VIDEHA — Issue 348 / अंक ३४८

Publication: VIDEHA · Issue: 348
Open original PDF at Internet Archive

'विदेह' ३४८ म अंक १५ जून २०२२ (वर्ष १५ मास १७४ अंक ३४८) ऐ अंकमे अछि:- १. गजेन्द्र ठाकुर- संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल  मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल सेहो] [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] [FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI ALSO] रवीन्द्रनाथ ठाकुर विशेषांक २.१.प्रस्तुत विशेषांकक संदर्भमे २.२.श्री रवीन्द्र नाथ ठाकुर २.३.प्रदीप पुष्प- गीतक अप्रतिम शिल्पकार: रवीन्द्र नाथ ठाकुर २.४.अजित कुमार झा- मिथिला मैथिली आन्दोलनक पाथेय: श्रद्धेय रवीन्द्र जी २.५.जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’-सभटा सोनारकें नहि गढ़बाक कला होइछ  (गजलक समीक्षा : पोथी ‘लेखनी एक रंग अनेक’) २.६.नारायणजी- आधुनिक मैथिली गीतक सजग उन्नायक २.७.लक्ष्मण झा सागर- मिथिलाक मुकुटमणि रवीन्द्र २.८.डॉ. कैलाश कुमार मिश्र- रवीन्द्रनाथ ठाकुर, हुनक रचना आ जनमानस केर उदासीनता २.९.जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’- भरि नगरीमे शोर २.१०.आशीष अनचिन्हार- रवीन्द्रनाथ ठाकुर जीक "कथित गजल" Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Books/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाउ। VIDEHA ARCHIVE विदेह पेटार View Videha googlegroups (since July 2008) view Videha Facebook Official Group (since January 2008)- for announcements १. गजेन्द्र ठाकुर Videha e-Learning ........................................................................................................................ [संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल  मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री] ................................................................................................................... [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल सेहो] [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] [FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI ALSO] .................................................................................................................. [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल/ FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI] NTA_UGC_NET_MAITHILI_01 NTA_UGC_NET_MAITHILI_02 NTA_UGC_NET_MAITHILI_03 (श्री शम्भु कुमार सिंह द्वारा संकलित) ................................................................................................................... यू. पी. एस. सी. (मेन्स) ऑप्शनल: मैथिली साहित्य विषयक टेस्ट सीरीज यू.पी.एस.सी. क प्रिलिमिनरी परीक्षा सम्पन्न भऽ गेल अछि। जे परीक्षार्थी एहि परीक्षामे उत्तीर्ण करताह आ जँ मेन्समे हुनकर ऑप्शनल विषय मैथिली साहित्य हेतन्हि तँ ओ एहि टेस्ट-सीरीजमे सम्मिलित भऽ सकैत छथि। टेस्ट सीरीजक प्रारम्भ प्रिलिम्सक रिजल्टक तत्काल बाद होयत। टेस्ट-सीरीजक उत्तर विद्यार्थी स्कैन कऽ editorial.staff.videha@gmail.com पर पठा सकैत छथि, जँ मेलसँ पठेबामे असोकर्ज होइन्हि तँ ओ हमर ह्वाट्सएप नम्बर 9560960721 पर सेहो प्रश्नोत्तर पठा सकैत छथि। संगमे ओ अपन प्रिलिम्सक एडमिट कार्डक स्कैन कएल कॉपी सेहो वेरीफिकेशन लेल पठाबथि। परीक्षामे सभ प्रश्नक उत्तर नहि देमय पड़ैत छैक मुदा जँ टेस्ट सीरीजमे विद्यार्थी सभ प्रश्नक उत्तर देताह तँ हुनका लेल श्रेयस्कर रहतन्हि। विदेहक सभ स्कीम जेकाँ ईहो पूर्णतः निःशुल्क अछि।- गजेन्द्र ठाकुर संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सर्विसेज (मुख्य) परीक्षा, मैथिली (ऐच्छिक) लेल टेस्ट सीरीज/ प्रश्न-पत्र- १ आ २ TEST SERIES-1 TEST SERIES-2 .................................................................................................................. MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) UPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS BPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. (ऐच्छिक) मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. (अनिवार्य) मैथिली प्रश्नपत्र- बी.पी.एस.सी.(ऐच्छिक) .................................................................................................................. मैथिलीक वर्तनी १ मैथिलीक वर्तनी- विदेह मैथिली मानक भाषा आ मैथिली भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम भाषापाक २ मैथिलीक वर्तनीमे पर्याप्त विविधता अछि। मुदा प्रश्नपत्र देखला उत्तर एकर वर्तनी इग्नू BMAF001 सँ प्रेरित बुझाइत अछि, से एकर एकरा एक उखड़ाहामे उनटा-पुनटा दियौ, ततबे धरि पर्याप्त अछि। यू.पी.एस.सी. क मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेल सेहो ई पर्याप्त अछि, से जे विद्यार्थी मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेने छथि से एकर एकटा आर फास्ट-रीडिंग दोसर-उखड़ाहामे करथि| IGNOU  इग्नू      BMAF-001 .................................................................................................................... MAITHILI (OPTIONAL) TOPIC 1    [Place of Maithili in Indo-European Language Family/ Origin and development of Maithili language (Sanskrit, Prakrit, Avhatt, Maithili) भारोपीय भाषा परिवार मध्य मैथिलीक स्थान/ मैथिली भाषाक उद्भव ओ विकास (संस्कृत, प्राकृत, अवहट्ट, मैथिली)] TOPIC 2    (Criticism- Different Literary Forms in Modern Era/ test of critical ability of the candidates) TOPIC 3    (ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददास सिलेबसमे छथि आ रसमय कवि चतुर चतुरभुज विद्यापति कालीन कवि छथि। एतय समीक्षा शृंखलाक प्रारम्भ करबासँ पूर्व चारू गोटेक शब्दावली नव शब्दक पर्याय संग देल जा रहल अछि। नव आ पुरान शब्दावलीक ज्ञानसँ ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददासक प्रश्नोत्तरमे धार आओत, संगहि शब्दकोष बढ़लासँ खाँटी मैथिलीमे प्रश्नोत्तर लिखबामे धाख आस्ते-आस्ते खतम होयत, लेखनीमे प्रवाह आयत आ सुच्चा भावक अभिव्यक्ति भय सकत।) TOPIC 4                (बद्रीनाथ झा शब्दावली आ मिथिलाक कृषि-मत्स्य शब्दावली) TOPIC 5                (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोरिक गाथामे समाज ओ संस्कृति) TOPIC 6                (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- विद्यापति) TOPIC 7                (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- पद्य समीक्षा- बानगी) TOPIC 8                (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोक गाथा नृत्य नाटक संगीत) TOPIC 9                (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- यात्री) TOPIC 10               (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली रामायण) TOPIC 11               (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली उपन्यास) TOPIC 12               (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- शब्द विचार) TOPIC 13               (तिरहुता लिपिक उद्भव ओ विकास) TOPIC 14                 (आधुनिक नाटकमे चित्रित निर्धनताक समस्या- शम्भु कुमार सिंह)् TOPIC 15                 (स्वातंत्र्योत्तर मैथिली कथामे सामाजिक समरसता- अरुण कुमार सिंह) TOPIC 16                 (यू. पी.एस.सी. मैथिली प्रथम पत्रक परीक्षार्थी हेतु उपयोगी संकलन, मैथिलीक प्रमुख उपभाषाक क्षेत्र आ ओकर प्रमुख विशेषता, मैथिली साहित्यक आदिकाल, मैथिली साहित्यक काल-निर्धारण- शम्भु कुमार सिंह) TOPIC 17                (मैथिली आ दोसर पुबरिया भाषाक बीचमे सम्बन्ध (बांग्ला, असमिया आ ओड़िया) [यू.पी.एस.सी. सिलेबस, पत्र-१, भाग-“ए”, क्रम-५]) TOPIC 18                 [मैथिली आ हिन्दी/ बांग्ला/ भोजपुरी/ मगही/ संथाली- बिहार लोक सेवा आयोग (बी.पी.एस.सी.) केर सिविल सेवा परीक्षाक मैथिली (ऐच्छिक) विषय लेल] .......................................................................................... GENERAL STUDIES (PRELIMINARY & MAINS) GS (Pre) TOPIC 1 GS (Mains) NCERT-ENVIRONMENT CLASS XI-XII NCERT PDF I-XII SANSAD TV http://prasarbharati.gov.in/ http://newsonair.com/ ............................................................................................ OTHER OPTIONALS IGNOU eGYANKOSH ........................................................................................................................ -गजेन्द्र ठाकुर रवीन्द्रनाथ ठाकुर विशेषांक २.१.प्रस्तुत विशेषांकक संदर्भमे २.२.श्री रवीन्द्र नाथ ठाकुर २.३.प्रदीप पुष्प- गीतक अप्रतिम शिल्पकार: रवीन्द्र नाथ ठाकुर २.४.अजित कुमार झा- मिथिला मैथिली आन्दोलनक पाथेय: श्रद्धेय रवीन्द्र जी २.५.जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’-सभटा सोनारकें नहि गढ़बाक कला होइछ  (गजलक समीक्षा : पोथी ‘लेखनी एक रंग अनेक’) २.६.नारायणजी- आधुनिक मैथिली गीतक सजग उन्नायक २.७.लक्ष्मण झा सागर- मिथिलाक मुकुटमणि रवीन्द्र २.८.डॉ. कैलाश कुमार मिश्र- रवीन्द्रनाथ ठाकुर, हुनक रचना आ जनमानस केर उदासीनता २.९.जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’- भरि नगरीमे शोर २.१०.आशीष अनचिन्हार- रवीन्द्रनाथ ठाकुर जीक "कथित गजल" प्रस्तुत विशेषांकक संदर्भमे नवम्बर 2021 केँ विदेह 'रवीन्द्र नाथ ठाकुर विशेषांक’ प्रकाशित करबाक सार्वजनिक घोषणा केलक आ प्रस्तुत अछि ई विशेषांक। एकरा एहि लिंकपर देखि सकैत छी-घोषणा। किछु आलेख एलाक बाद एकटा निश्चित तारीख केर घोषणा अप्रैल 2022 केँ केलक। एकरा एहि लिंकपर देखि सकैत छी घोषणा। रवीन्द्र नाथ ठाकुरजीक रचना संगे सभसँ बड़का विडंबना ई रहलै जे ओ अतिवादक शिकार भेलै। से अतिवाद चाहे हुनका महिमा मंडित कऽ "अभिनव विद्यापति" कहबाक प्रयासमे देखि सकै छी तँ दोसर दिस हुनकर रचनाकेँ मंचीय कहि खारिज करबामे सेहो अतिवादे छै। हमर अपन मत अछि जे जखन कोनो रचनाकारकेँ इग्नोर करबाक हो तखन ओहि रचनाकारक समकालीन द्वारा कोनो ने कोनो नीक तगमा, विशेषण दऽ देल जाइत छै। आ हम रवीन्द्रजीकेँ "अभिनव विद्यापति" कहबाक अभियानकेँ अही संदर्भमे देखै छी। आ अहँ सभ अनुभव केने हेबै तँ अभिनव विद्यापति कहि देल गेलनि मुदा ओहि लेल जे विमर्श चाही से रवीन्द्रजीक रचना-संसारसँ गाएब रहल। एखन धरि ई बुझबाक प्रयास भेबे नै केलै जे रवीन्द्रजी गीतक राजकुमार किए छथि वा हुनकर रचना मंचीय किए छै। भक्त सभ मंचक निच्चाक थपड़ी गानि, ओकरे मानक मानि कऽ खुश होइत रहलाह तँ प्रगतिशील आलोचक सभ हुनकर लोकप्रियतासँ डेराइत रहला। भक्त आ प्रगतिशील आलोचक दूनूक बीचमे रवीन्द्रजीक प्रतिभा मरैत गेलनि। एहि संदर्भमे हम कहि सकै छी जे विदेहक ई प्रस्तुत विशेषांक एहन पहिल प्रयास अछि जाहिमे ई बुझबाक प्रयास कएल अछि जे रवीन्द्रजीक रचना किए महान वा किए अधम अछि। ई अलग बात जे हम सभ कतेक सफल वा असफल भेलहुँ से पाठक कहता। एहि विशेषांक केर शुरूआत विदेहक आने विशेषांक जकाँ नव आलोचक-समीक्षक सभहक आलेखसँ कएल जा रहल अछि। संगे-संग ई क्रम ने तँ उम्रक वरिष्ठता केर पालन करैए आ ने रचनाक गुणवत्ताक। हँ, एतेक धेआन जरूर राखल गेल छै जे पाठकक रसभंग नहि होइन आ से विश्वास अछि जे रसभंग नै हेतनि। पाठक जखन एहि विशेषांककेँ पढ़ताह तँ हुनका वर्तनी ओ मानकताक अभाव लगतनि। वर्तनीक गलती जे थिक से सोझे-सोझ हमर सभहक गलती थिक जे हम सभ संशोधन नै कऽ सकलहुँ मुदा ई धेआन रखबाक बात जे विदेह शुरुएसँ हरेक वर्तनी बला लेखककेँ स्वीकार करैत एलैए। तँइ मानकता अभाव स्वाभाविक। एकर बादो बहुत वर्तनीक गलती रहल गेल अछि जे कि हमरे सभहक गलती अछि।  मैथिलीमे किछुए एहन पत्रिका अछि जकर वर्तनी एकरंगक रहैत अछि आ ई हुनक खूबी छनि मुदा जखन ओहो सभ कोनो विशेषांक निकालै छथि तखन वर्तनी तँ ठीक रहैत छनि मुदा सामग्री अधिकांशतः बसिये रहैत छनि। ऐतिहासिकताक दृष्टिसँ कोनो पुरान सामग्रीक उपयोग वर्जित नै छै मुदा सोचियौ जे 72-80 पन्नाक कोनो प्रिंट पत्रिका होइत छै ताहिमे लगभग आधा सामग्री साभार रहैत छनि, तेसर भागमे लेखक केर किछु रचना रहैत छनि आ चारिम भागमे किछु नव सामग्री रहैत छनि। मुदा हमरा लोकनि नव सामग्रीपर बेसी जोर दैत छियै। एकर मतलब ई नहि जे वर्तनीमे गलती होइत रहै। हमर कहबाक मतलब ई जे संपादक-संयोजककेँ कोनो ने कोनो स्तरपर समझौता करहे पड़ैत छै से चाहे वर्तनीक हो कि, मुद्राक हो कि विचारधारक हो कि सामग्रीक हो। हमरा लोकनि वर्तनीक स्तरपर समझौता कऽ रहल छी मुदा कारण सहित। प्रिंट पत्रिका एक बेर प्रकाशित भऽ गेलाक बाद दोबारा नै भऽ सकैए (भऽ तँ सकैए मुदा फेर पाइ लागि जेतै) तँइ ओकर वर्तनी यथाशक्ति सही रहैत छै। इंटरनेटपर सुविधा छै जे बीचमे (इंटरनेटसँ प्रिंट हेबाक अवधि) ओकरा सही कऽ सकैत छी मुदा समाग्रिए बसिया रहत तँ सही वर्तनी रहितो नव अध्याय नै खुजि सकत तँइ हमरा लोकनि वर्तनी बला मुद्दापर समझौता केलहुँ।  हमरा लोकनि कएलनि, कयलनि ओ केलनि तीनू शुद्ध मानैत छी, एतेक शुद्ध मानैत छी एकै रचनामे तीनू रूप भेटि जाएत। आन शब्दक लेल एहने बूझू। जेना कि नीचा परिचय बला पन्नापर सूचित केने छी जे 18 मइ 2022केँ रवीन्द्रजी एहि संसारसँ चलि गेलाह आ तकर बादो किछु लेख आएल अछि। तँइ एहि विशेषांक केर किछु लेखपर एकर असरि भेटि सकैए। आब एकटा लोक प्रवादपर आबी। प्रवाद एहन चीज छै जाहिसँ राम द्वारा सीताक दोसर बेर निर्वासन भऽ जाइत छै अग्निपरिक्षाक बादो। तँइ एहिपर बात करब उचित। संयोग वा कुसंयोग जे हो मुदा विदेहक विशेषांक केर घोषणा होइते किछु लेखक एहि संसारकेँ छोड़ि देलाह। रवीन्द्रजीक संगे इएह भेल। मुदा हमरा जनैत ई एकटा संयोग छै। विदेहक विशेषांक सभ शुरू होमएसँ पहिने आ तकर बादो ओहन लेखक सभ संसारसँ विदा भेलाह जिनकापर विदेह कोनो घोषणा नै केने छल। निच्चा किछु एहन तथ्य सभ दऽ रहल छी जाहिसँ मैथिली साहित्य केर असल बात बूझि सकबै-- 1) विदेहसँ पहिने ई बूझल जाइत छलै जे लेखक केर विशेषांक मरलाक बादे प्रकाशित हेबाक चाही। जँ अहाँ सभ पुरान पत्रिकाक लेखक केंद्रित विशेषांक देखबै तँ ई बात साबित भऽ जाएत। पुरान किए वर्तमानोमे सेहो मृत्युसँ पहिनेक चर्चा आ मृत्युक बादक चर्चा देखब तँ इएह साबित हएत जे मैथिल मूलतः मृत्युपूजक होइत छथि। मैथिलीक मुख्यधारामे एखनो इएह मानल जाइत छै। विदेह एहि रूढ़िकेँ तोड़लक। आ जेना कि संसारक नियम छै जे अंधविश्वासकेँ टुटबाक समयमे जँ कोनो घटना घटै छै तँ ओकरो तोड़हे बलासँ जोड़ि देल जाइत छै। संभवतः विदेहक संगे इएह भऽ रहल छै। 2) विदेह जिबैत मुदा उपेक्षित लेखकपर प्रयास करै छै आ एहि क्रममे बहुत एहन लेखक छथि जिनकर उम्र पूरि गेल छनि मुदा ओ उपेक्षित छथि। तँइ हमरा सभ लग संकट अछि जे किनकापर निकालू। जँ एकटा वरिष्ठ उपेक्षितकेँ कतिया कऽ दोसर कम उम्र बलापर निकाली तँ ईहो उचित नै। 3) जेना कि उपर कहने छी विदेहक विशेषांकमे साभार आलेख नइ के बराबर लेल जाइत छै तँइ फ्रेश आलेख पुरबामे समय लगैत छै। आ समय लगबाको चाही। नीक वस्तु, नीक रचना लेल समय चाहबे करी। हमरा लोकनि जतेक संभव भऽ सकैए ततबे कऽ रहल छी। ओनाहुतो जेना हमरा सभकेँ सहयोग भेटि रहल अछि ताहि हिसाबें लगभग दस बर्खमे विदेह असगरे ई लक्ष्य पाबि लेत। आभार हुनका सभकेँ जे हमर एहि काजमे कनियों सहयोग दै छथि। विदेह आगुओ एहन विशेषांक केर प्रयास करत। जिनका आपत्ति हेतनि ओ नै करबाक लेल कहता आ हम सभ पाछू हटि जाएब। अइसँ बेसी आर की भऽ सकैए। