'विदेह' ३४९ म अंक ०१ जुलाइ २०२२ (वर्ष १५ मास १७५ अंक ३४९) ऐ अंकमे अछि:- १. गजेन्द्र ठाकुर- संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल सेहो] [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] [FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI ALSO] २. गद्य २.१.गजेन्द्र ठाकुर- सझिया रोपनि (संपादक डा. प्रमोद कुमार)- ४३ टा बीहनि कथा लेखकक सझिया संग्रहक समीक्षा २.२.रबीन्द्र नारायण मिश्र- मातृभूमि (उपन्यास)-७म खेप २.३.गजेन्द्र ठाकुर- द ........ फाइल्स २.४.ज्ञानवर्द्धन कंठ- क्ष त्र ज्ञ २.५.शशिकांत कर्ण- बीहनि कथा-बड़का भक्त ३. पद्य ३.१.राज किशोर मिश्र- सुखसु ३.२.मुन्ना जी- कविता-दलाल ३.३.मुन्ना जी- किछु ताँका ४.स्त्री कोना ४.१.कल्पना झा- पान ४.२.सुभद्रा मिश्र भाव्या- २ टा बीहनि कथा Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Books/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाउ। VIDEHA ARCHIVE विदेह पेटार View Videha googlegroups (since July 2008) view Videha Facebook Official Group (since January 2008)- for announcements १. गजेन्द्र ठाकुर Videha e-Learning .................................................................................................................. [संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री] ................................................................................................................... [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल सेहो] [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] [FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI ALSO] .................................................................................................................. [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल/ FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI] NTA_UGC_NET_MAITHILI_01- गजेन्द्र ठाकुर NTA_UGC_NET_MAITHILI_02- गजेन्द्र ठाकुर NTA_UGC_NET_MAITHILI_03 (श्री शम्भु कुमार सिंह द्वारा संकलित) ................................................................................................................... यू. पी. एस. सी. (मेन्स) ऑप्शनल: मैथिली साहित्य विषयक टेस्ट सीरीज यू.पी.एस.सी. क प्रिलिमिनरी परीक्षा सम्पन्न भऽ गेल अछि। जे परीक्षार्थी एहि परीक्षामे उत्तीर्ण करताह आ जँ मेन्समे हुनकर ऑप्शनल विषय मैथिली साहित्य हेतन्हि तँ ओ एहि टेस्ट-सीरीजमे सम्मिलित भऽ सकैत छथि। टेस्ट सीरीजक प्रारम्भ प्रिलिम्सक रिजल्टक तत्काल बाद होयत। टेस्ट-सीरीजक उत्तर विद्यार्थी स्कैन कऽ editorial.staff.videha@gmail.com पर पठा सकैत छथि, जँ मेलसँ पठेबामे असोकर्ज होइन्हि तँ ओ हमर ह्वाट्सएप नम्बर 9560960721 पर सेहो प्रश्नोत्तर पठा सकैत छथि। संगमे ओ अपन प्रिलिम्सक एडमिट कार्डक स्कैन कएल कॉपी सेहो वेरीफिकेशन लेल पठाबथि। परीक्षामे सभ प्रश्नक उत्तर नहि देमय पड़ैत छैक मुदा जँ टेस्ट सीरीजमे विद्यार्थी सभ प्रश्नक उत्तर देताह तँ हुनका लेल श्रेयस्कर रहतन्हि। विदेहक सभ स्कीम जेकाँ ईहो पूर्णतः निःशुल्क अछि।- गजेन्द्र ठाकुर संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सर्विसेज (मुख्य) परीक्षा, मैथिली (ऐच्छिक) लेल टेस्ट सीरीज/ प्रश्न-पत्र- १ आ २ TEST SERIES-1- गजेन्द्र ठाकुर TEST SERIES-2- गजेन्द्र ठाकुर .................................................................................................................. MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) UPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS BPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. (ऐच्छिक) मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. (अनिवार्य) मैथिली प्रश्नपत्र- बी.पी.एस.सी.(ऐच्छिक) .................................................................................................................. मैथिलीक वर्तनी १ मैथिलीक वर्तनी- विदेह मैथिली मानक भाषा आ मैथिली भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम भाषापाक २ मैथिलीक वर्तनीमे पर्याप्त विविधता अछि। मुदा प्रश्नपत्र देखला उत्तर एकर वर्तनी इग्नू BMAF001 सँ प्रेरित बुझाइत अछि, से एकर एकरा एक उखड़ाहामे उनटा-पुनटा दियौ, ततबे धरि पर्याप्त अछि। यू.पी.एस.सी. क मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेल सेहो ई पर्याप्त अछि, से जे विद्यार्थी मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेने छथि से एकर एकटा आर फास्ट-रीडिंग दोसर-उखड़ाहामे करथि| IGNOU इग्नू BMAF-001 .................................................................................................................... MAITHILI (OPTIONAL) TOPIC 1 [Place of Maithili in Indo-European Language Family/ Origin and development of Maithili language (Sanskrit, Prakrit, Avhatt, Maithili) भारोपीय भाषा परिवार मध्य मैथिलीक स्थान/ मैथिली भाषाक उद्भव ओ विकास (संस्कृत, प्राकृत, अवहट्ट, मैथिली)]- गजेन्द्र ठाकुर TOPIC 2 (Criticism- Different Literary Forms in Modern Era/ test of critical ability of the candidates)- गजेन्द्र ठाकुर TOPIC 3 (ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददास सिलेबसमे छथि आ रसमय कवि चतुर चतुरभुज विद्यापति कालीन कवि छथि। एतय समीक्षा शृंखलाक प्रारम्भ करबासँ पूर्व चारू गोटेक शब्दावली नव शब्दक पर्याय संग देल जा रहल अछि। नव आ पुरान शब्दावलीक ज्ञानसँ ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददासक प्रश्नोत्तरमे धार आओत, संगहि शब्दकोष बढ़लासँ खाँटी मैथिलीमे प्रश्नोत्तर लिखबामे धाख आस्ते-आस्ते खतम होयत, लेखनीमे प्रवाह आयत आ सुच्चा भावक अभिव्यक्ति भय सकत।)- गजेन्द्र ठाकुर TOPIC 4 (बद्रीनाथ झा शब्दावली आ मिथिलाक कृषि-मत्स्य शब्दावली)- गजेन्द्र ठाकुर TOPIC 5 (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोरिक गाथामे समाज ओ संस्कृति)- गजेन्द्र ठाकुर TOPIC 6 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- विद्यापति)- गजेन्द्र ठाकुर TOPIC 7 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- पद्य समीक्षा- बानगी)- गजेन्द्र ठाकुर TOPIC 8 (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोक गाथा नृत्य नाटक संगीत)- गजेन्द्र ठाकुर TOPIC 9 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- यात्री)- गजेन्द्र ठाकुर TOPIC 10 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली रामायण)- गजेन्द्र ठाकुर TOPIC 11 (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली उपन्यास)- गजेन्द्र ठाकुर TOPIC 12 (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- शब्द विचार)- गजेन्द्र ठाकुर TOPIC 13 (तिरहुता लिपिक उद्भव ओ विकास)- गजेन्द्र ठाकुर अनुलग्नक-१-२-३ अनुलग्नक- ४-५ TOPIC 14 (आधुनिक नाटकमे चित्रित निर्धनताक समस्या- शम्भु कुमार सिंह)् TOPIC 15 (स्वातंत्र्योत्तर मैथिली कथामे सामाजिक समरसता- अरुण कुमार सिंह) TOPIC 16 (यू. पी.एस.सी. मैथिली प्रथम पत्रक परीक्षार्थी हेतु उपयोगी संकलन, मैथिलीक प्रमुख उपभाषाक क्षेत्र आ ओकर प्रमुख विशेषता, मैथिली साहित्यक आदिकाल, मैथिली साहित्यक काल-निर्धारण- शम्भु कुमार सिंह) TOPIC 17 (मैथिली आ दोसर पुबरिया भाषाक बीचमे सम्बन्ध (बांग्ला, असमिया आ ओड़िया) [यू.पी.एस.सी. सिलेबस, पत्र-१, भाग-“ए”, क्रम-५])- गजेन्द्र ठाकुर TOPIC 18 [मैथिली आ हिन्दी/ बांग्ला/ भोजपुरी/ मगही/ संथाली- बिहार लोक सेवा आयोग (बी.पी.एस.सी.) केर सिविल सेवा परीक्षाक मैथिली (ऐच्छिक) विषय लेल]- गजेन्द्र ठाकुर .......................................................................................... GENERAL STUDIES (PRELIMINARY & MAINS) GS (Pre) TOPIC 1 - गजेन्द्र ठाकुर GS (Mains) NCERT-ENVIRONMENT CLASS XI-XII NCERT PDF I-XII SANSAD TV http://prasarbharati.gov.in/ http://newsonair.com/ ............................................................................................ OTHER OPTIONALS IGNOU eGYANKOSH ..................................................................................................... -गजेन्द्र ठाकुर २. गद्य २.१.गजेन्द्र ठाकुर- सझिया रोपनि (संपादक डा. प्रमोद कुमार)- ४३ टा बीहनि कथा लेखकक सझिया संग्रहक समीक्षा २.२.रबीन्द्र नारायण मिश्र- मातृभूमि (उपन्यास)-७म खेप २.३.गजेन्द्र ठाकुर- द ........ फाइल्स २.४.ज्ञानवर्द्धन कंठ- क्ष त्र ज्ञ २.५.