VIDEHA — Issue 332 / अंक ३३२

Publication: VIDEHA · Issue: 332
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विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA ISSN 2229-547X VIDEHA 'विदेह' ३३२ म अंक १५ अक्टूबर २०२१ (वर्ष १४ मास १६६ अंक ३३२) १. गजेन्द्र ठाकुर- संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल  मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल सेहो] [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] [FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI ALSO] २. गद्य २.१.रबीन्द्र नारायण मिश्र-लजकोटर-३०म खेप २.२.जगदीश चन्द्र ठाकुर ’अनिल’- आँखिमे चित्र हो मैथिली केर (आत्मकथा)- २०. तीन बरख आदापुरमेे २.३. योगेन्द्र पाठक ’वियोगी’- पिरामिडक देशमे (तेसर खेप) २.४. मुन्नाजी- बीहनि कथा- टकटकी २.५.ज्ञानवर्द्धन कंठ-बीहनि कथा-फैदाबला बिजनेस २.६.डाॅ. किशन कारीगर-१. विलुप्त होइत मिथिला के लोक संस्कृति घोड़ा (कठघोड़वा) नाच २.कोन बिरड़ो मे उधिया गेल?कतअ हरा गेल मिथिला के नटुआ नाच? २.७.डाॅ. किशन कारीगर-पोसलाहा छागर सब आई गेले घर छह?(हास्य कटाक्ष) ३. पद्य ३.१.ज्ञानवर्द्धन कंठ- गजल ३.२.आशीष अनचिन्हार- २ टा गजल Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Books/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाउ। VIDEHA ARCHIVE विदेह पेटार View Videha googlegroups (since July 2008) view Videha Facebook Official Group (since January 2008)- for announcements १. गजेन्द्र ठाकुर ........................................................................................................................ ........................................................................................................................ [संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल  मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री] [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल सेहो] [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] [FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI ALSO] यू. पी. एस. सी. (मेन्स) २०२० ऑप्शनल: मैथिली साहित्य विषयक टेस्ट सीरीज यू.पी.एस.सी. क प्रिलिमिनरी परीक्षा २०२० सम्पन्न भऽ गेल अछि। जे परीक्षार्थी एहि परीक्षामे उत्तीर्ण करताह आ जँ मेन्समे हुनकर ऑप्शनल विषय मैथिली साहित्य हेतन्हि तँ ओ एहि टेस्ट-सीरीजमे सम्मिलित भऽ सकैत छथि। टेस्ट सीरीजक प्रारम्भ प्रिलिम्सक रिजल्टक तत्काल बाद होयत। टेस्ट-सीरीजक उत्तर विद्यार्थी स्कैन कऽ editorial.staff.videha@gmail.com पर पठा सकैत छथि, जँ मेलसँ पठेबामे असोकर्ज होइन्हि तँ ओ हमर ह्वाट्सएप नम्बर 9560960721 पर सेहो प्रश्नोत्तर पठा सकैत छथि। संगमे ओ अपन प्रिलिम्सक एडमिट कार्डक स्कैन कएल कॉपी सेहो वेरीफिकेशन लेल पठाबथि। परीक्षामे सभ प्रश्नक उत्तर नहि देमय पड़ैत छैक मुदा जँ टेस्ट सीरीजमे विद्यार्थी सभ प्रश्नक उत्तर देताह तँ हुनका लेल श्रेयस्कर रहतन्हि। विदेहक सभ स्कीम जेकाँ ईहो पूर्णतः निःशुल्क अछि।- गजेन्द्र ठाकुर संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सर्विसेज (मुख्य) परीक्षा, २०२० मैथिली (ऐच्छिक) लेल टेस्ट सीरीज/ प्रश्न-पत्र- १ आ २ TEST SERIES-1 TEST SERIES-2 [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल/ FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI] NTA_UGC_NET_MAITHILI_01 NTA_UGC_NET_MAITHILI_02 NTA_UGC_NET_MAITHILI_03 (श्री शम्भु कुमार सिंह द्वारा संकलित) Videha e-Learning MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) UPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS BPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. (ऐच्छिक) मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. (अनिवार्य) मैथिली प्रश्नपत्र- बी.पी.एस.सी.(ऐच्छिक) मैथिलीक वर्तनी १ भाषापाक २ मैथिलीक वर्तनीमे पर्याप्त विविधता अछि। मुदा प्रश्नपत्र देखला उत्तर एकर वर्तनी इग्नू BMAF001 सँ प्रेरित बुझाइत अछि, से एकर एकरा एक उखड़ाहामे उनटा-पुनटा दियौ, ततबे धरि पर्याप्त अछि। यू.पी.एस.सी. क मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेल सेहो ई पर्याप्त अछि, से जे विद्यार्थी मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेने छथि से एकर एकटा आर फास्ट-रीडिंग दोसर-उखड़ाहामे करथि| IGNOU  इग्नू       BMAF-001 ........................................................................................................................ MAITHILI (OPTIONAL) TOPIC 1    [Place of Maithili in Indo-European Language Family/ Origin and development of Maithili language (Sanskrit, Prakrit, Avhatt, Maithili) भारोपीय भाषा परिवार मध्य मैथिलीक स्थान/ मैथिली भाषाक उद्भव ओ विकास (संस्कृत, प्राकृत, अवहट्ट, मैथिली)] TOPIC 2    (Criticism- Different Literary Forms in Modern Era/ test of critical ability of the candidates) TOPIC 3    (ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददास सिलेबसमे छथि आ रसमय कवि चतुर चतुरभुज विद्यापति कालीन कवि छथि। एतय समीक्षा शृंखलाक प्रारम्भ करबासँ पूर्व चारू गोटेक शब्दावली नव शब्दक पर्याय संग देल जा रहल अछि। नव आ पुरान शब्दावलीक ज्ञानसँ ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददासक प्रश्नोत्तरमे धार आओत, संगहि शब्दकोष बढ़लासँ खाँटी मैथिलीमे प्रश्नोत्तर लिखबामे धाख आस्ते-आस्ते खतम होयत, लेखनीमे प्रवाह आयत आ सुच्चा भावक अभिव्यक्ति भय सकत।) TOPIC 4                (बद्रीनाथ झा शब्दावली आ मिथिलाक कृषि-मत्स्य शब्दावली) TOPIC 5                (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोरिक गाथामे समाज ओ संस्कृति) TOPIC 6                (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- विद्यापति) TOPIC 7                (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- पद्य समीक्षा- बानगी) TOPIC 8                (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोक गाथा नृत्य नाटक संगीत) TOPIC 9                (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- यात्री) TOPIC 10               (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली रामायण) TOPIC 11               (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली उपन्यास) TOPIC 12               (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- शब्द विचार) TOPIC 13               (तिरहुता लिपिक उद्भव ओ विकास) TOPIC 14                 (आधुनिक नाटकमे चित्रित निर्धनताक समस्या- शम्भु कुमार सिंह)् TOPIC 15                 (स्वातंत्र्योत्तर मैथिली कथामे सामाजिक समरसता- अरुण कुमार सिंह) TOPIC 16                 (यू. पी.एस.सी. मैथिली प्रथम पत्रक परीक्षार्थी हेतु उपयोगी संकलन, मैथिलीक प्रमुख उपभाषाक क्षेत्र आ ओकर प्रमुख विशेषता, मैथिली साहित्यक आदिकाल, मैथिली साहित्यक काल-निर्धारण- शम्भु कुमार सिंह) TOPIC 17                (मैथिली आ दोसर पुबरिया भाषाक बीचमे सम्बन्ध (बांग्ला, असमिया आ ओड़िया) [यू.पी.एस.सी. सिलेबस, पत्र-१, भाग-“ए”, क्रम-५]) TOPIC 18                 [मैथिली आ हिन्दी/ बांग्ला/ भोजपुरी/ मगही/ संथाली- बिहार लोक सेवा आयोग (बी.पी.एस.सी.) केर सिविल सेवा परीक्षाक मैथिली (ऐच्छिक) विषय लेल] ........................................................................................................................ GENERAL STUDIES (PRELIMINARY & MAINS) GS (Pre) TOPIC 1 GS (Mains) NCERT-ENVIRONMENT CLASS XI-XII NCERT PDF I-XII TN BOARD PDF I-XII ALL INDIA RADIO ENGLISH NEWS ALL INDIA RADIO NEWS ARCHIVE ALL INDIA RADIO TALKS AND CURRENT AFFAIRS RAJYA SABHA TV NEWS DISCUSSIONS OTHER OPTIONALS IGNOU eGYANKOSH (अनुवर्तते) -गजेन्द्र ठाकुर २. गद्य २.१.रबीन्द्र नारायण मिश्र-लजकोटर-३०म खेप २.२.जगदीश चन्द्र ठाकुर ’अनिल’- आँखिमे चित्र हो मैथिली केर (आत्मकथा)- २०. तीन बरख आदापुरमेे २.३. योगेन्द्र पाठक ’वियोगी’- पिरामिडक देशमे (तेसर खेप) २.४. मुन्नाजी- बीहनि कथा- टकटकी २.५.ज्ञानवर्द्धन कंठ-बीहनि कथा-फैदाबला बिजनेस २.६.डाॅ. किशन कारीगर-१. विलुप्त होइत मिथिला के लोक संस्कृति घोड़ा (कठघोड़वा) नाच २.कोन बिरड़ो मे उधिया गेल?कतअ हरा गेल मिथिला के नटुआ नाच? २.७.डाॅ. किशन कारीगर-पोसलाहा छागर सब आई गेले घर छह?(हास्य कटाक्ष) रबीन्द्र नारायण मिश्र लजकोटर (धारावाहिक उपन्यास) ३०म खेप जहिन-जहिना हमर सामर्थ्य बढ़ैत गेल तहिना-तहिना हमरा ओहिठाम लोकक ढ़बाहि लागैत रहल ।आखिर कतेक गोटेकेँ हम अपना ओहिठाम रखितिऐक? जकरा अपना ओहिठाम काज नहि भए सकै तकरो कतहु-ने-कतहि जोगार करेबाक प्रयास करी । जाबे ओकरा काज नहि भेटैक,दरमाहा नहि भेटि जाइक,ताबे हमरा ओहिठाम रहबाक ओरिआनरहिते छल । हम अपन मकानक एक तल ओहीसभ हेतु छोड़ि देने रही । हमरा ओतए जेसभ काज करैत छलाह ओहिमे प्रमुख छलाह शंकर । ओ सभक मेट छलाह । हमरा हुनका रहलासँ ई सुविधा छल जे ओ आओर कार्यकर्तासभकेँ नीकसँ व्यवस्था कए लैत छलाह । एक हिसाबे ओ मालिके जकाँ रहैत छलाह । मुदा एकदिन हुनका चलते बेस मोसकिलमे पड़ि गेलहुँ । पुलिस हुनका तकैत-तकैत हमरा लग आबि गेल । ओ कतहु नहि भेटथि । असलमेओ एकटा पड़ोसक कन्याकेँ लए चंपत भए गेल रहथि । कतए गेलाह,कोनो पता नहि । हमरो कहिओ एहिबारेमे किछु नहि कहलाह। आब की होएत? सभठाम हमरे घरक पता देने रहथि । पुलिस हमरा उठाकए थाना लए गेल । आब की करी? ककरा कहिऐक जे जान बाँचत? किछु नहि फुराए । एहि घटनासँ हमरा आँखि खुजि गेल । आब बुझाए जे किएककैकगोटे एहिसभ सँ बँचि कए रहए कहैत छल । मुदा हम ओकरा सभकेँ बुरिबक बुझिऐक । अपन लोकक काज नहि अएलहुँ तँ जीबिए कए की करब " -से मोने-मोन सोची । मुदा आब शंकर तँ तेहन  झटका देलाह जे हाथ-पैर सुन्न लागि रहल अछि । पुलिस लाख हाथ-पैर मारलक, ने ओहि कन्याक, ने शंकरक कोनो पता भेटलैक । हमरा उपर पुलिस दिन-राति दबाब बनओने रहैत छल । कतबो कहिऐक कोनो सुनबाइ नहि । पुलिस हमरा हाजतिमे बंद कए देलक । जमानतो नहिभेटल ।असलमे केस बहुत जगजिआर भए गेल रहैक।अखबार,रेडिओ,टेलीवीजन दिन-राति घोल केने रहैत छलैक । मुदा जखन हमर जहल जेबाक समाचार छपल तँ हमर कतेकोमित्र,शुभचिंतक परेसान भए गेलाह । हमर कर्मचारीसभ सेहो हल्ला केलक । तकर परिणाम उल्टे भेलैक । पुलिस लाठीसँ कर्मचारी सभकेँ ओध-बाधकए देलक । सभटा भेल मुदा शंकर पकड़ल नहिजा सकल । कन्या नवालिग छलि । केना-ने-केना ओकरा संपर्कमे अएलैक आ तकर शंकर नाजायज फएदा उठओलक । कनिको ई नहि सोचेलैक जे हमरो ऊपर किछु असर होएत । जखन दिल्ली आएल रहए तँ किछु नहि रहैक ।आधार कार्ड बनेबाक हेतु हम ओकरा अपन घरक पता देलिऐक । अपना ओहिठाम काज धरा देलिऐक । काज नीक करैक । बात-व्यवहारो नीक रहैक । क्रमशः ओकरापर विश्वास बढ़ैत गेल । कर्मचारीसभक देखरेखक भारओकरे दए देलीऐक । सत बुझी तँ ओ मालिके जकाँ काज करए।ओ एहनो भए सकैत अछि से नहि सोचि सकलहुँ । तकरे फल भोगि रहल छी । जे भेल से भेल आब एहिसँउबड़ब कोना? हमरा जहलमे जेबाक समाचार सुनि एकदिन मदनबाबू भेंट करए अएलाह । ओ कारबारक क्रममे विदेश चल गेल रहथि। ओहिठामसँ अएलाह तँ हमरा बारेमे जानकारी भेटलनि । जहलमे भेंट करए अएलाह । हुनका देखितहि कनाए लागल । ओ हमरा लेल मनुक्खक देहमे भगवानोसँ बेसी रहलाह अछि । हमर हालत देखि हुनका नहि रहल गेलनि । "अहाँक ई हाल केना भेल?" " हमर किछु गलती नहि अछि । मुदा पुलिसकेँ असली गुनहगार नहि भेटलैक तँ हमरे पकड़ि लेलक किएक तँ ओकर पता हमर घरेक छैक ।" "एहनो कतहु भेलैक अछि ।" ओ मोबाइल फोनसँ पता नहि ककरा-ककरासँ गप्प केलाह । औ बाबू! धराधर एकसँ -एक पुलिसक अधिकारी ओतएपहुँचए लागल । ओ सभ हुनकासँ घटी मानि रहल छल । मदनबाबू अड़ि गेलखिन - "पहिने हिनका जहलसँ बाहर करू तखने हम किछु सुनब। " पुलिससभ थरथर काँपि रहल छल । घंटाभरिक अंदरे हमर जमानतक कागज बनि गेल। हम जहलसँ छुटि मदनबाबूकसंगे हुनके ओहिठाम बिदा भेलहुँ । जाबत हम जहलसँ छुटलहुँ नहि ताबे ओ कतहु नहि गेलाह । हुनकर एहि महानताकेँ की कहबै? एहि दुनियाँमे अधलाह लोक अछि तँ भगवान नीको लोकक कमी नहि रखने छथि। तेँ ई संसार चलिओ रहल अछि । मदनबाबूक प्रयाससँ हमरा जमानतो भेल आ किछु दिनक बाद केससँ नामो हटि गेल। मुदा हम तबाह तँ भइए गेलहुँ। सभटा काज लटकि गेल । मासदिन काज बैसिगेलासँ कैकटा कार्यकर्ता एमहर-ओमहर भए गेल । फेरसँ सभकिछुकेँ पटरीपर आनबामे कतेको दिन लागि गेल । मदनबाबूकेँ फेर विदेश जेबाक रहनि । जाइतकाल हमरा बजा कए अपनाभरि बहुत किछु जोगार कए गेलाह । हवाइअड्डाधरि बहुत सिनेहक गप्प-सप्प करैत रहलाह ।