'विदेह' ३४६ म अंक १५ मई २०२२ (वर्ष १५ मास १७३ अंक ३४६) ऐ अंकमे अछि:- १. गजेन्द्र ठाकुर- संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल सेहो] [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] [FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI ALSO] २. गद्य २.१.गजेन्द्र ठाकुर- "विकीपीडिया"मे मैथिलीकबाद मैथिली "गूगल ट्रान्सलेट"मे सेहो.. अगिला लक्ष्य "अमेजन अलेक्सा" २.२.रबीन्द्र नारायण मिश्र- मातृभूमि (उपन्यास)- ५म खेप २.३.गढ़-नारिकेल उपन्यास-त्रयीक पहिल उपन्यास "सहस्रशीर्षा" क बाद दोसर उपन्यास- गजेन्द्र ठाकुर "द ........ फाइल्स"- (पहिल खेप) ३. पद्य ३.१.प्रदीप पुष्प- २ टा रुबाइ आ २ टा गजल ३.२.आशीष अनचिन्हार- भक्ति गजल ४.स्त्री कोना ४.१.कुमुद "अनुन्जया"- सुक्खा सिम्मड़ कत्तै जोगलो जाय Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Books/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाउ। VIDEHA ARCHIVE विदेह पेटार View Videha googlegroups (since July 2008) view Videha Facebook Official Group (since January 2008)- for announcements १. गजेन्द्र ठाकुर Videha e-Learning ........................................................................................................................ [संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री] ........................................................................................................................ [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल सेहो] [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] [FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI ALSO] ........................................................................................................................ [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल/ FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI] NTA_UGC_NET_MAITHILI_01 NTA_UGC_NET_MAITHILI_02 NTA_UGC_NET_MAITHILI_03 (श्री शम्भु कुमार सिंह द्वारा संकलित) ........................................................................................................................ यू. पी. एस. सी. (मेन्स) २०२० ऑप्शनल: मैथिली साहित्य विषयक टेस्ट सीरीज यू.पी.एस.सी. क प्रिलिमिनरी परीक्षा २०२० सम्पन्न भऽ गेल अछि। जे परीक्षार्थी एहि परीक्षामे उत्तीर्ण करताह आ जँ मेन्समे हुनकर ऑप्शनल विषय मैथिली साहित्य हेतन्हि तँ ओ एहि टेस्ट-सीरीजमे सम्मिलित भऽ सकैत छथि। टेस्ट सीरीजक प्रारम्भ प्रिलिम्सक रिजल्टक तत्काल बाद होयत। टेस्ट-सीरीजक उत्तर विद्यार्थी स्कैन कऽ editorial.staff.videha@gmail.com पर पठा सकैत छथि, जँ मेलसँ पठेबामे असोकर्ज होइन्हि तँ ओ हमर ह्वाट्सएप नम्बर 9560960721 पर सेहो प्रश्नोत्तर पठा सकैत छथि। संगमे ओ अपन प्रिलिम्सक एडमिट कार्डक स्कैन कएल कॉपी सेहो वेरीफिकेशन लेल पठाबथि। परीक्षामे सभ प्रश्नक उत्तर नहि देमय पड़ैत छैक मुदा जँ टेस्ट सीरीजमे विद्यार्थी सभ प्रश्नक उत्तर देताह तँ हुनका लेल श्रेयस्कर रहतन्हि। विदेहक सभ स्कीम जेकाँ ईहो पूर्णतः निःशुल्क अछि।- गजेन्द्र ठाकुर संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सर्विसेज (मुख्य) परीक्षा, २०२० मैथिली (ऐच्छिक) लेल टेस्ट सीरीज/ प्रश्न-पत्र- १ आ २ TEST SERIES-1 TEST SERIES-2 ........................................................................................................................ MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) UPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS BPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. (ऐच्छिक) मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. (अनिवार्य) मैथिली प्रश्नपत्र- बी.पी.एस.सी.(ऐच्छिक) ........................................................................................................................ मैथिलीक वर्तनी १ मैथिलीक वर्तनी- विदेह मैथिली मानक भाषा आ मैथिली भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम भाषापाक २ मैथिलीक वर्तनीमे पर्याप्त विविधता अछि। मुदा प्रश्नपत्र देखला उत्तर एकर वर्तनी इग्नू BMAF001 सँ प्रेरित बुझाइत अछि, से एकर एकरा एक उखड़ाहामे उनटा-पुनटा दियौ, ततबे धरि पर्याप्त अछि। यू.पी.एस.सी. क मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेल सेहो ई पर्याप्त अछि, से जे विद्यार्थी मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेने छथि से एकर एकटा आर फास्ट-रीडिंग दोसर-उखड़ाहामे करथि| IGNOU इग्नू BMAF-001 ........................................................................................................................ MAITHILI (OPTIONAL) TOPIC 1 [Place of Maithili in Indo-European Language Family/ Origin and development of Maithili language (Sanskrit, Prakrit, Avhatt, Maithili) भारोपीय भाषा परिवार मध्य मैथिलीक स्थान/ मैथिली भाषाक उद्भव ओ विकास (संस्कृत, प्राकृत, अवहट्ट, मैथिली)] TOPIC 2 (Criticism- Different Literary Forms in Modern Era/ test of critical ability of the candidates) TOPIC 3 (ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददास सिलेबसमे छथि आ रसमय कवि चतुर चतुरभुज विद्यापति कालीन कवि छथि। एतय समीक्षा शृंखलाक प्रारम्भ करबासँ पूर्व चारू गोटेक शब्दावली नव शब्दक पर्याय संग देल जा रहल अछि। नव आ पुरान शब्दावलीक ज्ञानसँ ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददासक प्रश्नोत्तरमे धार आओत, संगहि शब्दकोष बढ़लासँ खाँटी मैथिलीमे प्रश्नोत्तर लिखबामे धाख आस्ते-आस्ते खतम होयत, लेखनीमे प्रवाह आयत आ सुच्चा भावक अभिव्यक्ति भय सकत।) TOPIC 4 (बद्रीनाथ झा शब्दावली आ मिथिलाक कृषि-मत्स्य शब्दावली) TOPIC 5 (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोरिक गाथामे समाज ओ संस्कृति) TOPIC 6 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- विद्यापति) TOPIC 7 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- पद्य समीक्षा- बानगी) TOPIC 8 (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोक गाथा नृत्य नाटक संगीत) TOPIC 9 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- यात्री) TOPIC 10 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली रामायण) TOPIC 11 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली उपन्यास) TOPIC 12 (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- शब्द विचार) TOPIC 13 (तिरहुता लिपिक उद्भव ओ विकास) TOPIC 14 (आधुनिक नाटकमे चित्रित निर्धनताक समस्या- शम्भु कुमार सिंह)् TOPIC 15 (स्वातंत्र्योत्तर मैथिली कथामे सामाजिक समरसता- अरुण कुमार सिंह) TOPIC 16 (यू. पी.एस.सी. मैथिली प्रथम पत्रक परीक्षार्थी हेतु उपयोगी संकलन, मैथिलीक प्रमुख उपभाषाक क्षेत्र आ ओकर प्रमुख विशेषता, मैथिली साहित्यक आदिकाल, मैथिली साहित्यक काल-निर्धारण- शम्भु कुमार सिंह) TOPIC 17 (मैथिली आ दोसर पुबरिया भाषाक बीचमे सम्बन्ध (बांग्ला, असमिया आ ओड़िया) [यू.पी.एस.सी. सिलेबस, पत्र-१, भाग-“ए”, क्रम-५]) TOPIC 18 [मैथिली आ हिन्दी/ बांग्ला/ भोजपुरी/ मगही/ संथाली- बिहार लोक सेवा आयोग (बी.पी.एस.सी.) केर सिविल सेवा परीक्षाक मैथिली (ऐच्छिक) विषय लेल] ........................................................................................................................ GENERAL STUDIES (PRELIMINARY & MAINS) GS (Pre) TOPIC 1 GS (Mains) NCERT-ENVIRONMENT CLASS XI-XII NCERT PDF I-XII TN BOARD PDF I-XII ALL INDIA RADIO ENGLISH NEWS ALL INDIA RADIO NEWS ARCHIVE ALL INDIA RADIO TALKS AND CURRENT AFFAIRS RAJYA SABHA TV NEWS DISCUSSIONS SANSAD TV ........................................................................................................................ OTHER OPTIONALS IGNOU eGYANKOSH ........................................................................................................................ -गजेन्द्र ठाकुर २. गद्य २.१.गजेन्द्र ठाकुर- "विकीपीडिया"मे मैथिलीकबाद मैथिली "गूगल ट्रान्सलेट"मे सेहो.. अगिला लक्ष्य "अमेजन अलेक्सा" २.२.रबीन्द्र नारायण मिश्र- मातृभूमि (उपन्यास)- ५म खेप २.३.गढ़-नारिकेल उपन्यास-त्रयीक पहिल उपन्यास "सहस्रशीर्षा" क बाद दोसर उपन्यास- गजेन्द्र ठाकुर "द ........ फाइल्स"- (पहिल खेप) गजेन्द्र ठाकुर "विकीपीडिया"मे मैथिलीकबाद मैथिली "गूगल ट्रान्सलेट"मे सेहो.. अगिला लक्ष्य "अमेजन अलेक्सा" गूगल ट्रान्सलेट गूगल ट्रान्सलेटक लिंक https://translate.google.com/?sl=en&tl=mai&op=translate गूगल ट्रान्सलेटकेँ आर पुष्ट करबाक खगता छै तइ लेल अगिला काज अढ़ा रहल छी: https://translate.google.com/about/contribute/ प्रारम्भ: विकीपीडिया ०१ फरबरी २००८ लिंक https://books.google.co.in/books?id=VC-BD5Ad6z4C&lpg=PA1&pg=PA1#v=onepage&q&f=false (मैथिली देवनागरी) https://books.google.co.in/books?id=cTezCU59bJwC&lpg=PP1&pg=PP1#v=onepage&q&f=false (मैथिली तिरहुता) https://books.google.co.in/books?id=3zKudz6wAO8C&lpg=PP1&pg=PP1#v=onepage&q&f=false (मैथिली ब्रेल) गूगल ट्रन्सलेट २३ जून २०११क लिंक https://www.facebook.com/groups/videha/permalink/138489416229195/ गूगल ट्रांसलेशन टूलमे "बिहारी" भाषाक बदलामे मैथिली लेल अलग ट्रांसलेशन टूल बनेबाक आवेदन विदेहक सदस्यगण द्वारा देल गेल अछि। अपन योगदान गूगल ट्रांसलेट लेल करू, आ कएल सम्पादन बदलबा काल कारण मे (अंग्रेजीमे) "बिहारी" नाम्ना कोनो भाषा नै हेबाक चर्चा करू। ऐ लिंकपर अनुवाद करू; गूगल एकाउंटसँ लॉग इन केलाक बाद । http://www.google.com/transconsole/giyl/chooseProject http://www.google.com/transconsole/giyl/chooseActivity?project=gws&langcode=bh (links closed) विकीपीडिया मैथिली लिंक विदेह (पत्रिका) https://mai.wikipedia.org/s/kgv इन्टरनेटक संसारमे मैथिली भाषा https://mai.wikipedia.org/s/s6h भालसरिक गाछ https://mai.wikipedia.org/s/ipm विदेह https://mai.wikipedia.org/s/ie1 विदेहक फेसबुक भर्सन https://mai.wikipedia.org/s/iu1 विदेह सम्मान https://mai.wikipedia.org/s/jc2 विदेह आर्काइभ https://mai.wikipedia.org/s/jc0 विदेह मिथिला रत्न https://mai.wikipedia.org/s/jc3 विदेह मिथिलाक खोज https://mai.wikipedia.org/s/jc4 विदेह सूचना संपर्क अन्वेषण https://mai.wikipedia.org/s/jc5 श्रुति प्रकाशन https://mai.wikipedia.org/s/iu7 अनचिन्हार आखर https://mai.wikipedia.org/s/ion मैथिली गजल https://mai.wikipedia.org/s/idz मैथिली बाल गजल https://mai.wikipedia.org/s/iex मैथिली भक्ति गजल https://mai.wikipedia.org/s/if1 http://translatewiki.net/wiki/Project:Translator http://meta.wikimedia.org/wiki/Requests_for_new_languages/Wikipedia_Maithili http://translatewiki.net/wiki/Special:Translate?task=untranslated&group=core-mostused&limit=2000&language=mai http://incubator.wikimedia.org/wiki/Wp/mai http://translatewiki.net/wiki/MediaWiki:Mainpage/mai अंतिम पाँचू साइट विकी मैथिली प्रोजेक्टक अछि। एहि लिंक सभ पर जा कय प्रोजेक्टकेँ आगाँ बढ़ाऊ। (links closed) अमेजन अलेक्सा मैथिली (शीघ्र....) "विकीपीडिया"मे मैथिलीकबाद मैथिली "गूगल ट्रान्सलेट"मे सेहो.. अगिला लक्ष्य "अमेजन अलेक्सा" विदेहक तेसर अंकमे (०१ फरबरी २००८) जे खुशखबरी पाठक लोकनिकेँ मैथिली विकीपीडियाकसम्बन्धमे देल गेल छल तकर सुखद परिणति कएक साल पहिने भेटल छल। मैथिली गूगल ट्रान्सलेटक सम्बन्धमे विदेहक फेसबुक पृष्ठपर २०११ मे देल गेल तकर सुखद परिणति ११ मई २०२२ केँ भेटल। मैथिली अमेजन अलेक्साक सेहो आरम्भ शीघ्रे हएत। (लिंक-स्क्रीनचित्र नीचाँ देल जा रहल अछि।) https://books.google.co.in/books?id=VC-BD5Ad6z4C&lpg=PA1&pg=PA2#v=onepage&q&f=false https://www.facebook.com/groups/videha/permalink/138489416229195/ ओहि समयमे विदेह सम्पादक मण्डलमे ई लोकनि रहथि: सह-सम्पादक: उमेश मंडल । सहायक सम्पादक: शिव कुमार झा आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण) । भाषा सम्पादन: नागेन्द्रकुमार झा आ पञ्जीकार विद्यानन्द झा । कला-सम्पादन: वनीता कुमारी आ रश्मि रेखा सिन्हा । सम्पादक-शोध-अन्वेषण: डॉ. जया वर्मा आ डॉ. राजीव कुमार बर्मा । सम्पादका नाटक-रंगमंच-चलचित्र: बेचन ठाकुर। सम्पादक सूचना-सम्पर्क-समाद: पूनम मंडल अ प्रियंका झा। सम्पादक अनुवाद विभाग: विनीत उत्पल । स्पष्ट अछि जे "सम्पादक अनुवाद विभाग" विनीत उत्पल (आब असिस्टेन्ट प्रोफेसर, आइ.आइ.एम.सी. जम्मू) क विशेष सहयोग रहल, आशीष अनचिन्हार सम्पादक मण्डल मे नहियो रहला उत्तर कोनो सम्पादकसँ कम काज नै करैत छथि। मैथिलीेक पाठक वर्ग सेहो अपन यथाशक्ति योगदान देलनि। https://books.google.co.in/books?id=zmIugpjpOKYC&lpg=PA1&pg=PA600#v=onepage&q&f=false https://books.google.co.in/books?id=-U04e5FfnTEC&lpg=PA1&pg=PA405#v=onepage&q&f=false गूगल ट्रान्सलेटकेँ आर पुष्ट करबाक खगता छै तइ लेल अगिला काज अढ़ा रहल छी: https://translate.google.com/about/contribute/
गूगल ट्रान्सलेट कार्यक्रम देखू https://youtu.be/nP-nMZpLM1A Google Translate:04:45to06:25 (24 new languages at 06:00) Detailed Description Tune in to find out about how we're furthering our mission to organize the world’s information and make it universally accessible and useful. To watch this keynote with American Sign Language (ASL) interpretation, please click here: https://youtu.be/PeUXBvRExic 0:00 Opening Film 1:47 Introduction, Sundar Pichai 6:21 Knowledge 15:45 Knowledge&Search 27:15 Skin Tone Equity 32:00 Computing 33:08 Assistant 43:34 Computing: AI Test Kitchen 53:08 Safer with Google 1:04:38 Safer Way to Search 1:11:20 Android: Opening 1:45:45 Android: Wear OS&Tablet 1:25:32 Android: Better Together 1:31:22 Hardware: Opening 1:33:22 Hardware: Pixel Phone&Buds 1:45:44 Hardware: Ambient&Beyond the Phone 1:54:32 Augmented Reality&Close अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। रबीन्द्र नारायण मिश्र मातृभूमि (उपन्यास)- ५म खेप मातृभूमि़ ५ जयन्तक प्रतिभाक चर्चा त्रिकुट भवनमे होइते रहैत छल। कालीकान्त स्वयं हुनकासँ बहुत प्रभावित रहथि। शास्त्रक ज्ञानक संगे हुनका संगीतमे सेहो महारत छल। हुनकर स्वरसँ तँ लगैत छल जेना भगवती स्वयं प्रकट भए रहल छथि। सरस्वती पूजा दिन कालीकान्तक पाँजरमे बैसल हुनकर कन्या चंद्रिका तँ हुनकर गीत सुनि मंत्रमुग्ध भए गेल छलीह। तकर बाद संगीत सिखबाक बहाने चंद्रिका नित्य जयन्तलग पहुँचि जाइत छली। कालीकान्तकेँ सेहो एहिमे कोनो आपत्ति नहि रहनि अपितु हुनका सहमतिएसँ ओ शारदाकुंज आबि जयन्तसँ संगीत विद्या सिखैत छलीह। ई क्रम बहुत दिन धरि चलैत रहल । नित्य प्रतिक संपर्कसँ जयन्तक प्रति चंद्रिकाक आकर्षण बढ़ैत गेलनि। आचार्यजीकेँ तँ एहि बातक जानकारी रहनि मुद ाहुनका जयन्तपर पूर्ण विश्वास रहनि। ओ जनैत छलाह जे जयन्त सिद्धांतक पक्का छथि आ मर्यादाक प्रतिकूल किछु नहि करताह। कालांतरमे जयन्तकेँ चंद्रिका त्रिकुट भवन सेहो बजाबए लगलीह। जयन्तकेँ ई पसिन्न नहि पड़नि मुदा हठात मनो नहि कए पाबथि। भादवक मास छल । नदीमे बाढ़ि आबि गेल छल । लग-पास जेम्हरे देखू पानिए-पानि देखाइत छल । एहनो समयमे जयन्त ओतए नित्य साँझमे पहुँचि जाइत छलाह । एकसरमे मनन-चिंतन करैत छलाह । ओहूदिन जयन्त चंद्रिकाकेँ संगीत शिक्षा दए धारक कात बिदा रहथि। चंद्रिकाकेँ त्रिकुट भवन लए जएबाक हेतु कार तैयार छल। मुदा ओ जयन्तक संगे जएबाक हेत ुअड़ि गेलीह। "समय साल ठीक नहि छैक। नदीमे बाढ़ि से आएल अछि। एहन परिस्थितिमे अहाँक एमहर-ओमहर गेनाइ ठीक नहि होएत।"- जयन्त कहलखिन। "मुदा हमरा तँ अहाँसँ फराक हेबाक मोने नहि करैत अछि।" "ई कोनो नीक लक्षण नहि अछि। कहीं अहाँ परेसानीमे ने पड़ि जाइ। जँ अहाँक पिताक कान धरि ई बात सभ गेलनि तँ गेल घर छी। अहाँक तँ किछु नहि बिगड़त मुदा हमर तँ सत्यानाशे भए जाएत?" "अहाँ सदरि काल एहने गप्प किएक करैत रहैत छी?हुनका सभ बात बूझल छनि। हुनका इहो बूझल छनि जे हम अहाँसँ प्रेम करैत छी।" "ई तँ बड़ अनर्थ भेल। अहाँकेँ एहि बात सभक प्रचार नहि करक छल। एहिसँ अहाँकेँ सामाजिक अप्रतिष्ठा भए सकैत अछि।" "हम सभ किछु गलत करितहुँ तखन ने? अहाँक उज्ज्वल चरित्रपर जानकी धामक कण-कणकेँ विश्वास छैक।" "मुदा तकर माने की? लोकलाजो कोनो चीज होइत अछि। फेर हम अहाँक ेँकतेक दिन धरि संग दए सकैत छी? "एना नहि बाजू जयन्त। अहाँकेँ साइत नहि पता अछि जे अहाँ कतेक संपन्न छी। हमर पिता तँ एक इसारापर अहाँकेँ हेतु सभ किछु करबाक हेतु प्रस्तुत छथि, ओ निरंतर अहाँक बारेमे पुछैत रहैत छथि। आग्रह करैत रहैत छथि जे अहाँक सुख-सुविधाक ध्यान राखल जाए।" "मुदा अहाँकेँ ई नहि बिसरबाक चाही जे हम एहिठाम विद्याध्ययन हेतु आएल छी। हमर शोधप्रवंधक काज अंतिम चरणमे अछि आ एहन हालतमे हमरा अपनध्यानकेँ केन्द्रित राखब बहुत जरूरी अछि।" "अहाँ हमरा ठकबाक प्रयास नहि करू। हम नीकसँ जनैत छी जे केओ अहाँक ध्यानकेँ बिचलित नहि कए सकैत अछि। अहाँ स्वय ंसेहो नहि।" "एतेक प्रशंसा सुनि कए हम तँ आओर चिंतामे पड़ि गेल छी।" दुनू गोटे गप्पमे तल्लीन छलाह। ओमहर सूर्यास्त कखन भेल सेहो हुनका सभकेँ पता नहि चललनि। एही बीचमे चंद्रिकाक पैर ससरि कए साँपक बिहरि पर पड़ि गेलनि। ओ चिचिआ उठलीह- "लगैत अछि किछ ुकाटि लेलक। " दहिना पैरक औंठा लगसँ खून बलबला कए निकलि रहल छल। जाबे-जाबे जयन्त किछु बुझितथि ताबे चंद्रिका ठामहि खसि पड़लीह। जयन्त चिचिआ उठलाह - "दौड़ै जाउ। जुलुम भए गेल।चंद्रिकाकेँ साँप काटि लेलकनि। लग-पासमे कतहु केओ नहि छल। बरखा से भए रहल छल। रहि-रहि कए मेघ आपसमे टकराइत भयानक गर्जना करैत छल। बिजलौंकाक प्रकाशमे फटकीमे नागबाबा देखेलखिन। हुनका देखितहि जयन्त जोर-जोरसँ चिकरए लगलाह- "जुलुम भए गेल। चंद्रिकाकेँ साँप काटि लेलकनि।।' जयन्तक चिकरब सुनि नागबाबा सावधान भेलाह। "ई तँ जयन्तक आबाज बुझा रहल अछि। मुदा एहन बिकराल समयमे ओ एतए की कए रहल छथि?"-से सभ सोचैत नागबाबा ओतए पहुँचलाह। ताबे कालीकान्तक दूटा आदमी सेहो चंद्रिकाकेँ तकैत ओहिठाम पहुँचल। नागबाबा चंद्रिकाकेँ देखितहि बजैत छथि- "एकर बाँचब मोसकिल अछि। लगैत अछि नाग डसि लेलकनि अछि।" "किछु तँ करिऔक नागबाबा।" "हिनका नागपर्वत स्थित हमरकुटीमे लेने चलू। ओतहि किछु भए सकैत अछि।" नागबाबाक बात सुनि जयन्त माथ पकड़ि कए बैसि गेलाह। "बेसी सोच-बिचार करबाक समय नहि अछि। चंद्रिका लग बहुत कम समय छनि। विलंब केलासँ हिनका बँचब मोसकिल भए जाएत। तेँ हुनका शीघ्रे नाग पर्वत पर लए चलू। हमहु ओतहि चलैतछी।"- नागबाबा बजलाह। (अनुवर्तते) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। गढ़-नारिकेल उपन्यास-त्रयीक पहिल उपन्यास "सहस्रशीर्षा" क बाद दोसर उपन्यास गजेन्द्र ठाकुर द ........ फाइल्स (पहिल खेप) १ हमर नाम छी……….. आ गाम “गढ़ नारिकेल” शुक्र दिन ऑफिससँ दस बजे रातिमे घुरलहुँ तँ डेरा पहुँचिते बेटी स्वागत केलक। बुझा गेल जे रूसल अछि। पुछलिऐ की भेल तँ ओ मोन पाड़लक जे अझुका सिनेमा देखबाक प्रोग्राम छलै। हमर एहि जवाबपर कि देरी भऽ गेल अछि, थाकल छी ओ सोफापर मुँह घुमा कऽ बैसि गेल आ कथुक उत्तरे नै दिअए। कनियाँकेँ कहलियन्हि जे काल्हि सिनेमा चलै चलब से नै हेतै, ८-११ बला शो तँ खतम भऽ गेलै। ओ बेटीसँ पुछि कऽ ओतहियेसँ चिकरि कऽ कहलन्हि जे अहाँ अझुका प्रोमिस केने रहिऐ। हँ प्रॉमिस तँ केने रहिऐ, तकरा पूरा तँ करैये पड़त। फेर मोन पड़ल जे सरकार नाइट शो देखेबाक अनुमति थियेटर सभकेँ देने छै, से आइ काल्हि ११ सँ २ बजेक शो देखि सकै छी। बूक माइ शो साइटपर ऑनलाइन टिकट कटेलौं आ से देखि बेटीक रुसब खतम भेलै। बेटा, कनियाँ आ माँ तीनू गोटे तैयार भऽ गेला आ सिनेमो जे पड़ि लागल से सनगर। सालमे एक्के दू टा तँ नीक सिनेमा बनै छै बॉलीवुडमे। दू बजे रातिमे सिनेमा देखि कऽ घुरि रहल छी आकि गाड़ीक लाइट एकटा बड़का होर्डिंगपर पड़लै, आ ओहने बहुत रास होर्डिंग अबैत गेल। ओइ होर्डिंग सभपर राज्यक महिला मुख्यमंत्रीक कनी अगरायल सन अभयमुद्राबला फोटो छलै। ओना तँ बेटीसँ बेशी रनिंग कमेण्ट्री हमहीं करै छै, रस्ताक सभटा चीजक विस्तृत विवरण दैत गाड़ी चलबै छी, कखनो काल जखन दुनू हाथ छोड़ि खिस्सा आगू बढ़बै छिऐ तँ ओ टोकितो अछि आ सड़कक सभटा कानून, रेड-लाइट, ग्रीन लाइट, जेब्रा क्रॉसिंग, सभटा ओ बुझबऽ लगैए। मुदा ऐ होर्डिंग सभकेँ हम अनठा देलिऐ जे कहबै तँ उनटे सुना देत जे ई सभ हमरा बुझले अछि। मुदा ऐबेर से नै भेल। शीसा खोलि कऽ ओ अचरजसँ हमरासँ पुछलक- “ई ककर फोटो छिऐ डैडी?” “ईहो नै बूझल अछि, फलना दीदी मुख्यमंत्रीक फोटो छियन्हि ई”। “मरि गेलखिन्ह? कहिया?” कनी काल तँ हमरा बुझबामे नै आएल आ जखन आयल तँ ततेक हँसी लागल जे गाड़ी चलेनाइ मुश्किल। माँ कनियाँ आ बेटाकेँ कहलियन्हि जे ई किताबमे पढ़ैए जे मुइलाक बाद बड़का फोटो आ मूर्ति बनै छै से एकरा भेलै जे मरि गेलीह मुख्यमंत्री आ स्कूलमे एक्को दिनक छुट्टी नै भेटल, आ हमरा संगे ओहो सभ पेट पकड़ि कऽ हँसऽ लगला। बेटी हतप्रभ सभकेँ देखैत रहल। ओ हमरा दिस इशारा कऽ कय स्टीयरिंगपर ध्यानदेबा लऽ कहलक तँ हम गाड़ीकेँ सड़कक कात लगा कऽ गाड़ी ठाढ़ कऽ लेलौं। “सूतल छलौं की, उठा देलौं।”- फोन घनघनाइए आ ओइमेसँ अबाज बहराइए। “नै, एते जल्दी कहाँ सूतै छी, कि कोनो जरूरी गप अछि की?”, दू बजे राति कऽ ऑफिसक हाकिम बिना काजेक फोन किए करत, से जकरा इंस्टिंक्ट कहै छै तहिना पुछा गेल छल। “एम्सक ट्रॉमा सेन्टर आबि सकै छी, आउ तँ फेर आगाँ गप हेतै”। डेरा पहुँचि, कपड़ा पहीरि कऽ ऊबरकेँ बजबै छी, अपन गाड़ी लऽ जायब तँ पार्किंग भेटत आकि नै से सोचि कऽ। गेटपर उतरि कऽ जखने ट्रॉमा सेन्टरक भीतर जाइ छी तँ अबाज अबैए- “सर, एम्हर छी हम”। हमर इंस्पेक्टर सहैब गालकेँ हाथसँ साटने हमरा शोर करै छथि। “अहूँ एतै छी, हाकिम बजेने अछि, तेँ हम आयल छी”। “हमरे दुआरे बजेने छथि, अटैक कऽ देलक गुण्डा सभ”। “कतऽ, कोना?” ओ अपन गालपरसँ हाथ हटबै छथि तँ गाल दू टुकड़ी दुनू दिस भेल देखाइत अछि। “हाँ, हाँ”। ओ धड़फड़ा कऽ हाथसँ गालकेँ साटि लै छथि। हम कहै छिएन्हि- “अहिना केने रहू, अहाँकेँ अपन गाल देखा नै पड़ि रहल अछि तेँ अहाँकेँ पता नै अछि जे ….”। चुप भऽ जाइ छी। कते कालसँ एतऽ छी। एक घण्टासँ छी। जखन आइ.जी., डी.आइ.जी. सहैब सभ कनी काल पहिने एला तखनसँ कनी ध्यान देलकहेँ। ईहो सभ की करतै, देखै नै छिऐ भीड़। एकटा डॉक्टर हुनका बजाकेँ लऽ जाइ छन्हि एकटा कोठलीमे। ओइ कोठलीक बाहर सभ हाकिम जमा छथि, सभ गम्भीर मुद्रा बनेने छथि। लोकल थाना बला सभ सेहो आबि गेल अछि। थाना बला सभ सहटि कऽ हमरा लग आबि गेल। दरोगाजी हमरा अपन मोबाइल निकालि एकटा वी.डी.ओ. देखबैत छथि। “देखू ऐ गुण्डा सभकेँ, हमरेपर पाथर फेकि रहल अछि”। हवलदार सहैब टिपलखिन्ह जे ओइ सारकेँ हुजूर जेल पठा देलखिन मुदा गजेरी-चरसी सभ छै। कोनो डरे-भर नै होइ छै। हुजूरे कऽ मोटरसाइकिल थानेपरसँ चोरा लेलकन्हि, ओकर अखनि धरि पते नै चलल छै। हम दरोगाजीसँ पुछलियन्हि- “अहाँकेँ की लगैए, की ई लॉ एण्ड ऑर्डरक गप छै आकि ऑफिसक काजसँ एकर कोनो सम्बन्ध छै”? ओ कहै छथि जे मामिलामे पेंच छै। तहकीकात तँ जबरदस्त ढंगसँ हेतै। मुदा ओ सेहो कहै छथि जे मोटा-मोटी ई लॉ-ऑर्डरेक समस्या छिऐ। मुदा देखू… गाल सीबि देल गेल छन्हि। इन्सपेक्टर साहेब हमरा कहै छथि जे गाल तँ दू टुकड़ी भऽ गेल छलै। सीलाक बाद डॉक्टर एना देखेने छलन्हि। सभ हाकिम अपना-अपना घर दिस बिदा भेला। सरकारी गाड़ी इंस्पेक्टर साहैब कऽ लऽ गेलन्हि आ हम ऊबरकेँ फोन लगेलौं। …………………………………………………………………………………………………………. अगिला दिन भोरे-भोर ऑफिस गेलौं तँ अर्दली इशारामे कहलक जे एकटा इनफॉर्मर आयल अछि। हम कहलिऐ जे ककरोसँ भेँट किए नै करा देलिऐ, एतेक गोटे ऑफिसमे अछि तँ कहलक जे कहैए जे अहींसँ भेँट करत, कहैए जे हमर इलाकाक हाकिम छथि, अनकापर ओकरा भरोस नै छै। “हमर इलाकाक छी, कतुक्का छी, नामो-गाम बता देलक की?” “नाम तँ नै बतेलक मुदा कहलक जे गामक नाम कहि दियौन्ह हाकिमकेँ, अपने बजा लेता। गामक नाम कहलक विचित्रे…. किदन तँ “गढ़ नारिकेल”!” (अनुवर्तते) ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३. पद्य ३.१.प्रदीप पुष्प- २ टा रुबाइ आ २ टा गजल ३.२.आशीष अनचिन्हार- भक्ति गजल प्रदीप पुष्प २ टा रुबाइ आ २ टा गजल रुबाइ १ कोनो परीकेर नगरमे रहितौं हम खा दूध रोटी चट निनियाँ गबितौं हम माँ चूमितय माथ लगा टीका काजर मन होइए फेर सँ नेना बनितौं हम २ छै बियाह आइये ओकर से बिसरा देलियै नोर पोछि लेलियै आ दाढ़ी कटबा लेलियै लग्न जा रहल छलै आ बरियाती भुतिया रहल नाम पूछि दुल्हिनक हम रस्ता देखा एलियै गजल १ भाला बरछी तीर तलवार ककरा लेल ई व्यर्थक रणकेर ललकार ककरा लेल सब दिन भरि वसुधा कुटुम्बे रहल पहिने सँ ई खुनिआँ परमाणु हथियार ककरा लेल नोरक छै सबठाम बिक्री नगरमे आइ तखनो ई मुस्कीक परचार ककरा लेल लागल जकरा भूख भातक तकर सोझामे मेवा मिसरी केर जयकार ककरा लेल बस्ती डेरा जाइ जे मात्र हरहाड़ो सँ तै ठाँ विषधर केर फुफकार ककरा लेल जा धरि रहलै प्राण फुटहो अभावे भेल मुइला उत्तर भोज जयवार ककरा लेल (२२ २२ २१२ २१२ २२१) २ पाखड़ि त'रक मचान मोन पड़ि गेल खपड़ा बला दलान मोन पड़ि गेल तोहर हमर पिरीत भेल अनघोल मारिक पड़ल निशान मोन पड़ि गेल डग डग करय बदन त' लोकसब बाजै भादव बहय बलान मोन पड़ि गेल भूखल दिवस कनैत फेर बीतल त' गामक अपन नवान्न मोन पड़ि गेल तोरे भ' जीवनो कटैत ई 'पुष्प' जातिक मुदा सिमान मोन पड़ि गेल (2212 121 21 221 सब पाँतिमे, तेसर शेरक पहिल पाँतिक अंतमे दीर्घकेँ ह्रस्व मानबाक छूट लेल गेल अछि।पुरान गजल।) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। आशीष अनचिन्हार भक्ति गजल छथि सिया जन धिया मैथिली जानकी मोनमे बस रहथि मृणमयी जानकी भूमिमे भूमिका छल बनल ताहि दिन कोखिमे सोन सन पार्थवी जानकी बुद्धि ओ रूपमे तीक्ष्ण आ सौम्य धरि शिव धनुषकेँ उठा कामिनी जानकी राम तोड़ल धनुष जे जनक मोनमे एक भेलथि अपन रामजी जानकी भाग के दोष या राम माया रचल वन गमन सिय हरण मानिनी जानकी राम लक्ष्मण सकल सैन्य हनुमानपर भार छल ताकि आनब सही जानकी क्रूर रावण मरण दामिनी अग्निमे आबि सासुर सुनथि बतकही जानकी राम जानथि मुदा फेर सिय वन गमन गर्भमे रत्न रखने रही जानकी ॠषि वाल्मीकि रखलनि अपन धर्म आ पोसलनि पुत्र अभिमानिनी जानकी अश्व लव कुश पकड़ि युद्ध केलथि बहुत हारि गेलथि अपन रामजी जानकी भूमिजा भूमि गेलीह बड़ दुख सहैत दर्द दुख केर छथि जीवनी जानकी आधुनिक कालमे राम रावण जहाँ आइयो दुख सहथि भगवती जानकी सभ पाँतिमे 212-212-212-212 मात्राक्रम अछि। ई बहरे मुतदारिक मुसम्मन सालिम अछि। 11म शेरक पहिल पाँतिक अंतिम लघु छूटक तौरपर लेल गेल अछि। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ४.स्त्री कोना ४.१.कुमुद "अनुन्जया"- सुक्खा सिम्मड़ कत्तै जोगलो जाय कुमुद "अनुन्जया" सुक्खा सिम्मड़ कत्तै जोगलो जाय सुक्खा सिम्मड़ कत्तै जोगलो जाय,,, बिना दूध के बच्चा केना पोसलो जाय,, हाथ में रोजगार नय छै... स्वरोजगार के यहां व्यवहार नै छै... भूखलो पेट जयकारा आरो कत्तै लगैलो जाय... सूक्खा सिम्मड़ कत्ते जोगलो जाय,, बिना दूध के बच्चा केना पोसलो जाय,, महंगाई फुलंगी के पार छै भष्टाचार के व्यवहार छै द्वार द्वार भटकी भटकी के केकरो केकरो गोहार लगैलो जाय... सुक्खा सिम्मड़ कत्ते जोगलो जाय... बिना दुध के बच्चा केना पोसलो जाय... अपराध बेलगाम छै व्यवस्था हलकान छै रक्षक आब भक्षक भे गेलय बोलो केकरा केकरा पर एफ आई आर करलो जाय... सुक्खा सिम्मड़ कत्ते जोगलो जाय... बिना दूध के बच्चा केना पोसलो जाय... सुनै लै कोय तैयार नै छै बोले में सब पारंगत होशियार छै अकरकान के सभा मंडली में सत्संग कैकरा कैकरा सुनैलो जाय.. सुक्खा सिम्मड़ कत्तै जोगलो जाय बिना दूध के बच्चा केना पोसलो जाय... साहित्य सें केकरो सरोकार नय छै छपना छपान सब व्यापार भेल छै केकरा -केकरा आरो कहिया तक? नोन तेल हरदी लगैलो जाय... सुक्खा सिम्मड़ कत्तै जोगलो जाय... बिना दूध के बच्चा केना पोसलो जाय... अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] Videha e-Learning पेटार (रिसोर्स सेन्टर) ........................................................................................................................ शब्द-व्याकरण-इतिहास MAITHILI IDIOMS & PHRASES मैथिली मुहावरा एवम् लोकोक्ति प्रकाश- रमाकान्त मिश्र मिहिर (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) डॉ. ललिता झा- मैथिलीक भोजन सम्बन्धी शब्दावली (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) मैथिली शब्द संचय MAITHILI DICTIONARY- RAMDEO JHA (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) ENGLISH MAITHILI COMPUTER DICTIONARY MAITHILI ENGLISH DICTIONARY अणिमा सिंह -Shishu_Geet_Khel_Anima_Singh डॉ. रमण झा मैथिली काव्यमे अलङ्कार अलङ्कार-भास्कर आनन्द मिश्र (सौजन्य श्री रमानन्द झा "रमण")- मिथिला भाषाक सुबोध व्याकरण BHOLALAL DAS मैथिली सुबोध व्याकरण- भोला लाल दास राधाकृष्ण चौधरी- A Survey of Maithili Literature ........................................................................................................................ मूलपाठ तिरहुता लिपिक उद्भव ओ विकास (यू.पी.एस.सी. सिलेबस) राजेश्वर झा- मिथिलाक्षरक उद्भव ओ विकास (मैथिली साहित्य संस्थान आर्काइव) Surendra Jha Suman दत्त-वती (मूल)- श्री सुरेन्द्र झा सुमन (यू.पी.एस.सी. सिलेबस) प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) CIIL SITE ........................................................................................................................ समीक्षा सुभाष चन्द्र यादव-राजकमल चौधरी: मोनोग्राफ शिव कुमार झा "टिल्लू" अंशु-समालोचना डॉ बचेश्वर झा- B_JHA_Nibhand_Nikunj.pdf डॉ. देवशंकर नवीन- Adhunik_Sahityak_Paridrishya डॉ. रमण झा- भिन्न-अभिन्न प्रेमशंकर सिंह- मैथिली भाषा साहित्य:बीसम शताब्दी (आलोचना) डॉ. रमानन्द झा 'रमण' हिआओल अखियासल CIIL SITE दुर्गानन्द मण्डल-चक्षु RAMDEO JHA दत्त-वतीक वस्तु कौशल- डॊ. श्रीरामदेवझा SHAILENDRA MOHAN JHA परिचय निचय- डॊ शैलेन्द्र मोहन झा ........................................................................................................................ अतिरिक्त पाठ पहिने मिथिला मैथिलीक सामान्य जानकारी लेल एहि पोथी केँ पढ़ू:- राधाकृष्ण चौधरी- मिथिलाक इतिहास फेर एहि मनलग्गू फाइल सभकेँ सेहो पढ़ू:- केदारनाथ चौधरी चमेलीरानी माहुर करार कुमार पवन पइठ (मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ कथा) (साभार अंतिका) डायरीक खाली पन्ना (साभार अंतिका) याेगेन्द्र पाठक वियाेगी- विज्ञानक बतकही रामलोचन ठाकुर- मैथिली लोककथा ............................................................................................................... किछु मैथिली पोथी डाउनलोड साइट (ओपन सोर्स) SAHITYA AKADEMI http://sahitya-akademi.gov.in/publications/e-books.jsp http://sahitya-akademi.gov.in/general/Digitalbooks.jsp CIIL http://corpora.ciil.org/maisam.htm अखियासल (रमानन्द झा रमण) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI1.pdf जुआयल कनकनी- महेन्द्र http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI2.pdf प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI3.pdf सृजन केर दीप पर्व- सं केदार कानन आ अरविन्द ठाकुर http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI4.pdf मैथिली गद्य संग्रह- सं शैलेन्द्र मोहन झा http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI5.pdf ARCHIVE.ORG (विजयदेव झा) https://archive.org/details/%40vijay_deo_jha?&sort=-publicdate&page=2 VIDEHA MAITHILI BOOKS/ PICTURE-AUDIO-VIDEO ARCHIVE http://videha.co.in/new_page_15.htm IGNCA http://ignca.nic.in/coilnet/mithila.htm http://ignca.nic.in/coilnet/kalyani.htm (MAITHILI ENGLISH DICTIONARY) MITHILA DARSHAN https://mithiladarshan.com/ (online pdf of Maithili journal) OLE NEPAL's E-PUSTAKALAYA (https://pustakalaya.org/en/) पोथीक लिंक मैथिली साहित्य संस्थान https://www.maithilisahityasansthan.org/resources (online pdf of Reasearch Papers/ books) ................................................................................................................... अरिपन फाउण्डेशन (http://www.aripanafoundation.org/) PRATHAM BOOKS MAITHILI STORYWEAVER https://storyweaver.org.in/stories/?language=Maithili&query=&sort=Ratings https://www.youtube.com/playlist?list=PLAT74nNc2fmYaW29mRVAIgzRq63_9zWbI (मैथिली ऑडियो बुक्स) जानकी एफ.एम समाचार https://www.youtube.com/user/Janakifm/videos (जानकी एफ.एम समाचार) I LOVE MITHILA https://www.ilovemithila.com/ (online maithili journal) https://maithili.com.np/ (owner I Love Mithila) प्यारे मैथिल https://www.youtube.com/channel/UCq30Llck2tNw8BI4t8jjzQg (प्यारे मैथिल चैनल- किरण चौधरी आ संगीता आनन्द- मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय यू ट्यूब चैनल) ................................................................................................................... ALL INDIA RADIO DOORDARSHAN आकाशवाणी दूरदर्शन http://prasarbharati.gov.in/ http://newsonair.com/ https://doordarshan.gov.in/ आकाशवाणी मैथिली पोडकास्ट http://prasarbharati.gov.in/podcast.php?filterlang=Maithili&from=1947-08-15&fromwp=2020-08-29&to=2050-12-31&search=GO आकाशवाणी पटना/ दरभंगा मैथिली रेजनल न्यूज टेक्स्ट डाउनलोड-1 http://newsonair.com/RNU-NSD-Audio-Archive-Search.aspx आकाशवाणी पटना/ दरभंगा मैथिली रेजनल न्यूज टेक्स्ट डाउनलोड-2 http://newsonair.com/Regional-Text.aspx आकाशवाणी दरभंगा http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=282 आकाशवाणी दरभंगा यू ट्यूब चैनल https://www.youtube.com/channel/UCGdNveEFmv4pPolWiTEMxVA आकाशवाणी भागलपुर http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=359 आकाशवाणी पूर्णियाँ http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=256 आकाशवाणी पटना http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=122 ........................................................................................................................ VIDEHA e-LEARNING YOUTUBE CHANNEL https://www.youtube.com/channel/UC4abVKqMj2pDWIAkXiOHp7A -गजेन्द्र ठाकुर ........................................................................................................................ विदेहक किछु विशेषांक:- १) हाइकू विशेषांक १२ म अंक, १५ जून २००८ Videha_15_06_2008 Videha_15_06_2008_Tirhuta 12 २) गजल विशेषांक २१ म अंक, १ नवम्बर २००८ Videha_01_11_2008 Videha_01_11_2008_Tirhuta 21 ३) विहनि कथा विशेषांक ६७ म अंक, १ अक्टूबर २०१० videha_01_10_2010 videha_01_10_2010_tirhuta 67 ४) बाल साहित्य विशेषांक ७० म अंक, १५ नवम्बर २०१० videha_15_11_2010 videha_15_11_2010_tirhuta 70 ५) नाटक विशेषांक ७२ म अंक १५ दिसम्बर२०१० videha_15_12_2010 videha_15_12_2010_tirhuta 72 ६) नारी विशेषांक ७७म अंक ०१ मार्च २०११ videha_01_03_2011 videha_01_03_2011_tirhuta 77 ७) अनुवाद विशेषांक (गद्य-पद्य भारती) ९७म अंक videha_01_01_2012videha_01_01_2012_tirhuta 97 ८) बाल गजल विशेषांक विदेहक अंक १११ म अंक, १ अगस्त २०१२ videha_01_08_2012 videha_01_08_2012_tirhuta 111 ९) भक्ति गजल विशेषांक १२६ म अंक, १५ मार्च २०१३ videha_15_03_2013 videha_15_03_2013_tirhuta 126 १०) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक १४२ म, अंक १५ नवम्बर २०१३ videha_15_11_2013 videha_15_11_2013_tirhuta 142 ११) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 १२) अरविन्द ठाकुर विशेषांक १८९ म अंक १ नवम्बर २०१५ Videha_01_11_2015 १३) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक १९१ म अंक १ दिसम्बर २०१५ Videha_01_12_2015 १४) विदेह सम्मान विशेषाक- २००म अक १५ अप्रैल २०१६/ २०५ म अक १ जुलाई २०१६ Videha_15_04_2016 Videha_01_07_2016 १५) मैथिली सी.डी./ अल्बम गीत संगीत विशेषांक- २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ Videha_01_01_2017 १६) मैथिली वेब पत्रकारिता विशेषांक VIDEHA 313 १७) मैथिली बीहनि कथा विशेषांक-२ VIDEHA 317 १८) रामलोचन ठाकुर विशेषांक VIDEHA 319 १९) रामलोचन ठाकुर श्रद्धांजलि विशेषांक VIDEHA 320 २०) राजनन्दन लाल दास विशेषांक VIDEHA 333 ........................................................................................................................ लेखकक आमंत्रित रचना आ ओइपर आमंत्रित समीक्षकक समीक्षा सीरीज १. कामिनीक पांच टा कविता आ ओइपर मधुकान्त झाक टिप्पणी विदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016 ........................................................................................................................ "पाठक हमर पोथी किए पढ़थि"- लेखक द्वारा अप्पन पोथी/ रचनाक समीक्षा सीरीज १. आशीष अनचिन्हार 'विदेह' क ३२७ म अंक ०१ अगस्त २०२१ ........................................................................................................................ एडिटर्स चोइस सीरीज एडिटर्स चोइस सीरीज-१ विदेहक १२३ म (०१ फरबरी २०१३) अंकमे बलात्कारपर मैथिलीमे पहिल कविता प्रकाशित भेल छल। ई दिसम्बर २०१२ क दिल्लीक निर्भया बलात्कार काण्डक बादक समय छल। ओना ई अनूदित रचना छल, तेलुगुमे पसुपुलेटी गीताक एहि कविताक हिन्दी अनुवाद केने छलीह आर. शांता सुन्दरी आ हिन्दीसँ मैथिली अनुवाद केने छलाह विनीत उत्पल। हमर जानकारीमे एहिसँ बेशी सिहराबैबला कविता कोनो भाषामे नहि रचल गेल अछि। सात सालक बादो ई समस्या ओहने अछि। ई कविता सभकेँ पढ़बाक चाही, खास कऽ सभ बेटीक बापकेँ, सभ बहिनक भाएकेँ आ सभ पत्नीक पतिकेँ। आ विचारबाक चाही जे हम सभ अपना बच्चा सभ लेल केहन समाज बनेने छी। एडिटर्स चोइस सीरीज-१ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-२ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच ब्रेस्ट कैसरक समस्यापर विदेह मे मीना झा केर एकटा लघु कथा प्रकाशित भेल। ई मैथिलीक पहिल कथा छल जे ब्रेस्ट कैसर पर लिखल गेल। हिन्दीमे सेहो ताधरि एहि विषयपर कथा नहि लिखल गेल छल, कारण एहि कथाक ई-प्रकाशित भेलाक १-२ सालक बाद हिन्दीमे दू गोटेमे घोंघाउज भऽ रहल छल कि पहिल हम आकि हम, मुदा दुनूक तिथि मैथिलीक कथाक परवर्ती छल। बादमे ई विदेह लघु कथामे सेहो संकलित भेल। एडिटर्स चोइस सीरीज-२ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-३ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिलक किछु बाल कविता प्रकाशित भेल। बादमे हुनकर ३ टा बाल कविता विदेह शिशु उत्सवमे संकलित भेल जाहिमे २ टा कविता बेबी चाइल्डपर छल। पढ़ू ई तीनू कविता, बादक दुनू बेबी चाइल्डपर लिखल कविता पढ़बे टा करू से आग्रह। एडिटर्स चोइस सीरीज-३ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-४ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच जगदानन्द झा मनुक एकटा दीर्घ बाल कथा कहि लिअ बा उपन्यास प्रकाशित भेल, नाम छल चोनहा। बादमे ई रचना विदेह शिशु उत्सवमे संकलित भेल, ई रचना बाल मनोविज्ञानपर आधारित मैथिलीक पहिल रचना छी, मैथिली बाल साहित्य कोना लिखी तकर ट्रेनिंग कोर्समे एहि उपन्यासकेँ राखल जेबाक चाही। कोना मॊडर्न उपन्यास आगाँ बढ़ै छै, स्टेप बाइ स्टेप आ सेहो बाल उपन्यास। पढ़बे टा करू से आग्रह। एडिटर्स चोइस सीरीज-४ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-५ एडिटर्स चोइस ५ मे मैथिलीक "उसने कहा था" माने कुमार पवनक दीर्घकथा "पइठ" (साभार अंतिका) । हिन्दीक पाठक, जे "उसने कहा था" पढ़ने हेता, केँ बुझल छन्हि जे कोना अहि कथाकेँ रचि चन्द्रधर शर्मा ’गुलेरी’ अमर भऽ गेलाह। हम चर्चा कऽ रहल छी, कुमार पवनक "पइठ" दीर्घकथाक। एकरा पढ़लाक बाद अहाँकेँ एकटा विचित्र, सुखद आ मोन हौल करैबला अनुभव भेटत, जे सेक्सपीरिअन ट्रेजेडी सँ मिलितो लागत आ फराको। मुदा एहि रचनाकेँ पढ़लाक बाद तामस, घृणा सभपर नियंत्रणकेँ आ सामाजिक/ पारिवारिक दायित्वकेँ सेहो अहाँ आर गंभीरतासँ लेबै, से धरि पक्का अछि। मुदा एकर एकटा शर्त अछि जे एकरा समै निकालि कऽ एक्के उखड़ाहामे पढ़ि जाइ। एडिटर्स चोइस सीरीज-५ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-६ जगदीश प्रसाद मण्डलक लघुकथा "बिसाँढ़": १९४२-४३ क अकालमे बंगालमे १५ लाख लोक मुइला, मुदा अमर्त्य सेन लिखैत छथि जे हुनकर कोनो सर-सम्बन्धी एहि अकालमे नहि मरलन्हि। मिथिलोमे अकाल आएल १९६७ ई. मे आ इन्दिरा गाँधी जखन एहि क्षेत्र अएली तँ हुनका देखाओल गेल जे कोना मुसहर जातिक लोक बिसाँढ़ खा कऽ एहि अकालकेँ जीति लेलन्हि। मैथिलीमे लेखनक एकभगाह स्थिति विदेहक आगमनसँ पहिने छल। मैथिलीक लेखक लोकनि सेहो अमर्त्य सेन जेकाँ ओहि महाविभीषिकासँ प्रभावित नहि छला आ तेँ बिसाँढ़पर कथा नहि लिखि सकला। जगदीश प्रसाद मण्डल एहिपर कथा लिखलन्हि जे प्रकाशित भेल चेतना समितिक पत्रिकामे, मुदा कार्यकारी सम्पादक द्वारा वर्तनी परिवर्तनक कारण ओ मैथिलीमे नहि वरण् अवहट्ठमे लिखल बुझा पड़ल, आ ओतेक प्रभावी नहि भऽ सकल कारण विषय रहै खाँटी आ वर्तनी कृत्रिम। से एकर पुनः ई-प्रकाशन अपन असली रूपमे भेल विदेहमे आ ई संकलित भेल "गामक जिनगी" लघुकथा संग्रहमे। एहि पोथीपर जगदीश प्रसाद मण्डलकेँ टैगोर लिटरेचर अवार्ड भेटलनि। जगदीश प्रसाद मण्डलक लेखनी मैथिली कथाधाराकेँ एकभगाह हेबासँ बचा लेलक, आ मैथिलीक समानान्तर इतिहासमे मैथिली साहित्यकेँ दू कालखण्डमे बाँटि कऽ पढ़ए जाए लागल- जगदीश प्रसाद मण्डलसँ पूर्व आ जगदीश प्रसाद मण्डल आगमनक बाद। तँ प्रस्तुत अछि लघुकथा बिसाँढ़- अपन सुच्चा स्वरूपमे। एडिटर्स चोइस सीरीज-६ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-७ मैथिलीक पहिल आ एकमात्र दलित आत्मकथा: सन्दीप कुमार साफी। सन्दीप कुमार साफीक दलित आत्मकथा जे अहाँकेँ अपन लघु आकाराक अछैत हिलोड़ि देत आ अहाँक ई स्थिति कऽ देत जे समानान्तर मैथिली साहित्य कतबो पढ़ू अहाँकेँ अछौं नहि होयत। ई आत्मकथा विदेहमे ई-प्रकाशित भेलाक बाद लेखकक पोथी "बैशाखमे दलानपर"मे संकलित भेल आ ई मैथिलीक अखन धरिक एकमात्र दलित आत्मकथा थिक। तँ प्रस्तुत अछि मैथिलीक पहिल दलित आत्मकथा: सन्दीप कुमार साफीक कलमसँ। एडिटर्स चोइस सीरीज-७ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-८ नेना भुटकाकेँ रातिमे सुनेबा लेल किछु लोककथा (विदेह पेटारसँ)। एडिटर्स चोइस सीरीज-८ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-९ मैथिली गजलपर परिचर्चा (विदेह पेटारसँ)। एडिटर्स चोइस सीरीज-९ (डाउनलोड लिंक) ........................................................................................................................ जगदीश प्रसाद मण्डल जीक ६५ टा पोथीक नव संस्करण विदेहक २३३ (Videha_01_09_2017) सँ २५० (Videha_15_05_2018 ) धरिक अंकमे धारावाहिक प्रकाशन नीचाँक लिंकपर पढ़ू:- VIDEHA_233 VIDEHA_234 VIDEHA_235 VIDEHA_236 VIDEHA_237 VIDEHA_238 VIDEHA_239 VIDEHA_240 VIDEHA_241 VIDEHA_242 VIDEHA_243 VIDEHA_244 VIDEHA_245 VIDEHA_246 VIDEHA_247 VIDEHA_248 VIDEHA_249 VIDEHA_250 ........................................................................................................................ विदेह ई-पत्रिकाक बीछल रचनाक संग- मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ रचनाक एकटा समानान्तर संकलन: विदेह: सदेह: १ (२००८-०९) देवनागरी विदेह: सदेह: १ (२००८-०९) तिरहुता विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) देवनागरी विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) तिरहुता विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०)देवनागरी विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०) तिरहुता विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०)देवनागरी विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०) तिरहुता विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]देवनागरी विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ] तिरहुता विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]- दोसर संस्करण देवनागरी विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ]देवनागरी विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ] तिरहुता विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ]देवनागरी विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ] तिरहुता विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ]देवनागरी विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ] तिरहुता विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ]देवनागरी विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ] तिरहुता विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ]देवनागरी विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ] तिरहुता विदेह:सदेह ११ विदेह:सदेह १२ विदेह:सदेह १३ ........................................................................................................................ The readers of English translations of Maithili Novel "sahasrabadhani" and verse collection "sahasrabdik chaupar par" has intimated that the English translation has not been able to grasp the nuances of original Maithili. Therefore the Author has started translating his Maithili works in English himself. After these translations are complete these would be the official translations authorised by the Author of the original works.