विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA ISSN 2229-547X VIDEHA 'विदेह' ३२७ म अंक ०१ अगस्त २०२१ (वर्ष १४ मास १६४ अंक ३२७) १. गजेन्द्र ठाकुर- संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल सेहो] [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] [FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI ALSO] २. गद्य २.१.रबीन्द्र नारायण मिश्र- लजकोटर (धारावाहिक उपन्यास)- २५म खेप २.२.जगदीश चन्द्र ठाकुर ’अनिल’- आँखिमे चित्र हो मैथिली केर (आत्मकथा)- १५. आगिक बाद आगि २.३.मुन्नाजी- बीहनि कथाक आधार स्तम्भ छलाह- श्री राज- प्रथम पुण्यतिथि १ अगस्त २०२१पर मोन पाड़ैत २.४.आशीष अनचिन्हार- "पाठक हमर पोथी किए पढ़थि" ३. पद्य ३.१.संतोष कुमार राय 'बटोही'- गड़बड़झाला ३.२.ज्ञानवर्द्धन कंठ- २ टा गजल ४.स्त्री कोना (सम्पादक- इरा मल्लिक) ४.१.विभा रानी- स्तन, योनि आ गर्भाशय- मूल हिन्दी सं मैथिली रूपान्तरण- मुन्नाजी Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Books/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाउ। VIDEHA ARCHIVE विदेह पेटार View Videha googlegroups (since July 2008) view Videha Facebook Official Group (since January 2008)- for announcements १. गजेन्द्र ठाकुर ........................................................................................................................ ........................................................................................................................ [संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री] [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल सेहो] [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] [FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI ALSO] यू. पी. एस. सी. (मेन्स) २०२० ऑप्शनल: मैथिली साहित्य विषयक टेस्ट सीरीज यू.पी.एस.सी. क प्रिलिमिनरी परीक्षा २०२० सम्पन्न भऽ गेल अछि। जे परीक्षार्थी एहि परीक्षामे उत्तीर्ण करताह आ जँ मेन्समे हुनकर ऑप्शनल विषय मैथिली साहित्य हेतन्हि तँ ओ एहि टेस्ट-सीरीजमे सम्मिलित भऽ सकैत छथि। टेस्ट सीरीजक प्रारम्भ प्रिलिम्सक रिजल्टक तत्काल बाद होयत। टेस्ट-सीरीजक उत्तर विद्यार्थी स्कैन कऽ editorial.staff.videha@gmail.com पर पठा सकैत छथि, जँ मेलसँ पठेबामे असोकर्ज होइन्हि तँ ओ हमर ह्वाट्सएप नम्बर 9560960721 पर सेहो प्रश्नोत्तर पठा सकैत छथि। संगमे ओ अपन प्रिलिम्सक एडमिट कार्डक स्कैन कएल कॉपी सेहो वेरीफिकेशन लेल पठाबथि। परीक्षामे सभ प्रश्नक उत्तर नहि देमय पड़ैत छैक मुदा जँ टेस्ट सीरीजमे विद्यार्थी सभ प्रश्नक उत्तर देताह तँ हुनका लेल श्रेयस्कर रहतन्हि। विदेहक सभ स्कीम जेकाँ ईहो पूर्णतः निःशुल्क अछि।- गजेन्द्र ठाकुर संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सर्विसेज (मुख्य) परीक्षा, २०२० मैथिली (ऐच्छिक) लेल टेस्ट सीरीज/ प्रश्न-पत्र- १ आ २ TEST SERIES-1 TEST SERIES-2 [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल/ FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI] NTA_UGC_NET_MAITHILI_01 NTA_UGC_NET_MAITHILI_02 NTA_UGC_NET_MAITHILI_03 (श्री शम्भु कुमार सिंह द्वारा संकलित) Videha e-Learning MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) UPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS BPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. (ऐच्छिक) मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. (अनिवार्य) मैथिली प्रश्नपत्र- बी.पी.एस.सी.(ऐच्छिक) मैथिलीक वर्तनी १ भाषापाक २ मैथिलीक वर्तनीमे पर्याप्त विविधता अछि। मुदा प्रश्नपत्र देखला उत्तर एकर वर्तनी इग्नू BMAF001 सँ प्रेरित बुझाइत अछि, से एकर एकरा एक उखड़ाहामे उनटा-पुनटा दियौ, ततबे धरि पर्याप्त अछि। यू.पी.एस.सी. क मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेल सेहो ई पर्याप्त अछि, से जे विद्यार्थी मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेने छथि से एकर एकटा आर फास्ट-रीडिंग दोसर-उखड़ाहामे करथि| IGNOU इग्नू BMAF-001 ........................................................................................................................ MAITHILI (OPTIONAL) TOPIC 1 [Place of Maithili in Indo-European Language Family/ Origin and development of Maithili language (Sanskrit, Prakrit, Avhatt, Maithili) भारोपीय भाषा परिवार मध्य मैथिलीक स्थान/ मैथिली भाषाक उद्भव ओ विकास (संस्कृत, प्राकृत, अवहट्ट, मैथिली)] TOPIC 2 (Criticism- Different Literary Forms in Modern Era/ test of critical ability of the candidates) TOPIC 3 (ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददास सिलेबसमे छथि आ रसमय कवि चतुर चतुरभुज विद्यापति कालीन कवि छथि। एतय समीक्षा शृंखलाक प्रारम्भ करबासँ पूर्व चारू गोटेक शब्दावली नव शब्दक पर्याय संग देल जा रहल अछि। नव आ पुरान शब्दावलीक ज्ञानसँ ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददासक प्रश्नोत्तरमे धार आओत, संगहि शब्दकोष बढ़लासँ खाँटी मैथिलीमे प्रश्नोत्तर लिखबामे धाख आस्ते-आस्ते खतम होयत, लेखनीमे प्रवाह आयत आ सुच्चा भावक अभिव्यक्ति भय सकत।) TOPIC 4 (बद्रीनाथ झा शब्दावली आ मिथिलाक कृषि-मत्स्य शब्दावली) TOPIC 5 (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोरिक गाथामे समाज ओ संस्कृति) TOPIC 6 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- विद्यापति) TOPIC 7 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- पद्य समीक्षा- बानगी) TOPIC 8 (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोक गाथा नृत्य नाटक संगीत) TOPIC 9 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- यात्री) TOPIC 10 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली रामायण) TOPIC 11 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली उपन्यास) TOPIC 12 (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- शब्द विचार) TOPIC 13 (तिरहुता लिपिक उद्भव ओ विकास) TOPIC 14 (आधुनिक नाटकमे चित्रित निर्धनताक समस्या- शम्भु कुमार सिंह)् TOPIC 15 (स्वातंत्र्योत्तर मैथिली कथामे सामाजिक समरसता- अरुण कुमार सिंह) TOPIC 16 (यू. पी.एस.