कहलाह- " नीक काज करैत रहू । काँटेमे गुलाब फुलाइत छैक । मानलहुँ जे किछुगोटे धोखा दए देलक आ आगुए दए सकैत अछि मुदा तकर चलते अहाँ अपन सही रस्ता किएक बदलि लेब? नीक -नीके होइत छैक । शक्ति इजोतमे होइत छैक,अन्हारमे नहि । दीप जराउ,अन्हारक पाछु नहि जाउ । ई छोट-मोट मामलासभ अपने शांत भए जेतैक । " हमरा गुम्म देखि कहैत छथि- " आब अहाँ बिआह कए लिअ।" हुनकर बात सुनि हम लाजसँ मुड़ी नीचा कए लेलहुँ । जहाजक उड़बाक समय लगीच छल । हुनका प्रणाम केलहुँ । “नीकसँ रहब । पता नहि आब कहिआ भेंट होएत?” से बजैतमदनबाबू अंदर चलि गेलाह । हम अपन घर वापसबिदा भेलहुँ। रस्तामे ओ रहि-रहि कए मोन पड़ैत रहलाह ।थाकि से गेल रही ।झलफल भए गेल छल । हवाइअड्डासँ लौटिकए सबेरे- सकाल सुति रहलहुँ। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। जगदीश चन्द्र ठाकुर ’अनिल’ आँखिमे चित्र हो मैथिलीकेर ( आत्मकथा )             २०.चारि बरख पचरुखीमे – हम  18 .01.1989 क’ साँझमे सीवान आबि गेलहुं आ बैंकसं सटले राज होटलमे टिकलहुं |  19 क’ जीपसं पचरुखी गेलहुँ आ शाखामे योगदान केलहुं | शाखा प्रबंधक छलाह आर. एन. मिश्र जी | और सदस्य सभ जे ताहि समयमे छलाह अथवा बाद मे एलाह से छलाह : पी.दुबे ,ए. के. सहाय, मो.आलम,जे.बी. उपाध्याय, ओम प्रकाश स्वर्णकार,एस.के.तिवारी, आर. एम. प्रसाद आ मोहन राम | 7 अगस्त   91 क’ तीनटा नव लिपिक एलाह :  चन्द्रमा मांझी, जमादार मांझी आ राजेन्द्र दास | बाद मे एकटा अधिकारी एलाह एस.डी.राम | आर.एन.मिश्र जीक ट्रान्सफरक बाद किछुए दिन लेल एलाह एस.बी.तिवारीजी आ हुनका बाद 19.02.91 क’एलाह जनार्दन मिश्र जी | शाखामे ऋण आवेदन सबहक निष्पादन हेतु क्षेत्रीय कार्यालयक  आदेश पर ए.एफ.ओ. रामजीत सिंह जी किछुए दिन लेल एलाह | ई शाखा बहुत दृष्टिसं नीक छल मुदा अहू ठाम बैलेंसिंगबला समस्या छलै, आइ.आर.डी.पी. मे तीनटा लेजर छलै आ बैलेंस जून 1984 तक मिलल  छलै, फसल ऋणक दूटा लेजर छलै आ बैलेंस जून 1982 तक मिलल छलै | ई दुनू पहिने मिलयबाक प्रयास केलहुं | 10  मार्च तक फस ऋणक शेष मिलान दिसम्बर 1988 तक भ’ गेल |  आइ.आर.डी.पी. बहीक मिलान दिसम्बर                   1984 तक भेल | सभ गोटेक सहयोगसं बही मिलान स्थितिकें क्रमशः  नीक सं नीक बनयबाक प्रयास करैत रहलहुं | बचत खातामे 33 आ सावधि जमामे 10 टा लेजर छलै | पेंशनक काज सेहो बहुत छलै | सीवानसं लगभग 10  किलोमीटरपर पचरुखी शाखा छलै, हम सीवानमे आवास राखक लेल क्षेत्रीय प्रबंधकक अनुमति हेतु आवेदन पठा  देलिए | प्रतिदिन सीवानसं पचरुखी जाए लगलहुं | साँझमे घुरिक’ सीवानमे  राज होटल पहुंचि जाइ छलहुँ | सीवानमे पाँच साल रहि चुकल छलहुँ, बहुत गोटे पूर्व परिचित छलाह | डी ए वी कॉलेज सीवानक प्राध्यापक डा. अमर नाथ टाकुर, प्रो. गंगानंद झा, आर एन चौधरी आ  ओकील साहेब सुभाष्कर पाण्डेयजी सभ गोटेकें डेरा तकबामे सहयोग  हेतु कहि देलियनि आ निश्चिन्त छलहुँ जे डेरा जल्दिए कतहु अवश्य भेटत | यैह सोचिक’ परिवार संगे आबि गेल छलहुँ | चारि-पाँच दिन भ’ गेल छल | कतहुसं कोनो डेराक पता नहि भेटल  छल | एक दिन सबेरे होटलक बालकोनीसं नीचां तकलहुं त बाबूकें देखलियनि चल अबैत, आश्चर्य भेल, कत’ सं आबि रहल छथि एते सबेरे, नीचां जाक’ हाथसं सामान सभ ल’ लेलियनि आ हुनका संगे ऊपर गेलहुँ | गप-शप भेल त पता चलल, तिला संक्रान्तिक किछु सनेश ल’क’ ट्रेनसं आदापुर एलाह, ओत’ पता चललनि जे हम सीवान चल गेलहुँ | आदापुर शाखाक ए एफ ओ द्विवेदीजी हुनका अपना घरपर रक्सौल ल’ गेलखिन, ओत’ एकदिन राखिक’ बस पर चढ़ा देलखिन आ कहलखिन जे बैंक लग जाक’ होटलमे अथवा बैंक शाखामे पता करबै त भेंट भ’ जेताह | बस स्टैंडसं पता लगाक’  बैंक लग आबि गेल छलाह त हम देखि लेलियनि | बाबू एलाह त’ रस्तेसं हमर डेरा ठीक केने एलाह | जेबीमे सं एकटा कागजक टुकड़ी निकाललनि, कहलनि जे ई सज्जन  रक्सौलसं हमरा संगे बसमे एलाहे आ कहलनिहें  जे हमर डेरा बैंकक लगेमे अछि आ हमहूँ कोनो बैंके  स्टाफकें मकान भाडापर देब’ चाहैत छी | किछु काल बाद ठाकुरजी एलाह त कहलनि जे हम जनैत छियनि रामचंद्र सिंहकें, चलू ने एखने चलैत छी | सभ गोटे गेलहुँ | घर देखलिऐ, शास्त्री नगरमे काली मन्दिरसं कनिएँ दूरपर सड़कक कातेमे | राम चन्द्र सिंह जी सं भेंट भेल, गप  भेल, डेरा ठीक भ’ गेल | हम सभ गोटे होटल छोडि डेरामे आबि गेलहुँ | स्टोव संगमे  अनने रही, एकटा डेकची आ किछु थारी-बाटी-गिलास सेहो रह्य, डेरामे भोजन बनाएब शुरू भ’ गेल | डेरामे एकटा कमी छलै | लो वोल्टेज रहबाक कारणे पानि सदिखन ऊपर नै चढ़ि पबैत छलै, सबेरे एक बेर ऊपर आबि जाइत छलै | तें नहाए बला पानि स्टोर क’क’ रखबाक लेल बाबूक संगे जाक’ एकटा बड़का ड्रम किनलहुं  आ एकटा पाइप सेहो | ड्रम लेल ढक्कन बनबौलहुं | बाबू किछु दिन रहिक’ गाम वापस चल  गेलाह | हम सभ 14  फरबरीक’ आदापुरसं ट्रकमे सामान सभ ल’क’ सीवानक डेरामे चलि एलहुं | आदापुरसं चलबासं पहिने द्विवेदीजीक बहुत आग्रहक कारण रक्सौलमे हुनका घरमे  चारि दिन पहुनाइ कर’ पडल,से बहुत नीक लागल | जहिया सीवान सभ गोटे सभ सामान ल’क’ एलहुं, ओही दिन रातिमे ओकील साहेब सुभाष्कर पाण्डेय जीक प्रथम पुत्रीक विवाहक उत्सवमे सभ गोटे शामिल भेलहुँ | वसन्त आ मैथिलीक नाम राजवंशी बालिका उच्च विद्यालयमे आ शैलेन्द्रक नाम  सरस्वती शिशु मन्दिरमे लिखाएल गेलनि | आब शैलेन्द्र भ’ गेलाह विवेक आनन्द | सीवानमे क्षेत्रीय कार्यालय हमरा डेराक बहुत लग छल | ओत’ राजभाषा अधिकारी कर्णजी आ सुरक्षा अधिकारी मिश्र जी सं निकटता भेल | कर्ण जी और मिश्र जी दुनू गोटे दू यूनियनक सदस्य छलाह मुदा दुनू गोटेमे अदभुत सामंजस्य छलनि  | हम अधिकारी यूनियनक छलहुँ, हमरापर कर्णजीक सहयोगसं यूनियन बदलबाक लेल बहुत दबाब पडल आ कर्णजी ई कहिक’ एकर समापन केलनि जे ई दबाबपर एक मकानक किराया दू आदमीकें दैबला लोक छथि, तें हिनका दिक नै करै जैयनु | मिश्र जी सभकें भोरे जगबाक आ टहलबाक अभ्यास लगौलनि | अपना डेरासं अबैत छलाह , रस्तामे जकर-जकर डेरा छलै, सभकें जगबैत संग क’ क’ वी. एम. एच . ई. स्कूलक मैदानमे ल’ जाइत छलाह | ओत’  सभकें व्यायाम करबैत छलाह | हमरो भोरे जगबाक आ व्यायाम करबाक अभ्यास लागल | मिश्र जी साहित्यिक अभिरूचि सेहो रखैत छलाह | अपन आवासमे दिनकर स्मृति संध्या 23  सितम्बरक’ मनबैत छलाह |साहित्यिक गोष्ठी सभमे उपस्थित होइत छलाह आ भाग लैत छलाह | हमर साहित्यिक क्रिया कलाप : एहि बेर सीवानमे हमर साहित्यिक गतिविधि सीमित रहल | कॉलेजक पूर्व परिचित प्राध्यापक लोकनिसं सम्पर्क बनल रहल | आदरणीय प्रो. गंगा नन्द झाक सलाहसं बंगला लेखक आशापूर्ण देवीक प्रथम प्रतिश्रुति, बकुल कथा, शंकरक ए पार बांगला ओ पार बांगला, सीमाबद्ध आ विमल मित्रक इकाई दहाई सैकडा आ खरीदी कौड़ियों के मोल पढलहुं | एकर अतिरिक्त हरिवंश राय बच्चन, दिनकर आ नागार्जुनक किछु पोथी सेहो पढलहुं | ओशोक किछु पोथी सेहो पढलहुं | ओशो टाइम्स पत्रिका सेहो पढैत छलहुँ | 1992मे  26 जनबरी क’ सीवान  क्लब द्वारा आयोजित कवि सम्मलेनमे, 23फरबरीक’ डी ए वी कॉलेजमे  आयोजित  कवि सम्मेलनमे आ शास्त्री जयन्तीक अवसरपर 2 अक्टूबरक’ सीवानक मिडिल स्कूलक प्रांगणमे आयोजित कवि सम्मलेनमे किछु मैथिली आ हिन्दीक रचना प्रस्तुत केलहुं | क्लबक कार्यक्रममे क्षेत्रीय कार्यालयक सुरक्षा अधिकारी, हरि शंकर मिश्र जी सेहो नजरुल इस्लामक रचना ‘विद्रोही’क पाठ बहुत सुन्दर केने छलाह | कतहु साहित्यिक कार्यक्रम होइत छलै, त अवश्य जाइत छलहुँ | 1992 मे 26   जनवरी क’ पचरुखी मे इप्टाक नाटक ‘जनता पागल हो गई है’ देखलहुं | 28  जनवरीक’ सीवानमे इप्टा द्वारा प्रस्तुत नाटक ‘एक और द्रोणाचार्य’ बहुत नीक लागल | एहि साल  9-10  नवम्बर क’ पटनामे विद्यापति पर्वक अवसरपर सियाराम झा ‘सरस’ सं हुनक किछु रचना सुनलहुं, ‘डिगरी भ’ गेलै झुनझूना साढ़े छबे आनामे’ नीक लागल रह्य |ई रचना ओहि समयमे बिहारमे शिक्षा आ परीक्षाक स्थितिक पोल खोलैत छल | सीवान मे कवि सम्मेलन आ मुशायरा देखब नीक लगैत छल | एक बेर तंग इनायतपुरी( जे असलमे श्रीवास्तव छलाह )क संग डेरापर बैसार भेल | ओ एकटा पांती देलनि : ‘लोग पहचाने गए हैं काम से किरदार से’   एहि पांतीकें ल’क’ एकटा गजल तैयार करबाक लेल कहलनि | हम तैयार त केलहुं,मुदा ओहिसं अपनो संतुष्टि नै भेल | हम गजल लिखबाक कोशिश त करै छलहुं, मुदा गजलक व्याकरणक ज्ञान नै भ’ सकल छल | बच्चन जीक ‘मधुशाला’ बहुत पहिने पढने रही आ ‘की भेटल आ की हेरा गेल’ –आत्म गीत लिखबाक विचार मोनमे आएल छल, ताहि  लेल किछु पहिनहुं लिखने रही आ किछु अहू समयमे लिखलहुं | ओहि समय बिहारक जे स्थिति रहै, ताहिपर हमरासं एकटा रचना लिखाएल जे बादमे मैथिली पत्रिका ‘भारती मंडन’ मे प्रकाशित भेल : गीत गोली बारूदक मौसममे हम कविता केहेन सुनाबी हाल देखि बेहाल भेल छी, गीत कोनाक’ गाबी ? गाम-गाम  आ शहर-शहरमे आतंकक  अछि छाया ठोहि पारिक’ कानि रहल अछि गौतम बुद्धक काया शब्द-शब्दमे  चिनगी-चिनगी,  शब्द-शब्दमे धधरा अपनहि घर हम जरा रहल छी अप्पन-अप्पन बखरा गामक गाम जरैए धह-धह  ककरा कोना बचाबी एहेन हालमे कानि सकै छी, गीत कोनाक’ गाबी ? टूटल  सरस्वती केर वीणा केर संगीतक धारा मनुखक छुद्र स्वार्थ पर कनइत अछि विज्ञान बेचारा पत्रहीन सभ गाछ नग्न अछि जेम्हरे देखू तेम्हर कत’ अलोपित भेल गामसं बरक गाछ झमटगर थाकल-हारल लोक सोचैए कत’ कने सुस्ताबी एहेन हालमे अहीं कहू त गीत कोनाक’ गाबी ? बेर-बेर  उठबैए  हाबा   एखनहु  वैह  सवाल बुद्ध –महावीरक  ई  धरती  एहेन  किए कंगाल द्रोण -भीष्मकेर चुप्पी आ धृतराष्ट्रक कुत्सित सपना बेर-बेर दोहराएल जाइत अछि लाक्षागृह केर घटना उचित यैह जे आमक खातिर  आमक गाछ लगाबी चलै-चलू हम सभ हिलि-मिलिक’ अपन बिहार बचाबी | शिशवा गामक महादेव ठाकुर हारमोनियमपर नीक गीत गबैत छलाह, हमरासं किछु गीत लिखबौने छलाह, करीब दसटा गीतक कैसेट बनबौलनि, एकटा प्रति हमरो देलनि | ओहिमे निम्नलिखित गीत सभ छल : ‘आउ आइ हम सभ हिलि मिलिक’ मांक उतारी आरती’ ‘एना गे सुगिया कतेक दिन रहबें’ ‘बौआ बनि गेल नेता दाढ़ी बढ़ाक’ ‘आइ धरतियो लगैछ नव कनियाँ जेना’ ‘सजाउ हे यै बहिना, मैथिलीक प्रतिमा सजाउ’ ‘आजुक राति कथीले’ रे भैया, आजुक राति कथीले’ ‘छोटे-मोटे टूटल मडैयामे गौरी कोनाक’ रहती हे’ आ किछु और गीत | बादमे स्थानान्तरणपर बिहारसं बाहर जेबाक कारणे ने शशिकान्तजी-सुधाकान्तजीसं सम्पर्क राखि सकलहुं ने महादेवजीसं | रामचंद्र बाबूक मकानमे : मकान फ़ैल छलै, एकेटा कमी छलै, पानिक व्यवस्था नियमित नहि छलै, जाहि कारण असुविधा होइत छल तथापि एहि बेर सीवानमे जाधरि रहलहुं, अही मकानमे रहलहुं | द्विरागमनक बाद एक बेर किछु दिन एहि ठाम हमर अनुज ललनजी सपत्नी रहलाह | एक बेर दू सप्ताह लेल हमर ससुर आ  डुमरा बला साढू पत्नी आ छोट बालक नीरजक  संग रहलाह | ओहि समय हम सभ स्नान करबाक लेल विशेष उपाय करैत छलहुँ | सड़कक पच्छिम प्रथम तलपर हमर आवास छल आ सडकक पूब अवकाशप्राप्त प्राचार्य महेन्द्र बाबूक पैघ हातामे एकटा इनार छलै, आदमी बढलापर पुरुष लोकनि स्नान करबाक लेल ओहि इनारपर जाइत छलाह | ओहि हातामे एकटा चापा कल सेहो छलै, हम अधिक काल चापा कलक उपयोग करैत छलहुँ | एक बेर पटनासं मामा सेहो सपरिवार दस दिन लेल एलाह आ जेना-तेना काज चलि गेल | पान आ तमाकुल : सीवानमे पान बहुत खाए लगलहुं | काली मन्दिर लग पानक दोकान तेहेन सुन्दर पान खुअबैत छलै जे बेर-बेर खेबाक लेल प्रेरित करै छलै | दिन-दिन आदति पुष्ट भेल जा रहल छल | क्षेत्रीय कार्यालयक सुरक्षा अधिकारी लोकक स्वास्थ्यक सेहो चिन्ता करैत छलाह | ओ कय बेर कहैत छलाह पान छोडि देबाक लेल | एक बेर बहुत दृढ़ संकल्प ल’क’ छोडि देबाक निर्णय लेलहुं आ पान खाएब छोडि देलहुं, मुदा मोन विचलित होमय लागल | मोनकें ठकबाक लेल तमाकुल कखनोक’ खाए लगलहुं | मुदा मोन कनीसं मानैत नै छल , तकर परिणाम भेल जे जेना पहिने पान खाइ छलहुँ, तहिना तमाकुल खाए लगलहुं | ई और खतरनाक छल | एक दिन प्रो. गंगा नन्द झा कहलनि, ‘अहाँसं शिकायत अछि, अहाँ पान खाएब छोडि देलहुं त तमाकुल किए खाए लगलहुं |’ हम बहुत गंभीरतासं विचार करैत एक दिन तमाकुल सेहो छोडि देलहुं | तमाकुलक सेवन हमर पूर्वज सभ सेहो केने छलाह | हमरा टोलमे एक-दू घर छोडिक’ सभ घरमे जवान आ बूढ़ लोक सभ द्वारा तमाकुलक सेवन चलैत छल | हमर बाबा (दादा) सेहो अपने बाड़ीमे तमाकुल उपजबैत छलाह, ओकरा सरियाक’ रखैत छलाह आ साल भरि ओकर सेवन करैत छलाह | बाबू कलकत्तासं एलाह त ओहो एकर सेवन करय लगलाह | हम बी.