'विदेह' ३३४ म अंक १५ नवम्बर २०२१ (वर्ष १४ मास १६७ अंक ३३४) १. गजेन्द्र ठाकुर- संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल सेहो] [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] [FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI ALSO] २. गद्य २.१.डाॅ. किशन कारीगर- मिथिला मे बिलुप्त भेल जा रहल भांट/भैंट(घूमक्कर वाचक) २.२.मणिकांत ठाकुर- चिंता मामा २.३.ज्ञानवर्द्धन कंठ- अभिनव दधीचि २.४.आशीष अनचिन्हार- गजलक रखबार सूतल अछि २.५.मुन्नाजी- बीहनि कथाक विकास मे रचनाकारक योगदान २.६.संतोष कुमार राय 'बटोही'- मंगरौना (धारावाहिक उपन्यास)-पहिल खेप २.७.रबीन्द्र नारायण मिश्र- लजकोटर- ३१म खेप ३. पद्य ३.१.संतोष कुमार राय 'बटोही'- दू टा कविता ३.२.डाॅ. किशन कारीगर- आ रे सुग्गा आ आ- (बाल कविता) ४.स्त्री कोना ४.१.कल्पना झा- दीप Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Books/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाउ। VIDEHA ARCHIVE विदेह पेटार View Videha googlegroups (since July 2008) view Videha Facebook Official Group (since January 2008)- for announcements १. गजेन्द्र ठाकुर ........................................................................................................................ ........................................................................................................................ [संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री] [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल सेहो] [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] [FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI ALSO] यू. पी. एस. सी. (मेन्स) २०२० ऑप्शनल: मैथिली साहित्य विषयक टेस्ट सीरीज यू.पी.एस.सी. क प्रिलिमिनरी परीक्षा २०२० सम्पन्न भऽ गेल अछि। जे परीक्षार्थी एहि परीक्षामे उत्तीर्ण करताह आ जँ मेन्समे हुनकर ऑप्शनल विषय मैथिली साहित्य हेतन्हि तँ ओ एहि टेस्ट-सीरीजमे सम्मिलित भऽ सकैत छथि। टेस्ट सीरीजक प्रारम्भ प्रिलिम्सक रिजल्टक तत्काल बाद होयत। टेस्ट-सीरीजक उत्तर विद्यार्थी स्कैन कऽ editorial.staff.videha@gmail.com पर पठा सकैत छथि, जँ मेलसँ पठेबामे असोकर्ज होइन्हि तँ ओ हमर ह्वाट्सएप नम्बर 9560960721 पर सेहो प्रश्नोत्तर पठा सकैत छथि। संगमे ओ अपन प्रिलिम्सक एडमिट कार्डक स्कैन कएल कॉपी सेहो वेरीफिकेशन लेल पठाबथि। परीक्षामे सभ प्रश्नक उत्तर नहि देमय पड़ैत छैक मुदा जँ टेस्ट सीरीजमे विद्यार्थी सभ प्रश्नक उत्तर देताह तँ हुनका लेल श्रेयस्कर रहतन्हि। विदेहक सभ स्कीम जेकाँ ईहो पूर्णतः निःशुल्क अछि।- गजेन्द्र ठाकुर संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सर्विसेज (मुख्य) परीक्षा, २०२० मैथिली (ऐच्छिक) लेल टेस्ट सीरीज/ प्रश्न-पत्र- १ आ २ TEST SERIES-1 TEST SERIES-2 [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल/ FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI] NTA_UGC_NET_MAITHILI_01 NTA_UGC_NET_MAITHILI_02 NTA_UGC_NET_MAITHILI_03 (श्री शम्भु कुमार सिंह द्वारा संकलित) Videha e-Learning MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) UPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS BPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. (ऐच्छिक) मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. (अनिवार्य) मैथिली प्रश्नपत्र- बी.पी.एस.सी.(ऐच्छिक) मैथिलीक वर्तनी १ भाषापाक २ मैथिलीक वर्तनीमे पर्याप्त विविधता अछि। मुदा प्रश्नपत्र देखला उत्तर एकर वर्तनी इग्नू BMAF001 सँ प्रेरित बुझाइत अछि, से एकर एकरा एक उखड़ाहामे उनटा-पुनटा दियौ, ततबे धरि पर्याप्त अछि। यू.पी.एस.सी. क मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेल सेहो ई पर्याप्त अछि, से जे विद्यार्थी मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेने छथि से एकर एकटा आर फास्ट-रीडिंग दोसर-उखड़ाहामे करथि| IGNOU इग्नू BMAF-001 ........................................................................................................................ MAITHILI (OPTIONAL) TOPIC 1 [Place of Maithili in Indo-European Language Family/ Origin and development of Maithili language (Sanskrit, Prakrit, Avhatt, Maithili) भारोपीय भाषा परिवार मध्य मैथिलीक स्थान/ मैथिली भाषाक उद्भव ओ विकास (संस्कृत, प्राकृत, अवहट्ट, मैथिली)] TOPIC 2 (Criticism- Different Literary Forms in Modern Era/ test of critical ability of the candidates) TOPIC 3 (ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददास सिलेबसमे छथि आ रसमय कवि चतुर चतुरभुज विद्यापति कालीन कवि छथि। एतय समीक्षा शृंखलाक प्रारम्भ करबासँ पूर्व चारू गोटेक शब्दावली नव शब्दक पर्याय संग देल जा रहल अछि। नव आ पुरान शब्दावलीक ज्ञानसँ ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददासक प्रश्नोत्तरमे धार आओत, संगहि शब्दकोष बढ़लासँ खाँटी मैथिलीमे प्रश्नोत्तर लिखबामे धाख आस्ते-आस्ते खतम होयत, लेखनीमे प्रवाह आयत आ सुच्चा भावक अभिव्यक्ति भय सकत।) TOPIC 4 (बद्रीनाथ झा शब्दावली आ मिथिलाक कृषि-मत्स्य शब्दावली) TOPIC 5 (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोरिक गाथामे समाज ओ संस्कृति) TOPIC 6 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- विद्यापति) TOPIC 7 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- पद्य समीक्षा- बानगी) TOPIC 8 (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोक गाथा नृत्य नाटक संगीत) TOPIC 9 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- यात्री) TOPIC 10 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली रामायण) TOPIC 11 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली उपन्यास) TOPIC 12 (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- शब्द विचार) TOPIC 13 (तिरहुता लिपिक उद्भव ओ विकास) TOPIC 14 (आधुनिक नाटकमे चित्रित निर्धनताक समस्या- शम्भु कुमार सिंह)् TOPIC 15 (स्वातंत्र्योत्तर मैथिली कथामे सामाजिक समरसता- अरुण कुमार सिंह) TOPIC 16 (यू. पी.एस.सी. मैथिली प्रथम पत्रक परीक्षार्थी हेतु उपयोगी संकलन, मैथिलीक प्रमुख उपभाषाक क्षेत्र आ ओकर प्रमुख विशेषता, मैथिली साहित्यक आदिकाल, मैथिली साहित्यक काल-निर्धारण- शम्भु कुमार सिंह) TOPIC 17 (मैथिली आ दोसर पुबरिया भाषाक बीचमे सम्बन्ध (बांग्ला, असमिया आ ओड़िया) [यू.पी.एस.सी. सिलेबस, पत्र-१, भाग-“ए”, क्रम-५]) TOPIC 18 [मैथिली आ हिन्दी/ बांग्ला/ भोजपुरी/ मगही/ संथाली- बिहार लोक सेवा आयोग (बी.पी.एस.सी.) केर सिविल सेवा परीक्षाक मैथिली (ऐच्छिक) विषय लेल] ........................................................................................................................ GENERAL STUDIES (PRELIMINARY & MAINS) GS (Pre) TOPIC 1 GS (Mains) NCERT-ENVIRONMENT CLASS XI-XII NCERT PDF I-XII TN BOARD PDF I-XII ALL INDIA RADIO ENGLISH NEWS ALL INDIA RADIO NEWS ARCHIVE ALL INDIA RADIO TALKS AND CURRENT AFFAIRS RAJYA SABHA TV NEWS DISCUSSIONS SANSAD TV OTHER OPTIONALS IGNOU eGYANKOSH (अनुवर्तते) -गजेन्द्र ठाकुर २. गद्य २.१.डाॅ. किशन कारीगर- मिथिला मे बिलुप्त भेल जा रहल भांट/भैंट(घूमक्कर वाचक) २.२.मणिकांत ठाकुर- चिंता मामा २.३.ज्ञानवर्द्धन कंठ- अभिनव दधीचि २.४.आशीष अनचिन्हार- गजलक रखबार सूतल अछि २.५.मुन्नाजी- बीहनि कथाक विकास मे रचनाकारक योगदान २.६.संतोष कुमार राय 'बटोही'- मंगरौना (धारावाहिक उपन्यास)-पहिल खेप २.७.