विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA ISSN 2229-547X VIDEHA 'विदेह' ३३० म अंक १५ सितम्बर २०२१ (वर्ष १४ मास १६५ अंक ३३०) १. गजेन्द्र ठाकुर- संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल सेहो] [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] [FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI ALSO] २. गद्य २.१.रबीन्द्र नारायण मिश्र- लजकोटर (धारावाहिक उपन्यास)- २८म खेप २.२.जगदीश चन्द्र ठाकुर ’अनिल’- आँखिमे चित्र हो मैथिली केर (आत्मकथा)- १८. पाँच बरख सिवानमे २.३.योगेन्द्र पाठक ‘वियोगी’- पिरामिडक देश मे (पहिल खेप) २.४.मुन्नाजी- परस्पर ३. पद्य ३.१.आशीष अनचिन्हार- २ टा गजल Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Books/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाउ। VIDEHA ARCHIVE विदेह पेटार View Videha googlegroups (since July 2008) view Videha Facebook Official Group (since January 2008)- for announcements १. गजेन्द्र ठाकुर ........................................................................................................................ ........................................................................................................................ [संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री] [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल सेहो] [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] [FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI ALSO] यू. पी. एस. सी. (मेन्स) २०२० ऑप्शनल: मैथिली साहित्य विषयक टेस्ट सीरीज यू.पी.एस.सी. क प्रिलिमिनरी परीक्षा २०२० सम्पन्न भऽ गेल अछि। जे परीक्षार्थी एहि परीक्षामे उत्तीर्ण करताह आ जँ मेन्समे हुनकर ऑप्शनल विषय मैथिली साहित्य हेतन्हि तँ ओ एहि टेस्ट-सीरीजमे सम्मिलित भऽ सकैत छथि। टेस्ट सीरीजक प्रारम्भ प्रिलिम्सक रिजल्टक तत्काल बाद होयत। टेस्ट-सीरीजक उत्तर विद्यार्थी स्कैन कऽ editorial.staff.videha@gmail.com पर पठा सकैत छथि, जँ मेलसँ पठेबामे असोकर्ज होइन्हि तँ ओ हमर ह्वाट्सएप नम्बर 9560960721 पर सेहो प्रश्नोत्तर पठा सकैत छथि। संगमे ओ अपन प्रिलिम्सक एडमिट कार्डक स्कैन कएल कॉपी सेहो वेरीफिकेशन लेल पठाबथि। परीक्षामे सभ प्रश्नक उत्तर नहि देमय पड़ैत छैक मुदा जँ टेस्ट सीरीजमे विद्यार्थी सभ प्रश्नक उत्तर देताह तँ हुनका लेल श्रेयस्कर रहतन्हि। विदेहक सभ स्कीम जेकाँ ईहो पूर्णतः निःशुल्क अछि।- गजेन्द्र ठाकुर संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सर्विसेज (मुख्य) परीक्षा, २०२० मैथिली (ऐच्छिक) लेल टेस्ट सीरीज/ प्रश्न-पत्र- १ आ २ TEST SERIES-1 TEST SERIES-2 [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल/ FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI] NTA_UGC_NET_MAITHILI_01 NTA_UGC_NET_MAITHILI_02 NTA_UGC_NET_MAITHILI_03 (श्री शम्भु कुमार सिंह द्वारा संकलित) Videha e-Learning MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) UPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS BPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. (ऐच्छिक) मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. (अनिवार्य) मैथिली प्रश्नपत्र- बी.पी.एस.सी.(ऐच्छिक) मैथिलीक वर्तनी १ भाषापाक २ मैथिलीक वर्तनीमे पर्याप्त विविधता अछि। मुदा प्रश्नपत्र देखला उत्तर एकर वर्तनी इग्नू BMAF001 सँ प्रेरित बुझाइत अछि, से एकर एकरा एक उखड़ाहामे उनटा-पुनटा दियौ, ततबे धरि पर्याप्त अछि। यू.पी.एस.सी. क मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेल सेहो ई पर्याप्त अछि, से जे विद्यार्थी मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेने छथि से एकर एकटा आर फास्ट-रीडिंग दोसर-उखड़ाहामे करथि| IGNOU इग्नू BMAF-001 ........................................................................................................................ MAITHILI (OPTIONAL) TOPIC 1 [Place of Maithili in Indo-European Language Family/ Origin and development of Maithili language (Sanskrit, Prakrit, Avhatt, Maithili) भारोपीय भाषा परिवार मध्य मैथिलीक स्थान/ मैथिली भाषाक उद्भव ओ विकास (संस्कृत, प्राकृत, अवहट्ट, मैथिली)] TOPIC 2 (Criticism- Different Literary Forms in Modern Era/ test of critical ability of the candidates) TOPIC 3 (ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददास सिलेबसमे छथि आ रसमय कवि चतुर चतुरभुज विद्यापति कालीन कवि छथि। एतय समीक्षा शृंखलाक प्रारम्भ करबासँ पूर्व चारू गोटेक शब्दावली नव शब्दक पर्याय संग देल जा रहल अछि। नव आ पुरान शब्दावलीक ज्ञानसँ ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददासक प्रश्नोत्तरमे धार आओत, संगहि शब्दकोष बढ़लासँ खाँटी मैथिलीमे प्रश्नोत्तर लिखबामे धाख आस्ते-आस्ते खतम होयत, लेखनीमे प्रवाह आयत आ सुच्चा भावक अभिव्यक्ति भय सकत।) TOPIC 4 (बद्रीनाथ झा शब्दावली आ मिथिलाक कृषि-मत्स्य शब्दावली) TOPIC 5 (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोरिक गाथामे समाज ओ संस्कृति) TOPIC 6 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- विद्यापति) TOPIC 7 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- पद्य समीक्षा- बानगी) TOPIC 8 (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोक गाथा नृत्य नाटक संगीत) TOPIC 9 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- यात्री) TOPIC 10 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली रामायण) TOPIC 11 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली उपन्यास) TOPIC 12 (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- शब्द विचार) TOPIC 13 (तिरहुता लिपिक उद्भव ओ विकास) TOPIC 14 (आधुनिक नाटकमे चित्रित निर्धनताक समस्या- शम्भु कुमार सिंह)् TOPIC 15 (स्वातंत्र्योत्तर मैथिली कथामे सामाजिक समरसता- अरुण कुमार सिंह) TOPIC 16 (यू. पी.एस.सी. मैथिली प्रथम पत्रक परीक्षार्थी हेतु उपयोगी संकलन, मैथिलीक प्रमुख उपभाषाक क्षेत्र आ ओकर प्रमुख विशेषता, मैथिली साहित्यक आदिकाल, मैथिली साहित्यक काल-निर्धारण- शम्भु कुमार सिंह) TOPIC 17 (मैथिली आ दोसर पुबरिया भाषाक बीचमे सम्बन्ध (बांग्ला, असमिया आ ओड़िया) [यू.पी.एस.सी. सिलेबस, पत्र-१, भाग-“ए”, क्रम-५]) TOPIC 18 [मैथिली आ हिन्दी/ बांग्ला/ भोजपुरी/ मगही/ संथाली- बिहार लोक सेवा आयोग (बी.पी.एस.सी.) केर सिविल सेवा परीक्षाक मैथिली (ऐच्छिक) विषय लेल] ........................................................................................................................ GENERAL STUDIES (PRELIMINARY & MAINS) GS (Pre) TOPIC 1 GS (Mains) NCERT-ENVIRONMENT CLASS XI-XII NCERT PDF I-XII TN BOARD PDF I-XII ALL INDIA RADIO ENGLISH NEWS ALL INDIA RADIO NEWS ARCHIVE ALL INDIA RADIO TALKS AND CURRENT AFFAIRS RAJYA SABHA TV NEWS DISCUSSIONS OTHER OPTIONALS IGNOU eGYANKOSH (अनुवर्तते) -गजेन्द्र ठाकुर २. गद्य २.१.रबीन्द्र नारायण मिश्र- लजकोटर (धारावाहिक उपन्यास)- २८म खेप २.२.जगदीश चन्द्र ठाकुर ’अनिल’- आँखिमे चित्र हो मैथिली केर (आत्मकथा)- १८. पाँच बरख सिवानमे २.३.योगेन्द्र पाठक ‘वियोगी’- पिरामिडक देश मे (पहिल खेप) २.४.मुन्नाजी- परस्पर रबीन्द्र नारायण मिश्र लजकोटर (धारावाहिक उपन्यास) २८म खेप -२८- पिताक आकस्मिक निधनसँ लतानिठ्ठाहे असगर भए गेलि । एतेक रास संपत्तिक हिसाब-किताब राखब आ तकर रक्षाकरब ओकरा अबूह लगैत छलैक ।समय-साल केहन अछि से देखिए रहल छी । पिताक देहाबसानक कैक दिनक बाद तँ ओ मतिसुन्न जकाँ एमहर-ओमहर बौआइत रहलि। कैकबेर हमरो ओहिठाम आएलि । मुदा हमहु किछु आश्वासन नहि दए सकलिऐक ।हमरो तँ काज बढ़ि गेल छल । कालक्रमे हम अपन कारखाना स्थापित कए लेने रही जतए कारक छोट-मोट पार्टसभ बनैत छल । मरम्मतिक काज तँ चलिए रहल छल । गाम-घरसँ कैक गोटाक रोजगार हमरे ओहिठामसँ चलैत छलैक । गामघरक लोककेँ काजमे लगेबाक खिलाफ कैकगोटे कहलथि मुदा हमर मोन नहि मानलक । केओ कतहु खराप भए गेल तकर माने सभ खरापे भए जाएत से तँ ठीक बात नहि भेल । फेर हमरा अपन संघर्ष बिसराएल नहि छल । हम आँखि मुनि कए जतेक लोककेँ पार लागल काजपर राखि लेलिऐक । आगु भगवानमालिक । एमहर लताक हालत देखि कए कैकबेर चिंता होइत छल,डरो होइत छल । आखिरएतेकटा संपत्तिकओ मालिक अछि । ई महानगर थिक । धनेककारण ओकर पिताक अपने लोक हत्याक कारण बनि गेल ।देखभालक अभाव आ लगातार होइत घाटाककारण लताक कारखाना बंद भए गेल । मजदूरसभ कतेकोबेर हड़ताल केलक । सभक किछु-ने-किछु जायज/ नाजायज मांग रहैत छलैक । स्पष्ट बात तँ ई छल जे एतेल लफड़ा सम्हारब लताक बसक बाते नहि छल । कालेजसँ निकलल सभ दिन स्वतंत्र जीवन जीबाक आभ्यस्त लताक हेतु ई एकटा विकट समस्या भए गेल छल ।अस्तु,ओ कारखाना तँ बंद भेनहिछलैक,से भए गेलैक । कखनो-कखनो हम सोचिएक जे लता हमर के अछि,ओकर बात लए हम किएक परेसान रहैत छी? ई महानगरी छैक । ऐहिठाम सए तरहक लफड़ा होइते रहैत छैक । मोसकिलसँ तँ हम एहि महानगरमे ठाढ़ भेलहुँ अछि । आँखि-कान बंद कए अपन काजमे लागल रही । फेर दोसरे क्षण होइत जे हमसभ मनुक्ख छी,पाइ कमेबाक मसीन नहि छी जे सभ किछु बिसरि ओहीमे लागल रही । एहि अंतरद्वंदक प्रभाव हमर काजो पर पड़ि रहल छल। स्वास्थ्य सेहो गड़बड़ा रहल छल मुदा किछु समाधानो नहि फुरा रहल छल । हमरा कैकबेर होबए लागए जे एहिसभक हेतु हम स्वयं दोषीछी । आओर लोकसभ एहि सहरमे रहैत अछि। कहाँ केओ अनकर समस्याकेँ अपन माथपर लए घुमैत रहैत अछि । अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। जगदीश चन्द्र ठाकुर ’अनिल’ आँखिमे चित्र हो मैथिलीकेर ( आत्मकथा ) १८. पाँच बरख सिवानमे 18 अगस्त 1980 क’ हम सिवान शाखामे पद भार ग्रहण केलहुं | सिवान पैघ शाखा छलैक, लगभग बीसटा सदस्य काज करैत छलाह | श्री रामेश्वर प्रसाद सिंह वरिष्ठ शाखा प्रबंधक छलाह | ओ अधिक काल भोजपुरीमे सभसं गप करैत छलाह | ओना भोजपुरी साहित्यसं कोनो लगाव हम नहि देखलियनि | हुनका बाद मध्य प्रदेशसं सी.एल.व्यास एलाह आ हुनका बाद वैद्यजी एलाह | सुरक्षा प्रहरी छलाह जनार्दन सिंह | अन्य अधिकारी-कर्मचारी सभ छलाह रामेश्वर सिंह, लक्ष्मण तिवारी,ओ.पी. जग्गी, एम पी दुबे, एच.पी. शाही,नेफरे साहेब,श्री नारायण झा, जय राम शाही, अन्सारी जी, राम चरण सिंह आदि | अपना जिलाक अपन भाषा-भाषी एक गोटे भेटलाह श्री नारायण झा | झाजी घोंघौर गामक छलाह, ओत’ हमर मौसी छलीह | झाजीसं परिचय भेल त नीक लागल | बादमे मधुबनी शाखासं अधिकारीक रूपमे एलाह एम एन झा (मोद नारायण झा ) जे कलिगामक छलाह | झाजी बचत खाता विभागमे अधिकारी छलाह | कृषि विभाग ओही बिल्डिंगमे एकटा अलग हॉलमे छलैक | ओहिमे एकटा ए. एफ. ओ.( कृषि वित्त अधिकारी ) छलाह श्री शंभू शरण द्विवेदी जी आ दूटा कृषि सहायक छलाह सुधीर कुमार जी आ अरुण कुमार वर्मा जी | द्विवेदीजीक स्थानान्तरण मुजफ्फरपुर, क्षेत्रीय कार्यालयमे हेबाक छलनि | बादमे एलाह अंजनी कुमार सिन्हा(ए एफ ओ), कमलेश कुमार (ए एफ ओ), एन. पी. सिंह, डी सी ओ (आर डी ) ओवरटाइम बन्द भेलाक बाद शाखामे बैलेंसिंग ( शेष मिलान )क काज बाधित भ’ गेल छलैक | बचत खाताक संख्या आ बही बहुत छलै, ओकर बैलेंसिंग बहुत कठिन भ’ गेल छलैक, कृषि विभागमे सेहो गत तीन सालसं लंबित छलै आ आब असंभव जकाँ लगैत छलै | शाखामे कृषि विभागमे बी आर सी, आइ आर डी पी, आइ डी ए, डी आर आइ, अन्त्योदय आदि योजनान्तर्गत ऋण स्वीकृति-वितरण, पूर्वमे देल गेल ऋणक वसूली लेल नोटिस जारी करब आ व्यक्तिगत सम्पर्क करब, दस्ताबेज सबहक समयानुसार नवीनीकरण कराएब , नियमानुसार वसूली हेतु कानूनी कार्यवाही करब, मीटिंग सभमे भाग लेब आ नियंत्रक कार्यालय सभकें समयपर मासिक,तिमाही,अर्ध वार्षिक आ वार्षिक विवरणी बनाक’ प्रस्तुत करब, ऑडिट रिपोर्टक जबाब तैयार करब आ अपेक्षित सुधारक लेल आवश्यक काज करब, आदि कार्य सभसं समय नहि बचैत छलै जे शेष मिलानलेल समय निकालि सकय | हमरा एहिसं पूर्वक शाखामे ई समस्या नै रहै कारण शाखा नव रहै | एहि ठामक ई स्थिति हमरा ठीक नहि लागल | हम चाह्लहुँ जे ई अनियमितता दूर भ’ जाए, द्विवेदीजी सेहो एहिमे सहयोग करय चाहैत छलाह किन्तु ओ कोनो-ने-कोनो व्यवधानमे रहि जाइत छलाह | द्विवेदीजीक गेलाक बाद हम तय केलहुँ जे हम दुनू कृषि सहायकक संगे एहि कार्यकें अवश्य पूर्ण करब | हम अपना विभागकें स्वच्छ राखब,ई ठानि लेलहुं आ काज शुरू क’ देलहुं | बीचमे लोक दोसर काज लेल आबि जाइत छल त बाधित भ’ जाइ छल | ऑफिस-समयक बाद ई काज करब शुरू केलहुं | एकदिन एम एन झा कहलनि, हम अहाँकें एहि कार्यमे मदति क’ सकैत छी, मुदा एहि लेल शाखा प्रबंधककें कहिक’ दस दिन लेल बचत खाता विभागक कार्यसं हमरा मुक्त करबाब’ पड़त | शाखा प्रबंधककें अनुरोध केलियनि त ओ प्रसन्नतापूर्वक झाजीकें कृषि विभागक बैलेंसिंग हेतु अनुमति द’ देलखिन | झाजी एलाह कृषि विभागमे | मुदा एके घंटामे हॉलमे बचत खाता विभागमे ततेक समस्या भ’ गेलै जे झाजीकें शाखा प्रबंधक बजा लेलखिन बचत खाता विभागक काजक लेल | हमरा सभकें झाजी कहलनि जे एकटा निर्णय ली त ऑफिसक निर्धारित समयक बाद हम मदति क’ सकैत छी | निर्णय लेल गेल जे दिन भरि आन काजक संग जतेक संभव हो हम सभ बैलेंसिंग लेल जे किछु क’ सकी से करी, तकर बाद झाजी सेहो संग देताह आ एक तिमाहीक बैलेंस मिलाक’ डेरा लेल प्रस्थान करै जाएब | ओहि समय चारू गोटेक डेरा एकहि दिस रहय | सुधीर बाबू आ वर्माजी दिनमे आन काज करैत एक तिमाहीक अंतिम दिनक शेष उतारि लेथि, हम आ झाजी साँझमे बैसी बैलेंस मिलाबक हेतु | बिजलीक लाइन चलि जाइ त पेट्रोमैक्स जराओल जाइ | बीच मे सुधीर बाबू, वर्माजी आ झाजी बगलमे मारवाड़ी भोजनालयसं भोजन क’ अबैत छलाह | हम परिवारक संग रहैत रही, तें जखन घर जाइ, घरेमे भोजन करी | निर्णयक अनुसार सुधीर बाबू आ वर्माजीकें औंघी लागि जाइन त टेबुलपर माथ झुकाक’ पड़ि रहथि मुदा डेरा जाथि संगे | हम आ झाजी एक तिमाहीक बैलेंस मिलाइएक’ सीट छोड़ी | लगभग बारह बाजि जाइ एक तिमाहीक बैलेंस मिलाब’मे | यदि बारहो बजे नै होइ त छोडि दिऐ | क्षेत्रीय कार्यालय लगेमे छलै | क्षेत्रीय प्रबंधक एलाह एल.