एस.सी. पार्ट एक तक पान-सुपारी-तमाकुलसं दूर रहैत छलहुं | ढोली एग्रीकल्चर कॉलेजमे एक बेर एक संगीक जोरपर सिगरेट मुंहमे लेलहुं, मुदा चक्कर जकाँ आबि गेल | ओही दिन सिगरेटसं मुक्ति भेटि गेल | बहुत पहिने एक बेर रातिमे हमरा दांतमे दर्द उठल | बेचैन भेलहुँ | रातिमे और कोनो उपाय नहि देखि हमर पिता कनी तमाकुल चुनाक’ देलनि आ कहलनि जत’ दर्द करैछह ओत’ राखि दहक | हमरा तेहेन निशा लागल जे सबेरे तक सूतल रहि गेलहुँ | तकरा बाद बहुत दिन धरि ने दांतमे दर्द भेल आ ने तमाकुल दिस तकबाक हिम्मति भेल | बादमे जखन कखनो दांतमे दर्द हुए त हम तमाकुलक उपयोग करय लगलहुं | धीरे-धीरे पानक विकल्प तमाकुल आ तमाकुलक विकल्प पान भ’ गेल | क्यो एकर अधलाह पक्ष दिस सचेत नहि क’ सकलाह | बहुत दिन बाद मिश्र जी आ प्रो. गंगानंद झा एहेन लोक भेटलाह जे पान आ तमाकुलसं मुक्तिक लेल प्रेरित केलनि आ हम अपनापर नियंत्रण क’ सकलहुं | किछु दिन त निमाहि लेलहुं, मुदा एकटा सम्बन्धी एलाह आ कहलनि जे एक-दू बेर खेबामे हर्ज नै छै, ओ खाइत छलाह, हमरासं ओ प्रभावित नहि भेलाह, हमहीं हुनक प्रभावमे आबि गेलहुं आ कखनो-कखनोक’ लेब’ लगलहुं | धीरे-धीरे फेर पूर्ववत तमाकुलक अधीन भ’ गेलहुँ | एहिसं मुक्तिक लेल आवश्यक मंत्र तकबामे चौदह बरख लागि गेल | जबलपुर पहुंचलापर कारगर मंत्र भेटल जे एक संग पान, तमाकुल, माछ-मांस, पियाजु-लहसुन सभसं मुक्ति दिया देलक | ओहि मंत्रक चर्चा आगाँ समय एलापर करब | देश आ प्रान्तक राजनीति : 1989 मे 2 दिसम्बरक’ केन्द्रमे राष्ट्रीय मोर्चाक सरकारमे विश्वनाथ प्रताप सिंह प्रधान मन्त्री भेलाह | 1990 मे 7 अगस्तक’ प्रधानमन्त्री द्वारा मंडल आयोगक अनुशंसाकें क्रियान्वित करबाक घोषणा भेल | एहि घोषणाक विरोधमे पूरा देशमे छात्र-आन्दोलन शुरू भ’ गेल , कतेक युवक द्वारा आत्मदाहक घोषणा हुअ’ लागल | 25  सितम्बरक’ अयोध्यामे विवादास्पद बाबरी मस्जिद –राम जन्मभूमिपर मन्दिर निर्माण हेतु भाजपाध्यक्ष लाल कृष्ण आडवाणी द्वारा गुजरातमे सोमनाथ मन्दिरसं रथ-यात्रा आरम्भ भेल | 23  अक्टूबरक’ लाल कृष्ण आडवानीकें समस्तीपुरमे गिरफ्तार क’ लेल गेलनि, भाजपा राष्ट्रीय मोर्चा सरकारसं समर्थन वापस ल’ लेलक आ   7 नवम्बरक’ राष्ट्रीय मोर्चा सरकार खसि पड़लै | 1991मे  21   मइक’ राजीव गांधी बमसं मारल गेलाह,   21  जूनक’ पी. वी, नरसिंहा राव प्रधान मन्त्री भेलाह | बिहारक स्थिति दयनीय भ’ गेल छल | जे सरकार छलै से सरकार लेल  छलै | अशान्ति आ असुरक्षाक वातावरण उपस्थित छलै | सीवानमे ई स्थिति बेशी कष्टकर भ’ गेल छलै |शिक्षाक मन्दिर सभ अनाथ जकाँ भ’ गेल छल | स्थिति एतेक जबदाह भ’ गेल छलै जे पीड़ित लोक अस्पताल जेबासं, लोक लोकक जिज्ञासामे जेबासं आ अखबार सभ सही बात लोकक सोझाँ अनबासं डेराइत छल | आर्यावर्त, इंडियन नेशन आ मिथिला मिहिर पहिने बन्द भ’ गेल छल | माटि-पानि सेहो बन्द भ’ गेल छल | सरकार द्वारा लोक सेवा आयोगसं मैथिली विषयकें हटा देल गेल | राज्यमे विरोधक स्वर दबल रहल | असामान्य स्थितिक प्रभाव बैंक सभपर नहि छलै, तथापि सीवानक हवा विषाक्त लगैत छल | तैपर बिजलीक संकट आ ओहि सं उत्पन्न अनेक असुविधा बेर-बेर ई सोचबापर विवश क’ रहल छल जे कतहु एहेन ठाम स्थानान्तरण होइत जत’ बिजली सदिखन रहैत होइ आ वातावरणमे शान्ति होइ | पारिवारिक स्थिति : परिवार तीन ठाम भ’ गेल छल, गाममे माए-बाबू छलाह, सीवानमे हम पाँच गोटे छलहुँ आ दिल्लीमे ललनजी आ रतनजी छलाह | बादमे ललनजीक पत्नी सेहो पहुँचलखिन | हम गामपर एकटा बाथ रूमक आवश्यकताक अनुभव करैत छलहुँ, से ललनजीक द्विरागमनसं पूर्व भ’ गेल, दूटा कोठली सेहो हुनक द्विरागमनसं पहिने बनबाओल गेल |एहि लेल बैंकसं ऋण सेहो लेब’ पडल | ललनजी दिल्लीमे आजादपुर मंडीमे काज पकडलनि | बहुत दिन धरि ओत’ एसगरे रहलाह | रतनजी बी एस सी फिजिक्स प्रतिष्ठामे प्रथम श्रेणीमे उतीर्ण भेलाह | बाबूक विचार छलनि जे एम एस सी सेहो क’ लेथि, मुदा हुनका दिल्लीमे जीविकोपार्जन दिस ध्यान छलनि | माए आ बाबू  बेरा -बेरी अस्वस्थ रहैत गेलाह | बाबू मधुबनीमे डा.के. के. मिश्रसं देखौलनि, 25  दिनमे किछु लाभ नै भेलनि त दरभंगा जाक’ डा. आर.बी.ठाकुरसं देखौलनि | माएकें सूतलमे कोनो जंतु पैरमे नछोरि  लेलकनि, इलाज भेलनि | माए ठीक भेलीह त बाबू दुखित पडलाह | 1992 के सितम्बरमे रतनजी एक बेर पटना मे कोनो परीक्षा दैत गाम गेलाह त बाबूक स्वास्थ्य ठीक नै लगलनि, 16 सितम्बर क’ हुनका नेने दिल्ली चल गेलाह | दिल्लीमे बाबू हमर सभसं छोट बहिन-बहिनोक घरमे रहलाह | ललनजी आ रतनजी सेहो लगेमे रहैत छलखिन | ललनजी किछु मास एसगरे रहलाह,किछु दिन दुनू गोटे बहिन-बहिनो ओत’ रहलाह आ फेर बादमे शैल संगे आदर्श नगर बला मियानीमे रह’ लगलाह | पटेल अस्पतालक  डा. पालसं बाबूक  इलाज शुरू भेलनि, एकटा आयुर्वेदक आ एकटा यूनानी डा.सं सेहो सम्पर्क कएल गेल | बाबू किछु मास दिल्लीमे रहिक’ स्वस्थ भ’क’ गाम घुरलाह | दिल्लीमे रतनजी सेहो पीलियाक शिकार भेल छलाह | सीवानमे एक राति बच्चीकें बिच्छू डंक मारि देलकनि | डॉक्टरसं देखब’ पडलनि, दबाइ खाए पडलनि | मैथिलीकें एक बेर भरल गमला पैरपर खसि पडलनि | एक बेर माता निकलि गेलखिन | विवेक सेहो अस्वस्थ भेलाह | दरभंगाक डा. वीरेंद्र प्रसादक इलाजमे आ बादमे सीवानमे डा. डी. एन. श्रीवास्तवक इलाजमे रहलाह | हमरा सेहो बोखार भेल, मिश्रजीक सलाहपर डा.निजामुल हसनसं सम्पर्क केलहुं | कहलनि फैलेरिअल फीवर अछि,पन्द्रह दिन दबाइ खाए पडल | हमरा डेराक बगलमे एकटा आँखिक विशेषज्ञ एलाह डा. लाल बहादुर सिंह, हुनकासं आँखिक जांच कराय चश्माक उपयोग करय लगलहुं | परम्परा आ आधुनिकताक समन्वय : अही अवधिमे 1990 मे  प्रो.गंगा नन्द झाजीक दुनू बालकक विवाह भेलनि | हमरा सभसं सभ बातक चर्च करैत छलाह | हुनक जेठ बालकक विवाह 1 फरबरीक’ जमालपुरमे भेलनि जाहि ठाम वरियातीमे सीवानसं डा.अमर नाथ ठाकुर जीक संग हमहूँ गेल रही | ओहि वरियातीमे किछु विशेषताक संग परम्परागत विवाह जेना मधुबनी-दरभंगामे होइछै,तहिना अनुभव भेल, नीक लागल | हुनक दोसर बालकक विवाह आधुनिक ढंगसं भेलनि जाहिमे वरियातीक स्थानपर दुनू दिससं किछु मित्र लोकनि उपस्थित भेलखिन आ दुनू दिससं माता-पिताक उपस्थितिमे आ हुनका लोकनिक आशीषक संग दू-तीन घंटामे विवाहसं द्विरागमनधरिक  सभ कार्यक्रम आ सभ पावनि-तिहार पटनामे संपन्न भेल | हमरा एहि दुनू विवाहसं सिखबाक लेल बहुत किछु भेटल | माता-पिताकें अपन बालकक अनुरूप पुतोहु तकबामे कोन-कोन बातकें प्राथमिकता देबाक चाही आ कोन-कोन बातपर अपन सहमति आ आशीर्वाद देबाक लेल अपनाकें तैयार रखबाक चाही, से हमरा सिखबाक अवसर भेटल | अपनो  मोने विवाह करब त  माता-पिता आ मित्र-बन्धुक  आशीर्वाद आ शुभकामनाक संग करब, ईहो उदाहरण नव लोक सभ लेल बहुत अनुकरणीय आ प्रशंसनीय लागल | एकमात्र योग्य पुत्रक पिता विश्व प्रसिद्द किडनी विशेषज्ञ  डा.विवेकानंद झा आ एकमात्र योग्य पुत्रीक पिता साहित्यकार-चिन्तक आ दिल्ली विश्वविद्यालयक चर्चित प्रोफ़ेसर अपूर्वानन्द आधुनिक भारतीय समाज लेल सफल आ सबल दाम्पत्य जीवनक संग संतुलित पारिवारिक आ सामाजिक जीवनक अदभुत उदाहरण प्रस्तुत करैत छथि | हमरा हर्ष अछि जे हिनका लोकनिकें लगसं देखबाक आ जनबाक अवसर प्राप्त भेल अछि | माएक संग तीर्थाटन : 1991 के अक्टूबरमे रतनजी  शान्ती बहिनकें गामपर राखि माएकें सीवान नेने एलाह | एल.टी.सी.क सुविधाक उपयोग करबाक विचार भेल | सिवानसं सभ गोटे दिल्ली गेलहुँ, बहिन-बहिनोक घर पर रहलहुं | एक दिन दू टा ऑटो रिक्शा ल’क’ सभ गोटे दिल्लीमे लाल किला,इंडिया गेट,राजघाट,विजय घाट,शक्ति स्थल,शान्ति वन,चिड़िया खाना,लोटस मन्दिर  आदि बहुत ठाम घूमै गेलहुँ | किछु दिनक बाद  एक दिन एकटा गाड़ी ल’क’ सभ गोटे हरिद्वार आ  ऋषिकेश मे कय ठाम घूमै गेलहुँ | ऋषिकेश मे लक्ष्मण झूलापर द’ क’ दोसर कात मन्दिर सभ घूमैत रातिमे पुनः हरिद्वार पहुंचि श्री राम धर्मशालामे विश्राम करै गेलहुँ | दोसर दिन हरकी पौरी गेलहुँ,ट्रालीसं मनसा देवी मन्दिर गेलहुँ | ओत’सं भारत माता मन्दिर,राम हनुमान मन्दिर देखैत पाँच बजे गाड़ीसं विदा भ’ गेलहुँ | फेर किछु दिन बाद एकटा गाड़ी ल’क’ सभ गोटे आगरा, मथुरा, वृन्दावनमे कए ठाम घूमि अबै  गेलहुँ | ई यात्रा सभ गोटेक लेल बहुत आनन्द प्रदान करैबला रहल | रतनजी नोकरीक लेल ओतहि रहि गेलाह आ हम सभ माए संग सीवान घूरि माएकें गाम पहुंचा देलियनि | 1992 मे वसन्त (वंदना )क दसमी बोर्डक परीक्षा भेलनि | द्वितीय श्रेणीमे उतीर्ण भेलीह,900  मे   533 अंक एलनि,  59.2 प्रतिशत | पदोन्नति : 1992 मे स्केल II मे पदोन्नतिक प्रक्रियामे  17 जुलाइ  क’ साक्षात्कार भेलै,  21 अक्टूबर क’ परिणाम घोषित भेलै,  हमहूँ सफल भेलहुँ | ओहि बेर किछु गोटेकें मध्य प्रदेश जाए पड़लनि, पैंतालीस बरखसं बेशी वयसबलाकें बाहर नै जाए पडलनि | हम पैंतालीसक भीतरे रही, तें आंचलिक कार्यालय,रायपुरमे योगदान देबक लेल जिनका सभकें आदेश भेटल रहनि, ओहिमे हमहूँ रही |30 नवम्बरक’ हमरा सभकें रायपुर आंचलिक कार्यालय पहुँचबाक छल | अही बीचमे जमशेदपुरसं वीणाक विवाहक सूचना भेटल | वीणा आ ममता दुनू बहिन नान्हिए टा रहथि त माए दुनियाँ छोडि देलखिन, किछु दिन गाममे रहलाक बाद दुनू गोटे जमशेपुरमे जेठ भाए,भौजी,भातिज आ भतीजी सबहक संग रह्य लगलीह | साढ़ू समय-समयपर कलकत्तासं आबिक’ भेंट क’ जाइत छलखिन | वैह वीणा, हमर साढूक जेठ पुत्री वीणाक विवाह भ’ रहल छनि जमशेदपुरमे आ हमरा जमशेदपुर होइत जेबाक अछि रायपुर | कार्यक्रममे कनी सामंजस्य केलासं हम विवाह दिन त नहि, विवाहक तेसर दिन भेंट क’ सकैत छी हुनका सबहक |बच्ची अपन पिता लेल स्वेटर आ मफलर बुनने छथि सेहो द’ देबनि आ सभ गोटे सं भेंट-घाँट सेहो भ’ जाएत | तदनुसार कार्यक्रम  बनल जे पटनासं जमशेदपुर भोरे पहुंचब, सरोज स्टेशनसं हमरा डेरापर ल’ जेताह, ओत’ दिन भरि सभसं भेंट-गप करैत वर-कनियाँ कें आशीर्वाद दैत साँझमे जमशेदपुरसं रायपुर बला ट्रेन पकड़ि लेब | अही अनुसार ट्रेनमे आरक्षण कराओल | 27  नवम्बरक’ पचरुखी शाखासं भारमुक्त भए रायपुर जेबाक लेल सीवानसं  28  क’ एसगरे प्रस्थान केलहुं | सीवान स्टेशनपर तंग इनायतपुरी भेटलाह, हमरा विदा करैत ओ अपन कोनो मित्र-शायरक एकटा शेर सुनौलनि : ‘मुझे थकने नहीं देता है जरूरतों का पहाड़ मेरे  बच्चे  मुझे  बूढ़ा  होने  नहीं  देते’ ई शेर भरि रस्ता हमरा बझेने रहल | (क्रमशः) पटना / 14.10.2021 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। योगेन्द्र पाठक ‘वियोगी’ पिरामिडक देश मे (तेसर खेप) (पछिला दू अंक मे अपने पढ़लियैक मिस्रक राजधानी काहिरा के आसपासक इलाका मे हमर तीन दिनक यात्राक अनुभव, जाहि मे मुख्य छल गीजाक पिरामिड परिसर आ स्फिंक्स, पापीरस गैलरी, सकाराक स्टेप पिरामिड आ दहसुरक टेढ़ आ लाल पिरामिडक दर्शन, मेम्फिसक म्यूजियम मे रानी हातसेप्सुतक स्फिंक्स आ फैरो रैमसेस-2 के अनेक मूर्तिक दर्शन, काहिरा शहर मे ईजिप्सियन म्यूजियम मे तूतनखामन के सोनाक ताबूत आ अनेक ममी देखनाइ आ बजार घुमनाइ।) चारिम दिन 20 सितम्बर 2019। अधरतिए मे होटल छोड़बाक छल आसवानक यात्रा लेल। आसवान मिस्रक दक्षिण भाग मे अवस्थित प्रसिद्ध शहर छैक जे प्राचीन समय सँ बनिज व्यापारक प्रमुख केन्द्र रहलैक अछि। थोमस कूकक प्रोग्रामक अनुसार हम सब आब एही दछिनबरिया इलाका मे बस, जहाज आदि सँ घुमैत रहब आ अन्तिम दिन लक्जर शहर सँ फेर हवाइ जहाज द्वारा काहिरा पहुँचि देश आपस जाएब। पछिला राति मे मात्र तीन घंटा लेल हमरा निन्नक आवाहन नहिए कएल भेल, वेकअप कॉलक भरोसे हम नहिए रहैत छी कारण सुतबा काल आँखिक चश्माक संग कानक