'विदेह' ३३७ म अंक ०१ जनवरी २०२२ (वर्ष १५ मास १६९ अंक ३३७) ऐ अंकमे अछि:- १. गजेन्द्र ठाकुर- संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल सेहो] [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] [FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI ALSO] २. गद्य २.१.जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’- आँखिमे चित्र हो मैथिली केर (आत्मकथा)-२२. एत’ आबिक’ २.२.डा वीरेन्द्र मल्लिक जीक साक्षात्कार- नबोनारायण मिश्रजी द्वारा २.३.डॉ. किशन कारीगर-महामारी सन डेराउन भेल जा रहलै? मिथिला स पलायन (परदेश कमाएब) २.४.मुन्नाजी- बीहनि कथा- कोखिन २.५.संतोष कुमार राय 'बटोही' केर (डायरी) 'लव यू टू' २.६.संतोष कुमार राय 'बटोही'- मंगरौना (धारावाहिक उपन्यास)-(चारिम खेप) २.७. रबीन्द्र नारायण मिश्र- लजकोटर- ३४म खेप २.८.ज्ञानवर्द्धन कंठ- २ टा बीहनि कथा ३. पद्य ३.१.डाॅ. किशन कारीगर-के दर्शक आ के सब कवि? (हास्य कविता) ३.२.आशीष अनचिन्हार- २ टा गजल Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Books/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाउ। VIDEHA ARCHIVE विदेह पेटार View Videha googlegroups (since July 2008) view Videha Facebook Official Group (since January 2008)- for announcements १. गजेन्द्र ठाकुर ........................................................................................................................ ........................................................................................................................ [संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री] [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल सेहो] [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] [FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI ALSO] यू. पी. एस. सी. (मेन्स) २०२० ऑप्शनल: मैथिली साहित्य विषयक टेस्ट सीरीज यू.पी.एस.सी. क प्रिलिमिनरी परीक्षा २०२० सम्पन्न भऽ गेल अछि। जे परीक्षार्थी एहि परीक्षामे उत्तीर्ण करताह आ जँ मेन्समे हुनकर ऑप्शनल विषय मैथिली साहित्य हेतन्हि तँ ओ एहि टेस्ट-सीरीजमे सम्मिलित भऽ सकैत छथि। टेस्ट सीरीजक प्रारम्भ प्रिलिम्सक रिजल्टक तत्काल बाद होयत। टेस्ट-सीरीजक उत्तर विद्यार्थी स्कैन कऽ editorial.staff.videha@gmail.com पर पठा सकैत छथि, जँ मेलसँ पठेबामे असोकर्ज होइन्हि तँ ओ हमर ह्वाट्सएप नम्बर 9560960721 पर सेहो प्रश्नोत्तर पठा सकैत छथि। संगमे ओ अपन प्रिलिम्सक एडमिट कार्डक स्कैन कएल कॉपी सेहो वेरीफिकेशन लेल पठाबथि। परीक्षामे सभ प्रश्नक उत्तर नहि देमय पड़ैत छैक मुदा जँ टेस्ट सीरीजमे विद्यार्थी सभ प्रश्नक उत्तर देताह तँ हुनका लेल श्रेयस्कर रहतन्हि। विदेहक सभ स्कीम जेकाँ ईहो पूर्णतः निःशुल्क अछि।- गजेन्द्र ठाकुर संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सर्विसेज (मुख्य) परीक्षा, २०२० मैथिली (ऐच्छिक) लेल टेस्ट सीरीज/ प्रश्न-पत्र- १ आ २ TEST SERIES-1 TEST SERIES-2 [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल/ FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI] NTA_UGC_NET_MAITHILI_01 NTA_UGC_NET_MAITHILI_02 NTA_UGC_NET_MAITHILI_03 (श्री शम्भु कुमार सिंह द्वारा संकलित) Videha e-Learning MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) UPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS BPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. (ऐच्छिक) मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. (अनिवार्य) मैथिली प्रश्नपत्र- बी.पी.एस.सी.(ऐच्छिक) मैथिलीक वर्तनी १ भाषापाक २ मैथिलीक वर्तनीमे पर्याप्त विविधता अछि। मुदा प्रश्नपत्र देखला उत्तर एकर वर्तनी इग्नू BMAF001 सँ प्रेरित बुझाइत अछि, से एकर एकरा एक उखड़ाहामे उनटा-पुनटा दियौ, ततबे धरि पर्याप्त अछि। यू.पी.एस.सी. क मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेल सेहो ई पर्याप्त अछि, से जे विद्यार्थी मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेने छथि से एकर एकटा आर फास्ट-रीडिंग दोसर-उखड़ाहामे करथि| IGNOU इग्नू BMAF-001 ........................................................................................................................ MAITHILI (OPTIONAL) TOPIC 1 [Place of Maithili in Indo-European Language Family/ Origin and development of Maithili language (Sanskrit, Prakrit, Avhatt, Maithili) भारोपीय भाषा परिवार मध्य मैथिलीक स्थान/ मैथिली भाषाक उद्भव ओ विकास (संस्कृत, प्राकृत, अवहट्ट, मैथिली)] TOPIC 2 (Criticism- Different Literary Forms in Modern Era/ test of critical ability of the candidates) TOPIC 3 (ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददास सिलेबसमे छथि आ रसमय कवि चतुर चतुरभुज विद्यापति कालीन कवि छथि। एतय समीक्षा शृंखलाक प्रारम्भ करबासँ पूर्व चारू गोटेक शब्दावली नव शब्दक पर्याय संग देल जा रहल अछि। नव आ पुरान शब्दावलीक ज्ञानसँ ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददासक प्रश्नोत्तरमे धार आओत, संगहि शब्दकोष बढ़लासँ खाँटी मैथिलीमे प्रश्नोत्तर लिखबामे धाख आस्ते-आस्ते खतम होयत, लेखनीमे प्रवाह आयत आ सुच्चा भावक अभिव्यक्ति भय सकत।) TOPIC 4 (बद्रीनाथ झा शब्दावली आ मिथिलाक कृषि-मत्स्य शब्दावली) TOPIC 5 (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोरिक गाथामे समाज ओ संस्कृति) TOPIC 6 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- विद्यापति) TOPIC 7 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- पद्य समीक्षा- बानगी) TOPIC 8 (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोक गाथा नृत्य नाटक संगीत) TOPIC 9 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- यात्री) TOPIC 10 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली रामायण) TOPIC 11 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली उपन्यास) TOPIC 12 (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- शब्द विचार) TOPIC 13 (तिरहुता लिपिक उद्भव ओ विकास) TOPIC 14 (आधुनिक नाटकमे चित्रित निर्धनताक समस्या- शम्भु कुमार सिंह)् TOPIC 15 (स्वातंत्र्योत्तर मैथिली कथामे सामाजिक समरसता- अरुण कुमार सिंह) TOPIC 16 (यू. पी.एस.सी. मैथिली प्रथम पत्रक परीक्षार्थी हेतु उपयोगी संकलन, मैथिलीक प्रमुख उपभाषाक क्षेत्र आ ओकर प्रमुख विशेषता, मैथिली साहित्यक आदिकाल, मैथिली साहित्यक काल-निर्धारण- शम्भु कुमार सिंह) TOPIC 17 (मैथिली आ दोसर पुबरिया भाषाक बीचमे सम्बन्ध (बांग्ला, असमिया आ ओड़िया) [यू.पी.एस.सी. सिलेबस, पत्र-१, भाग-“ए”, क्रम-५]) TOPIC 18 [मैथिली आ हिन्दी/ बांग्ला/ भोजपुरी/ मगही/ संथाली- बिहार लोक सेवा आयोग (बी.पी.एस.सी.) केर सिविल सेवा परीक्षाक मैथिली (ऐच्छिक) विषय लेल] ........................................................................................................................ GENERAL STUDIES (PRELIMINARY & MAINS) GS (Pre) TOPIC 1 GS (Mains) NCERT-ENVIRONMENT CLASS XI-XII NCERT PDF I-XII TN BOARD PDF I-XII ALL INDIA RADIO ENGLISH NEWS ALL INDIA RADIO NEWS ARCHIVE ALL INDIA RADIO TALKS AND CURRENT AFFAIRS RAJYA SABHA TV NEWS DISCUSSIONS SANSAD TV OTHER OPTIONALS IGNOU eGYANKOSH (अनुवर्तते) -गजेन्द्र ठाकुर २. गद्य २.१.जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’- आँखिमे चित्र हो मैथिली केर (आत्मकथा)-२२. एत’ आबिक’ २.२.डा वीरेन्द्र मल्लिक जीक साक्षात्कार- नबोनारायण मिश्रजी द्वारा २.३.डॉ. किशन कारीगर-महामारी सन डेराउन भेल जा रहलै? मिथिला स पलायन (परदेश कमाएब) २.४.मुन्नाजी- बीहनि कथा- कोखिन २.५.संतोष कुमार राय 'बटोही' केर (डायरी) 'लव यू टू' २.६.संतोष कुमार राय 'बटोही'- मंगरौना (धारावाहिक उपन्यास)-(चारिम खेप) २.७. रबीन्द्र नारायण मिश्र- लजकोटर- ३४म खेप २.८.ज्ञानवर्द्धन कंठ- २ टा बीहनि कथा जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’ आँखिमे चित्र हो मैथिली केर (आत्मकथा)- २२. एत’ आबिक’ 15 जून 1999 क’ हम चिरिमिरीसं ट्रेनसं कोतमा आबि सेन्ट्रल बैंकक कोतमा शाखामे योगदान केलहुं | पूर्व शाखा प्रबंधक छलाह मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव, ओ किछु दिनक बाद शहडोल स्थानांतरित भ’ क’ गेलाह | शाखामे निम्नलिखित सहयोगी सबहक संग काज करबाक अवसर भेटल : बी.एल.मीना,अधिकारी, जे छओ मासक बाद स्थानांतरित भ’क’ जयपुर चल गेलाह आ दोसर शाखासं दिलावर सिंह एलाह उप-प्रबंधक भ’ क’ | के.एन.