'विदेह' ३३५ म अंक ०१ दिसम्बर २०२१ (वर्ष १४ मास १६८ अंक ३३५) ऐ अंकमे अछि:- १. गजेन्द्र ठाकुर- संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल सेहो] [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] [FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI ALSO] २. गद्य २.१.जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’- आँखिमे चित्र हो मैथिली केर (आत्मकथा)- २०म खेप- गोली-बारूदक मौसममे २.२.ज्ञानवर्द्धन कंठ- भोगी बनलाह बाघ २.३.डॉ. किशन कारीगर- लोक कलाकार ढोल पिपही वला के खोज खबैर के राखत? २.४.आशीष अनचिन्हार- भूमिका एक: फाँक अनेक २.५.मुन्नाजी- सुतिहार २.६.संतोष कुमार राय 'बटोही'- मंगरौना (धारावाहिक उपन्यास)-(दोसर खेप) २.७.रबीन्द्र नारायण मिश्र- लजकोटर ३. पद्य ३.१.डाॅ. किशन कारीगर- आबू यौ देखू मिथिला के गाम Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Books/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाउ। VIDEHA ARCHIVE विदेह पेटार View Videha googlegroups (since July 2008) view Videha Facebook Official Group (since January 2008)- for announcements १. गजेन्द्र ठाकुर ........................................................................................................................ ........................................................................................................................ [संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री] [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल सेहो] [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] [FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI ALSO] यू. पी. एस. सी. (मेन्स) २०२० ऑप्शनल: मैथिली साहित्य विषयक टेस्ट सीरीज यू.पी.एस.सी. क प्रिलिमिनरी परीक्षा २०२० सम्पन्न भऽ गेल अछि। जे परीक्षार्थी एहि परीक्षामे उत्तीर्ण करताह आ जँ मेन्समे हुनकर ऑप्शनल विषय मैथिली साहित्य हेतन्हि तँ ओ एहि टेस्ट-सीरीजमे सम्मिलित भऽ सकैत छथि। टेस्ट सीरीजक प्रारम्भ प्रिलिम्सक रिजल्टक तत्काल बाद होयत। टेस्ट-सीरीजक उत्तर विद्यार्थी स्कैन कऽ editorial.staff.videha@gmail.com पर पठा सकैत छथि, जँ मेलसँ पठेबामे असोकर्ज होइन्हि तँ ओ हमर ह्वाट्सएप नम्बर 9560960721 पर सेहो प्रश्नोत्तर पठा सकैत छथि। संगमे ओ अपन प्रिलिम्सक एडमिट कार्डक स्कैन कएल कॉपी सेहो वेरीफिकेशन लेल पठाबथि। परीक्षामे सभ प्रश्नक उत्तर नहि देमय पड़ैत छैक मुदा जँ टेस्ट सीरीजमे विद्यार्थी सभ प्रश्नक उत्तर देताह तँ हुनका लेल श्रेयस्कर रहतन्हि। विदेहक सभ स्कीम जेकाँ ईहो पूर्णतः निःशुल्क अछि।- गजेन्द्र ठाकुर संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सर्विसेज (मुख्य) परीक्षा, २०२० मैथिली (ऐच्छिक) लेल टेस्ट सीरीज/ प्रश्न-पत्र- १ आ २ TEST SERIES-1 TEST SERIES-2 [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल/ FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI] NTA_UGC_NET_MAITHILI_01 NTA_UGC_NET_MAITHILI_02 NTA_UGC_NET_MAITHILI_03 (श्री शम्भु कुमार सिंह द्वारा संकलित) Videha e-Learning MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) UPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS BPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. (ऐच्छिक) मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. (अनिवार्य) मैथिली प्रश्नपत्र- बी.पी.एस.सी.(ऐच्छिक) मैथिलीक वर्तनी १ भाषापाक २ मैथिलीक वर्तनीमे पर्याप्त विविधता अछि। मुदा प्रश्नपत्र देखला उत्तर एकर वर्तनी इग्नू BMAF001 सँ प्रेरित बुझाइत अछि, से एकर एकरा एक उखड़ाहामे उनटा-पुनटा दियौ, ततबे धरि पर्याप्त अछि। यू.पी.एस.सी. क मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेल सेहो ई पर्याप्त अछि, से जे विद्यार्थी मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेने छथि से एकर एकटा आर फास्ट-रीडिंग दोसर-उखड़ाहामे करथि| IGNOU इग्नू BMAF-001 ........................................................................................................................ MAITHILI (OPTIONAL) TOPIC 1 [Place of Maithili in Indo-European Language Family/ Origin and development of Maithili language (Sanskrit, Prakrit, Avhatt, Maithili) भारोपीय भाषा परिवार मध्य मैथिलीक स्थान/ मैथिली भाषाक उद्भव ओ विकास (संस्कृत, प्राकृत, अवहट्ट, मैथिली)] TOPIC 2 (Criticism- Different Literary Forms in Modern Era/ test of critical ability of the candidates) TOPIC 3 (ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददास सिलेबसमे छथि आ रसमय कवि चतुर चतुरभुज विद्यापति कालीन कवि छथि। एतय समीक्षा शृंखलाक प्रारम्भ करबासँ पूर्व चारू गोटेक शब्दावली नव शब्दक पर्याय संग देल जा रहल अछि। नव आ पुरान शब्दावलीक ज्ञानसँ ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददासक प्रश्नोत्तरमे धार आओत, संगहि शब्दकोष बढ़लासँ खाँटी मैथिलीमे प्रश्नोत्तर लिखबामे धाख आस्ते-आस्ते खतम होयत, लेखनीमे प्रवाह आयत आ सुच्चा भावक अभिव्यक्ति भय सकत।) TOPIC 4 (बद्रीनाथ झा शब्दावली आ मिथिलाक कृषि-मत्स्य शब्दावली) TOPIC 5 (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोरिक गाथामे समाज ओ संस्कृति) TOPIC 6 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- विद्यापति) TOPIC 7 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- पद्य समीक्षा- बानगी) TOPIC 8 (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोक गाथा नृत्य नाटक संगीत) TOPIC 9 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- यात्री) TOPIC 10 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली रामायण) TOPIC 11 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली उपन्यास) TOPIC 12 (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- शब्द विचार) TOPIC 13 (तिरहुता लिपिक उद्भव ओ विकास) TOPIC 14 (आधुनिक नाटकमे चित्रित निर्धनताक समस्या- शम्भु कुमार सिंह)् TOPIC 15 (स्वातंत्र्योत्तर मैथिली कथामे सामाजिक समरसता- अरुण कुमार सिंह) TOPIC 16 (यू. पी.एस.सी. मैथिली प्रथम पत्रक परीक्षार्थी हेतु उपयोगी संकलन, मैथिलीक प्रमुख उपभाषाक क्षेत्र आ ओकर प्रमुख विशेषता, मैथिली साहित्यक आदिकाल, मैथिली साहित्यक काल-निर्धारण- शम्भु कुमार सिंह) TOPIC 17 (मैथिली आ दोसर पुबरिया भाषाक बीचमे सम्बन्ध (बांग्ला, असमिया आ ओड़िया) [यू.पी.एस.सी. सिलेबस, पत्र-१, भाग-“ए”, क्रम-५]) TOPIC 18 [मैथिली आ हिन्दी/ बांग्ला/ भोजपुरी/ मगही/ संथाली- बिहार लोक सेवा आयोग (बी.पी.एस.सी.) केर सिविल सेवा परीक्षाक मैथिली (ऐच्छिक) विषय लेल] ........................................................................................................................ GENERAL STUDIES (PRELIMINARY & MAINS) GS (Pre) TOPIC 1 GS (Mains) NCERT-ENVIRONMENT CLASS XI-XII NCERT PDF I-XII TN BOARD PDF I-XII ALL INDIA RADIO ENGLISH NEWS ALL INDIA RADIO NEWS ARCHIVE ALL INDIA RADIO TALKS AND CURRENT AFFAIRS RAJYA SABHA TV NEWS DISCUSSIONS SANSAD TV OTHER OPTIONALS IGNOU eGYANKOSH (अनुवर्तते) -गजेन्द्र ठाकुर २. गद्य २.१.जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’- आँखिमे चित्र हो मैथिली केर (आत्मकथा)- २०म खेप- गोली-बारूदक मौसममे २.२.ज्ञानवर्द्धन कंठ- भोगी बनलाह बाघ २.३.डॉ. किशन कारीगर- लोक कलाकार ढोल पिपही वला के खोज खबैर के राखत? २.४.आशीष अनचिन्हार- भूमिका एक: फाँक अनेक २.५.मुन्नाजी- सुतिहार २.६.संतोष कुमार राय 'बटोही'- मंगरौना (धारावाहिक उपन्यास)-(दोसर खेप) २.७.रबीन्द्र नारायण मिश्र- लजकोटर जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’ आँखिमे चित्र हो मैथिली केर (आत्मकथा)- २०म खेप- गोली-बारूदक मौसममे – हम 18 .01.1989 क’ साँझमे सीवान आबि गेलहुं आ बैंकसं सटले राज होटलमे टिकलहुं | 19 क’ जीपसं पचरुखी गेलहुँ आ शाखामे योगदान केलहुं | शाखा प्रबंधक छलाह आर. एन. मिश्र जी | और सदस्य सभ जे ताहि समयमे छलाह अथवा बाद मे एलाह से छलाह : पी.दुबे ,ए. के. सहाय, मो.आलम,जे.बी. उपाध्याय, ओम प्रकाश स्वर्णकार,एस.के.तिवारी, आर. एम. प्रसाद आ मोहन राम | 7 अगस्त 91 क’ तीनटा नव लिपिक एलाह : चन्द्रमा मांझी, जमादार मांझी आ राजेन्द्र दास | बाद मे एकटा अधिकारी एलाह एस.डी.राम | आर.एन.मिश्र जीक ट्रान्सफरक बाद किछुए दिन लेल एलाह एस.बी.तिवारीजी आ हुनका बाद 19.02.91 क’एलाह जनार्दन मिश्र जी | शाखामे ऋण आवेदन सबहक निष्पादन हेतु क्षेत्रीय कार्यालयक आदेश पर ए.एफ.ओ. रामजीत सिंह जी किछु दिन लेल एलाह | ई शाखा बहुत दृष्टिसं नीक छल मुदा अहू ठाम बैलेंसिंगबला समस्या छलै, आइ.आर.डी.पी. मे तीनटा लेजर छलै आ जून 1984 तक बैलेंसक मिलान भेल छलै, फसल ऋणक दूटा लेजर छलै आ जून 1982 तक बैलेंसक मिलान भेल छलै | ई दुनू पहिने मिलयबाक प्रयास केलहुं | 10 मार्च तक फसल ऋणक शेष मिलान दिसम्बर 1988 तक भ’ गेल | आइ.आर.डी.पी. बहीक मिलान दिसम्बर 1984 तक भेल | सभ गोटेक सहयोगसं बही मिलान स्थितिकें क्रमशः नीक सं नीक बनयबाक प्रयास करैत रहलहुं | बचत खातामे 33 आ सावधि जमामे 10 टा लेजर छलै| पेंशनक काज सेहो बहुत छलै | सीवानसं लगभग 10 किलोमीटरपर पचरुखी शाखा छलै, हम सीवानमे आवास राखक लेल क्षेत्रीय प्रबंधकक अनुमति हेतु आवेदन पठा देलिए | प्रतिदिन सीवानसं पचरुखी जाए लगलहुं | साँझमे घुरिक’ सीवानमे राज होटल पहुंचि जाइ छलहुँ | सीवानमे पाँच साल रहि चुकल छलहुँ, बहुत गोटे पूर्व परिचित छलाह | डी ए वी कॉलेज सीवानक प्राध्यापक डा. अमर नाथ टाकुर, प्रो. गंगानंद झा, आर एन चौधरी आ ओकील साहेब सुभाष्कर पाण्डेयजी सभ गोटेकें डेरा तकबामे सहयोग हेतु कहि देलियनि आ निश्चिन्त छलहुँ जे डेरा जल्दिए कतहु अवश्य भेटत | यैह सोचिक’ परिवार संगे आबि गेल छलहुँ | चारि-पाँच दिन भ’ गेल छल | कतहुसं कोनो डेराक पता नहि भेटल छल | एक दिन सबेरे होटलक बालकोनीसं नीचां तकलहुं त बाबूकें देखलियनि चल अबैत, आश्चर्य भेल, कत’ सं आबि रहल छथि एते सबेरे, नीचां जाक’ हाथसं सामान सभ ल’ लेलियनि आ हुनका संगे ऊपर गेलहुँ | गप-शप भेल त पता चलल, तिला संक्रान्तिक किछु सनेश ल’क’ ट्रेनसं आदापुर एलाह, ओत’ पता चललनि जे हम सीवान चल गेलहुँ | आदापुर शाखाक ए एफ ओ द्विवेदीजी हुनका अपना घरपर रक्सौल ल’ गेलखिन, ओत’ एकदिन राखिक’ बस पर चढ़ा देलखिन आ कहलखिन जे बैंक लग जाक’ होटलमे अथवा बैंक शाखामे पता करबै त भेंट भ’ जेताह | बस स्टैंडसं पता लगाक’ बैंक लग आबि गेल छलाह त हम देखि लेलियनि | बाबू एलाह त’ रस्तेसं हमर डेरा ठीक केने एलाह | जेबीमे सं एकटा कागजक टुकड़ी निकाललनि, कहलनि जे ई सज्जन रक्सौलसं हमरा संगे बसमे एलाहे आ कहलनिहें जे हमर डेरा बैंकक लगेमे अछि आ हमहूँ कोनो बैंके स्टाफकें मकान भाड़ापर देब’ चाहैत छी | किछु काल बाद ठाकुरजी एलाह त कहलनि जे हम जनैत छियनि रामचंद्र सिंहकें, चलू ने एखने चलैत छी | सभ गोटे गेलहुँ | घर देखलिऐ, शास्त्री नगरमे काली मन्दिरसं कनिएँ दूरपर सड़कक कातेमे | राम चन्द्र सिंह जी सं भेंट भेल, गप भेल, डेरा ठीक भ’ गेल | हम सभ गोटे होटल छोड़ि डेरामे आबि गेलहुँ | स्टोव संगमे अनने रही, एकटा डेकची आ किछु थारी-बाटी-गिलास सेहो रह्य, डेरामे भोजन बनाएब शुरू भ’ गेल | डेरामे एकटा कमी छलै | कम वोल्टेज रहबाक कारणे पानि सदिखन ऊपर नै चढ़ि पबैत छलै, सबेरे एक बेर ऊपर आबि जाइत छलै | तें नहाए बला पानि स्टोर क’क’ रखबाक लेल बाबूक संगे जाक’ एकटा बड़का ड्रम किनलहुं आ एकटा पाइप सेहो | ड्रम लेल ढक्कन बनबौलहुं | बाबू किछु दिन रहिक’ गाम वापस चल गेलाह | हम सभ 14 फरबरीक’ आदापुरसं ट्रकमे सामान सभ ल’क’ सीवानक डेरामे चलि