चश्मा सेहो खोलि कए राखि दैत छिऐक। तें जगले आ सतर्क रहलहुँ। दू बजे होटल सँ चेकआउट करैत जलपानक पैकेट संग मे लैत गीजाक होटल छोड़ि देल आ बस मे सवार भए काहिरा एयरपोर्ट विदा होइत गेलहुँ। एयरपोर्ट पहुँचि हमरा आसवान लेल तुरत्ते एकटा पहिलुके फ्लाइट मे जगह भेटि गेल कारण हमर एहि खंडक टिकट बिजनेस क्लासक छल। सम्भवतः थोमस कूक कें सब पसिंजर लेल इकोनॉमी क्लास मे टिकट नहि भेटल हेतैक तें हमर प्रोमोसन भऽ गेल छल। अस्तु, एहि सँ कोनो विशेष लाभ नहि, एतबे जे बिजनेस क्लास मे एक कप नीक गर्म कॉफी भेटि गेल आ काहिरा एयरपोर्ट पर प्रतीक्षा करबाक बदला आसवान पहुँचि एयरपोर्ट पर प्रतीक्षा करए पड़ल। जलपानक पैकेट देखल, किछु बेसिये सामान बुझाएल। अस्तु, हिसाबें निकालि कए खा लेल आ बाकी राखि देल। आजुक प्रोग्राम मे लंच सेहो पैकेटे भेटबाक छलैक कारण बहुत दूरक बस यात्रा छल आ साँझे भेला पर जहाज पर भोजन भेटैत। ग्रुपक सदस्य लोकनि बादक फ्लाइट सँ बेराबेरी अबैत गेलाह। सब कें एकत्रित करैत सभक सामान बस मे उठबैत प्रायः साढ़े आठ बाजि गेलैक। बस मे चढ़िते थोमस कूकक स्थानीय पार्टनर कम्पनीक लोक लंच पैकेट आ जल सब कें बाँटि देलनि। एतए मोहम्मद अब्दुल्ला नामक गाइड बस मे संग भेलाह। कारी अफ्रिकन मूलक बेस पैघ कायाक व्यक्ति मुदा बहुत हँसमुख, ईजिप्टोलोजीक नीक ज्ञान, अपना काज मे दक्ष आ बहुत परिस्कृत अंग्रेजी बजैत। सब यात्री कें आदर अथवा मजाक मे ‘फैरो’ सँ सम्बोधन हुनक, माने हुनका लेल तऽ हम सब टूरिस्टे सम्राट छलिएनि। टूरिस्टेक आय सँ हुनको पेट चलैत छलनि आ देशक अर्थ व्यवस्था सेहो। अगिला चारि दिन हिनके संग हमरा सब कें भ्रमण करबाक छल। गाइडक बुद्धि आ व्यवहार सँ सब गोटे प्रसन्न छलाह आ थोमस कुक कें एहू लेल बधाइ भेटलनि। गाइड अब्दुल्ला बूझू प्राइमरी स्कूलक मास्टर जकाँ हमरा सब कें इतिहास बुझा रहल छथि, बीच बीच मे प्रश्न सेहो पूछि बैसैत छथि। भाषणक बीच ककरो गप करब हुनका पसिन्न नहि। यात्री सब सेहो मिस्रक इतिहास बहुत किछु बूझि पढ़ि कए आएल छथि आ गाइडक बात ध्यान सँ सुनलाक बाद हाथ उठा हुनकर प्रश्नक उत्तर दैत छथि अथवा किछु प्रतिप्रश्न सेहो करैत छथि। आइ हमरा सब कें जेबाक छल अबू सिम्बेल नामक जगह। ताहि सँ पहिने सकाले ओ सब कें आसवानक हाइ डैम देखबा लेल लऽ गेलखिन। आसवानक ई हाइ डैम आधुनिक आ स्वतंत्र मिस्रक कायाकल्प केनिहार प्रोजेक्ट छलैक जहिना स्वतंत्र भारत लेल भाखड़ा-नाँगल सदृश योजना। मिस्र मे नील नदीक प्रवेश करितहिं पैघ बान्ह बना कए विस्तृत जलाशय आ जल-विद्युत उत्पादन केन्द्र बनाओल गेल। नेहरूक परम मित्र मिस्रक राष्ट्रपति गमाल अब्दुल नासर एकर सूत्रधार छलाह। तें बान्ह सँ बनल जलाशय कें ‘लेक नासर’ कहल जाइत छैक। हाइ डैम पर ठाढ़ भऽ कए लेक नासरक विशालताक मात्र कल्पना कएल जा सकैत छैक। नील नदी पर आसवान इलाका मे अंग्रेज शासन मे सेहो एकटा बान्ह बनल छलैक, ओ छैके, मुदा छोट आ पुरान, एकरा आब ‘लो डैम’ कहल जाइत छैक। नव स्वतंत्र मिस्र कें औद्योगिक राष्ट्र बनेबाक दिशा मे बिजली उत्पादन बहुत जरूरी छलैक। ताही दिशा मे काज करैत राष्ट्रपति नासर पहिने स्वेज नहरक राष्ट्रीयकरण केलनि, अंग्रेजक हाथ सँ ओकर स्वामित्व अबिते राष्ट्रक आय सेहो बढ़ि गेलैक। तखन रूसक सहायता सँ नव पैघ डैम बनाओल गेल। गाइड अब्दुल्ला डैम आ लेक सम्बन्धित बहुत रास बात बतबैत छथि जाहि मे मुख्य अछि एखन लेक मे सहसह करैत गोहिक जनसंख्या। गोहि प्राचीन कालहिं सँ नील नदी मे भेटैत रहलैक आ नाविक सब कें सतबैत रहलैक। तें एकरो देवताक खाढ़ी मे राखल गेल। बान्ह बनला पर लेक मे गोहि सब फँसि गेल, दोसर कात जाएत कोना ? प्रजनन चलैत रहलैक आ जनसंख्या बढ़ैत रहलैक। एकर शिकार पर प्रतिबन्ध लागि गेला सँ ई जानवर आओरो छुट्टा भऽ गेल। एखन स्थिति ई छैक जे यदि पति पत्नी मे झगड़ो होइत छैक तऽ धमकी इएह देल जाइत छैक — “लेक नासर मे फेकि देबौ, गोहिक शिकार बनमे”। लेक नासरक विशालताक अन्दाज करबा लेल बुझियौ जे एकर जल धारण क्षमता 132 घन किलोमीटर छैक, एकरा तुलना मे भारतक सबसँ पैघ नर्मदा बान्हक जलाशय ‘इन्दिरा सागर डैम’क क्षमता मात्र 12.2 घन किलोमीटर छैक। लेक नासर के सतहक घेरा करीब साढ़े पाँच हजार वर्गकिलोमीटर मे पसरल छैक, बूझू एकर तुलना मे भाखड़ाक गोविन्द सागर मात्र 168 वर्गकिलोमीटर छेकने छैक। एहि जलाशयक बनला सँ मिस्रक एहि इलाका मे अवस्थित कएकटा प्राचीन स्मारक ओकरा पेट मे चल गेलैक। एहि मे सँ किछु अति महत्वपूर्ण स्मारक कें ओ लोकनि पूर्ण रूपें एक एकटा पाथर काटि कए उठा कए प्रतिस्थापित कऽ देलनि। ई काज कएल गेल यूनेस्को के तत्वावधान मे अनेको देशक वास्तुकार, इंजीनियर आ तकनीकी विशेषज्ञ लोकनिक देखरेख मे। एहने प्रतिस्थापित स्मारक अछि अबू सिम्बेल मे उनैसम वंशक प्रतापी सम्राट रैम्सेस-2 के मंदिर। अबू सिम्बेल आसवान शहर सँ 300 किलोमीटर दूर अवस्थित अछि, हिसाबें लेक नासरक दोसर छोड़ पर, रस्ता सपाट मरुभूमि बाटे। करीब चारि घंटा जेबा मे आ ओतबे फेर घुरबा मे लगैत। एहि यात्रा मे बसक एयरकन्डिसनिंग मसीनक देखभाल लेल अलग सँ मिस्त्री सेहो बस मे चढ़ल गेलाह कारण आइ गर्मी सेहो खूब छलैक आ रस्ता मे मरुभूमिक बीच कोनो तरहक सहायता भेटब असम्भवे। मरुभूमि मे एतए सड़क एकदम सपाट आ सीधा, बूझू पचीसो किलोमीटर मे कोनो घुमाव नहि। दूनू कात जतेक दूर तक नजरि जाइत छल कतहु कोनो आबादीक चिन्ह नहि। रस्ता मे कतहु कोनो गाड़ी नहि, कखनहु कए एकाधटा मिलिटरी ट्रक मात्र जाइत अबैत। अब्दुल्ला बतौलनि जे रस्ता मे एहि गर्मी मे मरुभूमिक प्रसिद्ध घटना ‘मृग मरीचिका’ (mirage) देखब सम्भव होएत। ठीके करीब एगारह बजे तक रौद एतेक तेज भऽ गेल छलैक जे मरीचिका देखबा मे आबऽ लागल। किताबे मे एहि घटनाक बारे मे पढ़ने रही मुदा प्रत्यक्षतः आइए देखल। एहि यात्रा मे बूझू ई बोनस भेल। पूरा रस्ताक बीच मात्र एक ठाम ‘मिडवे’ जकाँ एकटा दोकान जतए किछु ड्रिंक आदि भेटैत आ पाँच पौंड बला पेड शौचालयक सुविधा छलैक। करीब दू घंटाक यात्राक बाद आएल ओ मिडवे। सब गोटे उतरैत गेलहुँ। भारत मे एहन कोनो मिडवे पर अनेको गाड़ी बस लागल रहैत मुदा एतए किछु नहि। एकमात्र हमरा सबहिक बस। कने लेट भऽ गेला सँ दोसर टूरिस्ट बस पहिनहि चल गेल छलैक। एहि मिडवे मे एकटा घर आ तकरा आगू किछु काठक खुट्टा पर चढ़ाओल पातर छाही। मुदा वाह रे मरुभूमिक घरक छाही ! मकइक डाँट उपर मे छिड़िआएल, एतेक हटल हटल जे कहुना छाहरिक बोध होइत। एहि सँ घनगर तऽ बाती आ खरही देल बिन छाड़ल ठाठ हमरा सब बन्हैत छी गाम मे। बरखा तऽ एतए होइते नहि छैक तखन रौद सँ बँचबा लेल एतबो बहुत। अस्तु, एतए लोक शंका निवारण केलक, किछु गोटे कोल्ड ड्रिंक लेलनि। दस मिनट बाद बस विदा भेल। जेना जेना हम सब अबू सिम्बेलक लग अबैत गेलहुँ, गाम घरक दर्शन होमए लागल। मरुभूमि मे गाम घर तऽ जलक स्रोत ओएह लेक नासर। करीब डेढ़ बजे हम सब अबू सिम्बेल गाम पहुँचलहुँ। पार्किंग मे बस लगा देल गेल। ओतए सँ हमरा सब कें पएरे करीब आधा किलोमीटर चलि कए ओहि स्थल पर पहुँचबाक छल जतए प्रतिस्थापित मंदिर छलैक। रस्ता मे थोड़ेक दूर तक तऽ दूनू कातक मीनाबजारक छाहरि छलैक। तकर बाद जतए टिकट चेक कएल गेल ओतए एकटा घर ‘विजिटर सेन्टर’ बनाओल। एहि मे प्रतिस्थापन कालक पूरा भीडियो चलैत। तकर बाद रस्ता फेर खुला आ प्रचंड रौद मे। ई मंदिर अजन्ताक गुफा जकाँ पाथर कें काटि कए बनाओल गेल छलैक ईसा पूर्व तेरहम शताब्दी मे सम्राट रैमसेस-2 द्वारा। एकटा पैघ मंदिर अपना लेल आ बगल मे दोसर छोट मंदिर अपन सर्वप्रिय रानी नेफरतारी लेल। असल मे मंदिर मे ओहि समयक प्रचलित देवता ‘आमुन’ (Amun), ‘रा-होराख्ती’ (Ra-Horakhty) आ ‘ता’ (Ptah) कें समर्पित छल। ‘रा’ सूर्य कें कहल गेल छनि। प्रतिस्थापित करबा लेल पहिने उपरका पाथर कें हल्लुक ब्लास्ट सँ हटाओल गेल। तखन 20-30 टन ओजन के टुकड़ी मे मूर्ति सब कें काटल गेल। एक हजार सँ बेसी एहन टुकड़ी सब कें विशाल किरान द्वारा उठा कए नव जगह आनि फेर एक एकटा टुकड़ी कें बैसाओल गेल। एहि लेल पहिने कृत्रिम पहाड़ी बनाओल गेल आ ओकरा खोह मे पाथरक टुकड़ी सब कें एहि तरहें बैसाओल गेल जे एकदम असली मंदिर बनि गेल। विश्वक धरोहर कें सुरक्षित रखबाक एतेक पैघ स्तर पर एहन भगीरथ प्रयास अन्यत्र कतहु नहि भेल छलैक। सबसँ मुख्य बात छलैक मंदिरक द्वारक दिशा सही राखब जाहि सँ 22 अक्टूबर आ 22 फरवरी कें भोर मे सूर्योदयक समय सूर्यक किरण एकदम भीतरक गर्भगृह पर पड़ैक, जेना कि मूल मंदिर मे होइत छलैक। एहि तारीख कें विद्वान लोकनि रैमसेस-2 के जन्मदिन आ राज्यारोहण दिन सँ सम्बन्धित मानैत छथि। मुख्य मंदिरक सामने भाग मे रैमसेस-2 के 20 मीटर ऊँच चारिटा विशाल मूर्ति छलैक, प्रवेश द्वारक दूनू कात दू दूटा मूर्ति। एकटा मूर्ति मिस्रक प्राचीन भूकम्प मे पहिनहि क्षतिग्रस्त भऽ गेलैक। एकरा एखनहु ओहिना छोड़ि देल गेल छैक। मूर्ति मे सम्राट सिंहासन पर बैसल छथि आ मिस्रक दूनू भाग — अपर इजिप्ट आ लोअर इजिप्ट — कें निरूपित करैत जौआँ मुकुट पहिरने छथि। एहने जौआँ मुकुट पहिरने रैमसेस-2 के मूर्ति अन्यत्र सेहो पहिनहिं देखने छलहुँ। भीतर मे विशाल स्तम्भ सब पर मूर्ति, सम्राट द्वारा कएल गेल विभिन्न लड़ाइ के चित्रकारी आदि एखनहु जीवंत छैक। भीतर मे अनेक कक्ष छैक जे सामने सँ अन्दर जाइत छोट होइत जाइत छैक। सबसँ भीतर मे मात्र एकटा कक्ष जे गर्भगृह भेलैक। तहिना करीब 100 मीटर दूरी पर ओही कृत्रिम पहाड़ीक दोसर भाग मे रानीक मंदिर बैसाओल गेल। ई मंदिर देवता हाथोर आ रानी नेफरतारी कें समर्पित अछि। एकर सामनेक भाग मे प्रवेशद्वारक दूनू कात करीब 10 मीटर ऊँच तीन तीन टा मूर्ति, जाहि मे बीच मे सम्राट आ दूनू कात रानी। एहू मंदिर मे भीतर मे विशाल स्तम्भ सब मे चित्रकारी मुदा ओतेक कक्ष नहि। मंदिर घुमबा मे लोक कें प्रायः आधा घंटा लगलैक मुदा फेर बस तक आपस जेबा मे समय लगलैक। पाछू सँ देखला पर ई कृत्रिम पहाड़ी एको रत्ती बनाबटी नहि लगैत छैक। अस्तु करीब अढ़ाइ बजे हम सब अबू सिम्बेल सँ विदा लेल। एक घंटाक मंदिर दर्शन आ आठ-नौ घंटाक बस यात्रा। ओना तऽ साँझ मे आसवान शहर घुमबाक किछु कार्यक्रम छल मुदा यात्री सब कें थाकल रहला सँ एकरा त्यागि देल गेल। हम सब सोझे पहुँचलहुँ अपन जहाज ‘क्राउन प्रिंसेस’ पर। आब तीन दिन तक एतहि रात्रि विश्राम करबाक छल। ‘क्राउन प्रिंसेस’ पाँच सितारा होटलक समकक्ष मानल जाइत छैक। पाँच तल्लाक बेस पैघ जहाज, करीब अढ़ाइ सौ पसिंजरक रहबाक व्यवस्था। तकरा सेवा लेल सब प्रकारक कर्मचारी। सबसँ नीचा मे डाइनिंग हॉल छलैक, तकरो नीचा मे इंजन रूम आदि। तखन चारि तल्ला मे रहबाक कमरा, लॉबी, दोकान, बार, आदि सब किछु। उपरका डेक पर स्विमिंग पूल, आ खुला जगह मे अनेको कुर्सी लागल। एतहु चाह, कॉफी, ड्रिंक आदि उपलब्ध मुदा अलग सँ पैसा देला पर। दुपहरिया मे एक बेर चाह/कॉफी फ्री, माने जहिना होटलक आन भोजन फ्री (दाम तऽ टूरक पैकेज मे देले छलैक)। एहि समय अपन भारतीय यात्री लेल इन्द्रजित अपन रसोइया सँ पकोड़ा, सिंघाड़ा आदि सेहो बनबा लैत छलाह। एतए रूम सब करीब करीब होटले जकाँ, मात्र कने छोट कारण जगह बचेबाक लेल। रूमक सफाइ सेहो नित्य ओहिना कएल जाइत छैक। खाली इंटरनेट बहुत महग आ पीबाक जल जेना हमरा गीजाक होटल मे भेटैत छल से नहि। तें बाहर सँ जल कीनऽ पड़ल। एतहु डाइनिंग हॉल मे अलग सँ भारतीय व्यंजनक इन्तजाम थोमस कूक केनहि छल, ओकर अपन रसोइया तऽ संगहिं छलैक। हमरा सब लेल किछु टेबुल सेहो रिजर्व रहैत छल आ कहलो गेल छल जे अन्यत्र नहि बैसी। ओना भोजन लेल लोक किछुओ चुनि सकैत छल, कन्टिनेटल, जे अन्य यात्री लेल बनाओल जाइत छलैक, अथवा भारतीय, ई अपना इच्छा पर निर्भर छलैक। जहाजक सवारी के हमर अनुभव बहुत कमे रहल अछि -  किछु घंटाक सवारी अंडमान यात्रा मे केलहुँ, एक टापू सँ दोसर टापू पर जेबा लेल, तहिना इंगलिस चैनल पार करबा काल आ डेनमार्क सँ स्वीडन जेबा काल, ततबे। जहाज पर रात्रि विश्रामक अनुभव पहिले बेर भेल अछि। एतए देखलियैक जे एक बेर भीतर गेला पर आ चेकइन केला पर बाहर जेबा लेल लोक कें एकटा पास देल जाइत छलैक। घुरला पर गेटे पर ओ पास रखबा लेल जाइत छलैक। साधारणतः ई प्रक्रिया तखन बेसी जरूरी रहैत छैक जखन जहाज किछुए समय मे तट छोड़ि देबा लेल तैयार रहैत अछि आ कोनो व्यक्ति कें बाहर जाएब जरूरी भऽ गेलनि। जहाज खुजबा सँ पूर्व सबटा पासक गिनती कएल जाइत छैक जाहि सँ पता चलैक जे कोनो व्यक्ति बाहर तऽ ने छूटि गेल। आइ राति जहाज कें एतहि