VIDEHA — Issue 331 / अंक ३३१

Publication: VIDEHA · Issue: 331
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विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA ISSN 2229-547X VIDEHA 'विदेह' ३३१ म अंक ०१ अक्टूबर २०२१ (वर्ष १४ मास १६६ अंक ३३१) १. गजेन्द्र ठाकुर- संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल  मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल सेहो] [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] [FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI ALSO] २. गद्य २.१.रबीन्द्र नारायण मिश्र-लजकोटर-२९म खेप २.२.जगदीश चन्द्र ठाकुर ’अनिल’- आँखिमे चित्र हो मैथिली केर (आत्मकथा)- १९. तीन बरख आदापुरमेे २.३. योगेन्द्र पाठक ’वियोगी’- पिरामिडक देशमे (दोसर खेप) २.४. मुन्नाजी- बीहनि कथा- संगति २.५.ज्ञानवर्द्धन कंठ- लालदाइ २.६.किशन कारीगर- भोजकाजी मनेजर (हास्य कटाक्ष) २.७.अरविन्द ठाकुर- भीमनाथ झा “कुसुम” ! ३. पद्य ३.१.कल्पना झा- किछु छुटि गेल Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Books/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाउ। VIDEHA ARCHIVE विदेह पेटार View Videha googlegroups (since July 2008) view Videha Facebook Official Group (since January 2008)- for announcements १. गजेन्द्र ठाकुर ........................................................................................................................ ........................................................................................................................ [संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल  मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री] [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल सेहो] [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] [FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI ALSO] यू. पी. एस. सी. (मेन्स) २०२० ऑप्शनल: मैथिली साहित्य विषयक टेस्ट सीरीज यू.पी.एस.सी. क प्रिलिमिनरी परीक्षा २०२० सम्पन्न भऽ गेल अछि। जे परीक्षार्थी एहि परीक्षामे उत्तीर्ण करताह आ जँ मेन्समे हुनकर ऑप्शनल विषय मैथिली साहित्य हेतन्हि तँ ओ एहि टेस्ट-सीरीजमे सम्मिलित भऽ सकैत छथि। टेस्ट सीरीजक प्रारम्भ प्रिलिम्सक रिजल्टक तत्काल बाद होयत। टेस्ट-सीरीजक उत्तर विद्यार्थी स्कैन कऽ editorial.staff.videha@gmail.com पर पठा सकैत छथि, जँ मेलसँ पठेबामे असोकर्ज होइन्हि तँ ओ हमर ह्वाट्सएप नम्बर 9560960721 पर सेहो प्रश्नोत्तर पठा सकैत छथि। संगमे ओ अपन प्रिलिम्सक एडमिट कार्डक स्कैन कएल कॉपी सेहो वेरीफिकेशन लेल पठाबथि। परीक्षामे सभ प्रश्नक उत्तर नहि देमय पड़ैत छैक मुदा जँ टेस्ट सीरीजमे विद्यार्थी सभ प्रश्नक उत्तर देताह तँ हुनका लेल श्रेयस्कर रहतन्हि। विदेहक सभ स्कीम जेकाँ ईहो पूर्णतः निःशुल्क अछि।- गजेन्द्र ठाकुर संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सर्विसेज (मुख्य) परीक्षा, २०२० मैथिली (ऐच्छिक) लेल टेस्ट सीरीज/ प्रश्न-पत्र- १ आ २ TEST SERIES-1 TEST SERIES-2 [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल/ FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI] NTA_UGC_NET_MAITHILI_01 NTA_UGC_NET_MAITHILI_02 NTA_UGC_NET_MAITHILI_03 (श्री शम्भु कुमार सिंह द्वारा संकलित) Videha e-Learning MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) UPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS BPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. (ऐच्छिक) मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. (अनिवार्य) मैथिली प्रश्नपत्र- बी.पी.एस.सी.(ऐच्छिक) मैथिलीक वर्तनी १ भाषापाक २ मैथिलीक वर्तनीमे पर्याप्त विविधता अछि। मुदा प्रश्नपत्र देखला उत्तर एकर वर्तनी इग्नू BMAF001 सँ प्रेरित बुझाइत अछि, से एकर एकरा एक उखड़ाहामे उनटा-पुनटा दियौ, ततबे धरि पर्याप्त अछि। यू.पी.एस.सी. क मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेल सेहो ई पर्याप्त अछि, से जे विद्यार्थी मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेने छथि से एकर एकटा आर फास्ट-रीडिंग दोसर-उखड़ाहामे करथि| IGNOU  इग्नू       BMAF-001 ........................................................................................................................ MAITHILI (OPTIONAL) TOPIC 1    [Place of Maithili in Indo-European Language Family/ Origin and development of Maithili language (Sanskrit, Prakrit, Avhatt, Maithili) भारोपीय भाषा परिवार मध्य मैथिलीक स्थान/ मैथिली भाषाक उद्भव ओ विकास (संस्कृत, प्राकृत, अवहट्ट, मैथिली)] TOPIC 2    (Criticism- Different Literary Forms in Modern Era/ test of critical ability of the candidates) TOPIC 3    (ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददास सिलेबसमे छथि आ रसमय कवि चतुर चतुरभुज विद्यापति कालीन कवि छथि। एतय समीक्षा शृंखलाक प्रारम्भ करबासँ पूर्व चारू गोटेक शब्दावली नव शब्दक पर्याय संग देल जा रहल अछि। नव आ पुरान शब्दावलीक ज्ञानसँ ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददासक प्रश्नोत्तरमे धार आओत, संगहि शब्दकोष बढ़लासँ खाँटी मैथिलीमे प्रश्नोत्तर लिखबामे धाख आस्ते-आस्ते खतम होयत, लेखनीमे प्रवाह आयत आ सुच्चा भावक अभिव्यक्ति भय सकत।) TOPIC 4                (बद्रीनाथ झा शब्दावली आ मिथिलाक कृषि-मत्स्य शब्दावली) TOPIC 5                (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोरिक गाथामे समाज ओ संस्कृति) TOPIC 6                (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- विद्यापति) TOPIC 7                (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- पद्य समीक्षा- बानगी) TOPIC 8                (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोक गाथा नृत्य नाटक संगीत) TOPIC 9                (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- यात्री) TOPIC 10               (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली रामायण) TOPIC 11               (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली उपन्यास) TOPIC 12               (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- शब्द विचार) TOPIC 13               (तिरहुता लिपिक उद्भव ओ विकास) TOPIC 14                 (आधुनिक नाटकमे चित्रित निर्धनताक समस्या- शम्भु कुमार सिंह)् TOPIC 15                 (स्वातंत्र्योत्तर मैथिली कथामे सामाजिक समरसता- अरुण कुमार सिंह) TOPIC 16                 (यू. पी.एस.सी. मैथिली प्रथम पत्रक परीक्षार्थी हेतु उपयोगी संकलन, मैथिलीक प्रमुख उपभाषाक क्षेत्र आ ओकर प्रमुख विशेषता, मैथिली साहित्यक आदिकाल, मैथिली साहित्यक काल-निर्धारण- शम्भु कुमार सिंह) TOPIC 17                (मैथिली आ दोसर पुबरिया भाषाक बीचमे सम्बन्ध (बांग्ला, असमिया आ ओड़िया) [यू.पी.एस.सी. सिलेबस, पत्र-१, भाग-“ए”, क्रम-५]) TOPIC 18                 [मैथिली आ हिन्दी/ बांग्ला/ भोजपुरी/ मगही/ संथाली- बिहार लोक सेवा आयोग (बी.पी.एस.सी.) केर सिविल सेवा परीक्षाक मैथिली (ऐच्छिक) विषय लेल] ........................................................................................................................ GENERAL STUDIES (PRELIMINARY & MAINS) GS (Pre) TOPIC 1 GS (Mains) NCERT-ENVIRONMENT CLASS XI-XII NCERT PDF I-XII TN BOARD PDF I-XII ALL INDIA RADIO ENGLISH NEWS ALL INDIA RADIO NEWS ARCHIVE ALL INDIA RADIO TALKS AND CURRENT AFFAIRS RAJYA SABHA TV NEWS DISCUSSIONS OTHER OPTIONALS IGNOU eGYANKOSH (अनुवर्तते) -गजेन्द्र ठाकुर २. गद्य २.१.रबीन्द्र नारायण मिश्र-लजकोटर-२९म खेप २.२.जगदीश चन्द्र ठाकुर ’अनिल’- आँखिमे चित्र हो मैथिली केर (आत्मकथा)- १९. तीन बरख आदापुरमेे २.३. योगेन्द्र पाठक ’वियोगी’- पिरामिडक देशमे (दोसर खेप) २.४. मुन्नाजी- बीहनि कथा- संगति २.५.ज्ञानवर्द्धन कंठ- लालदाइ २.६.किशन कारीगर- भोजकाजी मनेजर (हास्य कटाक्ष) २.७.अरविन्द ठाकुर- भीमनाथ झा “कुसुम” ! रबीन्द्र नारायण मिश्र लजकोटर (धारावाहिक उपन्यास) २९म खेप -२९- दुर्गापूजाक समय छल । चारूकात लोक पूजा-पाठमे लागल छल । दिल्लिओमे ठाम-ठाम अपन समाजक लोकसभ भगवतीक दसोदिन आराधना करैत छथि ।नाच-गान एवम् अन्य प्रकारक सांस्कृतिक कार्यक्रम होइत रहैत अछि ।अष्टमीक साँझमे अपन कर्मचारी सभक संगे जनकपुरीमे भगवतीक दर्शन हेतु गेल रही । ओहि ठाम कुसुम भेटि गेलीह । बहुत दिनपर  हुनकासँ भेंट भेल । ताबे बहुत किछु भए गेल छल । अपन हाल-चाल कहए लगलीह । "डाक्टर साहेब नहि रहलाह।" ओ ई बात ततेक सहजतासँ बजलीह जे हम छगुन्तामे पड़ि गेलहुँ। "की भेलनि?" " की होइतनि।ओ तँ एकटा पैर सदिखन मृत्यु दिस रखने रहैत छलाह। दिन-राति, जतए-ततए पीबएमे डुबल रहैत छलाह। ने अपन होश, ने परिवारक।कतबो किछु कहिअनि कोनो असर नहि होइत चलनि। एक दिन एहिना एकटा पहाड़ी संगीक संगे ओकरे ओहिठाम पीबैत-पीबैत पड़ि गेलाह। प्रात भेने हुनकर लहासे आएल।" "ई तँ बड़ अनर्थ भेल।" आब ओ नीकसँ एसगर भए गेल रहथि । कुसुम चुप रहि गेलीह। एहन उदास कहिओ नहि देखने नहि रही। जीवन एहन पहाड़ भए जाएत साइत ओ कहिओ नहि सोचने हेतीह। पढ़ल-लिखल व्यक्तिक संग रहितहुँ ओ सभ दिन असहाय रहैत छलीह।डाक्टर साहेबघर जँ अबितो छलाह तँ मात्र विपत्तिक सहोदर बनि कए। तेँ एक हिसाबे आब कुसुमकेँ चैन लगैत छलनि। पहिनहु किछु-किछु काज करथि मुदा आब व्यस्तता संगहि आर्थिक आवश्यकताक पूर्ति हेतु काज चाही। से जोगार होइत देरी नहि लागल । लताकेँ एकटा केओ चाहैत छल जे ओकरा राज-काजमे मदति करैक ।कोना-ने-कोना ओ कुसुमक संपर्कमे अएलीह । हुनका ओ पसिन्दो भेलखिन आ काज करब गछिओ लेलखिन।हमरा तँ ई बात ओहीदिन भेंट भेलाक बादे पता लागल। "कुसुम कोना छी?" "एकटा नया काज पकड़लहुँ अछि" "कतए?" "नीरजक ओहिठाम।" ""अहाँ कोना जनैत छिअनि?" "छोड़ु ई बात।" कुसुमसँ गप्प-सप्प भइए रहल छल कि लता सेहो ओतहि आबि गेलीह । "हिनका कोना चिन्हैत छिअनि?" -लता बजलीह । हम किछु कहितिऐक ताहिसँ पहिने कुसुम बाजि ऊठलीह- "हमसभ एकहिठाम रहैत छलहुँ।” लता हमर मुँह बकर-बकर देखैत रहि गेलीह । हमसभ तीनूगोटे संगहि भगवतीक दर्शन केलहुँ । प्रसाद लेलहुँ । लगीचेमे गरम-गरम जिलेबी बनि रहल छल । मखानक खीर सेहो छल ।अपना ओहिठामक सभ चीज-वस्तु उपलव्ध छल । तीनूगोटे भरिपेट खेलहुँ । खाइत-खाइत हँसी ठठ्ठा सेहोहोइत रहल । लगबे नहि करए जे केओ आन अछि । समय कोना बीति गेल से नहि कहि । राति भए गेल छल। हमसभ अपन-अपन घर दिस बिदा होबएसँ पूर्व किछु-किछु सनेस किनलहुँ । मखान,मिहिका चूरा,कुम्हरौरी अपनो किनलहुँ आ किछु हुनको सभकेँ देलिअनि । तिलकोरक पात,तीलक अँचार आ धात्रीक अँचार सेहो कीनलहुँ । " ई की छैक?"-कुम्हरौरी दिस इसारा करैत लता बजलीह। "खेबै तँ मुँहसँ छुटत नहि ।" "मुदा छैक की?" "कुम्हरसँ बनाओल जाइत छैक ।" तैओ नहि बुझलखिन कारण कुम्हर देखने होथितखनने? हमरा नहि रहल गेल । भभा कए हँसा गेल । सभगोटे आनन्दपूर्वक ऐहिठामसँ बिदा भए गेलहुँ । अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। जगदीश चन्द्र ठाकुर ’अनिल’ आँखिमे चित्र हो मैथिलीकेर ( आत्मकथा ) १९.तीन बरख आदापुरमे 25   नवम्बर  1985 क’ हम आदापुर  शाखामे प्रवेश  केने रही | आदापुर  रेलवे स्टेशनक दोसर कात छल शाखा | ई स्टेशन नरकटियागंज-सीतामढ़ी-दरभंगा लाइनपर अछि  | शाखामे निम्नलिखित सदस्य सभ छलाह अथवा बादमे एलाह : रामजी चौबे जी – शाखा प्रबंधक अरुण कुमार –कृषि वित्त अधिकारी सुरेन्द्र कुमार द्विवेदी –कृषि वित्त अधिकारी राम एकबाल प्रसाद –मुख्य खजांची श्याम बिहारी प्रसाद’प्रमोद’-अधिकारी त्रिलोकी नाथ प्रसाद-विशेष सहायक नलिन विलोचन-लिपिक सह खजांची वीरेंद्र कुमार –लिपिक सह खजांची डी. बी. अधिकारी-सुरक्षा प्रहरी हरिमोहन ठाकुर –चपरासी शमीम अहमद-चपरासी बीर बहादुर साह –अंश कालीन कर्मचारी शाखामे कृषि ऋण बेशी छलैक | कृषि वित्त अधिकारी ओहि विभागक काज सभ देखि रहल छलाह | पेंशन-भुगतान काज सेहो बहुत छलै, त्रिलोकी बाबू ओकर भार उठौने छलाह | खजाना विभागक काजक जिम्मेदारी  राम इकबाल प्रसाद जीकें छलनि | शाखामे जतेक सदस्य छलाह से दैनिके काजमे एतेक बाझल रहैत छलाह जे शेष-मिलानक काज नहि क’ पबैत छलाह | मियादी ऋणक शेष-मिलान सेहो तीन सालसं लंबित छल | एहिसं मांग ऋण आ डी आर आइ ऋणक शेष सेहो सामान्य बहीसं मिलल नै छल | शाखा कार्यालय तारा बाबू (तारा चन्द प्रसाद )क मकानमे छल | तारा बाबू अपने बिजली विभागमे काज करैत छलाह | हुनक भ्राता अनूठा बाबू (अनूठा लाल प्रसाद ) स्थानीय उच्च विद्यालयमे प्रधानाध्यापक छलाह आ हुनके मकानमे शाखा प्रबंधकक आवास छल | शाखा प्रबंधक चौबेजी पूर्वमे हमर शाखा प्रबंधक रहि चुकल छलाह बसंतपुर शाखामे | हुनक स्थानान्तरण सिवान जिलामे गोरियाकोठी शाखामे भेलनि | हुनका गेलाक बाद ओही आवासमे हमहूँ रह’ लगलहुं | हमरा अनुरोधपर मास्टर साहेब ओहि आवासमे एकटा कोठली और बढ़ा देलनि, ओही अनुपातमे किराया राशिमे सेहो वृद्धि कएल गेलनि | मास्टर  साहेब लग कहियोक’ साँझमे बैसैत छलहुँ त बहुत तरहक जानकारी सेहो भेटैत छल जाहिसं बैंकक काज करबामे सेहो सहयोग भेटैत छल | मास्टर साहेब पान खेबाक शौकीन छलाह | हमरो सभकें नीक पान खुअबैत छलाह | मास्टर साहेब अपन एक पुत्रीक विवाह मधुबनी ठीक केलनि | लड़का बला सभ लडकी देखय आएल रहथिन त हमरो सभकें बजौलनि | बहुत शालीनताक संग सभ प्रक्रिया भेलै, से अनुकरणीय लागल | मास्टर साहेबक सलाहपर हमर बेटीक नाम  बसंत कुमारीसं वंदना कुमारी भेलनि | मास्टर साहेब बहुत अनुशासनप्रिय छलाह आ व्यवहारमे अदभुत शालीनता रखैत छलाह | ओहि ठामसं स्थानान्तरणक बादो बहुत बरख धरि पत्राचार होइत रहल | शाखामे किछु बरख पहिने शाखा प्रबंधक, कृषि  सहायक आ चपरासी- तीनटा सदस्य बैंकसं बाहर भ’ गेल छलाह | ओहिमे सं एक गोटे (जे शाखा प्रबंधक छलाह ) दोसर कोनो नोकरी कर’ लगलाह, शेष दू गोटे उच्च न्यायालयमे अपील केने छलाह | केस चलि रहल छलै | ओहि सिलसिलामे एक बेर ओहि समयक बादक शाखा प्रबंधक आ ओहि समयमे  नियंत्रक कार्यालय मुजफ्फरपुरमे स्थित ग्रामीण विकास विभागक अधिकारीक संग  हमरो ( वर्तमान शाखा प्रबंधक ) पटना बजाओल गेल छल | दू  सप्ताह धरि सी बी आइ एस.पी.