एलहुं | आदापुरसं चलबासं पहिने द्विवेदीजीक बहुत आग्रहक कारण रक्सौलमे हुनका घरमे चारि दिन पहुनाइ कर’ पडल,से बहुत नीक लागल | जहिया सीवान सभ गोटे सभ सामान ल’क’ एलहुं, ओही दिन रातिमे ओकील साहेब सुभाष्कर पाण्डेय जीक प्रथम पुत्रीक विवाहक उत्सवमे सभ गोटे शामिल भेलहुँ | वसन्त आ मैथिलीक नाम राजवंशी बालिका उच्च विद्यालयमे आ शैलेन्द्रक नाम सरस्वती शिशु मन्दिरमे लिखाएल गेलनि | आब शैलेन्द्र भ’ गेलाह विवेक आनन्द | सीवानमे क्षेत्रीय कार्यालय हमरा डेराक बहुत लग छल | ओत’ राजभाषा अधिकारी कर्णजी आ सुरक्षा अधिकारी मिश्र जी सं निकटता भेल | कर्ण जी और मिश्र जी दुनू गोटे दू यूनियनक सदस्य छलाह मुदा दुनू गोटेमे अदभुत सामंजस्य छलनि | हम दोसर यूनियनक सदस्य छलहुँ, हमरापर कर्णजीक सहयोगसं यूनियन बदलबाक लेल बहुत दबाब पडल आ कर्णजी ई कहिक’ एकर समापन केलनि जे ई दबाबपर एक मकानक किराया दू आदमीकें दैबला लोक छथि, तें हिनका दिक नै करै जैयनु | मिश्र जी सभकें भोरे जगबाक आ टहलबाक अभ्यास लगौलनि | अपना डेरासं अबैत छलाह , रस्तामे जकर-जकर डेरा छलै, सभकें जगबैत संग क’ क’ वी. एम. एच . ई. स्कूलक मैदानमे ल’ जाइत छलाह | ओत’ सभकें व्यायाम करबैत छलाह | हमरो भोरे जगबाक आ व्यायाम करबाक अभ्यास लागल | मिश्र जी साहित्यिक अभिरूचि सेहो रखैत छलाह | अपन आवासमे दिनकर स्मृति संध्या 23 सितम्बरक’ मनबैत छलाह |साहित्यिक गोष्ठी सभमे उपस्थित होइत छलाह आ भाग लैत छलाह | हमर साहित्यिक क्रिया कलाप : एहि बेर सीवानमे हमर साहित्यिक गतिविधि सीमित रहल | कॉलेजक पूर्व परिचित प्राध्यापक लोकनिसं सम्पर्क बनल रहल | आदरणीय प्रो. गंगा नन्द झाक सलाहसं बंगला लेखक आशापूर्ण देवीक प्रथम प्रतिश्रुति,सुवर्ण लता आ बकुल कथा, शंकरक ए पार बांगला ओ पार बांगला, सीमाबद्ध आ विमल मित्रक इकाई दहाई सैकड़ा आ खरीदी कौड़ियों के मोल पढलहुं | एकर अतिरिक्त हरिवंश राय बच्चन, दिनकर आ नागार्जुनक किछु पोथी सेहो पढलहुं | ओशोक किछु पोथी सेहो पढलहुं | ओशो टाइम्स पत्रिका सेहो पढैत छलहुँ | 1992मे 26 जनबरी क’ सीवान क्लब द्वारा आयोजित कवि सम्मलेनमे, 23फरबरीक’ डी ए वी कॉलेजमे आयोजित कवि सम्मेलनमे आ शास्त्री जयन्तीक अवसरपर 2 अक्टूबरक’ सीवानक मिडिल स्कूलक प्रांगणमे आयोजित कवि सम्मलेनमे किछु मैथिली आ हिन्दीक रचना प्रस्तुत केलहुं | क्लबक कार्यक्रममे क्षेत्रीय कार्यालयक सुरक्षा अधिकारी, हरि शंकर मिश्र जी सेहो नजरुल इस्लामक रचना ‘विद्रोही’क पाठ बहुत सुन्दर केने छलाह | कतहु साहित्यिक कार्यक्रम होइत छलै, त अवश्य जाइत छलहुँ | 1992 मे 26 जनवरी क’ पचरुखी मे इप्टाक नाटक ‘जनता पागल हो गई है’ देखलहुं | 28 जनवरीक’ सीवानमे इप्टा द्वारा प्रस्तुत नाटक ‘एक और द्रोणाचार्य’ बहुत नीक लागल | एहि साल 9-10 नवम्बर क’ पटनामे विद्यापति पर्वक अवसरपर सियाराम झा ‘सरस’ सं हुनक किछु रचना सुनलहुं, ‘डिगरी भ’ गेलै झुनझूना साढ़े छबे आनामे’ नीक लागल रह्य |ई रचना ओहि समयमे बिहारमे शिक्षा आ परीक्षाक स्थितिक पोल खोलैत छल | सीवान मे कवि सम्मेलन आ मुशायरा देखब नीक लगैत छल | एक बेर तंग इनायतपुरी( जे असलमे श्रीवास्तव छलाह )क संग डेरापर बैसार भेल | ओ एकटा पांती देलनि : ‘लोग पहचाने गए हैं काम से किरदार से’ एहि पांतीकें ल’क’ एकटा गजल तैयार करबाक लेल कहलनि | हम तैयार त केलहुं,मुदा ओहिसं अपनो संतुष्टि नै भेल | हम गजल लिखबाक कोशिश त करै छलहुं, मुदा गजलक व्याकरणक ज्ञान नै भ’ सकल छल | बच्चन जीक ‘मधुशाला’ बहुत पहिने पढने रही आ ‘की भेटल आ की हेरा गेल’ –आत्म गीत लिखबाक विचार मोनमे आएल छल, ताहि लेल किछु पहिनहुं लिखने रही आ किछु अहू समयमे लिखलहुं | ओहि समय बिहारक जे स्थिति रहै, ताहिपर हमरासं एकटा रचना लिखाएल जे बादमे मैथिली पत्रिका ‘भारती मंडन’ मे प्रकाशित भेल : गीत गोली बारूदक मौसममे हम कविता केहेन सुनाबी हाल देखि बेहाल भेल छी, गीत कोनाक’ गाबी ? गाम-गाम आ शहर-शहरमे आतंकक अछि छाया ठोहि पारिक’ कानि रहल अछि गौतम बुद्धक काया शब्द-शब्दमे चिनगी-चिनगी, शब्द-शब्दमे धधरा अपनहि घर हम जरा रहल छी अप्पन-अप्पन बखरा गामक गाम जरैए धह-धह ककरा कोना बचाबी एहेन हालमे कानि सकै छी, गीत कोनाक’ गाबी ? टूटल सरस्वती केर वीणा केर संगीतक धारा मनुखक छुद्र स्वार्थ पर कनइत अछि विज्ञान बेचारा पत्रहीन सभ गाछ नग्न अछि जेम्हरे देखू तेम्हर कत’ अलोपित भेल गामसं बरक गाछ झमटगर थाकल-हारल लोक सोचैए कत’ कने सुस्ताबी एहेन हालमे अहीं कहू त गीत कोनाक’ गाबी ? बेर-बेर उठबैए हाबा एखनहु वैह सवाल बुद्ध –महावीरक ई धरती एहेन किए कंगाल द्रोण -भीष्मकेर चुप्पी आ धृतराष्ट्रक कुत्सित सपना बेर-बेर दोहराएल जाइत अछि लाक्षागृह केर घटना उचित यैह जे आमक खातिर आमक गाछ लगाबी चलै-चलू हम सभ हिलि-मिलिक’ अपन बिहार बचाबी | शिशवा गामक महादेव ठाकुर हारमोनियमपर नीक गीत गबैत छलाह, हमरासं किछु गीत लिखबौने छलाह, करीब दसटा गीतक कैसेट बनबौलनि, एकटा प्रति हमरो देलनि | ओहिमे निम्नलिखित गीत सभ छल : ‘आउ आइ हम सभ हिलि मिलिक’ मांक उतारी आरती’ ‘एना गे सुगिया कतेक दिन रहबें’ ‘बौआ बनि गेल नेता दाढ़ी बढ़ाक’ ‘आइ धरतियो लगैछ नव कनियाँ जेना’ ‘सजाउ हे यै बहिना, मैथिलीक प्रतिमा सजाउ’ ‘आजुक राति कथीले’ रे भैया, आजुक राति कथीले’ ‘छोटे-मोटे टूटल मडैयामे गौरी कोनाक’ रहती हे’ आ किछु और गीत | बादमे स्थानान्तरणपर बिहारसं बाहर जेबाक कारणे ने शशिकान्तजी-सुधाकान्तजीसं सम्पर्क राखि सकलहुं ने महादेवजीसं | रामचंद्र बाबूक मकानमे : मकान फ़ैल छलै, एकेटा कमी छलै, पानिक व्यवस्था नियमित नहि छलै, जाहि कारण असुविधा होइत छल तथापि एहि बेर सीवानमे जाधरि रहलहुं, अही मकानमे रहलहुं | द्विरागमनक बाद एक बेर किछु दिन एहि ठाम हमर अनुज ललनजी सपत्नी रहलाह | एक बेर दू सप्ताह लेल हमर ससुर आ डुमरा बला साढू पत्नी आ छोट बालक नीरजक संग रहलाह | ओहि समय हम सभ स्नान करबाक लेल विशेष उपाय करैत छलहुँ | सड़कक पच्छिम प्रथम तलपर हमर आवास छल आ सडकक पूब अवकाशप्राप्त प्राचार्य महेन्द्र बाबूक पैघ हातामे एकटा इनार छलै, आदमी बढलापर पुरुष लोकनि स्नान करबाक लेल ओहि इनारपर जाइत छलाह | ओहि हातामे एकटा चापा कल सेहो छलै, हम अधिक काल चापा कलक उपयोग करैत छलहुँ | एक बेर पटनासं मामा सेहो सपरिवार दस दिन लेल एलाह आ जेना-तेना काज चलि गेल | पान आ तमाकुल : सीवानमे पान बहुत खाए लगलहुं | काली मन्दिर लग पानक दोकान तेहेन सुन्दर पान खुअबैत छलै जे बेर-बेर खेबाक लेल प्रेरित करै छलै | दिन-दिन आदति पुष्ट भेल जा रहल छल | क्षेत्रीय कार्यालयक सुरक्षा अधिकारी लोकक स्वास्थ्यक सेहो चिन्ता करैत छलाह | ओ कय बेर कहैत छलाह पान छोडि देबाक लेल | एक बेर बहुत दृढ़ संकल्प ल’क’ छोडि देबाक निर्णय लेलहुं आ पान खाएब छोडि देलहुं, मुदा मोन विचलित होमय लागल | मोनकें ठकबाक लेल तमाकुल कखनोक’ खाए लगलहुं | मुदा मोन कनीसं मानैत नै छल , तकर परिणाम भेल जे जेना पहिने पान खाइ छलहुँ, तहिना तमाकुल खाए लगलहुं | ई और खतरनाक छल | एक दिन प्रो. गंगा नन्द झाजी कहलनि, ‘अहाँसं शिकायत अछि, अहाँ पान खाएब छोडि देलहुं त तमाकुल किए खाए लगलहुं |’ हम बहुत गंभीरतासं विचार करैत एक दिन तमाकुल सेहो छोडि देलहुं | तमाकुलक सेवन हमर पूर्वज सभ सेहो केने छलाह | हमरा टोलमे एक-दू घर छोडिक’ सभ घरमे जवान आ बूढ़ लोक सभ द्वारा तमाकुलक सेवन चलैत छल | हमर बाबा (दादा) सेहो अपने बाड़ीमे तमाकुल उपजबैत छलाह, ओकरा सरियाक’ रखैत छलाह आ साल भरि ओकर सेवन करैत छलाह | बाबू कलकत्तासं एलाह त ओहो एकर सेवन करय लगलाह | हम बी.एस.सी. पार्ट एक तक पान-सुपारी-तमाकुलसं दूर रहैत छलहुं | ढोली एग्रीकल्चर कॉलेजमे एक बेर एक संगीक जोरपर सिगरेट मुंहमे लेलहुं, मुदा चक्कर जकाँ आबि गेल | ओही दिन सिगरेटसं मुक्ति भेटि गेल | बहुत पहिने एक बेर रातिमे हमरा दांतमे दर्द उठल | बेचैन भेलहुँ | रातिमे और कोनो उपाय नहि देखि हमर पिता कनी तमाकुल चुनाक’ देलनि आ कहलनि जत’ दर्द करैछह ओत’ राखि दहक | हमरा तेहेन निशा लागल जे सबेरे तक सूतल रहि गेलहुँ | तकरा बाद बहुत दिन धरि ने दांतमे दर्द भेल आ ने तमाकुल दिस तकबाक हिम्मति भेल | बादमे जखन कखनो दांतमे दर्द हुए त हम तमाकुलक उपयोग करय लगलहुं | धीरे-धीरे पानक विकल्प तमाकुल आ तमाकुलक विकल्प पान भ’ गेल | क्यो एकर अधलाह पक्ष दिस सचेत नहि क’ सकलाह | बहुत दिन बाद मिश्र जी आ प्रो. गंगानंद झा एहेन लोक भेटलाह जे पान आ तमाकुलसं मुक्तिक लेल प्रेरित केलनि आ हम अपनापर नियंत्रण क’ सकलहुं | किछु दिन त निमाहि लेलहुं, मुदा एकटा सम्बन्धी एलाह आ कहलनि जे एक-दू बेर खेबामे हर्ज नै छै, ओ खाइत छलाह, हमरासं ओ प्रभावित नहि भेलाह, हमहीं हुनक प्रभावमे आबि गेलहुं आ कखनो-कखनोक’ लेब’ लगलहुं | धीरे-धीरे फेर पूर्ववत तमाकुलक अधीन भ’ गेलहुँ | एहिसं मुक्तिक लेल आवश्यक मंत्र तकबामे चौदह बरख लागि गेल | जबलपुर पहुंचलापर कारगर मंत्र भेटल जे एक संग पान, तमाकुल, माछ-मांस, पियाजु-लहसुन सभसं मुक्ति दिया देलक | ओहि मंत्रक चर्चा आगाँ समय एलापर करब | देश आ प्रान्तक राजनीति : 1989 मे 2 दिसम्बरक’ केन्द्रमे राष्ट्रीय मोर्चाक सरकारमे विश्वनाथ प्रताप सिंह प्रधान मन्त्री भेलाह | 1990 मे 7 अगस्तक’ प्रधानमन्त्री द्वारा मंडल आयोगक अनुशंसाकें क्रियान्वित करबाक घोषणा भेल | एहि घोषणाक विरोधमे पूरा देशमे छात्र-आन्दोलन शुरू भ’ गेल , कतेक युवक द्वारा आत्मदाहक घोषणा हुअ’ लागल | 25 सितम्बरक’ अयोध्यामे विवादास्पद बाबरी मस्जिद –राम जन्मभूमिपर मन्दिर निर्माण हेतु भाजपाध्यक्ष लाल कृष्ण आडवाणी द्वारा गुजरातमे सोमनाथ मन्दिरसं रथ-यात्रा आरम्भ भेल | 23 अक्टूबरक’ लाल कृष्ण आडवानीकें समस्तीपुरमे गिरफ्तार क’ लेल गेलनि, भाजपा राष्ट्रीय मोर्चा सरकारसं समर्थन वापस ल’ लेलक आ 7 नवम्बरक’ राष्ट्रीय मोर्चा सरकार खसि पड़लै | 1991मे 21 मइक’ राजीव गांधी बमसं मारल गेलाह, 21 जूनक’ पी. वी, नरसिंहा राव प्रधान मन्त्री भेलाह | बिहारक स्थिति दयनीय भ’ गेल छल | जे सरकार छलै से सरकार लेल छलै | अशान्ति आ असुरक्षाक वातावरण उपस्थित छलै | सीवानमे ई स्थिति बेशी कष्टकर भ’ गेल छलै |शिक्षाक मन्दिर सभ अनाथ जकाँ भ’ गेल छल | स्थिति एतेक जबदाह भ’ गेल छलै जे पीड़ित लोक अस्पताल जेबासं, लोक लोकक जिज्ञासामे जेबासं आ अखबार सभ सही बात लोकक सोझाँ अनबासं डेराइत छल | आर्यावर्त, इंडियन नेशन बन्द भ’ गेल छल | माटि-पानि सेहो बन्द भ’ गेल छल | सरकार द्वारा लोक सेवा आयोगसं मैथिली विषयकें हटा देल गेल | राज्यमे विरोधक स्वर दबल रहल | असामान्य स्थितिक प्रभाव बैंक सभपर नहि छलै, तथापि सीवानक हवा विषाक्त लगैत छल | तैपर बिजलीक संकट आ ओहि सं उत्पन्न अनेक असुविधा बेर-बेर ई सोचबापर विवश क’ रहल छल जे कतहु एहेन ठाम स्थानान्तरण होइत जत’ बिजली सदिखन रहैत होइ आ वातावरणमे शान्ति होइ | पारिवारिक स्थिति : परिवार तीन ठाम भ’ गेल छल, गाममे माए-बाबू छलाह, सीवानमे हम पाँच गोटे छलहुँ आ दिल्लीमे अनुज ललनजी आ रतनजी छलाह | बादमे ललनजीक पत्नी सेहो पहुँचलखिन | हम गामपर एकटा बाथ रूमक आवश्यकताक अनुभव करैत छलहुँ, से ललनजीक द्विरागमनसं पूर्व भ’ गेल, दूटा कोठली सेहो हुनक द्विरागमनसं पहिने बनबाओल गेल |एहि लेल बैंकसं ऋण सेहो लेब’ पडल | ललनजी दिल्लीमे आजादपुर मंडीमे काज पकडलनि | बहुत दिन धरि ओत’ एसगरे रहलाह | रतनजी बी एस सी फिजिक्स प्रतिष्ठामे प्रथम श्रेणीमे उतीर्ण भेलाह | बाबूक विचार छलनि जे एम एस सी सेहो क’ लेथि, मुदा हुनका दिल्लीमे जीविकोपार्जन दिस ध्यान छलनि | माए आ बाबू बेरा -बेरी अस्वस्थ रहैत गेलाह | बाबू मधुबनीमे डा.के. के. मिश्रसं देखौलनि, 25 दिनमे किछु लाभ नै भेलनि त दरभंगा जाक’ डा. आर.बी.ठाकुरसं देखौलनि | माएकें सूतलमे कोनो जंतु पैरमे नछोरि लेलकनि, इलाज भेलनि | माए ठीक भेलीह त बाबू दुखित पडलाह | 1992 के सितम्बरमे रतनजी एक बेर पटना मे कोनो परीक्षा दैत गाम गेलाह त बाबूक स्वास्थ्य ठीक नै लगलनि, 16 सितम्बर क’ हुनका नेने दिल्ली चल गेलाह | दिल्लीमे बाबू हमर सभसं छोट बहिन-बहिनोक घरमे रहलाह | ललनजी आ रतनजी सेहो लगेमे रहैत छलखिन | ललनजी किछु मास एसगरे रहलाह,किछु दिन दुनू गोटे बहिन-बहिनो ओत’ रहलाह आ फेर बादमे शैल संगे आदर्श नगर बला मियानीमे रह’ लगलाह | पटेल अस्पतालक डा. पालसं बाबूक इलाज शुरू भेलनि, एकटा आयुर्वेदक आ एकटा यूनानी डा.