'विदेह' ३४२ म अंक १५ मार्च २०२२ (वर्ष १५ मास १७१ अंक ३४२) ऐ अंकमे अछि:- १. गजेन्द्र ठाकुर- संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल सेहो] [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] [FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI ALSO] २. गद्य २.१.जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’- आँखिमे चित्र हो मैथिली केर (आत्मकथा)- २७म खेप (मध्यान्तर) २.२.रबीन्द्र नारायण मिश्र- मातृभूमि (उपन्यास)- पहिल खेप २.३.डॉ. किशन कारीगर-मोछ वाली मौगी।(होली पर हास्य कथा) २.४.मुन्नाजी- बीहनि कथा-बेर पर २.५.आशीष अनचिन्हार- साहित्य केंद्रित जोगीरा २.६.संतोष कुमार राय 'बटोही'क धारावाहिक उपन्यास-मंगरौना-६अम खेप ३. पद्य ३.१.दिनकर कुमार- दस टा कविता ३.२.डाॅ किशन कारीगर-हो हो त हो हो (हास्य कविता) ३.३.संतोष कुमार राय 'बटोही' केर चारि टा कविता ३.४.राज किशोर मिश्र-इजोरिआ Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Books/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाउ। VIDEHA ARCHIVE विदेह पेटार View Videha googlegroups (since July 2008) view Videha Facebook Official Group (since January 2008)- for announcements १. गजेन्द्र ठाकुर ........................................................................................................................ ........................................................................................................................ [संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री] [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल सेहो] [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] [FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI ALSO] यू. पी. एस. सी. (मेन्स) २०२० ऑप्शनल: मैथिली साहित्य विषयक टेस्ट सीरीज यू.पी.एस.सी. क प्रिलिमिनरी परीक्षा २०२० सम्पन्न भऽ गेल अछि। जे परीक्षार्थी एहि परीक्षामे उत्तीर्ण करताह आ जँ मेन्समे हुनकर ऑप्शनल विषय मैथिली साहित्य हेतन्हि तँ ओ एहि टेस्ट-सीरीजमे सम्मिलित भऽ सकैत छथि। टेस्ट सीरीजक प्रारम्भ प्रिलिम्सक रिजल्टक तत्काल बाद होयत। टेस्ट-सीरीजक उत्तर विद्यार्थी स्कैन कऽ editorial.staff.videha@gmail.com पर पठा सकैत छथि, जँ मेलसँ पठेबामे असोकर्ज होइन्हि तँ ओ हमर ह्वाट्सएप नम्बर 9560960721 पर सेहो प्रश्नोत्तर पठा सकैत छथि। संगमे ओ अपन प्रिलिम्सक एडमिट कार्डक स्कैन कएल कॉपी सेहो वेरीफिकेशन लेल पठाबथि। परीक्षामे सभ प्रश्नक उत्तर नहि देमय पड़ैत छैक मुदा जँ टेस्ट सीरीजमे विद्यार्थी सभ प्रश्नक उत्तर देताह तँ हुनका लेल श्रेयस्कर रहतन्हि। विदेहक सभ स्कीम जेकाँ ईहो पूर्णतः निःशुल्क अछि।- गजेन्द्र ठाकुर संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सर्विसेज (मुख्य) परीक्षा, २०२० मैथिली (ऐच्छिक) लेल टेस्ट सीरीज/ प्रश्न-पत्र- १ आ २ TEST SERIES-1 TEST SERIES-2 [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल/ FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI] NTA_UGC_NET_MAITHILI_01 NTA_UGC_NET_MAITHILI_02 NTA_UGC_NET_MAITHILI_03 (श्री शम्भु कुमार सिंह द्वारा संकलित) Videha e-Learning MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) UPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS BPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. (ऐच्छिक) मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. (अनिवार्य) मैथिली प्रश्नपत्र- बी.पी.एस.सी.(ऐच्छिक) मैथिलीक वर्तनी १ भाषापाक २ मैथिलीक वर्तनीमे पर्याप्त विविधता अछि। मुदा प्रश्नपत्र देखला उत्तर एकर वर्तनी इग्नू BMAF001 सँ प्रेरित बुझाइत अछि, से एकर एकरा एक उखड़ाहामे उनटा-पुनटा दियौ, ततबे धरि पर्याप्त अछि। यू.पी.एस.सी. क मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेल सेहो ई पर्याप्त अछि, से जे विद्यार्थी मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेने छथि से एकर एकटा आर फास्ट-रीडिंग दोसर-उखड़ाहामे करथि| IGNOU इग्नू BMAF-001 ........................................................................................................................ MAITHILI (OPTIONAL) TOPIC 1 [Place of Maithili in Indo-European Language Family/ Origin and development of Maithili language (Sanskrit, Prakrit, Avhatt, Maithili) भारोपीय भाषा परिवार मध्य मैथिलीक स्थान/ मैथिली भाषाक उद्भव ओ विकास (संस्कृत, प्राकृत, अवहट्ट, मैथिली)] TOPIC 2 (Criticism- Different Literary Forms in Modern Era/ test of critical ability of the candidates) TOPIC 3 (ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददास सिलेबसमे छथि आ रसमय कवि चतुर चतुरभुज विद्यापति कालीन कवि छथि। एतय समीक्षा शृंखलाक प्रारम्भ करबासँ पूर्व चारू गोटेक शब्दावली नव शब्दक पर्याय संग देल जा रहल अछि। नव आ पुरान शब्दावलीक ज्ञानसँ ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददासक प्रश्नोत्तरमे धार आओत, संगहि शब्दकोष बढ़लासँ खाँटी मैथिलीमे प्रश्नोत्तर लिखबामे धाख आस्ते-आस्ते खतम होयत, लेखनीमे प्रवाह आयत आ सुच्चा भावक अभिव्यक्ति भय सकत।) TOPIC 4 (बद्रीनाथ झा शब्दावली आ मिथिलाक कृषि-मत्स्य शब्दावली) TOPIC 5 (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोरिक गाथामे समाज ओ संस्कृति) TOPIC 6 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- विद्यापति) TOPIC 7 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- पद्य समीक्षा- बानगी) TOPIC 8 (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोक गाथा नृत्य नाटक संगीत) TOPIC 9 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- यात्री) TOPIC 10 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली रामायण) TOPIC 11 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली उपन्यास) TOPIC 12 (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- शब्द विचार) TOPIC 13 (तिरहुता लिपिक उद्भव ओ विकास) TOPIC 14 (आधुनिक नाटकमे चित्रित निर्धनताक समस्या- शम्भु कुमार सिंह)् TOPIC 15 (स्वातंत्र्योत्तर मैथिली कथामे सामाजिक समरसता- अरुण कुमार सिंह) TOPIC 16 (यू. पी.एस.सी. मैथिली प्रथम पत्रक परीक्षार्थी हेतु उपयोगी संकलन, मैथिलीक प्रमुख उपभाषाक क्षेत्र आ ओकर प्रमुख विशेषता, मैथिली साहित्यक आदिकाल, मैथिली साहित्यक काल-निर्धारण- शम्भु कुमार सिंह) TOPIC 17 (मैथिली आ दोसर पुबरिया भाषाक बीचमे सम्बन्ध (बांग्ला, असमिया आ ओड़िया) [यू.पी.एस.सी. सिलेबस, पत्र-१, भाग-“ए”, क्रम-५]) TOPIC 18 [मैथिली आ हिन्दी/ बांग्ला/ भोजपुरी/ मगही/ संथाली- बिहार लोक सेवा आयोग (बी.पी.एस.सी.) केर सिविल सेवा परीक्षाक मैथिली (ऐच्छिक) विषय लेल] ........................................................................................................................ GENERAL STUDIES (PRELIMINARY & MAINS) GS (Pre) TOPIC 1 GS (Mains) NCERT-ENVIRONMENT CLASS XI-XII NCERT PDF I-XII TN BOARD PDF I-XII ALL INDIA RADIO ENGLISH NEWS ALL INDIA RADIO NEWS ARCHIVE ALL INDIA RADIO TALKS AND CURRENT AFFAIRS RAJYA SABHA TV NEWS DISCUSSIONS SANSAD TV OTHER OPTIONALS IGNOU eGYANKOSH (अनुवर्तते) -गजेन्द्र ठाकुर २. गद्य २.१.जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’- आँखिमे चित्र हो मैथिली केर (आत्मकथा)- २७म खेप (मध्यान्तर) २.२.रबीन्द्र नारायण मिश्र- मातृभूमि (उपन्यास)- पहिल खेप २.३.डॉ. किशन कारीगर-मोछ वाली मौगी।(होली पर हास्य कथा) २.४.मुन्नाजी- बीहनि कथा-बेर पर २.५.आशीष अनचिन्हार- साहित्य केंद्रित जोगीरा २.६.संतोष कुमार राय 'बटोही'क धारावाहिक उपन्यास-मंगरौना-६अम खेप जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’ आँखिमे चित्र हो मैथिली केर (आत्मकथा)- २७.बड़ सुख सार पाओल तुअ तीर २७.बड़ सुख सार पाओल तुअ तीरे 2008 मे 12 मइक’ हम एसगरे जबलपुरसँ बस पकड़ि करीब तीन घंटामे सिवनी पहुचलहुँ | होटल आनन्दमे अपन संगक सामान सभ राखि बैंक गेलहुँ | एकटा पुरान मकानमे बैंक छलै | बैंक भवनक एक कातमे एकटा नमहर कोठलीमे लीड बैंक सेल छलै | लीड बैंक सेलमे एकटा कंप्यूटर, नमहर टेबुल, किछु कुर्सी,तीन टा आलमारी छलै | एकर अतिरिक्त एकटा वाहन आ ड्राइवर सेहो छलै | किछुए अवधिक बाद बैंक आ अग्रणी जिला प्रबंधक कार्यालय नवनिर्मित भवनक प्रथम तलपर स्थानांतरित भेल | ओहू भवन आरम्भेमे एकटा कोठलीमे अग्रणी बैंक कार्यालय आबि गेल | बैंकक हॉल फ़ैल छलै | बैंकमे शाखा प्रबंधक बी.एम.अग्रवाल हमर पूर्व परिचित छलाह, ओ जबलपुरक गढ़ा शाखासँ स्थानांतरित भ’ क’ गेल छलाह | शाखामे पी.