ऑफिस, सी बी आइक ओकील साहेबक ऑफिस  आ उच्च न्यायालय  दौडय पडल रह्य | बहुत रास कागज सभ सेहो जमा करय पडल रहय | पता नहि ओकर परिणाम की भेलै | सी बी आइ ऑफिसमे सेहो अधिकारी लोकनिकें बड़ी-बड़ी राति धरि काज करैत देखने छलियनि | हमरो सभकें बहुत-बहुत राति धरि आ छुट्टीक दिन सेहो काज करबाक अभ्यास भ’ गेल छल | मुदा, शेष मिलानक काज तैयो संभव नहि भ’ पबैत छलैक | एक रविक’ ( 24  अगस्त  1986) किछु काज करय बैसल रही | किछु और सदस्य छलाह | किछु कालक बाद पता चलल जे कोनो बाँध टूटि गेलै आ नेपालसं पानि आबि रहल छै | दूरसं पानिक आभास भ’ रहल छलै | जे सभ बैंक आएल छलाह, चलि गेलाह | हमरा मोनमे संकल्प भेल जे आइ टर्म लोनक बैलेंस मिलाइए क’ शाखासं जाएब | बीर बहादुरकें तीन सालक वाउचरक बंडल हमरा लग राखि देबय कहलिऐ आ भीतरसं गेट बन्द कए हम एसगरे लागि गेलहुँ शेष मिलान कर’ | बैलेंस बुकमे एक तिमाहीक अंतिम तिथिक शेष उतारैत छलहुँ, टोटल करैत छलहुँ | जनरल लेजरसं मिलान करैत छलहुँ, अंतर नोट करैत छलहुँ | बहीक अनुसार जाहि-जाहि तिथिक’ डेबिट-क्रेडिट भेल रहै छलै, ओहि तिथिक वाउचर देखैत छलहुँ, जाहि दिन जे गलती देखाइत छल से नोट क’ लैत छलहुँ | एक तिमाहीमे भेल गलतीक समायोजन हेतु उपयुक्त वाउचर बना’ क’ देखैत छलहुँ | एहि गलती सबहक समायोजनसं बैलेंस मिलि जाइत छलै, तखन दोसर तिमाहीक लेल यैह प्रक्रिया अपनबैत छलहुँ | ऑफिसक पाछाँ सड़क छलै | सड़कपर चलैत लोक बाढ़िक स्थितिपर टिप्पणी करैत छल, जाहिसं स्थितिक पता चलैत छल | करीब तीन बजे हम हाथ धोबय गेलहुँ त रस्तापर पानि अबैत देखलिऐ | टिफ़िनमे जे अनने रही, से जलखैक’ क’ पुनः लागि गेलहुँ शेष मिलानमे | शेष मिलानमे आनन्द सेहो अबैत छै जखन गलती सभ पकडा जाइत छै आ शेष मिलान होमय लगैत छै  | करीब साढ़े आठ बजे रातिमे तीन सालक बैलेंस मिलि गेल | बहुत ख़ुशी भेल | सावधि ऋणक बैलेंस मिललासं मांग ऋण आ डी आर आइ ऋणक बैलेंस सेहो मिलि गेलै | भीतरसं देखलिऐ पानि बैंकक हॉलमे प्रवेश करय बला छल | हम सभटा वाउचरकें ऊंच स्थानपर राखिक’ सुनिश्चित केलहुं जे कोनो बहुमूल्य चीज पानिमे नै भीजै | सडकपर भरि डांड पानि रहै | पैंट निकाललहुं, ब्रीफ़केसमे रखलहुं | गेट खोलि बाहरसं ताला लगाय ब्रीफ़केस हाथसं ऊपर उठाय जंघिया पहिरने सडकपर उतरि गेलहुँ | डांड धरि पानि छलै | डेरा पहुँचलहुं त देखलहुं डेरामे सेहो पानिक  प्रवेश भ’ चुकल छल | भोजन पहिने बनि चुकल छल | फ्रेश भ’क’ भोजन क’क’ बड़ी राति धरि जगले रहै गेलहुँ | पानिक प्रकोप दू दिन धरि रहल मुदा बैलेंस मिलबाक ख़ुशी बहुत दिन धरि रहल, एखनो सोचिक’ आनन्द अबैत अछि | बाढ़ि  लगभग सभ साल अबैत छलै | एक बेर सिवानसं अबैत रही | मोतिहारी पहुँचलहुं त पता चलल बाढिक कारणे आगूक रस्ता बन्द छै आ अनुमान छै जे चारि-पाँच दिन अहिना रह्तै | मोतिहारीमे बैंक शाखाक लग एकटा होटलमे टिकलहुं | चारि-पाँच दिन होटलमे पडल रहब ठीक नै लागल | ब्रांच गेलहुँ | शाखा प्रबंधककें कहलियनि जे हम होटलमे टिकल छी, अहाँकें कोनो काज लंबित हो त कहू हम क’ दैत छी | हुनका पेंशनराशिक पुनर्भुगतान प्राप्त करबाक लेल दाबा प्रस्तुत करबाक काज बहुत दिनसं लंबित रहनि | मुदा मंगनीमे हमरासं काज कराएब ठीक नै लगलनि | क्षेत्रीय प्रबंधककें फोनसं पुछ्लखिन | ओ आदेश द’ देलखिन | ओ स्टाफ हाजिरी-बहीमे हमर नाम लिखि देलखिन, हमर उपस्थिति बनल | माने हमरा छुट्टी नै लेब’ पडल | हम अपना शाखाक बदला मोतिहारी शाखामे काज केलहुं  चारि दिन | शाखाक एकटा लंबित काज पूर्ण भ’ गेलै | हम चारि दिन बाद बस चल’ लगलै त मोतिहारीसं आदापुर चलि गेलहुँ | स्टेशन मास्टर छलाह डी के झा ( देव कान्त झा ) जे सीतामढ़ीक छलाह, मैथिलीयो  बजै छलाह मुदा हिन्दीसं प्रेम छलनि | हिन्दीमे पहिने किछु-किछु लिखैत छलाह | दिनकर जीक कृति ‘रश्मिरथी’, ‘कुरुक्षेत्र’, ‘उर्वशी’ आ ‘संस्कृति के चार अध्याय’क प्रशंसक छलाह | झाजीक ओत’ प्रो. हरीन्द्र हिमकर जीसं परिचय भेल जे रक्सौल कॉलेजमे हिन्दीक प्राध्यापक छलाह | हिमकर जीक एकटा बाल गीतक पोथी सेहो प्रकाशित भेल छलनि | हिनका लोकनिक संगतिमे हमरो  साहित्यिक भोजन सेहो भेटि जाइत छल | हिन्दी दिवस अथवा आनो अवसरपर हिन्दीमे कवि गोष्ठी हुअ’ लागल | दिनकर स्मृति पर्व सेहो मनाओल गेल | हमरा शाखाक सदस्य सभ सेहो काव्य-पाठमे रूचि लैत छलाह | प्रमोदजी, वीरेंद्र जी, द्विवेदी जी सभ गोटे विभिन्न अवसरपर कोनो साहित्यिक रचना अवश्य सुनबैत छलाह | द्विवेदी जी गीत सेहो नीक गबैत छलाह | दुष्यन्त कुमारक किछु गजल सेहो ई सभ प्रस्तुत करैत छलाह | डी के झा जी आ हिमकर जीक संगतिमे हमहूँ दिनकर जीक कृति ‘रश्मिरथी’, ‘कुरुक्षेत्र’ आ ‘उर्वशी’क विषयमे बहुत किछु जानि सकलहुं | हिमकरजी बच्चा  सभकें सेहो कविता पढनाइ  आ मंच संचालन केनाइ सिखबैत छलाह | दिनकर स्मृति पर्वमे हमरा ओत’ शैलेन्द्रकें कहलथिन जे अहाँक नाम हम कार्यक्रममे द’ देने छी, अहूँकें एकटा कविता मंचपर पढ़’ पडत | शैलेन्द्र रश्मिरथीक चारिम कि पांचम सर्गक किछु भाग तैयार केलनि आ कार्यक्रम दिन जखन हिमकर जी शैलेन्द्रक नाम लेलखिन त मंचपर जाक’ खूब सुन्दर काव्य-पाठ केलनि | डी के झा जी सं वर्तमानमे सम्पर्क नै अछि | प्रो. हिमकर जीक रचना त फेस-बुकपर देखि लैत छी | बहुत नीक  लगैए | आशा करैत छी झाजी सेहो अहिना कतहु भें ट भ’ जेताह | आदापुरसं  किछु दूर बेलदरबा गाममे छलाह शिवजी बाबू | हारमोनियमपर सुन्दर भजन गबैत छलाह | हुनकर गाएल गीत ‘ भरत भाई, कपिसौं उरिन हम नाहीं’ एखनो मोन पडैत अछि | हुनकोसं सम्पर्क नहि राखि सकलहुं | सीतामढ़ीमे कतहु मोरारी बापूक कार्यक्रम भेल रहै | ‘राम बन गमन’ केर कैसेट उपलब्ध करौने छलाह ग्रामीण बैंकक शाखा प्रबंधक मिश्रजी |  आह ! आनन्दक बरखा क’ दै छल ओ कैसेट | ओहि अवधिमे दूरदर्शनपर शुरू  भेलै अत्यन्त लोकप्रिय धारावाहिक ‘रामायण’ | बहुत गोटे ‘रामायण’ देखबाक लेल टी. वी. किनलनि | हमहूँ एकटा श्वेत-श्याम टी.वी. नेल्को किनलहुं | लगभग ओही समय ‘रामायण’पर आधारित ‘दीक्षा‘ आ अन्य अदभुत उपन्यास सभ एलनि नरेन्द्र कोह्लीक | बहुत प्रेरणा भेटल एहि तरहक उपन्यास सभ पढलासं | एहि अवधिमे हम मैथिलीमे कोनो नव रचना नहि क’ सकलहुं, पहिलुक लिखल एकटा रचना ‘एना गे सुगिया कतेक दिन रहबें’ मिथिला मिहिरमे जून 1987  केर पहिल पक्षमे प्रकाशित भेल ( ‘मिथिला मिहिर’ पाक्षिक भ’ गेल रहै) | किछु नीक पोथी सभ पढबाक अवसर अवश्य भेटल | हमर अनुभव अछि जे तन-मनकें स्वस्थ राखक लेल नीक साहित्यक अध्ययन करैत रहबाक चाही | तन-मन स्वस्थ रह्य तखने नोकरी सेहो नीक जकाँ क’ सकैत छी आ पारिवारिक जिम्मेदारीक सेहो नीक जकाँ निर्वाह कएल जा सकैत अछि | नीक चिट्ठी सेहो नीक साहित्यक काज क’ सकैत अछि | सिवानसं प्रो. गंगानंद झाक एकटा पत्र भेटल : सीवान 30.04.87 प्रिय ठाकुरजी, नमस्कार | पत्र भेटल, पत्र नहियों भेटलापर अहाँ स्मृतिसं विच्छिन्न नहि होइत छी | हमरा लोकनिक इच्छा रहैत अछि जे डिवीज़नल ऑफिस अयबाक प्रत्येक अवसरक उपयोग अहाँ अवश्य करी | उपर्युक्त पांती स्पष्ट क’ देने हएत जे अहाँ किएक महत्व रखैत छी | गंगानंद झा बिना ककरो आग्रहें, निस्संकोच मैथिलीमे लिखबाक प्रयास क’ रहल छथि, ई संभव भ’ गेल, जकर प्रमाण ई पत्र स्वयम अछि. अपन एहि लगनशील व्यक्तित्वक रक्षा अहाँ निश्चय करैत रहब जाहिसं परिवेश सकारात्मक तरीकासं प्रभावित हुए | ई बात प्रायः अहाँकें आकर्षित नहि करत जे एहि पत्रक पूर्वहु हम एक कथाक प्रसंगमे मैथिलीमे पत्राचार कयलहुं और  हमर स्थिति हास्यास्पद नहि भेल. हमरा मोन पडैत अछि जे पृथ्वी राज कपूर अपना सम्बन्धमे कहैत छलाह जे हम हिन्दी नहि पढल रही, किन्तु तुलसी-जयन्तीक अवसरपर हमरा अध्यक्ष बना देल गेल. ओहि अवसरपर हमरा लागल जेना तुलसीदासक तस्वीर हमरा कहैत अछि जे अहाँ हिन्दी सीखू. तस्वीरसं,किताबसं सिखनाइ अपेक्षाकृत सोझ छै, ई नहि बुझि पडैत छै जे कियो हमरापर अपनाकें स्थापित करबाक प्रयास क’ रहल अछि. जीवित मनुष्य सेहो अपनासं उमेरमे छोट, एहन लोकसं सिखलापर अहम (ego) कें चोट लगै छै, तें लोक लोकसं नहि सीखि पबैत अछि. अहाँ एकरो संभव क’ देलिऐ, हमर अहमकें बिना आहत केने. अहाँ हमरा एक उपलब्धिसं युक्त करबामे सफल भेलहुँ. आब हमरा मैथिलीमे लिखैत काल ई संकोच बाधा नहि दैत अछि जे भाषा-व्याकरणक त्रुटिसं भरल अभिव्यक्ति हएत. हमर साधुवाद और धन्यवाद दुनू ग्रहण करब | अहाँ जीवन संग्रामक आह्वानक स्वीकार और अंगीकार करैत रहब परन्तु अपन व्यक्तिगत विशिष्टतासं साहित्यक माध्यमसं जीवन देवताकें आहुति दैत रही,एकरो प्रति सजग रही, से हमर अनुरोध और आकांक्षा. संसारमे क्षुद्रता बहुत छैक और क्षुद्रताक वृद्धिक अनुकूल परिवेशो बराबर भेटैत रहैत छैक, तें अपनामे यदि किछु उच्चता, विशिष्टता पबैत छी त ओकरा जिएबाक भरिसक कोशिश अवश्य करी. हमरा लोकनि ठीक-ठाक छी . कन्यादानक प्रयास सफलता मण्डित नहि भेल अछि. हम जुटल छी. अप्पू पटनेमे छथि.एहि सालक पटना प्रगतिशील लेखक संघक सम्मेलन कयने छलाह. पूर्ण रिपोर्ट एखन हमरो उपलब्ध नहि भेल अछि. बब्बू-बेबी स्वस्थानमे छथि. बसन्ती, मैथिली और बौआजी नीके छथि ने ? हुनका सभकें तथा हुनका सबहक मायकें हमरा दुनूक आशीर्वाद कहबनि. आब अहाँ खुश छी ने ? हमर ई मैथिलीक पत्र अहाँक अन्दर की प्रतिक्रिया उत्पन्न कयलक, जान’ चाहब. पत्र देब. शुभेच्छु गंगानंद झा. हम सौभाग्यशाली छी जे हमरा जगौने रखबाक लेल एहि तरहक संवादक  प्रसाद एखनो धरि भेटैत आबि रहल अछि | मोन पडैत अछि रवीन्द्र नाथ टैगोरक गीतक ओ पांती : ‘ अहाँ हमरा जगौने रहू, हम नीक-नीक गीत सुनबैत रहब |’ साहित्यक काज होइत छैक जागल लोककें जगाक’ राखब | जागल लोककें सूति रहबाक बहुत सम्भावना बनल रहैत छैक | शहडोल  ( मध्य प्रदेश )क पारस मिश्र जीक एकटा कविताक दू पांती मोन पडैत अछि : ‘अच्छे भले चले थे घर से लेकर नेक ईरादा लोग जाने क्यों हो गए अचानक बिकने पर आमादा लोग’ आदापुरमे एकटा और बैंक छलै | एकदिन ओहि बैंकक लिपिक  एलाह आ हमरा कहलनि जे हमर शाखा प्रबंधक अंधा-धुंध लोन देने जा रहल छथि, हम बुझै छिऐ जे बहुत गलती क’ रहल छथि आ हमरासं वाउचर बनबा रहल छथि, हम नै चाहैत छी जे एहिमे हमहूँ शामिल होइ मुदा हमरा वाउचर बनयबा लेल ओ दबाब दैत छथि | हम कहलियनि जे किछु दिन पहिने हमरा भेटल छलाह आ कय बेर भेटल छलाह, हमरा हुनकामे कोनो आपत्तिजनक बात नहि बुझाएल छल | ओ कहलनि जे ई कलकत्ताक रह’बला छथि, एते दिन एसगर रहैत छलाह त ठीक छलाह, दू सप्ताह पहिने हिनक परिवार एलनि अछि, तकर बादे हिनक ई नव रूप प्रगट भेल छनि | हम कहलियनि जे अहाँक स्थानपर हम रहितहुं त अपन यूनियनक नेतासं एहि विषयमे उचित सलाह देब’ कहितियनि | ओ चलि गेलाह आ फेर की भेलै से हम नै बुझलिऐ | करीब दस दिनक बाद एक दिन स्टेशन मास्टर झा जी कहलनि जे हम त फेरीमे पड़ि गेल छी | झाजी कहलनि जे गाड़ी चल’ लगलै तखन ओ मैनेजर साहेब हमरा आगाँ एकटा तौलियामे बैंकक बहुत रास हस्ताक्षर कएल डॉक्यूमेंट राखिक’ ई कहैत गाड़ीपर चढि  गेलाह : ‘ हमारा दिमाग खराब हो गया है,हम ईलाज कराने कलकत्ता जा रहे हैं, हमारे बैंक से कोई आएगा तो दे दीजिएगा |’ बादमे पता चलल जे नव शाखा प्रबंधक ओत’ आबि गेल छथि आ जांच चलि रहल छै | ओकर बाद की भेल हेतै से अनुमान कएल जा सकैत अछि | संतोषक बात यैह अछि जे बैंकमे एहि तरहक घटना-दुर्घटनाक  प्रतिशत बहुत थोड़ होइत अछि | हमर पारिवारिक स्थिति : हमर स्वास्थ्य मोटा-मोटी सामान्य रहल | पत्नीकें यदा-कदा किछु चिकित्साक आवश्यकता पडैत छलनि | अधिक बेर ओतहि रामाश्रय बाबूक सलाह लैत छलहुँ, एक बेर दरभंगा डा.सत्यवती आ डा.ए.एम. झाक  देख-रेखमे किछु दिन रहलीह | छोट भाय ललनजी आइ आइ बी एम पटनासं एम बी ए क’ क’ दिल्लीमे  अपन जीविकाक तलाशमे लागि गेलाह, जत’ हमर छोट बहिन,बहिनो, दू टा भागिन आ एकटा भगिनी रहैत छलीह | रतनजी आर के कॉलेज मधुबनीसं आइ एस सी क’ क’ बी एस सी मे गेलाह | कहियोक’ आदापुर अबैत छलाह आ दू-चारि दिन रहिक’ चलि जाइत छलाह | बाबू दरभंगाक डॉक्टरक सलाहसं चलि रहल छलाह | बच्चा सबहक नाम चिल्ड्रेन स्कूलमे लिखाएल गेलनि | माएक स्वास्थ्य सेहो लगभग सामान्य रहलनि | हमर छोट भाए ललनजीक  विवाह, लखनपट्टीमे हमर भगिनी कविताक विवाह आ हमर मामा गाममे हमर ममियौत बहिन मंजूक विवाह आदि शुभ अवसरक लेल विभिन्न काज सभ हुनका व्यस्त रखबाक लेल पर्याप्त छल | हम बैंकसं आवास-ऋण लेबाक हेतु मधुबनी-दरभंगामे कतहु उपयुक्त भूमि अथवा बनल आवासक खोज केलहुं | बाबूजी मधुबनीमे कय ठाम पता लगौलनि, मुदा जमीनक कागज ठीक-ठाक नै भेटलनि | दरभंगामे बेता  चौक लग कोनो मकान बिकयबाक सूचना भेटल, मुदा ओ नीक नै लागल | गामपर धीरे-धीरे एकटा कोठली आ बाथ रूम बनेबाक मोन बनेलहुं | गामपर कोठलीयोसं बेशी जरूरी छल बाथ-रूम बनेबाक | किछु-किछुक’ एहि दिशामे प्रयास शुरू केलहुं | बच्ची किछु दिन आदापुर आ किछु दिन हमरा गाममे रहैत छलीह | शैलेन्द्र  एक बेर गाममे रहथि त संगी सबहक संग खेलैत-दौड़ैत पडोसीक आंगनमे ऐंठारपर खसि पड़लाह | माथसं खून बह्य लगलनि | बाबू डिटोल आ टिंचरक उपयोग केलनि त खून बहनाइ बन्द भेलनि | भोला डॉक्टर लग ल’ जाइ गेलखिन | उपचार किछु दिन चललनि | हमरा शनि दिन ई समाचार बाबूक चिट्ठीसं प्राप्त भेल | बैंक बन्द भेलाक बाद चिट्ठी पढने रही | सभ  गोटे चलि गेल छलाह | तुरंत गाम जेबाक मोन भ’ गेल | मुदा चावी लेबाक लेल कोनो अधिकारी उपलब्ध नै छलाह | निर्णय लेलहुं जे आइए जाएब आ काल्हि गामसं चलि देब | स्टेशनपर गाड़ी सीतामढ़ी जाए बला लागल छलै | ब्रीफ़केस  लेलहुं, जल्दी-जल्दी बैंकक गेट बन्द केलहुं, स्टेशन पहुंचि टिकट  ल’क’ गाड़ीमे चढलहुं कि गाड़ी चल’ लगलै जेना हमरे लेल रूकल छल होइ | सीतामढ़ीमे एकटा टैक्सी लेलहुं | साढ़े आठ बजे रातिमे घर पहुंचि   गेलहुँ | शैलेन्द्रकें हंसैत-बजैत देखिक’ नीक लागल | दोसर दिन स्नान-भोजन क’ क’ मधुबनी गेलहुँ, सीतामढ़ी बला बससं सीतामढ़ी आ ओत’ सं ट्रेनसं आदापुर रातिमे पहुंचि गेलहुँ | ललनजीक विवाह : ललनजीक विवाहक लेल कन्यागत सभ बाबू लग गाममे पहुँचैत छलाह | किछु कथाकें ओ अपनहि लग निष्पादन क’ दैत छलाह, किछु कथाकें हमरा लग पठा दैत छलाह | हम चाहैत छलहुँ जे ललनजी स्वयं अपन विवाहमे निर्णय लेथि, मुदा एहि लेल ओ तैयार नै छलाह | कयटा प्रस्ताव कटि  चुकल छल | एकरा लोक कहैत छैक जे जत’ नै लिखल छलै तत’ नै भेलै, भावी एखन नै एलैए | हम चाहैत रही जे हमर विवाह जेना भेल ताहिसं नीक जकाँ हिनक विवाह होनि | 29  अप्रैलक’  11.30 बजे रातिमे दू गोटे आदापुर पहुँचलाह | कन्यागत छलाह कटैया (बेनीपट्टी)क डा.