VIDEHA — Issue 343 / अंक ३४३

Publication: VIDEHA · Issue: 343
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'विदेह' ३४३ म अंक ०१ अप्रैल २०२२ (वर्ष १५ मास १७२ अंक ३४३) ऐ अंकमे अछि:- १. गजेन्द्र ठाकुर- संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल  मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल सेहो] [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] [FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI ALSO] २. गद्य २.१.जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’- आँखिमे चित्र हो मैथिली केर (आत्मकथा)- २८म खेप २.२.रबीन्द्र नारायण मिश्र- मातृभूमि (उपन्यास)- दोसर खेप २.३.डॉ. किशन कारीगर-मैथिलीमे रचना चोरीक विकट समस्या आ समाधान २.४.मुन्नाजी- बीहनि कथा-उपरौंज २.५.संतोष कुमार राय 'बटोही'-बकरी संस्कृति (व्यंग्य रचना) ३. पद्य ३.१.डाॅ किशन कारीगर- प्रकृति के बसाबह ४.स्त्री कोना ४.१.कल्पना झा- कोइली रे Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Books/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाउ। VIDEHA ARCHIVE विदेह पेटार View Videha googlegroups (since July 2008) view Videha Facebook Official Group (since January 2008)- for announcements १. गजेन्द्र ठाकुर ........................................................................................................................ ........................................................................................................................ [संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल  मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री] [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल सेहो] [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] [FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI ALSO] यू. पी. एस. सी. (मेन्स) २०२० ऑप्शनल: मैथिली साहित्य विषयक टेस्ट सीरीज यू.पी.एस.सी. क प्रिलिमिनरी परीक्षा २०२० सम्पन्न भऽ गेल अछि। जे परीक्षार्थी एहि परीक्षामे उत्तीर्ण करताह आ जँ मेन्समे हुनकर ऑप्शनल विषय मैथिली साहित्य हेतन्हि तँ ओ एहि टेस्ट-सीरीजमे सम्मिलित भऽ सकैत छथि। टेस्ट सीरीजक प्रारम्भ प्रिलिम्सक रिजल्टक तत्काल बाद होयत। टेस्ट-सीरीजक उत्तर विद्यार्थी स्कैन कऽ editorial.staff.videha@gmail.com पर पठा सकैत छथि, जँ मेलसँ पठेबामे असोकर्ज होइन्हि तँ ओ हमर ह्वाट्सएप नम्बर 9560960721 पर सेहो प्रश्नोत्तर पठा सकैत छथि। संगमे ओ अपन प्रिलिम्सक एडमिट कार्डक स्कैन कएल कॉपी सेहो वेरीफिकेशन लेल पठाबथि। परीक्षामे सभ प्रश्नक उत्तर नहि देमय पड़ैत छैक मुदा जँ टेस्ट सीरीजमे विद्यार्थी सभ प्रश्नक उत्तर देताह तँ हुनका लेल श्रेयस्कर रहतन्हि। विदेहक सभ स्कीम जेकाँ ईहो पूर्णतः निःशुल्क अछि।- गजेन्द्र ठाकुर संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सर्विसेज (मुख्य) परीक्षा, २०२० मैथिली (ऐच्छिक) लेल टेस्ट सीरीज/ प्रश्न-पत्र- १ आ २ TEST SERIES-1 TEST SERIES-2 [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल/ FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI] NTA_UGC_NET_MAITHILI_01 NTA_UGC_NET_MAITHILI_02 NTA_UGC_NET_MAITHILI_03 (श्री शम्भु कुमार सिंह द्वारा संकलित) Videha e-Learning MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) UPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS BPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. (ऐच्छिक) मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. (अनिवार्य) मैथिली प्रश्नपत्र- बी.पी.एस.सी.(ऐच्छिक) मैथिलीक वर्तनी १ भाषापाक २ मैथिलीक वर्तनीमे पर्याप्त विविधता अछि। मुदा प्रश्नपत्र देखला उत्तर एकर वर्तनी इग्नू BMAF001 सँ प्रेरित बुझाइत अछि, से एकर एकरा एक उखड़ाहामे उनटा-पुनटा दियौ, ततबे धरि पर्याप्त अछि। यू.पी.एस.सी. क मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेल सेहो ई पर्याप्त अछि, से जे विद्यार्थी मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेने छथि से एकर एकटा आर फास्ट-रीडिंग दोसर-उखड़ाहामे करथि| IGNOU  इग्नू       BMAF-001 ........................................................................................................................ MAITHILI (OPTIONAL) TOPIC 1    [Place of Maithili in Indo-European Language Family/ Origin and development of Maithili language (Sanskrit, Prakrit, Avhatt, Maithili) भारोपीय भाषा परिवार मध्य मैथिलीक स्थान/ मैथिली भाषाक उद्भव ओ विकास (संस्कृत, प्राकृत, अवहट्ट, मैथिली)] TOPIC 2    (Criticism- Different Literary Forms in Modern Era/ test of critical ability of the candidates) TOPIC 3    (ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददास सिलेबसमे छथि आ रसमय कवि चतुर चतुरभुज विद्यापति कालीन कवि छथि। एतय समीक्षा शृंखलाक प्रारम्भ करबासँ पूर्व चारू गोटेक शब्दावली नव शब्दक पर्याय संग देल जा रहल अछि। नव आ पुरान शब्दावलीक ज्ञानसँ ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददासक प्रश्नोत्तरमे धार आओत, संगहि शब्दकोष बढ़लासँ खाँटी मैथिलीमे प्रश्नोत्तर लिखबामे धाख आस्ते-आस्ते खतम होयत, लेखनीमे प्रवाह आयत आ सुच्चा भावक अभिव्यक्ति भय सकत।) TOPIC 4                (बद्रीनाथ झा शब्दावली आ मिथिलाक कृषि-मत्स्य शब्दावली) TOPIC 5                (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोरिक गाथामे समाज ओ संस्कृति) TOPIC 6                (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- विद्यापति) TOPIC 7                (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- पद्य समीक्षा- बानगी) TOPIC 8                (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोक गाथा नृत्य नाटक संगीत) TOPIC 9                (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- यात्री) TOPIC 10               (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली रामायण) TOPIC 11               (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली उपन्यास) TOPIC 12               (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- शब्द विचार) TOPIC 13               (तिरहुता लिपिक उद्भव ओ विकास) TOPIC 14                 (आधुनिक नाटकमे चित्रित निर्धनताक समस्या- शम्भु कुमार सिंह)् TOPIC 15                 (स्वातंत्र्योत्तर मैथिली कथामे सामाजिक समरसता- अरुण कुमार सिंह) TOPIC 16                 (यू. पी.एस.सी. मैथिली प्रथम पत्रक परीक्षार्थी हेतु उपयोगी संकलन, मैथिलीक प्रमुख उपभाषाक क्षेत्र आ ओकर प्रमुख विशेषता, मैथिली साहित्यक आदिकाल, मैथिली साहित्यक काल-निर्धारण- शम्भु कुमार सिंह) TOPIC 17                (मैथिली आ दोसर पुबरिया भाषाक बीचमे सम्बन्ध (बांग्ला, असमिया आ ओड़िया) [यू.पी.एस.सी. सिलेबस, पत्र-१, भाग-“ए”, क्रम-५]) TOPIC 18                 [मैथिली आ हिन्दी/ बांग्ला/ भोजपुरी/ मगही/ संथाली- बिहार लोक सेवा आयोग (बी.पी.एस.सी.) केर सिविल सेवा परीक्षाक मैथिली (ऐच्छिक) विषय लेल] ........................................................................................................................ GENERAL STUDIES (PRELIMINARY & MAINS) GS (Pre) TOPIC 1 GS (Mains) NCERT-ENVIRONMENT CLASS XI-XII NCERT PDF I-XII TN BOARD PDF I-XII ALL INDIA RADIO ENGLISH NEWS ALL INDIA RADIO NEWS ARCHIVE ALL INDIA RADIO TALKS AND CURRENT AFFAIRS RAJYA SABHA TV NEWS DISCUSSIONS SANSAD TV OTHER OPTIONALS IGNOU eGYANKOSH (अनुवर्तते) -गजेन्द्र ठाकुर २. गद्य २.१.जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’- आँखिमे चित्र हो मैथिली केर (आत्मकथा)- २८म खेप २.२.रबीन्द्र नारायण मिश्र- मातृभूमि (उपन्यास)- दोसर खेप २.३.डॉ. किशन कारीगर-मैथिलीमे रचना चोरीक विकट समस्या आ समाधान २.४.मुन्नाजी- बीहनि कथा-उपरौंज २.५.संतोष कुमार राय 'बटोही'-बकरी संस्कृति (व्यंग्य रचना) जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’ आँखिमे चित्र हो मैथिली केर (आत्मकथा)- २८. घर घुरबाक सुख २८. घर घुरबाक सुख आवास यज्ञ  : 2010 मे 30 नवम्बरक’ हम सेवा निवृत भेल रही, 3 दिसम्बरक’ भविष्य निधिमे जमा राशि एगारह लाख छियासठि हजारक चेक भेटि गेल | तखन आवास लेल सोचब प्रारम्भ केलहुँ | हमरासँ छोट भाए ललनजी दिल्लीमे एकटा छोट छीन घर ल’क’ एक पुत्री,एक पुत्र आ पत्नीक संग रहैत छलाह,एखनहु ओतहि रहैत छथि | सभसँ छोट भाए दूटा पुत्र आ पत्नीक संग गाममे रहि ओतहिसँ स्कूल जाइत-अबैत छलाह,एखनहु गामेमे रहि स्कूल जाइत-अबैत छथि | हम नोकरीमे बिहारक सिवान,पूर्वी चम्पारण, छत्तीसगढ़क सरगुजा,रायपुर  आ  मध्य प्रदेशक शहडोल,जबलपुर आ सिवनी जिलामे रहैत आबि रहल छलहुँ | विवेक नवी मुंबइक कोपरखैरनामे रहिक’ किछु मास पॉलिटेक्निक कॉलेजमे नोकरी केलनि, तकर बाद इंजीनियरिंग कॉलेजमे पढौनी क’रहल छलाह | हमरा सोझाँ तीनटा विकल्प छल : पहिल, मुंबइ चल जाइ,दोसर मधुबनी,दरभंगा अथवा पटना जाइ; तेसर, गाम जाक’ रही | बुढ़ारीमे चिकित्सा-सुविधाक आवश्यकता बेशी होइत छैक आ धिया-पूता लगमे नै रहत,से ध्यानमे राखि निर्णय लेबाक छल | विवेक,वसन्त आ बड़का जमाएसँ सम्पर्क केलहुँ | हुनका सभ गोटेक सलाह  भेलनि जे हम पटनामे रहबाक व्यवस्था करी, दिल्ली,मुंबइ आ गामक बीच रहत पटना | यैह निर्णय भेल | पटनामे साहित्यकार लोकनिसँ संपर्क नै छल | फुलवारी शरीफ लग साढ़ू रहैत छलाह,सगुना मोड़,दानापुर लग मामा रहैत छलाह आ मिथिला कॉलोनी,दानापुरमे छोट भाएक ससुर रहैत छलाह | तीनू गोटेकें कहलियनि जे पटनामे कतहु एक कट्ठा जमीन लेबामे सहयोग करथि | सभसँ पहिने साढ़ूक ओत’सँ सूचना प्राप्त भेल : बिक्री योग्य पन्द्रह धुर जमीन कनिए दूरपर छै | 7 दिसम्बरक’ गप भेल, 8 क’हम सहमति देलियनि आ जमीनबलाकें अग्रिम देबाक लेल किछु राशि पठा देलियनि | 23 क’ पटना पहुचलहुँ, 24 क’ प्लाट देखलिऐ | राजूक निर्देशनमे हमर आवास यज्ञ चलय लागल | लगमे एकटा डेरा ताकिक’ रखबाक भार हुनका सभकें द’क’ 29के रातिमे पटनासँ प्रस्थान कए 30 क’ सिवनी पहुँचि गेलहुँ | 3 जनवरीक’ ग्रेच्युटीक दस लाखक चेक भेटि गेल | सिवनी छोड़बासँ पहिने दूनू बेटी आ जमाए ओत’सँ घूमि एबाक विचार भेल | 10 जनवरीक’ जबलपुरसँ सोमनाथ एक्सप्रेस पकड़ि 11 क’  8.50 बजे अहमदाबाद आ 1  बजे पालनपुर (गुजरात) पहुचलहुँ |पालनपुरमे छोटका जमाए अमूल कम्पनीमे काज करैत छलाह, मैथिली ओतहि छलीह | 15 क’ बनास डेरी 1,2,3 घुमलहुँ, 2.30 बजे बससँ यात्रा कए 4  बजे गब्बर आ   6.30 बजे अम्बाजीक दर्शनार्थ पहुचलहुँ | 16  क’ 1 बजे माउंट आबू पहुचलहुँ | ओत’ घूमिक’ रातिमे 8.30  बजे पालनपुर वापस भेलहुँ | 17 क’ रातिमे रणकपुर एक्सप्रेससँ पालनपुरसँ प्रस्थान कए 18 क’ 2 बजे  बड़का जमाएक नवी मुंबइमे कोपरखैरना स्थित आवास पहुचलहुँ | 22  क’ मुंबइसँ प्रस्थान कए 23  क’ 11  बजे सिवनी पहुचलहुँ | 24 क’ विवेकक शिक्षा ऋण खातामे 85034 रु. जमाक’क’ ऋण खाता बंद करौलहुँ | मैथिलीक शिक्षा ऋण खातामे 35000 रु. जमा केलहुँ | 30 क’ सबेरे ट्रक आएल | ट्रकपर सामान सभ लदाएल | 31 जनवरीक’ हम दुनू गोटे 11.15 बजे सिवनीसँ प्रस्थान कए जबलपुरसँ ट्रेन पकड़ि 1 फरबरीक’ 11  बजे दिनमे फुलवारी शरीफ लग वृन्दावन कॉलोनी आवास पहुचलहुँ |ट्रकसँ सामान सभ ओही दिन बादमे आएल | 9 क’ इन्डेन ऑफिस जाक’ कागज आ 950 रु.  