रहबाक छलैक। अगिला दिन 21 सितम्बर 2019, सबेरे हम सब जलपानक बाद बस मे सवार भऽ कए गेलहुँ आसवान शहरक एक इलाका जतए फेर छोटका नाओ सँ एकटा टापू पर जाकए फिले (Philae) मंदिर देखबा छल। फिले मंदिर नील नदीक एकटा टापू पर छैक जे पुरना लो डैमक जलक्षेत्र मे पड़ैत छलैक। एहि इलाका मे अनेक छोट पैघ टापू। फिले मंदिरक मूल टापू मुदा जखन डूबऽ लगलैक तखन एकर समस्त मंदिर परिसर कें उठा कए लगेक दोसर उँचगर टापू पर प्रतिस्थापित कएल गेल। नाओ पर सँ गाइड अब्दुल्ला हमरा सब कें मूल फिले टापू देखा देलनि। फिले मे मंदिर सब मिस्रक मूल फैरो (सम्राट) नेक्टानेबो-1 द्वारा ईशापूर्व 370 इस्वी मे देवी इसिस लेल बनाओल गेल। जखन मिस्र पर ग्रीक लोकनि शासन करए लगला तखन स्थानीय जनताक विश्वास जितबाक लेल आ ओकरा सब कें अपना दिस मिला कए रखबा लेल ओ लोकनि मिस्रक पुरान देवी देवताक नाम पर फेर सँ मंदिर सब बनौनाइ शुरू केलनि। तहिना बाद मे रोमन शासक लोकनि सेहो मंदिर सब बनौलनि। फिलेक मंदिर मुख्यतः टोलेमी-2, टोलेमी-5 आ टोलेमी-6 के शासन काल मे बनाओल गेल। काहिराक ईजिप्सियन म्यूजियम देखबा काल अनेक टूरिस्ट ग्रुपक बीच हमरा सब कें ईयरफोन देल गेल छल जाहि सँ अपन गाइड कें सुनि सकी। एतए ओ सुविधा नहि आ अनेको ग्रुपक लोक आ गाइड बौआइत। हमर गाइड अब्दुल्ला सबकें एकठाम जमा कऽ कए फिलेक वर्णन सुनबए लगलाह मुदा लोक सब तऽ फोटो लेबा मे व्यस्त भऽ जाइत छल। भीड़ मे चालीस सदस्य कें एक संग सम्हारि कए राखब कठिन काज छलैक। तथापि ओ हमरा सब कें मंदिरक पहिल प्रवेश द्वार, जाहि मे विशाल गोपुर (pylon) बनल छलैक, फेर भीतर के विशाल आङन, तखन दोसर गोपुर होइत अन्त मे छोट गर्भगृह देखौलनि। गर्भगृह मे एखन मात्र ग्रेनाईटक चबूतरा टा छैक। कोनो समय मे एहि चबूतरा पर देवी इसिसक मूर्ति रहल हेतनि। आङन मे एक कात अनेको छोट छोट कमरा सब छैक जे कहियो पंडित लोकनिक निवास रहल हेतनि। संगहि कात मे सेहो विशाल स्तम्भ सब छैक। गाइड अपन काज समाप्त कऽ कए फोटो लेबा लेल अलग सँ बीस मिनट समय देलखिन। अस्तु हम सब ओतए सँ फेर नाओ पर चढ़ि कए बस पार्किंग बला जगह अबैत गेलहुँ। अगिला भ्रमण स्थल छल एतुका प्रसिद्ध ईजिप्सियन कॉटन के दोकान। मिस्रक सूती वस्त्र विश्व प्रसिद्ध छैक से सबकें बूझल छल। मुदा गाइड कहलनि जे साधारणतः दोकान सब मे एखन खाली चीनी सामान (जकरा ओ मजाक मे आर-ओ-सी, माने रिपब्लिक ऑफ चाइना कहैत छलथिन) भरल छैक आ सुच्चा ईजिप्सियन कॉटन सब ठाम नहि भेटैत छैक। एहि मे हमरा सब कें कोनो अतिशयोक्ति नहि बुझाएल कारण चीनी सामानक बाढ़ि तऽ विश्वक हरेक गली कूची मे देखबा मे अबिते छैक। अस्तु, हम सब एकटा एहन सुच्चा कपड़ाक दोकान मे प्रवेश केलहुँ। सत्ते एतुका वस्त्र देखि सन्देह मेटा गेल। मुदा वस्त्र सबहक दामो तहिना ऊँच। कोनो हाफ शर्ट 900 पौंड (माने करीब 4000 रुपैया) सँ कम नहि। थोड़ेक काल तक तऽ प्रायः सब गोटे घुरिआइते रहलाह मुदा किछु गोटे कीनब शुरू केलनि तऽ हमरहु धाख छूटल। नाति नातिन लेल टीशर्ट कीनल, क्रेडिट कार्ड सँ पेमेंट कएल। समय कम छल, लंच तऽ जहाजे पर करबाक छल मुदा बेसी महत्वपूर्ण छलैक जहाज कें डेढ़ बजे छुटबाक समय। तें अब्दुल्ला सब कें समेटि बस मे ढुका लऽ अनलनि जहाज पर। आसवान शहर छोड़ि देल। आब जहाजे पर सब किछु। एहने समय लेल पैघ समुद्री यात्रा मे लोक जहाजक लाइब्रेरीक उपयोग करैत रहल होएत। हमर लाइब्रेरी किन्डल मे छल। रौद बेसी रहला सँ उपरका डेक पर जाएब सम्भव नहि। रूम एयरकन्डिसन्ड छले। बस, खिड़कीक पर्दा हटा देल आ बैसि कए नील नदीक किनाराक बदलैत दृश्यक आनन्द लेबऽ लगलहुँ। सूर्यास्त सँ किछु पहिने हम सब पहुँचलहुँ “कोम ओम्बो” मंदिर लग। आब हम सब उत्तर दिशा मे चलैत आसवानक बान्ह सब के जलक्षेत्र सँ बहुत दूर चलि आएल छलहुँ आ मंदिर सब मूले स्थल पर अवस्थित छैक। एहि मंदिर कें “स्वास्थ्य लाभक मंदिर” सेहो कहल जाइत छैक। प्राचीन काल मे दूर दूर सँ बीमार लोक एतए अबैत छल, चढ़ौआ चढ़बैत छल आ अपन नीरोग हेबाक कामना करैत छल। कोम ओम्बो मन्दिर कें जोड़ा मन्दिर सेहो कहल जाइत छैक कारण एतए दूटा देवता लेल एक समान सटले-सटल दूटा मन्दिर बनलैक। एकटा मन्दिर मे गोहि देवता ‘सोबेक’ लेल, जिनका प्रजननक देवता सेहो बूझल जाइत छल। दोसर मन्दिर अछि बाज देवता ‘हारोरिस’ लेल। एतए घुमैत साँझ परि गेलैक आ बहुत रास मन्दिर परिसर हम सब बिजलीक प्रकाशे मे देखल, ई नव अनुभूति भेल। ई मन्दिर सब ग्रीक शासनक समय बनाओल गेल छलैक। कतेको चित्र आ मूर्ति कें देखा कए गाइड हमरा सब कें बुझौलनि जे ग्रीक लोकनिक बनाओल चित्र मे नारीक शरीरक विभिन्न अंगक अनुपात पुरान जमानाक मिस्र मे बनाओल चित्र सँ बहुत भिन्न छैक। ग्रीक लोकनि महिलाक वक्ष कें बेस पैघ बनाकए वक्षाग्र पर्यन्त कें देखनुक बना अनावृते छोड़ि दैत छलखिन। मुस्लिम संस्कृति मे जनमल भीजल अब्दुल्ला कें ई ढंग नीक नहि लागि रहल छलनि। एहि मन्दिर मे ओहि जमाना मे व्यवहृत शल्य चिकित्साक औजारक चित्र सब बनाओल छैक। एतए ओहि प्राचीन समय मे प्रसव काल महिला लोकनि कें कोन तरीका सँ बैसाओल जाइत छल तकर एकटा चित्र देखल। गाइड अब्दुल्ला हमरा सब कें बुझा देलनि जे ई तरीका आब फेर लोकप्रिय भऽ रहल छैक। हमरा ग्रुप मे एकटा तमिल महिला गाइनेकोलोजिस्ट छलीह। ओ एकर समर्थन केलखिन। मन्दिर परिसर मे पहिल बेर देखल नाइलोमीटर (Nilometer) जे एकटा इनार जकाँ होइत छलैक। प्राचीन काल मे एहि इनारक जल स्तर सँ प्रशासन कें ई बुझबा मे अबैत छलैक जे नील नदी मे एहि बेर कतेक पानि एलैक, ओहि हिसाबें जनता कें खेतीक उपजा केहन भेल हेतैक। ताही हिसाबें कर ओसूल कएल जाइत छलैक। यदि पानि कम रहलैक तऽ नीक उपजा नहि भेला सँ लोक कें कमे कर देबऽ पड़ैत छलैक। एतेक संतुलित आ वैज्ञानिक कर व्यवस्था विश्वक प्राचीन इतिहास मे अन्यत्र भेटब कठिन। एतहि क्रोकोडाइल म्यूजियम देखल जतए एकटा हॉल मे बहुत रास गोहिक ममी बना कए राखल छलैक। मनुष्यक ममी तऽ काहिराक म्यूजियम मे देखने छलहुँ, गोहिक ममी एतहि देखल, ई विश्व मे अद्भुते अछि। हमरा सब एखन जहाजक पंछी बनि गेल छी — जैसे उड़ि जहाज की पंछी पुनि जहाज पे आबै। सएह गति। अस्तु, मन्दिर भ्रमणक बाद घुरि अबैत गेलहुँ जहाज पर। जहाज राति मे एतए सँ विदा भऽ जेतैक से बता देल गेल। संगहि ईहो जे बहुत सकाले एडफू मंदिरक दर्शन करबा लेल तैयार होमए पड़त। साढ़े चारि बजे भोरे बार मे चाहक व्यवस्था भेल रहतैक। कोनो दशा मे पाँच बजे जहाज छोड़ि सड़क पर आबि जेबाक छल। बर बेस, भोजनक बाद रात्रि विश्रामक तैयारी मे लागि गेलहुँ। जहाज पर अन्तिम दिन, 22 सितम्बर। जहाज राति मे कखन चललैक आ कखन एडफू पहुँचि गेलैक से नहिए बुझलियै मुदा सकाल मे तैयार भऽ साढ़े चारि बजे चाह पीबा लेल सब गोटे जमा भए गेलहुँ। ठीक समय पर सड़क पर अबैत गेलहुँ। थोमस कूकक व्यवस्था मे कतहु कोनो कोताही नहिए रहैत छलैक। सड़क पर चारि सीट बला बहुत रास टमटम सब ठाढ़। एडफू मन्दिर जहाज सँ करीब डेढ़ किलोमीटर दूर छलैक तें सबके टमटम सँ ओतए जेबाक छल। लोक अपना हिसाबें चारि गोटेक ग्रुप बना लेलक। आ टमटम सब दौड़ए लागल। किछुए दूर गेला पर मंदिर परिसरक दर्शन होमए लागल। परिसर बहुत पैघ। एतेक सबेरे तैयार होइतहु मंदिर परिसर पहुँचैत हम सब अन्य ग्रुपक यात्री सबसँ कने पछुआइये गेलहुँ। गेट तऽ छओ बजे खुजबाक छलैक मुदा लोक लाइन मे पहिनहि सँ लागल। हमहूँ सब लाइन मे लगैत गेलहुँ। अस्तु, गेट खुजलाक बाद सब ग्रुप मे अपन अपन गाइड सब जगह बना कए लोक कें मदिरक इतिहास आदि बतबए लगलखिन। हमरो लोकनिक गाइड अब्दुल्ला कमान सम्हारलनि, सब गोटे कें घेरा मे ठाढ़ कऽ कए मंदिरक सब जानकारी विस्तार सँ दऽ देलनि। तकर बाद लोक स्वतंत्र छल अपना हिसाबें घुमबा लेल आ जतेक इच्छा होइ से फोटो घिचबा लेल। एडफू मंदिर ग्रीक शासनक समय मे बनल छलैक जे टोलेमी-3 के समय शुरू भेल आ टोलेमी-12 के समय मे बनि कए तैयार भेल। एकर पहिल गोपुर 37 मीटर ऊँच आ 70 मीटर चौड़ा छैक जकरा बीच मे प्रवेश द्वार बनल छैक। सामने मे दूटा बाजक मूर्ति। एकटा कने खंडित भऽ गेल। गेटक आगू भीतर मे विशाल आङन। ताहि मे तीन कात बरामदा जकाँ अनेको स्तम्भ बनल। भीतर मे एकटा बाजक मूर्तिक नीचा सम्राट टोलेमी-12 ठाढ़ छथि। ई मन्दिर देवता ‘होरस’ कें समर्पित अछि जे एतए बाज के रूप मे प्रतिष्ठित छथि। मंदिरक सबसँ भितरका भाग, गर्भगृह, मे एकटा ग्रेनाइटक चबूतरा पर हिनक पवित्र नाओ राखल रहैत छलैक। वर्ष मे दू बेर एतए सँ नाओ पर नील नदी मे जुलूसक संग होरस कें बाहर निकालल जाइत छल आ डेन्डारा सँ हिनक पत्नी देवी ‘हाथोर’ ओहिना नाओ पर जुलूसक संग अबैत छलखिन। एहि समय समूचा मिस्र मे खूब उत्सव मनाओल जाइत छलैक। पत्नी सँ मिलनक बाद एक सप्ताह तक दूनू गोटे एडफू मे रहैत छलाह। तकर बाद फेर हाथोर कें डेन्डारा पठा देल जाइत छलनि। एडफूक मन्दिर बहुत दिन तक नील नदीक गादि आ मरुभूमिक बालु सँ झाँपल रहलैक। एतेक तक जे एकरा उपर लोक सब घर सेहो बना लेलक। कतोक पाथरक टुकड़ी लोक सब अपन घर बनेबा मे उपयोग कऽ लेलक। उनैसम शताब्दी मे जखन मिस्र मे फ्रेंच लोकनि अएलाह आ प्राचीन स्मारक सबहक खोज शुरू भेल तखन एकरो पता चललैक। फेर एहि जगह कें अवैध कब्जा सँ मुक्त कराओल गेल आ पूरा परिसर के सफाइ भेल। वर्तमान मे ई मन्दिर मिस्रक सब स्मारक सँ बेसी नीक सुरक्षित अछि। मंदिरक किछु भाग मे एखनहु गादि मे डुबलाहा भागक चिन्ह भेटैत छैक। रोमन साम्राज्यक प्रारम्भिक समय मे जखन ईसाइ धर्मक अतिरिक्त आन धर्म कें ‘पागान’ घोषित कऽ देल गेल आ दूनू मे धर्मयुद्ध शुरू भेल तखन कतेको ईसाइ मिसनरी एहि मन्दिर मे नुका कए रहैत छलाह। मंदिर देखि हम सब करीब आठ बजे तक जहाज पर घुरि अएलहुँ। जलपान केलाक बाद एखन बेसी लोक डेक पर चल गेल। भरि दिन आब जहाजे पर रहबाक छलैक। किछु लोक स्विमिंग पूलक मजा लेलनि। किछु अन्य अपन चाह कॉफी आदि पीबैत नदीक दूनू कातक गाम घरक दृश्य देखैत रहलाह। असल मे थोमस कूकक बनाओल प्रोग्राम मे तीन दिनक ‘नील क्रूज’ के असली मजा लोक एखने लऽ रहल छल। एहि बीच एकटा खेला शुरू भेल। एकटा छोटका नाओ (डोंगी) हमरा सबहिक जहाज मे बन्हा गेल। ओहि मे दूटा स्थानीय युवक हमरा सब कें आकर्षित करैत चिचिया रहल छलाह जे हुनका सँ किछु कीनी। ओ सब बेडशीट, टेबुलक्लॉथ आदि बेचि रहल छलाह। सामान सब तऽ ओएह चीनी माल (अब्दुल्लाक भाषा मे आरओसी, republic of china, बला) मुदा आब लोक बचि कए कतए जाएत ? सब तरि तऽ ओएह सामान कीनैत छी, दीपावलीक गणेश आ लक्ष्मीजीक मूर्ति सँ लऽ कए सालो भरिक सजावटक बिजलीक सामान तक। संकेतक भाषा मे मोल मोलाइ चलए लागल। हमरा ग्रुपक किछु गोटे एहन सामान किनबो केलनि। सामान ओ सब प्लास्टिकक बैग मे बान्हि एहन साधल लक्ष्य सँ उपर फेकैत छलथि जे ओ सीधे डेक पर पहुँचि जाइत छल। यदि डेक सँ कियो हुनका सामान घुरा देलखिन तऽ ओहो ओहिना डोंगी पर फेकि दैत छलखिन आ ओ स्थानीय व्यक्ति आराम सँ ओकरा लौकि लैत छलाह। तहिना ओकर दाम सेहो एकटा चद्दरि मे बान्हि डेक पर सँ नीचा फेकि देलक लोक आ बेचनिहार लोकि लेलनि ओकरा। बाट मे करीब बारह बजे ‘एसना’ शहर लग एकटा लॉकगेट आएल जतए नदी पर बान्ह बनल छलैक। एतए जहाज कें ओहि लॉकगेट बाटे जेबाक दृश्य सेहो मनोरंजक छल। लॉकगेट सँ पास हेबा मे जहाज सबहक लाइन लागल छलैक। बेराबेरी सब निकलि रहल छल। एतए एक घंटा सँ बेसी समय लागि गेल। लुकझुक साँझ मे जहाज लक्जर शहरक बाहरी इलाका मे एक ठाम किनार लागल। एतए बहुत नीक बाग बगीचा लागल। आब हमरा सबहिक नदी यात्रा शेष भेल मुदा राति आइयो जहाजे पर बितेबाक छल। आब जहाज सँ बाहर जेबा मे कोनो पासक आवश्यकता नहि। ने जहाज कें कतहु जेबाक छलैक आ ने यात्री कतहु बेसी दूर भागि सकैत छल। अगिला दिन बहुत भोरे कोनो प्रोग्राम सेहो नहि छलैक। भोजनोपरान्त यात्री लोकनि एहि नदी यात्राक खुसी मे बहुत नाच गान करैत गेलाह। तकर बादे रात्रि विश्राम भेल। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। मुन्नाजी बीहनि कथा टकटकी बेरा बेरी लोकक जमा भेल भीड़क सोझाँ ठोहि पाड़ि क' कान' लागल छल ओ छओँड़ी. कियो किछु पुछय त' उतारा नै द' सभहक मुँह तकैत रहल.... भीड़ बढ़ैत जा रहल छल....मुदा सब मुकदर्शक बनल. शान्त भीड़ मे सँ आब शब्द बहरेलै " गै, ई कह  तोहर नाम ठेकान की छौ ?" --- यौ छोड़ू, की करब नाम ठेकान बुझि  ?. --- तोरा तोहर घर धरि पहुँचा देबौ. --- यौ, हमर नै कोनो घर वाँचल आछ ने कोनो ठेकाना, हम त' दंगा पीड़ित शिविर मे सँ भागि एत' एलौं ऐछ. --- किए भगलीही , अपन जान बचेबा लेल ? --- नै यौ, अपन संपति बचेबा लेल. ! --- आँय ! तहन तो अपन गाम - घर जो ने अपन संपैतक रक्षा करिहें. ---- गाम मे किछु आब कहाँ  वाँचल ऐछ.