ISSN 2229-547X 'विदेह' ३५२ म अंक १५ अगस्त २०२२ (वर्ष १५ मास १७६ अंक ३५२) (विदेह www.videha.co.in ) विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। ऐ पोथीक सर्वाधिकार सुरक्षित अछि। काॅपीराइट (©) धारकक लिखित अनुमतिक बिना पोथीक कोनो अंशक छाया प्रतिएवं रिकॉडिंग सहित इलेक्ट्रॉनिक अथवा यांत्रिक, कोनो माध्यमसँ, अथवा ज्ञानक संग्रहण वा पुनर्प्रयोगक प्रणाली द्वारा कोनो रूपमे पुनरुत्पादित अथवा संचारित-प्रसारित नै कएल जा सकैत अछि। (c) २०००- २०२२। सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। भालसरिक गाछ जे सन २००० सँ याहूसिटीजपर छल http://www.geocities.com/.../bhalsarik_gachh.html , http://www.geocities.com/ggajendra आदि लिंकपर आ अखनो ५ जुलाइ २००४ क पोस्ट http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html (किछु दिन लेल http://videha.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html लिंकपर, स्रोत wayback machine of https://web.archive.org/web/*/videha 258 capture(s) from 2004 to 2016- http://videha.com/ भालसरिक गाछ-प्रथम मैथिली ब्लॉग / मैथिली ब्लॉगक एग्रीगेटर) केर रूपमे इन्टरनेटपर मैथिलीक प्राचीनतम उपस्थितक रूपमे विद्यमान अछि। ई मैथिलीक पहिल इंटरनेट पत्रिका थिक जकर नाम बादमे १ जनवरी २००८ सँ "विदेह" पड़लै।इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA (c)२०००- २०२२। सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। Editor: Gajendra Thakur. रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि। एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि। सम्पादक 'विदेह' प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका ऐ ई-पत्रिकामे ई-प्रकाशित/ प्रथम प्रकाशित रचनाक प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ मूल आ अनूदित आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार रखैत छथि। (The Editor, Videha holds the right for print-web archive/ right to translate those archives and/ or e-publish/ print-publish the original/ translated archive). ऐ ई-पत्रिकामे कोनो रॊयल्टीक/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै। तेँ रॉयल्टीक/ पारिश्रमिकक इच्छुक विदेहसँ नै जुड़थि, से आग्रह। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। ISSN: 2229-547X Videha e-Journal: Issue No. 352 at www.videha.co.in अनुक्रम १. मैथिली भाषा जगज्जननी सीतायाः भाषा आसीत् - हनुमन्तः उक्तवान- मानुषीमिह संस्कृताम् अक्खर (अक्षर ) खम्भा तिहुअन खेत्तहि काञि तसु कित्तिवल्लि पसरेइ। अक्खर खम्भारम्भ जउ मञ्चो बन्धि न देइ॥ [कीर्तिलता प्रथमः पल्लवः पहिल दोहा।] माने अक्षररूपी स्तम्भ निर्माण कए ओहिपर (काव्यरूपी) मंच जँ नहि बान्हल जाए तँ एहि त्रिभुवनरूपी क्षेत्रमे ओकर कीर्तिरूपी लता (वल्लि) प्रसारित कोना होयत। केदार नाथ चौधरी विशेषांक- (पृ. २-२१०) २.१.केदारनाथ चौधरी विशेषांक सम्पादकीय- गजेन्द्र ठाकुर (पृ. २-२७) २.२.प्रस्तुत विशेषांकक संदर्भमे (पृ. २८-३१) २.३.केदारनाथ चौधरीजीक संक्षिप्त परिचय (पृ. ३२-३४) २.४.कल्पना झा- इएह गूड़ खेने,कान छेदौने (पृ. ३५-४६) २.५.निर्मला कर्ण- केदारनाथ चौधरी व्यक्तित्व एवं कृतित्व (पृ. ४७-४९) २.६.आभा झा- प्रेमक अद्वैतक अद्भुत आख्यान –हीना (पृ. ५०-५५) २.७.शिवशंकर श्रीनिवास- चमेली रानी (पृ. ५६-६२) २.८.दीपक मंजुल- मैथिली साहित्यक "कबीर"- हमरा सभक केदार बाबू (पृ. ६३-६८) २.९.कामेश्वर चौधरी- अंग्रेजिए पढ़ल लोक मैथिलीकेँ उबारि सकत (पृ. ६९-७१) २.१०.लक्ष्मण झा सागर- अबारा नहि...तन! (पृ. ७२-७५) २.११.अजित कुमार झा- अबारा नहितन : एक अनुपम कृति (पृ. ७६-८५) २.१२.भीमनाथ झा- तोर समान एक तोहेँ माधव (पृ. ८६-९०) २.१३.हितनाथ झा- ह्रास होइत सभ्यता संस्कृतिक इतिवृत्तिक अयना : "अयना" (पृ. ९१-९४) २.१४.अमरनाथ झा- अपरिचितसँ परिचितिक यात्राः केदारनाथ चौधरी (पृ. ९५-१००) २.१५.अशोक- केदार नाथ चौधरीक उपन्यास (पृ. १०१-१०६) २.१६.जगदीश चन्द्र ठाकुर "अनिल"- चुम्बकीय लेखनक दृष्टान्त "अबारा नहितन" (पृ. १०७-११२) २.१७.योगेन्द्र पाठक "वियोगी"- अपरिचित साहित्यकारक नुकाएल गप (पृ. ११३-१२३) २.१८.प्रदीप बिहारी- मुख्य पात्रक गौण व्यथा : अबारा नहितन (पृ. १२४-१२९) २.१९.आशीष चमन- मधुबाला नहि नहि लालदाय (पृ. १३०-१४२) २.२०.अरविन्द ठाकुर- विलक्षणकेँ व्याख्यायित करब: अबारा नहितन (पृ. १४३-१६५) २.२१.आशीष अनचिन्हार- मैथिली उपन्यासक 'केदारनाथ युग' (पृ. १६६-१७१) २.२२.गजेन्द्र ठाकुर- केदार नाथ चौधरी- हुनकर आ हुनकर उपन्यासक पुनर्पाठ (पृ. १७२-१७९) २.२३.अर्चना चौधरी- हमर पिताः श्री केदारनाथ चौधरी (पृ. १८०-१८१) २.२४. डॉ कैलाश कुमार मिश्र- केदारनाथ चौधरी रचित मैथिली उपन्यास: करार (पोथी समीक्षा) (पृ. १८२-२१०) ऐ अंकक अन्यान्य रचना (पृ. २११-८५८) गद्य (प्. २१३-८४५) ३.१.केशव भारद्वाज- अजगुत अफ्रीका (अफ्रीका डायरी) (पृ. २१४-४६६) ३.२.केशव भारद्वाज- खेलौना (पृ. ४६७-४८७) ३.३.केशव भारद्वाज- किछु पढ़ल आ किछु सुनल- ईदी अमीन (पृ. ४८८-५४८) ३.४.केशव भारद्वाज- पैबंद (पृ. ५४९-७९८) ३.५.डा. किशन कारीगर- कथाकार- मुकेश आनन्द- समीक्षा (पृ. ७९९-८००) ३.६.भुवनेश्वर चौरसिया "भुनेश"- उ लपट एमहरो ऐत (पृ. ८०१-८०१) ३.७.कुमारी आरती- यात्रा वृत्तांत (पृ. ८०२-८०३) ३.८.डॉ प्रमोद कुमार- पवना माय- (संस्मरण) (पृ. ८०४-८०८) ३.९.सुषमा ठाकुर- बोझ (पृ. ८०९-८१०) ३.१०.रबीन्द्र नारायण मिश्र- मातृभूमि (उपन्यास)- ९म खेप (पृ. ८११-८१५) ३.११.गजेन्द्र ठाकुर- ५ टा बीहनि कथा (पृ. ८१६-८१९) ३.१२.गजेन्द्र ठाकुर- गढ़-नारिकेल उपन्यास-त्रयीक पहिल उपन्यास "सहस्रशीर्षा" क बाद दोसर उपन्यास- द ........ फाइल्स (पृ. ८२०-८३६) ३.१३.महाकान्त प्रसाद- बीहनि कथा (चिड़िया घर, चिक्कस) (पृ. ८३७-८३८) ३.१४.निर्मला कर्ण- अग्नि शिखा (भाग - ४) (पृ. ८३९-८४५) पद्य (पृ. ८४६-८५८) ४.१.राज किशोर मिश्र- धान (पृ. ८४७-८५३) ४.२.गजेन्द्र ठाकुर- शुनः शेपक मृत्युदण्ड वा बलि- २ (पृ. ८५४-८५६) ४.३.कुमारी आरती- प्रकृति (पृ. ८५७-८५७) ४.४.सुषमा ठाकुर- आस (पृ. ८५८-८५८) 2
केदारनाथ चौधरी विशेषांक सम्पादकीय- गजेन्द्र ठाकुर कथा १-१० नाइट ड्यूटीमे छलौं, दू बजे राति मे हमर फोन टनटना उठल। हमर गप हमर कलीग, जे तमिल भाषी रहथि, सुनि रहल छली। फोन खतम भेलापर हिन्दीमे पुछलन्हि: "कोन भाषामे अहाँ एक घण्टा गप कऽ रहल छलौं, बड्ड मीठ भाषा अछि"। ऐ मिठासक खटास हुनका की बुझबितौं अहाँकेँ बुझायब। मुदा तइ लेल अहाँकेँ तैयार होमय पड़त। से पहिने भाग-१ मे स्टार्टर आ फेर दोसर भागसँ १००, २०० आ ५०० एम.जी. अहिना डोज बढ़ैत रहत। कथा १ केदारनाथ चौधरी (१९३६- ), मैथिलीक पहिल फिल्म 'ममता गाबय गीत' केर निर्माता द्वयमेसँ एकटा निर्माता छथि केदारनाथ चौधरी आ दोसर मदनमोहन दास। बादमे आर्थिक मजबूरीवश तेसर सहनिर्माता भेलखिन उदयभानु सिंह। माता-स्व. कुसुमपरी देवी, पिता- स्व. किशोरी चौधरी, जन्म: ०३/०१/१९३६ ग्रा.+पत्रा. नेहरा (दरभंगा), अन्य पारिवारिक सदस्य-पत्नी-श्रीमती कुमुद चौधरी, संतान- प्रथम पुत्री-श्रीमती किरण झा, द्वितीय पुत्री-श्रीमती अर्चना चौधरी, शिक्षा- १९५८ ई.मे अर्थशास्त्रमे स्नातकोत्तर, १९५९ ई.मे लॉ। १९६९ ई.मे कैलिफोर्निया वि.वि.सँ अर्थस्थास्त्र मे स्नातकोत्तर, १९७१ ई.मे मार्केटिंग एंड डिस्ट्रीब्यूशन विषयमे गोल्डेन गेट यूनिवर्सिटी, सानफ्रांसिस्को, USA सँ एम.बी.ए., १९७८ मे भारत आगमन। १९८१-८६ क बीच तेहरान आ प्रैंकफुर्तमे। फेर बम्बई, पुणे होइत रिटायरमेंटक बाद २००० सँ लहेरियासराय, दरभंगामे निवास।६ टा उपन्यास- चमेलीरानी २००४, करार २००६, माहुर २००८, अबारा नहितन २०१२, हीना २०१३, अयना २०१८. सम्मान- १) विदेह साहित्य सम्मान, बर्ख-२०१३ (झारखंड मैथिली मंच, राँची द्वारा), २) प्रबोध साहित्य सम्मान, बर्ख-२०१६ आ ३) केदार सम्मान, बर्ख-२०१६,'अबारा नहितन' लेल कथा २ डॉ कल्पना मणिकान्त मिश्र पिता डॉ शिव कुमार झा, गाम राटी, सासुर- गजहारा। मेडिकल शिक्षा जे. जे. हॉस्पीटल/ ग्रान्ट हॉस्पीटलसँ सम्पन्न कय स्त्री-रोग विशेषज्ञ। मुम्बइसँ १९८०-८२ मे प्रकाशित होइबला मैथिली पत्रिका "विदेह"क पति डॉ मणिकान्त मिश्र (निर्माता- मैथिली फिल्म- आउ पिया हमर नगरी) संग सम्पादन। अपन २००९ केर ई-पत्र मे ओ लिखैत छथि: गजेन्द्र ठाकुर जी केँ हमर नमस्कार! अहाँक पत्रिकाक हम नियमित पाठक छी। अहाँक वेबसाइटक पार्श्व गीत हृदय-स्पर्शी आर मधुर लागल। आगाँ ओ अपन संस्मरण लिखै छथि जे विदेह सदेह २ मे (http://videha.co.in/new_page_89.htm) मे सेहो संकलित अछि: मातृभाषा मातृभाषाक प्रेम, बहुत किछु पढ़ल आ सुनल अछि। अहूँ सभ सुनने होयब, कतेक बेर, मुदा स्वयं अनुभव करबाक अवसर किछुएक लोककेँ भेटैत छन्हि। हम सभ बम्बइ आयले रही। ओना तँ ऐ गप्पक एक युगसँ बेसी भय गेल मुदा बिसरबाक हिम्मत नै कऽ सकैत छी, आर किएक बिसरु? महानगरीक चकाचौन्ध मे हरायल रही, कतौ भटकि नै जाइ से चिन्ता रहय। १९८०क दशक मे संजय गाँधीक एकटा योजना आयल छल, बेरोजगार ग्रेजुएट लेल बैंकसँ किछु सुविधा पर २०,००० रुपया देबय लेल। हमहूँ बेरोजगार डाक्टर रही। आवेदन केलौं तँ लोन तुरत्ते भेट गेल। मुदा आब ओइ पाइक हम की करु? अपन रोजगार जेना दवाइखाना, कोनो छोटसन घर आदि जतऽ भविष्यमे अपन क्लीनिक खोलि सकी, जेकि ओइ समयमे अति सुलभ आर सम्भव छल, आब तँ से ओइ पाइमे सपना भऽ गेल अछि। ओइ पाइसँ निवेश कऽ हम अपन भविष्य सुरक्षित कऽ सकैत छलौं, गहना-गुड़िया बना अपन सख-सेहन्ता पूरा कऽ सकैत छलौं बा भारत भ्रमण कऽ सकैत छलौं। मुदा नै! हमर पति, डा.मणिकान्त मिश्रक इच्छा छलन्हि जे मैथिली भाषाक पत्रिका निकाली। हम दुनु गोटे मिलि कऽ 'विदेह' नामक मैथिली पत्रिकाक शुरुआत केलौं। पत्रिका तँ छपै, मुदा के कीनत आर के पढ़त? ई बड पैघ समस्या छल। कोनाहु कऽ कय अपन घरक पूँजी लगा कऽ २ बर्ख तँ पत्रिका चलेलौं। फेर हमरा सभकेँ बन्द करय पड़ल किएक तँ दुनु गोटे डाक्टरी व्यवसायमे लागल रही, घर-अस्पताल-पारिवारिक झन्झट सम्हारैत बड मुश्किल छल। बम्बइमे नबे-नबे रही। तहूमे एतेक दुस्साहस कोनो साधारण आदमी नै कऽ सकैत अछि मात्र आर मात्र डा. मणिकान्त मिश्र कऽ सकैत छलाह। किएक तँ मैथिलीक प्रति हुनका जुनूनी लगाव छलन्हि। बम्बइक आपाधापी भरल जीवन एवम् स्वास्थ्यक उतार-चढ़ाव किछुओ हुनकर मैथिली-प्रेमक उत्साहकेँ कम नै कऽ सकलन्हि। ...आर बीस-बाइस बर्खक पश्चात ओ अपन सभटा पूँजी, शरीर-समांग समेत मैथिलीक फिल्म "आउ पिया हमर नगरी" बनौलनि। फिल्म बड सुन्दर बनलै, अहाँ सभ देखने होयब। यदि नै तँ एक बेर अवश्य देखी। फिल्म बनबयमे जे कष्ट आर अनुभव भेल से हम एखन वर्णन नै कऽ सकै छी। फेर कखनो....! मुदा ऐ सभ प्रकरणमे माँ मैथिली अपन लायक पुत्रसँ सदा लेल बिछुड़ि गेली। अछि कोनो मातृभाषा भक्त-पुत्र जे अपन माँ-मैथिलीक हृदयक पीड़ाक अनुभुति कऽ हुनका लेल अपन सभ किछु समर्पित कऽ दिअय? कथा ३ १५ अगस्त २०२२ ई.क भारतक ७६म स्वतंत्रता दिवसक शुभकामना। ई संयोग छल जे विदेहक ६४म अंक भारतक ६४ म स्वतंत्रता दिवसक अवसर पर १२ बर्ख पहिने १५ अगस्त २०१० केँ ई-प्रकाशित भेल छल। ऐ बेर विदेहक ३५२म अंक सद्यः ई-प्रकाशित भेल। हमर पिताजीक मृत्यु १९९५ ई. मे ५५ बरखमे भेलन्हि। मुदा गाममे १२ बर्ख पहिने हुनकर संगी आ ज्येष्ठ सभ जीवित रहथि। परशुरामजी आ धनेश्वर जीक बहिन झंझारपुरमे मल्लिकजीसँ पढ़ैले जाइत रहथि तँ धनाढ्य लोकनि द्वारा बारि देल गेलाह। परशुरामजीक बहिनक पढ़ाइमे बाधा पड़लन्हि। मुदा धनेश्वरजी जे कनेक उमेरमे सेहो पैघ रहथि, अड़ल रहलाह। अंग्रेजी पुलिससँ हुनका पकड़बाओल गेल आ जे पकड़बओलन्हि से बादमे स्वाधीनता पेंशन पबैत रहलथि। १९४२ ई.मे धनेश्वरजी सभ थानासँ अंग्रेज पुलिसकेँ भगा देने रहथि आ फेकन मुन्शीकेँ थानेदार बना देने रहथि। हमरा बाबूजीक कहल ओ शब्द मोन पड़ैत अछि जे गामक धनाढ्य एक्स एम.एल.ए. हुनका स्कॉलरशिपबला फॉर्मपर साइन करबासँ मना कऽ देने रहथिन्ह मुदा तैयो ओ एम.आइ.टी. मुजफ्फरपुरसँ १९५९ ई. मे रॉल नं.१ लऽ सर्वोच्च अंकक संग अभियन्त्रणमे नाम लिखबा लेलन्हि। एक बेर धनेश्वरजी, परशुरामजी, हमर बाबूजी सभ गोपेशजी अहिठाम जा कऽ खएने छलाह आ ई काज अंडा खएलापर धनाढ्यक नेतृत्वमे हुनका बारल जएबाक विरुद्ध छल। आब ने धनेश्वरजी छथि आ ने गोपेशजी। परशुरामजी सेहो अही बर्ख स्वर्गवासी भऽ गेलथि। परशुरामजी १९९८ ई. मे कोलकातासँ अंग्रेजीक प्रोफेसरशिपसँ सेवानिवृत्त भऽ ओ अंग्रेजीमे "इन्ग्लिश पोएटिक्स"पर दूटा पोथी लिखने छथि। हमर पोथी "कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक समर्पण "पिताक सत्यकेँ लिबैत देखने रही स्थितप्रज्ञतामे तहिये बुझने रही जे त्याग नहि कएल होएत रस्ता ई अछि जे जिदियाहवला। -पिताक प्रिय-अप्रिय सभटा स्मृतिकेँ समर्पित" पढ़ि ओ हमर दुनू गाल अपना हाथमे लऽ अपन नोर नहि रोकि सकलाह। गाममे बहुत गोटे समर्पण पढ़ि कानए लागल रहथि आ कहने रहथि जे ई सभ हमर पिताक पुण्यक परिणाम अछि। स्वतंत्रता दिवसपर नहि जानि कोना ई सभ फेर स्मरण आबि गेल। कथा ४ साहित्य अकादेमी पुरस्कार प्रसंग पघलैत हिमखण्ड- डॉ शिव कुमार प्रसाद द्वारा अनूदित कविता संग्रह अछि (मूल हिन्दी - रजनी छाबड़ा- पिघलते हिमखण्ड)। अंतिम रेस धरि ई पहुँचल- ओतऽ हारि गेल। देखी अगिला साल की होइए। विदेहमे ई धारावाहिक रूपें ई- प्रकाशित भेल फेर पुस्तकाकार आयल। ऐ पोथीक कविता सभ संकलित भेल विदेहःसदेह २८ मे जे ऐ लिंक http://www.videha.co.in/new_page_89.htm पर डाउनलोड लेल उपलब्ध अछि। लेखक धोआ- धोती नै वरन कोरा-धोती परम्पराक छथि। ऐ बेर मूल पुरस्कार पहिल बेर कोरा-धोती परंपराक उपन्यासकार श्री जगदीश प्रसाद मण्डलकें हुनकर उपन्यास "पंगु" लेल देल गेलन्हि, आ से साहित्य अकादेमीक इतिहासमे पहिल बेर भेलै। मात्र धोआ-धोती बला लेल ई पुरस्कार रिजर्व रहै। विदेहमे ई धारावाहिक रूपें ई- प्रकाशित भेल फेर पुस्तकाकार आयल। ई पोथी संकलित भेल विदेहःसदेह २१ मे जे ऐ लिंक http://www.videha.co.in/new_page_89.htm पर डाउनलोड लेल उपलब्ध अछि। साहित्य अकादेमीक टैगोर लिटरेचर अवार्ड २०११ मैथिली लेल श्री जगदीश प्रसाद मण्डल केँ हुनकर लघुकथा संग्रह "गामक जिनगी" लेल देल गेल छल। कार्यक्रम कोच्चिमे १२ जून २०१२केँ भेल रहय। मैथिली लेल विवादक अन्तक कोनो सम्भावना नै देखबामे आबि रहल अछि। ओहू समय रेफरी जखन टैगोर लिटरेचर अवार्ड २०११ मैथिली लेल ७ टा पोथीक नाम पठेलन्हि तखन सेहो एकटा पोथी एहनो रहय जे निर्धारित अवधि २००७-२००९ मे छपले नै छल, तँ की बिनु देखने पोथी अनुशंसित कएल गेल छल? ऐ तरहक पोथी अनुशंसित केनिहारकेँ साहित्य अकादेमी चिन्हित केलक? की तकर नाम सार्वजनिक कयल गेल? की ओकरा स्थायी रूपसँ प्रतिबन्धित कयल गेल? नै कयल गेल आ तखन मैथिलीक प्रतिष्ठा बाँचल कोना रहि सकत। पुरस्कार शिव कुमार प्रसादकें सेहो देल जेबाक चाही छल मुदा एक्के बरिख दू-दू टा कोरा-धोती परम्पराबला कें ई नै देल जा सकत। एक्के टा कोरा-धोती बलाकें देल गेलै तहीमे अगरा-पिछड़ा दुनूक धोआ-धोतीधारी आ वर्णशंकर साहित्यकार (बायोलॉजिकल वर्णशंकरता सँ एकर कोनो सरोकार नै) कन्नारोहट उठेने छथि। धोआ-धोती धारी लोकनिकें साहित्य अकादेमीक अपन-अपन अनुवाद-असाइनमेंट आपस कऽ देबाक चाही आ ओ सभ असाइनमेंट नंद विलास राय, राजदेव मण्डल, रामबिलास साहु, धीरेंद्र कुमार, दुर्गानंद मण्डल, मनोज कुमार मण्डल, शिव कुमार प्रसाद, उमेश पासवान, संदीप कुमार साफी, बेचन ठाकुर, मेघन प्रसाद, किशन कारीगर, लालदेव महतों, उमेश मण्डल, शारदानंन्द सिंह, सुभाष कुमार कामत, मुन्नी कामत आदि कें देल जाय, आ से केलासँ मैथिली लेल अग्निवीरक एकटा फौज तैयार भऽ जायत। मेघन प्रसाद विदेह मे अपन आलेखमे ई इच्छा व्यक्त केने छलाह मुदा तखनो हुनका अनुवाद-असाइनमेंट नै देल गेल। अशोक अविचल कें अदहा बधाइ, कारण दू टा कोरा धोतीक बदला हुनकर कार्यकालमे एक्केटा कोरा-धोतीकें पुरस्कार भेट पेलै। आब अगरा-पिछड़ा दुनू दिसुका धोआ-धोती बला मायावी सभ कोन-कोन बहन्ने की-की उकबा उड़ेतन्हि आ अगिला बर्खसँ फेर सँ एकछाहा धोआ-धोतियाइन साहित्य अकादेमी भऽ जायत बा नै तकर उत्तर तँ भविष्यक कोखिमे अछि। कथा ५ एकटा साहित्यिक घटना एकटा साहित्यिक घटनाक विवरण दै छी। ई घटना भेलै तमिल साहित्यक आधुनिक कालमे। मूल धारा विश्व भरिसँ विद्वानकेँ बजेलक मारते रास प्रोग्राम-प्रचार। अस्सी-अस्सी हाथक नम्हर-नम्हर साहित्यकार बजाओल गेला, एकसँ एक कार्यक्रम, रेडियो टी.वी. पर प्रचार, टाकाक गुड्डी उड़ा देलक मूल धारा। एक नम्बरक प्रोग्राम समाप्त भेल। आ समानान्तर धारा की केलक। ओ निकाललक समकालीन समानान्तर गद्य आ पद्यक एकटा संकलन जकर नाम छलै "कुरुक्षेत्रम्"। साधारण कागज पर साधारण डिजाइन पर बहार भेल ई "कुरुक्षेत्रम्" तमिल साहित्यकेँ सिहरा देलकै। आ एकटा बहस शुरू भेलै जे तमिल साहित्यक इतिहासमे एक्के समय मे भेल दू घटनासँ तमिल साहित्यकेँ कोन घटना बेशी फौदेलकै। टाकाक गुड्डी उड़बैबला तमिल साहित्यक विश्व आकि ब्रह्माण्ड सम्मेलन आकि कुरुक्षेत्रम्! आ बहुमत मानलकै जे साधारण कागज पर साधारण डिजाइन कएल "कुरुक्षेत्रम्" श्रेष्ठ घटना छल। विदेहक जीवित साहित्यकारपर विशेषांक मैथिली साहित्यक "कुरुक्षेत्रम्" बनि गेल अछि। फेसबुकपर बहसमे साहित्यकार लोकनि मानलन्हि जे साहित्य अकादेमी पुरस्कारसँ बेशी महत्त्व विदेहक जीवित साहित्यकारपर विशेषांकक भऽ गेल अछि। लाखक-लाख टाकाक साहित्य अकादेमीमे पसरैत कन्नारोहट घटबाक नामे नै लऽ रहल अछि, मुख्य धारा अपनेमे जालक ओझरी बनि गेल अछि, जकरा असाइनमेण्ट भेटलै से पुरस्कार लेल आ जकरा पुरस्कार भेटलै से असाइनमेण्ट लेल आफन तोड़ने अछि, आ जकरा दुनूमे सँ किछु नै भेटलै तकरा दुनू चाही तइले, आ जकरा दुनू भेटि गेलै तकर हालत तँ सभसँ बेशी खराप छै, ने अकादेमीये ओकरा मोजर दऽ रहल छै आ ओकर रचना सेहो तेहेन नै छै जे समानान्तर धारा लग ठठि सकतै। आ जँ किछु अपवाद अछि तँ ओ डिप्रेशनमे चलि गेल छथि बा अपनाकेँ सेहो कतिआयल माने समानान्तर धारक घोषित करबामे लागल छथि। माने कतिआयल होयब घोषित करब बा समानान्तर धाराक होयब घोषित करब मूलधाराक (अगड़ा-पिछड़ा दुनूक अस्सी-अस्सी हाथक नम्हर-नम्हर साहित्यकार मूलधारामे छथि) एकटा फैशन बनि गेल अछि, मुदा ई फैशन अछि नै... कथा ६ विद्वान केना बनी? मैथिली भाषा जगज्जननी सीतायाः भाषा आसीत् - हनुमन्तः उक्तवान- मानुषीमिह संस्कृताम् अक्खर (अक्षर) खम्भा तिहुअन खेत्तहि काञि तसु कित्तिवल्लि पसरेइ। अक्खर खम्भारम्भ जउ मञ्चो बन्धि न देइ॥ [कीर्तिलता प्रथमः पल्लवः पहिल दोहा।]- माने अक्षररूपी स्तम्भ निर्माण कए ओहिपर (काव्यरूपी) मंच जँ नहि बान्हल जाए तँ एहि त्रिभुवनरूपी क्षेत्रमे ओकर कीर्तिरूपी लता (वल्लि) प्रसारित कोना होयत। गाम सभमे देखैत हेबै किछु लोक संस्कृत सुभाषितक चोटगर प्रयोग करैत छथि। मैथिली साहित्योमे विदेहक पदार्पणसँ पहिने वएह मैथिली साहित्यकार विद्वानक श्रेणी मे अबैत छल जिनका १० टा सुभाषित कंठस्थ रहैत छलन्हि। उचिते कारण बाशो सेहो कहने छथि, जे जे कियो जीवनमे ३ सँ ५ टा हाइकूक रचना कएलन्हि से छथि हाइकू कवि आ जे दस टा हाइकूक रचना कएने छथि से छथि महाकवि। प्रस्तुत अछि अहाँ लेल एहने ३२ टा बीछल संस्कृत सुभाषित ऐमे सँ दसोटा मोन रहि गेल तँ अहूँ भऽ गेलौं मैथिलीक मूल धाराक हिसाबे प्रकाण्ड पण्डित। मुदा समानान्तर धारामे ऐ शॉर्टकटक पलखति कतऽ, एतऽ तँ अढ़बैले कियो नै भेटत, खटना खटऽ पड़त। सुभाषितम् (सुष्ठि भाषितम् सुभाषितम्) मातेव रक्षति पितेव हिते नियुङ्कते कान्तेव चाभिरमयत्यपनीयं खेदम्। लक्ष्मीं तनोति वितनोति च दिक्षुं कीर्ति किं किं न साधयति कल्पलतेव विद्या॥ यस्य नास्ति स्वयं प्रज्ञा शास्त्रं तस्य करोति किम्? लोचनाभ्यां विहीनस्य दर्पणः किं करिष्यति ॥ आत्मार्थ जीवलोकेऽस्मिन को न जीवति मानवः। परं परोपकारार्थं यो जीवति स जीवति॥ गच्छन् पिपीलको याति योजनानाम् शतान्यपि अगच्छन् वैनतोयोपि पदमेकम् आगच्छति तृणानि भूमिरूदकं वाक् चतुर्थी च सूंतता। एतान्यपि सतां गेहे नोच्छिद्यंते कदाचन॥ सुलभाः पुरुषाः लोके सततं प्रियवादिनः। अप्रियस्यय च पर्थ्यस्य वक्ता श्रोता च दुर्लभः॥ उपर्जितानां वित्तानां त्याग एकहि रक्षणम्। तडागोदरसंस्थानां परीवाद इताम्भसाम्॥ पुस्तकष्था तु या विद्या परहस्तगतं धनम्। कार्यकाले समुत्पन्ने न सा विद्या न तद्दनम्। बहूनाम् अल्पसाराणां संहतिः कार्यसाधिका। तृणैर्गुणत्वमापन्नेः बध्यंते मत्तदंतिनः॥ जलबिन्दु निपातेन् क्रमशः पूर्ण्यते घटः। स हेतुः सर्वविद्यानां धर्मस्य च धनस्य च॥ चिन्तनीया हि विपदाम् आदावते प्रतिक्रिया। न कूपखननं युक्तम् प्रदीप्ते वह्णिना गृहे॥ मातृवत् परदारेषु परद्रव्येषु लोष्टवत् आत्मवत् सर्वभूतेषु यः पश्यति सः पण्डितः। यस्य कृत्यं न जानन्ति मंत्रं वा मंत्रितं परे। कृतमेवास्य जानन्ति सर्वै पण्डिते उच्यते। सदयं हृदयं यस्य भाषितं सत्यभूषितम्। कायः परहिते यस्य कलिस्तस्य करोति किम्॥ गतानुगतिकोलोकः न लोकः पारमार्थिकः गङ्गासैक्त लिङ्गेन नष्टं मे ताम्रभाजनम्। दानेन पाणिः न तु कङ्कणेन स्नानेन शुद्धिः न तु चन्दनेन। मानेन तृप्तिः न तु भोजनेन ज्ञानेन मुक्तिः न तु मुण्डनेन॥ आचार्यात् पादमादत्ते पादं शिष्यः स्वमेधया। पादं सब्रह्मचारिभ्यः पादं कालक्रमेण च। यथा चित्तं तथा वाचो यथा वाचस्तथा क्रिया। चित्ते वाचि क्रियायां च महता मेकरूपता॥ अमन्त्रमक्षरं नास्ति नास्ति मूलमनौषधम्। अयोग्यः पुरुषो नास्ति योजकस्तत्र दुर्लभः। आयत्यां गुणदोषज्ञः तदात्वे क्षिप्रनिश्चयः। अतीते कार्यशेषज्ञो विपदा नाभिभूयते॥ गते शोकं न कुर्वीत भविष्यं नैव चिन्तयेत्। वर्तमानेषु कालेषु वर्तयन्ति विचक्षणाः। छायामन्यस्य कुर्वन्ति तिष्ठन्ति स्वयमातपे। फलान्यापि परार्थाय वृक्षाः सत्पुरुषाः इव॥ उपकारिषु यः साधुः साधुत्वे तस्य को गुणः। आरिषु यः साधुः स सादुरिति कीर्तितः॥ उद्यमनैव सिध्यंति कार्याणि न मनोरथैः। नहि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशंति मुखे मृगा। अयं निजः परोवेत्ति गणना लघुचेतसाम्। उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्॥ प्रियवाक्य प्रदानेन सर्वे तुष्यन्ति जन्तवः। तस्मात् तदेव वक्त्तव्यं वचने का दरिद्रता। नाभिषेको न संस्कारः सिंहस्य क्रियते वने। विक्रमार्जित सत्त्वस्य स्वयमेव मृगेन्द्रता। वज्रादपि कठोराणि मृदुणि कुसुमादपि। लोकोत्तराणाम चेतांसि को हि विज्ञातुमर्हति। अन्नदानं परं दानं विद्यादनमतः परम्। अन्नेन क्षणिका तृप्तिः यवज्जीवं च विद्यया॥ षड् दोषाः पुरुषेणेह ह्यातव्या भूतिमिच्छिता। निद्रा तन्द्रा भयं क्रोधः आलस्य दीर्घसूत्रता॥ अकृत्वा परसन्तापम् अगत्वा खलनमताम्। अनुत्सृज्य सतां वर्त्म यत् स्वल्पमपि तद् बहु॥ अपार भूमि विस्तारम् अगम्य जन संकुलम् राष्ट्रं संघटनाहीनं प्रभवेन्नात्मरक्षणे॥ कथा ७ आब किछु भाषण-भाख किछु भाषण-भाख जे हम संगी साथी सभकेँ गप-शपमे दैत रहै छियन्हि से हुनका सभक आग्रह कारण आब एतए दऽ रहल छी। कम वसा बला दूध सदिखन पीबू आ कम नोन खाउ। माउसक सेवन सेहो कम करू, माँछ बेशी खा सकै छी। अपन आस-पड़ोसक लोकक दिनचर्यापर अहाँक ध्यान अवश्य रहबाक चाही नहि तँ घर बदलि लिअ। कोनो व्यक्तिकेँ जे अहाँ प्रशंसा करब तँ ओ ओकरा लेल बड़ उत्साह बढ़बएवला हएत। अपन पड़ोसीकेँ बगिया वा कोनो आन व्यंजन बना कए खुआऊ आ ओकर बनेबाक विधि सेहो लिखाऊ। ककरो प्रति दुर्भावना वा पूर्वाग्रह नहि राखू। कोनो मॉलमे जाऊ तँ कार खूब दुरगर लगाऊ आ परिवार-बच्चा संगे टहलि कए आऊ। दूरदर्शनपर मारि-पीट बला धारावाहिक नहि देखू आ जे-जे कम्पनी ओकर प्रायोजक अछि तकर उत्पादक बहिष्कार करू। सभ लोक, पशु-पक्षीक प्रति आदर राखू। ककरोसँ गाड़ी माँगी तँ घुरबैत काल पेट्रोल वा डीजल पूर्ण रूपसँ भरबा कऽ घुराऊ, लोक किएक तँ एकर उल्टा करैत छथि, भरल पेट्रोल गाड़ी लऽ जाइ छथि आ रिजर्वमे आनि कए घुरबैत छथि। देखब जे ओ व्यक्ति अहाँक चरचा बड्ड दिन धरि करत आ आगाँसँ गाड़ी देबामे बहन्ना नहि करत। दिनमे पाँच-सात गोटेकेँ अभिवादन अवश्ये करू। एक-आधटा माल-जाल राखू, जे दिल्ली-मुम्बैमे रहै छी तँ तकर बदला कुकुड़ पोसू। मासमे एक बेर सुर्योदय अवश्य देखू आ तरेगण सेहो। दोसराक जन्म दिन आ नाम अवश्य मोन राखू। होटलक खेनाइ परसनिहारकेँ टिप अवश्य देल करू। ककरोसँ भेँट भेलापर आह्लादसँ अभिवादन करू, हाथ मिलाऊ आ सर्वदा आँखि मिला कऽ गप करू। धन्यवाद आ आदरसूचक शब्द अवश्य बाजू। कोनो बाजा बजेनाइ अवश्य सीखू, नहि कोनो आर तँ झालि तँ बजाइये सकै छी। नहाइत काल गीत गाऊ। अपन सफलताक आकलन अनका प्रति कएल सेवासँ नापू नञि की ओहि वस्तुसँ जे अहाँ अनका हानि पहुँचा कऽ प्राप्त केने छी। धोखा देनाइ खराप गप छियै् धोखा खेनाइ नहि। साक्षात्कार केना लेबाक चाही ओहिमे की की आवश्यक बिन्दु छै से अवश्य सीखू। अफवाह सुनू मुदा अपना दिससँ ओहिमे कोनो वृद्धि वा योगदान नहि देल करू। अपन बच्चाक चिन्ता वा भएपर ध्यान देल करू। अपन माएक संग बहस नहि करू। सभटा सुनलाहा चीजपर विश्वास नहि करू। अहाँ लग जतेक पाइ अछि ओहिमेसँ किछु बचा कए खर्च करू। बूढ़-पुरानक संग भद्र व्यवहार करू। बुराइ आ अन्यायकेँ कखनो बर्दास्त नहि करू। प्रशंसात्मक पत्रकेँ सम्हारिकेँ राखू। कोनो सेमीनारमे भाषण देलाक बादे छपल भाषण वितरित करू। बियाहक बादेसँ अपन बच्चाक शिक्षा लेल पाइ बचेनाइ शुरू कऽ दिअ। माता-पिता अपन बच्चाकेँ आत्मनिर्भर रहनाइ सर्वदा सिखाबथु। अहाँ तखने मानसिक रूपसँ स्वतंत्र भऽ सकब जखन अपन समस्याक समाधान लेल दोसराक मुँहतक्की नहि करब। विवाह वा बच्चाक पोषण ओतेक भरिगर चीज नहि छैक। जखन अहाँ हँसब तँ स्वतः अहाँ सुन्दर देखा पड़ब, खूब हँसू।जाधरि अहाँ नव-नव काज नहि करब ताधरि नव-नव चीज कोना सीखब? जे अहाँ कोनो काज बिना त्रुटिक करए चाहब तँ ओ काज कहियो नहि भऽ सकत। कोनो खराप भेल सम्बन्धकेँ सुधारबा लेल कतबो देरी भेलाक बादो प्रयास करबाक चाही। मानवीय भावना कोनो काज करबामे आ कतबो कठिन परिस्थितिकेँ पार पएबामे सफल होएत। कोनो मार्गक,कोनो विचारक आ कोनो कार्यक जानकारी ओहिपर आगाँ बढ़लासँ पता चलत, ओहिपर बहस कएलासँ नहि। एकटा दोस वैह अछि जे अहाँक सभ गुण-दुर्गुणसँ अवगत रहलाक बादो अहाँकेँ पसिन्न करैत अछि। अपन ज्ञान आ अनुभवकेँ सर्वदा बाँटू आ अपन वाक्, कर्म आ निर्णयमे हरदम नम्र रहू। अहाँक मित्रक लेल जे कियो नीक शब्दक प्रयोग करै छथि तँ तकर जनतब मित्रकेँ अवश्य कराऊ। जे अहाँ बुझने सही काज छैक तकरा अवश्य करू। पहिचान बनबए लेल काज नहि करू वरन् तेहन काज करू जकरा लोक चीन्हि सकए आ मोन राखए। जीवनक पैघ-पैघ परिवर्तन बिना कोनो चेतौनीक अबैत छैक। अपन बच्चाकेँ ई सिखाऊ जे कोनो व्यक्तिक कमीकेँ कम कऽ कए नहि मूल्यांकन करए। जे कोनो काज अहाँ करै छी तकरा मोनसँ करू। कोनो नाटक खतम भेलापर थोपड़ी बजबैमे सर्वदा आगू रहू। सोचू, ओहिपर विश्वास करू, सपना देखू आ ओकरा पूर्ण करबाक साहस राखू। कथा ८ आब प्रस्तुत अछि हमर २००८-०९ मे लिखल समीक्षा जे विदेहमे ई-प्रकाशित भेल आ फेर हमर पोथी "कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक" (२००९) मे संकलित भेल। केदारनाथ चौधरीक उपन्यास- "चमेली रानी" आ "माहुर" केदारनाथ चौधरी जीक पहिल उपन्यास चमेली रानी २००४ ई. मे आएल । एहि उपन्यासक अन्त एहि तरहेँ आकर्षक रूपेँ भेल जे एकर दोसर भागक प्रबल माँग भेल आ लेखककेँ एकर दोसर भाग माहुर लिखए पड़लन्हि। धीरेन्द्रनाथ मिश्र चमेली रानीक समीक्षा करैत विद्यापति टाइम्समे लिखने रहथि- "...जेना हास्य-सम्राट हरिमोहन बाबूकेँ "कन्यादान"क पश्चात् "द्विरागमन" लिखए पड़लनि तहिना "चमेलीरानी"क दोसर भाग उपन्यासकारकेँ लिखए पड़तन्हि"। ई दुनू खण्ड कैक तरहेँ मैथिली उपन्यास लेखनमे मोन राखल जएत। एक तँ जेना रामलोचन ठाकुर जी कहैत छथि- "..पारस-प्रतिभाक एहि लेखकक पदार्पण एते विलम्बित किएक?" ई प्रश्न सत्ये अनुत्तरित अछि। लेखक अपन ऊर्जाक संग अमेरिका, ईरान आ आन ठाम पढ़ाइ-लिखाइमे लागल रहथि रोजगारमे रहथि मुदा ममता गाबए गीतक निर्माता घुमि कऽ दरभंगा अएलाह तँ अपन समस्त जीवनानुभव एहि दुनू उपन्यासमे उतारि देलन्हि। राजमोहन झासँ एकटा साक्षात्कारमे हम एहि सम्बन्धमे पुछने रहियन्हि तँ ओ कहने रहथि जे बिना जीवनानुभवक रचना संभव नहि, जिनकर जीवनानुभव जतेक विस्तृत रहतन्हि से ओतेक बेशी विभिन्नता आ नूतनता आनि सकताह। केदारनाथ चौधरीक "चमेली रानी" आ "माहुर" ई सिद्ध करैत अछि। चमेली रानी बिक्रीक एकटा नव कीर्तिमान बनेलक। मात्र जनकपुरमे एकर ५०० प्रति बिका गेल। लेखक "चमेली रानी"क समर्पण - "ओहि समग्र मैथिली प्रेमीकेँ जे अपन सम्पूर्ण जिनगीमे अपन कैंचा खर्च कऽ मैथिली-भाषाक कोनो पोथी-पत्रिका किनने होथि"- केँ करैत छथि, मुदा जखन अपार बिक्रीक बाद एहि पोथीक दोसर संस्करण २००७ मे एकर दोसर खण्ड "माहुर"क २००८ मे आबए सँ पूर्वहि निकालए पड़लन्हि, तखन दोसर भागमे समर्पण स्तंभ छोड़नाइये लेखककेँ श्रेयस्कर बुझेलन्हि। एकर एकटा विशिष्टता हमरा बुझबामे आएल २००८ केर अन्तिम कालमे, जखन हरियाणाक उपमुख्यमंत्री एक मास धरि निपत्ता रहलाह, मुदा राजनयिक विवशताक अन्तर्गत जाधरि ओ घुरि कऽ नहि अएलाह तावत हुनकापर कोनो कार्यवाही नहि कएल जा सकल। अपन गुलाब मिश्रजी तँ सेहो अही राजनीतिक विवशताक कारण निपत्ता रहलोपर गद्दीपर बैसले रहलाह्, क्यो हुनका हँटा नहि सकल। चाहे राज्यक संचालनमे कतेक झंझटि किएक नहि आएल होअए। उपन्यास-लेखकक जीवनानुभव, एकर सम्भावना चारि साल पहिनहिए लिखि कऽ राखि देलक। भविष्यवक्ता भेनाइ कोनो टोना-टापरसँ संभव नहि होइत अछि वरन् जीवनानुभव एकरा सम्भव बनबैत अछि। एहि दुनू उपन्यासक पात्र चमत्कारी छथि, आ सफल सेहो । कारण उपन्यासकार एकरा एहि ढंगसँ सृजित करैत छथि जेना सभ वस्तुक हुनका व्यक्तिगत अनुभव होइन्हि। "चमेली रानी" उपन्यासक प्रारम्भ करैत लेखक एकर पहिल परीक्षामे उत्तीर्ण होइत छथि जखन एकर लयात्मक प्रारम्भ पाठकमे रुचि उत्पन्न करैत अछि। -कीर्तिमुखक पाँच टा बेटाक नामकरणक लेल ओकर जिगरी दोस कन्टीरक विचार जे "पाँचो पाण्डव बला नाम बेटा सबहक राखि दहक। सुभिता हेतौ"। फेर एक ठाम लेखक कहैत छथि जे जतेक गतिसँ बच्चा होइत रहैक से कौरवक नाम राखए पड़ितैक। नायिका चमेली रानीक आगमन धरि कीर्तिमुखक बेटा सभक वर्णन फेर एहि क्रममे अंग्रेज डेम्सफोर्ड आ रूपकुम्मरिक सन्तान सुनयनाक विवरण अबैत अछि। फेर रूपकुम्मरिक बेटी सुनयनाक बेटी शनिचरी आ नेताजी रामठेंगा सिंह "चिनगारी"क विवाह आ नेताजी द्वारा शनिचरीकेँ कनही मोदियानि लग लोक-लाजक द्वारे राखि पटना जाएब, नेताजीक मृत्यु आ शनिचरी आ कीर्तिमुखक विवाहक वर्णन फेरसँ खिस्साकेँ समेटि लैत अछि। तकर बाद चमेली रानीक वर्णन अबैत अछि जे बरौनी रिफाइनरीक स्कूलमे बोर्डिंगमे पढ़ैत छथि आ एहि कनही मोदियानिक बेटी छथि। कनही मोदियानिक मृत्युक समय चमेली रानी दसमाक परीक्षा पास कऽ लेने छथि। भूखन सिंह चमेली रानीक धर्म पिता छथि। डकैतीक विवरणक संग उपन्यासक पहिल भाग खतम भऽ जाइत अछि। दोसर भागमे विधायकजीक पाइ आकि खजाना लुटबाक विवरण, जे कि पूर्व नियोजित छल, एहि तरहेँ देखाओल गेल अछि जेना ई विधायक नांगटनाथ द्वारा एकटा आधुनिक बालापर कएल बलात्कारक परिणामक फल रहए। आब ई नांगटनाथ रहथि मुख्यमंत्री गुलाब मिसिरक खबास जे राजनीतिक दाँवपेंचमे विधायक बनि गेलाह। ई चरित्र २००८ ई.क अरविन्द अडिगक बुकर पुरस्कारसँ सम्मानित अंग्रेजी उपन्यास "द ह्वाइट टाइगर"क बलराम हलवाइक चरित्र जे चाहक दोकानपर काज करैत दिल्लीमे एकटा धनिकक ड्राइवर बनि फेर ओकरा मारि स्वयं धनिक बनि जाइत अछि, सँ बेश मिलैत अछि आ चारि बरख पूर्व लेखक एहि चरित्रक निर्माण कऽ चुकल छथि। फेर के.जी.बी. एजेन्ट भाटाजीक आगमन होइत अछि जे उपन्यासक दोसर खण्ड "माहुर" धरि अपन उपस्थिति बेश प्रभावी रूपेँ रखबामे सफल होइत छथि। उपन्यासक तेसर भागमे अहमदुल्ला खाँक अभियान सेहो बेश रमनगर अछि आ वर्तमान राजनीतिक सभ कुरूपताकेँ समेटने अछि। उपन्यासक चारिम भाग गुलाब मिसिरक खेरहा कहैत अछि आ फेरसँ अरविन्द अडिगक बलराम हलवाइ मोन पड़ैत छथि। भुखन सिंहक संगी पन्नाकेँ गुलाब मिसिर बजबैत अछि आ ओकरा भुखन सिंहक नांगटनाथ आ अहमदुल्ला अभियानक विषयमे कहैत अछि। संगहि ओकरा मारबाक लेल कहैत अछि से ओ मना कऽ दैत छै। मुदा गुलाब मिसिर भुखन सिंहकेँ छलसँ मरबा दैत अछि। पाँचम भागमे भुखन सिंहक ट्रस्टक चरचा अछि, चमेली रानी अपन अड्डा छोड़ि बैद्यनाथ धाम चलि जाइत छथि। आब चमेली रानीक राजनीतिक महत्वाकांक्षा सोझाँ अबैत अछि। स्टिंग ऑपरेशन होइत अछि आ गुलाब मिसिर घेरा जाइत छथि। उपन्यासक छठम भाग मुख्यमंत्रीक निपत्ता रहलाक उपरान्तो मात्र फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाओल जएबाक चरचा होएबाक अछि, जे कोलिशन पोलिटिक्सक विवशतापर टिप्पणी अछि। उपन्यासक दोसर खण्ड "माहुर"क पहिल भाग सेहो घुरियाइत-घुरियाइत चमेली रानीक पार्टीक संगठनक चारू कात आबि जाइत अछि। स्त्रीपर अत्याचार, बाल-विधवा आ वैश्यावृत्तिमे ठेलबाक तेहन संगठन सभकेँ लेखक अपन टिप्पणी लेल चुनैत छथि। माहुरक दोसर भागमे गुलाब मिसिरक राजधानी पदार्पणक चरचा अछि। चमेली रानी द्वारा अपन अभियानक समर्थनमे नक्सली नेताक अड्डापर जएबाक आ एहि बहन्ने समस्त नक्सली आन्दोलनपर लेखकीय दृष्टिकोण, संगहि बोनक आ आदिवासी लोकनिक सचित्र-जीवन्त विवरण लेखकीय कौशलक प्रतीक अछि। चमेली रानी लग फेर रहस्योद्घाटन भेल जे हुनकर माए कनही मोदियाइन बड्ड पैघ घरक छथि आ हुनकर संग पटेल द्वारा अत्याचार कएल गेल, चमेली रानीक पिताक हत्या कऽ देल गेल आ बेचारी माए अपन जिनगी कनही मोदियाइन बनि निर्वाह कएलन्हि। ई सभ गप उपन्यासमे रोचकता आनि दैत अछि। माहुरक तेसर भाग फेरसँ पचकौड़ी मियाँ, गुलाब मिसिर, आइ.एस.आइ. आ के.जी.बी.क षडयन्त्रक बीच रहस्य आ रोमांच उत्पन्न करैत अछि। माहुरक चारिम भाग चमेली रानी द्वारा अपन माए-बापक संग कएल गेल अत्याचारक बदला लेबाक वर्णन दैत अछि, कैक हजार करोड़क सम्पत्ति अएलासँ चमेली रानी सम्पन्न भऽ गेलीह। माहुरक पाँचम भाग राजनैतिक दाँव-पेंच आ चमेली रानीक दलक विजयसँ खतम होइत अछि। विवेचन: उपन्यासक बुर्जुआ प्रारम्भक अछैत एहिमे एतेक जटिलता होइत अछि जे एहिमे प्रतिभाक नीक जकाँ परीक्षण होइत अछि। उपन्यास विधाक बुर्जुआ आरम्भक कारण सर्वांतीजक "डॉन क्विक्जोट", जे सत्रहम शताब्दीक प्रारम्भमे आबि गेल रहए, केर अछैत उपन्यास विधा उन्नैसम शताब्दीक आगमनसँ मात्र किछु समय पूर्व गम्भीर स्वरूप प्राप्त कऽ सकल। उपन्यासमे वाद-विवाद-सम्वादसँ उत्पन्न होइत अछि निबन्ध, युवक-युवतीक चरित्र अनैत अछि प्रेमाख्यान, लोक आ भूगोल दैत अछि वर्णन इतिहासक, आ तखन नीक- खराप चरित्रक कथा सोझाँ अबैत अछि। कखनो पाठककेँ ई हँसबैत अछि, कखनो ओकरा उपदेश दैत अछि। मार्क्सवाद उपन्यासक सामाजिक यथार्थक ओकालति करैत अछि। फ्रायड सभ मनुक्खकेँ रहस्यमयी मानैत छथि। ओ साहित्यिक कृतिकेँ साहित्यकारक विश्लेषण लेल चुनैत छथि तँ नव फ्रायडवाद जैविकक बदला सांस्कृतिक तत्वक प्रधानतापर जोर दैत देखबामे अबैत छथि। नव-समीक्षावाद कृतिक विस्तृत विवरणपर आधारित अछि। एहि सभक संग जीवनानुभव सेहो एक पक्षक होइत अछि आ तखन एतए दबाएल इच्छाक तृप्तिक लेल लेखक एकटा संसारक रचना कएलन्हि जाहिमे पाठक यथार्थ आ काल्पनिकताक बीचक आड़ि-धूरपर चलैत अछि। कथा ९ साकेतानन्द प्रकरण साकेतानन्दक १२ नवम्बर २००९ केर पोस्ट, http://saketanands.blogspot.com/2009/11/blog-post_12.html ओ लिखैत छथि: "हमरा लगैये जे जेना नेता सब के भीड,मंच आ माइक के देखिते किछु सबसबाय लगैत छै, तहिना किछु लेखको होइ छनि। कहिया कत' दू_चारि टा रचनाक की चर्चा भेलनि, बस भ' गेला स्थापित । तहिया स' जँ कोनो साहित्यिक मंच नज़रि एलनि, कि कुर्सी हथियेबालय वृतोष्मि भेटता। पटना मे मुन्नक़िद पुस्तक मेला मे नामवर संगे आलोकधन्वा के बैसल देखि लागल जे लेखन आ साहित्यक राजनीति, दुनू दू छोरक चीज छैक, जे एक संगे भैये ने सकैत अछि। मैथिलीमे एखन तक अपन मांटिक़ उदारता, अयाचीवृत्तिक छिकार छैके। एखनो बिना विचारने_सिचारने, जे ई के छापत आ कि तहू स' बढि क' जे एकरा के पढत ? लोक लिखैये, लिखिते जारहल अछि। हमरा जनैत पढैक वस्तु( कोन आ केहेन ?) भेटतै त' लोक पढबे करतै। तैं कि आब लोक 'चमेली रानी' लिखय ?" कथा १० ई कोनो कथा नै साकेतानन्द विद्वान लोक रहथि ईर्ष्यावश लिखि गेला आ से प्रतारणा हरिमोहन झाकेँ सेहो सहऽ पड़ल रहन्हि। ने हरिमोहने झा आ नहिये केदार नाथ चौधरी सुभाषित मात्र रटने छला। दत्त-चटर्जीक "इण्ट्रोडक्शन टू इण्डियन फिलोसोफी"क हिन्दी अनुवाद ओ अनुवाद-पुरस्कार लेल नै वरन् अपन दर्शनशास्त्रक प्रोफेसरशिपकेँ सिद्ध करय लेल केने छला। संस्कृतक श्लोक सभ ओ अपन पात्र खट्टर-ककाकेँ सेहो रटेने छला प्रयोगमे अन्तर मुदा भेटत। लोक मैथिली लेल अपन सर्वस्व लुटेने अछि, डॉ कल्पना मणिकान्त मिश्र आ केदारनाथ चौधरी मात्र उदाहरण छथि। लोक ठकहरबा सभसँ डेराइत अछि खास कऽ रंगमंच आ फिल्मक नामपर टण्डेली मारि रहल लोक सभसँ। भ्रमरजीक तँ सी.डी.ये लोक अपन नामसँ निकलबा लेलक। सएह हाल साहित्योमे छै। जँ उपरका कथा सभ अहाँकेँ सिहरेलक तँ समानान्तर धाराक संग चलि पड़ू आ जँ से नै तँ हमर प्रयास जारी रहत, आ तइ लेल विशेषांक सभ निकलैत रहत। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। प्रस्तुत विशेषांकक संदर्भमे नवम्बर 2021 केँ विदेह "केदारनाथ चौधरी विशेषांक" प्रकाशित करबाक सार्वजनिक घोषणा केलक आ प्रस्तुत अछि ई विशेषांक। एहि सूचनाकेँ एहि लिंकपर देखि सकैत छी-घोषणा। मैथिलीमे एकटा विचित्र स्थिति छै हिंदीसँ विचारधारा आयात करबाक। आ एहने एकटा विचार छै "गंभीरता बनाम लोकप्रियता"। हिंदी आ मैथिली छोड़ि आन भाषामे ई बेमारी नै भेटत। उर्दूमे जावेद अख्तर अपन फिल्मी डायलाग लेल, अपन फिल्मी गीत लेल सिनेमा केर पुरस्कार पाबै छथि तँ अपन गजल लेखन लेल साहित्य अकादेमी पुरस्कार सेहो। हिंदी केर नकलक कारणे मैथिलीमे ई स्थिति कहियो नै आबि सकत। वस्तुतः "गंभीरता बनाम लोकप्रियता" केर वाद किछु अगंभीर ओ अलोकप्रिय लेखक सभ द्वारा "गंभीर मुदा लोकप्रिय" लेखक केर विरुद्ध रचल षडयन्त्र छै। चंदा झा गंभीर ओ लोकप्रिय छथि तँ हरिमोहन झा सेहो। सीताराम झा होथि, किरणजी होथि वा कि मधुपजी। ई सभ गंभीर आ लोकप्रिय दूनू छथि। जे लोकनि लोकप्रियताकेँ गंभीरतासँ अलग मानै छथि तिनकर रचनाकेँ नीकसँ विवेचना करू तँ हाथमे सुन्ने-सुन्ना आएत। केदारनाथ चौधरी मैथिलीमे एहन नाम छथि जिनका लग गंभीरता सेहो छनि आ लोकप्रियता सेहो। लोकप्रियता तेहन जे हिनका छिटकी मारबाक लेल 2004 सँ धरि एखन धरि बारि देल गेल (अपवादमे प्रबोध साहित्य सम्मान ओ एक-दू स्थानीय सम्मान समारोह मानू)। एहन नै छै जे केदारजीपर लिखल नै गेलै मुदा ओ सभ एकट्ठा नै भऽ सकल छै तँइ ओकर प्रभाव हेड़ा गेल छै। एहि संदर्भमे हम कहि सकै छी जे विदेहक ई प्रस्तुत विशेषांक एहन पहिल प्रयास अछि जाहिमे ई बुझबाक प्रयास कएल अछि जे केदारनाथजीक रचना केतक गंभीर आ कतेक लोकप्रिय अछि। ई अलग बात जे हम सभ कतेक सफल वा असफल भेलहुँ से पाठक कहता। एहि विशेषांक केर शुरूआत विदेहक आने विशेषांक जकाँ नव आलोचक-समीक्षक सभहक आलेखसँ कएल जा रहल अछि। संगे-संग ई क्रम ने तँ उम्रक वरिष्ठता केर पालन करैए आ ने रचनाक गुणवत्ताक। हँ, एतेक धेआन जरूर राखल गेल छै जे पाठकक रसभंग नहि होइन आ से विश्वास अछि जे रसभंग नै हेतनि। पाठक जखन एहि विशेषांककेँ पढ़ताह तँ हुनका वर्तनी ओ मानकताक अभाव लगतनि। वर्तनीक गलती जे थिक से सोझे-सोझ हमर सभहक गलती थिक जे हम सभ संशोधन नै कऽ सकलहुँ मुदा ई धेआन रखबाक बात जे विदेह शुरुएसँ हरेक वर्तनी बला लेखककेँ स्वीकार करैत एलैए। तँइ मानकता अभाव स्वाभाविक। एकर बादो बहुत वर्तनीक गलती रहल गेल अछि जे कि हमरे सभहक गलती अछि। मैथिलीमे किछुए एहन पत्रिका अछि जकर वर्तनी एकरंगक रहैत अछि आ ई हुनक खूबी छनि मुदा जखन ओहो सभ कोनो विशेषांक निकालै छथि तखन वर्तनी तँ ठीक रहैत छनि मुदा सामग्री अधिकांशतः बसिये रहैत छनि। ऐतिहासिकताक दृष्टिसँ कोनो पुरान सामग्रीक उपयोग वर्जित नै छै मुदा सोचियौ जे 72-80 पन्नाक कोनो प्रिंट पत्रिका होइत छै ताहिमे लगभग आधा सामग्री साभार रहैत छनि, तेसर भागमे लेखक केर किछु रचना रहैत छनि आ चारिम भागमे किछु नव सामग्री रहैत छनि। मुदा हमरा लोकनि नव सामग्रीपर बेसी जोर दैत छियै। एकर मतलब ई नहि जे वर्तनीमे गलती होइत रहै। हमर कहबाक मतलब ई जे संपादक-संयोजककेँ कोनो ने कोनो स्तरपर समझौता करहे पड़ैत छै से चाहे वर्तनीक हो कि, मुद्राक हो कि विचारधारक हो कि सामग्रीक हो। हमरा लोकनि वर्तनीक स्तरपर समझौता कऽ रहल छी मुदा कारण सहित। प्रिंट पत्रिका एक बेर प्रकाशित भऽ गेलाक बाद दोबारा नै भऽ सकैए (भऽ तँ सकैए मुदा फेर पाइ लागि जेतै) तँइ ओकर वर्तनी यथाशक्ति सही रहैत छै। इंटरनेटपर सुविधा छै जे बीचमे (इंटरनेटसँ प्रिंट हेबाक अवधि) ओकरा सही कऽ सकैत छी मुदा समाग्रिए बसिया रहत तँ सही वर्तनी रहितो नव अध्याय नै खुजि सकत तँइ हमरा लोकनि वर्तनी बला मुद्दापर समझौता केलहुँ। हमरा लोकनि कएलनि, कयलनि ओ केलनि तीनू शुद्ध मानैत छी, एतेक शुद्ध मानैत छी एकै रचनामे तीनू रूप भेटि जाएत। आन शब्दक लेल एहने बूझू। उम्मेद अछि जे पाठक विदेहक आने विशेषांक जकाँ एकरा पढ़ताह आ पढ़ि एकर नीक-बेजाएपर अपन सुझाव देताह। विदेह अरविन्द ठाकुर विशेषांक केर पोथी रूप "स्वतंत्रचेता" केर नामसँ प्रकाशित भेल उम्मेद जे भविष्यमे केदारनाथ चौधरीजीपर केंद्रित एहि विशेषांक केर पोथी रूप सेहो आएत। विदेह द्वारा "जीबैत मुदा उपेक्षित" शृखंलामे प्रकाशित भेल आन विशेषांक सभहक लिस्ट एना अछि (एहिठाम जे अंकक लिस्ट देल गेल अछि ताहि अंकपर क्लिक करबै तँ ओ अंक खुजि जाएत)- 1) अरविन्द ठाकुर विशेषांक 189 म अंक 1 नवम्बर 2015 (ई विशेषांक 2020 मे पोथी रूपमे सेहो आएल अछि) 2) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक 191 म अंक 1 दिसम्बर 2015 3) रामलोचन ठाकुर विशेषांक 319म अंक 4) राजनन्दन लाल दास विशेषांक 333म अंक 5) रवीन्द्र नाथ ठाकुर विशेषांक 15 जून 2022 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। केदारनाथ चौधरीजीक संक्षिप्त परिचय एहिठाम प्रस्तुत अछि केदारनाथ चौधरीजीक संक्षिप्त परिचय। एहि परिचयक अधिकांश तथ्य अरविन्द गुप्ताजी एवं कामेश्वर चौधरीजीसँ भेटल अछि। विशेष परिचय- मैथिलीक पहिल फिल्म 'ममता गाबय गीत' केर निर्माता द्वयमेसँ एकटा निर्माता छथि केदारनाथ चौधरी आ दोसर मदनमोहन दास। बादमे आर्थिक मजबूरीवश तेसर सहनिर्माता भेलखिन उदयभानु सिंह। नाम : केदारनाथ चौधरी माता-स्व. कुसुमपरी देवी पिता- स्व. किशोरी चौधरी जन्म: 03/01/1936 ग्रा.+पत्रा. नेहरा (दरभंगा) अन्य पारिवारिक सदस्य- पत्नी-श्रीमती कुमुद चौधरी संतान- प्रथम पुत्री-श्रीमती किरण झा, द्वितीय पुत्री-श्रीमती अर्चना चौधरी शिक्षा- 1958 ई.मे अर्थशास्त्रमे स्नातकोत्तर, 1959 ई.मे लॉ। 1969 ई.मे कैलिफोर्निया वि.वि.सँ अर्थस्थास्त्र मे स्नातकोत्तर, 1971 ई.मे मार्केटिंग एंड डिस्ट्रीब्यूशन विषयमे गोल्डेन गेट यूनिवर्सिटी, सानफ्रांसिस्को, USA सँ एम.बी.ए., 1978मे भारत आगमन। 1981-86क बीच तेहरान आ प्रैंकफुर्तमे। फेर बम्बई, पुणे होइत रिटायरमेंटक बाद 2000 सँ लहेरियासराय, दरभंगामे निवास। वर्तमान पता- हिडेन कॅाटेज, बंगाली टोला, लहेरियासराय, दरभंगा-846001 लेखन /प्रकाशन (एखन धरि केदारजीक जतेक पोथी प्रकाशित भेलनि से विदेह पोथी डाउनलोडपर राखल गेल अछि आ एहिठाम जे पोथीक लिस्ट देल गेल अछि ताहिमे पोथीक नामपर क्लिक करबै तँ ओ पोथी खुजि जाएत) 1) चमेलीरानी (विधा-उपन्यास, प्रकाशन वर्ष- 2004, दोसर संस्करण-2007, प्रकाशक-इंडिका इंफोमीडिया, दिल्ली, एहि पोथीक चारिम संस्करण हेबाक सेहो सूचना अछि मुदा हम तेसर ओ चारिम संस्करण नहि देखि सकल छी) 2) करार (विधा-उपन्यास, प्रकाशन वर्ष- 2006, प्रकाशक-इंडिका इंफोमीडिया, दिल्ली) 3) माहुर (विधा-उपन्यास, प्रकाशन वर्ष- 2008, प्रकाशक-इंडिका इंफोमीडिया, दिल्ली, ई पोथी चमेली रानीक दोसर भाग छै) 4) अबारा नहितन (विधा- संस्मरणात्मक उपन्यास, प्रकाशन वर्ष- 2012, दोसर संस्करण-2013 प्रकाशक-इंडिका इंफोमीडिया, दिल्ली। ई पोथी बर्ख 2015 मे नेशनल बुक ट्रस्टसँ सेहो छपल।) 5) हीना (विधा-उपन्यास, प्रकाशन वर्ष- 2013, दोसर संस्करण-2020, प्रकाशक-इंडिका इंफोमीडिया, दिल्ली) 6) अयना (विधा-उपन्यास, प्रकाशन वर्ष- 2018, प्रकाशक-इंडिका इंफोमीडिया, दिल्ली) सम्मान- (एहिठाम जाहि सम्मानक लिस्ट देल गेल अछि ताहिमे सम्मानक नामपर क्लिक करबै तँ ओहि सम्मानक सोर्स खुजि जाएत) 1) विदेह साहित्य सम्मान, बर्ख-2013 (झारखंड मैथिली मंच, राँची द्वारा) 2) प्रबोध साहित्य सम्मान, बर्ख-2016 3) केदार सम्मान, बर्ख-2016,'अबारा नहितन' लेल 4) वर्तमानमे ललितनारायण मिथिला विश्वविद्यालयसँ तीन छात्र द्वारा केदारनाथ चौधरीजीक साहित्यपर शोधरत छथि। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। कल्पना झा, पटना इएह गूड़ खेने,कान छेदौने विदेहक सम्पादक द्वारा जखन केदारनाथ चौधरी विशेषांक निकालबाक घोषणा भेल तखन जिज्ञासा भेल जे आखिर ई कोन महान साहित्यकार छथि जनिका उपर विशेषांक निकालि रहल अछि विदेह। जिज्ञासा शान्त करबा लेल जखन हिनकर पोथी सभ पढ़ब शुरू केलहुँ तँ एकक बाद एक लगातार चमेलीरानी,करार,माहुर आ अबारा नहितन, चारि गोट उपन्यास पढ़ि गेलहुँ। पोथी सभ पढ़ि एक टा अपराध बोध सन लागए लागल,एहन उत्कृष्ट रचना सभक रचनाकारक नामसँ हम एखन धरि अनभिज्ञ छलहुँ,ताहि लेल। जखन कि 'ममता गाबए गीत' सिनेमा जकर निर्माणक कथा अछि "अबारा नहितन" से देखने छलहुँ अस्सीक दशकमे,प्रायः १९८३वा १९८४मे। मुदा निर्माताक नामसँ अनभिज्ञ छलहुँ। दस-बारह बरखक बएसमे ओतबा उहि नहि रहैत छै लोककेँ जे सिनेमाक निर्माता-निर्देशकक जनतब भेटैक। ताहि दिन परदाक पाछाँक लोक ततेक चर्चामे रहितो नहि छल। एहन रोचक उपन्यास सभक रचयिताक नाम पर्यन्त नहि सुनल छल हमरा,जखन कि हम अपनाकेँ साहित्य प्रेमी लोक बुझैत रहल छलहुँ,नहि जानि कोना,किएक? मैथिली साहित्य माने महाकवि विद्यापति, हरिमोहन झा, यात्रीजी,मधुप जी,किरण जी,उपेन्द्रनाथ झा'व्यास'जी,लिली रे, प्रभास कुमार चौधरी,राजकमल,ललित,एतबे सुनल/बूझल छल। माने किछु साहित्य अकादमी विजेता साहित्यकारक नामसँ आ हुनकर कृत्य सभसँ अवगत छलहुँ,बस। केहन कूपमंडूकता छल,आब सोशलमीडियाक कृपासँ घर बैसल दुनिआँ देखि/सुनि रहल छी,तेहेन सन लागैए।निश्चित रूपसँ इंटरनेट एक अत्यन्त उपयोगी आविष्कार अछि विज्ञानक। केदारनाथ चौधरी जीकेँ मैट्रिकसँ एम ए धरिक अध्ययन कालमे जे मैथिली प्रेम रोग लगलनि, हुनक ओहि मैथिली प्रेम रोगकेँ जँ मैथिल समाजसँ समुचित सहयोग भेटितनि,उत्साहवर्धन कएनिहार लोक भेटितनि तँ मैथिल समाज, मैथिली भाषाक कतेक उत्थान भेल रहैत। मुदा मैथिल समाजक असहयोगी प्रवृत्तिक कारणेँ एक टा प्रतिभासंपन्न व्यक्तित्व 'हिडेन कॉटेज'क सीमारेखामे सीमित भ' क' रहि गेलाह। हुनक व्यथित मोन मैथिल लोक आ मैथिल समाजसँ विरक्त सन भए गेल हेतनि,तेहेन सन लागैत अछि।ओ मैथिली प्रेमी तन मन धन लगा देलनि मैथिली सिनेमा "ममता गाबए गीत"क निर्माणमे,आ बदलामे हुनका प्रोत्साहन, सराहना ओ प्रशंसाक जगहपर बस संघर्ष, हतोत्साह टा भेटलनि। "अबारा नहितन" पोथीक माध्यमसँ अपन संघर्षक एहन रोचक विवरण देलनि अछि,जे एकहु क्षण लेल पाठकक मोन दिक नहि भ' सकैत अछि,जे ई की अपन दुखनामा लिखि क' प्रकाशित करा लेलनि अछि लेखक। संस्मरणात्मक उपन्यास रहितहुँ, एहि उपन्यासमे सभ तत्वक समावेश अछि,जे एक टा उपन्यास विधाक रिक्वायरमेंट होइत छै। माने गामसँ ल' क' शहर धरिक सामाजिक परिस्थितिक चित्रण,ओहि समयक राजनीतिक परिस्थिति,गाम घरक आपसी वैमनस्यता, कुटचालि,भ्रष्टाचार, चीन ओ पाकिस्तान द्वारा भारतपर आक्रमणक चर्चा,प्रवासी मैथिल समाजक दृष्टिकोण अपन मिथिला-मैथिली लेल,सभ टा समटैत अपन व्यथा कथा कहने छथि आ रोचक ढंगसँ कहने छथि। अपन मैथिली प्रेम रोगक चर्चा कतेक सहज,सरल रूपेँ कएलनि अछि लेखक,से एहि छोट सन अंशमे देखल जा सकैछ-"रोगक नाम भेल मैथिली प्रेम रोग।अपन व्यथाक विवरण दिअ पड़त।अहाँकेँ हमर व्यथा राग केहन लागल तकर चिंता हमरा कनिकबो नहि अछि। हमर मोनक संताप अबस्से कम भ' जाएत तैँ हमरा बड़बड़ाए दिअ।" अपन मोनक संताप कम करबाक क्रममे एहन उत्कृष्ट पोथी पाठकक सोझाँपरसब साधारण गप्प नहि। "अबारा नहितन" उपन्यास पढ़ि जे त्वरित प्रतिक्रिया हमर छल, जे हम मोने मोन बड़बडेलहुँ, "अरे ! एक टा फिल्म तँ एहि पोथीक कथानकपर सेहो बनि सकैत अछि।" 'ममता गाबए गीत' फिल्म बनेबाक क्रममे फिल्मक निर्माताद्वय केदारनाथ चौधरी आ महंथ मदन मोहन दास द्वारा भोगल एहि व्यथा-कथापर 'सुपरहिट' फिल्म बनि सकैत अछि । ई गप्प हम हास्य-विनोदमे नहि,गंभीरतासँ कहि रहल छी। एहि फिल्मक नाम "इएह गूड़ खेने कान छेदौने" राखल जेबाक चाही। हमर अनुमाने टा नहि,पूर्ण विश्वास अछि जे एहि फिल्मकेँ 'ममता गाबए गीत' फिल्मसँ बेसी पसिन करताह मैथिली-प्रेमी दर्शक।कारण एहिमे जे लिखल अछि से यथार्थ अछि,काल्पनिक किछु नहि। आ सत्य घटनापर आधारित,रियल हीरो बला कथापर बनल फिल्म बेसी पसिन कएल जा रहल अछि,एखनुक समयमे। चाहे ओ कोनो व्यक्तिक जीवनपर आधारित होअए किंवा कोनो ऐतिहासिक घटनापर। मैथिल समाजक सर्वश्रेष्ठ उपाधि "अबारा नहितन" ग्रहण क' आ अपन मान-सम्मान एवं अभिमानकेँ थुर्री-थुर्री होइत देखि,जखन लेखक आ हुनकर मित्र मदन भाइ कलकत्तासँ आपस दरभंगा एबाक निश्चय केलनि,तखन निश्चित इएह फकड़ा मोनमे आएल हेतनि "इएह गूड़ खेने,कान छेदौने।" जखन कि मैथिली भाषामे फिल्म बना क' लाभ होएत, यश भेटत आकी मैथिल समुदायक बीच प्रशंसाक पात्र बनब,ताहि दिश हिनका लोकनिक ध्यान गेले नहि रहनि।मात्र मैथिली भाषाक रक्षार्थ फिल्म बनेबाक आयोजन कएने रहथि,जेना कि लेखक लिखलनि अछि एहि उपन्यासमे। एहि पोथीमे मैथिलीक पहिल सिनेमाक निर्माण-यात्राक बहन्ने मैथिल समाजमे यत्र-तत्र उपलब्ध पंडित, बुधिआर,बुद्धिजीवी,विद्वान, जे कहल जाए,तनिकर सभक मानसिकताक सटीक आ निर्भीक चित्रण सेहो कएल गेल अछि। उपन्यासक मुख्य पात्र महंथ मदन मोहन दास जीक मुहेँ कहल गेल वक्तव्य देखल जा सकैछ-"मिथिलामे पंडित छथि,बुधिआर छथि,बुद्धिजीवी छथि,मुदा सभटा विद्वान एकटा खास संभ्रांत जातिक छथि। सभहक दुआरिपर अहंकारक माला टाँगल छनि। ओ भाषण देबामे कुशल छथि, कविता कर'मे निपुण छथि, कथा लिख'मे पटु छथि आ आन आन गुणसँ सेहो विभूषित छथि। मुदा तमाम पंडितक बीच प्रतिस्पर्धा छनि। कियो किनकोसँ छोट नहि।