रबीन्द्र नारायण मिश्र- लजकोटर- ३१म खेप डाॅ. किशन कारीगर मिथिला मे बिलुप्त भेल जा रहल भांट/भैंट(घूमक्कर वाचक) अहूं कहब ग ने जे बलू कारीगर भैंट जेका किए बड़बड़ाइए हइ.? अहां सुनियौ ने जे ओइ बड़बड़ि मे कते काजक गप होइ छै आ लोक के रमनगरो लगै छै? भांट हमरा जनतबे बुढ़ पुरान के मुँहे सुनल जे हइ एना किए भैंट जेका बजैत रहै छैं. ताबे दोसर गोटे बाजल जे उ भैंट बजै की छै से सुनीयै ने? मिथिला मे भैंट सब गामे गाम घूमि के लोक सब लक मनोरंजनात्मक रूप मे बजै गबै छलै. जै मे गाम लोक के खिदहांस, बड़ाई, उकटा पैंची, छल कपट, बैमानी शैतानी, झगड़ा सलाह, आदि के वर्णन उ फकड़ा रूपे बाजि,कहि,गाबि के करैत रहै. भांटि के घूमक्कर वाचक सेहो कहि सकब. ओकर मुख्य काज रहै गामे गाम जाके लोक के दूरे दरब्बजे जा के वाचक लोक शैली मे मनोरंजन करब. आ लोक तेकरा बदला मे भैंट के धान चाउर, रूपैया, चीज बौस जेकरा जे जुड़ै से दै. अहि स भैंट के गुजर बसर होइत रहै. भैंट अपना वाचक प्रस्तुति मे समाजिक बेबस्था बैमानी शैतानी नीक बेजाए पर बेस कटाक्ष करै आ हंसि गाबि के तेना जे लोक के अनसोंहातो नै लगै.. भैंटक कहल फकड़ा… कारी मुँह मे उज्जर दांत देखलों उज्जर मुँह मे कारी दांत देखलों धन रहैतो खाइ लै औनी पथारी देखलों बाबूए सीरे खा बमफलाट छौंड़ा देखलो बुढ़बा के केकरो स पटरी खाइत ने देखलो बज्र कोढ़िया के दूरा सर कुटमार ने देखलो अपने मे लड़ै जाइए दियादी मिलान ने देखलों उनटे भैंटे के गरिअबैत फलां बाबू के देखलों सर समाज लै काज करैत चिंला बाबू के देखलों अनके भरोसे बैसल रहैए बाबूू के देखलौं साउस पुतौह के झगड़ा मे आगि लगाएब टोलबैया के देखलों झगड़ा भेल पंचैति काल पंच बाबू के नीपत्ता देखलों (इ फकड़ा सब बुढ़ पुरान क मुँहे सुनल.. जे कहांदिनु हमरो गाम मंगरौना मे (भरौड़ा) गोनू झा के गाम स भैंट सब अबै आ फकड़ा बचै इ सब कहै) फकड़ा स्पष्टीकरण भ रहल जे ओ भैंट सब समाजक सब स्वरूप के देखार चिनहार लोक शैली फकड़ा रूपे क के लोक के मनोरंजन करै. तकरा बाद लोक ओकरा जे जुरै से दै आ ओकर आजीविका चलै. पमरीया जेका भैंटो सबके गाम आ इलाका बांटल रहै आ सब अपना इलाका मे घूमी घूमी बिशुद्ध रूपे लोकक मनोरंजन करै. अपना मे मिलानी बाद भैंट सब एक दोसरा के इलाका मे सेहो जाइत रहै. आब भैंट किनसाइते कतौह देखबा मे अबै छै. जेना उ भैंट सब मिथिला स बिलुप्त भेल जा रहल. ओइ भैंट सब के फेर स ताकि ओकरा संरक्षित करबाक सीमूहिक प्रयास हेबाक चाही. अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। मणिकांत ठाकुर चिंता मामा चिंता मामा हुनक नाम नहि छलैन- हमही सभ से कहैत छलियनि।हमर पित्ती सभ आ गामक अंतरंग लोक सभ हुनका चिंता बाबू कहैत छलथिन मुदा नाम छलनि चिंतामणि मिश्र। हमरा मात्रिक में हमरे जकाँ ओहो पूर्वक भगिनमाने छलाह।सात भाई छलाह आ सभ भाई छ-फुट्टा जवान छलाह। रंग म्लान छलनि मुदा मोंछ स भड़क़दार लगैत छलाह। अधोवस्त्र नहि रहने बेशीकाल एकटा चद्दरिए ओढ़ने रहैत छलाह आ ताही परिवेश में हमरो गाम अबैत छलाह। परिवार निर्धन आ ज़मीन कम, तैं सभ एक्के संग रहथि, खेती-पथाड़ी सभ संगे करथि। आन भाई सभ द त नहि ज्ञात भेल कहियो मुदा चिंता मामा ज़रूर अपना बहीन अर्थात् हमरा माय आ धीयापूता अर्थात् हमरा लोकनि के कुशल मंगलक जिज्ञासा करए साल में दू-तीन बेर हमरा ओतए आबिए जाइत छलाह। अप्पन माम साल-दू साल पर अबैत छलाह मुदा चिंता मामा के अबाई अधिक नियमित छलनि। हुनका पर अतिथिक ऐतिहासिक परिभाषा बहुत किछु लागू होईत छल- “अतति निरंतरं गच्छति भ्रमति इति अतिथिः “ । हमरा ओहि ठाम स निवृत्त भ ओ अपना एकटा बहीन छलथिन लदारी गाम में - हुनके ओतए चलि जाइत रहथि। कहथि- जखन घर स निकलले छी त एक धाप ओहू ठाम जाए कुशल मंगल बुझिए आबी। हमरा घर में जे भनसिया छली से हुनका चलि गेला पर बहुत आफ़ियत अनुभव करैत छली जे एक कोहा अतिरिक्त भात आब नहि रान्हय पड़तनि। चिंतामामा कहिया औताह से अज्ञात रहितो हिनक़ा एबाक ख़बरि सहजे पूरा टोल में तुरंत पसरि जाइत छल। चिंता मामाक अबाई के सभ स पैघ आकर्षण रहैत छल हिनकर भोजनक प्रति स्नेह।भोजन काल में राति हो या दिन, कम स कम आठ-दास गोटा हुनका देखबा लेल त आबिए जाइत छलाह। ई सिलसिला चारि पाँच दिन चलिते छल।हिनक़ा आगू में सब स बड़का थारी में भरि क केवल भाते परसल जाइत छलनि सहो बिना सँठने किएक त शीघ्रे दोसर परिथन के प्रयोजन भ जाइत छलैक।ओ थारी लगभग हिनके एला पर बाहर होईत छल सुविधा ललेल। भातक हरेक परसन संग एक बट्टा क दालि, तकर तरकारी, चटनी आदि ज़रूर पडैत छलनि। तरकारी में अधिक काल सजमनि, क़दीमा, भाँटा बारीक सीम आदि बनैत छल। तरुआ, पापड़, दनौरी आदिक आवश्यकता नहि बुझल जाइत छलैक। ओ भोजन करए काल जल ग्रहण नहि करितथि कियेक त वैदजीक मनाही छलनि। लोको कहनि- औ सुअन्न खाऊ ने, पानि त घरो पर भेटत। एहि बात सभक अधलाह नहि मानैत छलाह- अवधारने छलाह।सज्जन लोक, धुआ-धाजाक हिसाबे बज़ैत कम छलाह। एक बेर चिंता मामा विदा होईत काल कहलनि- बौआ राति क जाड़ बहुत होईत अछि, से एकटा अंगा कि गंजी होईत त नीक। हमरा डर भेल जे हिनक़ा ने त हमर अंगे अँटतनि आ ने गंजीए देह पर चढ़ि सकतनि। देह हमरा स तिनगुन्ना।तखन निर्णय शीघ्र करबाक़ दबाव में हम कहल- मामा, अहां बरू हमर स्वेटरे ल लीअ। नमरि क आंशिको रूपे शरीर के ठंढा स सुरक्षा करत त हैत जे देह पर किछु सटल अछि। ओ तुरंते मानि गेलाह आ जखन आनि क देलियनि त पहिरियो लेलनि घीचि तीर क । छोट रहने कहुना आधा पेट पर आबि स्वेटर लटकि गेलनि। ओ ताहि स कनियों क्षुब्ध नहि भेला। हम तकरा बाद चरण-स्पर्श कैल आ ओ ख़ुशी ख़ुशी पच्छिम मुँह बिदा भेला। आहि रे बा, ओ चारियो डेग ने देने हेता कि पूब स झौं झौं करैत हमरा भाई के अलशीशियन कुकुर “बिजली”हुनका पर टूटल। ओ बाप-बाप करैत पड़ैलाह मुदा कुकुर छड़पि क हुनका लग तुरंत पहुँचि गेल। मामा पड़ा रहल छलाह आ कुकुर खेहारि रहल छल। लोक कुकुर के रोकबा लेल तरह तरह के आवाज़ क रहल छल मुदा बिजली लेखे किछु ने। आख़िर, हुनका घुट्टा धोती के पकड़ि क फाड़ि देलकनि। ओ दूनू हाथे कुकुर के प्रतिकार अथक प्रयास स हौ-हौ द्वारा करबा में व्यस्त छलाह आ ओमहर कुकुर छल जे मानए बला नहि। छाबा में हबकियए लेलकनि। कुकुर के पकडल गेल ताधरि देरी भ चुकल छल। तखन जल्दी स एकटा लालटेम आनि ओकरा मटिया तेल तेल के घाव पर भुभकाएल गेल। घाव के तेल स भिजा देल गेल जे बिक्ख नहि लगैन्ह। मामा आहत आ डेराएल घंटा भरि बिलमि कि आख़िर बिदा भ गेलाह। चारि पाँच मास गुदस्त भ गेल। बेचारी बिजली कुकुर एहि बीच शरीर छोडि देलक। हमर परिवार बहुत दिन धरि शोक-ग्रस्त रहल। ओ मनुक्ख जकाँ बात बुझैत छलि। गेंद पोखरि में फेकि देल जाइक आ जाड़काला क सर्द जलो में छड़पि क ओ बीच पोखरि स हेलि क गेंद आनि दैक आ मुँह दिश ताकि अगिला आदेशक प्रतीक्षा करैक। से बिजली हमरा सभ के छोडि क जा चुकल छल। ताही बीच चिंता मामा एक दिन समागत भेला। साँझ पड़बाक प्रतीक्षा ओ गामक बाहरे बैसि क कए लेने छलाह कुकुरक डsरे आ तखने चोरा नुका क कहुना दरबज्जा पर पाएर देलनि।अबिये हमरे स पूछि बैसलाह-बौआ कुकुर कहाँ अछि? हम उदास होईत कहल- बेचारी चलि गेल छोडि क हमरा सभ के। निश्चित करबा लेल पुनः पुछलनि- कहाँ गेल अछि? हम कहल- भगवान लग। की ने की बुझयलनि, तs फेर जिज्ञासा कैलनि- भगवानपुर में के छथि? हम ज़ोर स कहल- भगवानपुर नहि, भगवान ओतए।त बजलाह- की ओ कटही कुकुर मरि गेल? हम चुप्पे रहलहुँ। ओ तुरंत बजलाह- चलू नीक भेल, एहेन कुकुर केओ राखए ? मरि गेल, नीके भेल। मोन भेल जे कहियनि- अहीं ओकरा बदला मरि गेल रहितहुँ त नीक…। दरबजा पर पोखरि में महाजाल पड़ल छलैक। बहुतो फड़ीक रहु मांछ ऊपर भेल रहैक।संयोग जे चिंता मामा हमरे ओहिठाम छलाह आ वापस गाम जाइए बला छलाह। माए कहलथिन- भैया, दू टा रहु मांछक कुट्टी तरि क दैत छी एकटा चंगेरा में। कनी, हमरा भाई के घर पर आइए पहुँचा देबैक।हमरा भाई के मांछ नीक लगैत छनि। चिंता मामा सहर्ष स्वीकार क लेलथिन। अपनो भरि पेट मांछ भात खा क चंगेरा भरि तरल मांछक सनेश ल क बिदा भेला।समय बीति गेलैक। किछु मास पश्चात हमर मामा हमरा ओतए संयोग स पहुँचला। माय मांछक चर्चा केलथिन त मामा चुप।माए खरियारि कि फेर पुछलथिन त हुनक जवाब छलनि- नहि, हमरा सभ के त एकटा गैंचीओ ने भेटल, रहुक कोन कथा? तकरा बाद मामा चलि गेलाह। दसे दिन बाद संयोग स चिंता मामा पहुँचला।भोजन काल माए जिज्ञासा केलथिन- भैया, पछिला बेर थोडेक मांछ देने रही…। एतबा सुनब छल कि चिंता मामा भयातुर चेहरा बनबैत बजलाह- बच्चा, पूछू नहि। हमर त जाने बांचि गेल। बुझू जे अपटी खेत में प्राण चलि गेल छल। मांछक सुगंध पर कहाँ ने कहाँ स एकटा साँढ़ पहुंचि गेल। हमरा चारु नाल पटकि क सभटा तरल मांछ खा गेल। हम कहुना चंगेरा ओकरे लग छोडि लंक लगा क भगलहुँ जे जान बांचल।एहन साँढ़ नहि देखल बच्चा। हमर माए की बजितथि? कहलथिन- ओ ज़रूर पूर्व-जन्मक कुकुर रहल हैत…। फेर एकर चर्चा कहियो ने भेल। सनेस पठेबाक सिलसिला सहो बंद भ गेल। एक बेरक खिस्सा अछि, एकटा हिनकर पड़ोसी अपना भीजल खेत में बूट छीटए चाहैत छलाह। मुदा कातिक मास रहने, जन-बनिहारक बेशी कमी छलैक आ बेरो बीतल जा रहल छलैक। चिंता मामा सभ के संयोग स पता चललनि त अपना भैयारी में सलाह कए बेरिए में खेतबला ओतए पहुँचलाह। कहलथिन जे ई सभ बूट के टोभक प्रबंध क लेता आ खेत बला चिंता नहि करथि। 