ताराकांत मिश्र जे दानापुर कॉलेजमे हिन्दीक प्राध्यापक छलाह | हुनका संग एक गोटे हुनके टोलक छलखिन जिनका लोक गांधीजी कहै छलनि, ओ हमर ससुरक भागिन छलखिन | दुनू गोटे कहलनि जे भोजन नै करब, भोजन क’ क’ आएल छी | कतबो कहलियनि, नै मानलंनि | दोसर दिन प्रोफेसर साहेबसं बहुत गप-शप भेल | हमरासं कथा स्वीकार करबाक अनुरोध करैत रहलाह | हुनकासं हम पुछलियनि जे अपनेकें ई कथा किए पसन्द अछि | ओ कहलनि, ‘हमरा मामाजीसं ( हमरा ससुर कें ओ मामा कहैत छलखिन)अहाँ सबहक विषयमे सभ बूझल अछि, हम हुनका संगे अहांक गामपर एक बेर गेलहुँ त सभसं पहिने अहाँक अनुजकें देखलियनि, दरबज्जापर छलाह, हमरा ओहो नीक लगलाह, हमर जेठ जमाए सेहो एम बी ए क’ क’ नीक नोकरीमे छथि, अहू दृष्टिसं हमरा ई कथा पसन्द अछि |’ मिथिलामे ओहि समय लडकी देखबाक परम्परा नै छलै | ई कतेक उचित आ कतेक अनुचित, एहि विषयपर बहुत गप्प भेल | विवाहमे भावी प्रवल होइछै, लोक कोनो आन माध्यमसं लडकीक विषयमे पता लगबैत अछि, कतेक ठाम लडकी देखयबाक क्रममे बहुत अनियमितता सेहो देखल जा रहल छै, एहि सभ विषयपर हमरा सबहक बीच गप्प भेल | हमर जिग्यासाक समाधान करबाक प्रयास केलनि प्रोफेसर साहेब | प्रोफेसर साहेब ईहो कहलनि जे शास्त्रमे लिखल छै जे तीन ठाम झूठ बजलासं पाप नै होइछै : जखन जानपर संकट हो तखन,  कियो गायकें मार’ जाइत हो  तखन आ कन्यादानक प्रसंगमे | ओ अपन विचार कहलनि जे लोककें परिवारकें प्रधानता देबाक चाही, परिवारसं संस्कारक पता चलैछै, संस्कारसं आगांक जेनरेशन प्रभावित होइछै | प्रोफेसर साहेब हमरासं बहुत बेशी अनुभवी छलाह, विचारवान छलाह, हमर सभ संदेह्क निराकरण करैत छलाह | हमरा ललनजी आ बाबूसं विचार करब आवश्यक लगैत छल तें हम किछु समय चाहैत छलहुँ | हमरासं ओ स्वीकारोक्ति चाहैत छलाह | हम कहलियनि जे एहि लेल हमरा किछु समय चाही | हम ‘हं’ नहि कहलियनि तें ओ हमरा डेरापर पानि आ चाहक अतिरिक्त किछुओ  ग्रहण नै केलनि आ 30  क’ 1.30 बजे  बला ट्रेन पकडि लेलनि | हुनक संगे आएल गांधीजी रहि गेलाह | हमरा डेरापरसं हुनक भुखले जाएब हमरा बहुत कचोट देलक, मुदा हम बिना सभसं विचार केने  कोना गछि लितियनि | गांधीजी चारि-पाँच दिन रहलाह | गांधीजी प्रोफेसर साहेबक कन्याक प्रशंसा करैत एक दिन बच्चीकें कहलखिन जे तोरासं सै गुणा नीक छै | गांधी जी प्रोफेसर साहेबक परिवारक सभ गोटेसं खूब नीक जकाँ परिचित छलाह, सबहक प्रशंसा जाधरि रहलाह, करैत रहलाह | गांधीजी हमरा ससुरक अपन भागिन छलखिन आ प्रोफेसर साहेबक निकटतम पडोसी छलखिन | ओहि समय अही तरहक लोकक माध्यमसं लोक कन्या आ कन्यागतक परिवारक विषयमे पता लगबैत छल | प्रत्यक्ष रूपसं पता लगेबाक परम्परा मैथिल ब्राह्मणमे नै छलै | कन्याक विवाहक लेल किछु झूठो बाजक आवश्यकता होइ त से करब लोक धर्म बुझैत छल | आ विवाह भ’ गेलाक बाद लोक एकरा भावीक बात मानि संतोष क’ लैत छल | हमर एकटा मित्र कहैत छलाह जे विवाहमे जौं किछु झूठ नै बाजल जाइ त एकोटा विवाह ठीक हएब असंभव भ’ जेतै | गांधीजी 4 मइ क’ चलि गेलाह | हम सभ किछु दिन धरि प्रोफेसर साहेब आ गांधीजीक बातक समीक्षा अपना स्तरसं करैत रहलहुं, फेर गाममे बाबूजी आ दिल्लीमे ललनजी आ ओझाजीसं सम्पर्क कय हुनका सबहक विचारसं ताल-मेल बैसयबाक प्रयास करय लगलहुं | एक दिन भोरे-भोर हमर ससुर एकटा सज्जनक संग पहुँचलाह | ट्रेन एबाक समय नहि छलै, तखन एते भोरे कोना एलाह, से पुछलियनि त कहलनि जे दुइए बजे रातिमे एलहुं, ओते रातिक’ जगाएब उचित नै लागल तें स्टेशनपर अखबार ओछाक’ सूति रहै गेलहुँ | ई जे कहलनि, से प्रोफेसर साहेबक सुपुत्र छलाह अशोक कुमार झा जे नागपुरमे कोलियरीमे इंजिनियर छलाह | हमरा सभकें परेशानी नै हो, से सोचिक’ रातिमे अखबार ओछाक’ स्टेशनपर रहि जाएब, ई सोचिक’ आ दू दिन धरि  संगमे रहलापर हुनक आचार-विचार देखिक’ हम सभ हुनक  बुद्धि आ विवेकसं ततेक प्रभावित भेलहुँ जे मोने मोन  हम हुनक प्रस्तावक स्वीकृति द’ देलियनि | हमरा लागल जे एहि परिवारक धिया-पूता सभ अवश्य नीक संस्कारसं युक्त हेथिन आ विवाहमे  एहि पक्षकें प्रधानता देबाक चाही | अशोक जीक विचार भेलनि जे  दानापुर हुनका घरपर चलिक’ कन्याक निरीक्षण क’ लेल जाए | ओ कहलनि, ‘हमरा विश्वास अछि जे अहाँकें अवश्य  पसन्द भ’ जाएत, आ यदि नै पसन्द भेल त अहाँ एकरा रिजेक्ट क’ सकै छी, हम सभ मानि लेब जे एत’ लिखल नै छलै, हम सभ दोसर ठाम प्रयास करब |’ अशोक बाबूक प्रस्ताव सूनि हमरा मोनमे दू टा ओकील अपन-अपन तर्क देब’ लागल : ‘मैथिल ब्राह्मण समाजमे एना कतहु सुनलिऐए ? लड़कीकें कोनो सार्वजनिक स्थानपर देखबाक कार्यक्रम बनाउ |’ ‘घरपर गेलासं किछु और जानकारी प्राप्त भ’ सकैए, सार्वजनिक स्थानपर देखलासं और की बुझबै ?’ ‘अहाँ लड़का बला छी, अहाँ किए जेबनि हुनका ओत’ ? हुनका जत’ जै बेर बजेबनि, हुनका आब’ पडतनि |’ ‘हमरो जाहि घरसं लडकी अनबाक अछि, से देखबाक चाही ने ? ओ तीन बेर हरान भेलाहए, एको बेर हमरो सभकें  कष्ट करक चाही ने ?’ अशोक बाबूक जीत भेलनि | हम तीनू गोटे दानापुरस्थित मिथिला कॉलोनीमे प्रोफेसर साहेबक अपन आवासपर छलहुँ | शैलकें देखलियनि | ऊंचाइक दृष्टिसं जोड़ी बेमेल हएत, से साफ़ बुझाएल | चर्चा भेल | प्रोफेसर साहेब, इंजिनियर साहेब सभ गोटे कतेक उदाहरण द्वारा एहि अन्तरकें सामान्य अंतर मानैत एहि बातकें ओतेक महत्व नहि देबाक अनुरोध केलनि | अशोक बाबू हमरा संतुलित करबाक लेल एक बेर फेर देखौलनि मुदा हमर राय वैह रहल | हमरा मोनक भीतर दूटा ओकील फेर जिरह कर’ लागल | ‘लोक देखतै त अहींकें दोख देत |‘ ‘बुद्धि-विवेक नमहर रहक चाही |’ ‘आ जौं ओहो छोटे होइन तखन ?’ ‘एना भइए ने सकै छै, ककरोमे ने सभटा गुणे रहैत छै, ने सभटा अवगुणे रहैत छै |’ ‘एहेन जोड़ी ककरो  देखलिऐए ?’ ‘अवश्य, गामोमे कय गोटे छथि |’ ‘धोखामे भ’ जाइ छै तकर छोडू, देखि-सूनिक’ कियो एना करै छै ?’ ‘अवश्य |’ ‘उदाहरण ?’ ‘महानायक अमिताभ बच्चन आ जया भादुड़ी |’ विरोधी पक्ष हारि गेल | ‘अपने कोना कर’ चाहैत छी ?’ हम स्वीकारक स्वरमे पुछलियनि | तकर बाद पाँच मिनटमे सभ बात तय भ’ गेल | पंडित जी बजाओल गेलाह | दिन तकाओल गेल | तय भेल 24 मइ | पैंतीसटा वरियाती | खान –पीन ख़तम | जे बर-वरियाती आन’ जेताह, हुनकहिसं  खान-पीन मानल जाएत | 24 मइक’ सलमपुरसं वरियाती दानापुर आएल | शुभ-शुभक’ विवाह भेलै | आइ प्रोफेसर साहेब नै छथि, इंजिनियर साहेब छथि, हुनक सुपुत्र सेहो नीक इंजिनियर छथिन  | शैल आ ललनजीकें  एकटा पुत्र आ एकटा पुत्री छथिन | रश्मि आ शुभमकें देखिक’ लगैत अछि जे निर्णय सही छल | आदापुरमे तीन साल पूर्ण होमय जा रहल छल त ई सोचलहुं  जे लगातार तीन सालसं बेशी लोककें शाखा प्रबंधकक कुरसीपर नै बैसबाक  चाही | तीन साल पूर्ण भेलापर फेर कोनो शाखाक प्रबंधक बना देल जाएत | डिवीज़नल ऑफिस गेल रही कोनो मीटिंगमे त पता चलल जे मध्यम शाखा पचरुखीमे  लेखापाल ( एम )क पोस्ट खाली छै, हम तुरंत ओत’ अनुरोधपर स्थानान्तरण लेल आवेदन पठा देलिऐ | स्थानान्तरण आदेश प्राप्त भेल | छपरा शाखासं आएल अशोक कुमार जीकें शाखाक कार्य-भार सौंपिक’ 17 जनवरी (1989) क’ शाखासं भार मुक्त भए पचरुखी शाखामे लेखापाल ( मध्यम शाखा ) बनबाक लेल आदापुरसं 18 क’ विदा भ’ गेलहुँ | (क्रमशः) पटना / 30.09.2021 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। योगेन्द्र पाठक ‘वियोगी’ पिरामिडक देश मे (दोसर खेप) (पछिला अंक मे हमर मिस्र यात्राक पहिल दिनक अनुभव पढ़लियैक जाहि मे हम टूर ऑपरेटर थोमस कूक के प्रोग्राम सँ अलग अपने खर्चा सँ गीजाक पिरामिड परिसरक दर्शन कएल आ पापीरस गैलरी देखल।) 18 सितम्बर 2019, आइ मिस्र मे दोसर दिन छी। थोमस कूक बला ग्रुप एलेक्जेन्ड्रिया जा रहल छैक मुदा हमरा आइ विश्वक पहिल पिरामिड देखबाक अछि। एहि लेल हम वियोन्डरक माध्यम सँ अलग सँ व्यवस्था केने छी मेम्फिस टूर नामक कम्पनीक संग। मेम्फिस टूरक टूर मैनेजर हमरा सँ भेंट करबा लेल सबेरे आबि गेलाह, हम तैयारे छलहुँ। हुनक गाइड, ‘हेन्ड’ नामक महिला आठ बजे एलीह आ हम सब विदा भेलहुँ टूर पर। आजुक टूर बिल्कुल प्राइवेट छल, गाड़ी मे ड्राइवर, गाइड आ हम, बस एतबे, जहिना कम्बोदिया यात्रा मे छलहुँ। समयक कोनो पाबंदी नहि, एतबे जे कुल आठ घंटा सँ बेसी नहि लगबाक चाही। गाड़ी मे बैसलाक बाद गाइड अपन परिचय दैत बतौलनि जे हेन्ड माने भेल इन्डिया, फ्रेन्च Inde (ऐन्द) सँ सम्भवतः बनल, तें हुनका हम ‘भारती’ कहि देलिएनि आ ओकर अर्थो बुझा देलिएनि। ओ खुसी भेलीह। अस्तु, ओ हमरा आजुक दर्शनीय स्थल सबहक इतिहास बतौनाइ शुरू केलनि। हम संगहि सड़कक दूनू कात आसपासक दृश्य सेहो देखब शुरू कएल। गीजा शहर सँ बहरेलाक बाद पहिल बेर जखन देहाती इलाका मे एलहुँ तखन देखल नील नदीक नहर सब जे पटौनी लेल सबतरि पसरल छैक। गाइड बतौलनि जे नहरक पानि खाली खेती लेल उपयोग कएल जाइत छैक, पीबाक लेल नहि। नहरक दूनू कात चाकर सड़क तकर कात मे घर, दोकान सब आ घरक कात खेत सब मे खजूरक गाछ। गाम देहात मे सब ठाम पक्का घर, सब तरहक, जहिना आब अपनहु सबके गाम मे भेटैत छैक। एखन सीजन छलैक आ पीयर पीयर खजूरक बड़का घोदा गाछ सब मे लटकल। ओना तऽ एहन दृश्य अपनहु गाम घर मे जून जुलाइ मास मे भेटि जाएत मुदा ने ओतेक पैघ गाछ आ ने ओहन पैघ गुदगर फल। एकटा आर विशेषता देखल, एतए खजूरक गाछ सँ रस निकालबाक कोनो प्रचलन नहि। कम्बोदिया मे तारक गाछक रस सँ गुड़, चीनी बनौनाइ राष्ट्रीय उद्योग छिऐक से बात हम गाइड कें कहलिएनि। हुनका ई नहि बूझल छलनि। हम अपना देहातक खजूरक फल आ एतुका फलक तुलना कए सोचल जे सम्भवतः रस निकलि गेला सँ गाछ कमजोर भऽ जाइत छैक आ फल रसगर गुदगर नहि भऽ पबैत छैक। एतए सम्भवतः एही कारण रस नहि निकालल जाइत हेतैक। एतए फल मुख्य छैक, रस नहि। अपना देहात मे खजूरक फल कोनो महत्वक चीज नहि होइत छैक आ लोक ताड़ीक व्यवसाय लेल रस निकालब बेसी उपयोगी काज बुझैत अछि। एक ठाम ठाढ़ भऽ कए खजूरबोनीक पृष्टभूमि मे फोटो सेहो लेल। बुझाएल जे जहिना अपना सब आमक गाछी लगबैत छी तहिना एतए लोक खजूरक गाछी लगबैत अछि। किछु दूर गेला पर आमक गाछ सेहो भेटल जाहि मे फरल आम लटकल छलैक। गाइड बुझौलनि जे मिस्र मे आम सेहो लोक उपजबैत अछि। गाड़ी मे चलैत चलैत गाइड हमरा दहसुरक टेढ़ (Bent) पिरामिड आ लाल (Red) पिरामिडक खिस्सा बतबैत रहलीह। एहि इलाकाक पिरामिड सब चारिम वंशक पहिल फैरो (सम्राट) स्नेफेरू द्वारा बनाओल गेल छैक। स्नेफेरू गीजाक ग्रेट पिरामिड बनौनिहार फैरो खुफुक पिता छलखिन। स्नेफेरूक बनबाओल पहिल पिरामिड सकाराक सीढ़ीनुमा पिरामिडक नकल करैत बनाओल गेलैक मुदा असफल रहलैक आ नष्ट भऽ गेलैक। स्नेफेरू हारि मानै बला नहि छलाह। हुनक एक पुत्र हेमि उनी पिरामिडक वास्तुकार छलखिन। प्रयास चलैत रहलैक। दोसर जे बनलैक तकर उन्नत कोण शुरू मे 54 डिग्री राखल गेलैक। एकरा भीतर सेहो ब्यूरियल चैम्बर आदि बनाओल गेल छलैक। एहि समय पिरामिडक इंजीनियरिंग विकसिते भऽ रहल छलैक। एहि पिरामिडक आधार बहुत नीचा सँ नहि उठाओल गेलैक आ पिरामिडक बाहरी भागक जगह सेहो ओतेक मजगूत नहि छलैक। करीब 47 मीटर उँचाइ तक बनेलाक बाद वास्तुकार हेमी उनी कें डर भेलनि जे यदि एहिना आगू ऊँच करैत रहताह तऽ पिरामिडक आधार ओकर समस्त ओजन कें सम्हारि नहि सकतैक। तें कोण घटा कए 43 डिग्री कऽ देलखिन। पिरामिड बनि तऽ गेलैक मुदा देखबा मे ई टेढ़ लगैत छैक। टेढ़ो भेला पर पिरामिड बनेबाक बहुत बुद्धि तऽ वास्तुकार कें भैए गेलनि आ मजदूर सब सेहो अनुभवी भैए गेल छल। तखन बनाओल गेल तेसर पिरामिड जकरा रेड पिरामिड कहल जाइत छैक। इतिहासक हिसाबें उचित कही तऽ इएह विश्वक पहिल पूर्ण पिरामिड छिऐक आ फैरो स्नेफेरूक कब्र सेहो। “रेड” विशेषण लगलैक कारण लाल पाथर सँ बनलाक कारण एकर रंग ललौन छैक। आब रंग बहुत मलिन भऽ गेल छैक तथापि दूर सँ एखनहु अपन विशेषण कें सार्थक करितहिं छैक।  220 मीटर आधार आ 105 मीटर उँचाइ बला ई पिरामिड गीजाक खुफु आ खाफ्रे पिरामिडक बाद विशालता मे तेसर स्थान पर अछि। मुदा एहि पिरामिड कें 43 डिग्री उन्नत कोण पर बनाओल गेल छैक। मजबूती देबा लेल एकर ठोस घनाभ आधार 9 मीटर गहींर जगह सँ उठाओल गेलैक। हमरा जिज्ञासा पर गाइड मिस्रक प्रसिद्ध ममी बनेबाक विधि सेहो बतबैत गेलीह। ममी बनाएब कहिया शुरू भेलैक से तऽ अज्ञात अछि मुदा एतेक तऽ जरूर जे राजा लोकनि अपन अगिला जीवन (afterlife) लेल अपन शरीर कें सुरक्षित करबाक प्रयास करैत रहलाह। मिस्र मे जे सबसँ पुरान ममी भेटलैक से अनुमानतः 3000 BC  अवधि के छैक। ममी बनेबाक बारे मे जे किछु बात बूझल छैक तकरा अनुसार पहिने डाँड़ लग नीचा भाग मे भूर कऽ कए शव सँ द्रव बला अंग आँत, लीवर आ किडनी कें निकालि कए अलग राखल जाइत छलैक। तहिना मस्तिष्कक द्रव पदार्थ सेहो नाक बाटे निकालि कए राखि लेल जाइत छलैक। हृदय शरीर मे छोड़ि देल जाइत छलैक। शव कें लेटा कए काटल भाग मे सूती कपड़ा ठूसि देल जाइत छलैक। तखन दूनू हाथ कें छातीक उपर क्रॉस जकाँ मोड़ि कए रखलाक बाद पूरा शव कें नूनक ढेरी मे राखि देल जाइत छलैक जाहि सँ ओकर सब द्रव पदार्थ शोषित भऽ जेतैक। एहि प्रक्रिया मे चालीस सँ सत्तरि दिन तक लगैत छलैक। तकर बाद बचल सुखाएल शरीर कें सूती कपड़ाक कतेको तह मे खूब सक्कत कए लपेटि देल जाइत छलैक। चेहरा उघारे रहैत छलैक जाहि सँ ओ व्यक्ति भगवानक घर मे चीन्हल जा सकैछ। हृदय भीतरे मे छोड़ि देबाक एकटा खिस्सा ओ सेहो कहलनि। अगिला जीवन मे जखन व्यक्तिक कर्मक लेखा जोखा हेतैक तखन ओकर हृदयक ओजन कें न्यायक एकटा काल्पनिक पाँखि (feather of Justice) सँ तुलना कएल जेतैक। यदि लोक नीक काज कएने रहत तऽ ओकर हृदय ओहि पाँखि सँ हल्लुक रहतैक। खराप काज केनिहारक हृदय भारी भऽ जेतैक। एहि खिस्सा सँ सम्बन्धित कतेको चित्र हम पापीरस गैलरी मे कालि देखने छलहुँ आ ओतहु एहन खिस्सा सुनने छलहुँ। पहिने तऽ ममी मात्र राजा लेल बनैत छलैक मुदा बाद मे ई व्यवसाय भऽ गेलैक। राजाक लगुआ भगुआ धनीक सेठ आ कुलीन व्यक्ति सेहो अपन ममी बनबए लगलाह। ममी बनौनिहार कें ते टाका चाही। तखन ममी लेल किछु नियम बनाओल गेल। राजा-रानीक लेल ममीक संग गहना-गुड़िया, मुकुट, अस्त्र शस्त्र आदि अलंकरणक संग दामी रेशमी वस्त्र आदि सँ लपेटि रखबाक विधान बनलैक, मध्यम वर्गक लेल अलंकरण-रहित, खाली सूती कपड़ा सँ लपेटल आ जनसाधारण लेल ममी कें बैसल स्थिति मे राखल जेबाक प्रावधान भेलैक। करीब चालीस मिनटक यात्राक बाद दहसुर इलाका मे प्रवेश करितहिं फैरो स्नेफेरू नामक साइनबोर्ड भेटऽ लागल। स्नेफ़ेरू नामक दोकान आदि सेहो देखल। एहि इलाका मे टूरिस्टक कोनो भीड़ नहि, बल्कि एक्का-दुक्का टुरिस्ट, सएह बूझू। हमरे जकाँ जिद्दी आ कि अन्वेषी टूरिस्ट एमहर अबैत हेताह। पिरामिड पहुँचबा सँ करीब दू किलोमीटर पहिने आबि गेल ‘टूरिस्ट पुलिस’ के चेक पोस्ट। ओतए पुलिस गाड़ीक नम्बर, गाइड आ ड्राइवरक नाम आ लाइसेंसक वर्णनक अतिरिक्त हमर राष्ट्रीयता सेहो लिखलनि। ई तऽ बूझल नहि भेल जे हमर भारतीय राष्ट्रीयताक कारण आन विवरण नहि लीखल गेल आ कि कोनो अन्य देशक नागरिक लेल दोसर तरहक व्यवहार छलैक। अस्तु, तकर बाद गाड़ी आगू बढ़ल। एतहि कने दूर गेला पर गाइड उतरि कए टिकट कीन लेलनि। आगू विस्तृत मरुभूमि छल। मात्र एकटा पैघ घेरल इलाका जे मिलिट्री लेल बनाओल गेल छलैक। ओतहु हलचल बहुत कम। मुदा एतुका दर्शनीय स्मारक रेड आ बेन्ट पिरामिडक महत्वे ततेक छैक जे एहि मरुभूमिक बीच सेहो बहुत नीक सड़क बनल। रस्ता तेना बनल छलैक जे पहिल पड़ाव आबि गेल रेड पिरामिड। एखन सबेरक नओ बाजल छलैक आ पार्किंग एरिया मे हम सब पहिल यात्री छलहुँ। गाइड हमरा टिकट दऽ देलनि आ पिरामिड लग छोड़ि देलनि कारण पिरामिडक भीतर गाइड नहि जाइत छथि। ई बात तऽ हम कालिए देखि लेने छलहुँ। अस्तु, बाहर सँ कने मने देखि लेलाक बाद हम चढ़ि गेलहुँ सुरंगक गेट तक। एतए एकटा अरब सुरक्षा कर्मचारी हमर टिकट चेक केलनि। तकर बाद उतरए लगलहुँ भीतर। सीढ़ी तऽ बनल छैक मुदा सुरंग एतहु मात्र 3 फुट ऊँच, तें खूब लिघुरि कए जाए पड़ैत छल। पूरे 200 फुट (करीब 61 मीटर) नीचा उतरलाक बाद देह सोझ केलहुँ आ सामने आबि गेल अति सुन्दर शंकुनुमा चैम्बर जाहि मे दू कातक देवालक बीच के दूरी उपर उठला पर घटैत जाइत छलैक। उपर दिस देखला पर लगैत जे देबालक दूरी घटेबा लेल ओकरो उन्टा सीढ़ीनुमा आकार देल गेलैक। करीब 40 फुट उपर गेला पर दूनू देबाल मिल जाइत छलैक। एहने दोसर चैम्बर फेर बगले मे भेटल। एहि चैम्बरक सामने सेल्फी लेल। उपर अबै काल ओएह अरब सुरक्षा कर्मचारी हमर फोटो लेबाक अनुरोध केलनि। एतए हम कने हूसि गेलहुँ आ अपन मोबाइल हुनका पकड़ा देल। ओ किछु फोटो तऽ लेलनि मुदा अन्त मे बख्सीस माँगए लगलाह। ई गप हमरा बूझल छल जे मिस्र मे बख्सीस बहुत प्रचलित छैक आ यदि ककरो सँ कनियो सहायता लेबैक तऽ बख्सीस देबऽ पड़बे करत। मुदा एखन हमरा जेबी मे खाली दू सौ पौंडक नोट छल, दस बीस के किछु नहि आ एतेक बेसी बख्सीस तऽ नहिए देल जा सकैत छलैक। हम कने झूठ बजैत जे हमरा लग खुचरा नहि अछि, नीचा उतरि गेलहुँ। ओहुना आब लगैत अछि जे ई सब अनुभव मिलाइए कए यात्रा चिरस्मरणीय होइत छैक। बाहर सँ पिरामिड सब एके रंग लगैत छैक आ विशालतम पिरामिड तऽ हम कालि देखिये लेने छलहुँ। मुदा भीतर मे दूनू पिरामिडक कक्ष सब मे बहुत अन्तर छलैक, से बिना अन्दर गेने कोना बुझितिऐक ? एकर बाद  हम सब आबि गेलहुँ एक किलोमीटर दूर पर टेढ़ (bent) पिरामिड