-Editor ........................................................................................................................ Maithili Books can be downloaded from: MAITHILI BOOKS ........................................................................................................................ विदेह मैथिली मानक भाषा आ मैथिली भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम- भाषापाक विदेह सम्मान-सम्मान-सूची (समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार सहित)........................................................................................................................ अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। सूचना/ घोषणा "विदेह सम्मान" समानान्तर साहित्य अकदेमी पुरस्कारक नामसँ प्रचलित अछि। "समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार" (मैथिली), जे साहित्य अकादेमीक मैथिली विभागक गएर सांवैधानिक काजक विरोधमे शुरु कएल छल, लेल अनुशंसा आमन्त्रित अछि। अनुशंसा २०१९ आ २०२० बर्ख लेल निम्न कोटि सभमे आमन्त्रित अछि: १) फेलो २)मूल पुरस्कार ३)बाल-साहित्य ४)युवा पुरस्कार आ ५) अनुवाद पुरस्कार। पुरस्कारक सभ क्राइटेरिया साहित्य अकादेमी, दिल्लीक समानान्तर पुरस्कारक समक्ष रहत, जे एहि लिंक sahitya-akademi.gov.in पर उपलब्ध अछि। अपन अनुशंसा editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू। Top of Form Search the full text of GOOGLE VIDEHA books Bottom of Form VIDEHA ARCHIVE OF OLD ISSUES विदेह पुरान अंकक आर्काइव (पूर्णतः अव्यवसायिक उद्देश्य आ मात्र एकेडमिक प्रयोग लेल) विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक पी.डी.एफ. डाउनलोड लेल क्रमानुसार नीचाँक लिंकपर उपलब्ध अछि। All the old issues of Videha e journal are available for pdf download at the respective links below. “विदेह” ई-पत्रिकाक पुरान अंक: देवनागरी वर्सन “विदेह” ई-पत्रिकाक पुरान अंक: मिथिलाक्षर वर्सन “विदेह” ई-पत्रिकाक पुरान अंक: मैथिली-ब्रेल वर्सन Videha_01_01_08 Videha_01_01_08_Tirhuta 1 Videha_15_01_08 Videha_15_01_08_Tirhuta 2 Videha_01_02_08 Videha_01_02_08_Tirhuta 3 Videha_15_02_08 Videha_15_02_08_Tirhuta 4 Videha_01_03_08 Videha_01_03_08_Tirhuta 5 Videha_15_03_08 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नबोनारायण मिश्र) अस्मिता (लघुकथा संग्रह) भामती (नाटक) बिनय भूषण (सौजन्य- आशीष अनचिन्हार) उजरा परवाक खोज (कविता संग्रह) डॉ. उदय नारायण सिंह "नचिकेता" (सौजन्य- नचिकेता) नो एण्ट्री : मा प्रविश (देवनागरी) NO_ENTRY_MA_PRAVISH नो एण्ट्री : मा प्रविश (तिरहुता) No_Entry_Ma_Pravish_Tirhuta नो एण्ट्री : मा प्रविश (ब्रेल) NO_ENTRY_BRAILLE Andolan Ek_Chchal_Raja Janak_A_Anya_Ekanki Natak_ka_lel Nayak_ka_naam_JEEVAN Pratyavarthan Rama_leela प्रियंवदा (एकांकी) अणिमा सिंह (सौजन्य- नचिकेता) Shishu_Geet_Khel_Anima_Singh प्रबोध नारायण सिंह (सौजन्य- नचिकेता) Anher_Nagari_translator_Prabodh_Narayan_Singh Chayanika_Edited_Prabodh_Narayan_Singh Vaijayanti_Poems_Prabodh_Narayan_Singh Haathik_Daant टटका गप (सम्पादित कथा संकलन) प्रेमक रोग (नाटक) डॉ बचेश्वर झा B_JHA_Nibhand_Nikunj डॉ. देवशंकर नवीन (सौजन्य- देवशंकर नवीन) Adhunik_Sahityak_Paridrishya डॉ. ललिता झा (सौजन्य- ललिता झा) मैथिलीक भोजन सम्बन्धी शब्दावली शिव कुमार झा "टिल्लू" क्षणप्रभा-कविता-संग्रह अंशु-समालोचना राजेश्वर झा (मैथिली साहित्य संस्थान आर्काइव) राजेश्वर झा- मिथिलाक्षरक उद्भव ओ विकास सुरेन्द्र झा सुमन (आर्काइव डॊट कॊम) Surendra Jha Suman दत्त-वती (मूल)- श्री सुरेन्द्र झा सुमन गोविंद झा ((IGNCA SITE आर्काइव) MAITHILI ENGLISH DICTIONARY रामदेव झा (सौजन्य- शंकरदेव झा) सव्यसाची (अभिनन्दन ग्रन्थ) MAITHILI DICTIONARY- RAMDEO JHA दत्त-वतीक वस्तु कौशल- डॊ. श्रीरामदेवझा डॊ शैलेन्द्र मोहन झा (आर्काइव डॊट कॊम) परिचय निचय- डॊ शैलेन्द्र मोहन झा रमानाथ झा (CIIL SITE आर्काइव) प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा शम्भु कुमार सिंह तुकाराम रामा शेटक कोंकणी उपन्यासक मैथिली अनुवाद डॉ शम्भु कुमार सिंह द्वारा पाखलो TOPIC 14 (आधुनिक नाटकमे चित्रित निर्धनताक समस्या- शम्भु कुमार सिंह) TOPIC 16 (यू. पी.एस.सी. मैथिली प्रथम पत्रक परीक्षार्थी हेतु उपयोगी संकलन, मैथिलीक प्रमुख उपभाषाक क्षेत्र आ ओकर प्रमुख विशेषता, मैथिली साहित्यक आदिकाल, मैथिली साहित्यक काल-निर्धारण- शम्भु कुमार सिंह) अरुण कुमार सिंह TOPIC 15 (स्वातंत्र्योत्तर मैथिली कथामे सामाजिक समरसता- अरुण कुमार सिंह) कुमार पवन (सौजन्य- अंतिका) पइठ (मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ कथा) डायरीक खाली पन्ना रमाकान्त मिश्र "मिहिर" (आर्काइव डॊट कॊम) मैथिली मुहावरा एवम् लोकोक्ति प्रकाश- रमाकान्त मिश्र मिहिर आनन्द मिश्र (सौजन्य- रमानन्द झा "रमण") मिथिला भाषाक सुबोध व्याकरण सुभाष चन्द्र यादव (सौजन्य- सुभाष चन्द्र यादव) बनैत बिगड़ैत (लघुकथा संग्रह) Banait_Bigrait_SubhashChandraYadav राजकमल चौधरी: मोनोग्राफ प्रेमशंकर सिंह मैथिली भाषा साहित्य:बीसम शताब्दी (आलोचना) डॉ. रमण झा (सौजन्य- रमण झा) मैथिली काव्यमे अलङ्कार अलङ्कार-भास्कर मैथिली काव्यमे ज्योतिष भिन्न-अभिन्न भोला लाल दास (आर्काइव डॊट कॊम) मैथिली सुबोध व्याकरण- भोला लाल दास डॉ. रमानन्द झा 'रमण' (सौजन्य- रमानन्द झा "रमण"/ CIIL SITE आर्काइव) हिआओल Sagar_rati_Deep_Jaray राजू आ ’ टाकाक गाछ (अनुवाद) अखियासल CIIL SITE केदारनाथ चौधरी (सौजन्य- केदारनाथ चौधरी) चमेलीरानी माहुर करार अबारा नहितन याेगेन्द्र पाठक "वियाेगी" विज्ञानक बतकही दुर्गानन्द मण्डल संचयिका कथा कुसुम (विहनि आ लघु कथा संग्रह) Chakshu रामलोचन ठाकुर (सौजन्य- रामलोचन ठाकुर) आँखि मुनने आँखि खोलने (संस्मरण) स्मृतिक धोखरल रंग (संस्मरण) अपूर्वा (कविता संग्रह) इतिहासहन्ता (कविता संग्रह) देशक नाम छलै सोन चिड़ैया (कविता संग्रह) लाख प्रश्न अनुत्तरित (कविता संग्रह) प्रतिध्वनि (विदेशी भाषाक कविताक मैथिली रूपान्तरण) पद्मानदीक माझी (अनूदित उपन्यास) मैथिली लोककथा आजुक कविता (सम्पादित कविता संग्रह) बेताल कथा (हास्य-व्यंग) देसिल बयना (अख़बार) गजेन्द्र ठाकुर प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना भाग-१ प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना भाग दू (कुरुक्षेत्रम अन्तर्मनक-२) सहस्रबाढ़नि (उपन्यास) सहस्राब्दीक चौपड़पर (पद्य संग्रह) गल्प-गुच्छ (विहनि आ लघु कथा संग्रह) संकर्षण (नाटक) त्वञ्चाहञ्च आ असञ्जाति मन (दूटा गीत प्रबन्ध) बाल मण्डली/ किशोर जगत (बाल नाटक, लघुकथा, कविता आदि) उल्कामुख (नाटक) सहस्रशीर्षा (उपन्यास) धांगि बाट बनेबाक दाम अगूबार पेने छँ (रुबाइ, कता आ गजल संग्रह) शब्दशास्त्रम् (लघुकथा संग्रह) कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक देवनागरी वर्सन तिरहुता वर्सन ब्रेल वर्सन सहस्रबाढ़नि_ब्रेल-मैथिली (मैथिलीक पहिल ब्रेल पोथी) UPSC/ BPSC MAITHILI OPTIONAL TOPIC 1[Place of Maithili in Indo-European Language Family/ Origin and development of Maithili language (Sanskrit, Prakrit, Avhatt, Maithili) भारोपीय भाषा परिवार मध्य मैथिलीक स्थान/ मैथिली भाषाक उद्भव ओ विकास (संस्कृत, प्राकृत, अवहट्ट, मैथिली)] TOPIC 2(Criticism- Different Literary Forms in Modern Era/ test of critical ability of the candidates) TOPIC 3 (ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददास सिलेबसमे छथि आ रसमय कवि चतुर चतुरभुज विद्यापति कालीन कवि छथि। एतय समीक्षा शृंखलाक प्रारम्भ करबासँ पूर्व चारू गोटेक शब्दावली नव शब्दक पर्याय संग देल जा रहल अछि। नव आ पुरान शब्दावलीक ज्ञानसँ ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददासक प्रश्नोत्तरमे धार आओत, संगहि शब्दकोष बढ़लासँ खाँटी मैथिलीमे प्रश्नोत्तर लिखबामे धाख आस्ते-आस्ते खतम होयत, लेखनीमे प्रवाह आयत आ सुच्चा भावक अभिव्यक्ति भय सकत।) TOPIC 4 (बद्रीनाथ झा शब्दावली आ मिथिलाक कृषि-मत्स्य शब्दावली) TOPIC 5 (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोरिक गाथामे समाज ओ संस्कृति) TOPIC 6 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- विद्यापति) TOPIC 7 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- पद्य समीक्षा- बानगी) TOPIC 8 (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोक गाथा नृत्य नाटक संगीत) TOPIC 9 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- यात्री) TOPIC 10 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली रामायण) TOPIC 11 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली उपन्यास) TOPIC 12 (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- शब्द विचार) TOPIC 13 (तिरहुता लिपिक उद्भव ओ विकास) TOPIC 17(मैथिली आ दोसर पुबरिया भाषाक बीचमे सम्बन्ध (बांग्ला, असमिया आ ओड़िया) [यू.पी.एस.सी. सिलेबस, पत्र-१, भाग-“ए”, क्रम-५]) TOPIC 18[मैथिली आ हिन्दी/ बांग्ला/ भोजपुरी/ मगही/ संथाली- बिहार लोक सेवा आयोग (बी.पी.एस.सी.) केर सिविल सेवा परीक्षाक मैथिली (ऐच्छिक) विषय लेल] जलोदीप (बाल-नाटक संग्रह) अक्षरमुष्टिका (बाल-लघुकथा संग्रह) बाङक बङौरा (बाल-पद्य संग्रह) नाराशंसी (गीत-प्रबन्ध) सहस्रजित् (पद्य संग्रह) जगदीश प्रसाद मण्डल- एकटा बायोग्राफी गंगा ब्रिज (नाटक) मचण्ड (नाटक) The_Science_of_Words Learn Mithilakshar Script तिरहुता (मिथिलाक्षर) सीखू Learn Braille through Mithilakshar Script ब्रेल सीखू Learn International Phonetic Script through Mithilakshar Script अन्तर्राष्ट्रीय ध्वन्यात्मक वर्णमाला सीखू मिथिला रत्न/ मिथिला चित्रकला/ मिथिलाक पाबनि तिहार (कथा) आ मिथिलाक संगीत A Survey of Maithili Literature- Vol.II- GAJENDRA THAKUR (soon) मिथिलाक इतिहास- भाग-२ (शीघ्र) गजेन्द्र ठाकुर (सम्पादन) विदेह सदेह [विदेह www.videha.co.in पेटार : :विदेह ई-पत्रिकाक ०१ सँ २५ म अंकक बीछल रचनाक संग containing matter from 01st to 25th issue of Videha e-magazine विदेह: सदेह: १ (२००८-०९) देवनागरी विदेह: सदेह: १ (२००८-०९) तिरहुत विदेह सदेह [विदेह www.videha.co.in पेटार :विदेह ई-पत्रिकाक २६ म सँ ५० म अंकक बीछल रचनाक संग containing matter from 26th to 50th issue of Videha e-magazine विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) देवनागरी विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) तिरहुत विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०)देवनागर विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०) तिरहुता विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०)देवनागरी विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०) तिरहुता विदेह सदेह [विदेह www.videha.co.in पेटार (अंक ५१-१००) सँ, मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ रचनाक एकटा समानान्तर संकलन] विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]देवनागरी विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ] तिरहुता विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]- दोसर संस्करण देवनागर विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ]देवनागरी विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ] तिरहुत विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ]देवनागरी विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ] तिरहुता विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ]देवनागर विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ] तिरहुता विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ]देवनागरी विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ] तिरहुता विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ]देवनागरी विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ] तिरहुता विदेह:सदेह ११ विदेह:सदेह १२ विदेह:सदेह १३ विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक Videha e journal's all old issues VIDEHA ARCHIVE OF OLD ISSUES विदेह पुरान अंकक आर्काइव “विदेह” ई-पत्रिकाक पुरान अंक: देवनागरी वर्सन (अंक ००१ सँ १४९) “विदेह” ई-पत्रिकाक पुरान अंक: मिथिलाक्षर वर्सन (अंक ००१ सँ १४९) “विदेह” ई-पत्रिकाक पुरान अंक: मैथिली ब्रेल वर्सन (अंक ००१ सँ १४९) VIDEHA 150 ONWARDS VIDEHA-SADEHA विदेह फाइल (अंक ००१ सँ १४९-देवनागरी , मिथिलाक्षर आ मैथिली ब्रेल वर्सन) विदेह ई-पत्रिका GOOGLE VIDEHA BOOKS भाषापाक -विदेह मैथिली मानक भाषा आ मैथिली भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम AUDIO ARCHIVE FOLDER MITHILA_PAINTING-MODERN ART-PHOTOS VIDEHA OLD ISSUES FOLDER VIDEHA CLASSICAL SITES FOLDER AND CLICK EACH OF THE FOLLOWING 17 LINKS TO DOWNLOAD ALL THE 11000 JPG IMAGES IN 17 PDF FILES. पंजी (मूल मिथिलाक्षर ताड़पत्र) दूषण पंजी मोदानन्द झा शाखा पंजी मंडार- मरड़े कश्यप-प्राचीन प्राचीन पंजी (लेमीनेट कएल) उतेढ़ पंजी पनिचोभे बीरपुर दरभंगा राज आदेश उतेढ आदि छोटी झा पुस्तक निर्देशिका पत्र पंजी मूलग्राम पंजी मूलग्राम परगना हिसाबे पंजी मूल पंजी-२ मूल पंजी-३ मूल पंजी-४ मूल पंजी-५ मूल पंजी-६ मूल पंजी-७ गजेन्द्र ठाकुर, नागेन्द्र कुमार झा आ पञ्जीकार विद्यानन्द झा जीनोम मैपिंग (४५० ए.डी.सँ २००९ ए.डी.)--मिथिलाक पञ्जी प्रबन्ध जीनियोलोजिकल मैपिंग (४५० ए.डी.सँ २००९ ए.डी.)--मिथिलाक पञ्जी प्रबन्ध -भाग-२ MAITHILI-ENGLISH DICTIONARIES Maithili_English_Dictionary_Vol.I MaithiliEnglishDictionary_Vol.II_GajendraThakur ENGLISH-MAITHILI DICTIONARIES VIDEHA ENGLISH MAITHILI DICTIONARY English-Maithili Computer Dictionary गजेन्द्र ठाकुर आ आशीष अनचिन्हार (सम्पादन) मैथिलीक प्रतिनिधि गजल मैथिली गजल: आगमन ओ प्रस्थान बिंदु (गजलक आलोचना-समालोचना-समीक्षा) आशीष अनचिन्हार कुमारि इच्छा (गजल संग्रह) जंघाजोड़ी (गजल संग्रह) अनचिन्हार आखर (गजल, रुबाइ आ कताक संग्रह) मैथिली गजलक व्याकरण ओ इतिहास मैथिली वेब पत्रकारिताक इतिहास (अनुलग्नक: अंतिका आलेख:अंतर्जाल आ मैथिली: गजेन्द्र ठाकुर ) मैथिली गजलक रेडी रेकोनर शब्द-अर्थ-शक्ति जगदानन्द झा ‘मनु’ (सौजन्य- जगदानन्द झा ‘मनु’) नढ़िया भुकैए हमर घराड़ीपर (गजल संग्रह) तोहर कतेक रंग (विहनि कथा संग्रह) चोनहा- (बाल उपन्यास) व्यथा- (कविता-गीत संग्रह) उमेश मण्डल निश्तुकी- कविता संग्रह मिथिलाक संस्कार गीत, विध-व्यवहार गीत आ गीतनाद (संकलन) मिथिलाक वनस्पति स्लाइड शो मिथिलाक जीव-जन्तु स्लाइड शो मिथिलाक जिनगी स्लाइड शो MITHILA_PAINTING-MODERN ART-PHOTOS सगर राति दीप जरय- इतिहास दुध-पानि फराक-फराक (कथा एवं पाण्डुलिपि जगदीश प्रसाद मण्डल)-(छाया एवं सम्पादन- उमेश मण्डल) हिन्दुस्तानी मुसलमान और हिन्दुस्तानियत - मूल हिन्दी लेख- गीतेश शर्मा, मैथिली अनुवाद- उमेश मण्डल उमेश मण्डल द्वारा मैथिली लेखकक रचना संसारसँ बीछल विचारक पाम्फलेटक पोथी जगदीश प्रसाद मण्डल राजदेव मण्डल डॊ. शिव कुमार प्रसाद रामदेव प्रसाद मण्डल ’झारूदार’ राम विलास साहु नन्दविलास राय कपिलेश्वर राउत प्रीतम कुमार निषाद मिथिलाक सभ जाति आ धर्मक संस्कार, लोकगीत आ व्यवहार गीत (सौजन्य: उमेश मंडल) 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 32 33 34 35 36 37 38 39 40 41 42 43 राम विलास साहु अंकुर- लघुकथा संग्रह रथक चक्का उलटि चलै बाट (कविता/ टनका संग्रह) कर्म बिनु जग सुन्ना (दोसर कविता/ टनका संग्रह) स्कूलक खिचड़ी (विहनि/ लघु कथा संग्रह) दूधबेचनी (लघु कथा संग्रह) RVS_Manak_Mail रबीन्द्र नारायण मिश्र (सौजन्य- रबीन्द्र नारायण मिश्र) RNM_Maharaj नन्द विलास राय NVR_Bhardutiya.pdf NVR_CHHATHIK_DALA.pdf NVR_HAMAR_CHAROODHAM.pdf नारायण यादव (सौजन्य- उमेश मण्डल) Narayan_Yadav__Khali_Ghar.pdf रामदेव प्रसाद मण्डल ’झारूदार’ हमरा बिनु जगत सूना छै Gatanjali Jharoo राजदेव मण्डल अम्बरा-कविता-संग्रह हमर टोल (उपन्यास) बसुंधरा(कविता संग्रह) जाल (पटकथा) लाज (एकांकी) जल भंवर (उपन्यास) त्रिवेणीक रंग (विहनि आ लघु कथा संग्रह) पंचैती (लघु पटकथा) R_Mandal_Waapsi जगदीश प्रसाद मण्डल गामक जिनगी (लघुकथा संग्रह) मिथिलाक बेटी (नाटक) मौलाइल गाछक फूल (उपन्यास) जिनगीक जीत (उपन्यास) उत्थान-पतन (उपन्यास) जीबन-मरन (उपन्यास) जीवन-संघर्ष (उपन्यास) तरेगन (बाल प्रेरक विहनि कथा संग्रह) पंचवटी (एकांकी-संचयन) अर्द्धांगिनी..सरोजनी.. सुभद्रा.. भाइक सिनेह इत्यादि (लघुकथा संग्रह) कम्प्रोमाइज (नाटक) झमेलिया बिआह (नाटक) इन्द्रधनुषी अकास (पद्य संग्रह) शंभुदास (तीनटा दीर्घ कथा मइटुग्गर, शंभुदास आ फाँसी) गीतांजलि (गीत संग्रह) राति-दिन (कविता संग्रह) सतभैंया पोखरि (लघु कथा संग्रह) तीन जेठ एगारहम माघ (गीत संग्रह) बजन्ता-बुझन्ता (विहनि कथा संग्रह) रत्नाकर डकैत (नाटक) बड़की बहिन (उपन्यास) भकमोड़ (लघुकथा संग्रह) उलबा चाउर (लघुकथा संग्रह) सरिता (कविता संग्रह) सुखाएल पोखरिक जाइठ (गीत संग्रह) नै धाड़ैए (बाल उपन्यास) स्वयंवर (नाटक) पतझाड़ (लघु कथा संग्रह) फलहार (लघु कथा संग्रह) गामक शकल सूरत (लघु कथा संग्रह) लजबिजी (लघु कथा संग्रह) बटेसर काका (लघु कथा संग्रह) आमक गाछी अप्पन गाम दिवालीक दीप पंचदेव सीरीज Panchdeo_1.pdf Panchdeo_2.pdf Panchdeo_3.pdf Panchdeo_4.pdf Panchdeo_5.pdf Panchdeo_6.pdf Panchdeo_7.pdf Panchdeo_8.pdf Panchdeo_9.pdf Panchdeo_10.pdf Panchdeo_20.pdf Panchdeo_30.pdf Panchdeo_40.pdf Panchdeo_50.pdf Panchdeo_60.pdf Panchdeo_70.pdf Panchdeo_80.pdf Panchdeo_90.pdf Panchdeo_100.pdf दुध-पानि फराक-फराक (कथा एवं पाण्डुलिपि जगदीश प्रसाद मण्डल)- (छाया एवं सम्पादन- उमेश मण्डल) जगदीश प्रसाद मण्डल जीक ६५ टा पोथीक नव संस्करण विदेहक २३३ (Videha_01_09_2017) सँ २५० (Videha_15_05_2018 ) धरिक अंकमे धारावाहिक प्रकाशन नीचाँक लिंकपर पढ़ू:- VIDEHA_233 VIDEHA_234 VIDEHA_235 VIDEHA_236 VIDEHA_237 VIDEHA_238 VIDEHA_239 VIDEHA_240 VIDEHA_241 VIDEHA_242 VIDEHA_243 VIDEHA_244 VIDEHA_245 VIDEHA_246 VIDEHA_247 VIDEHA_248 VIDEHA_249 VIDEHA_250 कथा बौद्ध सिद्ध मेहथपा (बाल साहित्य) मेंहथमे भेल ८२ म सगर राति दीप जरयमे पठित कथा सभक संकलन कथा बौद्ध सिद्ध मेहथपा सखुआवाली भपटियाहीमे भेल ८३ म सगर राति दीप जरयमे पठित कथा सभक संकलन सखुआवाली कीर्तिनाथ झा कुरल: मैथिली भावानुवाद खड्ग वल्लभ दास 'स्वजन' (सौजन्य- रमानन्द झा "रमण") सीता-शील मायानन्द मिश्र (सौजन्य- केदार कानन) अवांतर अवांतर १ (गजल -गीतल ) अवांतर २ (गजल -गीतल ) अरविन्द ठाकुर परती टूटि रहल अछि (कविता संग्रह) अन्हारक विरोध मे (लघु कथा संग्रह) बहुरुपिया प्रदेश मे (गजल संग्रह) जगदीश चन्द्र ठाकुर ’अनिल’ (सौजन्य- जगदीश चन्द्र ठाकुर ’अनिल’) धारक ओइ पार (दीर्घ कविता) गीत गंगा (गीत संग्रह) गजल गंगा (गजल संग्रह) तोरा अंगना मे (गीत संग्रह) तोरा अंगना मे (गीत संग्रह)- मूल ललन कुमार कामत (सौजन्य- उमेश मण्डल) किछु विहनि आ लघुकथा मुन्नाजी मोकाम दिस (बीहनि कथा संग्रह) प्रतीक (विहनि कथा संग्रह) माँझ आंगनमे कतिआएल छी (मैथिली गजल संग्रह) हम पुछैत छी (साक्षात्कार) तीन टा बाल नाटक (मैथिली बाल साहित्य) खुरलुच्ची (मैथिली बाल कविता- बाल साहित्य) घाह (हाइकू-टंका संग्रह) सन्दीप कुमार साफी बैशाखमे दलानपर विन्देश्वर ठाकुर नेपालक नोर मरुभूमिमे मुन्नी कामत सुखल मन तरसल आँखि (पद्य आ गद्य) सुखल मन तरसल आँखि (कविता) कपिलेश्वर राउत उलहन (विहनि - लघु कथा संग्रह) नंद विलास राय सखारी-पेटारी(लघुकथा संग्रह) मदन अमर (दोसर लघु कथा संग्रह) मरजादक भोज (तेसर लघुकथा संंग्रह) अरुन्धती देवी (सौजन्य- रमानन्द झा "रमण") मिथिलाक विदुषी महिला बाबा बैद्यनाथ (सौजन्य- केदार कानन) पहरा इमानपर (गजल संग्रह) रूपनारायण झा "राकेश" (सौजन्य- रमानन्द झा "रमण") मनमोहन लड्डू ओम प्रकाश झा कियो बूझि नै सकल हमरा (गजल, रुबाइ आ कता संग्रह) सुधांशु शेखर चौधरी (सौजन्य- शरदिन्दु चौधरी) शेखर रचित गजल ओ गीत विजय नाथ झा (सौजन्य- शरदिन्दु चौधरी) अहींक लेल अमित मिश्र नव अंशु (गजल-हजल, रुबाइ संकलन) चन्दन कुमार झा मोनक बात (गजल, हजल,बाल गजल, रुबाइ आ कताक संकलन) कलानन्द भट्ट (सौजन्य- केदार कानन) कान्ह पर लहास हमर मैथिली गजल संग्रह अनुलग्नक-कोसी कॉलोनी सँ किशन कुटीर धरि डॉ. रामभरोस कापड़ि "भ्रमर" (सौजन्य- रामभरोस कापड़ि भ्रमर) रामभरोस कापड़ि "भ्रमर"क किछु नाटक घरमुहाँ (उपन्यास) भ्रमर मैथिली दीर्घ कविता (हिन्दी अनुवाद-अब बस नहीं) Maithili Lok-Sasnskriti-book.pdf (नेपाली भाषामे) मैथिली लोक संस्कृति संगोष्ठी अनहरियाक चान (गजल संग्रह) आंगन आंगन अंक-४ गामघर साउन २६ ३० अगस्त २०१८ ०४_१०_२०१८ गामघर १६ मई २०१९ गामघर २७ जून २०१९ उमेश पासवान वर्णित रस नीता झा (सौजन्य- नीता झा) बिलाइ मौसी (बाल लघुकथा संग्रह) कनकमणि दीक्षित (मूल नेपालीसँ मैथिली अनुवाद श्रीमती रूपा धीरू आ श्री धीरेन्द्र प्रेमर्षि, बाल साहित्य) (सौजन्य- धीरेन्द्र प्रेमर्षि) भगता बेङक देश-भ्रमण सुजीत कुमार झा (सौजन्य- सुजीत कुमार झा) जिद्दी (लघुकथा संग्रह) चिड़ै (लघुकथा-संग्रह) रिपोर्टर डायरी (रिपोर्ताज) गन्ध (लघु कथा संग्रह) खजुरीबाली (लघु कथा संग्रह) कोइली घूरि आउ (बाल लघु-विहनि कथा संग्रह) दूधमती- (नेपाली आ मैथिलीमे) अंक ३१ अंक ३२ अंक ३३ अंक ३४ अंक 35 अंक 36 अंक 37 अंक 38 अंक 39 अंक 40 अंक 41 उपेन्द्रनाथ झा "व्यास" (सौजन्य- मयंक झा) रूबाइयात-ए-ओमर खैयाम (मैथिली पद्यानुवाद) प्रतीक (कविता संग्रह) संन्यासी (काव्य) अनमोल झा समय साक्षी थिक (विहनि कथा संग्रह) ई जे समय अछि (विहनि कथा संग्रह) आनन्द कुमार झा टाकाक मोल (नाटक) कलह (नाटक) बदलैत समाज (नाटक) धधाइत नवकी कनियाँक लहास (नाटक) हठात् परिवर्तन (नाटक) नीतू कुमारी मैथिली चित्रकथा ( बाल साहित्य) रमेश नारायण (सौजन्य- शेफालिका वर्मा) पाथरक नाव (लघुकथा संग्रह) कीर्तिनारायण मिश्र (सौजन्य- कीर्तिनारायण मिश्र) ध्वस्त होइत शान्ति स्तूप सीमान्त आदमीकेँ जोहैत अपन एकान्त मे कालीकान्त झा "बूच" कलानिधि- कविता-संग्रह लल्लन प्रसाद ठाकुर (सौजन्य- कुसुम ठाकुर) लौंगिया मिरचाइ बेचन ठाकुर बेटीक अपमान आ छीनरदेवी (नाटक) बाप भेल पित्ती आ अधिकार (नाटक) बिसवासघात (नाटक) ऊँच-नीच (नाटक) भोँट (नाटक) रवि भूषण पाठक रिहर्सल (नाटक) राजनाथ मिश्र MITHILA_PAINTING-MODERN ART-PHOTOS प्रीति ठाकुर गोनू झा आ आन मैथिली चित्रकथा -पहिल मैथिली चित्रकथा ( बाल साहित्य) मैथिली चित्रकथा ( बाल साहित्य) मिथिलाक लोकदेवता (बाल साहित्य) विद्यापतिक पुरुष परीक्षा (बाल साहित्य) देवांशु वत्स नताशा -मैथिली बाल चित्रशृंखला (कौमिक्स) शेफालिका वर्मा (सौजन्य- शेफालिका वर्मा) यायावरी (यात्रावृत्तान्त) अर्थयुग (लघुकथा संग्रह) एकटा अकास (लघुकथा संग्रह) भावांजलि (गद्य गीत) किस्त-किस्त जीवन (आत्म कथा) आखर-आखर प्रीत नागफांस (उपन्यास) NAAGPHANS (IN ENGLISH) विभा रानी विभा रानीक दूटा नाटक (भाग रौ आ बलचन्दा) नरेन्द्र झा (सौजन्य- नरेन्द्र झा) पोथी:विकास ओ अर्थतंत्र- नरेन्द्र झा पन्ना झा (सौजन्य- नरेन्द्र झा) पोथी:अनुभूति: लघुकथा संग्रह: पन्ना झा सुशीला झा (सौजन्य- प्रभा खेतान/ सुशीला झा) छिन्नमस्ता- प्रभा खेतानक हिन्दी उपन्यासक मैथिली अनुवाद विनीत उत्पल हम पुछैत छी (कविता संग्रह) रेहन पर रग्घू - काशीनाथ सिंहक हिन्दी उपन्यासक विनीत उत्पल द्वारा मैथिली अनुवाद मन्त्रद्रष्टाऋष्यश्रृङ्ग- लेखक हरिशंकरश्रीवास्तव “शलभ" (हिन्दीसं मैथिली अनुवाद विनीत उत्पल द्वारा) मोहनदास- उदय प्रकाशक हिन्दी उपन्यासक विनीत उत्पल द्वारा मैथिली अनुवाद मोहनदास (मैथिली-देवनागरी) मोहनदास (मैथिली-मिथिलाक्षर) मोहनदास (मैथिली-ब्रेल) संतोष मिश्र (सौजन्य- संतोष मिश्र) पोसपुत (लघुकथा-संग्रह) उदास मोन (लघुकथा-संग्रह) एना-किए (कविता-संग्रह) अएना (संपादन- कविता-संग्रह) विनीत ठाकुर (सौजन्य- विनीत ठाकुर) बाँकी अछि हम्मर दूधक कर्ज कमलधर दास (सौजन्य- कमलधर दास) मैथिल कर्ण कायस्थक गोत्र, प्रवर, मूल आ वैवाहिक सम्बन्ध गोपालजी झा "गोपेश" (सौजन्य- गोपालजी झा "गोपेश") गुम्म भेल ठाढ़ छी डॉ. गंगेश गुंजन (सौजन्य- गंगेश गुंजन) प्रथम-चौबटिया-नाटक (बुधिबधिया) नाटक aai_bhor_gangesh_gunjan उपन्यास Pahil_Lok_Gangesh_Gunjan कथा-संग्रहUchitvakta_GangeshGunjan गीत-गजल DukhakDuphariya_GangeshGunjan तारानन्द वियोगी (सौजन्य- तारानन्द वियोगी) प्रलय रहस्य सत्यानन्द पाठक (सौजन्य- सत्यानन्द पाठक) HamarGaam_SatyanandPathak डॉ. मदनेश्वर मिश्र (सौजन्य- पञ्जीकार विद्यानन्द झा) एक छलीह महारानी बृषेश चन्द्र लाल (सौजन्य- बृषेश चन्द्र लाल) मोदिआइन (बी.पी.कोइरालाक कथा) माल्हा (कथा संग्रह) गोलबा रासबिहारी लाल दास (सौजन्य- रमानन्द झा "रमण") सुमति श्यामानन्द झा (सौजन्य- रमानन्द झा "रमण") मैथिली गीत चन्द्रिका मैथिली संदेश (विभिन्न कविक कविता-सम्पादित) भवप्रीतानन्द ओझा (सौजन्य- रमानन्द झा "रमण") Bhavpritanand_Ojha_Padavali गणनाथ-विन्ध्यनाथ पदावली (सौजन्य- रमानन्द झा "रमण") Gannath_Vindyanath_Padavali अमरनाथ (सौजन्य- अमरनाथ) क्षणिका- विहनि कथा संग्रह नगेन्द्र कुमर (सौजन्य- अमरनाथ) Sasarphani यात्री (नागार्जुन) (सौजन्य- मिथिला सांस्कृतिक परिषद) Balchanma_I Balchanma_II .................................................................................... बौद्ध चर्यापद Baudha_Charyapad महाकवि डाक Dak_Vachan ज्योतिरीश्वर ठाकुर मैथिली धूर्तसमागम विद्यापति व्याडीभक्ति तरङ्गिणी Goraxvijayam शंकरदेव पारिजातहरण रामविजय दैत्यारि ठाकुर SyamantHaranYatra_DaityariThakur_Ankia_Nat लक्ष्मीदेव kumarharannat_shatskandhravanbadh_laxmideva_Ankianat जगत्प्रकाशमल्ल प्रभावतीहरण नाटक सिद्ध नरसिंहमल्ल Gitavali_Sidhi_NarsimhMall जगत्ज्योतिर्रमल्ल HarGauriVivahNatak_KunjViharNatak_Jagatjyotirmall हर्षनाथ झा माधवानन्द नाटक Ushaharan_Harshnath_Jha रत्नपाणि Ushaharan_Natak_Ratnpani श्रीकांत srikrishnajanmrahasya_srikanta नन्दीपति कृष्णकेलिमाला Geetmala_Nandipati कान्हा रामदास Gaurisvayambar_Kanharamdas लाल Gaurisvayambar_Natak_Lal उमापति ParijatHaran_Umapati भानुनाथ PrabhavatiHaran_Bhanunath देवानन्द Ushaharan_Devananda रमापति RukmaniParichay_Ramapati उपाध्याय रामदास AnandavijayabhidanNatika_UpadhyayaRamdas शिवदत्त Shivdatt_Gauripranay_Sitasvayambar_Durgavijay Shivdatt_parijat_Natak ............................................................................................... पत्रिका- जर्नल देसिल बयना (अख़बार) -रामलोचन ठाकुर (सौजन्य- रामलोचन ठाकुर) SOCIETY TODAY (सौजन्य- सुमित आनन्द) अंक ११ अंतिका (सौजन्य- गौरीनाथ) जुलाइ-सितम्बर २००८ (हरिमोहन झा विशेषांक) अक्टूबर २०१०सँ मार्च २०११ अक्टूबर २०११ सँ मार्च २०१२ मैलोरंग (सौजन्य- प्रकाश झा) अंक२-३ धूआ-धजा (सौजन्य- परमेश्वर कापड़ि) अंक ७ अंक १४ अंक १५ अंक १६ अंक १८ अंक १० जून २०१२ अंक २४ जून २०१२ 23February2016 २५ जुलाइ २०१२ ०५ अगस्त २०१२ आसिन २०७३ आंगन (सौजन्य- रामभरोस कापड़ि भ्रमर) आंगन अंक-४ गामघर (सौजन्य- रामभरोस कापड़ि ’भ्रमर’) साउन २६ ३० अगस्त २०१८ ०४_१०_२०१८ गामघर १६ मई २०१९ गामघर २७ जून २०१९ दूधमती- (नेपाली आ मैथिलीमे) (सौजन्य- सुजीत कुमार झा) अंक ३१ अंक ३२ अंक ३३ अंक ३४ अंक 35 अंक 36 अंक 37 अंक 38 अंक 39 अंक 40 अंक 41 घर-बाहर (सौजन्य- चेतना समिति) अप्रैल-जून २०११ रचना (सौजन्य- सुभाष चन्द्र यादव) दिसम्बर ’०५ मार्च ’०६राजकमल चौधरी: मोनोग्राफ पल्लव (सौजन्य- धीरेन्द्र प्रेमर्षि) पल्लव- १ गजल अंक पूर्वोत्तर मैथिल (सौजन्य- प्रेमकान्त चौधरी) अप्रैल-जून 2010 जुलाइ-सितम्बर 2010 अक्टूबर सँ मार्च 2011 ........................................................................................... किछु मैथिली पोथी डाउनलोड साइट (ओपन सोर्स) SAHITYA AKADEMI http://sahitya-akademi.gov.in/publications/e-books.jsp http://sahitya-akademi.gov.in/general/Digitalbooks.jsp CIIL http://corpora.ciil.org/maisam.htm अखियासल (रमानन्द झा रमण) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI1.pdf जुआयल कनकनी- महेन्द्र http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI2.pdf प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI3.pdf सृजन केर दीप पर्व- सं केदार कानन आ अरविन्द ठाकुर http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI4.pdf मैथिली गद्य संग्रह- सं शैलेन्द्र मोहन झा http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI5.pdf ARCHIVE.ORG (विजयदेव झा) https://archive.org/details/%40vijay_deo_jha?&sort=-publicdate&page=2 VIDEHA MAITHILI BOOKS/ PICTURE-AUDIO-VIDEO ARCHIVE http://videha.co.in/new_page_15.htm IGNCA http://ignca.nic.in/coilnet/mithila.htm http://ignca.nic.in/coilnet/kalyani.htm (MAITHILI ENGLISH DICTIONARY) MITHILA DARSHAN https://mithiladarshan.com/ (online pdf of Maithili journal) OLE NEPAL's E-PUSTAKALAYA (https://pustakalaya.org/en/) पोथी लिंक अरिपन फाउण्डेशन (http://www.aripanafoundation.org/) PRATHAM BOOKS MAITHILI STORYWEAVER https://storyweaver.org.in/stories/?language=Maithili&query=&sort=Ratings https://www.youtube.com/playlist?list=PLAT74nNc2fmYaW29mRVAIgzRq63_9zWbI (मैथिली ऑडियो बुक्स) जानकी एफ.एम समाचार https://www.youtube.com/user/Janakifm/videos (जानकी एफ.एम समाचार) I LOVE MITHILA https://www.ilovemithila.com/ (online maithili journal) https://maithili.com.np/ (owner I Love Mithila) प्यारे मैथिल https://www.youtube.com/channel/UCq30Llck2tNw8BI4t8jjzQg (प्यारे मैथिल चैनल- किरण चौधरी आ संगीता आनन्द- मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय यू ट्यूब चैनल) मैथिली साहित्य संस्थान https://www.maithilisahityasansthan.org/resources (online pdf of Reasearch Papers/ books) ....................................................................................... विदेह सम्मान: सम्मान-सूची (समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार सहित) ........................................................................................ मैथिलीक वर्तनी १ मैथिलीक वर्तनी- विदेह मैथिली मानक भाषा आ मैथिली भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम भाषापाक २ मैथिलीक वर्तनीमे पर्याप्त विविधता अछि। मुदा प्रश्नपत्र देखला उत्तर एकर वर्तनी इग्नू BMAF001 सँ प्रेरित बुझाइत अछि, से एकर एकरा एक उखड़ाहामे उनटा-पुनटा दियौ, ततबे धरि पर्याप्त अछि। यू.पी.एस.सी. क मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेल सेहो ई पर्याप्त अछि, से जे विद्यार्थी मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेने छथि से एकर एकटा आर फास्ट-रीडिंग दोसर-उखड़ाहामे करथि| IGNOU इग्नू BMAF-001 .................................................................... अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू। "VIDEHA" Ist Maithili Fortnightly ejournal ARCHIVE OF VIDEOS 'विदेह' प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका वीडियो आर्काइव मैथिली वीडियोक संकलन (पूर्णतः अव्यवसायिक उद्देश्य आ मात्र एकेडमिक प्रयोग लेल) वीडियो देखबाक लेल सबधित लिककें क्लिक करू। For viewing 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........................................................................................................................ ममता गाबय गीत (सौजन्य- श्री केदारनाथ चौधरी) गीत .................................................................................................................. मिनाप-१ बुधियार छौड़ा आ राक्षस .................................................................................................................. https://www.youtube.com/channel/UCq30Llck2tNw8BI4t8jjzQg (प्यारे मैथिल चैनल- किरण चौधरी आ संगीता आनन्द- मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय यू ट्यूब चैनल) ................................................................................................ अरिपन फाउण्डेशन (http://www.aripanafoundation.org/) PRATHAM BOOKS MAITHILI STORYWEAVER https://storyweaver.org.in/stories/?language=Maithili&query=&sort=Ratings https://www.youtube.com/playlist?list=PLAT74nNc2fmYaW29mRVAIgzRq63_9zWbI (मैथिली ऑडियो बुक्स) जानकी एफ.एम समाचार https://www.youtube.com/user/Janakifm/videos (जानकी एफ.एम समाचार) I LOVE MITHILA https://www.ilovemithila.com/ (online maithili journal) https://maithili.com.np/ (owner I Love Mithila) ...................................................................................................................... बृखेश चन्द्र लाल, जनकपुरक सौजन्यसँ झिझिया http://youtu.be/ffQS-_uiOXI ढोल-पिपही http://youtu.be/eGHDvuvi1bw पवनकान्त झा (काश्यप कमल), भटसिमरि, मधुबनीक सौजन्यसँ रसनचौकी http://youtu.be/DzTeAEH7gGo ...................................................................................................................... विद्यापति गीत http://www.youtube.com/watch?v=CtmaWYyPlRs रजनी पल्लवी (http://www.youtube.com/user/rajnipallavi) http://www.youtube.com/watch?v=1nwmrcbmsx0 तूलिका http://www.youtube.com/watch?v=SQPJYnJkHrs अंशुमाला गीत-गोविन्ददास (गायन दीक्षा भारती) http://youtu.be/BJEH6Cy4rNk http://youtu.be/9Jvupm02uHg http://youtu.be/Sn3H8yuH9PU http://youtu.be/EpAvkk9Qa40 http://youtu.be/FNWGQz1evRg http://youtu.be/D2AxSdv8LyA ....................................................................................................................... मैथिली गजल (गजल- गजेन्द्र ठाकुर, गायन दीक्षा भारती) http://youtu.be/WDcPyKqAKIc http://youtu.be/weA0vk5-d8g (बहरे मुतकारिब) http://youtu.be/vma-sniQ8zs http://youtu.be/b2ti1ASefn4 ...................................................................................................................... ७१म सगर राति दीप जरए (०२ अक्टूबर २०१०), गाम बेरमा , जिला मधुबनी (संयोजक- जगदीश प्रसाद मंडल) भाग-१ भाग-२ भाग-३ भाग-४ भाग-५ भाग-६ 82 म सगर राति दीप जरए, स्थान- गजेन्द्र ठाकुर जीक निज आवास, गाम- मेंहथ, जिला- मधुबनी। दिनांक- 31 मई 2014 (शनि दिन), समए- संध्या छह बजेसँ। गोष्ठीक नाओं- कथा बौद्ध सिद्ध मेहथपा सगर राति दीप जरए। आयोजनक खेप- ८२ म आयोजन, संयोजक- गजेन्द्र ठाकुर। विशेषता- बाल साहित्यपर केन्द्रित। https://www.youtube.com/watch?v=lnu6pf9e7zY ..................................................................................................................... मैलोरंग-१ नचिकेताक एक छल राजा - भाग-1 http://youtu.be/gzW8FTK6RQU नचिकेताक एक छल राजा - भाग- 2 http://youtu.be/04Uqa_r04Z4 काठक लोक- महेन्द्र मलंगिया भाग-1 http://youtu.be/AMOU4nIk0AY काठक लोक- महेन्द्र मलंगिया भाग-2 http://youtu.be/oCd3UxfiXvQ मैलोरंग-२ कोसी सेमीनार 12 सितम्बर 2008 http://www.youtube.com/user/ggajendra71#p/u/14/CTZ3vbrI7gU http://www.youtube.com/user/ggajendra71#p/u/11/yuFXmDRcgi8 ....................................................................................................................... मिनाप-२ http://www.youtube.com/watch?v=UAx-Q5l1Fsw http://www.youtube.com/watch?v=OT2yOBDpEvs http://www.youtube.com/watch?v=vmkJBDO0Mu8 http://www.youtube.com/watch?v=BjyZu0ydjkU ..................................................................................................................... मिथिलांगन http://www.youtube.com/user/ggajendra71#p/u/19/CCf_A4vGBZ0 विदेह मैथिली नाट्य उत्सव , गाम-चनौरागंज, भाया-झंझारपुर, जिला मधुबनी (बेचन ठाकुर)-विदेह (http://www.youtube.com/user/ggajendra71) यू ट्यूब लिंक विदेह मैथिली साहित्य/ नाट्य/ कविता/ परिचर्चा उत्सव विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी सम्मान समारोह जनकपुर- विद्यापति पर्व http://www.youtube.com/watch?v=j48rFSl1KxU जितेन्द्र झा, जनकपुरक सौजन्यसँ http://www.youtube.com/user/jitumaithil रामभद्र http://www.youtube.com/watch?v=76U7kQGYD3c सामा चकेवा 1 http://www.youtube.com/watch?v=lZxoac9mtis सामा चकेवा 2 http://www.youtube.com/watch?v=3aBvRT6vIgQ मैथिली कवि सम्मेलन ((मिथिला कल्चरल ऑर्गेनाइजेशन, यू.के.) http://youtu.be/RXXrIlu0gYA रिपब्लिक डे 2009 (भारत) http://www.youtube.com/user/ggajendra71#p/u/20/GPm-wlSirf8 सगर राति दीप जरए, कबिलपुर, जून २०१० http://www.youtube.com/watch?v=_3w2WIDSEQs http://www.youtube.com/watch?v=uLdHyl4DBw0 कृष्ण कुमार कश्यपसँ गजेन्द्र ठाकुर द्वारा लेल साक्षात्कार http://www.youtube.com/watch?v=FpuFQsaUslY http://www.youtube.com/watch?v=VeQuNL0BbYM http://www.youtube.com/watch?v=_3w2WIDSEQs http://www.youtube.com/watch?v=nQaQGQ_r4QI http://www.youtube.com/watch?v=o6nLJiWc9ao http://youtu.be/AvBsJCHWccw http://youtu.be/1_DygqhnUKs प्रबोध सम्मान: राजमोहन झा http://in.youtube.com/watch?v=2r9Z0qlI0HI http://www.youtube.com/user/ggajendra71#p/u/10/4po6E_-gJL0 (स्लाइडरकेँ बीचमे ल' जाउ, अदहाक बाद राजमोहन झासँ विनीत उत्पलक साक्षात्कार छन्हि।) साहित्य अकादमी पुरस्कार: मन्त्रेश्वर झा http://www.youtube.com/watch?v=RvOraitCMak मिथिलाक खोज 1.गौरीशकर http://www.youtube.com/watch?v=GZPmUC42CN4 http://www.youtube.com/watch?v=J7iFiiJ2CZU 2. बाइसी-बसैटी http://www.youtube.com/user/ggajendra71#p/u/25/bABW1Ezv5bs वर्षकृत्य http://www.youtube.com/user/ggajendra71#p/u/5/KEsDS2JacDE http://www.youtube.com/user/ggajendra71#p/u/8/amm9_4T-HrM http://www.youtube.com/user/ggajendra71#p/u/6/OJsg4LM22x8 http://www.youtube.com/user/ggajendra71#p/u/0/p00Cl71sSXA http://www.youtube.com/user/ggajendra71#p/u/3/XLhcxdHnaV4 http://www.youtube.com/user/ggajendra71#p/u/21/L8ENMDv7LPQ http://www.youtube.com/user/ggajendra71#p/u/18/xGZKmXrS-T0 http://www.youtube.com/user/ggajendra71#p/u/12/ZZ70nsUt-yI http://www.youtube.com/user/ggajendra71#p/u/13/yC-MjqO2opM http://www.youtube.com/user/ggajendra71#p/u/22/oOw18Z9igEc समन्वय २-४ नवम्बर २०१२ इण्डिया हैबीटेट सेन्टर भारतीय भाषा महोत्सव SAMANVAY 2-4 November 2012 IHC INDIAN LANGUAGES' FESTIVAL. Venue: India Habitat Centre, Lodhi Road, New Delhi -- 110 003. 3rd NOVEMBER 2012 MAITHILI- LOVE's OWN LANGUAGE/ BRAHMINISM IN MAITHILI/ PRE-JYOTIRISHWAR NON-BRAHMIN VIDYAPATI http://youtu.be/YLoyVBlySn8 http://www.youtube.com/watch?v=qKkki28Haxg&feature=share&list=UULiovHPPEpCk_x5WBmT2M3g http://www.youtube.com/watch?v=Qz5GQWw2nl0&feature=share&list=UULiovHPPEpCk_x5WBmT2M3g http://www.youtube.com/watch?v=ghy3gZA0uWU&feature=share&list=UULiovHPPEpCk_x5WBmT2M3g http://www.youtube.com/watch?v=ApN69U25tXQ&feature=share&list=UULiovHPPEpCk_x5WBmT2M3g http://www.youtube.com/watch?v=6RXHC2puRMM&feature=share&list=UULiovHPPEpCk_x5WBmT2M3g http://www.youtube.com/watch?v=0FvIDa04Smo&feature=share&list=UULiovHPPEpCk_x5WBmT2M3g http://www.youtube.com/watch?v=vKpeUKNEZK4&feature=share&list=UULiovHPPEpCk_x5WBmT2M3g http://www.youtube.com/watch?v=-oi9WbAm7rw&feature=share&list=UULiovHPPEpCk_x5WBmT2M3g http://www.youtube.com/watch?v=GTe1zA8w_UE&feature=share&list=UULiovHPPEpCk_x5WBmT2M3g http://www.youtube.com/watch?v=TCNjyuFTLLQ&feature=share&list=UULiovHPPEpCk_x5WBmT2M3g http://www.youtube.com/watch?v=OHhP9wsEGpw&feature=share&list=UULiovHPPEpCk_x5WBmT2M3g 2nd NOVEMBER 2012 UGNA RE- BY SHOVNA NARAYAN (PRE-JYOTIRISHWAR NON BRAHMIN VIDYAPATI's LIFE EPISODE) http://www.youtube.com/watch?v=AkmLrT8EBPw&feature=share&list=UULiovHPPEpCk_x5WBmT2M3g http://www.youtube.com/watch?v=bovATLRYkI0&feature=share&list=UULiovHPPEpCk_x5WBmT2M3g http://www.youtube.com/watch?v=ldfSFg16oSI&feature=share&list=UULiovHPPEpCk_x5WBmT2M3g http://www.youtube.com/watch?v=c8OMoK4E4QA&feature=share&list=UULiovHPPEpCk_x5WBmT2M3g http://www.youtube.com/watch?v=nPFqTxTolng&feature=share&list=UULiovHPPEpCk_x5WBmT2M3g http://www.youtube.com/watch?v=VKB_eNx-LUI&feature=share&list=UULiovHPPEpCk_x5WBmT2M3g http://www.youtube.com/watch?v=EY9vJgkeAsQ&feature=share&list=UULiovHPPEpCk_x5WBmT2M3g http://www.youtube.com/watch?v=WVvGac4YSOg&feature=share&list=UULiovHPPEpCk_x5WBmT2M3g ७५म सगर राति दीप जरए मे मुन्नाजीक पहिल विहनि कथा पोस्टर प्रदर्शनी http://youtu.be/urpFSxaNu-I मिथिलाक मूड़न- (रसनचौकीक स्वरक संग) http://youtu.be/cMnvc97I4S8 हृदयनारायण झा http://www.youtube.com/watch?v=SiteS_YztLM http://www.youtube.com/watch?v=ajXBN5Z6J2I https://www.youtube.com/watch?v=lnu6pf9e7zY रंजन चौधरी आ हनी मिश्र (तबला) http://youtu.be/0B2CNNLbDgU http://youtu.be/wD3k8qVr00g http://youtu.be/64HLJNvZTV0 http://youtu.be/FxqDT4yQ6aI http://youtu.be/M6Fjti7QHKA http://youtu.be/m0bSjsmyLsA http://youtu.be/74vZ4Sa_LRU http://youtu.be/oYf0OXJsiGQ http://youtu.be/YqoEk8R-qdo ललित रंग आ हनी मिश्र (तबला) http://youtu.be/KwwRdIx-Dec http://youtu.be/ltrQF-BDrlc http://youtu.be/hOAjK-n9Isc दीक्षा भारती http://youtu.be/pTPYg_4a_II http://youtu.be/25NmustCBPI http://youtu.be/k43HnEW-TBk http://youtu.be/LXhMeEPnqys सुषमा http://youtu.be/FfR3Cf_VNWQ (बटगमनी) नन्द कुमार मिश्रक गजल पाठ http://youtu.be/3zcS-b4P6HE नन्द कुमार मिश्र जीक कविता पाठ http://youtu.be/OW5cqLjb4DA http://youtu.be/sAih6hpt884 मैथिली- भोजपुरी अकादमी, नई दिल्ली http://www.youtube.com/user/ggajendra71#p/u/9/SJ2QmoFF7qA http://www.youtube.com/user/ggajendra71#p/u/7/vRJYXuF9yY8 http://www.youtube.com/user/ggajendra71#p/u/4/dR_xHRFqGFI http://www.youtube.com/user/ggajendra71#p/u/2/Z-aRfV0SRYU http://www.youtube.com/user/ggajendra71#p/u/1/LMOcB6BQBMQ मैथिली- भोजपुरी अकादमी, नई दिल्ली सेमीनार 29 मार्च 2009 http://www.youtube.com/watch?v=bfE-JIRWCXM http://www.youtube.com/watch?v=DvSga09kAK4 http://www.youtube.com/watch?v=CLhFbjOptBU http://www.youtube.com/watch?v=9-1S5HQcF5I http://www.youtube.com/watch?v=dJV7TiP3j7w http://www.youtube.com/watch?v=Q1qSSfQsHCk http://www.youtube.com/watch?v=bdAm-NryWYM http://www.youtube.com/watch?v=sMqREeJBfG4 http://www.youtube.com/watch?v=PPCWXZaxmSo मैथिली- भोजपुरी अकादमी, द्वारका, नई दिल्ली सेमीनार http://www.youtube.com/user/ggajendra71#p/u/29/nYQsiFjWTPE http://www.youtube.com/user/ggajendra71#p/u/28/1NzA1jr6vTM http://www.youtube.com/user/ggajendra71#p/u/27/Y8Ufpj15iyk http://www.youtube.com/user/ggajendra71#p/u/26/19JBSA4F3hw http://www.youtube.com/user/ggajendra71#p/u/24/CCapM_JdYss http://www.youtube.com/user/ggajendra71#p/u/23/uwrnrAfufw8 ....................................................................................................................... विदेह सम्मान: सम्मान-सूची (समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार सहित) ...................................................................................................................... मैथिलीक वर्तनी १ मैथिलीक वर्तनी- विदेह मैथिली मानक भाषा आ मैथिली भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम भाषापाक २ मैथिलीक वर्तनीमे पर्याप्त विविधता अछि। मुदा प्रश्नपत्र देखला उत्तर एकर वर्तनी इग्नू BMAF001 सँ प्रेरित बुझाइत अछि, से एकर एकरा एक उखड़ाहामे उनटा-पुनटा दियौ, ततबे धरि पर्याप्त अछि। यू.