'विदेह' ३३६ म अंक १५ दिसम्बर २०२१ (वर्ष १४ मास १६८ अंक ३३६) ऐ अंकमे अछि:- १. गजेन्द्र ठाकुर- संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल सेहो] [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] [FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI ALSO] २. गद्य २.१.जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’- आँखिमे चित्र हो मैथिली केर (आत्मकथा)-२१.हम पहाड़पर २.२.ज्ञानवर्द्धन कंठ-जालंधर-यात्रा २.३.डॉ. किशन कारीगर-पुरूस्कारी गुर्गा पुरूस्कार बँटा डकैत (हास्य कटाक्ष) २.४.आशीष अनचिन्हार-हे शिव " एकरा गजल कहितहुँ" होइछ लाज (आलेख) २.५.मुन्नाजी-वैधव्यता २.६.संतोष कुमार राय 'बटोही'- मंगरौना (धारावाहिक उपन्यास)-(तेसर खेप) २.७. रबीन्द्र नारायण मिश्र- लजकोटर- ३३म खेप ३. पद्य ३.१.डाॅ. किशन कारीगर-बहिन के अंगना भरदुतिया नत पूरब ४.स्त्री कोना ४.१.कल्पना झा-नहि रहल लचार Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Books/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाउ। VIDEHA ARCHIVE विदेह पेटार View Videha googlegroups (since July 2008) view Videha Facebook Official Group (since January 2008)- for announcements १. गजेन्द्र ठाकुर ........................................................................................................................ ........................................................................................................................ [संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री] [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल सेहो] [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] [FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI ALSO] यू. पी. एस. सी. (मेन्स) २०२० ऑप्शनल: मैथिली साहित्य विषयक टेस्ट सीरीज यू.पी.एस.सी. क प्रिलिमिनरी परीक्षा २०२० सम्पन्न भऽ गेल अछि। जे परीक्षार्थी एहि परीक्षामे उत्तीर्ण करताह आ जँ मेन्समे हुनकर ऑप्शनल विषय मैथिली साहित्य हेतन्हि तँ ओ एहि टेस्ट-सीरीजमे सम्मिलित भऽ सकैत छथि। टेस्ट सीरीजक प्रारम्भ प्रिलिम्सक रिजल्टक तत्काल बाद होयत। टेस्ट-सीरीजक उत्तर विद्यार्थी स्कैन कऽ editorial.staff.videha@gmail.com पर पठा सकैत छथि, जँ मेलसँ पठेबामे असोकर्ज होइन्हि तँ ओ हमर ह्वाट्सएप नम्बर 9560960721 पर सेहो प्रश्नोत्तर पठा सकैत छथि। संगमे ओ अपन प्रिलिम्सक एडमिट कार्डक स्कैन कएल कॉपी सेहो वेरीफिकेशन लेल पठाबथि। परीक्षामे सभ प्रश्नक उत्तर नहि देमय पड़ैत छैक मुदा जँ टेस्ट सीरीजमे विद्यार्थी सभ प्रश्नक उत्तर देताह तँ हुनका लेल श्रेयस्कर रहतन्हि। विदेहक सभ स्कीम जेकाँ ईहो पूर्णतः निःशुल्क अछि।- गजेन्द्र ठाकुर संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सर्विसेज (मुख्य) परीक्षा, २०२० मैथिली (ऐच्छिक) लेल टेस्ट सीरीज/ प्रश्न-पत्र- १ आ २ TEST SERIES-1 TEST SERIES-2 [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल/ FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI] NTA_UGC_NET_MAITHILI_01 NTA_UGC_NET_MAITHILI_02 NTA_UGC_NET_MAITHILI_03 (श्री शम्भु कुमार सिंह द्वारा संकलित) Videha e-Learning MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) UPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS BPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. (ऐच्छिक) मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. (अनिवार्य) मैथिली प्रश्नपत्र- बी.पी.एस.सी.(ऐच्छिक) मैथिलीक वर्तनी १ भाषापाक २ मैथिलीक वर्तनीमे पर्याप्त विविधता अछि। मुदा प्रश्नपत्र देखला उत्तर एकर वर्तनी इग्नू BMAF001 सँ प्रेरित बुझाइत अछि, से एकर एकरा एक उखड़ाहामे उनटा-पुनटा दियौ, ततबे धरि पर्याप्त अछि। यू.पी.एस.सी. क मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेल सेहो ई पर्याप्त अछि, से जे विद्यार्थी मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेने छथि से एकर एकटा आर फास्ट-रीडिंग दोसर-उखड़ाहामे करथि| IGNOU इग्नू BMAF-001 ........................................................................................................................ MAITHILI (OPTIONAL) TOPIC 1 [Place of Maithili in Indo-European Language Family/ Origin and development of Maithili language (Sanskrit, Prakrit, Avhatt, Maithili) भारोपीय भाषा परिवार मध्य मैथिलीक स्थान/ मैथिली भाषाक उद्भव ओ विकास (संस्कृत, प्राकृत, अवहट्ट, मैथिली)] TOPIC 2 (Criticism- Different Literary Forms in Modern Era/ test of critical ability of the candidates) TOPIC 3 (ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददास सिलेबसमे छथि आ रसमय कवि चतुर चतुरभुज विद्यापति कालीन कवि छथि। एतय समीक्षा शृंखलाक प्रारम्भ करबासँ पूर्व चारू गोटेक शब्दावली नव शब्दक पर्याय संग देल जा रहल अछि। नव आ पुरान शब्दावलीक ज्ञानसँ ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददासक प्रश्नोत्तरमे धार आओत, संगहि शब्दकोष बढ़लासँ खाँटी मैथिलीमे प्रश्नोत्तर लिखबामे धाख आस्ते-आस्ते खतम होयत, लेखनीमे प्रवाह आयत आ सुच्चा भावक अभिव्यक्ति भय सकत।) TOPIC 4 (बद्रीनाथ झा शब्दावली आ मिथिलाक कृषि-मत्स्य शब्दावली) TOPIC 5 (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोरिक गाथामे समाज ओ संस्कृति) TOPIC 6 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- विद्यापति) TOPIC 7 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- पद्य समीक्षा- बानगी) TOPIC 8 (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोक गाथा नृत्य नाटक संगीत) TOPIC 9 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- यात्री) TOPIC 10 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली रामायण) TOPIC 11 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली उपन्यास) TOPIC 12 (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- शब्द विचार) TOPIC 13 (तिरहुता लिपिक उद्भव ओ विकास) TOPIC 14 (आधुनिक नाटकमे चित्रित निर्धनताक समस्या- शम्भु कुमार सिंह)् TOPIC 15 (स्वातंत्र्योत्तर मैथिली कथामे सामाजिक समरसता- अरुण कुमार सिंह) TOPIC 16 (यू. पी.एस.सी. मैथिली प्रथम पत्रक परीक्षार्थी हेतु उपयोगी संकलन, मैथिलीक प्रमुख उपभाषाक क्षेत्र आ ओकर प्रमुख विशेषता, मैथिली साहित्यक आदिकाल, मैथिली साहित्यक काल-निर्धारण- शम्भु कुमार सिंह) TOPIC 17 (मैथिली आ दोसर पुबरिया भाषाक बीचमे सम्बन्ध (बांग्ला, असमिया आ ओड़िया) [यू.पी.एस.सी. सिलेबस, पत्र-१, भाग-“ए”, क्रम-५]) TOPIC 18 [मैथिली आ हिन्दी/ बांग्ला/ भोजपुरी/ मगही/ संथाली- बिहार लोक सेवा आयोग (बी.पी.एस.सी.) केर सिविल सेवा परीक्षाक मैथिली (ऐच्छिक) विषय लेल] ........................................................................................................................ GENERAL STUDIES (PRELIMINARY & MAINS) GS (Pre) TOPIC 1 GS (Mains) NCERT-ENVIRONMENT CLASS XI-XII NCERT PDF I-XII TN BOARD PDF I-XII ALL INDIA RADIO ENGLISH NEWS ALL INDIA RADIO NEWS ARCHIVE ALL INDIA RADIO TALKS AND CURRENT AFFAIRS RAJYA SABHA TV NEWS DISCUSSIONS SANSAD TV OTHER OPTIONALS IGNOU eGYANKOSH (अनुवर्तते) -गजेन्द्र ठाकुर २. गद्य २.१.जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’- आँखिमे चित्र हो मैथिली केर (आत्मकथा)-२१.हम पहाड़पर २.२.ज्ञानवर्द्धन कंठ-जालंधर-यात्रा २.३.डॉ. किशन कारीगर-पुरूस्कारी गुर्गा पुरूस्कार बँटा डकैत (हास्य कटाक्ष) २.४.आशीष अनचिन्हार-हे शिव " एकरा गजल कहितहुँ" होइछ लाज (आलेख) २.५.मुन्नाजी-वैधव्यता २.६.संतोष कुमार राय 'बटोही'- मंगरौना (धारावाहिक उपन्यास)-(तेसर खेप) २.७. रबीन्द्र नारायण मिश्र- लजकोटर- ३३म खेप जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’ आँखिमे चित्र हो मैथिली केर (आत्मकथा)- २१.हम पहाड़पर सीवान –जमशेदपुर-रायपुर : पटनासं रातिमे ट्रेनसं चललहुं, सबेरे टाटानगर पहुँचलहुं | हमर साढूक पुत्र सरोज स्कूटर ल’क’ आएल छलाह |हुनका संग थोड्बे कालमे आदित्यपुर हुनक डेरा पहुंचि गेलहुँ | हमर सासुरक लोक सभ भेटलाह-ससुर,सार, सरबेटा | साढ़ू भेटलाह, सरोजक अनुज अशोक भेटलाह,साढ़ूक पुत्री वीणा आ जमाए मिश्रजीकें देखलियनि, दोसर पुत्री ममताकें देखलियनि | ससुरकें बच्चीक देल स्वेटर आ टोपी द’ देलियनि | सभसं परिचय आ गप-शप करैत, खाइत-पिबैत चारि बाजि गेल, हमर ट्रेनक समय निकट आएल त मिश्रजी भिलाइक अपन पता लिखा देलनि आ 2 दिसम्बर क’ ओत’ रिसेप्शनक उत्सव दिन हमरा एबाक लेल आग्रह केलनि, अशोक बाबू हमरा स्कूटरसं स्टेशन पहुंचा देलनि | ट्रेनमे हमरे बर्थ लग भेटि गेलाह हरे कृष्ण वर्मा जे मोतिहारीसं जा रहल छलाह आ हमरे जकाँ रायपुर आंचलिक कार्यालय जेबाक छलनि | नीक लागल जे एकटा संगी भेटलाह | दोसर दिन रायपुर पहुंचि हम सभ आंचलिक कार्यालयक लगेमे मयूरा होटलमे रूम ल’ लेलहुं | पता रह्य जे हमर यूनियनक महासचिव एम. के. अग्रवाल सदर बाज़ार शाखामे छथि, हुनकासं सम्पर्क केलहुं | आंचलिक कार्यालय गेलहुँ | आंचलिक प्रबंधक महोदय सभकें बजाक’ कहलखिन जे अहाँ सभ बिहारसं छी, अहाँ सबहक सुविधाक ध्यान रखैत बिहारसं सटल शहडोल क्षेत्रक शाखा सभमे पोस्टिंग कएल गेल अछि अनूपपुर, मनेन्द्रगढ़,चिरमिरी आ डोमनहिल | हमरा सबहक लेल त सभ स्थान अपरिचिते छल, नीक-अधलाह सोचबाक समय नहि रहि गेल छल, सभटा तय भ’ गेल छलै, तें सभ गोटे अपन-अपन आदेश-पत्र लेलहुं जाहिमे तीन दिसम्बरक’ शाखामे योगदान करबाक आदेश छल | दू तारीखक’ वर्माजीक संग भिलाइक स्मृति नगरमे मिश्रजीक ओत’ गेलहुँ, द्विरागमन भ’ गेल छलै, वीणा जमशेदपुरसं भिलाई आबि गेल छलीह | जमशेदपुरसं अशोक आ हुनकर एकटा पितिऔत भाए संजय सेहो आएल छलखिन | हुनका सभसं गप भेल त सूचना देलनि जे हुनक एकटा सम्बन्धी चिरमिरी लगमे सेंट्रल बैंकक कोनो शाखामे काज करैत छथिन, ओ पिंडारुचक छथि आ नाम सभापति चौधरी छनि | ई सूनिक’ नीक लागल जे अपरिचित स्थानमे एक गोटे त मैथिली भाषी भेटलाह अपना दिसक | मिश्रजीक पिता आ अनुजसं सेहो गप भेल, ई जानि नीक लागल जे भिलाई स्टील प्लांटमे मिश्रजीक पिता सेहो काज करैत छथिन आ मिश्रजी दुनू भाइ सेहो,दोसर भाए हिनकासं छोट छथिन, हिनका सबहक गाम कुशेश्वरस्थान लग छनि | रिसेप्शनक उत्सव त रातिमे होइतइ,मुदा रातिए हमरा सभकें सारनाथ एक्सप्रेससं प्रस्थान करबाक छल, तें दिनेमे भोजनक बाद हुनका सभसं आज्ञा लए विदा भ’ गेलहुँ रायपुर | रायपुर–अनुपपुर-चिरमिरी-डोमनहिल : रातिमे रायपुर स्टेशनसं सारनाथ एक्सप्रेससं हम सभ पाँच गोटे विदा भेलहुँ | अनूपपुर जंक्शनपर दू गोटे उतरि गेलाह,सिंह जी आ वर्माजी | सिंह जी कें अनूपपुर शाखामे रहबाक छलनि, दोसर छलाह वर्माजी जिनका ओतसं बस अथवा जीपसं दस-पन्द्रह किलोमीटर दूर शाखामे ज्वाइन करबाक छलनि | ओत’ चिरमिरी बला ट्रेन लागल रहै,हम सभ तीन गोटे ओहिमे जाक’ बैसि गेलहुँ | ट्रेन भोरमे खुजलै आ किछु स्टेशनक बाद मनेन्द्रगढ़ पहुँचलै त ए.के. सरकार ओत’ उतरि गेलाह,हुनका मनेन्द्रगढ़सं किछु दूर रामनगर कॉलरी शाखामे ज्वाइन करबाक छलनि | हम आ आर.पी.शर्माजी अंतिम स्टेशन चिरमिरी तक गेलहुँ | चिरमिरी स्टेशनसं पहाड़ जकाँ चढ़ाइ देखबामे आएल | ब्रीफ़केस ल’क’ चढ़ब कठिन लागल | भरिया सभकें देखलिऐ | दूर जेबाक लेल जीप जाइ छै, मुदा एखन त हमरा दुनू गोटेकें कोनो होटलमे एतहि रहबाक छल, तें भार बलाकें ब्रीफकेस द’क’ पयरे धीरे-धीरे ऊपर चढ़लहुं | दीपक लॉजमे डेरा लेलहुं | शर्माजीकें त ओही ठाम रहबाक छलनि,हमरा ओत’सं जीपसं और चारि-पाँच किलोमीटर दूर जेबाक छल | पता छल जे डोमनहिलमे होटल नै छै, तें जाधरि आवासक व्यवस्था नै हएत ताधरि अही ठाम रहिक’ एतहिसं गेनाइ आ साँझमे वापस एनाइ कर’ पडत | गर्म जलसं स्नान कए एकटा होटलमे दू टा सोन पापड़ी,एकटा समोसा आ एक कप चाह ल’क’ एकटा जीपपर बैसलहुं, शर्माजी ओतहि अपन शाखा गेलाह | जीप पन्द्रह-बीस मिनटमे पहाड़पर घूम-घुमौआ रस्तापर चलैत डोमनहिल स्टैंड पहुंचा देलक, ओत’सं पयरे घुमैत आ पुछैत पाँच मिनटमे बैंक शाखा पहुंचि गेलहुँ | हमरा हाथमे बैंकबला डायरी देखिक’ सुरक्षा प्रहरी खडग सिंह अनुमान केलनि आ नव शाखा प्रबंधक बूझिक’ नमस्कार केलनि, शाखामे खबरि त फोनसं पहिने आबिए गेल छलै | खडग सिंह सभ सदस्यसं परिचय करौलनि | जाएबला शाखा प्रबंधक पाण्डेय जी छलाह,अधिकारी छलाह प्रदीप सिंह पाल,लिपिक छलाह सोना लाल यादव आ योगेन्द्र सिंह सोरी,अंशकालीन कर्मचारी छलाह राम कृपाल | यादवजी कें छोडिक’ सभ गोटे मध्य प्रदेशक छलाह | यादवजी बिहारक छलाह | शाखामे किछु दिन बाद दूटा और लिपिक एलाह तेज राम साहु आ टी. हेम्ब्रोम |एकटा अधिकारी आलोक कुमार बनर्जी सेहो एलाह | शाखामे करीब एक हजार एक सय कालरी कर्मचारी-अधिकारी सबहक बचत खाता, सावधि जमा खाता आ मांग ऋणक खाता छलनि | मुख्यतः एस.ई.सी.एल.