एन.भाटिया | बनर्जी साहेब ए आर एम छलाह | डी सी ओ (आर डी) सिंह जी छलाह | ग्रामीण विकास विभागमे अन्य अधिकारी छलाह एस एस पी सिंह,मंजुल मोहन, कमलेश प्रसाद आदि | अन्य अधिकारी छलाह बी एम त्रिपाठी, एच सी पी दत्ता, सुनील कुमार श्रीवास्तव आदि | सुभाष नामक स्टाफ सेहो छलाह | क्षेत्रीय प्रबंधक भाटिया साहेब एक साँझ एलाह आ हमरा सबहक प्रयासक प्रशंसा करैत पुछ्लनि जे क्षेत्रीय कार्यालयसं एहि कार्यमे अहाँ सभ कोन तरहक सहयोगक अपेक्षा करै छी | हम सभ कहलियनि जे संभव होइ त एकटा चपरासीकें हमरे सबहक लेल उपलब्ध करा देथि जे आवश्यकतानुसार वाउचर हमरा सभकें उपलब्ध करबैत रहथि | भाटिया साहेब क्षेत्रीय कार्यालयसं एकटा चपरासीक ड्यूटी हमरा सबहक विभागमे लगा देलनि | हमरा सभहक रूटीन भ’ गेल जे सभ दिन साढ़े दस बजे ऑफिस आबी आ राति बारह बजेक बादे ऑफिससं प्रस्थान करी | लगातार सत्रह दिन लागल रहलापर शेष मिलानक काज अद्यतन भ’ गेल | शाखा प्रबंधक रामेश्वर बाबू सेहो प्रसन्न भेलाह, आब बाहरसं कोनो उच्च अधिकारी अबथिन त कहथिन जे हमर एग्रीकल्चर विभागक शेष मिलान अद्यतन अछि | क्षेत्रीय कार्यालयसं शाखाकें आ कृषि विभागक सभ सदस्य आ झाजीक लेल सेहो प्रशंसा पत्र निर्गत भेल | क्षेत्रीय प्रबंधकक नजरिमे हमर सबहक नीक छवि बनल | एक बेर डी सी ओ (आर डी )क स्थानपर अस्थायी रुपें हमरा क्षेत्रीय कार्यालयमे बजा लेलनि जखन हमरासं सीनियरो ए एफ ओ उपलब्ध छलखिन | हम किछु दिन ओहि पदपर काज केलहुं, फेर वापस अपन स्थानपर सिवान शाखामे आबि गेलहुँ | एक बेर शेष मिलान अद्यतन भेलापर नियमित रूपसं बही सभ संतुलित होइत रहल | एम एन झा जी ऑफिस एबा काल घडी देखैत छलाह, जेबा काल नै, मुदा हुनका जकाँ बहुत कम स्टाफ छलाह | तें बचत खाता विभागक बही-संतुलन असंभव भ’ गेल छलैक | सभ पैघ शाखा एहि समस्यासं ग्रस्त रहैत छल | बही सबहक असंतुलनसं कपट अथवा धोखाघड़ीक आशंका बनल रहैत छलैक | किछु शाखामे बहीक संतुलन भेलाक बाद कपट प्रकाशमे अबैत छलैक | सभ साल ऑडिट रिपोर्टमे एहि अनियमितताक चर्च रहैत छलै, सभ शाखा एहि अनियमितताकें दूर करय चाहैत छल, किछु शाखामे एहि काज लेल दोसर शाखासं अथवा नियंत्रक कार्यालयसं स्टाफ सभ पठाओल जाइत छलाह | तथापि पैघ शाखा सभमे एहि समस्याक समाधान नै भ’ पबैत छलै | कंप्यूटरीकरण भेलाक बाद बही संतुलनक समस्या इतिहासक बात भ’ गेलै | ऋण वितरण समारोह : जनता पार्टीक सरकार समाप्त भ’ गेल छलै, श्रीमती इन्दिरा गाँधी भारी बहुमतसं पुनः सत्तामे एलीह नव बीस सूत्री कार्यक्रम तीव्र गतिसं चलय लागल | आइ आर डी पी कार्यक्रम राष्ट्रीयकृत बैंक सबहक लेल आ सरकारी विभाग लेल सेहो मुख्य कार्यक्रम भ’ गेल छल | जिलामे जतेक राष्ट्रीयकृत बैंकक शाखा छलै, सभकें गाम निर्धारित क’ देल गेल छलै, सभ शाखाकें लक्ष्य सेहो निर्धारित क’ देल गेल छलै | सभ गामसं पर्याप्त संख्यामे आवेदन सम्बन्धित बैंक शाखाकें प्रेषित कएल जाइत छलै, शाखा सभ युद्ध स्तर पर आवेदन निष्पादन लेल स्थल निरीक्षण आ स्वीकृतिक तैयारी करैत छल | शिविर लगाओल जाइत छलै जाहिमे सभ सम्बन्धित बैंक शाखाक अधिकारी / शाखा प्रबंधक, स्थानीय नेता लोकनि आ प्रखंड आ जिला स्तरक शासकीय अधिकारी लोकनि उपस्थित होइत छलाह | कलेक्टर महोदय सेहो अधिक शिविरमे उपस्थित होइत छलाह | शिविरमे विभिन्न बैंक शाखा द्वारा विभिन्न उत्पादक क्रियाकलापक लेल लाभार्थीकें स्वीकृति पत्र प्रदान कएल जाइत छल | बादमे लाभार्थी सम्बन्धित बैंक शाखामे उपस्थित भ’ क’ बैंकक निर्धारित दस्ताबेज सभपर हस्ताक्षर करैत छलाह, जे सामान जाहि दोकानसं लेबाक मोन होइ छलनि ओकर कोटेशन प्रस्तुत करैत छलाह, बैंक द्वारा आपूर्तिकर्ताकें आदेश देल जाइ छलै जे हिनका अमुक सामान द’ दियनु | आपूर्तिकर्ता लाभार्थीकें सामान द’ क’ बैंक शाखामे बिल प्रस्तुत करैत छलाह | बैंक अधिकारी / कर्मचारी द्वारा स्थल निरीक्षण क’ क’ लाभार्थीकें संतुष्ट भेला पर बैंक बहीमे लाभार्थीक खाता खोलि हुनकर खाताकें नामे करैत आपूर्तिकर्ताकें पे-आर्डर अथवा ड्राफ्ट द्वारा बिलक भुगतान क’ देल जाइत छलै | शिविरमे कतेक गोटेकें ऋण स्वीकृत कएल गेलै आ ओहिमे सं कतेक गोटेकें बैंक द्वारा ऋण वितरित कएल गेलै, एकर समीक्षाक लेल विभिन्न स्तरपर मीटिंग होइ छलै | सभ जिलामे अग्रणी बैंकक जिम्मा कोनो खास बैंककें निर्धारित छलै | अग्रणी बैंकक काज होइ छलै सम्पूर्ण जिलाक लेल वार्षिक कार्य योजना तैयार करब, सभ बैंक शाखा आ शासकीय विभागक सहयोग प्राप्त करब आ कलेक्टरक अध्यक्षतामे जिला स्तर पर विभिन्न मीटिंगक आयोजन क’ क’ उपस्थित समस्या सबहक निराकरण सुनिश्चित करब | सिवानमे सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया लीड बैंक छल | पहिने क्षेत्रीय कार्यालयमे एकटा डी सी ओ (आर डी ) आ एकटा कृषि सहायक अथवा ए एफ ओ (कृषि वित्त अधिकारी ) द्वारा एहि विभागक काज चलैत छल, बादमे लीड बैंकक अलग कार्यालय बनल, लीड बैंक अधिकारीक पदस्थापन भेल | श्री आर पी शर्मा लीड बैंक अधिकारी भ’ क’ एलाह | जिलास्तर पर मीटिंगमे सभ बैंकक प्रतिनिधि आ भारतीय रिज़र्व बैंकक अधिकारी सेहो भाग लैत छलाह आ कखनो-कखनो बैंक आ शासकीय कार्यालयक बीच मध्यस्थक भूमिकाक निर्वाह सेहो करैत छलाह | बैंक आ सरकारी मशीनरीक सम्मिलित प्रयाससं जिलाक अन्तर्गत समेकित ग्रामीण विकास कार्यक्रमक संग वार्षिक कार्य योजनाक अनुसार जिलाक विकासक यग्य चलैत छलैक | कखनो-कखनो एहिमे बाधा उपस्थित होइतो छलैक त आपसमे बैसक क’ क’ निराकरण क’ लेल जाइत छलै | एक बेर एकटा ऋण शिविरमे कोनो स्थानीय नेता द्वारा शिकायत कएल गेलै जे स्टेट बैंकमे ऋण सम्बन्धी काजक लेल बहुत दौड़’ पडैत छैक | कलेक्टर साहेब अपन भाषणमे कहलखिन जे हमर ध्यान आब बैंक दिस गेल अछि आ बैंकके सेहो ठीक करब कोनो बड कठिन बात नै अछि | एहिपर स्टेट बैंकक जिला शाखाक वरिष्ठ प्रबंधक उठिक’ कहलखिन जे हम एहि सन्दर्भमे किछु स्पष्टीकरण देब’ चाहैत छी | कलेक्टर साहेब हुनका ‘ बैसू, ऐ ठाम कोनो डिबेट थोड़े भ’ रहल छै |’ –ई कहैत चुप हेबाक लेल बाध्य क’ देलखिन | स्टेट बैंकक वरिष्ठ प्रबंधक की करितथि, चुप भ’क’ बैसि गेलाह, मुदा ई बात शिविरमे उपस्थित सभ बैंकक प्रतिनिधिकें अपमानजनक लगलनि | लीड बैंक कार्यालयमे सभ बैंकक आपात बैसक भेल आ कलेक्टर द्वारा शिविरक मध्य स्टेट बैंकक सम्मानित प्रतिनिधिकें अपमानित करबाक बातकें गंभीरतासं लैत आगामी निर्धारित सभ शिविरक बहिष्कार करबाक निर्णय लेल गेल आ एहि निर्णयक सूचना कलेक्टर कार्यालय, भारतीय रिज़र्व बैंक आ सभ बैंकक नियंत्रक कार्यालयकें देल गेल | ओकर बाद निर्धारित तिथिक’ शिविरमे कोनो बैंकक प्रतिनिधि उपस्थित नै भेलाह, तखन कलेक्टर साहेब लीड बैंकसं सम्पर्कक’क’ सभ स्थानीय बैंक प्रतिनिधिक बैसक अपना सभा कक्षमे बजौलनि | आपसी गप-शपसं स्थिति सामान्य भेल आ तकर बाद जे शिविर सभ निर्धारित छलै ताहिमे कोनो व्यवधान नै भेलै आ जे शिविर नै भेल छलै सेहो सफल भेलै | तकरा बाद बैंक प्रतिनिधिकें कोनो शिकायतक अवसर नै देल गेलनि | यैह कलेक्टर साहेब सिवान शहरक सभ सर्विस लैट्रिनकें सेप्टिक टैंक लैट्रिनमे बदलबाक एकटा स्कीम बनौलनि आ सभ बैंककें लक्ष्य निर्धारित करबाक’ नियत समयमे एहि लक्ष्यकें पूरा करबाक भार देलखिन | नगरपालिका द्वारा सभ बैंक शाखाकें वार्ड आबंटित क’ क’ पर्याप्त संख्यामे आवेदनपत्र उपलब्ध करा देल गेलै | तीन मासक बाद जखन कलेक्टर साहेब एहि योजनामे उपलब्धिक जानकारी मंगलखिन त उपलब्धि शून्य सूनिक’ बहुत दुखी भेलाह | कारण पुछलखिन त बेरा-बेरी सभ बैंक प्रतिनिधि द्वारा सुचित कएल गेलनि जे हुनक नियंत्रक कार्यालय द्वारा एहि योजनाक स्वीकृति नै देल गेलनि, कलेक्टर साहेब बहुत नाराज भेलाह | कलेक्टर साहेब कहलखिन ‘ हम बेसीकली इंजिनियर छी, हम सोचि समझिक’ ई स्कीम बनेने छी, एकरा कोना कोनो बैंक रिजेक्ट क’ सकैए |’ अपन पी ए कें बजाक’ तुरत एकर शिकायत विभिन्न स्तर पर पठेबाक आदेश देलनि आ एजेंडाक अगिला विन्दु ‘वसूली’ सुनिते सभा कक्षसं बाहर चलि गेलाह | तीन मासक बाद दोसर-तेसर विषय सभ प्राथमिकतामे ऊपर अबैत गेलै आ ई विषय नीचां भ’ गेल | फेर स्थिति सामान्य भ’ गेलै | एक बेर दोसर कलेक्टर साहेब एकटा बैंक शाखामे गेलाह | शाखा प्रबंधक ठाढ़ भ’ क’ हुनका नमस्कार केलखिन | कलेक्टर साहेब कहलखिन जे एम्हर जे ऋण वितरण केने छी ताहिमे सं किछु प्रकरण हमरा देखाउ, शाखा प्रबंधक आलमारीमे सं किछु दस्ताबेज आन’ गेलाह त कलेक्टर महोदय हुनका कुरसीपर बैसि गेलाह | शाखा प्रबंधक जखन किछु फाइल हुनका सोझा रखलनि त किछु उनटा-पुनटा क’ कलेक्टर साहेब कहलखिन जे एहि सभमे बहुत अनियमितता अछि आ अपना संगे गेल अधिकारीकें दस्ताबेज जप्त करबाक लेल कहलखिन | शाखा प्रबंधक डरि गेलाह, किछु नहि बजलाह, कलेक्टर साहेब किछु दस्ताबेज शाखा प्रबंधककें बिना कोनो सीजर लिस्ट देने जप्त क’ क’ ल’ गेलाह | साँझमे ओ शाखा प्रबंधक अपन कोनो दोसर अधिकारी संगे लीड बैंक कार्यालय एलाह आ घटनाक लिखित सूचना दैत ओ अपन नियंत्रक कार्यालयकें सेहो सुचित क’ देलखिन | किछुए दिनमे जिला स्तरीय मीटिंग होम’ बला रहै, ओकर एजेंडाक अन्य विषयमे ई विषय सम्मिलित क’ लेल गेलै | जहिया मीटिंग रहै, रिज़र्व बैंकक प्रतिनिधिकें एहि घटनाक पूर्ण जानकारी द’ देल गेलनि | मीटिंगमे जखन अन्य विषयपर चर्चा शुरू भेलै, मीटिंगक संयोजक लीड बैंकक तरफसं कलेक्टर महोदयसं पूछल गेलनि, ‘सर, ई हाउस जान’ चाहैत अछि जे की सरकें कोनो बैंक शाखामे जाक’ शाखाक दस्ताबेज जप्त करबाक अधिकार छनि |’ कलेक्टर महोदय ओहि शाखा प्रबंधकपर अपन खीझ प्रगट करैत कहलखिन ‘ हमरा अपन अधिकारक ज्ञान अछि, हम जिलामे कतहु कोनो ठाम जाक’, कोनो ऑफिस मे कोनो चीजक जांच क’ सकैत छी |’ रिज़र्व बैंकक प्रतिनिधि कहलखिन जे कलेक्टर महोदयकें अपन अधिकारक उपयोग जिलाक विकासक कार्यक्रममे बैंककें सहयोग करबामे लगेबाक चाहियनि बैंकक कार्यमे बाधा उपस्थित करबामे नहि | ओ इहो कहलखिन जे कलेक्टर महोदयकें कोनो बैंकक शाखा प्रबंधकसं कोनो शिकायत छनि त सम्बन्धित बैंकक नियंत्रक कार्यालयकें सुचित करथि, ओ हुनका विरुद्ध जे करबाक हेतनि से अवश्य करताह लेकिन बैंकक दस्ताबेजकें जप्त करबाक आ सीजर लिस्ट नै देबाक क्रियाकें कोनो दृष्टिसं उचित नहि कहल जा सकैत अछि | कलेक्टर महोदय आवेशमे कहलखिन, देखू हमरा अपन अधिकार बूझल अछि, हम चाही त जिलामे ट्रेन चलनाइ बन्द करा सकैत छी, प्लेनकें उड़नाइ बन्द करा सकै छी, हम चाही त अहाँ सभ गोटेकें ऐ हॉलमे चौबीस घंटाक लेल बन्द क’ द’ सकैत छी | हॉलमे सबहक मूँहसं हंसी छुटलै | कलेक्टर साहेब सभा कक्षसं निकलि गेलाह | किछुए दिनमे सम्बन्धित शाखाकें सभ दस्ताबेज भेटि गेलै | फेर अगिला मीटिंगसं पहिने सभ किछु सामान्य भ’ गेलै | एक बेर वी एम एच ई स्कूलमे विशाल ऋण वितरण शिविर आयोजित भेलै, कलेक्टर महोदय सिवानक विश्व स्तरीय इतिहासकार स्व. बांके बिहारी मिश्र जीकें मुख्य अतिथिक रूपमे बजौने रहथिन | मिश्रजी ई देखि बहुत हर्षित भेल रहथि जे समाजक जरूरतमंद लोक सभकें एते सम्मानपूर्वक ऋण देबाक लेल एहि तरहक उत्सव मनाओल जा रहल अछि | ओ ई दृश्य देखिक’ भावुक होइत उदगार व्यक्त केने रहथि जे जाहि उद्देश्यसं बैंकक राष्ट्रीयकरण भेल, से प्रशासन आ बैंकक संयुक्त प्रयाससं फलीभूत भ’ रहल अछि | महान साहित्यकार प्रेमचन्दक कथा सभमे जाहि समाजक उल्लेख छल, नागार्जुन जे लिखने छलाह –जहां न भरता पेट / देश वह कैसा भी हो / महा नरक है - से समाज आब बदलि रहल छल, रिक्शाबला, ठेलाबला, पान दोकानबला, हजाम, दर्जी, मोची,चाहक दोकानबला, साइकिल मरम्मति दोकानबला, दोसर कोनो छोटो-छिन रोजगार करैबला सबहक लेल बैंकक सम्पर्क आसान भ’ गेलै, महाजनक शरणमे जेबाक आ अनियंत्रित ब्याजक पीड़ासं मुक्तिक समय आबि गेल छलैक | हमरा सबहक लेल ई हर्षक विषय छल जे एहि परिवर्तनमे हमहूँ सभ किछु योगदान देबाक स्थितिमे भेलहुँ | तें निष्ठापूर्वक एहि यग्यमे भाग लेब अपन सौभाग्य मानैत छलहुँ आ बैंकमे अबैबला लोक सबहक संग स्नेहपूर्वक व्यवहार करब अपन धर्म बुझैत छलहुँ | वसूली : बैंकमे नव ऋण देबाक संगहि पूर्वमे देल गेल ऋणक वसूली सेहो बड़ महत्वपूर्ण काज होइ छै | नव ऋण त एके-दू ब्लाकमे देबाक लेल गाँव आबंटित छलै, किन्तु पुरान ऋण सभ कयटा ब्लाकमे स्थित छलै जेना सिवानक अतिरिक्त आंदर, पचरुखी, सिसवन, रघुनाथपुर, दरौली आदि जकर वसूलीक लेल व्यक्तिगत सम्पर्क कठिन होइत छलैक | वसूलीक सम्बन्धमे हमर सबहक अनुभव यैह छल जे किछु लोक समयपर ऋणक किश्त बैंकमे जमा करैत छलाह, किछु लोक जमा करैत छलाह मुदा निश्चित समयपर नहि, किछु लोक ई मानैत छलाह जे ऋण ल’क’ नहि जमा केलासं मुक्ति नहि भेटतनि, किछु लोक बैंक ऋण सरकारी मदति बूझिक’ चुकाएब आवश्यक नहि बुझैत छलाह | मुख्य रूप सं नै चुकबैबलाक दूटा श्रेणी छल- बहुत मजबूरीक कारण नै चुकब’ बला आ जानि-बूझिक’ नै चुकब’ बला | हम सभ नियमानुसार ऋणक किश्त जमा करबाक लेल नोटिस पठबै छलिऐ, स्मरण पत्र सेहो जारी कएल जाइत छलै, व्यक्तिगत रूपसं सम्पर्क कएल जाइत छलै, पर्याप्त समय देल जाइ छलै, तैयो जे नै जमा करै छलाह हुनका विरुद्ध लोक मांग वसूली एक्टक अन्तर्गत कार्यवाही कएल जाइत छलै | चपरासीक नै रहलापर हम सभ अपने पोस्ट ऑफिस जाक’ पावती पत्रक संग पंजीकृत डाकसं नोटिस पठयबाक काज करैत छलहुँ | सालमे जखन ऑडिट होइ छलै त ई देखल जाइ छलै जे वसूलीक लेल शाखा द्वारा की की प्रयास कएल गेल छै अर्थात बैंक द्वारा निर्धारित सभ कार्यवाही कएल गेल छै कि नै | वसूलीक सम्बन्धमे हमरा दूटा घटना मोन पडैत अछि | एक दिन एकटा मुस्लिम महिला एलीह आ कहलनि जे हुनकर पति बैंकसं रिक्शा कीन’ लेल लोन नेने छथिन, हुनकर देहान्त भ’ गेल छनि, ओ हुनकर बकाया जमा कर’ चाहैत छथि, हिसाब जोड़िक’ कहि दीय’ जे कते जमा करबाक छै | हम सभ खाता देखलिऐ, खातामे समयपर किश्त जमा होइत आएल छलै | हम सभ हुनका पुछलियनि जे हुनकर बेटा जवान छनि की नै | बेटा जवान नै छलनि | हम सभ कहलियनि जे ओ एखन चिन्ता नहि करथि, मुदा ओ मानक लेल तैयार नै भेलीह | हुनकर कहब छलनि जे जाधरि पूरा कर्ज ख़तम नै भ’ जेतनि, हुनका जन्नत नै भेटि सकैत छनि | हम सभ भावुक भ’ गेल रही, ओ पूरा पाइ चुकाक’ प्रसन्न भ’ गेल छलीह | लगभग चालीस बरख भ’ गेलै, ओहि महिलाक अविस्मरनीय छाप हमरा सबहक स्मृतिमे अछि | एकर विपरीत एकटा उदाहरण सेहो मोन अछि | एक दिन हम सभ एकटा जीपसं एक आदमी ओत’ गेल रही जे किछु साल पहिने ट्रैक्टर किनबाक लेल ऋण नेने छलाह आ नियमानुसार किश्त नै जमा करैत छलाह | दूरेसं देखि ओ हमरा सभ लग दौगल एलाह आ कहलनि जे आइ हमरा दरबज्जापर नै जाउ, पौत्रक विवाह लेल घटक सभ आएल छथि | हम सभ हुनका दरबज्जापर नै जाक’ आन-आन ठाम गेलहुँ | मास दिनक बाद जखन फेर हम सभ गेलहुँ त ओ अपने असहाय जकाँ कहलनि जे हमरापर केसक’ क’ हमरा जहलमे ध’ देब तखने हमरा घरक लोक ऋण चुकयबाक लेल तैयार हैत | ओ कहलनि सबेरे सभ खा-पी क’ अपन-अपन मोटर साइकिल ल’क’ घरसं निकलि जाइए, ककरो चिन्ता नै छै बैंकक ऋण चुकयबाक | कोठाबला बड़का घर आ घरक मालिकक विवशता सेहो नहि कहियो बिसराएल | हुनका अंतिम नोटिस द’क’ पी डी आर एक्टक शरणमे जाए पडल | एखनो दुनू तरहक लोक समाजमे विद्यमान छथि | किछु लोक त नै चुकयबाक लेल देशोसं भागि जाइ छथि, हुनका नरक जेबाक भय नै होइ छनि | किछु गोटेक कहब छनि जे चार्वाक दर्शनमे कहल गेल छै जे ऋण लिय’ आ घी पीबू माने सुखसं रहू | हुनकर कहब छनि जे चार्वाक दर्शनमे ऋण चुकयबाक बात नहि लीखल छै | बैंक आ साहित्य : नया बीस सूत्री कार्यक्रम पूरा देशमे पावनि जकाँ मनाओल जा रहल छल | हम हिन्दीमे ओहिसं सम्बन्धित एकटा कविता लिखलहुं : आया है नव सपने लेकर और नए आयाम श्रीमती गांधी का नूतन बीस सूत्री प्रोग्राम | आकाशवाणी,पटनामे चौपाल अथवा मैथिली कार्यक्रम ‘भारती’ मे भाग लेबय सालमे एक-दू बेर जाइ छलहुँ | क्षेत्रीय प्रबंधककें से बूझल छलनि | एक दिन हमरा बजाक’ कहलनि जे डी ए वी कॉलेजमे सेंट्रल बैंकक एक्सटेंशन काउंटर खुज’ बला छै | ओकर उद्घाटन दिनले’ एकटा कविता तैयार करबाक भार हमरा देलनि | दू-तीन दिन लागल | सस्वर पाठ कर’बला एकटा कविता तैयार भेल : क्या है सेंट्रल बैंक हमारा क्यों इसके गुण गाते हैं सुनो साथियो हम इसका इतिहास तुम्हें बतलाते हैं | भाटिया साहेब प्रसन्न भेलाह | हमरासं ओहि दिन एकर सस्वर पाठ करबाओल गेल | ओहि दिनक बाद हमरा लागल जे बैंकक क्रिया-कलापक अन्तर्गत अबैबला बहुत विषय छै जैपर रचना कएल जा सकैत अछि | ओहि समयमे बैंकमे बैलेंसिंग, दस्ताबेजक नवीनीकरण, वसूली, ऋण वितरण आदि काज सबहक जे तनाव भोगल जा रहल छल ताहि लेल एकटा रचना भेल : ‘यह बैंक का चक्कर है, चक्कर में रहना है जिन्दगी और कुछ भी नहीं तबाही से गुजरना है’............... आइ आर डी पी पर दू टा रचना भेल : (1) रिक्शा बाला तांगा बाला पान बीडी और ठेले बाला होटल सैलून चाय बाला बैल भैंस और गाय बाला आज ब्लाकमे लगा है मेला मेला आइ आर डी पी बाला |........ (2) आइ आर डी पी की न टूटे लड़ी लोन देते चलो हर घडी | बैंकमे ऑडिट होइत रहै छलै, ओहिपर एकटा व्यंग्य रचना : ए ऑडिटर साहेब कब जाएगा तू यहाँ कब तक माथा खपाएगा तू और कब तक डाइम बनाएगा तू चला जा..तू चला जा .......... कतहु-कतहु कोनो अधिकारीक अथवा कर्मचारीक कदाचार प्रकाशमे अबैत छलैक | एहि सम्बन्धमे एकटा पैरोडी : एहसान मेरे दिल पे तुम्हारा है दोस्तो ये कोट तेरे नोट से भरा है दोस्तो ....... नव शाखाक शाखा प्रबंधक सबहक समस्या पर एकटा कविता : खुद ही रिसीट भी लेना है, खुद ही करना पेमेंट खुद को ही निर्मित करने हैं सारे एस्टेटमेंट सारे एस्टेटमेंट कभी कुछ तार यूं आते अनुशासनिक कार्र्बाई की धमकी दे जाते धमकी दे जाते नेतागण पेंडिंग आवेदन को लेकर सुचित करेंगे श्रीमती इन्दिरा गांधी को लेटर देकर बड़ी मुसीबत दे जाता पेंशन पेमेन्ट का काम रात गयी सर्कुलर उलटते कभी नहीं आराम देख व्यस्तता श्रीमतीजी यूँ झल्लाती इससे तो अच्छा होता जो मैं मर जाती एक दिन लगी बुखार भाग्य से तो मैंने मौका पाया बड़े प्रेम से पास बिठाकर मैंने उन को समझाया प्यारी दीदी इन्दिरा गांधी का है ये अभियान कल हम कहाँ रहेंगे प्रियतम मत करना अनुमान मत करना अनुमान जेल का द्वार खुला है अभी-अभी मोतिहारी का समाचार मिला है हो जाएंगे बिष-सूत्री पर हम बैंकर कुर्वान कृपा करो जल्दी आकर हे बेकटेश्वरम भगवान | ( ओहि समय बेकटेश्वरम साहेब हमर सबहक आंचलिक प्रबंधक छलाह, मोतिहारी शाखाक एकटा फील्ड स्टाफकें मेलामे पशु-खरीदक विधिमे कोनो आपत्ति लगाक’ जेलमे ध’ देल गेल छलै ) अही अवधिमे हम दुष्यंत कुमारक गजल संग्रह ‘साये मे धूप’ आ हरिवंश राय बच्चनजीक आत्म कथाक दू भाग ‘क्या भूलूं क्या याद करूं’ और ‘नीड़ का निर्माण फिर’ पढने छलहुँ | किछु दिनक बाद प्रशिक्षणमे आंचलिक प्रशिक्षण केन्द्र, राजेंद्रनगर पटना गेलहुँ | ओहि कार्यक्रममे पटना जोनल ऑफिससं एन के झा आ दरभंगासं नवेन्द्र झा सेहो आएल छलाह | एक दिन जोनल ऑफिससं मुख्य प्रबंधक एन सी मित्रा साहेब क्लास लेब’ एलाह | मित्रा साहेब देशक आजादीक लेल महापुरुष सबहक बलिदानक चर्च करैत सभकें भावुक क’ देलनि, फेर बैंकक राष्ट्रीयकरणक उद्देश्य आ तकर बाद आइ आर डी पीक आवश्यकता आ समाजक गरीबी दूर करबामे बैंकक योगदान आ ताहि लेल सम्बन्धित स्टाफ सबहक निष्ठापूर्ण कर्तव्यक बोध करौलनि | तकरा बाद वातावरणकें आनंदपूर्ण बनयबाक लेल प्रशिक्षु लोकनिसं योगदान देबाक लेल कहलनि | एक गोटे कोनो फ़िल्मी नीक गजल सस्वर सुनौलखिन | एन के झा हमर लेखनक चर्च केलखिन | मित्रा साहेब हमरा किछु सुनाबय कहलनि | हम कहलियनि जे हम मैथिलीमे लिखैत छी | मित्रा साहेब हमरा मैथिलीए रचना सुनबय कहलनि | हम कोनो रचना सुनौलियनि | कहलनि जे हम बुझै छी मैथिली मुदा बाजि नहि सकब | ओ पुछ्लनि, हिन्दीयोमे किछु सुना सकै छी | हम सुनौलियनि - ‘ क्या है सेंट्रल बैंक हमारा क्यों इसके गुण गाते हैं सुनो साथियो हम इसका इतिहास तुम्हें बतलाते हैं ‘ मित्रा साहेब पूरा रचना सूनिक’ भावुक भ’ गेलाह | ओ बजलाह, हम चाहैत छी जे बैंकक सभ सदस्य ई गीत सुनथि, तें ट्रेनिंग समाप्त हेबासं दू दिन पहिने एकटा भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमक घोषणा केलनि जाहिमे पटनामे स्थित सभ कर्यालयक अधिक सं अधिक स्टाफ रहथि | हमरा कहलनि जे अहाँ और किनको एहि कार्यक्रममे बजाबय चाही त बजा सकै छी एन के झा आ नवेन्द्र झा जी एहि कार्यक्रमक व्यवस्थाक भार लेलनि | हिनके सबहक संग हम आकाशवाणी,पटना गेलहुँ, बटुक भाइकें अनुरोध केलियनि जे वैह ऐ कार्यक्रमक उदघाटन करथि आ कोनो कलाकारकें सेहो संगे नेने आबथि | निर्धारित तिथिक’ साँझमे लगभग छओ बजेक बाद पटना स्थित क्षेत्रीय कार्यालय, आंचलिक कार्यालय आ शाखा कार्यालयसं पर्याप्त संख्यामे अधिकारी-कर्मचारी लोकनि अबै गेलाह | मित्रा दादा कार्यक्रमक विषयमे संक्षेपमे अपन विचार रखलनि | बटुक भाइ आइ आर डी पी मे बैंकक योगदानक चर्च केलनि | बटुक भाइ मैथिली गायक कृष्णानन्द जीकें हारमोनियम आ एकटा तबलाबादक संगे नेने आएल छलाह | कृष्णानन्द जी हमर नाम लैत हमरहु किछु मैथिली गीत रचना प्रस्तुत केलनि जे गीत सभ ‘तोरा अंगना मे’ गीत संग्रहमे छल | अन्तमे हम अपन एकटा मैथिली गीत आ तकर बाद सेंट्रल बैंकक परिचय गीत सुनौलियनि : क्या है सेंट्रल बैंक हमारा क्यों इसके गुण गाते हैं सुनो साथियो हम इसका इतिहास तुम्हें बतलाते हैं | आते हैं जब याद वो दिन भर आता आँखों में पानी अपने ही घर में थे खोए हम सारे हिन्दुस्तानी शान्तिप्रिय यह देश हमारा बेबस था परतंत्र था यहाँ की अर्थ व्यवस्था में अंग्रेजों का षड्यंत्र था उनके दमन-नीति से घायल तेजस्वी लोग अनेक थे सर सोरावजी पोचखानावाला उनमें से एक थे उन महान देश-प्रेमी ने देखा एक सुन्दर सपना भारत में एक बैंक बने जो भारतियों का हो अपना ये देते हैं ताने हमको, हम इनको दिखलाएंगे आलोकित होगा भारत हम ऐसा दीप जलाएंगे चला बहादुर अपने पथपर निश्छल कदम बढ़ा करके अपनी प्रतिभा से पाए ओहदे को भी ठुकरा करके उनके देश-प्रेम के आगे फिर-फिर शीश झुकाते हैं सुनो साथियो हम इससे आगे की कथा सुनाते हैं | सच है शूरों के राहों में रोड़े कितने आते हैं पर विश्वास अटल हो जिनका कभी नहीं घवराते हैं विपदाओं को गले लगाते आगे बढ़ते जाते हैं और किसी दिन निश्चित ही मंजिल अपनी पा जाते हैं इसी तरह भारतमे भैया एक दिन जय-जयकार हुआ सन उनीस सौ ग्यारह में जब यह सपना साकार हुआ पोचखानावाला ने भारत को अनुपम उपहार दिया भारत वासी के दिल में आजादी का संचार किया एक अनोखा एक निराला एक नया आयाम दिया सचमुच ही कितना सुन्दर और कितना प्यारा नाम दिया पलते लाखों लोग निरंतर इस बरगद की छांव मे तीन हजार शाखाएं जिसकी हैं शहरों और गांव मे प्रस्तुत करती कार्य प्रणाली झांकी हिन्दुस्तान की गाँवों के आधुनिकीकरण की बातें जन कल्याण की राष्ट्रीयकरण हुआ फिर इसने एक अनोखा मोड़ लिया कल तक थे जो लोग दूर अब सबसे नाता जोड़ लिया प्रथम स्वदेशी बैंक हमारा हम जिसके गुण गाते हैं इसीलिए सब बैंकों से हम इसे महान बताते हैं | एहि प्रस्तुतिक प्रशंसामे किछु वरिष्ठ अधिकारी सभ अपन-अपन उदगार व्यक्त केलनि | हमर दोसर प्रस्तुति छल नव बीस सूत्री कार्यक्रम पर लिखल कविता : ‘आया है नव सपने लेकर और नए आयाम श्रीमती गांधी का नूतन बीस-सूत्री प्रोग्राम |’ फेर किछु वरिष्ठ अधिकारी सभ प्रशंसाक रूपमे अपन-अपन उदगार व्यक्त केलनि | करीब दू घंटा धरि कार्यक्रम चललै | बैंकक क्रिया-कलापसं सम्बन्धित हमर बहुत रचना सुनै गेलाह | टिप्पणी एतेक धरि भेलै जे बैंकक पी. आर. ओ. पद लेल हम एकदम उपयुक्त छी | बहुत गोटे ई बूझय लगलाह जे हम बहुत जल्दी पी. आर. ओ. होमय जा रहल छी | कखनो-कखनो हमरो भ्रम हुअ’ लागय जे हम पी.आर.ओ. बन’ जा रहल छी | ओहि समय तक सेंट्रल बैंक में पी. आर. ओ. पद नहि छलैक, तें ई उत्सुकता भेल जे ओहि पद पर कोन-कोन काज करय पडैत छै, से बूझि ली | बटुक भाइ एक आदमीक पता देलनि जे दोसर कोनो बैंक में पी. आर. ओ. छलाह | हम हुनकासं भेंट कर’ गेलहुँ मुदा हुनकासं भेंट नै भेल, ओ पटनामे ओहि समय नहि छलाह | एक दिन हम नवेन्द्र झा जीक संग एन.के.झा जीक कंकड़बाग़ स्थित डेरापर सेहो गेलहुँ | नवेन्द्र जी कहैत छथि जे ओतहु किछु गीत-नाद भेल रहै | प्रशिक्षण कार्यक्रमसं घुरिक’ सिवान एलहुं आ फेर अपन वर्तमान काजमे एतेक तल्लीन भ’ गेलहुँ जे हमरा सही समय पर पतो नहि चलि सकल जे बैंक में पी.आर.ओ.पद लेल विज्ञापन एलै,जिनका जेबाक छलनि,से आवेदन पठा देलनि आ साक्षात्कारक तिथि सेहो आबि गेलै | हम जेना एहि उमेदमे रही जे हमरा लेल विशेष आमंत्रण पत्र आएत | सभ किछु बिहित नियमक अनुसार भेलै | सिवाने शाखाक श्री नारायण झा जी पटना आंचलिक कार्यालयमे पी.आर.ओ. पदपर गेलाह | झा जी बैंकक सी.ए.आइ.आइ.बी. क परीक्षा उत्तीर्ण छलाह, बैंकक एकटा यूनियनक नेता छलाह आ नीक वक्ता छलाह, मैथिलीमे एकटा पोथी सेहो प्रकाशित भेलनि | जे अपन प्रशंसक वरिष्ठ अधिकारी सभसं सेहो सम्पर्क रखबाक कला नहि जनैत हो, ओकरा जन सम्पर्क अधिकारी पद लेल उपयुक्त हमहूँ कोना मानि सकै छी ? ओकरा लेल अस्तित्व किछु और तय केने छलैक | हम सोचैत छी यदि हम आवेदन देनहु रहितिऐ आ गेलो रहितहुं साक्षात्कारमे त सफल नहि होइतहुं किएक त हम सी ए आइ आइ बीक परीक्षा पास नहि केने छलहुँ आ एकर महत्व बेशी छलै | हम अपन मोनक शान्तिक लेल एहि दर्शनकें आत्मसात क’ लेलहुं : ‘’जे भेटल सैह अहाँक लेल सर्वोत्तम अछि आ जे आगाँ भेटत से और सुन्दर होयत आ जे नहि भेटल से बूझू जे अहाँक लेल उपयुक्त नहि छल’’ मैथिली साहित्य परिषद आ हमर मैथिलीमे लेखन : मैथिली साहित्य परिषदक सम्पर्कमे एलापर बहुत गोटेसं परिचय भेल जे कलेक्टरिएट, बैंक, कोर्ट, जेल, डी. ए. वी. कॉलेज आदि ठाम विभिन्न पदपर काज करैत छलाह | नरेश कुमार दत्त, अचुतानंद कंठ कलेक्टरिएटमे छलाह | दत्त जी लिखैत सेहो छलाह | सेंट्रल बैंक शाखामे हम रही, मोद नारायण झा, श्री नारायण झा छलाह | सेंट्रल बैंकक क्षेत्रीय कार्यालयमे अरुण झा आ अरुण कुमार झा छलाह, बादमे बिन्दुजी (बिन्दु प्रसाद कर्ण ) एलाह राजभाषा अधिकारीक पद पर | स्टेट बैंकमे चौधरी जी छलाह | कोर्टमे लाल साहेब मजिस्ट्रेट छलाह | जेल अधिकारी पी. के. झा छलाह | जेलमे डॉक्टर छलाह चौधरी जी | डी.ए.वी. कॉलेजमे प्राध्यापक छलाह संस्कृत विभागमे कमलोद्भव शर्मा आ डा. अमर नाथ ठाकुर, बनस्पति विज्ञान विभागमे गंगानंद झा, हिन्दी विभागमे सोमेश्वर झा, राजनीति विज्ञान विभागमे उपेन्द्र मिश्र आ इतिहासमे छलाह आर.एन. चौधरी | इंजिनियर रमेश झा छलाह, हुनका संग उमेशजी छलाह, टनटन जी छलाह | उपेन्द्र चौधरी कुसियार विभागमे छलाह | बी. डी. ओ. छलाह शिव देव सिंह आ सी.