५ जुलाई २००४ केँ http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् 'विदेह' ३२६ म अंक १५ जुलाई २०२१ (वर्ष १४ मास १६३ अंक ३२६)
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