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। श्री रवीन्द्र नाथ ठाकुर एहि परिचयात्मक विवरणमे अधिकांश तथ्य आदरणीय रवीन्द्र नाथ ठाकुरजी द्वारा फेसबुकपर पोस्ट कएल विवरणसँ लेल गेल अछि (मूलतः हिंदीमे छल) जे कि संभवतः हुनकर इष्ट-मित्र ओ परिजन द्वारा तैयार कएल गेल हेतनि। हुनका सभ लोकनिकेँ आभार। एहि विवरणमे एक-दू ठाम हमरा विसंगति नजरि आएल जकरा हम अपन ज्ञानसँ ठीक केलहुँ आ ओहिठाम पाठक लेल एकटा सूचना देलहुँ अछि। बहुत संभव जे कोनो आन सूचनाक संबंधमे हमरा ज्ञान नै हो आ विदेहक एहि पन्नापर सेहो विसंगति आबि गेल हो से संभव। पाठक एकरा सही करबाक लेल सहयोग करथि से आग्रह (संपादक)। श्री रवीन्द्र नाथ ठाकुर पिता: स्वर्गीय केदार नाथ ठाकुर जन्म तिथि: 08-08-1938 (आठ अगस्त सन उन्नीस सौ अड़तीस) मृत्यु-18 मई, 2022 (नोएडा) स्थायी पता: ग्राम-पोस्ट - धमदाहा (मध्य), वार्ड संख्या-7, जिला - पूर्णियाँ (बिहार) वर्तमान पता: A -327, सैक्टर-46, नोएडा, जिला- गौतम बुद्ध नगर, उत्तर प्रदेश ई-मेल: abhinavvidyapati@gmail.com नोट- बहुत ठाम हुनकर जन्म बर्ख 1936 लिखल भेटत मुदा उपर देल 1938 हुनके द्वारा देल पोस्टसँ लेल गेल अछि। शैक्षणिक पृष्ठभूमि - प्राथमिक शिक्षा: संस्कृत माध्यमिक विद्यालय, धमदाहा (पूर्णियाँ) इण्टर एवं स्नातक: पूर्णियाँ कॉलेज, पूर्णियाँ (बिहार) सेवा (पूर्णकालिक नौकरी)-धमदाहा माध्यमिक विद्यालयमे अस्थायी शिक्षक। • माध्यमिक विद्यालय डुंगरा, भवानीपुरक संस्थापक प्रधानाध्यापक। संस्कृत उच्च वि0 वख्तियारपुर जिला पटनामे उप-प्रधानाध्यापक। वर्ष 1960 मे वित्त विभाग (राष्ट्रीय बचतसंगठन) बिहार सरकारसँ वर्ष 1980 मे राजपत्रित पदाधिकारीक रूपमे ऐच्छिक सेवा-निवृत्त। बिहार सरकार शिक्षा विभाग द्वारा गठित "मैथिली अकादमी"मे लियन सर्विसक अंतर्गत सहायक निदेशक, उप निदेशक एवं निदेशक-सह सचिव केर पदपर क्रमश: अधिसूचनाक आधारपर सेवा दान। (विशेष उपलब्धि- मैथिली भाषाक प्रथम शब्दकोशक दू भागमे प्रकाशन) साहित्यिक कृति - प्रकाशित पोथी- 1) चलू-चलू बहिना (गीत संग्रह) कन्हैया लाल कृष्णदास, दरभंगा वर्ष-1961 2) जहिना छी तहिना (गीत संग्रह) ग्रंथालय प्रकाशन, दरभंगा, वर्ष-1963 3) चित्र-विचित्र (प्रयोदवादी कविता), स्व प्रकाशित, वर्ष-1966 4) नर -गंगा (लघु महाकाव्य), स्वप्रकाशित, वर्ष-1968 5) सीता (खण्डकाव्य) ग्रंथालय प्रकाशन, दरभंगा, वर्ष-1968 6) श्रीगोनू झा (उपन्यास) ग्रंथालय प्रकाशन, दरभंगा, वर्ष-1969 7) एक राति (नाटक) ग्रंथालय प्रकाशन, दरभंगा, वर्ष-1969 8 एक मिनट की रानी (हिंदी नाटक), ग्रंथालय प्रकाशन, दरभंगा, वर्ष-1970 9) स्वतंत्रता अमर हो अमर (देश भक्ति लोक गीत संग्रह), चेतना समिति, पटना, वर्ष-1972 10) अति-गीत(लोकगीत), पूर्वाञ्चल प्रकाशन, पटना, वर्ष-1976 11) प्रगीत (लोक गीत), पूर्वाञ्चल प्रकाशन, पटना, वर्ष-1976 12) सुगीत (गीतसंग्रह), पूर्वाञ्चल प्रकाशन, पटना, वर्ष-1976 13) रवीन्द्र पदावली (भक्ति एवं व्यवहारगीत), पूर्वाञ्चल प्रकाशन, पटना, वर्ष-1976 14) पञ्चकन्या (प्रयोगधर्मी खण्डकाव्य), पूर्वाञ्चल प्रकाशन, पटना, वर्ष-1976 15) लेखनी एक रंग अनेक (मैथिली ग़ज़ल संग्रह), पूर्वाञ्चल प्रकाशन, पटना, वर्ष-1985 16) दो फूल, दीपायतन, बिहार सरकार, पटना 17) प्रत्यय (कविता एवं गीत), पूर्वाञ्चल प्रकाशन, पटना, वर्ष-1999 18) श्री सीता चालीसा (धार्मिक पुस्तिका), पूर्वाञ्चल प्रकाशन, पटना, वर्ष-1999 19) रवीन्द्र पद्यावली वर्ष-2022 नोट- लेखनी एक रंग अनेक नामक पोथीक प्रकाशन वर्ष 1978 देल गेल छलै मुदा हमरा हिसाबें ई वर्ष 1985 वा तकर बाद प्रकाशित भेल अछि कारण एहि पोथीक भूमिकामे तारीख 15 अगस्त 1985 केर तारीख लिखल अछि आ भूमिका अपने रवीन्द्रजी लिखने छथि। एहि पोथीक संबंधमे ईहो लिखल भेटल जे ई पोथी "प्रथम मैथिली ग़ज़ल संग्रह" अछि मुदा ई सही नै अछि। एहि पोथीक भूमिका केर फोटो परिचयक अंतमे देल जा रहल अछि (संपादक) । विशेष द्रष्टव्य- 1) रवीन्द्र जी द्वारा लिखित खण्ड काव्य द्रौपदी नामक खण्डकाव्य केर अंग्रेजी भाषामे अनुवाद, साहित्य   2) अकादमी, नई दिल्ली द्वारा 'Fifty Years of Indian Literature' मे प्रकाशित। 3) बिहार सरकारक स्कूल एवं कॉलेज केर सिलेबसमे अनेकानेक रचनाएं शामिल छनि। 4) सीता चालीसा का पाठ मिथिलाञ्चलक अनेक परिवार द्वारा नियमित कएल जाइत अछि। 5) भारत सरकारक बुक ट्रस्ट ऑफ इंडिया द्वारा प्रकाशित आखर' कविता संग्रहमे कविता प्रकाशित। नाटक लेखन एवं प्रसारण- 1) घड़ी (हास्य नाटिका,आकाशवाणी पटना) 2) मालिक (हास्य नाटिका,आकाशवाणी पटना) 3) गुरु गुड़,चेला चीनी (हास्य नाटिका,आकाशवाणी पटना) 4) सिंहासन बत्तीसी (,ऐतिहासिक फिक्शन,कुल 34 एपिसोड,आकाशवाणी पटना) 5) पैंच-उधार (हास्य नाटिका,आकाशवाणी पटना) 6) माँटीका गन्ध (हिंदी संगीतसभा,आकाशवाणी पटना) 7) काठक पुतहु चानीक समधि (पद्य नाटिका,आकाशवाणी दरभंगा) 8) उत्तर विद्यापति (नाटक, आकाशवाणी दरभंगा) विशेष द्रष्टव्य- 1) श्री रवीन्द्रनाथ ठाकुर द्वारा लिखिल एवं निर्देशित नाटक जीरोमाइल, एक दिन एक राति, टू लेट, एक मिनट की रानी (हिंदी) आदि नाटकक मंचन मिथिला सहित बिहारक बहुत जिला एवं अनुमण्डल स्तरपर कएल गेल अछि।

पत्रकारिताक क्षेत्रमे योगदान- 1) स्तम्भकार- मिथिला मिहिर (साप्ताहिक) -सुर-सुर-मुर-मुर 2) स्तम्भकार. आर्यावर्त, हिंदी दैनिक गोनू गवेषणा नामसँ प्रकाशित 3) मुख्य सलाहकार सम्पादक, हिंदी मासिक-संपादक-(धर्मयुग प्रकाशन प्रा. लि. नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित) 4) मुख्य सलाहकार सम्पादक-भवदीय प्रभात (हिन्दी दैनिक) (भू भारती मीडिया प्रा0 लि0 नई दिल्ली) समाजिक कार्य- 1) सेवा निवृतिक पश्चात महाकाली कन्या उच्च वि0 धमदाहा (पूर्णियाँ)क स्थापना (आब सरकार द्वारा प्रोजेक्ट स्कूलक रूपमे अधिग्रहण) 2) नाट्य संस्था "रंगलोक" केर पटनामे स्थापना। 3) संगीतायन संगीत महाविद्यालय केर नोएडामे स्थापना जाहिसँ करीब 2000 छात्र/छात्रा डिग्री लऽ चुकल अछि। 4) A.A.U. इण्टर कॉलेज, आदित्यपुर, जमशेदपुर (झारखण्ड)क स्थापना। 5) बेरोजगार युवक/युवतीकेँ संगीत शिक्षा प्रदान कऽ हुनका सभकेँ रोजगारक योग्य बनेलाह। 6) मैथिली भाषाकेँ अष्टम अनुसूची में शामिल करेबाक लेल अथक प्रयास। 7) मिथिलामे दहेज़ उन्मूलन हेतु संगठित प्रयास, जनजागरण एवं निजी प्रयास द्वारा दहेज़ उन्मूलनमे सशक्त एवं प्रमुख भूमिका। 8) सूखा एवं बाढ़ास्त क्षेत्रमे सघन दौरा कऽ वांछित सहायता प्रदान केलाह। रिकॉईस एवं कैसेट्स- 1) वर्ष 1966 मे मैथिली लोकगीतक ग्रामोफोन रिकॉर्ड H.M.V. कोलकाता द्वारा गीतकार/संगीतकारक रूपमे रिलीज। 2) सीता चालीसा-टी-सीरीज, नोएडा द्वारा रिलीज 3) पूर्वाञ्चल म्यूजिकल रिकॉर्ड्स पटना द्वारा भजनामृत विद्यापति गीत. दोरस (मैथिली, भोजपुरी)क अलावा करीब 15 कैसेट्स रिलीज- वर्ष 1977-78 4) भजन-भारती-सुयोजन फिल्म्स-नई दिल्ली द्वारा रिलीज। 5) सोनी कैसेट्स द्वारा गीतकारक रूपमे रिलीज एल्बम। फिल्म निर्माण एवं टेली सीरियल / वृत्त चित्र- 1) प्रथम मैथिली फीचर फिल्म “ममता गाबय गीत"क निर्माणमे प्रमुख भूमिका । गीतकार/पटकथा लेखक एवं सह-दिग्दर्शकक रूपमे सफल प्रदर्शन। 2) मैथिली फीचर फिल्म "गोनू झा"क पटकथा लेखक एवं गीतकार। 3) आयुर्वेद चिकित्सा पद्धतिपर आधारित टेलीफिल्म- "आयुर्वेद की अमर कहानी" केर पटकथा लेखक एवं निर्देशक संगीतकार। सरकारी विभागों/संस्थान सभ लेल कएल गेल कार्य- 1) पंचायत मंत्रालय, भारत सरकारक लेल वृत्त-चित्रक निर्माण - आपका फैसला आपकी मुट्ठी में। 2) साहित्य अकादमी. भारत सरकार, नई दिल्ली लेल मैथिली भाषाक प्रतिष्ठित विद्वान पण्डित गोविन्द झा, श्री मायानन्द मिश्र तथा हिंदी साहित्य केर विद्वान प्रो. श्रीरामनरेश त्रिपाठीपर वृत्त-चित्रक निर्माण। 3) Beware of God अमरीकामे प्रवासी भारतीय केर आध्यात्मिक द्वन्दपर आधारित वृत-चित्र 4) "नारी" वृत- चित्र 5) गोनू झा (धारावाहिक) दूरदर्शन केन्द्र, गोहाटी (असम)सँ कुल 15 एपिसोडक प्रसारण। 6) "ऐसे बनी बात' केर लखनऊ दूरदर्शन केन्द्रसँ 3 एपिसोड प्रसारित। 7) युवा समस्यापर आधारित "फड़फड़ाते पंख" (हिंदी)क कुल 5 एपिसोडक दूरदर्शन केन्द्र गुहाटीसँ प्रसारण। 8) सुनहरा सफर:-सुयोजन फिल्म्स नई दिल्लीक बैनरसँ (भारतीय सिनेमा के 36 वर्षों का इतिहास) दूरदर्शन केन्द्र जयपुरसँ प्रसारण। 9) साहित्य अकादमी दिल्ली द्वारा निर्मित डॉ0 सुकमार सेनपर आधारित वृत-चित्र। 10) एमईएमंत्रालय केर सौजन्यसँ भारतक शहीद' 'martyr of India' वृत्त-चित्र-5 एपिसोडक निर्माण। पुरस्कार/सम्मान एवं अन्य विशिष्ट उपलब्धि- 1) स्व0 वैद्यनाथ मिश्र यात्री (बाबा नागार्जुन) द्वारा कला भवन पूर्णियाक मंचपर व्यक्तिगत सम्मान अभिनव विद्यापतिक नामसँ अलंकृत। 2) स्वाती फाउण्डेशन कोलकाता (प0 बंगाल) द्वारा प्रबोध साहित्य सम्मान (वर्ष 2014) 3) अखिल भारतीय मिथिला संघ नई दिल्ली द्वारा मिथिला विभूति सम्मान वर्ष-2016 4) तृतीय अंतर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मलेन मुम्बई-द्वारा मिथिला रत्न सम्मान - वर्ष 2016- आयोजक: मैथिल मित्र मण्डल मुंबई। 5) झारखण्ड मैथिली मंच रांची द्वारा लाइफटाइम अचीवमेन्ट अवार्ड. वर्ष 2014 6) विद्यापति सेवा संस्थान दरभंगा द्वारा विशिष्ट मैथिली सेवा सम्मान- (3 बेर)। 7) काया कल्प साहित्य कला फाउण्डेशन . नोएडा (उ0 प्र0) द्वारा कायाकल्प साहित्य शिरोमणि सम्मान - 2016 8) विश्व मैथिली संघ संतनगर, बुराड़ी, नई दिल्ली द्वारा तीन वर्ष धरि विशिष्ट सम्मान। 9) जन जागृति मंच, पालम नई दिल्ली द्वारा विशेष सम्मान- वर्ष 2018 10) वैदेही फाउण्डेशन नई दिल्ली द्वारा विशिष्ट सम्मान-स्थान मावलंकर हॉल. वर्ष 2017 11) इला फाउण्डेशन, नई दिल्ली द्वारा वर्ष 2016-17 लेल भाषा साहित्य सम्मान। 12) विद्यापति समिति धनवाद (झारखण्ड) द्वारा वर्ष 2016 मे विद्यापति सम्मान। 13) वाराणसी (उ0 प्र0) मे दूरदर्शन केन्द्र नई दिल्ली द्वारा आयोजित अखिल भारतीय कविता कुम्भमे मैथिली भाषाक प्रतिनिधि कविक रूपमे कविता पाठ। 14) काशीमे स्थानीय साहित्यिक संस्था द्वारा विशेष सम्मान। 15) गोहाटी (असम)मे साहित्य अकादमी दिल्ली द्वारा आयोजित कवि सम्मलेनमे रचना पाठ। 16) साहित्य अकादमी, भारत सरकार, नई दिल्ली द्वारा आयोजित पूर्णियाँमे एकल काव्य पाठ। 17) आकाशवाणी पटना, दरभंगा द्वारा आयोजित कवि सम्मेलनोंमे नियमित काव्यपाठ। 18) मैथिली भोजपुरी अकादमी नई दिल्ली द्वारा 15 अगस्त एवं 26 जनवरीकेँ कवि सम्मेलनमे सम्मलेनक अध्यक्षता एवं कविता पाठ। 19) मिथिलांचल साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था. नई दिल्ली द्वारा मणिपद्म सम्मानसँ सम्मानित। 20) कुल 40 वर्षसँ मैथिली मंचपर कलाकारक रूपमे सर्वाधिक लोकप्रिय एवं युवा कलाकारक प्रेरणास्रोत। मैथिली लोक संगीत में विशिष्ट योगदान- 1) श्री रवीन्द्रनाथ ठाकर आधुनिक मैथिली मंचक जनक मानल जाइत छथि। 2) श्री महेन्द्र झाक संगे वर्ष 1966-67 मे एहन जोड़ी बनेलनि जाहिमे दू पुरुष द्वारा बिना कोनो वाद्य यंत्रक स्वरचित रचनासँ दर्शक सभहक मनोरंजन कएल जाइत छल। 3) मूल रूपसँ कवि एवं गीतकार श्री रवीन्द्र जीक गायन शैली बिल्कुल नवीन एवं अलग छल जे हुनका लोकप्रियताक शिखरपर पहुँचेलक। 4) रवीन्द्र-महेन्द्रक जोड़ी लोकप्रिय भेलाक बाद मैथिलीमे ई एकटा परंपरा क रूपमे स्थापित भेल। 5) बिहारक अलावा, दिल्ली, मुम्बई, कोलकाता तथा चैन्नई सहित भारतक सभ प्रदेशमे करीब 10 हजारससँ बेसी मंचपर सफल प्रस्तुति। परिशिष्ट अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। प्रदीप पुष्प- संपर्क-7903496553 गीतक अप्रतिम शिल्पकार: रवीन्द्र नाथ ठाकुर गीत साहित्यक सभसँ लोकप्रिय विधा थिक। साहित्यक वर्णमालासँ अपरिचित कोनो गृहस्थ हो वा कहियो विद्यालय नहि गेल घरक कोनो महिला, गीत सभक प्रिय होइत अछि। गाय- महिंसक चरबाही करय बला लोक हो वा कोनो विद्या-विशारद्, गीत सबकेँ आकृष्ट करैत अछि आ गुनगुनेबाक लेल बाध्य करैत अछि। एकर मधुरता आ भावपूर्णता जन सामान्यक हृदयमे स्थापित भ' लोकक कंठमे बसि जाइत अछि। मैथिली साहित्यमे गीति काव्यक सुदृढ परम्परा रहल अछि। यद्यपि मैथिलीक प्रथम पोथी नाट्यशास्त्र आधारित अछि, तथापि विद्यापतिक गीतक बदौलति मैथिलीक विश्व साहित्यक मध्य अपन विशिष्ट पहिचान बनल अछि। विद्यापतिसँ आरंभ भेल गीतक ई क्रम आगूओ बनल रहल। एहने क्रमे आधुनिक कालमे पदार्पण होइत अछि गीतक राजकुमार रवीन्द्रनाथ ठाकुरक। रवीन्द्रनाथ ठाकुर जीक जन्म हिनक मातृक मधुबनी जिलाक ननौर गाममे आठ अगस्त उन्नीस सय अड़तीसकेँ भेल। हिनक पैतृक पूर्णियाक धमदाहा गाममे छल। प्रारंभमे अपन मातृकमे शिक्षा ग्रहण आरंभ क' तत्पश्चात् अपन पैतृक गाममे प्राथमिक शिक्षा पूर्ण कयलनि। पूर्णिया कॉलेज, पुर्णियासँ  स्नातक धरि शिक्षा ग्रहण क' पहिने विद्यालयमे शिक्षकक रूपमे सेवा देब प्रारंभ केलनि। बादमे, बिहार सरकारक वित्त विभागमे पैघ पद पर नियुक्त भेलाह। अपने मैथिली अकादमीक सहायक निदेशक आ निदेशक केर पदपर सेहो सेवा द' मैथिलीक विकासमे बहुत सहयोग करबाक काज केलौं। रवीन्द्र जीक साहित्य - सृजनक उपवन सदाबहार रहल। ओ कहियो मौलायल नहिं, म्लान नहिं भेल। हिनक अनुसार- "साहित्य सृजन कहियो रूकबाक नहिं चाही, कारण साहित्यसँ भाषाकेँ बल भेटैत छैक ।" कविता, उपन्यास, नाटक जकाँ विभिन्न साहित्यक विधामे रचना करितो गीत हिनक पहिचान रहल। अपन चौदह टा पोथी जे मैथिलीमे लिखलनि ताहिमे अधिकांश गीत संग्रह छल। एक गोट पोथी हिंदीमे सेहो लिखलनि। हिनका विभिन्न संस्था सभक द्वारा बहुतो सम्मान प्राप्त भेल छल यथा- मिथिला विभूति सम्मान, मिथिला रत्न सम्मान, मैथिली सेवा सम्मान, लाइफ टाइम अचीवमेंट सम्मान इत्यादि। हिनका प्रतिष्ठित प्रबोध सम्मान(2014) प्राप्त भेल छल। जनकवि यात्री हिनका व्यक्तिगत रूपेण 'अभिनव विद्यापति' सम्मान सँ सेहो सम्मानित केने रहथिन। विद्यापति मैथिली गीति काव्यक जे पैघ अट्टालिका स्थापित केलनि ओ समस्त मिथिला नहिं, अपितु विश्व भरिक साहित्यक लेल एकटा उदाहरण भेल। 'देसिल बयना सब जन मिट्ठा' केर उद्घोष क' विद्यापति साहित्यकेँ जनमुखी हेबाक मार्गक प्रशस्त केलनि। विद्यापतिक बाद आदरणीय मधुपजी आ रवीन्द्रजी दू गोट पैघ हस्ताक्षर भेलाह जे अइ गीति परम्परा केँ सुचारू ढंगसँ निमाहलनि। ओना एहेन नै छै जे अइ बीचमे गीतकार कवि लोकनि नै भेलाह वा गीतक रचना नहिं भेल, तेहेन कोनो गप्प नहिं। मुदा, जाहि तरहेँ विद्यापति अपन गीत मधुरता, भावक कोमलता आ नव लयमे गीतक प्रस्तुति क' जनसामान्यक मन मोहि लैत छलाह ओहेन सफलता हुनका बाद रवीन्द्रजीकेँ भेटल। आदरणीय मधुप जीक गीत साहित्यिक मूल्य आ मैथिली भाषाक विकासक दृष्टिसँ उत्कृष्ट अछि। मधुपजी विद्यापतिक बाद निस्संदेह महाकवि कहेबाक सामर्थ्य रखैत छथि। गीतक गेयता ओकर प्रबल पक्ष थिक। जे गाओल नहिं जा सकैत अछि ओ गीत केहेन होयत? तेँ गीतक भास आ लय प्रमुख तत्व थिक। मौलिक भास आ मोहक भावपूर्ण शब्दसँ सजाओल गीत जन-जनकेँ आनंदित करैत अछि, पसिन पड़ैत अछि। ताहि दृष्टिसँ आदरणीय रवीन्द्र जीक महत्ता अहू लेल आर बेसी भ' जाइत अछि जे विद्यापतिक बाद ओ पहिल गीतकार भेलाह जे अपन रचना लेल खाँटी नव ट्यून ल' मंचस्थ होइत छलाह। जहिना रूचिगर रचना, तहिना ओकर भास। चिट्ठीकेँ तार बुझू, भरि नगरीमे शोर, यार कुसियार यार, तांगा हमर अलबेला, हम गुदड़ी पहिरि जीबि लेबै, चलू चलू बहिना, के थिक मैथिल की थिक मिथिला, पिरिये पिराननाथ, चल मिथिलामे चल,चारि पाँति सुनू रामकेर नामसँ जकाँ अपन बहुतो गीत लेल बहुतो नव नव भास तैयार करब, हिनक रचनाधर्मिताकेँ समस्त भारतीय समकालीन गीति- काव्यमे हिनक श्रेष्ठत्व स्थापित करैत अछि। बंगलामे जहिना रवीन्द्र संगीतक परम्परा स्थापित भेल, तहिना ई विद्यापतिक संगीतक बाद नव तरहक मैथिली गीत- संगीतक स्थापना केलनि। रवीन्द्र जी मैथिली गीत लेखनकेँ स्टारडम दियाबय बला रचनाकार रहथि। महेन्द्र जी संग हिनक जोड़ी जहन मंचस्थ होइत छल त' दूर- दूर सँ लोक आबि क' हिनका सुनबाक लेल भरि राति मंचक आगू बैसल रहैत छल।