कुमरे जी सेहो अधिकारीक रूपमे संग देलनि | हिनका सबहक अतिरिक्त नेल्सन लकड़ा जी आ रंजीत बक्सला जी सेहो लिपिक-सह-खजांचीक रूपमे छलाह | विनोद कुमार सोंधिया वरिष्ठ लिपिक सह खजांची छलाह | दफ्तरी छलाह अशोकजी | सुरक्षा प्रहरी सेहो छलाह | शाखा बजार क बीचमे छल | रेलवे स्टेशन सेहो बहुत दूर नै छलै | किछु दिन धरि डोमनहिलसं संपर्क बनल रहल | ओत’सं बस अथवा ट्रेनसं चिरिमिरी,मनेन्द्रगढ़ होइत कोतमा जाइत छलहुं | वापसीक लेल सेहो यैह बाट छल | करीब एक मासक बाद डोमनहिलसं घरक सामान सभ मनेन्द्रगढ़मे खेड़िया काम्प्लेक्समे एकटा डेरामे स्थानान्तरित केलहुं | मनेन्द्रगढ़मे कोतमाक तुलनामे नीक कॉलेज छलै, तें मनेन्द्रगढ़मे आवास राखब उपयुक्त छल | हम किछु अवधि तक बससं मनेन्द्रगढ़सं कोतमा जाइत छलहुं आ सांझमे ट्रेनसं मनेन्द्रगढ़ घूरि जाइत छलहुं | मनेन्द्रगढ़मे जगदीश पाठक जी भेटलाह | ओ कोतमामे भारतीय स्टेट बैंकमे काज करैत छलाह, घर मनेन्द्रगढ़मे छलनि, मनेन्द्रगढ़सं बससं कोतमा आ कोतमासं ट्रेनसं मनेन्द्रगढ़ जाइत-अबैत छलाह | ओ हिन्दीमे व्यंग्य लिखैत छलाह | बस आ ट्रेनमे हम सभ बहुत दिन धरि संग भ’ जाइत छलहुं आ कोनो साहित्य-चर्चामे प्रसन्नतापूर्वक समय बिता लैत छलहुं | मनेन्द्रगढ़मे काशीम फूलवाला भेटलाह जे उर्दू आ हिन्दीमे गीत-गजल लिखैत छलाह | किछु और साहित्यकार सभसं परिचय भेल | ओत’ श्रीराम मन्दिरक प्रांगनमे समय-समयपर कवि गोष्ठीमे भाग लेबाक अवसर भेटल | किछु अंतरालक बाद हमरा प्रतिदिन यात्रा कठिन लाग’ लागल | कोतमामे एकटा छोट-छीन डेरा लेलहुं | भोजन जैन भोजनालयमे करैत छलहुं | शनि दिनक’ मनेन्द्रगढ़ जाइ आ सोम दिन कोतमा आबि जाइ छलहुं | ओहि ठाम हमरा बगलक डेरामे भारतीय स्टेट बैंकक प्रबंधक कुमार साहेब सेहो रहैत छलाह | हुनक परिवार जबलपुरमे छलनि, एत’ एसगर रहैत छलाह आ अपने भोजन बनबैत छलाह | हुनकासं प्रेरित भ’ क’ हमहूँ अपन डेरामे भोजन बनेबाक व्यवस्था केलहुं | हमरा दूधवला दलिया बनाएब आ खाएब नीक लगैत छल | से एक दिन हमरा भारी भ’ गेल | ऑफिससं घुरैत रही | मोटर साइकिलसं रही, हमरा पाछाँ उप-प्रबंधक दिलावर सिंह सेहो छलाह | किछु दूर गेलाक बाद हमरा चक्कर आबि गेल | हम तुरंत गाड़ी रोकि उतरि गेलहुं, सिंहजी सेहो उतरि गेलाह | एकटा किरानाक दोकान छलै ओत’ | दोकानपर जाक’ पड़ि रहलहुं आ एकटा टेबुल पंखा हमरा माथ लग चला देब’ कहलियनि | हम बेसुधि भेल बड़ी काल धरि रहि गेलहुं | आँखि खूजल त उठबाक कोशिश केलहुं | उठबामे असौकर्य भ’ रहल छल | हमरा एकटा डॉक्टर लग ओ सभ ल’ गेलाह | डॉक्टर बी.पी. चेक केलनि | बी. पी. बहुत कम भ’ गेल छल | हमरा मनेन्द्रगढ़ जाक’ चिकित्सा करेबाक आ आराम करबाक सुझाव भेटल | सिंह जी तुरत एकटा जीप भाड़ापर ल’क’ हमरा मनेन्द्रगढ़ ल’ गेलाह, डॉक्टरसं संपर्क कराक’, दबाइ ल’क’ हमरा डेरापर पहुंचा देलनि | करीब डेढ़ मास धरि हमरा डॉक्टरक परामर्शक अनुसार दबाइ, पथ्य आ आरामक अधीन रह’ पडल | बाइस दिन अवकाश मे रहलहुं | एहि अवधिमे किछु पत्रिका सभ कहुना पढ़ि लैत छलहुं | पाठकजी आ किछु और साहित्यकार लोकनि अबैत रहैत छलाह | अही बीच हम मैथिली दीर्घ कविताक एक अंशकें हिन्दीमे अनुवाद क’ क’ समकालीन भारतीय साहित्यकें पठा देलिऐ | साहित्यिक परिवेश : कोतमामे सेहो साहित्यिक कार्यक्रम सभ होइत रहै छलै | प्रगतिशील लेखक संघक मासिक बैसकमे कवि गोष्ठी होइत छलै | किछु लोक सभ एखनो खूब मोन छथि आ किछु गोटेसं एखनो संपर्क अछि | जगदीश पाठकजी व्यंग्य लिखैत छलाह, एखनो लिखैत छथि, एखन फेस बुकपर हुनक व्यंग्य रचना आ कार्टून सेहो नीक लगैत अछि | नीहार स्नातक सेवा निवृत अध्यापक छलाह | नीक रचना करैत छलाह, गोष्ठीक आयोजन करैत छलाह, किछु पत्रिका मंगबैत छलाह, ओ सभकें किछु दिन लेल उपलब्ध करबैत छलाह आ ओहिपर गोष्ठीमे कोनो आलेख अथवा मौखिक प्रतिक्रिया देबाक लेल आमंत्रित करैत छलाह | हुनक स्मरण शक्ति एतेक तीक्ष्ण छलनि जे गप-शपमे सेहो परिलक्षित होइत छल | दस बरख पहिने कोनो साहित्यकारसं भेंट भेलनि तकर स्मरण करैत ओ इहो कहैत छलाह जे ओ साहित्यकार कोन रंगक वस्त्र पहिरने छलाह आ कोन मूहें बैसल छलाह आ की करैत छलाह | हुनकहि जोर पर 11 नवम्बर 2000 क’ रीवाक महाविद्यालयमे आयोजित कवि गोष्ठीमे भाग नेने छलहुं जाहिमे प्रख्यात गीतकार सोम ठाकुर जी सेहो आएल छलाह,शैलेश जी सेहो छलाह,नीहारजी गोष्ठीक संचालन केलनि | 12 नवम्बर क’ हम सभ सतनामे साहित्यकार शैलेशजीक ओत’ सेहो आयोजित गोष्ठीमे भाग नेने छलहुं | एक दिन साहित्यिक टीम अमरकंटक गेल | ओत’ एक दिन रहै गेलहुं | जैन मुनि सभक संग एकटा नीक कवि सम्मेलन भेल | हमहूँ ओहिमें सम्मिलित रही | नीहार जीसं जबलपुर आ सिवनीमे सेहो भेंट भेल | किछु मास पूर्व एकटा साहित्यकार मित्र कैलाश पाटकरक माध्यमसं नीहार जी सं संम्पर्क भेल | आब पचासी बरखसं बेशीक छथि, स्वाभाविक शारीरिक स्थितिक अधीन छथि | धर्मेन्द्रजी नवगीत लिखैत छलाह | हुनकासं संपर्क नै अछि | भरिसक आब ओ नै छथि | शिव कुमार सिंह जी हास्य-व्यंग्य लिखैत छलाह | हुनकोसं संपर्क नै अछि | कैलाश पाटकर जी सेहो नीक लिखैत छलाह | किछु मास पूर्व हुनकासं फेस-बुकक माध्यमसं संपर्क भेल | कोतमा आ यमुना कोलियरीमे काज केनिहार रावजी आ किछु और साहित्यकार सभ सम्पर्कमे छलाह | कोतमामे हमरा आवासपर एक जनवरी क’ कवि गोष्ठीमे स्थानीय साहित्यकारक अतिरिक्त शहडोलसं प्रख्यात कवि पारस मिश्रजी सेहो एलाह | 22 नवम्बर 2000 क’ शहडोलमे पारस मिश्रजी ओत’ कवि गोष्ठीमे हमहूँ सभ भाग लेलहुं | 1999 मे 14 अगस्तक’ क्षेत्रीय कार्यालय, शहडोलमे आयोजित काव्य गोष्ठीमे भाग लेलहुं | हम प्रस्तुत केने छलहु गीत ‘मैं कभी मन्दिर न जाता...’ 5 सितम्बर 2000 क’ आकाशवाणी,शहडोलसं मंजुल वर्माजी फोनपर संपर्क क’ क’ बहुत आनन्दित भेल टेप कएल हमर ओहि गीतक बहुत प्रशंसा केलनि आ कह्लनि जे कोनो काजसं जहिया शहडोल आबी त आकाशवाणी एबाक कष्ट करब, हम ओही दिन अहांक किछु रचना टेप करबाक’ कार्यक्रम लेल राखि लेब | आदरणीय वर्माजीक उद्गार हमरा आनन्दित केलक | हम अपन कार्यक्रम तेना नै बना सकलहुं, मुदा हुनक अनायास फोन क’ क’ रचनाक प्रति अपन सम्मान व्यक्त करबाक भाव हमरा सुख दैत रहल अछि | चिन्तक लोकनि कहैत छथि जे किनकहु कोनो काज अथवा कोनो व्यवहार अहाँकें जं नीक लागल अछि तं एहि लेल हुनका प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूपसं धन्यवाद देब अथवा हुनक प्रशंसा करब सेहो मानवीय धर्म थिक | 2000 मे 22 सितम्बर क’ रातिमे कोतमा कन्या विद्यालयमे कवयित्री सम्मेलनक आयोजन भेलै | एहिमे डा. राजकुमारी ‘रश्मि’, जया जादवानी, डा. माधुरी शुक्ला आ डा. प्रेमलता नीलमक योगदान उल्लेखनीय आ स्मरणीय रहल | मैथिली पत्रिका ‘अंतिका’ आ ‘आरम्भ’ अबैत छल | आरम्भमे हमर निम्नलिखित छोट-छोट किछु कविता छपल | समकालीन भारतीय साहित्यक मैथिली विशेषांकमे हमर एहि कविताक अनुवाद प्रकाशित भेल : एत’ आबि क’ एत’ आबि क’ हम देखय लागल छी मनुक्खक हड्डी कोना चिबबैत अछि मनुक्ख आ मनुक्ख कोना मनुक्खक शोणित पीबि जाइत अछि हम सोचय लागल छी कोना चोराओल जा सकैत अछि सूर्य आ चन्द्रमा कोना कएल जा सकैत अछि ग्रह आ नक्षत्रक संग बलात्कार आ कोना भ’ सकैत अछि कोनहु स्वर्गक अपहरण | एत’ आबि क’ हम बूझ’ लागल छी किए कोनो लोकसं लोक डेरा जाइत अछि किए कोनो लोकमे लोक हेरा जाइत अछि, हम स्वीकार कर’ लागल छी एकटा चम्मचक महत्व एकटा हथगोलाक कमाल अश्रु-गैसक महिमा, हमहूँ सम्मिलित भ’ जाइत छी एकटा नव आविष्कारमे – ‘कोना अनका पयरपर लोक ठाढ़ भ’ सकैत अछि (!)’ ( क्रमशः ) पटना / 31.12.2021 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। "मैथिलीमे संप्रति जे लिखल जा रहल अछि ताहिसँ हम निराश नहि छी" (डा वीरेन्द्र मल्लिक जीक साक्षात्कार जे कि नबोनारायण मिश्रजी द्वारा लेल गेल अछि) (डा.वीरेन्द्र मल्लिक) (नबोनारायण मिश्र) एहि साक्षत्कारक इतिहास 2016 मे विदेह "वीरेन्द्र मल्लिक विशेषांक" प्रकाशित करबाक घोषणा केने रहए। मुदा अपेक्षित सहयोग नै भेटबाक कारणे ई प्रकाशित नै भऽ सकल। एहि विशेषांक लेल वीरेन्द्र मल्लिक जीक साक्षात्कार नबोनारायण मिश्रजी द्वारा लेल गेल छल। आब ओ साक्षात्कार विदेहक एहि अंकमे दऽ रहल छी। 3 जनवरीकेँ मल्लिकजीक जन्मदिन छनि आ पाठक लेल ई दूनू अवसर अछि। पहिल मल्लिकजीक विचार जनबाक आ दोसर हुनक जन्मदिनपर हुनका मोन पाड़बाक। उम्मेद अछि जे पाठककेँ एहि साक्षात्कारसँ नव विचार प्राप्त हेतनि। एहि विशेषांक लेल विदेह द्वारा कुल 16 टा प्रश्न देल गेल छल जे कि एना अछि- 1) आग्नेय कविताक आधार की? वर्तमान आग्नेय कविता कोन दिशामे अछि? 2) ओना पुरस्कार तँ प्रोत्साहन लेल होइत छै मुदा मैथिलीमे पुरस्कार भेटिते साहित्यकारक गति रुकि जाइत छै। एना किएक? 3) वर्तमान समयमे मैथिली पत्र-पत्रिकाक की हाल छै? 4) चेतना समीतिमे एखनो दलित वर्गक प्रवेश निषेध छै। एकरा अहाँ कोन रूपमे देखै छिऐ? 5) दरभंगे पीठ जकाँ आब सहरसा पीठ बनि रहल छै। ई मैथिलीक लेल नीक की खराप? 6) बहुत दिन धरि मैथिलीमे दलित लेखक केर प्रवेश नै छल। एकरा अहाँ कोन रूपमे देखै छिऐ? एखनुक केहन अवस्था छै? 7) अहाँक साहित्यिक यात्रामे कोन तत्व प्रेरक आ कोन तत्व बाधक रहल? 8) वर्तमान साहित्यकारक मूल्याकंन अहाँ कोना करबै? 9) अहाँक प्रिय साहित्यकारकेँ छथि? 10) साहित्यकारक लेखकीय विचार आ वास्तविक जीवनक विचार एक हेबाक चाही की अलग-अलग? जँ एक हेबाक चाही तँ "वैद्यनाथनाथ मिश्र यात्री"जीक वैचारिक विचलनकेँ अहाँ कोन रूपमे देखै छिऐ। आ जँ अलग-अलग हेबाक चाही तँ ओहन साहित्य ओ साहित्यकारक मूल्य की? 11) मैथिल साहित्यकार बहु विधावादी होइत छथि। मुदा जँ अहाँ एकै विधामे रहितहुँ तँ ओ कोन विधा होइतै ? 12) मैथिलीकेँ तोड़बामे दरभंगा मठाधीश सभहँक कतेक योगदान छै? 13) कलकत्ताक साहित्यकारक गुटबाजी मैथिलीक कतेक अहित केलकै? 14) कलकत्ताक युवासँ की आशा। ओहिमेसँ के आगू जा सकै छथि। 