ओ. अर्चना मैडम छलीह जे बिहारक छलीह, हुनकर पिता पटनामे प्राध्यापक छलखिन | दोसर अधिकारी श्रीनिवासजी छलाह | और सदस्य सभ छलाह गौतमजी,शर्माजी,राम नारायण,इमरान आदि | सिवनी मध्य प्रदेशक एकटा जिला छलै | सेन्ट्रल बैंकक रायपुर जोनक छिंदवाडा क्षेत्रमे सिवनी, बालाघाट आ छिन्द्वाडा तीन टा जिला छलैक | छिंदवाडामे अग्रणी जिला प्रबंधक छलाह विजय कुमार जे बिहारक छलाह | समय-समयपर छिंदवाड़ा क्षेत्रक सभ शाखा प्रबंधक आ तीनू अग्रणी जिला प्रबंधक छिंदवाड़ा क्षेत्रीय कार्यालयमे समीक्षा बैसकमे जमा होइत छलाह | सिवनी जिलामे सेन्ट्रल बैंकक आठ टा शाखा छलै : सिवनी, अर्री, कान्हीवाडा, छुई, केवलारी, डुंगरिया छपारा,गणेशगंज आ लखनादौन | सेन्ट्रल बैंक ऑफ़ इंडियाक आठ शाखाक अतिरिक्त निम्नलिखित बैंक सबहक 82 टा शाखा छलै : भारतीय स्टेट बैंकक 8, बैंक ऑफ़ महाराष्ट्रक 9,यूनियन बैंक ऑफ़ इंडियाक 5,केनरा बैंकक 1, इलाहाबाद बैंकक 1, बैंक ऑफ़ इंडियाक 1,पंजाब नेशनल बैंकक4 ,सतपुरा नर्मदा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकक 26, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकक 16, जिला सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंकक 7,आइ सी आइ सी आइ बैंकक एकटा आ एच डी एफ सी बैंकक एकटा शाखा छलै | जिलाक लेल वार्षिक साख योजना तैयार करब, ओकरा जिला स्तरीय समन्वय समितिमे स्वीकृत कराएब, ओकर क्रियान्वयनक हेतु जिलाक सभ बैंक शाखा आ जिला प्रशासनक सहयोग प्राप्त करैत विभिन्न योजनान्तर्गत जिलाक वार्षिक लक्ष्य प्राप्त करबाक लेल जिला स्तरपर तिमाही बैसकक संयोजन करब अग्रणी जिला प्रबन्धकक मुख्य काज छलनि |एकर अतिरिक्त आवश्यकतानुसार क्षेत्रीय प्रबन्धकक सलाह अथवा आदेशसँ ऋण शिविर, वसूली,जाँच अथवा ऋण माफ़ी योजनासँ सम्बंधित कार्य सेहो समय-समयपर करबाक रहैत छलैक | आरम्भमे क्षेत्रीय प्रबंधक छलाह श्री शिवेश प्रसाद, हुनका बाद एलाह दिनेश चन्द्र आ हुनका बाद एलाह खंडेलवाल साहेब | जिला स्तरीय बैसकमे सभ बैंकक जिला अथवा क्षेत्रीय स्तरक नियन्त्रक अधिकारी, अग्रणी जिला प्रबंधक, भारतीय रिज़र्व बैंकक प्रतिनिधि,नाबार्डक प्रतिनिधि आ कलेक्टर समेत विभिन्न विभागक जिला स्तरक अधिकारी रहैत छलाह | विभिन्न योजनाक अंतर्गत विभिन्न बैंकक लक्ष्य आ उपलब्धिपर चर्चा होइत छलै | जाहि ठाम आवश्यकता होइत छलैक, कलेक्टर अथवा भारतीय रिज़र्व बैंकक प्रतिनिधि आवश्यक सलाह दैत छलाह | अग्रणी जिला प्रबंधक संयोजक आ कलेक्टर अध्यक्ष होइत छलाह | बैसकक कार्यवाही नोट कयल जाइत छल, ओकर कार्यवाही-विवरण तैयार क’क’ अग्रणी बैंक कार्यालय द्वारा विभिन्न बैंकक नियंत्रक कार्यालय आ विभिन्न शासकीय कार्यालयकें प्रेषित कयल जाइत छलै | बैसकमे लेल गेल निर्णयक क्रियान्वयनक समीक्षा अगिला तिमाही बैसकमे होइत छलै | कलेक्टर कार्यालय सभा कक्षमे सप्ताहमे एक दिन टी एल मीटिंग होइत छलै जाहिमे विभिन्न विभागसँ सम्बंधित शिकायतक निवारणक समीक्षा होइत छलै | बैंकसँ सम्बंधित शिकायतक निराकरण हेतु अग्रणी जिला प्रबंधक द्वारा सम्बंधित बैंकक सक्षम पदाधिकारीसँ संपर्क कयल जाइत छल | एकटा नियत अवधिमे शिकायतक निराकरण सुनिश्चित कयल जाइत छल | समय-समय पर जिला स्तरपर उद्योग कार्यालयमे आ जिला पंचायत कार्यालयमे सेहो स्वर्ण जयंती शहरी रोजगार योजना, प्रधान मन्त्री रोजगार योजना, स्वर्ण जयन्ती ग्राम स्वरोजगार योजनाक क्रियान्वयन आ प्रगतिक लेल बैसकक आयोजनमे सेहो अग्रणी जिला प्रबन्धक उपस्थित रहैत छलाह | सिवनी जिलामे सिवनी,बरघाट, कुरइ, छपारा, गणेशगंज, लखनादौन, धनोरा,घन्सोर,केवलारी आदि जनपदमे तिमाही बैसक आयोजित होइत छलै जाहिमे अग्रणी जिला प्रबंधक अध्यक्ष होइत छलाह | ओहि बैसकमे जिला स्तरक शासकीय अधिकारी परियोजना पदाधिकारी अथवा सहायक परियोजना पदाधिकारी सेहो उपस्थित होइत छलाह | हमरा समयमे परियोजना पदाधिकारी छलाह टी. गणेश कुमार आ सहायक परियोजना पधाधिकारी छलाह एम. के. जैन | हम सभ सिवनीसँ अपन-अपन विभागक वाहनसँ अथवा एकहि वाहनसँ सिवनीसँ जाइत छलहुँ आ संगहि घुरैत छलहुँ | ओहि बैसक सभमे जे निर्णय लेल जाइत छलै, तकर सूचना कार्यवाही विवरण द्वारा सभ सम्बंधित अधिकारी सभकें ओहि बैसकक संयोजक द्वारा प्रेषित कयल जाइत छलै |ओहि बैसक सभक संयोजक लीड बैंकक स्थानीय शाखा प्रबंधक होइत छलाह | जिला स्तरीय समीक्षा समिति एवं जिला परामर्शदात्री समितिक बैसकक सूचना जिलाक विधायक आ सांसद लोकनिकें सेहो देल जाइत छलनि जाहिसँ हुनको सभक माध्यमसँ क्षेत्रक समस्या सभ प्रकाशमे आबय, ओहि पर चर्चा होइ आ ओकर निराकरणक लेल समुचित समाधान ताकल जाए | विभिन्न योजनाक अंतर्गत वार्षिक लक्ष्यक प्राप्ति आ शिकायतक निराकरण हेतु जनपद आ जिला स्तरपर बैसक सभक आयोजन होइत छल | हमरा समयमे आरम्भमे सिवनी जिलाक कलेक्टर छलाह पी. नरहरि जी | हुनक स्थानान्तरणक बाद एलाह मनोहर दुबे जी | जिला पंचायतक मुख्य कार्यपालन पदाधिकारी छलाह राकेश सिंह जी | सामान्य लोककें सरकारी अथवा बैंकक अधिकारी-कर्मचारी सबहक प्रति की धारणा बनैत छलैक से पता नहि, मुदा जनपद पंचायतसँ जिला पंचायत धरि आ कलेक्टर सभा कक्षमे विभिन्न बैसकमे भाग लैत हम अनुभव करैत छलहुँ जे गाम आ शहर सभ ठाम लोकक जीवन-स्तर ऊपर उठाबक लेल, देशक समृद्धिक हेतु विकासक यज्ञमे सरकार आ बैंकक विभिन्न योजना चलि रहल छल : स्वर्ण जयन्ती ग्राम स्वरोजगार योजना, स्वर्ण जयन्ती शहरी रोजगार योजना, प्रधानमन्त्री रोजगार योजना, दीन दयाल रोजगार योजना,किसान क्रेडिट कार्ड योजना, आर्टीजन क्रेडिट कार्ड,लघु उद्यमी क्रेडिट कार्ड आदि | शासकीय अनुदानक प्रक्रिया सरल भेल जा रहल छलैक, गामे-गामे स्वयं सहायता समूह बनि रहल छल, महिला लोकनि सेहो एहि विकास यज्ञमे सक्रिय योगदान द’ रहल छलीह | बैंकमे भीड़ बढ़ि रहल छलै | बैंकक अधिकारी-कर्मचारी बैंकसँ आवास घुरबाक लेल घड़ी देखनाइ छोडि देने छलाह | सभ बैंक प्रबंधन अपन-अपन लक्ष्य पूर्ण करबाक लेल बहुत श्रम क’ रहल छल | जाहि उद्देश्यसँ 1969 आ 1980 मे बैंक सबहक राष्ट्रीयकरण भेल छलै से पूर्ण भ’ रहल छलै | हम जतेक दूर धरि देखैत छलहुँ, हमरा बैंक कदाचारमुक्त देखाइत छल | असंयमी लोक सभ कतेक तरहक अशांति आ मानसिक अथवा आर्थिक प्रताड़नाक शिकार होइत छलाह | देशक एहि विकास-यज्ञमे एकटा छोट-छीन किन्तु महत्वपूर्ण भूमिकामे अपनाकें संलग्न पाबि हर्षक अनुभव क’ रहल छलहुँ | ऑफिसमे रहैत छलहुँ त काजमे लागल रहैत छलहुँ | किछु काज डेरोपर करबालेल ब्रीफ़केसमे नेने अबैत छलहुँ | सुतबासँ पहिने अथवा सबेरे डेरापर सेहो किछु काज क’ लैत छलहुँ | काजकें अपन धर्म बूझिक’ करैत छलहुँ, ओहिमे डूबि जाइत छलहुँ, तें थकानक अनुभव नहि होइत छल | ऑफिसक काज करैत घर, बजार,अस्पताल आदिक काज सेहो करैत छलहुँ | आवास आ अध्यात्म : सिवनीमे आरम्भमे किछु दिन होटल आनन्दमे, किछु दिन सिवनीक शाखा प्रबंधक बी.एम. अग्रवालजीक आवासमे आ तकर बाद जखन परिवारक संग रह’ लगलहुँ त बारापत्थरमे बाबूजीनगरमे नामदेवजीक मकानमे प्रथम तलपर आवास छल | नामदेवजी भूतलपर एकटा शिव मन्दिर बनौने छलाह | बच्ची सभ दिन पूजा करैत छलीह | ऑफिससँ आवासक बाटमे ब्रम्हाकुमारी संस्थान छलैक | दूरदर्शनपर बी.के.शिवानीक कार्यक्रम देखि उत्सुकता भेल | एक दिन दुनू गोटे गेलहुँ | सात दिनक कोर्स केलहुँ | एक दिस समाजमे लोक कन्यादानक लेल गामे-गाम कि एहि शहरसँ ओइ शहरक यात्रा करैत रहैत छथि, कन्या सभ मन पसंद घर-बर लेल महादेवक पूजा करैत छथि, बूढ़ी सभ कबुला-पाती करैत रहैत छथि, दोसर दिस एहि संस्थानमे कुमारि कन्या सभ उज्जर दप-दप वस्त्रमे सात्विक जीवन जीबैत लोककें सात्विक जीवन जीवाक प्रेरणा दैत ज्ञान-दान मंगनीमे क’ रहल छथि आ जीवन भरि सात्विक जीवन जीवाक व्रत नेने छथि | हिनका सबहक मूहें एहि संस्थानक संस्थापक दादा लेखराजक पवित्र जीवन आ एहि संस्थानक स्थापनाक कथा अद्भुत लागल | ई सभ बुझबैत छथि जे हम सभ आत्मा छी आ दिन भरिमे जिनका-जिनकासँ भेट होइत अछि सभ आत्मा छथि आ सभ हमरे जकाँ ओही परम पिता परमात्माक संतान छथि, हम सभ परम धामसँ आएल छी, फेर ओतहि घुरिक’ जेबाक अछि, ककरोसँ राग आ द्वेष नहि राखू, संसारमे एना रहू जेना थालमे कमल रहैत अछि, सृष्टिक एक चक्र पांच हजार बरखमे पूर्ण होइत अछि, सतयुग-त्रेता-द्वापर-कलियुग सभयुग एक हजार दू सय पचास बरखक, कलियुगक अन्त लग आबि गेल अछि,सतयुगक आगमनक तैयारी चलि रहल अछि, एहि ज्ञान यज्ञमे सभ क्यो शामिल होथि से आह्वान क’ रहल छथि ई साध्वी लोकनि | एहि संस्थानक प्रधान कार्यालय राजस्थानक माउंट आबूमे अछि आ दुनियाँक बहुत देशमे हजारो शाखाक माध्यमसँ दिव्य ज्ञानक बरखा भ’ रहल अछि, उल्लेखनीय बात ई जे सभ शाखाक मुख्य बहिने लोकनि छथि | ई बहिन लोकनि सभ ठाम निर्भय रहैत छथि, हिनका सबहक सोच ई छनि जे सभसँ शक्तिशाली परमात्मा पिता सदिखन संगमे रहै छथिन तखन भय कथीक | एहि संस्थानक विशेषता इहो अछि जे ई लोकनि ककरोसँ चन्दा नै मंगैत छथि, जे हिनका सबहक ज्ञान नहि प्राप्त करैत छनि ओ स्वेच्छासँ किछु देबय चाहैत छथि त स्वीकार नहि कएल जाइत छनि | हम ओशोक किछु पोथी पढने छलहुँ, हुनक तर्क सभ बहुत प्रभावित करैत छल | जबलपुर स्थित देवताल गढ़ामे ओशो संन्यास आश्रममे तीन दिनक एकटा आयोजनमे सम्मिलित भेल छलहुँ, चिरिमिरीमे सेहो तीन दिनक शिविरमे भाग नेने छलहुँ, पुणेमे हुनक संस्थानमे गेल रही, देखने-सुनने रही | हमरा नीक लागल, मुदा हमरा शिष्य बनबाक मोन नहि भेल | एखनहु कोनहु रूपमे हुनका पढ़ब नीक लगैत अछि |छोट-छोट कथाक माध्यमसँ ज्ञानक पैघ-पैघ बात कहबाक अद्भुत कौशल हुनक वक्तव्यमे रहैत अछि | हुनका माध्यमसँ संसारक विभिन्न धर्मक अनेक दार्शनिक लोकनिक परिचय प्राप्त करबाक आनन्द उपलब्ध होइत अछि | जबलपुरमे बाबा रामदेवक शिविरमे भाग नेने छलहुँ, देह आ मोनकें शुद्ध रखबाक लेल आसन-प्राणायाम आ यम-नियमक पालन करबाक लाभसँ परिचित भेल छलहुँ, टी.भी.पर हुनक कार्यक्रम सेहो देखबामे-सुनबामे नीक लगैत अछि | वैदिक चैनलक माध्यमसँ सनातन धर्मक अंतर्गत योग आ आयुर्वेदकें केन्द्रमे रखैत ऋषि लोकनिक ज्ञानसँ लोककें लाभान्वित करबाक हुनक प्रयास प्रशंसनीय अछि | हमहूँ वैदिक चैनलपर वेद आ उपनिषदक ज्ञानक गंगामे स्नान कय आनन्दित होइत छी | ब्रम्हाकुमारी संस्थान सेहो नीक लगैत अछि | सिवनीमे जाधरि रही, समय-समयपर जाइत छलहुँ | मुरली सुनैत छलहुँ | संस्थानमे बहिन द्वारा प्रतिदिन मुरलीक माध्यमसँ लोककें भगवानक ज्ञानक प्रसादक वितरण नियमित रूपसँ होइत रहैत अछि | समय-समयपर संस्थानक प्रधान कार्यालय माउंट आबूमे आयोजित कार्यक्रममे भाग लेबाक अवसर सेहो भेटैत छैक | हम कोनो कार्यक्रममे माउंट आबू त नहि गेलहुँ, मुदा टी.भी.पर ओहिठामक कार्यक्रम आ ‘पीस ऑफ़ माइंड’ चैनलपर बहुत रास कार्यक्रम देखलहुँ, नीक लागल | पटनामे सेहो एहि संस्थानसँ परिचित भेलहुँ | कहियो-कहियो जाइत छी | नियमित रूपसँ जाएब नहि पार लगैत अछि | टी.भी.पर सभ कार्यक्रम उपलब्ध भेलासँ केन्द्रपर जाएब आवश्यक सेहो नहि लगैत अछि | ओशो, रामदेव बाबा आ ब्रम्हाकुमारी संस्थान सभ ठाम ‘परमात्मा आ पुरुषार्थ’क महिमाक प्रचार-प्रसार अलग-अलग ढंगसँ भ’ रहल अछि | सबहक शिक्षा अछि जे तन आ मोनकें पवित्र राखू, तखने जीवनक आनन्द प्राप्त भ’ सकैत अछि | हमरा लगैत अछि जे तन आ मोनकें पवित्र रखबाक लेल कतहु बौएबाक काज नहि छैक, जतहि जे छी, से यम आ नियमक पालन करैत रही, सैह पर्याप्त अछि आनन्दित जीवन जीबाक लेल | मैथिलीक विवाह : मैथिलीक विवाहक उद्देश्यसँ कय ठाम यात्रा करबाक अवसर भेटल | जमशेदपुर,पटना, राँची, बिलासपुर, नवसारी, अहमदाबाद गेलहुँ | गाम जाक’ छोट भाए रतनजीक संगे सेहो चानपुरा,पंडौल डीह टोल, गनौली आदि गामक यात्रा कयलहुँ | दिल्लीसँ हमर छोट बहिन आ बहिनो एकटा सूचना देलनि | फोनपर अरविन्द जीसँ संपर्क भेल, डेरी टेक्नोलॉजीमे बी.