सी. मैथिली प्रथम पत्रक परीक्षार्थी हेतु उपयोगी संकलन, मैथिलीक प्रमुख उपभाषाक क्षेत्र आ ओकर प्रमुख विशेषता, मैथिली साहित्यक आदिकाल, मैथिली साहित्यक काल-निर्धारण- शम्भु कुमार सिंह) TOPIC 17 (मैथिली आ दोसर पुबरिया भाषाक बीचमे सम्बन्ध (बांग्ला, असमिया आ ओड़िया) [यू.पी.एस.सी. सिलेबस, पत्र-१, भाग-“ए”, क्रम-५]) TOPIC 18 [मैथिली आ हिन्दी/ बांग्ला/ भोजपुरी/ मगही/ संथाली- बिहार लोक सेवा आयोग (बी.पी.एस.सी.) केर सिविल सेवा परीक्षाक मैथिली (ऐच्छिक) विषय लेल] ........................................................................................................................ GENERAL STUDIES (PRELIMINARY & MAINS) GS (Pre) TOPIC 1 GS (Mains) NCERT-ENVIRONMENT CLASS XI-XII NCERT PDF I-XII TN BOARD PDF I-XII ALL INDIA RADIO ENGLISH NEWS ALL INDIA RADIO NEWS ARCHIVE ALL INDIA RADIO TALKS AND CURRENT AFFAIRS RAJYA SABHA TV NEWS DISCUSSIONS OTHER OPTIONALS IGNOU eGYANKOSH (अनुवर्तते) -गजेन्द्र ठाकुर २. गद्य २.१.रबीन्द्र नारायण मिश्र- लजकोटर (धारावाहिक उपन्यास)- २५म खेप २.२.जगदीश चन्द्र ठाकुर ’अनिल’- आँखिमे चित्र हो मैथिली केर (आत्मकथा)- १५. आगिक बाद आगि २.३.मुन्नाजी- बीहनि कथाक आधार स्तम्भ छलाह- श्री राज- प्रथम पुण्यतिथि १ अगस्त २०२१पर मोन पाड़ैत २.४.आशीष अनचिन्हार- "पाठक हमर पोथी किए पढ़थि" रबीन्द्र नारायण मिश्र लजकोटर (धारावाहिक उपन्यास) २५म खेप ओहिदिनका बैसारमे क्रमशः बहुतरास लोक आबि गेल। मंचपर नीरजक अतिरिक्त चारिगोटे आओर बैसल छलाह । सभ पाग पहिरने छलाह । दिल्लीमे प्रवासी लोकनिमे आपसी मेलजोलक अभाव आ तकर समाधान चर्चाक मूल विषय छल । गप्प-सप्प भइए रहल छल कि कोनपरसँ केओ हल्ला केलक । " मंचपर विराजमानलोकसभ एकहि जातिविशेषक किएक छथि? की आन जातिमे पढ़ल-लिखल लोक नहि छैक ?" "बेसी कबिलपनी नहि करह । ई तोहर गाम नहि छह जे -जे चाहबह सएह हेतैक।-दोसरदिससँ केओ बाजल। "लफंगासभकेँ पैसा दए कए भीड़ कए लेलहुँ अछि आ मोन तर-ऊपर भेल अछि ।”-तेसर आदमी बाजल । बात बढ़िते गेल । लोक जातिक हिसाबे गोलबंद भए गेल । केओ किछु,केओ किछु बाजएलागल। बात बढ़िते गेल । के ककरा सम्हारैत? हालत काबूसँ बाहर भेल जा रहल छल । औ बाबू ! देखिते-देखिते ओ परिसर कुरुक्षेत्रमे बदलि गेल । मारि-पीट शुरुभए गेल ।कैकगोटेक कुरता फाटल। कैकगोटेक हाथ टुटि गेल । केओ लथपथ भेलभूलंठित छलाह। बात बढ़ैत देखिपुलिस ओहि परिसरकेँ घेरि लेलक । किछुगोटेकेँ थुड़बो केलक। बाहर मे यत्र-तत्र लोकसभक चप्पल -जूता ,चीज-वस्तु पसरल छल। आयोजकसभ इएह-ले ओएह-ले कहुनाकए जान बचा कए घसकलाह ।देखिते-देखिते हौलमे भम्म पड़ि रहल छल । रचनाकेँ ओहि आदमी संगे गेटपर ठाढ़ देखलिऐक ।ओकरासभकेँ अपसिआँत देखि हम अपने कारमे बैसा कए ओतएसँ घसकलहुँ। बैसारमेलफड़ा बढ़ैत देखि नीरजमंचसँ उतरि लोकसभकेँ बुझाबक प्रयास करए लगलाह। मुदा भेल उल्टे। हौलमे भगदर भए गेलाक बाद जकरा जेम्हरे रस्ता भेटलैकभागल। कैकगोटा हिनका ऊपर चढ़ैत आगा बढ़ैत गेल । धन कही विजयकेँ जे हिनकर जान बँचि गेलनि । ओ जानपर खेलि गेल। कहुना कए लगपासक लोककेँ धकिआ कए हुनका घिचलक । ताबेतँ नीरज लस्त पड़ि गेल छलाह । जौँ कनीक काल एहिना पड़ल रहितथि तँ गेल घर छलाह । मुदा हाथक हड्डीतँ टुटिए गेलनि। पुलिस घायल व्यक्तिसभकेँ इलाज हेतु सरकारी अस्पतालमे लए गेल । विजयअपना भरि बचाबक प्रयास केलक । मुदा के ककरा सुनैत ? किछुगोटे विजयकेँ घेरि कए अंट-बंट कहए लागल। कोनो कुन्नह रहल हेतैक।किछु कहासुनी भेल । ओहोकिछु बजलाह कि दे- दनादन दे -दनादन तत मारि मारलकनि जे ओ ओहीठाम पड़ि गेलाह । चोट भितरिआ छल । बाहर नहि बुझाइक मुदा हुनकर हालत गड़बड़ाइते गेलनि ।अस्पतालेमे हुनका छातीमे बड़ी जोरसँ दर्द उठल। जाबे केओ किछु बुझैत,किछु करैत ताबे ओ धराम दए खसलाह आ ठामहि रहि गेलाह । लोकसभ ओहिठामसँ उठापुठाकए हुनका आपत्तिकालीनविभागमे लए गेल । डाक्टर नारी देखितहि कहि देलाह-" ई तँ आब नहि छथि"। लोकसभ आश्चर्यचकित छल जे आखिरएना भेलैक किएक?। पुलिसकेँ सक रहैक जे किछु षड़यंत्र कएल गेल अछि। जौँ से सही अछि तँ तकर सूत्रधारके छथि? एहि प्रश्नक जबाबनहि भेटि रहल छल । ओहि बैसारसँ बाँचि कए निकलि गेलहुँसएह बहुत। बहुतथाकि गेल रही, किछु आओर करबाक स्थितिमे नहि रही। रचनाकेँ ओहि आदमी संगे लगीचक बसस्टापपर छोड़ि हम ठोकले अपन डेराआबि गेलहुँ । लगैत चल जेना ठाढ़े खसि पड़ब । खाटपर पड़ि गेलहुँ । कखन सुतलहुँ किछु नहि बुझलिऐक । भोरे सुतले रही कि फोनक घंटी बाजल । लताक फोन छल ।ओकरा ई सभ किछु नहि बूझल रहैक । ओ तँ भोर भेने अखबारमे अपन पिताक हाथमे पलास्टर लागल फोटो देखलक । समाचार पत्रसँ ओकरा जानकारी भेलैक जे ओकर पिता सेहो अस्पतालेमे छथि । हुनकर हाथक हड्डी टुटि गेल छनि । “समाचार पत्र तँ पढ़नहि होएब ।" "हम तँ ओतहि रही ।" "ओ! कोना की भेलैक?" "की कहू? हम तँ स्वयं आश्चर्यचकित रहि गेलहुँ । लफड़ा बढैत देखि हम तँ शुरुएमे चलि अएलहुँ । बादमे पता लागल जे झंझट बहुत बढ़ि गेल । पुलिस वलप्रयोग सेहो केलक मुदा बात बढ़िते गेल । विजयक हृदयाघातसँ मृत्यु भए गेलैक । कैकगोटे अखनहुँ अस्पतालेमे छथि। अहाँक पिता के सेहो चोट लागि गेलनि से नहि बूझल छल ।" " हम आबि रहल छी । अहाँ तैयार रहब । संगे अस्पताल चलब । " " ठीक छैक, आउ ।" हम चाह पिलहुँ । स्नान करिते रही कि घंटी बाजल । बाहर निकलि कए देखैत छी तँ लता ठाढ़ि छलीह। "आउ, आउ।" हम स्नान कए भीजले बाहर निकलि गेल रही से देखि ओ हँसए लगली। इसारासँ हुनका बैसए कहि हम स्नानगृहमे वापसगेलहुँ ।धरफरीमे स्नानगृहक फटक खुजले रहि गेल ।हम स्नान करैत रही आ लता फटकक फाटसँ सटल हुलकैत रहथि । हमरा एकर अनुमान जाबे भेल ताबे तँ ओ अंदर रहथि । हम बाहर निकलएलगलहुँ कि ओ हमर गट्टा जोरसँ पकड़ि लेलथि।" हमरा तँ बकोर लागि गेल । किछुकालक बाद दुनू गोटे संगे अस्पताल पहुँचलहुँ । हम लताक संगे आगा बढ़ैत छी तँ स्वागत कक्षमे नीरज भेटि गेलाह। "हम तँ आबिए रहल छलहुँ । दहिना हाथमे प्लास्टर रहनि। पैरमे कच्चा पट्टी बान्हल छल । कहए लगलाह-" बँचि गेलहुँ । औ बाबू! एहन आफद होएतसे नहि सोचि सकलहुँ ।" “विजयक की हाल छनि?"-नीरज पुछलाह । "ओ नहि रहलाह "-हम कहलिअनि । ई सुनितहि नीरज माथपकड़िलेलनि। हमसभ कनीकाल ठामहि रहि गेलहुँ ।फेर सभ गोटे आगा बढलहुँ।