15) अहाँ अपन साहित्यक यात्राक पड़ाव कतऽ आ कोन रूपें देखै छिऐ? 16) पारिवारिक परिचय जनबाक इच्छा अछि। मुदा उपरमे देल गेल प्रश्न सभ संशोधित भेल (विदेह दिससँ नै) प्रश्न संख्या 1,2,3 आ 5 ओहिना रहल। प्रश्न संख्या 4 आ 6 मिला कऽ एकटा प्रश्न बनल। प्रश्न संख्या 7,8,9,10 आ 11 ओहिना रहल। प्रश्न संख्या 12 आ 13 केर कोनो उत्तर नै भेटल। प्रश्न संख्या 14,15 आ 16 ओहिना रहल। अंतमे नबोनारायण मिश्रजी प्रसंगानुकूल अपना दिससँ 2 टा प्रश्न जोड़लाह। मने फाइनल स्वरूपमे कुल 15 टा प्रश्न भेल जकर उत्तर संग देल जा रहल अछि (संपादक)- 1) आग्नेय कविताक आधार की? वर्तमान आग्नेय कविता कोन दिशामे अछि? मैथिली कवितामे जनवादी वा प्रगतिशील कविताक जन्मदाता "यात्री"सँ जे कविता प्रारंभ भेल छल से निरंतर प्रवाहित होइत मैथिली जनमानसकेँ आलोरित-विलोरित करैत रहल। हुनकर विचारधाराकेँ संवहन करैत जे मैथिलीक काव्यधारा आगाँ बढ़ल छल ओहिमे सोमदेवक सहजतावाद आबि समाहित भेल छलैक आ बादमे अग्निजीवी काव्यधारा सेहो आबि अंतर्भुक्त भेल छलैक। वस्तुतः विचार-वैभव पूर्वहि के छलैक मुदा ओकरा कहबाक ढंग सर्वथा नवीन आ एकर विषय वस्तु जीवन यथार्थसँ संबंद्ध छलैक। ओकरामे एक नव त्वरा छलैक। अग्निक ताप छलैक तँइ लोक (विशेषतः सोमदेव) एहि कविताकेँ अग्निजीवी कविता नाम प्रदान केलक। वर्तमान कविता युगसापेक्ष थिक। ओकरामे अनेकशः परिवर्तन, संवर्धन एलैक अछि। ओकरामे ग्लोबलाइनेशनक गर्मी, नेट, बैट, सैट,चैट सभ आबि आइ समाहित भऽ गेल छैक। "वसुधैव कुटुम्बकम्" केर विराट वैचारिक फलक ओकरामे आबि गेल छैक। 2) ओना पुरस्कार तँ प्रोत्साहन लेल होइत छै मुदा मैथिलीमे पुरस्कार भेटिते साहित्यकारक गति रुकि जाइत छै। एना किएक? कोनो भाषामे पुरस्कार वा सम्मान जे साहित्यकार, कलाकार लोकनिकेँ प्रदान कएल जाइत छै तकरा पाछाँ प्रोत्साहन केर भावना निहित रहैत छैक। पुरस्कार पाबि साहित्यकार गौरवान्वित-आह्लादित होइत छथि और हुनकामे लिखबाक आर बेसी क्षमता आबि जाइत छनि। मैथिली पुरस्कारक जे अवस्था अछि से सर्वविदित अछि। पुरस्कार वितरणमे भ्रष्टाचार एना ने प्रवेश कऽ गेल अछि जे ओकर वर्णन नहि कएल जाए। जिनका लोकनिकेँ पुरस्कार प्राप्त भऽ जाइत छनि ओ पुरस्कारकेँ गंगाजल मानि उदरस्थ कऽ लैत छथि आ सुखक चिरनिद्रामे सूति रहैत छथि। 3) वर्तमान समयमे मैथिली पत्र-पत्रिकाक की हाल छै? वर्तमानमे मैथिली पत्र-पत्रिकाक दशा अछि तकरा उछतगर नहि कहल जा सकैछ। अधुना कलकत्तासँ प्रकाशित "कर्णामृत" ओ "मिथिला दर्शन" सएह निरंतर समयपर निकलि जाइत अछि। पटनासँ "घर-बाहर" जे निरंतर प्राप्त होइत छल तकरो दशा ठीक नहि बुझना जाइछ। "पूर्वोत्तर मैथिल" कहियो-कहियो कऽ उदित भऽ जाइत अछि। दिल्लीसँ "मैथिली लोकमंच" सेहो प्रकाशित भऽ रहल अछि। ओना संपूर्ण भारतवर्षमे यत्र-तत्रसँ स्मारिकाक बाढ़ि आबि गेल अछि। कोलकातासँ प्रकाशित "कोकिल मंच" प्रति वर्ष प्राप्त भऽ जाइत अछि। धन्य थिक मैथिलीक पत्र-पत्रिका जे मैथिलीकेँ जिया कऽ रखने अछि और साहित्यकार ओ बुद्धिजीवी लोकनिक मानसिक दिशाकेँ तृप्त करैत रहैत अछि। 4) चेतना समीति एवं अन्यान्य मैथिली संगठनमे एखनो दलित वर्गक प्रवेश नगण्य छै। एकरा अहाँ कोन रूपमे देखै छिऐ? चेतने समीति किएक, मिथिलामे जे जतेक जे कतहुँ मैथिली संस्था अछि ओहिमे ब्राह्मणवादक वर्चस्व थिकैक। ब्राह्मण आ कर्ण-कायस्थ जे अदौकालसँ मैथिली बजैत रहलाह अछि ओकरे आइयो मानक मैथिली मानल जाइत अछि। हमरा जनैत एकरा पाछू शिक्षाक प्रमुख हाथ रहलैक अछि। संपूर्ण भारत वर्षमे वैदिक युग किंवा सनातन युगमे जे चारि वर्गमे समाज विभाजित छलैक (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य आ शूद्र) ओकरा पाछा गुण आ कर्म छलैक जाहि आधारपर ई विभाजन भेल छलैक। चातुरवर्ण मया श्रष्टा गुण कर्म विभागशः (गीता) चारि युगमे गुण आ कर्मकेँ आधारपर लोक विभाजित छलाह। एकहि परिवारमे एक भाइ ब्राह्मण छलाह जे विद्याक दान वा विद्याध्य्यन करैत छलाह, दोसर भाइ कर्मक आधारपर क्षत्रिय, तेसर वैश्य आ चारिम शूद्र। ईसासँ पूर्वहि ३५०० वर्ष एहि देशमे उत्तर-पश्चिम दिशासँ जे भारतमे विदेशी आक्रमण भेल छल, वएह एतए आबि कऽ हमरा लोकनिक गुण आर कर्म आधारित जे वर्ग-विभाजन छल ओकरा नष्ट-भ्रष्ट कऽ जातिवादकेँ जन्म देलक। वएह जातिवाद आइ वर्तमानमे राजनीतिक प्रधान पोषक तत्व बनि गेल छै। पूर्वमे जे अध्य्यन-अध्यापन करैत छलाह, राजाक ओहि ठाम हुनके सम्मान होइत छलैक। व्यापारी वर्ग सेहो राजेक साथ हाथ मिला कऽ हुनके गुणगानमे लागि जाइत छल। शूद्र वर्ग नितांत एकांकी रहि जाइत छलैक। ताहि समयमे जे समाज संचालकन हेतु नियम कानून बनाओल जाइत छल तकरा पाछाँ एही तीनूकहि हाथ रहैत छलैक। हमरा जनैत एहि सभकेँ पाछाँ शिक्षे छलैक। शिक्षाक अभावक कारण शूद्र आ नारी वर्ग सभसँ पाछाँ रहि गेल। एकैसम शताब्दीमे जे हरिजनकेँ विशेष अधिकार प्रदान कएल गेलैक अछि ताहिमे शिक्षापर विशेष जोर देल गेल छै। आइयो कोनो संस्थामे जे सभ छथि ओ ब्राह्मण, कायस्थ, राजपूत, भूमिहार आदि-आदि वर्गसँ छथि। निम्न वर्गसँ बहुत कम लोक एहि दिशामे एबाक प्रयास करैत छथि। 5) दरभंगे पीठ जकाँ आब सहरसा पीठ बनि रहल छै। ई मैथिलीक लेल नीक की खराप? हमरा जनैत दरभंगे किएक पटनामे सेहो मैथिलीक पीठ रहल अछि। कलकत्तामे सेहो रहल अछि जाहिठाम किछु प्रखर विद्वान लोकनिक, बुद्धिमान लोकनिक बैसार होइत रहल अछि। लोक अपना सुविधाक अनुसार कर्म आ बुद्धिक बलपर सरकारी सहाय्य प्राप्त करैत रहल अछि। जे अधिक चतुर से अधिक लाभान्वित। मैथिलीमे दरभंगा पीठकेँ लऽ कऽ जे विभिन्न पत्र-पत्रिकामे नवतुरिया वर्ग द्वारा जे विद्रोहक स्वर मुखरित कएल जाइत रहल अछि तकरा विस्मृत नहि कएल जा सकैत अछि। तँइ आइ जँ सहरसामे कोनो पीठक स्थापना भऽ रहल अछि तँ एहिमे कोनो आश्चर्यक बात नहि अछि। 6) अहाँक साहित्यिक यात्रामे कोन तत्व प्रेरक आ कोन तत्व बाधक रहल? हम प्रारंभमे हिन्दीमे लिखैत छलहुँ। हमरा पाछाँ कलकत्ताक महान मैथिली सपूत स्व. पीताम्बर पाठक ओ मैथिली पत्रकारिताक दधीचि राजनंदन लाल दास हाथ जोड़ि विनम्र भावे मैथिलीमे लिखबाक हेतु परि गेलाह। पीताम्बर बाबू कहलनि जे अहाँ मैथिलीयेमे सपनो देखू, मैथिलीयेमे सोचू आ मैथिलीयेमे लीखू से हमरा लोकनिक आकांक्षा अछि। ताही दिनसँ मैथिलीमे लेखन प्रारंभ कएल। १९५७-५८ के जे छात्र जीवनक अवधि छल ताही समयमे "मिथिला सांस्कृतिक परिषद्" कलकत्तासँ संबंधित, संपर्कित भेलहुँ। पश्चात ओकर महामंत्री बनाओल गेलहुँ। ताही दिनसँ परम श्रद्धेय बाबू साहेब चौधरीक संपादनमे "मैथिली दर्शन"मे रचना लेखन प्रारंभ कएल। अध्य्यन-मनन और संघर्षक पश्चात विचारमे परिवर्तन आएल आ हम मार्क्सवादी दर्शनसँ प्रभावित भेलहुँ। बादमे माओत्सोतुंग सेहो प्रभावित केलनि। हुनकर कहब छलनि "power comes out of the barrel of a gun" हमरा विशेष प्रेरित केने छल। बादमे "आमार बाड़ी, तोमार बाड़ी, नक्सलबाड़ी" केर नारा गुंजायमान भेल और हमरा चमत्कृत केने छल। मैथिली लेखनमे बाधक तत्व हमरा लेल केओ नहि छल। किछु कालक लेल लेखनमे शिथिलता अवश्य आएल छल तकरा पाछाँ हमर अपन आर्थिक सीमा छल और कोनो व्यक्ति विशेष नहि। 7) वर्तमान साहित्यकारक मूल्याकंन अहाँ कोना करबै? हम जीवन के प्रारंभहिसँ आशावादी रहलहुँ अछि। वर्तमान मैथिली साहित्य विधामे निरंतर अग्रसर भऽ रहल अछि। एकसँ एक रचनाकार माँ मैथिलीक भंडारकेँ अपन लेखन उर्जा ओ शक्तिसँ संपूरित कऽ रहलाह अछि। समयक अनुसार ओ लोकनि आगाँ बढ़ि रहलाह अछि, तखन लेखन जे संप्रतिमे भऽ रहल अछि ताहिमे अध्य्यनक पूर्ण अभाव परिलक्षित होइछ। अधिकांश रचनाकार व्यक्तिकेंद्रित भऽ गेल छथि। हुनका वामा-दहिना देखबाक पलखति नै छनि। ग्लोबलाइजेशनक जे भावना आइ संपूर्ण विश्व साहित्यमे व्याप्त अछि तकर हिनका लोकनिमे अभाव परिलक्षित होइछ। ओना संप्रति जे लिखल जा रहल अछि ताहिसँ हम निराश नै छी। 8) अहाँक प्रिय साहित्यकारकेँ छथि? मैथिलीमे हमर प्रिय साहित्यकार छथि "वैद्यनाथ मिश्र यात्री"| 9) साहित्यकारक लेखकीय विचार आ वास्तविक जीवनक विचार एक हेबाक चाही की अलग-अलग? जँ एक हेबाक चाही तँ "वैद्यनाथ मिश्र यात्री"जीक वैचारिक विचलनकेँ अहाँ कोन रूपमे देखै छिऐ। आ जँ अलग-अलग हेबाक चाही तँ ओहन साहित्य ओ साहित्यकारक मूल्य की? संसारक प्रायः सभ साहित्यमे मुख्य रूपसँ दू धाराक रचनाकार देखना जाइत छथि। रचनाकार लेल ओकर एक वैचारिक आधारकेँ हएब अनिवार्य मानल जाइछ। जकरामे कोनो विचार नै, ओकर कोनो महत्व नहि। मैथिलीये साहित्यमे नहि भारतक विभिन्न भाषाक साहित्यमे सेहो विभिन्न विचारक पोषक रचनाकार परिलक्षित होइछ। हम जे बाजब सएह करब, सएह जीएब एहि अवधारणाक पोषक साहित्यकारक संख्या मैथिली अत्यंत अल्प अछि। आइ वैज्ञानिक युगमे एकसँ एक विचारधाराक जन्म-मरण-पुनर्जन्म भऽ रहलैक अछि। युग बहुत तीव्र गतिएँ आगाँ बढ़ि रहल छैक। ओ मंगलग्रहपर पहुँचबाक प्रयासमे लागल छैक। एहना स्थितिमे एक सीमामे बद्ध भऽ रचना करब आइ संभव नहि बुझना जाइछ। युगानुसारे डेग बढ़बैत जँ रचनाकार अपन वैचारिकताक संग लीखि रहलाह अछि तँ ओ प्रसंशाक पात्र थिकाह। नवतुरियाक कहब थिकैक जे हमरा लोकनिकेँ कठमुल्ला नहि हेबाक चाही। हमरा सभकेँ गत्यात्मक हेबाक चाही। एहि परिप्रेक्ष्यमे यात्रीजीक जे वैचारिक विचलन के जे प्रश्न उठाओल गेल तकर उत्तरमे स्वयं यात्रीजी वएह बात कहलखिन जे हम एखन कहि रहल छी। 10) मैथिल साहित्यकार बहु विधावादी होइत छथि। मुदा जँ अहाँ एकै विधामे रहितहुँ तँ ओ कोन विधा होइतै ? "कविर्मनीषी परिभू: स्वयंभू:" जे कहल गेल अछि से कोनो अनुचित नहि। मैथिल तँ सभ जन्मना प्रायः कविये होइत छथि, तखन प्रत्येक रचनाकारक कोनो अपन प्रिय विधा होइत छैक जाहिमे ओ लिखबामे आनंदक अनुभूति करैछ। हमरा विचारे जकर जे प्रिय विधा होइक ताहिमे जँ ओ अपन संपूर्ण शक्ति आ उर्जाकेँ लगा दै तँ मैथिलीक ओहि विधा विशेषमे चमत्कार उत्पन्न भऽ सकैत अछि। तँइ तँ कहल गेल अछि "एकश्चन्द्रस्तमो हन्ति न चा तारा सहस्रशः"। (एहि प्रश्नक पहिले भागक उत्तर देल गेल अछि से बुझाइए-संपादक) 11) कलकत्ताक युवासँ की आशा। ओहिमेसँ के आगू जा सकै छथि। हम जीवनकेँ प्रारंभहिसँ नवतुरिया वर्गक समर्थक रहलहुँ अछि। ओकरा हम अंतःकरणसँ प्रोत्साहित आ संवर्धित करैत रहलियैक अछि। युवा वर्गमे सीमाहीन शक्ति रहैत छैक। वएह कोनो देश,जाति, किंवा समाज केर कर्णधार होइत अछि तँइ अंग्रेजीक लेखक newman कहने छथि "It is an established truism that youngmen of today are the countrymen of tomorrow, holding in their hands the high destinies of the land, they are the seeds that spring And bear fruit." कहबाक तात्पर्य जे कलकत्ताक नवतुरिया वर्गमे जे उभरि कऽ एलाह अछि ताहिमे मिथिलेश कुमार झा, चंदन कुमार झा, अनमोल झा, आमोद कुमार झा, अमरनाथ झा 'भारती', भास्करानंद झा 'भास्कर" आदि विशेष प्रभावित कऽ रहलाह अछि। 