शशिकांत कर्ण- बीहनि कथा-बड़का भक्त गजेन्द्र ठाकुर सझिया रोपनि (संपादक डा. प्रमोद कुमार)- ४३ टा बीहनि कथा लेखकक सझिया संग्रहक समीक्षा १ सझिया-साझ बीहनि कथा संग्रह माने ४३ टा बीहनि कथा लेखक माने १.घनश्याम घनेरो, २.मुन्नाजी, ३.नारायणजी, ४.प्रमोद कुमार झा 'गोकुल ', ५.डा. प्रमोद कुमार, ६.मुन्नी कामत, ७.अमरेश कुमार लाभ, ८.विद्या चन्द्र झा 'बमबम', ९.सत्येन्द्र कर्ण, १०.विन्देश्वर ठाकुर, ११.आभा झा, १२.शिव कुमार, १३.प्रियंवदा, १४.महाकान्त प्रसाद, १५.प्रभाष अकिंचन, १६.आशीष अनचिन्हार, १७.पूनम झा, १८.शुभ्रा संतोष, १९.जवाहर लाल कश्यप, २०.सुभाष कुमार कामत, २१.नीरज कर्ण, २२.कुमारी आरती, २३.कल्पना झा-१ (बोकारो), २४.कल्पना झा-२ (पटना), २५.सबिता झा 'सोनी', २६.विनीता ठाकुर, २७.मृणाल आशुतोष, २८.अमर ठाकुर, २९.मनीषा झा, ३०.रूबी झा, ३१.ओम प्रकाश झा, ३२.हिमाद्रि मिश्र 'हिम', ३३.इरा मल्लिक, ३४.कंचन कंठ, ३५.राजेश वर्मा 'भवादित्य', ३६.मिसिदा, ३७.जयन्ती कुमारी, ३८.कल्पना कुमारी, ३९.सांत्वना मिश्रा, ४०.नन्दनी झा, ४१.भुवनेश्वर चौरसिया 'भुनेश', ४२.अमर कान्त लाल आ ४३.दीपा मिश्रा। २३ गोट पुरुष आ २० गोट महिल बीहनि कथाक अछि ई संग्रह। संग्रहक पुरुष बीहनि कथाकार १.घनश्याम घनेरो, २.मुन्नाजी, ३.नारायणजी, ४.प्रमोद कुमार झा 'गोकुल ', ५.डा. प्रमोद कुमार, ६.अमरेश कुमार लाभ, ७.विद्या चन्द्र झा 'बमबम', ८.सत्येन्द्र कर्ण, ९.विन्देश्वर ठाकुर, १०.शिव कुमार, ११.महाकान्त प्रसाद, १२.प्रभाष अकिंचन, १३.आशीष अनचिन्हार, १४.जवाहर लाल कश्यप, १५.सुभाष कुमार कामत, १६.नीरज कर्ण, १७.मृणाल आशुतोष, १८.अमर ठाकुर, १९.ओम प्रकाश झा, २०.राजेश वर्मा 'भवादित्य', २१.मिसिदा, २२.भुवनेश्वर चौरसिया 'भुनेश', २३.अमर कान्त लाल। संग्रहक महिला बीहनि कथाकार १. मुन्नी कामत, २.आभा झा, ३.प्रियंवदा, ४.पूनम झा, ५.शुभ्रा संतोष, ६.कुमारी आरती, ७.कल्पना झा-१ (बोकारो), ८.कल्पना झा-२ (पटना), ९.सबिता झा 'सोनी', १०.विनीता ठाकुर, ११.मनीषा झा, १२.रूबी झा, १३.हिमाद्रि मिश्र 'हिम', १४.इरा मल्लिक, १५.कंचन कंठ, १६.जयन्ती कुमारी, १७.कल्पना कुमारी, १८.सांत्वना मिश्रा, १९.नन्दनी झा, आ २०.दीपा मिश्रा। महिला बीहनि कथा लेखकक ई संख्या आह्लादकारी अछि। आ तइ लेल सम्पादकक अपक्ष दृष्टिकोण प्रशंसनीय अछि। सम्पादकक अपक्ष रहब अखनो मैथिलीमे एकटा गुण सन अछि, से कष्टकारी धरि अवश्य अछि। २ ४३ गोट लेखकक ८६ टा बीहनि कथाक सझिया-साझ रोपनि भेल अछि। घनश्याम घनेरोक “अछोप” मैथिलीकेँ सोंगर दऽ ठाढ़ रखबाक सम्पादकीय प्रयास दिस लक्षित हुअए बा नै मुदा कटाह अछि तँ मुन्नाजीक “फोकस!” खट-मिठाह। नारायणजीक “कुशल” राजमोहन झा केर बीहनि कथा “चलह”(देखू विदेहक ६७म बीहनि कथा विशेषांक https://videha123.files.wordpress.com/2010/10/videha_01_10_2010.pdf) सन मानव प्रकृतिकेँ देखबैत अछि आ एक्के प्लॉटपर अछि। से बीहनि कथामे सेहो प्लॉट होइत अछि आ एक्के प्लॉटपर दू तरहक बीहनि कथा लीखल जा सकैए से सिद्ध भेल। प्रमोद कुमार झा “गोकुल”क बीहनि कथा अलंकृत आ क्लासिकल दृश्यक निर्माण करैत अछि, से बीहनि कथामे तकर पलखति नै, से कहैबला गलत सिद्ध भेला। मैथिलीकेँ सोंगर दऽ ठाढ़ रखबाक सम्पादकीय प्रयासक सम्पादक डॉ प्रमोद कुमारक ५ टा बीहनि कथा ऐ संग्रहमे अछि। आ से बच्चा उचिते कहै छन्हि जे मायकेँ बिरयानी नै बनबऽ अएलै तँ ओ पिछड़ल भेल तँ ओहो गूगल, क्लासरूम आ पी.पी.टी आ किदनि सभ नै बुझने कोरोना-पश्चात कालमे पिछड़ल भेलाह। मुन्नी कामतक फेमिनिज्म “गर्ल्स हॉस्टल”क “फेरसँ देहकेँ स्वतंत्र करबाक प्रयास” सँ परिलक्षित होइत अछि। से बीहनि कथा फेमिनिज्म लेखन लेल सेहो औजार बनबाक योग्यता रखैत अछि। अमरेश कुमार लाभक “करिकी”मे ई मत आर पुष्ट भेल अछि- “पढ़ि लिखि ने लैक आ कोइ बड़का नोकरी लागि ने जाइक!”, आ से कारीसँ गोर हेबाक नव मलहम छी, आ तखन बऽर हेरैमे कोनो मौगति नै हएत। विद्या चन्द्र झा “बमबम” प्रेम-पिशाचसँ अपने ग्रसित छथि “माफ कऽ सकी तँ”मे; आ कक्काकेँ ऐमे ओ सान्हैत छथि “प्रभा”मे आ ऐ पिशाचेकेँ सत्येन्द्र कर्ण बाबाजीक “दिमाग फूजब” कहैत छथि….. अन्तिम सत्य। विन्देश्वर ठाकुर धरि पुरातन लोक छथि हुनका ने बेटाक बदमाशी “सोकाज”मे पसिन्न छन्हि आ ने पुतोहुक बदमाशी “बहसल कनिया” मे। आभा झा केर “लाज” पुरुखक नैतिकताक परिभाषापर चोट अछि। शिव कुमार सेहो “फर्मलिटी”मे परिवारमे नव अर्थव्यस्थाक वातावरणमे होइत झमेलकेँ चिन्हित करैत छथि। प्रियम्वदा “स्वाभिमान”मे- “बेटी केर विवाहक मूल्य”क विरोधमे छथि। महाकान्त प्रसाद “गोली”मे प्रधानमंत्रीक “मोनक बात”क गोलीसँ तुलना करैत छथि, हँ प्रधानमंत्री शब्दक ओ प्रयोग नै केने छथि। प्रभाष अकिंचन विवाहसँ ठामे पूर्व मोन पड़ैत उपनयन संस्कारक सम्बन्धमे “कपरछिल्ला” लिखैत छथि। आशीष अनचिन्हारक “स्थिति” विवाह-पूर्व आ विवाह पश्चात स्त्रीक अवस्थापर अछि तँ पूनम झा “उपदेश”क मादेँ फरिछा दै छथि जे कोना लोकक उपदेश आ करनी मे अन्तर होइ छै। शुभ्रा संतोष “मोल भाव” मे पुरुखक वीभत्स रूप देखबै छथि आ संगे नारीक भितरका शक्ति सेहो। जवाहर लाल कश्यप “कुक्कुर”मे मालिक आ कुक्कुरक मनोविज्ञानमे जाइत छथि आ “हीरो”मे सेक्सपियर सन “गुलाब गुलाबे सन सुगंधित रहत भने ओकर नाम किछु आर भऽ जाय” नाम-चलीसापर लिखै छथि। सुभाष कुमार कामत “कोड वर्ड”क माध्यमसँ देखबै छथि जे बेटीक जन्मक समाचार लोककेँ प्रसन्न करैत छै मुदा समाजक घटनाक डरे ओ ओकरा जन्म नै देमऽ चाहैए। मुन्ना प्रसन्न भेलाह मुदा सुधा टेलीविजन समाचार देखि चिन्तित भऽ गेली। नीरज कर्ण “फादर्स डे” केर माध्यमसँ कुटिलतापर प्रहार करै छथि। कुमारी आरतीक “जीवनसंगी” मुदा स्त्री-पुरुखक पत्नी-पति रूपमे सहमेलू हेबाक सेहो आस बनेने रखैत अछि। कल्पना झा-१ (बोकारो)क “संताप” गंगाक प्रदूषणपर टिप्पणी अछि तँ “सप्पत” बेटा आ साँय केर खाइत देखि बेटीक आक्रोशकेँ गहिंकी नजरिसँ देखबैत अछि। कल्पना झा-२ (पटना) “फेसबुकिया जिनगी” मे वृद्धावस्थाक समस्याक संग फेसबुक पोस्टपर संगे टिप्पणी कऽ जाइत छथि, से बीहनि कथामे छोट आकारक बादो दूटा प्लॉट संगे समाहित भऽ सकैए सेहो सिद्ध करै छथि। सबिता झा “सोनी”क स्त्री-विमर्श “नौत”मे देखार होइत अछि, भूख पुरुखकेँ पहिने लगैत छै की? विनीता ठाकुरक “समय केर मारल” ’समयक फेर’ भूखक माध्यसँ बतेबाक प्रयास थिक। मृणाल आशुतोषक “न्यूटन के थर्ड लॉ” लीव-इन रिलेशनमे रहनिहारि स्त्रीक दशा देखबैत अछि मुदा समापन विवशतासँ नै मुदा क्रिया-प्रतिक्रिया (“न्यूटन के थर्ड लॉ”)क माध्यसँ करैत अछि ओना क्रिया-प्रतिक्रिया शब्दक प्रयोग ओ नै करैत छथि कारण मिथिलामे एतेक साक्षरता तँ आबिये गेल छै जे “न्यूटन के थर्ड लॉ” कहने लोक ओकर अर्थ “क्रिया-प्रतिक्रिया” बुझि जेतै। अमर ठाकुर “नाम उच्च कान बुच्च” मे “बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर” केर अर्थ फरिछबैत छथि। मनीषा झा “निपुत्र” केर माध्यमसँ एक्के गोटेक ’अपना का” आ ’अनका काल’ दुनू काल दू तरहक व्यक्तित्व होएब देखबैत छथि। रुबी झा “आस”मे माय आ बच्चाक दू परिस्थितिमे हठ आ “टुगर” मे मनुक्ख आ पशु दुनू क एक्के सन कष्ट अनुभव करबाक विवेचना केने छथि। ओम प्रकाश झा केर “पुरना दलान”- “नव घर उठे, पुरान घर खसे” केर विपरीत पुरना दलानक खसबाक कथा नै वरन चिड़ैक जोड़क आश्रय-स्थानक कथा अछि। बीहनि कथाक ई समीचीन अन्त अछि, हुनकर “स्पेशल परमिट” जे विदेह मैथिली विहनि कथा [विदेह सदेह ५] मे संकलित भेल छल सेहो अही तरहक कबीर-उलटबासी सन अछि। बीहनि कथाक अन्त अही तरहक हेबाक चाही, से गप हम बीहनि कथाक समीक्षाशास्त्र [विदेह सदेह ५] मे लिखने छी। हिमाद्रि मिश्र “हिम” केर “अधिकार” मे सासु-पुतोहुक उतराचौड़ी वर्णित अछि। इरा मल्लिक “पीड़ न जाने कोय” मे दुख बिसरबाक लेल राति भरि जाँत पिसबाक उदाहरण दऽ बीहनि कथामे मनोवैज्ञानिक विश्लेषण करबाक क्षमताकेँ देखबैत छथि, राति काटब मोश्किल होइ छै, दिन तँ कटि जाइ छै। कंचन कण्ठ बराबरीमे बीहनि कथाक अन्त हास्यसँ करैत छथि। राजेश वर्मा “भवादित्य” वर्तमानक भूत बनब आ फेर दुनूमे विवाद हएब केर माध्यम सँ किछु आर कहि जाइ छथि। मनुक्ख रोल बदललापर अपन विचारो अहिना तँ बदलैत अछि। मिसिदा अपन बीहनि कथा “सपना” सेहो ऐ गपकेँ साहित्य, रचना आ राजनीति केर तीन संकल्पनाक माध्यमसँ पाँच पाँतिमे फरिछा दइ छथि।