कौशन मनीक संग कुल             2074 रु. जमा केलहुँ | 10 क’ दू टा गैस सिलिंडर आबि गेल | राजूक निर्देशनमे हमर आवास-यज्ञ चलि रहल छल | शहरमे जमीन कीनब सेहो एकटा पैघ यज्ञ थिक | एहि यज्ञमे आवश्यकतासँ बहुत बेशी समय,श्रद्धा, विश्वास, साहस आ धैर्यक आवश्यकता होइत छैक | ई हमरा लेल एकटा नव आ नीक अनुभव छल | भूमि किनबा काल महग लगैत छैक, बादमे ओकर मूल्य बढि जाइत छैक | साढ़ू, राजू, प्रमोद बाबू, रंजीतजी,रामजनम महतो आ मंजू देवी आदि लोकक सहयोगसँ हमर ई यज्ञ 22  फरबरीक’ दानापुर रजिस्ट्री ऑफिसमे संपन्न भेल | वृन्दावन कॉलोनीक रोड न.1 ईमे लाल बहादुर सिंह जीक घरमे किरायाक आवासमे रह’ लगलहुँ | किछु दूरपर स्थित छलै जमीन | 2011 मे 14 जूनक’ इंजिनियर रामजी सिंहजीक माध्यमसँ मंजूर ठीकेदारसँ संपर्क भेल आ हुनका द्वारा  83 रु.प्रति वर्गफीटक दरसँ घर बनयबाक काज शुरू भेल | पानिक व्यवस्था भेल | तकर बाद छओ मास धरि चिन्तनक मुख्य विषय छल ईंटा,बालु,सीमेंट,गिट्टी,लोहक छड़ आदि | दौड़-धूपमे दस बरखक स्कूटी काज दैत छल | 2012 मे 16 जनवरीक’ छत ढलायल,29 फरबरीक’ गृह प्रवेश भेल | ओहि दिन विवेक सेहो मुंबइसँ आबि गेल छलाह | गृह प्रवेशक अवसर पर  संक्षिप्त भोजक व्यवस्था कयल गेल, साढ़ूक पुतोहु सभ भोजनक व्यवस्था केलनि | ओही दिन हम सभ किरायाबला घर छोड़ि नव घरमे सामान सभ आनिक’ रह’ लगलहुँ आ रहिएक’ शेष काज पूर्ण करेलहुँ | 15 अप्रैलक’ बिजलीक काज आ 8 मइक’ बड़हीक काज संपन्न भेल | घरक निर्माण काज सेहो बड़का यज्ञ थिक | हम तय केने छलहुँ जे कोनो स्थितिमे कखनो ककरोपर बिना तामस केने काज पूर्ण करब, से पार लागल |एहिस लाभ अपने होइ छै | शान्त चित्तस काज करबामे आनन्द अबैत छैक | अशान्त चित्तक परिणाम शुभ नै भ’ सकैत छैक, काज भारी लाग’ लगै छै, मोन उबि जाइ छै | काज करबाक लक्ष्य शुभ चिन्तनक  संग पूर्ण भ’ सकय से सुनिश्चित करबाक चाही | गाम-घरक यात्रा : पिसिऔत भाएक पुत्रीक कन्यादानमे सम्मिलित हेबाक लेल 27 फरबरीक’ गाम गेलहुँ | 28 क’ गामसँ सोहराय गेलहुँ |बर आ बरियातीक अगवानीमे सात गोटेक समूहमे मौआही (बाबू बरही लग )गेलहुँ | रातिमे बरियाती एलै सोहराय (पंडौल लग ) | एक गोटे मोटर साइकिलसँ आबि रहल छलाह, दुर्घटनाग्रस्त भ’क’ दरभंगासँ पटना गेलाह इलाजक लेल | बरक पिता आ दादा दुख आ चिन्तासँ  भोजन नहि ग्रहण केलनि | बरियातीक ई रूप हमरा लेल नव छल | एतेक संख्यामे बरियाती, एतेक फटक्का छोड़ब हमरा असहज केलक | एहि असहजतासँ बादमे एकटा गीत जन्म लेलक : नब्बेटा बरियाती एलै, हल्ला भेलै गाममे ......| गामक एहि यात्रामे रतनजी (छोट भाए)क संग मामा गाम रुचौल, बहिनक सासुर शिशवा, समधियान राघोपुर आ  गोनौली, दीदीक सासुर नारायणपट्टी सेहो गेलहुँ | घुरती काल अपन सासुर लदारी होइत पटना मामाक घर पहुचलहुँ | हुनका संगे विजेता (ममियौत बहिन)क विवाहक प्रसंगमे 13  मार्चक’ टाटानगर गेलहुँ | विजेता बायो इन्फार्मेटिक्समे बी टेक छलीह,नोकरी करैत छलीह | लड़का सेहो इंजिनियर छलखिन | बिना कोनो दहेजक माँगक  विवाह तय भेलै, से नीक लागल | एहि विवाह सँ ई भावना दृढ़ भेल जे बेटीकें समुचित शिक्षा द’क’ सबल आ सक्षम बनाओल जा सकैत अछि जाहिसँ ओ अपना बलपर उचित सम्मान प्राप्त क’ सकय |एहि चिन्तनसँ एकटा गीत जन्म लेलक : बुच्ची बढती, लिखती-पढ़ती हमरा चिन्ता कथी के, भाग्य अपन अपनेसँ गढ़ती हमरा चिन्ता कथी के | रेप-दहेजक दानवकेर उत्पात मचल अछि भारतमे, महिषासुरलय दुरगा बनती हमरा चिन्ता कथी के | ज्ञान और विज्ञानक सम्पति अर्जित करती जीवनमे, नव सुरुज आ चान बनेती हमरा चिन्ता कथी के | लोकक मोल बुझै छै एखनो लोक बहुत छै दुनियाँमे, संगी अप्पन अपने चुनती हमरा चिन्ता कथी के | अपनहि श्रमसँ बाट बनेती एहि बबूरकेर जंगलमे, ‘किरण’ ‘सुनीता’’मीरा’ बनती हमरा चिन्ता कथी के | हमरा भरोस भेल जे जतेक चिन्ता लोक बेटीक बियाहक लेल करैत अछि, से बेटीक समुचित शिक्षा दिस लागि जाइ त युग-युगसँ चल अबैत ई ‘पराधीन सुख सपनहु नाही’ बला  धारणाक अन्त भ’ सकैत अछि | सेवा,अनुसन्धान,राजनीति आदि सभ क्षेत्रमे बेटी लोकनिक प्रशंसनीय काज हमरा सभकें आश्वस्त करैत अछि | 17   जूनक’ मामाक सगुना मोड़ लगक आवासमे कन्या निरीक्षणक औपचारिता भेलै आ 10 जूनक’ मामाक गाम रुचौलमे विजेताक विवाह भेलनि, हमहूँ  दुनू अवसरपर उपस्थित भेलहुँ | गाम-गाम घुमैत बहुत रास पोखरि, दारूक दोकान आ आनो कतेक देखल आ सूनल  बात सभ मोनमे घुरिआइत रहल आ चिन्तनक विषय बनल जाहिसँ एकटा गीत जन्म लेलक : पोखरिमे मखान गामे-गामे दारूके दोकान गामे-गामे | दिनक’ पूजा राति बिताबय चोरीमे रावणकेर खरुहान गामे-गामे | कबुला केलक पूर मनोरथ भेलै लोकक गेल छागरक जान गामे-गामे | ठाढ़े-ठाढ़े लोक मुतैए बाटेपर टाका के मचान गामे-गामे | परिणयकें उद्योग बनौलक मिथिलामे अयाचीक संतान गामे-गामे | कि हेतै अइ बेर बाढ़िमे के जानय छटपट कोटि परान गामे-गामे | बाट-घाटसँ काँट-कूशकें  दूर करू अन्नाकेर अभियान गामे-गामे | (ओहि समय बिहारोमे शराब-बंदी नहि छलै )| मैथिली जगतसँ सम्पर्क : विजेताक विवाहमे मामा मैथिलीमे कार्ड छपयबाक भार देलनि | हमरा लेल पटना नव छल | तीस बरख पहिने मुसल्लहपुरमे मुरलीधर प्रेस देखने छलहुँ, ओत’ पहिल पोथी ‘तोरा अङनामे’ छपल छल | ओहि स्थानपर गेलहुँ त पता चलल जे बहुत पहिने बंद भ’ गेलै, घुरि एलहुँ | जीवकान्तजीसँ संपर्क भेल त ओ शेखर प्रकाशनक पता कहलनि आ शरदिंदु चौधरीजीक मोबाइल न. देलनि | चौधरीजीसँ संपर्क भेल, न्यू मार्केट गेलहुँ | कार्डक काज हुनका देलियनि | हुनकासँ मैथिली जगतक पर्याप्त सूचना प्राप्त भेल | हुनका लग  मैथिली पोथीक भण्डार देखि नीक लागल | हुनका लग हमर पोथी ‘तोरा अङनामे’क एक प्रति सेहो भेटल जे तीस बरख पहिने मिथिला मिहिर / आर्यावर्तमे समीक्षाक लेल जमा केने रही, हमरा लग एकहुटा प्रति नहि रहि गेल छल, नीक स्थितिमे हुनका ओत’ भेटल,से नीक लागल | ओ पढबाक लेल तीनटा पोथी सेहो देलनि जाहिमे एकटा आदरणीय मन्त्रेश्वर झाजीक ‘चिनवार’ उपन्यास सेहो छल | ‘चिनवार’ पढलहुँ, नीक लागल, ओहिपर समीक्षा सेहो कवितामे लिखलहुँ जे ‘पूर्वोत्तर मैथिल’पत्रिकामे प्रकाशित भेल | शेखर प्रकाशनमे मैथिलीक सभ पत्रिकाक अद्यतन स्थितिसँ  परिचित भेलहुँ, बहुत साहित्यकार लोकनिसँ सेहो संपर्क भेल | डा. कमल मोहन ‘चुन्नू’, डा.योगानन्द झा,श्याम दरिहरे,मधुकान्त झा, वैद्यनाथ’विमल’,डा. बासुकी नाथ झाजीसँ परिचय भेल, बच्चा ठाकुर आ बटुक भाइ भेटलाह | दूरदर्शनपर एकटा कार्यक्रममे बटुक भाइ डा.बासुकी नाथ झा आ शरदिंदु चौधरीक सङ हमरो सम्मिलित केलनि,हम प्रस्तुत केने रही : पोखरिमे मखान गामे-गामे दारू के दोकान गामे-गामे | बादमे ‘समय-साल’ पत्रिकाक सम्पादकीयमे एहि गीतक चर्च भेल, आदरणीय जीवकान्तजी सुचित केलनि | ई रचना ‘विदेह’क 1 जून 2011 केर अंकमे प्रकाशित भेल छल | ‘शेखर प्रकाशन’सँ बहुत रास पोथी पढबाक लेल सहजतासँ उपलब्ध भ’गेल | विजय नाथ झाक गीत-गजल  संग्रह ‘अहींक लेल’क अतिरिक्त हुनक मैथिली पोथी ‘कन्दर्प कानन’ आ ‘कामायनी’(छन्दानुवाद) सँ परिचय भेल | बच्चा ठाकुरक ‘मैथिली आलोचना साहित्यक दिशाबोध’ आ मैथिली गीत-कविता संग्रह ‘गौरी-गिरामृता’देखल | मधुकान्त झाक पोथी ‘क्रान्ति-रथी’ आ ‘ममता-जोगी’, वैद्यनाथ ‘विमल’क पोथी ‘खण्ड-खण्ड पाखण्ड’,मन्त्रेश्वर झाक पोथी ‘शिरोधार्य’,’द्रुत विलंबित’ ‘टोंटानाथक चिट्ठी’ और ‘कतेक डारि पर’, कामिनीक पोथी ‘समयसँ संवाद करैत’,’परती परहक फूल’आ ‘खण्ड-खण्डमे बँटैत स्त्री’,डा.बासुकी नाथ झाक ‘बोध संकेतन’,कीर्ति नारायण मिश्रक ‘ध्वस्त होइत शान्ति स्तूप’,जीवकान्त जीक ‘छाह सोहाओन’,’खीखिरिक बीअरि’,’गाछ झूल-झूल’,’अधरतियामे चान’,’हमर अठन्नी खसलइ वनमे’ आ ‘पंजरि प्रेम प्रकासिया’,सुधांशु ‘शेखर’ चौधरीजीक ‘भफाइत चाहक जिनगी’,‘जिनगीक बाट’,’निवेदिता’,’लेटाइत आँचर’,’हस्ताक्षर’,’अंगरेजी फूलक चिट्ठी’,’साक्षात्कारक दर्पणमे’,’गीत ओ गजल’ और ’हम साहित्यकार ओ सम्पादक’,शरदिंदु चौधरी जीक ‘जँ हम जनितहुँ’,’बड़ अजगुत देखल’,’गोबरगणेश’,’करिया कक्काक कोरामिन’,’बात-बातपर बात’,’हमर अभाग : हुनक नहि दोष’,’साक्षात्’,उषा किरण खानक पोथी ‘काँचहि बाँस’,’गोनू झा क्लब’आ ‘भामती’,डा. शेफालिका वर्माक ‘मोहपाश’,गोविन्द झा कृत ‘सुबोध मैथिली व्याकरण’,भीमनाथ झाक ‘भनहि भीम कर जोड़ि’,मधुप जीक ‘मधुप गीतिका’,मणिपद्मजीक ‘अनंग कुसुमा’,अशोक कुमार दत्तक ‘झिझिरकोना’,डा.