जे किछु संपति शेष ऐछ ओ त' हमरे लग ऐछ.आ तकरे बचेबा खातिर त' गाम सँ भगलौं. " कत्तौ कियो रक्षक नै देखएल. !" --- के पुरूष राखत तोरा ? जे राखत ओहो बदनाम भ' जएत. हा....हा.......हा, ठठा के हँसैत......यौ , जँ पुरूष सबके बदनामीक सत्ते डर होइतै त' गाम सँ परदेश धरि हमर संपैतक नोच- नोची नै ने करितए. ? भीड़ उछहि गेल....! ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ज्ञानवर्द्धन कंठ बीहनि कथा फैदाबला बिजनेस -"बाबा!हमर सेठजी केँ कनी बुझबियौन्ह ने।ओतेक बेमार छथिन आ कंजूसीसँ इलाजे नहि करबै छथिन।" -"बेटा सभ किएक नहि बुझबै छनि?" -"एह,बुझबै कोना नहि छनि?मुदा ई ओकरे सभकेँ बुझाब' लगैत छथिन।की कहलखिन से बुझलियैक?" -"की?" -"पहिने पुछलखिन जे जँ हम मरि जेबौह त' कतेक खरचा हेतौह? किरिया-करम शार्टकटमे क' लीह'।डोम-लकड़ी-अगरम-बगरम जोड़ि क' पाँच ने दस हजार।की?हुंडा सराध क' लीह'।पाँच हजार।एगारह जन ल' क' निमहि जाइ जैह'।हे पाँच हजार आर राखह।जोड़ह।कतेक भेलौह?बीस हजार।बस बमभोला! आ किंसाइत इलाज कराब' चलि गेलहुँ,तखन हिसाब लगाबह।डाक्टरक फीस पाँच सय अगाउ धरा लेतौह।खून-पेशाब-पैखाना-एक्स रे,अल्ट्रासाउंड,हेन-टेन करबैत-करबैते पनरह टपि जेतौह।साढ़े पनरह।पथ-पानि, आनी-जानी-रहनी-रुकनी दससँ कममे नहि फरियेतौह।साढ़े पचीस एखने भ' गेलौह।तखन जावत जीयब तावत दवाइ-दीगर नहि बेसी त' दुइये हजार महीना राखह।पुछारी-पैगाममे अबैत-जाइत लोकक आगत-भागतपर खरचा लागल रहतौह,से फराके जोड़ह।आब कहह,की भा' पड़तौह?लौसबला बिजनेस करबह आकि फैदाबला? बेटोसभ की करितैक?गुम भ' जाइ गेलैक।" ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। डाॅ. किशन कारीगर-१. विलुप्त होइत मिथिला के लोक संस्कृति घोड़ा (कठघोड़वा) नाच २.कोन बिरड़ो मे उधिया गेल?कतअ हरा गेल मिथिला के नटुआ नाच? १ विलुप्त होइत मिथिला के लोक संस्कृति घोड़ा (कठघोड़वा) नाच आरौ तोरी के देखही रौ घोड़ा लथारो मारै छै? अच्छा चल त घोड़ावला के छू क देखबै? नै रौ अखनी खूब जोर स लथार फेकै हेलै बलू चोट लगतौ तब. इह कोनो देह टुटि जेतै की? कनि मनि चोट लगतै त कि हेतै रौ बाद मे देह झारि लेब कीने? छै़डा मारेड़, धिया पूता, बुढ़ पुराण सब कोइ गाम घर दिस बेस मोन स घोड़ा नाच देखै जाइ छलै. आब नै ओहेन घोड़े वला, नै ओहेन डफली बौंसली वला, आ नै ओहेन छमकी नटुए सब रहल आ नै आब तेहेन घोड़ीनाच रहलै? आ नै कतौ आब होइ छै. विलुप्त भेल जा रहलै घोड़ा नाच? पहिने गाम घर, छोट छिन बजार सब दिस घोड़ा (कठघोड़वा) नाच बेस लोकप्रिय रहै आ लोक मनोरंजन के सहज सोहनगर साधन रहै. डफली वला डफ डफ करै, बौंसली वला बौंसरी बजबै, कैसियो वला धुन बजबै आ नटुआ मेकप केने डांर लचका के नचै आ बीच मे घोरा वला अपना कांख मे रस्सी काठ बत्ति स बनल सजल घोड़ा के टंगने नटुआ संगे रमैक रमैक के नचै. घोड़ा वला नचैत नचैत बीच बीच धिया पूता दिसी हुड़ैक जाई, आस्ते स लथार फेकै आ छौंड़ा मारेर सब धरफरा के एक दोसर के देह पर खसै? कोइ धांई भटका खसै त कखनो के छौंडा सब घोड़ा वला के लथारो छू के देखै त घोड़ा वला आरो हुमैक हुमैक के अपना ताले बैंड के धुन पर नचै आ धिया पूता सब घोड़ा के मुँह नांगैर छू के अपनो एक दोसरा के धकैल दै छेलै एना जेना घोड़े वला लथार फेकने होई.आ धिया पूता बुढ़ पुरान, जनिजाति सब भभा हँसै आ घोड़ा वला नचैत नचैत हुड़कैत हुड़कैत सब दिस घूमि घूमि नाच करै आ ओकरा संगे नटुआ सेहो खूब नचै आ लोक मनोरंजन होइ. घोड़ा नाच काल लोक सब नटुआ आ घोड़ा वला के रूपैया पैसा दै, कतेक छौंड़ा सब त नटुआ के चोली मे आलपिन लगा दस पंच टकही खोंसि दै ताबे एम्हर घोड़ा वला हुड़ैक जाइ आ लोक धड़फरा के भगै आ उ ओकरा देह पर त कोइ ककरो देह पर धरफरा के खसै. नाच देखनिहार लोक सबहक किरमान लागल रहै आ लोक सब भभा भभा हंसै आ लोक सबहक नीक मनोरंजन होइत रहै. बुढ़ पुरान, जनिजाति, आ गामक गनमान्य लोक सब घोड़ा वला, नटुआ, डफली वला सबके हाथे मे रूपैया, खुदरा पाई द अशीरवादी बक्शीस दै जाइ छलै. पहिने मिथिला मे गाम घर दिसी बियाह शादी, मूरन, मांगलिक काज सब मे घोड़ा नाच अब्बसे होइत रहै. गरीब, गिरहस्थ, लोक सब घोड़े नाच वला के बजबै आ घोड़ा नाच सब जाति वर्गक लोक देखै छलै आ लोक मनोरंजन के नीक साधन रहै घोड़ा नाच. लेकिन आब ई घोड़ा नाच बिलुप्त भेल जा रहलै? बड्ड चिंता के गप जे लोक मनोरंजक घोड़ा नाच आब कतौ देखबामे नै अबै हइ. एकरा सरंक्षित करै लै सरकार आ मिथिला समाज के आगू आबए पड़तै. आब त गामे गामे डी जे बजैए, बाई जी नचैए, अरकेसरा होइए? त के चिंता करतै केकरा बेगरता परतै आ के देखतै घोड़ा (कठघोड़वा) नाच? २ कोन बिरड़ो मे उधिया गेल?कतअ हरा गेल मिथिला के नटुआ नाच? हौ कतए के नटुआ एलैइए? फलां ठाम के. इ कहू जे थेहगरीये टा की लटकियो नटुआ सब अएल छै? एह जेबै देखै ले तब ने? थेहगरही, लटकी, छमकी सबटा नटुआ एलैइए, ततेक नीक नचै जाइ हइ से छौंड़ा मारेर सब मारते रूपैया लूटबै जाइ छै आ नटुआ सब नाचै के त थैह थैह केने रहै छै. हं तब त हमहूँ जेबै नाच देखै लै एमकी मने नीक नटुआ सब एलैइए? मिथिला के लोक संस्कृति मे रचल बसल रहै नटुआ नाच जे लोक मनोरंजक रूपे बेस प्रचलित रहै. मूरन, उपनेन, बिआह दान, नाटक, नाच, छकरबाजी, अल्ला रूदल, दिवाली, छैठ जे कोनो उत्सव होउ ओइ मे नटुआ नाच अब्बसे होइ. आ लोक नटुआ के साज सिंगार, लटक झटक, अदाकारी देख के ओकर नाचब देखै, नटुआ संगे नाइच के आनंदित होइत रहै आ लोक मनोरंजन के नीक साधन रहै. हमरा मोन परैए जे हमर गाम मंगरौना के दुर्गा पूजा मे भटचौरा के नाटक पार्टी, विरदाबोन के नाच पार्टी सब अबै. दुनू के नटुआ सब तेहेन लटक झटक वला, रोल खेलै वला नटुआ सब रहै जे अपन अदाकारी स देखनिहार के मोन मोहि लै. आ लोक खुशी स झूमि के नटुआ के इनाम दैत रहै. अनदिना त मूरन, बिआह, सब मे बाबूबरही के फूल हसन बैंड पार्टी अबै . उ बैंड वला बेस नामी आ तेकर नटुआ उसमान हुसेन खूब नीक नटुआ रहै ओकर नाचब देखै ले त लोक सौंसे गामक लोक सब अबै. नटुआ नाच के प्रचलित प्रकार.. 1. रोल खेलिनहार नटुआ- एकरे सब के बोल चाल मे लोक सब थेहगरी नटुआ कहै जाइ छै. इ सब अनुभवी आ  उमेरगर कलाकार सब होइ जे अपना नाचब अभिनय आ बेहतर संवाद स लोक के बेस प्रभावित करै जाइ. नाटक देखनिहार लोक सब एकरा मे अपना समाजिक संबध माए, बहिन, भौजाइ, आदि के छवि देखै जाइत रहै. पाठ (रोल) खेलाएब शुरू करै स पहिने इ नटुआ सब मेकअप, सैज धैज के स्टेज पर अबै आ कहै जाइ हे बाबू भैया सब, हे माता बहिन, अहाँ सब अशीरवाद करै जेबै. लोक इ संवाद सुनि के जोड़दार थौपड़ि तालि बजबै जाइ आ मोने मोन नटुआ के अशीरवाद दै लोक सब जे आइ नीक रोल खेलेतै. नीक नाटक, नाच देखब सुनै जाएब. रोल खेलाइत खेलाइत उ थेहगरही नटुआ सब दर्शक बीच मे अशीरवादी मंगै ले अबै आ लोक सब के दस, बीस, पचास जे जुड़ै से नटुआ के चाबस्सी रूपे दै. 2. लटकी नटुआ- नामक अनरूपे इ सब तेहेन सजल धजल रहै आ नचैत काल तेहेन लटक झटक करै जे छौंड़ा मारेर सब त एकरा पर फिदा भऽ जाइत रहै. एतेक फिदा जे नटुआ के कोरा मे उठा लेब, ओकर गाल छूअब, नटुआ के चोली मे आलपिन लगा रूपैया खोंसि देब आ लटकी नटुआ संगे छौंड़ा मारेर के खूब नाचब बेस रमनगर लगै. बूढ़ पुरान सब सेहो तरे आंखि नटुआ सब पर मोहित होइत रहै आ छौंड़ा मारेर सब पर झूठो खिसियाइ जाइ जे हे तूं सब नटुआ के बेसी नंगो चंगो नै करै जाहि की ताबे छौंड़ा सब नटुआ के बुढ़ पुरान दिस हुलका दै आ खूब पिहकारी होइ. बुढ़ो पुरान सब नटुआ के नीसा मे डूबल देह हाथ डोला के थोड़ बहुत नाचै आ नटुआ के बक्शीस दै. अइ लटकी नटुआ सबहक साज सिंगार, इनाम भेटला पर शुक्रिया अदा करब के आगू त फिल्मी कलाकार सब फिका बूझना जइतै. जिन बलमा ने दिया रूपैया मैं रखूंगी चोली मे सम्हाइर के,     अठ्ठनी हमरा गाल पर आ रूपैया हमरा माल पर.आ तेहेन ने लटक झटक स लोक के मोन मोहि लै जे नवयुबक सब फिदा भऽ जैत रहै. छौंड़ा मारेर सब त अइ लटकी नटुआ सब मे अप्पन प्रेमिका, बहुरिया, भौजाइ आदि के छवि देखै आ बेस लोक मनोरंजन मे डूबल रहै. इ नटुआ सब नाटक, नाच, बैंड पार्टी मे रहैत रहै जे सब गेबो करै आ खूब नचबो करै जाइ. 3. छमकी नटुआ- इ छमकी सब त रेकार्डिंग डांस कला फिल्मी गीत पर तेना छमा छम नचै जे लोक सब सुइध बुइध बिसरा जाइ. एना एकटिंग करै जे लोक के होइ फिलिम देखै छि. कोठे उपर कोठरी उस पर रेल चला दूंगी, बस एक को कुंवारा रखना, मैने जो घूंघरू बांध लिए सब पर तेहेन रिकार्डिंग डांस होइ से छौंड़ा सब सेहो नचै लगै, खूब पिहकारी सिटी बजै आ लोक रूपैया इनाम दै.शेरो शायरी. रेकोडिंग डांस के जमाना एला पर छमकी नटुआ सब बेस लोकप्रिय भेल रहै. इ सब सब तरहक गीत पर मनमोहक डांस करै जाइ छलै. 4. नटुआ- इ नटुआ सब बैंड पार्टी, छकरबाजी, नाच पार्टी, ढोल पिपही पार्टी, अल्ला रूदल सबमे रहैत रहै जे पारंपरिक वेश भूसा, पारंपरिक नाच लेल बेस प्रचलित रहै. सजल धजल मेकअप केने चोली पर रूपैया टंगने समाजिक लोक मर्यादा के मान रखने इ नटुआ सब नचै आ लोक के मनोरंजन करै जाइ. हमरा मोन परैए स्कूलि जीवन मे गाम घर दिस प्रसिद्ध नटुआ सब जेना रामउदगार, रामदुलार पासवान (दुनू सहोदर रहै), सीरिदेब पंडित, उसमान हुसैन, बनैया राम, बबलू मंडल आदि लोक कलाकार सब जेकर नटुआ नाच देखै लेल लोक दूर दूर स अबै. कतेक कलाार सब त अाब अइ दुनिया मे नै रहलै तइयो जे कलाकार सब बांचल छै हुनका प्रति आदर दिर्घायु हेबाक कामना करैत छि. गाम घर मे नटुआ त सब के मन मोहि लै जेना? नटुआ सबके मेकअप करैत काल धिया पूता के हुलुक बुलुक करब, छौंड़ा मारेर सब के नटुआ मेकअप रूम के पहरेदारी करब, बुढ पुरान सब तकतान करै मे जे नटुआ सबके बेसी नंगों चंगो नै करै जाही, फेर पिहकारी हंसि ठहक्का जे लोकरंग रहै से नटुआ नाच के आरो जीवंत बना दै. मिथिला समाज लोक कलाकार प्रति सब दिन उदास रहल. बात बात मे दुत्कारि देब जे पढबें लिखमै की नचनीया बजनिया बनमैं? त एना मे के अइ कला सबके जियाअ कए के राखत? भोजपूर वला सब नटुआ नाच (लौंडा डांस) के जियाअ के रखलक त देखियौ जे रामचंद्र मांझी के पद्मश्री अवार्ड भेटलै. आ अपना मिथिला वला सब नटुआ के हेय दृष्टिये देखलक ओहेन प्रोत्साहन नै देलक त आब नटुआ नाच कलाकार नैंहे भेटत?  बड्ड भेल त नेपाल,बंगाल,यू पी स बाई जी मंगा के लोक नचा लैइए सैह टा? नटुआ नाच के पारंपरिक रूप आ उत्सव बला सुआद डीजे, बाई जी मे किन्नौ ने भेटत? असली आनंद त नटुआ नाच मे देखाएत यदि तकियौ त? मिथिला समाजक लोक चिंता कए के देखियौ जे नटुआ नाच के जिआ के राखै परत. नटुआ कलाकार के प्रोत्साहन देबाक अभाव मे, बड्ड दुखक आ चिंता के गप जे एहेन लोकरंग वला नटुआ नाच आब कतौ हेरा गेल जेना? डी जे, अरकेसरा बाइ जी के बिरड़ो मे कतौ उधिया गेल नटुआ नाच? अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। डाॅ. किशन कारीगर पोसलाहा छागर सब आई गेले घर छह? (हास्य कटाक्ष) बाबा बड़बड़ाइत चल जाइत रहै जे हे पोसलाहा खस्सी सब? आई त गेले घर छह? पूजा होइ टा के देरी छै? तकरा बाद खरांस स गर्दैन उड़ा देल जेतह? ताबे भागेसर पंडा बमैक गेल जे अहां किए एना खस्सी सबके मोन भांगठ करै पर लागल छियै? भगवति स्थान मे ज खस्सी मूड़ि नै डोलबै त बैइल कोना चढ़तै? बाबा सेहो तामसे तमतमा क तामसे फाइर भेल बजलै अईं हौ भागेसर इ कहअ त भगवति ई कहै छथुन जे बैइल चढाबह? की अपनामने तूं सब तितमहा करै जाइ छह जे भगवति नाम पर पोसलाहा खस्सी के चढ़ा सांझे स माउस गबर गबर भोकसब की ने? आ बहन्ना जे भगवति के बैइल चढाएब. कहअ त भगवति कहूं कहथिदिन जे हमरा बैइल चढाबह? एतेक कहूँ बैइल चढाएब भेलैए जे दुर्गा स्थान मे लाइन लागल रहै छै? बाबा आ भागेसर मे कहा कहि होइत रहै. भागेसर कहै बाबा अहाँ के एको रति धर्म कर्म दिया नै बुझै छियै? बाबा बजलै हौ ताबे तोंही कोन बड्ड नेहाल कए देलहक आ समाज स अंधविश्वास के हटा देलहक? भागेसर बाजल यौ बाबा सब दिन स जे होइत एलैए से लोक केना छोइड़ देतै? बाबा कहलकै हौ भागेसर जा जा कि बेमतलबक हमरा संगे डिस्कस करै मे लागल छहअ? जल्दी दुर्गा स्थान जा नै त छागरक सीरा कमीटी वला ध रखतअ त तोरा कीछो फैबो ने लगतह? जा तंहू छागर पोसनहे छह त लगले दुर्गा स्थान भऽ आबह? भागेसर बाजल हम जाएब सै अपना मने की अंहा मने? एम्हर