ओतए किशुन आ हुनक पत्नी मालती भेटि गेलीह । ओ सभ विजयक आकस्मिक निधनसँ बहुत आहत छलाह । अस्पतालसँ लहास लए जेबाक हेतु परिवारक किछु आओर गोटेक अएबाक प्रतीक्षा कए रहल छलाह । नीरज बहुतकालधरि ठाढ़ रहबाक स्थितिमे नहि छलाह। तेँ हमसभ ओहिठामसँ बिदा भए गेलहुँ । एहिघटनाक मासदिन भए गेल । नीरज घरसँ बाहर नहि भेलाह । एकदिन निकलबो केलाह तँ बस अस्पताल धरि । प्लास्टर कटि गेलनि । तकरबाद मासदिन आओर लागत तखने हुनकर हाथ काजक होएत ।एतेकटा घरमे बैसल-बैसल ओ कैकबेर बहुत दुखी भए जाथि । मुदा कोनो समाधान नहि बुझानि ।लताकेँ बुझेबाक प्रयास करथि तँ उल्टे ओएह बुझबए लागनि । एकदिन लताकेँ प्रशन्न मुद्रामे देखि नीरज कहलकैक -"आगाक की कार्यक्रम अछि?" "अहाँकेँ ताहिसँ की मतलब?" एहन जबाबक आशा ओकरा नहि रहैक । तथापि ओ गप्प आगा बढ़बैतबाजल-"बच्चाक हित-अहितक चिंता तँ होइते छैक?" "मुदा अहाँकेँ ई सभएतेकदिनक बाद किएक सोचारहल अछि?" "अहाँ एना किएक बजैत छी?" "सही बात कहि रहल छी तँ खरापलागि रहल अछि।" "हम कोन परिस्थितिसँ गुजरलहुँ से अहाँ की जाने गेलिऐक?" "इएह बात हमहु अहाँसँ कहए चाहैत छी ।” दुनूगोटेमे विवाद बढ़िते गेल । नीरज लताकेँ शांत करबाक प्रयास करैत बजलाह -" समय-सालठीक नहि छैक.." ओ एतबे बाजल छलाह की लता लपकि लेलक- "पापा अहाँ एतेक चिंता जँ पहिने केने रहितहुँ तँ साइत किछु फएदा हेबो करैत । आब ई टंटमंट कए की होएत?अहूँ परेसान होएब आ हम तँ होइते छी।का वर्षा जब कृषि सुखाने। समय चूकि पुनि का पछिताने।” नीरज लताक मुँह तकैत रहि जाइत छथि। मोने-मोने सोचथि- “लता आब कोनो बच्चा नहि छथि । व्यर्थक विवादक परिणाम कहीं आओर खरापे नहि भए जाए?” अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। जगदीश चन्द्र ठाकुर ’अनिल’ आँखिमे चित्र हो मैथिली केर (आत्मकथा ) १५. आगिक बाद आगि बच्ची किछुए दिनमे हमरा परिवारक आवश्यकताक अनुरूप अपनाकें बना लेलनि | माएकें काजुल पुतोहु भेटि गेलनि | गृहस्थ परिवारक काजसँ पूर्ण परिचित छलीह बच्ची | नैहरमे माए,बाबू,दू टा भाए,दू टा भाउज,चारिटा भातिज आ एकटा भतीजीक संग छलीह, एत’ सासु,ससुर,पति, छओ आ चौदह बरखक दू टा दीय’र आ एकटा विवाहित ननदिक बीच प्रसन्न रहब जल्दी सीख गेलीह | अगिलगीक दुख क्रमशः कम होइत गेलै | जीवन सामान्य हुअ’ लगलै | हिनक पढाइ-लिखाइक लेल जे किछु सोचने रही, से स्थगित भ’ गेल | हम यथास्थितिकें स्वीकार क’ लेलहुँ आ अपन नोकरीक प्रतीक्षा करय लगलहुँ | एक दिन अपन दरबज्जापर हम एसगर बैसल रही | पछ्बाइ टोलक बटोही कका कतहुसँ जा रहल छलाह | ह्मरा सोर पाड़लनि | कहलनि, अहाँक घराड़ीक सटले पूब खेत बिका रहल छै, अहाँकें कोनो व्यवस्था हुए त’ सामनेबला सबा दू कट्ठा भेटि सकैए, बिचारिक’ जल्दी कहू, ने त बिका जेतै | एकटा नव समस्या सोझाँमे उपस्थित छल, बिनु समस्याक समस्या | हम सोचय लगलहुँ, हमरा बैंकमे नोकरी त भेटबे करत, कते देरी हेतै, दू मास...चारि मास यैह ने | हम एखन कोनो तरहें जँ पाइक व्यवस्था क’ लै छी त खेत कीनि सकैत छी | समाधान छनि बच्ची लग | जँ हुनक गहना बन्धक ध’ क’ पाइक व्यस्था क’ लै छी त संभव अछि, अन्यथा नहि | घराड़ीबला जमीन छै, तें ल’ लेब जरूरी लागल | हमरा मोन पडल, दू साल पहिने ई गहना बन्हकी ध’ क’ छोट बहिनक विवाहमे उपयोग केने रही, बादमे पौधा संरक्षणमे नियोजित भेलापर एक बेर छओ मासक पाइ भेटल त गहना छोड़ा लेलहुँ | हम बच्चीसँ पुछलियनि ओ तैयार भ’ गेलीह | हम बाबूकें कहलियनि सभ बात | ओ पुछ्लनि जे ककरा नामे लिखबिऐ | हम हुनका अपने नामपर लिखा लेब’ कहलियनि | सैह भेलै | गहना मधुबनीमे बन्हक राखल गेल | दू कट्ठा सबा पाँच धुर खेत पुबाइ टोलक बुधन ठाकुरसँ बाबूक नामपर 08.05.1974 क’ मधुबनीमे रजिस्ट्री भेल | हमर पड़ोसीक सामनेबला खेत ओ लिखौलनि | बच्चीकें विश्वास रहनि जे पहिने जकाँ फेर सातो अठन्नी हमरा लग वापस आबि जाएत, जँ हुनका बूझल रहितनि जे आब ई गहना हमरा वापस नहि भेटत, त ओ एत्ते आसानीसँ अपन पेटीसँ निकालिक’ सहर्ष नहि दीतथि | ओ नहि जनैत रहथि जे ओ गहना आब माटिमे परिवर्तित भ’ गेल अछि | हमहीं कहाँ जनैत रहिऐक जे हमरा नोकरी भेटबामे एत्ते देरी भ’ जाएत आ परिवारक स्थितिक कारण हमर प्राथमिकतामे गहना नहि रहि जाएत | क्यो नहि जनैत रहै जे देशक स्थिति एहेन भ’ जेतै, उत्तर प्रदेशक चुनावमे इन्दिरा गांधी एहेन नेताक जीतकें राजनारायण द्वारा चुनौती देल जेतै, इलाहाबाद हाई कोर्ट हुनक जीतकें अबैध घोषित क’ देतै, प्रधान मन्त्री इन्दिरा गांधीसँ इस्तीफ़ा मांगल जेतै, सौंसे देशमे हंगामा शुरू भ’ जेतै आ प्रधान मन्त्री द्वारा इस्तीफ़ा देबाक स्थानपर देशमे आपातकाल लागू भ’ जेतै आ बैंकमे बहाली सेहो स्थगित भ’ जेतै | क्यो नै जनैत रहै, मुदा सभ भेलै | नोकरीक प्रतीक्षामे मास पर मास बीतल चल गेल | हम एक बेर सेंट्रल बैंकक क्षेत्रीय कार्यालय मुजफ्फरपुर गेलहुँ पता लगब’ | एकटा झाजी छलाह ए.एफ.ओ.| कहलियनि, हमरा सेलेक्शन भेना दस मास भ’ गेल, एखन धरि बहालीक चिट्ठी नै भेटल अछि | झाजी मुस्किआइत कहलनि,ठीक कहै छी, दस मासमे त बच्चो भ’ जाइ छै | झाजी एते कहिक’ अपन काजमे व्यस्त भ’ गेलाह | हम यूनियनक सेक्रेटरीसँ सम्पर्क केलहुँ, ओ ककरोसँ गप केलनि, हमरा कहलनि, टाइम लगेगा मगर होगा निश्चित ये भरोसा रखिए | हमरा सचिव महोदयक वचनपर भरोस भेल, घर एलहुँ आ जहिना प्रतीक्षा करैत छलहुँ, तहिना फेर प्रतीक्षा कर’ लगलहुँ | घर, कैटोला चौक,मधुबनी वाचनालय यैह हमर ठेकाना छल | हमर गामक मुखियाजी एकदिन परम शुभचिन्तक जकाँ बुझौलनि, विद्यार्थी, एना गाममे निश्चिन्त भ’क’ बैसलासँ आइ के समयमे नोकरी नै हैत, नोकरी बिना दौड़-धूपके नै होइछै, एक बेर पटना जाउ, एम एल ए सँ भेंट करू, मुख्य मन्त्रीसँ भेंट करू, जरूरत हेतै त हमहूँ जैब, कोना ने हेतै मुदा एना बैसलासँ त बैसले रहि जाएब | हम निश्चिन्त रही जे नोकरी भेटबे करत, सभकें छोड़िक’ खाली हमर बहाली क’ देतै से त संभव नै छै | मुदा मुखियाजी एहि सभकें फ़ालतू बात बुझै छलाह | हमर पिताजीकें सेहो कहलखिन | हमर पिताजी सेहो मुखियाजीक सुझावपर मोहित भेलाह | अंततः पटनाक प्रोग्राम बनल | हमर परोसी अमिरीलाल ठाकुर ( हुनको लोक सभ मुखियाजी कहैत छलनि ) सेहो अपन जेठ बेटाक नोकरी लेल प्रयासमे मुखियाजीक संग भेलाह | पटना गेलहुँ | शफीकुल्लाह अंसारी, कांग्रेसक एम एल ए साहेब सँ भेंट केलहुँ | एकटा कागजपर संक्षेपमे लिखिक’ देब’ कहलनि | देलियनि | कहलनि, मुख्य मन्त्री महोदय से बात करता हूँ, वो अगर बुलाएंगे तो बताऊंगा तब जाइएगा मिलने | साँझमे एलाह त कहलनि, उनका कहना है कि बैंक के मामलेमे हमलोग कुछ नहीं कर सकते हैं, सिलेक्शन हो गया है तो देर-सबेर नोकरी तो मिलेगी ही | मुखियाजी कहलनि, चलू आब मोनमे ई नहि ने हैत जे प्रयास नै केलियै आ मुख्य मन्त्री महोदय कहि देलनि तखन