योगानन्द झा द्वारा संकलित –संपादित ‘गहबर गीत’, किशोर केशव आ वंदना किशोर द्वारा संपादित पोथी ‘अक्षर पुरुष’  आदि सेहो शेखर प्रकाशनसँ उपलब्ध भेल | शेखर प्रकाशनसँ ‘घर-बाहर’ अनलहुँ | पाण्डेयजीसँ ‘मिथिला दर्शन’ अनलहुँ | इन्टरनेट पत्रिका ‘विदेह’कें 30 मइक’ एकटा गीत आ एकटा गजल पठौलियनि | रातिमे आशीष अनचिन्हारजीसँ  गप भेल | 31 मइ क’ निर्मलीसँ उमेश मंडलजी गप केलनि | ‘अनचिन्हार आखर’ साइटपर गजलपर  पर्याप्त सामग्री देखि हर्ष भेल, लागल जेना हम कते बरखसँ जे तकैत छलहुँ, से भेटि गेल | गजेन्द्र ठाकुर आ आशीष अनचिन्हार द्वारा प्रस्तुत गजल शास्त्रक अध्ययन मैथिलीमे गजल लेखन दिस आकर्षित केलक | हमरा गजेन्द्र ठाकुर द्वारा प्रस्तुत सरल वार्णिक बहर सोझ लागल, गजल लिखय लगलहुँ आ ‘विदेह’कें प्रेषित करय लगलहुँ | ‘विदेह’कें सदेह सेहो देखल | विदेह मैथिली शिशु उत्सव,विदेह मैथिली विहनि कथा,विदेह मैथिली पद्य सेहो प्रकाशित भेल जाहिमे गजेन्द्र ठाकुर द्वारा महत्वपूर्ण आलेख ‘शिशु,बाल आ किशोर साहित्य आ ओकर समीक्षाशास्त्र’,’गद्य साहित्य मध्य विहनि कथाक स्थान आ विहनि कथाक समीक्षाशास्त्र’ और ‘पद्य साहित्य आ ओकर समीक्षा शास्त्र’क संग अनेक नव-पुरान  साहित्यकार लोकनिक रचना प्रकाशित भेल | अंगरेजी-मैथिली शब्द कोष प्राप्त भेल | ‘विदेह’ अपना ढंगक एसगर पत्रिका अछि मैथिलीमे | एकर कोनो अंक देखिएक’ ककरो आश्चर्य लगैत छैक जे कतेक विविधता आ कतेक विषय समेटने रहैत अछि ई पत्रिका | सम्पादक गजेन्द्र ठाकुर अपनो खूब लिखलनि | हिनक चर्चित पोथी ‘कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक’ सेहो अपना ढंगक एसगर पोथी अछि जाहिपर सेहो मैथिली साहित्य गर्व क’ सकैत अछि | हमर बेसी  गजल ‘विदेह’मे छपल | ’विदेह’ लेखक आ पाठक वर्गक  विस्तार बहुत सुन्दर ढंगसँ क’ रहल छल | हाइकू, गजल,विहनि कथा,बाल साहित्य,नाटक,बाल गजल,भक्ति गजल,आलोचना-समालोचना-समीक्षा आदि विशेषांक ‘विदेह’मे प्रकाशित भेल | 1 जनवरी 2015   क’मधुपजीपर विशेषांक निकलल, 1 नवम्बर 2015 क’अरविन्द ठाकुर विशेषांक निकलल |  1 दिसम्बर 2015 क’ जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’ विशेषांक निकलल | राजनन्दन लाल दास आ रामलोचन ठाकुर विशेषांक निकलि चुकल अछि | आदरणीय रवीन्द्र नाथ ठाकुर आ केदार नाथ चौधरी विशेषांक निकल’बला अछि | आगाँ और विशेषांक सभ विदेहमे प्रकाशित हएत | बहुत चर्चित लेखकक बहुत रास चर्चित पोथी सभ उपलब्ध अछि ‘विदेह’क साइटपर, क्यो कखनो अपना सुविधानुसार एहि सभक मङनीमे उपयोग क’ सकैत छथि | आशीष अनचिन्हार ‘अनचिन्हार आखर’नामक मैथिली गजलक प्रथम स्वतन्त्र वेबसाइट बनाक’ ओहि पर गजल शास्त्र प्रस्तुत क’क’ बहुत लोककें गजल लेखन लेल प्रेरित करैत, मार्गदर्शन दैत, पुरस्कारक योजना चला रहल छलाह,बाल-गजल,भक्ति-गजल आदि विशेषांक प्रस्तुत क’ रहल छलाह, गजलकारक परिचय श्रृंखला प्रस्तुत क’ रहल छलाह | अपनो बहुत रास गजल लिखलनि | हिनक गजल संग्रह ‘कुमारि इच्छा’,’जंघाजोड़ी’,’अनचिन्हार आखर’ आदि आ पोथी ‘मैथिली गजलक व्याकरण आ इतिहास’,’मैथिली वेब पत्रिकाक इतिहास’,’मैथिली गजलक रेडी रेकोनर’,’शब्द-अर्थ-शक्ति’ आदि उल्लेखनीय अछि | मैथिली गजलक सामर्थ्य,दिशा आ दशा आदि जनबाक लेल ई पोथी सभ पढ़ब आवश्यक अछि | एहि अभियानसँ बहुत गोटे लाभान्वित भेल छथि | किछु झिझकके बाद हमहूँ एहि अभियानमे शामिल भेलहुँ |हमर गीत लेखनक प्रयास गजल लेखन दिस अग्रसर भेल | हमरा जे कहबाक अछि से गजलक रूपमे  कहबामे सुविधाजनक लागय लागल | आशीष अनचिन्हार जी हमरो काफिया बुझबामे आ अरबी बहरमे गजल लिखबामे बहुत सहयोग केलनि |गजलक सम्बन्धमे हुनका द्वारा प्रस्तुत आलेख सभक मनन केलहुँ |’विदेह’मे प्रकाशित गजल सभक अध्ययन केलहुँ | हमर ममियौत भाए डा.शशिधर कुमर हमरा लेल दू टा ब्लॉग बना देलनि : 1.आँखिमे चित्र हो मैथिली केर : मैथिली रचना सबहक लेल | 2.तिरंगे के लिए   : हिन्दी रचना सबहक लेल | हमर मैथिली रचना सभकें मैथिली ब्लॉगपर पोस्ट करबामे सेहो मदति केलनि | हरिमोहन बाबूक आत्मकथा पढ़ल छल | सुधांशु शेखर चौधरी,जीवकान्त आ मन्त्रेश्वर झाजीक आत्मकथा पढ़लहुँ | जीवकान्तजीसँ पटनामे हुनक छोट पुत्र वरुणजीक आवासपर भेंट केलहुँ | आदरणीय जीवकान्तजी कहने छलाह जे पटना आबि गेल छी, त गोष्ठी सभमे जाउ, बजाबय त जाउ, नहियो बजाबय तैयो जाउ | गोष्ठी सभमे जाए लगलहुँ | गणेश झा,विजय नाथ झा,बच्चा ठाकुर आदि साहित्यकार  सभक संग मैथिली गोष्ठीक अतिरिक्त हिन्दी गोष्ठीमे सेहो जाए लगलहुँ | हिन्दी साहित्य सम्मेलन भवनमे बड्ड गोष्ठी होइत छलैक | दूरसँ जेबाक कारणे किछुए दिनमे हम हिन्दी गोष्ठीमे जेबासँ थाकि गेलहुँ | मध्य प्रदेशमे रही, तखने हिन्दीमे लिखबाक अभ्यास भेल छल, आब हिन्दीमे लिखब हमरा लेल कठिन भ’ गेल छल | हम मैथिलीपर ध्यान केन्द्रित केलहुँ, हिन्दीक गोष्ठी  सभमे जाएब बंद भ’ गेल | मैथिलीक गोष्ठी सभमे जाएब पटना धरि सीमित रखलहुँ | 2018 मे मिथिला विभूति पर्वमे दरभंगा गेलहुँ जाहिमे  14  गोटेकें मिथिला विभूति सम्मान देल गेलनि जाहिमे हमहूँ छलहुँ | आदरणीय उदय चन्द्र झा ‘विनोद’जीक अध्यक्षतामे आयोजित कवि सम्मेलनमे हमहू एकटा गजल प्रस्तुत केलहुँ | चेतना समिति द्वारा आयोजित आ राजीवनगरक  विद्यापति पर्वक कवि गोष्ठी सभक अतिरिक्त अकादमी आ मैथिली लेखक संघ द्वारा पटनामे आयोजित गोष्ठी सभमे भाग लेलहुँ | चेतना समितिक आयोजनमे आदरणीय रवीन्द्र नाथ ठाकुर,उदय चन्द्र झा ‘विनोद’, बुद्धिनाथ मिश्र,तारानंद वियोगी,मधुकान्त झा,अशोक,रमानंद झा ‘रमण’,विद्या नाथ झा’विदित’,गणेश ठाकुर,बच्चा ठाकुर,छत्रानंद सिंह झा (बटुक भाइ),डा. गंगेश गुंजन,सरस,चंद्रमणि,कामिनी,सदरे आलम गौहर,कमल मोहन ‘चुन्नू’, स्वयंप्रभा झा,कुमार मनीष अरविन्द,रमेश,शारदा झा, मनोज शांडिल्य,मेनका मल्लिक,रानी झा,संस्कृति मिश्र,रघुनाथ मुखिया, नवलश्री पंकज,गुंजनश्री आदि पुरान आ नव साहित्यकार लोकनिकें देखबाक आ सुनबाक अवसर भेटल | ‘क्यो नहि दै अछि आगि’ बुद्धि नाथ मिश्र जीक नीक गीत–संग्रह छनि | हिन्दी आ मैथिली दुनूमे लीखि रहल छथि | चन्द्रमणिजीक सैकड़ो गीत सभ अनेक पोथीमे छनि, करीब पचास बरखसँ मैथिली मंचपर लोकप्रियता प्राप्त करैत आएल छथि |गीतक अतिरिक्त आनो विधामे सक्रिय छथि | ‘काव्य-द्वीपक ओहि पार’,’यथास्थितिक बादक लेल’,’निकती’ आदि रमेश जीक पोथी छनि | ‘निकती’मे रमेशजी द्वारा मैथिलीक गजल शास्त्रपर असंतुलित  टिप्पणी कयल गेल अछि | कुमार मनीष अरविंदक पोथी ‘निछ्च्छ बताह भेल’नीक कविता संग्रह अछि | राजीवनगरक गोष्ठीमे विनोद कुमार झा, गणेश झा,किशोर केशवजी,अखिलेश कुमार झा आ जीवानंद ‘निराला’जीसँ सेहो परिचय भेल | अखिलेशजी आकाशवाणी,पटनामे छलाह, आकाशवाणीक लेल ‘आधुनिक कविता एबं ओकर उपयोगिता’ विषयपर 17.12.2011  क’ विजयनाथ झा जीक आवासपर गोष्ठीक आयोजन केलनि जाहिमे डा. इंद्र कांत झा, दिनेश झाक संग हमहूँ छलहुँ | अखिलेशजी ‘नवतुरियाक हाथमे मैथिली साहित्यक भविष्य’ विषयपर 6 जून 2012 क’ हमरा आवासपर गोष्ठीक आयोजन केलनि जाहिमे विजयनाथ झा, अखिलेश कुमार झा, दिनेश झाक अतिरिक्त हमर साढ़ू शुभ चन्द्र झा आ हुनक पुत्र  कुमार प्रमोद चन्द्र,राजीव कुमार झाक संग मिथिलेश झाजी सेहो छलाह | प्रेमलता मिश्र ‘प्रेम’ 2008 सँ अपना आवासपर मासे-मासे कवि गोष्ठी आयोजित करैत छलीह,हुनका ओत’ सेहो जाए लगलहुँ |हुनका ओत’ डा.इंद्र कान्त झा,        बटुक भाइ,डा. रमानंद झा ‘रमण’, गणेश झा, बच्चा ठाकुर,विजय नाथ झा,अजित आजाद, मनोज ‘मनुज’,बैद्य नाथ मिश्र,कमलेन्द्र झा ‘कमल’, धीरेन्द्र नाथ झा, राम नारायण सिंह,कुमार गगन,गायक आशुतोष मिश्र, रवीन्द्र बिहारी’राजू’ आदि साहित्यकार आ रंग कर्मी लोकनिसँ भेंट भेल, किछु नव लोक सभसँ सेहो परिचय भेल | गणेश झाक काव्य संग्रह ‘नवाद्या’ देखलहुँ | ओत’ हिन्दीक किछु रचनाकार मृत्युन्जय मिश्र’करुणेश’,आर.पी.घायल,नगेन्द्र मेहता,श्री राम तिवारी आ अन्य साहित्यकार सभसँ सेहो परिचय भेल |करुणेश जी आ घायल जीक हिन्दी गजल नीक लागल, मेहताजी पर्यावरण सम्बन्धी नीक रचना सुनबैत छलाह | प्रेमलता जीक नीक कथाकारक रूप हुनक पोथी ‘ओ दिन ओ पल’,’एगो छली सिनेह’ आ ‘शेखर प्रसंग’मे भेटल |ओ पावनि जकाँ सांध्य गोष्ठीक आयोजन मासे-मासे अपना ओत’ करैत आबि रहल छथि | सालमे एकटा पत्रिका ‘सांध्य गोष्ठी’क प्रकाशनक लेल आनन्द आ उत्साहसँ सभसँ रचना प्राप्त करैत छथि, छपबैत छथि आ बिलहैत छथि | धीरेन्द्र कुमार झाक कविता संग्रह ‘अपनाकें अकानैत’, ‘कनिए टा बात’,’अही सभमे कतहु’, कथा संग्रह ‘एहि मोड़ पर’ आ उपन्यास ‘उत्तरार्ध’ पढलहुँ |हिनक कविता,कथा,उपन्यास सभ नीक लगैत अछि | हम मैथिलीमे गीत आ गजल प्रस्तुत करैत छलहुँ | हमर गीत लेखन कम भ’ गेल, गजल सिखबाक आ लिखबाक प्रवृति बढल गेल | सरल वार्णिक बहरमे गजल लिखैत छलहुँ आ ‘विदेह’मे पठबैत छलहुँ | ‘विदेह’ एकटा नव लेखक आ पाठक वर्ग तैयार क’ रहल छल, से उत्साहबर्धक लागल, ओहिमे जगदीश प्रसाद मंडलक रचना बहुत नीक लगैत छल | बादमे पटनामे एक बेर ‘सगर राति दीप जरय’ कार्यक्रममे मंडल जी, हुनक पुत्र उमेश मंडल जीसँ भेट भेल, हुनक पोथी ‘गामक जिनगी’ भेटल | ‘गामक जिनगी’अद्भुत कथा संग्रह लागल | मंडलजीक कथा सभक संग हुनक परिवारक समर्पण कहैत अछि ‘मैथिली अमर रहतीह’ | ओहि गोष्ठीमे नव-नव कथाकार लोकनिक कथा सुनबाक आनन्द भेटल | ओत’ विशिष्ट पाठक आदरणीय श्यामानंद चौधरीजी भेटलाह जे ‘तोरा अङनामे’ मे प्रकाशित गीत ‘छोटे-मोटे टूटल मड़ैयामे गौरी कोनाक’ रहती हे’क स्मरण केलनि | ओहिठाम तारानन्द ‘वियोगी’जी सेहो भेटलाह | हुनक पोथी ‘तुमि चिर सारथि’ पढने छलहुँ,एकटा गीत मिथिला दर्शनमे पढलहुँ ‘मदना माएकें रहै सिहन्ता खैतहुँ पूरी खीर,मगर मन लगले रह्लै’-से नीक लागल | ओहो बहुत विधामे लिखबाक सामर्थ्य रखैत छथि | उमेश जी ‘सगर राति दीप जरय’क आयोजनक सूचना दैत छलाह,किन्तु ई आयोजन हमरा स्वास्थ्यक अनुकूल नहि लगैत छल,तें आन ठाम कतहु एहि आयोजनमे नहि जा सकलहुँ, मुदा पता रहैत छल जे एहि कार्यक्रमसँ बहुत काज भ’ रहल अछि, खूब लीखल जा रहल अछि,खूब प्रकाशित सेहो भ’ रहल अछि | पटनामे आयोजित मैथिली साहित्य उत्सवक आयोजनमे सेहो कवि गोष्ठीमे शामिल भेलहुँ | ओहि अवसरपर  आदरणीय उदय चन्द्र झा ‘विनोद’जीसँ  बहुत रास कविता सुनवाक सौभाग्य प्राप्त भेल | हुनक कविता-संग्रह ‘अथ उत्तरकथा’क रचना सभ बहुत आकर्षक अछि | हुनक एकटा गीत हमरा नीक लगैत अछि ‘ लोक एके छै सभठाँ अनेक छैक गाम, अहाँ करबै जँ नीक त अबस्स लेत नाम |’ 25.11.2012 क’ आइ एम ए हॉलमे गौरीनाथक उपन्यास ‘दाग’पर विचार गोष्ठी आ नाटक देखलहुँ | विद्यापति भवनमे यात्री जयंती,मधुप जयंती,हरिमोहन झा जयंती,मणिपद्म जयंतीमे भाग लेलहुँ |27.11.2012 क’ मणिपद्मजीपर विचार गोष्ठीमे भाग लेलहुँ |आदरणीय रामानंद झा ‘रमण’जीक समर्पण आकर्षित केलक |हुनका द्वारा संकलित–संपादित बहुत रास पोथी सबहक पता चलल | गांधी संग्रहालय परिसरमे 18अगस्त 2013क’ आ डाक बंगला चौराहा लग ‘झा एसोसिएट्स’मे 4 जनवरी  2014 क’अजित आजादक एकल काव्य पाठ  कार्यक्रममे उपस्थित भेलहुँ |’पेन ड्राइवमे पृथ्वी’ हिनक चर्चित कविता संग्रह अछि | पटनासँ मधुबनी गेलाक बाद हिनक बहुमुखी प्रतिभाक चमत्कार लोक देखि रहल अछि | लेखन,सम्पादन,प्रकाशन,आयोजन आदि सभ दिशामे प्रशंसनीय काज क’ रहल छथि | बहुत बादमे ए.