5 कट्ठा के कोला छलैक, मुदा बियाक जोगार भ गेलैन। बेशी घरे में रहनि मुदा किछु फरीक स पैंच ल क खेत पर जा, कोला भरि बूट छींटि एला। छलनि जे राति भरि में बूट फूलि जेतैक त भोरे पाँचो भाई जा क ओकरा टोभि लेब। खा पिबि क सभ भाई घूर लग बैसि गपशप कए रहल छलाह। ततबे में खेत बला ओतए धमकलाह आ ओसा क एक्केठाम कहि देलखिन - सुनू, बटाई के मादे हमर बिचार बदलि गेल अछि। खेत हम सभ अपने करब, बिया आ जनक प्रबंध सहो भ गेल अछि।मामा कहलथिन- हौ, हम सभ त जा क बीयो छीटि देल, आब ई कोन तमाशा करैत छह? वाद-विवाद भेल, मुदा खेत बला किन्नहु ने मानलक। कहलकनि- हम सवाई लगा क बिया काल्हि द देब, मुदा हमर अपने जन भोरे जा क टोभत बूट। ई बाजि क खेत बला चल जाइत रहलाह।मामा लोकनि विचारए लगलाह- झगड़ा झाँटी आब व्यर्थ। एना करी जे भोरे हुनकर जन तावत् पहुँचत, ताहि स पहिने हमहि सभ भाई आरि पर पहुँचि जाई आ बाओग भेल बूट के खेत में स बीछब शुरू कए दी।बूट फूलल रहतैक त की, घर आनि, धो-पका क जलखै क लेब। सैह भेल। जाधरि खेत बला जन ल क खेत पर पहुँछथि, मामा पाँचो भाई आधा स बेशी खेतक बूट बीछि चुकल छलाह। एहन कहियो ने सुनल ने देखल गेल छल। खेत बला आ पाँचो जन के त जेना अठबज्जर मारि देलकनि ओ दृश्य देखि क। मुदा आब कैए की सकैत छलाह? एमहर मामा सभ घर पहुँचलाह आ ओमहर खेतबला चिकरैत-भोकरैत गाम में पैसला। लोको सुनैक त आश्चर्ये करैक। मामा कहलखिन- औ पंच लोकनि, ई कनी टा बात नहि, खेत द क आ बूट छिटबा क तखन बात बदलि गेलाह। एहन कतहुँ लोक कएलक अछि? चलू, बूट त एक तरहें व्यर्थ नहि भेल मुदा हुनको अढ़ाएल जन के हर्ज क देला स हमरा सभ के ख़ुशी अछि। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ज्ञानवर्द्धन कंठ अभिनव दधीचि अप्रैल,2021।इंदिरा गाँधी अस्पताल,नागपुर।आनल जाइत छथि एकटा पचासी सालक वयोवृद्ध।नाम छियनि नारायण दाभलकर।ऑक्सीजन-लेभेल भ' गेल छनि बहुत डाउन।लगैए,गछारने छनि कोरोना।बड्ड दिक्कम-सिक्कम छैक बेडक।बेड कम, रोगी बेसी।बेडक लेल अछरा-पछरी चलि रहल छैक।एत्तहि नहि, सभतरि।सगर देशमे यैह हालति छैक।कोनहुना जोगार लागि जाइत छैक, वयोवृद्धक लेल एकटा बेडक।राहत भेटैत छनि। दू घंटाक अभ्यंतर कोनो महिलाक कातर स्वर कर्णगत होइत छैक।ओकरो चाही अपन पतिक लेल एकटा बेड।कोनो भाइ-बहिन दया क' देथुन।सिउथक सिन्नूर बचा देथुन।प्राण आब-तब भेल छनि।साँस उपरे-उपर भेल छनि।गे मैया गे मैया!हा विधाता! नारायण सुनि लैत छथिन।दाभलकर अपन बेडसँ नीचाँ उतरैत छथि।सिस्टर दौड़ैत छनि- "हाँ-हाँ, अहाँ किएक बेडसँ नीचाँ उतरलहुँ?केमहर विदा भेलहुँ?बाथरूम जेबैक?नहि?घर आपस जेबैक?माथा खराप भ' गेल अछि?एहि हालतिमे?नहि-नहि।किन्नहुँ नहि..." डाक्टर लोकनिक मत छनि जे एहन हालतिमे जोखिम लेनाइ उचित नहि।नारायण जिद्द ध' लैत छथिन- "हम पचासी बरखक छी।अपन जिनगी जी चुकल छी।ओहि महिलाक पतिक बयस चालीससँ बेसी नहि हेतनि।छोट-छोट धीया-पुता हेतनि।हुनकर जिनगी जियान नहि हेबाक चाही।हम अपन बेड हुनका लेल रिक्त कर' चाहैत छी।" अस्पताल-प्रबंधन बुझेलकनि जे एहन कोनो नियम नहि छैक जे रिक्त बेड हुनके भेटनि,मुदा नारायण नहि-के-नहिये मानलथिन।बेटीक बात सेहो बेठीक लगलनि।घर आपस भ' गेलथिन।ओहि व्यक्तिकेँ बेड द' देल गेलैक।तेसर दिन दाभलकरक उर्ध्व-साँस चल' लगलनि।किछुए कालक बाद कालक कोरमे चलि गेलाह ओ अभिनव दधीचि। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। आशीष अनचिन्हार गजलक रखबार सूतल अछि 1 मैथिलक बड़ हितैषी बनल मैथिलीक सोधनिहार छथि 2 उपरक दू पाँति बैकुंठ झा रचित छनि। बैकुंठ झा मूलतः लघुकथाकार छथि। मुदा हुनका लघुकथा लिखबाक जरूरते किए पड़लनि जखन कि मैथिलीमे कथा नामक विधा छलैहे। आब बैकुंठजी हमरा बहुत रास बात कहता (मने कथा ओ लघुकथाक संदर्भमे), बहुत रास अंतर देखेताह। मुदा बैकुंठजी ई बात ई अंतर तखन बिसरि जाइत छथि जखन कि ओ गजल विधामे प्रवेश करै छथि आ गीत-ओ कविताक उपर गजलक लेबल लगा लै छथि। जतबे अंतर कथा आ लघुकथामे भऽ सकैए ततबे अंतर गीत-कविता ओ गजलमे छै। जँ लघुकथाक नियम छै तँ गजलक नियम सेहो छै मुदा बैकुंठजी लघुकथा बेरमे तर्क देता मुदा गजल बेरमे कुतर्क से हमरा विश्वास अछि। 3 "रखबार" नामसँ एकटा कथित गजल संग्रहक आएल अछि जकर लेखक बैकुंठ झा छथि। एहि पोथीक समर्पण एवं भूमिका दूनू पद्येमे अछि जे की नीक लगैत अछि। समपर्णसँ ई पता लगैए जे मैथिलीपुत्र प्रदीपजी पहिल संसर्ग बैकुंठजीकेँ भेटलनि आ भूमिकासँ ई पता चलैए जे बैकुंठजी भ्रम आ पूर्वाग्रह दूनूमे फँसल छथि आ हुनकर रचना सभमे व्याकरणिक स्थिति छनि से हुनको नै पता छनि। चारि पाँति देखल जाए-- "..मात्राक खाँच-साँचमे कसल-फँसल नहि होय गजल अछि से संभव शिरोधार्य सब समालोचना करब ग्रहण अथवा बुझना जाय गजल यदि छंद वितानमे खुटेसल ओहो नहि सायास भेल अछि सहजहिं भेलय शब्दांकन.." एहि केर बाद आरो-आरो तर्क (??) सभ पद्येमे देल गेल अछि। 4 अतेक तँ निश्चित जे बैकुंठजीकेँ गजलक व्याकरण पता नै छनि (अथवा ओ पूर्वाग्रहक कारणे जानए नै चाहै छथि अथवा डर छनि जे सही चीज मानि लेलासँ हुनकर पचासो बर्खक तपस्या खंडित भऽ जेतनि) मुदा जे लोक मात्रिक छंदक अभ्यास केने छथि हुनकर रचना गजलमे बहरे मीरक नजदीक जा सकैए। हम मात्र नजदीक कहि रहल छी पूरा नै। आ हम बैकुंठजीकेँ जतेक जानै छियनि ताहिमे ओ मात्रिक छंदक नीक अभ्यासी छथि। तँइ हुनकर रचना सभमे मात्राक अंतर कम्मे छनि मुदा तैयो मूल अंतर संयुक्ताक्षर एवं चंद्रबिंदु बला अक्षर सभ छै। जाहि कारणसँ प्राचीन मैथिलीमे संयुक्ताक्षर बला नियम हटाएल गेल रहै तकरा
सभ बिसरि गेल छथि आ धड़ल्लेसँ संस्कृतक शब्द प्रयोग कऽ रहल छथि। एहन स्थितिमे अहाँ कि हम लाठी हाथे संयुक्ताक्षर बला नियम मानू वा कि नै मानु मुदा उच्चारणमे, आवृतमे ओ नियम अपने आबि जाइत छै। ओहिपर केकरो वश नै छनि। तँइ हम सभ संयुक्ताक्षर बला नियम मानि रहल छी आ जे भाषाक जानकार हेता आ जिनका रचना संग भाषोक संरक्षण करबाक हेतनि से एहि नियमकेँ मानताह। चंद्रबिंदु बला प्रसंगमे मैथिलीमे अराजकता पसरल अछि। पं.दीनबंधु झाजी (मिथिला भाषा विद्योतनमे) चंद्रबिंदुयुक्त अक्षरकेँ दीर्घ मानै छथि जे कि चलि पड़ल मुदा पं. गोविन्द झा “मैथिली परिचायिका” केर पृष्ठ 20पर लिखै छथि जे “अनुस्वार भारी होइत अछि आ चंद्रबिंदु भारहीन” तकरा जनबाक बेगरता मैथिलीक विद्वान सभकेँ नै बुझेलनि। चंद्रबिंदु भारहीन मने लघु होइत छै। ई तथ्य जानब उचित हेतनि बैकुंठ जी लेल। तँइ हम ई कहि सकैत छी जे बैकुंठजीक रचना सभ बहरे मीरक संरचनामे होइत-होइत रहि गेल अछि आ स्पष्ट ओ गजल नै अछि। एहन स्थितिमे आब हम रचनामे भाव ओ वैचारिकत देखब। रचनापर बात करैत काल हम बेसी उदाहरण नै देब। पाठक पोथी कीनथि आ ओहि उदाहरण सभकेँ पढ़थि आ जानथि से हमर उद्येश्य अछि। 5 एहि पोथीक पहिल रचना भक्तिपरक अछि आ ई कोनो खराप बात नै छै। प्रगतिशीलता केर माने बहुत किछु होइत छै। मात्र परंपराकेँ छोड़ए बलाकेँ प्रगतिशील नै मानल जा सकैए। आ ठीक इएह बात बैकुंठजी अपन तेसर रचनामे देने छथि। अहिंसक बंसी विरल प्रतीक अछि एकर स्वागत हेबाक चाही। तेनाहिते साँपक जासूस मूस ईहो विरल प्रतीक अछि। हिनकर वैचारिकतामे विरोधाभास सेहो छनि। उदाहरण लेल दू रचनाक दू-दू पाँति देखू-- अगर उठौलक कियो सवाल भौं-भौं-खौं जवाबमे भेल फेर आन दोसर रचनामे कहै छथि- ढेप फेकि गाड़ल झंडापर तों नहि नमहर भ जएबें मान तहन बढ़तौ ओहू सँ झंडा ऊँच गाड़ पहिने स्पष्ट भऽ गेल हएत जे हमर इशारा किम्हर अछि। 6 मैथिलीमे जे गजलक व्याकरणकेँ नै मानै छथि ताहि लिस्टमेसँ किछु एहन नाम छथि जिनका गजलपर एबामे बेसी मेहनति नै करए पड़तनि। जेना सुधांशु शेखर चौधरी, नरेन्द्र, बाबा बैद्यनाथ, अरविन्द ठाकुर आब एहि लिस्टमे बैकुंठ झा सेहो छथि। सुधांशु शेखर चौधरी बहुत पहिने एहि संसारसँ चलि गेलाह तँइ ओहिपर बात नै हो। नरेन्द्रजी पूर्वाग्रहमे छथि तँइ ओ आगू नै जा सकताह। बाबा बैद्यनाथजीक गजल संग्रह आलोचना हम 2013 मे केने रही। ओ आहत भेल रहथि आ हमर बातक पुष्टि लेल ओ हिंदी गजलकार सभ लग गेल रहथि। जखन ओत्तहु पता लगलनि जे बिना बहर-काफियाक गजल नै होइत छै तखन ओ बहरक अभ्यास केलाह आ हिंदीमे लगभग सात-आठ टा गजल संग्रह प्रकाशितो भेलनि। मुदा दुर्भाग्य मैथिलीक जे