टेक. छलाह, गुजरातमे पालनपुरमे ‘अमूल’मे काज करैत छलाह | गाम गेलहुँ | गनौली गेलहुँ | ओतहु हुनक पिता, कक्का आ किछु अन्य लोक सभसँ संपर्क केलहुँ | दिल्लीमे हमर बहिन-बहिनोक पड़ोसी छलखिन हुनक जेठ भाए आनन्दजी, ओत’ कोनो व्यवसाय करैत छलाह | ओहि ठाम अरविन्दजीक आवागमन होइत छलनि, सभ क्यो देखने छलखिन | हुनका सभकें पसंद छलनि | हमरा फोनपर गप भेल, हमहूँ संतुष्ट भेलहुँ | 2009 मे मैथिलीक विवाहक संयोग बनलनि | हमर छोट भाए ललनजी पत्नी आ दू पुत्र-पुत्रीक संग दिल्लीमे छलाह, पूर्व परिचित ज्योतिषी जीक ओत’ कोनो पूजाक लेल सुझाव देने छलखिन | हुनके सबहक सलाहपर मैथिली पुणेसँ दिल्ली गेल छलीह | ललनजीक डेरासँ मैथिली दीदीक घर गेलीह | ओत’ आनन्दजीक बहिनो मैथिलीकें देखलखिन, गप केलखिन,ओ कोनो कम्पनीमे काज करैत छलाह | हुनका सभकें विवाहक प्रस्ताव स्वीकार भेलनि | आनन्दजी निर्णायक छलखिन | दिल्लीमे बैसार भेलै | हमर छोट भाए ललनजी, हमर बहिन-बहिनो हुनकासँ गप केलनि | हम फोनपर छलहुँ | विवाह तय भ’ गेलै | विवाहक दिन आदि तय भेलै | गाम गेलहुँ | निर्धारित कार्यक्रमक अनुसार विवाहसँ चारि दिन पहिने मधुबनी स्टेशनपर अरविन्द जी आ हुनक अग्रज आनन्द जीसँ पहिल बेर भेंट भेल | रतनजी बहुत रास व्यवस्था क’ क’ रखने छलाह | 26 क’ ललनजी आ हमर छोट सार बिन्देजी गनौली गेलाह | पटनासँ हमर साढ़ू, जेठ सारि आ प्रमोद बाबू एलाह | दिल्लीसँ हमर छोट बहिन सच्ची आ भगिनी पूनम आएल छलीह | लखनपट्टी आ शिशवासँ दुनू बहिन शान्ती आ बच्ची एलीह | रुचौलसँ हमर मझिला मामा एलाह,छोटका मामा पटनासँ कोइलख गेल छलाह, कोइलखसँ हमरा गाम एलाह |लदारीसँ गोपालजी सेहो एलाह | नारायणपट्टीसँ हमर दीदी एलीह | 27 क’ गनौलीसँ भरिसक 60 गोटे बरियातीमे एलाह | विवाह भेलै | चारि बजे भोरमे बरियाती प्रस्थान केलनि | 30 क’ चतुर्थी भेलै | 2 क’ द्विरागमन भेलै | 5 क’ हम सभ गामसँ प्रस्थान केलहुँ, 6 क’ 10 बजे रातिमे सिवनी पहुँचलहुँ | सिवनीमे मैथिल आ मैथिली : सिवनीमे भारतीय स्टेट बैंकक मंगलीपेठ शाखाक प्रबंधक देवघरक छलाह | हुनका सँ परिचय भेल | ओ एक गोटेसँ परिचय करौलनि | ओ जजुआरक छलाह | ओ सिवनी अस्पतालमे एकटा मैथिलसँ परिचय करौलनि |हुनका सभसँ कहियोक’ भेट होइत छल | बैंक ऑफ़ महाराष्ट्रक शाखामे मुंगेर जिलाक सिंहजी छलाह | ओ जबलपुरमे सेहो हमर पड़ोसी छलाह, एतहु भेटलाह | बैंक ऑफ़ इंडियाक एक शाखाक प्रबन्धक मिश्र जी सहरसाक छलाह, ओ जबलपुरमे सेहो भेटल छलाह | हुनका सभक संग सिवनी लग बैनगंगाक तटपर छठि पावनिमे जाइत छलहुँ | छठि पावनिमे सिवनी शाखाक पी.ओ. मैडम अर्चना सेहो परिवारक संग बैनगंगाक तटपर गेल छलीह | एकटा होटलक मालिक सेहो छठिमे संग रहैत छलाह, ओ गोरखपुरक छलाह | सिवनीमे हमर साहित्यिक गतिविधि : सिवनीमे हमर साहित्यिक गतिविधि लगभग शून्य रहल | क्षेत्रीय कार्यालयमे राजभाषा विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रममे भाग लैत छलहुँ | अधिक काल रातिएमे घर घुरैत छलहुँ | टेप रिकॉर्डरपर चिरिमिरीक पल्टू दादाक स्वरमे अपन रचना सुनैत छलहुँ : ‘जिन्दगी जब हुई जिन्दगी के लिए हर घड़ी शुभ घड़ी आदमी के लिए’ ............................................... ‘सूर्य बनकर जियो उनकी खातिर जियो जो तड़पते अभी रोशनी के लिए |’ थकान दूर होइत छल, आनंदित होइत छलहुँ | पल्टू दादा मोन पड़ैत छलाह | सिवनीक साहित्यिक समाजसँ हम नुकाएल रहलहुँ | एक बेर एकटा कवि गोष्ठीमे श्रोताक रूपमे उपस्थित भेल छलहुँ | अवकाश प्राप्तिक बाद 8 जनवरीक’ नटराज होटलमे शाखा प्रबंधक अग्रवाल साहेब एकटा कवि गोष्ठीक आयोजन करौलनि जाहिमे अरविन्द मानवक संग और किछु साहित्यकार उपस्थित भेलाह | काव्य पाठमे हमहूँ भाग लेलहुँ | रोग-शोक–संताप : मइ 2008 सँ नवम्बर 2010 धरि हम सिवनीमे पदस्थापित छलहुँ | एहि अवधिमे स्वास्थ्य सम्बन्धी किछु समस्याक समाधानक लेल डा. बघेलसँ संपर्क करैत छलहुँ, दाँतक कष्टक निदान डा. चौधरीजीसँ प्राप्त होइत छल | 2009 मे 19 जनवरीक’ बडका मामाक देहान्तक सूचना भेटल, 25 दिसम्बरक’ हमर सारक पुत्री नीलमक दुर्घटनाक पता चलल, आइ सी यू मे भर्ती भेल छलीह, सामान्य स्थितिमे एबामे समय लगलनि | 29 दिसम्बरक’ बड़का साढ़ू कोरियाही गाममे देह त्यागि देलनि, से पता चलल | 13 दिसम्बरक’ फोनपर संपर्क भेल छल | देश-दुनियाँक विषयमे सेहो अखबारक माध्यमसँ किछु सूचना भेटैत छल | अपन दुख सभकें भारी लगैत छै किन्तु कतेक ह्रदय विदारक घटना देखि-सूनि लगैत छै जे हमर दुख त बहुत कम अछि | 2010 मे 12 जनवरीक’ ‘हैती’मे भूकंपसँ करीब दू लाख लोक ख़तम भ’ गेलाह | 11 अप्रैलक’ हबाइ दुर्घटनामे पोलैंडक राष्ट्रपति आ हुनक पत्नी समेत सभ 96 गोटे समाप्त भ’ गेलाह | सेवानिवृति : 29 नवम्बर(2010)क’ हमरा द्वारा कलेक्टर सभा कक्षमे अंतिम जिला स्तरीय समन्वय आ समीक्षा समितिक बैसकक संयोजन भेल | बी.एम.अग्रवाल,शाखा प्रबंधक आ नाबार्डक प्रतिनिधि श्रीराम अप्पुलिंगम द्वारा 30 क’हमर सेवानिवृतिक सूचना देल गेलनि, कलेक्टर महोदयक हाथें हमरा शाल आ श्रीफलक संग शुभकामना प्रदान कयल गेल | 30 क’ बैंकमे नोकरीक हमर अंतिम दिन छल | बैंकमे 6 बजे साँझमे हमर बिदाइक औपचारिकताक कार्यक्रम भेल | 9 बजे होटल ‘वाटिका’मे कार्यक्रम आयोजित छल | बैंकक शाखा प्रबंधक आ अन्य अधिकारी सभ छलाह |वीरेन्द्र सिंह जी लखनादौन शाखासँ आएल छलाह | क्षेत्रीय कार्यालयसँ किछु अधिकारी लोकनि शेखरजी,मंडलजी,सत्येन्द्रजी, साहूजी आ सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक डे साहेब आएल छलाह | जिला पंचायतक मुख्य कार्य पालन पदाधिकारी राकेश सिंह साहेब सेहो छलाह | शुभकामनाक संग हमरा दुनू गोटेकें शाल आ श्रीफलसँ सम्मानित कएल गेल | बैंक द्वारा अवकाश नगदीकरण आ मोमेंटोक चेक ओही दिन भेटि गेल | हमर विदाइ समारोहमे अग्रवाल जी चर्चा केलनि जे हम बैंकमे पैंतीस बरख नोकरीक अवधिमे अपन आवासक व्यवस्था नहि क’ सकल छलहुँ | बड़ सुख सार पाओल तुअ तीरे : ओहि साँझ हम स्मरण केलहुँ जे दस दिसम्बर 1975 क’ बैंक ज्वाइन केने रही, हमरा परिवारकें ओहि समय हमर नोकरीक बहुत खगता छलैक | बैंकमे समयपर वेतन भेटबामे कहियो कोनो व्यवधान नहि भेल, हमरा निरीक्षण,वसूली,मीटिंग आदिमे भाग लेब’ जेबाक अवसर भेटैत छल, एहि लेल नियंत्रक कार्यालयसँ यात्रा-बिलक स्वीकृतिमे कोनो व्यवधान नहि होइत छल | वेतन वृद्धि, स्थानान्तरण,पदोन्नति आदिमे सेहो पारदर्शिता आ पवित्रताक स्वस्थ परम्परा बैंकमे भेटल | नोकरी भेटल त माएक लेल जे कर्ज छलनि, से ब्याज सहित सभकें द’ देल गेलनि, बाबूक लेल जे कर्ज छलनि, से वापस कएल गेल |खेत सभ जे भरना छल से छूटल, बाबूक बिमारीमे गाम,दिल्ली आ डोमनहिल-चिरिमिरीमे इलाज आ पथ्य-पानिक व्यवस्था भेल, दूटा छोट भाए छलाह,हुनका सभक पढाइक व्यवस्था भेल, गाममे दू कोठलीक घर, चापा-कल आ लेट्रिनक व्यवस्था भेल | दू पुत्री आ एकटा पुत्रक शिक्षा आ दुनू पुत्रीक विवाहक आयोजन भेल | अपन जे साहित्यिक सौख छल ताहू लेल पत्रिका सभ मंगयबाक आ तीन टा पोथी छपयबाक व्यवस्था भेल | हमर साहित्यक गतिविधिक लेल सेहो हमरा बैंकमे समय-समयपर प्रशंसा आ अतिरिक्त सम्मान भेटल | बैंक सेवामे एल.टी.सी. ल’क’ माएक संग मथुरा,वृन्दावन,आगरा,हरिद्वार,ऋषिकेश आदि ठाम तीर्थाटनक अवसर भेटल | परिवारक संग एल.टी.सीक अन्तर्गत रायपुरसँ दिल्ली आ दिल्लीसँ पटना हबाइ जहाजसँ यात्रा करबाक अवसर भेटल | बैंकक नोकरीक कारण बिहारक सीवान आ पूर्वी चंपारण,छत्तीसगढ़क अम्बिकापुर आ रायपुर और मध्य प्रदेशक शहडोल, जबलपुर आ सिवनी जिलाक बहुत रास गाम आ शहर घुमबाक अवसर भेटल आ रंग-विरंगक लोक, अधिकारी आ साहित्यकार लोकनिसँ परिचय आ आत्मीयता भेल | समय-समयपर बैंक द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रममे पटना, मुंबई, भोपाल आ लखनऊमे देशक विभिन्न प्रान्तक रहनिहार आ विभिन्न शाखामे काज केनिहार लोक सभक संग रहबाक आ विभिन्न प्रतिभासँ परिचित हेबाक अवसर भेटैत छल | स्थानातरणसँ किछु परेशानी त होइत छलै, मुदा विभिन्न परिस्थितिमे रहबाक आ विभिन्न स्वभावक लोक सबहक संग काज करबाक अनुभवक लाभ छलै | बैंकक सेवामे छलहुँ, तें हजारो लोककें बैंकक नियमानुसार ऋण उपलब्ध करयबामे अपन विवेकक उपयोग करबाक आ अपनामे स्थित छुद्रता अथवा दिव्यताक अनुभव करबाक अवसर भेटल | हमरा विश्वास छल जे सेवा निवृतिक बाद जे राशि प्राप्त हएत ताहिसँ आवश्यकता भरि आवासक व्यवस्था सेहो भ’ जाएत | एहेन प्रियतम संस्थासँ पृथक हेबाक कारण दुख त भ’ रहल छल, मुदा पेंशनक माध्यमसँ बैंकसँ जीवन भरि जुड़ल रहबाक एकटा आश्वस्ति सेहो छल | आँखिमे चित्र हो मैथिलीकेर : हमर ममियौत डा. शशिधर कुमर ‘मिथिला दर्शन’ पत्रिकाक जुलाई-अगस्त आ सितम्बर-अक्टूबर (2010 ) अंकमे हमरासँ सम्बंधित लेखक विषयमे सुचित केलनि | बादमे देखलहुँ | जुलाई-अगस्त अंकमे भाइ सियाराम झा ‘सरस’क लेख छपल छलनि जाहिमे हमर रचनाक उपेक्षा कएल गेल छल | सितम्बर-अक्टूबर अंकमे पाठकीय प्रतिक्रियामे भाइ उमाकान्तजी द्वारा ‘संकल्प लोक’ आ ‘शशिकान्तजी-सुधाकान्तजी’क चर्चा करैत हमर रचना सभक प्रशंसा कएल गेल छल, से जानिक’ नीक लागल | सेवा निवृतिक बाद मैथिली दिस उन्मुख हेबाक प्रेरणा सेहो भेटल | चंडीगढ़सँ आदरणीय प्रो. गंगानन्द झा जीक शुभेच्छा प्राप्त भेल : आब इन्टरनेटपर मैथिली पत्रिका ‘विदेह’मे अहाँक रचना देखय चाहैत छी | हमरा ‘विदेह’मे अपन रचना देखबाक आ एकटा नव जीवनमे प्रवेश करबाक कल्पना आनन्दित केलक | मोन पड़ल ‘मिथिला मिहिर’,’माटि-पानि’, ‘भारती-मंडन’,’आरम्भ’, ‘मिथिला दर्शन’, ‘कर्णामृत’ आ मैथिली कार्यक्रम ‘भारती’ | मोन पड़लाह हरिमोहन बाबू, मधुपजी,किरणजी,शेखरजी,जीवकान्तजी, सोमदेवजी,गुंजनजी,रमणजी,रवीन्द्रजी,उदय चन्द्र झा’विनोद’जी,विभूति आनन्द जी,छत्रानंद सिंह झाजी,प्रदीपजी | मोन पड़लाह महेन्द्रजी,शशिकान्तजी, सुधाकान्तजी,उमाकान्तजी,कमलाकान्तजी | मोन पड़ल कोइलख,रामपट्टी,रहिका,हाजीपुर,सीवानक विद्यापति-पर्व | मोन पड़ल शशिकान्तजी-सुधाकान्तजीक स्वरमे अपन गीतक ई पाँती : ‘आँखिमे चित्र हो मैथिलीकेर ह्रदयमे हो माटिक ममता माएक सेवामे जीवन बितादी अछि बस यैह एकटा सिहन्ता |’ ओहि राति एकटा मीठ-मीठ दर्दक अनुभव भेल | पटना / 13.03.2022 (मध्यान्तर) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। रबीन्द्र नारायण मिश्र मातृभूमि (उपन्यास)- पहिल खेप मातृभूमि़ मिथिलाक प्रसिद्ध गाम लखनपुर । ओहि गामक प्रमुख विशेषतामेसँ एकटा छल गामक बीचोबीच खुनल गेल दैता पोखरि। ओ पोखरि कहिआ खुनल गेल से केओ नहि देखलक। ओहि पोखरिक महार अखनहु ओहिना साबूत छल जेना कहिओ रहल होएतैक। गामक पश्चिममे आमक गाछी अछि जे कम सँ कम दसबीघामे पसरल होएत । ओहिमे कतेक तरहक आमसभ छल से कहब मोसकिल। रामभोग,कृष्णभोग,जर्दालु,बम्बइ,मालदह,सीपिआ तँ भरल छल। सभसँ ई विशेषता रहैक जे गछपक्कु आम जकरे भेटि जाइक सएह ओकर मालिक । ओहुना केओ रोक-टोक करएबाला नहि रहैक । गामक पूब दिस छल चओर । दूपहरिआमे रौदक धाहीसँ चन-चन करैत चओरक वायुमण्डल जेना यात्रीसभकेँ दण्डित करबाक हेतु ठाढ़ रहैत छल । कैकटा जन-बनिहार हकासल-पिआसल जखन हर जोति कए वापस अबैत छल तँ चओरकेँ टपैत हनुमान चलीसा पढ़ैत रहैत छल । कहल जाइक जे कए गोटेकेँ भूत गछाड़ि चुकल छल । कै गोटे चओर टपैत-टपैत बेहोश भए जाइत छल । कारण जे किछु रहल होइक मुदा नाम लगैत छल चओरमे साबिक जमाना सँ रहैत जीनकेँ । कहाँ दनि ओही गामक छल ओ जीन ।