एन कॉलेजक सभागारमे सुकान्त सोमक एकल पाठ सेहो सुनबाक अवसर प्राप्त भेल | ओ एकल पाठ आब हुनक स्मृति भ’गेल | रवीन्द्र नाथ ठाकुर, केदार नाथ चौधरी आ कीर्ति नारायण मिश्रक प्रबोध साहित्य सम्मान समारोहमे उपस्थित भेलहुँ | ‘प्रेमलता मिश्र ‘प्रेम’,कामिनीक लेल ‘आखर’द्वारा आयोजित कार्यक्रम देखलहुँ | श्याम दरिहरे जीक पोथी ‘घुरि आउ मान्या’क विमोचन समारोह देखलहुँ | किछु पोथी सभ पढ़लहुँ |हिनक पोथी ‘बड़की काकी एट हॉट मेल डॉट कॉम’ नीक  कथा-संग्रह अछि | जगदीश प्रसाद मंडल, उषा किरण खान,श्याम दरिहरे,प्रदीप बिहारी,अशोक,शिव शंकर श्रीनिवास,अमरनाथ मिश्रजीक बहुत रास कथा हमरा आकर्षक लागल | मंडल जीक ‘गामक जिनगी’ अशोकजीक  ‘डैडीगाम’, शिवशंकर श्रीनिवासक ‘गुण कथा’,अमरनाथ मिश्र जीक ‘इजोत दिस’,प्रदीप बिहारीक ‘सरोकार’ आदि विलक्षण कथा संग्रह अछि | विद्यापति पर्वक अवसरपर आ आनो अवसरपर मैथिली नाटक देखिक’ आनन्दित भेलहुँ |कुशल रंगकर्मी कुमार गगन और मनोज’मनुज’ आब नहि छथि, हिनका लोकनिक कृतिकें अमरता प्रदान करबाक लेल किशोर केशवक नेतृत्वमे ‘भंगिमा’ द्वारा हिनके सबहक लिखल नाटक ‘सपथ ग्रहण’ आ ‘नदी गोंगियाएल जाय’क  उत्कृष्ट प्रस्तुति द्वारा बहुत स्मरणीय कार्यक्रमक आयोजन 30 आ 31  दिसम्बर 2021 क’ कयल गेल | मैथिली साहित्य उत्सवमे किरण जीक कथा ‘मधुरमनि’ कें लघु फिल्मक रूपमे देखब नीक लागल | विद्यापति भवनमे फिल्म ‘बबितिया’ देखलहुँ जकर बहुत रास काज मधुबनीएमे भेल छै | चेतना समिति द्वारा आयोजित विचार गोष्ठी देखबाक-सुनबाक अवसर भेटल | 8 अगस्त 2015 क’ पटनामे आरम्भ भेल ‘साहित्यिक चौपाड़ि’ कार्यक्रममे दू बेर भाग लेबाक सुअवसर भेटल जाहिमे नव लेखक-कवि सभकें देखबाक-सुनबाक आनन्द प्राप्त भेल,नवलश्री पंकज आ बालमुकुन्दक सम्पादनमे एकटा पोथीक रूपमे सेहो ‘साहित्यिक चौपाड़ि’मे दू बरखक मध्य प्रस्तुत रचना सभकें देखल | नवलश्री पंकज आ बालमुकुन्दक संग सुमित मिश्र गुंजन,पंकज प्रियांशु,श्याम झा,मनीष झा बौआभाइ,आनन्द मोहन झा,अमित पाठक,प्रियंका मिश्र,सुमित झा,अनिमेष मिश्र,रजनीश प्रियदर्शी,सत्यम कुमार झा,विकास वत्सनाभ,नारायण झा,इंद्रकांत लाल,अशोक कुमार दत्त,दयाशंकर मिथिलांचली,मुकुंद मयंक,अखिलेश कुमार झा,घनश्याम घनेरो,अविनाश श्रोत्रिय,सागर नवदिया,रंजीत राज आ और बहुत गोटेक सहभागिता आ सक्रियता नीक भविष्यक सूचना दैत अछि | ‘उपमान’क गोष्ठीमे श्याम दरिहरे, अशोक,प्रदीप बिहारी,अमरनाथ मिश्र आदि कथाकारसँ हुनक बहुत नीक-नीक कथा सभ सुनबाक-गुनबाक लेल अवसर भेटल | विजयनगरमे दरिहरे जीक आवासपर आयोजित गोष्ठीमे अनिल कुमार सिंह जीक गजल सूनल | धीरेन्द्र नाथ झा आ मोहन भारद्वाजजीक आवासपर सेहो गोष्ठीक आयोजन भेल | कोरोनाक कारणे स्थगित ‘उपमान’क  गोष्ठी आब पुनः शुरू भेल अछि आ स्थान विद्यापति भवन भेल अछि | दरिहरेजी नहि छथि मुदा, ‘उपमान’हुनक मधुर स्मृति अछि | जनकपुरसँ प्रकाशित पत्रिका ‘आँजुर’,हैदराबाद-सिकंदराबादसँ प्रकाशित ‘प्रवासी’,पटनासँ ‘भंगिमा’द्वारा प्रकाशित छमाही पत्रिका ‘भंगिमा’ आ पटनासँ प्रकाशित ‘पकठोस’सँ सेहो परिचित भेलहुँ | भावना मिश्र ‘हैप्पी फॉर यू’क माध्यमसँ मैथिलीक सेहो सेवा क’ रहल छथि | हुनकहु द्वारा आयोजित साक्षात्कार कार्यक्रममे शामिल हेबाक अवसर भेटल अछि | दीपा मिश्र सेहो बहुत सक्रिय छथि | पत्रिका ‘वाची’क माध्यमस हिनक मैथिली सेवा आनन्दित करैत अछि | और बहुत गोटेक सक्रियता फेस बुक,यू-ट्यूब आदिपर देखैत छी रंग-विरंगक कार्यक्रमक आयोजनक माध्यमसँ | फेस-बुक पर आदरणीय उदय चन्द्र झा ‘विनोद’जीक समसामयिक रचना प्रतिदिन पढैत आबि रहल छी | बिनोद कुमार झाक नीक-नीक कविता सभ सेहो पढबा लेल उपलब्ध भ’ रहल अछि |किछु माससँ दीपा मिश्रक नीक कविता सभ पढबाक लेल भेटैत अछि | भाइ विजय नाथ झा जी खूब लीखि रहल छथि,हुनकासँ रचना सुनबाक अवसर  भेटैत रहैत अछि | अजय नाथ झा शास्त्री द्वारा पत्रिका ‘मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश’क माध्यमसँ मिथिलाक्षरक प्रचार-प्रसारक अभियान चलैत आबि रहल अछि, अही नामसँ  दैनिक अखबारक प्रकाशन  सेहो गत 26  दिसम्बरसँ  भ रहल अछि | हम साढ़ूक परिवारक सक्रियता सेहो एहि अभियानमे देखि रहल छी | अखबारक पटनाक संस्करण लेल बहुत श्रम क’ रहल छथि प्रमोद बाबू | प्रकाशन आ प्रसारण : हमर रचना सभ इन्टरनेट पत्रिका ‘विदेह’मे  1 जून 2011 ( 83 म) अंकसँ प्रकाशित होमय लागल | ‘मिथिला दर्शन’मे पहिल बेर सितम्बर-अक्टूबर2011मे रचना  प्रकाशित भेल, एहिमे दूटा गीत आ दूटा गजल छपल छल | फेर बादमे किछु और अंकमे गजल प्रकाशित भेल | ’समय-साल’क मइ-जून 2011,  जुलाई-अगस्त2013,सितम्बर-दिसम्बर 2013अंकमे,   ’पूर्वोत्तर मैथिल’,’अंतिका’क अक्टूबर 2011-  मार्च 2012 अंकमे सेहो रचना सभ छपल | ‘सांध्य गोष्ठी’ पत्रिकाक 2012के अंकसँ  रचना सभ प्रकाशित भेल | ‘कर्णामृत’, ‘घर-बाहर’मे सेहो जनवरी-मार्च 2013 अंकमे दूटा गजल प्रकाशित भेल आ तकर बादो समय-समयपर किछु रचना प्रकाशित भेल | ‘एजिंग नेपाल’ द्वारा प्रकाशित काव्य संग्रह ‘पियर आमक अमृत रस’मे दूटा कविता ‘हमर संसार’ आ ‘लत्ती’ प्रकाशित भेल | 2013 मे डा. रामानन्द झा ‘रमण’द्वारा संपादित पोथी ‘मणिपद्म चेतना’मे हमर कविता ‘मणिपद्मक काव्य-संसार  एक झलक’ प्रकाशित भेल | आकाशवाणी,पटनाक मैथिली कार्यक्रम ‘भारती’मे 2012 मे 23 मार्चक’ रिकॉर्डिंग भेल आ सालमे दू बेर ई अवसर प्राप्त होइत रहल | पटना दूरदर्शनमे 21.06.2011  आ   02.01.2014 क’ रिकॉर्डिंग भेल,कार्यक्रमक  प्रसारण क्रमशः 04.07.2011 आ 14.01.2014 क’ भेलै | गीत गंगा : नवम्बर 2013 मे शेखर प्रकाशनसँ 96 पृष्ठक पोथी ‘गीत-गंगा’ प्रकाशित भेल | एहि संकलनकेर  निम्नलिखित गीत सभ शशिकान्त-सुधाकान्तजीक स्वरमे विभिन्न मंचपर प्रस्तुत कएल गेल छल आ लोकप्रिय भेल छल : ‘तीन कोटि मैथिल ताल ठोकिक’ कहैए ई प्रवाह मैथिलीक कियो रोकि ने सकैए |’ ‘सजाउ हे यै बहिना, मैथिलीक प्रतिमा सजाउ’ ‘समधि एला बनि-ठनिक’ धोती-कुरता  पहिरिक’ एला डहकन सून’ बेटाके बियाहमे’ ‘आँखिमे चित्र हो मैथिली केर ह्रदयमे हो माटिक ममता माएक सेवामे जीवन बितादी अछि बस यैह एकटा सिहन्ता |’ ‘पटनाक मजा लीय’ दिल्लीक मजा लीय’ बेकार छी अहाँ त बम्बइक मजा लीय’..... किछु गीत महादेव ठाकुरक स्वरमे कैसेटमे आबि चुकल छल : ‘आउ आइ हम सब हिलि-मिलिक’ माँक उतारी आरती, गाउ जय मिथिला,जयति मैथिली,जय भारत जय भारती |’ ‘नोरेके जिनगी कतेक दिन उघबें एना गे सुगिया कतेक दिन रहबें’ किछु  गीत आदरणीय उदय चन्द्र झा ‘विनोद’ आ विभूति आनन्द द्वारा संपादित पत्रिका ‘माटि-पानि’मे प्रकाशित भेल छल | ‘चल घूमैलय मेला, दुरगाजीके मेला’ ‘आउ बाउ आउ, रूसिक’ ने जाउ.....’ ‘उठ-उठ बौआ भेल परात’ ‘देशज’2001मे ई गीत छपल छल : (1) ‘भरि गाम चोरे त चोर कहू ककरा कोतबालो सैह तखन सोर करू ककरा’ (2) ‘करजेमे जीवें आ करजेमे मरबें एना रे बिल्टू कतेक दिन रह्बें’ ‘मिथिला मिहिर’ मे ई गीत सभ प्रकाशित भेल छल : 26.02.1984 ‘तीन कोटि मैथिल ताल ठोकिक’ कहैए ई प्रवाह मैथिलीक कियो रोकि ने सकैए |’ 20.09.1984 गूर-चाउर मोने-मोने फँकै छी बात लाखो करोड़क करै छी राखि छाती पर हाथ कनी  सोचू अहाँ मैथिलीले’ अहाँ की करै छी | जून 87 पहिल पक्ष ‘नोरेके जिनगी कतेक दिन उघबें एना गे सुगिया कतेक दिन रहबें’ ‘भारती-मंडन’ मे निम्नलिखित गीत सभ प्रकाशित भेल छल : (1) (अंक जुलाइ96–जून97) ‘गोली-बारूदक मौसममे हम कविता केहेन सुनाबी हाल देखि बेहाल भेल छी गीत कोनाक’ गाबी’ ( एहि गीतमे नब्बेक दशकक बिहारक स्थितिक वर्णन छल ) (2) (अंक जुलाइ96–जून97) ‘हम नहि जायब मास करैलय, हम नहि करब उपास अपनहि मन मन्दिर बनि पाबय तकरहि करब प्रयास’ (3) (अंक  5 ) ‘आएल पानि, गेल पानि,बाटहि बिलाएल पानि’ ‘समय-साल’ मइ–जून 2011 मे निम्नलिखित गीत सभ प्रकाशित भेल छल : ( 1 ) ओहिना त मोन धह-धह जरिते रहैत अछि फाटि जाए करेज तेहेन बात नै कहू | (2) पाथरकें भगवान बुझै छी धन्य अहाँ, भगवानक अपमान करै छी धन्य अहाँ | (3) पत्रिका नै किनै छी अखबार नै पढै छी बुझिएक’ हम की करबै समाचार नै सुनै छी | ‘विदेह’मे पोथीक ई गीत सभ प्रकाशित भेल छल : (1) ‘बुच्ची बढती, लिखती-पढ़ती हमरा चिन्ता कथी के ? भाग्य अपन अपनेसँ गढती हमरा चिता कथी के ?’( विदेह मैथिली शिशु उत्सव/विदेह-सदेह 9 ) (2) ‘मम्मी, तों चिन्ता जुनि कर’( विदेह मैथिली शिशु उत्सव/विदेह-सदेह 9 ) (3) हमरहि खातिर सुरुज उगै छथि हमरहि खातिर चान हमरहि खातिर कोटि तरेगन हमरहि ले’ आसमान |( विदेह मैथिली शिशु उत्सव/विदेह-सदेह 9 ) (4) ‘पोखरिमे मखान गामे-गामे दारूके दोकान गामे-गामे’ (1.6.2011) (ओहि समय बिहारमे शराब-बन्दी नहि भेल छल ) (5) भूख अशिक्षा आ अन्हार अछि मिथिलामे गर्म बहुत ब्याहक बजार अछि मिथिलामे | (15.01.2012) निम्नलिखित गीत रायपुरसँ प्रकाशित पत्रिका ‘मिथिलायातन’क दिसम्बर 2005 अंकमे प्रकाशित भेल छल : ‘बनाउ हे यै कनियाँ घ’रेकें मन्दिर बनाउ |’ ‘गीत-गंगा’ संकलनक आदिमे आत्म-गीत देल गेल अछि जे हमरा विषयमे बहुत किछु कहैत अछि | एहि संग्रहक निम्नलिखित सहित किछु  और गीत हमरा नीक लगैत अछि : ‘हम आङन छी अहाँ अरिपन छी’ 16.11 क’ विद्यापति पर्वक अवसरपर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमक मंचपर पोथीक विमोचन भेल | 14 दिसम्बरक’ फ्रेजर रोडमे मैथिली लेखक संघक बैसारमे पोथीपर चर्चा भेल | डा.कमल मोहन चुन्नू पोथी पर समीक्षा-आलेख पढलनि | चर्चामे कथाकार अशोक, सुकान्त सोम,डा.रामानंद झा ‘रमण’,अजित आजाद आ मोहन भारद्वाज आ किछु और साहित्यकार लोकनि  अपन-अपन विचार रखलनि | रमनजीक कहब छलनि जे हमर पहिल पोथी’तोरा अङनामे’क तुलनामे ‘गीत-गंगा’मे गाम कम अछि | सुकान्त सोमक कहब छलनि जे रवीन्द्रजीक गीत सूनिक’ जेना लगैत अछि जे ई मैथिली गीत अछि, से आकर्षणक कम अछि एहि संग्रहक गीत सभमे | अजित आजाद गोष्ठीक संचालन केलनि, आदरणीय मोहन भारद्वाज अध्यक्ष छलाह | अध्यक्षजी मैथिली आन्दोलनक दृष्टिसँ पोथीकें देखबाक विचार रखलनि | डा.कमल मोहन चुन्नू जी एहि संकलनक रचना सबहक किछु दुर्बल पक्षक सेहो चर्च केने छलाह | हम चाहलहुँ जे हुनक आलेख प्रकाशित होइ कोनो पत्रिकामे, आ हम आगाँ रचनामे ओहि दुर्वलतासँ बचबाक ध्यान राखि सकी, परन्तु चुन्नू जीसँ ओ आलेख प्राप्त नहि भ’ सकल | ओहि गोष्ठीमे हम आत्मगीतक किछु भाग प्रस्तुत केने छलहुँ |हमहूँ किछु ‘होम वर्क’क’क’ नहि गेल रही, तें अपन गीत सभक नीक पक्षकें सबहक सोझाँ नहि राखि सकलहुँ | ‘विदेह’मे विशेषांक : ‘विदेह’क 191 म (1.12.2015)अंक जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’ विशेषांक छल | हमर मैथिलीक प्रकाशित तीनू पोथीक पी.डी.एफ.विदेहक साइटपर छल | विशेषांकमे तीनू पोथीपर समालोचना प्रकाशित भेल | ’तोरा अङनामे’क समीक्षक छलाह डा.अजित मिश्र, दीर्घ कविताक पोथी ‘धारक ओइ पार’क समीक्षक छलाह आशीष अनचिन्हार | ‘गीत-गंगा’क समीक्षा डा.