सं सेहो सम्पर्क कएल गेल | बाबू किछु मास दिल्लीमे रहिक’ स्वस्थ भ’क’ गाम घुरलाह | दिल्लीमे रतनजी सेहो पीलियाक शिकार भेल छलाह | सीवानमे एक राति बच्चीकें बिच्छू डंक मारि देलकनि | डॉक्टरसं देखब’ पडलनि, दबाइ खाए पडलनि | मैथिलीकें एक बेर भरल गमला पैरपर खसि पडलनि | एक बेर माता निकलि गेलखिन | विवेक सेहो अस्वस्थ भेलाह | दरभंगाक डा. वीरेंद्र प्रसादक इलाजमे आ बादमे सीवानमे डा. डी. एन. श्रीवास्तवक इलाजमे रहलाह | हमरा सेहो बोखार भेल, मिश्रजीक सलाहपर डा.निजामुल हसनसं सम्पर्क केलहुं | कहलनि फैलेरिअल फीवर अछि,पन्द्रह दिन दबाइ खाए पडल | हमरा डेराक बगलमे एकटा आँखिक विशेषज्ञ एलाह डा. लाल बहादुर सिंह, हुनकासं आँखिक जांच कराय चश्माक उपयोग करय लगलहुं | परम्परा आ आधुनिकताक समन्वय : अही अवधिमे 1990 मे प्रो.गंगा नन्द झाजीक दुनू बालकक विवाह भेलनि | हमरा सभसं सभ बातक चर्च करैत छलाह | हुनक जेठ बालकक विवाह 1 फरबरीक’ जमालपुरमे भेलनि जाहि ठाम वरियातीमे सीवानसं डा.अमर नाथ ठाकुर जीक संग हमहूँ गेल रही | ओहि वरियातीमे किछु विशेषताक संग परम्परागत विवाह जेना मधुबनी-दरभंगाक गाम सभमे होइछै,तहिना अनुभव भेल, नीक लागल | हुनक दोसर बालकक विवाह आधुनिक ढंगसं भेलनि जाहिमे वरियातीक स्थानपर दुनू दिससं किछु मित्र लोकनि उपस्थित भेलखिन आ दुनू दिससं माता-पिताक उपस्थितिमे आ हुनका लोकनिक आशीषक संग दू-तीन घंटामे विवाहसं द्विरागमनधरिक सभ कार्यक्रम आ सभ पावनि-तिहार पटनामे संपन्न भेल | हमरा एहि दुनू विवाहसं सिखबाक लेल बहुत किछु भेटल | माता-पिताकें अपन बालकक अनुरूप पुतोहु तकबामे कोन-कोन बातकें प्राथमिकता देबाक चाही आ कोन-कोन बातपर अपन सहमति आ आशीर्वाद देबाक लेल अपनाकें तैयार रखबाक चाही, से हमरा सिखबाक अवसर भेटल | अपनो मोने विवाह करब त माता-पिता आ मित्र-बन्धुक आशीर्वाद आ शुभकामनाक संग करब, ईहो उदाहरण नव लोक सभ लेल बहुत अनुकरणीय आ प्रशंसनीय लागल | एकमात्र योग्य पुत्रक पिता विश्व प्रसिद्द किडनी विशेषज्ञ डा.विवेकानंद झा आ एकमात्र योग्य पुत्रीक पिता साहित्यकार-चिन्तक आ दिल्ली विश्वविद्यालयक चर्चित प्रोफ़ेसर अपूर्वानन्द आधुनिक भारतीय समाज लेल सफल आ सबल दाम्पत्य जीवनक संग संतुलित पारिवारिक आ सामाजिक जीवनक अदभुत उदाहरण प्रस्तुत करैत छथि | हमरा हर्ष अछि जे हिनका लोकनिकें लगसं देखबाक आ जनबाक अवसर प्राप्त भेल अछि | माएक संग तीर्थाटन : 1991 के अक्टूबरमे रतनजी शान्ती बहिनकें गामपर राखि माएकें सीवान नेने एलाह | एल.टी.सी.क सुविधाक उपयोग करबाक विचार भेल | सिवानसं सभ गोटे दिल्ली गेलहुँ, बहिन-बहिनोक घर पर रहलहुं | एक दिन दू टा ऑटो रिक्शा ल’क’ सभ गोटे दिल्लीमे लाल किला,इंडिया गेट,राजघाट,विजय घाट,शक्ति स्थल,शान्ति वन,चिड़िया खाना,लोटस मन्दिर आदि बहुत ठाम घूमै गेलहुँ | किछु दिनक बाद एक दिन एकटा गाड़ी ल’क’ सभ गोटे हरिद्वार आ ऋषिकेशमे कय ठाम घूमै गेलहुँ | ऋषिकेशमे लक्ष्मण झूलापर द’ क’ दोसर कात मन्दिर सभ घूमैत रातिमे पुनः हरिद्वार पहुंचि श्री राम धर्मशालामे विश्राम करै गेलहुँ | दोसर दिन हरकी पौरी गेलहुँ,ट्रालीसं मनसा देवी मन्दिर गेलहुँ | ओत’सं भारत माता मन्दिर,राम हनुमान मन्दिर देखैत पाँच बजे गाड़ीसं विदा भ’ गेलहुँ | फेर किछु दिन बाद एकटा गाड़ी ल’क’ सभ गोटे आगरा, मथुरा, वृन्दावनमे कए ठाम घूमि अबै गेलहुँ | ई यात्रा सभ गोटेक लेल बहुत आनन्द प्रदान करैबला रहल | रतनजी नोकरीक लेल ओतहि रहि गेलाह आ हम सभ माए संग सीवान घूरि माएकें गाम पहुंचा देलियनि | 1992 मे वसन्त (वंदना )क दसमी बोर्डक परीक्षा भेलनि | द्वितीय श्रेणीमे उतीर्ण भेलीह,900 मे 533 अंक एलनि, 59.2 प्रतिशत | पदोन्नति : 1992 मे स्केल II मे पदोन्नतिक प्रक्रियामे 17 जुलाइ क’ साक्षात्कार भेलै, 21 अक्टूबर क’ परिणाम घोषित भेलै, हमहूँ सफल भेलहुँ | ओहि बेर किछु गोटेकें मध्य प्रदेश जाए पड़लनि, पैंतालीस बरखसं बेशी वयसबलाकें बाहर नै जाए पडलनि | हम पैंतालीसक भीतरे रही, तें आंचलिक कार्यालय,रायपुरमे योगदान देबक लेल जिनका सभकें आदेश भेटल रहनि, ओहिमे हमहूँ रही |30 नवम्बरक’ हमरा सभकें रायपुर आंचलिक कार्यालय पहुँचबाक छल | अही बीचमे जमशेदपुरसं वीणाक विवाहक सूचना भेटल | वीणा आ ममता दुनू बहिन नान्हिए टा रहथि त माए दुनियाँ छोडि देलखिन, किछु दिन गाममे रहलाक बाद दुनू गोटे जमशेदपुरमे जेठ भाए,भौजी,भातिज आ भतीजी सबहक संग रह्य लगलीह | साढ़ू समय-समयपर कलकत्तासं आबिक’ भेंट क’ जाइत छलखिन | वैह वीणा, हमर साढूक जेठ पुत्री वीणाक विवाह भ’ रहल छनि जमशेदपुरमे आ हमरा जमशेदपुर होइत जेबाक अछि रायपुर | कार्यक्रममे कनी सामंजस्य केलासं हम विवाह दिन त नहि, विवाहक तेसर दिन भेंट क’ सकैत छी हुनका सबहक |बच्ची अपन पिता लेल स्वेटर आ मफलर बुनने छथि सेहो द’ देबनि आ सभ गोटे सं भेंट-घाँट सेहो भ’ जाएत | तदनुसार कार्यक्रम बनल जे पटनासं जमशेदपुर भोरे पहुंचब, सरोज स्टेशनसं हमरा डेरापर ल’ जेताह, ओत’ दिन भरि सभसं भेंट-गप करैत वर-कनियाँ कें आशीर्वाद दैत साँझमे जमशेदपुरसं रायपुर बला ट्रेन पकड़ि लेब | अही अनुसार ट्रेनमे आरक्षण कराओल | 27 नवम्बरक’ पचरुखी शाखासं भारमुक्त भए रायपुर जेबाक लेल सीवानसं 28 क’ एसगरे प्रस्थान केलहुं | सीवान स्टेशनपर तंग इनायतपुरी भेटलाह, हमरा विदा करैत ओ अपन कोनो मित्र-शायरक एकटा शेर सुनौलनि : ‘मुझे थकने नहीं देता है जरूरतों का पहाड़ मेरे बच्चे मुझे बूढ़ा होने नहीं देते’ ई शेर भरि रस्ता हमरा बझेने रहल | (क्रमशः) पटना / 14.10.2021 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ज्ञानवर्द्धन कंठ भोगी बनलाह बाघ भोगी मैथिलीमे 'बी ए' की कयलाह,बड़का भोगे भोगि रहलाह अछि।जे सभ 'एम ए' रहय ओकरा त' परफेसरीओक आस रहैक,मुदा 'बी ए- बरद'क दरद के बुझैए?मैथिलीक परफेसर भ' सकैत छी,इस्कूलक मास्टर नहि।प्राथमिक कक्षामे जँ पढ़ाइ होइतैक,त' कनी गुंजाइश भइयो सकैत रहैक।मुदा भोगी बाजथि,त' बाजथि की?कहथि त' कहथि ककरा?गुड़क मारि धोकरे जनैए।भोगी पछिला रोटी खयने रहथि। जहिया सोचलनि 'एम ए' क' लैत छी, तहिया यूनिवर्सिटीए जवाब द' देलकनि।काउंटरपरक बाबू मुँह बिदूरि कहलकनि- "एतेक दिन कत' घास छीलैत रही? एडमिसने बन्न भ' गेल आब।पंछी चलल बासके त' जोलहा चलला घास के।" भोगी अपन भागपर अछतैत- पछतैत दिन गिन रहल छलाह। नहि जानि, कहिया दिन घुरतनि! मुदा एक दिन आन्हरोक लेल इजोत होइत छैक।भोगियोक भागक द्वार खुजलनि।भेलैक ई जे नवानीक चैती-दुर्गामे 'हिन्दुस्तान सर्कस' लगलैक।ओकर टेंट लागि रहल रहैक।भोगी लग सहटिक' एकटा सईस एलनि आ पुछलकनि- "कतेक पढ़ल छह?" भोगी बजलाह-"मैथिलीसँ 'बी ए' कएने बेरोजगार भेल फिफिया रहल छी।" पुछलकनि- "सर्कसमे काज करबह?" भोगी अकचका गेलाह -"आँय? सर्कसमे हम कोन काज करबैक?हम कोन काजक लोक छी?" ओ उत्तर देलकनि- "बाघ बन' पड़तह,नीक पाइ भेटतह।मंजूर हुअ त' मालिकसँ बात करा देबह।" भोगी कहलथिन-"हम मनुख त' ओतेक नहिए छी,मुदा बाघ बनि जायब,से ततबो नहि छी।" ओ कहलकनि-"तकर चिंता नहि करह।रिंग मास्टर रहैत छैक।सभटा सिखा देतौह।तों खाली 'हँ' त' कहक।" भोगीक मोन चपचपा गेलनि।अन्हरा चाहय दूनू आँखि।मालिक हिनका राखि लेलकनि।नकली खाल ओढ़ा बाघ बना पिंजरामे ढुका देलकनि।ओहिमे एकटा अजोध बाघ पहिनेसँ बैसल रहय।ओ हिनका देखि मूड़ी उचकाक' देह जोरसँ झाड़लक।भोगीक सिट्टी-पिट्टी गुम!बरहम बाबाकेँ गोहराब' लगलाह- "हे बरहम बाबा!एहि बेरहम बाघसँ बचाबह।बड़ी फँसान फँसल छी।आइ ई बाघ हमरा गिड़नेहे अछि।अपटी खेतमे हमर परान जा रहलए।बरहम भोज करेबह हे बरहम बाबा!अरौ तोरीक तोरी!इम्हरे आबि रहल अछि।बड्ड बरंबताह बाघ बूझि पड़ि रहलए..." तावत ओ बाघ बाघ-बनल भोगीक लग आबि गेल रहैक।भोगीक जीह सकपंज भेल रहनि। करेज भालरि जकाँ थरथर काँपि रहल रहनि।ओ बाघ धीरे-धीरे हिनका सूँघ' लगलनि।तखन ओ अपन मुँह हिनक कान लग ल' गेलनि।भोगी-बाघ बाघ-डरे आँखि मुनि लेलनि।तखने ओ बाघ हिनक कानमे फुसफुसेलनि-"तोहूँ मैथिलीएमे 'बी ए' कयने छह की?" अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। डॉ. किशन कारीगर लोक कलाकार ढोल पिपही वला के खोज खबैर के राखत? लोक कलाकार सब के पोसबा संरक्षित करबा मे मिथिलाक लोक के नै कहियो ओतेक उत्साह रहलै आ ताबे कोन तेहेन बेगरते हइ? बड्ड बेसी त दुर्गा पूजा मे बिधि पूराउ, की मूरन उपनेन मे मंगाउ आ बियाह शादी मे जेकरा बैंड पाटी सटा नै भेलै आ की गरीब लोक हइ त ढ़ोल पिपही बला के बजौतै. तकरा बाद ढोल पिपही बला सब जड़ौ की मरौ केकरा कोन माने मतलब हइ आ बलू कथी लै रहतै ग. हमरा अरू कना जीबै खेबै? इ ढ़ोल पिपही केना बांचल रहतै कोइ ने सोचै जाइ हइ? आब ढ़ोल पिपही आस्ते आस्ते उठाएब भ गेलै. डी जे नाच आगू हमरा ढोल पिपही बला के खोज खबैर रखतै ग? पहिने मिथिला के गामे गाम सब मे दुर्गा पूजा, मूरन उपनेन, बियाह तिलक सब मे ढोल पिपही बजबाएब के परंपरा रहै. पिपही (शहनाई) के मांगलिक धून, ओकरा संगे डूगडूगी के डूग डूग, झुनझुना बजौनिहार सब के धून बेस लोक के मोन मोहि लैत रहै. लोक कलाकार ढोल पिपही वला सब लोकाचार, गीत नाद, भगवति सुमिरन, सोहर समदाउन, थोड़े फिल्मी धुन सब सेहो बजबै आ खूब सोहनगर रमनगर लगै. धिया पूता बुढ़ पुरान छौंड़ा मारेर, जनिजाइत सब ढोल पिपही वला सबके कलाकारी देखै सुनै छलै. मोन पड़ैए हमरा अपने पैतृक गाम मंगरौना के नामी ढोल पिपही कलाकार जुगेसर राम, देबन राम, सीताराम राम, बनैया, भोला राम सब जे सब ढोल पिपही कला मे बेस पारंगत रहै जाइ. गामक दुर्गास्थान मे ओ सब ढोल पिपही पर धून बजबै जाइ.. भगवती बसै यै बरी दूर गमक लागे गेंदा के फूल. सोहर, समदाउन बजबै. सुननाहर सब बेस भक्ति भाव, सोहनगर मोन स ढोल पिपही वला के सुनै. जेकरा जे जुड़ै से खुशनामा मे रूपैया पैसा दै. पूजा कमिटी दिस स सेहो रूपैया देल जाइ. दुर्गा पूजा मे इ कलाकार सब 9बो दिन आ दसमी के भसाउन तक ढोल पिपही बजबैत रहै. आब त कोनो कोनो गाम मे ढोल पिपही वला सब बंचलै सेहो आब दुर्गे पूजा टा मे कतौ कतौ देखल जेतै. हमरो गाम कलाकार सह आब नै रहलै आ नव पिढी सब अइ कला के सीखो नै रहलै आ नै मिथिला समाज मे तेहेन ओतेक मोजर देल जाइ छै. कलाकार सब परदेश कमाई लै चल गेलै त कोइ खेती बारी मे लागल यै, त नबका लोक सब सीखबे नै करैए. त आब आस्ते आस्ते ढोल पिपही कलाकार सेहो बिलुप्त भेल जा रहलै. बड्ड चिंता के गप? मिथिला समाज के लोक के आगू बढि लोक कलाकार सब के जियाअ के राखै परतै. ढोल पिपही बला लोक कलाकार के खोज खबैर रखै जाउ. एइ कलाकार सबके प्रोत्साहन आर्थिक मदैद क ढोल पिपही सन रमनगर सोहनगर लोक वाद्य रंग के बंचा के रखै जाइ जाउ. ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। आशीष अनचिन्हार भूमिका एक: फाँक अनेक (आलोचना) 1 लूरि किछुओ सीख ले नहि सदति अंदाज कर (शाइर-बाबा बैद्यनाथ, मात्राक्रम-2122-212) रचनाकारक तौरपर हम ई मानै छी जे कोनो रचना नीक-खराप भऽ सकैए मुदा एकटा विचारक केर तौरपर हम ईहो मानै छी जे खराप रचनाकेँ येन-केन-प्रकारेण "नीक" साबित करबा उद्योग अंततः रचनाकारक पतनक पहिल सीढ़ी बनैए आ साहित्यक पतन केर सेहो। 2 कथित गजल संग्रह (जे बिना बहर-काफिया केर हो) आब हमरा प्राप्त नै होइए। बहुत रास प्रकाशकीय-लेखकीय निर्देश अनचिन्हारक नामपर देल गेल छै से हमरा बुझाइए (एकर अपवाद सेहो छै) आ तँइ कमल मोहन चुन्नू जीक कथित गजल संग्रह "आबि रहल एक हाहि" केर भूमिका फोटो रूपमे प्राप्त करबाक जोगाड़ हमरा करए पड़ल। एहि ठाम रचनाकार खुश भऽ सकै छथि जे हम एतेक प्रतापी जे हमरा `कियो "इग्नोर" नै कऽ सकल मुदा हुनका शायद ई पता हेतनि जे एहि पाँतिक लेखक केकरो इग्नोर करिते नै छै। कहियो-कहियो आलस आबि जाइए तँ वरिष्ठ सभ कहि दै छथि जे जाहि विधामे छी ताहि विधाक मामूलियो बातकेँ नोटिस लेबाक चाही आ तकर बाद फेर मोन बनि जाइत छै आ तकरे परिणाम अछि ई आलेख (सीधा बात जे ओ सभ हमरा इग्नोर करताह मुदा हम हुनका सभकेँ इग्नोर नै करबनि)। हमर प्रयास रहैए जे मामूलियो बातक मंथनसँ हम साहित्य केर हित कऽ सकी। आ अही कारणसँ मात्र 13 बर्खमे बिना कोनो मंच बिना कोनो फंडकेँ मैथिली गजलमे एकटा एहन विमर्श शुरू भेलै जकरासँ बचि निकलबाक कोनो साधन आब किनको लग नै छनि। अन्यथा मैथिली गजलमे कियो चालिस, कियो पचास बर्खसँ छथि मुदा गजलक लक्ष्य हुनका सभसँ दूर भऽ गेल छनि। 