चिन्ता करबाक काज नै छै | घर आबि फेर हम ओहिना नोकरीक लेल प्रतीक्षा कर’ लगलहुँ जेना पहिने करैत रही | खेत कीनब एखन हमर परिवारक आवश्यकता नहि छलैक | परिवारक आवश्यकता छलैक पाँच-छओ आदमीक जलखै, भोजन,कपड़ाक खर्च,समय-समयपर पाहुनक उचित सत्कार,सर-कुटुम्बमे आवश्यकतानुसार समय-समयपर भार-चंगेराक व्यवस्था, समय-समयपर ब्राह्मण-भोजनक व्यवस्था आदिमे आवश्यक खर्चक लेल टाकाक जोगार | ई जोगार हथपैंचसँ शुरू होइत-होइत खेत भरना तक जाइत छल |खेतक उपजासँ तीन-चारि मासक काज चलैत छल | फेर खेतीक लेल वैह जोगार होइत छल | टोलमे दू-तीन घर छोड़िक’ सभ घरक स्थिति मोटा-मोटी एहने छलै | एहनो स्थितिमे मूड़न, उपनयन,विवाह,श्राद्ध,बरखी आदि काजमे लोक नीक भोजनक व्यवस्था करिते छल चाहे एहि लेल खेत भरना देब’ पड़ै अथवा बेच’ पड़ै | भोजेमे अथवा वरियातीमे लोककें जी-भरि नीक-निकुत खेबाक मौका भेटैत छलैक | तें लोक भोजक नामपर सब तरहक सहयोग देबा लेल तैयार रहैत छल | श्राद्धक भोज दू दिन होइ छलै, तें एकर आकर्षण बेशी छलै | भोज लोककें एतेक आकर्षित करैत छलै जे कोनो बृद्ध लोककें देखिते लोकक सोझाँ दू दिनक भोजक दृश्य उपस्थित भ’ जाइ छलै-पूड़ी-जिलेबी,खाजा-मुंगबा, रंग-विरंगक तड़ुआ-तरकारी आ चटनी, ब’ड़-ब’ड़ी, दही-चिन्नी-सकरौड़ी आदिक संग हाथ जोड़ने पाँते-पाँते घुमैत कर्ताक विनीत भाव- ‘अपने लोकनि संतुष्ट हेबै, तखने हमरो उद्धार हैत |’ सबजाना भोज कम होइ छलै | खाली पुरुखे सभ जखन भोज खाए जाइ छलाह त स्त्रीगण सभ अपनाले’ भोजन नै बनबैत छलीह, दिनका किछु बाँचल रहै छलनि से अथवा घरमे चूड़ा अथवा और किछु रहै छलनि त नून,गुड़ अथवा मूर संगे ख़ाक’ सूति रहै छलीह | पुरुख सभ एकर चिन्ता नहि करैत छलाह जे स्त्रीगण सभ की खेलनि | स्त्रीगण सभकें भोजन नै बनब’ पड़ैत छलनि, एतबेसँ प्रसन्न रहैत छलीह | सबजाना भोज दिन त हुनको सभले’ पावनि भ’ जाइत छलनि| घरक स्त्रीगणकें भोजे दिन भानस-भातसँ अवकाश भेटैत छलनि | सामान्य दिनमे सेहो कोनो घरमे स्त्री-पुरुखक भोजन एक बेर नहि होइत छलै | सभ पुरुख आ धिया-पुताकें परसन द’ द’ क’ खुआक’ जे किछु बचि जाइ छलै, से नून,मूर आकि गुड़ संगे खाक’ रहि जाइत छलीह स्त्रीगण सभ | बेशी घरमे भात तखने बनै छलै जखन कोनो पाहुन अबै छलखिन | पाहुनक लेल भात,दालि,तरकारी,तडुआ,कने घी आ दहीक व्यवस्था कोनो तरहें अवश्य कएल जाइत छलनि | पाहुनकें खुआक’ घरबारी भोजन करैत छलाह | घरबारीक भोजनमे बेशी काल रोटी,दालि,अल्हुआक प्रधानता रहैत छलै | रोटी गहुम,मड़ुआ,खेसारीक बनैत छलै | जकरा खुट्टापर महींस रहैत छलै, ओकरे दूध-दही भेटै छलै | जकरा खुट्टापर महींस नै छलै, ओकरा घरमे क्यो दुखित पड़ि जाइ छलै तखने अथवा कोनो पाहुन अबै छलखिन तखन दूध कीनल जाइ छलै |धिया-पुताकें सेहो ओहीमे सँ बचाक’ द’ देल जाइ छलै | हमर बाबा महींस पोसैत छलाह | हमर मझिली बहिनक द्विरागमनक समय महींस खुट्टापर सँ गेल, फेर कहियो खुट्टापर महींस नै आएल | बहुत दुखित पड़लेपर ककरो समतोला खेबाक अवसर भेटैत छलैक, ने त कीनिक’ फल खैब संभव नै छलै | बाड़ीमे केरा ककरो-ककरो रहैत छलै, त माटितर गाड़ि क’ डाबा ल’ क’ धूकिक’ पकाक’ खाइत छल |हमरो सबहक बाड़ीमे केरा, नेबो आ अरड़नेबा छल | केराक उपयोग कतहु भार पठेबामे कएल जाइत छल, एकटा चंगेरामे एक कात पाकल केरा, दोसर कात दहीक भार लोकप्रिय छल | पाकल केराक उपयोग चौठचन्द्र पावनिमे आ केरा घौड़ अथवा हत्थाक उपयोग छठि पावनिमे सेहो होइत छल |आमक मासमे अपना गाछक आम खेबाक आनन्द भेटैत छलैक | हमरो सबहक आमक गाछ दुर्गास्थानमे छल,पुरना घराड़ी लग सेहो किछु गाछ छलै | नबका घराड़ीपर सेहो बाबा कलकतिया आ कृष्णभोग आमक किछु गाछ लगौने छलाह जे फड़ै छलै | दुर्गास्थानमे एकटा बेलक गाछ सेहो छलै | गरीबी एहि लेल छलै जे घरमे छओ-सात आदमीक सामान्य जलखै-भोजनक अतिरिक्त समय-समय पर घरक मरम्मति,खेतीमे लागत आ भोज-भातक परम्पराक निर्वाह करैत सभ साल किछु खेत भरना पड़बाक कारणे जोत योग्य खेत कम भेल जा रहल छलै आ जे खेत छलै ताहिसँ आवश्यकतानुसार उपज नै प्राप्त होइत छलै | बाहरी आमदनी नै रहबाक कारणे लोक सभ किछु लेल खेतपर आश्रित रहैत छल आ खेती भगवान भरोसे चलैत छलै | नोकरीक प्रतीक्षा धीरे-धीरे कठिन भेल जा रहल छल | एकदिन एक पाँती लिखा गेल : ‘कहिया तोहर मूँह देखबौ गे, बहालीक चिट्ठी |’ आ एकटा गीत और जकर किछु पाँती द’ रहल छी : मोटका-मोटका पोथी पढ़लौं पोथी केर सभ पन्ना रटलौं से सभ रटिक’ किछु नै भेल | पहिने जोड़ी जोड़ दशमलव आब जोड़ै छी नून आ तेल || मोटका-मोटका पोथी ........ ईहो टुकड़ी देखू : पहिने छल डिगरीक सिहन्ता आब अछि नोकरी केर चिन्ता खेतो सभ अछि पड़ि गेल भरना बिका गेलनि कनियाँ केर गहना हम छगुन्तामे पडले छी हे परमेश्वर ई की भेल ?? मोटका-मोटका पोथी...... अंतिम टुकड़ी : पहिने बिपति पड़ै त लोकक मदति करैत छला भगवान आब कतबो हर-हर बम-बम कहू देथि ने शिवशंकरजी ध्यान आइ कृष्ण गोवर्धनधारीक चक्र-सुदर्शन कत्त’ गेल ?? मोटका-मोटका पोथी .......... समस्या मात्र हमरे लेल नहि छल | हमरो सभसँ बदतर स्थितिमे बहुत लोक कहुना जीबि रहल छल | समाजमे अधिक लोकक आर्थिक स्थिति दयनीय छलै | बहुत नवयुवक बेरोजगारीक कष्ट भोगि रहल छलाह | कतेक लोक एहेन छल जकरा रहबाक लेल घर नहि छलै, पहिरबाक लेल आवश्यक कपड़ा नै रहै छलै, भोजन लेल चाउर-दालि-आँटा नै छलै | एहेन लोक सबहक लेल फगुआक कोनो आकर्षण नै रहैत छलै | एहेन स्थितिक लेल जे गीत लिखाएल तकर चारि पाँती देखू : छै जेबी जकर खाली-खाली आ खरची घरक लटपटायल से फगुआ खेलायत कोनाक’ जकरा आंगन वसन्त नहि आयल ......... ईहो चारि पांती : जकरा सोझाँमे नेना कनैछै माँ, की खैब भूख अछि लागल ? से पूआ पकाओत कोनाक’ जकरा आंगन वसन्त नहि आयल ......... पटना / 30.07.2021 ( क्रमशः ) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। मुन्नाजी बीहनि कथाक आधार स्तम्भ छलाह- श्री राज प्रथम पुण्यतिथि १ अगस्त २०२१पर मोन पाड़ैत अपन आखर ,अपन बाट। साहित्य संवर्द्धन लेल ककरो बाट जोहब हुनकर आदति सं बहरीक चीज छल।पठन- पाठन आ लेखन में मस्त! जमीन परहक लोकक पीड़ा देखार करबाक जेना भारवाहक होइथ।सदिखन आम रचनाकारक भीड़ सं विलग अपन बात राखब एकमात्र उद्देश्य में लीन देखल जाइथ।ओ साहित्य सृजन स्वान्त सुखाय लेल नै,पर पीड़ा हरनाय लेल करैत रहला।हुनकर गमैया सोच, शब्द पाठककें बन्हने रहैत छल। ओहने सोचक परिणाम छल मैथिली साहित्यक एकमात्र अपन विधा-" बीहनि कथा "। जकरा कतेको बरख धरि मगजक शिरा के खिरबैत साहित्यक जमीन पर बैसा छोड़लनि।