लखनपुरक लोकसभ कएबेर ओहि जीनक निराकरण करबाक प्रयास केलक,ओझा-गुनीकेँ बजओलक मुदा कोनो फएदा नहि भेलैक । कखनो काल कए कनबाक आबाज सेहो लोक सुनए । भगवान जानथि सत्य की छल? मुदा एहि बातक चर्चा गाममे बहुत पुरान समयसँ होइत रहैत छल । गामक दक्षिण दिस बागमतीक धार छल । एक समय छलैक जे बागमती लखनपुरक बीचोबीच बहैत छलीह ।अस्तु,धारक दुनू कात लोकसभ बसल छल ।धारक उत्तर बसल टोल उतरबारि टोल आ धारक दक्षिण दिस बसल टोलकेँ दछिनबारि टोल कहल जाइत छल । एकहि गामक लोक एक-दोसरसँ भेंट करबाक हेतु नाओक सहारा लैत छलाह । धारक कटावसँ गामक खेत कखनधार बनि जाएत तकर कोनो ठेकान नहि । बागमतीक इच्छा जखन जेहन होइत गेलनि,गामक भूगोलतहिनाबदलैत रहल। पहिने नाओसँ बागमतीकेँ टपू, फेर कतेक कोस धरि पैरे चलू आ तखन उजरी बस पकड़ि सकैत छी तँ पकड़ू। जँ ओ बस छुटि गेल तँ पैरे-पैर दस कोस जाउ नहि तँ वापस गाम घुरि जाउ आ फेर दोसर दिन तहिना प्रयास करू। उजरी बसक कोनो समय नह िरहैक। एकर वाहन चालकक मर्जीपर छलैक ओकर चलब। कै बेर ओकर निन्न नहि टुटल वा मोन खराप भए गेल तँ ओ बस कखन खुजत आ लखनपुरक लगीचक बस स्टाप कखन पहुँचत से केओ नहि कहि सकैत छल। पचास साल पहिलुका आ आजुक लखनपुरमे बहुत अंतर भए गेल अछि । गामसँ वागमती कनी फटकी सहटि गेल छथि । गामसँ दरभंगा जएबाक हेतु पहिने बहुत मोसकिल होइत छल। मुदा आब परिस्थिति बदलि गेल। वागमतीपर पूल बनि गेलाक बाद लखनपुर धरि बस सरदर आबि जाइत अछि। बसक संख्यामे सेहो बृद्धि भेलैक। कहक मतलब जे लखनपुरसँ सहर आएब-जाएब आब खेल धूप भए गेल। गामक उत्तर दिस छल पाठशाला । ई पाठशाला इलाका भरिक विद्यार्थी सभमे प्रसिद्ध छल । ओहिमे इलाकाक विद्यार्थीसभ निःशुल्क शिक्षा प्राप्त करैत छलाह। कोनो चीजक चिंता विद्यार्थीकेँ नहि रहनि। सभटा व्यवस्था पाठशाला दिससँ होइत छल । कालक्रमे एकर हालत गड़बड़ा गेलैक। जयन्तक पिताक देहान्तक बाद बहुत दिन धरि केओ एकर सुधि लेबए नहि आएल। पाठशाला ढहि-ढनमना गेल। ओना तँ सभगामक किछु-ने-किछु विशेषता होइते अछि मुदा लखनपुरक नाओं चमकाबएमे ओहि गामक विद्याप्रेमी जयन्तक बहुत योगदान छलनि । कखनो केओ हुनका बैसल नहि देखितनि। किछु पढ़ि रहल छी वा लीखि रहल छी । नहि किछु तँ हाथमेरुद्राक्षलेनेकिछुजपेकए रहल छी। पचासक लग-पास बएस हेतनि। लोकसभ कहैत अछि जे हुनकासन विद्वान ओहि परोपट्टामे नहि अछि ।जयन्त शास्त्री आ लखनपुर आब एक भए गेल अछि। लग-पासक ककरो जँ लखनपुर गामक नाम लेब तँ धर दए कहि देत- "ओ! जयन्तशास्त्रीक गाम। हुनका के नहि जनैत अछि?ओ तँ मनुक्खक देहमे भगवानक अवतार छथि। ओ तँ अपन कुलक उद्धार कए देलाह, आदि-आदि।" केओ कतहु जाइत हो, कतहुसँ अबैत हो मुदा जँ लखनपुर लगसँ गेल तँ जयन्तसँ भेंट अवश्य करत। सभ इएह कहैत जे धनभाग्य लखनपुरकेँ जे जयन्त सन व्यक्ति ओतए जन्म लेलथि। केओ कहैत-“ओ तँ अवतारी पुरुख छथि। हुनकर की गप्प करैत छी?” कहबी छैक जे जखन केओ प्रसिद्ध भए जाइत अछि तँ ओकर जयगान केनिहारक कमी नहि रहैत अछि। के-के ने ओकरा अपन भए जाइत छैक। मुदा ओहि ठाम धरि पहुँचबाक यात्रा केना की छलैक से जानबाक प्रयासो लोक नहि करैत अछि। साइते ककरो बूझल हेतैक जे जयन्त नेनामे केना लोहछि कए एक दिन धारमे कुदि गेल रहथि। आ तकर बाद की-केना भेल? केना हुनकर जान बाँचल आ केना ओ एतेक महान विद्वान बनि फेर गाम वापस आबि समस्त सुविधा संपन्न अत्याधुनिक विश्वविद्यालयक स्थापना कए सकलाह?ई खिस्सा बहुत मार्मिक अछि। अहाँ कही तँ तकर चर्च कएल जाए। असलमे जयन्त अपना-आपमे एकटा इतिहास थिकाह। कहि नहि जीवनक कतेक दुखद प्रसंगकेँ भगवान शिव जकाँ घोटि नीलकंठ भए गेल छथि। तखनने आइ-काल्हि समुद्रक गंभीरता लेने लखनपुर गामकेँ ज्योतिर्मय केने छथि। (अनुवर्तते) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। डॉ. किशन कारीगर मोछ वाली मौगी।(होली पर हास्य कथा) धनिक दोकान दिस सँ अबैत रही कि रस्ते मे खरंजे पर बिकाउ दास भेंट भए गेलाह पूछलनि बच्चा ई कहू करिया के कतहू देखलियैअ। हम बजलहूँ नहि यौ बाबा हम अहँ पोता के एमहर कहँ देखलहूँ। बिकाउ दास बजलाह धू जी महराज हम कारी सँ केस दारही कटाएब आ अहाँ हमरा पोताक भांज कहि रहल छी। लगैए जे आई होरी खेलेबाक निशा मे अहूँ मातले छी। हमरे खनदानी नौआ छल कारी ठाकुर एमहर बिकाउ दासक पोताक नाम सेहो कारी, दूनू गोटे नामक अनुरूप देखैयोअ में ततबेक कारी। कारी जतबाक देखबा में कारी ओतबाक उजर धब. धब आकेर मोछ, बड्ड ईमानदारी सॅ शाही अंदाज मे हजामत करैत छल। ओकरा मोछक आगू मे त राजा महराजक मोछ छुछूआन लगैए। बिकाउ दास के हम कहलियैन बाबा बुझहैए मे धोखा भए गेल कारी नौआ तए अपने बथान दिस भेटत ओम्हरे जाउ ने। ताबैत उतरभारी दिस सँ कारी अपने मगन में झूमैत चलि अबैत रहैए। ओनाहियो फागुन मे सभ अपना धुन में मगन रहैए। कारी के देखैत मातर बिकाउ दास बजलाह अईं रौ करिया एहि बेर जोगिरा गबै लेल नहि एबहि रौ तोहर सिद्धप वाली भाउज खोज पूछारी क रहल छलखुन जे एहि बेर किर्तन मंडली होरी गीत गाबि जोगीरा खेलेताह कि नहि। कारी मोछ पिजबैत बाजल भैया अहाँ जाउ ने भाउजी के कहबैन भांगक सरबत बना के रखतीह। हम सभ पहिने भगवति स्थान में होरी गीत गाबि अबीर चढ़ाएब तकरा बाद अंगने अंगने होरी खेलाएब। कारी के गप सुनि त हमहूँ राग मल्हार मे मोने मोन नाचए लगलहूँ जे आई भांग पीबि क कारी संगे खूम नाचब। एहि बिचार मे मगन रही की कारी बाजल किशन बच्चा अहूँ चलि आएब एहि बेर झाइल बजौनिहार लोक कम छै त अहाँ गीत गाबि झाइलो बजाएब। गाम घर मे नाटक खेलाई त हमही गीत नाद गाबै सँ ल के मंच संचालन तक करी। तहि दआरे निधोखे हम बजलहूँ बेस जाउ हम भगवती सथान में भेंट भए जाएब । दूपहर दू बजे किर्तन मंडलीक सभ कलाकार आस्ते आस्ते जुटान होमए लगलयै। कारी अपना दरवज्जा पर बैसी के चिलम फूकै मे मगन रहैए एक सोंठ खिचनहियै रहै की केम्हरो सँ मनोज क्रांतिकारी धरफराएल आएल आ कारी के देह पर धाईं दिस खसल। बाजल हौ कारी कक्का आई तोरे संगे होरी खेलाएब। एतबाक मे कारी फनकैत बाजल कह त एहनो खसान खसब होइत छैक एखने चिलमक आगि सँ मोछ झरैक जाएत। फेर मनोज बाजल हौ कक्का हमरो स बेसी त डंफाक ओजन छै तही दुआरे धरफरा गेलहूँ। तकरा बाद दूनू गोटे एक एक सोंठ चिलम खिचलक धआँ नाक दए के फेकलकै की कारी बाजल रौ भातिज किर्तन मंडलीक कलाकार सभ कतए नुकाएल अछि। एतबाक में हरेकृष्ण ढ़ोलकिया ढ़ोल ढ़ूम.ढ़ूमबैत बुद्धना हरमोनियम पिपयबैत आ रामअशीष झाइलि झनकबैत तीनू गोटे तीन दिसि सॅं एकसुरे बजबैत आएल। ताबैत मे मनोज डंफा डूग.डूगबैत बाजल हल्ला गुल्ला बंद करू आ सुनु कारी कक्का के वाणी जी नहि त भरू ढ़ोलकिया के पानि जी। कि एतबाक मे कारी कठझाइल झनकबैत बाजल जोगी जा सारा रा रा त सभ गोटे एक सुरे बाजल सारा रा रा। बुद्धन बाजल रौ मनोजबा तेहेन शास्त्रीय राग मे पानि भरबाक लेल कहलीह जे दू.चारि टा छौंड़ा मारेर त डरे सँ भागी गेल। मनोज बाजल हौ भौया रंग घोरबाक लेल त पानि चाहि ने। रामअशीष बाजल हं रौ भजार ई त ठीके कहलीहि आब ई कह जे एहि बेर भाउजी के बनत। एतबाक में कारी मोछ पिजबैत बाजल रौ भातिज जूनि चिंता कर हम एखन जीवते छी। होरी मे कारी सौंसे गौआक भाउजी बनैत छलैक की बुढ़.पुरान की छौंड़ा मारेर सभ गोटे हंसी खुशी सँ गीत गाबि कारी संगे दिअर भाउज जेंका होरी खेलाइत छल। मनोज बाजल हौ कक्का माउगी बनबहक से साड़ी बेलाउज कहँ छह। कारी बाजल धूर रे बुरिबक जो ने तू अपने माए बला साड़ि नेने आ ने तोरे माए त हमरा भाउजे हेतीह। हौ कक्का तूं मारि टा खूएबह तोरा त बुझलेह छह हमर बाप मलेटी स रिटायर आ हमर माए सेहो मलेटी। ज ई सारी मे लाल पीअर लागल देखतैह त कतेक मुक्का मारत से कोनो ठीक नहि। अच्छा कक्का तू चिंता नहि करअ हम अपने कनियँ वला नुआँ नेने अबैत छी। कारी बाजल रौ भातिज तू बुरहारी मे हमरा गंजन टा करेमेह। हम ससुर भए के पूतहू देहक नुआँ कोना पहिरब रौ राम.राम। लोक त साड़ी देखैते मातर चिन्हि जेतैए जे ई तोरे कनियाँक नुआँ छै तब त लोको कोनो दसा बाँकि नहि राखत। बुद्धन कनेक बुझनुक ओ बाजल हौ तोरा डर किएक होइत छह कियो पूछतह त कहिअक जे ई त बुधनाक साउस के नुआँ छियैक। हमर साउस एखन अपने गाम आएल छथहिन। कारि ई सुनि चौअनियँ मुस्कान दैति एकसुरे दू गिलास देसी भांगक सरबत घोंटि गेल आ बाजल बुधन तूं हरमोनिया बजाअ ताबैत हम समधिन संगे होरी खेलेने अबैत छी जोगी जा सारा रा रा, कि फेर सभ एकसुरे गाबैए लागल जोगी जा सारा रा रा। हरेकृष्ण ढ़ोलकिया ढ़ोल धूम.धूमबैत बाजल होरी मे कक्का करै छथि बरजोरी बुरहारी मे मोन होइत छनि थोरू थोरू जोगी जा सारा रा रा। मनोज डंफा डूग.डूगबैत बाजल हौ कारी कक्का एना किएक मोन लुपलुपाइत छह। कारी झाइलि झनकबैत बाजल रौ भातिज ई फगुआ होइते अछि रंगीन तोंही कह ने मलपुआ खेबाक लेल केकर मोने ने लुपलुपाइत छैक। हं हौ कक्का एनाहियो होरी मे नएका नएका भाउज सबहक गाल त मलपुए सन पुल पुल करैत रहैत छैक। कारी साड़ी पहिर अनमन माउगी बनि गेल मुदा मोछक देखार चिनहार दुआरे घोघ तनने। कारी हाथ सँ झाइलि ल हम गीत गाबि झाइलि बजबैत होरी गाबै लगलहूँ रंग घोरू ने कनहैया हो खेलैए होरी रंग घोरू ने सभ गोटे गीत गबैत भगवति स्थान बिदा भेलहूँ। भगवति के अबीर चढ़ा प्रणाम करैत मंडलीक सभ कलाकार अंगने अंगने होरी खेलेबाक लेल बिदा भेलहूँ। जेहेन घर तेहेन सरबत कतहु छूछे रंग टा। मुदा लोक हँसी खुशी सँ होरी खेलाई मे मगन, होइत होइत बिकाउ दासक दरवज्जा पर पहुँचलहुँ त होरी गीत शुरू केलहुँ हो हो किनका के हाथ कनक पिचकारी बुधना हरमोनियम पिपयबैत बाजल हो बिकाउ कक्का के हाथ कनक पिचकारी। एतबाक सुनितेंह विकाउ दास अपना बेटा के हाक देलखिहिन हौ मांगनि जल्दी सँ मंडली सभहक लेल दूध भांगक सरबत नेने आबह। ई सुनि हम सभ आर बेसी जोर सँ जोगीरा गबै लगलहूँ ताबैत मनोज एक आध बेर डंफा लेने धरफड़ा के खसि पड़ल। ओकरा उठेलहूँ आ सभ गोटे भरि छाक भांगक सरबत पीबि होरी गबै मे मगन। एम्हर जोगीरा देखबाक लेल कनिया.