अमरनाथ ठाकुर, कामिनी, छत्रानंद सिंह झा, परमानन्द प्रभाकर आ केदार कानन केने छलाह,अरविन्द ठाकुरजीक आलेख सेहो छनि | विशेषांकमे ‘गजल गंगा’क अंतर्गत सरल वार्णिक बहरमे 61 टा आ अरबी बहरमे 20  टा गजल प्रकाशित भेल | एहिपर जगदानंद ‘मनु’जीक समीक्षा सेहो प्रकाशित भेल | बालमुकुन्दजीक आलेख सेहो सम्मिलित छल | अपन सम्पादकीयमे गजेन्द्र ठाकुर सेहो गजल-गंगाक रचना सभ पर सेहो टिप्पणी केने छलाह | हमर जीवनीक रूपमे डा. शशिधर कुमरक आ संस्मरणक रूपमे प्रो. गंगानंद झाजीक आलेख सेहो छल विशेषांकमे | हमर आत्मकथाक किछु अंश, संस्मरण’एकटा छलाह ननू कका’, एकांकी ‘कोराँटी’, आलेख ‘हमर तीर्थ यात्रा गीतसँ गजल धरि’,किछु दोहा आ चतुष्पदी, किछु चिट्ठी आ किछु अप्रकाशित रचना सभ सेहो छल एहि विशेषांकमे | ‘गजल-गंगा’क रचना सभ पर जगदानंद ‘मनु’क समीक्षामे जे त्रुटि सभ देखाओल गेल छल, ओहि सभक निराकरण कय हम संशोधित ‘गजल-गंगा’ ‘विदेह’क बादक अंकमे प्रस्तुत केलहुँ, मुदा ओहो सुधार अंतिम नहि छल | फेस बुकपर : 15 दिसम्बर 2017 सँ  27  मार्च 2018 धरि प्रतिदिन पोस्ट करैत 101 टा गजल आ किछु गीत फेस बुकपर पोस्ट केलहुँ | पाठकीय प्रतिक्रियाकें ध्यानमे रखैत पुनः किछु गजलमे सुधार केलहुँ | यू-ट्युबपर : हमर गीत संग्रह ‘तोरा अङनामे’क  निम्नलिखित गीत सभ यू-ट्युबपर विभिन्न गायक लोकनिक स्वरमे विभिन्न तिथिक’ प्रसारित कयल गेल अछि, तकर संक्षिप्त विवरण देल जा रहल अछि : गीतक नाम                         गायक                  अन्य सूचना मोन होइए अहाकें देखिते रही           (i)सुरेश पंकज (ii)हेमकांत झा बौआ दुनू हाथ जोरि करू माटिकें प्रणाम   सुरेश पंकज भौजी आइ ने छोड़ब                  सुरेश पंकज एवं अन्य ई जुनि पूछू अहाँ बिना            (i)   हरिनाथ झा (ii)    बिजय सिंह तोरा अङनामे वसन्त नेने आएब सजना     राजेश ठाकुर फगुआ आएल,फगुआ गेल               राजेश ठाकुर आधा अंगक मालिक छी अहीं           सुरेश पंकज जुनि कान जुनि कान जुनि कान रे       अशोक चंचल छोटे-मोटे टूटल मड़ैयामे गौरी        (i) मैथिली ठाकुर  गीतकारक नाम अंकित नै केने छथि,सूचना देल गेल छनि | (ii) रजनी पल्लवी गीतकार महाकवि विद्यापति अंकित केने छथि | गीत संग्रह ‘गीत-गंगा’क  निम्नलिखित गीत सेहो यू-ट्युबपर देखल अछि : गीत : समधि एला बनि-ठनिक’ स्वर : अरविन्द कुमार झा ‘कविता कोष’ पर प्रकाशित हिन्दीमे लिखल हमर दस टा गीत- गजल  राजा शर्माक स्वरमे काव्य पाठक रूपमे यू-ट्युबपर अछि | गीत : ‘मैं कभी मन्दिर न जाता’ ‘मालती विचार हो गई’ ‘मैं जगा तो आज सूर्योदय हुआ’ ‘काजल की कोठरी में मैं और मेरे साथ मेरा मन’ ‘मै कहता हूँ चीज पुरानी घर के अन्दर मत रखो’ गजल : हर जगह बस दीनता-ही-दीनता है / एक भिखारी दूसरे से छीनता है अपनी इच्छाओं का ही विस्तार है / जिन्दगी जैसी भी है स्वीकार है कभी ख़ुशी मिली तो कभी गम कहीं मिला/ जो भी मिला किसी से कभी कम नहीं मिला गुल ही गुल है खार नहीं है / ऐसा  तो संसार नहीं है यूं दिल में अरमान बहुत हैं / अक्षत कम भगवान बहुत हैं ई हिन्दी रचना सभ 1993 स 1999के बीच डोमनहिल, चिरिमिरी(मध्य प्रदेश/ छत्तीसगढ़)मे रही, तखने लिखाएल रह्य | पर्यावरण गीत : किशोर केशव जीक सूचनापर वन विभाग द्वारा पर्यावरण गीत-मालाक लेल प्रेषित रचनामे ह्मरहु एकटा मैथिली आ एकटा हिन्दी गीत चुनल गेल, 2014 मे 13  फरबरी आ 17  जूनक’ सी.डी. प्राप्त भेल | अनुवाद कार्य : कन्नड़ भाषाक छओटा संत सभक चौरानवेटा ( 1375-1469) वचनक अनुवाद कार्य हमरा किशोर केशव जीक माध्यमसँ भेटल छल, से पूर्ण कएल | ‘वचन’ नामक संकलनमे विभिन्न कन्नड़ सन्त सभक 2500 वचनक अनुवाद लेल 14 टा मैथिली साहित्यकारमे हमहू शामिल भेलहुँ | अनुवाद कार्य लेल दिल्लीक कर्नाटक भवनमे आयोजित कार्यशालामे भाग लेबाक हेतु पटनासँ किशोर केशव जीक संगे गेल रही, ओत’ उदय नारायण सिंह ‘नचिकेता’,प्रो.देव शंकर नवीन,प्रो.विद्यानंद झा,अरुणाभ सौरभ आ चन्दन कुमार झा भेटलाह | ‘वचन’क मैथिली अनुवादक सम्पादक आदरणीय नचिकेता जी छलाह | मूल कन्नड़ सम्पादक छलाह स्व.डा.एम.एम.कलबुर्गी | बसव शताब्दी(1913-2012) जयंतीक अवसर पर ई कार्य भेल छलै | समीक्षा आ आलोचना : आदरणीय मन्त्रेश्वर झा लिखित ‘चिनवार’ उपन्यासपर कविताक रूपमे समीक्षा लिखलहुँ जे ‘पूर्वोत्तर मैथिल’ पत्रिकामे छपल | चन्दन कुमार झाक काव्य-संकलन ‘धरती सँ अकास धरि’केर समीक्षा सेहो ‘समय-साल’ अथवा कोनो दोसर पत्रिकामे छपल | ‘विदेह’मे प्रकाशित अरविन्द ठाकुर विशेषांक लेल अरविन्द ठाकुर जीक गजल संग्रह ‘बहुरुपिया प्रदेशमे’ पर समीक्षा प्रस्तुत केलहुँ : अरविन्द जीक आजाद गजल | सियाराम झा ‘सरस’जीक गजल संग्रह ‘थोड़े आगि थोड़े पानि’ पर प्रस्तुत केलहुँ : प्रतिबद्ध साहित्यकारक अप्रतिबद्ध गजल | शरदिंदु चौधरीजीक पोथी ‘गोबर गणेश’ आ मधुकान्त झाजीक पोथी ‘क्रान्ति रथी’पर सेहो समीक्षा लिखलहुँ | डा.कमल मोहन चुन्नूजीक गजल संग्रह ‘आबि रहल एक हाहि’ आ एहिपर  आशीष अनचिन्हारजीक आलोचनापर पाठकीय प्रतिक्रिया फेस-बुकपर प्रस्तुत कयल गेल | अरविन्द ठाकुरजीक गजल संग्रह ‘मीन तुलसी पातपर’ आ एहिपर आशीष अनचिन्हारजीक आलोचनापर पाठकीय प्रतिक्रिया सेहो हमरा द्वारा फेस-बुकपर प्रस्तुत कयल गेल अछि | आदरणीय रवीन्द्र नाथ ठाकुर जीक गीतक लेल समीक्षात्मक आलेख ‘भरि नगरीमे सोर’ आ हुनक गजलक पोथी ‘लेखनी एक रंग अनेक’क लेल समीक्षा ‘विदेह’ द्वारा प्रस्तावित ‘रवीन्द्र नाथ ठाकुर विशेषांक’लेल प्रस्तुत कयल गेल अछि | समय-समयपर फेसबुकपर सेहो किछु पोथी सभपर अपन उद्गार प्रगट करैत आएल छी | पटना / 31 मार्च 2022 (क्रमशः) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। रबीन्द्र नारायण मिश्र मातृभूमि (उपन्यास)- दोसर खेप मातृभूमि़ २ नेनामे जयन्त आ शीला संगे-संगे एकहि किलासमे पढ़ैत छलाह। शीलाक पिता बैद मधुकान्त आ जयन्तक पिता हरेकृष्णमे बहुत घनिष्टता रहनि। जयन्तक एक डेग सदिखन बैदजीक आङनेमे रहैत छल। जयन्तकेँ माए नहि रहथिन आ पिता निरंतर पाठशाला चलबएमे लागल रहथि। हुनका समय नहि रहनि जे ओ जयन्तक हाल-चाल लैत रहथि। एहि तरहें जयन्त शीलाक परिवारक अंग जकाँ भए गेल रहथि। मुदा समय पलटी लैत रहैत छैक। ई ओकर स्वभाव छैक। से भेलैक। एक दिन पाठशालामे विद्यार्थी लोकनिकेँ पढ़बैत काल हरेकृष्णकेँ छातीमे जोरसँ दर्द उठलनि । जाबे केओ किछु बुझितए ओ ओतहि धराम दए खसलाह आ सभ दिनक हेतु एहि  दुनिआसँ बिदा भए गेलाह। गाममे सभ हाकरोस करए लागल। सभसँ मोसकिल तँ पाठशालाके विद्यार्थी लोकनिकेँ भेलनि। हुनकर सभक शिक्षा अपूर्ण रहि गेलनि । क्रमशः ओ सभ आन-आन ठाम चलि गेलाह। पाठशाला ठप्प भए गेल। जयन्तक हालचाल लेनिहार केओ नहि रहि गेल। बैदजी ओहि ठाम जएबामे ओकरा कोनादनि लागए लगलैक। जाबे पिता रहथिन आ पाठशाला चलैत रहलैक ताबे हुनका किछु खराप नहि लगलनि मुदा आब कतहु जाएब कोनादनि लागनि। कौलिक मर्यादाक रक्षा करब मोसकिल भए गेलनि। भादवक महिना छलैक। बागमतीमे पानि उमरि रहल छल। जयन्त उदास ओकर कातमे ठाढ़ भेल रहथि। कहि नहि हुनका मोनमे की फुरेलनि? ओ एहन बिकराल समयमे धारमे कुदबाक उपक्रम केलनि। संयोगसँ नाग बाबा ओहिठाम तर्पण कए रहल छलाह। ओ जयन्तक ई अवस्था देखि चिचिआ उठलाह- "बालक ठहरु। जीवन अमुल्य थिक।एकर रक्षा करू।" "हुनकर आबाज सुनि जयन्त ठमकि गेलाह। नाग बाबा हुनका भरि पाँज धेलनि । "अहाँ एना किएक कए रहल छी?" " हमराके अछि? ककरा बले जीब? जीबिए कए करब की?" "अहाँ तँ बहुत संस्कारी बुझाइत छी, फेर एहन बात सभ अहाँक मोनमे किएक आबि रहल अछि? एहि संसारकेँ चलओनिहार परमपिता परमेश्वर छथि। हुनकापर विश्वास राखू। अखन अहाँक बएसे की भेल अछि?" "हम आब एहि गाममे नहि रहब।" "से किएक? अहाँकेँ की कष्ट भेल?" "हमर पिताक देहांत किछु दिन पूर्व भए गेलनि।आब एहि ठाम हम ककरा बले रहू?" "अहाँ हमरा संगे जानकी धाम चलू। हम अहाँक शिक्षाक व्यवस्था करब।तकर बाद अहाँक जे इच्छा होएत से करब।" नागबाबाक बात मानि कए जयन्त हुनका संगे जानकी धाम बिदा भए गेलाह। कै पुस्त पहिने लखनपुरसँ बहुत रास मैथिल सभ जानकीधाम आ लग-पासक गाम सभमे बसि गेल रहथि। ओ सभ निकललाह तँ जीविकोपार्जन हेतु मुदा जतए जे गेलाह ओही ठाम बसि गेलाह । तथापि गाम-घरसँ हुनका लोकनिक संपर्क बनले रहल । बिआह अखनहुँ ओ सभ अपने समाजमे करैथ छथि ।एहने छल कालीकान्तक परिवार । जीविकोपार्जन हेतु ओ सभ सपरिवार गामसँ निकललाह। भाग्य संग देलकनि। थोड़बे दिनमे हुनकर स्थिति बदलि गेल। कालक्रममे ओ सभ जानकीधाममे बहुत समृद्ध भए गेलाह । कालीकान्त आ हुनकर परिवारक बासा सौंदर्य, सुविधा आ वैभवमे ओ एकटा राजमहले छल। ओकरा त्रिकुट भवनक नामसँ जानल जाइत छल। जेहने बनाबट, तेहने सजाबट। अपना ओहिठामक लोक केओ हुनका लगसँ  खाली नहि जाइत छल। जे संभव होनि से अवश्य करथि। परोपकारी स्वभावक कारण प्रवासी लोकनिमे हुनकर बहुत प्रतिष्ठ़ा छल। कोनो अवसर होइत, कालीकान्त जरूर बजाओल जाथि। हुनकर पत्नीक नाम गौरी छलनि । ओ लखनपुरसँ सटले महिपुर गामक छलीह । ओमहर बैदजीक ओहिठाम जयन्तक बाट तकैत-तकैत सभ परेसान भए गेलथि। भोरसँ दुपहरिआ भए गेल। जयन्त नहि अएलाह तँ शीलाकेँ बहुत चिंता भेलनि। "जयन्त बागमतीमे कुदि गेल।"-शीला अपन पिताकेँ कहलखिन। से कोना बुझैत छही?"- बैदजी पुछलखिन। "ओ बेर-बेर सएह कहैत रहैत छल।' "की?" "जे हम धारमे कुदि जाएब। आब नहि जीब।हमरा के देखत?" “तँ तूँ हमरा पहिने किएक नहि कहलैँ?" बैदजी किछु गोटेकेँ संग कए बागमतीक घाट पहुँचलाह। रस्तामे केओ-केओ कहलकनि - "भोरे जयन्त ओमहरे जाइत छलाह। " "ओ बहुत उदास लागि रहल छलाह।" "हुनका फेर घुरैत नहि देखलिअनि।” तरह-तरहक बात लोक सभ कए रहल छल। सभकेँ बात सुनि बैदजीक सक गहींर भए गेलनि। गामक किछु लोकसभ संयोगसँ ताबे ओतए आबि गेल रहथि। ओ सभ अपना भरि बहुत प्रयास केलनि। मुदा जयन्तक कतहु पता नहि चललनि। ओहीमे सँ केओ मलाह सभकेँ बजओने अएलाह। ओ सभ महाजाल फेकलथि आ घण्टों प्रयास करैत रहलाह । मुदा किछु पता नहि चललनि। एकबेर तँ बड़काटा माछ जालमे फँसि गेल। मलाह सभकेँ भेलनि जे जयन्ते छथि। बहुत सावधानीसँ जालकेँ बाहर खिचलनि। मुदा जखन जाल बाहर आएल तँ बेस पैघ माछ छल। सौंसे गाम हाकरोस करैत रहि गेल मुदा जयन्तक किछु पता नहि चलल। शीला कनैत-कनैत बेहाल छलि। मुदा के ओ की करैत? लोक सभकेँ ई नहि बुझेलैक जे आखिर जयन्त एहन बिकराल समयमे वागमतीमे किएक कुदि गेलाह? गौंवा सभ जयन्तक बचबाक कोनो आशा नहि देखि निराश रहथि। नहि बुझानि जे  आब की करथि? कोनो रस्ता नहि देखि ओ सभ गाममे नवाह शुरु कए देलाह। लोकसभ कीर्तन करएमे व्यस्त भए गेल। समय आगा बढ़ल। एक-दिन,दू-दिन,तीन-दिन भेल। कतहुँसँ किछु समाचार नहि आएल। एहि प्रकारें नवाहक आठम दिन भए गेल। काल्हि भेने नवाह समाप्त भए जाएत। प्रात भेने नवाह समाप्त भए रहल छल। विसर्जनक बिधि चलि रहल छल।