पी.एस.सी. क मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेल सेहो ई पर्याप्त अछि, से जे विद्यार्थी मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेने छथि से एकर एकटा आर फास्ट-रीडिंग दोसर-उखड़ाहामे करथि| IGNOU इग्नू BMAF-001 ....................................................................................................................... अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू। Loading... Top of Form विदेहक नव-पुरान अंकमे ताकू (कोष्ठकमे देवनागरी, मिथिलाक्षर किंवा रोमनमे टाइप करू)। Bottom of Form Top of Form एहि पृष्ठ पर देल गेल मिथिला आ मैथिलीसँ संबंधित साइट सभमे ताकू (कोष्ठकमे देवनागरी, मिथिलाक्षर किंवा रोमनमे टाइप करू)। Bottom of Form Top of Form Search the full text of GOOGLE VIDEHA books Bottom of Form मैथिली आ मिथिलासँ संबंधित किछु मुख्य साइट:- आन लिंकक विषयमे सूचना editorial.staff.videha@gmail.com केँ ई मेलसँ पठाबी। सूचना/ घोषणा "विदेह सम्मान" समानान्तर साहित्य अकदेमी पुरस्कारक नामसँ प्रचलित अछि। "समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार" (मैथिली), जे साहित्य अकादेमीक मैथिली विभागक गएर सांवैधानिक काजक विरोधमे शुरु कएल छल, लेल अनुशंसा आमन्त्रित अछि। अनुशंसा २०१९ आ २०२० बर्ख लेल निम्न कोटि सभमे आमन्त्रित अछि: १) फेलो २)मूल पुरस्कार ३)बाल-साहित्य ४)युवा पुरस्कार आ ५) अनुवाद पुरस्कार। पुरस्कारक सभ क्राइटेरिया साहित्य अकादेमी, दिल्लीक समानान्तर पुरस्कारक समक्ष रहत, जे एहि लिंक sahitya-akademi.gov.in पर उपलब्ध अछि। अपन अनुशंसा editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ............................................................................................ http://www.videha.co.in/ ("विदेह" प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका) http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html (इंटरनेटपर मैथिली भाषाक प्रथम उपस्थिति/ मैथिलीक पहिल ब्लॉग- मैथिली भाषा ब्लॉगक एग्रीगेटर, ५ जुलाइ २००४) http://videha.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html (इंटरनेटपर मैथिली भाषाक प्रथम उपस्थिति/ मैथिलीक पहिल ब्लॉग- मैथिली भाषा ब्लॉगक एग्रीगेटर, ५ जुलाइ २००४) भालसरिक गाछ जे सन २००० सँ याहूसिटीजपर छल http://www.geocities.com/bhalsarik-gachh/, http://www.geocities.com/gajendrathakur/ आदि लिंकपर आ अखनो ५ जुलाइ २००४ क पोस्ट http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html (किछु दिन लेल http://videha.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html लिंकपर, स्रोत wayback machine of https://web.archive.org/web/*/videha 258 capture(s) from 2004 to 2016- http://videha.com/ भालसरिक गाछ-प्रथम मैथिली ब्लॉग / मैथिली ब्लॉगक एग्रीगेटर) केर रूपमे इन्टरनेटपर मैथिलीक प्रचीनतम उपस्थितिक रूपमे विद्यमान अछि। ई मैथिलीक पहिल इंटरनेट पत्रिका थिक जकर नाम बादमे १ जनवरी २००८ सँ "विदेह" पड़लै।इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA पल्लवमिथिला (धीरेन्द्र प्रेमर्षि) २०५९ माघे संक्रान्ति- २००३ जनवरी मैथिलीक दोसर इंटरनेट पत्रिका अछि जे ऐ लिंक www.pallavmithila.mainpage.net पर छल मुदा आब ई उपलब्ध नै अछि। ई टिप्पणी मात्र इतिहास शुद्धता लेल अछि। ............................................................................................ गूगल ट्रान्सलेट "विकीपीडिया"मे मैथिलीकबाद मैथिली "गूगल ट्रान्सलेट"मे सेहो.. अगिला लक्ष्य "अमेजन अलेक्सा" गूगल ट्रान्सलेट गूगल ट्रान्सलेटक लिंक https://translate.google.com/?sl=en&tl=mai&op=translate गूगल ट्रान्सलेटकेँ आर पुष्ट करबाक खगता छै तइ लेल अगिला काज अढ़ा रहल छी: https://translate.google.com/about/contribute/ प्रारम्भ: विकीपीडिया ०१ फरबरी २००८ लिंक https://books.google.co.in/books?id=VC-BD5Ad6z4C&lpg=PA1&pg=PA1#v=onepage&q&f=false (मैथिली देवनागरी) https://books.google.co.in/books?id=cTezCU59bJwC&lpg=PP1&pg=PP1#v=onepage&q&f=false (मैथिली तिरहुता) https://books.google.co.in/books?id=3zKudz6wAO8C&lpg=PP1&pg=PP1#v=onepage&q&f=false (मैथिली ब्रेल) गूगल ट्रन्सलेट २३ जून २०११क लिंक https://www.facebook.com/groups/videha/permalink/138489416229195/ गूगल ट्रांसलेशन टूलमे "बिहारी" भाषाक बदलामे मैथिली लेल अलग ट्रांसलेशन टूल बनेबाक आवेदन विदेहक सदस्यगण द्वारा देल गेल अछि। अपन योगदान गूगल ट्रांसलेट लेल करू, आ कएल सम्पादन बदलबा काल कारण मे (अंग्रेजीमे) "बिहारी" नाम्ना कोनो भाषा नै हेबाक चर्चा करू। ऐ लिंकपर अनुवाद करू; गूगल एकाउंटसँ लॉग इन केलाक बाद । http://www.google.com/transconsole/giyl/chooseProject http://www.google.com/transconsole/giyl/chooseActivity?project=gws&langcode=bh (link closed) ................................................................................................................... किछु मैथिली पोथी डाउनलोड साइट (ओपन सोर्स) IGNOU इग्नू BMAF-001 SAHITYA AKADEMI http://sahitya-akademi.gov.in/publications/e-books.jsp http://sahitya-akademi.gov.in/general/Digitalbooks.jsp CIIL http://corpora.ciil.org/maisam.htm अखियासल (रमानन्द झा रमण) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI1.pdf जुआयल कनकनी- महेन्द्र http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI2.pdf प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI3.pdf सृजन केर दीप पर्व- सं केदार कानन आ अरविन्द ठाकुर http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI4.pdf मैथिली गद्य संग्रह- सं शैलेन्द्र मोहन झा http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI5.pdf ARCHIVE.ORG (विजयदेव झा) https://archive.org/details/%40vijay_deo_jha?&sort=-publicdate&page=2 VIDEHA MAITHILI BOOKS/ PICTURE-AUDIO-VIDEO ARCHIVE http://videha.co.in/new_page_15.htm IGNCA http://ignca.nic.in/coilnet/mithila.htm http://ignca.nic.in/coilnet/kalyani.htm (MAITHILI ENGLISH DICTIONARY) http://tdil.mit.gov.in/CoilNet/IGNCA/mithila.htm MITHILA DARSHAN https://mithiladarshan.com/ (online pdf of Maithili journal) OLE NEPAL's E-PUSTAKALAYA (https://pustakalaya.org/en/) पोथी लिंक मैथिली साहित्य संस्थान https://www.maithilisahityasansthan.org/resources (online pdf of Reasearch Papers/ books) https://www.maithilisahityasansthan.org/ राजेश्वर झा- मिथिलाक्षरक उद्भव ओ विकास (मैथिली साहित्य संस्थान आर्काइव) .................................................................................................. https://www.youtube.com/channel/UCq30Llck2tNw8BI4t8jjzQg (प्यारे मैथिल चैनल- किरण चौधरी आ संगीता आनन्द- मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय यू ट्यूब चैनल) .................................................................................................. अरिपन फाउण्डेशन (http://www.aripanafoundation.org/) PRATHAM BOOKS MAITHILI STORYWEAVER https://storyweaver.org.in/stories/?language=Maithili&query=&sort=Ratings https://www.youtube.com/playlist?list=PLAT74nNc2fmYaW29mRVAIgzRq63_9zWbI (मैथिली ऑडियो बुक्स) ........................................................................................................... I LOVE MITHILA https://www.ilovemithila.com/ (online maithili journal) https://maithili.com.np/ (owner I Love Mithila) https://www.quotesinmaithili.com/ (owner I Love Mithila) जानकी एफ.एम समाचार https://www.youtube.com/user/Janakifm/videos (जानकी एफ.एम समाचार) ............................................................................................................... http://videha-aggregator.blogspot.com/ (मैथिली भाषा ब्लॉगक एग्रीगेटर) http://www.videha.com/ (इंटरनेटपर मैथिली भाषाक सभसँ पुरान उपलब्ध उपस्थिति/ लोकप्रिय ब्लॉग- मैथिली भाषा ब्लॉगक एग्रीगेटर ५ जुलाइ २००४ www.gajendrathakur.blogspot.com ) http://esamaad.blogspot.com/ (पूनम मंडल आ प्रियंका झाक पहिल मैथिली न्यूज पोर्टल, ९ अगस्त २००४ सँ) http://prakarantar.blogspot.com/ (प्रकारांतर मैथिलीक लोकप्रिय ब्लॉग, फरबरी २००५) http://vidyapati.blogspot.com/ (मैथिलीक लोकप्रिय ब्लॉग, अगस्त २००५) http://www.vidyapati.org/ (मैथिलीक लोकप्रिय ब्लॉग, अगस्त २००५) http://hellomithila.blogspot.com/ (हेलो मिथिला- धीरेन्द्र प्रेमर्षि, सम्पादक-प्रकाशक, रूपा झा, सम्पादन सहयोग, पल्लव, मैथिली साहित्यिक, ३ मइ २००६) http://pallav.blogsome.com/ (हेलो मिथिला- धीरेन्द्र प्रेमर्षि, सम्पादक-प्रकाशक, रूपा झा, सम्पादन सहयोग, पल्लव, मैथिली साहित्यिक, १७ मइ २००६) http://hellomithilaa.blogspot.com/ (मैथिली न्यूज पोर्टल, सितम्बर २००७) http://www.hellomithila.com/ (मैथिली न्यूज पोर्टल, सितम्बर २००७) http://shampadak.wordpress.com/ (मैथिली न्यूज पोर्टल, जनवरी-फरबरी २००८) http://www.esamaad.com/ (मैथिली न्यूज पोर्टल, जनवरी-फरबरी २००८) http://hellomithilaa.wordpress.com/ http://premarshi.wordpress.com/ (धीरेन्द्र प्रेमर्षि) ............................................................................................ http://anchinharakharkolkata.blogspot.com/ (मैथिलीक लोकप्रिय गजलक ब्लॉग) ............................................................................................ JNU http://sanskrit.jnu.ac.in/maithili/index.jsp http://sanskrit.jnu.ac.in/student_projects/lexicon.jsp?lexicon=maithili ........................................................................................................... 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https://books.google.co.in/books?id=cTezCU59bJwC&lpg=PP1&pg=PP1#v=onepage&q&f=false (मैथिली तिरहुता) https://books.google.co.in/books?id=3zKudz6wAO8C&lpg=PP1&pg=PP1#v=onepage&q&f=false (मैथिली ब्रेल) गूगल ट्रन्सलेट २३ जून २०११क लिंक https://www.facebook.com/groups/videha/permalink/138489416229195/ गूगल ट्रांसलेशन टूलमे "बिहारी" भाषाक बदलामे मैथिली लेल अलग ट्रांसलेशन टूल बनेबाक आवेदन विदेहक सदस्यगण द्वारा देल गेल अछि। अपन योगदान गूगल ट्रांसलेट लेल करू, आ कएल सम्पादन बदलबा काल कारण मे (अंग्रेजीमे) "बिहारी" नाम्ना कोनो भाषा नै हेबाक चर्चा करू। ऐ लिंकपर अनुवाद करू; गूगल एकाउंटसँ लॉग इन केलाक बाद । http://www.google.com/transconsole/giyl/chooseProject http://www.google.com/transconsole/giyl/chooseActivity?project=gws&langcode=bh (link closed) किछु मैथिली विकिपिडिया पेजक लिंक: विदेह (पत्रिका) https://mai.wikipedia.org/s/kgv इन्टरनेटक संसारमे मैथिली भाषा https://mai.wikipedia.org/s/s6h भालसरिक गाछ https://mai.wikipedia.org/s/ipm विदेह https://mai.wikipedia.org/s/ie1 विदेहक फेसबुक भर्सन 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विदेह ई-पत्रिकाक ५०म सँ १४९ म अंक https://sites.google.com/a/videha.com/videha-archive-part-ii/ विदेह ई-पत्रिकाक १५०म आ आगाँक अंक https://sites.google.com/a/videha.com/videha-archive-part-iii/ २.मैथिली पोथी डाउनलोड Maithili Books Download http://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi ३.मैथिली ऑडियो संकलन Maithili Audio Downloads http://sites.google.com/a/videha.com/videha-audio ४.मैथिली वीडियोक संकलन Maithili Videos http://sites.google.com/a/videha.com/videha-video ५.मिथिला चित्रकला/ आधुनिक चित्रकला आ चित्र Mithila Painting/ Modern Art and Photos http://sites.google.com/a/videha.com/videha-paintings-photos/ Top of Form Bottom of Form अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू।Always refresh the pages for viewing new issue of VIDEHA. भारत आ नेपालक माटिमे पसरल मिथिलाक धरती प्राचीन कालहिसँ महान पुरुष ओ महिला लोकनिक कर्मभूमि रहल अछि। प्रस्तुत अछि मिथिला रत्नक एकटा छोट संग्रह। एहि संग्रहकेँ पूर्ण करबाक हेतु अपन बहुमूल्य संग्रहकेँ editorial.staff.videha@gmail.com केँ पठाउ। आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार, सम्बन्धित फोटोग्राफर आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। फोटो सभ पठएबाक लेल धन्यवाद पाठकगण। साभार। पूर्णतः अव्यवसायिक उद्देश्य आ मात्र एकेडमिक प्रयोग लेल। विदेहक ९६म अंक (१५ दिसम्बर २०११) मे हिनकर सभक विशेष विवरण देल गेल अछि। तत्काल विवरण देखबा लेल क्लिक करू मिथिला रत्न/ मिथिला चित्रकला/ मिथिलाक पाबनि तिहार (कथा) आ मिथिलाक संगीत । वैदिक जनक वाल्मीकि सीतापति राम लव कुश विदेघमाथव वाजसनेयी याज्ञवल्क्य अंगराज कर्ण वैशेषिक दर्शन कणाद महावीर जैन 599-527 गौतम बुद्ध BC 563-483 चाणक्य BC 350-283 चन्द्रगुप्त मौर्य चाणक्यक शिष्य BC 340-293 आर्यभट्ट वैज्ञानिक 476-550 सिद्ध सरहपाद 700-780 आदि शंकराचार्य 788-820 मंडन मिश्रसँ शास्त्रार्थ म.म.गोनू झा 1050-1150 कृष्णाराम आ हाथी सुबरन वंशीधर ब्राह्मण छेछन महराज दीना- भदरी ज्योति पँजियार राजा सलहेस दुलरा दयाल कालिदास बोधि कायस्थ राधाकृष्ण आ करताराम मल्लिक महाराज नान्यदेव मल्लदेव महाराज हरसिंहदेव मंत्री गणेश्वर मीरां साहेब अमर बाबा गरीबन बाबा लालबन बाबा बंठा चमार कारिख पजियार लोरिक राय रणपाल अयाची मिश्र शंकर मिश्र पक्षधर मिश्र मैथिलीक आदिकवि विद्यापति (ज्योतिरीश्वर पूर्व) महाराज शिव सिंह उगना महादेव महाकवि विद्यापति ठाकुर 1350-1435 (मैथिलीक आदि कवि ज्योतिरीश्वर-पूर्व विद्यापतिसँ भिन्न, संस्कृत आ अवहट्ठमे लेखन) शंकरदेव 1449-1569 जगज्ज्योतिर्मल्ल १६१३-३७ सुनीति कुमार चटर्जी मैथिली प्रेमी 1890-1977 अरविन्द घोष मैथिली प्रेमी 1872-1950 डॉ. सर आशुतोष मुखर्जी मैथिली प्रेमी 1864-1924 सर जी. ए. ग्रियर्सन मैथिली प्रेमी 1851-1941 कवि चन्दा झा 1831-1907 महाकवि लालदास 1856-1921 म. म. परमेश्वर झा 1856-1924 अवध बिहारी प्रसाद शाही 1859-1929 सर्वतंत्र स्वतंत्र बच्चा झा 1860-1921 म. म. शशिनाथ झा 1860-1930 मुंशी रघुनन्दन दास 1860-1945 मधुसूदन ओझा 1866-1939 म.म. मुरलीधर झा १८६८-१९२९ मुकुन्द झा "बख्शी" 1869-1936 डॉ. सर गंगानाथ झा 1871-1941 जनार्दन झा जनसीदन 1872-1951 रासबिहारी लालदास 1872-1940 रामचन्द्र मिश्र "चन्द्र" 1873-1937 मैथिल प्रभा महावैय्याकरणाचार्य पं दीनबन्धु झा 1878-1955 भवनाथ मिश्र 1879-1933 कीर्त्यानन्द सिंह टंकनाथ चौधरी 1884-1928 भवप्रीतानन्द ओझा 1886-1970 कपिलेश्वर मिश्र 1887-1987 बालकृष्ण मिश्र 1888-1948 बलदेव मिश्र 1890-1975 आचार्य रामलोचन शरण 1889-1971 सीताराम झा 1891-1975 ताराचरण झा 1892-1928 बद्रीनाथ झा 1893-1973 जीवनाथ राय 1893-1964 उमेश मिश्र 1895-1967 बाबू धनुषधारी लाल दास 1895-1965 अमरनाथ झा 1897-1955 भोलालाल दास 1897-1977 कुमार गंगानन्द सिंह 1898-1971 ब्रजमोहन ठाकुर 1899-1977 भुवनेश्वर प्रसाद 1902- जयनारायण झा 'विनीत' 1902-1991 नरेन्द्र नाथ दास विद्यालंकार १९०४-१९९३ सुधाकर झा "शास्त्री" 1904-1974 दामोदर लाल दास विशारद 1904-1981 बबुआजी झा 'अज्ञात' 1904-1996 श्रीवल्लभ झा हाटी 1905-1940 रमानाथ झा 1906-1971 काशीकान्त मिश्र "मधुप" 1906-1987 लक्ष्मीनाथ गोसाई 1793-1872 मेही दास बुचन भगत, संत 1928-1991 अभिराम दास स्नेहलता 1909-1993 स्वतंत्रता सेनानी स्व. रामफल मण्डल सुन्दर झा "शास्त्री" 1930-1998 कांञ्चीनाथ झा "किरण" 1906-1988 श्यामानन्द झा 1906-1949 रमाकांत झा, नेपाल 1907-1971 ईशनाथ झा 1907-1965 भुवनेश्वर सिंह 'भुवन' 1907-1944 हरिमोहन झा 1908-1984 कालीकान्त झा 1909- तंत्रनाथ झा 1909-1984 जीवनाथ झा 1910-1977 सुरेन्द्र झा 'सुमन' 1910-2002 पं. रामचन्द्र झा 1910- 'नागार्जुन' वैद्यनाथ मिश्र 'यात्री' 1911-1998 आरसीप्रसाद सिंह 1911-1996 गुरु जयदेव मिश्र 1911-1991 शिष्य गंगानाथ झा यशोधर झा वैद्यनाथ मल्लिक 'विधु' 1912-1987 भीम झा 1912- राधानाथ दास १९१२- उपेन्द्र ठाकुर 'मोहन' 1913-1980 जयनाथ मिश्र 1913-1985 श्रीकांत ठाकुर "विद्यालंकार" पञ्जीकार मोदानन्द झा 1914-1998 आनन्द झा 1914-1988 टोक्यो हासेगावा, निदेशक मिथिला म्यूजियम, निगाटा माँगनि खबास 1908-1943 संगीतज्ञ रामाश्रय झा 'रामरंग' अभिनव भातखण्डे 1928-2009 रामचतुर मल्लिक ध्रुपद संगीत 1905-1990 अभयनारायण मल्लिक कुमार तारानन्द सिंह, संगीतज्ञ संगीताचार्य रायबहादुर लक्ष्मीनारायण सिंह पंडित परमानन्द चौधरी, संगीतज्ञ हृदयनारायण झा संगीत भाष्कर राजकुमार श्यामानन्द सिंह १९१६-१९९४ मिथिलेश कुमार झा, तबला वादन नागेश्वर लाल कर्ण, तबला वादक बाबू साहेब चौधरी 1916-1998 लक्ष्मण झा 1916-2000 शुद्धदेव झा 'उत्पल' 1916- रामचरित्र पाण्डेय "अणु" १९१७-२०१० लक्ष्मीनाथ झा मिथिला चित्रकला 1917-1990 उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' 1917-2002 मनमोहन झा 1918-2009 ब्रजकिशोर वर्मा 'मणिपद्म' 1918-1986 पं. सहदेव झा १९१९- बुद्धिधारी सिंह रमाकर 1919-1991 आद्याचरण झा 1920- जयकान्त मिश्र, पुत्रीक संग आ' नेहरूक संग 1922-2009 चन्द्र भानु सिंह 1922- सुधांशु शेखर चौधरी 1922-1990 गोविन्द झा 1923- योगानन्द झा 1923-1986 रामकृष्ण झा 'किसुन' 1923-1970 उमानाथ झा 1923-2009 ज़टाशंकर दास 1923-2006 प्रबोध नारायण सिंह 1924-2005 मदनेश्वर मिश्र 1924-2004 अमोघ नारायण झा "अमोघ" 1924- मुरलीधर सिंह, ब्रजमोहन ठाकुर, शुभंकर झा, मदनेश्वर मिश्र 1924-2004, ललित नारायण मिश्र, देवनाथ राय मतिनाथ मिश्र मतंग 1924- आनन्द मिश्र 1924-2007 डॉ. जयमन्त मिश्र १९२५-२०१० चन्द्रनाथ मिश्र अमर 1925- मुक्तिनाथ झा (1926-2009) शुभंकर झा 1926- दीनानाथ पाठक 'बन्धु' 1928-1962 अनंत बिहारी लाल दास "इन्दु" 1928-2010 कृष्णकान्त मिश्र १९२८-२००० जगदानन्द झा 1928- दुर्गानाथ झा "श्रीश" राजकमल चौधरी 1929-1967 विश्वनाथ झा "विषपायी" 1929-2005 जयधारी सिंह 1929-2007 शैलेन्द्र मोहन झा 1929-1994 विजयनाथ ठाकुर 1929-2008 रमेशचन्द्र वर्मा 1930- गोपालजी झा 'गोपेश' 1931-2008 विवेकानन्द ठाकुर 1931- ताराकांत मिश्र 1931- ललित 1932-1983 मुरारि मधुसूदन ठाकुर 1932- विद्यानारायण ठाकुर 1933- धूमकेतु 1932-2000 राजमोहन झा 1934- डॉ. धीरेन्द्र 1934-2004 रमेश नारायण १९३४- २०११ हरिमोहन झा, मायानन्द मिश्र, स्वरूप दास बाबू श्री सत्यनारायण सिंह आ राघवाचार्य बाबू श्री सत्यनारायण सिंह मायानन्द मिश्र 1934- तारानन्द तरुण १९३५-२०११ सोमदेव 1934- राजनन्दन लाल दास 1934- रमानन्द रेणु 1934-2011 कालीकांत झा "बूच" 1934-2009 श्याम चन्द्र 1934- डोरीलाल शर्मा "श्रोत्रिय" १९३५- रामभद्र, धनुषा, नेपाल १९३५-२०२० केदारनाथ चौधरी 1936- जीवकांत 1936- देवकांत झा 1936- डॉ अमरेश पाठक 1936- बलराम 1936-2008 मैथिलीपुत्र प्रदीप 1936- रामदेव झा 1936- रवीन्द्र नाथ ठाकुर 1936- बिनोद बिहारी वर्मा 1937-2003 वीरेन्द्र मल्लिक 1937- कीर्तिनारायण मिश्र 1937- गौरीकांत चौधरीकांत 1937-2001 युगल किशोर मिश्र १९३८-२००७ प्रफुल्ल कुमार सिंह 'मौन' 1938- महेश्वरनाथ मल्लिक 1938- परशुराम झा १९३८- कुलानन्द मिश्र 1940-2000 बिलट पासवान 'विहंगम' 1940- फजलुर रहमान हासमी 1940-2011 गुणनाथ झा प्रभास कुमार चौधरी 1941-1998 साकेतानन्द 1940- गंगेश गुंजन 1942- प्रेमशंकर सिंह 1942- मार्कण्डेय प्रवासी 1942-2010 देवेन्द्र झा १९४३- डॉ. भीमनाथ झा 1945- महेन्द्र मलंगिया 1946- डॉ राम दयाल राकेश, सर्लाही, नेपाल 1942- उपेन्द्र दोषी 1943-2001 उदयचन्द्र झा "विनोद" 1943- रेवती रमण लाल, जनकपुर 1943- मंत्रेश्वर झा 1944- रत्नेश्वर मिश्र 1945- जगदीश प्रसाद मंडल राज महाराजाधिराज लक्ष्मीश्वर सिंह 1858-1898 महाराजाधिराज रमेश्वर सिंह 1860-1929 महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह 1907-1962 सर हरगोविन्द मिश्र, अलीगढ़ आ कामेश्वर सिंह बिनोदानन्द झा 1895-1971 ललित नारायण मिश्र 1922-1975 डॉ. रामबरन यादव, नेपाल राष्ट्रपति स्वर्गीय विन्ध्येश्वरी प्रसाद मंडल, राजनेता 1919-1982 भूपेन्द्र नारायण मण्डल कर्पूरी ठाकुर 1921-1988 रामविलास पासवान १९४६- राम लषण राम "रमण" भोगेन्द्र झा चतुरानन मिश्र रमाकांत मिश्र रमानाथ मिश्र "मिहिर" गजेन्द्र नारायण चौधरी, पत्रकार 1929-2008 मोहन भारद्वाज 1943- योगानन्द झा 1955- हीरानन्द झा "शास्त्री" ,पत्रकार दीनानाथ झा, पत्रकार नरेन्द्र झा, अर्थशास्त्र-पत्रकार प्रेमशंकर झा, पत्रकार शरदिन्दु चौधरी, पत्रकार राजेश्वर झा (१९२३-१९७७) एस.एन.सत्यार्थी राधाकृष्ण चौधरी, इतिहासकार 1921-1985 प्रो. रामशरण शर्मा १९२०-२०११ विजयकान्त मिश्र इतिहासकार 1927-1994 द्विजेन्द्र नारायण झा, इतिहासकार सुरेश्वर झा, राजनीति विज्ञान भागीरथ लाल दास लक्ष्मीकान्त झा रिजर्व बैंक गवर्नर 1913-1988 एन. एन. झा डिप्लोमेट कामेन्द्रनाथ झा "अमल" 1938- भाग्यनारायण झा 1941- रमाकांत राय "रमा" 1947 प्रोफेसर महेन्द्र 1947- महेन्द्र 1944-2009 सुभाषचन्द्र यादव 1948- सुभद्र झा 1909-2000 रामावतार यादव, मैथिली भाषिकी, नेपाल 1942- योगेन्द्र प्रसाद यादव, भाषिकी,सिरहा, नेपाल 1946- रमानन्द झा 'रमण' 1949- रामलोचन ठाकुर 1949- गंगा प्रसाद मंडल "अकेला", नेपाल 1944- महेन्द्रनारायण निधि, धनुषा, नेपाल परमेश्वर कापड़ि, धनुषा, नेपाल जयनारायण झा "जिज्ञासु", नेपाल सुरेश झा, नेपाल 1920-1995 रोहिणी रमण झा 1950- डॉ. कमलाकान्त भण्डारी 1952- विनोद बिहारी लाल 1953- अरविन्द ठाकुर 1954- श्याम दरिहरे 1954- दिनेश कुमार झा अशोक कुमार ठाकुर प्रतापनारायण झा, नेपाल शीतल झा, नेपाल उग्रनारायण मिश्र "कनक" डॉ. शम्भूनाथ चौधरी 1920-2008 इन्द्रकांत झा पंचानन मिश्र प्रोफेसर गुरमैता महेन्द्र नारायण सिंह "मगन" सूर्यकांत झा, जनकपुर रमण झा (1957- ) विजयनाथ झा योगानन्द हीरा बाबा बैद्यनाथ जगदीश चन्द्र अनिल १९५०- विद्यानन्द झा 1965- हरेकृष्ण झा 1950- उदय नारायण सिंह नचिकेता 1951- आशीष अनचिन्हार कुमार पवन 1958 कीर्तिनाथ झा 1955- महेन्द्र हजारी स्व. चन्द्रकान्त मिश्र, आसी, दरभंगा स्व. महेन्द्र नारायण झा, बेलौंजा, मधुबनी स्व.राजकुमार मल्लिक, सोहराय (पोखरिभीड़ा), मधुबनी लक्ष्मीपति सिंह फूलचन्द्र मिश्र रमण किशोरनाथ झा सूर्यनारायण झा "सरस" कलानन्द भट्ट दयानाथ झा डॉ. सुधाकर चौधरी १९४६- स्व. चुनचुन मिश्र, रहिका, मधुबनी। सत्यनारायण लाल कर्ण ले. कर्नल मायानाथ झा 1945- श्याम किशोर सिंह सचिन्द्रनाथ झा कालीनाथ ठाकुर राजेन्द्र विमल, जनकपुर, नेपाल 1949- नरेश कुमार विकल 1950- जनक किशोर लाल दास कृष्णचन्द्र झा "मयंक" लक्ष्मण झा "सागर" 1953- रघुवीर मोची शारदानन्द दास "परिमल" शशिबोध मिश्र "शशि" 1946- सुरेन्द्रनाथ अमरनाथ बच्चा ठाकुर बुद्धिनाथ मिश्र राजाराम सिंह राठौर, धनुषा वैद्यनाथ विमल 1955- डॉ वासुकीनाथ झा 1940- जितेन्द्र मिश्र "जीवन" वीरेन्द्र नारायण झा वीरेन्द्र झा 1956- वैकुण्ठ झा 1954- वैकुण्ठ झा विद्यानन्द झा 'पञ्जीकार' 1957- महेन्द्र नारायण कर्ण डॉ. विश्वेश्वर मिश्र अर्जुन नारायण चौधरी नरेन्द्र महेन्द्र मिश्र, नेपाल कमल कांत झा 1943- महाप्रकाश 1946- छत्रानन्द सिंह झा 1946- अयोध्यानाथ चौधरी, धनुषा, नेपाल 1947- विद्यानाथ झा 'विदित' सियाराम झा "सरस" 1948- अग्निपुष्प 1948- मधुकांत झा 1949- वीनू भाइ सत्यानन्द पाठक योगीराज कुणाल 1951- राम भरोस कापड़ि भ्रमर, धनुषा, नेपाल 1951- धीरेन्द्रनाथ मिश्र शिवेन्द्रलाल कर्ण, धनुषा, नेपाल 1951- ब्रह्मदेव लाल दास चण्डेश्वर खान दयाकान्त झा गजेन्द्र नारायण सिंह, नेपाल पद्मश्री श्री गजेन्द्र नारायण सिंह हरिकान्त झा इन्द्रनारायण झा प्रवासी साहित्यालंकार सीताराम सिंह तुलानन्द मिश्र शैलेन्द्र कुमार झा 1952- शिवशंकर श्रीनिवास 1953- अशोक 1953- विभूति आनन्द 1953- केदार कानन 1959- डॉ. शशिनाथ झा 1954- धनुर्धर झा शिवकान्त पाठक डॉ. योगेन्द्र पाठक "वियोगी" , वैज्ञानिक राजनन्द झा आद्यानाथ झा "नवीन" अमलतास 1956- यंत्रनाथ मिश्र दिगम्बर ठाकुर गणेश झा 1950- कन्दर्पनारायण लाल कर्ण शैलेन्द्र आनन्द 1955- कमलाकांत झा लल्लन प्रसाद ठाकुर 1951-1995 डॉ. कमलानन्द झा लोकनाथ मिश्र डॉ. रवीन्द्र कुमार चौधरी 1966- अशोक अविचल डॉ. श्रीपति सिंह १९४४- डॉ. उमाकान्त सुशील 1942- श्रीदेव सुकांत सोम 1950- डॉ. देवकांत मिश्र 1952- डॉ. नित्यानन्द लाल दास राजनाथ मिश्र 1950- पशुपतिनाथ झा, महोत्तरी, नेपाल 1954- अनिलचन्द्र ठाकुर 1954-2009 बृषेश चन्द्र लाल नारायणजी 1956- डॉ. श्री श्रीशंकर झा 1952- जगदीपनारायण "दीपक" राजदेव मंडल शिवप्रसाद यादव हीरेन्द्र कुमार झा 1958- मानेश्वर मनुज 1958- नबोनाथ झा महेन्द्र नारायण राम 1958- तारानन्द वियोगी 1966- भालचन्द्र झा मनमोहन झा कुमार शैलेन्द्र रमेश 1961- मेघन प्रसाद 1961- प्रदीप बिहारी 1963- चन्द्रमोहन झा पर्वा डॉ. सुरेन्द्र लाभ, नेपाल रोशन जनकपुरी, नेपाल डॉ. अरविन्द अक्कू 1957- फूलचन्द्र झा "प्रवीण" 1961- देवशंकर नवीन 1962- कुमार मनीष अरविन्द 1964- बदरी नारायण बर्मा राजेन्द्र किशोर, नेपाल श्याम सुन्दर शशि, नेपाल हिमांशु चौधरी, नेपाल सत्यनारायण मेहता भुवनेश्वर पाथेय राजेन्द्र झा, धनुषा अशोक कुमार मेहता धर्मेन्द्र विह्वल, सिरहा, नेपाल 1967- धीरेन्द्र कुमार झा निमिष झा, नेपाल अनलकान्त आनन्द कुमार झा 1977- वनदेवीपुत्र भवनाथ, नाटककार चन्द्रेश राम सेवक सिंह शहीद दुर्गानन्द झा, नेपाल उदयनाथ झा "अशोक" कपिलेश्वर राउत कपिलेश्वर साहू डॉ. शम्भु कुमार सिंह कृष्णचन्द्र यादव, नेपाल शिवकान्त ठाकुर शोभाकान्त झा उमाकान्त झा आ प्रियंका, मैथिली रंगमंच श्यामानन्द ठाकुर हरिकांत लाल दास, नेपाल शशिनाथ ठाकुर, नेपाल दुर्गानन्द मंडल शिव कुमार झा 1973- राम बिलास साहू महाकान्त ठाकुर बचेश्वर झा, निर्मली धीरेन्द्र कुमार, निर्मली चन्द्रशेखर कामति 1959- नन्द विलास राय बिनय भूषण सुधाकर झा, महोत्तरी , नेपाल सदरे आलम "गौहर" डॉ. भुवन किशोर मिश्र "भुवनेश" दिनकर कुमार डॉ. विनय विश्वबन्धु रामदेव प्रसाद मण्डल झारूदार, उमेश पासवान ओमप्रकाश झा जगदानन्द झा मनु अच्छेलाल शास्त्री डॉ अमोल राय नन्द कुमार मिश्र नन्द डॉ. नन्द कुमार मिश्र शिव कुमार प्रसाद दिलीप कुमार झा डॉ ताराकान्त झा अमरकान्त, नेपाल मुरलीधर झा कमलधर दास श्रीकान्त मण्डल, मैथिली रंगमंच बेचन ठाकुर गंगा झा नबोनारायण मिश्र 1955- कमलेश कुमार दास, रंगमंच कलाकार किशोर केशव, मैथिली रंगमंच कुमार गगन, मैथिली रंगमंच अशोक दत्त, जनकपुर मदन ठाकुर अभय कुमार यादव, मैथिली रंगमंच आशुतोष यादव अभिज्ञ कृष्ण कुमार कश्यप 1949- ललित कुमुद बटोही झा, मिथिला चित्रकला प्रवीण कुमार ठाकुर लाला पंडित, मिथिला मूर्तिकला राजेन्द्र पंडित, मिथिला मूर्तिकला गिरीश चन्द्र लाल दिनेश कुमार मिश्र नवेन्दु कुमार झा, पत्रकार चन्द्र किशोर लाल, पत्रकार, नेपाल उपेन्द्र भगत नागवंशी, नेपाल रमेश रंजन, परवाहा, नेपाल 1966- विनीत ठाकुर सुजीत कुमार झा, नेपाल सरोज खिलाड़ी देवांशु वत्स संतोष मिश्र, नेपाल सुनील कुमार मल्लिक, गायक, जनकपुर, नेपाल 1968- धीरेन्द्र प्रेमर्षि, सिरहा, नेपाल 1967- रबीन्द्र नारायण मिश्र कुमार भास्कर अमरेन्द्र यादव, नेपाल रघुनाथ मुखिया प्रदीप पुष्प संदीप कुमार साफी उमेश मंडल चन्द्रमणि स्व. हेमकान्त झा, गायक मुरलीधर, मैथिली फिल्म निर्देशक कुंज बिहारी, मैथिली गायक रामबाबू झा, गायक बि.पि.उदासी जितेन्द्र सहयोगी उदितनारायण फिल्म गायक प्रकाश झा, फिल्म निर्देशक कीर्ति आजाद क्रिकेट श्रीराम झा शतरंज अभिषेक झा गोल्फ अशोक कुमार 1981- राजेश रंजन, मैथिली फेडोरा प्रोजेक्ट संजय झा बिन्देश्वर पाठक बिनोद मिश्र राजकमल झा, अंग्रेजी लेखक, पत्रकार मानस बिहारी वर्मा, वैज्ञानिक फणीश्वर नाथ 'रेणु' मिथिला रत्न 1921-1977 रामधारी सिंह 'दिनकर' मिथिला रत्न 1908-1974 रामवृक्ष बेनीपुरी 1899-1967 डॉ. हरिवंश तरुण 1927-2009 हरिशंकर श्रीवास्तव "शलभ" 1934- स्व. जनार्दन प्रसाद झा 'द्विज' ओमप्रकाश भारती 1968- रामेश्वर प्रेम डॉ. नवल किशोर दास "नवल" मोहनानन्द झा 1955- रामाज्ञा शशिधर गणेश चंचल १९३०-२०११ डॉ. अमरेन्द्र गोरेलाल मनीषी कुन्दन अमिताभ शंभु अगेही पोद्दार रामावतार अरुण १९२३-१९९९ मजहर इमाम १९३०-२०१२ अरुण प्रकाश १९४८-२०१२ अंशुमन पाण्डेय वैदेही सीता याज्ञवल्क्य पत्नी मैत्रेयी मोतीदाइ बिहुला गांगो देवी रेशमा, कुसुमा, फुल्वा मोरंगक मोतीसायर विन्ध्यवासिनी देवी मैथिली लोकगीत 1920-2006 कामेश्वरी देवी 1922- कुसुमलता कर्ण अणिमा सिंह 1924- लिली रे 1933- चित्रलेखा देवी 1935- मोहिनी झा 1937- डॉ. सावित्री झा कविता देवी 1942- प्रमिला झा शान्ति सुमन 1942- प्रभावती झा 1945-1999 स्व. इलारानी सिंह 1945-1993 उषाकिरण खान 1945- नीरजा रेणु 1945- वीणा ठाकुर 1954- ज्ञानसुधा मिश्र जस्टिस मृदुला मिश्र वीणा कर्ण 1946- शेफालिका वर्मा 1943- नीता झा 1953- आशा मिश्र 1950- डॉ. सुनीति झा प्रेमलता मिश्र 'प्रेम' 1948- डॉ. इन्दिरा झा 1957 मेनका मल्लिक 1966- शारदा सिन्हा मैथिली लोकगीत 1953- लालपरी देवी शकुंतला चौधरी गोदावरी दत्ता, मिथिला चित्रकला उषा वर्मा 1948- कमला चौधरी 1953- सीता देवी, मिथिला चित्रकला सरस्वती चौधरी, जनकपुर डॉ. अरुणा चौधरी विभा रानी 1959- ज्योत्सना चन्द्रम 1963- सुस्मिता पाठक 1962- उर्मिला देवी, मिथिला चित्रकला यमुना देवी, मिथिला चित्रकला यशोदा देवी, मिथिला चित्रकला रमा झा, सम्पादक मिथिला दर्पण पन्ना झा सुधा कर्ण नूतन दास राधिका झा, अंग्रेजी लेखिका स्वयंप्रभा झा 1970- रूपा धीरू 1973- रंजना झा, विद्यापति संगीत गायिका रश्मि दत्त, गायिका, जनकपुर कामिनी कामायनी मुन्नी झा युवा रचनाकार कामिनी 1978- युवा कवियित्री रुक्साना सिद्दीकी कल्पना मिश्र, मैथिली रंगमंच ज्योति झा, , मैथिली रंगमंच किरण झा, मैथिली रंगमंच प्रियंका झा, मैथिली रंगमंच ऋतु कर्ण, मैथिली रंगमंच ज्योति वत्स, रंगमंच नेहा वर्मा, रंगमंच सविता अनुप्रिया मृदुला प्रधान अरुण मिश्र, महिला बॉक्सिंग राखी दास, मिथिला चित्रकला बनारसी पंडित,मिथिला चित्रकला, धनुषा, नेपाल देवकला देवी कर्ण,मिथिला चित्रकला, नेपाल मदनकला कर्ण,मिथिला चित्रकला, नेपाल महासुन्दरी देवी,मिथिला चित्रकला निर्जला झा, मिथिला चित्रकला, नेपाल फुलो साह, मिथिला चित्रकला, महोत्तरी, नेपाल रजनी पल्लवी संगीता कुमारी, मैथिली फेडोरा प्रोजेक्ट विन्देश्वरी दास गौरी सेन सीमा झा वाणी मिश्र, कवियित्री १९५३-१९९६ मौसमी बनर्जी, कवियित्री शैल झा शान्ति देवी शशिबाला मुन्नी कामत प्रेरणा झा अंशुमाला श्वेता झा चौधरी, चित्रकार श्वेता झा रानी झा मोती कर्ण कल्पना मिश्र निक्की प्रियदर्शिनी प्रज्ञा झा डॉ. नलिनी चौधरी नीलम चौधरी, कथक नृत्यांगना इरा मल्लिक गुंजन कर्ण पूनम मंडल प्रियंका झा स्तुति नारायण डॉ. ललिता झा १९५१ आरती कुमारी १९६७- मीना झा अनुपमा प्रियदर्शिनी आराधना मल्लिक शिखा प्रीति ठाकुर अनुपमा झा विनीता मल्लिक रेवती मिश्र अनामिका राज आभा झा प्रियंवदा तारा झा डॉ अपर्णा शान्ति लक्ष्मी चौधरी अनुपम रैना डॉ चित्रलेखा मिथिला रत्न/ मिथिला चित्रकला/ मिथिलाक पाबनि तिहार (कथा) आ मिथिलाक संगीत मैथिलीक आदिकवि विद्यापति ( विद्यापतिक चित्र: विदेह चित्रकला सम्मानसँ पुरस्कृत पनकलाल मण्डल द्वारा) कवीश्वर ज्योतिरीश्वर(लगभग १२७५-१३५०)सँ पूर्व (कारण ज्योतिरीश्वरक ग्रन्थमे हिनक चर्च अछि), मैथिलीक आदि कवि। संस्कृत आ अवहट्ठक विद्यापति ठक्कुरःसँ भिन्न। सम्भवतः बिस्फी गामक बार्बर कास्टक श्री महेश ठाकुरक पुत्र। समानान्तर परम्पराक बिदापत नाचमे विद्यापति पदावलीक (ज्योतिरीश्वरसँ पूर्वसँ) नृत्य-अभिनय होइत अछि।ज्योतिरीश्वर पूर्व विद्यापति:- कश्मीरक अभिनव गुप्त (दशम शताब्दीक अन्त आ एगारहम शताब्दीक प्रारम्भ)- ग्रन्थ “ईश्वर प्रत्याभिज्ञा- विभर्षिणी” मे विद्यापतिक उल्लेख करै छथि। श्रीधर दासक सदुक्तिकर्णामृत, (रचना ११ फरबरी १२०६, मध्यकालीन मिथिला, वि.कु. ठाकुर)- श्रीधर दास विद्यापतिक पाँच टा पद उद्धृत केने छथि जे विद्यापतिक पदावलीक भाषा छी। “जाव न मालतो कर परगास तावे न ताहि मधुकर विलास।” आ “मुन्दला मुकुल कतय मकरन्द” ज्योतिरीश्वर (१२७५-१३५०) षष्ठः कल्लोल- ॥अथ विद्यावन्त वर्णना॥….. विदातञो आस्थान भीतर भउ. तका पछा तेलङ्गी. मरहठी. वि।दओतिनी दुइ चित्रकइ गाङ्ग जउन निहालि अइसनि देषुअह. चउआञ्चरि चीरि एकहोङ्क परिहने …….से कइसन देषु. जइसे प्रयागक्षेत्र सरस्वतीकेँ गङ्गाजमुनाक सम्वाहि। का हो तइसे ता विदाञोतके दुअओ सम्वाहिका हो भउअह . दशञुन्धी राजा अवधान कराउ. विदाञोत आस्थान वइसु. (विदाञोत (पुरुख) भीतर भेल, तकर पाछाँ तेलङ्गी, मरहठी। विदओतनी (स्त्री) दूटा रंगक गङ्गा यमुनामे नहायलि एहन देखाइए। चारि-चारि आँचरबला चीर एकहकटा पहिरने। से केहन देखू. जेना प्रयागक्षेत्र सरस्वतीकेँ गङ्गाजमुनाक संगबे तेहने ओइ विदाञोतकेँ दुनू सम्वाहिका। दशञुन्धी राजाकेँ अवधान करेलक, विदाञोत स्थानपर बैसला। अष्टमः कल्लोलः- ॥अथ राज्य वर्णना॥ …विदाञोत त।न्हिक गीत. नृत्य. वाद्य. ताल. घाघर परिठरइतेँ आह… विदाञोत लोकनिक गीत, नृत्य, वाद्य, ताल, घाघर पहीरि कऽ भेल। महाकवि विद्यापति ठाकुर 1350-1435 विद्यापति ठक्कुरः 1350-1435 विषएवार बिस्फी-काश्यप (राजा शिवसिंहक दरबारी) आ संस्कृत आ अवहट्ठ लेखक। कीर्तिलता, कीर्तिपताका, पुरुष परीक्षा, गोरक्षविजय, लिखनावली आदि ग्रंथ समेत विपुल संख्यामे कालजयी रचना। ई मैथिलीक आदिकवि विद्यापति (ज्योतिरीश्वर पूर्व)सँ भिन्न छथि। (चित्रक आधार मिथिला सांस्कृतिक परिषद, कोलकाता द्वारा कोनो कलाकारसँ बनबाओल , कलाकारक नाम ६०-७० सालसँ अज्ञात कारणसँ गुप्त राखल गेल अछि।) रामलोचन शरण 1889-1971, सीतामढ़ीमे जन्म आ दरभंगामे मृत्यु। "मैथिली रामचिरत मानस" सहित तुलसीदासक समस्त रचनाक मैथिलीमे लेखन। मिथिलाक्षरमे मैथिलीक प्रकाशनक प्रारम्भ केनिहार। प्रकाशन-संस्था "पुस्तक भण्डार", लहेरियासराय, पटनाक संथापक। स्व. श्री हरिमोहन झा (१९०८-१९८४) जन्म १८ सितम्बर १९०८ ई. ग्राम+पो.- कुमर बाजितपुर , जिला- वैशाली, बिहार, भारत। पिता- स्वर्गीय पं. जनार्दन झा “जनसीदन” मैथिलीक अतिरिक्त हिन्दीक लब्धप्रतिष्ठ द्विवेदीयुगीन कवि-साहित्यकार। शिक्षा- दर्शनशास्त्रमे एम.ए.- १९३२, बिहार-उड़ीसामे सर्वोच्च स्थान लेल स्वर्णपदक प्राप्त। सन् १९३३ सँ बी.एन.कॉलेज पटनामे व्याख्याता, पटना कॉलेजमे १९४८ ई.सँ प्राध्यापक, सन् १९५३ सँ पटना विश्वविद्यालयमे प्रोफेसर तथा विभागाध्यक्ष आऽ सन् १९७० सँ १९७५ धरि यू.जी.सी. रिसर्च प्रोफेसर रहलाह। हिनकर मैथिली कृति १९३३ मे “कन्यादान” (उपन्यास), १९४३ मे “द्विरागमन”(उपन्यास), १९४५ मे “प्रणम्य देवता” (कथा-संग्रह), १९४९ मे “रंगशाला”(कथा-संग्रह), १९६० मे “चर्चरी”(कथा-संग्रह) आऽ १९४८ ई. मे “खट्टर ककाक तरंग” (व्यंग्य) अछि। “एकादशी” (कथा-संग्रह)क दोसर संस्करण १९८७ ए. मे आयल जाहिमे ग्रेजुअट पुतोहुक बदलाने “द्वादश निदान” सम्मिलित कएल गेल जे पहिने “मिथिला मिहिर”मे छपल छल मुदा पहिलुका कोनो संग्रहमे नहि आएल छल।श्री रमानथ झाक अनुरोधपर लिखल गेल “बाबाक संस्कार” सेहो एहि संग्रहमे अछि। आऽ हुनकर “खट्टर काका” हिन्दीमे सेहो १९७१ ई. मे पुस्तकाकार आएल। एकर अतिरिक्त हिनकक स्फुट प्रकाशित-लिखित पद्यक संग्रक “हरिमोहन झा रचनावली खण्ड ४ (कविता)” एहि नामसँ १९९९ ई.मे छपल आऽ हिनकर आत्मचरित “जीवन-यात्रा” १९८४ ई.मे छपल। हरिमोहन बाबूक “जीवन यात्रा” एकमात्र पोथी छल जे मैथिली अकादमी द्वारा प्रकाशित भेल छल आऽ एहि ग्रंथपर हिनका साहित्य अकादमी पुरस्कार १९८५ ई. मे मृत्योपरान्त देल गेलन्हि। साहित्य अकादमीसँ १९९९ ई. मे “बीछल कथा” नामसँ श्री राजमोहन झा आऽ श्री सुभाष चन्द्र यादव द्वारा चयनित हिनकर कथा सभक संग्रह प्रकाशित कएल गेल, एहि संग्रहमे किछु कथा एहनो अछि जे हिनकर एखन धरिक कोनो पुरान संग्रहमे सम्मिलित नहि छल। हिनकर अनेक रचना हिन्दी, गुजराती, मराठी, कन्नड़, तेलुगु आदि भाषामे अनुवादित भेल। हिन्दीमे “न्याय दर्शन”, “वैशेषिक दर्शन”, “तर्कशास्त्र”(निगमन), दत्त-चटर्जीक “भारतीय दर्शनक” अंग्रेजीसँ हिन्दी अनुवादक संग हिनकर सम्पादित “दार्शनिक विवेचनाएँ” आदि ग्रन्थ प्रकाशित अछि। अंग्रेजीमे हिनकर शोध ग्रंथ अछि- “ट्रेन्ड्स ऑफ लिंग्विस्टिक एनेलिसिस इन इंडियन फिलोसोफी”। प्राचीन युगमे विद्यापति मैथिली काव्यकेँ उत्कर्षक जाहि उच्च शिखरपर आसीन कएलनि, हरिमोहन झा आधुनिक मैथिली गद्यकेँ ताहि स्थानपर पहुँचा देलनि। हास्य व्यंग्यपूर्णशैलीमे सामाजिक-धार्मिक रूढ़ि, अंधविश्वास आऽ पाखण्डपर चोट हिनकर लेखनक अन्यतम वैशिष्ट्य रहलनि। मैथिलीमे आइयो सर्वाधिक कीनल आऽ पढ़ल जायबला पीथी सभ हिनकहि छनि। हरिमोहन झा समग्र हरिमोहन झा जीक समग्र रचनाक एक बेर सिंहावलोकन कएल जाए। कथा-एकांकी १. १.अयाची मिश्र (एकाङ्की) २. मंडन मिश्र (एकाङ्की) ३. महाराज विजय (एकाङ्की)४. बौआक दाम (एकाङ्की)५.रेलक झगड़ा (एकाङ्की) ६. संगठनक समस्या- पत्र शैली ७. “रसमयी”क ग्राहक – पत्र-शैली ८.पाँच पत्र –पत्र-शैली ९. दलानपरक गप्प१०.घूरपरक गप्प११.पोखड़िपरक गप्प १२. चौपाड़िपरक गप्प १३.धर्मशास्त्राचार्य १४.ज्योतिषाचार्य १५.पंडितजी १६.कविजी १७.परिवर्तन १८.युगक धर्म १९.महारानीक रहस्य २०.सात रंगक देवी २१.नौ लाखक गप्प २२.रंगशाला २३.अँचारक पातिल २४.चिकित्साक चक्र २५.रेशमी दोलाइ २६.धोखा २७.प्रेसक लीला २८.देवीजीक संस्कार २९.एहि बाटे अबै छथि सुरसरि धार ३०. कन्याक जीवन ३१. रेलक अनुभव ३२. ग्रामसेविका ३३. मर्यादाक भंग ३४. तिरहुताम ३५.टोटमा ३६.तीर्थयात्रा ३७.अलंकार-शिक्षा ३८.बाबाक संस्कार ३९.द्वादश निदान ४०.ग्रेजुएट पुतोहु ४१.ब्रह्माक शाप ४२.आदर्श भोजन ४३.सासुरक चिन्ह ४४.कालीबाड़ीक चोर ४५.कालाजारक उपचार४६.विनिमय ४७.दरोगाजीक मोंछ ४८.शास्त्रार्थ ४९.विकट पाहुन ५०.आदर्श कुटुम्ब ५१.साझी आश्रम ५२.घरजमाय५३.भदेशक नमूना ५४.बीमाक एजेन्ट ५५.अंगरेजिया बाबू पद्य १.सनातनी बाबा ओ कलियुगी सुधारक २.कन्याक नीलामी डाक ३.मिथिलाक मिहिर सँ ४.ढाला झा ५.टी. पार्टी ६.बुचकुन झा ७.पंडित लोकनि सँ ८.निरसन मामा ९.आगि १०.अङरेजिया लड़कीक समदाउनि ११.गरीबनीक बारहमासा १२.श्री यात्रीजीक प्रति : मैथिलीक उक्ति १३.सौराठ १४.अलगी १५.अशोक-वाटिकामे १६.पटना-स्तोत्र १७.श्रद्धेय अमरनाथ झाक प्रति श्रद्धांजलि १८.हिन्दी ओ मैथिली १९.बुचकुन बाबाक चिट्ठी २०.जगमग-जगमग दीप जराऊ २१.कलकत्ता गेला उत्तर २२.अकाल २३.कलकत्ता हमरा बड़ पसन्द २४.सलगमक खण्ड २५.बूढ़ानाथ २६.नवकी पीढ़ीसँ २७.पंडित ओ मेम २८.पंडित-विलाप २९.गंगाक घाटपर ३०.समयक चक्र ३१.महगी-माहात्म्य ३२.रस-निमन्त्रण ३३.अकविताक प्रति : कविताक उक्ति ३४.हम पाहुन छी ३५.अनागत प्रेयसीसँ ३६.मत्स्य-तीर्थ ३७.मिष्टान्न ३८.हे राजकमल ३९.घटक सौं ४०.पंडितजी सौं ४१.कनियाँक समस्या ४२.मुक्तक ४३.गजल ४४.मातृभूमि ४५.नारी-वन्दना ४६.हे दुलही के माय ४७.मात्रूभूमि वन्दना ४८.चन्द्रमाक मृत्यु ४९.मिथिला वन्दना ५०.कवि हे! आब कोदारि धरु ५१.महगी ५२.नव पराती ५३.चालिस आ चौहत्तरि ५४.प्रयोगवादी कविता ५५.स्व. ललित नारायण मिश्रक स्मृतिमे ५६.उद्गार ५७.अन्तिम सत्य ५८.मधुर भाषा मैथिली छी ५९.छगुन्ता ६०.विद्यापति पर्व महान हमर ६१.आठ संकल्प ६२.घूटर काका ६३.वनगाम-महिषी स्मृति ६४.मैथिली-वन्दना ६५.हे मातृभूमि केर माटि ६६.कहू की औ बाबू ६७.कश्मीर हमर थीक ६८.मंगल प्रभात ६९.बुचकुन बाबाक स्वप्न ७०.जय विद्यापति ७१.शुभांशसा ७२.पारिचारिका स्तोत्र ७३.मनचन बाबा ७४.एहि बेरक फगुआ ७५.परतारु जुनि ७६.हे मजूर! कष्ट लखि अहाँक (कविजी: प्रणम्य देवता) ७७.हे हे मजूर! (कविजी: प्रणम्य देवता) ७८.अबि! अनन्त कोमल करुणे! (कविजी: प्रणम्य देवता) ७९.हे वीर! हलायुध धर खड्ग(कविजी: प्रणम्य देवता) ८०.अयि! प्रचंड चंडिके! (कविजी: प्रणम्य देवता) ८१.झाँसीक रानी(कविजी: प्रणम्य देवता) ८२.हे प्रगतिशील महिला समाज(कविजी: प्रणम्य देवता) ८३.प्रिये! हम जाइत छी ओहि पार(कविजी: प्रणम्य देवता) ८४.धन्य-धन्य मातृभूमि (अयाची मिश्र : चर्चरी) ८५.धन्य ई मिथिलेशक दरबार(अयाची मिश्र : चर्चरी) ८६.हे डीह! अमर कीर्तिक निधान! (अयाची मिश्र : चर्चरी) ८७.हरिहर जन्म किएक लेल (माछक महत्व : खट्टर ककाक तरंग) ८८.केहन भेल अन्हेर(खट्टर ककाक टटका गप्प : खट्टर ककाक तरंग) खट्टर ककाक तरंग (कथा-व्यंग्य) कन्यादान (उपन्यास) द्विरागमन (उपन्यास) जीवनयात्रा (आत्मकथा) कन्यादानक समर्पण- जे समाज कन्या कैं जड़ पदार्थवत् दान कय देबा मे कुंठित नहि होइत छथि, जाहि समाजक सूत्रधार लोकनि बालक कैं पढ़ैबाक पाछाँ हजारक हजार पानि मे बहबैत छथि और कन्याक हेतु चारि कैञ्चाक सिलेटो कीनब आवश्यक नहि बुझैत छथि, जाहि समाजमे बी.ए. पास पतिक जीवन-संगिनी ए बी पर्यन्त नहि जनैत छथिन्ह, जाहि समाज कैं दाम्पत्य-जीवनक गाड़ी मे सरकसिया घोड़ाक संग निरीह बाछी कैं जोतैत कनेको ममता नहि लगैत छन्हि, ताही समाजक महारथी लोकनिक कर-कुलिश मे ई पुस्तक सविनय, सानुरोध ओ सभय समर्पित। प्रणम्य देवताक समर्पण- आइ सँ सात वर्ष पूर्व जे कार्तिकी पूर्णिमाक करार पर हमरा सँ पैंच लऽ गेलाह और तहियासँ पुनः कहियो दर्शन देबाक कृपा नहि कैलन्हि, जनिक चिर-स्मरणीय कीर्ति-कलाप प्रथमे कथा मे विशद रूप सँ वर्णित छैन्ह, जे “प्रणम्य देवता” क मध्य सर्वश्रेष्ठ आसन पर अधिकार जमा सकैत छथि, जनिक वन्दनीय बन्धुवर्ग ई पुस्तक देखि विनु मङनहि अपन स्वत्व स्थापित कय लऽ सकैत छथि, तेहन प्रमुख चरित-नायक, विकट पाहुन भीमेन्द्रनाथ क सुदृढ़ विशाल मुष्टिमे ई विचित्र-चरित्र-पूर्ण पोथी विवशतापूर्वक अर्पित छैन्ह! खट्टर ककाक तरंगक समर्पण- जे भंगक तरंगमे काव्य-शास्त्र-विनोदक धारा बहा दैत छथि; जनिक प्रवाहमे थोड़ेक कालक हेतु वेद-पुराण, धर्मशास्त्र, सभटा भसिया जाइत अछि; जे बात-बातमे अद्भुत रस ओ चमत्कारक चाशनी घोरि दैत छथि; जे मर्मस्पर्षी व्यंग्य द्वारा लोकक अन्तस्तल मे पहुँचि गुदगुदी लगा दैत छथि; तेहन चिर आनन्दमूर्ति, परिहास-प्रिय खट्टर कका कैं- त्व्दीयं वस्तु पितृव्य! तुभ्यमेव समर्पितम्। रंगशालाक समर्पण- जे अक्षययौवना नटी एहि अनादि अनन्त रंगशालाक प्रवर्तिका थिकीह, जे मनोहर वीणा-वादिनी सम्पूर्ण चराचर विश्वकैं अपना आंगुरक अग्रभाग पर नचा रहल छथि, जे रहस्यमयी अपन मोहिनी लीलाक झलक देखाय ककरो स्पर्श नहि करय दैत छथिन्ह, जे कल्पनाक रंगीन पाँखि पर आबि कलाकारक कलामे रसक संचार करैत छथिन्ह, तेहन आश्चर्यकारिणी चिरसुन्दरी त्रैलोक्य-विजयिनी माया देवी कैं। २.स्व. श्री वैद्यनाथ मिश्र “यात्री” (१९११-१९९८) स्व. श्री वैद्यनाथ मिश्र “यात्री” केर जन्म १९११ ई. मे अपन मामागाम सतलखामे भेलन्हि, जे हुनकर गाम तरौनीक समीपहिमे अछि। यात्री जी अपन गामक संस्कृत पाठशालामे पढ़ए लगलाह, फेर ओऽ पढ़बाक लेल वाराणसी आऽ कलकत्ता सेहो गेलाह आऽ संस्कृतमे “साहित्य आचार्य” केर उपाधि प्राप्त कएलन्हि। तकर बाद ओऽ कोलम्बो लग कलनिआ स्थान गेलाह पाली आऽ बुद्ध धर्मक अध्ययनक लेल। ओतए ओऽ बुद्धधर्ममे दीक्षित भए गेलाह आऽ हुनकर नाम पड़लन्हि नागार्जुन। यात्रीजी मार्क्सवादसँ प्रभावित छलाह। १९२९ ई. क अन्तिम मासमेमे मैथिली भाषामे पद्य लिखब शुरू कएलन्हि यात्री जी। १९३५ ई.सँ हिन्दीमे सेहो लिखए लगलाह। स्वामी सहजानन्द सरस्वती आऽ राहुल सांकृत्यायनक संग ओऽ किसान आन्दोलनमे संलग्न रहलाह आऽ १९३९ सँ १९४१ धरि एहि क्रममे विभिन्न जेलक यात्रा कएलन्हि। हुनकर बहुत रास रचना जे महात्मा गाँधीक मृत्युक बाद लिखल गेल छल, प्रतिबन्धित कए देल गेल। भारत-चीन युद्धमे कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा चीनकेँ देल समर्थनक बाद यात्रीजीक मतभेद कम्युनिस्ट पार्टीसँ भए गेलन्हि। जे.पी. अन्न्दोलनमे भाग लेबाक कारण आपात्कालमे हिनका जेलमे ठूसि देल गेल। यात्रीजी हिन्दीमे बाल साहित्य सेहो लिखलन्हि। हिन्दी आऽ मैथिलीक अतिरिक्त बांग्ला आऽ संस्कृतमे सेहो हिनकर लेखन आएल। मैथिलीक दोसर साहित्य अकादमी पुरस्कार १९६९ ई. मे यात्रीजीकेँ हुनकर कविता संग्रह “पत्रहीन नग्न गाछ”पर भेटलन्हि। १९९४ ई.