ओ. छलाह धीरेन्द्र मोहन झा | प्रो. गंगानंद झा मैथिली, हिन्दी आ बंगला साहित्यक नीक अध्येता छलाह | हुनक साहित्यिक समझसं हमरा बहुत लाभ भेल | हुनकहि अनुशंसा पर हम बंगला लेखक शंकर आ आशापूर्णा देवीक किछु महत्वपूर्ण पोथीक हिन्दी अनुवाद पढलहुं | रवीन्द्र नाथ ठाकुरक गीतांजलि पढ़िक’ बुझबामे हुनकासं बहुत सहयोग भेटल | हुनकासं सूनल रवीन्द्र नाथ ठाकुरक कविता ‘पुरस्कार’ आ गीत ‘ जगते आनन्द यज्ञे आमार निमंत्रण / धन्य होलो धन्य होलो मानव जीवन’ मोन-प्राणमे बसि गेल काजी नजरूल इस्लामक रचना सबहक रसास्वादन करबाक सेहो अवसर भेटल | सर्वप्रथम हुनकहिसं नजरूल इस्लामक प्रसिद्द कविता ‘विद्रोही’ सुनने छलहुँ | हुनक संघर्षमय, संयमित आ संतुलित जीवनसं हमहूँ प्रेरित भेलहुँ | एक दिन दैनिक जनशक्तिक सम्पादक सिवान एलाह त हुनकासं परिचय करौलनि, ओ किछु मैथिली गीत सुनलनि आ 14.10.84 क’ जनशक्तिक रविवारीय अंकमे ‘तीन मैथिली गीत शीर्षकसं हमर तीनटा गीत छपलनि | 1983 मे मिथिला मिहिरक 3-9 अप्रैलक अंकमे दूटा गजल आ माटि-पानिक दिसम्बर अंकमे तीनटा गीत प्रकाशित भेल | 1984 मे मिथिला मिहिरक 15 सं 21 जनवरी बला अंकमे एकटा कविता ‘दुख’, 26 फरबरीबला अंकमे गीत ‘ तीन कोटि मैथिल ताल ठोकिक’ कहैए / ई प्रवाह मैथिलीक कियो रोकि ने सकैए’ आ 20 सितम्बरबला अंकमे गीत ‘ मैथिलीले’ अहाँ की करै छी’ प्रकाशित भेल | माटि-पानिक फरबरी अंक मे दूटा गजल प्रकाशित भेल : (1) ‘रौदीक मारिसं कुहरैत हमर गाम हमरा करैछ सोर बिलटैत हमर गाम’ (2) ‘चालनिमे पानिसभ दिन भरैत रहल लोक करबाक नामपर किछु करैत रहल लोक’ विद्यापति पर्व दिन एकटा रचना लिखाएल : आजुक राति कथीले’ भैया, आजुक राति कथीले’ माटिक ममता सोर करैए, सैह समाद सुनैले’ | ( गीत संग्रह गीत- गंगामे रचना सम्मिलित अछि ) दूटा रचना एहि तरहक लिखाएल : पहिल : ‘विकास हो कि नै हो परचार होना चाही वाह रे वाह एहने सरकार होना चाही’ दोसर : ‘ई की भेल ई की भेल हे गै बुढ़िया ई की भेल जानि ने कत’ चोराक’ रखलें चिन्नी और किरासन तेल |’...... साढ़ू-मित्र मनोजानन्द झाक असामयिक निधनक दुखद समाचारसं मर्माहत भेल रही | ओना ओ दूटा शिशुकें छोडिक’ गेल छलाह जे शान्तीक जीवनक लेल पैघ संबल छल | शान्ती नीक परिवारक पुतोहु छलीह, जतय हुनका सम्मानित जीवन जीबाक लेल सबहक सिनेह आ आशीर्बाद प्राप्त छलनि | मुदा समाजमे बहुत एहनो शान्ती रहैत छथि जिनका लेल सम्मानित जीवन सुलभ नै होइत छनि | एहि समस्यापर गम्भीर चिन्तन-मनन चलल आ ओहीसं निकलल एकटा एकांकी ‘कोरांटी’ आ एकटा गीत ‘एना गे सुगिया कतेक दिन रहबें ( जे गीत संग्रह ‘गीत-गंगा’ मे सम्मिलित अछि | मैथिली साहित्य परिषद निष्क्रिय जकाँ छल, मुदा सिवानक स्थायी निवासी बनल बड़का आवास-परिसरक स्वामी आ प्रतिष्ठित चिकित्सक डा. बी. एल. दास आ श्रीमती आशा दास जीक सिनेहसं पुनः सक्रिय भेल, निर्धारित समयपर डा. दास ओत’ बैसक होमय लागल | डा. साहेब संरक्षक छलाह | बैसकमे सभ गोटेकें पर्याप्त सिनेह आ सत्कारक संग डा. दम्पतिक उपस्थिति आ सलाह सुलभ होइत छलनि | बैसकमे विभिन्न विषयपर चर्चाक संग काव्य-पाठ सेहो होइत छलै | हम मिथिला मिहिर पढैत छलहुँ | पटनासं ‘माटि - पानि’ प्रकाशित होमय लगलै त ओहो दस प्रति मंगब’ लगलहुं, परिषदक किछु सदस्य सभ लैत छलाह, पढैत छलाह, गोष्ठीमे ओहिपर सेहो चर्चा होइत छल | हमर अनुरोधपर प्रो. गंगा नन्द झा मैथिलीमे किछु लेख लिखलनि- एकटा लेख ‘मिथिलामे दीयाबातीक परम्परा’ हुनकहि द्वारा आकाशवाणी,पटनाक मैथिली कार्यक्रम ‘भारती’ मे दिनांक 25.10.1984 क’ प्रसारित भेलनि, दोसर लेख ‘प्रवासी मैथिल : बैद्यनाथ धामक पंडा’ मासिक पत्रिका ‘माटि-पानि’मे प्रकाशित-प्रशंसित भेलनि | ‘बंगला भाषा आन्दोलन आ मैथिलीपर ओकर प्रभाव’ आ ‘मैथिली आंदोलनक दिशा’पर सेहो हुनक विचार बहुत स्वस्थ आ सुन्दर छलनि | प्रो. अमर नाथ ठाकुरक दू टा लेख ‘सूतल नहि अछि सिवान’ आ ‘जागल अछि बासोपट्टी’ माटि-पानिमे प्रकाशित भेलनि | हुनकहु लेखनीक गति तेज भेलनि | किछु साल नरेश कुमार दत्त आ किछु साल रमेश झा परिषदक सचिव छलाह | हम रही त दू बेर विद्यापति स्मृति पर्व मनाओल गेल छल | ओकर बादो परिषद सक्रिय छल | कवि गोष्ठीमे मार्कंडेय प्रवासी, उदय चन्द्र झा ‘विनोद’, विभूति आनन्द,छत्रानंद सिंह झा, रवीन्द्र नाथ ठाकुर सेहो भाग नेने छलाह | विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रममे रवीन्द्र नाथ ठाकुर, महेन्द्र झा, अवनींद्र नाथ ठाकुर, शारदा झा,अशर्फी अजनवी, अमिय हलाहल,महादेव ठाकुर आदि भाग नेने छलाह | रवीन्द्र-महेन्द्रक कार्यक्रम अमैथिल लोक सभकें सेहो बहुत आकर्षित करैत छलनि | दुनू गोटे मंचपर अबै छलाह त एक बेरमे लगातार छओटा गीत गाबि लैत छलाह | छक्का कय बेर चलैत रहैत छल | एक बेर गरमीमे कार्यक्रम भेल रहै | रवीन्द्र आ महेन्द्र जखन मंच पर एलाह आ गाबय लगलाह ‘ हवा रे चल मिथिलामे चल’ त लोक आनन्दसं ततेक भरि गेल जे लगै छलै जेना ठीके शीतल बसात बहय लागल हो | बहुत दिन धरि कार्यक्रमक चर्चा चलैत रहैत छल | जिला कार्यालयक किछु अधिकारी सभ सेहो ओहि कार्यक्रमक प्रतीक्षा करैत छलाह | डा.बी.एल.दास ओत’ अतिथि सबहक ठहरबाक व्यवस्था रहैत छलनि | एक बेर कार्यक्रमक प्रात सेहो सबेरे-सबेरे डा. साहेब ओत’ बहुत गोटे जमा भ’ गेलाह | रवीन्द्रजी आ महेन्द्र जी लोकक आग्रहपर ‘पञ्च कन्या’क पाठ गीते जकाँ दुनू गोटे मिलिक’ बड़ी काल धरि प्रस्तुत करैत रहलाह आ सभ श्रोता आनंदक सागरमे डूबल रहलाह, बड्ड आकर्षक रहल ओहो कार्यक्रम | लगभग एहि समय तक गीतकार चन्द्रमणि जी सेहो अपन शब्द आ स्वर ल’क’ मैथिली गीत-मंचपर अपन स्थान जमा चुकल छलाह, से हरिमोहन बाबूक अभिनन्दन समारोहक मंचपर पटनामे देखने छलहुँ | 1984 मे 19 फरबरी क’ आर्यावर्तमे प्रकाशित लेख “ मिथिला राज्य क्यों’’ पढ़लहुं | 20 फरबरीक’ मिथिला-मिहिर दैनिक शुरू भेल | 23 फरबरीक’ तीन बजे भोरमे दरभंगा मेडिकल कॉलेज-अस्पतालमे 76 बरखक अवस्थामे हास्य सम्राट हरिमोहन बाबूक देहान्त भ’ गेलनि, दाह संस्कार सिमरियाघाटमे भेलनि | 24 क’ आर्यावर्त्तमे खबरि प्रकाशित भेलै, श्री मार्कंडेय प्रवासीक वक्तव्य प्रकाशित भेलनि : मैथिली साहित्याकाशक सूर्यास्त भ’ गेल | हरिमोहन बाबूकें श्रद्धांजलि अर्पित करबाक हेतु 26 क’ एकटा शोक सभा जेल अधिकारी पी. के. झाक आवासीय परिसरमे आयोजित भेल | 1985 मे 23 फरबरी क’ हरिमोहन बाबूक स्मृति – संध्या स्थानीय आ आदरणीय अधिवक्ता श्री सुभाष्कर पाण्डेय जीक आवासीय परिसरमे हॉलमे मनाओल गेल जाहिमे मैथिल आ अमैथिल विद्वान् लोकनि द्वारा हरिमोहन बाबूक स्मृतिमे हुनक साहित्यिक कृतिक पाठ कएल गेल आ हुनक साहित्य संसारक चर्चा भेल | गोष्ठी श्री आर. एन. मिश्र, एस.डी. जी. एम. क अध्यक्षतामे भेल | स्वागत भाषण केलनि श्री राम चन्द्र त्रिपाठी | श्रद्धांजलि अर्पित करयबलामे देवेन्द्र झा,प्रो. आर.एन. चौधरी, डा. अमरनाथ ठाकुर, शिवदेव सिंह आ प्रो. गंगानंद झा सेहो छलाह | डा. ठाकुर एकटा लेख प्रस्तुत केलनि आ हरिमोहन बाबूक कथा ‘टोटमा’क पाठ केलनि | श्रीमती कान्ति पाण्डेय हरिमोहन बाबूक कथा-संग्रह ‘रंगशाला’क एक कथा ‘रसमयीक ग्राहक’क पाठ केलनि | नीलांजना आ सुदीप्ता द्वारा प्रस्तुत कएल गेल गीत ‘ तोरा अंगनामे ...’ आ ‘जोगिया मोर जगत सुखदायक .....’ काव्य पाठ केलनि नरेश कुमार दत्त, डा. ए. के. घोष आ मानस मुख़र्जी | श्री सुभाष्कर पाण्डेय जी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन कएल गेल | एहि कार्यक्रमक अध्यक्ष श्री आर एन मिश्र, एस डी जी एम सं 13 मार्च क’ साँझमे सड़केपर भेंट आ संक्षिप्त गप भेल | दुखक बात ई भेल जे 15 मार्चक’ रस्तोगीजी (अधिवक्ता) सं पता चलल जे 4.30 बजे भोरमे आर एन मिश्र जीक ह्रदय गति रुकि गेलनि | पत्नी, सार आ चारिटा बच्चा छलखिन डेरामे | ऑफिससं छुट्टी ल’ लेलहुं | बहुत गोटेकें सुचित केलियनि, अबै गेलाह | मिश्र जीक शव देखि लगैत छल जे सूतल होथि | कातमे ठाढ़ पाँच बरखक अबोध नेनाक चेहरापर शून्य ह्रदय विदारक छल | सिवानमे अही अवधिमे हरिमोहन बाबूक किछु पोथी आ व्यासजीक पोथी ‘दू पत्र’ सेहो पढबाक अवसर भेटल | बच्ची सेहो ‘रंगशाला’ पढ़िक’ आनन्दित भेलीह | जीवकांत जीक कथा संग्रह ‘वस्तु’ पढ़लहुँ | ‘नानी’ कथा एखनो स्मृतिमे अछि | अरुणजीसं नानी कथाक भूमिका सूनि नीक लागल | बेरोजगारीक अवधिमे जमशेदपुरमे लीखल अपन दीर्घ कथाकें फेरसं लीखिक’ अरुणजी ( जीवकान्त जीक सुपुत्र )क माध्यमसं आदरणीय जीवकान्त जीकें पठौलियनि आ हुनक सुझाव प्राप्त भेल | बहुत बादमे ई दीर्घ कविता ‘धारक ओइ पार’ नामसं प्रकाशित भेल | जीवकान्त जीसं पत्राचार होइत रहल | हुनकासं सुझाव प्राप्त भेल जे किछु गद्यो लिखी, नीक रचनाकार सबहक रचना पढ़ी आ पोथी छपयबाक लक्ष्य बनाबी | प्रो. गंगानंद झाजीक सुपुत्र अपूर्वानन्द जीसं नागार्जुनक बहुत रास रचना एहि अवधिमे सुनबाक अवसर भेटल | ‘उत्तरशती’ मे छपल अपूर्वानंदजीक कविता सभ सेहो सुनबाक अवसर भेटल | गंगा बाबूक ओत’सं ‘निशा निमंत्रण’( बच्चन जीक ), भवप्रीत्यानंद पदावली आ ‘अंधा युग’ आनि पढ़लहुँ | 1985 मे 22 अगस्तक’ आकाशवाणी,पटनाक मैथिली कार्यक्रम ‘भारती’ मे संध्या 5.30 बजे कवि गोष्ठीमे भाग लेलहुं जाहिमे श्री आरसी प्रसाद सिंह, प्रो. श्याम नारायण चौधरी आ श्री पूर्णेंदु चौधरी सेहो छलाह | हमर पारिवारिक स्थिति : सिन्धुजीक जन्म भेलनि | बादमे हिनक नाम शैलेन्द्र आ फेर बादमे विवेक आनन्द भेलनि | आरम्भमे वसन्त, मैथिली आ शैलेन्द्रक संग बच्ची किछु मास गाम आ किछु मास सिवान रहैत छलीह | आरम्भमे स्टेशन रोडमे एकटा मुनीमजीक मकानमे रही | बाबूक स्वास्थ्यमे परिवर्तन होइत रहै छलनि आ समय-समयपर डॉक्टरक सम्पर्क आवश्यक रहै छलनि | ओहो एक-दू बेर सिवान एलाह आ किछु दिन रहिक’ गाम चलि गेलाह | लहेरियासराय शाखामे जे ए एफ ओ छलाह हुनकासं म्यूच्यूअल ट्रान्सफरक लेल आवेदन देलिऐ | शुरूमे ओ तैयार छलाह, मुदा बादमे ओ तैयार नै भेलाह तें स्थानान्तरणक प्रयास विफल भ’ गेल | एक बेर दुर्गा पूजामे गाम गेलहुँ आ 22.10.82 क’ बाबूकें दरभंगामे कोनो डॉक्टरसं सम्पर्क हेतु बैदिक ककाक संगे गेलहुँ | घुरती काल बाबू गामक कैटोला चौकपर बससं उतरि सोझे घर चलि गेलाह, ओ दोकानपर चाह ओहि समय नहि पिबैत छलाह, हम दुनू गोटे चौकपर चाह पीबाक हेतु रुकि गेलहुँ | पानि भेल रहै, बाट सभ पिछराह भ’ गेल छलै | हाथमे बैग आ जूता नेने बढल जाइत रही | पुरना आँगन लग द’क’ कनी लग होइत, से सोचि पुरने आंगन बला रस्तासं बिदा भेलहुँ | चापा कल लग पिछड़ि गेलहुँ, एकटा पैर सोझे नब्बे डिग्री घूमि गेल | खसबाक आबाज सूनि मौसी ( हमर काकी मौसी सेहो छलीह, तें हम सभ मौसिए कहै छलियनि ) लालटेम ल’क’ दौड़लीह | कक्का हाथसं एक झटकामे पैर सोझ क’ देलनि | कहुनाक’ आंगन गेलहुँ | कक्का ओहि पैरकें पातर रस्सीसं बान्हि देलनि | रातिमे दर्दसं नीन ठीकसं नै भेल | सबेरे आबि कक्का जखने रस्सी खोललनि त पैर फूलि गेल | छूलासं दर्द होइ छल | मधुबनी गेलहुँ | एक्स-रे भेल | फ्रैक्चर भ’ गेल छलै | 23.10.82 सं 6.12.82 धरि डेढ़ मास प्लास्टर भेल पैर नेने गामपर इलाजमे रहलहुं | ओही अवधिमे आँगनमे एकटा चापा-कल गड़ाएल | ओही बीच शैलेन्द्रक मूड़न सेहो भेलनि | बहुत दिनक छुट्टीक बाद सिवान घुरलहुं आ यात्रासं परहेज करैत बहुत दिन धरि ओइ पैरमे एंकलेट लगाक’ रहलहुं | खसबाक सिलसिला ओही समयसं चलैत आबि रहल अछि | एहि बेर गत मार्चमे 15 आ 22 क’ खसलहुं आ दहिना केहुनीमे सूजन भेल, 29 जूनक’ एम्समे एस्पिरेशन द्वारा अतिरिक्त द्रब्य पदार्थकें सूईसं निकालि देल गेल | डेढ़ मासक बाद फेर ओहिना ओही ठाम सूजन भेल आ गत 8 सितम्बरक’ पुनः वैह एस्पिरेशन द्वारा सूईसं अतिरिक्त द्रब्य पदार्थकें निकालि देल गेल | निदेशानुसार क्रेप बैंडेज लगबैत छी, दुनू समय बर्फसं सेकाइ करैत छी आ दुनू समय एकटा टेबलेट थ्राइज ल’ रहल छी, कहल गेल अछि जे पुनः यदि सूजन होइत अछि त स्टेरॉयडक उपयोग कएल जाएत | पता नहि अहू बेर की होइत अछि | की पता दहिना हाथ कखन काज केनाइ बन्द क’ दिए, तें जल्दी-जल्दी कथाक संग जा रहल छी | हं, 1984 मे छलहुँ | सभसं छोट भाए रतनजी दसमी उत्तीर्ण भेलाह, 650 अंक एलनि | ओ एक-दू बेर एलाह सिवान मुदा, आर. के. कॉलेज,मधुबनीमे आगाँक पढ़ाइ केलनि | 22.06.1984 क’ बसंती आ मैथिलीक नाम गिरिधर लाल स्मारक मोंटेसरी स्कूलमे लिखाएल गेलनि | ओहि दिन सिन्धुजी सेहो स्कूल गेलाह | एक सालक बाद मकान मालिक एहि मकानमे आबि गेलाह आ हम सभ हुनक दच्छिन टोला स्थित मकानमे रहय लगलहुं | रतनजीक जांघमे एकटा गिल्टी भ’ गेल रहनि | सिवानमे डा. बी.एल.दास ऑपरेशनक सलाह देलखिन | डा. श्याम बालक सिंह सेहो दरभंगामे डा. द्विवेदीसं ऑपरेशनक सलाह देलखिन | 17.07.1984 क’ दरभंगामे जांघक ऑपरेशन भेलनि | हम सिवानसं 3 अगस्तक’ देखय गेलहुँ दरभंगा | द्विवेदी जीक क्लिनिकमे पता चलल जे रतनजी ठीक भ’ क’ बाबूक संगे काल्हिए गाम चलि गेलाह | मिश्र जी,उमाकांतजी, शशिकान्तजीसं गप-शप भेल | क्लिनिकमे एक घंटा गीत-नाद भेलै | रातिमे मिश्रजीक आग्रहपर हम आ शशिकान्तजी हुनके डेरापर रहलहुं | बड़ी राति धरि खिस्सा आ गीत-नाद होइत रहलै | शशिकान्तजीकें तीनटा गीत लीखिक’ देलियनि : 1. ‘भरि गाम चोरे त चोर कहू ककरा’ 2. ‘जखन घरेबला छथि कसाइ, तखन सुख की बुझबै’ 3. ‘जे सोचैत छी से बजबाक समय आएल अछि’ 4 क’ गाम गेलहुँ, रतनजी ठीक छलाह | 6 क’ गामसं सिवान वापस आबि गेलहुँ | 04.9.1984 क’ गामसं बाबू एलाह | 12.09 क’ 1700 रु. मे गैस बला चुल्हा किनलहुं | 17.09 सं गैसबला चुल्हापर भोजन बनब प्रारंभ भेल | एक अन्तरालक बाद बच्चीकें एकटा डॉक्टरक अनुसार उच्च रक्त-चापक समस्या भेलनि | पटनामे प्रसिद्द चिकित्सक डा. शिव नारायण सिंह जी जांचक उपरान्त कहलनि उच्च रक्त चाप नहि छनि, एकटा दबाई लिखलखिन डिस्प्रिन, कहलनि बहुत माथ दर्दक शिकायत कहथि त दू टा टेबलेट एक गिलास पानिमे द’क’ पी लेबय कहबनि | एकटा और सुझाव देलनि जे भ’ सकय त नीक परिसरमे डेरा स्थानांतरित क’ लेब | सिवान घुरलाक किछुए दिन बाद 30.09.1984 क’ कचहरी रोडमे प्रतिष्ठित अधिवक्ता श्री सुभाष्कर पाण्डेय जी क परिसरमे हुनक सभसं छोट अनुजक हिस्सा बला मकानमे आबि गेलहुँ | मकान मालिक पटना हाई कोर्टमे प्रैक्टिस करैत छलाह | सम्पूर्ण आवासीय परिसर बहुत आकर्षक छल आ ओहि परिसरमे श्रीमती कान्ति पाण्डेयक देख-रेख मे सदिखन उत्सव जकाँ माहौलमे रहैत छल | श्रीमती पाण्डेय स्थानीय हाई स्कूलमे प्रधानाध्यापिका छलीह | एतय मजिस्ट्रेट लाल साहेब,जेल अधिकारी पी के झा, अधिवक्ता रस्तोगी साहेब सभ गोटेक परिवारक आवागमन होइत रहैत छलनि | पी के झा जीक पत्नी सेहो गीत गबैत छलखिन | कान्तिजीक छोट दियादिनी किरणजीकें सेहो बहुत सुन्दर स्वर छलनि, समय-समयपर लोक अनुरोध करैत छलनि त सुनबैत छलखिन | हुनका हॉलमे टी वी सेहो लागल छलै | हुनका सबहक संग बच्ची सेहो आनन्दित रहय लगलीह आ पटनासं जे डिस्प्रिन ल’क’ आएल रही तकर उपयोग कहियो नहि कर’ पड़ल | एहि परिसरमे सप्ताहमे दू दिन संगीतक कक्षा सेहो चलैत छलै | एक बेर कान्ति जी अपना स्कूल लेल पन्द्रह अगस्तक अवसर लेल एकटा गीत हमरासं लिखबौलनि आ एतहि ओकर समूह गानक अभ्यास बालिका लोकनिसं करबौलनि : ‘ पन्द्रह अगस्त का शुभ दिन हमको करता है आह्वान हमें बनाना है बलशाली हिन्दुस्तान |’ ओकील साहेबक परिचयक क्षेत्र बहुत व्यापक छलनि | कैंपसमे साँझक’ बहुत गोटे सभक जुटान होइत रहैत छल | हमरा एलाक बाद कॉलेजक मैथिल प्राध्यापक आ बैंक स्टाफ सभ सेहो कहियो-कहियो अबैत रहैत छलाह, सभ गोटेक स्वागत होइत छलनि ओकील साहेबक परिसरमे | हमरासं छोट भाए ललनजी सिवानमे संगे रहिक’ डी ए वी कॉलेजसं जूलॉजीमे प्रतिष्ठाक संग बी.एस.