केर कर्मचारी-अधिकारी सबहक लेल ई शाखा खूजल छलै | ओहि ठामक अस्पताल,स्कूल आ अन्य सरकारी अथवा गैर सरकारी संस्था सबहक स्टाफक विभिन्न खाता सेहो छलै | शाखा भवन कॉलरी द्वारा मंगनीमे देल गेल छलै | मंगनीमे सभ बैंक स्टाफकें आवासक सुविधा सेहो देल गेल छलै | शाखा प्रबंधक आ एकटा अन्य अधिकारीक लेल आवास कनिए दूरपर सेंट्रल स्कूल कैंपसमे देल गेल छलै, शेष सदस्य लेल आवास दोसर ठाम देल गेल छलनि | सभ सदस्य लेल पानि आ बिजलीक सुविधा मंगनीमे उपलब्ध छलनि | खुशीमे रहबाक लेल एते सुविधा पर्याप्त छलै | दुखी रहबाक सेहो पर्याप्त कारण उपस्थित छलै | पीबै बला पानि कीन’ पडैत छलैक, भारपर दू टिन इनारक पानि प्रतिदिन लोक मंगबैत छल जकर दाम तीन रु. होइत छलैक | ओइ पानिकें पीबाक योग्य बनयबाक लेल ओकरा उबालिक’ तखन फ़िल्टरमे छानब आवश्यक होइत छलैक | एकर मतलब ई जे स्वास्थ्यपर खर्च बेशी छलैक | दोसर बात ई जे बाहर कतहु जेबाक लेल पहिने चिरिमिरी स्टेशन जाएब, ओत’सं ट्रेनसं अनूपपुर जंक्शन जाएब आवश्यक होइत छलैक आ चिरिमिरीसं उपलब्ध ट्रेनक संख्या बहुत कम छलैक | स्थानीय भ्रमण हेतु अपन सवारी आवश्यक होइत छलैक | एकर अतिरिक्त नीक शिक्षण संस्था सबहक अभाव छलैक | बारह्बीं तक के लेल सेंट्रल स्कूल नीक छलै, मुदा और नीक संस्था सबहक कमी छलैक | चिकित्सा –व्यवस्था सेहो बहुत नीक नै छलै | मुदा अही सभ सुविधा आ असुविधाक बीच देशक विभिन्न प्रांतसं एत’ आबिक’ हजारो लोक कते-कते बरखसं अपन परिवार संगे जीवन-यापन करिते आबि रहल छलाह आ जिनका एत’ समाधान नहि भेटैत छलनि ओ जबलपुर, बिलासपुर,रायपुर,भिलाई अथवा भोपाल दौड़ैत छलाह | भिलाइमे जाहि चौधरीजीक विषयमे पता चलल छल, हुनकर चर्चा केलहुं त पता चलल जे ओ नार्थ चिरमिरी कॉलरी शाखामे काज करैत छथि | पता चलल जे एहि एरियामे सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडियाक सातटा शाखा छै : चिरिमिरी, नार्थ चिरिमिरी, वेस्ट चिरिमिरी,कुरासिया कॉलरी,डोमनहिल कॉलरी,कोरिया कॉलरी आ खडगवां | इहो पता चलल जे सेंट्रल स्कूल कैंपसमे नार्थ चिरिमिरी शाखाक शाखा प्रबंधक आ एकटा अन्य अधिकारी लेल सेहो आवासीय सुविधा प्रदान कएल गेल छै जाहिमे शाखा प्रबंधक खुन्तवाल साहेब आ अधिकारी मिश्रजी एखन रहैत छथि, एतहिसं जाइत-अबैत छथि, ओहि शाखाक दूटा लिपिक चौधरीजी आ मिश्रजी सेहो डोमनहिलमे रहैत छथि आ सभ दिन सबेरे स्कूटरसं जाइत छथि आ साँझमे आबि जाइत छथि | ओ मिश्रजी सेहो मधुबनी जिलाक छथि, से पता चलल | साँझमे हमरा शाखाक अधिकारी पी.एस.पाल अपन स्कूटरसं चिरिमिरी पहुंचा देलनि | ओत’ दीपक लॉजमे शर्माजीसं गप-शप भेल, ओ सीतामढ़ी जिलाक छलाह | आब हमर परिवार चारि ठाम भ’ गेल छल, गाममे कोनो नातिन संगे माए छलीह,बाबू छलाह | दिल्लीमे ललनजी दुनू गोटे आ रतनजी छलाह, सीवानमे पत्नी, दुनू पुत्री आ पुत्र छलाह आ चिरिमिरीमे हम छलहुँ | दिनमे कोनो होटलमे जलखै क’ क’ चिरिमिरीसं डोमनहिल जाएब, दिनका भोजन ओतहि करब आ साँझमे घूरिक’ चिरिमिरी आएब, रातिक भोजन चिरिमिरीक होटलमे करब, करीब दू सप्ताह धरि अहिना चलल | ओहि ठाम पहाडपर दीपक लॉजमे बैसि ई गीत लिखाएल : कोना कहू जे कोन हालमे जीबि रहल छी हम पहाड़पर बैसल चिट्ठी लीखि रहल छी | पर्वत केर कायासं निकलय कोयला कारी-कारी घूम-घुमौआ रस्तापर अछि चलइत मोटर गाड़ी कारी-कारी गाछ-पात सभ देखि रहल छी हम पहाड़पर बैसल चिट्ठी लीखि रहल छी | ठाम-ठाम पर्वतक आँखिसं नोरक बहय टघार जहां-तहां मजदूर चलैए नेने पानिक भार एत’ आबिक’ पानि कीनिक’ पीबि रहल छी हम पहाड़पर बैसल चिट्ठी लीखि रहल छी | अछि पहाड़पर जहां-तहां माटिक सुन्दर घर मुदा जखन नीचां तकैत छी होइए सरिपहुं ड’र आगाँ निहुरि-निहुरिक’ ससरब सीखि रहल छी हम पहाड़पर बैसल चिट्ठी लीखि रहल छी | एत’ आबिक’ मोन पड़ैए सीवानक संसार मोन पड़ैए गाम-घ’र आ हरियर खेत-खम्हार हम कल्पना केर डारिपर झूलि रहल छी हम पहाड़पर बैसल चिट्ठी लीखि रहल छी | मोन पड़ैए चूड़ा-दही चीनी आओर अंचार कविता-गीत-गजल केर खातिर जहां-तहां बैसार एत’ तपस्वी केर भोग हम भोगि रहल छी हम पहाड़पर बैसल चिट्ठी लीखि रहल छी | बिजली रानी सतत रहै छथि तें त अछि किछु मौज साधू केर कुटी-सन लागय अनमन दीपक लॉज एतहि ठाढ़ भए एस्टेसन दिस देखि रहल छी हम पहाड़पर बैसल चिट्ठी लीखि रहल छी | पूर्व शाखा प्रबंधक पाण्डेय जी अंबिकापुर चलि गेलाह आ 27 दिसम्बरक’ हम लॉज छोडिक’ डोमनहिलमे सेंट्रल स्कूल कैंपसमे शाखा प्रबंधक लेल निर्धारित आवासमे चलि गेलहुँ | पानि लेल बड़का तौला आ भोजन लेल किछु बर्तन आदि किनलहुं | कृपाल पहिने पूर्व शाखा प्रबंधक पाण्डेयजीक भोजन बनबैत छल, आब हमर भोजन बनब’ लागल | 14 जनबरीक हम सीवान पहुँचलहुं | राजवंशी देवी वालिका उच्च विद्यालयसं मैथिलीक आ महावीरी सरस्वती विद्या मन्दिरसं विवेकक स्थानान्तरण प्रमाण पत्र, वसन्त लेल पटना बोर्ड ऑफिससं प्रवजन प्रमाण-पत्र आ प्रोविजिनल प्रमाण-पत्र लेल दौड़-धूप केलहुं,डी.एस.ओ. कार्यालयमे राशन कार्ड जमा क’क’ राशन कार्डक समर्पण प्रमाण-पत्र प्राप्त केलहुं,गैस कनेक्शन ट्रान्सफर करबौलहुं | टी. सी.आइ.बला ट्रक ठीक भेल | एकटा कमी रहि गेल जे महावीरी सरस्वती विद्या मन्दिरवला विवेकक स्थानान्तरण प्रमाण-पत्रपर डी. ई.ओ. साहेब हस्ताक्षर नहि केलनि | चिरमिरीमे स्थानान्तरण प्रमाण-पत्रपर डी. ई. ओ.क हस्ताक्षर अनिवार्य कहल गेल छल | वनगमन : हमर अनुज रतनजी दिल्लीसं सीवान आबि गेल छलाह | हुनका सामान संगे ट्रकसं पठाय हम सभ बनारससं ट्रेनसं जेबाक कार्यक्रम बनौलहुं | तदनुसार वनारस जाक’ ट्रेनमे आरक्षण करा आएल छलहुँ | 10 फरवरीक’ हम सभ बनारसमे ट्रेन पकड़बाक लेल सीवानसं बससं भोरे विदा भेलहुँ | जीरादेइ लग बसक एक्सिल टूटि गेलै त घूरि अबै गेलहुँ | ओही दिन साँझमे ट्रकपर सामान लोड भेल | 11 क’ भोरे ट्रकपर सामानक संग अपनो सभ गोटे बैसि गेलहुँ | 10 बजे मनेरमे जलखै क’ क’ विदा भेलहुँ | दूपहरक बाद घनघोर जंगलसं निकलैत अनुभव भेल जे हम सभ वनबासमे जा रहल छी | मुनहारि साँझक बाद घनघोर जंगल होइत जखन एकटा पुलपर गाड़ी रूकल त चेकिंग हुअ’ लागल | रतनजी मैथिलीमे किछु हमरा कहलनि कि चेकिंग अधिकारीक स्वर मधुर भ’ गेलनि | गप-शप भेल त कहलनि, अहाँ सभ बहुत रिस्क ल’क’ एहि समयमे आबि रहल छी, एहि रस्तामे एते अबेरक’ एबामे बहुत खतराक आशंका रहै छै, अहाँ सभ भागवंत छी जे सकुशल आबि गेलहुँ | मातृभाषाक चमत्कारसं प्रभावित भेलहुँ | नाहर घर छलनि चेकिंग अधिकारी सिंह जीक | हुनका मूँहसं खतरोक बात मैथिलीमे सूनिक’ आनन्दित भेलहुं | सिंह जी कहलनि, अहाँ सभ खतरा बला क्षेत्र पार क’ गेल छी, आगाँ आब कतहु चल जाएब त कोनो खतराक आशंका नहि अछि | हम सभ रामानुजगंज पहुंचि गेल रही, सिंह जीक बातसं आश्वस्त त भेल रही, मुदा राति ओतहि शिवम् लॉजमे विश्राम करै गेलहुँ, आगाँ बढबाक साहस नहि भेल | 12 क’ भोरे रामानुजगंजसं प्रस्थान कए अम्बिकापुर होइत एक बजे नागपुरमे भोजन कए 3.15 बजे दिनमे डोमनहिल पहुंचि जाइ गेलहुँ | सीवानमे रहथि त बच्ची सोचथि जे नीचां बला डेरा रहितै त किछु फूल, गाछ अपना पसन्दसं लगबितहुं, एत’ नीचां बला डेरा, पाछाँमे फूल आ अररनेबाक गाछ, आगाँमे आंगन देखि चकित भेलीह, मुदा पानि पीबाक लेल एतेक ताल-भजार करबाक बातसं व्यथित भ’ गेलीह | मुदा ई दुनियाँ अहिना बनल छै जे कतहु जाउ, किछु वस्तु अहाँक मनोनुकूल भेटत आ किछु प्रतिकूल सेहो भेटत | अनुकूल आ प्रतिकूल स्थितिक बीच ताल-मेल बैसयबाक आवश्यकता होइत छैक जीवनमे | जंगलमे मंगल : जहिया परिवार संगे डोमनहिल पहुँचलहुं,ओकरा प्राते पिंडारूचक सभापति चौधरीजी परिवार संगे डेरापर एलाह, सभकें सभसं परिचय भेलनि | चौधरीजी जाहि शाखामे काज करैत छलाह,ओही शाखामे बेनीपट्टी लगक नवीन मिश्र जी छलाह, ओहो लिपिक छलाह, हुनकोसं भेंट भेल | बैंकमे एक दिन खाता खोलब’ लेल आएल एकटा आवेदन पत्रमे नामपर ध्यान गेल-चक्रधर झा, सेंट्रल स्कूलमे शिक्षक छलाह, घर दुलहा छलनि, डेरा सेंट्रल स्कूल कैंपसमे हमर डेराक लगे मे छलनि, हुनका परिवारमे हमर सरबेटीक बियाह भेल छलनि | परिचय भेल, नीक लागल | झंझारपुर लगक ए.एन. झा सं परिचय भेल, जे कॉलरी ऑफिसमे काज करैत छलाह | झंझारपुर लगक एकटा मंडलजी सेहो भेटलाह, जे कॉलरी ऑफिसमे चपरासी छलाह | तरौनी गामक के.एन.झा भेटलाह, जे ठीकेदार छलाह | विजय सलमपुर गामक एकटा झाजी भेटलाह जे कपड़ाक दोकान करैत छलाह | हजारीबागक आर.के.रवि भेटलाह जे कॉलरी ऑफिसमे काज करैत छलाह संगहि कवि सेहो छलाह | पलामूक दुबेजी भेटलाह जे स्कूलमे शिक्षक छलाह आ काव्य-प्रेमी सेहो छलाह | सहारनपुरक रामेश्वर काम्बोज हिमांशु भेटलाह, जे सेंट्रल स्कूलक प्राचार्य छलाह आ नीक साहित्यकार सेहो छलाह , हिनक हिन्दी मे प्रकाशित काव्य संकलन छलनि ‘अंजुरी भर आशीष’, लघु कथापर सेहो बहुत काज क’ चुकल छलाह | हिनका स्कूलक एकटा शिक्षक चन्द्र भूषण पासवानजी, जे बिहारेक छलाह, हिनके प्रभावमे काव्य सृजन सेहो करैत छलाह | एकटा शिक्षिका ‘भारती’ सेहो नीक कविता लिखैत छलीह,ओ बिलासपुरक छलीह | सेंट्रल बैंकक छोटा बाज़ार शाखामे शाखा प्रबंधक छलाह महेश प्रसाद शुक्ल, जे जबलपुरक छलाह आ हिन्दीमे नीक व्यंग्य रचना करैत छलाह | मध्य प्रदेशक विभिन्न ठामक रहनिहार आ कॉलरी स्थित विबिन्न विभागमे काज करैबला किछु गोटे छलाह जे साहित्यकार सेहो छलाह, जाहिमे प्रमुख छलाह नरेन्द्र मिश्र ‘धड्कन’, राजेन्द्र ‘धुरंधर’, राजेंद्र तिवारी ‘राही’,सी.एल.मिश्र ‘साहिल’, इरशाद अहमद सिद्दीकी,अब्दुल सत्तार भारती आदि | उत्तर प्रदेशक शफीक ‘इलाहाबादी’ छलाह जे कॉलरी कर्मी छलाह आ बहुत नीक गजल लिखैत छलाह | डोमनहिल कॉलरीक अधिकारी अशोक दादा छलाह जे संगीत प्रेमी छलाह, हिनक पत्नी हारमोनियमपर बहुत सुन्दर रवीन्द्र संगीत, नजरूल गीत,लोक गीत आदि गबैत छलीह आ तबलापर अपने छोट बेटी संग दैत छलखिन | चिरिमिरी कॉलरीमे इंजिनियर छलाह पलटू मुख़र्जी जे शास्त्रीय संगीतक प्रसिद्द गायक छलाह, हिनकोसं परिचय भेल | छपराक रामजी सिंह भेटलाह जे कॉलरीमे काज करैत छलाह | कोनो ठाम गेलापर यदि मैथिली भाषी क्यो भेटि जाथि,त मोन आनन्दित भ’ जाइत अछि | यदि मैथिल नहि भेटथि, कोनो बिहारी भेटि जाथि, तैयो मोन प्रसन्न होइत अछि | यदि ओहो नहि भेटथि, कोनो प्रान्तक रह्यबला कोनो साहित्यकार अथवा गुणी कलाकार भेटथि, तैयो आनन्दित होइत छी | आ सेहो यदि नहि भेटथि, कोनो बैंक स्टाफ भेटि जाथि, तखनो आनन्दमे रहैत छी | संयोगसं एहि ठाम मैथिली भाषी लोक सभ सेहो भेटलाह, अमैथिल बिहारी सेहो भेटलाह, विभिन्न प्रान्तक साहित्यकार-कलाकार सेहो भेटलाह, पूर्व परिचित एग्रीकल्चर पृष्ठभूमिक प्रिय वरिष्ठ अधिकारी सेहो भेटलाह आ सज्जन बैंक स्टाफ सभ सेहो भेटलाह | सीवानमे हम ए. एफ. ओ.( कृषि वित्त अधिकारी) रही, त आर.पी. शर्माजी एल.बी.ओ.(लीड बैंक अधिकारी ) छलाह , वैह शर्माजी हमर सबहक शहडोल क्षेत्रक क्षेत्रीय प्रबंधक छथि, से हमरा बूझल छल | एकदिन ऑफिसमे ओ अनायास आबि गेलाह, बड़ी काल बैसलाह, सीवानक सभ परिचित लोकक हाल पुछैत गप-शप केलनि, मंगल दिन रहै,उपास केने छलाह, हमरा अनुरोधपर एकटा सेव आ एकटा केरा लेलनि, ऑफिसक लेल किछु जरूरी चीज खरीदक हेतु तुरत स्वीकृति-पत्र सेहो द’ देलनि | ओ क्षेत्रीय कार्यालयक राजभाषा अधिकारीकें हमर साहित्य सृजनसं सेहो अवगत करौलखिन आ हमरा ‘सेंट्रल रश्मि’ पत्रिका लेल रचना पठयबाक लेल सेहो कहैत गेलाह | हुनका गेलाक बाद शाखाक सभ गोटे आश्चर्य प्रगट केलनि जे क्षेत्रीय प्रबंधक एते मिलनसार कोना भ’ गेलाह | हमरा अपना लेल किछु मांग करबाक हिम्मति नहि भेल | हमरा संगे जे हरे कृष्ण वर्माजी बिहारसं आएल छलाह से शर्माजीसं पैरवी क’ क’ अपन स्थानान्तरण शहडोल मुख्य शाखामे करा लेलनि आ हमरो सुचित केलनि जे कोनो आवश्यकता हो त कहब | हम एक दिन छुट्टी ल’क’ शहडोल गेलहुँ जे हमहूँ अपना लेल कोनो नीक शाखामे स्थानान्तरणक जोगार धराएब | ओत’ गेलहुँ त पहिने शहडोल शाखामे वर्माजीसं सलाह लेब’ गेलहुँ | वर्माजीकें चिन्तित आ परेशान देखलियनि | पता चलल जे शर्माजी जे ट्रान्सफर आदेश देने छलखिन से यूनियनक दबाबपर वापस लेब’ पडलनि आ वर्माजी पुनः ओही शाखामे वापस जा रहल छथि | हमर बात मूँहेंमे रहि गेल | कथी लेल रुकितहुं | क्षेत्रीय प्रबंधकसं बिना भेंट केनहि डोमनहिल घूरि गेलहुँ | किछु दिनक बाद, अम्बिकापुरक क्षेत्रीय प्रबंधक संगे शहडोलक क्षेत्रीय प्रबंधक शर्माजी एलाह त कहलनि, ‘मैं बहुत नाराज हूँ ठाकुर, तुम शहडोल गए और बिना हमसे मिले चले आए ?’ हम कहलियनि,’वर्माजी की हालत देखकर मैंने आपसे कुछ याचना करना उचित नहीं समझा सर |’ कहलनि, ‘क्यों, वैसे नहीं मिल सकते थे ?’ कहलियनि, ‘वैसे मिलते और आप कहीं पूछ देते कि बिना आदेश प्राप्त किए क्यों मिलने आ गए, तों मैं क्या जबाब देता ?’ कहलनि,’सीवान में जिन लोगों के साथ काम कर चुका हूँ,उनसे ऐसा क्यों पूछूँगा, वो तो यहाँ के लिए नियम है, यहाँ अगर छूट दे दूँ तो लोग शाखामे काम करने के बदले क्षेत्रीय कार्यालयमे ही जमा होने लगेंगे |’ बादमे हमर सबहक शाखा अंबिकापुर क्षेत्रमे आबि गेल | हमरा मोन मारिक’ ओतहि रहि जेबाक अतिरिक्त कोनो आन नीक विकल्प नहि रहि गेल |एक सालक बाद अनुरोधपर स्थानान्तरण लेल आवेदन पठा देलिऐ, आदेश एबामे ततेक देरी भ’ गेलै जे हमरा लेल काजक नहि रहल | कॉलरीक किछु शाखा प्रबंधक सभ कृषि पृष्ठभूमिक छलाह | कहियो चिरिमिरी शाखामे, कहियो मनेन्द्रगढ़, शहडोल अथवा अम्बिकापुरमे मीटिंग होइत छलैक | अधिक काल सभ शाखा प्रबंधक एकहि जीपसं जाइत छलाह आ घुरैत छलाह | सभ शाखामे फोन छलै, सभ शाखा प्रबंधक फ़ोनपर एक-दोसरसं सम्पर्कमे रहैत छलाह | एहि ठाम विभिन्न प्रान्तक लोक छलाह, तें विभिन्न तरहक आयोजन होइत रहैत छलै | बंगाली लोकनि द्वारा दुर्गा पूजाक बहुत उत्कृष्ट आयोजन होइत छल | रावण-दहनक उत्सवमे अपार भीड़ रहैत छलैक | बिहारी तथा किछु अन्य प्रान्तक लोक सभ सेहो छठि पावनिक बहुत नीक आयोजन करैत छलाह | कॉलरी द्वारा कृत्रिम जलाशयक व्यवस्था कएल गेल छलै |छपराक रामजी सिंह आ तरौनीक के.एन.