1991सं चलि अबैत विमर्श मे सर्वसम्मति सं 1995मे विधाक मूर्त रूप में सोझां आबि सकल।ओना त' शोधक क्रम में एहेन कथाक प्रादुर्भाव मिथिला मिहिरक 1937क अंक-2सं भेल भेटैछ।मुदा ओ एखन ओहने अइछ जेना मानवीय उत्पत्तिक समय 25-30लाख वर्ष पूर्वक मानल जाइछ मुदा ओ पूर्णत: मनुक्खे छी तकर निश्तुकी 5लाख वर्ष पूर्व मात्रक। एकान्त वास हुनक आदति मे समएल छल।मुदा विचारें दसगरदा हेबा मे रूचि रखै छलाह! हम दिल्ली सं जखन गाम जाइ त' अपन घरक बाट में पहिने हिनके घर पड़ैए,ओत' विलमैत जाइ।मारिते रास गप कोनो नव बिन्दु पर पहुंचाबए। गपक क्रम में पूछि दियैन - भाई, जिनका सं अपनेकें गप होइए तिनका लग ऐ विधाक चर्च/ पसार नै करै छियै ? छुटिते कहथि- आगन्तुक मे सं बेसी लोक सोझां अबिते साष्टांग करै छथि आ दलान सं बहराइते अदखोइ- बदखोइ,कुचिष्टा।मुन्नाजी, इ विधा,विषय गहींर आ गम्भीर लोक लेल छै।एकरा ओहोन उठल्लू लोकक बीच सझिया करै के सोचिए करेजा कांपि उठए तें मौन रहब उचित बुझी। 1995 सं विधिवत समवेत प्रयासें यात्रारत इ विधा आइ राष्ट्रीय/अन्तर्राष्ट्रीय पटल पर अपन आसन जमा लेलक।अफसोस जे बीहनिक झमटगर होइत रूप देखबा लेल नै रहला। साहित्य ककरो वैयक्तिक वा पैतृक संपत्ति नै होइछ।तें कोनो विधाक कियो प्रतिपादक/आविष्कारक नै कहा सकाइछ।कोनो विधा समवेत सहयोगे भेल विकासक फल थिक ,तें बीहनि कथा कें सेहो ओही नजरिये देखल जा सकैए।ऐ विधाक स्थापना आ विकास मे श्रीराजक कृत्य सं विद्यापतिक पछाति उएह टा चिरकालिक भ' सकलाह। जेना अन्य रचना सं विलग विद्यापति, मैथिली गीत लए अमर भेलाह,तहिना बीहनि कथाक संग' श्रीराजक नाम अक्षुण्ण रहतनि।शेष कथाकार हुनक नीचला पांति मे बुझू। सादर नमन! ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। आशीष अनचिन्हार "पाठक हमर पोथी किए पढ़थि" एहि शीर्षककेँ एनाहुतो लीखि सकैत छी जे "पाठक हमर पोथी किए किनताह"। एहि तरहक विषयपर विवाद होइत रहत मुदा हमरा लाभ बुझाइए जे हम पाठक लग अपन self-appraisal प्रस्तुत कऽ रहल छी। बहुत लोक एकरा नैतिक रूपे खराप मानताह तँइ मैथिलीमे एहन विषयपर नै लीखल गेल (मौखिक तँ सभ लेखक करिते छथि) मुदा हम नहि मानैत छी। कहबाक लेल तँ ई self-appraisal प्राइभेट नौकरी लेल छै जाहिमे कर्मचारी अपन गुणक विवरण दैत छै आ ओकर बॅास ओकरा देखि कऽ मिलान करै छै जे लिखल चीज वास्तवमे सही छै कि नै आ तकर बाद ओहि कर्मचारीक वेतन वृद्धि वा प्रमोशन होइत छै। हमरा लगैए जे ई साहित्यो लेल नीक काज करत। एहि विषय अंतर्गत लेखक अपन पोथीक ओहन किछु विशेषता अवश्य लीखथि जकरा बादमे समीक्षक-आलोचक देखि कऽ तय कऽ सकथि जे देल गेल विशेषता केर निर्वाह पोथीमे भेल छैक वा कि नै। आ एहि क्रममे हम अपन पोथी "अनचिन्हार आखर" जे कि 2011 मे श्रुति प्रकाशन, दिल्लीसँ प्रकाशित भेल छल पाठक लग तकरा दऽ रहल छी। श्रुति प्रकाशन केर परिचय लेल ओकर विकीपीडियापर जा सकैत छी जकर लिंक https://mai.wikipedia.org/s/iu7 अछि। जहिया इंटरनेटपर ब्लागपर धूम रहै तहिया लेखक सभ अपन पोथीक नामपर ब्लाग बनेलाह मुदा "अनचिन्हार आखर" नामक ब्लाग 2008 मे बनल आ 2011 मे अही नामसँ हमर पहिल पोथी प्रकाशित भेल। पोथीक नाम ब्लागक नामपर हो से आइडिया गजेन्द्र ठाकुरजीक छलनि आ प्रकाशनक श्रेय हुनके। वर्तामनमे एहि पोथीक प्रिंट रूप उमेश मंडल, निर्मलीसँ प्राप्त भऽ सकैए। आब आबी किछु एहन बातपर जाहिसँ ई पाठककेँ ई सहूलियत हेतनि जे उपरमे लिखल पोथी किए पढ़बाक चाही वा कि किए किनबाक चाही--- 1) कोनो विषय वा विधापर पहिल बेर लिखबासँ पहिने कतेक तैयारी हेबाक चाही तकरा जनबाक लेल पाठक एवं लेखककेँ अनिवार्य रूपसँ पढ़बाक चाही ई पोथी। 2) रचनामे प्रचलित शब्द हेबाक चाही वा कि पुरान एवं अप्रचलित से बहस मैथिलीमे अनवरत चलि रहल अछि आ ताही संदर्भमे पाठक एवं लेखक-आलोचक सभकेँ आमंत्रित करैत छियनि ई पोथी पढ़बाक लेल। हमर एहि पोथीमे नव आ पुरान दूनू तरहक शब्दक जाहि तरहे प्रयोग कएल गेल अछि से ताहिसँ दूनू पक्षक लोक संतुष्ट हेताह से हमरा विश्वास अछि। 3) ई पोथी वैदिक छन्द जनबाक लेल सहायक अछि। लोक वेदक नाम तँ जपैत छथि मुदा वैदिक छन्दक गिनती कोना होइत छै से नै जानि पाबै छथि। पाठक ई पोथी एहि लेल ई पोथी अवश्य पढ़थि। 4) साहित्यमे खास कऽ गजलमे प्रेमपरक विषय अनिवार्य रूपसँ अबैत छै मुदा अधिकांशतः प्रेमपरक रचना एक सीमाक बाद बाधक भऽ जाइत छै। मुदा प्रस्तुत पोथीमे प्रेमक प्रयोग एना भेल छै जे बाप-बेटी वा कि भाए-बहीनि एकै संगे एहि पोथीक रचना सभकेँ पढ़ि सकैत छथि। 5) जे पाठक मैथिली गजलक विकासक्रम बूझए चाहै छथि तिनका ई पोथी अवश्य पढ़बाक चाही। ई पोथी अही विधा केर अछि। एहि पाँच टाक अतिरिक्त आरो बात सभ अछि जाहि लेल पाठककेँ ई पोथी पढ़बाक चाही मुदा एहि ठाम ओ बात सभहक खोज करबाक लेल हम पाठक एवं आलोचक दूनूकेँ आग्रह करबनि। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३. पद्य ३.१.संतोष कुमार राय 'बटोही'- गड़बड़झाला ३.२.ज्ञानवर्द्धन कंठ- २ टा गजल संतोष कुमार राय ' बटोही ' गड़बड़झाला आयल पंचायत चुनाव मुस्की मारै बिलाय कुक्कुर करै हुंकार बकरी केँ सभ कियो पहनाबै माला बउआ हौ पंचायत मे भेलै वर-वर घोटाला। महिष पोखरि खूनै माछ मारै सियार मखान चोराबै बौना के बजतै ? सभ खाएत छै पान-मसाला हँ यौ गाम-गाम मे भेल छै गड़बड़झाला। पढ़ायल सुगा बौर गेल चौक-चौराहा लबड़ाक भेल आब की किनको छन्हि बथान ? गरीबक लेल अखनो धरि सभ दफ्तर मे ताला के सुनतै ? सभ कियो बनल छै लाला। -संतोष कुमार राय 'बटोही', ग्राम- मंगरौना, पोस्ट- गोनौली, जिला- मधुबनी, बिहार- 847401, मोबाइल नंबर- 6204644978 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ज्ञानवर्द्धन कंठ २ टा गजल १ सवाल जय सियाराम जवाब जय सियाराम दबाइ छै बिकै लेल इलाज जय सियाराम खरैच कय पचा गेल हिसाब जय सियाराम पढ़ैत ओ बढ़ै लेल पढ़ाइ जय सियाराम विचार छै बड़ा नीक हियाव जय सियाराम सवाल बड़ लगै तीत जवाब जय सियाराम २ बात बिगड़तै नहि कहबै यौ लोक बमकतै नहि कहबै यौ आगि लगा ससरैछै से की देखि ससरबै नहि कहबै यौ दाबि नरेठी कमजोरक ओ खेत हड़पतै नहि कहबै यौ छोट बड़क की निर्धारणमे जाति पकड़बै नहि कहबै यौ दूध अलग की पानिक फेंटल निर्णय करबै नहि कहबै यौ ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ४.स्त्री कोना (सम्पादक- इरा मल्लिक) ४.१.