सी. उतीर्ण भए आइ आइ बी एम पटनामे एम बी ए कोर्समे दिनांक 20.08.1984 क’ नाम लिखौलनि | सिवानमे हमरा सबहक सभसं प्रिय छलाह झा जी | स्पष्टवक्ता छलाह | हुनक तामसोमे बाजल बातमे मनोरंजनक सामग्री खूब रहैत छल | सिवानमे भांग आ रसगुल्लाक भोज सेहो एक-दू बेर केने छलाह | हम सभ एक दोसरक डेरापर जाइत-अबैत रहै छलहुँ | हमरा ककरो नोत द’क’ खुएबाक अभ्यास नै छल, आइयो नै अछि | मुदा, झाजी समय-समयपर नोत द’ दैत छलाह | एक-दू बेर हमहूं सभ गोटे गेल छी | मुदा, अधिक काल हमर अनुज ललनजी जाइत छलाह | झाजी सभ गोटेक स्वभाव बहुत नीक छलनि, बड्ड आग्रह क’क’ खुअबैत छलखिन जेना गाममे लोक खुअबैत छै | ललनजी सिवानेमे छलाह त एक दिन झाजी डेरा पर एलाह आ ललनजीक विवाहक सम्बन्धमे चर्चा करैत कहलनि, हम अपना सारिसं ललनजीक विवाह करब’ चाहैत छिऐ, अहाँ अपन स्वीकृति द’ दियौ त भ’ जेतै | हम कहलियनि जे ललनजीक विचार हेतनि त हमरा स्वीकार करबामे कोनो दिक्कत नै हैत | झाजी कहलनि जे ललनजी अस्वीकार नै करत, अहाँ ‘हं’ त कहियौ | हम कहलियनि जे ललनजीकें स्वीकार छै त हमरो स्वीकार अछि | झाजी तुरत ललनजीकें बजेलखिन आ पुछ्लखिन जे ठाकुरजी तैयार छथि, अहाँ तैयार छी ने ललनजी ? ललनजी कहलखिन जे हम एखन विवाह नै करब, हमरा ऐ विषयमे त कहियो कोनो गप नै भेल अछि | झाजी कहलखिन ‘ आ, हमर कनियाँ जे ओते तरि-तरिक’ तडुआ खुअबैत छलीह से अहाँ नै बुझै छलिऐ ?’ सभकें हंसी लगलै | हमरो झाजीक बातसं ओहू दिन हंसी लागल रह्य | इहो भेल जे झाजीक सोचब गलत नै कहल जा सकैछ | कियो अहाँकें ओतेक प्रेमसं भोजन कराबय त अहूँक कर्तव्य किछु भ’ जाइत अछि | हरिमोहन बाबूक ‘खट्टर ककाक तरंग’मे एक गोटेकें अबैत देखि कक्का तमसाक’ कहैत छथिन ‘ हे..हे..कनी घूमिक’ आबह, ओम्हर भांटाक गाछ रोपल अछि,’ मुदा जखन ओ कहैत छनि, ‘कका नोत दैले’ आएल छी’ त कहै छथिन ‘ तखन सोझे चलि आबह, दू-चारिटा धंगेबे करतै त की हेतै |’ मतलब जे नोत दैबलाक प्रति सम्वेदनशील हेबाक चाही | हरिमोहन बाबू दोसर गोटेक चर्च केने छथि जिनकर कहब छलनि, जकर खेबै, तकर गेबै; जेहेन खेबै, तेहेन गेबै आ जाधरि खेबै ताधरि गेबै | अहूमे भोजन करैबलाक प्रतिबद्धताक बात अछि | अर्थात नोत खाइबलामे कृतज्ञताक भाव रहबाक चाही | मुदा अधिक ठाम यैह होइछै जे भोजनक बाद लोक ऐ भोजनकें बिसरि जाइए | खेबा काल जे आनन्द अबैछै से एक दिनक बाद कहाँ ? सुनलिऐ जे एक गोटे कोनो अवसरपर अपना गामक लोककें लगातार दस दिन धरि दुनू समय भोजन करबैत रहलखिन, सभकें अपना घरमे भानस बन्द क’ देबाक अनुरोध केने छलखिन | भोज खाएबला सभ गोटेकें एक जोड़ धोती, एक सेट थारी,लोटा,बाटी, गिलास आ दक्षिणा एक सै एक टाका सेहो देलखिन, पंडित जीकें हीरो हौंडा मोटर साइकिल देलखिन | लोक ओहि समय त गुणगान करै छलनि, मुदा एको बरख धरि मोन नहि रखलकनि | मुखियाक चुनावमे ठाढ़ भेलाह आ हारि गेलाह | दुख भेलनि, स्वाभाविक छै | एना नै हेबाक चाही | जे कियो नोत अथवा भोज खुएबाकें निवेश मानि लै छथि, से दुखी भ’ सकैत छथि कखनो नहियो भ’ सकैत छथि | मुदा, रिस्क त छै | हमरा लगैए अही दुआरे बहुत अवसरपर लोक जे कतहु भोजन करै छथि, से चलबा काल एकावन वा एक सै एक अथवा अपना विवेकसं किछु राशि आशीर्वाद कहिक’ कोनो धिया-पुताकें अथवा कोनो नव कनियाँकें द’ दैत छथि आ कृतग्यताक भावसं अपनाकें मुक्त क’ लैत छथि | भ’ गेल सद्धम-बद्धम | मुदा की ई सभ नोतमे संभव छै ? किछु गोटे एहि सिद्धान्तकें मानैबला छथि : ‘खेबै त खुएबै’ बात ख़तम | किछु गोटेक कहब छनि : ‘जे खुएतै सबहक खेबै करबै अपनहि मोनकेर’ एहि सिद्धांतक उपयोग बहुत गोटे चुनावक समय करैत छथि | किछु गोटे एहि सिद्धान्तक समर्थक छथि : ‘ने खेबै ने गेबै’ किछु गोटे ईहो मानैत छथि : ‘ने खेबै ने ककरो खाए देबै’ की उचित, की अनुचित हम बड़ी काल धरि सोचैत रहि गेलहुँ | आइयो सोचैत छी | गुत्थी एखन धरि नहि फ़रिआएल अछि | ओइ दिन झाजी हमरा बड़का टास्क द’ क’ चलि गेलाह | हमरा आइयो कियो नोत दैए त झाजी आ हुनक ओ गप मोन पड़ि जाइए आ स्वीकार अथवा अस्वीकार करबामे सुविधा होइए | नोत आ भोजसं बचबाक कोशिश करैत छी आ तडुआसं त एकदम परहेज करिते छी | भगवानक कृपासं हुनक सारिक विवाह अहूसं नीक दोसर ठाम भ’ गेलनि | आ किछुए दिनक बाद हमरा सबहक बीच स्थिति सामान्य भ’ गेल | ललनजी पटना रह्य लगलाह | ओत’ मामाक डेरामे रह्बाक व्यवस्था भ’ गेलनि | ओतहिसं क्लास कर’ जाइत छलाह | ओत’ हमर ममिऔत मिथिलेश पहिनेसं रहिक’ नोकरी करय जाइत छलाह | हुनकहि कोठलीमे इहो रह’ लगलाह | मामाक बच्चा सभ छोट छलनि | बच्चा सभक कारणे असुविधाक अनुभव करैत ललनजी एकबेर दोसर ठाम डेरा ठीक केलनि मुदा ओत’ जे असुविधा भेलनि त ओहि ठामसं पड़ेलाह आ फेर मामाक डेरा आबि गेलाह, फेर जाधरि कोर्स पूर्ण भेलनि, ओही ठाम रहलाह | बसन्ती, मैथिली आ शैलेन्द्र तीनूक नाम 18.10.1984 (वृहस्पति दिन )क’ सूर्या अकादमी (स्कूल)मे लिखाएल गेलनि | अही साल 31 अक्टूबरक’ दुर्भाग्यसं प्रधान मन्त्री श्रीमती इन्दिरा गांधीक हत्याक खबरि एलै, 1 नवम्बरक’ शहरमे लूट-पाट भेलै आ तकरा बाद तीन-चारि दिन धरि कर्फ्यूमे लोक घेराएल रहल | हमर माए कोनो अवसरपर हमर पितिऔत दिलीप संगे मिनी बससं नैहर (रुचौल ) जा रहल छलीह | कैटोला आ तारसरायक बीचमे बस पलटि गेलै, सामान्य चोट लगलनि, मुदा ठीक भ’ गेलीह | सिवानमे दरबार टाकीज कंपाउंडमे एकटा भांगक पेड़ाबला दोकान छलै | साँझक’ ओत’ भीड़ रहैत छलै | हमहूँ झाजी संगे ओत’ साँझक’ जाइ छलहुँ, एकटा पेड़ा खाइत छलहुँ | एक दिन ओत’ एक आदमीकें देखलियनि, एक दर्जन पेड़ा ल’क’ टुप-टुप खाए लगलाह | हम हुनका दिस आश्चर्यसं तकैत रहलहुँ | हम एकटा पेड़ा लेबामे डेराइत छी, ई महाशय एक दर्जन सामान्य ढंगे ल’ रहल छथि | हमरा आश्चर्यमे डूबल देखि ओ कहलनि, क्या देख रहे हैं ? हम चुप छलहुँ | ‘यही न कि मैं एक दर्जन कैसे पचा लेता हूँ ?’ फेर कहलनि, ‘बहुत दिन हो गया’ ‘साहब, जिसके घर छः-छः जवान अविवाहित लड़कियां हों, उसे नींद के लिए एक दर्जन भी कम पड़ जाते हैं |’ बादमे पता चलल ओ शासकीय अधिकारी छलाह | मुदा दोसर एहेन लोक हमरा फेर नहि भेटलाह | भांगक पेड़ा बैंकक किछु सदस्य नियमित रूपसं लैत छलाह, किन्तु एक अथवा दूटासं बेशी नहि लैत छलाह | हमहूँ बहुत दिन धरि साँझमे एकटा पेड़ा लैत छलहुं | भांगक व्यवस्था लाल साहेब आ पी के झाक ओत’ सेहो रहैत छलनि | गाम जाइ छलहुँ त ओतहु भांगक व्यवस्था भ’ जाइत छल | हम सी ए आइ आइ बीक पहिल पार्टमे पाँचमेसं एकटा विषय ‘बुक कीपिंग’ मे उतीर्ण नहि भ’ सकलहुं | दोसर पार्टक कथे की ? बहुत कठिन काज सभ क’ चुकल छलहुँ, मुदा ई काज हमरा लेल असंभव भ’ गेल, एहि कारण एकटा और हानि भेल | हम आंचलिक प्रशिक्षण केन्द्रमे फैकल्टी मेम्बरक लेल साक्षात्कारमे सम्मिलित भेलहुँ, मुदा असफल भ’ गेलहुँ | 1985 क अन्तमे मुख्य धारामे एबाक लेल साक्षात्कारमे सम्मिलित भेलहुँ | पूर्वी चम्पारण जिलाक आदापुर शाखामे शाखा प्रबंधकक कार्य भार ग्रहण करबाक आदेश प्राप्त भेल आ तदनुसार 23 नवम्बर क’ सिवान शाखासं भारमुक्त भेलहुँ | (क्रमशः) पटना / 12.09.2021 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। योगेन्द्र पाठक ‘वियोगी’ पिरामिडक देश मे (पहिल खेप) हमरा सबहिक सनातन धर्म दर्शनक अनुसार मनुष्य योनि मे जन्म लेनिहारक सबसँ पैघ इच्छा रहैत छैक पुनर्जन्मक चक्र सँ छुट्टी भेटब आ मोक्षक प्राप्ति जाहि मे मनुष्य वैकुण्ठलोक पहुँचि जाइत अछि। विभिन्न शास्त्र पुराणक अनुसार मोक्ष प्राप्त भेला सँ पहिने लोक निरन्तर जन्म लैत रहैत अछि। अगिला जन्म मे कोन योनि मे जन्म लेत से ओकर कर्मक फल पर निर्भर करैत छैक। ओना तऽ ई कहब कठिन छैक जे कोन तरहक कर्म केला सँ लोक मोक्ष प्राप्त करैत अछि आ यदि ककरो मोक्ष भेटियो जाइत छैक तऽ ओकर की परिचय अथवा चिन्ह होइत छैक मुदा मानि लेल जाइत छैक जे कोनो बहुत धर्मात्मा व्यक्ति कें एहि तरहक गति भेटैत हेतनि। जे किछु होइ, मुदा मृत्युक बाद एहि पार्थिव शरीर कें सनातन धर्म मे कोनो महत्व नहि छैक तें एकरा आगि मे जरा देल जाइत छैक। आब सोचियौक यदि मोक्षक बदला अपने कें कहल जाए जे बहुत नीक कर्मक फल सँ अपने फेर अगिला जन्म मे कहियो ओही शरीर मे आबि जाएब, तखन कोन तरहक तैयारी करबैक ? शरीर कें बचा कए राखब तखन जरूरी भऽ जेतैक ने। एहि पार्थिव शरीर कें बचा कए राखब कतेक कठिनाह हेतैक ? ठंढा प्रदेश मे किछु बेसी दिन तक तऽ सुरक्षित राखलो जा सकैत छैक मुदा गर्म जलवायुक प्रदेश मे तऽ मुश्किले। देखिते छिऐक जे किछुए घंटा मे मृतक के शरीर अकड़ि जाइत छैक आ एकाध दिनक बाद ओकर क्षय शुरु भऽ जाइत छैक, ओहि सँ दुर्गन्ध बहराए लगैत छैक। प्राचीन मिस्र मे एहि तरहक मान्यता छलैक जे नीक काज केला सँ राजा मृत्युक बाद फेर कहियो ओही शरीर मे प्रवेश करैत जन्म लेताह। तें खास कऽ कए राजपरिवारक बीच एहि लेल प्रयास कएले गेलैक आ ओहि समाज मे शरीर कें सुरक्षित रखबाक फर्मूला ताकि लेल गेल। सुरक्षित शव कें, जकरा ‘ममी’ कहल गेलैक, कएक तह के ताबूत मे बन्द कऽ कए विशेष कक्ष मे राखल जाइत छलैक जकरा उपर पैघ पाथर राखि देल जाइत छलैक जे कोनो तरहें यदि कनियो दुर्गंध निकलबो करतै तऽ सियार कुकुर आदि कें ओहि शव तक गेल नहि होइक। एहि पाथर कें मस्तबा कहल जाइत छलैक। अफ्रिका मे जीवनदायिनी नील नदीक कछेर मे विकसित मिस्र देशक सभ्यता प्राचीन तऽ छैके, कतेको हिसाबें प्राचीनतम सभ्यता सब मे अद्वितीय सेहो। ओतुका पिरामिड संसारक सात आश्चर्य मे एक मानल जाइत रहलैक अछि। मिस्रक सभ्यताक बारे मे बच्चा मे इतिहास मे जे पढ़ने छलहुँ ताहि सँ ओतए जाकए देखबाक इच्छा तऽ छलेहे, हाल मे इंटरनेट पर अनेको सामग्री उपलब्ध भेला सँ मिस्र भ्रमणक उत्सुकता बढ़िते गेल। भ्रमण लेल हम पहिने अपन विश्वासी ट्रैवल एजेंट बंगलोरक वियोन्डर सँ सम्पर्क कएल। वियोन्डरक टीम मे श्रीनिवास सेनॉय मिस्रक विशेषज्ञ छथि आ मिस्र टूर पर कतेको ब्लॉग लिखने छथि। मुदा छोट संस्था रहलाक कारणें ओ कम्पनी हमरा लेल कोनो एहन टूर ग्रुपक जोगार नहि कऽ सकल जे सुविधाजनक होअए। अन्त मे श्रीनिवास अपनहि सुझाव देलनि जे हम थोमस कूक टूर कम्पनीक मिस्र पैकेज मे यात्रा करी। टूर पर जेबा सँ पहिने श्रीनिवास हमरा मिस्रक दर्शनीय स्थल, इतिहास, आदिक बहुत जानकारी देलनि। ओएह बतौलनि जे एकटा प्रख्यात अमेरिकन ईजिप्टोलॉजिस्ट श्रीमान बॉब ब्रॉयर अठतालीस लेक्चर के एकटा ऑडियो बुक बनौने छथि, ओहि ऑडियोबुक कें फोकटे मे कोना डाउनलोड कएल जा सकैत छैक। हम सेहो कएल। बॉब ब्रायर लिखित ओही ऑडियोबुक के संक्षिप्त रूपरेखा के एकटा पीडीएफ सेहो इंटरनेट पर भेटि गेल। एहि स्रोत सबसँ मिस्रक प्राचीन सभ्यताक आधुनिक ज्ञान सँ परिचित भेलहुँ। श्रीनिवास थोमस कूक के पैकेज मे दूटा परिवर्तन सेहो करौलनि — दोसर दिनक एलेक्जेन्ड्रिया टूरक बदला गीजाक आसपास के सकारा आ दहसुर नामक जगह, जतए प्राचीनतम पिरामिड छैक। सकारा मे तऽ बहुते किछु छैक जे हम आगू लिखब। दोसर परिवर्तन छल टूर कें एक दिन बढ़ा कए लक्जर के आसपास डेन्डारा आ आबीदोस मे प्राचीन मंदिर सब देखब। यद्यपि एहि लेल हमरा अतिरिक्त खर्चा लागल मुदा एहि लेख कें अन्त तक पढ़लाक बाद अपने कें विश्वास भैये जाएत जे ओ अतिरिक्त खर्चा बहुत उपयोगी छल आ हम कहि सकैत छी जे ओकरा बिना टूर किछु हिसाबें अपूर्णे रहि जइतए। थोमस कूक के सात-राति-आठ-दिनक पैकेज मे तीन दिन राजधानी काहिराक उपनगर गीजा मे पाँच सितारा होटल मे रहबाक, तकर बाद तीन राति नील नदी पर ओहने बहुत नीक जहाज पर रहबाक आ अन्तिम राति लक्जर शहर मे फेर पाँच सितारा होटल मे रहबाक व्यवस्था छलैक। खर्चाक चर्चा हम एतए नहि करैत छी कारण एहि मे करीब आधा भाग विदेशी मुद्रा के छैक आ ओकर विनिमय दर बदलैत रहैत छैक। कहबा लेल मिस्रक टूर बारहो मास चलैत छैक मुदा नीक समय नवम्बर सँ फरवरिए तक रहैत छैक। तकर बाद गर्मी। हमर टूर 17 सँ 24 सितम्बर 2019 तक छल। माने भेल 17 सितम्बर कें पहुँचनाइ आ 24 कें भोरे बिदा भऽ गेनाइ। एकरे कहल जाइत छैक सात-राति-आठ-दिनक (7N8D) पैकेज। बिदा हेबाक तिथि सँ मात्र चारि दिन पहिने टिकट आ मेडिकल इन्स्योरेन्स पेपरक संग सातो राति लेल होटल के नाम, यात्राक एडवाइजरी आदि सब किछु थोमस कूक ईमेल सँ पठा देलक - सबटा सॉफ्ट कॉपी। प्रिंट अहाँक काज छी लेबाक होअए तऽ लीअए नहि तऽ सॉफ्ट कॉपी सँ काज चलाउ। ओना एडवाइजरी मे कहल गेल छल जे प्रिंट जरूरे लऽ लेब। उचिते, कारण यदि कतहु मोबाइल हरा गेल अथवा भंगठा गेल तखन सॉफ्ट कॉपी कतए सँ आओत ? जे किछु, एक प्रति सब चीजक प्रिंट लऽ कए रखलहुँ। हमरा 16 सितम्बर कें साँझ मे कलकत्ता सँ मुम्बइ जेबाक छल, ओतए छओ घंटाक प्रतीक्षाक बाद 17 सितम्बर कें तीन बजे भोर मे ईजिप्ट एयर सँ काहिराक यात्रा। कहल गेल जे काहिरा एयरपोर्ट पर टूर मैनेजर प्रतीक्षा करैत रहताह। ओतहि ग्रुपक अन्य सदस्य सब सँ भेंट होएत। सबेरे स्थानीय समय ठीक साढ़े पाँच बजे हम सब काहिरा एयरपोर्ट पर उतरि गेलहुँ। आश्चर्य लगैत छल जे एतेक सबेरे पहुँचलाक अछैतो थोमस कूक आजुक भरि दिनक कोनो कार्यक्रम नहि रखने छल। अस्तु, हवाइ जहाज सँ बहराइते थोमस कुक के एकटा स्थानीय प्रतिनिधि अपन बैनर लेने भेटला, कहलनि, चलू चेकइन लगेज लेबाक बेल्ट लग सब गोटे प्रतीक्षा करू। एतए गोटागोटी ग्रुपक किछु सदस्य सँ भेंट होइत गेल। सबकें एकत्रित करबा मे कने समय तऽ लागिए गेलैक। अन्त मे करीब साढ़े सात बजे हम सब बाहर निकलि बस मे सबार भेलहुँ। एखन मात्र अठारह गोटे ग्रुप मे छलहुँ। एतए बस मे थोमस कूकक भारतीय टूर मैनेजर पहिल बेर उपस्थित भेलाह, ओ अपन परिचय देलनि इन्द्रजित देशमुख नाम सँ। बर बेस, आगू बिदा भेलहुँ। हमरा सबहिक होटल काहिरा शहरक उपनगर गीजा मे छल आ प्रसिद्ध पिरामिड सँ मात्र एकाध किलोमीटर के दूरी पर। मुदा एयरपोर्ट सँ बेस दूर। रस्ता मे एकठाम बस ठाढ़ कऽ कए यात्री लेल जलपान लेल गेल। एहि मे सैंडविच सदृश एक प्रकारक स्थानीय स्टफ्ड ब्रेड, जकरा फलाफेल कहल जाइत छलैक, के दू पीस आ किछु फल, लतामक जूसक डिब्बा आदि छलैक। एकर अतिरिक्त पीबाक लेल डेढ़ लीटरक जलक बोतल सेहो देल गेल। हमरा सबकें बुझा देल गेल जे आजुक दिन भरिक लेल जलपान आ लंच सब किछु इएह भेल। करीब डेढ़ घंटाक बाद होटल पहुँचलहुँ। होटल नाम गुण पाँच सितारा बला छलैक। बेस पैघ लॉबी। हमरा सब एतेक पैघ लॉबी मे जेना हरा गेलहुँ। एतए रूम भेटबा मे मुदा बेस देरी लागल। तकर कारण जे साधारणतः एतेक सबेरे रूम सब तैयार नहि रहैत छैक। मिस्र मे होटलक चेकइन समय दुपहरिया मे दू बजे छैक। इन्द्रजित हमरा सबहिक पासपोर्ट आ रिटर्न टिकटक छापल प्रति जमा केलनि आ एकटा होटल स्टाफक संग लगला रूम दिएबाक तैयारी मे। लोक कें फ्री वाइफाइ होटल मे प्रवेश करिते भेटि गेल छलैक तें सोचिये सकैत छिऐक सब अपन अपन मोबाइल फोन पर व्यस्त भऽ गेल। रूम भेटबाक ओतेक हड़बड़ी आब नहि छलैक। आइ बीस साल पहिने लोक कें प्रतीक्षा अखरितैक, लॉबी मे लोक टहलैत रहैत, मात्र किछु स्थानीय