लग। पार्किंग एरिया मे एतए एकटा गाड़ी पहिनहि सँ लागल आ किछु टूरिस्ट ओहि पिरामिड कें बाहरे सँ देखि रहल छलाह। पार्किंग एरियाक बगल मे छाहरि बला एकटा बस स्टैण्ड सदृश जगह बनल, किछु टूरिस्ट पुलिस एतहु आराम करैत। गाइड आ ड्राइवर कें एतहि छोड़ि हम गेलहुँ पिरामिडक परिक्रमा करबा लेल। पथराह जमीन। एहि पिरामिड मे हालहि मे करीब पचास वर्ष बाद भीतर जेबाक बाट खोलल गेलैक अछि। सुरंग तऽ बनि गेलैक मुदा ओहि मे प्रकाश एखनहु नहि छैक। गेट पर जे सुरक्षा कर्मचारी छलाह ओ एकटा टॉर्च रखने। यदि कियो अन्दर जाए तऽ ओ संग संग इजोत देखबैत जेताह। एतए भीतर मे चैम्बर करीब 80 मीटर गहींर छैक, माने रेड पिरामिड सँ करीब बीस मीटर बेसिए। एकरा पाछू मे छोटका 18 मीटर उँचाइ बला पिरामिड छैक जाहि मे स्नेफेरूक रानी हेतेफेरसक कब्र छलनि। एहू मे आब उतरबाक व्यवस्था भऽ गेलैक अछि मुदा एकर दरबज्जा बन्द रहैत छैक आ आग्रह केले पर सुरक्षाकर्मी अपनेक लेल ताला खोलताह, अपने जतेक काल भीतर रहबै, ओतेक काल ठाढ़ रहताह आ फेर ताला लगाइये कए जेताह। जतेक एहि अरब लोकनिक सेवा लिअऽ ओतेक बख्सीस देबा लेल तैयार रहू। हम ओहुना रेड पिरामिड मे चढ़ि उतरि कए थाकि गेले छलहुँ आ दिन सेहो चढ़ल जा रहल छलैक आ ओही अनुसारें एहि मरुभूमि इलाका मे भगवान भास्कर अपन तीक्ष्णता बढ़ा रहल छलाह। तें हम एहि दूनू पिरामिडक प्रदक्षिणा कऽ कए घुरि गेलहुँ। फेर एकटा नीक जगह चुनि कए गाइड कें कहलिएनि फोटो लेबा लेल। एतहि हमर दहसुर दर्शन समाप्त भेल। अगिला स्थल छल मेम्फिसक म्यूजियम। मेम्फिस एखन तऽ अति छोट गाम जकाँ छैक मुदा प्राचीन समय मे मिस्रक राजधानी सेहो छलैक। एतए म्यूजियमक भीतर गाइड संगहि रहलीह आ विभिन्न दर्शनीय स्मारक कें बुझबैत रहलीह। एतए मिस्रक प्रायः सबसँ प्रतापी फैरो रैमसेस-द्वितीयक विशाल किन्तु अंशतः खंडित प्रस्तर प्रतिमा सुताएल राखल छैक। रैमसेस-2 उनैसम वंशक तृतीय फैरो छलाह आ प्रायः 66 वर्ष तक (1279-1213 BC) राज केलनि जे विश्व मे एखनहु कीर्तिमान छैक। लम्बा अवधिक शासन लेल सम्भवतः ब्रिटेनक वर्तमान महारानी एलिजाबेथ-2 एहि कीर्तिमान कें तोड़ि देलनि अछि, मुदा कतए रैमसेस-2 सन सक्रिय प्रतापी सम्राट आ कतए ब्रिटेनक सांकेतिक राष्ट्राध्यक्ष महारानी एलिजाबेथ ? दूनू मे कोनो तुलने नहि। हिनका जहिना अनेकानेक पत्नी छलखिन तहिना सैकड़ो पुत्र छलखिन। रैमसेस-2 के स्मारक मे सब ठाम दूटा मुकुट देखल, दूटा मुकुट मिस्रक दूनू भाग – निचला आ उपरका – कें संकेत करैत जे सम्राट समान भाव सँ दूनू भाग कें देखैत छथिन। हिनकर खिस्सा मिस्र भ्रमण मे आगू अनेक बेर आओत। म्यूजियम परिसर मे खुला जगह पर हिनक कने छोट प्रस्तर प्रतिमा ठाढ़ अवस्था मे सेहो लागल छैक। मुदा एहि सबसँ विशिष्ट अछि एतुका स्फिंक्स। ई स्फिंक्स आकार मे तऽ गीजाक स्फिंक्स सँ बहुत छोट छैक मुदा एकर मुखरा छैक मिस्रक रानी हातसेप्सुत केर। रानी हातसेप्सुत मिस्र मे एकमात्र महिला शासक भेलीह जे अपन नावालिग बेटाक समय करीब 12 वर्ष तक पुरुषक वेष मे राज केलनि। हिनकर खिस्सा आगू अनेक बेर आओत। मेम्फिस म्यूजियम मे देबाल पर अनेको चित्रकला आदि तऽ छलैके, परिसर मे खुला आकाश मे कतेको खंडित प्रस्तर स्मारक सब राखल। गाइड कहलनि जे पुरातात्विक खुदाइ मे जखन जे किछु भेटलैक आ जकरा आन ठाम जगह नहि भेटलैक से एतए आनि कए राखि देल गेलैक। लोक बाद मे अध्ययन करैत रहत। एतए परिसर मे, जेना कि टूरिस्ट जगह पर सर्वत्र होइत छैक, बहुतो दोकान उपयोगी अनुपयोगी आ कहबाक लेल बहुमूल्य वस्तु सब बेचैत। हमरा आकर्षित करबा लेल ओहिना एकटा दोकानदार लगला भारतीय फिल्मस्टार सबहक नाम गनाबए। ओतेक सँ हम नहि रीझलहुँ तऽ एकटा नील रंगक पाथरक टुकड़ी, जकरा ओ सब सौभाग्यक प्रतीक बुझैत छथिन, से पकड़ा देलनि। गाइड हमरा कहलनि लऽ लेबाक लेल, हम लऽ लेलहुँ। मुदा घुरती मे जखन हम ओहि दोकान सँ किछु नहि कीनल तखन दोकानदार जरूरे मोने मोन हमरा सरापने होएत। छोड़ू, एना तऽ होइते रहैत छैक। एतए सँ हमसब विदा भेलहुँ सकारा कें। फेर रस्ता मे आबि गेल नील नदीक नहर सब। करीब आधा घंटाक बाद टूरिस्ट पुलिसक चेकपोस्ट पार करैत मरुभूमिक एकटा उँचगर जगह पर छलहुँ जतए छल विस्तृत खंडहर सब के भंडार आ सबसँ महत्वपूर्ण स्मारक – विश्वक पहिल विशाल प्रस्तर स्मारक जकरा लोक स्टेप पिरामिड कहैत छैक। तृतीय वंशक पहिल फैरो जोसर (Djoser) एवं हुनक वास्तुकार इम्होटेप कल्पना केलनि जे कब्र मे ममी कें झँपबा लेल मात्र एक मस्तबा (शिलाखंड) के बदला यदि शिलाखंडक उपर शिलाखंड रखैत खूब उँचगर उठा देल जाए तऽ नीक रहतैक। एही कल्पना सँ सकारा मे जोसरक कब्र लेल बनाओल गेल सीढ़ीनुमा (stepped) पिरामिड। स्टेप पिरामिडक परिसर मे हम सब प्रवेश केलहुँ एकटा गैलरी होइत जाहि मे खूब ऊँच स्तम्भ दूनू कात बनल आ ऊपर सेहो पाथरेक छत। गाइड बतौलनि जे ई छत पुनरुद्धार (restoration)  के प्रयास मे हालहि मे बनाओल गेलैक। भीतर परिसर बेस पैघ, एतए वार्षिक उत्सव होइत छलैक। सामने ठाढ़ छल ओएह सीढ़ीनुमा पिरापिड जे विश्वक पहिल एतेक पैघ प्रस्तर स्मारक बनल। वर्तमान मे ओ स्मारक ढहि रहल छैक तें ओकर भीतर के कहए, लगो जाएब प्रतिबन्धित छैक। सब किछु घेरल। प्रायः पाँच हजार साल पुरान एहन स्मारक एखनहु देखबा लेल कहुना ठाढ़े छैक सएह की कम आश्चर्य ? आर्यावर्त मे तऽ एहन किछु नहिए छैक। अस्तु, हम सब एही कात सँ किछु फोटो आदि लेल। तकर बाद बाहर निकलि कए एकटा उँचगर जगह सँ सकारा स्थित विभिन्न स्मारक के दर्शन कएल। सामने मे दूर अवस्थित दहसुरक टेढ़ आ लाल पिरामिड सेहो देखाइ पड़ि रहल छल। एकर अतिरिक्त भग्नावस्थाक विभिन्न चरण मे करीब एगारहटा पिरामिड एक लाइन सँ देखाइ पड़ल। गाइड बतौलनि जे सकारा मे बहुत रास स्मारक एखनहु माटिक भीतर पड़ल छैक, हम अपनहु देखलियै एक ठाम खुदाइ चलिये रहल छलैक। सकाराक विस्तृत क्षेत्र देखबा लेल एक दिन बहुते कम, तखन टूरिस्ट कें किछु मुख्य स्मारक सब देखि कए संतोष करए पड़ैत छैक। हम एकर बाद फैरो उनासक पिरामिड देखबा लेल गेलहुँ। ओना ई पिरामिड भग्ने छैक मुदा एकर भीतर कक्ष सब अद्वितीय छैक। पहिल बेर देखल पूरा ब्यूरियल चैम्बर मे देबाल आ छत सब हाइरोग्लिफ (hieroglyph) लेखन सँ भरल। एकर एकटा छोट चित्र संलग्न कऽ रहल छी। इएह हाइरोग्लिफ लेखन आधुनिक युग मे लोक कें मिस्रक प्राचीन सभ्यता सँ परिचय करौलकै। विद्वान लोकनिक अनुसार हाइरोग्लाइफिक लेखनक आविष्कार प्रायः 3300 BC ( अर्थात करीब 5300 वर्ष पूर्व) मे भेल छलैक। मिस्रक सब प्राचीन स्मारक मे एकर प्रचुर व्यवहार भेलैक। मध्य युग मे एहि लिपिक ज्ञान नष्ट भऽ गेल छलैक मुदा आधुनिक युग मे मिस्रक रोजेटा जगह पर एकटा प्राचीन शिलालेख, जकरा रोजेटा स्टोन नाम देल गेलैक, कें पढ़ि कए फ्रासीसी विद्वान जाँ-फोंस्वा शाँपोलिओं  एकर कुंजी ताकि लेलनि आ तखनहि मिस्रक सभ्यताक पूरा इतिहास जगजगार भऽ गेलैक। रोजेटा स्टोन वर्तमान मे ब्रिटिश म्यूजियम मे राखल छैक। स्टेप पिरामिडक परिसर मे खुदाइ भेला पर बहुत रास पाथरक हाइरोग्लाइफिक लेख सब भेटलैक जाहि मे पहिल आ दोसर वंसक राजा सबहिक नाम छलैक। उनासक पिरामिडक लगे मे एकटा छोट कब्र छल राजकुमारी इदुत के, जे उनासक पुत्री छलीह। एतहु देबाल सब पर बहुत रास चित्रकारी आ लिखाइ। चित्रक रंग एखनहु बहुत जीवंत छैक। देखबाक तऽ बहुत किछु छल मुदा रौद बढ़ल चल जा रहल छलैक आ मरुभूमि मे बालु आ पाथरक टुकड़ी बला जमीन पर चलबो आनन्ददायक नहि रहि गेल छलैक। भूखो लागि गेल छल। तें किछु खंडहर सब कें देखैत फोटो लैत सकारा सँ विदा लेल। हमरा टूरक खर्चा मे लंच जोड़ल छल। गाइड पुछलनि की खाएब ? हम शाकाहारी विकल्प चूनल। ओ अपनहि मोने बैगनक तरकारी बनेबाक आदेश रेस्तराँ कें दऽ देलखिन। हम सब घुरि कए करीब सबा दू बजे गीजा एलहुँ।  जाहि रेस्तराँ मे हमर लंचक व्यवस्था छल से एकदम स्फिंक्सक सामने। एतए दुतल्ला पर बैसि पूरा पिरामिड परिसरक दृश्य देखबा मे अबैत छल। उत्तम जगह, तहिना भोजनो उत्तम। भात, स्थानीय रोटी, तीन प्रकारक चटनीक संग बैगनक तरकारी जे बूझू तरुआ आ रसदारक बीच मे छल, बेस स्वादिष्ट लागल। अन्त मे खीर सेहो। आर की चाही ? गाइड बुझा देलनि जे टिप (बख्सीस) हमरा देबाक चाही। हुनके सँ पूछि दस पौंड टिप हम बेयरा कें दऽ देल। होटल अबैत अबैत साढ़े तीन बाजिए गेलैक, माने टूर साढ़े सात घंटाक भैये गेल। हम गाइड आ ड्राइवर कें सेहो यथोचित बख्सीस दऽ कए विदा कएल आ रूम मे आराम करए गेलहुँ। साँझ मे थोमस कूकक ग्रुप जखन एलेक्जेन्ड्रिया सँ घुरलैक तखन सब गोटे संगहिं भारतीय भोजनक रसास्वादन कएल। एतहि इन्द्रजित ग्रुपक ड्राइवर, गाइड, रसोइया आ अन्य स्थानीय सहयोगी सबके बख्सीस लेल सब सदस्य सँ करारक अनुसार पाँच डॉलर प्रतिदिनक हिसाबें चालीस डॉलर रखबा लेलनि। अस्तु आब अगिला पाँच दिन हमरो एही ग्रुपक संग रहबाक छल। अगिला दिन 19 सितम्बर काहिरा प्रवासक अन्तिम दिन छल। आजुक कार्यक्रम मे बहुत किछु शामिल छल। सबेरे जलपानक बाद साढ़े सात बजे सब गोटे बस मे सवार भेलहुँ पिरामिड परिसर जेबा लेल। गाइड एतहु एकटा महिला छलीह। ओ सब कें बुझा देलनि जे जिनका ग्रेट पिरामिडक भीतर जेबाक होअए से अलग सँ गेटे पर टिकट कीन लेथि कारण थोमस कूकक पैकेज मे भीतर जाएब सम्मिलित नहि छलैक। हमरा ग्रुप मे तऽ एहनो तमिल महिला छलीह जे हवाइ जहाज मे ह्वील चेयर सँ चढ़ैत उतरैत गेलीह। तहिना किछु अन्य लोक अपन असुविधा कें खियाल करैत पिरामिड कें बाहरे सँ दर्शन करब यथेष्ट बुझलनि। मुदा किछु गोटे कें तऽ टिकट किनबाक छलनि। एतेक सबेरे विदा भेलाक अछैतो पिरामिड परिसरक प्रवेश मार्ग पर टूरिस्ट बसक ततेक ने लाइन लागि गेल छलैक जे हमरा सब कें सब प्रक्रिया करैत सुरक्षा जाँच करबैत अन्दर जेबा मे नओ बाजि गेल। आइ हमरा एतए बहुत किछु करबाक नहि छल कारण सब किछु तऽ देखले छल। जतेक समय मे ग्रुपक अन्य सदस्य लोकनि ग्रेट पिरामिडक भीतर जाइत गेलाह ओतेक समय मे हम तीनू पिरामिड कें नजदीक सँ प्रदक्षिणा कएल जाहि सँ ओहि मे भेल क्षयक अनुमान भऽ सकए। बसे सँ सब गोटे भ्यू प्वाइन्ट जाइत गेलहुँ। पैघ ग्रुप मे समस्या अबितहिं छैक जे विभिन्न लोक कें फोटोग्राफीक विभिन्न आवश्यकता। सब कें सम्हारि कए राखब आ समय के पाबन्दी सेहो बना कए राखब कठिन काज छैक मुदा टूर मैनेजर इन्द्रजित तऽ इएह काजे करैत रहल छथि। बेस दक्ष अपना उत्तरदायित्व मे। एतहि करीब 200 मीटर चलि कए सब लेल ऊँटक सवारी करबाक व्यवस्था कएल छलैक। लोक ऊँट पर चढ़ि दस मिनट तक एहि मरुभूमिक हिआओ लेलक, ततबे। करीब आधा घंटा लागल एहि काज मे। फेर सब गोटे बस मे सवार भए आबि गेलहुँ परिसरक बाहर पार्किंग एरिया लग जतए सँ स्फिंक्सक दर्शन करबाक छल। स्फिंक्स लग तऽ हम पहिनहु गेल छलहुँ मुदा आइ दोसर बाटें प्रवेश भेला पर एतहु एकटा कब्र देखल। भीड़ ततेक जे ककरहु सेल्फी ठीक सँ नहिए लेल होइत छलैक। मुदा लोक की मानैत छल ? अस्तु, तय समय पर सब गोटे बस मे सवार भेलहुँ। अगिला स्थल छल मिस्रक नामी इत्र देखबाक आ कीनबाक। हम सब एकटा बेस पैघ घर मे प्रवेश कएलहुँ जतए सब कें बैसबा लेल सोफा, कुर्सी आदि देल गेल, संगहिं मुफ्त शौचालयक सुविधा सेहो। अन्यत्र तऽ पाँच पौंड देबऽ पड़ैत छैक लघुशंको लेल। तें एतए लोक अपना अपना हिसाबें शंका निवारण केलक। गृहस्वामी अथवा उचित कही जे इत्रक दोकानदार हमरा सब कें एक एक गिलास शीतल पेय देलनि। गर्मी तऽ छलैके से एहि पेय सँ सबहक मोन प्रसन्न भेलैक। तकर बाद सबकें एकटा कए कागत पकड़ा देल गेल जाहि मे विभिन्न इत्रक नाम आ दाम सेहो लीखल छलैक। फेर चलल इत्र आदिक वर्णन आ सब कें हाथ मे लगा लगा कए ओकरा सुँघबाक आ जँचबाक क्रम। हमरा एहि सब मे बेसी रुचि नहि छल मुदा महिला वर्ग तऽ तल्लीन छलीह – ई देखाउ, ओ देखाउ आदिक फरमाइस चलि रहल छलैक। अन्त मे दोकानदार अपन विभिन्न पैकिंग के ‘ऑफर’ दाम आदि बतबैत गेलाह, कोन कम्बिनेसन मे कतेक लेला सँ कतेक लाभ होएत आदि। अस्तु किछुए लोक छोट छोट शीशी किनलनि। तकर बाद हम सब बस मे सवार भेलहुँ काहिरा जेबाक लेल जतए भोजन करबाक छल, फेर विश्व प्रसिद्ध काहिरा म्यूजियम देखबाक छल आ तखन फेर एकटा बजारक दर्शन आ शॉपिंग आदि। दू बाजि गेल छलैक, लोक कें भूखो लागि गेल छलैक मुदा बस शहरक ट्रैफिक मे घुसकिए रहल छल सएह बूझू। सब शहरक हाल एहिना छैक। मुदा किछु होउ, ट्रैफिक नियम भंगक बात सोचिओ नहि सकैत छी। अस्तु, हमसब पहुँचलहुँ नील नदीक कछेर मे नाओ पर बैसाओल एकटा होटल जकर रेस्तराँ मे हमरा सबहिक भारतीय भोजनक  उत्तम व्यवस्था छल। थोमस कूक भोजनक व्यवस्था मे कखनहु कोनो शिकाएतिक अवसर ककरो नहि दैत छैक। लोक भरि पोख भोजन केलक। भोजनक बाद पहुँचलहुँ म्यूजियम। एतए पहिल बेर इन्द्रजित लोक कें बुझौलखिन जे कैमरा सँ फोटोग्राफी लेल अलग सँ टिकट लगैत छैक। मुदा मोबाइल सँ बिना फ्लैस के फोटो लेबा पर कोनो रोक नहि छैक। बर बेस, किछु शौकिया फोटोग्राफर लोकनि टिकट कीनैत गेलाह। हमरा सब कें म्यूजियमक प्रवेश टिकट हाथ मे देल गेल। संगहिं गाइड सबकें एकटा इयरफोन सेहो पकड़ा देलनि, ओहि मे चैनल सेट करबाक व्यवस्था। एहि तरहक व्यवस्था आब पैघ आ भीड़भाड़ बला जगह मे सबतरि भऽ गेलैक अछि से हम छओ वर्ष पूर्व ऑसविच भ्रमण मे देखने रही। अस्तु, सब गोटे गाइडक पाछू म्यूजियम मे प्रवेश केलहुँ। इयरफोन भेला सँ सुविधा छैक जे लोक कें गाइड सँ सटल रहब जरूरी नहि आ गाइड अपनहु साधारण आवाज मे बिना आन ग्रुप कें डिस्टर्ब केने बाजि सकैत छथि। तैयो ग्रुपक सदस्यक संग रहब आ संग चलब जरूरी नहि तऽ फेर भोतला जाएब। एतेक विशाल म्यूजियम मे मात्र डेढ़ घंटा मे सब किछु देखब तऽ सम्भव नहि छलैक। गाइड लोकनि एकटा रूट बना लैत छथि जाहि मे प्रमुख प्रदर्शन स्थल होइत लोक चलैत अछि। पहिल महत्वपूर्ण स्थल छल रोजेटा स्टोन। पहिनहि कहि देने छी असली रोजेटा स्टोन, जे रोजेटा नामक जगह पर भेटल छलैक आ जाहि सँ मिस्रक प्राचीन हाइरोग्लाइफिक लेखन कें पढ़बा मे मदति भेटलैक, ब्रिटिस म्यूजियम मे राखल छैक। एतुका म्यूजियम मे ओकर अनुकृति छैक। गाइड एकर इतिहास बतबैत दुख सेहो प्रकट केलनि जे असली पाथर मिस्र मे नहि अछि। तकर बाद किछु राजा रानीक मूर्ति, चित्र आदि देखल जाहि मे मुख्य छल खुफु, खाफ्रे आ मेन्कौरेक पाथर प्रतिमा, जिनकर पिरामिड हम सब गीजा मे देखि लेने छी। म्यूजियम मे कतेक ने वस्तु छैक देखबाक जे लोक महीनो एकर अध्ययन करैत रहत तैयो शेष नहि हेतैक। तखन एहि डेढ़ घंटाक टूर मे सब किछु मोन राखब सेहो सम्भव नहि। एहि म्यूजियम मे दूटा प्रसिद्ध वस्तु छैक – तूतनखामन के सोनाक ताबूत आ ममी आदि। गाइड सेहो बुझैत छथिन जे लोक एतबे मोन राखत। अस्तु, घुमैत घुमैत हम सब पहुँचलहुँ ओहि स्थल पर जतए प्रसिद्ध फैरो तूतनखामनक ताबूत राखल छैक। तूतनखामन नवीन साम्राज्यक अठारहम वंशक तेरहम फैरो छलाह जिनक शासनक समय 1355-1346 BC आँकल जाइत अछि। मिस्रक पुरातात्विक खुदाइ के इतिहास मे एकटा इएह ताबूत एतेक सही सलामत भेटलैक जाहि मे असली सोनाक ताबूतक संग ममी सेहो छलैक। ममी किछु नष्ट भऽ गेल छलैक आ एखन प्रदर्शनी सँ हटा देल गेल छलैक। आश्चर्ये जे प्रायः 3300 वर्ष मे एतए चोर नहि पहुँचि सकल। ताबूत तीन तह मे छलैक – सब सँ भीतर बला ताबूत 110 किलो ओजन बला ठोस सोनाक बनल छलैक, ओकर उपर दूटा आर काठक ताबूत बनल छलैक, बूझू जहिना रसियन डॉल रहैत छैक तहिना। ताबूत सब मात्र काठक बक्सा नहि होइत छलैक, अपितु ओहि मे उपर नीचा दूनू भाग मे बहुर रास चित्र, कलाकारी आदि बनल रहैत छलैक। एकदम मनुष्यक आकार मे बनाओल जाइत छलैक ई ताबूत सब, जाहि मे सिर, धर आ पएर के अंश ओहिना बुझाइत छैक जेना लोक शवासन मुद्रा मे पड़ल