जयन्ती कुमारीक बोल्ड बीहनि कथा अछि “खौंझी”, तामसमे किचेनमे बर्तन पटकबसँ शुरू भेल ई बीहनि कथा घरेलू सहायिका सोनी केर स्त्री विमर्शसँ शुरू भेल मुदा मलकिनी रेखा सेहो ओइ विमर्शक हीस छथि ओतऽ जा कऽ खतम, आ ई करबाक सामर्थ्य, जकरा एपेक्स-समापन कहि सकै छिऐ, लेखिकामे छन्हि। कल्पना कुमारीक “झमारल मोन” हिस्सा-बखड़ापर केन्द्रित अछि। सांत्वना मिश्रे धरि “भगवती जनम लेली” मे स्त्रीक समस्या लेल स्त्रीये दोखी बा स्त्रीयो दोखी बजैत सुनाइत छथि। नन्दिनी झा मुदा “भदबा” मे एकरा उनटि दैत छथि आ सासुक प्रगतिशील हेबाक प्रमाण प्रस्तुत करैत छथि। भुवनेश्वर चौरसिया “भुनेश” अपन “सहमत” मे बकथोथीकेँ प्रयुक्त करैत हास्य उत्पन्न करैत छथि आ सएह अमर कान्त लाल अपन “एम आर पी” मे करैत छथि। दीपा मिश्राकेँ बुझल छन्हि जे “चलाक” बेशी स्त्री होइत अछि मुदा कहै छथि “पुरुखे होइत हेतै” आ से कहि ढेर रास काज पुरुखसँ करबा लैत छथि। ३ सझिया रोपनि (सझिया बीहनि कथा-संग्रह) केर सम्पादक डॉ. प्रमोद कुमार ऐ संग्रहक भूमिकामे बीहनि कथाक गुणक विषयमे लिखैत छथि जे “एकरा मे एगो पैघ कथाक सब गुण होइछ। जेना कथोपकथन, वातावरण, शिल्प, तथ्यक गांभीर्य, उद्देश्य आ प्रासंगिकता आदि।” हुनकर बीहनि कथाक नपना अछि कठोर रूपसँ १०० शब्द जे पढ़ल जा सकय २ मिनटमे- एनामे २ मिनट नूडल्सक विज्ञापन मोन पड़नाइ स्वाभाविक। हुनकर सम्पादकीय सामर्थ्य अछि जे किछु हास्य तँ किछु गम्भीर, किछु स्त्री-विमर्श तँ किछु कोरोना आ फेसबुक सन्दर्भित सभ तरहक बीहनि-कथा ओ ऐ संग्रहमे देलनि। से हास्य कणिका सेहो संदर्भयुक्त रहलापर बीहनि कथाक रूपमे चिन्हित आ संकलित भऽ सकैत अछि (देखू बीहनि कथाक समीक्षाशास्त्र- विदेह सदेह ५) ओ से सिद्ध केलनि। अष्टाध्यायीक भाष्य ओकर आकारक कएक गुणा बेशी आकारमे कएल जेबाक खगता ओकर रचनाक मोटामोटी ५ सय बर्खक बादे अनुभूत भेल आ से भेबो कएल। तहिना ऐ संग्रहक बीहनि कथा सभक समीक्षा संग्रहक हीसक रूपमे नै वरन् स्वतंत्र रूपेँ सेहो जँ कएल जाय तँ ओ सभ अपन आकारसँ कएक गुणा बेशी स्थान छेकत। आ से ऐ संग्रहक संकलित बीहनि कथा सभक विशेषता अछि आ त्इ लेल संकलनकर्ता-सम्पादक धन्यवादक पात्र छथि। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। रबीन्द्र नारायण मिश्र- मातृभूमि (उपन्यास)-७म खेप ६ नागपर्वतपर चंद्रिका जाइत-जाइत अधमरु भए गेल रहथि। हुनकर साँस जोर-जोरसँ चलि रहल छलनि । मुँहसँ लार-पोटा खसि रहल छलनि । सभके भेलैक जे आब ई नहि बँचतीह। ताबे नाग बाबा सेहो ओतए पहुँचि गेलाह। "हम कतए आबि गेलहुँ?"-आँखि खोलितहि चंद्रिका बजलीह। हुनकर चारू कात लोकक करमान लागि गेल छल। सौंसे जानकी धामसँ लोग सभ जुटि गेल रहए। सभक मोनमे एतबे जिज्ञासा रहैक-"चंद्रिकाक की हाल छनि? कालीकान्त अपन पत्नी गौरीक संगे महादेव! महादेव! करैत रहथि। मुदा संयोग कहू जे नागबाबा सही समयपर भेटि गेलखिन। ओ तुरंत जड़ी-बुटी देलखिन। किछु झाड़फूक सेहो केलखिन। नागबाबाक उपचार सही रहल। चंद्रिकाकेँ होश आबि गेलनि। कनीके कालक बाद चंद्रिका आँखि खोललीह। चंद्रिकाकेँ होशमे देखि कालीकान्त आ गौरीक प्रसन्नताक अंत नहि छल। ओ चंद्रिकाकेँ वापस अपन घर लए जएबाक हेतु आगा बढ़लाह। "ठहरू। हिनकर संकट अखन खतम नहि भेल अछि। -नाग बाबा बजलाह। से सुनि कालीकान्त ओ गौरी दुनू गोटे ठमकि गेलाह, फेर साहस कए पुछैत छथि- "आब की समस्या आबि गेल?" "आबि नहि गेल, अएले अछि। चंद्रिकाक देह दिस किएक नहि देखैत छिअनि?"- नाग बाबा बजलाह। " ई की भए गेल? केहन उज्जर धप-दप एकर वर्ण छल। एकर देह तँ कारी सिआह भए गेल अछि।" –कालीकान्त बजैत छथि। गौरीकेँ तँ बकारे नहि फुटनि। "बेसक हिनकर प्राण बँचि गेलनि मुदा जहर बहुत भयानक छल। तकरे प्रभावसँ हिनकर शरीरक रंग कारी भए गेल अछि।" "ई ठीक भए सकैत अछि कि नहि? –कालीकान्त बजैत छथि। "हम सब तँ प्रयासे करब आगा महादेवपर निर्भर करैत अछि।" "अपने सही निदान बताउ। हम सभ एहि हेतु अपनेक बहुत आभारी रहब। चंद्रिकाक जहिना जान बँचि गेल तहिना हिनकर रूपक रक्षा कएल जाए।" “जहर सौंसे देह पसरि गेल छल। जँ कनिको देरी होइत तँ हिनकर प्राण नहि बँचैत।" "किछु उपाय करिऔक जाहिसँ चंद्रिका अपन मौलिक स्वरुपकेँ प्राप्त करथि।" "हम अवश्य प्रयास करब।” "हिनकर देहक रंग ठीक हेबाक आधा-आधी संभावना अछि । " जाहिसँ चंद्रिकाक स्वास्थ ठीक भए जानि से कएल जाए "- कालीकान्त बजलाह। “चंद्रिकाक इलाजमे किछु समय लागत । बढ़ियां होएत जे ओ हमर आश्रमेमे दू-तीन दिन रहि जाथि।” "कोनो हर्जा नहि । अहाँ तँ हुनकर पितातुल्य छिअनि । हुनकर कल्याणक चिंता हमरासँ बेसी अपने कए सकैत छी ।"- कालीकान्त बजलाह। चंद्रिकाक हालत देखि जयन्त बहुत दुखी रहथि। हुनका चिंतित देखि आचार्यजी कहलखिन- "जयन्त अहाँ बहुत चिंतित लागि रहल छी।" ओ की बजितथि? चंद्रिकाक प्रति हुनकर मोह कष्टक कारण छल। आचार्यजी तँ ज्ञानी छलाह। हुनकर मोनक बात बुझलखिन। "अहाँ विद्वान छी। भावी प्रवल होइत अछि। एकरा के टारि सकैत अछि। इलाज चलिए रहल छनि। समयक संगे सभ किछु अपने ठीक भए जेतैक । अस्तु, हमरा लोकनिकेँ सही समयक प्रतीक्षा करबाक चाही ।"- आचार्य बजलाह। आचार्यक बात मानि जयन्त हुनका संगे शारदा कुंज लौटि गेलाह। संगे-संगे आश्रमक समस्त विद्यार्थी सेहो लौटि गेलाह। नागबाबाक परामर्श मानि कालीकान्त सेहो गौरीक संगे त्रिकुट भवन लौटि गेलाह। ओ सभ चंद्रिकाकेँ इलाजकेँ प्रधानता देलथि। असलमे हुनकर रंग ततेक कारी भए गेल छल जे ककरो चिंता भए जेतैक, फेर ओ सभ तँ ओकर माता-पिता रहथिन। फेर नाग बाबापर हुनका सभकेँ पूर्ण विश्वास छलनि । नागबाबाकेँ इलाकामे के नहि जनैत छल? अपना क्षेत्रमे ओ बहुत यशस्वी छलाह । चंद्रिकाक संगे भेल एहि दुर्घटनाक बाद जयन्त बहुत परेसान रहैत छलाह । हुनका मोनमे कतहु-ने-कतहु रहनि जे हुनके चलते चंद्रिकाक ई हाल भेलनि । ने ओ हिनका लग अबितथि, ने हुनका साँप कटितनि । दिन-राति ओही विषय सभपर सोचैत रहैत छलाह। "अहाँ बहुत परेसान लागि रहल छी ।"-आचार्यजी कहलखिन। "हमरा तँ किछु फुराइते नहि अछि। लाख कोशिश करैत छी मोन रहि-रहि कए ओतहि पहुँचि जाइत अछि।" "ई नीक लक्षण नहि अछि, जयन्त! अहाँकेँ विद्याध्ययनपर ध्यान देबाक चाही। शेष वस्तु गौण थिक।" जयन्त किछु नहि बाजि सकलाह। जखन दू-तीन दिन एहिना छटपट करैत बीतल तँ जयन्तकेँ नहि रहल गेलनि। ओ चुपचाप नाग पर्वतपर पहुँचि गेलाह। संयोगसँ थोड़बे कालक बाद कालीकान्त गौरीक संगे सेहो ओतए अएलथि। ओहि ठाम जयन्त परेसान एमहर-ओमहर टहलि रहल छलाह । “अहाँ बहुत परेसान बुझा रहल छी?"- कालीकान्त पुछैत छथि। ओ किछु नहि बाजि सकलाह। चंद्रिकाक स्वास्थक चिंतासँ जयन्तक हालत खराप भेल जा रहल छल। गौरीक दुखक तँ अंते नहि छल। कालीकान्त तैओ धैर्य राखबे उचित बुझलनि। हुनका नाग बाबापर विश्वास बनल रहनि। ओ मोने-मोन हनुमानजीकेँ गोहराबए लगलाह। नागबाबाक प्रयाससँ चंद्रिका पूर्ण ठीक भए गेल रहथि। हुनका पूर्व अवस्थामे देखि कालीकान्त बहुत प्रसन्न भेलथि। मुदा गौरी अखनो जेना मानसिक अवसादमे होथि। "आब कथीक चिंतामे पड़ल छी?"- कालीकान्त बजलाह। "चिंताक तँ बाते अछि। आखिर चंद्रिकाकेँ ई समस्या सभ किएक भेलनि? कहीं ई सभ किछु षड़यंत्र तँ नहि अछि?" "अहाँक माथा तँ सदिखन उलटे सोचैत रहैत अछि। एकटा दुर्घटना छलैक जकर अंत भए गेल। आब एहिपर बेसी माथापच्चीक कोनो औचित्य नहि अछि।" कालीकान्त कहैत छथि- "हमरा लोकनि अहाँक बहुत ॠणी छी । कहि नहि एहि महान उपकारक बदला हम सभ कोना सधा सकब? " "एहिमे उपकारक कोन बात भेलैक । हम तँ नित्य एहन काज करिते रहैत छी । ई तँ संयोग भेल जे हमरा अपने लोकनिक सेवाक अवसर सेहो भेटल । चंद्रिका पूर्ण स्वस्थ भए गेलीह । हिनका लए कए आब कोनो चिंताक बात नहि अछि । "- नाग बाबा बजलाह। कालीकान्त आ गौरी नाग बाबाकेँ बहुत धन्यवाद देलनि। चंद्रिका आब पहिनेसँ बेसी सुंदर लगैत छलीह। नागबाबाकेँ प्रणाम कए ओ अपन माता-पिताक संगे त्रिकुट भवन लौटि गेलीह। जयन्त असगरे शारदाकुंज वापस चलि गेलथि। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। गढ़-नारिकेल उपन्यास-त्रयीक पहिल उपन्यास "सहस्रशीर्षा" क बाद दोसर उपन्यास गजेन्द्र ठाकुर द ........ फाइल्स १ हमर नाम छी………..आ गाम “गढ़ नारिकेल” शुक्र दिन ऑफिससँ दस बजे रातिमे घुरलहुँ तँ डेरा पहुँचिते बेटी स्वागत केलक। बुझा गेल जे रूसल अछि। पुछलिऐ जे की भेल तँ ओ मोन पाड़लक जे अझुका सिनेमा देखबाक प्रोग्राम छलै। हमर एहि जवाबपर कि देरी भऽ गेल अछि आ थाकल छी, ओ सोफापर मुँह घुमा कऽ बैसि गेल आ कथुक उत्तरे नै दिअए। कनियाँकेँ कहलियन्हि जे काल्हि सिनेमा चलै चलब से नै हेतै कारण ८-११ बला शो तँ खतम भऽ गेल हेतै। ओ बेटीसँ पुछि कऽ ओतहियेसँ चिकरि कऽ कहलन्हि जे अहाँ अझुका प्रॉमिस केने रहिऐ। हँ प्रॉमिस तँ केने रहिऐ, तकरा पूरा तँ करैये पड़त। फेर मोन पड़ल जे सरकार नाइट शो देखेबाक अनुमति थियेटर सभकेँ देने छै, से आइ काल्हि ११ सँ २ बजेक शो सेहो देखि सकै छी। “बूक माइ शो” साइटपर ऑनलाइन टिकट कटेलौं आ से देखि बेटीक रुसब खतम भेलै। बेटा, कनियाँ आ माँ तीनू गोटे तैयार भऽ जाइ गेला आ सिनेमो जे पड़ि लागल सेहो सनगर। सालमे एक्के दू टा तँ नीक सिनेमा बनै छै बॉलीवुडमे। दू बजे रातिमे सिनेमा देखि कऽ घुरि रहल छलौं, रस्तामे गाड़ीक लाइट एकटा बड़का होर्डिंगपर पड़लै, आ ओहने बहुत रास होर्डिंग अबैत गेल। ओइ होर्डिंग सभपर राज्यक महिला मुख्यमंत्रीक कनी अगरायल सन अभयमुद्राबला फोटो छलै। ओना तँ बेटीसँ बेशी रनिंग कमेण्ट्री हमहीं करै छी, रस्ताक सभटा चीजक विस्तृत विवरण दैत गाड़ी चलबै छी, कखनो काल जखन दुनू हाथ छोड़ि खिस्सा आगू बढ़बै छिऐ तँ ओ टोकितो अछि आ सड़कक सभटा कानून, रेड-लाइट, ग्रीन लाइट, जेब्रा क्रॉसिंग, सभटा ओ बुझबऽ लगैए। मुदा ऐ होर्डिंग सभकेँ हम अनठा देलिऐ ई सोचिकऽ जेजँ कहबै तँ उनटे सुना देत जे ई सभ हमरा बुझले अछि। मुदा ऐबेर से नै भेल। शीसा खोलि कऽ ओ अचरजसँ हमरासँ पुछलक- “ई ककर फोटो छिऐ डैडी?” “ईहो नै बूझल अछि, फलना दीदी मुख्यमंत्रीक फोटो छियन्हि ई”। “मरि गेलखिन्ह की? कहिया?” कनी काल तँ हमरा बुझबामे नै आएल आ जखन आयल तँ ततेक हँसी लागल जे गाड़ी चलेनाइ मुश्किल। माँ कनियाँ आ बेटाकेँ कहलियन्हि जे ई किताबमे पढ़ैए जे मुइलाक बाद बड़का फोटो आ मूर्ति बनै छै से एकरा भेलै जे मरि गेलीह मुख्यमंत्री आ स्कूलमे एक्को दिनक छुट्टी नै भेटल। मुदा आइ काल्हि तँ जिबितेमे बड़का फोटो आ मूर्ति सभ बनऽ लागल छै। हमरा संगे सभ पेट पकड़ि कऽ हँसऽ लगला। बेटी हतप्रभ सभकेँ देखैत रहल। तखने हमर फोनक घण्टी बाजल आ हम जेबीसँ फोन निकालनहिये रही तखने ओ हमरा दिस इशारा कऽ कय स्टीयरिंगपर ध्यानदेबा लऽ कहलक तँ हम गाड़ीकेँ सड़कक कात लगा कऽ गाड़ी ठाढ़ कऽ लेलौं। “सूतल छलौं की, उठा देलौं।”