अखबार अथवा कोनो मैगजीनक पन्ना उनटबैत रहैत मुदा आब ई मोबाइल आ वाइफाइ सब व्यवहार कें बदलि देलक। कोनो शिकाएत नहि। स्थानीय मुद्रा लेल होटलक लॉबीए मे एटीएम मसीन छलैक। लोक सब अपना आवश्यकताक हिसाबें डॉलर भजा कए मिस्रक ईजिप्सियन पौंड लैत गेल। हमहूँ एक सौ डॉलर के ईजिप्सियन पौंड लेल। इन्द्रजित बुझा देने छलाह जे विनिमय दर सबतरि एके छैक। अस्तु, करीब दस बजे हमरा चाभी देल गेल। बुझा देल गेल जे एखन भरि दिन अपनहि पर छी, जे मोन होअए से करू। साँझ मे साढ़े छओ बजे ग्रुप जाएत ‘साउन्ड एन्ड लाइट’ शो देखबा लेल। तकर बाद एही होटल मे आबि हम सब अलग सँ भारतीय भोजन करब। माने साढ़े छओ बजे सँ थोमस कूकक जिम्मा मे सब यात्री आबि जेताह। रूम गेलहुँ, स्नानादि सँ निवृत्त भेलहुँ। तकर बाद पैकेट मे बचल सामान सधा देलियैक। भारतीय समयक अनुसार एखन करीब अढ़ाइ बाजि रहल छलैक तें लंचक बेर तऽ भैए गेल छलैक। आब आगूक दिन खाली छल। होटलक रूम मे बैसि दिन बिताएब अखरि रहल छल। थोमस कूकक प्रोग्रामक हिसाबें पिरामिडक दर्शन तेसर दिन कराओल जाइत। ताहू मे समस्या छल जे पैघ ग्रुप मे रहैत कतेक फैल सँ सब किछु देखि सकब। अपन कम्बोदिया यात्रा मे एकसर टूर करबाक लाभ देखिये लेने छलिऐक। मोन मानैत नहि छल। नीचा उतरि होटलक ट्रैवेल डेस्क पर पुछारी कएल। कहल गेल जे दू घंटाक लेल कार सँ घुमला पर करीब 600 पौंड लागत। बेसी समय भेला पर प्रति घंटा 200 पौंड अतिरिक्त। बर बेस। हम एकटा गाड़ी कऽ लेलहुँ। ड्राइवर अंग्रेजी बजैत छलाह। ईहो नीके। एखन ओएह हमर गाइड भऽ गेलथि। ओना तऽ ई ड्राइवर महोदय ईजिप्टोलॉजी पढ़निहार कोनो प्रशिक्षित गाइड नहि छलाह मुदा जखन मंडन मिश्रक गामक परिचारिका सब शास्त्र चर्चा कऽ सकैत छलीह तखन ई मिस्रवासी ड्राइवर, जे टूरिस्टे सबकें घुमबैत रहल छथि, किएक ने जरूरी ज्ञान रखताह ? से ओ हमरा बहुत किछु बुझबैत गेलाह। पिरामिड परिसर कें बुझबा लेल मिस्रक किछु इतिहास बूझब जरूरी। तखने ईहो बुझबा मे आओत जे टूरिस्ट पिरामिडक भीतर जेबा लेल किएक उत्सुक रहैत छथि आ ओकर की महत्व छैक ? मिस्रक इतिहास पर कतेको हजार पोथा सब लिखल गेल छैक आ ईजिप्टोलॉजी एखनहु महत्वपूर्ण शोध विधा छैक जकर अध्ययन चलिते छैक आ पोथा सब लिखाइते छैक। तथापि एहि भ्रमण लेख कें बुझेबा लेल जे लघुरूपक इतिहासक जानकारी चाही से हम लिखैत छी। विद्वान लोकनि प्राचीन मिस्रक इतिहास कें तीन भाग मे बँटैत छथि — प्राचीन साम्राज्य (old kingdom), मध्य साम्राज्य (middle kingdom) आ नवीन साम्राज्य (new kingdom) जे प्रायः ईसा पूर्व 3500 वर्ष सँ शुरू होइत ईसा पूर्व 300 वर्ष तक चलल। एहू तीन साम्राज्यक भीतर अनेक वंश (dynasty) के शासन रहलैक। तकर बाद तऽ यूनानी शासन आबि गेलैक, सिकन्दर (Alexander) आ हुनक वंशज राज्य करए लगलाह, एलेक्जैन्ड्रिया शहर अस्तित्व मे आएल आ कतेको शताब्दी तक देशक राजधानी सेहो रहल। तकर बाद अबैत गेलाह रोमन साम्राज्यक राजा लोकनि। मिस्रक इतिहास कें बुझबा लेल कने ओकर भूगोल पर सेहो ध्यान देबए पड़त। दक्षिण सँ उत्तर जमीन नीचा ढाल पर छैक, तें नील नदी दक्षिण सँ उत्तर दिस बहैत भूमध्यसागर मे मिलैत छैक। नील नदीक पूब पच्छिम दूनू कात किछु दूर तक, जतेक मे नदीक जल बाढ़िक कारण पसरि जाइत छलैक आ लोक कें जलक सुविधा उपलब्ध रहैत छलैक, एकटा पातर पट्टी जकाँ क्षेत्र मे सभ्यताक उदय भेलैक। सागर मे समाहित हेबा सँ पूर्व नदी कें अनेक भाग मे बँटि गेला सँ ओहि क्षेत्र मे डेल्टा जकाँ बनैत छैक, बस बूझि लिअऽ जहिना गंगा कें समुद्र मे मिलबा काल सुन्दरवनक डेल्टा बनल अछि। ई डेल्टा क्षेत्र तऽ उन्नत कृषिक उपजाउ क्षेत्र रहबे केलै। मिस्रक वर्तमान राजधानी काहिरा (Cairo), गीजा प्लेटो, सकारा आदि एही इलाका मे अवस्थित छैक। नील नदीक कछेरक उपजाउ इलाका कें छोड़ि पूब आ पश्चिम दूनू कात विशाल मरुभूमि — अफ्रिकाक नामी सहारा मरुभूमिक अंग। मिस्रक दछिनबरिया भाग कें Upper Egypt आ उतरबरिया भाग कें Lower Egypt सेहो कहल जाइत छैक। कबीलाइ साम्राज्यक समय ई दूनू भाग अलग शासन के कब्जा मे छल आ दूनू भाग मे परस्पर युद्ध चलिते रहैत छलैक। कबीलाइ लोक सब कें एक सूत्र मे बान्हि देश कें सुगठित शासन देब शुरू भेल प्राचीन साम्राज्य सँ जाहि मे राज्यक मुखिया कें फैरो (pharaoh) कहल जाइत छल। शुरुएहि सँ ई बात प्रचारित कएल गेल आ जनता मानि लेलक जे फैरो ईश्वरक अवतार होइत छथि, हुनका मे विशेष दैवी गुण होइत छनि। ई आस्था ओहिना छल जेना आर्यावर्त मे राजा कें इन्द्रक अवतार मानल जाइत छल। फैरो सब कें महिमा मन्डित करबा लेल पन्डित चाहबे करी से ओतहु भेल। विभिन्न प्राकृतिक घटना सँ सम्बन्धित देवता गढ़ल गेलाह आ हुनका लोकनिक अर्चना आरम्भ भेल। एहि मे मुख्य छल सूर्यक तीन रूप मे देवता — भिनसर के बालरविक रूप, मध्यान्हक तेज रवि आ अस्त होइत समयक निश्तेज रवि। एकर अतिरिक्त जाहि जीवजन्तु सँ लोक कें भय भेलैक ओकरो देवताक मान्यता भेटलैक, तहिना जकरा बहुत उपयोगी बूझल गेल तकरो दैवीय पद भेटलैक। एहि सबहक चर्चा हम बाद मे करब। सब साम्राज्य मे नील नदीक पुबरिया भाग आ पछबरिया भागक महत्व अलग रहलैक। पूब मे जेना कि सूर्योदय होइत छैक, एहि भाग कें उगैत जिनगीक रूप बूझल गेल। एकर विपरीत पच्छिम मे सूर्य अस्त होइत रहलाह तें एहि भागक जमीन कें सेहो जिनगीक अस्तक रूप बूझल गेल। तें सब वंश मे जतेक समाधि, पिरामिड आदि बनल से सब नदीक पछबरिया भाग मे। गीजा प्लेटो सेहो नील नदीक पछबरिया भाग मे अवस्थित अछि। तहिना सबटा पिरामिड। गीजाक तीनटा मुख्य पिरामिड प्राचीन साम्राज्यक चारिम वंश (Fourth Dynasty), जकर समय ईसापूर्व 2575 सँ 2465 तक मानल जाइत छैक, के दोसर फैरो (सम्राट) खुफु, हुनक पुत्र आ चारिम फैरो खाफ्रे आ हुनक पौत्र आ पाँचम फैरो मेनकौरे द्वारा बनाओल गेल छलैक। प्रथा छलैक जे फैरो सब अपनहि शासन काल मे अपन मृत्युस्थलक चुनाव कऽ कए पिरामिड आ मोर्च्यूअरी टेम्पल बना लैत छलाह जाहि सँ हुनका मरलाक बाद शरीर कें ममी बना कए ओहि मे राखल जा सकए। एतुका तीनटा पिरामिड मे खुफुक पिरामिड सबसँ पैघ अछि। एकर आधार करीब 230 मीटर आ मूल ऊँचाइ 146 मीटर अछि। तहिना खाफ्रेक पिरामिडक आधार 216 मीटर आ उँचाइ 143 मीटर छलैक। मेनकौरेक पिरामिडक आधार 109 मीटर आ उँचाइ 66 मीटर छलैक। खुफुक पिरामिड कें ग्रेट पिरामिड कहल जाइत छैक। मिस्रक इतिहास मे एकटा आर महत्वपूर्ण घटना छलैक करीब दू हजार साल पहिने भेल विध्वंसकारी भूकम्प। एहि दुर्घटना मे बहुत रास स्मारक नष्ट भऽ गेलैक आ पिरामिड सब सेहो धँसि गेलैक। तें वर्तमान मे ग्रेट पिरामिडक ऊँचाइ मात्र 139 मीटर रहि गेलैक अछि। भूकम्पक प्रभावक वर्णन एहि यात्रा कथा मे आगू बहुत ठाम भेटत। प्राचीन मिस्र मे देवाल पर चित्र बनाएब आ पापीरस पर चित्र आ अक्षर लीखब ईशापूर्व करीब 3500 वर्ष पहिनहि शुरू भऽ गेल छलैक। एहि लिखावट कें हाइरोग्लिफ कहल गेलैक। प्रायः एही समय आर्यावर्त मे सेहो सिन्धु घाटी सभ्यताक उदय भेल आ हरप्पा आदि जगह मे लिखावट शुरू भेल होएत। भाग्यशाली रहल मिस्रक समाज जे एहि प्राचीन लिखावट कें पढ़बाक कुंजी उनैसम शताब्दी मे भेटि गेलैक आ प्राचीन मिस्रक सम्पूर्ण इतिहास आधुनिक विश्व मे जगमगा गेलैक। एकर विपरीत हमरा लोकनि हरप्पाक लिपि एखनहु पर्यन्त पढ़ि नहि सकलहुँ, ओ कुंजी हरा गेल अछि अथवा बनाओले नहि गेलैक। कतेक विरोधाभास जे खजूर खेबाक लूरि लोक मोन पाड़ने रहल आ आम खेबाक लूरि बिसरि गेल ! ओना तऽ एयरपोर्ट सँ गीजा अबैत आ होटल पहुँचैते विशाल पिरामिडक दर्शन लोक कें होमए लगैत छैक मुदा परिसरक भीतर नजदीक गेला पर विश्वक एहि प्राचीन आश्चर्यक सामने ठाढ़ भेल लोक कें एक बेर विस्मय सँ जरूरे आहि बहरेतैक। ओतेक पुरान जमाना मे, जखन कोनो मसीन नहि बनल छलैक, कोनो ट्रक ट्रेलर नहि, कोनो क्रेन नहि, कोनो विशाल मालवाही जहाज नहि, मात्र छेनी हथौरी टा मजदूर आ कि कलाकारक हाथ मे रहैत छलैक, तखन कोना कए एतेक पैघ पाथरक खंड सब सुदूर दक्षिण के आसवान क्षेत्रक पाथरक खदान सँ काटि नदी मे बहा कए आनल गेल आ फेर नदी सँ निकालि समाधि स्थल तक पहुँचाओल गेल आ एक एक कए नीचा सँ उपर तक उठा कए जोड़ल गेल, से एखनहु बहुत तीव्रबुद्धि इंजीनियर लोकनि कें आश्चर्यचकित करितहिं छनि। किछु विद्वानक मत छनि जे मिस्रक इतिहास अथवा उचित कही तऽ मानव सभ्यताक इतिहास मे किछु महत्वपूर्ण अंश हेराएल अछि। पिरामिड मात्र एकटा प्राचीन स्मारके टा नहि, अपितु सब तरहें आश्चर्यक खजाना अछि। सबटा प्रवेश द्वार सटीक उत्तर दिशा मे कोना बनलैक ? कतेक सटीक ? उत्तर दिशा सँ एकर दिशाक अन्तर मात्र एक डिग्री, आधा डिग्री ? नहि, यौ ई अन्तर छैक मात्र 0।003 डिग्री। ग्राहम हैनकॉक के अनुसार एखनहु कोनो इंजीनियर एतेक सटीक दिशा निर्धारण कइए नहि सकैत छथि आ ओकरा कोनो भवन आ कि स्मारक मे उतारब तऽ असम्भवे बूझू। जतबे एकर विस्तार मे जेबैक ततबे ई आश्चर्य बढ़िते जाएत। आ एही आश्चर्य कें निहारैक लेल तऽ सब साल लाखो टूरिस्ट मिस्र दौड़ैत अछि। अस्तु, ड्राइवरक संग पहुँचलहुँ पिरामिड परिसरक गेट पर। पिरामिड परिसर मे एक कात सँ दोसर कात जेबा मे किछु किलोमीटर के दूरी भऽ जाइत छैक। तें भीतर मे टूरिस्ट लोकनि बस, कार अथवा अन्य सवारी लैते छथि। परिसरक भीतर मात्र जेबा लेल 160 पौंड के टिकट, जाहि मे लोक परिसर मे टहलि सकैत छल, पिरामिड देखि सकैत छल मुदा ओकर भीतर नहि जा सकैत छल। पिरामिडक भीतर जेबा लेल अलग सँ 360 पौंडक टिकट, मुदा सेहो एखनहि गेटे पर लऽ लेबाक छल। तहिना अन्य किछु जगह लेल अतिरिक्त टिकट। एकर विपरीत 500 पौंडक एकटा टिकट छलैक जाहि मे लोक पिरामिडक भीतर जा सकैत छल आ एकाध अन्य दर्शनीय स्थल सेहो। हमर ड्राइवर कहलनि जे यदि पिरामिडक भीतर जाएब तखन नीक होएत जे सम्मिलित टिकट लऽ लिअऽ। हुनके सुझाव पर हम 500 पौंडक टिकट लेल। सुरक्षा जाँच करबैत परिसरक भीतर प्रवेश केलहुँ। ड्राइवर दोसर रस्तें हमरा ओहि कात भेटि गेलाह। फेर गाड़ी मे बैसि ग्रेट पिरामिड लग बनल पार्किंग एरिया पहुँचलहुँ। अन्दर मे स्थानीय लोक टूरिस्ट लेल घोड़ाबला टमटम सेहो चलबैत अछि, किछु इलाका मे ऊँटक सवारी सेहो चलैत छैक मुदा ई सब भेल ओकरा लेल, जेना अमेरिकन आ कि यूरोपियन टूरिस्ट, जे टमटम सदृश सवारी पर नहि चढ़ल होए अथवा ओकर विशेष मजा लूटऽ चाहैत होअए। हम सब तऽ मधेपुर सँ दरभंगा तक एक्का टमटम के बीचे पैघ भेल छी तखन ओकर कोन विशेष आकर्षण ? परिसर पहुँचि ड्राइवर पहिने विभिन्न मुद्रा मे पिरामिडक पृष्टभूमि मे हमर फोटो लेलनि। एकटा फोटो संलग्न अछि उदाहरण लेल। फोटो देखि अपनहुँ कें अन्दाज भैए जाएत जे ओ ड्राइवर ट्रेंड गाइड आ फोटोग्राफर सेहो छलाह। अन्यत्र सेहो हमर फोटो ओएह लैत रहलाह। कोनो सेल्फी सँ ई फोटो सब जरूरे नीक छैक। बाहर सँ पहिने ग्रेट पिरामिड देखल। जेना कि पिरामिडक ज्यामितीय बनाबट सँ बुझिए गेल हेबैक, आधार वर्गाकार होइत छैक आ ऊँचाइ समान भाव सँ घटैत घटैत अन्त मे एक विन्दु रहि जाइत छैक। चारू कातक फलक त्रिभुजाकार होइत छैक। आधार आ त्रिभुजक बीच के कोण पिरामिडक उन्नत कोण (angle of inclination) कहल जाइत छैक। जतेक पैघ कोण ओतेक उँचगर ओ पिरामिड बनतैक, तखने ने चारू त्रिभुजक फलक एक विन्दु पर मिलतैक। छोट कोण रहला सँ उँचाइ कम हेतैक। ग्रेट पिरामिडक ई कोण करीब 52 डिग्री छैक। एहि मे करीब 23 लाख प्रस्तर खंडक उपयोग भेलैक, प्रत्येक घनाकार खंड करीब एक मीटर सँ कने बेसी अछि आ ओकर ओजन करीब अढ़ाइ टन छैक। पिरामिड बनबै मे पीयर चूना पत्थर (lime stone) के व्यवहार भेलैक। बाहरी सतह कें चिक्कन बनबै लेल नीक जकाँ पालिस कएल उज्जर चूनापत्थर लगाओल गेलैक। भीतर मे कमरा सब आ ब्युरियल चैम्बर ग्रेनाइट सँ बनाओल गेलैक। बाहरक उजरा पाथर तऽ प्रायः सबटा लोक छोड़ा छोड़ा कए लऽ गेल अथवा नष्ट भऽ गेलैक। मात्र खाफ्रेक पिरामिड मे उपरका टोपी बचल छैक। अपना गाम-घर मे यदि कोनो बहुत पैघ पोखरि रहैत छैक तऽ ओकरा लेल जनश्रुति प्रचलित भऽ जाइत छैक जे ई दैत्य अथवा राक्षस द्वारा खुनाओल गेल हेतैक। तखन सोचियौक जे पाँच हजार वर्ष पहिने बनल ई पिरामिड कोन दैत्य बनौने हेतैक ? प्राचीन यूनानी इतिहासकार हेरोडोटस के अनुसार ग्रेट पिरामिड कें बनेबा मे बीस साल लगलैक आ करीब एक लाख मजदूर काज करैत रहलै। मुदा वर्तमान ईजिप्टोलोजिस्ट सबके अनुमान छनि जे एतेक मजदूर अस्थायी रूपें खाली ओहि समय मे रहैत हेतैक जखन नील नदीक सालाना बाढ़िक समय रहैत छलैक जाहि समय मजदूर सब कें खेतीबारीक काज नहि रहैत छलैक। स्थायी रूपें सब मिला कए बीस हजार के करीब लोक पिरामिडक निर्माण लेल काज करैत छलैक जाहि मे रसोइया, डाक्टर सँ लऽ कए पंडित तक सामिल छलैक। एहि सब कें अनुमाने बूझल जेबाक चाही। पिरामिड कोना बनलै तकर समुचित इंजीनियरिंग जानकारी एखनहु नहि बूझल भेलैक अछि आ रिसर्च चलिये रहल छैक। पिरामिड परिसरक खुदाइ मे कतेको मजदूरक बस्ती, ओकरा सबहिक कब्र, कतेको हाइरोग्लाइफिक लेख आदि भेटलैक। आब संक्षेप मे बूझि लिअऽ जे पिरामिडक भीतरे रहैत छलैक राजा अथवा रानीक ममी आ ओकरा संग आर बहुत किछु, जाहि मे छलैक ओकरा द्वारा प्रयुक्त गहना-गुड़िया, अस्त्र, शस्त्र आर अनेको वस्तु। एतेक दिन मे किछु बचल तऽ नहि छैक, सबटा चोरि भऽ गेलैक, जे किछु चोरि नहि भेलैक से ब्रिटिश शासक लोकनि द्वारा ब्रिटेन लऽ जाएल गेल। तथापि ओकर बनाबट, भीतर मे अवस्थित कब्रक विभिन्न कोठरी आदि एखनहु टूरिस्ट कें आकर्षित करिते छैक। सबसँ महत्वपूर्ण छैक भीतर जेबाक अनुभव। नहि गेलहुँ तऽ जरूरे लागत जे टूर मे किछु छूटि गेल। ड्राइवर चेता देलनि जे एतए बहुत गाइड सब तंग करत तें अपन टिकट अनका नहि देखाएब। ठीके देखल जे जेना जेना पिरामिडक लग पहुँचैत गेलहुँ अनेको गाइड टिकट देखेबाक आग्रह करए लागल, किछु तऽ बलजोरी टिकट छीन लेबा पर उद्यत भऽ गेल। अपना कें बचबैत पिरामिडक किछु सीढ़ी चढ़ि ओहि द्वार लग पहुँचलहुँ जतए सँ भीतर जेबाक रस्ता छलैक। एतए एकटा गार्ड टिकट चेक केलक आ अन्दर जेबाक इशारा कऽ देलक। भीतर जाएब कठिनाह छैक, यद्यपि पूरा रस्ता इजोत रहैत छैक तथापि रस्ता एकटा संकीर्ण सुरंग जकाँ छैक जाहि मे लोक कें उतरए आ चढ़ए पड़ैत छैक। सुरंगक उँचाइ एतेक कम जे बहुत लिघुरि कए, कतहु कतहु बूझू घुसकि कए, जाएब जरूरी। एतेक जे पीठ पर राखल बैग सेहो उपर के देबाल मे सटि जाइत छलैक आ आगू बढ़ब कठिन भऽ जाइत छलैक। बैग राखब जरूरी मात्र एही कारण जे जलक बोतल अति आवश्यक। अन्दर गर्मी बहुत छैक, मोन