विभा रानी- स्तन, योनि आ गर्भाशय- मूल हिन्दी सं मैथिली रूपान्तरण- मुन्नाजी विभा रानी स्तन, योनि आ गर्भाशय -मूल हिन्दी सं मैथिली रूपान्तरण- मुन्नाजी हे ईश्वर ! काटि दियय हमर स्तन, बना दिय' हमरा बिनु स्तन आ योनिकें, निकालि दिय' हमरा देह सं गर्भाशय किए ? त' नै पचैए बौद्धिककें तोरा देखब। रहि लेब हम बिनु गर्भधारण केने, जी लेब बिनु अपन देहकें निहारने वा ओहि पर बिनु गर्व केने ककरो सं नै कहबै कि तोहर सृष्टिक निर्माणमें कतेक सहायक ऐछ देह। पीट लेब छाती आ बान्हि लेब ओइ पर कसिकें कोनो लत्ता, निकलवा पर दूध ऐ स्तन सं। हम मरि रहलौं भटकि रहलौं चाहि रहलौं कि जी जए एक जोड़ी स्तन एक्टा योनि आ एकटा गर्भाशय। किएक कि बचि जए एकटा स्त्री एकटा घर एकटा माए एकटा बेटी कैंसर सं। हे ईश्वर! बजबितौं नै कहियो अहांकें मुदा ऐ बेर अहां आबि जाउ आ किछु अहीं करू समाजक मगजमें भरल- ऐ कैंसरकें भगेबाक उपाय जनेबाक ऐछ जे हमरा गरियेबा आओर मारबा- जरेबा लेल सेहो ओहीठां सं जए पड़त आगू अन्यथा नै आबि सकब ऐ धरती पर जं नै हुअए उपस्थित " इ स्तन,योनि आ गर्भाशय। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ........................................................................................................................ संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] Videha e-Learning पेटार (रिसोर्स सेन्टर) शब्द-व्याकरण-इतिहास MAITHILI IDIOMS & PHRASES मैथिली मुहावरा एवम् लोकोक्ति प्रकाश- रमाकान्त मिश्र मिहिर (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) डॉ. ललिता झा- मैथिलीक भोजन सम्बन्धी शब्दावली (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) मैथिली शब्द संचय MAITHILI DICTIONARY- RAMDEO JHA (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) ENGLISH MAITHILI COMPUTER DICTIONARY MAITHILI ENGLISH DICTIONARY अणिमा सिंह -Shishu_Geet_Khel_Anima_Singh डॉ. रमण झा मैथिली काव्यमे अलङ्कार अलङ्कार-भास्कर आनन्द मिश्र (सौजन्य श्री रमानन्द झा "रमण")- मिथिला भाषाक सुबोध व्याकरण BHOLALAL DAS मैथिली सुबोध व्याकरण- भोला लाल दास राधाकृष्ण चौधरी- A Survey of Maithili Literature ........................................................................................................................ मूलपाठ तिरहुता लिपिक उद्भव ओ विकास (यू.पी.एस.सी. सिलेबस) राजेश्वर झा- मिथिलाक्षरक उद्भव ओ विकास (मैथिली साहित्य संस्थान आर्काइव) Surendra Jha Suman दत्त-वती (मूल)- श्री सुरेन्द्र झा सुमन (यू.पी.एस.सी. सिलेबस) प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) CIIL SITE ........................................................................................................................ समीक्षा सुभाष चन्द्र यादव-राजकमल चौधरी: मोनोग्राफ शिव कुमार झा "टिल्लू" अंशु-समालोचना डॉ बचेश्वर झा- B_JHA_Nibhand_Nikunj.pdf डॉ. देवशंकर नवीन- Adhunik_Sahityak_Paridrishya डॉ. रमण झा- भिन्न-अभिन्न प्रेमशंकर सिंह- मैथिली भाषा साहित्य:बीसम शताब्दी (आलोचना) डॉ. रमानन्द झा 'रमण' हिआओल अखियासल CIIL SITE दुर्गानन्द मण्डल-चक्षु RAMDEO JHA दत्त-वतीक वस्तु कौशल- डॊ. श्रीरामदेवझा SHAILENDRA MOHAN JHA परिचय निचय- डॊ शैलेन्द्र मोहन झा ........................................................................................................................ अतिरिक्त पाठ पहिने मिथिला मैथिलीक सामान्य जानकारी लेल एहि पोथी केँ पढ़ू:- राधाकृष्ण चौधरी- मिथिलाक इतिहास फेर एहि मनलग्गू फाइल सभकेँ सेहो पढ़ू:- केदारनाथ चौधरी चमेलीरानी माहुर करार कुमार पवन पइठ (मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ कथा) (साभार अंतिका) डायरीक खाली पन्ना (साभार अंतिका) याेगेन्द्र पाठक वियाेगी- विज्ञानक बतकही रामलोचन ठाकुर- मैथिली लोककथा SAHITYA AKADEMI http://sahitya-akademi.gov.in/publications/e-books.jsp http://sahitya-akademi.gov.in/general/Digitalbooks.jsp CIIL http://corpora.ciil.org/maisam.htm अखियासल (रमानन्द झा रमण) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI1.pdf जुआयल कनकनी- महेन्द्र http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI2.pdf प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI3.pdf सृजन केर दीप पर्व- सं केदार कानन आ अरविन्द ठाकुर http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI4.pdf मैथिली गद्य संग्रह- सं शैलेन्द्र मोहन झा http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI5.pdf JNU http://sanskrit.jnu.ac.in/maithili/index.jsp http://sanskrit.jnu.ac.in/student_projects/lexicon.jsp?lexicon=maithili ARCHIVE.ORG https://archive.org/details/%40vijay_deo_jha?&sort=-publicdate&page=2 VIDEHA MAITHILI BOOKS/ PICTURE-AUDIO-VIDEO ARCHIVE http://videha.co.in/new_page_15.htm https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ ALL INDIA RADIO DOORDARSHAN आकाशवाणी दूरदर्शन http://prasarbharati.gov.in/ http://newsonair.com/ https://doordarshan.gov.in/ आकाशवाणी मैथिली पोडकास्ट 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(online maithili journal) मैथिली साहित्य संस्थान https://www.maithilisahityasansthan.org/ https://www.maithilisahityasansthan.org/resources (online pdf of Reasearch Papers/ books) ........................................................................................................................ VIDEHA e-LEARNING YOUTUBE CHANNEL https://www.youtube.com/channel/UC4abVKqMj2pDWIAkXiOHp7A (अनुवर्तते) -गजेन्द्र ठाकुर विदेहक किछु विशेषांक:- १) हाइकू विशेषांक १२ म अंक, १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf 12.pdf २) गजल विशेषांक २१ म अंक, १ नवम्बर २००८ Videha_01_11_2008.pdf Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf 21.pdf ३) विहनि कथा विशेषांक ६७ म अंक, १ अक्टूबर २०१० Videha_01_10_2010 Videha_01_10_2010_Tirhuta 67 ४) बाल साहित्य विशेषांक ७० म अंक, १५ नवम्बर २०१० Videha_15_11_2010 Videha_15_11_2010_Tirhuta 70 ५) नाटक विशेषांक ७२ म अंक १५ दिसम्बर२०१० Videha_15_12_2010 Videha_15_12_2010_Tirhuta 72 ६) नारी विशेषांक ७७म अंक ०१ मार्च २०११ Videha_01_03_2011 Videha_01_03_2011_Tirhuta 77 ७) अनुवाद विशेषांक (गद्य-पद्य भारती) ९७म अंक Videha_01_01_2012 Videha_01_01_2012_Tirhuta 97 ८) बाल गजल विशेषांक विदेहक अंक १११ म अंक, १ अगस्त २०१२ Videha_01_08_2012 Videha_01_08_2012_Tirhuta 111 ९) भक्ति गजल विशेषांक १२६ म अंक, १५ मार्च २०१३ Videha_15_03_2013 Videha_15_03_2013_Tirhuta 126 १०) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक १४२ म, अंक १५ नवम्बर २०१३ Videha_15_11_2013 Videha_15_11_2013_Tirhuta 142 ११) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 १२) अरविन्द ठाकुर विशेषांक १८९ म अंक १ नवम्बर २०१५ Videha_01_11_2015 १३) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक १९१ म अंक १ दिसम्बर २०१५ Videha_01_12_2015 १४) विदेह सम्मान विशेषाक- २००म अक १५ अप्रैल २०१६/ २०५ म अक १ जुलाई २०१६ Videha_15_04_2016 Videha_01_07_2016 १५) मैथिली सी.