ओ ओतेक मात्रामे मैथिली गजल सिखलाक बाद नै लिखलाह। अरविन्द ठाकुर साफे कहै छथि जे अइ उम्रमे सीखब पार नै लागत। कुल मिला कऽ भाव केर हिसाबसँ देखल जाए तँ निश्चिते ई पोथी पाठककेँ पढ़बाक चाही। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। मुन्नाजी बीहनि कथाक विकास मे रचनाकारक योगदान खगता सृजनक आधार होइछ।तकरे पूर्ति लेल गद्यक विकास क्रममें जुड़ल बीहनि कथा।सब पीढ़ीक नवका पीढ़ी,नव खगता पूर्ति लेल नव विचार ल' सोझां अबैए। कथा विकासक क्रममें उपन्यास( Novel) आ लघु कथा(कथा/ गल्प, Short stories)क पछाति अपन भाषा साहित्यमें कथाक परिष्कृत आ आधुनिक रूपमें एकटा स्वतंत्र विधाक खगता भेल।जकर खोराक थिक बीहनि कथा। बीसम सदीक अन्तिम दशकमें तत्कालीन नवका पीढ़ी कान्ह उठेलनि ।संग एलाह साहित्यक अग्रज पीढ़ीक किछु अभिभावकीय दायित्व बला रचनाकार।ऐ तरहक अवधारणाक परिकल्पना जुलाई 1991मे पैटघाट मे भेल कथा गोष्ठी सं प्रेरित भ' सोझां आयल।एकरा मौखिक सहमति आ कि बल देलनि- डा. धीरेन्द्र आ जीवकान्तजी।करीब तीन चारि बरिख धरि ऐ पर विमर्ष/ घमर्थन चलैत रहल। पछाति 05मार्च 1995कें सहयात्री मंच लोहना( मधुबनी)क सामुहिक बैसारमें सर्वसम्मति सं स्वतंत्र विधाक मूर्त रूपमें सोझां आयल -' बीहनि कथा ' आ ओइ चारि वर्षक बीच भेल घोंघाउज सं निष्कर्षत: जे नाम निश्तुकी भेल ओ नामकरण कर्ता भेलाह श्रीराज 05मार्च 1995कें सर्वसम्मति सं ऐ नव विधाक जे शुरुआत भेल ताहिमें उपस्थित छलाह- श्रीराज, शैलेन्द्र आनन्द, डा.बी.के लाल,ललन प्रसाद,अमल झा ,मुन्नाजी, कुमार राहुल,विजयानन्द हीरा, सच्चिदानन्द सच्चू,करणजी,अखिलेश्वर झा,अतुलेश्वर झा ।एहि निर्णयक पछाति ऐ दिशामें जे पहिल काज भेल से छल-12मार्च1995कें मुन्नाजीक बीहनि कथा " नामर्द "केर पाठ आ विमर्ष संगहि ऐ विधाक भावी प्रारूप पर चर्चा।जाहि आयोजनक संयोजक वा कर्ता धर्ता रहथि श्री शैलेन्द्र आनन्द।एकरा एक डेग आओर आगू बढ़बैत 20मार्च 1995कें हटाढ़-रूपौली, झंझारपुर (मधुबनी) में भेल पहिल ' बीहनि कथा गोष्ठी' जकर संयोजनक श्रेय ऐछ तत्कालीन नवतुरिया रचनाकार मलयनाथ मिश्र,' मण्डन' जीकें। आब अग्रज सं अनुज धरि उत्साहित भ' बीहनि कथा लिख' लगलाह।प्रारम्भमें हिन्दीक चिलका लघुकथा आ बीहनि कथा मे नामहिक अन्तर छल।ओइ तथाकथित लघुकथा सं बीहनि कथा के फुटेबा वा स्वतंत्र अस्तित्वमे एबा में करीब डेढ़ दशक संघर्षरत रह' पड़ल। 1995सं किछु रचनाकार बीहनि कथाक लेखन आ कथा गोष्ठी मे निरन्तर पाठ करब शुरू केलनि।एहेन रचनाकार में प्रमुख छलाह-मुन्नाजी, विजयानन्द हीरा, कुमार राहुल,मलयनाथ मिश्र, सचिदानंद सच्चू...आदि।इ स्थिति करीब 2000धरि यथावत रहल।तकर पछाति भहरव /भसड़ब शुरू भेल।किएक त' गोटा गोटी इ रचनाकार सब जत' तत' छिड़िया गेलाह।कियो अग्रिम शिक्षा लेल त' कियो रोजगारक खगता पूर करबा लेल।2000इ.सं2009धरिक सांच कहब त' हंसी लागत।एकरा हास्यास्पदक संज्ञा द' सकै छी।सांच इ जे श्रीराजक अतिरिक्त एकरा उघि आगू ल' जाइ बला मे मुन्नाजी एकसरूआ बांचल छलाह।एहि एक दशकक खालीपन में 2003में श्रीराजक पहिल बीहनि कथा ,बीहनि कथा नामे छपल। जकरा जनकपुर,नेपाल सं प्रकाशित मैथिली साप्ताहिक " गाम-घर " मे प्रकाशित करबाक श्रेय एकर संपादक श्री रामभरोस कापड़ि भ्रमरकें जाइत छनि। एहि तरहें श्रीराजक 'वात्सल्य ' भेल पहिल प्रकाशित बीहनि कथा(2003) एहि बीच किछु आओर रचना आ आलेख छपल त' मुदा संपादकक अज्ञानता ,पुर्वाग्रह वा हठधर्मिताक कारणे उधारक, तथाकथित विधा लघुकथा नामे यथा-' नवतुरिया, कानपुर,मिथिलांचल संपर्क,दरभंगा,पल्लव नेपाल.. आदि। जुलाइ- 2010में डा.योगानन्द झाजीक संयोजन में कबिलपुर(दरभंगा) में भेल कथा गोष्ठी में उपस्थित छलाह मैथिली नवजागरणक अग्रदूत श्री गजेन्द्र ठाकुर।हमर बीहनि कथा पाठ पर हुनक प्रतिक्रिया छल-" बीहनि कथा, मैथिली कथा साहित्यक परिमार्जित,निश्शन आ समयानुकूल अवधारणा ऐछ!"एकरा सबलता देलक।तकर पछाति गजेन्द्र ठाकुरक संपादन मे प्रकाशित मैथिली इ पाक्षिक विदेहक( अंक 62,अगस्त2010)मे बीहनि कथा नामे छपल मुन्नाजीक रचना " निपुतराहा।( जे आब कथा रूपमें सेहो आबि गेल ऐछ)खूब चर्चित रहल।तकर पछाति विदेहक माध्यमे बीहनि कथा लेखक एकटा हुजुम ठाढ़ भेल।जाहि मे वर्तमान मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ साहित्यकार श्री जगदीश प्रसाद मण्डलक योगदान अविस्मरणीय ऐछ।हुनक अतिरिक्त शेफालिका वर्मा,रविभूषण पाठक,उमेश मण्डल,बेचन ठाकुर, विनित उत्पल, रामविलास साहु,जगदानन्द झा मनु,कपलेश्वर राउत,अमित मिश्रा,संदीप साफी, आशीष अन्चिन्हार,डा.भवनाथ झा,जवाहर लाल कश्यप,मुन्नी कामत,चन्दन झा,बिन्देश्वर ठाकुर,ओम प्रकाश झा,मनोज कुमार मण्डल.....आदि रचनाकार बीहनि कथा विधा मे अपन उपस्थिति बनौने रहलाह।जाहि सं इ विधा सबल होइत रहल। बीहनि कथा मे सक्रिय सब रचनाकारक निरन्तर लेखनीक परिणाममे संग्रह सब आबय लागल।ऐ विधाक पहिल संग्रह देनिहार लेखक छथि-श्री जगदीश प्रसाद मण्डल।हिनकर ' तरेगण ' नामे अक्तुबर 2010मे बहरएल पहिल बीहनि कथा संग्रह।एखन धरि एकर तीन संशोधित संस्करण बहरा चुकल ऐछ।हिनक दोसर बीहनि कथा संग्रह छनि- " बजन्ता - बुझन्ता "(2013)तकर पछाति ऐ विधाक कतेको एकल संग्रह बहरएल।यथा- प्रतीक - मुन्ना जी,(2012), कपलेश्वर राउत,,संदीप साफी,राम विलास साहु(2013,).....आदि 2011मे ऐ विधाक एकटा महत्त्वपूर्ण उपलब्धि छल मुन्नाजीक एकल बीहनि कथाक पोस्टर प्रदर्शनी।जे आदरणीय कथाकार अशोक आ कमलमोहन चुन्नूजीक संयोजनमें भेल कथा गोष्ठी(पटना) में लगाओल गेल छल।जकर उद्घाटन वरिष्ठ कथाकार आदरणीय प्रदीप बिहारी आ श्रेष्ठ आलोचक,संपादक आदरणीय रमानन्द झा 'रमण' द्वारा कएल गेल छल। बीहनि कथाक दू टा महत्त्वपूर्ण कथाकारक पदार्पण 2014मे भेल। पहिल-आठम दशकक चर्चित आ वरिष्ठ कथाकार आदरणीय घनश्याम घनेरो,दोसर-नवतुरिया रचनाकार श्री विद्याचन्द्र झा बम-बम जीक। घनश्यामजी अपन चोखगर कलम आ फरिछएल विचारें जन जन मे बीहनि कथाक प्रति जिज्ञासा जगौलनि। आ लोकक ठोढ़ पर बीहनि कथा शब्द साटि सन देलनि।तकरे फलस्वरूप एलनि पहिल बीहनि कथा संग्रह-" उपरान्त "(2016) बम-बमजी अपन समतुरियाक अनेको अवरोध/बाधा सहि आत्मविश्वासक संग आगां बढ़ैत ऐ सात बरखमें करीब चारि सए सं बेशी रचना ऐ विधाक केलनि।जाहि में करीब 200 वा बेसी प्रेम परक रचना छनि।तीन गोट पोथी प्रकाशनक बाट जोहै छनि। 2015ई.,मिसिदा आ कल्पना झा दुनू प्रबुद्ध रचनाकारक प्रवेश ऐ विधा में भेल।दुनू गोटे कतेको बाधक तत्व( लेखक) द्वारा बहटारल जेबाक पछातियो ऐ विधाक विकास मे अविस्मरणीय योगदान देलनि।मिसिदा,ऐ विधाक प्रत्येक रचना पर गहींर आ गम्भीर नजरिये पड़ताल करैत निछरल / निश्शन बनौलनि।कल्पनाजी,अपन फरिछएल आ निश्शन उपस्थिति दैत कतेको लेखिकाकें निर्देशित करैत सोझां अनलनि।हिनक बीहनि कथाक एकल सङोर सेहो अबैया छनि। इ वर्ष (2015) बीहनि कथा लेल ग्रह सं ग्रसित सन छल।जे वृहस्पति वा शनि बनि ठाढ़ छलाह स्वघोषित विद्वान कहेबाक भ्रम सं ग्रसित अग्रज कथाकार।हुनकर विक्षिप्तावस्था सं प्रभावित भ' कतेको रचनाकार बीहनि कथा सं स्वयंकें विलगा लेलनि।इ स्वघोषित विद्वान बीहनि कथाकें रोकबा लेल एकटा हिन्दी पत्रकारक आत्म संस्मरण( छात्र जीवनक प्रसंग)कें नकल करबा आ करेबा लेल अगिया बेताल भ' गेला।मुदा ओ कर्म (जाहिमें कु उपसर्ग लागल छल )के फल धुंआ- धुंआ भ' उड़ि गेल। आ ओ विद्वान आ हुनकर कृत्रिम अनुयायी सब प्रसन्न जे- " नै उठलह त' भारी लगलह ने " एहेन कुवृति सं प्रभावित भेलीह कोसिकन्हाक आंखिगर युवा लेखिका जे बीहनि कथा त' दुर जे साहित्यें सं दुर भ' गेलीह।आब इ विधा अपन रंगत पकड़ि लेने छल।चारु भ'र सबतुरिया लेखक ऐ विधा में तल्लीन भ' गेलाह।जे निस्वार्थ लेखन करथि से अटल आ डटल छथि।जिनका लाभक लोभ रहनि ओ द्वन्द में पड़ि आइयो ओझरएल छथि।ने घरकें ने घाटकें सन भेल बुझू। 2016मे नव प्रवेशी भेलाह-राजीव कर्ण,महाकान्त कामत,नीरज कर्ण,इन्द्रकान्त लाल, अरूण कुमार लाल हिनका सबहक प्रयास सं इ विधा आओर आगां बढ़ल। 2019मे मैथिली-भोजपुरी अकादमी, दिल्ली द्वारा आयोजित " अखिल भारतीय बीहनि कथा सम्मेलन" रचनाकारक दृष्टि फरीछ आ नव बाट पर चलबाक श्रेष्ठ साधनक रूपें सहयोगी भेल।ऐ आयोजनक पछाति ऐ विधाक रचना सृजनक उत्सुकतावश रचनाकारक एकटा हुजुम ठाढ़ भेल।एकर सब पक्षकें अकानैत डा.आभा झा,सोनी नीलू झा, धर्मवीर कुमार,सबिता झा सोनी,अमरेश चौधरी,सान्त्वना मिश्रा,डा.प्रमोद कुमार,मिन्नी मिश्र,डा.रॉबिन खान,पूनम झा,डा.कैलाश कुमार मिश्र,मोहन झा गगन,राम कुमार मिश्र, अमरकांत लाल, प्रभाष अकिंचन, विनीता ठाकुर,ज्ञानवर्द्धन कंठ,वीरेन्द्र झा,....आदि रचनाकार जुड़िकें/ जुटिकें एकर तत्कालीन स्थिति आ अस्तित्वकें आओर निश्शन ,फरीछ आ सुरेबगर बना आगूक बाट प्रशस्त केलनि।