फरमाइश पर फरमाइश। आग्रह पर आग्रह। आ रवीन्द्र बाबू अपन जोड़ीदार गायक महेन्द्र जीक संग श्रोताक सबटा 'डिमांड' पूरा करैत छलाह। रवीन्द्र बाबू गीतकेँ  घर आंगन, सर-समाज,प्रेम - विरह, माय- बेटा, पूतोहु सँ ल' क' बाध- बोन, खेत -पथार,जन - बोनिहार, रौद- घाम आ पनिभरनी धरि ल' जाइत छथि। ककरो प्रेमिका पनिभरनी सेहो भ' सकैए तकर उन्मुक्त स्वीकारोक्ति रवीन्द्रजीक गीतमे भेलनि। मिथिलाक नारी जीवनक दुरूहता होइ वा रोजगारक लेल पलायन रवीन्द्रजी हरेक विंदुपर नजरि राखि गीतक रचना केलाह। रवीन्द्र जी जनसामान्यक आँखिसँ रचना करैत छथि तेँ हुनक रचना निसंदेह संपूर्ण मिथिलाक प्रतिनिधित्व करैत अछि। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। अजित कुमार झा, मुजफ्फरपुर, संपर्क-9472834926 मिथिला मैथिली आन्दोलनक पाथेय: श्रद्धेय रवीन्द्र जी जीबैत मुदा उपेक्षित लेखक सब पर विदेह डाट काम जे कार्य क' रहल छथि से निस्संदेह प्रशंसनीय अछि। श्रद्धेय राम लोचन ठाकुर जी एवं श्रद्धेय राज नन्दन लाल दास जी पर नीँक काज भेल मुदा ईश्वर केँ मंजूर नहि छलनि जे हुनका सबहक जीबैत मे ई कार्य पूर्ण होइत। खैर अपना हाथ मे त' प्रयासेटा अछि। शेष ईश्वर केर मर्जी। अहि कड़ी मे आशीष जी द्वारा अगिला नाम श्रद्धेय रवीन्द्र नाथ ठाकुर जी केर घोषणा भेल आ अहि महान मिथिला विभूति पर किछु लिखबाक हेतु हमरो आग्रह भेल। जीवन केर आपाधापी मे अहि कार्य हेतु अग्रसर नहि भ' सकल छलहुँ मुदा आइ श्रद्धेय रवीन्द्र बाबू केर अवतरण दिवस केर अवसर पर आशीष जी केर पोस्ट देखि  अपन शिथिलता केँ त्यागि किछु लिखबाक हेतु प्रेरित भेलहुँ। वास्तव मे पुछु त' श्रद्धेय रवीन्द्र बाबू पर अपन मोनक उद्गार केँ व्यक्त करबाक लोभ हम संवरण नहि क' पाबि रहल छी। प्रत्यक्ष रुप सँ श्रद्धेय रवीन्द्र बाबू सँ गप्प करबाक हमरा सौभाग्य नहि प्राप्त भेल अछि मुदा तैयो हम अपना आप केँ अति सौभाग्य वान बुझैत छी जे मिथिला मैथिलीक मंच सँ अपन शब्दक जादूगरी सँ दर्शकवृन्द केँ सम्मोहित करैत हिनका हम लगभग दस-पन्द्रह बेर देखने छियनि। नेना भुटका रही आ मिथिला मैथिलीक लेशमात्र ज्ञान नहि छल तखनो ई मंच अपन चुम्बकीय शक्ति सँ हमरा खिँचैत छल तकर एकमात्र कारण छल श्रद्धेय रवीन्द्र बाबू आ हुनक पार्टनर महेन्द्र जी। एक गोटे शब्दक जादूगर तँ दोसर स्वर सम्राट। श्रद्धेय रवीन्द्रजी ओना त' साहित्यक हर विधा मे लिखलनि आ धुरझार लिखलनि मुदा हमर मोनक कणकण मे हुनका लेल एकटा प्राकृतिक गीतकारक छवि बसल अछि। गाम-घर, बाध-वन, खेत-खरिहान, पाबनि-तिहार, विवाह दान, मुड़न-उपनयन आ अन्य समस्त अवसर हेतु सुपरहिट गीत हिनकर कलम सँ निकलल छन्हि। धीया-पुता, नवयुवक-नवयुवती सँ ल' क' सबहक मोनक उद्गार केँअपन अनुपम शब्द सँ गढ़ि माँ मैथिलीक कंठहार सजौने छथि। देशक विभिन्न शहरमे अतेक सालक अनवरत मिथिला मैथिली आंदोलनक उपरांत एखनधरि जे स्थिति छैक से बहुत हद तक निराश करय वाला अछि। मात्र आन्दोलन सँ जुड़ल संग्रामी मिथिला विभूति सबहक नाम पर एखनहु भीड़ नहि जुटैत अछि आ जखन भीड़े नहि जुटतै तखन आंदोलन हेतु प्रेरित किनका करबनि? गरीबक धीया-पुता पेट भरि भोजनक लोभ मे सरकारी स्कूल जाइत अछि ' मिड डे मील' लेल जाहि सँ अपन जठराग्नि केँ शान्त क' सकय आ ओहू लाथे किछु ज्ञान सेहो अर्जित क' लैत अछि । कम सँ कम शिक्षाक महत्व त' बूझय लगैत अछि। ठीक तहिना ( ई हमर व्यक्तिगत सोच अछि) श्रद्धेय रवीन्द्र जी मिथिला मैथिली आन्दोलन मे पाथेय केँ रुप मे कार्यरत रहला अछि। वास्तव मे हिनकर योगदान स्वर्णाक्षर सँ अंकित करबा योग्य अछि। हिनकर कणकण मे संगीत रचल बसल छन्हि। पूरा परिवारे संगीतमय छन्हि। ई ओहिकाल मे मंचक शोभा छलथि जखन अहि मंच पर साज बाज नहि पहुँचल छल तथापि हिनकर एक-एकटा शब्द कान मे मिसरी घोरि दैत छल। हिनकर गीत मे उत्सव, खुशी एवं टीसक अनुभूति होइत छल। ई कखनो हँसाबैत छलथि त' कखनो गुदगुदाबैत छलथि। कखनो प्रेमक अथाह सागर मे डुबकी लगबाबैत छलथि त' कखनो नयन सँ दहोबहो नोर झहराबैत छलथि। अद्भुत शब्द संयोजन आ सुमधुर कंठक आशीष हिनका माँ सरस्वती सँ भेटल छलनि। एकबेर एकटा कार्यक्रम मे राजकमल जी हिनका सँ जमसम निवासी महेन्द्र जी केँ भेँट करबेने छलखिन आ हिनका अपन गीत गाबय लेल देबाक आग्रह केने छलखिन। आखिरकार एक दिन अवसर भेटलनि आ दुनुगोटे संयुक्त रूप सँ एक कार्यक्रम मे " बाबा दंडोत, बच्चा जय सियाराम" गीत सँ जे धूम मचौलनि से फेर जीवन मे कहियो घुरि क' पाछू नहि तकलनि। एक केँ बाद एक एवं एक सँ बढ़ि एक सुपरहिट गीत सँ माँ मैथिलीक अक्षय कोष केँ परिपूर्ण करैत रहलाह। पिरिये परान नाथ सादर परनाम, चलू चलू बहिना जहिना छी तहिना, अहाँ लटर पटर कने कम करु, बाँहि मे रहू ने रहू, निहुरि निहुरि क' रोपय बहिना जन बोनिहारिन धान गे, पढ़ क का मे कि की कु कू बदाम के कै को कौ कं कः राम, बिलमि जो गुजरिया अहि मिथिला केँ धाम गे, रोटी अछि त' दुनिया हरियर बिनु रोटी के फाँका रोटी खातिर घेँट कटैया रोटी खातिर डाका आकि हम सच कहै छी नहि यौ आ कि हम गप्प हँकै छी नहि यौ (भांगड़ा धुन पर),  की थिक मिथिला के छथि मैथिल हम कहैत छी ओरे सँ  मिथिला वासी सुनु पिहानी हम कहैत छी ओरे सँ सन सन नाहि जानि कतेको कालजयी गीतक रचना कयने छथि श्रद्धेय रवीन्द्र बाबू। पहिल मैथिली फिल्म " ममता गाबय गीत" मे विद्यापतिक एकटा गीत केँ छोड़ि अन्य समस्त गीत हिनके कलम सँ लिखायल अछि। एक सँ बढ़ि एक अद्भुत गीत अछि जेना: १. भरि नगरी मे सोर बौआ मामी तोहर गोर, मामा चान सन केँ.. २. अर्र बकरी घास खो, छोड़ि गोठुल्ला बाहर जो ...... ३. घर घर घुमि घुमि तोहर कथा ई बहि बहि कहत बयार चलल कहरिया जे कौने नगरिया.. ४. मिथिला केर ई माटि उड़ल अछि छूबय गगनक छाती भरि दुनिया केँ मंगल हो जन जन गाबय प्राती हाँ रे कहू भैया रामे राम हो भाई माता जे बिराजै मिथिले देश मे... मैथिली फिल्म " ममता गाबय गीत " केर निर्माता श्री केदार नाथ चौधरी आ महंथ मदन मोहन दास जी  छथि आ एकर निर्माणक क्रम मे नाना प्रकारक झंझावात सहैत आगू बढ़ैत गेलाह मुदा पैसाक तंगी आ निराशाक क्षण मे एक दिन अपन स्वप्न केँ मझधार मे छोड़ि भारी मोन सँ केदार बाबू अपन जीवनपथ पर आगू बढ़बाक हेतु सनफ्रांसिस्को विदा भेलाह। पहिल मैथिली फिल्म डिब्बा मे बन्द भ' गेल। जाहि फिल्म केँ महंथ मदन मोहन दास जी लाचारी मे भविष्यक जिम्मा लगा देने छलखिन तकर रील केँ लगभग अठारह वर्षक बाद बन्द डिब्बा सँ निकालि सिनेमा हाल मे प्रदर्शित करबाबय केर दुर्लभ काज अहि फिल्मक गीतकार श्री रवीन्द्र नाथ ठाकुर जी महंथ जी सँ लिखित अधिकार प्राप्त कयलाक उपरांत पूर्ण कयलनि। महंथ जी केँ शब्द मे- "रवीन्द्रे जी वीर बहादुर बनलाह" । श्रद्धेय रवीन्द्र जी केँ विषय मे केदार बाबूक शब्द जौँ हूबहू राखी त' - " उपनयनक समय मे ढ़ोल पिपहीक धमगज्जर ध्वनि मे लपेटल गीत, चतुर्थी रातिक कनियाँ-वरक प्रथम मिलन मे लजायल-सकुचायल सिहरैत गीत, दुरागमनक समय मे बेटीक नोर मे भीजल गीत, गामक छौंड़ीक काँख तर दाबल छिट्टा खुरपीक खनखन गीत। सभ गीत मे मिथिलाक माटिक अनुपम सुगन्धि"। अहि फिल्मक तेसर निर्माता भानु बाबूजे स्वयं अपन लिखल गीत अहि फिल्म मे देबय चाहैत छलथि से हिनकर गीत सुनि मंत्र मुग्ध होइत बाजल रहथि- " ई व्यक्ति जनिकर नाम रवीन्द्र नाथ ठाकुर अछि, विलक्षण प्रतिभाक स्वामी छथि। हिनकर गीत मे मिथिलाक संवेदनशीलता मुखरित होइए। हिनकर प्रत्येक गीत सँ एक नव खिस्साक निर्माण भ' सकैए। रवीन्द्रक गीत मिथिला मे गीत संगीतक एकटा नवयुग आनत तकर हम कल्पना करैत छी"। कतेक सटिक कहलनि केदार बाबू आ भानु बाबू। वास्तव मे गीत संगीतक एकटा नवयुग अनलनि ताहि मे कोनो संदेह नहि। सच पुछु त' हिनक विपुल रचना संसारक ज्ञान हमरा नहि अछि मुदा हिनकर पंच कन्या आ रवीन्द्र पदावली एखनो अछि हमरा पास मे। किछु पुस्तक केओ ल' गेलाह से फेर द' नहि गेलाह।  ई पोथी सब हमर बाबू जी  स्वयं श्रद्धेय रवीन्द्र बाबू सँ हुनक कलकत्ता ( एखुनका कोलकाता) यात्राक क्रम मे प्राप्त केने छलथि।  हिनकर रचना सब एकठाम संकलित कय पुनः प्रकाशित होयबाक चाही। एकटा कार्यक्रम मे श्रद्धेय रवीन्द्र बाबूक उपस्थिति मे मंच पर हिनकर रचना केँ कोनो सज्जन अपन  टटका रचना बाजि पाठ कयने छलाह। एहन धृष्टता जौँ हुनका सामने भ' सकैया तखन परोक्ष मे के देखय जायत? एकर संरक्षणक आवश्यकता छैक। अपन आबय वाला पीढ़ी केँ आखिर कोना सही बातक जानकारी भेटतनि। मात्र पोथी प्रकाशनेटा नहि मुदा डिजिटल रुप मे सेहो आनल जाय। मिथिला मैथिली आन्दोलन मे हिनक योगदान केँ बिसरल नहि जा सकैत अछि। हिनक शब्द अमर छन्हि, हिनक स्वर अमर छन्हि। अंत मे जौँ एकटा गीतक चर्चा नहि करब त' हमर मोनक उद्गार अधूरा रहि जायत किएक त' माँ आओर मातृभाषाक अनादर पाप अछि आ नहि जानि कतेक बेर ई गीत सुनि हमर नयन सँ अश्रुधार बहल अछि- जन्म देलनि माय थिकीह, सेहो कने सोचू हमरा कि हमरा त' उसरल बजार बुझु चिट्ठी केँ तार बुझु, बुढ़िया बेमार बुझु ............................................. विशेष: श्रद्धेय रवीन्द्र बाबू केँ सादर समर्पित करैत छियन। ओ स्वस्थ रहथि आ हुनक आशीष हमरा सब पर बनल रहय। कोनो गलती भेल होएत त' क्षमा करब। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’-संपर्क-8789616115 सभटा सोनारकें नहि गढ़बाक कला होइछ  (गजलक समीक्षा : पोथी ‘लेखनी एक रंग अनेक’) एकटा समय छल जखन मैथिली गजलक नामपर जे किछु लीखल जा रहल छल तकरा भक्ति-भावसँ लोक ग्रहण करैत जा रहल छल | समय बदलल | ओकरा राजनीतिक चश्मासँ देखल जाए लागल | मुदा रचना स्वस्थ दृष्टिसँ नहि पढल जा रहल छल | प्रगति भेल अछि | आब ठीकसँ पढल जा रहल अछि | ओ गजल अछियो कि नहि सेहो देखल जा रहल अछि | कोनहु रचनाक सार्थकता सेहो अहीमे अछि जे ओकरा स्वस्थ दृष्टिसँ पढल जाए, ओकर समीक्षा हुए, कमजोर पक्षक आलोचना हुए, नीक पक्षक प्रशंसा हुए | मुदा, सभसँ पहिने त ई देखब जरूरी अछि जे ओ रचना जाहि विधाक लेल लीखल गेल अछि ओकर योग्यता रखैत अछि कि नहि | मैथिली गजलकें भक्ति-भावसँ अथवा राजनीतिक दृष्टिसँ देखब ओकर उपेक्षा करब हएत | जाहि समयमे, मैथिलीमे गजलक व्याकरण उपलब्ध नहि छल, 111 टा रचना ल’ क’ ‘लेखनी एक रंग अनेक’ प्रकाशित भेल छल, ओहि समय ई एकटा स्पष्ट घोषणा छल जे मैथिलीमे गजल अवश्य लीखल जा सकैत अछि | ई एकटा क्रान्ति छल किएक त ओहि समय किछु साहित्यकार कहैत छलाह जे मैथिलीमे गजल लिखले नहि जा सकैत अछि | एहि धारणाक खण्डन छल ई संग्रह | रचनाकारक गीते जकाँ तथाकथित किछु शेर सभ लोककें आकर्षित केलक | शब्द सभमे गीतहि जकाँ वैह मिथिलाक माटि-पानि आ बसातक सुगन्धि ! मिथिला मिहिरमे पढल किछु शेर सभ हमरो बहुत आकर्षित केलक: ‘हम जे मैथिल थिकहुँ से मूर्ख कालिदास सन जतय बैसल छी सैह डारि काटि रहल छी’ ‘चली जखनसँ सदिखन सोची एखन दहिन की बाम चलै छी राखू अपने विश्व-नगर भरि, हम त अपना गाम चलै छी’ ‘सुखकेर हो कि दुखक बीतैये घड़ी सभटा हो बाँस आ कि बेंतक टुटैये छड़ी सभटा’ एहि संग्रहक रचना सभक जन्म अस्पतालमे भेल छल | अस्पतालसँ बाहर आबि ई शेर सभ दहाड़ मारिक’ चिकरल : ‘गजल मैथिलीक मर्म आब जानि लेने छैक गजल मिथिलामे घर अपन बान्हि लेने छैक’ जे सभ कहैत छलाह जे मैथिलीमे गजल नहि लिखल जा सकैत छैक, सभ शान्त भ’ गेलाह | गीतक महाराजक अश्वमेघक घोड़ा निकलि गेल गजलक मैदानमे | लव-कुशक हाथें पकड़ल गेल घोड़ा | रामक कृत्यक सार्थकता सेहो अहीमे अछि जे घोड़ा पकड़ल जाए लव-कुश द्वारा | अनचिन्हार आखरक साइटपर गजेन्द्र ठाकुर आ आशीष अनचिन्हार द्वारा गजल शास्त्र एलाक बाद जाँच-पड़ताल हुअ’ लागल जे गजलक नामपर जे किछु लिखा रहल अछि से गजल अछियो कि नहि | ई पाछाँ मूहें घुसक’ बला बात नहि भेलै | ई पछिला पीढ़ीक कृत्यकें आगाँ ल’ जेबाक, गौरव प्रदान करबाक,ओकरा परिपूर्ण करबाक, स्वस्थ आ समृद्ध करबाक दिशामे आन्दोलन भेलै | हमहूँ त भक्ति –भावसँ सभ रचनाकें गजल मानिए नेने रही | अनचिन्हार आखर साइटपर उपलब्ध व्याकरणसँ परिचित भेलाक बाद ई पोथी पढ़ि जे किछु नीक –बेजाए देखबामे आएल अछि ताहिसँ अवगत करयबाक प्रयास क’ रहल छी : (1) 109 टा गजलमे 587 टा शेर अछि | एहि संग किछु ‘कतआ’ अछि | (2) 26 टा बिना रदीफक गजल अछि | (3) 5 टा गजलमे मतलाक अभाव अछि ( गजल क्रमांक 35,42,45,54,90 ) (4) 4 टा गजलमे रदीफ मतलामे अछि मुदा ओकर पालन सभ शेरमे नहि भेल अछि ( गजल क्रमांक :49,62,81,82 ) (5) 9 टा गजलक कयटा शेरमे समान काफियाबला शब्द अछि (गजल क्रमांक :65,68,72,77,89,103,105,107,108) (6) 10 टा गजलक मतला छोड़ि सभ शेरमे अनुपयुक्त काफियाबला शब्द अछि ( गजल क्रमांक :5,10,11,23,41,43,62,70,83,93 ) (7) 7 टा गजलक मतलामे काफिया नियमित नहि अछि ( गजल क्रमांक :48,50,63.99,100,101,106 ) (8) 16 टा गजलक एक अथवा अधिक शेरक काफियाबला शब्द सभ उपयुक्त नहि अछि ( गजल क्रमांक : 15,21,25,29,30,31,46,49,59,75,86,87,88,94,97,109 ) (9) रचना सभ ओहि समय लिखल गेल अछि जखन रचनाकारक पयरमे प्लास्टर पड़ल छलनि, ओ अस्पतालमे छलाह | (10) भरिसक मैथिली गजलक नामपर एतेक संख्यामे रचनाक ई पहिल संकलन अछि | (11) कतहु-कतहुसँ किछु गजलक अवलोकनसँ पता चलैत अछि जे बहरक उपेक्षा भेल अछि | (12) किछुए रचनाकें छोड़िक’ सभक अंतिम दू-पाँतीमे रचनाकारक नाम अछि | (13) नमहर भूमिका द्वारा पाठककें आतंकित करबाक अथवा रचनाक त्रुटिकें झाँपन देबाक प्रयास नहि कयल गेल अछि, रचना सभमे पाठककें गुद्गुदयबाक, आनन्द प्रदान करबाक आ जीवनक विभिन्न पक्षक रहस्यकें शालीनताक संग प्रस्तुत करबाक सामर्थ्य छैक | उदाहरणस्वरूप किछु पाँती प्रस्तुत कएल जा रहल अछि : ‘जतय सभ किछु देखार, जकर सभ किछु नुकैल गजल गागरमे सागर तमाशा थिकैक’ ‘मोट मडुआकेर रोटीपर रैंचीकेर साग गजल जीवन केर स्वादहु ठेकानि लेने छैक’ ‘मनसँ मनकेर संचार-सेतु ओहि महासेतुकेर नाम गजल कहलहुँ से गजल, सुनलहुँ से गजल, कहबामे कहू की शेष रहल’ ‘रवीन्द्र’ प्रेम-पंथी से छंदकार जानथि किछुए गजल एहन जे पढ़बाले’ होइत अछि’ ‘रवीन्द्र’ रह-रहाँ एतय होइत अछि एहन कि जैह क’र मूँह धरी, ताहीमे केस’ ‘दाग चेहराक हो कि वस्त्रक, सब दाग थिकै दागे साधूकें छोड़ि चट-पट सब चोरकें धरक चाही’ ‘औंठा ने कटय ध्यान रहय, एहि बातकेर कि कोन गुरु केर अहाँ शिष्य बनल छी’ ‘अस्मिताक प्रश्न अछि त एक भ’ ‘रवीन्द्र’ प्रगट होइत जाउ जे अदृश्य बनल छी’ ‘धकियाय आगू गेल जे, बुधियार छल सब लोक से नाव एखनहुँ अछि हमर, ओहिना पड़ल मझधारमे’ ‘किछुओ ने बचा सकलहुँ किछुओ ने बचा पायब सूझय ने जाल लेकिन, जंजालमे फसल छी’ ‘दर्द अपन गुपचुप सह्बाले होइत अछि हरेक बात नहि हरेककें कहबाले होइत अछि’ ‘आँचर रहयसमेटल,बरु केस रहयफूजल किछु बात त चौपेतिक’ धरबाले’ होइत अछि’ ‘ई बात खानगीमे कहबाक मोन होइछ बैद्य एहन के जे चीन्हैये जड़ी सबटा’ ‘बात केर बात अछि त एक बात हम कहि दी कि बात, बात-बातमे हो, बात से जरूरी नहि’ ‘गुलाब जलक शीशी भरि, पयर धोइत शोषक नोरक इन्होरमे नहाइत अछि लोक’ ‘गाइयो हँ, बड़दो हँ, एहने व्यवस्थामे आँटाक सङे घून सन पिसाइत अछि लोक’ (14) संकलनक कोनो रचनामे मैथिलीसँ इतर कोनो आन भाषाक शब्द नहि लेल गेल अछि |एहि दृष्टिसँ ई संकलन मैथिली गजल-लेखन लेल पथ-प्रदर्शकक योग्यता रखैत अछि |मैथिली गजलक बहुमंजिला भवनकक निर्माणमे एहि संकलनक आधारक उपयोग कयल जा सकैत अछि | प्रकाशनक छत्तीस बरखक बाद एहि संकलनक समीक्षा कि आलोचनाक प्रस्तुति एकटा सादर आ सविनय आश्वस्ति अछि जे ‘लेखनी एक रंग अनेक’ पढल गेल अछि, गुनल गेल अछि आ आदरणीय रवीन्द्र नाथ ठाकुर जी द्वारा रोपल गेल गाछ आब फुला रहल अछि | ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। नारायणजी- संपर्क-9431836445 आधुनिक मैथिली गीतक सजग उन्नायक संसारक सभ भाषामक साहित्य पद्यसँ आरम्भ भेल अछि। पद्यमे गेयधर्मिता रहैत अछि जे छन्दक बलें पाओल जाइत अछि, जे गीतक निजी विशेषता थिक जे पद्यमे सृजन करबाक लेल सृजनकर्ताकेँ सभ दिनसँ विशेष प्रभावित करैत रहल अछि, आ तँइ कोनो भाषा-साहित्यक आदि रचना पद्यमे भेटैत अछि। स्पष्ट रूपसँ पद्य विधा लोकगीतसँ रसग्रहण कऽ साकार होइत अछि अथवा अपन पथ प्रशस्त करैत अछि। लोकगीत अनाम धर्मा साहित्य थिक से महाकवि विद्यापति धरिकेँ रचनाशील होएबाक लेल प्रेरित कएने रहनि, तकर एकटा उदाहरणस्वरूप देखल जा सकैछ, विद्यापति पदावलीमे संग्रहीत विद्यापतिक गीत ...."