झा ओत’ छठि पावनिमे खरना दिन प्रसाद पबैत छलहुँ | 15 अगस्त आ 26 जनवरीक’ कवि सम्मलेन होइत छलै | सन्त सम्मेलनक आयोजन सेहो भेल छलै | प्रपन्नाचार्यजी महाराजक मुखसं भागवत कथाक प्रवचन सेहो सुनबाक अवसर भेटल | हल्दीबाड़ी स्थित काली मन्दिर सेहो कहियोक’ जाइत छलहुँ | कोरिया कॉलरीमे एकटा अवकाशप्राप्त कॉलरीकर्मी द्वारा योगासन सिखाएल जाइत छलै, सेहो सीख’ रवि दिनक’ कहियो-कहियो जाइत छलहुँ | हल्दीबाड़ीमे ओशोक शिष्य स्वामी आनन्द सिद्धार्थक आगमन भेलनि, तीन दिनक लेल आयोजित ध्यान-शिविरमे सेहो भाग लेबाक अवसर भेटल | कहियोक’ अशोक चक्रवर्ती दादा ओत’ हुनक श्रीमतीजीक गायन-रवीन्द्र संगीत,नजरुल संगीत, लोकगीत सुनबाक अवसर भेटैत छल | कहियोक’ रविजी आ दुबेजीक संग चिरिमिरीमे पलटू मुखर्जी दादा ओत’ हुनक गायन सुनबाक लेल जाइत छलहुं | पलटू दादा रविजी आ हमर किछु रचनाकें उपयुक्त रागमे अपन स्वर दय कैसेट तैयार केलनि | हुनक प्रस्तुति बहुत मनमोहक लागल | ओहि कैसेटकें करीब बारह साल सुरक्षित रखलहुं | दुर्भाग्यवश आब ओ कैसेट किनको लग सुरक्षित अछि | एक राति एकटा सूफी सन्तक आगमन पर आयोजित उत्सवमे पलटू दादाक आकर्षक गायन सुनबाक सौभाग्य भेटल | साहित्यिक गतिविधि : कादंबरी साहित्य परिषद्क सदस्य बनलहुं | कहियो सेंट्रल स्कूल, कहियो गुदरीपारा, चिरिमिरी ,छोटा बाज़ार अथवा अन्यत्र कतहु कवि गोष्ठीमे सम्मिलित हुअ’ लगलहुं | पहिने किछु गोष्ठीमे हम अपन मैथिली रचना प्रस्तुत केलहुं | बादमे हुनका सबहक संग देखैत-सुनैत हमरोसं किछु रचना हिन्दीमे लिखाए लागल | हम 3 दिसम्बरक’ डोमनहिल शाखामे ज्वाइन केने रही, 6 दिसम्बरक’ अयोध्यामे बाबड़ी मस्जिद ध्वस्त हेबाक समाचार अखबार सबहक मुख्य जगह नेने छलैक | हमरापर जे प्रतिक्रिया भेल ताहिसं धीरे-धीरे एकटा गीतक जन्म भेल : मैं कभी मन्दिर न जाता और न चन्दन लगाता मंदिरों-से लोग मिल जाते जहां पर बस वहीं पर सर झुकाता देर थोड़ी बैठ जाता मुस्कुराता गुनगुनाता, गीत गाता, मैं कभी मन्दिर न जाता | ई रचना ‘नवनीत’क दीपावली विशेषांकमे प्रकाशित भेल, एहि लेल किछु पाठकक मधुर प्रतिक्रिया सेहो प्राप्त भेल | एकटा बैंक प्रबंधकक रूपमे हम की अनुभव करैत छलहुँ से किछु अंशमे एहि गीतमे प्रगट भेल : काजल की कोठरी में मैं और मेरे साथ मेरा मन | किछु और गीत सबहक पहिल दू पांती एना अछि : ‘मै जगा तो आज सूर्योदय हुआ डालियों पे फूल भी खिलने लगे |’ ‘रास्ते दुकान हो गए लोग परेशान हो गए |’ ‘तुम पहनो तो शब्दों के कुछ हार गूँथ कर लाऊं मैं |’ ‘जिन्दगी जब हुई जिन्दगी के लिए हर घड़ी शुभ घड़ी आदमी के लिए |’ ‘मैं कहता हूँ चीज पुरानी घर के अन्दर मत रखो वो कहती है कौन जानता बादल कब घिर आ जाए |’ ‘जंगलों के पार हो गई मालती विचार हो गई |’ ‘ सो गए तुम मैं जगा था रात भर |’ दैनिक भास्कर(बिलासपुर)मे रवि दिनक’ एक पृष्ठमे एक कात साहित्यिक रचना रहैत छलैक | ओहिमे रचना पठबैत छलिऐक | कहियो-कहियो ओहिमे रचना प्रकाशित होमय लागल | कहानी लेखन महाविद्यालय, अम्बाला छावनी द्वारा मासिक पत्रिका ‘शुभतारिका’ निकलैत छलैक | ओहिमे दू-तीन प्रयासक बाद दूटा लघु कथा ‘रात और दिन’,’चन्द्रमा’ और किछु गीत प्रकाशित भेल | ‘हंस’ पत्रिकामे सेहो एकटा लघुकथा ‘संसार’ प्रकाशित भेल | इंदौरसं प्रकाशित ‘वीणा’, मुंबईसं प्रकाशित ‘नवनीत’ आ लखनऊसं प्रकाशित पत्रिका ‘सानुबंध’मे सेहो किछु रचना प्रकाशित भेल | मैथिलीमे रचनाक सृजन बाधित भेल | मैथिलीक प्रसिद्द साहित्यकार जीवकान्त जी सं पत्राचार चलैत रहल |ओ मैथिलीक स्मरण दिअबैत रहैत छलाह | सुपौलसं प्रकाशित मैथिली पत्रिका ‘भारती मंडन’ मे किछु रचना प्रकाशित भेल | पहिनेक लिखल एकटा दीर्घ कविता छल, तकरामे किछु संशोधन केलहुं, ओ ‘धारक ओइ पार’ नामसं सुपौलसं प्रकाशित भेल | आदरणीय जीवकान्तजी ओकर भूमिका लिखने छलाह | ओही अवधिमे किछु गजल हिन्दीमे लिखाएल आ ‘तिरंगे के लिए’ नामसं गजल संग्रह संवेदना प्रकाशन, अलीगढसं प्रकाशित भेल | सीवानक प्रोफेसर गंगानंद झा जी सेहो अवकाशप्राप्तिक बाद चंडीगढ़सं पत्राचारक माध्यमसं अपन पढ़ल कोनो प्रिय रचना आ ओहिपर अपन प्रतिक्रिया शेयर करैत छलाह, ताहूसं साहित्यसं जुडल रहबामे आनन्द प्राप्त होइत रहल | बैंकक काज : बैंक शाखाक मुख्य काज छलै कॉलरीक कर्मचारी-अधिकारी सबहक वेतन भुगतान | सभ मास एकसं पन्द्रह तारीख धरि बड्ड भीड़ रहैत छलै | बैंक बन्द होइत-होइत मुनहारि साँझ भ’ जाइत छलै | शेष पन्द्रह दिन साँझमे 6 बजे धरि जरुरी काज भ’ जाइत छलै | सप्ताहमे एक दिन गैर-बैंकिंग कार्य दिवस होइत छलै, जाहिमे सभ लंबित कार्यक निपटान क’ लेल जाइत छलै | बही सभ संतुलित रहैत छलै | किछु विवरण आदि बनयबाक लेल कहियो-कहियो अवकाशक दिन सेहो बैस’ पडैत छलै | शासकीय योजनान्तर्गत ऋण वितरणक किछु लक्ष्य सेहो रहैत छलै, ओहो पूर्ण करबाक रहैत छलै | कॉलरीक करीब एक हजार एक सै कर्मचारी-अधिकारी लोकनिक वेतन भुगतान बैंक द्वारा होइत छलै | करीब 900 कर्मचारी और बांचल छलाह जिनकर वेतन भुगतान बैंकक माध्यमसं करेबाक लेल कॉलरी प्रबन्धन द्वारा अनुरोध कएल जा रहल छलै | शाखा द्वारा ई कहल जाइत छलै जे हमरा और स्टाफ भेटि जाएत तखने भ’ सकैत अछि | कॉलरी प्रबन्धन दुखी छल जे बैंक भवन, सभ स्टाफक लेल आवास,बिजली,पानि सभ निःशुल्क उपलब्ध करेबाक बादो बैंक शत प्रतिशत कर्मचारीक वेतन भुगतान करबामे सहयोग नहि क’ रहल अछि | हम स्टाफक बीच ई सुझाव देलिऐ जे हम सभ पाँच-पाँचटा कर्मचारीक खाता प्रतिदिन खोलि कॉलरी प्रबन्धनकें मदति करबाक आश्वासन द’ सकैत छियनि, मुदा हमर अधिकारी एकरा उचित नहि बुझैत छलाह | कॉलरी प्रबन्धन द्वारा खिसियाक’ एकदिन हमर आ हमर अधिकारीक आवासक बिजली आ पानिक कनेक्शन कटबा देल गेल | अस्थायी किछु जोगार लगाक’ हम सभ दू दिन काज चलेलहुं,मुदा कॉलरी प्रबन्धनसं टकराव सेहो उचित नहि लागल, हमर अधिकारी सेहो कॉलरीक जी.एम.सं सम्पर्क करबाक सलाह देलनि | हुनका संगे जी.एम. साहेबक आवासपर गेलहुँ | जी. एम. साहेब एहेन डेग उठ्यबाक लेल दुख प्रगट करैत अपनो समस्याक निराकरणक अनुरोध केलनि जाहिसं बैंक द्वारा शत प्रतिशत कर्मचारीक वेतन भुगतानक लक्ष्य पूर्ण भ’ सकनि | अन्तमे यैह निष्कर्ष निकलल जे हम सभ प्रतिदिन कम-सं-कम पाँचटा नव खाता खोलि दियनि,जाहिसं ओहो अपन उच्चाधिकारीकें सूचित क’ सकथि जे शत प्रतिशत भुगतान बैंक द्वारा करबाक दिशामे सहयोग प्राप्त भ’ रहल अछि | मैत्रीपूर्ण गप भेल आ हमरा सभकें डेरा घुरबासं पहिने डेरामे बिजली आ पानिक सुविधा आबि चुकल छल | ओकर बाद फेर कहियो कोनो तरहक व्यवधान नै उपस्थित भेल | बैंकमे चोरी : शाखाक स्ट्रांग रुमक दरबाजा बैंकक नियमानुकूल नहि छलैक | ई अनियमितता आरम्भेसं आबि रहल छलैक मुदा सक्षम अधिकारीक समुचित आदेशक अभावमे ओ कमी दूर नहि भेल छलैक | एक राति चोर ताला तोड़ि स्ट्रांग रूममे प्रवेश क’ गेल आ तिजोड़ीकें खोलबाक प्रयासमे तिजोड़ीक हैंडिल तोड़ि देलक,मुदा तिजोड़ी नहि खुजलै | नगद राशिक चोरी नहि भेलै, मुदा चोर सुरक्षा प्रहरी द्वारा राखल बन्दूक ल’क’ भागि गेल | सबेरे हमरा पता चलल त क्षेत्रीय प्रबंधककें सूचित केलियनि, थानामे एफ. आइ. आर. आ और जे किछु करबाक चाही, से शाखा द्वारा कएल गेलै | जांच अधिकारी सभ एलाह, खोजी कुकुर आएल, नियमानुसार सभ किछु भेलै | बन्दूक त नहि भेटलै, मुदा ओकर बीमाक नवीनीकरण भेल छलै, तें बीमित राशि शाखाकें भेटि गेलै | तकरा बाद नियंत्रक कार्यालयक मार्गदर्शनमे बजटमे उचित संशोधन क’क’ स्ट्रांग रूममे बैंकक नियमानुसार गेट लागि गेलै | फेर कोनो अप्रिय घटना बैंक शाखामे नहि भेलै | हमर दुपहिया वाहनक चोरी : हमरा लग 1979 क राजदूत मोटर साइकिल छल | ठीक रहैत छल त नीक जकाँ चलैत छल | तें एकरा हटबैत नै छलहुँ | तें नव गाड़ी नै कीनैत छलहुँ | भ’ सकैत अछि जे लोककें हमर गाड़ी नीक नै लगैत होइ, भ’ सकैए जे ककरो बर्दाश्त नै भेल होइ आ ओ हमर दुविधा समाप्त करबाक उद्देश्यसं एहेन डेग उठेने हो | एक दिन हम स्नान करैत रही त पाल साहेबक पत्नीक आवाज सुनाइ पड़ल,’मैथिली,तुम्हारे पापा कल गाड़ी कहीं दूसरे जगह रख दिए थे क्या ? हमरा बुझैमे आबि गेल जे गाड़ी क्यो ल’ गेल | हम आरामसं स्नान-भोजन क’ क’ ऑफिस गेलहुँ |ओहिठाम किछु जरूरी काज सभ क’क’ गेलहुँ थाना | एफ. आइ. आर. केर औपचारिकता पूर्ण क’क’ आबि गेलहुँ | हमरा विश्वास छल जे हमर गाड़ी भेटि जाएत कारण दोसर क्यो ओकरा बहुत दूर धरि नै ल’ जा सकैए | एक बेर हम खडगवां गेल रही सरप्राइज चेकिंगमे | साँझमे वापस एबा काल ओहि शाखाक शाखा प्रबंधक सेहो संग भ’ गेलाह, हुनका चिरिमिरी जेबाक छलनि | रस्तामे सात किलोमीटर लगभग जंगल आ पहाड़ी क्षेत्र छै, ओही ठाम आबिक’ चढ़ाइपर गाड़ी बन्द भ’ गेल, ओहो बेचारे पाछूसं बहुत दूर धरि ठेललनि मुदा गाड़ी नै चलल | अन्तमे ओ थाकिक’ घूरि गेलाह, एकटा बस जाइत रहै, ओहीसं चलि गेलाह | हम कहुना क’ ओकरा गुडकेने-गुड़केने बहुत देरीसं घर पहुँचलहुं | सभकें चिन्ता हुअ’ लागल छलै, किछु गोटे हमरा तकैत आबि रहल छलाह,रस्तामे भेटलाह | दोसर दिन मिस्त्री ठीक क’ देलक त फेर चल’ लागल | एक सप्ताह बाद बिजली मिस्त्री कहलक जे रस्तामे एकटा पुलियाक नीचाँ कोनो गाड़ी खसल छै,लोक सभक भीड़ लागल छै | हम बैंक गेलहुँ त थानासं सूचना भेटल जे गाड़ी भेटि गेल अछि, मुदा गाड़ी लेबाक लेल कोर्टमे किछु औपचारिकता करब’ पडत | ओकील साहेबक माध्यमसं किछु औपचारिकता पूर्ण करेलाक बाद गाड़ी हमरा भेटि गेल, किछु पार्ट्स ख़राब भ’ गेल रहै से ठीक कराक’ गाड़ी ल’ अनलहुं | ओ गाड़ी भेटि गेल ताहिसं लाभ ई भेल जे हमरा तत्काल दोसर गाड़ी लेबाक आवश्यकता नहि रहल आ हानि ई भेल जे नव गाड़ी नहि किनाएल आ बादमे ई गाड़ी एकबेर हमर बामा हाथक फ्रैक्चरक गबाह बनल | ओ गाड़ी एखनो हमरा लग अछिए | यद्यपि कए बरखसं एकर उपयोग नै करैत छी आ गाड़ीपर चढ़ितो नै छी, मुदा कबाड़ी बला हाथें बेचियो नै पबैत छी, डर होइए जे कतहु कियो एकर दुरूपयोग क’ क’ हमरा जबाबदेहीमे ने फंसा दिए’ | 20.10.21 माएक संसार : माएक संसारमे तीनटा बेटा,दूटा पुतोहु,एकता पोता,दूटा पोती,तीनटा बेटी,पाँचटा नाति आ सातटा नातिन, तीनटा भाए,तीनटा भाउज,आठटा भतीजी, आठटा भतीजा, एकटा बहिन,पाँचटा बहिनपूत आ दूटा बहिनधी, ननदि,दूटा भागिन आ भगिनी सभ आ फेर हिनका सबहक आगू पीढ़ीक लोक सभ आ किछु पड़ोसिन सभ छलखिन | माएक संसार सलमपुर,रुचौल,लखनपट्टी, शिशवा,घोंघौर,सोहराय ,नारायणपट्टीक अतिरिक्त दिल्ली आ मध्य प्रदेश धरि पसरल छलनि | जेठकी पुतोहु बहुत दिन धरि संगे छलखिन, फेर सालमे तीन-चारि बेर किछु-किछु दिन लेल आबि जाइत छलखिन | छोटकी पुतोहु सेहो थोड़े दिन संग रहलखिन | बादमे एसगर भेलीह त कोनो नातिनकें लखनपट्टी अथवा शिशवासं बजा लैत छलीह | आब बेटा-पुतोहुक संगे रहती त गाममे बूढ़ा एसगर कोना रहथिन आ दुनू गोटे बेटा-पुतोहु संगे रहै जेताह त गामपर के रहत, घर-दुआरि के की हेतनि,ककरापर छोडिक’ जाइ जेतीह | घरमे सांझो दै बला के रहतनि ? आब एसगर दिन बितयबाक समय आबि गेल छलनि | रातिमे बड़ी राति धरि मोन बौआइत रहैत छलनि दिल्ली, मध्य प्रदेश,गाम-गाम, भगवान-भगवतीसं प्रार्थना करैत रहैत छलीह, सभ धिया-पूता नीके ना रहै जाइ | कखनो काल पेट आ कि माथ दुखाइत छलनि त चौकपर दबाइ दोकानसं दबाइ मंगाक’ खा लैत छलीह | दू-चारि दिन ठीक रहै छलनि, फेर पुनरावृत्ति होइत छल | एक दिन दोकान बला कहलकनि बाबूकें जे आब दबाइ ओना नै दियनु, जांच करबा दियनु बेर-बेर पेटमे दर्द किए भ’ जाइत छनि | जखन जांच भेल त भ’ गेल शुरू दैया-मैया, दौड़-धूप, चिट्ठी-पतरी,फ़ोन-फान | हमरा 9 नवम्बर क’ दिल्लीसं अनुज ललनजी द्वारा प्रेषित भागिन अशोकक लिखल चिट्ठीसं आ तकरा बाद बाबूक चिट्ठीसं पता चलल जे माएक देह लीवर कैंसरक चपेटमे आबि गेल छनि आ गोरखपुरमे हनुमान प्रसाद पोद्दार कैंसर अस्पताल एवं शोध संस्थानमे इलाज सेहो शुरू भ’ चुकल छनि | मधुबनी शिक्षक संघक प्रेसमे प्रबंधक छलाह आशा भाइ, ओ गामसं समाचार पटना हमरा मामाकें दैत छलाह आ मामा हमरा ऑफिसमे फ़ोनपर सुचित क’ दैत छलाह | गोरखपुरमे माए लग हमर दूटा बहिन सच्ची आ बच्ची, दुनू छोट भाए ललनजी आ रतनजी और ललनजीक पत्नी छलखिन | बाबू गाम चल गेल छलाह, गाममे हुनक देख-रेख लेल नातिन विभा छलनि | किछुए मास पहिने हमरा टोलक एक गोटे अही बिमारीसं देह छोडि चुकल छलाह, माए हुनकर कष्ट देखिक’ बहुत दुखी भेल छलीह, आब अपने एहि डकूबा बिमारीक चपेटमे आबि गेल छलीह | हमहूँ एसगरे गोरखपुर पहुँचलहुं | डा.ए.के. चतुर्वेदी सं सम्पर्क केलहुं, कहलनि जे एहि ठामसं नीक इलाज आनो ठाम कतहु नहि भ’ सकैत अछि, तें टाटा मेमोरियल (मुंबइ) गेलासं कोनो विशेष लाभ नै भेटत | सेकाइ चलैत छलैक | एकर प्रभाव सेहो देखाइत छल | पटनासं मामी संग मामा सेहो आबि गेल छलाह | माएक संग गोरखनाथ मन्दिर गेलहुँ | ललनजी दुनू गोटेक संग हम गामो गेलहुं | वरंडापर माएक लेल एकटा कोठलीक व्यवस्था केलहुं | घुरिक’ हम फेर गोरखपुर एलहुं | माएकें खून चढ़लनि | डॉक्टर साहेब 11 जनबरीक’ आब’ कहलकनि | माएक संग सभ गोटे गाम गेलहुँ | हम डोमनहिल वापस गेलहुँ | एहि बीच माएकें ल’क’ निर्धारित तिथिक’ रतनजी गोरखपुर जाक’ फेर गाम घूरि गेलाह | 18 फरबरी क’ पटनासं मामाक सन्देश भेटल जे माएक हालत खराब भ’ गेल छनि | 20 क’ जीपसं परिवार संग विदा भेलहुँ | 21 क’ साँझमे 7 बजे गाम पहुँचलहुं | दिल्लीसं ललनजी एलाह, सच्ची एलीह | दिन-दिन माएक हालत खराब होइत गेलनि आ 3 मार्चक’ रातिमे लगभग 9 बजे देह छोडि देलनि | वसन्तक 12 वींक परीक्षाक तिथि 12.03 सं 4.4 धरि छलनि, ओ परीक्षा नहि द’ सकलीह | ओ अपन माएक संग गामेमे रहि गेलीह | मैथिली आ विवेकक परीक्षाक तिथि निकट छलनि | हिनका दुनू गोटेक संग हम 29 मार्चक’ डोमनहिल पहुँचलहुं | मैथिलीक बोर्ड परीक्षा भेलनि | परीक्षा केन्द्रपर जे अनुशासन देखलहुं, से ओहि समय बिहारमे दुर्लभ छल | नीक लागल | बहुत दिन धरि पढ़ाइ –लिखाइमे बाधा उपस्थित हेबाक अधलाह प्रभाव धिया-पुताक परीक्षा आ ओकर परिणामपर पडलै | धिया-पुतापर कोनो प्रभाव नहि पड़ै ताहि लेल कोनो दोसर व्यवस्था करब हमरा बूते नहि पार लागल | 20/10/21 माएक बाद : बच्ची नैहरमे भातिजक उपनयनमे सम्मिलित भेलाक बाद अपन बहिनपूत राजू कें संग क’क’ वसन्त संगे 15 जूनक’ डोमनहिल पहुंचि गेलीह | गाममे बाबू आ रतनजीक संग बहुत दिन धरि हमर भावहु नहि रहि सकलीह, 24 जूनक’ भाएक संग कहुनाक’ सलमपुरसं दानापुर पहुंचि गेलीह | गाममे बाबू आ हमर अनुज रतन जी रहि गेलाह | हमर तीनू बहिन अपन-अपन संसारमे बाझल छल, ककरो पलखति नै छलै जे हिनका सबहक देख-रेख गाम आबिक’ क’ सकितनि | हमहूँ ओहि स्थितिमे नहि छलहुँ जे पत्नीकें गाममे छोड़ि दितियनि | हमरा गामसं किछु लोक पत्र द्वारा सुचित केलनि जे हिनका सभ लेल कोनो व्यवस्था सुनिश्चित करू | हम कोनो आदमी राखि लेबाक सुझाव देलियनि, मुदा गाममे से व्यवस्था नहि भ’ सकलनि | हमरा लग वसन्त अस्वस्थ भ’ गेल छलीह, टाइफाइड भ’ गेलनि,ओत’ नहि ठीक भेलनि त हम पटना ल’ गेलियनि | ओही समयमे हम गाम जाक’ बाबू आ रतनजीक हाल देखि एलहुं | दुनू गोटे दुखित पड़ि गेल छलाह, मुदा ठीक भ’ भेल छलाह | हम पुनः गाममे कोनो आदमी तकबाक सुझाव दैत घूरि गेल छलहुँ | माएक पहिल बरखीमे एक बेर फेर जुटान भेलै,मौसी एलीह, मामी एलीह,ललनजी एलाह, घर भरलै किछु दिन लेल, भोज-भात भेलै आ फेर चारि-पाँच दिन बाद स्थिति पूर्ववत भ’ गेलै | सभ क्यो अपन-अपन दुनियाँक दुख-सुखमे ओझरा गेल आ बाबू गाममे कोनो आदमीक समूल्य सेवा नहि प्राप्त क’ सकलाह | एकटा एहेन समय एलै जे अपना संसारमे बाबू एसगर रहि गेलाह | बच्चीक स्वास्थ्य : एक दिन बच्चीकें बहुत घबराएल देखलियनि, कहलनि,’हमरा धिया-पूताकें देखब |’ डॉक्टरसं सम्पर्क केलहुं | बी. पी. बढल छलनि | हिनका लेल दौड़-धूप शुरू भेल, किछु दिन होमियोपैथीसं आ तकर बाद अंगरेजी दबाइसं उपचार हुअ’ लगलनि | कहियो डोमनहिलक अस्पताल त कहियो रीजनल अस्पताल दौड़’ लगलहुं | बादमे पटना आबि डा. अरुण तिवारीसं सलाह लेलहुं | ओ बी.