मे हिनका साहित्य अकादमीक फेलो नियुक्त कएल गेल। यात्रीजी जखन २० वर्षक छलाह तखन १२ वर्षक कान्यासँ हिनकर विवाह भेल। हिनकर पिता गोकुल मिश्र अपन समाजमे अशिक्षितक गिनतीमे छलाह, मुदा चरित्रहीन छलाह। यात्रीजीक बच्चाक स्मृति छन्हि, जे हुनकर पिता कोना हुनकर अस्वस्थ आऽ ओछाओन धेने मायपर कुरहड़ि लए मारबाक लेल उठल छलाह, जखन ओऽ बेचारी हुनकासँ अपन चरित्रहीनता छोड़बाक गुहारि कए रहल छलीह। यात्रीजी मात्र छ वर्षक छलाह जखन हुनकर माए हुनका छोड़ि प्रयाण कए गेलीह। यात्रीजीकेँ अपन पिताक ओऽ चित्र सेहो रहि-रहि सतबैत रहलन्हि जाहिमे हुनकासँ मातृवत प्रेम करएबाली हुनकर विधवा काकीक, हुनकर पिताक अवैध सन्तानक गर्भपातमे, लगभग मृत्यु भए गेल छलन्हि। के एहन पाठक होएत जे यात्रीजीक हिन्दीमे लिखल “रतिनाथ की चाची” पढ़बाक काल बेर-बेर नहि कानल होएताह। पिता-पुत्रक ई घमासान एहन बढ़ल जे पुत्र अपन बाल-पत्नीकेँ पिता लग छोड़ि वाराणसी प्रयाण कए गेलाह। कर्मक फल भोगथु बूढ़ बाप हम टा संतति, से हुनक पाप ई जानि ह्वैन्हि जनु मनस्ताप अनको बिसरक थिक हमर नाम माँ मिथिले, ई अंतिम प्रणाम! (काशी/ नवंबर १९३६) काशीसँ श्रीलंका प्रयाण “कर्मक फल भोगथु बूढ़ बाप” ई कहि यात्रीजी अपन पिताक प्रति सभ उद्गार बाहर कए दैत छथि। १९४१ ई. मे यात्रीजी पत्नी, अपराजिता, लग आबि गेलथि। १९४१ ई. मे यात्रीजी दू टा मैथिली कविता लिखलन्हि- “बूढ़ वर” आऽ विलाप आऽ एकरा पाम्फलेट रूपमे छपबाए ट्रेनक यात्री लोकनिकेँ बेचलन्हि।जीविकाक ताकिमे सौँसे भारत दुनू प्राणी घुमलाह। पत्नीक जोर देलापर बीच-बीचमे तरौनी सेहो घुमि कए आबथि। आऽ फेर अएल १९४९ ई. अपना संग लेने यात्रीजीक पहिल मैथिली कविता-संग्रह “चित्रा”। १९५२ ई. धरि पत्नी संगमे घुमैत रहलथिन्ह, फेर तरौनीमे रहए लगलीह। यात्रीजी बीच- बीचमे आबथि। अपराजितासँ यात्रीजीकेँ छह टा सन्तान भेलन्हि, आऽ सभक सभ भार ओऽ अपना कान्हपर लेने रहलीह। यात्रीजी दमासँ परेशान रहैत छलथि। हम जखन दरभंगामे पढ़ैत रही तँ यात्रीजी ख्वाजा सरायमे रहैत छलाह। हमरा मोन अछि जे मैथिलीक कोनो कार्यक्रममे यात्रीजी आएल छलाह आऽ कम्युनिस्ट पार्टीबला सभ एजेन्डा छीनि लेने छल। अगिले दिन यात्रीजी अपनाकेँ ओहि धोधा-धोखीमे गेल सभाक कार्यवाहीसँ हटा लेलन्हि। एमर्जेन्सीमे जेल गेलाह तँ आर.एस.एस. केर कार्यकर्ता लोकनिसँ जेलमे भेँट भेलन्हि। आऽ जे.पी.क सम्पूर्ण क्रान्तिक विरुद्ध सेहो जेलसँ बाहर अएलाक बाद लिखलन्हि यात्रीजी। यात्रीजी मैथिलीमे बैद्यनाथ मिश्र “यात्री” आऽ हिन्दीमे नागार्जुन केर नामसँ रचना लिखलन्हि। “पृथ्वी ते पात्रं” १९५४ ई. मे “वैदेही”मे प्रकाशित भेल छल, हमरा सभक मैट्रिकक सिलेबसमे छल। यात्रीजी लिखैत छथि- “आन पाबनि तिहार तँ जे से। मुदा नबान निर्भूमि परिवारकेँ देखार कए दैत छैक। से कातिक अबैत देरी अपराजिता देवीक घोघ लटकि जाइन्हि। कचोटेँ पपनियो नहि उठा होइन्ह ककरो दिश! बेसाहल अन्नसँ कतउ नबान भेलइए”? आऽ अन्तमे यात्रीजीक संस्कृत पद्य:- वासन्ती कनकप्रभा प्रगुणिता पीतारुर्णेः पल्लवैः हेमाम्भोजविलासविभ्रमरता दूरे द्विरेफाः स्ता यैशसण्डलकेलिकानन कथा विस्मरिता भूतले छायाविभ्रमतारतम्यतरलाः तेऽमी “चिनार” द्रुमाः॥ बसंतक स्वर्णिम आभा द्विगुणित भऽ गेल अछि पीयर-लाल कोपड़सँ। स्वर्णकाल भ्रममे भौरा सभ एकरासँ दूर-दूर रहैत अछि। नन्दनवनक विहार जे पृथ्वीपर बिसारि दैत छथि, छाह झिलमिल घटैत-बढ़ैत जिनक डोलब अछि चंचल आ तरल। ओही चिनारकेँ हम देखने छी अडिग भेल ठाढ़। ३.श्री आरसी प्रसाद सिंह (१९११-१९९६), एरौत, समस्तीपुर। मैथिली आऽ हिन्दीक गीतकार। मैथिलीमे माटिक दीप, पूजाक फूल, सूर्यमुखी प्रकाशित। सूर्यमुखीपर १९८४क साहित्य अकादमी पुरस्कार। ४.रामाश्रय झा “रामरग” (१९२८-२००९ ) विद्वान, वागयकार, शिक्षक आऽ मंच सम्पादक छथि। भारतीय शास्त्रीय संगीतक समर्पित आऽ विलक्षण ओऽ विख्यात संगीतज्ञ पं रामाश्रय झा ’रामरंग’ केर जन्म ११ अगस्त १९२८ ई. तदनुसारभाद्र कृष्णपक्ष एकादशी तिथिकेँ मधुबनी जिलान्तर्गत खजुरा नामक गाममे भेलन्हि। हिनकर पिताक नाम पं सुखदेव झा आऽ काकाक नाम पं मधुसदन झा छन्हि। रामाश्रयजीक संगीत शिक्षा हिनका दुनू गोटेसँ हारमोनियम आऽ गायनक रूपमे मात्र ५ वर्षक आयुमे शुरू भए गेलन्हि। तकरा बाद श्री अवध पाठकजीसँ गायनक शिक्षा भेटलन्हि। १५ वर्ष धरि बनारसक एकटा प्रसिद्ध नाटक कम्पनीमे रामाश्रय झा जी कम्पोजरक रूपमे कार्य कएलन्हि। पं भोलानाथ भट्ट जी सँ २५ वर्ष धरि ध्रुवपद, धमार, खयाल, ठुमरी, दादरा, टप्पा शैली सभक विधिवत शिक्षा लेलन्हि। पं भट्ट जीक अतिरिक्त्त रामाश्रय झा जी पं बी.एन. ठकार (प्रयाग), उस्ताद हबीब खाँ (किराना), पं बी.एस. पाठक (प्रयाग) सँ सेहो संगीतक शिक्षा प्राप्त कएलन्हि। पं झा १९५४ सँ प्रयागमे स्थाई रूपसँ रहि रहल छथि। १९५५ ई.मे हिनकर नियुक्त्ति लूकरगंज संगीत विद्यालयमे संगीत अध्यापक रूपमे भेलन्हि। १९६० ई.मे हिनकर नियुक्त्ति प्रयाग संगीत समितिमे भेलन्हि, जतए १९७० धरि प्रभाकर आऽ संगीत प्रवीण कक्षाक शिक्षक रहलाह। १९७०मे इलाहाबाद विश्वविद्यालयक संगीत विभागाध्यक्ष श्री प्रो. उदयशंकर कोचकजी पं झाक संगीत क्षेत्रक सेवासँ प्रभावित भए विश्वविद्यालयमे हिनकर नियुक्त्ति कएलन्हि। पं झा उत्कृष्ट शिक्षक, गायक आऽ आकाशवाणीक प्रथम श्रेणीक कलाकार छथि। हिनकर अनेक शिष्य-शिष्या आकाशवाणीक प्रथम श्रेणीक कलाकार आऽ उत्तम शिक्षक छथि, जेना- डॉ. गीता बनर्जी, श्रीमति कमला बोस, श्रीमति शुभा मुद्गल, श्रीकान्त वैश्य,श्री शान्ता राम कशालकर, श्री शान्ता राम कशालकर, श्री कामता खन्ना, श्रीमति सत्या दास, डॉ. रूपाली रानी झा, डॉ इला मालवीय, श्री अनिल कुमार शर्मा, श्री रामशंकर सिंह, श्रीमति संगीता सक्सेना, श्री राजन पर्रिकर, श्रीमति रचना उपाध्याय, श्री नरसिंह भट्त, श्री भूपेन्द्र शुक्ला, श्री जगबन्धु इत्यादि। पं झा संगीत शास्त्र केर श्रेष्ठ लेखक छथि आऽ हिनकर लिखल अभिनव गीतांजलि केर पांचू भाग प्रकाशित भए चुकल अछि, जाहिमे २००सँ ऊपर रागक व्याख्या अछि आऽ दू हजारक आसपास बंदिश अछि। मिथिलावासी श्री रामरंग राग तीरभुक्त्ति, राग वैदेही भैरव, आऽ राग विद्यापति कल्याण केर रचना सेहो कएने छथि आऽ मैथिली भाषामे हिनकर खयाल ’रंजयति इति रागः’ केर अनुरूप अछि। अभिनव गीतांजलि, हुनकर उच्चकोटिक शास्त्र रचना अछि, जे पाँच भागमे अछि। अपन साहित्यिक वाणी, शाब्दिक रूप जे होइत अछि कोनो संगीत रचनाक, आऽ धातु जे अछि स्वरक लयक रचना आऽ एहि सभ गुणसँ युक्त्त छथि “रामरंग”। रामरंगक बंदिश वा रचनामे अहाँकेँ भेटत स्वर, शब्द आऽ मात्राक लयबद्ध बंधन। पुरान ध्रुपद जेकाँ पद्य आऽ स्वरकेँ ओऽ तेनाकेँ बान्हि दैत छथि, जे दुनू एक दोसरमे मिलि जाइत अछि। हुनकर रचना हुनकर उच्चारणसँ मिलि कए मौलिक तात्त्विक स्थायी भरण, सभ बितैत दिन एकटा नव आत्मनिरीक्षण एकटा नव स्थायी। रामरंगमे संगीतक लाक्षणिक तत्त्व प्रखर होइत छन्हि। संगीतक व्याकरणक सम्पूर्ण पकड़ छन्हि, जाहिसँ उचित शब्दक प्रयोगक निर्णय ओऽ कए पबैत छथि। छन्द शास्त्रक, कोषक, अलंकारक, भावक आऽ रसक वृहत् ज्ञान छन्हि रामरंगकेँ। संगहि स्थानीय संस्कृतिक, विभिन्न भाषाक आऽ ललित कलाक सिद्धान्तक सेहो गहन अध्ययन छन्हि रामाश्रय झा जीकेँ। वादन, गाय आऽ नृत्यक, साधल-कण्ठ, लय-ताल-काल, देशी राग, दोसराक मनसमे जाऽ कए बुझनिहार, नव लय आऽ अभ्व्यक्त्ति, प्रबन्धक समस्त ज्ञान, कम समयमे गीत रचना, विभिन्न मौखिक संरचना निर्माण, आलापक प्रदर्शन आऽ गमक एहि सभटामे पारंगत छथि रामरंग। १९८२ मे उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादेमी पुरस्कारक संगे ’रत्न सदस्यता’ सेहो देल गेलन्हि। संगीत लेखनक हेतु काका हाथरसी पुरस्कार, आऽ भारतक सर्वोच्च संगीत संस्था आइ.टी.सी. केर सम्मान सेहो हिनक भेटि चुकल छन्हि। २०० ई. मे स्वर साधना रत्न अवार्ड, २००५ मे संगीत नाटक अकादेमीक राष्ट्रीय पुरस्कार, भारत संगीत रत्न, राग ऋषि, संत तुलसीदास सम्मान, प्रायाग गौरव एवं सोपरी अकादेमीक ’सा म प वितस्ता’ इत्यादि सम्मान श्री झाकेँ प्राप्त छन्हि। श्री रामरंग जी प्रयागमे ’वारिन दास संगीत परिषद’ केर स्थापना कए अनेकानेक संगीत समारोहक आयोजन सेहो कएने छथि। ’इलाहाबाद विश्वविद्यालय संगीत सम्मेलन’ ३० वर्षसँ बन्द पड़ल छल जकरा वार्षिक रूपसँ १९८० मे पुनः श्री झा आरम्भ करबओलन्हि। किएक तँ श्री झा लग कोनो औपचारिक डिग्री नहि छलन्हि, इलाहाबाद विश्वविद्यालय अपन नियममे परिवर्त्तन कएलक आऽ हिनका ओतए संगीत विभागाध्यक्ष बनाओल गेलन्हि, जतएसँ ओऽ १९८९ ई. मे सेवानिवृत्त भेलाह। तुलसीक मानसक आधार पर श्री झा सात काण्डक संगीत रामायणक सेहो रचना कएलन्हि। पं झा मुख्य रूपसँ खयाल, ठुमरी, दादरा, टप्पा आऽ संगहि ध्रुवपद, धमार, तराना, तिरवट, चतुरंग, रागमाला, रागसागर, रागताल सागर, भजन आऽ लोकगीत गायनमे सिद्ध छथि। अखन ८० वर्षक आयुमे प्रयागमे श्री झा संगीत साधनामे रत छथि। ५.स्व. राजकमल (मणीन्द्र नारायण चौधरी) (१९२९-१९६७), महिषी, सहरसा। रचना:- आदि कथा, आन्दोलन, पाथर फूल (उपन्यास), स्वरगंधा (कविता संग्रह), ललका पाग (कथा संग्रह), कथा पराग (कथा संग्रह सम्पादन)। हिन्दीमे अनेक उपन्यास, कविताक रचना, चौरङ्गी (बङला उपन्यासक हिन्दी रूपान्तर) अत्यन्त प्रसिद्ध। मिथिलांचलक मध्य वर्गक आर्थिक एवं सामाजिक संघर्षमे बाधक सभ तरहक संस्कार पर प्रहार करब हिनक वैशिष्ट्य रहलन्हि अछि। कथा, कविता, उपन्यास सभ विधामे ई नवीन विचार धाराक छाप छोड़ि गेल छथि। ६.स्व. श्री गोपालजी झा “गोपेश” क जन्म मधुबनी जिलाक मेहथ गाममे १९३१ ई.मे भेलन्हि। गोपेशजी बिहार सरकारक राजभाषा विभागसँ सेवानिवृत्त भेल छलाह। गोपेशजी कविता, एकांकी आऽ लघुकथा लिखबामे अभिरुचि छलन्हि। ई विभिन्न विधामे रचन कए मैथिलीक सेवा कएलन्हि। हिनकर रचित चारि गोट कविता संग्रह “सोन दाइक चिट्ठी”, “गुम भेल ठाढ़ छी”, “एलबम” आऽ “आब कहू मन केहन लगैए” प्रकाशित भेल जाहिमे सोनदाइक चिट्ठी बेश लोकप्रिय भेल। वस्तुस्थितिक यथावत् वर्णन करब हिनक काव्य-रचनाक विशेषता छन्हि। श्री मायानन्द मिश्रजीसँ दूरभाषपर गपक क्रममे ई गप पता चलल जे गोपेशजी नहि रहलाह, फेर देवशंकर नवीन जी सेहो कहलन्हि। हमर पिताक १९९५ ई.मे मृत्युक उपरान्त हमहूँ ढ़ेर रास आन्ही-बिहाड़ि देखैत एक-शहरसँ दोसर शहर बौएलहुँ, बीचमे एकाध बेर गोपेशजी सँ गप्पो भेल, ओऽ ईएह कहथि जे पिताक सिद्धांतकेँ पकड़ने रहब। फेर पटना नगर छोड़लहुँ आऽ आइ गोपेशजीकेँ श्रद्धांजलिक रूपमे स्मरण कए रहल छियन्हि। स्मरण: हमरा सभक डेरापर भागलपुरमे गोपेशजी आऽ हरिमोहन झा एक बेर आयल छलाह। गोपेशजी सनेस घुरैत काल मधुर लेलन्हि आऽ हरिमोहनझा जी कुरथी! हुनकर कवितामे सेहो वस्तुस्थितिक एहि तरह्क यथावत वर्णनक आग्रह अछि जे हुनका चरित्रमे रहैत छथि। हरिमोहन झाजीक अन्तिम समयमे प्रायः गोपेशजीकेँ अखबार पढ़िकेँ सुनबैत देखैत छलियन्हि। हरिमोहनझाक १९८४ ई.मेमृत्युक किछु दिनुका बादहिसँ ओऽ शनैः शनैः मैथिली साहित्यक हलचलसँ दूर होमए लगलाह। एहि बीच एकटा साक्षात्कारमे शरदिन्दु चौधरी सेहो हुनकासँ एहि विषयपर पुछबाक कोशिश कएने छलाह मुदा गोपेशजी कहियो ने कन्ट्रोवर्सीमे रहलाह, से ओऽ ई प्रश्न टालि गेल छलाह। ७.मायानन्द मिश्रक हिनक जन्म १७ अगस्त १९३४ ई. केँ सुपौल जिलाक बनैनियाँ गाममे भेलनि। तत्कालीन बनैनियाँ कोसीक प्रकोपसँ उजड़ि गेल। फलतः हिनक आरम्भिक शिक्षा अपन मामा स्व. रामकृष्ण झा “किसुन” क सान्निध्यमे सुपौलसँ भेलनि। उच्च शिक्षाक हेतु ई दरभंगा चलि गेलाह आऽ ओतएसँ बी.ए. कएल। पश्चात् बिहार विश्वविद्यालय मुजफ्फरपुरसँ हिन्दी एवं मैथिलीमे एम.ए. कएलनि। १९५६ ई. मे आकाशवाणी पटनामे मैथिली कार्यक्रमक लेल नियुक्त भेलाह। एहि अवधिमे मायानन्द बाबू १० गोट रेडियो नाटक लिखलनि जे अत्यन्त प्रशंसनीय रहल। १९६१ ई.मे ओऽ व्याख्याता, मैथिली विभाग, सहरसा कॉलेज सहरसा, पदपर नियुक्त कएल गेलाह, जतए ई विश्वविद्यालय आचार्य एवं मैथिली विभागाध्यक्षक पदकेँ सुशोभित कएल तथा एक सफल शिक्षकक रूपमे अगस्त १९९४ मे एही विभागसँ अवकाश ग्रहण कएलनि। छात्रजीवनसँ हिनक सुकोमल गेय गीतक रचना- “नभ आंगनमे पवनक रथपर कारी कारी बादरि आयल। देखितहि धरणीक बिषम पियास, सजल-सजल भए गेल आकाश बिजुरी केर कोमल कोरामे डुबइत सुरुज किरण अलसायल। झिहरि-झिहरि सुनि गगनक गान, धरणि अधर पर मृदु मुसुकान आकुल कोमल दूबरि दूभिक मनमे नव-नव आशा उमड़ल।” मैथिली काव्य मंचक श्रोताक हृदयकेँ जीति चुकल छल। आचार्य रमानाथ झाक “कविता कुसुम” मे ई कविता स्थान पाबि विश्वविद्यालयक पाठ्यक्रममे अध्ययन-अध्यापनक हेतु स्वीकृत भेल। हिनक उद्घोषण-कला आऽ मंच-संचालन कौशलसँ मैथिलीक कोन मंच नहि लाभान्वित भेल होएत। तेँ हिनका मैथिली मंचक सम्राट कहल जाइत छल। १९६० ई.सँ २००० ई. धरि सफलतम मंच संचालन आऽ अपन चुम्बकीय वाणीसँ मैथिली जनमानसकेँ अपना दिस आकृष्ट कएलनि। भाषा आन्दोलनक सूत्रधारक रूपमे हिनक सहयोगकेँ मिथिला आऽ मैथिली सेहो सभदिन स्मरण राखत। पहिने मायानन्द जी कविता लिखलन्हि,पछाति जा कय हिनक प्रतिभा आलोचनात्मक निबंध, उपन्यास आ’ कथामे सेहो प्रकट भेलन्हि। भाङ्क लोटा, आगि मोम आ’ पाथर आओर चन्द्र-बिन्दु- हिनकर कथा संग्रह सभ छन्हि। बिहाड़ि पात पाथर , मंत्र-पुत्र ,खोता आ’ चिडै आ’ सूर्यास्त हिनकर उपन्यास सभ अछि॥ दिशांतर हिनकर कविता संग्रह अछि। एकर अतिरिक्त सोने की नैय्या माटी के लोग, प्रथमं शैल पुत्री च,मंत्रपुत्र, पुरोहित आ’ स्त्री-धन हिनकर हिन्दीक कृति अछि। मंत्रपुत्र हिन्दी आ’ मैथिली दुनू भाषामे प्रकाशित भेल आ’ एकर मैथिली संस्करणक हेतु हिनका साहित्य अकादमी पुरस्कारसँ सम्मानित कएल गेलन्हि। श्री मायानन्द मिश्र प्रबोध सम्मानसँ सेहो पुरस्कृत छथि। पहिने मायानन्द जी कोमल पदावलीक रचना करैत छलाह , पाछाँ जा’ कय प्रयोगवादी कविता सभ सेहो रचलन्हि। श्री मायानान्द मिश्रक जन्म सहरसा जिलाक बनैनिया गाममे 17 अगस्त 1934 ई.केँ भेलन्हि। मैथिलीमे एम.ए. कएलाक बाद किछु दिन ई आकाशवानी पटनाक चौपाल सँ संबद्ध रहलाह । तकरा बाद सहरसा कॉलेजमे मैथिलीक व्याख्याता आ’ विभागाध्यक्ष रहलाह। पहिने मायानन्द जी कविता लिखलन्हि,पछाति जा कय हिनक प्रतिभा आलोचनात्मक निबंध, उपन्यास आ’ कथामे सेहो प्रकट भेलन्हि। भाङ्क लोटा, आगि मोम आ’ पाथर आओर चन्द्र-बिन्दु- हिनकर कथा संग्रह सभ छन्हि। बिहाड़ि पात पाथर , मंत्र-पुत्र ,खोता आ’ चिडै आ’ सूर्यास्त हिनकर उपन्यास सभ अछि॥ दिशांतर हिनकर कविता संग्रह अछि। एकर अतिरिक्त सोने की नैय्या माटी के लोग, प्रथमं शैल पुत्री च,मंत्रपुत्र, पुरोहित आ’ स्त्री-धन हिनकर हिन्दीक कृति अछि। मंत्रपुत्र हिन्दी आ’ मैथिली दुनू भाषामे प्रकाशित भेल आ’ एकर मैथिली संस्करणक हेतु हिनका साहित्य अकादमी पुरस्कारसँ सम्मानित कएल गेलन्हि। श्री मायानन्द मिश्र प्रबोध सम्मानसँ सेहो पुरस्कृत छथि। पहिने मायानन्द जी कोमल पदावलीक रचना करैत छलाह , पाछाँ जा’ कय प्रयोगवादी कविता सभ सेहो रचलन्हि। (प्रबोध साहित्य-सम्मान २००७क पाम्फलेटसँ)- प्रो. मायानन्द मिश्र आधुनिक मैथिली साहित्य-साधनमे प्र्. मायानन्द मिश्रकेँ श्रेष्ठ रचनाकारक श्रेणीमे परिगणित कएल जाइत छनि। प्रतिभा, पाण्डित्य आऽ रचनात्मकता, नित-नवीन शोध तथा स्थायी साहित्यक सृजन, हिनक मातृभाषाक प्रति अगाध समर्पणक द्योतक थिक। मैथिली कथा साहित्यक क्षेत्रमे हिनक रचना यथार्थवादक ठोस भूमिक दर्शन करबैत अछि। कथ्य, भाव-भाषा, शिल्प-शैली आदि पक्षमे ई मैथिली कथाकेँ कलात्मकताक उच्च गरिमा प्रदान कएलनि। उपन्यासकारक रूपमे मनोवैज्ञानिक एवं यथार्थवादी दृष्टिकोण हिनक रचनामे समान रूपेँ प्राप्त होइत छन्हि। हिनक रचना सभ उत्तरोत्तर बदलैत कथा-शिल्पक आस्वादन करबैत अछि। हिनका ऐतिहासिक उपन्यास “मंत्रपुत्रपर” १९८८ ई. मे साहित्य अकादमी पुरस्कारसँ सम्मानित कएल गेलनि। हिनक जन्म १७ अगस्त १९३४ ई. केँ सुपौल जिलाक बनैनियाँ गाममे भेलनि। तत्कालीन बनैनियाँ कोसीक प्रकोपसँ उजड़ि गेल। फलतः हिनक आरम्भिक शिक्षा अपन मामा स्व. रामकृष्ण झा “किसुन” क सान्निध्यमे सुपौलसँ भेलनि। उच्च शिक्षाक हेतु ई दरभंगा चलि गेलाह आऽ ओतएसँ बी.ए. कएल। पश्चात् बिहार विश्वविद्यालय मुजफ्फरपुरसँ हिन्दी एवं मैथिलीमे एम.ए. कएलनि। १९५६ ई. मे आकाशवाणी पटनामे मैथिली कार्यक्रमक लेल नियुक्त भेलाह। एहि अवधिमे मायानन्द बाबू १० गोट रेडियो नाटक लिखलनि जे अत्यन्त प्रशंसनीय रहल। १९६१ ई.मे ओऽ व्याख्याता, मैथिली विभाग, सहरसा कॉलेज सहरसा, पदपर नियुक्त कएल गेलाह, जतए ई विश्वविद्यालय आचार्य एवं मैथिली विभागाध्यक्षक पदकेँ सुशोभित कएल तथा एक सफल शिक्षकक रूपमे अगस्त १९९४ मे एही विभागसँ अवकाश ग्रहण कएलनि। छात्रजीवनसँ हिनक सुकोमल गेय गीतक रचना “नभ आंगनमे पवनक रथपर कारी कारी बादरि” मैथिली काव्य मंचक श्रोताक हृदयकेँ जीति चुकल छल। आचार्य रमानाथ झाक “कविता कुसुम” मे ई कविता स्थान पाबि विश्वविद्यालयक पाठ्यक्रममे अध्ययन-अध्यापनक हेतु स्वीकृत भेल। हिनक उद्घोषण-कला आऽ मंच-संचालन कौशलसँ मैथिलीक कोन मंच नहि लाभान्वित भेल होएत। तेँ हिनका मैथिली मंचक सम्राट कहल जाइत छल। १९६० ई.सँ २००० ई. धरि सफलतम मंच संचालन आऽ अपन चुम्बकीय वाणीसँ मैथिली जनमानसकेँ अपना दिस आकृष्ट कएलनि। भाषा आन्दोलनक सूत्रधारक रूपमे हिनक सहयोगकेँ मिथिला आऽ मैथिली सेहो सभदिन स्मरण राखत। माया बाबूक पहिल रचना १९५१ मे प्रकाशित “भांगक लोटा” व्यंग्यात्मक कथासंग्रह छलनि जे मैथिली पाठक वर्गकेँ एकत्रित कएलक आऽ हिनका ख्याति देलक। आधुनिक मैथिली साहित्यमे आलोचनात्मक यथार्थवाद हिनक रचनामे पाओल जाइत अछि। “आगि मोम आऽ पाथर” (१९६०) एवं “चन्द्रबिन्दु” (१९८३) एहि शृंखलाक महत्वपूर्ण उपलब्धि थिक। मैथिली साहित्यमे हिनक प्रादुर्भाव कविक रूपमे भेल छलनि जकर परिणति “दिशान्तर” (१९६०) ओ “अवान्तर” (१९८८) एहि दू काव्यसंग्रहमे भेल। प्रयोगवादी कविक रूपमे सेहो हिनका रेखांकित कएल जाइत अछि। मायानन्द बाबोक पहिल उपन्यास “बिहाड़ि पात आऽ पाथर” (१९६०) वैवाहिक समस्यापर लिखल गेल। ओतहि “खोता आऽ चिड़ै” मे समाजक दलित-पीड़ित, उपेक्षित वर्गमे सुनगैत चेतनाकेँ रेखांकित कएल गेल अछि। “मंत्रपुत्र” (१९८६) मे हिनक ऐतिहसिक चिन्तन तथा युग-सत्यक मौलिक उपस्थापन झलकैत अछि। “सूर्यास्त” (२००४) हिनक मानवीय जीवनक अगाध अनुभवक प्रतिफलन अछि। गम्भीर निबन्ध संग्रहक रूपमे “अकथ कथा” (२००४) एवं “भारतीय परम्पराक भूमिका” (२००५) हिनक साहित्य कृतिक विविधताकेँ प्रदर्शित करैत छनि। “माटी के लोग सोने की नैया”(१९६७) हिन्दीमे हिनक पहिल उपन्यास अछि जे कोसीक मल्लाहक जीवन संघर्षकेँ उजागर करैत अछि। एकर अतिरिक्त हिन्दीमे मायाबाबूक ऐतिहासिक उपन्यासक शृंखला महत्वपूर्ण अछि- “प्रथमं शैलपुत्री च” (१९९०), मंत्रपुत्र (१९९०), पुरोहित (१९९९) आऽ “स्त्रीधन” (२००७) प्राचीन भारतीय सभ्यताक गाथा थिक। माया बाबूकेँ तीन पुत्र छनि आऽ ओऽ धर्मपत्नी श्रीमति मणि देवीक संग विद्यापति नगर, सहरसामे बसल छथि। साहित्य अकादमी, दिल्ली आऽ चेतना समिति, पटना केर ३० जुलाई २००६ केर “मीट द ऑथर” पाम्फलेटसँ अंग्रेजीसँ मैथिलीमे अनुदित मायानन्द्र मिश्र- प्रोफेसर मायानन्द मिश्र मैथिली साहित्यक एकटा पैघ नाम छथि। ओऽ विख्यात कवि, गीतकार, लघु-कथा लेखक, उपन्यासकार, नाटककार, निबन्ध-लेखक, सम्पादक आऽ मंत्रमुग्ध करबा लेल विख्यात वक्ता छथि। जीवनक वृहत अनुभव आऽ मानव अन्तर्मनमे पैसबाक आत्मचेतना लए माया बाबू उपन्यासमे प्रयोग करैत रहलाह। एहि अद्भुत कलाक कारण हुनकर उपन्यास-लेखन नूतनतासँ भरल अछि। हुनकर गद्यमे पठनीयता आऽ प्रवाह अछि। हुनकर जीवन-दर्शन वैज्ञानिक, आधुनिक आऽ वस्तुनिष्ठ अछि। मायानन्द मिश्रक जन्म १७ अगस्त १९३४ ई. केँ सुपौल जिलाक बनैनियाँ गाममे भेलन्हि। हुनकर प्रारम्भिक शिक्षा सुपौलमे भेलन्हि। कोशीक बाढ़िसँ बनैनियाँ आऽ सुपौल दुनू ठाम भारी विपदा आएल आऽ जीवनक अपार क्षति भेल। अपन आरम्भिक जीवन कालहिसँ कोशी क्षेत्रक जीवनसँ हिनकर परिचय छल। आगाँक शिक्षाक लेल ई दरभंगा गेलाह आऽ ओतएसँ स्नातक भेलाह। फेर बिहार विश्वविद्यालयसँ हिन्दी आऽ मैथिलीमे एम.ए. कएलन्हि। ओऽ १९५६ मे आकाशवाणी पटनामे अएलाह जतए ओऽ बहुत लोकप्रिय छलाह। अपम स्पष्ट, अल्प-वयसू, मुग्ध करए बला कंठ आऽ आकर्षक प्रस्तुतिसँ ओऽ चौपाल कार्यक्रमकेँ सम्पूर्ण बिहारमे प्रशंसनीय बना देलन्हि। बिहारक सभ भाषा-बोलीक लोक सभ दिन चौपाल सुनबाक हिस्सक लगा लेलन्हि। आकाशवाणी पटनामे अपन अल्पकालक उपस्थितिमे ओऽ १० टा रेडियो नाटक लिखलन्हि, जे व्यापक-स्तरपर चर्चित रहल आऽ प्रशंसा पओलक। हुनका पहिल कथा-संग्रह “भांगक लोटासँ” पर्याप्त ख्याति भेटलन्हि। ई विश्वास कएल गेल जे व्यंग्य-सम्राट हरिमोहन झाक प्रभाव एहि संग्रहपर पर्याप्त पड़ल छल। मुदा ओऽ एहिसँ शीघ्रहि बाहर अएलाह आऽ समालोचनात्मक यथार्थवाद दिसि मुख कएलन्हि। “आगि मोम आऽ पाथर” आऽ “चन्द्र-बिन्दु” ई दुनू टा कथा-संग्रहमे एहि तरहक यथार्थवाद सोझाँ आएल। हुनकर कथा लेखनक तेसर चरण छल राजनीतिपर समालोचनात्मक व्यंग्य, राजनीतिक अपराधीकरण आऽ सामाजिक विकृति। भाषा, भावना, दृश्य आऽ कलात्मक निरपेक्षता जे मायानन्द मिश्रक कथामे छन्हि, से व्यंग्यक एकटा एकटा अद्भुत प्रतिमान बनेलक। हुनकर औपन्यासिक चेतनता एतेक नोकगर, तीव्र, तीक्ष्ण आऽ सूक्ष्म छलन्हि जे कथा स्मरणीय बनि जाइत छल। लोकक आर्थिक, सामाजिक आऽ राजनैतिक संघर्ष लेखकक प्रमुख अभिरुचि छन्हि आऽ हुनकर कथामे ई सभ तत्व सन्हायल भेटत। आधुनिक मैथिलीमे राजनीतिपर पहिल बेर कथा लिखबाक श्रेय हुनके जाइत छन्हि। तहिना उपन्यास बिहाड़ि पात पाथर, खोंता आऽ चिड़ै, मंत्रपुत्र आऽ सूर्यास्त उपन्यासक क्षेत्रमे नव पथ तकलक अछि। सूर्यास्त छोड़ि, हुनकर आन उपन्यास निम्न मध्य-वर्गकेँ वर्णित करैत अछि, सूर्यास्त भारतमे बिटिश साम्राज्यक पतनक प्रभावी रूपसँ वर्णन करैत अछि। मैथिली साहित्यमे मायानन्द मिश्रक योगदान बहुआयमी छन्हि। जतए हुनकर दिशान्तर आऽ अवान्तर नव पद्यक क्षितिजकेँ ऊँचसँ छुबैत अछि, हुनकर गीत आऽ गीतल मानवीय कोमल भावनाकेँ रुकर रूपेँ छुबैत अछि। ताहि द्वारे ओऽ शृंगारिक कविक रूपमे सेहि विख्यात छथि। ओऽ विभिन्न महत्वपूर्ण साहित्यिक निबन्ध आऽ समालोचनात्मक निबन्ध सभ सेहो लिखने छथि, जे मैथिली साहित्यक अमूल्य धरोहड़ि अछि। अपन तार्किक चिन्तन-विधिसँ ओऽ विभिन्न विषयपर अपन मौलिक चिन्तनकेँ निबन्धमे सोझाँ अनैत छथि। निबन्धमे सेहो हुनकर शोभा आऽ प्रवाह आश्चर्यजनक रूपमे बनल रहैत छन्हि। ओऽ किछु ऐतिहासिक निबन्ध सेहो लिखलन्हि जे हुनकर इतिहास विषयमे विस्तृत अध्ययनकेँ दर्शित करैत अछि। हुनकर ऐतिहासिक निबन्ध संग्रह “भारतीय परम्पराक भूमिका” प्रेसमे अछि। ओऽ अपन योगदान मैथिली पत्रकारितामे मैथिली पत्रिका “अभिव्यञ्जना” निकालि आऽ सम्पादित कए देलन्हि। ई अपन समयक एकटा महत्वपूर्ण पत्रिका छल जे अपन समयक विश्वक श्रेष्ठ उपन्यासक चर्चा आऽ मूल्यांकन करैत छल। ई पत्रिका अपन समयक विभिन्न विवादक समाधान तकबाक प्रयास कएलक। ई सभ हुनकर परिपक्व सम्पादकीय क्षमताक परिणाम छल। मायानन्द मिश्र मैथिली आऽ मिथिलाकेँ एकटा नव प्लेटफॉर्म देलन्हि। मैथिली साहित्यिक प्लेटफॉर्मक ओऽ एकमात्र राजकुमार छथि आऽ हुनकर विकल्प क्यो नहि अछि। हुनका “मैथिली मंचक राजकुमार” आऽ मैथिली मंचक सम्राट”क उपाधि प्राप्त छन्हि। ओऽ आकाशवाणीक जीवन्त परम्पराक जनक छथि। ओऽ मैथिली भाषा आन्दोलनक पथ प्रदर्शक छथि। ओऽ मैथिली भाषाक सांवैधानिक मान्यताक लेल एकटा उत्साही आऽ आज्ञाकारी योद्धाक रूपमे संघर्ष कएलन्हि। हुनकर मैथिली आन्दोलनपर लिखल पोथी “अकथ कथा” प्रकाशित भए रहल अछि। मायानन्द जी एकाटा सफल, लोकप्रिय आऽ निष्कपट शिक्षक रहल छथि। विद्यार्थी सभ हुनकर शिक्षकक उच्च गुणक प्रेमी रहलाह। विश्वविद्यालय प्रोफेसर आऽ विभागाध्यक्ष पदसँ सेवावकाशक बाद ओऽ सम्पूर्ण रूपसँ लिखबामे अपनाकेँ समर्पित कए लेलन्हि। ओऽ हिन्दीमे उपन्यास आऽ कथा सेहो लिखलन्हि। “माटी के लोग सोने की नैय्या” मे ओऽ कोसी क्षेत्रक नाविकक जीवन-संघर्षकेँ चित्रित करैत छथि। ओऽ प्राचीन भारतपर उपन्यासक शृंखला लिखने छथि। ओहि श्रेणीमे प्रथम अछि “प्रथमं शैलपुत्री च” जे २०००० ई.पू.सँ १८०० ई.पू. क सभ्यताक सामाजिक, आर्थिक आऽ सांस्कृतिक स्वरूप देखबैत अछि। एहि उपन्यासमे ओऽ भारतीय संस्कृतिक पुरातन सामूहिक समाजसँ द्रविड़ उत्पादक समाजक उत्थान आऽ पतन वर्णित करैत छथि। मंत्रपुत्र एहि श्रृंखलाक दोसर उपन्यास अछि जे १५०० ई.पू.सँ १२०० ई.पू.क ऋगवैदिक समाजपर आधारित अछि। ई आर्य आऽ अनार्य सभ्यताक मिलनक एकटा विश्वसनीय चित्र सोझाँ रखैत अछि। ई उपन्यास तात्कालिक सामाजिक-सांस्कृतिक संघर्षक आऽ प्रारम्भिक भारतीय समाजमे रक्त-मिलनक आऽ भारतीय संस्कृतिक एकीकृत-भिन्नताक वर्णन करैत अछि। उपन्यासकार एहि क्षेत्रमे कएल गेल अध्ययन आऽ शोधक अध्ययन कएने छथि। श्रृंखलाक तेसर उपन्यास पुरोहित ऋगवेदकालक बादक समाजक सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक आऽ सांस्कृतिक संघर्षक विस्तृत विवरण अछि। ई कथा अछि समाज आऽ जीवनक चतुष्कोटि हिन्दू वर्गीकरण- वर्णाश्रमक उदयक जे कर्मकाण्ड आऽ ज्ञानकाण्डक १००० ई.पू. केर सैद्धांतिक संघर्षक बाद उदित भेल। श्रृंखलाक चारिम उपन्यास स्त्रीधन ५०० ई.पू.क सूत्रकालक विवेचन करैत अछि, मुद्रण अवस्थामे अछि। ई महिलापर एकटा अद्वितीय वितर्क अछि। आब ओऽ एकटा उपन्यास लिखि रहल छथि कर्मकाण्ड। अपन सभ ऐतिहासिक उपन्यासमे ओऽ आधुनिक भारतीय समाजक प्रासंगिकता तकबाक प्रयास कएने छथि। हुनकर गहन शोधक बाद लिखल किछु ऐतिहासिक निबन्ध “प्राचीन भारत में पुरुओत्तर” भारतीय इतिहास परिषद, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित कएल जाऽ रहल अछि। प्रोफेसर मायानन्द मिश्र एखनो मैथिली साहित्यकेँ समृद्ध करबामे जुटल छथि आऽ एकर चतुर्दिक विकासक हेतु समर्पित छथि। ८.डॉ प्रफुल्ल कुमार सिंह ‘मौन’ (१९३८- )- ग्राम+पोस्ट- हसनपुर, जिला-समस्तीपुर। पिता स्व. वीरेन्द्र नारायण सिँह, माता स्व. रामकली देवी। जन्मतिथि- २० जनवरी १९३८. एम.ए., डिप.एड., विद्या-वारिधि(डि.लिट)। सेवाक्रम: नेपाल आऽ भारतमे प्राध्यापन। १.म.मो.कॉलेज, विराटनगर, नेपाल, १९६३-७३ ई.। २. प्रधानाचार्य, रा.प्र. सिंह कॉलेज, महनार (वैशाली), १९७३-९१ ई.। ३. महाविद्यालय निरीक्षक, बी.आर. अम्बेडकर बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर, १९९१-९८. मैथिलीक अतिरिक्त नेपाली अंग्रेजी आऽ हिन्दीक ज्ञाता। मैथिलीमे १.नेपालक मैथिली साहित्यक इतिहास(विराटनगर,१९७२ई.), २.ब्रह्मग्राम(रिपोर्ताज दरभंगा १९७२ ई.), ३.’मैथिली’ त्रैमासिकक सम्पादन (विराटनगर,नेपाल १९७०-७३ई.), ४.मैथिलीक नेनागीत (पटना, १९८८ ई.), ५.नेपालक आधुनिक मैथिली साहित्य (पटना, १९९८ ई.), ६. प्रेमचन्द चयनित कथा, भाग- १ आऽ २ (अनुवाद), ७. वाल्मीकिक देशमे (महनार, २००५ ई.)। प्रकाशनाधीन: “विदापत” (लोकधर्मी नाट्य) एवं “मिथिलाक लोकसंस्कृति”। भूमिका लेखन: १. नेपालक शिलोत्कीर्ण मैथिली गीत (डॉ रामदेव झा), २.धर्मराज युधिष्ठिर (महाकाव्य प्रो. लक्ष्मण शास्त्री), ३.अनंग कुसुमा (महाकाव्य डॉ मणिपद्म), ४.जट-जटिन/ सामा-चकेबा/ अनिल पतंग), ५.जट-जटिन (रामभरोस कापड़ि भ्रमर)। अकादमिक अवदान: परामर्शी, साहित्य अकादमी, दिल्ली। कार्यकारिणी सदस्य, भारतीय नृत्य कला मन्दिर, पटना। सदस्य, भारतीय भाषा संस्थान, मैसूर। भारतीय ज्ञानपीठ, दिल्ली। कार्यकारिणी सदस्य, जनकपुर ललित कला प्रतिष्ठान, जनकपुरधाम, नेपाल। सम्मान: मौन जीकेँ साहित्य अकादमी अनुवाद पुरस्कार, २००४ ई., मिथिला विभूति सम्मान, दरभंगा, रेणु सम्मान, विराटनगर, नेपाल, मैथिली इतिहास सम्मान, वीरगंज, नेपाल, लोक-संस्कृति सम्मान, जनकपुरधाम,नेपाल, सलहेस शिखर सम्मान, सिरहा नेपाल, पूर्वोत्तर मैथिल सम्मान, गौहाटी, सरहपाद शिखर सम्मान, रानी, बेगूसराय आऽ चेतना समिति, पटनाक सम्मान भेटल छन्हि। राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठीमे सहभागिता- इम्फाल (मणिपुर), गोहाटी (असम), कोलकाता (प. बंगाल), भोपाल (मध्यप्रदेश), आगरा (उ.प्र.), भागलपुर, हजारीबाग, (झारखण्ड), सहरसा, मधुबनी, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, वैशाली, पटना, काठमाण्डू (नेपाल), जनकपुर (नेपाल)। मीडिया: भारत एवं नेपालक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिका सभमे सहस्राधिक रचना प्रकाशित। आकाशवाणी एवं दूरदर्शनसँ प्रायः साठ-सत्तर वार्तादि प्रसारित। अप्रकाशित कृति सभ: १. मिथिलाक लोकसंस्कृति, २. बिहरैत बनजारा मन (रिपोर्ताज), ३.मैथिलीक गाथा-नायक, ४.कथा-लघु-कथा, ५.शोध-बोध (अनुसन्धान परक आलेख)। व्यक्तित्व-कृतित्व मूल्यांकन: प्रो. प्रफुल्ल कुमार सिंह मौन: साधना और साहित्य, सम्पादक डॉ.रामप्रवेश सिंह, डॉ. शेखर शंकर (मुजफ्फरपुर, १९९८ई.)। चर्चित हिन्दी पुस्तक सभ: थारू लोकगीत (१९६८ ई.), सुनसरी (रिपोर्ताज, १९७७), बिहार के बौद्ध संदर्भ (१९९२), हमारे लोक देवी-देवता (१९९९ ई.), बिहार की जैन संस्कृति (२००४ ई.), मेरे रेडियो नाटक (१९९१ ई.), सम्पादित- बुद्ध, विदेह और मिथिला (१९८५), बुद्ध और विहार (१९८४ ई.), बुद्ध और अम्बपाली (१९८७ ई.), राजा सलहेस: साहित्य और संस्कृति (२००२ ई.), मिथिला की लोक संस्कृति (२००६ ई.)। वर्तमानमे मौनजी अपन गाममे साहित्य शोध आऽ रचनामे लीन छथि। ९.डॉ. प्रेमशंकर सिंह (१९४२- ) ग्राम+पोस्ट- जोगियारा, थाना- जाले, जिला- दरभंगा। मैथिलीक वरिष्ठ सृजनशील, मननशील आऽ अध्ययनशील प्रतिभाक धनी साहित्य-चिन्तक, दिशा-बोधक, समालोचक, नाटक ओ रंगमंचक निष्णात गवेषक, मैथिली गद्यकेँ नव-स्वरूप देनिहार, कुशल अनुवादक, प्रवीण सम्पादक, मैथिली, हिन्दी, संस्कृत साहित्यक प्रखर विद्वान् तथा बाङला एवं अंग्रेजी साहित्यक अध्ययन-अन्वेषणमे निरत प्रोफेसर डॉ. प्रेमशंकर सिंह ( २० जनवरी १९४२ )क विलक्षण लेखनीसँ एकपर एक अक्षय कृति भेल अछि निःसृत। हिनक बहुमूल्य गवेषणात्मक, मौलिक, अनूदित आऽ सम्पादित कृति रहल अछि अविरल चर्चित-अर्चित। ओऽ अदम्य उत्साह, धैर्य, लगन आऽ संघर्ष कऽ तन्मयताक संग मैथिलीक बहुमूल्य धरोरादिक अन्वेषण कऽ देलनि पुस्तकाकार रूप। हिनक अन्वेषण पूर्ण ग्रन्थ आऽ प्रबन्धकार आलेखादि व्यापक, चिन्तन, मनन, मैथिल संस्कृतिक आऽ परम्पराक थिक धरोहर। हिनक सृजनशीलतासँ अनुप्राणित भऽ चेतना समिति, पटना मिथिला विभूति सम्मान (ताम्र-पत्र) एवं मिथिला-दर्पण, मुम्बई वरिष्ठ लेखक सम्मानसँ कयलक अछि अलंकृत। सम्प्रति चारि दशक धरि भागलपुर विश्वविद्यालयक प्रोफेसर एवं मैथिली विभागाध्यक्षक गरिमापूर्ण पदसँ अवकाशोपरान्त अनवरत मैथिली विभागाध्यक्षक गरिमापूर्ण पदसँ अवकाशोपरान्त अनवरत मैथिली साहित्यक भण्डारकेँ अभिवर्द्धित करबाक दिशामे संलग्न छथि, स्वतन्त्र सारस्वत-साधनामे। कृति- लिप्यान्तरण-१. अङ्कीयानाट, मनोज प्रकाशन, भागलपुर, १९६७। सम्पादन- १. गद्यवल्लरी, महेश प्रकाशन, भागलपुर, १९६६, २. नव एकांकी, महेश प्रकाशन, भागलपुर, १९६७, ३.पत्र-पुष्प, महेश प्रकाशन, भागलपुर, १९७०, ४.पदलतिका, महेश प्रकाशन, भागलपुर, १९८७, ५. अनमिल आखर, कर्णगोष्ठी, कोलकाता, २००० ६.मणिकण, कर्णगोष्ठी, कोलकाता २००३, ७.हुनकासँ भेट भेल छल, कर्णगोष्ठी, कोलकाता २००४, ८. मैथिली लोकगाथाक इतिहास, कर्णगोष्ठी, कोलकाता २००३, ९. भारतीक बिलाड़ि, कर्णगोष्ठी, कोलकाता २००३, १०.चित्रा-विचित्रा, कर्णगोष्ठी, कोलकाता २००३, ११. साहित्यकारक दिन, मिथिला सांस्कृतिक परिषद, कोलकाता, २००७. १२. वुआड़िभक्तितरङ्गिणी, ऋचा प्रकाशन, भागलपुर २००८, १३.मैथिली लोकोक्ति कोश, भारतीय भाषा संस्थान, मैसूर, २००८, १४.रूपा सोना हीरा, कर्णगोष्ठी, कोलकाता, २००८। पत्रिका सम्पादन- भूमिजा २००२ मौलिक मैथिली: १.मैथिली नाटक ओ रंगमंच,मैथिली अकादमी, पटना, १९७८ २.मैथिली नाटक परिचय, मैथिली अकादमी, पटना, १९८१ ३.पुरुषार्थ ओ विद्यापति, ऋचा प्रकाशन, भागलपुर, १९८६ ४.मिथिलाक विभूति जीवन झा, मैथिली अकादमी, पटना, १९८७५.नाट्यान्वाचय, शेखर प्रकाशन, पटना २००२ ६.आधुनिक मैथिली साहित्यमे हास्य-व्यंग्य, मैथिली अकादमी, पटना, २००४ ७.प्रपाणिका, कर्णगोष्ठी, कोलकाता २००५, ८.ईक्षण, ऋचा प्रकाशन भागलपुर २००८ ९.युगसंधिक प्रतिमान, ऋचा प्रकाशन, भागलपुर २००८ १०.चेतना समिति ओ नाट्यमंच, चेतना समिति, पटना २००८ मौलिक हिन्दी: १.विद्यापति अनुशीलन और मूल्यांकन, प्रथमखण्ड, बिहार हिन्दी ग्रन्थ अकादमी, पटना १९७१ २.विद्यापति अनुशीलन और मूल्यांकन, द्वितीय खण्ड, बिहार हिन्दी ग्रन्थ अकादमी, पटना १९७२, ३.हिन्दी नाटक कोश, नेशनल पब्लिकेशन हाउस, दिल्ली १९७६. अनुवाद: हिन्दी एवं मैथिली- १.श्रीपादकृष्ण कोल्हटकर, साहित्य अकादमी, नई दिल्ली १९८८, २.अरण्य फसिल, साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली २००१ ३.पागल दुनिया, साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली २००१, ४.गोविन्ददास, साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली २००७ ५.रक्तानल, ऋचा प्रकाशन, भागलपुर २००८. १०.श्री बिलट पासवान “विहंगम” जीक जन्म मधुबनी जिलाक एकहत्था ग्राममे १९४० ई. मे भेलन्हि। छात्रावस्थासँ राजनीति एवं साहित्य दुनूमे अभिरुचि रहलन्हि अछि। किछु अवधिक हेतु ई बिहार राज्यक उपमंत्री पदकेँ सेहो सुशोभित कएलन्हि आऽ बिहार विधान सभाक सदस्य रहलाह। गाम घरक चित्रण एवं दलित वर्गक वर्णन हिनक रचनामे सर्वत्र भेटत। ११.श्री डॉ. गंगेश गुंजन(१९४२- )। जन्म स्थान- पिलखबाड़, मधुबनी। एम.ए. (हिन्दी), रेडियो नाटक पर पी.एच.डी.। कवि, कथाकार, नाटककार आ’ उपन्यासकार।१९६४-६५ मे पाँच गोटे कवि-लेखक “काल पुरुष”(कालपुरुष अर्थात् आब स्वर्गीय प्रभास कुमार चौधरी, श्री गंगेश गुन्जन, श्री साकेतानन्द, आब स्वर्गीय श्री बालेश्वर तथा गौरीकान्त चौधरीकान्त, आब स्वर्गीय) नामसँ सम्पादित करैत मैथिलीक प्रथम नवलेखनक अनियमितकालीन पत्रिका “अनामा”-जकर ई नाम साकेतानन्दजी द्वारा देल गेल छल आऽ बाकी चारू गोटे द्वारा अभिहित भेल छल- छपल छल। ओहि समयमे ई प्रयास ताहि समयक यथास्थितिवादी मैथिलीमे पैघ दुस्साहस मानल गेलैक। फणीश्वरनाथ “रेणु” जी अनामाक लोकार्पण करैत काल कहलन्हि, “ किछु छिनार छौरा सभक ई साहित्यिक प्रयास अनामा भावी मैथिली लेखनमे युगचेतनाक जरूरी अनुभवक बाट खोलत आऽ आधुनिक बनाओत”। “किछु छिनार छौरा सभक” रेणुजीक अपन अन्दाज छलन्हि बजबाक, जे हुनकर सन्सर्गमे रहल आऽ सुनने अछि, तकरा एकर व्यञ्जना आऽ रस बूझल हेतैक। ओना “अनामा”क कालपुरुष लोकनि कोनो रूपमे साहित्यिक मान्य मर्यादाक प्रति अवहेलना वा तिरस्कार नहि कएने रहथि। एकाध टिप्पणीमे मैथिलीक पुरानपंथी काव्यरुचिक प्रति कतिपय मुखर आविष्कारक स्वर अवश्य रहैक, जे सभ युगमे नव-पीढ़ीक स्वाभाविक व्यवहार होइछ। आओर जे पुरान पीढ़ीक लेखककेँ प्रिय नहि लगैत छनि आऽ सेहो स्वभाविके। मुदा अनामा केर तीन अंक मात्र निकलि सकलैक। सैह अनाम्मा बादमे “कथादिशा”क नामसँ स्व.श्री प्रभास कुमार चौधरी आऽ श्री गंगेश गुंजन दू गोटेक सम्पादनमे -तकनीकी-व्यवहारिक कारणसँ-छपैत रहल। कथा-दिशाक ऐतिहासिक कथा विशेषांक लोकक मानसमे एखनो ओहिना छन्हि। श्री गंगेश गुंजन मैथिलीक प्रथम चौबटिया नाटक बुधिबधियाक लेखक छथि आऽ हिनका उचितवक्ता (कथा संग्रह) क लेल साहित्य अकादमी पुरस्कार भेटल छन्हि। एकर अतिरिक्त्त मैथिलीमे हम एकटा मिथ्या परिचय, लोक सुनू (कविता संग्रह), अन्हार- इजोत (कथा संग्रह), पहिल लोक (उपन्यास), आइ भोर (नाटक)प्रकाशित। हिन्दीमे मिथिलांचल की लोक कथाएँ, मणिपद्मक नैका- बनिजाराक मैथिलीसँ हिन्दी अनुवाद आऽ शब्द तैयार है (कविता संग्रह)। १२.सुभाष चन्द्र यादव, कथाकार, समीक्षक एवं अनुवादक, जन्म ०५ मार्च १९४८, मातृक दीवानगंज, सुपौलमे। पैतृक स्थान: बलबा-मेनाही, सुपौल- मधुबनी। आरम्भिक शिक्षा दीवानगंज एवं सुपौलमे। पटना कॉलेज, पटनासँ बी.ए.। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्लीसँ हिन्दीमे एम.ए. तथा पी.एह.डी.। १९८२ सँ अध्यापन। सम्प्रति: अध्यक्ष, स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग, भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय, पश्चिमी परिसर, सहरसा, बिहार। मैथिली, हिन्दी, बंगला, संस्कृत, उर्दू, अंग्रेजी, स्पेनिश एवं फ्रेंच भाषाक ज्ञान। प्रकाशन: घरदेखिया (मैथिली कथा-संग्रह), मैथिली अकादमी, पटना, १९८३, हाली (अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद), साहित्य अकादमी, नई दिल्ली, १९८८, बीछल कथा (हरिमोहन झाक कथाक चयन एवं भूमिका), साहित्य अकादमी, नई दिल्ली, १९९९, बिहाड़ि आउ (बंगला सँ मैथिली अनुवाद), किसुन संकल्प लोक, सुपौल, १९९५, भारत-विभाजन और हिन्दी उपन्यास (हिन्दी आलोचना), बिहार राष्ट्रभाषा परिषद्, पटना, २००१, राजकमल चौधरी का सफर (हिन्दी जीवनी) सारांश प्रकाशन, नई दिल्ली, २००१, मैथिलीमे करीब सत्तरि टा कथा, तीस टा समीक्षा आ हिन्दी, बंगला तथा अंग्रेजी मे अनेक अनुवाद प्रकाशित। भूतपूर्व सदस्य: साहित्य अकादमी परामर्श मंडल, मैथिली अकादमी कार्य-समिति, बिहार सरकारक सांस्कृतिक नीति-निर्धारण समिति। १३.प्रोफेसर उदय नारायण सिंह ‘नचिकेता’ जन्म-१९५१ ई. कलकत्तामे। शिक्षा- बी. ए. (सम्मान) भाषाविज्ञान (प्रथम ईशान स्कॉलर) कलकत्ता विश्वविद्यालय, कलकत्ता एम.ए. भाषाविज्ञान, पी-एचडी. भाषाविज्ञान, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली रचना संसार- मैथिली साहित्य मध्य छद्म नाम ‘नचितकेता’क नामे, मैथिली आ बंगला साहित्यक कवि आ नाटककारक रूपमे प्रख्यात श्री सिंह एखन धरि चारि कविता संग्रह, एगारह गोट नाटक (मैथिलीमे), छओ साहित्यिक निबंध आ दू टा कविता संग्रह (बांग्लामे), एकर अतिरिक्त एहि दुनू भाषामे आ अंग्रेजीमे कतोक पुस्तकक अनुवाद क’ चुकल छथि। १९६६ मे १५ वर्षक उम्रमे पहिल काव्य संग्रह ‘कवयो वदन्ति’। १९७१ ‘अमृतस्य पुत्राः’ (कविता संकलन) आऽ ‘नायकक नाम जीवन’ (नाटक)| १९७४ मे ‘एक छल राजा’/ ’नाटकक लेल’ (नाटक)। १९७६-७७ ‘प्रत्यावर्त्तन’/ ’रामलीला’(नाटक)। १९७८मे जनक आऽ अन्य एकांकी। १९८१ ‘अनुत्तरण’(कविता-संकलन)। १९८८ ‘प्रियंवदा’ (नाटिका)। १९९७-‘रवीन्द्रनाथक बाल-साहित्य’(अनुवाद)। १९९८ ‘अनुकृति’- आधुनिक मैथिली कविताक बंगलामे अनुवाद, संगहि बंगलामे दूटा कविता संकलन। १९९९ ‘अश्रु ओ परिहास’। २००२ ‘खाम खेयाली’। २००६मे ‘मध्यमपुरुष एकवचन’(कविता संग्रह। २००८ ई. मे नाटक “नो एण्ट्री: मा प्रविश” सम्पूर्ण रूपेँ “विदेह” ई- पत्रिकामे धारावाहिक रूपेँ ई-प्रकाशित भए एकटा कीर्तिमान बनेलक। भाषा-विज्ञानक क्षेत्रमे दसटा पोथी आऽ दू सयसँ बेशी शोध-पत्र प्रकाशित। १४ टा पी.एच.डी. आऽ २९ टा एम.फिल. शोध-कर्मक दिशा निर्देश। आन साहित्यिक गतिविधि- प्रो. सिंह बांगलादेश, कॅरबियन आयलैंड, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नेपाल, पाकिस्तान, रूस, सिंगापुर, स्वीडन, थायलैंड आर अमेरिकामे विविध विषय पर अपन व्याख्यान देने छथि। इंडो-इटैलियन कल्चरल एक्सचेंज फॉर क्रिएटिव रायटर्सक सदस्य(1999), त्रिनिदाद आर टॉबेगो मे कार्यालयी प्रतिनिधिक सदस्य (2002), आ मॉरीशस (2005), फ्रैंकफर्ट पुस्तक मेलामे आमंत्रित कवि, जतय ‘इंडिया गेस्ट ऑफ ऑनर’ सँ सम्मानित भेलाह (2006), हालहिमे चीन मे संपन्न एगारह लेखकक सांस्कृतिक प्रतिनिधिक प्रमुखक रूपमे भाग नेने छलाह। कार्यक्षेत्र- महाराजा सियाजी राव विश्वविद्यालय,बड़ौदा,(1979-81), दक्षिणी गुजरात विश्वविद्यालय (1981-85), दिल्ली विश्वविद्यालय,दिल्ली (1985-87), हैदराबाद विश्वविद्यालय, हैदराबाद,(1987-2000) मे भाषाविज्ञानक प्रोफेसर, ओ अतिथि प्रोफेसरक रूपमे इंडियन इन्स्टीच्यूट ऑफ एडवांस स्टडी, शिमला (1989) मे काज करैत वर्तमानमे केन्द्रीय भारतीय भाषा संस्थान, मैसूर मे निदेशकक पद पर आसीन छथि। १४.श्री रामभरोस कापड़ि “भ्रमर” (१९५१- ) जन्म-बघचौरा, जिला धनुषा (नेपाल)। सम्प्रति-जनकपुरधाम, नेपाल। त्रिभुवन विश्वविद्यालयसँ एम.ए., पी.एच.डी. (मानद)। हाल: प्रधान सम्पादक: गामघर साप्ताहिक, जनकपुर एक्सप्रेस दैनिक, आंजुर मासिक, आंगन अर्द्धवार्षिक (प्रकाशक नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान, कमलादी)। मौलिक कृति: बन्नकोठरी: औनाइत धुँआ (कविता संग्रह), नहि, आब नहि (दीर्घ कविता), तोरा संगे जएबौ रे कुजबा (कथा संग्रह, मैथिली अकादमी पटना, १९८४), मोमक पघलैत अधर (गीत, गजल संग्रह, १९८३), अप्पन अनचिन्हार (कविता संग्रह, १९९० ई.), रानी चन्द्रावती (नाटक), एकटा आओर बसन्त (नाटक), महिषासुर मुर्दाबाद एवं अन्य नाटक (नाटक संग्रह), अन्ततः (कथा-संग्रह), मैथिली संस्कृति बीच रमाउंदा (सांस्कृतिक निबन्ध सभक संग्रह), बिसरल-बिसरल सन (कविता-संग्रह), जनकपुर लोक चित्र (मिथिला पेंटिङ्गस), लोक नाट्य: जट-जटिन (अनुसन्धान)। नेपाली कृति: आजको धनुषा, जनकपुरधाम र यस क्षेत्रका सांस्कृतिक सम्पदाहरु (आलेख-संग्रह), भ्रमरका उत्कृष्ट नाटकहरु (अनुवाद)। सम्पादन: मैथिली पद्य संग्रह (नेपाल राजकीय प्रज्ञा प्रतिष्ठान), लाबाक धान (कविता संग्रह), माथुरजीक “त्रिशुली” खण्डकाव्य (कवि स्व. मथुरानन्द चौधरी “माथुर”), नेपालमे मैथिली पत्रकारिता, मैथिली लोक नृत्य: भाव, भंगिमा एवं स्वरूप (आलेख संग्रह)। गामघर साप्ताहिकक २६ वर्षसँ सम्पादन-प्रकाशन, “अर्चना” साहित्यिक संग्रहक १५ वर्ष धरि सम्पादन-प्रकाशन। “आँजुर” मैथिली मासिकक सम्पादन प्रकाशन, “अंजुली” नेपाली मासिक/ पाक्षिकक सम्पादन प्रकाशन। अनुवाद: भयो, अब भयो (“नहि आब नहि”क मनु ब्राजाकीद्वारा कयल नेपाली अनुवाद) सम्मान: नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान द्वारा पहिल बेर १९९५ ई.मे घोषित ५० हजार टाकाक मायादेवी प्रज्ञा पुरस्कारक पहिल प्राप्तकर्ता। प्रधानमंत्रीद्वारा प्रशस्तिपत्र एवं पुरस्कार प्रदान। विद्यापति सेवा संस्थान दरिभङ्गाद्वारा सम्मानित, मैथिली साहित्य परिषद, वीरगंजद्वारा सम्मानित, “आकृति” जनकपुर द्वारा सम्मानित, दीर्घ पत्रकारिता सेवाक लेल नेपाल पत्रकार महासंघ धनुषाद्वारा सम्मानित, जिल्ला विकास समिति धनुषा द्वारा दीर्घ पत्रकारिता सेवाक लेल पुरस्कृत एवं सम्मानित, नेपाली मैथिली साहित्य परिषद द्वारा २०५९ सालक अन्तर्राष्ट्रिय मैथिली सम्मेलन मुम्वई द्वारा “मिथिला रत्न” द्वारा सम्मानित, शेखर प्रकाशन “पटना” द्वारा “शेखर सम्मान”, मधुरिमा नेपाल (काठमाण्डौ) द्वारा २०६३ सालक मधुरिमा सम्मान प्राप्त। काठमाण्डूमे आयोजित सार्कस्तरीय कवि गोष्ठीमे मैथिली भाषाक प्रतिनिधित्व। सामाजिक सेवा : अध्यक्ष-तराई जनजाति अध्ययन प्रतिष्ठान, जनकपुर, अध्यक्ष- जनकपुर ललित कला प्रतिष्ठान, जनकपुर, उपाध्यक्ष- मैथिली प्रज्ञा प्रतिष्ठान, जनकपुर, उपकुलपति- मैथिली अकादमी, नेपाल, उपाध्यक्ष- नेपाल मैथिली थाई सांस्कृतिक परिषद, सचिव- दीनानाथ भगवती समाज कल्याण गुठी, जनकपुर, सदस्य- जिल्ला वाल कल्याण समिति, धनुषा, सदस्य- मैथिली विकास कोष, धनुषा, राष्ट्रीय पार्षद- नेपाल पत्रकार महासंघ, धनुषा। १५.डॉ महेन्द्र नारायण राम (१९५८- ), मैथिलीमे एम.ए. आऽ पी.एच..डी., नीलकमल नाट्य कला परिषद, खुटौनाक संस्थापक, दीपायतनक मास्टर ट्रेनर, सम्पादन-“नव ज्योति” पत्रिका, “लोकशक्ति” सामाजिक मुख-पत्रक। लोकवृत्त ताहूमे लोकगाथाक अध्येता। ओऽ अध्यक्ष मैथिली अकादमी, बिहारक संग अनेक संस्थामे विभिन्न पदकेँ सुशोभित कएलनि। हिनका बिहार ग्रंथ अकादमी, पटना, राष्ट्रभाषा परिषद, पटना, लोक साहित्यिक मंच, पटना, साहित्यकार संसद, समस्तीपुर लोकभाषा साहित्य पुरस्कार सहित विभिन्न संस्थासँ कतिपय साहित्यिक सामाजिक सम्मान प्राप्त छनि। हिनकर प्रकाशनमे मैथिली लोकमहागाथा: कारिख पजियार, कारिख-गीतावली, कारिख लोकगाथा, जागि गेल छी, गहवर, सहलेस लोकगाथा, दीना भद्री लोकगाथा, रमणजी: ग्रामसभा से विधानसभा तक(हिन्दी) प्रमुख अछि। १६.भालचन्द्र झा, ए.टी.डी., बी.ए., (अर्थशास्त्र), मुम्बईसँ थिएटर कलामे डिप्लोमा। मैथिलीक अतिरिक्त हिन्दी, मराठी, अग्रेजी आऽ गुजरातीमे निष्णात। १९७४ ई.सँ मराठी आऽ हिन्दी थिएटरमे निदेशक। महाराष्ट्र राज्य उपाधि १९८६ आऽ १९९९ मे। थिएटर वर्कशॉप पर अतिथीय भाषण आऽ नामी संस्थानक नाटक प्रतियोगिताक हेतु न्यायाधीश। आइ.एन.टी. केर लेल नाटक “सीता” केर निर्देशन। “वासुदेव संगति” आइ.एन.टी.क लोक कलाक शोध आऽ प्रदर्शनसँ जुड़ल छथि आऽ नाट्यशालासँ जुड़ल छथि विकलांग बाल लेल थिएटरसँ। निम्न टी.वी. मीडियामे रचनात्मक निदेशक रूपेँ कार्य- आभलमया (मराठी दैनिक धारावाहिक ६० एपीसोड), आकाश (हिन्दी, जी.टी.वी.), जीवन संध्या (मराठी), सफलता (रजस्थानी), पोलिसनामा (महाराष्ट्र शासनक लेल), मुन्गी उदाली आकाशी (मराठी), जय गणेश (मराठी), कच्ची-सौन्धी (हिन्दी डी.डी.), यात्रा (मराठी), धनाजी नाना चौधरी (महाराष्ट्र शासनक लेल), श्री पी.के अना पाटिल (मराठी), स्वयम्बर (मराठी), फिर नहीं कभी नहीं( नशा-सुधारपर), आहट (एड्सपर), बैंगन राजा (बच्चाक लेल कठपुतली शो), मेरा देश महान (बच्चाक लेल कठपुतली शो), झूठा पालतू(बच्चाक लेल कठपुतली शो), टी.वी. नाटक- बन्दी (लेखक- राजीव जोशी), शतकवली (लेखक- स्व. उत्पल दत्त), चित्रकाठी (लेखक- स्व. मनोहर वाकोडे), हृदयची गोस्ता (लेखक- राजीव जोशी), हद्दापार (लेखक- एह.एम.मराठे), वालन (लेखक- अज्ञात)। लेखन- बीछल बेरायल मराठी एकांकी, सिंहावलोकन (मराठी साहित्यक १५० वर्ष), आकाश (जी.टी.वी.क धारावाहिकक ३० एपीसोड), जीवन सन्ध्या( मराठी साप्ताहिक, डी.डी, मुम्बई), धनाजी नाना चौधरी (मराठी), स्वयम्बर (मराठी), फिर नहीं कभी नहीं( हिन्दी), आहट (हिन्दी), यात्रा ( मराठी सीरयल), मयूरपन्ख ( मराठी बाल-धारावाहिक), हेल्थकेअर इन २०० ए.डी.) (डी.डी.)। थिएटर वर्कशॉप- कला विभाग, महाराष्ट्र सरकार, अखिल भारतीय मराठी नाट्य परिषद, दक्षिण-मध्य क्षेत्र कला केन्द्र, नागपुर, स्व. गजानन जहागीरदारक प्राध्यापकत्वमे चन्द्राक फिल्मक लेल अभिनय स्कूल, उस्ताद अमजद अली खानक दू टा संगीत प्रदर्शन। श्री भालचन्द्र झा एखन फ़्री-लान्स लेखक-निदेशकक रूपमे कार्यरत छथि। १७.डॉ. देवशंकर नवीन (१९६२- ), ओ ना मा सी (गद्य-पद्य मिश्रित हिन्दी-मैथिलीक प्रारम्भिक सर्जना), चानन-काजर (मैथिली कविता संग्रह), आधुनिक (मैथिली) साहित्यक परिदृश्य, गीतिकाव्य के रूप में विद्यापति पदावली, राजकमल चौधरी का रचनाकर्म (आलोचना), जमाना बदल गया, सोना बाबू का यार, पहचान (हिन्दी कहानी), अभिधा (हिन्दी कविता-संग्रह), हाथी चलए बजार (कथा-संग्रह)। सम्पादन: प्रतिनिधि कहानियाँ: राजकमल चौधरी, अग्निस्नान एवं अन्य उपन्यास (राजकमल चौधरी), पत्थर के नीचे दबे हुए हाथ (राजकमल की कहानियाँ), विचित्रा (राजकमल चौधरी की अप्रकाशित कविताएँ), साँझक गाछ (राजकमल चौधरी की मैथिली कहानियाँ), राजकमल चौधरी की चुनी हुई कहानियाँ, बन्द कमरे में कब्रगाह (राजकमल की कहानियाँ), शवयात्रा के बाद देहशुद्धि, ऑडिट रिपोर्ट (राजकमल चौधरी की कविताएँ), बर्फ और सफेद कब्र पर एक फूल, उत्तर आधुनिकता कुछ विचार, सद्भाव मिशन (पत्रिका)क किछि अंकक सम्पादन, उदाहरण (मैथिली कथा संग्रह संपादन)। सम्प्रति नेशनल बुक ट्रस्टमे सम्पादक। १८.