2008 ई.सँ पहिने जे सभ गजलमे सुखासनमे छलाह से सभ आब शीर्षासनमे लागल छथि। लोक केकरो नाम लीखथु वा कि नै नै लीखथु ,बाजथु वा कि नै बाजथु मुदा 2008 क बाद बला एहि विमर्शक पहिचान वाटरमार्क रूपमे हुनकर लीखल -बाजल हरेक पाँतिमे भेटत। कुल मिला कऽ बात ई जे आब हम चुन्नूजीक कथित गजल संग्रहक भूमिकापर बात करब। ई भूमिका पृष्ठ 9 सँ लऽ कऽ 18 धरि अछि। एहि भूमिकामे सेहो 2008 क बाद बला विमर्शक पहिचान वाटरमार्क रूपमे भेटत। 2008 मे मैथिली गजल के पहिल आ एखन धरिक अंतिम शोध ब्लाग "अनचिन्हार आखर" केर निर्माण भेल छल जे एखनो एक्टिभ अछि। राणा प्रताप नहि अकबर नहि असगर चेतक सुल्तान बढल (शाइर-राजीव रंजन मिश्र, मात्राक्रम-22-22-22-22) 3 गजल लिखबासँ पहिने चुन्नूजी नाटक विधामे महारत (अइ महारत शब्दकेँ सर्टिफाइ नाटक विधाक लोक करताह) हासिल केने छथि आ ओहिमे बहुत रास आलोचना-समीक्षा लिखने छथि। संभवतः निनाद आ रंगमंच कहि हुनकर नाटक आलोचनापर दू टा पोथी आएलो छनि। आनो विधापर आलोचना लिखने हेता से हमरा विश्वास अछि। विश्वासक कारण ई जे मैथिलीमे सभा-संस्था वा कि विद्यालय-विश्वविद्यालय बला सभ बाइ-डिफाल्ट विद्वान होइ छथि। एहन अवस्थामे चुन्नूजी सेहो विद्वान हेबे करताह। मुदा हमर सौभाग्य देखू जे आन विद्वानसँ अलग चुन्नूजी साहसी लोक छथि। साहस केर संदर्भ ई जे चुन्नूजीमे शायद अपनाकेँ खारिज करबाक, अपन लिखलकेँ खारिज करबाक साहस छनि। पद पराक्रम मुखर के कहत की कहू दंभ अछि बड़ सुघड़ मुग्ध दरबार सब (शाइर-विजयनाथ झा, मात्राक्रम-212-212-212-212-212) 4 पृष्ठ-10 पर चुन्नू जी अपन रचनाक अप्रत्यक्ष रूपें स्वमूल्यांकन करैत लिखैत छथि जे "बड़दक दाम बड़दे कहत" आ से लीखि ओ अपन लीखल हरेक आलोचनाकेँ ओ खारिज कऽ देलाह। निनाद आ रंगमंच नामक हुनक पोथी नाटक आलोचनापर छनि आ जँ हुनकर वर्तमान मतकेँ (गजल बला) देखल जाए तँ साफे मतलब छै जे नाटक अपन बात अपने कहतै एहि लेल चुन्नूजी सहित आन कोनो लोकक जरूरति नै छै। चुन्नूजी जे लिखलाह तकर साफ-साफ मतलब छै जे ओ अपने (चुन्नूजी) जाहि-जाहि रचना-पोथीपर आलोचना लिखने हेता से रचना-पोथी सभ ततेक बौक रहल हेतै जे ओकरा बाजए लेल चुन्नूजीक सहारा लेबए पड़लै। से आब ओहन लेखक सभ जानथि जिनकर रचना-पोथीपर चुन्नूजी आलोचना लिखने छथिन। जिनकर रचनापर चुन्नूजी लिखने छथिन जँ हुनका बुझाइत छनि जे चुन्नूजीक उपरक देल विचार गलत छनि तँ आगू आबि चुन्नूजीक विचारकेँ गलत कहथि। समयक फेर छै आ तँइ रहीमक हीरा एखनो धरि अपन मोल नै कहि सकल अछि मुदा चुन्नूजीक बड़द अपन दाम कहि रहल छै। संगे-संग हम ईहो बात कहब जे चुन्नूजी द्वारा भविष्यमे लिखल गेल कोनो आलोचना-समीक्षा (भूमिका रूपमे सेहो), आलेखपर सेहो उपरक बात लागू हएत। भविष्यमे जाहि लेखक केर रचनाक उपर चुन्नूजी लिखता तिनका बारेमे ई मानि लेल जेतनि जे हुनकर रचना बौक छलनि तँइ आलोचकक जरूरति पड़लै। विरोधाभास एहन जे अही पृष्ठपर आगू चलि चुन्नूजी लीखि रहल छथि जे "..तें हम अपन गजलक मादे अपनहि किछु नहि कहब"। एकर मतलब साफ छै जे या तँ ओ अपने दाम कहताह वा हुनकर बड़द दाम कहतनि, तेसर कियो नै कहि सकैए। माने जँ हुनकर बड़द अपन दाम नै कहलकनि तैयो ओ कोनो बड़द विशेषज्ञकेँ नै बाजए देताह। जँ बड़द रचना भेल तँ बड़द विशेषज्ञ आलोचक भेलाह। चुन्नूजी अपन लिखल आलोचनाकेँ खारिज कऽ सकै छथि मुदा ओ बहुत महीन रूपसँ नैरेटिभ बना कऽ मैथिलीमे आलोचना विधाकेँ मारबाक जे खडयंत्र केलाह अछि से आपत्तिजनक बात अछि। लेखके नै मैथिलीक आलोचको सभकेँ एहि बातक धेआन रखबाक चाही। सोचियौ खाली चुन्नुए जीक बड़द किए दाम कहतै, सभ लेखक केर बड़द दाम कहतै ने। जेना चुन्नूजी इशारामे विशेषज्ञ केर निषेध करै छथि तेनाहिते दोसरो करतै। एहन स्थितिमे आलोचना विधा रहतै कतए से सोचू। तँइ हम कहलहुँ जे चुन्नूजी बहुत महीन रूपसँ मैथिलीमे आलोचना विधाकेँ मारबाक खडयंत्र केलाह अछि। ई खडयंत्र हम किछु आलोचक जेना भीमनाथ झा, अरविन्द ठाकुर, अशोक, शिवशंकर श्रीनिवास, कैलाश कुमार मिश्र, प्रदीप बिहारी, नारायणजी, केदार कानन, विद्यानंद झा, कुणाल, कमलानंद झा, किशोर केशव आदिक सामने स्पष्ट कऽ रहल छी। ओना ई बाध्यता नै छै जे एहि ठाम किनको टिप्पणी करहे पड़तनि। कारण हमर मानब अछि जे सभहक अपन सीमा ओ सुविधा छै। जहिया जिनका जेहन सुविधा बुझेतनि ताहि अनुरूपे ओ अपन विचार व्यक्त करताह। बहुत संभव जे किछु लोक भविष्येमे जा कऽ एहिपर टिप्पणी करथि। हमर काज छल एहि खडयंत्रकेँ सामने आनब आ एकर विरोधमे पहिल पाँति लीखब से हम केलहुँ। त्वरित टिप्पणी आ भविष्यमे जा कऽ लिखल टिप्पणी दूनूक अपन मेरिट-डिमेरिट छै। एहि प्रसंगमे जेना-जेना समय बीतैत चलि जेतै तेना-तेना आलोचक सभहक अपने लिखल आलोचना एहि घटनापर प्रश्न पुछतनि। आ तहिया बहुत बिखाह भऽ कऽ पुछतनि। तँइ सुविधा आ नैतिकता दूनूमेसँ जकर पलड़ा भारी हेतै ताहि अनुरूपे आलोचक सभ एहि घटनापर अपन विचार जरूर देताह से हमरा विश्वास अछि। जे आलोचक चुन्नूजीक बातसँ सहमत छथि से अपन लीखल आलोचनाकेँ अपनेसँ खारिज कऽ रहल छथि। आ से खारिज ओ चुन्नूजी जकाँ साहसक संग करथि तँ बेसी नीक। लोक कतबो हुए जोरगर अन्तमे सभ नचरि जाइए (शाइर-जगदीश चंद्र ठाकुर 'अनिल', मात्राक्रम-212-212-212) 5 पृष्ठ-11 पर चुन्नूजी लिखैत छथि जे एक संप्रदाय व्याकरण छंद अक्षुण्ण रखबाक समर्थक छथि चाहे कथ्य विचार आदि चोटलग्गू किएक ने भऽ जाए। मुदा चुन्नू जी अपन बातक पुष्टि लेल एकौटा उदाहरण चाहे गजल कि शेर रूपमे नै राखि सकल छथि। जखन कि बिना व्याकरण-छंद (बहर-काफिया-रदीफ)क गजल नै होइत छै ताहि लेल अनेक उदाहरण रचनाकारक नाम सहित छांदिक संप्रदाय द्वारा देल गेल छै। जँ चुन्नूजी आ हुनकर विचार सही छनि तखन उदाहरण देबामे डर कथिक? जँ कोनो गजल बहर-छंदमे छै मुदा ओ निरर्थक अक्षरक समूह छै तँ ओ उदाहरण सहित जनताक सामनेमे रखबाक चाही चुन्नूजीकेँ। चुन्नुएजी नै हरेक बेबहर कथित गजलकार सभ ई कहने फीरै छथि जे बहर-काफियासँ कथ्य कमजोर भऽ जाइत छै मुदा ओहो सभ कोनो उदाहरण एखन धरि नै दऽ सकल छथि। एकर साफ मतलब भेल जे बहर-काफिया माने असल गजल सभ मजगूत अछि आ बेबहर कथित गजलकार सभ मात्र ढेप फेकि अपनाकेँ ओ अपन गुटकेँ खुश कऽ लै छथि। लोक कहि सकै छथि जे चुन्नूजी अपन गजलक अग्रसारण लेल ई भूमिका लिखलाह तँइ उदाहरण देब उचित नै। मुदा जँ भूमिकामे विधापर बात हो (कोनो रूपमे) तँ ओ अग्रसारण नै रहि जाइत छै आ विधापर बात जँ संदर्भहीन हो तँ ओ उचित नै। कविवर सीताराम झाजीक वैचारिकता बहरक पालनसँ नै टूटै छनि, योगानंद हीरा, जगदीश चंद्र ठाकुर 'अनिल' जीक नै टूटै छनि, दुष्यंत कुमार, अदम गोंडवी सहित आन केकरो वैचारिकता बहरसँ नै टूटै छै मुदा चुन्नूजीक टुटि जाइत छनि तँ एकर मतलब ई भेल जे चुन्नूजीमे गजल कहबाक / लिखबाक क्षमता नै छनि। अरे भलेमानस बाबू, कमसँ कम औपचारिकतोवश कोनो गजल, कोनो शेर दऽ कहू जे एहिमे बहर छै आ बहरक कारण अर्थ नै छै। हम सभ मानि लेब। अथवा ईहो कहि दियौ जे ई गजल वा ई शेर हमरा बुझबामे नै आएल। हम सभ ईहो मानि लेब। चुन्नूजी हमर एहि आग्रहकेँ चैलेंज बूझथि। असल बात ई जे मैथिलीक किछु लेखक अपन कमजोरीकेँ पूरा मैथिली साहित्य / पूरा विधाक कमजोरी बना देबाक सफल अभियान चला लेने अछि। केकरो पाँच सए पन्ना नै लीखल होइत छै तँइ ओ गोलौसी कऽ पचास पन्नाक उपन्यासक सरदार बनि जाइए। केकरो बहर नै सीखल होइत छै तँ वैचारिकताक नाम दऽ गजलमे बहरकेँ बेकार कहि दैए। मैथिली साहित्य केर असल बेमारी इएह आ एहने लेखक सभ अछि। भाषण आमो पर दै छै थुर्री लताम बला लोक (शाइर-प्रदीप पुष्प, मात्राक्रम-22-22-22-2) 6 पृष्ठ-11 पर चुन्नू जी फेर लिखैत छथि जे "मैथिली गजलक संदर्भमे दूटा तत्व सदित चर्चामे रहल अछि। हमरा बुझने ओ दूनू तत्व अछि गजलक वैधानिकता आ गजलक वैचारिकता।" आब कने एहि बातक तहमे जाइ। कुल मिला कऽ मैथिलीमे गजल विधा लगभग 115 बर्खसँ अछि मुदा एहिपर विमर्श???????? चुन्नूजी जाहि हिसाबें लीखि रहल छथि ताहि हिसाबें गजलक विमर्श सेहो 115 बर्खक वा तकर आपस-पासक हेबाक चाही। मुदा ई विमर्श कहियासँ छै से चुन्नूजी नै कहि रहल छथि। नै कहबाक कारण हुनकर कोनो गु्प्त एजेंडा बुझाइए। जँ मैथिली गजलक विमर्शकेँ देखल जाए तँ 1981 मे तारानंद वियोगी जी द्वारा आलेख लीखि एकर शुरूआत भेलै। ओ आलेख केहन छलै से बादक बात मुदा शुरूआत ओहीठामसँ भेलै। पहिने तँ गजलक वैचारिकते केर विमर्श भेलै बादमे 1984मे डा. रामदेव झा जी वैधानिक आ वैचारिक दूनू रूपसँ गजलक विमर्शकेँ नव मोड़ देलाह। आब एहि ठाम अहाँ सभ लग प्रश्न उछाल मारैत हएत जे आखिर चुन्नूजी कोन एजेंडा छलनि? हमरा बुझाइए जे ओ तारानंद वियोगीजीक काजकेँ खारिज करबाक लेल जानि-बूझि कऽ "सदति" शब्दक प्रयोग केलाह अछि। हमर अनुमान निराधार नै अछि आ एहि लेल हम गजल विमर्शक प्रगति कार्ड देखाएब। 1981 सँ शुरू भेल विमर्श कहाँ धरि पहुँचल अछि से देखेबाक लेल हम मैथिली गजल विमर्शकेँ दू खंडमे बाँटब पहिल 1981 सँ लऽ कऽ एखन धरिक विमर्श जे कि मुख्यधाराक कथित गजलकार द्वारा भेल आ दोसर 2008 सँ लऽ कऽ "अनचिन्हार आखर" द्वारा विमर्श। मैथिली गजलकेँ दू खंडमे बँटबाक मूल संकल्पना गजेन्द्र ठाकुरजीक छनि ( देखू हिनकर लिखल गजल शास्त्र)। उपरमे ई निश्चित भेल जे 1981 सँ शुरू भेल अछि तँ 2021 धरि मात्र 40 बर्खक भेलैए आ एहि 40 बर्खमे कथित गजलक उपर बेसीसँ बेसी 20-22 टा आलेख आएल सेहो अधिकांशतः पोथीक भूमिका रूपमे। सोचियौ 40 बर्खमे जाहि विमर्शक शुरूआत वियोगीजी केलाह आ ओ विमर्श अतबो नै छै जे लोक ओकरा बिसरि जाए। बेसी मात्रा रहै छै तखन कने हौच-पौच हेबाक संभावना रहैत छै मुदा 40 बर्खमे कथित गजलक उपर मात्र 20-22 टा आलेख आएल छै आ सेहो चुन्नूजीकेँ मोन नै छै ,ई कोना संभव हेतै। तँइ हमर मानब अछि जे चुन्नूजी "सदित" शब्दक प्रयोग तारानंदजीकेँ कात करबाक लेल केलाह। जँ "अनचिन्हार आखर" बला 13 बर्खक विमर्श देखब तँ लगभग 38-40 टा आलेख (ई आलेख सभ आन रचनाकारक पोथीपर आ गजलक विभिन्न पक्षपर आएल अछि जे कि दू टा स्वतंत्र पोथीमे सेहो संकलित भेल), गजल व्याकरणक मैथिलीकरण आ इतिहास आदि आएल। जँ एहि 13 बर्खमे आएल गजलक पोथीक भूमिकाकेँ जोड़ल जाए तँ आलेखक संख्या 50क पार पहुँचत। विमर्शसँ अलग गजल लेखन केर बात करी तँ एकरो हम दू खंडमे बाँटब पहिल 1905 सँ लऽ कऽ एखन धरिक गजल लेखन जे कि प्रारंभिक गजलकार आ मुख्यधाराक कथित गजलकार द्वारा भेल आ दोसर "अनचिन्हार आखर" द्वारा 2008 सँ लऽ कऽ एखन धरिक। पहिल खंडमे 1905 सँ लऽ कऽ एखन धरि लगभग 3000 (अधिकतम) कथित गजल लिखाएल अछि (जाहिमे पं.जीवन झा, कविवर सीताराम झा, मधुपजी, योगानंद हीरा, विजयनाथ झा, जगदीश चंद्र ठाकुर 'अनिल' आदिक गजल पूर्ण रूपेण बहर-काफिया युक्त अछि मने व्याकरण सम्मत आ बाँकी सभ अपन गीतक उपर गजलक शीर्षक लगेने छथि) जखन कि "अनचिन्हार आखर" बला 13 बर्खमे लगभग 32-33 टा नव गजलकार एलाह जाहिसँ लगभग 5000 गजल, 38-40 टा आलेख, गजल व्याकरणक मैथिलीकरण आ इतिहास, गजलक नव-नव उपविधा जेना बाल गजल, भक्ति गजल तकर परिभाषा, लगभग 200 बाल गजल, 100 भक्ति गजल सहित सैकड़ो मात्रामे रुबाइ, कता, नात, दू टा आलोचनाक स्वतंत्र पोथी आदिक रचना भेल। एहि 13 बर्खमे आएक अधिकांश गजल, बाल ओ भक्ति गजल सहित कता-रुबाइ विभिन्न पोथीमे सेहो संक्ति भेल अछि। एहिमे किछु पोथी प्रिंटमे अछि तँ किछु ई-भर्सन रूपमे। ओना साहित्यिक बेपारी सभ पोथीक डिजिटल रूपमे नै मानै छथि मुदा बेपारीकेँ ज्ञानसँ नै टकासँ मतलब होइत छै। जाहि समाजमे पाथरपर लीखि, ताड़पत्रपर लीखि, अथवा श्रुति परंपरोसँ ज्ञान बचेबाक प्रयास भेल हो ताही समाजमे मात्र पुरस्कार लेल प्रिंट बला चीजकेँ किताब मानब अधोगतिक लक्षण छै। अतबे नै "अनचिन्हार आखर" बला 13 बर्खमे मैथिली गजल आन भारतीय भाषाक गजलक समकक्ष आएल आ वर्तमानमे हिंदी-उर्दू सहित मराठी, हरियाणवी, ब्रजभाषा, नेपाली आदिक गजलकार सभ "अनचिन्हारे आखर" ब्लाग द्वारा मैथिली गजलसँ परिचित भेलाह। ओना ई विवरण एहिठाम उचित नै मुदा चुन्नूजीकेँ बुझाइ छनि जे विधान तोड़ि देलासँ विधाक विकास होइत छै। विकास माने की? 