सभटा पंडितकेँ एक मंचपर आनब असंभव। एक दोसराक आलोचना करैत करैत अपन अपन अलग अलग मंडली बना क' अपन भितरका इर्खाक पूजे टा क' रहल छथि। आब विचारियौ जे एहि ठामक पंडितक एहन स्वभाव किएक छनि।एकर जवाब अछि जे अत्यधिक संस्कारी,अत्यधिक पांडित्य एहन विरल स्वभावकेँ जन्म दैत अछि। वशिष्ठ एवं विश्वामित्र दुनूक तर्क वितर्क आ एक दोसराकेँ पछाड़ैक जन्मजात प्रवृत्ति। तकरे प्रतिफल अछि जे सभटा पंडित अपन अपन अहंकारक ओढ़नामे नुकाएल छथि। मिथिलाक पांडित्य फूल नहि काँट बनि गेलैए। ई काँट जाबे तक अगिला पाँतमे बनल रहतैक,विद्यापति समारोह होइत रहतैक। मुदा मिथिलाक सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक प्रगतिमे मुख्यतः की बाधक छैक, तकर सही सही जानकारी कहियो नहि भेटतै।" मिथिलाक महान तथाकथित हाइप्रोफाइल व्यक्तित्वक मानसिकताक विश्लेषण करैत एकटा दोसर प्रसंग सेहो मोन पड़ैए। बंबइमे फिल्म "ममता गाबए गीत" लेल वितरकक खोजमे अपसिआँत भेल लेखक,मदन मोहन जी आ भानु बाबूक पाला जखन पड़ैत छनि इनकम टैक्स महकमाक कमीश्नर साहबसँ। महाराष्ट्र सरकारमे चीफ ड्रग कंट्रोलर जीक नाम लैते देरी हुनकर मिजाजक पलटी मारब,महान मैथिलक प्रतिद्वंद्विताक पोल खोलैत प्रकरण अछि। दू गोट महान मैथिल आत्मा, एक दोसराक एहन प्रतिद्वंद्वी ? दुखद अछि ई स्थिति। एहि प्रतिद्वंदिताक फेरामे प्रवासी मैथिल दू खेमामे बँटि जाइत अछि। दुनू महान मैथिलक माथपर सोनाक पाग। सोनाक पागमे कलयुगक वास। कलयुगक सिपहसलार भेल अहंकार। अहंकारक पुत्रवधू भेलीह इर्खा। तोरासँ हम कोन बातमे छोट। तोँ बड़ पैघ, तँ सड़ अपन घरमे। दू फाँक भेल मैथिल समुदायक एकहि टा कार्यक्रम छलै। अपन भाषा अर्थात मैथिली भाषामे एक दोसराकेँ गाड़ि पढ़ब।जे होउक,तन-मन-धनसँ बनाएल मैथिलीक पहिल फिल्म "ममता गाबए गीत" प्रवासी मैथिल महासंघक दू फाँक भेल चक्कीमे पिसा गेलनि। एहन भयावह स्थितिमे केहनो मैथिली प्रेमी, मैथिल समाजक उपकार लेल कोनो काज करबाक सहास कोना क' सकताह। तैँ बेर बेर लेखक अपन कपारकेँ कोसैत सन चर्चा करैत छथि अपन मैथिली प्रेम रोगक। एहन सन जेना मति मारल गेल छलनि जे ई असाध्य रोग लगलनि। लेखकक शब्दसँ स्पष्ट बुझबामे आबि रहलए,जे मैथिली प्रेम रोगसँ ग्रसित होएब,दुर्भाग्यक गप्प-"सरल चित्त एवं मैथिली भाषालेल पूर्णत: समर्पित दीपक जीक सम्पर्कमे रहैत रहैत हमरा मैथिली प्रेम रोग नीक जकाँ जकड़ि लेलक। वयसक संग रोगमे विस्तार होइत गेल।" ई मैथिली प्रेम रोग सौभाग्यक गप्प बनि सकैत छलनि, जँ समाजक प्रतिष्ठित, बुद्धिजीवी, बुधिआर लोकसँ, एहन मैथिली प्रेम रोगीकेँ उचित मान सम्मान आ समर्थन भेटितनि। मुदा एकरा विडम्बने कहल जा सकैछ जे लेखकक मैथिली प्रेम,हुनका मात्र दर्दे टा देलकनि। हुनकर दर्द शब्दक माध्यमसँ कोना बहराएल छनि से देखल जाए - "मैथिली प्रेम रोगक संबंध कोनो लेन-देन,नफा-नोकसानसँ नहि,मात्र हृदयक ओहि तन्तुसँ छैक जतए केवल दर्द छैक। दर्दमे पीड़ामे रोगी फुइस नहि बाजैत अछि।" मैथिली साहित्यिक जगतमे व्याप्त अराजक स्थितिक भयावहताक चर्चा एहि पोथीक एक टा प्रसंगमे हिन्दी साहित्यक सफल ओ प्रभावशाली लेखक फणीश्वरनाथ रेणु जीक वक्तव्यक माध्यमसँ राखल गेल अछि,जखन "ममता गाबए गीत" फिल्मक म्युजिक डाइरेक्टर श्याम शर्मा लेखककेँ कहैत छथिन, "मुहूर्त त' काल्हि होएत। आजुक काज शेष भ' गेलए। की हर्ज हमसभ फणीश्वरनाथ रेणुसँ भेंट करए चली ? हुनका कल्हुका मुहूर्तक निमंत्रण देबनि आ थोड़ेक गप्प-सप्प सेहो करब।" रेणु जी गप्पक क्रममे कहैत छथिन, "हमहूँ मिथिलेक छी आ हमरो मातृभाषा मैथिलीए अछि। नेनामे हम जखन नेपालक विराटनगरमे रहैत रही,तखन मैथिली भाषामे कइएक-टा कथा लिखने छलहुँ। मुदा मैथिली भाषाक क्षेत्र सकुचल ,समटल आ एक विशेष जातिक एकाधिकारमे। अपने लिखू,अपने पढ़ू।श्रोताक अभाव,खैर छोड़ू ओहि प्रसंगकेँ। समय बदललैए आ आब मैथिली भाषामे फिल्म बनि रहलैए,ई हमरा प्रसन्न क' रहलए।" (पृष्ठ संख्या-८१) उपन्यास पढ़ैत काल फणीश्वरनाथ जीक उपर्युक्त वक्तव्य पढ़ि हम सोचमे पड़ि गेलहुँ, माने मैथिली साहित्यक ई स्थिति १९६३-६४ ई.सँ एखन धरि,एकहि रंग रहि गेल।अपने लिखू,अपने पढ़ू बला स्थितिमे कोनो बहुत बेसी सुधार नहिए सन बुझना जाइत अछि। मैथिली पोथीक उपलब्धताक समस्याक चर्चा सेहो आएल अछि,माने पोथी-पत्रिकाक वितरणक समुचित व्यवस्था, व्यवस्थित नहि रहलाक कारण सेहो पाठक धरि नहि पहुँचि पाबैत अछि पोथी सभ। ओना आब ऑनलाइन उपलब्ध होमए लागल अछि, तथापि ऑनलाइन ऑर्डर ओतबा सहज नै बुझाइत छै बहुत लोककेँ। गामे-गाम,शहरे-शहर एक टा सुनिश्चित स्थानपर मैथिली पोथीक उपलब्धता एखनो धरि नहिए भेल अछि। पता लगाबए पड़ैत छै, जे फलाँ पोथी कतए उपलब्ध भ' सकैए। ओना किनबाक इच्छा रहतनि पाठककेँ,तँ पातालोसँ ताकि लेताह मुदा पोथी कीनि क' नहि पढ़बाक बेमारी सेहो सभदिना रहलनि,मैथिल समाजक लोककेँ। उपन्यासमे एकर चर्चा सेहो भेल अछि।देखल जाए-"कका कहलनि-कैंचा खर्च क' पत्रिका किननिहार धरतीक एहि भागमे कियो नहि भेटतौ,तेँ हम पत्रिका बेचै नहि छी,बिलहै छी। एक-दू दिनक बाद पत्रिकाक मूल्य नेताजीकेँ पहुँचा दैत छियनि। इहो कहि आबैत छियनि,जे पत्रिका हाथे हाथ बिका गेल।" स्थिति एखनो नहि बदलल अछि।मैथिली भाषाक पत्रिका एखनहु अहिना बिलहल जाइत अछि,बहुत ठाम। पत्रिका बिलहि, प्रकाशककेँ वितरक पाइ पहुँचा दैत छथि,ई कहि जे पत्रिका बिका गेल। मैथिली भाषाक ई स्थिति दुखद। एहि भाषाक अपन लिपि छै,अपन व्याकरण छै आ सभसँ पैघ विद्यापति सन महान कविक आशीर्वाद छैक। मैथिली भाषाकेँ ई सामर्थ्य छैक जे ओ मिथिलाक संस्कृति, सभ्यता एवंपरम्पराकेँ अक्षुण्ण राखि सकैत अछि। मुदा ई वाक्पटुतासँ नहि कर्तव्यपटुतासँ संभव होएत। मैथिल आ मिथिलासँ जेना मोन टूटि गेल छनि लेखककेँ, तकर कारण सेहो छै। एकठाम लेखक कहैत छथि,"मिथिलामे बहुत तरहक गुण छैक,जाहिमे प्रधान अछि आलस्यक साम्राज्य। एतुक्का समस्याक निदान लेल विष्णुकेँ नहि,महादेवकेँ अवतार लिअ' पड़तनि।तांडव नृत्य कर' पड़तनि।" पोथीमे कतेको ठाम मिथिलाक दुर्गुण सभकेँ निस्संकोच देखार करैत प्रसंग सभ आएल अछि। भिन्न भिन्न पात्रक चरित्र चित्रण करैत मैथिल लोक सभक निम्नस्तरीय मानसिकताकेँ देखार कएल गेल अछि। बेसी लोक अपन स्वार्थ सिद्धिमे लागल अछि,जे दुर्भाग्यपूर्ण। कलकत्तामे "ममता गाबए गीत" फिल्मक वितरक ताकबाक क्रममे लेखकक सामना भेलनि मैथिली-सेवामे लागल तृप्ति नारायण उपाध्याय उर्फ तिरपित बाबूसँ। विचित्र कैरेक्टर मुदा एहन लोकसँ निश्चित भेंट भेल होएत, सभकेँ अपन जीवनमे। लेखकक शब्दमे देखल जाए,"अछिंजलसँ धोअल तिरपित बाबूक मुखमंडलसँ सज्जनताक आभा प्रस्फुटित भ' रहल छल। हुनक जीवनक एकमात्र उद्देश्य रहनि मिथिला- मैथिलीक कोनो तरहक सेवाक काज होइ, अपन सर्वस्व न्योछावर क' ओहि पुनीत काजमे योगदान करब। फिल्मक सभ टा समस्याकेँ जड़िसँ समाप्त क' देब, तकर वचन दैत छी।" तिरपित बाबू जाहि तरहेँ गणेश टॉकिजक व्यवस्था करबाक नामपर साठि रुपैया आ प्रोजेक्टर चलबै बला लेल दू बंडिल बीड़ी लेल पाइ ठकि अन्तर्धान भ' गेलाह,से हास्यास्पद, संगहि दुखद सेहो। एतबे नहि,मैथिली भाषामे बनल फिल्मक प्रलोभन द' ओ बहुतोसँ बहुत किछु ठकने हेताह,से अनुमान छलनि बाबू साहेब चौधरीक। बाबू साहेब चौधरी, जे वास्तवमे निर्लोभ, निर्भीक आ मिथिला-मैथिली लेल समर्पित लोक छलाह,मैथिली भाषा ओ मैथिलपरम्पराकेँ अक्षुण्ण रखबा लेल प्रतिबद्ध लोक।लेखक द्वारा देल बाबू साहेब चौधरीक परिचयक हिसाबसँ। बाबू साहेब चौधरीक सहयोगी स्वभाव आ मैथिली साहित्यकार लोकनिक असहयोगी प्रवृत्तिक चित्रण बड़ा बेजोड़ केलनि अछि लेखक। शब्द संयोजन देखबा योग्य। देखल जाए- "सरल हृदय बाबू साहेब चौधरी, हमरा दुनूक मदति लेल अधीर छलाह। ताहि क्रममे ओ मैथिली भाषाक अनेक नव-पुरान,छोट-पैघ, मोट-पातर कवि,कथाकार, नाटककार,आलोचक, समालोचकसँ भेंट करौलनि। मुदा सभ टा साहित्यकार अपन अपन व्यथासँ व्यथित छलाह। हुनकर सभक निजक वेदन ततेक गहींर छलनि जे हम सभ "ममता गाबए गीत" फिल्मक समस्याकेँ कात टारि हुनके दुखमे सहानुभूतिक बर्खा करैत करैत सभसँ पिण्ड छौड़ौलहुँ।" शब्द संयोजनक चमत्कार बहुत ठाम देखबालेल भेटल। सभहक चर्चा करब संभव नहि मुदा जे एकदम स्मरण भ' गेल अछि,से एकाध टा कथ्यक चर्चा हम अवश्य करब। एकटा कथ्य अछि, " संवादक डब कएल जा सकैए मुदा सुन्दरताक डब करब संभव नहि छैक।" ई बात मदन भाइ कहलनि अछि,लेखककेँ।जखन "ममता गाबए गीत" फिल्मक कलाकारक चयन करबाक क्रममे मुख्य हिरोइनक रूपमे अजराक चयनपर विचार भ' रहल छलनि,दुनू मित्रक बीच। अजराकेँ साइन करब फिल्मक बजटपर भारी पड़त,तकर प्रतिक्रियामे उपरोक्त बात कहल गेल छल। तहिना लाख टाकाक एकटा गप्प कहल गेल अछि लेखक द्वारा, "प्रत्येक व्यक्तिक हृदय कूपमे रचनात्मक उर्जा भरल रहैत छैक।एकर प्रगटीकरण अथवा स्पष्टीकरण समयानुकूल होइत छैक।" एहि उपन्यासक सभ पात्र एहन-एहन छथि, जेहन चरित्रक व्यक्तिसँ प्रत्येक मनुष्यक सामना भेल हेतनि जीवनमे। कहबाक माने, लोक रिलेट क' पाबैत अछि, कथाक पात्र सभसँ।चाहे ओ लेखकक मित्र शिवकांत होइथ किंवा महंथ मदन मोहन दास सन धीर गम्भीर लोक।विदुर नीतिक अनुगमन कएनहार लेखकक मैट्रिक फेल छोटका कका, बाबू शारदाकान्त चौधरी उर्फ कौआली बाबू होइथ वा लोअर फेल फकिरनाक छोटका नेना कंटिरबा। शिवकान्तक मामा चतुरभुज लाल दास,गामक भगिनमान टने झा,बौआ अर्थात बाबू नारायण चौधरी, फुद्दी कका, मैथिली भाषा लेल पूर्णत: समर्पित दीपक जी, बैद्यनाथ बाबू,मिस्टर टमाटर जी,भानु बाबू,जनिकर अन्तरात्मामे किछु विचार, स्वयं हीरो बनी, प्रायः पहिनेसँ संचित रहनि,जे अनुकूल समय देखि मुखरित भ' गेलनि। कलकत्तामे फिल्मक वितरक ताकबाक क्रममे सेहो रंग- रंगक लोकसँ सामना भेलनि लेखक आ हुनकरपरम मित्र मदन भाइकेँ। तिरपित बाबू, बाबू साहेब चौधरी,रतन बाबू,कलकत्ता विश्वविद्यालयक विख्यात प्राध्यापक, हुनक पत्नी, सखा जी, बिड़ला जी माने छोटका बिड़ला जी, जे लेखक आ हुनकर मित्रकेँ "अबारा नहितन"क उपाधिसँ विभूषित केलथिन। संगहि फिल्मक कलाकार आ साउंड इंजीनियर, लाइटमैन सभकेँ मिला, कुल साठि-पैंसठि गोटाक टीम। माने असंख्य पात्रक समावेशसँ तैयार भेल ई उपन्यास विविध रंगक रस,स्वादसँ परिपूर्ण अछि। एतेक रास पात्र रहितो,कतहु कोनो पात्रक परिचय वा गुणगाम/निन्दा करैत लेखक बहुत शब्द खर्च नहि केने छथि। माने अनेरे पन्नाक पन्ना नहि भरने छथि। सीमित शब्दमे अपन बात स्पष्ट करैत, एक टा रोचक पोथी पाठकक समक्ष प्रस्तुत करबालेल लेखक साधुवादक पात्र छथि। एकठाम लेखक कहलनि अछि,"कमलनाथक प्रशंसामे हम किछु पाँती आरो खर्च करब।" तहिना फिल्मक गीतकार रवीन्द्र नाथ ठाकुर जीक गुणगानमे सेहो सीमित शब्दक प्रयोग करैत गीतकारक असीमित गुणक वर्णन क' देलनि अछि। माने शब्द आ पाँती बहुत संयमित तरीकासँ खर्च कएल गेल अछि, जे पोथीकेँ उबाउ नहि होमए देने अछि। एहि बातक जतेक सराहना कएल जाए,कम अछि। मैथिली प्रेम रोगसँ वशीभूत भ' मैथिली फिल्म निर्माणक डेग उठाएब बहुत सहासक काज छलनि लेखकक मुदा फिल्म निर्माण एवं फिल्म वितरणक पर्याप्त जानकारीक बिना अति उत्साहमे आबि फिल्म निर्माण प्रारम्भ करब एकटा व्यावहारिक त्रुटि भेलनि लेखकक। जकर नोकसान डेग डेगपर उठबए पड़लनि फिल्मक निर्माताद्वयकेँ। आरम्भमे फिल्मक बजट चालीस हजारक बनल छलनि,आ फिल्म निर्माणक अन्तकाल धरि बजट चालीस हजारपर ठाढ़े छलनि। येन केन प्रकारेँ मैथिली भाषाक फिल्म बनिओ गेलनि, तकर बात वितरक ताकैमे नौ डिबिया तेल जराबए पड़लनि आ वितरक नहिए भेटलनि। "अबारा नहितन" पोथीक कथानक,शिल्प वा भाषाक गप्प करी, तँ हम ताकैत रहि गेलहुँ, मुदा त्रुटि तेहेन किछु भेटल नहि हमरा। बस कतहु कतहु वर्तनीक समस्या जेना- कतहु करता,कतहु करताह। कतहु छल,कतहु छलै। कतहु छै,कतहु छैक। कतहु छला,कतहु छलाह, एहन किछु किछु मामूली सन त्रुटि देखाइ पड़ल, सएह टा। एकटा अनुत्तरित प्रश्न जे लेखक एहि पोथीक अन्तमे रखने छथि पाठकक सोझाँ,से झकझोरए बला अछि, "फिल्म पूरा बनि गेलै तकर सूचना पाबि हमरा दुख नहि प्रसन्नता भेल छल। मुदा एकटा जिज्ञासा मोनमे रहिए गेल रहए। की हम आ मदन भाइ मैथिल समाजमे अपरिचितसँ परिचित भेलहुँ? जवाबक प्रतीक्षामे मदन भाइ संसार त्यागि बिदा भ' गेला। मुदा हम एखन तक प्रतीक्षामे जीविते घुमि- फिरि रहल छी।" मुदा मैथिल समाज लेल धनि सन। २०१२ ई.मे एहि पोथीक प्रथम संस्करण प्रकाशित भेल अछि। एहि दस बर्खमे लेखकक प्रश्नपर केओ कान-बात धरएबला नहि भेलनि, से दुखद। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। निर्मला कर्ण- राँची,झारखण्ड केदारनाथ चौधरी व्यक्तित्व एवं कृतित्व
केदारनाथ चौधरी जी मैथिली भाषाक प्रसिद्ध उपन्यासकार छथि । हिनका मैथिली उपन्यास जगत के श्लाका पुरुष कहल जाइत छनि l ई अपन कृति क आधार लोकभाषा के बनौलनि l यैह कारण अछि जे हिनक उपन्यास के पात्र आत्मा में बसि जाइत अछि । हिनक उपन्यास नव पीढ़ी के सेहो आकर्षित करैत अछि। केदारबाबू अपन रोचक उपन्यासक लेल प्रसिद्ध छथि l हिनक उपन्यास एक बेर पढ़नाई प्रारम्भ केला उपरांत बिना समाप्त केने छोड़नाई असंभव होइत अछि पाठक केँ l केदारनाथ चौधरी जीक जन्म 3 जनवरी 1936 ई. केँ नेहरा,जिला दरभंगा में भेल। 1958 ई.मे अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर, आ 1959 ई.मे लॉ केलथि ।अपन पूरा जीवन केदार बाबू प्रबंधन के क्षेत्र में कार्य केलथि l 1969 ई.मे अपने पुनः कैलिफोर्निया वि.वि.सँs अर्थस्थास्त्र मे स्नातकोत्तर,1971 ई.मे सैन फ्रांसिस्को वि.वि.सँ एम.बी.ए. केलहुँ l एकर पश्चात् 1978 में भारत आगमन भेलनि । सन् 1981-86 के मध्य तेहरान आ प्रैंकफर्ट में रहलथि । फेर मुम्बई,पुणे होइत 2000 सँ लहेरियासराय में निवास भेलनि । आ.केदारनाथ चौधरी लगभग सत्तर वर्षक उम्र में लेखन प्रारम्भ केलथि l हिनक साहित्य जगत में पदार्पण 2004 में प्रकाशित उपन्यास "चमेली रानी" सs भेलनि। हिनक लिखल चमेलीरानी,आयना,माहुर,हीना,करार, आवारा नहितन पढ़वाक सौभाग्य भेटल l हिनक उपन्यासक विशेषता शुद्ध मैथिली भाषाक प्रयोग एवं रोचकता,सँगहि भाषा में प्रवाह अछि l हिनक उपन्यास पढ़वा काल बुझना जाइत अछि जेना मिथिलांचल में भ्रमण कs रहल छी l वैह वातावरण,वैह संस्कृति,वैह मिथिलांचलक बात व्यवहार,आँखिक समक्ष आबि जाइत अछि l हिनक उपन्यास पर हिनक विचारधाराक छाप स्पष्ट बुझाएत l सब चरित्रक बीच बुझाएत जेना केदार बाबू अपने होथि l मैथिली भाषाक प्रचार-प्रसार हेतु भागीरथ प्रयास केलथि केदार बाबू l मैथिली फिल्म "ममता गाबय गीत" के निर्माण ओकर एकटा स्तम्भ रहल l "ममता गाबय गीत" के निर्माण सन् 1966 में भेल जेकर मदनमोहन दास आ उदयभानु सिंहक संग सह निर्माता छलाह केदार बाबू l हिनक उपन्यास "आवारा नहितन" एक तरह सs प्रस्तावना अछि फिल्म "ममता गाबय गीत" के l "ममता गाबय गीत" के निर्माण कोना भेल वैह पूरा कथा पुस्तक में अत्यंत रोचक ढँग सँs वर्णित भेल अछि l किनका सँs संवाद-विचार कs हिनक मैथिली के प्रति स्नेह-भाव बढ़लनि,किनका द्वारा हिनक भाषा प्रेम में उन्नति भेलनि तेकर विशद वर्णन "आवारा नहितन" में भेल अछि l वर्ष 2016 के लेल मैथिली भाषा'क सर्वोच्च साहित्यिक पुरस्कार 'प्रबोध साहित्य सम्मान" हिनका भेटलनि l शांति निकेतन के प्रोफेसर डॉ. उदय नारायण सिंह नचिकेता जीक अध्यक्षता में गठित दस सदस्यीय निर्णायक मन्डली हिनक नामक चयन केने रहथिन। मैथिली आंदोलन के अग्रणी नेता प्रबोध नारायण सिंह के नाम पर ई सम्मान 2004 सँ देल जाइत अछि l वर्ष 2016 में केदारनाथ चौधरी जी के हुनक रचना "आवारा नहितन" के लेल "केदार सम्मान" सँs पुरस्कृत कएल गेलनि l "केदार सम्मान" प्रगतिशील हिंदी कविता के शीर्षस्थ कवि केदारनाथ अग्रवाल जीक स्मृति में केदार शोध पीठ के द्वारा देल जाइत अछि l ई सम्मान प्रति वर्ष भेटय बला एक प्रमुख साहित्यिक सम्मान अछि l ई साहित्य सम्मान सृजनक उत्कृष्टता केँ रेखांकित करवा हेतु केदारनाथ अग्रवाल जी क परम्परा में लोकतांत्रिक, प्रगतिशील, आधुनिक, विवेकसम्मत, वैज्ञानिक चिंतन के पक्षधर, सृजनकार के प्रदान कएल जाइत अछि l केदारबाबू अपन उपन्यासक द्वारा सदिखन स्मृति में रहताह l हिनक उपन्यासक सृजन नव पीढ़ी के दृष्टिगत राखि कएल गेल अछि l केदारबाबू अपन उपन्यासक द्वारा मैथिली साहित्य के नव दिशा देलनि l यैह कारण अछि जे "प्रबोध सम्मान" सँs सम्मानित हिनक कृतिक पुन: प्रकाशन नेशनल बुक ट्रस्ट सँs भs रहल अछि l ई मैथिली साहित्य एवं सम्पूर्ण मिथिलाञ्चलक हेतु गौरवक विषय अछि l ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। आभा झा, दिल्ली प्रेमक अद्वैतक अद्भुत आख्यान -हीना आइ व्यावसायिकताक एहि युगमे जखन सभ मानवीय भावना लेन-देनक बटखरा पर जोखल जा रहल अछि, रक्त-सम्बन्धोक पवित्रता धोखरिक' बेदरंग भए गेल अछि, वैवाहिक संबंध प्रेमक नहिॅं, आर्थिक- सामाजिक- समृद्धिक नेओं(नींव) पर ठाढ़ कएल जा रहल अछि,निष्काम मैत्री आ निःस्वार्थ सम्बन्धक गप मात्र पोथीक शोभा बनिक' रहि गेल छैक, ओहेन समयमे श्री केदारनाथ चौधरीजीक 'हीना' नामक उपन्यास पढ़ब हृदयकेँ एकटा सुखद अनुभूति आओर आत्मिक आनन्दसँ भरि दैत अछि। वस्तुत: साहित्यकार समाजक सृष्टि आ स्रष्टा दूहू होइत अछि।ओकरा जेहन दुनियां रुचै छै,ओहने दुनियांक सृजन ओ साहित्यक माध्यमसॅं करैत अछि आ एहि तरहेँ ओ समाजक सोझां एकटा उदाहरण सेहो रखैत अछि। संभवतः लेखकक हृदयकेँ समंधक नाम पर भ' रहल वणिग् वृत्ति औंटैत होनि,प्रेमक नाम पर मांसलताक प्रसार विरक्त करैत होनि अथवा जाति-धर्मक सिक्कड़िमे कुहरैत घाहिल प्रेमक पीड़ा विह्वल बनबैत होनि, फलस्वरूप ओ कल्पनाक यान पर चढ़ि सात्विक, निर्मल, परस्पर नितान्त समर्पित सिनेहक यात्रा करबा आ करयबा लेल प्रस्तुत भेल होथि।अस्तु! 'हीना'क(हिना) शाब्दिक अर्थ होइत छैक मेंहदी। मेंहदी आ प्रेमक तुलना अत्यन्त स्वाभाविक- पीसैत कालहुमे मेंहदीक सुगन्धि वातावरणमे पसरि जाइत छैक,मेंहदी जकाँ प्रेमोक रंग धीरे धीरे चढ़ैत प्रगाढ़ होइत छैक। ओएह मेंहदी जखन हाथ पर रचाओल जाइत छैक,हाथक शोभा अद्वितीय भए जाइत छैक ,तहिना प्रेमक अनुभूति आ आस्वाद जीवनकेँ सुन्दर बनबैत छैक,परमानन्दक भूमिमे ल' जाइत छैक। केदारनाथ चौधरीजीक एहि उपन्यासक भावभूमि शाश्वत, निर्मल, निष्काम प्रेम थिक जे भौगोलिक- सांस्कृतिक - धार्मिक परिधिसॅं मुक्त पल्लवित- पुष्पित होइत अछि आओर अपन सौंदर्य आ सुवाससॅं समाजमे सकारात्मक परिवर्तन अनबामे सफल होइत अछि ।किन्तु प्रेमक बाट कतौ आसान भेलै अछि? बिनु तपस्यें जखन पार्वतीओकेँ शिव नहिॅं भेटलखिन, तखन सामान्य जनक त' कथे की? प्रेमानुभूतिक प्रबल वेगसॅं उद्दीपित शिव कुमार आ हिना वैवाहिक बंधनमे बन्हा त' जाइत छथि, मुदा ओ दुन्नू बिसरि गेल छलाह सामाजिक अनुशासन, जाति- धर्मक सुदृढ़ प्राचीर, उचित- अनुचितक समाज- स्वीकृत मापदंड! परिणामो स्वाभाविके! जाही क्षण धर्मक बाह्य आवरणकेँ चरम-परम कृत्य माननिहार शिबूक पिताकेँ सत्यक पता चललनि,पुश्त दर पुस्तक संचित संस्कार आ विश्वाससॅं उपार्जित अहंकार पर वज्रपात भेलनि ।ओ तत्क्षण पुत्रकेँ शरीर- स्पर्शक अधिकारसॅं वंचित कए प्राण त्यागि दैत छथि।आब संगीतक मधुर- मोहक- कोमल दुनियांमे रहनिहार सामाजिक- व्यवहार- ज्ञान-शून्य शिबूकेँ अचक्के लागल यथार्थक कठोर आघात सहि नहिॅं होइत छनि , ओ विधनाक निर्मम निष्करुण निर्णय देखि हतबुद्धि भए कतौ निरुद्देश्य बहरा जाइत छथि! एम्हर गामक संस्कार- व्यवहारसॅं अनभिज्ञ हिना अचानक भेल एहि कुकाण्डसॅं हतबुद्धि अवश्य भेलीह किन्तु कर्तव्य ज्ञानशून्य नहिॅं। ओ धैर्यपूर्वक शिबूक सभ कर्तव्य संपादित करब अपन धर्म बूझि हुनक पिताक श्राद्धादिकर्म अप्रत्यक्ष रूपेँ शिबूक मित्र ठक्कन आ कल्लूक सहायतासॅं सम्पादित करबैत छथि।ओ यवन पिता आ ईरानी मायक संतति होइतो हिन्दू धर्मक विवाहक एहि मंत्रक साकार रूप में अनैत छथि - " मे हृदयं ते हृदये निदधानि' अर्थात् ह'म अपन हृदय अहाँक हृदयमे रखैत छी-जखन मम-परक भेदे तिरोहित ,तखन केहन पार्थक्य? कैलिफोर्नियाक सुविधापूर्ण जिनगीक मोह छाड़ि ओ तपस्विनीक जिनगी जिबैत प्रतीक्षा करए लगलीह अपन प्रियतमक, हुनकहि गाम आ हुनकहि घ'रमे! कहियो त' भक्क टुटतनि शिबूक,कहियो त' मोन पड़थिन पत्नी! एत' प्रेमक पराकाष्ठा अछि,मिलनक अधीरता अछि,धरतीक धैर्य अछि आ अछि प्रतीक्षाक अनन्त घड़ी! पचास बरख धरि शिबू बताह बनल रहलाह,पत्नीसॅं दूर पड़ाइत रहलाह परञ्च हिनासॅं हीरा मौसी बनलि तपस्विनी हुनकहि गाममे शिक्षाक प्रसारमे,कर्मोन्मुखताक निदर्शनमे,गामक तरक्कीक ब्योंतमे स्वेच्छासॅं अनाम जिनगी जिबैत रहलीह।ओ अपन व्यक्तित्व ग्रामीण संस्कृति आ परिवेशमे मात्र मिज्झरेटा नहिॅं कएलनि, अपितु विलीन क' लेलनि अपन स्वतंत्र सत्ता! हुनक प्रेम कायिक नहिॅं अपितु आत्मिक छलनि आ तैं विकल- विषण्ण होइतो शान्त छलीह,कानि-खीझि नहिॅं, परोपकारमे अपन जिनगी बिता रहल छलीह। करुणरस सम्राट् भवभूति संभवतः प्रेमक एहि अद्वैतक अनुभव करैत लिखलन्हि अछि- अद्वैतं सुखदु:खयोरनुगतं सर्वास्ववस्थासु यत् विश्रामो हृदयस्य यत्र जरसा यस्मिन्नहार्यो रस:। कालेनावरणात्ययात् परिणते यत् प्रेमसारे स्थितं धन्यं तस्य सुमानुषस्य कथमप्येकं हि तत् प्राप्यते ।। एम्हर सामाजिक व्यवस्थाक भंजनक प्रभावेँ पिताक देहांतक आघातसॅं मतिविशेष भेल शिबू अपराध- बोध आ ग्लानिक भार ढोऐत वैवाहिक संबंध स्वीकार करबाक साहस नहिॅं कए सकलाह, मुदा हृदयमे प्रेमक विशुद्ध भाव गहीरसॅं गहीरतर होइत रहलनि,जमा होइत होइत घनीभूत भ' गेलनि आ फूटि पड़लनि करुणाक उद्रेकक रूपमे।पहिनहुँ हुनक स्वरमे माधुर्य आओर करुणाक संगम छलनि मुदा आब त' हृदयसॅं बहरायल निछच्छ पीड़ाक उद्गार पाथरकेँ पानि बना रहल छल।ओ बौआइत रहैत छलाह, मुदा घुरि-फिरि अबैत छलाह ओही गाममे,जत' हुनक जड़ि छलनि,जत' मित्र छलनि आ जत' प्राणवल्लभा पत्नी निष्कम्प दीपशिखा जकाँ एसकरि जरि रहल छलीह। कहल जाइत छैक वेदना संगीतक उत्स होइत छैक।क्रौञ्च युगलमेसॅं एकटाक वध आ दोसरक करुण चीत्कार आदिकवि वाल्मीकिक कवित्वक प्रस्फुटनक कारण बनल,शोके श्लोक बनि गेल छलै।तहिना करुणासॅं पोर पोर तीतल शिबूक संगीतक टाहि हिना आ ठक्कन- कल्लूक संग समस्त गामक लोककेँ द्रवित करैत छलै। प्रेमक पराकाष्ठा आ अनन्त प्रतीक्षाक प्रतीक एहि अनाम अपूर्ण प्रेमक साक्षी छलथि मात्र दू गोट व्यक्ति- ठक्कन- यानी मालिक बाबा आ कल्लू! प्रेम प्राप्तिक स्थितिमे संकुचित भ' जाइत अछि मुदा विप्रलम्भमे ओएह प्रेमक व्याप्ति सीमाहीन भए जाइत छैक,ओ सभहक भए जाइत छैक,सभहक कल्याणक कारण बनैत छैक। उपन्यासक मूल विषय- वस्तु हिना ओ शिव कुमारक प्रेम, अनुपम त्याग, सर्वस्व समर्पणक पवित्र आख्यान एवं अर्धनारीश्वरक संकल्पनाक निदर्शन अछि, मुदा प्रेम प्राप्तिक पर्याय नहिॅं बनि सकल ,ओ रहल मौन, पवित्र ,निर्मल- एकदम गंगाजल सन! अवश्य उपन्यासक आवश्यकतानुसार घटनाक्रममे आओर आनो आन पात्र सभ छथि,साधूपुरा सन छोट गामक सिमानमे होइत राजनीतिक कदाचारो अछि, छोट- छीन स्वार्थक लेल दोसरक जीवन सुड्डाह करबाक क्षुद्र प्रवृत्तिओ अछि, प्रेम आओर वासनाक घालमेल सेहो अछि (पार्वती- गगन ,कोबी आदि चरित्र में), मुदा मित्रताक निर्मल भावना आ दू प्रेमीकेँ मिलयबा लेल समस्त युवावर्गक एकता ओहि सभ कुत्सित भाव पर भारी पड़ैत अछि । शिबू-हिनाक बाद जखन मंगली आ गंगाक प्रेम जाति- पातिक सिमानकेँ तोड़ैत उत्फाल होइत अछि त' सामाजिक कायदा- कानूनक कारण आजीवन एकाकीपनक दंश सहबा लेल विवश हीरा मौसीक संग सामाजिक वर्जना आ दबावक कारण विक्षिप्तताक कगार पर पहुंचल शिवकुमारो डेरा जाइत छथि आ दूनू प्रेमीकेँ मिलयबा लेल पचास बरखक बाद एकसंग गाम तेजि दैत छथि। एहि तरहेँ लेखक उपन्यासकेँ सुखान्त बनबैत छथि। संक्षेपमे एतबहि जे उपन्यासक शीर्षकक अनुरूप हिनामे सहज प्रेमक रंग, निश्छल त्यागक सुवास, सौंदर्यक विलक्षणता आ सकारात्मकताक तिलिया-फुलिया अछि आ एतेक गुणक कारण सहृदय पाठक लेल सुग्राह्य अछि। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। शिवशंकर श्रीनिवास- संपर्क-9470883301 चमेली रानी 'चमेली रानी' केदार नाथ चौधरीक चर्चित उपन्यास थिक। एकर प्रकाशन 2004 ई. मे भेल। एहि उपन्यासमे उपन्यासकार कहैत छथि जे एहि देशक राज-सत्ता एहिठामक जनताकेँ लूटि रहल अछि, दोसर दिस जे एहि ठाम विभिन्न डकैतक गुट अछि ओहो जनताकेँ लूटि रहएलैए। एहि स्वतंत्र देशक जनता राजनीति केनिहार व्यक्ति द्वारा कोना ठकल जाइए आ लुटाइए आ दोसर दिस विभिन्न डकैत द्वारा कोना लूटल जाइए। ओहिमे राजनीति केनिहारमे कतेक भिन्नता ओ समानता अछि, अहिकेँ बहुत कौशलसँ देखबैत सम्मुख 'बिहार' राज्यकेँ रखैत कथा कहैत छथि जे बहुत बेबाक ढंगसँ कहल गेल अछि। जाहि कहबमे कोनो पर्दा नहि राखल गेल अछि जे ईहो प्रश्न उठबैत अछि जे की एना कहल जेबाक चाही? उक्त प्रश्न-स्थलकेँ हम आगू उठा ओहिपर विवेचन करब। संप्रति एकर कथापर ध्यान दी। कथा कीर्तमुखक परिवार वर्णनसँ प्रारंभ होइत अछि। कीर्तमुखक पत्नी छलि शनीचरी। अंग्रेज हाकिम डन्सफोर्डक रखैलक बेटी छलै सुनयना, ओकर बेटी छलै शनीचरी। ओहि शनीचरीकेँ चिनगारीजी माने सोस्लिस्ट पार्टीक सदस्य जे बादमे नेता आ मंत्री भेलाह अपन प्रिय मोदियाइनक ओहिठाम ओकरा आनि रखलनि ओ मोदियाइन शनीचरीकेँ चिनगारीजीक लेल जुगता कऽ रखबाक लेल गंगा कातसँ आनि कीर्तमुखकेँ बियाहि देलकै जकरामे पुरुषत्वक अभाव रहै। जखन चिनगारी मंत्री बनि मोदियाइन लग एलाह तँ ओ मोदियाइन स्पष्ट कहलकनि-"गंगा कातसँ एकटा मनुक्खकेँ आनि जकर नाम छै कीर्तमुख, शनीचरीक बियाह करा देलियै। आखिर समाजसँ, लोक-लाजसँ अहाँक रक्षा करब आवश्यक छल। कीर्तमुखकेँ सहवास करबाक लूड़ि नहि छैक। सनीचरीसँ बच्चा अहाँ जन्माउ आओर बाप रहत कीर्तमुख।" चिनगारीजी बेसी दिन नहि टीकि सकलाह। रोगी भऽ मरि गेलाह आ शनीचरी आजाद भऽ गेलि। मोदियाइनक आमदनी बढ़ि गेलै। एहि क्रममे ओकरा पाँच टा बेटा भेलै-युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, सहदेव आ नकुल। नकुलक जन्मकाल शनीचरी मरि गेलि। हम्मर मोदियाइनक एक मात्र बेटी 'चमेली' हाइवेपर फैलसँ घर बनेलक। ओकर धर्मपिता नामी डकैत भुखन सिंहक अभिभावकत्व ओकरा भेटल छलै। ओ पढ़लि-लिखलि छलि। फटाफट अंग्रेजी बजै वाली, तेजतर्रार आ मुँहफट। ओकरे इशारापर भूखन सिंहक गैंग नचैत छल। अही चमेली रानीक नेतृत्वमे उक्त उपन्यासक कथा आगू बढ़ैत अछि। इमहर गुलाब मिसिर राज्यक मुख्यमंत्री छथि। एकटा अनाथालयमे पलल बच्चा कोना सहारा पाबि ऊँच कुल-मूल संग भ्रष्ट रस्तासँ शिक्षाक डिग्री पाबि एकाएक राजनीतिक दलक नेता भऽ मुख्यमंत्री कुर्सी पाबि शासन करैत अछि ओकर आश्चर्यजनक कथामे आएल अछि। उपन्यास चमेली रानी गिरह द्वारा संपूर्ण राज्यमे जाल बिछा पूँजीपतिकेँ लूटल जाइत अछि ओकर वर्णन बहुत रोचक ढंगसँ कएल गेल अछि, एहि गिरोहमे स्त्री-पुरुष दूनू अछि। दूनू भेष बदलि जाहि रूपे मालदार यात्री ओ मालदार भ्रष्ट नेताकेँ लुटैत अछि ओ अद्भुत नाटकीय ढंगसँ कथाकेँ पुष्ट करैत, रोचकता भरैत आगू बढ़ैत अछि। डकैतक गिरह अपन डकैती क्रममे कतेको हिंसा ओ क्रूरतम काजकेँ अंजाम दैत आगू बढ़ैत अछि किंतु आश्चर्य तखन लगैत अछि जे गिरहक नायिका एहन व्यक्तिक चुनाव अपन पतिक रूपमे करैत अछि जकरा लग संवेदना छैक। अर्जुन पहिले दिन चमेली रानीक आह्वानपर ओहि गिरोहमे सम्मलित भऽ ट्रेनमे डकैती करैत अछि, ओहि लूटक क्रममे एकटा सोहागिन स्त्रीक विनती कएलापर जे मंगलसूत्र ओकर सोहागक निशानी छियैक, एकरा नहि छिनय। अर्जुन ओहि स्त्रीक संवेदनासँ संवेदित भऽ ओकर मंगलसूत्र नहि छीनैत छैक। ई बात चमेली रानी बुझैत अछि। ओ दूर रहैत सभक कार्य पता रखैत अछि। ओना ओ अर्जुनकेँ कहैत अछि जे एहि तरहक कमजोर व्यक्ति हिंसा नहि कऽ सकैत अछि आ तें ओकरा आगू कोनो तरहे केकरो हत्या करबाक भार नहि देल जाएत, कारण डकैतकेँ कोनो तरहक संवेदना नहि राखक चाही। किंतु विवाह करैत अछि ओही अर्जुनसँ। संपूर्ण उपन्यासमे देखाओल गेलैए जे डकैत गिरोहक बीच एक-दोसरक प्रति वएह स्नेह-प्रेम छैक जे कोनो परिवारमे एक-दोसराक बीच रहैत छैक। अपन नायक प्रति, मित्रक प्रति ओ अपन कार्य प्रति अद्भुत-अद्भुत निष्ठा ओ प्रेम छैक। ओहि गिरहक बीच कोनो तरहक विश्वासघातक जगह नहि छैक। पन्ना, दोसर गिरहक सरदार, कोनो हालतिमे भूखन सिमहक अधलाह नहि करत। किएक तँ ओ ओकर मित्र थिक। भले ओकर गिरहो फूटै छै। किंतु राजनीतिमे ककरो प्रति कोनो संवेदना नहि छैक। ओहिठाम मात्र कुर्सी महत्वपूर्ण छैक आ महत्वपूर्ण छैक ओकर कोनो लाभ अंश। उपन्यासमे आएल अछि- "राजनीतिक सवसँ विशिष्ट गून थिक धूर्तता"। आ धूर्तता गुलाब मिसिरमे भरल अछि। जे भूखन सिंह ओकर गिरह द्वारा कतेको बेर गुलाब मिसिरक सहायक भेल छल आ जखन अहमदुल्ला खांक संपूर्ण खजाना लूटल जाइए। अहमदुल्ला जे देश विरोधी छल, जनताकेँ शोषण करैत छल। ओकर खजानाकेँ जखन चमेली रानीक गिरोह लूटि लैत अछि आ नांगटनाथकेँ ट्रेनमे लुटि हत्या कऽ दैत अछि तखन गुलाब मिसिरक क्रोध असमान छूबए लगैत अछि, आ ओ कोनो हालतिमे भूखन सिंहकेँ मारि देबए चाहैत छथि आ एहि लेल दोसर गिरोहक सरदार पन्नासँ भेट करैत अछि आ ओकरा आदेश करैत छथि जे भूखन सिंहकेँ मारि देथि। किंतु पन्ना नहि मानैत अछि, ओक कहैत अछि- "गलत, भूखन सिंह मेरा बड़ा भाइ जैसा है। भूकन भाइ का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। तुम्हारा इन्टेलिजेन्स गोबर टीम है। तुम्हारे कहने से मैं अपने देवता समान भाइ की हत्या नहीं कर सकता"। राजसत्तापर बैसल लोककेँ सतत कोनो गतिविधिसँ ओकरा पहिने राजसत्तेपर खतरा बुझाइत छैक। चमेली रानी द्वारा हुनक सहयोगीपर हमलाकेँ ओ अपन कुर्सीपर अबैत खतरा बुझै छथि आ हुनका अर्थात गुलाब मिसिरकेँ पन्नाकेँ किछु कहबाक साहस नहि होइत छनि किंतु पन्नाक बाडीगार्ड ध्रुवा केर बेटीक अपहरण करबा ध्रुवासँ कहैत छथि जे जँ ओ छलसँ जहर दऽ भूखन सिंहकेँ नहि मारत तँ ओकर बेटीकेँ मारि देल जेतै। आ पन्नासँ जखन भूखन सिंह भेट करए अबैत अछि तँ ध्रुवा ओकर शराबमे जहर मिला दैत छैक। भूखन सिंह तुरंत बूझि जाइए आ ब्रजनाथकेँ कहि कहि ओतएसँ विदा होइए। ओकर बाडीगार्ड ब्रजनाथ ओकरा बाद पहुँचि उतारैत अछि आ भूखन सिंह अपन इच्छाइ टेप कऽ ब्रजनाथकेँ दैत कहैत छैक जे ई टेप ओ टेप चमेली रानीकेँ सुना दैक। पन्ना आश्चर्यचकित भऽ ध्रुवासँ सभटा बात बुझि ओकर हत्या कऽ दैत अछि। चमेली रानी अपन धर्मपिताक हत्यासँ बहुत हताश होइत अछि किंतु पन्नाक अभिभावकत्वमे आगा बढ़ैत अछि आ ततबा समधानि कऽ आगू बढ़ैत अछि जे धूर्ताताकेँ धूर्ततासँ कटैत संपूर्ण प्रदेशमे पन्नाक निर्देशनमे जाल बिछा गुलाब मिसिरक सत्तापर चुनावक माध्यमे पहुँचि जाइत अछि। उपन्यासक कथामे गुलाब मिसिरक अपहरण होइत अछि, ओ अज्ञातमे चल जाइत छथि ,ओहि अज्ञातक पर्दासँ बहराइ नहि छथि तकर कारण स्पष्ट नहि होइत अछि। हमरा जनैत खुजल मैदानमे गुलाब मिसिरकेँ पदच्युत करबासँ पाठक लग पारदर्शी संवाद पहुँचैत से नहि भऽ पबैत अछि। ओ चमेली रानी जनताक शोषण विरुद्ध अपन गतिकेँ रखैत राजनीतिसँ राजनीतिक धूर्तता कए कऽ विजय प्राप्त करैत अछि जे स्प्षट कहैत अछि जे राजनीतिमे केकरो धूर्तता बिना परास्त नहि कएल जा सकैए। उपन्यासक उक्त दृष्टि हमरा जनैत लोकपक्षीय नहि भऽ पबैए कारण कोनो चक्रचालि वा षड्यंत्र लोकहितमे नहि भऽ सकैए चाहे उपरसँ ओ जे लागए तँइ उक्त उपन्यास यथास्थितिक परिचय तँ दैत अछि किंतु पाठककेँ निर्विकार-पथक प्रेरणा देबामे पाछू रहि जाइत अछि। मैथिली भाषामे कोनो दैनिक पत्र-पत्रिका बेसी दिन टिकल भले किछु-किछु दिनपर पुनः-पुनः नव दैनिक पत्र बहराइत रहलैए। उक्त पत्र सभ निश्चित रूपसँ भाषा प्रेमक प्रतीक थिक, किंतु ओकर बंद होएब स्पष्ट कहैत अछि जे मिथिला भूमिपर एखन तक भाषाक लेल लोक जागरण नहि भेलैए। एहि उपन्यासमे मैथिलीक दैनिक 'स्वयं प्रकाशक'क लोकप्रियताक चर्चा कएल गेल अछि जे संपूर्ण रूप एहि उपन्यासक कल्पना संसारक प्रकाशन अछि। 'स्वयं प्रकाशक'क लोकप्रियताक कारण अछि जे ओहिमे नव-नव, एहन-एहन समाचार छपैत अछि जे लोकमे ओकरा पढ़बाक उत्सुकता बढ़ि जाइत छै। ओकर लोकप्रियताक उदाहरण इएह छैक जे हिंदी दैनिक पत्र सभ ओहि पत्रसँ ईर्ष्या करऽ लगैत छैक। अर्थाप मैथिली दैनिक 'स्वयं प्रकाशक'क लोकप्रियताकेँ देखबैत उपन्यासकार कहैत छथि जे मैथिली दैनिक एहि मिथिला भूमिपर लोकप्रिय भऽ सकैए जँ ओकरा राजनीतिक दृष्टिसँ चलाओल जाए। उपन्यासमे आएल विभिन्न प्रसंग वर्तमान समाजक मनोदशा के जेना कहैत अछि जे वर्तमान समयमे समाजकेँ लाभ स्थिति देखा ओकरा जिम्हर चाही तिम्हर कऽ सकैत छी, मात्र जनता बूझए जे ओकर तारणहार के अछि। एक बेर यदि जनता तारणहार बुझि गेल तँ अहाँकेँ छोड़त नहि। जेना पहिने गुलाब मिसिरकेँ बुझै छल बादमे चमेली रानीकेँ बूझए लागल। उक्त सभ बात अपन कथा प्रसंगसँ कहैत उपन्यास आजुक भ्रष्ट शासन तंत्र ओ जनताक कोमल मानसिकतापर ओकर प्रभावकेँ स्पष्ट रूपे स्पष्ट करैत आजुक समयक भयावहतासँ परिचय करबैत छथि जे महत्वपूर्ण अछि। गुलाब मिसिर अनाथालयसँ सुपथपर आगू अबैत तँ निश्चित रूपसँ पाठककेँ नव सनेस भेटितैक मुदा से नहि भऽ पबैत अछि तकर कारणो स्पष्ट अछि जे एहि उपन्यासक मुख्य उद्येश्य आजुक समयक भ्रष्ट स्थितिकेँ अनबाक अछि जाहिमे उपन्यासकेँ बहुत हद तक सफल कहबाक चाही। असमदुल्ला खांक अजीब दृश्य जाहि अश्लीलता परिदृश्यमे देखाओल गेलैए ओ हमरा जनैत उपयुक्त नहि अछि। ओना हम मानै छी जे कोनो दृश्य ओ शब्द यदि उपन्यासक कथाक लेल आवश्यक अछि तँ ओ अश्लील किएक ने रहए ओकर प्रयोग हेय नहि थिक से उपन्यास अहमदुल्ला ओ रजियाक बीचक अश्लील दृश्य निष्प्रयोजक लगैत अछि। उपन्यासकार मैथिलीमे उपन्यास कहैत एहि आएल विभिन्न पात्रक भाषाक प्रयोग कएल गेल अछि। हमरा जनैत उपन्यासकार सभ बात हमरा अपन भाषामे कहि रहला अछि तँइ पानक संवाद कहलासँ की लाभ? हमरा जनैत उक्त विषय हमरा अनावश्यक लगैए। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। दीपक मंजुल, हिन्दी सम्पादक, एन.बी.टी., इण्डिया, नई दिल्ली मैथिली साहित्यक "कबीर"- हमरा सभक केदार बाबू जिनगीक चारिम आश्रममे आबि कऽ ओ लिखनाइ शुरु केलन्हि आ पैंसठि पार "लेखक"क परिचितिसँ ६-६ टा उपन्यासक ओ लेखक बनि गेला। ई विश्वास योग्य तँ नै लगैत अछि मुदा अछि ई पूरा-पूरी सत्य। अपन पहिले उपन्यास "चमेली रानी" सँ मैथिली साहित्यमे ओ खाली अपन स्थाने नै बनेलन्हि वरन् एकटा "स्थापित" साहित्यकारक रूपमे सेहो चिन्हल जाय लगला। फेर तँ "करार", "माहुर", "हीना", "अबारा नहितन" आ "अयना" धरिक यात्रामे हुनका मैथिली साहित्यक दूटा पैघ सम्मान "प्रबोध साहित्य सम्मान" आ "झारखण्ड मैथिली मंच"सम्मानसँ सेहो सम्मानित कयल गेलन्हि।एहेन प्रतिभा सम्पन्न छियासी पार वयोवृद्ध साहित्यकारकेँ मैथिली साहित्य समाज केदार नाथ चौधरीक रूपमे जनैत आ सम्मान दैत अछि। केदार बाबू मैथिली फिल्मक "जनक"क रूपमे सेहो ओतबे सम्मानित छथि। प्रथम मैथिली फिल्म "ममता गाबय गीत" क ओ निर्माता सेहो रहल छथि। सन् साइठक युगमे मैथिली फिल्म निर्माण लेल जे ओ प्रयास केलन्हि से मैथिली फिल्म उद्योग लेल एकटा महत्व्वपूर्ण घटना मानल जाइत अछि। कबीर सन घर सुड्डाह कऽ तमाशा देखबाक ऊहि केदार बाबूकेँ मैथिली फिल्म निर्माण दिस लऽ गेलन्हि मुदा अपन सर्वस्व अर्पण केलाक बादो फिल्मक ३/४ भाग मात्र पूर्ण कऽ सकला आ छातीपर पाथर राखि अइ सँ फराक भऽ गेला। हालेमे दिवंगत रवीन्द्रनाथ ठाकुर फिल्मकेँ पूर्ण करबाक भार उठेलन्हि आ फेर ओ फिल्म पूर्ण भेल आ प्रदर्शितो भेल। केदार बाबूक उपन्यास "अबारा नहितन" हुनकर फिल्म निर्माणक अही संघर्षपर आधारित अछि जकरा पढ़ि कोनो पाठक ऐ फिल्मक निर्माणक "क" सँ "ज्ञ" धरिक जनतब लऽ सकैत अछि। ओना तँ केदार नाथ चौधरी फिल्मक निर्माणमे असफल भेला मुदा मैथिली समाज हुनका पहिल मैथिली फिल्मक "जनक" क पदवीसँ सम्मानित कऽ उचिते केलक। एहेन बहुप्रतिष्ठित आ आजुक मैथिली साहित्यक बहुपठित लेखक श्री केदार नाथ चौधरी जी सँ हमर परिचय २० बर्खसँ बेशी पुरान अछि। एक्के नग्र लहेरियासरायक रहनिहार केदार बाबूक मुख्य बजार स्थित हमर घरक सोझाँक "ड्राइक्लिनिंग"क दोकानमे मोटा-मोटी सभ दिन उठनाइ-बैसनाइ होइ छलन्हि। हमर घर "घरदुकनिया" छल, आगाँ दोकान आ पाछाँ घरवास। ई दोकान पोथी आ सम्बन्धित समानक छल, जतऽ हम तीनू भाइ बैसै छलौं। हमर बाबूजी सेहो सेवानिवृत्तिक बाद ओतऽ बैसऽ लगला। सभसँ पैघ भाइ मुख्य दोकानदार छला आ हम आ माँझिल छलौं सहायक। केदार बाबू ड्राइक्लिनिंगक दोकानपर समय बितबैक गर्जसँ अबै छला। से कहियो काल हुनकासँ गप-शप भऽ जाइ छलय मुदा तइमे अखन धरि आत्मीयताक प्रवेश नै भेल छल।१९९० केर दशक मे पैघ भाइ अरविन्द गुप्ता दिल्ली आबि गेला परीक्षाक तैयारी लेल, आ पाछाँ-पाछाँ हमहूँ आबि गेलौं। सन् २०००मे हम सरकारी नोकरीमे आबि गेलौं सम्पादक बनि। पुस्तक प्रकाशन आ प्रोन्नयन संस्था, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत सरकारमे हिन्दी सम्पादकक रूपमे हम एलौं। आ एम्हर भैया प्रतियोगी परीक्षामे सफल नै भेलापरान्त "साक्षी भारत" क सम्पादकक रूपमे कार्यारम्भ केलन्हि। संगे ओ हिन्दी, अंग्रेजी आ मैथिलीमे पुस्तक-प्रकाशन कार्य सेहो आरम्भ केलन्हि। संयोगे कहू जे २००३ मे केदार बाबू दिल्ली एला, अपन जमायक डेरापर, आ हमरा ओतऽ आमंत्रित केलन्हि आ तखन अपन एकटा पाण्डुलिपि देलन्हि आ कहलन्हि जे एकरा पढ़ू आ जँ नीक लागय तँ भैया केँ कहियन्हु एकरा छापय लेल। कहबाक खगता नै जे किछुए पन्ना पढ़लाक बादे हमरा ऐ पोथीमे "सम्भावना" बुझायल आ भैया सेहो एकरा अविलम्ब छापलनि। सन् २००४ मे "चमेली रानी" नामसँ हुनकर पहिल मैथिली उपन्यास छपि गेल छलन्हि आ तुरत्ते मैथिली समाज ऐ पुस्तककेँ स्वीकारऽ लागल। फेर ओ पाँछा घुरि कऽ नै तकलनि आ "करार", "माहुर", "हीना", "अबारा नहितन" आ "अएना" शीर्षकसँ पाँच टा आर उपन्यास धाँइ-धाँइ प्रकाशित भऽ गेलनि। हुनकर ई सभटा उपन्यास परम्परागत काना-खीजी बला सामाजिक उपन्यास नै वरन् परम्पराभंजक उपन्यासक रूपमे पढ़ल आ बूझल गेल। केदार बाबू मैथिली उपन्यासकेँ ओकर पारम्परिक रूपसँ बहार निकालि एकटा नब लीख खेचलन्हि आ मैथिली साहित्य समाजकेँ सिखेलन्हि जे सासु-पुतोहु, ननदि-भौजी आ निन्दा-चुगली सँ फराको एकटा दुनियाँ छै आ साहित्यकारक ई दायित्व छै जे ओ अपन लेखनीसँ नब बौस्तु आनथि जइसँ पाठकक रुचि बनल रहय। तँ स्पष्ट भेल जे केदार बाबू मैथिलीक परम्पराभंजक "कबीर" बनला। केदार बाबूक ई सभटा उपन्यास दिल्ली स्थित हमर पैघ भाइ श्री अरविन्द गुप्ताक प्रकाशनगृह "इण्डिका इंफोमीडिया"सँ छपल आ ई सभटा उपन्यास विक्रयक नव प्रतिमान बनेलक। मैथिलीमे पाठक नै हेबाक बा कम हेबाक जतेक अनघोल छल सत्य तँ यएह अछि जे ई एकटा भ्रम छल कारण मैथिली समाज भयंकर रूपसँ पढ़ुआ समाज अछि मुदा पुरस्कार लोलुप स्वनामधन्य साहित्यकार "पढ़ऽ योग्य" सामिग्री उपलब्धे नै करा सकल छला आ उनटे प्रबुद्ध पाठके पर आरोप लगबै छला। केदार बाबूक उपन्यास जे बिक्रीक प्रतिमान बनेलक से सिद्ध केलक जे पाठक किछु नवक आस जोहि रहल छल आ स्वनामधन्य-साहित्यसँ ओकर मोहभंग भऽ गेल छल। केदार बाबूक बहुपठित उपन्यास "अबारा नहितन" केर प्रकाशन इंडिका इंफोमीडियाक बाद भारत सरकारक राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (एन.बी.टी., इण्डिया) सँ सेहो भेल। कहबाक आवश्यकता नै जे ई मैथिली पाठकक स्नेहे छलै जे राष्ट्रीय पुस्तक न्यास केँ ऐ पोथीक प्रकाशन लेल विवश केलकै। ऐ पाँतिक लेखकक ई सौभाग्य छै जे ओ हिन्दी सम्पादकक अतिरिक्त मैथिली भाषाक अतिरिक्त प्रभारीक रूपमे सेहो राष्ट्रीय पुस्तक न्यासमे काज कऽ रहल अछि आ ऐ पुस्तकक प्रकाशनमे किंचित् योगदान दऽ सकल। केदार बाबूक जीवनक प्रवासी पक्षक जँ चर्च नै कयल जाय तँ किंशाइत ई आलेख अपूर्णे रहत।" ममता गाबय गीत"क निर्माणमे भेटल असफलताक बादे दुखी, निराश आ हताश केदार बाबू अपन "करिअर"क विषयमे सोचैत विदेश-गमन लेल विवश भेला। सन् १९६६ मे केदार बाबू अमेरिका लेल प्रस्थान कऽ गेला। ओतऽ पढ़ाइ संग कमाइ केर सिद्धांतक आधारपर पढ़ाइ संग जीवनयापन आ पढ़ाइक खर्चा लेल काज केलनि। अर्थशास्त्रक ओ छात्र छला आ ओतऽ ओ ओही विषयमे आगाँक पढ़ाइ आ शोधकार्य आदि केलनि।अमेरिकाक सैन फ्रांसिस्कोमे रहैत ओ एम.बी.ए.क पढ़ाइक संग जीवनयापन लेल कइएक तरहक काज करै छला। बैंक ऑफ अमेरिका मे काज करैत अमेरिका प्रवासक एगारहम बर्ख जखन ओ यूरोपक लक्जमबर्ग एला तँ छ सप्ताहक छुट्टी भेटलनि जकर उपयोग ओ यूरोप क विभिन्न देश जेना यू.के., फ्रांस, जर्मनी, रूस आदि आ ईरानक भ्रमणमे केलन्हि। आ फेर जखन ओ भारत आपस एला तँ घर-परिवारक लोक हुनका तेना ने गछारलखिन जे फेर ओ घुरि कऽ आपस नै गेला। फेर तँ ई घरे-परिवारक भऽ गेला आ भारतेमे रहि गेला, रमि गेला। आइ छियासी पारक वयसमे हुनकर साहित्यपर तीन टा छात्र पी.एच.डी. कऽ रहल छथि, जे हुनका लेल गर्वक गप अछिये, ई मैथिली भाषा समाज लेल सेहो धरोहर सिद्ध हएत। मैथिली साहित्य समाजमे "केदार नाथ चौधरी" क रूपमे समादृत लेखककेँ ऐ पाँतिक लेखक केदारे बाबूक रूपमे मोन पाड़ैत अछि आ ओ जे सनेस अपन अभिनव उपन्यासक रूपमे दऽ कऽ अपन अतुलनीय योगदान देलन्हि तइमे अपन पैघ भाइ अरविन्द गुप्ताक संग हमहूँ अपनाकेँ कने-मने सहयोगी बुझै छी। आ सेहो सत्ये जे अइ अधिकार-भावक पाछाँ केदार बाबूक हमरा सभक ऊपर स्नेह-भाव सेहो कतौ-ने-कतौ दोखी अछि।जखन कखनो हम-दुनू भाँय लहेरियासराय जाइ छी तँ १० मिनटक दूरमे अवस्थित बंगाली टोला स्थित हुनकर डेरा "हिडेन कॉटेज" पर दसो मिनट लेल जाइते छी आ हुनकर "कुटी"क पहिल तल पर हुनकर आवासपर हुनका आ हुनकर पत्नीक (जिनका हम माताजी कहैत छियनि) स्नेहसँ अभिसिंचित भइये कऽ घुरैत छी। दू कप चाह आ दूटा बिस्कुट कोनो औपचारिकता नै वरन् अतिशय स्नेह आ सम्मानेक अनुभव करबैत रहल अछि। हुनकर स्नेह-वर्षासँ हम दुनू भाइ सदैव भीजले अनुभव करै छी। हमरे नै वरन् समस्त मैथिल समाजक "केदार बाबू" शतायु होथि सएह ईश्वरसँ कामना करै छी। मैथिली साहित्य समाज हुनकासँ आरो बहुत रास आशा रखने अछि। आशा अछि केदार बाबू अपन प्रशंसक आ पाठक लोकनिकेँ निराश नै करताह। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। कामेश्वर चौधरी-संपर्क-9717245666 अंग्रेजिए पढ़ल लोक मैथिलीकेँ उबारि सकत कोनो लेखकक जीवनकालमे पत्रिका द्वारा "विशेषाङ्क" प्रकाशित करब बहुत प्रशंसनीय अछि। एहि लेल "विदेह"क सम्पादक एवं पूर्ण मण्डलीकेँ हार्दिक धन्यवाद। अर्थशास्त्रमे एम.ए.क पढ़ाइ आ तत्पश्चात् कलकत्ता स्थित ब्रिटिश फर्म (केलिस डाइरेक्टरी)मे चाकरी। मैथिली भाषाक प्रति विशेष अनुराग तेँ चाकरी छोड़ि बम्बइक लेल प्रस्थान। ईएह छथि श्री केदार नाथ चौधरी (केदार बाबू), जे गाममे लोक द्वारा "केदार भैया" एवम् परिवारमे "छोटका कका"क नामे जानल जाइत छथि। हमर विवाह (सन् १९७०)मे ओ अमेरिकाक "सन फांसिस्को"मे छलाह। किछुए दिनक बाद अमेरिका छोड़ि गाम आबि गेल छलाह। हुनकर सान्निध्य एवम् प्रेम बहुत भेटल। देश विदेशक विषयमे हुनकर ज्ञान हुनक विशिष्ट सम्प्रेषण क्षमतासँ भेटैत रहल। किछुए सालक बाद (सन् १९८७) मे दरभङ्गा (लहेरियासराय) चलि गेल छलाह- अपन "हिड्डेन काटेज"मे। हिनक लेखन-कार्य ओतहि आरम्भ भेल, जखन कोनो प्रबुद्ध साहित्यकार लहेरियासरायमे कटाक्ष कयलनि जे अंग्रेजी पढ़ल लोक मैथिलीमे कोना लिखताह। ताही क्रममे बिहारक राजनीतिमे उठल बिहारिमे मिथिलाञ्चल समाजकेँ उद्वेलित करैत लिखलनि प्रथम उपन्यास "चमेली रानी"। एहि पोथीक कथानक, भाषा-विन्यास एवम् विशिष्ट शैली- पढ़बाक बादे एकर लोकप्रियताक कारणक पता चलत। ओही क्रममे हिनक तेसर पोथी "माहुर" छल जे चमेली रानीक कथानककेँ आगाँ बढ़ओलक। "करार" दोसर पोथी छल जे आध्यात्मक चर्चा गामकबासीक बीच होइत रहल। "हीना" आ अन्तिम पोथी "अयना"सँ पूर्व चारिम पोथी छल "अबारा नहितन"। ई चारिम पोथी केदार बाबूक मैथिली भाषाक प्रेम रोगक कथा थीक। मैथिलीमे फिल्म बनय आ सेहो श्रेष्ठ स्तरक, तेँ ओ दरभंगाक महंत जी (मदन बाबू)क संग कलकत्ताक चाकरी छोड़ि बम्बइ बिदा भऽ गेलाह। फिल्म कोना आरम्भ भेल, टीम (दल)क संगठन, कथानक, कलाकार, फनकार एवम् गायक-गायिकाक सङ्गोरकरैत एकटा विशिष्ट "समूह"केँ सार्थकता देलनि। "अबारा नहितन" पोथी हिनक आत्म-कथात्मक उपन्यास थीक जाहिमे अपन टीमक श्री उदयभानु सिंह एवम् श्री परमानन्द (फिल्म डाइरेक्टर)क संग बम्बइमे त्रिदीप कुमार जी, अजरा, लताबोसक कोना चुनाव केलनि,दरभंगामे श्री रवीन्द्रनाथ ठाकुर लोकप्रिय गीतकारकेँ कोना तकलनि आदि वर्णित अछि। बम्बइमे गायिका गीता दत्त, सुमन कल्याणपुर आ गायक श्री महेन्द्र कपूरतथा श्री श्याम शर्माक संग लोकप्रिय गीत सभक रिकार्डिंग कयलनि। राजनगर जाय फिल्मक शूटिंग भेल जे अनुभवी कैमरामेनप्रसादजी कयलनि। फिल्मक नाम छल "ममता गाबय गीत"- मैथिलीक प्रथम फिल्म। ताहि समय हुनका यू.एस.ए.क गोल्डन गेटक कॉलेजमे एम.बी.ए.क लेल प्रवेश भऽ गेल आ ओ कैलिफोर्निया चलि गेलाह। "ममता गाबय गीत" बहुत दिनक बाद स्व. रवीन्द्रनाथ ठाकुर द्वारा विमोचन कयल गेल। एहि कथा प्रवाहमे हिनक मैथिली प्रेम, संघर्षशील फिल्म-निर्माणक प्रक्रिया आ मिथिलाञ्चलक समाजक व्यवहार विशेष रूपेँ परिलक्षित होइछ। अमेरिकाक प्रवाससँ गाम आबि छओ टा (६)पोथीक लेखन हिनक जीवनक बड़ पैघ उपलब्धि रहल। भाषाक सर्वग्राही स्वभाव, सामयिक विषयक विवेचना एवम् मैथिल समाजक चित्रणसँ भरल-पुरल हिनकर कथा-साहित्य,मैथिली पाठकक बीच अत्यन्त लोकप्रिय भऽ गेल अछि। स्व. हरिमोहन बाबूक व्यंग्य लेखनक बाद मैथिली साहित्यमे लोक-समाजक चित्रण करैत "जनभाषा"मे लेखन करैत हिनकर पोथीसभ सभकेँ सम्मोहित करैत रहत। हिनक साहित्य साधना एवम् लेखन-कर्मकेँ शत-शत नमन। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। लक्ष्मण झा सागर, संपर्क-9903879117 अबारा नहि...तन! पाँच छ: बरख पुरान गप थिक। एकटा अज्ञात नम्बरसँ फोन आयल छल। फोन कान लग लगा कऽ उतारा देल जे हलो अपने के बजैत छी? अपनेक नाम सेब नै अछि। क्षमा करब।नै चिन्ह पाबि रहल छी? प्रत्युतर आयल छल - हम छी केदार नाथ चौधरी।लहेरियासरायसँ बाजि रहल छी। तकरा बाद प्रणाम पाती भेल। असलमे हमर एकटा आलेख कोनो पत्रिकामे छपल छल से पढ़लाक बाद हुनकर फोन आयल छल। कहलनि जे सबसँ पहिने त हमर नाम सेभ कऽ लेल जाय। हम बेसी काल आब अहाँ के फोन पर तंग करब। हम तँ लाजे बुझी जे काठ भऽ गेल रही। से ठीके तकर बादसँ बराबरि फोन पर बातचित होइत रहैत छल। अपन नव उपन्यास लेल योजना बतबैत रहैत छलाह। उपन्यास छपि गेला पर स्नेहसँ पठा दैत रहैत छलाह। पछिला एक दू सालसँ कोनो सम्पर्क नै रहल अछि। पता लागल जे आब शरीर संग नै दऽ रहल छनि। लिखब पढ़ब तँ बाधित छन्हियें जे अपन नित्य क्रियाक्रम अपने करबामे असौकर्य होइ छनि। से सब सुनि मोन कचोटैत रहैत अछि जे हमरा जा कऽ हुनका देखबाक चाही। जे से ताहि लेल अपन भाग्य के दोष दैत छी। हुनकासँ पहिल परिचय हुनक लिखल चमेली रानी उपन्याससँ भेल। हम मैथिलीमे एहन उपन्यास पहिले-पहिल पढ़ने रही। एक बेरे अछौं नै भेल। फेर पढ़ल। देखल जे उपन्यासमे निर्मली आ सिमरियाक चर्च भेल अछि। फोन केलियनि। कहलनि जे सब घटना,पात्र आ स्थान सत्य अछि। रोचक आ पाठकक रुचि लेल कने घीक छौंका दऽ देने छीयै। से सहीमे चौधरी जी अपन पहिल उपन्यास चमेली रानीसँ मैथिलिक साहित्यिक जगतमे अपन परिचिति बना लेने रहथि। ठाम-ठीम हिनक उपन्यास लेखनक विलक्षनताक चर्च-वर्च हुअय लागल छल। चारि किंवा पाँच बरख पहिलेक बात थिक। रामलोचन ठाकुर जीक संग चेतना समिति, पटनाक विद्यापति पर्व समारोहमे भाग लेबाक लेल पटना गेल रही। फेर रामलोचन जीक आग्रह पर बैजू( बैद्यनाथ चौधरी) जीक कार्यक्रममे दरभंगा गेलहुँ। हमरा दुनू गोटे केँ दरभंगा रेलवेक यात्री निवासमे आवासक वेबस्था भेल छल। रातिमे 3 बजे सुतय आयल रही दुनू गोटे से भोरे 8 बजे जगौल गेल रही। जगबै वाला छलाह श्री केदार नाथ चौधरी। भोरे भोर एहेन गोर-नार लमगर-खरगर सुदर्शन व्यक्तित्वक स्वामी श्री केदार नाथ बाबूक दर्शनसँ मोन हर्षित भेल छल हमरा दुनू गोटेक। आँखि जुरा गेल छल। घुरती रेलक टिकट कोलकाताक लेल जे प्रतीक्षा सूचीमे छल से कंफर्म भऽ गेल छल। मने कहल जे जाइ छै जे नीक लोकक भोरमे दर्शन भेलासँ जतरा शुभ होइत छै से ठीके जतरा बनि गेल छल। केदार बाबू असलमे भेंट ठाकुर जीसँ करय आयल छलाह अपन बासा लहेरियासरायसँ मुदा संयोग एहन जे हमरो भेंट भऽ गेलाह। हुनकासँ बड़ी काल धरि हुनक विदेश यात्रा आ मैथिलीक सेवामे कैल काज सभक विस्तारसँ गप भेल। मैथिली फिल्म लेल अपन लक्ष्य आ प्रयास लेल बहुत नीक जकाँ जानकारी देलनि। मिथिलाक माटिसँ अपन तादात्यम केर उल्लेख केलनि। मैथिली साहित्यक गोलैसी आ पुरस्कार प्रक्रिया पर बड़ सहजता आ विनम्रतासँ बात केलनि। नव रत्न गोष्ठी,दरभंगाक पराक्रम आ वैभव पर बात केलनि। समकालीन दरभंगा लहेरियासरायक साहित्य आ साहित्यकारक रुझान पर चिन्तित होइत देखलियनि। सम्पूर्ण बातचीतमे कतहुसँ हुनकामे ककरो प्रति कोनो ने तँ शिकाइत आ ने दुर्भावना लक्षित भेल। हम प्रसन्न रही जे मिथिलाक एक महान उपन्यासकार के एतेक लगसँ देख सकल रही। स्वस्ति फाउन्डेसन,सहरसा जहन अपन वार्षिक प्रबोध साहित्य सम्मान लेल श्री केदार नाथ चौधरी जीक नामक घोषणा केलक तहन हमरा रामलोचन ठाकुर जीक कहल सब बात जे हम दुनू गोटेक बीच ट्रेनमे भेल छल से मिलैत सन लागल। मैथिली जगतमे सर्वत्र प्रशंसा भेल नचिकेता जीक। वाजिबो छल कियैक त एते कम समयक अंतरालमे चारि पाँच टा मैथिलीमे एकसँ नीक एक उपन्यास प्रकाशित कय केदार बाबू एकटा रेकर्ड बना लेने छलाह। एहि लेल हिनका पर किछु मैथिलीक लोक सब आरोपो लगेलकनि जे अपन बेसी पोथी पाइ दऽ कऽ सोमदेव जीसँ लिखेलनि। से आरोप कतेक सही आ कतेक मिथ्या तकर तहमे नै जा कऽ एतेक बात त निधोख कहल जा सकैत अछि जे केदार नाथ चौधरी मैथिली साहित्य के नव भाव भूमिक आ नव स्वादक उपन्यास विधाक मौलिक वस्तु देलखिन्ह। करार, माहुर आ चमेली रानी पढ़लाक बाद हमर ई अपन व्यक्तिगत मत अछि। आब अबैत छी जे जहन श्री केदार नाथ चौधरी जी कलकत्तामे मैथिली आन्दोलनमे अपन सक्रियता बनौने छलाह ताहिसँ सम्बन्धित घटना क्रम पर। कलकत्ताक अपन प्रवासमे केदार नाथ चौधरी जी नेता नै बनल छलाह। कार्यकर्ता बनल रहैत छलाह। कोनो सांस्कृतिक वा साहित्यिक कार्यक्रम लेल चन्दा संग्रह करबाक लेल मैथिल सभक घरमे जाइत छलाह। एक टा संभ्रांत मैथिल अपन परिवारक लोक के कहलखिन जे केबार नै खोलू। फेर कियो चन्दा माँगय आयल हैत। ई सभ मैथिलीक नाम पर चन्दा संग्रह कऽ कऽ अपन अपन पेट भरै जाइ अछि। मारू। भगाउ एकरा सब के। आबारा नहि तन। से आबारा आन कियो नै केदारे बाबू छलाह। आ से जहन हमर उक्त आलेखमे अपन नामक चर्च नै देखलनि तँ दुखी भऽ कऽ हमरा फोन केने रहथि। कहलनि जे अहाँ हमर पोथी आबारा नहितन नै पढ़ने छी भरिसक। यदि नै पढने छी तँ हम पठा दैत छी। से पठा देने रहथि। हम पूरा पढ़लाक बाद अपन भूल स्वीकार करैत कहलियनि फोन पर जे अहाँ तँ कलकत्तामे मैथिलीक सम्पूर्ण इतिवृति लिख देने छियैक। से अपनो लोकनिसँ आग्रह करब जे जिनका किनको कलकत्तामे मैथिलीक बारेमे कोनो जानकारी लेबाक हो। हमरा लोकनिक विभूति लोकनि की की दशा भोगने छथि मैथिलीक अभियान लेल से बुझबाक हो तँ हिनक पोथी जरूर पढ़ी - आबारा नहितन। एखन तँ हम अपन मैथिलीक महान सपूत श्री केदार नाथ चौधरी जीक स्वस्थ जीवनक जगदम्बासँ कामाना करैत छियनि। विदेहक समस्त टीमक प्रति आभार व्यक्त करैत छी जे अहाँ लोकनि हुनका पर केन्द्रित अपन एक अंक निकालि रहल छियनि। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। अजित कुमार झा- संपर्क-9472834926 अबारा नहितन : एक अनुपम कृति केदार भैया (श्रद्धेय केदार बाबूकेँ गामपर नेनासँ ल' क' बूढ़ा सब अही नामसँ हुनका सम्बोधित करैत छलनि तैँ हमहूँ ई आजादी ल' रहल छी) एवं शिवकांत मैट्रिकमे फेल भेलाक उपरांत असाध्य पीड़ासँ मर्माहत भ' एकमी पुल लग बागमती नदीक प्रचंड वेगमे जल समाधि लेबय लेल विदा भेल छलथि आ एहन विषम परिस्थितिमे शुद्ध देशी घीमे छानल जिलेबी-कचौड़ीक सुगंधिसँ आकृष्ट भ' जीवनक अंतिम इच्छा पूर्ति हेतु ढनजी महाराजक भोजनालयमे प्रवेश आ अकस्मात कौआली बाबूसँ भेँट एकटा अद्भुत संयोगे कहबाक चाही अन्यथा 'आबारा नहितन' एवं पहिल मैथिली सिनेमा " ममता गाबए गीत" केर अस्तित्व जन्मसँ पूर्वहि अन्त भ' गेल रहितैक। कौआली बाबूसँ विदुर नीति सीखि केदार भैया अपन असह्य पीड़ाकेँ बिसरि गेलाह आ गाम पहुँचि क' मस्त मौला जीवन बिताबय लगलाह। पढ़ाई लिखाई केर आब हुनका लेल कोनो महत्व नहि छलनि मुदा एकदिन हिनका बौआ (गामक एक बुजुर्ग स्वतंत्रता सेनानी) अपना पास बजा क' विस्तारपूर्वक गप्प केलखिन आ केदार भैयाकेँ फेल होयबाक कारण स्पष्ट भेलन तखन हिनका पुनः पढ़ाई शुरू करबाक हेतु प्रेरित कयलनि आ ओहिकेँ बाद कौआली बाबू द्वारा सिखाओल विदुर नीतिकेँ त्यागि केदार भैया जे योग्यता प्राप्त कयलनि से त' सबकेँ बुझले अछि। तत्पश्चात् कलकत्ताक 'केलीज डाइरेक्टरी'मे एक सौ पच्चीस रुपैयाक नौकरीमे रमि गेलाह। समय नीँके कटि रहल छलनि मुदा अहि बीच हिनका एकटा असाध्य रोग ध' लेलकनि। हँ प्रेम रोग, मुदा एहन ओहन नहि जेहन साधारणतया होइत छैक। हिनका त' मिथिला-मैथिली वाला प्रेम रोग ध' लेलकनि। सूतल- जागल, उठल-बैसल, चौक-चौराहा, बाटे-घाटे सदर काल बस एक्कहि चिंता जे मैथिली भाषाक विकास कोना होएत एवं अहि यज्ञमे ओ कोन समिधासँ आहुति देताह? बहुत तरहक सलाह सब भेटलनि मुदा कोनो चित्तपर नहि चढ़ैत छलनि। हिनक एक मित्र बैद्यनाथ बाबू हिनका मिथिलाक्षरक पुन: स्थापना हेतु कार्य करबाक सुझाव देलकनि। मिथिला मैथिली करय वाला नेता सबहक हाल देखि मोन स्थिर नहि क' पाबि रहल छलथि । मैथिली हेतु किछु नीँक करबाक लेल संकल्पित त' छलथि मुदा कोन माध्यमसँ ताहि प्रश्नक उत्तर नहि भेटि पाबि रहल छलनि । बहुत मंथन कयलाह मुदा कोनो निष्कर्षपर नहि पहुँचि पाबि रहल छलथि । अही उहापोहक स्थितिमे केदार भैया अपन मित्र महंथ मदन मोहन दास जीकेँ पास पहुँचलाह। अपन समस्याकेँ विस्तारसँ हुनका कहलनि। जवाबमे महंथ जी कहलखिन: " जाबे तक सम्पूर्ण मिथिलाक लोक अपनाकेँ मैथिल नहि बुझत ताबे तक कोनो तरहक अभियान सफल नहि हेतैक। तैँ हम विचार देब जे कोनो एहन योजना बनाउ जाहिमे कल्पने सही, कल्पनाकेँ साकार करैक मार्ग होइ। कल्पनाकेँ यथार्थ बनबैक एकहि टा मंत्र सफल होयत जे मंत्र मिथिलामे रहनिहार प्रत्येक जाति, प्रत्येक समुदायकेँ मैथिल बनैक प्रेरणा देतै, अनिवार्यता बुझौतै।" मैथिली प्रचार प्रसारक माध्यम मनोरंजन हो से विचार महंथ जीकेँ छलनि। महंथ जी मैथिली फिल्म बनयबाक सलाह देलखिन आ केदार भैयाकेँ अहि महत्वपूर्ण जिम्मेदारीकेँ उठयबाक आग्रह सेहो केलखिन। निस्संदेह पग पगपर केदार भैयाकेँ मदद करबाक हेतु महंथ जी संकल्पित छलथि। ई सब सुनि केदार भैया गुमसुम भेल अंतर्द्वन्दमे पड़ल छलथि । हुनक मनोदशा देखैत महंथ जी बाजल छलाह: " विचार विषम स्थितिमे पहुँचि गेलया। हम एतबा कहब जे अगुता क' किछु निर्णय नहि लिअ। कलकत्ता जाउ आ अपनाकेँ तौलू। मैथिली सेवा लेल वाकपटुता नहि कर्तव्यपटुता चाही। एक तरहक बलिदान लेल अहाँ अपनाकेँ तैयार करु। हम अहाँक तैयारीक सूचनाक प्रतीक्षामे रहब।" सन् 1961 उमर मात्र 25 बरख, गदह पचीसीक आयु। विवाहेटा भेल छलनि, दुरागमन बाँकिए छलनि। एहन परिस्थितिमे मिथिला मैथिली हेतु बलिदान करबाक लेल मोनमे सतत् युद्ध चलि रहल छलनि। आखिर प्रेम रोगी छलथि आ सेहो लैला-मजनू अथवा रोमियो-जूलियट वाला नहि मुदा माँ मैथिलीक हेतुअपन नौकरीकेँ बलिदान करय वाला प्रश्न छल। महंथ जीकेँ आदेश छलनि जेँ भावनाकेँ लहरिमे डूबि क' नहि मुदा बहुत सोचि समझि क' निर्णय लेबाक छलनि। सन् 1962मे एक प्रेम रोगी अपन मातृभाषा मैथिलीक मान बढ़ाबय हेतु नीँक नौकरीकेँ त्यागि अपन वाकपटुता नहि मुदा कर्तव्यपटुताक परिचय दैत बलिदानक पथपर चलयसँ पूर्व गाम पहुँचलाह। परिवारक सदस्य सब बंटवारा ल' क' बाझल छलथि तैँ किनको फुर्सत नहि छलनि जे केदार भैयाकेँ विषयपर सोचितथि। आखिर केदार भैया सेहो कोना अहि फेरामे पड़ितथि। नौकरी त' छोड़िए देने छलाह आब अपन जमीन जायदादक मोह त्यागि माँ मैथिलीक सेवामे किछु नीँक करबाक भावनासँ ओतप्रोत भ' आगूक कार्यक्रम तय करबाक हेतु महंथ जीकेँ पास मिर्जापुर पहुँचलनि कि तखने देशमे भूचाल आबि गेलै। पंचशील नीतिकेँ धत्ता बतबैत आ हिन्दी चीनी भाई भाई केर नाराक मध्य भारतक पीठमे चीन छूरा घोँपि देलक। चीनसँ दोस्तीक भ्रममे नेहरु जी निफिक्र छलथि मुदा चीनक पुरान इतिहास छैक जे ई भरोसाकेँ लायक नहि अछि। ई एक लुटेरा देश अछि आ अपन विस्तारवादी नीतिकेँ कारण छल करयमे सिद्ध हस्त अछि। केदार भैया आगू लिखैत छथि: " समय चक्र मलहमक काज करैए। नौकरी छोड़ब, परिवारमे बंटवाराक कलह आ देशपर चीनक आक्रमणसँ उपजल मानसिक प्रताड़ना हमरा एहन स्थितिमे पहुँचा देने छल जे सोचल विचारल सब तरहक काजसँ विरक्ति भ' गेल छल। उत्साहमे ब्रेक लागि गेल छल। मुदा जखन थोड़ेक समय बितलै तखन जा क' मोनमे विचारल बात फेरसँ अपन जगह पकड़लक। हम मदन भाई लग पहुँचलहुँ। अन्ततोगत्वा 23 सितम्बर 1963 ई० क दिन हम आ मदन भाई मैथिली भाषामे फिल्म निर्माणक उद्देश्यसँ बम्बई लेल प्रस्थान केलहुँ।" मैथिली प्रेम रोगसँ ग्रसित दुनु मित्र माया नगरी बम्बई पहुँचलाह, जहाँ हिनका सबकेँ अपन स्वप्न साकार करबाक छलनि। पहुँचि त' गेलाह मुदा स्वप्न साकार करबाक मार्ग आसान नहि छलनि किएक त' दुनु गोटामेसँ किनको अहि विधाक ज्ञान नहि छलनि। एहन समय आवश्यकता छलनि एकटा सूत्रधारक आ से छलथि महंथ जीकेँ एक पुरान परिचित मधुबनी जिलाक रहुआ संग्राम वासी उदय भानु सिंह उर्फ भानु बाबू। ' इंडियन नेशन' एवं 'आर्यावर्त'क बम्बईमे संवाददाता एवं विज्ञापन संग्रह कर्ताकेँ रुपमे कार्यरत छलथि भानु बाबू। दुनु मित्र खोजि हेरि क' भानु बाबूक कार्यालय पहुँचलाह। सर्वप्रथम किछु औपचारिकताक निर्वहन भेल आ तकर बाद महंथ जी अपन बम्बई अयबाक उद्देश्य विस्तारपूर्वक भानु बाबूकेँ सुनौलनि। भानु बाबू हिनकर गप्प निर्विकार भावसँ सुनैत रहलाह एवं अंतमे अपन चपरासी घटोत्कचकेँ दफ्तर बन्द करबाक आदेश दैत दुनु आगंतुककेँ साथमे लैत चर्च गेटक समुद्री किनारा पकड़ि अपन भारी भरकम शरीर आ ताहिपरसँ नम्हर डेग दैतमेरिन ड्राइव पहुँचलाह। फुटपाथ एवं समुद्रक बीच एकटा चौड़गर देबाल छल जाहिपर भानु बाबू बैसि रहलाह एवं हुनकर अनुसरण करैत दुनु मित्र सेहो ओहिपर बैसि गेलाह।मेरिन ड्राइवक दृश्य अति मनोरम लगैत छैक देखयमे। किछु देरमे एक अपरिचित व्यक्ति तीनू गोटेकेँ हाथमे डाभ थमा गेलनि। डाभक आनन्द लैत भानु बाबू अहि अपरिचित डाभ वालाक परिचय देलनि। भोगेन्द्र झा उर्फ भोगी बाबू फुलपराससँ बम्बई हीरो बनय आयल छलथि मुदा बहुत संघर्ष कयलाक उपरांत कोनो सफलता नहि भेटलनि तखन पेटक भूख जीवन केर असली रंग देखाबय लगलनि। भानु बाबू अपन एक मित्र जे कि फलक व्यापारमे छलथि हुनका कहि भोगी बाबूकेँ अपन स्वप्नक नगरी बम्बईमे डाभ बेचबाक काजमे लगा देलखिन। केदार भैया दुविधामे पड़ि सोचय लगलाह: ' भोगी हीरो बनय लेल बम्बई आयल रहथि आ एखन डाभ बेचि रहल छलाह। की हम आ मदन भाई चिनिया बदाम बेचब? नहि यौ, हम सभ हीरो बनय लेल नहि, हीरो बनब' लेल बम्बई गेल रही। तखन चिंता कथीक?" बहुत सोचि विचारि क' दोसर दिन दुनु मित्र भानु बाबूक डेरापर पहुँचलाह आ चाह जलपानक उपरांत तीनू गोटे नजदीकेमे एकटा सोलीसीटरक दफ्तरमे पहुँचलाह। दू घंटाक समय लगलनि आ विभिन्न तरहक धारा युक्त कान्ट्रैक्ट पेपर तैयार भेलै। रुपैयाक आठ आना महंथ मदन मोहन दास, छह आना उदय भानु सिंह आओर दू आना केदार नाथ चौधरीक हिस्सा तय भेलनि आ अहि तरहें प्रथम मैथिली भाषाक फिल्म " ममता गाबए गीत"क श्री गणेश भेल छल। फिल्मक विषय वस्तु ल' क' विस्तृत चर्चा भेलन्हि। केदार भैया एवं महंथ जी भक्ति फिल्म बनाबय चाहैत छलथि मुदा भानु बाबूकेँ सोच किछु हटि क' छलनि। ओ जानकारी देलखिन जे मिथिलाक एकटा लाल दरभंगा जिलाक मोरो ग्रामवासीपरमानन्द चौधरी एकटा नामी डाइरेक्टरक सहायककेँ रुपमे कार्य क' रहल छलथि । अहि कार्यक हेतु वएह उपयुक्त व्यक्ति हेताह जिनका फिल्म निर्माणक ज्ञान छन्हि आ हुनकेँसँ बातचीत कयलाक उपरांत फिल्मक कथा फाइनल होएत। दोसर दिन चारु गोटेकेँ मीटिंग भेलनि। मैच पहिनहेसँ फिक्स छलनि। डाइरेक्टर साहेबकेँ संग भानु बाबू फिल्मक कथा तय क' लेने छलथि । फिल्मक बजट लगभग चालीस हजारकेँ छल। भानु बाबूकेँ तूफानी निर्णयमे दुनु मित्र भसिया रहल छलाह। अहि संदर्भमे महंथ जी कहैत छथि: " केदार भाई जे भ' रहलैए तकरा होब' दिऔ। मैथिली भाषाक प्रति स्नेह हमरा अहाँकेँ एतय अनने अछि। भाषाक प्रतिष्ठा कोना कायम हेतै ताहि लेल भानु बाबू सहित सभटा मैथिलकेँ जिम्मेदारी छनि ने! एकटा बात कठोर सत्य छैक जे हमरा-अहाँकेँ फिल्म बनबैक लूरि नहि अछि। तखन त' दोसरेकेँ भरोसे ने काज हेतैक।" भानु बाबू फिल्मक नाम रखलनि " नैहर भेल मोर सासुर"। फिल्मक प्रसिद्ध नाम " ममता गाबए गीत" त' बहुत बादमे फुरायल रहैक। 'इम्पा'मे " नैहर भेल मोर सासुर" नामसँ फिल्मक रजिस्ट्रेशन भेलै आ फिल्मक गीत- संगीत, रिकार्डिंग, एडिटिंग, प्रोसेसिंग इत्यादि कार्यक हेतु ' बम्बई लैब' केर चयन भेल। दस हजार टका जमा कय रजिस्ट्रेशनक कागत प्राप्त कयलाह। संभवतः ओही दिन अथवा एक दू दिन पहिने भोजपुरी फिल्म " गंगा मैया तोहें पिअरी चढ़ैबो"क सेहो रजिस्ट्रेशन भेल छलैक। भानु बाबूकेँ पत्र पाबि दुनु मित्र अपना संग गीतकार रवीन्द्रनाथ ठाकुर जीकेँ ल' क' बम्बई पहुँचलाह। संगीतकारकेँ रुपमे पटना खगौल वासी श्याम शर्माकेँ चुनल गेलन। ओहिकेँ बाद स्टार कास्ट फाइनल भेल। बजट बहुत तेजीसँ भागि रहल छल तथापि सुमन कल्याणपुर, गीता दत्त एवं महेन्द्र कपूर आ श्याम शर्माकेँ आवाजमे सदाबहार गीतक रिकार्डिंग सम्पन्न भेल। फिल्मक मुहूर्त खूब धूम धामसँ पटनामे मनाओल गेल जाहिमे बिहारक तत्कालीन राज्यपाल फिल्मक क्लिप दबलनि। फिल्म मंडली महेन्द्रू घाटसँ पनिया जहाजपर सवार भ' पहलेजा घाट होइत आउटडोर शूटिंग लेल दरभंगा महाराजक पुरना राजधानी राजनगर विदा भेलाह। फिल्मक शूटिंग केर दौरान अनेक तरहक बिर्रोक आक्रमण भेलै। अन्हड़ उठैत रहलै। कतेकोकेँ कपार फुटलै, कतेकोकेँ छातीमे दर्द पैसलै। दू महीना तेरह दिनक बाद शूटिंग समाप्त भेल फिल्मक आरम्भमे बनल बजटक दोबर खर्च भ' चुकल छलै मुदा एडिटिंग काल ज्ञात भेलन जे फिल्मक शूटिंग अधूरा भेल अछि। केदार भैया लिखैत छथि: " आब 'ममता गाबए गीत' ममताक नोरे टा बहा रहल छल। ' हारि क' दुनु गोटे गाम वापस अयलाह एवं पाँच मास बाद पुनः हिम्मत जुटौलनि आ अधूरा काजकेँ पूरा कयलनि। अहिबेर लगभग एक मास शूटिंग चलल छल। बम्बई जायकेँ तैयारीमे छलथि मुदा ओही समय पाकिस्तान भारतपर आक्रमण क' देलक। भारत युद्ध जीति गेल मुदा ताशकंदमे शास्त्री जीकेँ आकस्मिक निधनसँ पूरा देश मर्माहत छल। समय सब घावकेँ भरैत छैक। शूटिंग भेल सब निगेटिव ल' क' दुनु गोटे पुनः बम्बई पहुँचलाह। ओत्तह पहुँचि ज्ञात भेलन जे एखन लगभग चालीस हजारक आओर आवश्यकता छलनि,अर्थात् बजट जस के तस। आब विषम आर्थिक तंगीमे पड़ि गेलाह। भानु बाबू सुझाव देलखिन जे बम्बईमे मिथिला मैथिली लेल समर्पित संस्थाक मदद लेल जाय। अपन अहि उपन्यासमे एहन संस्था सबहक क्रियाकलापकेँ पढ़ि मोनमे विरक्ति भ' जायत। एत्तह असफलता हाथ लगलाक बाद भानु बाबू हरदा बाजि दैत छथि । यद्यपि निराशा हाथ लगलनि तथापि दुनु मित्र उम्मीद नहि छोड़लाह। ई सोचि जे कलकत्तामे प्रवासी मैथिलक संख्या बहुत अछि ओत्तह केर संस्थासँ किछु सहयोग जरुर भ' जायत मुदा ओत्तहु वएह ढ़ाककेँ तीन पात। संस्था एवं ओकर मठाधीश सबहक अद्भुत चरित्र चित्रण अहिसँ नीँक कत्तहु नहि पढ़ने छी। बम्बईसँ दू डेग आगू निकलल कलकत्ता आ अहि दुनु मैथिली प्रेम रोगीकेँएत्तहि "आबारा नहितन " केर उपाधिसँ संबोधित कएल गेल छलनि। मैथिल समाजक सर्वश्रेष्ठ उपाधि "आबारा नहितन" ग्रहण क" आ अपन मान सम्मानकेँ थुर्री थुर्री करैत दुनु मैथिली प्रेम रोगी अपन होटलकेँ बेडपर पड़ि रहलाह। ठीक एहने समयमे केदार भैयाक पितियौत फोनपर सूचना दैत छथिन्ह जे हिनका कैलिफोर्निया विश्वविद्यालयक गोल्डेन गेट कॉलेज, सैन फ्रांसिस्कोसँ एडमिशनक एप्रूवल वाला पत्र गामपर आयल छन। महंथ जी बहुत प्रसन्न होइत छथि एवं केदार भैयाकेँ सब किछु बिसरि अहि नीँक मौकाकेँ नहि छोड़बाक लेल आग्रह करैत छथिन्ह।16 मई 1966केँआठ डालर जेबीमे राखि केदार भैया बैंकाक होइत सैन फ्रांसिस्को लेल हवाई जहाजमे बैसि गेल रहथि। कलकत्ता एयरपोर्ट धरि हिनका अरियातय लेल एकमात्र हिनकर मित्र मदन भाई अर्थात् महंथ जी पहुँचल रहथि। सन् 2001मे केदार बाबू स्वदेश अर्थात् अपन गामपर घर बना क' रहय लेल अयलाह मुदा से संभव नहि भेलन। लहेरियासरायक बंगाली टोलामे कनिएटा जमीन कीनि क' घर बनयलाह आ एकर नाम रखलनि 'हिडेन काॅटेज'। ओहिकेँ बादसँ एत्तहि रहय लगलाह। पासेमे महंथ जी केर आवास सेहो छलनि। रिटायरमेंट वाला जीवन नीँकेसँ बिता रहल छलथि । सन् 2003 संभवतः जून अथवा जुलाई केर महीना आ बज्र दुपहरियाक समयमे एकटा मैथिल युवक हिनकासँ भेँट करय अयलनि। अपन परिचय दैत ओ बाजय लगलाह: " हमर नाम विजय कुमार मिश्र अछि। हम पत्रकार छी। हमरा मैथिली सिनेमाक कब्र खोधयमे रुचि अछि। हम कइएकटा मैथिली भाषामे बनल, बिन बनल सिनेमाक कब्र खोधि चुकलहुँ अछि। कनिए काल पहिने उमा बाबूसँ भेँट भेल रहय। ओ " ममता गाबए गीत" फिल्मक कब्रक पता देलनि। हमर प्रश्नक अपने उत्तर दिअ। की अहाँ मैथिली भाषामे बनल ' ममता गाबए गीत' फिल्मक कर्ता धर्ता छी? अगर हँ त' अहाँ मैथिल समाजमे अपरिचित किएक छी?" पत्रकार विजय कुमार मिश्रकेँ संगमे ल' क' केदार बाबू अपन मित्र महंथ मदन मोहन दास जीकेँ घर पहुँचलाह। ओही दिन केदार बाबूकेँ जानकारी भेटलनि जे गीतकार रवीन्द्रनाथ ठाकुर जी महंथ जीसँ लिखित अधिकार प्राप्त कय अहि फिल्मकेँ रिलीज करबौलनि। विजय जी केर अपरिचित किएक वाला प्रश्नपर जवाब दैत महंथ जी कहलखिन: " जतेक ठूसि-ठूसि अँटतैक तकर दोबड़, तेबड़ विद्वान मिथिलामे छथि । अहाँ पत्रकार छी, अहाँकेँ त' सभ किछु बुझले होएत? मुदा तइयो सुनि लिअ। मैथिल विद्वानकेँ पुरस्कार देबय वाला जतेक संस्था छैक तकरा सही-सही विद्वानक चुनावमे प्राणांतक पीड़ा होइत छैक। तैँ संस्थाक कर्णधार सभटा पुरस्कार अपनेमे बाँटि लैत छथि । हम आ केदार भाई जँ मिथिला समाजमे अपरिचित छी ताहिमे हर्जे की? हमरा सभकेँ पुरस्कारक लोभ नहिए, तखन परिचित किएक होइ। पुरस्कारक लेल गोलमे के जैत? मैथिली प्रेम रोगमे जे भोगलहुँ से भोगिलेलहुँ, आब की?" केदार बाबूअहि उपन्यासक अन्तिम पैराग्राफमे लिखैत छथि: " फिल्म पूरा बनि गेलै तकर सूचना पाबि हमरा दुःख नहि प्रसन्नता भेल छल।मुदा एकटा जिज्ञासा मोनमे रहिए गेल रहए। की हम आ मदन भाई मैथिल समाजमे अपरिचितसँ परिचित भेलहुँ? जवाबक प्रतीक्षामे मदन भाई संसार त्यागि बिदा भ' गेला। मुदा हम एखन तक प्रतीक्षामे जिविते घुमि-फिरि रहलहुँ अछि।" मिथिला मैथिलीक यथार्थ चरित्र चित्रण अहिसँ नीँक शायद संभव नहि। इंडिका इन्फोमीडिया, नई दिल्लीसँ सन् 2012मे प्रकाशित " अबारा नहितन " 136 पृष्ठक एक अनुपम कृति अछि। अद्भुत रोचक शैलीमे लिखल अहि पोथीक प्रथम पृष्ठ पढ़बै त' बिनु एकरा शेष कयने उठनाइ कठिन होयत। मूल्य मात्र 100 टका।परम आदरणीय स्व० रामलोचन ठाकुर जीकेँ शब्द अथवा मोनक उद्गारकेँ लिखने बिना हम विराम नहि ल' सकैत छी: " अबारा नहितन " एक अबाराक कथा-गाथा थिक। अद्भुत, अभिनव, अविस्मरणीय कथा-गाथा! अफसोच जे मिथिला-मैथिलीमे एहन अबारा दोसर नहि भेल। जँ दस-बीसोटा एहन अबारा भेल रहैत त' निश्चिते आइ मिथिला-मैथिलीक दोसर रुप रहितैक। ई अबारा थिका अपन प्रिय बन्धु महंथ मदन मोहन दासक संग केदार नाथ चौधरी। मिथिला विभूति मदन मोहन दास आइ हमरा लोकनिक बीच नहि छथि, ई पोथी हुनको श्रद्धांजलि थिक। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। भीमनाथ झा-संपर्क-7482066855 तोर समान एक तोहेँ माधव २००४ ई.। मास ठेकान नहि। कटहरबाड़ी गुमतीपर लाइन टपैत काल मोदू बाबू (लालबाग) अभरला। देखिते कहलनि-अहीं ओतऽ चलल छी। केदारनाथ बाबू अहाँकेँ देबा लेल ई पोथी देलनि अछि। ई कहैत चकमक गत्ता बला पोथी बढ़ा देलनि। चमेली रानी- केदारनाथ चौधरी। पुछलियनि-लेखक ध्यानपर नहि आबि रहल छथि। कहलनि डॅा.शभूनाथ चौधरीक छोट भाइ थिका। मैथिलीक पहिल सिनेमा 'ममता गाबय गीत'क निर्माता सदस्य छला। लहेरियासरायमे रहै छथि। अहाँकेँ आ विभूति आनंदकेँ खास कऽ देबा लेल कहलनि अछि। 'बेस' ई कहि आँगा बढ़ि गेलहुँ। खा कोनो प्रतिक्रिया मनमे नहि आएल। अपितु, कवरपरक फोटो 'बजारू' पोथी जकाँ लागल आ सत्त पूछी तँ कने वितृष्णेक भाव जागल। पोथी पड़ले रहलै। गोटेक मासक धकमे सूचना भेटल जे ओहि पोथीपर पूहर होममे समीक्षा-गोष्ठी आयोजित छै, ताहिमे हमहूँ आमंत्रित छी। आब तँ पोथी देखब अनिवार्य। से जखन पढ़ब शुरू केलहुँ तँ दोसरे लोकमे पहुँचि गेलहुँ। हम 'फास्ट रीडर' नहि छी। थम्हि-थम्हि कऽ पढ़ै छियै। मुदा ई पोथी तँ जुलुम छलै। थम्हऽ दैते ने छल। जकरा कहै छै एकै श्वासमे, तेना पढ़ि गेलहुँ।पढ़ला उत्तर तात्काले दू टा जिज्ञासा मनेमे उठल। एक टाक तँ उठिते निराकरण भऽ गेल। कने सोचलापर दोसरोक, मुदा लगले भऽ गेल। पहिल छल- अइ तरहक विषय-वस्तुपर मैथिलीमे कतहुँ पढ़ने छी? -नहि दोसर छल-चुम्मक जकाँ पाठककेँ अपना दिस घिचबाक कलामे कतऽ अछि ई उपन्यास?- 'कन्यादान'क बाद दोसर कहू ने 'मरीचिका'क बाद तेसर नम्बरपर। हम नहि बुझै छी जे हमरा ई कते आकृष्ट केलक से आब कहबाक काज अछि। समीक्षा गोष्ठीमे पहिले-पहिल देखलियनि। सुदर्शन व्यक्तित्व, शालीन ओ मृदुभाषी, प्रसन्नानन, वयसे हमरासँ आठ-दस वर्ष जेठे लगला। पचासक करीब प्रबुद्ध समाजक उपस्थिति। जाइत देरी परिचय नहि केलहुँ। उपरि कऽ अपन परिचय देब हमर स्वभाव नहि। ईहो पूर्वमे देखने नहि हेता। तँइ बजबा लेल जखन हमर नाम लेल गेल, तखने ई बुझने हेता। स्वाभाविक छल-कृतिक जमि कऽ प्रसंशा भेलै। ताहिमे हम स्वयंकेँ सेहो शामिल केलहुँ। सभा समाप्तिक बादे दुटप्पी भऽ सकल। ई कंटेक्ट नम्बर लेलनि। फोन-मोबाइलपर गप होइत रहल। ई हमरासँ सभ तरहेँ जेष्ठ-श्रेष्ठ। आदरणीय। किंतु क्यो हिनक विश्वासी हमरा दऽ हिनका बेसी बढ़ा-चढ़ा कऽ कहि देने हेथिन, तकरा ई भरिसक गीरह बान्हि लेलनि आ हमरा मैथिली साहित्यिक 'जानकार' बुझऽ लगलाह आ ताही तरहेँ गप्पो करऽ लगलाह। मुदा वास्तविकता तँ ई थिक जे शास्त्रीय आ व्यावहारिक ज्ञान, अनुभव, प्रतिभा, साहित्यिक योगदानमे हमरा के पुछैए, कतोक नामी-कलामी 'उलार' भऽ जेता। २००४ मे हिनक चमेली रानी एलनि आ ओ हिनक नामकेँ संपूर्ण मैथिली वातावरणमे गमगमा देलकनि। उपन्यास उद्यान तँ नूतन सुरभिसँ महमहा उठल। हजार प्रतिक संस्करण धराधरि चारि खेप आएल आ जकरा कहै छै 'छूह उड़िआएब' से उड़िया गेल। वएह टा नहि, ओही जोड़क एकपर एक चारि टा उपन्यास 'करार' (२००६), 'माहुर' (२००८), 'हीना' (२०१३), तथा 'अयना' (२०१८) अबैत गेलनि आ लोक हाथे-हाथ लोकैत गेल। हीनामे तँ हुनक स्नेहादेशकेँ शिरोधार्य करैत भूमिका-स्थानीय अपन अभ्युक्ति देबहि पड़ल। हम अपन सीमा जनैत छी। उपन्यासक मर्मकेँ छूबाक हमरा क्षमता नहि तँइ उचित मूल्यांकनो नहिए संभव भेल। मुदा ई तँ जकरा स्वीकारि लेलनि तकरा तारि देलनि। हिनक पाँचो उपन्यास मैथिली साहित्यिक सचारमे स्वादिष्ट व्यंजनक विन्यास अछि। मैथिलीक आरंभिक सिनेमा 'ममता गाबय गीत'क ई प्रमुख निर्माता रहथि। ओकरे उत्थान-पतनक प्रमाणिक उपाख्यान थिक 'अबारा नहितन'- जे संस्मरण साहित्यिक अमर कृति भऽ गेल अछि। सिनेमा जगतक रंगीन दृश्य जे पर्दापर देखै छी, तकर निर्माण प्रक्रियामे केहन-केहन भयावह आ विकट श्वेत-श्याम अदृश्य दृश्य सभकेँ पार करबामे निर्माताकेँ कोन-कोन बेलना बेलऽ पड़ै छै, से समान्य लोक नहि बुझितै जँ ई पोथी नहि लिखल जैतै। सिनेमापरक ई पोथी, हम तँ कहब साक्षात् सिनेमा देखब थिक। मैथिली सिनेमा सभ भने फ्लॅाप भऽ गेल हो, मुदा सिनेमापरक मैथिली पोथी, जे एखन धरि एकमात्र अछि, से धरि सुपरहिट भऽ गेल अछि। नेशनल बुक ट्रस्ट दिससँ एहर हिंदी अनुवाद सेहो उपल्बध अछि। पाठ़कीय सम्मान तँ हिनका जकाँ विरल लेकककेँ प्राप्त होइ छै। आ, हमरा जनैत साहित्यकारक हेतु सर्वोच्च सम्मान वएह थिकै। एकमात्र वएह सम्मान थिकै जाहिमे पक्षपातक गुंजाइश शून्यवत् छैक। सांस्थाकिक सम्मान समान्यतः पाठकवर्गकेँ आब नहि करै छै। किंतु एखन धरि ओहो विमर्शवाह्य नहि भेलै अछि। ताहू क्षेत्रक, राशि आ प्रतिष्ठाक दृष्टिएँ, सर्वोच्च 'प्रबोध साहित्य सम्मान-२०१६' सँ ई विभूषित भेला, जाहिसँ हिनक विशाल पाठक वर्ग प्रफुल्लित भऽ उठल छल। ताहि अवसरपरक लिखित भाषणमे हिनक साहित्य दृष्टि एवं पाठकीय रुचिक समाजिक एवं मनोवैज्ञानिक विश्लेषण श्रोतागणकेँ बहुत दिन धरि मन रहलैक। जाहि वयसमे आबि गेल छथि ताहिमे लेखन कार्य शिथिल पड़ि जाएब स्वाभाविके थिक। किंतु, हिनक चेतना, समृति, उत्कंठा आ उर्जा पूर्ववत् कायम छनि। भने शारिरिक गति मंद पड़ि गेल होउन, किंतु सारस्वत मति स्वच्छंद विचरण करबा लेल तत्पर छनिहेँ। जतबा आ जेहन साहित्य जथा ई दऽ देने छथि, ततबोसँ हिनक नामक पतक्खा फहराइत रहतनि,किंतु हमरा लोकनिक, हिनकर हजारो "फैन" आ लाखो प्रबुद्ध मैथिल समाजक कामना छै जे हिनक दोसर पारीकेँ सेहो देखए। ईश्वरक दरबारमे उजूर पहुँचाएबे टा हमरा लोकनिक सकमे अछि, से बारंबार पहुँचा रहल छियनि। हुनका कहबनि की?-ओ तँ सभटा जनिते छथिन, देखिते छथिन। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। हितनाथ झा-संपर्क-09430743070 ह्रास होइत सभ्यता संस्कृतिक इतिवृत्तिक अयना : "अयना" मिथिलाक सामाजिक -आर्थिक -साहित्यिक-सांस्कृतिक व्यथा-कथा , प्रेम-अनुराग-विरागक सचित्र चित्रण, ह्रास होइत सभ्यता -संस्कृतिक इतिवृत्ति , हाहाकार करैत जीवनक मर्मस्पर्शी कथाक वर्णन ठीक ओहने जेहन अयनाक प्रति छबि देखा पड़ैत छैक, ने कोनो काट-छाँट, ने कोनो कम-बेस, ने कतौ कृत्रिमताक भान, ने कतौसँ शब्दक आयात,ने निर्यात, विशुद्ध अपन भाषाक शब्द-लालित्यक प्रयोग कयने छथि जेना अयनाक सामने ठाढ़ होथि जतय कृत्रिमताक कोनो गुंजाइस नहि,सोझ तँ सोझ,टेढ़ तँ टेढ़, गोल तँ गोल,चाकर तँ चाकर, भोर,दुपहरिया,सांझ,राति,जखन देखब, जेना देखब,जकर देखब, जाहि स्थिति-परिस्थितिमे देखब, ओहिना स्पष्ट रूप झलकि सामनेमे आबि जायत। उपर्युक्त बात हम केदार नाथ चौधरीक 'अयना' उपन्यास पढ़लाक बाद विश्वासक संग कहि रहल छी, जाहिमे कनेको कृत्रिमता नहि अछि,कारण उपन्यासकारक लेखनीक अपन निजता छनि, विशिष्टता छनि, सहजता आ सरलता छनि, ग्रामांचल - शब्दक बहुलता छनि, कथ्य आ तथ्यक प्रचुरता छनि,कल-कल बहैत नदीक जल धाराक सदृश भाषाक प्रवाह छनि, पाठककेँ अपना दिस आकर्षित करबाक पूर्ण क्षमता छनि। ई पोथी मनलग्गूक संग समाजक कुप्रथापर जबर्दस्त प्रहार अछि, घटना -कल्पनाक समुचित उपयोग उपन्यासक श्रृंगार अछि, ढोंगीक अनुचित व्यवहारक भंडाफोड़ अछि, विद्रूप समाजक कुत्सित व्यवहारक कार्य -कलाप अछि, सामाजिक बन्धन तोड़बाक हेतु लेड़ चुबैत कामवासनाक देखार करैत घुटन अछि, आतंकवादक आतंक अछि, चिन्ताक संग चिंतन अछि, शब्दचित्रक मिथिलाक रंग-विरंगक अचार जकाँ विन्यस्त सचार अछि, राजनीतिमे चलैत भाइ-भतीजाबादक कारणसँ सरकारी कार्यमे अयोग्य व्यक्तिक नियुक्तिसँ कार्यपर पड़ैत प्रभावक चुभन अछि, आर अछि मायक ममता, पिताक निर्ममता, उच्च वर्गक लोलुपता, भाइ -बहिनक स्नेह, ठेला वलाकक उपकारक नेह, बेइमानक इमान आ वचनबद्धताक प्रमाण। प्रारम्भ होइत अछि, मैथिली पोथीक लेखक,प्रकाशक,ग्राहकक चिन्तासँ, लेखकक गोंधियागिरीक हम सुनरी कि पिया सुनरासँ,ढेर लागल किताबक ढेरीमे दीवार खाइत चिन्तासँ, किन्तु विशुद्ध लेखक,कविकेँ एकर कोन चिन्ता,ओ तँ जीवाक लेल लेखनी करैत अछि, ईश्वर प्रदत्त प्रतिभाक उपयोग करैत अछि आ से उपन्यासकार कवि-लेखक उदयचन्द्र झा 'विनोद'क निम्नलिखित पाँतीक उद्धरण कयलनि अछि -' हम लिखैत छी कविता,सूर्यकेँ अर्घ्य दैत छी,ककरो किछु फर्क भने नहि पड़ौक, हमरा पड़ैत अछि।अहाँ पढू वा नहि, हमरा लिखय पड़ैत अछि। हमरा लेल कविता लिखब,आइयो अछि आवश्यक, परमावश्यक अछि जीवाक लेल।" से सत्ते,जीवाक लेल साहित्यक सृजन होइत छैक, तात्कालिक प्रभाव पड़ौ वा नहि पड़ौ,कालजयी रचनाक पाठक सभ समयमे भेटतैक, सभ पीढ़ीमे भेटतैक, आगाँक पीढ़ीक लेल तत्कालीन समाजक अयनाक काज करतैक,बाँकी माल-जालक निघेस जकाँ आगिक ज्वालामे विलीन भ' जेतैक। साहित्य अखबारक पन्ना नहि अछि,जे तत्काले पढ़ल जायत,नहि तँ बासि भ ' जायत। उत्कृष्ट साहित्य कहियो नहि बासि होइत अछि,अपितु युग-युग ओहिमे निखार अबैत रहैत अछि, ओकर उपयोगितक अनुसन्धानपर अनुसन्धान होइत रहैत अछि,आगाँकक पीढ़ीक लेल अनुकरणीय होइत रहैत अछि। एहि उपन्यासमे शब्दक लालित्य, जेना पूर्वमे कहलहुँ अद्भुत अछि, एक्कहि डारिये कतेकपर निशाना अछि,तकर मात्र हम एक उद्धरण प्रस्तुत करबाक प्रयास करैत छी, बाँकी पूराक पूरा पोथी अपने जँ पढ़बै,तँ बिना पूरा पढ़ने कतौ निकलि नहि सकबै, कतौ नीरस नहि, रस तँ नैराश्यमे सेहो छैक,किन्तु हिनकर पोथीमे बिज्जू (सरही)आमक रंग -विरंगक स्वाद छनि -मधुर -खटगर-अम्मत-चहटगर। " हमरे गामक जटाधर मिश्र धनिक लोक तs छथिहे संगहि छथि कलाक पुजेगरी। हुनकर पौत्रक उपनयनमे हमहूँ निमन्त्रित छलहुँ।मुफ्फरपुरसँ दू टा बाइजी आयल छलीह। दुनू बाइजी मानि लिअ इन्द्रक दरबारक परी-मेनका आ तिलोत्तमा।हम सौन्दर्यक उपासक छी से बजबामे हमरा लाज नहि होइए। दुनू बाइजीक नृत्यमे जे छटा छल ताहिसँ रसक बरखा भ ' रहल छल।दुनूक कंठसँ निकलल मधुर गीत स्वतः संगीत बनि हमर मोनकेँ आप्लावित क ' देने छल।हम दुनू बाइजीक अद्भुत नृत्य एवं कर्णप्रिय संगीतमे एतेक ने रमि गेलहुँ जे हमरा समयक ठेकान नहि रहि सकल। लगभग अर्धरात्रिक वेलामे आपस अपन आँगन पहुँचलहुँ।आषाढ़क महिना,तितल अन्हरिया राति,किछुए काल पहिने एक जबर्दस्त अछार भेल रहैक, आँगन पिछर, टोर्चक बैटरी कमजोर, भगजोगनीक इजोत,पैरक चट्टीमे थाल-कादो लेभरल। कहुना दुआरिपर चढ़लहुँ। मुदा पिछरि गेलहुँ। कतबो अपनाकेँ सम्हारलहुँ तइयो दुआरिपर सूतलि फुलकाहीवाली टहलनीक छोटकी बेटी कुसमियाक देहेपर ओघरा गेलहुँ। कुसमिया चिचिया उठल -माइगे माइ ! अनघोल जकाँ भ ' गेलै। कोठलीसँ पत्नी बाहर एलीह। हुनकर हाथक टॉर्चमे पेट्रोमेक्सक प्रकाश।उपस्थित दृष्यकेँ अवलोकन करैत ओ बजलीह - लुच्चा ! मनसाक लुचपना हमरासँ अधिक के बुझत। " काल -पात्रक समुचित चयन "अयना" उपन्यासक पठनीयता सदैब रहत,ताहि हेतु प्रबोध साहित्य सम्मान एवं केदार सम्मानसँ सम्मानित, मैथिलीक पहिल सिनेमा 'ममता गाबय गीत 'क लेखक,निर्माता श्री केदारनाथ चौधरी बधाइक पात्र छथि। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। अमरनाथ झा- संपर्क-9110932557 अपरिचितसँ परिचितिक यात्राः केदारनाथ चौधरी लिफापपर अहाँक पता लिखैत हम कते तरहक मनोभावसँ गुजरल रही। हिडेन कॅाटेज लिखैत लागल जेना ई घर शिमला, दर्जिलिंग वा कोनो रमणीय पहाड़ी उपात्यकाक बीच शांत-निश्चल-एकांतमे बसल हुअए। मोनककेँ एकटा शीतल हरितिमा घेरि लैत अछि। आगू बंगाली टोला, लहेरियासराय लिखतहि हमरा मूँहपर एकटा स्मित मुस्कान खेलए लगैत अछि। अचानक हुनक हँसी हमरा सुनाइ दैत अछि। हम हुनका दिस तकैत छी। हुनकर झलकैत दाँत नजरि अबैत अछि। हुनकर हँसी एक तरहे जबाब छल। मुदा हम संतुष्ट नहि होइत छी। हम पुनः कहै छियनि " वा अहाँ विदेशमे बहुत दिन रहलहुँ तकर प्रभाव एकर नामाकरणपर अछि"। ओ मुस्काइत संक्षिप्त उत्तर दैत छथि "विदेशसँ घुमलाक बाद २००१ मे कनियें टा जमीन कीनि कऽ कनियें टा घर बनेलहुँ, किएक तँ घर कतहुँसँ देखबामे अबैत छलै तँइ नाम देलियै "हिडेन कॅाटेज"। हम आर किछु पुछतियनि ताहिसँ पहिनहि ओ पुछलनि- अहाँ हमरा चिन्हलहुँ केना? हमर जबाब छल- एहि दू दिनसँ पोथीक ब्लर्बपर छपल अहाँक फोटो बेर-बेर देखि कऽ। हुनक एकटा पैघ ठहक्का प्लेटफार्मपर पड़ल। हमरा लोकनिक ग्पप राँची स्टेशनक प्लेटफार्मपर चलैत भऽ रहल अछि। ओ जयनगर-राँची एक्सप्रेससँ राँची आएल छलाह। हमरा लोकनि स्टेशनक बाहर ठाढ़ गाड़ी दिस जे हुनका लऽ जेबाक लेल अनने छी, बढ़ि रहल छी। हम आ मोहन झा पड़ोसी। झारखंड मैथिली मंचसँ जुड़ल मैथिलीक कार्यकर्ता छी, राँची स्टेशनपर हुनका रिसीभ करबाक लेल आएल छी। हम गप्प कऽ रहल छी मैथिलीक जनप्रिय लेखक केदारनाथ चौधरीक, जिनकर पोथी "अबारा नहितन" केँ बर्ख २०१३ केर 'विदेह साहित्य सम्मान' सँ सम्मानित करबाक अवसर छै आ ओ राँची आएल छथि। झारखंड मैथिली मंचस, राँची मैथिली भाषा आ साहित्यिक उन्नयन हेतु एकटा गौरवपूर्ण परंपराक आरंभ करैत बर्ख २०११ सँ 'विदेह साहित्य सम्मान' प्रतिवर्ष लब्ध प्रतिष्ठित साहित्यकारकेँ हुनक मौलिक कृतिपर प्रदान करैत अछि। केदार बाबूक पोथी 'अबारा नहितन'केँ विदेह साहित्य सम्मानसँ सम्मानित करबाक अवसर अछि आ ताहि लेल झारखंड मैथिली मंच, राँची द्वारा आग्रहपूर्वक बजाओल गेल छथि। 'अबारा नहितन' पहिल मैथिली फिल्म "ममता गाबय गीत" कोना बनल तकर रोचक, विलक्षण एवं आकर्षक कथा अछि। बिना भावुक केने मर्मस्पर्शी वर्णन हिनक कथा-कलाक अद्भुत गुण अछि। जे लेखककेँ जीवनक यथार्थ सेहो अछि। कठोर यथार्थ। एहि पोथीक हिन्दी अनुवाद सेहो भेल अछि। NBT (नेशनल बुक ट्रस्ट) एहि पोथीक पुर्नप्रकाशन सेहो केने अछि। मैथिली सिनेमा एखनहुँ निरंतरतामे नहि अछि। कहि सकै छी टी.भी सिरियल आ सिनेमा डेगा-डेगी बढ़ि रहल अछि। 'ममता गाबय गीत' सिनेमा पर्दापर भनहि बादमे आबि सकल, मुदा ई कहबामे कोनो हर्ज नहि कि जे स्थान हिन्दी सिनेमाक इतिहासमे "राजा हरिश्चंद्र" (वर्ष-१९१३) एवं पहिल बजैत फिल्म "आलम आरा" केर अछि वएह स्थान मैथिली सिनेमाक इतिहासमे 'ममता गाबय गीत' केर अछि आ रहत। मैथिली सिनेमाक पहिल नायिकाक स्मरण अबितहि मोन पड़ैत छथि अजरा आ संगहि मोन पड़ैत अछि कालजयी फिल्म 'मदर इंडिया'। सुनील दत्तक नायिका 'चंद्रा' केर भूमिकामे गुजराती बाला अजराक अनुपम सौंदर्य आ विलक्षण अभिनय। ई पोथी फिल्म निर्माणक कथागाथा सँ तँ परिचित करबिते अछि, संगहि अपन पारदर्शी कथाभाषा, उत्सुकता आ खिस्सा कहबाक चासनीमे अंत-अंत तक पाठककेँ डुबौने रहैत अछि। पाठककेँ अपूर्व स्वाद भेटैत रहैत छनि। वर्णन शैलील मधुरता, सरसता केखनो गुदगुदबैत अछि, केखनो हँसबैत अछि। मुदा एतबे नहि उपन्यास अपन अंतक पश्चात पाठकक समक्ष एकटा प्रश्नचिह्न सेहो ठाढ़ करैत अछि। ई पोथी फिल्म निर्माणक कथेगाथा नहि अछ, एहिमे एकर अतिरिक्तो बहुत किछु अछि। जेना एहि पोथीक संबंधमे स्व. रामलोचन ठाकुरक लिखल अंश अछि "अबारा नहितन एक अबाराक कथागाथा थिक। अद्भुत, अभिनव, अविस्मरणीय कथागाथा। अफसोस जे मिथिला-मैथिलीमे एहन दोसर अबारा नहि भेल। जँ दस-बीसो टा एहन अबारा भेल रहैत तँ निश्चित आइ मिथिला-मैथिलीक दोसर रूप रहितैक"। उपरोक्त पाँति मिथिला-मैथिलीक सौंबंधमे बहुत बात उजागर करैत अछि। उजागर करैत अछि मैथिलक स्वाभाव, स्वार्थपरता। मैथिली नामधारी संस्थासँ जुड़ल लोकक चरित्र। अपन मैथिल भाइ-बंधुक किरदानीक कथा कहैत उपन्यासकारक शब्द मात्र शब्द नहि रहि जाइत अछि बल्कि चित्रमय संसारक खंड-खंड झाँकी बनि जाइत अछि। वचनवीर ओ क्रियाहीन समाजक कथा बनि जाइत अछि। फिल्म निर्माणक पश्चात वितरक नहि भेटबाक कारण नगरे-नगर बौआइत, मान-अपमानक मधुर-तिक्त घोंट पिबैत निर्माताद्वय महंथ मदनमोह दास ओ केदारनाथ चौधरी। सभटा बर्दास्त करैत अंतमे अबाराक उपाधि। परिणाम स्वरूप वितरककेँ अभावमे बनल फिल्म डिब्बामे बंद कऽ अपन जीवनयापन लेल विदेशक रुख एवं महंथ मदनमोहन दासक अपन महंथानक कार्यमे लागब। पोथीक निम्न पाँति हृद्यकेँ मथि दैत अछि-" मैथिल समाजक सर्वश्रेष्ठ उपाधि 'अबारा नहितन' ग्रहण कऽ आ अपन मान-सम्मान एवं अभिमानकेँ थुर्री-थुर्री करैत दिनक लगभग दू बजे आपस होटल पहुँचल रही। हम आ मदन भाइ भोजन कयल आ चुपचाप अपन बेडपर पड़ि रहलहुँ-जाहि कर्मकेँ केलासँ मोनकेँ दुख, अशांति आ शोक भेटैत छै से पाप भेल। जाहि कर्मकेँ केलासँ मोनकेँ सुख, शांति आ तृप्ति भेटैत छैक से पुण्य भेल। अएँ यौ केदार भाइ, हमरा दूनूक फिल्म निर्माणक काज पाप भेलै कि पुण्य? मदन भाइक प्रश्न सटीक छल। केखनो कऽ विचार करैत छी तँ लगैत अछि कि फिल्म निर्माता द्वय समयसँ आगू छलाह वा जे सूतक समाजकेँ जगेबाक प्रयास करैत छैक ओकरा कोपभाजन हुअए पड़ैत छैक। आइ फिल्म निर्माण आ टी.भी सिरियकक क्षेत्र थोड़े गति पकड़लक अछि। मुदा की तात्कालीन मिथिलाक सुतल समाज एकरा स्वीकार करबाक लेल तैयार छल जे मैथिलीमे फिल्मक निर्माण भऽ सकैत छै। हरिमोहन बाबूक नायिका बुच्ची दाइ चुप जकाँ ई समाज चुपचाप आँखि मुनने छल। १९६५-६६ मे बनल सिनेमाकेँ पर्दापर अबैत बीस साल लागि गेल। ताहि लेल रवीन्द्रनाथ ठ़ाकुर जे ओहि फिल्मक गीतकार छथि, हुनक प्रयास सराहनीय अछि। इतिहास भरल-पड़ल एहन उदाहरणसँ जे समयसँ पूर्व कएल गेल काजकेँ प्रसंशा भेटबाक बदला निंदा भेटल अछि। गुरूदत्तजीक फिल्म "कागज के फूल" बादमे प्रसंशित आ चर्चित भेल मुदा प्रारंभमे उपेक्षाक शिकार भेल। नोबेल केर हकदार देशमे पहिल टेस्ट ट्यूब बेबीक जनक डा. सुभाष मुखोपाध्यायकेँ बादमे अंतरराष्ट्रिय स्तरपर मान्यता भेटलनि मुदा अपना समयमे भेटलनि तिरस्कार आ मृत्यु। मुदा एहिमे दोष केकर? यद्यपि समय एलापर समाज मान्यता दैत अछि। आइ मैथिली फिल्म निर्माणक दिशामे निर्माताद्वयक देन अद्वितीय अछि। विदेह साहित्य सम्मान समारोहक अवसरपर तीन दिन तक हुनक संग-साथ भेटल। जतए मैथिली पोथी लेखक मात्र दू सए-तीन सए प्रति छपबैत छथि ओतए हिनक उपन्यासक कए-कए टा संस्करण निकलल। केदार बाबूक साहित्य हुनक पाठकक भरोसे जनप्रिय भेल अछि। हुनक सुधी पाठक हुनक उपन्यासक कथ्य एवं कथा कहबाक जिज्ञासु प्रवृति (आगू की हेतै)क कारणे हुनकासँ एकटा आत्मीयता स्थापि कऽ लैत अछि। इएह हुनक साहित्यक विशेषतो अछि। एक दिन हम हुनका पुछने रहियनि- अहाँक पोथी सभपर पाठक आ लेखक लोकनिक केहन प्रतिक्रिया? हुनक जबाब छल-पाठकक प्रतिक्रियाक फल थिक पोथीक एकसँ बेसी संस्करण मुदा लेखकक प्रतिक्रया बड्ड क्रूर। एहि संदर्भमे एकटा प्रसंग मोन पड़ैत अछि जे हुनकहिसँ सुनने रही- एक बेर अमरजी (चंद्रनाथ मिश्र 'अमर') संवाद पठेलनि जे हम अहाँसँ भेंट करए चाहैत छी। हम हुनका ओतए गेलहुँ। ओ साक्षात कल जोड़ि कहलनि "अहाँक लेखनक आगू हमर लेखन फूसि"। एते कहैत ओ अचानक चुप भऽ गेला आ हमरा दिस स्मित मुस्कानक संग तकैत रहलाह। ओहि नजरिक अनुभूति हमरा आइयो भऽ रहल अछि। युवावस्थामे लागल मैथिली प्रेमरोग विदेशसँ आपस भेलाक बाद एकटा लेखककेँ रूपमे प्रस्फुटित भेल। परिणामतः २००४ आएल हिनक पहिल उपन्यास 'चमेली रानी'। २००६ मे दोसर उपन्यास 'करार'। चमेली रानीक दोसर भाग 'माहुर' प्रकाशित भेल २०१० मे। चारिम 'हीना' २०११ मे आ २०१२ मे 'अबारा नहितन'। सभ पोथी पाठक हाथों हाथ लेलनि। प्रबोध साहित्य सम्मानसँ सम्मानित केादर बाबूक छोट-छोट वाक्य, संक्षिप्त विश्लेषण आ पारदर्शी कथा भाषा पाठककेँ बान्हने रहैत अछि। हि८नक प्रतिभा, प्रतिबद्धता, मातृभाषक प्रति समर्पण, जनप्रियताक एहिसँ पैघ प्रमाण की भऽ सकैत अछि कि केदार बाबू मैथिली पाठकक मोनमे बसै छथि। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। अशोक-संपर्क-8986269001 केदार नाथ चौधरीक उपन्यास मैथिलीमे उपन्यासक उदय संग एकटा विशेष बात ई भेल जे मात्र मनोरंजन लेल एहिठाम उपन्यास नहि लिखल गेल। ओकर एक समाजिक संपृक्ति वा उद्येश्य अवश्य रहैत छल। पत्र-पत्रिको जे प्रकाशित हएब प्रारंभ भेल से कोनो व्यावसायिक हितकेँ देखैत नहि भेल। एकर एक प्रभाव अवश्य पड़ल जे पाठकक रुचिकेँ प्राथमिकता नहि भेटल। साहित्य संग समाज आ तखन पाठकक मनोरंजन तँ ओहिमे रहिते छल। मुदा फिल्मी पत्रकारिता सन सनसनीखेज, उत्तेजनापरक और चहटगर पत्रिका सन कोनो समानान्तर पत्रकारिता मैथिलीमे देखबामे नहि आआोत। उपन्यासोमे देवकीनंदन खत्रीक 'चंद्रकान्ता' (१८८८) सन तिलस्मी आ ऐयारी बला उपन्यास समान्यतः नहि लिखल गेल जे पाठकक संख्या बढ़बैमे सहायक भेल हो। हरिमोहन झाक 'कन्यादान' (१९३३) उपन्यासक लोकप्रियताकेँ कियो नकारि नहि सकैत अछि मुदा ओहिसँ ओकर समाजिकता आ उद्येश्यकेँ, कलात्मकताकेँ पृथक करब संभव नहि अछि। तँइ मैथिलीमे गंभीर आ कलात्मक ओ लोकप्रिय उपन्यासकेँ भिन्न-भिन्न कोटिमे बाँटि देखब संभव नहि अछि। एहि भिन्नताक शुरूआत मुदा एकैसम शताब्दीमे आबि कऽ एहिठाम संभव भेल अछि। हिंदी आ अन्य भाषा सभमे एहन लोकप्रिय कोटिक उपन्यासक अनेक रूप भेटैत अछि। जाहिमे प्रमुख अछि ऐयारी आ जासूसी उपन्यास, रहस्य-रोमांसक उपन्यास,प्रेमपरक उपन्यास, विज्ञान संबंधी उपन्यास, साहसिक अभियानपर आधारित उपन्यास, रोमांटिक ऐतिहासिक उपन्यास आ सेक्स तथा हिंसा बला उपन्यास। पश्चमी साहित्य सभमे तँ लोकप्रिय उपन्यास सभमे तँ अपार विविधता अछि। मैथिलीमे दोसर लोकक प्राणीक एहि धरतीपर जन्म लऽ ओकर क्रिया-कलाप, जीवनपर आधारित उपन्यास सेहो एकैसम सदीमे लीखल गेल अछि। श्याम दरिहरेक एहन उपन्यास सभकेँ एहि क्रममे देखल जा सकैत अछि। केदार नाथ चौधरीक उपन्यास सभ एहने लोकप्रिय उपन्यास सभ थिक जकरा खूब पढ़ल गेल चर्च-वर्च भेल। हुनक पहिल उपन्यास 'चमेली रानी' (२००४) अपराधी आ राजनीति, भाषा-संस्कृति आदिक गठजोड़पर रोचक ढंगक उपन्यास अछि। पाठककेँ पढ़बामे खूब मोन लगैत छै। अपराधतंत्रक एक समानान्तर दुनियाँ समक्ष अबैत चल जाइत छैक। चमेली रानी संगठित रूपसँ डकैती करबैत अछि। ओ कनही मोदियाइन क बेटी थिक। चमेली दशमाक परीक्षा देने अछि। होस्टलमे रहि कऽ। कनही मोदियाइनक डेरा हाइवेपर रहैक। ओकरा ओहिठाम सभ चीजक इंतिजाम रहैक। माय के मृत्युक बाद बाद चमेली हाइवेपर नवका अड्डा बनेलक। अपराधक ओकर कारबार बढ़ैत गेलै। अपन तकनीकी संसाधनक बदौलति ओ पैघ-पैघ हाथ मारए लागलि। अपार रुपैया-सोना, डालर आदि जमा करैत गेल। प्रान्तक मुख्यमंत्री सेहो अपराधी रहथि। बादमे चमेली सेहो मिथिला-मैथिलीक राजनीति करैत समाज सेवाक बाना धऽ कऽ मुख्यमंत्री तककेँ चुनौती दिअ लागलि। मुख्यमंत्री बनबाक योजना बनबए लागलि। बहुत रास असंभव संयोगपर आधारित घटना सभहक समावेश, चमत्कारिक संरचनाक संग ई उपन्यास मनोविलास लेल बुनल काल्पनिक उपन्यास थिक। ई उपन्यास पूर्वक मैथिली उपन्यास सभक अपेक्षा नव विषयपर लिखल गेलाक कारणे पाठक बीच खूब पढ़ल गेल। चौधरीजीक दोसर उपन्यास 'करार' (२००६) भूत-प्रेत, प्रेतयोनिसँ मुक्ति, ईश्वरीय सत्ताक जयघोष, तंत्र-मंत्रमे आस्थासँ भरल उपन्यास थिक। दरभंगामे आएल बाढ़िसँ शुरू भेल ई उपन्यास एक मृत व्यक्तिक अपन जीवन-कथाकेँ अमर बनेबाक लालसापर अन्त होइत अछि। रहस्य-रोमांच उतपन्न करबाक लेल ओ मृत व्यक्ति पंडित राजशेखर दत्तक देह धारण कऽ अबैत छथि आ अपन कथा सुनबैत तेरह सय बर्ख पुरान राजा-रानी, राजकुमारी, कपालिक आदिक प्रेम ओ घृणाक गाथा सुनबैत छथि। एहि गाथामे पियासल, अतृप्त भूत-प्रेत बनल लोक सभकेँ प्रेत योनिसँ मुक्तिक विवरण अछि। एहि उपन्यासमे त्याग-मोक्ष, मृत्युक गप्प, आत्मा-परमात्मा, पांडित्य-उपदेश आदि सभ किछु भेटैत छैक। उपन्यासकारक मनोरथ छनि जे पाठक एकरा रुचिसँ पढ़थि, चर्च करथि। से पाठक सभ उपन्यास पढ़लनि अछि। एहि उपन्यासमे जे दू-चारि टा जीवित मनुक्ख अछि तकरा चकविदोर लगैत छैक, पंडित ककाक कथा सुनि कऽ। पंडित कका कथो सुनबैत छथि आ संगमे राखल रोटी-तरकारी सेहो खुआबैत छथि। बादमे पता चलैत छैक जे पंडित कका तँ बहुत पहिने मरि गेल छथि। जे कथा सुनौलक से हुनक भूत छल। हम हिनक तेसर उपन्यास 'माहुर' (२००८) एखन धरि नहि पढ़ि सकल छी। तँइ ओहिपर किछु कहब संभव नहि अछि। चारिम उपन्यास 'हीना' (२०१३) अंतर्जातीय आ अंतरधार्मिक विवाहक कथानकपर आधारित अछि। संगहि गाममे अबैत समाजिक-आर्थिक प्रगति आ ईर्ष्या-द्वेष, जातीय-भेद-भावक यथाशक्ति सेहो समक्ष अनैत अछि। उपन्यासमे सभसँ पैघ लोक महावीर यादवक बालक ठक्कन यादव छथि। लोक हुनका मालिक बाबा कहैत अछि। हुनकर आश्रम ओ सदाशयतामे संपूर्ण गाम अपन दुख-अभावसँ फराकति पबैत अछि। ओ प्रभावशाली लोक छथि। गाममे इन्दौर शाहरक लग रहनिहार गायक निसार हुसैन खाँसँ ठक्कन यादवक दोस्त शिव कुमार मिश्र संगीतक शिक्षा ग्रहण करैत छथि। खाँ साहबक पौत्री हीनासँ हुनकर विवाह होइत छनि। ई बात बुझि हुनकर पिताक मृत्यु भऽ जाइत छनि। हीना साधुपुरामे आबि कऽ रहैत छथि। सभ हुनका हीरा मौसी कहैत छनि। शिव कुमार सेहो शीबू बाबा बनि गाममे एकदम एकांतमे रहैत छथि। मालिक बाबाक पौत्र गंगाकेँ दलित कन्या मंगलीसँ प्रेम होइत छनि। दूनू विवाह करए चाहैत अछि। मुदा गामक लोक एहिमे षड्यंत्र कऽ विवाह नहि हुअ दिअ चाहैत अछि। मालिक बाबा विवाह चाहैत छथि मुदा हुनक मृत्यु भऽ जाइत छनि। हीरा मौसीक प्रयाससँ गंगा आ मंगलीक मनोरथ पूर्ण होइत अछि। जहिना एक दिन पिताक मृत्यु देखि शिवकुमार विक्षुब्ध भेल रहथि तहिना गंगा आ मंगलीक विवाहमे अड़चन देखि नहि सकला शिवकुमार, गंगा आ हीना (हीरा मौसी) गाम छोड़ि दैत छथि। मघली आ गंगा हीरा मौसीक संपतिक वारिस भऽ जाइत अछि। केदार नाथ चौधरीक पाँचम उपन्यास 'अयना' (२०१८) मैथिलीक कथा-कविताक पाठककेँ तकबाक एक यात्रामे शून्यसँ महाशून्य धरि पहुँचब थिक। अहू उपन्यासमे भूत-प्रेत, मुसलमान आतंकवादी आ ओकर व्यापार आदिक वर्णन अछि। एक उपन्यासकार एहि खोजमे दिल्ली धरि जाइत छथि। विभिन्न लोकक मत सुनैत छथि, सरकारी साहित्यिक संस्थाक यथार्थसँ अवगत होइत छथि आ अंततः करुणासँ विलगित होइत छथि। उपन्यास कहैत अछि जे मनुक्खक समग्र जीवन एक अयना थिक। अयनामे अपन छविकेँ देखैत-देखैत मनुक्ख अपन आयुकेँ शेष कऽ लैत अछि। मुदा किछु एहनो भाग्यशाली लोक छथि जे अयनामे अपन छविक अतिरिक्त सृष्टिकर्ताक अद्भुत देखैत छथि, विभिन्नतरहक चमत्कारकेँ देखैत छथि आ कखनहुँ काल भगवानसँ साक्षात्कारो कऽ लैत छथि। उपन्यासमे अवकाश प्राप्तिक बाद एक सुविधा संपन्न व्यक्ति मातृभाषा मैथिली दिस आकृष्ट होइत छथि। उपन्यासक रचना करैत छथि। तकरा बाद साहित्य क्षेत्रक आ समाजक यथार्थ सभसँ परिचित होइत छथि। पाठकक समस्याकेँ, पाठकक अभावकेँ बूझि ओकर कारण तकबाक लेल हरान होइत छथि। एहि क्रमे मोहनाक कथा कथा आएल अछि जे अपन बअिनिक रक्षा करैत मारल जाइत अछि। साहित्य आ समाजक खोज करैत उपन्यास अन्ततः जिनगीक शून्यसँ साक्षात्कार करैत अछि। से साक्षात्कार शून्यसँ महाशून्य धरि पहुँचि जाइत अछि। जेना कहल केदार नाथ चौधरीक उपन्यास सभ एक लोकप्रिय उपन्यास अछि। एहन उपन्यास सभक समग्र साहित्य संसारमे अपन फराक अस्तित्व होइत छैक। तखन ओ नीक अछि अथवा बेजाए, आवश्यक अछि वा अनावश्यक, समाज लेल हानिकारक अछि वा लाभकर से प्रश्न अवश्य विचारणीय अछि। पँजीवादी समाजमे एहन उपन्यासक अपन खास महत्व होइत छैक। लोकप्रिय उपन्यासमे जे अनेक तत्व होइत छैक तकर रचनात्मक उपयोग श्रेष्ठ उपन्यासकार सेहो करैत छथि। श्रष्ठो उपन्यासमे एहन उपन्यासक कथा शैली आर शिल्प-संरचनाक भऽ सकैत अछि। एहन उपन्यास सभ थिक जखन राजनीति आ अपराधकेँ बिलगाएब कठिन भऽ गेल छै। जखन लोक वर्तमानसँ कटि कऽ अतीतमे आश्रय ताकए लगैत अछि। अतीत महत्वपूर्ण लागए लगैत छैक। प्रत्यक्षसँ बेसी परोक्षमे विश्वास करए लागल अछि। रहस्य-रोमांच, भूत-प्रेत पसिन्न पड़ए लगैत छैक। एहन उपन्यासक लोकप्रियता एहन समयक एक यथार्थ थिक। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। जगदीश चन्द्र ठाकुर "अनिल"-संपर्क-8789616115 चुम्बकीय लेखनक दृष्टान्त "अबारा नहितन" हम मैथिली फिल्म "ममता गाबए गीत" नहि देखि सकल छी, किन्तु पोथी "अबारा नहितन" पढ़िक" फिल्म देखि सकबाक आनन्द प्राप्त भ" चुकल अछि। आदरणीय केदार नाथ चौधरीजीक पोथी "चमेली रानी" हम अठारह बरख पहिने पढने रही। ओ पोथी पढ़िक" चौधरीजीक लेखनक जादूसँ परिचित भेल रही। आइ ई पोथी पढ़िक" ओहूसँ बेशी आनन्द आएल। हमरा लगैए जे जिनका ई पोथी पढबाक सौभाग्य प्राप्त भेल हेतनि हुनको हमरे जकाँ अनुभव भेल हेतनि। चौधरीजी समस्त मैथिली प्रेमीक ह्रदयमे अपन महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त क" चुकल छथि। ई पोथी सेहो सभ मैथिली प्रेमीक सोझाँ सभ दृष्टिसँ विशिष्ट स्थान पाबि चुकल अछि। ई पोथी एकटा इतिहास सेहो अछि जाहिमे देशमे स्वतंत्रता प्राप्ति बाद समाजमे आएल उथल-पुथल, चीन द्वारा भारतपर आक्रमण आ ओकर परिणाम, पाकिस्तान द्वारा भारतपर आक्रमण, भारतक जीत, ताशकंद समझौता,प्रधान मंत्री लाल बहादुर शास्त्रीक मृत्यु, सामाजिक, आर्थिक आ राजनीतिक परिवर्तन, मिथिलाकें एक सूत्रमे जोड़बाक लेल मिथिलाक्षर अभियान आ मिथिला राज्यक सपना, मैथिलीकें संविधानमे स्थान दिएबाक लेल आन्दोलनक सुगबुगाहटि, गाम, कलकत्ता आ मुंबई स्थित मैथिल लोकनिक दशा आ दिशा आदिक बहुत पारदर्शी चित्र प्रस्तुत कएल गेल अछि। छोटका कका अर्थात कौआली बाबू,टने झा, बौआ अर्थात नारायणजी चौधरी,नेताजी,अमरनाथ चौधरी "दीपक",बैद्यनाथ बाबू,बाले बाबू,टमाटर जी,मदन भाई,भानु बाबू,रवींद्र जी,श्याम शर्मा,सुमन कल्यानपुर,गुजराती मुसलमान हिरोइन अजरा,कमलनाथ,बिच्छू जी,शिव कुमार चौधरी,टंच जी,खगेन्द्र जी,प्यारे मोहन,जलील,लता बोस, प्रसाद जी,हीरो त्रिदीप कुमार, डायरेक्टर सी. परमानन्द, मुंबइक चीफ ड्रग कंट्रोलर,इनकम टैक्स कमिश्नर,कोलकाताक यदुवीर बाबू,तिरपित बाबू,बाबू साहेब चौधरी,रतन बाबू,मैथिल बन्धु,मैथिल विभूति,मैथिली सखा जी,बिड़लाजी, छोटा बिड़ला, दरभंगाक डा.शंभूनाथ मिश्र,मैथिलीक प्राध्यापक उमा बाबू आ पत्रकार विजय कुमार मिश्र आदि विभिन्न स्वभाव आ विभिन्न किरदार बला व्यक्ति सभक माध्यमसँ ई पोथी फिल्म "ममता गाबय गीत"क निर्माणक इतिहास प्रस्तुत करैत अछि। पोथीक भूमिकामे भीमनाथ बाबू एकदम ठीक कहैत छथि जे केदार बाबूक चुम्बकीय लेखन,वर्णन शैलीक मधुरता एकरा अतिशय मनलग्गू उपन्यास बना देने अछि। कौआली बाबूक विषयमे कहैत छथि : कका मैट्रिकमे तीन बेर फेल केलाक बादो राजनीतिक चासनीमे डुबाओल भविष्यक इमिरतीकें चूसि रहल छलाह आ प्रसन्न छलाह। टने झाक कहब छलनि जे टीक कटेनाइक अर्थ भेल विचारमे प्रगति आनब। नारायण चौधरी पढ़ाइ नहि छोड़बाक सलाह दैत छथिन। देशक स्थितिपर टिपण्णी करैत कहैत छथि : प्रधान नेता देशक छोट-छोट समस्या सभसँ विरक्त संसारक गुरुपद प्राप्त करबाक लेल व्यग्र छलाह। वैद्यनाथ बाबू मिथिला, मैथिल आ मैथिलीक विकास लेल मिथिलाक्षरक प्रचार-प्रसारकें आवश्यक बुझैत छथि। टमाटरजी मिथिला राज्यक विचार रखैत छथि किन्तु अखबारमे जानकी नंदन सिंहक नाम देखि तमसा जाइत छथि। मदन भाइक कहब छनि जे मिथिलाक पांडित्य फूल नहि काँट बनि गेल अछि, एकटा संकुचित सोच,एकटा निरर्थक गौरवसँ मुक्त कर" पड़तैक, एक ख़ास जातिक एकाधिकारकें तोड़" पड़तैक। ओ भाषाक विकासमे फ़िल्मक भूमिकाकें सभसँ महत्वपूर्ण मानैत छथि, ओ कहैत छथि जे फिल्म बनलासँ भाषाक पहिचान उजागर हेतै,मिथिला आलस्यमे ओंघरायल अछि,उपजाति एवं परम्परा एकरा दरिद्र बनौने छैक आ सभटा दुखक निदान फिल्मक माध्यमे कएल जा सकैत अछि। मदन भाइ कोनो धार्मिक फिल्म बनाबक विचार रखैत छथि आ फिल्मक लेल नोकरी छोडिक" आएल एहि पोथीक लेखकक संग मुंबई पहुँचैत छथि। मुंबईमे जिनकासँ सहयोग लेब" चाहैत छथि ओ स्वयं पचास प्रतिशतक हिस्सेदारी आ अपन पसंदक सामाजिक कथापर आधारित फिल्म बनेबाक लेल हिनका सभकें विवश क" दैत छथि। भानुजीक कहब छनि जे ई फिल्म सम्पूर्ण मिथिलामे समरसता अनबाक लेल क्रांतिकारी सिद्ध हएत। मुंबईमे चीफ ड्रग कण्ट्रोलर आ इनकम टैक्स कमिश्नर दुनू गोटे दू मैथिल समुदायक नेतृत्व करैत छलाह। ओहि सन्दर्भमे कहल गेल अछि जे दू फाँक भेल मैथिल समुदायक एकहिटा कार्यक्रम छलै : अपन भाषा अर्थात मैथिली भाषामे एक-दोसराकें गारि पढ़ब। पोथी पढैत काल बेर-बेर हरिमोहन बाबू मोन पड़ि जाइत छथि। फ़िल्मक कथामे मदन भाइ आ भानू बाबूक विचारमे अन्तर स्पष्ट करैत कहल गेल अछि : मदन भाइक कथनक एकोटा शब्द भानू बाबूक कर्ण-यन्त्रमे प्रवेश नहि क" रहल छलनि। आगाँ कहैत छथि, चूड़ा-दही-चीनी भोजन करय गेल रही। आगूमे पोलाव-विरयानी-मुर्ग मोसल्लम परसि देल गेल। महंथ जी अर्थात मदन भाइक संग रहैत छलाह, हुनकास चौल करैत लिखैत छथि : अजराकें देखिक" मदन भाइक कंठसँ हिन्दी कविता धाराप्रवाह निकल" लागल। "मदन भाइ,अजराक सौन्दर्य अहाकें निर्गुणसँ सगुन बना देलकए।" राजनगरमे सूटिंगक तैयारीक सम्बन्धमे लिखैत छथि : "फिल्म निर्माणमे मादक द्रव्यक ओहने महानता रहय जेना पूजाक समय गंगाजलक। बिच्छू जी नित्य एक कनस्तर ठर्रा पहुंचाबैक कठिन दायित्व अपना कन्हापर लदलनि।" खगेन्द्रजीकें हिरोइन अजराक मैथिली शब्द सबहक शुद्ध उच्चारण करबा मे मदति करबाक भार दैत कहलखिन, "अहाँक कर्मइन्द्री तृप्ति प्राप्त नहि करत मुदा पाँचो ज्ञानेन्द्रीय असीम सुखक भोग अबस्से प्राप्त करत तकर हम विश्वास दिअबैत छी।" खगेन्द्रजीक चित्रण बहुत सुन्दर भेल अछि। ओ कुरता,बन्डीमे आएल छलाह। सेनुरक ठोप केने रहथि, तुलसीक माला छलनि। किछु दिनक बाद हुनक वर्णन करैत लिखैत छथि : पाउडरसँ पोतल दुनू गाल,सेनूरक ठोप निपत्ता, टीक नदारत। मुँहक महक सिगरेटमे गाजाक गंध भरल छलनि। प्यारे मोहन घीचैत ल" जा रहल छलनि मुदा खगेन्द्रजीक चालिमे थ्री स्टेप्स डांस बला लचक आ थिरकन साफ-साफ देख"मे आबि रहल छल। ओरिजिनल खगेन्द्रजीक कतहु अता-पता नहि। ""फिल्म मण्डली लेल चाननक गमक बला ठर्रा कनस्तरमे अबैत रह्य। खगेन्द्रजी भांग,गाजा एवं ठर्राक त्रिवेणीमे डुबकी लगबय लगलाह। "कोलकातामे गिरीश पार्कमे सभामे एक गोटे जे हिनका सबहक परिचय देलखिन ओहि पर हिनक टिप्पणी छनि : ओ हमर आ मदन भाइक परिचय एतेक विस्तारसँ देलनि जे परिचयक बहुतो अंश हमरो दुनू गोटेकें नहि बुझल रहय। कोलकातामे जे मैथिल सभ मदति करबाक लेल सोझाँ एलखिन हुनका मैथिल रत्न, मैथिल बन्धु,मैथिल विभूति,मैथिल सखा, बिड़ला,छोटका बिड़ला आदि नामसँ स्मरण करैत छथि,हुनका सबहक वर्णन बहुत आकर्षक भेल छनि। ओतहि कोना आ के "अबारा नहितन" कहलकनि, से अवश्य पढ़क चाही। कोलकातासँ 16 मइ 1966 क" अमेरिका चल जाइत छथि आ सितम्बर 1977 मे घुरैत छथि, 2001 मे लहेरियासरायमे बंगाली टोलामे "हिडेन कॉटेज"मे रहय लगैत छथि। अही ठाम पुनः मदन भाइसँ भेंट होइत छनि आ पता चलैत छनि जे रवीन्द्रजी महंथजीसँ अधिकार प्राप्त क" क" फिल्म "ममता गाबय गीत" पूर्ण केलनि आ पटना,कोलकाता आ जमशेदपुरमे प्रदर्शन सेहो करौलनि। पोथीक अन्तमे चौधरीजी कहैत छथि, "एकटा जिज्ञासा रहिए गेल जे हम आ मदन भाइ मैथिल समाजसँ परिचित भेलहु ? मदन भाइ त संसार त्यागि देलनि, हम प्रतीक्षामे छी।" हमरा जनैत चौधरीजीकें एहि जिज्ञासाक समाधान भ चुकल छनि। सभ मैथिल जे हिनक पोथी पढलक जे जनैत अछि जे केदार बाबूक अपन जन्मभूमिक प्रति प्रेम, भाषा-साहित्य-संस्कृतिक चेतना एवं तकर उन्नति-विकासक चिन्ता अतुलनीय अछि। हिनक चिन्तनमे मिथिला-मैथिली बसैत अछि जे आखरक रूप ध" कागजपर उतरि लोककें अपना दिस आकर्षित करैछ। हिनक भाषाक सहजता-सौन्दर्य आ कहबाक अभिनव क्षमता पाठककें बन्हने रहैत अछि। तें कोनो दोकानमे हिनक पोथीक छुहुक्का उड़ि जाइत अछि। "वैदेही सम्मान (2013)" आ "प्रबोध साहित्य सम्मान (2016)" सेहो हिनक मैथिली साहित्य सेवाक गुण गाबि चुकल अछि। हिनक मित्र मदन भाइ अर्थात महंथ मदन मोहन दास सेहो हिनक लेखनी द्वारा मैथिल सभक मोनमे नीक स्थान बना चुकल छथि। भरिसक ओ पहिल आ अंतिम महंथ छलाह जिनका मोनमे मिथिला आ मैथिलीक लेल फिल्म निर्माणक बात ध्यानमे एलनि आ फिल्म निर्माणक अनुभव आ ज्ञान नहियो रहैत अपन लक्ष्य लेल मिर्जापुरसँ मुंबइ, मुंबइसँ पटना,राजनगर, फेर राजनगरसँ मुंबइ, मुंबइसँ कोलकाता दौड़ैत रहलाह आ अन्तमे फिल्म बनि जाइ ताहि उद्देश्यसँ रवींद्र जीकेँ अधिकार सेहो द" देलखिन। ओ सदेह नै छथि, किन्तु हुनक मित्र आदरणीय केदार नाथ चौधरी हुनका "अबारा नहितन" पोथीक माध्यमसँ लोकक ह्रदयमे स्थापित आ प्रतिष्ठित क" चुकल छथिन। एहि पोथीक कथानकपर कियो फिल्म बनब" चाहथि त फिल्म सार्थक आ लोकप्रिय भ" सकैत अछि आ ओकर मुख्य भूमिकामे रहताह महंथ मदन मोहन दास। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। योगेन्द्र पाठक "वियोगी"- संपर्क- 9831037532 अपरिचित साहित्यकारक नुकाएल गप हिडेन कॉटेज अर्थात नुकाएल घर। लहेरियासराय के बंगालीटोला मे सत्ते ई पता ताकब आसान नहि छैक कारण मुख्य सड़क के सामनेक भाग मे जे घर छैक ओकर पाछू मे ई छोट सन बंगला बनल छैक, अपन नाम कें सार्थक बनबैत, जकर अपन अलग गेटो नहि छैक। कोनो बात नहि। मुदा आश्चर्य तखन होएत जखन बुझबैक जे एहि हिडेन कॉटेज मे रहनिहार व्यक्ति सेहो, जे मिथिला-मैथिलीक प्रति तन-मन-धन सँ आजीवन समर्पित रहल छथि, प्राय: ओतबे गुमनाम छथि, अथवा किछु वर्ष पूर्व तक गुमनाम छलाह। चमेलीरानी सन उपन्यास, जकर चारिम संस्करण मैथिली भाषा मे एकटा कीर्तिमान स्थापित करैत पन्द्रह वर्षक भीतरे छपि गेलैक, के रचयिता श्री केदारनाथ चौधरी कें मैथिली साहित्य जगत मे बहुत कम लोक चिन्हैत छलनि आ एखनहु प्राय: सएह स्थिति छैक कारण ओ मुख्यधाराक साहित्यकारवर्ग मे चर्चाक विषय नहि रहलाह। जखन ओ मैथिली भाषाक उद्धार लेल सिनेमाक कल्पना केलनि तखन कियो चिन्हलकनि नहि। मिथिलाक बुद्धिजीवीवर्ग लेल ई प्रयास कोनो अर्थे नहि रखैत छलैक। तें चमेलीरानीक प्रकाशन तक ओ मैथिली साहित्याकाश मे उगले नहि छलाह। छोट-छीन लेख, कथा आ कविता अदि लीखि कए पत्र-पत्रिका मे ओ छपौलनि नहि, कवि सम्मेलन आदि मे सम्मिलित भेलाहे नहि आ जिनगीक अधिकांश भाग विदेश मे बितौलनि तऽ लोक कोना चिन्हितनि ? मिथिला मे रहनिहार लोक मैथिली बजिते छल, एखनहु बजैत अछिए, मुदा कोनो एकटा तत्व छलैक जकर अभाव मे लोक कें अपना भाषा पर गर्व नहि भऽ रहल छलैक। ओ तत्व छलैक भावनात्मक एकता। कवि चूड़ामणि मधुपजी एहि तत्व कें चिन्हलनि आ हिन्दी सिनेमाक स्टाइल मे मैथिली लोकगीतक रचना करए लगलाह। कोनो आश्चर्य नहि जे ई गीत सब अत्यन्त लोकप्रिय भेलैक आ पछिला शताब्दीक साठिक दशक मे इसकुलिया बच्चा सँ लऽ कए घसवाहिनी तक के कंठ सँ ई गीत सब चहुँदिसि मुखरित होमए लगलैक। एहि गीतक माध्यमे पहिल बेर बुझेलैक जे मिथिला मे भाषाक लेल भावनात्मक एकता आनल जा सकैत छैक। एकर आगू सिनेमाक माध्यमे मैथिली भाषाक विकास, राष्ट्रीय पटल पर प्रचार आ भावनात्मक एकताक विस्तार केदारबाबूक मौलिक सोच छलनि। मुदा मैथिल समाजक ई दुर्भाग्य जे हुनकर एहि सोच कें अंगीकृत नहि केलक। मैथिलीक पहिल सिनेमाक सूत्रधार रहितहुँ "अवारा नहितन" के उपाधि सँ विभूषित केदार बाबूक रचना दर्जनो मे नहि छनि, आङुर पर गनैबला ‐ चमेलीरानी, करार, माहुर, हीना, अवारा नहितन आ अन्त मे अएना, सबटा उपन्यासे। मुदा एहि सब रचना मे एकटा समान गुण छैक जे कोनो किताब उठा लेब तऽ ओ मस्तिष्क मे लस्सा जकाँ सटि जाएत, अर्थात जाबे ओकरा समाप्त करबैक नहि, चैन नहि भेटत। "रजनी-सजनी"क तर्ज पर साधारणत: लिखए जाए बला उपन्यासक विपरीत एहि छबो कृति कें हरेक पेज, हरेक पाराग्राफ मे एतेक जिज्ञासा भरल छैक जे बिना आगू पढ़ने आ खतम केने उपाय नहि। आ यदि बिना खतम केने राखि देलियैक तऽ निन्न मे ओहि उपन्यासक पात्र सब सपना मे आबि ततेक ने उत्पात करत जे फेर उठि कए पढ़नहि कुशल। चमेलीरानी जासूसी ढंगक उपन्यास छैक जाहि मे रॉबिन हुड सदृश चरित्र लऽ कए खिस्सा बूनल गेल छैक। मिथिलाक समस्या आओर ओकर समाधान हमेशा लेखकक दृष्टिपटल पर बनल छनि। जन आन्दोलन द्वारा राजनीतिक परिवर्तन आनब आ चमेलीरानी कें मुख्यमंत्री बनाएब एकटा समाधान बताओल गेल अछि। मिथिला राज्य आन्दोलन लेल सेहो लेखक सजग रहल छथि आ ओहि मे मुख्य बाधक तत्वक विश्लेषण भावनात्मक एकताक अभावक रूप मे देखैत छथि। लेखक एहि सपना कें मैथिलीक अखबारक सफलता सँ जोड़ैत छथि। चमेलीरानी उपन्यासक कथा सम्पन्न नहि भेल छलैक आ लेखक कें ओकर कड़ी मे "माहुर" लिखए पड़लनि। हीना मैथिली साहित्यक प्रेमकथा क्षेत्र मे अद्वितीय अछि। एहि उपन्यास मे दूटा अनुपम प्रेम कथाक चर्चा भेल छैक ‐ एक तऽ इरानी मूलक मुसलमान कन्या हीना आ साधूपुराक एकमात्र ब्राह्मण परिवारक गायक युवक शिवकुमार मिश्र के बीच आ दोसर ओही गामक एकमात्र धनीक व्यक्ति ठक्कन यादवक पौत्र गंगा आ चमार जातिक सुन्नरि कन्या मंगलीक बीच। दूनू प्रेम अपना तरहें अद्वितीय छैक। मैथिली मे सुच्चा प्रेमकथाक अभाव कें देखैत ई उपन्यास बहुत प्रशंसनीय भेल अछि। "अवारा नहितन" कें संस्मरणात्मक उपन्यासक संज्ञा एही लेल देल गेल जे लेखक किछु नाम कें उजागर नहि केलखिन आ बदला मे दू-चारिटा काल्पनिक पात्र उतारि देलखिन। ओना हुनके शब्द मे, "एहि मे वर्णित सबटा घटना सत्य छैक।" माने पात्रक नामेटा बदलल गेलैक, हुनका द्वारा कएल काजक वर्णन अक्षरशः ओहिना लीखल छैक। एकरा पढ़ला सँ स्पष्ट होइत अछि जे लेखक बहुत कमे वयस सँ मिथिला-मैथिलीक उद्धार लेल समर्पित छलाह, एक हिसाबें बताह छलाह। जे कोनो मार्ग भेटलनि, तकर अनुसरण केलनि, यद्यपि नीक मार्गदर्शक के अभाव मे से सम्भव नहि होइत छलनि आ एहि मार्ग पर चलैत हुनकर बहुत रास सम्पत्ति बोहा गेलनि। जाहि अवस्था मे लोक नीक सरकारी नोकरीक जोगार करैत अछि आ स्थायित्वक जिनगी जीबाक मार्ग प्रशस्त करैत अछि ओहि वयस मे ई बम्बइ के गली-कूची मे बौआ रहल छलाह अपन अभिन्न मित्र महंथ मदन मोहन दासक संग। समाज सँ सबतरि दुतकारल गेलाक बाद हारि कए ई अमेरिका चल गेलाह। ने सिनेमा बनल आ ने मैथिलक भावनात्मक एकता मे कोनो पैघ परिवर्तन भेल। उनटे भीन-भिनाउज होमए लागल। सीताक देल सराप ‐ "गृहे शूराः रणे भीताः परस्पर विरोधिनः। कुलाभिमानो यूयं मिथिलायां भविष्यथ॥" सँ सदा-सर्वदाक लेल अभिशप्त मैथिल समाज कें के बचाओत ? मैथिलीक विकासक लेल सदैव तत्पर लेखककें बूझल छनि जे "हिन्दीए मैथिली भाषा कें थकुचने अछि।" ताहि कारण ओ साधूपुरा गाम मे होइत नाटकक भाषा कें लऽ कए बेस सजग छथि आ स्कूलक मास्टर दीनजीक माध्यमे लोक कें मैथिली भाषाक नाटक खेलेबाक आग्रह करैत छथिन। तहिना चमेलीरानी मे मैथिली अखबारक सम्पादक आ व्य्वस्थापक कें मिथिला सँ दूरक क्षेत्र सँ अबितो मैथिली प्रेम मे सराबोर करौलखिन अछि आ अखबारक पाठक संख्या दू लाख सँ उपर पहुँचा देलखिन अछि। हम खास कऽ कए चर्चा करब "करार" उपन्यासक। गूढ़ जीवन दर्शन सँ लबालब भरल एहि उपन्यास मे चहटगर फर्मूला टाइप वर्णन सेहो कम नहि छैक। एहि मे लेखक अपन दार्शनिक विद्वत्ता कें कन्हाइ मंडलक माध्यमे व्यक्त केलनि अछि। कन्हाइ मंडलक व्यक्तित्व अति असाधारण छनि। ओ सब किछु पर विजय प्रात केने छथि। विद्वान पात्र कन्हाइ मंडल कहैत छथिन, "मोन कें स्वतंत्र करबाक लेल आवश्यक अछि सब तरहक महत्वाकांक्षाक त्याग। जकरा संतुष्टि भेटि गेलैक ओ बाजी जीति लेलक।" से तऽ बुझले अछि। पहिनहुँ पढ़ने छलहुँ, "गोधन, गजधन, बाजिधन, और रतन धन खान। जौं आबे संतोष धन सब धन धूरि समान।" मुदा से की भऽ पबैत छैक ? कन्हाइ मंडल कें प्राण पर अधिकार प्राप्त भेल छनि। प्राण पर अधिकार प्राप्त भेने काल पर स्वत: अधिकार भेटि जाइत छैक आ तखन वयसक कोनो अर्थ नहि रहि जाइत छैक। लोक एक सौ वर्ष जीबए आ कि एक हजार वर्ष, ओ देखबा मे ओहने लागत। अन्तर बुझेबे नहि करत। कन्हाइ मंडल सर्वज्ञानी छथि तें ने पंडित राजशेखर दत्त कें बिना कोनो परिचय के चीन्ह जाइत छथिन। हुनका भूत भविष्य सब किछु बूझल छनि। हुनका इहो बूझल छनि जे पंडित राजशेखर दत्त हुनका गाड़ी पर किएक बैसल छथि आ हुनका माध्यमे विधाता कोन काज करौथिन। कन्हाइ मंडल मिथिलाक ओही विशिष्ट श्रेणी मे छथि जाहि मे जनक राज्य मे धर्मव्याध भेल छलाह, जिनकर कथा महाभारत के वन पर्व मे वर्णित अछि। धर्मव्याध मासु बेचैत छलाह आ कन्हाइ मंडल अपन बैलगाड़ी पर सामान उघि कए एक स्थान सँ दोसर स्थान पहुँचबैत छलखिन। एहि काज सँ दूनूक धर्म मे कोनो बाधा नहि अबैत छनि। करार उपन्यासक विशेषता इएह जे एकर कथावस्तु एहि मर्त्यलोकक छैके नहि, ओ तऽ सूक्ष्म लोक मे बसल छैक। आब ई सूक्ष्म लोक छैक कतए तकरा बुझबाक लेल हम डूबि गेलहुँ विष्णु पुराण मे। एहि पुराणक द्वितीय अंशक सातम अध्याय मे वर्णन छैक विभिन्न लोक के, लोक माने मनुष्य नहि, संसार, जेना मृत्युलोक, स्वर्गलोक, यमलोक आदि। ओहि ठाम चर्चा भेटत ऊर्ध्वलोक के, जे आकाश मे लटकल छैक, जेना सूर्यलोक, जकरा सूर्यमण्डल कहल गेलैक, चन्द्रलोक जकरा चन्द्रमण्डल कहल गेलैक, एही प्रकारें अछि नक्षत्रमण्डल, बुध, शुक्र, मंगल, बृहस्पति, शनि, सप्तर्षिमंडल, ध्रुवमंडल, महर्लोक, जनलोक, तपलोक, सत्यलोक अर्थात् ब्रह्मलोक आदि। मुदा एहि मे सूक्ष्मलोक आ कारणलोक नहि भेटत। ओकरा बुझबाक लेल केदार बाबू रचित "करार" कें छानऽ पड़त। विष्णुपुराणक अनुसार त्रैलोक्य मे अछि भू (पृथ्वी), भुव:, स्व:, जाहि मे भुवर्लोक पृथ्वी आ सूर्यक बीच कतहु अवस्थित छैक आ स्वर्लोक सूर्य आ ध्रुव के बीच। हम कतेक बेर करार पढ़ि चुकल छी मुदा सूक्ष्मलोक आ कारणलोक कोन त्रैलोक्यक भाग छिऐक से बुझबा मे नहि आएल। लेखक अपन कथावाचक पण्डित राजशेखर दत्तक माध्यमे पाठक कें सूक्ष्म लोक, कारण लोक सब किछु बता देलखिन। आब पाठक जानथु। ओ वीर बाबू जकाँ बुझक्कर बनथु आ कि पंकज जकाँ अबूझ। यदि अपने सब बूझि गेलियै तऽ जीत गेलहुँ। से नहियो भेल तऽ एहि मे वर्णित नाओ परहक दृश्य जरूरे चहटगर लागत। एतबहुँ सँ भऽ गेल पैसा ओसूल। सत्य की छैक ? ई जनबाक लेल हमरा निरक्षरासन करए पड़ल आ "रीडिंग बिटविन द लाइन्स" के लूरिक फेर सँ अभ्यास करए पड़ल। (एकर विशेषता लेल देखू निरक्षराचार्य लिखित "क्रिकेटक कोचक अवतार मे विद्यापति", मिथिला दर्शन, नवम्वर 2017)। शास्त्र-पुराण मे वर्णित विभिन्न लोकक अतिरिक्त साहित्यकार लोकनि एकटा आर लोकक निर्माण केलनि। ओ भेल स्वप्नलोक। असल मे करारक सबटा खिस्सा स्वप्नलोकक खिस्सा छिऐक। खिस्साक किछु अंश तऽ पंडित राजशेखर दत्त एहि लोक मे विचरण करैत देखलनि जखन ओ नाओ पर कने कालक लेल निन्न पड़ि गेलाह। मुदा शुरुएहि सँ लेखक जाहि तरहक वातावरणक श्रृष्टि करैत छथि, दरभंगा शहरक ओ भयंकर बाढ़ि देखबैत छथि आ ओहि विकराल समय मे मृतात्मा पंडित राजशेखर दत्त कें रोटी-तरकारी लऽ कए अवतरित करैत छथि से सब स्वप्नेलोक मे घटित घटना मानल जा सकैत छैक। अन्त मे हम ओ बात सब लीख रहल छी जे लेखक लिखब छोड़ि देलनि। ई बात सब हम निरक्षरासन द्वारा हुनका मस्तिष्क मे ढुकि कए खोजल जे आन कोनो तरहें सम्भव नहिए होइत। चमेलीरानी उपन्यासक अन्त नीक भेल छलैक। "चौबेजीक बन्द आँखि मे भूत आ भविष्य दूनू प्रगट भऽ गेल। भूत जे चाणक्यक साम दाम दंड आ भय नीतिक चलते नंद वंशक समूल नाश भेल, आ भविष्य जे चमेलीरानी मुख्यमंत्री पदक शपथग्रहण कऽ रहलीह अछि।" एहि मे लेखक स्पष्ट संकेत दऽ देने छलखिन जे आगू किछु हेतैक। तें पाठकवर्गक आग्रह पर बिनु माहुर खेने "माहुर" लिख देलखिन। मुदा माहुरक अन्त मात्र दूटा सरकारी अफसरक बातचीत सँ होइत छैक। पाठक कें जिज्ञासा बनले रहि जाइत छनि जे जनसाधारण कें अन्त मे भेटलैक की ? जनसाधारण कें अन्त मे भेटलैक की ? ई तऽ बड़का यक्ष प्रश्न छैक जे आदि काल सँ चल अबैत रहलैक अछि। बाढ़ि अबौक, अकाल पड़ौक आ कि युद्ध होउक, मेवा खेनिहार कें मेवा भेटिए जाइत छैक मुदा जनसाधारण तऽ पिसाइते अछि। इएह ओकर नियति छिऐक। एकरा बदलैक शक्ति विधाता मे नहि छनि। तैयो एहि प्रश्नक उत्तर लेखक की सोचैत छलाह से जनबा लेल हम फेर निरक्षरासन करैत हुनका मस्तिष्क मे प्रवेश केलहुँ। हमरा जे भेटल से नीचा लिखैत छी। "चमेलीरानीक मुख्यमंत्री बनि गेलाक बाद सबटा अड्डा कें तोड़ि देल गेलैक। भाटाजी कें सेहो छुट्टी दऽ देल गेलनि। एहि दुख सँ हुनका हर्टएटैक भऽ गेलनि। चमेलीरानी सरकार सम्हारलनि। सरकारी तंत्र कें दुरुस्त करबाक प्रयास शुरु भेल। मुदा एकटा आश्चर्यजनक परिवर्तन भेलैक। बूथ स्तरक सबटा कार्यकर्ता दलाली करए लागल। (ई कल्पना नहि यथार्थ छिऐक। सुननहि हेबैक जे हालहि मे अपना देशक एकटा बहुत पैघ राज्यक मुख्यमंत्री अपन कार्यकर्ता सब कें दलाली बन्द करबाक आदेश दऽ देलखिन।) ओकरा सब कें पेटक सवाल छलैक। ओ सब अच्छेलाल पकड़ी कें नोटक गड्डी लुटबैत देखनहि छलैक। ज्ञाता स्वादो नोट बंडलम् को विहातुम् समर्थः ? लक्ष्मीक तिरस्कार नहि करिएनि। एहि लेल ठीकेदार सब कें सोझे गामक पार्टी ऑफिस मे कमीसन जमा करबाक निर्देश देल गेलैक। कार्यकर्ता लोकनिक विकासक संग राज्यक विकास होइत रहलैक। चमेलीरानीक इमानदारी पर एहि सबसँ कोनो बट्टा नहि लगलनि।" करारक अन्त मे केदार बाबू ई लिखब बिसरि गेलाह जे पन्डित राजशेखर दत्तक जीवनी कोन भाषा मे लीखल छलनि। हमरा बुझबा मे आबि गेल जे एतेक सुन्दर खिस्सा मैथिली छोड़ि आन भाषा मे नहिए लीखल गेल हेतैक। अगिला बेर जखन बिन बाढ़िए के पंडितजी कें धरती पर आबऽ पड़लनि तखन देखलनि जे विनय अपन काज तऽ पूरा केलक आ हुनकर खिस्सा छपा देलकनि मुदा सबटा किताब के बन्डल ओहिना पड़ल रहि गेलनि। एकोटा किताब नहि बिकेलैक। एहि दुर्दशाक दुख पन्डितजी बर्दास्त नहि कऽ सकलाह आ ठामहि खसि पड़लाह। एहि बेर हुनका ने सूक्ष्म लोक भेटलनि आ ने कारण लोक। ओ प्रेत योनि मे एखनहुँ बौआ रहल छथि आ मैथिल समाज कें सरापि रहल छथिन जे एतेक रोचक हुनकर खिस्सा ओ सब नै पढ़लक। हीना उपन्यासक अन्त मे लेखक लिखैत छथि, "एहि संसार मे मृत्यु तऽ रोज होइते रहैत छैक। हजार मे, लाख मे प्रतिदिन मनुक्ख धरती त्याग करैत अछि। मुदा मालिक बाबाक मृत्यु ? ... बिना हीरा मौसी आ शिबू बाबाक साधुपुरा केहन लगैत छैक? ... जाए दियौक, एहि बातक विचार नहिए करी सएह उत्तम होएत।" बुझिए गेल हेबैक जे लेखक अपना पेट मे किछु राखि लेलनि जे प्रकट नहि करए चाहैत छलाह कारण खबरि नीक नहि छलैक। एहू लेल हम निरक्षरासनक प्रयोग कएल, हुनका मस्तिष्कक भीतर ढुकलहुँ आ तखन जे भेटल से एना अछि ‐ "हीनाक चल गेलाक बाद अपन बाबाक मृत्युक समाचार सुनि गगन कें बहुत खुसी भेलैक। ओकरा सबटा राजपाट भेट गेलै। ललित कें सेहो ओ डरा-धमका कए अपना पक्ष मे कऽ लेलक। तें ललित आ पल्लवीक जोड़ी नहिए बनि पौलैक। पल्लवी निराश भेल पटना घुरि गेलीह। गंगाक चल गेलाक बाद साधुपुराक नवयुवक सब नेतृत्वविहीन भऽ गेल। जकरा गगनक कार्यशैली पसिन्न भेलैक से ओहि दल मे सम्मिलित भऽ गेल जकर लीडर कोबी बनि गेल छलैक। अधिकांश नवयुवक मोहभंगक स्थिति मे गाम छोड़ि दिल्ली-पंजाब भागि गेल।" "अवारा नहितन" नामेक उपन्यास छैक, असल मे सत्येक उद्बोधन छैक एहि मे। तें लेखक जे किछु लिख देलनि ताहि सँ बेसी हमरा निरक्षरासन कैयो कए नहि भेटल। एकरा अन्त मे लेखक लिखैत छथि, "फिल्म पूरा बनि गेलै तकर सूचना पाबि हमरा दुख नहि प्रसन्नता भेल। मुदा एकटा जिज्ञास मोन मे रहिए गेल। की हम आ मदन भाइ मैथिल समाज मे अपरिचित सँ परिचित भेलहुँ ? जबाबक प्रतीक्षा मे मदन भाइ संसार त्यागि विदा भऽ गेलाह। मुदा हम एखन तक प्रतीक्षा मे जीबिते घुरि-फिरि रहलहुँ अछि।" ई लीखल गेल छलैक 2012 मे। तकर चारि वर्ष बाद केदार बाबू कें "प्रबोध साहित्य सम्मान" सँ सम्मानित कएल गेलनि। एहि मे रामलोचन ठाकुरक बहुत पैघ भूमिका छलनि। मुदा फल की ? प्रबोध साहित्य सम्मान अपनहि मुख्यधाराक सम्मान के सूची मे नहि आबि सकल। कारण बहुतो छैक मुदा हमरा जनैत एकटा मुख्य कारण छैक जे कतेको मठाधीश कें, जिनका बड़ आस लागल छलनि एहि सम्मान कें प्राप्त करबाक, निरास होमए पड़लनि। तखन तऽ ओएह गप ‐ "जाहि भोज मे नोत नहि ताहि मे बज्र खसओ"। आ जखन मठाधीस सब अमान्य कऽ देलखिन तखन ओहि सम्मान आ पुरस्कारक मूल्ये की ? तें केदार बाबू एखनहु अपरिचिते छथि। केदार बाबू कें एकेटा मित्र छलखिन ‐ महंथ मदन मोहन दास। कॉलेजक दिन सँ लऽ कए महंथजीक स्वर्गारोहण तक। जिनगीक चारिम अवस्था मे हिडेन कॉटेज मे रहैत केदार बाबू एकेठाम बैसार करैत छलाह, ओही महंथ भाइक डेरा पर। हुनका गेलाक बाद ओ हिसाबें अपना डेरा मे कैद भऽ गेल छथि। लोक कें भेंट करबा सँ मना करैत रहैत छथिन। तैयो किछु थेथर लोक ओहि हिडेन जगह पर पहुँचिए जाइत छथि। ओही थेथरक श्रेणी मे हमहुँ रहल छी। केदार बाबू कें स्पृहा किछु छनि नहि। तें ओ स्वस्थ जीवन व्यतीत करैत छथि। कन्हाइ मंडल जकाँ प्राण कें ओ जीत लेने छथि तें आब हुनक आयु के कोनो हिसाब करब व्यर्थ। हमरा सबहिक इएह शुभकामना जे ओ एहिना जीवन व्यतीत करैत रहथु। जहिया कहियो ई जीर्ण-शीर्ण काया छोड़ि ओ सूक्ष्म लोक अथवा स्वर्गलोक कें प्रस्थान करताह, हुनकर समाधि पर लिख देल जेतैक अंग्रेजी कवि एलेक्जैन्डर पोपक कविताक पाँती "Thus let me live unseen unknown, Thus unlamented let me die।" केदारबाबू अनचिन्हार छथि ताहि सँ की ? हुनक सब किताबक अनेको संस्करण छपिये गेल छैक आ पाठकवृन्द आनन्द लऽ रहल छथि। एतेक तऽ निश्चित जे केदारबाबूक कोनो पोथी पढ़ि कए पाठक कदीमाक भुजिया जकाँ नहिए बनताह, अपितु एकदम करकर बंगाली आलूभाजा जकाँ टनटनाइत रहताह। जय मिथिला, जय मैथिली। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। प्रदीप बिहारी-संपर्क-6202140561 मुख्य पात्रक गौण व्यथा : अबारा नहितन केदारनाथ चौधरी एकटा एहन विरल लेखक छथि, जे मिथिला आ मैथिली हित लेल बताह होइत रहलाह। अपन छात्र-जीवनक आरंभहिसँ मैथिली हित लेल चिन्तनमे जीब' लगलाह। अपन शैक्षणिक कैरियरक बिनु परबाहि कयनहि मैथोलीक हितमे लगलाह आ लागल रहलाह। हुनक उपन्यास 'अबारा नहितन' पढ़लाक बाद हमरा से बुझायल। ई उपन्यास पढ़लाक बाद आर जे सभ बुझायल, से आगाँ कहब। मैथिलीमे अपन पहिल उपन्यास 'चमेलीरानी'सँ चर्चित केदारनाथ चौधरी देखौलनि जे उपन्यास लिखबाक हिनक लूरि आ उपन्यासक भाषा पाठककें 'दीवाना' बना सकैत छै। ईहो उपन्यास मैथिलीक पाठककें मोहि लेबामे सफल भेल। एहि उपन्यासक विषय-वस्तु, एकर सहरजमीन मैथिलीक आन उपन्यास सभसँ फराक अछि, जे पाठककें आकर्षित करैत अछि। हमरा लगैत अछि जे चौधरी जी अपन भाषाक उन्नति आ साहित्यक कोषमे वंचित विषय सभकें चुनि क' आनबाक आ जमा करबाक आग्रही छथि। भाषाक सहजता आ चमकी हिनका लग छनिहें, अपन गप पाठकक हृदयमे साँठि देबाक अवगति तँ छनिहें आ तें एही क्रममे करार, माहुर, हीना आ अबारा नहितन सन उपन्यास अबैत छनि। प्रसन्नताक गप तँ ई जे हिनक पोथी सभक तीन-तीन, चारि-चारि संस्करण प्रकाशित भेलनि अछि। एकर माने ई जे मैथिलीमे हिनक पाठक छनि। हमरा हिनक उपन्यास 'अबारा नहितन'क मादे गप करबाक मोन होइत अछि। एहि पोथीक मुखपृष्ठक बादक पृष्ठ पर लिखल छैक- मैथिलीक पहिल फिल्म 'ममता गाबय गीत' कोना बनल तकर रोचक कथा-संस्मरणात्मक उपन्यास। उपन्यासमे कथा आ संस्मरण तँ रहितहिं छैक, मुदा हमरा जनैत एहि उपन्यासकें कथा, संस्मरण आ फिल्म-निर्माणक 'रोमांच'कें मोनमे राखि पढ़ने बहुत रास साँचकें बुझबा-गुणबामे पाठक हुसि जयताह। फिल्म-निर्माणक कथाक संग मिथिला आ मैथिलीक समस्या आ विकास पर गंभीर चिन्तन एहि उपन्यासमे अछि। एहि उपन्यासमे मैथिलक विभिन्न चरित्रक गहन आ सूक्ष्म चित्रण अछि। उपन्यासमे एकठाम वर्णित अछि- लेखक अपन अध्ययनक क्रमक कालेजक तातिलमे गाम जयबालेल टेन पकड़' हावड़ा टीसन पर अबैत छथि, तँ ताहि समयक दृश्य देखि मोन द्रवित भ' जाइत छथि। जाइ बला एक, अरिआत' बला बीस जन। सबहक समाद, सबहक आह्लाद। अपने पोखरिमे नहैह', अपने इनारक जल पीबिह'। आदि-आदि। किनको बूढ़ गायकें कसाइसँ बचयबाक चिन्ता छनि, किनको भरना लागल ब्रम्होत्तरा बला खेतकें छोड़यबाक संघर्ष-गाथा छनि, तँ किनको कंटिरबी लेल अन्दाजेक नापसँ फ्राक पठयबाक स्नेह। पलायनजन्य विवशताक नीक चित्रण देखबामे अबैत अछि। एहि क्रममे ओही पृष्ठ 27 पर लिखैत छथि- गरीब, असहाय, निर्बल भेल मैथिलकें अपन जन्मभूमि छोड़लासँ कतेक पीड़ा भ' रहलैए। एकर निदान लेल किछु होयबाक चाही। जागू हे मिथिला! सभ किछुसँ परिपूर्ण रहितहुँ अहाँ दरिद्र किएक छी, निरुपाय किएक छी? आब तँ देश स्वतंत्र छै। तइयो की मिथिलाक समस्या मुँह बौने रहतैक? चौधरी जीक एहि प्रश्नक उतारा, हमरा जनैत, एखनो नहि भेटि सकलनि अछि। देशक स्वतंत्रताक भने अमृत महोत्सव मनाओल जाइक, चौधरी जीक प्रश्न ओहिना ठाढ़ अछि। एहि उपन्यासमे चौधरी जीक एकटा पात्र छथिन- वैद्यनाथ बाबू। ओ कहैत छथि जे मिथिला आ मैथिलीक पहचान लेल जँ मिथिलाक्षरकें आवश्यक मानैत छी तँ स्कूल खोलू। एहिठाम (पृष्ठ 35) एकटा आर चिन्ता छैक। ओ ई जे जँ मिथिलाक्षरक बले मैथिली पढ़निहार, मैथिली बजनिहारक फौज तैयार नहि कयल जेतै तँ कालक्रममे मैथिली भाषा विलुप्त भ' जेतै। जेना, ब्रजभाषा आ अवधी भाषाक कविक रचनाकें हिन्दी भाषा अपनामे आत्मसात क' लेलक, तहिना विद्यापतियोक कविता हिन्दी भाषाक अंग बनि जायत। आधुनिक शिक्षाक विस्तार भेने मैथिल परिवारक भाषा मैथिलीसँ हिन्दी आ अंग्रेजी भ' गेलैए। एकरा रोकल नहि जा सकैत अछि। मुदा, सावधान भेल जा सकैत अछि। एहिना मिथिलाक पंडित लोकनिक प्रतिस्पर्धा, केओ किनकोसँ कम नहि होयबाक दंभ आ किछु जाति आ क्षेत्र विशेषक भाषाक ढोलहोकें मिथिलाक सामाजिक, आर्थिक आ राजनीतिक प्रगतिक बाधक मानैत चिंता व्यक्त करैत छथि। एहि सभसँ निवारणक बाट ताकबाक प्रयासमे कतोक रचनाकार आ मैथिलीक हित चिंतक सभसँ भेंट करैत छथि आ अंतत: महंथ मदन मोहन दासक संग तय करैत छथि जे मैथिलीमे फिल्म बनाओल जाय। फिल्मेसँ मैथिल सभकें एकत्रित कयल जा सकैत अछि। भाषाकें आमलोक धरि पहुँचाओल जा सकैत अछि। आ फिल्म निर्माणक घुरघुरा दुनू मित्र महंत जी आ चौधरी जीक माथमे पैसि जाइत छनि। पहिने दुनू तय करैत छथि जे मैथिलीक पहिल फिल्म धार्मिक होअय। फिल्म-निर्माणक क्षेत्रमे दुनूक अनुभव शून्य बटा शून्य बराबर शून्य। मुदा, हिआउ बड़ी टा, संकल्प बड़ी टा, अनुराग बड़ी टा। चलि जाइत छथि बम्बई । ओत' भेंट होइत छथिन उदय भानु सिंह। ओ हिनका दुनूक संग सह निर्माता बनैत छथिन आ बम्बईमे फिल्म जगतमे कार्यरत आ प्रयासरत मैथिली-अमैथिल सभसँ भेंट करबैत छथिन आ फिल्ममे अपन अभिनयक भूमिका ओगरि लैत छथि। मैथिलीमे फिल्म-निर्माण हेबनिमे बढ़ल अछि। लोक प्रयासरत छथि। मुदा, एकटा लसेढ़ एखनो बेसी फिल्ममे पाओल जाइत अछि जे पूँजी लगौनिहार अपन अभिनयक भूमिका ओगरितहिं छथि। एहन फिल्म सभक दशा सबहक सोझाँ अछि। प्रोफेसनलिज्मक अभाव एखनुक बनैत फिल्म सभमे झलकैत अछि। हँ, एहि सभसँ फराक किछु फिल्मकार छथि, जे अपन प्रतिभा आ इमानदार प्रयासक संग मैथिली फिल्मकें उँचाइ धरि ल' जा रहल छथि। हिनकालोकनिक प्रयाससँ जखन राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय परिदृश्यमे मैथिली फिल्मकें देखैत छी, तँ करेज सूप सन होइत रहैत अछि। फिल्म बनायब सरल काज नहि छैक। बहुत रास बाधा एहि मार्गमे छैक, जकर सांगोपांग वर्णन उपन्यास 'अबारा नहितन'मे कयल गेल अछि। फिल्म-निर्माण प्रक्रिया पाठकक मोनमे कौतुक जगबैत छैक, मुदा संगहि आरंभिक दुनू निर्माताक पीड़ा सेहो झलकैत छैक। फिल्मक वितरक ताकबाक लेल जे संघर्ष छैक, से पढ़िते बनैत छैक। मैथिल आ मैथिलीक संस्था सभक अपरूप-कुरूप चेहरा सभसँ पाठककें साक्षात् करबैत अछि ई उपन्यास। छगुन्ताक बात ई जे एतेक बरखक बादो चौधरी जी जे चेहरा देखलनि, से बदलल नहि अछि। अपन एहि क्रममे मैथिलीक दधीचि नामसँ विख्यात बाबू साहेब चौधरी हिनका लोकनिक मदति करबा लेल दुआरिए दुआरि हिनका सभक संग जाइत छथि आ अपमान सहैत रहैत छथि। हँ, एहि उपन्यासक एकटा विशेषता इहो अछि जे मैथिलीक प्रख्यात लोक सभ एकर पात्र छथि। लेखकक ई एकटा साहसिक काज सेहो छनि। सामान्यतः रचनाकार कोनो पात्रक मूल नामसँ सृजन करबासँ परहेज करैत छथि, मुदा चौधरी जीक साहस देखबा योग्य अछि जे मैथिली आ मिथिलाक काजमे बौअएबाक क्रममे नीक आ अधलाह, मृदुल आ कुटिल, जे सभ भेटलखिन, सभके बिनु कोनो आवरणक पाठकक सोझाँ रखलनि अछि। अबाराक उपाधि पौलाक बाद 'ममता गाबय गीत' बाकसमे बन्न भ' गेल आ कतोक बरखक बाद प्रसिद्ध गीतकार रवीन्द्र (रवीन्द्रनाथ ठाकुरक सत्प्रयासें रिलीज भेल। उपन्यास कहैत अछि जे फिल्म बाकसमे बन्न भेलाक बाद चौधरी जी उच्च शिक्षा लेल कलकत्तेसँ कैलिफोर्निया जाइत छथि आ 1977 ई मे अपन देश घुरैत छथि। 2001ई मे लहेरियासरायमे घर बनबैत छथि आ रह' लगैत छथि। 2003 ई मे एकटा पत्रकार 'ममता गाबय गीत' फिल्मक कब्र खुनि बहार करैत छनि आ पुछैत छनि- 'की अहाँ मैथिली भाषामे बनल 'ममता गाबय गीत' फिल्मक कर्ताधर्ता छी? अगर 'हँ' तँ अहाँ मैथिल समाजमे अपरिचित किएक छी? ई प्रश्न चौधरी जीकें आहत कयने होयतनि। हुनका लग एहि प्रश्नक उत्तर उपन्यासक अंत धरि नहि छनि। उपन्यासक अंतिम पाराग्राफमे ओ लिखैत छथि - 'फिल्म पूरा भ' गेलै तकर सूचना पाबि हमरा दुख नहि प्रसन्नता भेल छल। मुदा एकटा जिज्ञासा मोनमे रहिए गेल रहए। की हम आ मदन भाइ मैथिल समाजमे अपरिचितसँ परिचित भेलहुँ? जवाबक प्रतीक्षामे मदन भाइ संसार त्यागि बिदा भ' गेला। मुदा हम एखन तक प्रतीक्षा मे जिविते घुमि-फिरि रहलहुँ अछि।' एहि समाजकें अपन नायककें चिन्ह' नहि अयलैक अछि। 'अपना'सँ पैघ केओ देखाइते ने छैक। विभिन्न क्षेत्रमे चौधरिए जी सन सेवारत बहुत रास मुख्य पात्र सभ छथि, जिनक परिचितिजन्य गौण व्यथा एखनहुँ प्रश्नक संग ठाढ़ अछि। मुदा, ई प्रश्न मिथिलाक समाज लेल धनि सन। हमरालोकनि ने अपन चश्मा साफ करैत छी आ ने बदलिते छी। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। आशीष चमन- संपर्क-6206839141 मधुबाला नहि नहि लालदाय यात्रा-वृतांत. आत्मकथा, जीवनी एवं संस्मरण साहित्य केर मनोरम विधा मानल जाइछ। एहि विधाक रूचिगर होयबाक पाछू मानव स्वभाव प्रमुख अछि। दोसराक जीवनके झाँपल हिस्साकेँ अनावृत होइत देखब, सूनब ओ गूनब हमरा सभकेँ बड्ड आह्लादित करैत अछि। जतऽ यात्रा-वृतांत द्वारा मानवक यायावरी जीवन एवं ताहि सँ उत्पन्न रोमांच ओ अनुभवक सनेस एक संस्कृति सँ दोसर संस्कृतिक बीच बॉटल जाइछ, ततऽ जीवनी ओ आत्मकथा, मानव जीवनक आत्मसंघर्ष, ओकर पूरल एवं टूटल सपना, लालसा ओकर (जीवनीकारक) जीवन सिद्धान्त, ओकर उपलब्धि ओकर आत्मगौरवक जीवन्त दस्तावेज मानल जाइछ। संस्मरण उपरोक्त तीनू विधा, माने यात्रा-वृतांत, आत्मकथा एवं जीवनीक संयुक्त एकीकृत साहित्यिक विधा थिकैक। जतऽ उपरोक्त तीन विषयमे हमरा एवं अहाँक जीवन-गाथा प्रायः एकाकी रहेछ, सहायक परिस्थितिक भूमिका गौण वा उन्नैस रहैत अछि ओतऽ संस्मरण, ओ काव्यात्मक विधा होइछ जाहिमे यात्रा-वृतात, आत्मकथा एवं जीवनी, तीनू समेकित एवं संतुलित रूप सँ अपन योगदान दैत रहल अछि, एहिमे कोनो एक हिस्सा ने ककरो सँ दुबर आ ने असम्पृक्त रहैत अछि। अपन मैथिली साहित्यमे एकटा रोग देखल जा रहल अछि, किछु साहित्यकार अपन साहित्यिक यात्राक एक डेढ़ वा दुई दशकके समाप्तिक पश्चात् आत्मकथा ओ संस्मरण लेल उताहुल भऽ जाइत छथि। एकर जता लाभकारी स्थिति ई होइछ जे नबका पीढ़ीक हुनक अनुभवक लाभ अनायासहि भेटि जाइत छनि ओतहि उक्त कथित वयोवृद्ध साहित्यकारक आगूक साहित्यिक यात्रा "महायात्रा मानि लेल जाइत छनि। ई स्थिति अपन भाषाइ आंदोलन लेल हानिकारक होइत अछि। मौलिक रचनाकेँ यदि निरपेक्ष भऽ देखी तऽ ऊपरके चारू साहित्यिक विधाकेँ एकदम सँ सहज एवं आसान विधा कहि सकैत छी, जाहिमे ने कल्पनाक मिश्रणक बेगरता रहैछ, ने कथा-वस्तुक ठहरवाक भय, माने, अहाँ जँ साहित्यिक रूचि सम्पन्न लोक छी, देखल-सूनल-भोगल यथार्थ सँ परिपूर्ण छी तऽ खूब नीक जकाँ ई कार्य कऽ सकैत छी। मुदा केदारनाथ चौधरी जीक प्रस्तुत संस्मरणात्मक उपन्यास "अबारा नहितन उपरोक्त सरलीकृत मानदंड सँ ऊपरके विषय-वस्तु थिकैक। | श्री केदारनाथ चौधरी अपन जीवनक पछिलुका हिस्सा जे बितौलनि ओ स्वयममे युगान्तरकारी अछि। प्रस्तुत उपन्यासक विषय इतिहासक ओहि कालखण्ड सँ लेल गेल अछि जे वास्तवमे मानव जीवनक हर क्षेत्रमे अनिवार्य रूप सँ हस्तक्षेप कयने छल। भारत नव स्वाधीन भेल रहैक। स्वाधीनता जाहि लेल प्राप्त कयल गेल छलैक से तिरोहित भऽ गेल रहैक। स्वाधीनता सँ पूर्व अंग्रेजक राज छलैक आ ताहि सँ पूर्व "मुगल शासन" छलैक। आब मुगल शासन एवं अंग्रेजी शासनक संयुक्त दर्शन कथित स्वाधीन भारत पर लादि देल गेल छलैक। एतऽ द्रष्टव्य ई जे नेहरू परिवार मुगल शासनमे दिल्लीक कोतवाल छल आ ब्रिटिश इंडियामे समयकेँ अकानि ओहि व्यवस्थाके चिहुँटि कऽ गरोसि नेने छल। इएह कारण छलैक जे महात्मा गाँधी एहि परिवारकेँ "पूर्वक नैतिकता एवं पाश्चात्य आधुनिकताक सेतु मानि, अपन भारतक राजनैतिक सत्ता लेल उपयुक्त पात्र बुझि अपन उत्तराधिकारी घोषित कयलनि। उपर जेना कहल जे ओ कालखण्ड जीवनक हर क्षेत्रमे अपन अनिवार्य उपस्थिति दर्ज करौने छल। ओहि समयमे भारतक आनो क्षेत्रक संगहि सदति सूतल वा भंगियाल बिहारक उत्तरी हिस्सा जे मिथिलांचलक कहल जाइछ बाँचल नहि छलैक। ओहिकालमे जे आर्थिक ओ सामाजिक क्रांति भारतमे व्याप्त छलैक तकर प्रभाव सँ मिथिलाचल सेहो वंचित नहि छलैक। अपन सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक एवं राजनैतिक उत्कर्ष पयबा लेल एहिठामक विभिन्न समूह अपन-अपन विचारधाराक पोषित करबा लेल जगह-जगह संगठित होयब शुरू कऽ देने छलैक। जाहिमे सभ सँ पहिने मैथिल महासभाक" नाम अबैत छैक। आब भनहि एकर महत्ताक सीमित कयल जा रहल छैक मुदा अपन सीमित सोचक अछैतहु ई सामाजिक बदलाव लेल एकटा व्यापक मंचक काज कयने छलैक। मुदा जातिवादी सोच मूलतः मैथिल बाभन एवं कर्ण-कायस्थक प्रति उत्तरदायी भावना कारणे ई संस्था प्रतिगामी होइत क्रमशः अलोपित भऽ गेलैक। इतिहास एहि क्रममे प्रवासी मैथिलक ओ भाग जे इतिहासक गर्तमे मीलि गेल छलैक ओ अपन वास्तविक रूप सँ वंचित भऽ गेल छलैक तकरा मूल धारामे अनबा लेल जे किछु लोक प्रयास कयलनि आहिमे स्वनामधन्य म.म रूना झा एवं लखनौर ड्योढ़ीक बाबू लक्ष्मीपति प्रमुख छथि। जनिक सतत् प्रयत्न सँ दिल्ली आगरा समेत समस्त ब्रजमंडलमे बसल मैथिल बंधु मुख्य धारामे आबि आब ब्रजस्थ मैथिल केर नाओं सँ समादृत होइत छथि। पोथी-पत्रिकाक प्रकाशन ताहि कालक लेल अत्यन्त लाभप्रद भेल छलैक जे मिथिलांचलक पुनर्जागरण हेतु महत्वपूर्ण कार्य कयलक। एहि तरहक तमाम प्रयासक मध्य अपन भाषामे एक महत्वपूर्ण प्रयास, प्रथम मैथिली फीचर फिल्म जनमानसक मध्य अनबाक छल। यद्यपि तदयगीन अवस्था देखैत फिल्मकार द्वयक ई प्रयास दुस्साहसपूर्ण छलैक अनुभवक जगह पर केवल उदाम पौरुष छलैक जेकर निष्पत्ति वएह छल जे अन्तमे भइये टा गेलैक। अपन प्रस्तुत औपन्यासिक संस्मरण द्वारा श्री केदारनाथ चौधरी ओहि समयक सामाजिक अवस्थाक सूक्ष्म अवलोकन करबामे पूर्णतः सफल सिद्ध भेलाह अछि। एहिमे जाहि पात्र ओ घटनाक चित्रण कयल गेल अछि ताहिमे आई करीब 65-70 वर्ष बीति गेलाक बादो बहुत परिवर्तन नहि भेलैक अछि। ममता गाबय गीत सिनेमाक चित्रांकन आ तकर पाछाक अध्यवसायक रेखांकन एतऽ बहुत महत्व नहि रखैत छैक। यदि एकरा केन्द्रमे राखल जाइक तखनि हमरा सभके बम्बइक माहौल सँ साक्षात्कार करय पड़त जकर हदयद्रावक चित्रण स्व. सआदत हसन मंटो अपन विभिन्न संस्मरण सभमे कयने छथि। एहि उपन्यासक माध्यमे लेखक तद्युगीन जीवनक विभिन्न क्षेत्रक जे वर्जित विषय छलैक ताहि पर प्रकाश देलनि अछि। जेना कि मुख्य अभिनेत्री अजराक प्रति कामातुर दरिद्रछिम्मड़ि मैथिल पंडित सऽ लऽ कऽ मिथिलेश्वर पर्यन्तमे छलनि। एहिमे टुन्ने झा सन सेहो व्यक्ति छथि जे अपना ढंगक अलग क्रांतिकारी व्यक्ति छथिन। ओ गाममे सभ सँ पहिने अपन टीक कटौलनि, कमीज पहिरलनि, अहमद हुसैन दिलदार हुसैन जर्दा फँकलनि। महन्थ मदन मोहन दास छथिन, जे अजराक सौंदर्य सँ ततेक अभिभूत छथि जे लेखककेँ हुनक ब्रह्मचर्य खतरामे लागऽ लगैत छनि। सामाजिक साहित्य उपदेशमूलक नहि होइछ। उपेदश लेल अहाँकेँ धार्मिक एवं नैतिक साहित्य केर खगता ओ बेगरता चाही मुदा तकर बादो सामाजिक साहित्य सकारात्मकता सँ बेछप नहि भऽ सकैछ। एहि उपन्यासमे बौआजी सन मुखिया, दीपकजी सन साहित्यिक जीव, वैद्यनाथ बाबू ओ महंथ मदन मोहन दास सन अग्रसोची लोक छथि तऽ टने झा सन हास्यास्पद उत्तर आधुनिकतावादी प्राणी सेहो छथि जे मिरजइ त्यागि कमीज पहीरि पिता ओ समाजक भर्त्सना, अवहेलनाक निष्ठापूर्वक बर्दाश्त कयलनि। ई सभ व्यक्ति शांत ओ निष्क्रिय भेल कोनो समाजक लेल अनिवार्य अंग थिक जे ओहि समाजक अस्तित्व लेल, ओकर जीवित सत्ताक प्रमाण-पत्र ओ मानपत्र होइछ। ई सभ लोकनि पुनर्जागरणकेँ लेल ओ "स्लीपर सेल" छथि जाहि कारणे मैथिलीक प्रथम सिनेमा "ममता गाबय गीत केर निर्माण भऽ सकलैक। मिथिला समाजकेँ छोड़ि दिऔक तऽ जखन एहि टाइपके उपन्यासकेँ अन्य भाषा अनुवाद भेला पर ओहि भाषा-भाषी पाठक एकरा पढ़थिन तऽ हुनका सभकेँ एतुक्का समाज, जाहिमे टंचजी, बिच्छूजी, कौआली बाबू, टन्ने झा, फुद्दी झा आदि सभ जे छथि से "पिकुलिअर पर्सन्सैक" लगतनि। प्रस्तुत उपन्यास फिल्म निर्माणक बारीकीक ब्यौरा संगहि अन्यान्यो घटनाक्रमकेँ सहज भाव सँ समेटने जाइत अछि। ओहन घटनाक्रम, जे कर्मकारण श्रृंखला जँका अनिवार्य रूप सँ घटित भऽ रहल छैक। आरम्भ होइछ सकरी स्टेशन सँ सटल एकटा सुखी-सम्पन्न गाम जतऽ सँ एक सम्भ्रान्त परिवारक लड़का पढ़ऽ लेल दरभंगाक नॉथब्रुक जिला स्कूल जाइत छैक। ओकर हॉस्टलक सहपाठी सभमे शिवकान्तक विवाह भऽ गेलैक अछि। ओकर विवाह सहपाठी किशोरवयक छात्र सभक लेल स्वभाविक रूप सँ ईर्ष्या आ उत्कंठाक विषय छैक। "भागमत शिवकान्त" सदति अपन पत्नीक कल्पनामे लीन रहैत अछि। लेखक पढ़ुआ विद्यार्थी छथि आ शिवकान्त भुसकौल छैक तथापि दुनूक बीच मित्रता छैक। ई मित्रताक सेतु शिवकान्तक वैवाहिक प्रतिष्ठाक सेतु पर टिकल छैक, जाहि कारणे जखन लेखक अपन लापरवाही कारणे मैट्रिक परीक्षामे फेल करैत छथि तऽ शिवकान्त जेकर असफलता प्रायः असंदिग्ध छलैक तकरा संग आत्महत्या करऽ लेल बागमती नदीमे कुदऽ लेल जाइत छथि। बाटमे दुनेजी महाराजक होटल सँ अबैत शुद्ध घी केर पूड़ी-जिलेबीक सुवास दुनू आत्महत्याक अभ्यर्थी मित्रकेँ आकर्षित करैत छनि। ओहि होटलसँ कौआली बाबू उर्फ छोटका कका भोजन करैत भेटैत छथिन। कौआली बाबूक आर्षवचन सूनि दुनू मित्र आत्महत्याक विचार त्यागि दैत छथि। ई कौआली बाबू रोचक व्यक्ति छथि, हिनकामे अहाँक तद्युगीन समाजक सम्पूर्ण इतिहास भूगोल भेटि जाएत। कौआली बाबूक भोजनक स्टाइल, शिक्षा पद्धति आदिपर हुनक टिप्पणी बड्ड सटीक। देखिऔक ने औखन धरि कतेको विद्यार्थी कम्पीटिशनक कुचालिमे फँसि फँसरी लगबैत अछि तकर आदि चित्रण, प्रजातांत्रिक पद्धतिमे टिकट लेल मारिते झंझट, विधायकी ओ ताहि सँ प्राप्त धन लाभक कल्पना...। मुदा कौआली बाबू सोझमतिया छथि जे दोसराक टिटकारामे आबि अपन आर्थिक नोकसान लेल प्रस्तुत छथि। एहन टाइपक व्यक्ति आब मैथिल समाज सँ अलोपित भऽ गेलैक अछि। भैयारीक बीच सम्पतिक बँटवारा, कलह-कलेश मैथिलेटामे नहि अपितु आसेतू निरन्तर व्याप्त अछि। एक नजरि एहि उपन्यासक मूल एवं अन्तरात्मा पर अपन सभक समाजमे टंगघिच्चापन अदौ सँ रहल अछि। कोनो नीक एवं सद्प्रयासकें संदेहास्पद मानब एहिठामक परिपाटी थिकैक एहि सँ अपन सभक समाज आत्मघात करैत रहल अछि। हरि सिंह देव पंजी प्रबन्ध करौलनि, एहिठामक शासन-व्यवस्थामे सुधार अनबाक प्रयास कयलनि, मुदा एतुक्का समाजक अगुआ लोकनि ततेक ने झंझट पसारलनि जे हुनका सुधारवादी उपाय तक छोडू राज्य छोड़ि बनवासी बनऽ पड़लनि। ब्रिटिश शासन, भाया बंगाल सभ सँ पहिने मिथिलेमे आएल। बंगालमे गाँधी युग सँ पूर्व सामाजिक सुधार आंदोलन सभ चलल तत्पश्चात गाँधीजीक समय राजनैतिक जागरण सम्पूर्ण भारतमे आएल मुदा मिथिलामे ने सामाजिक जागरण आएल ने राजनैतिक। यदि हमर गप्प असत्य होइक तऽ देखू मिथिलामे अरविन्दो, रवीन्द्र, सुभाष, जवाहरलाल, घनश्याम दास बिड़ला सन एक्कोटा साहित्यिक, राजनैतिक एवं औद्योगिक नेतुत्व अभड़ल? एकर पाछा ई कारण छलैक जे हम सभ अपन वर्तमानक प्रति पलायनवादी रूख अख्तियार कयने छलहुँ। मुदा तकर बादहु किछु सकारात्मक पहल भेल छलैक। ओ पहल मैथिल वर्गमे आधुनिक शिक्षाक प्रति छलैक। साहित्यिक आन्दोलन सेहो आरम्भ भेलैक। भुदा से समाजक बड्ड थोड़ हिस्सामे भेल छलैक। एहिठाम सभ दिन पहिनो ओ आइओ पत्रिका सभ प्रकाशित होइत रहल अछि ओ अकालमृत्युक शिकार होइत रहल अछि। उपन्यासक यात्राक्रममे दुइ गोट प्रमुख पात्र सँ भेंट होइछ। दुनूक चर्चा करब परम आवश्यक अछि। एहि सँ जतऽ अपना सभक सामाजिक अवस्था पर जे रोग लागल अछि तकरा पर ध्यान जाएत ओतहि दोसर दिस अपना सभक आवाजक कमजोरीक पाछूक असली कारण पर ध्यान जाएत। प्रथम व्यक्ति छथि श्री उदयभानु सिंह एवं दोसर व्यक्ति महन्थ मदन मोहन दास। उदयभानु सिंहक बहन्ने जतऽ एक दिशि मैथिल-चरित्रक सफलतापूर्वक चित्रण भेल अछि ओत्तहि हुनका माध्यमे प्रवासी मैथिलके चरित्रक सेहो नीक जकाँ निरूपण भेल अछि। उदयभानु सिंह दबल महत्वाकांक्षा एवं सबल अहम केर स्वामी छथि, जनिका कारणे एक निर्दोष एवम पवित्र विचारक असामयिक निधन भऽ जाइत छैक। ई व्यक्ति एकभगाह छथि अपन हिसाबसे जमाना देखब ओ ओकरा हाँकब हिनक स्वभावक अंग छनि। ई स्वभाव मैथिल जातिक सर्वकालीन समस्या अछि। विश्वास नहि होइछ तऽ गाम घरक बात छोड़ि प्रवासोमे कोनो कॉलोनीमे जत 10 घर मैथिल रहैत छथि ओतक्का स्थिति देखू सभ एक दोसरासे विपरीत रहैत छथि। गेहे-शूराः रणे भीता परस्पर विरोधिनः" स्वभाव बला मैथिल भने समुद्रयात्रा नहि करैत छलाह नहि तऽ गाँधी जीक दक्षिण अफ्रीकामे आन्दोलन ठाढ़ करवाने गुरू-गोसाई याद आबि जइतनि। उदय भानु सिंह जीक माध्यमे कलकत्ता ओ बम्बइक प्रवासी मैथिल सभक चित्रण सेहो आयल अछि जे मैथिल बंधु केवल भनसिया ओ मुनीमगिरीक काजे टा लेल नहि अपितु हाकिम-हुक्काम के बिजनेसमैन बनेबा लेल सेहो परदेस जाइत छलाह। हुनका सभमे अपन देशीय गौरवक भावना छलनि, संगठित छलाह ततहि दोसर दिस तिरपित बाबूक उच्चका चरित्र जुगुप्सा उत्पन्न करैछ। महंथ मदन मोहन दासजीक चर्चा कयने बिनु एहि साहित्यिक यात्राक वर्णन अपूर्ण मानल जाइत...। महन्थ जीक व्यक्तित्वक समीक्षा अपरिहार्य अछि। ई अपना संग कतेको सहमति एवं असहमति हमरा सभक सोझा रखैत छथि। महंथजी मैथिल जातिक कुचालि, एकरा सभक पारस्परिक ईर्ष्या, वर्णगत श्रेष्ठताक अहंकार मैथिली एवं मिथिलाक बदहालीक प्रति जखन चिन्ता व्यक्त करैत छथि तऽ मिसियो भरि मतान्तर नहि राखल जा सकैछ मुदा ओ जखन भाषा एवं जाति लऽ कऽ प्रश्न उपस्थित करैत छथि तऽ मतान्तर ठाढ़ भऽ जाइत अछि। हनक मतानुसार दरभंगा, मधुबनी ओ समस्तीपुरक बाद बला भाषा मैथिली नहि थिकैक। एतऽ प्रश्न उपस्थित अछि जे सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, अररिया, किशनगंज प्रति उत्तर बिहारके जनभाषा कोन भाषा थिकैक। एहि प्रश्नक उत्तर की होयत? प्रस्तुत रचनामे उपस्थित ई प्रश्न मैथिली भाषाई आन्दोलनकै कमजोर करतैक की नहि? एहि सभ प्रश्नक उत्तर अनिवार्य अछि। दोसर प्रश्न जातीय अछि। एकटा फैशन स्वतंत्रताक बाद भारतक मिथिलामे चलि चुकल छैक-मैथिली भाषा, बाभन ओ कर्ण कायस्थक बपौती थिकैक। एकर आधार की छैक? ई प्रश्न हिन्दी, मराठी आदि भाषाई आंदोलन सँ पैंच लेल गेल छैक जतऽ "दलित विमर्श" चलल छलैक। एहि विमर्शक आधारभूमि सामाजिक विषमता सँ लऽ कऽ भक्ति साहित्यक परम्परामे सेहो छैक। की मैथिली साहित्यमे सामाजिक विषमताकेँ लऽ कऽ कोनो विशद विमर्श ठाढ़ भेलैक अछि? हँ, यात्री जीक बलचनमा ओ ललितक पृथ्वीपुत्र सन किछु अपवाद छोड़ि। ईहो दुनू उपन्यास मूलतः भू-समस्या ओ तकर निदान लेल वामपन्थ विचारधाराक पुखापेक्षी अछि। कोनो भक्ति आन्दोलन जकर आधारशिला सामाजिक चेतनाकेँ आन्दोलित करैत छैक जकर आधार पर दलित विमर्श जे साहित्यिक आन्दोलन जकाँ मैथिली भाषामे "अछोप विमर्श ओ साहित्यिक आंदोलन" द्रष्टव्य नहि अछि। हम एक नहि अनेक उदाहरण द्वारा ई बात साबित कऽ सकैत छी जे मैथिली भाषा एवं साहित्य सदति जातीय घेराबन्दी सँ मुक्त रहल अछि। महन्थजी अपनाकेँ मैथिल नहि भूमिहार कहैत स्वयंकेँ अमैथिल कहैत छथिन, तखन ओ कोन प्रेरक तत्व छलनि जखन हुनकर अपन अस्मिता (महंथी) पर संकट छलनि तखनो मैथिली लेल फिल्म निर्माण आ ताहिमे ओतेक फज्जति झेलबा लेल हुनका प्रेरित केलकनि? जबाव अछि हुनक धमनीमे बहैत सुच्चा मैथिल रक्त। ई ओ रक्त जे भूमिहारिन शारदा सिन्हा मैथिलीक स्वरकोकिला बलौलकनि। ई मैथिलत्व रघुनाथ मुखिया (गोढि), तारानन्द वियोगी (धानुक), अरविन्द ठाकुर (भूमिहार), बुचरू पासवान (दुसाध), रघुवीर मोची (चमार), फजलुर रहमान हासमी (मीयाँ), सुभाषचन्द्र यादव एवं सोमदेव सन अनेको कथित अमैथिल मैथिली साहित्यक महफाके कहार बनबा लेल अवश कऽ देलकनि। यह मैथिलत्व माँगनि खबासकेँ शास्त्रीय गायनमे अमर बनौलकनि। एहि भाषामे जट-जटिन, राजा सलहेस, दीनाभद्रीक गाथा, खेखन महाराजक करामति सभ लोक-कलामे जीवित छैक। एहिठामक मनोरथ एतुक्के अहिपन पुरहर डाला, साजी, मौनी, पौतीमे सहेजल छैक। वस्तुतः स्वयंकेँ अमैथिल मानऽ मे केवल फैशने टा नहि अपितु एकर पाछू ऐतिहासिक दुर्दिनता सेहो छैक। सदति रौदी-दाही, जीवनयापनके साधनक अभाव, पलायन, विस्थापनक दंश झेलनिहार विशाल आबादीकेँ पलखति कतऽ रहैक जे ओ अपना मैथिल बुझितइ? प्रस्तुत उपन्यास "अबारा नहितन" साहित्यिक दृष्टिसँ पूर्णतः सफल भेल अछि। एहि उपन्यासमे जतऽ भविष्यक प्रति उत्साह उमंग छैक ओत्तहि गतके प्रति वितृष्णाक भाव सेहो रेखांकित छैक। तद्युगीन व्यवस्थाक चित्रण सेहो भेल छैक, जमिन्दारी प्रथाक उन्मूलन अपरिहार्य छैक। नव व्यवस्थाकेँ थाह-ठेकान, पुरान व्यवस्थापर आधारित वर्गकेँ नहि भेटि रहल छनि। युवा वर्गक बेरोजगारी, नशा-पान, चरमराइत सामाजिक व्यवस्था, पुरातनपन्थ, कुलीनताक दोग-सान्हिमे अव्यक्त किन्तु उद्दीप्त काम-भाव, नवाचारक प्रति संशययुक्त आकर्षण एकरा रुचिपूर्ण बनौने छैक। अपन कार्यकलापकेँ त्याग नहि मानि गदहपचीसी कहब, अपन स्वप्न भंगक त्रासदी पर पश्चाताप नहि अपितु ठहक्का भरि हँसब अबरपनी थिकैक। महाभौतिकवादी छोटका बिड़ला जखन बाबू साहेब चौधरीक संग कादारनाथ चौधरी एवं महंथ मदन मोहनदासकेँ अपना ओहिठाम देखलनि आ हुनका ज्ञात भेलनि जे ई दुनू महापुरूष फिल्म निर्माता सेहो मैथिलीक छथि तऽ अझक्कमे कहि उठलाह "अबारा नहितन जेकरा तखनहि महन्थ मदन मोहन दास ओकरा अपन ताहि क्षणक मनोदशामे सही मुदा अपना लेल अंगीकार कऽ लेलनि। अपन जिनगीक उत्तरार्धमे केदार बाबू सेहो अपन गत कार्यकेँ अबरपनी मानि लेलनि। एक नजरि "अबारा" शब्दक व्याख्या पर, ई शब्द विभिन्न युगमे, विभिन्न क्षेत्रमे विभिन्न तरह सँ आयल अछि। संस्कृत साहित्यमे "इत्वर" शब्द आयल छैक। जकर शब्दार्थ निष्प्रयोजन कार्य कयनिहार सँ होइछ। अपन उपन्यास "बाणभट्ट की आत्मकथामे पूज्य हजारी प्रसाद द्विवेदी "बंड" शब्दक प्रयोग कयलनि अछि जेकर अर्थ-नाँगड़ि कटल बड़द होइछ। बड़द जेकरा हुथियाबऽ लेल ओकर नाँगड़ि मोचाड़ल जाइछ, ताहि सँ बड़द हुलसि कड दौड़़ लगैत अछि, आ काजक सम्पादन होइछ। मुदा जखन बड़दक नाँगड़िये कटि जयतैक तऽ ओ हुथियाएल कोना जाएत आ पनिगर कोना होएत तऽ ओ "बंड" कहाओत। बादमे एहि बंड सँ मैथिलीमे "अबंड" शब्द बनल। जकर अर्थ बंडक रूपमे या फालतू व्यक्तित्वक रूपमे भेल जेना कि "लोपित" शब्द सँ "अलोपित भऽ गेलैक जेकर भावार्थ "निपत्ता वा सदति गायब रहऽ योग्य वस्तु अथवा प्राणी सँ कएल जाइछ। एहि तरहे देखैत छी जे अपना सभक गाम-परिवारमे औखन धरि कतेको "अबंड", "अलोपित नहि होयबाक सप्पत खा नेने छथि। अबारा शब्द संस्कृत भाषाक "इत्वर" सँ मेल खाइत अछि। मुदा प्रश्न उठैत अछि जे लेखक श्री केदारनाथ चौधरी अपन कार्यक निष्प्रयोजन कियैक मानलनि? मैथिली भाषामे जे फिल्म बनतैक से व्यवसायिक दृष्टिकोणसँ नहि अपितु भाषाइ सामाजिक जागरणकेँ ध्यानमे राखि कऽ बनतैक ई सिद्धान्त दुनू मित्र फिल्मक निर्माण सँ पहिने तय कयने रहथि, तखन निर्माणक बाद वितरण हेतु बम्बइया फिल्म वितरण फार्मूला अपनौलनि आ असफल भेलाह। वस्तुतः "ममता गाबय गीत केर पटकथामे जेना-जेना परिवर्तन होइत गेलै निर्माता द्वयक मनोरथो बढ़ैत गेलनि। याद अबैत अछि बहुत पूर्वमे डॉ. मायानन्द मिश्रक पढ़ल कथा जकर सार ई अछि-एकटा किशोरवयक लड़का मधुबाला अभिनीत फिल्म देखैत अछि, प्रस्तुत फिल्ममे मधुबालाक सौंदर्य एवं ओकर अदा ओहि कम उमरिक लड़काक मोन-मिजाज पर ततेक हावी होइत छैक ओ स्वप्नमे मधुबालाक संग विहार करैत छै, आलिंगनबद्ध होइत छैक,चरम पर जा कऽ ओकर नींद टुटैत छैक तऽ ओ जकरा पँजियौने रहैक से मधुबाला नहि ओकर जेठ बहीन जेकरा ओ "लालदाय" कहैत छलैक से रहैक, कथाक शीर्षक अछि "मधुबाला, नहि नहि लालदाय। लेखक एहने मधुबाला रूपी व्यवसायिक चक्रव्यूहमे फँसि लालदाय रूपी प्रयोजनमूलक सिद्धान्तकेँ त्यागि देलनि। लालदाय सुन्नरि अछि, ममत्व सँ भरल अछि, मुदा महात्वाकांक्षासँ परहेज कयने अछि। फिल्मक गीतकार, आब स्वर्गीय, रवीन्द्रनाथ ठाकुर एहि लालदायके पकड़लनि। फिल्म वितरणक परम्परागत लीक छोडि, अपना हुनर सँ ठाम-ठाम प्रदर्शित करौलनि। आ लालदायक प्रतापे मारि रास "लबका पाइ" उपार्जित कयलनि। ओ अबारा छथि? ओ अपन कयल कार्यक गदहपचीसीक क्रिया कलाप कहैत छथि। मुदा एक पाठकके रूपमे हम छोटका बिड़ला सँ पूर्णतः असहमत छी जे हिनका कहलकनि-"अबारा नहितन । हँ यौ! हमर गदहपचीसी बीति चुकल अछि, सम्प्रति हम 50 वर्षक अवस्थामे छी। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। अरविन्द ठाकुर- सम्पर्क- 9955155156/ 9431091548 "अबारा नहितन"क "विलक्षण" कें व्याख्यायित करब अपन किछु लिखए सँ पहिने हम सभ पढ़ए छी। कतय की-की लिखल गेल अछि, केना लिखल गेल अछि, तेकर थाह लए छी। कहलहु गेल छै जे लिखबाक-गढ़बाक लेल पढ़ब अनिवार्य अछि। अहि पढ़बाक क्रम मे हम सभ अनेकानेक विधाक अनेकानेक पोथी पढ़ए छी। पढ़बाक ई क्रम एकटा नशा छै -- चढ़ए छै, उतरए छै, उतरि-उतरि कए फेर चढ़ए छै, चढ़ि-चढ़ि कए फेर उतरए छै, उतरलाक बाद फेर चढ़ए के मांग करए छै। जिनका-जिनका अहि नशाक लत छनि, से अहि पिनक कें नीक जकाँ बुझता। पढ़बाक ई क्रम कखनहु काल रुटीन वर्क जकाँ होइत अछि मने जे एकटा आदत, एकटा हिस्सक जकाँ पोथी पढ़ने जाए रहल छी, पाँति सभ पर नजरि दौड़ैत जाए रहल अछि, पन्ना पलटने जाए रहल छी, पोथी खतम भए जाइत अछि। फेर कोनो दोसर पोथी हाथ मे पहिने पढ़ल पोथी कें बिसरि जाइत। आ फेर ओहिना पाँति सभ पर नजरि दौड़ाएब, पन्ना पलटब आ पोथी-पाठक समापन कए देब। रहरहाँ ई होइत अछि जे अहि पढ़ल पोथी सभक अन्तर्वस्तुक कोनो अंश, कोनो भागक प्रभाव अहाँक अचेतन भने ग्रहण कएने हुअए, अहाँक चेतन-सचेतन एकदम सँ प्रभावहीन रहि जाइत अछि। अर्थात नशा त कएलिअए,नशा चढ़ल नहि। फेर कोनो पोथी एहन हाथ लागल जे डेग-डेग पर अहाँ कें रोकैत गेल। ओकर किछु शब्द-प्रयोग, किछु वाक्य-संरचना, किछु अनुच्छेद अहाँ कें बेर-बेर थाम्हलक, ठहरि-ठहरि कए बुझबाक लेल बाध्य कएलक, बेसी समय लेलक आ ओकर समापनक बाद अहाँ के लागल जे अहि बेरका पढ़ब सार्थक भेल, ओकरा सँ अहाँ कें किछु विशेष, किछु संग्रहणीय भेटल। पढ़बाक अहि पगलपनी, अहि अन्तहीन क्रियाक बीच अकस्मात कोनो एहन पोथी अहाँक हाथ लागि जाइत अछि जेकर कवर-पृष्टक अक्षर सभ सँ शुरू होइत ओकर अंत तक जाइत ओहि पोथीक प्रवाह अहाँ कें अपना संग तेना ने बहएने चलि जाइत अछि जे खेनाइ-पिनाइ, शौच जेनाइ, सुतनाइ सन-सन दैनन्दिनीक प्राकृतिक माँग (नेचुरल काल) सेहो अहाँ कें बाधक-बैरी जकाँ बुझाबए लागैत अछि। अहि पोथी विशेष कें पढ़बाक क्रम मे ठहरबाक कोनो बेगरता, कोनो आग्रह नहि, ओकरा बुझबाक लेल दम लेबाक, पागुर करबाक आवश्यकता नहि पढ़ने जाउ, बुझने जाउ, बढ़ल जाउ, आनन्दित होइत जाउ आ पोथी समाप्त। पोथीक समापनक बाद अहाँक भक टुटैत अछि आ अहाँक अन्तर्मन सँ एकटा शब्द बहराइत अछि "विलक्षण"! आ अहाँ पाठजनित आनन्दक संग एकटा अफसोस सँ भरि जाइ छी जे पोथी समाप्त किऐ भए गेलए, ई और नमहर किऐ ने रहए? एकटा सामान्य पाठक लेल एतय आबि कए ओकर काज समाप्त भए जाइ छै। ई कहि जे, "पोथी विलक्षण रहए। पढ़ए मे खूब आनन्द भेटल। लेखक नीक पोथी लिखलनि।" , ओ पोथी कें चौपेत कए अपन अलमारी मे सैंति लेत। बात खतम। दिक्कत छै ओहि पाठक लेल जे लेखक सेहो अछि। ई दिक्कत तखनि और घनीभूत भए जाइ छै जखनि ओहि लेखक-पाठक कें ओहि पोथी-विशेष पर लिखबाक आन्तरिक वा वाह्य दबाव बनए छै, बनाएल जाइ छै, ओकर अन्तर्मन सँ बहराएल "विलक्षण" शब्दक व्याख्या करबाक लेल कहल जाइ छै, अहि शब्दक औचित्य पूछल जाइ छै आ ओकरा लग बौक भए जएबाक, चुप रहि जएबाक,उत्तर नहि देबाक विकल्प नहि देल जाइ छै। कोनो पोथी कें पढ़ब, ओकर आस्वादन करब, रसे-रसे ओकर रस ग्रहण करब, ओहि रस मे कखनहु कें ऊब-डूब करब, ओकर लहरि सभ सँ खेलाएब एकटा वैष्णवी प्रक्रिया छिअए। एकरा अनुभूत कएल जाइ छै, ई अव्याख्येय होइ छै आ अव्याख्येय रहि जाएबहि मे एकर आनन्द छै। एकर विपरीत, पोथीक पाठोपरान्त ओकर गुण-दोष, रस-नीरस, आनन्द-क्षोभ आदि कें चिह्नित करब, ओकर व्याख्या करब आ ओकर औचित्य कें विश्लेषित करब एकटा शाक्त-प्रक्रिया छिऐ -- कोनो शल्य-क्रिया, कोनो चीर-फाड़ जकाँ। पोथीक पाठ सँ आनन्दित मन वैष्णवी-प्रक्रियाक पक्षधर होइत अछि। ओ ओहि आनन्द कें निःशब्द राखबाक आकांक्षी होइत अछि। शाक्त-प्रक्रियाक रस्ता तखनि खुलए छै, जखनि पोथी-पाठ सँ पाठकक मन ओहि सँ विलग भेल हुअए, क्षुब्ध भेल हुअए, ओकर अन्तर्वस्तुक कोनो अंश सँ भिन्न तरहें उद्वेलित भेल हुअए, ओकरा जे अपेक्षित रहए, से ओकर ओहि मे नहि भेटल हुअए। मने एहन स्थिति, जेकरा असन्तोष सँ तिलमिलाएब कहल जाइ छै। कोनो पोथीक नीक लागब अहाँ कें ओकरा संग जोड़ि दैत अछि, अभिन्नताक भाव सँ भरि दैत अछि। ओ अहाँ कें अपन समांग जकाँ लागए लागैत अछि आ अपनहि अंगक शल्य-क्रिया करब केकरा रुचतए? के तैयार हएत एहन अप्रिय आ कष्टदायक काज करए लेल? किन्तु जीवनहि जकाँ साहित्यक क्षेत्र सेहो मात्र प्रिय-प्रिय केर खेल नहि अछि, डेग-डेग पर अप्रिय डेग उठएबाक अप्रिय काज करबाक अनिवार्यता समक्ष होइत रहए छै, करए पड़ए छै। "अबारा नहितन" पढ़ैत कालक रस अपूर्व रहए। पोथीक पाठक समापनोपरान्त एकरा लेल पहिल प्रतिक्रिया मन मे अभरल रहए "विलक्षण"! हम अहि "विलक्षण"क अव्यक्त आनन्द मे रहि जाएब चाहैत रही कोनो वैष्णव जकाँ। किन्तु सभ किछु लोकक इच्छेक अनुरूप होइत रहितए त जीवन की भेल? [फ्लैशबैक : 2012-13 : "मिथिला आवाज", दैनिक समाचार-पत्रक सम्पादक रूप मे दरभंगा मे रही। एक दिन योगानन्द जी (डा योगानन्द झा,कबिलपुर) अपन लिखल मोनोग्राम "स्नेहलता" आ केदारनाथ चौधरीक लिखल "अबारा नहितन" एकहि संग दए गेला। कहलनि जे "केदार जी अहाँक जबरदस्त प्रशंसक छथि,बेर-बेर अहाँक लिखल सम्पादकीय सभक चर्चा करए छथि आ कहए छथि जे मैथिली पत्रकारिता कें पहिल बेर ई अत्याधुनिक, प्रगतिशील आ आक्रामक तेवर भेटल अछि। ओ बहुत स्नेह सँ ई पोथी पठएलनि अछि।" सम्पादकीय कर्तव्यक निर्वहनक चलते फुरसतक अभाव रहैत छल। सम्पादक रहैत किनकहु दुआरि पर नहि जाएब, से शपथ सेहो खएने रही। तें ने केदारनाथ जी सँ भेंट संभव भेल आ ने दरभंगा मे रहैत हुनक पोथीएक पारायण कए सकलहुँ। पोथी कें आन-आन पोथी सभक संग सैंति कए राखि देल। अखबार सँ त्यागपत्र दए सुपौल अएलहुँ त पढ़बाक खूब फैलगर आ अहगर समय भेटल आ जकिआएल पोथी सभ कें बेराबेरी पढ़ब शुरू कएलहुं। अहि क्रम मे "अबारा नहितन" पर दृष्टि गेल आ ओकरा पढ़ब शुरू कएलहुँ। पढ़ब शुरू करितहि अहि मे डूबि गेलहुँ आ पढ़ब समाप्त होइतहि मुँह सँ बहराएल "विलक्षण"। केदार जी सँ कहिओ सम्मुख भेंट नहि छल। "अबारा नहितन" पढ़लाक बाद हुनका सँ भेंट लेल मन लालायित भए उठल छल। 