तारानन्द वियोगी (१९६६- ), महिषी, सहरसामे जन्म। मैथिलीक समर्थ कवि, कथाकार आऽ समालोचक। पिता श्री बद्री महतो, माता श्रीमति बदामी देवी। संस्कृत साहित्यमे आचार्य, एम.ए., पी.एच.डी. आदि कयलाक बाद केन्द्रीय विद्यालयमे अध्यापक भेलाह। सम्प्रति बिहार प्राशासनिक सेवामे छथि। १९७९ ई.मे पहिल रचना “मिथिला मिहिर”मे प्रकाशित भेलन्हि। ताहिसँ पहिने संगी लोकनि हिनकर एकटा कविता संग्रह छापि चुकल छलाह। पहिल पोथी अपन युद्धक साक्ष्य (गजल संग्रह) १९९१ मे प्रकाशित। अन्य पुस्तक हस्तक्षेप (कविता-संग्रह), अतिक्रमण (कथा-संग्रह), शिलालेख(लघुकथा संग्रह), कर्मधारय। रमेशक संग राजकमल चौधरीक कथाकृति एकटा चंपाकली एकटा विषधर कऽ संपादन कयलनि। स्वातन्त्र्योत्तर मैथिली कथा संग्रह देसिल बयनाक संपादन। कहियो काल हिन्दीमे लिखैत छथि। अपन हिन्दी कविताक लेल वर्ष १९९५ मे “मुक्तिबोध पुरस्कार”सँ सम्मानित। मैथिलीक श्रेष्ठ साहित्यकेँ राष्ट्रीय धरातलपर अनूदित-प्रसारित करबामे विशेष रुचि। पं. गोविन्द झाक महत्वपूर्ण उपन्यास भनहि विद्यापति तथा मैथिली की प्रतिनिधि कहानियाँ अनूदित-संपादित। एक संपादित कृति राजकमल चौधरी: सृजन के आयाम। समय-समयपर मैथिली हिन्दीमे कैक गोट पत्रिका/ संकलनक संपादन कयलनि। किछु रचना बंगला, तेलुगु, अंग्रेजीमे अनूदित भेलनि अछि। १९.डॉ कैलास कुमार मिश्र (८ फरबरी १९६७- ) दिल्ली विश्वविद्यालयसँ एम.एस.सी., एम.फिल., “मैथिली फॉकलोर स्ट्रक्चर एण्ड कॊग्निशन ऑफ द फॉकसांग्स ऑफ मिथिला: एन एनेलिटिकल स्टडी ऑफ एन्थ्रोपोलोजी ऑफ म्युजिक” पर पी.एच.डी.। मानव अधिकार मे स्नातकोत्तर, ४०० सँ बेशी प्रबन्ध -अंग्रेजी-हिन्दी आऽ मैथिली भाषामे- फॉकलोर, एन्थ्रोपोलोजी, कला-इतिहास, यात्रावृत्तांत आऽ साहित्य विषयपर जर्नल, पत्रिका, समाचारपत्र आऽ सम्पादित-ग्रन्थ सभमे प्रकाशित। भारतक लगभग सभ सांस्कृतिक क्षेत्रमे भ्रमण, एखन उत्तर-पूर्वमे मौखिक आऽ लोक संस्कृतिक सर्वांगीन पक्षपर गहन रूपसँ कार्यरत। यूनिवर्सिटी ऑफ नेब्रास्का, यू.एस.ए. केर “फॉकलोर ऑफ इण्डिया” विषयक रेफ़ेरी। केन्द्रीय हिन्दी निदेशालयक पुरस्कारक रेफरी सेहो। सय सँ ऊपर सेमीनार आऽ वर्कशॉपक संचालन, बहु-विषयक राष्ट्रीय आऽ अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठीमे सहभागिता। एम.फिल. आऽ पी. एच.डी. छात्रकेँ दिशा-निर्देशक संग कैलाशजी विजिटिंग फैकल्टीक रूपमे विश्वविद्यालय आऽ उच्च-प्रशस्ति प्राप्त संस्थानमे अध्यापन सेहो करैत छथि। मैथिलीक लोक गीत, मैथिलीक डहकन, विद्यापति-गीत, मधुपजीक गीत सभक अंग्रेजीमे अनुवाद। २०.चन्दा झा (१८३१-१९०७), मूलनाम चन्द्रनाथ झा, ग्राम- पिण्डारुछ, दरभंगा। कवीश्वर, कविचन्द्र नामसँ विभूषित। ग्रिएर्सनकेँ मैथिलीक प्रसंगमे मुख्य सहायता केनिहार। कृति- मिथिला भाषा रामायण, गीति-सुधा, महेशवाणी संग्रह, चन्द्र पदावली, लक्ष्मीश्वर विलास, अहिल्याचरित आऽ विद्यापति रचित संस्कृत पुरुष-परीक्षाक गद्य-पद्यमय अनुवाद। २१.सर्वतंत्र स्वतंत्र श्री धर्मदत्त झा(बच्चा झा) (1860 ई.-1918 ई.) मिथिला आ’ संस्कृत स्तंभमे एहि अंकमे सर्वतंत्र स्वतंत्र श्री धर्मदत्त झा जिनकर प्रसिद्धि बच्चा झाक नामसँ बेशी छन्हि, केर जीवनी द’ रहल छी। मधुबनी जिलांतर्गत लवाणी(नवानी) गाममे हिनकर जन्म भेलन्हि। वाराणसीमे श्री विशुद्धानन्द सरस्वती आ’ बालशास्त्रीसँ शिक्षा ग्रहण करबाक बाद गाम आबि गेलाह आ’ शारदा भवन विद्यापीठक स्थापना गामेमे कएलन्हि।गुरुकुल पद्धति सँ एतय संन्यासी आ’ गृहस्थ शिक्षा ग्रहण करैत छलाह। विद्यार्थीगणक खर्चा गुरुजी उठबैत रहलाह। द्वारकाक शंकराचार्य हिनका आमंत्रित कए नव्यन्यायक अध्ययन कएलन्हि। आस्तिक आ’ नास्तिक आ’ नव्यन्यायक विद्वत्तक दृष्टिये हिनका सर्वतंत्र स्वतंत्रक उपाधि देल गेलन्हि। हिनका बच्चामे लोक बच्चा झा कहैत छलन्हि, आ’ ईएह नाम धर्मदत्त झाक अपेक्षा बेशी प्रचलित रहल। हिनक कृति सभ अछि। 1. सुलोचन-माधव चम्पू काव्य, 2.न्यायवार्त्तिक तात्पर्य व्याख्यान, 3.गूढ़ार्थ तत्त्वलोक(श्री मदभागवतगीता व्याख्याभूत मधुसूदनी टीका पर) 4.व्याप्तिपंचक टीका 5.अवच्छदकत्व निरुक्त्ति विवेचन 6.सव्यभिचार टिप्पण 7.सतप्रतिपक्ष टिप्पण 8.व्याप्तनुगन विवेचन 9.सिद्धांत लक्षण विवेक 10.व्युत्पत्तिवाद गूढार्थ तत्वालोक 11.शक्त्तिवाद टिप्पण 12.खण्डन-ख़ण्ड खाद्य टिप्पण 13. अद्वैत सिद्धि चन्द्रिका टिप्पण 14.कुकुकाञ्जलि प्रकाश टिप्पण. महाराज लक्ष्मीश्वर सिंहक सिंहासनारोहणक बहुत दिन बाद धरि धौत परीक्षा नहि भेल छल। ई परीक्षा दरभंगा राजक संस्थापक श्री महेश ठाकुर द्वारा प्रारम्भ कएल गेल छल आ’ एहिमे मौखिक परीक्षा द्वारा श्रेष्ठ पंडितक चयन कएल जाइत छल। महाराज रमेश्वर सिंह एकर आयोजन करबओलन्हि आ’ श्री गंगानाथ झाकेँ एकर दायित्व देल गेल। श्री गंगानाथ झा परीक्षार्थीक रूपमे सेहो आवेदन कएने छलाह। महाराज परेक्षाक हेतु लिखित पद्धतिक आदेश देने छलाह। प्रश्निक नियुक्त्त भेलाह श्री बच्चा झा आ’ श्री शिव कुमार मिश्र। ई दुनू गोटे क्लिष्ट प्राश्निक आ’ कृपण परीक्षक मानल जाइत छलाह। मुदा ताहि पर श्री गंगानाथ झाकेँ 200 मे 197 अंक भेटलन्हि। महाराज पुरान परम्पराक अनुसार हिनका धोती तँ देलखिन्ह, मुदा नवीन पद्धतिक अनुसार दुशाला नहि देलखिन्ह, कारण संस्कृतक विद्वान् होयतहुँ श्री गंगानाथ झाक झुकाव अंग्रेजी दिशि छल। श्री बच्चा झा प्रकाण्ड पण्डित छलाह। महाराष्ट्र आ’ काशीक पण्डितक प्रसंगमे ओ’ कहैत छलाह जे शब्द खण्डक प्रसंगमे ओ’ सभ किछु नहि जनैत छलाह। ओहि समयमे महामहोपाध्याय दामोदर शास्त्री काशीक एकटा प्रसिद्ध वैयाकरण छलाह। विद्वान लोकनिक सुझाव पर दरभंगा महाराज गुरुधाममे एकटा पंडित सभाक आयोजन कएलन्हि। एहिमे हथुआ महाराज विशिष्ट अतिथि छलाह। काशीक सभ प्रमुख विद्वान एहिमे उपस्थित छलाह। प्रतियोगी छलाह पं.बच्चा झा आ’ म.म. दामोदर शास्त्री भरद्वाज। निर्णायक छलाह पं.कैलाश शिरोमणि भट्टाचार्या आ’ म.म.पं शिव कुमार मिश्र। एकटा सरल समस्यासँ शास्त्रार्थ प्रारम्भ भेल। एकर नैय्यायिक पक्ष लेलन्हि बच्चा झा आ’ व्याकरण पक्ष पंदामोदर शास्त्री। दामोदर शास्त्री अपन जवाब अत्यंत सरल शब्दमे वैयाकरणिक आधार पर द’ देलन्हि। आब बच्चा झाक बेर आयल। बच्चा झा गहन परिष्कार प्रारम्भ कएलन्हि। विद्वान लोकनिमे विवाद भेलन्हि जे हुनकर प्रश्न प्रासंगिक छन्हि वा नहि। निर्णायक लोकनि एकरा प्रासंगिक मानलन्हि। जौँ-जौँ बच्चा झा आगू बढ़ैत गेलाह हुनकर उत्तर दामोदर शास्त्री आ’ निर्णायक लोकनिक हेतु अबोधगम्य होइत गेलन्हि। मध्य रात्रि तक ई चलल। अन्ततः अनिर्णीत राखि कए सभा विसर्जित भेल। पं. रत्नपाणि झाक पुत्र केँ बच्चा झाकेँ अपर गङ्गेश उपाध्याय सेहो कहल जाइत अछि। हिनकर प्रारम्भिक अध्ययन गामे पर भेलन्हि। तकरा बाद ओ’ विश्वनाथ झासँ अध्ययनक हेतु ‘ठाढ़ी’ गाम चलि गेलाह। फेर बबुजन झा आ’ ऋद्धि झासँ न्यायदर्शनक विधिवत अध्ययन कएलन्हि। फेर धर्मदत्त झा प्रसिद्ध बच्चा झा काशी गेलाह। ओतय स्वामी विशुद्धानन्द सरस्वतीसँ मीमांसा, वेदान्तक अध्ययन कएलन्हि। सन् 1886 ई. केर गप छी। एकटा पुष्करिणीक उद्घाटनक उत्सवमे दामोदर शास्त्री जी काशीसँ मिथिलाक राघोपुर ग्राममे निमंत्रित भेल छलाह। ओतय हुनकर शास्त्रार्थ परम्परानुसार बच्चा झाक विद्यागुरु ऋद्धि झासँ भेल छलन्हि। एहिमे ऋद्धि झा परास्त भेल छलाह। गुरुक पराजयक प्रतिशोध लेबाक हेतु सन् 1889 मे बच्चा झा काशी गेलाह। बच्चा झाक उम्र ओहि समयमे 29 वर्ष मात्र छलन्हि। ओ’ प्रायः दामोदर शास्त्रीकेँ लक्ष्य करैत छलाह, जे काशीक वैय्याकरणिक पण्डित लोकनिकेँ शब्द-खण्डक कोनो ज्ञान नहि छन्हि।बच्चा झा समस्त काशीक विद्वान् लोकनिकेँ शास्त्रार्थक हेतु ललकारा देलन्हि। दामोदर शास्त्रीसँ भेल शास्त्रार्थक वर्णन पछिला अंकमे कएल जा’ चुकल अछि। शास्त्रार्थ तीन दिन धरि चलल। ई शास्त्रार्थ सन्ध्यासँ शुरू होइत छल, आ’ मध्य रात्रि धरि चलैत छल।शास्त्रार्थक तेसर दिन दामोदर शास्त्री तर्क कएनाइ बन्न कए देलन्हि, आ’ श्रोताक रूपमे बच्चा झाक तर्क सुनैत रहलाह। पं शिवकुमार शास्त्री आ’ कैलाशचन्द्र शिरोमणि दू टा निर्णायक छलाह। शिरोमणिजीक दृष्टिमे वादी श्री बच्चा झाक पक्ष न्यायशास्त्रक दृष्टिसँ समुचित छल। शिवकुमारजीक सम्मतिमे प्रतिवादी श्री दामोदरशास्त्रीक पक्ष व्याकरणक मंतव्यानुसार औचित्यसम्पन्न छलन्हि।दुनू पण्डितक शास्त्रार्थ कलाक संस्तुति कएल गेल आ’ दुनू गोटेकेँ अपन सिद्धान्तक उत्कृष्ट व्यवस्थापनक लेल विजयी मानल गेल। बच्चा झा गामेमे रहि कए अध्यापन करैत छलाह। मुदा महाराजाधिराज दरभंगा नरेश श्री रमेश्वरसिंहक अकाट्य आग्रहक कारणसँ मुजफ्फरपुरक धर्म समाज संस्कृत कॉलेजक प्रधानाचार्यक पद स्वीकार कएलन्हि। मुदा एकर एकहि वर्षमे ओ’ शरीर त्याग कए देलन्हि। बच्चा झाजीकेँ समालोचकगण किछु उदण्ड आ’ अभिमानी मनबाक गलती करैत रहलाह अछि। मुदा एकटा उदाहरण हमरा लगमे एहन अछि, जाहिसँ ई गलत सिद्ध होइत अछि। ई घटना एहन सन अछि। मुजफ्फरपुर धर्मसमाज संस्कृत विद्यालयमे बच्चा झा प्रधानाचार्य/अध्यक्ष पद पर छलाह, आ’ हुनकर शिष्य पं बालकृष्ण मिश्र ओतय प्रध्यापक छलाह। ओहि समय काशीक पण्डित-पत्रमे गंगाधर शास्त्रीक एकटा श्लोकक विषयमे बच्चा झा कहलन्हि, जे एहि श्लोकमे एकहि पदर्थ वारिधर एक बेर मृदंग बजबय बला चेतन व्यक्त्तिक रूपमे आ’ दोसर बेर वैह अम्बुद- जवनिकारूपी अचेतन रूपमे वर्णित अछि। एतय पदार्थाशुद्धि अछि। एहि पर हुनकर शिष्य बालकृष्ण टोकलखिन्ह- गुरुजी! एहिमे कोनो दोष नहि अछि। किएक तँ वारिकेँ धारण करए बला मेघ(वारिधर) केर स्थिति आकाशमे ऊपर होइत अछि, आ’ अम्बु(जल) केँ देबय बला मेघ (अम्बुद) केर स्थिति नीचाँ होइत अछि।अतः दुनूमे स्थानक भिन्नता अछि। वारिधर आ’ वारिद एहि दुनू शब्दसँ दू भिन्न अर्थ ज्ञात होइत अछि। ताहि हेतु एतय पदार्थक अशुद्धि नहि अछि। ई श्लोक निम्न प्रकारे छल:- मृदुमृदङ्गनिनादमनोहरे, ध्वनित वारिधरे चपला नटी। वियति नृत्यति रङ्ग इवाम्बुदे, जवनिकामनुकुर्वति सम्प्रति॥ २२. म.म. शंकर मिश्र पन्द्रहम शताब्दीमे भवनाथ मिश्रक घरमे मधुबनी जिलाक सरिसव ग्राममे शंकर मिश्रक जन्म भेल। भवनाथ मिश्र बहुत पैघ नैय्यायिक छलाह आऽ कहियो ककरोसँ कोनो वस्तुक याचना नहि कएलन्हि, ताहि लेल सभ हुनका अयाची मिश्र कहए लगलन्हि। शँकर मिश्र पितासँ अध्ययन प्राप्त कएलन्हि आऽ पैघ भाए जीवनाथ मिश्रससँ विद्याक अधिग्रहण कएलन्हि। जखन शंकर मिश्र पाँच वर्षक छलाह तँ महाराज शिव सिंहक सबारी जाऽ रहल छल। राजा ओहि प्रतिभाशाली बालककेँ देखलन्हि आऽ हुनकासँ परिचय पुछलन्हि। तखन उत्तर भेटलन्हि- बालोऽहं जगदानन्द न मे बाला सरस्वती। अपूर्णे पंचमे वर्षे वर्णयामि जगत्त्रयम् ॥ फेर राजाक आग्रह पर ओऽ दोसर श्लोक पढ़लन्हि- चलितश्चकितच्च्हन्नः प्रयाणे तव भूपते। सहस्रशीर्षा पुरुषः सहस्त्राक्षः सहस्रपात् ॥ राजा प्रसन्न भए द्रव्य देलखिन्ह जाहिसँ, शंकरक माए पोखरि खुनबेलन्हि, ओऽ पोखरि एखनो सरिसबमे अछि। शंकर मिश्र महाराज भैरव सिंहक कनिष्ठ पुत्र राजा पुरुषोत्तमदेवक आश्रित छलाह। एकर वर्णन रसार्णव ग्रंथमे भेटैत अछि। शंकर मिश्र कवि, नाटककार, धर्मशास्त्री आऽ न्याय-वैशेषिक केर व्याक्याकार रहथि। शंकर मिश्र ग्रंथावली- १. १.गौरी दिगम्बर प्रहसन २. २.कृष्ण विनोद नाटक ३. ३.मनोभवपराभव नाटक ४. ४.रसार्णव ५. ५.दुर्गा-टीका ६. ६.वादिविनोद ७. ७.वैशेषिक सूत्र पर उपस्कार ८. ८.कुसुमांजलि पर आमोद ९. ९.खण्डनखण्ड-खाद्य टीका १०.१०.छन्दोगाह्निकोद्धार ११.श्राद्ध प्रदीप १२.प्रायश्चित प्रदीप। अंतिम तीनू टा ग्रन्थ धर्मशास्त्र पर लिखल गेल आऽ क्रमसँ सामवेदक अनुसारे दैनिक धार्मिक कृत्यक नियमावली, श्राद्ध कर्म आऽ प्रायश्चितिक अनुष्ठानसँ संबंधित अछि।शंकर मिश्रसँ संबंधित बहुत रास जनश्रुति प्रसिद्ध अछि। अयाची वृद्ध भए गेल छलाह, परन्तु पुत्रविहीन रहथि। पत्नी भवानी दुःखसँ काँट भए गेल छलीह। तखन अयाची मिश्र बाबा वैद्यनाथसँ पुत्रक याचना कएलन्हि आऽ हुनकर मनोकामना पूर्ण भेलन्हि-स्वयं शंकर भगवान अवतरित भेलाह आऽ ताहि द्वारे बालकक नाम शंकर पड़ल। जन्म पर गामक आया किंवा चमैन इनाम मँगलखिन्ह, मुदा परिवारक लगमे किछु नहि छल आऽ ताहि हेतु भवानी वचन देलखिन्ह जे बालकक प्रथम कमाइ अहाँकेँ दए देब। से जखन एक बेर राजा शिव सिंह खुशी भए बालककें कहलखिन्ह जे अहाँ जतेक सोना-चाँदी लए जा सकी लए जाऊ। बालक मात्र धरिया पहिरने छलाह तेँ मात्र किछु सोनाक छड़ लए जाऽ सकलाह, आऽ सेहो भवानी अपन वचनक अनुरूपें आया-चमैनकेँ दए देलखिन्ह। चमैन ओहि पाइसँ एकटा पोखरि सरिसवमे खुनबएलन्हि, जे चमनियाँ पोख्रिक नामसँ एखनो विद्यमान अछि। २३. विद्यापति(१३५०-१४५०)विद्यापतिक जन्म १३७० ई.क लगातिमे बिस्फी गाममे भेलन्हि। हिनकर परवर्ती सभ आइ-काल्हि सौराठ गाममे रहैत छथि। एकर प्रमाण निम्न गप सभसँ लगैत अछि। १३९४-९६ क बीच कएल पदक समर्पण गियासौद्दीन आजमशाह आ नसरत शाहकेँ कएल गेल अछि। देव सिंहक आदेश सँ १४०० ई.क लगातिमे ई “भू-परिक्रमा लिखलन्हि। १४०२-०४ क बीच कीर्तिलताक रचना कीर्ति सिंहक राज्यकालमे कएलन्हि। १४०९-१४१५ ई.क बीच कीर्तिपताकाक रचना। पूर्वार्ध १४०९ क लगातिमे मे – हरि केलि अर्जुन सिंहक कीर्तिगाथासँ सम्बन्धित अछि आ उत्तरार्ध १४१५ क लगातिमे शिवसिंहक युद्ध आ तिरोधानसँ सम्बद्ध अछि। विद्यापति जीक आदेशसँ १४१० ई. मे “काव्य प्रकाश विवेक”क प्रतिलिपि बनाओल गेल। १४१० ई.मे शिवसिंहक राज्यारोहण भेल आ एहि उपक्ष्यमे विद्यापतिकेँ बिसपीक दानपत्र प्रदान कएल गेल। शिवसिंहक राज्यकाल १४१०-१४ ई. धरि रहल आ एहि अवधिमे गोरक्ष विजय नाटक आ पुरुष-परीक्षा अधिकांश भागक रचना भेल। १४१६ ई. क लगाति पुरादित्यक आदेशसँ लिखनावलीक निर्माण भेल। १४२८ ई. मे भागवत पुराणक विद्यापति लिखित प्रतिलिपि पूर्ण भेल। १४२७-१४३९ ई. मे पद्म सिंहक महारानी विश्वास देवी क आदेशसँ शैव सर्वस्वसार, शैव सर्वस्वसार प्रमाण भूत संग्रह आ गंगा वाक्यावलीक रचना, १४५३-६० ई.क लगाति राजा नरसिंह दर्पनारायण आ रानी धीरिमतिक समयमे विभागसार, व्याडिभक्ति तरंगिणी आ दानवाक्यावलीक रचना भेल। १४५५ ई. क लगाति भैरव सिंहक अनुज्ञासँ “दुर्गाभक्ति तरंगिणी”क रचना भेल आ १४६१ ई. मे श्री रूपधर हिनकासँ छात्र रूपमे अध्ययन कएलन्हि। १४६५ ई.क आसपास हिनकर मृत्यु भेल होएतन्हि, जनश्रुति अछि जे ई दीर्घायु भेल छलाह आ सए बरखक आयु प्राप्त कएने छलाह। हिनकर रचनामे एक बेर जगज्जननी सीताक चरचा एहि रूपमे आएल अछि- I. इन्द्रस्येव शची समुज्जवलगुणा गौरीव गौरीपतेः कामस्येव रतिः स्वभावमधुरा सीतेव रामस्य या। विष्णोः श्रीरिव पद्मसिंहनृपतेरेषा परा प्रेयसी विश्वख्यातनया द्विजेन्द्रतनया जागर्ति भूमण्डले॥9॥ उपर्युक्त पद्य विद्यापतिकृत शैवसर्वस्वसारक प्रारम्भक नवम श्लोक छी। एकर अर्थ अछि- उत्कृष्ट गुणवती, मधुर स्वभाववाली, ब्राह्मण-वंशजा, नीति-कौशलमे विश्वविख्यातओ’ महारानी विश्वासदेवी सम्प्रति संसारमे सुशोभित छथि, जे पृथ्वी-पति पद्मसिंहकेँ तहिना प्रिय छलीह जहिना इन्द्रकेँ शची, शिवकेँ गौरी, कामकेँ रति , रामकेँ सीता ओ’ विष्णुकेँ लक्ष्मी॥9॥ २४.श्रीकर श्रीकर प्रथम मैथिल निबन्धकार छलाह। विज्ञानेश्वर, हरिनाथ, जीमूतवाहन चण्डेश्वर ठाकुर ई सभ श्रीकरक विचारक उल्लेख कएने छथि। श्रीकर एहि हिसाबसँ सातम शताब्दीक बुझना जाइत छथि। श्रीकर याज्ञवल्क्य आऽ लक्ष्मीधरक बीचक सूत्र छथि। ओऽ कल्पतरु लिखलन्हि, जाहिमे १४ भाग छल, मुदा हुनकर कोनो कार्य एखन उपलब्ध नहि अछि। श्रीकरक अनुसार आध्यात्मिक लाभ उत्तराधिकारक लेल आवश्यक अछि। चण्देश्वर ठाकुर अपन राजनीतिरत्नाकरमे श्रीकरक सिद्धांत ई सिद्धांत रखने छथि, जे गरीबक अधिकार राजा आऽ राज्यक सम्पत्तिमे छैक। २५.लक्ष्मीधर कृत्यकल्पतरुक लेखक लक्ष्मीधर भट्ट हृदयधरक पुत्र छलाह। हुनकर पिता राजा गोविन्दचन्द्रक दरबारमे शान्ति आऽ युद्धक मंत्री छलाह। लक्ष्मीधर मीमांसक छलाह। चण्डेश्वर, वाचस्पति आऽ रुद्रधर अपन-अपन रचनामे लक्ष्मीधरक उद्धरण प्रचुर मात्रामे देने छथि। लक्ष्मीधर एगारहम शताब्दीक दोसर भाग आऽ बारहम शताब्दीक पहिल भागमे अवतरित भेल छलाह। लक्ष्मीधरक कृत्यकल्पतरु महाभारतक एक तिहाइ आकारक अछि आऽ जीवन जीबाक कला आऽ निअमक वर्णन करैत अछि। मैथिल-स्मृतिशास्त्रक ई श्रेष्ठतम योगदान अछि। चण्डेश्वरक विवाद रत्नाकर पूर्ण रूपसँ कृत्यकल्पतरुपर आधारित अछि, विद्यापतिक विभागसार सेहो कल्पतरुक विषयसूचीक प्रयोग करैत अछि। लक्ष्मीधरक विचार- राजाक कार्य कानून आऽ न्याय प्रदान केनाइ छैक। व्यवहार तार्किक रूपसँ राजधर्मक रूपमे बुझल जाऽ सकैत अछि। राज्यक सात टा पारम्परिक तत्त्वक सेहो चरचा अबैत अछि। राजाक कर्तव्यक छह प्रकारक षडगुण्यम केर सेहो चर्च अछि। राजशाहीकेँ ओऽ सरकारक एकमात्र विकल्प कहैत छथि। मुदा लक्ष्मीधर राजाक दैविक उत्पत्तिमे विश्वास नहि करैत छथि। राजा जनताक ट्रस्टी अछि, न्यायी अछि आऽ धर्मक अनुसार कार्य करैत अछि। मुदा राजाकेँ धार्मिक-कानून बदलबाक कोनो अधिकार नहि छल। सर्वभौमिकताक अभिषेकक बाद राजाक शिक्षा-दीक्षा आऽ जनताक प्रति आदरपर ओऽ बहुत जोड़ देलन्हि। लक्ष्मीधर राजकर्मचारीक आचार-संहितापर बड़ जोर दैत छथि। दुर्गक विवरण ओऽ राजमहल आऽ किलाक रूपमे करैत छथि। २६.हरिनाथ (१३००-१४०० ई.) हरिनाथ गंगौर मूलक मैथिल ब्राह्मणक छलाह आऽ हुनकर पौत्र शिवनाथक विवाह पाली मूलक ज्योतिरीश्वर ठाकुरक पुत्रीसँ भेल छलन्हि। हिनकर विवाह गलतीसँ अपन पुरखाक वंशजसँ भऽ गेलन्हि, ताहि द्वारे हरसिंहदेव पञ्जी व्यवस्थाक प्रारम्भ केलन्हि। हरिनाथ स्मृतिसार लिखलन्हि, जे धर्मशास्त्रक विभिन्न अध्यायपर आधारित छल। हरिनाथ संस्कारक ८ भेद करैत छथि। आचार खण्डमे संस्कारक अतिरिक्त आह्निका- द्विजक नित्यकर्म, श्राद्ध आऽ प्रायश्चितक विवरण अछि। विवाद, व्यवहार आऽ उत्तराधिकारपर सेहो हरिनाथ लिखने छथि। ज्येष्ठ पुत्रकेँ जेठांश, स्त्रीधन, पुत्रक विभिन्न प्रकार, विभिन्न प्रकारक दण्ड इत्यादिक वर्णन हरिनाथ कएने छथि। विधिमे कोना कम्प्लेन फाइल करी, ओकर उत्तर, न्याय आऽ न्यायक आधार आऽ न्यायक पुनरीक्षण, एहि सभक चरचा अछि। विवादक १८ टा प्रकार आऽ सिविल आऽ आपराधिक विधि जे न्यायालयमे अपनाओल जाइत अछि, तकर विवरण हरिनाथ देने छथि। २७.चाणक्य…कौटिल्य चाण्क्य भारतकेँ एकटा सुदृढ़ आऽ केन्द्रीकृत शासन प्रदान कएलन्हि, जकर अनुभव भारतवासीकेँ पूर्वमे नहि छलन्हि। चाणक्यक जीवन आऽ वंश विषयक सूचना अप्रामाणिक अछि। चाणक्यक आन नाम सभ सेहो अछि। जेना कौटिल्य, विष्णुगुप्त, वात्स्यायन, मालांग, द्रामिल, पाक्षिल, स्वामी आऽ आंगुल। विष्णुगुप्त नाम कामंदक केर नीतिसार, विशाखादत्तक मुद्राराक्षस आऽ दंडीक दशकुमारचरितमे भेटैत अछि। अर्थशास्त्रक समापनमे सेहो ई चर्च अछि जे नन्द राजासँ भूमिकेँ उद्धार केनिहार विष्णुगुप्त द्वारा अर्थशास्त्रक रचना भेल। अर्थशास्त्रक सभटा अध्यायक समापनमे एकर रचयिताक रूपमे कौटिल्यक वर्णन अछि। जैन भिक्षु हेमचन्द्र हिनका चणकक पुत्र कहैत छथि। अर्थशास्त्रमे उल्लिखित अछि जे कौटिल्य कुटाल गोत्रमे उत्पन्न भेलाह। पन्द्रहम अधिकरणमे कौटिल्य अपनाकेँ ब्राह्मण कहैत छथि। कौटिल्य गोत्रक नाम, विष्णुगुप्त व्यक्तिगत नाम आऽ चाणक्य वंशगत नाम बुझना जाइत अछि। धर्म आऽ विधिक क्षेत्रमे कौटिल्यक अर्थशास्त्र आऽ याज्ञवल्क्य स्मृतिमे बड्ड समानत अछि जे चाणक्यक मिथिलावासी होयबाक प्रमाण अछि। अर्थशास्त्रमे(१.६ विनयाधिकारिके प्रथमाधिकरणे षडोऽध्यायः इन्द्रियजये अरिषड्वर्गत्यागः) कराल जनक केर पतनक सेहो चर्चा अछि। तद्विरुद्धवृत्तिरवश्येन्द्रियश्चातुरन्तोऽपि राजा सद्यो विनश्यति- यथा दाण्डक्यो नाम भोजः कामाद् ब्राह्मण कन्यायमभिमन्यमानः सबन्धराष्ट्रो विननाश करालश्च वैदेहः,…। अर्थशास्त्रमे १५ टा अधिकरण अछि। सभ अधिकरण केर विभाजन प्रकरणमे भेल अछि। कौटिल्यक राज्य संब्धी विचार सप्तांग सिद्धांतमे अछि।स्वामी, अमात्य, राष्ट्र, दुर्ग, कोष, दंड आऽ मित्र केर रूपमे राज्यक सातटा अंग अछि। कऊतिल्यक संप्रभुता सिद्धांतमे राज्यक प्राशसनिक विभा वा तीर्थक चर्च अछि- ई १८ ट अछि। १.मंत्री२.पुरोहित३.सेनापति४.युवराज५.दौवारिक६.अंतर्वांशिक७.प्रशास्त्र८.संहर्त्ता९.सन्निधात्रा१०.प्रदेष्टा११.नअयक१२.पौर व्यावहारिक१३.कर्मांतिक१४.मंत्रिपरिषदाध्यक्ष१५,.दंडपाल१६.दुर्गपाल१७.अंतर्पाल१८.आत्विक। विधिक चरिटा श्रोत अछि- धर्म, व्यवहार, चरित्र आऽ राजशासन। कौटिल्यक अतरराज्य संबंध केर सिद्धांत मंडल सिद्धांत केर नामसँ प्रतिपादित अछि। विजिगीषु राजा- विजय केर इच्छा बला राजा- केर चारू कात अरिप्रकृति राजा आऽ अरिप्रकृति राजाक सीमा पर निम्न प्रकृति राजा रहैत छथि। विजुगीषु राजाक सोझाँ मित्र, अरिमित्र, मित्र-मित्र आऽ अरिमित्र-मित्र रहैत छथि आऽ पाछाँ पार्ष्णिग्राह९फीठक शत्रु), आक्रंद (पीठक मित्र), पार्ष्णिग्राहासार (फार्ष्णिग्राहक मित्र) आऽ अक्रंदसार (आक्रंदक मित्र) रहैत छथि। विजिगीषुक षाड्गुण्य सिद्धांत अछि, संधि, विग्रह, यान, आसन, संश्रय आऽ द्वैधीभाव। कऊटिल्यक अर्थशास्त्रक प्रथम अधिकरणक पन्द्रहम अध्यायमे दूत आऽ गुप्तचर व्यवस्थाक वर्णन अछि। भारतीय शिलालेखसँ पता चलैत अछि जे चन्द्रगुप्त मौर्य ३२१ ई.पू. मे आऽ अशोकवर्द्धन २९६ ई.पू. मे राजा बललाह। तदनुसार अर्थशास्त्रक रचना ३२१ ई.पू आऽ २९६ ई.पू. केर बीच भेल सिद्ध होइत अछि। २८.याज्ञवल्क्य याज्ञवल्क्य मिथिलाक दार्शनिक राजा कृति जनकक दरबारमे छलाह। हुनकर माताक वा पिताक नाम सम्भवतः वाजसनी छलन्हि। ओना हुनकर पिता देवरातकेँ मानल जाइत छन्हि। हुनकर माता ऋषि वैशम्पायनक बहिन छलीह। वैशम्पायन याज्ञवल्क्यक मामा छलाह संझ्गहि हुनकर गुरु सेहो। हुनकर पिता खेनाइ पुरस्कारक रूपमे बँटैत रहथि आऽ तेँ हुनकर नाम बाजसनि सेहो छन्हि। ब्यासक चारू पुत्रसँ ओऽ चारू वेदक शिक्षा पओलन्हि। यजुर्वेद ओऽ वैशम्पायनसँ सेहो सिखलन्हि, वेदान्त उद्दालक आरुणिसँ आऽ योगक शिक्षा हिरण्यनाभसँ लेलन्हि। याज्ञवल्क्यक दू टा पत्नी छलथिन्ह, १. कात्यायनी आऽ दोसर मैत्रेयी। मत्रेयी ब्रह्मवादिनी छलीह। कात्यायनीसँ हुनका तीनटा पुत्र छलन्हि- चन्द्रकान्ता, महामेघ आऽ विजय। याज्ञवल्क्य १. शुक्ल यजुरवेद, २. शतपथ ब्राह्मण, बृहदारण्यक उपनिषद आऽ याज्ञवल्क्य स्मृतिक दृष्टा/लेखक छथि। याज्ञवल्क्य स्मृतिमे आचार, व्यवहार, आऽ प्रायश्चित अध्याय अछि।राजधर्म, सिविल आऽ क्रिमिनल लॉ एहिमे अछि।कौटिल्य जेकाँ याज्ञवल्क्य सेहो मानैत छथि जे राजा आऽ पुरहित दुनू दण्डनीतिक ज्ञान राखथि। याज्ञवल्क्य राज्यक सप्तांग सिद्धांतक चरचा सेहो विस्तारमे करैत छथि। २९.जनक ’वैदेह राजा’ ऋगवेदिक कालक नमी सप्याक नामसँ छलाह, यज्ञ करैत सदेह स्वर्ग गेलाह। ऋगवेदमे वर्णन अछि। ओऽ इन्द्रक संग देलन्हि असुर नमुचीक विरुद्ध आऽ ताहिमे इन्द्र हुनका बचओलन्हि। पुरोहित गौतम राहूगण ऋगवेदक एकटा महत्त्वपूर्ण ऋषि छथि। शुक्ल यजुरवेदक लेखक रूपमे याज्ञवल्क्य प्रसिद्ध छथि। शतपथ ब्राह्म्णक माथव विदेह आऽ पुराणक निमि दुनू गोटेक पुरोहित गौतम छथि से दुनू एके छाथि आऽ एतएसँ विदेह राज्यक प्रारम्भ देखल जाऽ सकैत अछि। माथवक पुरहित गौतम मित्रविन्द यज्ञक/बलिक प्रारम्भ कएलन्हि आऽ पुनः एकर पुनःस्थापना भेल महाजनक २ केर समयमे याज्ञवल्क्य द्वारा। निमि गौतमक आश्रमक लग जयन्त आऽ मिथि जिनका मिथिला नामसँ सेहो सोर कएल जाइत छन्हि, मिथिला नगरक निर्माण कएलन्हि। ’सीरध्वज जनक’ सीताक पिता छथि आऽ एतयसँ मिथिलाक राजाक सुदृढ़ परम्परा देखबामे अबैत अछि। ’कृति जनक’ सीरध्वजक बादक 18म पुस्तमे भेल छलाह। कृति हिरण्यनाभक पुत्र छलाह, आऽ जनक बहुलाश्वक पुत्र छलाह। याज्ञवलक्य हिरण्याभक शिष्य छलाह, हुनकासँ योगक शिक्षा लेने छलाह। कराल जनक द्वारा एकटा ब्राह्मण युवतीक शील-अपहरणक प्रयास भेल आऽ जनक राजवंश समाप्त भए गेल (अश्वघोष-बुद्धचरित आऽ कौटिल्य-अर्थशास्त्र) मैथिलीक पुरोधा जयकान्त मिश्र (1922-2009) क 3 फरबरी 2009 केँ सात बजे साँझमे निधन भ’ गेलन्हि। मैथिली साहित्यक एकटा बड़ पैघ विद्वान डॉ. जयकांत मिश्र 1982 ई. मे इलाहाबाद विश्वविद्यालयक अंग्रेजी आ आधुनिक यूरोपियन भाषा विभागक प्रोफेसर आ हेड पद सँ सेवा निवृत्त भेल छलाह। तकरा बाद ओ चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालयमे भाषा आ समाज विज्ञानक डीन रूपमे कार्य कएलन्हि। स्व. मिश्र अखिल भारतीय मैथिली साहित्य समिति, इलाहाबादक अध्यक्ष, गंगानाथ रिसर्च इंस्टीट्यूट, इलाहाबादक अवैतनिक सचिव आ सम्पादक, हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयागक प्रबन्ध विभागक संयोजक आ साहित्य अकादमी, नई दिल्लीक मैथिली प्रतिनिधि आ भाषा सम्पादक रहल छलाह। मैथिली साहित्यक इतिहास, फोक लिटेरेचर ऑफ मिथिला, कीर्तनिया ड्रामा सभक क्रिटिकल एडीशन, लेक्चर्स ऑन थॉमस हार्डी, लेक्चर्स ऑन फोर पोएट्स आ द कॉम्प्लेक्स स्टाइल इन एंगलिश पोएट्री हिनक लिखित किछु ग्रंथ अछि। हिनकर वृहत मैथिली शब्द कोष मात्र दू खण्ड प्रकाशित भए सकल, जाहिमे देवनागरीक संग मिथिलाक्षर आ फोनेटिक अंग्रेजीमे सेहो मैथिली शब्दक नाम रहए। ई दुनू खण्ड मैथिली शब्दकोष संकलक लोकनिक लेल सर्वदा प्रेरणास्पद रहत। विदेह डाटाबेस आधार पर सोलह खण्डमे गजेन्द्र ठाकुर, नागेन्द्र कुमार झा आ पञ्जीकार विद्यानन्द झाक मैथिली अंग्रेजी शब्दकोष जाहिमे मिथिलाक्षर आ अंतर्राष्ट्रीय फोनेटिक रोमन आ देवनागरीमे शब्द आ शब्दार्थ देल गेल अछि प्रेसमे अछि आ एहि मासमे ओकर पहिल खण्ड प्रकाशित भए जाएत। ई पोथी दीनबन्धु झा, जयकांत मिश्र आ गोविन्द झाकेँ समर्पित कएल जा रहल अछि। स्व. जयकांत मिश्रकेँ मैथिल आर मिथिला परिवार दिससँ श्रद्धांजलि। एहि घटनापर मैथिली भाषा-साहित्यक प्रसिद्ध समीक्षक प्रोफेसर डॉ. प्रेमशंकर सिंह जीक उद्गार- ” डॉ. जयकांत मिश्रक मृत्यु मैथिलीक लेल एकटा अपूरणीय क्षति अछि। मैथिलीक लेल हिनकर सेवाक कोनो जोड़ नहि अछि, ग्रियर्सनक बाद ई एकमात्र एहन मैथिली प्रेमी रहथि जे मैथिलीकेँ विश्व-स्तर तक अनलन्हि आ विश्वक सोझाँ अनलन्हि।” एहि घटनापर मैथिली भाषा-साहित्यक प्रसिद्ध कवि-कथाकार डॉ. गंगेश गुंजन जीक उद्गार- “जयकांत बाबूक निधन बहुत सांघातिक सूचना। समस्त मैथिल, मिथिला आ मिथिलांचल लेल। किछु कहल सम्भव नहि भ’ रहल अछि….।” डॉ विजयकांत मिश्रा जिक जन्म १० अगस्त १९२७ डो. विजयकांत मिश्रक जन्म मंगरौनी गाम – जे नव्य न्याय आ तांत्रिक साधनाक जन्म-स्थली अछि- (जिला मधुबनी) मे भेलन्हि। ओ 1948 मे प्राचीन भारतीय इतिहास आ संस्कृति विषयमे एलाहाबाद विश्वविद्यालयसँ सनात्तकोत्तर उपाधि कएलाक बाद कतेक बरख धरि बिहार सरकार आ पटना विश्वद्यालयसँ सम्बद्ध रहलाह आ 1957 ई. सँ भारतीय पुरात्तत्व विभागमे काज कएलन्हि आ ओकर शिशुपालगढ़, कौशाम्बी, वैशाली, हस्तिनापुर, कुम्हरार, पाटलिपुत्र, करियन, सोनपुर, बिलावली, नालन्दा, राजगीर, चन्द्रवल्ली, आ हम्पी खुदाइमे विभिना भूमिकामे भाग लेलन्हि। हिनकर लिखल-सम्पादित पोथी सभमे अछि: 1.वैशाली,1950 2.कुम्हरार एक्सकेवेशंस: 1950-1957 3.पुरातत्व की दृष्टिमे वैशाली 4.नागेश भट्टाज पारिभाषेन्दुशेखर 5.मिथिला आर्ट एण्ड आर्किटेक्चर (सम्पादित) 6.कल्चरल हेरिटेज ऑफ मिथिला 7.श्रृंगार भजनावली- एक अध्ययन 8.क्षेत्र पुरातत्वविज्ञान – 9.पुरातत्व शब्दावली स्व. अनिलचन्द्र ठाकुर जीक जन्म 13 सितम्बर 1954 ई.केँ कटिहार जिलाक समेली गाममे भेलन्हि। 1982 ई.मे हिन्दी साहित्यमे स्नातकोत्तर केलाक बाद नवम्बर ’93 सँ नवम्बर ’94 धरि “सुबह” हस्तलिखित पत्रिकाक सम्पादन-प्रकाशन कएलन्हि आ कोशी क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकमे अधिकारी रहथि। मैथिली, अंगिका, हिन्दी आ अंग्रेजीमे समानरूपेँ लेखन। मृत्युक पूर्व ब्रेन ट्यूमरसँ बीमार चलि रहल छलाह। प्रकाशित कृति: आब मानि जाउ(मैथिली उपन्यास)- पहिने भारती-मंडन पत्रिकामे प्रकाशित भेल, फेर मैलोरंग द्वारा पुस्तकाकार प्रकाशित भेल। कच( अंगिकाक पहिल खण्ड काव्य,1975) एक और राम (हिन्दी नाटक,1981) एक घर सड़क पर (हिन्दी उपन्यास, 1982) द पपेट्स (अंग्रेजी उपन्यास, 1990) अनत कहाँ सुख पावै (हिन्दी कहानी संग्रह,2007) आब मानि जाउ(मैथिली उपन्यास)- एहि उपन्यासमे एक एहन युवतीक संघर्ष-गाथा अंकित अछि जे अपन लगनसँ जीवन बदलैत अछि। असंख्य गामक ई कथा, कुलीनताक अधःपतनक कथा, संस्कारविहीनताक उद्घाटन आ भविष्यक पीढ़ीकेँ बचएबाक चेतौनी छी ई कथा। अणिमा सिंह (१९२४- )—समीक्षिका, अनुवादिका, सम्पादिका।प्रकाशन: मैथिली लोकगीत, वसवेश्वर (अनु.) आदि। लेडी ब्रेबोर्न कॉलेज, कलकत्तामे पूर्व प्राध्यापिका। लिली रे जन्म:२६ जनवरी, १९३३,पिता:भीमनाथ मिश्र,पति:डॉ. एच.एन्.रे, दुर्गागंज, मैथिलीक विशिष्ट कथाकार एवं उपन्यासकार । मरीचिका उपन्यासपर साहित्य अकादेमीक १९८२ ई. मे पुरस्कार।मैथिलीमे लगभग दू सय कथा आ पाँच टा उपन्यास प्रकाशित।विपुल बाल साहित्यक सृजन। अनेक भारतीय भाषामे कथाक अनुवाद-प्रकाशित। प्रबोध सम्मान प्राप्त। शांति सुमन जन्म 15 सितम्बर 1942, कासिमपुर, सहरसा, बिहार, प्रकाशित कृति, “ओ प्रतीक्षित, परछाई टूटती, सुलगते पसीने, पसीने के रिश्त, मौसम हुआ कबीर, समय चेतावनी नहीं देता, तप रेहे कचनार, भीतर-भीतर आग, मेघ इन्द्रनील (मैथिली गीत संग्रह), शोध प्रबंध: मध्यवर्गीय चेतना और हिन्दी का आधुनिक काव्य, उपन्यास: जल झुका हिरन। सम्मान: साहित्य सेवा सम्मान, कवि रत्न सम्मान, महादेवी वर्मा सम्मान। अध्यापन कार्य। शेफालिका वर्मा जन्म:९ अगस्त, १९४३,जन्म स्थान : बंगाली टोला, भागलपुर । शिक्षा:एम., पी-एच.डी. (पटना विश्वविद्यालय),सम्प्रति: ए. एन. कालेज मे हिन्दीक प्राध्यापिका ।प्रकाशित रचना:झहरैत नोर, बिजुकैत ठोर । नारी मनक ग्रन्थिकेँ खोलि:करुण रससँ भरल अधिकतर रचना। प्रकाशित कृति :विप्रलब्धा कविता संग्रह,स्मृति रेखा संस्मरण संग्रह,एकटा आकाश कथा संग्रह, यायावरी यात्रावृत्तान्त, भावाञ्जलि काव्यप्रगीत । ठहरे हुए पल हिन्दीसंग्रह । इलारानी सिंह जन्म 1 जुलाई, 1945, निधन : 13 जून, 1993, पिता: प्रो. प्रबोध नारायण सिंह सम्पादिका : मिथिला दर्शन, विशेष अध्ययन: मैथिली, हिन्दी, बंगला, अंग्रेजी, भाषा विज्ञान एवं लोक साहित्य। प्रकाशित कृति: सलोमा (आस्कर वाइल्डक फ्रेंच नाटकक अनुवाद 1965), प्रेम एक कविता (1968) बंगला नाटकक अनुवाद, विषवृक्ष (1968) बंगला नाटकक अनुवाद, विन्दंती (1972), स्वरचित: मैथिली कविता संग्रह (1973), हिन्दी संग्रह। नीरजा रेणु जन्म: ११ अक्टूबर १९४५,नाम: कामाख्या देवी,उपनाम:नीरजा रेणु,जन्म स्थान:नवटोल,सरिसबपाही ।शिक्षा: बी.ए. (आनर्स) एम.ए.,पी-एच.डी.,गृहिणी ।प्रकाशित रचना:ओसकण (कविता मि.मि., १९६०) लेखन पर पारिवारिक, सांस्कृतिक परिवेशक प्रभाव।मैथिली कथा धारा साहित्य अकादेमी नई दिल्लीसँ स्वातन्त्र्योत्तर मैथिली कथाक पन्द्रह टा प्रतिनिधि कथाक सम्पादन ।सृजन धार पियासल कथा संग्रह,आगत क्षण ले कविता संग्रह, ऋतम्भरा कथा संग्रह,प्रतिच्छवि हिन्दी कथा संग्रह,१९६० सँ आइधरि सएसँ अधिक कथा, कविता, शोधनिबन्ध, ललितनिबन्ध,आदि अनेक पत्र-पत्रिका तथा अभिनन्दनग्रन्थमे प्रकाशित ।मैथिलीक अतिरिक्त किछु रचना हिन्दी तथा अंग्रेजीमे सेहो। उषाकिरण खान जन्म:१४ अक्टूबर १९४५,कथा एवं उपन्यास लेखनमे प्रख्यात।मैथिली तथा हिन्दी दूनू भाषाक चर्चित लेखिका।प्रकाशित कृति:अनुंत्तरित प्रश्न, दूर्वाक्षत, हसीना मंज़िल (उपन्यास), नाटक, उपन्यास। प्रेमलता मिश्र ’प्रेम’ जन्म:१९४८,जन्मस्थान:रहिका,माता:श्रीमती वृन्दा देवी,पिता:पं. दीनानाथ झा,शिक्षा:एम.ए., बी.एड.,प्रसिद्ध अभिनेत्री दू सयसँ बेशी नाटकमे भाग लेलनि ।भंगिमा (नाट्यमंच) क भूतपूर्व उपाध्यक्षा, पत्रिकाक सम्पादन, कथालेखन आदिमे कुशल । ’अरिपन’ आदि अनेक संस्था द्वारा पुरस्कृत-सम्मानित। आशा मिश्र जन्म:६-७-१९५० ई.,प्रकाशित कथा मे मैथिकीक संग हिन्दी मे सेहो । सभसँ पैघ विजय मैथिली कथा संग्रह। नीता झा जन्म : २१-०१-१९५३,व्यवसाय:प्राध्यापिका । लेखन पर समाजक परम्परा तथा आधुनिकताक संस्कार सँ होइत विसंगतिक प्रभाव।प्रकाशित कृति : फरिच्छ, कथा संग्रह १९८४, कथानवनीत १९९०,सामाजिक असन्तोष ओ मैथिली साहित्य शोध समीक्षा। ज्योत्स्ना चन्द्रम मूल नाम: कुमारी ज्योत्स्ना ,उपनाम : ज्योत्स्ना आनन्द ,जन्मतिथि: १५ दिसम्बर, १९६३,जन्मस्थान : मरूआरा, सिंधिया खुर्द, समस्तीपुर,पिता: श्री मार्कण्डेय प्रवासी,माता: श्रीमती सुशीला झा,कार्यक्षेत्र : अध्ययनाध्यापन ।,रचना प्रकाशित : झिझिरकोना (कथा-संग्रह), एसगर-एसगर (नाटक),बीतक संग संकलन एवं सम्पादन।एकर अतिरिक्त दर्जनाधिक कथा ओ कविता विभिन्न पत्र-पत्रिका में प्रकाशित तथा आकाशवाणीक पटना, भागलपुर, दरभंगा केन्द्रसँ प्रसारित।शिक्षा : पटना विश्वविद्यालयसँ हिन्दी साहित्यमे एम.ए,। सुस्मिता पाठक जन्म:२५ फरवरी, १९६२,सुपौल, बिहार । परिचिति कविता संग्रह प्रकाशित । कथावाचक, कथासंग्रह प्रकाशनाधीन । राजनीति शास्त्रमे एम.ए.। संगीत, पेंटिंगमे रुचि । मैथिलीक पोथी पत्रिका पर अनेक रेखाचित्र प्रकाशित । समकालीन जीवन, समय, आ तकर स्पंदनक कवयित्री । अनेक भाषामे रचनाक अनुवाद प्रकाशित। विभा रानी (१९५९- )लेखक- एक्टर- सामाजिक कार्यकर्ता-बहुआयामी प्रतिभाक धनी विभा रानी राष्ट्रीय स्तरक हिन्दी व मैथिलीक लेखिका, अनुवादक, थिएटर एक्टर, पत्रकार छथि, जिनक दर्ज़न भरि से बेसी किताब प्रकाशित छन्हि आ कएकटा रचना हिन्दी आ र्मैथिलीक कएकटा किताबमे संकलित छन्हि। मैथिली के 3 साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता लेखकक 4 गोट किताब “कन्यादान” (हरिमोहन झा), “राजा पोखरे में कितनी मछलियां” (प्रभास कुमार चाऊधरी), “बिल टेलर की डायरी” व “पटाक्षेप” (लिली रे) हिन्दीमे अनूदित छन्हि। समकालीन विषय, फ़िल्म, महिला व बाल विषय पर गंभीर लेखन हिनक प्रकृति छन्हि। रेडियोक स्वीकृत आवाज़क संग ई फ़िल्म्स डिविजन लेल डॉक्यूमेंटरी फ़िल्म, टीवी चैनल्स लेल सीरियल्स लिखल व वॉयस ओवरक काज केलन्हि। मिथिलाक ‘लोक’ पर गहराई स काज करैत 2 गोट लोककथाक पुस्तक “मिथिला की लोक कथाएं” व “गोनू झा के किस्से” के प्रकाशनक संगहि संग मिथिलाक रीति-रिवाज, लोक गीत, खान-पान आदिक वृहत खज़ाना हिनका लग अछि। हिन्दीमे हिनक 2 गोट कथा संग्रह “बन्द कमरे का कोरस” व “चल खुसरो घर आपने” तथा मैथिली में एक गोट कथा संग्रह “खोह स’ निकसइत” छन्हि। हिनक लिखल नाटक ‘दूसरा आदमी, दूसरी औरत’ राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्ली के अन्तर्राष्ट्रीय नाट्य समारोह भारंगममे प्रस्तुत कएल जा चुकल अछि। नाटक ‘पीर पराई’क मंचन, ‘विवेचना’, जबलपुर द्वारा देश भरमे भ रहल अछि। अन्य नाटक ‘ऐ प्रिये तेरे लिए’ के मंचन मुंबई व ‘लाइफ़ इज नॉट अ ड्रीम’ के मंचन फ़िनलैंडमे भेलाक बाद मुंबई, रायपुरमे कएल गेल अछि। ‘आओ तनिक प्रेम करें’ के ‘मोहन राकेश सम्मान’ से सम्मानित तथा मंचन श्रीराम सेंटर, नई दिल्लीमे कएल गेल। “अगले जनम मोहे बिटिया ना कीजो” सेहो ‘मोहन राकेश सम्मान’ से सम्मानित अछि। दुनु नाटक पुस्तक रूप में प्रकाशित सेहो अछि। मैथिलीमे लिखल नाटक “भाग रौ” आ “मदद करू संतोषी माता” अछि। हिनक नव मैथिली नाटक प्रस्तुति छन्हि- बलचन्दा। विभा ‘दुलारीबाई’, ‘सावधान पुरुरवा’, ‘पोस्टर’, ‘कसाईबाड़ा’, सनक नाटक के संग-संग फ़िल्म ‘धधक’ व टेली -फ़िल्म ‘चिट्ठी’मे अभिनय केलन्हि अछि। नाटक ‘मि. जिन्ना’ व ‘लाइफ़ इज नॉट अ ड्रीम’ (एकपात्रीय नाटक) हिनक टटका प्रस्तुति छन्हि। ‘एक बेहतर विश्र्व– कल के लिए’ के परिकल्पनाक संगे विभा ‘अवितोको’ नामक बहुउद्देश्यीय संस्था संग जुड़ल छथि, जिनक अटूट विश्र्वास ‘थिएटर व आर्ट– सभी के लिए’ पर अछि। ‘रंग जीवन’ के दर्शनक साथ कला, रंगमंच, साहित्य व संस्कृति के माध्यम से समाज के ‘विशेष’ वर्ग, यथा, जेल- बन्दी, वृद्ध्राश्रम, अनाथालय, ‘विशेष’ बच्चा सभके बालगृहक संगहि संग समाजक मुख्य धाराल लोकक बीच सार्थक हस्तक्षेप करैत छथि। एतय हिनकर नियमित रूप से थिएटर व आर्ट वर्कशॉप चलति छन्हि। अहि सभक अतिरिक्त कॉर्पोरेट जगत सहित आम जीवनक सभटा लोक आओर लेल कला व रंगमंचक माध्यम से विविध विकासात्मक प्रशिक्षण कार्यक्रम सेहो आयोजित करैत छथि। श्रीमति विभारानी सम्प्रति मुम्बईमे रहैत छथि। रूपा धीरू- जन्मस्थान-मयनाकडेरी, सप्तरी, श्रीमती पूनम झा आ श्री अरूणकुमार झाक पुत्री।स्थायी पता- अञ्चल- सगरमाथा, जिल्ला- सिरहा। प्रथम प्रकाशित रचना-कोइली कानए, माटिसँ सिनेह (कविता),भगता बेङक देश-भ्रमण (कनक दीक्षितक पुस्तकक धीरेन्द्र प्रेमर्षिसँग मैथिलीमे सहअनुवाद,सङ्गीतसम्बन्धी कृति- राष्ट्रियगान, भोर, नेहक वएन, चेतना, प्रियतम हमर कमौआ (पहिल मैथिली सीडी), प्रेम भेल तरघुस्कीमे, सुरक्षित मातृत्व गीतमाला, सुखक सनेस। सम्पादन-पल्लव, मैथिली साहित्यिक मासिक पत्रिका, सम्पादन-सहयोग,हमर मैथिली पोथी (कक्षा १, २, ३, ४ आ ५ आ कक्षा 9-10 क ऐच्छिक मैथिली विषय पाठ्यपुस्तकक भाषा सम्पादन), पल्लवमिथिला, प्रथम मैथिली इन्टरनेट पत्रिका,वि.सं. २०५९ माघ (साहित्यिक), सम्पादन-सहयोग। मैत्रेयी – याज्ञवल्क्यक दू टा पत्नी छलथिन्ह, १. कात्यायनी आऽ दोसर मैत्रेयी। मत्रेयी ब्रह्मवादिनी छलीह। कात्यायनीसँ हुनका तीनटा पुत्र छलन्हि- चन्द्रकान्ता, महामेघ आऽ विजय। डा. रमानन्द झा ‘रमण’ जन्म: 02 जनबरी,1949, शिक्षा-एम.ए., पीएच.डी., आजीविका-भारतीय रिजर्व बैंक, पटना (सेवा निवृत्त)। प्रकाशन: मौलिक- समीक्षा 1. नवीन मैथिली कविता,1982, 2. मैथिली नऽव कविता,1993, 3. मैथिली साहित्य ओ राजनीति, 1994, 4. अखियासल, 1995, 5. बेसाहल,2003, 6. भजारल, 2005., 7. निर्यात कैसे शुरू करें? हिन्दी- रिजर्व बैंक, पटनाक प्रकाशन सम्पादित 8. मैथिलीक आरम्भिक कथा, 1978 समीक्षा, 9. श्यामानन्द रचनावली, 1981, 10. जनार्दनझा‘ जनसीदनकृत निर्दयीसासु (1914) आ पुनर्विवाह (1926), 1984, 11. चेतनाथझाकृत श्रीजगन्नाथपुरी यात्रा (1910), 1994, 12. तेजनाथ झाकृत सुरराजविजय नाटक (1919), 1994, 13. रासबिहारीलाल दासकृत सुमति (1918), 1996, 14. जीबछ मिश्रकृत रामेश्वर (1916), 1996, 15. भेटघॉंट (भेटवार्ता), 1998, 16. रूचय तँ सत्य ने तँ फूसि, 1998, 17. पुण्यानन्द झाकृत मिथिला दर्पण (1925), 2003, 18. यदुवर रचनावली (1888-1934) 2003, 19. श्रीवल्लभ झा (1905-1940) कृत विद्यापति विवरण, 2005, 20. मैथिली उपन्यासमे चित्रित समाज, 2003, 21. पण्डित गोविन्द झाः अर्चा ओ चर्चा, 1997 प्रबन्ध सम्पादक, 22. कवीश्वर चेतना, 2008, चेतना समिति, पटना अनुवाद 23. मौलियरक दू नाटक, 1991, साहित्य अकादमी, 24. छओ बिगहा आठ कटठा, 1999, साहित्य अकादमी, 25. मानवाधिकार घोषणा Universal Declaration of Human Rights २००७( यूनेसको), 26. राजू आ’ टाकाक गाछ, 2008 रिजर्व बेंक -वित्तीय शिक्षा योजना के अन्तर्गत पत्रिका सम्पादन-सह-सम्पादन 1. प्रयोजन, 1993 (मासिक), 2. कोषाक्षर (हिन्दी) 1982, 3. घर बाहर, त्रैमासिक, चेतना समिति, पटना कार्यशाला 1. National Workshop on Literary Translation,- Dec 20.1991 to January 12,02,1992, Sahitya Akademi, New Delhi2.Bonds Beyond the Borders (India-Nepal civil society interaction on Cross Border issues) -Consulate General of India, Birgunj, Nepal and B.P. Koirala India-Nepal Foundation-May 27-28, 20062.Preparation of Intensive Course in Maithili- ERLC, Bhubneswar जूरी 6th Inter National Maithili Drama Festival,1992 -Biratnagar, Nepal पुरस्कार- सम्मान 1. जार्ज ग्रियर्सन पुरस्कार, 1994-95, राजभाषा विभाग,बिहार सरकार, मैथिली नऽव कविता पुस्तक पर, 2. भाषा भारती सम्मान, 2004-05 छओ बिगहा आठ कटठा, (अनुवाद) CIIL, मैसूर। राजेन्द्र विमल (1949- )। चामत्कारिक लेखन-प्रतिभाक स्वामी राजेन्द्र विमल नेपालक मैथिली साहित्यक एक स्तम्भ छथि। मैथिली, नेपाली आ हिन्दी भाषाक प्राज्ञ विमल शिक्षाक हकमे विद्यावारिधि (पी.एच.डी.)क उपाधि प्राप्त कएने छथि। सुललित शब्द चयन एवं भाषामे प्राञ्जलता डा. विमलक लेखनक विशेषता रहलनि अछि। अपन सिद्धहस्त लेखनसँ ई कोनहु पाठकक हृदयमे स्थान बना लैत छथि। कथा आ समालोचनाक सङ्गहि मर्मभेदी गीत गजल लिखबामे प्रवीण डा. विमलक निबन्ध, अनुवाद आदि सेहो विलक्षण होइत छनि। कम्मो लिखिकऽ यथेष्ट यश अरजनिहार डा. विमलक लेखनीक प्रशंसा मैथिलीक सङ्गसङ्ग नेपाली आ हिन्दी साहित्यमे सेहो होइत रहलनि अछि। खास कऽ मानवीय संवेदनाक अभिव्यक्तिमे हिनक कलम बेजोड़ देखल जाइत अछि। त्रिभुवन विश्वविद्यालयअन्तर्गत रा.रा.ब. कैम्पस, जनकपुरधाममे प्राध्यापन कएनिहार डा. विमलक पूर्ण नाम राजेन्द्र लाभ छियनि। हिनक जन्म २६ जुलाई १९४९ ई. कऽ भेल अछि। साहित्यकारक नव पीढ़ीकेँ निरन्तर उत्प्रेरित करबाक कारणे ई डा.धीरेन्द्रक बाद जनकपुर-परिसरक साहित्यिक गुरुक रूपमे स्थापित भऽ गेल छथि। जनकपुरधामक देवी चौक स्थित हिनक घर सदति साहित्यक जिज्ञासुसभकअखाड़ाजकाँबनलरहैतअछि। प्रकाश झा सुपरिचित रंगकर्मी। राष्ट्रीय स्तरक सांस्कृतिक संस्था सभक संग कार्यक अनुभव। शोध आलेख (लोकनाट्य एवं रंगमंच) आ कथा लेखन। राष्ट्रीय जूनियर फेलोशिप, भारत सरकार प्राप्त। राजधानी दिल्लीमे मैथिली लोक रंग महोत्सवक शुरुआत। मैथिली लोककला आ संस्कृतिक प्रलेखन आ विश्व फलकपर विस्तारक लेल प्रतिबद्ध। अपन कर्मठ संगीक संग मैलोरंगक संस्थापक, निदेशक। मैलोरंग पत्रिकाक सम्पादन। संप्रति राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्लीक रंगमंचीय शोध पत्रिका रंग-प्रसंगक सहयोगी संपादकक रूपमे कार्यरत। डॉ मित्रनाथ झा (१९५६-) पिता स्वनामधन्य मिथिला चित्रकार स्व. लक्ष्मीनाथ झा प्रसिद्ध खोखा बाबू, ग्राम-सरिसब, पोस्ट सरिसब-पाही, भाया- मनीगाछी, जिला-मधुबनी (भारत), सम्प्रति मिथिला शोध संस्थान, दरिभङ्गामे पाण्डुलिपि विभागाध्यक्ष ओ एम.ए. (संस्कृत) कक्षाक शिक्षार्थीकेँ एम.ए. पाठ्यक्रमक सभ पत्रक अध्यापन। लेखन, उच्चस्तरीय शोध ओ समाज-सेवामे रुचि। संस्कृत, मैथिली, हिन्दी, अंग्रेजी, भोजपुरी ओ उर्दू भाषामे गद्य-पद्य लेखन। राष्ट्रीय ओ अन्तर्राष्ट्रीय स्तरपर सुप्रतिष्ठित अनेकानेक पत्र-पत्रिका, अभिनन्दन-ग्रन्थ ओ स्मृति-ग्रन्थादिमे अनेक रचना प्रकाशित। राष्ट्रीय ओ अन्तर्राष्ट्रीय स्तरपर आयोजित अनेक सेमिनार, कॉनफेरेन्स, वर्कशॉप आदिमे सक्रिय सहभागिता।— काशीकान्त मिश्र “मधुप” (1906-1987) ’राधाविरह’ (महाकाव्य) पर साहित्य अकादेमी पुरस्कार प्राप्त मैथिलीक प्रशस्त कवि आ मैथिलीक प्रचार-प्रसारक समर्पित कार्यकर्ता ’झंकार’ कवितासँ क्रान्ति गीतक आह्वान कएलनि । प्रकृति प्रेमक विलक्षण कवि । ’घसल अठन्नी कविताक लेल कथ्य आ शिल्प-संवेदना—दुहू स्तर पर चरम लोकप्रियता भेटलनि। महेन्द्र मलंगिया मैथिलीक सुपरिचित नाटककार, रंग निर्देशक एवं मैलोरंगक संस्थापक अध्यक्ष । लोक साहित्य पर गंभीर शोध आलेख । मैथिलीमे 13टा नाटक, 19टा एकांकी, 14टा नुक्कड़ आ 10टा रेडियो नाटक प्रकाशित आ आकाशवाणी सँ प्रसारित । सीनियर फेलोशिप (भारत सरकार), इंटरनेशनल थिएटर इंस्टिच्यूट (नेपाल), प्रबोध साहित्य सम्मान आदि सँ सम्मानित । संप्रति ज्योतिरीश्वर लिखित मैथिलीक प्रथम पुस्तक वर्णरत्नाकर पर शोध कार्य । श्री महेन्द्र मलगियाक जन्म २० जनबरी १९४६ मे मधुबनी जिलाक मलंगिया गाममे भेलन्हि। मलंगियाजी मैथिली हिन्दी, अंग्रेजी आ नेपाली भाषाक जानकार आ थियेटर शिक्षण, पटकथा लेखन आ तत्सम्बन्धी शोधक फ्रीलान्स शिक्षक छथि। सम्मान, उपाधि आ पुरस्कार: २००६(सीनियर फ़ेलो, मानव ससाधन विकास विभाग, भारत सरकार), २००५ ई. मे मैथिली भाषाक सर्वाधिक प्रतिष्ठित प्रबोध सम्मान, उनाप सम्मान, परवाहा (उवा नाट्य परिषद, परवाहा), भानु कला पुरस्कार (कला जानकी संस्थान, जनकपुर), २००४- पाटलिपुत्र पुरस्कार ( प्रांगन थिएटर, पटना), इप्टा पुरस्कार (कटिहार इप्टा, कटिहार), २००३- गोपीनाथ आर्यल पुरस्कार (इन्टरनेशनल थिएटर इन्स्टीट्यूट, नेपाल), यात्री चेतना पुरस्कार (चेतना समिति, पटना), बैद्यनाथ सियादेवी पुरस्कार (बी.एस.डी.पी. काठमाण्डू), २०००- चेतना समिति सम्मान (चेतना समिति, पटना), जिला विकास धनुषा साहित्य पुरस्कार (जिला विकास समिति, जनकपुर), १९९९- विद्यापति सेवा संस्थान सम्मान (विद्यापति सेवा संस्थान सम्मान, दरभंगा), १९९८- रंग रत्न उपाधि (अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली साहित्य परिषद, राँची), १९९७- सर्वोत्तम निर्देशक पुरस्कार (सांस्कृतिक संस्थान, काठमाण्डू), १९९१- भानु कला पुरस्कार, विराटनगर (भानु कला परिषद, बिराटनगर), १९९०- सर्वनाम पुरस्कार (सर्वनाम समिति, काठमाण्डू), १९८५- आरोहण सम्मान, काठमाण्डू, १९८३- वैदेही पुरस्कार (विद्यापति स्मारक समिति, राँची), शोध कार्य: सलहेस: एकटा ऐतिहासिक अध्ययन, विरहा: मिथिलाक एकटा लोकरूप, सामा चकेबा: लोकनाट्यक एक अवलोकन, सलहेसक काल निर्धारण, विद्यापतिक उगना, शिवक गण, मधुबनी एकटा नगर अछि, हम जनकपुर छी, ई जनकपुर अछि। हिनकर दू टा पोथी “ओकरा आँगनक बारहमासा” आ “काठक लोक” ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगाक मैथिली पाठ्यक्रममे अछि। हिनकर दू टा पोथी त्रिभुवन विश्वविद्यालय, काठमाण्डू केर एम.ए. पाठ्यक्रममे अछि। हिनकर कैकटा आलेख आ किताब सेकेण्डरी आ हायर सेकेण्डरी पाठ्यक्रममे अछि। प्रकाशित पोथी: नाटक: ओकरा आँगनक बारहमासा, जुआयल कंकनी, गाम नञि सुतय, काठक लोक, ओरिजनल काम, राजा सलहेस, कमला कातक राम, लक्ष्मण आ सीता, लक्ष्मण रेखा खण्डित, एक कमल नोरमे, पूष जाड़ कि माघ जाड़, खिच्चड़ि, छुतहा घैल, ओ खाली मुँह देखै छै। ई सभटा कैक बेर आ कैक ठाम खेलाएल गेल अछि। एकाङ्की: टूटल तागक एकटा ओर, लेवराह आन्हरमे एकटा इजोत, गोनूक गबाह, हमरो जे साम्ब भैया, “बिरजू, बिलटू आओर बाबू”, मामा सावधान, देहपर कोठी खसा दिअ, नसबन्दी, आलूक बोरी, भूतहा घर, प्रेत चाहे असौच, फोनक करामात, एकटा बताहि आयल छलय, मालिक सभ चल गेलाह, भाषणक दोकान, फगुआ आयोजन आ भाषण, भूत, एक टुकड़ा पाप, मुहक कात, प्राण बचाबह सीता राम, ओ खाली घैल फोड़य छै। ई सभटा मंचित भऽ चुकल अछि। २५ टा चौबटिया नाटक: चक्रव्युह, लटर पटर अहाँ बन्द करू, बाढ़ि फेर औतय, एक घर कानन एक घर गीत, सेर पर सवा सेर, ई गुर खेने कान छेदेने, आब कहू मन केहेन लगैए, नव घर, हमर बौआ स्कूल जेतए, बेचना गेलए बीतमोहना गबए गीत, मोड़ पर, ककर लाल आदि। ई सभटा चौबटिया वीथीपर खेलायल गेल अछि। ११ टा रेडियो नाटक: आलूक बोरी, ई जनम हम व्यर्थ गमाओल, नाकक पूरा, फटफटिया काका आदि। ई सभटा टा पटना, दरभंगा आ नेपालक रेडियो स्टेशनसँ प्रसारित भेल अछि। सम्पादन: मैथिली एकाङ्की (साहित्य अकादमी, नई दिल्ली), विदेहक नगरीसँ (कविता संग्रह), मैथिली भाषा पुस्तक (सेकेण्डरी स्कूल पोथी), लोकवेद (मैथिली पत्रिका)। कथा: प्रह्लाद जड़ि गेल, धार, एक दिनक जिनगी, बनैया सुगा, बालूक भीत, बुलबुल्ला आदि। लघुकथा: डपोरशंख, मुहचिड़ा आदि। सदस्यता: अध्यक्ष, मैथिली लोक रंग, सदस्य कार्यकारी बोर्ड, मिनाप, जनकपुर, यात्री मधुबनी, मिथिला सांस्कृतिक मंच, मधुबनी। राष्ट्रीय आ अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनार सभमे सहभागिता। मैथिलीपुत्र प्रदीप १. श्री मैथिली पुत्र प्रदीप (१९३६- )। ग्राम- कथवार, दरभंगा। प्रशिक्षित एम.