कहा कही होइते रहै बाबा के मोन रंज भेल रहै की ताबे हमहूँ बाबा लक पहुँचलौ आ एक लोटा जल चढा देलियैन? की बाबा आरो अघोर भेल बजलै कोन उलुआ सब छी जे बेरो कुबेरो जल चढा दैइए? अखैन लोक बैइल चढबै लै जाइए आ एकरा जल ढारबाक तार छै? के छियअ हौ? हम बजलहुँ यौ बाबा हम छि कारीगर. ई सुनि बाबा के कनी तामस कम भेलै कहलकै जे अच्छा तूं छियअह तोरो अखुनके बड्ड तार लागल छेलह? एकटा काज करह कनी एक बाल्टी पाइन आनि के बसहा बरद के पिया दहक आ कनि एक जूम तमाकुल खुआबह. भागेसर पंडा त अपने एक बाकुट तमाकुल खा गेल आ हम मंगलियै त कहलक जे आब चुनैटी मे तमाकुले नै अछि? ई सुनि भागेसर फेर बमैक गेल जे बाबा अहाँ खाली हमरा बेज्जैत करै पर लागल रहै छी की? बाबा बजलै एह हमरा कहबाक भावार्थ बुझलहक नैहें? कहबाक ई जे जहिना एक बाकुट तमाकुल एक्के बेर नै खेबाक चाही तहिना ओतेक छागर के बैइल नै देबाक चाही? भागेसर तैइओ बाजल बैइल हेबाके चाही की आ डिस्कस करअ लागल. हम भागेसर के समझा बुझहा के शांत करौलहुँ आ फेर तमाकुल चुना एक एक जूम बाबा आ भागेसर पंडा के देलियै. बाबा स पुछलहुँ जे की भेल जे अहाँ भागेसर संगे डिस्कस मे लागल छी बेमतलबो. बाबा बजलौ हौ कारीगर हम त सुप्पत गप कहै छियैअ त भागेसर बेमतलबो डिस्कस मे लागल यै? हम बजलहुँ यौ बाबा सोझ साझ फरिछा के कहू जे भेल की? बाबा हां हां क हँसैत बजलै हौ कारीगर तहूं पत्रकार भऽ एते खाने बुझहै छहक? आईं हौ आई सतमी मेला छियै त गाम घर दिस दरबज्जे दरबज्जे पोसुआ छागर देखलहक की ने? हम कहलियै जे हँ देखलियै त कएटा दरबज्जा पर दू दू चारि टा के? बाबा बजलै देखिहक जे अष्टमी नौमी दिन त आरो ततेक बैइल चढबै जेतै से दुर्गा स्थान खूने खूनाम अनपट लागल रहतै? बाबा कहैअ लागल एह अखैन देखबहक जे सब खस्सी के खूब मान दान करतह की, कटहर पत्ता, घास, जिमरक पत्ता, की की ने खुएतह? एतेक दिन लोक डाइलोक माइरतह जे बकरी खस्सी छोटका जाइत सब पोसै जाइए आ अखनी त बड़को जाइत सब बैल चढबै दुआरे छागर पोसअ लागल. अइ गप के फेर जातिवादी नै बना दिहक, तूं सब यथार्थ बुझने बिना अकानह नै लगिहअ? हे देखहक त भागेसरो पंडा दू टा छागर पोसने अछि आ दुनू भगवति के चढौतै. एकटा अपना आ दोसर बेटा साति. कहअ त भगवति कहूं कहथिहिन जे हमरा बैल चढाबह? दरबज्जा पर खस्सी देख हम एतबा त बाजल रही जे हे छागर आई तों सब गेल घर छह? पूजा होइतै मातर खरांस स गर्दैन उड़ा देल जेतह? यैह गप सुनि देखै छहक भागेसर के बेटा सरवेसर हूर उठा देलकै आ भागेसरो हमरा स लड़ै लै एलैह जे अहां छागर के भरकबै मे लागल छियै? अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३. पद्य ३.१.ज्ञानवर्द्धन कंठ- गजल ३.२.आशीष अनचिन्हार- २ टा गजल ज्ञानवर्द्धन कंठ गजल एक बेरि सभ संगे कहियौ जय जय सीताराम बेरि बेरि सभ संगे बजियौ जय जय सीताराम पाँच बर्ख जे सूतल रहला तकला नहि घुरि गाम फेर आइ ओ जितला नचियौ जय जय सीताराम एक बेरि नहि सूतल खटिया जिनगी मे ओ प्रेत दान आइ खटिया नव करियौ जय जय सीताराम मूर्ति माइ दुर्गा केँ पुजिकय कन्या पूजी सात मारि पेट मे कन्या कहियौ जय जय सीताराम भाव भेस भाषा केँ बिसरी कहबाबी स्मार्ट आन नीक अपना केँ दुसियौ जय जय सीताराम (21 21 222 22 22 2221) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। आशीष अनचिन्हार २ टा गजल १ बाहर बाहर जोड़ल भतार भितरे भीतर टूटल भतार छै मृगतृष्णा सन के विकास इम्हर उम्हर दौड़ल भतार इच्छा माने पूरा समान किम्हर जेतै परिकल भतार लेने हेतै सभटा हिसाब चुप्पे रहि रहि कानल भतार हमरा आने देलक समाद अपने लोकक दागल भतार सभ पाँतिमे 22-22-22-121 मात्राक्रम अछि। २ निशानापर बूढ़ संगे बच्चा छै देशमे आब युवा केर सत्ता छै दर्दक अनुभव होइतो नोर रोकब ईहो एक तरहँक गर्भहत्या छै सत्य हुनकर ठोरक चुप्पी जगतमे बाद बाँकी बात मिथ्ये मिथ्या छै केकरो हाथमे भरलाहा भारी केकरो हाथमे खाली डिब्बा छै लोहा के हो प्लास्टिक के या काठक कोनो कुर्सी अपनामे सत्ता छै सभ पाँतिमे 22-22-22-22-22 मात्राक्रम अछि। दू टा अलग-अलग लघुकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि। ई बहरे मीर अछि। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ........................................................................................................................ संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल  मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] Videha e-Learning पेटार (रिसोर्स सेन्टर) शब्द-व्याकरण-इतिहास MAITHILI IDIOMS & PHRASES मैथिली मुहावरा एवम् लोकोक्ति प्रकाश- रमाकान्त मिश्र मिहिर (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) डॉ. ललिता झा- मैथिलीक भोजन सम्बन्धी शब्दावली (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) मैथिली शब्द संचय MAITHILI DICTIONARY- RAMDEO JHA (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) ENGLISH MAITHILI COMPUTER DICTIONARY MAITHILI ENGLISH DICTIONARY अणिमा सिंह -Shishu_Geet_Khel_Anima_Singh डॉ. रमण झा मैथिली काव्यमे अलङ्कार    अलङ्कार-भास्कर आनन्द मिश्र (सौजन्य श्री रमानन्द झा "रमण")- मिथिला भाषाक सुबोध व्याकरण BHOLALAL DAS मैथिली सुबोध व्याकरण- भोला लाल दास राधाकृष्ण चौधरी- A Survey of Maithili Literature ........................................................................................................................ मूलपाठ तिरहुता लिपिक उद्भव ओ विकास (यू.पी.एस.सी. सिलेबस) राजेश्वर झा- मिथिलाक्षरक उद्भव ओ विकास (मैथिली साहित्य संस्थान आर्काइव) Surendra Jha Suman दत्त-वती (मूल)- श्री सुरेन्द्र झा सुमन (यू.पी.एस.सी. सिलेबस) प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) CIIL SITE ........................................................................................................................ समीक्षा सुभाष चन्द्र यादव-राजकमल चौधरी: मोनोग्राफ शिव कुमार झा "टिल्लू" अंशु-समालोचना डॉ बचेश्वर झा- B_JHA_Nibhand_Nikunj.pdf डॉ. देवशंकर नवीन- Adhunik_Sahityak_Paridrishya डॉ. रमण झा- भिन्न-अभिन्न प्रेमशंकर सिंह- मैथिली भाषा साहित्य:बीसम शताब्दी (आलोचना) डॉ. रमानन्द झा 'रमण' हिआओल अखियासल     CIIL SITE दुर्गानन्द मण्डल-चक्षु RAMDEO JHA दत्त-वतीक वस्तु कौशल- डॊ. श्रीरामदेवझा SHAILENDRA MOHAN JHA परिचय निचय- डॊ शैलेन्द्र मोहन झा ........................................................................................................................ अतिरिक्त पाठ पहिने मिथिला मैथिलीक सामान्य जानकारी लेल एहि पोथी केँ पढ़ू:- राधाकृष्ण चौधरी- मिथिलाक इतिहास फेर एहि मनलग्गू फाइल सभकेँ सेहो पढ़ू:- केदारनाथ चौधरी चमेलीरानी                         माहुर                          करार कुमार पवन पइठ (मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ कथा) (साभार अंतिका)       डायरीक खाली पन्ना (साभार अंतिका) याेगेन्द्र पाठक वियाेगी- विज्ञानक बतकही रामलोचन ठाकुर- मैथिली लोककथा SAHITYA AKADEMI http://sahitya-akademi.gov.in/publications/e-books.jsp http://sahitya-akademi.gov.in/general/Digitalbooks.jsp CIIL http://corpora.ciil.org/maisam.htm अखियासल (रमानन्द झा रमण) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI1.pdf जुआयल कनकनी- महेन्द्र http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI2.pdf प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI3.pdf सृजन केर दीप पर्व- सं केदार कानन आ अरविन्द ठाकुर http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI4.pdf मैथिली गद्य संग्रह- सं शैलेन्द्र मोहन झा http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI5.pdf JNU http://sanskrit.jnu.ac.in/maithili/index.jsp http://sanskrit.jnu.ac.in/student_projects/lexicon.jsp?lexicon=maithili ARCHIVE.ORG https://archive.org/details/%40vijay_deo_jha?&sort=-publicdate&page=2 VIDEHA MAITHILI BOOKS/ PICTURE-AUDIO-VIDEO ARCHIVE http://videha.co.in/new_page_15.htm https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ ALL INDIA RADIO DOORDARSHAN आकाशवाणी दूरदर्शन http://prasarbharati.gov.in/ http://newsonair.com/ https://doordarshan.gov.in/ आकाशवाणी मैथिली पोडकास्ट http://prasarbharati.gov.in/podcast.php?filterlang=Maithili&from=1947-08-15&fromwp=2020-08-29&to=2050-12-31&search=GO आकाशवाणी पटना/ दरभंगा मैथिली रेजनल न्यूज टेक्स्ट डाउनलोड-1 http://newsonair.com/RNU-NSD-Audio-Archive-Search.aspx आकाशवाणी पटना/ दरभंगा मैथिली रेजनल न्यूज टेक्स्ट डाउनलोड-2 http://newsonair.com/Regional-Text.aspx आकाशवाणी दरभंगा http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=282 आकाशवाणी दरभंगा यू ट्यूब चैनल https://www.youtube.com/channel/UCGdNveEFmv4pPolWiTEMxVA आकाशवाणी भागलपुर http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=359 आकाशवाणी पूर्णियाँ http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=256 आकाशवाणी पटना http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=122 IGNCA http://ignca.nic.in/coilnet/mithila.htm http://ignca.nic.in/coilnet/kalyani.htm (MAITHILI ENGLISH DICTIONARY) http://tdil.mit.gov.in/CoilNet/IGNCA/mithila.htm MITHILA DARSHAN https://mithiladarshan.com/ (online pdf of Maithili journal) I LOVE MITHILA https://www.ilovemithila.com/  (online maithili journal) मैथिली साहित्य संस्थान https://www.maithilisahityasansthan.org/ https://www.maithilisahityasansthan.org/resources (online pdf of Reasearch Papers/ books) ........................................................................................................................ VIDEHA e-LEARNING YOUTUBE CHANNEL https://www.youtube.com/channel/UC4abVKqMj2pDWIAkXiOHp7A (अनुवर्तते) -गजेन्द्र ठाकुर विदेहक किछु विशेषांक:- १) हाइकू विशेषांक १२ म अंक, १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf          Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf       12.pdf २) गजल विशेषांक २१ म अंक,  १ नवम्बर २००८ Videha_01_11_2008.pdf       Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf         21.pdf ३) विहनि कथा विशेषांक ६७ म अंक, १ अक्टूबर २०१० Videha_01_10_2010        Videha_01_10_2010_Tirhuta             67 ४) बाल साहित्य विशेषांक ७० म अंक, १५ नवम्बर २०१० Videha_15_11_2010        Videha_15_11_2010_Tirhuta             70 ५) नाटक विशेषांक ७२ म अंक १५ दिसम्बर२०१० Videha_15_12_2010        Videha_15_12_2010_Tirhuta           72 ६) नारी विशेषांक ७७म अंक ०१ मार्च २०११ Videha_01_03_2011        Videha_01_03_2011_Tirhuta           77 ७) अनुवाद विशेषांक (गद्य-पद्य भारती) ९७म अंक Videha_01_01_2012 Videha_01_01_2012_Tirhuta           97 ८) बाल गजल विशेषांक विदेहक अंक १११ म अंक, १ अगस्त २०१२ Videha_01_08_2012        Videha_01_08_2012_Tirhuta           111 ९) भक्ति गजल विशेषांक १२६ म अंक, १५ मार्च २०१३ Videha_15_03_2013        Videha_15_03_2013_Tirhuta           126 १०) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक १४२ म, अंक १५ नवम्बर २०१३ Videha_15_11_2013        Videha_15_11_2013_Tirhuta           142 ११) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 १२) अरविन्द ठाकुर विशेषांक १८९ म अंक १ नवम्बर २०१५ Videha_01_11_2015 १३) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक १९१ म अंक १ दिसम्बर २०१५ Videha_01_12_2015 १४) विदेह सम्मान विशेषा‍क- २००म अ‍क १५ अप्रैल २०१६/ २०५ म अ‍क १ जुलाई २०१६ Videha_15_04_2016 Videha_01_07_2016 १५) मैथिली सी.