आब विश्व भरिमें पसरल मैथिल रचनाकार जन द्वारा सृजित आ चर्चित भ' रहल ऐछ। 2020 वैश्विक संकट सं दबल लोक घरे में बन्न रहि समय कटबा पर बाध्य छल।ओइ समयक उपयोग करैत ऐ विधाक रचना आ सृजनकर्ता दुनूक श्री वृद्धि एकरा आओर भरल-पुरल बनेलक। आनो विधाक सृजन आसान नै,मुदा विनाशक कोनो बन्हन नै रहला सं लिखबा में तर'दुत नै। बीहनि कथा में शब्द सीमा निर्धारित रहला सं एकर सृजन कने बेसी दुरूह। एको टा अतिरिक्त शब्द भात में आंकड़ सन।तें ऐ विधा में उएह ठठै,बढ़ै छथि जे अपनाकें परिश्रम बलें एकर विधानक योग्य स्वयं के सधबा में सक्षम होइ छथि।दोसर महत्त्वपूर्ण बात जे ऐ विधा लेल मंच पर स्वतंत्र रूपें एखन जगह खतियाओल नै छै।जाहि सं मंच,माला,माइक,धोती,तौनी,लिफाफ सनक लाभक लोभ निर्लोभ में परिवर्तित।जाहि कारणे इ विधा एखन निश्शन भ' उच्च मानकताक संग आगू बढ़ि रहल।ओना आगू दसगरदा भेने इहो ओहोन रोग सं ग्रसित भ' जएत से असंभव नै। 2020 ,घरे मे रहू।के आह्वान बीहनि कथा विधा लेल सकारात्मक रहल।ऐ बीच नव आंखि-पांखि बला रचनाकारक प्रवेश भेल जेना कि-अभिलाषा मिश्रआकांक्षा,रूचि स्मृति,सुभाष कामत,गुफरान जिलानी,कंचन कंठ,कुंदन कर्ण,चन्दना दत्त,प्रियंवदा तारा झा,अनिता मिश्र,इरा मल्लिक,कल्पना झा पटना,कल्पना झा बोकारो। कुल मिला क' कुशल / साधल रचनाकारों संग नव सिखुआ रचनाकारक उपस्थिति आ रचनात्मक सक्रियता सुखद भविष्यक संकेत ऐछ।ऐ बीच मोकामक बाटकें आओर सघन सबल बनेबा में दि जिनकर उल्लेखनीय योगदान रहलनि ओ दू टा प्रमुख नाम ऐछ- डा. आभा झा, दिल्ली आ डा.प्रमोद कुमार, पांडिचेरी।जकर बानगी ऐछ 2020ई.क अन्तमें आयल डा.आभा झाजीक बीहनि कथा संग्रह-" सिनेहक दाम आ डा.प्रमोदजीक " कनकिरबा" बीहनि कथाक बढ़ैत डेग आ विकास वा पसारक क्रमकें किछु निश्शन संपादक,लेखक,आलोचकक उपस्थिति सुखद ऐछ! आदरणीय डा. रमानन्द झा रमण,आ उदयचन्द्र झा विनोदजीक समीक्षकीय विचार आ आदरणीय सतीरमण झा,रेवती रमण झा एवं डा. नारायणजीक प्रायोगिक रूपें ऐ विधामे उपस्थिति ऐ विधा,रचना आ रचनाकार सबकें सबलता देबा में अग्रसर भेल।बीहनि कथा विधाकें स्थापनामें प्रत्यक्ष/परोक्ष रूपें सहयोगी सब रचनाकारक कें शुभकामना! ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। संतोष कुमार राय 'बटोही' मंगरौना (धारावाहिक उपन्यास) पहिल खेप इ मंगरौना गाम छियैय। अमात जातिक राजधानी कहल जाएत छै। इ गाम राजनीति, सांस्कृतिक, धार्मिक, सामाजिक आओर आर्थिक रूप सँ ठीक-ठाक कहल जा सकैत अछि। इ गाम दरिभंगा राज्य केँ समय मे बसौल गेल छल। वर्तमान दरिभंगा जिला के भरौड़ा गाम के आसपास सँ आबि कs पाँच भाई (पाँच पांडव) उपजाऊ क्षेत्र देखि कs अइ जगह बसि गेलाह। वो पाँच भाई छलाह- ऋषि खवास, हुलास खवास, तारा खवास, भंजन खवास आओर भिक्षुक खवास। हिनकर पिताजीक नाम की छलन्हि से अज्ञात अछि। सुनवा मे आबि रहल अछि जे इ पाँचों भाई दरिभंगा राजा के ओहिठाम खवासी करैत छलाह। ऐतिहासिक आओर सामाजिक दृष्टि सँ ' ख़वास' शब्द विशेष अर्थ रखैत छै। परञ्च 'ख़वास' शब्द अखुनका समय मे निगेटीव अर्थ मे लेल जाएत छै। ख़वास यानी सेवा करै वाला दास। 'ख़वास' खास शब्दक विकृत रूप अछि। खास माने विशेष होएत छै। ख़वास लोकनि राजा केँ खासमखास ख़िदमतगार लोकनि होएत छल । जिनकर काज छलन्हि- राजा के ख़िदमत करनै यानी अंगरक्षा करनै। ऐतिहासिक दृष्टि सँ ख़वास राजा केँ सबस निकट रहै वाला लोकनि छलाह । अइ सँ जाहिर अछि जे सामाजिक रूप सँ ख़वास उच्च मानल जाएत छल। युद्ध कौशल मे निपुण रहला केँ कारने इ पाँचों भाई राजाक खास छलाह। राजाक समीपताक कारने इ क्षत्रिय छलाह अइ गप्प सँ हम मुँह नहि मोरि सकैत छी। कहल जाएत छै जे इ जगह दरिभंगा राजा युद्ध मे सहयोग के एवज मे पाँचों भाई के दान देने रहथिन्ह। वरगद गाछ के समीप अपन पहिल निवास बनौलथि पाँचों भाई। वरगद गाछ अखनो धरि छेबे करै। ओइ गाछ के आसपासक क्षेत्र फुलवारी कहल जाएत अछि। फुलवारी मे फूल तs हम नहि देखैत छियैय। पहिनहौं फुलवारी मे फूल नहि छेलै। अंग्रेजी शासन काल मे मंगरौना दरिभंगा राज्यक अंग छेलै। झंझारपुर थाना छेलै। झंझारपुर पुरना बाजारक हाट व्यवसायक केन्द्र छल। धानक खेती बेसि होएत छेलै।लोक गेहूँ कम उपजाबैत छलाह। मरुआ , तेबखा, राहैर, बदाम वगैरह खूब उपजै छेलै। सरसोंं के खेती खूब होएत छेलै। वो पाँचों भाई अपना संगे लौवा आओर चमार के बसौलन्हि। तेली सहो बाद मे बैस गेल। एकटा घर यादव आओर एकटा घर केवट केँँ छन्हि। अंग्रेजी शासन काल आओर देशक आजादी के बाद 1960 धरि गाम गृहयुद्ध मे फँसल रहल। 1957-58 के दरमियान लक्ष्मीनारायण राय जी केँँ हत्या केँ बाद गाम मे किछु साल तक अशान्ति रहल। फेर किछु सालक बाद गाम शांत तs भ गेल, परञ्च गाम दुटा खेमा मे बँटले रहल। भिक्षुक खवास के बेटा नहि भेलन्हि। हुनका बेटीए टा छलन्हि। ओ बेटीक ब्याह कोन गाम केलन्हि तकर कोनहु जानकारी नहि अछि। ऋषि, हुलास तारा आओर भंजन के वंश आगाँ बढ़लन्हि। आजु भरि गाम जे शोर भs रहल छै इ लोकनि हुनके वंशज छियाह। बाद मे किछु भगिमान बैस गेलाह। किछु दोसर गाम सँ आबि कs बैस गेलाह। इ गाम शैक्षणिक दृष्टि सँ केरल कहल जा सकैत अछि। एकटा वैज्ञानिक, एकटा जेलर, एकटा विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार बनल छथि। शिक्षक ढ़ेर रास अछि। एयरफोर्स मे एकटा, बीएसएफ मे एकटा, एकटा एमबीबीएस डॉक्टर अछि। चीन आओर पाकिस्तान के संग युद्ध के समय तीन टा नौजवान सेना मे भर्ती भेलाह- हवलदार रामह्रृदय राय,हवलदार तेतर ठाकुर आओर हवलदार किशन ठाकुर। गामक चौहद्दी अछि - उत्तर मे गनौली,दक्खिन मे शिवा, पछिम मे सहुरिया आओर पूरब मे पस्टन। गाम मे गौड़गामा नामक जगह पर एकटा हाई स्कूल छै, मखनाही (माखनपुरा टोल) पर मिडिल स्कूल आओर पुरनी पोखरि पर संस्कृत स्कूल अछि। गामक पहिल नेतृत्वकर्ता युगेश्वर राय छलाह ।तदुपरांत श्री उमाकांत राय, श्री सर्वेश्वर राय, श्री विश्वेश्वर राय आदि नेतृत्व केलन्हि। अखैन गाम अनाथ अछि। 1999 मे राजेश्वर राय मास्टर साहब केँँ हत्या भs गेलन्हि। हुनकर हत्यारा अखनो धरि पुलिस के गिरफ्त सँ बाहर अछि। गाम मे पाँच टा पोखैर अछि। गामक बाहर सिमराहा पोखैर, निमैछपोखैर, गौड़गामा पोखैर, सुगौना पट्टी पोखैर, शिवसागर पोखैर आओर अगरबल्ला पोखैर अछि। गाम मे चारि टा मंदिर अछि - दूटा हनुमान मंदिर , एकटा महादेव मंदिर आओर ऐतिहासिक दुर्गा मंदिर। इंजीनियर बहुत रास अछि। आईआईटी पास केलाह अछि- श्री अखिलेश्वर निराला,श्री हेमंत कुमार राय ।पीएचडी केलाह अछि - डॉ० गौरीशंकर राय, डॉ० वेद प्ररकाश राय, डॉ० सुधांशु राय, डॉ० कृष्ण कुमार राय, डॉ० बासुदेव राय, आओर दूटा लेडिज ।रिसर्च स्कॉलर छथि- श्री संतोष कुमार राय, श्री अखिलेश्वर निराला, श्री अखिलेश राय। गाम मे जनवितरण प्रणाली केँ दूटा डीलर छथि - श्री सुरेश राय आओर श्री बेचन राम। गाम मे पहिल ईंट उद्योग छलन्हि स्व० उमाकांत राय जी केँ आओर दोसर छन्हि श्री कौशल राय जी केँ। श्री मनोज राय माछक व्यवसाय सँ जुड़ल छथि। गाम मे सबसँ महत्त्वपूर्ण अछि -' दुर्गा मंदिर'। 2016-17 मे विवादक केंद्र मे रहल इ मंदिर। गाम दू भाग मे खंडित भs गेल। मंगरौना इतिहास मे इ बड़ि पैघ घटना छल। गाम मे घृणाक वातावरण बनि गेल। अपन गाम मे अपन लोक सँ गप्प बन्न भs गेल। एक-दोसरक मुँह देखनै बन्न भs गेल। भात-पानि बन्न भs गेल। 1957-58 टिस के परिणति 2016-17 मे फेर बेसि भs गेल। "की अहाँ पठैत बनबै?" "सोचि कs कहैत छी ।" " गामकs सभ दिस सँ अइ टीम मे लोक केँ जोड़ु।" "हँ, जोड़ल जेतै...।" कलश यात्रा निकैल रहल छै। गाड़ी पर डीजे पीछा जा रहल अछि। आगाँ-आगाँ कतारबद्ध कलश भरनिहारिन-भरनिहार जा रहल छथि। सबस आगाँ गंगाजल छिड़कैत एक जन बढ़ि रहल छथि। दोसर जन 'चर' डोलबैत जा रहल छथि। पुजारी, आचार्यजी, अन्य पंडितगण, पंच मुख्य कलश भरनिहार आगाँ छथि। " दुर्गा महरानी की।" "जय।" "महिषासुरमर्दिनी की।" "जय।" "रमंत महराज की।" "जय।" "महादेव बाबा की ।" "जय...।" सभ कियो आगाँ कमला दिस पड़ाइत जा रहल छथि। माखनपुरा टोल सँ लकs शिवा चौक धरि कतारबद्ध लोक जा रहल छथि। घड़ीघंट, शंख बाजि रहल अछि। 'माँ शेरावली की जय' केँ नारा लागि रहल अछि। सभहक मुँह पर खुशीक रेखा देखि सकैत छी। छोट-छोट बालक-बालिका कूदि-कूदि कs अपन खुशी जाहिर कs रहल छथि। शिवा चौक सँ घोंघरड़िया होएत गाड़ी आओर कतार छहर टपि कमला दिस जा रहल अछि। इ दृश्य धार्मिक आस्थाक छी। धर्म लोक केँ एकताक सूत्र मे बन्हैत छै। धर्म लोक केँ जोड़ैत छै। धर्म सभ अहंकार केँ दूर भगा कs लोक केँ भाईचाराक बन्हन मे बांधैत छै। धर्म प्रेम आओर स्नेहक दोसर रूप छियैय। इ घृणा, द्वेष वगैरह केँँ दूर करैत छै। परञ्च गाम मे भात-पानि बन्न भs गेल छै।