ए., साहित्य रत्न, नवीन शास्त्री, पंचाग्नि साधक। हिनकर रचित “जगदम्ब अहीं अवलम्ब हमर’ आ ’सभक सुधि अहाँ लए छी हे अम्बे हमरा किए बिसरै छी यै” मिथिलामे लेजेंड भए गेलअछि। अयोध्यानाथ चौधरी धनुषा, नेपाल 1947- मूलत: कविक रूपमे परिचित छथि। नेपालक आधुनिक कविताक क्षेत्रमे हिनक नाम उल्लेखनीय अछि। श्री चौधरीक लेखनमे मानवीय संवेदनाक प्रतिबिम्ब पाओल जाइत अछि। कविताक संग कथा आ निबन्धमे सेहो ई कलम चलबैत छथि। फड़िछाएल लेखन हिनक विशेषता थिकनि।धनुषा जिलाक दुहबी गामक रहनिहार श्री चौधरीक जन्म ६अक्टुबर १९४७कऽ भेल छनि। हिनक क्षितिजक ओहिपार नामसँ एक कविता-संग्रह प्रकाशित छनि।– बी.के कर्ण (1963-) पिता श्री निर्भय नारायण दास गाम- बलौर, भाया- मनीगाछी, जिला-दरभंगा। पैकेजिंग टेक्नोलोजीमे स्नातकोत्तर आ यू.एन.डी.पी. जर्मनी आ इग्लैण्डक कार्यक्रमक फेलोशिप, २२ वर्षक पेशेवर अनुभव आ २७ टा पत्र प्रकाशित। डायगनोस्टिक मिथिला पेंटिंग आ मिथिलाक सामाजिक-आर्थिक समस्यापर चिन्तन। सम्प्रति इन्डियन इन्स्टीट्यूट ऑफ पैकेजिंग, हैदराबादमे उपनिदेशक (क्षेत्रीय प्रमुख)।— वृषेश चन्द्र लाल जन्म 29 मार्च 1955 ई. केँ भेलन्हि। पिताः स्व. उदितनारायण लाल,माताः श्रीमती भुवनेश्वरी देव। हिनकर छठिहारक नाम विश्वेश्वर छन्हि। मूलतः राजनीतिककर्मी । नेपालमे लोकतन्त्रलेल निरन्तर संघर्षक क्रममे १७ बेर गिरफ्तार। लगभग ८ वर्ष जेल । सम्प्रति तराई–मधेश लोकतान्त्रिक पार्टीक राष्ट्री्य उपाध्यक्ष। मैथिलीमे किछु कथा विभिन्न पत्रपत्रिकामे प्रकाशित। आन्दोलन कविता संग्रह आ बी.पीं कोइरालाक प्रसिद्ध लघु उपन्यास मोदिआइनक मैथिली रुपान्तरण तथा नेपालीमे संघीय शासनतिर नामक पुस्तक प्रकाशित। ओ विश्वेश्वर प्रसाद कोइरालाक प्रतिबद्ध राजनीति अनुयायी आ नेपालक प्रजातांत्रिक आन्दोलनक सक्रिय योद्धा छथि। नेपाली राजनीतिपर बरोबरि लिखैत रहैत छथि। धर्मेन्द्र विह्वलजन्म विक्रम सम्वत २०२३-१२-०४, बस्तीपुर सिरहा,शिक्षा: एम ए (मैथिली/राजनीतिशास्त्र), डिप्लोमा ईन डेभलपमेन्ट जर्नालिज्म, प्रकाशित कृति : एक समयक बात (वि स २०६१ मैथिली हाईकु संग्रह ), रस्ता तकैत जिनगी (वि स २०५०/ कविता संग्रह ),एक सृष्टि एक कविता (२०५७/दीर्घ कविता ),हमर मैथिली पोथी (कक्षा 1 सं ५ धरिक पाठय पुस्तक),सम्प्रति: सभापति, नेपाल पत्रकार महासंघ— धीरेन्द्र प्रेमर्षि (१९६७- ) मैथिली भाषा, साहित्य, कला, संस्कृति आदि विभिन्न क्षेत्रक काजमे समान रूपेँ निरन्तर सक्रिय व्यक्तिक रूपमे चिन्हल जाइत छथि धीरेन्द्र प्रेमर्षि। वि.सं.२०२४ साल भादब १८ गते सिरहा जिलाक गोविन्दपुर-१, बस्तीपुर गाममे जन्म लेनिहार प्रेमर्षिक पूर्ण नाम धीरेन्द्र झा छियनि। सरल आ सुस्पष्ट भाषा-शैलीमे लिखनिहार प्रेमर्षि कथा, कविताक अतिरिक्त लेख, निबन्ध, अनुवाद आ पत्रकारिताक माध्यमसँ मैथिली आ नेपाली दुनू भाषाक क्षेत्रमे सुपरिचित छथि। नेपालक स्कूली कक्षा १,२,३,४,९ आ १०क ऐच्छिक मैथिली तथा १० कक्षाक ऐच्छिक हिन्दी विषयक पाठ्यपुस्तकक लेखन सेहो कएने छथि। साहित्यिक ग्रन्थमे हिनक एक सम्पादित आ एक अनूदित कृति प्रकाशित छनि। प्रेमर्षि लेखनक अतिरिक्त सङ्गीत, अभिनय आ समाचार-वाचन क्षेत्रसँ सेहो सम्बद्ध छथि। नेपालक पहिल मैथिली टेलिफिल्म मिथिलाक व्यथा आ ऐतिहासिक मैथिली टेलिश्रृङ्खला महाकवि विद्यापति सहित अनेक नाटकमे अभिनय आ निर्देशन कऽ चुकल प्रेमर्षिकेँ नेपालसँ पहिलबेर मैथिली गीतक कैसेट कलियुगी दुनिया निकालबाक श्रेय सेहो जाइत छनि। हिनक स्वर सङ्गीतमे आधा दर्जनसँ अधिक कैसेट एलबम बाहर भऽ चुकल अछि। कान्तिपुरसँ हेल्लो मिथिला कार्यक्रम प्रस्तुत कर्ता जोड़ी रूपा-धीरेन्द्रक धीरेन्द्रक अबाज गामक बच्चा-बच्चा चिन्हैत अछि। “पल्लव” मैथिली साहित्यिक पत्रिका आ “समाज” मैथिली सामाजिक पत्रिकाक—सम्पारदक ज्योति प्रकाश लाल ग्राम-जगतपुर, सुपौल, (भारत)।ज्योतिप्रकाश लाल विप्रो टेक्नोलोजी, हैदराबादमे सॉफ्टवेअर अभियन्ता छथि, स्पेन आ यू.एस.ए.मे पहिने काज कए चुकल छथि। एप्लिकेशन आ वेब आधारित सॉफ्टवेअरक निर्माणमे संलग्न। माइक्रोसॉफ्ट कॉरपोरेशन, वाशिंगटनमे विन्डोज ऑपेरेटिंग सिस्टमपर शोध आ विकासमे योगदान। स्कूल, कम्प्य़ुटर इंस्टीट्यूट आ सरकारी पोलीटेकनिकमे शिक्षणक पूर्व अनुभव। वर्तमानमे साक्षातकार आ व्यक्तित्व विकासपर पोथी लिखबामे व्यस्त। श्री लालमे संगठनात्मक शक्ति छन्हि आ ओऽ विभिन्न ग्रुप आ फोरमसँ जुड़ल छथि। किछु आर अनुभवी सहयोगीक संग ओऽ http://www.jyoticonsultant.com द्वारा मुफ्त कैरिअर सुझाव दए रहल छथि।– केदारनाथ चौधरी जन्म 3 जनवरी 1936 ई नेहरा, जिला दरभंगामे। 1958 ई.मे अर्थशास्त्रमे स्नातकोत्तर, 1959 ई.मे लॉ। 1969 ई.मे कैलिफोर्निया वि.वि.सँ अर्थस्थास्त्र मे स्नातकोत्तर, 1971 ई.मे सानफ्रांसिस्को वि.वि.सँ एम.बी.ए., 1978मे भारत आगमन। 1981-86क बीच तेहरान आ प्रैंकफुर्तमे। फेर बम्बई पुने होइत 2000सँ लहेरियासरायमे निवास। मैथिली फिल्म ममता गाबय गीतक मदनमोहन दास आ उदयभानु सिंहक संग सह निर्माता।तीन टा उपन्यास 2004मे चमेली रानी, 2006मे करार, 2008 मे माहुर। कृपानन्द झा (1970- ), जन्म- समौल, मधुबनी, मिथिला। गणितमे स्नातकोत्तर (एल.एन.एम.यू, दरभंगा), बी.लिब. (जामिया मिलिया इस्लामिया) आ सोचाना विज्ञानमे एसोसिएटशिप, आइ.एन.एस.डी.ओ.सी., नई दिल्ली। कृपानन्द जी मीरा बाइ पोलीटेकनिक, महारानी बाग, नई दिल्लीमे व्याखाता छथि। कृपानन्दजी यूथ ऑफ मिथिलाक अध्यक्ष छलाह आ एखन अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली परिषदक जेनरल सेक्रेटरी छथि। हिनकर ६ टा शोध पेपर सूचना प्रबन्धनक क्षेत्रमे प्रकाशित छन्हि, संगहि हिन्दी आ अग्रेजीमे एक-एकटा कविता सेहो प्रकाशित छन्हि। कृष्णमोहन झा (1968- ) जन्म मधेपुरा जिलाक जीतपुर गाममे। “विजयदेव नारायण साही की काव्यानुभूति की बनावट” विषयपर जे.एन.यू. सँ एम.फिल आ ओतहिसँ “निर्मल वर्मा के कथा साहित्य में प्रेम की परिकल्पना” विषयपर पी.एच.डी.। हिन्दीमे एकटा कविता सँग्रह “समय को चीरकर” आ मैथिलीमे “एकटा हेरायल दुनिया” प्रकाशित। हिन्दी कविता लेल “कन्हैया स्मृति सम्मान”(1998) आ “हेमंत स्मृति कविता पुरस्कार” (2003)। असम विश्वविद्यालय, सिल्चरक हिन्दी विभागमे अध्यापन। कुमार मनोज कश्यप जन्म : १९६९ ई़ मे मधुबनी जिलांतर्गत सलेमपुर गाम मे। स्कूली शिक्षा गाममे आ उच्च शिक्षा मधुबनी मे। बाल्य काले सँ लेखनमे आभरुचि। कैक गोट रचना आकाशवाणी सँ प्रसारित आ विभिन्न पत्र-पत्रिका मे प्रकाशित। सम्प्रति केंद्रिय सचिवालयमे अनुभाग अधिकारी पद पर पदस्थापित।— हिमांशु चौधरी पिता : स्वर्गीय कामेश्र्वर चौधरी,माताः श्रीमती चन्द्रावती चौधरी,जन्मः वि स २०२०/६/५ लहान, सिरहा,शिक्षाः स्नातकोत्तर(नेपाली),पेशाः पत्रकारिता (सम्प्रति : राष्ट्रिय समाचार समिति ),कृति : की भार सांठू ? (मैथिली कविता संग्रह), विगत दू दशकसं नेपाली आ मैथिली लेखन तथा अभियानमे निरन्तर क्रियाशील आ विभिन्न संघ संस्थासं आबद्ध। ज्योति http://www.poetry.comसँ संपादकक चॉयस अवार्ड (अंग्रेजी पद्यक हेतु) ज्योतिकेँ भेटल छन्हि। हुनकर अंग्रेजी पद्य किछु दिन धरि http://www.poetrysoup.com केर मुख्य पृष्ठ पर सेहो रहल अछि। ज्योति मिथिला चित्रकलामे सेहो पारंगत छथि आऽ हिनकर मिथिला चित्रकलाक प्रदर्शनी ईलिंग आर्ट ग्रुप केर अंतर्गत ईलिंग ब्रॊडवे, लंडनमे प्रदर्शित कएल गेल अछि। मिथिला पेंटिंगक शिक्षा सुश्री श्वेता झासँ बसेरा इंस्टीट्यूट, जमशेदपुर आऽ ललितकला तूलिका, साकची, जमशेदपुरसँ। नेशनल एशोसिएशन फॉर ब्लाइन्ड, जमशेदपुरमे अवैतनिक रूपेँ पूर्वमे अध्यापन। ज्योति झा चौधरी, जन्म तिथि -३० दिसम्बर १९७८; जन्म स्थान -बेल्हवार, मधुबनी ; शिक्षा- स्वामी विवेकानन्द मिडिल स्कूल़टिस्को साकची गर्ल्स हाई स्कूल़, मिसेज के एम पी एम इन्टर कालेज़, इन्दिरा गान्धी ओपन यूनिवर्सिटी, आइ सी डबल्यू ए आइ (कॉस्ट एकाउण्टेन्सी); निवास स्थान- लन्दन, यू.के.; पिता- श्री शुभंकर झा, ज़मशेदपुर; माता- श्रीमती सुधा झा, शिवीपट्टी। श्री आद्याचरण झा (१९२०- )। मंगरौनी। संस्कृतक महान विद्वान। मैथिलीमे मिहिर, बटुक, वैदेहीमे रचना प्रकाशित। दरभंगा संस्कृत वि.वि. केर प्रतिकुलपति। राष्ट्रपतिसँ सम्मान प्राप्त। श्री रामलोचन ठाकुर जन्म १८ मार्च १९४९ ई.पलिमोहन, मधुबनीमे। वरिष्ठ कवि, रंगकर्मी, सम्पादक, समीक्षक। भाषाई आन्दोलनमे सक्रिय भागीदारी। प्रकाशित कृति- इतिहासहन्ता, माटिपानिक गीत, देशक नाम छल सोन चिड़ैया, अपूर्वा (कविता संग्रह), बेताल कथा (व्यंग्य), मैथिली लोक कथा (लोककथा), प्रतिध्वनि (अनुदित कविता), जा सकै छी, किन्तु किए जाउ(अनुदित कविता), लाख प्रश्न अनुत्तरित (कविता), जादूगर (अनुवाद), स्मृतिक धोखरल रंग (संस्मरणात्मक निबन्ध), आंखि मुनने: आंखि खोलने (निबन्ध)।– प्रोफेसर रत्नेश्वर मिश्र (१९४५- ) पूर्व अध्यक्ष, इतिहास विभाग, ल.ना.मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा। अनुवादक, निबन्धकार। प्रकाशन: तमिल साहित्यक इतिहास, भवभूति (दुनू अनुवाद)। रूपा धीरू जन्मस्थान-मयनाकडेरी, सप्तरी, श्रीमती पूनम झा आ श्री अरूणकुमार झाक पुत्री।स्थायी पता- अञ्चल- सगरमाथा, जिल्ला- सिरहा। प्रथम प्रकाशित रचना-कोइली कानए, माटिसँ सिनेह (कविता), भगता बेङक देश-भ्रमण (कनक दीक्षितक पुस्तकक धीरेन्द्र प्रेमर्षिसँग मैथिलीमे सहअनुवाद, सङ्गीतसम्बन्धी कृति-राष्ट्रियगान, भोर, नेहक वएन, चेतना, प्रियतम हमर कमौआ (पहिल मैथिली सीडी), प्रेम भेल तरघुस्कीमे, सुरक्षित मातृत्व गीतमाला, सुखक सनेस। सम्पादन-पल्लव, मैथिली साहित्यिक मासिक पत्रिका, सम्पादन-सहयोग, हमर मैथिली पोथी (कक्षा १, २, ३, ४ आ ५ आ कक्षा 9-10 क ऐच्छिक मैथिली विषय पाठ्यपुस्तकक भाषा सम्पादन), पल्लवमिथिला, प्रथम मैथिली इन्टरनेट पत्रिका, वि.सं. २०५९ माघ (साहित्यिक), सम्पादन-सहयोग।— डॉ शंभु कुमार सिंह जन्म: 18 अप्रील 1965 सहरसा जिलाक महिषी प्रखंडक लहुआर गाममे। आरंभिक शिक्षा, गामहिसँ, आइ.ए., बी.ए. (मैथिली सम्मान) एम.ए. मैथिली (स्वर्णपदक प्राप्त) तिलका माँझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर, बिहार सँ। BET [बिहार पात्रता परीक्षा (NET क समतुल्य) व्याख्याता हेतु उत्तीर्ण, 1995] “मैथिली नाटकक सामाजिक विवर्त्तन” विषय पर पी-एच.डी. वर्ष 2008, तिलका माँ. भा.विश्वविद्यालय, भागलपुर, बिहार सँ। मैथिलीक कतोक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिका सभमे कविता, कथा, निबंध आदि समय-समय पर प्रकाशित। वर्तमानमे शैक्षिक सलाहकार (मैथिली) राष्ट्रीय अनुवाद मिशन, केन्द्रीय भारतीय भाषा संस्थान, मैसूर-6 मे कार्यरत। श्याम सुन्दर शशि जनकपुरधाम, नेपाल। पेशा-पत्रकारिता। शिक्षा: त्रिभुवन विश्वविद्यालयसँ, एम.ए. मैथिली, प्रथम श्रेणीमे प्रथम स्थान। मैथिलीक प्रायः सभ विधामे रचनारत। बहुत रास रचना विभिन्न पत्र-पत्रिकामे प्रकाशित। हिन्दी, नेपाली आ अंग्रेजी भाषामे सेहो रचनारत आ बहुतरास रचना प्रकाशित। सम्प्रति- कान्तिपुर प्रवासक अरब ब्यूरोमे कार्यरत।– श्री बैकुण्ठ झा पिता-स्वर्गीय रामचन्द्र झा, जन्म-२४-०७-१९५४ (ग्राम-भरवाड़ा, जिला-दरभंगा), शिक्षा-स्नायतकोत्तर (अर्थशास्त्र),पेशा- शिक्षक। मैथिली, हिन्दी तथा अंग्रेजी भाषा मे लगभग २०० गीत कऽ रचना। गोनू झा पर आधारित नाटक ”हास्यशिरोमणि गोनू झा तथा अन्य कहानी कऽ लेखन। अहि के अलावा हिन्दी मे लगभग १५ उपन्यास तथा कहानीक लेखन। श्री विद्यानन्द झा पञ्जीकार प्रसिद्ध मोहनजी जन्म-09.04.1957, पण्डुआ, ततैल, ककरौड़ (मधुबनी), रशाढ़य (पूर्णिया), शिवनगर (अररिया) आ’ सम्प्रति पूर्णिया। पिता लब्ध धौत पञ्जीशास्त्र मार्त्तण्ड पञ्जीकार मोदानन्द झा, शिवनगर, अररिया, पूर्णिया|पितामह-स्व. श्री भिखिया झा। पञ्जीशास्त्रक दस वर्ष धरि 1970 ई.सँ 1979 ई. धरि अध्ययन,32 वर्षक वयससँ पञ्जी-प्रबंधक संवर्द्धन आ संरक्षणमे संलग्न।– विनीत उत्पल (१९७८- )। आनंदपुरा, मधेपुरा। प्रारंभिक शिक्षासँ इंटर धरि मुंगेर जिला अंतर्गत रणगांव आs तारापुरमे। तिलकामांझी भागलपुर, विश्वविद्यालयसँ गणितमे बीएससी (आनर्स)। गुरू जम्भेश्वर विश्वविद्यालयसँ जनसंचारमे मास्टर डिग्री। भारतीय विद्या भवन, नई दिल्लीसँ अंगरेजी पत्रकारितामे स्नातकोत्तर डिप्लोमा। जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्लीसँ जनसंचार आऽ रचनात्मक लेखनमे स्नातकोत्तर डिप्लोमा। नेल्सन मंडेला सेंटर फॉर पीस एंड कनफ्लिक्ट रिजोल्यूशन, जामिया मिलिया इस्लामियाक पहिल बैचक छात्र भs सर्टिफिकेट प्राप्त। भारतीय विद्या भवनक फ्रेंच कोर्सक छात्र। आकाशवाणी भागलपुरसँ कविता पाठ, परिचर्चा आदि प्रसारित। देशक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिका सभमे विभिन्न विषयपर स्वतंत्र लेखन। पत्रकारिता कैरियर- दैनिक भास्कर, इंदौर, रायपुर, दिल्ली प्रेस, दैनिक हिंदुस्तान, नई दिल्ली, फरीदाबाद, अकिंचन भारत, आगरा, देशबंधु, दिल्ली मे। एखन राष्ट्रीय सहारा, नोएडा मे वरिष्ट उपसंपादक।— देवांशु वत्स मैथिली चित्र-श्रृंखला (कॉमिक्स) जन्म- तुलापट्टी, सुपौल। मास कम्युनिकेशनमे एम.ए। हिन्दी, अंग्रेजी आ मैथिलीक विभिन्न पत्र-पत्रिकामे कथा, लघुकथा, विज्ञान-कथा, चित्र-कथा, कार्टून, चित्र-प्रहेलिका इत्यादिक प्रकाशन। विशेष: गुजरात राज्य शाला पाठ्य-पुस्तक मंडल द्वारा आठम कक्षाक लेल विज्ञान कथा “जंग” प्रकाशित (2004 ई.)- जीवकान्त- पूर्ण नाम- जीवकान्त झा पिता-गुणानन्द झा, माता-महेश्वरी देवी, जन्म तिथि-२५.०७.१९३६ स्थान अभुआढ़, जिला-सुपौल शिक्षा-मैट्रिक (१९५५ उ.वि.डेवढ़), आइ.एस.सी. (१९५७ आर.के.कॉलेज, मधुबनी), बी.ए. (१९६४ बिहार वि.वि.स्वतंत्र छात्र), डिप.इन.एड.(१९६९ मिथिला वि.वि.) नौकरी-उच्च विद्यालयमे सहायक शिक्षक। विज्ञान शिक्षक (उ.वि.खजौली १९५७-८१), हिन्दी शिक्षक (उ.वि.डेओढ़ एवं उ.वि.पोखराम १९८१-९८) पहिल रचना-इजोड़िया आ टिटही (कविता, जनवरी १९६५ मिथिला मिहिर) पहिल छपल पोथी- दू कुहेसक बाट (उपन्यास १९६८) नवीनतम पोथी-खिखिरक बीअरि (२००७ बाल पद्य कथा), अठन्नी खसलइ वनमे (पद्य-कथा संग्रह) आ पंजरि प्रेम प्रकासिया (जीवन-वृत्तक अंश) प्रेसमे पुरस्कार-साहित्य अकादेमी (दिल्ली १९९८), किरण सम्मान (१९९८), वैदेही सम्मान (१९८५) प्रकाशित पोथी- कविता संग्रह: नाचू हे पृथ्वी (७१), धार नहि होइछ मुक्त (९१), तकैत अछि चिड़ै (९५), खाँड़ो (१९९६), पानिमे जोगने अछि बस्ती (९८), फुनगी नीलाकाशमे (२०००), गाछ झूल-झूल (२००४), छाह सोहाओन (२००६), खिखिरिक बीअरि (२००७) कथा-संग्रह: एकसरि ठाढ़ि कदम तर रे (७२), सूर्य गलि रहल अछि (७५), वस्तु (८३), करमी झील (९८) उपन्यास: दू कुहेसक बाट(६८), पनिपत(७७), नहि, कतहु नहि (७६), पीयर गुलाब छल (७१), अगिनबान (८१) हिन्दी अनुवाद- निशान्त की चिड़िया (हिन्दी अनुवाद-तकैत अछि चिड़ै, साहित्य अकादमी, दिल्ली २००३) जीवकांत 1936- जन्म स्थान ड्योढ़, घोघरडीहा, मधुबनी, बिहार । विशिष्ट कथाकार, कवि, उपन्यासकार । ’तकैत अछि चिड़ै’ (कविता) हेतु साहित्य अकादेमी पुरस्कारसँ सम्मानित । प्रकाशित कृति: एकसरि ठाढ़ि कदम तर रे, सूर्य गलि रहल आछि, वस्तु, करमी झील (कथा संग्रह), दू कुहेसक बाट, पीयर गुलाब छल, नहि कतहु नहि पनिपत, अगिनबान (उपन्यास), नाचू हे पृथ्वी, तकैत अछि चिड़ै, खाँड़ो (कवितासंग्रह)। महाकवि लालदास 1856-1921 हिनक जन्म खड़ौआ ग्राममे १८५६ ई. मे तथा मृत्यु १९२१ ई. मे भेलन्हि । हिनक अनेक रचना उपलब्ध होइत अछि, यथा—रमेश्वर चरित रामायाण,’ स्त्री शिक्षा,’ ’सावित्री-सत्यवान,’ ’चण्डी चरित,’ ’विरुदावली,’ ’दुर्गा सप्तशती,’ तन्त्रोक्त मिथिला माहात्म्य’ आदि । मैथिलीक अतिरिक्त ई संस्कृत, हिन्दी तथा फारसीक ज्ञाता छलाह । कविताक अतिरिक्त गद्यमे सेहो ई रचना कएल । रमेश्वर चरित रामायण हिनक सभसँ विशिष्ट ग्रन्थ अछि । राम-कथाक उल्लेखमे सीताक महिमाक महत्त्व दए मिथिला तथा मैथिलीक प्रति ई अपन श्रद्धा तथा भक्तिकेँ व्यक्त कएल अछि । म. म. परमेश्वर झा 1856-1924 जन्म 1856 ई. मे तरौनी ग्राम (दरभंगा) जिलामे भेल छलन्हि तथा निधन 1924 ई. मे । संस्कृत व्याकरणक ई दिग्गज विद्वान् छलाह तथा ‘वैयाकरण केशरी’ क उपाधिसँ विभूषित छलाह । मैथिली साहित्यमे अपन कृति ‘मिथिलातत्त्व विमर्श’ तथा ‘सीमंतिनी आख्यायिका’क कारणे महत्त्वपूर्ण स्थान रखैत छथि । ई महाराज रमेश्वर सिंहक दरवारमे राज-पंडितक पदपर अनेको वर्ष धरि सुप्रतिष्ठित छलाह । मुकुन्द झा “बख्शी” 1869-1936 जन्म हरिपुर बख्शी टोल ग्राम (मधुबनी जिला) मे 1869 ई. मे भेल तथा हिनक निधन काशीमे 1937 ई. मे भेलन्हि । हिनक लिखल संस्कृत मे अनेक ग्रंथ अछि । मैथिलीमे हिनक महत्त्वपूर्ण कृति अछि ‘मिथिला भाषामय इतिहास’ । एकर अतिरिक्त मैथिलीमे हिनक स्फुट निबन्ध सभ सेहो प्रकाशित भेल । मिथिलाक ऐतिहासिक वर्णन सभसँ पहिने हिनके प्रकाशित भेल । एहि इतिहासमे मिथिलाक सर्वतोमुखी परिचय प्रस्तुत कएल गेल अछि । डॉ. सर गंगानाथ झा 1871-1941 जन्म मधुबनी जिलाक सरिसब-पाही ग्राममे 1871 ई. मे भेल तथा निधन प्रयागमे 1941 ई. मे । ई अपना समयक संस्कृतक प्रकाण्ड विद्वान म. म. चित्रधर मिश्र, म. म. जयदेव मिश्र तथा म. म. शिवकुमार शास्त्नीसँ मीमांसा एवं दर्शनक अध्ययन कएलन्हि तथा दर्शनक विभित्र दुरूह ग्रंथक अङरेजीमे अनुवाद कए पाश्चात्य संसारक ध्यान आकृष्ट कएलन्हि । ई गवर्नमेन्ट संस्कृत कॉलेज बनारसमे 1917 सँ 1923 धरि प्रिसिपल छलाह तथा एलाहाबाद विश्वविद्यालयक 1923 सँ 1932 पर्यन्त कुलपति रहलाह । मैथिलीमे हिनक सम्पादित चन्दा झाक ‘महेशवाणी संग्रह’ तथा ‘गणनाथ-विन्ध्यनाथ पदावली’ प्रकाशित अछि । मैथिली साहित्य परिषद् द्वारा प्रकाशित हिनक ‘वेदान्त दीपक’ (दर्शन) विषयक अपूर्व ग्रंथ अछि । एहिसँ भिन्न हिनक निबंध सभ सामयिक मैथिली पत्न-पत्निकामे प्रकाशित अछि । बलदेव मिश्र 1890-1975 हिनक जन्म सहरसा जिलाक वनगाँव ग्राममे 1890 ई. मे एवं निधन फरवरी, 1975मे भेलन्हि । प्रारम्भमे पं. गेनालाल चौधरीसँ ज्यौतिष पढ़ि ई काशीमे पं. सुधाकर द्विवेदीजीक शिष्य भेलाह । बहुत वर्ष धरि सरस्वती भवन (वाराणसी) मे हस्तलिखित विभागमे कार्य कएल । पश्चात् पटनाक काशीप्रसाद जयसवाल रिसर्च संस्थानमे अनेक प्राचीन तिब्बती हस्तलिपिकेँ देवनारीमे लिप्यन्तरित कएल। ’मिथिलामोद’ प्रकाशन एवं म.म. मुरलीधर झाक प्रोत्साहनसँ ज्यौतिषीजी १९१० ई.सँ ’मोद’मे लिखए लगलाह। हिनक प्रकाशित रचना अछि—’रामायण शिक्षा’, ’चन्दा झा’, ’संस्कृति’, ’भारत शिक्षा’, ’गप्प-सप्प विवेक’, ’समाज’ आदि । पण्डितजी यावत् धरि पटना रहलाह बराबरि ’मिहिर’मे लिखैत रहलाह । सीताराम झा 1891-1975 जन्म चौगामा ग्राममे १८९१ ई.मे तथा निधन १९७५ ई. मे भेलन्हि । संस्कृतमे ज्योतिष शास्त्रक अनेक रचनाक .अतिरिक्त मैथिलीमे हिनक ’अम्ब चरित’ (महाकाव्य), ’सूक्ति सुधा,’ लोक लक्षण,’ ’पढ़ुआचरित,’ ’पूर्वापर व्यवहार,’ उनटा बसात,’ ’अलंकार दर्पण’, ’भूकम्प वर्णन’, ’काव्य षट-रस’, ’मैथिली काव्योपवन’, आदि ग्रन्थ उपलब्ध अछि । हिनक गीताक मैथिली अनुवाद सेहो उपलब्ध अछि । मिथिला मोदक सम्पादन १९२० ई.सँ १९२७ ई. धरि ई कएल । बद्रीनाथ झा 1893-1973 जन्म मधुबनी जिलाक सरिसव ग्राममे १८९३ ई. मे भेलन्हि तथा १९१४ ई. मे ई काशी लाभ कएलिन्ह । बहुत दिन धरि ई मुजफ्फरपुरक धर्म्म समाज संस्कृत कॉलेजमे साहित्यक अध्यापक छलाह । मैथिलीक विख्यात कवि लोकनि यथा सुमनजी, मधुपजी, मोहनजी आदि हिनक शिष्य छथिन्ह । संस्कृत साहित्यमे हिनक अनेक रचना अछि । जाहिमे राधा परिणय’ (महाकाव्य) क स्थान विशिष्ट अछि । मैथिलीमे हिनक ’एकावली परिणय’ (महाकाव्य) एक नवीन कीर्तिमान स्थापित कएलक। कोनो अलंकारक दृष्टान्त तकबाक हेतु ’एकावली परिणय’ पर्याप्त अछि । उमेश मिश्र 1895-1967 जन्म मधुबनी जिलाक गजहरा ग्राममे 1895 ई. मे भेल छलन्हि । ई एकहतरि वर्षक आयुमे १९६७ ई. मे प्रयागमे स्वर्गवासी भेलाह । ई अपन स्वनाम-धन्य पिता म. म. जयदेव मिश्र तथा म. म. डा. गंगानाथ झाक सान्निध्यमे विद्यार्जन कएल। १९२३ सँ १९५९ धरि मिश्रजी एलाहाबाद विश्वविद्यालयमे संस्कृतक प्राध्यापक छलाह । दरभंगा ’मिथिला शोध संस्थान’क निदेशक पदपर किछु समय कार्य कए १९६२ सँ ६५ धरि कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालयक कुलपति रहलाह ।म. म. मुरलीधर झासँ प्रभावित भए ’मिथिलामोद’मे ई लिखब प्रारम्भ कएलन्हि तथा अपन विविध प्रकारक रचनासँ मैथिलीक गद्यकेँ समृद्ध् कएलन्हि । मैथिलीमे हिनक प्रसिद्ध ग्रन्थ अछि—’कमला’ (शेक्सपीयरक ’टेम्पेस्ट’क भावानुवाद), ’नलोपाख्यान’, ‘मैथिली-संस्कृति’ तथा अनेक वर्णनात्मक एवं आलोचनात्मक निबन्ध; मनबोधक कृष्णजन्मक सम्पादन, विद्यापतिक कीर्तिलता, कीर्तिपताका, गोरक्ष विजय आदिक अनुवाद-सम्पादन सेहो कएल। अमरनाथ झा 1897-1955 सरिसब पाहीटोल ग्राममे १८९७ ई. मे भेल । हिनक निधन पटनामे जखन ई बिहार लोक सेवा आयोगक अध्यक्ष छलाह, १९५५ मे भेलन्हि । ई एलाहाबाद विश्वविद्यालयक नओ वर्ष धरि कुलपति रहि पश्चात् हिन्दू विश्वविद्यालयक सेहो कुलपतिक पदकेँ सुशोभित कएलन्हि । ई अंगरेजीक प्रकाण्ड विद्वान् छलाह, ताहि संग हिन्दी, उर्दू, फारसी, संस्कृत, बङला एवं मैथिलीक सेहो अद्भुत विद्वान् छलाह ।मैथिलीमे हिनका द्वारा सम्पादित ‘हर्षनाथ काव्य ग्रन्थावली’ तथा ‘गोविन्ददासक श्रृग्ङारभजन’ महत्त्वपूर्ण अछि । एहिसँ भिन्न हिनक मैथिली साहित्य परिषदक अध्यक्षीय भाषण तथा अन्य लेख प्रकाशित अछि । भोलालाल दास 1897-1977 हिनक जन्म दरभंगा जिलाक कसरौर मे भेलन्हि । साहित्य सर्जनाक अतिरिक्त अपन संगठन क्षमता तथा मैथिली साहित्यक सर्वतोमुखी विकासक हेतु सतत तत्पर रहबाक कारणेँ भोला बाबू मैथिली संसारक एक स्तम्भक रूपमे रहलाह । हिनक निधन 1977 ई. मे भेल । मैथिलीक प्रचार-प्रसारमे ई अपन जीवन समपित कएने छलाह। पाठ्यक्रममे मैथिलीकेँ स्थान हो ताहि हेतु ई बीड़ा उठओलन्हि । विद्यालय स्तरक अनेक पोथीक निर्माण कएल । मैथिली साहित्य परिषदक ई संस्थापक मण्डलक सदस्य छलाह । 1931 सँ 1940 ई. पर्यन्त ओकर प्रधान मन्त्नी रहलाह । हिनक मन्त्नित्वकालमे ’भारती’ नामक मासिक पत्नक प्रकाशन भेल । एहिसँ पूर्व (१९२९-३१) कुशेश्वर कुमरजीक संग संयुक्त सम्पादनमे ’मिथिला’ नामक पत्न चलाओल । ई नवीन एवं प्रगतिशील विचारक लोक छलाह । ननव लेखककेँ प्रोत्साहित करब, शैलीमे एकरूपता आनब, नव प्रकाशनसँ मैथिलीक साहित्य भंडारक पूर्त्ति करब हिनक कर्त्तव्य बनि गेल छल । हिनक लिखल ‘मैथिली व्याकरण’ तथा हिनकहि द्वारा सम्पादित ‘गद्यकुसुमांजलि बहुत दिन धरि विद्यालयमे पढ़ाओल जाइत रहल । हिनक लिखल अनेक निबन्ध समालोचना, कविता, संस्मरण, जीवनी-साहित्य मैथिलीक पत्र-पत्निकामे छिड़िआएल अछि । कुमार गंगानन्द सिंह 1898-1971 जन्म—बनैली राजपरिवारमे 24-9-1898, मृत्यु:-श्रीनगर पूर्णिञा 17-1-1970 । भूतपूर्व शिक्षामंत्नी, बिहार एबं कुलपति, कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय ।रचना—अगिलही (उपन्यास) तथा अनेक कथा एवं एकांकी । साहित्यकारक रूपमे अगिलही लएकेँ विशेष रव्याति । युगक अनुरूप सामाजिक कुरीति आदिकेँ आधार बनाए सुधारवादी दृष्टिएँ कथा सभहिक रचना| रमानाथ झा 1906-1971 जन्म दरभंगा जिलाक उजान (धर्मपुर) ग्राममे 1906 ई. मे एवं हिनक निधन दरभंगामे १९७१ ई. मे भेलन्हि । 1930 ई. मे अङरेजीमे एम. ए. कएलाक बाद ई कतोक वर्ष धरि मधेपुर उच्च विद्यालयक प्रधानाध्यापक छलाह, तकरा बाद दरभग्ङा-राज-लाइब्रेरीक पुस्तकालयाध्यक्षक रूपमे 1936 सँ अन्तिम समय धरि रहलाह । 1952 सँ 62 चन्द्रधारी मिथिला कॉलेजमे प्रो. झा अङरेजीक प्राध्यापक रूपेँ काजka पश्चात् ओही कॉलेजमे मैथिली विभागाध्यक्ष बनाओल गेलाह । 1965 मे रमानाथ बाबू साहित्य अकादमीक मैथिलीक प्रतिनिधि निर्वाचित भेलाह जाहि पद पर ओ जीवनक अन्त समय तक रहलाह । हिनक रचनाक क्षेत्न बहुत व्यापक छल । हिनक अनुसंधानात्मक निबंक दू गोट संग्रह ‘निबन्धमाला’ तथा ‘प्रबंध संग्रह’ प्रकाशित अछि । संकलित सम्पादित पुस्तक सभमे ‘मैथिली पद्य-संग्रह’, ‘मैथिली गद्य-संग्रह’, ‘प्राचीन गीत’, ‘कथा काव्य’, ‘नवीन गीत’, ‘कविता कुसुम’, ‘कथा संग्रह’ आदि अछि । ‘कथासरित्सागर’क आधार पर प्राञ्जल गद्य शैलीमे हिनक ‘उदयन-कथा’ तथा ‘बररुचि-कथा’ बेश ख्याति पओलक । व्याकरणक ‘मिथिला भाषा प्रकाश’, ‘अलक्ङारप्रवेश’ आदि अनेक ग्रन्थ प्रकाशित अछि । ‘मैथिली साहित्य पत्र’ त्नैमासिक पत्रिकाक संपादक। काशीकान्त मिश्र “मधुप” 1906-1987 ’राधाविरह’ (महाकाव्य) पर साहित्य अकादेमी पुरस्कार प्राप्त मैथिलीक प्रशस्त कवि आ मैथिलीक प्रचार-प्रसारक समर्पित कार्यकर्ता ’झंकार’ कवितासँ क्रान्ति गीतक आह्वान कएलनि । प्रकृति प्रेमक विलक्षण कवि । ’घसल अठन्नी कविताक लेल कथ्य आ शिल्प-संवेदना—दुहू स्तर पर चरम लोकप्रियता भेटलनि। कांञ्चीनाथ झा “किरण” 1906-1988 जन्म स्थान-धर्मपुर,लोहना रोड, दरभंगा बिहार । मैथिली भाषा आंदोलनमे महत्वपूर्ण भूमिका। ’पराशर’ महाकाव्य लेल साहित्य अकादमी ओ ’कथा किरण’ लेल वैदेही पुरस्कारसँ सम्मानित । प्रकाशित कृति: चंद्रग्रहण (उपन्यास), वीर-प्रसून (बालकथा), जय जन्मभूमि (एकांकी), विजेता विद्यापति (नाटक), कथा-किरण (कथा-संग्रह), किरण-कवितावली, कतेक दिनक बाद (कविता-संग्रह), पराशर (महाकाव्य) ओ किरण-निबंधावली (निबंध-संग्रह) आदि। ईशनाथ झा 1907-1965 बहुमुखी प्रतिभाक कवि । प्राचीन आ नवीन पद्धतिक काव्य-रचनाक विलक्षण संयोग हिनकर कवितामे भेटैत अछि । दलित वर्ग, शोषणक समस्या, स्वदेश प्रेमक यथार्थवादी रचनाक संग संग व्यक्तिनिष्ठ कल्पनाक अनेक विशिष्ट कविता मैथिलीमे लिखलनि । भुवनेश्वर सिंह ‘भुवन’ 1907-1944 अपन खाढ़ीक बहुमुखी प्रतिभाक कवि । प्राचीन आ नवीन रीतिक कविताक रचना विपुल संख्यामे कएलनि । ’भुवन भारती’ कविता संकलन प्रकाशनसँ मैथिली ओज आ नव चेतनाक शंख फुकलनि। तंत्रनाथ झा 1909-1984 जन्म १९०९ ई मे दरभंगा जिलाक धर्मपुर ग्राममे भेलन्हि मुत्यु ४-५-’८४,चन्द्रधारी मिथिला कॉलेजमे अर्थशास्त्नक प्राध्यापक छलाह । अवकाश ग्रहण क काव्य साधनामे लागल रहलाह । महाकाव्य, मुक्तक, एकांकी सभ विधामे ई सिद्ध हस्त छलाह । हिनक ’कीचक वंध’ महाकाव्य अङरेजीक ‘ब्लैक्ङ भर्स’ (अमित्नाक्षर छन्द) म लिखल अछि । मैथिलीमे ’सौनेट’ एवं ब्लैक्ङ भर्स’क ई प्रथम प्रयोक्ता थिकाह । संस्कृत परम्परामे काव्य रचना करितहुँ पाश्चात्य शैलीक नवीनता हिनका रचनामे भेल । हिनक ’कीचक वध’ ओ ’कृष्ण चरित’ महाकाव्य—‘मङ्गल-पञ्चाशिका’ एवं ‘नमस्या’ मैथिली साहित्यमे अपन विशिष्ट स्थान रखैछ । तकर अतिरिक्त मुक्तक काव्यमे विषय वस्तुक व्यापकता एवं शिल्प शैलिक प्रचुरता अबैत अछि । एक दिश यदि प्राचीन ढंगक ईश्बर वन्दनाक रचना कएलन्हि तँ दोसर दिस ‘सौनेट’ (चतुर्दशपदी) ‘बैलेड’ आदि लिखबामे पूर्ण सफलता प्राप्त कएलन्हि ।‘कृष्ण चरित’ महाकाव्य पर हिनका 1979 ई क साहित्यक अकादमी पुरस्कार भेटलन्हि । 1980 ई. मे हिनका अभिनन्दन ग्रन्थसमर्पित कएल गेलन्हि । सुरेन्द्र झा ‘सुमन’ 1910-2002 जन्म: ग्राम : बल्लीपुर, जिला-समस्तीपुर । प्रकाशित कृति: प्रतिपदा, अर्चना,साओन-भादव,अंकावली, अन्तर्नाद, पयस्विनी, उत्तरा आदि तीससँ अधिक मौलिक कविता-पुस्तक;पुरुष-परीक्षा, अनुगीतांजलि, ऋतु श्रृंगार तथा वर्णरत्नाकर, पारिजात-हरण, कृष्णजन्म, आनन्द-विजय आदि कतिपय ग्रन्थक अनुवाद-संपादन; ’मैथिली काव्य पर संस्कृतक प्रभाव’ नामक समीक्षा-ग्रंथ। ’पयस्विनी’ लेल १९७१ मे साहित्य अकादेमी पुरस्कार तथा ’उत्तरा’ पर १९१८ मे मैथिली अकादेमीक विद्यापति पुरस्कार प्राप्त । मैथिलीक प्रथम दैनिक पत्र ’स्वदेश’क लब्धप्रतिष्ठ सम्पादक। उपेन्द्र ठाकुर ‘मोहन’ 1913-1980 जन्म १९१३ ई. मे दरभंगा जिलाक चतरिया ग्राममे भेलन्हि । मृत्यु २४-५-१९८० । संस्कृत शिक्षामे साहित्याचार्य ओ बड़ौदा राजक विद्वत्-परीक्षासँ ‘साहित्य-रत्न’क उपाधिसँ विभूषित भेलाह । दैनिक आर्यावर्तमे आदिअहिसँ, पश्चात् १९६० सँ मिथिला मिहिरक उप-सम्पादक एवं सह-सम्पादक रूपेँ कार्य करैत १९७७ मे सेवा निवृत भेलाह ।मोहनजी करीब पचास वर्ष साहित्य साधनामे लागल रहलाह । विजयानन्द, कुंजरंजन, सुदर्शन, पुण्डरीक, शास्त्नी, बामन आदि छद्म नामसँ पत्न-पत्निकामे विविध विषयपर हिनक लेख सभ प्रकाशित भेल अछि ।मोहन जीक ‘बाजि उठल मुरली’मे १०१ गोट कविताक संकलन अछि जाहिमे हिनक सुदीर्घ काव्य-आराधनाक विभित्र विचारधाराक ओ विभित्र अनुभूतिक सामग्री उपलब्ध अछि । एहि पुस्तकपर मोहन’जीकेँ १९७८ मे साहित्य अकादम् पुरस्कार भेटलन्हि। एहिसँ बहुत पूर्व हिनक ’फुलडाली’ नामक कविता संग्रह सेहो प्रकाशित भेल छल | पञ्जीकार मोदानन्द झा 1914-1998 लब्ध धौत पञ्जीशास्त्र मार्त्तण्ड पञ्जीकार मोदानन्द झा, शिवनगर, अररिया, पूर्णिया। पिता-स्व. श्री भिखिया झा। गुरु- पञ्जीकार भिखिया झा। शास्त्रार्थ परीक्षा- दरभंगा महाराज कुमार जीवेश्वर सिंहक यज्ञोपवीत संस्कारक अवसर पर महाराजाधिराज(दरभंगा) कामेश्वर सिंह द्वारा आयोजित परीक्षा-1937 ई. जाहिमे मौखिक परीक्षाक मुख्य परीक्षक म.म. डॉ. सर गंगानाथ झा छलाह। उपेन्द्र नाथ झा ‘व्यास’ 1917-2002 जन्म स्थान-हरिपुर वकशीटोल, मधुबनी, बिहार । ’दू-पत्र’ लेल साहित्य अकादेमी पुरस्कारसँ सम्मानित । साहित्य अकादेमीक अनुवाद पुरस्कार प्राप्त । प्रकाशित कृति: कुमार, दू पत्र (उपन्यास), विडंबना, भजना भजले (कथा-संग्रह), पतन संन्यासी, प्रतीक (काव्य), महाभारत (पहिल दू पर्व) आदि। ब्रजकिशोर वर्मा ‘मणिपद्म’ 1918-1986 जन्म स्थान-बहेड़ा, दरभंगा बिहार । नैका बनिजार (उपन्यास) लेल साहित्य अकादेमी पुरस्कारसँ सम्मानित । उपन्यासकार, कथाकार ओ कवि । प्रकाशित कृति: कोब्रागर्ल, कनकी, अर्द्धनारीश्वर, लोरिक विजय, नैका-बनिजारा, लवहरि-कुशहरि, राय रणपाल, आदिम गुलाम आदि उपन्यास ओ कंठहार (नाटक) आदि। बुद्धिधारी सिंह रमाकर 1919-1991 जन्म मधुबनीमे 1919 ई. मे भेल । अपन पिता स्व. क्षेमधारी सिंहसँ विभित्र विषयक शिक्षा ग्रहण कएलन्हि । ई रामकृष्ण कॉलेज, मधुबनीक मैथिली विभागाध्यक्ष छलाह । जतएसँ अवकाश प्राप्त कएलन्हि । बाल्या-वस्थहिसँ ई कविकार्यमे लागल रहलाह अछि । संस्कृत तथा मैथिली दुनू भाषामे हिनक रचना प्रकाशित अछि । यथा—मैथिलीमे ‘प्रयास’ (कथा-संग्रह), ‘मधुमती’, ‘अमरबापू’ (कविता-संग्रह), ‘शरशय्या’ (खंड-काव्य) ‘स्मृति साहस्री’ (महाकाव्य) आदि । गोविन्द झा 1923- जन्मस्थान-इसहपुर, सनकोर्थु सरिसब पाही, मधुबनी, बिहार । प्रसिद्धकथाहार,उपन्यासकार, नाटककार, भाषा वैज्ञानिक ओ अनुवादक। साहित्य अकादेमी पुरस्कार, साहित्य अकादेमी अनुवाद पुरस्कारसँ सम्मानित। बिहार सरकारसँ कामिल बुल्के पुरस्कार, ग्रियर्सन पुरस्कार आदिसँ सम्मानित । प्रकाशित कृति: उपन्यास, नाटक, कथा, कविता, भाषा विज्ञान आदि विभिन्न विधामे अड़तीस टा पोथी प्रकाशित । प्रकाशन: सामाक पौती,नेपाली साहित्यक इतिहास (अनु) आदि । प्रबोध सम्मान 2006 सँ सम्मानित। सुधांशु शेखर चौधरी 1922-1990 जन्म दरभंगाक मिश्रटोलामे 1922 ई. मे भेलन्हि तथा मृत्यु 1990 ई. मे भेलन्हि । किछु दिन विभिन्न जीविकामे रहि पश्चात् साहित्यकारक जीवन प्रारम्भ कएल । किछु दिन ‘बैदेही’क सम्पादन श्री सुमनजी एवं श्री कृष्णकान्त मिश्रजीक संग कएल तत्पश्चात् 1060 ई. सँ 1982 ई. धरि पटनामे ‘मिथिला मिहिर’’क सफल सम्पादन कएल ।हिनक दू गोट नाट्यकृति-‘भफाइत चाहक जिनगी’, लेटाइत आँचर’, तथा ‘पहिल साँझ’ हिनक नाटकक नीक व्यावहारिक अनुभवक परिचायक अछि ।छद्मनामसँ हिनक दू गोट उपन्यास मिहिर’ मे प्रकाशित भेल अछि । हिनक उपन्यास ई वतहा संसार’ जे मैथिली अकादमी द्वारा प्रकाशित भेल आ जाहि पर 1980 क साहित्य अकादमीक पुरस्कार देल गेल | योगानन्द झा 1923-1986 हिनक जन्म मधुबनी जिलाक कोइलख ग्राममे 1923 ई. मे भेलन्हि । मृत्यु 1986 मे भेलनि । अग्रेजीमे एम. ए. कएलाक पश्चात् ई किछु दिन चन्द्रधरी मिथिला कॉलेजमे प्राध्यापक रहलाह । बिहार प्रशासनिक सेवामे 1981 धरि विभिन्न पदपर कार्य कएल । तत्पश्चात्मैथिली अकादमीक निदेशक ’84 धरि ।योगानन्द झाजी मैथिली साहित्यमे अपन उपन्यास ‘भलमानुस’ एवं ‘पवित्ना’क हेतु ख्यात छथि । हिनक नाटक ‘मुनिक मतिभ्रम’ एवं कथा संग्रह ‘उड़ैत वंशी’ यथेष्ट प्रतिष्ठा प्राप्त कएने अछि । एकर अतिरिक्त ई महात्मा गान्धीक आत्मकथाक अनुवाद एवं ‘आमक जलखरी’ नामक एक कथा संग्रहक सम्पादन सेहो कएने छथि | रामकृष्ण झा ‘किसुन’ 1923-1970 आधुनिक धाराक विशिष्ट कवि, कथाकार, चिन्तक । प्रकाशित कृति: आत्मनेपद (कविता संग्रह), मैथिली नवकविता (सम्पादन)। मृतयुपरान्त ’किसुन रचनावली’ तीन खण्डमे प्रकाशित । उमानाथ झा 1923- जन्म:-1-1-1923: महरैल, भधुबनी ।भूतपूर्व अङरेजी विभागाध्यक्ष एवं प्रति-कुलपति मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा । रचना:-रेखाचित्न, अतीत (कथा संग्रह); मैथिली नवीन साहित्य, इन्द्र धनुष, विद्यापति गीतशती (सम्पादन)। प्रबोध नारायण सिंह 1924-2005 हिन्दी, संस्कृत, मैथिली, पाली एवं फारसीक विद्वान्। मिथिला, मैथिल एवं मैथिलीक ई अनन्य भक्त छथि । कलकत्ता रहि मिथिला दर्शन’, मैथिली कविता’, मैथिली रंगमंच’ आदि पत्निकाक प्रकाशनक माध्यमसँ श्री प्रबोधजी मैथिलीक जे सेवा कएल अछि तकर वर्णन थोड़मे सम्भव नहि । अनेक बङला कृतिक ई अनुवाद सेहो कएल अछि ।हिन्दीमे सेहो हिनक ‘कविता संग्रह’ प्रकाशित अछि ।कलकत्ता विश्वविद्यालयमे हिन्दीक पूर्व अध्यक्ष। चन्द्रनाथ मिश्र अमर 1925- जन्म: खोजपुर, मधुबनी । वरिष्ठ कवि, कथाकार-उपन्यासकार । हास्य-व्यंग्यक कवितामे बेजोड़। मैथिलीक लेल समर्पित व्यक्तित्व । पांच दर्जनसं बेसी कथा आ विदागरी, वीरकन्या (उपन्यास) जल समाधि (कथा संग्रह) प्रकाशित । ’पत्रकारिताक इतिहास’ लेल साहित्य अकादमीसं सम्मानित। एम. एल. एकेडमी, लहेरिरियासरायसं शिक्षकक रूपमे अवकाश प्राप्त। आशा दिशा, गुदगुदी, युगचक्र, उनटा पाल आदि कविता संग्रह प्रकाशित। जयधारी सिंह 1929-2007 समीक्षक, कवि । प्रकाशन: बौद्धगानमे तांत्रिक सिद्धांत, समीक्षा शास्त्रा अदि । रामकृष्ण कॉलेज, मधुबनीमै मैथिली विभागक पूर्व अध्यक्ष गोपालजी झा ‘गोपेश’ 1931-2008 जन्म मधुबनी जिलाक मेहथ गाममे १९३१ ई.मे भेलन्हि।हिनकर रचित “सोन दाइक चिट्ठी”, “गुम भेल ठाढ़ छी”, “एलबम” “आब कहू मन केहन लगैए”, “मखानक पात” प्रकाशित भेल जाहिमे सोनदाइक चिट्ठी बेश लोकप्रिय भेल ललित 1932-1983 जन्म स्थान बसैठ चानपुरा मधुबनी, बिहार । प्रसिद्ध कथाकार ओ उपन्यासकार । प्रकाशित कृति: प्रतिनिधि, (कथा संग्रह), पृथ्वी-पुत्र (उपन्यास) आदि। धूमकेतु 1932-2000 जन्म स्थान कोइलख, मधुबनी, बिहार । प्रसिद्ध कथाकार, उपन्यासकार ओ कवि । प्रकाशित कृति : दू टा कथा संग्रह ओ एक टा उपन्यास । राजमोहन झा 1934- जन्म स्थान कुमरबाजितपुर, वैशाली, बिहार । प्रख्यात कथाकार ओ संपादक । आइ काल्हि परसू (कथा-संग्रह) लेल साहित्य अकादेमीसँ सम्मानित । प्रकाशित कृति : एक आदि एकांत, झूठ साँच, एकटा तेसर, अनुलग्नक, आइ काल्हि परसू (कथा संग्रह), गलतीनामा, भनहि विद्यापति, टीप्पणीत्यादि (आलोचना)। ’आरम्भ’ पत्रिकाक संपादन।प्रबोध सम्मान 2009 सँ सम्मानित। डॉ. धीरेन्द्र 1934-2004 जन्म स्थान लोहन, सरिसब पाही, मधुबनी, बिहार । प्रसिद्ध कथाकार,उपन्यासकार ओ कवि । प्रकाशित कृति: कुहेस आ किरण, पझाइत घूरक आगि, शतरूपा ओ मनु अपन मन्दिर (कथासंग्रह) हैंगरमे टाँगल कोट, काल्हि ओ आइ (कविता संग्रह) सहित कैक विधामे विभिन्न पोथी। सोमदेव 1934- उपन्यासकार ओ कवि । साहित्य अकादेमी पुरस्कारसँ सम्मानित । प्रकाशित कृति: चानोदाइ, होटल अनारकली (उपन्यास), काल ध्वनि (कविता संग्रह), चरैवेति (गीति नाट्य) सोम सतसइ (दोहा)। रमानन्द रेणु 1934- जन्म स्थान उसमामठ, दरभंगा, बिहार । वरिष्ठ कवि, कथाकार ओ उपन्यासकार। साहित्य अकादेमी पुरस्कारसँ सम्मानित। प्रकाशित कृति: कचोट, त्रिकोण, अंतहीन आकाश (कथा-संग्रह), दूधफूल (उपन्यास), अंतत:, ओकरे नाम (कविता-संग्रह) रामभद्र, धनुषा, नेपाल 1935- साहित्य तथा अन्यान्य क्षेत्रक कतोक सफल व्यक्तिसभ अपन प्रेरणास्रोत आ पथ-प्रदर्शक मानैत छथि । मैथिली साहित्य-क्षेत्रमे हिनक परिचयक मादे एतबाए कहब पर्याप्त होएत जे मैथिलीक मूर्द्धन्य साहित्यकार डा. धीरेन्द्र हिनका मैथिली साहित्यक सर्वश्रेष्ठ कथाकार मानैत छथि ।हिनक कथामे प्रतीकात्मकताक अदभुत प्रयोगहिटा नहि, अपितु एकटा आदर्श कथाक समस्त वैशिष्टसभविद्यमान रहैत अछि । कथाकारक अतिरिक्त ई उत्कृष्ट समालोचक, नाटककार आ कवि सेहो छथि । नेपालमे मैथिलीक पहिल मोनोड्रामा लिखबाक श्रेय सेहो हिनका जाइत छनि ।सामाजिक कुरीतिसभकँ कुशलतासँ चित्रण करबामे, चिन्तनीय बनएबामे आ मन-मस्तिष्कपर अमिट छाप छोड़बामे रामभद्र सिद्धहस्त छथि । धनुषा जिलाक कुर्था गाममे जनमल रामभद्रक पूर्ण नाम रामभद्र कर्ण छनि । अग्ङरेजी विषयक अवकाशप्राप्त शिक्षक रामभद्र व्याकरण, पाठयपुस्तक आ सहायक पुस्तकसभ लिखबाक काजमे निरन्तर सक्रिय छथि। केदारनाथ चौधरी 1936- जन्म 3 जनवरी 1936 ई नेहरा, जिला दरभंगामे। 1958 ई.मे अर्थशास्त्रमे स्नातकोत्तर, 1959 ई.मे लॉ। 1969 ई.मे कैलिफोर्निया वि.वि.सँ अर्थस्थास्त्र मे स्नातकोत्तर, 1971 ई.मे सानफ्रांसिस्को वि.वि.सँ एम.बी.ए., 1978मे भारत आगमन। 1981-86क बीच तेहरान आ प्रैंकफुर्तमे। फेर बम्बई, पुणे होइत 2000 सँ लहेरियासरायमे निवास। मैथिली फिल्म ‘ममता गाबय गीत’क मदनमोहन दास आ उदयभानु सिंहक संग सह निर्माता। तीन टा उपन्यास 2004 मे चमेली रानी, 2006 मे करार, 2008 मे माहुर। डॉ अमरेश पाठक 1936- हिनक जन्म सीतामढ़ी जिलाक अन्तर्गत सामारि ग्राममे १९३६ मे भेलन्हि । १९५७ मे पटना विश्वविद्यालयसँ मैथिलीक एम. ए. परीक्षामे प्रथम श्रेणीमे प्रथमस्थान पाओल । १९५७ सँ १९६० धरि रामकृष्ण महाविद्यालय, मधुबनीमे व्याख्याता रूपेँ तकरा बाद पटना विश्वविद्यालयमे व्याख्याता रूपमे कार्य करए लगलाह । पटना विश्वविद्यालयमे मैथिली विभागाध्यक्ष रूपेँ । मैथिली उपन्यासक आलोचनात्मक अध्ययन’ शोध प्रबन्धपर हिनका बिहार विश्व-विद्यालय द्वारा डि. लिट्क उपाधि भेटलन्हि । ई शोध प्रबन्ध पुस्तकाकार रूपेँ सेहो प्रकाशित भेल अछि बिहार राष्ट्रभाषा परिषदक विद्यापति ग्रन्थावलीक सम्पादक मण्डलक सदस्य । हिनक अन्य प्रकाशित रचना अछि ’निबन्ध संकलन’ । एकरा छोड़ि विभित्र पत्न-पत्निकामे हिनक कतेको निबन्ध प्रकाशित छन्हि । मैथिली अकादमी द्वारा प्रकाशित कथा-संग्रहक इहो एक सम्पादक छथि । ई अधिकतर उच्च स्तरीय आलोचनात्मक निबन्ध लिखैत छथि । बलराम 1936-2008 जन्म स्थान पचही, मधुबनी, बिहार । विशिष्ट कथाकार । प्रकाशित कृति : दकचल देबाल (कथा-संग्रह)। रामदेव झा 1936- कथाकर, समीक्षक, अनुवादक, ग्रंथ सम्पादक । साहित्य अकादेमीक मूल एवं अनुवाद पुरस्कार प्राप्त कर्त्ता ल. ना. मिथिला विश्वविद्यालय दरभंगाक मैथिली विभागक पूर्व प्राचार्य । प्रकाशन: पसिझैत पाथर, (अनु.) आदि । रवीन्द्र नाथ ठाकुर 1936- जन्म पूर्णिञा जिलाक धमदाहा ग्राममे 1936 ई. मे भेलन्हि । नेने अवस्थासँ गीत गएबामे एवं कविता लिखबामे विशेष रुचि । कोनो मंच पर ठाढ़ भेला पर ई सहजहि श्रीताकेँ आह्लादित करैत छथि । हिनक सात गोट मैथिलीक गीत संग्रह, एक मिनी महाकाव्य, एक प्रयोगधर्मी काव्य, एक उपन्यास, एक नाटक ‘एक राति’ एवं एक हिन्दी नाटक, प्रकाशित भेल छन्हि । कीर्तिनारायण मिश्र 1937- जन्म १७ जुलाई १९३७ ई. केँ ग्राम शोकहारा (बरौनी), जिला बेगूसरायमे भेलन्हि। हुनकर प्रकाशित कृति अछि सीमान्त, हम स्तवन नहि लिखब (कविता संग्रह)। आखर पत्रिकाक लब्धप्रतिष्ठ सम्पादक। कुलानन्द मिश्र 1939- कुलानन्द मिश्र (१९४०-२०००), जन्म पकड़ी कोठी, सीतामढ़ी, बिहार। सुविख्यात कवि,, संपादक, समालोचक। प्रकाशित कृति- तावत एतबे, भोरक प्रतीक्षामे (कविता संग्रह), भारतक भाषा सर्वेक्षण, पारो, राजकमल चौधरी की ग्यारह कहानियाँ (अनुवाद)। बिलट पासवान ‘विहंगम’ 1940- जन्म मधुबनी जिलाक एकहत्था ग्राममे १९४० ई. मे भेलन्हि। प्रभास कुमार चौधरी 1941-1998 गाम- पिंडारुछ, जिला- दरभंगा ।प्रख्यात कथाकार ओ उपन्यासकार । प्रभासक कथा (कथा-संग्रह) लेल साहित्य अकादमी पुरस्कारसँ सम्मानित । प्रकाशित कृति : कथा-प्रभास, प्रभासक कथा, नव घर उठय पुरान घर खसय, दिदवल (कथासंग्रह), अभिशप्त, युगपुरुष, हमरा लग रहब, नवारम्भ, राजा पोखरिमे कतेक मछरी (उपन्यास) । विभिन्न महत्वपूर्ण पत्रिकाक सम्पादन । त्रैमासिक कथा गोष्ठी ‘सगर राति दीप जरय’ केर प्रारम्भ साकेतानन्द 1941- वरिष्ठ कथाकार, गणनायक (कथा-संग्रह) लेल साहित्य अकादेमी पुरस्कारसँ सम्मानित। प्रकाशित कृति: गणनायक (कथासंग्रह), सर्वस्वांत (उपन्यास)। मार्कण्डेय प्रवासी 1942- जन्म ग्राम: गरुआर, जिला: समस्तीपुर । प्रकाशित कृति: अगस्त्यायिनी (महाकाव्य); एतदर्थ (कविता संग्रह), अक्षर चेतना (काव्य संग्रह)। अभियान, हम कालिदास (उपन्यास)। ’अगस्त्यायिनी’ लेल । १९८१मे साहित्य अकादेमी पुरस्कार प्राप्त। मोहन भारद्वाज 1943- गाम- नवानी, जिला- मधुबनी । मैथिलीक प्रखर समालोचक, प्रबोध सम्मान 2008 सँ सम्मानित भीमनाथ झा 1945- जन्म:कोइलख, मधुबनी, बिहार । प्रखर कवि, समालोचक, प्राध्यापक । ’विविधा’पुस्तक लेल सन् १९९२मे सहित्य अकादेमी पुरस्कारसँ सम्मानित । प्रकाशित कृति: त्रिधारा, वीणा, की फुरैए की नहि, नाम तँ थिक ओएह (कविता संकलन), परिचायिका, सीताराम झा, कवि चूड़ामणिक काव्य साधना, विविधा (निबंध, आलोचना) आदि । डॉ रामदयाल राकेश, सर्लाही, नेपाल 1942- मैथिली मातृभाषा, हिन्दीक प्राध्यापक आ नेपालीक लेखक ई तीनू भाषा ’राकेश’क व्यक्तित्वमे एना ने मिझराएल छैक जे कोनहुसँ हिनका भिन्न नहि कएल जा सकैत अछि । ई विशेषत: नेपालीमे लिखैत छथि, मुदा लेखनक विषय मूलत: मैथिलीए संस्कृति रहैत छनि । ओना मैथिली, हिन्दी आ अग्ङरेजीमे सेहो ई अनेक रचना कएने छथि ।नेपालक राजकीय-प्रज्ञा-प्रतिष्ठानक सदस्य ’राकेश’ दिल्ली विश्वविद्यालयसँ पीएचडी आ अमेरिकास्थित इण्डियाना यूनिभर्सिटीसँ पोस्ट डाक्टरल रिसर्च कएने छथि । डा. ’राकेश’क जन्म २५ जुलाइ १९४२ ई. कऽ सर्लाही जिलाक सिसौटियामे भेल छनि । नेपाली, मैथिली, हिन्दी आ अग्ङरेजीमे मौलिक, सम्पादित आ अनूदित कऽ करीब दू दर्जन पोथी प्रकाशित , दर्जनभरि देशक भ्रमण सेहो कएने छथि । उपेन्द्र दोषी 1943-2001 जन्म स्थान रामपुर-कोरिगामा, दरभंगा । कवि-कथाकार, गीत-गजलकार । प्रकाशित कृति: यंत्रणाक क्षणमे (कविता संग्रह)। हिन्दीमे अनेक पोथी प्रकाशित। ओड़ियासँ मैथिली अनुवाद हेतु मृत्युपरान्त साहित्य अकादेमीसँ पुरस्कृत। उदयचन्द्र झा “विनोद” 1943- गाम- रहिका, मधुबनी । जन्म-ग्राम- दुलहा, मधुबनी । प्रकाशित कृति: संक्रान्ति, मौसम अयला पर, एहना स्थितिमे, भरि देह गौरा (कविता-संग्रह), धूरी (सहयोगी कविता संग्रह); जांत (कथा संग्रह) ’माटि पानि’क वरेण्य सम्पादक। मंत्रेश्वर झा 1944- जन्म ६ जनवरी १९४४ ई.ग्राम-लालगंज, जिला-मधुबनीमे। प्रकाशित कृति: खाधि, अन्चिनहार गाम, बहसल रातिक इजोत (कविता संग्रह); एक बटे दू (कथा संग्रह), ओझा लेखे गाम बताह (ललित निबन्ध)। मैथिली कथा संग्रहक हिन्दी अनुवाद “कुंडली” नामसँ प्रकाशित। दि फूल्स पैराडाइज (अंग्रेजीमे ललित निबन्ध), कतेक डारि पर (आत्मकथा)। रत्नेश्वर मिश्र 1945- अनुवादक, निबंधकार । प्रकाशन: तमिल साहित्यक इतिहास,भवभूति (दुनू अनुवाद)। वीरेन्द्र मल्लिक 1945- कवि, सम्पादक, समीक्षक । आखर, अगनिपत्रक सम्पादन शैलेन्द्र आनन्द 1955- जन्म स्थान शिवनगर मधुबनी, दू टा समीक्षा, तीन टा कथा संग्रह, दू टा गीत-गजल संग्रह ओ चारि टा कथा-संग्रह प्रकाशित। पद्म नारायण झा “विरंचि” 1941- जन्म- गाम खोजपुर, जिला-मधुबनीमे । मिथिला मिहिरक प्रशस्त स्तंभकार । 1977 केर जनता आन्दोलनमे अग्रणी भूमिका, पार्टीक मुखपत्र “जनता”क सम्पादक। बादमे लोक दल (ब) मे हेमवतीनन्दन बहुगुणाक राजनीतिक सलाहकार। विजयकान्त मिश्र इतिहासकार 1927-1994 डॉ. विजयकांत मिश्रक जन्म १० अगस्त १९२७ मंगरौनी गाम – जे नव्य न्याय आ तांत्रिक साधनाक जन्म-स्थली अछि- (जिला मधुबनी) मे भेलन्हि। ओ 1948 मे प्राचीन भारतीय इतिहास आ संस्कृति विषयमे एलाहाबाद विश्वविद्यालयसँ सनात्तकोत्तर उपाधि कएलाक बाद कतेक बरख धरि बिहार सरकार आ पटना विश्वद्यालयसँ सम्बद्ध रहलाह आ 1957 ई. सँ भारतीय पुरात्तत्व विभागमे काज कएलन्हि आ ओकर शिशुपालगढ़, कौशाम्बी, वैशाली, हस्तिनापुर, कुम्हरार, पाटलिपुत्र, करियन, सोनपुर, बिलावली, नालन्दा, राजगीर, चन्द्रवल्ली, आ हम्पी खुदाइमे विभिना भूमिकामे भाग लेलन्हि।हिनकर लिखल-सम्पादित पोथी सभमे अछि: 1.वैशाली,1950 2.कुम्हरार एक्सकेवेशंस: 1950-1957 3.पुरातत्व की दृष्टिमे वैशाली 4.नागेश भट्टाज पारिभाषेन्दुशेखर 5.मिथिला आर्ट एण्ड आर्किटेक्चर (सम्पादित) 6.कल्चरल हेरिटेज ऑफ मिथिला 7.श्रृंगार भजनावली- एक अध्ययन 8.क्षेत्र पुरातत्वविज्ञान- 9.पुरातत्व शब्दावली विनोद बिहारी लाल 1953- जन्म स्थान पचही, मधुबनी, बिहार ।चर्चित कथाकार । सयसँ ऊपर कथा प्रकाशित श्याम दरिहरे 1954- जन्म स्थान बरहा, बेनीपट्टी मधुबनी, बिहार । कवि, कथाकार । प्रकाशित कृति : सरिसोमे भूत (कथा संग्रह) अनूदित कृति : कनिप्रिया (धर्मवीर भारती प्रोफेसर महेन्द्र 1947- जन्म: भेलाही, सुपौल, बिहार । प्रसिद्ध कवि, कथाकार, आलोचक । वृत्ति: भू.