पूतरा धिया.पूता सभ घूघरू लागल। एतबाक मे सिद्धप वाली दाई अबीर उड़बैत एलीह आ हँसैत बजलीह गे दाए गे दाए ई नचनिहार माउगी के छीयैक, सुखेत वाली कनिया बजलीह माए इहेए चिन्थुहुन ने। दाई बजलीह चिन्हबै की पहिने रंग अबीर सँ देह मुँह छछारि दैति छियैक। दाई निधोखे रंग लगबै लगलीह की घिचा तिरी मे कारीक घोघ उघार भए गेलै। दाई बजलीह गे माए गे माए एहेन मोछ वाली कनियँ त पहिनुक बेर देखलहूँ। ताबैत कारी मुस्की मारैत बाजल भाउजी हम छी अहाँक दुलरूआ दिअर कारी। दाई एतबाक सुनि ठहक्का मारैत बजलीह अईं रौ मोछ वाली कनियाँ ला कनि तोहर मोछो कारीये रंग मे रंगि दैति छियौ। एकटा दिअर भाउज के निश्छल प्रेम त गामे घर में भेटत। तखने मनोज बाजल काकी ई कनियाँ पसीन भेल किने, दाई बजलीह हं रौ मनोज बड्ड पसीन भेल 60 वर्षक अवस्था में पहिनुक बेर देखलहुँ एहेन सुनर मोछ वाली माउगी। -डाॅ किशन कारीगर (मूल नाम- डाॅ कृष्ण कुमार राय) ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। मुन्नाजी- बीहनि कथा बेर पर अमरी कक्का मोइस लैत बमकि उठलाह-- पोती भेल से त' खुशीक बात मुदा जनमिते सोहर सुनि अनकट्ठल लागल। अहां सब पुरषाक सब परंपरा ध्वस्त क' मान मर्दन करता पर वीर्त छी । कक्काक पीठ पर चालू भर सं,कलकतिया,बम्बइया,पटनिया भातिज सब लुधकल-- कक्का,बेटा विवाह में धोती-कुर्ता त्यागि शेरवानी धारण आ घोड़चढ़ी में से हो बमकल रहियै।मोन ऐछ ने। जाह,तों सब तुर्क बना के छोड़बह।-कक्का सरदिएलाह। हौ,कनिञा सेहो आधुनिकता मे लपटएल छथि,हुनका पुछियौन इ करते सोहनगर ?ओ त' कहती डी. जे शुरु करू। नै पप्पा,जहन हिनका विजातीय कनिञा इ कहि स्वीकार जे बेटा सर्वोपरि । " त' बेटीये सं ने बेटा!बेटी जन्म पर सोहर किए नै ? ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। आशीष अनचिन्हार साहित्य केंद्रित जोगीरा पूर्वांचलमे जे जोगीरा प्रचलित अछि तकर विषय दिअर-भाउज, ननदि-भाउज, सारि-सार-बहनोइ (मने क्षम्य सबंध केर परिधिमे) अछि। प्रेम विषयक किछु जोगीरा सेहो किछु अछि। बहुत बेर कोनो लोककेँ खिसिएबाक लेल सेहो जोगीरा कहल जाइत छै। नब्बे केर दशकमे भोजपुरीमे किछु राजनीतिक जोगीरा केर रचना सेहो भेलै। इम्हर दू-तीन बर्खसँ हम साहित्य केंद्रित जोगीरा केर रचनासँ प्रमुखतासँ क' रहल छी। एहिमे हम साहित्यिक विडंबना केर स्थान दैत छियै। एखन हम मानैत छी जे साहित्य केंद्रित जोगीरा लोककेँ नै नीक लागैत हेतनि कारण ई प्रारंभिक अवस्थामे छै आ दोसर जे एकर गायन लेल एखन गायक उपल्ब्ध नै छथि। मुदा पाँच छह बर्खमे साहित्य केंद्रित जोगीरा अपन स्थान बना लेत से हमरा विश्वास अछि। ओना मैथिलीमे मात्र पहिल हेबाक जोर रहैत छै तँइ हमरा विश्वास अछि जे कियो ने कियो भूतकालमे साहित्यिक जोगीरा लिखने हेता आ तकर बाद ओकरा खत्तामे फेकि अपन नाम इतिहासमे लिखा लेने हेता मुदा साहित्यमे एकर संभावना क्षीण बुझाइए कारण लेखक अपन वर्गक कमीपर टिप्पणी करत से स्थिति मैथिलीमे बहुत कम अछि तँइ ईहो हम मानि सकै छी जे हमरे लिखल साहित्यिक जोगीरा पहिल हो। तँ प्रस्तुत अछि किछु साहित्यिक जोगीरा। ई जोगीरा सभ फेसबुकपर प्रायः बहुत बर्खसँ हम दऽ रहल छी जकरा एहि ठाम हम एकट्ठा कऽ विदेहक पाठक लेल देलहुँ अछि-- 1 जोगीजी सारा रारा रारा रारा रारा रारा ए जोगीजी सारा रारा रारा रारा लड्डू, पेड़ा छेना बँटलहुँ निकहा बुनियाँ तैयो ने देलक हमरा पुरस्कार ई दुनियाँ जोगीजी सारा रारा रारा रारा रारा रारा ए जोगीरा सारा रारा रारा रारा 2 जोगीजी सारा रारा रारा रारा रारा रारा ए जोगीजी सारा रारा रारा रारा बौआकेँ लगलै लेखक बनबाक भूख बौआ चाटै छै पुरस्कार लेल थूक जोगीजी सारा रारा रारा रारा रारा रारा ए जोगीरा सारा रारा रारा रारा 3 जोगीजी सारा रारा रारा रारा रारा रारा ए जोगीजी सारा रारा रारा रारा कहानी भेलै काँच कविता भेलै तीत पुरस्कार लेल जूरी लागै बापोसँ मीठ जोगीजी सारा रारा रारा रारा रारा रारा ए जोगीरा सारा रारा रारा रारा 5 जोगीजी सारा रारा रारा रारा रारा रारा ए जोगीजी सारा रारा रारा रारा पोथी लेने घूमैए बौआ कोने कोन जूरी केर दर्शन भेलै चानी ओ सोन जोगीजी सारा रारा रारा रारा रारा रारा ए जोगीरा सारा रारा रारा रारा 6 जोगीजी सारा रारा रारा रारा रारा रारा ए जोगीजी सारा रारा रारा रारा चाहे गजेनदर हो कि हो अनचिन्हार मठाधीश के चाही विदेहिया भतार जोगीजी सारा रारा रारा रारा रारा रारा ए जोगीरा सारा रारा रारा रारा 7 जोगीजी सारा रारा रारा रारा रारा रारा ए जोगीजी सारा रारा रारा रारा दू दुन्नी चारि पढ़ि बनलै चारि सए बीस जूरी के दरबज्जापर चरबै महींस जोगीजी सारा रारा रारा रारा रारा रारा ए जोगीरा सारा रारा रारा रारा 8 जोगीजी सारा रारा रारा रारा रारा रारा ए जोगीजी सारा रारा रारा रारा जकरा लागै पुरस्कारक पियास तकरे मूँह होइ बेर बेर उदास जोगीजी सारा रारा रारा रारा रारा रारा ए जोगीरा सारा रारा रारा रारा 9 जोगीजी सारा रारा रारा रारा रारा रारा ए जोगीरा सारा रारा रारा रारा चिन्नीसँ बेसी मिठ आलोचक के बोली लेखक सभ खोलि देलकै ओकरा लग चोली जोगीजी सारा रारा रारा रारा रारा रारा ए जोगीरा सारा रारा रारा रारा 10 जोगीजी सारा रारा रारा रारा रारा रारा ए जोगीजी सारा रारा रारा रारा जे लगबै छे जत्ते मक्खन पुरस्कार भेटै तत्ते चिक्कन जोगीजी सारा रारा रारा रारा रारा रारा ए जोगीरा सारा रारा रारा रारा 11 जोगीजी सारा रारा रारा रारा रारा रारा ए जोगीजी सारा रारा रारा रारा पुरना लेखक लेल अनेरे बबाल नवका हँसोथि गेल सभहँक माल जोगीजी सारा रारा रारा रारा रारा रारा ए जोगीरा सारा रारा रारा रारा 12 जोगीजी सारा रारा रारा रारा रारा रारा ए जोगीरा सारा रारा रारा रारा एक हाथक किताबमे दस हाथ के परिचय पन्ने पन्ना लिखने छै अपने जय जय जोगीजी सारा रारा रारा रारा रारा रारा ए जोगीरा सारा रारा रारा रारा 13 जोगीजी सारा रारा रारा रारा रारा रारा ए जोगीरा सारा रारा रारा रारा पटना बला आलोचक केलकै बड़का प्लान दरभंगामे खोलि लेलकै पुरस्कारक दोकान जोगीजी सारा रारा रारा रारा रारा रारा ए जोगीरा सारा रारा रारा रारा 14 जोगीजी सारा रारा रारा रारा रारा रारा ए जोगीरा सारा रारा रारा रारा मंचपर सस्ता भेलै कोनो मिथिला रत्न आत्मसम्मान बेचि क' किनबाक यत्न जोगीजी सारा रारा रारा रारा रारा रारा ए जोगीरा सारा रारा रारा रारा 15 जोगीजी सारा रारा रारा रारा रारा रारा ए जोगीजी सारा रारा रारा रारा एकटा संस्थाक मालिक हजार संस्था बनलै माछक बजार जोगीजी सारा रारा रारा रारा रारा रारा ए जोगीरा सारा रारा रारा रारा 16 जोगीजी सारा रारा रारा रारा रारा रारा ए जोगीरा सारा रारा रारा रारा सहरसा दरभंगा बला ठोकै कपार पटना बला केलकै विदेहिया भतार जोगीजी सारा रारा रारा रारा रारा रारा ए जोगीरा सारा रारा रारा रारा 17 जोगीजी सारा रारा रारा रारा रारा रारा ए जोगीरा सारा रारा रारा रारा दरभंगाकेँ पुरहित पटना के पंडा सहरसाकेँ मुर्गी मधुबन्नी के अंडा जोगीजी सारा रारा रारा रारा रारा रारा ए जोगीरा सारा रारा रारा रारा 18 जोगीजी सारा रारा रारा रारा रारा रारा ए जोगीरा सारा रारा रारा रारा मंदिरमे जा क' गाबै राधे राधे पुरस्कार पाबि मूतै ठारे ठारे जोगीजी सारा रारा रारा रारा रारा रारा ए जोगीरा सारा रारा रारा रारा 19 सारा रारा रारा रारा रारा रारा ए जोगीजी सारा रारा रारा रारा कोन खेत केर आलू भाँटा कोन खेत केर सजमनि कोन खेत केर लेखक बाबू भेलैए लतखुर्दनि अइ खेतक आलू भाँटा ओइ खेतक सजमनि पुरस्कार खेतक लेखक बाबू भेलैए लतखुर्दनि जोगीजी सारा रारा रारा रारा रारा रारा ए जोगीरा सारा रारा रारा रारा 20 सारा रारा रारा रारा रारा रारा ए जोगीजी सारा रारा रारा रारा एक डारिपर दू चिड़ैया दन्नू उड़लै फुर्ररररररर पुरस्कार बिन लेखक बाजै चुर्रररररररररररर जोगीजी सारा रारा रारा रारा रारा रारा ए जोगीरा सारा रारा रारा रारा 21 सारा रारा रारा रारा रारा रारा ए जोगीजी सारा रारा रारा रारा गुंडा मारै सभ्य लोककेँ आ टीका मारै बीमारी लेखक मारै अपन अत्मा लै पुरस्कार सरकारी जोगीजी सारा रारा रारा रारा रारा रारा ए जोगीरा सारा रारा रारा रारा ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। संतोष कुमार राय 'बटोही'क धारावाहिक उपन्यास मंगरौना-६अम खेप कलियुग मे सभ कियो अपन नीक देखैत छथिन्ह। नीक लोक केँ बड़ि सताउल जाएत छै। भिनभिनौज आओर जड़-जमीन केर बँटवारा सभ सs पैघ अधकपाड़ छियैए। संतोष केँ जिनगी मे बड़ि दु:ख छलैन्ह। व्यासजी केँ कोंरियाही बेमारी छलैन्ह। भाई सभ अधपागल , दोसरक गप्प सुनियार भौजै छलैन्ह। जखन संतोष इंटर मे पढैत छलाह तँ हुनकर मैझली भौजाई नियारलीहि जे एकरा नहि पढ़s देबै। हमर स्वामी केँ कमेलाहा पर इ डाकटर भs जेताह, मूरख के लाठी बीचे कपाड़ । फेर की भेलै ? ओ सियालदह केँ गाड़ी पकड़ि कs कलकत्ता पहुँच गेलीह। मंगरौना केँ मरद अपन कनिया केँ गुलाम। संतोष कुनौह धरानी आई एससी मे दरिभंगा मे सी एम साइंस कॉलेज मे नामांकन लेलाह आओर पढ़s लगलाह। आई एससी केलाह। घरक गरीबी आओर आगा पढ़वाक कोनहु चारा नहि छलैन्ह। बाबूजी फुसिंयौह केँ व्यासजी! कर्महीन व्यासजी ! हुनकर माए आओर बहिन मिलि कs हिनका पढ़ौलकैन्ह। माए केँ दोसरक घर मे कुटौन-पिसौन करs पड़लैन्ह। बहिन केँ उमिर बेसी भ' रहल छलैन्ह। हुनका सँ छोट चचेरी बहिन केर ब्याह भs गेलैन्ह। व्यास जी बेमार भेलाक बाद 2001 मे गुजैर गेलाह। धर्म नीक काज छियैए, परञ्च कर्म सँ मुँह नहि मोड़क चाही । ओ पार उतैर गेलाह। अपन लीला समाप्त केलाह। 2002 मे संतोष केर बड़ भाई अपन बेटी केर ब्याह कs लेलैत। बहिन हुनकर बेटी सँ पैघ छलैन्ह। कलियुग मे सभ आचार-विचार पर जेना डोम मूति देने छै ! घोर कलियुग !! पुत्रक की कर्म होएत छै, सेहो लोक विसैर रहल छथिन्ह। एकर सबूत 'वृद्धाश्रम' अछि। व्यास जी केँ गाँड़िक धोती तक हुनकर बड़ लड़का छिन्न लेलकैन्ह। व्यास जी धोती, गमछा आदि उतैर कs बड़ लड़का केँ सोझा मे फेंक देलकीहिन। चारि टा दशरथ केँ एको टा नहि काम केँ। भूख आओर पै केँ अभाव मे दवाई-दारू नहि भेलैन्ह। आओर ओ बेमार भs गेलाह। पिता केँ की मतलब होएत छै से संतोष केँ जामिया मे विशेष खललैन्ह। पै सँ बेसी जरूरत विचार केँ अखनो होएत छै। विचार सँ जग जीत सकैत छी। मंगरौना मे पैर खींचनाहर बेसी अछि। राजनीति पुरूख बेसी छथि। गाम बौरा गेल छै। जेकरा जे मोन से करैत छथि। 