मोरा रे अँगनमा चनन केर गछिया.."एहन मानल जाइत हछि जे महाकवि विद्यापति तँइ कतेको लोकगीतक संपादन टा कएलनि। आ मैथिली साहित्यक आरम्भ जे कवि शेखराचार्य ज्योतिरीश्वर ठाकुरसँ मानल जाइत अछि, से वास्तवमे गीतेसँ आरम्भ भेल हएत जे लिखित रूपमे नष्ट भए गेल हएत। महाकवि विद्यापतिक गीतिधाराक भाव, भाषा,विषय, विधा ओ रागक प्रबल वेगमे एकटा कृत्रिम काव्यभाषाक जन्म भेल भऽ गेल जकर नाम "ब्रजबुलि" पड़ि गेल। से थिक जनभाषामे गीति काव्यक अतुल सामर्थ्य आ से बीसम शताब्दीक पूर्वार्ध धरि मैथिलीमे लिखाइत रहल आ जनमानस गीति काव्यक रससँ आलोड़ित होइत रहलाह। एहन विशिष्ट परंपरासँ भिन्न सेहो मैथिलीमे लिखल जाइत रहल हएत, आ से लोक द्वारा अभिनय कएल जाइत रामलीला आ महारासमे, नाचमे, जाहिमे जन-जीवनक राग आ हास्य अवश्य छल हएत, जकरा सभकेँ सुसंस्कारित गीतक परंपरामे फूहड़ बूझल गेल हएत आ जाहि गीत सभकेँ संकलित कए लिखित रूप नहि देल गेल हएत। मुदा मैथिली गीतमे नवताक प्रवेश भेल, जखन अपनामे श्रव्य आ दृश्य-काव्य समेटने अभिनय कएल जाइत लीला, मनोरंजन लेल होइत नाचसँ फूट सिनेमाक पदार्पण भेल आ सिनेमाक गीतक लोकमे प्रिय होबए लागल आ गाओल जाइत मैथिली गीतक लोकप्रियता घटए लागल। मधुपजी लोकमानसमे पसरैत रोग अर्थात घटैत लोकप्रियताकेँ अकानि सिनेमा गीत सभक भासपर मैथिलीमे गीत रचए लगलाह आ से सभ बेस लोकप्रिय भेल। यद्यपि, मधुपजीक संग किछु आर गीतकार सभ गीत रचना केलनि मुदा हुनका लोकनिक छविमे ओ निखार नहि आबि सकल जे मधुपजीमे रहलनि। यद्यपि, प्रदीपजी किछु मौलिक गीतक अवश्य रचना केलनि जे सभ अपन समयमे अनेक मंचसँ गाओल जाइत रहल, मुदा हुनकर रचल गीत सभ सिनेमाक गीतक सोझाँ झूस होइत छल तथा नवताक माँग करैत छल एवं ओ गीत सभ सिनेमाक भासपर रचित मधुपजीक गीतक आगू हल्लुक लगैत छल। मैथिली गीतक लेल व्याप्त एहने दारुण समयमे मैथिलीक गीति-साहित्यिक आकाशमे मैथिलमे पसरल आ परसल जाइत गीत सभमे पाओल जाइत त्रुटिकेँ संपूर्ण सजगतासँ अकानि मैथिली गीतकेँ लोकप्रियताक शिखर धरि लए जेबाक लेल समस्त नवता-बोधसँ युक्त उन्नायक बनि, गीतकारक रवीन्द्र नाथ ठाकुर जे प्रकट होइत छथि से मैथिली गीतक स्वर्णकाल लए जेबाक एकटा चकित करैत घटना थिक। गीतकार रवीन्द्रनाथ ठाकुर, देखलनि जे सिनेमाक गीतक भासक आधारपर जखन लोक मैथिली गीत पसिन्न करैत अछि तखन मैथिलीक सिनेमाकेँ सेहो पसिन्न करत, तँइ ओ मैथिलीमे सिनेमा सेहो बनौलनि जकर नाम "ममता गाबए गीत" थिक जकरा लोकप्रिय बनेबाक लेल, हिंदी सिनेमाक चर्चित अभिनेत्री अजराकेँ सिनेमामे रखलनि तथा चर्चित गायिकासँ गीत गबौलनि, जकर गीतकार आ संगीतकार, हमर थोड़ जनतबमे अछि आ स्वंय रहथि। रवीन्द्र नाथ ठाकुर मैथिलीमे गीत रचनाक लेल एहि क्षेत्रक जनजीवनकेँ गीतक विषय बनौलनि जाहिमे दुःखे-दुःख आएल। कदाचित् हुनकर मानब छलनि जे दुःख लोक सूनए चाहैत अछि। हमर तँ मानब अछि जे विद्यापतिक गीत "कखन हरब दुख मोर हे भोलानाथ" आइयो लोक गबैत अछि आ लोकप्रिय अछि जे ओहिमे दुःखक गप्प भेल अछि। आ हिंदीक कवि मदन कश्यपक कविताक तँ एकटा पाँति अछि जे "मुझको विद्यापति का दुख चाहिये"। गीतकार रवीन्द्रनाथ ठाकुर अपन गीत रचनाक लेल एक दिस जँ एहि क्षेत्रक जनजीवनक विषयक चुनाव केलनि तँ दोसर दिस ओ अपन गीत लेल अपन लयक सेहो अविष्कार केलनि। एहि दूनूक संगे रवीन्द्रनाथ ठाकुर मिथिलामे प्रचलित पौराणिक पात्रकेँ अपन गीत लेल लेलनि, जाहि लेल हुनका जगज्जननी जानकी, हुनकर कष्टमय जीवन आ हुनकर वेदनामय वाणीसँ बहराएल समाद पर्याप्त छलनि। हुनकर गीतक पाँति द्रष्टव्य अछि-- कने बाजू हे प्राण अहाँ ई की केलहुँ कोना सोनाके अहाँ मानि सीता लेलहुँ हम विदेहक धिया तें विदेही भेलहुँ तथ्य राखब नुकाय हमर सन्तान सँ।। मिथिलाक सभ दिनसँ मुख्य व्यवसाय खेती रहल। खेती, परिवारक सभ सौख-सेहंता पूर्ति नहि कऽ सकैत छल तँइ एहिठामक लोक सभ दिनसँ कमेबाक लेल परदेस जाइत रहल छथि। महाकवि विद्यापतिक गीतमे सेहो एहिठामक लोकक परदेस कमाए लेल जेबाक वर्णन भेटैत अछि। गीतकार रवीन्द्रनाथ ठाकुरक रचित गीतमे एहिठामक लोकक परदेस जेबाक जे चर्च भेल अछि तकर मूलमे अभाव थिक। से एहिठामक लोक कतेक अभावमे जीवन बितबैत छल तथा जनसाधारण कतेक बेसी अपमानित आ निर्धनताक जीवन जिबैत छल तकर हृदय विदीर्ण करए बला एकटा बानगी देखू-- बरद एक्केटा छल, सेहो पहिने मरल खेत अनके दखल, तै पर करजा लदल तँ जैह-सैह आबि , जैह-सैह कहि जाइछ सहिते-सहैत आब भथि गेल इनार बुझु काया लचार बुझु, वैदक उधार बुझु कतेक बात लिखब की आफत हजार बुझु... मैथिली साहित्यक समर्पण आ प्रेम सभ दिनसँ मुख्य स्वर रहल अछि। प्रेमक अविरल धारामे बहेबामे मैथिली साहित्य अग्रगामी रहल अछि जाहिमे परकीया प्रेमक स्वर सर्वाधिक मुखर रहल अछि। मुदा दाम्पत्य-प्रेमक जीवनमे अप्रतिम महत्व सर्था रहलैक अछि। गीतकार रवीन्द्रनाथ ठाकुरक एकटा गीतक अधोलिखित पाँतिक अवलोकन करू जाहिमे मैथिल संस्कृतिक ओहि विधिकेँ उजागर कएल जाइत अछि जे द्विरागमनक पूर्व हजाम अबैत अछि, तकरा चित्रात्मक अभिव्यक्ति कतेक सहजतासँ देलनि अछि जे मुग्ध आ मोहित करैत अछि- बन्हने छलियै केश फलकौआ कोंचा बला नुआ छलै आँचर घुमौआ लेलक अझक्के मे देखि मुँहझौंसा अहीँ के गामक बुढ़बा हजाम पिरिये पिराननाथ सादर परनाम। गीतकार रवीन्द्रनाथ ठाकुरक गीत सभमे नवताक प्रवेश हुनकर अपन प्रतिभा, मैथिली गीतक प्रति सर्वोत्तम समर्पणक बले भेल अछि जाहिमे भाषा आ ओहि प्रचलित शब्दक अप्रतिम योगदान अछि जे शब्द सभ उर्दू-फारसीक थिक आ मैथिल समाजमे बाजल जाइत अछि। गीतकार रवीन्द्रनाथ ठाकुर मैथिली गीतकेँ, गीतक लोकप्रियताकेँ ध्यानमे राखि जे स्तरोन्नयन केलनि ताहि बाटकेँ प्रशस्त करबामे अनेक गीतकार लागल छथि जाहिमे डा. चंद्रमणि प्रमुख छथि। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। लक्ष्मण झा सागर, संपर्क-9903879117 मिथिलाक मुकुटमणि रवीन्द्र तहिया हम मधुबनी मे पढ़ैत रही। 1971- 72 केर घटना थिक। सुनल जे लहेरियासरायमे मैथिलीक कोनो कार्यक्रममे रबीन्द्र जी मारि-पीट कऽ लेलनि आयोजक लोकनिसँ। कथी लेल त दारू लेल। रवीन्द्र जी कहाँ दन कहै छलखिन जे हमरा लेल बोतलक इंतजाम कियै ने भेल? नै भेल त टाका दिअ हम कीनि लेब। तहीपर बाता-बाती भऽ गेल छल। आ से तखने शान्त भेल जहन हुनका बोतलक दाम भेटलनि। हमरा नजरिमे रबींद्र जीक प्रति बहुत दिन धरि नीक धारणा नै रहल। तकरा बाद हम जहन उच्च शिक्षा लेल 1974 मे कलकत्ता गेलहुँ त चौधरी जीक (स्व बाबू साहेब चौधरी) प्रेस खिलात घोष लेनमे अखिल भारतीय मिथिला संघक किछु पदाधिकारी सभसँ सुनल जे ऐ बेर रबींद्र-महेन्द्रक जोड़ीकेँ बजौल जाय। हमर कान ठाढ़ भऽ गेल। नव-नरस गेले रही। किनको किछु पुछबाक साधंस नै भेल। दू तीन दिनक बाद चौधरी जी अपने हमरा कहलनि जे विद्यापति पर्व समारोहमे रबींद्र- महेंद्रक जोड़ीक उपस्थित भेनाय अनिवार्य रूपेँ आवश्यक भऽ गेल अछि। सभागारमे दर्शक लोकनिक भीड़ मात्र एहि जोड़ीक नाम सुनि उमरि पड़ैत अछि। मैथिली आन्दोलन वाला बात हम सब भीड़क माध्यमसँ बेसीसँ बेसी प्रवासी मैथिल बंधु सभ लग पहुँचा पबैत छी। ई बात हमरा मोनमे जे रबींद्र जीक प्रति अरुचि उत्पन्न भऽ गेल छल तकरा आदर आ श्रद्धामे बदलि देलक। मिथिला मिहिर आ मैथिली दर्शन दुनू पत्रिकाक नियमित पाठक रहल करी। दुनू पत्रिकाक प्रकाशन सुचारू रूपेँ होइत रहल करै। दुनू पत्रिकाक अंतिम दू-तीन पृष्ठ सभा- संस्थाक गतिविधि सब छापैत रहै। हम से सब खूब गहिंकी नजरिसँ पढ़ल करी। देखैत रही जे मिथिला आ प्रवासी मैथिली सेवी अधिकांश संस्था सभ रबींद्र- महेंद्रकेँ बजबैत रहल छलनि। खूब लोकक जुटान भेल करै। दुनू युगल जोड़ीक लोकप्रियता उठान पर रहै। पहिल भेंट हमरा दुनू गोटेक जोड़ीसँ कलकत्तेमे भेल छल आ से विद्यापति समारोहक अवसरपर। हमरो स्वागत कमिटीक एक सदस्य रूपेँ कार्य देल गेल छल अतिथि सभक स्वागतमे सदिखन रहबाक लेल। हमरा तकर लाभ भेटल जे हम दुनू गोटेसँ परिचय पात कऽ लेने रही। रबींद्र जी पूर्णियाँ जिलाक धमदाहा गामक छथि। महेन्द्र जी मधुबनी जिलाक जमसम गामक लोक छलाह। महेंन्द्र जी गीत लिखैत छलाह। आ दुनू गोटे गीत गवैत रहथि। लोक के से नीक लागि रहल छल। पहिने त रबींद्र जी खाली गीत लिखैत रहैत छलाह आ से अपने गबितो रहथि। गला नीक नै रहनि। तही पर प्रो मायानन्द मिश्र जी हुनका कहने रहथिन जे विधातासँ एकटा चूक भऽ गेलनि। तोहर वाला गुण हमरा दितथि आ हमर वाला गुण तोरा दितथुन त कमाल भऽ जइतै। माया बाबुक् स्वर बड़ मीठगर रहनि। खैर, जे से। बेगुसरायक कोनो मैथिली प्रोग्राममे रबीन्द्र जीकें कियो कहलखिन जे एहि युवक के अपना संगे लऽ जइयनु। नीक गबैत छथि। युवक रहथि महेन्द्र जी जे रबींद्र जीक गीत के अपन स्वर दऽ मैथिली गीत के एकटा नव आयाम देलनि। सगरो तहलका मचाय देलखिन। रवीन्द्र- महेन्द्रक जोड़ी आधुनिक मिथिलाक गीतक आरम्भ थिक। मैथिली आन्दोलन के गति देबामे एहि जोड़ीक भूमिका अप्रतिम अछि। तकरा बाद सरस- रमेश, शशिकांत- सुधाकांत, पवन- गोविंद, धीर- महेन्द्र- जयराम( तीजोरी) आ अपना दमपर एसगर प्रदीप मैथिलीपुत्र, चन्द्रभानु सिंह आ चन्द्रमणि जीक नाम आदर पूर्वक नै लेब घोर अन्याय हैत। कवि चूड़ामणि काशीकांत मिश्र मधुप जी, स्नेहलता जी आ डा. बी झाक कतिपय गीत सभ मिथिलाक लोकक जीहपर एखनो बसल अछि जे विद्यापतिक बाद मैथिली गीत साहित्य के जीवंत रखने अछि। हम बात करैत रही रबींद्रजीक से कहय लागल रही जे रबींद्र-महेन्द्रक जोड़ीसँ हमरा बेसी काल भेंट-घाँट होइत रहय लागल। कलकत्तामे एकटा सांस्कृतिक मंचपर दुनू गोटे रहथि। कवि सम्मेलन सेहो रहै। हमरो एकटा गीत फुरायल। गीत गायन भेल हमर। महेन्द्र जी हमरा कहलनि जे अहाँ कियैक गीत गायन कैल? अहाँक त कविता नीक होइत अछि। रवीन्द्र जीक कहब रहनि जे विद्यापति आ बांगलाक रबींद्र नाथ ठाकुर जँ आइ विश्व कवि मानल जाइत छथि त गीतेक बलपर। हम दुनू गोटेक बात सुनि कऽ चुप भ गेल रही। मुदा, जीवन यात्राक क्रममे असरि दुनू गोटेक बातक पड़ल। ई कहब जे रबींद्र जीक गीत यात्राक जे गाड़ी चललनि ताहि गाड़ीक एकटा पहिया महेन्द्र जी छलाह। महेन्द्र जीसँ अंतिम भेंट भेल गुआहाटीमे से पछिला सदीक उत्तरार्धमे। तकरा बाद सुनल जे महेन्द्र जी एहि दुनियाँकेँ टा-टा , बाइ-बाइ कए कऽ चल गेलाह। पत्नी हिनकासँ पहिने चल गेल रहथिन। आब रबींद्र जी एसगर भऽ गेल छलाह। सुनयमे आयल छल जे रबींद्र जी किछु दिन बहुत आर्थिक संकटमे रहल छलाह। कियो हित अपेक्षित घुरि कऽ खोज खबरि नै लैत छलनि। एहि अवधिमे रबींद्र जी पत्रिका निकालैत रहल छलाह। पोथी सब लिखलनि। महेन्द्र जीक नहि रहने रबींद्र जी के कोनो सांस्कृतिक कार्यक्रमक मंचपर नै देखल गेल। जीवनक अंतिम पराव भेलनि दिल्ली। जीवनमे जे उपार्जन केलनि ताहिसँ किछु टाका बचा कऽ दिल्लीमे किछु गज जमीन किनने रहथि। सैह जमीन पैत रखलकनि। जमीनक किछु अंश करोड़ टाकामे बेच कऽ अपन घर बनेलनि। आरामसँ गुजर-बसर हुअय लगलनि। भाइ लोकनि बाजय लागल रहलाह जे रबींद्र जी त आब धन्ना सेठ भऽ गेल छथि। हमरा से सुनि के खुशी होइत छल। पटनामे मैथिली अकादमीक अध्यक्ष रहल छलाह। अपना अवधिमे रबींद्र जी मैथिली गीत -संगीतक संवर्धन लेल अभिनव प्रयोग सब करैत रहलाह। खूब नाम यश भेलनि। कहि दी जे रबींद्र जीक चारि पुश्त मैथिलीक गीत संगीतक विधा के अकाश ठेकाय देलनि। हिनक पिता निष्णात संगीत साधक रहथिन। हिनकर त कोनो बाते नै। पुत्र श्री अवनीन्द्र नारायण ठाकुर दिल्लीमे संगीतक एकटा नामी हस्ती छथिन। हमरा अचानक एक दिन दू साल पूर्व हिनक फोन आयल जे हमर पोती सा-रे-गा-मा प्रोग्राममे नम्बर वन पर आबि जायत जँ बेसी सँ बेसी भोट करै लोक सब। से नै भेलइ मुदा, दू पर त आबिये गेल रहै। सहरसामे कोनो सांस्कृतिक कार्यक्रममे रबींद्र जी सेहो दर्शक रूपे आगूक पाँतीमे बैसल रहथि। मंचपर एकटा कलाकार आबि कऽ हिनके गीत के भोजपुरी टोनमे गाबय लागल छल। बगलमे बैसल रहथिन डा मदनेश्वर मिश्र जी। हिनका कहलखिन जे हौ ई त तोरे गीत के भोजपुरी मे गबैत छहु। रवीन्द्र जी विनीत भावे उत्तर देलखिन जे गाबय ने दियौ अपन मैथिलीक पसार भऽ रहल अछि। हुनका अप्पन प्रचारसँ बेसी मैथिलीक क्षेत्र विस्तार नीक लगैत रहलनि अछि। एक बेर मैथिलीक कोनो कार्यक्रममे रबींद्र-महेन्द्र पंजाब गेल रहथि। महेन्द्र जी कहने रहथिन जे एतय त लोक सब भांगरा बुझैत छै। रबींद्र जी कहलखिन जे चिंता नै करह। रबींद्र जी आशु गीतकार रहलथि अछि। तुरत्ते हिनक जोड़ी शुरू भऽ गेल रहथि- कहू कि हम झूठ कहै छी नै यौ नै यौ......। रवीन्द्र जी प्रयोगवादी गीतकार रहलाह अछि। हिनक गीतक किछु अंशक चर्च नै केने बिना ई आलेख अधूरा रहि जायत। देखल जाय- बाबा दण्ड वत बच्चा जय सियाराम। अर्र बकरी घास खो चलु भैया रामहि राम हो भाइ माता जे विराजे मिथिले धाम मे। बहुत एहन गीत सब अछि जे मनोरंजनक अतिरिक्त अपन माटि अपन पानि अपन सभ्यता संस्कृतिक प्रति लोकक रुचि जगबैत अछि। सचेत करैत अछि। स्वस्ति फाउन्डेशन,सहरसा हिनका प्रबोध साहित्य सम्मान देने छनि। उचिते केने छनि। हालहिमे मिथिला सकल समाज,दिल्लीमे हिनक नागरिक अभिनन्दन भेलनि अछि। बाजिव भेल अछि। आब हम रबींद्र जीक बारे मे अपन किछु संस्मरण कहय चाहब। अस्सी दशक के उत्तरार्धमे रबींद्र जी कलकत्ता आयल रहथि ममता गाबय गीतक प्रीमियर शो करबय लेल। हम तखन कलकत्ता केला बगानक राजेन्द्र छात्र निवासमे रहैत रही। रबींद्र जीक भोजन आवासक बेबस्था सटले श्री सत्य नारायण लाल दास जीक घरमे भऽ गेल रहनि। भोरे रबींद्र जी हमर खोज पुछारि लेल होस्टल आयल रहथि। हम सी ए परीक्षाक तैयारी लेल छुट्टीपर रही दू महिना। कहलनि जे अहींक भरोसपर एतय अयलहुँ। हमरा एहन काज सबमे नीके लगैत छल। पोथी पतरा कात कऽ देने रही। आ लागि गेल रही रबींद्र जीक संग। भोरे आठ बजे निकली आ राति के दस बजे धरि आबि जायल करी। देबाल सबपर मैथिलक घरक पछुआर् सबपर गली चौक सबपर ममता गाबय गीतक पोस्टर आ बैनर साटल करी दुनू गोटे खूब उत्साह आ उमंगसँ। अही क्रममे तत्कालीन मिथिला मैथिलीक अनुरागी लोकनिसँ भेंट सेहो कैल करी। कियो चाह बिस्कुट त कतहु जलखै पनापिआइ आ कैक ठाम त भोजनोक आबेस भऽ जाय। एक दिन श्री बुद्धिनाथ मिश्र जी जे दूरक लाटें रबींद्र जीक साढ़ू छथि अपना आवासपर दिनका भोजनक नोंत दऽ देलखिन। बुद्धी भाइ तखन साल्ट लेक जे अविकसित इलाका छलमे रहैत छलाह। रवि दिन रहैक। दुनू गोटे गेल रही। भोजनपर बैसल रही तीनू गोटे। गप-सर्रका चलैत रहै। बुद्धी भाइ पुछलखिन जे माछ बनलै नीक। हम चुप्पे रही। रबींद्र जी कहलखिन जे हमरा कने मधनोन लगइए। बुद्धी भाइ बाजल रहथि जे एतय हमरा घरमे नूनक खर्च नै होइए। एतुक्का पानिमे नून मिलाएले रहैत छैक। हमरा साल्ट लेक नामक सार्थकताक बोध भेल। रबींद्र जी बाजल रहथि जे एतय लोक एकादशी कोना पार लगबैत छथि। भरि दिन दुनू मैथिली-पुत्रक बात सब सुनैत रही। लागय जेना हमर परीक्षाक तैयारी भऽ रहल छल। मास दिन धरि रबींद्र जीक संग कलकत्तामे कोना बितल से नै बूझि सकल रही। भरि दिन पोस्टर साटी आ साँझ कऽ अखबार लेल समाचार बनाबी। विश्वमित्र आ सन्मार्गमे खबरि छपै। रवीन्द्र जी सब दिन पेपर कटिंग रखैत जाथि। ताही समयक गप थिक। महाजाति सदनमे कोशी कुसुम पत्रिकाक विमोचन समारोह भेल रहै। संपादिका रहथि श्रीमती अम्बिका मिश्र (श्री मृत्युंजय नारायण मिश्रक पत्नी, ललित बाबूक भावहु आ जगन्नाथ मिश्रक भाउज)। सब गोटे मैथिली पत्रिकाक उन्नयनक बात भाषणमे बाजल करथि। रबींद्र जी अपना भाषणमे बजलाह जे मैथिलीक अभ्युदय लेल मैथिलीक सिनेमापर ध्यान देब बड़ जरूरी काज अछि। हुनक कृतज्ञता देखू जे अपना भाषणमे हमर नामक चर्च केलनि आ हमर परिचय मैथिलीक उर्जावान पत्रकार रूपे देलनि। मैथिल समाजमे एहि गुणक तीव्रतासँ बिलौनी भऽ रहल अछि। रवीन्द्र जीपर बहुत काज हैब बाँकी अछि। मिथिला विश्वविद्यालय हरही-सुरहीपर शोध कार्य करबा रहल अछि मुदा, रबींद्र जीक काजक संज्ञान लेब उचित नै बूझि रहल अछि। एहिसँ दुःखद बात आर की भऽ सकैत