2016 मे "काशीकान्त मिश्र मधुप राष्ट्रीय शिखर सम्मान" ग्रहण करबा लेल समस्तीपुर जएबाक रहए। पोथीए पर सँ नम्बर लए केदार जी कें फोन कएलियनि आ भेंटक अपन इच्छा प्रकट कएलियनि। ओ प्रसन्न भेला, कहलनि जे ओ दरभंगे मे छथि आ हमर प्रतीक्षा करता। मैथिलीक सुप्रसिद्ध गजलगो रामेश्वर पाण्डेय "निशांत (कनैल,मधुबनी) आ कथा लेखिका अलका वर्मा हमर संग रहथि। दरभंगा मे केदार जी सँ भेंट भेल। मार्गदर्शन लेल ओ सड़क पर आबि ठाढ़ रहथि। बंगाली टोलाक हिडेन काटेज मे ओ दुनू परानी मात्र रहथि आ हुलसि कए स्वागत कएलनि। चाह-ताह भेल, मारिते रास गप-सरक्का भेल आ ओ अपन अद्यतन प्रकाशित सभटा पोथी हमरा भेंट कएलनि। किछु पोथी हमरा सँ आएलहु कें भेटलनि। हम हुनका सँ भेंट कए ततेक आह्लादित आ भावुक भेल रही जे चलबा काल हुनका भावातिरेक मे कहि बैसलियनि जे "हमर रुचि आलोचना कर्म दिस बढ़ल अछि। हम अहूँ पर, अहाँक पोथी पर लिखब आ वचन दए छी जे जा तक अहाँ पर लिखब नहि, हम स्वयं कें मरबाक अनुमति नहि देब"। तेकर बाद सँ एकटा दीर्घावधि बीत गेलए। नाना-जंजाला सभ मे ओझराइत समय ससरल गेलए। मनक स्मृति-पटल पर केदार जीक चेहरा अभरए त अपराध-बोध हुअए। समस्या ईहो रहए जे अहि "विलक्षण" शब्दक भावोच्छवास कें कागज पर उतारबाक लेल कोनो प्रारंभिक सूत्र, कोनो स्पष्ट रूपरेखा मन मे नहि बनि पाबैत रहए। एकर अभाव मे हम कोनो विषयक लेखन मे हाथ नहि लगबए छी। कोनो विषय पर लिखबाक लेल जखनि प्रारंभिक मार्गक दरबज्जा बंद भेटए त आगूक रस्ता केना तै भए सकैछ? हमर आलोचक-मन भयंकर छिद्रान्वेषी आ आक्रामक अछि। अहि मनोभावक लेखनक कोनो टा स्कोप "अबारा नहितन" नहि दए छै। अहि पोथीक रसास्वादन सँ एकर आकलन तक सभठाम सुकोमल मनक बेगरता छै। ई सुकोमल मन हमरा लग नहि अछि, से बात नहि। किन्तु हमर ई सुकोमल मन संकोची अछि, प्रशंसा कें अपन आंतरिक बोध मानैत अछि आ ओकरा व्यक्त करए मे हिचकैत अछि। दोसर बात ई जे "अबारा नहितन"क चरित नायक महंथ मदनमोहन दास ओहि भूमिहार ब्राह्मण जातिक छथि,जहि मे हमहूँ छी। मैथिल समाज मे भूमिहार ब्राह्मण लोकनिक प्रति जे भयजनित विद्वेष छै, तेकर आकलन हमरा अछि। अहि विषय कें छूअब हमर आक्रामकता कें कोनो सीमा तक लए जाए सकैत छल आ तखनि ओकरा सीमा मे बान्हब बहुत दुरूह आ कठिन काज भए सकैत छल। ई दूटा प्रमुख कारण रहए जे हमरा "अबारा नहितन" पर अपन भावाभिव्यक्ति कें शब्द दए सँ रोकैत रहल, डरबैत रहल। किन्तु कखनो-कखनो बाहरी दबाव काज कए जाइ छै। जेहन भेल हुअए, "अबारा नहितन" पर लिखबाक काज भए सकल, तेकर प्रसन्नता अछि। संभव जे हुनक पोथी पर लिखबाक हमर ई प्रयास केदारनाथ चौधरी जी कें संतुष्ट नहि करनि आ ओ नाराजगी मे कहि बैसथि "कामचोर नहितन"! ओ जे कहता, हमरा कबूल हएत। ] परीक्षा मे कथावाचकक असफल भेलाक उपरांत आत्मघातक "सती-क्रिया भावक स्त्रैण निर्णय सँ अहि कथाक आरंभ होइत अछि आ असफलता कें समुद्र-मंथनक उपरांत प्राप्त हलाहल जकाँ कथानायक द्वारा पी जाएब आ कंठ मे रोकि लेबाक "शिव-क्रिया भावक अपरिमेय पुरुषार्थक संग समाप्त होइत अछि। बीच मे अनेकानेक प्रसंग सभ आबैत अछि जे रसक चारू अंग ( स्थायी भाव, संचारी भाव, विभाव आ अनुभाव) आ नओ प्रकार ( शृंगार, हास्य, करुण, रौद्र, वीर, भयानक, वीभत्स, अद्भुत आ शांत ) क दर्शन कराबैत कथाक प्रारंभ आ अंत कें संपुष्ट करैत चलैत अछि आ अहि सभक सम्मिलित प्रभाव सँ रचनाकारक गद्यक डंक बहुत मारूक भेल अछि, भने ओ "मैथिल आँखि" लेल प्रत्यक्ष नहि हो। अहि संपूर्ण रचना-क्रम मे रचनाकार जहि प्रकारक चित्रमय गद्य रचए छथि, से अनन्य आ विरल अछि। "अबारा नहितन" मैथिलीक श्रेष्ठ गद्य-रचना सभ मे एक अछि आ एहन "श्रेष्ठ गद्य-रचना"क मात्रा मैथिली मे बहुत अल्प अछि। केदार जीक गद्यक छटा अपूर्व अछि। हुनक गद्यक ठाठ चकित-विस्मित करैत अछि। ई अपूर्व छटा, ई गद्यक ठाठ हुनक चमेली रानी, करार, माहुर, हीना आदि उपन्यास मे सेहो खूब नीक जकाँ प्रकट भेल अछि। अपन विषय-वस्तुक खाँका आ तत्संबंधी हुनक स्मृति तेहन स्पष्ट आ तीव्र अछि जे जखनि पछिला उपन्यासक विस्तार अगिला उपन्यास मे होइत अछि त पछिला उपन्यासक कोनो मामूली आ भुलल-बिसरल सन पात्र अगिला उपन्यास मे खूब जगजियार जकाँ उपस्थित भए जाइत अछि आ कथा-विस्तारक एकटा अनिवार्य तत्व जकाँ भए जाइत अछि। कथानक कें साधबाक क्रम मे हुनका अपन उपन्यास सभ मे भाषा कें विषयानुकूल साधए पड़ल छनि। किन्तु "अबारा नहितन" मे हुनक गद्यक मनोहारी छटा उन्मुक्त भए अपन पसार कएलक अछि। एकरा पढ़ैत बेर-बेर चार्ली चैप्लीनक सिनेमा सभ आ ओकर प्रस्तुतिकरणक खिलंडर-प्रणाली मन पड़ैत रहैत अछि, जेकर माध्यम सँ हास्य-व्यंग्यक अढ़ मे मनुष्यक आंतरिक वेदना, दर्द आ पीड़ा खूब स्पष्ट आवेगक संग अभिव्यक्त भेल अछि। "अबारा नहितन" मे अनेक ठाम एहन प्रसंग सभ आएल अछि जेकर अहि कथानकक संग प्रकटतः कोनो तारतम्य नहि बुझाइत अछि, किन्तु ओ सभ अनायास नहि अछि, कथा कें चहटगर-सुअदगर बनएबाक लेल छौंक जकाँ नहि अछि। कथानकक अंत जहि "विफलता" पर होइत अछि, तहि विफलताक जड़ि-मूल आ सूत्र मैथिल समाजक कोन-कोन चरित्र मे उपस्थित अछि, कोन-कोन द्वैध कोनो योजना-परियोजनाक लेल घातक आ विनाशक अछि, के कोनो पौध कें गाछ हएबा सँ पहिनहि ओकरा चिबाए कए उदरस्थ कए लैत अछि, तहि सभ कें उजागर करबा लेल, चिह्नित करबा लेल ओ प्रसंग सभ सहायक होइत अछि, क्रमानुसार आधार तैयार करैत चलैत अछि। स्वतंत्रता प्राप्तिक प्रारंभिक दौर अति-उत्साहक दौर रहए। पराधीनताक संग एकमेक भेल मानसिकताक केंचुल उतारि स्वतंत्रता, क्रांतिकारिता, आधुनिकता आ प्रगतिशीलताक संग तारतम्य बैसएबाक दौर रहए। अहि दौर मे अहि बातक होड़ चलल रहए जे पराधीनताक प्रत्येक रूपक कुप्रभाव सँ मुक्त भए अपन आचरणादि मे शुद्ध वैज्ञानिक भारतीयताक आत्मसातीकरणक प्रविष्टि के कतेक मात्रा मे कए पाबैत अछि। ब्रिटिश प्रभुत्वक अतिरिक्त धर्म, जाति, सम्प्रदाय आ तहि सँ जुड़ल अनेक कर्मकांडीय पाखंडी विधान-परिधानक पराधीनता-चिह्न सभ कें त्याज्य मानल गेल छल आ ओहि क्रम मे अनेकानेक लोक सभ टीक कटाए लेलनि, जनेउ पहिरब छोड़ि देलनि। ई सभ समाजवादी मानसक प्रतीकात्मक प्रयोग सभ रहए। एकर प्रभाव सँ तत्कालीन मैथिल लोकनि सेहो नहि बचल छला। से मात्र युवे वर्ग टा नहि, स्वतंत्रता संग्राम सँ देखौटी तौर पर जुड़ल बुजुर्गहु सभ अहि प्रभाव कें ग्रहण कएलनि, भने ई जोश स्थायी नहि भए सकल, किछुए दिन तक टिकल। बादक दौर मे जाए कए फरक एतबे टा रहलए जे मैथिलेतर वर्ग त ओहि परिवर्तन सभक संग अभिन्नता राखि आधुनिकता आ प्रगतिशीलताक ड़गर पर आगू बढ़ितहि रहि गेल, किन्तु मैथिल वर्ग ओहि दौरक नशा उतरितहि फेर सँ अपन कर्मकांडीय खोल मे काछु जकाँ वापस घुरि गेल, बल्कि ओहि खोल कें और सक्कत कए लेलक। टीक कटाए कए गाम जाएब आ तेकरा गमछा सँ झाँपने रहबाक प्रसंग इएह आ एहने द्वैध सभ कें उजागर करबाक लेल पोथी मे आएल अछि। अहिना "उर्दी पर भांग खाएब" आ ओकरा नशा नहि मानब मात्र पात्रगत नहि अछि। ई तहि कालक (कमोबेस आइओ) मैथिल परिवेश आ मानसिकताक सूत्र-चित्रण अछि। मेहनत-मशक्कत करब, उद्यम करब, घाम बहाएब आ तहि पुरुषार्थ सँ अपन आ परिवारक भरण-पोषण करब यजमान लोकनिक काज रहए, पुरहित लोकनिक नहि। पुरहित लोकनिक मानब रहनि जे हुनका श्रम सन घिनाष्टक काज नहि करबाक छनि, हुनक भरण-पोषणक जिम्मेदारी यजमान लोकनिक छनि, तें श्रम करब हुनके सभक काज छनि। पुरहित सभक काज छिअए लोकक जन्म सँ मरण तक विभिन्न कर्मकांडीय संस्कार सभक रचना-स्थापना करब, ओहि संस्कार सभक आयोजन मे उपस्थित भए विकृत उच्चारण मे देवभाषाक किछु मंत्र बुदबुदाए देब, पूजा-पाठ कराए देब आ तदोपरांत दछिनाक रूप मे टका-वस्त्र-अन्नादि प्राप्त कए घर घुरि आएब आ शेष समय मे भांग पीयब, पुष्टांग मात्रा मे भकसब आ फोंफ काटब। "उर्दी पर भांग खाएब" अहि पुरहिती अलसपना, परजीविताक मानसिकता कें देखार करबाक प्रसंग अछि। एहने एक टा प्रसंग अछि पनबाड़ीक टाट मे कनटिरबाक फँसबाक चलते गिरफ्तार भए जाएब, जेल जाएब आ जेल सँ बाहर आबि नेता-विधायक भए जाएब। जँ इमानदारी सँ शोध हुअए त आजादीक उपरांत एहने सन दुर्घटना, एहने सभ प्रपंच सभक फलस्वरूप स्वतंत्रता-सेनानी बनि गेल, नेतृत्वक कतार मे चलि आएल अनेकानेक नेता सभक पर्दाफाश भए जाएत। देशक प्रत्येक भूभाग मे एहन अनेक रास उदाहरण भेटि जाए सकैत अछि। एकटा उदाहरण त हमरे सुपौलक अछि। एकटा हजाम कांग्रेस आफिस मे आबि नेता सभक केश-दाढ़ी बनबैत रहए। अपन श्रद्धा निवेदित करबाक लेल ओ ई काज मोफत मे करए। स्वतंत्रता-सेनानी पेंशन योजनाक घोषणा भेला पर ओ बिहार सरकारक एकटा लब्ध-प्रतिष्ठित मंत्री कें कहलकनि जे "सरकार! अहाँ सभक एतेक सेवा कएल। ई पेंशन हमरा नहि भेटि सकए छै?" मंत्री कें मसखरी सुझलनि आ ओ अपन एकटा चेला सँ फारम मँगाए हजामक नाम सँ ओकरा भरबएलनि, स्वयं ओकरा रिकोमेंड़ कए पठबाए देलनि। किछुए दिनक बाद आवेदन स्वीकृत भए गेलए। हजाम जी ताम्रपत्रधारी स्वतंत्रता-सेनानी भए आजीवन पेंशन पाबैत रहला। कनटिरबाक कथाक माध्यम सँ स्वातंत्र्योत्तर भारतक ओ कलंकित अध्याय सोझाँ आबैत अछि, जहि मे अनेक जोगारी, अनेक जालसाज मुख्यधारा मे चलि आएल आ अपन सर्वस्व गमैनिहार अनेक संघर्षकर्त्ता लोकनि राष्ट्रीय परिदृश्य सँ बाहर कए देल गेला। देश पर चीनी आक्रमण, ओहि सँ हताश-निराश भेल देशक मानस आ तद्जनित नेहरूक प्रति जनाक्रोशक चर्चा सेहो कथाक्रम कें आगू बढ़ैबाक लेल मात्र नहि, सोद्देश्य अछि। ई ऐतिहासिक घटना-क्रम त अछिए, एकर माध्यम सँ तत्कालीन भारतीय मानस-भाव प्रकट भेल अछि, किन्तु "अबारा नहितन"क मूल कथाक संग एकर तार सेहो जुड़ैत अछि। ई राष्ट्रीय संस्कार आ मैथिल संस्कारक बीच तुलनात्मक अध्ययन सेहो अछि। चीन सँ पराजयजनित हताशा आ असहायताक मानसिकता मे रहितहु अहि देशक ई संस्कार अछि जे नेहरूक प्रति अपन आक्रोश बिसरि राष्ट्र उन्नयन लेल, राष्ट्र कें सशक्त बनएबाक लेल राष्ट्रीय चेतनासम्पन्न प्रत्येक भारतीय स्त्री-पुरुष अपन नागरिक कर्तव्यक पालन करैत देशक प्रतिरक्षा-कोष मे अपन यथासंभव योगदान दैत अछि। दोसर दिस अछि मैथिल संस्कार, जेकरा बबुआनी करबाक लेल मिथिला राज्य चाही, से "ममता गाबए गीत"क निर्माण मे कोनो आर्थिक सहयोग त नहिए करैत अछि, ओकर वितरण-प्रदर्शनहु लेल कोनो दैहिक वा भावनात्मक सहयोग दए सँ विरत अछि। विरतहु की अछि, फिल्म निर्माणक रूप मे मैथिलीक लेल एकटा विशिष्ट आ ऐतिहासिक काज भेल अछि, तेकर चर्चा कए दोसरहु कें सहयोग देबाक लेल उत्साहित करबा सँ दूर भावक अभावक मारल एकदम मतिशुन्य जकाँ भेल अछि मुंदहुं आंख, कतहु कछु नाहीं। "अबारा नहितन"क अध्याय दू आ तीन अहि रोचक कथा-यात्राक बीच कोनो सून-सपट स्टेशन पर ट्रेनक अनपेक्षित ठहराव जकाँ बुझाइत अछि। मिथिला-मैथिलीक एहन कथा सभ कतेकहु बेर कतेकहु लोक द्वारा घोसल गेल अछि, असरहीन भए गेल अछि, मन मे खीझ उत्पन्न करैत रहल अछि। जँ अहि प्रसंग कें बोर करए सँ नहिओ जोड़ी, तखनिओ ई अहि रोचक पोथीक बीच मे एकटा अवांछित व्यवधान जकाँ लागैत अछि। तेकर बादहु अहि दुनू अध्यायक प्रासंगिकता त छैहे पोथीक मूल कथ्यक संदर्भ मे। ई दुनू अध्याय अहि बात कें देखार त करितहि अछि जे अहि मिथिलान्दोलनजीविता सँ जुड़ल लोक सभ जेहन बेदरमतिया आइ छथि, तेहने बेदरमतिया तहिओ रहथि। ओ सभ प्रौढ़ हएबाक लेल तैयार नहि छथि। परिपक्व हएब हुनका सभ कें स्वीकार नहि छनि। बिहार कें मिथिला, भोजपुर आ संथाल आदि में बाँटब त घोर वायवीय आ हास्यास्पद परिकल्पना अछि। ओहिना वायवीय आ हास्यास्पद, जेना भारत आ नेपालक तथाघोषित मिथिला राज्य कें एकहि ठाम एकत्रित करबाक फूहड़ सपना। ई दुनू अध्याय प्रायः बाद मे क्षेपक जकाँ प्रविष्ट कएल गेल बुझाइत अछि। उद्देश्य दू टा भए सकैत अछि पोथीक किछु पृष्ट बढ़ाएब वा थोड़-बहुत आत्मरति करब आ बेर-बेर प्रयुक्त भेल "मैथिलीक प्रेम-रोग" शब्दावली कें जस्टीफाइ करब। कोनो लेखक लेल अहि दुनू तरहक रोग वा कमजोरी अस्वाभाविक नहि छै। किन्तु केदारनाथ चौधरी अपन लेखनक अन्तर्वस्तु, ओकर कथ्य आ प्रस्तुतिकरण मे बहुत प्रगतिशील छथि, तें ई बात कनी खटकए जरूर छै। अहि प्रसंग कें आठ-दस पंक्ति मे फरिआएल जाए सकैत छल। प्रसन्नताक गप जे "अबारा नहितन"क कथा-वितान आ हुनक व्यक्तिगत जीवन-शैली अहि बातक प्रमाण अछि जे ओ अहि बेदरमतिया मिथिलान्दोलनजीविताक सहरजमीनी यथार्थ कें समय रहैत चीन्हि गेला, अहि मिथकीय सस्सरफानी सँ बचि कए बाहर आबि गेला आ अपन जीवन कें एकर फेर मे व्यर्थ नहि कएलनि।
"अबारा नहितन" घोषित रूप सँ मैथिलीक पहिल फिल्म "ममता गाबए गीत"क निर्माण-यात्राक रोचक कथा थिक। किन्तु अहि पोथीक वितान कवर-पृष्ट पर देल अहि घोषणा मात्र तक सीमित नहि रहि गेल अछि। हमरा दृष्टि मे "अबारा नहितन" मैथिली-समुद्र-मंथन-गाथा अछि, जहि मे देव-दानवलोकनि अपन-अपन हितसाधन, स्वार्थ-साधन आ व्यक्तिगत लोलुपतावश समस्त भौतिक-आधिभौतिक संसाधन-उपादान सभ कें लूटि लेबाक हीतोड़ प्रयास मे लूझल छथि आ अहि मंथन-क्रम मे बहराएल हलाहल देवाधिदेव महादेवक हिस्सा मे छोड़ि दए छथि। देवाधिदेव महादेवक भूमिका मे महंथ मदनमोहन दासक हएब स्पष्ट अछि। अन्य देव-दानव (जे सहोदरा दिति आ अदितिक संतान छथि) कें पाठकजन अपन सुविधानुसार चीन्हि सकए छथि, नामित कए सकए छथि। अहि पोथीक गढ़न होमियोपैथी पद्धति जकाँ अछि, एलोपैथी पद्धति जकाँ नहि। देहक कोनो भाग मे गूड़़ (व्रण / पीज सँ भरल गुलठी) भेला पर एलोपैथी मे ओकर उपचार मात्र शल्य-क्रिया छै। प्रभावित स्थल कें चीर कए पीज बहाए दए छै,किन्तु ई प्रक्रिया पीड़ादायक होइ छै। एकर विपरीत होमियोपैथी मे अहि व्रण कें फोड़बाक लेल मड़ुआ साइजक उज्जर-उज्जर मीठ-मीठ गोली मे मिलाए कए एकटा दवाइ देल जाइ छै हिप्पर-सल्फर। ई दवाइ पेट मे गेलाक बाद भीतरे-भीतर अपन काज करए छै, दर्दक लेश नहि हुअए दए छै, रोगी कें पतो नहि लागए छै आ दिन-रातिक कोनो क्षण मे गूड़ स्वतः फूटि जाइ छै, ओकर पीज बहिकए बाहर निकलि जाइ छै। "अबारा नहितन" एहने मिठका होमियोपैथी गोली अछि, जे बिना कोनो प्रत्यक्ष दर्द, बिना कोनो हिंसक प्रक्रियाक मिथिला-मैथिल-मैथिलीक प्रपंचत्रयी व्रण कें फोड़ि ओकर पीज कें बहएलक अछि। ई पोथी शुद्ध गाँधीवादी-सह-होमियोपैथ प्रणाली सँ ओहि पिजहा मानसिकता कें बेनंगन कएलक अछि जे कोनो योजना-परियोजनाक नींव पड़ितहि अहि फिराक मे लागि जाइत अछि जे अहि योजना-परियोजना मे लुटबाक भाँज कतय-कतय छै, कतेक छै आ ओहि मे कतेक सुतारल जाए सकैत अछि, कतेक हँसोथल जाए सकैत अछि। अहि पिजहा मानसिकता लग एतबहु धैर्य नहि छै जे कोनो योजना-परियोजना भविष्य कें ध्यान मे राखि शुरू होइत अछि, तें पहिने एकर अस्तित्व कें सहरजमीन पर उतरए दी, स्वरूप ग्रहण करए दी, स्थापित हुअए दी आ ई जखनि स्वचालित गति पकड़ि लिअए, लाभ कमाबए लागए, तखनि ओहि प्रतिफल मे अपन हिस्सा अपन श्रम वा योगदानक अनुपात मे निर्धारित करी। नहि, एतेक धैर्य नहि। ई धैर्य श्रमजीविक काज छिअए, जन-बोनिहारक काज छिअए, गैर-मैथिलक काज छिअए, दछिनाजीवी मैथिलक नहि। ओकर भाँज बैसि गेलए त ओ मूलाधारहि कें, मूल पूँजीए कें कुतरब-चिबाएब शुरू कए देत कोनो मूस जकाँ। मूसक अपन मजबूरी छै। ओकर दाँत निरन्तर बढ़ैत रहए छै। कोनो वस्तु कें कुतरैत रहबा सँ ओकर दाँतक वृद्धि थम्हल रहए छै। अहि कुतरब मे पसन्दगी-नापसन्दगीक कोनो मापदंड़ नहि छै, जे भेटि गेल, तेकरे कुतरब। कुतरनाइ बंद करत त ओकर दाँत ओकर मूँह आ देहहु सँ नमहर भए जाएत आ ओ मरि जाएत। मरबाक विकल्प सँ बेसी नीक छै कुतरबाक विकल्प, भने अहि कुतरब सँ आनक जान चलि जाइ। अहि क्षेत्रक इतिहास गवाह अछि, जे "ममता गाबए गीत" संग भेलए, सएह अशोक पेपर मिल, रैयाम आ लोहट चीनी मिल संग भेलए आ सएह "मिथिला आवाज" अखबार संग भेलए। मूषक-संस्कृतिक अनन्त सिलसिला छै, एकर शिकार भेल वस्तु, व्यक्ति, विचार सभक नमहर सूची छै। ई पोथी संस्मरणक थिक, किन्तु हास्य-व्यंग्य आ चित्रमयताक संग ई अपन परिवेशक पर्यवेक्षण, अन्वेषण, विश्लेषण आ आलोचना त करितहि चलैत अछि, एकटा काल-विशेषक इतिहास सेहो रचैत अछि। अहि क्रम मे कतेकहु चरित्र, कतेकहु प्रवृति अनावरित होइत अछि त कतेकहु अनाम व्यक्तित्वक बलुआही आ सोडावाटरी प्रतिष्ठा-प्रतिमा ध्वस्त सेहो होइत अछि। अचरज नहि जे अहि पोथी आ पोथीकार कें कट्टर मैथिलवादीलोकनि आ हुनकर चिरकुटिया गिरोह मौखिक तौर पर खूब गरिअएलनि। ( संभव अछि जे केदार जी पर आयोजित "विदेह"क विशेषांक मे सेहो ओहि खिधांस-गाथाक हुलकी-झलकी देखाइ पड़ए।) खबोत्तर-पीठक स्वघोषित चिरकुटिया मठाधीश लोकनिक पहिल प्रयास ई होइ छनि जे गैर-मैथिल कें किछु विशेष करबाक अवसरहि नहि देल जाए, जँ ओ प्रयास करए त ओकरा हतोत्साहित कएल जाए, ओकर ड़गर कें कंटकाकीर्ण कए बाधा ठाढ़ कएल जाए, येन-केन-प्रकारेण ओकरा कोनो उपलब्धि हासिल करए सँ रोकल जाए आ जं कोनो उपलब्धि हासिल कए लेलक त ओकर अवमूल्यन कए ओकर उपहास उड़ाएल जाए। अहि खबोत्तर-पीठक कबंध मानस कें ई बात बर्दास्त नहि होइ छै जे मैथिलीक विकास, एकर स्थापना, एकर सशक्तिकरण मे आन कोनो जातिक व्यक्तिक योगदान कें पहचान भेटए, ओकरा सकारल जाए आ ओकरा दस्तावेजीकृत कएल जाए। हुनकर सभक ई मानब छनि जे एहन लोकक मूँह पोछबाक लेल कोनो आयोजन मे जँ कनी काल लेल कोनो आसन दए देल गेलए, मंच पर ओकरा पाग पहिरा देल गेलए, ओकर मौखिक प्रशंसा मे किछु शब्द कहि देल गेलए त ओहि गैर-मैथिल मानुस कें एतबे मे तिरपित भए जएबाक चाही, जनम सोगारथ बुझबाक चाही आ अहि प्रदत्त कृपा लेल खबोत्तर-पीठक स्वयंभू लोकनिक प्रति आत्मा आ हृदय सँ कृतज्ञ हएबाक चाही। लिखित रूप मे कोनो गैर-मैथिलक योगदानक उल्लेखक गप जाए दिअ, कोनो लिखित सूची मे ओकर नामक उल्लेख तक नहि हुअए, तेकरा सुनिश्चित करबाक हर संभव प्रयास ई खबोत्तर-पीठ करैत रहल अछि, करैत आएल अछि। आन जाति मे खास कए जँ भूमिहार ब्राह्मण हुअए, तखनि त अहि खबोत्तरजीवी सभ कें जेना मिर्गी चढ़ि जाइत अछि। जे लोकनि अहि खबोत्तरजीवी तत्व सभक दिनचर्या पर नजरि राखए छथि, तिनका सभ कें ई बुझल छनि जे डा. योगानन्द झा द्वारा कपिलदेव ठाकुर "स्नेहलता"क मोनोग्राम लिखला पर, केदारनाथ चौधरी द्वारा "अबारा नहितन"क माध्यम सँ महंथ मदनमोहन दासक महिमा आ योगदान कें दस्तावेजीकृत कएला पर, बैजनाथ चौधरी "बैजू" द्वारा डा सी पी ठाकुर कें "मिथिला विभूति" सम्मान प्रदान कएला पर वा अजित आजाद द्वारा अरविन्द ठाकुर कें "मिथिला आवाज"क सम्पादक बनएला पर ई खबोत्तरजीवी तत्व सभ मिर्गीक चारू पहरक रोगी वा वृषोत्सर्ग सराध लेल दागल साँढ़ जकाँ केना सनकल रहथि, कोन हद तक रुष्ट-क्षुब्ध भेल रहथि आ एकर प्रतिक्रिया मे केहन-केहन अपशब्द सभ सँ अहि महानुभाव लोकनि कें विभूषित कएने रहथि। ई अलग गप जे मूँहामूँही, आमना-सामनी एना करबाक/कहबाक साहस कि भप्प ने हिनका सभ कें कहिओ भेलनि आ ने हएतनि। भूमिहार ब्राह्मण लोकनिक प्रति हिनकर सभक भयजनित घृणा कतेक तीव्र अछि, तेकर किछु आभास पंडित गोविन्द झा लिखित "मिथिलाक सामाजिक इतिहास" केर असामाजिक अभिव्यक्ति मे देखल जाए सकैत अछि। खबोत्तरजीवी-सम्प्रदायक अहि कुप्रवृतिक एकटा सकारात्मक आ इजोरिया अर्थ-पक्ष सेहो अछि। हुनकर सभक ई प्रवृति अहि भय सँ उपजल अछि जे धपचट मे भने ओ सभ खबोत्तर हड़पि लेने छथि, किन्तु खतियानी मालिक लोकनिक जागृत होइतहि ई खबोत्तर हुनकर सभक चांगुर सँ निकलि जाएत। ओ सभ अजुका यथार्थ कें बुझि रहल छथि जे आन वर्गक लोक अपन श्रम, अपन पुरुषार्थ आ निरन्तर सशक्त होइत अपन बौद्धिक क्षमताक बल पर हुनका सभ सँ बेसी सबल आ सक्षम छथि आ जँ एक बेर ओ लोकनि अपन सामर्थ्य कें चीन्हि अहि क्षेत्र मे अबरजात शुरू कए देलनि त हिनकर सभक अपन अयोग्यता देखार भए जएतनि आ देखार होइतहि हिनकर सभक वर्चस्व सेहो समाप्त भए जएतनि, छिनाए जएतनि। "अबारा नहितन"क सर्वाधिक आकर्षक, प्रभावशाली आ उद्वेलक ओ अंश सभ अछि जहि मे महंथ मदनमोहन दास (केदार जीक मदन भाइ) उपस्थित रहए छथि। रचनाकारक उद्देश्य सेहो हुनका अहि रचनाक केन्द्र मे राखबाक अछि आ ओ प्रत्यक्ष वा परोक्ष रूप मे सभ ठाम उपस्थित छथिओ। महंथ मदनमोहन दास, जिनका रचनाकार "मदन भाइ" कहि सम्बोधित कएने छथि, के युवकोचित उत्साह-भाव, पुरुषार्थक समर्पण-भाव, दुख मे द्रष्टाभाव, कर्म मे यज्ञ-भाव आ "कर्मण्ये वाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन"क उत्सर्ग-भाव खूब जगजियार भए कए पोथी मे आएल अछि। मदन भाइ अल्पभाषी छथि, जे बाजए छथि से नापि-तौल कए बाजए छथि, हुनक बाजब मे युग-सत्य आ वैचारिक परिपक्वता उपस्थित रहैत अछि आ एकटा धार्मिक-स्थलक प्रधान होइतहु आधुनिकता आ व्यावहारिकताक गुण सँ लैस छथि। जतय कत्तहु लेखक कहए छथि "मदन भाइ मौन रहि गेला", त ओ मौन सेहो अनेक रास गाथा-महागाथा कहि जाइत अछि। मदन भाइ स्थैर्यक प्रतिमूर्ति छथि केहनो स्थिति मे विचलित नहि होइ छथि, समुद्र जकाँ गंभीर रहैत छथि। सामने बलाक चतुर-चलाकी, अवसरपरस्ती, क्षुद्रता आदि हुनका शीशा जकाँ साफ-साफ देखाइत छनि, किन्तु हुनक पुरुषोत्तम निकृष्टतमहु के "दीन जानी प्रभु निज पद दीन्हा"क भाव सँ क्षमाशील रहैत छनि। अहि पोथीक सम्पूर्ण कथाक्रम मे मदन भाइ एकहि बेर क्रोधावेग मे आबि तमतमाएल छथि, आक्रामक भेल छथि आ से भेल छथि "भिखमंगा" कहल गेला पर। ई क्रोधावेग, ई आक्रामकता स्वाभिमान आ आत्मगौरवक प्रतीक, ओकर प्रकटीकरण अछि। कल्पना करब कठिन अछि जे, जे व्यक्ति एकटा पुनीत लक्ष्य लए कए आगू बढ़ल अछि, अग्रगामी भेल अछि, निर्धारित उद्देश्यक लेल अपन सर्वस्व स्वाहा करबाक साहस राखैत अछि, साहसहि टा नहि करैत अछि, ओकरा क्रियान्वित करबाक लेल उत्तम-अधम सभ तरहक लोकक सहयोग लैत अछि, सहयोगक वांछित-अवांछित मूल्य चुकता करैत अछि, तेकरा कोनो "वृषोत्सर्ग सराधक दागल साँढ़" सन प्रतिगामी-कीट एहन क्षुद्र बात कहबाक पतितपना कए सकैत अछि। किन्तु मैथिल समाज एहन "अकल्पनीय", एहन "पतितपना" आ एहन "वृषोत्सर्ग सराधक दागल साँढ़" सभ सँ भरल अछि। मिथिला(?)क अनेकानेक रत्न, बंधु, सखा, विभूति आ बिड़ला लोकनि मिथिला(?)क गामे-गाम, टोले-टोल अँटल पड़ल अछि, सहसह करैत अछि आ अहि भूमि कें धाँसि-धाँसि, खोधि-खोधि धन्य-धन्य कए रहल अछि। एना नहि छै जे बाबू साहेब चौधरी नहि छथि, ओहो छथि, अँगुरी पर गिनल जाएबला संख्या मे छथि, किन्तु एक त अल्पसंख्यक छथि आ दोसर "वृषोत्सर्ग सराधक दागल साँढ़" सभक बहुमतक गोल सँ घेराएल छथि आ तें एन मौका पर हुनक सभक मूँह मे ताला लागि जाइ छनि, पेट मे मरोड़ पड़ए लागए छनि। ई अल्पसंख्यक बाबू साहेब चौधरी लोकनि गाहे-बगाहे कुपित सेहो होइ छथि। किन्तु कुपित होइ छथि त "मैथिली सखा" लग सँ "मैथिल बिड़ला" लग, "मैथिल रत्न" लग सँ "मैथिल विभूति" लग जाइ छथि, फेर वएह मूँह मे ताला, फेर वएह पेट मे मरोड़़ आ एहने व्यर्थ सन तिरपेच्छन मे बाबू साहेब चौधरी लोकनिक जीवनक शक्ति-सामर्थ्य बेजाय भए जाइत अछि। तिरपित- लोकनिक कबंध-सम्प्रदाय सदी-सदी सँ अहि पावन धरा पर उपस्थित अछि, निरन्तर अपन संख्या-बल बढ़ैने जाए रहल अछि, एकर अक्षौहिणी सेना खोराकी देखितहि ओहि पर धाबा बोलि दैत अछि, देखितहि-देखितहि सभकिछु चाटि-हबकि जाइत अछि, तिरपित नहि होइत अछि, अतृप्तक अतृप्तहि रहि जाइत अछि। मदन भाइ हँसैत कहए छथि "मैथिली भाषा मे जँ तिरपित बाबू कें चरित्र-नायक बनाए कए सिनेमा बनाओल जाइ त केहन फिल्म बनतै? ओ फिल्म अबस्से बाक्स आफिस मे हिट फिल्म हेतैक।" किन्तु मदन भाइ आ केदार भाइ दुनू कें सहरजमीनी मैथिल-यथार्थ बुझल छनि, नहि बुझल रहनि त "ममता गाबए गीत"क निर्मम, श्रमसाध्य निर्माणानुभव दुनू गोटे कें यथार्थ बुझाए देने छनि। मूल जिज्ञासा त ई अछि जे तिरपित कें चरित्र-नायक बनाए कए जे फिल्म बनत, तेकरा बनएबाक लेल त फेर कोनो मदन भाइ अवतरित भए जएता, ई मही बेसी दिन तक वीर विहीन नहि रहए छै, ओकरा वितरित-प्रदर्शित करबाक लेल रवीन्द्र सन कोनो भजारी सेहो चलि अएता, किन्तु ओहि फिल्म कें टिकट कटाए कए देखबा लेल दर्शक कतय सँ आएत? गिनतीक किछु बाबू साहेब चौधरी टिकट कटाए कए सिनेमा हाल मे प्रवेश कए जएता, किन्तु तिरपित-समुदाय कें त फ्रीक टिकट चाही। आ जँ फ्रीए मे सिनेमा देखाएल गेल त बाक्स आफिस पर ओकर हिट हएबाक कोनो रत्तीअहु-भरि संभावना कतय छै? जहि तिरपित बाबूक एन मौका पर अपन जेबी मे हाथ घुसिआबितहि हुनक हाथ फाटल जेबी सँ निकलि ठेहुन पर पहुँचि जाइ छनि, तेकर जेबी भरब मदन भाइ सन अवतारहु सँ संभव नहि अछि। जे गैर-मैथिल मैथिली मे अएता, हुनका चालीस हजारक अनुमानित खर्चक बादहु फेर-फेर चालीस हजारक चोट खाइए पड़़तनि, माइक मैन कें बीस टका, ठेला भाड़ाक दस टका, सिनेमा हाल मैनेजर कें सत्तरि टका, प्रोजेक्टर चालक कें पँचटकही आदिक दोहरी भुगतानक अनन्त सिलसिलाक अनन्त बोझा अपन माथ पर लेबहिए पड़तनि। तिरपित घुरि कए नहि अएता, से संतोष करैए पड़तनि आ अहि सभ लुज्झातिरीक यथार्थ कें बुझितहुँ अपन मुंह सँ हँसीक फुलझड़ी बहराबैए पड़तनि, ठठाए कए हँसैए पड़तनि तमाशा-ए-अहल-ए-करम देखबाक लेल। एतबे धरि किऐ? अपन पूँजी लगाए कए स्टाम्प-पेपर पर रुपैयाक छह आनाक हिस्सेदार उदयभानु सिंह कें बनबैए पड़तनि। जहि रवीन्द्रनाथ ठाकुर कें नोनी लागल देबाल, चालीक भुरभुरी सँ भरल फर्शबला बलभद्रपुर मोहल्ला स्थित माटि सँ लेबल घरक अखरा चौकी पर सँ उठाए कए मायानगरीक चकाचौंध आ सुख-समृद्धिक दुनियाँ देखबए लए जएता, अपन फनकारी देखएबाक अवसर देता, वएह रवीन्द्रनाथ कें लिखित अधिकार-पत्रक माध्यम सँ अपन सभटा कएल-घएल, अपन कीर्ति सौंपि दिअए पड़तनि। मैथिल-कथा हरि-कथा अछि, अनन्त अछि हरि अनन्त, हरि-कथा अनन्ता! स्वतंत्रता प्राप्तिक बाद जे दौर अएलए, तहि मे विभिन्न दलीय नेतृत्व पर मैथिल लोकनिक वर्चस्व जकाँ रहनि। सत्ताधारी कांग्रेसहि टा नहि, समाजवादी आ वामपंथी दल सभ पर सेहो मैथिलहि लोकनि कब्जा कएलनि। आमजन मे सजगता नहि रहए, मैदान एकदम साफ रहए। अहि शून्य-काल मे मैथिल लोकनि अगुअएला आ खाली पड़ल स्थान सभ पर आसीन भए गेला। राजनीतिक दल जखनि हाथ मे हुअए त व्यक्ति अपना कें परम शक्तिशाली बुझए लागैत अछि आ ओहि शक्तिक प्रदर्शन लेल अतीव व्याकुलता सँ भरि जाइत अछि। ई व्याकुलता विशेष कए मैथिल वामपंथी लोकनि कें गैरकानूनी तरीका सँ आक्रामक आ अतिक्रमणकारी हएबाक ड़गर पर लए गेलनि। हिनकर सभक निशाना पर धार्मिक स्थल सभ सेहो आएल, किन्तु चयनक दोहरा मानदंड़क संग। जहि मन्दिर आदिक बागडोर पुरहित लोकनिक हाथ मे रहए, तेकरा बकसि देल गेल। मूल निशाना बनल महंथाना सभ, जेकर अधिकांश पर भूमिहार ब्राह्मण लोकनि काबिज रहथि। से अहि छद्म जनेउधारी-वामपंथी लोकनिक वक्र-दृष्टि महंथ मदनमोहन दासक महंथाना पर सेहो पड़़ल रहनि आ ई महंथाना हुनकर सभक कर्मकांडीय-क्रांतिकारिताक क्रीड़़ाभूमि बनल रहनि। बत्तीस सय बीघाक जिरात स्वतंत्रता प्राप्तिक काल तक आबैत-आबैत एक हजार बीघा तक सिमटि चुकल छल। इलाहाबादक क्वींस कालेजक आधुनिक वातावरण मे रहि शिक्षा-दीक्षा ग्रहण करनिहार मदनमोहन दास स्वाभाविक रूप सँ आधुनिकता सँ अनुप्राणित रहथि। अंग्रेजी, हिन्दी आ बांग्ला भाषा जाननिहार, पढ़निहार मदनमोहन जी मे युवकोचित उत्साह रहनि, स्वातंत्र्योत्तर भारतक सामाजिक संरचनाक नित बदलैत रूप-स्वरूप पर हुनक दृष्टि रहनि आ तहि संग तालमेल बैसएबाक हुनर आ बुद्धि सेहो रहनि। ई हुनर बहुत मोल माँगए छै। महंथानाक धार्मिक परम्परा सँ आएल मूल मिर्जापुर आ आन-आन जिलाक विभिन्न मौजा मे संचालित मंदिर, ओकर रख-रखाव, नियमित पूजा-अनुष्ठान आ दरिद्र-भोजन आदिक क्रियाकलाप यथावत चलैत रहए, जेकर असीमित खर्च-वर्चक भार अनुमान कएल जाए सकैत अछि। एकरा संग आधुनिक समाज-बोध आ ओकर दायित्व अहि व्यय-भार कें निरन्तर बढ़ैने चलि जाइत रहए। आमदनी वएह, किन्तु खर्चक नव-नव बाट, नव-नव द्वार खुलैत। अहि सभक उपर रेलिजस बोर्डक विभिन्न तरहक प्रतिबंध आ तहि पर उपरोक्त वर्णित वामपंथी लोकनि द्वारा महंथानाक जमीन पर ठाम-ठाम लाल झंडा गाड़ि ओकरा हड़पबाक कृत्य। स्थितिक विकरालताक अनुमान लगाएल जाए सकैत अछि। तखनिओ मैथिलीक हित मे एकटा फिल्म बनएबाक विचार आ तेकरा कार्य-रूप दए मे तन-मन-धन सँ निछावर हएबाक काज वएह व्यक्ति कए सकैत अछि, जेकरा मे आधुनिकता-बोधक संग-संग अटूट साहस, अचल निष्ठा, असीमित धैर्य आ अपरिमित पुरुषार्थ हुअए। अहि सभ अतिमानवीय (सूपर ह्युमैनेटिक) गुण सभ सँ निर्मित छला महंथ मदनमोहन दास। सभटा विरुद्धक सामंजस्य कए ओ फिल्म-निर्माणक अपन संकल्प कें अपन व्यक्तिगत प्रयास सँ सफल त कए लए छथि, किन्तु जतय सामूहिक सहयोगक मामला आबैत अछि, ततय ओकर अभाव मे ओ असफलताक साक्षी भए जाइ छथि। ई दुख, ई पीड़ा असह्य अछि, किन्तु ओ तेकरहु सहए छथि। सीताहरण सँ व्यथित राम कलपि सकए छथि। पशु-पक्षी सँ अपन व्यथा-कथा कहि सकए छथि। अनुज लक्ष्मण सँ अपन पीड़़ाक बखान कए सकए छथि। किन्तु मदन भाइ अपन व्यथा, अपन पीड़़ा केकरा लग व्यक्त करता? बाली राम सँ पुछि सकैत अछि अवगुण कवन नाथ मोही मारा? मदन भाइ ई प्रश्न केकरा सँ करता? हुनक लक्ष्मण हुनका बीचहि मे छोड़ि सैनफ्रांसिस्को उड़ि गेला। जेकरा सँ प्रश्न पुछबाक छनि, ओ एकटा व्यक्ति नहि अछि, विराट समुदाय अछि। तें "ममता गाबए गीत"क निर्माण-क्रमक सभटा अप्रिय अनुभव, निर्माणक बाद "ममता गाबए गीत"क हरणक सभटा व्यथा कें मदनमोहन दासक पुरुषोत्तम समुद्र-मंथन सँ प्राप्त हलाहल मानि देवाधिदेव महादेव जकाँ घोंटि कए अपन कंठ मे रोकि लए छथि। रावणक कैद मे रहैत सीता कें छोड़़एबाक लेल राम सभ संभव प्रयत्न करए छथि। किऐ? किऐ त हुनका अपन समर्थनक भरोस छनि। हुनका लग बानर-सेना छनि जे हुनका लेल तन-मन-धन सँ समर्पित अछि। किन्तु मदन भाइ! ओ अपन सीताक रावणक खतियान मे चलि जाएब कें अपन नियति मानि लए छथि। किऐ? किऐ त हुनका मैथिल समुदायक यथार्थ बुझाए गेल छनि। ओ बुझि गेल छथि जे हुनक पीठ पर कोनो सैन्य-दल नहि, परजीवी कीटाणु-विषाणु सभक हेंज अछि आ ओकरा भरोसे ओ जेतबे लड़बाक प्रयास करता, तेतबे क्षीण आ अबल होइत जएता। हुनक व्यक्तित्वक उच्चताक ई पराकाष्ठा छै जे पत्रकारक खोध-बीन पर जखनि ओ केदार जी कें कहए छथि, " केदार भाइ, पछिला तीन-चारि बर्ख सँ हम-अहाँ नित्य एक ठाम बैसैत छी, गप्प-सप्प करैत छी। तथापि हम अहाँक लग "ममता गाबए गीत" फिल्मक चर्चा नहि केलहुँ। अहाँक चोखायल घावक पपड़ी मे टकुआ भोंकैक इच्छा हमरा नहि भेल।------" धन्य! धन्य! एतेक भेलहु पर मदन भाइ कें अपन चिन्ता नहि, केदार भाइक चोखायल घावक पपड़ी उखड़ि जएबाक चिन्ता छनि। पोथी समाप्त होइत-होइत संवेदनशील पाठकक माथ पर ओहि व्यक्तित्वक समस्त आंतरिक पीड़ा सवार भए जाइत अछि, और घनीभूत भए जाइत अछि, जेकरा केन्द्र मे राखि ई पोथी लिखल गेल अछि। अहि कृतिक सभटा पात्र अपन-अपन भूमिकाक निर्वहन करैत नेपथ्य मे विलीन भए जाइ छथि आ "द एण्ड" रूप मे महंथ मदनमोहन दास जीक अतिमानव छवि स्थिर आ स्थायी रूप मे संरक्षित रहि जाइत अछि। कहबाक लेल ई "द एण्ड" हुअए, किन्तु असल मे ई शुरुआत अछि, "द बिगनिंग" अछि। आशावादी आ पुरुषार्थी लोकनि अहि बात सँ सहमत हएता। दुनियाँ मे सभ काज श्रेयहि लेबाक लेल नहि कएल जाइ छै। गंगा-स्नान कए, "हर-हर-गंगे"क नारा दए अपन-अपन पाप धोनिहार कतेक लोक भगीरथ आ हुनक पुनीत प्रयास कें मन राखैत अछि? जे निष्पाप छथि, ओ गंगा नहिओ नहएता, तखनिओ भगीरथ हुनकर स्मृति मे रहतनि। (१५ अगस्त २०२२) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। आशीष अनचिन्हार-संपर्क-8876162759 मैथिली उपन्यासक 'केदारनाथ युग' 1 मैथिल जाति अधिकांशतः द्वैधमे जीबए बला जाति अछि। एक बात, एकमत, एक डारिपर रहब एहि जाति लेल कठिन। हम अपन एकटा व्यंग्यमे लिखने छी जे मैथिल किए पंच देव उपासक छथि। मैथिल बहुदेवक उपासना करै छथि मुदा हुनका एकौ देवक आशीर्वाद सहीसँ नहि भेटि पाबै छनि। देवो सभ सहिए करै छथिन। ओहो सभ बुझै छथि जे ई मैथिल सभ सभहक घर पकड़ने अछि आ हरेक घरमे जाइते देरी दोसरक बुड़ाइ करिते अछि। तँइ देवतो सभ चलाक भऽ गेल छथि। मैथिलक एकटा द्वैधक उदाहरण ई अछि जे जखन कोनो विद्यार्थी गुलशन नंदाक उपन्यास पढ़ैत पकड़ल जाइत छै तखन ओकरा उच्चतम सजा देल जाइत छै मुदा जँ वएह विद्यार्थी गुलशन नंदाक उपन्यासपर बनल फिल्म देखैत छै तँ ओकरा कमसँ कम सजा भेटैत छै आ ओकर गार्जियनो ओहि फिल्मकेँ देखैत अछि। जानकार लोक जानै छथि जे राजेश खन्नाकेँ सुपरस्टार बनेबाकमे गुलशन नंदाजीक उपन्यास, कथा एवं आइडिया छनि। आराधना नामक फिल्ममे राजेश खन्नाक डबल रोल गुलशन नंदाक आइडियासँ संभव भेलै। गुलशनजीक उपन्यास आ कहानीपर बनल किछु हिट फिल्म लिस्ट एना अछि "काजल" (1965), सावन की घटा" (1966), "पत्थर के सनम"(1967), "नील कमल" (1968), "खिलोना" (1970), "कटी पतंग" (1970), "शर्मीली" (1970), "नया ज़माना" (1971), "दाग़" (1973), "झील के उस पार" (1973), "जुगनू" (1973), "जोशीला" (1973), "अजनबी" (1974), "भंवर" (1976), "महबूबा" (1976) आदि आदि जे कि विभिन्न कलाकारक अभिनयसँ सजल अछि (सोर्स-विकीपीडिया एवं जानकीपुल)। हिंदी फिल्ममे आनो भाषक रचनापर फिल्म बनल छै जेना विमल मित्रक उपन्यासपर 'साहब बीबी और गुलाम' जाहिमे गुरूदत्त आ मीना कुमारी मुख्य भूमिका छलनि।, रवीन्द्रनाथ टैगोरक काबुली वाला जाहिमे बलराज साहनी छलाह। केशव प्रसाद मिश्रजीक उपन्यास 'कोहबर की शर्त'पर 'नदिया के पार' बनलै आ एही नदिया के पार केर रीमेक अछि 'हम आपके हैं कौन'। एकर अतिरिक्त बहुत रास रचनापर फिल्म बनल अछि। मुदा हरेक रचना फिल्म बनेबाक लेल उपयुक्त नै होइत छै। प्रेमचंद जीक रचनापर सेहो फिल्म बनल छै मुदा ओ लोकप्रिय नै भऽ सकलै। लोकप्रिय किए ने भऽ सकलै तकर अनेको कारण भऽ सकैए मुदा एकटा कारण प्रमुख ई अछि जे हिंदीमे कोनो लोकप्रिय रचनाकेँ साहित्य मानले नै जाइत छै। हिंदीमे कननी-खिजनी बला रचनाक दर्जा प्राप्त छै। ओहि ठाम रचनाक मतलबे बूझल जाइत छै जे लेखक केहनो हो मुदा जँ ओकर रचनामे घाम ओ लाल झंडा लिखल छै तँ ओ लेखक भेल। एकर प्रभाव आन प्रांतीय भाषापर सेहो पड़ल जाहिमे मैथिली प्रमुख अछि। हिंदीक कमलेश्वर फिल्म नगरीमे बसल रहलथि आ 'कितने पाकिस्तान' लेल साहित्य अकादेमी पुरस्कार भेटलनि। मनोहर श्यामजोशी जी हिंदी सीरीयलमे मानक स्थापित केलाह आ संगहि साहित्यकार सेहो रहथि। उर्दूक क्रांतिकारी कथाकार सआदत हसन मंटो फिल्म कथा लिखबाक काजसँ जुड़ल छलाह। उर्दू समेत आन सभ भाषामे लोकप्रियता ओ गंभीरता केर झगड़ा नै। ई बहस हिंदीमे छै आ ताही ठामसँ मैथिलीक साहित्यकार लऽ लेलाह अपन अयोग्यता नुकेबा लेल। 2 मैथिली लग बहुत एहन 'लोकप्रिय मुदा गंभीर' रचना छै जाहिपर लोकप्रिय फिल्म बनि सकैए। एहिमे कथा, उपन्यास एवं आन विधा सभ अछि। किछु उदाहरण एना अछि- योगानंद झा (सीनीयर) केर कथा 'आम खयबाक मूँह', हरिमोहन झाजीक सभ रचना (प्रसंगवश कहैत चली जे 2010 मे रिलीज भेल अजय देवगन ओ परेश रावल केर फिल्म 'अतिथि तुम कब जाओगे' केर फर्स्ट हाफ हरिमोहन जीक 'विकट पाहुन' केर बहुत लगीच छै। जँ मैथिली लेखक सभ साकांक्ष रहितथि तँ कोर्ट जा कऽ हरिमोहन जीकेँ क्रेडिट दिया सकैत छल मुदा एहिठाम तँ सभकेँ अपन क्रेडित लेल चिंता छै)। ब्रजकिशोर वर्मा 'मणिपद्म'जीक सभ उपन्यास जे कि लोकगाथापर आधारित अछि, मनमोहन झा (सीनियर) केर सभ रचना, प्रभास कुमार चौधरीजीक सभ कथा-उपन्यास, गजेन्द्र ठाकुरजीक सभ कथा-उपन्यास आ संगे राजदेव मंडलजीक सभ उपन्यास फिल्म लेल उपयुक्त छनि। "रंजना" ई उपन्यास छनि लेखनाथ मिश्रजीक जे कि लगभग 1970 मे प्रकाशित भेल रहै। ई उपन्यास फिल्म ओ सीरियल दूनू लेल उपयुक्त अछि। एही क्रममे राजकमल चौधरीजीक-ललका पाग (एहि कथापर बनलो छै), किरणजीक-मधुरमनि, शिवशंकर श्रीनिवास जी कथा-सिनुरहार, प्रदीप बिहारीजीक कथा-सरोकार, श्याम दरिहरेजीक कथा-बिअहुती नूआ, अशोकजीक कथा- डेरबुक, अरविन्द ठाकुरजीक कथा-विष पान ई सभ कथा फिल्म लेल उपयुक्त छै। तेनाहिते लल्लन प्रसाद ठाकुरजी नाटक सेहो उपयुक्त छै। कोन रचना फिल्म लेल उपयुक्त छै आ कि नै छै से जनबाक लेल हम एकै रचनाकारक दू कथाक नाम दऽ रहल छी, से पढ़ि बूझि जेबै जे फिल्मक लेल कोन रचना नीक कोन नै नीक। ई दू रचना थिक राजकमल चौधरी जीक- पहिल रचना भेल 'ललका पाग' आ दोसर रचना भेल 'साँझक गाछ'। उपरमे हम जतेक नाम देलहुँ ताहिमे एकटा आर नाम अछि आ से छथि-केदारनाथ चौधरी। 3 मैथिलीमे केदारनाथ चौधरीजीक आगमन फिल्मक माध्यमे भेल, फिल्मे लेल भेल। आ तँइ हिनकर रचनामे ओ सभ तत्व सायास-अनायास चलि अबैत अछि जे कि फिल्म लेल अनिवार्य छै। जेना कि हम पहिने लिखलहुँ जे लोकप्रियता एवं गंभीरता एकै बातकेँ कहबाक दू तरीका अछि। तँइ जे आलोचक लोकप्रिय पोथीकेँ अगंभीर मानि लै छथि से अनिवार्य रूपें केदारजीक रचना पढ़थि। चमेलीरानीमे जतेक राजनीतिक यथार्थ निकलि कऽ आएल छै तकर चौथाइयो यथार्थ कोनो कथित 'गंभीर' रचनाकारक रचनामे नै अछि। गूढ़ दर्शनक सरल रूप पहिल बेर मैथिलीमे आएल सेहो केदारजीक रचना 'करार'मे। वास्तविकता ई अछि जे मैथिलीमे अधिकांश लेखक अपनाकेँ सुपीरियर मानि लैत अछि। ओकरा अपनामे कोनो कमी नै देखाइत छै। आ तँइ ओकरा लग जखन कोनो एहन रचना अबै छै जाहिमे मात्र अपनापर, अपन असफलतापर हँसल गेल हो, ओकरा सार्वजनिक कएल गेल हो तँ ओहन रचनासँ ओ सभ दूरी बना लैत छै। दूरी बनेबाक कारण ई जे ओहि रचनाकेँ पढ़ि ई तँ बुझा जाइत छै एहन कमी हमरोमे अछि मुदा से स्वीकार करबाक ओकरामे क्षमते नै छै। दोसर बूझि जेतै तँ फेर साधारण जनता ओ 'कवि'मे अंतर की रहतै। आ इएह कारण छै जे अपनापर हँसि, अपन असफलता केर कथा जखन केदारनाथजी 'अबारा नहितन'मे लिखला तँ एक बेर फेर कथित प्रगतिशील सभ ओकरा लोकप्रिय कहि टारि देलक। केदारजीक रचनाक बहन्ने सभ कथित प्रगतिशील आलोचककेँ ई विचार करबाक चाही जे कथित गंभीर ओ प्रगतिशील रचना लेल पाठक किए ने छै? एहन आलोचक सभ ई कहि सकै छथि जे पाठक लेल अवांछित रचना नै एबाक चाही। ईहो बात ठीक मुदा आलोचकक काजे छै अवांछित तत्वक ताक-हेर करब। आ से ओ आगू बढ़ि केदारजीक रचनाकेँ खराप साबित करथि। दिक्कत की छै? हमरा बहुत बेर लगैए जे मात्र चौंकाउ बात कहि देब 'कथित प्रगीतशील रचना' केर मानक अछि। जखन कि सरल बात कहैत रचना (से ओ बात कतबो नीक किए ने हो)केँ खराप मानि लेल जाइत छै। मैथिलीमे तँ ई हाल छै जे 'बिकाएब साहित्य केर पैमाना नै छै' सन नारा देबए बला कचरा लेखक सभ हमर पोथी पढ़ू कहि पाठककेँ जबरदस्ती किनबाक लेल कहैत छै ठीक ताही मैथिलीमे केदारोनाथ चौधरी सन लेखक छथि जिनकर पोथी पाठक ताकि कऽ कीनि लैत अछि। एहनो नै छै जे केदारनाथजी रचना सभ अकाससँ खसल छै आ ओहिमे कोनो कमजोरी नै हेतै फेर अहीठाम प्रश्न उठैत छै जे कोन भाषाक कोन लेखक केर रचना बेदाग रहैत छै (छान्दिक रचना छोड़ि, कारण छान्दिक रचनामे पहिल अनिवार्य तत्व छन्द छै)। पाठक अपन-अपन अनुभव केर अधारपर केकरो नीक वा खराप कहैत छै। आ तँइ जतेक महान यात्रीजीक रचना वा ललितजीक उपन्यास, वा धुमकेतु सहित मायानंद मिश्रजीक उपन्यास अछि ततबे महान केदारनाथ चौधरीजीक उपन्यास सेहो अछि। केदारनाथजीक उपन्यास अपन कालखंडकेँ गंभीरता ओ बिक्री दूनू मानकपर अतिक्रमण कऽ देने अछि। आ अही कारणसँ............ हम मैथिली उपन्यासमे 2004 केर बाद बला समयकेँ "केदारनाथ युग" कहबाक अभिलाषी छी। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। गजेन्द्र ठाकुर केदार नाथ चौधरी- हुनकर आ हुनकर उपन्यासक पुनर्पाठ मैट्रिकक परीक्षामे फेल भेलाक बाद सुगम स्थल एकमी पुलसँ बागमतीक प्रचण्ड वेगमे कूदि प्राणत्याग करबाक निर्णयमे शुद्ध देसी घीमे छानल जिलेबी-कचौड़ीक सुगन्धो व्यवधान नै दऽ सकल हँ मुदा ई निर्णय भेल जे आत्महत्यासँ पहिने एक तोड़ जिलेबी-कचौड़ी खा लेल जाय। आ भोजनालयमे जिलेबी-कचौड़ी खाउ आ एकमी पुल जाउ आ बात खतम। मुदा ओतऽ खट्टर ककाक सहोदर छोटका कका विद्यमान छथि। फेर बैकग्राउण्ड जे देश स्वतंत्रो आ गणतंत्रो भऽ गेल रहै, ओइ समयक घटना छी। फेर जे दू टा मे सँ एक गोटे बियाहलो छला, घटानाक समय पहिने देल अछि से बालविवाह आदिबला मामिले खतम। आ फेर संगीक मामाजी एला। आब ओ तेहेन रोजगारमे भागिनकेँ लगेथिन्ह जे ओ टाकाक मोटरी बापकेँ पठेथिन। माने आतम्हत्याक तँ मामिले खतम। ओ बिदा भेला हाबड़ा आ आत्मकथात्मक शैलीक उपन्यासक "हम" बिदा भेला गाम। पहिल अध्याय समाप्त। दोसर अध्यायमे एम.ए. अर्थशास्त्र पास भऽ गेला अपन "हम"। आ फेर प्रवेश भेल इंगलैण्डसँ पी.एच.डी. कयल प्रबुद्धक, दोसर अध्याय समाप्त। एते जल्दी समाप्त नै होइ छै मुदा जइ हिसाबे पहिल अध्याय चललै तहिना दोसर सेहो चलल हेतै तकर अंदाजा भऽ गेल हएत। "मिथिला" पत्रिकाक चर्च आ सेहो लिखल जे मिथिले जकाँ काहि कटैत छल ओकर कागत आ आखर। तेसर अध्यायमे कलकत्तामे जीविकोपार्जन शुरू। चारिम अध्यायमे जानकी नन्दन सिंह गिरफ्तार आ इंगलैण्डसँ पी.एच.डी. कयल, सम्भवतः नै सत्ये- लक्ष्मण झा प्रसिद्ध लखन झा, केँ भुइयाँक लोकक ठोकल बात कहब। आ अपन "हम" प्रस्थान केलथि महंथ मदन दास जीक डेरा। माने असली खेला शुरू। अध्याय पाँचमे मैथिली लेल काज आ ओइ लेल फिल्म-निर्माण आ ओइ लेल पूँजी संग नौकरीसँ इस्तीफा देमऽ पड़तन्हि अपन "हम"केँ। १९३६मे जन्म आ १९६१ क ई गप्प, गदह-पचीसी बला समै। नोकरीसँ इस्तीफा, अध्याय छ समाप्त। अध्याय ७ मे बम्बइ आगमन। अध्याय ८ फिल्मी स्टाइलक परमानन्द चौधरी। आब फिल्मक पौराणिक कथानक हुअय आकि सामाजिक तइपर घमर्थन। अध्याय ९ फिल्मक पटकथा तैयार। गीतकार भेला रवीन्द्र। गीत गेता के? लता आ रफी केर फीस तीन हजार टाका प्रति गाना। सुमन कल्याणपुर दू गीतक फीस लेलनि चौदह सय टाका आ हुनकर पति रसीद देलखिन्ह तीन सय टाकाक। गीता दत्त दिन-रति नशामे बुत्त, पति गुरुदत्तसँ समस्या रहन्हि, बादमे गुरुदत्त आत्महत्या कऽ लेलनि, पाँच दिनमे गाना टेक केलनि गेता दत्त। म्यूजिकक कुल खर्च १४ हजार टाका। फणीश्वर नाथ रेणु मैथिलीमे फिल्म बनबाक सूचनासँ भाव विह्वल भऽ गेला। अध्याय दस राजनगरमे सूटिङ्ग। अध्याय एगारह २ मास तेरह दिनुका बाद सूटिंग समाप्त, अल्मुनियमक २० पेटीमे फिल्मक निगेटिव लऽ कऽ "हम" आ मदन भाइक बम्बइ प्रस्थान। अध्याय बारह फिल्म मात्र अदहासँ कनिये बेशी बनल अछि, तइ सूचनासँ हड़कम्प। अध्याय तेरह पाँच टा एडिट कयल रीलक सङ्ग कलकत्ता आगमन। गणेश टॉकीजमे एकर प्रदर्शन भेल आ "भरि नगरी मे सोर, बौआ मामी तोहर गोर" सभकेँ भाव-विभोर कऽ देलक। अध्याय चौदह अमेरिकन विश्वविद्यालयमे अपन "हम" एडमिशन लेल चयनित होइ छथि। अध्याय १५ मे १९७७ मे भारत घुरै छथि। रवीन्द्रनाथ ठाकुर केदारनाथ चौधरीसँ राइट लऽ कऽ फिल्म पूरा करबेलन्हि, ई प्रदर्शितो भेल, ओ नीक नफा कमेलनि। जे गप ऐ पोथीमे नै लिखल अछि से ई जे ई फिल्म दूरदर्शनपर सेहो एकाधिक बेर देखाओल गेल। तँ आब बुझिये गेल होयब जे ई कोनो उपन्यास नै, ऐमे कोनो स्थान-पात्रक काल्पनिक हेबाक कोनो कैप्शन नै लागल अछि। मुदा हरिमोहन झा केर "ग्रेजुएट पुतोहु" सन एकर अन्त मार्मिक कोना भऽ गेल। आ उपन्यास छी की? सभक जिनगी उपन्यासे तँ छी, सभ आत्मकथा लिखै जाउ आ उपन्यास बनैत जायत। तँ ई आत्मकथात्मक शैलीमे लिखल पोथी छी, एकर "हम" छथि केदारनाथ चौधरी। मैथिली आ मिथिलाक नामपर होइबला कार्यक्रमक रस्तो सँ लोक किए भागि जाइ छथि, ई तकर कथा थीक। आ यएह कारण छी जे केदारनाथ चौधरी जीक समस्त साहित्यकेँ हम प्रतियोगी परीक्षार्थी सभ लेल अनिवार्य रखने छी। रवीन्द्र नाथ टैगोरक बाल नाटकक साहित्य अकादेमी जे मैथिली अनुवाद केने अछि तकर मंचन तँ बच्चाक बापो नै कऽ सकत। जे जतबी भऽ रहल छै से ई नाट्य-साहित्यिक-मिथिला-अभियानी संस्थे सभ कऽ रहल छै- तेँ सभ सही, ई तर्क हमरा स्वीकार्य नै। ई उपन्यास आत्मकथात्मक आ संस्मरणात्मक केर श्रेणीमे अबैत अछि। जँ अहाँ अपन जिनगीकेँ "सूट" कऽ सकी तँ अहाँकेँ लागत जे लेन्ससँ देखल जिनगी बेशी मारुख होइ छै। रंगमंचसँ फिल्ममे आयल कलाकारकेँ आँखिमे नोर आनैले ग्लिसरीन नै लगबऽ पड़ै छै। अहाँकेँ लागत जे खाली रोडपर बर्खामे हम जे ड्राइव कऽ रहल छी, से लेन्ससँ सूट केलापर "सिनेमाक हीरो" सन हम भऽ जायत। मुदा हम धैनसन ओकरा कोनो मोजर नै दै छी। हमरा विचारे प्रतियोगी परीक्षार्थीये नै वरन् साहित्यकारो सभकेँ ई पोथी सभ पढ़बाक चाही। हम तँ सभकेँ सलाह दै छियन्हि जे सभकेँ फोटोग्राफीक कोनो "समर कोर्स" अवश्ये करबाक चाही। एकटा आर सलाह हम लोककेँ दैत छियन्हि जे आइ-काल्हि मोबाइलमे कैमरा आबि गेल छै, अहाँ प्रतिदिन ५-१० मिनटक वीडियो रेकार्डिंग करू, दुनियाँकेँ चौखुट, आयताकार, त्रिभुजीय आदि फ्रेममे देखू आ अनुभव करू जे कोनो भरिगरो विषय लोक केना नीकसँ बुझैत अछि। भौतिकी विज्ञानक प्रोफेसर फेनमेन (फेनमेन्स लेक्चर्स) ऐ लेल प्रसिद्ध अछि, फिजिक्सकें रुचिगर ढ़ंग सँ पढ़ेबा लेल। आ एतऽ तँ तेहेन भूप सभ छथि जे "फिक्शनो" "फिजिक्स" सन लिखैत छथि। कला फिल्म कियो किए नै देखैत अछि, कारण लेखक-निर्देशककेँ होइ छै जे कला फिल्मक सब्जेक्ट मात्र ओकरा पुरस्कार दिया देतै। वास्तविकता ई छै जे कला फिल्म सेहो हिट होइ छै, "द कश्मीर फाइल्स" फिल्म डोक्यूमेण्ट्री-फिल्म भेलाक बादो हिट भेलै, कारण डाइरेक्टर आ स्क्रिप्ट राइटर बेइमान नै छलै, सिण्डलर्स लिस्टमे "पोलिस" सभ कहै छै "गो ज्यू, गो" तकर माने ओ एकतरफा चित्रण भेलै? आ आब हम एकटा नीक लोक जे पोलिस (पोलेण्डक) छथि तकरा आनी आ स्क्रिप्टमे घुसाबी। ने १८० मिनटक (विदेशमे १०० मिनटक) फिल्ममे सभ बौस्तु देल जा सकैए ने सय-सवा पन्नाक संस्मरणमे। कियो कहि सकै छथि जे केदारनाथ चौधरी फिल्म छोड़ि कऽ चलि गेला, रवीन्द्र नाथ ठाकुर ओकरा पूरा केलन्हि। मुदा ई पोथीयो तँ सएह कहि रहल अछि। सरल भाषा लेल बेशी प्रतिभा चाही। ऐ छोटसन पोथीमे छथि मिथिला अभियानी, जिनका सभ आदर करै छन्हि मुदा सएह टा। मैथिलक सभ संस्थामे जे हाल छै सेहो भेटत तेँ की लोक जुआ छोड़ि पड़ा जाय। नै, मुदा अहाँ अपनाकेँ फ्रेममे देखू, कोन काज लेल अहाँ बनल छी। मुदा केदारनाथ चौधरीक कलममे जे धार छन्हि से मात्र प्रतिभाक कारण नै छन्हि। ओ जे अनुभव बम्बइमे लेलन्हि, जे फ्रेममे "सूट" आ "एडिट" करबाक कला सिखलन्हि-देखलन्हि, से हुनकर सभ रचनामे देखाइत अछि। लोक "सूट" करैत रहि जाइ छथि आ "एडिट" करबा कल कम-बेशी भऽ जाइ छन्हि। रचनामे धार अछि, धरगर बला धार आ बहैबला धार, दुनू। आ तेँ संस्मरण उपन्यास बनि गेल अछि। अनुलग्नक: विदेह सदेह ३२ मे (ऐ लिंकपर उपलब्ध http://videha.co.in/new_page_89.htm) संकलित श्री शैलेन्द्र मोहन झा जी केर रचना, देखू केना नव-पीढ़ीमे "ममता गाबय गीत" लेजेण्ड बनि गीतमे पैसि गेल अछि। शैलेन्द्र मोहन झा
सौभाग्यसँ हम ओहि गोनू झाक गाम, भरवारासँ छी, जिनका सम्पूर्ण भारत, हास्यशिरोमणिक नामसँ जनैत अछि। वर्तमानमे हम टाटा मोटर्स फाइनेन्स लिमिटेड, सम्बलपुरमे प्रबन्धकक रूपमे कार्यरत छी।
सपना
सुतल रही दुपहरियामे तँ देखलौ हम एक सपना भयल विवाह हमर यै भौजी कनिया चान्द के जेना हम्मर, टुटि गेल सपना ये भौजी, भरल दुपहरियामे...
जहन भेँट भेल हुनकर हम्मर, भेलहुँ हम प्रसन्न देखि कऽ हुनकर रूप हे भौजी, भय गेलौँ हम दङ नाम पुछलियनि हुनकर हम तँ कहलनि ओऽ जे रजनी स्वप्न सुन्दरी ओऽ बनि गेलि हम्मर हृदयक रानी
हमरा पुछली कहु हे साजन केहन हम लगै छी? हम कहलियनि सुनु हे सजनी आहाँ चान्द लगै छी चन्दामे तँ दागो छञि, आहाँ बेदाग लगै छी आँखि अहाँक ऐश्वर्या जेहन नाक अछि जुही चावला केश अहाँक अछि नीलम जेहन गाल वैजन्तिमाला
एहि के बाद पुछलियनि हमहू केहन हम लगै छी? कहय लगलि खराब छी, छी अहूँ ठीक-ठाक लेकिन एहि यौवनमे साजन भेलहुँ कोन टाक* कनिक लगै छी सन्नी जेना, किछु-किछु राहुल राय किछु-किछु गुण गोविन्दा बाला, यैह अछि हम्मर राय
तहन कहलियनि चलु हे सजनि घुरए लेल दरभंगा आहाँ लेल हम सारी किनब, अपनो लेल हम अंगा दू टा टिकट अछि उमा टाकीजक, अगले-बगले सीट दुनू गोटे बैस कऽ देखब "ममता गाबय गीत"** हुनक हाथ लेल अपन हाथमे उठि विदाय हम भेलहुँ हुनक हाथ लेल अपन हाथमे उठि विदाय हम भेलहुँ तखने जगा देलक पिंटूआ, तखने जगा देलक पिंटुआ***, नीन्दसँ हम उठि गेलहुँ हम्मर टूटि गेल सपना ये भौजी, भरल दुपहरियामे......