गाम मे केस-केसामैल भs गेल छै। अहंकारक पराकाष्ठा इ थिक। गामक इज्ज़त अखबारक पेज पर बिका रहल अछि। 'दुर्गा मंदिरक विवाद मे कोतवाल का हाथ टूटा' अखबारक इ सुर्खी अछि। गाम बौरा गेल। लोक बौरा गेल। इ सौ सालक सामंतवादक विरूद्ध आम लोकक आवाज़ छियैय। दुर्गा मंदिर एकटा बहाना छियैय। गरीब-गुरबाक सामंतशाही लोकक विरूद्ध धधकैत आगि छियैय इ मंदिर विवाद। जे गामक विभाजन कs देलकै। दोखी केँ छथि ? इ भविष्य निष्कर्ष देत। मंगरौना आब मंगरौना नहि रहल। गरीबक आवाज़ केँ अहाँ कतेक दिन दबा सकैत छी ? ( उपन्यासक शेष अंश अगिला खेप मे) -संतोष कुमार राय 'बटोही', ग्राम-मंगरौना, पोस्ट- गोनौली, थाना- अंधराठाढ़ी, जिला- मधुबनी, बिहार-847401. मोबाईल नंबर- 6204644978 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। रबीन्द्र नारायण मिश्र लजकोटर -31- आखिर शंकर पकड़ल गेल । कन्या नवालिग छलैक तेँ न्यायलयमेओकर पिताक बातक महत्व बेसी भेलैक । शंकरकेँ सातसालक सजा भेल। कन्याकेँ पिता ओकर ककरोसँ बिआहकरा देलकैक । क्रमशः सभकिछु शांत भेल मुदा एहि प्रकरणसँहमर कारबारकेँ जबरदस्ता धक्का लागल । ओकरा फेरसँ पटरीपर आनएमे बहुत प्रयास करए पड़ल । बीचमे बहुत रास अपना दिसक कर्मचारीसभ काज छोट़ि-छोड़ि चल गेल ।आब तँ अपना दिसक लोकसँ डर होइत छल। तेँसोचलहुँ जे किछु बहरिओकर्मचारी आनल जाए ।कुसुम प्लेसमेंट एजेंसी चलबैत छलीह से हमरा बूझल छल । हम हुनका फोन केलहुँ तँ ओ कहए लगलीह- "आबिए किएक नहि जाइत छी?सामनेमे गप्प भए जाएत ।" "से तँ ठीके । भेंटो भेला बहुत दिन भए गेल ।" "ठीक छैक । आइ तँ हम कतहु जा रहल छी । काल्हि आएब । " तकरबाद एकटा एसएमएस आएल जाहिमे हुनकर कार्यालयक पतामे लताक घरक पता लिखल छल । दोसर दिन चारि बजे साँझमे हम ओतएपहुँचलहुँ । लता पहिनहिसँ गेटेपर ठाढ़ि छलीह ।हमरा देखितहि ओ बहुत प्रशन्न भेलीह । जोरसँ हमर हाथ पकड़ि कए घर दिस लेने गेलीह ।हम दुनूगोटे अंदर जाइत छी । ओ कहैत छथि जे कुसुम किछु जरुरी काजसँ गेलीह अछि आ जल्दिए आबि जेतीह । हमरा कुसुम केँ नहि रहब अखरि रहल छल । एना समय दए कए ओ किएक चलि गेलीह ? कही ई पूर्वनियोजित तँ नहि छल ? तरह-तरहक बातसभ मोनमे घुमि रहल छल । हमरा अस्तव्यस्त देखि लता पुछिए देलीह - "एम्हरे आबि जाउ ने । असगरनीक नहि लगैत होएत ।" जाबे-जाबे हम किछुसोचितहुँ ओ स्वयं हमरा घिचने चलि गेलीह। आब की होएत?हमरा तँ ठकबिदरो लागि गेल । "अहाँ बड़ लजकोटर छी । एतेक दिनसँ दिल्लीमे रहितहुँ अहाँ किछु नहि सिखलहुँ।"-से कहि ओ भभाकए हँसि पड़लथि । हम सरिपहुँ लजा गेलहुँ । कनीके कालमे कुसुमक फोन आएल । " हम किछु जरुरी काजसँ अटकि गेल छी । जँ हमरा आबएमे देरी भए जाए तँ अहाँ सभबात लताकेँ कहि देबनि ।आगु काल्हि गप्प कए लेब ।" हम बुझि गेलिऐक जे ईसभ आपसमे किछु खेल कए रहल अछि । "की काज छल?" " किछु नव-नव कार्यकर्ताक हेतु कुसुमकेँ कहने रहिऐक।" "अहाँ ई सभ चक्कर छोड़ू ।" "तखन कीकरू?" "हमरासंगे आबि जाउ ।ई सभ सम्हारु ।" हम किछु नहि बाजि सकलहुँ । गप्पेक क्रममे लता कहलथि जे दामोदर जमानतपरछुटि गेल । " आ किशुन?" "ओहो । " " से केना भेलैक?" " कुसुमसँ पुछबै। ओकरासभ बात पता छैक ।" साँझ भए रहल छल ।लोकसभ अपन अपन काज समाप्त कए घर वापस भए रहल छल । सड़कपर जाम से लागि गेल छल । हम कहलिऐक- "तँ आब जेबाक आज्ञा दिअ ।" "एना असगरे अहाँ कतेक दिन रहब?" “समय अएलापर सभ अपनेभए जेतैक ।” हमरा ओ गेटधरि आरिआति देलीह । सत पुछी तँ हमरो जेबाक मोन नहि होइत छल । अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३. पद्य ३.१.संतोष कुमार राय 'बटोही'- दू टा कविता ३.२.डाॅ. किशन कारीगर- आ रे सुग्गा आ आ- (बाल कविता) संतोष कुमार राय 'बटोही' दू टा कविता 1.झालदार चुनाव अइ बेर मंगला जीतबे करताह पहिने सँ बेसी घोटाला करताह 'नलजल योजना' में टोंटीए टा रहलै तैं अइ बेर ढोंरबा-मंगला सभ ठाड़ भेलै। सभ कियो हगैत अछि रस्ते पर 'शौचालय योजना' सभ रहलै कागजे पर लूटिस भेलै मनरेगा में सगरो प्रतिनिधि मालामाल भेलै जनता डुबि मरौ। जते लबड़ा, लुच्चा, लफंगा, छिनरा छल चौबनिया, अठनिया नेताजी बनल जे हगला गुँह पर छौर नहि देनिहार से उजरा कुरता पहिन क' बनल सेवादार। समाजक कल्याण लेल दू पैसा नहि दै वाला बनल अछि पैघ समाजसेवी पहैन क' माला दरवजे-दरवजे गिड़गिडैत अछि वोटक लेल अइ बेर अछि वादा आब हम नहि होयब 'फेल' । 2. राजगद्दी पर उल्लू जंगल मे सभा भ' रहल छै विषय छै राजगद्दी किनकर छियैन्ह उल्लू केर वा कौआ केर जंगलक उन्नति केर प्रश्न छै। डुबकि मारि हंसनी हँसि रहल अछि सियारो चुनाव मे ठाड़़ छथि सिंहक राज नीक कि उल्लू केर ? जोर-शोर सँ चुनाव प्रचार भ' रहल छै सियार हुआँ-हुआँ करैत छै उल्लू दिनभरि कोहवर मे घुसल रहैत छै सिंह बेचारा बौक भेल छै। के जीततै ? बेंग टर्र-टर्र क' रहल छै बगुला टकटकी लगौने छै कुक्कुर छौं-छौं क' रहल छै। आइ चुनावक परिणाम औतै सभ कियो टीवी ओगरने छथि हौ इ की भेलै ? राजगद्दी पर उल्लू ! -संतोष कुमार राय 'बटोही', ग्राम- मंगरौना, पोस्ट- गोनौली, थाना- अंधराठाढ़ी, जिला- मधुबनी, बिहार, मो०-6204644978 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। डाॅ. किशन कारीगर आ रे सुग्गा आ आ (बाल कविता) आ रे कौआ आ आ आ रे सुगा आ आ आ रे मैना आ आ आ रे बगरा तहूं आबि जो चिड़ै चुनमुन सब आ आ दौगा गौगी बौआ संगे खेलो जो हे सुग्गा तूं बौआ के रोटी नै खैहियै हम तोलो लै रोटी रखने छियौ. है मैना आइ तूं कतअ रैह गेलही हमर बौआ तोरा तकै छेलौ आ रे बगरा जल्दी आबि जो हमर बुच्ची कटोरी मे पानि रखने छौ चिड़ै चुनमुन सब चूं चूं चीं चीं करै हमला बौआ के कते नीक लगलै आ सब मिल के खेलै जाइ जो हे खेलाइत खेलाइत झगड़ा नै करै जाहियैं आ रे सुग्गा आ आ बौआ संगे खेलो जो. ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ४.स्त्री कोना ४.१.कल्पना झा- दीप कल्पना झा दीप माटिक मोल अछि बडु अनमोल, आगि में दयैत बनल कठोर, देह धिपैत ने आह करय, बातिक संग ओहो जरय, कनमा भरि तेल जरायब, ज्योत सं विपदा दूर भगायब, महंगाई पर बडु अछि रोष, नहि सिवाय कोनो अफसोस, ककरा हंसोथु कतो पसारु, खखरी में कोना धान के ताकु, दीप जरल अछि कोन डगर, घुमि रहल छी नगर डगर, बिसुरि गेलवं मोनक हुल्लास, क रहल हृदय विलाप, दीप जरैत किलोल करय, अन्न धन लक्ष्मी घर आबय, दरिद्रा बाहर करय, दीप जरल अछि सगरो राति शुभ मंगल होय सबहक प्राति। -कल्पना झा, बोकारो, झारखंड अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ........................................................................................................................ संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] Videha e-Learning पेटार (रिसोर्स सेन्टर) शब्द-व्याकरण-इतिहास MAITHILI IDIOMS & PHRASES मैथिली मुहावरा एवम् लोकोक्ति प्रकाश- रमाकान्त मिश्र मिहिर (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) डॉ. ललिता झा- मैथिलीक भोजन सम्बन्धी शब्दावली (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) मैथिली शब्द संचय MAITHILI DICTIONARY- RAMDEO JHA (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) ENGLISH MAITHILI COMPUTER DICTIONARY MAITHILI ENGLISH DICTIONARY अणिमा सिंह -Shishu_Geet_Khel_Anima_Singh डॉ. रमण झा मैथिली काव्यमे अलङ्कार अलङ्कार-भास्कर आनन्द मिश्र (सौजन्य श्री रमानन्द झा "रमण")- मिथिला भाषाक सुबोध व्याकरण BHOLALAL DAS मैथिली सुबोध व्याकरण- भोला लाल दास राधाकृष्ण चौधरी- A Survey of Maithili Literature ........................................................................................................................ मूलपाठ तिरहुता लिपिक उद्भव ओ विकास (यू.पी.एस.सी. सिलेबस) राजेश्वर झा- मिथिलाक्षरक उद्भव ओ विकास (मैथिली साहित्य संस्थान आर्काइव) Surendra Jha Suman दत्त-वती (मूल)- श्री सुरेन्द्र झा सुमन (यू.पी.एस.