ना. विश्वविद्यालयक स्नातकोत्तर केन्द्र, सहरसामे मैथिली विभागाध्यक्ष। प्रकाशित कृति साहित्य अकादेमीसँ प्राकाशित मोनोग्राफ शैलेन्द्र मोहन झा । सहयोगी संकलन-संकल्प । ’राजकमल जयन्ती प्रसंगक संपादन बैकुण्ठ झा 1954- श्री बैकुण्ठ झा,पिता-स्वर्गीय रामचन्द्र झा, जन्म-२४ – ०७ – १९५४ (ग्राम-भरवाड़ा, जिला-दरभंगा),शिक्षा-स्नात्कोत्तर (अर्थशास्त्र),पेशा- शिक्षक। मैथिली, हिन्दी तथा अंग्रेजी भाषा मे लगभग २०० गीत कऽ रचना। गोनू झा पर आधारित नाटक ”हास्यशिरोमणि गोनू झा तथा अन्य कहानी कऽ लेखन। अहि के अलावा हिन्दी मे लगभग १५ उपन्यास तथा कहानी के लेखन। विद्यानन्द झा ‘पञ्जीकार’ 1957- जन्म-09.04.1957,पण्डुआ, ततैल, ककरौड़(मधुबनी), रशाढ़य(पूर्णिया), शिवनगर (अररिया) आ’ सम्प्रति पूर्णिया। पिता लब्ध धौत पञ्जीशास्त्र मार्त्तण्ड पञ्जीकार मोदानन्द झा, शिवनगर, अररिया, पूर्णिया|पितामह-स्व. श्री भिखिया झा। पञ्जीशास्त्रक दस वर्ष धरि 1970 ई.सँ 1979 ई. धरि अध्ययन,32 वर्षक वयससँ पञ्जी-प्रबंधक संवर्द्धन आऽ संरक्षणमे संलग्न। कृति- पञ्जी शाखा पुस्तकक लिप्यांतरण आऽ संवर्द्धन। महाप्रकाश 1946- जन्म: बनगांव, सहरसा, बिहार । वरिष्ट कवि ओ कथाकार। प्रकाशित कृति: कविता संभवा, संग समय के (कविता संग्रह)। अयोध्यानाथ चौधरी, धनुषा, नेपाल 1947- मूलत: कविक रूपमे परिचित छथि । नेपालक आधुनिक कविताक क्षेत्रमे हिनक नाम उल्लेखनीय अछि । श्री चौधरीक लेखनमे मानवीय संवेदनाक प्रतिबिम्ब पाओल जाइत अछि । कविताक संग कथा आ निबन्धमे सेहो ई कलम चलबैत छथि । फड़िछाएल लेखन हिनक विशेषता थिकनि ।धनुषा जिलाक दुहबी गामक रहनिहार श्री चौधरीक जन्म ६अक्टुबर १९४७कऽ भेल छनि । हिनक क्षितिजक ओहिपार नामसँ एक कविता-सग्ङप्रह प्रकाशित छनि सियाराम झा “सरस” 1948- जन्म स्थान मेंहथ, मधुबनी बिहार । प्रसिद्ध गीतकार, बादमे कथा लेखन प्रारम्भ केलनि । प्रकाशित कृति आंजुर भरि सिंगरहार, शोणिताएल उगैत सूर्यक धम्मक (कथा संग्रह)। अग्निपुष्प 1948- जन्म: तरौनी, दरभंगा। मूलनाम : महेन्द्र झा । मैथिलीमे सहस्त्रबाहु कविता संग्रह प्रकाशित । मुक्ति प्रसंगक अनुवाद प्रकाशित । वामपंथी आन्दोलनमे सक्रिय। शिक्षा, सम्वाद आदि पत्रिकाक सम्पादन । वामपंथी विचारधाराक सशक्त कवि। रामलोचन ठाकुर 1949- श्री रामलचन ठाकुर, जन्म १८ मार्च १९४९ ई.पलिमोहन, मधुबनीमे। वरिष्ठ कवि, रंगकर्मी, सम्पादक, समीक्षक। भाषाई आन्दोलनमे सक्रिय भागीदारी। प्रकाशित कृति- इतिहासहन्ता, माटिपानिक गीत, देशक नाम छल सोन चिड़ैया, अपूर्वा (कविता संग्रह), बेताल कथा (व्यंग्य), मैथिली लोक कथा (लोककथा), प्रतिध्वनि (अनुदित कविता), जा सकै छी, किन्तु किए जाउ(अनुदित कविता), लाख प्रश्न अनुत्तरित (कविता), जादूगर (अनुवाद), स्मृतिक धोखरल रंग (संस्मरणात्मक निबन्ध), आंखि मुनने: आंखि खोलने (निबन्ध)। राजेन्द्र विमल, जनकपुर, नेपाल 1949- राजेन्द्र विमल (1949- )। मैथिली, नेपाली आ हिन्दी भाषाक प्राज्ञ विमल शिक्षाक हकमे विद्यावारिधि (पी.एच.डी.)क उपाधि प्राप्त कएने छथि।कम्मो लिखिकऽ यथेष्ट यश अरजनिहार डा. विमलक लेखनीक प्रशंसा मैथिलीक सङ्गसङ्ग नेपाली आ हिन्दी साहित्यमे सेहो होइत रहलनि अछि। त्रिभुवन विश्वविद्यालयअन्तर्गत रा.रा.ब. कैम्पस, जनकपुरधाममे प्राध्यापन कएनिहार डा. विमलक पूर्ण नाम राजेन्द्र लाभ छियनि। हिनक जन्म २६ जुलाई १९४९ ई. कऽ भेल अछि। साहित्यकारक नव पीढ़ीकेँ निरन्तर उत्प्रेरित करबाक कारणे ई डा.धीरेन्द्रक बाद जनकपुर-परिसरक साहित्यिक गुरुक रूपमे स्थापित भऽ गेल छथि। हरेकृष्ण झा 1950- जन्म १० जुलाई १९५० ई. गाम- कोइलखमे। अभियंत्रणक अध्ययण छोड़ि मार्क्सवादी राजनीतिमे सक्रिय। अनेक कविता आ आलोचनात्मक निबन्ध प्रकाशित। अनुवाद एवं विकास विषयक शोध कार्यमे रुचि। स्वतंत्र लेखन। प्रकृति एवं जीवनक तादात्म्य बोधक अग्रणी कवि। “एना त’ नहि जे” (कविता संग्रह)। शिवेन्द्रलाल कर्ण, धनुषा, नेपाल 1951- लेखकसँ अधिक शिक्षकक रूपमे परिचित आ प्रतिष्ठित छथि । त्रिभुवन विश्वविद्यालयअन्तर्गतरा. रा. ब. कैम्पस, जनकपुर-धामक सह-प्राध्यापक श्री कर्णक ऐतिहासिक विषय-वस्तुपर लिखल कतोक लेख मैथिली, हिन्दी आ अग्ङरेजी भाषामे प्रकाशित अछि । स्वान्त-सुखाय ई कहियो कालकऽ कविता-कथा सेहो लिखि लैत छथि । हिनक लेखन ज्ञानवर्द्धक, जानकारीमूलक एवं सोझारएल रहैत अछि । देखलापर बुझना जाइत अछि जे ई हिनक गम्भीर अध्ययनक परिणति थिक ।सामाजिक तथा साहित्यिक सङ्घ-संस्थासभमे सेहो सक्रिय प्राध्यापक कर्णक जन्म धनुषा जिलाक देवडीहा गाममे २ जनवरी १९५१ ई. कऽ भेल छनि । शैलेन्द्र कुमार झा 1952- जन्म स्थान हरिपुर, वकशी टोल, मधुबनी बिहार। प्रकाशित कृति: आरोह अवरोह, दशम खुट्टी (कथा संग्रह), इकोनोमिक हिस्ट्री ऑफ मिथिला (अंग्रेजी) । शिवशंकर श्रीनिवास 1953- जन्म स्थान लोहना मधुबनी, बिहार । चर्चित कथाकार ओ आलोचक । गीत ओ कविता सेहो कहियो काल लिखैत छथि । प्रकाशित कृति : त्रिकोण, अदहन, गाछ-पात, गामक लोक (कथा संग्रह)। अशोक 1953- जन्म स्थान लोहना, मधुबनी, बिहार। चर्चित कथाकार, कवि ओ सम्पादक । प्रकाशित कृति : चक्रव्यूह (कविता संग्रह) त्रिकोण (सहयोगी कथा संग्रह), ओहि रातिक भोर (कथा-संग्रह), मातवर (कथा संग्रह)। विभूति आनन्द 1953- जन्म: शिवनगर, मधुबनी, बिहार। चर्चित कवि, कथाकार, संपादक । प्रकाशित कृति टूटा उपन्यास टूटा समीक्षा, तीन टा कथ संग्रह, टूटा गीत-गजल संग्रह ओ चारिटा कथा-संग्रह प्रकाशित। डॉ. शशिनाथ झा 1954- गाम-दीप, जिला- मधुबनी। मैथिली, बांग्ला, नेवारी आ देवनागरी पांडुलिपिक विशेषज्ञ। लल्लन प्रसाद ठाकुर 1951-1995 जन्म ५ फरबरी १९५१ मुंगेर मे श्रीमती सुभद्रा देवी आ श्री हीरानंद ठाकुरक द्वितीय बालक । हिनक ग्राम- समौल,जिला-मधुबनी। सिविल इंजीनियर, टाटा स्टीलमे चाकरी। प्रकाश झाक फ़िल्म “कथा माधोपुर की” मे मुख्य भुमिका। नाटककार आ मंच अभिनेता। हुनक लिखल किछु प्रसिद्ध मैथिली नाटक छन्हि :बडका साहेब,मिस्टर निलो काका, लोंगिया मिरचाई,बकलेल आदि वा अंत। सुकांत सोम 1950- जन्म दरभंगा जिलाक तरौनी गाममे 1950 ई. मे भेलन्हि । बी. ए. पास कए ई पटनाक दैनिक ‘जनशक्ति’क सहायक सम्पादक छलाह । फेर नव भारत टाइम्स, पटनामे।बाल्यवस्थासँ अपन पैतृक (पिता यात्नीजी) गुण कविता करबाक तथा कथा लिखबामे सेहो यश अर्जन कएलन्हि अछि । वर्त्तमान राजनीति सामाजिक विषयसँ सम्बद्ध व्यंग्यात्मक, सरल भाषामे लिखल नव कविता हिनक विशेषता छन्हि । गामघरक परिवेश तदनुकूल शब्द एवं बिम्ब रचनामे क्रमहि सिद्ध छथि । पशुपतिनाथ झा, महोत्तरी, नेपाल 1954- हिनक लेखन विवरणात्मक होइत अछि आ सम्बद्ध विषयमे नीकजकॉ जानकारी दैत अछि । विभिन्न पत्र-पत्रिकामे हिनक लेख-रचना बरोबरि देखबामे अबैत रहैछ ।रा.रा.ब. कैम्पस, जनकपुरधाममे मैथिली विषयक प्राध्यापनमे संलग्न श्री झा मैथिलीसम्बन्धी सग्ङठनात्मक गतिविधिसँ सेहो जुड़ल छथि । मैथिली भाषाक लोपोन्मुख अवस्थामे रहल अपन लिपि तिरहुतामे विशेषज्ञता रखनिहार श्री झा एकर संरक्षण-सम्बर्द्धनक दिशामे सेहो क्रियाशील छथि ।प्रध्यापक झा मैथिली महाकाव्यमे रस निरूपण विषयपर विद्यावारिधि कएने छथि आ शिक्षा तथा कानून विषयमे सेहो स्नातक छथि । महोत्तरी जिलाक एकरहिया रहनिहार श्री झाक जन्म ४ दिसम्बर १९५४ कऽ भेलछनि । वृखेश चन्द्र लाल, नेपाल 1955- जन्म 29 मार्च 1955 ई. केँ भेलन्हि। पिताः स्व. उदितनारायण लाल,माताः श्रीमती भुवनेश्वरी देव। हिनकर छठिहारक नाम विश्वेश्वर छन्हि। मूलतः राजनीतिककर्मी । नेपालमे लोकतन्त्रलेल निरन्तर संघर्षक क्रममे १७ बेर गिरफ्तार । लगभग ८ वर्ष जेल ।सम्प्रति तराई–मधेश लोकतान्त्रिक पार्टीक राष्ट«ीय उपाध्यक्ष । मैथिलीमे किछु कथा विभिन्न पत्रपत्रिकामे प्रकाशित । आन्दोलन कविता संग्रह आ बी.पीं कोइरालाक प्रसिद्ध लघु उपन्यास मोदिआइनक मैथिली रुपान्तरण तथा नेपालीमे संघीय शासनतिर नामक पुस्तक प्रकाशित । ओ विश्वेश्वर प्रसाद कोइरालाक प्रतिबद्ध राजनीति अनुयायी आ नेपालक प्रजातांत्रिक आन्दोलनक सक्रिय योद्धा छथि। नेपाली राजनीतिपर बरोबरि लिखैत रहैत छथि। नारायणजी 1956- जन्म: घोघरडीहा (मधुबनी)। मैथिली भाषा-साहित्यमे एम. ए., पी-एच. डी. कामेश्वर लता संस्कृत विद्यालय, घोघरडीहामे अध्यापन । प्रकाशित कृति: ’घरि घुरि रहल छी’ (काव्य-संग्रह)। केदार कानन 1959- जन्म स्थान सुपौल, बिहार। चर्चित कवि, कथाकार ओ संपादक। प्रकाशित कृति : आकार लैत शब्द (कविता संग्रह), अनूदित कृति राजा राम मोहन राय, प्रायश्चित। सम्पादन संकल्प, भारती मंडन (पत्रिका)। मानेश्वर मनुज 1958- जन्म गम्हरिया (मानपौर, मधुबनी)मे, 1978सँ 1992 धरि नौसेनामे विभिन्न जहाजपर कार्यरत, फेर यात्री रेलमे। सम्बन्ध (कथा संग्रह) प्रकाशित। महेन्द्र नारायण राम 1958- सम्पादन-“नव ज्योति” पत्रिका, “लोकशक्ति” सामाजिक मुख-पत्रक। लोकवृत्त ताहूमे लोकगाथाक अध्येता। तारानन्द वियोगी 1966- महिषी, सहरसामे जन्म।पहिल पोथी अपन युद्धक साक्ष्य (गजल संग्रह) १९९१ मे प्रकाशित। अन्य पुस्तक हस्तक्षेप (कविता-संग्रह), अतिक्रमण (कथा-संग्रह), शिलालेख(लघुकथा संग्रह), कर्मधारय।राजकमल चौधरीक कथाकृति एकटा चंपाकली एकटा विषधर संकलन-सपादन। भालचन्द्र झा मैथिलीक अतिरिक्त हिन्दी, मराठी, अग्रेजी आऽ गुजरातीमे निष्णात। १९७४ ई.सँ मराठी आऽ हिन्दी थिएटरमे निदेशक।बीछल बेरायल मराठी एकांकीक मैथिली अनुवाद। रमेश 1961- जन्म स्थान मेंहथ, मधुबनी, बिहार। चर्चित कथाकार ओ कवि । प्रकाशित कृति: समांग, समानांतर (कथा संग्रह), नागफेनी (गजल संग्रह), संगोर, समवेत स्वरक आगू, कोसी धारक सभ्यता, पाथर पर दूभि (काव्य संग्रह), प्रतिक्रिया (आलोचनात्मक निबंध)। प्रदीप बिहारी 1963- जन्म स्थान कन्हौली मल्लिक टोल, खजौली, मधुबनी, बिहार। चर्चित कथाकार, उपन्यासकार ओ रंगकर्मी । प्रकाशित कृति: गुमकी ओ बिहाड़ि, विसूवियस (उपन्यास), औतीह कमला जयतीह कमला, खण्ड-खण्ड जिनगी, सरोकार (कथा संग्रह)। फूलचन्द्र झा “प्रवीण” 1961- गाम तुमौल दरभंगा, आयल नवल प्रभात, पांगल गाछक छाहरि, हमरा मोनक खजन चिड़ैया, बसंतक बजनिञा (कविता संग्रह), भूत होइत भविष्य़ (कथा संग्रह)। विद्यानन्द झा 1965- बुद्धपूर्णिमा, १९६५कें कैथिनियाँ, झंझारपुर मुधुबनीमे जन्म। पराती जकाँ (कविता संग्रह) प्रकाशित । मूलतः कवि, थोड़ कथा लिखलनि, जे अपन मार्मिक अभिव्यक्तिक कारण बेस चर्चित भेल । विडम्बनापूर्ण परिस्थितिक पाछू जिम्मेवार समाजार्थिक कारणक खोज हिनकर मूल सृजन प्रेरणा थिक रमेश रंजन, परवाहा, नेपाल 1966- परवाहा, नेपालमे जन्म । नेपालीय कथा-जगतक नवीन मुदा सम्मानित नाम । जनपक्षधर कथा-दृष्टि आ मोहक शिल्प । थोड़ लिखलनि, मुदा बेर-बेर चर्चित रहलाह । धीरेन्द्र प्रेमर्षि, सिरहा, नेपाल 1967- वि.सं.२०२४ साल भादब १८ गते सिरहा जिलाक गोविन्दपुर-१, बस्तीपुर गाममे जन्म लेनिहार प्रेमर्षिक पूर्ण नाम धीरेन्द्र झा छियनि।कान्तिपुरसँ हेल्लो मिथिला कार्यक्रम प्रस्तुत कर्ता जोड़ी रूपा-धीरेन्द्रक धीरेन्द्रक अबाज गामक बच्चा-बच्चा चिन्हैत अछि। “पल्लव” मैथिली साहित्यिक पत्रिका आ “समाज” मैथिली सामाजिक पत्रिकाक सम्पादन। श्याम सुन्दर शशि, नेपाल श्याम सुन्दर शशि, जनकपुरधाम, नेपाल। पेशा-पत्रकारिता। शिक्षा: त्रिभुवन विश्वविद्यालयसँ,एम.ए. मैथिली, प्रथम श्रेणीमे प्रथम स्थान। मैथिलीक प्रायः सभ विधामे रचनारत। बहुत रास रचना विभिन्न पत्र-पत्रिकामे प्रकाशित। हिन्दी, नेपाली आऽ अंग्रेजी भाषामे सेहो रचनारत आऽ बहुतरास रचना प्रकाशित। सम्प्रति- कान्तिपुर प्रवासक अरब ब्यूरोमे कार्यरत। हिमांशु चौधरी, नेपाल पिता : स्वर्गीय कामेश्र्वर चौधरी,माताः श्रीमती चन्द्रावती चौधरी,जन्मः वि स २०२०/६/५ लहान, सिरहा,शिक्षाः स्नातकोत्तर(नेपाली),पेशाः पत्रकारिता (सम्प्रति : राष्ट्रिय समाचार समिति ),कृति : की भार सांठू ? (मैथिली कविता संग्रह ),विगत दू दशकसं नेपाली आ मैथिली लेखन तथा अभियानमे निरन्तर क्रियाशील आ विभिन्न संघ संस्थासं आबद्ध । कृष्ण मोहन झा 1968- जन्म मधेपुरा जिलाक जीतपुर गाममे। “विजयदेव नारायण साही की काव्यानुभूति की बनावट” विषयपर जे.एन.यू. सँ एम.फिल आ ओतहिसँ “निर्मल वर्मा के कथा साहित्य में प्रेम की परिकल्पना” विषयपर पी.एच.डी.। हिन्दीमे एकटा कविता सँग्रह “समय को चीरकर” आ मैथिलीमे “एकटा हेरायल दुनिया” प्रकाशित। हिन्दी कविता लेल “कन्हैया स्मृति सम्मान”(1998) आ “हेमंत स्मृति कविता पुरस्कार”(2003)। असम विश्वविद्यालय, सिल्चरक हिन्दी विभागमे अध्यापन। सुनील कुमार मल्लिक, गायक, जनकपुर, नेपाल 1968- मैथिलीक गायक-सग्ङीतकारक रूपमे प्रसिद्ध छथि । मैथिली भाषाक गीतसभमे मौलिक तथा सार्थक सग्ङीतक सृजनमे हिनक सक्रियता प्रशंसनीय छनि । सुनीलक गायन तथा सग्ङीतमे कैसेट एलबमसभ सेहो बाहर भेल अछि ।लेखनदिस हिनक सक्रियता परिमाणात्मक रूपमे कम रहितहुँ गुणात्मक दृष्टिएँ हृदयस्पर्शी मानल जाइत अछि ।पेशासँ विज्ञान-शिक्षक छथि । नीरज कर्ण, धनुषा, नेपाल 1970- समाजशास्त्रक छात्र आ गणित तथा विज्ञानक शिक्षक छथि, मुदा मैथिली साहित्य आ संगठनक क्षेत्रमे सेहो निरन्तर सक्रिय छथि । भाषा, व्याकरण आदिक मेंही पक्षसभपर सेहो ई पूर्ण अधिकार रखैत छथि । जन्म धनुषा जिलाक कुर्था गाममे भेल छनि । विभिन्न पत्रपत्रिकामे हिनक कथा, कविता, लेख-रचनासभ मैथिली, नेपाली आ अग्ङरेजी भाषामे प्रकाशित होइत रहैत छनि । अनुवादक क्षेत्रमे सेहो हिनक नीक अधिकार छनि । राजेश्वर झा (१९२३-१९७७) जन्म- सहरसा जिलाक रसुआर गाम (आब सुपौल जिला)। कृति- मिथिलाक्षरक उद्भव ओ विकास, अवहट्ठ: उद्भव ओ विकास, मैथिली साहित्यक आदिकाल, विद्यापतिक संगीतमे वर्णित नायक-नायिका भेद एवं राग-रागिनी वर्गीकरण। महाकवि विद्यापति नाटक, शास्त्रार्थ नाटक, कन्दर्पीघाट नाटक, एकादशी, विद्याधर-कथा, उर्वशी, धर्मव्याध- कथा, मेनका। रबीन्द्र नारायण मिश्र, पिताक नाम : स्वर्गीय सूर्य नारायण मिश्र, माताक नाम : स्वर्गीया दयाकाशी देवी, बएस : ६६ बर्ख, पैतृक ग्राम : अड़ेर डीह, मातृक : सिन्घिआ ड्योढ़ी, वृति : भारत सरकारक उप सचिव (सेवा निवृत्त)/ स्पेशल मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट, दिल्ली(सेवा निवृत्त), शिक्षा : चन्द्रधारी मिथिला महाविद्यालयसँ बी.एस-सी. भौतिक विज्ञानमे प्रतिष्ठा : दिल्ली विश्वविद्यालयसँ विधि स्नातक प्रकाशित कृति : मैथिलीमे:- १. ‘भोरसँ साँझ धरि’ (आत्म कथा), २. ‘प्रसंगवश’ (निवंध), ३. ‘स्वर्ग एतहि अछि’ (यात्रा प्रसंग), ४. ‘फसाद’ (कथा संग्रह) ५. `नमस्तस्यै’ (उपन्यास) ६. विविध प्रसंग (निवंध ) ७.महराज(उपन्यास) ८.लजकोटर(उपन्यास) ९.सीमाक ओहि पार(उपन्यास)१०.समाधान(निवंध संग्रह) ११.मातृभूमि(उपन्यास)१२.स्वप्नलोक(उपन्यास)१३.शंखनाद(उपन्यास) १४.इएह थिक जीवन(संस्मरण) In English:- 1.The Lost House (Collection of short stories), 2.Life is an art हिन्दी में – १.न्याय की गुहार(उपन्यास) मिथिला चित्रकला मिथिला कला-चित्रकला पृथ्वी पूजा गौरी पूजा अरिपन पिठारसँ त्रिभुज बनाऊ। त्रिभुज पृथवीक प्रतीक अछि।त्रिभुजक ऊपर दूटा आर त्रिभुज बनाऊ।ओकर चारूकात बिन्दू जे हिमकणक समान होय,बनाऊ।मध्यमे अनेक त्रिकोणसँ आऽतीन टा रक्त बिन्दु युक्त गौरी यंत्र बनाऊ। कोनो बर्खक माघ मासक मकरसंक्रांतिसँ अगिलामाघ मासक मकरसंक्रांति धरि विवाहक बाद स्त्रीगण गौरीपूजन करैत छथि। सीताजीक गौरी पूजनक चर्च बाल्मीकि रामायणमे छैक।नीचाँ हमर माँक बनाओल ई चित्र अछि। मौहक केर अरिपन महुअक मिथिलामे विवाहक बादक विधि छैक जे वर- वधूमे स्नेहक सृजन करबाक हेतु अछि। वर वधूकेँ दू आसन पर बैसा खीर आ’ दही-चूड़ाक परसल जाइत अछि। दुनू गोटे एकरा सानि आ’ कौर बना कय एक दोसर पर फेकैत छथि। पहिने फेंकय बला विजयी होइत अछि। तीन दिन कोहबर घरमे आ’ चतुर्थी दिन कुलदेवताक घरमे ई विधि संपादित होइत अछि। नीचाँ देल अरिपन दुनू थारीक नीचाँ बनाओल जाइत अछि। चित्र निर्माण- छोट-पैघ चारि वृत्ताकार रेखा, सभसँ ऊपरका गोलाप चारू कात बिन्दु। दुनूकेँ कमल-नालसँ जोड़ल जाइत अछि। चारू आश्रमक शिक्षा वर वधूकेँ प्रेम सूत्रसँ बान्हिकेँ संतान सृष्टिक ज्ञान करा कय एहि अरिपन द्वारा कएल जाइत अछि। कुमरम मने विवाह आ’ उपनयनसँ एक दिन पहिने क्रमशः कनियाँ आ’ बरुआकेँ आङ उङारल जाइत अछि मने श्रेष्ठ स्त्रीगण यव आ’ आन पदार्थसँ बनल उबटन लगबैथ छथि। एतय मंडप पर सबरंग पटिया पर षट पाइस अरिपनक समक्ष मंडप पर ई कार्य संपादित होइत अछि। ई एकटा रक्षा कवच थिक। विधि- तीनटा आयत बनाऊ एकक नीचाँ एक। पाँच खंड उर्ध्वाधर आ’ तीन क्षैतिज खंड करू। एहि 18 खंडमे फूल बनाऊ। श्रावन कृष्ण पंचमी (नाग पंचमीसँ) प्रारम्भ भ’ कय श्रावन शुक्ल तृतीया पर्यन्त नीचाँक अरिपन पर विभिन्न नागक पूजा कएल जाइत अछि, आ’ वृद्धा लोकनि एहि अवसर पर कथा सेहो कहैत छथि। नव वर-वधूकेँ संग बैसा कय पूजाक समापन होइत अछि। इइ अरिपन दूटा मेना-पात आ’ पूजा करयबालीक दुनू दिशि भूमि पर बनाओल जाइत अछि। वाम पात पर 101 सर्पिणी सिनूर आ’ काजरसँ आ’ दहिन कातक पात पर 101 सर्पिणी पिठारसँ बनाओल जाइत अछि। वाम कातक सर्पक मुखिया कुसुमावती आ’ दहिन कातक वौरस नागक पूजा होइत अछि। मेना पातमे सर्प वशीकरण शक्त्ति होइत अछि। संगमे सूर्य चन्द्र गौर, साठि आ’ नवग्रहक चित्र सेहो लिखल जाइत अछि। मधुश्रावणी अरिपन गतांकमे एकर चर्चा छल जे मधुश्रावनीमे संगमे सूर्य चन्द्र गौर, साठि आ’ नवग्रहक चित्र सेहो लिखल जाइत अछि। एकर चित्र एहि अंकमे प्रस्तुत अछि। दशपात अरिपन कन्याक मुण्डन,कान छेदन आ’ विवाहक अवसर पर कुलदेवताक घर आकि मण्डप पर बनाओल जाइत अछि। बनेबाक- विधि। एकर बनेबाक विधि सूक्ष्म अछि। ऊपरमे तीन पातक पुष्प, ,ओकरनीँचा पाँच-पातक कमल-पुष्प,ओकर नीचाँ सात-पात युक्त्त कमल, बीचमे अष्टदल कमल अछि। दश पात चारू दिशि अछि। नौ टा माँछक चित्र सेहो अछि। दशपात अरिपन पछिला अंकमे स्त्रीगणक दशिपात अरिपन देल गेल छल। एहि बेर पुरुषक दशिपात अरिपन देल गेल अछि। एकर नाम दसकर्मक बोध करएबाक कारण दशपात अछि, आ’ ई पुरुषक सभ संस्कारक अवसर पर लिखल जाइत अछि। ऊपरी भागमे दू टा मयूर,कमलक फूल,शुभ मत्स्य,भीतरमे 12 टा माँछक चित्र आ’ दसटा डाढ़िक चित्र देल गेल अछि,आ’, बीचमे अष्टदल कमल। एहिमे ४१ टा स्वास्तिक जोड़ल गेल अछि। स्वस्ति भेल आशीर्वाद। ई कार्त्तिक मासक तुलसी-पूजा,शारदीय दुर्गापूजामे तुलसी-चौड़ा/ दुर्गा-मन्दिरमे अष्टमी दिन पिठारसँ बनाओल जाइत अछि। ई वैदिक यज्ञक ’सर्वतोभद्र’ छथि आऽ यज्ञक चौड़ा पर सेहो लिख्ल जाइत छथि। बनेबाक विधि- ४१ टा स्वास्तिक आऽ ओकर बीचमे ४१ टा सिन्दूरक ठोप। नीचाँमे पाँचटा शंख, चारू कात आठ अस्त्रक अंकन, अर्ध्वमुख-अधोमुख त्रिकोण, षट्कोण, अष्टकोण, श्रीयंत्र बनाओल जाइत अछि। कोजगराक अरिपन कोजगरा मिथिलामे आश्विन पूर्णिमाक रातिमे मनाओल जाइत अछि।संध्यामे लक्ष्मीक पूजा कए मखानक भोग लगैत अछि। रत्रि जगरण कए चन्द्रमाक देखबाक आनन्द लेल जाइत अछि। नीचाँक लंब अरिपन पार कए देवता घरमे प्रवेश करैत छथि।कमलक फूल आऽ पद चिन्ह एहि निमित्त देल गेल अछि। षडदल अरिपन मिथिलामे भगवती पूजाक अवसर पर ई अरिपन पाड़ल जाइत अछि।एतय देवी भागवत पुरानक षटकोण यंत्र पारल गेल अछि। छः टा कमल दल एहिमे अछि। आदिशक्त्ति भुवनेश्वरीक पद चिन्ह आऽ पञ्चोपचार पूजाक सामग्रीसँ युक्त्त ई अरिपन अछि। नीचाँक चित्र अँगनाक पश्चिममे बनल कुल-देवताक घर जे ’गोसाउनि घर’ कहबैत अछि, ओतए बनाओल जाइत अछि। पश्चिम देबाल पर कारी छोड़ि दोसर रंगसँ ई चित्र बनाओल जाइत अछि। एकरे सरोवर कहल जाइत छैक। देवोत्थान एकादशी कार्तिक शुक्ल एकादशीकेँ मनाओल जाइत अछि, एहि दिन क्षीरसागरमे भगवान निन्नसँ जागल छलाह। गोसाउन घरमे आऽ तुलसी लगमे अरिपन होइत अछि। अरिपन पिठारसँ होइत छैक, सिन्दूर सेहो लगाओल जाइत छैक। तुलसी लगमे मखान, नारिकेर, मिश्रीक प्रसाद चढ़ैत अछि। भादव मासक एकादशीक दिन भगवान शंखासुर राक्षसकेँ मारि कए गाढ़ निन्नमे सूति गेलाह, आऽ कार्तिक शुक्ल एकादशीकेँ उठलाह, देवोत्थान ईएह अर्थ अछि।तुलसी तरक देवोत्थान अरिपन नीचाँक रीतिए बनाओल जाइत अछि। चित्रकार- तूलिका, ग्राम-रुद्रपुर, भाया-आन्ध्रा-ठाढ़ी, जिला-मधुबनी। एक बेर कुबेर कोनहुना लक्ष्मीकेँ पत्नीक रूपमे प्राप्त कए लेलन्हि आऽ हुनका लेल समुद्रमे एकटा’कोवर’ घर बनेने रहथि। कोबर चित्रमे पुरैनक पात, पुष्पित बांस, मत्स्य,सांप, काछु, नवग्रह, शंख आदिक प्रयोग होइत अछि। धारावाहिक रूपें विभिन्न प्रकारक कोबरक चित्र देल जायत। एहि अंकमे कोबर (पुरैन) देल जाऽ रहल अछि। एक बेर कुबेर कोनहुना लक्ष्मीकेँ पत्नीक रूपमे प्राप्त कए लेलन्हि आऽ हुनका लेल समुद्रमे एकटा’कोवर’ घर बनेने रहथि। कोबर चित्रमे पुरैनक पात, पुष्पित बांस, मत्स्य,सांप, काछु, नवग्रह, शंख आदिक प्रयोग होइत अछि। धारावाहिक रूपें विभिन्न प्रकारक कोबरक चित्र देल जायत। एहि अंकमे कोबर (पुरैन) देल जाऽ रहल अछि। मिथिला पाबनि-तिहार (कथा) पाबनिक कथा मधुश्रावणी- श्रावण मास कृष्ण-पक्षक पञ्चमीसँ शुक्लपक्ष तृतिया धरि नाग आऽ गौरीशंकरक अभ्यर्थना कएल जाइत अछि। मौना पञ्चमी-श्रावन मास कृष्णपक्ष पञ्चमीकेँ साँपक माए बिसहराक बर्थडे मनाओल जाइत अछि। नवविवाहिताक प्रथम वर्षक मधुश्रावणीक ई प्रथम दिन थिक । धुरखुरपर गोबरक नाग-नागिनपर सिन्दूर-पिठार लगाओल जाइत अछि आऽ पञ्चमीक माटिक थुम्हा घरमे साँप कटला उत्तर झाड़ा-फूकी लए राखि देल जाइत अछि। गोसाउनिकेँ खीर-घोरजाउड़क पातरि आऽ बिसहराकेँ नेबो,झौआ,नीमक पातरि देल जाइत अछि। गोसाउनिक, गौरीक आऽ बिसहराक गीत होइत अछि, पूजा-पाठक बाद पाँच बीनी (फकड़ा-कवित्त) तीन-तीन बेर सुनलाक बाद कथा सुनल जाइत अछि, ई सभदिन कथाक बाद दोहराओल सेहो जाइत अछि। प्रथम दिनक कथा- एकटा बूढ़ीकेँ धारमे नहाए काल पुरैनी पात पर पाँचटा जीव देखाइ पड़ैत छन्हि आऽ ओऽ हुनका मौना-पञ्चमीक मोन पाड़ि गाममे लोकसभकेँ पूजा करबाक लेल कहैत छन्हि। किछु गोटे गप मानैत छथि, मुदा किछु गोटे ओकरा फूसि-फटक मानैत छथि। जे सभ पूजा नञि कएलन्हि से रातियेमे मरि गेलाह। सभ दौड़ि कए पाँचो बहिन बिसहरा लग जाइ गेलाह, आऽ हुनका कहलासँ बचल खीर-घोड़जाउड़ मृतकेँ चटा देलन्हि, ओऽ सभ जीबि गेलाह आऽ मरड़ए नाम पड़लन्हि। पाँचो बिसहरा महादेव सन्तान छलीह। साँपक पोआकेँ देखि एकदिन तमसा कए गौरी हिनकासभकेँ थकुचि देलखिन्ह। साँझमे साँझक आऽ कोबरक गीत होइत अछि। दोसर दिनक-कथा मनसा महादेवक पुत्री छलीह जे जनमितहि युवती भए गेलीह आऽ लाजक रक्षाक हेतु साँप हुनका देहमे लपटाए गेल। गौरी तमसा गेलीह से हुनका कैलास छोड़ि जाए पड़लन्हि आऽ मृत्युलोकमे सभसँ पैघ व्यापारी चन्नू-चन्द्रधर हुनकर पूजा करन्हि से ओऽ इच्छा कएलन्हि, मुदा ओऽ छल महादेवक भक्त से ओऽ वाम हाथे पूजा करबाक गप कहलन्हि। ओकर छओ बेटाकेँ साँप डसि लेलक, मरि जाइ गेल। बुढारीमे चन्नूकेँ बेटा भेलन्हि मुदा ज्योतिषि कहलकन्हि जे हुनका विवाहक दिन कोबरघरमे साँप डसि लेतन्हि। ओहि बच्चाक नाम लक्ष्मीधर-बाला-लखन्दर राखल गेल, छहे-मासमे ओकर विवाह चिर-सोहागनि योगक कान्याँसँ होएब निश्चित भेल। पहाड़पर कोठामे बिज्जी आऽ बिढ़नीक पहराक बीच कान्याँ बिहुलासँ विवाह भेल। मुदा कोहबरमे साँप आयल आऽ हुनका डसि लेलक। बिहुला पतिकसंग केराक थम्हपर गंगाधारमे चलि पड़लीह आऽ प्रयाग पहुँचि गेलीह। ओतए एकटा धोबिनकेँ ओकर बच्चा तंग कए रहल छल, ओऽ ओकरा मारि नुआसँ झाँपि देलन्हि आऽ कपड़ा खीचलाक बाद ओकरा जिआ देलन्हि। दोसर दिन जखन ओऽ अएलीह तखन बिहुला हुनकासँ अपन व्यथा सुनओलन्हि। फेर हुनका संग इन्द्रक दरबार गेलीह आऽ बिसहराक पैर पकड़ि कहलन्हि जे यदि हुनकर पति आऽ छबो भैंसुर जीबि जएताह तखन ओऽ बिसहरा पूजा करबो करतीह आऽ मृत्युलोकमे ओकर प्रचार सेहो करतीह। सभ जीबि गेल आऽ बिसहराक पूजा शुरू भेल। बिसहरा कथा-कश्यप मुनिकेँ कद्रूसँ एक हजार साँप भेल आऽ कशप मुनि विष झारबाक मन्त्र बनओलन्हि, तपस्या कए मनसँ बिसहरा बनओलन्हि से भेलीह मनसा। ओऽ कैलास आऽ पुष्कर गेलीह फेर बूढ़ तपस्वीसँ हुनकर विवाह भेलन्हि, ताहिसँ आस्तीक नामक पुत्र भेलन्हि। राजा जनमेजयक सर्प-यज्ञमे जड़ल सर्पसभके आस्तीक बचा लेलन्हि। आषाढ़क संक्रान्तिसँ नाग-पंचमी धरि बिसहराक पूजा पसीझक डारिपर होइत अछि। मंगला-गौरी कथा- श्रुतकीर्ति राजाकेँ बेटा नहि छलन्हि, भगवतीक उपासना कएल। भगवती कहलन्हि जे सर्वगुणी बेटा १६ वर्ष आयुक होएत आऽ महामूर्ख बेटा दीर्घायु होएत, से केहन वर चाही। राजा सर्वगुणी बेटाक वर मँगलन्हि। मन्दिरक सोझाँक आमक गाछसँ आम तोड़ि ओऽ अपन पत्नीकेँ खुआ देलन्हि आऽ पुत्र जे प्राप्त भेल ओकर नाम चिरायु राखल। १६ वर्ष पूर्ण भेलापर रानीक भाए संगे राजकुमार चिरायु काशी चलि गेलाह। माम भागिन जे काशी लेल बिदा भेलाह तँ रस्तामे आनन्दनगर राज्यमे बीरसेन राजाक पुत्री मंगलागौरीक विवाह होमए बला छल। ओऽ सखी-बहिनपा संग फूल लोढ़ए लेल फुलवारीमे आयल छलीह तँ गपे-गपमे एकटा सखी हुनका राँड़ी कहि देलखिन्ह, तँ ओऽ कहलन्हि जे हम गौरकेँ तेना गोअहरने छी जे जाहि वरक माथपर हमर हाथक अक्षत पड़त से अल्पायु रहबो करत तँ दीर्घायु भए जाएत। ओहि राजकुमारेक विवाह बाह्लीक देशक राजा दृढ़वर्माक बेटा सुकेतुसँ हेबए बला रहए। ओही फुलबारीमे माम-भागिन रहथि, आऽ साँझमे बर-बरियाती सभ सेहो अएलाह। वर महामूर्ख आऽ बहीर छल से ओऽ लोकनि राति भरि लेल चिरायुकेँ वर बनबाक आग्रह कएलन्हि। चिरायु गौरी-शंकरक प्रतिमाक समक्ष सिन्दूर-दान कएलन्हि। कोहबरमे वर कनिआ अएलाह तँ ओही राति चिरायुक १६म वर्ष पुरि गेलन्हि आऽ तखने गहुमन साँप डसबाक लेल आबि गेल। राजकुमारी जगले छलीह आऽ ओऽ गहुमनक सोझाँ दूध राखि देलखिन्ह आऽ पतिकेँ नहि मारबाक आग्रह कएलन्हि। गहुमन दूध पीबि पुरहरमे पैसि गेल, राजकुमारी आँगीसँ पुरहरक मुँह बन्न कए देलन्हि। राजकुमारक निन्द खुजलन्हि तँ ओऽ किछु खाए लेल मँगलन्हि। राजकुमारी हुनका खीर-लड्डू देलन्हि, हाथ धोबाक काल राजकुमारक हाथसँ पञ्चरत्न औँठी खसि पड़लन्हि से राजकुमारी उठा लेलन्हि। वर पान-सुपारी खाए सुतलाह आऽ पुरहरिक साँप रत्नक हार बनि गेल आऽ से राजकुमारी गरामे पहिरि लेलन्हि। भोरमे माम भागिनकेँ लए गेलाह मुदा सुकेतुकेँ राजकुमारी कोबरमे नहि पैसए देलखिन्ह। साल भरिक बाद प्राय विन्ध्याचलसँ जे माम-भागिन घुरि रहल छलाह तँ राजकुमारी कोठापसँ हुनका चीन्हि गेलीह। धूमधामसँ सभ घर कनिआँ लए पहुँचलाह आऽ गौरी आऽ नाग पूजाक महत्व ज्ञात भेल। तेसर दिनक कथा पृथ्वीक जन्म- पापसँ पृथ्वी पाताल चलि गेलीह, तखन ब्रह्मा, विष्णु प्रार्थना कए हुनका ऊपर अनलन्हि, फेर ओऽ डगमगाइत छलीह, तखन विष्णु काछु बनि नीचाँ चलि गेलाह, अपन पीठपर राखि लेलन्हि, तैयो ओऽ जल-पर भँसैत छलीह, तखन आगस्त्यक जाँघ तरसँ माटि आनल गेल, विष्णु सेहो माछ बनि माटि अनलन्हि, तकर जोड़न दए पृथ्वीकेँ स्थिर कएल गेल, जे कमी छल से भगवान वराह बनि उत्तर माथसँ पृथ्वीकेँ ठोकि कए ठीक कए देलन्हि। समुद्र-मन्थन- देवता-दानव सुमेरुपर एकत्र भए समुद्र-मन्थनक हेतु बासुकीनागकेँ मन्दार पर्वतमे लपटाए समुद्रमे उतारल।कूर्मराजकेँ आधार बनाए मूँह दिसनसँ दानव आऽ पुच्छी दिसनसँ देवता नागकेँ पकड़ि मन्दारक मथनीसँ मंथन शुरू कएलन्हि। रगरसँ पर्वतपर गाछ-वृक्षमे आगि लागि गेल। इन्द्र वर्षा कएलन्हि, समुद्रक नूनगर पानि दूध-घी भए गेल, लक्ष्मी, सुरा आऽ उच्चैःश्रवा घोड़ा निकलल से चन्द्रमा-लोकनि लए लेलन्हि। अमृत लेने धन्वन्तरि बहार भेलाह, विष निकलल से महादेव कण्डमे लेलन्हि। गौरी बिसहरा,साँप,बिढ़नी,चुट्टीक मदतिसँ विश महादेवक देहसँ निकाललन्हि। अमृत लेल झगड़ा बझल, विष्णु मोहिनी बनि गेलाह। दैत्य मोहित भए अमृत-कलश हुनकर हाथमे राखि देलन्हि आऽ देवतासँ लड़ए लगलाह। विष्णु सभ देवताकेँ अमृत पिआ देलन्हि। दैत्य राहु भेष बदलि अमृत पीबए चाहलक मुदा चन्द्रमा सूर्य हुनका चीन्हि गेलखिन्ह, अम्र्त मुँसँ कंठ धरि यावत जाइत तावत विष्णु ओकर गर्दने चक्रसँ काटि देलन्हि। मुदा अमृतक जे स्पर्श ओकरा भए गेल छल से ओऽ मरल नहि, मुण्ड भाग राहु आऽ शेष भाग केतु बनि गेल, एखनो कोनो अमावस्यामे सूर्यकेँ तँ कोनो पूर्णिमामे चन्द्रमाकेँ गीड़ैत अछि, मुदा कटल मुण्ड-धरक कारण दुनू गोटे किछु कालक बाद बहार भए जाइत छथि। बचल अमृत विश्वकर्माक रखबाड़िमे इन्द्रकेँ दए देल गेल।बासुकी नागकेँ माइक श्राप नहि लगबाक आऽ जनमेजयक यज्ञमे भागिन आस्तीक द्वारा सपरिवार प्राणरक्षा होएबाक वर भेटलन्हि। चारिम दिनक कथा सतीक कथा- ईश्वरकेँ विश्वक सृष्टि करबाक छलन्हि, से ओऽ पहिने विष्णु, फेर शिव आऽ तखन ब्रह्माक रूपमे अवतार लेलन्हि। ओऽ तखन देवता-ऋषि-मुनि, शतरूपास्त्री, स्वायंभुव मनु, दहिना आँखिसँ अत्रि, कान्हसँ मरीचि, दहिना पाँजरसँ दक्ष-प्रजापतिक रचना कएलन्हि। मरीचीसँकश्यप, अत्रिसँ चन्द्रमा, मनुक प्रियव्रत एवं उत्तानपाद बेटा आऽ आकृति, देवहूति आऽ प्रसूति बेटी भेलन्हि। प्रसूतिक विवाह दक्ष प्रजापतिसँ आऽ ताहिसँ साठि कन्या भेल। साठिमे आठक विवाह धर्म, एगारहक कश्यप, सत्ताइसक चन्द्रमा आऽ एक गोट जिनकर नाम सती छलन्हि हुनकर विवाह महादेवसँ भेलन्हि। चन्द्रमाकेँ जे सताइस टा पत्नी भेलन्हि ताहिमेसँ ओऽ रोहिणीकेँ सभसँ बेशी मानैत छलाह, से २६ टा बहिन अपन पिता दक्षकेँ कहलनि, ओऽ शाप देलकिन्ह आऽ चन्द्रमाक शरीर घटए लगलन्हि। तखन ओऽ महादेव लग गेलाह तँ ओऽ हुनका अपन कपार पर चढ़ा लेलन्हि। एहिसँ दक्ष महादेवकेँ बारि देलखिन्ह। फेर दक्ष एकटा यज्ञ कएलन्हि आऽ शंकरकेँ नोत नहि देलन्हि। सती नैहर जएबाक लेल जिद पकड़ि लेलन्हि तँ वीरभद्रक संग शिव हुनका पठा देलन्हि। सती चलि तँ गेलीह मुदा अपमान देखि यज्ञकुण्डमे कूदि पड़लीह। वीरभद्र ई देखि दक्षक गरदनि काटि लेलन्हि।महादेवकेँ तमसायल देखि कए देवता सभ प्रार्थना कएलन्हि जे बिना जिअओने यज्ञ पूर्ण नहि होएत से यज्ञक काटल छागरक मूरी दक्षक धरपर महादेव लगा देलन्हि, आऽ ओ जीबि कए बो-बो करए लगलाह, से माहादेव ई देखि प्रसन्न भेलाह। तहियेसँ महादेवक पूजाक अन्तमे बू कहल जाए लागल। महादेव सतीक मृत शरीर लए बताह भेल फिरथि से देखि विष्णु चक्रसँ सतीक टुकड़ा कए देलन्हि आऽ जतए-जतए ओऽ टुकड़ा खसल से सभटा सिद्धपीठ भए गेल। महादेव कैलाश छोड़ि जंगलमे तपस्या करए लगलाह। पतिव्रताक कथा- एकटा राजा छालाह। हुनका दूटाबेटी छलन्हि- कुमरव्रता आऽ पतिव्रता। कुमरव्रता नन्दनवनमे कुटीमे रहए लगलीह आऽ पतिव्रता विवाह कए सासुर चलि गेलीह। एक दिन एकटा योगीक माथपर कौआ चटक कए देलकैक तँ ओऽ शाप दए ओकरा भसम कए देलक। नन्दनवनमे आगि लागल रहए। पतिव्रता अपन बहिन कुमरव्रताक कुटी बचेबाक लेल तुलसीक बेढ़ देलन्हि ताहिमे योगीकेँ भीख देबामे देरी भए गेलैक। योगी तमसाएल तँ पतिव्रता देरीक कारण कहलन्हि। योगी बोनमे गेल तँ देखलक जे सौँसे बोनमे आगि लागल अछि मुदा कुमरव्रताक कुटी बचल अछि। ओऽ कुमरव्रताकेँ एकर रहस्य बतेलक तँ ओहो निर्णय लेलन्हि जे हमहुँ विवाह कए पतिव्रता बनब। भोरमे एकटा कुष्ठरोगीकेँ ओऽ देखलन्हि तँ हुनकेसँ विवाह कए लेलन्हि। पति हुनका कहलखिन्ह जे हमरा तीर्थ कराए दिअ। ओऽ हुनका पथियामे लए बिदा भेलीह तँ रस्तामे जखन पथिया उतारि रहल छलीह तँ चोट लागि कए एक गोट सूली पर लटकल ऋषिकेँ चोट लागि गेलैक। ओऽ भोर होइते पतिक मृत्युक शाप हुनका दए देलन्हि। से सुनि बेचारी सूर्यक उपासना करए लगलीह से पति मृत्यु पाबि फेर जीबि उठलखिन्ह आऽ एहि बेर बिना रोग व्याधिक घुरि अएलन्हि। सती,सावित्री, अनुसूया आऽ बिहुला जेकाँ सतीक अनेक उदाहरण अछि। पाँचम दिनक कथा दक्षक पुनर्जन्म भेलन्हि हिमालयक रूपमे, आऽ एहि जन्ममे हुनका उमा, पार्वती, गंगा, गौरी आऽ सन्ध्या ई पाँचटा कन्या भेलन्हि। हिमालय आऽ मनाइनक बेटी उमा महादेवकेँ प्राप्त करबाक लेल तपस्या करए चलि गेलीह, माय उमा कए रोकलन्हि, से नाम उमा पड़ि गेलन्हि ओऽ वरक रूपमे महादेवकेँ प्राप्त कए लेलन्हि। दोसर पुत्री पार्वती एकदिन कनकशिखरपर गेलीह आऽ बसहापर चढ़ि हुनका संग चलि गेलीह। तेसर पुत्री गंगा रहथि। एक दिन महादेव भिक्षुक भेष धए अएलाह आऽ गंगाकेँ जटामे नुकाए चलि गेलाह। छठम दिनक कथा सगर राजाक पत्नी रहथि शैब्या आऽ हुनकासँ असमंजस नामक पुत्र भेलन्हि। दोसर पत्नी वैदर्भीसँ कोनो बच्चा नञि भेलन्हि। वैदर्भी महादेवक तपस्या केलन्हि तँ सए बरखक बाद एकटा लोथ जन्म लेलकन्हि। महादेव अएलाह आऽ लोथकेँ साठि हजार खण्डमे काटि ओतेक तौलामे राखि झाँपि देलनि। ई सभटा किछु दिनमे पुत्रक रूप लए लेलकन्हि। सगर राजाक सएम अश्वमेध यज्ञक इन्द्र व्रोधी भेलाह कारण तखन सगर शतक्रतु इन्द्र भए जएताह। इन्द्र यज्ञक घोड़ाकेँ लए भागि गेलाह आऽ कपिलक आश्रममे बान्हि देलखिन्ह। साठियो हजार पुत्र कपिलपर दौगलाह, ओ तपस्यालीन छलाह आऽ अपन क्रुद्ध आँखि खोलि सभकेँ जरा देलन्हि। वैकुण्डसँ गंगाकेँ अनबाक लेल असमंजस आऽ तकर बाद हुनकर पुत्र दिलीप आऽ तकर बाद तिनकर पुत्र अंशुमान तपस्या करैत-करैत मरि गेलाह। अंशुमानक पुत्र भगीरथक तपस्यासँ विष्णु प्रसन्न भेला आऽ गंगाकेँ मृत्युलोक लऽ जएबाक अनुमति दए देलन्हि। महादेव हिमालयपर जाए स्वर्गसँ उतरैत गंगाकेँ अपन जटामे राखि सम्हारि लेलन्हि, मुदा जे आगू बढ़लीह तँ जहु ऋषिक कुटी दहाए लागल। जहु ऋषि गंगाकेँ पीबि गेलाह। मुदा आग्रह कएलापर ओऽ गंगाकेँ छोड़ि देलन्हि आऽ तहियासँ गंगा हुनकर पुत्री जाह्नवीक रूपमे विख्यात भेलीह। आऽ फेर अन्तमे सगरक पुत्र लोकनि द्वारा, घोड़ाक खोजमे खुनल ओहि खाधिमे खसलीह जे आब सागर कहाबए लागल आऽ एहि तरहेँ सगरक पुत्रसभकेँ सद्गति भेटलन्हि। गौरीक जन्म- सतीक मृत्युक बाद महादेवकेँ विरक्ति भए गेलन्हि। तखन ताड़कासुर ब्रह्माकेँ प्रसन्न कए महादेवक पुत्रक अतिरिक्त ककरो आनसँ नहि मरबाक वर लए लेलक, देवताकेँ स्वर्गसँ भगा देलकन्हि। तखन देवता लोकनि महामाया दुर्गाक आराधना कएलन्हि आऽ ओ हिमालयक घरमे जन्म लेलन्हि। ओऽ बड़ गोर-नार छलीह से हुनकर नाम पड़ल गौरी। नारद एकदिन हिमालयक ओहिठाम अएलाह आऽ गौरीक हाथ देखि कहलखिन्ह जे हिनकर विवाह महादेवसँ होएतन्हि। हिमालय गौरीकेँ दूटा सखीक संग महादेवक सेवामे पठा देलखिन्ह। देवतागण कामदेवकेँ मित्र वसन्त आऽ स्त्री रतिक संग ओतए पठेलन्हि। गौरी जखन पहुँचलीह तखन कामदेव वाण चलेलखिन्ह। महादेव आँखि खोलि गौरीकेँ देखल। गौरी पूजा कएलन्हि। महादेव हुन्का देखि उपमा देलन्हि, मुँह चन्द्रसन, आँखि कमलसन, भोँह कामदेवक धणुषसन, ठोर पाकल तिलकोरसन, नाक सुग्गाक लोलसन, बोली कोइलीसन। मुदा तखने हुनका होश अएलन्हि ओऽ झाँकुरमे कामदेवकेँ देखलन्हि तँ तेसर नेत्र क्रोधित भए खोलि देखल तँ ओऽ जरि गेलाह। रति मूर्छित भए गेलीह। रतिक विलाप देखि देवतागण अएलाह आऽ कहलन्हि जे ताड़कासुरक वध लेल ई सभटा रचल गेल। महादेव कहलन्हि जे रति समुद्रमे शम्बर दैत्य लग जाथि। कृष्णक पुत्र प्रद्युम्नकेँ ओऽ दैत्य उठा कए लए जायत। जखन प्रद्युम्न पैघ होएताह तखन ओऽ शम्बरकेँ मारि रतिकेँ बियाहि द्वारका लए जएताह। वैह प्रद्युम्न कामदेव होएताह। सातम दिनुका कथा गौरी कामदेवक दहन देखि डराए गेलीह। नारद गौरीकेँ तपस्या करए लेल कहलखिन्ह। तपस्याक लेल हिमालय अपन पत्नी मैनासँ पुछलन्हि। गौरी फेर पटोर खोलि देलन्हि आऽ कृष्णाजिन आऽ बल्फर पहिरि सखी संग गौरीशिखर चोटीपर चलि गेलीह। घोर तपस्या देखि ऋषि-मुनि संग नारद महादेव लग पहुँचलाह। महादेव गौरीक परीक्षा लेल भेष बनाए गौरीशिखर पहुँचलाह आऽ महादेवक ढेर-रास निन्दा कएलन्हि। गौरी तमसाए गेलीह तँ ओऽ सोझाँ आबि गेलाह आऽ विवाहक लेल तैयार भए गेलाह। आठम दिनक कथा काशीमे सप्तऋषि , वशिष्ठ आऽ वशिष्ठक स्त्री अरुन्धती अएलीह। महादेव हुनका लोकनिकेँ कथा लए हिमालयक ठाम पठओलन्हि। हिमालय आऽ मैनाक आँखिसँ खुशीसँ नोर झड़ए लगलन्हि। कथा स्थिर भए गेल। नारद देवता लोकनिकेँ हकार देलन्हि। चारिम दिन बरियाती लगल। गन्धर्वराजकेँ देखि मैनाकेँ नारदकेँ पुछलन्हि तँ ओऽ कहलन्हि जे ई तँ देवताक गबैया छी। फेर धर्मराज, इन्द्र सभ अएलाह। नारद सभक परिचए देलन्हि। मैना सोचलन्हि जे ई सभ एतेक सुन्दर अछि तँ महादेव कतेक सुन्दर होएताह। महादेव मैनाक मोनक गप बुझि किछु तमाशा कएलन्हि। महादेव, हुनकर गण, भूत-पिशाचकेँ देखि मैना बेहोश भए गेलीह। नवम दिनक कथा मैनाकेँ जखन होश अएलन्हि तँ ओऽ नारद-गौरी सभकेँ बहुत रास बात कहलन्हि आऽ विवाहसँ मना कए देलन्हि। सभ मनबए अएलन्हि तैयो नहि मानलीह। तखन महादेव अपन भव्यरूप देखेलन्हि, तँ मैना देखिते रहि गेलीह। विवाहक कार्य शुरू भेल। परिछनि, अठोंगर, गोत्राध्यायक बद कन्यादान सम्पन्न भेल आऽ ताड़कासुरकेँ मारबाक बाट सोझाँ प्रतीत भेल। दशम दिनुका कथा महादेव आऽ गौरीक संभोगसँ जे बच्चा होएत ओऽ पृथ्वीक नाश कए देत, ब्रह्माक ई वचन सुनि देवता लोकनि हल्ला मचा देलन्हि आऽ महादेवक अंश पृथ्वीपर खसि पड़ल। गौरी देवताकेँ सरापलन्हि जे आइ दिनसँ हुनका लोकनिकेँ सम्भोगसँ सन्तान नहि होएतन्हि। पृथ्वी अंशकेँ आगिमे आऽ आगि सरपतवनमे भार सहन नहि होएबाक कारण दए देलन्हि। ओतए छह मुँहबला बच्चा भेल, ओकरा कृत्तिकसभ पोसलन्हि तेँ नाम कार्तिकेय पड़ि गेलन्हि। गणेशक जन्मक बाद महादेव हुनका बजा लेलन्हि, देवतालोकनि हुनकर अभिषेक कए अपन सेनाध्यक्ष बना लेलन्हि। ओऽ ताड़कासुरकेँ मारि इन्द्रकेँ राज्य घुरा देलन्हि आऽ साठिसँ विवाह कएलन्हि। गणेशक जन्म- माघसूदि त्रयोदशी सुपुष्य विष्णुव्रत एक मासमे समाप्त कए कैलाशमे गौरी-महादेव रमण करए लगलाह। विष्णु तपस्वीक भेष बनाए अएलाह आऽ भूखसँ प्राण रक्षाक गप कहलन्हि। ओछाओनपर अंश खसि पड़ल आऽ गणेशक जन्म भए गेल। समारोहमे सभ अएलाह, शनिकेँ गौरी देखए लेल कहलन्हि, मुदा हुनका देखलासँ गणेशक गरदनि कटि कए खसि पड़ल। विष्णु एकटा हाथीक गरदनि काटि लगा देलन्हि आऽ अमृत छींटि जिआ देलन्हि। गणेशक विवाह दक्षप्रजापतिक बेटी पुष्टिसँ भेलन्हि। गौरीक नागदन्त कथा-हिमालयक आऽ मनाइनक चारिम बेटी गौरीक विवाह महादेवसँ भेल। महादेव भाभट पसारि फेर हटा लेलनि।बेटी-जमाएकेँ पुष्ट भार साँठि बिदा कएलन्हि, से सठबे नहि करन्हि। भड़कनि छुलाहि जखन धुरखुर सटि ठाढ़ भेल, तखन सभटा भार बिलाएल। एकबेर गौरी कहलन्हि जे सभक ननदि अबैत छैक, भागिन अबैत छैक। महादेव बहिन अशावरीकेँ बजेलन्हि। हुनका बेमाय फाटल छलन्हि, बेमायमे गौरीकेँ नुका लेलन्हि। गौरी कानथि तँ क्यो सुनबे नहि करन्हि। म्हादेव पुछाड़ि कएलन्हि तँ ओऽ पैर झाड़लन्हि। गौरी भटसँ खसलीह। तहिना ननदि लेल माँछ रान्हलन्हि। सभटा माँछ ननदि खाऽ गेलखिन्ह। गौरी अकछ भए ननदिकेँ बिदा कएलन्हि। गौरी गंगा जल भरए गेलीह तँ पुरबा आऽ पछबा दुनू भागिन जोरसँ बहए लागल। गौरी हाथ जोड़ि हँसी बन्न करए लेल कहलन्हि। गौरी छिनारि/चोरनी- गौरी कहलन्हि जे छिनारिकेँ माथपर सिंह आऽ चोरनीकेँ नाङरि दए दिऔक। महादेव तथास्तु कहलन्हि। गौरी माछ आनए गेलीह तँ धारक कातमे महादेव भेष बदलि माँछ बेचबाक लेल ठाढ़ भए गेलाह। गौरीकेँ माँछ बेचबासँ मना कए देलन्हि, कहलन्हि जे हँसी-ठट्ठा करब तखने हम अहाँकेँ माँछ देब। गौरीकेँ महादेव लेल माँछ लेब जरूरी छलन्हि से ओऽ हँसी कए माछ आनि, रान्हि महादेवकेँ खोआबए बैसलीह तँ माथपर सिंघ उगि गेलन्हि। दोसर दिन महादेव गौरीकेँ जल्दीसँ खेनाइ बनाबए लेल कहलन्हि, तखने गौरीकेँ दीर्घशंका लागि गेलन्हि। ओऽ जखन दीर्घशंका कए ओकरा पथियासँ झाँपि देलखिन्ह। जखन महादेव ओम्हर अएलाह आऽ पुछलखिन्ह तँ ओऽ लजा गेलीह आऽ गप चोरा लेलन्हि। जखन महादेवकेँ ई कहलन्हि तँ हुनका नाङरि भए गेलन्हि। गौरी छिनारि आऽ चोरनीक चेन्ह मेटएबाक अनुरोध कएलन्हि। तहियासँ ई चेन्ह मेटा गेल। एगारहम दिनुका कथा गौरीसँ छोट आऽ हिमालयक पाँचम बेटी संध्यासँ विवाहक लेल महादेव चोरा कए चलि गेलाह। गौरीकँ दहो-बहो नोर चुबए लगलन्हि। घामे-पसीने भए गेलीह। देहसँ मैल छुटए लगलन्हि तकरा ओऽ जमा केलन्हि आऽ साँप बनाए पथपर छोड़ि देलन्हि। महादेव जखन संध्याक संग विवाह कए अएलाह तखन ओहि साँपमे प्राण दए देलन्हि। गौरीकेँ कहलन्हि जे ई साँप, लीली, अहाँक बेटी छी आऽ एकरासँ खेलएबाक लेल संध्याकेँ अनने छी। गौरी भभा कए हँसि देलन्हि। नाहर राजा आऽ ताँती रनिक सए बेटामे सभसँ पैघ् बेटा बैरसी महादेव लग नोकरी करए लेल गेलाह। महादेव हुनका कहलखिन्ह जे लीलीकेँ धर्मकुण्डमे स्नान कराए दियौन्ह आऽ सोहागकुण्डमे औँठा डुबा दियौन्ह। मुदा ओऽ उलटा कए देलन्हि। सोहाकुण्डमे डुबलाक कारण सोहाग बड़ पैघ भेलन्हि। मुदा धर्मकुण्डमे मात्र औँठा डुबलन्हि से ओकर लेशमात्र रहलन्हि। से ओऽ बेरसीसँ विवाह करबाक गप कहलन्हि आऽ हुनकेसँ हुनकर विवाह भेल। रवि दिनुका पतिव्रता सुकन्याक कथा एकटा राजा- आऽ चरिटा हुनकर रानी छलन्हि। छोटकी रानीटासँ एकटा बचिया सुकन्या भेलन्हि। एक दिन राजा सुकन्या संगे टहलैत छलाह तँ सुकन्या एकटा दिबड़ाक भीड़ देखलन्हि। ओहिमे दूटा चमकैत वस्तु सेहो छल। ओऽ ओहिमे कटकीसँ भूड़ करए चाहलन्हि, तँ ओहिमेसँ शोनित बहार भए गेल आऽ चीत्कार उठल। एकटा मुनि तपस्या कए रहल छलाह आऽ हुनकर दुनू आँखि फूटि गेल छलन्हि। राजा हाथ जोड़ि क्षमा माँगलन्हि तँ ओऽ सुकन्याकेँ सेवाक लेल माँगि लेलन्हि। राजा कुमोनसँ सुकन्याक विवाह ओहि बूढ़ ऋषिसँ करबाए देलन्हि। फेर एक दिन अश्विनीकुमार सुकन्याकेँ भेटलखिन्ह आऽ हुनका लोकनिक संग पतिकेँ गंगा स्नान करेबाक लेल कहलखिन्ह। जखने तीनू गोटे स्नान कए निकललाह तँ एके रंग-रूपक युवा आँखि सहित बाहर आबि गेलाह। आब सुकन्या हुनका चिन्हतथि कोना। तखने ओऽ देखलन्हि जे दुनू देवताक पिपनी तँ खसिते नहि छन्हि से ओऽ अपन पतिकेँ चीन्हि गेलीह। राजा बेटी-जमाएक खुशीमे भोज देलखिन्ह। देवता सभ सेहो अएलाह मुदा देवता सभ श्वनेकुमारकेँ पाँतीमे बैसि कए खाए नहि देमए चाहैत छलाह मुदा राजाक कहलापर हुनका सभकेँ एके पाँतीमे बैसए देलखिन्ह। बारहम दिनुका कथा एकटा ब्राह्मणीक सात टा बेटा छलन्हि। छोटकी पुतोहु गरीब घरक छलीह से ससु-ससुर नहि मानैत छलन्हि। हुनका गर्भ भेलन्हि तँ खीर पूरी खएबाक इच्छा पतिकेँ कहलखिन्ह। पति कहलखिन्ह जे माय हम खेत जाइत छी हमर पनपिआइमे आइ खीर-पूरी कनिआक हाथे पठा दिअ। मायकें बुझेलन्हि जे हो नञि हो, ई अपन कनिआकेँ खीर-पूरी खुआओत। से ओऽ पुतोहुक जीहपर लिखि कहलन्हि, जे घुरि कए आबी तँ ई लिखल रहबाक चाही। पुतोहु खीर-पूरी लए खेत पहुँचलीह तँ पति आधा-आधा खाए लेल कहलखिन्ह। मुदा ऒऽ जीह देखा देलखिन्ह। तखन ओऽ पीपरक धोधरिमे खीर-पूरी राखि कहलन्हि जे जाऊ, मायकेँ जीह देखा कए घुर्रि आऊ। जखन ओऽ घुरलीह तँ ओहि धोधरिक बीहड़िमे रहएबला बासुकी साँपक कनिआ, जे गर्भवती छलीह से सभटा खीर-पूरी खाऽ गेल छलीह। ओहि सापिनकेँ बाल आऽ बसन्त दूटा पोआ भेलैक। एक दिन चरबाहा सभ ओकरासभकेँ मारए लेल दौगल तँ छोटकी पुतोहू ओकरा बचेलक। फेर एकर उत्तरमे बाल-बसन्त हुनका वर मँगबाक लेल कहलखिन्ह। पुतोहू वर मँगलन्हि जे एहन कए दिअ जे हमरो नैहरक आस रहए। सैह भेल। बाल-बसन्त विदागरी करेबाक लेल पहुंचि गेलाह मनुष्यरूप धारण कए। सासुरमे बाल-बसन्त रूपमे परिचए दए कहलन्हि जे हमरा सभक जन्म बहिनक द्विरागमनक बाद भेल छल। बिदागरी कराए रस्तामे बीहरिमे पैसि कए जे निकललाह तँ पैघ घर आबि गेल। बासुकीनि स्वागत कए साँझमे सुआसिनक काज साँझमे दीअठिपर दीप जरेनाइ अछि- से कहलन्हि। बासुकीनागक फनपर ओऽ दीप जरबथि तँ ओऽ खौँझाकए पत्नीकेँ कहलन्हि जे एकरा हम डसि लेब। पत्नी मना कएलन्हि जे अजश होएत से बिदा करए दिअ। ससुर चलि जाएत तँ जे मोन होए से करब। बसुकिनी नूआ-लहठी दए बिदा करैत काल धरि ई केलन्हि जे साँप रक्षकमंत्र कनिआकेँ सिखा कए बाल-बसन्तक संग बिदा कए देलन्हि। कहलन्हि जे ई मंत्र सूतएकाल पढ़ि सूतब। दीप-दीपहरा आगू हरा मोती मानिक भरू धरा। नाग बड़थु, नागिन बढ़थु, पाँचो बहिन, विषहरा बढ़थु। बाल बसन्त भैय्या बढ़थु, डाढ़ि-खोढ़ि मौसी बढ़थु। आशावरी पीसी बढ़थु, खोना-मोना मामा बढ़थु। राही शब्द लए सुती, काँसा शब्द लए उठी। होइत प्रात सोना कटोरामे दूध-भात खाइ। साँझ सुती, प्रात उठी, पटोर पहिरी कचोर ओढ़ी। ब्रह्माक देल कोदारि, विष्णुक चाँछल बाट। भाग-भाग रे कीड़ा-मकोड़ा, ताहि बाटे आओत। ईश्वर महादेव, पड़ए गरुड़केँ ठाठ। आस्तीक, आस्तीक, आस्तीक। बासुकी डसए लए आबथि मुदा ई मंत्र सुनि घुरि जाथि। चारिमदिन सासुकेँ डसि तीन बेर नाङरि पटकि घर सोना-चानीसँ भरि देलखिन्ह। गोसाउनिक कथा- मधस्थ राजाक एकसए एक बेटीक विवाह नाहर राजाक एकसए एक बेटासँ भेलन्हि।सभसँ पैघ भाए बैरसीक विवाह सभसँ पैघ कान्या गोसाउनीसँ भेलन्हि।विवाहकालमे बैरसीक पागसँ पहिल कनिआ महादेवक पुत्री लीली खसि पड़लन्हि। लीली लाबा बिछि खए लागलि।गोसाउनिक पिता मधस्थ सरापलन्हि जे बैरसी डेग पाछाँ पानक बिड़िया खएताह आऽ कोश पाछाँ तिरियासँ गप करताह तँ जीताह नहि तँ मरि जएताह। मुदा बैरसी लीलीकेँ मानथि। सासुरमे गोसाउनि अपन व्यथा दिअर चनाइकेँ कहलन्हि। ओऽ भाइकेँ कहलन्हि जे बाहर घुमि फिरि आऊ। तँ बैरसी ससुरक सरापक कथा कहलन्हि। मुदा चनाइ सभटा व्यवस्था कए भौजीकेँ कहलन्हि जे हम पाँच्-पाँच कोसपर ठरबाक व्यवस्था करब अहाँ भायसँगे भेष बदलि रहू आऽ संगमे पासाक गोटी लए लिअ आऽ तकरा प्रमाण रूपमे गाड़ैत जाएब। सैह भेल। पाँच विश्रामक बाद जखन सभ घुरि अएलाह, तखन गोसाउनिकेँ ओधु, कछु, महानाग, श्रीनाग, आऽ नग्नश्री नमक पाँचटा पुत्र भेलन्हि। लीली बैरसीकेँ कहलन्हि जे ई चनाइक सन्तान छी। मुदा गोसाउनि पासाक गोटी देखेलन्हि। तखन बैरसी लीलीकेँ मालभोग चौर आऽ खेड़हीक दालि आऽ गोसाउनिकेँ लोहाक चाउर आऽ पाथरक दालि सिद्ध करए कहलन्हि। मुदा तैयो लीली बुते सिद्ध नञि कएल भेलन्हि, मुदा गोसाउनि सुसिद्ध कए देलन्हि। ई देखि कए गोसाउनिक शरीर गौरवे फाटि गेलन्हि। तेरहम दिनुका कथा राजा श्रीकरक कन्याक टीपणिमे छाती लात, झोँटा हाथ आऽ सौतिनक पोखड़िमे अढ़ाइ झाक माटि उघब लिखल छल। हुनकर मुइलाक बाद हुनकर बेटा चन्द्रकर जंगलमे एकटा सोन्हि बना कए एकटा चेरीसंगमे दए राजकुमारीकेँ ओतए राखि देलन्हि। जंगलमे सुवर्ण राजाकेँ ओऽ भेँट भेलीह तँ दुनू गोटे जाए लगलाह तँ राजकुमारी साओन सूदि तृतियाकेँ मधुश्रावणी पाबनिक लेल सासुरक अन्न खएबाक आऽ वस्त्र पहिरबाक प्रथाक मोन पाड़ि कहलन्हि जे ई दुनू वस्तु अवश्य पठायब। राजा राज्य जाए कारीगरकेँ वस्त्रलेल कहलन्हि तँ बड़की रानी सुनि लेलन्हि आऽ वस्त्रमे छाती-लात आऽ झोँटा हाथ लिखि देबाक लेल कहलन्हि। कौआकेँ जखन ई वस्त्र पहुँचेबाक भार राज देलन्हि तँ ओऽ रस्तामे कतहु भोज-भात खए लागल आऽ सनेस पहुँचेनाइ बिसरि गेल। राजा सेहो सभटा बिसरि गेलाह। मधुश्रावणी दिन राजकुमारी गौरीक पूजन उज्जर चानन-फूलसँ कएलन्हि आऽ कहलन्हि जे जहिया राजा भेँटा होथि तहिआ हम बौक भए जाइ। जखन चन्द्रकरकेँ पता चलल जे राजकुमारी विवाह कए लेलन्हि तँ ओऽ खरचा बन्द कए देलन्हि। आब दुनू गोटे राजकुमारी अऽ चेरी सुवर्ण राजाक बड़की रानी द्वारा खुनाओल जाए रहल पोखड़िमे माटि उघए लगलीह। सुवर्ण एक दिन हिनका लोकनिकेँ देखलखिन्ह तँ हुनका सभटा मोन पड़ि गेलन्हि। ओऽ हुनका राज्य लए अनलन्हि। मुदा राजकुमारी बजबे नहि करथि। चेरी सभटा गप बुझेलन्हि तँ राजा कहलन्हि जे ई कौआक गलती अछि। तखन रानी अगिला मधुश्रावणीमे लाल चाननसँ गौर पुजलन्हि आऽ हुनकर बकार घुरि गेलन्हि आऽ सुखसँ जीवन बिताबए लगलीह। श्रीगणेशजी मधुश्रावणी दिन मए गौरीसँ कहलन्हि जे आइ हम सोहाग मथब आऽ बाँटब। धान-धन्य, काठक तामा, नीम बेल आऽ आमक काठीसँ ओऽ सोहाग मथि सभकेँ बँटलन्हि। झूलन साओन मासक शुक्लपक्ष पुत्रदा एकादशीसँ प्रारम्भ भए पाँच दिनक बाद सलौनी पूर्णिमा धरि काठक झूला, आङी, टोपी, चद्दरि , रेशमी डोरीसँ सजावट कए झूला गाओल जाइत अछि। भादवमास कृष्णपक्ष अष्टमी तिथिक १२ बजे रातिमे कृष्णक जन्म भेलन्हि। सतयुगमे केदार नाम्ना राजा परम्परानुसार वृद्धावस्था प्राप्त भेलापर पुत्रकेँ राज्यभार दए तपस्याक लेल बोन चलि गेलाह। केदारक एकेटा पुत्री छलन्हि वृन्दा नाम्ना। ओऽ भरि जिनगी यमुना तटपर घोर तपस्या केलन्हि। अन्तमे भगवान प्रकट भए वर मँगबाक लेल कहलन्हि। वृन्दा कहलखिन्ह जे अहाँ हमर वर बनू। ओऽ बोन जतए बृन्दा तपस्या कएलन्हि वृन्दावनक नामसँ प्रसिद्ध भेल। ओतए यमुनाक नदीक निचुलका दक्षिण तटपर मधुपुरी नामक नगर बसेलक। शत्रुघन ओहि दैत्यकेँ मारि मधुपर (मथुरा) जितलन्हि। द्वापरमे ई शूरसेनक राजधानी बनल। यादव,अंधक भोज एतए राज केलन्हि। भोजराज उग्रसेनकेँ हुनकर बेटा कंस गद्दीपरसँ उतारि देलकन्हि। हुनकर बहिन यदुवंशी क्षत्रिय वासुदेवसँ बियाहल छलीह। एक दिन कंस देवकीकेँ सासुर पहुँचाबए जाऽ रहल छलाह मुदा आकाशवाणी भेल जे देवकीक आठम बच्चा कंसकेँ मारत से ओऽ अपन बहिन बहिनोईकेँ कारागारमे धऽ देलक। देवकीक सात टा सन्तानकेँ ओऽ मरबा देलक। भादव मासक रोहिणी नक्षत्रक कृष्णपक्षक अष्टमी तिथिक अन्हरियामे मूसलधार बरखामे कारागारमे प्रकाश भए गेल आऽ भगवान शंख-चक्र-गदा-पद्म लए ठाढ़ भए गेलाह, कहलन्हि जे हमरा जन्म होइत देरी वृन्दावन नन्दक घर दए आउ आऽ ओतए एकटा बचिया चण्डिका जन्म लेने अछि, ओकरा आनि कए कंसकेँ दए दिऔक। मायासँ सभ पहरेदार सूति जाएत, फाटक सभ अपने खुजि जाएत, यमुना मैय्या स्वयं रस्ता दए देतीह। वासुदेव सएह कएलन्हि। भोरमे कंस एकटा पाथरपर एकटा रजक द्वारा पटकबाय जखने ओहि बचियाकेँ मारए चाहलन्हि उड़ि गेलीह आऽ कहलन्हि जे हुनका मारए बला वृन्दावन पहुँचि गेल अछि। कंस कतेको राक्षसकेँ पठेलक कृष्णकेँ मारबाक लेल मुदा वैह सभ मारल गेल। पैघ भए कृष्ण मथुरा आबि कंसकेँ मारि माता-पिताकेँ कारागारसँ छोड़ाओल आऽ फेर किछु दिनका बाद गोपी-सखाकेँ छोड़ि द्वारका चलि गेलाह। 