डी./ अल्बम गीत संगीत विशेषांक- २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ Videha_01_01_2017 १६) मैथिली वेब पत्रकारिता विशेषांक VIDEHA 313 लेखकसं आमंत्रित रचनापर आम‍ंत्रित आलोचकक टिप्पणीक शृंखला १७) मैथिली बीहनि कथा विशेषांक-२ VIDEHA 317 १८) रामलोचन ठाकुर विशेषांक VIDEHA 319 १९) रामलोचन ठाकुर श्रद्धांजलि विशेषांक VIDEHA 320 लेखकक आमंत्रित रचना आ ओइपर आमंत्रित समीक्षकक समीक्षा सीरीज १. कामिनीक पांच टा कविता आ ओइपर मधुकान्त झाक टिप्पणी विदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016 "पाठक हमर पोथी किए पढ़थि"- लेखक द्वारा अप्पन पोथी/ रचनाक समीक्षा सीरीज १. आशीष अनचिन्हार 'विदेह' क ३२७ म अंक ०१ अगस्त २०२१ एडिटर्स चोइस सीरीज एडिटर्स चोइस सीरीज-१ विदेहक १२३ म (०१ फरबरी २०१३) अंकमे बलात्कारपर मैथिलीमे पहिल कविता प्रकाशित भेल छल। ई दिसम्बर २०१२ क दिल्लीक निर्भया बलात्कार काण्डक बादक समय छल। ओना ई अनूदित रचना छल, तेलुगुमे पसुपुलेटी गीताक एहि कविताक हिन्दी अनुवाद केने छलीह आर. शांता सुन्दरी आ हिन्दीसँ मैथिली अनुवाद केने छलाह विनीत उत्पल। हमर जानकारीमे एहिसँ बेशी सिहराबैबला कविता कोनो भाषामे नहि रचल गेल अछि। सात सालक बादो ई समस्या ओहने अछि। ई कविता सभकेँ पढ़बाक चाही, खास कऽ सभ बेटीक बापकेँ, सभ बहिनक भाएकेँ आ सभ पत्नीक पतिकेँ। आ विचारबाक चाही जे हम सभ अपना बच्चा सभ लेल केहन समाज बनेने छी। एडिटर्स चोइस सीरीज-१ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-२ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच ब्रेस्ट कैसरक समस्यापर विदेह मे मीना झा केर एकटा लघु कथा प्रकाशित भेल। ई मैथिलीक पहिल कथा छल जे ब्रेस्ट कैसर पर लिखल गेल। हिन्दीमे सेहो ताधरि एहि विषयपर कथा नहि लिखल गेल छल, कारण एहि कथाक ई-प्रकाशित भेलाक १-२ सालक बाद हिन्दीमे दू गोटेमे घोंघाउज भऽ रहल छल कि पहिल हम आकि हम, मुदा दुनूक तिथि मैथिलीक कथाक परवर्ती छल। बादमे ई विदेह लघु कथामे सेहो संकलित भेल। एडिटर्स चोइस सीरीज-२ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-३ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिलक किछु बाल कविता प्रकाशित भेल। बादमे हुनकर ३ टा बाल कविता विदेह शिशु उत्सवमे संकलित भेल जाहिमे २ टा कविता बेबी चाइल्डपर छल। पढ़ू ई तीनू कविता, बादक दुनू बेबी चाइल्डपर लिखल कविता पढ़बे टा करू से आग्रह। एडिटर्स चोइस सीरीज-३ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-४ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच जगदानन्द झा मनुक एकटा दीर्घ बाल कथा कहि लिअ बा उपन्यास प्रकाशित भेल, नाम छल चोनहा। बादमे ई रचना विदेह शिशु उत्सवमे संकलित भेल, ई रचना बाल मनोविज्ञानपर आधारित मैथिलीक पहिल रचना छी, मैथिली बाल साहित्य कोना लिखी तकर ट्रेनिंग कोर्समे एहि उपन्यासकेँ राखल जेबाक चाही। कोना मॊडर्न उपन्यास आगाँ बढ़ै छै, स्टेप बाइ स्टेप आ सेहो बाल उपन्यास। पढ़बे टा करू से आग्रह। एडिटर्स चोइस सीरीज-४ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-५ एडिटर्स चोइस ५ मे मैथिलीक "उसने कहा था" माने कुमार पवनक दीर्घकथा "पइठ" (साभार अंतिका) । हिन्दीक पाठक, जे "उसने कहा था" पढ़ने हेता, केँ बुझल छन्हि जे कोना अहि कथाकेँ रचि चन्द्रधर शर्मा ’गुलेरी’ अमर भऽ गेलाह। हम चर्चा कऽ रहल छी, कुमार पवनक "पइठ" दीर्घकथाक। एकरा पढ़लाक बाद अहाँकेँ एकटा विचित्र, सुखद आ मोन हौल करैबला अनुभव भेटत, जे सेक्सपीरिअन ट्रेजेडी सँ मिलितो लागत आ फराको। मुदा एहि रचनाकेँ पढ़लाक बाद तामस, घृणा सभपर नियंत्रणकेँ आ सामाजिक/ पारिवारिक दायित्वकेँ सेहो अहाँ आर गंभीरतासँ लेबै, से धरि पक्का अछि। मुदा एकर एकटा शर्त अछि जे एकरा समै निकालि कऽ एक्के उखड़ाहामे पढ़ि जाइ। एडिटर्स चोइस सीरीज-५ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-६ जगदीश प्रसाद मण्डलक लघुकथा "बिसाँढ़": १९४२-४३ क अकालमे बंगालमे १५ लाख लोक मुइला, मुदा अमर्त्य सेन लिखैत छथि जे हुनकर कोनो सर-सम्बन्धी एहि अकालमे नहि मरलन्हि। मिथिलोमे अकाल आएल १९६७ ई. मे आ इन्दिरा गाँधी जखन एहि क्षेत्र अएली तँ हुनका देखाओल गेल जे कोना मुसहर जातिक लोक बिसाँढ़ खा कऽ एहि अकालकेँ जीति लेलन्हि। मैथिलीमे लेखनक एकभगाह स्थिति विदेहक आगमनसँ पहिने छल। मैथिलीक लेखक लोकनि सेहो अमर्त्य सेन जेकाँ ओहि महाविभीषिकासँ प्रभावित नहि छला आ तेँ बिसाँढ़पर कथा नहि लिखि सकला। जगदीश प्रसाद मण्डल एहिपर कथा लिखलन्हि जे प्रकाशित भेल चेतना समितिक पत्रिकामे, मुदा कार्यकारी सम्पादक द्वारा वर्तनी परिवर्तनक कारण ओ मैथिलीमे नहि वरण् अवहट्ठमे लिखल बुझा पड़ल, आ ओतेक प्रभावी नहि भऽ सकल कारण विषय रहै खाँटी आ वर्तनी कृत्रिम। से एकर पुनः ई-प्रकाशन अपन असली रूपमे भेल विदेहमे आ ई संकलित भेल "गामक जिनगी" लघुकथा संग्रहमे। एहि पोथीपर जगदीश प्रसाद मण्डलकेँ टैगोर लिटरेचर अवार्ड भेटलनि। जगदीश प्रसाद मण्डलक लेखनी मैथिली कथाधाराकेँ एकभगाह हेबासँ बचा लेलक, आ मैथिलीक समानान्तर इतिहासमे मैथिली साहित्यकेँ दू कालखण्डमे बाँटि कऽ पढ़ए जाए लागल- जगदीश प्रसाद मण्डलसँ पूर्व आ जगदीश प्रसाद मण्डल आगमनक बाद। तँ प्रस्तुत अछि लघुकथा बिसाँढ़- अपन सुच्चा स्वरूपमे। एडिटर्स चोइस सीरीज-६ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-७ मैथिलीक पहिल आ एकमात्र दलित आत्मकथा: सन्दीप कुमार साफी। सन्दीप कुमार साफीक दलित आत्मकथा जे अहाँकेँ अपन लघु आकाराक अछैत हिलोड़ि देत आ अहाँक ई स्थिति कऽ देत जे समानान्तर मैथिली साहित्य कतबो पढ़ू अहाँकेँ अछौं नहि होयत। ई आत्मकथा विदेहमे ई-प्रकाशित भेलाक बाद लेखकक पोथी "बैशाखमे दलानपर"मे संकलित भेल आ ई मैथिलीक अखन धरिक एकमात्र दलित आत्मकथा थिक। तँ प्रस्तुत अछि मैथिलीक पहिल दलित आत्मकथा: सन्दीप कुमार साफीक कलमसँ। एडिटर्स चोइस सीरीज-७  (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-८ नेना भुटकाकेँ रातिमे सुनेबा लेल किछु लोककथा (विदेह पेटारसँ)। एडिटर्स चोइस सीरीज-८ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-९ मैथिली गजलपर परिचर्चा (विदेह पेटारसँ)। एडिटर्स चोइस सीरीज-९ (डाउनलोड लिंक) जगदीश प्रसाद मण्डल जीक ६५ टा पोथीक नव संस्करण विदेहक २३३ सँ २५० धरिक अंकमे धारावाहिक प्रकाशन  नीचाँक लिंकपर पढ़ू:- Videha_15_05_2018 Videha_01_05_2018 Videha_15_04_2018 Videha_01_04_2018 Videha_15_03_2018 Videha_01_03_2018 Videha_15_02_2018 Videha_01_02_2018 Videha_15_01_2018 Videha_01_01_2018 Videha_15_12_2017 Videha_01_12_2017 Videha_15_11_2017 Videha_01_11_2017 Videha_15_10_2017 Videha_01_10_2017 Videha_15_09_2017 Videha_01_09_2017 विदेह ई-पत्रिकाक  बीछल रचनाक संग- मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ रचनाक एकटा समानान्तर संकलन: विदेह: सदेह: १ (२००८-०९) देवनागरी विदेह: सदेह: १ (२००८-०९) तिरहुता विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) देवनागरी विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) तिरहुता विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०)देवनागरी विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०) तिरहुता विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०)देवनागरी विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०) तिरहुता विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]देवनागरी विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]  तिरहुता विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]- दोसर संस्करण देवनागरी विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ]देवनागरी विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ] तिरहुता विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ]देवनागरी विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ]  तिरहुता विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ]देवनागरी विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ] तिरहुता विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ]देवनागरी विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ] तिरहुता विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ]देवनागरी विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ] तिरहुता विदेह:सदेह ११ विदेह:सदेह १२ विदेह:सदेह १३ The readers of English translations of Maithili Novel "sahasrabadhani" and verse collection "sahasrabdik chaupar par" has intimated that the English translation has not been able to grasp the nuances of original Maithili. Therefore the Author has started translating his Maithili works in English himself. After these translations are complete these would be the official translations authorised by the Author of the original works.-Editor Maithili Books can be downloaded from: https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ विदेह सम्मान: सम्मान-सूची (समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार सहित) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। सूचना/ घोषणा १ "विदेह सम्मान" समानान्तर साहित्य अकदेमी पुरस्कारक नामसँ प्रचलित अछि। "समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार" (मैथिली), जे साहित्य अकादेमीक मैथिली विभागक गएर सांवैधानिक काजक विरोधमे शुरु कएल छल, लेल अनुशंसा आमन्त्रित अछि। अनुशंसा २०१९ आ २०२० बर्ख लेल निम्न कोटि सभमे आमन्त्रित अछि: १) फेलो २)मूल पुरस्कार ३)बाल-साहित्य ४)युवा पुरस्कार आ ५) अनुवाद पुरस्कार। अपन अनुशंसा ३१ दिसम्बर २०२० धरि २०१९ पुरस्कारक लेल आ ३१ मार्च २०२१ धरि २०२०क पुरस्कारक लेल पठाबी। पुरस्कारक सभ क्राइटेरिया साहित्य अकादेमी, दिल्लीक समानान्तर पुरस्कारक समक्ष रहत, जे एहि लिंक sahitya-akademi.gov.in पर उपलब्ध अछि। अपन अनुशंसा editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २ “मिथिला मखान” फिल्म देखू मात्र १०१ टाकामे। Android App “BEJOD” download करू वा जाउ www.bejod.in पर, signup करू, एकटा ईमेल जायत, अपन ईमेल खोलू आ ओकरा क्लिक करू अहाँक अकाउंट एक्टीवेट भय जायत। आब मिथिला मखान रेण्ट पर लिअ, डेबिट कार्डसँ १०१ टाका अॉनलाइन पेमेंट करू आ फिल्म देखू। ३ विदेह अपन आगामी अंक (२०२१ क प्रारम्भमे) श्री रामलोचन ठाकुर पर विशेषांक निकालबाक नेयार केने अछि। हुनका सम्बन्धी रचना आमंत्रित अछि (संस्मरण, साक्षात्कार, समीक्षा आदि) जे ३१ दिसम्बर २०२० धरि editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाओल जा सकैत अछि। विदेह पेटारक अन्तर्गत (पोथी डाउनलोड साइट) मे http://www.videha.co.in/new_page_15.htm  हुनकर मौलिक, अनूदित आ सम्पादित रचना फ्री पी.डी.एफ. डाउनलोड लेल उपलब्ध अछि। विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम्: VIDEHA: AN IDEA FACTORY (c)२००४-२०२१. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHAसम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: डॉ उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम वि‍लास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक -स्त्री कोना- इरा मल्लिक। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि)editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि। एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै, आ से हानि-लाभ रहित आधारपर छै आ तैँ ऐ लेल कोनो रॊयल्टीक/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै। तेँ रॉयल्टीक/ पारिश्रमिकक इच्छुक विदेहसँ नै जुड़थि, से आग्रह। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत।  एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-2021 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। ५ जुलाई २००४ केँ http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA वि  दे  ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् 'विदेह' ३३२ म अंक १५ अक्टूबर २०२१ (वर्ष १४ मास १६६ अंक ३३२)

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