सी. सिलेबस) प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) CIIL SITE ........................................................................................................................ समीक्षा सुभाष चन्द्र यादव-राजकमल चौधरी: मोनोग्राफ शिव कुमार झा "टिल्लू" अंशु-समालोचना डॉ बचेश्वर झा- B_JHA_Nibhand_Nikunj.pdf डॉ. देवशंकर नवीन- Adhunik_Sahityak_Paridrishya डॉ. रमण झा- भिन्न-अभिन्न प्रेमशंकर सिंह- मैथिली भाषा साहित्य:बीसम शताब्दी (आलोचना) डॉ. रमानन्द झा 'रमण' हिआओल अखियासल CIIL SITE दुर्गानन्द मण्डल-चक्षु RAMDEO JHA दत्त-वतीक वस्तु कौशल- डॊ. श्रीरामदेवझा SHAILENDRA MOHAN JHA परिचय निचय- डॊ शैलेन्द्र मोहन झा ........................................................................................................................ अतिरिक्त पाठ पहिने मिथिला मैथिलीक सामान्य जानकारी लेल एहि पोथी केँ पढ़ू:- राधाकृष्ण चौधरी- मिथिलाक इतिहास फेर एहि मनलग्गू फाइल सभकेँ सेहो पढ़ू:- केदारनाथ चौधरी चमेलीरानी माहुर करार कुमार पवन पइठ (मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ कथा) (साभार अंतिका) डायरीक खाली पन्ना (साभार अंतिका) याेगेन्द्र पाठक वियाेगी- विज्ञानक बतकही रामलोचन ठाकुर- मैथिली लोककथा SAHITYA AKADEMI http://sahitya-akademi.gov.in/publications/e-books.jsp http://sahitya-akademi.gov.in/general/Digitalbooks.jsp CIIL http://corpora.ciil.org/maisam.htm अखियासल (रमानन्द झा रमण) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI1.pdf जुआयल कनकनी- महेन्द्र http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI2.pdf प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI3.pdf सृजन केर दीप पर्व- सं केदार कानन आ अरविन्द ठाकुर http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI4.pdf मैथिली गद्य संग्रह- सं शैलेन्द्र मोहन झा http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI5.pdf JNU http://sanskrit.jnu.ac.in/maithili/index.jsp http://sanskrit.jnu.ac.in/student_projects/lexicon.jsp?lexicon=maithili ARCHIVE.ORG https://archive.org/details/%40vijay_deo_jha?&sort=-publicdate&page=2 VIDEHA MAITHILI BOOKS/ PICTURE-AUDIO-VIDEO ARCHIVE http://videha.co.in/new_page_15.htm https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ ALL INDIA RADIO DOORDARSHAN आकाशवाणी दूरदर्शन http://prasarbharati.gov.in/ http://newsonair.com/ https://doordarshan.gov.in/ आकाशवाणी मैथिली पोडकास्ट http://prasarbharati.gov.in/podcast.php?filterlang=Maithili&from=1947-08-15&fromwp=2020-08-29&to=2050-12-31&search=GO आकाशवाणी पटना/ दरभंगा मैथिली रेजनल न्यूज टेक्स्ट डाउनलोड-1 http://newsonair.com/RNU-NSD-Audio-Archive-Search.aspx आकाशवाणी पटना/ दरभंगा मैथिली रेजनल न्यूज टेक्स्ट डाउनलोड-2 http://newsonair.com/Regional-Text.aspx आकाशवाणी दरभंगा http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=282 आकाशवाणी दरभंगा यू ट्यूब चैनल https://www.youtube.com/channel/UCGdNveEFmv4pPolWiTEMxVA आकाशवाणी भागलपुर http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=359 आकाशवाणी पूर्णियाँ http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=256 आकाशवाणी पटना http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=122 IGNCA http://ignca.nic.in/coilnet/mithila.htm http://ignca.nic.in/coilnet/kalyani.htm (MAITHILI ENGLISH DICTIONARY) http://tdil.mit.gov.in/CoilNet/IGNCA/mithila.htm MITHILA DARSHAN https://mithiladarshan.com/ (online pdf of Maithili journal) I LOVE MITHILA https://www.ilovemithila.com/ (online maithili journal) मैथिली साहित्य संस्थान https://www.maithilisahityasansthan.org/ https://www.maithilisahityasansthan.org/resources (online pdf of Reasearch Papers/ books) ........................................................................................................................ VIDEHA e-LEARNING YOUTUBE CHANNEL https://www.youtube.com/channel/UC4abVKqMj2pDWIAkXiOHp7A (अनुवर्तते) -गजेन्द्र ठाकुर विदेहक किछु विशेषांक:- १) हाइकू विशेषांक १२ म अंक, १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf 12.pdf २) गजल विशेषांक २१ म अंक, १ नवम्बर २००८ Videha_01_11_2008.pdf Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf 21.pdf ३) विहनि कथा विशेषांक ६७ म अंक, १ अक्टूबर २०१० Videha_01_10_2010 Videha_01_10_2010_Tirhuta 67 ४) बाल साहित्य विशेषांक ७० म अंक, १५ नवम्बर २०१० Videha_15_11_2010 Videha_15_11_2010_Tirhuta 70 ५) नाटक विशेषांक ७२ म अंक १५ दिसम्बर२०१० Videha_15_12_2010 Videha_15_12_2010_Tirhuta 72 ६) नारी विशेषांक ७७म अंक ०१ मार्च २०११ Videha_01_03_2011 Videha_01_03_2011_Tirhuta 77 ७) अनुवाद विशेषांक (गद्य-पद्य भारती) ९७म अंक Videha_01_01_2012 Videha_01_01_2012_Tirhuta 97 ८) बाल गजल विशेषांक विदेहक अंक १११ म अंक, १ अगस्त २०१२ Videha_01_08_2012 Videha_01_08_2012_Tirhuta 111 ९) भक्ति गजल विशेषांक १२६ म अंक, १५ मार्च २०१३ Videha_15_03_2013 Videha_15_03_2013_Tirhuta 126 १०) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक १४२ म, अंक १५ नवम्बर २०१३ Videha_15_11_2013 Videha_15_11_2013_Tirhuta 142 ११) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 १२) अरविन्द ठाकुर विशेषांक १८९ म अंक १ नवम्बर २०१५ Videha_01_11_2015 १३) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक १९१ म अंक १ दिसम्बर २०१५ Videha_01_12_2015 १४) विदेह सम्मान विशेषाक- २००म अक १५ अप्रैल २०१६/ २०५ म अक १ जुलाई २०१६ Videha_15_04_2016 Videha_01_07_2016 १५) मैथिली सी.डी./ अल्बम गीत संगीत विशेषांक- २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ Videha_01_01_2017 १६) मैथिली वेब पत्रकारिता विशेषांक VIDEHA 313 लेखकसं आमंत्रित रचनापर आमंत्रित आलोचकक टिप्पणीक शृंखला १७) मैथिली बीहनि कथा विशेषांक-२ VIDEHA 317 १८) रामलोचन ठाकुर विशेषांक VIDEHA 319 १९) रामलोचन ठाकुर श्रद्धांजलि विशेषांक VIDEHA 320 २०) राजनन्दन लाल दास विशेषांक VIDEHA 333 लेखकक आमंत्रित रचना आ ओइपर आमंत्रित समीक्षकक समीक्षा सीरीज १. कामिनीक पांच टा कविता आ ओइपर मधुकान्त झाक टिप्पणी विदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016 "पाठक हमर पोथी किए पढ़थि"- लेखक द्वारा अप्पन पोथी/ रचनाक समीक्षा सीरीज १. आशीष अनचिन्हार 'विदेह' क ३२७ म अंक ०१ अगस्त २०२१ एडिटर्स चोइस सीरीज एडिटर्स चोइस सीरीज-१ विदेहक १२३ म (०१ फरबरी २०१३) अंकमे बलात्कारपर मैथिलीमे पहिल कविता प्रकाशित भेल छल। ई दिसम्बर २०१२ क दिल्लीक निर्भया बलात्कार काण्डक बादक समय छल। ओना ई अनूदित रचना छल, तेलुगुमे पसुपुलेटी गीताक एहि कविताक हिन्दी अनुवाद केने छलीह आर. शांता सुन्दरी आ हिन्दीसँ मैथिली अनुवाद केने छलाह विनीत उत्पल। हमर जानकारीमे एहिसँ बेशी सिहराबैबला कविता कोनो भाषामे नहि रचल गेल अछि। सात सालक बादो ई समस्या ओहने अछि। ई कविता सभकेँ पढ़बाक चाही, खास कऽ सभ बेटीक बापकेँ, सभ बहिनक भाएकेँ आ सभ पत्नीक पतिकेँ। आ विचारबाक चाही जे हम सभ अपना बच्चा सभ लेल केहन समाज बनेने छी। एडिटर्स चोइस सीरीज-१ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-२ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच ब्रेस्ट कैसरक समस्यापर विदेह मे मीना झा केर एकटा लघु कथा प्रकाशित भेल। ई मैथिलीक पहिल कथा छल जे ब्रेस्ट कैसर पर लिखल गेल। हिन्दीमे सेहो ताधरि एहि विषयपर कथा नहि लिखल गेल छल, कारण एहि कथाक ई-प्रकाशित भेलाक १-२ सालक बाद हिन्दीमे दू गोटेमे घोंघाउज भऽ रहल छल कि पहिल हम आकि हम, मुदा दुनूक तिथि मैथिलीक कथाक परवर्ती छल। बादमे ई विदेह लघु कथामे सेहो संकलित भेल। एडिटर्स चोइस सीरीज-२ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-३ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिलक किछु बाल कविता प्रकाशित भेल। बादमे हुनकर ३ टा बाल कविता विदेह शिशु उत्सवमे संकलित भेल जाहिमे २ टा कविता बेबी चाइल्डपर छल। पढ़ू ई तीनू कविता, बादक दुनू बेबी चाइल्डपर लिखल कविता पढ़बे टा करू से आग्रह। एडिटर्स चोइस सीरीज-३ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-४ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच जगदानन्द झा मनुक एकटा दीर्घ बाल कथा कहि लिअ बा उपन्यास प्रकाशित भेल, नाम छल चोनहा। बादमे ई रचना विदेह शिशु उत्सवमे संकलित भेल, ई रचना बाल मनोविज्ञानपर आधारित मैथिलीक