2.हरितालिका/ चौरचन्द्र/ अनंत चतुर्दशी- गजेन्द्र ठाकुर हरितालिका पूजा व्रत (तीज) तिथि भादव शुक्ल तृतियाकेँ कुमारि कन्या सोहागक लेल व्रत करैत छथि। कथा एहि प्रकारेँ अछि। सूतजी- पार्वती शिवसँ शिवसन वरप्राप्तिक व्रतक विषयमे पुछैत छथि तँ ओऽ उत्तर दैत छथि जे हिमवान पहाड़पर अहाँ भादव शुक्ल तृतियाकेँ ई व्रत कएने रही बारह वर्ष उल्टा टांग मात्र धुँआ पीबि कए, मघमे जलमे बैसि, श्रावनमासमे वर्षामे आऽ बैसाख दुपहरियामे पंचाग्निमे। तखन अहाँ पिता नारदकेँ कहलन्हि जे ओऽ पार्वतीक विवाह विष्णुसँ करओताह। ई सुनि अहाँ सखीक घरपर कानए लगलहुँ जे हम तँ पात्र शिवकेँ अपन पति बनाएब आऽ अपन सखेक संग गंगाकात खोहमे चलि गेलहुँ आऽ भादव शुक्ल तृतियाकेँ हमर बालूक प्रतिमाक पूजा कएलहुँ तखन हम आबि अहाँकेँ पति होएबाक वर देलहुँ। तखन अहाँ हमर बालुक प्रतिमाक विसर्जन कए पारण केलहुँ, तखने अहाँक पिता सेहो पहुँचि गेलाह आऽ अहाँकेँ घर अनलन्हि आऽ हमरासँ अहाँक विवाह भेल। अहाँक सखी अहाँकेँ हरिकए लए गेल छलीह तैँ एहि व्रतक नाम हरितालिका पड़ल। चौरचनक कथा सनत्कुमारकेँ नन्दिकेश्वर योगीन्द्र कथा सुनबैत छथि- कृष्ण मिथ्या आरोपसँ दुखित भए गणेश आऽ चन्द्रमाक पूजा कएलन्हि। पृथ्वीक भार उतारए लेल बलराम, कृष्ण आऽ कमलनाभ उत्पन्न भेलाह। कंसक वध कृष्ण कएलन्हि। मुदा कंसक ससुर जरासन्धक आक्रमण संकट देखि छप्पन करोड़ यदुवंशीक आऽ सोलह हजार आठ स्त्रीवर्गक संग द्वारका अएलाह। संत्राजित सूर्यक उपासना द्वारका तटपर कए स्यामन्तक मणि- जे सभ दिन आठ भार सोना उत्पन्न करैत छल- पओलन्हि। ओऽ एकरा अपन भाइ प्रसेनकेँ दए देलन्हि। राजा उग्रक दुनू सन्तान छलाह- संत्राजित आऽ प्रसेन। एक दिन कृष्ण आऽ प्रसेन शिकार खेलाए लेल बोन गेलाह तँ एकटा सिह प्रसेन कए मारि मणि लए विदा भेल तँ जाम्बवान भालु ओहि सिंहकेँ मारि मणि अपन पुत्रकेँ खेलाए लेल दए देलन्हि। कृष्ण जख्न असगरे आपिस भेलाह तखन सभ हुनकापर प्रसेनक हत्या मणिक लोभमे करबाक आरोप लगओलक। तखन कृष्ण सभकेँ लए बोन गेलाह तँ सिंह आऽ प्रसेनकेँ मुइल देखलन्हि आऽ जाम्बवानक पुत्र सुकुमारक झूलामे लटकल मणि देखलन्हि। जाम्बवानक पुत्री कृष्णकेँ मणि लए भागए कहलन्हि, मुदा कृष्ण शंख फुकि सात दिन खोहमे भेल युद्धक बाद द्वारकावासी द्वारका घुरि कृष्णक अन्तिम संस्कार मृत बुझि कएल, मुदा २१ म दिन जाम्बवान हारि मानि पुत्रीक विवाह हुनकासँ कराए मणि उपहारमे देलन्हि। कष्ण ओहि मणिकेँ संत्राजितकेँ दए देलन्हि। संत्राजित हुनकापर मिथ्या आरोपसँदुखी भए अपन पुत्रीक विवाह कृष्णसँ कराओल आऽ स्यामन्तक मणि कृष्णकेँ देल मुदा कृष्ण नहि लेलन्हि। फेर कृष्ण-बलराम जखन बाहर छलाह तखन शतधन्वा सत्राजितकेँ मारि मणि लए लेलक आऽ अक्रूर यादवकेँ दए अपने भागि गेल। सत्यभामाक कहलापर कृष्ण-बलराम ओकरा खेहारलन्हि, कृष्ण ओकरा मारल मुदा मणि नहि भेटल, ई कथा सुनिते बलरामकेँ ई शंका भेल जे कृष्ण कपट करैत छथि, से ओऽ कृष्ण द्वारका अएलाह मुदा बलराम विदर्भ चल गेलाह, अक्रूर तीर्थयात्रापर निकलि गेलाह, मणि धारण कए काशीमे सूर्यक उपासना करए लागल। तखन नारद कृष्णकेँ भाद्र शुक्ल चौठमे चन्द्रमाक दर्शन कएलाक कारण ई कलंक लागल, से कहलनि, कारण रूपक गर्वमे चन्द्रमाकेँ गणेशजी श्राप देलन्हि जे एहि दिन हुनकर दर्शन करएबलाकेँ कलंक लागत। ब्रह्मा-विष्णु-महेश निर्विघ्नदेवक अष्टसिद्धि पूजा कएल आऽ जखन ओऽ घुरि रहल छलाह तँ चन्द्रमा हुनकर हाथी बला मस्तक, पैघ पेट देखि कए हँसि देलन्हि आऽ ई श्राप पओलन्हि। तखन एहि चतुर्थी तिथिकेँ ब्रह्माक कहल अनुसार गणेशक पूजा भेल फेर चन्द्रमाक अनुनय-विनयपर ई वर देल जे जे क्यो भाद्र शुक्ल चौठमे हथमे फल-फूल लए मंत्रक संग अहाँ दर्शन करत ओकरा कलंक नहि लागत। अनंत पूजा अनन्त भादवमास शुक्ल पक्ष चतुर्दशीकेँ अनन्त पूजा होइत अछि। कथा- जुआमे हारल युधिष्ठिरकेँ बोनमे कृष्ण एहि व्रत करबाकलेल कहलन्हि आऽ कथा सुनओलन्हि। सत्ययुगमे सुमन्त नाम्ना ब्राह्मण भृगुक कन्या दीक्षासँ विवाह कएलन्हि। मुदाक शील जन्मक बाद दीक्षाक मृत्यु भए गेलन्हि। फेर सुमन्तक विवाह कर्कशासँ भेलन्हि ओऽ शीलाकेँ कष्ट देमए लागलि। फेर शीलाक विवाह कौण्डिन्यसँ भेलन्हि। दुनू गोटे अनन्त चतुर्दशीक दिन यमुना तटपर घुरैत कल जाइत छलाह तँ स्त्रीगण लोकनि हुनका बाँहिपर अनन्तक ताग बान्हि देलन्हि जाहिसँ हुनकर सभक घर गृहस्तीमे समृद्धि आयल। घरमे माणिक्य रहितहुँ ई ताग देखि एक दिन पति ओकरा तोड़ि आगिमे फेंकि देलन्हि। शील जरल डोरकेँ निकालि दूधमे राखि लेल। आब विपत्ति शुरू भए गेल आऽ घरमे आएल दरिद्रताकेँ देखि कौण्डिन्य बोन चलि गेलाह। ओतए अनन्त भगवान हुनका विष्णु लग लए गेलखिन्ह। ओऽ हुनका अनन्त व्रत १४ बरख धरि करबाक लेल कहलन्हि। मिथिला सङ्गीत रामाश्रय झा “रामरग” (१९२८- ) विद्वान, वागयकार, शिक्षक आऽ मंच सम्पादक छथि। रामरगजीसँ गप शप। (६ जुलाई २००८) गजेन्द्र ठाकुर: गोर लगैत छी। स्वास्थ्य केहन अछि। रामरंग: ८० बरख पार केलहुँ। संगीतमे बहटरल रहैत छी। गजेन्द्र ठाकुर: संगीतक तँ अपन फराक भाषा होइत छैक। मैथिली संगीत विद्यापति आऽ लोचन सँ शुरू भए अहाँ धरि अबैत अछि। मैथिलीमे अहाँ लिखनहिओ छी। रामरंग: अपन मिथिलासँ सम्बन्धित हम तीन रागक रचना केलहुँ अछि, जकर नाम ऐ प्रकारसँ अच्हि। १.राग तीरभुक्ति, राग विद्यापति कल्याण तथा राग वैदेही भैरव। ऐ तीनू रागमेसँ तीरभुक्ति आर विद्यापति कल्याणमे मैथिली भाषामे खयाल बनल अछि। हमर संगीत रामायणक बालकाण्डमे रागभूपाली आर बिलावलमे सेहो मैथिली भाषामे खयाल छैक। आर सन्गीत रामायणक पृष्ठ ३ पर बिलावलमे श्री गणेशजीक वन्दना तथा पृष्ठ २० पर राग भूपालीमे श्री शंकरजीक वन्दना अछि। पृष्ठ ८७ पर राग तीरभुक्तिमे मिथिला प्रदेशक वन्दना अछि आर पृष्ठ १२० पर राग वैदेही भैरवक (हिन्दीमे) रचना अछि। “अभिनव गीताञ्जलीक पंचम भागमे २६५ आर २६६ पृष्ठ पर विद्यापति कल्याण रागमे विलम्बित एवं द्रुत खयाल मैथिली भाषामे अछि। मिथिला आऽ मैथिलीमे हम उपरोक्त सामग्री बनओने छी। गजेन्द्र ठाकुर: मुदा पूर्ण रागशास्त्र विद्यापति कल्याणक, तीरभुक्तिक वा वैदेही भैरवक नञि अछि। मैथिलीमे आरो रचना अहाँ… रामरंग: बहुत रचना मोन अछि, मुदा के सीखत आऽ के लीखत। हाथ थरथराइत अछि आब हमर। गजेन्द्र ठाकुर: कमसँ कम ओहि तीनू रागक रचना शास्त्र लिखि दैतियैक तँ हम पुस्तकाकार छापि सकितहुँ। रामरंग: जे रचना सभ हम देने छी ओकरा छापि दिऔक। हाथ थरथराइत अछि , तैयो हम तीनूक विस्ट्रुत विवरण पठायब, लिखैत छी। गजेन्द्र ठाकुर: प्रणाम। रामरंग: निकेना रहू। रामाश्रय झा “रामरग” (१९२८- ) विद्वान, वागयकार, शिक्षक आऽ मंच सम्पादक छथि। राग विद्यापति कल्याण- एकताल (विलम्बित) मैथिली भाषामे श्री रामाश्रय झा “रामरंग” केर रचना। स्थाई- कतेक कहब गुण अहांके सुवन गणेश विद्यापति विद्या गुण निधान। अन्तरा- मिथिला कोकिला किर्ति पताका “रामरंग” अहां शिव भगत सुजान॥ स्थायी – – रेग॒म॑प ग॒रेसा ऽऽ क ते ऽऽ क क ऽ रे सा (सा) नि॒ध निसा – रे नि॒ध प धनि सा सारे ग॒रे रेग॒म॑ओअ – म॑ ह ब ऽ ऽ ऽ गु न ऽ अ हां, ऽऽ के ऽ ऽ सुव नऽ ऽऽऽऽ ऽ ग प प धनि॒ धप धनिसां – – रें सां नि धप (प)ग॒ रे सा रे ग॒म॑प ग॒ रेसा ने स विऽ द्याप ति ऽऽ ऽ ऽवि द्या गुन निधा न, क ते ऽऽऽ क, कऽ अन्तरा पप नि॒ध निसां सांरें मिथि लाऽ ऽऽ कोकि सां – निसांरेंगं॒ रें सां रें नि सांरे नि॒ धप प (प) ग॒ रेसा लाऽ की ऽऽऽ ति प ता ऽ ऽऽ का ऽऽ रा म रं ग अ रे सासा धनि॒प ध निसा -सा रे ग॒म॑प -ग॒ सारे सा,सा रेग॒म॑प ग॒, रेसा हां शिव भऽ, ग तऽ ऽसु जाऽऽऽ ऽ ऽ न ऽ, क ते ऽऽऽ क,कऽ *गंधार कोमल, मध्यम तीव्र, निषाद दुनू आऽ अन्य स्वर शुद्ध। रामाश्रय झा “रामरग” (१९२८- ) विद्वान, वागयकार, शिक्षक आऽ मंच सम्पादक छथि। राग विद्यापति कल्याण- एकताल (विलम्बित) मैथिली भाषामे श्री रामाश्रय झा “रामरंग” केर रचना। स्थाई- कतेक कहब गुण अहांके सुवन गणेश विद्यापति विद्या गुण निधान। अन्तरा- मिथिला कोकिला किर्ति पताका “रामरंग” अहां शिव भगत सुजान॥ स्थायी – – रेग॒म॑प ग॒रेसा ऽऽ क ते ऽऽ क क ऽ रे सा (सा) नि॒ध निसा – रे नि॒ध प धनि सा सारे ग॒रे रेग॒म॑ओअ – म॑ ह ब ऽ ऽ ऽ गु न ऽ अ हां, ऽऽ के ऽ ऽ सुव नऽ ऽऽऽऽ ऽ ग प प धनि॒ धप धनिसां – – रें सां नि धप (प)ग॒ रे सा रे ग॒म॑प ग॒ रेसा ने स विऽ द्याप ति ऽऽ ऽ ऽवि द्या गुन निधा न, क ते ऽऽऽ क, कऽ अन्तरा पप नि॒ध निसां सांरें मिथि लाऽ ऽऽ कोकि सां – निसांरेंगं॒ रें सां रें नि सांरे नि॒ धप प (प) ग॒ रेसा लाऽ की ऽऽऽ ति प ता ऽ ऽऽ का ऽऽ रा म रं ग अ रे सासा धनि॒प ध निसा -सा रे ग॒म॑प -ग॒ सारे सा,सा रेग॒म॑प ग॒, रेसा हां शिव भऽ, ग तऽ ऽसु जाऽऽऽ ऽ ऽ न ऽ, क ते ऽऽऽ क,कऽ रामाश्रय झा “रामरग” (१९२८- ) विद्वान, वागयकार, शिक्षक आऽ मंच सम्पादक छथि। २.राग विद्यापति कल्याण – त्रिताल (मध्य लय) स्थाई- भगति वश भेला शिव जिनका घर एला शिव, डमरु त्रिशूल बसहा बिसरि उगना भेष करथि चाकरी। अन्तरा- जननी जनक धन, “रामरंग” पावल पूत एहन, मिथिलाक केलन्हि ऊँच पागड़ी॥ स्थाई- रे भ सा गम॑ प म॑ प – – म॑ग॒ – रे सा सारे नि सा -, नि ग तिऽऽ व श ऽ ऽ भे ऽ ला ऽ शि ऽ व ऽ ऽ जि ध़ नि सा रे सा नि॒ – प़ ध़ नि॒ ध़ प़ – नि सा – – सा न का ऽ घ र ऽ ऽ ए ऽ ला ऽ शि व ऽ ऽ ड रे ग॒ म॑ प प – प नि॒ ध प म॑ प धनि सां सां गं॒ म रु ऽ त्रि शू ऽ ल ब स हा ऽ बि सऽ ऽऽ रि उ रें सां नि रें सां नि॒ ध प म॑ प पनि॒ ध प – -ग — रे ग ना ऽ ऽ भे ऽ ष क र थि चाऽ ऽ कऽ ऽरी ऽऽ, भ अन्तरा प ज प नि सां सां सां – – ध नि – ध नि नि सां रें सां -, नि न नी ऽ ज न ऽ ऽ ऽ ऽ क ध न ध न ऽ, रा नि सां – गं॒ रें सां सां नि – ध नि सां नि॒ ध प ग॒ म॑ प नि सां सां नि॒ ध प म॑ प पनि॒ ध प- -ग – रे थि ला ऽ क के ल न्हि ऊँ ऽ च पाऽऽ गऽ ऽड़ी ऽऽ,भ ***गंधार कोमल, मध्यम तीव्र, निषाद दोनों व अन्य स्वर शुद्ध। राग विद्यापति कल्याण- एकताल (विलम्बित) मैथिली भाषामे श्री रामाश्रय झा “रामरंग” केर रचना। स्थाई- कतेक कहब गुण अहांके सुवन गणेश विद्यापति विद्या गुण निधान। अन्तरा- मिथिला कोकिला किर्ति पताका “रामरंग” अहां शिव भगत सुजान॥ स्थायी – – रेग॒म॑प ग॒रेसा ऽऽ क ते ऽऽ क क ऽ रे सा (सा) नि॒ध निसा – रे नि॒ध प धनि सा सारे ग॒रे रेग॒म॑ओअ – म॑ ह ब ऽ ऽ ऽ गु न ऽ अ हां, ऽऽ के ऽ ऽ सुव नऽ ऽऽऽऽ ऽ ग प प धनि॒ धप धनिसां – – रें सां नि धप (प)ग॒ रे सा रे ग॒म॑प ग॒ रेसा ने स विऽ द्याप ति ऽऽ ऽ ऽवि द्या गुन निधा न, क ते ऽऽऽ क, कऽ अन्तरा पप नि॒ध निसां सांरें मिथि लाऽ ऽऽ कोकि सां – निसांरेंगं॒ रें सां रें नि सांरे नि॒ धप प (प) ग॒ रेसा लाऽ की ऽऽऽ ति प ता ऽ ऽऽ का ऽऽ रा म रं ग अ रे सासा धनि॒प ध निसा -सा रे ग॒म॑प -ग॒ सारे सा,सा रेग॒म॑प ग॒, रेसा हां शिव भऽ, ग तऽ ऽसु जाऽऽऽ ऽ ऽ न ऽ, क ते ऽऽऽ क,कऽ *गंधार कोमल, मध्यम तीव्र, निषाद दुनू आऽ अन्य स्वर शुद्ध। ३.श्री गणेश जीक वन्दना राग बिलावल त्रिताल (मध्य लय) स्थाई: विघन हरन गज बदन दया करु, हरु हमर दुःख-ताप-संताप। अन्तरा: कतेक कहब हम अपन अवगुन, अधम आयल “रामरंग” अहाँ शरण। आशुतोष सुत गण नायक बरदायक, सब विधि टारु पाप। स्थाई नि ग प ध नि सा नि ध प ध नि॒ ध प म ग म रे वि ध न ह र न ग ज ब द न द या ऽ क रु ग ग म नि॒ ध प म ग ग प म ग म रे स सा ग रु ऽ ह म र दु ख ता ऽ प सं ता ऽ प ऽ अन्तरा नि रें प प ध नि सां सां सां सां सां गं गं मं गं रें सां – क ते क क ह ब ह म अ प न अ व गु न ऽ रे सां सां सां सां ध नि॒ ध प ध ग प म ग ग प प अ ध म आ य ल रा म रे ऽ ग अ हां श र ण ध प म ग म रे सा सा सा सा ध – ध नि॒ ध प आ ऽ शु तो ऽ ष सु त ग ण ना ऽ य क व र धनि संरें नि सां ध नि॒ ध प पध नि॒ ध प म ग म रे दाऽ ऽऽ य क स ब बि ध टाऽ ऽ रु ऽ पा ऽ ऽ प ४.मिथिलाक वन्दना राग तीरभुक्ति झपताल स्थाई: गंग बागमती कोशी के जहँ धार, एहेन भूमि कय नमन करूँ बार-बार। अन्तरा: जनक याग्यवल्क जहँ सन्त विद्वान, “रामरंग” जय मिथिला नमन तोहे बार-बार॥ स्थाई रे – ग म प म ग रे – सा गं ऽ ग ऽ बा ऽ ग म ऽ ती प सा नि ध़ – प़ नि नि सा रे सा को ऽ शी ऽ के ज हं धा ऽ र सा म ग रेग रे प ध म पनि सां सां ए हे नऽ ऽ भू ऽ मि कऽ ऽ य प सां नि प ध (ध) म ग रे सा सा न म न क रुँ बा ऽ र बा र अन्तरा प पध म – प नि नि सां – सां ज नऽ क ऽ ऽ या ग्य व ऽ ल्क रें रें गं – मं मं गं रें – सां ज हं सं ऽ त वि ऽ द्वा ऽ न ध प सां नि प ध म प नि सां सां सां रा म रं ऽ ग ज य मि थि ला प सां नि प ध (ध) म ग रे सा सा न म न तो हे बा ऽ र बा र ५.श्री शंकर जीक वन्दना राग भूपाली त्रिताल (मध्य लय) स्थाई: कतेक कहब दुःख अहाँ कय अपन शिव अहूँ रहब चुप साधि। अन्तरा: चिंता विथा तरह तरह क अछि, तन लागल अछि व्याधि, “रामरंग” कोन कोन गनब सब एक सय एक असाध्य॥ स्थाई प ग ध प ग रे स रे स ध सा रे ग रे ग ग क ते क क ह ब दुः ख अ हाँ कय अ प न शि व ग ग – रे ग प ध सां पध सां ध प ग रे सा – अ हूँ ऽ र ह ब चु प साऽ ऽ ऽ ऽ ऽ ऽ धि ऽ अन्तरा प ग प ध सां सां – सां सां ध सां सां सां रें सां सां चिं ऽ ता ऽ वि था ऽ त र ह त र ह क अ छि सां सां ध – सां सां रें रें सं रे गं रें सां – ध प त न ला ऽ ग ल अ छि व्या ऽ ऽ ऽ ऽ ऽ धि ऽ सां – ध प ग रे स रे सा ध स रे ग रे ग ग रा ऽ म रं ऽ ग को न को ऽ न ग न ब स ब ग ग ग रे ग प ध सां पध सां ध प ग रे सा – ए क स य ए ऽ क अ साऽ ऽ ऽ ऽ ऽ ऽ ध्य ऽ वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू। Always refresh the pages for viewing new issue of VIDEHA. प्रस्तुत अछि विदेह, मिथिला, तीरभुक्ति आ तिरहुतक नामसँ विख्यात वर्त्तमान भारत आ नेपालमे पसरल माटिक प्राचीन आ नव स्थापत्य, चित्रांकित अभिलेख आ मूर्त्तिकलाक एकटा छोट संग्रह। एहि संग्रहकेँ पूर्ण करबाक हेतु अपन बहुमूल्य संग्रह editorial.staff.videha@gmail.com केँ पठाऊ। आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार, सम्बन्धित फोटोग्राफर आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। फोटो सभ पठएबाक लेल धन्यवाद पाठकगण। साभार। पूर्णतः अव्यवसायिक उद्देश्य आ मात्र एकेडमिक प्रयोग लेल। गौरीशंकर, जमथरि, हैंठी बाली, मधुबनी गौरीशंकर, जमथरि, हैंठी बाली, मधुबनी गौरीशंकर, जमथरि, हैंठी बाली, मधुबनी गौरीशंकर, जमथरि, हैंठी बाली, मधुबनी गौरीशंकर, जमथरि, हैंठी बाली, मधुबनी गौरीशंकर, जमथरि, हैंठी बाली, मधुबनी गौरीशंकर, जमथरि, हैंठी बाली, मधुबनी गौरीशंकर, जमथरि, हैंठी बाली, मधुबनी गौरीशंकर, जमथरि, हैंठी बाली, मधुबनी गौरीशंकर, जमथरि, हैंठी बाली, मधुबनी गौरीशंकर, जमथरि, हैंठी बाली, मधुबनी बाइसी-बसैटी, अररिया मिथिलाक्षर ताम्रलेख बाइसी-बसैटी, अररिया मिथिलाक्षर ताम्रलेख बाइसी-बसैटी, अररिया मिथिलाक्षर ताम्रलेख बाइसी-बसैटी, अररिया मिथिलाक्षर ताम्रलेख धरहरा, बनमनखी, पूर्णियाँ, नरसिंह अवतार धरहरा, बनमनखी, पूर्णियाँ, नरसिंह अवतार पूरणदेवी, पूर्णियाँ बिदेश्वर स्थान अभिलेख, मधुबनी अन्ध्राठाढी अभिलेख, मधुबनी बुद्ध अष्टधातु, सिसव बसंतपुर, बगहा 12 शताब्दी, कोइलख, मधुबनी अग्नि बिदेश्वर स्थान, मधुबनी बुद्ध, मुंगेर अहिल्या स्थान अन्ध्राठाढी, मधुबनी अशोक स्तंभ, बसाढ, वैशाली बुद्ध अवलोकितेश्वर तारा, भागलपुर बसाढ, वैशाली बुद्ध भूमिस्पर्श बुद्ध, ताम्र बुद्ध मस्तक, सुलतानगंज वैशाली मूर्त्ति चामुण्डा नाग-नागिनी, मुंगेर मुकुटधारी बुद्ध, अंतीचक, भागलपुर नाचैत गणेश, 10म शताब्दी, दरभंगा दरभंगा म्युजियम दरभंगा म्युजियम दुर्गा, कार्त्तिकेय 10म शताब्दी, भीट भगवानपुर, अन्ध्रा ठाढी गणेश बुद्ध गौतम बुद्ध, वैशाली हरिहर बुद्ध चिड़ैकेँ खुआबैत महिला, राजमहल लौरिया नन्दनगढ, अशोक स्तंभ लोमश सुदामा गुफा मुंगेर नागराज तीर्थंकर कुमारिल भटट फेकेलाह, नालन्दा विक्रमशिला विश्वविद्यालय, भागलपुर ठाढ बुद्ध पार्वती रामायण रामपुरवा वृषभ रामपुरवा बुद्धक अवशेष संकिसा सप्तमातृका सर्वतो भद्र मण्डल सूर्य सूर्य सूर्यक संगी सूर्य, मधुबनी आ भागलपुर मूर्त्ति मूर्त्ति मूर्त्ति, वैशाली उमा माहेश्वर, कल्याणसुन्दर वैशाली वृषभ शीर्ष वैशाली, शालभंजिका भागलपुर नाओक प्रकार विष्णु बुद्धा पाँखियुक्त्त महिला अहिल्या अष्टयोगिनी मन्दिर, सहरसा बनगंगा दरभंगा दरभंगा नगर, 1934 दरभंगा मेडिकल कॉलेज दुल्हदुल्हिन मन्दिर, जनकपुर श्री यंत्र गण्डीश्वर गंगासागर पोखरि, मधुबनी हनुमान मन्दिर, मधुबनी हरिहरस्थान मधुबनी हॉस्पीटल जनकपुर जानकी मन्दिर जानकी मन्दिर जानकी मन्दिर, सीतामढी जानकी मन्दिर, सीतामढी जिला स्वास्थ्य कार्यालय राजबिराज, नेपाल कलनेश्वर बाबा कपिलेश्वर कोषलेखाकार्यालय, राजबिराज, नेपाल मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा लक्ष्मीश्वर पैलेस, 1934 माध्यमिकविद्यालय , जनकपुर महेन्द्र चौक, जनकपुर जनकपुर मंडप मिथिला, 1988 भूकम्प पगलाबाबा धर्मशाला, जनकपुर, नेपाल पंडौल अहल्या मधुबनी बस स्टैंड राज हेड ऑफिस, 1934 राज हॉस्पीटल, दरभंगा, 1934 सौराठ सभा शिव मन्दिर, 1934 शिवशंकर सिनेमा, मधुबनी श्यामा मन्दिर विद्यापति मूर्त्ति, बिस्फी उग्रतारा, तारास्थान, महिषी, सहरसा विद्यापति स्मारक, बिस्फी विस्फी, उदना महादेव बिस्फी, विश्वेश्वरी भगवती अहल्या मन्दिर, अहियारी अशोक स्तंभ, वैशाली स्तूप अशोक स्तंभ, वैशाली बलिराजपुर किला पूर्वी गेट बलिराजपुर किला मीनार चण्डी स्थान, बिराटपुर, सहरसा गाँधी पोखरि, ढाका, मोतिहारी गाँधी विद्यालय, ढाका, मोतिहारी गिरिजा स्थान, मधुबनी हरिहर मन्दिर, सोनपुर जैन मन्दिर, भागलपुर जैन मन्दिर, वैशाली कमलादित्य स्थान कपिलेश्वर शिव मन्दिर लौरिया नन्दनगढ मदनेश्वर शिव मन्दिर मन्दार पर्वत, बाँका मोतिहारी सत्याग्रह स्मारक परमेश्वरी मन्दिर, ठाढी, मधुबनी रामजानकी मन्दिर, सीतामढी सत्याग्रह स्मारक, सीतामढी शांति स्तूप, वैशाली उच्चैठ भगवती उच्चैठ मन्दिर सिंघेश्वर स्थान, मधेपुरा सूर्यधाम, परसा उग्रतारा मन्दिर, महिषी, सहरसा वैशाली स्तूप विक्रमशिला विश्वविद्यालय, भागलपुर विराटपुर मन्दिर, मधेपुरा वृषभ शीर्ष, रामपुरवा सिंह शीर्ष, रामपुरवा शरभ, नेपाल पाँखियुक्त्त देवी, वैशाली बाबा बडेश्वर, देवना, बनगाँव वट वृक्ष, बनगाँव भगवान विष्णु, देवना, बनगाँव शास्त्रार्थ स्थल,तारास्थान महिषी शास्त्रार्थ स्थल,तारास्थान महिषी तारास्थान महिषी माता तारा, तारास्थान महिषी उग्रतारा (खादर वाणी तारा) मूर्ति, महिषी वशिष्ठ मुनि, तारास्थान महिषी आवर्धित काली उच्चैठ बौद्धदेवी तारा वारी समस्तीपुर भगवती देकुली भगवती गिरिजा फुल्हर भगवती मृणमूर्ति गन्धबारि भगवती वारी समस्तीपुर भुवनेश्वरी कोर्थ देवीकाली कोर्थ गंगामूर्ति नगरडीह दरभंगा गोसाउनि मन्दिर कोर्थ हैहट्ट देवी हाबीडीह काली उच्चैठ महिषासुरमर्दिनी बहेरी दरभंगा महिषासुरमर्दिनी हाबीडीह महिषासुरमर्दिनी नाहर-भगवतीपुर उमा म्लेच्छमर्दिनी मिर्जापुर दरभंगा यमुना भैरव बलिया मधुबनी अष्टभुज गणेश,कोर्थ भैरव, भैरव-बलिया नटराज, तारालाही शिव-पार्वती मन्दिर, कपिलेश्वरस्थान शिव-पार्वती मन्दिर, कपिलेश्वरस्थान शिव मन्दिर, सिंगिया, विस्पी उमामाहेश्वर, महादेवमठ उमामाहेश्वर, तिरहुत विष्णु, भवानीपुर विष्णु, भीठ भगवानपुर विष्णु, जयनगर विष्णु, लदहो विष्णु, साहो-पररी, हाबीडीह शेषशायी विष्णु, सवास, मुजफ्फरपुर वराह मूर्ति, तिलकेश्वरस्थान मिथिलाक्षर अभिलेख, विष्णु बुद्ध मूर्ति भगवती उच्चैठ, बेनीपट्टी भगवती वाणेश्वरी, भंडारीसम चामुण्डा मन्दिर, कटरा, मुजफ्फरपुर अष्टभुज गणेश, हाबीडीह अष्टभुज गणेश, कोर्थ गंगा, आन्ध्रा-ठाढ़ी महिषासुरमर्दिनी, दुर्गा म्लेच्छमर्दिनी मन्दिर, मिर्जापुर, दरभंगा नटराज राममन्दिर, अहिल्यास्थान सेहनी, वैशाली, विष्णु तिलक-यज्ञोपवीतधारी रूपनगर शिव मन्दिर सूर्य, देकुली सूर्य मूर्ति, डिलाही सूर्य मूर्ति, विष्णु, बरुआर उमामाहेश्वर यमुना, आन्ध्रा-ठाढ़ी सिमरौनागढ़ मूर्ति आदि काली, चैनपुर सहरसा चैनपुर सहरसा- मिथिलाक एकमात्र नीलकंठ मन्दिर, संगमे आदिकालीन भव्य काली-मन्दिर सेहो एहि गाममे अछि। महाशिवरात्रि आ कालीपूजा बड़ धूमधामसँ चैनपुरमे होइत अछि। त्योथागढ़क स्वामी माध्वानन्द कौलाचार्य काली मन्दिर त्योथा गढ़ लग। पुरान गढ़। एकर पूबमे ब्रह्मपुराक बाबा हरिहरनाथ महादेव मन्दिर आ दक्षिणमे उच्चैठ भगवती छथि। त्योथागढ़क दसमुखी काली त्योथा गढ़ लग। पुरान गढ़। एकर पूबमे ब्रह्मपुराक बाबा हरिहरनाथ महादेव मन्दिर आ दक्षिणमे उच्चैठ भगवती छथि। कोइलख (मधुबनी) देवीक मन्दिर अकौर, बेनीपट्टी, भगवती दुर्गा, भगवतीपीठ अकौर, बेनीपट्टी, भगवती दुर्गा, भगवतीपीठ १.अष्टभुज गणेश, कोर्थ २.शिव मन्दिर, सिंघिया, बिस्फी १. बौद्ध देवी तारा, वारी, समस्तीपुर २.उग्रतारा मन्दिर, महिषी, सहरसा १.भगवती, वारी २.भगवती, देकुली १. भगवती गिरिजा, फुलहर २.काली, उच्चैठ १. भैरव, भैरव बलिया २. उमामाहेश्वर, महादेवमठ १. देवीकाली, कोर्थ २. गुसाउनि स्थल मन्दिर, कोर्थ १. गणेश, लहेरियासराय २.उमामाहेश्वर ३. नटराज, ४. विष्णु, तिलक, जनउ धारी, सेहान, वैशाली १. गंगा मूर्ति, नगरडीह, दरभंगा २. भगवती मृण्मूर्ति, गन्धवारि १. हैहट्ट देवी, हाबीडीह २.भुवनेश्वरी, कोर्थ १. कथित काली, उच्चैठ, २.अष्टभुज गणेश, कोर्थ १. महिषासुर मर्दिनी, हाबीडीह, २.उमा, म्लेच्छमर्दिनी, मिर्जापुर, दरभंगा १.महिषासुरमर्दिनी, भगवतीपुर, नाहर, महिषासुर मर्दिनी, बहेरी, दरभंगा १. म्लेच्छमर्दिनी भगवती, मिर्जापुर, दरभंगा २. राम मन्दिर, अहिल्यास्थान १. म्लेच्छमर्दिनी भगवती, मिर्जापुर, दरभंगा २.सिंहेश्वर स्थान, मधेपुरा १. नटराज, तारालाही २. उमामाहेश्वर १_शेषसायी, सवास, मुजफ्फरपुर, २_नटराज_तारालाही ३_ भगवती ४_ उमा माहेश्वरी १-शिव पार्वती मन्दिर, कपिलेश्वर स्थान २. सूर्य मूर्ति डिलाही १_ सूर्यमूर्ति, विष्णु बरुआर २. गंगा, आन्ध्रा ठाढ़ी १_उच्चैठ भ्हगवती, बेनीपट्टी २_महिषासुरमर्दिनी, दुर्गा ३_ चामुण्डा मन्दिर, कटरा, मुजफ्फरपुर ४._भगवती वानेश्वरी, भण्डारिसम १. वराहमूर्ति, तिलकेश्वरस्थान, २.विष्णु, भवानीपुर १. विष्णु, जयनगर २.विष्णु, भीठ भगवानपुर १_विष्णु, लदहो, २.सूर्य, देकुली १_विष्णु_साहो परड़ी, स्थापित-हाभीडीह २.बुद्ध-विष्णु मूर्ति अभिलेख १_विष्णु, सेहान, २_वराह ३_गणेश ४.शिव मन्दिर_रूपनगर १_यमुना, आन्ध्रा ठाढ़ी, २.अष्टभुज गणेश, हाबीडीह १_यमुना, भैरव बलिया, २_शेषसायी, सवास, मुजफ्फरपुर, ३_नटराज_तारालाही ४_ भगवती ५_ उमा माहेश्वरी कथित, काली, उच्चैठ, बेनीपट्टी मिथिलाक खोज ई आलेख हमर दशकसँ ऊपरक मिथिलाक यात्राक उपरान्तक सूत्र-वृत्तान्त अछि आ एहिमे एहि सभ स्थानक स्थानीय निवासी आ गाइड सभक अकथनीय योगदान छन्हि । कखनो कालतँ भाड़ाक गाड़ीक ड्राइवर लोकनि सेहो नीक गाइड सिद्ध भेलाह ।-गजेन्द्र ठाकुर १.गौरी-शंकर स्थान- मधुबनी जिलाक जमथरि गाम आ हैंठी बाली गामक बीच ई स्थान गौरी आ शङ्करक सम्मिलित मूर्त्ति आ एहि पर मिथिलाक्षरमे लिखल पालवंशीय अभिलेखक कारणसँ विशेष रूपसँ उल्लेखनीय अछि। ई स्थल एकमात्र पुरातन स्थल अछि जे पूर्ण रूपसँ गामक उत्साही कार्यकर्त्ता लोकनिक सहयोगसँ पूर्ण रूपसँ विकसित अछि। शिवरात्रिमे एहि स्थलक चुहचुही देखबा योग्य रहैत अछि। बिदेश्वरस्थानसँ २-३ किलोमीटर उत्तर दिशामे ई स्थान अछि। २.भीठ-भगवानपुर अभिलेख- राजा नान्यदेवक पुत्र मल्लदेवसँ संबंधित अभिलेख एतए अछि। मधुबनी जिलाक मधेपुर थानामे ई स्थल अछि। ३.हुलासपट्टी- मधुबनी जिलाक फुलपरास थानाक जागेश्वर स्थान लग हुलासपट्टी गाम अछि। कारी पाथरक विष्णु भगवानक मूर्त्ति एतए अछि। ४.पिपराही-लौकहा थानाक पिपराही गाममे विष्णुक मूर्त्तिक चारू हाथ भग्न भए गेल अछि। ५.मधुबन- पिपराहीसँ १० किलोमीटर उत्तर नेपालक मधुबन गाममे चतुर्भुज विष्णुक मूर्त्ति अछि। ६.अंधरा-ठाढ़ीक स्थानीय वाचस्पति संग्रहालय- गौड़ गामक यक्षिणीक भव्य मूर्त्ति एतए राखल अछि। ७.कमलादित्य स्थान- अंधरा ठाढ़ी गामक लगमे कमलादित्य स्थानक विष्णु मंदिर कर्णाट राजा नान्यदेवक मंत्री श्रीधर दास द्वारा स्थापित भेल। ८.झंझारपुर अनुमण्डलक रखबारी गाममे वृक्षक नीचाँ राखल विष्णु मूर्त्ति, गांधारशैली मे बनाओल गेल अछि। ९.पजेबागढ़ वनही टोल- एतए एकटा बुद्ध मूर्त्ति भेटल छल, मुदा ओकर आब कोनो पता नहि अछि। ई स्थल सेहो रखबारी गाम लग अछि। १०.मुसहरनियां डीह- अंधरा ठाढ़ीसँ ३ किलोमीटर पश्चिम पस्टन गाम लग एकटा ऊंच डीह अछि।बुद्धकालीन एकजनियाँ कोठली, बौद्धकालीन मूर्त्ति, पाइ, बर्त्तनक टुकड़ी आ पजेबाक अवशेष एतए अछि। ११.भगीरथपुर- पण्डौल लग भगीरथपुर गाममे अभिलेख अछि जाहिसँ ओइनवार वंशक अंतिम दुनू शासक रामभद्रदेव आ लक्ष्मीनाथक प्रशासनक विषयमे सूचना भेटैत अछि। १२.अकौर- मधुबनीसँ २० किलोमीटर पश्चिम आ उत्तरमे अकौर गाममे एकटा ऊँच डीह अछि, जतए बौद्धकालक मूर्त्ति अछि। १३.बलिराजपुर किला- मधुबनी जिलाक बाबूबरही प्रखण्डसँ ५ किलोमीटर पूब बलिराजपुर गाम अछि। एकर दक्षिण दिशामे एकटा पुरान किलाक अवशेष अछि। किला चारि किलोमीटर नमगर आ एक किलोमीटर चाकर अछि। दस फीटक मोट देबालसँ ई घेरल अछि। १४.असुरगढ़ किला- मिथिलाक दोसर किला मधुबनी जिलाक पूब आ उत्तर सीमा पर तिलयुगा धारक कातमे महादेव मठ लग ५० एकड़मे पसरल अछि। १५.जयनगर किला- मिथिलाक तेसर किला अछि भारत नेपाल सीमा पर प्राचीन जयपुर आ वर्त्तमान जयनगर नगर लग। दरभंगा लग पंचोभ गामसँ प्राप्त ताम्र अभिलेख पर जयपुर केर वर्णन अछि। १६.नन्दनगढ़- बेतियासँ १२ मील पश्चिम-उत्तरमे ई किला अछि। तीन पंक्त्तिमे १५ टा ऊँच डीह अछि। १७.लौरिया-नन्दनगढ़- नन्दनगढ़सँ उत्तर स्थित अछि, एतए अशोक स्तंभ आ बौद्ध स्तूप अछि। १८.देकुलीगढ़- शिवहर जिलासँ तीन किलोमीटर पूब हाइवे केर कातमे दू टा किलाक अवशेष अछि। चारू दिशि खधाइ अछि। १९.कटरागढ़- मुजफ्फरपुरमे कटरा गाममे विशाल गढ़ अछि, देकुली गढ़ जेकाँ चारू कात खधाइ खुनल अछि। २०.नौलागढ़-बेगुसरायसँ २५ किलोमीटर उत्तर ३५० एकड़मे पसरल ई गढ़ अछि। २१.जयमंगलगढ़-बेगूसरायमे बरियारपुर थानामे काबर झीलक मध्य एकटा ऊँच डीह अछि। एतए ई गढ़ अछि। नाओकोठी (मझौल) गाम लग ई गढ़ अछि। २१ अ.मंगलगढ़- समस्तीपुर जिलामे दुधपुरा बजार लग देओढ गाम लग। २२.अलौलीगढ़-खगड़ियासँ १५ किलोमीटर उत्तर अलौली गाम लग १०० एकड़मे पसरल ई गढ़ अछि। २३.कीचकगढ़-पूर्णिया जिलामे डेंगरघाटसँ १० किलोमीटर उत्तर महानन्दा नदीक पूबमे ई गढ़ अछि। २४.बेनूगढ़-टेढ़गाछ थानामे कवल धारक कातमे ई गढ़ अछि। २५.वरिजनगढ़-बहादुरगंजसँ छह किलोमीटर दक्षिणमे लोनसवरी धारक कातमे ई गढ़ अछि। २६.गौतम तीर्थ- कमतौल स्टेशनसँ ६ किलोमीटर पश्चिम ब्रह्मपुर गाम लग एकटा गौतम कुण्ड पुष्करिणी अछि। २७.हलावर्त्त- जनकपुरसँ ३५ किलोमीटर दक्षिण पश्चिममे सीतामढ़ी नगरमे हलवेश्वर शिव मन्दिर आ जानकी मन्दिर अछि। एतएसँ डेढ़ किलोमीटर पर पुण्डरीक क्षेत्रमे सीताकुण्ड अछि। हलावर्त्तमे जनक द्वार हर चलएबा काल सीता भेटलि छलीह। राम नवमी (चैत्र शुक्ल नवमी) आ जानकी नवमी (वैशाख शुक्ल नवमी) पर एतए मेला लगैत अछि। २८.फुलहर-मधुबनी जिलाक हरलाखी थानामे फुलहर गाममे जनकक पुष्पवाटिका छल जतए सीता फूल लोढ़ैत छलीह। २९.जनकपुर-बृहद् विष्णुपुराणमे मिथिलामाहात्म्यमे जनकपुर क्षेत्रक वर्णन अछि। सत्रहम शताब्दीमे संत सूर किशोरकेँ अयोध्यामे सरयू धारमे राम आ जानकीक दू टा भव्य मूर्त्ति भेटलन्हि, जकरा ओ जानकी मन्दिर, जनकपुरमे स्थापित कए देलन्हि। वर्त्तमान मन्दिरक स्थापना टीकमगढ़क महारानी द्वारा १९११ ई. मे भेल। नगरक चारूकात यमुनी, गेरुखा आ दुग्धवती धार अछि। राम नवमी (चैत्र शुक्ल नवमी),जानकी नवमी (वैशाख शुक्ल नवमी) आ विवाह पंचमी (अगहन शुक्ल पंचमी) पर एतए मेला लगैत अछि। ३०.धनुषा- जनकपुरसँ १५ किलोमीटर उत्तर धनुषा स्थानमे पीपरक गाछक नीचाँ एकटा धनुषाकार खण्ड पड़ल अछि। रामक तोड़ल ई धनुष अछि। एहिसँ पूब वाणगंगा धार बहैत अछि जे लक्ष्मण द्वारा वाणसँ उद्घाटित भेल छल। ३१.सुग्गा-जनकपुर लग जलेश्वर शिवधामक समीप सुग्गा ग्राममे शुकदेवजीक आश्रम अछि। शुकदेवजी जनकसँ शिक्षा लेबाक हेतु मिथिला आएल छलाह- एहि ठाम हुनकर ठहरेबाक व्यवस्था भेल छल। ३२.सिंहेश्वर- मधेपुरासँ ५ किलोमीटरपर गौरीपुर गाम लग सिंहेश्वर शिवधाम अछि। ३३.कपिलेश्वर-कपिल मुनि द्वार स्थापित महादेव मधुबनीसँ ६ किलोमीटर पश्चिममे अछि। ३४.कुशेश्वर- समस्तीपुरसँ उत्तर-पूब, लहेरियासरायसँ 60 किलोमीटर दक्षिण-पूब आ सहरसासँ २५ किलोमीटर पश्चिम ई एकटा प्रसिद्ध शिवस्थान अछि। एतए चिड़ै-अभ्यारण्य सेहो अछि जतए उज्जर आ कारी गैबर, लालसर, दिघौछ, मैल, नकटा, गैरी, गगन, सिल्ली, अधानी, हरिअल, चाहा, करन, रतबा चिड़ै सभ अनायासहि नवम्बरसँ मार्च धरि देखबामे आएत । ३५.सिमरदह-थलवारा स्टेशन लग शिवसिंह द्वारा बसाओल शिवसिंहपुर गाम लग ई शिवमन्दिर अछि। ३६.सोमनाथ- मधुबनी जिलाक सौराठ गाममे सभागाछी लग सोमदेव महादेव छथि। ३७.मदनेश्वर- मधुबनी जिलाक अंधरा ठाढ़ीसँ ४ किलोमीटर पूब मदनेश्वर शिव स्थान अछि। ३८.कुन्दग्राम:हाजीपुरसँ बत्तीस किलोमीटर उत्तर-पूर्वमे बसाध-वैशाली आ लगमे वासोकुण्ड लग गाम गढ़-टीलासँ २ कि.मी. उत्तर-पूर्व अछि कुन्दग्राम , जतए जैनक २४म तीर्थंकर महावीरक जन्म भेल छलन्हि। एतए बुद्धक छाउर, अभिषेक पुषकरणी (राजा अभिषेकसँ पूर्व एतए नहाइत रहथि), अशोक स्तम्भ आ संसद-भवन (राजा विशालक गढ़) अछि। ३९.चण्डेश्वर- झंझारपुरमे हरड़ी गाम लग चण्डेश्वर ठाकुर द्वारा स्थापित चण्डेश्वर शिवस्थान अछि। ४०.बिदेश्वर-मधुबनी जिलामे लोहनारोड स्टेशन लग स्थित शिवधामक स्थापना महाराज माधवसिंह कएलन्हि। ताहि युगक मिथिलाक्षरक अभिलेख सेहो एतए अछि। ४१.शिलानाथ- जयनगर लग कमला धारक कातमे शिलानाथ महादेव छथि। ४२.उग्रनाथ-मधुबनीसँ दक्षिण पण्डौल स्टेशन लग भवानीपुर गाममे उगना महादेवक शिवलिंग अछि। विद्यापतिकेँ प्यास लगलन्हि तँ उगनारूपी महादेव जटासँ गंगाजल निकालि जल पिएलखिन्ह। विद्यापतिक हठ कएला पर एहि स्थान पर उगना हुनका अपन असल शिवरूपक दर्शन देलखिन्ह। ४३.उच्चैठ छिन्नमस्तिका भगवती- कमतौल स्टेशनसँ १६ किलोमीटर पूर्वोत्तर उच्चैठमे कालिदास भगवतीक पूजा करैत छलाह। भगवतीक मौलिक मूर्त्ति मस्तक विहीन अछि। ४४.उग्रतारा- मण्डन मिश्रक जन्मभूमि महिषीमे मण्डनक गोसाउनि उग्रतारा छथि। ४५.भद्रकालिका- मधुबनी जिलाक कोइलख गाममे भद्रकालिका मंदिर अछि। ४६.चामुण्डा- मुजफ्फरपुर जिलामे कटरागढ़ लग लक्ष्मणा वा लखनदेइ धार लग दुर्गा द्वारा चण्ड-मुण्डक वध कएल गेल। ओहि स्थान पर ई मन्दिर अछि। ४७.परसा सूर्य मन्दिर- झंझारपुरमे सग्रामसँ पाँच किलोमीटर पूर्व परसा गाममे साढ़े चारि फीटक भव्य सूर्य मूर्त्ति भेटल अछि। ४८.बिसफी- मधुबनी जिलाक बेनीपट्टी थानामे कमतौल रेलवे स्टेशनसँ ६ किलोमीटर पूब आ कपिलेश्वर स्थानसँ ४ किलोमीटर पश्चिम बिसफी गाम अछि। विद्यापतिक जन्म-स्थान ई गाम अछि। एतए विद्यापतिक स्मारक सेहो अछि। ४९.मंदार पर्वत-बांका स्थित स्थलमे मिथिलाक्षरक गुप्तवंशीय ७म् शताब्दीक अभिलेख अछि। समुद्र मंथनक हेतु मंदारक प्रयोग भेल छल। निकटमे बौंसीमे जैनक बारहम तीर्थंकर वासुपूज्य नाथक दूटा मूर्त्ति अछि, पैघ मूर्ति लाल पाथरक अछि तँ दोसर काँसाक जकर सोझाँ दूटा पदचिन्ह अछि। जैनक बारहम तीर्थंकर वासुपूज्य नाथक जन्म चम्पानगरमे आ निर्वाण एतहि भेल छलन्हि। ५०.विक्रमशिला-भागलपुरमे स्थित प्राचीन विश्वविद्यालय। भागलपुर जिलाक अंतीचक गाममे राजा धर्मपालक बनाओल बुद्ध विश्वविद्यालय अछि। १०८ व्याख्याता लेल रहबाक स्थान आ बाहरसँ पढ़ए बला लेल सेहो स्थान एतए निर्मित अछि ५१. मिथिलाक बीस टा सिद्ध पीठ- १.गिरिजास्थान(फुलहर, मधुबनी), २.दुर्गास्थान(उचैठ, मधुबनी), ३.रहेश्वरी (दोखर, मधुबनी), ४.भुवनेश्वरीस्थान(भगवतीपुर, मधुबनी), ५.भद्रकालिका(कोइलख, मधुबनी), ६.चमुण्डा स्थान(पचाही, मधुबनी), ७.सोनामाइ(जनकपुर, नेपाल), ८.योगनिद्रा(जनकपुर, नेपाल), ९.कालिका स्थान (जनकपुर स्थान), १०.राजेश्वरी देवी(जनकपुर, नेपाल), ११.छिनमस्ता देवी(उजान, मधुबनी), १२.बनदुर्गा(खररख, मधुबनी), १३.सिधेश्वरी देवी(सरिसव, मधुबनी), १४.देवी-स्थान (अंधरा ठाढ़ी, मधुबनी),१५.कंकाली देवी (भारत नेपाल सीमा आ रामबाग प्लेस, दरभंगा), १६.उग्रतारा (महिषी, सहरसा), १७.कात्यानी देवी(बदलाघाट, सहरसा), १८.पुरन देवी(पूर्णियाँ), १९.काली स्थान (दरभंगा), २०.जैमंगलास्थान(मुंगेर), ५२. जनकपुर परिक्रमाक १५ स्थल आ ओतुक्का मुख्य देवता १. हनुमाननगर- हनुमानजी, २.कल्याणेश्वर- शिवलिंग, ३.गिरिजा-स्थान- शक्ति, ४.मटिहानी- विष्णु मन्दिर, ५.जालेश्वर- शिवलिंग, ६.मनाई- माण्डव ऋषि, ७. श्रुव कुण्ड- ध्रुव मन्दिर, ८.कंचन वन- कोनो मन्दिर नञि मात्र मनोरम दृश्य, ९.पर्वत- पाँच टा पर्वत, १०.धनुषा- शिवधनुषक टुकड़ी, ११.सतोखड़ी- सप्तर्षिक सात टा कुण्ड, १२.हरुषाहा- विमलागंगा, १३. करुणा- कोनो मन्दिर नहि मात्र मनोरम दृश्य, १४. बिसौल- विश्वामित्र मन्दिर, १५.जनकपुर।“मिथिलायदयश्च मध्यंते रिपवो इति मिथिला नगरी” - मिथिला जतए शत्रुकेँ मथल जाइत अछि- पाणिनीक विवरण ।
५३. चैनपुर सहरसा- मिथिलाक एकमात्र नीलकंठ मन्दिर, संगमे आदिकालीन भव्य काली-मन्दिर सेहो एहि गाममे अछि। महाशिवरात्रि आ कालीपूजा बड़ धूमधामसँ चैनपुरमे होइत अछि। ५४.धरहरा, बनमनखी, पूर्णियाँमे नरसिंह अवतारक स्थान अछि, एकटा खोह जेकाँ पैघ पाया अछि जाहिमे जे किछु फेकबैक तँ बड़ी काल धरि गों-गोँ अबाज होइत रहत। ई स्थान आब नरसिंह भगवानक मूर्ति आ मन्दिरक कारणसँ बेश विकसित भए गेल अछि। ५५.नेऊरी: दरभंगाक बिरौल प्रखण्डसँ १३.किलोमीटर पश्चिममे एकटा गढ़ अछि जे लोरिकक मानल जाइत अछि। ५६.दरभंगा कैथोलिक चर्च: १८९१मे स्थापित ई चर्च १८९७ केर भूकम्पमे क्षतिग्रस्त भए गेल। एकरा होली रोजेरी चर्च सेहो कहल जाइत अछि। ५७.सेंट फांसिस ऑसिसी चर्च मुजफ्फरपुरमे अछि। ५८.भिखा सलामी मजार: गंगासागर पोखरि दरभंगाक महारपर ई मजार अछि। ५९.दरभंगा टावर मस्जिद इस्लाम मतावलम्बीक एकटा भव्य मस्जिद आ धार्मिक स्थल अछि। ६०. मकदूम बाबाक मजार:ललित नारायण मिथिला विश्ववविद्यालय आ कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय दरभंगाक बीच स्थित ई मजार हिन्दू आ मुस्लिम मतावलम्बीक एकटा पावन स्थान अछि। ६१.चम्पानगर:भागलपुरक पश्चिममे, आब नगरसँ सटि गेल अछि। ई जैन लोकनिक एकटा पवित्रस्थल अछि, एतए महावीर तीनटा बस्सावास कएने रहथि। दू टा जैन मन्दिर एतए अछि, जे जैनक बारहम तीर्थंकर वासुपूज्य नाथकेँ समर्पित अछि। ६२.बसैटी अभिलेख- पूणियाँमे श्रीनगर लग मिथिलाक्षरक ई अभिलेख मिथिलाक पहिल महिला शासक रानी इद्रावतीक राज्यकालक वर्णन करैत अछि। एकर आधार पर मदनेश्वर मिश्र ’एक छलीह महारानी’ उपन्यास सेहो लिखने छथि। बाइसी-बसैटी, अररिया मिथिलाक्षर अभिलेख- रानी इन्द्रावती (१७८४-१८०२) जे फूड-फॉर-वर्क आ अन्य कल्याणकारी कार्यक प्रारम्भ कएलन्हि केर मिथिलाक्षर अभिलेख एतए एकटा मन्दिरक ऊपरमे ताम्र-पत्रपर कीलित अछि जे निम्न प्रकारसँ अछि:- बसैटी (अररिया) बिहार, शिव मन्दिरक मिथिलाक्षर अभिलेखक देवनागरी लिप्यान्तरण।
वंशे सभा समाने सुरगन बिदिते भू सूरस्यावतिर्ना। राजाभूतकृष्णदेवोनृपति समरसिंहा मिधस्यात्मजातः॥ यस्मिन् राज्याभिषेकं फलयितु मिवतद्भक्तितुष्टोमहेशः। कैलाशाद् भूगतेद्योप्यधिन सतितरा वैद्यनाथेन नाम्नाः॥ तस्य तनुजः सुकृतिनृपवरौ विश्वनाथ राजा भूत। विरनारायण राजस्तस्याप्यासीद् सुतस्य॥ नरनारायण राजो नरपति कुल मौलि भूषणम् पुनः। अर्थिनकल्पद्रूमदूव सुरगन वंसावतंसोत्भूत॥२॥ तस्मादि वैरिकुल सूदन रामचन्द्र नारायणो नरपतिस्तनयो वभूक। संमोदिता दश दिशो निज कीर्ति चन्द्र ज्योतिस्नेहाभिरार्थ निवहः सुरिवतश्चयेण॥३।। यद्दानवारि परिवर्द्धित वारि राशि सक्तान्त कीर्ति विमलेन्दु मरिचिकाभिः। प्रोद्योतिता दशदिशः सतनुज इन्द्रनारायणोस्य कुलभूषण राजराजः॥४॥ तेनच सत्कुल जाता तनया मनबोध शझणिः कृतिनः। परिणीता बन्धु यत्नैस्त्रिलोचननाद्रि पुत्रीव॥५॥ यस्या प्रतापतरणावुदितेऽपिचिते चिन्तारजविन्द वनमालभते विकासम सौहृदय हृदय मकरन्द च उद्येन तत्रैव यद् गुणगणा मधुपन्ति योगात्॥६॥ यज्ञेवर्देव गणो द्विजाति निवहः सस्तायनत्यादरैः। दर्दानैपूर्णः मनोरथोऽर्थपरन सन्तितिनिः सज्जना॥७॥ गर्ज्जद वैरि मदान्धवारण चपश्चञ्चःपेतापांकुरौ। र्वस्याः सर्वदृशेकृतागुण चमेर्मस्याश्च भूमीतने॥८॥ श्री श्री इन्दुमति सतीमतिमती देवी महाराज्ञिका जाता मैथिल माण्डराऽमिछकुलात् मोधोसरी जानयाः। दानै कल्पलता मधः कृतवती श्री विष्णु सेवा परा पातिव्रत्य परायणाच सततं गंगेर सम्पारणी॥९॥ शाकेन्दु नवचन्द्र शैलधरणी संलक्षित फाल्गुने मासि श्रेष्ठतरे सिताहनि शितेपक्षे द्वितीयायां तिथौ। भूदेवैर्वर वैदिकेर्म्मठमयं निर्भारय सच्चिनिमिः तत्रे सेन्दुमति सुरस्य विधित्र प्राण प्रतिष्ठाव्यधात्॥१०॥ सोदरपुर सम्भव राजानुकम्पापजिवनिकृतिनः। श्री शुभनायस्य कृतिर्मिदं विज्ञेक्षं सन्रन्तताम्॥११॥ विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम्: VIDEHA: AN IDEA FACTORY (c)२००४-२०२२. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHAसम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: डॉ उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम विलास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक -स्त्री कोना- इरा मल्लिक। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि)editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि। एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै, आ से हानि-लाभ रहित आधारपर छै आ तैँ ऐ लेल कोनो रॊयल्टीक/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै। तेँ रॉयल्टीक/ पारिश्रमिकक इच्छुक विदेहसँ नै जुड़थि, से आग्रह। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) २००४-२०२२ सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। भालसरिक गाछ जे सन २००० सँ याहूसिटीजपर छल http://www.geocities.com/bhalsarik-gachh/, http://www.geocities.com/gajendrathakur/ आदि लिंकपर आ अखनो ५ जुलाइ २००४ क पोस्ट http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html (किछु दिन लेल http://videha.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html लिंकपर, स्रोत wayback machine of https://web.archive.org/web/*/videha 258 capture(s) from 2004 to 2016- http://videha.com/ भालसरिक गाछ-प्रथम मैथिली ब्लॉग / मैथिली ब्लॉगक एग्रीगेटर) केर रूपमे इन्टरनेटपर मैथिलीक प्राचीनतम उपस्थितक रूपमे विद्यमान अछि। ई मैथिलीक पहिल इंटरनेट पत्रिका थिक जकर नाम बादमे १ जनवरी २००८ सँ "विदेह" पड़लै।इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् 'विदेह' ३४६ म अंक १५ मई २०२२ (वर्ष १५ मास १७३ अंक ३४६) विदेह: मैथिली साहित्य आन्दोलन VIDEHA: AN IDEA FACTORY मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA
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9:54 a Se) < _-, Gajendra Thakur shared a link. eee Admin 23 Jun 207 - हि NUp://WWww.google.com/transconsole/glyl/CNOOSerroject http://www.google.com/transconsole/giyl/ chooseActivity?project=gws&langcode=bh google.com Google in Your Language ॥है Like © Comment @® Send © You, Ashish Anchinhar and 7 others —-, Gajendra Thakur Author Admin १११ नीचाँक पाँचू साइट विकी मैथिली प्रोजेक्टक अछि, प्रोजेक्टकें आगाँ बढ़ाऊ। http://translatewiki.net/wiki/Project:Translator http://meta.wikimedia.org/wiki/ Requests_for_new_languages/ Wikipedia_Maithili http://translatewiki.net/wiki/Special:Translate? task=untranslated&group=core- mostused&limit=2000&language=mai http://incubator.wikimedia.org/wiki/Wp/mai http://translatewiki.net/wiki/ MediaWiki:Mainpage/mai 0y Like 30 Write a comment... GIF © 0 € am & @ @ ८ @ Home Friends Watch Profile Notifications Menu —— eee
9:53 o > लि < -, Gajendra Thakur shared a link. eee Admin 23 Jun 207 - हि गूगल ट्रांसलेशन टूलमे "बिहारी" भाषाक बदलामे मैथिली लेल अलग ट्रांसलेशन टूल बनेबाक आवेदन विदेहक सदस्यगण द्वारा देल गेल अछि। अपन योगदान गूगल ट्रांसलेट लेल करू, आ कएल सम्पादन बदलबा काल कारण मे (अंग्रेजीमे) "बिहारी" नाम्ना कोनो भाषा नै हेबाक चर्चा करू। ऐ लिंकपर अनुवाद HS; गूगल एकाउंट सँ लॉग इन केलाक बाद | http://www.google.com/transconsole/giyl/chooseProject http://www.google.com/transconsole/giyl/ chooseActivity?project=gws&langcode=bh google.com Google in Your Language a Like © Comment ® Send © You, Ashish Anchinhar and 7 others 7... Gajendra Thakur Author Admin +++ नीचाँक पाँचू साइट विकी मैथिली प्रोजेक्टक अछि, प्रोजेक्टकें आगाँ बढ़ाऊ। http://translatewiki.net/wiki/Project:Translator http://meta.wikimedia.org/wiki/ Requests_for_new_languages/ Wikipedia_Maithili http://translatewiki.net/wiki/Special:Translate? task=untranslated&group=core- mostused&limit=2000&language=mai Write a comment... GIF, © 0 € am & @ @ ८ @ Home Friends Watch Profile Notifications Menu —— eee
9:25 all. @ ) Videha ‘faze’ प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका १ फरवरी २००८ (वर्ष । मास 2 अंक 3) favre fee सक्कि Videha Maithili Formightly € Magazine fare विदेह a me where विकीपीडिया पर मैथिली पर लेख ते छल yer मैथिलीमे लेख नहि छल,कारण मैथिलीक विकीपीडियाक स्वीकृति नहि मेटल छल। हम बहुत Port एहिमे लागल रही,आ' सूचि करैत afta छी जे 27.07.2008 कें भाषारें विकी शुरू करवाक हेतु स्वीकृति भेटल छैक, मुदा एहि हेतु कमसें कम पाँच गोटे,विभिन्न जगहसें एकर एडिटरक रूपमे नियमित रे कार्य करथि तखने योजनाकें पूर्ण स्वीकृति भेटतैक। नीचां लिखल लिंक पर जाय एडिट कय एहि प्रोजेक्टमे अहाँ सभ सहयोग करव, से आशा अछि। पद्चिला अंकमे देवनागरी कोना लिखू ,एहि पर हम लेख लिखने रही। इंगलिश कीबोर्ड पर ओहि तरहे लिखने विकीमे सेहो मैथिली लिखि सकैत छी। एम. गेरार्डक माध्यम श्री अंशुमन पाष्डेयक, जिनकर मैथिलीक युनीकोडमे स्थानक आवेदन लंबित अछि, अनुरोध मेटल छल, ओ' सूचना मैंगलन्ि जाहि at स्पष्ट ee बंगला लिपि आ' मैथिली लिपिक मध्य अंतर ज्ञात भय सकयाई सूचना हम एम. गेरा्डक माध्यम हुतका पठा देलियन्हि, कारण पाण्डेयजी ईमेल एडरेस हमरा नहि अछि। विकीमे पूर्ण स्वीकृतिक हेतु एहिं लिंक सभ पर राखल प्रोजेक्टकें ऑँगा बढ़ाऊ। http:/meta.wkimedia org/wiki/Requests_for_new_languages/WMKipedia_Maithili http:/Anaubator.wkimedia org/wki/Wpimai http://transiatewiki nevwiki/MediaWiki:Mainpage/mai http://translatewiki netwiki/Sped al: Translate 7task=untransiated&group=core- mostused&limit=20008&language=mai अपनेक प्रतिक्रिया आ' रचनाक प्रतीक्षा aft नई दिल्ली fiw LLG 07022008 & सर्वाधिकार लेखकाधीन ar जतय लेखकक नाम नहि af ततय संपादकाधीना Rite (nits) संपादक-बचेन्द्र ठाकुरा एतय प्रकाशित रचना समक कॉपी राइट लेखक लोकनिक लगमे रहतन्द्वि, मात्र एकर कम प्रकाशनक अधिकार Ui Safer सैका स्वनाकार अप्पन मौलिक a, अश्रकाशित रचना सम(जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व deere मध्य खन्ि) ggsendra@ychoo.cain aft ggajendra@idehacoin’ मेल अटैचमेष्टक रूपये .60८, 6०0, Lot eat pdf फॉर्मेटमें पठाय सकेत खजिरचनाक संग रचनाकार अप्पन संक्षिप्त 'परिचव(बायोदाटा) ar अप्यन स्कैन कल मेल फोटो पठेताह, से आशा sta छी। रचनाक संग ई घोषणा रहव-ने ई रचना मौलिक af ar पहिल प्रकाशनक हेतु विदेज्नंपाकिक)-ई-पत्रिकाकें देल जा रहल afer मेल प्राप्त होवनाक बाद ययासंभव शीज्रतासें (सात दिनमें) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायता 2 Videha ‘faze’ प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका १ फरवरी २००८ (वर्ष 4 मास 2 अंक 3) favre साशिक सक्कि Videha Maithili Formighty 6 Magazine fare विदेह vensfitehtrhvnidera coin ma wenger . शोध लेख, @ books.googleusercontent.com eS