अछि। हम आभारी छी विदेह पत्रिका (http://www.videha.co.in/)क समस्त टीमक जे रबीन्द्र जी सन मिथिलाक सपूतपर एकटा अपन फ़राक अंक निकालि रहल छथि। खूब नीक काज भऽ रहल अछि। अंतमे हम अपन अग्रज श्री रबींद्र नाथ ठाकुर जीक स्वस्थ आ दीर्घायु जीवनक लेल माँ मैथिलीसँ मंगल कामना कऽ रहल छी! अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। डॉ. कैलाश कुमार मिश्र- संपर्क-8076208498 रवीन्द्रनाथ ठाकुर, हुनक रचना आ जनमानस केर उदासीनता हमरा लोकनि अपन मानवीय धरोहरक सम्मान आ सत्कारमे कने कंजूस रहल छी। ई संस्कार आजुक नहि अछि, अदौसँ मानवीय धरोहर केर प्रति निष्क्रियताक स्थानीय धरोहर अथवा संस्कारक रूपमे आबि रहल अछि। आब मैथिल समुदाय बहुत पोखगर अनुपातमे प्रवास आ अपन योगदानक कारणे वैश्विक भऽ रहल अछि। हम सब वैश्विक सोच आ शारीरिक उपस्थिति दुनू रूपमे भऽ रहल छी। वैश्विक भऽ रहल छी तँ हमर सबहक ई दायित्व बनैत अछि जे हमरा लोकनि वैश्विक संस्कृतिक नीक बात, प्रथा, परम्परा आ संस्कारकेँ अंगीकार करी। ई कहब सहज छैक जे हमर संस्कृति, संस्कार, लोक व्यवहार सर्वोत्तम अछि, मुदा ओहूसँ पैघ बात अपन संस्कृतिमे जे घाव अछि तकरा ठीक करब। कायाकेँ निरोग रखबा लेल रुग्ण अंगक समुचित चिकित्सा आ जरुरी पड़ला पर शल्यचिकित्सा सेहो आवश्यक। अहिसँ भले प्रारम्भमे कने कष्टक अनुभूति हो, बादमे जीवन सुखद भऽ जाइत छैक। रवीन्द्रनाथ ठाकुर दीर्घ आयु जिबैत मृत्युलोकसँ अनन्तक यात्रा हेतु प्रस्थान कऽ गेलाह। आब ओ हमर सबहक नित्य स्मरणीय पितर छथि। हुनक रचना पर किछु लिखब नब नहि हएत। एक बात अवश्य जे ओ जन-जनमे व्याप्त गीतकार छथि। हुनकर रचना लोक पढ़ि कऽ कम आ सुनि कऽ, दोहरा कऽ, गुनगुना कऽ, अनुकरण, अनुशरण करैत सीख लैत अछि। अगर बिना पोथी देखने हुनकर रचनाक संकलन करबाक हो तँ 45 आ 80 बरखक बीच केर करीब एक सए स्त्री पुरुष लग चर्च करू, सब मिलि हुनक सब गीत लिखा देताह। अगर ओहूमे आलस्य भऽ रहल अछि तँ सोशल साइट पर लोक सबसँ निवेदन करू, किछुए दिनमे अहाँक संकलन तैयार। लोक कंठमे अहि तरहक कमोवेश मिथिला भूमि – अहि पार, ओहि पार आ तमाम भौगोलिक उपक्षेत्र अथवा पॉकेटमे लिंगभेद ओ जातिक आरि तोड़बाक मोनोपोली महाकवि विद्यापतिक बाद अगर ककरो भेटल अछि तँ ओ छथि रवीन्द्रनाथ ठाकुर। हुनक गीत जखन महेन्द्र जीक गलाक चिपमे सेट भऽ जाईत छल तँ ओकर भाव देसी राहरिक दालिमे घी संग तेजपत, जीरक फोरन जकाँ भऽ जाइत छल। मिथिलामे जन सरोकारक गीत काशीकांत मिश्र “मधुप”, स्नेहलता (कपिल देव ठाकुर), मैथिलीपुत्र प्रदीप आदि लिखलनि। सभक रचना अपना आपमे अपूर्व छल। मधुप स्वयं गबैत नहि छलाह। गीतक वेरिएशन सीमित छलनि; स्नेहलता राधा-कृष्ण आ सीता-राम भक्तिमे एकनिष्ठ योगी जकाँ केन्द्रित रहला; प्रदीप किछु गीत समाजिक व्यवस्थापर केन्द्रित करैत अन्ततः सीता-राम, जगदम्बा आ भगवान भजनमे सन्तक डेगसँ लिखैत रहला। रवीन्द्रनाथ ठाकुर की नहि लिखलनि? हिनक रचनामे नायक –नायिकाक प्रेम, तरुणक प्रेमक उद्वेग, मिथिला भूमिक कण-कण केर गान, सीताक बेदनाक चित्रण, ओकर ओहि पर सोच, चिंतन, मनन, राम संग लड़बाक हिम्मत, पुरुख मोनमे नारी भावक व्यवस्थापन, बाल गीतमे नेना मोनक अबैत जाइत मनोवैज्ञानिक भावक छोट-छोट खाटी शब्द आ कवित्तसँ प्रस्तुतिकरण भेटत। हिनक गीतमे नाटक भेटत, स्त्री-पुरुषक प्रेम, नोक-झोक भेटत। हिनक गीतमे परदेसिया मैथिलक दर्द, माता पिताक समस्या, जनरेशन गैप, संगतुरिया मस्ती, पर्यटन, यायावरी प्रवृति, गामक लोकक शहर अथवा नगर केर जीवनक अनुभव, ओकर विवेचन, गाम आ नगरमे तुलनात्मक विवेचन सब किछु भेटत । हिनकर गीतमे अतिवादी सेहो लोकवादी बनल अल्हड़ बनल भेटता। हिनक गीतमे की मधुबनी, की पुरनिया, बेगुसराय, सीतामढ़ी, दड़िभंगा आ नेपालक मिथिला सब एकाकार भेटत। रवीन्द्रनाथ जी शब्दक जादूगर छलाह। भावक आ गीत आ छंदक पेटार छलाह। चूँकि स्वयं स्टेज पर गीत गबैत छलाह तँ उतार-चढ़ाव सब बात बुझैत छलाह। श्रोता संग आँखि आ बॉडी लैंग्वेजसँ वार्तालाप करैत तदनुकूल रचना करैत छलाह। हुनक गीतक कुनो एक उदाहरणसँ हम अतए स्थानकेँ अनेरे नहि छेकए चाहैत छी। ताहि हम बिना उदाहरणकेँ अपन बात लिखैत छी। पढ़ैत रहू। रवीन्द्रनाथ ठाकुर जी केर गीत संग मिथिलाक हवा, पानि, पोखरि, इनार, नदी, खेत , पथार, चिड़इ-चुनमुन सब मस्त छैक। सब हँसै छै। सब पात्र छैक। सभक अभिनय छैक। एक लड़की जे सासुरसँ नैहर जा रहल छैक, आ नदी उमटाम भरल छैक, तकरा लेल मलाह मात्र मल्लाह नहि भैया छैक। वएह धार पार करेतैक। परदेशी मिथिला चलैत मस्त हवासँ वार्तालाप करैत छैक। तप, जप, काम सब किछु छैक। की नहि छैक। अगर किछु नहि छैक तँ रवीन्द्रनाथ ठाकुर लेल उचित सम्मान। से कियैक ? रवीन्द्रनाथ ठाकुर केर तुलना हमर बउआइत मोन असमिया गीत लेखक आ गायक भूपेन हजारिकासँ करैत अछि। संयोग देखू जे दूनु गोटे समकालीन छलाह। मिथिला अनेक प्राकृतिक आ सांस्कृतिक वैविध्य केर आधारपर असमसँ बहुत लगीच अछि। मल्लाह, हवा, धार, जन मानस, स्थानीय प्रेम आ खाँटी देशी शब्द भूपेन हजारिका आ रवीन्द्रनाथ ठाकुर दुनुक रहल छनि। दूनू अपन-अपन मातृभाषा क्रमशः असमिया आ मैथिलीसँ बहुत सिनेह करैत छलाह। दूनुक रचना काल एक रहल छनि। ओना भूपेन हजारिका रवीन्द्रनाथ ठाकुरसँ दस बरख पैघ छलाह। दस बरख पैघ छलाह तँ हुनक मृत्यु सेहो रवीन्द्रनाथ ठाकुरसँ लगभग दस वर्ष पहिने 2011मे भेलनि। मुदा दुनूमे आसमान जमीनक स्पष्ट अंतर छनि। की? भूपेन हजारिका स्टार नहि सुपर आमेगा स्टार छथि। हुनका फालके पुरस्कार भेटल छनि। ओ देशरत्न थिकाह। असम केर लोक भूपेन हजारिकामे भगवान देखैत छल। एखनो देखैत अछि । भूपेन हजारिका केर मृत्यु केर बाद हुनका पद्मविभूषण, आ भारतरत्न भेटलनि। भारतरत्न तँ मृत्यक 8 वर्ष बाद भेटलनि। ई सब बात हुनका अलग व्यक्तित्व प्रदान करैत छनि। चाहे असमिया कुनो जाति, सम्प्रदाय, वर्ग, क्षेत्रक हो, भूपेन हजारिका सबहक पूज्य छथि, असमिया संस्कृति केर नायक छथि। कनेक्टिंग फैक्टर छथि। ई बात ई प्रमाणित करैत अछि जे असम केर लोक अपन मानवीय धरोहर केर सम्मान करब जनैत अछि। हमरा लोकनि अर्थात मैथिल रवीन्द्रनाथ ठाकुरकेँ जिबैतमे सेहो दूर धकेलने रहलहुँ अछि। मानवीय धरोहर केर सम्मान कोना करी ई कला हमरा सभकेँ मराठीसँ सिखबाक चाही। ध्यानचंद, कपिलदेव, अमिताभ बच्चन सन धुरंधर लाइनमे लागल रहलनि आ अपन एकता आ मुखर प्रवृति केर बलपर मराठी सब सचिन तेंदुलकरकेँ भारतरत्न दिया लेलक। सचिन केर कंटेम्पररी धोनी मुँह देखैत रहि गेलाह। एकरा कहैत छैक मराठी मानुष केर संस्कार। अपनामे भले लड़ब मुदा अपन आइकॉन लेल, अपन संस्कृति संरक्षण लेल एक रहब। किन्सियाइत ई गुण मैथिल मानुषमे आबि गेल रहैत ! ठीक छैक, मैथिल साहित्यकार केर लॉबी रवीन्द्रनाथ ठाकुरकेँ साहित्य अकादमी पुरस्कारसँ वंचित रखने रहलनि। साहित्यकार लोकनि हुनक प्रयोग जे ओ साहित्यमे गीत लेखनकेँ छोड़ि आन दिशा जेना गद्य लेखन, कविता आदिमे केलनि तकरा संज्ञानमे नहि लेलनि। बहुत रास बात भेल। मुदा ताहि लेल जनताक आक्रोश कहाँ भेटल? मिथिला, पटना आ दिल्लीमे कार्यरत असंख्य संस्था कहाँ कोनो उचावच केलक हिनका लेल! सब सुतल रहल। जनता आ दरभंगा, पटना, दिल्ली, कोलकाता, मुंबई आदि नगर आ महानगरक संस्थाक सभक सहयोगसँ, निष्ठा आ आन्दोलनसँ राजनीतिक दबाबसँ रवीन्द्रनाथ ठाकुर लेल पद्मश्री आ पद्मभूषण बहुत छोट चीज छल। मुदा, हाय रे मिथिलाक दुर्भाग्य! अहि लेल संस्था सब सोचबो ने केलक। अपना आपके समाजक प्रतिनिधित्व कहय बला संस्था आ संगठन घोड़ा बेचि सुतल रहल। रवीन्द्रनाथ ठाकुर जेना महेन्द्र जी संग अपन स्टेजकेँ जोड़ी बनेलाह तहिना किछु जोड़ी स्त्री-पुरुष केर तैयार कएल जा सकैत छल। स्त्री पुरुष केर जोड़ी बनलासँ गीत सभहक प्रस्तुति आरो नीक भऽ सकैत छल। यद्यपि 1970 आ 80 केर दशकमे अनेक ठाम पुरूखक जोड़ी बनल मुदा कूनो शाश्वत जोड़ी नहि बनि सकल। बेर-बेर ईमानदारीसँ कहि रहल छी जे हमरा लोकनिकेँ अपन मानवीय धरोहर केर प्रति कनि साकांक्ष होबाक दरकार अछि। साकांक्ष होबा लेल समस्त समाजमे अपन संस्कृति संरक्षण हेतु सामूहिक सिनेह उत्पन्न भेनाइ आवश्यक। कतेक उदाहरण देखैत छी जाहिमे हम सब विध पुरौआ काज करैत लोककेँ, समाजकेँ आ अपना आपकेँ ओहिना मनबैत छी जेना कोनो माता अपन छोट नेनाकेँ पानिसँ भरल थारीमे चान केर प्रतिबिम्ब देखा ओकरा मना दैत छथि जे चान थारीमे आबि चुकल अछि। बहुत दुखद स्थिति अछि। हम सब एखनो धरि चंदा झा (कवि चन्द्र), यात्री, प्रदीप आ रवीन्द्रनाथ ठाकुर लेल किछु नहि कऽ पाबि रहल छी। तीन महिना जखन मृत्युकेँ भऽ जाइत छनि तखन अपना आपके पैघ कहए बला संस्था लिली रे केर स्मृतिमे शोक सभा बजबैत अछि। कतेक संस्था सब तँ facebook आ सोशल साइट्स पर लिख काज चला लैत अछि। हम एक प्रयोजनसँ किछु दिन लेल अप्रैलमे पटना गेल रही। ओतय कियोक सूचना देलाह जे दिल्ली आ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्रक तमाम मिथिला मैथिली लेल कार्यरत संस्था श्री रवीन्द्रनाथ ठाकुर केर सम्मानमे बहुत पैघ कार्यक्रम केर आयोजन नॉएडामे कऽ रहल अछि। ई बात सुनि आनंदित भेल रही। बादमे पता चलल जे ओ कार्यकर्म अति सामान्य रहैक। सब कियोक रुग्ण भेल रवीन्द्रनाथ ठाकुर संग फोटो घिचा अपन व्यक्तिगत आ संस्थागत आर्काइव्जमे संचित कऽ लेलाह। जखन ओ आब नहि छथि तँ सब कियोक हुनकर छवि संग अपन छवि बला फोटोकेँ साथ शोक सन्देश प्रेषित कएलनि। दिल्ली आ राष्ट्रिय राजधानी क्षेत्रमे लगभग 100 जाग्रत संस्था अछि। सब कियोक सांस्कृतिक कार्यक्रम करैत रहैत छथि। दिल्लीमे मैथिली भोजपुरी अकादमी सनक दिल्ली सरकार केर संस्था अछि। अहि संस्था केर उपाध्यक्ष संजीव झा मैथिल छथि, तीन बेरसँ विधायक छथि, आ दिल्ली सरकारमे हिनक बहुत नीक प्रतिष्ठा छनि। मैथिली-भोजपुरी अकादमी लेल अगर हुनकासँ सब संस्थाक कर्ता-धर्ता लोकनि वार्तालाप केने रहितथि तँ असगरे मैथिली भोजपुरी अकादमी पचास लाख टका आसानीसँ अहि कार्यक्रममे खर्च कऽ सकैत छल। सब संस्था अगर एक-एक लाख खर्च करैत तँ एक करोड़ सहजतासँ भऽ सकैत छल। दिल्ली केर मैथिल उद्योगपति, एवं जन मानस सेहो यथाशक्ति अपन सहयोग दऽ सकैत छलाह। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री अथवा उपराष्ट्रपतिकेँ अहि आयोजन केर मुख्य अतिथि बनाओल जा सकैत छल। मुंबईसँ उदित नारायण, दिल्लीसँ मैथिली ठाकुर, बिहारसँ शारदा सिन्हा आदिकेँ आमंत्रित कएल जा सकैत छल। अहिसँ दिल्लीक लोक आन भाषा भाषी, मीडिया, नेता, सभ कियोक बुझैत जे एहेन मैथिल आइकॉन छथि रवीन्द्रनाथ ठाकुर। अतबे मात्र केलासँ हुनका लेल पद्मश्री आसानीसँ भेट सकैत छल। कनिक तत्परता, कने सिनेह, कने समर्पण बहुत किछु कऽ सकैत छल। मुदा भेल की! हुनकर कदकेँ आरो छोट कऽ देल गेल। मुदा दोष आयोजक केर नहि, दोष तँ हमरा लोकनिक सोचक अछि। भऽ सकैत अछि बहुत लोक हमर अहि बातसँ बिलबिला उठथि आ हमरे पर नाना तरहक प्रश्न चिन्ह ठाढ़ करथि। मुदा ताहिसँ स्थिति थोड़े ने बदलि जायत? मैथिल समुदाय चाहे मिथिला भूमि केर होथि अथवा प्रवासी होथि,मे विद्वान, समाजिक संस्था, युवा संगठन आ विद्यार्थी संगठन अथवा यूनियन केर मध्य सामन्जस्य नहि भेटैत अछि। ई बात आजुक नहि ऐतिहासिक अछि। भोगेन्द्र जीमे सब गुण छलनि मुदा ओ विद्वान सभ कें दिल्ली केर अखिल भारतीय मिथिला संघ केर कोर समितिमे बहुत सघन भूमिकामे नहि आबय देलथिन्ह। भोगेन्द्र जी ओना तँ अखिल भारतीय मिथिला संघ केर पदाधिकारी नहि छलाह मुदा सही अर्थमे वएह सर्वेसर्वा छलाह। ई प्रसंग लिखबाक प्रयोजन ई जे एखनो हमरा लोकनि अहि सब बात पर गंभीर होइ आ सब तरहक समायोजन करी। एखनो हम सब अपन रत्न: लिली रे, रवीन्द्रनाथ ठाकुर, फणीश्वर नाथ “रेनू”, यात्री, स्नेहलता, प्रदीप लेल बहुत किछु कऽ सकैत छी। कोआर्डिनेशन ताहि लेल बहुत आवश्यक। बहुत बात लिखा गेल। लेकिन सोचब तँ हमरा बातमे कोनो ने कोनो समाधान भेटत। स्वर्गीय रवीन्द्रनाथ ठाकुर मिथिलाक अनुपम रत्न छथि। ओ सदैव अपना रचनाक संग जनमानस केर ह्रदयमे जीवंत रहताह। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’-संपर्क-8789616115 भरि नगरीमे शोर ‘ममता गाबय गीत’ फ़िल्मक ई गीत ‘भरि नगरीमे शोर,बौआ मामी तोहर गोर मामा चान सन’ सौंसे मिथिलामे मिथिलाक माटि-पानि आ बसातक सुगन्धि नेने शोर करैत आएल आ जन-जनक मोनकें आनन्दित,प्रफुल्लित आ दलमल्ल्लितक’ देलक |एच.एम.वी. कम्पनी क रेकॉर्डमे एहि गीतक संग किछु और गीत छलै : ‘अर्र बकरी घास खो / छोड़ि गठुल्ला बाहर जो / लूरू-खुरू बिनु केने बहिना पेट भरय नहि ककरो’ ‘कनी बाजू अमोल बोल भौजी, कहू लेब कोन गहना’ ‘मिथिला केर ई माटि उडल अछि छूबय गगनक छाती भरि दुनियाँ केर मंगल हो आ जन-जन गाबय प्राती चलू भैया रामे-राम हो भाइ, माता जे बिराजै मिथिले देशमे’ ई सभ गीत मिथिला-क्षेत्रमे ओहि समयक फ़िल्मी गीत सबहक प्रभावकें त’र क’ देने छल | उत्सुकता छल बुझबाक जे ई गीत सभ के लिखने छथि | रेकॉर्डमे गीतकारक नाम ‘रवीन्द्र’ लीखल छलै | एहिसँ जिज्ञासा बनले रहल | ई रवीन्द्र के छथि, कत’ रहैत छथि | एक बेर दुर्गा पूजाक अवसरपर मधुबनी जिलाक यमसम गाममे नाटक देखबाक अवसर भेटल | ओत’ नाटकक सभ दृश्यक समाप्तिपर ओही गामक निवासी आ लोकप्रिय गायक महेन्द्र झा जीक स्वरमे उपरोक्त सभ गीतक संग और बहुत रास गीत सभ सुनबाक सुअवसर प्राप्त भेल | ओहू ठाम ई जिज्ञासा बनले रहल जे ई गीत सभ के लिखने छथि | चलू चलू बहिना : एक दिन मधुबनीमे स्टेशन लग एक ठाम एक गोटे लग मधुप जीक ‘टटका जिलेबी’ आ ‘अपूर्व रसगुल्ला’क संग एकटा पोथी देखलहुँ ‘चलू-चलू बहिना’ | ई पोथी हाथमे लेलहुँ | गीतकारक नाम लीखल छलै ‘रवीन्द्र नाथ ठाकुर’ | देखलिऐ जे एहि पोथीमे ओ सभ गीत छै जे सभ एच.एम.बी.क रेकॉर्डमे देखने छलहुँ आ यमसममे महेन्द्र झाजीक मुँहसँ सुनने छलहुँ | पोथीक भूमिका पं.चन्द्रनाथ मिश्र ‘अमर’जी लिखने छलाह | ईहो पता चलि गेल जे रवीन्द्र जी पूर्णियाँ जिलाक धमदाहा गामक निवासी छथि | एहि पोथीमे किछु और लोकप्रिय गीत सभ छलै : ‘चलू-चलू बहिना / जहिना छी तहिना / लाल भैया नेने एला लाले-लाले कनियाँ’ ‘माटिक सामा बनली,बहिनो खेल’ चलली, भैया जीब’ हो...’ ‘सुन-सुन-सुन पनिभरनी गे, कनी घुरियो क’ ताक चुप रह छौंड़ा बटोहिया रे, बड़ भेलें चलाक......’ ‘गोरे इजोरियापर तारा के तिलबा, कमाल गोदना लागे गोरे बदनपर कमाल गोदना |’ ‘लाले-लाले साड़ी सेहो रे तिनपढिया लाले रङ आङी लाले सिन्नूर...’ जहिना छी तहिना : महेन्द्रजीक मूँहें किछु और गीत सभ सुनने रही से सभ ऐ पोथीमे नै छलै | महेन्द्रजी किछु लोकोक्ति सबहक पहिल पाँती पढ़ि कहैत छलाह जे ई पाँती त सभ गोटे सुनने हैब, एहिसँ आगाँक पाँती हमरासँ सूनू | जेना : ‘बापक दुलारि बेटी दूरि गेली’ ‘बिढ़नी बिन्ह्लक, तुम्मा फुलौलक, फेर कन्हुआइ छौ तोरेपर’ ‘चकै के चकदुम मकै के लाबा’ ‘करिया झुम्मरि खेलै छी’ ‘दालि ददरी मरीच ददरी’ एक दिन दरभंगा टावर चौकपर रवीन्द्र जीक एकटा पोथी ‘जहिना छी तहिना’ भेटल, ओही पोथीमे एहि तरहक गीत सभ छलै जकर पहिल पाँती मिथिलाक गाम-गाममे लोकोक्तिक रूपमे व्यवहारमे छल | ओहि पाँती सभकें नव जीवन प्रदान करैत रवीन्द्रजी नव-नव प्रयोग करैत अपन विलक्षण प्रतिभाक परिचय देने छलाह | ई गीत सभ लोक सभकेँ अप्पन गीत, अपन गाम-घरक, अपन आँखि-पाँखिक, अपन खेत-पथारक,पोखरि-इनारक,पावनि-तिहारक गीत लगैत छलैक आ होइत रहै छलै जे सुनिते रही | बहुत दिनक बाद रहिकामे विद्यापति पर्वक विलक्षण आयोजनक अवसरपर आदरणीय रवीन्द्रजीसँ किछु कविता आ महेन्द्रजीक संग बहुत रास गीत सभ सुनबाक सुअवसर भेटल | उत्साह, आनन्द, प्रेम, करुणा, हास्य आ व्यंग्यक बहुत रास विषय नेने बहुत गीत सभ लोककें आनन्द विभोर क’ देबाक सामर्थ्य रखैत छल : ‘की थिक मिथिला के छथि मैथिल’ ‘जेम्हरे देखू तेम्हर, ठाकुर ओझा मिसर...’ ‘तोरा अपने हाथें विधिना गढ़लनि अछि मोन लगाक’....’ ‘अहाँकें लगैए किए लाज हे यै कनियाँ...’ ‘बड़ा छणमे छनाक भेलै दाइ गे, गेलै पेटी के कुंजी हेराइ गे’ ‘पिरिए पिराननाथ सादर परनाम’ ‘यार दिलदार यार- की रे भजार यार .....’ ‘कियो लिखि दे दू पाँती सिपहियाके नाम’ ‘अहाँ ई करू, ओ करू, जे करू....’ ‘चारि पाँती सुनू रामकेर नामसँ....’ ‘कोन गामसँ चललें रे भरिया..’ ‘हजमा रे काट-काट बौआ केर केश....’ ‘हे यौ बर बाबू यौ हैत ने बियाह बौआ घर घूरि जाउ.....’ ‘हवा जे चल मिथिलामे चल ....’ ‘हम मिथिले के जलसँ भरब गगरी..’ ‘बटोही भैया, चलिते जाउ बटोही...’ ‘कतेक दिन रहबै यौ मोरंगमे..’ ‘चिट्ठी के तार बुझू, बुढिया बेमार बुझू ...’ ‘हमरा देशक गरीबी छुतहरी गे तों उढरियो त जो...’ पोथीक पथार : देखिते-देखिते रवीन्द्र जी रंग-विरंगक गीत सबहक पोथीक पथार लगा देलनि | स्वतंत्रता अमर हो हमर, सुगीत, प्रगीत, अति गीत, रवीन्द्र पदावली आदि पोथीक बहुत रास गीत बहुत लोकप्रियता अर्जित केलक | गीतक अतिरिक्त कविता आ आनो विधाक पोथी सभ प्रस्तुत कए रवीन्द्रजी मैथिली साहित्यक भण्डार भरबामे महत्वपूर्ण योगदान देलनि | चित्र-विचित्र, नर-गंगा,पंचकन्या,एक राति, श्रीमान गोनू झा,लेखनी एक, रंग अनेक आदि पोथी हमहूँ पढने छी |किछु और पोथी सभ छनि जे हमरा नहि पढ़ल अछि | नव-नव प्रयोग : रवीन्द्रजी गीतमे नव-नव प्रयोग करैत आएल छथि | एकर उदाहरण अछि निम्नलिखित किछु गीत : ‘लटर – पटर दुनू टाङ करय, जे ने ई नबका भाङ करय...’ ‘कोंचा लेटाइ छनि, केश फहराइ छनि, मोछो गेलनि कलकत्ते...’ ‘ आकि हम झूठ कहै छी / नै यौ / आकि हम गप्प हँकै छी / नै यौ .....’ ‘ बाबा डंडोत बच्चा जय सियाराम ....’ ‘सभटा कर्म के कमाल सभटा विधि के विधान.....’ ‘यार दिलदार यार ! की रे भजार यार !....’ युगल गायनक परम्परा : बिना कोनो साज-बाज के पुरुखक स्वरमे आकर्षक युगल गायनक परम्परा रवीन्द्रजी द्वारा स्थापित भेल आ रवीन्द्र-महेंद्रक जोड़ी सम्पूर्ण भारतमे विभिन्न क्षेत्रमे,गाम-गाम आ विभिन्न शहर सभमे सेहो लोकप्रियताक शीर्षपर पहुँचल | यैह लोकनि अपन मनमोहक प्रस्तुतिक बलपर बहुत गोटेक सहयोग पाबि मैथिली फिल्म ‘ममता गाबय गीत’क बाँचल काज पूर्ण करबाय लोकक समक्ष प्रस्तुत करबामे सफल भेलाह | विद्यापति पर्वक लोकप्रियता बढयबामे, सांस्कृतिक कार्यक्रम सभमे लोकक भीड़ जुटयबामे रवीन्द्र-महेन्द्रक जोड़ीक उल्लेखनीय योगदान रहल अछि | गीतक अतिरिक्त ‘पंचकन्या’क किछु अंशक पाठ एहि जोड़ीक मूँहसँ सुनबाक अवसर हमरो प्राप्त भेल अछि आ ओहि आनन्दक वर्णन हम नहि क’ सकैत छी | सीवानमे गरमीक समय विद्यापति स्मृति पर्वक अवसरपर दुनू गोटे आएल छलाह, दुनू गोटे जखन गाबय लगलाह : ‘हवा रे चल मिथिलामे चल, जतय अनन्त वसन्त हँसैए सुरभित आठहु पल,हवा रे चल मिथिलामे चल |’ हुनक एहि आकर्षक प्रस्तुतिक परिणाम रहै जे लोककें लगलै जेना गरमी भागि गेल होइ आ शीतल बसात चल’ लागल होइ | लोक एतेक आनन्दित अनुभव करैत रहय जे बड़ी राति धरि बैसले रहल, श्रोता नहि थाकल,डटल रह्ल, जखन ई दूनू गोटे चाह्लनि तखने कार्यक्रम समाप्त भेल | एकटा भोजपुरी गीतकार छलाह परशुराम शास्त्री,ओहो सुनैत छलाह, हुनका नै रहल गेलनि, ओ मंचपर चल गेलाह आ रवीन्द्रजीक जीभरि प्रशंसा केलनि | स्कूल, कॉलेज, बैंक, शासकीय विभागक बहुत अधिकारी-कर्मचारी आ स्थानीय साहित्यकार आ आनो लोक सभ श्रोतामे छलाह | बहुत गोटे एहि कार्यक्रमक स्थायी प्रशंसक भेलाह आ फेर कहिया हेतै से पुछैत रहैत छलाह | ओही स्मृतिमे अपन किछु पाँती प्रस्तुत क’ रहल छी : मोन पड़ैए आनन्दक बरखा होइ छल जखन रवीन्द्र-महेन्द्र मंचपर अबै छला बह’ लगै छल शीतल हाबा गरमीमे ‘चल मिथिलामे चल’जखन ओ गबै छला जिनका ‘रवीन्द्र-महेन्द्र’कें सुनबाक सौभाग्य भेटल छनि, तिनका ई अतिशयोक्ति नहि लगतनि : जहिना दिन आ राति सूर्य आ चन्द्र बिना तहिना गीतक मंच रवीन्द्र-महेन्द्र बिना

अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। आशीष अनचिन्हार-संपर्क-8876162759 रवीन्द्रनाथ ठाकुर जीक "कथित गजल" रवीन्द्रनाथ ठाकुर मैथिलीमे गीत लेल जानल जाइत छथि मुदा आनो विधामे लिखने छथि जाहिमे एकटा "कथित गजल" सेहो अछि। कथित गजल एहि लेल जे ओ अपने एकरा गजल कहने छथि आ हुनकर समर्थक सेहो मुदा वस्तुतः ओ रचना सभ गजल नै छै। ओ रचना सभ गजल किए नै छै तकर विवेचना करबासँ पहिने आन गजलकार सभक किछु शेर देखू। ओना ई शेर सभ हम अपन हरेक लेखमे दैत छियै कारण मैथिली भाषाकेँ किछु अपढ़ लोक सभ मात्र लिखबाक भाषा बना देने छै पढ़बाक नै। तँइ हम सदिखन हम ई मानि कऽ चलैत छी जे हमर पुरना लेख कियो नै पढ़ने हेता। आ तँइ बेर-बेर हम एकै तथ्यकेँ हरेक आलेखमे दोहराबैत छी जाहिसँ कियो लेखनी-वीर हमरा ई नै कहि सकथि जे हम नै पढ़ने रही। ओना मैथिल तँ बस मैथिल छथि ओ केखनो किछु कहि सकैत छथि। तँ आबी किछु शेरपर। पं जीवन झाजीक एकटा गजलमे वर्णित विरहक नीक चित्रण देखू— अनंङ्ग सन्ताप सौं जरै छी अहाँक चिन्ता जतै करै छी सखीक लाजे ततै मरै छी जतै कही वा जतै कहाबी एहि शेरक मात्रक्रम 12+122+12+122+12+122+12+122 अछि आ पूरा गजलमे एकर प्रयोग भेल अछि। झाजीक दोसर गजलक एकटा आर विरहपरक शेर देखू— अहाँ सों भेंट जहिआ भेल तेखन सों विकल हम छी उठैत अन्धार होइए काज सब करबामे अक्षम छी एहि शेरक मात्राक्रम 1222+1222+1222+1222 अछि आ पूरा गजलमे एकर प्रयोग भेल अछि। उपरक एहि तीन टा उदाहरणसँ स्पष्ट अछि जे पं. जीवन झाजी मैथिली गजल आ गजलक व्याकरणक बीच नीक ताल-मेल रखने छलाह। फेर हुनक तेसर शेरक एकटा आरो शेर देखू जे कि प्रेममे पड़ल नायक-नायिका मनोभाव अछि— पड़ैए बूझि किछु ने ध्यानमे हम भेल पागल छी चलै छी ठाढ़ छी बैसल छी सूतल छी कि जागल छी एहि शेरक मात्राक्रम 1222+1222+1222+1222 अछि आ पूरा गजलमे एकर प्रयोग भेल अछि। कविवर सीताराम झाजीक किछु शेरक उदाहरण देखू— हम की मनाउ चैती सतुआनि जूड़शीतल भै गेल माघ मासहि धधकैत घूड़तीतल ` मतलाक छंद अछि 2212+ 122+2212+ 122 आब एही गजलक दोसर शेर मिला लिअ- अछि देशमे दुपाटी कङरेस ओ किसानक हम माँझमे पड़ल छी बनि कै बिलाड़ि तीतल पहिल शेर आइयो ओतबे प्रासंगिक अछि जते पहिले छल। आइयो नव साल गरीबक लेल नै होइ छै। दोसर शेरकेँ नीक जकाँ पढ़ू आइसँ साठि-सत्तर साल पहिलुक राजनीतिक चित्र आँखि लग आबि जाएत। स्पष्ट अछि जे बिना व्याकरण तोड़ने कविवरजी प्रगतिशील भावक गजल लिखला जे अजुको समयमे ओतबे प्रासंगिक अछि जतेक की पहिने छल। जे ई कहै छथि जे बिना व्याकरण तोड़ने प्रगतिशील गजल नै लिखल जा सकैए हुनका सभकेँ ई उदाहरण देखबाक चाही। काशीकान्त मिश्र "मधुप" जीक दूटा शेर देखल जाए— मिथिलाक पूर्व गौरव नहि ध्यान टा धरै छी सुनि मैथिली सुभाषा बिनु आगियें जड़ै छी सूगो जहाँक दर्शन-सुनबैत छल तहीँ ठाँ हा आइ "आइ गो" टा पढ़ि उच्चता करै छी एहि गजलमे 2212-122-2212-122 मात्राक्रम अछि जे कि गजलक हरेक शेरमे पालन कएल गेल अछि। देखू मधुपजी भिन्न स्वर लऽ कऽ आएल छथि मुदा बिना व्याकरण तोड़ने। ई शेर सभ छल रवीन्द्रनाथजीक पूर्वज गजलकार सभहक। आब आबी हुनकर किछु समकालीन (उम्रमे किछु छोट वा नमहर) गजलकारक शेर सभपर। योगानंद हीराजीक गजलक दू टा शेर— मोनमे अछि सवाल बाजू की छल कपट केर हाल बाजू की मतलाक दूनू पाँतिमे 2122-12-1222 अछि आ दोसर शेर देखू- छोट सन चीज कीनि ने पाबी बाल बोधक सवाल बाजू की हीराजी दोसर गजलक दू टा आर शेर देखू— शूल सन बात ई संसदे जेल अछि आब हीरा कहै जौहरी खेल अछि एहि गजलक हरेक शेरमे सभ पाँतिमे 2122+12 मात्राक्रम अछि। आब अहीं सभ कहू जे हीराजीक गजलमे समकालीनता, प्रगतिशीलता आदि छै कि नै। पहिल शेरमे शाइर वर्तमान जीवनमे पसरल अजरकताकेँ देखा रहल छथि तँ दोसर शेरमे अभावक कारण बच्चा धरिकेँ कोनो चीज नै दऽ पेबाक विवशता छै। तेसर शेर आजुक विडंबना अछि। संसद वएह छै जे पहिने छलै मुदा सांसद सभ आब अपराधी वर्गक अछि तँइ शाइरकेँ ओ जेल बुझा रहल छनि। चारिम शेरमे शाइर प्रायोजित प्रसंशाक खेलकेँ उजागर केने छथि। ई खेल साहित्य कि आन कोनो क्षेत्रमे भऽ सकैए। जगदीश चंद्र ठाकुर "अनिल" जीक गजलक दू टा शेर— टूटल छी तँइ गजल कहै छी भूखल छी तँइ गजल कहै छी मतलाक दूनू पाँतिमे 2222 +12 + 122 छंद अछि आ एकर दोसर शेर देखू— ऑफिस सबहक कथा कहू की लूटल छी तँइ गजल कहै छी भूख केर कथा सेहो व्याकरणयुक्त गजलमे। सरकारी आफिसक कथा सभ जनैत छी। अनिलजी एहू कथाकेँ व्याकरणक संग उपस्थित केने छथि। समकालीन स्वरे नै कालातीत स्वरक संग विजयनाथ झा जीक ऐ गजलक दूटा शेर देखू— चिदाकाश मधुमास मधुमक्त मति मन विभव अछि विविधता उदय ह्रास अपने मतलाक छंद अछि 122-122-122-122 आब दोसर शेरक दूनू पाँतिकेँ जाँच कऽ लिअ संगे संग भाव केर सेहो- खसल नीर निर्माल्य निधि नोर जानल सकल स्रोत श्रुति विन्दु विन्यास अपने जँ आदि शंकराचर्य केर मातृभाषा मैथिली रहितनि तँ शायद विजयनाथेजी सन लिखने रहितथि ओ। आ एहिठाम हम रवीन्द्रनाथजीक कनिष्ठ मने एखनुक गजलकार सभहक शेर नै दऽ रहल छी मुदा उपरका उदाहरण सभसँ स्पष्ट अछि जे मैथिली गजलमे शुरूआतेसँ बहरक पालन भेल छै। संगे-संग उपरक एहि उदाहरण सभसँ ई स्पष्ट भऽ गेल हएत जे व्याकरण केखनो भाव वा विचार लेल बाधक नै होइ छै। हँ, हजारक हजार रचनामे किछु एहन रचना बुझाइ छै जाहिमे व्याकरणक कारण भाव बाधित भेलैए मुदा ई तँ रचनाकारक सीमा सेहो भऽ सकै छै। रचनाकारक सीमा लेल कोनो विधाक नियमकेँ खराप मानब कतेक उचित? ई उदाहरण ईहो स्पष्ट करैए जे 1970 केर बाद गजलक नामपर जे पीढ़ी आएल से ने गजल विधाक अध्य्यन केलक आ ने अपनासँ पहिनेक गजलकारक अध्य्यन केलक। रवीन्द्रनाथ ठाकुर समेत अधिकांश कथित गजलकार खाली फतवा देबामे व्यस्त रहलाह।  आब किछु हिंदी गजलक व्याकरण सेहो देखी। सूर्यकांत त्रिपाठी निरालाजीक ई शेर देखू- भेद कुल खुल जाए वह सूरत हमारे दिल में है देश को मिल जाए जो पूँजी तुम्हारी मिल में है मतला (मने पहिल शेर)क मात्राक्रम अछि--2122+2122+2122+212 आब सभ शेरक मात्राक्रम इएह रहत। एकरे बहर वा की वर्णवृत कहल जाइत छै। अरबीमे एकरा बहरे रमल केर मुजाइफ बहर कहल जाइत छै। निरालाजी जाहि बहरमे लिखने छथि ठीक ताही बहरमे हुनकोसँ पहिने हसरत मोहानीजी अपन ई गजल लिखने छथि जकर शेर सभकेँ जीहपर छनि- चुपकेचुपके रात दिन आँसू बहाना याद है हमको अब तक आशिक़ी का वो ज़माना याद है एकर बहर अछि 2122+2122+2122+212 आ अही बहरमे दुष्यंत कुमार लिखने छथि हो गई है / पीर पर्वत /सी पिघलनी / चाहिए, इस हिमालय / से कोई गं / गा निकलनी / चाहिए 2122 / 2122 / 2122 / 212 मने एकै बहरपर तीन गजल आ तीनू गजलक भाव ओ प्रभाव अलग-अलग। निश्चित तौरपर मैथिली गजलक शुरूआत प्रभावी छल मुदा बादमे हिनका सभ द्वारा नाश कऽ देल गेल। रवीन्द्रजीक कथित गजल संग्रह नाम छनि "लेखनी एक रंग अनेक"। एहि पोथीक संक्षिप्त भूमिकामे लेखक लिखै छथि जे "..मैथिली गजल लेल अरबी-फारसीक दुआर पर नहि लऽ गेलहुँ अछि तें एकटा हार्दिक संतोष अछि"..। आब लेखक ई किएक लिखलनि से ठोस रूपे जानब संभव नै अछि मुदा हम एकरा दू रूपे देखै छी। बहुत संभव जे एकटा कोनो सही हो मुदा ताही संगे हम दूनू कारणकेँ सेहो खंडन करब। पहिल कारण ई भऽ सकैए जे ओ गजलक व्याकरणपर कटाक्ष केने होथि आ जकरा पालन नै केलापर संतोष व्यक्त केने होथि। जँ ई कारण मानल जाए ओहि कथन लेल तखन निश्चित रूपे ई मानल जाएत जे रवीन्द्रनाथजीकेँ भारतीय परंपरा खास कऽ संस्कृत परंपराक कोनो ज्ञान नै छलनि, कारण जे संस्कृतक वार्णिक छन्द छै सएह अरबी-फारसीक बहर छै। जे तुक छै सएह काफिया छै। जेना संस्कृतक छन्दमे किछु शिथिलताक प्रावधान छै तेनाहितो बहरक पालनमे सेहो छूट वा शिथिलताक प्रावधान छै। बस नामक भेद देखि अलग मानि लेब आ ओकरासँ अलग भऽ संतोष कऽ लेब कतेक उचित? वार्णिक छंद अथवा बहरक माने छै निर्धारित ओ निश्चित मात्राक्रममे रचना रचब। दोसर कारण ई भऽ सकैए जे ओ अपन रचनामे खाँटी मैथिली शब्द लेने होथि आ ताहि लेल संतोष व्यक्त केने होथि। मुदा प्रश्न उठै छै जे गजल कोन भाषाक शब्द छै? आ अहीठाम रवीन्द्रजीक संतोषपर प्रश्नचिह्न लागि जाइत छनि। जाहिमे मैथिलीमे 30-40 प्रतिशत शब्द फारसीक छै ताहि भाषा लेल एहन घोषणा किएक? जे शब्द हमरा भाषामे नै अछि से आन भाषासँ एबाके चाही। हँ, कोनो अवांछित शब्द नै एबाक चाही से ध्यान रहए। ओनाहुतो रवीन्द्रजी आनो भाषाक ओहनो शब्द सभ लेने छथि जे कि किछुए बर्खसँ मैथिलीमे प्रचलित अछि जेना- भँवरा, यार, मस्ती, बहार, लालसा... आदि-आदि। तँइ हमर मानब अछि जे शब्दक स्तरोपर रवीन्द्रजीक संतोष एकटा फतवा मात्र छनि। रवीन्द्रजी एहि कथित संग्रहमे बहुत रास विसंगति अछि। एकटा एहनो विसंगति अछि जे प्रायः हरेक लेखक केर उठानमे होइत छै आ ओ विसंगति अछि अपन कोनो पूर्वज रचनाकारक पाँतिकेँ सीधे अनुवाद कऽ देब। एहन हमरो संग भऽ चुकल अछि मुदा आइसँ सात बर्ख एकर पहिचान कऽ हम फेसबुकपर सार्वजनिक रूपे सभकेँ सूचित केने छियनि। जखन कि रवीन्द्रजी एहि विसंगतिकेँ चिन्हबामे चुकि गेलाह। आन बात कहबासँ पहिने हम दुष्यंत कुमारजीक एकटा ई शेर देखू- मैं जिसे ओढ़ता-बिछाता हूँ वो ग़ज़ल आपको सुनाता हूँ एकर बहर अछि 212-212-1222 आब एकटा शेर रवीन्द्रनाथजीक देखू-- हम जे भोगै छी से ओ जेना जीबै छी से रवीन्द्र सैह गजल सबकेँ हम बाँटि रहल छी रवीन्द्रजीक शेरमे कोनो बहर नै छनि मुदा भाव तँ दुष्यंतेजी बला उठाएल छनि। पहिने कहलहुँ एहन अवसर हरेक लेखक लग आबै छै। कियो एकरा चीन्हि अपनाकेँ मुक्त कऽ लै छथि आ कियो रखने रहि जाइ छथि। कुल मिला कऽ देखी तँ रवीन्द्रजीक ई पोथी नीक गीतक पोथी छनि गजलक नहि। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। स्थायी स्तम्भ जेना मिथिला-रत्न, मिथिलाक खोज, विदेह पेटार आ सूचना-संपर्क-अन्वेषण सभ अंकमे समान अछि, ताहि हेतु ई सभ स्तम्भ सभ अंकमे नइ देल जाइत अछि, ई सभ स्तम्भ देखबा लेल क्लिक करू नीचाँ देल विदेहक 346म आ 347 म अंक, ऐ दुनू अंकमे सम्मिलित रूपेँ ई सभ स्तम्भ देल गेल अछि। “विदेह” ई-पत्रिका: देवनागरी वर्सन “विदेह” ई-पत्रिका: मिथिलाक्षर वर्सन “विदेह” ई-पत्रिका: मैथिली-IPA वर्सन “विदेह” ई-पत्रिका: मैथिली-ब्रेल वर्सन VIDEHA_346 VIDEHA_346_Tirhuta VIDEHA_346_IPA VIDEHA_346_Braille VIDEHA_347 VIDEHA_347_Tirhuta VIDEHA_347_IPA VIDEHA_347_Braille संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल  मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] Videha e-Learning पेटार (रिसोर्स सेन्टर) ...................................................................................................... शब्द-व्याकरण-इतिहास MAITHILI IDIOMS & PHRASES मैथिली मुहावरा एवम् लोकोक्ति प्रकाश- रमानाथ मिश्र मिहिर (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) डॉ. ललिता झा- मैथिलीक भोजन सम्बन्धी शब्दावली (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) मैथिली शब्द संचय MAITHILI DICTIONARY- RAMDEO JHA (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) ENGLISH MAITHILI COMPUTER DICTIONARY MAITHILI ENGLISH DICTIONARY अणिमा सिंह -Shishu_Geet_Khel_Anima_Singh डॉ. रमण झा मैथिली काव्यमे अलङ्कार    अलङ्कार-भास्कर आनन्द मिश्र (सौजन्य श्री रमानन्द झा "रमण")- मिथिला भाषाक सुबोध व्याकरण BHOLALAL DAS मैथिली सुबोध व्याकरण- भोला लाल दास राधाकृष्ण चौधरी- A Survey of Maithili Literature ................................................................................................... मूलपाठ तिरहुता लिपिक उद्भव ओ विकास (यू.पी.एस.सी. सिलेबस) राजेश्वर झा- मिथिलाक्षरक उद्भव ओ विकास (मैथिली साहित्य संस्थान आर्काइव) Surendra Jha Suman दत्त-वती (मूल)- श्री सुरेन्द्र झा सुमन (यू.पी.एस.