'शिष्टाचार' शब्द गाम सँ निपत्ता भs गेल छै। सभ कियो विद्वान भs गेल छथि। गप्प छोड़वा मे गोनू झा केँ पितामह भs गेलाह अछि। सभ कियो। दारू केँ ठेका गाम मे चलि रहल अछि। समाज, परिवार, व्यक्ति सभ कियो दिशाहीन भs गेलाह छथि। मुँहा-ठिट्ठुर, गुँहा-गिज्जर आम गप्प भs गेल छै। भाई-बहिनक रिश्ता खत्म भs गेल छै। समाजक प्रतिष्ठा दाऊ पर लागल छन्हि, परञ्च अइ गप्प सँ किनको किछु मतलब नहि छन्हि। सभ कहैत छथि - '' अपन माथा साहौर-साहौर करू।" गाम शहर भs सकैत अछि ? परञ्च संस्कार केँ शहरी नहि होमs देल जाउ। मनुख केँ मनुख बुझल जाउ। चिटिंगबाजी समाज केँ दिशाहीन कs सकैत अछि। बेसी सँ बेसी लोक फिरिशान भs सकैत अछि। सत्य कुंठित भs सकैत छै, परञ्च सत्य केँ जीत हेबे करतै - 'सत्यमेव जयते' । सामाजिक समरसता केँ कृत्रिमता खतम कs रहल छै। गाम मे फुँसियौंह केँ राजनीति भs रहल छै। पद केँ की गरिमा होएत छै, जिम्मेदारी की होयत छै से बुझिनिहार कियो नहि छथि। बस, हुनका अपन पेट भरवाक चाही आओर सभ किछु जाउ भाँड़ मे। गाम मे सभ किछु मे राजनीति केनिहार सामाजिक मेलजोल के खतम कs रहल अछि। बड़ि दुखक गप्प छियैय जे गाम मरि रहल छै। कियो देखनिहार नहि छै। संतोष केँँ गरीबी मे जन्म भेलन्हि। हुनकर बाबू जी गुमान मे छलाथि जे चारिटा पुत्र अछि। परञ्च विद्वान रहितौंह ओ अपन संतान केँ नीक संस्कार देवा मे असफल रहलाह। तकरे परिणाम भेलन्हि जे चारि टा बेटा रहैतहुँ हुनकर अकाल मृत्यु भेलन्हि। हुनकर तेसर बेटा दसवीं पास कsकेs को़लकाता में काज करs रगलाहा। ज्ञान केँ अभाव मे एवं पारिवारीक विखण्डन केँ कारणे ओ पथ सँ भटैक गेलाह आओर 'डोली मोंडल' सँ ब्याह केलाथि। काली मंदिर मे मंगरौना केँ किछु बिगाड़ै वाला लोकनि मिलि कs किशन केँ ब्याह करवा देलकन्हि। ब्याहक कय्यैन सालक बादो हुनका मुसरियो नहि गिरलन्हि। 'डोली मोंडल' केँ ओ छोड़ि देलथिन्ह। हिनकर देखादेखी हुनकर भतीजा नीतीश आओर अभिषेक केलाथि । दुनू भैय्यारी बिन दहेज केँ 'लव मैरीज' केलाह। देहज-प्रथा केँ खतम कके मिसाल देलाथि। हुनकर माए-बाप केँ मोन लगले रहि गेलन्हि जे बेटा केँँ ब्याह धूमधाम सँ करताह। बकरी बकरी होएत छै ; सूअर सूअर । से समाज केँ बुझs पड़तन्हि। जिनगी अनमोल होएत छै। बेपटरी पर रेलगाड़ी नहि चलि सकैत छै। गामक छौड़ा शहर जाकs 'इंटरकास्ट मैरीज' कs रहल छथि। वैदिक वर्ण-बेवस्था आओर जाति-प्रथा के तोड़ि रहल छथि। आब कुनहुँ रोक-टोक नहि छै। जिनका जे मोन होएत अछि से करू। गाँड़ि खोलि कs नाचू ; नहि देखल जेतन्हि तँ जिनका शरम हेतैन्ह , ओ आँखि बन्न कs लेताह। घोर कलियुग बीत रहल अछि ! मंगरौना बताह भs रहल अछि। भांग खा कs ; गांजा पीबि कs आओर दारू पीबि कs लोक बौरा रहल अछि। युवाजन भोला बाबा बनि रहल छथिन्ह। आक-धतूर खेनै आम गप्प भs गेल छै। गामक शरम बिका रहल अछि - "झिनि-झिनि बिनि चदरिया ।" परेम केँ खुल्लेआम प्रदर्शन भs रहल छै। देह केँ नुमाईश खुल्लेआम भs रहल छै। इतिहास मे नीक छवि दर्ज़ हुइए इ कोशिश करकs चाही। युवा धरम केँ प्रति आग्रह भ रहल छथि। ओ करम सँ दुरि बनौने जा रहल छथि। जे कर्तव्य सँ विमुख हेताह ओ मिट जेताह। घड़ीक पहिया नाचि रहल अछि। (बाकी अंश अगिला खेप मे ) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३. पद्य ३.१.दिनकर कुमार- दस टा कविता ३.२.डाॅ किशन कारीगर-हो हो त हो हो (हास्य कविता) ३.३.संतोष कुमार राय 'बटोही' केर चारि टा कविता ३.४.राज किशोर मिश्र-इजोरिआ दिनकर कुमार दस टा कविता भीज रहल छी दुखके बरखामे भीज रहल छी दुखके बरखामे सावन मासके आर्द्रता लपेटने अछि अपन बांहिमे नागरिक जीवनके समस्त तिक्तता अवरुद्ध केने अछि चारु दिशाके भीज रहल छी दुखके बरखामे खोताके दूरी अकस्मात बढि गेल अछि आश्वासनके छत्ता हेरा गेल कतौ गाछके स्थान पर सुखायल काठ असमर्थ अछि बरखा सS रक्षा करयमे भीज रहल छी दुखके बरखामे देहक रक्त बहि रहल अछि घाम भ' क' बरखा जलमे मिश्रित घामके स्वाद अनुभव क' रहल छी वंचक मेघ सभ क' रहल अछि दुरभिसंधि हमर गामके शहनाई वादक सभ एना किएक लगैत अछि हम ओकरा सभके अंतिम बेर देखि रहल छी तन्मय भ' क' शहनाई बजबैत आंगनके कोनटामे निहुरिके बैसल हमर गामके शहनाई वादक सभ ओकर सभके मंगलध्वनिमे केहन विलक्षण आकर्षण अछि हमर नेनाकालके अनेक उत्सव अछि उल्लासके अनेक अस्पष्ट क्षण केना ध्वनि संगे प्रकट भ' रहल अछि ई केहन आदिम राग छी जे कतेक शताब्दी सS मिश्रित होइत रहल अछि हमर गामके वायुमे हम किएक ओकरा सभके देखिके उदास भ' जाइत छी ओकरा सभके मंगलध्वनिमे त' कोनो विषाद नहि छै कतौ विपन्नताके आक्षेप नहि छै तखन की एहन पीड़ा छै जे हमरा विचलित क' रहल अछि की हम शंकित छी जखन ई शहनाई वादक सभ चलि जायत फेर हमरा गाममे कियो नहि बजायत ई बाजा वैशाख बिहू लोककथाके राजकुमारी जल सS निर्मित मेखला चादर धारण केने तरहत्थी पर ल' क' वर्षाके बुन्नी नैहर घुरैत अछि बिहूके पकवान खाईके लेल बांहि पसारि दैत अछि वैशाख बिहू नर्तकी आंखिमे नेने बिजुलीके ज्योति अबैत अछि झंझावात जेंका बसंतके मादकतामे लीन भ' जाइत अछि दिन राति ढोलकके थाप प्रतिध्वनित होइत रहैत अछि पर्वत-मैदान-वनमे उन्मादित होइत अछि वृक्ष हथकरघा लग बैसल युवती सभ प्रियतमके लेल बुनैत अछि रंगीन स्वप्नके वस्त्र कचरा बीछय बला बालक ओ नगरके सभ सS निर्धनतम परिवार छल जे अपन क्षुधा आ निर्धनता सS मुकाबिला करैत नगरके सभ सS सुखी परिवार बुझाइत छल हम सांझके प्रायः देखैत छलौंह भरि दिन कचरा बीछलाक बाद कबाड़ी सS पाई ल' क' ठेला पर घुरैत छल परिवार पिता चलबैत छल ठेला आ ठेला पर बैसल रहैत छल माता माताके कोरामे छोट बालिका खेलाइत आ लगमे कचरा सS उठायल गेल कोनो टूटल खेलोना सS खेलाइत बारह बरखके बालक कालि हठात सिटी बसके खिड़की सS हम देखलौंह नगरके सभ सS निर्धनतम परिवार ठेला पर बैसल घर घूरि रहल छल मुदा पिता उपस्थित नहि छल पिताके स्थान ल' लेने छल बारह बरखक बालक जेकर छीलल माथ देखिके हम उदास भ' गेल छलौंह अनचिन्हार ई जे मात्र बाहरे देखैत अछि बाहरे बौआइत रहैत अछि प्रति क्षण अस्थिर प्रति क्षण तमसायल कोनो पर्वतके कर्तव्य जेंका उठेने ओ कतेक अनचिन्हार लगैत अछि तैयो ओकरा हम चिन्हइत छी कारण ई छी हमरे प्रतिरूप जे वर्तमानमे विछिन्न अछि संवेदना सS भावुकता सS प्रकृतिके मनोरम दृश्य सS तें ओ प्रति क्षण बुझा रहल अछि एतेक अवसादग्रस्त एतेक हताश जेना कोनो कारावासमे व्यतीत क' रहल अछि जीवन अनुकूलन परिचित परिवेशमे जे वस्तु सभ विचित्र होइत अछि ओ सभ सेहो नीक लागय लगैत अछि विचित्र आ अवांछित वस्तु सभके हमरा अभ्यास भ' जाइत अछि असुविधा सS हमरा कनियो विचलन नहि होइत अछि ऋतुके प्रतिकूलताके कोनो प्रभाव अनुभव नहि होइत अछि वास्तवमे ई छी व्यवस्था तंत्रके खूबी जे हमरा विरोधके हमरा आक्रोशके नट-बोल्ट सS कसि दैत अछि आ एकरा अनुकूलित क' दैत अछि ओ सभ नचारी गायत ओ सभ नचारी गायत आ रोग-शोक-क्षुधाके बिसरयके चेष्टा करत बिसरयके चेष्टा करत माघके शीतलहरीके पेटके क्षुधा अग्निके बिसरयके चेष्टा करत जल प्रलयमे धानके संगे बहल स्वप्न सभके ओ सभ नचारी गायत आ ईश्वरके कष्ट निवारक गोटी जेंका सेवन करयके चेष्टा करत करुण आंखि करुण आंखिमे संभव नहि तकनाइ संभव नहि दुखके गंभीरताके नपनाइ मूर्ति जेंका लोक सभ मात्र शून्य दिस ताकि रहल अछि शून्य सS आरंभ होइत जीवनके गणित समाप्त होइत अछि शून्य पर करुण आंखि अस्तित्वके आर-पार आहत करैत अछि एतेक करुण आंखि जेकरा देखि मोन सिहरैत अछि स्त्री सभके लगमे स्त्री सभके लगमे यातनाके खिस्सा छल ओहि खिस्सामे अपूर्ण नेनाकालके किछु मीठ किछु तीत स्मृति छल स्त्री सभके लग पथरायल आंखि छल जे आंखिमे पहिले एतेक जल छल मंगल गीतके राजकुमार ओहिमे स्नान करैत छल तितली-पोखैर-एकपेरिया-आमगाछीके मधुर क्षण ओहि आंखिके पुलकित करैत छल स्त्री सभके लग मात्र कुपोषणके वर्तमान अछि असमय प्रसवके दंड गिरहस्थीके कोल्हू बेरोजगार पतिके क्रोध दरिद्रताके गह्वर अज्ञानके परिवेश स्त्री सभके लगमे जीवन नहि मात्र जीवनके नाटक अछि ई हमर जनपद छी ई हमर जनपद छी अवसादके पीबैत अछि कष्टके सेवन करैत अछि कुहेसमे कनैत अछि हमरा जनपदमे मात्र विपन्नताके लोकगीत गायल जाइत अछि सरिसोके फूल जेंका पीयर मुख पर स्वप्नके कचोट सर्पदंश जेंका नील दाग जेंका पसरैत अछि हमर जनपदमे स्वाभाविक किछु नहि अछि नहि जीवनके छंद नहि चूल्हाके उत्सव नहि सुखके नीन नहि आशाके भिनसर अंतहीन यंत्रणाके भाठीमे झरैक रहल अछि हमर जनपद संपर्क: दिनकर कुमार, 4-बी-1, ग्लोरी अपार्टमेंट, तरुण नगर मेन रोड, गुवाहाटी-781005(असम) फोन-9476844365 (दिनकर कुमार क जन्म 5-10-1967 के ब्रह्मपुरा गाम, प्रखण्ड मनीगाछी, जिला दरभंगामे भेल। नेनाकालमे गुवाहाटी आबिके कर्मभूमि बनेलैथ। 32 वर्ष धरि पत्रकारिता, लेखन आ अनुवादके अनुभव। हिन्दीमे दस टा कविता संग्रह, दू टा उपन्यास, असमियाके साठि टा पोथीके हिन्दी अनुवाद प्रकाशित। पुश्किन सम्मान सहित विभिन्न पुरस्कार।) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। डाॅ किशन कारीगर हो हो त हो हो (हास्य कविता) आइ तक कोनो पुरूस्कारी मुहें नै कतौअ सुनली? हो हो? जे बलू कि बाभन कि सोलकन? साहित्य मे सब एक समान? हो हो? सब वर्ग के दियौअ मैथिली साहित्य मे स्थान? नै कोई हो हो मिथिलाक सब जाति के समावेशी सम्मान? कोई ने करह हो हो? होहकारीयो नै कहियो बजलै ग साहित्य मे सब रहौ? हो हो? हं पेटपोसै लै मिथिला राज मैथिली मठ बनले रहौ? हो हो? सबटा मैथिली छियै सब मैथिल छै? सब करह हो हो? मानके टा मैथिली आ सर्वजन बाजब के राड़ बोली कहक? हो हो? अंगिका बज्जिक्का षडयंत्र केलकै? हो हो? मैथिली अपने षड्यंत्र केलकै तेकरा झांपह? हो हो? वर्गभेद हेबे करतै कियो देखार ने करै जाह? हो हो? मिथिला मैथिली हमरे टा बपौती रैह जाउ? हो हो? पछुएलहा सबके भ्रम मे राखि पिछलगुआ बनेने रहबै हो हो? मानक बहन्ने मैथिली पर सब दिन कब्जा केने रहबै हो हो? यथार्थ देखा के बिरोध नै हुअ दहक? हो हो चोरनुकबा बनल तमस्सा देखब? बिरोध ने करबै? हो हो हमहू कहबै हो हो तहूं कहक हो हो? मिथिला मैथिली के निदान नै हुअ दहक हे हो त फेर हो हो? के रोकत टोकत? मनमाना करै जाह मैथिली के रोटी खाह? मिथिला विकास मे पछुआले रैह जाऊ? हम तू करब हो हो? -डाॅ किशन कारीगर (मूल नाम- डाॅ कृष्ण कुमार राय) ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। संतोष कुमार राय 'बटोही' केर चारि टा कविता १. घरवाली आइ धरि नहि बुझलियै कि घरवाली की होएत छै विहंसर की होएत छै आओर साँझ की होएत छै। २. माए इस्कूल जै सँ पहिने भनसा उतैर जैत छलन्हि बेरहट रखनै कहियो नहि भूलैत छलथिन्ह बेमार पड़लाह पर तेल सँ मालिश करैत छलथिन्ह पेट काटि क' माए पोषलन्हि । ३. पिता कर्तव्य विमुख रहलाह जिनगीभरि पोथी-पतरा वचवा मे लागल रहलाह बीड़ीक धुआँ सँ घर उजाड़लाह पिताक धरम निर्वाह मे चूक भेलन्हि। ४. भैय्यारी नान्हि टा सँ भिन्ने रखलाह पढ़वा-लिखवा मे असहयोग केलाह परिवार केँ बरबाद केलाह भाई की होएत छै से विसरलाह। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। राज किशोर मिश्र इजोरिआ देखलहुँ, राति में टहाटही इजोरिआ सँ आँगन पाटल छल, बुझि पड़ल जेना जे चारु चित्र सभ रजत -पटल पर साटल छल। तरेगन सबहक बीच मे देखलहुँ, छथि मयंक, अध्यक्ष, बनल, ताकू कतहु, अवनि सँ अंबर, सुंदर छल शुक्ल -पक्ष सजल। ज्योतिर्मय छथि तारागण, मुदा, विधुक बात अछिए अलग, की भव्य चाननि निकलि रहल! अकाशे नहि, वसुधो जगमग। अछि मोह जागल, चाननि मे, तएँ,ओतेक दूर सँ आएल अछि, धरा केँ धवल, शुभ्र रंग सँ, गहि-गहि, खूब सजाएल अछि। विभावरी मे घोर तिमिर, इजोत पीबि गौरबाएल छल, भ' गेल निस्तेज इजोत -पुंज, अन्हार सँ ओ घायल छल। बनि वीरांगना, एहेन क्षण मे, कए देलक क्षीण, तमता के, बिधुआएल रजनी करैत छलि स्वीकार चाननिक 'प्रभुता के। व्योम सँ ल'क'वसुधा धरि लगै छल, हो शुभ्र -रश्मि सेतु, इजोरिआ इजोत -सनेस अनलक, नभ सँ वसुन्धरा के हेतु। किंवा, दिन आ' राति के, लएलक कोनो , "मिलानक' विधान, भए अवतरित नभ -लोक सँ, जनु कएलक वसुधा के चुमान। आँगन मे देखलहुँ, कतेक रास उज्जर -इजोत जे पसरल छल, झक -झक अँगना चमकि रहल, जेना ,अन्हरिया ससरल छल। बाहर चलि देखलहुँ, पोखरि के, भरि पोख, उदक सँ छल भरल, परञ्च, समग्र सरोवर के छल तिता देने ओ रश्मि,तरल । जल -पुष्प,प्रस्फुटित तड़ाग मे, डूबल छल सोम-सुंदरता मे, जल -जीव किछु, छल व्यस्त तखनो, छल लागल पेट बेगरता मे। तरु-शोभा देखए लेल, निमंत्रण, इजोरिआ द्वारा, आएल छल -राज किशोर मिश्र, रिटायर्ड चीफ जेनरल मैनेजर (ई), बी.एस.एन.एल.(मुख्यालय), दिल्ली,गाम- अरेर डीह, पो. अरेर हाट, मधुबनी सम्पर्क:9958538865 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ....................................................................................................................... संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] Videha e-Learning पेटार (रिसोर्स सेन्टर) शब्द-व्याकरण-इतिहास MAITHILI IDIOMS & PHRASES मैथिली मुहावरा एवम् लोकोक्ति प्रकाश- रमाकान्त मिश्र मिहिर (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) डॉ. ललिता झा- मैथिलीक भोजन सम्बन्धी शब्दावली (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) मैथिली शब्द संचय MAITHILI DICTIONARY- RAMDEO JHA (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) ENGLISH MAITHILI COMPUTER DICTIONARY MAITHILI ENGLISH DICTIONARY अणिमा सिंह -Shishu_Geet_Khel_Anima_Singh डॉ. रमण झा मैथिली काव्यमे अलङ्कार अलङ्कार-भास्कर आनन्द मिश्र (सौजन्य श्री रमानन्द झा "रमण")- मिथिला भाषाक सुबोध व्याकरण BHOLALAL DAS मैथिली सुबोध व्याकरण- भोला लाल दास राधाकृष्ण चौधरी- A Survey of Maithili Literature ........................................................................................................................ मूलपाठ तिरहुता लिपिक उद्भव ओ विकास (यू.पी.एस.सी. सिलेबस) राजेश्वर झा- मिथिलाक्षरक उद्भव ओ विकास (मैथिली साहित्य संस्थान आर्काइव) Surendra Jha Suman दत्त-वती (मूल)- श्री सुरेन्द्र झा सुमन (यू.पी.एस.सी. सिलेबस) प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) CIIL SITE ........................................................................................................................ समीक्षा सुभाष चन्द्र यादव-राजकमल चौधरी: मोनोग्राफ शिव कुमार झा "टिल्लू" अंशु-समालोचना डॉ बचेश्वर झा- B_JHA_Nibhand_Nikunj.pdf डॉ. देवशंकर नवीन- Adhunik_Sahityak_Paridrishya डॉ. रमण झा- भिन्न-अभिन्न प्रेमशंकर सिंह- मैथिली भाषा साहित्य:बीसम शताब्दी (आलोचना) डॉ. रमानन्द झा 'रमण' हिआओल अखियासल CIIL SITE दुर्गानन्द मण्डल-चक्षु RAMDEO JHA दत्त-वतीक वस्तु कौशल- डॊ. श्रीरामदेवझा SHAILENDRA MOHAN JHA परिचय निचय- डॊ शैलेन्द्र मोहन झा ........................................................................................................................ अतिरिक्त पाठ पहिने मिथिला मैथिलीक सामान्य जानकारी लेल एहि पोथी केँ पढ़ू:- राधाकृष्ण चौधरी- मिथिलाक इतिहास फेर एहि मनलग्गू फाइल सभकेँ सेहो पढ़ू:- केदारनाथ चौधरी चमेलीरानी माहुर करार कुमार पवन पइठ (मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ कथा) (साभार अंतिका) डायरीक खाली पन्ना (साभार अंतिका) याेगेन्द्र पाठक वियाेगी- विज्ञानक बतकही रामलोचन ठाकुर- मैथिली लोककथा SAHITYA AKADEMI http://sahitya-akademi.gov.in/publications/e-books.jsp http://sahitya-akademi.gov.in/general/Digitalbooks.jsp CIIL http://corpora.ciil.org/maisam.htm अखियासल (रमानन्द झा रमण) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI1.pdf जुआयल कनकनी- महेन्द्र http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI2.pdf प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI3.pdf सृजन केर दीप पर्व- सं केदार कानन आ अरविन्द ठाकुर http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI4.pdf मैथिली गद्य संग्रह- सं शैलेन्द्र मोहन झा http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI5.pdf JNU http://sanskrit.jnu.ac.in/maithili/index.jsp http://sanskrit.jnu.ac.in/student_projects/lexicon.jsp?lexicon=maithili ARCHIVE.ORG https://archive.org/details/%40vijay_deo_jha?&sort=-publicdate&page=2 VIDEHA MAITHILI BOOKS/ PICTURE-AUDIO-VIDEO ARCHIVE http://videha.co.in/new_page_15.htm https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ ALL INDIA RADIO DOORDARSHAN आकाशवाणी दूरदर्शन http://prasarbharati.gov.in/ http://newsonair.com/ https://doordarshan.gov.in/ आकाशवाणी मैथिली पोडकास्ट http://prasarbharati.gov.in/podcast.php?filterlang=Maithili&from=1947-08-15&fromwp=2020-08-29&to=2050-12-31&search=GO आकाशवाणी पटना/ दरभंगा मैथिली रेजनल न्यूज टेक्स्ट डाउनलोड-1 http://newsonair.com/RNU-NSD-Audio-Archive-Search.aspx आकाशवाणी पटना/ दरभंगा मैथिली रेजनल न्यूज टेक्स्ट डाउनलोड-2 http://newsonair.com/Regional-Text.aspx आकाशवाणी दरभंगा http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=282 आकाशवाणी दरभंगा यू ट्यूब चैनल https://www.youtube.com/channel/UCGdNveEFmv4pPolWiTEMxVA आकाशवाणी भागलपुर http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=359 आकाशवाणी पूर्णियाँ http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=256 आकाशवाणी पटना http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=122 IGNCA http://ignca.nic.in/coilnet/mithila.htm http://ignca.nic.in/coilnet/kalyani.htm (MAITHILI ENGLISH DICTIONARY) http://tdil.mit.gov.in/CoilNet/IGNCA/mithila.htm MITHILA DARSHAN https://mithiladarshan.com/ (online pdf of Maithili journal) I LOVE MITHILA https://www.ilovemithila.com/ (online maithili journal) मैथिली साहित्य संस्थान https://www.maithilisahityasansthan.org/ https://www.maithilisahityasansthan.org/resources (online pdf of Reasearch Papers/ books) ........................................................................................................................ VIDEHA e-LEARNING YOUTUBE CHANNEL https://www.youtube.com/channel/UC4abVKqMj2pDWIAkXiOHp7A विदेहक किछु विशेषांक:- १) हाइकू विशेषांक १२ म अंक, १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf 12.pdf २) गजल विशेषांक २१ म अंक, १ नवम्बर २००८ Videha_01_11_2008.pdf Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf 21.pdf ३) विहनि कथा विशेषांक ६७ म अंक, १ अक्टूबर २०१० Videha_01_10_2010 Videha_01_10_2010_Tirhuta 67 ४) बाल साहित्य विशेषांक ७० म अंक, १५ नवम्बर २०१० Videha_15_11_2010 Videha_15_11_2010_Tirhuta 70 ५) नाटक विशेषांक ७२ म अंक १५ दिसम्बर२०१० Videha_15_12_2010 Videha_15_12_2010_Tirhuta 72 ६) नारी विशेषांक ७७म अंक ०१ मार्च २०११ Videha_01_03_2011 Videha_01_03_2011_Tirhuta 77 ७) अनुवाद विशेषांक (गद्य-पद्य भारती) ९७म अंक Videha_01_01_2012 Videha_01_01_2012_Tirhuta 97 ८) बाल गजल विशेषांक विदेहक अंक १११ म अंक, १ अगस्त २०१२ Videha_01_08_2012 Videha_01_08_2012_Tirhuta 111 ९) भक्ति गजल विशेषांक १२६ म अंक, १५ मार्च २०१३ Videha_15_03_2013 Videha_15_03_2013_Tirhuta 126 १०) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक १४२ म, अंक १५ नवम्बर २०१३ Videha_15_11_2013 Videha_15_11_2013_Tirhuta 142 ११) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 १२) अरविन्द ठाकुर विशेषांक १८९ म अंक १ नवम्बर २०१५ Videha_01_11_2015 १३) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक १९१ म अंक १ दिसम्बर २०१५ Videha_01_12_2015 १४) विदेह सम्मान विशेषाक- २००म अक १५ अप्रैल २०१६/ २०५ म अक १ जुलाई २०१६ Videha_15_04_2016 Videha_01_07_2016 १५) मैथिली सी.