पहिल रचना छी, मैथिली बाल साहित्य कोना लिखी तकर ट्रेनिंग कोर्समे एहि उपन्यासकेँ राखल जेबाक चाही। कोना मॊडर्न उपन्यास आगाँ बढ़ै छै, स्टेप बाइ स्टेप आ सेहो बाल उपन्यास। पढ़बे टा करू से आग्रह। एडिटर्स चोइस सीरीज-४ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-५ एडिटर्स चोइस ५ मे मैथिलीक "उसने कहा था" माने कुमार पवनक दीर्घकथा "पइठ" (साभार अंतिका) । हिन्दीक पाठक, जे "उसने कहा था" पढ़ने हेता, केँ बुझल छन्हि जे कोना अहि कथाकेँ रचि चन्द्रधर शर्मा ’गुलेरी’ अमर भऽ गेलाह। हम चर्चा कऽ रहल छी, कुमार पवनक "पइठ" दीर्घकथाक। एकरा पढ़लाक बाद अहाँकेँ एकटा विचित्र, सुखद आ मोन हौल करैबला अनुभव भेटत, जे सेक्सपीरिअन ट्रेजेडी सँ मिलितो लागत आ फराको। मुदा एहि रचनाकेँ पढ़लाक बाद तामस, घृणा सभपर नियंत्रणकेँ आ सामाजिक/ पारिवारिक दायित्वकेँ सेहो अहाँ आर गंभीरतासँ लेबै, से धरि पक्का अछि। मुदा एकर एकटा शर्त अछि जे एकरा समै निकालि कऽ एक्के उखड़ाहामे पढ़ि जाइ। एडिटर्स चोइस सीरीज-५ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-६ जगदीश प्रसाद मण्डलक लघुकथा "बिसाँढ़": १९४२-४३ क अकालमे बंगालमे १५ लाख लोक मुइला, मुदा अमर्त्य सेन लिखैत छथि जे हुनकर कोनो सर-सम्बन्धी एहि अकालमे नहि मरलन्हि। मिथिलोमे अकाल आएल १९६७ ई. मे आ इन्दिरा गाँधी जखन एहि क्षेत्र अएली तँ हुनका देखाओल गेल जे कोना मुसहर जातिक लोक बिसाँढ़ खा कऽ एहि अकालकेँ जीति लेलन्हि। मैथिलीमे लेखनक एकभगाह स्थिति विदेहक आगमनसँ पहिने छल। मैथिलीक लेखक लोकनि सेहो अमर्त्य सेन जेकाँ ओहि महाविभीषिकासँ प्रभावित नहि छला आ तेँ बिसाँढ़पर कथा नहि लिखि सकला। जगदीश प्रसाद मण्डल एहिपर कथा लिखलन्हि जे प्रकाशित भेल चेतना समितिक पत्रिकामे, मुदा कार्यकारी सम्पादक द्वारा वर्तनी परिवर्तनक कारण ओ मैथिलीमे नहि वरण् अवहट्ठमे लिखल बुझा पड़ल, आ ओतेक प्रभावी नहि भऽ सकल कारण विषय रहै खाँटी आ वर्तनी कृत्रिम। से एकर पुनः ई-प्रकाशन अपन असली रूपमे भेल विदेहमे आ ई संकलित भेल "गामक जिनगी" लघुकथा संग्रहमे। एहि पोथीपर जगदीश प्रसाद मण्डलकेँ टैगोर लिटरेचर अवार्ड भेटलनि। जगदीश प्रसाद मण्डलक लेखनी मैथिली कथाधाराकेँ एकभगाह हेबासँ बचा लेलक, आ मैथिलीक समानान्तर इतिहासमे मैथिली साहित्यकेँ दू कालखण्डमे बाँटि कऽ पढ़ए जाए लागल- जगदीश प्रसाद मण्डलसँ पूर्व आ जगदीश प्रसाद मण्डल आगमनक बाद। तँ प्रस्तुत अछि लघुकथा बिसाँढ़- अपन सुच्चा स्वरूपमे। एडिटर्स चोइस सीरीज-६ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-७ मैथिलीक पहिल आ एकमात्र दलित आत्मकथा: सन्दीप कुमार साफी। सन्दीप कुमार साफीक दलित आत्मकथा जे अहाँकेँ अपन लघु आकाराक अछैत हिलोड़ि देत आ अहाँक ई स्थिति कऽ देत जे समानान्तर मैथिली साहित्य कतबो पढ़ू अहाँकेँ अछौं नहि होयत। ई आत्मकथा विदेहमे ई-प्रकाशित भेलाक बाद लेखकक पोथी "बैशाखमे दलानपर"मे संकलित भेल आ ई मैथिलीक अखन धरिक एकमात्र दलित आत्मकथा थिक। तँ प्रस्तुत अछि मैथिलीक पहिल दलित आत्मकथा: सन्दीप कुमार साफीक कलमसँ। एडिटर्स चोइस सीरीज-७ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-८ नेना भुटकाकेँ रातिमे सुनेबा लेल किछु लोककथा (विदेह पेटारसँ)। एडिटर्स चोइस सीरीज-८ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-९ मैथिली गजलपर परिचर्चा (विदेह पेटारसँ)। एडिटर्स चोइस सीरीज-९ (डाउनलोड लिंक) जगदीश प्रसाद मण्डल जीक ६५ टा पोथीक नव संस्करण विदेहक २३३ सँ २५० धरिक अंकमे धारावाहिक प्रकाशन नीचाँक लिंकपर पढ़ू:- Videha_15_05_2018 Videha_01_05_2018 Videha_15_04_2018 Videha_01_04_2018 Videha_15_03_2018 Videha_01_03_2018 Videha_15_02_2018 Videha_01_02_2018 Videha_15_01_2018 Videha_01_01_2018 Videha_15_12_2017 Videha_01_12_2017 Videha_15_11_2017 Videha_01_11_2017 Videha_15_10_2017 Videha_01_10_2017 Videha_15_09_2017 Videha_01_09_2017 विदेह ई-पत्रिकाक बीछल रचनाक संग- मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ रचनाक एकटा समानान्तर संकलन: विदेह: सदेह: १ (२००८-०९) देवनागरी विदेह: सदेह: १ (२००८-०९) तिरहुता विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) देवनागरी विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) तिरहुता विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०)देवनागरी विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०) तिरहुता विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०)देवनागरी विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०) तिरहुता विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]देवनागरी विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ] तिरहुता विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]- दोसर संस्करण देवनागरी विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ]देवनागरी विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ] तिरहुता विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ]देवनागरी विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ] तिरहुता विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ]देवनागरी विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ] तिरहुता विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ]देवनागरी विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ] तिरहुता विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ]देवनागरी विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ] तिरहुता विदेह:सदेह ११ विदेह:सदेह १२ विदेह:सदेह १३ The readers of English translations of Maithili Novel "sahasrabadhani" and verse collection "sahasrabdik chaupar par" has intimated that the English translation has not been able to grasp the nuances of original Maithili. Therefore the Author has started translating his Maithili works in English himself. After these translations are complete these would be the official translations authorised by the Author of the original works.-Editor Maithili Books can be downloaded from: https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ विदेह सम्मान: सम्मान-सूची (समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार सहित) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। सूचना/ घोषणा "विदेह सम्मान" समानान्तर साहित्य अकदेमी पुरस्कारक नामसँ प्रचलित अछि। "समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार" (मैथिली), जे साहित्य अकादेमीक मैथिली विभागक गएर सांवैधानिक काजक विरोधमे शुरु कएल छल, लेल अनुशंसा आमन्त्रित अछि। अनुशंसा २०१९ आ २०२० बर्ख लेल निम्न कोटि सभमे आमन्त्रित अछि: १) फेलो २)मूल पुरस्कार ३)बाल-साहित्य ४)युवा पुरस्कार आ ५) अनुवाद पुरस्कार। पुरस्कारक सभ क्राइटेरिया साहित्य अकादेमी, दिल्लीक समानान्तर पुरस्कारक समक्ष रहत, जे एहि लिंक sahitya-akademi.gov.in पर उपलब्ध अछि। अपन अनुशंसा editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम्: VIDEHA: AN IDEA FACTORY (c)२००४-२०२१. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHAसम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: डॉ उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम विलास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक -स्त्री कोना- इरा मल्लिक। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि)editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि। एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै, आ से हानि-लाभ रहित आधारपर छै आ तैँ ऐ लेल कोनो रॊयल्टीक/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै। तेँ रॉयल्टीक/ पारिश्रमिकक इच्छुक विदेहसँ नै जुड़थि, से आग्रह। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-2021 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। ५ जुलाई २००४ केँ http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् 'विदेह' ३३४ म अंक १५ नवम्बर २०२१ (वर्ष १४ मास १६७ अंक ३३४) विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA ISSN 2229-547X VIDEHA
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