पी.क दबाइ एमटास- 5 लीखि देलखिन | हुनकहि सलाहसं दबाइ लेलासं लाभ भेलनि | कय साल धरि अही दबाइसं ठीक रहलीह | बाबूक संग डोमनहिलमे : बाबू अपन अस्वस्थ शरीरक संग घरक ओगरबाही करबासं ऊबि गेलाह | हुनका लग दू टा विकल्प छलनि डोमनहिल चल जाथि जत’ हम सभ छलहुँ अथवा दिल्ली जाथि जत’दुनू छोट पुत्र ललनजी, रतनजी छलखिन आ एकटा बेटीक परिवार छलनि | दिल्लीमे एक बेर पहिनहुं रहि चुकल छलाह, ओहि ठामक रस्ता सेहो जानल छलनि, तें ओतहि जेबाक निर्णय लेलनि | कैला खेतक काज क’ दैत छलनि, ओकरा दरबज्जापर सुतबाक लेल कहलखिन | हमर पितिऔत भाए दिलीपकें कहलखिन, हमरा कहुनाक’ दिल्ली पहुंचा दैह | बाबू दिलीप संगे दिल्ली पहुंचि गेलाह | फेर आश्रय-स्थल भेलनि छोट बेटीक घर जत’ बेटी,जमाए,नाति,नातिन आ दूटा पुत्र सेहो छलखिन | मोन ठीक रहै छलनि त ओशोक प्रवचन सुनैत छलाह, अस्वस्थ रहै छलाह त डा.पाल अथवा चड्ढा नर्सिंग होम जाक’ किछु दिनमे ठीक भ’क’ आबि जाइत छलाह | हमरा सभटा पता रहैत छल | हम हुनक इलाज हेतु आर्थिक आवश्यकताक प्रतिपूर्ति करबाक प्रयास करैत छलहुँ | बहुत दिन धरि एहि तरहें चलल | मुदा, एकटा समय एलै जे चड्ढा नर्सिंग होम सेहो इलाज करबासं असमर्थ भ’ गेल | हमरा सूचना भेटल जे आब स्थिति ठीक नहि छनि आ कखन की भ’ जेतनि तकर कोनो ठीक नहि | फेर हमरा समक्ष प्रश्न ठाढ़ भ’ गेल जे दिल्ली एसगर जाउ कि सभ गोटेक संग जाउ | एसगर जाएब त हिनका सबहक सुरक्षाक की हेतनि आ सभकें संग ल’ जाउ त हिनका सबहक पढ़ाइक की हेतनि | जीवनमे कय बेर एहेन समय अबैत छैक जे लगैत छैक जेना परिवार समेत कोनो नावपर कोनो नदी पार क’ रहल छी आ नाव ड़ूब’ लागल अछि आ तत्काल निर्णय लेबाक अछि जे ककरा-ककरा आ कोन-कोन चीजकें बचाएब सुनिश्चित करू | हम ओहि समय सभसं बेशी अपनाकें बचयबाक कोशिश करैत छी, परिणाम किछु नीक आ किछु अधलाह होइत अछि, किछु चीज बचि जाइत अछि, किछु चीज नहि बचि पबैत अछि, परिणाम जे अबैत अछि,तकरा अस्तित्वक निर्णय मानि संतोष क’ लैत छी | हम बैंकक नोकरीमे छलहुँ, खाजानाक एक सेट कुंजी हमरो लग रहैत छलैक | बिना क्षेत्रीय प्रबंधकक आदेशक ने हम ककरो ओ कुंजी द’ सकैत छलहुँ ने ओ स्थान छोडि सकैत छलहुँ | हम पिताक समुचित इलाजक हेतु दिल्ली जेबाक लेल क्षेत्रीय प्रबंधकसं अनुमति हेतु प्रार्थना केलहुं किन्तु अनुमति भेटि नहि रहल छल | क्षेत्रीय प्रबंधक महोदयकें कोनो अधिकारी उपलब्ध नहि भ’ रहल छलखिन जिनका हमरासं चार्ज लेबाक लेल पठा देथिन | एना कय दिन चलल | एक दिन हमर बहिनो फोनपर सुचित केलनि जे डॉक्टरक अनुसार आब किछु घंटाक मेहमान छथि | हम दुखी भ’क’ क्षेत्रीय प्रबंधक महोदयकें कहलियनि जे एहि स्थितिमे हमरा की आदेश दै छी,तखन ओहो कहलनि जे कोनो सीनियर क्लर्क कें चावी द’क’ अहाँ निकलि जाउ, हम कोनो –ने-कोनो अधिकारीकें आइ पठा देबै | हम सपरिवार निकलि गेलहुँ विना आरक्षण के ट्रेनसं दिल्ली जेबाक लेल | संयोग भेलै जे अनुपपुर जं. पर हमरा पाँचो गोटेक लेल आरक्षण भेटि गेल | हम सभ 4 मइ ( 1996)क’ साँझमे दिल्ली पहुंचि गेलहुँ, बाबू अचेत नहि भेल रहथि | हमरा सभकें देखि किछु सकारात्मक परिवर्तन भेलनि,से सभकें अनुभव भेलनि | कहुना राति बीतल | सबेरे ऑटो रिक्शासं चड्ढा नर्सिंग होम ल’ गेलियनि | डा. ई. सी. जी. रिपोर्ट देखि कहलनि हम सभ किछु नहि क’ सकैत छी | पुछलियनि, ई विचार कहू जे कत’ ल’ जइयनु जत’ सुधारक किछुओ आशा क’ सकी, त कहलनि, सेंट स्टीफेंसमे देखि सकैत छी, ओना हिनका लग समय बहुत कम छनि | तत्काल हम सभ ओही ऑटो रिक्शासं सेंट स्टीफेंस अस्पताल बिदा भ’ गेलहुँ | हमर बहिनो स्कूटरसं चललाह,बहिन सेहो पाछाँ बैसलि | सभ गोटे जल्दी-सं-जल्दी अस्पताल पहुंच’ चाहैत रही | दुर्घटना भ’ गेलै, कोनो स्पीड ब्रेकर लग हमर बहिन स्कूटरसं नीचां खसि पडलीह, सड़क पर घिसिया गेलीह,हाथ बहुत छिला गेल छलनि | बाबू आ सच्ची दुनू गोटेकें इमरजेंसी वार्डमे भरती कराओल गेलनि | चिन्ता दुगुना भ’ गेल | सच्ची कें फ्रैक्चर नै भेल छलनि, तें प्लास्टरक’क’ किछु दबाइ सभ द’क’ छोड़ि देलकनि | बाबू द’ कहल गेल जे हिनका लेल 24 घंटा भारी छनि, 24 घंटा रहि गेलाह त बूझू एखन बचि जेताह | बाबू बचि गेलाह | 15 तारीखक’ बाबू अस्पतालसं मुक्त भेलाह | मुदा चलबा-फिरबा योग्य हेबामे समय लागि गेलनि | दू बेर पुनः जांच लेल जाए पडलनि | डॉक्टर दबाइ लीखि देलखिन आ कतहु ल’ जेबाक सह्मति सेहो देलनि | 17 जूनक’ बाबूक संग हम सभ गोटे दिल्लीसं डोमनहिल वापस पहुंचि गेलहुँ | ओत’ बाबूकें आँखिक कष्ट भ’ गेलनि | आंखिक डोक्टरसं सम्पर्क कय ड्रेसिंग लेल किछु दिन ल’ गेलियनि | तकर बाद किछु दिन डेरापर रहथि आ किछु दिन अस्पतालमे | डेरापर रहथि त साँझक’ बहुत गोटे भेंट करय अबैत छलखिन, रविजी आ दुबेजी नियमित रूपसं अबैत छलाह आ बाबू गीत-गजलक आनन्दमे लीन भ’ जाइत छलाह | हमरो लिखबा लेल प्रतिदिन तगादा करैत छलाह, रविजीकें सेहो तगादा करैत छलखिन, रचनापर अपन प्रतिक्रिया सेहो दैत छलखिन | बाबू कैसेटमे पलटू दादा द्वारा गाओल हमर लिखल गीत सभ सेहो सुनैत छलाह | चक्रधर झा,सभापति चौधरी,नवीन मिश्र,रामजी सिंह सेहो सभ अबैत रहैत छलखिन जिज्ञासामे | एस ई सी एल केर क्षेत्रीय अस्पतालक डा.उमेश मिश्र जीक दबाइसं ठीक रहैत छलाह, हुनक प्रशंसक भ’ गेल छलाह | कखनो डा. साहेब बजबैत छलखिन, कखनो हम जाक’ स्थिति कहैत छलियनि त दबाइ लीखि दैत छलाह, से कीनिक’ देब’ लगैत छलियनि | आवश्यकतानुसार डा.साहेबक सुझावपर किछु दिन लेल अस्पतालमे भर्ती सेहो कर’ पडैत छल | अपन लोक : अपन दुख : एक दिन बाबू प्रसन्न स्थितिमे पोता-पोती सबहक संग गप करैत रहथि | छुट्टीक दिन छलै | हमहूँ डेरेमे दोसर कोठलीमे रही, किछु लिखैत-पढैत रही | बाबू अपन किछु संस्मरण सुनबैत धिया-पूता लग बजलखिन जे एकटा समय छलै जे एम एल ए आ एम पी हमरा जेबीमे रहै छल | बच्ची साल भरिसं बाबूक लेल , धिया-पूताक लेल आ हमरा लेल एसगरे बहुत रास काज करैत छलीह, कोनो काज लेल डेरामे नोकर –चाकर राखब नीक नहि लगैत छलनि | एसगरे भोजन,जलखै, पथ्य, झाड़ू-पोछा, कपड़ा साफ़ करब आदि काजमे परेशान रहैत छलीह, बारह बजेसं पहिने चाह छोडि किछु मुंहमे नै दैत छलीह , बी.पी.क दबाइ सेहो समयपर नहि खाइत छलीह | क्यो पूछि देलकनि, ‘हं गे माए, एम.एल.ए.-एम.पी. बाबाक जेबी मे रहै छलनि ?’ बच्ची जोरेसं कहलखिन,’ऊंह....हमरा सभटा देखल अछि |’ हम दूनू बात सुनने छलहुँ : ‘एमेले एम पी हमरा जेबीमे रहै छल |’ ‘ऊंह....हमरा सभटा देखल अछि |’ हमरा हरिमोहन बाबूक कथा ‘अलंकार–शिक्षा’ मोन पड़ि गेल छल | बच्चीक बात अप्रिय हमरो लागल, मुदा हम ओहि एक पांती ‘ ऊंह...हमरा सभटा देखल अछि’ मे बच्चीक मोनक वेदनाकें देखलहुं...एकटा अभावक इतिहास...गोठुल्ला एतेक टा घरमे द्विरागमन, भरि टोलक लोकक करजा, घर लेल गहना बिकाएब,आवश्यकताक पहाड़ आ एकटा नोकरीपर सभटा व्यवस्थाक भार .....| मुदा बाबूक लेल ई वाक्य एखन बड्ड असह्य पीड़ाक कारण बनि गेल छलनि,एकटा हलचल मोनमे उठि गेल छलनि, की करथि,एको पल आब एत’ रहब कठिन लाग’ लगलनि, अपन सभ कपड़ा,दबाइ आदि झोडामे रखलनि आ विदा भ’ गेलाह | पोता-पोती रोकलकनि, नहि रुकलाह, डेरासं बाहर निकलि गेलाह | हम उठलहुं, बाहर गेलहुँ, झटकारिक’ हुनका लग पहुँचलहुं | पुछलियनि, ‘कत’ जेबै ?’ कहलनि,’ हम दिल्ली जा रहल छी, हमरा नहि रोकू |’ पुछलियनि, ‘ककरा संगे जेबै दिल्ली ?’ कहलनि, ‘विजय बला झाजी कहने छथि, हम दिल्ली जाइत –अबैत रहै छी...हुनके संग जेबै, हमरा आब नै रोकू |’ हम कहलियनि,’दिल्ली जेबाक हएत त हमहीं पहुंचा देब, मुदा एखन किए ? अपने संसारसं रूसिक’ जाएब ?’ हम जनैत छी अहाँ आहत छी, मुदा ईहो त देखू जे साल भरिसं अहाँक सेवा जे क’ रहल अछि तकरा एकटा वाक्य लेल क्षमा नहि क’ सकैत छिएक ? बाबू ठाढ़ भ’ गेलाह | हम कहलियनि, ओकर की त्याग आ योगदान छै घरमे , से अहाँ त जनैत छी | बाबूक आँखि डबडबा गेलनि | ‘अहाँ देखै छिऐ जे आइ धरि नोकर –चाकर नहि राखि, मोनो खराब रहै छै तैयो अपने सभ काज करिते रहै छै,बी.पी.क दबाइ सेहो समयपर नहि खाइत छै, एहेन स्थितिमे ओकर एकटा अप्रिय वाक्यक कारण ओकरा एतेक पैघ अपयश,एतेक पैघ दंड देबै, से उचित लगैए ?’ बाबू कान’ लगलाह | कहलनि, ‘हमरा अहाँ बड़का अपराधसं बचा लेलहुं |’ बाबू घूरि एलाह | घरमे बच्ची सेहो दुखी भेल पड़लि छलीह, हमरा सबहक आहट पाबि उठलीह, चाह बनौलनि | सभ गोटे प्रसन्न मोनसं चाह पिबै गेलहुँ | तकर बाद फेर कहियो एहेन स्थिति नहि आएल | दुर्घटना : बाबूक लेल निरन्तर डा.साहेबक सम्पर्कमे रहय पड़ैत छल | एक बेर साँझक’ डा.साहेबसं सम्पर्क क’ क’ घुरैत रही, रस्तामे मोटर साइकिलक आगाँ एकटा सुगर आबि गेलै, हमर गाड़ी खसि पड़ल आ हम सड़कपर गाडीक संग किछु दूर घिसिआइत गेलहुँ जाहिसं हमर बामा हाथमे फ्रैक्चर भ’ गेल | एक आदमी हमरा डोमनहिल अस्पताल पहुंचा देलक | बिलासपुर जाक’ प्लास्टर कराब’ पडल आ डेढ़ मास छुट्टीमे रह्य पड़ल | बाबूक इलाजमे दौड़-धूप लेल अनुज रतनजीकें बजब’ पड़ल | जाधरि हमरा हाथमे प्लास्टर रहल रतनजी डेरा आ अस्पतालक चक्कर लगबैत रहलाह | विवेकक उपनयन : विवेकक उपनयन हेबाक छलनि | गाममे जेना उपनयनक विधि-विधान छै, तेना करबामे बहुत खर्च आ बहुत समयक आवश्यकता छलै | गाम जाक’ करू त कम-सं-कम पन्द्रह दिनक छुट्टी ल’क’ जाउ, ओते दिन सभ धिया-पुताक स्कूल-कॉलेजक पढ़ाइ सेहो छुटतै, से जानि हम विकल्पक खोज कर’ लगलहुं | हरिवंश राय ‘बच्चन’क आत्म-कथा पढने रही, ओहिमे ओ लिखने छलाह जे तेजीक नैहरमे केश कटयबाक चलन नहि छलनि, मुदा बच्चन जीक परिवारमे बहुत विधि-विधानसं पहिल बेर लड़काक केश कटाएल जाइत छलैक, बच्चन जी हजामकें आवासपर बजाक’ अमिताभ आ अजिताभक केश उतरबा देलखिन | बच्चन जीक आत्मकथा पढ़िक’ लागल रह्य जे समय आ परिस्थितिक अनुसार परम्परामे किछु परिवर्तन कएल जा सकैत अछि | हम विचार केलहुं त लागल जे एखन जाहि तरहें गाममे उपनयन भ’ रहल छै, आरम्भमे अथवा बहुत दिन पहिने एहेन नहि छल हेतै, ओहि समय स्र्त्रीक शिक्षा आवश्यक नहि मानल गेल हेतै अथवा गुरूक आश्रममे जाक’ पढबाक चलन लड़केक लेल आवश्यक मानल गेल हेतै, तें लड़कीक उपनयन नहि करबाक आ लडकेक लेल गुरूक आश्रममे विद्याध्ययन करबाक लेल पूर्व तैयारीक ध्येयसं किछु विधि कएल गेल हेतै जाहिमे किछु-किछु समय-समय पर जुटैत चल गेलै आ वर्तमानमे जे स्वरूप, जे विधि-विधान चलि रहल अछि ताहिमे आवश्यक कम आ अनावश्यक बेशी भ’ गेल छै | कोनो एहेन संस्था नहि छैक जे अध्ययन करै जे कोन-कोन अवसरपर चालू विधि-विधानमे कतेक आ कोन प्रकारक संशोधनक आवश्यकता छै आ तदनुसार अपन सुझाव दै आ लोक ओकर पालन करय | एहेन स्थितिमे व्यक्तिगत रूपसं कियो आवश्यकतानुसार कोनो परिवर्तन करैत जाए, सैह व्यवहारिक लगैत छैक | एक दिन दुबेजी आचार्य श्री राम शर्माक विषयमे किछु सूचना देलनि, से नीक लागल | श्री राम शर्माक कहब छलनि जे विवाह आ अन्य संस्कारक विधि-विधानमे अनावश्यक बहुत खर्च करब भ्रष्टाचारकें जन्म दैत अछि | ओ कहैत छलाह जे कम-सं-कम खर्चमे सभ संस्कारक पालन करू | ओ एकरा व्यावहारिक रूपमे कोना कएल जाए सेहो देखबैत छलाह | हुनक अनुयायीक संख्या सेहो संतोषप्रद छलनि | जहां-तहां शिविर लगबैत छलाह,लोककें जगबैत छलाह,किछु लोक और जुटि जाइत छल | सीवानमे सेहो एक बेर हुनक कार्यक्रमक झलक देखने रही, मुदा ओहि समय ओतेक गंभीरतापूर्वक एहि विषयपर विचार नहि केने रही | एक दिन दुबेजी सुचित केलनि जे आचार्य श्रीराम शर्मा जीक शिविर चिरिमिरीमे लागि रहल छनि | शिविरमे जाक’ देखलहुं | नीक लागल | बच्चीकें सेहो ल’ जाक’ देखेलियनि | हुनको नीक लगलनि | बाबू त पहिने विरोध केलनि, मुदा जखन अपनो जाक’ देखलखिन त नीक लगलनि | ओहिठामक व्यवस्थापकसं गप केलहुं |उपनयनक तिथि सेहो निर्धारित रहै | घरमे सभ गोटेक बीच सहमति भ’ गेल | सभ गोटे जीपसं गेलहुँ | ओही शिविरमे 4 जनवरी 1998 क’ विवेकक उपनयन भ’ गेलनि |ज्ञानक सभ बातक समावेश भेलै | अनावश्यक कोनो बात नहि भेलै | दान-पात्रमे स्वेच्छासं जे देलिऐ सैह, कोनो बन्धन नहि रहै, घर आबि साँझमे लगक पाँच-सात आदमीक संग भोजन करै गेलहुँ | बहुत दिनक बाद गाम गेलहुँ त एक गोटे आबि सुचित केलनि जे अहाँ द’ सुनलहुं त हमरो साहस भेल आ हमहूँ मधुबनीमे गायत्री शिविरमे उपनयनक संस्कार पूर्ण केलहुं | हमरा नीक लागल | लीखसं हटिक’ चलबामे अपन मोने नै मानैत रहै छै, मोनकें मजबूत बनयबाक लेल सत्संग अथवा महापुरुषक जीवनी अथवा आत्मकथा पढबाक चाही | जे समस्या हमरा सोझाँ अछि से पूर्वमे सेहो किनको सोझां अवश्य आएल हेतै, ओहि स्थितिमे ओ कोन रस्ता पकड़लनि, से जनलासं मोन मजबूत होइत छैक | गाममे अधिक ठाम भोजकें प्रधानता देल जाइत छैक, ब्राह्मण भोजनक प्रधानता |एहिमे मुख्य उद्देश्य गौण भ’ जाइत अछि |किछु गोटे करजा ल’क’ अथवा खेत भरना ध’ क’ अथवा बेचियोक’ भोजक परम्पराक पालन करब धर्म बुझैत छथि | शास्त्र और परम्पराकें ठीकसं बुझबाक आवश्यकता छै | जाहि समयमे ब्राह्मण लोकनि विद्याध्ययन आ विद्यादान मात्र करैत छलाह, भविष्य