- फोनमेसँ अबाज बहराइए। “नै, एते जल्दी कहाँ सूतै छी, कि कोनो जरूरी गप अछि?”, दू बजे राति कऽ ऑफिसक हाकिम बिना काजेक फोन किए करत, से जकरा इंस्टिंक्ट कहै छै तहिना पुछा गेल छल। “एम्सक ट्रॉमा सेन्टर आबि सकै छी, आउ तँ फेर आगाँ गप हेतै”। डेरा पहुँचि, कपड़ा बदलि कऽ ऊबरकेँ बजबै छी, अपन गाड़ी लऽ जायब तँ पार्किंग भेटत आकि नै से सोचि कऽ। गेटपर उतरि कऽ जखने ट्रॉमा सेन्टरक भीतर जाइ छी तँ अबाज अबैए- “सर, एम्हर छी हम”। हमर इंस्पेक्टर सहैब गालकेँ हाथसँ साटने हमरा शोर करै छथि। “अहूँ एतै छी, हाकिम बजेने छथि, तेँ हम आयल छी”। “हमरे दुआरे बजेने छथि, अटैक कऽ देलक गुण्डा सभ”। “कतऽ, कोना?” ओ अपन गालपरसँ हाथ हटबै छथि तँ गाल दू टुकड़ी दुनू दिस भेल देखाइत अछि। हमर “हाँ, हाँ”कहला उत्तर ओ धड़फड़ा कऽ अपन हाथसँ गालकेँ साटि लै छथि। हम कहै छिएन्हि- “अहिना केने रहू, अहाँकेँ अपन गाल देखा नै पड़ि रहल अछि तेँ अहाँकेँ पता नै अछि जे ….”। चुप भऽ जाइ छी। “कते कालसँ एतऽ छी?” “एक घण्टासँ छी। जखन आइ.जी., डी.आइ.जी. सहैब सभ कनी काल पहिने एला तखनसँ कनी ध्यान देलकहेँ। ईहो सभ की करतै, देखै नै छिऐ भीड़”। एकटा डॉक्टर हुनका बजाकेँ लऽ जाइ छन्हि एकटा कोठलीमे। ओइ कोठलीक बाहर सभ हाकिम जमा छथि, सभ गम्भीर मुद्रा बनेने छथि। लोकल थाना बला सभ सेहो आबि गेल अछि। थाना बला सभ सहटि कऽ हमरा लग आबि गेल। दरोगाजी हमरा अपन मोबाइल निकालि एकटा वी.डी.ओ. देखबै छथि। “देखू ऐ गुण्डा सभकेँ, हमरेपर पाथर फेकि रहल अछि”। हवलदार सहैब टिपलखिन्ह जे ओइ सारकेँ हुजूर जेल पठा देलखिन, सभटा गजेरी-चरसी सभ छै। कोनो डरे-भर नै होइ छै। हुजूरे कऽ मोटरसाइकिल थानेपरसँ चोरा लेलकन्हि, तकर अखनि धरि पते नै चलल छै। हम दरोगाजीसँ पुछलियन्हि- “अहाँकेँ की लगैए, की ई लॉ एण्ड ऑर्डरक गप छै आकि ऑफिसक काजसँ एकर कोनो सम्बन्ध छै”? ओ कहै छथि जे मामिलामे पेंच छै। तहकीकात तँ जबरदस्त ढंगसँ हेतै। मुदा ओ सेहो कहै छथि जे मोटा-मोटी ई “लॉ आ ऑर्डरे”क समस्या छिऐ। मुदा देखू तहकीकातमे की निकलैए… इंसपेक्टर सहैबक गाल सीबि देल गेल छन्हि। इन्सपेक्टर सहैब हमरा कहै छथि जे गाल तँ दू टुकड़ी भऽ गेल छलै से हुनका बुझले नै छलन्हि, सीलाक बाद डॉक्टर अएना देखेने छलन्हि से देखि कऽ पता चललन्हि। सभ हाकिम अपना-अपना घर दिस बिदा भेला। सरकारी गाड़ी इंस्पेक्टर साहैब कऽ लऽ गेलन्हि आ हम ऊबरकेँ फोन लगेलौं। …………………………………………………………………………………………………………. अगिला दिन भोरे-भोर ऑफिस गेलौं तँ अर्दली इशारामे कहलक जे एकटा इनफॉर्मर आयल अछि। हम कहलिऐ जे ककरोसँ भेँट करा दैतिऐ, एतेक गोटे ऑफिसमे अछि तँ कहलक जे कहैए जे अहींसँ भेँट करत, कहैए जे हमर इलाकाक हाकिम छथि, अनकापर ओकरा भरोस नै छै। “हमर इलाकाक छी? कतुक्का छी? नामो-गाम बता देलक की?” “नाम तँ नै बतेलक मुदा कहलक जे गामक नाम कहि दियौन्ह हाकिमकेँ, अपने बजा लेता। गामक नाम जे कहलक से विचित्रे…. किदन तँ … “गढ़ नारिकेल”!” २ कएक दिन बीति गेल, डेटा, डेटा, डेटा… बैलेंस शीट, एक्सेल फाइल, फेक अकाउण्ट, फेक इनवोइस.. फेर सभ फेक अकाउण्ट लेल एकटा कनसोलिडेटेड इनवोइस..आ तइसँ बनल ट्रायल बैलेंस… आ से डेटा गेल चार्टर्ड अकाउण्टेण्ट लग। आ तखन बनल ऑडिटेड बैलेंस शीट.. पकिया बला! “एतेक सामग्री अहाँ लग अछि, अहाँ कोनो पैघे लोक छी, कारण कोनो संगठनक छोट-छीन लोकक हाथमे एतेक डेटा नै एतै। गढ़-नारिकेल एकटा रहस्य छै आ ई रहस्ये छिऐ ई दुनियाँ”। “हमहूँ छी एकटा रहस्ये। गढ़-नारिकेलक कर्ज। हम सभटा गप कहब, किछुओ नुकाएब नै अहाँसँ, से समए आएत। एकबेर जखने शुरू कऽ देलौं अहाँ ई काज, तखने हम निश्चिन्त भऽ गेलौं। हमरा बुझल छल जे अनका ई डेटा देखेबै तँ ओ बुझबो करत आकि नै, आ जँ बुझि कय डेरा बा बिका जाय। आइक बाद हमरा आ अहाँक भेँट नै हएत, कोनो सूचनाक आदान-प्रदान आइक बाद आब डार्क-वेब टा पर हएत”। ………………………………… आ ओ चलि गेल। ओकरा जिताएब हम। ओ जीतत तँ जीतब हम। एतेक सूचना, एतेक धरि खसि गेल लूकक सूचना? सूचना आ डेटा बनि गेल अछि बड़का खेल। सभकेँ बूझल छै सभटा गप आ सभ गबदी मारने अछि बैसल। डर.. कियो एकर कारण घर्-द्वार-परिवारकेँ बचाएब कहैए, फैमिली बला छी, अपन नै तँ परिवारक चिन्ता तँ करैए पड़त, तँ अपना लेल नै परिवारक लेल डेराइत छी… ओकरा की छै, ने आगू नाथ ने पाछू पगहा… आ कियो-कियो होइत अछि बताह, ने अपन चिन्ता आ ने परिवारक.. बौआइत छै ओकर परिवार… कियो कनी कालमे थम्हि जाइत अछि कियो कोनो पैघ दुर्घटनाक बाद थम्हैत अछि आ कियो किछुअ भऽ जाउ थम्हिते नै अछि… आ एहनो लोक सभ अछि जकरा संग दुर्घटना होइते नै छै.. से ओ किए थम्हत.. बुझाइ छै जे ओकर बड़कति होइत छै अधलाह काज केने..,. लागि रहल अछि जे कोनो अन्हार तरहड़ि मे उतरल जा रहल छी, सीढ़ी नीचाँ दिसि जाइ छाइ, पहिने कनी-मनी इजोत, फेर झलफल, फेर राति सन अन्हार आ फेर अन्हार गुज-गुज, आगिपरक खापड़िक अधोभाग… इजोत कोनो आस नै? आ जँ आबि जाएत इजोत तँ भऽ नै जाइ आन्हर… इजोतसँ डेरा रहल लोक? अन्हारेमे लागि रहल छै मोन आकि लगा रहल अछि मोन… आ जे अछि बताह? शोनितक रङ देखा पड़ि रहल अछि डेटामे, शोनित-शोनितामे… मुदा शोनितक रङ सेहो कारी, अन्हार-गुज्ज… शोनित तँ होइत अछि लाल टुह-टुह… मुदा ऐ डेटाकेँ हमरा लग अबैत-अबैत देरी भऽ गेलै.. लाल-रङ बेसी गाढ़ भेने कारी भऽ जाइ छै, आ देरी भेने सेहो… देरी किए भेलै? बताह लोकक कमी तँ कहियो नै छलै ऐ लोकमे… मुदा लगैए जे आब भऽ गेल छै, आ से नै रहितै तँ एतेक शोनित युक्त डेटा, एतेक मात्रामे कोना थकिया जइतैक? आ जँ रहबो करितैक तँ तकर रङ लाल रहितैक, गरम रहितैक, कारी-पपड़ी पड़ल नै रहितैक। सीढ़ी पहुँचि गेल अछि तरहड़िमे… तेहन ब्लैक-होलमे जतऽ जा कऽ सभ किछु गुरुतवाकर्षणक अधीन भऽ जाइत अछि, जकर मध्य विचित्र आकृति अछि जन्म लऽ लेने, डेराओन आ ध्वनि उत्पन्न करैत… जेना समुद्रमे उठल अछि चक्रवात… सभ आकृति घेर लैत अछि हमरा… पहिने हमर गप सुनू तँ पहिने हमर… हॉस्पीटलमे जे हालत होइत छै डॉक्टरक, रोगी सभ जखन घेरने रहै छाइ ओकरा… ओतऽ तँ रोगीक सङ ओकर परिवारक लोक सेहो रहै छै, मुदा एतऽ तँ मात्र रोगीये टा छै.. पहिल फाइल “सभ मानैए जे एकटा दैवीय शक्ति होइ छै, सभ तरहेँ नीक, सभसँ बेशी जानकार आ सभसँ बेशी शक्तिशाली, जकरामे कोनो अवगुण नहि अछि, जे सभ ठाम अनुभव कएल जा सकय आ जे अछि सभटा बौस्तुक ज्ञाता अछि। मुदा फेर दुष्ट शक्तिक कोन तरहेँ व्याख्या हएत? फेर कोना होइए दुष्ट कृति, किए होमए दैत अछि ओ ई दुष्कृति”? अन्हारसँ निकलि रहल ई अबाज, दर्शनक एकटा समस्याकेँ अनैत अछि। नाम छियै गोप कुमार। “सभ हमरे दोखी मानैत अछि, मुदा दोखी कएक तरहक होइत छै, एकटा होइ छै गैंगस्टर, एकटा नक्सल आ एकटा आतंकवादी आ एकटा हमरो सभ सन लोक”। “तीनूमे हमरा लेखेँ कोनो अन्तर नै छै, जे राज्यक विरुद्ध शस्त्र उठेलक से भेल दोखी, आ तकरा भेटतै सजा”। “मुदा जँ गैंगस्टर कहए जे ओ देशभक्त अछि आ अहाँकेँ नक्सल आ अतंकवादीक विरुद्ध अपन सहयोग देत, तखन”? “तखन ओकर सहयोग लैत छी हम, मुदा ओइसँ ओकर केलहा माफ नै होइ छै। हँ, ओकरा पश्चातापक एकटा अवसर भेटै छै। आ से तँ नक्सली आ आतंकवादीकेँ सेहो भेटै छै”। आ ओ कथा शुरू करैत अछि, सत्यकथा। मानवक समस्त प्रकृतिपर विजयक पश्चात, मानवक मानवसँ संघर्षक कथा। दोसर महाभारतक प्रारम्भ, वैश्विक कुरुक्षेत्रक युद्धस्थलपर। देखा चाही कतेक निअम टुटैत अछि एहि महाभारतमे, कतेक नव निअम बनैत अछि एहि क्रीड़ाक। कएकटा आशाक संचार होइत अछि आ कएकटा निराशाक। गढ़ नारिकेल बला ओ इन्फॉर्मर फेरसँ हमरा भीतर कृष्णक चपलता आनि देने अछि। “जे अहाँ करबै सएह सही हएत आ जकर अहाँ विरोध करबै से गलत हएत”। यएह कहने रहए गढ़ नारिकेलक बसिन्दा आ यएह कहि रहल अछि गोप कुमार। हमर बड़ाइ कऽ कय जान लऽ जाइ जो- हम सोचैत छी। “बड़ाइ नै अछि ई। दुष्ट शक्तिक कोन तरहेँ व्याख्या हएत? बुझू जे ई छी प्रारब्ध जे अहाँकेँ एतए आनल गेल अछि। सर्वज्ञानी, सर्वशक्तिमान आ सभठाम उपस्थित शक्तिक अछैत दुष्ट शक्तिक व्याख्याक द्वार खुजत”। हमर सोचलाहो गपक उत्तर दऽ रहल अछि गोप कुमार। ई एकटा नव अनुभूति अछि हमरा लेल। आइसँ पहिने हमर सोचलाहा गपक उत्तर स्वप्नमे कोनो शक्ति दऽ दइ छल, बा अर्द्ध-चेतनावस्थामे। अर्द्ध-चेतनावस्थामे माने जखन हम सोचब बन्द करैत छी, थाकि जाइ छी जे आब एकर उत्तर नै भेटत, तखने कइएक घण्टाक बाद कोनो ट्रैफिक जाममे बा सिनेमा देखैत काल बा खाइत काल, कइएक बेर सरल समाधान भेटि जाइत अछि। स्वप्नक समाधानकेँ तँ हम दैवीय हस्तक्षेप मानैत छलहुँ मुदा अर्द्ध-चेतनावस्थामे भेटल सरल समाधानकेँ शुरुहमे अपन ताकल समाधान मानैत छलौं। आर तँ आर अर्द्ध-चेतनावस्थाकेँ चेतनावस्थे मानैत छलौं शुरुहमे। मुदा स्वप्न कालक बढ़ैत सरल समाधान अर्द्ध-चेतनावस्थाकेँ परिभाषित केलक आ अर्द्ध-चेतनावस्थामे भेटल सरल समाधानकेँ सेहो दैवीय हस्तक्षेप सिद्ध केलक। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ज्ञानवर्द्धन कंठ क्ष त्र ज्ञ आइ उदयजीक नाम अखबारमे छपलनि अछि। भोरेसँ बधाइ देनिहारक धरोहि लागल छनि। ओ त' बिसरिए गेल छलाह जे ओ कहियो 'अभिनव मैथिल साहित्य विवेचन संस्थान'कें अपन नव रचना डाक द्वारा पठा देने रहथिन,मुदा एकटा भारी गलती भ' गेल रहनि। असलमे भेल ई रहैक जे कोपीक जे पन्ना अपन आलेख बुझि ओ फाड़ने रहथिन ओहिमे हुनक बउआ तीनटा अक्षर लिखने रहनि- क्ष त्र ज्ञ। ई ओकरे लिफाफमे ध' क' साटि देलथिन आ हिनकर लिखल रचना कोपिएमे रहि गेल रहनि। ताहूमे अजगुत ई जे हुलबुल्लीमे भेल एहि गलतीक भान हुनका आइधरि भेले नहि रहनि। ओम्हर डाक पहुँचलाक उपरांत भारी झमेला उत्पन्न भ' गेलैक। पन्नामे त' मात्र तीन गोट अक्षर लिखल रहैक,मुदा ई पन्ना पठाओल किनका गेल अछि,से बुझब मोश्किल भ' गेलैक। अंततोगत्वा लिफाफपरक प्रेषिती- प्रेषकक नाम देखि पंजीमे अंकित कय ओहि डाककेँ अध्यक्ष महोदयक सोझा उपस्थापित क' देल गेलनि। ओ ओकरा संस्थानक विद्वत्समितिक विचारार्थ प्रस्तुत क' प्रतिवेदन प्रस्तुत करबाक लेल निदेशित क' देलथिन। समितिमे गहन समीक्षा भेलैक।अध्यक्ष महोदय जरूर कोनो वैशिष्ट्य देखने हेथिन, तखने एहि विशिष्ट समितिकें एतदर्थ निदेशित केलथिन अछि। सांगोपांग विवेचन-उपरांत प्रतिवेदन निम्न प्रकारें अंकित क' अध्यक्ष महोदयक समक्ष प्रस्तुत कैल गेलैक- 'ई आलेख विलक्षण अछि। मात्र तीन गोट संयुक्त वर्ण नै केवल एकर शीर्षक थिकैक,अपितु एहीमे एकर असीम संभावनासँ भरल कथ्य सेहो समाहित छैक। जे एहिमे जतेक गहींर उतरताह से ओतेक मूल्यवान मोती पओताह।सभ दिनसँ स्वर वर्ण अ, आ, इ ,ई,... सँ शुरूह करबाक जे मिथ छल ताहिकेर जोरगर खंडन क' अंतिम पओदानपर ठाढ़ क्ष, त्र, ज्ञ सँ शुरूह आ अंत करब एकटा प्रबल आ नवोन्मेषी डेग कहल जा सकैछ। भिन्न-भिन्न ई तीनू वर्णकें एकसंग सटा क' लिखलापर एकटा सार्थक शब्द निर्मित होइछ -क्षत्रज्ञ अर्थात् क्षत्रक ज्ञाता वा मर्मज्ञ। एतय 'क्षत्र'सँ आशय छैक- बल,शक्ति वा सत्ता।तकर मर्म जे जानि गेल,से असल तत्व पाबि गेल। एवं प्रकारें एक संग ई तीनू वर्ण एकटा बड़का दर्शन धारण कयने अछि। ई संसारक अतिसूक्ष्म,किंतु सभक सार आत्मसात कयने बड़ मूल्यवान विमर्श दिस ल' जयबामे सक्षम आलेख अछि। एहिमे कथाक की कहल जाय,बड़का उपन्यासक बीज-तत्व समाहित छैक।जे जेहन क्षमतावान,से तेहन विस्तार पाबि सकैत अछि। ई तीनू वर्ण संयुक्त वर्ण थिक जे इशारा क' रहल अछि एकता आ एकताक शक्तिक महत्ता दिस। एहिमे कौमी एकता आ विश्वबंधुत्वक आह्वान समाविष्ट छैक। ई एकटा नवीन साहित्यक मानक उपस्थापित करैछ आ परंपरावादी जड़ता ओ प्रवृत्तिपर जोरगर प्रहार करबामे सक्षम सिद्ध भ' रहल अछि।चूंकि ई देवनागरी लिपिक तीन वर्ण धारण कयने अछि, एहि लेखपर संस्कृत, हिंदी,मैथिली एवम् अन्य ओ सभ भाषाक एक संग दाबी बनैत छैक जे एहि लिपिकें अपनौने अछि। आइधरि एहन बहुभाषिक आलेख कहियो केओ लिखनेहे नहि छल। ई विश्व-मानकक समक्ष एकटा पैघ डरेड़ पाड़ि रहल अछि। तें एहि अद्भुत रचना आ रचनाकारकें सम्मानित करबाक संस्तुति प्रदान कयल जाइछ।' ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। शशिकांत कर्ण बीहनि कथा-बड़का भक्त -बाबा!दुखना बड़का भक्त बुझाइए।घंटो-घंटा पिपरक गाछतर बैसि जप करैत रहैए। -हँ हौ। पहिने संतानलेल भगवान- भगवान करै छल,आब संतानदुआरे भगवान-भगवान करैए। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३. पद्य ३.१.राज किशोर मिश्र- सुखसु ३.२.मुन्ना जी- कविता-दलाल ३.३.मुन्ना जी- किछु ताँका राज किशोर मिश्र सुखसु हम ताकि रहल छी पता सुखक' भेटत त' समाद पठाएब, डिगडिगिआ पीट क' सभ केँ, जा-जा क' समाद सुनाएब। अपना तरहेँ ताकि रहल छथि , सभ किओ सुख संसार मे, अपन-अपन छन्हि बाट सबहक, लागैन्हि जे नीक, विचार मे। सुख पाबै छथि किओ गीत गाबि , दए उपरागे, किओ पाओल सुख, सुन्दर-सुंदर, सौंदर्य प्रसाधन सँ किओ सजबैत, छथि निज मुख। घोड़ा-हाथी साजि कए, होइत अछि किनको, सत्कार, किओ, पाबि केवल फूल-पान, क' दै छथि जय जयकार। किनको त' दए रहल अछि सुख, सम्पत्ति के भंडार, आ, किनको लए धन-संग्रह, पूरा पूरी, बेकार। औपचारिकता निबाहब, किनको लेल सर्वोच्च, जीवन बिता लैत छथि , रखैत ओकरे रोच। गुमान पोसय मे किनको, रहैत छन्हि बड़ भारी हुलास, निज अहंकार क' तुष्टि मे, छथि पबैत सुख ओ, बहुत रास। किनको विधु क' चाननि निहारि, होइ ने छन्हि, सुख समटल, माॅलक' कृत्रिम इजोत देखए, किओ, ओकरे लेल रकटल। व्योम मे पसरल, तारा मंडल, ओ दृश्य, किनको छू जाइत अछि, ओही के, किओ देख-देख क' जोर-जोर, ओँघाइत अछि। भौतिक सुख-साधन, किनको, होइत छैन्ह प्राण-समान, संसार-विषय सँ बैरागी, छोड़बैत रहैत छथि जान। भोकारि पारि कनैत छथि किओ, छोड़ैत काल निज गाम, किनको अभिलाषा रहैत छन्हि , जाइ दूर, कोनो ठाम। अठोङर कूटि निबाहैत छथि, बिआहक' सभ रीति-रेबाज, आ', सुख दैत छन्हि किनको , परम्परा तोड़' के काज। मुदित होइत छथि पाबि क' अपनापन-अनुबंध, किनको नीक लगैत छन्हि, राखब बाँतर संबंध। व्यक्ति-व्यक्ति पर परिभाषा, बदलैत रहैत अछि सुखक', किनका लेल की सुख? निर्भर अछि अभिलाषा ओहि मनुखक'। मान, प्रतिष्ठा पाबि जगत् मे, जयजयकार कराबी, खाँहिस जिनकर, कीर्ति मे त्रिलोकक सुख हम पाबी । कर्त्तव्य-पालन मे जिनका , संसारक, सभ सुख भेटल, सुख पओलथि, उपकार, त्याग मे, अनकर दुःख जे मेटल। किनको मोन मे, सुख ओ दुःख, दुहूक मोल, समतूल अछि, हर्ष-विषादक ई समता वैराग्य-भाव के मूल अछि । मुदा, उठैत अछि प्रश्न आब, वास्तव मे, सुख ककरा कही? विषय अछि गूढ़, कठिन अछि उत्तर, की छै गलती? की सही? होइछ सापेक्षिक, सुख क' रूप, हर व्यक्तिक अपन छन्हि परिभाषा, मुदा, प्रत्येक सुख अवश्य बुझय, मानवता आ कानूनक भाषा । जँ मोन खुश, त' बरसैत छै, सभ सुख के पुष्प, अँगना मे, एहि फूलक' गमक, गमकैत छै, डिह-डाबर, हन्ना-हन्ना मे। कथमपि जरूरी अछि ने ई, सम्पत्तिए सँ निकलैत अछि सुख, आओर, अकिंचन के दोआरि, डेरा देने बैसल अछि दुःख। हर्ष-विषाद, समतुल्य बूझि, चलैत छथि जे कर्तव्य क' बाट, सुख ओतहि भेटतन्हि, जे चलाबथि , गृहस्थी किंवा राजपाट। गला-गला क' सुख ओ दुःख मिलाओल जाए समतुल्य, सोच बनत एहि मिश्रण सँ, होएत ई सोच, अमूल्य। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। मुन्ना जी कविता-दलाल जँ राखब हम बन्हकी, अहाँ मोल बेच देब घराड़ीक करब बात , सौंसे टोल बेच देब
रहू ज' सदिखन बन्न केने मुँह हम अपन राखि हाथहिं फुटबॉल अहाँ गोल बेच देब
बचा के राखू कोना अपन देहक ठठरी अहाँ त' उतारि चामक खोल बेचि देब
हम कहिया सँ ताकी असरा इजोतक अहाँ त' गड़िते सब टा पोल बेच देब
जँ तखनो मोन नै भरल एतबे सँ अहाँक लगा के मुखड़ा हमर डबल रोल बेच देब ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। मुन्ना जी किछु ताँका (TANKA)
1-गाम पुरान ताकू नव ठेकान भेलौं जवान अन्हरिया हँटल पुर्णिमा केर चान
2-ललका पाग रंग फीका पड़ल कोना उघत छोडल संस्कार निवहता हएत
3-भाषा बचाऊ हस्तान्तरित करू अगिला पीढी मिथिला हेरएल कोना बचा पएब
4-दुलार करू माथ पर चढाउ बेटा गौरव लतिया भगाओत बेटीये देत काज
5-पाग दोपटा विद्यापतिक नाम माला पहिरू नाम बेचि कमाउ निजभाषा गमाउ
6-जौर जड़ल पुरखा बल पर ऐंठन ऐछ बाट नव बनाउ हएत धरोहर ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ४.स्त्री कोना ४.१.कल्पना झा- पान ४.२.सुभद्रा मिश्र भाव्या- २ टा बीहनि कथा कल्पना झा पान फ़िकर करु ने कोनो बात के स्वाद में अछि अतीव, आन मूंह कि सुनब स्वाद में इ "सुपरस्पेशलिट", पान क हम कि करु बखान, केहन सुनरि हरियर हरियर कारगर सन पात अछि, चून कऽथ आ दै सुपारी, सौंफ क संग पान बहार अछि, जर्दा , तुलसी आ निर्मली तकर ओहि पर ताल अछि, ददा क मूंह रमनगर लागै खिल्ली धेने पान अछि, ओझा क मूंह सोहनगर लागय भ रहल गुनगान अछि, बात ओझरायल क्षण में सोझरायल, दैत खिल्ली मूंह दबाय, सरपट दिमाग दौड़ै लागय आन्हरो के रस्ता दियै देखाय, माछ खाऊ या मेवा मिसरी, ज्यों नय पान मूंह दबोलौं, सब टा बुझु व्यर्थ गवेलु हाथ जोड़ि निहोरा करय छी, हमर लाजक राखु मान, छप्पन भोग सजल अति तयो परतर नहि करय पान क आन। -कल्पना झा, बोकारो, झारखंड अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। सुभद्रा मिश्र भाव्या २ टा बीहनि कथा १ हकार
बहिन दाई ये बहिन दाई क'त छैथ....हकार पुरैए लए नहि जेतीह...