*= हमर केश किछु बेशी कम अछि **= प्रसिद्ध मैथिली सिनेमा ***= हमर छोट भाई अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। अर्चना चौधरी हमर पिताः श्री केदारनाथ चौधरी हम अत्यंत सौभाग्यशालिनी छी जे हमरा सर्वश्रेष्ठ पिता भेटलाह। ओ हमर पिता मात्र नहि अपितु हमर शिक्षक, हमर मार्गदर्शक एवं प्रिय मित्र छथि। नेनपनक अधिकांश समय, हम हुनकहि संग बितौलहुँ। थोड़ेक शब्दमे हुनकर व्यक्तित्वक संबंधमे लिखनाइ कठिन अछि। हमर पिता जीक व्यक्तित्व अत्यंत प्रभावशाली छनि। अपन साफ मन एवं सरल स्वाभावक कारणे ओ सहजहि सभसँ मित्रवत् भऽ जाइत छथि। हुनकर संग रहि हम जीवनक विभिन्न आयामकेँ नीक जकाँ बुझलहुँ। कोनो कठिन समयकेँ शांत रहि, संयमसँ पार पाबी से हुनकहिसँ सिखलहुँ। हमर शिक्षामे हुनकर बहुत पैघ योगदान छनि। नेना सभकेँ शिक्षा संग उचित संस्कार देब हुनकर लक्ष्य छलनि। जीवनकेँ सकारात्मक रूपे देखबाक प्रेरणा हमरा हुनकहिसँ भेटल। हमर पिताजी अपन मातृभाषा मैथिलीक सेवा, प्रचार एवं प्रसारमे सेहो अपन योगदान कय रहल छथि। मैथिली लेखनक एकटा नव रूप प्रस्तुत केलनि जे मनोरंजक एवं प्रेरणादायक अछि। मैथिल समाज द्वारा हुनकर प्रयासकेँ सराहना एवं सम्मान भेटि रहल छनि से देखि हम गौरवान्वित छी। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। डॉ कैलाश कुमार मिश्र केदारनाथ चौधरी रचित मैथिली उपन्यास: करार (पोथी समीक्षा) आजुक कालखण्ड मैथिली साहित्य लेखन आ मुद्रण लेल स्वर्णिम अछि। साहित्यक विविध विधा, विशेष रूप सँ पद्य मे त’ क्रान्तिक शंखनाद भ’ रहल अछि। सर्वोत्तम बात ई जे अहि क्रान्ति केर सहयात्री केबल पुरुखे नहि मैथिलानी सेहो छथि। अगर एहि क्रान्ति सं कियोक पिछडल छथि त’ गंभीर पाठक। ओना कोनो पाठक नहिये जकाँ मैथिली पढ़ैत छथि? अधिकांश पोथी पर समीक्षा पढ़ब त’ लागत जेना पेड समीक्षा पढ़ैत होई। किछु-किछु समीक्षा मित्रता हेतु एक्सचेंज ऑफर जकाँ अथवा ‘अहाँ हमरा नीक कहू हम अहाँ कें नीक कहब’ एहनो मनोवृत्ति सँ लिखल रहैत छैक। जे साहित्यकार नहि छपा सकैत छथि, से सब सोशल साइट पर अपन साहित्य पोस्ट क’ लेत छथि। एहि तमाम प्रक्रिया मे मारल जाईत अछि निष्पक्ष पाठक जकरा उत्तम पद्य, गद्य किंवा साहित्यक आन विधा केर पोथी पढबाक लेल चाही। कोना चयन करत अहि महासमुद्र मे सँ अपन काजक पोथी? डेटा माइनिंग असम्भव जकाँ लगैत छैक। केदारनाथ चौधरी केर रचना पर किछु लिखबाक छल। लागल, कनि पढ़ी अहि साहित्यकार केँ। फेर पता चलल जे चौधरी जी केर उपन्यास करार पर कियोक नहि लिखने छथि। हम तुरत निर्णय लेल जे तखन करार पढ़ब आ ओहि पर लिखब। अहि पोथी केँ पढ़ि जे अनुभूति भेल से अति साधारण पाठक केर मादे लिख रहल छी। करार मैथिली साहित्य केर अनुपम निधि अछि। एकर भाषा, कथ्य, विश्लेषण, सोच, फिक्शन केर इतिहास, लोक व्यवहार, धर्म, दर्शन, तंत्र, आ स्थानीयता सँ जोड़बाक विलक्षण काज केदारनाथ चौधरी केने छथि। कोना मिथिलाक आम जीवन मे धर्मक आ दर्शन केर गूढ़ रहस्य व्याप्त छैक, तकर प्रमाण अतय डेगे-डेगे भेटत। ज्ञान आ दर्शन केर सब गंभीर बात एक टायरगाड़ी केर बहलमान कन्हाइ मण्डल सँ सुनब नीक लगैत छैक। अहि सँ पहिने जे पोथी पर किछु लिखी, एकर संक्षेप जानकारी द’ देब आवश्यक। उपन्यास केर प्रारम्भ दरिभंगा शहर केर बाढ़ि सँ आ एक घर मे उपस्थित दू भाई वीर बाबू आ पंकज सँ होइत छैक। दुनू बाढ़िक बढैत जल स्तर सँ परेशान वार्तालाप क’ रहल छथि आ प्राण बचेबाक युक्ति ताकि रहल छथि। ततबे मे एक व्यक्ति दहाईत हुनका सब लग अबैत छथि। आगंतुक “पचपन-साठि बयस, छः फीट लम्बा, एखनहुँ स्वस्थ आ गठल शरीर, सशक्त ताहि पर भव्य मुखमंडल, चौरगर ललाट, पैघ-पैघ आंखि, गौरवर्ण, छिड़ियायल, भीजल आ कान तक कें झंपने कारी-कारी केश। (पृष्ट 7)। आगंतुक हुनका सबकें कहैत छथिन जे विनय जे अतय रहैत छथि तिनकर छोटका काका जटाधर केर अभिन्न मित्र पंडित राज शेखर दत्त छथि। विनय हुनका पंडित काका कहि सम्बोधित करैत छथिन। पंडित राज शेखर दत्त हिनका दुनु भाई सँ निवेदन करैत छथिन जे राति भरिक आश्रय देथि। वीर बाबू आ पंकज दुनू कात सँ पंडित राज शेखर दत्तक दुनू हाथ धय हुनका वरामदा पर ल’ जाईत छथिन। अंततः पंडित राज शेखर दत्त केर सुझाव सँ बगल केर तीन महला मकान जकर मालिक अपन मकान मे ताला लगा अयोध्या गेल छलाह मे ताला तोड़ि अपन जान बचेबाक जोगार मे जाईत छथि । राज शेखर दत्त पंकज आ वीर केँ अपन झोरी सँ निकालि रोटी तरकारी खेबा लेल देत छथिन। बाढ़ि केर भय बनल रहैक। कखन की विकराल स्वरुप ल’ लेत तकर कोनो ठेकान नहि। अतएव राति भरि जागरण आवश्यक। यएह सब सोचैत दुनू भाई आगंतुक सँ निवेदन करैत कहैत छथिन: “हमर ई सोचब अछि जे अहाँ साधारण लोक नहि विशिष्ट व्यक्तित्वक स्वामी छी। तें अपने सँ आग्रह जे अहाँ अपन जीवन मे घटल कोनो सुरुचिपूर्ण घटनाक वर्णन करियौक जाहि सँ मोनो लागल रहय आ रातियो कटि जाए।” (पृष्ट 8) आब पंडित काका अपन कथा कहनाइ प्रारम्भ करैत छथि । पंडित काका अर्थात पंडित राज शेखर दत्त बहुत कम अवस्था मे नैनीताल गेल छलाह। ओतय एक विस्मयकारी घटना घटित भेलनि । नैनीताल मे फुलक गाछक मध्य एक अति सुन्दर गौरवर्ण युवती ठार छलीह आ अपलक राज शेखर दिस देखि रहल छलीह। राज शेखरक समस्त चेतना ओहि युवती मे समर्पित भ’ गेलनि। तकरा बाद बहुतो दिन धरि ओ युवती नहि प्रकट भेलीह। राजक मोनक निशा क्रमशः समाप्त भ’ गेलनि। ओ ओहि फुल कुमारी केँ नीक जकाँ बिसरि गेलाह। फेर बैशाख मास मे ऋषिकेश जयबाक क्रम मे समस्तीपुर रेलवे स्टेशन लग राज केँ एकाएक वएह मनमोहनी युवती उभरि गेल्थिन। राजक सम्पूर्ण गत्र झनझना उठलनि। ओ ठमकि क’ ठार भ’ गेलाह। एक बूढ आ भयावन मनुखक पाछा-पाछा ओ युवती जा रहल छलीह। युवती बूढा संग राज शेखर लग अबैत एकटा लिफ़ाफ़ा खसा देलथिन्ह । युवतीक भाव पढ़ैत राज शेखर दत्त ओ लिफ़ाफ़ उठा लेलनि। तत्काल युवतीक मोती सन दांत चमकि उठलनि, ठोर बिहुँसि गेलनि आ आँखिक भाव एहन भ’ गेलनि जेना ओ राज कें धन्यवाद कहि रहलि होथि। राज शेखर प्लेटफार्म पर एक ठाम बैस उत्कंठित भ’ चिट्ठी पढ़ब शुरू करैत छथि: “मदति चाही तँ पत्र लिखलहुँ अछि। आगू-आगू बुढ सन जे मनुक्ख गेल अछि ओ कापालिक थिक. कापालिक मे ई अघोर पन्थीक तामसी पूजा केनिहार तांत्रिक अछि आ एकरा अनेको एकरा अनेकों सिद्धि प्राप्त छै। स्वभाव, प्रवृत्ति आ आचरण सँ ई धूर्त, दुष्ट आ मक्कार अछि। हम पूर्णतः एकर कैदी छी। अगिला अमावस्याक बाद तंत्र मार्गक विधि विधान सँ ई हमरा पत्नी बनाओत आ भोग करत। तकर किछु महिना बाद ई हमर भैरवीक आगा बलि द’ देत। अनेकों सुन्दरि कन्याक बलि एकरा हाथे पड़ि चुकल छैक। जकरा ई डाकनी, योगिनी, प्रेतनी बना क' अश्लील आ वीभत्स तंत्रक होम-जाप क’ अपन अभीष्ट पूरा करैत अछि। अहाँ हमर मदति कोना करब से सुनू। हमर गाम चननपुरा मे हमर बाल-सखा एवं प्रेमी गोवर्धन रहैत अछि। गोवर्धन साहसी, बलबान आ हमर प्रेम मे माँतल अछि। पुजारी बाबा सँ प्राप्त मंत्र-सिक्त अष्ट धातुक सिद्धि बला मट्ठा ओकर हाथ मे छैक। विशम्भरी माताक मंत्रायल हाथी दाँत बला कबच ओकर गरदनि मे झुलै छैक। तँ गोवर्धन अहि कापालिकक तंत्र प्रहार सँ परे अछि। अहाँ गोवर्धन केँ हमर सोचनीए स्थितिक सूचना देबै । ओ हमर सहायता कर' लेल शीघ्र तैयार भ' जायत। अहाँ गोवर्धन केँ चिन्हबै कोना? गामक पूब मे सघन आम्र कुंज आ तकर सटल बड़ी टा परती मैदान भेटत। हजारो गाय आ तकर बाछा एवं बाछी केँ चरैत देखबैक। अही स्थान पर अहाँ केँ भेटताह गोवर्धन। गौर वर्ण, ऊँच कद, औंठिया कारी-कारी केश, चेहरा पर देवताक सुन्दरता, दाहिना हाथक पहुँचा लग लहसुनियाँक दाग आ सभ सँ पैघ चेन्ह जे हमर वियोग मे तरासल पाषाण मूर्ति बनल उदास कोनो गाछक डारि पर बैसल। सैह भेलाह हमर गोवर्धन। गोवर्धन केँ हमर सभटा अता-पता देबनि। कहबनि जे ओ अमावस्या सँ दू दिन पहिनहि अहि शहर मे आबथि। कापालिक दिवा-राति होम करैत अछि। तेँ ओहि मकानक ओ खोज करथि जतए होमक धुआँ आकाश मे जाइत होइक। अहि तरहें ओ मकान केँ ताकि लेताह जतय हम कैद छी। अमावास्या तिथि मे कापालिक भरि राति श्मशान मे रहैत अछि। कापालिकक अनुपस्थिति मे रात्रिक दोसर पहर बितला पर गोवर्धन एतय आबि बाँसुरी बजाबथि। बाँसुरी मे विहगक ओ धुन बजबथि जकरा सुनला सँ एहन अनुभूति होइत छै जेना कोनो चंचल नदी सागर मे डुबैत काल अन्तिम आबाज दैत होइक- हमरा बचा लिअ। हम त' डुबि रहल छी। बाँसुरीक धुन मे डुबैत नदीक चीत्कार सुनि हम बुझि जेबै जे हमर प्राणनाथ आबि चुकल छथि। हम कहुना ने कहुना गोवर्धन लग अवस्से पहुँचि जायब। अहि तरहें हमर प्राण बाँचि जायत। चननपुरा गाम जेबाग मार्गक ब्योरा अहि चिट्ठीक पृष्ठ पर अंकित अछि। शेखर! हमर अटल विश्वास अहाँ मे ओहि सीमा तक अछि जतय तर्क शून्य भ' जाइत छै। (13-14) राज शेखर आब स्वेताक प्राण रक्षा लेल चननपुरा लेल विदा भेलाह। चिट्ठी मे रस्ताक संकेत देल छलनि। पहिल पड़ाव धर्मकांटा छलनि। एक जर्जर बस जकर नाम सुपर फ़ास्ट रहैक मे बैस धर्मकांटा लेल प्रस्थान केलाह राज शेखर। संयोग सं बस धर्मकांटा पहुंचे सँ किछु काल पहिने भांगठ भ’ गेलनि। राज शेखर केर बगल मे एक युवक बैसल छलथिन । ओ कहलथिन: “बंधुवर, अहाँ धर्मकांटा तक जायब। हमहुँ ओही ठाम तक जायब। जं मुख्य सड़क छोडि एक पेरिया पकड़ि ली त’ धर्मकांटा मुस्किल सं आध कोस।” (पृष्ठ 21) राज शेखर युवक संग बिदा भेलाह । हुनका पाछा-पाछा ओही बसक दू आर पसिन्जर आबि रहल छलथिन्ह। दुनू आपस मे उच्च स्वर मे वार्तालाप करैत। एकाएक “पछिला यात्री आगाँ बला कें चिचियाति कहलक – ‘हमर बहु ड्राइभर संगे उरहरि गेल तों से बजबें। तोहर एतेक टा मजाल? ठहर रौ सार, तोरा आइ जिबैत नहि छोड़बौ। अगिला पड़ायल आ पछिला खिहारलक। पछिलाक हाथ मे चमचमाइत बड़ी टा छुरा रहैक। रस्ता एकपेरिया रहैक तइयो राज शेखर केर सहयात्री हुनक बगल मे आबि गेल छला। आगाँ पड़ायल आब'बला व्यक्ति तीन-चारि हाथ दूरहि एकपेरिया सँ ओघरा क' खेत मे लुढ़कि गेल। छुरा बला व्यक्ति छुरा तनने दौड़ते रहल। ओकरा सोझ राज शेखरक छाती मे छुरा भोकै लेल वृत्त भ' गेल। ठीक ताही काल हुनक सहयात्री राज शेखर केँ एक कात ठेल देलथिन्ह । छुराबला मनुक्ख एकपेरिया रस्ताक ऊपरे लटपटा क' मुंहे भरे खसल। मुदा ओ अपन संतुलन कँ दुरुस्त करैत ठार भ' गेल आ खेत मे उतरि क' एक दिस भागल। आश्चर्य जे दोसर व्यक्ति जे पहिने सँ खेत मे ओंघरायल छल। सेहो उठि ओकरे पाछाँ दौड़' लागल। राजक प्राणरक्षक कहलथिन्ह - योजना बना क' दुश्मन आक्रमण कयने छल। हम सावधान छलहुँ आ दुनूक मंसा पहिने सँ भाँपि नेने छलियै। धर्मकांटा तक हम संगे रहब तँ कोनो चिन्ता नहि। ओहि इलाका लेल राज शेखर दत्त पूर्णतः नव लोक रहथि। कनेकाल तक दुविधा मे ठार रहलाह । दुविधा ग्रस्त मोन कॅ अजब उलझन होइत छै। किछु निर्णय लेब मुस्किल । फेर धर्मकांटा दिस डेग उठौलनि। यात्राक उद्देश्य की छलनि? स्वेताक प्राण रक्षा लेल हुनक सम्बाद केँ गोवर्धन तक पहुँचेनाइ। स्वेताक अधीर भेल छवि राज शेखरक हृदय मे अंकित छलनि। मोन स्वेता मे नीक जकाँ समर्पित छलनि। मोन के स्थिर करैत चलैत रहलाह। धर्मकांटा लग सँ बसक सहयात्री अलग भ’ गेलथिन्ह। आब राज शेखर अगिला पड़ाव दिस पैदल बिदा भेलाह। आधा कोस रस्ता पार केला पर एकटा मोड़ छलैक। मोड़ लग एक टायरगाड़ी ठार। राज केँ आश जगलनि। गाड़ी लग गेलाह। बहलमान मन्द-मन्द मुस्की सँ स्वागत करैत उत्तर देलथिन्ह “जे गाड़ी घेघिया जेतैक। हम अहाँक हित चिन्तक छी आ अही लेल टायरगाड़ी केँ ठार कयने छी।” (24) उल्लसित मोने राज शेखर टायरगाड़ी पर बहलमान केर बगल मे बैस गेलाह। बहलमानजी सिद्ध पुरुष सँ कम नहि छलाह। हुनक सत्संग सँ राज शेखर मुदित छलाह। भरि रस्ता ओ राज केँ अनेक गूढ़ दार्शनिक आ धार्मिक प्रश्नक उत्तर देत रहल्थिन्ह। बहलमानजी अपन बरद केर नाम माधव आ तिलकेसर रखने छलाह। टायरगाड़ी पर धर्मनिष्ट सेठ सियाशरण झुनझुनवालाक अन्न लादल रहैक जकरा दोसर धर्मात्मा सेठ बनबारीलालक घेघियाक गद्दी तक ल’ जएबाक रहैक। बहलमानजी जन्म, मृत्यु, पाप पुन्य, प्रेत, भुत, सब पर बजैत रहलनि। ओ अपन उमेरि सँ बहुत कम लगैत छलाह। बरदो सँ गप्प करैत छलाह। अध्यात्म केर गूढ़ बात लोक भाषा आ उदाहरण सँ बुझा रहल छलाह। बहलमान जी संयत छलाह आ हुनकर वाणी मे गम्भीरता छलनि । नाम कन्हाइ मंडल छलनि। अपन परिचय के विस्तार देत कहलथिन जे ओ प्रारम्भिक शिक्षा प्राप्त केला के बाद एक संस्कृत विद्यालय केर छात्रावास मे खाना बनेबाक आ अन्य तरहक काज केँ नौकरी क’ लेलाह। समय पर विवाह भेलनि रेशमा नामक एक बेटी सेहो भेलनि। रेशमा पांच वर्ष के भ’ गेलनि। एक दिन संवाद एलनि जे हुनक माता मृत्यु सय्या पर छथिन। गाम पहुंचलाक दोसरे दिन माताक निधन भ’ गेलनि। मायक द्वादशा दिन कन्हाइ मंडल केर पत्नी केर निधन साँप कटला सँ भ’ गेलनि। आब कन्हाइ मंडल भगवती आराधना करैत रहलाह। महामाया हुनका दिव्य ज्ञान देलथिन्ह आ कान मे मन्त्र। आब ओ ऋद्धि सिद्धिक स्वामी भ’ गेल छलाह। ओ अपन दिव्य दृष्टि सँ अहि संसारक तथा दृष्टि सँ परे सम्पूर्ण ब्रह्मांडक गति विधि देख सकैत छलाह। कन्हाइ मंडल पंडित राज शेखर दत्त केँ जनैत छलथिन्ह। आ जाहि प्रयोजन सँ ओ चननपुरा जा रहल छलाह से हुनका ज्ञात छलनि। टायरगाड़ी आब घेघिया पहुँच गेल रहैक। कन्हाइ मंडल राज शेखर कें एक आश्रम पर उतारि देलथिन्ह जेकर स्वामी ओ स्वयं छलाह। एक व्यक्ति राज केँ भीतर ल’ गेलनि। ओकर नाम पंजा रहैक। आश्रम मे ओकर पत्नी सुकुमारी जे नाम ज्ञाने अति कोमल आ सुन्दर रहैक, केर संग रहैत रहैक। दुनूक जोड़ी बेमेल रहैक मुदा सुकुमारी पंजा सँ प्रेम विवाह केने छलीह। कन्हाइ मंडल पुनः राज शेखर दत्त केर दुनू बरद माधव आ तिलकेसर केर पूर्व जन्मक कथा कहैत छथिन्ह । घेघिया सं अगिला पड़ाव भंभरा छलनि। पंजा राज कें घाट लेल ल’ गेलनि। नाव सँ यात्रा शुरू केलाह। नाव पर जखन बैस गेलाह तँ पंजा एक अंगूठी द’ देलकनि। ओ अंगूठी कन्हाइ मंडल देने छलथिन। कनि काल बाद पता चललनि जे नाविक एक युवती छथि। युवती केर सौन्दर्य राज शेखर के बहसी बनाबय लागल छलनि। युवतीक स्वरुप कहन? “धिपाओल सोनाक सूर्ख रंगबला हुनक कांति, छिड़ीयाएल पैघ-पैघ केशक लट, कान मे झुमैत चानीक झुमका, नाक मे सटल नथिया, मींचल ठोर, पसीना मे भीजल लाल-लाल, लहंगा आ ब्लाउज मे अपसियांत हुनक यौवन। युवती ग़जब कें सुन्नरि छलीह।” (56) युवती केर नाम उलपी रहैक। ओ राज शेखर कें काम लेल आमंत्रित केलकनि। राज सेहो उद्यत भेलाह। मुदा फेर किछु एहेण संयोग भेलैक जे स्वेताक स्मरण करैत बढल डेग रोकि लेलनि। अनायास नाव कादो मे फंसि। गेलैक। उलपी नाव केँ ठीक करय लागलि। अहि बीच राज शेखर कें नींद आबि गेलन्हि। देखैत छथि जे एक भव्य राज महल मे वेदी लग महिला समूहक भीड़ स्थान कें छेकने छैक। रानी आ राजा नव परिधान मे बैसल छथि। मुदा सभक आँखि मे उदासी रहैक। से कियैक? तखन देखैत छथि जे वेदीक एक कात भयावह आकृतिबला, कारी चोंगा पहिरने, लाल-लाल आँखि, कपार पर सिन्दूरक ठोप आ देखिते भय उत्पन्न होइक तेहन एक व्यक्ति जानवरक छालक आसनी पर बैसल अछि। ओ निश्चय कोनो कापालिक अथवा अघोरी छल। ओकरा आगाँ नर-मुण्ड पर दीप जरि रहल छलै। कापालिकक शिष्य मंडली ओकर पाछाँ कारी वस्त्र पहिरने पाँत मे ठार छलै। कापालिक छोट-छोट लकड़ी केँ कोनो द्रव्य मे सिक्तक' वेदीक बीच ठाम बनल कुंड मे आहुति दैत छल आ क्षणहिक्षण हुँकार करैत छल। कापालिक चेहरा सँ क्रूरता बरसि रहल छलै। वेदीक एक कात महिला सँ घेरल एक सुन्दर बालिका बैसलि छलीह। हुनक दुनू हाथ कूशक जौर सँ बान्हल छल आ ओहि पर लाल अरहुलक फूल राखल छलै। बालाक बयस चौदह-पन्द्रह बर्खक आ वस्त्र एहन पहिरने जेना राजकुमारी होथि। ओ बालिका स्वेता छलीह। हुनक समस्त मुख मंडल सँ क्षोभ आ घृणाक कुत्सित भाव झहरि रहल छलनि। कुंड लग जेना कापालिक पूर्णाहुति कयने होअय, तेना ओ द्रव्य सिक्त लकड़ी कॅ कुंड मे आहुति द' भयंकर गर्जना केलक जकर ध्वनि प्रतिध्वनि बनि समस्त राजभवन मे झनझना देलकै। ठीक ओही काल कोनो अदृश्य शक्ति सँ प्रेरित भ' अपन हाथक जौरक रस्सी कँ तोड़ि, अरहूल फूल कँ भूमि पर फेंकि स्वेता उठलीह आ राजभवनक फूजल सिंहदरबज्जा दिस दौड़ि पड़लीह। भागैत-भगैत स्वेता एक खर सं छाडल बाड़ा लग अबैत छथि आ ओतय ठार एक युवक केर देह मे लेपटा जाइत छथि। युवक बहुत भव्य, सुसंस्कृत छलाह आ हाथ मे पुजारी के देल अष्ट धातुक मन्त्र सिक्त मट्ठा छनि। ओ कियोक आर नहि अपितु गोवर्धन छलाह। स्वेता गोवर्धन सं अपन रक्षा के निवेदन करैत छथि। हुनका बुझल छनि जे मट्ठा सं कपाली के कोनो तंत्र हुनका पर दुस्प्रभाव नहि करतनि आ अहि तरहे स्वेता कपालीक संग विवाह सं बचि सकैत छथि। आ हुनकर प्राण रक्षा भ जेतनि। राज सपना देखिते रहलाह। देखैत छथि जे आब स्वेता आ गोवर्धन दुनू एक दिस दौड़ी रहल छथि। अनुभूति ई भेलनि जेना प्रेम अपन उत्सर्ग लेल, अपन त्याग लेल जेना दुनू बालक आ बालिका मे एतेक ने उर्जा भरि देने होथि जाहि सं दुनू हवा मे उधिया रहल छथि। दुनू एक नदी पार करैत छथि। बीचहि मे कपाली आबि जाइत छैक आ रस्सी काटी देत छनि। आब गोवर्धन आ स्वेता बहैत नदी केर वेग मे खसैत छथि। आ धार मे उब डूब करैत पानि मे डूबि गेलाह। स्वेता के नदी मे डूबैत देखि रानी आ राजा हा स्वेता कहैत कूदि पडैत छथि, तकर बाद समस्त सेना आ स्त्री पुरुष। सब अपन प्राण त्यागि देलक। ई की भेल? ततबे मे राज कें उलपी उठबैत छनि जे नाव ठीक भ गेल। सपना देखि अहाँ एना कियैक कराहि रहलहु अछि। की अहाँक प्रेमिका नदी मे डुबि मरलीह? स्वेता अहाँक के छथि? स्वेता, स्वेता चिचियाइति अहाँ तेना ने आक्रोश कयलहु जे एखन तक नाव कांपि रहल अछि। जागू, निन्न तोडू। नाव तबेत धरि अपन गंतव्य पर आबि गेल छल। राज शेखर दत्त अपन झोरा ल आगा बढ़ि गेलाह। । आब राज शेखर दत्त चननपूरा हेतु बिदा भ’ चुकल छथि। साँझ भ’ गेल रहैक आ एकपेरिया रस्ता मे झुण्डक झुण्ड बनैय्या सुग्गर ठार आ राज दिस तकैत। मेघ से लागि गेलैक। अन्हार सं बचबा लेल एक पुरान घर दिस गेलाह। मुदा घरक लोक आश्रय नहि देत छनि। लाचार भेल एकटा गाछक नीचा मे बनल गहवर मे नुकेबा केर यत्न केलाह। वर्षा होइत रहलैक। अन्हार मे टोर्च बारि देखैत छथि त एक अजोद्ध गहुमन साँप हिनका दिस फफकर कटने – साँपक फन उठल आ जिह्वा लपलपा रहल छलैक। बज्जर भेल ई अपन समय कटैत रहला। मृत्यु जेना लगे मे ठार होनि! थोड़े काल मे ओतय एक बनैय्या सुग्गर आबि गेलैक आ हिनका पर आक्रमण कएलकनि। आक्रमण चुक भ’ गेलैक। आब साँप आ बनैय्या सुग्गर मे मल्ल युध्ह शुरू भ’ गेलैक। सुग्गर आ साँप केर युद्ध देखि हिनका नेनपन केर सुनल एक कथा याद आबि जाईत छनि: “संसार मे मात्र साढ़े तीन टा वीर छथि। पहिल साँप, दोसर बनैया सुग्गर, तेसर भैंसा आ नुका क' बालि कें मारलनि तें आधा रामचन्द्र"। साँप आ सुग्गर लडैत-लडैत पोखरि दिस बढलैक। राज शेखर दत्त जान बचा ओतय सं पडेलाह। चलैत चलैत रस्ता मे कोना बेहोस भ’ गेलाह से पते ने चललनि। जखन होश मे अएलाह त एक युवक आ युवती हुनका लग ठार। युवक आ युवती केर नाम चन्द्रकांत आ पार्वती छलनि। आब ओ आचार्य प्रभुक आश्रम मे छलाह। प्रभु हिनका जमीन पर खसल बेहोश देखलनि। प्रभु वनोषधि उपचारक परम आदरणीय गुरु सेहो छथि। औषधि एवं मंत्र शिक्त जलक छिड़काव सँ हिनक उपचार क’ प्रभु निश्चिन्त भेलाह आ हिनक पूर्ण विश्राम हेतु एतय अनबाक लेल आदेश देलनि। राज भरि दिन शयन केने छलाह । राज शेखर चन्द्रकांत संगे कुटिया सँ बाहर अबैत छथि । सभ किछु बदलल-बदलल जकाँ देखाय पड़लनि। कुटियाक बनाबट किछु विचित्रे रहैक। बाहरी देबाल चिकनी माटि सँ छछारल आ ओहि मे पशु-पक्षीक अद्भुत चित्र बनाओल रहैक। अति साधारण चित्रकलाक अलौकिकता एवं सजीवता कोनो सभ्यता कँ मुखरित क' रहल छल। ने कतहु प्रदूषण देखल आ ने प्रकृतिक कुटिलता। सभ किछु सहज, सरस, नैसर्गिक एवं पवित्र। सरोवर सँ स्नान क' बाहर अएलाह । चंद्रकांत नव वस्त्र पहिरक हेतु देलथिन्ह आ पार्वती उत्कृष्ट भोजनक इंतजाम केने छलीह। आब राज शेखर दत्त अपन गंतव्य स्थान पर आबि गेल छलाह। चंद्रकांत आ पार्वती संग ओ आश्रम आबि गेलाह। आचार्य केर दर्शन भेलनि। मोन तृप्त भ’ गेलनि। आचार्य हुनका कहैत छथिन जे अहाँक चननपूरा तक केर यात्रा पूर्ण भेल। काल्हि प्रातः काल अही ठाम अहाँकें गोवर्धन स सशरीर भेट होयत। आब अहाँ सहज भ’ जाउ। आचार्य सं पता चलैत छनि जे चननपूरा तेरह सए बर्ख पूर्वक चन्दनपुर थिकै। राज शेखर दत्त के आचार्य बतबैत छथिन जे तेरह सए बर्ख पूर्व मिथिला केर एहि भाग मे कोनो राजा नहि रहैक। तीन चौथाई भाग जंगल रहैक। जंगल मे जंगली जातिक बहुतो समुदाय केर अपन नियम रहैक। तांत्रिक बौध लोकनि केना ब्राहम्णक श्रेष्ठता भंग केने छलाह तकर वृतांत सेहो सुनला राज शेखर। शान्तिप्रिय मैथिल तंत्रवादी सं अशांत भ’ गेल रहथि। ताहि समय मैथिल पुरोहित राम बल्लभ उपाध्याय केर निवेदन पर कर्णाटकक महाराज अपन अनुज रूद्र प्रताप सिंह कें मिथिला भेजैत छथि। चननपुरा हुनक राजधानी बनल। रूद्र प्रताप सिंह कानून व्यवस्था स्थापित केलाह। स्वेता महाराजा केर पुत्री छलीह। स्वेता नेने सँ पुरोहित जीक बालक गोवर्धन संग खेलय लगलीह। यौवन एला पर सेहो स्वेता केर सिनेह गोवर्धन संग बनल रहलनि। गोवर्धन सब गुने संपन्न छलाह। ताहिं राजा रानी निर्णय लेलनि जे दुनूक विवाह अग्रहण शुक्ल पंचमी क भ जेतनि। आचार्य कहैत रहलथिन्ह। ओहने सुखद समय मे दक्षिण भारत सं चंडचूर नामक कपाली पुजारी भजनानंद केर मंदिर मे अपन खंती गारि देलक। पुरोहित रम बल्लभ उपाध्याय के ज्ञात छलनि जे दक्षिण भारत केर कपाली उदंड, भयंकर आ पापाचारी होइत अछि। अहि सन्देश सं ओ अनिष्ट केर आशंका सं कापय लगलाह। चंडचूर अति दुष्ट वाममार्गी कापालिक छल। चंडचूरक अबितहिं पुजारी बाबा विश्वंभरी माताक मंदिर मे चल गेलाह। चंडचूरक तामसी पूजा अति पर पहुंचि गेलैक। ओ शव साधना करय लागल। जंगली जातिक कुमारी कन्या संग काम आ पुनः ओकर बलि देमय लागल । बाद मे चंडचूर कें भोग देबा लेल स्वेता सँ नीक कियोक नहि देखेलैक। एकर सुचना सेहो पुरोहित राम बल्लभ उपाध्याय केँ लागि गेलनि। हुनका मंदिर केर पुजारी सँ ज्ञात भेलनि जे चण्डचूर राजकुमारी स्वेताक प्राप्ति सँ पहिने तंत्रक चक्रार्चन पूजा करत, फेर सँ भैरवी लग अपन प्रण केँ दोहराओत। अहि काज मे ओकरा पन्द्रह दिन सँ कम समय नहि लगतै। ओहुना अगिला अमावस्याक आइ सँ चौबीस दिन बिलम्ब छैक। माता विशम्भरीक आशीर्वाद सँ कोनो महामुनीक संग ल' पुजारी मानसरोवर सं समय सँ पहिने घुमि क' आबि जेताह। पुजारी बाबा अपन आगाँ राखल थार सँ एकटा कबच आ एकटा मट्ठा पुरोहितक हाथ मे दैत कहलनि हम अपन समस्त तप अर्पित क' माता सँ मंत्र सिक्त हाथी दाँतक बनल कबच तथा योग सिद्ध अष्ट धातुक मट्ठा प्राप्त केलहुँ अछि। कबच आ मट्ठा ल' अहाँ चननपुरा जाउ। उचित व्यक्ति के कबच आ मट्ठा पहिरा देबनि। अहि कबच आ मट्ठा पर तत्काल चण्डचूरक तंत्रक कोनो प्रभाव नहि पड़तैक। अहाँ अबिलम्ब घुमि कँ आउ। तखन हम दुनू मानसरोवर झील हेतु शीघ्रतिशीघ्र प्रस्थान करब। पुरोहित राम बल्लभ उपाध्याय कबच आ मट्ठा ल' क' चननपुरा अयलाह। किछु काल तक ओ विचार केलनि महाराज आ महारानी, सेना आ सेनापति तथा चननपरा साम्राज्यक समस्त प्रजाक स्नेह राजकमारी स्वेता मे आरोपित अछि। स्वेताक प्राण त' गोवर्धन छथि। तँ सभ सँ उत्तम जे कबच आ मट्ठा गोवर्धनक शरीर मे रहए। आचार्य कहैत रहला: “शून्य, अति शून्य, महाशून्य एवं सर्वशून्य जे क्रमशः कायात्मक, वचनात्मक, मानसात्मक तथा ज्ञानात्मक सुख अछि तकरा पार क' हम सहजानन्द सुखधाम पहुँचि योग निद्रा मे विश्राम क' रहल छलहुँ। बाबा भजनानन्द आ पुरोहित राम बल्लभ उपाध्यायक पीड़ा भरल विनती हमरा लग पहुँचल। योगबल सँ हम दुनूक प्रार्थनाक उद्देश्य एवं चण्डचूर द्वारा चननपुरा पर आनल विपत्तिक ज्ञान प्राप्त कयलहुँ। वस्तुस्थिति मैं बुझि आ विधाता सँ आदेशित भ' हम दुनूक समक्ष प्रगट भेलहुँ। फेर पुजारी आ पुरोहित के संग ल' आकाश मार्ग सँ सोझे चननपुराक बेगबती नदीक कछेर मे पहुँचलहुँ। मुदा, हमरा तीनूक पहुँचबा सँ पूर्वहि जे विनाश हेबाक रहैक से किछु घड़ी पहिने भ' चुकल रहै। स्वेता आ गोवर्धन संगहि समस्त चननपुरा साम्राज्यक प्राणी कालग्रस्त भ' चुकल रहथि। जे भेलै से बड़ दुखद भेलै।“ (96) ठीक पन्द्रहम दिन जेठ मासक अष्टमीक सकाले चण्डचूर चननपुरा पहुँचि गेल। खूखार आ भयानक आकृति बला चण्डचूर अपन सभटा शिष्यक संगे चननपुरा राजभवनक मुख्य दरबज्जा पर आबि ठार भेल । कापालिकक आगमनक सूचना सेनापति शूर सेन गणपति के भेटलनि। महलक रक्षार्थ सेनापति व्यूह रचना क' चण्डचूर एवं ओकर शिष्य मंडली के घेरि लेलनि। तीर-कमान, भाला, तलवार सँ लैस सेना आक्रमणक लेल तैयार भ' गेल। सूचना पाबि महाराजा एवं महारानी सेहो ओतए अयलीह। पशुबलि आ नरबलि देनिहार वामाचार तांत्रिक कॅ देखि महाराजा आ महारानी आतंकित भ' गेली। चण्डचूरक एक हाथ मे लोहाक चूट्टा आ दोसर हाथ मे मदिरा सँ भरल नरमुंड छलै। ओ महाराजा आ महारानी केँ देखतहिं भयंकर अट्टाहास केलक। सम्पूर्ण राजमहल काँपि उठल। चण्डचूर नरमुंड सँ एक घोंट मदिराक कुरुर क' गर्जना केलक-ने हम मंत्र जानी आ ने तंत्र। हम छी रमणी सँ रमण कर'बला व्यभिचारी कापालिक चण्डचूर। अय! रुद्र प्रताप सिंह देब! सुन', हम तोहर पुत्री राजकुमारी स्वेता संग विवाह कर' एलहुँ अछि। शीघ्र विवाहक तैयारी कर। नहि त' सम्पूर्ण चननपुरा के जरा क' भस्म क' देबौक। एकोटा प्राणी के जिबैत नहि छोड़बौ आ स्वेता के अपहरण क' ल जेबौक। हम शपथ ल' चुकल छी। भैरवी के स्वेताक रुधिर सँ तृप्त करक हमर प्रतिज्ञा के संसार मे कियो ने तोड़ि सकैत अछि। चण्डचूरक अति कर्कश प्रलाप सुनि महाराज आ महारानी किछु पल लेल जड़वत भ' गेला। ताहि समय मे कापालिकक अत्याचार सँ सम्पूर्ण भारत कराहि रहल छल। साधारण गृहस्थक कोन कथा, दिन-दहाड़े, सभहक समक्ष राजाक पुत्री के केश पकड़ि घिसिया क' कापालिक ल' जाइक आ ककरो साहस नहि होइक जे ओकरा रोकि सकितए। मुदा स्वेता त' महाराज आ महारानी | कलेजाक टुकड़ा छलथिन। ताहू पर सँ चण्डचूर स्वेताक लेल अपशब्द बाजल छल। महाराजक राजपूती शोणित मे उफान उठलनि। ओ गरजैत सेनापति के आदेश देलनि-गणपति, अहि बदमास तांत्रिक पर हमला करू। एकोटा जीबि क' वापस नहि जाए। महाराज आ सेनापति, दुनूक हाथ मे तलवार चमकि उठल। समूह मे सेना चण्डचूर आ ओकर शिष्य मंडलीक नाश करबाक लेल आगाँ बढ़ल । मुदा चण्डचूर त' सभ तरहक तैयारी क' क' आयल छल। ओ मंत्रोचार करैत अपन गरदनि सँ मनुक्खक हड्डीक माला निकाललक आ माया पसारि सम्मोहन एवं स्तवन, दुनू तरहक सिद्धि के एकहि समय मे प्रयोग केलक। ताही क्षण चण्डचूरक सिद्धि अपन करतब देखौलक। महाराज, महारानी, सेनापति आ तमाम सेना सम्मोहित होइत अपन अकिल आ विवेक सँ अलग भ' गेला। भ्रमित भेल ओतुका जन समुदाय पोसुआ कुकुर जकाँ चण्डचूरक आगाँ नांगरि डोलाब' लागल। चण्डचूर अपन शिष्य संगे राजभवनक भीतरी प्रांगण मे प्रवेश केलक। तत्काल ओकर चेला सभ मिलिक' विवाह बेदी आ होम करबा लेल कुंड तैयार क' लेलक। कुशक जउर मे हाथ बान्हि क' स्वेता के विवाह मंडप मे आनल गेल। स्वेताक सभटा सखी, राज्यक कर्मचारी आ महाराज-महारानी भ्रमित भेल विवाह मंडप मे पहुँचि मूक दर्शक बनल रहल। चण्डचूर कोयला सन कारी चोंगा पहिरने छल। ओकर आँखि करजनी जकाँ लाल-लाल भ' गेल रहैक। ओ एक बेर स्वेता दिस ताकए ओ फेर नरमुंड सँ मदिरा पान करए। विवाह मंडप सँ थोड़बे हटल सेनापति शूर सेन गणपति अचेत अवस्था मे जमीन पर बैसल रहथि। सभटा दृश्य अजीबे आ डेराओन रहैक। जेना बुझि पडैत छलै जे स्वयं समय चण्डचूरक बंदी बनल कराहि रहल होअय। एकाएक आश्चर्यबला बात भेलै। जेना स्वयं भगवती आबि स्वेता मे कोनो शक्ति भरि देलथिन तहिना ओ चण्डचूरक माया केँ तोड़ि हाथ मे बान्हल जउरक रस्सी केँ खोलि राजभवनक सिंहदरबज्जा दिस दौड़ि पड़लीह। स्वेताक पयर मे बिहारि पैसि गेल छल। ओ सिंहदरबज्जा सँ बाहर भ' दौड़ि रहल छलीह। हुनक पाछाँ चूट्टा भंजैत चण्डचूर, ओकर शिष्य, महाराज, महारानी आ बड़ी टा जन समूह दौड़ि रहल छल। चरैत पशु, बैल, गाय सब बायं बायं कर लागल। राजभवनक अहि हलचल सँ पूर्णतः अनभिज्ञ गोवर्धन गौशालाक एक कात ठार हल्ला सुनि आश्चर्य सँ एम्हरे ताकि रहल छलाह। स्वेता सोझे जा क' गोवर्धनक देह मे लेपटा गेलीह आ चिचियाति बजलीह-हमरा बचाउ हे हमर प्राणनाथ। हमर पिता राजा होइतहुँ कापालिकक भय सँ आन्हर भेल छथि। ओ कापालिक संग हमर बिआह करा रहल छथि। अहाँ के हम अपन स्वामी मानने छी। अहाँक देह मे पुजारी बाबाक देल कबच आ मट्ठा अछि। दुष्ट कापालिकक कोनो टा वश अहाँ पर नहि चलतैक। हे हमर स्वामी, अहि स्थान सँ हमरा दूर ल' चलू। स्वेताक संगहि सभ कियो डुबि मरला। सभ के मोह ग्रसित कयने छलनि। तँ विधाताक बनाओल नियमक अनुसारे निर्दोष रहितहुँ सभ के प्रेत योनि भेटलनि। मात्र गोवर्धन प्रेत बन' सँ बाँचि गेलाह,कारण ओ अनासक्त एवं अनुराग हीन प्राणी छलाह। विभिन्न तरहक जीव-जन्तुक योनि मे जिबैत-मरैत तेरह सय बर्खक बाद गोवर्धन पुनः मनुक्ख योनि मे जन्म लेलनि अछि। अंतत रहस्योद्घाटन ई होइत छैक जे राज शेखर दत्त गोवर्धन छलाह। हुनके स्वीकृति केर इन्तजार मे हजारों जीवात्मा प्रेतात्मा बनल प्रतीक्षारत छथि। आइये जेठ शुक्ल अष्टमी तिथि छैक। राज शेखर विवाह करबा लेल तैयार भ जाइत छथि। स्वेताक गोवर्धनक प्रति एकांगी प्रेमक जीत भेलै। आचार्य लग एकर खबरि भेलनि। शून्य भेल चननपुरा लोक सं भरि गेलैक। ढ़ोल पिपही बाजे लगलैक। गीत नाद शुरू भेलैक। राज शेखर कें लज्ज्वती सँ जानकारी भेटैत छनि जे जखन ओ चननपुरा हेतु यात्रा शुरू केने छलाह तखन जे हुनका पर हमला भेल छलनि से हमलावर बज्रेषर छल। ओ प्रेत बनि अहाँ पर आक्रमण केने छल। शेखर केर रक्षा करयबला छलाह रूद्र प्रताप सिंह केर सेनापति शुर सेन गणपति। गहवर मे जखन राज शेखर फंसल छलाह ताहि क्षण शुर सेन गणपति साँप बनि हिनक रक्षा केने छलथिन। सुग्गर बनल छलाह ब्रजेश्वर। वर केँ ल’ जेबाक लेल कन्हाइ मंडल अपन टायरगाड़ी आ माधव आ तिलकेसर बरद संग विराजमान छलाह। सासुर मे खबासी केर काज पंजा के भेटल रहैक। बाराती जखन राज दरबार पहुचैत छैक ताहि काल उलपी हुनकर बिधकरी बनल छलथिन। अतेक खिस्सा कहैत कहैत पंडित काका अर्थात राज शेखर दत्त ठार भ’ जाइत छथि। वीर बाबू आ पंकज, खिस्सा सुने मे व्यस्त छथि। थोड़े काल मे पंडित काका दुनू के कहलथिन्ह जे विनय शायाद आयल छथि, देखू। ओ सब देखे गेलाह। विनय ठीके आयल छलाह। जखन भीतर अयलाह त पंडित काका नदारत। ई दुनू भाई विनय कें सब बात कहलथिन। विनय आश्चर्य मे अबैत उत्तर देलथिन्ह जे पंडित काका केर अपन कियोक नहि छलनि। ओ कहिये ने मरि गेलाह। हुनका शरीर के मुखाग्नि हमही देने रहीयनि। आब तीनू विस्मय मे छलाह। ई छल उपन्यास केर मूल कथाक सारांश। आब अहि पर थोड़े चर्च करी। ई उपन्यास बहुत प्रसंग संग बढ़ैत छैक। अहि मे दर्शन, धर्म, पाप पुण्य, पुनर्जन्म, प्रेत योनि, इतिहास, पुरातत्व, सौंदर्य सब किछु केर सुंदर समावेश छैक। सबसँ पैघ बात समय केर बहुत खंडक अनुपम चित्रण भेटत। दरभंगा सँ चलैत सीतामढ़ी, आ चननपुरा तक केर बाट केर १९८० दशक केर जे सड़क, यातायात, बाढ़ि, सड़क केर स्थिति लोकक मानसिकता, समाज आ संस्कृति केर खांका देख सकैत छी। ओहि समय मुजफ्फरपुर, दरभंगा, सीतामढ़ी तक रघुनाथ झा केर बस केर चला चलती रहैक। कोना बस मे दादागिरी होईक, कोना कंडक्टर बर्ताव करैक सब बात सहजता सँ लिखल छैक। शैली सहज आ कथावस्तु संग ताल मे ताल मिलेने चलैत छैक। बाढ़ि केँ समय बाढ़ि ग्रस्त क्षेत्र मे लोक कोना चलैत छल तकर विवरण पाठक कें मुग्ध करैत छैक। कथा वस्तु यद्यपि बहुत रहस्यमय छैक, तथापि प्रमाणिक बनेबा लेल बहुत प्रमाण केर आनल गेल छैक। एहि पोथी लेखन सँ पूर्व साहित्यकार गहन शोध केने छथि, धर्म, तंत्र, आदि केँ बुझने छथि, से स्पष्ट छैक। ई पोथी अपना आपमे एक दृष्टांत बनैत छैक जे साहित्य केवल मोनक उद्वेग, आवेग अथवा स्फूरन नहि, अपितु गंभीर अध्ययन आ आवोलकन सँ रचित संदर्भ ग्रंथ सेहो होई छैक। मैथिलांचल मे कोना अराजकता तंत्रयाणी संग अबैत छैक, कोना बाम मार्ग वैदिक मार्ग पर प्रहार करैत छैक, कोना तंत्र सिद्धि केर नाम पर नारी दोहन होईत छैक तकर बहुत सूक्ष्म आ तर्कसंगत प्रमाण लोक देखैत अछि। उपन्यास अनेक काल खंड केर संग-संग अनेक भोगोलिक परिवेश पर चलैत छैक। दरिभंगा सँ कथा केर आधार बनैत छैक फेर कथा कहब हिल स्टेशन नैनीताल सं शुरू होइत छैक। कथाक पात्र पुनः समस्तीपुर रेलवे स्टेशन लग भेटैत छैक आ कथाक नायिका स्वेता अपन प्राण बचेबा लेल उपन्यास केर नायक राज शेखर दत्त सं निवेदन करैत छैक। फेर सीतामढ़ी केर क्षेत्र, आ अंततः अनेक स्थान होइत, अनेक परिस्थिति संग चननपुरा लग कथाक अंत होइत छैक। उपन्यास मे सब स्थानक बहुत नीक वर्णन उपस्थित होइत छैक। अगर पाठक ओहि स्थान मे गेल छथि तँ सब छवि हुनकर मस्तिष्क मे घुमरय लगैत छनि। उदाहरण लेल नैनीतालक वर्णन देखल जाओ: “पहाड़ मध्य विशाल घाटी, घाटी मे दूर-दूर तक पगडन्डी, उज्जर-कारी मेघ सँ छाड़ल आकाश, शीत सँ बोझिल भेल पवनक प्रियगर झोंका, जामुन-जमुनीक गाछ सँ घरेल आ जमुनिआँ रंग सँ लबालब भरल झील, चारूकात देवदारक घनघोर जंगल, जंगली फूल सँ पाटल धरती, झुण्डक-झुण्ड पहबा नामक चिडैक विचरण, सभ किछ के देखैत।” (10) अतबे नहि स्थान विशेष केर प्रकृति आ वातावरण संग नायिका केर वर्णन कतेक सटिक आ प्रेम स भरल छैक: “ककरो नजरि हमर बामा कपाल मे सुल्फा भोंकि रहल छै तेहन सन अनुभव भेल। बामा कात घुमि गेलहुँ। सटले एकटा दोसर कॉटेज रहै। ओकर आगाँ थोड़ेक समतल भूमि छलै जाहि मे फुलायल फूल सँ लदल अनेकों छोट-पैघ गाछक पतियानी रहै। ओही फूलक गाछक मध्य एकटा युवती ठार छलीह। ओस सँ भीजल हरियर-हरियर दुभि पर ठार युवतीक सर्वांग शरीर उज्जर वस्त्र सँ झाँपल छलनि। लाल-लाल फुदनाबला ओढ़नी युवतीक गरदनि पर झुलि रहल छलै। युवतीक चेहरा गोल, आँखिक ऊपर भौं सीटल, माथक केश जूड़ा मे लेपटाओल, दुनू कान मे झुलैत झुमका आ सूर्यक लालिमा सँ रंगल गाल आ ठोर अत्यधिक आकर्षित क' रहल छल। युवती परम सुन्दरी छलीह आ अपलक हमरा दिस देखि रहल छलीह। हुनक तकबाक अन्दाज मे गजब के उत्तेजना भरल छलनि। हमर शरीर झनझना उठल। मस्तिष्क तन्तु मे पीपही बाज' लागल। हमरा नारीक सौन्दर्य मे एखन तक रुचि नहि भेल छल। अविवाहित रही आ कहिओ सुन्दर युवतीक कल्पना तक नहि कयने रही। मुदा जनिका हम देखि रहल छलहुँ ओहि मे हमर जिज्ञासा, हमर कौतुहल के एना ने जगा देने छल जे हम अचैन भ' गेलहुँ। करेजक धड़कन कान मे पहुँचि गेल।“ (10) युवती सँ भेट होइते देरी प्रसंग मे तंत्र, विचित्र भाव, रहस्य आदि प्रारम्भ भ’ जाइत छैक। प्रेम यद्यपि अपन डोर धेने रहैत छैक। तंत्रक विकट आ विकराल प्रवृतिक विवरण आ रहस्य स्वेताक चिट्ठी केर प्रथम किछु लाइन मे स्पष्ट भ’ जाइत छैक: “मदति चाही तँ पत्र लिखलहुँ अछि। आगू-आगू बूढ़ सन जे मनुक्ख गेल अछि ओ कापालिक थिक। कापालिको मे ई अघोर पंथीक तामसी पूजा केनिहार तांत्रिक अछि आ एकरा अनेकों सिद्धि प्राप्त छै। स्वभाव, प्रवृत्ति आ आचरण सँ ई धूर्त, दुष्ट आ मक्कार अछि। हम पूर्णतः एकर कैदी छी। अगिला अमावस्याक बाद तंत्र मार्गक विधि-विधान सँ ई हमरा पत्नी बनाओत आ भोग करत। तकर किछु महिना बाद ई हमर भैरवीक आगाँ बलि द' देत। अनेकों सुन्दरि कन्याक बलि एकरा हाथे पड़ि चुकल छैक। जकरा ई डाकनी, योगिनी, प्रेतनी बना क' अश्लील आ वीभत्स तंत्रक होम-जाप क' अपन अभीष्ट पूरा करैत अछि।“ (13) जेना मेघदूतक यक्ष मेघक कतरा कें अपन यक्षप्रिया लग जेबा लेल सब बात विस्तार सँ बतबैत छैक तहिना अहि चिट्ठी मे स्वेता राज शेखर दत्त केँ बतबैत छथि: “हमर गाम चननपुरा मे हमर बाल-सखा एवं प्रेमी गोवर्धन रहैत अछि। गोवर्धन साहसी, बलबान आ हमर प्रेम मे माँतल अछि। पुजारी बाबा सँ प्राप्त मंत्र-सिक्त अष्ट धातुक सिद्धि बला मट्ठा ओकर हाथ मे छैक। विशम्भरी माताक मंत्रायल हाथी दाँत बला कबच ओकर गरदनि मे झुलै छैक। तँ गोवर्धन अहि कापालिकक तंत्र प्रहार सँ परे अछि। अहाँ गोवर्धन के हमर सोचनीए स्थितिक सूचना देबै । ओ हमर सहायता कर' लेल शीघ्र तैयार भ' जायत।“ (13) स्वेता राज कें इहो युक्ति बता रहल छथिन्ह जाहि सँ ओ गोवर्धन कें चिन्ह जाथि: “गामक पूब मे सघन आम्र कुंज आ तकर सटल बड़ी टा परती मैदान भेटत। हजारो गाय आ तकर बाछा एवं बाछी केँ चरैत देखबैक। अही स्थान पर अहाँ कॅ भेटताह गोवर्धन। गौर वर्ण, ऊँच कद, औंठिया कारी-कारी केश, चेहरा पर देवताक सुन्दरता, दाहिना हाथक पहुँचा लग लहसुनियाँक दाग आ सभ सँ पैघ चेन्ह जे हमर वियोग मे तरासल पाषाण मूर्ति बनल उदास कोनो गाछक ठारि पर बैसल। सैह भेलाह हमर गोवर्धन।“(13-14) जखन नायक अर्थात राज शेखर दत्त यात्रा शुरू करैत छथि आ बज्जिका क्षेत्र मे अबैत छथि त स्थानीय पात्र मैथिली केर उपभाषा बज्जिका मे बाजब शुरू करैत अछि: “की कहली धर्मकांटा जाइबला बसक खोज मे बौआ रहली हएँ। देखिऔ, बसक कतार मे लोहाक ढोल जकती मुंह-कान बला बस, हँ, हँ, उहे जायत। कब खुलत? कितना टेम भेल हेएँ? ठीक एक घंटाक बाद सात बजे खुलत। की पुछली, धर्मकांटा कब पहुँचत? सीरीमान, रौआ इहाँ फैल क’ गेली। खुलक टेम बता सकै छी, पहुँचत कब तकर इनक्वायरी महावीर मंदिर मे होत। पवनसुत त्रिकालदर्शी छथ, हुनका सभ जानकारी हनि। हम त' मनुक्ख हती।“ (16) उपरोक्त कथन भाषा वैविध्य केर सम्मान करैत अछि संगहि कोना बिहार मे ओहि समय लोक जीबैत छल। कोना सुविधा केर नाम पर ठकल जा रहल छल, तकर जिवंत प्रमाण। स्मरण राखी जे ई उपन्यास वर्त्तमान के लैत भूतक यात्रा करबैत छैक। वर्तमान समय केर सब बात रखैत चलैत छैक। बस मे एक पति-पत्नी आपस मे वाक् युद्ध मे लागल छथि। हुनक वार्तालाप सुनला पर लोअर क्लास केर लोकक जीवन केर की समस्या छैक तकर साक्ष्य भेटत: “पत्नी-अहाँ कतेक निष्ठुर छी यौ। हम रंज भ' क' नैहर चलि गेलि रही। अहाँ तीन मास धरि कोनो खोज-खबरि नै कैलहुँ। दुःख आ चिन्ताक पहाड़ तर हम समय कोना क’ बितेलहुँ से हमही जनैत छी। पति-रंज कर' लेल के कहलक? पत्नी- सुनियौन हिनकर गप्प। रंज करब वा नै करब अपना बस मे छै? ओहुना रंज करब, रूसब-फूलब त' सिनेहक नाकक बुट्टा थिकै। पति-पत्नीक मधुर सम्बन्ध बनल रहै, ओकर नवीकरण होइत रहै, तँ ने भगवान एकर इन्तजाम कयने छथिन्ह। तकर ई अर्थ थोड़बे भेलै जे कठोर बनि पत्नी के बिसरिए जाइ। कने काल चुप रहि पति जवाब देलनि-पछिला तीन मास मे की-की भेलै, हम कोन-कोन नगरक यात्रा केलहुँ, सभटा सुनबै तखन भाँज लागत जे हम ने निष्ठुर छी आने कठोर। मात्र भविष्यक प्रति जागरूक छी, जिम्मेदार छी। पत्नी– फरिछा क' कहबै तखन ने हम बात बुझबै। पति- त' सुनू। अहाँक नैहर गेलाक दू दिन बादक गप्प छियै। दलान पर चुपचाप बैसल रही। दुलार कका सोर पाड़लनि। एकांत मे ल' जा क' कहलनिबिआह केल' नीक केल'। आब अगिला जिनगी पर ध्यान दहक। खेती-बाड़ीक उपजा केहन होइत छै से त' बुझले छह। भैया तोहर बिआह करा देलथुन, निश्चिन्त भेलाह। फिकिर तोरा करैक छह । नहि त' धरा जेबह आ दुर्गति मे पडि जेबह। पत्नीक खर्च, काल्हि धिया-पूता हेतह तकर खर्च कत' सँ अनबहक? बाप सँ मंगबहुन त' ओ कपार ढाहि देथुन्ह। तँ हमर विचार जे कोनो नौकरी-चाकरी ताकह। दुलार कका जे कहलनि से हमर आँखि खोलि देलनि। वैह एकटा चिट्ठी देलनि। हुनक पितिऔत सारक दौहित्र बम भोला बाबू गुजरात राज्यक सूरत शहर मे कार्यरत छथि। मुजफ्फरपुर मे ट्रेन धेलहुँ आ तेसर दिन सूरत शहर पहुँचलहुँ। बम भोला बाबू बड़ आदर-सत्कार सँ रखलनि। दौड़-बरहा क' दरबानक जगह पर नौकरी रखा देलनि। ताबत अखन सुक्खा अठारह सय मासिक भेटत। अगिला एक तारीख सँ नौकरी शुरू हैत। तँ सूरत सँ घुमि कँ आबि अहाँक बिदागरी करा क' गाम ल' जा रहल छी।“ (17) घेघिया केर रस्ता मे जे बहलमान कन्हाइ मंडल भेटैत छनि से तीसरी कसम केर हिरामन जकाँ लगैत छैक मुदा जते हिरामन निश्छल छैक कन्हाइ मंडल ज्ञान, दर्शन, धर्म आदिक गूढ़ बुझबा मे प्रवीण। ओ अपन उपस्थिति मात्र सं मोनक सब दुबिधा समाप्त करबाक क्षमता रखैत छथि। कन्हाइ मंडल अध्यात्म अन्वेषणक तीन गोट मार्ग, यथा प्रत्यक्ष, अनुमान एवं धार्म ग्रन्थ सं सूचना लेबाक संदर्भित ज्ञान देमाक सामर्थ्य रखैत छथि। फेर ओकर छिलका ओदारैत ओकर अर्थ स्पष्ट करैत छथि। हुनक वाणी संयत आ भाव गंभीर छनि। उपन्यासकार कन्हाइ मंडल केर मादे बतबैत छथि जे ज्ञान बिना शास्त्र पुराण पढ़ने नित्य साधना सं सेहो प्राप्त कएल जा सकैत अछि। ताहि हुनका भुत, भविष्य आ वर्तमान केर ज्ञान छनि। मिथिला के लोक मे शास्त्र बसल रहैत अछि। एकर प्रमाण थिकाह कन्हाइ। ओ वेद, उपनिषद, पुराण, सांख्य दर्शन, न्याय दर्शन, मीमांसा, शंकर अद्वैत, रामानुजक द्वैत आ रामकृष्णक विशिष्टाद्वैत सब बुझैत छथि आ अपन मंतव्य देत छथि। कन्हाइ मंडल मोनक अतिरिक्त शरीर मे बारह गोट इन्द्रिय केर बात करैत छथि आ चाहैत छथि जे मोन के सब इन्द्रिय पर नियंत्रण राखए। कन्हाई कृष्णक युक्ति, भतृहरि दर्शन बता सकैत छथि। रूपक सौन्दर्य आ विकृति केर वर्णन सेहो जेना पाठक के अपना दिस खिचैत हो। स्वेताक स्वरुपक लघु वर्णन देखने छी, आब कनि पंजा के स्वरुप देखी: “ऊँचाइ तीन, सवा तीन फीट। ठोकल आ ठसगर कद-काठी। बहिक्रम द' की कहल जाय किछु भ' सकैत छल। तीसी तेल मे छानल पापड़ जकाँ घोंकचल आ चड़कल हुनक देहक चमड़ा, कौआ जकाँ दुनू आँखि दू दिस तकैत, उठल नाक, ठाम-ठाम पर उड़ल आ भुल्ल भेल मोंछ, थथुनक नीचा छिड़िआयल आ टेढ़ भेल दाँत, पीयर ढाबुस भेल चेहरा आ कपार पर तेल पोचकारल जुल्फी। आब ककरा कहबै कुरूप? मुदा जिराफ छाप गंजी पहिरने पंजाक बाजब मे गजब के माधुर्य, विनम्रता ककरो अपना वश मे करक लेल पर्याप्त छलै।“ (47) नाव स जयबाक काल उलपी मलाहिनक यौवन देखि राज शेखर केर पुरुष मोन जाग्रत भ जाइत छनि। एकर मनोवैज्ञानिक वाक्य देखल जाओ "उद्दंडता पुरुषक स्वाभाविक गुण थिकै। अवसर पाबि ई गुण निर्लज्ज बनबा मे संकोच नहि करैत अछि । ओहुना भुखायल लोकक आगू लड्डूक थार राखि देला स जे ने होअय।" (56) उलपी केर देहक वर्णन करैत काल साहित्यकार हुनका मत्सगंधा बना देत छथि: “धिपाओल सोनाक सूर्ख रंगबला हुनक कांति, छिड़िआयल पैघ-पैघ केशक लट, कान मे झुमैत चानीक झुमका, नाक मे सटल नथिया, मींचल ठोर, पसीना मे भीजल लाल-लाल गाल, लहंगा आ ब्लाउज मे अपसियाँत हुनक यौवन। युवती गजब कँ सुन्नरि छलीह। लग्गा सँ नावक संतुलन सम्हारक लेल एक पयर मैं नावक मांग पर टेकने छलीह। पयर अलता सँ रंगल छलनि। पयर मे पायल, पायल मे बिछिया आ बिछिया मे खनक सोझे हमर मति के भसियाब'क लेल बहुत छल।“ (56) उपली केर सौदर्य कोना राज शेखर कें मादक बना रहल छनि तकर एक बानगी आरो प्रस्तुत अछि: “हुनक काजर सँ पोतल आँखि मे हमर आँखि ठक्कर मारलक आ ताही क्षण हमर सत्यानाश भ' गेल। जहिना मंडलजीक सम्पर्क मे अबिते हमर चित मे अध्यात्म प्रवेश क' गेल छल, तहिना युवतीक चुम्बकिए परिधि मे अबिते हमर मोन चटपट-चटपट कर' लागल। बिना हमर अनुमतिक हमर मोन चहक सेहो लागल। बहुत पहिने रफीक गाओल एकटा हिन्दी गीत मोन पड़ि गेल–'ये रेशमी जुल्फें, ये शरबती आँखें'। शरबतीक अर्थ अपन भाषा मे की होइत छै से तखने बुझा गेल छल।“ (56) कोना तंत्रयानी बौध सब मिथिला मे उत्पात मचेने छल हएत (?) तकर रोचक विवरण एहि पोथी मे भेटैत अछि। कारी वस्त्र, लाल-लाल आँखि, कपार पर सिंदूरक ठोप, नर मुंड पर दीप जरबैत, अघोरी अथवा कापालिक स्वरुप, क्रूरता देखबैत, हुनकर भरैत किछु चित्रण अहि पोथी कें विशेष बनबैत अछि आ लेखक कें गुणी। पोथी मे नाटकीयता, आ मनोवैज्ञानिक बात सब सहजता सं कहल जा रहल छैक। स्वप्न कथ्य के मनोरंजक आ भयावह बनेबाक साधन बनैत रहैत छैक। बनैय्या सुग्गर आ साँपक मल्ल युद्ध सेहो विपरीत समय मे रोमांच उत्पन्न करैत छैक। पाठक सिहरि उठैत अछि। स्वेता आ गोवर्धन द्वारा नदी रस्सी के सहारे पार करब आ अंत समय मे कापालिक द्वारा काटब, फेर स्वेता संग संग गोवर्धन केर नदी केर बहैत अगम जल मे बिला गेनाइ, रानी आ राजा संग समस्त प्रजा के हाहाकार करैत नदी मे कुदनाइ आ सामूहिक आत्महत्या अतिसय कारुणिक छैक। हमरा लगैत अछि, शायद लेखक ई दृश्य सब पाठक केर मोन पोथी मे लागल रहनि तकरा ध्यान मे रखैत करैत छथि। कारण अति धर्म, तंत्र, दर्शन आदि कथ्य कें बोझिल बना सकैत छलैक। चंद्चुरक व्यक्तित्व एक अलग दिशा मे भेल छैक जे शोधक विषय भ सकैत अछि मुदा साहित्य केर कल्पना मे किछु लिखल जा सकैत छैक। यात्राक विस्तार महाराष्ट्र सं होइत खंडवा आ दक्षिण मे अर्थात आंध्रप्रदेश केर श्री शैलम तक पसरल छैक। सब जगहक अलग संस्कार देखार भ रहल छैक। योग, कुण्डलनी किछु नहि छुटल छैक। नेपाल, सिक्किम तक केर चर्चा छैक। सही अर्थ मे ई उपन्यास हमरा हिसाबे अखिल भारतीय स्वरुप ग्रहण करैत अछि। अहि उपन्यास केँ रसे-रसे पढ़ब त’ ई अहाँ कें अर्थात पाठक कें अपन मायाजाल मे बंधने रहत। विनय सं इहो ज्ञात होइत छैक जे पंडित काका विनय के अपन पोथिक पाण्डुलिपि देने छलथिन। छापेबा लेल। जखन हुनकर पाण्डुलिपि निकलल गेल त ई कथा हु-ब-हु लिखल रहैक। इहो नहि कहि सकैत छी जे सब किछु सर्वोत्तम छैक। कतौ-कतौ कुनो प्रसंग अव्शयाकता सं अधिक बोझिल आ अनेड़े ठुसल सन सेहो लगैत छैक। मुदा सम्पूर्णता मे इ पोथी मैथिली साहित्य लेल अमूल्य निधि थिक। एहन पोथी कें अनेक भाषा –कम सं कम हिंदी आ अंग्रेजी मे अनुदित होबाक चाही। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ऐ अंकक अन्यान्य रचना गद्य ३.१.केशव भारद्वाज- अजगुत अफ्रीका (अफ्रीका डायरी) ३.२.केशव भारद्वाज- खेलौना ३.३.केशव भारद्वाज- किछु पढ़ल आ किछु सुनल- ईदी अमीन ३.४.केशव भारद्वाज- पैबंद ३.५.डा. किशन कारीगर- कथाकार- मुकेश आनन्द- समीक्षा ३.६.भुवनेश्वर चौरसिया "भुनेश"- उ लपट एमहरो ऐत ३.७.कुमारी आरती- यात्रा वृत्तांत ३.८.डॉ प्रमोद कुमार- पवना माय- (संस्मरण) ३.९.सुषमा ठाकुर- बोझ ३.१०.रबीन्द्र नारायण मिश्र- मातृभूमि (उपन्यास)- ९म खेप ३.११.गजेन्द्र ठाकुर- ५ टा बीहनि कथा ३.१२.गजेन्द्र ठाकुर- गढ़-नारिकेल उपन्यास-त्रयीक पहिल उपन्यास "सहस्रशीर्षा" क बाद दोसर उपन्यास- द ........ फाइल्स ३.१३.महाकान्त प्रसाद- बीहनि कथा (चिड़िया घर, चिक्कस) ३.१४.निर्मला कर्ण- अग्नि शिखा (भाग - ४) पद्य ४.१.राज किशोर मिश्र- धान ४.२.गजेन्द्र ठाकुर- शुनः शेपक मृत्युदण्ड वा बलि- २ ४.३.कुमारी आरती- प्रकृति ४.४.सुषमा ठाकुर- आस गद्य केशव भारद्वाज अजगुत अफ्रीका (अफ्रीका डायरी) अफ्रीका मे बोने बोन बऊआईत किछु अजगुत गप्प सब सोझा आयल। साऊथ अफ्रीका आ ईस्ट अफ्रीका दुनुके अपन अपन ढंग छई। अहुं सब के जाईन कअ अचरज होयत। इक्वेटर करीब ग्यारह टा देश सं गुजरई छई। युगांडा, कांगो, केन्या, इंडोनेशिया आ ब्राजील अही ११ मे सअ छई। इक्वेटर के लग रहअ बाला लोक सबहक बारे मे किछु रोचक जानकारी भेटल। ई लोग सब आराम पसंद आ आलसी स्वभाव के होईत अईछ। बेशी संग्रह क प्रवृत्ति अकरा सब मे नई होई छई। कलुका चिंता बेगरता ई सब नई करईत अईछ। वर्तमान मे जीबईत अईछ। परिवार के प्रति कोनो खास प्रतिबद्धता नई रहई छई। लिव-इन मे सालों साल रहत। धीया-पुता सेहो भ जाई छई। कयेक बेर एहनो भअ जाई छई, जखईन बच्चा कालेज मे पढ़अ जोगर भअ जाई छई, तखईन बियाह करईत अईछ। कारण आगु बतायब। पेट भरअ जोगर जंगल झार सं भेंट जाई छई, तैं उद्यम नई करबाक चाहईत अईछ।जंगल मे अनेरो के केरा सब फरल रहईत छई। ओई तरकरिया केरा के "मटोके" नामसं खाद्य पदार्थ बनबईत अईछ। ओहिना खम्हाऊर जेकां माईटक तर सं "कसावा " भेटई छई, ओकरा ओ सब खाईत अईछ।कसावा के स्वाद खम्हाऊर सं मिलईत जुलईत छई। अकर अलावा माईटक टीला सब मे कीड़ा मकोड़ा सब के ढ़ेर रहई छई। ओहो सब खा लईत अईछ। आम, लताम सब सेहो जंगल मे भरल छई। ओहिना कतेक तरहक जंगली गाछ सब छई- जेकर फर ई सब खुब चाव सं खाईत अईछ।आब भोजन के जोगार प्रकृति क देने छथिन तखईन देह कोना घुसकैत। अपन अहीना जीवन जीब लईत अईछ। बहुत मैथिल क फलसफा त ईयाह रहईत अईछ- सांई इतना दीजिए, जामे कुटुंब समाय। मैं भी भुखा न रहुं, साधु ना भुखा जाय। कतेक मैथिल लोक त बिन देह डलोने जीवन जीब लईत छईथ- जेना तेना। बिना कोनो इक्वेटर के संपर्क मे रहने, ओहने जीवन जीबईत लोक स्मृति मे आईब जाईत छईथ। एतअ कखनो युवा मजदूर कही देत जे आई हम थाकल छी। आई काज नई करब। आगु आहां के काज देबाक हुआय त दियअ आ नई त नई दियअ। काज की त मोटरगाड़ी साफ केनाई। हल्लुक फल्लुक काजो मे कखनो ओ थाईक जाईत। बेपरवाह जेकां लोक भेटत। हम किछु दिन पूर्व कंपाला के एकटा प्रसिद्ध शिक्षाविद जे की सफल व्यवसाई सेहो छईथ- सं सुनलऊं- � आई सं ७० साल पहिने जखईन ओ छोट छलाह त ओ अपन गाम सं राईत मे कम्पाला के कमोचा/कोलोलो महल्ला मे संगी सबहक संग अबई छलाह।� अयबाक कारण जाईन कअ हम अचंभित भअ गेलऊं।कमोचा/कोलोलो मे भारतीय सबहक घर छलईन। उनकर सबहक घर मे बिजली जड़ई छलईन। राईत मे बिजली के ईजोत मे फतिंगा सब उड़ई छलई। ओई फतिंगा सबके ओ जमा करई छलाह। आ फेर सब संगी मिल कअ खाई छलाह। ई बहुत स्वादिष्ट आ पौष्टिक होई छई। आब त बिजली सऊंसे पसईर गेलई, तैं आब चहुंओर भेटई छई। अपनो सब कतअ जग परोजन मे पेट्रोमेक्स आ जेनरेटर के लाईट पर अहिना फतिंगा सब उड़ईत रहई छलई। ओकर प्रकोप कम करबाक लेल थोड़ेक हरियर झाईढ़ ओतई टाईंग देल जाई छलई। जई पर फतिंगा सब जमा भअ जाई। अतअ ओहिना फतिंगा के फंसावल जाई छई।युगांडा क एहन लोक सब के मिथिला मे गाम दिश आनल जाईन, तऽ रोज इनका सबहक लेल भोजे- भोज। घरबईया के सेहो ई कीड़ा- फतिंगा सब स मूक्ति। दुनु के फायदा।राईत मे जड़ल पेट्रोमेक्स आ बल्ब ट्युब सब ई फतिंगा के आकर्षित करईत छई। अपनो देश मे पूर्वोत्तर मे विशेष कअ नागालैंड मे ओतुका जनजाति सब कुक्कुरक मास खाईत अईछ। नागालैंड के पुलिस बल जखईन कखनो दिल्ली आ उत्तरी राज्य सब मे अबईत अईछ त ओ सब कुक्कुर के तलाश मे सीधा रेलवे स्टेशन जाईत अईछ। ओकरा सबहक अनुसारे रेलवे स्टेशन कुक्कुरक अड्डा छई। ओतअ ओ सब नुका कअ कुकुरक शिकार करईत अईछ। जही शहर मे नागालैंड के बटालियन के तैनाती भअ गेलई, ओतअ लोग अनेरूआ कुकुर सं त्राण ल लईत अईछ।ओई शहर मे कुकुर नई भेटईत। जेना भारत मे चिनिया बदाम, भुजा, पापर सब ट्रेन, मेला, बजार, चौक चौराहा सब जगह बिकाईत रही छई, ओहिना कम्पाला मे फतिंगा के पंख तोईर कअ ओकर भुजा सदरो बिकाईत भेटत। लोको सब खुब चाव सं कीनत आ खाईत देखायत। भारतीय सब सेहो खाईत भेटताह। हम जखईन पुछलियईन त उनकर ज़बाब सुनु- " आहां ई बिसईर जाऊ कि, की खाई छी? खुब नीक लागत खेबा मे।बहुत चहटगर होई छई।" हमरा मोन मे आयल जे बिशेष कअ बरसात क समय मे ई कीड़ा-फतिंगा सब जग मे बड्ड व्यवधान करई छई। अहिना एकटा अफ्रीकी के लाईटक लग बईसा देबअ के चाही। ओकरा भोज की, महाभोज भअ जेतई। नोतहारी सब के सेहो भोजन मे सुविधा। पुर्वी अफ्रीका मे लोक कतेक निफिक्र रहईत अईछ तकर एकटा खिस्सा सुनु। नीक त नीक लोक, चोरो चुहार बेशी दिमाग खर्च नई करईत अईछ। कम्पाला मे एकटा जज के सामने चोर के पुलिस पेश केलकई। पुलिस क अनुसार ई चोर, चोरी के सामान संग पकरायल अईछ। जज साहब देखईत छईथ जे चोरबा त उनके सुट पहिरने अईछ। ओ अपन सुट आ चोर, दुनु के चिन्ह गेल छलाह। ई चोरबा छह महीना सं जेहल मे बंद छल। अकरा पर अभियोग छलई जे ई एकटा सुटकेश चोरी केने छल। जिनकर सुटकेश चोरी भेल छलईन, ओ अई शहरक नामचीन लोक छलाह। जज साहब के पुरा केशक ट्रायल मे बुझेलईन जे नाहक मे अतुका पुलिस अकरा बंद कअ देने छई। पैघ लोक के मामला छलई, केश सुलझबई लेल, अकरा जेहल कअ देलकई। जिनकर सामान चोरी भेल छलईन, ओ कतबो नोटिस देला पर गवाही देबअ नई अयलाह। चाईर दिन पहिने जज साहब अई चोरबा के बरी कअ देलखिन आ पुलिस क खिलाफ निर्दोष के बंद करबाक बारे मे अपन फैसला मे लिखलकिन।चोरबा ईनकर जय-जयकार करईत चईल गेल छलईन। जखन चोरबा जेहल सं छुटल त ओ जेहल के अधिकारी कतअ चोरी केलक। ओतई बगले मे जज साहब के सेहो घर छलईन। खुब बरखा भअ रहल छलई। मौसम बढ़िया देख कअ जज साहब लांग ड्राइव पर चईल गेल छलाह। चोरबा मौका देख कअ ईनकर घर मे घुसल। दु टा ईनकर सुट आ पाईनक बोतल के लअ कअ परा रहल। पाईनक बोतल के ओ उजरा तेल बुईझ कअ धोखा मे लअ गेल छल। जखईन जज साहब लांग ड्राइव सं घुरलाह त उनका बुझा गेलईन जे चोरी भअ गेल छईन। कोनो तेहन महंग वस्तु नई छलईन, तैं पुलिस मे रिपोर्ट दर्ज नई करेलाह। ओ चोरबा समान सब लअ कअ थोरबे दुर पर एकटा घन झाड़ी मे परल छल। एक राहगीर के अकरा पर किछु शक बुझेलई। ओ पुलिस के खबर केलक। पुलिस जखईन पुछताछ केलकई त ओ जेहल अधिकारी के घर मे चोरी के बात कहलकई। जज साहब के सुट ओकरा फिट भेलई, ओही लेल पहिर लेने छल। ओ थाईक गेल छलाय तैं बेशी दुर मे नुकाय नई गेल। जज साहब के जखईन सब वृतांतक पता लगलईन त ओ तखने कोर्ट के एडजार्न कअ देलखिन। ओ ततेक ने मानसिक तनाव मे आईब गेलाह जे सात दिन क छुट्टी पर चईल गेलाह। उनकर अपन सब बुद्धियारी घुसईर गेल छलईन। ईयाह इक्वेटर क लग रहअ बाला लोक क खिस्सा छई। चोरबा सेहो बेशी नई सोचईत अईछ आ भलाई करअ बाला जज के सेहो नई छोड़ईत अईछ। जे आसानी सं भेंट जाई छई -अपन ल लईत अईछ।