लेल संचय नहि करैत छलाह, पाँच घर भीख मांगिक’ जीवन-यापन करैत छलाह, ओहि समय ब्राह्मण भोजनक औचित्य आ महत्व बूझल जा सकैत अछि | वर्तमान समयमे ओ स्थिति नहि अछि, तें अपन-अपन विवेकसं आ परिस्थितिक अनुकूल नीक परम्पराक समावेश कएल जा सकैत अछि | जीवनकें सरल, सहज आ स्वस्थ बनयबाक प्रयास होइत रहबाक चाही |कोनहु आयोजनमे अनावश्यक भीड़सं आ अनावश्यक खर्चसं बचबाक चाही | चिन्तक लोकनि कहैत छथि जे बच्चाकें तन-मनकें स्वस्थ रखबाक विधि सिखयबाक चाही, खूब श्रम करब आ सदिखन इमानदारी आ सत्यक मार्गपर चलबाक आ केहनो स्थितिमे गलत मार्गपर नहि चलबाक बात सिखेबाक आयोजनक उत्सव हेबाक चाही उपनयन | बाबूक अंतिम अध्याय : बाबू दिल्लीसं एलाक बाद डेढ़ सालसं बेशी धरि कहुना रहलाह | फेर एक बेर रीजनल हॉस्पिटलमे भर्ती भेलाह | पलटू मुखर्जी दादा आएल रहथिन भेंट कर’ त अस्पतालेमे हुनका बाबू गीत सुनयबाक लेल जिद्द कर’ लगलखिन | दादा हुनका भरोस देलखिन जे अहाँ अस्पतालसं डेरापर जाएब त हम अहाँकें एक दिन अवश्य आबिक’ गीत सभ साज-बाजक संग सुनाएब | बाबू अस्पताल सं डेरापर आबियो गेलाह | अस्पतालमे ग्लूकोज बहुत चढल रहनि, बाबूकें भेलनि जे आब एकदम ठीक भ’ गेल छी | डॉक्टर कहने छलाह जे यदि एहि अवस्थामे फ्रैक्चरसं बाँचल रहथि त किछु मास अथवा सालो जेना-तेना जीबैत रहि सकैत छथि | हम सभ सतर्क रहैत छलहुँ जे ओहेन स्थिति नहि आबनि, मुदा मृत्यु त कोनो-ने-कोनो रस्ता ताकिए लैत अछि, ओकरा के सभ दिन रोकि सकैत अछि ! एक दिन अपनेसं कुरसी ल’क’ बाबू कोठलीसं बाहर निकलि गेलाह आ कुरसी नेने खसि पड़लाह | कमजोर देह, बिमारीसं टूटल देह छलनि, डांडमे फ्रैक्चर भ’ गेलनि | ओहि दिन जे बाबू खसलाह से फेर उठिक’ ठाढ़ नहि भ’ सकलाह, बिलासपुरमे डॉक्टरसं सम्पर्क केलहुं | डॉक्टर सड़नसं रक्षाक लेल किछु दबाइ लीखि देलनि आ कहलनि, आब पैघ सपना देखब छोडू | बाबू सेहो हिम्मति हारि गेलाह | 30 अप्रैलक’ रातिमे स्थिति ख़राब देखि रीजनल अस्पताल ल’ गेलियनि | हमरा संगे सेंट्रल स्कूलक किछु शिक्षक सेहो छलाह | डॉक्टर आला ल’क’ जांचिक’ कहलनि, ‘अब नहीं हैं |’ घर घुरबाक लेल साधनक व्यवस्था नहि भ’ रहल छल | अस्पतालक निदेशक मोहन्ती साहेब उडीसाक छलाह | हमरा संग सेंट्रल स्कूलक शिक्षक छलाह शीत सर, ओहो उडीसाक छलाह | ओ कहलनि, रुकिए मैं मोहन्ती साहब को कहता हूँ, मेरा उनसे अच्छा सम्बन्ध है | शीत सर मोहन्ती साहेबकें फोन क’क’ कहलखिन सभ बात आ एम्बुलेंसक व्यवस्थाक अनुरोध केलखिन | मोहन्ती साहेब कहलखिन,आपने मुझे सूचित कर दिया, अब तो नियमानुसार कल पोस्टमार्टम के बाद ही डेड बॉडी दी जा सकती है, कल शाम हो जाएगा | सभ विभागक अपन-अपन नियम होइ छै | मोहन्ती साहेब मजबूर छलाह, शीत सरकें कहलखिन, मुझे बिना कहे ले गये रहते तो अलग बात थी, मुझे कह दिया तब तो नियमानुसार चलना होगा | शीत सर अपनाकें दोखी मानैत हमरासं क्षमा याचना कर’ लगलाह | हम कहलियनि, अहाँ त हमरा मदति कर’ चाहैत छलहुँ,अहाँ अपनाकें दोखी किए मानैत छी, भ’ सकैत अछि हमर पिता मरियोक’ हमरा किछु सिखयबाक कोशिश क’ रहल होथि | डेड बॉडीकें आइस रूममे सुरक्षित रखबाक लेल शुल्क जमाक’ क’ बैसिक’ भोरक प्रतीक्षा कर’ लगलहुं | शीत सर सेहो भरि राति हमरे संग रहलाह | भोरे हम डेरामे खबरि क’ क’ रविजी ओत’ गेलहुं | रविजी दुबेजी ओत’ ल’ गेलाह | दुबेजी गिरिजी ओत’ ल’ गेलाह | गिरिजी कहलनि, चलै चलू अस्पताल | तीनू गोटे विदा भेलहुँ | रीजनल अस्पताल लग गिरिजी कहलनि, आप लोग चलिए,हम तुरंत आ रहे हैं | हम सभ अस्पताल गेलहुँ | किछुए कालमे कतहुसं फोन एलै | डॉक्टर साहेब कहलनि, आप ले जा सकते हैं, एम्बुलेंस भी आ रहा है | हम पुछलियनि,’और पोस्टमॉर्टेम ?’ कहलनि, आदेश मिल गया है, आप ही चार लाइन लिख दीजिए कब से बीमार थे,अब पोस्टमॉर्टेम की जरुरत नहीं है | हम संक्षेप मे लिखिक’ देलियनि, रवि जी,दुबेजी,गिरि जी तीनू गोटे गबाहक रूपमे हस्ताक्षर केलखिन | गिरिजी सभ बात कहलनि | ओ कोनो नेताजी लग गेल छलाह, हुनका सभ बात कहलखिन,ओ अस्पतालक सम्बन्धित अधिकारी सभकें कहलखिन, ठाकुर साहब से विवरण लिखाकर, उस पर गवाहों का हस्ताक्षर लेकर डेड बॉडी सुपुर्द कर दीजिए, प्रबन्धन आ थाना मानि गेलै | एम्बुलेंस सेहो उपलब्ध भ’गेल | किछु गोटे लकड़ीक प्रबन्ध केलनि | रविजी,दुबेजी,गिरिजी – ई तीनू गोटे त गत लगभग दू बरखसं बाबूक जिज्ञासामे अधिक काल अबिते रहैत छलाह, अस्पतालोमे जाक’ देखैत रहैत छलखिन, ई सभ त रहबे करथि, विवेक छलाहे, नवीन मिश्रजी,चक्रधर झा जी,मायाकांत झा जी,दुबे जीक छोट भाए,दीक्षित जी,मुखिया जी, राजेंद्र अग्रवाल,अशर्फी मंडल,सुरेश प्रसाद साहु,विजय कुमार श्रीवास्तव, दल प्रताप,श्याम किशोर, मथुरा नाई, बैंकक स्टाफमे बालाकृष्णनजी,तिग्गाजी,खडग सिंह,राम कृपाल और बहुत गोटे संग आबि गेलाह | मुखिया जीक नेतृत्वमे औपचारिकता हुअ’ लागल | सभ औपचारिकताक संग आवाससं किछुए दूरपर अन्त्येष्ठिक प्रबन्ध कएल गेल | साँझमे नवीन मिश्रजी हल्दीबाड़ी गेलाह | पी.सी.ओ.सं दिल्लीमे दुनू भाए, बहिन-बहिनोकें आ पटनामे मामाकें फोनसं सूचना द’ देल गेलनि | गयामे श्राद्धक व्यवस्था : दिल्लीसं दुनू अनुज ललनजी आ रतनजी एलाह, बहिन सच्ची बुच्चीक संग एलीह | बसंतक बी.ए.अंतिम वर्षक परीक्षा लग आबि गेल छलनि | चारि साल पहिने मायक श्राद्धक समय गाम मे रहबाक कारण हिनकर परीक्षा छूटि गेल रहनि आ दोसर साल बारहवींक परीक्षा देबामे बहुत कष्ट भेल रहनि | आब एहि बेर यदि गाम जाक’ श्राद्धक सभ काज करै छी त फेर बहुत झंझट उपस्थित हएत, तें विकल्पपर विचार करै गेलहुँ | कय गोटेसं विचार-विमर्श भेल | अन्तमे गयामे श्राद्ध क्रिया संपन्न कय डोमनहिल आबि जते गोटे कठियारी गेल छलाह हुनका सभकें आमंत्रित कय भोजक औपचारिकता पूर्ण करबापर सहमति भेल | अस्थि सेहो ओतहि विसर्जित करबाक निर्णय लेल गेल | पटनामे छोटका मामा छलाह, हुनका सभ बात कहि देल गेलनि | हम सभ गोटे डोमनहिलसं एकटा जीप आरक्षित क’ क’ अंबिकापुर होइत गरबा रोड जंक्शन पहुँचलहुं | हम अपने संगमे अस्थि सेहो ल’ नेने रही | पटनासं मामा सेहो एलाह | गयामे फल्गू नदी छथिन, हुनका गुप्त गंगा कहल जाइ छनि | किछुए माटि हटेलासं जल निकलि जाइत छैक | ओना ओ नदी सूखल रहैत छैक | विद्यापतिक ओ कथा पढने रही, सिमरियासं बहुत पहिनहि कहार सभकें रोकि देलखिन, सभ थाकि गेल छल, कहलखिन जे हम एतेक दूर धरि आबि गेल छी त माए अपन पुत्र लेल किछु दूर नहि आबि सकैत छथि ? चमत्कार भेलै, भोरे सभ क्यो जागल त देखलक गंगा ओत’ धरि पहुंचि गेल छलखिन | हमहूँ ओहि घटनाक स्मरण करैत मोने मोन कहलियनि, हे माँ गंगे, हमरा बूते से संभव भ’ सकल से क’ रहल छी, जे त्रुटि भेल होइ तकरा अहाँ पूर्ण क’ देबै | हम सभ ओतहि रही त एक आदमी एलाह कहैत, अहाँ सभ जल्दी हटू ओत’ सं, गंगा हहाएल आबि रहल छथि | हम सभ ऊपर चलि गेलहुँ आ थोड्बे कालमे ओ सूखल नदी लबालब भरि गेलै | ओहि ठामक पंडा सभ कहलनि जे कहियो-कहियो एना होइ छै, फेर धीरे-धीरे पानि कम होमय लगैत छैक | गया धाममे सभ गोटेक रहबाक व्यवस्था भ’ गेल छल | नीक जकाँ सभ काज संपन्न क’क’ ट्रेनसं गरबा रोड जंक्शन आ ओत’ सं बससं अम्बिकापुर आ ओत’सं बससं डोमनहिल पहुंचि जाइ गेलहुँ | डोमनहिलमे जे सभ दाह क्रियामे सम्मिलित भेल छलाह, हुनका सभ गोटेकें निमंत्रण दए भोजनक व्यवस्था कएल गेल | बसंत बी.ए. अंतिम वर्षक परीक्षामे सम्मिलित भेलीह, तैयारीमे बाधा त भेबे केलनि, मुदा साल बर्बाद नै भेलनि, बी.ए.उतीर्ण भेलीह | गत कए बरखसं हमर प्राथमिकतामे अपने छलहुँ, हमर नोकरी छल,हमर पिता छलाह | धिया-पुताक शिक्षाक समुचित व्यवस्था करबामे हम असफल रहलहुं, एकर परिणाम हुनका सभकें भोग’ पड़लनि | बाबूक प्रस्थानक बाद हमर प्राथमिकतामे धिया-पुताक शिक्षाक समुचित व्यवस्था करब आएल, मुदा ताधरि बहुत देरी भ’ चुकल छलै | मैथिली आ विवेक भिलाइ गेलाह, कोचिंग संस्थानमे एक सत्र रहै गेलाह | वसन्त एम.ए. (अर्थ शास्त्र )मे नाम लिखौलनि | स्थानान्तरण : हमरा डोमनहिलमे पाँच सालसं बेशी भ’ गेल छल | अनुरोधपर स्थानान्तरणक आदेश एक बेर तेहेन समय आएल छल जखन बी.ए.अंतिम वर्षमे छलीह | पता चलल जे एखन यदि बिहार जाइ छी त ओत’ बी.ए.प्रथम वर्षसं शुरू कर’ पड़तनि, अही कारण ओहि स्वीकृतिकें अस्वीकार कर’ पड़ल | तकर बाद एक बेर पदोन्नतिक अवसर आएल, मुदा हम सफल नहि भेलहुँ | पाँच साल बाद हमरा मध्य प्रदेशक सिवनी जिलाक एकटा शाखामे स्थानान्तरणक आदेश प्राप्त भेल | हम चाहैत रही जे एहेन स्थानपर होइतय जाहि ठामसं बिहार जेबाक लेल ट्रेनक सुविधा रहितइ | रायपुर गेलहुँ | यूनियन क महासचिव एम.के.अग्रवाल साहेबसं सम्पर्क केलहुं | आंचलिक कार्यालय गेलहुँ | हमरा एकटा विकल्प देल गेल ‘कोतमा’ शाखा | कोतमामे रेलवे स्टेशन छै, ओत’सं अनूपपुर आ अनूपपुर जंक्शनसं पटनाक लेल ट्रेन उपलब्ध होइत छै | हम स्वीकार क’ लेलहुं | चिरिमिरी आ कोतमाक बीच मनेन्द्रगढ़मे नीक कॉलेज छै आ नीक आवास सेहो उपलब्ध भ’ सकैए, तें निर्णय लेलहुं जे परिवार मनेन्द्रगढ़मे राखि अपने मनेन्द्रगढ़सं कोतमा जाएब | जेबा-एबाक लेल ट्रेन छै, से पता चलल | कोतमा शाखाक लेल स्थानान्तरण आदेश ल’ क’ रायपुरसं डोमनहिल घुरलहुं | 15.06.1999 क’ हम डोमनहिल कोलियरी शाखा सं भारमुक्त भेलहुँ | ( क्रमशः ) पटना / 13.12.2021 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ज्ञानवर्द्धन कंठ जालंधर-यात्रा परियोजना-ऑफिसमे आइ हूलि-मालि मचल छैक।जे साहेब हर संचिकापर 'विमर्श' लिखि संभाग-प्रभारीसँ तय-तमन्ना कयने बिनु कहियो 'यथाप्रस्तावित' लिखिते नहि छलाह,वएह साहेब आइ हाइं -हाइं फाइल साइन क' रहल छथिन।रतुका ट्रेन छनि।जहिया साहेब मुख्यालय छोड़ै छथिन तहिया हुनकर एम्बेसडरमे दूटा एयरबैग धराइ छैक।एकटामे पाइ भरल रहैत छैक।ड्राइवर शोएबकेँ सभटा बूझल रहैत छैक।साहेब क्वार्टर चलि गेलखिन।चलैसँ पहिने शोएबकेँ पुछलथिन- "दूनू बैग रख देलहू?" कहलकनि-"एमरी कोनो टसकबे न कलकै।एक्केगो बैग हय समानबला।" साहेब पैजामासँ बाहर।एकाउंट्स अफसरकेँ फोन लगेलनि- "का रे, हम मर गेली का?कहाँ हय साले कंपोनेंट इंचार्ज के नाती सब?आबे दे जालंधर से।" जवाब भेटलनि-"आ रहली ह' हमनी सर।पितायल न जाउ।" तकर बाद एकाउंट्स अफसर ऑफिसमे फनक' लागल- "तनको लाज लगै हय कोढ़िया कंपोनेंट इंचार्ज सब के?रे केकरा नाम पर कोनो दूगो पाइ दै हौ?ओकाद हौ केकरो बाप के?बमकल हौ साहेब।बेटा बेमार हइ, तैसे!आबे देही ओन्नी से।भेंट करेतौ बपहिया से..." तावत एकाउंट्स सेक्शनमे भीड़ लागि गेलैक।धाइं-धाइं स्टाफ सभ जूट' लगलैक।सभक लिफाफ ल' एकाउंट्स अफसर साहेबक क्वार्टरपर गेलाह।संगे टीशन छोड़ि एलथिन। आइ पंद्रह दिनक बाद साहेब घुरलाह अछि।कोनो कंपोनेंट इंचार्जक लिफाफ नहि पकड़ि रहल छथिन।सभ अचरजमे पड़ल अछि।एकाउंट्स सेक्शनमे फेर सभ जुटल।एकाउंट्स अफसर बाजि रहल छथि- "साहेब बदल गेलन साफे-साफ।बेटा के इंजीनियरिंगमे नाउँ लिखा के आयल रहलन।ततना न रैगिंग कलकै आ बरजोरी ड्रग्स खियाबे लगलै जे सनकल लेखा करै हइ।एक्केगो बेटा हइन।साहेब बड़ा रोऐत रहलथिन ह'।बोलैत रहलथिन ह'-हम त' बरबाद हो गेली हो ए.ओ. साहेब।भोग भोग रहली ह'।ई जालंधर-ट्रिप बदल देलको लाइफ।की होइय',की कहियो?गूड़ के मार धोकरे जनै हइ..." अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। डॉ. किशन कारीगर पुरूस्कारी गुर्गा पुरूस्कार बँटा डकैत (हास्य कटाक्ष) बाबा बड़बड़ाइत रहै घिना गेल मिथिला मैथिली. इ मैथिल डकैत आ गुर्गा सब पुरूस्कारी खेल मे त चंबलो घाटी डकैत के कान काटि लेत की? एकरा सबके कोनो लाज धाख छै आ कोन झड़कलहा के पुरूस्कारी धूर्तै के लाज छै? किताब बिकाइ छै नैहे लोक पढ़लकै नैहे आ वरिष्ठ साहित्यकार हेबाक दाबिए चूर रहैए ई डकैत सब. मनमाना पर उतारू यै जे हमरा के की कए लेत? वास्तव मे मिथिला समाजक लोक सब सेहो चोरनुकबा यै त अई डकैत सबके मनमाना के रोकत? के मंगतै जवाब, केकरा माने मतलब छै? हम बजली हौ बाबा भिंसरे भिंसरे की हो गेलहो? घर मे डकैती हो गेलौ? की कोइ भांग खुआए देलकहो जे बाबा तोंई एना बड़बड़ाए रहलौ? पुरस्कार त गेल जाइ हइ ओकरो कहूँ डकैति होलैइए? हमर गप सुन बाबा हां हां के हँसे लगले आ बोललकै हौ कारीगर तोरा सबटा यथार्थ बुझल छह आ यथार्थवादी लेखन माध्यमे लोक के पुरूस्कारी धूर्तै के देखार चिन्हाक कए दै छहक? आ अखैन अनठिया के हमरे स पुछै छह आ हमरे स सुनै चाहै छह? हम बोलली यौ बाबा हम कोनो चोर डकैत के गिरोह मे रहै छी की? हमरा पुरूस्कारी चोरी डकैती बारे मे कुछो ने बुझल है क? बलू अहीं साफ साफ कहू जे पुरूस्कारी डकैती की हइ? बाबा बोललकै देखै नै छहक जे मैथिली साहित्यकार सब चोर डकैत जेंका अपन गिरोह बनेने अछि. जेहेन गिरोह तेहेन पुरूस्कार बँटा डकैत आ तेहने पुरूस्कारी गुर्गा सब. ई सब तेना हो हो करतह जे एकरे सब दुआरे मिथिला मैथिली बांचल होउ? आ एहि धूर्तै मे इ सब मिथिला मैथिली के अपन बपौती बुझि कब्जा जमौने रहल. कतेक नाम गनबिअह? साहित्य अकादमी, मैथिली भोजपुरी अकादमी, मिथिला मैथिली समिति, लेखक संघ, परिषद कतेको एहेन गिरोह आ तेक्कर गुर्गा सब मिली मैथिली पुरस्कारक डकैति मे लागल यै की? यथार्थ कहबहक त डकैत आ गुर्गा सब बतकुट्टबैल क अप्पन चलकपनी कुकृत्य के झँपै के फिराक मे रहतह. मैथिली पुरस्कार मे कोनो निष्पक्ष व्यवस्था कतौ नै भेटतह? जेहेन गिरोह आ जेहेन गुर्गा तेहने पुरस्कार बँटा डकैती. अहि दुआरे त मैथिली पुरस्कार सब महत्वहीन भ गेलै आ घिना के राखि दै जाइ गेलै. यथार्थ कहक त उनटे हमरे तोरे कुंठित कहि चलकपनी करतह. उ डकैत गुर्गा सब अपने कतेक कुंठित अछि जे निष्पक्ष व्यवस्था के बात पर कपरफोरी पर उतारू भऽ जेतह की? हम बाबा स पुछली जे पुरूस्कार देलकै आ भेटलै त अइ मे पुरूस्कारी डकैत आ गुर्गा कैसने हो गेलै? बाबा हां हां के बोलै लगलै हौ कारीगर तहूँ सबटा हमरे मुँहे अइ पुरूस्कार बँटा डकैत सबहक देखार चिन्हार करेबह त हैइए लैह सुनहअ सबटा किरदानी. एकटा गप कहअ हमर तोहर यथार्थवादी बिचार मिलै छह आ अपना सब त कोनो गिरोहो मे नै रहै छि. तइयो हम तोरा बसहा बरद पुरूस्कार द दियअ आ तूं हमरा मिथिलांचल टुडे पत्रकारित पुरूस्कार बाँटि दैए त इ पुरस्कारी डकैति भेलै की नै? चिन्हा परिचे, सर कुटमारी, हिरोहबादी होहकारी, संयोजकीय जोगारी बले मैथिली पुरूस्कार लूट मचल छै आ उनटे अनका उपदेश जे झरकल मुँह झपनै नीक त अइ डकैत सबके अपन किरदानी किए नै देखै छै. एकरो सब लेल कहबी बनतै ने पुरूस्कारी डकैत के अपकरमी मुँह उघारे नीक. पुरस्कारी डकैत सब नैह तन निष्पक्ष व्यवस्था बेर हरहड़ी बज्जर खैस परै छैन्ह की? ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। आशीष अनचिन्हार हे शिव " एकरा गजल कहितहुँ" होइछ लाज (आलेख) कोनो लेखक केर एकटा मुख्य विषय, मुख्य विधा आ मुख्य तेवर रहैत छै जकरा पूरा दुनियाँ जानै छै। मुदा ताही संगे ओहि लेखक केर किछु एहन बात रहै जे दुनियाँ नै जानै छै आ जहिया जानै छै तहिया आश्चर्य लागै छै जे हिनकर ईहो रूप छनि। ई रूप नकारात्मक हेतै से हम नै कहि रहल छी मुदा नीको पक्ष जँ नुकाएल रहए तँ सार्वजनिक भेलापर आश्चर्य होइते छै। एहने सन अनुभव हमरा प्रो. भैरवेश्वर झा द्वारा संपादित "किरण समग्र-खंड चारि, भक्ति एवं श्रृंगार गीत संग्रहःरसमंजरी" नामक पोथी पढ़ि भेल। ई पोथी डा. काञ्चीनाथ झा 'किरण'जीक भक्ति एवं शृंगारपरक रचनाक संग्रह अछि। भक्ति आ शृंगार ताहूमे काञ्चीनाथ झाजी द्वारा लिखल। जखन कि किरणजीक मुख्य तेवर छनि यथार्थवादी रचना आ ओकर पोषण। एहन नै छै जे भक्ति वा शृंगार लिखब अपराध छै मुदा उपरे कहलहुँ जे मुख्य तेवरक बाद जँ आन तेवरसँ परिचय होइत छै तखन आश्चर्य लगिते छै। आ से आश्चर्य पोथीक भूमिकामे सेहो भेटत। आ एहन-एहन गौण पक्षकेँ पाठक लग आनए बला साधुवादक पात्र छथि। तँइ भैरवेश्वरजी सेहो धन्यवादक पात्र छथि। मुदा एहि धन्यवादक संगे हम ईहो स्पष्ट कऽ दी जे किछु बिंदुपर हिनक संपादन कमजोर रहि गेल छनि जकर चर्च हम आगू करब। तैयो भैरवेश्वर जी धन्यवादक पात्र रहबे करताह। भैरवेश्वरजी अपन भूमिकामे कविक प्रारंभिक कालक वर्णन आ हुनकर काव्य शैलीक चर्च केने छथि जे कि पर्याप्त नै अछि। पर्याप्त नै अछि माने जे बहुत रास महत्वपूर्ण बिंदुकेँ छोड़ल गेल अछि। प्राचीन कालमे कोनो मूल कविकेँ अपन भाषाक अनुरूप बना कऽ प्रस्तुत करब अपराध नै होइत छलै मुदा आब एहि प्रवृतिकेँ हेय बूझल जाइत छै। बौद्ध कवि भुसुकपाद केर रचनाक अनुवाद कबीर केने छथि तँ जयदेवक रचनाक अनुवाद विद्यापति। दामोदर मिश्रजीक हनुमानपर आधारित नाटक केर अनुवाद रामचरित मानसमे भेटत। तेनाहिते ज्योतिरीश्वर कृत धूर्तसमागम केर अनुवाद अंधेर नगरीमे भेटत। जँ किरणजीक रचना जे कि एहि पोथीमे संकलित अछि ताहिमे सेहो अनुवाद करबाक प्राचीन परंपराकेँ पालन केलाह अछि जेना कि पृष्ठ़-17 पर "नील कलेवर मुरली मनोहर" रचना। ई शुरूआत अछि जँ पोथी पढ़ैत जेबै तँ एहन उदाहरण भेटैत चलि जाएत। भैरवेश्वरजी एहि बिंदुकेँ अपन भूमिकामे नै उठा सकलाह अछि जाहि कारणसँ आजुक पाठक किरणजीपर नकलक आरोप लगा सकै छथि। पोथीक बहुत रास रचनाक संगे राग-भास केर उल्लेख भेल अछि जे कि नीक अछि। संगे-संग गीतक प्रकार यथा तिरहुत बटगवनी आदिक उल्लेख भेल अछि जकरा भूमिकामे सेहो कहल गेल अछि। मुदा भूमिकामे जे एहि संगे एक चीज छूटल अछि ओ अछि "गजल"। एहि पोथीक पृष़्ठ-87 पर आ ताहिसँ आगू किछु रचनाक उपर गजल शब्दक प्रयोग भेल अछि आ एहि संबंधमे भूमिकामे किछु नै कहल गेल अछि। आगू बढ़ी ताहिसँ पहिने अहाँ सभ गजल लागल रचना सभकेँ पढ़-देखि ली से नीक रहत। 1 प्रिये अपना नैना सँ नैना मिलाउ अहाँ अपना कोइली वयना के सुर सुनाउ अहाँ देखि मुखचंद्र प्रेयसि युगपयोधर उन्नते पान रञ्जित अधर पल्लव मदन मम दसंते अपना कुसमित छाती मे छाती लगाउ अहाँ कुसुम कोमल बाहुलति सँ बान्हि चुमबन देहु मे बसहु काञ्चिनाथ के मन मृदुल बीच मे हमरा सँ यौवन के सेवा कराउ अहाँ। (पृष्ठ -87) 2 कन्हैया कन्त सङ सखिया खेलबै आजु होरी पहिरि कय रेसमी सड़िया उड़ेबै भरि झोड़ी चलेबै काजरित अँखिया सुतिख-तिख वाण हरि रिपु के। सुनेबै फगुआ लोभेबै चित्त साजन के नारिक मान ई यौवन पहुक उत्संग मे बसि के काञ्चिनाथ पिय के हम चढ़ेबै विहुँसी हँसि के। (पृष्ठ-88) 3 कन्त बिना कामिनी खेलाएत कोना भानु बिना कमलिनि फुलाएत कोना चन्द्र बिना चन्द्रिका अमृताएत कोना मेघ बिना दामिनि विलसाएत कोना काञ्चिनाथ विनु लता मुकुलाएत कोना (पृष्ठ-95) 4 तोरि मदभरी यौवन नसाबए हमे हो ओठ पर लाली तोर गाल गुलाबी नयनो मे काजर कटारी मारे हो बेलि कली सभ यौवन खिलल तोर रेशम बनल चोली सताबै मोहे हो काञ्चिनाथ भन तव मुख पंकज मन मधुकर हिये लुभावै मोरे हो (पृष्ठ-95-96) 5 प्रीतम मोर विदेश मे हे अलि, वारि वयस के हम भेलौं फूलल बेली जूही चमेली चम्पा मालति हे आलि कमलिनि कामिनि मुख अलि चूमय रभसि कुसुम रस पीब हे आलि मोरा यौवन बगिया मे सखि फुलल अनुपम दुइ कलिया हे आलि कुसुमक सौरभ चहु दिसि गमकय कौन भ्रमर रस लेता हे आलि काञ्चिनाथ बिनु के मम सखिया उरज कमल रस पीता हे आलि (पृष्ठ-96) 6 नयना चला कै मारल तिखवान गाल गुलाबी शोभय नाक बुलाकी नैना मे कारी कमान नहुँ-नहुँ यौवना कमल कली सम शुभय मदन के थान तोर नयन सर बेधल हृदि मँह लहरय गरल समान (पृष्ठ-97) 7 कमल कुसुम सम फुलु यौवन मम विफल पियाक विना रे निठुर मलय बहु कुसुम सर वलय कोकिल करथि अनोरे गुञ्जि भ्रमर कुल घूमय फूल जलय कमलिनि कामिनि द्वारे काञ्चिनाथ पिय बिनु सखि क्रूरमार सर मारे (पृष्ठ-97) 8 प्रियतम नाजुक रहितै रतिया मे खेलबितौं सजनी बेली चमेली जूही चिनतौं रेशम सूत मे गजरा गथितौं आदर सँ पिया के पहिरबितौं आली, घाड़ाजोड़ी बगिया बुलबितौं सजनी लाल महल मे पलङ बिछबितौं, कुसुम कली सँ सेज सजबितौं अपने सुतितौं पिय केँ सतबितौं, बालम छतिया मे छतिया मिलबितौं सजनी मुसकि-मुसकि युग नैन चलबितौं, प्रियतम मानस मदन जगबितौं जँ किछु कहितथि हँसि मुख फेरितौं, वालम सँ पौना धरबितौं सजनी बिहुँसि उठि पिय अंग लगबितौं गहि भुजपाश तनिक मुख चुमितौं काञ्चिनाथ सङ खेल खेलइतौं आली, नूतन यौवन रसवा लुटबितौं सजनी। (पृष्ठ- 104) जखन अहाँ सभ एहि रचना सभसँ गुजरल हएब तँ साफे पता चलि गेल हएत जे ई रचना सभ गजल विधाक रचना नै अछि। तखन फेर ई की अछि? हमरा बुझने किरणजी गजलकेँ राग बुझि लेने छथिन। ई बात हमरा एहि दुआरे बुझाइए जे आन रचना सभमे राग-भास निर्देश कएल गेल छै। ओनाहुतो गजल गायन अर्ध शास्त्रीय संगीतक बेसी निकट छै तँइ किरणजीकेँ भ्रम भऽ गेल हेतनि। मुदा गजल संगीतक विधा छैहे नै तँइ एहि पोथीमे देल गेल रचना गजल विधाक रचना नै अछि। बहुत संभव जे गजल नामक कोनो राग अथवा कि ताल हो मुदा से हमरा नै पता। जँ गजल नामक कोनो राग वा ताल हेबो करतै तँ संगीतक गजल आ साहित्य केर गजलमे अंतर रहबे करतै। भैरवेश्वरजी अपन भूमिकामे एहि सभ तथ्य दिस कोनो इशारा नै केने छथि जाहिसँ नव रचनाकार लग भ्रम पसरबाक पूरा संभावना बनै छै। एकै रचना किछु पाँति वा किछु शब्दक कारणे दू-दू बेर आएल अछि (देखू पृष्ठ 16-17 केर रचना आ पृष्ठ 79 केर रचना) एहन उदाहरण आर भऽ सकैए। संपादक चाहतथि तँ एकरा संपादित कऽ एक रूपमे आनि सकैत छलाह। मुदा भूमिकामे एहि तथ्य दिस कोनो बात नै कहल गेल अछि। जँ पोथीमे संकलित रचना सभकेँ पढ़ब तँ आधुनिक रोमांटिक गीत सभसँ ई आगू बुझाएत। एक-दू रचना तँ थियेटर (थियेटर के जे अर्थ मैथिलीमे होइत छै से ग्रहण करू) केर चलताउ गीतक बराबर सेहो अछि जेना "छोट-छोट यौवना दू तोर रसाल रे" (पृष्ठ-107)। भैरवेश्वरजी एहू तथ्यकेँ भूमिकामे नै लिखने छथि। "काञ्चीनाथ" भनितासँ एकटा गीत "जगत जननि जगतारिणी" सेहो भेटैत अछि जे कि एहि पोथीमे नै भेटल। बहुत संभव जे हमर नजरिसँ छूटि गेल हो। पाठक हमरा सूचित करथि हम अपन आलेखकेँ सुधारि लेब। अथवा ईहो भऽ सकैए जे "काञ्चीनाथ" भनितासँ आनो कवि लिखने होथि जे कि हमरा पता नै हएत। जे किछु हो मुदा एहि संपादित पोथीमे देल गेल गजल नाम्ना रचना सभ ने तँ गजल अछि आ ने गजलक इतिहासमे उल्लेख करबा योग्य अछि मुदा ओइ बाबजूद मात्र अइ कारणसँ हम विवरण देलहुँ जे काल्हि कियो उठि कऽ कहि सकै छथि जे किरणजी सन महान साहित्यकार गजल लिखने छथि आ सही लिखने छथि। बस एही कारणसँ हम एतेक मेहनति केलहुँ अन्यथा एहि पोथीमे देल गजल नामक रचना सभमे कोनो एहन बात नै। एहि आलेख केर शीर्षक अही संपादित पोथीमे देल किरणजीक एकटा गीतपर आधारित अछि। ओहि गीतकेँ ताकि पढ़ब पाठक केर काज छनि। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। मुन्नाजी वैधव्यता जानि नहि, पुजारीक मोनमे की छन्हि - बिधवा रमाक प्रतिए ! ओकर उमेरे कतेक हेतै - अंदाजन बीस-एकैस साल । प्रतिदिन ओ अबैत अछि आ अपन मनोकामनाक प्रश्न मंदिरमे छोड़ि दैत अछि । रमेश केँ सदैव एहि बातक कचोट रहैछ जे रमा असमय घटल घटनाक बिपत्ति उघि रहलि छलि । हँ ! एक बरख कहिया ने पूरि गेल छलै ओ विकट समय । आब रमा हँसि केँ बजबामे सक्षम भेलि ताहिमे रमेशक योगदान छैक । मधुश्रावणी दिन ! मंदिरमे महिलाक जुटान - गर्द्धमिसान ! रमा हाथमे पूजाक थारीमे फल - फूल आ माला देखि पुजारी आगू अबैत रमा सँ आग्रह कयलनि - हाँ - हाँ ? रमा ! आइ सोहागिन सभक पाबनि छैक । मंदिरक शोभा स्थिर आ स्थायी रहैक - सहयोग करू, सिरिफ आइ घुरि जाउ । रमेश ई सुनतहि थारीमे राखल गेना फूलक माला उठा रमाक घेंटमे खसा देलकै आ बाजल - आब तँ मंदिरक कोनो व्यवस्था भंग नहि हयत ने ? पुजारी आर आगू बढलाह - बाबू ! अहाँ नव विधानक संरक्षण कयल, निधोख पूजा करू ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। संतोष कुमार राय 'बटोही' मंगरौना (धारावाहिक उपन्यास) (तेसर खेप) "लव माने प्रेम होएत छै कि प्यार ?" "हमरा से नहि बुझल अछि।" " नीतू अहाँँ, अहाँ बताउ।" "बहिन, हमरा लगैत अछि-'प्रेम' ।" इ छियैय आर के कॉलेज के प्रांगण। दू गोट सहेली बीए पार्ट वन मे पढ़ि रहल छथिन्ह। पहिल साल मौज-मस्ती मे बीत जाएत छै । विद्यार्थी के पता नहि चलैत छै। शीतलहर के बीच कॉलेज मे दोसरे मजा छै। " नीतू, बुझौल छौ- अमीना छेलहु ने, वो गोलू के संग भागि गेलै।" "हँ, ओकरा दुनू केँ बीच बड़ि दिन सँ खिचड़ी पकि रहल छेलै। हमरा तs पहिने सँ बुझल छल।" "मोन मे हमरो गुदगुदी भs रहल अछि। " "दु साल सँ उ दुनू कबड्डी खेलैत छेलै।" "तुहों तs गुल खिला रहर छैं रोहित केँ संग।" "नहि गै, हम ओहिना गप्प करैत रहैत छी।" "कॉलेज के पीछा हरिजन हॉस्टल मे के गेल रहै।" "धत्, तूं तs सभटा उघैरे देलही।" " हँ, तू लवकी पोखैर पर की करैत छेलही ?" दुनू छौड़ी के मोन मे गुदगुदी भs रहल छै। दुनू गिलेशन बाजार जै केँ योजना बनौलथि। पैर गिलेशन दिस दुनू बढ़ा देलथि। आइ-काल्हि कॉलेज मे पढ़ाई-लिखाई सँ बेसी ब्वॉय-गर्ल फ्राइंड बनबै के ट्रेंड चलि रहल छै। पढ़ाई-लिखाई गेलै तेल लबै लेल। मोनू आओर श्रेया केँ बीच चारि साल सँ प्रेम प्रसंग छै। कतेक बेर पछबैर बाध मे देखल गेलै एक संग। एक दिन देवहार मे मुक्तेश्वर स्थान मे मूरही-कचड़ी खैत छलि ओकरा संग। अंधरा मे कुमार टॉकिज मे फिल्म देखै लेल जैत छलीह। मोनू एम ए मे छथि। गाँजा पिबति छथि अर्जुन कलम मे जा कs। किछु आओर छौड़ा सभ सेहो संग दैत छन्हि। गाम मे दारू भेट रहल छै। गाजा पीबै वाला बेसी अछि गाम मे।रतन एक दिन गिनलक-' गाम मे 23 टा पागल छै।' दिमागी रूप सँ लोचा वाला लोक ज्यादा गाम मे देखल जा रहल छै। दुर्गा दारू पीब कs अंधरा मे लुढ़ैक गेल छलै। ओकरा लाबै लेल तीन आदमी अंधरा भेजल गेलै। इ हाल छै युवा केँ। पढ़ै के नाम पर सभटा बोकवा भs रहल छै। चारि-पाँच पाँति शुद्ध-शुद्ध लिखल नहि होएत छै आ वो एम ए पास छथि। "हौ गजब भs गेलै।" "से की भेलै ?" " रेवती भागि गेलीह राति मे।" "केकरा संगे ?" " तेतरू संगे।" "ओकर माए सतवरती बनल छलीह।" "हँ, कियो अगर हुनका कहैत छलन्हि जे रेवती जवान भs गेल काकी, तँ जवाब दति छलथिन्ह -" तोड़ो बहिन जवान भs गेल छौ।" " देश-दुनिया खराब नहि भेलैए, बल्कि लोक सभ खराब करबा मे लागल छै।" "हँ,....।" गाम मे भागा-भागी बेसी बढ़ि गेलैए। जवान छौड़ा-छौड़ी नयन-मटक्काक खेल बेसी खेलs लागल अछि। गामक फलाँ केँ बहिन केँ ओ बहिन मानै लेल तैयार नहि छै। गामक वातावरण केँ बिगाड़ै मे डीजे केँँ भूमिका मैन छै। डीजे पर बजैत अश्लील गीत जवनका सँ बेसी बुढ़बो केँ हड्डी मे जान लाबि दैत छै। बाबा बाँस तs दारूबाज, गँजेरी, नशेरी केँ अड्डा बनि गेल छै। इ थिक गाम 'मंगरौना'। उदय जी केँ सरकारी जॉब भेटलाक बाद गिनाउ जे कियो कम्पीटीशन पास कैने होएत , नहि ने ? इ गामक विकास छियैय। गाम बौरा गेलै। बैजू राम केँ लड़का भांग खाकs पागल भs रहल छै। सभ युवा भटैक रहल छै। गार्जियन रोकवा मे असमर्थ छथि। संचार क्रांति युवाक लेल नीक छै तँ खराबो छै। ज्यादातर युवा मोबाईल घांटै मे लागल रहति छथि। इ छियैय युवाक नशा। सोशल मीडिया पर अनाप-शनाप लिखनै केँ ओ अपन धर्म समैझ रहल छथि। साँझ-विहनसर विद्यार्थी के अपन-अपन दलान पर वा घर मे पढ़ै केँ रबाज़ छेलै से खतम भs गेलै। कियो नहि पढ़ैत अछि । सभ कियो बिना पढ़ने विद्वान भs गेलाह अछि। "की रौ, पटलौ की नहि ?" "की कहलीह ?" " पटबैत पटबैत पानि निकैल गेल, परञ्च इ बेबी डॉल भावे नहि दति अछि। की करीयै ?" " एक दिन पकड़ि केँ ला ने।" " खूब कs दति छियैए।" " डर नहि होएत छौ।" "जे डरि गेलै से मरि गेलै।" पुलिस केँँ गाड़ी लागल छै। पवन केँ मारि कs भैटला बान्न के पुलिया तर मे फेक देने छेलै। माथा पर जेना पाथर सँ चोट मारने छै। पुलिस केँ कैमरा मैन फोटो खिचलथिन्ह। पुलिस पोस्टमार्टम लेल लाश केँ मधुबनी भेज देलथिन्ह। प्रेम मतलब 'मर्डर' होएत छै मिथिला मे। "पछमी सभ्यताक नकल आओर शहरी वातावरण के नकल सँ गाम खराब भs जा रहल छै।" "सभटा उघैरे केँ चलनै ठीक छियैय ?" " मोबाईल नेना-भुटा सभ लग छै। चौदह बरख होएत छै आओर ओ परेम करs लगैत अछि। " "ओकरा बुझैत छै परेम माने घिच्चम-तिरा।" मधु आओर जगत गप मे लागल छलाथि। परंपरा, मिथिलाक रहन-सहन, संस्कृति वगैरह दुनिया केँ आन कोना सँ अलगे छै। भगा-भग्गी गाम मे बढ़ि गेल छै। घोंघड़रिया मे कार्तिक मेला मे छौड़ा सभ उत्पात मचौने रहै। खूब मारि खेलाथि। थुथुन फुलि कs फूटबाल भs गेल छलन्हि। गामक इज़्ज़त-आबरू पर हाथ डालनै कतहुँ उचित नहि कहल जा सकैत अछि। ढेर रास मारि लगलन्हि। भागि कs ब्याह करै केँ परंपरा बढ़ि रहल छै। समाज मे इ स्वीकारोक्ति बढ़ि रहल छै। परिवार आओर समाज नहि स्वीकार करतिहीन तँ हुनका लग चारा कोन छन्हि। तँ जो बाउ जिनगी तोहर जिबै के तोहर अधिकार छौ। मारि-दंगा सँ इ रोकल नहि जा सकैत अछि। संस्कार आओर परबरिस एकर जिम्मेदार अछि। ओना तँ इ रोकनै कठिन छै। "की हालचाल अछि ?" "गरीबक हाल की पूछैत छियैय मालिक ?" "गरीब लुटि लबैए आओर कुटि खैत अछि।" "संतोष पढ़ैत छथि, ने ?" "हँ, मालिक दरिभंगा मे पढ़ैत अछि।" " पढ़s दिऔ।" सीएम साइंस कॉलेज मे पढ़लाक बाद ओ जयपुर चलि गेलाह। जयपुर मे पहिल काज नवका मकान मे पुताई वाला किछु दिन धरि केलाह। तदोपरांत होटल मे किछु दिन काज केलाह। तीन अक्टूबर, 2003 केँ ओ दिल्ली चलि गेलाह। दिल्ली मे काज नहि भेटैत छलन्हि तs हुनकर बड़ भाई कहलकन्हि, "तू गाम चलि जा।" अहि बीच गार्डक नौकरी हिनका भेटलन्हि।