बहिन दाई - धूर भोर सॅं हकार पूरैत पूरैत टाॅंग टटा रहल अछि।भरि टोल एक्के सॅंगे उपनयन मूड़न ठानि लैत छैक।
छोटकी- चलथु ने.....लाल मैया बड्ड खेखनियाॅं करैत रहैथ..... कहैत छलीह कियो नहि अबैत अछि हमरा ऑंगन मरबा पर गीत गबैक लेल....दूनू साउस पूतोहुॅं रहैत छी बस।
बहिन दाई - ऐं दू टूक सुपाड़ी पर दूनू सौस पूतोहुॅं नहि रहती त भरि टोलक लोक रहतनि....कहलके जे।
चलु फूलक अंगना चलैत छी। हमर फूल सभ दिन रॅंग विरॅंगक बिगजी परसैत छथि सॅंग गीत गबैत-गबैत कॅंठ सुखाएत त ठंढा सेहो पिएती। २ प्रपंच
विवाहक बीस बरख बाद पूतोहु......माॅं देखथुन ने अहि बेर नैहर गेल रहि तऽ माॅं पायल आ कान महक देलक।
सासु- बेस।भोग हुया।
किछु दिनक पश्चात पितिया सासु- हे ये कनिया कनि हमरो देखय दिअ मायक देल गहना.....
कनिया- देखथुन काकी। काकी- बड्ड दीप...... अपने किनने हैब फूंसियों के नैहरक पत्क्खा फहरबैत छी।
कनिया- हिनका जे सोचवाक छैन्ह सोचौथ।
किछु दिनक पश्चात- ये कनिया ओहि दिन जे गहना देखि हम नैहरक पत्क्खा बला गप्प कहने रहि.....अहिंक साउस हमरा अहाॅंस कहैक लेल कहने रहैथ। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। स्थायी स्तम्भ जेना मिथिला-रत्न, मिथिलाक खोज, विदेह पेटार आ सूचना-संपर्क-अन्वेषण सभ अंकमे समान अछि, ताहि हेतु ई सभ स्तम्भ सभ अंकमे नइ देल जाइत अछि, ई सभ स्तम्भ देखबा लेल क्लिक करू नीचाँ देल विदेहक 346म आ 347 म अंक, ऐ दुनू अंकमे सम्मिलित रूपेँ ई सभ स्तम्भ देल गेल अछि। “विदेह” ई-पत्रिका: देवनागरी वर्सन “विदेह” ई-पत्रिका: मिथिलाक्षर वर्सन “विदेह” ई-पत्रिका: मैथिली-IPA वर्सन “विदेह” ई-पत्रिका: मैथिली-ब्रेल वर्सन VIDEHA_346 VIDEHA_346_Tirhuta VIDEHA_346_IPA VIDEHA_346_Braille VIDEHA_347 VIDEHA_347_Tirhuta VIDEHA_347_IPA VIDEHA_347_Braille ..................................................................................................... संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] Videha e-Learning पेटार (रिसोर्स सेन्टर) ...................................................................................................... शब्द-व्याकरण-इतिहास MAITHILI IDIOMS & PHRASES मैथिली मुहावरा एवम् लोकोक्ति प्रकाश- रमानाथ मिश्र मिहिर (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) डॉ. ललिता झा- मैथिलीक भोजन सम्बन्धी शब्दावली (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) मैथिली शब्द संचय MAITHILI DICTIONARY- RAMDEO JHA (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) ENGLISH MAITHILI COMPUTER DICTIONARY MAITHILI ENGLISH DICTIONARY अणिमा सिंह -Shishu_Geet_Khel_Anima_Singh डॉ. रमण झा मैथिली काव्यमे अलङ्कार अलङ्कार-भास्कर आनन्द मिश्र (सौजन्य श्री रमानन्द झा "रमण")- मिथिला भाषाक सुबोध व्याकरण BHOLALAL DAS मैथिली सुबोध व्याकरण- भोला लाल दास राधाकृष्ण चौधरी- A Survey of Maithili Literature ................................................................................................... मूलपाठ तिरहुता लिपिक उद्भव ओ विकास (यू.पी.एस.सी. सिलेबस) राजेश्वर झा- मिथिलाक्षरक उद्भव ओ विकास (मैथिली साहित्य संस्थान आर्काइव) Surendra Jha Suman दत्त-वती (मूल)- श्री सुरेन्द्र झा सुमन (यू.पी.एस.सी. सिलेबस) प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) CIIL SITE .................................................................................................... समीक्षा सुभाष चन्द्र यादव-राजकमल चौधरी: मोनोग्राफ शिव कुमार झा "टिल्लू" अंशु-समालोचना डॉ बचेश्वर झा- B_JHA_Nibhand_Nikunj.pdf डॉ. देवशंकर नवीन- Adhunik_Sahityak_Paridrishya डॉ. रमण झा- भिन्न-अभिन्न प्रेमशंकर सिंह- मैथिली भाषा साहित्य:बीसम शताब्दी (आलोचना) डॉ. रमानन्द झा 'रमण' हिआओल अखियासल CIIL SITE दुर्गानन्द मण्डल-चक्षु RAMDEO JHA दत्त-वतीक वस्तु कौशल- डॊ. श्रीरामदेवझा SHAILENDRA MOHAN JHA परिचय निचय- डॊ शैलेन्द्र मोहन झा ................................................................................................. अतिरिक्त पाठ पहिने मिथिला मैथिलीक सामान्य जानकारी लेल एहि पोथी केँ पढ़ू:- राधाकृष्ण चौधरी- मिथिलाक इतिहास फेर एहि मनलग्गू फाइल सभकेँ सेहो पढ़ू:- केदारनाथ चौधरी चमेलीरानी माहुर करार कुमार पवन पइठ (मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ कथा) (साभार अंतिका) डायरीक खाली पन्ना (साभार अंतिका) याेगेन्द्र पाठक वियाेगी- विज्ञानक बतकही रामलोचन ठाकुर- मैथिली लोककथा .................................................................................................. किछु मैथिली पोथी डाउनलोड साइट (ओपन सोर्स) SAHITYA AKADEMI http://sahitya-akademi.gov.in/publications/e-books.jsp http://sahitya-akademi.gov.in/general/Digitalbooks.jsp CIIL http://corpora.ciil.org/maisam.htm अखियासल (रमानन्द झा रमण) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI1.pdf जुआयल कनकनी- महेन्द्र http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI2.pdf प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI3.pdf सृजन केर दीप पर्व- सं केदार कानन आ अरविन्द ठाकुर http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI4.pdf मैथिली गद्य संग्रह- सं शैलेन्द्र मोहन झा http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI5.pdf ARCHIVE.ORG (विजयदेव झा) https://archive.org/details/%40vijay_deo_jha?&sort=-publicdate&page=2 VIDEHA MAITHILI BOOKS/ PICTURE-AUDIO-VIDEO ARCHIVE http://videha.co.in/new_page_15.htm IGNCA http://ignca.nic.in/coilnet/mithila.htm http://ignca.nic.in/coilnet/kalyani.htm (MAITHILI ENGLISH DICTIONARY) MITHILA DARSHAN https://mithiladarshan.com/ (online pdf of Maithili journal) OLE NEPAL's E-PUSTAKALAYA (https://pustakalaya.org/en/) पोथीक लिंक मैथिली साहित्य संस्थान https://www.maithilisahityasansthan.org/resources (online pdf of Reasearch Papers/ books) अरिपन फाउण्डेशन (http://www.aripanafoundation.org/) PRATHAM BOOKS MAITHILI STORYWEAVER https://storyweaver.org.in/stories/?language=Maithili&query=&sort=Ratings https://www.youtube.com/playlist?list=PLAT74nNc2fmYaW29mRVAIgzRq63_9zWbI (मैथिली ऑडियो बुक्स) पोथी डॉट कॉम https://store.pothi.com/browse/free-ebooks/?language=Maithili I LOVE MITHILA https://www.ilovemithila.com/maithili-books-pdf-free-download/ (पोथी डाउनलोड लिंक) https://www.ilovemithila.com/ (online maithili journal) https://maithili.com.np/ (owner I Love Mithila) प्यारे मैथिल https://www.youtube.com/channel/UCq30Llck2tNw8BI4t8jjzQg (प्यारे मैथिल चैनल- किरण चौधरी आ संगीता आनन्द- मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय यू ट्यूब चैनल) जानकी एफ.एम समाचार https://www.youtube.com/user/Janakifm/videos (जानकी एफ.एम समाचार) आकाशवाणी दरभंगा यू ट्यूब चैनल https://www.youtube.com/channel/UCGdNveEFmv4pPolWiTEMxVA ....................................................... JNU http://sanskrit.jnu.ac.in/maithili/index.jsp http://sanskrit.jnu.ac.in/student_projects/lexicon.jsp?lexicon=maithili ......................................................... VIDEHA e-LEARNING YOUTUBE CHANNEL https://www.youtube.com/channel/UC4abVKqMj2pDWIAkXiOHp7A -गजेन्द्र ठाकुर ....................................................................................................... विदेहक किछु विशेषांक:- १) हाइकू विशेषांक १२ म अंक, १५ जून २००८ Videha_15_06_2008 Videha_15_06_2008_Tirhuta 12 २) गजल विशेषांक २१ म अंक, १ नवम्बर २००८ Videha_01_11_2008 Videha_01_11_2008_Tirhuta 21 ३) विहनि कथा विशेषांक ६७ म अंक, १ अक्टूबर २०१० videha_01_10_2010 videha_01_10_2010_tirhuta 67 ४) बाल साहित्य विशेषांक ७० म अंक, १५ नवम्बर २०१० videha_15_11_2010 videha_15_11_2010_tirhuta 70 ५) नाटक विशेषांक ७२ म अंक १५ दिसम्बर२०१० videha_15_12_2010 videha_15_12_2010_tirhuta 72 ६) नारी विशेषांक ७७म अंक ०१ मार्च २०११ videha_01_03_2011 videha_01_03_2011_tirhuta 77 ७) अनुवाद विशेषांक (गद्य-पद्य भारती) ९७म अंक videha_01_01_2012videha_01_01_2012_tirhuta 97 ८) बाल गजल विशेषांक विदेहक अंक १११ म अंक, १ अगस्त २०१२ videha_01_08_2012 videha_01_08_2012_tirhuta 111 ९) भक्ति गजल विशेषांक १२६ म अंक, १५ मार्च २०१३ videha_15_03_2013 videha_15_03_2013_tirhuta 126 १०) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक १४२ म, अंक १५ नवम्बर २०१३ videha_15_11_2013 videha_15_11_2013_tirhuta 142 ११) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 १२) अरविन्द ठाकुर विशेषांक १८९ म अंक १ नवम्बर २०१५ Videha_01_11_2015 १३) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक १९१ म अंक १ दिसम्बर २०१५ Videha_01_12_2015 १४) विदेह सम्मान विशेषंाक विदेह सम्मान: सम्मान-सूची (समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार सहित) साक्षात्कार/ समारोह साक्षात्कार videha_15_12_2011 videha_15_01_2012 videha_01_02_2012 videha_01_03_2012 videha_01_09_2012 videha_15_01_2013 videha_01_03_2013 Videha_15_04_2016 Videha_01_07_2016 १५) मैथिली सी.डी./ अल्बम गीत संगीत विशेषांक- २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ Videha_01_01_2017 १६) मैथिली वेब पत्रकारिता विशेषांक VIDEHA 313 १७) मैथिली बीहनि कथा विशेषांक-२ VIDEHA 317 १८) रामलोचन ठाकुर विशेषांक VIDEHA 319 १९) रामलोचन ठाकुर श्रद्धांजलि विशेषांक VIDEHA 320 २०) राजनन्दन लाल दास विशेषांक VIDEHA 333 २१) रवीन्द्र नाथ ठाकुर विशेषांक VIDEHA_348 VIDEHA_348_Tirhuta VIDEHA_348_IPA VIDEHA_348_Braille ................................................................................................... लेखकक आमंत्रित रचना आ ओइपर आमंत्रित समीक्षकक समीक्षा सीरीज १. कामिनीक पांच टा कविता आ ओइपर मधुकान्त झाक टिप्पणी विदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016 .................................................................................................... "पाठक हमर पोथी किए पढ़थि"- लेखक द्वारा अप्पन पोथी/ रचनाक समीक्षा सीरीज १. आशीष अनचिन्हार 'विदेह' क ३२७ म अंक ०१ अगस्त २०२१ .................................................................................................... एडिटर्स चोइस सीरीज एडिटर्स चोइस सीरीज-१ विदेहक १२३ म (०१ फरबरी २०१३) अंकमे बलात्कारपर मैथिलीमे पहिल कविता प्रकाशित भेल छल। ई दिसम्बर २०१२ क दिल्लीक निर्भया बलात्कार काण्डक बादक समय छल। ओना ई अनूदित रचना छल, तेलुगुमे पसुपुलेटी गीताक एहि कविताक हिन्दी अनुवाद केने छलीह आर. शांता सुन्दरी आ हिन्दीसँ मैथिली अनुवाद केने छलाह विनीत उत्पल। हमर जानकारीमे एहिसँ बेशी सिहराबैबला कविता कोनो भाषामे नहि रचल गेल अछि। सात