अफ्रीका के युरोप, दक्षिण अफ्रीका अईछ। अतुका सब बात बेबसथा बड़का स्तर के अईछ। बेशी सर सम्पईत पर अंग्रेज माने गोरका चमरी बाला सब कब्जा जमौने अईछ। जहीना चम्पारण मे नीलहा अंग्रेज सबहक कोठी होईत छलई, अनमन तेहने डिजाइन के बनल कोठी दक्षिण अफ्रीका मे देखबई। भारत मे आब अंग्रेज सबहक कोठी सब ढहल ढिमलायल भेटत, मूदा अतुका सब आरो नीक स्थित मे। 1994 मे रंगभेद खत्म भेला के बाद आब ई सब अपना के बदलअ के प्रयास केलक अईछ। नई त 1994 सं पहिने कयेक टा शहर सब मे उजरे चमरी बाला रही सकई छल। दिन मे त अनुमति लअ कअ आनो चमरी वाला आईबो सकईत छल, लेकिन राईत मे उजरे चमरी देखाय के चाही। प्रिटोरिया सं भारतीय सब के उजाईर कअ " लोडियम आ जोहानिसबर्ग सं "लेनेशिया" मे बसायल गेल छलई। जेना अपनो देश मे पहिने अछोप बस्ती होई तहिना अतुका हाल छलई। प्रिटोरिया, जोहानिसबर्ग, केप टाउन, पोर्ट एलिजाबेथ, फ्री स्टेट, ब्लुम फाउंटेन आदि कयेक टा शहर छलई, जई मे खाली गोरा सब रही सकईत अईछ। ओहिना कम्पाला, युगांडा मे सेहो "कलोलो" सन किछु एरिया रहई, जकरा भारतीय सब अपना लेल रिजर्व रखने छल। ओई मे अतुका अश्वेत मूल लोक सबहक आबाजाही पर अपरोक्ष रूप मे रोक छलई। दक्षिण अफ्रीका मे अंग्रेज सब जे बर्ताव भारतीय संग करईत छल, ऊयाह बर्ताव भारतीय सब युगांडाक मूल लोक सब सं करईत छल। ई हाल अफ्रीके टा मे नई, अपनो देश मे बड़का छोटका मे विभाजन छल। जाईतक आधार पर टोल सब बांटल छल।अई सब कुरीति सबहक पाछु अशिक्षा आ गरीबी ईयाह दु टा मुख्य कारक छल।जेना महात्मा गांधी के संदर्भ मे सबके बुझल अईछ जे दक्षिण अफ्रीका मे उनका अंग्रेजबा सब ट्रेन सं धक्का द क उतारबा सं ल कअ, कयेक बेर कुटाई केने छईन। अगर हम सब अपन अंदर झांकु त ई की भारत मे हमर आहां के समाज मे नई छल। हमरा अतुका समाज मे अई बिंदु पर कोनो अंतर नई लागल।ई साधन संपन्न समाजक, सुविधा विहीन समाजक प्रति भेदभाव स भरल अनुचित व्यवहार अईछ। आब हम ओई बातक चर्चा कअ रहल छी जे पुर्वी अफ्रीका सं ईतर दक्षिण अफ्रीका मे अनुभव भेल। दक्षिण अफ्रीका मे समय के लोक बड्ड पाबंद होईत अईछ। बिना समय देने कियो भेंट नई करत। ज्यों एक बेर आहां समय पर नई गेलियई, त आहां के दोबारा भेंट भेनाई दुरूह बुझु। प्रिटोरिया मे हमर मकान मलकिनी एकटा संभ्रांत श्वेत महिला छलीह। ओ पेशा सं वकील छलीह आ 1500किलोमीटर दुर शहर केपटाउन मे रहईत छलीह। पैंतालीस बरख के करीब बयस रहईन आ टटके टटकी छह महीना पहिने पहिले बियाह केने छलीह। अपनानुसार पुरुख नई भेटल छलईन, तैं बियाह नई केने छलीह। ओ सब धरफरी मे कोनो काज नई करई छईथ। हम सब नब किरायेदार छलऊं त भेंट करबाक लेल अयलीह। पहिने सं रईब दिन कअ 11बजे के समय हमरा सं लेलीह। केपटाउन सं हवाई जहाज सं जोहानिसबर्ग अयलीह। ओतअ किराया पर कार बिना ड्राईवर के भेंट जाई छई। बेशी लोक के मोटर चलबअ अबई छई। पौने ग्यारह बजे एकटा मोटर हमर घरक नीचा मे रूकल। हम सब मोटर देखते पाहुन के इंतजार करअ लगलऊं। केबारी खोईल कअ ठार रही। पन्द्रह मिनट के बाद कालबेल बाजल। ओ महिला अयलीह। हम अपन 15मिनटक बेचैनी उनका कहलियईन। उनकर ज़बाब सुनु-"हम आहा़ं के ग्यारह के समय देने रही। रस्ता मे ट्रैफिक कम छल। हम जल्दी ठीके पहुंच गेल रही। लेकिन समय त समय होईत छई। हम पहिने कोना अबितऊं।हम मोटर मे बईस कअ नियत समय के इंतजार करईत छलऊं। आहां के ज्यों कोनो व्यस्तता होईताय।" ईनका की बुझल जे हम एक राईत पहिने सं उनकर इंतजार कअ रहल छलऊ। गप्पक क्रम मे पता चलल जे हिनकर पिता सेहो स्काऊट-गाईड संस्था के पैघ अधिकारी छलाह आ भारत गेल छलाह। अतुका बारे मे ओकरा किछु अचंभित करअ बाला बात बतेने रहथिन। अतअ ज्यों घर के किरायेदार ठीक सं साफ सफाई नई रखने अईछ- त मकान मालिक, किरायेदार पर फाईन लगा सकईत अईछ। ओना ओहन स्थित नई आयल। दक्षिण अफ्रीका मे पब्लिक ट्रांसपोर्ट शहर सबहक भीतर नहिये जकां छई। मेटाडोर जेकां गाड़ी किछु किछु रूट मे चलई छई।ओई मे कंडक्टर नई होईत छई। जे सवारी दरवज्जा के कात बला सीट पर बईसत, उयाह सवारी के चढ़ला उतरला काल गेट खोलत आ किराया बसुली करत। अगर अई सवारी कंडक्टर के बीच मे उतरबा के छई त ओ अपन ई जिम्मेदारी दोसर सवारी के द देत। अहीना विश्वास मे व्यवस्था चलई छई। हमरा ई देख कअ आईजोल, मिजोरम याद आईब गेल। नब्बे के दशक मे ओतऊ स्वराज माजदा शहर के अंदर चलई। ओहु मे टिकट नई होई। आहां अपन गंतव्य अयला पर उतईर जाऊ आ कही दियऊ जे हम फलां जगह चढ़लऊं अईछ। ओई अनुसार किराया ओ ल लेत। किछु गैर मिजो सब कम किराया लेल झुठ बजनाई शुरू कअ देने छलाह। पता नई आब आईजोल मे पब्लिक ट्रांसपोर्ट के की व्यबस्था छई? अफ्रीका आ पूर्वोत्तर भारतक बीच मे बहुत रास समानता हमरा लागल। ताहि लेल किछु बरख सं बहुत बेशी संख्या मे अफ्रीकी आ पूर्वोत्तर भारत के लोग के बीच विवाह वा लिव-इन के समाचार आईब रहल छई। सबसं कमाल अई वैवाहिक संबंध स भेल बच्चा सब देखबा मे लगई छई। --x-- अफ्रीका मे हैव आ हैवनोट के बीच मे खाई बहुत छई।मध्यम वर्ग नहिये बराबर छई। ओही लअ कअ किछु लोक जिनका खोबाक कोनो डर नई, ओ बिन सोचने किछुओ कअ लई छईथ। अपराध बढ़ल रहबाक ई मूल कारण अईछ। पेटक आईग बुझेबाक लेल ओ कोनो कदम उठा लईत अईछ। उचित-अनुचित के परिभाषा ओकरा लेल गौण भअ जाई छई। अपन सब बला घर परिवार के कंसेप्ट अतऽ कमजोर छई, तैं बेशी सोच विचार के जरूरत कम पड़ई छई। मध्यम वर्ग समाजक मर्यादा के बांईध कअ रखई छई। भारत मे "लोक की कहत" अहु डरे बहुत अनुचित काज लोक नई करईत अईछ। अतअ लोकक डरे नई, तैं डिस्परेट अपराधी बेशी देखबा मे अबईत छई। भारत मे लुटेरा आ हत्यारा दु तरहक अपराधीक वर्ग छई मूदा अतअ छोट छीना-झपटी मे अपराधी हत्या करबाक सं गुरेज नई करत।ई सब परिवार आ समाज के कमजोर रहबाक कारण भअ रहल छई। भारत मे सेहो किछु अल्पसंख्यक वर्ग मे जतअ घर- परिवार जेहन कोनो बात नई छई, ओतुका लोक बेशी अपराध मे लिप्त भेटत। कोनो भाषाक अखबार उठा क पईढ़ लियअ, बेशी अपराधी के नाम एक समुदाय मे सं भेटत। कोनो भी देश मे अपराध बढ़ल रहबाक पाछु सामाजिक कारण रहई छई, अफ्रीका मे सेहो सामाजिक व्यवस्था ही मूख्य कारण अईछ। दक्षिण अफ्रीका मे ज्यों रस्ता पेरा ककरो सं किछु पुईछ लियअ त बुईझ लिय अपराध क लेल नोत पठा देलियई।एहन पब्लिक परसेप्शन छई जे बहुत हद तक सही छई। ओहिना इन्टरनेट सं जुड़ल ATM के ट्रांजेक्शन मे ककरो मदद लेलियई तअ जबरदस्त फ्राड के आशंका रहत। अतऊ एक समुदाय क लोक अई गोरखधंधा मे सिद्धहस्त अईछ।आब त ओ सब अपन कार्यक्षेत्र भारत मे सेहो बढ़ा लेने अईछ। दक्षिण अफ्रीका मे पैदल लोक सड़क पर चलत नई भेटत। ट्रेफिक अनुशासन जबरदस्त छई। दोकान सब माॅल मे ही भेटत। एकटा पावरोटी लेबय लेल आहां के माॅल जाय पड़त।ओना दोकान सबहक आगु मे गाड़ी पार्क करबाक लेल नियत जगह बनावल रहत। पार्किंग त मुफ्त अईछ लेकिन गाड़ी पार्क करबाक मे मदद लेल स्थानीय लोक ठार रहत। जेकरा आहां ईनाम मे किछु रकम द दियऊ। एक बेर नई देबई त दोसर बेर गाड़ी साबुत नई भेटत। अतुका पेट्रोल पंप पर गाड़ी के भोजनक बेबसथाक संग मनुक्खक भोजन के सेहो ठीहा सब रहई छई।आहां देह सोज कअ ली ओकर पुरा सृष्टजाम रहई छई। दक्षिण अफ्रीका मे सुदुर गाम सब मे गुजरात क लोक सब किराना के दोकान चलबईत अईछ आ मनमाना दाम लईत अईछ। ईमहर चीनी लोक सब सेहो किराना दोकान गाम सब मे खोलअ लागल अईछ। भारतीय, पाकिस्तानी आ बंगलादेशी सबहक मूंहकान एक्के रंग के रहई छई- लेकिन कहाई सब इंडियने छई। चीनी सब सेहो अई समाज मे घुईल मिल गेल अईछ। सबसं अजगुत लागत जखईन लुंगी मे चीनी दोकान पर बईसल देखायत। भारतीय सबहक रहबाक स्तर आर देशक लोक सबसं कनीक नीक छई। दक्षिण अफ्रीका मे कतऊ जाय सं पहिने होटल बुकिंग एकदम्मे जरूरी छई। होटल बुकिंग तखने मानल जाईत छई, जखईन आहां लग पैसा ट्रांसफर क रसीद हुअय।एतअ भारत जकां गुडविल पर काज नई होई छई। ओही लेल होटल बुक भेला के बाद लोक घर सं विदा होईत अईछ। ई नई जे पटना पहुंचला के बाद होटल ताईक लेब- से अतअ नई चलत। उत्तराखंड, हिमाचल जेकां अतअ घरों मे टुरिस्ट के पाई लअ कअ ठहरावल जाई छई, लेकिन ई जतरा के अंतिम समय मे नई। कहबाक जे पुरा प्लानिंग क कअ लोक अतअ घर सं निकलईत अईछ। "गार्डेन रूट" विश्वस्तरीय छई। समुद्र क काते काते रंग-बिरंगक फुलक बीच मे रस्ता छई। केपटाउन आ पोर्ट एलिजाबेथ के बीच मे पड़ई छई। रस्ता मे "नाईसना " मे बहुत रास स्पोर्ट्स, एडबेंचर आ फन सेंटर सब छई।पिज्जा बर्गर ज्यों खाय मे नीक लगईत अईछ त कोनो कष्ट नई, सर्व सुलभ अईछ। बहुत कम लोकक बस्ती सब छई। जेना श्रीनगर सं बालटाल जयबाक मे उदान जगह सब देखात ओहो सं बेशी अई रस्ता सब मे। एक्को टा अंग्रेजबा सब अतेक संपईत रहबाक बावजुदो भारत मे नई रहल आ दक्षिण अफ्रीका मे सब रही गेल। अकर पाछु अतुका जलवायु आ सस्ता श्रमशक्ति कारण अईछ। दुनिया के बहुत देशक लोग ओतअ स्थायी तौर पर रहईत अईछ। अपराध बढ़ल रहबाक बावजुदो ओ सब खुब शांति आ सुख मे अईछ। ओतअ अपराध भेला पर पुलिस सं पहिने निजी सुरक्षा एजेंसी मे लोक खबर करईत अईछ।सुरक्षा एजेंसी के धंधा खुब फलल फुलल छई। अकरा आहां एना बुझु जेना निजी सेना। जेहन अर्थ खर्च करब ओहन सुरक्षा घेरा आहां के रहत। पुलिस के चर्चा भेल त एकटा घटना मोन पईर गेल। दक्षिण अफ्रीका सं सटल " लेसोथो" छोटछीन देश छई। भारतीय सबहक नीक संख्या एतअ रही रहल अईछ। एकगोटे कतअ किछु स्थानीय अपराधी लुटपाट खातिर आईब गेलईन। ओ ओतुका थाना मे फोन केलखिन।थाना प्रभारी कहलकईन जे हमरा लग "वाहन" नई अईछ।आहां वाहन लअ क आऊ तं हम आईब जायब। ई मोन मे सोचलाह जे लुटेरा ताबईत रूकल रहत जे हम घर सं जायब आ पुलिस के बजा कअ आनब। हमरा लुटेरा सब माईर नई देत। तखईन ओ अपन एकटा भारतीय दबंग परिचित के फोन कयलाह। उनका लग बंदुक छलईन। ओ दुर सं फायर करईत अयलाह। अपराधी सब के बुझेलई जे पुलिस फायर कअ रहल अईछ। तखईन ओ सब भागल। दक्षिण अफ्रीका मे पुलिस के पुरा साजो सामान छई। अपन हेलिकॉप्टर तक छई। जरूरत पड़लाह पर हेलिकॉप्टर सं पीछा क क अपराधी के पकड़ईत अईछ। इनकाउंटर करअ मे सेहो अतुका पुलिस पुरा आगु अईछ। भारत जेकां इनकाउंटर भेला पर दुनिया भईर के जांच कमीशन अतअ नई बनई छई। सबसं नीक बात जे हम अनुभव केलऊं ओ छल सामाजिक जिम्मेदारी के भाव। एक दिन हम 21/22बरखक श्वेत युवक के देखलियई जे ओ अपन मोटर मे नब टी-शर्ट सब रखने छल आ जतअ रस्ता मे कियो कम कपड़ा वा फाटल पुरान कपड़ा मे देखाई, ओकरा खुब आदर सं कपड़ा पहिरबई। हम ओकरा पुछलियई त ओ कहलक जे हमरा भगवान बहुत किछु देने छईथ। हमर फर्ज बनईत अईछ जे जरूरतमंद के किछु दी। हम कहियो काल अनायास शहर के कोनो सड़क पर निकईल जाई छी आ जेकरा जरूरी बुझाईत अईछ ओकरा द दई छियई। हमर सामने ओ एक टा 14/15बरखक बच्चा के नब टी-शर्ट पहिरलकई। हम ओ पहिरनिहार बच्चा आ ई देनिहार युवक दुनु के चेहरा पर जे खुशी आ संतुष्टि के भाव देखलियई, से कहअ सुनअ सं बाहर छल। ओ युवक कहलक जे "देबाक जे आनंद" होई छई से परमानंद थीक। अपन भारत मे लोक या तअ पुरान कपड़ा दान करत या दान मे अपन लोक के चुनत या ककरो देत त दस के कहत। दान के महिमा मंडन करत। दक्षिण अफ्रीका के मूल निवासी ओतेक कर्मठ नई भेटत। अतअ "जिम्बाब्वे" के लोक सब बहुतायत मे लिखा पढ़ी बाला काज करईत भेटत। जिम्बाब्वे के तेज दिमाग बाला लोक के देखला पर हमरा अपन समाज के देबानजी सब याद आईब गेलाह।अतअ 6/7 टा देश के बीच वीसा के जरूरत नई परई छई। ओहिना जेना भारतीय के नेपाल जयबाक काल। अतुका लोक सब के अपन छोटका हेलिकॉप्टर सेहो खुब छई, जकर दाम सेहो बहुत नई होई छई। करीब 20 लाख दाम होईत छई।हमरा पुछला पर छोटकी हवाई जहाज के मालिक कहलक जे एकरा उड़ेनाई हमर शौक अई। शौक पुरा केला सं हमर स्ट्रेस खत्म होईत अईछ। जईसं हम बाकी दिन नीक क्षमता सं काज करई छी।ओ हमरा शौक रखबाक बारे मे भाषण सुनबअ लागल। हम ओकरा नई किछु कहलियई।अपन देश मे संजय गांधी के शौक छलईन छोटकी हवाई जहाज उड़ेबाक आ ओही सं 1980 मे मरबो केलाह। हमर एकटा सहकर्मी के बेटा ओतुके एकटा अंग्रेजन सं विवाह केलक। उनका सं पता लागल जे ओ अंग्रेजिन लड़की के माय बाघक बच्चा सब के पोसईत अईछ आ बेचईत अईछ। 80 के करीब ओकर घर मे बाघ बाघिन आ नेना भुटका बाघ छई। कयेक एकड़ मे फैलल ओकर घर परिसर छई। फ्रीस्टेट शहर मे रहईत छलीह ओ अंग्रेजिन। तलाकशुदा अईछ।जे बाघ पोसत ओकरा लग बर कतअ सं रही पेतई। हमरो एकबेर नोत परल छल ओकरा कतअ जायक लेल, लेकिन नई जा सकलऊं।5लाख रूपया के करीब एकटा बाघक बच्चा के दाम होई छई। सबसं बेशी गाहक खाड़ी देशक लोक अईछ। जिज्ञासा भेल जे ई 80 प्राणी के भोजन भात केना होई छई। अई पर पता चलल जे ओई क्षेत्र मे बहुत लोक भिन्न भिन्न जानवर पोसने छईथ। बाघ बाली अंग्रेजन के मोबाइल नंबर सब के देल छई। जानवर के मरला पर अतअ खबर भअ जाई छई। आ ई मोटर पठा कअ मंगा लईत अईछ। अकर अलावा बकरी सब सेहो रखने अईछ जे बाघक भोजन होई छई। हमरा त ईयाह बुझल छल जे बाघ भुखले रही जायत मूदा दोसर के शिकार कैल नई खायत। अतअ सब उल्टा पुल्टा, बाघ मरलो जानवर खाईत अईछ।बाघक बच्चा सब एकटा नियत समय तक ओकर घरक भीतर रहई छई जेना कुक्कुर आ बिलाईर सब। ओकर बाद उमर बढ़ला के संग संग ओकर केज बनल छई। ओई मे राखल जाईत छई। हम तो ओई सहकर्मी के चेता देलियईन जे समधिन सं बईच कअ रहब। ओ बाघ के बच्चा बना कअ रखने अईछ। आहां के की बना देत से सोईच लियह। --x-- जहिना युगांडा मे लोक बहुत ही सुस्त स्वभाव के भेटत ओहिना साऊथ अफ्रीका मे तेज तर्रार आ समयक पाबंद भेटत। दुनु जगह भारतीय के स्थिति अलग अलग छई। एक जगह भारतीय रंगभेद के शिकार रहल अईछ तअ दोसर जगह अकरा पर रंगभेद करबाक आरोप लागल छई। साऊथ अफ्रीका मे भारतीय मूल के लोग गिरमिटिया मजदूर सं जनई छई- ओना सच्चाई ई नई छई।ओतुका भारतीय मूलक लोकक अनुसार सबसं पहिने 1771 मे एकटा साऊथ इंडियन धनिक व्यवसाई के सजा मे डच सबहक द्वारा केप टाउन भेजल गेल छलई।ओ अतई बईस गेल। गिरमिटिया मजदूर सब तअ 1860सं एतअ एनाई शुरू केलक। श्री एफ डी क्लार्क जे रंगभेद क समय साऊथ अफ्रीका के राष्ट्रपति रहल छथि आ उनकर स्थित कमोबेश भारतक माउंटबेटन बला छलईन। ओ अपन आत्ममकथा मे " पुर्वज के रुप मे वीर बंगाली बाला " के चर्चा केने छथि। अई सं सेहो अई बात पर जोड़ परईत अईछ जे भारतीय सब पहिने सं साऊथ अफ्रीका के श्वेत परिवार मे उपस्थित छथि। अकर अलावा बहुत रास गुजरात क व्यवसाई सब सेहो आयल अईछ।अही व्यवसाई सब मे श्री प्रवीण गोर्डन (असली मे गोबर्धन) आ अनवर सुर्ती छईथ। ई दुनु गोटे संप्रति साऊथ अफ्रीका मे मंत्री छईथ। श्री प्रवीण गोर्डन के त भारत सरकार पद्म भूषण स सेहो सम्मानित केलकईन। गिरमिटिया मजदूर सब मे सं सेहो कयेक गोटे राजनीति मे नीक हस्ती बना लेला अईछ। हमरा ओतुका स्वतंत्रता सेनानी "नानासीता" के वृद्ध बेटी सं भेंट करबाक मौका लागल।ओ कहली जे उनकर पिताजी सब भारतीय के कहथिन �� आहां सब भारतक प्रतिनिधि अतअ छी। एहन कोनो काज नई करू जईसं भारत के बदनामी हुअय। "नाना सीता" के नाम पर प्रिटोरिया के प्रमुख सड़क क नामकरण भेल अईछ। ई सब देख कअ गर्व होई छई। एक टा भारतक वरीय अधिकारी नाना सीता सं किछु ईच्छा पुछलकिन त ओ बजलीह �� महात्मा गांधी हमर आदर्श छथि। आहां उनकर आत्मकथा अतुका भारतीय बाहुल्य स्कुल सब मे उपलब्ध करा दियऊ जई सं भारतीय नेना भुटका सब उनका बारे मे पईढ़ सकय आ किछु बुईझ सकय।� हम अई वार्ताक साक्षी रही। हमर सम्मान ओतुका भारतीय सब के प्रति आर बईढ़ गेल। साऊथ अफ्रीका के रंगभेद नीति के जतेक निंदा कयल जाय से कम छई, मूदा ओ देशक विकास क लेल दूरगामी नीति सब अपनेलक। हमरा सबसं बेशी आकर्षित कयलक ओकर देश के सब शहरक विकासक द्ष्टा। प्रिटोरिया मे राष्ट्रपति क कार्यालय छई, जेकरा " युनियन बिल्डिंग" कहल जाई छई। अकर नक्शा बहुत किछु भारतक राष्ट्रपति भवन सं मिलई छई। पुछला पर पता चलल जे अतुका युनियन बिल्डिंग आ भारतक राष्ट्रपति भवन क निर्माण मे एक गोटे के योगदान छईन। ओ महानुभाव छईथ " हर्बट बेकर"। अकर परिसर मे नेल्सन मंडेला के बड़की टा मूर्ति लागल छईन। मंडेला के मूर्ति सं आशीर्वाद लई लेल नब बिबाह भेल दम्पत्ति सब रईब दिन अबई छईथ। ओना दु तीन टा बियाह अतअ मंडेला स्टेच्यू लग सब रईब क आब होईत रहई छई। हमरा जेकां पर्यटक सब मंगनी मे बियाह देखअ के मजा लईत छईथ आ नीक संस्मरण ल कअ जाई छथि। ओतुका संसद "केपटाउन" आ सर्वोच्च न्यायालय "ब्लुमफाऊंटेन " शहर मे छई। अई कारण देश मे सब कात विकास भेलई। भारतक दिल्ली जकां एक्के शहर पर जनसंख्या क सब बोझ ई संस्था सब के रहबाक कारण नई भेलई।अगर भारत मे अहिना एक शहर मे राष्ट्रपति आ प्रधानमंत्री, दोसर शहर मे सर्वोच्च न्यायालय, तेसर शहर मे संसद आ चारिम शहर मे व्यवसायिक प्रतिष्ठान भअ जाई त ओ देश के एकसुत्र मे बंधबाक संग चहुंओर विकास क भावना के निश्चित बल देतई। ओहिना ओतुका सब कैबिनेट के मंत्री सब के रहबाक लेल राष्ट्रपति भवनक सटले एकटा परिसर बनल छई। सब मंत्री ओही मे रहईत छईथ। सुरक्षा आ सुचिता दुनु दृष्टिकोण सं हमरा नीक कदम लागल। भारतीय सब ओतअ बड्ड उद्यमी छईथ। बहुत विकास कअ रहल छथि। भारत के नागरिक नहियो रहला पर भारतीय राजनीति पर नजर गड़ौने रहईत छथि। HSS(हिंदू स्वयंसेवक संघ) ओतअ काफी प्रभावी अईछ। हमरा पीटरमैरिजबर्ग यात्रा के दौरान एकटा दक्षिण भारतीय भेटलाह। ओ शिवानंद स्वामी, हरिद्वार सं जुड़ल छथि।ओ कहलाह जे उनकर प्रपितामह मजदूर रूप मे एतअ आयल छलाह। अपना संग ओ किछु मिरचाई के बिया अनने छलाह। पहिने अपन घर के चारु कात मिरचाई लगेलाह, ओकर बाद अपन अंग्रेज मालिक सं किछु जमीन लीज पर ल कअ मिरचाई के खेती शुरू कयलाह। अतुका लोक के ईनकर मिरचाई नीक लगलईन। अई सं खुब कमेलाह। एक समय एहन आईब गेलईन जहिया उनकर सम्पईत, अंग्रेज मालिक सं बेशी भअ गेलईन। ई दिन उनका लेल सबसं खुशी के दिन छलईन। बाद मे उनकर परिवार आध्यात्म सं जुईर गेलईन।उनकर प्रपितामह नेटाल कांग्रेस के संस्थापक सदस्य छलाह। पीटरमेरिजबर्ग उयाह शहर अईछ जतअ गांधी जी के ट्रेन पर सं धक्का माईर कअ उताईर देने रहईन। अतई स्टेशन मास्टर के कक्ष मे ओ राईत बितेने रहईत। अकर बाद अतअ गांधी जी रंगभेद क खिलाफ आंदोलन शुरू केने छलाह। ओहिना गांधी जी द्वारा स्थापित फीनिक्स आश्रम जखईन गेलऊं त देखलऊं जे अकर सैकड़ों एकड़ जमीन पर स्थानीय लोक सब अवैध कब्जा कअ लेने अईछ। फीनिक्स आश्रम के आसपास क एरिया मे अपराध प्रवृति के बेशी लोक रहईत अईछ। सालो गांधी जी आ बा (कस्तुरबा) अतअ रहलीह। स्कुल चलेलीह, अखबार निकाललीह, साफ सफाई के पाठ पढ़ेलीह आर कयेक तरहक सामाजिक काज सब अतअ कयलीह। ओई जगह पर जाय मे "डरक" बात हमरा नई हजम भेल। दिसम्बर महीना मे फीनिक्स आश्रम मे आमक गाछ फर सं लदरल छल। स्थानीय केयरटेकर सं अनुमति लअ हमर श्रीमतीजी आम तोड़लीह। ओ आम छल- जर्दालु। हम अई आम के यादक रूप मे संग अनलऊं। अखईन गांधीजी के परपोती ईला गांधी डर्बन मे रही रहल छथि। ओ गांधी जी के अलख जगौने छथि।ओना बेशी सांकेतिक छईन। ओ ओतुके स्थानीय लोक सं बियाह केलीह लेकिन बियाह बेशी दिन नई चललईन। बहुत ही सरल स्वभावक महिला छथि। उनकर बेटा डर्बन मे कम्प्युटर व्यवसाय सं जुड़ल छथि। भारत मे रहितईथ त संसद सदस्य त बईने जईतईथ। उत्सव आ सरकारी समारोह मे टा लोक याद करई छईन। ओहिना गांधी जी द्वारा स्थापित "टालस्टाय आश्रम" के स्थित नीक नई लागल। मूल आश्रम के जमीन तक गायब भअ गेल छलई। चारु कात ई़टा भट्ठा सब के जमीन छलई। बाद मे सरकारी आग्रह पर ओ ईंटा भट्ठा मालिक किछु जमीन गांधी आश्रमक लेल देलकई। अखईन ओकर विकास क लेल प्रयास चईल रहल अईछ। ईहो जगह के चारू कात अपराधी प्रवृत्ति के लोकक बोलबाला। दिन दिन मे सरकारी समारोह खास दिन मे होईत अईछ, ओकर बाद सुन्न सपट्टा। कखनो काल हमरे जेकां कियो भूलल बिसरल ओतअ पहुंच जाईत अईछ। ओहिना जोहानिसबर्ग मे जे गांधी जी के बैरिस्टर के रूप मे जे कार्यालय छलईन ओकरो निशानी गायब। ओ मकान बिकाईत बिकाईत आ नक्शा बदलईत आब भीर मे हरा गेल अईछ। ओतुका सरकार अकर भरपाई मे ओतअ गांधी जी के मूर्ति लगा देने अईछ आ ओई चौराहा के नाम "गांधी स्कावयर"राईख देने अईछ। ओना उनकर मूर्ति देख कअ गर्व होईत छई। आखिर हम सब ओई देशक वासी छी जतअ गांधी जी जन्म लेने छलाह। सबसं अचरज लागल जे ओतुका मूल निवासी के गांधी जी मे कोनो दिलचस्पी नई छई। ओकरा सबहक अनुसारे गांधी जी भारतीय सबहक लेल संघर्ष आ आंदोलन कयलाह। स्थानीय लोक क लेल उनकर संघर्ष नई बराबर छईन। सच्चाई जे भी हो, ओतुका लोक के गांधी जी के याद के नीक जेकां संजो क राखअ चाही, जेकर जरूरत छई। --x-- दक्षिण अफ्रीका ततेक ने रंगभेद क दंश झेल चुकल अईछ जे आब ओ सब अपन बात बेबहार मे बेशी सतर्क रहईत अईछ।श्वेत सब बेशिये लिबल रहत।तखनो अश्वेत सब गाहे बेगाहे रेसियल होबाक आरोप लगबईत रहई छई। "चलता है" बला भारतीय एप्रोच सं ओ सब बचबाक प्रयास करईत अईछ। एकटा ओतुका अश्वेत चालक अपन मोटर के सड़कक बगल मे पार्क कअ क ठार छल। तखने एकटा श्वेत मोटरबाला एलई आ अई पार्क कयल मोटर के फोटो खींचलक आ अई चालक के सेहो कहलक जे आहां अतअ किया गाड़ी लगौने छी। ई त पार्किंग के जगह नई छई। ई अश्वेत चालक ज़बाब देलकई - "आहां तीन मे कि तेरह मे", आहां पुलिस त नई छी। हम आब जायबला छी। आहां अपना सं मतलब राखु। बस की छलई। अगला दिनक अखबार मे ई गलत जगह मे पार्क कयल मोटर के फोटो छपलई। फेर ट्रेफिक विभाग सं चलान सेहो एलई। अश्वेत चालक के कहबाक छलई जे ओ ज्यों श्वेत रहितय त नई कियो फोटो खीचतय आ नई बात ओतय बढ़ितय। अतअ फफरदलाली मे अहिना लोक बीच मे कुईद पड़ई छई। "काजीजी दुबले क्यों, शहर के अंदेशे से"- बहुत लोक देश लेल चिंतित रहईत अईछ।श्वेत सब के ई होईत रहई छई जे अश्वेत सब शहरी अनुशासन के ठीक सं पालन नई करईत अईछ आ ईनका सबके सिविक सेंस सेहो ओतय नई छईन। बाजत त नई, लेकिन भाव भंगिमा सं बुझा देत। एकटा आंखिक देखल घटना सं आर फरिछा जायत। हम राईत मे भोजनक बाद भारतक लेखे अपन गली मे टहलईत रही। हमर घर सं तीन घर छोईर कअ एकटा एशियाई युवक रहईत छलाह।ओई राईत दु टा युवती आ एकटा आर युवक उनका कतअ आयल छलईन। अई चाईर गोटे मे दु श्वेत आ दु अश्वेत छलाह।अपन बालकोनी मे बईस कं ओ सब राजनीतिक बहस करईत छलाह। गप्प सब सं बुझायल जे बेशिये पढ़ल लिखल छलाह ओ सब। एक्टिविस्ट कही सकय छी। बहस मे मतैक्य नई छलईन।बिरोध भेला पर एक दोसरा के अपन पक्ष मे किछु ऊंच आवाज मे तर्क दई छलखिन। हम टहलईत ईनकर सबहक बहसक आनन्द लईत छलऊं।तखने ईनकर पड़ोसी महिला बाहर एलीह। उनकर मूंह बिचकाबअ के ढंग सं पता चईल गेल जे ईनका ई बहस कनिको नीक नई लगलईन। नीक छोड़ु, बेसिये अधलाह लगलईन। ओ अई बहस करईत लोक के त किछु नई कहलखिन लेकिन गेट पर आईब कअ सुरक्षा कर्मी के शिकायत केलखिन। ओ सुरक्षाकर्मी तखने ओई घर बाला सब के इन्टरकाम पर कहलकई। बहस बीच मे ही रुईक गेलई। आ चारू गोटे फुसफुसा कअ थोड़े काल गप्प केलाह आ हमरा जनईत बिन निष्कर्ष के बहस मे विराम लाईग गेलई।ओ महिला हमरो कहली जे अतेक जोर सं ई सब बाईज रहल छलाह। आहां किया ने मना केलियईन। उनकर बजला सं तअ अहुं के टहलअ मे दिक्कत भेल होयत। हम ईनका सब तरफ सं माफी मंगई छी। ईनका सब के रहअ नई अबई छईन। कनी काल बाद पुरा शांति भअ गेलई। हम उनका की कहितियईन जे जोर सं बजनाई त हमरा खराब कनिको नई लागल। हम त अई आवाज के रेहल खेहल छी। हमरा त सुन्न सपट्टा अपरतित लगईत रहईत अईछ। हम त ओई समाज सं आयल छी जतअ दु लोक के झगड़ा सुनबाक आनंदे अलग छई। लोक झगड़ा छोड़बाक बदला ओई मे नोन तेल लगबईत छई। सब बहस /झगड़ा मे तर्क होई वा नई, सबके चढ़बअ बाला लोक भेंट जाई छई। अपन घर मे हम कुरहारिये नाथब, दोसर हमरा की कहत। हमरा अतअ त खानगी अतेक जोड़ सं होई छई, बड़का बड़का लड़ाई मे ओते हल्ला नई। हम सब तअ ताश जितला हारला पर, या खेल मे बईमानी पकड़ेला पर एना गला फाड़ई छी जे जेना कीदन भअ गेल होई। अपन कमी ओकरा किया बतेतियई। हम हां मे हां मिला कअ घर घुरी अयलऊं। अई मे के पार्टी बनिताय। हमरा जे अई मे नीक लागल जे ओ चारू युवा, कोनो विरोध नई केलकई आ शांत भअ गेलई। की अपना कतअ सोसाइटी मे हमरे दरमाहा पर राखल गार्ड अतेक साहस करत जे हमरा धीरे बाजअ लेल कहत।ई सब संस्था के प्रति आदर के भाव सं अयलई अईछ, ओ एक दिन मे नई होई छई। अतअ मोटरक हार्न कखनो नई सुनबई। आहां अपन घर क चौकीदार के गेट खोलबा मे देरी होबा पर सेहो हार्न नई बजा सकईत छी। हार्न बजेनाई आ गाईर/अपशब्द कहनाई, एक्के बुझल जाई छई। ट्रेफिक बहुतही अनुशासित छई। एहनो चौराहा सब छई, जतअ लाल बत्ती नई छई, कोनो मोटरक अवरजात नई, ओतऊ वाहन चालक सब मोटर रोकत,चारू कात देखत, तखने आगु बढ़त। हाईवे पर इमरजेंसी लेन हरदम खाली रहत, चाहे मेन लेन मे कतबो ट्रैफिक जाम भअ जाई, अपन लेन नई कियो पार करत। गाड़ी के गति के आधार पर लेन सब निर्धारित छई। एकटा आर परिपाटी हमर ध्यान खींचलक-ओ छल सड़क पर दुर्घटना। हमर एकटा सहकर्मी के कनिया के मोटर सं दोसर मोटर टकरा गेलईन। सहकर्मी के कनिया ओना त मूल रूप सं गोवा के छलीह, बाद मे मोजाम्बिक के नागरिकता भेटलईन। ओतअ सं होईत संप्रति भारतीय छथि। उनकर जीवनी दिलचस्प छईन, तहि लेल कनी बता दई छी। जखईन गोवा के भारत मे मिलावल गेलई, तखईन ओतुका लोक के ई आप्शन छलई कि चाहे त ओ पुर्तगाल के नागरिकता लअ सकई छी। गोवा पहिने पुर्तगाल क उपनिवेश छलई, तैं पुर्तगाल ओकरा सब के ई सुविधा देलकई। हमर सहकर्मी के कनिया के पिता पुर्तगाल जाय के निर्णय लेलाह। ओई समय मे उनकर कनिया गर्भ मे छलखिन। जखईन मोजांबिक मे उनकर जहाज पहुंचलईन त ओ सब ओतुका कोनो संबंधी कतअ गेलाह। तखने उनकर कनिया के मोजांबिक मे जन्म भेलईन। अई बीच मे ओ जहाज जा चुकल छल आ हमर सहकर्मी के ससुर किछु किछु जीविकोपार्जन करअ लागल छलाह। उनका सब के ओतअ नीक लाईग गेलईन। फेर व्यवसाय केलाह आ सुव्यवस्थित भअ गेलाह। हमर मित्र जखईन मोजांबिक गेलाह त भारतीय होबाक कारण ओई परिवार सं नजदीकी भेलईन,विवाह भेलईन आ अंततः उनकर कनिया फेर भारतीय भेलीह। एक्सीडेंट के सुचना अयला पर हमर सहकर्मी हमरो खबर कयलाह। हम अविलंब ओतअ पहुंचलऊं। चालक सब के कम चोट मूदा मोटर दुनु मे बेशी टुईट फुट भेल छलई।दुनु दिशक लोक आयल छल। दुनु घायल के दोसर राहगीर के गाड़ी मे अस्पताल पठा देल गेल छलई। बीमा कंपनी के खबर दअ देल गेल छलई। ओ क्रेन ल कअ आईब रहल छल। अतेक ने नमस्कार पाती दुनु पक्ष मे होई छलई जे हमरा बुझबे ने करय जे के कोन तरफ सं अईछ। अपने देश जकां पुलिस के इंतजार मे किछु घंटा लगलई। जखईन ओ सब आयल त बयान दर्ज कअ कअ विदा भेल। अतअ एक्सीडेंट मे दुनु पक्ष मानवीय आ संयमित व्यवहार करईत छई। कोनो ककरो पर दोषारोपण नई। अपना सब जेकां नई जे दस लोक के आहां बजाऊ आ बीस लोक के हम बजायब। सड़क पर फैसला लेल माईर पीट करब। कयेक बेर त पढ़ल लिखल लोक दुर्घटना मे नई घायल भअ कअ ओकर बाद जे दोसर पक्ष सं माईर पीट केलाह, ओई मे घायल होईत छथि। अतुका एक्सीडेंट के बाद जे ओकरा सं निबटअ के तरीका छई, से सही मे सरल छई। सब भार बीमा कंपनी पर पड़ई छई। मोटरक बीमा ओही सं मंहग छई। सब साल मोटर के रजिस्ट्रेशन आ बीमा करबअ पड़ई छई। ज्यों अहां के कार्यालय के एक आदमी एक्सीडेंट केलाह, त बीमा के प्रीमियम ओई अनुसार सब के बईढ़ जाईत। जिनका दुआरे प्रीमियम बढ़ई छई, उनका परोक्ष मे लोक उलहन दईत रहई छईन। --x� जेना एक समय मे पाकिस्तान मे जन्म लेल मनमोहन सिंह भारतक प्रधानमंत्री आ भारत मे जन्म लेल परवेज मुशर्रफ पाकिस्तान क राष्ट्रपति, ओहिना युगांडा आ रवांडा के राष्ट्रपति के छईन। ओना ओतेक दस्तावेज अई बारे मे नई छई। अतुका लोक के कहब छई जे युगांडा के राष्ट्रपति मुसेवनी के जन्म रवांडा मे भेल छलईन आ रवांडन राष्ट्रपति पौल कगामे के जन्म युगांडा मे भेल छईन। ई सब खानाबदोश जनजाति सं छईथ तैं ओहन कोनो पता ठिकाना नई होई छईन। अई सं मोन पड़ल जे मोबाईल फोन आबअ सं पहिने जेकर कोनो संबंधी पनिया जहाज पर काज करईत छलाह त उनकर घरक लोक जे चिट्ठी लिखई छलाह तअ ओई मे पता लिखअ सं पहिने पहुंचअ के तारीख अंदाज कायल जाई छलई- फलां तारीख तक मारीसस, फलां तारीख तक डर्बन, फलां तक केपटाउन के जहाजक कंपनी के पता होईत छलई। ज्यों जहाज के रस्ता मे देरी भेलई, फेर सब चिट्ठी कियो आने पढ़त। युगांडा आ रवांडा के बीच बढ़िया संबंध अखईन नई छई। सीमा पर तनाव चईल रहल छई। जकरा जतअ मौका लगई छई, दु चाईर टा के टपका दई छई। जखने ई जन्म स्थान बाला बात पता चलल, तखने मनमोहन सिंह आ मुशर्रफ दिमाग मे घुईम गेलाह। इतिहास अपना के दोहरबईत रहई छई- बुझबा के दरकार छई। सब राष्ट्राध्यक्ष सब के अपन अपन प्रतिबद्धता रहई छईन। भारत मे हमरे जेकां बहुत लोक के ईयाह बुझल छई जे जिनका अंग्रेजी बाजअ अबई छईन , उनका विदेश मे बड्ड सुभीता छईन।जखईन आहां रवांडा आ बुरूंडी देश जायब त सब अंगरेजिया बुधियारी घुसईर जायत। कियो अंग्रेजी नई बुझत। ओतुका भाषा फ्रेंच छई। रवांडा मे ईमहर ओमहर हाथ पाईर माईर कअ काज चलाईयो लेब, मूदा बुरूंडी मे तअ सब सफाचट।"ओझा लेखे गाम आ गऊंआ लेखे ओझा बताह" बाला स्थित भ जायत। रवांडा हमरा ईमहरका सबसं विकसित देश लागल। खुब चिक्कन चिनमुन सड़क। सड़क सं लालु यादव के हेमा मालिनी प्रसंग मोन पड़ा जाईत अईछ।चारू कात काॅफी आ चाहक बगान सब। सड़कक कात रंग बिरंगा फुल, खुब साफ सफाई, शहर मे कोनो मोल मोलई नई, एक दाम समान सब के, सड़क पर भारतीय कंपनी के मोटरसाइकिल चारु कात छीटल, (अतुका लोक परिवहन मोटरसाइकिल छई), हफ्ता मे एक दिन सामुहिक श्रमदान, कोनो लुटपाट के डर नई,देश भक्ति के बात आर आन आन गप सब। जखईन आहां एकतरफ ई विकास देख रहल छी त दोसर तरफ अकर यात्रा सेहो किछु जननाई जरूरी छई।अहिना सबदिना नई छलई। दुनिया के सबसं पैघ जाईतक नाम पर नरसंहार अतई भेल छलई, ओहो बेशी दिन पहिने नई- बस पच्चीस बरख पहीने। एकतरफ दक्षिण अफ्रीका मे रंगभेद शासन खत्म भेल आ पुर्वी अफ्रीका मे अतेक पैघ जाति संहार। बहुत छोट दुनिया छई ज्यों बुझई लेल सपरतीब छी, नई त दरभंगो दुर छई। रवांडा आ बुरूंडी पड़ोसी देश अईछ। युगांडा सं सटल अईछ।1884 मे जखईन बर्लिन सम्मेलन भेल छलई, ओई मे अफ्रीका के देश सब के सीधा लाईन खींच कअ सीमांकन कयल गेलई आ युरोपीय देश सब आपस मे बांईट लेलक। ई तहिना छलई जहिना पहिलुका मिथिला के जमींदार परिवार सब मे दियादी बंटवारा मे नौकर चाकर बंटाई छलई। रवांडा आ बुरूंडी, जर्मनी के हिस्सा मे एलई। जर्मनी अतुका राजा के मिला कअ अपन काज निकलबा रहल छल, जेना अंग्रेजबा सब भारत मे करईत छल। साम-दाम-दंड-भेद, राज करबाक ई नीति छलई। पहिल विश्व युद्ध के बाद बेल्जियम के हिस्सा मे रवांडा आईब गेल छलई।अतअ तीन टा मूख्य जनजाति सब छलई- हुतु, तुत्सी आ तवा। हुतु बहुसंख्यक छल। प्रतिशत मे बंटबई तं हुतु -85 प्रतिशत, तुत्सी -14 प्रतिशत आ तवा-1प्रतिशत। एक तं संख्या बेशी, उपर सं हुतु जनजाति के मूल इथियोपिया छलई, तैं ई सब अपना के आर्य सब जेकां श्रेष्ठ बुझईत छल। इथियोपियाई मूल के अफ्रीका मे श्रेष्ठता छलई। जर्मन सब सेहो तुत्सी जनजाति के बेशी मोजर दईत छलई। जखईन प्रथम विश्व युद्ध के बाद बेल्जियम अतुका कर्ता धर्ता भेल त ओहो तुत्सी के मोजर बरकरार रखलकई आ सब के एकटा परिचय पत्र देलकई, जईमे " जाईत" लिखल छलई। ई हाल भअ गेल छलई जे "धनिक हुतु" के " आदरणीय तुत्सी "कहल जाय लागल छलई। जखईन आहां अंखिदेखार एक टा के मोजर बेशी देबई तअ दोसर मे प्रतिक्रिया हेबे करतई।अई सब सं हुतु मे बहुत बेचैनी छलई।अकरा हवा फ्रा़ंस देबअ लगलई। अकर संग एकटा धार्मिक संस्था सेहो आईब गेल छलई। धीरे धीरे ओहो सब सत्ता मे आबअ लागल। अही बीच मे रवांडा आ बुरूंडी, दुनु के राष्ट्रपति जे कि हुतु जनजाति सं छलाह, के किगाली मे हवाईजहाज मे मिसाइल सं माईर देल गेलईन।अही पर शुरू भअ गेल जाईतक नाम पर संहार।अई सं पहिने नाजी - जर्मनी मे आ खमेर रूज - कम्बोडिया मे जाति संहार भेल छल। रवांडा मे 7अप्रेल1994सं 15जुलाई1994 तक नरसंहार भेल।हुतु जे की अल्प संख्यक छल ओ बहुसंख्यक तुत्सी के नृशंस तरीका सं हत्या केलक। दस लाख सं बेशी लोक परिचय पत्र देख कअ मारल गेल।पांच लाख सं बेशी महिला सब सं वीभत्स तरीका सं व्यभिचार कैल गेल। कयेक लाख लोक ओतअ सं परा गेल आ रिफ्युजी भअ गेल। विश्व के जानल मानल शक्ति शाली देश सबहक प्राथमिकता खाली युरोपिय लोक के बचा कअ लअ जाय पर रहईन। अई जातिय नरसंहार गाम गाम आ महल्ले महेल्ला मे पहुंच गेल छलई। गाम मे सब एक दोसर के जाईत जनिते छलई, तैं हत्या करबाक सं पहिने सोचबो के समय नई लेलकई। पड़ोसी पड़ोसी, गऊंआ गऊंआ आ सहकर्मी सहकर्मी के हत्या केलकई।बेशी हत्या सब टांगी, खंती, कोदाईर, राड ई सब सं भेल छलई। बाद मे अई नरसंहार के रोकबा लेल पौल कगामे, युगांडा सं सेना के एक टा टुकड़ी लअ कअ अयलाह, आ शांति बहाल करअ मे सफल भेलाह। ओतुका लोक उनका सं उपकृत भअ उनका अपन राष्ट्रपति बनेलकईन। पुरा रवांडा मे चारु कात लाशे लाश परल छलई। ओई मृत शरीर सब के ईज्जत दईत एक जगह दफनावल गेलई आ ओतई "जेनोसाईड मेमोरियल" बनावल गेलई। अई मे नरसंहार सं जुड़ल सब टा सुचना आ फोटो सब राखल छई। ओ देखला पर विश्वास नई होई छई जे मनुक्ख अतेक नृशंस अखनो भअ सकईत अईछ। एकटा परिचित रवांडा मे भेंट भेला पर कहला कि हम फुलवारी मे बेशी कोरियईनी नई करई छी, कियैक कतऊ कखनो मनुक्खक हड्डी गुड्डी सब भेंट जाईया। देख क जे मोन खिन्न होयत ओई सं नीक कोरबे नई करब। नरसंहार के बाद मनुक्खक लाश सब जखईन सरअ लगलई त लोक के जे जतअ जगह भेटलई, ओतई माईटक तर मे गाईर देलकई। अई नरसंहार मे के जज, के प्रोफेसर, के वकील, के पुलिस, के आम, के खास कियो नई छुटल। पुरे रवांडा मे मात्र पचास टा वकील जीवित बचल छलाह, जे लोकक केश लड़ताह। आब जे हम असल बात आहां सब के बतबअ चाहई छी ओ अईछ जे सब रवांडियन अई घटना के बिसईर गेल अईछ। अकर कोनो चर्चा ओ सब कखनो नई करत। जेकर संतान मरल छई, जेकर माय बाप मरल छई, जेकर कनिया वा बर मरल छई, जकर संगी साथी मरल छई, ओ सब आब अई अध्याय के बंद कअ देने अईछ। ओकरा अनुसार, अगर आहां अकरा बिसरब नई, तं नब समाज के निर्माण कोना होयत। जातिगत वैमनस्यता के ओ सब तिलांजलि दे देने अईछ। जातिगत वैमनस्यता कतेक वीभत्स होईत छई, ओई सं आहां सबके अवगत करबअ चाहईत रही। --x�
अतअ अफ्रीका मे एक टा आर गुण हमर ध्यान खींचलक ओ छल "गलती गछनाई"। जखने मनुक्खक जोनि मे जन्म भेल, गलती त हेबे करत। जे गलती नई करताह/करतीह ओ त भगवान/भगवती भअ जेताह/जेतीह। तैं सब जगहक मनुक्ख सं गलती होई छई।ई स्वभाविक छई। अतअ हमरा कयेक बेर मौका लागल, जईमे स्थानीय लोक अपन गलती गछलक। भारत मे किछु भअ जायत, गलती गछत नई। अंखदेखार गप्प होयत, तखनो नई मानत। आहां के जे करबा के अई, कअ लियअ, ओ अपन गलती नई कहत। ईमहर ओमहर के बड़की टा ढीम पलासी सुना देत, लेकिन अपन दोष नई बतैत।अकरा "थेथर" कहियो या "गलगर", ई प्रजाति अपना दिस बहुतायत मे भेटत। साऊथ अफ्रीका के क्रिकेटर हैन्सी क्रौनिये के खिस्सा बुझले होयत। ओ गलती केलक, गछलक आ सजा भुगतलक। अपना देश मे देखु, की सब दुध के धोवल छथि। ओतेक आंगुर उठलेन, जेहलो गेलाह, मीडिया के आगु कनबो करई गेलाह लेकिन कियो नई गछलाह। ओतअ कोर्ट कचहरी मे सेहो गलती माईन कअ सजा लोक काईट लईया। कम सं कम बाकी जिनगी त शुकुन सं बीतय छई। अपना कतअ रंगे हाथ पकड़ायत, तखनो बचबाक लेल जे भी संभव होई, ओकर पाछु लागल रहत। एकटा छोट दृष्टांत बतबई छी। एकदिनआफिस जाय काल देखई छी जे हमर मोटर के पाछु दोसर मोटर एना राखल छल जे हम अपन मोटर नई निकाईल सकई छी। चौकीदार के कहलियई। ओ ओई मोटर के मालिक कतअ गेल। मोटर के चाभी घर मे नई छलई। ड्राईवर जे स्थानीय छल, ओ चाभी संग बाहर निकईल गेल छल। ओकर मोबाइल फोन लाईग नई रहल छलई। पन्द्रह मिनट बीत गेल। फेर हम सोसायटी के केयरटेकर के कहलियई।ओ कहलक जे फोटो खींच कअ पठा दियह, हम अई ड्राईवर के ब्लैकलिस्टेड करा देबई। ओकरा अतअ आबअ मे प्रतिबंध लाईग जेतई। हमरो ओई ड्राईवर पर क्रोध आईब रहल छल जे कतअ गेल। ओना ई बात नई छल जे हमरा बड़ड्ड देरी भअ गेल छलाह। अहु सं देरी सं आफिस गेल छी। जखईन अपना सं छोट हैसियत वाला के कृत्य सं असुविधा होई छई तं क्रोध बेशी अबई छई। अगर ओ मोटर कोनो पैघ लोक के रहितई त हमहु ओकरा सामान्य बात मे लअ लईतऊं।ईयाह गुनधुन चलिते रहय त ओ स्थानीय चालक आईब गेल। ओ देखिते बुईझ गेल जे ओकरा कारण हमरा असुविधा भेल अईछ। ओ दुनु हाथ के जोईड़ कअ अपन गलती मानलक आ कहलक जे हमरा कारण जे आहां के असुविधा भेल, ओई सं हम दुखी छी। आहां जे सजा देब, हम ओकरा सहर्ष भुगतब। हम जखईन कहलियई जे फोन किया नई आहां के लागल त ओकर जवाब छल-" उयाह टाकटाइम भरबअ त गेल रही। दोकान मे भीड़ छलई, तैं देरी भअ गेल"। ओकर निश्छल ज़बाब सुईन कअ हमर क्रोध कतअ चईल गेल, से बुझबो नई केलियई। अहिना एकटा भारतक घटना याद आईब गेल जई मे एकटा पढ़ल लिखल लोक एहने गलती केने छलाह लेकिन मानई लेल तैयार नई भेलाह। आब अफ्रीका के अश्वेत बिन पढ़ल लिखल लोक के नीक कहबई, कि अपन देश के शिक्षित ढीठ के। अई सं ई नई बुझु जे ई सब राजा हरिश्चंद्र अईछ। सबसं असली जे युगांडा के स्थानीय लोक के कमी हमरा लागल ओ छई "समयक पाबंद नई रहनाई"। जेना अपनो देश मे बेशी लोक लेट लतीफ होईत छईथ, अतअ एक डेग आर आगु। समय द देत जे अतबा बजे अबई छी। समय बीतला के थोड़े देर बाद जखईन आहां फोन करबई त कहत जे रस्ता मे छी। नई अयला पर आहां फोन करबई त ज़बाब देत जे "एराउंड" छी। फेर नई आयत आ नई फोन उठायत। बाद मे फोन उठायत त कहत जे आई हम दोसर शहर आयल छी, नई आईब सकब। हमरा ई नई बुझायल जे ओ अंत मे कहई छई कि हम आई नई आईब सकब, ओ बात पहिले बेर मे कियैक नई कहई छई। हम लागल छी ई राज बुझबा लेल, जखईन पता चईल जायत त अहुं सब के बतायब। अतअ युगांडा मे स्थानीय अश्वेत सब अंग्रेजी बड्ड सुन्नर आ लच्छेदार बजईत अईछ।लाल बत्ती सब पर लोक ठार भअ कअ अनेरो भाषण दईत रहत। जेना अपना देश मे नेता सब के नुक्कर पर भाषण होई छई, ओहिना अतअ ओ गोलम्बर आ लाल बत्ती सब पर भाषण दईत भेटत। ट्रैफिक जाम बहुत बेशी अतअ होई छई। सब ट्रैफिक चौराहा सब पर हाकर के भीड़ भेटत। खुब मोल मोलई होई छई। भारतीय एक रूपया, करीब पचास युगांडन शिलींग के बराबर होई छई। लाख दु लाख शिलिंग सं कम मे त तरकारियो के बजार नई कअ सकई छी। स्थानीय लोक क आर्थिक स्थिति पातर छई। पाकल कटहर आ केरा खुब खाईत अईछ ई सब। कटहर के तअ जंगल सब छई। तरकरिया आ कोआ बला कटहर दुनु लुधकल फरल रहई छई। अतअ के माल जाल के सिंघ बड़की बड़की टा होई छई। गाय-बड़द सबहक सिंघ देखते बनई छई। अई बड़का सिंघ सब के रंग ढौड़ कअ कअ बेचलो जाई छई। भारत मे गाय बड़द के सिंघ बिकाईत नई देखने छेलियई। अतअ ई अजुबा लागल। जखईन एन्टेबे एयरपोर्ट पर आहां पहुंचअ के करीब होयब तअ आहां के चारु दिश पाईने पाईन देखायत।हैत कि कोन समुद्र क कात आईब रहल छी। ई समुद्र नई थीक, ई अईछ "विक्टोरिया लेक"।बड़की टा लेक छई। समुद्र जेकां अकर "बीच" सब छई। लोक छुट्टी मनबअ वा सैर सपाटा करअ अतअ जाईत रहईत अईछ। अई लेक मे "मगरमच्छ " के हुजुम देखायत। छोट पैघ मगरमच्छ सब पकईर कअ एकटा दरबानुमा जगह सब मे राखल भेटत। बहुत रास मनुक्ख अई मगरमच्छ सबहक भोजन भअ चुकल छईथ। अखनो अई लेक के कात करौट सं लोक एकाएक गायब भअ जाईत अईछ। ओ सब अई मगरमच्छ सबहक ग्रास भअ जाईत अईछ। बाकी लेक के कात बहुतही मनोरम छई। ओहिना रवांडा मे "लेक किवु" छई। ईहो समुद्र जेकां विशाल आ विकराल लगई छई।अई लेक मे एकतरफ त रवांडा देश आ दोसर दिस सटले कांगो देश छई। रवांडा दिश बेशी भीड़भाड़ नई छई लेकिन कांगो दिश खुब भीड़ छई। दिल्ली के चांदनी चौक जेकां लोकक भीड़। अई शहरक नाम "गोमा" छई। रवांडा मे पुरा शांति आ बगले मे कांगो मे कखईन की भअ जायत से कियो नई कही सकईत अईछ-तेहन हाल। पहिने बिहार मे "गोमा" के जैकेट के बड्ड चलती छलई। गोमा मतलब गरम जैकेट होई छल। ओई गोमा आ अई कांगो के बीच कोनो संबंध छई-से नई पता चलल। लेक किवु करीब नब्बे किलोमीटर लंबा आ पचास किलोमीटर चौड़ा अईछ। लंबाई चौड़ाई बुझबाक लेल बहुत अईछ जे कतेक पैघ अईछ।अई लेक के भीतर सं "मिथेन" आ कार्बन डाइऑक्साइड निकलई छई।कयेक बेर पहिने पाईन मे सं आईग निकलई। बाद मे मिथेन गैस के पता चललई। छोटकी छोटकी नाव सब अतअ रहई छई, ओ आहां के मिथेन प्लांट के पुरा चौहद्दी घुमा देत। अई मिथेन प्लांट सं बिजली बनावल जाई छई।जे लेक पहिने अभिशाप बुझल जाई छलई, निरीह लोक आईग मे फंईस कअ जईर जाई छलाय, से आब ओतुका लेल बरदान भअ गेल छई। ओई बिजली बेचला सं सरकार के पाई आ विकासक रस्ता खुईज गेल छई। रवांडा दिस एकटा बड़का होटल छई आ ओ समुद्र क "बीच" जकां सब बात बेबसथा रखने अईछ। अई पुर्वी अफ्रीका मे सेहो एक धर्म विशेष क लोक पर आतंकवाद के प्रश्रय देबाक आरोप लगईत रहई छई। संयुक्त राष्ट्र संघ के सेहो बहुत रास विभाग सब कार्यरत अईछ। रिफ्युजी के समस्या सेहो विकराल ठार छई। कतेको लोक एहन छई जेकर कोनो पता नई। कतअ सं आयल, कतअ जायत सब अधर मे छई। तरह तरह के बीमारी नई, महामारी सब उपरईत रहई छई। हमर एकटा मित्र कहला कि अतुका देसिला बीमारी सब के अतई ईलाज छई। दोसर देसक डाक्टर बीमारी बुझबो नई करत।तैं अतई लोक टीका तीका लईत रहईत अईछ। पुरा अफ्रीका मे सफारिये सफारी। एहन एहन सफारी जे एक देश मे घुसु आ दोसर देश मे निकलु। क्रुगर नेशनल पार्क, साऊथ अफ्रीका की, दुनिया के नामी सफारी अईछ। ओकरे सटल "गौड्स विंडो" सेहो प्रकृत के अद्भुत लीला सब छई। खूब मनलग्गु जगह सब छई। घुमअ जायब त अबिते जाईत दिन बीत जाई छई। गुरिल्ला सब सेहो अफ्रीका मे आहां के देखायत। साऊथ अफ्रीका मे त ओकरा एकटा घेरा के अंदर रखने छई। आहां लोहा जाली सं देख सकई छी। युगांडा मे तअ आहां स्वच्छंद घुमईत गुरिल्ला के नेशनल पार्क सब मे देख सकईत छी। कनीक सावधानी अपनो बरतअ पड़ई छई। किछु दिन पूर्व एकटा अमेरिकन महिला टुरिस्ट के स्थानीय टुरिस्ट गाईड सहित अपहरण भअ गेल छलई। युगांडा सं लअ कअ तरे तर केन्या चईल गेल छलई। हल्ला छई जे बाद मे किछु लअ दअ कअ छुटलई। ई सब ओहिना जेना भारत सं अपहरण कअ कअ नेपाल मे लअ जाई छई।बोर्डर के तेहने हाल अतऊ छई। सब बोर्डर के नियम कानून नीक लोक लेल, अपराधी सब शार्ट कट अपन मारईत रहईत अईछ। हम सब अपन देश मे स्ट्रीट लाईट लगबअ लेल उफान मचेने रहई छी। जतअ गली मे ईजोत, ओ नीक जगह मानल जाईत अईछ। अकर उल्टा केपटाउन, साउथ अफ्रीका मे एक गोटे कतअ गेलऊं त रस्ता मे सऊंसे अन्हारे अन्हार। उनका कतअ पहुंचला पर उलहन दैत कहलियईन जे ई मोहल्ला भारत जेकां लगईत अईछ, सदरो अन्हार। लोको अतेक कंजुस जे दलान पर एकटा डिबरियो नई जड़ेने अईछ। ओ घरबईया हंसईत कहला- ई अतुका बड़का लोकक महल्ला छई। प्रकृति के कृत्रिम ईजोत सं ओकर वातावरण मे हस्तक्षेप के अवैध अतअ घोषित कयल गेल छई। नेचर सं कोनो छेड़छाड़ क मनाही छई, तैं आहां के रस्ता अन्हार लागल। अतअ अन्हार कैल गेल छई। जे घरों मे बेशी ईजोत करता, उनका अतुका समाज दंड देतईन आ सामुहिक निंदा करतईन। ओई डरे सब अन्हार केने छईथ। आहां घर मे पार्टियों मे बेशी हो हल्ला नई कअ सकईत छी। तखईन अपना के गर्व भेल जे अपन गाम घर ,अतुका हिसाबे वी आई पी क्षेत्र भेल, कियैक जे पहिने सऊंसे अन्हार रहई छलई। अशिक्षा रहलाक कारण अंधविश्वास बड्ड छई।अतअ लड़की बच्चा सं बेशी लड़का बच्चा के लोक रक्षा मे लागल रहईत अईछ। बेशी बच्चा सब के कान छेदल रहई छई। अकर जईड़ मे ई बात छई जे जई बच्चा के कोनो अंग भंग छई, ओकरा बलि जोगर नई मानल जेतई। ओ अशुभ भेल। अखनो गाहे बेगाहे, बच्चा के बलि के बात चर्चा मे अबईत रहई छई।अई सब सं डरबा के ओना नई छई। --x� अफ्रीकी देश सब मे प्रकृति ततेक ने संसाधन देने छई जे सब विकसित देश सब शुभचिंतक बनअ लेल आफन तोड़ने रहईत छई। अई मे सबसं आगु अईछ-चीन।ओहिना जेना भारत के पहिने " सोनाक चिड़ई" कहल जाई छलई, आ कयेक देशक लोक अकरा पर कब्जा जमबई लेल आतुर छलाह। अफ्रीका मे आहां कतऊ चईल जाऊ-"चीनी" लोक आहां के भेटबे करत। ई तहिना बुझाई छई जेना आजादी सं पहिने भारत मे सरकारी/गैरसरकारी, राजा/महाराजा आ रियासत कतऊ जाऊ, या तअ मालिक नई तं मुलाजिम अंग्रेज भेटिये जयताय। ओहिना चीनी सब हक हाल छई। दक्षिण सं पूर्वी अफ्रीका आईब गेलऊं, अतऊ ऊयाह हाल- जतअ जाऊ चीनक चर्चा। एक्सप्रेस-वे होई वा सामुदायिक भवन होई वा सरकारी भवन होई वा पुल -पुलिया, सब मे चीनी के योगदान। भारत मे सेहो अखने सरदार बल्लभभाई पटेल के बड़का मूर्ति चीन सं बनल अईछ। आम लोक सं जुड़ल काज सब मे ओ सब बेशी सक्रिय बुझाईत अईछ।ई जनता के विश्वास जीतबाक उपक्रम भअ सकईत छई। अफ्रीका की एशियाई देश सब मे सेहो ओकर उपस्थित देखना जाईत छई। हम जई दिश आहां सबहक ध्यान दिबावअ चाहई छी ओ अई अफ्रीका मे चीनी के बसनाई के बारे मे। ई एहन त नई अई जेना जे भुसकौल आ लफंडर अंग्रेज के इंग्लैंड, गुलाम भारत मे अधिकारी वा व्यापारी बना कअ पठा दईत छलई। अई सं एक त इंग्लैंड क अपन स्तर बनल रहईत छलई, दोसर ई युवा उच्छशृंखल लोक सब सं ओ मूक्त रहईत छल। ब्रिटेन के कम बुद्धिमता बाला अधिकारी सब के एशिया पठाओल जाई छलई। ओ सब "एक तअ राकस दोसर नोतल"। पहिनेहे सं अबंड्ड रहईत छल, उपर सं "पद " सेहो भेंट जाई भारत मे। आब की छलई, लगय आईग मुतअ भारत मे। अहिना सब के बुझल अईछ जे चीन आबादी के समस्या सं कतेक बरख सं जुईझ रहल अईछ।ओ सब अपन देश के लोक के अफ्रीका मे बसबअ के जोगार निकाललक। जे चीनी, ओतेक तेज आ देशक लेल ओतेक फायदेमंद नई ओकरा सब के किछु आर्थिक मदद कअ व्यापार व रोजगार करबाक लेल अफ्रीका पठा दई छई। अकर अलावा,जेना ब्रिटेन सब अपराधी सब के, सजा काटई लेल अपन उपनिवेश संयुक्त राज्य अमेरिका मे पठा दई छलई, ओहिना चीन जेकरा पर संगीन अपराधक आरोप वा दोषी नई छई, ओकरा सब के अफ्रीका मे जोगार सं पठा दई छई। अई सं दु फायदा होई छई, एक त जेहल पर खर्च कम होईत छई दोसर आबादी के नियंत्रित करबा मे मदद होईत छई। आब अफ्रीका के गाम सब मे परचुनक दोकान चीनी करईत भेटाईत।एकदम सं ओहिना जेना अपना सब दिश सब शहर की कस्बा मे राजस्थान क मारवाड़ी सब दोकान करईत भेंट जायत। एकटा आर देश क बारे मे नब गप पता लागल। ओतअ लोकक आमदनी के आधार पर सरकारी सुविधा के मोल होई छई। जेना आहां दरभंगा सं पटना बस सं गेलऊं। जेकरा आमदनी पचास हजार महीना छई, ओकरा बसक भाड़ा पांच हजार लगतई। ओहिना जकर आमदनी पांच हजार छई, ओकरा पांच सौ लगतई। बराबर दुरी के यात्रा केला के बावजूद किराया मे दसगुणा के अंतर। ओहिना कियो गैस सिलेंडर भरबबई आय तअ ओकर आमदनी के अनुसार ओकरा दाम लगतई।सबके एकटा कार्ड छई, ओई मे सब सुचना रहई छई। कार्ड सं ही भुगतान होईत छई। सब सरकारी सुविधा पर ईयाह पैमाना छई। दक्षिण अफ्रीका मे सेहो नगदक देबलेब कम होई छलई, सब कार्ड सं। पहिने साम्यवादी देश सब मे सेहो जरुरत के हिसाब सं सरकारी सुविधा भेटबाक गप छलई।अगर अधिकारी के धीया पुता नई छईन तं उनका दु कमरा के घर भेंटतई आ उनके चपरासी जेकरा पांच टा धीया पुता छई त ओकरा चाईर कमरा के घर सरकार देतई।अकर ई अर्थ नई जे सब चपरासी बनबाक चाहईत अईछ। ओहिना मारीशस मे आहां बियाह वा कोनो उत्सव मनबई छी त ओई मे कतेक लोक अऊताह आ की की भोजनक मेन्यू रहत, ओई मे सरकारक दिशा निर्देश रहईत छई। ओई फिरीस्त सं बेशी केलऊं त नोताहरी सब नीक नुकुत खेताह आ आहां के बाकी समय काल कोठरी मे बीतबअ परत। भारत मे बियाह, श्राद्ध आ जनऊ मे लम्फलम्फा आ देखाबा मे लोक के बिलाईत देखने छियई।मारीशस जे अफ्रीकी देश अईछ, ओतुका ई भोज भात पर लगामक परिपाटी हमरा आकर्षित केलक। ओहिना कयेक देश मे गंदगी फैलाबअ पर बड्ड सख्ती छई। अगर आहां कोनो कागज के बिना कुड़ेदान के कतऊ आर फेंक दई छियई त आहां के आर्थिक दंड देबअ पड़त। दक्षिण अफ्रीका मे बच्चे सं ई संस्कार देल जाई छई जे अपन आस पास के कोना साफ राखल जा सकईत छई। स्कुली बच़्चा ओ कोनो देशक हुआय, ओकरा सब मे ई भावना कुईट कुईट कअ भईर देल जाय छई। पुर्वी अफ्रीका अई मामला मे किछु दब बुझायल। --x� चोर-चुहार के बारे मे बहुत रास खिस्सा सब गोटे सुनने होयब।अपनो देश मे आर्डर पर मोटर के चोरी वाला गप गाहे बेगाहे अखबार आ समाचार मे अबईत रहई छई। कम्पाला मे एकटा चोरी के घटना बड्ड अजगुत लागल। कम्पाला मे कम्मे जगह वैध पार्किंग छई। स्थानीय अश्वेत सब मोटर पार्क करअ मे मदद करत आ ओकर बदला मे किछु ईनामक आशा करत। ज्यों एक बेर नई देबई त दोसर बेर आहांक पार्क कैल गाड़ी मे किछु उलट फेर कअ देत। हमर एकटा सहकर्मी कनी बेशिये काबिल छथि। ओ कखनो अई अश्वेत सब के एना पाई देबाक पक्ष मे नई रहई छथि। जखईन कतऊ गाड़ी पार्क करबाक काज रहतईन त ओ बेशी काल कोनो स्थानीय लोक के गाड़ी मे बईसा कअ लअ जेता।एक बेर बजार गेलाह आ ओहिना कार पार्क कअ क चईल गेलाह। पांचे मिनट मे घुईर कअ अयलाह। ताबईत गाड़ी के साईड मिरर आ अगिला शीशा चोरबा पार कअ चुकल छलईन। स्थानीय लोक गाड़ी मे बईसले छलईन। एकटा चोरबा के आकर्षक मऊगी संगी हंईस हंईस कअ एकरा सं गप करअ लगलई आ दोसर ताबईत हाथ साफ कअ देलकईन। जखईन ओ घुरलाह त ओ मऊगी ईनको चवन्निया मुस्की दईत चईल गेलईन। ओ अई मुस्की मे लोटपोट होईत रहल आ ईमहर गाड़ी के सामान गायब भअ गेलईन। ओतअ सं निराश आ दुखी भअ आफिस घुरलाह। अपना अफसोस होईन जे किछु रखबारी द दईतियई, तं सामान नई खोईलताय। आफिस मे एकटा स्थानीय लोक फोन नंबर देलकईन जे आहां के जे सामान चोरी भेल अईछ, ओ अई नम्बर पर बता दियऊ। बजार सं सस्त मे ओ दोसर लगा देत। हमर सहकर्मी ओई नम्बर पर फोन कअ कअ कहलखिन।गाड़ी के मेक आ माडल ओ पुछलकईन। दोसर दिश सं ज़बाब एलईन जे काईल दिन मे आईब कअ लगा देब। अगर काईल नई आयब त परसु पक्के। काईल ओ लोक आयल आ नबे जेकां समान लगा देलकईन। पाईयो बजार सं आधा लेलकईन। उनका ई फायदा के सौदा लगलईन। ओ लोक अपन कार्ड देलकईन आ कहलकईन जे ककरो आर अहिना जरूरी होई त हमरा कहब। हमर सहकर्मी, हमरो ओकरा सं परिचय करेलाह। हम ओकरा ओहिना उत्सुकता मे पुछलियई जे आहां कम्म दाम मे नीक समान केना लगा दई छियई। ओ मासुमियत सं भरल ज़बाब देलक जे गाड़ी के मेक आ मोडल जं लोकप्रिय रहई छई त ओ भेटबा मे दिक्कत आ देरी नई होई छई।हमरा जखने ओहन गाड़ी देखाईत अईछ, तखने ओई मे सं खोईल लई छी।हम एक बेर मे एक्के टा आर्डर लई छी। जखईन ओकरा सप्लाई कअ दई छी, तखने दोसर आर्डर लई छी। किछु खास माडल के गाड़ी कम्पाला मे कम छई, ओकर आर्डर आईब जाईत अईछ, तखईन डिलिवरी मे समय लगईत अईछ।आब चांस के बात छई जे आहां बेर मे केहन मेन्टेन गाड़ी भेटईत अईछ। हमर सहकर्मी ई ज़बाब सुईन कअ एक बेर तं सहईम गेलाह लेकिन कम दाम मे नीक समान के लोभ मे चुपा गेलाह। अई मे चोरबो के फायदा आ जिनकर गाड़ी मे समान लगलईन, उनको फायदा। ओही सं नई शिकायत होई छई आ ई धंधा खुब फईल फुईल रहई छई। आब एकटा अजगुत परिपाटी के बारे मे बुझु। अफ्रीकी देश मारीशस मे शादी व्याह मे कम खर्चा के बारे मैं पहिनेहो बतेने रही।ओतअ बियाह मे भात, दाईल,अचार, कटहरक तरकारी सहित पांच टा आईटम मात्र भोज मे रहई छई। मंत्री सं लअ कअ संतरी के बेटी के बियाह मे ईयाह पांच टा मेन्यु रहतई। खाई लेल लोक सं कम टेबुल कुर्सी राखल रहई छई। जखईन खाली कुर्सी भेटत तखईन आहां बईसु आ खेनाई लियअ आ खाऊ।बियाह के बाद "रिसेप्शन" मे ओ सब पुरा ताम झाम देखबईत अईछ। ओई मे मेन्यु के बरखा करईत अईछ। मारीशस के अई परिपाटी सं याद परल जे बिहार मे सेहो किछु भाग मे बियाह दिनक मेन्यु अतेक त नई, मूदा साधारणे रहई छई। अकर बकियौता ओतअ "मर्याद" जे बियाहक अगिला दिन होई छई, ओई मे करईत अईछ। घरबईया अपन हैसियत मुताबिक "मर्याद" मे खर्च करईत अईछ। आब जकरा बुझल आ समय रहतई, उयाह ने बियाह के अगिलो दिन रूकत। दुनु जगह मे ई समानता हमरा बुझना गेल। मारीशस मे पैघ छोट कियो भी माय बाप जाबईत बेटा लेल अलग घर नई कीन लईत अईछ ओ बेटा के बियाह नई करईत अईछ। नई कीन सकत त ओ किरायो पर बियाह सं पहिने बेटा पुतोहु के रहबाक अलग बेबसथा करिते टा अईछ।कहबाक मतलब जे एकल परिवार के सोच ओतअ चईल रहल अईछ। भारत मे संयुक्त परिवार क प्रथा त पहिने छलई। ई मारीशस मे रहईत भारतीय मूलक लोक बुझाईत अईछ जे पाश्चातय सभ्यता के अपनौने अईछ। --x� युगांडा मे ईदी अमीन के शासनक बारे मे कयेकटा खिस्सा सब सर्वविदित छई। जहिया हमर बदली अई देश मे भेल, तहिया कयेक लोक डरबअ बाला गप्प सब कहलाह। हम अई मतक छी जे आहांक भाग मे जतअ के नोन खेबाक लिखल अईछ, ओतअ आहां पहुंच जायब। अपन चाहला आ सोचला सं किछु नई होई छई। तैं जे जतअ भाग्य लअ जाय, बिना कोनो किंतु परंतु के चईल जाई। हमरा विचारे आहां के नीके लिखल होयत। 1972 मे ईदी अमीन, सब एशियाई के युगांडा सं बाहर जाई लेल तीन महीना के समय देलकई। एशियाई कहक लेल छलई, असली निशाना तअ भारतीय सब छलई। ओकर उद्देश्य भारतीय व्यवसाई सबहक अकुत धन लेबाक छलई। एक लाख के करीब भारतीय सब तहिया अई देश मे रहई छल। ओई मे सं बेशी के ब्रिटेन अपना कतअ शरण देलकई आ अपन नागरिकता देलकई। कनाडा, अमेरिका आ आर किछु पश्चिमी देश सब सेहो थोड़ेक लोक के अपना देश मे बसेलकई। किछु लोक घुईर कअ भारत सेहो आईब गेल छल। ओ देश छोड़बाक काल गहना गुड़िया, नकदी आ संपईत लअ जाय पर पाबंदी लगेने छल। एक टा भारतीय अधेड़ महिला लग बड्ड गहना गुड़िया छलईन।ओ अपन समान मे नुका कअ देश सं बाहर लअ जाई छलीह। हवाई अड्डा पर ओ पकड़ेलीह। उनका सेनाक गाड़ी मे बांईध कअ पुरा कम्पाला मे घिसियावल गेल छलईन। अकर पाछु जे कारण छलई ओ छल- जे सब निर्वासित लोक मे डरक भावना होई आ कियो कोनो महंग वस्तु नई संग लअ जाय। अई घटना के असर सेहो भेलई। भारतीय लोक सब मात्र दु जोड़ी कपड़ा लअ कअ युगांडा छोईर देलक। अपन अर्जित सब संपईत अतई छोईर देलक।धनक दुख, सब दुख पर भारी पड़ई छई। तखनो "जीयब तअ फेर अरईज लेब" से सोचईत लोक अतअ सं चईल गेल। अतेक ईदी अमीन के फरमान एलाह के बादो किछु भारतीय लोक युगांडा नई छोड़लक।ओकर गुप्तचर सुचना तंत्र बड्ड मजबूत छलई। ओकरा पता लाईग गेलई जे किछु भारतीय नुका कअ रही रहल अईछ। तखईन ईदी अमीन आदेश देलकई जे ई छुटलाहा भारतीय सब एयर स्ट्रीप पर जमा होयत। भारतीय सब सोचलाह कि की करत? जाने लेत ने! अहुना मरले दाखिल छी। चलई छी। जे हेतई से हेतई। मोटर मे भारतीय प्रौढ़ मऊगी के सऊंसे शहर मे घिसियाईत ओ सब देखने छलाह। सब कियो नियत समय पर एयर स्ट्रीप पर जमा भेलाह। थोड़ेक काल बाद ईदी अमीन आयल। ओ इनका सब सं गप्प केलक। फेर कहलकईन जे आहां सब असली " हीरो" छी। हमर आदेश सं डरा कअ अमरीका, ब्रिटेन सहित सब देशक लोक परा गेल। लाखक करीब भारतीय, पाकिस्तानी, चीनी सब चईल गेल। आहां सब नई गेलऊं। ई आहां सबहक अई युगांडा क धरती सं प्रेम देखा रहल अईछ।जानक डर आहां सब के सेहो नई अईछ। ई हमर कार्ड राखु। अई मे हमर नम्बर लिखल अईछ। आहां सब के कहियो कोनो परेशानी वा कष्ट हुआय त सीधा हमरा फोन कअ सकईत छी। ई कही कअ ओ चईल गेल। ई जे बचल भारतीय सब छलाह,ओ सब कालक्रमेण पैघ पैघ पद पर आसीन भेलाह। व्यवसाय सं बड्ड पाई कमाई गेलाह आ अखनो ओही डेग पर आगु बईढ़ रहल छैत। किछु भारतीय अभिनेत्री सब अतई रहईत छथि। जुही चावला आ मुमताज क सासुर युगांडा मे छईन। दुनु के घरवाला प्रतिष्ठित भारतीय मूलक व्यवसाई छथि। चीनी मिल, होटल सहित कयेक टा आर उद्योग धंधा सब छईन। फिल्मी हस्ती मीरा नायर सेहो अधिककाल कम्पाला मे रहई छथि। विश्व सुंदरी रहल डायना हेडन सेहो पहिने अतई रहई छलीह। कहबाक मतलब ई छल जे " डरक आगु जीत" छई।दोसर कड़ी मे फेर आन बात। --x� युगांडा के माईट दुनिया मे सबसं बेशी उपजाऊ जमीन सब मे सं छई। कोनो बीया माईटक तर हला दियऊ, अपने ओ गाछ भअ कअ फर भअ जायत। बिना कोनो बेशी हील- हुज्जत आ मशक्कत के पेटक जोगाड़ भअ जाई छई।अकर सबहक हाल देख कअ बच्चा मे सुनल पराती मोन पईर जाईत अईछ- " अजगर पड़ा रहा जंगल मे, तनियो ना ससरे। सबका खर्चा रामजी दियो हैं, भूखा कोई ना मरे।।" जखईन भोजन भेटे जाई छई, त ओ सब मेहनत केनाई छोईर देलक। अपनो सब कतअ, जिनका बिन मेहनत के प्राप्ति भअ जाई छईन, ओ सब निकम्मा भअ जाई छईथ। ऊयाह हाल अफ्रीकी सबहक छई। बेशिये आलसी अईछ ओ सब। अपना सबहक जेना किछू पाबई लेल " येन-केन-प्रकारेण " वाला मानसिकताक अभाव सगरो देखा जायत। अतअ स्थानीय सब के दरमाहो बड्ड कम्म भेटई छई। भारतक पांच/सात हजार रूपया दरमाहा मे लोक भेंट जायत। सरकारी मुलाजमानक दरमाहा सेहो तहीना कम्मे छई।कतेक कम दरमाहा पर स्थानीय लोक भेटला के बादो, कम्पनी सब भारतीय/ चीनी के बेशी दरमाहा पर रखई छई।कम्पनी मे चोरी चकारी के कोनो मौका ओ सब हाथ सं नई जाय देत। छोट छोट चीज पर ईमान डोईल जाई छई। जकरे देबई रखबारी, ऊयाह लअ कअ चलईत बनत। अतुका सवारी गाड़ी मोटरसाइकिल/साईकिल छई। मोटरसाइकिल के " बोडा- बोडा" कहल जाई छई। ओटोरिकशा/टेम्पो जेकां ई सऊंसे छिरियाल भेंटत। ई बोडा- बोडा क सवारी महंग होई छई। ओना " उबर" टैक्सी सेहो भेटअ लगलई अई। मूदा ततेक ने ट्रैफिक जाम होई छई जे लोक बोडा बोडा पर बेशी निर्भर रहईत अईछ। ओना किराया, मोटरसाइकिल आ उबर टैक्सी के एकरंगाहे छई। टैक्सी के थोड़बे बेशी। ई बोडा - बोडा त बुईझ लियअ जमीन पर चलअ बाला हेलिकॉप्टर भेल। एना बुझायत जे उईर उईर कअ जा रहल छई। ओहिना दिल्लीक ब्लु लाईन जेकां घातक " मटैटो" एतअ चलई छई। ई मटैटो मिनी बस जेकां भेल। ई अफ्रीका मे बेशी देश मे छई। ब्लु लाईनक बस जेकां सवारी के देखिते ब्रेक लाईग जाई छई। आहां के कर्त्तव्य अईछ जे बईच सकईत छी त बचु। कतऊ रूकल अईछ त कखन ससरत से बिधातो के नई बुझल। अकर सबहक अपन कानुन छई। ओकर गलती हेतई तअ ओ " सौरी" बाईज कअ काज चला लेत। आहांक गलती होयत त बिन हर्जाना लेने नई छोड़त। अखईन किछु दिन पहिने कम्पाला मे एकटा युवा भारतीय, तीन टा चीनी संग मदिरापान कअ कअ मोटर चलबईत गाछ सं टकरा गेलाह। चारू युवा के मौके पर जीवन लीला समाप्त भअ गेलईन। पीयअ बला लोक के दु मिनट मे दोस्ती भअ जाई छई। पहिले बेर चीनी आ भारतीय के भेंट भेल छलईन आ चट दं पार्टी सेहो भअ गेल छलई। एक्सीडेंट बाला जगह लग एकटा होटलक कैमरा लागल छलई। ओई मे जे रिकार्ड भेलई, से बड्ड वीभत्स छलई। जखने एक्सीडेंट भेलई तखने ई बोडा बोडा बाला सब पहुंचल। ओकरा सब के जे मोटर मे आ मृत शरीर पर भेंटलई, किछु नई छोड़लकई। पासपोर्ट, पर्स, अंगुठी, चेन, मोबाइल, जुत्ता, बैग, घड़ी, बेल्ट सं लअ कअ जे भी भेटलई, ओ भीड़ अस्पताल पहुंचाबअ के जगह, ई सामान सब लअ गेलई। कनिको घायलक प्रति दया माया नई, आ नई कनियो मानव शरीरक प्रति कोनो आदर सम्मान। बस ओकरा सब के समान चाही। पुलिस दोषी के पकड़अ के कोशिश करई छई, लेकिन से भअ नई सकई छई। भारत मे सेहो पहिने अही तरहक घटना सुनबा मे अबई छलई। एकटा बस के रस्ता मे एक्सीडेंट भेलाक बाद सब घायल के अस्पताल मे भर्ती करावल गेल छलई। जखईन एकटा घायल लोक के पुछल गेलई जे कोना कोना आहां के एक्सीडेंट मे चोट लागल। ओकर ज़बाब रहई जे भगवान क कृपा सं एक्सीडेंट मे हम बाल बाल बईच गेल रही। ओ तअ ओतुका गाम बला सब जखईन घायल सब सं लुटपाट करअ लागल त हम ओकरा सब के रोकबाक प्रयास केलऊं। ओही मे ओ सब माईर कअ हमर हाथ पाईर तोईर देलक। हम एक्सीडेंट मे चोटिल नई भेल रही, हम त बादक लुटपाटक विरोध कैलाक कारण आई अस्पताल मे पड़ल छी। अई तरहक घटना आब भारत मे सुनबा मे नई अबई छई। भअ सकई छई, अफ्रीको मे किछु बरखक बाद ई सब नई होई। सोच सुधरबा मे किछु बरख लगईत होई। कम्पाला के सटले " जिंजा " शहर छई। अतई सं बच्चे सं सुनल सबसं लंबा नदी, " नील" नदी निकलई छईथ।ईयाह उद्गम स्थल मे महात्मा गांधी के मरलाक बाद १९४८ मे उनकर "अस्थि विसर्जन" कयल गेल छल। ओतई गांधी जी के मूर्तिक स्थापना भेल अईछ। गांधीजी के ओई मूर्तिके देखबाक टिकट अतुका करेंसी मे बिदेशीक लेल ३५००० सीलिंग छई। गांधी स्कावयर हमरा जोहानिसबर्ग मे सेहो भेटल। ओतअ चौराहा पर मूर्ति लागल छईन, आहां जते चाही, देखु। जिंजा मे महंग टिकटक कारण बहुत लोग देखअ सं बंचित भअ जाईत छईथ। सरकार के चाहियई जे टिकसक पाई कम करई, ताहि सं आरो देशक लोक गांधी के देखय आ आर किछु जानय। ओतअ चारू कात बरकी टटा " तारक " गाछ सब छई, जई मे लुधकल तार फरल छल। दु बरख पहिने भारतक उपराष्ट्रपति एकटा " अशोकक गाछ " लगेने छथि, जे ओतेक नई बढ़ल बुझायल, जतेक बढ़बाक चाही। ओतई गांधी के मूर्ति सं सटले " नील नदी" मे एकटा लोहाक पाया जेकां देखायल। पुछला पर पता चलल जे ई सामने एकटा टापु पर जाई लेल पुलक पाया अईछ। अंग्रेज सब के गेलाक बाद अतुका लोक के जे भेटलई, सब खा पका गेल। बाकी लोहा के उखाईर कअ बेच लेलक ओ सब। ई पाया पाईन मे धंसल छलई, ओ नई निकाईल सकल त ओ बांचल छई। जहिना भारत मे अंग्रेज सब रेलक जाल बिछेलक, तहिना अतऊ केलक। भारत मे रेल दऊड़ रहल छई आ अतअ ओकरा सब के जाईते पटरी तटरी उखाअईर कअ बेच बिकिन लेलक। आई कतऊ ट्रेन चलईत नई देखायत। कम्पाला मे एकटा भारतीय बैंक क शाखाक नाम रेलवे स्टेशनक नाम पर छई, मूदा ओतअ आब रेलवे के कोनो निशान नई बचलई। बैंकक शाखा ऊयाह नाम सं चईल रहल छई, अकर पाछु मे कहियो रेलवे स्टेशन रहई।