12) अहाँ अपन साहित्यक यात्राक पड़ाव कतऽ आ कोन रूपें देखै छिऐ? ऐतरेय ब्राह्मण केर कथन छैक- चरैवेति-चरैवेति-चरैवेति मने चलैत रहू-चलैत रहू-चलैत रहू। हम एही सिद्धांतमे विश्वास करैत छी। प्रायः 1960 सँ लऽ कऽ आइ धरि हमर लेखनमे कहियो गतिरोध नहि आएल अछि। हम निरंतर लिखैत रहलहुँ अछि। हम माँ मैथिलीक सेवामे अपनाकेँ समर्पित केने रहलहुँ अछि। हम अंतिम श्वास धरि लिखैत रहब से हमरा विश्वास अछि। 13) पारिवारिक परिचय जनबाक इच्छा अछि। नाम- वीरेन्द्र मल्लिक जन्म-परसौनी (मधुबनी) जन्मतिथि-3 जनवरी 1937 शिक्षा- एम.ए, पी.एस.डी (हिन्दी) माताक नाम-स्व. सत्यभामा पिताक नाम-स्व. अजब नारायण मल्लिक 14) "आखर" के अपने संपादक मंडलमे छलहुँ ओहिमे के सभ योगदान देने छलाह? "आखर"केँ संपादक छलाह-कीर्तिनारायण मिश्र ओ वीरेन्द्र मल्लिक। सहयोगीक रूपमे- राजनंदन लाल दास, स्व. पीताम्बर पाठक एवं स्व. सुन्दरकांत झा। 15) मैथिली रंगमंचमे कलकत्ताक अवदानपर अहाँ अपन मंतव्यसँ पाठकवर्गकेँ अवगत कराबी। मैथिली नाटक ओ रंगमंचक क्षेत्रमे कलकत्ताक सर्वोपरि स्थान रहलैक अछि। ओकर विकास ओ संवर्धनमे एतुक्का विभिन्न संस्थाक योगदान अतुलनीय अछि। बीचमे एक पैघ अंतरालकेँ पश्चात दू टा नाट्य संस्था -१) मिथिला विकास परिषद् २) कोकिल मंच सामने आएल। ई दूनू निरंतर जन्मसँ लऽ कऽ एखन धरि प्रति बर्ष नियमपूर्वक मैथिली नाटकक मंचन करैत आबि रहल अछि। आइयो धन्यवाद एही दूनू संस्थाक रंगकर्मीकेँ जाइत छनि जे मनसा-वाचा-कर्मणासँ मैथिलीक प्रति समर्पित छथि। हम वर्तमान नाट्यमंचनक परिदृश्यकेँ देखैत आशा करैत छी जे ई दूनू नाट्य संस्था नवसँ नव मैथिली नाटकक मंचन प्रस्तुत करैत रहताह और मैथिली नाटक ओ रंगमंचक परिवर्धन-संवर्धनमे अपनाकेँ समर्पित केने रहताह। हमरा दूनू संस्थाक प्रति पूर्ण आस्था आ विश्वास अछि। हम दूनू संस्थाक मंगलकामना चाहैत छी। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। डॉ. किशन कारीगर महामारी सन डेराउन भेल जा रहलै? मिथिला स पलायन (परदेश कमाएब) यथार्थ कहब देखाएब त भक्क दिस लागत किने आ कतेक मखान वला नेता, मिथिलाक बुद्धिजीवी समाज त कुतर्क कए बतकुट्टबैल पर उतारू भेल यथार्थ के नुकेबाक चलकपनी करै जाएब? तइयो मिथिला स पलायन के भयाऔन डेराउन इतिहास आ यथार्थ के मुँह झांपल नै हेतै? मिथिला मे रोजगार लेल छैहे की? रौदी, दाही, बेसी बुझक्करी दाबी, टांगघिच्चा मनोवृति, बंद परल चिनी मिल, पाग मखानक पेटुोसुआ राजनीति आ परदेश कमेबाक बिमारी छोड़ि आरो किछो नै छै? मिथिला समाज कहियो अइ बातक चिंता नै केलक की ओकर धिया पूता सब केना रोजी रोटी कमेतै? आ परदेश कमेबाक बिमारी नव पीढी तक पसरैत गेल? रोजगार नाम पर मिथिलाक लोक सरकारी योजना तंत्र, सरकारी सेवा, परदेश कमाएब (पलायन) भरोसे सब दिन बैसल रहल आ अपना भाग के दोख दैत हक्कन कनैत रहल. रोजगार के विकल्प सब कहियो ने सोचलक आ नै तकर बेगरता कहियो बुझलक? मिथिला मे फैक्ट्री चैकरी, स्टार्ट अप, लघु उद्योग लगेबाक गप करब त अपना पैर पर कुरहैड़ मारब सन भऽ गेलै? केकरो लक इ गप बाजू त लोक हंसी उड़ाउत जे हे हिनका नै नोकरी चाकरी भेटलै तैं एना कहै छै त ई परदेश कमाई नै चाहै छै, परदेश कमाएल नै भेलै? एहने टोंटबाजी स लोक के मनोबल आरो तोइड़ दै छै? त एहेन टांगघिच्चा मनोवृति वला मिथिला समाज मे के उद्योग धंधा लगाउत? पुरना लोक बुढ पुरान सबहक मुँहे सुनल गप जे पहिने मिथिला के बेसी भाग लोक परदेश कमाई लै नै जाइ? बड्ड गरीब लोके सब टा परदेश खटै. लेकिन 1934 के भूइकंप मिथिला के तहस नहस क देलकै. आ गरीबताइ बढ़ैत गेलै आ लोक सब देश परदेश कमाएब खटाएब शुरू केलकै. पहिने मिथिला मे चिनी मिल, खादी भंडार, लोहा कपसिया मे सूत कटैए, रांटी राजनगर सब मे लहाट बनै, बेगूसराय दड़भंगा, सहरसा पूर्णिया सब मे खाद, कागज, चूरा मिल, आरा मिल सब रहै, जइ मे कतेक लोक के रोजी रोटी भेटैत रहै? आस्ते आस्ते मिथिला मे रोजगार के साधन सब बंद होइत गेल आ लोक सबहक परदेश कमेबाक बिमारी बढ़ैत गेल? एहेन भयाबह जे मिथिला लोक के परदेश कमेने बिना गुजर जाएब मोशकिल भऽ जाइत छै. अहाँ मजदूर छि की हाकिम वा बिजनेस मैन परदेशक मूँह देखै परत यौ बाबू? दिल्ली, पंजाब, बंगाल, बंबई, साउथ इंडिया, नार्थ इस्ट, यूपी, गुजरात, सब ठाम मिथिला के मजदूर भेटबे टा करत? मिथिलाक इ मजदूर सब केहेन अभिशप्त जिनगी जिबै लेल मजबूर अछि आब इ डेराउन स्थिति स सब परिचित भेल जा रहलै? एहि मजदूर सबहक सुधि के लेतै? केकरा बेगरता छै? महामारी सन डेराउन भयाबह भेल जा रहलै मिथिला स पलायन. एतुका नेता सब पाग मखान माला के राजनीति आ अपना फायदा दुआरे पटनिया नेता सबहक दलाली करै मे बेहाल टा रहैए? मिथिलाक चुटपुचिया, फोकटिया, मानल नेता सब केकरो बुते चिनी मिल शुरू कराउल नै भेलै आ नै मिथिला मे उद्योग धंधा लेल इ नेता सब कहियो सोचलक? मिथिला समाजक लोक सब सेहो मूइल अछि जे अनके आ सरकार भरोसे बैसल रहल? मिथिला मे रोजगार के कोनो दुआरा नै छै आ अइ ठाम गामे गाम, मिथिला के घरे घरे पलायन (परदेश कमाएलब) महामारी सन डेराउन भयाबह भेल जा रहलै? ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। मुन्नाजी- बीहनि कथा कोखिन " हम अपन पेट पैंच लगएब,देह नै ने।" सब स्त्री-पुरूष पेट भरवा आ देह झंपवा खातिर देश-परदेश जा की ने करैए।हम त' घरे में रहि कोखि पोसब आ सुखक सपना पूर करब। श्रॉक्सी आ रॉड्रिग्स दंपति द्वारा देल गेल विज्ञापन -"एकटा स्वस्थ कोखिन स्त्री चाही,हमर गर्भधारण आ निवारणक लेल !" इ देखिते स्मिता मुग्ध भ' गेल छलि। आ ओइ दंपतिक संपर्क में आबि सुखक सपना देखए लागलि। स्मिता अहां किए उठेलौं एहेन डेग,लोक की कहत हमरा ,अहांकें ? देखै छीयै यशोदा बेन कें।विदेशी सब जहन ओकर घर आबि घुरै छै तहन लोक ओकरा अभच्छक संज्ञा दै छै।आब अहीं कहू जे इएह सुनबा लेल हम गाम छोड़ि सुरत धेलहुं? नै विशाल,अहां निचैन रहू,हम चिकित्सकीय विधि सं गर्भ राखब,अवैध संबंधे नै।सफल होइते भेटत एक लाख डॉलर, हम सब भ' जएब मालोमाल। "हम कोखि बेचब,देह नै।" ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। संतोष कुमार राय 'बटोही' केर (डायरी) 'लव यू टू' 24.04.2007 लाइफ मीन्स परेम आइ हम जामिया मे बैसल इ सोचि रहल छी जे लल्ली केँ हम नहि बुझि पउलियै। ओ शकूरपुर छोड़ि कs किछु नहि जनैत अछि। दुनिया कतs सँ कतs चैल गेलैक अछि, परञ्च ओ अखनो धरि गाम मे डूबल छथि। पहिल परेम ठीके मे लोक नहि भूलि सकैए। पहिल परेम 'ठुमरी' छियैए। जिनगी केँ तमाशा बनौल जाएत छै। इस्कूल मे पढ़ैत ओ सीखलीहि जे हम ओकर पहिल परेम छियैए। ओना तs इ समाजक लेल हजम करनै इजी नहि छै कि किताब मे पढ़ौल चीज प्रैक्टिकल हेवाक चाही। सभ धर्म मे कहल गेल छै कि परेम सभ सँ ऊपर होएत छै, परञ्च इ दैहिक नीक नहि होएत छै। हम तs टुटि गेल रही। लल्ली के पढ़बैत हम ओकरा लेल अपन दिल कहिया हारि गेलहुँ से हमरा नहि बुझल अछि। दिल्ली केँ सरदी मे कुक्कुर जँका कुकुआइत रहि हम । दुनिया मे भरम छै -" माला फेरत जग मुआ.....।" दैहिक परेम करनै मतलब तलवार केँ धार पर चलनै बुझू। रसखान अपन रचना 'प्रेम वाटिका' मे परेम के लेल बड़ि रास लिखलकिन्हैं - "प्रेम प्रेम सब कोउ कहत, प्रेम न जानत कोय। जो जन जानै प्रेम तो, मरै जगत क्यों रोय।" 25.07.2007 एकटा अनार सौ लोकनि बेमार नीक लड़की देखला सँ सभ कियो केँ आँखि हुनके पर टिकल रहैत छन्हि। जखन ओ गली सँ निकैल कs इस्कूल दिस जाएत छलीह तँ कनहा-कोतरा सभ केँ आँखि चौंधिया जाएत छलैह। सभ लफंगा इस्कूल धरि हुनकर पाँछा जाएत छल। इस्कूल केँ छुट्टी केँ समय ठीक दू बजे लफंगा सभ इस्कूल केँ गेट पर आँखि टिकौने रहैत छलाह। इ दैहिक खिंचाव छेलैक। लल्ली इ दृश्य देखि कs फिरिशान छलीह। जेकरा परेमक अ आ नहि बुझल सेहो हुनका पीछा करैत छलन्हि। इस्कूल मे आइ फंक्शन छेलैक - 'गीत-नादक आओर नृत्यक'। सभ लड़की घरे सँ सजि-धजि कs गेल छलीह। लल्ली आइ नृत्य लेल अपन तैयारी केने छलीह। ओ ततेक बढ़िया नचलीहि जे मैडम हुनका पहिल स्थान देवाक लेल कनिको पाँछा नहि भेलीह। इस्कूल सँ अबितँहें मातर ओ हमरा फोन केलीह - " आज हमारा प्रोग्राम बहुत अच्छा रहा। मुझे नृत्य में प्रथम स्थान मिला है। आप बधाई नहीं दोगो ?" हम बड़ि खुश भेलहुँ अछि। लल्ली हमर जान छलीह। हम हुनका फोने पर कहलियैन्ह - " मैं तुमसे मिलकर बधाई देना चाहता हूँ। तुम कब मिलोगी ?" " अच्छा ठीक है, अभी मम्मी नीचे आ गयी है। मैं फोन रखती हूँ। आपसे बाद में बात करूंगी,तब बताऊंगी। बाय... आई लव यू।" "लव यू टू "- मे हम जवाब देलियैन्ह। 14.02.2008 वेलेंटाइन द ग्रेट पार्क में हम बैठल छी। इ खिज़राबाद केँँ अशोका पार्क छियैय। लायंस हॉस्पीटल केँँ बगल वाला पार्क।हमरा नहि बुझल छल जे 'वेलेंटाइन डे' सेहो किछु छियैय। रोज डे, टैडी डे, चॉकलेट डे ....हग डे, प्रॉमिस डे वगैरह किछु छियैय की ? गाम सँ दिल्ली सन शहर मे आयल हम गोबरे छलहुँ। की परेम मनावै लेल स्पेशल दिवस सेहो होएत छै ? हम खुद सँ प्रश्न केलहुँ अछि। मिथिला मे मधु श्रावणी परब तँ होएत छै। परञ्च देशक राजधानी मे इ नवका शब्द हमरा लेल बड़ि राशि रोमांचक छल। जामिया केँ कैंपस मे प्रेमी युगल केँ देखि कs हमरो मोन भयल जे हमहुँ अइ शब्द के भजा कs देखियै। परेम करवाक लेल दू आदमी चाही। परेम लौकिक आओर पारलौकिक होएत छै। भगवान सँ परेम हमरा एहेन नास्तिक तs नहि कs सकैत अछि। ओहनायोंं भगवान सs परेम दिव्य लोकनि करैत छथि। कालिका मंदिर मे उमड़ल लोकनि तकर आँखिक देखल हाल कहि सकैत अछि। हम तs नरक वाला परेम के लेल बौरायल छी। हम लैला-मजनू जँका परेम नहि कs सकैत छी । 