होए। ताबूत दू टुकड़ी मे बनैत छलैक, नीचा बला भाग मे ममी बनल शव राखि उपर बला भाग सँ झाँपि देल जाइत छलैक। एकर अतिरिक्त तूतनखामन के ताबूत पर 10 किलो शुद्ध सोनाक मुखौटा सेहो छलैक। मुखौटा मिस्रक उन्नत कलाक अद्वितीय नमूना अछि। एकर फोटो लेब वर्जित छैक मुदा इएह फोटो इंटरनेट पर सबतरि भेटि जाएत। तीन तह बला ई ताबूत चारि तह के सोनाक मुलम्मा चढ़ाओल काठक बहुत पैघ बक्सा मे सुरक्षित राखल छलैक। ओहि बक्सा मे ताबूतक बगल मे चारिटा छोट बक्सा सेहो छलैक जाहि मे अलाबास्टर पाथरक विशेष पात्र मे शरीरक द्रव बला अंग - आँत, लीवर, किडनी आ मस्तिष्क, निकालि कए राखल गेल छलैक। ई सब गाड़ल छलैक राजाक घाटी (valley of kings) मे जे कि नील नदीक पश्चिम मरुभूमि मे एकटा पहाड़ी इलाका मे गुप्त स्थान छलैक। नवीन साम्राज्य तक राजा सबकें बुझबा मे आबि गेल छलनि जे कब्रक चोरि होइते रहैत छैक तें एकटा गुप्त जगह चुनि कए अपन कब्र बनबैत गेलाह। हमरा सबहिक टूर के अन्तिम दिन एहि घाटीक भ्रमण होएत। अस्तु, तूतनखामनक कब्रक अवशेष देखि लेलाक बाद हम सब ममी देखबा लेल पहुँचलहुँ। दूटा ममी म्यूजियमक जेनरल भाग मे राखल छैक। राजा-रानीक ममी सब विशेष “रोयाल कक्ष” मे राखल, जकरा लेल अलग सँ 180 पौंडक टिकट लगैत छलैक। हम टिकट लऽ कए एहि कक्ष मे सेहो ममी सब देखलहुँ। सब ममी काँचक पारदर्शी घेरा मे बन्द आ सब घेराक भीतर एक एकटा हाइग्रोमीटर राखल ओकरा भीतर नमी कें जँचबा लेल। टिकट बला ममी सब के दूटा हॉल छलैक आ दूनू मिला कए करीब पचीस टा ममी राखल, सब नीक सुरक्षित अवस्था मे। एहि प्रकारें आजुक म्यूजियम दर्शन शेष भेल। तकर बाद बस सँ जाइत गेलहुँ अल-खलीली बजार। थोमस कूक इएह बजार हमरा सब लेल किएक चुनलनि से तऽ ठीक सँ बुझबा मे नहि आएल मुदा रस्ता मे राजधानी काहिराक किछु दर्शनीय स्थलक दर्शन जरूर भेल। बसे सँ देखैत आँखि जुरबैत गेलहुँ जे ई काहिराक किला छिऐक तऽ ई स्टेडियम। काँच ईंटाक बनल किछु प्राचीन घर बला इलाका सेहो देखल। आब तऽ सबतरि पक्का ईंटा आ सीमेंट-कंक्रीटक घर बनैत छैक। अल-खलीली बजार हमरा सबकें आनल गेल छल जे लोक अपन बेगरताक अनुसार सनेसक चीज वस्तु कीन लेत। एतए मिस्रक स्थानीय निर्मित वस्तुक अपेक्षा चीन सँ आयातित वस्तुक भरमार देखल। पूरा विश्व मे एहिना चीनी सामान भरि गेल छैक। अस्तु, हमरा बहुत किछु किनबाक तऽ नहि छल, बच्चा सब कें मिस्र भ्रमणक सनेस देबा लेल किछु पिरामिडक अनुकृति कीनल। ग्रुपक महिला लोकनि तऽ एतहु अनेक सस्ता ड्रेस आदि किनलनि, बर बेस। ग्रुपक किछु सदस्य कें आइ रातिए आसवान (Aswan) जेबाक फ्लाइट छलनि। ओ लोकनि अपन सामान लइए कए भोर मे चलल छलाह। एतए हुनका सबकें एकटा अलग बस मे बैसा कए एयरपोर्ट पठा देल गेल। ओ सब राति मे आसवान मे होटल मे विश्राम करताह आ भोर मे फेर एयरपोर्ट आबि जेताह सबहक संग आगूक भ्रमण लेल। हमर स्थानीय मुद्रा आब शेष भऽ रहल छल आ होटल छोड़बा सँ पहिने एकर इन्तजाम कैए लेबाक छल कारण आगूक यात्रा मे एहन सुविधा कतए भेटत से निश्चित नहि। एहि आशयक चर्चा हम जखन घुरती मे बस मे चलाओल तऽ एकटा तमिल यात्री बजलाह जे हुनका लग किछु विशेष ईजिप्सियन मुद्रा छनि। ई अतिरिक्त मुद्रा हुनका एकटा मित्र देने छलखिन जे कहुना डॉलर मे विनिमय करा कए भारत लऽ आबथि। बेस, हमरा एहि मे कोनो आपत्ति नहि छल, हुनके सँ एक सौ डॉलर भजा लेल। करीब साढ़े आठ बजे हम सब होटल घुरलहुँ आ फ्रेस भेलाक बाद जुमि गेलहुँ भोजनालयक भारतीय खंड मे। टूरक अगिला भाग मे सबेरे सब कें हवाइ जहाज सँ मिस्रक दछिनबरिया शहर आसवान जेबाक छल, सेहो पूरा ग्रुपक सदस्य एकहि फ्लाइट सँ नहि जा रहल छलाह, किछु कें फ्लाइट पाँच बजे आ किछु कें साढ़े पाँच बजे। आ हम सब छलहुँ एयरपोर्ट सँ दूर गीजा मे। इन्द्रजित सबकें बुझा देलखिन वेकअप कॉल एक बजे रातिए मे बजि जाएत, डेढ़ बजे तक सब गोटे अपन सुटकेस सब गेटक आगू राखि देबैक जाहि सँ होटलक कर्मचारी ओकरा उठा कए नीचा उतारि बस लग राखि देत। आ दू बजे तक सब गोटे होटल सँ चेकआउटक क्रियाकर्म पूरा करा कए अपन सुटकेस चीन्हि कए बस मे रखबा लेब आ बस मे सवार भऽ जाएब। बस कोनो दशा मे सवा दू बजे विदा भैए जाएत जाहि सँ तीन बजे तक एयरपोर्ट पहुँचल जा सकए। काउन्टर पर सब यात्रीक लेल होटल सँ जलपान पैक करबा कए राखल रहत। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। मुन्नाजी बीहनि कथा संगति रीवा आ सुकेशक बीच टना बेनी बुझू खेलौड़िया धियापुता सन। आइ दुनूक बहस शास्त्र सं विज्ञान पर जा अटकलै। -- अच्छा,अहां सब ,सब किछु मे हमर सबहक बरोबरिक दावा  करै छी से पुर हएत।- सुकेश अखियासैत बाजल। किए नै ? प्रकृति नै बदलतै,मुदा कृत्रिम बेर! आबो पुछय पड़ैए ? - त' निश्तुकी कहू ,स्त्री कहियो पिता भ' सकैए ? सुकेश मोंछ पर ताव दैत जिज्ञासा रखलक। - हें.... हें.....हें।माए बिनु बाप ! ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ज्ञानवर्द्धन कंठ लालदाइ 'कलिंग लिटरेचर फेस्टिवल'क ऑनलाइन कार्यक्रम देखि रहल छलहुँ।कोनो फोन-कॉल बेरि-बेरि आबि व्यवधान क' दिए।काटि दियैक।तेसर बेरि जखन फेर फोन बाजल त' उठा लेलियैक।ओमहरसँ एकटा स्त्री-स्वर आयल - "नीरज बजै छही?हम लालदाइ।" -"हम कनीकालमे फोन करैत छियौक"। ई कहि हम फेर फोन काटि देलियैक,मुदा आब कार्यक्रम देखैत मोनमे बेरि-बेरि प्रश्न आबय- 'लालदाइ, वैह लालदाइ की?' कार्यक्रम समाप्त भेलाक बाद इमहरसँ हम फोन लगेलियैक- "हलो!हम नीरज।एकटा कार्यक्रममे..." -"हँ, से त' हमरा भेल।रौ,हम सीतामढ़ी आयल छियौक,एकटा श्राद्धमे।आइ द्वादशा छियैक।काल्हि चलि जयबौक।तोहर डेरा कतय छौक?" जँ केओ तेसर व्यक्ति ई संवाद सुनने रहितथि त' लगितनि जे लालदाइ हमर निकट संबंधी होयत एवं हमरा लोकनिक संवाद नियमित रूपसँ होइत होयत।एतेक सामान्य बात नहि रहैक।तेँ संवाद सम्पन्न भेलाक बाद एकटा फिलिम आँखिमे चलय लागल आ हम 1977-78 ईoक स्मृति- चलचित्र देखय लगलहुँ। हमर गामक टोलक मध्य एक घर 'मल्लिक' छथि।स्कूल जाइकाल सड़क पश्चिमसँ समकोणपर जतय दक्षिण मुड़ि जाइत छैक, ओहीठाम अछि 'मल्लिक-अँगना'।ओहि आँगनमे हमरा लोकनिक बाबा श्री(आब स्वo) धनुषधारी मल्लिकक परिवार रहैत रहनि।बाबा हमर गामक सभसँ सुन्नर व्यक्तिमे सँ एक रहथि।सुन्दरताक धनुषपर सज्जनताक वाण धारण केनिहार बाबा सभक हृदय-भूमि विजित करबाक सामर्थ्यसँ युक्त रहथि।हुनक सभ संतति तेहने सुन्नर आ सज्जन।तहिया गाम-घरमे गरीबीक साम्राज्य रहैक,मुदा शील-संस्कार-सौहार्दक शीतल मंद सुगंधित मलय सर्वत्र प्रवाहित भ' जीवनी-शक्तिक संचार कयने रहैक। स्कूलमे हम दू भाय पहिला किलासमे रही।हमरा लोकनि नित्य अपनासँ एक किलास ऊपर अपन गुलाब बहिनक संग स्कूल विदा होइ, झोरामे सिलेट-पेंसिल आ बोरा नेने।अपन अँगनासँ निकलि हमरा लोकनि मल्लिक- अँगना आबी।ओतय बाबाक बेटी लालदाइकेँ संग करी।गुलाब बहिन कहैक- "गै फूल!चल ने इस्कूल, अबेर होइ छौक।" एहिना किछु बरख चलल हेतैक।तकर बाद लालदाइ कतेक पढ़लक, की पढ़लक,कतय गेल, किछु पता नहि।हमहूँ सीतामढ़ी आबि गेलहुँ।एत्तहि पढ़लहुँ- लिखलहुँ, एत्तहि नोकरी कर' लगलहुँ।तहियासँ आइधरि कमला-लक्ष्मणामे बहुतेक पानि बहि गेलैक।साझी आश्रमक युग भसियाइत-भसियाइत आब एहन स्थितिमे आबि गेलैक अछि जे एक परिवारक सदस्य लोकनिक संपर्क-संवाद जतय भ' रहल छैक, ततय बड़का भाग्य-सौभाग्य मानक चाही।एहन परिस्थितिमे ओ लालदाइ आइ एना फोन कयलक,से अपन कानपर विश्वासे नहि हुअय,मुदा घंटाभरिक भीतर ओ दू जनीकेँ संग कयने डेरापर आबि गेल।नैहरक लोकसँ भेँट भेलापर जे अपूर्व आनंद ओकर मुखमंडलपर व्याप्त रहैक,से देखि हमरा लोकनि प्रफुल्लित भ' उठलहुँ।ओ हमर मायकेँ प्रणाम क' देह गछारि लेलकैक।हम ओकरा प्रणाम क' एक कात ठाढ़ भ' गेलहुँ।हमर बियाह भेना चौबीस बरख भ' गेल आ ओ हमर कनियाँकेँ सेहो पहिले बेरि देखि रहल रहैक।ओ हुनका देहमे साटि लेलकनि।हमर कोनो पीसी आब जीवित नहि रहलीह,मुदा ई तथ्य असत्य सिद्ध भ' गेल।लागल जेना अपन पीसी नैहर आयल अछि।बहुत आनंद भेल।पुछलियैक- "पीसाकेँ नहि अनलिही?" कहलक-"ओ भोज-भातमे अरसिया-परसियामे लागल छथुन।एतय अयलहुँ त' हिनकासँ तोहर फोन नंबर लेलहुँ।बड्ड मोन लागल छल तोरा सभकेँ देखबाक लेल।कैकटा धीया-पुता छौक?फेसबुकपर तोहर हम फ्रेंड छियौक।देखही ने,जया दास।तोहर रचना पढ़ैत रहैत छियौक।बड्ड गौरव होइत अछि...." लालदाइ बजैत गेल आ हमरा लोकनि ओकरा संगे भाव-तरंगमे उग-डूब करैत रहलहुँ।हम पुछलियैक- "तोरा कैकटा धीया-पुता छौक आ की करै जाइ छौक?" सहजतासँ कहि गेल- "एकटा बेटीक बियाह क' देने छियैक।दूनू परानी फ्राँसमे छौक।बेटा जर्मनीमे इंजीनियर छौक।छोटकी लॉ-फायनलमे छौक।" हम विस्फारित नेत्रसँ देखिते रहि गेलियैक ओकरा।कोनो दम्भ वा उपलब्धिक दर्प नहि छू सकल छैक एखनहुँ ओकरा।पीसा बैंकमे छथिन।पटनामे घर लेने अछि,मुदा गामपर सेहो सभ किछु व्यवस्थित रखने अछि।एखन किछु दिनसँ गामे अछि।एखनहुँ गाम ओकरासँ बाहर नहि भेल छैक।तेँ एहन प्रीति,तेँ एतेक भाव।जाइकाल हमर कनियाँकेँ 'देखना' देनाइ नहि बिसरल।तीनू जनीक तेल-सिनूर भेलैक।हम अपन पोथी देलियैक तीनूकेँ।लालदाइ ओकरा नैहरक सनेस जकाँ  जुबुताक' राखि लेलक।जे लोकनि मिथिलाक दिन-दिन घटैत संस्कारक दोहाइ दैत छथि,हम आब हुनक किंचित प्रतिवाद क' सकैत छी।'लालदाइ' हमर प्रमाण थिक। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। किशन कारीगर भोजकाजी मनेजर (हास्य कटाक्ष) बसहा बड़द पर बैसल बाबा बज़बड़ाइत रहै जे एहने कहूं मनेजर भेलैइए? एतेक दाबी त पैंजाब आ स्टेट बैंक वला के नै देखलियै रूपैया छोड़बै काल?  एकरा सब के त बैंको वला मनेजर स बेसी दाबी भऽ गेलै. इ सब गाम घर मे रहैए तेकर माने की भोज काज मे मनमाना करै जाएत? से नहि चलअ देबै आब? बाबा तामसे अघोर भेल बजैत दमसल चलि जाइत रहै. रस्ता मे बाबा भेंट भेलैथ त हम हाल चाल पूछली की समाचार यौ बाबा? बाबा बजलै अंगोरा धधकल्हा. हौ कारीगर तंहू की हमर मन अघोर करै पर उतारू भेल छह? तोरा मीडिया वला सब के त एहने ख़बैर मे मोन रमकल रहै छह की आ लगले ब्रेकिंग न्यूज बना दै छहक. पहिने एक जूम तमाकुल खुआबह त कहै छिअह? बाबा कतबो तामस मे रहौ की मोन अघोर रहै त तइयो कारीगर भेंट होइ त मोन हलूक आ तामस कम जरूर भऽ जाइ की. आब ब्रेकिंग न्यूज़ बनेबा लोभ मे बाबा के तमाकुल बना के खुएलहुँ? फेर बाबा के पुछली जे कि सब होल कैले खिसियाएले रहली ग. तमाकुल खाइत मातर बाबा पूरा घटनाक्रम एकसूरे कहअ लगलै. हौ कारीगर की कहियअ काल्हि एकटा सराधि भोज खाई लै गेल रही. छौंड़ा मारेर सब बारिक रहै त रमकल फिरै? कोनो पता मे देलकै किछो कोनो छूटियो गेल. फुँसियाहिक हो हो बेसी होइत रहै. भोजकाजी मनैजर झूठो के बारिक छौंड़ा सब पर दमसै जे सब पता दिसी सब किछो परस, बेरा बेरी घूम. असल मे त ओइ मनेजरे के सिखाउल विद्या रहै जे मूँहे कान देख पता मे परसै जंहियै आ दौगल फिरिहें. आ ठीक सैह होइत रहलै. हम बाबा के पुछलौंह जे अंहा पांत दिस अहगर के रसगुल्ला अएल रहै की ने? बाबा फेर तमतमाइत बजलाह जे एक आध बेर लालमोहन एक बेर रसगुल्ला एलै. आ दोहरबै लै कहलियै त छौंड़ा सब कहलक जे बाबा आब त दही चिन्नी उठि गेलै?  तोंही कहअ त केना तामस ने उठत? एना कहूं करब भेलैए भोजकाजी मनेजर सबके जे अपना चिन्हा परिचे वला गिरोह दिसी सब किछो दोहरा तेहरा दै छै. कतेक खेबो करै छै आ चोरा के लोटो मे भरि लअ जाइए? आ जेकरा चिन्हा परिचे ने तेकरा पता दिसी बेर निबदी धअ लेतह की?  ओहिना जेना बैंक मे रूपैया छोड़ेबा काल बैंक वला कहतअ जे लिंक फेल तहिना इ भोजकाजी मनेजर सब भांज पूरबै मे रहतह की? सराध होउ एहेन भोजकाजी मनेजर सबहक? अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। अरविन्द ठाकुर भीमनाथ झा “कुसुम” ! 2016 क कोनो दिन। अपन ‘भानुमती’ सिरीजक एकटा कविता कें अंतिम रूप देबाक क्रम मे एकटा शब्द पर अटकि गेलहुं।ई संशय केना दूर हुअए? किनका सं सलाह ली? मानसपटल पर तुरत भीम भाय अभरला। फोन कएलियनि।प्रणाम-पाती आ कुशल-क्षेम भेल। पुछलियनि, “ई ‘उत्स’ शब्द ‘स्रोत’ वा ‘उद्गम’ आदिक समानार्थीए छिअए ने?” “से की?” हम कहलियनि, “हम अपन एकटा कविता मे ‘स्रोत’ वा ‘उद्गम’क ठाम पर ‘उत्स’क प्रयोग करए चाहए छी।कविताक शब्द-संरचना मे ‘उत्स’ शब्दक ध्वनि बेसी नीक जकां खपए छै।किन्तु शब्दकोश मे ‘उत्स’ शब्द छैहे नहि।“ “एह! एहनहु कतहु होइ जे शब्दकोष मे ‘उत्स’ शब्द नहि होइ!ओना अहां निधोख भए कए ओकर प्रयोग करू।तीनू शब्द प्राय: एकहि अर्थ दए छै।“ “ठीक छै।“,कहि कए फोन बन्द कएलहुं आ कविता कें अन्तिम रूप दए मे लागि गेलहुं।काज करितहि रही कि प्राय: दस-पन्द्रह मिनट बाद सेलफोन घनघनाएल। स्क्रीन पर देखलिअए---भीम भाय। “जी!”,काल रिसीव करैत हम कहलियनि। “हे यौ अरविन्द बाबू,ठीके कहैत रही अहां।शब्दकोष मे हमरहु ‘उत्स’ शब्द नहि भेटल।अहांक कोन शब्दकोष अछि?”,भीम भायक स्वर मे बेचैनीक ध्वनि बुझाएल। “नालन्दा शब्दकोष। हिन्दीक सभ सं समृद्ध कोष मानल जाइ छै।“,हम कहलियनि। “हम त दोसर मे देखल। नहि भेटल। अचरजक गप!”,भीम भाय एना बाजलथि,जेना शब्दकोष मे ‘उत्स’ शब्दक उपस्थिति नहि रहब हुनके दोष हुअए। त से की करबए! एहनहि छथि भीम भाय---दायित्वबोध सं आप्लावित एकटा साधुपुरुष!सामान्य-सन जिज्ञासाक समाधान करब हुनका अपन परम व्यक्तिगत दायित्व बुझाइ छनि। आन कोनो व्यक्ति रहितए त पहिलहि बेरक वार्ता यथेष्ठ होइतए।किन्तु नहि।ई त भीम भाय छथि!ओ फोन राखि अपन शब्दकोष खोलता, ओहि मे ‘उत्स’ शब्दक खोजबीन करता आ नहि भेटला पर दोषी-भाव सं दुबारा फोन करता, अचरज आ अफसोस व्यक्त करता। ***** 2017क कोनो दिन। मनक की छै?एहिना बौआइत रहए छै। बहुत दिन सं मन मे ई बात कुलबुलाइत रहए जे हमर कोनो विशिष्ट साहित्यिक नाम हएबाक चाही छल—सामाजिक रूप मे प्रचलित नाम सं अलग कोनो अदभुत,कोनो एहन संज्ञा जे हमर लेखकीय व्यक्तित्व कें प्रतिबिम्बित करए। भीम भाय कें फोन लगएलियनि। अपन जिज्ञासा हुनका लग राखलियनि। ओ क्षण भरि चुप रहला आ फेर कहलनि, “मने जेना हम अपन नाम राखी—भीमनाथ झा ‘कुसुम’? सएह ने?” आ फेर हुनकर एकटा घनघोर ठहक्का। हमरहु हंसी लागल। ‘भीमनाथ’ सन महाकाय शब्दक संग ‘कुसुम’ सन कोमल शब्दक गठबन्हनक अद्भुत कल्पना सं हमर रोम-रोम रोमांचित भए उठल।हमहुं हंसैत अपन सहमति व्यक्त कएलियनि, “हं! जेना हम अपन साहित्यिक नाम अरविन्द ‘अजातमित्र’ राखी।“ भीम भायक विचार अएलनि जे एहि तरहक नाम वा उपनाम कोनो साहित्यकार अपन प्रारंभिक दौर मे राखैत अछि।कोनो नाम सं प्रसिद्ध वा सुपरिचित भेलाक बाद उपनाम जोड़बाक प्रचलन नहि रहल अछि। चर्चा चलल त एहि क्रम मे विविध गप भेल।प्रसंगवश हम अज्ञेयक चर्चा करैत कहलियनि जे हुनक किछु पुस्तक (आत्मनेपद,अपने-अपने अजनबी) मे लेखकक नाम मात्र “अज्ञेय” अछि,किछु (एक बूंद सहसा उछली) मे मात्र “सच्चिदानन्द वात्स्यायन” आ किछु (कलास्वाद का मर्म) मे “स0 ही0 वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ “ लिखल गेल अछि। आकि,भीम भाय हड़बड़ाए कए गड़बड़ाए गेला, ‘हे यौ,एहि बात दिस हमर ध्यान कहियो नहि गेल।‘ हम गपक क्रम आगू बढबैत बैद्यनाथ मिश्र सं विद्यार्थी,वैदेह, यात्री आ फेर यात्री सं नागार्जुन हएबाक चर्चा कएलियनि।एतय भीम भाय कें अपन चिन्हल-जानल सुपरिचित क्षेत्र भेटलनि। ओ खूब विस्तार सं एहि पर चर्चा कएलनि।खिस्सा पर खिस्सा। किन्तु भाव एहन जेना ओ बैद्यनाथ मिश्रक डिफेन्सक वकील होथि आ बैद्यनाथ मिश्रक धर्म बदलनाइ, मैथिली सं हिन्दी दिस गेनाइ,यात्री सं नागार्जुन भेनाइ,परिवारक जिम्मेदारी तजि औलिया जीवन जीनाइ आदि-आदिक स्पष्टीकरण देब भीम भायक व्यक्तिगत आ परम पुनीत कर्तव्य होनि।