115 बर्खमे 3000 कथित रचना जाहिमे कोनो मेहनति नै छै वा कि 13 बर्खमे 5000 गजल जे कि पूरा विधानक संग अछि। 40 बर्खमे 22 टा आलेख वा कि 13 बर्खमे 50 टा आलेख। विकास माने की? 115 बर्खमे वएह 18-20 टा गजलकार वा कि 13 बर्खमे 30-32 टा नवगजलकार। वएह एकटा आजाद गजल कि 13 बर्खमे गजलक विभिन्न उपविधाक विकास, विकास की छै? विकास कोन खंडमे छै बिना विधान बलामे वा कि विधान बलामे से पाठक तय करताह। जेना भूतक पएर उल्टा होइत छै तेनाहिते चुन्नूजी विकासक परिभाषा उल्टा मानै छथि। किछु लोक ईहो कहि सकै छथि जे मैथिली गजल वा ओकर विमर्शकेँ दू खंडमे बँटबाक कोन जरूरति? तखन हमर कहब जे मैथिली साहित्यमे जे समय, वाद, प्रयोग आदिक नामपर वर्गीकरण भेल छै से किए बाँटल गेलै। जँ ओ वर्गीकरण सभ ध्वस्त भऽ जाए तँ ई गजल बला स्वतः ध्वस्त भऽ जेतै। मैथिलीक कथित मुख्यधारामे गजलक विमर्श कोना होइत छै तकर दू टा उदाहरण दैत छी (उदाहरणकेँ उदाहरणे जकाँ देखबाक आग्रह रहत हमर)। पहिल उदाहरण- दरभंगामे एकटा स्थानीय कवि छथि ओ गीत लीखि ओकरा गजल घोषित करै छथि आ बहस करै छथि जे गजलमे बहर नै हेबाक चाही। बहर-काफियासँ भाव मरि जाइ छै आदि-आदि। ओही कविक एकटा बेटा हिंदीमे गजल लीखै छनि आ नियम मानि लीखै छनि। हिंदीमे बाप-बेटा दूनूक क्रांति घुसड़ि जाइत छनि। ओहि ठाम ओ सभ बहस नै कऽ पाबि रहल छथि। खाली मैथिलीमे ई सभ क्रांति करै छथि। दोसर उदाहरण- 2010मे एकटा युवा "अनचिन्हार आखर" ब्लाग केर माध्यमसँ गजल सिखलाह। तकर एक-दू सालक बाद हुनका पटनाक एकटा साहित्यकारक बेटा मार्फत नौकरी भेटलनि आ ओही साहित्यकारक कृपासँ बियाहो भेलनि। आब ओ युवा कहने घूरै छथि जे गजलमे बहर नै हेबाक चाही। ओना किछु युवा आर छथि जे कि पहिने अनचिन्हार आखरसँ गजल सिखलाह आ तकर बाद लोभ-लाभसँ ग्रस्त भऽ मुख्यधारामे जा कऽ बहरक विरोध कऽ रहल छै। खएर ई सभ चलिते रहै छै। सभकेँ अपन सुविधा-असुविधा चुनबाक हक छै। हम उपरक दू उदाहरण एहि लेल देलहुँ जे कथित मुख्यधारामे विमर्श साहित्य वा विधा लेल नै होइत छै। विमर्श मात्र संबंध, पद आ लोभ-लाभ लेल होइत छै। हमरा विश्वास अछि जे विमर्शक ई फार्मेट गजलक अतिरिक्त मैथिली साहित्य केर आनो विधामे हएत। मुदा से बात आन विधासँ जुड़ल लोक कहताह। एकटा सत्य बात ईहो छै जे कथित गजलक मुख्यधारा ततेक अक्षम छै जे ओहिमे कोनो नव रचनाकार एबे नै केलै। चुन्नूजी जाहि युवा सभपर नाचि रहल छथि ताहिमेसँ अधिकांश "अनचिन्हार आखर"सँ निकलल छै आ एक-दू टा अनचिन्हार आखरक विरोधमे बिना बहरक रचना लीखै छै। कुल मिला कऽ देखबै तँ सभ युवा अनचिन्हारे आखरक देन छै। आब हीरा उगत खेतमे आरि झगड़ाक तोड़ल अहाँ (शाइर-योगानंद हीरा , मात्राक्रम-2122-122-12) 7 पृष्ठ-11 पर चुन्नू जीक अभिमत छनि जे हमरा लेल विधा बात-विचार करबाक साधन अछि तँइ हम ओकर नियम नै मानब। मुदा तखन विधेक कोन जरूरति? जकरा नाटक कहल जाइत छै तकरा उपन्यास कहल जाए आ कथाकेँ संस्मरण कारण सभमे लेखक बाते विचार करै छै। एहन तँ नै छै जे कथामे विचार छै आ कवितामे नै, गीतमे छै आ उपन्यासमे नै। विचार सभमे छै तँइ अनेक विधाक छोड़ि मात्र एकटा विधा हो। आ जँ चुन्नूजी एहिसँ सहमत नै होथि तँ तात्काल मानि लेबाक चाही जे गजलक वैचारिकतापर विचार करैत चुन्नूजी मात्र लफ्फाजी केने छथि। एक तँ मैथिलीक मुख्यधारामे कियो गजलक जानकार नै छै आ ताहिपरसँ जखन ओ अपन संयोजनमे कोनो कार्यक्रम करबै छै तँ स्वाभाविक तौरपर अपनासँ कमजोर वक्ता सभकेँ आनै छै। ओ कमजोर वक्ता सभ उपकृत आ एहसानमंद रहैत छै। तँइ ओहन कार्यक्रममे कोनो वस्तु, कोनो विधाक अनिवार्य घटककेँ "दुराग्रह" मानल जाइत हो तँ से आश्चर्यक बात नै। उदाहरण लेल मानू जे जँ अहाँ चाउर केर खीर बनेबै तँ अहाँ दूध, चाउर आ चिन्नी मिलेबै। आब एतेक मिलेलाक बाद ओ खीर तँ हेतै मुदा जँ ओहिमे काजू-किशमिश आदि मेवा मिलेबै तँ खीर आरो स्वादिष्ट हेतै। मानि लिअ सभ चीज देलियै मुदा चिन्नी बिसरि गेलियै तँ ओ स्वादिष्ट नै हेतै मुदा ओकरा खीरे कहल जेतै। आब फेर सोचियौ जँ पानिमे चाउर, चिन्नी, काजू-किशमिश आदि दऽ बनेबै तँ कि ओ खीर हेतै? फेर सोचियौ जँ दूधमे चाउर छोड़ि आन सभ चीज देबै तैयो कि ओ खीर हेतै? जँ कोनो बुद्धिमान पाठक हेता तँ ओ बुझि जेता जे चाउरक खीर बनेबाक लेल दूध आ चाउर अनिवार्य घटक भेलै। आब जँ कोनो लोक ई कहए जे खीरमे दूध अथवा चाउर देबाक बाध्यता "दुराग्रह" छै तँ फेर मानि लिअ जे ओ एहि धरतीक प्राणी नै छै। तेनाहिते गजल लेल बहर आ काफिया अनिवार्य तत्व छै। जँ बहर-काफिया हेतै तखने ओ गजल बनतै आ तकर बादे ओ गजल नीक छै कि खराप ताहिपर बहस हेतै। जखन रचनामे बहर-काफिया छैहे नै तखन ओ गजल तँ भेबे नै केलै। कोनो एक गजलक हरेक शेर एक बहर ओ एक काफियाक नियमसँ संचालित होइत छै। रदीफ गजल लेल अनिवार्य नै मुदा जाहि गजलमे रदीफ देल जाइत छै सेहो एकै हेबाक चाही पूरा गजलमे। पघिलह जुनि बेसी जियान भ' जेबह भाइ पाथर बनबह त' भगवान भ' जेबह भाइ (शाइर-राजीवरंजन झा, मात्राक्रम-22-22-22-22-22-2) 8 चुन्नूजी लग मैथिली गजलक संबंधमे कोनो ठोस जानकारी नै छनि कारण एक दिस ओ मानै छथि जे पं.जीवन झासँ गजल प्रारंभ भेल दोसर दिस ई मानै छथि जे "किछु पितामह रचनाकार लोकनि घोषणा केलनि जे मैथिलीमे गजल असंभव (पृष्ठ-13 पर)। जखन घोषणा केनिहार पितामह केर पितामहे सभ मैथिलीमे गजल संभव कऽ गेल छथि तखन फेर ओहि कथन सभहक औचित्य की? ईहो मोन राखन उचित जे जीवन झासँ लऽ कऽ कविवर सीताराम झा आ मधुपजी धरि बहरमे गजल लिखने छथि। अतबे आ इएह बात सभ साबित करैए जे मैथिलीमे गजलकेँ असंभव संबंधमे घोषणा केनिहार सभ लग जतेक गजलक ज्ञान छलनि ओतबे ज्ञान चुन्नूओजी लग छनि आ चुन्नूजी ओहिसँ आगू नै बढ़ि सकल छथि। फेर चुन्नूजी लीखै छथि जे "यद्यपि ई घोषणा कालांतरमे अमान्य भेल"। मुदा कोना अमान्य भेल से सूचना पाठककेँ नै दऽ रहल छथि। बहुत संभव जे 2021 मे हुनकर पोथी प्रकाशित भेलनि अछि आ ओ अही बर्खसँ अमान्य सिद्ध मानि रहल होथि। टेमी जकाँ कखनो मिझा फेर जरैत गेलियै हारैत कखनो खूब कखनो कऽ जितैत गेलियै (शाइर-अभिलाष ठाकुर, मात्राक्रम-2212-2212-2112-1212) 9 पृष्ठ-14 पर चुन्नूजी वार्णिकता (छंद)केँ अंकगणीतीय रूपकेँ व्यक्त करबाकेँ कृत्रिम मानै छथि। हमरा एहन कथनपर आश्चर्य नै भेल कारण हमरा बूझल अछि जे चुन्नूजी समाजसँ कटल लोक छथि आ समाजसँ कटल लोक किछु लीखि-बाजि सकैए। वस्तुतः समाजक सभ विध कृत्रिमे छै। से लालन-पालनसँ लऽ कऽ शिक्षा-दीक्षा, ओढ़न-पहिरन-भोजन धरिमे। सुख-सुविधासँ लऽ कऽ राग-विराग धरि। समाजमे अनुशासन अनबाक लेल कृत्रिम बिध सभ बनाएल जाइत छै आ हरेक बिधक अंकगणीतीय रूपमे सेहो व्यक्त कएल जाइत छै। उदाहरण लेल घरक नक्शा ओकर अंकगणीतीय रूप छै तँ संगीतमे स्वरलिपि ओकर अंकगणीतीय रूप छै। आब चुन्नूजी मंचपर वा रेडियो-टीभीपर गीत-संगीत सुनि लैत हेता तँइ स्वरलिपि हुनका नै देखाइत हेतनि। अन्यथा बिना स्वरलिपिकेँ कोनो प्रोफेशनल आ विद्वान संगीतकार काज करिते नै छथि। ओतबे किए चुन्नूजीक पोथी सभ जे छपल छनि ओकरो अंकगणित होइत छै जे कते बाइ कतेक पोथी हेतै आ ओहीपर ओकर स्वरूप निर्भर करैत छै। ओना आने बात जकाँ हमरा विश्वास अछि जे चुन्नूजी ई बात सभ नै बुझि सकताह कारण बुझबाक लेल समाजिक होमए पड़ैत छै। समाजिके किए संन्यासियो हएब तँ इएह अंकगणित काज आएत। मंत्रो पढ़ब तँ मंत्रसँ पहिने छंदक नाम, ओकर देवता, ओकर ऋषि आदिक नाम भेटत। मुदा ई बात सभ चुन्नूजीकेँ पता नै छनि। ऋगवेद संहिता, अथ प्रथमं मण्डलम्, सूक्त-१, देवता-अग्निः ; छन्द-गायत्री; स्वर-षड्जः; ऋषि-मधुच्छन्दाः वैश्वामित्रः ॐ अग्निमीळे पुरोहितं यज्ञस्य देवमृत्विजम्। होतारं रत्नधातमम् ॥1॥ जगत मे थाकि जगदम्बे अहिंक पथ आबि बैसल छी हमर क्यौ ने सुनैये हम सभक गुन गाबि बैसल छी (शाइर-कविवर सीताराम झा, मात्राक्रम-1222-1222-1222-1222) आब जँ चुन्नूजीकेँ गायत्री छन्दक परिभाषा जनबाक छनि तँ ओ "अनचिन्हार आखर"पर जा कऽ पढ़ि सकैत छथि आ संपूर्ण वैदिक छन्द सीखि सकै छथि। हजारो वर्ष पहिने जाहि समाजक कवि साहस संग अपन रचनासँ पहिने ओकर विधान लीखि सकैत छलाह ओही कविक वशंज सभ ततेक कमजोर जे ओ सभ विधान देखिते छुल-छुल मूतए लागै छथि। 10 पृष्ठ 15 पर चुन्नूजी लिखैत छथि जे "हम छंद मे लयक आग्रही बेसी छी"। ई कथन आ चुन्नूजीक वास्तविकता दूनू अलग-अलग अछि। हुनका लय बेसी चाही सेहो छंदमे मुदा छंद कतए छनि? ओ तँ छंद-बहर मानिते नै छथि तखन छंदमे बेसी कि कम लय कोना भऽ सकतै? वास्तविकता तँ ई अछि जे चुन्नूजीकेँ ई पते नै छनि जे लय की होइत छै। साहित्ये नै दुनियाँक कोनो एहन चीज नै छै जाहिमे लय नै होइत हो। लय केर मतलब छै "गति"। चलैत हवाक लय छै तँ नदी संग नालाक सेहो। गुड़कैत पाथरक सेहो लय छै। आब अही लय सभमेसँ जखन कोनो एकटा लय बेर-बेर निश्चित अवधि-अंतरालक संग अबैत छै तखन ओ छंद बनि जाइत छै, ओकर नाम पड़ि जाइत छै। कथा अछि जे साँपकेँ भागैत देखि संस्कृतक "भुजंगप्रयात" छंद बनल अछि। एकर सोझ मतलब भेल जे छंद एकटा विशिष्ट लय केर नाम छै। आब जखन लय छैहे तखन चुन्नूजी कम-बेसी किए रहल छथि तकर हम अनुमान कऽ सकैत छी। हमर अनुमान अछि जे छंद बला रचना एक तँ लिखहेमे कठिन छै आ तकर बाद ओकर धुन बनाएब सेहो कठिन। मुदा बिना छंद-बहर बला रचना तँ केनाहुतो लीखू आ ओकर धुन बना गाबि लिअ। चुन्नूजी मूलतः मंचीय गायक छथि आ चुन्नूजीकेँ मंचपर प्रेशर रहैत छनि गेबाक आ तही प्रेशरक कारणे ओ लयक बेसी आग्रही हेता। मुदा फेर कहब छंद विशिष्ट लयक नाम छै ओहिमे जँ कियो कम-बेसी केर बात करै छथि तँ साफे बुझू जे हुनका लग कान्सेप्ट केर कमी छनि। एहिठाम कियो ई कहि सकै छथि जे गायककेँ मंचपर अनिवार्य रूपसँ जाए पड़तै तँइ मंचीय गायक नामक वर्गीकरण उचित नै। मुदा कवि-साहित्यकारकेँ तँ सेहो अनिवार्य रूपसँ मंचपर जाए पड़ै छै तखन अलगसँ मंचीय कवि-साहित्यकारक वर्गीकरण करबाक कोन जरूरति? जे गुण कोनो कवि-साहित्यकारकेँ मंचीय बना दैत छै ठीक ओहने गुण कोनो गायककेँ सेहो मंचीय बना दैत छै। ओढल ओ शेरक खाल बरु छै तँ सिआरे एहन परजीवीकेँ रगड़बाक समय छै (शाइर-रामबाबू सिंह, मात्राक्रम-2222-2212-211-22) 11 चुन्नूजी गजलक व्याकरण मानिते नै छथि तखन छोट बहर वा पैघ बहरक चर्चा करब संकेत दैए जे चुन्नूजी छोट पाँतिकेँ छोट बहर आ पैघ पाँतिकेँ पैघ बहर मानि लेने छथि से साफे अज्ञानता छै (पृष्ठ-17)। पाँतिसँ बहरक निर्धारण नै होइत छै बल्कि बहरसँ पाँतिक निर्धारण होइत छै से बूझब आवश्यक आ पहिल दू पाँतिक जे बहर-काफिया-रदीफ कायम हेतै सएह पूरा गजलमे अंत धरि निर्वाह हेबाक चाही। ईहो देखि हँसी लागैए जे एक दिस चुन्नूजी गजलक छंद ओ छंदकार सभकेँ खारिज करै छथि मुदा ओही छंदकार, ओही "अनचिन्हार आखर" केर बनाएल परिभाषिक शब्दावली जेना बाल गजल, भक्ति गजल आदिकेँ हपसि कऽ रखबाक प्रयास कऽ रहल छथि (पृष्ठ-18)। बहुत संभव चुन्नूजी ई मानि बैसल होथि जे एहि पारिभाषिक शब्दावली आ सिद्धांतक जन्मदाता हुनकेसँ उपकृत कोनो युवा छै। मुदा हँसिए-हँसीमे एहि सभ बातकेँ कात करैत ईहो विश्वास भऽ जाइए जे मैथिलीमे असल गजलक बाट एनाहिते लक्ष्य धरि पहुँचतै। काँटक ढेरीमे फूल खोजि रहल छी संकटमे हर्षक मूल खोजि रहल छी (शाइर-कुन्दन कुमार कर्ण, मात्राक्रम-222-22-2121-122) 12 चुन्नूजीक भूमिका एकै छनि मुदा ओहिमे फाँक बहुत अछि। अतेक जे एकटा फाँकमे हाथ देब तँ दस टा फाँक केर अनुभव हएत मुदा सभ फाँक किछु मुख्य फाँकमे जा कऽ मीलि जाइत छै। आ तँइ हमर प्रयास रहल अछि जे हम ओही मुख्य फाँक सभकेँ अपन आलोचनाक विषय बना सकी। रहलै बात एहि कथित संग्रह रचना सभकेँ तँ ओ हमरा लग नै अछि मुदा चुन्नूजीक अध्य्यन, क्षमता एवं पूर्वाग्रहकेँ देखैत रचना सभकेँ बिना पढ़ने कहल सकैए जे पोथीमे देल गेल रचना सभ गजल नै हएत। ओ रचना सभ आन जे किछु (गीत-कविता) हुअए मुदा गजल तँ नहिए हएत। आब जँ ओ गीत कि कविता अछि तँ ओ केहन अछि से गीत-कविताक मर्मज्ञ सभ कहता। मैथिलीमे पुरस्कारक जे हाल छै ताहिमे ई बहुत संभव जे हुनकर एहि पोथीकेँ पुरस्कार भेटि जाइक। मुदा मोन राखू पुरस्कार कोनो विधाक मानक नै होइत छै। एकटा बात ईहो जे चुन्नूजी "नाटक" करएमे महारथी छथि आ तँइ ई गजल विधाक संग "नाटक" केने छथि। हीरो नै ऐ नाटकमे बिपटा छै भरमार सजल (शाइर-ओमप्रकाश, मात्राक्रम-22-22-22-2) ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। मुन्नाजी सुतिहार -- तों त' बड्ड सुतिहार लगै छह हौ , थम्ह' तोरा एकर सबहक मेट (Team Leader )बना दै छीय' ! -- माथ पर बज्जर खसएब की ? हम अपने पुश्तैनी काज के सुखितगर बुझै छी...! -- गामो मे सुतिहारी देखबै छलियै अहाँ मुदा पेट भूखले रहि जए. -- तें त' शहर धेलौं ! -- आब सुखीतगर छी ने ? -- सुख मरि गेल बुझू ! -- ऐँ...? -- गाम मे तंगी एहेन जे शहर एबाक सोचबा पर मासूल जोड़ब पसेना छोड़ा देने छल . आब त' सब मास मे हवाई जहाज से जा आइब सकै छी. -- मास पुरिते गाम चल जा ठेही उतारै छ' की ? -- नै साहेब, कैञ्चा पुरि गेल त' पलखति.....