ताबतेमे हकासल-पिआसल एकटा ग्रामीण ओहिठाम पहुँचलाह। ओ जानकीधामसँ लौटि रहल छलाह। "जयन्त भेटि गेलाह।" सब अकचका गेल। "फेरसँ कहिओक की बात छैक?" 'जयन्त भेटि गेलाह ।" “कतए भेटलखिन, केना भेटलखिन से किछु कहिए नहि रहल छी, खाली भेटि गेलाह, भेटि गेलाह बकने जा रहल छी।"- एकटा गौंवा तमसा क बजलाह। "एना नहि तमसाइ। हुनका अपन बात कहए देल जाए। अपने कहताह जे केना की भेलैक।"-दोसर गौंव ाबजलाह। "अहाँ हुनका कतए देखलिअनि?" "जानकी धाममे नागबाबाक संगे जाइत देखलिअनि।" "ओहिठाम ओ कोना पहुँचलाह?" "संयोगसँ नागबाबा बागमतीमे तर्पण करैत काल हुनका देखलखिन। " "तखन?" "तखन की? हुनक ानागबाब ाअपना संगे लेने चलि गेलखिन।" "एकर माने जयन्त जीवित छथि?" "ओ पूर्ण स्वस्थ छथि ।" "तँ हुनका गाम किएक नहि लेने अएलहुँ?" "ओ गाम अएबाक हेतु किन्नहु तैयार नहि भेलथि।" ई बात सुनि गौंवा सभ बहुत उदास भए गेलाह। जतबे सुख हुनकर बँचि गेलासँ भेलनि ताहिसँ बेसी दुख एहि बातसँ भेलनि जे ओ गाम नहि अएलाह?" ई संसार चमत्कारसँ भरल अछि। कहबी छैक जे'राखनहारा साइयाँ, मारि सकहि नहि कोई' सएह बात एहि ठाम भेल छल। जयन्त बँचि जेताह आ हुनका जीबित हेबाक समाचार भेटत से गाममे ककरो आशा नहि रहैक। नवाह जरूर लोक ठनने छल मुदा तकर परिणतिमे एहन सुखद समाचारक आशा नहि रहैक। कमसँ कम ओ जीवित तँ छथि। आइ ने काल्हि गामक सुधि हेबे करतनि। गाम लौटबे करताह।गौंवा सभ बाजए। नागबाबा जयन्तकेँ लेने जानकीधाम अपन आश्रम पहुँचि गेलाह। हुनकर आश्रमक प्राकृतिक शोभा अवर्णनीय छल। तरह-तरहलफल-फूलसँ सुसज्जित बाग चारूकात अनुपम शोभा केने छल। ओही ठाम एकदिस जड़ी-बुटीक किआरी छल। औषधीय गुणसँ परिपूर्ण ओहि जड़ी-बुटीक चर्च इलाका भरिमे होइत छल। केओ-केओ तँ इहो कहैत छल जे लक्षमणकेँ मेघनाथक शक्तिबाणसँ बचओनिहार लक्षमण बुटी सेहो ओहिठाम छल।तेँ ने कतए-कतएसँ लोक नागबाबाक शरणमे अबैत छल। आश्रममे हुनकर उचित सेवा भेल जाहिसँ ओ शीघ्रे समान्य भए गेलाह। गप्प-सप्पक क्रममे नागबाबा जयन्तकेँ पुछलखिन- "अहाँ एना धारमे किएक कुदैत छलहुँ?" "पिताक देहावसानक बाद हमरा अनकापर आश्रित होएब नीक नहि लागए। सोचलहुँ जे एहि जीवनसँ मरण नीक।" "अहाँ नान्हिटा बालक छी। अहाँक रक्षा करब समाजक कर्तव ्यथिक। अहाँ सन प्रतिभा संपन्न लोकक जीवन एना व्यर्थ नहि जएबाक चाही। तेँ नियति अहाँकेँ बँचा लेलथि। आब की विचार अछि?" "जे अपने आज्ञा दी। अपने हमर जीवन रक्षा केलहुँ अछि तेँ अहाँक हमर जीवनपर पूर्ण अधिकार अछि।" "एहनो कतहु भेलैक अछि?केओ ककरो जीवन देनिहार नहि भए सकैत अछि। ई तँ विधिक विधान छल जे अहाँक निमित्ते हमरा ठाढ़ कएल गेल। हमरा हिसाबसँ अहाँकेँ अपन प्रतिभाक अनुकूल शिक्षा ग्रहण करबाक चाही। तकर बादक रस्ता स्वयं प्रशस्त भए जाएत।“ "जे आज्ञा।" प्रात भेने नागबाबा जयन्तकेँ लेने शारदाकुंज पहुँचलाह। (अनुवर्तते) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। डॉ. किशन कारीगर मैथिलीमे रचना चोरीक विकट समस्या आ समाधान मिथिला मैथिली स जुड़ल लोक सब एक नम्बर धूर्त,दलाल आ रचना चोर प्रवृति के होइए. इ कटु सत्य स्वीकारह पड़त. कुकृत्य क अहाँ सब कते दिन चोरनुकबा खेला खेलैत अप्पन कुकृत्यक झांप तोप करैत रहब? जसौती कमेबा दुआरे अहाँ मिथिला मैथिली के आयोजक प्रकाशक सलाहकार आदी बनल साहित्य अकादमी वला पुरूस्कारी आयोजनी वेबिनार मलाई खा ढेकरैत फिरै जाई छी से कते दिन छजत? पब्लिक अहाँ के कुकृत्य बुझि गेल यै आ कतेको बेर अोई साहित्यिक दलाल सबहक देखार चिन्हार भेल. तइयो लाजे कथिक निरलज्ज भेल चुपेचाप रचना चोरी क जसौती कमाई लै सबटा अपकर्म कुकर्म करैत रहै जाउ. धूर छिया. रचना चोरी समस्या के कारण:- 1. मैथिली के अधिकांश पत्र पत्रिका साहित्यिक गिरोहक अधिन त्रैमासिक छमाही द्वैमासिक रूपे बहराइत रहलै. जेकर पब्लिक तक कोनो पहुँच नै रहलै. 2. कोनो नीक रचना के चोरा के अपना नामे प्रकाशित क लेब. रचना पठौनिहार वा पब्लिक तक नै पत्रिका पहुँचै देबै आ नै रचना चोरी के दोख लागत. 3. रचना पठौनिहार के कोनो माध्यम स सूचित नै करब जे ओक्कर रचना प्राप्त भेलै प्रकाशित अप्रकाशित? आखिर की भेलै? 4. कोनो अपरिचित वा आन गिरोहक वा स्वतंत्र लेखक के मौलिक रचना के सद्य: वा की पैरोडी तोइड़ मरोईड़ के अपना नामे प्रकाशित करबाक ठकहर प्रवृति. 5. रचना चोर के देखार भेला पर ओकर सामूहिक प्रयास नै क ओई चोरबा चोरनी के गैंगवार बचेबाक प्रयास आ कुकृत्यक झांप तोप क मैथिली मे अहिना होइत एलैए वला राग अलापब. 6. काॅपीराईट अधिनियम के जानकारी नै राखब वा संपदाकीय मनमाना फार्मूला पर चलब. जे के की हमरा कए लेत? 7. रचना चोरी सिद्ध भेलाक बादो ओई रचना चोर सबके मंच देब आ अप्पन गिरोहबादी ठेकदारी के फिराक मे रहब. समाधान:- 1. रचना चोरी करनिहार पुरूष स्त्री जे कोई होऊ तेकर साहित्यिक बहिष्कार आ काॅपीराईट अधिनियम के दुआरा ठोस जुर्माना लगेबाक चाही. 2. रचनाकार के अहि बात के सूचना मेल वा लिखित वाट्सएप माध्यमे सूचना अबस्से दी जे ओकर रचना प्राप्त  भेलै तकरा बाद प्रकाशित अप्रकाशित की भेलै. 3. काॅपीराईट अधिनियम के मानब आ जानकारी राखि निष्पक्ष प्रकाशक संपादक व्यवस्था के मजबूती स लागू करब. 4. अहाँ संपादक प्रकाशक के धर्म निरवाह करैत रचना मौलिकता के जाँच वा मौलिक रचना संग छेड़छाड़ करबाक प्रयास अबस्से करी. 5. मौलिक रचना प्रकाशन लेखन प्रोत्साहन दिस सामूहिक प्रयास मे भागिदार बनि रचना चोरी के रोकै मे सहयोग अबस्से करी. -डाॅ किशन कारीगर (मूल नाम- डाॅ कृष्ण कुमार राय) ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। मुन्नाजी- बीहनि कथा उपरौंज रे रोहित ,तोहर एडमिशन भेलौ ? हं शशांक,भ' गेल,आ किताब से हो कीना गेल। कोन स्कूल में लिखेलौ नाम ?-शशांक पूछलक सर्वोदय बाल विद्यालय मे।-रोहित बाजल। ऐं, सरकारी स्कूल मे।गेलौ तोहर पढ़ाई।किताब देखा तं ? रौ रोहितवा,सभटा त' उएह किताब छौ,जे हमर ऐछ।माने NCERTक रौ शशांक,हमर भइया सब किछु बुझल- गमल मे नाम ओत' लिखेलखिन्ह।भइया आ दीदी सेहो अही स्कूल में पढ़ने छथिन। पढ़िए के की सब नेहाल सनाथ केलखुन सेहो कह ने ? भइया ,सरकारी बैंक में कैशियर छथिन आ दीदी बी. टेक करै छै। हमरा कहलनि-"मोन लगा के पढ़,तोरा हम सब अपना सं उपर ल' जेबौ।" ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। संतोष कुमार राय 'बटोही' बकरी संस्कृति (व्यंग्य रचना) गाम मे बकरी पोसनैक चलन बढ़ि रहल अछि। जिनका बथान दिस नजर जाएत एकटा-दूटा बकरी जरूत भेटत। बकरी पोसनै सिहंता सेहो लगैत छै। ओनs भैं , ओनs में ..में..। सृष्टि दोसर के दलान पर बकरी देखि कs हबोडकार भsकs कानल कि माए हमरो बकरी किन दे। बकरी पोसवाक लेल सरकार लोन दैत छै। गरीब लोकनि लोन लेवा सँ कतरैत छथि। डर होएत छन्हि - लोन नहि चुकौला सँ घर केँ कुर्की जब्त भs जाएत।  लोन तँ बैंक मैनेजर आओर हुनकर रिश्तेदार , अरोसिया-परोसिया केँ भेटैत छै।  बैंक मे दौड़ लागाबैत थाकि जाएब, तबो नहि लोन भेटत। लोन अमीर केँ भेटैत छै जेना अंबानी केँ। बकरी केँ मूत खरैन-खरैन मँहकैत रहैत छै। ओकर नेरी बड़ि पैघ खादक काज करैत छै। भाँटा केँ जड़ि मे दियौ , तs भाँटा बड़ि फड़त।  बकरी पालनैक देखौंस लागि रहल छै। बकरीक दूध डेंगू/चिकेन गुइयाँ  आओर करोना केँ इलाज मे सरिपौंह कारगर होएत छै , की ? जनमौटी बच्चा केँ माएक दूध सँ पहिने बकरी केँ दूध देल जाएत छलैक। आब इहो संस्कृति बन्न भs रहल अछि। बकरी केँ खून सँ दवा सेहो बनैत छै। बकरा के गुर्दा नीक होएत छै। मौगी जाति केँ खून केँ कमी रहला पर बकरा के कलेजी खेबाक लेल डागडर कहैत छथिन्ह। बकरा केँ 'लेग' पीस नीक मानल जाएत छै। बकरा केँँ तेल नीक मानल जाएत छै। बकरा केँ मुड़ी और गोड़ नीक मानल जाएत छै। एकटा गप्प पर बहस छिड़ल छै कि 'गायक संस्कृति' नीक होएत छै कि 'बकरी संस्कृति' ?  गाय आओर माए दुनू केँ स्थान सर्वोपरि मानल गेल छै। गाय केँ सेवा केला सँ स्वर्ग केँँ द्वार खुलल रहैत छै  माए केँ सेवा केला सँ स्वर्ग केँ द्वार खुलि जाएत छै। 'गो सेवा' सँ पुत्र रत्न के प्राप्ति होएत छै। ' कामधेनु' केँ चरचा खूब होएत छै। गाय केर संस्कृति केँ सोझा करैत प्रेमचंद ' गोदान' लिखि देलथिन्ह। साहित्य मे गाय पर ढेर राशि लिखल गेल छै। बकरी पर लिखै सँ रचनाकार डरैत छथि। बकरी समाज केँ छोट तबका केँ प्रतीक छियैय। सभ किछु करू, परञ्च बकरी नहि पोसू ! बलि प्रदानक परथा अखनो धरि अछि। आश्विन मास मे माँ भगवती केँ अँड़िया छागड़ केँ बलि देल जैत छन्हि। ओइ कटनिहार केँ साहस देखियौ जे ओ पाँच-पाँच सै छागड़ एक दिन मे काटि दैत छथिन्ह दारू पी केँ। ओकरा पाप नहि होएत छै। क्याक तँ ओ भगवती केँ खुश रखवा लेल इ कट्टा-पिट्टी केँ काज करैत छथि। ओइ कटनिहार केँ समाज मे बेसी सम्मान छन्हि। कलियुग इएहा छियैय ! कहल जाएत छै हुनका पर भगवती स्वयं सवार रहैत छथिन्ह। जखन भगवती हुनका पर सवार रहैत छथिन्ह, तँ ओ दारू क्याक पिबैत छथि ? बिना दारू पिने कहियौन्ह हुनका छागड़ काटै लेल। बकरी लेल गाम, टोल आओर परिवार मे कलह बढ़ि रहल अछि। परिवार मे अइ गप्प लके झगड़ा रहैत छै जे बकरी के चराउत। सभ धिया-पुता कहतै अछि - ''हम नहि... तँ... हम नहि।''  बड घर मे कुत्ता पालल जाएत छै। कुत्ता लेल माँस अबैत छै। स्पेशल आहारक बेवस्था केल जाएत छै। शैम्पू आओर स्पेशल साबून सँ नहौल जाएत छै, सेंट मारल जाएत छै। कुत्ता बेड पर सुतैत अछि। कुत्ता हवाई सफर करैत अछि। परञ्च बकरी अपन भाग्य केँँ कोसैत अछि। बकरी पोसला सँ हाथ गरम होएत छै, परञ्च जिनकर जजात खा लैत छै, ओ 'पुतखौकी  बकरीवाली' रूप मे आशीरबाद पबैत छथि। गाछक निमन-निमन पत्ता खैत अछि बकरी। गेहूँ, चना, मकई , गुल्लरिक पत्ता, शिरीठक लौजा पत्ता, जामुनक लौजा पत्ता बकरी के निक लगैत छै। बकरी केँ दाम अनमोल छै। 'बकरीद' पर कुर्बानी लेल लाखों रुपइया मे बकरी केँ पुत बकरा केँ किनल जाएत छै। आइ-काल्हि मिथिला मे मट्टन केँ चलन ब्याह मे बढ़ि गेल छै। बराती केँ अगबे बुट्टी चाही। कतेक बेर बुट्टी नहि पचल तँ अदरस भs गेल। ढेकार आओर मैदान जाएत-जाएत बराती फिरिशान भs जाएत छथि, परञ्च अगिला बराती मे जेबाक लेल फेर ताल ठोकि दैत छथिन्ह। मिथिला पोखरिक माछक लेल जानल जाएत छल, परञ्च आब ' मट्टन' लेल जानल जाएत। शिव चरचा बढ़ि गेलैक , तैओ मैथिल माँसाहारी पर जोर देने छथि। मिथिला मे पोथी-पतरा बचनिहार लोकनि मट्टन पर बेसी चोट करैत छथिन्ह। बकरी संस्कृति केँ कियो कतबो निन्दा क्याक नहि करतुहुन, परञ्च ओ नहि बदलतै। समाजक किछु लोकनि बकरी सँ आगाँ किछु नहि सोचैत छथि। मिथिला केँ लेल दुर्भाग्य अछि, जे ओ पछुएल छथि। पूरा भारत मे गायक गोंत, गोबर वगैरह केँ महत्त्वक  चरता भs रहल छै। गोबरक महादेव बनाउल जा रहल छै। सरिपहुँ मैथिल अइ मामला मे पिछड़ल छथि। परिवार आओर समाज केँ पिछड़ै केँ पाँछा ' बकरी संस्कृति' छै। धिया-पुता केँ इस्कूल नहि भेज कs बकरी चरवाहाक डिग्री देनै कुनो भी कीमत पर उचित नहि छै। ज्ञान आओर समझ केँ अभावक कारणे बकरी संस्कृति बढ़ि रहल छै। बकरी पालनै गलत नहि छियैय। खयाल रखवाक छै जे बेटा-बेटी मे बकरी संस्कृतिक संस्कार नहि चलि जै। निक बनेनिहार लोकनि कम छै। दारू पिया कs बकरी जकाँ हुलुल-हुलुल नहि करवाक चाही। पढ़ने-लिखनै क्याक जरूरी छै, इ लोक बुझि जेतै, तँ सभ अपना धिया-पुता केँ जरूर इस्कूल भेजतै। बकरी जरूर पोसू। अर्थ रहतै तँ सभ किछु भs सकैए। ताहि लेल बकरी चराबैत रहु आओर पाठशाला सँ ज्ञान लेल सेहो जाऊ। ज्ञान भेला पर अपन कर्त्तव्य करबा मे आसान रहैत छै। अपन अधिकार केँ सेहो धिया-पुता बुझि जाएत छै। बकरी केँ संस्कृत शब्द रूप - ' अजा अजौ अजा: '.