औलबालि तऽ हेबे करत, घाम छुटबे करत। जिनका ठेहुनक दर्दक शिकाएति रहए अथवा संकीर्ण जगह मे जेबा मे डरक अनुभूति होनि ओ नहिए जाथि से नीक। किछु दूरक रस्ता तऽ सामान्य उँचाइ बला छलैक, तकर बाद आबि गेल सुरंग। सीढ़ी बनल, प्रकाशित मुदा उँचाइ बड़ कम। अस्तु, लिघुरैत घुसकैत चढ़ए उतरए लगलहुँ। बेस लम्बा रस्ता। लोक सेहो बहुते कम। कियो कियो भीतर अबैत आ कि बाहर जाइत। अस्तु करीब दस-बारह मिनट के बाद भितरका कक्ष मे प्रवेश केलहुँ आ ठीक सँ ठाढ़ भेलहुँ। एतए कक्ष तऽ सामान्ये मुदा एक कात मे एकटा पैघ हौज जकाँ बनल। इएह जगह छलैक ममी-युक्त ताबूत कें रखबा लेल, एकरा ब्यूरियल चैम्बर कहल जाइत छैक। एतए किछु सेल्फी लेल, एकटा टूरिस्ट कें अनुरोध कएल जे हमर फोटो लऽ लेथि, एवम् प्रकारें फोटो लैत फेर बहार होएब शुरू कएल। करीब आधा घंटा लागल। पार्किंग तक अबैत अबैत अनेको फेरीबाला सब घेरैत रहल अपन सामान सब बेचबा लेल। सब सामान ओएह चीन सँ आयातित नकली अनुकृति आदि। एतुका लोक भारतीय सिनेमा स्टार सबसँ खूब परिचित छथि। भारतीय मुह-कान सदृश यात्री कें आकर्षित करै लेल ओ लोकनि सलमान खान, अमिताभ बच्चन, करीना कपूर, प्रियंका चोपड़ा आदि हीरो हीरोइनक नाम लैत आ किछु तऽ कोनो गीतक एकाध पाँती सेहो गबैत। हम अपना कें बचबैत गाड़ी तक पहुँचलहुँ। तकर बाद ड्राइवर संग गाड़ी मे बैसि बाकी दूटा पिरामिड देखैत एकटा उँचगर जगह पर गेलहुँ जतए सँ तीनू पिरामिड एक रेखा मे दृष्टिगोचर होइत छलैक। एहि जगह कें ‘पैनोरैमिक भ्यू’ बला जगह कहल जाइत छैक। एतए सँ किछु भग्न पिरामिड सेहो देखबा मे अबैत छैक। एतहु किछु फोटो लेल। हमर 500 पौंडक टिकट मे परिसर मे अवस्थित सोलर बोट म्यूजियमक दर्शन सम्मिलित छल। एतहु गेलहुँ। एतए फैरो खुफ्रुक सोलर बोट राखल छैक। पिरामिड परिसर के खुदाइ के समय 1954 इo मे जखन साफ-सफाइ चलि रहल छलैक तखन अकस्मात एकटा पाथरक देबालक भीतर करीब 1200 टुकड़ी मे ई नाओ भेटलैक। एकरा निकालि कए फेर सँ जोड़ल गेल आ एकटा आधुनिक म्यूजियम बनाए ओहि मे प्रदर्शित कएल गेल। बोट म्यूजियम मे मोट पातर विभिन्न साइजक पापीरसक रस्सी आ काठक तखता सब कें कोना कए ओहि डोरी सब सँ जोड़ि कए नाओ बनाओल जाइत छलैक तकर विधि सेहो प्रदर्शित अछि। बोट म्यूजियम के बाद ड्राइवर हमरा लेने गेलाह प्रसिद्ध स्फिंक्स लग। गीजाक ई स्फिंक्स सेहो अद्भुत छैक। बैसल सिंहक विशाल मूर्ति मुदा मानव मुखाकृति बला चूनापत्थर के एकहि शिलाखंड सँ बनल ई 73 मीटर लम्बा आ 20 मीटर ऊँच स्मारक विश्व मे अद्वितीय अछि। विद्वान लोकनिक कहब छनि जे मुखाकृति फैरो खाफ्रे सँ मिलैत छैक। एहि मे राजकीय सिरस्त्राण सँ युक्त फैरो कें देखाओल गेल अछि। एतहु किछु फोटोग्राफी भेल। पिरामिड परिसरक भ्रमण एतहि शेष भेल। तकर बाद घुरती रस्ता मे ड्राइवर हमरा लेने गेलाह एकटा पापिरस (papyrus) गैलरी मे। पापीरस अपना इलाकाक मोथी जकाँ पानि मे उपजैबला वनस्पति छिऐक। एकर पौधा डेढ़ मीटर के उँचाइ तक होइत छैक, उपर मुह पर फुलाएल, एकर डाँट गोल नहि, त्रिभुजाकार होइत छैक। एही पापीरस सँ पुरान जमाना मे मिस्र मे लिखबा लेल कागत बनाओल जाइत छलैक। गेटे पर एकटा नवयुवती पापीरस के गाछ, एकटा ट्रे मे जल मे डुबाओल ओकर किछु ओदारल टुकड़ी आदि रखने पर्यटक कें कागत बनेबाक विधिक प्रदर्शन हेतु। लिखबाक नीक सतह बनेबा लेल बूझू सीकी सदृश पातर पातर किन्तु आठ-दस मिलीमीटर चाकर एक फुट लम्बा टुकड़ी सब कें तानी भरनी के क्रॉस स्टाइल मे बना कए एकटा समतल काठक पटरी पर राखि खूब जोड़ सँ बेलन चलाओल जाइत छैक जाहि सँ ओ पूरा समतल भऽ जाइ। एहि गैलरी मे एहने कागत पर चित्रकारी कएल अनेक कलाकृति प्रदर्शित छल। ओ महिला एहि कलाकृति कें देखबए लगलीह आ संगहिं मिस्रक प्राचीन इतिहास सेहो बुझबए लगलीह। कलाकृति सब तऽ ओही इतिहासक विविध प्रसंग कें चित्रित करैत छलैक तें ई बुझाएब जरूरी। हमरो लेल ई नीके रहल। एतहि बूझल जे अगिला जीवन मे लोकक नीक बेजाए काजक लेखाजोखा करबा लेल ओकर हृदय कें एकटा काल्पनिक पाँखि, जकरा “फेदर ऑफ जस्टिस” कहल जाइत छलैक, के ओजन सँ तुलना कएल जाइत छलैक। पाँखिक तुलना मे जाहि फैरोक हृदय हल्लुक पाओल गेलनि ओ नीक काज केने छलाह तें हुनका देवत्व भेटैत छलनि। एही चित्र सब सँ बूझल जे फैरो लोकनि अपन नाम चित्र पर अथवा देवाल पर बेलनाकार घरक भीतर लिखैत छलाह, जकरा प्राचीन मिस्रक भाषा मे शेन (shen) कहल जाइत छलैक। एहि बेलनक एक कात मे रेखा खीचल रहैत छलैक जाहि सँ पता चलै जे कोन दिशा मे पढ़बाक चाही। नेपोलियनक सिपाही लोकनि एकर नाम कारतूस देलखिन कारण ओहि बेलनक आकार बन्दूकक गोली भरै बला कारतूस सदृश छलैक आ सएह नाम आब प्रचलित भऽ गेलैक। गैलरी मे टाँगल चित्र सबके दामो लीखल मुदा आश्चर्य लागल जे सरकारी नाम रहितहुँ दाम मे मोलाइ सम्भव छलैक। एहू वस्तु मे चीन सँ बनल नकल बहुत घुसिया गेल छैक आ कहब कठिन जे कोन मूल अछि आ कोन चीनी नकल। तैयो एकटा कलाकृति मोला कए 200 पौंड मे कीनल। ओहि मे कारतूस बनल छलैक जाहि मे पर्यटक अपन अथवा कोनो आत्मीय के नाम लिखबा सकैत छल। हाइरोग्लिफ्स अक्षर मे हमर नाम Y P VIYOGI लीखि देलनि ओएह नवयुवती। करीब तीन घंटा समय नीक जकाँ बिताए हम होटल घुरि एलहुँ। साँझ मे फेर थोमस कूक के बस मे पूरा दल गेलहुँ “लाइट एण्ड साउन्ड” शो देखबा लेल। ई जगह स्फिंक्सक ठीक सामने उँच चबूतरा पर बनल छैक। सैकड़ो कुर्सी लागल। कतेको टूरिस्ट ग्रुप संगहि ई प्रोग्राम देखैत अछि। करीब पचास मिनटक अंग्रेजी भाषा बला ई प्रोग्राम साढ़े सात बजे शुरू भेलैक। विभिन्न कालखंडक मिस्रक इतिहास बतबैत ई प्रोग्राम पूरा पिरामिड परिसर कें चित्रित आलोकित करैत रहल। एखन स्फिंक्स बहुते जीवंत भऽ गेल छलैक। एतेक सुन्दर स्फिंक्स दिनक रौद मे कोना देखि सकत लोक? घुरती बस मे चेन्नै सँ आएल बीस बाइसटा पर्यटक हमरा सबहिक ग्रुप मे जुड़ि गेलाह। ई लोकनि साँझ मे काहिरा उतरल छलाह आ एयरपोर्ट सँ सीधे लाइट एण्ड साउन्ड प्रोग्राम देखबा लेल अबैत गेलाह। आब बस पूरा भरती भऽ गेल। होटल पहुँचि ओकर विस्तृत डाइनिंग हॉल मे कन्टिनेन्टल बुफे भोजन सँ अलग एक ठाम हमरा सब लेल भारतीय भोजनक बुफे व्यवस्था छल। थोमस कुक एकटा भारतीय रसोइया अपना टीम मे राखब शुरू केलक अछि। सूप सँ लऽ कए मिठाइ तक, नीक व्यंजन सब। लोक किछुओ खा सकैत छल — कन्टिनेन्टल आ कि भारतीय। लोक अपना अपना रुचिएँ डिनर लेलक आ रात्रि विश्राम लेल जाइत गेल। एहि प्रकारें हमर मिस्र यात्राक पहिल दिन शेष भेल। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। मुन्नाजी- परस्पर -- हे यै ,ओम्हर द' नै जाउ.बेर उनहि गेलैए. -- की करथिन, एखन त' साँझे छै राति नै ने भेलैए ? की करतै नेतबा सब खिधान्से ने ? -- नै यै, उछन्नर करत ! -- कक्का , ओहो सब महिला दिवस मनेबाक योजना बना रहल ऐछ ! -- धुर बताहि ! महिला कल्याण की सोचत ओ सब सुथनी ! अपन जुआनीक कल्याणक रिहर्सल करैए ! -- " अहा ! मुँह केहेन लगै छै , जेना चाने हो...." " रौ चुप्प तों सब ! बेचारी विधवा अपन हुब्बा सँ धीया - पुताक पेट त' भरै छै . " -- हा..हा..हा ! नेता जी , धीया- पुताक पेट त' पछातिक गप्प , पहिने अपन देह- पेटक जुगत धरा नेने हएत ! -- हिनका कहलियैन- बाट बदलि लौथ , नै मानलनि ने.देखलखिन जनि जाति देखि कोना चौल करैए जेना ई संबंधीये रहथिन ! -- कक्का , हमरा सँ ओकर सबहक भलहिं कोनो संबंध नै होइ मुदा ओकर चालि सँ जरूर संबंध छै. -- ऐँ.....केहेन ? --ओकर बौह , पंचायत समितिक काजे बी.डी.ओ ल'ग आ बेटी , कॉलेज जाइ छै तहन दोसरो पुरूषक जीह एहिना लपलपाइत हेतै , नै ? -- ओह !ई कहिया धरि चलैत रहतै एना से नै जानि ! -- " जा धरि एहेन पुरूष सबहक आँखिक पानि सुखएल रहतै . " ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३. पद्य ३.१.आशीष अनचिन्हार- २ टा गजल आशीष अनचिन्हार २ टा गजल १ पानि कादो थाल की छै बोनि उपजा टाल की छै प्रश्न ईहो पूछि देलक आर कहियौ हाल की छै साधि लेलक दर्द सभटा राग सुर आ ताल की छै घीचि लेतै प्राण सभहक जीह की छै खाल की छै गेल सौतिन फेर पोखरि माछ पुछतै जाल की छै सभ पाँतिमे 2122-2122 मात्राक्रम अछि (बहरे रमल मोरब्बा सालिम वा बहरे रमल सालिम चारि रुक्नी)। २
बात हुनकर सम्मोहन हो राम हँसी हुनकर दुखमोचन हो राम
नमरी बड़ हल्लुक छै से कहलक फाइल सभ केर ओजन हो राम
ने बँचलै नौकरी ने बेपार भेटतै कोना भोजन हो राम
छै हुनके माला हुनके माइक हुनके मंच संयोजन हो राम
छै तीत अकत बेबहार लेकिन भेलै मीठ संबोधन हो राम
सभ पाँतिमे 222-222-222 मात्राक्रम अछि। दू टा अलग-अलग लघुकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि। ई बहरे मीर अछि। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ........................................................................................................................ संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] Videha e-Learning पेटार (रिसोर्स सेन्टर) शब्द-व्याकरण-इतिहास MAITHILI IDIOMS & PHRASES मैथिली मुहावरा एवम् लोकोक्ति प्रकाश- रमाकान्त मिश्र मिहिर (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) डॉ. ललिता झा- मैथिलीक भोजन सम्बन्धी शब्दावली (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) मैथिली शब्द संचय MAITHILI DICTIONARY- RAMDEO JHA (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) ENGLISH MAITHILI COMPUTER DICTIONARY MAITHILI ENGLISH DICTIONARY अणिमा सिंह -Shishu_Geet_Khel_Anima_Singh डॉ. रमण झा मैथिली काव्यमे अलङ्कार अलङ्कार-भास्कर आनन्द मिश्र (सौजन्य श्री रमानन्द झा "रमण")- मिथिला भाषाक सुबोध व्याकरण BHOLALAL DAS मैथिली सुबोध व्याकरण- भोला लाल दास राधाकृष्ण चौधरी- A Survey of Maithili Literature ........................................................................................................................ मूलपाठ तिरहुता लिपिक उद्भव ओ विकास (यू.पी.एस.सी. सिलेबस) राजेश्वर झा- मिथिलाक्षरक उद्भव ओ विकास (मैथिली साहित्य संस्थान आर्काइव) Surendra Jha Suman दत्त-वती (मूल)- श्री सुरेन्द्र झा सुमन (यू.पी.एस.सी. सिलेबस) प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) CIIL SITE ........................................................................................................................ समीक्षा सुभाष चन्द्र यादव-राजकमल चौधरी: मोनोग्राफ शिव कुमार झा "टिल्लू" अंशु-समालोचना डॉ बचेश्वर झा- B_JHA_Nibhand_Nikunj.pdf डॉ. देवशंकर नवीन- Adhunik_Sahityak_Paridrishya डॉ. रमण झा- भिन्न-अभिन्न प्रेमशंकर सिंह- मैथिली भाषा साहित्य:बीसम शताब्दी (आलोचना) डॉ. रमानन्द झा 'रमण' हिआओल अखियासल CIIL SITE दुर्गानन्द मण्डल-चक्षु RAMDEO JHA दत्त-वतीक वस्तु कौशल- डॊ. श्रीरामदेवझा SHAILENDRA MOHAN JHA परिचय निचय- डॊ शैलेन्द्र मोहन झा ........................................................................................................................ अतिरिक्त पाठ पहिने मिथिला मैथिलीक सामान्य जानकारी लेल एहि पोथी केँ पढ़ू:- राधाकृष्ण चौधरी- मिथिलाक इतिहास फेर एहि मनलग्गू फाइल सभकेँ सेहो पढ़ू:- केदारनाथ चौधरी चमेलीरानी माहुर करार कुमार पवन पइठ (मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ कथा) (साभार अंतिका) डायरीक खाली पन्ना (साभार अंतिका) याेगेन्द्र पाठक वियाेगी- विज्ञानक बतकही रामलोचन ठाकुर- मैथिली लोककथा SAHITYA AKADEMI http://sahitya-akademi.gov.in/publications/e-books.jsp http://sahitya-akademi.gov.in/general/Digitalbooks.jsp CIIL http://corpora.ciil.org/maisam.htm अखियासल (रमानन्द झा रमण) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI1.pdf जुआयल कनकनी- महेन्द्र http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI2.pdf प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI3.pdf सृजन केर दीप पर्व- सं केदार कानन आ अरविन्द ठाकुर http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI4.pdf मैथिली गद्य संग्रह- सं शैलेन्द्र मोहन झा http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI5.pdf JNU http://sanskrit.jnu.ac.in/maithili/index.jsp http://sanskrit.jnu.ac.in/student_projects/lexicon.jsp?lexicon=maithili ARCHIVE.ORG https://archive.org/details/%40vijay_deo_jha?