'परेम न बारी उपजै , परेम न हाट बिकाय....।' परेम केर बिना दुनिया शून्य अछि। मधु श्रावणी मे परेम केर परीक्षा होएत छै। मिसरामी टेमी सँ हाथ केँ दागल जाएत छै। हम बैसल छी। आकाश दिस ताकि रहल छी। आकाश मे मेघ केँ रूइया जँका रूप देखि रहल छी। लल्ली केँ मुँह सन मेघ ; भागि रहल अछि मेघ ; फागुनक हवा अगिया बेताल भेल छै। 'हवा हूँ हवा हूँ बसंती हवा हूँ' केर गीत गबैत सरसरैत पछुआ हवा। लल्लीक परेम दैहिक नहि छल। नैसर्गिक चोरनुकबा परेम जाहि मे परेमी बगुला बनल रहति छथि। फोनक रिंग टोन बाजल 'ओ लम्हे....' । हम हबड़हबड़ फोन रिसीव केलहुँ। 'हलो..लो...' । इ मिठगर बोली केँ सुनि कs हमर करेज फाटि गेल। हमर फुरा गेल 'अहाँ बिनु सजनी...'। " कैसे हो आप ?" हम अइ प्रश्न केँ सुनि कs तमतमा गेलहुँ , परञ्च दिल पर बंदूक तानि कs आहिस्ता सँ कहलियै , " मैं ठीक हूँ।" मोन तs अपन कब्जा मे छल नहि। आओर की कहियै ! इ 'वेलेंटाइन डे' बनेनिहार बुरिबक छलाह। भरि साल चोरनुकबा परेमक गेम खेलाउ आओर माघक जाड़ मे हगलाहा, पदलाहा 'हग डे' , 'किस डे' मनाउ।मिथिला केँ लोक इ नहि मनाउत। लल्ली हमरा सँ लगभग छह महीना बाद गप्प केलीह अछि। कोन इ बेमारी छियैय से हमरा नहि बुझल। वेलेंटाइन कहियो 'वेलेंटाइन द ग्रेट' नहि भs सकैत अछि। 20.03.2008 लव लेटर टू गॉड लल्ली आइ विहंसर मे चाह मे नून डालि देलकै। हुनकर पापा कहलथिन्ह, " बेटा तबीयत ठीक है, न ?" एतेक कहि कs ओ नांगलोई ड्यूटी निकैल गेलथिन्ह । लल्ली अवाक् रहि गेल छलीह। पापा ड्यूटी सँ साँझ मे एलाह तँ लल्ली केँ माए हुनका सँ पूछलथिहीन, "विहंसर मे की भेल छल ?" मूच्छर के हँसि-हँसि कs हालत खराब भs गेलैन्ह। ओ लाहालोट होएत बजलाह अछि , " चाह मे चीनी नहि, नून देने छलीह लल्ली।" काल्हि जखन साँझ मे हम लल्ली केँ फोन रिसीव नहि केलियैन्ह। तखने सँ हुनकर मोन मनुहैल छेलैन्ह।हुनकर ध्यान हमरे दिस छेलैक। इ 'ओ' परेमिका छलीह ! काल्हि सँ कोनहुँ काज मे हुनका मोन नहि लगैत छलैन्ह। ओ आइ हमरा चारि पेजक लिखल किछु कागज पकड़ा देलाथि। हम काँपति ओकरा पेंटक जेबी मे ठुसि देलियै। जखन जे ब्लॉक जाकs ओकरा पढ़ि लेल बैसलहुँ तँ ओइ मे महीन महीन भूकभूकैत आखर मे 'हीर-राँझा' लिखल छलैह । तखन तँ हम नहि बुझलियै, परञ्च अगिला दिन लल्ली फोन केलीह , "हलो ! क्या हुआ ? आप ठीक हैं, न ?" "हम अकवका के कहलियैन्ह ," क्या ठीक रहूंगा ? अब तो रोग लग गया है।" इ चिट्ठी छेलैक जकरा आजन्म हम नहि भूलि सकैत छी। लेटर हमरा लेल लिखल छलैह, परञ्च पता मे 'लव लेटर टू गॉड' लिखल छेलैह। (संतोष कुमार राय 'बटोही' केँँ डायरी 'लव यू टू' केर शेष अंश अगिला अंक मे ) -संतोष कुमार राय 'बटोही', ग्राम - मंगरौना ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। संतोष कुमार राय 'बटोही' मंगरौना (धारावाहिक उपन्यास) (चारिम खेप) स्वर्गीय उमाकांत राय जी केँ मोन रहन्हि जे गाम मे किछु हेबाक चाही जाहि सँ गामक नाम हुए। ओ चैती दुर्गा पूजा केँ शुरुआत गाम मे केलाथि। कोलकाता सँ मिस्त्री (मूर्तिकार) शंभू पाल आओर हुनकर टीम केँ लौलाथि। अखन जे दुर्गा मंदिर अछि ओही केँ पछबरिया भाग रस्ता केँ बगल मे चैती दुर्गा पूजा शुरू भेल । इ पूजा ' मंगरौना' केँँ इतिहास केँ सभसँ ललितगर चीज छल। देश-विदेश केँ लोक मेला देखै लेल अबैत छलाह। नेपाल धरि लोक अबैत छलाह। अइ चैती दुर्गा पूजा मे बड़ि भारी टसमटस रहति छलैह।वॉलंटियर मेला मे सुरक्षा देबा मे तबाह रहति छलाह । नेना-भुटा सभ देर राति धरि दुर्गा स्थान ओगरने रहति छलाह। जहिया सँ मिस्त्री अबैत छलथिन्ह तहिए सँ दुर्गा स्थान मे भीड़ रहति छल।ऐतिहासिक दृष्टि सँ चैती दुर्गा पूजा मंगरौना केँ लेल पैघ चीज छियैय। गामक एकता केँँ सूत्रधार इ पूजा छियैय तँ गामक पार्टिशन के सूत्रधार सेहो इ पूजे आओर मंदिर छियैय। गनौली पंचायत मे ब्राह्मण केँ एकछत्र राज्य केँ खतम केनिहार मंगरौना छल। सीताराम झा जी के मुखिया चुनाव मे हरेनिहार मंगरौना छल। स्वर्गीय युगेश्वर राय जी सीताराम मुखिया जी केँ खिलाफ अपन भाई श्री विश्वेश्वर राय जी के चुनाव मे उतारि कs मुखिया चुनाव जीतौलाथि। वर्ण-बेवस्था केँ बीच नीचला जातिक एकता सीताराम झा जी के भारी पड़लन्हि आओर मुखिया केर पद पर सोलकन्ह बैठलाह। गनौली केर ब्राह्मण केँ विद्वता मे मंगरौना सदैव चुनौती देलाथि। स्वर्गीय कालीचरण राय आओर स्वर्गीय चिरंजीव राय 'व्यासजी' ब्राह्मण केँँ शास्त्रार्थ मे पदा देलथिन्ह। सहुरिया मे अपछ दास केँ चुनौती केँ स्वीकार करैत 'व्यासजी' हुनका चारोनाल चीत केलाथि। मंगरौना मे विद्वता मे कोनहु कमी नहि छल। गामक मान-सम्मान बढ़ाबै मे पूर्वजक बड़ि पैघ भूमिका रहलन्हि अछि। 'मंगरौनाक कौवो पढ़ल छै' इ अवधारणा विकसित भेल छल। ओ आब किछु कम भेल जा रहल अछि।कारण अछि युवा अपन पथ सँ भटैग गेलाह अछि। भांग, गांजा, दारू वगैरह-वगैरह नशा मे ओ संलिप्त रहति छथि। परिणाम अछि - गामक इतिहास पर बंट्टाधार लागि रहल अछि। नंग्गे नाचबाक प्रवृत्ति बढ़ि रहल अछि। मंगरौनाक नाक कटि गेल आब। गाम बौरा गेल । गाम अनाथ भs गेल। गाम मे पार्टिशन भs गेल। "हँ, कहू की केल जाए ?" " हमर विचार अछि सभ कियो एकरा रोकवाक प्रयास करू।" " हँ, ठीक कहैत छियैय।" " राति मे एकटा मिटिंग राखू आओर ओइ मे जे निर्णय होएतै से सभ कियो स्वीकार कs लेबै।" "ठीक छै।" मंदिर विवाद एतेक बढ़ि गेलै जे दुनू पार्टी केँ लोक एक-दोसर केँ मारै लेल उतारू भs गेलाथि। भूमि पूजनक बाद मंदिर निर्माणक काज बान्हक पूरूब शुरू भेल। 2017 मे नवका मंदिर मे प्रतिमा स्थापित केल गेल। विवादक क्रम मे केश-फौदारी भेलै। एसपी आओर डीएसपी केँ समझ दुनू पार्टी केँ लोक बयान देलथिन्ह। अगिला दिन इ ख़बर अख़बार केँ सुर्खी बनल- 'मंगरौना में मंदिर विवाद में दो पक्षों में झड़प' । लंगटू माहटर साहेब के मुइला (हत्या) केँ बाद दोसर बेर अख़बार केँ पन्ना पर ' मंगरौना' केर नाम आयल छलै। गामक कौवा पढ़ल, परञ्च गामक संस्कार जेना बिका गेल छै। ककरो कियो मोजर नहि दैत छथिन्ह। सिनियर-जुनियर माने किछु नहि। सब धान बाईस पसेरी। लंगटू माहटर साहेब केँ हत्या केर फाइल की भेलै से नहि पता। गाम मे इ घटना हेनै नीक नहि छेलै। गामक इज़्ज़त बड़ि बिका गेलै अख़बार मे। "जम तर केँ जमीन लिखs।" "नहि लिखब, अहाँ राज मे बसल छी की ?" " जs नहि लिखबीहि तs चलिऐंह बापक बपौती दकs। " हमहुँ गामक पाँच हिस्सेदार मे एकटा हिस्सेदार छियैय।" गाम मे सामंतवाद केँ इएह रूप छेलै। दरवारी बाबा के जमतर करीब छह कट्ठा जमीन छलन्हि से मायादत्त कहति छलन्हि जे लिख दे। एक दिन कामेश्वर बाबा के महिस रोकि देने छलथिन्ह ओ। तब युगेश्वर बाबा केँ पक्ष लेला पर ओ शांत भेलाह। लाठी केँ बल पर दोसरक जमीन लिखौनिहार केँ आब गाम मे कोनहु मोजर नहि छन्हि। सामंतवादक रस्सी जैर गेलै। नवयुवक समाज मे शोषणक बान्ह केँ ढैह देलथिन्ह। 'मंगरौना' सs एकटा वैज्ञानिक सेहो भेलाह अछि -'श्री अरूण राय' । इ छथि गामक मान बढ़ेनिहार। जखन हम छोट छलहुँ तs ओ पटना सs अबैत छलाह तs हम सभ गणित बढ़वाक लेल हुनका लग जाएत छलहुँ। करीब पाँच फूट केँ गोर-नार वो छथि। नीक छवि केँ लोक छथि जिनका नाम सँ गामक मान-प्रतिष्ठा बढ़ैत छै। इ छथि स्वर्गीय उमाकांत राय जीक ज्येष्ठ पुत्र। संतोष 2007 जामिया मे दाखिला लेलाथि। जामिया मे बढ़वाक इच्छा केँ जगौलाथि कृष्ण कुमार जी। ओही समय मे एंट्रेंस फॉर्म केर दाम 200 टाका छेलै। दूटा फॉर्म भरलक संतोष । एकटा बी ए हिंदी ऑनर्स केँ आओर दोसर बी ए मास मीडिया केँ। मास मीडिया केँ फॉर्म भरवाक लेल कृष्ण जी टाका देलथिन्ह आओर बी ए हिंदी ऑनर्स लेल ओ स्वयं फॉर्मक टाका देलथिन्ह। मास मीडिया वेटिंग लिस्ट मे हिनकर नाम चलि गेलन्हि। मार्क्स सीट आओर सिर्टिफिकेट छोड़ाबs लेल ओ दरिभंगा आबि गेलाह। बिहार मे बरसातक समय छेलैह। बाढ़ि आयल छेलैह। किछु दिनक लेल हुनका लेट भs गेलन्हि। ताबत धरि वेटिंग लिस्ट क्लीयर भs गेलै आओर ओ सातम क्रम पर छलाह परञ्च चौदह स्थान वाला दाखिला लs लेलाथि। संतोष मुँह ताकैत रैह गेलाह। ओही बीच बीए हिंदी ऑनर्स केर परिणाम आबि गैलै। ओ एंट्रेंस टॉप केलाथि आओर हिंदी विषय सँ जामिया मे दाखिला लेलाथि। जामिया मिल्लिया इस्लामिया गंगा-यमुना तहज़ीब केँ लेल जानल जाएत छै। संतोष केँ नसीब नीक छलन्हि जे ओ अतेक नीक विश्वविद्यालय सँ पढ़लाक अछि। कियो नहि बुझैत छथिन्ह जे सभ विश्वविद्यालय केँ रंग जामिया जकाँँ हेवाक चाही।ओखला क्षेत्र मे इ संस्थान अबैत छै। देश-विदेश केँ लोक अइ मे पढ़ैत छथि- फ्रांस, फिजी, अफगानिस्तान, नेपाल, श्रीलंका, मॉरिशस वगैरह। नीक लैब्रेरी, एसी/हीटर लगलाहा रीडिंग रूम, कम्प्युर लैब, सस्ता कैंटीन आदि-आदि जामिया केँ गरीब-गुरबा केँ लेल बनौल गेल अछि। साल 2007 धरि ओ जामिया सँ जुड़लाहा। तीनटा डिग्री ओ जामिया सँ लेलाह। जामिया हुनका लेल मंदिर साबित भेलन्हि। जिनगी केँ पटरी पर लेबाक लेल मार्गदर्शन होएत छै से इ संस्थान संतोष केँ देलकन्हि अछि। गरीबी प्रतिभा केँ केतक दिन रोकि सकैत अछि ? जामिया केँ कैंपस जानवरों केँ मनुख हेवाक लेल शिक्षा दैत छै। परञ्च 2019-20 केँ घटना जामिया केँ लेल आओर अइ संस्थान सँ जुड़ल मनुख केँ लेल बड़ि दुखद रहलै। मनुख केँ मनुख नहि बुझिनिहार , देशक गंगा-जमुना सन तहज़ीब केँ माटि पलित केनिहार केँ इतिहास माफ़ नहि करतन्हि। देश बाँटि कs नहि चलतै। देश केँ चलेबाक लेल मनुख चाही। लुच्चा-लफंगा सँ देश नहि चलैत छै। भांग सँ दिमाग पगला जाएत छै। आक-धतुर खा कs महादेव सभ नहि बनि सकैत अछि। देश चलेवाक लेल विख केँ पीबs पड़ैत छै। दिल्ली केँ इ दंगा अबै वाला समय मे सभ दोगला सँ सवाल पूछतन्हि जे इ क्याक भेलै । जाहि देश मे महात्मा बुद्ध आओर महावीर जैन सन महापुरुख भेलाह अछि। अहिंसा केँ उपदेश देनिहार हमरे सभहक वंशज छेलाह अछि। ओतs दंगा नीक नहि कहल जा सकैत अछि। जामिया सँ संतोषे टा केँ जिनगी नहि सुधरलन्हि ।