सी. सिलेबस) प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) CIIL SITE .................................................................................................... समीक्षा सुभाष चन्द्र यादव-राजकमल चौधरी: मोनोग्राफ शिव कुमार झा "टिल्लू" अंशु-समालोचना डॉ बचेश्वर झा- B_JHA_Nibhand_Nikunj.pdf डॉ. देवशंकर नवीन- Adhunik_Sahityak_Paridrishya डॉ. रमण झा- भिन्न-अभिन्न प्रेमशंकर सिंह- मैथिली भाषा साहित्य:बीसम शताब्दी (आलोचना) डॉ. रमानन्द झा 'रमण' हिआओल अखियासल     CIIL SITE दुर्गानन्द मण्डल-चक्षु RAMDEO JHA दत्त-वतीक वस्तु कौशल- डॊ. श्रीरामदेवझा SHAILENDRA MOHAN JHA परिचय निचय- डॊ शैलेन्द्र मोहन झा ................................................................................................. अतिरिक्त पाठ पहिने मिथिला मैथिलीक सामान्य जानकारी लेल एहि पोथी केँ पढ़ू:- राधाकृष्ण चौधरी- मिथिलाक इतिहास फेर एहि मनलग्गू फाइल सभकेँ सेहो पढ़ू:- केदारनाथ चौधरी चमेलीरानी                         माहुर                          करार कुमार पवन पइठ (मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ कथा) (साभार अंतिका)       डायरीक खाली पन्ना (साभार अंतिका) याेगेन्द्र पाठक वियाेगी- विज्ञानक बतकही रामलोचन ठाकुर- मैथिली लोककथा .................................................................................................. किछु मैथिली पोथी डाउनलोड साइट (ओपन सोर्स) SAHITYA AKADEMI http://sahitya-akademi.gov.in/publications/e-books.jsp http://sahitya-akademi.gov.in/general/Digitalbooks.jsp CIIL http://corpora.ciil.org/maisam.htm अखियासल (रमानन्द झा रमण) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI1.pdf जुआयल कनकनी- महेन्द्र http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI2.pdf प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI3.pdf सृजन केर दीप पर्व- सं केदार कानन आ अरविन्द ठाकुर http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI4.pdf मैथिली गद्य संग्रह- सं शैलेन्द्र मोहन झा http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI5.pdf ARCHIVE.ORG (विजयदेव झा) https://archive.org/details/%40vijay_deo_jha?&sort=-publicdate&page=2 VIDEHA MAITHILI BOOKS/ PICTURE-AUDIO-VIDEO ARCHIVE http://videha.co.in/new_page_15.htm IGNCA http://ignca.nic.in/coilnet/mithila.htm http://ignca.nic.in/coilnet/kalyani.htm (MAITHILI ENGLISH DICTIONARY) MITHILA DARSHAN https://mithiladarshan.com/ (online pdf of Maithili journal) OLE NEPAL's E-PUSTAKALAYA (https://pustakalaya.org/en/) पोथीक लिंक मैथिली साहित्य संस्थान https://www.maithilisahityasansthan.org/resources (online pdf of Reasearch Papers/ books) ............................................................................................ अरिपन फाउण्डेशन (http://www.aripanafoundation.org/) PRATHAM BOOKS MAITHILI STORYWEAVER https://storyweaver.org.in/stories/?language=Maithili&query=&sort=Ratings https://www.youtube.com/playlist?list=PLAT74nNc2fmYaW29mRVAIgzRq63_9zWbI (मैथिली ऑडियो बुक्स) जानकी एफ.एम समाचार https://www.youtube.com/user/Janakifm/videos (जानकी एफ.एम समाचार) I LOVE MITHILA https://www.ilovemithila.com/  (online maithili journal) https://maithili.com.np/ (owner I Love Mithila) प्यारे मैथिल https://www.youtube.com/channel/UCq30Llck2tNw8BI4t8jjzQg (प्यारे मैथिल चैनल- किरण चौधरी आ संगीता आनन्द- मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय यू ट्यूब चैनल) ....................................................... आकाशवाणी दरभंगा यू ट्यूब चैनल ....................................................... JNU http://sanskrit.jnu.ac.in/maithili/index.jsp http://sanskrit.jnu.ac.in/student_projects/lexicon.jsp?lexicon=maithili ......................................................... VIDEHA e-LEARNING YOUTUBE CHANNEL https://www.youtube.com/channel/UC4abVKqMj2pDWIAkXiOHp7A ....................................................................................................... विदेहक किछु विशेषांक:- १) हाइकू विशेषांक १२ म अंक, १५ जून २००८ Videha_15_06_2008   Videha_15_06_2008_Tirhuta     12 २) गजल विशेषांक २१ म अंक,  १ नवम्बर २००८ Videha_01_11_2008  Videha_01_11_2008_Tirhuta         21 ३) विहनि कथा विशेषांक ६७ म अंक, १ अक्टूबर २०१० videha_01_10_2010       videha_01_10_2010_tirhuta           67 ४) बाल साहित्य विशेषांक ७० म अंक, १५ नवम्बर २०१० videha_15_11_2010       videha_15_11_2010_tirhuta           70 ५) नाटक विशेषांक ७२ म अंक १५ दिसम्बर२०१० videha_15_12_2010       videha_15_12_2010_tirhuta           72 ६) नारी विशेषांक ७७म अंक ०१ मार्च २०११ videha_01_03_2011       videha_01_03_2011_tirhuta           77 ७) अनुवाद विशेषांक (गद्य-पद्य भारती) ९७म अंक videha_01_01_2012videha_01_01_2012_tirhuta          97 ८) बाल गजल विशेषांक विदेहक अंक १११ म अंक, १ अगस्त २०१२ videha_01_08_2012   videha_01_08_2012_tirhuta   111 ९) भक्ति गजल विशेषांक १२६ म अंक, १५ मार्च २०१३ videha_15_03_2013  videha_15_03_2013_tirhuta   126 १०) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक १४२ म, अंक १५ नवम्बर २०१३ videha_15_11_2013  videha_15_11_2013_tirhuta   142 ११) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 १२) अरविन्द ठाकुर विशेषांक १८९ म अंक १ नवम्बर २०१५ Videha_01_11_2015 १३) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक १९१ म अंक १ दिसम्बर २०१५ Videha_01_12_2015 १४) विदेह सम्मान विशेषंा‍क विदेह सम्मान: सम्मान-सूची (समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार सहित) साक्षात्कार/ समारोह साक्षात्कार videha_15_12_2011 videha_15_01_2012 videha_01_02_2012 videha_01_03_2012 videha_01_09_2012 videha_15_01_2013 videha_01_03_2013 Videha_15_04_2016 Videha_01_07_2016 १५) मैथिली सी.डी./ अल्बम गीत संगीत विशेषांक- २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ Videha_01_01_2017 १६) मैथिली वेब पत्रकारिता विशेषांक VIDEHA 313 १७) मैथिली बीहनि कथा विशेषांक-२ VIDEHA 317 १८) रामलोचन ठाकुर विशेषांक VIDEHA 319 १९) रामलोचन ठाकुर श्रद्धांजलि विशेषांक VIDEHA 320 २०) राजनन्दन लाल दास विशेषांक VIDEHA 333 ................................................................................................... लेखकक आमंत्रित रचना आ ओइपर आमंत्रित समीक्षकक समीक्षा सीरीज १. कामिनीक पांच टा कविता आ ओइपर मधुकान्त झाक टिप्पणी विदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016 .................................................................................................... "पाठक हमर पोथी किए पढ़थि"- लेखक द्वारा अप्पन पोथी/ रचनाक समीक्षा सीरीज १. आशीष अनचिन्हार 'विदेह' क ३२७ म अंक ०१ अगस्त २०२१ .................................................................................................... एडिटर्स चोइस सीरीज एडिटर्स चोइस सीरीज-१ विदेहक १२३ म (०१ फरबरी २०१३) अंकमे बलात्कारपर मैथिलीमे पहिल कविता प्रकाशित भेल छल। ई दिसम्बर २०१२ क दिल्लीक निर्भया बलात्कार काण्डक बादक समय छल। ओना ई अनूदित रचना छल, तेलुगुमे पसुपुलेटी गीताक एहि कविताक हिन्दी अनुवाद केने छलीह आर. शांता सुन्दरी आ हिन्दीसँ मैथिली अनुवाद केने छलाह विनीत उत्पल। हमर जानकारीमे एहिसँ बेशी सिहराबैबला कविता कोनो भाषामे नहि रचल गेल अछि। सात सालक बादो ई समस्या ओहने अछि। ई कविता सभकेँ पढ़बाक चाही, खास कऽ सभ बेटीक बापकेँ, सभ बहिनक भाएकेँ आ सभ पत्नीक पतिकेँ। आ विचारबाक चाही जे हम सभ अपना बच्चा सभ लेल केहन समाज बनेने छी। एडिटर्स चोइस सीरीज-१ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-२ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच ब्रेस्ट कैसरक समस्यापर विदेह मे मीना झा केर एकटा लघु कथा प्रकाशित भेल। ई मैथिलीक पहिल कथा छल जे ब्रेस्ट कैसर पर लिखल गेल। हिन्दीमे सेहो ताधरि एहि विषयपर कथा नहि लिखल गेल छल, कारण एहि कथाक ई-प्रकाशित भेलाक १-२ सालक बाद हिन्दीमे दू गोटेमे घोंघाउज भऽ रहल छल कि पहिल हम आकि हम, मुदा दुनूक तिथि मैथिलीक कथाक परवर्ती छल। बादमे ई विदेह लघु कथामे सेहो संकलित भेल। एडिटर्स चोइस सीरीज-२ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-३ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिलक किछु बाल कविता प्रकाशित भेल। बादमे हुनकर ३ टा बाल कविता विदेह शिशु उत्सवमे संकलित भेल जाहिमे २ टा कविता बेबी चाइल्डपर छल। पढ़ू ई तीनू कविता, बादक दुनू बेबी चाइल्डपर लिखल कविता पढ़बे टा करू से आग्रह। एडिटर्स चोइस सीरीज-३ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-४ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच जगदानन्द झा मनुक एकटा दीर्घ बाल कथा कहि लिअ बा उपन्यास प्रकाशित भेल, नाम छल चोनहा। बादमे ई रचना विदेह शिशु उत्सवमे संकलित भेल, ई रचना बाल मनोविज्ञानपर आधारित मैथिलीक पहिल रचना छी, मैथिली बाल साहित्य कोना लिखी तकर ट्रेनिंग कोर्समे एहि उपन्यासकेँ राखल जेबाक चाही। कोना मॊडर्न उपन्यास आगाँ बढ़ै छै, स्टेप बाइ स्टेप आ सेहो बाल उपन्यास। पढ़बे टा करू से आग्रह। एडिटर्स चोइस सीरीज-४ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-५ एडिटर्स चोइस ५ मे मैथिलीक "उसने कहा था" माने कुमार पवनक दीर्घकथा "पइठ" (साभार अंतिका) । हिन्दीक पाठक, जे "उसने कहा था" पढ़ने हेता, केँ बुझल छन्हि जे कोना अहि कथाकेँ रचि चन्द्रधर शर्मा ’गुलेरी’ अमर भऽ गेलाह। हम चर्चा कऽ रहल छी, कुमार पवनक "पइठ" दीर्घकथाक। एकरा पढ़लाक बाद अहाँकेँ एकटा विचित्र, सुखद आ मोन हौल करैबला अनुभव भेटत, जे सेक्सपीरिअन ट्रेजेडी सँ मिलितो लागत आ फराको। मुदा एहि रचनाकेँ पढ़लाक बाद तामस, घृणा सभपर नियंत्रणकेँ आ सामाजिक/ पारिवारिक दायित्वकेँ सेहो अहाँ आर गंभीरतासँ लेबै, से धरि पक्का अछि। मुदा एकर एकटा शर्त अछि जे एकरा समै निकालि कऽ एक्के उखड़ाहामे पढ़ि जाइ। एडिटर्स चोइस सीरीज-५ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-६ जगदीश प्रसाद मण्डलक लघुकथा "बिसाँढ़": १९४२-४३ क अकालमे बंगालमे १५ लाख लोक मुइला, मुदा अमर्त्य सेन लिखैत छथि जे हुनकर कोनो सर-सम्बन्धी एहि अकालमे नहि मरलन्हि। मिथिलोमे अकाल आएल १९६७ ई. मे आ इन्दिरा गाँधी जखन एहि क्षेत्र अएली तँ हुनका देखाओल गेल जे कोना मुसहर जातिक लोक बिसाँढ़ खा कऽ एहि अकालकेँ जीति लेलन्हि। मैथिलीमे लेखनक एकभगाह स्थिति विदेहक आगमनसँ पहिने छल। मैथिलीक लेखक लोकनि सेहो अमर्त्य सेन जेकाँ ओहि महाविभीषिकासँ प्रभावित नहि छला आ तेँ बिसाँढ़पर कथा नहि लिखि सकला। जगदीश प्रसाद मण्डल एहिपर कथा लिखलन्हि जे प्रकाशित भेल चेतना समितिक पत्रिकामे, मुदा कार्यकारी सम्पादक द्वारा वर्तनी परिवर्तनक कारण ओ मैथिलीमे नहि वरण् अवहट्ठमे लिखल बुझा पड़ल, आ ओतेक प्रभावी नहि भऽ सकल कारण विषय रहै खाँटी आ वर्तनी कृत्रिम। से एकर पुनः ई-प्रकाशन अपन असली रूपमे भेल विदेहमे आ ई संकलित भेल "गामक जिनगी" लघुकथा संग्रहमे। एहि पोथीपर जगदीश प्रसाद मण्डलकेँ टैगोर लिटरेचर अवार्ड भेटलनि। जगदीश प्रसाद मण्डलक लेखनी मैथिली कथाधाराकेँ एकभगाह हेबासँ बचा लेलक, आ मैथिलीक समानान्तर इतिहासमे मैथिली साहित्यकेँ दू कालखण्डमे बाँटि कऽ पढ़ए जाए लागल- जगदीश प्रसाद मण्डलसँ पूर्व आ जगदीश प्रसाद मण्डल आगमनक बाद। तँ प्रस्तुत अछि लघुकथा बिसाँढ़- अपन सुच्चा स्वरूपमे। एडिटर्स चोइस सीरीज-६ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-७ मैथिलीक पहिल आ एकमात्र दलित आत्मकथा: सन्दीप कुमार साफी। सन्दीप कुमार साफीक दलित आत्मकथा जे अहाँकेँ अपन लघु आकाराक अछैत हिलोड़ि देत आ अहाँक ई स्थिति कऽ देत जे समानान्तर मैथिली साहित्य कतबो पढ़ू अहाँकेँ अछौं नहि होयत। ई आत्मकथा विदेहमे ई-प्रकाशित भेलाक बाद लेखकक पोथी "बैशाखमे दलानपर"मे संकलित भेल आ ई मैथिलीक अखन धरिक एकमात्र दलित आत्मकथा थिक। तँ प्रस्तुत अछि मैथिलीक पहिल दलित आत्मकथा: सन्दीप कुमार साफीक कलमसँ। एडिटर्स चोइस सीरीज-७  (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-८ नेना भुटकाकेँ रातिमे सुनेबा लेल किछु लोककथा (विदेह पेटारसँ)। एडिटर्स चोइस सीरीज-८ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-९ मैथिली गजलपर परिचर्चा (विदेह पेटारसँ)। एडिटर्स चोइस सीरीज-९ (डाउनलोड लिंक) ............................................................................................... जगदीश प्रसाद मण्डल जीक ६५ टा पोथीक नव संस्करण विदेहक २३३ (Videha_01_09_2017) सँ २५० (Videha_15_05_2018 ) धरिक अंकमे धारावाहिक प्रकाशन नीचाँक लिंकपर पढ़ू:- VIDEHA_233 VIDEHA_234 VIDEHA_235 VIDEHA_236 VIDEHA_237 VIDEHA_238 VIDEHA_239 VIDEHA_240 VIDEHA_241 VIDEHA_242 VIDEHA_243 VIDEHA_244 VIDEHA_245 VIDEHA_246 VIDEHA_247 VIDEHA_248 VIDEHA_249 VIDEHA_250 ................................................................................................ विदेह ई-पत्रिकाक  बीछल रचनाक संग- मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ रचनाक एकटा समानान्तर संकलन: विदेह: सदेह: १ (२००८-०९) देवनागरी विदेह: सदेह: १ (२००८-०९) तिरहुता विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) देवनागरी विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) तिरहुता विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०)देवनागरी विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०) तिरहुता विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०)देवनागरी विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०) तिरहुता विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]देवनागरी विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]  तिरहुता विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]- दोसर संस्करण देवनागरी विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ]देवनागरी विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ] तिरहुता विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ]देवनागरी विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ]  तिरहुता विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ]देवनागरी विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ] तिरहुता विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ]देवनागरी विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ] तिरहुता विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ]देवनागरी विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ] तिरहुता विदेह:सदेह ११ विदेह:सदेह १२ विदेह:सदेह १३ ....................................................................................................... Maithili Books can be downloaded from: MAITHILI BOOKS VIDEHA ARCHIVE विदेह पेटार १.विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक Videha e journal's all old issues २.मैथिली पोथी डाउनलोड Maithili Books Download ३.मैथिली वीडियोक संकलन Maithili Videos ................................................................................................. विदेह सम्मान: सम्मान-सूची (समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार सहित) ................................................................................................................... मैथिलीक वर्तनी १ मैथिलीक वर्तनी- विदेह मैथिली मानक भाषा आ मैथिली भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम भाषापाक २ मैथिलीक वर्तनीमे पर्याप्त विविधता अछि। मुदा प्रश्नपत्र देखला उत्तर एकर वर्तनी इग्नू BMAF001 सँ प्रेरित बुझाइत अछि, से एकर एकरा एक उखड़ाहामे उनटा-पुनटा दियौ, ततबे धरि पर्याप्त अछि। यू.