एहि क्रम मे भीम भायक स्मरणशक्तिक दीप्ति अद्भुत,गपक रस खूब रसगर,सब किछु प्रेम सं सुनबा जोगर आ प्रशंसनीय। एहि वार्ताक समापन सं पूर्व ओ फेर सं जेना स्वयं कें सम्बोधित करैत हुंकारा देलनि, “भीमनाथ झा कुसुम” आ अपन एहि स्वनामकरणक मौलिक आ अनायास अभरल कल्पना पर मुग्धभाव सं प्रमुदित होइत फेर एकटा घनघोर ठहक्का देलनि। आ अन्त मे,जे हुनक व्यक्तित्वक विशिष्टता बनल छनि,तहि सहज,सरल,हास्यबोध सं भरल-पूरल विनम्रताक संग, “नीक विषय पर गप भेल,अरबिन्द बाबू! अहांक आभार!” ओहि दिनुका गप खतम भेलाक बाद बहुत दिन तक हुनक ई स्वनामकरण हमर विचारणक क्षेत्र मे बेर-बेर घुरियाबएत रहल। आइयहु घुरियाबएत अछि।भीम भायक जे भौतिक वाह्य व्यक्तित्व छनि,तेकरा हुनक नाम ‘भीमनाथ’ खूब नीक जकां प्रतिबिम्बित करए छनि।किन्तु अपन साहित्यिक-सामाजिक आभ्यंतर संचेतनाक स्तर पर ओ कोनो कुसुमहि जकां सुकोमल,सुगंधित आ सुन्दरमक प्रतिरूप छथि। एहि दृष्टिकोण सं “भीमनाथ झा कुसुम” नाम हुनक सम्पुर्णताक द्योतक होइतए। अफसोस जे भीम भाय कें ई ध्यान पहिने नहि अएलनि। त से की कएल जाए,तहिया हुनका हमरा सन अलबटाह सं परिचयहु नहि रहनि! ******* 2012क मई मासक कोनो तिथि। उदयचन्द्र झा विनोद फोन कएलनि।रहिका गाम मे ओ प्रतिवर्ष एकटा साहित्यिक आयोजन करए छथि—मिथिला विभुति स्मृति पर्व समारोह।एहि बेर केना ने केना हुनका हमहुं मन पड़लियनि। हुनक आग्रह भेलनि जे हम ओहि कार्यक्रम मे आबी आ अपना संग किछु और कविलोकनि कें सेहो लेने आबी। हम युवा कवि विजय हरीश आ एकटा अन्य कविक संग चललहुं। अजित आजाद पटना सं चलि सकरी आबि प्रतीक्षारत रहथि। हुनका संग कएल आ मधुबनी मे चन्द्रमोहन झा जी सं भेंट करैत रहिका पहुंचलहुं। ओतय भीम भाय जेना हमरहि प्रतीक्षा मे रहथि। हम गाड़ी सं उतरबहि कएल रही कि भीम भाय अपन विशाल कायाक संग सम्मुख मे उपस्थित—“आऊ,अरबिन्द बाबू।“ प्रणाम कएलियनि।ओ कुशल-छेम लएत हमर बांहि धएने हमरा पहिने सं उपस्थित कविलोकनिक गोल लग लए गेला।कोनो विद्यालयक परिसर रहए प्राय:। टेन्ट हाउसक टेबुल सब एक सोझ मे लागल रहए आ ओकर दुनू कात कुर्सी—कोनो भोज भातक आयोजन जकां।ओतय बहुत रास लोक रहथि।सब गोटय सं नमस्कार-पाती भेल। चाय आएल,पीलहुं। ओतहि मनमोहन झा रहथि।पूर्व सं चलैत कोनो गप कें कन्टीन्युटी दएत भीम भाय मनमोहन जी सं कहलथिन, “हं,त कहैत रही जे पोथी त अहांक जे अछि,से त अछिए,किन्तु अहां आइ अरबिन्द बाबू पर भारी पड़ि गेलियनि। अहांक गाड़ी हुनकर गाड़ी सं मंहग अछि।“ आ फेर हुनक गगनभेदी ठहक्का।तत्काल हुनक गपक पहिल अंशक सन्दर्भ हमर माथ मे नहि घुसल। चुपहि रहलहुं। कार्यक्रम शुरू होइ मे बिलम्ब रहए।विनोद जी आबि प्रस्ताव देलनि जे एहि बीचक अवधि मे हम सब कमरा मे आराम कए सकए छी।सब गोटय कमरा मे अएलहुं। कमरा मे दरी-जाजिम बिछाएल रहए। अभ्यागतलोकनि अपन-अपन रूचि,अपन-अपन वयसक लोकसबक संग अलग-अलग गोल बनाए अपन-अपन स्थान धएलनि। हम,भीम भाय,रामलोचन ठाकुर,मनमोहन झा आ दू-चारि गोटय और एक ठाम बैसलहुं।रामलोचन भाय अपन झोड़ा सं स्वयं द्वारा अनुदित पोथी ‘नन्दित नरके’ निकालि हमरा भेंट कएलनि।भीम भाय मनमोहन जी कें सम्बोधित करैत कहलथिन, “अहूं अपन पोथी बहार करू आ अरबिन्द बाबू कें दियनु”।मनमोहन जी संकुचित होइत अपन पोथी ‘खिस्सा’क एक प्रति हमरा दिस बढएलनि।भीम भाय टीपलथि, “पोथी त अहांक जे अछि,से त अछिएएएए,किन्तु आइ जं अहां चरिपहिया पर नहि आएल रहितहुं त विनोद जी अहांक लेल घोषित भेल आइ देल जाइ बला पुरस्कार अहां कें दए सं नठि जएतथि।“ भीम भाय फेर अपन भीमियन ठहक्का मारलनि।बात आब हमर संज्ञान मे आएल।मनमोहन जीक पोथी ‘खिस्सा’ पर रहिका समाज द्वारा आइ हुनका पुरस्कृत करए जाए रहल छल आ एकरहि पर भीम भाय बीच-बीच मे आनन्दी चुटकी लएत रहथि।बात बुझए मे आएल त हमरहुं हंसी छूटल।भीम भाय ओहि दिन परम-आनंदी मूड मे रहथि। हुनक एहि मूडक पकड़ मे बेराबेरी प्राय: सबगोटे आबएत गेला।कार्यक्रम प्रारम्भ होइ सं पहिने तक हमसब एहिना विभिन्न विषयसब पर गप-सरक्का करैत रहलहुं।एहि गपक बीच-बीच मे भीम भाय मनमोहन जी दिस ताकथि, कनेक आंखि नचाबथि आ अपन विशिष्ट टोन मे बाजथि, “पोथी त अहांक जे अछि,से त अछिएएएएए….!” मंच पर सम्मान-पुरस्कार आदिक क्रम चलल आ तेकर बाद कवि सम्मेलन प्रारम्भ भेल। ओहि दिन हम अपन कविता ‘हम हत्या करए चाहए छी’क पाठ कएने रही। कविता-पाठक बाद जखनि हम आबि कए बैसलहुं त भीम भाय बिहुंसैत बजला, “बड़ बिखाह कविता रहए। आब आगां सं विनोद जी अहां कें रहिका नहि बजएताह”। आ फेर मंचक अनुशासन कें देखैत यत्नपूर्वक दबाएल हुनक मद्धिम ठहक्का।(अद्भुत बात जे तेकर बाद ठीके विनोद जी फेर कहियो हमरा रहिका नहि बजएलनि।) कार्यक्रम समाप्त भेलए।भोजन-भात भेलए।सब गोटय चलबाक तैयारी मे लागि गेलहुं।दुनू ड्राइवर गाड़ी लए कए आबि गेल—हमरहु आ मनमोहनहु जीक।जे सब अपन गाड़ी सं नहि आएल छला,तिनकर सभक रात्रि विश्रामक व्यवस्था रहिके मे रहनि।भीम भाय मनमोहन जीक गाड़ी सं आएल छला आ ओहि सं घुरबाकहु रहनि। ओ हमरा संग ठाढ रहथि। हम कहलियनि, “चलू,हम अहां कें गाड़ी मे बैसाए कए बिदा करए छी”। भीम भाय हंसला।कहलनि, “से नहि हएत।पहिने अहां बैसिकए निकलू।की यौ,मनमोहन जी”?मनमोहन जी सहमति मे मूड़ी डोलएलनि। आकि, अकस्मात हुनका दिस ताकैत भीम भाय बजला, “पोथी त अहांक जे अछि,से त अछिए,गाड़ीअहु अहांक तेहने अछि,मनमोहन जी“। एहि बेर भीम भायक ठहक्का मे सब गोटेक ठहक्का सम्मिलित छल। भीम भायक आदेश पर हम अपन गाड़ी मे बैसलहुं।प्रणाम कएलियनि,उत्तर देलनि। जा तक हमर गाड़ी आगू नहि बढि गेल,भीम भाय अपन स्थान सं टस सं मस नहि भेला। एहनहि छथि भीम भाय! ***** 2013क सितम्बर मासक कोनो तिथि(प्राय: 10 वा11)। मायानन्द मिश्र जीक निधन भए गेल रहनि। हुनकर द्वादशाक दिन सहरसा मे हुनक निवास पर उपस्थित रही।सोचने रही जे सांझ तक ओतय उपस्थित रहब आ तेकर बाद सुपौल दिस जाएबला अन्तिम ट्रेन पकड़ि घुरि जाएब।किन्तु से नहि भेल। केदार (कानन)क ज्येष्ठ भ्राता-द्वय ओतय उपस्थित रहथि।बैद्यनाथ छात्र जीवनक संगी रहए आ विश्वनाथ हमर राजनीतिक जीवनक सहकर्मी-सहयोगी छला।एहि दुनू भायक जिद भेलनि जे हम भोजन कैए कए जाइ। भीम भाय सेहो दरभंगा सं दू-तीन गोटेक संग सड़क-मार्ग सं आएल छला। हुनकहि संग लगातार बैठकी जमल रहल।श्राद्धकर्म बिलम्ब सं सम्पन्न भेलए आ भोजन होइत-होइत हमर ट्रेनक समय निकलि गेल रहए।भोजन समाप्त भेलाक बाद भीम भाय जिज्ञासा कएलनि।स्थिति जानि कहलनि, “एतय रुकबा मे त अहां कें कष्ट भए जाएत।राज-काजक घर मे ढग सं सुतबाक जोगार-भांज कहां भए पाबए छै”? हम कहलियनि जे हम एतय नहि, कोनो होटल मे ठहरि जाएब आ भोरका गाड़ी सं सुपौल घुरि जाएब।भीम भाय असहज भेल कने काल मौन रहला। हुनका दरभंगा घुरबाक रहनि आ हुनक संग आएल लोकसभ निकलबाक लेल हड़बड़ाएल रहथि। भीम भाय कनिएं काल मे असमंजस सं बहरएला आ कहलनि, “अहां हमरासभक संग चलू। हमरहुंसभ कें त सुपौलहि दके जएबाक अछि”। ओसभ ड्राइवर छोड़ि चारि गोटे रहथि;मने जे सिटिंग व्यवस्थाक हिसाब सं फुल्ल। हम ई कहैत हुनक प्रस्ताव नकारि देलियनि जे हमर शामिल भेला सं हुनकासभ कें अनावश्यक दिक्कत हेतनि। किन्तु भीम भाय अपन निर्णय पर अडिग।कहलनि, “चालीस किलोमीटर जएबा मे कोन दिक्कत?आ जं दिक्कत हेबहु करत त ई अहांक राति भरि जे दिक्कत हएत,तेकर तुलना मे त किछु नहि। चलू,दिक्कते-सिक्कत मे निकलि जाएब आ अहां कें घरक आराम भेटि जाएत”। अन्तत: वैगन आरक पछिला सीट पर चारि गोटेक अंटान कए हमसभ ओतय सं चललहुं। हम भरि रस्ता अपराधबोध सं ग्रस्त,जे हमरा चलते तीन-तीन गोटे कष्ट मे छथि,सिकुड़ल जाइ,सिकुड़ल जाइ। ओमहर भीम भाय सेहो जेना प्रयासपूर्वक अपन देह कें सिकोड़थि जे हमरा बैसए मे अधिक सं अधिक सुभीता हुअए। खैर,एक घंटा मे सुपौल पहुंच गेलहुं। हम आग्रह कएलियनि जे “जं अहां सभ कें बेसी हड़बड़ी हुअए त हमरा बस-स्टैंड लग छोड़ैत निकलि जाउ,ओतय सं हम पएरे घर निकलि जाएब। आ जं तेहन हड़बड़ी नहि त पांच मिनट लेल हमर घर पर चलू,पानि-तानि पी लेब आ फेर निकलि जाएब। अहांसभक पएर पड़ला सं हमर घरहु धन्य हएत”। आनसभक कहब रहनि जे निकलि चलू,किन्तु भीम भाय बजला, “एह!एहनहु कहूं होइ।बीच रस्ता मे हिनका कोना छोड़ि देबनि? हमरा अरबिन्द बाबूक घरहु देखबाक अछि। रूकब नहि,से ठीक,किन्तु हिनका हिनक घर पर छोड़िए कए हमरासभ आगां बढब”। गाड़ी हमर घर तक आएल। हम पुन: आग्रह कएलियनि जे “घर तक आबिए गेल छी त कनी काल बैसिकए बिलमि लिअ,पानि-तानि पी लिअ,फेर निकलि जाएब”। भीम भाय गाड़ी सं बहरएला।पाछू-पाछू हुनक तीनहु संगी सेहो बहरएलथि।‘विप्लव भवन’क बहरुका लाइट जरैत रहए आ तेकर प्रकाश मे सम्पूर्ण परिसर विजिबुल रहए।भीम भाय मेन गेट पर ठाढ भेल मुग्धभाव सं हमर घर कें निहारैत कहलनि, “राजमहल थिक!” हम बिहुंसैत हुनकासभ कें अपन स्टडी सह ड्राइंगरूम मे बैसलियनि। भीम भाय किताबसभ सं भरल हमर अलमारीसभ कें मन्त्रमुग्ध भए निहारैत रहला।सभक लेल गिलास मे पानि आएल।सभ गोटे पीलनि। हम शोधित पानिक दू-तीन टा भरल बोतल गाड़ी मे रखबाए देलियनि—बटखर्चाक लेल।बिदा दएत काल हम कहलियनि, “कनिएं काल लेल सही,अहांसभक अएला सं आइ विप्लव भवन धन्य भेल”।भीम भाय बिहुंसैत,गाड़ी मे बैसैत बजला, “ एतय आबि बहुत पावन आ आनन्ददायक अनुभूति सं भरि गेलहुं। अहांक पिताक प्रबल पुरुषार्थ गमकैत अछि एहि डीह पर।धन्य त हमसभ भेलहुं”। भीम भाय मूड़ी घुमाए कए एक बेर फेर विप्लव भवन दिस निहारलनि। ड्राइवर गाड़ी स्टार्ट कएलक आ हम विनीतभाव सं गाड़ी कें जाइत देखैत रहलहुं। ***** 2012-13,दरभंगा। दरभंगा सं मैथिलीक पहिल रंगीन दैनिक समाचारपत्र “मिथिला आवाज”क प्रकाशनक तैयारी शुरू रहए।एकर परिकल्पनाक बीजारोपन त बहुत पहिने भए गेल रहए आ बारह मई,2012 मे एहि सं सम्बन्धित पहिल औपचारिक बैसार एहि अखबारक वित्तपोषक चन्द्रमोहन झाक उपस्थिति आ सभापतित्व मे सम्पन्न सेहो भए चुकल रहए।1जुलाई,2012 कें हम विधिवत एहि अखबारक प्रभारी सम्पादकक पदभार ग्रहण कएने रही।एकर बाद काजक गति तेजी पकड़लक। कटहलबाड़ी मे एकर कार्यालय लेल एकटा दूमंजिला भवन सहित जमीनक खरीद आ तेकर भौतिक हस्तान्तरण सेहो भए चुकल रहए।कार्यालयक उपस्कर-उपादान आदिक खरीद,ओकर आमद आ ओकरासभ कें स्थापित-सुसज्जित करबाक काज निरन्तर जारी रहए।कोनो दिन विशाल आकारक जेनरेटर आबि रहल ए त कोनो दिन प्रिन्टिंग मशीन।प्राथमिक स्तर पर किछु टंककलोकनिक नियुक्ति सेहो भए गेल रहए।टेबुल कुर्सी आ कम्प्युटरादिक व्यवस्थित भेलाक बाद ओहिपर प्रैक्टिसक काज शुरू भए गेल रहए।सम्पादकक चैम्बर बनि गेल रहए।एहिसभ प्रारंभिक काज सं लए कए अखबारक प्रकाशनक अवधि मे भीम भाय नियमित रूप सं आबथि,दैनन्दिन होइत प्रगति कें देखथि आ प्रसन्न होथि। एहिसभ व्यस्तताक बीच मे हमरा एकटा आयोजन करए पड़ि गेल। ‘सगर राति दीप जरए’ कथा गोष्ठीक चेन्नई मे भेल आयोजनक बाद हमर टिलिफोनिक सहमति लए रमानन्द झा रमण ओहि आयोजनक दीप आ ओकर पंजी हमरा नामे लेने आएल छला आ एक दिन ‘मिथिला आवाज’ कार्यालय आबि ओसभ वस्तु हमरा सुपुर्द कए गेल रहथि। एकर अर्थ जे अगिला 78म आयोजन हमरहि करबाक रहए। हम अतस्तितह मे रही जे ई आयोजन सुपौल मे करी वा दरभंगा मे।एहि गोष्ठीक तीन टा आयोजन ‘कथा विप्लव’ नाम सं हम सुपौल मे कए चुकल रही आ स्थायी निवासी हएबाक चलते सुपौलक प्रति अतिरिक्त मोह सेहो रहए,तें हमर इच्छा सुपौलहि मे आयोजन करबाक प्रति जोर मारए।एम्हर अजित आजाद,कुमार शैलेन्द्र,अमलेन्दु पाठक आ चन्द्रमोहन झा पड़बा आदिक जोर रहनि जे आयोजन दरभंगा मे हुअए। ओसभ आश्वस्त कएलनि जे दरभंगा मे आयोजन करए मे कोनो दिक्कत नहि हेतए आ अन्तत: आयोजन दरभंगहि मे हएब तय भेलए। हमरा मात्र अर्थक भार लेबाक रहए आ हुनकासभ कें व्यवस्थाक।1 दिसम्बर कें ई आयोजन एमएमटीएम कालेज, दरभंगाक हाल मे भेल।एहि मे राकेश झा,डीआईजी आ बैजनाथ चौधरी बैजू प्रभृति किछु गैरसाहित्यिक व्यक्तिक उपस्थिति सेहो भेलए। एकर आर्थिक भार अधिक भए जएबाक चलते हमरा सुपौल सं पाइ मंगाबए पड़ल,किन्तु आकार,भव्यता आ भोजनादिक आधार पर एकरा धमगज्जर आयोजन मानल गेलए।किछु सहयोगी एहि गोष्ठीक अध्यक्षताक लेल जे नामसभक सुझाव हमरा दएत छला से हमरा अरघएत नहि रहए। हमर हार्दिक इच्छा रहए जे भीम भाय एकर अध्यक्षता करथि। हम अपन एहि इच्छा सं अजित आजाद कें अवगत करएलियनि त ओ कहलनि जे भीम भाय राति भरि रहब नहि गछता। हम अजित कें कहलियनि जे ओ भीम भाय सं राति भरि उपस्थित रहबाक शर्त पर सहमति लए लेथि।भीम भाय सहमत भेला आ अपन व्यक्तिगत नियम कें भंग करैत राति भरि जागल रहि खूब प्रसन्नतापूर्वक अध्यक्षक दायित्वक निर्वहन कएलनि। हम एकरा हमरा प्रति हुनक अतिरिक्त अनुराग मानए छी। भीम भाय ‘मिथिला आवाज’क प्रकाशनक प्रति अति-उत्साहित रहथि। हुनक मनोरथ रहनि जे ई अखबार स्तरीय हुअए,प्रगति करए,दीर्घायु होइ आ पत्रकारिताक इतिहास मे ‘मीलक पाथर’ बनए। हुनक ई सदिच्छा मात्र भावनात्मक स्तर तक सीमित नहि रहए,ओ लेखकीय स्तर पर सहयोग देबाक लेल सेहो सदैव प्रस्तुत रहथि।तें ‘मिथिला आवाज’क प्रकाशन शुरू भेलाक बाद ओ कोनो ने कोनो आर्टिकल लए कए आबथि।ओना ई सभ फीचर पृष्ट सं जुड़ल वस्तु रहए,जेकर प्रभारी नरेन्द्र जी छला।किन्तु भीम भाय आबथि त शिष्टाचारवश दूओ मिनट लेल हमर चैम्बर मे आबि अवश्य बैसथि। हमर मनोमस्तिष्क मे अखबार सं जुड़ल अनेकरास बिन्दुसभ नाचैत रहैत छल आ अपन एहि सम्पादकीय व्यक्तित्वक अस्तित्व मे हम अनायास बहुत औपचारिक भए जाइत रही।गपक्कर हम पहिनहुं नहि रही,किन्तु ई जिम्मेदारी आ एकर निर्वहनक भार हमरा और बेसी शब्द-संकोची बनाए देने रहए। भीम भाय आबथि त हम अभिवादन करियनि, तुरत हुनका लेल चाय मंगाबियनि, कुशल-छेम पुछियनि,किन्तु चैम्बरक शीशा सं हमर दृष्टि सौंसे कार्यालय दिस बौआइत रहैत रहए।भीम भाय एकरा अनुभव करथि।ओ औपचारिकताक बेढ मे बेसी काल रहएबला लोक नहि छथि,तें कनिएं काल मे ओ असहज भए जाथि। हम एहि बात कें अनुभव करी,किन्तु हमरा लग अपन एहि अवांछित औपचारिकताक कोनो उपचार नहि रहए।तें प्राय: चाय समाप्त होइतहि भीम भाय नरेन्द्र सं भेंट करबाक बात कहि पांच-दस मिनटहि मे उठि नरेन्द्रक चैम्बर दिस चलि जाथि। हम एहन स्थिति पर कनी देर अफसोस करी आ फेर अपन काज मे रमि जाइ। दरभंगा मे हमर संसार दूए ठाम सिमटल—चूनाभट्ठीक अपन किरायाबला डेरा आ कटहलबाड़ी स्थित ‘मिथिला आवाज’क कार्यालय,बस।ई हमर जिद रहए।‘मिथिला आवाज’क सम्पादक हएब हमरा लेल कोनो सम्मान,कोनो गौरव सं बेसी एकटा मिशन,एकटा पवित्र उद्देश्य जकां रहए।तें हम कोनो प्रकारक गोलैसी सं दूर रहि अपन जिम्मेदारीक निर्वहनक प्रति समर्पित रही,कोनो प्रकारक डेविएशन हमरा कबूल नहि रहए आ एहि लेल स्वयं कें क्रुरतापूर्वक अनुशासित कएने रही। हमरा बूझल रहए जे एतय तथाकथित मैथिली-हितैषी मैथिललोकनिक एकटा बड़का गोल एहन छै जे अपन संकीर्ण परिधि मे जूठहु लेल कुकरौझ करैत अछि आ तहि मे सं अधिकांश लेल हम हुनक कुमंशाक डगर मे बाधक छियनि आ जातिक आधार पर सेहो हुनकासभक लेल एकटा अवांछित आ माथ पर बथाएल तत्व जकां छी।ई किनकहु साहस वा भप नहि रहनि जे हमर सोझांसोझी हमर एकबाल कें चुनौती दितथि,किन्तु हमर पीठ पाछू ओसभ अपन धंधा मे लागल छथि,तेकर सुचना हमरा भेटैत रहैत रहए।भीम भाय त एतहुका रहबासीए रहथि,तें हुनका दरभंगाक रग-रग चिन्हल हेतनि।जे बात हम अन्य माध्यम सं अनुभव मात्र करैत रही,तेकरा ओ प्रत्यक्ष आ क्रियात्मक रूप मे देखैत हएता।तें कहियो काल व्यंजना-लक्षणा मे कोनो छोट-सन टिप्पणी करथि।