सालक बादो ई समस्या ओहने अछि। ई कविता सभकेँ पढ़बाक चाही, खास कऽ सभ बेटीक बापकेँ, सभ बहिनक भाएकेँ आ सभ पत्नीक पतिकेँ। आ विचारबाक चाही जे हम सभ अपना बच्चा सभ लेल केहन समाज बनेने छी। एडिटर्स चोइस सीरीज-१ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-२ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच ब्रेस्ट कैसरक समस्यापर विदेह मे मीना झा केर एकटा लघु कथा प्रकाशित भेल। ई मैथिलीक पहिल कथा छल जे ब्रेस्ट कैसर पर लिखल गेल। हिन्दीमे सेहो ताधरि एहि विषयपर कथा नहि लिखल गेल छल, कारण एहि कथाक ई-प्रकाशित भेलाक १-२ सालक बाद हिन्दीमे दू गोटेमे घोंघाउज भऽ रहल छल कि पहिल हम आकि हम, मुदा दुनूक तिथि मैथिलीक कथाक परवर्ती छल। बादमे ई विदेह लघु कथामे सेहो संकलित भेल। एडिटर्स चोइस सीरीज-२ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-३ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिलक किछु बाल कविता प्रकाशित भेल। बादमे हुनकर ३ टा बाल कविता विदेह शिशु उत्सवमे संकलित भेल जाहिमे २ टा कविता बेबी चाइल्डपर छल। पढ़ू ई तीनू कविता, बादक दुनू बेबी चाइल्डपर लिखल कविता पढ़बे टा करू से आग्रह। एडिटर्स चोइस सीरीज-३ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-४ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच जगदानन्द झा मनुक एकटा दीर्घ बाल कथा कहि लिअ बा उपन्यास प्रकाशित भेल, नाम छल चोनहा। बादमे ई रचना विदेह शिशु उत्सवमे संकलित भेल, ई रचना बाल मनोविज्ञानपर आधारित मैथिलीक पहिल रचना छी, मैथिली बाल साहित्य कोना लिखी तकर ट्रेनिंग कोर्समे एहि उपन्यासकेँ राखल जेबाक चाही। कोना मॊडर्न उपन्यास आगाँ बढ़ै छै, स्टेप बाइ स्टेप आ सेहो बाल उपन्यास। पढ़बे टा करू से आग्रह। एडिटर्स चोइस सीरीज-४ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-५ एडिटर्स चोइस ५ मे मैथिलीक "उसने कहा था" माने कुमार पवनक दीर्घकथा "पइठ" (साभार अंतिका) । हिन्दीक पाठक, जे "उसने कहा था" पढ़ने हेता, केँ बुझल छन्हि जे कोना अहि कथाकेँ रचि चन्द्रधर शर्मा ’गुलेरी’ अमर भऽ गेलाह। हम चर्चा कऽ रहल छी, कुमार पवनक "पइठ" दीर्घकथाक। एकरा पढ़लाक बाद अहाँकेँ एकटा विचित्र, सुखद आ मोन हौल करैबला अनुभव भेटत, जे सेक्सपीरिअन ट्रेजेडी सँ मिलितो लागत आ फराको। मुदा एहि रचनाकेँ पढ़लाक बाद तामस, घृणा सभपर नियंत्रणकेँ आ सामाजिक/ पारिवारिक दायित्वकेँ सेहो अहाँ आर गंभीरतासँ लेबै, से धरि पक्का अछि। मुदा एकर एकटा शर्त अछि जे एकरा समै निकालि कऽ एक्के उखड़ाहामे पढ़ि जाइ। एडिटर्स चोइस सीरीज-५ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-६ जगदीश प्रसाद मण्डलक लघुकथा "बिसाँढ़": १९४२-४३ क अकालमे बंगालमे १५ लाख लोक मुइला, मुदा अमर्त्य सेन लिखैत छथि जे हुनकर कोनो सर-सम्बन्धी एहि अकालमे नहि मरलन्हि। मिथिलोमे अकाल आएल १९६७ ई. मे आ इन्दिरा गाँधी जखन एहि क्षेत्र अएली तँ हुनका देखाओल गेल जे कोना मुसहर जातिक लोक बिसाँढ़ खा कऽ एहि अकालकेँ जीति लेलन्हि। मैथिलीमे लेखनक एकभगाह स्थिति विदेहक आगमनसँ पहिने छल। मैथिलीक लेखक लोकनि सेहो अमर्त्य सेन जेकाँ ओहि महाविभीषिकासँ प्रभावित नहि छला आ तेँ बिसाँढ़पर कथा नहि लिखि सकला। जगदीश प्रसाद मण्डल एहिपर कथा लिखलन्हि जे प्रकाशित भेल चेतना समितिक पत्रिकामे, मुदा कार्यकारी सम्पादक द्वारा वर्तनी परिवर्तनक कारण ओ मैथिलीमे नहि वरण् अवहट्ठमे लिखल बुझा पड़ल, आ ओतेक प्रभावी नहि भऽ सकल कारण विषय रहै खाँटी आ वर्तनी कृत्रिम। से एकर पुनः ई-प्रकाशन अपन असली रूपमे भेल विदेहमे आ ई संकलित भेल "गामक जिनगी" लघुकथा संग्रहमे। एहि पोथीपर जगदीश प्रसाद मण्डलकेँ टैगोर लिटरेचर अवार्ड भेटलनि। जगदीश प्रसाद मण्डलक लेखनी मैथिली कथाधाराकेँ एकभगाह हेबासँ बचा लेलक, आ मैथिलीक समानान्तर इतिहासमे मैथिली साहित्यकेँ दू कालखण्डमे बाँटि कऽ पढ़ए जाए लागल- जगदीश प्रसाद मण्डलसँ पूर्व आ जगदीश प्रसाद मण्डल आगमनक बाद। तँ प्रस्तुत अछि लघुकथा बिसाँढ़- अपन सुच्चा स्वरूपमे। एडिटर्स चोइस सीरीज-६ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-७ मैथिलीक पहिल आ एकमात्र दलित आत्मकथा: सन्दीप कुमार साफी। सन्दीप कुमार साफीक दलित आत्मकथा जे अहाँकेँ अपन लघु आकाराक अछैत हिलोड़ि देत आ अहाँक ई स्थिति कऽ देत जे समानान्तर मैथिली साहित्य कतबो पढ़ू अहाँकेँ अछौं नहि होयत। ई आत्मकथा विदेहमे ई-प्रकाशित भेलाक बाद लेखकक पोथी "बैशाखमे दलानपर"मे संकलित भेल आ ई मैथिलीक अखन धरिक एकमात्र दलित आत्मकथा थिक। तँ प्रस्तुत अछि मैथिलीक पहिल दलित आत्मकथा: सन्दीप कुमार साफीक कलमसँ। एडिटर्स चोइस सीरीज-७ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-८ नेना भुटकाकेँ रातिमे सुनेबा लेल किछु लोककथा (विदेह पेटारसँ)। एडिटर्स चोइस सीरीज-८ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-९ मैथिली गजलपर परिचर्चा (विदेह पेटारसँ)। एडिटर्स चोइस सीरीज-९ (डाउनलोड लिंक) ............................................................................................... जगदीश प्रसाद मण्डल जीक ६५ टा पोथीक नव संस्करण विदेहक २३३ (Videha_01_09_2017) सँ २५० (Videha_15_05_2018 ) धरिक अंकमे धारावाहिक प्रकाशन नीचाँक लिंकपर पढ़ू:- VIDEHA_233 VIDEHA_234 VIDEHA_235 VIDEHA_236 VIDEHA_237 VIDEHA_238 VIDEHA_239 VIDEHA_240 VIDEHA_241 VIDEHA_242 VIDEHA_243 VIDEHA_244 VIDEHA_245 VIDEHA_246 VIDEHA_247 VIDEHA_248 VIDEHA_249 VIDEHA_250 ................................................................................................ विदेह ई-पत्रिकाक बीछल रचनाक संग- मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ रचनाक एकटा समानान्तर संकलन: विदेह: सदेह: १ (२००८-०९) देवनागरी विदेह: सदेह: १ (२००८-०९) तिरहुता विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) देवनागरी विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) तिरहुता विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०)देवनागरी विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०) तिरहुता विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०)देवनागरी विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०) तिरहुता विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]देवनागरी विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ] तिरहुता विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]- दोसर संस्करण देवनागरी विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ]देवनागरी विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ] तिरहुता विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ]देवनागरी विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ] तिरहुता विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ]देवनागरी विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ] तिरहुता विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ]देवनागरी विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ] तिरहुता विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ]देवनागरी विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ] तिरहुता विदेह:सदेह ११ विदेह:सदेह १२ विदेह:सदेह १३ ................................................................................................. Maithili Books can be downloaded from: MAITHILI BOOKS ................................................................................................. विदेह सम्मान: सम्मान-सूची (समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार सहित) ................................................................................................................... मैथिलीक वर्तनी १ मैथिलीक वर्तनी- विदेह मैथिली मानक भाषा आ मैथिली भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम भाषापाक २ मैथिलीक वर्तनीमे पर्याप्त विविधता अछि। मुदा प्रश्नपत्र देखला उत्तर एकर वर्तनी इग्नू BMAF001 सँ प्रेरित बुझाइत अछि, से एकर एकरा एक उखड़ाहामे उनटा-पुनटा दियौ, ततबे धरि पर्याप्त अछि। यू.पी.एस.सी. क मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेल सेहो ई पर्याप्त अछि, से जे विद्यार्थी मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेने छथि से एकर एकटा आर फास्ट-रीडिंग दोसर-उखड़ाहामे करथि| IGNOU इग्नू BMAF-001 ................................................................................................................... सूचना/ घोषणा "विदेह सम्मान" समानान्तर साहित्य अकदेमी पुरस्कारक नामसँ प्रचलित अछि। "समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार" (मैथिली), जे साहित्य अकादेमीक मैथिली विभागक गएर सांवैधानिक काजक विरोधमे शुरु कएल छल, लेल अनुशंसा आमन्त्रित अछि। अनुशंसा निम्न कोटि सभमे आमन्त्रित अछि: १) फेलो २)मूल पुरस्कार ३)बाल-साहित्य ४)युवा पुरस्कार आ ५) अनुवाद पुरस्कार। पुरस्कारक सभ क्राइटेरिया साहित्य अकादेमी, दिल्लीक समानान्तर पुरस्कारक समक्ष रहत, जे एहि लिंक sahitya-akademi.gov.in पर उपलब्ध अछि। अपन अनुशंसा editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। गजेन्द्र ठाकुर "विकीपीडिया"मे मैथिलीकबाद मैथिली "गूगल ट्रान्सलेट"मे सेहो.. अगिला लक्ष्य "अमेजन अलेक्सा" गूगल ट्रान्सलेट गूगल ट्रान्सलेटक लिंक https://translate.google.com/?sl=en&tl=mai&op=translate गूगल ट्रान्सलेटकेँ आर पुष्ट करबाक खगता छै तइ लेल अगिला काज अढ़ा रहल छी: https://translate.google.com/about/contribute/ प्रारम्भ: विकीपीडिया ०१ फरबरी २००८ लिंक https://books.google.co.in/books?id=VC-BD5Ad6z4C&lpg=PA1&pg=PA1#v=onepage&q&f=false (मैथिली देवनागरी) https://books.google.co.in/books?id=cTezCU59bJwC&lpg=PP1&pg=PP1#v=onepage&q&f=false (मैथिली तिरहुता) https://books.google.co.in/books?id=3zKudz6wAO8C&lpg=PP1&pg=PP1#v=onepage&q&f=false (मैथिली ब्रेल) गूगल ट्रन्सलेट २३ जून २०११क लिंक https://www.facebook.com/groups/videha/permalink/138489416229195/ गूगल ट्रांसलेशन टूलमे "बिहारी" भाषाक बदलामे मैथिली लेल अलग ट्रांसलेशन टूल बनेबाक आवेदन विदेहक सदस्यगण द्वारा देल गेल अछि। अपन योगदान गूगल ट्रांसलेट लेल करू, आ कएल सम्पादन बदलबा काल कारण मे (अंग्रेजीमे) "बिहारी" नाम्ना कोनो भाषा नै हेबाक चर्चा करू। ऐ लिंकपर अनुवाद करू; गूगल एकाउंटसँ लॉग इन केलाक बाद । http://www.google.com/transconsole/giyl/chooseProject http://www.google.com/transconsole/giyl/chooseActivity?project=gws&langcode=bh (links closed) विकीपीडिया मैथिली लिंक विदेह (पत्रिका) https://mai.wikipedia.org/s/kgv इन्टरनेटक संसारमे मैथिली भाषा https://mai.wikipedia.org/s/s6h भालसरिक गाछ https://mai.wikipedia.org/s/ipm विदेह https://mai.wikipedia.org/s/ie1 विदेहक फेसबुक भर्सन https://mai.wikipedia.org/s/iu1 विदेह सम्मान https://mai.wikipedia.org/s/jc2 विदेह आर्काइभ https://mai.wikipedia.org/s/jc0 विदेह मिथिला रत्न https://mai.wikipedia.org/s/jc3 विदेह मिथिलाक खोज https://mai.wikipedia.org/s/jc4 