इ गार्डक नौकरी करs लागलाथि लाजपत नगर मार्किट मे। लगभग 12 साल धरि इ गार्डक नौकरी केलाथि।संग मे दिन मे जामिया मे पढ़ैत छलाह। किछु ट्यूशन दैत छलथिहिन। जिनगी बड़ि संघर्षक नाम छियैय। अनाथ छलाथि संतोख। बाबूजी केँ मरला केँ बाद विखंडित परिवार मे कमौवा रहलाक बादो एकटा होनकार केँ पढ़ौल नहि भेलन्हि किनको। गाम समाज केँ कोन मतलब। "जिन्दगी किराये का घर है, सबको एक दिन जाना पड़ेगा।" निरगुन गबैत सियालाल बाबा मटैक रहल छथिन्ह। सियालाल बाबा बेजोर गबैत छलथिहिन- "अपने खैंहें माछक कुटिया , पिया के दियैह झोर। बेटी कहियो नहि होइहैं कमजोर।" लोक कलाकार छलाथि सियालाल बाबा। थानतर हुनकर प्रोग्राम बड़ि नीक छलन्हि। ओ खिस्सा कहैत छलथिन्ह - इस्कूल पीछा मे मालिक केँ महिस चरवाहा महिस चरावैत छल। गरीब रहबाक कारने ओकरा पढ़ल नहि भेलै। तैं ओ इस्कूले पीछा मे महिस चराबैत छल जे किछु ज्ञान तs भेटे जाएत। ओ किछु नहि सीखलक सिबाय- 'यस आओर नो' केँ। एक दिन मालिक केँ घर मे चोरी भेलन्हि। पुलिस-दरोगा तहकीकात करवाक लेल एलथिन्ह। " बताइए, आपको किस पर शक है ?" " सर, घर मे तो बाहरी कोई नहि है।" " फिर चोरी कैसे हुआ ?" " नहि मालूम सर।" " किसी ने नहि देखा ?" "नहि सर।" " घर मे मंगरूआ छोड़ि कs आओर बाहरी कोई नहि है।" " ये मंगरूआ कोन है ? बुलाइए उसको।" मंगरूआ इ सुनि कs कि दरोगा हमरा बुलौलकs पेंटे मे मुति देलकै। " हँ, मालिक।" " तुम्हारा नाम क्या है ?" " मंगलदेव ।" " तो फिर ये मंगरूआ कोन है ?" " हमही छियैय मालिक।" " तो बताओ घर में तुमने चोरी की है ?" दरोगा के हिंदी मे बाजैत सुनि कs मंगरूआ सोचलक क्याक नहि हमहुँ इस्कूल केँ पीछा मे महिस चरबैत भेटल ज्ञान केँ भँझौव। मंगरूआ प्रत्युत्तर देलकै - " यस सर।" आब तs मंगरूआ केँ खैर नहि। दरोगा बजलाह - " चोर मिल गया।" आब मंगरूआ केँ लाठी परs लगलन्हि - " माए गै माए....। बाप रौ बाप....।" मंगरूआ हाक मारि कs कानs लागल - " यौ मालिक, बचौ ने यौ। माए गै माए...। बाप रौ बाप....।" दरोगा फेर दू लाठी मंगरूआ केँ मारलकिहीन आओर पूछलथिन्ह -""बताओ, माल कहाँ छुपा कर रखा है ?" " बाप रौ बाप...। हमरा मारि देलक...। हमरा नहि बुझल अछि मालिक... यौ मालिक...।" "साले तुम्हेंं नहि पता है तो किसको पता होगा।" "नो....नो सर।" इ इस्कूल केँ पीछा मे महिस चरबैत पढ़लाहक परिणाम छलैह। ( धारावाहिक उपन्यास 'मंगरौना' केर बाकी अंश अगिला खेप मे ) -संतोष कुमार राय 'बटोही', ग्राम-मंगरौना, पोस्ट- गोनौली, थाना- अंधराठाढ़ी, जिला- मधुबनी, बिहार-847401. मोबाईल नंबर- 6204644978 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। रबीन्द्र नारायण मिश्र लजकोटर -३३- मदनबाबूक कोठी खालीभए गेलैक । विद्यार्थीसभ परीक्षा खतम होइते अपन-अपन ठामपर चलि गेलाह । रचना आओर माधव सेहो ओहिकोठीकेँ छोड़ि कतहुँ आनठाम रहए लगलाह । बादमे कहिओ कुसुम कहलथि- "अहाँ माधवकेँ जनैत छलिऐक की?" "की बात?" "ओ अहाँक चर्चा करैत रहैत छल।" "अहाँ ओकरा कोना जनैत छिऐक?" "हमरा ओतए काजक हेतु आएल रहए । अहाँक परिचय देलक । हम एकटा काज देबो केलिऐक ।मुदा ओकरा संगे तँ बहुतभारी दुर्घटना भए गेलैक?" "की भेलैक?" "ओ काजपर गेल छल । रचना घरे पर रहैक । ओकरा की फुरेलैक जे ओहिदिन बसस्टापेपरसँ वापस भए गेल । घर पहुँचैए तँ कोठरी अन्दरसँ बंद छल । कानपाथिकए सुनलक तँ विचित्र तरहक आबाजसभ सुनाइ । बाहर ककरो जुता राखल सेहो देखलक । मोन तामसे व्यग्र भए गेलैक । ओ केबारपर जोरसँ लात मारलक । कमजोर केबार छलैक । धराम दए खसि पड़लैक। रचना आ किशुनधरफराकए बाहरनिकलल । मुदा माधव तँ पिशाँच भए गेल छल । ओहिठाम राखल कुरहरिउठओलक आ किशुनपर बजारि देलक । किशुनक माथसँ खुनक फुचक्का निकलि रहल छल । रचना कतबो प्रयास केलक ओकरा नहि बचा सकलि।अस्पताल जाइत-जाइत ओकर मृत्यु भए गेलैक ।" "तखन?" "तखन की?माधव पकड़ल गेल । जहलमे बंद अछि ।" "ई तँ बड़ अनर्थ भए गेल । " “दामोदर हमरा ओहिठामसँ किछुदिनसँ संपर्कमे छल । ओकर किछु कारबारसभ चलैत छलैक जाहि हेतु हमरा ओहिठामसँ आदमी लए जाइत छल। ओ सभजरुरतमंद छल, परेसान छल, तेँ हम दामोदरक ओहिठाम एकरासभकेँ पठा देलिऐक । यद्यपि दामोदरक गतिविधि संदेहास्पद तँ छलहे । ओएहसभ ओकररहबाक हेतु डेरा सेहो अपने लगपास ताकि देलक । घटनाक्रम एहन रुखिलेत से के जनैत छल?" हम सोचमे पड़ि गेलहुँ । कैकबेर मोन मे होअए जे बेकारे एकरासभकेँ काजपरसँ निकालि देलहुँ । साइत एहि झंजटमे नहि पड़ैत । साइत जान बचि जइतैक । तखने इहो सोचाए जे की पता,हमरे किछु अनट कए दैत । कोठीमे बिदति तँ कइए देने रहए।हमरा परेसान देखि कुसुमबजलीह- "अहाँ तँ चिंतामे पड़ि गेलहुँ । ई महानगर छैक । ककर-ककर की-की देखैत रहब? अपन काजसँ मतलब राखी ।" "फेर ओएह बात । आदमी छी तँ संवेदना हेबे करत,हेबेक चाही । कोनो यंत्र थोड़े छी?" हम कुसुमसँ गप्प करितहि रही की लताक फोन आएल। सुनलहुँ जे अहाँ हमरे ओहिठाम छी । हम आबिए रहल छी । अगुताएब नहि ।" आब जखन ओरोकिए लेलीह तँ कोना चलि अबितहुँ । बैसल कुसुमसंगे गप्प-सप्प करए लगलहुँ । गप्पेक क्रममे ओ कहलीह -"दामोदर नीक लोक नहि अछि । " "ओ कोन नव गप्प अछि ।" "अखन अहाँकेँ बहुत बात नहि बूझल अछि ।" "किछु विशेष गप्प छैक की?" अहाँकेँ पता अछि जे ओ जहलसँ कोना छुटल?" "हम की जानेगेलिऐक?" "तँ सुनू । दामोदरआ ओकरसंगीसभकेँ नीरजक हत्या ओ डकैतीक मामलामे सजा तँ भेनहि रहैक । मुदा ओ सभ कोना ने कोना पुलिसक सभटा सबूत हथिआ लेलक । केसक जिरह होइत रहैक । जज बेर-बेर सबूत माँगैक । पुलिसक फाइलेगायब भए गेलैक । कतबो प्रयास केलक फाइल नहि भेटलैक । हारि कए सबूतक अभावमे जज एकरासभकेँ छोड़ि देलक। ओकरा लगमे आओर कोनो उपाय नहि रहि गेलैक । ऐहिबातसँ खुश भएदामोदर वैष्णवदेवीक दर्शन करए गेल छल कि एमहर ई कांड भए गेलैक।" किशुन मारल गेल । ताहिसँ पहिने बटुक स्वयं पानिमे डुबिकए मरि गेल । माधव किशुनक हत्याक आरोपमे जहलमे बंद अछि । आब रचना की करितए? पहुँचल दामोदर लग। ओ वैष्णवदेवीसँ लौटले छलाह ।मालती पहिनहिसँ ओतहि रहथि ।रचनाक माथा काज नहि कए रहल छलैक । ओ विक्षिप्त भए गेल छलीह । कखनो बटुक, तँ कखनो माधव, तँ कखनो किशुनक नाम लैत चिकरैत छलीह । दामोदर रचनाक बगए देखि डरा गेल। मालती लाख बुझाबक प्रयास केलकैक , ओ नहि रुकल,चिकरिते- चिकरिते ओहि घरक देबालसँ बाहर चलिगेलि।तकरबाद ओ कतए गेल,ककरा संगे गेल आइ धरि किछु पता नहि चलि सकल। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३. पद्य ३.१.डाॅ. किशन कारीगर-बहिन के अंगना भरदुतिया नत पूरब डाॅ. किशन कारीगर बहिन के अंगना भरदुतिया नत पूरब गोबर स निपल आंगन मे पिठारक अरिपन. पिरही पर बैस बहिन के अंगना भरदुतिया नत पूरब. भाई बहिन के निश्छल सिनेह समर्पण. आश बहिन के राखब भैया जुग जुग अहाँ जीयब. आई दौगल अबै हेतै हमरो भैया गाम स बाट तकैत बहिन कहि भैया के नाम लअ भैगना भैगनी सेहो खुशी मनबै छै मामा अबै हथिन नाना गाम स मामा एलै अपना बहिन गाम भरदुतिया नत लेलकै केहेन सिनेहगर भाए बहिन के पाबैन भरदुतिया अबौ सबहक भाईक औरदा रहौ सब बहिन के आश रहौ. जुग जुग जीबौ भाई बहिन सब भरदुतिया मे बहिन अंगना नत पूरब. अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ४.स्त्री कोना ४.१.कल्पना झा-नहि रहल लचार कल्पना झा नहि रहल लचारी उठि 'दिनमा' के भोरहिं सं, माथ पर असबार, नहि तों किछु काज करै, थारी भरि संहारि, मालिक इ कि अनहोर करै छी, फूसि फटका कि बजय छी, जुनि बुझु ने इ हमर लचारी, पुरखा क ड्योढ़ी हम संभारी, नहि किछु बेगरता आब हमरा अछि, भरी रहल हमरो बखारी, गप्प तो किछु नहि पतियै, हमरा सं तों गाल बजोबै, उठा कोदारी लय जो फुलवारी, तामहि खेत बनो तों क्यारी, सुनि 'दिनमा' के सनक फुटि परल, मालिक पहिले दरमाहा दहक, सुनि मालिक सकदम्म भेला, माथ पकरि ठामहि बैसला, नहि किछु आब भेद रहल, छोट पघि सब चेत रहल, हरही सोरही आब नहि कियो रहल, काजक बल पर सब जागि रहल। -कल्पना झा, बोकारो अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ........................................................................................................................ संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] Videha e-Learning पेटार (रिसोर्स सेन्टर) शब्द-व्याकरण-इतिहास MAITHILI IDIOMS & PHRASES मैथिली मुहावरा एवम् लोकोक्ति प्रकाश- रमाकान्त मिश्र मिहिर (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) डॉ. ललिता झा- मैथिलीक भोजन सम्बन्धी शब्दावली (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) मैथिली शब्द संचय MAITHILI DICTIONARY- RAMDEO JHA (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) ENGLISH MAITHILI COMPUTER DICTIONARY MAITHILI ENGLISH DICTIONARY अणिमा सिंह -Shishu_Geet_Khel_Anima_Singh डॉ. रमण झा मैथिली काव्यमे अलङ्कार अलङ्कार-भास्कर आनन्द मिश्र (सौजन्य श्री रमानन्द झा "रमण")- मिथिला भाषाक सुबोध व्याकरण BHOLALAL DAS मैथिली सुबोध व्याकरण- भोला लाल दास राधाकृष्ण चौधरी- A Survey of Maithili Literature ........................................................................................................................ मूलपाठ तिरहुता लिपिक उद्भव ओ विकास (यू.पी.एस.सी. सिलेबस) राजेश्वर झा- मिथिलाक्षरक उद्भव ओ विकास (मैथिली साहित्य संस्थान आर्काइव) Surendra Jha Suman दत्त-वती (मूल)- श्री सुरेन्द्र झा सुमन (यू.पी.एस.सी. सिलेबस) प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) CIIL SITE ........................................................................................................................ समीक्षा सुभाष चन्द्र यादव-राजकमल चौधरी: मोनोग्राफ शिव कुमार झा "टिल्लू" अंशु-समालोचना डॉ बचेश्वर झा- B_JHA_Nibhand_Nikunj.pdf डॉ. देवशंकर नवीन- Adhunik_Sahityak_Paridrishya डॉ. रमण झा- भिन्न-अभिन्न प्रेमशंकर सिंह- मैथिली भाषा साहित्य:बीसम शताब्दी (आलोचना) डॉ. रमानन्द झा 'रमण' हिआओल अखियासल CIIL SITE दुर्गानन्द मण्डल-चक्षु RAMDEO JHA दत्त-वतीक वस्तु कौशल- डॊ. श्रीरामदेवझा SHAILENDRA MOHAN JHA परिचय निचय- डॊ शैलेन्द्र मोहन झा ........................................................................................................................ अतिरिक्त पाठ पहिने मिथिला मैथिलीक सामान्य जानकारी लेल एहि पोथी केँ पढ़ू:- राधाकृष्ण चौधरी- मिथिलाक इतिहास फेर एहि मनलग्गू फाइल सभकेँ सेहो पढ़ू:- केदारनाथ चौधरी चमेलीरानी माहुर करार कुमार पवन पइठ (मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ कथा) (साभार अंतिका) डायरीक खाली पन्ना (साभार अंतिका) याेगेन्द्र पाठक वियाेगी- विज्ञानक बतकही रामलोचन ठाकुर- मैथिली लोककथा SAHITYA AKADEMI http://sahitya-akademi.gov.in/publications/e-books.jsp http://sahitya-akademi.gov.in/general/Digitalbooks.jsp CIIL http://corpora.ciil.org/maisam.htm अखियासल (रमानन्द झा रमण) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI1.pdf जुआयल कनकनी- महेन्द्र http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI2.pdf प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI3.pdf सृजन केर दीप पर्व- सं केदार कानन आ अरविन्द ठाकुर http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI4.pdf मैथिली गद्य संग्रह- सं शैलेन्द्र मोहन झा http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI5.pdf JNU http://sanskrit.jnu.ac.in/maithili/index.jsp http://sanskrit.jnu.ac.in/student_projects/lexicon.jsp?lexicon=maithili ARCHIVE.ORG https://archive.org/details/%40vijay_deo_jha?