ओत पढ़ि कs लाखो लोकनि आबाद भेलाह अछि। लगैत अछि मनुख हेवाक लेल किछु अलग करs पड़ैत छै। केन्द्रीय विश्वविद्यालय मे पढ़नै केँ अलगे मजा छै। आजुक समय मे एहेन विश्वविद्यालय मे दाखिला लेनै सपना जँका भs गेल छै। सरकार सभ किछु केँ महगा केने जाएत छै। शिक्षा बड़ महग भs गेल छै। गरीब लड़का डाक्टर आओर इंजिनीयरिंग केँ कोर्स नहि कs सकैए। मिड डे मिल गरीब-गुरबा के लेल छियैए। मजदूरो केँँ कनेक पढ़ल-लिखल हेतै तब नs गलत-सलत पर साइन करवा कs ठेकेदार सभ टाका ठकतिन्ह। पूरा देश मे शिक्षा बिकाउ भs गेल छै। इ छियैए शिक्षा केन्द्र जाहि सँ पढ़ि कs हम सभ पास भेल छी - ' जनता हरि हर दत्त उच्च विद्यालय गौड़गामा '। 1971 मे स्थापित केल गेल छै। तहिया सँ इ संस्थान अइ परोपाटा केँ लोक केँ शिक्षा देलकै। लगभग 20 टा गामक विद्यार्थी अइ संस्थान सँ पढ़ि चुकल अछि आओर पढ़ि रहल अछि। अखन अइ संस्थान मे नवाँ आओर दसवाँ केँ पढ़ै भs रहल छै। मास्टरक अभाव रहितहुँ इ विद्यालय अपन नाम केँ नीचा नहि गिरs देलकै। 1996-97 सँ प्राइवेट मास्टर राखि कs विद्यालय चलि रहल छै। विज्ञान, गणित , अंग्रेजी आओर संस्कृत केँ मास्टर अखनो धरि नहि छै। पहिने श्री मोहन मास्टर साहब आओर श्री सियाराम मास्टर साहब विद्यार्थी आओर अन्यान्य मास्टर साहब केँ सहयोग राशि सँ पढ़बैत छलथिन्ह। फेर मोहन मास्टर साहब के सरकारी उत्क्रमित मध्यविद्यालय मे नौकरी भs गेलन्हि। तs शिवा केँ नवयुवक मो० खालिद विज्ञान आओर गणित पढ़ाबs लगलथिन्ह। अखन बिहार केँ सभ विद्यालय मे मास्टरक अभाव छै। बिहारक शिक्षा-बेवस्था लंगरैत छै, परञ्च बिहार सरकार सुतल छथि। मास्टर केँ बहाली केँ 2017 सँ लटकौने छथि। गौड़गामा उच्च विद्यालय प्राइवेट मास्टर के बदौलत चलि रहल अछि। आब माखन टोल पर उत्क्रमित विद्यालय मे सेहो प्राइवेट मास्टर साहब पढ़ा रहल छथि। विद्यार्थी सभ मिल कs हुनका बीस टाका महीना देतैन्ह। नीक बेवस्था ! सरकार केँ मुँह पर गोबर ! शिक्षक बहाली लेल नियोजित शिक्षक अभ्यर्थी पटना केँ गर्दनीबाग मे जमल छथि। हुनका पर बिहार सरकार लाठियो बरसौलथि, परञ्च बहाली लेल तारीख-पर-तारीख बढ़ा रहल छथिन्ह। शिक्षा मामला मे बिहार पूरा भारत मे नीचला पायदान पर अछि। नीतीश सरकार केँ अइ सँ कोनहुँ फ़र्क नहि पड़ैत छन्हि। सुतल छथि कान मे तेल डालि कs। अमीर तs प्राइवेट मे पढ़ा रहल छथि। नीक शिक्षा आओर संपूर्ण शिक्षा नहि भेट रहल छै गरीबक धिया-पुता केँ। गोबरक छाता जकाँ स्तरहीन ट्युशन सेंटर खुजि गेल छै। पढ़बै के लुरि छन्हि नहि भs गेलाह माहटर साहब। गारजन सेहो नहि बुझैत छथिन्ह। बिहार सरकार अखनो धरि अंग्रेजी के अनिवार्य विषय नहि घोषित केलाथि । "हलो , मेय आई टॉक टू संतोष रॉय ?" "या, सर ।" " आई एम कार्तिकेय , कॉलिंग फ्रॉम ग्लोबल प्लेसमेंट, न्यू देल्ही।" "या....।" " सर , एक्च्युअली आई एम कॉलिंग रिगार्डिंग टीचिंग जॉब इन मल्टिनेशनल एजुकेशनल इंस्ट्युट, इन हांगकांग। डू यू इंटेरेस्टेड सर। यू कैन गेट गुड सैलरी , एचआर , फोर व्हीलर टू ट्रैवेल एंड अदर ऑल फैसिलिटीज यू नीड। वी हैव सेलेक्टेड योर रिज्यूम फॉर दिस फ्रॉम नौकरी डॉट कॉम। यू आर एम एम, बीएड....., आई एम राइट सर ?" " या...., बट दिस टाइम आई एम बिजी , सो आई एम नॉट इंटरेस्टेड इन योर जॉब। एक्चुअली आई हैव नॉट पासपोर्ट । "आफ्टर गेटिंग पासपोर्ट आई'ल कॉल यू लेटर। हैव अ' नाइस डे।" संतोष केँ नौकरी लेल बड़ि रास फोन अबैत छन्हि, परंच ओ घरमुँहा भs गेल छथि। दिल्ली केँ नौकरी छोड़लाक बाद हुनकर मोन छन्हि जे अपन डीहडाबर पर रहि कs नौकरी करी, से पूरा हेतन्हि।बीजेपी 2020 केँ बिहार विधान सभा चुनाव केँ समय अपन चुनावी मेनिफेस्टो मे लिखने छेलाथि जे 19 लाख लोक के रोजगार देबै , से कहिया ? ...बुढ़ारी मे। 2017 सँ बिहार मे माहटरक बहाली कमला मे डूबकी लगा रहल छै। कतेक शिक्षक अभ्यर्थी बहालीक आस मे परलोक सेहो गेलाह अछि। परंच नीतीश कुमार ठेका आओर होम डिलेवरी रोकवाक लेल फिरिशान छथि। आब पंचायत मे दारू के बन्न करेवाक लेल सीसीटीवी लगतै। मदिरा की की नहि करौत...। बिहारक अर्थ बेवस्था केँ सेहो लूटलक आओर सरकार केँ नग्न नचवाक लेल सेहो फिरिशान केने छथि। "आँऐं यौ दारू बन्न भs गेलै , तs की भेलै।" " किछु नहि, बिहारक अर्थ तंत्र डुबि गेलै आओर पुलिस, प्रशासन, दारू माफिया, गाँजा, भांग बेचनिहार मालामाल भs गेलै।" " होम डिलेवरी भs रहल छै। मदिरा बन्न नहि भs सकैत अछि। अखनो घर मे दारूबाज हो-हल्ला कैरते अछि। दारू पीब कs छौड़ा सभ तमाशा कैरते अछि। बाबा बाँस गजेरी केँ अड्डा बनल अछि।" " दारू केँ जीएसटी केँँ उच्च स्लाइव मे डालि कs लाभ हेतै की ? या किछु नहि.... अइ कानून केँ वापिस नहि कs सकैत अछि सरकार की ?" " हँ, क्याक नहि ? 'पोटा' कानून जँका दुनू सदन मे अइ कानून केँ वापिस करवाक बिल लैब कs वापिस केल जा सकैत अछि ।" "दिल्ली सरकार जँका ऊपर सँ आओर टैक्स लगा कs राज्यक खजाना भरि सकैत छी।" फुदुक्की आओर विक्कू अइ विषय पर बतियात शिवा चौक सँ गाम दिस अबैत छलाह कि देखैत छथिन्ह 'दुर्गा' रस्ता किनारे ओंघराएल छथि। ( धारावाहिक उपन्यास 'मंगरौना' केर बाकी अंश अगिला खेप मे ) -संतोष कुमार राय 'बटोही', ग्राम-मंगरौना, पोस्ट- गोनौली, थाना- अंधराठाढ़ी, जिला- मधुबनी, बिहार-847401. मोबाईल नंबर- 6204644978 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। रबीन्द्र नारायण मिश्र लजकोटर -३४- कहबी छैक जे भगवानकघरमे देर अछि ,अन्हेर नहि अछि । सएह बात दामोदरक मामलामे भेल । दुनियाँकेँ तँ अहाँ ठकि सकैत छी मुदा अपना आपसँ कोना बाचब? दामोदरक मोन तँ ई बात सदरिकाल कहैत रहैक जे ओ अनीति ओ अन्यायक चौकठिपर ठाढ़ भएबहुतदिनधरि ठहाका नहि पाड़ि सकैत अछि। मुदा लोभ आ लालच आदमीक पतन कराइए कए मानैत अछि। दामोदरक संगे सएह भेलैक । जँ से नहि रहैत तँ ओ सरकारी नौकरी कए शांतिपूर्वक जीवि सकैत छल । लंद-फंद कए मनुक्खक न्यायलयसँ तँ ओ बँचि गेल मुदा भगवानसँ नहि बचि सकल। दामोदर कुसुमक कार्यालयमे किछु काजसँ गेल रहथि। लौटतीमे कुसुम संग भए गेलखिन। हुनको सरोजिनी नगर मार्केटमे काज रहनि। रवि दिन रहैक। सरोजिनीनगर मार्केटमे चुट्टी ससरबाक जगह नहि रहैक । सभकाज संपन्नकए बिदा छल कि कुसुमक किछु सामान दोकानेमे छुटि गेलैक ।ओ कारसँ नीचा उतरलि आ दोकानदिस बिदा भेले छलीह की बड़ी जोरक आबाज भेल । लागल जेना कोनो बम फुटल हो। दामोदरक कार धू-धू कए जड़ए लागल। कारमे स्वचालितताला लागल छलैक । दामोदरलाख कोशिश केलक जे कारसँ भागी,किछु नहि कए सकल। सभटा गेट जाम भए गेलैक । चारूकात हंगामा भए गेल। पुलिस,फायरब्रिगेड सभ दौड़ल । मुदा ताबे सभ किछु खतम छल। कार धू-धू कए जरि गेल। सभ किछु खाक भए गेल छल। सौंसे सरोजिनीनगर मार्केटमे जेना भूकंप भए गेल । लोकसभ जहाँ-तहाँ भागिरहलछल।ककरो नहि बूझल रहैक जे आखिर भेलैक की? केओ किछु,केओ किछु अनुमान लगबैत रहल। संयोग एहन रहेक जे हम लताक संगे सरोजिनी नगर मार्केटेमे रही मुदा दोसर दिस । चारू दिस लोककेँ भागैत देखि हमरो उत्सुकता भेलजे आखिर बात की छैक । हमआगाबढ़लहुँ।कनीके दूरपर कुसुम देखेलीह। ओ डरसँ हाँफि रहल छलीह । किछु कहए चाहथि मुदा बजले नहि होनि। पुलिस चारूकात घेराबंदी कए देलक। हम सभ कहुना कए ओतएसँ निकलि अपन घर वापस अएलहुँ। एहि दुर्घटनाक बाद दामोदरक घरपर पड़ल छापामे पुलिसकेँ बहुत महत्वपूर्ण जानकारी सभ भेटलैक। दिल्ली अबैत काल ट्रेनसँ मालतीक अपहरण आओर कनाट प्लेसक गहनाक दोकानक डकैतीसँ जुड़ल फाइल ओकर आल्मीरासँ निकलल। नीरज द्वार ाआयोजित अपन समाजक बैसारमे भेल हंगामासँ जुड़ल कागजात सेहो ओकरे लगमे छल। एहि फाइल सभसँ ई स्पष्ट भेल जे दामोदर एहि घटना सभमे लिप्त छल। मुदा आब की? आब तँ ओ मरि चुकल छल। ई सभ बात एकटा इतिहास छल। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ज्ञानवर्द्धन कंठ- २ टा बीहनि कथा १ केकर मौसा छियौ? बूढ़ा 'ए टी एम'मे पाइ निकाल' गेलाह।एगो बच्चा पहिनेसँ भीतर रहय।हिनका देखितहि बाजल - "मौसा हो? गोर लगै छियो।पाइ इकाले के हौ?लाब', इकाल दै छियो।बोल',पिन...! नअ'..पैसे न हइ 'ए टी एम'मे।न भेलो।ल' धरा अपन कार्ड।" बूढ़ा घुरल अबै छलाह।तावत बेटा फोन केलकनि- "बाबू हो?पैसा इकाललहू ह'?" बूढ़ा बजलाह- "न इकललइ ह'।'ए टी एम'मे पइसे न हइ।" बेटा-"एह, मोबाइल पर मैसेज एलो ह'।बीस हजार अखुनते इकल गेलो।" आब बूढ़ाक माथा ठनकलनि।रोड पर विलाप करैत जा रहल छथि- "बौओ रे बौओ! रे हम केकर मौसा छियो रे बौओ!" २ मैथिलीक पढ़ाइ -तोहर मातृभाषा? -कैला? -बाल-बच्चा कथी बजै छह? -हिन्दी बोलै हय। -स्कूलमे कोन भाषामे लिखै-पढ़ै छह? -कॉन्वेंटमे कथी होइ हइ, अंग्रेजिए चलै हइ। -कोन गीत सुनै छह? -ऊ त' बलु भोजपुरिये नीमन लगैय',झमकौआ! -विद्यापतिक नाम सुनने छहक? -कैला न?जय हो उगना महादेव!उगना हो मोर कत' गेला.... -मिथिला धाम कत' छैक? -ले बलैया के!हम सब कहाँ हती?हइ मिथिले धाम नु हइ, अपन जानकी माइ के धाम!इहो कोनो पूछे के बात हइ? -त' तों मैथिल छह कि नहि? -छेबे करियइ। -बंगाली कोन भाषामे लिखै-पढ़ै छैक? -बंगले नु, और कथी? -आ मराठी? -मराठिये। -आ गुजराती? -गुजरातिये। -तोरा मैथिली लिख'-पढ़' अबै छह किने? -समझ-बोल लै हतियै, महज लिखे-पढ़े न अबैय'। -से किएक? -सरकार पढ़े देतइ तब नु?कोनो इस्कुलमे पढ़ाइ होबे देतइ तब नु? -तों किछु नहि करबहक? -कथी करियइ?सभ गोरे त' कानमे ठेपी देलही हइ। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३. पद्य ३.१.डाॅ. किशन कारीगर-के दर्शक आ के सब कवि? (हास्य कविता) ३.२.आशीष अनचिन्हार- २ टा गजल डाॅ. किशन कारीगर के दर्शक आ के सब कवि? (हास्य कविता) होइए खूब मैथिली कवि सम्मेलन तै मे दर्शको स बेसी मंच पर बैसल कवि? बूझबा मे ने आउत के दर्शक आ के सब कवि? बानरक हेंज सन अफरजात भेल मैथिली कवि? औ जी एतेक कहूं कवि भेलैए? पुछियौ त उनटे मुँह दुसी देत, छिना झपटी मंचे पर दौगा दौगी किए मंचदौग्गा बनि गेल मैथिली कवि? आयोजक सब बड़का पोस्टर छपाउत चंदा देलक सेहो सब कवि? दू चारि टा त दर्शको मे स मंच पर चढ़ल बीच कार्यक्रम उहो सब बनि गेल कवि? एतेक उपरौंजी आ मंचदौगीय आन भाषाक समेमलन मे नै देखलियै? मैथिली आयोजन मे कनिको ने करत लाज, बूझबा मे ने आउत के दर्शक आ के सब कवि? कारीगर कविता पढ़ब शुरू केने रहै की? कनिये काल मे दर्शको मे स दू टा मंच चढल, हमरा माला पहिरबैत कहलक जल्दी करू हमहू कवि? आयोजक दिसी तकलहुँ? उहो गुम्हरल कि दर्शक आ कवि? अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। आशीष अनचिन्हार दू टा गजल १ मनोबल मनोरम बना देत पक्का मनोकामना सभ पुरा देत पक्का नियम ई सदा मोन राखब अहाँ हम अपेक्षा उपेक्षित बना देत निश्चित कते रोकि रखतै कते दाबि सकतै बहल नोर दुनियाँ जरा देत पक्का कनी आचरण ठीक रखबै तँ अनुभव गजल नीक सुंदर कहा देत पक्का कियो आइ पूजा करैए मुदा ओ विसर्जन कऽ जल्दी भसा देत पक्का सभ पाँतिमे 122-122-122-122 मात्राक्रम अछि (बहरे मुतकारिब मोसम्मन (चारि) मोसम्मन सालिम वा बहरे मुतकारिब सालिम अठरुक्नी)। २ दुखमे चाहत मोन हमर सुखमे बाँटत मोन हमर