रटैत इस्कूल सँ एकटा विद्यार्थी निछोह गाम दिस कॉपी-किताब लकs परायल जाएत छै, क्याक तँ ओकर माए कहने छै जे दु घंटी पढ़ि कs इस्कूल सँ आबि जहिंए बकरी माठ पर , सिमराहा मे चराबै लेल। बकरी नहि चरेबीहि तँ खेबही की ; बाप तँ मरि गेलौ कलकत्ता ओगरने ! -संतोष कुमार राय. ग्राम - मंगरौना ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३. पद्य ३.१.डाॅ किशन कारीगर- प्रकृति के बसाबह डाॅ किशन कारीगर प्रकृति के बसाबह हौ कंक्रीटक महल अटारी मे चूर तूं सब प्रकृति के नै उजारह? हौ सब मिल गाछ बिरिछ लगाबह आबह उजरल प्रकृति के हरियर क बसाबह. गाछ बिरिछ खेत पथार पोखैर इनार सबटा तोरे बेगरता पर काज औतह. चहचह करैत चिड़ै चुनमुन आ चरैत माल जाल देखहक प्रकृति रूप सोहाबन केहेन कमाल. प्रकृति संग मनुक्खो के जिनगी सोहनगर हेतै आबह प्रकृति पर्यावरण के सब मिलि बचाबह देखहक कतेक खुशियार हेतह जिनगी हौ सब मिल गाछ बिरिछ लगाबह. गलवोल वार्मिंग स तबाह भ रहलै मनुक्खक जिनगी तइयो आधुनिकता के चक्करफांस मे प्रकृति के नै उजारह हौ आबो सचेत भऽ जाई जाह महातबाही स बंचअह आबह उजरल प्रकृति के हरियर कचोर क बसाबह -डाॅ किशन कारीगर (मूल नाम- डाॅ कृष्ण कुमार राय) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ४.स्त्री कोना ४.१.कल्पना झा- कोइली रे कल्पना झा कोइली रे कोइली रे एना कियै तूं, मिठगर बोल बाजय छै, भेल सकाल कू कू क , सगरे शोर करय छै, मह मह करैत गाछी, आ डारि डारि फुदिकय छै, कोन गाम सं तूं अयलै , आ कतय ठाम रखने छै, तोहर बोली क भाषा नय बुझी, कानि रहल कि हंसय छै, कारी झामैस रुप तोहर छव, बोली कते मधूर बजय छै, उठु उठु हे धिया बहिन सब, माय सनेश पठौलक, कू  कू करैत हम बटोही, हम त नेहक गीत गाबय छी, जो जो कोइली एना कियै तूं, हमरा मोन पाड़य छै, नैहर भेल अछि कोसों दूर, आ तूं बटगबनी गाबय छै, हमर बोली आबो नय चिन्हलवं, हम अहिंक बाल सखी छी, मोन हमर कोइली बनी उड़ल, हम सब विधना क रचल छी। -कल्पना झा, बोकारो, झारखंड अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ....................................................................................................................... संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल  मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] Videha e-Learning पेटार (रिसोर्स सेन्टर) शब्द-व्याकरण-इतिहास MAITHILI IDIOMS & PHRASES मैथिली मुहावरा एवम् लोकोक्ति प्रकाश- रमाकान्त मिश्र मिहिर (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) डॉ. ललिता झा- मैथिलीक भोजन सम्बन्धी शब्दावली (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) मैथिली शब्द संचय MAITHILI DICTIONARY- RAMDEO JHA (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) ENGLISH MAITHILI COMPUTER DICTIONARY MAITHILI ENGLISH DICTIONARY अणिमा सिंह -Shishu_Geet_Khel_Anima_Singh डॉ. रमण झा मैथिली काव्यमे अलङ्कार    अलङ्कार-भास्कर आनन्द मिश्र (सौजन्य श्री रमानन्द झा "रमण")- मिथिला भाषाक सुबोध व्याकरण BHOLALAL DAS मैथिली सुबोध व्याकरण- भोला लाल दास राधाकृष्ण चौधरी- A Survey of Maithili Literature ........................................................................................................................ मूलपाठ तिरहुता लिपिक उद्भव ओ विकास (यू.पी.एस.सी. सिलेबस) राजेश्वर झा- मिथिलाक्षरक उद्भव ओ विकास (मैथिली साहित्य संस्थान आर्काइव) Surendra Jha Suman दत्त-वती (मूल)- श्री सुरेन्द्र झा सुमन (यू.पी.एस.सी. सिलेबस) प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) CIIL SITE ........................................................................................................................ समीक्षा सुभाष चन्द्र यादव-राजकमल चौधरी: मोनोग्राफ शिव कुमार झा "टिल्लू" अंशु-समालोचना डॉ बचेश्वर झा- B_JHA_Nibhand_Nikunj.pdf डॉ. देवशंकर नवीन- Adhunik_Sahityak_Paridrishya डॉ. रमण झा- भिन्न-अभिन्न प्रेमशंकर सिंह- मैथिली भाषा साहित्य:बीसम शताब्दी (आलोचना) डॉ. रमानन्द झा 'रमण' हिआओल अखियासल     CIIL SITE दुर्गानन्द मण्डल-चक्षु RAMDEO JHA दत्त-वतीक वस्तु कौशल- डॊ. श्रीरामदेवझा SHAILENDRA MOHAN JHA परिचय निचय- डॊ शैलेन्द्र मोहन झा ........................................................................................................................ अतिरिक्त पाठ पहिने मिथिला मैथिलीक सामान्य जानकारी लेल एहि पोथी केँ पढ़ू:- राधाकृष्ण चौधरी- मिथिलाक इतिहास फेर एहि मनलग्गू फाइल सभकेँ सेहो पढ़ू:- केदारनाथ चौधरी चमेलीरानी                         माहुर                          करार कुमार पवन पइठ (मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ कथा) (साभार अंतिका)       डायरीक खाली पन्ना (साभार अंतिका) याेगेन्द्र पाठक वियाेगी- विज्ञानक बतकही रामलोचन ठाकुर- मैथिली लोककथा SAHITYA AKADEMI http://sahitya-akademi.gov.in/publications/e-books.jsp http://sahitya-akademi.gov.in/general/Digitalbooks.jsp CIIL http://corpora.ciil.org/maisam.htm अखियासल (रमानन्द झा रमण) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI1.pdf जुआयल कनकनी- महेन्द्र http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI2.pdf प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI3.pdf सृजन केर दीप पर्व- सं केदार कानन आ अरविन्द ठाकुर http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI4.pdf मैथिली गद्य संग्रह- सं शैलेन्द्र मोहन झा http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI5.pdf JNU http://sanskrit.jnu.ac.in/maithili/index.jsp http://sanskrit.jnu.ac.in/student_projects/lexicon.jsp?lexicon=maithili ARCHIVE.ORG https://archive.org/details/%40vijay_deo_jha?&sort=-publicdate&page=2 VIDEHA MAITHILI BOOKS/ PICTURE-AUDIO-VIDEO ARCHIVE http://videha.co.in/new_page_15.htm https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ ALL INDIA RADIO DOORDARSHAN आकाशवाणी दूरदर्शन http://prasarbharati.gov.in/ 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https://mithiladarshan.com/ (online pdf of Maithili journal) I LOVE MITHILA https://www.ilovemithila.com/  (online maithili journal) मैथिली साहित्य संस्थान https://www.maithilisahityasansthan.org/ https://www.maithilisahityasansthan.org/resources (online pdf of Reasearch Papers/ books) ........................................................................................................................ VIDEHA e-LEARNING YOUTUBE CHANNEL https://www.youtube.com/channel/UC4abVKqMj2pDWIAkXiOHp7A विदेहक किछु विशेषांक:- १) हाइकू विशेषांक १२ म अंक, १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf          Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf       12.pdf २) गजल विशेषांक २१ म अंक,  १ नवम्बर २००८ Videha_01_11_2008.pdf       Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf         21.pdf ३) विहनि कथा विशेषांक ६७ म अंक, १ अक्टूबर २०१० Videha_01_10_2010        Videha_01_10_2010_Tirhuta             67 ४) बाल साहित्य विशेषांक ७० म अंक, १५ नवम्बर २०१० Videha_15_11_2010        Videha_15_11_2010_Tirhuta             70 ५) नाटक विशेषांक ७२ म अंक १५ दिसम्बर२०१० Videha_15_12_2010        Videha_15_12_2010_Tirhuta           72 ६) नारी विशेषांक ७७म अंक ०१ मार्च २०११ Videha_01_03_2011        Videha_01_03_2011_Tirhuta           77 ७) अनुवाद विशेषांक (गद्य-पद्य भारती) ९७म अंक Videha_01_01_2012 Videha_01_01_2012_Tirhuta           97 ८) बाल गजल विशेषांक विदेहक अंक १११ म अंक, १ अगस्त २०१२ Videha_01_08_2012        Videha_01_08_2012_Tirhuta           111 ९) भक्ति गजल विशेषांक १२६ म अंक, १५ मार्च २०१३ Videha_15_03_2013        Videha_15_03_2013_Tirhuta           126 १०) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक १४२ म, अंक १५ नवम्बर २०१३ Videha_15_11_2013        Videha_15_11_2013_Tirhuta           142 ११) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 १२) अरविन्द ठाकुर विशेषांक १८९ म अंक १ नवम्बर २०१५ Videha_01_11_2015 १३) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक १९१ म अंक १ दिसम्बर २०१५ Videha_01_12_2015 १४) विदेह सम्मान विशेषा‍क- २००म अ‍क १५ अप्रैल २०१६/ २०५ म अ‍क १ जुलाई २०१६ Videha_15_04_2016 Videha_01_07_2016 १५) मैथिली सी.