उड़ि गेल ! ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। संतोष कुमार राय 'बटोही' मंगरौना (धारावाहिक उपन्यास) (दोसर खेप) आचार्यजी मंत्र पढ़ा रहल छथिन्ह। पुजारी बाबा पीछा-पुछा पढ़ि रहल छथि। "ओम् इदं दुर्वादलं .....नम:।" "ओम् इदं एष पुष्पम् श्री दुर्गा देव्यै नम:।" वगैरह-वगैरह मंत्रोच्चारणक बीच सभ कियो कलश भरनिहारिन-भरनिहार कतारबद्ध कमला केँ जल कलश मे भरि रहल छथि। सभ कियो केँ माथ पर ललका पगड़ी नीक लागि रहल छन्हि। फुलकी वाला पगड़ी। कमला किनारे पूजा भेलाक बाद आचार्यजी, पुजारी बाबा आगु-आगु बढ़ि रहल छथिन्ह। एकटा साइड मे चर डोलाबति आओर दोसर साइड मे गंगाजल सँ भूमि के शुद्ध करैत दू जने आगा बढ़ि रहल छथिन्ह। तारापट्टी होएत कलश यात्रा घोंघड़रिया आबि गेल। अइ गामक लोकनि अपन-अपन घरक सोझा मे रस्ता केँ पानि सँ धोने छथि। "गणेश भगवान की....।" "जय...।" "कार्तिक भगवान की।" "जय।" "दुर्गा महरानी की।" "जय।" "सरस्वती माँ की।" "जय।" वगैरह-वगैरह नारा लगबैत कलश यात्रा आगाँँ आबि रहल अछि। घड़ीघंट, शंख वगैरहक बीच पूरा गाम भक्ति मे डुबल अछि। कलश यात्रा के पूरा गाम मे घुमौल गेल। "हौ , कलश कतारबद्ध राखल जेतै।" "ठीक छै चाचाजी।" "सरोज, मुख्य कलश ऊपर लs जाउ।" "ठीक छै।" "बाकी कलश के मंदिर केँ चारू ओर कतारबद्ध राखल जाउ।" सभटा कलश केँ मंदिरक बेसमेंट के चारू ओर राखल गेलै। "माता-बहिन, ध्यान देबै- शरबत पी केँ जायब।" "माँ शेरावाली की।" "जय।" सभ कियो एनाउंसर के संग देलथिन्ह। मेला लागि गेल छै। नाच, नाटक, थियेटर, बड़का झूला, मिठाई दुकान, मनिहारा , पान वाला वगैरह मेलाक रौनक केँ बढ़ा रहल छै। ऐं रौ संतोख , माँ कतs गेल छौ ?" "हमरा नहि बुझल अछि बाबा।" "धानक तीन बरख लेला भs गेलै। कहिया देतै ?" "हमरा नहि बुझल अछि बाबा।" गरीबक जिनगी नरक होएत छै। घर मे एको कनमा धान नहि छै। मरूआ खेत बाबू बेच देलथिन्ह। सुगौनापट्टीक खेत बिका गेलै। ओतs राहैर आओर मरूआ उपजैत छलै। अगहन सँ पहिने इ जान बचाबैत छलै। अगहन मे बोइन सँ ठीकठाक धान भs जायत छलै। धानक कटनीक बाद घर मे धानक ढेर लागि जायत छलै। गरीबक घर भरि जाएत छलै। कमाय वाला कियो नहि। खाय वाला न टा लोक। परिवारक की दशा हेतै से अंदाजा लगा सकैत छी। पहिल बेटिक ब्याह मे सुगौनापट्टी बिका गेलन्हि । दोसर बेटिक ब्याह मे कमलाजीत बिका गेलन्हि। पछबैर बाधक आओर जमतरक खेत फुसिंयौंहक ज्ञान बघारैत बाबूजी बेचलाथि। "बेटा मरतौ।" "गै बेटखौकी , तोरे बेटा मरतौ ।" "हे सूरू सरकार निसाफ करियह..।" "आगि नहि उठाबही गै बेटचोदी... जमाए मरतौ।" "एकटा अलंग जाबे नहि तोड़बौ, ताबे आब हम शान्त नहि हेबै।" इ गामक सोहर छियैय। साझँ-विहंसर गुहाँ गिज्जर भs रहल छै। एक धुर जमीनक लेल झगड़ा भs रहल छै। अमीन लौल गेल छेलै, परञ्च अमीन केँ गप्प बुढ़िया फुसि भs गेलै। किछु बच्चा स्कूल जैत छल। संस्कृत स्कूल पार करैत दुर्गा स्थान दिस निछोह भागि रहल छलै। मखानपुरा टोल पर राजकीय प्राथमिक विद्यालय छै। इ स्कूल मंगरौना गामक शिक्षा बेवस्थाक रीढ़क हड्डी कहल जा सकैत अछि। स्कूल केँँ स्थापना मे राम अवतार मास्टर साहब केँ बड़ि भूमिका रहलन्हि अछि। स्कूल आब राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय शिवा-मंगरौना भs चुकल अछि। स्कूल के अपग्रेड भेलाक बादो स्कूल मे पढ़ाई-लिखाई नहि होएत छै। स्कूल केँ पीछा मे कलम मे विद्यार्थी सभ खेलाति रहैत छै आओर मास्टर सभ टेबुल केँ चारू दिस बैस कs गोलमेज सम्मेलन करैत छथिन्ह। हुनका लोकनि केँ कहै वाला कियो नहि छन्हि जे मास्टर साहब पढ़बै क्याक नहि छियैय। फिलहाल वीणा देवी प्रधानाध्यापक छथिन्ह। वीणा देवी आँखि पर चश्मा लगौने रजिस्टर मे घुसल रहति छथिन्ह आओर बाकी माहटर गप्प करवा मे मसगुल रहति छथिन्ह। टाइम पास कोना केल जाएत अछि से अइ माहटर सभ सँ सीख सकैत छी। विद्यालय केँ गप्पशाला बनौने छथि। मिड-डे मिल स्कूल के लेल आओर स्टाफ के लेल दुधारू गायक समान योजना अछि।खा-खा कs सभ कियो अलसैत छथि। पढ़ाई-लिखाई जाउ भाँड़ मे।स्कूल के सेक्रटरी सेहो खुश आओर माहटर सेहो खुश।वाह रे! मुर्गा भात।मिड-डे मिल योजना गरीब छात्र केँँ स्कूल सँ पौष्टिक आहार भेटवाक योजना छल। बड़ि पैघ सोच छल सरकार केँ अइ योजनाक पीछा मे। गरीबक घर मे पौष्टिक आहार धिया-पुता केँ नहि मिललाक कारने कुपोषण के शिकार नेना-भूटा सभ बेमार होएत रहति छथि। जिनगीभरि फिरिशान। खिचड़ी, फल, अंडा वगैरह केँँ घोटाला पूरा देश मे स्कूल मे भs रहल छै, परञ्च अइ पर तेसर आँखि के राखत ? सभ लुटि खौ सरकारक धन। कनी अहाँ खौ, कनी हम खायब , कनी वो खेताह, कनी मालिक खेताह , कनी हाकिम, ऊपर सँ नीचा धरि सभ हाकिम खौ। सुशासनक सरकार अछि देश मे आओर राज्य मे। विद्यार्थीक खाता पर आयल पै पर सेहो डाका पड़ति छै। चाह आओर नाश्ता लेल भीख माँगवा मे ऊपर सँ नीचा धरि हाकिम सभ महारत हासिल केने छथि। "ऐं यौ , हुनका देलियन्हि , हमरो बनै छै; किछु तँ हमरो देल जाउ।" "हँ, सर ! अहुँ केँ भेटत।" सभटा निर्लज्ज भs चुकल अछि हाकिम। अइ भ्रष्टाचार पर नकेल के कसत ? जे नकेल कसै के कोशिश करैत छथि ,वो मारल जाएत अछि। बेनीपट्टी मे की भेलै अविनाश केँ ? आओर झंझारपुर मे की भेलन्हि एडीजे प्रथम अविनाश केँँ ? बिहार मे सभ किछु भs सकैए- कुता की की ने करौत। जनता मरि रहल अछि। दुनिका मे जे जतेक बड़का ठग अछि ओकर ओतेक बेसी विकास। कतेक बेर रामधनी सेहो परयास केलन्हि अछि जे हमहु बेलॉक मे कोनो हाकिम भs जाउ, परञ्च घुस देबाक पै हुनका जोगाड़ नहि भेलन्हि। "अहाँ , एना नहि मारियौ। छौड़ा मरि जेतै। की अपराध केलक ?" "सार मारि देबौ, दोसर दिन हमर कलम दिस नहि अबिएँह।" " की केलक हमर बउवा ?" "छौड़ा केँ समहैल ले, नहि तँ घेंट तोड़ि देबै कुनो दिन।" "से बिना कारने अहाँ कोना तोड़ि देबै ?" " सार, हमर नबका कलम मे भिड़ल क्याक ?" " माटिक भीता मे कनेक भिड़े गेलै, तँ तों एना मारबहक ।" "तोड़ो, तोड़ि देबौ।" " रौ सार, माएक दूध पीने छैं, तँ फरचिया ले।" आब लतम- जुतम भs रहल छै। किछु लोकनि धड़हरिया छथि। दुनु के बीच बचाव करैत छथिन्ह। इएहा गाम 'मंगरौना' छियैय- 'मंगरौना'; ऐतिहासिक गाम ; जतs दुर्गा मंदिर छै। नेपाल सँ लकs पूरा बिहार भरि मे चैती दुर्गा मेला लेल ख्यात छै। चिरंजीव व्यास जी गुजैर गेलाह। गरीब छलाह। चारिटा बेटा रहैतहुँ हुनका मुखाग्नि अपन बेटाक हाथ सँ नसीब नहि भेलन्हि। छोट बेटा दरिभंगा में पढ़ैत छलन्हि। बड़का बेटा सारक ब्याह मे मधुबनी मे आयल छल, परञ्च गाम पर किनको नहि खबर। बाप मरि गेल छन्हि आओर वो सारक ब्याह मे लागल छथि। घोर कलियुग !! ठीके कहल गेल छै- 'न टा बेटा राम के एक्को टा नहि काम के' । आइ व्यासजीक नहकेश छियन्हि। बड़का बेटा पहुँच गेलाह अछि। उतरी आब हुनका गला जेतन्हि। तेरहवीं भs गेलन्हि अछि। बाप बाप होएत छै। बाप मुइला पर संतोख बौक भs गेलाह अछि। छोट बहिनक ब्याहक कार्यभार आब संतोख पर आबि गेलन्हि। संतोख साइंस मे केमेस्ट्री ऑनर्स सँ आर के कॉलेज मधुबनी मे दाखिला तँ लs लेलाथि ,परञ्च छोट बहिनक उमर बेसि भ रहल छन्हि इ सोचि ओ पगला गेलाथि। संतोख पागल भs गेलाथि। कोनहुँ धरानी बहिनक ब्याह संपन्न भेलन्हि जबदी मनोज राय सँ। 'जीते जी गुँहा भत्ता- मरिते दुधा भत्ता' ठीके कहल जाएत छै। एगारह दुना बाईस जन आओर टोलबैया लकs भोज केलथि तीनु भाई। छह साल सँ संतोख दिल्ली ओगरने छथि। झलकू बाबा केँ डर सँ ओ गाम नहि आबैत छलाह अछि।दिल्ली मे वो मनतोख बाबा केँ दस हजार देने छलथिन्ह आओर किछु हजार हुनकर बड़ भैय्या देलथिन्ह, परञ्च झलकू बाबा नहि मानलकन्हि अछि। 2009 मे संतोख अपने हाथ सँ 21,000 हजार रूपया दकs महाजन सँ फारकति भेलाथि। तीन साल मे दस हजारक सुदि-मुरि पैंतीस-छत्तीस हजार देमs पड़लन्हि। इ 'मंगरौना' गाम छियैय । गरीबक खाल उतारै वाला गाम। तिला संक्रांति मे 'लाई' केँ लेल मोनू ठाकुर केँ जान चलि गेलन्हि अछि। गरीबक जानक कोनहु मोल नहि। बेचारा झपकी पोखैर में शीतलहरी मे पोखैर मे 'लाई' खेवाक इच्छा सँ हेलकs ओइ पार सँ दोसर पार जेबाक क्रम मे जान गमा देलाथि। चिउरा-मुरही-लाई खेवाक सजा भेटलन्हि हुनका वा गरीब हेवाक सजा ? 'मंगरौना' बड़ि रास अपराधी केँ पचा लेने छथि। गामक एकता अइ मामला मे बेजोड़ अछि। बलुआहा बान्ह पर साँझ मे छौड़ा सभ भड़ल रहति छै ; आओर देर राति धरि भड़ल रहति छै। किछु महान काजक योजना बनि रहल छै अर्जुनक कलम लग बम्मा पर देर राति मे। 'मंगरौना' गामक भविष्य शिवा चौक पर बनति अछि। गामक आओर पंचायतक विकासक योजना शिवा चौक पर लिखैत अछि। बड़ि नीक ! ढेर रास नीक - 'फलाँ छौड़ी भागि गेलै फलाँ छौड़ा संग' इ विकासक योजना छियैय। ( उपन्यासक शेष अंश अगिला खेप मे) -संतोष कुमार राय 'बटोही', ग्राम-मंगरौना, पोस्ट- गोनौली, थाना- अंधराठाढ़ी, जिला- मधुबनी, बिहार-847401. मोबाईल नंबर- 6204644978 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। रबीन्द्र नारायण मिश्र लजकोटर -३२- बहुत प्रयासक बाद हमर काजसभ फेरसरिआ गेल छल।हम दिल्लीमे नीक जकाँ व्यवस्थित भए गेल रही । कहिओ काल मदनबाबूक ओहिठाम जा कए हुनकर घरक देखरेख करए पड़ैत छल । ततेकटा घर छलैक जे साफे करएमे सौंसे दिन लागि जाइ। ओहिदिन आओर किछु करब संभव नहि भए सकैत छल । कैकबेर मोनमे होअए जे जौं क्यो विश्वस्त लोक भेटि जाइत तँ ओकरा ओहिठाम राखि दितिऐक । हमरो भार कमैत आ ओकरो किछु लाभ होइतैक । मदनबाबू कैकबेर फोनपर ई बात कहबो करथि मुदा तेहन क्यो भेटए तखन ने ? एहन ने होअए जे लेनाक-देना पड़ि जाए । एकदिन एहिना अपन कार्यालयमे बैसल रही की रचनाकेँ आबाज बुझाएल । ओ हमर कोठरीक बाहर ककरोसँ हमरे बारेमे पुछि रहल छलखिन । हम बाहर निकलैत छी । हुनका देखितहि जेना करेंट लागि गेल । एहन सुंदर लोककेँ देखि कए क्यो ठाढ़ भए जाएत । हम कोनो अपवाद नहि छलहुँ । लगपास देखलिऐक कैकगोटे किछु-किछु बतिआ रहल अछि । ओ सभ गाहे-वगाहे रचने दिस इसारा कए रहल छल । "आउ, आउ । अंदरे आबि जाउ ।" ओ हमर कोठरीमे अबैत छथि । लगलैक जेना सौंसे कोठरीमे इजोत भए गेल हो । "कोना अएलहु?" "किछु दिक्कतमे पड़ि गेल छी ।" "की बात?" "कहबामे लाज होइत अछि मुदा अहाँकेँ नहि कहब तँ ककरा कहबै?परदेशमे के ककरा देखैत छैक? एहनमे अहाँ एतेक लोकक पालन कए रहल छी । असलमे बहुत दिनसँ मोन छ-पाँच कए रहल छल मुदा लाज होअए।