डी./ अल्बम गीत संगीत विशेषांक- २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ Videha_01_01_2017 १६) मैथिली वेब पत्रकारिता विशेषांक VIDEHA 313 लेखकसं आमंत्रित रचनापर आमंत्रित आलोचकक टिप्पणीक शृंखला १७) मैथिली बीहनि कथा विशेषांक-२ VIDEHA 317 १८) रामलोचन ठाकुर विशेषांक VIDEHA 319 १९) रामलोचन ठाकुर श्रद्धांजलि विशेषांक VIDEHA 320 लेखकक आमंत्रित रचना आ ओइपर आमंत्रित समीक्षकक समीक्षा सीरीज १. कामिनीक पांच टा कविता आ ओइपर मधुकान्त झाक टिप्पणी विदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016 "पाठक हमर पोथी किए पढ़थि"- लेखक द्वारा अप्पन पोथी/ रचनाक समीक्षा सीरीज १. आशीष अनचिन्हार 'विदेह' क ३२७ म अंक ०१ अगस्त २०२१ एडिटर्स चोइस सीरीज एडिटर्स चोइस सीरीज-१ विदेहक १२३ म (०१ फरबरी २०१३) अंकमे बलात्कारपर मैथिलीमे पहिल कविता प्रकाशित भेल छल। ई दिसम्बर २०१२ क दिल्लीक निर्भया बलात्कार काण्डक बादक समय छल। ओना ई अनूदित रचना छल, तेलुगुमे पसुपुलेटी गीताक एहि कविताक हिन्दी अनुवाद केने छलीह आर. शांता सुन्दरी आ हिन्दीसँ मैथिली अनुवाद केने छलाह विनीत उत्पल। हमर जानकारीमे एहिसँ बेशी सिहराबैबला कविता कोनो भाषामे नहि रचल गेल अछि। सात सालक बादो ई समस्या ओहने अछि। ई कविता सभकेँ पढ़बाक चाही, खास कऽ सभ बेटीक बापकेँ, सभ बहिनक भाएकेँ आ सभ पत्नीक पतिकेँ। आ विचारबाक चाही जे हम सभ अपना बच्चा सभ लेल केहन समाज बनेने छी। एडिटर्स चोइस सीरीज-१ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-२ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच ब्रेस्ट कैसरक समस्यापर विदेह मे मीना झा केर एकटा लघु कथा प्रकाशित भेल। ई मैथिलीक पहिल कथा छल जे ब्रेस्ट कैसर पर लिखल गेल। हिन्दीमे सेहो ताधरि एहि विषयपर कथा नहि लिखल गेल छल, कारण एहि कथाक ई-प्रकाशित भेलाक १-२ सालक बाद हिन्दीमे दू गोटेमे घोंघाउज भऽ रहल छल कि पहिल हम आकि हम, मुदा दुनूक तिथि मैथिलीक कथाक परवर्ती छल। बादमे ई विदेह लघु कथामे सेहो संकलित भेल। एडिटर्स चोइस सीरीज-२ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-३ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिलक किछु बाल कविता प्रकाशित भेल। बादमे हुनकर ३ टा बाल कविता विदेह शिशु उत्सवमे संकलित भेल जाहिमे २ टा कविता बेबी चाइल्डपर छल। पढ़ू ई तीनू कविता, बादक दुनू बेबी चाइल्डपर लिखल कविता पढ़बे टा करू से आग्रह। एडिटर्स चोइस सीरीज-३ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-४ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच जगदानन्द झा मनुक एकटा दीर्घ बाल कथा कहि लिअ बा उपन्यास प्रकाशित भेल, नाम छल चोनहा। बादमे ई रचना विदेह शिशु उत्सवमे संकलित भेल, ई रचना बाल मनोविज्ञानपर आधारित मैथिलीक पहिल रचना छी, मैथिली बाल साहित्य कोना लिखी तकर ट्रेनिंग कोर्समे एहि उपन्यासकेँ राखल जेबाक चाही। कोना मॊडर्न उपन्यास आगाँ बढ़ै छै, स्टेप बाइ स्टेप आ सेहो बाल उपन्यास। पढ़बे टा करू से आग्रह। एडिटर्स चोइस सीरीज-४ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-५ एडिटर्स चोइस ५ मे मैथिलीक "उसने कहा था" माने कुमार पवनक दीर्घकथा "पइठ" (साभार अंतिका) । हिन्दीक पाठक, जे "उसने कहा था" पढ़ने हेता, केँ बुझल छन्हि जे कोना अहि कथाकेँ रचि चन्द्रधर शर्मा ’गुलेरी’ अमर भऽ गेलाह। हम चर्चा कऽ रहल छी, कुमार पवनक "पइठ" दीर्घकथाक। एकरा पढ़लाक बाद अहाँकेँ एकटा विचित्र, सुखद आ मोन हौल करैबला अनुभव भेटत, जे सेक्सपीरिअन ट्रेजेडी सँ मिलितो लागत आ फराको। मुदा एहि रचनाकेँ पढ़लाक बाद तामस, घृणा सभपर नियंत्रणकेँ आ सामाजिक/ पारिवारिक दायित्वकेँ सेहो अहाँ आर गंभीरतासँ लेबै, से धरि पक्का अछि। मुदा एकर एकटा शर्त अछि जे एकरा समै निकालि कऽ एक्के उखड़ाहामे पढ़ि जाइ। एडिटर्स चोइस सीरीज-५ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-६ जगदीश प्रसाद मण्डलक लघुकथा "बिसाँढ़": १९४२-४३ क अकालमे बंगालमे १५ लाख लोक मुइला, मुदा अमर्त्य सेन लिखैत छथि जे हुनकर कोनो सर-सम्बन्धी एहि अकालमे नहि मरलन्हि। मिथिलोमे अकाल आएल १९६७ ई. मे आ इन्दिरा गाँधी जखन एहि क्षेत्र अएली तँ हुनका देखाओल गेल जे कोना मुसहर जातिक लोक बिसाँढ़ खा कऽ एहि अकालकेँ जीति लेलन्हि। मैथिलीमे लेखनक एकभगाह स्थिति विदेहक आगमनसँ पहिने छल। मैथिलीक लेखक लोकनि सेहो अमर्त्य सेन जेकाँ ओहि महाविभीषिकासँ प्रभावित नहि छला आ तेँ बिसाँढ़पर कथा नहि लिखि सकला। जगदीश प्रसाद मण्डल एहिपर कथा लिखलन्हि जे प्रकाशित भेल चेतना समितिक पत्रिकामे, मुदा कार्यकारी सम्पादक द्वारा वर्तनी परिवर्तनक कारण ओ मैथिलीमे नहि वरण् अवहट्ठमे लिखल बुझा पड़ल, आ ओतेक प्रभावी नहि भऽ सकल कारण विषय रहै खाँटी आ वर्तनी कृत्रिम। से एकर पुनः ई-प्रकाशन अपन असली रूपमे भेल विदेहमे आ ई संकलित भेल "गामक जिनगी" लघुकथा संग्रहमे। एहि पोथीपर जगदीश प्रसाद मण्डलकेँ टैगोर लिटरेचर अवार्ड भेटलनि। जगदीश प्रसाद मण्डलक लेखनी मैथिली कथाधाराकेँ एकभगाह हेबासँ बचा लेलक, आ मैथिलीक समानान्तर इतिहासमे मैथिली साहित्यकेँ दू कालखण्डमे बाँटि कऽ पढ़ए जाए लागल- जगदीश प्रसाद मण्डलसँ पूर्व आ जगदीश प्रसाद मण्डल आगमनक बाद। तँ प्रस्तुत अछि लघुकथा बिसाँढ़- अपन सुच्चा स्वरूपमे। एडिटर्स चोइस सीरीज-६ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-७ मैथिलीक पहिल आ एकमात्र दलित आत्मकथा: सन्दीप कुमार साफी। सन्दीप कुमार साफीक दलित आत्मकथा जे अहाँकेँ अपन लघु आकाराक अछैत हिलोड़ि देत आ अहाँक ई स्थिति कऽ देत जे समानान्तर मैथिली साहित्य कतबो पढ़ू अहाँकेँ अछौं नहि होयत। ई आत्मकथा विदेहमे ई-प्रकाशित भेलाक बाद लेखकक पोथी "बैशाखमे दलानपर"मे