डी./ अल्बम गीत संगीत विशेषांक- २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ Videha_01_01_2017 १६) मैथिली वेब पत्रकारिता विशेषांक VIDEHA 313 लेखकसं आमंत्रित रचनापर आमंत्रित आलोचकक टिप्पणीक शृंखला १७) मैथिली बीहनि कथा विशेषांक-२ VIDEHA 317 १८) रामलोचन ठाकुर विशेषांक VIDEHA 319 १९) रामलोचन ठाकुर श्रद्धांजलि विशेषांक VIDEHA 320 २०) राजनन्दन लाल दास विशेषांक VIDEHA 333 लेखकक आमंत्रित रचना आ ओइपर आमंत्रित समीक्षकक समीक्षा सीरीज १. कामिनीक पांच टा कविता आ ओइपर मधुकान्त झाक टिप्पणी विदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016 "पाठक हमर पोथी किए पढ़थि"- लेखक द्वारा अप्पन पोथी/ रचनाक समीक्षा सीरीज १. आशीष अनचिन्हार 'विदेह' क ३२७ म अंक ०१ अगस्त २०२१ एडिटर्स चोइस सीरीज एडिटर्स चोइस सीरीज-१ विदेहक १२३ म (०१ फरबरी २०१३) अंकमे बलात्कारपर मैथिलीमे पहिल कविता प्रकाशित भेल छल। ई दिसम्बर २०१२ क दिल्लीक निर्भया बलात्कार काण्डक बादक समय छल। ओना ई अनूदित रचना छल, तेलुगुमे पसुपुलेटी गीताक एहि कविताक हिन्दी अनुवाद केने छलीह आर. शांता सुन्दरी आ हिन्दीसँ मैथिली अनुवाद केने छलाह विनीत उत्पल। हमर जानकारीमे एहिसँ बेशी सिहराबैबला कविता कोनो भाषामे नहि रचल गेल अछि। सात सालक बादो ई समस्या ओहने अछि। ई कविता सभकेँ पढ़बाक चाही, खास कऽ सभ बेटीक बापकेँ, सभ बहिनक भाएकेँ आ सभ पत्नीक पतिकेँ। आ विचारबाक चाही जे हम सभ अपना बच्चा सभ लेल केहन समाज बनेने छी। एडिटर्स चोइस सीरीज-१ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-२ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच ब्रेस्ट कैसरक समस्यापर विदेह मे मीना झा केर एकटा लघु कथा प्रकाशित भेल। ई मैथिलीक पहिल कथा छल जे ब्रेस्ट कैसर पर लिखल गेल। हिन्दीमे सेहो ताधरि एहि विषयपर कथा नहि लिखल गेल छल, कारण एहि कथाक ई-प्रकाशित भेलाक १-२ सालक बाद हिन्दीमे दू गोटेमे घोंघाउज भऽ रहल छल कि पहिल हम आकि हम, मुदा दुनूक तिथि मैथिलीक कथाक परवर्ती छल। बादमे ई विदेह लघु कथामे सेहो संकलित भेल। एडिटर्स चोइस सीरीज-२ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-३ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिलक किछु बाल कविता प्रकाशित भेल। बादमे हुनकर ३ टा बाल कविता विदेह शिशु उत्सवमे संकलित भेल जाहिमे २ टा कविता बेबी चाइल्डपर छल। पढ़ू ई तीनू कविता, बादक दुनू बेबी चाइल्डपर लिखल कविता पढ़बे टा करू से आग्रह। एडिटर्स चोइस सीरीज-३ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-४ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच जगदानन्द झा मनुक एकटा दीर्घ बाल कथा कहि लिअ बा उपन्यास प्रकाशित भेल, नाम छल चोनहा। बादमे ई रचना विदेह शिशु उत्सवमे संकलित भेल, ई रचना बाल मनोविज्ञानपर आधारित मैथिलीक पहिल रचना छी, मैथिली बाल साहित्य कोना लिखी तकर ट्रेनिंग कोर्समे एहि उपन्यासकेँ राखल जेबाक चाही। कोना मॊडर्न उपन्यास आगाँ बढ़ै छै, स्टेप बाइ स्टेप आ सेहो बाल उपन्यास। पढ़बे टा करू से आग्रह। एडिटर्स चोइस सीरीज-४ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-५ एडिटर्स चोइस ५ मे मैथिलीक "उसने कहा था" माने कुमार पवनक दीर्घकथा "पइठ" (साभार अंतिका) । हिन्दीक पाठक, जे "उसने कहा था" पढ़ने हेता, केँ बुझल छन्हि जे कोना अहि कथाकेँ रचि चन्द्रधर शर्मा ’गुलेरी’ अमर भऽ गेलाह। हम चर्चा कऽ रहल छी, कुमार पवनक "पइठ" दीर्घकथाक। एकरा पढ़लाक बाद अहाँकेँ एकटा विचित्र, सुखद आ मोन हौल करैबला अनुभव भेटत, जे सेक्सपीरिअन ट्रेजेडी सँ मिलितो लागत आ फराको। मुदा एहि रचनाकेँ पढ़लाक बाद तामस, घृणा सभपर नियंत्रणकेँ आ सामाजिक/ पारिवारिक दायित्वकेँ सेहो अहाँ आर गंभीरतासँ लेबै, से धरि पक्का अछि। मुदा एकर एकटा शर्त अछि जे एकरा समै निकालि कऽ एक्के उखड़ाहामे पढ़ि जाइ। एडिटर्स चोइस सीरीज-५ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-६ जगदीश प्रसाद मण्डलक लघुकथा "बिसाँढ़": १९४२-४३ क अकालमे बंगालमे १५ लाख लोक मुइला, मुदा अमर्त्य सेन लिखैत छथि जे हुनकर कोनो सर-सम्बन्धी एहि अकालमे नहि मरलन्हि। मिथिलोमे अकाल आएल १९६७ ई. मे आ इन्दिरा गाँधी जखन एहि क्षेत्र अएली तँ हुनका देखाओल गेल जे कोना मुसहर जातिक लोक बिसाँढ़ खा कऽ एहि अकालकेँ जीति लेलन्हि। मैथिलीमे लेखनक एकभगाह स्थिति विदेहक आगमनसँ पहिने छल। मैथिलीक लेखक लोकनि सेहो अमर्त्य सेन जेकाँ ओहि महाविभीषिकासँ प्रभावित नहि छला आ तेँ बिसाँढ़पर कथा नहि लिखि सकला। जगदीश प्रसाद मण्डल एहिपर कथा लिखलन्हि जे प्रकाशित भेल चेतना समितिक पत्रिकामे, मुदा कार्यकारी सम्पादक द्वारा वर्तनी परिवर्तनक कारण ओ मैथिलीमे नहि वरण् अवहट्ठमे लिखल बुझा पड़ल, आ ओतेक प्रभावी नहि भऽ सकल कारण विषय रहै खाँटी आ वर्तनी कृत्रिम। से एकर पुनः ई-प्रकाशन अपन असली रूपमे भेल विदेहमे आ ई संकलित भेल "गामक जिनगी" लघुकथा संग्रहमे। एहि पोथीपर जगदीश प्रसाद मण्डलकेँ टैगोर लिटरेचर अवार्ड भेटलनि। जगदीश प्रसाद मण्डलक लेखनी मैथिली कथाधाराकेँ एकभगाह हेबासँ बचा लेलक, आ मैथिलीक समानान्तर इतिहासमे मैथिली साहित्यकेँ दू कालखण्डमे बाँटि कऽ पढ़ए जाए लागल- जगदीश प्रसाद मण्डलसँ पूर्व आ जगदीश प्रसाद मण्डल आगमनक बाद। तँ प्रस्तुत अछि लघुकथा बिसाँढ़- अपन सुच्चा स्वरूपमे। एडिटर्स चोइस सीरीज-६ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-७ मैथिलीक पहिल आ एकमात्र दलित आत्मकथा: सन्दीप कुमार साफी। सन्दीप कुमार साफीक दलित आत्मकथा जे अहाँकेँ अपन लघु आकाराक अछैत हिलोड़ि देत आ अहाँक ई स्थिति कऽ देत जे समानान्तर मैथिली साहित्य कतबो पढ़ू अहाँकेँ अछौं नहि होयत। ई आत्मकथा विदेहमे ई-प्रकाशित भेलाक बाद लेखकक पोथी "बैशाखमे दलानपर"मे संकलित भेल आ ई मैथिलीक अखन धरिक एकमात्र दलित आत्मकथा थिक। तँ प्रस्तुत अछि मैथिलीक पहिल दलित आत्मकथा: सन्दीप कुमार साफीक कलमसँ। एडिटर्स चोइस सीरीज-७ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-८ नेना भुटकाकेँ रातिमे सुनेबा लेल किछु लोककथा (विदेह पेटारसँ)। एडिटर्स चोइस सीरीज-८ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-९ मैथिली गजलपर परिचर्चा (विदेह पेटारसँ)। एडिटर्स चोइस सीरीज-९ (डाउनलोड लिंक) जगदीश प्रसाद मण्डल जीक ६५ टा पोथीक नव संस्करण विदेहक २३३ सँ २५० धरिक अंकमे धारावाहिक प्रकाशन नीचाँक लिंकपर पढ़ू:- Videha_15_05_2018 Videha_01_05_2018 Videha_15_04_2018 Videha_01_04_2018 Videha_15_03_2018 Videha_01_03_2018 Videha_15_02_2018 Videha_01_02_2018 Videha_15_01_2018 Videha_01_01_2018 Videha_15_12_2017 Videha_01_12_2017 Videha_15_11_2017 Videha_01_11_2017 Videha_15_10_2017 Videha_01_10_2017 Videha_15_09_2017 Videha_01_09_2017 विदेह ई-पत्रिकाक बीछल रचनाक संग- मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ रचनाक एकटा समानान्तर संकलन: विदेह: सदेह: १ (२००८-०९) देवनागरी विदेह: सदेह: १ (२००८-०९) तिरहुता विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) देवनागरी विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) तिरहुता विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०)देवनागरी विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०) तिरहुता विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०)देवनागरी विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०) तिरहुता विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]देवनागरी विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ] तिरहुता विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]- दोसर संस्करण देवनागरी विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ]देवनागरी विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ] तिरहुता विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ]देवनागरी विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ] तिरहुता विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ]देवनागरी विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ] तिरहुता विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ]देवनागरी विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ] तिरहुता विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ]देवनागरी विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ] तिरहुता विदेह:सदेह ११ विदेह:सदेह १२ विदेह:सदेह १३ The readers of English translations of Maithili Novel "sahasrabadhani" and verse collection "sahasrabdik chaupar par" has intimated that the English translation has not been able to grasp the nuances of original Maithili. Therefore the Author has started translating his Maithili works in English himself. After these translations are complete these would be the official translations authorised by the Author of the original works.-Editor Maithili Books can be downloaded from: https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ विदेह सम्मान: सम्मान-सूची (समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार सहित) सूचना/ घोषणा "विदेह सम्मान" समानान्तर साहित्य अकदेमी पुरस्कारक नामसँ प्रचलित अछि। "समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार" (मैथिली), जे साहित्य अकादेमीक मैथिली विभागक गएर सांवैधानिक काजक विरोधमे शुरु कएल छल, लेल अनुशंसा आमन्त्रित अछि। अनुशंसा २०१९ आ २०२० बर्ख लेल निम्न कोटि सभमे आमन्त्रित अछि: १) फेलो २)मूल पुरस्कार ३)बाल-साहित्य ४)युवा पुरस्कार आ ५) अनुवाद पुरस्कार। पुरस्कारक सभ क्राइटेरिया साहित्य अकादेमी, दिल्लीक समानान्तर पुरस्कारक समक्ष रहत, जे एहि लिंक sahitya-akademi.gov.in पर उपलब्ध अछि। अपन अनुशंसा editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम्: VIDEHA: AN IDEA FACTORY (c)२००४-२०२२. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHAसम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: डॉ उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम विलास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक -स्त्री कोना- इरा मल्लिक। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि)editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि। एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै, आ से हानि-लाभ रहित आधारपर छै आ तैँ ऐ लेल कोनो रॊयल्टीक/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै। तेँ रॉयल्टीक/ पारिश्रमिकक इच्छुक विदेहसँ नै जुड़थि, से आग्रह। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-2022 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। ५ जुलाई २००४ केँ http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् 'विदेह' ३४२ म अंक १५ मार्च २०२२ (वर्ष १५ मास १७१ अंक ३४२) विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA ISSN 2229-547X VIDEHA
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