मुदा परिस्थिति एहन भए गेल जे बिना अएने कोनो उपाय नहि रहल । " हम की कए सकैत छी?" "हमरासभ केँ किछु काज धरा दिअ ।" से कहि ओ बाहर ठाढ़ माधवकेँ बजओलखिन । माधव अंदर अबैत छथि । माधव बटुकक पितिऔत छलाह । गामे मे कुस्ती खेलाथि । हार-पाँजर बेस मजगूत छलैक । तमाकुल खाइत ओ हमर कोठरीमे अबितहि पहिल काज केलाह जे मुँहसँ तमाकुलकेँ थुकरलाह । "कतेक पढ़ल छी?" -हम पुछलिऐक । नौवाँ फेल छिऐ? "ओ की काज कए सकैत छी?" " जे काज भेटत से कए लेबैक ।" से बाजि ओ जोरसँ तमाकुल थुकरलाह । हम ओकरा मदनबाबूक ओहिठाम चौकीदारक काजमे राखि देलिऐक । ओतहि बाहरमे एकटा कोठरीमे रहबाक सेहो जोगार भए गेलैक । ओसभ बहुत खुश भेलाह । हमरो कनी चैन बुझाएल कारण बेर-बेर ओहि कोठीपर गेनाइ मोसकिल भए जाइत छल । मास-दूमास तँओसभनित्य साँझमे फोन करितथि । तकरबाद फोन कहिओ-कहिओ आबए । हमरो एतेक फुर्सति नहि रहए जे ओहीपर लागल रहितहुँ । मुदा जखन बहुत दिनधरि फोन नहि आएल तँ चिंता भेल जे एकबेर अपने जा कए देखी जे बात की छैक । कहीं ईहोसभ किछु खेल तँ नहि शुरु केलक । रविदिन छलैक । हमरा ओहिठाम छुट्टी रहैक । हम ओहिठाम पहुँचलहुँ । जानि कए ओकरासभकेँ फोन नहि केलिऐक । औ बाबू! ओतए पहुँचतहि हालत देखि गुम्म पड़ि गेलहुँ। सौंसे कोठीमे लोक गज-गज करैत छल । केओ परिचित लोक नहि बुझाएल । ताबे ओकरासभकेँ पता लागि गेलैक जे हम आएल छी । माधव तमाकुल चुनबैत आएल । गोर लागलक । रचना सेहो आबि गेलीह । दुनूगोटे नि:शब्द ठाढ़ छलाह। "ई की देखि रहल छी?" "एकहि सप्ताहमे चलि जाइ जेतेक । विद्यार्थीसभ छैक। सभ बहुत कष्टमे रहैक । परीक्षा देबए आएल छैक ।" "मुदा अहाँकेँ ई अधिकार के देलक जे अनकर मकानकेँ बिना अनुमतिकेँ ई हाल कए दी?" हमरा तमसाएल देखि रचना थोड़-थाम्ह लगेबाक प्रयास करए लगलीह । माधव कतहुँ सहटि गेलाह । रचना असगर देखि कनखी-मटकीपर उतड़ि गेलीह । एहिबातसँ हमरा आओर तामस चढ़ि गेल। "माधव! माधव !"-हम जोर-जोरसँ चिकरलहुँ । ओ किन्नहुँ सामने नहि आएल ।पता नहि कतए चलि गेल । आबकी करी?रचनाकेँ बेसी किछु कहब नीक नहि लागए?तथापि समाधान तँ करक रहैक । "एकरासभकेँ दूघंटाक अंदर खाली कराउ नहि तँ हम पुलिसकेँ बजाएब।" "जकरा बजाउ मुदा ई सभ एकसप्ताहसँ पहिने नहि जा सकत ।" रचनाक ऐहन पकठोस बात सुनि ककरो खराप लगितैक। कहबी छैक जे एक तँ चोरी ताहिपरसँ सीनाजोरी । की दुनियाँ छैक?एकरासभकेँ चौकीदारक काज धरा देलिऐक जे अपनो गुजर करत आ मकानोक देखभाल भए जाएत । मुदा ई सभ तँ बेस धोखेबाज निकलल । गलती हमरे छल जे एकरासभपर एतेक विश्वास केलहुँ ।आब जखन फँसिए गेल रही तँ बुधिआरीसँ बिना बेसी फसाद केनहि निकलि जाइ सएह ठीक बुझाएल । हम ओहिदिन पुलिस नहि बजओलहुँ । भेल जे बातकेँ बतंगर ने भए जाए । ओहिठामसँ वापस अबैत-अबैत रचनाकेँ बेर-बेर कहलिऐक जे जलदीसँ जलदी एकरासभकेँ हटाबए । हम फेर कखनो आबि सकैत छी । “अहाँ निश्चिन्त रहू।”-रचना बाजलि । हम ओहिठामसँ चलि तँ अएलहुँ मुदा मोन ओम्हरे लटकल छल । मदनबाबूहमरा विश्वासपर कोठीक कुंजी दए गेल रहथिजे कहिओ काल सफाइकरा देल करबैक,देख-रेख कए देबैक । हम रचना आ माधवक हालत देखि ओकराकिछु फएदा करबाक हेतु ई व्यवस्था कए देने रहिऐक।तकर ओ सभ की हाल केलक ? एकरासभकेँ देखि कए बुझाएल जे एहि दुनियाँमेकेहन-केहन लोक होइत अछि । लोभ-लालचमे फँसि कए कोनो हद धरि जा सकैत छैक । चीज ककरोरहैक, मालिक केओ बनि गेल । रातिभरि निन्न नहि भेल । भोरे मदनबाबूकेँ फोन कए सभबात कहलिअनि । मुदा ओ कनिको चिंतित नहि भेलाह । कहलाह-"जे वाजिब होइ से कए लेब ।" एहिसँ बेसीओ किछु नहि बजलाह । खैर !जे भेल,से भेल, आबो बात सम्हरि जाए ताहि दिसामे प्रयास केलहुँ । प्रातभेने फेरओहिठाम पहुँचलहुँ आ ओहिमे रहनिहार विद्यार्थीसभकेँ सभबात खोलि कए कहलिऐक । ओ सभ कहलक – “हमरा सभसँ तँ किराया लए लेने अछि आ फाजिल टाका अछिओ नहि । परीक्षा छोड़िकए हम सभ कतए जाएब?" “परीक्षा कहिआ धरि छैक ।" "काल्हि भरि छैक । परसू दूपहरिआमे हमसभ अपने चलि जाएब ।" हम ओकरासभक बात मानि लेलहुँ ,कारण ओकरा सभक कोनो गलती नहि छलैक । बाहरसँ आएल छल । एतेक छल -प्रपंच नहि बुझि सकल । रचना हमरासँ गप्प करबाक कैकबेर प्रयास केलक मुदा हम बिना किछु गप्प केनहि वापस अपन डेरापर चलि अएलहुँ । हम माधवकेँ तकलिऐक । मुदा ओ तँ चंपत भए गेल छल । साइत एहूमे ओकर कोनोचालि छलैक? अबैत-अबैत हम एतबा साफ कहि देलिऐक-"अहूँसभ अपन डेरा ताकि लिअ ।" रचना बिना किछु बजने पाछू घुमि गेलीह । अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३. पद्य ३.१.डाॅ. किशन कारीगर- आबू यौ देखू मिथिला के गाम डाॅ. किशन कारीगर आबू यौ देखू मिथिला के गाम (मैथिली गीत) आबू आबू यौ भैया काका आबू आबू हे दीदी बहिन पोखरि इनार गाछि कलम छै गामे गाम देखू घुमू अहाँ मिथिला के गाम. गामक दलान पर लोक छै बैसल हां हां हीं हीं करैए, नै कोई रूसल? आबू आबू यौ भैया काका आबू यौ देखू मिथिला के गाम मंडन मिश्र के शास्त्रार्थ दिया बुझब राजा सलेहसक पराक्रम लोक मुँहे सुनब स्वाभिमानी अयाची के साग उपजाएब दियै कहब बंठा चमार के वीरगाथा सेहो अहाँ सुनब. आबू आबू यौ भैया काका आबू यौ देखू मिथिला के गाम दिना भदरी के लोकगाथा सब सुनब कवि विद्यापतिक नचारी पर झूमब बाबा नागार्जुन के जनभावना सब पढ़ब गोनू झा के खिस्सा लोक सब मुँहे सुनब. आबू आबू यौ भैया काका आबू यौ देखू मिथिला के गाम रामफल मंडल सूरजनारयण सिंह के शहादत देखू मांगैन खबास संग राज दरभंगा के कहनाम सुनू पान मखान संग कतरल सुपारी चाउर मरूआ के रोटी पर धनियाक चटनी अंगना नीपैत जलखै बनबैत देखू घर गिरहथनी गीत गबैत धान गहूमक होइए बाध बोन मे कटनी कहैए ‘किशन कारीगर’ अहिं सब स यौ भैया आबू आबू यौ देखू घुमू अहाँ मिथिला के गाम. अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ........................................................................................................................ संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] Videha e-Learning पेटार (रिसोर्स सेन्टर) शब्द-व्याकरण-इतिहास MAITHILI IDIOMS & PHRASES मैथिली मुहावरा एवम् लोकोक्ति प्रकाश- रमाकान्त मिश्र मिहिर (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) डॉ. ललिता झा- मैथिलीक भोजन सम्बन्धी शब्दावली (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) मैथिली शब्द संचय MAITHILI DICTIONARY- RAMDEO JHA (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) ENGLISH MAITHILI COMPUTER DICTIONARY MAITHILI ENGLISH DICTIONARY अणिमा सिंह -Shishu_Geet_Khel_Anima_Singh डॉ. रमण झा मैथिली काव्यमे अलङ्कार अलङ्कार-भास्कर आनन्द मिश्र (सौजन्य श्री रमानन्द झा "रमण")- मिथिला भाषाक सुबोध व्याकरण BHOLALAL DAS मैथिली सुबोध व्याकरण- भोला लाल दास राधाकृष्ण चौधरी- A Survey of Maithili Literature ........................................................................................................................ मूलपाठ तिरहुता लिपिक उद्भव ओ विकास (यू.पी.एस.सी. सिलेबस) राजेश्वर झा- मिथिलाक्षरक उद्भव ओ विकास (मैथिली साहित्य संस्थान आर्काइव) Surendra Jha Suman दत्त-वती (मूल)- श्री सुरेन्द्र झा सुमन (यू.पी.एस.सी. सिलेबस) प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) CIIL SITE ........................................................................................................................ समीक्षा सुभाष चन्द्र यादव-राजकमल चौधरी: मोनोग्राफ शिव कुमार झा "टिल्लू" अंशु-समालोचना डॉ बचेश्वर झा- B_JHA_Nibhand_Nikunj.pdf डॉ. देवशंकर नवीन- Adhunik_Sahityak_Paridrishya डॉ. रमण झा- भिन्न-अभिन्न प्रेमशंकर सिंह- मैथिली भाषा साहित्य:बीसम शताब्दी (आलोचना) डॉ. रमानन्द झा 'रमण' हिआओल अखियासल CIIL SITE दुर्गानन्द मण्डल-चक्षु RAMDEO JHA दत्त-वतीक वस्तु कौशल- डॊ. श्रीरामदेवझा SHAILENDRA MOHAN JHA परिचय निचय- डॊ शैलेन्द्र मोहन झा ........................................................................................................................ अतिरिक्त पाठ पहिने मिथिला मैथिलीक सामान्य जानकारी लेल एहि पोथी केँ पढ़ू:- राधाकृष्ण चौधरी- मिथिलाक इतिहास फेर एहि मनलग्गू फाइल सभकेँ सेहो पढ़ू:- केदारनाथ चौधरी चमेलीरानी माहुर करार कुमार पवन पइठ (मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ कथा) (साभार अंतिका) डायरीक खाली पन्ना (साभार अंतिका) याेगेन्द्र पाठक वियाेगी- विज्ञानक बतकही रामलोचन ठाकुर- मैथिली लोककथा SAHITYA AKADEMI http://sahitya-akademi.gov.in/publications/e-books.jsp http://sahitya-akademi.gov.in/general/Digitalbooks.jsp CIIL http://corpora.ciil.org/maisam.htm अखियासल (रमानन्द झा रमण) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI1.pdf जुआयल कनकनी- महेन्द्र http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI2.pdf प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI3.pdf सृजन केर दीप पर्व- सं केदार कानन आ अरविन्द ठाकुर http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI4.pdf मैथिली गद्य संग्रह- सं शैलेन्द्र मोहन झा http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI5.pdf JNU http://sanskrit.jnu.ac.in/maithili/index.jsp http://sanskrit.jnu.ac.in/student_projects/lexicon.jsp?lexicon=maithili ARCHIVE.ORG https://archive.org/details/%40vijay_deo_jha?&sort=-publicdate&page=2 VIDEHA MAITHILI BOOKS/ PICTURE-AUDIO-VIDEO ARCHIVE http://videha.co.in/new_page_15.htm https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ ALL INDIA RADIO DOORDARSHAN आकाशवाणी दूरदर्शन http://prasarbharati.gov.in/ http://newsonair.com/ https://doordarshan.gov.in/ आकाशवाणी मैथिली पोडकास्ट http://prasarbharati.gov.in/podcast.php?filterlang=Maithili&from=1947-08-15&fromwp=2020-08-29&to=2050-12-31&search=GO आकाशवाणी पटना/ दरभंगा मैथिली रेजनल न्यूज टेक्स्ट डाउनलोड-1 http://newsonair.com/RNU-NSD-Audio-Archive-Search.aspx आकाशवाणी पटना/ दरभंगा मैथिली रेजनल न्यूज टेक्स्ट डाउनलोड-2 http://newsonair.com/Regional-Text.aspx आकाशवाणी दरभंगा http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=282 आकाशवाणी दरभंगा यू ट्यूब चैनल https://www.youtube.com/channel/UCGdNveEFmv4pPolWiTEMxVA आकाशवाणी भागलपुर http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=359 आकाशवाणी पूर्णियाँ http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=256 आकाशवाणी पटना http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=122 IGNCA http://ignca.nic.in/coilnet/mithila.htm http://ignca.nic.in/coilnet/kalyani.htm (MAITHILI ENGLISH DICTIONARY) http://tdil.mit.gov.in/CoilNet/IGNCA/mithila.htm MITHILA DARSHAN https://mithiladarshan.com/ (online pdf of Maithili journal) I LOVE MITHILA https://www.ilovemithila.com/ (online maithili journal) मैथिली साहित्य संस्थान https://www.maithilisahityasansthan.org/ https://www.maithilisahityasansthan.org/resources (online pdf of Reasearch Papers/ books) ........................................................................................................................ VIDEHA e-LEARNING YOUTUBE CHANNEL https://www.youtube.com/channel/UC4abVKqMj2pDWIAkXiOHp7A विदेहक किछु विशेषांक:- १) हाइकू विशेषांक १२ म अंक, १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf 12.pdf २) गजल विशेषांक २१ म अंक, १ नवम्बर २००८ Videha_01_11_2008.pdf Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf 21.pdf ३) विहनि कथा विशेषांक ६७ म अंक, १ अक्टूबर २०१० Videha_01_10_2010 Videha_01_10_2010_Tirhuta 67 ४) बाल साहित्य विशेषांक ७० म अंक, १५ नवम्बर २०१० Videha_15_11_2010 Videha_15_11_2010_Tirhuta 70 ५) नाटक विशेषांक ७२ म अंक १५ दिसम्बर२०१० Videha_15_12_2010 Videha_15_12_2010_Tirhuta 72 ६) नारी विशेषांक ७७म अंक ०१ मार्च २०११ Videha_01_03_2011 Videha_01_03_2011_Tirhuta 77 ७) अनुवाद विशेषांक (गद्य-पद्य भारती) ९७म अंक Videha_01_01_2012 Videha_01_01_2012_Tirhuta 97 ८) बाल गजल विशेषांक विदेहक अंक १११ म अंक, १ अगस्त २०१२ Videha_01_08_2012 Videha_01_08_2012_Tirhuta 111 ९) भक्ति गजल विशेषांक १२६ म अंक, १५ मार्च २०१३ Videha_15_03_2013 Videha_15_03_2013_Tirhuta 126 १०) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक १४२ म, अंक १५ नवम्बर २०१३ Videha_15_11_2013 Videha_15_11_2013_Tirhuta 142 ११) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 १२) अरविन्द ठाकुर विशेषांक १८९ म अंक १ नवम्बर २०१५ Videha_01_11_2015 १३) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक १९१ म अंक १ दिसम्बर २०१५ Videha_01_12_2015 १४) विदेह सम्मान विशेषाक- २००म अक १५ अप्रैल २०१६/ २०५ म अक १ जुलाई २०१६ Videha_15_04_2016 Videha_01_07_2016 १५) मैथिली सी.