संकलित भेल आ ई मैथिलीक अखन धरिक एकमात्र दलित आत्मकथा थिक। तँ प्रस्तुत अछि मैथिलीक पहिल दलित आत्मकथा: सन्दीप कुमार साफीक कलमसँ। एडिटर्स चोइस सीरीज-७ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-८ नेना भुटकाकेँ रातिमे सुनेबा लेल किछु लोककथा (विदेह पेटारसँ)। एडिटर्स चोइस सीरीज-८ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-९ मैथिली गजलपर परिचर्चा (विदेह पेटारसँ)। एडिटर्स चोइस सीरीज-९ (डाउनलोड लिंक) जगदीश प्रसाद मण्डल जीक ६५ टा पोथीक नव संस्करण विदेहक २३३ सँ २५० धरिक अंकमे धारावाहिक प्रकाशन नीचाँक लिंकपर पढ़ू:- Videha_15_05_2018 Videha_01_05_2018 Videha_15_04_2018 Videha_01_04_2018 Videha_15_03_2018 Videha_01_03_2018 Videha_15_02_2018 Videha_01_02_2018 Videha_15_01_2018 Videha_01_01_2018 Videha_15_12_2017 Videha_01_12_2017 Videha_15_11_2017 Videha_01_11_2017 Videha_15_10_2017 Videha_01_10_2017 Videha_15_09_2017 Videha_01_09_2017 विदेह ई-पत्रिकाक बीछल रचनाक संग- मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ रचनाक एकटा समानान्तर संकलन: विदेह: सदेह: १ (२००८-०९) देवनागरी विदेह: सदेह: १ (२००८-०९) तिरहुता विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) देवनागरी विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) तिरहुता विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०)देवनागरी विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०) तिरहुता विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०)देवनागरी विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०) तिरहुता विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]देवनागरी विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ] तिरहुता विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]- दोसर संस्करण देवनागरी विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ]देवनागरी विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ] तिरहुता विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ]देवनागरी विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ] तिरहुता विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ]देवनागरी विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ] तिरहुता विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ]देवनागरी विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ] तिरहुता विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ]देवनागरी विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ] तिरहुता विदेह:सदेह ११ विदेह:सदेह १२ विदेह:सदेह १३ The readers of English translations of Maithili Novel "sahasrabadhani" and verse collection "sahasrabdik chaupar par" has intimated that the English translation has not been able to grasp the nuances of original Maithili. Therefore the Author has started translating his Maithili works in English himself. After these translations are complete these would be the official translations authorised by the Author of the original works.-Editor Maithili Books can be downloaded from: https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ विदेह सम्मान: सम्मान-सूची (समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार सहित) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। सूचना/ घोषणा १ "विदेह सम्मान" समानान्तर साहित्य अकदेमी पुरस्कारक नामसँ प्रचलित अछि। "समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार" (मैथिली), जे साहित्य अकादेमीक मैथिली विभागक गएर सांवैधानिक काजक विरोधमे शुरु कएल छल, लेल अनुशंसा आमन्त्रित अछि। अनुशंसा २०१९ आ २०२० बर्ख लेल निम्न कोटि सभमे आमन्त्रित अछि: १) फेलो २)मूल पुरस्कार ३)बाल-साहित्य ४)युवा पुरस्कार आ ५) अनुवाद पुरस्कार। अपन अनुशंसा ३१ दिसम्बर २०२० धरि २०१९ पुरस्कारक लेल आ ३१ मार्च २०२१ धरि २०२०क पुरस्कारक लेल पठाबी। पुरस्कारक सभ क्राइटेरिया साहित्य अकादेमी, दिल्लीक समानान्तर पुरस्कारक समक्ष रहत, जे एहि लिंक sahitya-akademi.gov.in पर उपलब्ध अछि। अपन अनुशंसा editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २ “मिथिला मखान” फिल्म देखू मात्र १०१ टाकामे। Android App “BEJOD” download करू वा जाउ www.bejod.in पर, signup करू, एकटा ईमेल जायत, अपन ईमेल खोलू आ ओकरा क्लिक करू अहाँक अकाउंट एक्टीवेट भय जायत। आब मिथिला मखान रेण्ट पर लिअ, डेबिट कार्डसँ १०१ टाका अॉनलाइन पेमेंट करू आ फिल्म देखू। ३ विदेह अपन आगामी अंक (२०२१ क प्रारम्भमे) श्री रामलोचन ठाकुर पर विशेषांक निकालबाक नेयार केने अछि। हुनका सम्बन्धी रचना आमंत्रित अछि (संस्मरण, साक्षात्कार, समीक्षा आदि) जे ३१ दिसम्बर २०२० धरि editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाओल जा सकैत अछि। विदेह पेटारक अन्तर्गत (पोथी डाउनलोड साइट) मे http://www.videha.co.in/new_page_15.htm हुनकर मौलिक, अनूदित आ सम्पादित रचना फ्री पी.डी.एफ. डाउनलोड लेल उपलब्ध अछि। विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम्: VIDEHA: AN IDEA FACTORY (c)२००४-२०२१. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHAसम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: डॉ उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम विलास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक -स्त्री कोना- इरा मल्लिक। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि)editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि। एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै, आ से हानि-लाभ रहित आधारपर छै आ तैँ ऐ लेल कोनो रॊयल्टीक/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै। तेँ रॉयल्टीक/ पारिश्रमिकक इच्छुक विदेहसँ नै जुड़थि, से आग्रह। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-2021 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। ५ जुलाई २००४ केँ http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् 'विदेह' ३२७ म अंक ०१ अगस्त २०२१ (वर्ष १४ मास १६४ अंक ३२७)
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