जेना एक दिन बजला, ‘अहां निधोख भ क अपन काज करैत रहू’। ने हम पुछलियनि जे ओ कोन सन्दर्भ मे ई बात कहि रहल छथि आ ने ओ एहि सुक्त-वाक्य कें फरिछाएब आवश्यक बुझलनि।ई आपसी समझदारीक पराकाष्ठा रहए। हम त निधोख भए कए अपन काज करितहि रही,हुनक सुक्ति कें अपन गेंठ मे सेहो बान्हि लेलहुं। एक दिन भीम भाय हमर चैम्बर मे बैसल रहथि।दुनू गोटेक आगू मे चायक कप रहए आ ओकर चुस्की लैत कोनो चर्चा चलि पड़ल रहए। अकस्मात किछु कोलाहल-सन भेलए।सम्पूर्ण कार्यालय हमर त आंखिक सोझहि मे रहए,भीम भाय कें ओमहर देखबाक लेल मूड़ी घुमबए पड़लनि।देखए छी,अजित आजाद एकदम नव आ चकाचक सूट-बूट मे लकदक,माथ पर हैट आ आंखि पर गोगल्स पहिरने कार्यालय मे प्रवेश कएने रहथि। चारि-पांच गोटे हुनक आगू-पाछू डोलैत रहनि। हुनक अभिवादन आ परिधानक प्रशंसाक क्रम मे ई हलचल भेल रहए।भीम भाय कने काल नि:शब्द भेल ओमहर ताकैत रहला आ फेर हमरा दिस पलटि बिहुंसैत बजला, ‘लक्षण गड़बड़ बुझाइत अछि। अजित त एकदम्मे बदलि गेला हे’। आ से कहैत भीम भाय अनचोक्के उठलथि आ नरेन्द्र लग जाएब बिसरि चुपचाप कार्यालय सं बहराए गेला। एकर प्राय: किछुए दिन बाद ई दुखद सूचना आएल जे अजित ‘मिथिला आवाज’ सं मुक्त कए देल गेला आ हुनक मुख्य कार्यकारीबला सभटा अधिकार ललन झा कें दए देल गेलनि।लागल जेना भीम भाय ओहि दिन भविष्य देख लेने रहथि। 18 अप्रैल,2013 कें ‘मिथिला आवाज’क पदभार सं त्यागपत्र देलाक बाद अपन चूनाभट्ठीबला डेरा मे खूब निश्चिन्तता, सहजता आ आराम सं रही।डेराक प्रत्येक मासक किराया अग्रिम भुगतान कएल करैत रही।तें मासक अन्त तक एहि मे रहबाक अधिकार रहए। ने कोनो हड़बड़ी आ ने कोनो बाधा वा व्यस्तता।पुत्रलोकनि कें सूचना भेट गेल रहनि।आब प्रतीक्षा रहए जे ओतए सं गाड़ी कोन दिन आएत आ हमसभ अपन डेरा-डंटा उठाए एहि तपस्या-अवधिक अंत करब। फुरसतिक एहि अवसरक लाभ लैत दुनू प्राणी खूब घूमी।बीणा जी (हमर धर्मपत्नी) एहि बीच प्राय: पच्चीस-तीस हजार रुपैयाक खरीदारी कएलनि।ओ प्रसन्न छली जे आब घर घुरब आ बेटा-पुतहु,पोता-पोतीक सानिध्य-सुख लेब। हमर मन किन्तु किछु संकेत करए।एक दिन बैसल-बैसल ई संकेत स्पष्ट भेल।एह!घर घुरए सं पहिने जं एक बेर भीम भाय सं भेंट नहि कए लेब त ई केहनदन गप हेतए। छुछाओन-छुछाओन त लागबहि करत,एकटा अपराध सेहो हएत। हुनक घर किन्तु देखल नहि रहए।‘मिथिला आवाज’ मे सहयोगी रहल युवा आ तेज-तर्रार भैरव जी कें फोन कएलियनि।ओ हमरा भीम भायक छपकी परड़ी स्थित आवास तक पहुंचएलनि। भीम भाय प्रतीक्षा मे रहथि। हम अपन तावत धरि प्रकाशित पोथीसभ हुनका देलियनि।घरक बनल किछु मीठ-नमकीन आएल।फेर चाय आएल।गपक क्रम मे भीम भाय हमर त्यागपत्र देबाक प्रति जिज्ञासा कएलनि। हम मुस्काइत कहलियनि जे अखनि एहि विषय पर कोनो टिप्पणी उप्लब्ध नही अछि,समय आएत त हम एकरा लिखिकए व्यक्त करब आ तहि लेल प्रतीक्षा करए पड़त।भीम भाय सेहो मुस्कएला आ गप दोसर बिन्दु दिस घुरि गेल। चलैत बेर ओ अपन बहुत रास पोथी हमरा देलनि,जेकरा कोनो अमोल वस्तु जकां अपन पांज मे भरने हम अपन डेरा घुरल रही। ***** 1993क फ्लैशबैक। ई ओ वर्ष रहए जहिया हम पहिल बेर भीम भायक नाम सुनने रही।ई ओ वर्ष छल जहि मे हमर संग सं उत्साहित केदार (कानन) तेरहम कथा गोष्ठीक आयोजनक भार लए ओकरा सम्पन्न कएलनि आ ओही वर्ष अनियतकालीन पत्रिका ‘संकल्प’क समकालीन कथा पर केन्द्रित अंक बहराएल।सुपौलक मैथिली साहित्यक परिदृश्य लेल ओ वर्ष बहुत उर्वर रहए।ओही वर्ष हमर पहिल कविता संग्रह ‘परती टुटि रहल अछि’क संग-संग नारायण जीक ‘हम घर घुरि रहल छी’ आ केदार काननक ‘आकार लैत शब्द’ एकहि संग प्रकाशित भेल।ई ओ समय रहए,जहिया हम मैथिली साहित्य आ साहित्यकार कें केदार काननहिक आंखि सं देखी,हुनकहि कान सं सूनी,हुनकहि नाक सं सूंघी।एकदिन केदार एकटा आवेदननुमा कागज लए कए अएला आ कहलनि, ‘भैया,एहि पर दस्तखत कए दहक’। हमर जिज्ञासा कएला पर ओ बतएलनि जे दरभंगाक एगो भीमनाथ झा नामक कोनो लेखक छथि,जे ‘विविधा’ नामक एकटा व्यर्थ-सन पोथी लिखलनि अछि आ जोगारक प्रभाव सं एहि पोथी पर हुनका साहित्य अकादेमी पुरस्कार दए देल गेल छनि।तहिकाल हम मैथिलीक साहित्यिक राजनीति सं एकदम अभिज्ञ रही।केदार हमर जिज्ञासाक उत्तर देलनि,से नीक,किन्तु जं ओ नहियो दितथि तखनहु हुनका पर जे हमर अगाध विश्वास रहए, तहि मे हुनका सं कोनो असहमतिक कोनो टा गुंजाइश नहि रहए।तें ओहि विरोध-पत्र पर हमरहु दस्तखत भेल आ ओ पत्र प्राय: साहित्य अकादेमी कें पठाएल गेल रहए।बाद मे भीम भाय एकटा कविता हमरासभक तीनू पोथी पर केन्द्रित लिखलनि, जे हुनक 1997 मे प्रकाशित संग्रह ‘नाम तं थिक वैह’ मे आएल।भीम भाय केदारेक माध्यम सं अपन ओ संग्रह पठएलनि। हमर प्रति पर ओ लिखलनि, ‘बन्धुवर श्री अरविन्द ठाकुर जी कें सस्नेह—भीमनाथ झा,16-11-97’।भीम भायक कहब छनि जे एहि कविता मे रोष नहि छै।किन्तु एतय हम साहसपूर्वक हुनक बातक खण्डन करए छी।कोनो बात कें अनठिआए देब,ओहि दिस पीठ कए लेब सेहो रोषक अभिव्यक्तिक एकटा प्रकार छै।ओहि कविताक अंतिम पंक्ति ‘अपने टहलि जाइ ताबे’ एहि प्रकारक अभिव्यक्तिक एकटा काव्यात्मक उदाहरण अछि।ई शुद्ध ‘भीमीय पद्धति’ अछि आ एहि पद्धतिक उपयोग करबाक हुनका अधिकारहु छनि। एहि ‘भीमीय पद्धति’क दोसर रूप आ हुनक भौतिक स्वरूपक साक्षात दर्शनक पहिल अवसर भेटल वर्ष 1995 मे।रांटी,मधुबनी मे साहित्य अकादेमी द्वारा आयोजित ‘अखिल भारतीय कवि सम्मेलन’क जहि सत्र मे हमरा काव्य-पाठ करबाक छल,तेकर संचालनक भार भीम भाय पर रहनि।भीम भाय कें मंच पर देखब एकटा अद्भुत अनुभव अछि।ओ बैसलहु रहए छथि त सभ सं उंच देखाइ छथि।ठाढ होइ छथि त पर्वताकार देखाइ छथि।बाजय छथि त घन-गर्जनक निनादक अनुभव होइत अछि। से,ओहि सत्र मे जखनि हमर काव्य-पाठक बेर आएल त हमरा आमंत्रित करबाक लेल अपन विशिष्ट उच्चारण मे भीम भायक घोषणा रहनि, ‘अपन लेखकीय प्रताप सं जे मैथिली कविताक परती कें तोड़लनि,से तपस्वी श्रमसाधक अरविन्द ठाकुर आबथु आ अपन कविताक पाठ करथु’। अपन ठाम पर सं उठैत-उठैत हमरा क्षणांश लेल भीम भायक विरोध मे लिखल शिकायत-पत्र मन पड़ल, ओहि पर कएल अपन दस्तखत मन पड़ल,मैथिली साहित्य मे अपन अकिंचन-पात्रता मन पड़ल आ हम किंचित लज्जित भावक संग काव्य-पाठ लेल प्रस्तुत भेल रही।इएह छिऐ ‘भीमीय पद्धति’, जेकर माध्यम सं व्यक्ति अपन कद ततेक उंच कए लएत अछि जे आन सभ व्यक्तित्व ओकरा आगू छोट पड़ि जाइत अछि। हमरा नहि बूझल अछि जे भीम भाय माछ-मासु खाइ छथि वा नहि?किन्तु ओ अपन सामाजिक-साहित्यिक दुनू व्यक्तित्व मे एकदम दुद्धा वैष्णव छथि। हुनक आक्रोषहु अपन अभिव्यक्ति लेल शाक्तक नहि,वैष्णवक शरण मे जाइ छनि। ***** ई-पत्रिका ‘विदेह’ जीवित साहित्यकार सभ पर विशेषांक निकालबाक योजना बनएलक त वर्ष 2016 मे ओकर श्रीगणेश हमरहि सं कएलक।एहि विशेषांक लेल भीम भाय सेहो एकटा आलेख लिखलनि।बाद मे 2020 मे एकर मुद्रित रूप ‘स्वतंत्रचेता’ नाम सं प्रकाशित भेल। ई पोथी हमरा लग पहुंचल त हम फेसबुक पर एकर सहभागी लेखकलोकनि कें टैग करैत तेकर सूचना 20 दिसम्बर,2020 कें पोस्ट कएल।भीम भाय तावत फेसबुक पर अपन उपस्थिति दर्ज कए चुकल छला। एहि पोस्ट पर ओ टिप्पणी कएलनि, “अरविन्द फुला गेल।भ्रमर सभ मकरन्द पान ले’ टुटि पड़त। हमरा त एतहि सं सुंघ’ पड़त……..”।प्रत्युत्तर मे हम लिखलियनि, “फुलाएल अरविन्द अहांक हस्तारविन्द तक दौगल पहुंचत”।भीम भाय टिपलनि, “तखन तं हमरो मनारविन्द खिलखिला उठत”। किन्तु दौगल पहुंचबाक क्रिया बिलम्बित होइत गेल।कोरोनाक संक्रमण चहुंदिस पसरल रहए आ तेकरा चलते हमर बाहरी आवाजाही दीर्घकाल सं बन्द रहए। अजित जी (अजित आजाद) जखनि सूचित कएलनि जे हमर दोसर गजल संग्रह ‘मीन तुलसीपात पर’ छपि कए आबि गेल अछि त लागल जे इएह समय अछि जे भीम भायक मनारविन्द कें खिलखिलएबाक भांज कए लेल जाइ।9 फरवरी,2021 कें अपन गाड़ी सं पहिने मधुबनी अएलहुं।संयोगवश ‘स्वतंत्रचेता’क सम्पादक आशीष अनचिन्हार सेहो अपन गाम आएल रहथि आ ओ सेहो नवारम्भ कार्यालय पहुंच गेल रहथि—नवोनाथ झा जीक संग।ओतहि बैठका जमि गेल।फेर भेलए जे दिलीप कुमार झा अपन टांग मे चोट लगाए बैसला अछि त हुनकहु सं भेंट कैए लेल जाए।ई भेंटघांट सम्पन्न करैत बेस बिलम्ब भए गेल। मधुबनी सं रहिका दके निकललहुं जे आशीष अनचिन्हार कें हुनक गाम छोड़ैत दरभंगा निकलि जाएब। हुनका छोड़ैत आगू बढलहुं त भूखक तीव्रता सं छटपटाए गेलहुं।एकटा लाईन होटल पर रुकि भोजन कएल।तहि बीच मे भीम भाय कें फोन कएलियनि जे हम आधा घंटा मे पहुंच रहल छी।ओ कहलनि जे ओ घर सं बाहर छथि आ जं हुनका कनेक विलम्ब होनि त हम हुनक घर पर हुनक प्रतीक्षा करी।दरभंगाक ट्रैफिकक सघनता आ छपकी परड़ी जएबाक रस्ताक संकीर्णताक चलते हमरहि विलम्ब भेल।पहुंचलहुं त भीम भाय पहिनहि सं उपस्थित आ प्रतीक्षारत रहथि। हुलसि कए बहरएला। हम गाड़ी सं किताब निकालए लागलहुं त हमर मना करितहु-करितहु ओ हाथ बढाए कए किताब धए लेलनि।दुनू किताब देखि बहुत प्रफुल्लित भेला।बधाइ देलनि।ताबत विभुति आनन्द सेहो आबि गेल रहथि आ तेकर कनिकहि बाद दमन कुमार झा सेहो। चाय आएल।गप-सरक्का भेल।ता हमर ध्यान घड़ी दिस गेल। छह सं उपर होइत रहए।बहुत दिनक बाद भेंट भेल रहए आ तें और गप करबाक मन रहए।किन्तु एकर बाद हमरा समस्तीपुर सेहो जएबाक रहए आ ओतय सं रोसड़ा आ बिरौल होइत सुपौल घुरबाक रहए।तें हम हड़बड़ाए कए अनुमति मांगलियनि।भीम भाय सन्तुष्ट नहि रहथि, किन्तु यात्रा-पथक दूरी देखैत ओ सहमति देलनि। छुछाउन सन एहि भेंट सं मन सेहो छुछाउन-छुछाउन लागैत रहए।गाड़ी पर चढि विदा होइत एतबे टा संतोष रहए जे पोथी भीम भायक हाथ मे पहुंचि गेलनि।लहेरियासराय टपलाक बाद अकस्मात ध्यान मे आएल—“जा!पोथी पाबि भीम भायक मनारविन्द खिलखिलएलनि कि नहि,से त हुनका सं पुछबे नहि कएलियनि।“ फेर मन मे आएल जे सभटा बात पुछिअहि कए थोड़बे बुझल जाइ छै।इन्ट्युशनहु कोनो चीज होइ छै कि नहि! अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३. पद्य ३.१.कल्पना झा- किछु छुटि गेल कल्पना झा किछु छुटि गेल तेतरिक खट्टा लतामक भक्खा खेसारिक झक्खा मोन परै ओ अमलता। हीत सन मीत नय कोइलिक सन बोल नय रातिक अन्हरिया में भगजोगनिक सन इजोरिया नय। ठोढ पर लाली तयौ मुंह खाली पानक दिक में किलोल करय सुपारी। बिसरी गेलवं सोहारी कतो भेटत बुआरी भखरि गेल इनार सब पोखरिक अछि लचारी। धानक पांज नय खेत बनल घरारी गाम में शहर क सेंध परल बिसरि गेलवं कोठी आ बखारी। -कल्पना झा, बोकारो झारखंड अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ........................................................................................................................ संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल  मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] Videha e-Learning पेटार (रिसोर्स सेन्टर) शब्द-व्याकरण-इतिहास MAITHILI IDIOMS & PHRASES मैथिली मुहावरा एवम् लोकोक्ति प्रकाश- रमाकान्त मिश्र मिहिर (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) डॉ. ललिता झा- मैथिलीक भोजन सम्बन्धी शब्दावली (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) मैथिली शब्द संचय MAITHILI DICTIONARY- RAMDEO JHA (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) ENGLISH MAITHILI COMPUTER DICTIONARY MAITHILI ENGLISH DICTIONARY अणिमा सिंह -Shishu_Geet_Khel_Anima_Singh डॉ. रमण झा मैथिली काव्यमे अलङ्कार    अलङ्कार-भास्कर आनन्द मिश्र (सौजन्य श्री रमानन्द झा "रमण")- मिथिला भाषाक सुबोध व्याकरण BHOLALAL DAS मैथिली सुबोध व्याकरण- भोला लाल दास राधाकृष्ण चौधरी- A Survey of Maithili Literature ........................................................................................................................ मूलपाठ तिरहुता लिपिक उद्भव ओ विकास (यू.पी.एस.सी. सिलेबस) राजेश्वर झा- मिथिलाक्षरक उद्भव ओ विकास (मैथिली साहित्य संस्थान आर्काइव) Surendra Jha Suman दत्त-वती (मूल)- श्री सुरेन्द्र झा सुमन (यू.पी.एस.सी. सिलेबस) प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) CIIL SITE ........................................................................................................................ समीक्षा सुभाष चन्द्र यादव-राजकमल चौधरी: मोनोग्राफ शिव कुमार झा "टिल्लू" अंशु-समालोचना डॉ बचेश्वर झा- B_JHA_Nibhand_Nikunj.pdf डॉ. देवशंकर नवीन- Adhunik_Sahityak_Paridrishya डॉ. रमण झा- भिन्न-अभिन्न प्रेमशंकर सिंह- मैथिली भाषा साहित्य:बीसम शताब्दी (आलोचना) डॉ. रमानन्द झा 'रमण' हिआओल अखियासल     CIIL SITE दुर्गानन्द मण्डल-चक्षु RAMDEO JHA दत्त-वतीक वस्तु कौशल- डॊ. श्रीरामदेवझा SHAILENDRA MOHAN JHA परिचय निचय- डॊ शैलेन्द्र मोहन झा ........................................................................................................................ अतिरिक्त पाठ पहिने मिथिला मैथिलीक सामान्य जानकारी लेल एहि पोथी केँ पढ़ू:- राधाकृष्ण चौधरी- मिथिलाक इतिहास फेर एहि मनलग्गू फाइल सभकेँ सेहो पढ़ू:- केदारनाथ चौधरी चमेलीरानी                         माहुर                          करार कुमार पवन पइठ (मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ कथा) (साभार अंतिका)       डायरीक खाली पन्ना (साभार अंतिका) याेगेन्द्र पाठक वियाेगी- विज्ञानक बतकही रामलोचन ठाकुर- मैथिली लोककथा SAHITYA AKADEMI http://sahitya-akademi.gov.in/publications/e-books.jsp http://sahitya-akademi.gov.in/general/Digitalbooks.jsp CIIL http://corpora.ciil.org/maisam.htm अखियासल (रमानन्द झा रमण) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI1.pdf जुआयल कनकनी- महेन्द्र http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI2.pdf प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI3.pdf सृजन केर दीप पर्व- सं केदार कानन आ अरविन्द ठाकुर http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI4.pdf मैथिली गद्य संग्रह- सं शैलेन्द्र मोहन झा http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI5.pdf JNU http://sanskrit.jnu.ac.in/maithili/index.jsp http://sanskrit.jnu.ac.in/student_projects/lexicon.jsp?lexicon=maithili ARCHIVE.ORG https://archive.org/details/%40vijay_deo_jha?