&sort=-publicdate&page=2 VIDEHA MAITHILI BOOKS/ PICTURE-AUDIO-VIDEO ARCHIVE http://videha.co.in/new_page_15.htm https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ ALL INDIA RADIO DOORDARSHAN आकाशवाणी दूरदर्शन http://prasarbharati.gov.in/ http://newsonair.com/ https://doordarshan.gov.in/ आकाशवाणी मैथिली पोडकास्ट http://prasarbharati.gov.in/podcast.php?filterlang=Maithili&from=1947-08-15&fromwp=2020-08-29&to=2050-12-31&search=GO आकाशवाणी पटना/ दरभंगा मैथिली रेजनल न्यूज टेक्स्ट डाउनलोड-1 http://newsonair.com/RNU-NSD-Audio-Archive-Search.aspx आकाशवाणी पटना/ दरभंगा मैथिली रेजनल न्यूज टेक्स्ट डाउनलोड-2 http://newsonair.com/Regional-Text.aspx आकाशवाणी दरभंगा http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=282 आकाशवाणी दरभंगा यू ट्यूब चैनल https://www.youtube.com/channel/UCGdNveEFmv4pPolWiTEMxVA आकाशवाणी भागलपुर http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=359 आकाशवाणी पूर्णियाँ http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=256 आकाशवाणी पटना http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=122 IGNCA http://ignca.nic.in/coilnet/mithila.htm http://ignca.nic.in/coilnet/kalyani.htm (MAITHILI ENGLISH DICTIONARY) http://tdil.mit.gov.in/CoilNet/IGNCA/mithila.htm MITHILA DARSHAN https://mithiladarshan.com/ (online pdf of Maithili journal) I LOVE MITHILA https://www.ilovemithila.com/ (online maithili journal) मैथिली साहित्य संस्थान https://www.maithilisahityasansthan.org/ https://www.maithilisahityasansthan.org/resources (online pdf of Reasearch Papers/ books) ........................................................................................................................ VIDEHA e-LEARNING YOUTUBE CHANNEL https://www.youtube.com/channel/UC4abVKqMj2pDWIAkXiOHp7A विदेहक किछु विशेषांक:- १) हाइकू विशेषांक १२ म अंक, १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf 12.pdf २) गजल विशेषांक २१ म अंक, १ नवम्बर २००८ Videha_01_11_2008.pdf Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf 21.pdf ३) विहनि कथा विशेषांक ६७ म अंक, १ अक्टूबर २०१० Videha_01_10_2010 Videha_01_10_2010_Tirhuta 67 ४) बाल साहित्य विशेषांक ७० म अंक, १५ नवम्बर २०१० Videha_15_11_2010 Videha_15_11_2010_Tirhuta 70 ५) नाटक विशेषांक ७२ म अंक १५ दिसम्बर२०१० Videha_15_12_2010 Videha_15_12_2010_Tirhuta 72 ६) नारी विशेषांक ७७म अंक ०१ मार्च २०११ Videha_01_03_2011 Videha_01_03_2011_Tirhuta 77 ७) अनुवाद विशेषांक (गद्य-पद्य भारती) ९७म अंक Videha_01_01_2012 Videha_01_01_2012_Tirhuta 97 ८) बाल गजल विशेषांक विदेहक अंक १११ म अंक, १ अगस्त २०१२ Videha_01_08_2012 Videha_01_08_2012_Tirhuta 111 ९) भक्ति गजल विशेषांक १२६ म अंक, १५ मार्च २०१३ Videha_15_03_2013 Videha_15_03_2013_Tirhuta 126 १०) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक १४२ म, अंक १५ नवम्बर २०१३ Videha_15_11_2013 Videha_15_11_2013_Tirhuta 142 ११) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 १२) अरविन्द ठाकुर विशेषांक १८९ म अंक १ नवम्बर २०१५ Videha_01_11_2015 १३) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक १९१ म अंक १ दिसम्बर २०१५ Videha_01_12_2015 १४) विदेह सम्मान विशेषाक- २००म अक १५ अप्रैल २०१६/ २०५ म अक १ जुलाई २०१६ Videha_15_04_2016 Videha_01_07_2016 १५) मैथिली सी.डी./ अल्बम गीत संगीत विशेषांक- २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ Videha_01_01_2017 १६) मैथिली वेब पत्रकारिता विशेषांक VIDEHA 313 लेखकसं आमंत्रित रचनापर आमंत्रित आलोचकक टिप्पणीक शृंखला १७) मैथिली बीहनि कथा विशेषांक-२ VIDEHA 317 १८) रामलोचन ठाकुर विशेषांक VIDEHA 319 १९) रामलोचन ठाकुर श्रद्धांजलि विशेषांक VIDEHA 320 २०) राजनन्दन लाल दास विशेषांक VIDEHA 333 लेखकक आमंत्रित रचना आ ओइपर आमंत्रित समीक्षकक समीक्षा सीरीज १. कामिनीक पांच टा कविता आ ओइपर मधुकान्त झाक टिप्पणी विदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016 "पाठक हमर पोथी किए पढ़थि"- लेखक द्वारा अप्पन पोथी/ रचनाक समीक्षा सीरीज १. आशीष अनचिन्हार 'विदेह' क ३२७ म अंक ०१ अगस्त २०२१ एडिटर्स चोइस सीरीज एडिटर्स चोइस सीरीज-१ विदेहक १२३ म (०१ फरबरी २०१३) अंकमे बलात्कारपर मैथिलीमे पहिल कविता प्रकाशित भेल छल। ई दिसम्बर २०१२ क दिल्लीक निर्भया बलात्कार काण्डक बादक समय छल। ओना ई अनूदित रचना छल, तेलुगुमे पसुपुलेटी गीताक एहि कविताक हिन्दी अनुवाद केने छलीह आर. शांता सुन्दरी आ हिन्दीसँ मैथिली अनुवाद केने छलाह विनीत उत्पल। हमर जानकारीमे एहिसँ बेशी सिहराबैबला कविता कोनो भाषामे नहि रचल गेल अछि। सात सालक बादो ई समस्या ओहने अछि। ई कविता सभकेँ पढ़बाक चाही, खास कऽ सभ बेटीक बापकेँ, सभ बहिनक भाएकेँ आ सभ पत्नीक पतिकेँ। आ विचारबाक चाही जे हम सभ अपना बच्चा सभ लेल केहन समाज बनेने छी। एडिटर्स चोइस सीरीज-१ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-२ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच ब्रेस्ट कैसरक समस्यापर विदेह मे मीना झा केर एकटा लघु कथा प्रकाशित भेल। ई मैथिलीक पहिल कथा छल जे ब्रेस्ट कैसर पर लिखल गेल। हिन्दीमे सेहो ताधरि एहि विषयपर कथा नहि लिखल गेल छल, कारण एहि कथाक ई-प्रकाशित भेलाक १-२ सालक बाद हिन्दीमे दू गोटेमे घोंघाउज भऽ रहल छल कि पहिल हम आकि हम, मुदा दुनूक तिथि मैथिलीक कथाक परवर्ती छल। बादमे ई विदेह लघु कथामे सेहो संकलित भेल। एडिटर्स चोइस सीरीज-२ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-३ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिलक किछु बाल कविता प्रकाशित भेल। बादमे हुनकर ३ टा बाल कविता विदेह शिशु उत्सवमे संकलित भेल जाहिमे २ टा कविता बेबी चाइल्डपर छल। पढ़ू ई तीनू कविता, बादक दुनू बेबी चाइल्डपर लिखल कविता पढ़बे टा करू से आग्रह। एडिटर्स चोइस सीरीज-३ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-४ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच जगदानन्द झा मनुक एकटा दीर्घ बाल कथा कहि लिअ बा उपन्यास प्रकाशित भेल, नाम छल चोनहा। बादमे ई रचना विदेह शिशु उत्सवमे संकलित भेल, ई रचना बाल मनोविज्ञानपर आधारित मैथिलीक पहिल रचना छी, मैथिली बाल साहित्य कोना लिखी तकर ट्रेनिंग कोर्समे एहि उपन्यासकेँ राखल जेबाक चाही। कोना मॊडर्न उपन्यास आगाँ बढ़ै छै, स्टेप बाइ स्टेप आ सेहो बाल उपन्यास। पढ़बे टा करू से आग्रह। एडिटर्स चोइस सीरीज-४ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-५ एडिटर्स चोइस ५ मे मैथिलीक "उसने कहा था" माने कुमार पवनक दीर्घकथा "पइठ" (साभार अंतिका) । हिन्दीक पाठक, जे "उसने कहा था" पढ़ने हेता, केँ बुझल छन्हि जे कोना अहि कथाकेँ रचि चन्द्रधर शर्मा ’गुलेरी’ अमर भऽ गेलाह। हम चर्चा कऽ रहल छी, कुमार पवनक "पइठ" दीर्घकथाक। एकरा पढ़लाक बाद अहाँकेँ एकटा विचित्र, सुखद आ मोन हौल करैबला अनुभव भेटत, जे सेक्सपीरिअन ट्रेजेडी सँ मिलितो लागत आ फराको। मुदा एहि रचनाकेँ पढ़लाक बाद तामस, घृणा सभपर नियंत्रणकेँ आ सामाजिक/ पारिवारिक दायित्वकेँ सेहो अहाँ आर गंभीरतासँ लेबै, से धरि पक्का अछि। मुदा एकर एकटा शर्त अछि जे एकरा समै निकालि कऽ एक्के उखड़ाहामे पढ़ि जाइ। एडिटर्स चोइस सीरीज-५ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-६ जगदीश प्रसाद मण्डलक लघुकथा "बिसाँढ़": १९४२-४३ क अकालमे बंगालमे १५ लाख लोक मुइला, मुदा अमर्त्य सेन लिखैत छथि जे हुनकर कोनो सर-सम्बन्धी एहि अकालमे नहि मरलन्हि। मिथिलोमे अकाल आएल १९६७ ई. मे आ इन्दिरा गाँधी जखन एहि क्षेत्र अएली तँ हुनका देखाओल गेल जे कोना मुसहर जातिक लोक बिसाँढ़ खा कऽ एहि अकालकेँ जीति लेलन्हि। मैथिलीमे लेखनक एकभगाह स्थिति विदेहक आगमनसँ पहिने छल। मैथिलीक लेखक लोकनि सेहो अमर्त्य सेन जेकाँ ओहि महाविभीषिकासँ प्रभावित नहि छला आ तेँ बिसाँढ़पर कथा नहि लिखि सकला। जगदीश प्रसाद मण्डल एहिपर कथा लिखलन्हि जे प्रकाशित भेल चेतना समितिक पत्रिकामे, मुदा कार्यकारी सम्पादक द्वारा वर्तनी परिवर्तनक कारण ओ मैथिलीमे नहि वरण् अवहट्ठमे लिखल बुझा पड़ल, आ ओतेक प्रभावी नहि भऽ सकल कारण विषय रहै खाँटी आ वर्तनी कृत्रिम। से एकर पुनः ई-प्रकाशन अपन असली रूपमे भेल विदेहमे आ ई संकलित भेल "गामक जिनगी" लघुकथा संग्रहमे। एहि पोथीपर जगदीश प्रसाद मण्डलकेँ टैगोर लिटरेचर अवार्ड भेटलनि। जगदीश प्रसाद मण्डलक लेखनी मैथिली कथाधाराकेँ एकभगाह हेबासँ बचा लेलक, आ मैथिलीक समानान्तर इतिहासमे मैथिली साहित्यकेँ दू कालखण्डमे बाँटि कऽ पढ़ए जाए लागल- जगदीश प्रसाद मण्डलसँ पूर्व आ जगदीश प्रसाद मण्डल आगमनक बाद। तँ प्रस्तुत अछि लघुकथा बिसाँढ़- अपन सुच्चा स्वरूपमे। एडिटर्स चोइस सीरीज-६ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-७ मैथिलीक पहिल आ एकमात्र दलित आत्मकथा: सन्दीप कुमार साफी। सन्दीप कुमार साफीक दलित आत्मकथा जे अहाँकेँ अपन लघु आकाराक अछैत हिलोड़ि देत आ अहाँक ई स्थिति कऽ देत जे समानान्तर मैथिली साहित्य कतबो पढ़ू अहाँकेँ अछौं नहि होयत। ई आत्मकथा विदेहमे ई-प्रकाशित भेलाक बाद लेखकक पोथी "बैशाखमे दलानपर"मे संकलित भेल आ ई मैथिलीक अखन धरिक एकमात्र दलित आत्मकथा थिक। तँ प्रस्तुत अछि मैथिलीक पहिल दलित आत्मकथा: सन्दीप कुमार साफीक कलमसँ। एडिटर्स चोइस सीरीज-७ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-८ नेना भुटकाकेँ रातिमे सुनेबा लेल किछु लोककथा (विदेह पेटारसँ)। एडिटर्स चोइस सीरीज-८ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-९ मैथिली गजलपर परिचर्चा (विदेह पेटारसँ)। एडिटर्स चोइस सीरीज-९ (डाउनलोड लिंक) जगदीश प्रसाद मण्डल जीक ६५ टा पोथीक नव संस्करण विदेहक २३३ सँ २५० धरिक अंकमे धारावाहिक प्रकाशन नीचाँक लिंकपर पढ़ू:- Videha_15_05_2018 Videha_01_05_2018 Videha_15_04_2018 Videha_01_04_2018 Videha_15_03_2018 Videha_01_03_2018 Videha_15_02_2018 Videha_01_02_2018 Videha_15_01_2018 Videha_01_01_2018 Videha_15_12_2017 Videha_01_12_2017 Videha_15_11_2017 Videha_01_11_2017 Videha_15_10_2017 Videha_01_10_2017 Videha_15_09_2017 Videha_01_09_2017 विदेह ई-पत्रिकाक बीछल रचनाक संग- मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ रचनाक एकटा समानान्तर संकलन: विदेह: सदेह: १ (२००८-०९) देवनागरी विदेह: सदेह: १ (२००८-०९) तिरहुता विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) देवनागरी विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) तिरहुता विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०)देवनागरी विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०) तिरहुता विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०)देवनागरी विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०) तिरहुता विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]देवनागरी विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ] तिरहुता विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]- दोसर संस्करण देवनागरी विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ]देवनागरी विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ] तिरहुता विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ]देवनागरी विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ] तिरहुता विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ]देवनागरी विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ] तिरहुता विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ]देवनागरी विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ] तिरहुता विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ]देवनागरी विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ] तिरहुता विदेह:सदेह ११ विदेह:सदेह १२ विदेह:सदेह १३ The readers of English translations of Maithili Novel "sahasrabadhani" and verse collection "sahasrabdik chaupar par" has intimated that the English translation has not been able to grasp the nuances of original Maithili. Therefore the Author has started translating his Maithili works in English himself. After these translations are complete these would be the official translations authorised by the Author of the original works.-Editor Maithili Books can be downloaded from: https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ विदेह सम्मान: सम्मान-सूची (समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार सहित) सूचना/ घोषणा "विदेह सम्मान" समानान्तर साहित्य अकदेमी पुरस्कारक नामसँ प्रचलित अछि। "समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार" (मैथिली), जे साहित्य अकादेमीक मैथिली विभागक गएर सांवैधानिक काजक विरोधमे शुरु कएल छल, लेल अनुशंसा आमन्त्रित अछि। अनुशंसा २०१९ आ २०२० बर्ख लेल निम्न कोटि सभमे आमन्त्रित अछि: १) फेलो २)मूल पुरस्कार ३)बाल-साहित्य ४)युवा पुरस्कार आ ५) अनुवाद पुरस्कार। पुरस्कारक सभ क्राइटेरिया साहित्य अकादेमी, दिल्लीक समानान्तर पुरस्कारक समक्ष रहत, जे एहि लिंक sahitya-akademi.gov.in पर उपलब्ध अछि। अपन अनुशंसा editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम्: VIDEHA: AN IDEA FACTORY (c)२००४-२०२१. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHAसम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: डॉ उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम विलास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक -स्त्री कोना- इरा मल्लिक। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि)editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि। एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै, आ से हानि-लाभ रहित आधारपर छै आ तैँ ऐ लेल कोनो रॊयल्टीक/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै। तेँ रॉयल्टीक/ पारिश्रमिकक इच्छुक विदेहसँ नै जुड़थि, से आग्रह। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-2021 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। ५ जुलाई २००४ केँ http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् 'विदेह' ३३६ म अंक १५ दिसम्बर २०२१ (वर्ष १४ मास १६८ अंक ३३६) विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA ISSN 2229-547X VIDEHA
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