अते इयाद लेने जाउ अतबे राखत मोन हमर
बेर बखतपर भस्मासुर हमरे मारत मोन हमर
कऽ लिअ छल कपट आ जे से किछु ने जानत मोन हमर
अपन बूझि अबियौ कहियो अपने लागत मोन हमर
सभ पाँतिमे 22-22-22-2 मात्राक्रम अछि। दू अलग-अलग लघुकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि। ई बहरे मीर अछि। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ........................................................................................................................ संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] Videha e-Learning पेटार (रिसोर्स सेन्टर) शब्द-व्याकरण-इतिहास MAITHILI IDIOMS & PHRASES मैथिली मुहावरा एवम् लोकोक्ति प्रकाश- रमाकान्त मिश्र मिहिर (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) डॉ. ललिता झा- मैथिलीक भोजन सम्बन्धी शब्दावली (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) मैथिली शब्द संचय MAITHILI DICTIONARY- RAMDEO JHA (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) ENGLISH MAITHILI COMPUTER DICTIONARY MAITHILI ENGLISH DICTIONARY अणिमा सिंह -Shishu_Geet_Khel_Anima_Singh डॉ. रमण झा मैथिली काव्यमे अलङ्कार अलङ्कार-भास्कर आनन्द मिश्र (सौजन्य श्री रमानन्द झा "रमण")- मिथिला भाषाक सुबोध व्याकरण BHOLALAL DAS मैथिली सुबोध व्याकरण- भोला लाल दास राधाकृष्ण चौधरी- A Survey of Maithili Literature ........................................................................................................................ मूलपाठ तिरहुता लिपिक उद्भव ओ विकास (यू.पी.एस.सी. सिलेबस) राजेश्वर झा- मिथिलाक्षरक उद्भव ओ विकास (मैथिली साहित्य संस्थान आर्काइव) Surendra Jha Suman दत्त-वती (मूल)- श्री सुरेन्द्र झा सुमन (यू.पी.एस.सी. सिलेबस) प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) CIIL SITE ........................................................................................................................ समीक्षा सुभाष चन्द्र यादव-राजकमल चौधरी: मोनोग्राफ शिव कुमार झा "टिल्लू" अंशु-समालोचना डॉ बचेश्वर झा- B_JHA_Nibhand_Nikunj.pdf डॉ. देवशंकर नवीन- Adhunik_Sahityak_Paridrishya डॉ. रमण झा- भिन्न-अभिन्न प्रेमशंकर सिंह- मैथिली भाषा साहित्य:बीसम शताब्दी (आलोचना) डॉ. रमानन्द झा 'रमण' हिआओल अखियासल CIIL SITE दुर्गानन्द मण्डल-चक्षु RAMDEO JHA दत्त-वतीक वस्तु कौशल- डॊ. श्रीरामदेवझा SHAILENDRA MOHAN JHA परिचय निचय- डॊ शैलेन्द्र मोहन झा ........................................................................................................................ अतिरिक्त पाठ पहिने मिथिला मैथिलीक सामान्य जानकारी लेल एहि पोथी केँ पढ़ू:- राधाकृष्ण चौधरी- मिथिलाक इतिहास फेर एहि मनलग्गू फाइल सभकेँ सेहो पढ़ू:- केदारनाथ चौधरी चमेलीरानी माहुर करार कुमार पवन पइठ (मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ कथा) (साभार अंतिका) डायरीक खाली पन्ना (साभार अंतिका) याेगेन्द्र पाठक वियाेगी- विज्ञानक बतकही रामलोचन ठाकुर- मैथिली लोककथा SAHITYA AKADEMI http://sahitya-akademi.gov.in/publications/e-books.jsp http://sahitya-akademi.gov.in/general/Digitalbooks.jsp CIIL http://corpora.ciil.org/maisam.htm अखियासल (रमानन्द झा रमण) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI1.pdf जुआयल कनकनी- महेन्द्र http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI2.pdf प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI3.pdf सृजन केर दीप पर्व- सं केदार कानन आ अरविन्द ठाकुर http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI4.pdf मैथिली गद्य संग्रह- सं शैलेन्द्र मोहन झा http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI5.pdf JNU http://sanskrit.jnu.ac.in/maithili/index.jsp http://sanskrit.jnu.ac.in/student_projects/lexicon.jsp?lexicon=maithili ARCHIVE.ORG https://archive.org/details/%40vijay_deo_jha?&sort=-publicdate&page=2 VIDEHA MAITHILI BOOKS/ PICTURE-AUDIO-VIDEO ARCHIVE http://videha.co.in/new_page_15.htm https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ ALL INDIA RADIO DOORDARSHAN आकाशवाणी दूरदर्शन http://prasarbharati.gov.in/ http://newsonair.com/ https://doordarshan.gov.in/ आकाशवाणी मैथिली पोडकास्ट http://prasarbharati.gov.in/podcast.php?filterlang=Maithili&from=1947-08-15&fromwp=2020-08-29&to=2050-12-31&search=GO आकाशवाणी पटना/ दरभंगा मैथिली रेजनल न्यूज टेक्स्ट 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Papers/ books) ........................................................................................................................ VIDEHA e-LEARNING YOUTUBE CHANNEL https://www.youtube.com/channel/UC4abVKqMj2pDWIAkXiOHp7A विदेहक किछु विशेषांक:- १) हाइकू विशेषांक १२ म अंक, १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf 12.pdf २) गजल विशेषांक २१ म अंक, १ नवम्बर २००८ Videha_01_11_2008.pdf Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf 21.pdf ३) विहनि कथा विशेषांक ६७ म अंक, १ अक्टूबर २०१० Videha_01_10_2010 Videha_01_10_2010_Tirhuta 67 ४) बाल साहित्य विशेषांक ७० म अंक, १५ नवम्बर २०१० Videha_15_11_2010 Videha_15_11_2010_Tirhuta 70 ५) नाटक विशेषांक ७२ म अंक १५ दिसम्बर२०१० Videha_15_12_2010 Videha_15_12_2010_Tirhuta 72 ६) नारी विशेषांक ७७म अंक ०१ मार्च २०११ Videha_01_03_2011 Videha_01_03_2011_Tirhuta 77 ७) अनुवाद विशेषांक (गद्य-पद्य भारती) ९७म अंक Videha_01_01_2012 Videha_01_01_2012_Tirhuta 97 ८) बाल गजल विशेषांक विदेहक अंक १११ म अंक, १ अगस्त २०१२ Videha_01_08_2012 Videha_01_08_2012_Tirhuta 111 ९) भक्ति गजल विशेषांक १२६ म अंक, १५ मार्च २०१३ Videha_15_03_2013 Videha_15_03_2013_Tirhuta 126 १०) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक १४२ म, अंक १५ नवम्बर २०१३ Videha_15_11_2013 Videha_15_11_2013_Tirhuta 142 ११) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 १२) अरविन्द ठाकुर विशेषांक १८९ म अंक १ नवम्बर २०१५ Videha_01_11_2015 १३) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक १९१ म अंक १ दिसम्बर २०१५ Videha_01_12_2015 १४) विदेह सम्मान विशेषाक- २००म अक १५ अप्रैल २०१६/ २०५ म अक १ जुलाई २०१६ Videha_15_04_2016 Videha_01_07_2016 १५) मैथिली सी.डी./ अल्बम गीत संगीत विशेषांक- २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ Videha_01_01_2017 १६) मैथिली वेब पत्रकारिता विशेषांक VIDEHA 313 लेखकसं आमंत्रित रचनापर आमंत्रित आलोचकक टिप्पणीक शृंखला १७) मैथिली बीहनि कथा विशेषांक-२ VIDEHA 317 १८) रामलोचन ठाकुर विशेषांक VIDEHA 319 १९) रामलोचन ठाकुर श्रद्धांजलि विशेषांक VIDEHA 320 २०) राजनन्दन लाल दास विशेषांक VIDEHA 333 लेखकक आमंत्रित रचना आ ओइपर आमंत्रित समीक्षकक समीक्षा सीरीज १. कामिनीक पांच टा कविता आ ओइपर मधुकान्त झाक टिप्पणी विदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016 "पाठक हमर पोथी किए पढ़थि"- लेखक द्वारा अप्पन पोथी/ रचनाक समीक्षा सीरीज १. आशीष अनचिन्हार 'विदेह' क ३२७ म अंक ०१ अगस्त २०२१ एडिटर्स चोइस सीरीज एडिटर्स चोइस सीरीज-१ विदेहक १२३ म (०१ फरबरी २०१३) अंकमे बलात्कारपर मैथिलीमे पहिल कविता प्रकाशित भेल छल। ई दिसम्बर २०१२ क दिल्लीक निर्भया बलात्कार काण्डक बादक समय छल। ओना ई अनूदित रचना छल, तेलुगुमे पसुपुलेटी गीताक एहि कविताक हिन्दी अनुवाद केने छलीह आर. शांता सुन्दरी आ हिन्दीसँ मैथिली अनुवाद केने छलाह विनीत उत्पल। हमर जानकारीमे एहिसँ बेशी सिहराबैबला कविता कोनो भाषामे नहि रचल गेल अछि। सात सालक बादो ई समस्या ओहने अछि। ई कविता सभकेँ पढ़बाक चाही, खास कऽ सभ बेटीक बापकेँ, सभ बहिनक भाएकेँ आ सभ पत्नीक पतिकेँ। आ विचारबाक चाही जे हम सभ अपना बच्चा सभ लेल केहन समाज बनेने छी। एडिटर्स चोइस