&sort=-publicdate&page=2 VIDEHA MAITHILI BOOKS/ PICTURE-AUDIO-VIDEO ARCHIVE http://videha.co.in/new_page_15.htm https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ ALL INDIA RADIO DOORDARSHAN आकाशवाणी दूरदर्शन http://prasarbharati.gov.in/ http://newsonair.com/ https://doordarshan.gov.in/ आकाशवाणी मैथिली पोडकास्ट http://prasarbharati.gov.in/podcast.php?filterlang=Maithili&from=1947-08-15&fromwp=2020-08-29&to=2050-12-31&search=GO आकाशवाणी पटना/ दरभंगा मैथिली रेजनल न्यूज टेक्स्ट डाउनलोड-1 http://newsonair.com/RNU-NSD-Audio-Archive-Search.aspx आकाशवाणी पटना/ दरभंगा मैथिली रेजनल न्यूज टेक्स्ट डाउनलोड-2 http://newsonair.com/Regional-Text.aspx आकाशवाणी दरभंगा http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=282 आकाशवाणी दरभंगा यू ट्यूब चैनल https://www.youtube.com/channel/UCGdNveEFmv4pPolWiTEMxVA आकाशवाणी भागलपुर http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=359 आकाशवाणी पूर्णियाँ http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=256 आकाशवाणी पटना http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=122 IGNCA http://ignca.nic.in/coilnet/mithila.htm http://ignca.nic.in/coilnet/kalyani.htm (MAITHILI ENGLISH DICTIONARY) http://tdil.mit.gov.in/CoilNet/IGNCA/mithila.htm MITHILA DARSHAN https://mithiladarshan.com/ (online pdf of Maithili journal) I LOVE MITHILA https://www.ilovemithila.com/  (online maithili journal) मैथिली साहित्य संस्थान https://www.maithilisahityasansthan.org/ https://www.maithilisahityasansthan.org/resources (online pdf of Reasearch Papers/ books) ........................................................................................................................ VIDEHA e-LEARNING YOUTUBE CHANNEL https://www.youtube.com/channel/UC4abVKqMj2pDWIAkXiOHp7A (अनुवर्तते) -गजेन्द्र ठाकुर विदेहक किछु विशेषांक:- १) हाइकू विशेषांक १२ म अंक, १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf          Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf       12.pdf २) गजल विशेषांक २१ म अंक,  १ नवम्बर २००८ Videha_01_11_2008.pdf       Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf         21.pdf ३) विहनि कथा विशेषांक ६७ म अंक, १ अक्टूबर २०१० Videha_01_10_2010        Videha_01_10_2010_Tirhuta             67 ४) बाल साहित्य विशेषांक ७० म अंक, १५ नवम्बर २०१० Videha_15_11_2010        Videha_15_11_2010_Tirhuta             70 ५) नाटक विशेषांक ७२ म अंक १५ दिसम्बर२०१० Videha_15_12_2010        Videha_15_12_2010_Tirhuta           72 ६) नारी विशेषांक ७७म अंक ०१ मार्च २०११ Videha_01_03_2011        Videha_01_03_2011_Tirhuta           77 ७) अनुवाद विशेषांक (गद्य-पद्य भारती) ९७म अंक Videha_01_01_2012 Videha_01_01_2012_Tirhuta           97 ८) बाल गजल विशेषांक विदेहक अंक १११ म अंक, १ अगस्त २०१२ Videha_01_08_2012        Videha_01_08_2012_Tirhuta           111 ९) भक्ति गजल विशेषांक १२६ म अंक, १५ मार्च २०१३ Videha_15_03_2013        Videha_15_03_2013_Tirhuta           126 १०) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक १४२ म, अंक १५ नवम्बर २०१३ Videha_15_11_2013        Videha_15_11_2013_Tirhuta           142 ११) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 १२) अरविन्द ठाकुर विशेषांक १८९ म अंक १ नवम्बर २०१५ Videha_01_11_2015 १३) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक १९१ म अंक १ दिसम्बर २०१५ Videha_01_12_2015 १४) विदेह सम्मान विशेषा‍क- २००म अ‍क १५ अप्रैल २०१६/ २०५ म अ‍क १ जुलाई २०१६ Videha_15_04_2016 Videha_01_07_2016 १५) मैथिली सी.डी./ अल्बम गीत संगीत विशेषांक- २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ Videha_01_01_2017 १६) मैथिली वेब पत्रकारिता विशेषांक VIDEHA 313 लेखकसं आमंत्रित रचनापर आम‍ंत्रित आलोचकक टिप्पणीक शृंखला १७) मैथिली बीहनि कथा विशेषांक-२ VIDEHA 317 १८) रामलोचन ठाकुर विशेषांक VIDEHA 319 १९) रामलोचन ठाकुर श्रद्धांजलि विशेषांक VIDEHA 320 लेखकक आमंत्रित रचना आ ओइपर आमंत्रित समीक्षकक समीक्षा सीरीज १. कामिनीक पांच टा कविता आ ओइपर मधुकान्त झाक टिप्पणी विदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016 "पाठक हमर पोथी किए पढ़थि"- लेखक द्वारा अप्पन पोथी/ रचनाक समीक्षा सीरीज १. आशीष अनचिन्हार 'विदेह' क ३२७ म अंक ०१ अगस्त २०२१ एडिटर्स चोइस सीरीज एडिटर्स चोइस सीरीज-१ विदेहक १२३ म (०१ फरबरी २०१३) अंकमे बलात्कारपर मैथिलीमे पहिल कविता प्रकाशित भेल छल। ई दिसम्बर २०१२ क दिल्लीक निर्भया बलात्कार काण्डक बादक समय छल। ओना ई अनूदित रचना छल, तेलुगुमे पसुपुलेटी गीताक एहि कविताक हिन्दी अनुवाद केने छलीह आर. शांता सुन्दरी आ हिन्दीसँ मैथिली अनुवाद केने छलाह विनीत उत्पल। हमर जानकारीमे एहिसँ बेशी सिहराबैबला कविता कोनो भाषामे नहि रचल गेल अछि। सात सालक बादो ई समस्या ओहने अछि। ई कविता सभकेँ पढ़बाक चाही, खास कऽ सभ बेटीक बापकेँ, सभ बहिनक भाएकेँ आ सभ पत्नीक पतिकेँ। आ विचारबाक चाही जे हम सभ अपना बच्चा सभ लेल केहन समाज बनेने छी। एडिटर्स चोइस सीरीज-१ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-२ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच ब्रेस्ट कैसरक समस्यापर विदेह मे मीना झा केर एकटा लघु कथा प्रकाशित भेल। ई मैथिलीक पहिल कथा छल जे ब्रेस्ट कैसर पर लिखल गेल। हिन्दीमे सेहो ताधरि एहि विषयपर कथा नहि लिखल गेल छल, कारण एहि कथाक ई-प्रकाशित भेलाक १-२ सालक बाद हिन्दीमे दू गोटेमे घोंघाउज भऽ रहल छल कि पहिल हम आकि हम, मुदा दुनूक तिथि मैथिलीक कथाक परवर्ती छल। बादमे ई विदेह लघु कथामे सेहो संकलित भेल। एडिटर्स चोइस सीरीज-२ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-३ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिलक किछु बाल कविता प्रकाशित भेल। बादमे हुनकर ३ टा बाल कविता विदेह शिशु उत्सवमे संकलित भेल जाहिमे २ टा कविता बेबी चाइल्डपर छल। पढ़ू ई तीनू कविता, बादक दुनू बेबी चाइल्डपर लिखल कविता पढ़बे टा करू से आग्रह। एडिटर्स चोइस सीरीज-३ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-४ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच जगदानन्द झा मनुक एकटा दीर्घ बाल कथा कहि लिअ बा उपन्यास प्रकाशित भेल, नाम छल चोनहा। बादमे ई रचना विदेह शिशु उत्सवमे संकलित भेल, ई रचना बाल मनोविज्ञानपर आधारित मैथिलीक पहिल रचना छी, मैथिली बाल साहित्य कोना लिखी तकर ट्रेनिंग कोर्समे एहि उपन्यासकेँ राखल जेबाक चाही। कोना मॊडर्न उपन्यास आगाँ बढ़ै छै, स्टेप बाइ स्टेप आ सेहो बाल उपन्यास। पढ़बे टा करू से आग्रह। एडिटर्स चोइस सीरीज-४ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-५ एडिटर्स चोइस ५ मे मैथिलीक "उसने कहा था" माने कुमार पवनक दीर्घकथा "पइठ" (साभार अंतिका) । हिन्दीक पाठक, जे "उसने कहा था" पढ़ने हेता, केँ बुझल छन्हि जे कोना अहि कथाकेँ रचि चन्द्रधर शर्मा ’गुलेरी’ अमर भऽ गेलाह। हम चर्चा कऽ रहल छी, कुमार पवनक "पइठ" दीर्घकथाक। एकरा पढ़लाक बाद अहाँकेँ एकटा विचित्र, सुखद आ मोन हौल करैबला अनुभव भेटत, जे सेक्सपीरिअन ट्रेजेडी सँ मिलितो लागत आ फराको। मुदा एहि रचनाकेँ पढ़लाक बाद तामस, घृणा सभपर नियंत्रणकेँ आ सामाजिक/ पारिवारिक दायित्वकेँ सेहो अहाँ आर गंभीरतासँ लेबै, से धरि पक्का अछि। मुदा एकर एकटा शर्त अछि जे एकरा समै निकालि कऽ एक्के उखड़ाहामे पढ़ि जाइ। एडिटर्स चोइस सीरीज-५ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-६ जगदीश प्रसाद मण्डलक लघुकथा "बिसाँढ़": १९४२-४३ क अकालमे बंगालमे १५ लाख लोक मुइला, मुदा अमर्त्य सेन लिखैत छथि जे हुनकर कोनो सर-सम्बन्धी एहि अकालमे नहि मरलन्हि। मिथिलोमे अकाल आएल १९६७ ई. मे आ इन्दिरा गाँधी जखन एहि क्षेत्र अएली तँ हुनका देखाओल गेल जे कोना मुसहर जातिक लोक बिसाँढ़ खा कऽ एहि अकालकेँ जीति लेलन्हि। मैथिलीमे लेखनक एकभगाह स्थिति विदेहक आगमनसँ पहिने छल। मैथिलीक लेखक लोकनि सेहो अमर्त्य सेन जेकाँ ओहि महाविभीषिकासँ प्रभावित नहि छला आ तेँ बिसाँढ़पर कथा नहि लिखि सकला। जगदीश प्रसाद मण्डल एहिपर कथा लिखलन्हि जे प्रकाशित भेल चेतना समितिक पत्रिकामे, मुदा कार्यकारी सम्पादक द्वारा वर्तनी परिवर्तनक कारण ओ मैथिलीमे नहि वरण् अवहट्ठमे लिखल बुझा पड़ल, आ ओतेक प्रभावी नहि भऽ सकल कारण विषय रहै खाँटी आ वर्तनी कृत्रिम। से एकर पुनः ई-प्रकाशन अपन असली रूपमे भेल विदेहमे आ ई संकलित भेल "गामक जिनगी" लघुकथा संग्रहमे। एहि पोथीपर जगदीश प्रसाद मण्डलकेँ टैगोर लिटरेचर अवार्ड भेटलनि। जगदीश प्रसाद मण्डलक लेखनी मैथिली कथाधाराकेँ एकभगाह हेबासँ बचा लेलक, आ मैथिलीक समानान्तर इतिहासमे मैथिली साहित्यकेँ दू कालखण्डमे बाँटि कऽ पढ़ए जाए लागल- जगदीश प्रसाद मण्डलसँ पूर्व आ जगदीश प्रसाद मण्डल आगमनक बाद। तँ प्रस्तुत अछि लघुकथा बिसाँढ़- अपन सुच्चा स्वरूपमे। एडिटर्स चोइस सीरीज-६ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-७ मैथिलीक पहिल आ एकमात्र दलित आत्मकथा: सन्दीप कुमार साफी। सन्दीप कुमार साफीक दलित आत्मकथा जे अहाँकेँ अपन लघु आकाराक अछैत हिलोड़ि देत आ अहाँक ई स्थिति कऽ देत जे समानान्तर मैथिली साहित्य कतबो पढ़ू अहाँकेँ अछौं नहि होयत। ई आत्मकथा विदेहमे ई-प्रकाशित भेलाक बाद लेखकक पोथी "बैशाखमे दलानपर"मे संकलित भेल आ ई मैथिलीक अखन धरिक एकमात्र दलित आत्मकथा थिक। तँ प्रस्तुत अछि मैथिलीक पहिल दलित आत्मकथा: सन्दीप कुमार साफीक कलमसँ। एडिटर्स चोइस सीरीज-७  (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-८ नेना भुटकाकेँ रातिमे सुनेबा लेल किछु लोककथा (विदेह पेटारसँ)। एडिटर्स चोइस सीरीज-८ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-९ मैथिली गजलपर परिचर्चा (विदेह पेटारसँ)। एडिटर्स चोइस सीरीज-९ (डाउनलोड लिंक) जगदीश प्रसाद मण्डल जीक ६५ टा पोथीक नव संस्करण विदेहक २३३ सँ २५० धरिक अंकमे धारावाहिक प्रकाशन  नीचाँक लिंकपर पढ़ू:- Videha_15_05_2018 Videha_01_05_2018 Videha_15_04_2018 Videha_01_04_2018 Videha_15_03_2018 Videha_01_03_2018 Videha_15_02_2018 Videha_01_02_2018 Videha_15_01_2018 Videha_01_01_2018 Videha_15_12_2017 Videha_01_12_2017 Videha_15_11_2017 Videha_01_11_2017 Videha_15_10_2017 Videha_01_10_2017 Videha_15_09_2017 Videha_01_09_2017 विदेह ई-पत्रिकाक  बीछल रचनाक संग- मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ रचनाक एकटा समानान्तर संकलन: विदेह: सदेह: १ (२००८-०९) देवनागरी विदेह: सदेह: १ (२००८-०९) तिरहुता विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) देवनागरी विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) तिरहुता विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०)देवनागरी विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०) तिरहुता विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०)देवनागरी विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०) तिरहुता विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]देवनागरी विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]  तिरहुता विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]- दोसर संस्करण देवनागरी विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ]देवनागरी विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ] तिरहुता विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ]देवनागरी विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ]  तिरहुता विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ]देवनागरी विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ] तिरहुता विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ]देवनागरी विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ] तिरहुता विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ]देवनागरी विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ] तिरहुता विदेह:सदेह ११ विदेह:सदेह १२ विदेह:सदेह १३ The readers of English translations of Maithili Novel "sahasrabadhani" and verse collection "sahasrabdik chaupar par" has intimated that the English translation has not been able to grasp the nuances of original Maithili. Therefore the Author has started translating his Maithili works in English himself. After these translations are complete these would be the official translations authorised by the Author of the original works.-Editor Maithili Books can be downloaded from: https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ विदेह सम्मान: सम्मान-सूची (समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार सहित) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। सूचना/ घोषणा १ "विदेह सम्मान" समानान्तर साहित्य अकदेमी पुरस्कारक नामसँ प्रचलित अछि। "समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार" (मैथिली), जे साहित्य अकादेमीक मैथिली विभागक गएर सांवैधानिक काजक विरोधमे शुरु कएल छल, लेल अनुशंसा आमन्त्रित अछि। अनुशंसा २०१९ आ २०२० बर्ख लेल निम्न कोटि सभमे आमन्त्रित अछि: १) फेलो २)मूल पुरस्कार ३)बाल-साहित्य ४)युवा पुरस्कार आ ५) अनुवाद पुरस्कार। अपन अनुशंसा ३१ दिसम्बर २०२० धरि २०१९ पुरस्कारक लेल आ ३१ मार्च २०२१ धरि २०२०क पुरस्कारक लेल पठाबी। पुरस्कारक सभ क्राइटेरिया साहित्य अकादेमी, दिल्लीक समानान्तर पुरस्कारक समक्ष रहत, जे एहि लिंक sahitya-akademi.gov.in पर उपलब्ध अछि। अपन अनुशंसा editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २ “मिथिला मखान” फिल्म देखू मात्र १०१ टाकामे। Android App “BEJOD” download करू वा जाउ www.bejod.in पर, signup करू, एकटा ईमेल जायत, अपन ईमेल खोलू आ ओकरा क्लिक करू अहाँक अकाउंट एक्टीवेट भय जायत। आब मिथिला मखान रेण्ट पर लिअ, डेबिट कार्डसँ १०१ टाका अॉनलाइन पेमेंट करू आ फिल्म देखू। ३ विदेह अपन आगामी अंक (२०२१ क प्रारम्भमे) श्री रामलोचन ठाकुर पर विशेषांक निकालबाक नेयार केने अछि। हुनका सम्बन्धी रचना आमंत्रित अछि (संस्मरण, साक्षात्कार, समीक्षा आदि) जे ३१ दिसम्बर २०२० धरि editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाओल जा सकैत अछि। विदेह पेटारक अन्तर्गत (पोथी डाउनलोड साइट) मे http://www.videha.co.in/new_page_15.htm  हुनकर मौलिक, अनूदित आ सम्पादित रचना फ्री पी.डी.एफ. डाउनलोड लेल उपलब्ध अछि। विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम्: VIDEHA: AN IDEA FACTORY (c)२००४-२०२१. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHAसम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: डॉ उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम वि‍लास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक -स्त्री कोना- इरा मल्लिक। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि)editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि। एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै, आ से हानि-लाभ रहित आधारपर छै आ तैँ ऐ लेल कोनो रॊयल्टीक/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै। तेँ रॉयल्टीक/ पारिश्रमिकक इच्छुक विदेहसँ नै जुड़थि, से आग्रह। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत।  एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-2021 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। ५ जुलाई २००४ केँ http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA वि  दे  ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् 'विदेह' ३३१ म अंक ०१ अक्टूबर २०२१ (वर्ष १४ मास १६६ अंक ३३१)

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