पी.एस.सी. क मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेल सेहो ई पर्याप्त अछि, से जे विद्यार्थी मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेने छथि से एकर एकटा आर फास्ट-रीडिंग दोसर-उखड़ाहामे करथि| IGNOU  इग्नू       BMAF-001 ................................................................................................................... अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। सूचना/ घोषणा "विदेह सम्मान" समानान्तर साहित्य अकदेमी पुरस्कारक नामसँ प्रचलित अछि। "समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार" (मैथिली), जे साहित्य अकादेमीक मैथिली विभागक गएर सांवैधानिक काजक विरोधमे शुरु कएल छल, लेल अनुशंसा आमन्त्रित अछि। अनुशंसा निम्न कोटि सभमे आमन्त्रित अछि: १) फेलो २)मूल पुरस्कार ३)बाल-साहित्य ४)युवा पुरस्कार आ ५) अनुवाद पुरस्कार। पुरस्कारक सभ क्राइटेरिया साहित्य अकादेमी, दिल्लीक समानान्तर पुरस्कारक समक्ष रहत, जे एहि लिंक sahitya-akademi.gov.in पर उपलब्ध अछि। अपन अनुशंसा editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। गजेन्द्र ठाकुर "विकीपीडिया"मे मैथिलीकबाद मैथिली "गूगल ट्रान्सलेट"मे सेहो.. अगिला लक्ष्य "अमेजन अलेक्सा" गूगल ट्रान्सलेट गूगल ट्रान्सलेटक लिंक https://translate.google.com/?sl=en&tl=mai&op=translate गूगल ट्रान्सलेटकेँ आर पुष्ट करबाक खगता छै तइ लेल अगिला काज अढ़ा रहल छी: https://translate.google.com/about/contribute/ प्रारम्भ: विकीपीडिया ०१ फरबरी २००८ लिंक https://books.google.co.in/books?id=VC-BD5Ad6z4C&lpg=PA1&pg=PA1#v=onepage&q&f=false  (मैथिली देवनागरी) https://books.google.co.in/books?id=cTezCU59bJwC&lpg=PP1&pg=PP1#v=onepage&q&f=false  (मैथिली तिरहुता) https://books.google.co.in/books?id=3zKudz6wAO8C&lpg=PP1&pg=PP1#v=onepage&q&f=false  (मैथिली ब्रेल)  गूगल ट्रन्सलेट २३ जून २०११क लिंक https://www.facebook.com/groups/videha/permalink/138489416229195/ गूगल ट्रांसलेशन टूलमे "बिहारी" भाषाक बदलामे मैथिली लेल अलग ट्रांसलेशन टूल बनेबाक आवेदन विदेहक सदस्यगण द्वारा देल गेल अछि। अपन योगदान गूगल ट्रांसलेट लेल करू, आ कएल सम्पादन बदलबा काल कारण मे (अंग्रेजीमे) "बिहारी" नाम्ना कोनो भाषा नै हेबाक चर्चा करू। ऐ लिंकपर अनुवाद करू; गूगल एकाउंटसँ लॉग इन केलाक बाद । http://www.google.com/transconsole/giyl/chooseProject http://www.google.com/transconsole/giyl/chooseActivity?project=gws&langcode=bh (links closed) विकीपीडिया मैथिली लिंक विदेह (पत्रिका) https://mai.wikipedia.org/s/kgv इन्टरनेटक संसारमे मैथिली भाषा https://mai.wikipedia.org/s/s6h भालसरिक गाछ https://mai.wikipedia.org/s/ipm विदेह https://mai.wikipedia.org/s/ie1 विदेहक फेसबुक भर्सन https://mai.wikipedia.org/s/iu1 विदेह सम्मान https://mai.wikipedia.org/s/jc2 विदेह आर्काइभ https://mai.wikipedia.org/s/jc0 विदेह मिथिला रत्न https://mai.wikipedia.org/s/jc3 विदेह मिथिलाक खोज https://mai.wikipedia.org/s/jc4 विदेह सूचना संपर्क अन्वेषण https://mai.wikipedia.org/s/jc5 श्रुति प्रकाशन https://mai.wikipedia.org/s/iu7 अनचिन्हार आखर https://mai.wikipedia.org/s/ion मैथिली गजल https://mai.wikipedia.org/s/idz मैथिली बाल गजल https://mai.wikipedia.org/s/iex मैथिली भक्ति गजल https://mai.wikipedia.org/s/if1 http://translatewiki.net/wiki/Project:Translator http://meta.wikimedia.org/wiki/Requests_for_new_languages/Wikipedia_Maithili  http://translatewiki.net/wiki/Special:Translate?task=untranslated&group=core-mostused&limit=2000&language=mai http://incubator.wikimedia.org/wiki/Wp/mai http://translatewiki.net/wiki/MediaWiki:Mainpage/mai अंतिम पाँचू साइट विकी मैथिली प्रोजेक्टक अछि। एहि लिंक सभ पर जा कय प्रोजेक्टकेँ आगाँ बढ़ाऊ। (links closed) अमेजन अलेक्सा मैथिली (शीघ्र....) "विकीपीडिया"मे मैथिलीकबाद मैथिली "गूगल ट्रान्सलेट"मे सेहो.. अगिला लक्ष्य "अमेजन अलेक्सा" विदेहक तेसर अंकमे (०१ फरबरी २००८) जे खुशखबरी पाठक लोकनिकेँ मैथिली विकीपीडियाक सम्बन्धमे देल गेल छल तकर सुखद परिणति कएक साल पहिने भेटल छल। मैथिली गूगल ट्रान्सलेटक सम्बन्धमे विदेहक फेसबुक पृष्ठपर २०११ मे देल गेल तकर सुखद परिणति ११ मई २०२२ केँ भेटल। मैथिली अमेजन अलेक्साक सेहो आरम्भ शीघ्रे हएत। (लिंक-स्क्रीनचित्र नीचाँ देल जा रहल अछि।) https://books.google.co.in/books?id=VC-BD5Ad6z4C&lpg=PA1&pg=PA2#v=onepage&q&f=false https://www.facebook.com/groups/videha/permalink/138489416229195/ ओहि समयमे विदेह सम्पादक मण्डलमे ई लोकनि रहथि: सह-सम्पादक: उमेश मंडल । सहायक सम्पादक: शिव कुमार झा आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण) । भाषा सम्पादन: नागेन्द्र कुमार झा आ पञ्जीकार विद्यानन्द झा । कला-सम्पादन: वनीता कुमारी आ रश्मि रेखा सिन्हा । सम्पादक-शोध-अन्वेषण: डॉ. जया वर्मा आ डॉ. राजीव कुमार बर्मा । सम्पादका नाटक-रंगमंच-चलचित्र: बेचन ठाकुर। सम्पादक सूचना-सम्पर्क-समाद: पूनम मंडल अ प्रियंका झा। सम्पादक अनुवाद विभाग: विनीत उत्पल । स्पष्ट अछि जे "सम्पादक अनुवाद विभाग" विनीत उत्पल (आब असिस्टेन्ट प्रोफेसर, आइ.आइ.एम.सी. जम्मू) क विशेष सहयोग रहल, आशीष अनचिन्हार सम्पादक मण्डल मे नहियो रहला उत्तर कोनो सम्पादकसँ कम काज नै करैत छथि। मैथिलीेक पाठक वर्ग सेहो अपन यथाशक्ति योगदान देलनि। https://books.google.co.in/books?id=zmIugpjpOKYC&lpg=PA1&pg=PA600#v=onepage&q&f=false https://books.google.co.in/books?id=-U04e5FfnTEC&lpg=PA1&pg=PA405#v=onepage&q&f=false गूगल ट्रान्सलेटकेँ आर पुष्ट करबाक खगता छै तइ लेल अगिला काज अढ़ा रहल छी: https://translate.google.com/about/contribute/ गूगल ट्रान्सलेट कार्यक्रम देखू https://youtu.be/nP-nMZpLM1A Google Translate:04:45to06:25 (24 new languages at 06:00) Detailed Description Tune in to find out about how we're furthering our mission to organize the world’s information and make it universally accessible and useful. To watch this keynote with American Sign Language (ASL) interpretation, please click here: https://youtu.be/PeUXBvRExic   0:00 Opening Film 1:47 Introduction, Sundar Pichai 6:21 Knowledge 15:45 Knowledge&Search 27:15 Skin Tone Equity 32:00 Computing 33:08 Assistant 43:34 Computing: AI Test Kitchen 53:08 Safer with Google 1:04:38 Safer Way to Search 1:11:20 Android: Opening 1:45:45 Android: Wear OS&Tablet 1:25:32 Android: Better Together 1:31:22 Hardware: Opening 1:33:22 Hardware: Pixel Phone&Buds 1:45:44 Hardware: Ambient&Beyond the Phone 1:54:32 Augmented Reality&Close अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम्: VIDEHA: AN IDEA FACTORY (c)२०००-२०२२. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: डॉ उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम वि‍लास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक -स्त्री कोना- इरा मल्लिक। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि। एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, 'विदेह' प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै, आ से हानि-लाभ रहित आधारपर छै आ तैँ ऐ लेल कोनो रॊयल्टीक/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै। तेँ रॉयल्टीक/ पारिश्रमिकक इच्छुक विदेहसँ नै जुड़थि, से आग्रह। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) २०००-२०२२ सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। भालसरिक गाछ जे सन २००० सँ याहूसिटीजपर छल http://www.geocities.com/.../bhalsarik_gachh.html , http://www.geocities.com/ggajendra आदि लिंकपर आ अखनो ५ जुलाइ २००४ क पोस्ट http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html (किछु दिन लेल http://videha.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html लिंकपर, स्रोत wayback machine of https://web.archive.org/web/*/videha 258 capture(s) from 2004 to 2016- http://videha.com/ भालसरिक गाछ-प्रथम मैथिली ब्लॉग / मैथिली ब्लॉगक एग्रीगेटर) केर रूपमे इन्टरनेटपर मैथिलीक प्राचीनतम उपस्थितक रूपमे विद्यमान अछि। ई मैथिलीक पहिल इंटरनेट पत्रिका थिक जकर नाम बादमे १ जनवरी २००८ सँ "विदेह" पड़लै।इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह: प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका Videha: Ist Maithili Fortnightly eJournal  विदेह: प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका विदेह: मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् 'विदेह' ३४८ म अंक १५ जून २०२२ (वर्ष १५ मास १७४ अंक ३४८) विदेह: मैथिली साहित्य आन्दोलन VIDEHA: An Idea Factory मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA: Maithili Literature Movement

के | है ce 2 ‘ ; |

EE = —— VEZ ee tee ee is 7 hl oe ‘i a lan x & Uo ag 4 Ae rs y स्‍ OS ee NI Ye ll a eet ४ Be a Ae है! कु |

9:54 a Se) < _-, Gajendra Thakur shared a link. eee Admin 23 Jun 207 - हि NUp://WWww.google.com/transconsole/glyl/CNOOSerroject http://www.google.com/transconsole/giyl/ chooseActivity?project=gws&langcode=bh google.com Google in Your Language ॥है Like © Comment @® Send © You, Ashish Anchinhar and 7 others —-, Gajendra Thakur Author Admin १११ नीचाँक पाँचू साइट विकी मैथिली प्रोजेक्टक अछि, प्रोजेक्टकें आगाँ बढ़ाऊ। http://translatewiki.net/wiki/Project:Translator http://meta.wikimedia.org/wiki/ Requests_for_new_languages/ Wikipedia_Maithili http://translatewiki.net/wiki/Special:Translate? task=untranslated&group=core- mostused&limit=2000&language=mai http://incubator.wikimedia.org/wiki/Wp/mai http://translatewiki.net/wiki/ MediaWiki:Mainpage/mai 0y Like 30 Write a comment... GIF © 0 € am & @ @ ८ @ Home Friends Watch Profile Notifications Menu —— eee

9:25 all. @ ) Videha ‘faze’ प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका १ फरवरी २००८ (वर्ष । मास 2 अंक 3) favre fee सक्कि Videha Maithili Formightly € Magazine fare विदेह a me where विकीपीडिया पर मैथिली पर लेख ते छल yer मैथिलीमे लेख नहि छल,कारण मैथिलीक विकीपीडियाक स्वीकृति नहि मेटल छल। हम बहुत Port एहिमे लागल रही,आ' सूचि करैत afta छी जे 27.07.2008 कें भाषारें विकी शुरू करवाक हेतु स्वीकृति भेटल छैक, मुदा एहि हेतु कमसें कम पाँच गोटे,विभिन्न जगहसें एकर एडिटरक रूपमे नियमित रे कार्य करथि तखने योजनाकें पूर्ण स्वीकृति भेटतैक। नीचां लिखल लिंक पर जाय एडिट कय एहि प्रोजेक्टमे अहाँ सभ सहयोग करव, से आशा अछि। पद्चिला अंकमे देवनागरी कोना लिखू ,एहि पर हम लेख लिखने रही। इंगलिश कीबोर्ड पर ओहि तरहे लिखने विकीमे सेहो मैथिली लिखि सकैत छी। एम. गेरार्डक माध्यम श्री अंशुमन पाष्डेयक, जिनकर मैथिलीक युनीकोडमे स्थानक आवेदन लंबित अछि, अनुरोध मेटल छल, ओ' सूचना मैंगलन्ि जाहि at स्पष्ट ee बंगला लिपि आ' मैथिली लिपिक मध्य अंतर ज्ञात भय सकयाई सूचना हम एम. गेरा्डक माध्यम हुतका पठा देलियन्हि, कारण पाण्डेयजी ईमेल एडरेस हमरा नहि अछि। विकीमे पूर्ण स्वीकृतिक हेतु एहिं लिंक सभ पर राखल प्रोजेक्टकें ऑँगा बढ़ाऊ। http:/meta.wkimedia org/wiki/Requests_for_new_languages/WMKipedia_Maithili http:/Anaubator.wkimedia org/wki/Wpimai http://transiatewiki nevwiki/MediaWiki:Mainpage/mai http://translatewiki netwiki/Sped al: Translate 7task=untransiated&group=core- mostused&limit=20008&language=mai अपनेक प्रतिक्रिया आ' रचनाक प्रतीक्षा aft नई दिल्‍ली fiw LLG 07022008 & सर्वाधिकार लेखकाधीन ar जतय लेखकक नाम नहि af ततय संपादकाधीना Rite (nits) संपादक-बचेन्द्र ठाकुरा एतय प्रकाशित रचना समक कॉपी राइट लेखक लोकनिक लगमे रहतन्द्वि, मात्र एकर कम प्रकाशनक अधिकार Ui Safer सैका स्वनाकार अप्पन मौलिक a, अश्रकाशित रचना सम(जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व deere मध्य खन्ि) ggsendra@ychoo.cain aft ggajendra@idehacoin’ मेल अटैचमेष्टक रूपये .60८, 6०0, Lot eat pdf फॉर्मेटमें पठाय सकेत खजिरचनाक संग रचनाकार अप्पन संक्षिप्त 'परिचव(बायोदाटा) ar अप्यन स्कैन कल मेल फोटो पठेताह, से आशा sta छी। रचनाक संग ई घोषणा रहव-ने ई रचना मौलिक af ar पहिल प्रकाशनक हेतु विदेज्नंपाकिक)-ई-पत्रिकाकें देल जा रहल afer मेल प्राप्त होवनाक बाद ययासंभव शीज्रतासें (सात दिनमें) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायता 2 Videha ‘faze’ प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका १ फरवरी २००८ (वर्ष 4 मास 2 अंक 3) favre साशिक सक्कि Videha Maithili Formighty 6 Magazine fare विदेह vensfitehtrhvnidera coin ma wenger . शोध लेख, @ books.googleusercontent.com eS

Ss Rok. | Sa दर वर, पर बुरे, cet arene | geek हू. ना, कुगवियद,. sorert wma ee ुगबुस्वासि” = ite allie h abate bad sate ink, teers eer few eae GLE लोक gear et che te foi) है. एस न, soe peer Bree tee eke at, rear 2 eerie बस el a अर Bee cr: fea: ene एक, fm ay सैका pee = a et, tea: ne fede er si tin वि | ea ae नर कर, मुसिदचिस, cor fret हैं. एक. गजल, तेड जोड़ carer eee fal nial Aidt Geet मर, अलग fe Be | PEG) co केर com, outs are fe) € een mite बेन cet oe _ fee are bn med ere ot हो eee Rae Fe) हद em कूद बन gree Ree eh. wd: Ady wate जाइत, भी. tds, Ye का भगाने |

नल : pal oar Free 4 eee rent eae of ot ty et नदिनप्2520: Tig feu se ete my oe F तननलतलल तट: १४ लत: नि 908 eat af eae tet SOTA) cece tage tg ed seme z न मन ose ges Paces Bat 8 eo नि sea et fir Slee one coated SSE anew rns टन arate ee oe Sat ne feces मर tron पार सर बम Boag arate ted 8 shee at कर बम onekee ene बल; cr te बस, Tener ce

9:53 o > लि < -, Gajendra Thakur shared a link. eee Admin 23 Jun 207 - हि गूगल ट्रांसलेशन टूलमे "बिहारी" भाषाक बदलामे मैथिली लेल अलग ट्रांसलेशन टूल बनेबाक आवेदन विदेहक सदस्यगण द्वारा देल गेल अछि। अपन योगदान गूगल ट्रांसलेट लेल करू, आ कएल सम्पादन बदलबा काल कारण मे (अंग्रेजीमे) "बिहारी" नाम्ना कोनो भाषा नै हेबाक चर्चा करू। ऐ लिंकपर अनुवाद HS; गूगल एकाउंट सँ लॉग इन केलाक बाद | http://www.google.com/transconsole/giyl/chooseProject http://www.google.com/transconsole/giyl/ chooseActivity?project=gws&langcode=bh google.com Google in Your Language a Like © Comment ® Send © You, Ashish Anchinhar and 7 others 7... Gajendra Thakur Author Admin +++ नीचाँक पाँचू साइट विकी मैथिली प्रोजेक्टक अछि, प्रोजेक्टकें आगाँ बढ़ाऊ। http://translatewiki.net/wiki/Project:Translator http://meta.wikimedia.org/wiki/ Requests_for_new_languages/ Wikipedia_Maithili http://translatewiki.net/wiki/Special:Translate? task=untranslated&group=core- mostused&limit=2000&language=mai Write a comment... GIF, © 0 € am & @ @ ८ @ Home Friends Watch Profile Notifications Menu —— eee

A