सीरीज-१ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-२ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच ब्रेस्ट कैसरक समस्यापर विदेह मे मीना झा केर एकटा लघु कथा प्रकाशित भेल। ई मैथिलीक पहिल कथा छल जे ब्रेस्ट कैसर पर लिखल गेल। हिन्दीमे सेहो ताधरि एहि विषयपर कथा नहि लिखल गेल छल, कारण एहि कथाक ई-प्रकाशित भेलाक १-२ सालक बाद हिन्दीमे दू गोटेमे घोंघाउज भऽ रहल छल कि पहिल हम आकि हम, मुदा दुनूक तिथि मैथिलीक कथाक परवर्ती छल। बादमे ई विदेह लघु कथामे सेहो संकलित भेल। एडिटर्स चोइस सीरीज-२ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-३ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिलक किछु बाल कविता प्रकाशित भेल। बादमे हुनकर ३ टा बाल कविता विदेह शिशु उत्सवमे संकलित भेल जाहिमे २ टा कविता बेबी चाइल्डपर छल। पढ़ू ई तीनू कविता, बादक दुनू बेबी चाइल्डपर लिखल कविता पढ़बे टा करू से आग्रह। एडिटर्स चोइस सीरीज-३ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-४ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच जगदानन्द झा मनुक एकटा दीर्घ बाल कथा कहि लिअ बा उपन्यास प्रकाशित भेल, नाम छल चोनहा। बादमे ई रचना विदेह शिशु उत्सवमे संकलित भेल, ई रचना बाल मनोविज्ञानपर आधारित मैथिलीक पहिल रचना छी, मैथिली बाल साहित्य कोना लिखी तकर ट्रेनिंग कोर्समे एहि उपन्यासकेँ राखल जेबाक चाही। कोना मॊडर्न उपन्यास आगाँ बढ़ै छै, स्टेप बाइ स्टेप आ सेहो बाल उपन्यास। पढ़बे टा करू से आग्रह। एडिटर्स चोइस सीरीज-४ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-५ एडिटर्स चोइस ५ मे मैथिलीक "उसने कहा था" माने कुमार पवनक दीर्घकथा "पइठ" (साभार अंतिका) । हिन्दीक पाठक, जे "उसने कहा था" पढ़ने हेता, केँ बुझल छन्हि जे कोना अहि कथाकेँ रचि चन्द्रधर शर्मा ’गुलेरी’ अमर भऽ गेलाह। हम चर्चा कऽ रहल छी, कुमार पवनक "पइठ" दीर्घकथाक। एकरा पढ़लाक बाद अहाँकेँ एकटा विचित्र, सुखद आ मोन हौल करैबला अनुभव भेटत, जे सेक्सपीरिअन ट्रेजेडी सँ मिलितो लागत आ फराको। मुदा एहि रचनाकेँ पढ़लाक बाद तामस, घृणा सभपर नियंत्रणकेँ आ सामाजिक/ पारिवारिक दायित्वकेँ सेहो अहाँ आर गंभीरतासँ लेबै, से धरि पक्का अछि। मुदा एकर एकटा शर्त अछि जे एकरा समै निकालि कऽ एक्के उखड़ाहामे पढ़ि जाइ। एडिटर्स चोइस सीरीज-५ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-६ जगदीश प्रसाद मण्डलक लघुकथा "बिसाँढ़": १९४२-४३ क अकालमे बंगालमे १५ लाख लोक मुइला, मुदा अमर्त्य सेन लिखैत छथि जे हुनकर कोनो सर-सम्बन्धी एहि अकालमे नहि मरलन्हि। मिथिलोमे अकाल आएल १९६७ ई. मे आ इन्दिरा गाँधी जखन एहि क्षेत्र अएली तँ हुनका देखाओल गेल जे कोना मुसहर जातिक लोक बिसाँढ़ खा कऽ एहि अकालकेँ जीति लेलन्हि। मैथिलीमे लेखनक एकभगाह स्थिति विदेहक आगमनसँ पहिने छल। मैथिलीक लेखक लोकनि सेहो अमर्त्य सेन जेकाँ ओहि महाविभीषिकासँ प्रभावित नहि छला आ तेँ बिसाँढ़पर कथा नहि लिखि सकला। जगदीश प्रसाद मण्डल एहिपर कथा लिखलन्हि जे प्रकाशित भेल चेतना समितिक पत्रिकामे, मुदा कार्यकारी सम्पादक द्वारा वर्तनी परिवर्तनक कारण ओ मैथिलीमे नहि वरण् अवहट्ठमे लिखल बुझा पड़ल, आ ओतेक प्रभावी नहि भऽ सकल कारण विषय रहै खाँटी आ वर्तनी कृत्रिम। से एकर पुनः ई-प्रकाशन अपन असली रूपमे भेल विदेहमे आ ई संकलित भेल "गामक जिनगी" लघुकथा संग्रहमे। एहि पोथीपर जगदीश प्रसाद मण्डलकेँ टैगोर लिटरेचर अवार्ड भेटलनि। जगदीश प्रसाद मण्डलक लेखनी मैथिली कथाधाराकेँ एकभगाह हेबासँ बचा लेलक, आ मैथिलीक समानान्तर इतिहासमे मैथिली साहित्यकेँ दू कालखण्डमे बाँटि कऽ पढ़ए जाए लागल- जगदीश प्रसाद मण्डलसँ पूर्व आ जगदीश प्रसाद मण्डल आगमनक बाद। तँ प्रस्तुत अछि लघुकथा बिसाँढ़- अपन सुच्चा स्वरूपमे। एडिटर्स चोइस सीरीज-६ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-७ मैथिलीक पहिल आ एकमात्र दलित आत्मकथा: सन्दीप कुमार साफी। सन्दीप कुमार साफीक दलित आत्मकथा जे अहाँकेँ अपन लघु आकाराक अछैत हिलोड़ि देत आ अहाँक ई स्थिति कऽ देत जे समानान्तर मैथिली साहित्य कतबो पढ़ू अहाँकेँ अछौं नहि होयत। ई आत्मकथा विदेहमे ई-प्रकाशित भेलाक बाद लेखकक पोथी "बैशाखमे दलानपर"मे संकलित भेल आ ई मैथिलीक अखन धरिक एकमात्र दलित आत्मकथा थिक। तँ प्रस्तुत अछि मैथिलीक पहिल दलित आत्मकथा: सन्दीप कुमार साफीक कलमसँ। एडिटर्स चोइस सीरीज-७ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-८ नेना भुटकाकेँ रातिमे सुनेबा लेल किछु लोककथा (विदेह पेटारसँ)। एडिटर्स चोइस सीरीज-८ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-९ मैथिली गजलपर परिचर्चा (विदेह पेटारसँ)। एडिटर्स चोइस सीरीज-९ (डाउनलोड लिंक) जगदीश प्रसाद मण्डल जीक ६५ टा पोथीक नव संस्करण विदेहक २३३ सँ २५० धरिक अंकमे धारावाहिक प्रकाशन नीचाँक लिंकपर पढ़ू:- Videha_15_05_2018 Videha_01_05_2018 Videha_15_04_2018 Videha_01_04_2018 Videha_15_03_2018 Videha_01_03_2018 Videha_15_02_2018 Videha_01_02_2018 Videha_15_01_2018 Videha_01_01_2018 Videha_15_12_2017 Videha_01_12_2017 Videha_15_11_2017 Videha_01_11_2017 Videha_15_10_2017 Videha_01_10_2017 Videha_15_09_2017 Videha_01_09_2017 विदेह ई-पत्रिकाक बीछल रचनाक संग- मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ रचनाक एकटा समानान्तर संकलन: विदेह: सदेह: १ (२००८-०९) देवनागरी विदेह: सदेह: १ (२००८-०९) तिरहुता विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) देवनागरी विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) तिरहुता विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०)देवनागरी विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०) तिरहुता विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०)देवनागरी विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०) तिरहुता विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]देवनागरी विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ] तिरहुता विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]- दोसर संस्करण देवनागरी विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ]देवनागरी विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ] तिरहुता विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ]देवनागरी विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ] तिरहुता विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ]देवनागरी विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ] तिरहुता विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ]देवनागरी विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ] तिरहुता विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ]देवनागरी विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ] तिरहुता विदेह:सदेह ११ विदेह:सदेह १२ विदेह:सदेह १३ The readers of English translations of Maithili Novel "sahasrabadhani" and verse collection "sahasrabdik chaupar par" has intimated that the English translation has not been able to grasp the nuances of original Maithili. Therefore the Author has started translating his Maithili works in English himself. After these translations are complete these would be the official translations authorised by the Author of the original works.-Editor Maithili Books can be downloaded from: https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ विदेह सम्मान: सम्मान-सूची (समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार सहित) सूचना/ घोषणा "विदेह सम्मान" समानान्तर साहित्य अकदेमी पुरस्कारक नामसँ प्रचलित अछि। "समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार" (मैथिली), जे साहित्य अकादेमीक मैथिली विभागक गएर सांवैधानिक काजक विरोधमे शुरु कएल छल, लेल अनुशंसा आमन्त्रित अछि। अनुशंसा २०१९ आ २०२० बर्ख लेल निम्न कोटि सभमे आमन्त्रित अछि: १) फेलो २)मूल पुरस्कार ३)बाल-साहित्य ४)युवा पुरस्कार आ ५) अनुवाद पुरस्कार। पुरस्कारक सभ क्राइटेरिया साहित्य अकादेमी, दिल्लीक समानान्तर पुरस्कारक समक्ष रहत, जे एहि लिंक sahitya-akademi.gov.in पर उपलब्ध अछि। अपन अनुशंसा editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम्: VIDEHA: AN IDEA FACTORY (c)२००४-२०२२. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHAसम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: डॉ उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम विलास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक -स्त्री कोना- इरा मल्लिक। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि)editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि। एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै, आ से हानि-लाभ रहित आधारपर छै आ तैँ ऐ लेल कोनो रॊयल्टीक/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै। तेँ रॉयल्टीक/ पारिश्रमिकक इच्छुक विदेहसँ नै जुड़थि, से आग्रह। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-2022 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। ५ जुलाई २००४ केँ http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् 'विदेह' ३३७ म अंक ०१ जनवरी २०२२ (वर्ष १५ मास १६९ अंक ३३७) विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA ISSN 2229-547X VIDEHA
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