डी./ अल्बम गीत संगीत विशेषांक- २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ Videha_01_01_2017 १६) मैथिली वेब पत्रकारिता विशेषांक VIDEHA 313 लेखकसं आमंत्रित रचनापर आम‍ंत्रित आलोचकक टिप्पणीक शृंखला १७) मैथिली बीहनि कथा विशेषांक-२ VIDEHA 317 १८) रामलोचन ठाकुर विशेषांक VIDEHA 319 १९) रामलोचन ठाकुर श्रद्धांजलि विशेषांक VIDEHA 320 २०) राजनन्दन लाल दास विशेषांक VIDEHA 333 लेखकक आमंत्रित रचना आ ओइपर आमंत्रित समीक्षकक समीक्षा सीरीज १. कामिनीक पांच टा कविता आ ओइपर मधुकान्त झाक टिप्पणी विदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016 "पाठक हमर पोथी किए पढ़थि"- लेखक द्वारा अप्पन पोथी/ रचनाक समीक्षा सीरीज १. आशीष अनचिन्हार 'विदेह' क ३२७ म अंक ०१ अगस्त २०२१ एडिटर्स चोइस सीरीज एडिटर्स चोइस सीरीज-१ विदेहक १२३ म (०१ फरबरी २०१३) अंकमे बलात्कारपर मैथिलीमे पहिल कविता प्रकाशित भेल छल। ई दिसम्बर २०१२ क दिल्लीक निर्भया बलात्कार काण्डक बादक समय छल। ओना ई अनूदित रचना छल, तेलुगुमे पसुपुलेटी गीताक एहि कविताक हिन्दी अनुवाद केने छलीह आर. शांता सुन्दरी आ हिन्दीसँ मैथिली अनुवाद केने छलाह विनीत उत्पल। हमर जानकारीमे एहिसँ बेशी सिहराबैबला कविता कोनो भाषामे नहि रचल गेल अछि। सात सालक बादो ई समस्या ओहने अछि। ई कविता सभकेँ पढ़बाक चाही, खास कऽ सभ बेटीक बापकेँ, सभ बहिनक भाएकेँ आ सभ पत्नीक पतिकेँ। आ विचारबाक चाही जे हम सभ अपना बच्चा सभ लेल केहन समाज बनेने छी। एडिटर्स चोइस सीरीज-१ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-२ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच ब्रेस्ट कैसरक समस्यापर विदेह मे मीना झा केर एकटा लघु कथा प्रकाशित भेल। ई मैथिलीक पहिल कथा छल जे ब्रेस्ट कैसर पर लिखल गेल। हिन्दीमे सेहो ताधरि एहि विषयपर कथा नहि लिखल गेल छल, कारण एहि कथाक ई-प्रकाशित भेलाक १-२ सालक बाद हिन्दीमे दू गोटेमे घोंघाउज भऽ रहल छल कि पहिल हम आकि हम, मुदा दुनूक तिथि मैथिलीक कथाक परवर्ती छल। बादमे ई विदेह लघु कथामे सेहो संकलित भेल। एडिटर्स चोइस सीरीज-२ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-३ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिलक किछु बाल कविता प्रकाशित भेल। बादमे हुनकर ३ टा बाल कविता विदेह शिशु उत्सवमे संकलित भेल जाहिमे २ टा कविता बेबी चाइल्डपर छल। पढ़ू ई तीनू कविता, बादक दुनू बेबी चाइल्डपर लिखल कविता पढ़बे टा करू से आग्रह। एडिटर्स चोइस सीरीज-३ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-४ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच जगदानन्द झा मनुक एकटा दीर्घ बाल कथा कहि लिअ बा उपन्यास प्रकाशित भेल, नाम छल चोनहा। बादमे ई रचना विदेह शिशु उत्सवमे संकलित भेल, ई रचना बाल मनोविज्ञानपर आधारित मैथिलीक पहिल रचना छी, मैथिली बाल साहित्य कोना लिखी तकर ट्रेनिंग कोर्समे एहि उपन्यासकेँ राखल जेबाक चाही। कोना मॊडर्न उपन्यास आगाँ बढ़ै छै, स्टेप बाइ स्टेप आ सेहो बाल उपन्यास। पढ़बे टा करू से आग्रह। एडिटर्स चोइस सीरीज-४ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-५ एडिटर्स चोइस ५ मे मैथिलीक "उसने कहा था" माने कुमार पवनक दीर्घकथा "पइठ" (साभार अंतिका) । हिन्दीक पाठक, जे "उसने कहा था" पढ़ने हेता, केँ बुझल छन्हि जे कोना अहि कथाकेँ रचि चन्द्रधर शर्मा ’गुलेरी’ अमर भऽ गेलाह। हम चर्चा कऽ रहल छी, कुमार पवनक "पइठ" दीर्घकथाक। एकरा पढ़लाक बाद अहाँकेँ एकटा विचित्र, सुखद आ मोन हौल करैबला अनुभव भेटत, जे सेक्सपीरिअन ट्रेजेडी सँ मिलितो लागत आ फराको। मुदा एहि रचनाकेँ पढ़लाक बाद तामस, घृणा सभपर नियंत्रणकेँ आ सामाजिक/ पारिवारिक दायित्वकेँ सेहो अहाँ आर गंभीरतासँ लेबै, से धरि पक्का अछि। मुदा एकर एकटा शर्त अछि जे एकरा समै निकालि कऽ एक्के उखड़ाहामे पढ़ि जाइ। एडिटर्स चोइस सीरीज-५ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-६ जगदीश प्रसाद मण्डलक लघुकथा "बिसाँढ़": १९४२-४३ क अकालमे बंगालमे १५ लाख लोक मुइला, मुदा अमर्त्य सेन लिखैत छथि जे हुनकर कोनो सर-सम्बन्धी एहि अकालमे नहि मरलन्हि। मिथिलोमे अकाल आएल १९६७ ई. मे आ इन्दिरा गाँधी जखन एहि क्षेत्र अएली तँ हुनका देखाओल गेल जे कोना मुसहर जातिक लोक बिसाँढ़ खा कऽ एहि अकालकेँ जीति लेलन्हि। मैथिलीमे लेखनक एकभगाह स्थिति विदेहक आगमनसँ पहिने छल। मैथिलीक लेखक लोकनि सेहो अमर्त्य सेन जेकाँ ओहि महाविभीषिकासँ प्रभावित नहि छला आ तेँ बिसाँढ़पर कथा नहि लिखि सकला। जगदीश प्रसाद मण्डल एहिपर कथा लिखलन्हि जे प्रकाशित भेल चेतना समितिक पत्रिकामे, मुदा कार्यकारी सम्पादक द्वारा वर्तनी परिवर्तनक कारण ओ मैथिलीमे नहि वरण् अवहट्ठमे लिखल बुझा पड़ल, आ ओतेक प्रभावी नहि भऽ सकल कारण विषय रहै खाँटी आ वर्तनी कृत्रिम। से एकर पुनः ई-प्रकाशन अपन असली रूपमे भेल विदेहमे आ ई संकलित भेल "गामक जिनगी" लघुकथा संग्रहमे। एहि पोथीपर जगदीश प्रसाद मण्डलकेँ टैगोर लिटरेचर अवार्ड भेटलनि। जगदीश प्रसाद मण्डलक लेखनी मैथिली कथाधाराकेँ एकभगाह हेबासँ बचा लेलक, आ मैथिलीक समानान्तर इतिहासमे मैथिली साहित्यकेँ दू कालखण्डमे बाँटि कऽ पढ़ए जाए लागल- जगदीश प्रसाद मण्डलसँ पूर्व आ जगदीश प्रसाद मण्डल आगमनक बाद। तँ प्रस्तुत अछि लघुकथा बिसाँढ़- अपन सुच्चा स्वरूपमे। एडिटर्स चोइस सीरीज-६ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-७ मैथिलीक पहिल आ एकमात्र दलित आत्मकथा: सन्दीप कुमार साफी। सन्दीप कुमार साफीक दलित आत्मकथा जे अहाँकेँ अपन लघु आकाराक अछैत हिलोड़ि देत आ अहाँक ई स्थिति कऽ देत जे समानान्तर मैथिली साहित्य कतबो पढ़ू अहाँकेँ अछौं नहि होयत। ई आत्मकथा विदेहमे ई-प्रकाशित भेलाक बाद लेखकक पोथी "बैशाखमे दलानपर"मे संकलित भेल आ ई मैथिलीक अखन धरिक एकमात्र दलित आत्मकथा थिक। तँ प्रस्तुत अछि मैथिलीक पहिल दलित आत्मकथा: सन्दीप कुमार साफीक कलमसँ। एडिटर्स चोइस सीरीज-७  (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-८ नेना भुटकाकेँ रातिमे सुनेबा लेल किछु लोककथा (विदेह पेटारसँ)। एडिटर्स चोइस सीरीज-८ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-९ मैथिली गजलपर परिचर्चा (विदेह पेटारसँ)। एडिटर्स चोइस सीरीज-९ (डाउनलोड लिंक) जगदीश प्रसाद मण्डल जीक ६५ टा पोथीक नव संस्करण विदेहक २३३ सँ २५० धरिक अंकमे धारावाहिक प्रकाशन  नीचाँक लिंकपर पढ़ू:- Videha_15_05_2018 Videha_01_05_2018 Videha_15_04_2018 Videha_01_04_2018 Videha_15_03_2018 Videha_01_03_2018 Videha_15_02_2018 Videha_01_02_2018 Videha_15_01_2018 Videha_01_01_2018 Videha_15_12_2017 Videha_01_12_2017 Videha_15_11_2017 Videha_01_11_2017 Videha_15_10_2017 Videha_01_10_2017 Videha_15_09_2017 Videha_01_09_2017 विदेह ई-पत्रिकाक  बीछल रचनाक संग- मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ रचनाक एकटा समानान्तर संकलन: विदेह: सदेह: १ (२००८-०९) देवनागरी विदेह: सदेह: १ (२००८-०९) तिरहुता विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) देवनागरी विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) तिरहुता विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०)देवनागरी विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०) तिरहुता विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०)देवनागरी विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०) तिरहुता विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]देवनागरी विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]  तिरहुता विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]- दोसर संस्करण देवनागरी विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ]देवनागरी विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ] तिरहुता विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ]देवनागरी विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ]  तिरहुता विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ]देवनागरी विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ] तिरहुता विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ]देवनागरी विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ] तिरहुता विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ]देवनागरी विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ] तिरहुता विदेह:सदेह ११ विदेह:सदेह १२ विदेह:सदेह १३ The readers of English translations of Maithili Novel "sahasrabadhani" and verse collection "sahasrabdik chaupar par" has intimated that the English translation has not been able to grasp the nuances of original Maithili. Therefore the Author has started translating his Maithili works in English himself. After these translations are complete these would be the official translations authorised by the Author of the original works.-Editor Maithili Books can be downloaded from: https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ विदेह सम्मान: सम्मान-सूची (समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार सहित) सूचना/ घोषणा "विदेह सम्मान" समानान्तर साहित्य अकदेमी पुरस्कारक नामसँ प्रचलित अछि। "समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार" (मैथिली), जे साहित्य अकादेमीक मैथिली विभागक गएर सांवैधानिक काजक विरोधमे शुरु कएल छल, लेल अनुशंसा आमन्त्रित अछि। अनुशंसा २०१९ आ २०२० बर्ख लेल निम्न कोटि सभमे आमन्त्रित अछि: १) फेलो २)मूल पुरस्कार ३)बाल-साहित्य ४)युवा पुरस्कार आ ५) अनुवाद पुरस्कार। पुरस्कारक सभ क्राइटेरिया साहित्य अकादेमी, दिल्लीक समानान्तर पुरस्कारक समक्ष रहत, जे एहि लिंक sahitya-akademi.gov.in पर उपलब्ध अछि। अपन अनुशंसा editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम्: VIDEHA: AN IDEA FACTORY (c)२००४-२०२२. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHAसम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: डॉ उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम वि‍लास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक -स्त्री कोना- इरा मल्लिक। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि)editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि। एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै, आ से हानि-लाभ रहित आधारपर छै आ तैँ ऐ लेल कोनो रॊयल्टीक/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै। तेँ रॉयल्टीक/ पारिश्रमिकक इच्छुक विदेहसँ नै जुड़थि, से आग्रह। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत।  एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-2022 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। ५ जुलाई २००४ केँ http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA वि  दे  ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् 'विदेह' ३४३ म अंक ०१ अप्रैल २०२२ (वर्ष १५ मास १७२ अंक ३४३) विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA ISSN 2229-547X VIDEHA

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