डी./ अल्बम गीत संगीत विशेषांक- २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ Videha_01_01_2017 १६) मैथिली वेब पत्रकारिता विशेषांक VIDEHA 313 लेखकसं आमंत्रित रचनापर आमंत्रित आलोचकक टिप्पणीक शृंखला १७) मैथिली बीहनि कथा विशेषांक-२ VIDEHA 317 १८) रामलोचन ठाकुर विशेषांक VIDEHA 319 १९) रामलोचन ठाकुर श्रद्धांजलि विशेषांक VIDEHA 320 २०) राजनन्दन लाल दास विशेषांक VIDEHA 333 लेखकक आमंत्रित रचना आ ओइपर आमंत्रित समीक्षकक समीक्षा सीरीज १. कामिनीक पांच टा कविता आ ओइपर मधुकान्त झाक टिप्पणी विदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016 "पाठक हमर पोथी किए पढ़थि"- लेखक द्वारा अप्पन पोथी/ रचनाक समीक्षा सीरीज १. आशीष अनचिन्हार 'विदेह' क ३२७ म अंक ०१ अगस्त २०२१ एडिटर्स चोइस सीरीज एडिटर्स चोइस सीरीज-१ विदेहक १२३ म (०१ फरबरी २०१३) अंकमे बलात्कारपर मैथिलीमे पहिल कविता प्रकाशित भेल छल। ई दिसम्बर २०१२ क दिल्लीक निर्भया बलात्कार काण्डक बादक समय छल। ओना ई अनूदित रचना छल, तेलुगुमे पसुपुलेटी गीताक एहि कविताक हिन्दी अनुवाद केने छलीह आर. शांता सुन्दरी आ हिन्दीसँ मैथिली अनुवाद केने छलाह विनीत उत्पल। हमर जानकारीमे एहिसँ बेशी सिहराबैबला कविता कोनो भाषामे नहि रचल गेल अछि। सात सालक बादो ई समस्या ओहने अछि। ई कविता सभकेँ पढ़बाक चाही, खास कऽ सभ बेटीक बापकेँ, सभ बहिनक भाएकेँ आ सभ पत्नीक पतिकेँ। आ विचारबाक चाही जे हम सभ अपना बच्चा सभ लेल केहन समाज बनेने छी। एडिटर्स चोइस सीरीज-१ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-२ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच ब्रेस्ट कैसरक समस्यापर विदेह मे मीना झा केर एकटा लघु कथा प्रकाशित भेल। ई मैथिलीक पहिल कथा छल जे ब्रेस्ट कैसर पर लिखल गेल। हिन्दीमे सेहो ताधरि एहि विषयपर कथा नहि लिखल गेल छल, कारण एहि कथाक ई-प्रकाशित भेलाक १-२ सालक बाद हिन्दीमे दू गोटेमे घोंघाउज भऽ रहल छल कि पहिल हम आकि हम, मुदा दुनूक तिथि मैथिलीक कथाक परवर्ती छल। बादमे ई विदेह लघु कथामे सेहो संकलित भेल। एडिटर्स चोइस सीरीज-२ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-३ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिलक किछु बाल कविता प्रकाशित भेल। बादमे हुनकर ३ टा बाल कविता विदेह शिशु उत्सवमे संकलित भेल जाहिमे २ टा कविता बेबी चाइल्डपर छल। पढ़ू ई तीनू कविता, बादक दुनू बेबी चाइल्डपर लिखल कविता पढ़बे टा करू से आग्रह। एडिटर्स चोइस सीरीज-३ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-४ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच जगदानन्द झा मनुक एकटा दीर्घ बाल कथा कहि लिअ बा उपन्यास प्रकाशित भेल, नाम छल चोनहा। बादमे ई रचना विदेह शिशु उत्सवमे संकलित भेल, ई रचना बाल मनोविज्ञानपर आधारित मैथिलीक पहिल रचना छी, मैथिली बाल साहित्य कोना लिखी तकर ट्रेनिंग कोर्समे एहि उपन्यासकेँ राखल जेबाक चाही। कोना मॊडर्न उपन्यास आगाँ बढ़ै छै, स्टेप बाइ स्टेप आ सेहो बाल उपन्यास। पढ़बे टा करू से आग्रह। एडिटर्स चोइस सीरीज-४ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-५ एडिटर्स चोइस ५ मे मैथिलीक "उसने कहा था" माने कुमार पवनक दीर्घकथा "पइठ" (साभार अंतिका) । हिन्दीक पाठक, जे "उसने कहा था" पढ़ने हेता, केँ बुझल छन्हि जे कोना अहि कथाकेँ रचि चन्द्रधर शर्मा ’गुलेरी’ अमर भऽ गेलाह। हम चर्चा कऽ रहल छी, कुमार पवनक "पइठ" दीर्घकथाक। एकरा पढ़लाक बाद अहाँकेँ एकटा विचित्र, सुखद आ मोन हौल करैबला अनुभव भेटत, जे सेक्सपीरिअन ट्रेजेडी सँ मिलितो लागत आ फराको। मुदा एहि रचनाकेँ पढ़लाक बाद तामस, घृणा सभपर नियंत्रणकेँ आ सामाजिक/ पारिवारिक दायित्वकेँ सेहो अहाँ आर गंभीरतासँ लेबै, से धरि पक्का अछि। मुदा एकर एकटा शर्त अछि जे एकरा समै निकालि कऽ एक्के उखड़ाहामे पढ़ि जाइ। एडिटर्स चोइस सीरीज-५ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-६ जगदीश प्रसाद मण्डलक लघुकथा "बिसाँढ़": १९४२-४३ क अकालमे बंगालमे १५ लाख लोक मुइला, मुदा अमर्त्य सेन लिखैत छथि जे हुनकर कोनो सर-सम्बन्धी एहि अकालमे नहि मरलन्हि। मिथिलोमे अकाल आएल १९६७ ई. मे आ इन्दिरा गाँधी जखन एहि क्षेत्र अएली तँ हुनका देखाओल गेल जे कोना मुसहर जातिक लोक बिसाँढ़ खा कऽ एहि अकालकेँ जीति लेलन्हि। मैथिलीमे लेखनक एकभगाह स्थिति विदेहक आगमनसँ पहिने छल। मैथिलीक लेखक लोकनि सेहो अमर्त्य सेन जेकाँ ओहि महाविभीषिकासँ प्रभावित नहि छला आ तेँ बिसाँढ़पर कथा नहि लिखि सकला। जगदीश प्रसाद मण्डल एहिपर कथा लिखलन्हि जे प्रकाशित भेल चेतना समितिक पत्रिकामे, मुदा कार्यकारी सम्पादक द्वारा वर्तनी परिवर्तनक कारण ओ मैथिलीमे नहि वरण् अवहट्ठमे लिखल बुझा पड़ल, आ ओतेक प्रभावी नहि भऽ सकल कारण विषय रहै खाँटी आ वर्तनी कृत्रिम। से एकर पुनः ई-प्रकाशन अपन असली रूपमे भेल विदेहमे आ ई संकलित भेल "गामक जिनगी" लघुकथा संग्रहमे। एहि पोथीपर जगदीश प्रसाद मण्डलकेँ टैगोर लिटरेचर अवार्ड भेटलनि। जगदीश प्रसाद मण्डलक लेखनी मैथिली कथाधाराकेँ एकभगाह हेबासँ बचा लेलक, आ मैथिलीक समानान्तर इतिहासमे मैथिली साहित्यकेँ दू कालखण्डमे बाँटि कऽ पढ़ए जाए लागल- जगदीश प्रसाद मण्डलसँ पूर्व आ जगदीश प्रसाद मण्डल आगमनक बाद। तँ प्रस्तुत अछि लघुकथा बिसाँढ़- अपन सुच्चा स्वरूपमे। एडिटर्स चोइस सीरीज-६ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-७ मैथिलीक पहिल आ एकमात्र दलित आत्मकथा: सन्दीप कुमार साफी। सन्दीप कुमार साफीक दलित आत्मकथा जे अहाँकेँ अपन लघु आकाराक अछैत हिलोड़ि देत आ अहाँक ई स्थिति कऽ देत जे समानान्तर मैथिली साहित्य कतबो पढ़ू अहाँकेँ अछौं नहि होयत। ई आत्मकथा विदेहमे ई-प्रकाशित भेलाक बाद लेखकक पोथी "बैशाखमे दलानपर"मे संकलित भेल आ ई मैथिलीक अखन धरिक एकमात्र दलित आत्मकथा थिक। तँ प्रस्तुत अछि मैथिलीक पहिल दलित आत्मकथा: सन्दीप कुमार साफीक कलमसँ। एडिटर्स चोइस सीरीज-७ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-८ नेना भुटकाकेँ रातिमे सुनेबा लेल किछु लोककथा (विदेह पेटारसँ)। एडिटर्स चोइस सीरीज-८ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-९ मैथिली गजलपर परिचर्चा (विदेह पेटारसँ)। एडिटर्स चोइस सीरीज-९ (डाउनलोड लिंक) जगदीश प्रसाद मण्डल जीक ६५ टा पोथीक नव संस्करण विदेहक २३३ सँ २५० धरिक अंकमे धारावाहिक प्रकाशन नीचाँक लिंकपर पढ़ू:- Videha_15_05_2018 Videha_01_05_2018 Videha_15_04_2018 Videha_01_04_2018 Videha_15_03_2018 Videha_01_03_2018 Videha_15_02_2018 Videha_01_02_2018 Videha_15_01_2018 Videha_01_01_2018 Videha_15_12_2017 Videha_01_12_2017 Videha_15_11_2017 Videha_01_11_2017 Videha_15_10_2017 Videha_01_10_2017 Videha_15_09_2017 Videha_01_09_2017 विदेह ई-पत्रिकाक बीछल रचनाक संग- मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ रचनाक एकटा समानान्तर संकलन: विदेह: सदेह: १ (२००८-०९) देवनागरी विदेह: सदेह: १ (२००८-०९) तिरहुता विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) देवनागरी विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) तिरहुता विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०)देवनागरी विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०) तिरहुता विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०)देवनागरी विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०) तिरहुता विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]देवनागरी विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ] तिरहुता विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]- दोसर संस्करण देवनागरी विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ]देवनागरी विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ] तिरहुता विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ]देवनागरी विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ] तिरहुता विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ]देवनागरी विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ] तिरहुता विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ]देवनागरी विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ] तिरहुता विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ]देवनागरी विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ] तिरहुता विदेह:सदेह ११ विदेह:सदेह १२ विदेह:सदेह १३ The readers of English translations of Maithili Novel "sahasrabadhani" and verse collection "sahasrabdik chaupar par" has intimated that the English translation has not been able to grasp the nuances of original Maithili. Therefore the Author has started translating his Maithili works in English himself. After these translations are complete these would be the official translations authorised by the Author of the original works.-Editor Maithili Books can be downloaded from: https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ विदेह सम्मान: सम्मान-सूची (समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार सहित) सूचना/ घोषणा "विदेह सम्मान" समानान्तर साहित्य अकदेमी पुरस्कारक नामसँ प्रचलित अछि। "समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार" (मैथिली), जे साहित्य अकादेमीक मैथिली विभागक गएर सांवैधानिक काजक विरोधमे शुरु कएल छल, लेल अनुशंसा आमन्त्रित अछि। अनुशंसा २०१९ आ २०२० बर्ख लेल निम्न कोटि सभमे आमन्त्रित अछि: १) फेलो २)मूल पुरस्कार ३)बाल-साहित्य ४)युवा पुरस्कार आ ५) अनुवाद पुरस्कार। पुरस्कारक सभ क्राइटेरिया साहित्य अकादेमी, दिल्लीक समानान्तर पुरस्कारक समक्ष रहत, जे एहि लिंक sahitya-akademi.gov.in पर उपलब्ध अछि। अपन अनुशंसा editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम्: VIDEHA: AN IDEA FACTORY (c)२००४-२०२१. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHAसम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: डॉ उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम विलास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक -स्त्री कोना- इरा मल्लिक। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि)editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि। एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै, आ से हानि-लाभ रहित आधारपर छै आ तैँ ऐ लेल कोनो रॊयल्टीक/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै। तेँ रॉयल्टीक/ पारिश्रमिकक इच्छुक विदेहसँ नै जुड़थि, से आग्रह। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-2021 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। ५ जुलाई २००४ केँ http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् 'विदेह' ३३५ म अंक ०१ दिसम्बर २०२१ (वर्ष १४ मास १६८ अंक ३३५) विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA ISSN 2229-547X VIDEHA
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