विदेह सूचना संपर्क अन्वेषण https://mai.wikipedia.org/s/jc5 श्रुति प्रकाशन https://mai.wikipedia.org/s/iu7 अनचिन्हार आखर https://mai.wikipedia.org/s/ion मैथिली गजल https://mai.wikipedia.org/s/idz मैथिली बाल गजल https://mai.wikipedia.org/s/iex मैथिली भक्ति गजल https://mai.wikipedia.org/s/if1 http://translatewiki.net/wiki/Project:Translator http://meta.wikimedia.org/wiki/Requests_for_new_languages/Wikipedia_Maithili http://translatewiki.net/wiki/Special:Translate?task=untranslated&group=core-mostused&limit=2000&language=mai http://incubator.wikimedia.org/wiki/Wp/mai http://translatewiki.net/wiki/MediaWiki:Mainpage/mai अंतिम पाँचू साइट विकी मैथिली प्रोजेक्टक अछि। एहि लिंक सभ पर जा कय प्रोजेक्टकेँ आगाँ बढ़ाऊ। (links closed) अमेजन अलेक्सा मैथिली (शीघ्र....) "विकीपीडिया"मे मैथिलीकबाद मैथिली "गूगल ट्रान्सलेट"मे सेहो.. अगिला लक्ष्य "अमेजन अलेक्सा" विदेहक तेसर अंकमे (०१ फरबरी २००८) जे खुशखबरी पाठक लोकनिकेँ मैथिली विकीपीडियाक सम्बन्धमे देल गेल छल तकर सुखद परिणति कएक साल पहिने भेटल छल। मैथिली गूगल ट्रान्सलेटक सम्बन्धमे विदेहक फेसबुक पृष्ठपर २०११ मे देल गेल तकर सुखद परिणति ११ मई २०२२ केँ भेटल। मैथिली अमेजन अलेक्साक सेहो आरम्भ शीघ्रे हएत। (लिंक-स्क्रीनचित्र नीचाँ देल जा रहल अछि।) https://books.google.co.in/books?id=VC-BD5Ad6z4C&lpg=PA1&pg=PA2#v=onepage&q&f=false https://www.facebook.com/groups/videha/permalink/138489416229195/ ओहि समयमे विदेह सम्पादक मण्डलमे ई लोकनि रहथि: सह-सम्पादक: उमेश मंडल । सहायक सम्पादक: शिव कुमार झा आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण) । भाषा सम्पादन: नागेन्द्र कुमार झा आ पञ्जीकार विद्यानन्द झा । कला-सम्पादन: वनीता कुमारी आ रश्मि रेखा सिन्हा । सम्पादक-शोध-अन्वेषण: डॉ. जया वर्मा आ डॉ. राजीव कुमार बर्मा । सम्पादका नाटक-रंगमंच-चलचित्र: बेचन ठाकुर। सम्पादक सूचना-सम्पर्क-समाद: पूनम मंडल अ प्रियंका झा। सम्पादक अनुवाद विभाग: विनीत उत्पल । स्पष्ट अछि जे "सम्पादक अनुवाद विभाग" विनीत उत्पल (आब असिस्टेन्ट प्रोफेसर, आइ.आइ.एम.सी. जम्मू) क विशेष सहयोग रहल, आशीष अनचिन्हार सम्पादक मण्डल मे नहियो रहला उत्तर कोनो सम्पादकसँ कम काज नै करैत छथि। मैथिलीेक पाठक वर्ग सेहो अपन यथाशक्ति योगदान देलनि। https://books.google.co.in/books?id=zmIugpjpOKYC&lpg=PA1&pg=PA600#v=onepage&q&f=false https://books.google.co.in/books?id=-U04e5FfnTEC&lpg=PA1&pg=PA405#v=onepage&q&f=false गूगल ट्रान्सलेटकेँ आर पुष्ट करबाक खगता छै तइ लेल अगिला काज अढ़ा रहल छी: https://translate.google.com/about/contribute/ गूगल ट्रान्सलेट कार्यक्रम देखू https://youtu.be/nP-nMZpLM1A Google Translate:04:45to06:25 (24 new languages at 06:00) Detailed Description Tune in to find out about how we're furthering our mission to organize the world’s information and make it universally accessible and useful. To watch this keynote with American Sign Language (ASL) interpretation, please click here: https://youtu.be/PeUXBvRExic 0:00 Opening Film 1:47 Introduction, Sundar Pichai 6:21 Knowledge 15:45 Knowledge&Search 27:15 Skin Tone Equity 32:00 Computing 33:08 Assistant 43:34 Computing: AI Test Kitchen 53:08 Safer with Google 1:04:38 Safer Way to Search 1:11:20 Android: Opening 1:45:45 Android: Wear OS&Tablet 1:25:32 Android: Better Together 1:31:22 Hardware: Opening 1:33:22 Hardware: Pixel Phone&Buds 1:45:44 Hardware: Ambient&Beyond the Phone 1:54:32 Augmented Reality&Close विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम्: VIDEHA: AN IDEA FACTORY (c)२०००-२०२२. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: डॉ उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम विलास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक -स्त्री कोना- इरा मल्लिक। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि। एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, 'विदेह' प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै, आ से हानि-लाभ रहित आधारपर छै आ तैँ ऐ लेल कोनो रॊयल्टीक/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै। तेँ रॉयल्टीक/ पारिश्रमिकक इच्छुक विदेहसँ नै जुड़थि, से आग्रह। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) २०००-२०२२ सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। भालसरिक गाछ जे सन २००० सँ याहूसिटीजपर छल http://www.geocities.com/.../bhalsarik_gachh.html , http://www.geocities.com/ggajendra आदि लिंकपर आ अखनो ५ जुलाइ २००४ क पोस्ट http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html (किछु दिन लेल http://videha.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html लिंकपर, स्रोत wayback machine of https://web.archive.org/web/*/videha 258 capture(s) from 2004 to 2016- http://videha.com/ भालसरिक गाछ-प्रथम मैथिली ब्लॉग / मैथिली ब्लॉगक एग्रीगेटर) केर रूपमे इन्टरनेटपर मैथिलीक प्राचीनतम उपस्थितक रूपमे विद्यमान अछि। ई मैथिलीक पहिल इंटरनेट पत्रिका थिक जकर नाम बादमे १ जनवरी २००८ सँ "विदेह" पड़लै।इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह: प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका Videha: Ist Maithili Fortnightly eJournal विदेह: प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका विदेह: मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् 'विदेह' ३४९ म अंक ०१ जुलाइ २०२२ (वर्ष १५ मास १७५ अंक ३४९) विदेह: मैथिली साहित्य आन्दोलन VIDEHA: An Idea Factory मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA: Maithili Literature Movement
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9:53 o > लि < -, Gajendra Thakur shared a link. eee Admin 23 Jun 207 - हि गूगल ट्रांसलेशन टूलमे "बिहारी" भाषाक बदलामे मैथिली लेल अलग ट्रांसलेशन टूल बनेबाक आवेदन विदेहक सदस्यगण द्वारा देल गेल अछि। अपन योगदान गूगल ट्रांसलेट लेल करू, आ कएल सम्पादन बदलबा काल कारण मे (अंग्रेजीमे) "बिहारी" नाम्ना कोनो भाषा नै हेबाक चर्चा करू। ऐ लिंकपर अनुवाद HS; गूगल एकाउंट सँ लॉग इन केलाक बाद | http://www.google.com/transconsole/giyl/chooseProject http://www.google.com/transconsole/giyl/ chooseActivity?project=gws&langcode=bh google.com Google in Your Language a Like © Comment ® Send © You, Ashish Anchinhar and 7 others 7... Gajendra Thakur Author Admin +++ नीचाँक पाँचू साइट विकी मैथिली प्रोजेक्टक अछि, प्रोजेक्टकें आगाँ बढ़ाऊ। http://translatewiki.net/wiki/Project:Translator http://meta.wikimedia.org/wiki/ Requests_for_new_languages/ Wikipedia_Maithili http://translatewiki.net/wiki/Special:Translate? task=untranslated&group=core- mostused&limit=2000&language=mai Write a comment... GIF, © 0 € am & @ @ ८ @ Home Friends Watch Profile Notifications Menu —— eee
9:25 all. @ ) Videha ‘faze’ प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका १ फरवरी २००८ (वर्ष । मास 2 अंक 3) favre fee सक्कि Videha Maithili Formightly € Magazine fare विदेह a me where विकीपीडिया पर मैथिली पर लेख ते छल yer मैथिलीमे लेख नहि छल,कारण मैथिलीक विकीपीडियाक स्वीकृति नहि मेटल छल। हम बहुत Port एहिमे लागल रही,आ' सूचि करैत afta छी जे 27.07.2008 कें भाषारें विकी शुरू करवाक हेतु स्वीकृति भेटल छैक, मुदा एहि हेतु कमसें कम पाँच गोटे,विभिन्न जगहसें एकर एडिटरक रूपमे नियमित रे कार्य करथि तखने योजनाकें पूर्ण स्वीकृति भेटतैक। नीचां लिखल लिंक पर जाय एडिट कय एहि प्रोजेक्टमे अहाँ सभ सहयोग करव, से आशा अछि। पद्चिला अंकमे देवनागरी कोना लिखू ,एहि पर हम लेख लिखने रही। इंगलिश कीबोर्ड पर ओहि तरहे लिखने विकीमे सेहो मैथिली लिखि सकैत छी। एम. गेरार्डक माध्यम श्री अंशुमन पाष्डेयक, जिनकर मैथिलीक युनीकोडमे स्थानक आवेदन लंबित अछि, अनुरोध मेटल छल, ओ' सूचना मैंगलन्ि जाहि at स्पष्ट ee बंगला लिपि आ' मैथिली लिपिक मध्य अंतर ज्ञात भय सकयाई सूचना हम एम. गेरा्डक माध्यम हुतका पठा देलियन्हि, कारण पाण्डेयजी ईमेल एडरेस हमरा नहि अछि। विकीमे पूर्ण स्वीकृतिक हेतु एहिं लिंक सभ पर राखल प्रोजेक्टकें ऑँगा बढ़ाऊ। http:/meta.wkimedia org/wiki/Requests_for_new_languages/WMKipedia_Maithili http:/Anaubator.wkimedia org/wki/Wpimai http://transiatewiki nevwiki/MediaWiki:Mainpage/mai http://translatewiki netwiki/Sped al: Translate 7task=untransiated&group=core- mostused&limit=20008&language=mai अपनेक प्रतिक्रिया आ' रचनाक प्रतीक्षा aft नई दिल्ली fiw LLG 07022008 & सर्वाधिकार लेखकाधीन ar जतय लेखकक नाम नहि af ततय संपादकाधीना Rite (nits) संपादक-बचेन्द्र ठाकुरा एतय प्रकाशित रचना समक कॉपी राइट लेखक लोकनिक लगमे रहतन्द्वि, मात्र एकर कम प्रकाशनक अधिकार Ui Safer सैका स्वनाकार अप्पन मौलिक a, अश्रकाशित रचना सम(जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व deere मध्य खन्ि) ggsendra@ychoo.cain aft ggajendra@idehacoin’ मेल अटैचमेष्टक रूपये .60८, 6०0, Lot eat pdf फॉर्मेटमें पठाय सकेत खजिरचनाक संग रचनाकार अप्पन संक्षिप्त 'परिचव(बायोदाटा) ar अप्यन स्कैन कल मेल फोटो पठेताह, से आशा sta छी। रचनाक संग ई घोषणा रहव-ने ई रचना मौलिक af ar पहिल प्रकाशनक हेतु विदेज्नंपाकिक)-ई-पत्रिकाकें देल जा रहल afer मेल प्राप्त होवनाक बाद ययासंभव शीज्रतासें (सात दिनमें) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायता 2 Videha ‘faze’ प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका १ फरवरी २००८ (वर्ष 4 मास 2 अंक 3) favre साशिक सक्कि Videha Maithili Formighty 6 Magazine fare विदेह vensfitehtrhvnidera coin ma wenger . शोध लेख, @ books.googleusercontent.com eS
9:54 a Se) < _-, Gajendra Thakur shared a link. eee Admin 23 Jun 207 - हि NUp://WWww.google.com/transconsole/glyl/CNOOSerroject http://www.google.com/transconsole/giyl/ chooseActivity?project=gws&langcode=bh google.com Google in Your Language ॥है Like © Comment @® Send © You, Ashish Anchinhar and 7 others —-, Gajendra Thakur Author Admin १११ नीचाँक पाँचू साइट विकी मैथिली प्रोजेक्टक अछि, प्रोजेक्टकें आगाँ बढ़ाऊ। http://translatewiki.net/wiki/Project:Translator http://meta.wikimedia.org/wiki/ Requests_for_new_languages/ Wikipedia_Maithili http://translatewiki.net/wiki/Special:Translate? task=untranslated&group=core- mostused&limit=2000&language=mai http://incubator.wikimedia.org/wiki/Wp/mai http://translatewiki.net/wiki/ MediaWiki:Mainpage/mai 0y Like 30 Write a comment... GIF © 0 € am & @ @ ८ @ Home Friends Watch Profile Notifications Menu —— eee