&sort=-publicdate&page=2 VIDEHA MAITHILI BOOKS/ PICTURE-AUDIO-VIDEO ARCHIVE http://videha.co.in/new_page_15.htm https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ ALL INDIA RADIO DOORDARSHAN आकाशवाणी दूरदर्शन http://prasarbharati.gov.in/ http://newsonair.com/ https://doordarshan.gov.in/ आकाशवाणी मैथिली पोडकास्ट http://prasarbharati.gov.in/podcast.php?filterlang=Maithili&from=1947-08-15&fromwp=2020-08-29&to=2050-12-31&search=GO आकाशवाणी पटना/ दरभंगा मैथिली रेजनल न्यूज टेक्स्ट डाउनलोड-1 http://newsonair.com/RNU-NSD-Audio-Archive-Search.aspx आकाशवाणी पटना/ दरभंगा मैथिली रेजनल न्यूज टेक्स्ट डाउनलोड-2 http://newsonair.com/Regional-Text.aspx आकाशवाणी दरभंगा http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=282 आकाशवाणी दरभंगा यू ट्यूब चैनल https://www.youtube.com/channel/UCGdNveEFmv4pPolWiTEMxVA आकाशवाणी भागलपुर http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=359 आकाशवाणी पूर्णियाँ http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=256 आकाशवाणी पटना http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=122 IGNCA http://ignca.nic.in/coilnet/mithila.htm http://ignca.nic.in/coilnet/kalyani.htm (MAITHILI ENGLISH DICTIONARY) http://tdil.mit.gov.in/CoilNet/IGNCA/mithila.htm MITHILA DARSHAN https://mithiladarshan.com/ (online pdf of Maithili journal) I LOVE MITHILA https://www.ilovemithila.com/ (online maithili journal) मैथिली साहित्य संस्थान https://www.maithilisahityasansthan.org/ https://www.maithilisahityasansthan.org/resources (online pdf of Reasearch Papers/ books) ........................................................................................................................ VIDEHA e-LEARNING YOUTUBE CHANNEL https://www.youtube.com/channel/UC4abVKqMj2pDWIAkXiOHp7A (अनुवर्तते) -गजेन्द्र ठाकुर विदेहक किछु विशेषांक:- १) हाइकू विशेषांक १२ म अंक, १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf 12.pdf २) गजल विशेषांक २१ म अंक, १ नवम्बर २००८ Videha_01_11_2008.pdf Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf 21.pdf ३) विहनि कथा विशेषांक ६७ म अंक, १ अक्टूबर २०१० Videha_01_10_2010 Videha_01_10_2010_Tirhuta 67 ४) बाल साहित्य विशेषांक ७० म अंक, १५ नवम्बर २०१० Videha_15_11_2010 Videha_15_11_2010_Tirhuta 70 ५) नाटक विशेषांक ७२ म अंक १५ दिसम्बर२०१० Videha_15_12_2010 Videha_15_12_2010_Tirhuta 72 ६) नारी विशेषांक ७७म अंक ०१ मार्च २०११ Videha_01_03_2011 Videha_01_03_2011_Tirhuta 77 ७) अनुवाद विशेषांक (गद्य-पद्य भारती) ९७म अंक Videha_01_01_2012 Videha_01_01_2012_Tirhuta 97 ८) बाल गजल विशेषांक विदेहक अंक १११ म अंक, १ अगस्त २०१२ Videha_01_08_2012 Videha_01_08_2012_Tirhuta 111 ९) भक्ति गजल विशेषांक १२६ म अंक, १५ मार्च २०१३ Videha_15_03_2013 Videha_15_03_2013_Tirhuta 126 १०) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक १४२ म, अंक १५ नवम्बर २०१३ Videha_15_11_2013 Videha_15_11_2013_Tirhuta 142 ११) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 १२) अरविन्द ठाकुर विशेषांक १८९ म अंक १ नवम्बर २०१५ Videha_01_11_2015 १३) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक १९१ म अंक १ दिसम्बर २०१५ Videha_01_12_2015 १४) विदेह सम्मान विशेषाक- २००म अक १५ अप्रैल २०१६/ २०५ म अक १ जुलाई २०१६ Videha_15_04_2016 Videha_01_07_2016 १५) मैथिली सी.डी./ अल्बम गीत संगीत विशेषांक- २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ Videha_01_01_2017 १६) मैथिली वेब पत्रकारिता विशेषांक VIDEHA 313 लेखकसं आमंत्रित रचनापर आमंत्रित आलोचकक टिप्पणीक शृंखला १७) मैथिली बीहनि कथा विशेषांक-२ VIDEHA 317 १८) रामलोचन ठाकुर विशेषांक VIDEHA 319 १९) रामलोचन ठाकुर श्रद्धांजलि विशेषांक VIDEHA 320 लेखकक आमंत्रित रचना आ ओइपर आमंत्रित समीक्षकक समीक्षा सीरीज १. कामिनीक पांच टा कविता आ ओइपर मधुकान्त झाक टिप्पणी विदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016 "पाठक हमर पोथी किए पढ़थि"- लेखक द्वारा अप्पन पोथी/ रचनाक समीक्षा सीरीज १. आशीष अनचिन्हार 'विदेह' क ३२७ म अंक ०१ अगस्त २०२१ एडिटर्स चोइस सीरीज एडिटर्स चोइस सीरीज-१ विदेहक १२३ म (०१ फरबरी २०१३) अंकमे बलात्कारपर मैथिलीमे पहिल कविता प्रकाशित भेल छल। ई दिसम्बर २०१२ क दिल्लीक निर्भया बलात्कार काण्डक बादक समय छल। ओना ई अनूदित रचना छल, तेलुगुमे पसुपुलेटी गीताक एहि कविताक हिन्दी अनुवाद केने छलीह आर. शांता सुन्दरी आ हिन्दीसँ मैथिली अनुवाद केने छलाह विनीत उत्पल। हमर जानकारीमे एहिसँ बेशी सिहराबैबला कविता कोनो भाषामे नहि रचल गेल अछि। सात सालक बादो ई समस्या ओहने अछि। ई कविता सभकेँ पढ़बाक चाही, खास कऽ सभ बेटीक बापकेँ, सभ बहिनक भाएकेँ आ सभ पत्नीक पतिकेँ। आ विचारबाक चाही जे हम सभ अपना बच्चा सभ लेल केहन समाज बनेने छी। एडिटर्स चोइस सीरीज-१ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-२ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच ब्रेस्ट कैसरक समस्यापर विदेह मे मीना झा केर एकटा लघु कथा प्रकाशित भेल। ई मैथिलीक पहिल कथा छल जे ब्रेस्ट कैसर पर लिखल गेल। हिन्दीमे सेहो ताधरि एहि विषयपर कथा नहि लिखल गेल छल, कारण एहि कथाक ई-प्रकाशित भेलाक १-२ सालक बाद हिन्दीमे दू गोटेमे घोंघाउज भऽ रहल छल कि पहिल हम आकि हम, मुदा दुनूक तिथि मैथिलीक कथाक परवर्ती छल। बादमे ई विदेह लघु कथामे सेहो संकलित भेल। एडिटर्स चोइस सीरीज-२ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-३ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिलक किछु बाल कविता प्रकाशित भेल। बादमे हुनकर ३ टा बाल कविता विदेह शिशु उत्सवमे संकलित भेल जाहिमे २ टा कविता बेबी चाइल्डपर छल। पढ़ू ई तीनू कविता, बादक दुनू बेबी चाइल्डपर लिखल कविता पढ़बे टा करू से आग्रह। एडिटर्स चोइस सीरीज-३ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-४ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच जगदानन्द झा मनुक एकटा दीर्घ बाल कथा कहि लिअ बा उपन्यास प्रकाशित भेल, नाम छल चोनहा। बादमे ई रचना विदेह शिशु उत्सवमे संकलित भेल, ई रचना बाल मनोविज्ञानपर आधारित मैथिलीक पहिल रचना छी, मैथिली बाल साहित्य कोना लिखी तकर ट्रेनिंग कोर्समे एहि उपन्यासकेँ राखल जेबाक चाही। कोना मॊडर्न उपन्यास आगाँ बढ़ै छै, स्टेप बाइ स्टेप आ सेहो बाल उपन्यास। पढ़बे टा करू से आग्रह। एडिटर्स चोइस सीरीज-४ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-५ एडिटर्स चोइस ५ मे मैथिलीक "उसने कहा था" माने कुमार पवनक दीर्घकथा "पइठ" (साभार अंतिका) । हिन्दीक पाठक, जे "उसने कहा था" पढ़ने हेता, केँ बुझल छन्हि जे कोना अहि कथाकेँ रचि चन्द्रधर शर्मा ’गुलेरी’ अमर भऽ गेलाह। हम चर्चा कऽ रहल छी, कुमार पवनक "पइठ" दीर्घकथाक। एकरा पढ़लाक बाद अहाँकेँ एकटा विचित्र, सुखद आ मोन हौल करैबला अनुभव भेटत, जे सेक्सपीरिअन ट्रेजेडी सँ मिलितो लागत आ फराको। मुदा एहि रचनाकेँ पढ़लाक बाद तामस, घृणा सभपर नियंत्रणकेँ आ सामाजिक/ पारिवारिक दायित्वकेँ सेहो अहाँ आर गंभीरतासँ लेबै, से धरि पक्का अछि। मुदा एकर एकटा शर्त अछि जे एकरा समै निकालि कऽ एक्के उखड़ाहामे पढ़ि जाइ। एडिटर्स चोइस सीरीज-५ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-६ जगदीश प्रसाद मण्डलक लघुकथा "बिसाँढ़": १९४२-४३ क अकालमे बंगालमे १५ लाख लोक मुइला, मुदा अमर्त्य सेन लिखैत छथि जे हुनकर कोनो सर-सम्बन्धी एहि अकालमे नहि मरलन्हि। मिथिलोमे अकाल आएल १९६७ ई. मे आ इन्दिरा गाँधी जखन एहि क्षेत्र अएली तँ हुनका देखाओल गेल जे कोना मुसहर जातिक लोक बिसाँढ़ खा कऽ एहि अकालकेँ जीति लेलन्हि। मैथिलीमे लेखनक एकभगाह स्थिति विदेहक आगमनसँ पहिने छल। मैथिलीक लेखक लोकनि सेहो अमर्त्य सेन जेकाँ ओहि महाविभीषिकासँ प्रभावित नहि छला आ तेँ बिसाँढ़पर कथा नहि लिखि सकला। जगदीश प्रसाद मण्डल एहिपर कथा लिखलन्हि जे प्रकाशित भेल चेतना समितिक पत्रिकामे, मुदा कार्यकारी सम्पादक द्वारा वर्तनी परिवर्तनक कारण ओ मैथिलीमे नहि वरण् अवहट्ठमे लिखल बुझा पड़ल, आ ओतेक प्रभावी नहि भऽ सकल कारण विषय रहै खाँटी आ वर्तनी कृत्रिम। से एकर पुनः ई-प्रकाशन अपन असली रूपमे भेल विदेहमे आ ई संकलित भेल "गामक जिनगी" लघुकथा संग्रहमे। एहि पोथीपर जगदीश प्रसाद मण्डलकेँ टैगोर लिटरेचर अवार्ड भेटलनि। जगदीश प्रसाद मण्डलक लेखनी मैथिली कथाधाराकेँ एकभगाह हेबासँ बचा लेलक, आ मैथिलीक समानान्तर इतिहासमे मैथिली साहित्यकेँ दू कालखण्डमे बाँटि कऽ पढ़ए जाए लागल- जगदीश प्रसाद मण्डलसँ पूर्व आ जगदीश प्रसाद मण्डल आगमनक बाद। तँ प्रस्तुत अछि लघुकथा बिसाँढ़- अपन सुच्चा स्वरूपमे। एडिटर्स चोइस सीरीज-६ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-७ मैथिलीक पहिल आ एकमात्र दलित आत्मकथा: सन्दीप कुमार साफी। सन्दीप कुमार साफीक दलित आत्मकथा जे अहाँकेँ अपन लघु आकाराक अछैत हिलोड़ि देत आ अहाँक ई स्थिति कऽ देत जे समानान्तर मैथिली साहित्य कतबो पढ़ू अहाँकेँ अछौं नहि होयत। ई आत्मकथा विदेहमे ई-प्रकाशित भेलाक बाद लेखकक पोथी "बैशाखमे दलानपर"मे संकलित भेल आ ई मैथिलीक अखन धरिक एकमात्र दलित आत्मकथा थिक। तँ प्रस्तुत अछि मैथिलीक पहिल दलित आत्मकथा: सन्दीप कुमार साफीक कलमसँ। एडिटर्स चोइस सीरीज-७ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-८ नेना भुटकाकेँ रातिमे सुनेबा लेल किछु लोककथा (विदेह पेटारसँ)। एडिटर्स चोइस सीरीज-८ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-९ मैथिली गजलपर परिचर्चा (विदेह पेटारसँ)। एडिटर्स चोइस सीरीज-९ (डाउनलोड लिंक) जगदीश प्रसाद मण्डल जीक ६५ टा पोथीक नव संस्करण विदेहक २३३ सँ २५० धरिक अंकमे धारावाहिक प्रकाशन नीचाँक लिंकपर पढ़ू:- Videha_15_05_2018 Videha_01_05_2018 Videha_15_04_2018 Videha_01_04_2018 Videha_15_03_2018 Videha_01_03_2018 Videha_15_02_2018 Videha_01_02_2018 Videha_15_01_2018 Videha_01_01_2018 Videha_15_12_2017 Videha_01_12_2017 Videha_15_11_2017 Videha_01_11_2017 Videha_15_10_2017 Videha_01_10_2017 Videha_15_09_2017 Videha_01_09_2017 विदेह ई-पत्रिकाक बीछल रचनाक संग- मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ रचनाक एकटा समानान्तर संकलन: विदेह: सदेह: १ (२००८-०९) देवनागरी विदेह: सदेह: १ (२००८-०९) तिरहुता विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) देवनागरी विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) तिरहुता विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०)देवनागरी विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०) तिरहुता विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०)देवनागरी विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०) तिरहुता विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]देवनागरी विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ] तिरहुता विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]- दोसर संस्करण देवनागरी विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ]देवनागरी विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ] तिरहुता विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ]देवनागरी विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ] तिरहुता विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ]देवनागरी विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ] तिरहुता विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ]देवनागरी विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ] तिरहुता विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ]देवनागरी विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ] तिरहुता विदेह:सदेह ११ विदेह:सदेह १२ विदेह:सदेह १३ The readers of English translations of Maithili Novel "sahasrabadhani" and verse collection "sahasrabdik chaupar par" has intimated that the English translation has not been able to grasp the nuances of original Maithili. Therefore the Author has started translating his Maithili works in English himself. After these translations are complete these would be the official translations authorised by the Author of the original works.-Editor Maithili Books can be downloaded from: https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ विदेह सम्मान: सम्मान-सूची (समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार सहित) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। सूचना/ घोषणा १ "विदेह सम्मान" समानान्तर साहित्य अकदेमी पुरस्कारक नामसँ प्रचलित अछि। "समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार" (मैथिली), जे साहित्य अकादेमीक मैथिली विभागक गएर सांवैधानिक काजक विरोधमे शुरु कएल छल, लेल अनुशंसा आमन्त्रित अछि। अनुशंसा २०१९ आ २०२० बर्ख लेल निम्न कोटि सभमे आमन्त्रित अछि: १) फेलो २)मूल पुरस्कार ३)बाल-साहित्य ४)युवा पुरस्कार आ ५) अनुवाद पुरस्कार। अपन अनुशंसा ३१ दिसम्बर २०२० धरि २०१९ पुरस्कारक लेल आ ३१ मार्च २०२१ धरि २०२०क पुरस्कारक लेल पठाबी। पुरस्कारक सभ क्राइटेरिया साहित्य अकादेमी, दिल्लीक समानान्तर पुरस्कारक समक्ष रहत, जे एहि लिंक sahitya-akademi.gov.in पर उपलब्ध अछि। अपन अनुशंसा editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २ “मिथिला मखान” फिल्म देखू मात्र १०१ टाकामे। Android App “BEJOD” download करू वा जाउ www.bejod.in पर, signup करू, एकटा ईमेल जायत, अपन ईमेल खोलू आ ओकरा क्लिक करू अहाँक अकाउंट एक्टीवेट भय जायत। आब मिथिला मखान रेण्ट पर लिअ, डेबिट कार्डसँ १०१ टाका अॉनलाइन पेमेंट करू आ फिल्म देखू। ३ विदेह अपन आगामी अंक (२०२१ क प्रारम्भमे) श्री रामलोचन ठाकुर पर विशेषांक निकालबाक नेयार केने अछि। हुनका सम्बन्धी रचना आमंत्रित अछि (संस्मरण, साक्षात्कार, समीक्षा आदि) जे ३१ दिसम्बर २०२० धरि editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाओल जा सकैत अछि। विदेह पेटारक अन्तर्गत (पोथी डाउनलोड साइट) मे http://www.videha.co.in/new_page_15.htm हुनकर मौलिक, अनूदित आ सम्पादित रचना फ्री पी.डी.एफ. डाउनलोड लेल उपलब्ध अछि। विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम्: VIDEHA: AN IDEA FACTORY (c)२००४-२०२१. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHAसम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: डॉ उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम विलास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक -स्त्री कोना- इरा मल्लिक। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि)editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि। एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै, आ से हानि-लाभ रहित आधारपर छै आ तैँ ऐ लेल कोनो रॊयल्टीक/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै। तेँ रॉयल्टीक/ पारिश्रमिकक इच्छुक विदेहसँ नै जुड़थि, से आग्रह। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-2021 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। ५ जुलाई २००४ केँ http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् 'विदेह' ३३० म अंक १५ सितम्बर २०२१ (वर्ष १४ मास १६५ अंक ३३०)
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