भारत के पंजाब सं सिक्ख मजदूर सब रेलवे ट्रैक बनबई लेल सौ बरख सं पहिने अतअ आयल छलाह। गिरमिटिया मजदूर लोक बिहार, युपी बला के भारत मे बुझई छई। लेकिन एतअ सिक्ख मजदूर आ डरबन मे दक्षिण भारतीय मजदूर क नीक संख्या तहिया आयल छलई। ई कम्पाला केन्या रेलवे लाईनक रस्ता मे आदमखोर बाघ सब सेहो छलई। कतेक भारतीय सिक्ख मजुर सब ओकर ग्रास बनल।ओही समयक गुरूद्वारा सेहो युगांडा आ केन्या मे भेटत। जे ई पुरान सरदार सब छथि उनका " सिंघा " कहल जाई छईन।अई पुरान सिक्ख/सरदार सब मे जे अतुका अफ्रीकी सब सं बियाह कयला पर जे संतान सब भेलईन, ओकरा " काला सिंघा" कहल जाई छई। सिंघा आ काला सिंघा के नीक संख्या एतअ भेटत। सरदार सब कयेक टा शब्द अतुका लोक के सीखा देलकई। जेना " दुकान" के अतुका भाषा मे "दुक्का " कहल जाईत छई। "अनानास" के "नानास"। ओहिना आर कतेक शब्द अई सौ बरख मे अतअ के स्थानीय सबहक बोली बानी मे आईब गेल छई। "आंईखक पपनी" के उपर खींचनाई मतलब " नई" भेलई। आब बात बात मे ओकर आ़ईखक पपनी देखईत रहु कि कखईन नई कहलक। अहिना कयेक टा गप्प के अर्थ मुंहक भंगिमा सअ लगई छई। अपनो सब मे बहुत लोक के खीस बरला पर नाक-कान लाल भअ जाई छईन। जिंजा मे पहिने पुरा भारतीय सबहक वर्चस्व छलई। कयेक टा सड़कक नामकरण भारतीयक नाम पर भेल छई। घरों सब भारतीय शहर जकां छई। कतेक घरक अखनो कियो वारिस नई छई आ भारतीय नामक पट्टी लागल छई। ईदी अमीनक समय मे जे लोक सब परेलई, ओई मे बहुत नहिये घुरलई। ओकरे सबहक घर सब बियाबान पड़ल छई। ओतुका मंदिर आ गुरूद्वारा मे सेहो स्थानीय सब कब्जा जमा लेने छल। आब धीरे-धीरे भारतीय सब अपन पुजारी आ ग्रंथी सब रखलाह अईछ। बहुत रास दोकान दऊरी पर अखनो स्थानीय सब कब्जा जमौने अईछ।ई अवैध कब्जा ओहिना लगईत अईछ जेना दक्षिण अफ्रीका मे गांधी के फीनिक्स आश्रमक सैकड़ों एकड़ जमीन मे स्थानीय सब कब्जा जमौने अईछ। सही आ प्रर्याप्त कागजात नई रहबाक कारणे ओकरा सब के भारतीय सब नई हटा पाईब रहल छथि। ई बेनामी संपत्ति आ कब्जा देख कअ दिल्ली मेट्रो के ओ घटना सब याद आईब गेल। जखईन हम ओतअ आठ बरख प्रतिनियुक्ति पर रही त कयेक बेर नब लाईन बिछबअ लैल घर आ जमीनक अधिग्रहण कैल जाईत छलई। अई मे बहुते एहन संपईत लेल गेलई, जेकर कब्जाधारी के कोनो कागज पत्तर नई रहई। ओकरा सब के दिल्ली मेट्रो के मुआवजा नई देबअ परलई। अहिना किछु जगह किछु मकान मालिक के किरायेदार सब नई किराया दई आ नई कब्जे छोड़ई। ओ जमीन/ मकान के मालिक सब आगु बईढ़ कअ ई जमीन/मकान मेट्रो के देबई लेल दौड़ बरहा करईत छल। कम सं कम ओकरा सब के सरकारी मुआवजा त भेंट जेतई। अहिना अतुका संपईतक हाल छई। जिंजा शहर विक्टोरिया लेक आ नील नदी के संगमक कात मे छई। अतअ आहां विक्टोरिया लेक क शांत पाईन आ नील नदीक बहईत धारक संगम देख सकईत छी। ओई संगम स्थल पर जाई लेल सिने अभिनेत्री मुमताज क परिवारक माधवानी ग्रुप सं स्टीमर बुक कअ कअ जा सकईत छी। ओई संगम स्थल पर ज्यों कोनो वस्तु के ओई धार मे छोड़बई, तं तीन महीना बाद ओ वस्तु मिश्र( ईजिप्ट) मे जा कअ भेटत। अगर कोनो रस्ता मे व्यवधान नई भेलई तअ। कहबाक अर्थ जे तीन महीना लगई छईअतअ सं पाईन के ईजिप्ट पहुंचअ मे। अतअ नील नदीक उद्गम लग ईजिप्ट सरकार अपन आफिस खोलने अई- ई नदी के बहाव क निगरानी क लेल। कहीं कियो अई बहाव के रोईक वा छेड़छाड़ तअ नई कअ रहल अईछ। ई देख नीक लागल, मूदा अफसोसो भेल कि काश हमहु सब नेपाल आ चीन सं उद्गम भेल नदी सब पर नजर रखबाक लेल कोनो बेबसथा केने रहितऊं त आई सब साल मिथिला मे नेपालक मनमानी सं पाईन छोड़ला सं, एहन त्रासदी नई होईतई। जिंजा सं तीस किलोमीटर दूर " ईटिंडा फाल" छई।ई शहर सं दुर कच्चा रस्ता सं जुड़ल छई। अतअ जायब तअ आहां के बीहड़ जंगल मे डाकु सबहक अड्डा जकां लागत।बुझायत जे अपहरण कअ कअ लोक लअ जा रहल अईछ। सैकड़ों एकड़ मे फैलल आ निजी प्रतिष्ठान एकरा चला रहल अईछ। मेन गेट पर खाकी बर्दी मे वाकी टाकी आ हथियार सं लैश लोक भेटत। पहिने सं बुकिंग भेला के बादो, सट्ट सं नई दरवज्जा खोलत। पुछताछ क बादे आहांक मोटर अंदर जा सकईत अईछ। ओकर बाद किछु दुरी तय केलाक बाद नदीक किनारा होयत। ओतअ दोसर लोक भेटत। मोटर ओतई छोड़अ परत। फेर छोटकी नाव मे तेजी सं बहईत धार मे लअ जायत। लाईफ जैकेट पहिरला के बादो नावक यात्रा डरबईत रहत। हिलईत डुलईत आहां एकटा घनघोर जंगल सं घिरल टापु पर पहु़चब। ओतअ खाकीधारी महिला आहां के नाव सं उताईर कअ पगडंडीक रस्ता सं पाछु पाछु अयबाक निर्देश देतीह। थोड़ेक दुर गेलाक बाद पाईनक हनहनाईत धारा देखायत। ओ धारा आगु जा कअ नील नदी मे मिल जाई छई। ई टापु बियाबान जंगल सं भरल अईछ। थोड़ेक दुर पर राफ्टिंग क सुविधा सेहो छई। लेमाला वाईल्ड वाटर्स लौज सेहो अकरा कहल जाई छई। अगर किनको अपहरण क कअ बीहर मे डकैत सब ल जाईत हेतईन, त ओ अहिने होईत हेतई। ओहिना युगांडा मे बड़का बड़का चाहक बगान सब छई। आहां मोटर रोईक कअ चाहक पात तोईर सकईत छी। कियो रोकत टोकत नई।चाहक पात के तोड़बाक सेहो तकनीक छई। सोंझे तोईर कअ सुखा कअ चाह बनायब त ओई मे सुआद नई आयत।आहां जेना" बेलपात" के तीन पातक गुच्छा एक संग तोड़ई छी आ भोलेनाथ पर चढ़बई छियैन। ईयाह तीन पात के महात्म्य छई। ओहिना चाह के तीन टा के जुड़ल पात के संग खोंटब, तखैन सुखायब आ फेर चाह बनायब त स्वाद लागत। हमरा एकटा मऊगी ई सब तकनीकी पक्ष बतबई छलीह। ओ तीन टा के पात सं हमरा बेलपात मोन पईर गेल। ओहिना अतअ चीनीक मिल सब छई। भारत जेकां चीनी मिल सीजनल नई होई छई। ईक्वेटरक लग रहबाक कारण सालों भईर एक्के ऱंगक मौसम रहई छई। एना बेबसथा छई जे एक तरफ सं कुसियार रोपईत एक ग्रुप आगु बईढ़ रहल अईछ आ दोसर तरफ सं तैयार कुसियार कटाअ रहल अईछ। जे कुसियार रोपअ बाला टीम अईछ, ओ सालों भईर रोपिते रहईत अईछ आ काटअ बाला सालों भईर कटिते अईछ, ढोबअ बाला ढोईते रहईत अईछ। अहिना सालों भईर कुसियार क मिल चलिते रहई छई। भारत जेकां अलग-अलग कुसियार क चलान नई कटईत छई। कुसियार मिलक मालिक के अपने सब जमीन होई छई। भारतीय मूलक लोक सब अई चीनी मिल सबहक मालिक छथि, जई मे जुही चावला आ मुमताज क सासुर प्रमुख अईछ। अहिना आम आ लतामक बगान सब अईछ, जतेक मोन खाईत रहु। ई देखला सं हमरा दक्षिण अफ्रीका के स्ट्रोबेरी के फार्म मोन पईर गेल। आहां पाई के अनुसार पथिया लियअ, फार्म मे जाऊ, जतेक मर्जी खाऊ आ पथिया भईर कअ लअ जाऊ। अहिना ज्यों अपनो दिश आमक गाछी मे होईतई जे जाऊ, गोपी आम तोड़ु, खाऊ आ बाकी बचल पथिया मे भईर कअ लअ जाऊ। --x� युगांडा मे जे सत्ताधारी दल छई, ओकरा राजधानी कम्पाला मे बढ़त नई छई। ओतुका लोकक कहब छई जे ताहि दुआरे ओतेक आधारभूत संरचना के विकास नई भेलई, जतबा राजधानी रहबाक कारणे होबाक चाही। कम्पाला मे सड़क सबहक स्थिति ओतेक बढ़िया नई छई, जतेक कम्पाला सं बाहर निकलला के बाद भेटत।सड़कक नीक स्थिति नई रहबाक ईहो कारण भअ सकई छई जे सड़क पर गाड़ीक दबाव बेशी छई। जे भी कारण होई, ई सत्य थीक जे अतुका सड़क, स्तरीय नई छई। बढ़िया सड़क त दक्षिण अफ्रीका मे छई.......... भारत मे सेहो ओहन नई छई। आब जे हम कहअ चाहई छलऊं, से छई सड़क परक गड्ढा। अतअ अई गड्ढा सबहक भराई शईन / रईब कअ होई छई। ओई सं पहिने गड्ढा के आर खोईद दई छई जे भरअ मे सहुलियत होई। हमर एकटा सहकर्मी कम्पाला शहर सं कनी बाहर दिश रहईत छथि। नबका धनिक सब ऊमहर घर बना कअ रही रहल छथि। उनकर गली मे अहिना गड्ढा सब भअ गेल छलईन। बहुत दिन सं ओकर भराई नई भेल छलई। किछु पड़ोसी के चढ़ेला पर नबका धनिक ओई गड्ढा सब के बढ़िया सं भरबा देलखिन। सब गली बाला सब बाहबाही देलकईन। ओहो बड़ाई सुनला सं अघा नई रहल छलाह। ओही बीच मे ओतुका नगर निगम बला ई पता कअ कअ,जे के बनेलक अईछ..... घर पहुंचलईन। सरकारी सड़क के निजी व्यक्ति द्वारा मरम्मत करवेनाई नियम आ व्यवस्था के खिलाफ भेलई। ओ निगमक अधिकारी अई नबका धनिक के चेताअ गेलईन जे या तअ सड़क जेना गड्ढा बाला छलई, ओना बना दियऊ.......या भारी जुर्माना भरबा लेल तैयार रहु। आब कियो पड़ोसी हालचाल पुछहो नई एलईन। जुर्माना क रकम बेशी होबाक संभावना छलई, तैं फेर मजुर बजा कअ सड़क पर गड्ढा करबा कअ जान बचेला। फेर मोने मोन कसम खेलाह जे आब फेर लोकक कहला पर नई चढ़ताह। ई नियम ओतअ पुरान लोक सब के बुझल छलई।उनकर पड़ोसी सब के सेहो बुझल छलईन। मूदा मजा लई लेल ईनका सब मूर्गा बना देलकईन। जेना किछु फल जे अतअ बहुत रास भेटत - पैशन, अवाकाडो, केरा, कटहर, आम,लताम........... ओहिना किछु बैक्टिरिया सब सेहो छई, ओ आहां के दहेज मे भेटत। " बिलहारजिया " ई बीमारी एतअ होई छई आ ईलाज सेहो अतई टा छई। तैं लोक अतअ सं जाय सं पहिने, एकर जांच करा लईत अईछ। ज्यों रिपोर्ट पोजिटिव अबई छई, तं तखने अकर टीका लगा लईत अईछ। बीमारी लाईलाज नई छई, लेकिन पते नई चलई छई। हमर एकटा पूर्व सहकर्मी एक बरख सं कोनो ने कोनो बीमारी सं ग्रसित रहलाह। "बीमारी कोनो आ ईलाज कोनो" चईल रहल छलईन। बाद मे ककरो सलाह पर जांच करेलाह, त बिलहारजिया निकललईन। दवाई खेलाह......आब पूर्ण स्वस्थ छईथ आ न्युयार्क मे आनंद लअ रहल छथि।आई सं करीब सौ बरख पहिने अई बैक्टिरिया जनित बीमारी के पता लगलई। कालक्रमेण दवाई सेहो निकललई।अफ्रीका छोरबा सं पहिने अकर जरूर जांच करालीह। बाहरक डाक्टर के नई ई बीमारी आ नई एकर ईलाज बुंझल छईन। तैं फोंसरी के भोकन्नर होबअ सं पहिने दवाई लअ रोग के काईट ली। आब सुनु अकर होबाक कारण- ई अतुका बहईत पाईन मे होई छई। नील नदी के पाईन मे सेहो अकर बैक्टिरिया पायल जाई छई। पाईन के छुला मात्र से ई बीमारी भअ सकई छई। एक बेर ज्यों अकर बैक्टीरिया देह मे भीतर आईब गेल त ओ तीसो बरखक बाद आहां के अपन शिकार बना सकइत अईछ। ई बैक्टीरिया आईब कअ सुईतो रहई छई आ कयेक बरखक बाद जाईगो जायत।अकर सिमटम सामान्य जर बोखार जेकां शुरू मे रहई छई। बढ़ला पर तअ बाद मे खुनक उल्टी तक होईत छई। फेर कोनो ईलाज नई। ओही लेल अतअ आबअ जाय बला लोक अकर बचाव करईथ। जांच करा कअ निश्चिंत सं जाईथ। दक्षिण अफ्रीका मे अई बीमारी के बारे मे नई सुनने रही। अहिना यलो फीवर के टीका तअ अतअ आबअ सं पहिने अनिवार्य छई। टीका के बादे आहां के इमीग्रेशन अई देश मे घुसअ देत। ओना एक बेर यलो फीवर के टीका लगा लियह त ओ दस बरख तक वैध छई। अतुका लोग सब खुब हृष्ट पुष्ट होईत अईछ। शरीरक अंगक प्रतिरोधक क्षमता सेहो बढ़ल रहईत छई।हमरा अतअ अबिते एकटा सहकर्मी कहला जे कोनो बीमारी भेला पर अतुका डाक्टर जे दवाई लिखत, ओकर आधे गोटी खायब। ओ सब अपन शरीरक क्षमता के अनुसार दवाई लिखईत अईछ। हमर सबहक शरीर दोसर रंगक अईछ, तैं ई गांठ बाईंध लियह जे आधा या चौथाई दवाई खेबाक अईछ। एक बेर ओ जतेक लिखलकईन, ओतैक खा लेने छलाह तं तेसरे परेशानी भअ गेल छलईन। ओना एशियाई डाक्टर सब सेहो छई, ओ सब भारतीय लोकक शरीरक क्षमता सं अवगत अईछ। तैं ओ सब जे लिखय त ओ खा लेब। शुरू मे त हमरा ई गप सुनबा मे केना दन लागल, लेकिन आब हमहु ऊनकर सलाह सं सहमत छी। युगांडा समुद्र सं नई जुड़ल अईछ। तैं अतुका लोक नोन सं बेश दिन बाद परिचित भेल। नोन क स्वाद ओ सब बड बाद मे लेलक। कहल जाई छई जे अतअ पहिने सोना बड्ड रहई आ नोन क स्वाद चखने नई छल। ओई समयका व्यापारी सब नोन लअ कअ अतअ जेना तेना पहुंचय आ नोनक मोटरी बराबर " सोन" लअ कअ अतअ सं जाय।अतअ नोनक मोल छलई, सोन त अहिना रहई। मनुक्खक शरीर नोन लेल नई बनल छई। बहुत बाद मे धीरे-धीरे मनुक्ख नोन खेनाई शुरू केने अईछ। बाद मे नोन मनुक्खक जीन मे पीढ़ी-दर-पीढ़ी एलई। आब त शरीर अभ्यस्त भअ गेल छई। नई त पहिने नोन देहक भीतर जाईते जहर भअ जाई छलई। ओई देशी नोनक बदला मे व्यापारी सब अतुका संसाधनक बड्ड शोषण केलकई। नोनक एहन स्वाद छई जे अकरा चीखला के बाद आहां अई बिनु नई रही सकईत छी। अकरे फायदा दुनिया के व्यापारी सब लईत अईछ। पहिने सस्ता सुभिस्ता बेबसथा कअ कअ आदत लगाओत। ओ आदत बाद मे लत भअ जाई छई। तखन ओई लत सं ओ फायदा लेनाई शुरू करत। अतुका स्थानीय लोक संग व्यापारी सब ईयाह केलकई। दुनिया बड्ड अजीब छई। एकटा सहकर्मी कहईत छलाह जे एकटा देश मे त चोरी के रिपोर्ट लिखेबाक पाई देबअ के परई छई। ई पाई सरकारी फीस छई। जेना आहां के पर्स चोरी भअ गेल। ओई पर्स मे आहां के पाई, आई कार्ड, ए टी एम कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस आ क्लब मेम्बरसिप कार्ड छलाय।सब वस्तु खातिर बीस बीस स्विस फ्रैंक देबई, तखने रिपोर्ट लिखत।आहां के कुल जमा पर्स लगा कअ छह टा चीज चोरी भेल। आहां के बीस जमा छह, एक सौ बीस स्विस फ्रैंक देबअ परत। आब आहां देबई कतअ सं? आहांक पर्स आ कार्ड दुनु चोरी भअ गेल अईछ। अई सं ओकरा कोनो मतलब नई छई। आहां आब पहिने घर वा आफिस जाऊ....... पाई लअ कअ आऊ........ तखने पुलिस रिपोर्ट लिखैत। हमर सहकर्मी कहला जे एक त चोरी भेल, ऊपर सं आरो पाई दियऊ। एतअ सं ओतअ बऊआईत रहु।अई सं नीक जे चुपचाप घर जा कअ बईस रहु। ओ ईयाह केलाह। हमरा जहां तक मोन परईत अईछ जे ई बेबसथा स्विट्जरलैंड के छई। ई सब सुनला पर होई छई जे अपन भारत देश नीक अईछ। देर सबेर रिपोर्ट त लिखाईये जाई छई।अतऊ कम्पाला मे पुलिस के कोनो काज लेल बजेबई, त ओकर ओ कोनो ने कोनो रूप सं आहां के जेबी ढीला करबायत। आहां स्विट्जरलैंड जेकां नाक सीधा छुबु वा युगांडा जकां हाथ घुमा क छुबु। बात एक्के। --x� अफ्रीका मे जे सबसं बढ़िया परम्परा हमरा लागल ओ छल बियाह मे बर बाला दिश सं कनिया बाला के दहेज देनाई।ई पहीने अपनो समाज मे छल। बाद मे ऊल्टा भअ गेलई। अखनो पुर्वोत्तर भारत मे ई बेबसथा छई।मऊगी के सामाजिक स्थिति बहुतही बढ़िया छई। कम्पाला मे स्थानीय सबहक बियाह मे एकटा प्रथा बड रोचक लागल - कनिया के "मामी", खास बरियाती सब के खेनाई अपने बनबई छई। खास बरियाती मे बरक पिता, कका, बहनोई, पीसा, मौसादि सब होई छई। बाकी बरियाती त अपने सब जेकां हलुआई वा केटरर बनबई छई, लेकिन खास लोकक अपने सब बनेनाई, पारिवारिक संस्था के मजबुती दई छई। कन्या पक्ष सब तरहक पेय पदार्थ क बेबसथा केने रहई छई। सबसं पहिने कनियाक बाप के सब ड्रिंक्स चीखैल जाई छई। ओ जकरा जकरा नीक कहई छई, ऊयाह ओतअ परसल जाई छई। बाकी गाना बजाना आ नाच ठुमका त सब जगह एकरंगाहे छई।बरक बाप अपन जे सब सामग्री अनने रहईत अईछ, से सब कन्या पक्ष के दई छई।बरक पक्षक खास लोक के अलग सं घर मे बईसा कअ खुवावल जाई छई। अपनो सब कतअ अहिना पैर धुएनाई सं लअ कअ, नबका स्टाईल मे पंडाल मे खास लोक के घरबईया अलग सं खुआबई छईथ। दहेज मे अखनो गाय प्रमुख छई। पांच टा गाय वा दस टा गाय लड़की के बाप के, लड़का तरफ सं प्रस्ताव अबई छई। लड़की के बाप अपन बेटी के बजार भाव देखई छई। मोल मोलई सेहो होई छई। कयेक टा लड़की के बाप, बस अतबे देखई छई जे, के ओकरा बेशी गाय दअ रहल अईछ। ई त ओहिना अईछ जेना अपना कतअ बरक बाप, बेशी पाई गनअ बाला वा भरिगर कुटुम्ब के तकई छथि। उनका आर कोनो गुण नई, बस आ बस, पाई वा स्टेटस चाही।ईयाह परम्परा हम जिम्बाब्वे, लेसेथो आ दक्षिण अफ्रीका मे सेहो देखलियई। लड़की के बाप सब सीना चौड़ा क कअ घुमत। अपन गाय आ समान सब लेलक, बाकी जाय चुल्ही मे। युगांडा मे किछु जनजाति मे लड़का सब सं पहिने लड़की के पीसी लग अपन दावेदारी पेश करई छई। अपन ईच्छा जतबई छई। लड़की के पीसी, लड़की सबहक ट्रेनर होई छई। ओ चौका बर्तन , घर सईंतनाई सं लअ कअ बैबाहिक जीवन कोना जीबल जाई छई, सब सीखबईत छई। अतबे नई, ओ लड़का के दान दहेज के गप केला के बाद, ओकर पौरुष के सेहो जांच करई छई। लड़की के पीसी संग लड़का के सुतअ पड़ई छई। ओकर बादे लड़की के पीसी अपन सहमति दई छई। बिना ओकर सहमति के बियाह निश्चित नई होई छई। लड़का पहिने लड़की तकईया, फेर लड़की के पीसी के गाम ठाम, फेर अपन गाय आ समान सबहक सुचीक संग प्रस्ताव, फेर मर्दानगीक परीक्षा, तखईन जा कअ गप आगु बढ़ई छई। लड़की के पीसी, तखईन लड़की के पिता के सब बात निश्चित भेला पर अपन सहमति दई छई। कयेक बेर एहन भेलईया जे लड़का धन संपईत रहला के बावजुदो पौरूष परीक्षा मे नई पास कअ चुकल। ज्यों लड़की के कयेक टा पीसी छई, त ओकरा स्वतंत्रता छई कि ओ कोनो लग प्रस्ताव लअ कअ जा सकईत अईछ। "विधकरी" त सेहो मैथिल समाज मे अहिनाहे भेल, संग सुतनाई छोईर कअ। ओकरा सब मे बियाह सं पहिने, अतअ बियाहक दौरान मददगार भेल। लड़की ज्यों सासुर मे विधवा भअ गेल त ओकर भार लड़का परिवार मे कियो उठा लई छई। विधवा ओई परिवार क संपईत भेलई। लड़का बाला दहेज दअ कअ अनने अईछ। तैं पहिल हक ओई मऊगी पर ओकर सबहक छई।बाल बच्चा सहित ओ मऊगी ओई परिवार के दोसर पुरूख संग रहअ लगईत अईछ। अगर ओकर पहिलका बर किछु संपईत छोईर गेल अईछ,त ओकर हक ओई पर छई। नई तअ दोसर पुरूख संग रहला पर, ओई पुरूख के विवेक पर छई जे ओ चाहे तअ हिस्सा दई वा नई दई। अतअ अही लअ कअ सांझा आ वृहत परिवार के चलन छई। अई सं सामाजिक सुरक्षा सेहो छई। किछु ऊंच नीच भअ गेला पर बेलेल्ला नई होबअ परई छई।पच्चीस तीस लोक त अतअ सामान्य परिवार मे संग रहईत अईछ। दोसरो के कनिया बच्चा के सेहो संग रखईत छई। पारिवारिक मामला मे सरकार क कानुन बड्ड लचर छई। अकर फायदा कयेक लोक उठबईतो अईछ। कतऊ आ कखनो बियाह कअ लेलक......जखन मोन तखन छोईर देलक.........ककरो संग रहअ लागल.......धीया पुता के जन्मेला के बाद परवरिश क जिम्मेदारी सं बचबा लेल पराअ कअ चईल गेनाई.........फेर जहिया मोन भेल, मूंह उठा कअ घर घुईर एनाई। भारत मे सेहो अहिना कयेक तरहक प्रथा आ परम्परा छई, से सब मोन पड़ल। केरल मे तअ मामा आ भगिनी मे बियाह होई छई। ओहिना मेघालय मे लड़का, बियाहक बाद सासुरे मे रहई छई। ओकर सार के जखईन बियाह हेतई त ओ घर छोईर अपन सासुर चईल जायत। तलाक सेहो ओहिना आसान छई। कनिया के माथ पर घईल राईख दियऊ, बर ढेपा फेंक कअ ओई घईल के फोईर देतई। घईल फुटिते, संबंध खत्म......भअ गेल छुट्टा छुट्टी कही वा तलाक कही। अहिना युगांडा मे बरियाती सब घईल जेकां माईटक बर्तन मे देशी मदिरा लअ कअ अबईत अईछ, आ कन्यागत के पीबई लेल दई छईन। उनका पीयला मे स्वाद नीक लगलईन त ओ प्रसन्न हेताह। फेर आगु के कार्यक्रम नीक हेतई। घईलक कोनो ने कोनो रूप मे सब काज मे उपयोग होईत अईछ। ओहिना मिजोरम मे चर्च मे किछु हजार खर्च कअ कअ बियाह भअ जाई छलई। बहुते बच्चा के पिता के नामो नई छई। पुछला पर कहत- "ललपा दिया है।" ललपा माने भगवान। अरूणाचल मे बड़का बड़का अपराध मे ओतुका समाज किछु "मिथुन" के दंड लगबई छई।मिथुन, भैंसा जेकां जानवर होई छई। मिथुन के मांसक भोज भेल, सब अपराध खत्म। ई पंचायत क संरचना ततेक ने सुदृढ़ छई, जे कोनो गप बाहर नई जाई छई। ओहिना अतुका लोक सबहक अपन समाज क ढर्रा छई जे की झांपल तोपल छई। अखुनका स्वघोषित सभ़्य समाज अकरा नीक नई कहई छई, लेकिन अई लोक के परवाह नई छई। पूरा आजादीक संग जीवन छई। जकरा आहां लोक लाज कहई छी- ओकर परिभाषा किछु आर छई। --x� अफ्रीका मे आहां बहुत तरहक एकटा क्षेत्रीय समानता देखबई। उत्तरी अफ्रीका के देश सब इस्लाम बहुल भेटत आ ओहिना दक्षिणी अफ्रीका के देश सब ईसाई धर्मावलंबी। जे सब खाड़ी देश सब सं सटल अईछ ओतअ मुसलमान बेशी आ जे अफ्रीकी देश ब्रिटिश उपनिवेश छल ओई सब मे ईसाई धर्म बेशी फैलल। पुर्वी अफ्रीकी देश सब मे एशियाई बिशेष कअ भारतीय बेशी भेटताह। ई सब व्यापार सं जुड़ल काज सब मे संलग्न भेटताह। अतअ भारत सं मतलब बिभाजन सं पहीलका भारत सं अईछ। देखला- सुनला आ बोली- बानी सं आहां प्राचीन भारतक लोग के अखुनका एशियाई देश मे बांईट कअ नई देख सकई छी। हमरा कयेक लोक एहन भेटल, जेकरा हम कतुका कहबई, से स्पष्ट नई भेल। एकटा लोकक बारे मे आब पढ़ु। प्रिटोरिया, साऊथ अफ्रीका मे, हमर घरक अगली बगली भारतीय मूलक घर छलाय। एक मे लोक रहईतो छल। वो परिवार आईब कअ भेंट केने छल। जेना अपना दिश होई छई जे नब पड़ोसी के आश्वस्त कैल जाई छई -कोनो वस्तु के बेगरता हुआय त कहब- से भरोसा दअ कअ ओ परिवार गेल। ई परिवारक पूर्वज गिरमिटिया मजदूर बईन कअ डर्बन, साऊथ अफ्रीका आयल छल। आम भारतीय जकां ईनकर रहन-सहन लागल।अई पर कहियो आन विस्तृत चर्चा करब। हमर दोसर कातक घर मे किछु रिनोभेशन चईल रहल छल।ओई मे कियो रहईत नई छल।जखईन हम आफिस जाई लेल निकली तअ हैट-सैट लगा कअ एकटा महिला कखनो फोल्डिंग कुर्सी तअ कखनो ठार भेल काजक देखरेख करईत रहई छलीह। दु टा भारतीय जेकां देखअ-सुनअ बाली मऊगी, उनकर आगु-पाछु करईत रहई छलईन। हम घर सं निकली, मोटर स्टार्ट करी-आवाज त होई, लेकिन ओ कनखियो आंईखे हमरा दिश नई तकई छलीह। हमहु उनका दिश कियैक तकबईन। हल्का आभास उनकर लअ लीह। हैट आ गुगल्स मे उनकर मुंह झापल तोपल रहई छलईन, ऊपर सं कखनो कअ छत्ता सेहो, कखनो गर्दा सं बचई लेल नाक -कान सेहो झंपने रहई छलीह। गुगल्स मे आंईख झापल रहला सं ई पते नई चलई छई जे ओ कतअ ताईक रहल छई। आंईख सं आंईख मिलतय, तखने ने हम नमस्कार-पाती करितयईन। ओना साऊथ अफ्रीका मे एक दोसर के हाय-हेलो कहबाक परिपाटी छई। सुन्नर मऊगी एक अंजान पुरूख के सेहो नमस्कार करत आ हाल-चाल पुछत। ऊपर सं लाबा-दुआ मे मुस्की सेहो छोड़त। नब नब भारत सं आयल लोक तअ अई मुस्किये पर लोटपोट भअ जाईत अईछ। आहां दोकान मे जाऊ वा टैक्सी-ड्राईवर के बजाऊ वा सिक्युरिटी गार्ड हुआय वा काजबाली हुआय, पुलिस कर्मी होई वा पड़ोसी होई वा कोनो राही-बटोही होई वा डाक्टर-कम्पाऊंडर होई वा रिसेप्शनिस्ट होई वा अधिकारी होई वा स्कुलक गुरुजी होईत वा प्रिंसिपल होईत, कियो भेटत आहां के पहिने प्रणाम-पाती करु......फेर हाल-चाल पुछियऊ.......ओकर बाद मूल बात पर आऊ। आहां सोझे काजक गप्प शुरू करब त एक त ओ आहांके जाहिल गंवार आ बिना एथिक्स बाला बुझत आ दोसर ज़बाब सेहो अनमने ढंग सं देत। ओकर बस मे हेतई तअ टरकाईये देत। ओही लेल शुरूये सं साकांक्ष रहु। चवन्निया मुस्की जबरदस्तिये सही, बनने रहु आ बिन बजायले सही बहिनक सासुर के कठपिंगल पाहुन जेकां उनका सं आदर स बेबहार करु।ओई पाहुन के बिदा होईते " हअ हअ हअ" कअकअ त्राण लियह। अतअ ई हैटसैट वाला मउगी त तकबे नई करय। हमहु त किनको सं कम थोड़बे छी। हम तोहर देश आयल छियऊ.......तु मान वा नई मान, हम त अपना के पाहुन मानई छी..........पहिने प्रणाम -पाती तोरे करअ परतऊ.........। अहीना करीब एकाध मास बीतलई। ओकरा हमर जाय आबअ के समय ठेकना गेल छलई।हमहु ओकरा कतऊ कतऊ ठार बैसल देखबा के अभ्यस्त भअ गेल छलऊं। हफ्ता दु हफ्ता ओ नईयो देखाई छल। एक दिन रईब कअ घर मे काल बेल बाजल। हम ओकरा कनी काल पहिने नीचा मे ठार देखने रहियई। अकरा सिवाय दोसर के भअ सकईत अईछ। बिना एप्वाइंटमेट के तअ दोसर कियो ककरो कतअ अबिते नई छई। आई कनीक ढंग सं तकने छल.......अंदाज सहिये भेल। ऊयाह छल। आई बिना हैट आ गुगल्स के ओ छलीह। उनका सब बुझल छलईन जे हम कतअ आ की काज करई छी। धीया पुता हमर कतअ पईढ़ लिख रहल अईछ। ओ ई सब गप्प कहअ लगलीह। हमहु तखईन हुनका कहलियईन जे आहां फलां सं फलां दिन नई छलऊं। उनको आश्चर्य आ नीक लगलईन जे कियो अयबाक तारीख मोन रखने छईन। ओ कहलीह जे उनकर दरमाहा पर राखल सहायक के सेहो नई मोन हेतईन जे ओ कहिया कखईन एलीह आ कहिया नई एलीह।ईयाह भेलई ओ अपन सहायिका के बजा कअ पुछलकिन आ ओ ज़बाब देबअ मे सकपका गेल। दिन कन्फर्म करअ लेल मोबाइल मे सर्च करअ लागल। ओ ओकरा कहलखिन- भअ गेल,हमरा जे बुझबा के रहय से बुझा गेल। आहां जाऊ, काज देखुगअ। ईनका बुझले नई जे हम तअ ओतअ के छी जतअ किनका कतअ कोन पाहुन एलईन, किनकर जमाय- ननिदोस रुसल छथिन, के कतेक पाई डोनेशन दअ कअ बच्चा के एडमिशन करेलाह अईछ,किनका किनका सं घुट्टा सोहार छईन, के बेशी आ कियैक फलां सं चौल करअ लगलाह, बेटाक सासुर सं आयल भार के नुका कअ बेचलीह आ किनका कतअ नोत मे फलां कियैक नई एलखिन, फलां साल भदबारी मे अपना छोईर कअ किनकर बारी मे कतेक फुट बाईढ़क पाईन आयल छलईन आ अहिना आर खोद-बेद सब, बईसले बईसले थाह लगा लेल जाई छई। ओ अपन नाम " सायरा" बतेलीह। भारत कयेक बेर घुईम फिईर चुकल छलीह।हमर बिहार कहलाह पर "बोधगया" घुमला के अपन अनुभव बतेलीह। चाह - काफी के आग्रह केला पर दुध आ दुध सं बनल खाय पीबाक वस्तु सं एलर्जी के बात बतेलीह। ओ पूर्व मे ब्रेस्ट कैंसर सं पीड़ित रहल छलीह। हमरा किछु कहबाह सं पहिने ओ आपरेशन कैल अंग सेहो देखा देलीह। पहिले दिन खुब गप्प ठहक्का भेल। ओ सम्प्रति ब्रिटीश नेशनल छलीह। हिंदी बढ़िया सेहो बजई छलीह। हनकर पतिदेव साऊथ अफ्रीका के एकटा पैघ प्रतिष्ठित कंपनी के सी ई ओ छलखिन। हमर ई कहला पर जे उनका नई कहियो एतअ अबईत देखलियईन। उनकर ज़बाब छलईन- ओ व्यस्त छथि। कहियो काल अबई छथि , अतुका कतेक काज बढ़ल अईछ , से देखई लेल। ओना हम सब काजक बारे मे बतबईत रहई छियईन। ई काज हमरे जिम्मा अईछ। जखईन हम काज देखिये रहल छी तअ उनकर कोन काज। ई समय ओ आन काज मे लगेताह। कतेक सहज ढंग सं ओ ई बात बजलीह। हमरा मोन पड़ल अपना कतअ त घर बनअ काल घरक लोक के तअ छोईर दियह, सर संबंधी आ टोल समाज सेहो बिन बजेने टहलईत आयत , आ दस टा सलाह दअ कअ चईल जायत। नई किछु हेतई त ई जरुरे कहत- "बाकी सब तअ ठीक अईछ लेकिन आहांक घर मे सुरजक ईजोत कम आयत, अन्हार बेशी रहत।" ओकर अपन घर मे एक्को टा खिड़की नई रहला सं सदरो अन्हार होई लेकिन आहां के तअ कनी ज्ञान दअ कअ चईल जायत। एक्को कोठरी जे जीवन मे नई कहियो बनेने हेताह ओहो घर बनेबाक आ वास्तुक एक्सपर्ट जेकां सलाह दअ कअ चईल जेताह। एतअ तअ सद्य ओकर घरबाला छथिन लेकिन उनका अकर अनुभव नई , तैं ओ सलाह नई दई छथिन। अपना सब कतअ " फलां बुझिते कतेक छथिन" बाला भाव सं ई सब ऊपर उईठ गेल अईछ। आब शईन रईब कअ बेशी काल सायरा हमरा कतअ आबअ लगलीह। हुनकर अपन घर मे काज चईल रहल छलईन। उनका प्रिटोरिया मे सेहो पैघसन घर पहिने सं छईन- जतअ ओ अखईन ई दुनु नौकरानी सब संग रहई छथि।एकटा तलाकशुदा बेटी छईन ओ इंग्लैंड आ साऊथ अफ्रीका अबईत जाईत रहई छईन। बेटी सं जुड़ाव त छईन लेकिन धृतराष्ट्र बाला संतान प्रेम नई छलईन। हम कहलियईन- अतेक टा घर त पहिनेहे सं प्रिटोरिया मे अईछ, तखईन ई घर किया कीनलऊं। हमर घरबाला के ईच्छा छलईन जे " युनियन बिल्डिंग" के लग रही। कहिया सं ताक मे रही। युनियन बिल्डिंग के लग ईयाह घर भेटल तैं कीन लेलहुं। युनियन बिल्डिंग अतुका राष्ट्रपति भवन भेल। ई तअ ओहिना भेल जेना इंडिया गेट के लगीच रहअ के सब भारतीय के सपना रहई छई। हमरा डांर मे दर्द रहईत अईछ, सीढ़ी नई चईढ़ सकई छी, तैं लिफ्ट लगबा रहल छी। अई एरिया के ई पहिल दुमंजिला घर होयत जइमे लिफ्ट होयत। अकरे सरकारी परमिशन सब लेबअ मे दिक्कत भअ रहल अईछ। हमरा त पुरने घर नीक लगईत अईछ। ओ पैघ परिसर मे अईछ। मूदा घरबाला के ईच्छापूर्ति के लेल हमरा ई घर बनबावअ के पईर रहल अईछ। अतअ हम एकटा बात जोईर दी जे हमर घर मे बैठकी दोसर मंजिल पर छल आ सायरा खुशी-खुशी अपने चईढं कअ अबई छलीह। तरह तरह के टाईल्स आ लकड़ी के काज घर मे भअ रहल छलईन। चारु कात फूल पत्ती सब लगा चुकल छलीह।हमर सहकर्मी सब सं सेहो हमरा कतअ हुनका भेंट गांठ भअ गेल छलईन। एक दिन बहुत शिकायत के लहजा मे बजलीह जे आहां के सहकर्मी के कनिया सब तअ बिदेशी भअ गेल छथि। हम कारण पुछलियईन तअ ओ कहलीह- हम आहां कतअ आयल रही। सब स्त्रीगण सब हमरा सं अंग्रेजी मे बाजअ लगलीह। हम हिंदी मे ज़बाब दियईन आ ओ सब अंग्रेजी मे बजई छलीह। हमरा नई रहल गेल हम कहलियईन - आहां सब नार्थ इंडियन भअ कअ हिंदी नई बजई छी। तखईन ओ सब लजेलीह। फेर हिंदी मे गप सरक्का भेलईन। ओ राफ- साफ, ठांई पर ठांई बाजअ बाला लोक छलीह। जखईन किछु दिन ओ नई अबईत त हमरा सब के खाली खाली लागय। उनका हमर धीया- पुता सं सेहो दोस्ती भअ गेल छलईन। हर महीना उनका लंदनक यात्रा रहबे करईन। बाद मे ओ कहलीह जे हुनक ईत्र के कंपनी ब्रिटेन मे छईन आ ओकर सप्लाई भारत, दक्षिण अफ्रीका सहित कतेक देश मे छईन। उनकर घर पर आबअ सं पहिनेहे माली, केयरटेकर, गार्ड, सफाईकर्मी के चहलकदमी शुरू भअ जाई छलई, तई सं पता लाईग जाई जे ओ आबअ बाली छईथ। ओ कहई छलीह जे जहिया हम काज केनाई छोईर देब, पागल भअ जायब। हमरा जीबा लेल काज चाही। जोहानिसबर्ग मे सेहो कयेक टा घर कीन कअ रखने छईथ। अकरे सब के देखअ सुनअ मे समय बीतई छईन। किछु दिन बाद ओ अपन पचहत्तरमा जन्मदिन इस्तांबुल,टर्की मे मना कअ घुरलीह। ओतई उनकर सब संबंधी जन्मदिन मनबई लेल दुनिया के अलग अलग देश सं पहुंचल रहईन। हमरो लेल केक अनने छलीह। हमरा सं ओ हाथ नई मिलबई छलीह। ओ गर लगा कअ हमरा सं मिलई छलीह । जखईन हमरा प्रिटोरिया सं कम्पाला, युगांडा बदली भेल त ओ कहलीह- हमर जन्मभूमि कंपाला अईछ। उनकर पिता एकटा सिक्ख (सरदार) भारतीय छलखिन। जहिना उनकर पिता निरक्षर आ जाहिल छलखिन ओहिना उनकर मां पढ़ल लिखल, गुणी आ व्यवहारकुशल छलखिन। दुनु के एक्को टा गुण आपस मे नई मिलईन। तखनो चाईर टा संतान भेलईन। ओही मे सं एकटा सायरा छलीह। हम कहलियईन जे आऊ अपन जन्म भूमि देखई लेल। ओ कहलीह किछो ओतुका याद नई अईछ।हमरा साहस नई भेल जे हुनका सं " पिता" के नाम पुईछतियईन। सायरा के देेहक गोराई आ सौम्यता देखला सं बुझा रहल अईछ जे ब्रिटीश गोरी मेम हुनकर मां हेथिन, जे बाद मे ब्रिटेन घुईर गेल हेथिन। जखईन प्रिटोरिया सं कंपाला अंतिम बेर अबई छलऊं त हुनकर फोन आयल आ ओ हमरा सब के बिदा होबा काल अपन दुनु सहायिका संग ठार छलीह।हमहु सब भारी मन सं प्रिटोरिया सं एकटा नीक यादगारी लअ कअ चईल एलऊं। कतऊ ने कतऊ भारतीय कनेक्शन हमरा सब के सायरा सं जोड़लक। अहन सह्रदय लोक अफ्रीकी माईट मे पनईप सकईत अईछ। दोसर समाज तअ अकरा ठुंठ कअ दईतई। --x� हमर प्रिटोरिया के एकटा पड़ोसी सायरा के बारे मे आहां सब के बुझल अईछ। आब दोसर कातक जे भारतीय मूल क पड़ोसी छलाह, ऊनकर नाम किशोर रामलाल छलईन। रामलाल ऊनकर सरनेम छलईन। तीन खाड़ी पहिने रामलाल नामक ऊनकर पूर्वज गिरमिटिया मजदूर बईन कअ नेटाल प्रांत, साऊथ अफ्रीका आयल छलखिन।ओ सब बस्ती, ऊत्तर प्रदेशक मूल निवासी छलाह।ओकर बाद ऊनकर परिवार मे सबहक सरनेम रामलाल भअ गेल छईन। उनका अपन पूर्वजक संघर्ष के प्रति बहुत सम्मान छईन। डर्बन मे जखईन भारतीय मूलक लोक के उच्च शिक्षा ग्रहण करबाक अनुमति भेटलई, तं ऊनका फर्स्ट बैचक इंजीनियरिंग क छात्र होबाक गौरव प्राप्त भेलईन। ओई बैचक सब भारतीय मूलक लोक सब नीक नीक पद पर साऊथ अफ्रीका मे अईछ। ई ओतुका स्थापित व्यवसाई छथि। मूलतः डर्बन मे रहईत छथि। अपन प्रतिष्ठान ओतई छईन। प्रिटोरिया मे उनकर इकलौता बेटा डाक्टरी के पढ़ाई कअ रहल छईन,ओकरे सहुलियत लेल घर कीनने छथि। हुनकर श्रीमतीजी, बेटा लग रहई छथिन। अपने शईन रईब मे डर्बन प्रिटोरिया दऊर बरहा करईत रहई छथि।अतऊ बेटा आ कनिया लेल फराक फराक बी एम डब्ल्यू रखने छथि। अपने तअ एयरपोर्ट सं टैक्सिये स़ं अबई जाई छथि।ईनकर डर्बन प्रिटोरिया के दौरहट सं हमरा कयेक टा अपन लोक स्मृति मे आईब जाई छथि, जे धीया पुता के पढ़ाई के लेल अही सं गुजरल छथि। ईनकर बाप- पित्ती सब बढ़ई के काज बाद मे करअ लागल छलखिन। नेने सं उनका ठोक ठठाक काज मे मोन लगईन। ईयाह बाद मे इनका इंजीनियरिंग पढ़बा लेल उत्साहित केलकईन। तहिया भारतीय मूलक लोक के इंजीनियर भेनाई साऊथ अफ्रीका लेल बड्ड भारी एचीवमेट छलई। ई अपन मोन सं अपन भारतीय मूलक संगी के बहिन आशा सं बियाह केने छलाह। आशा के पुरखा सुखलाल एतअ आयल छलाह। ईनकर सबहक सरनेम सुखलाल छईन। ईनकर बाबा गिरमिटिया मजदूरी के बाद किराना के दोकान खोलने रहथिन। ओ समय समय पर भारत सेहो जाईत अबईत छलाह। उनकर मृत्यु सेहो भारते मे भेलईन। आजमगढ़ जिला घर छलईन। आशा के पिता प्रगतिवादी छलाह। ओ कर्ज बर्ज लअ कअ "बस" कीनलाह आ अपने ओकर ड्राईवरी करईथ। बस के मैकेनिक सेहो ओ अपने छलाह। अई बस सं ओ चिक्कन पाईयो कमेलाह आ धीया पुता के पढ़ेबो केलाह। सुखलालक परिवार क सब लोक सिनेमा देखबाक शौकीन छलाह। ओ अपन सब धीया- पुता के नाम हिन्दी फिल्म के हीरो- हीरोईन पर रखने छलाह। बाद मे ओ मोटर सेहो कीन लेने छलाह आ मोटर सं ओ सब सनीमा हाल तक जाई छलाह।ओई समय मे मोटर सं सनीमा हाल गेनाई बड़का गप छलई। हिन्दी सिनेमा डर्बनक सनीमा हाल मे लगईत रहई। एक दु बेर भारत सं हीरो हिरोइन सेहो डर्बन आयल छलई।ओकरो सं ई सब तहिया भेंट केने छलाह। तकर खिस्सा ठोरे पर रहई छईन। ई रामलाल आ सुखलाल सरनेम सं हमरा अपन गाम याद आईब गेल। ओतऊ रमललवा आ सुखिया छल।रमललवा के माय मनोरिया पहिने हमरा सबहक कतअ खबासिन छल। ओकरे बिकलांग बेटाक नाम राम लाल छलई जकरा सब रमललवा कहई छलई। सुखलाल, हमर सबहक असामी रामलगन के बेटा छलई। ओई असामी सं सिकमी बटाई लअ कअ केस मोकदमा बाद मे सेहो चललई। सुखलाल के सब सुखिया कहई आ ओ गामक बाबु भैय्या कतअ काज नई कअ कअ चिरान मिल मे लकड़ी मशीन सं चिरई छल। रामलाल के नाम बिगाईर कअ रमललवा, सुखलाल के सुखिया आ मनोर के मनोरिया, भारतीय समाज कअ देने छलई। कहबाक मतलब अतबे अईछ जे अई सरनेम सं ओकर सबहक तहिया के सामाजिक स्थिति के बारे मे अनुमान लगा सकईत छी। आशा के एकटा भाई जे पहिने प्रोफेसर छलाय ओ आब दक्षिण अफ्रीका सरकार मे राजदूतक पद पर विराजमान अईछ।ई सब राजनीतिक नियुक्ति छई। पुरा दक्षिण एशिया के प्रभारी अईछ। प्रधानमंत्री आ राष्ट्रपति सनक लोक के एला गेला के कार्यक्रम के प्रभारी उयाह रहईत अईछ। बाकी ओकर दु टा भाई, दु अलग अलग प्रमुख देशक साऊथ अफ्रीका दुतावास मे पदस्थापित अईछ। बनारस मे भेल प्रवासी भारतीय दिवस मे सुखलाल के सम्मान सेहो कयल गेलई। एकटा बहिन आशा जे परम सुन्नईर छलई, ओकर बियाह ईयाह किशोर रामलाल सं भेल छई।आशाक माय गीता बेशी काल बेटी कतअ प्रिटोरिया मे रहईत अईछ।हमरा बुझाईत अईछ जे गीता बुढापाक कारने दोसराईत लेल बेटी कतअ रहईत अईछ। ओकर बेटा सबहक पैर मे तअ चकरी लागल छई, घुमिते रहई छई। दोसर रामलाल समझदारो छई आ सब के देखअ सुनअ ......संग डेबअबाला अईछ। रामलाल आ आशाक बियाह मे गीताक सहमति बेशी छलई, सैह रामलाल कर्जा, ओकरा पर ध्यान राईख कअ, चुका रहल अईछ।भारत जेकां गीता के सेहो बेटी कतअ सबदिना रहनाई ठीक नई लगई छई। रहत बेटी कतअ, मूदा बड़ाई हरदम बेटे सबहक करईत रहत। जोहिया कअ बेटा आबअ बला रहई छई, ओई सं सात दिन पहिने सं सबके कहने घुरत।ई सब हमरा भारते जकां लगईत अईछ। भारतीय मूलक लोक सब जे गिरमिटिया मजदूरक रूप मे दक्षिण अफ्रीका गेल अईछ, अखनो पैघ- छोट जाईतक भ्रम मे जीब रहल अईछ।हमरा सं एकदिन गीता, जे भोजपुरी अखनो ठीक-ठाक बाईज लई छथि,पुछलीह- " भारत मे महाराज कोन जाईत होई छई? हम कहलियईन- राजा-महाराजा के कोनो जाईत- धरम थोरे होई छई। कतऊ मुसलमान छलई, मुगल छलई, राजपूत छलई, ब्राह्मण छलई, भुमिहार छलई, किस्तान छलई,आरो कयेक तरहक जाईत छलई। सब जाईत आ धर्मक राजा होईत छलई। बड़का राजा जकरा पर प्रसन्न,ओकरा छोटका राजा बना दई छलई।आब तअ कियो राजा नई। जिनका लग पावर- पैसा, सैह भेल महाराजा। ओ बजलीह- से तअ हम बुझिते छी। हम पुछलऊं जे "महराज टाईटिल" बला कोन जाईतक भेल। महराजगंज, सुरी जाईतक महल्ला छई, दोकान दौरी ओ सब करईत अईछ।हमरा बुझल छल। हम कहलियईन- बनिया बुझु। बनिया तअ ब्राह्मण नई भेल। हम कहलियईन- नई भेल। अतअ एकटा महराज अईछ, ओ अपना के बड़का जाईत बाला कहईत अईछ। हमरा जन्तवे बड़का तअ नई भेल। मूदा आब तअ भारतो मे जकरा धन सम्पईत, सैह बड़का। नई नई ओ कहईत अईछ जे हम सब बड़का छी। आ अखनो ओ सब हरसट्ठे कतऊ नई खाईत पीबईत अईछ।अपना के बड़का बनईत अईछ। ओना नौकरी त रामलाल के कम्पनी मे करईत अईछ। हम कहलियईन-आहांक जमाय रामलाल ओकर मालिक छथिन। मालिक ने बड़का भेल। हम उनका जाईत के जंजाल सं बाहर आनअ चाहई छलियईन। ऊनका बेशी पाछु परला पर कहलियईन-कतऊ कतऊ ब्राह्मण भ़सिया के काज सेहो करई छलई- ओई भंसिया के सेहो "महराज" कहल जाई छलई। भअ सकईत अईछ, ओ ऊयाह भंसिया ब्राह्मण बाला मे सं होईत। हमर भंसिया बाला तर्क उनका दिमाग मे ठीक जगह चोट केलकईन। ओ बजलीह- आहां ठीक कहलऊं। ई भंसिया बाला ब्राह्मण छथि। अगर ओतैक रहितईन तं मजुर बईन कअ डर्बन किया अबितईथ।ओ अपन बेटी आशा के सेहो बजा कअ हमर भन्सिया वाला गप बतेलकई। उनका आब संतोष भेलईन।फेर महराज सरनेम बला हमरे हमनाम क्रिकेट खेलाड़ी केशव के गप होबअ लगलई। ओ केशव महराज साऊथ अफ्रीका के क्रिकेट टीम मे अईछ। ओकरा ओ सब जनई छलखिन। हमरा ई जाईन कअ आश्चर्य लागल अतेक रंगभेदक दंश झेलबाक बादो भारतीय मूल क लोक सब मे पैघ छोट जाईतक प्रपंच अखनो छई। ओना आब के जेनेरेशन अकरा सब के तिलांजलि द देने अईछ। थोक मे अंतर्रंग, अंतर्रजातिय आ अंतरराष्ट्रीय विवाह भारतीय मूलक लोक कअ रहल अईछ। एकटा गुत्थी नई सुलझल जे कयेक भारतीय मूलक लोक सब के मारीशस मे संबंधी सब छई। एक दोसर देश मे जा कअ बियाह दान सेहो करईत अईछ। हमरा बुझा रहल अईछ जे जेना अपनो सब कतअ एक्के घर मे कियो बम्बई, कियो दिल्ली, कियो सुरत आ कियो लुधियाना मे सेट्ल कअ जाईत छईथ, ओहिना एक्के घरक कियो साऊथ अफ्रीका, कियो मारीशस, कियो फिजी आ कियो सुरीनाम मे गिरमिटिया मजदूर बईन कअ चईल गेल हेताह। माइग्रेशन सेहो कयेक परिवार के सदौं सं प्रवृत्ति होई छई। ओ नीक जिनगी लेल पलायन करईत रहईत अईछ। बाद मे सब देश मे व्यवस्थित भेलाक बाद एकदोसर के संपर्क मे आयल होयत। फेर आन-जान आ अपेक्षा बढ़ल हेतई। एकटा ईहो संभावना छई जे एकटा मालिक के कयेक शहर मे कम्पनी रहईत छई। एक भाई अई शहर बाला कम्पनी मे, दोसर भाई दोसर शहर आ तेसर भाई तेसर शहर मे नौकरी करअ लगईत अईछ। अंग्रेज मालिक के सब देश मे उपनिवेश छलई। तु़ं अई मे जो आ तुं ओई मे जो। हमरा खोचाईर कअ पुछलाक बादो ओ सब कोनो खोईंचा छोड़ावल ज़बाब नई देलक। ईहो भअ सकईत छई " दुनिया के मजदूरों एक हो" के नारा जेकां सब गिरमिटिया अपना के एक्के बुझईत होई। ओना अई गिरमिटिया मजुरक जीवन तअ सब जगह एकरंगाहे छलई। किशोर रामलाल बहुतही सहज आ सह्रदय लोक छथि।उनका अपन संघर्ष क दिन याद छईन।साऊथ अफ्रीका मे अपन एशियाई चेहरा मोहराक कारण घुअईल मिल नई सकईत छथि।कयेक बेर भारतीय मूलक लोक के खिलाफ स्थानीय लोकक आंदोलन देखने छथि। उनका अंदेशा छईन की आबअ बाला समय मे उनका सब के ई देश छोड़अ परतईन।ओ अही लेल ओ सी आई कार्ड बनौने छथि। हरिद्वार मे घर सेहो कीनने छथि। शिवानंद स्वामी के परम शिष्य छथि। ओकर फालोवर सबहक मानी तअ शिवानंद आश्रम, डर्बनक अगिला मठाधीश किशोर रामलाल नियुक्त हेताह। अकर मुख्यालय जे हरिद्वार मे छई, से तअ इनका ई जिम्मेदारी देबअ लेल तैयार अईछ लेकिन ई अखईन बेटाक डाक्टरीक पढ़ाई लेल रूकल छथि। ओकर बाद पुर्णकालिक स्वामी भअ जेताह।अतअ डाक्टरी के पढ़ाई पुरा करअ मे करीब आठ बरख लाईग जाई छई। एक्के टा नीक बात छई जे भारत जेकां कठिन इन्ट्रैन्स परीक्षा नई छई। बारहवीं के नंबर के आधार पर सीधा नाम डाक्टरी आ इंजीनियरिंग मे लिखा जाई छई। अपन कंपनी मे ओ महराज भारतीय के आगु के पढ़ाई के खर्चा सेहो ऊठौने छथि। उनका अपना पढ़बा काल पाई के दिक्कत भेल छलईन ओही लेल भारतीय मूलक विद्यार्थी के पढ़अ लेल मदद खातिर सदिखन तैयार रहईत छथि। अई महराज सरनेम बाला विद्यार्थी, जकर जातीय दंभ सं ऊनकर साऊस गीता सेहो खुश नई छथिन, तखनो किशोर ओकरा मदद करईत छथिन। अतअ भारतीय मूल बाला भाव , सब भाव पर हावी भअ जाई छई। एकटा आर समानता हमरा साऊथ अफ्रीका आ युगांडा मे देखायल। भअ सकईत छई जे आनो अफ्रीकी देश मे ई सब होई। हम जखईन केपटाउन, साऊथ अफ्रीका मे एकटा मंदिर मे दर्शन करअ गेलऊं त हमरा ओही परिसर मे राम-जानकी मंदिर क अलावा गुरूद्वारा, जैन मंदिर आ मस्जिद सेहो भेटला। सब के पुजारी, ग्रंथी, आ मौलवी के रहबाक घरो फराक फराक रहई। ओहिना कम्पाला, युगांडा मे एक्के जगह एस डी एम मंदिर, जैन मंदिर, गुरुद्वारा आ मस्जिद भेटल। सब सटले सटल। पुछला पर पता चलल जे सौ बरख सं पहिनेहे अंग्रेज सरकार ई जगह धार्मिक आस्था के नाम पर देने छलई। आब श्रद्धालु के संख्या सब जगह बईढ़ गेल छई। मोटरक पार्किंग भारी समस्या भअ गेल छई। ओकर समाधान लेल अतुका गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी सरकार सं गुरुद्वारा आ मंदिर क बीचक सड़क सौ बरख के लीज पर पाई दअ कअ लअ लेलक अईछ।आब अई सड़क के मोटर पार्किंग मे बदलबा के काज चईल रहल अईछ। मंदिर कमेटी वाला के या तअ नई फुरेलईन या पैसा आरे हाथ एलईन या ढीला ढाला छलाह.........मौका हाथ सं निकईल गेलईन। धार्मिक सहिष्णुता के एकटा आर उदाहरण केपटाउन के सुनबई छी। दक्षिण भारतीय एकटा पुजारी अपन जागृत मंदिर मे लअ गेलाह। ओ कहलाह जे ई पहिने अकटा क्रिश्चनक प्रार्थना स्थल छल......आहां चर्च बुझु। ओ अतअ सं चईल गेल। ओकर बाद बन्ने छलई। हम सब ओकरा सं मंदिर बनबाव के नाम पर ई जगह कीनलऊं आ आई ई भव्य मंदिर आहांक सामने ठार अईछ। हम सोचअ पर मजबुर भेलऊं कि भारत मे कोनो मंदिर मस्जिद के चर्च मे बदलनाई संभव छई। अतअ कतेक आसानी सं सड़क आ चर्च के उपयोगिता बदला गेलई। काश हमरो सबहक उदार समाज होईता तअ भव्य राममंदिर अयोध्या मे बनल रहितै। ई एक परिसर मे सब धार्मिक स्थल सबके देखला सं हमरा भारतक बड़का अस्फतालक आपरेशन थियेटर के बाहर बनल प्रार्थना कक्ष मोन परल। ओतअ भगवान भगवती, गिरजाघर, मक्का मदीना आ गुरूद्वारा सबहक फोटो राखल रहई छई। आहां अपन अपन धार्मिक आस्था के अनुसार अपन रोगी के आपरेशन सफल होबाक गोहार लगबईत रहु। नदी सब तअ कतऊ के हुआय, अपन धारा बदलईत रहईत अईछ।अतअ युगांडा आ कांगो के बीच मे सेमुलिकि नदी छई। नदी सीमा बांटई छई। अकर धारा हर बरख बदलईत रहई छई। एक किलोमीटर करीब सब साल युगांडा तरफ बढ़ल जा रहल छई। ओई कारण नदी मे बनल द्वीप सब के स्वामित्व पर विवाद होईत रहई छई। मोटा मोटी नदी के धारा कांगो मे आ किनारा युगांडा मे छई। अई सीमा के बिबाद सं हमरा दिल्ली मे पुलिस थानाक सीमांकन बिबाद मोन परल।यमुना नदी के पाईन तक के भाग नदी के पश्चिम तरफक पुलिस थाना के छई। बरसात मे यमुनाजी अपन असली रुप मे रहईत छईथ, तखईन पश्चिम कतका थाना के क्षेत्र बईढ़ जाई छई। जखईन पाईन कम भअ जाई छईन, त क्षेत्राधिकार कम भअ जाई छई। सीमा त मनुक्खक बनायल छई। नदी धार कतऊ के हुआय, ओ कतऊ ककरो अनुसार बहतई। --x� साऊथ अफ्रीका मे ओतुका लोकक बीच भारतीय मसाला आर भोजन मे "कढ़ी" के बड खोज पुछारी रहई छई।हमरा कयेक स्थानीय लोक अई बारे मे जिज्ञासा केलक। एक तरह सं ओ मसाला मंगलक आ "कढ़ी" खुआबअ लेल कहलक। अई दुनुं के अतबे महात्म्य छई जे आहां "भारतीय मसाला " दअ कअ आ " कढ़ी " खुआ कअ कअ ककरो पटा सकई छी। हमरा एकटा अंग्रेजन मीटिंग मे भेटलीह, ओ मीटिंग क बाद अपने आगु बईढ़ कअ कहलीह जे ऊनकर बर भारतीय छथिन। हम कनी खोज पुछारी केलीयैन जे भारत तअ बरकी टा छई, ओ कतुका छथि। ओ चुपा गेलीह। ज़बाब सोचअ लगलीह। हम ऊनकर मोन मे चलईत अंतर्द्वंद्ध के बुईझ गेलियईन। पुछलियईन- खेनाई मे ईडली डोसा खाई छथि कि भात रोटी। ओ बुधियार छलीह, कहलीह- ओ भारतीय मूलक छथि। कहियो भारत गेल नई छथि।ओना दक्षिण भारतीय छथि। ई बिदेश मे बसल भारतीय सब टा मे ई देखलियई जे ओ सब अतऊ बिखरल छथि-,जेना मराठी समाज, आंध्रा एशोसिएशन, तमिल संगम, बंगाली संघ, ऊत्तर भारतीय समाज, केरला संघ,कन्नड़ संघ, ऊड़ीसा संघ, हिंदु समाज, इंडियन क्रिश्चियन एशोसिएशन, पहाड़ी समाज, गुजराती समाज, पाटीदार, लोहानी, कश्मीरी, आसामी आर आर कतेक रास। भारतीय अस्मिता गौण, क्षेत्रिय/भाषाई/धार्मिक पहचान हावी। बाकी देशक एकटा संघ रहई छई-पाकिस्तानी, बंग्लादेशी, चीनी, ब्रिटिश,रशियन आर आर। हम गप के आगु बढ़बईत पुछलियईन- आहां ऊनकर कोन गुण देख कअ आकर्षित भेल रही? हम जे देख कअ आकर्षित भेल रही, आहां से सुनब तअ हंसी लाईग जायत, कियैक तअ भारत मे अखनो अकरा गुण नई मानल जाई छई। हमरा भेल कि बाईज कअ, कोन "बम " फोरतीह। हम कहलियनि- आहां कहुं ने , हमरा सब सुनबाक हिस्सक अईछ। कहलीह- ओ खेनाई बढ़िया मसालेदार बनबई छथि। पहिने मरचाई बेशी दई छलखिन, से हमरा बाद मे दिक्कत करय। आब मरचाई कम कअ बनबई छईथ। बहुतही लजीज। हम कहलियईन- आंगुर त नई चटिते रही जाई छी,? नई। हम चम्मच सं खाई छी- हंसईत बजलीह। ईयाह गुण पर बियाह कअ लेलऊं? आब की चाही। रोज बढ़िया मसाला बाला भोजन भेटईत अईछ । ओ कढ़ी सेहो बढ़िया बनबई छथि। हम आहां के बजायब। हम कहलियईन- हमरा सामने ओ बनबअ सं लजेताह। कहलीह- हं। आहां ठीक कहई छी। उनकर मां जखईन रहई छथि , ओ खेनाई नई बनबई छथि, तखईन हम सब बाहरे खाई छी। हम मोने मोन कहलऊं, भारतीय मूल छईन तैं छजई छईन। नै तं कै गाम ढ़िढोंरा पिटा जईतईन। उनका कहलियईन- भारत मे "बर" , खेनाई नई बनबई छई।ज्यों बनबईतो छई, तं नुका चोरा कअ, पर्दा खसा कअ, चुप्पे चाप। अतुका भारतीय मूलक लोक सब पश्चिमी देश सबहक जेना खुईल कअ घरक काज करई छथि।दाई/खबासिन सब दक्षिण अफ्रीका मे भारतक लेखें महंग परई छई।घंटाक अनुसार पाई देबअ परई छईन। लेकिन पुर्वी अफ्रीका मे बड्ड सस्ता छई। युगांडा मे गृहणी सबके मौज छईन। दक्षिण अफ्रीका मे भारतीय होटल सब बहुतही कम छई। नीक नुकुत भारतीय भोजन करअ लेल लंबा दुरी तय करअ परई छई।अकर ऊल्टा कम्पाला मे ढेरी ढाकी भारतीय होटल सब छई। नौ छौ खाईत रहु। दक्षिण अफ्रीका मे डाक्टर सं देखेनाई बड्ड महंग।एक तअ, इमरजेंसी छोईर कअ, बिना एप्वाईंटमेट के नई देखत। दोसर केहनो डाक्टर हुआय - कम सं कम चाईर हजार भारतीय रूपया के बराबर खाली देखबाक फीस छई। जांच तांच तअ बाद मे।बिना डाक्टर के पर्ची के मथदूक्खी के गोटियो नई देत। पेट मे किछु गड़बड़ भेला पर पांच हजारक नाम सं भारतीय लोक एक टाइम खेनाई अंठिया दईत अईछ। पेटो ठीक भअ जाई छई, आ पांच हजार रूपियो बचा लईत अईछ। बहुत रास भारतीय मूलक लोक सब बेशी मोन खराब मे वा डिलीवरी के समय मे भारत चईल जाईत अईछ।ओतबे पाई मे घुमियो लईत अईछ, अपन लोक सं भेंटो भअ जाई छई, बढ़िया डाक्टरी जांचो भेटई छई। ई सब आम लोकक बारे मे कही रहल छी। ओना दुनिया मे पहिल हार्टक बाईपास सर्जरी, दक्षिण अफ्रीका के हास्पिटल मे भेल छई। कम्पाला मे स्थानीय डाक्टर सब अपन देह दशाक मोताबिक दबाई दई छई। हमरा अतअ अबिते एकटा सहकर्मी बता देने छलाह, जे डाक्टर दवाई लिखय ओकर चौथाई या आधा गोटी खायब। पुरा गोटी हम आहां नई पचा सकई छी। ई सब अपन देहक शक्तिक अनुसारे दवाई लिखई छई। ओकर हिसाब सं ज्यों गोटी खेलऊं, त बाद मे पहिलुका बीमारी त कात भअ जायत, अई गोटी के असर कम करबाक बाला बीमारी के ईलाज शुरू भअ जायत। दक्षिण अफ्रीका मे भारतीय मूल क लोक सब, बियाह दान गोरो सब सं, ओतुका स्थानीय लोक( जकरा हम सब श्यामसुन्दर कहई छीयई ) सं सेहो, भारतीय मूलक लोग सब सं सेहो आ भारत जा कअ सेहो करईत अईछ।हमरा तअ ओतुका HSS( हिंदू स्वयंसेवक संघ) के शीर्षस्थ पदाधिकारी अपने अपन मसियौत बहिन के बर सं परिचय करेलाह। ई उनकर कुटुम्ब अंग्रेज छलखिन। एकटा आर भारतीय मूलक महिला अधिकारी भेटलीह , जे हाल मे भारत सं आयल व्यवसाई सं बियाह केने छलीह। लड़का कहलक जे हमरा दुनु गोटे के हिंदी सिनेमा के शौक अईछ, अही सं दोस्ती भेल आ बाद मे बियाहो केलऊं। लड़की कहलीह जे हमर मां के हिंदी बाजअ कनी मनी अबई छलईन। पहिने ऊनके ईनका सं परिचय भेलईन। फेर ई घर आबअ जाय लगलाह त हमरा सब के हिंदी फिल्म के कामन शौक के बारे मे पता चलल।हम त आब भारत छुट्टी मे सासुर जाईत रहई छी। कहबाक जे साऊथ अफ्रीका मे भारतीय मूलक लोक के बियाह दान मे प्रथम वरीयता भारतीय अखनो छई।ओना कतऊ आरो करबा मे कोनो पूर्वाग्रह नई छई। युगांडा मे स्थिति ईतर छई।अतअ त झुठ की सच, अखनो लोक दबले ज़बान मे सही, चर्चा करईत भेटायत जे ई " बियाहक " कारण भारतीय सब के 1972 मे अतअ सं पराय परलई। अकर दु टा समानांतर खिस्सा छई।ईदी अमीन के बारे मे " The last king of Scotland" सनीमा बाद मे बनबो केलई। मुमताज हीरोइन के नाम तअ सुनने होयब। ओकर बड़की दियादिनी " मीना जयंत माधवानी" 1971, मे बिधवा भअ गेल छलीह। ओकरा सं ईदी अमीन 1972 मे बियाह करअ के प्रस्ताव पठेने छलई।ईदी अमीन के खौफ एहन छलई जे कियो ओकरा सीधा नई नई कही सकई छलई। मीना माधवानी टरकबईत रहलई ,आ बाद मे ओकरा सं बचअ लेल युगांडा सं परा रहली। एकटा बुझअ बाला गप छई जे ईदी अमीन के बाप जखईन ओकर माय के छोईर देलकई , तअ ईयाह माधवानी परिवार ओकरा ठांव देने छलई। दोसर खिस्सा छई जे एक टा भारतीय कतअ बियाह मे ईदी अमीन गेल छलाय। भारतीय सब के सबदिना देखेबाक आदत रहईत छईन, जे हमरा कतअ जग मे फलां फलां आयल।ईदी अमीन ओतअ एकटा सुन्नर लड़की के अबईत देखलकई। जखईन ओ लड़की एक जगह बईसलई तअ ईदी अमीन अपन बाडीगार्ड के ओकरा बारे मे पता करअ के कहलकई। ओ लड़की ओतुका फेयरवे होटलक मालिक के बेटी छलई।ईदी अमीन ओकरा बियाहक समाद पठेलकई। ई भारतीय होटल मालिकक जान अवग्रह मे पईर गेलई। ईदी अमीन के पहीने सं कतेक रास कनिया छलई।अई होटल मालिक के घरक लोक राजी नई भेलई।ओ लड़की घरक लोक संग चुप्पे चाप नुका कअ केन्या भाईग गेल। ईमहर ईदी अमीन के जखईन पता लगलई त ओ अग्निश्च वायुश्च। ओ तअ ब्रिटेन, अमेरिका, इजरायल, कनाडा किनको किछु नई बुझई छल। एकटा अदना होटल बाला ओकरा गपक गोली मे ओझरा कअ लड़की के भगा देलकई। अही सब लअ कअ ओ नब्बे दिनक अंदर सब एशियाई के युगांडा छोड़बाक हुक्म सुनौने रहई। ओना ई सही छई जे युगांडा के भारतीय समाज क दरबज्जा, साऊथ अफ्रीका जेकां खुजल नई छई। युगांडा के भारतीय अतुका स्थानीय श्यामसुन्दर सब सं बियाह नई करई छथि। युगांडन लड़की के तअ घर लअ एताह लेकिन अपन बेटी के कोनो स्थिति मे ओकरा सब सं बियाह के स्वीकृति नई देताह। अतुका स्थानीय सब के कहब छलई जे ब्रिटीश, चीनी, अमेरिकी सब सं संबंध स्थानीय लोक के छई, ई भारतीय सब जखईन संबंधक काबिल नई बुझई छथि तअ देश छोईर दैश। ओना पूर्व मे किछु भारतीय लड़की के बियाह अतुका स्थानीय लोक सब सं भेल छलई, लेकिन ओ नई चईल पेलई। ओना जतअ जतअ ब्रिटिश कालोनी छलई ओतअ ब्रिटिश सब वर्गीकरण केने छल।जेना फर्स्ट क्लास बोगी मे टिकट रहलाक बादो गांधीजी के दक्षिण अफ्रीका मे गाड़ी पर सं धक्का माईर कअ उताईर देबअ बाला घटना तअ सब के बुझल अईछ, लेकिन अंग्रेज सब एक नम्बर पर अपना लेल, दु नम्बर पर भारतीय/एशियाई के लेल आ तीन नम्बर पर अफ्रीकी सब के रखने छल। ट्रेन मे फराक बेबसथा त छलईये, जेलो मे अलग छलई। हम कन्सट्युचिशन हिल, जोहानिसबर्ग मे जखईन जेल घुमअ गेलऊं त ओतअ सबहक खुराकी आ सुविधा के तख्ती लागल देखलियई।अही जेल मे गांधी जी आ नेल्शन मंडेला दुनु बेश दिन गुजारने छथि। अंग्रेज क ईहो सब नीति स्थानीय श्यामसुन्दर सब के भारतीय के खिलाफ भरकाबअ मे हवा देलकई। युगांडा मे जे स्थानीय सबहक स्वाहिली भाषा छई ओई मे कयेक टा भारतीय शब्द आईब गेल छई, जेना कुर्सी के ओहो सब कुर्सी कहत,साबुन के साबुनी, दोकान के दुकां, साहब के सेबो। बहुत लोक तअ अतेक तक कहई छई जे ईदी अमीन भारतीय सब के धने टा लुटलकई ने, अतुका तअ करीब तीन लाख स्थानीय लोकक हत्या ओकर दौर मे भेलई। भारतीय सब तअ अई सं बांचल। जहां तक भारतीय संग बियाहक बात छई, ओ जबरदस्ती कतऊ नई केलक।ओ अपना के सीधा अल्लाह के दुत मानय आ कहई -अल्लाह हमरा कहला अईछ जे एशियाई सब के अतअ सं भगाऊ। माधवानी के घरक एक लोक जे अतअ रही गेल छलाह, उनका तअ जेहल मे दअ देने रहईन।कहल जाई छई जे जखईन 1980मे ओ सब घुरलाह तअ खेती के लेल राखल 120 ट्रैक्टर मे सं एकटा बांचल रहईन। ओहिना जतेक मोटर रहईन, ओ सब ओतुका लोक आपस मे बांईट लेने छल।फैक्ट्री , घर नई महल कहु ,जई मे इंदिरा गांधी सेहो रहल छलीह, सब लुअईट लाईट कअ लअ गेलईन।अहिना आरो भारतीय सबहक लुटलकई।जिनका बेशी छलईन, ऊनका बेशी लुटेलईन। भारत मे रानी पद्मिनी आ अलाऊद्दीन खिलजी बाला खिस्सा पर तअ सनीमा सेहो बईन गेल छई। मुगल सब तअ राजस्थान के स्थानीय राजा सबहक बेटी सं बियाह कअ कअ कुटनीतिक चाईल चलिते छल, रानी जोधाबाई के बारे मे सुनने होयब। भारतीय इतिहास मे नई भेटत जे मूगल वा मुस्लिम राजकुमारी के एना बलात बियाह भेल छई। ईदी अमीन के अई तरहक बलात बियाहक बात भारतीय तक नई छलई। ओकर आरो कतेक अवैध संतानक चर्चा छई। ओकर अतुका एकटा राजकुमारी संग अहिने बेबहार क खिस्सा सेहो फैलल छई। ओई राजकुमारी के नाम छलई " बगाया"। ओ अतुका विदेश मंत्री सेहो रहल। अकर ईदी अमीन के पक्ष मे संयुक्त राष्ट्र संघ मे देल भाषण एतिहासिक कहल जाईत छई। अकरो पाछु अहिना ईदी अमीन पईर गेल छलई। ईहो बाप बाप कअ कअ जान बचा कअ भागल। अई सब मे एक्के टा भागबा मे सफलताक कारण भेलई- "पोरस सीमा"। केन्या, तंजानिया, रवांडा , सुडान आ कांगो सीमा सं लोक भागअ मे सफल भअ जाई छल। आई तअ " लुक आउट सर्कुलर" जारी भेलाक बाद देश छोरनाई असंभव जेकां छई। चिंता अई बातक दुनिया के करबाक चाही जे आई के समय मे ज्यों एहन शासक भअ जाई, त की हेतई? अत्याचारक स्तर के अंदाजा लगा कअ सोईच सकई छी। ईदी अमीन बाद मे अपने भाईग कअ चाईर कनिया आ तीस धीया पुता क संग सऊदी अरब मे निर्वासित जीवन बीतबईत छल। 2003 मे ओकर मरलाक संग ओ अध्याय, जकरा अतुका भारतीय नई पढ़बाक चाहईत छथि, समाप्त भेल। साऊथ अफ्रीका के खुजल भारतीय समाज आ युगांडा के ठेपी लागल भारतीय समाज अईछ। युगांडा मे तअ अथाह सम्पईतक मालिक भारतीय सब छईथ। जे बड़का घर देखियऊ, भारतीय के छई। साऊथ अफ्रीका क अंग्रेज जेकां युगांडा के भारतीय अईछ। ओना भारत मे सेहो कतेक तरहक समाज छई।ओई पर कखनो आर चर्चा। --x� ई आहां सब पईढ़ चुकल छी जे युगांडा मे बिबाह योग्य लड़की के व्यवहारिक प्रशिक्षण ओकर पीसी/बुआ दई छई, जकरा ई सब आंटी कहई छई। अई आंटी के बहुत प्रभाव ओई लड़की पर ताउम्र रहई छई।ई आंटी बिबाह खातिर चुनल दुल्हाक संग बेशीतर सुतई सेहो छई, जई सं ओई लड़का के सेक्स क्षमता पता चलई। लड़का के जेना परीक्षा होई छई, ओहिना लड़की के सेहो जंचबाक ढंग छई।अतअ मोट डांट लड़की के नीक मानल जाई छई। अकरा सबहक मान्यता छई जे जई मऊगी के पोन पैघ, ओकरा मे संतानोत्पत्ति के बेशी शक्ति होई छई। अई पईघ पोन बाला मऊगी सं जन्म लेल संतान के स्वस्थ होबाक प्रबल संभावना रहई छई।जकर पोन पैघ ,ओकर उन्नत स्तन सेहो होईत छई। परिवार आ संतानक महत्व छई, ओई लेल ई सब गुण पर बियाह सं पहीने विशेष कअ आ बाद मे सेहो ध्यान देल जाई छई।अपन पारंपरिक उत्सव मे अई सब के कोनो ने कोनो रूप मे देखेबाक चेष्टा करईत ई सब भेटत।अकरा सब के केश होई नई छई, तैं सब बिग पहिरने भेटत।सुंदरताक परिभाषा अतअ बहुत सीमित छई। ओई सं जल्दिये फरिछा जाई छई।अतुका सुंदरी प्रतियोगिता, आन देश जेका़ं कठिन आ लंबा नई होई छई। जेना दुनिया मे विश्व सुंदरी क प्रतियोगिता होई छई,ओहिना अतअ पोनक कर्वक नुमाइश सेहो होई छई। अई सब आयोजन मे सहभागिता लेल लोक उफान तोड़ने रहईत अईछ। अतेक ने आवेदन आईब जाई छई जे कोनो ने कोनो आधार बना कअ आयोजक के छंटनी करअ परई छई।अई सब मे भाग लेनाई गर्वक बात होई छई। अतअ संतान के स्तनपान पर बहुत जोर छई, परम्परागत संस्कार सेहो अकरा बल दई छई। आब तअ सरकार आर ढंग सं लागु करई लेल कानुन सेहो बनबअ जा रहल छई।अई मे छह महीना तक बच्चा के मायक दुध पियेनाई अनिवार्य रहतैक। जे कियो अकरा नई मानताह, उनका लेल जेहल मे जगह आरक्षित रहतईन। जहिना ह्रष्ट पुष्ट मऊगी पुर्वी अफ्रीका मे भेटत, ओकर उल्टा खियाल मियाल बेशी मऊगी साऊथ अफ्रीका मे भेटत। ओतुका लोकक अनुसार मोटापा बीमारीक घर ,आ अतअ मोटापा फर्टिलिटी के लक्षण। के सही के गलत? ई के कहत। ओहिना पुरुख सब गरिष्ठ मांसाहारी होबाक कारण भारी शरीर बाला अक्सरहां भेटत। दुनु देश मे तरह तरह के मांस ओ सब खुब खाईत अईछ। उपर सं सुरा के पान सेहो। दक्षिण अफ्रीका मे एकटा ट्रेंड देखलियई जे लोक कसरत आ जिम के अलावा दौरईत बड्ड अईछ। अई दौरबाक कोनो निश्चित समय नई छई। जखने समय भेटई छई, दौड़नाई शुरू कअ दई छई।ओकरा सबहक अनुसार गरिष्ठ मांसाहार भोजन के बाद अगर शारीरिक श्रम नई करत तअ ह्रदय रोगक संभावना बईढ़ जाई छई। ओही गरिष्ठ भोजन के पचबई लेल ओ सब दौरईत रहईत अईछ। अपन भारत मे तअ भोर सांझ लोक दौरत। ज्यों कोनो कारण सं राईत मे देरी सं सुतल तअ ओई दिनक दौरनाई अंठिया देत। ईहो बात छई जे साऊथ अफ्रीका मे सब जगह फुटपाथ पर दौड़बाक जगह छोड़ल छई, युगांडा मे फुटपाथ छईये नई, आ भारत मे लोकक भीड़ अतेक जे भोरुकबा छोईर कअ दौड़अ के जगह सड़क पर नई भेटत।दिल्ली मे किछु पार्क सब मे विदेशी सब दुपहरिया मे दौराईत देखा जायत।ई सब ऊयाह अईछ, जकरा दौरबाक छई, समय जखईन भेटई। दक्षिण अफ्रीका मे लोक अपन वजन के प्रति बहुत सजग अईछ। अकरा नई बढ़अ देत। लेकिन युगांडा मे तअ वजन बढ़बई लेल जी जान लगेने रहत, बिशेष कअ बिबाह योग्य लड़की सब। दक्षिण अफ्रीका मे एक हजार सं बेशी सड़क, चौक- चौराहा सबहक नाम बदईल देल गेल छई।1994 मे रंगभेद शासन खत्म भेलाक बाद, अई नाम बदलला पर बड्ड काज भेल छई। अकर उल्टा साऊथ अफ्रीका सं तीस बरख पहिनेहे युगांडा आजाद भेल, अखनो सोईचिये रहल अईछ। अई सोचनाई पर पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव याद आईब गेलाह। उनकर एकटा बेटा कुमारे रही गेल छलईन। कियो कहलकईन जे कियैक नई बियाह केलाह। ज़बाब भेटलईन- ओ अपन पिता नरसिम्हा राव सं बियाहक अनुमति लेल पुछला। अखईन तक ज़बाब नई देलखिन। ओही इंतजारी मे बेटा कुमारे रही गेलखिन। युगांडा मे तअ प्राइवेट फर्म सब के पाई लअ जाई लेल सेहो चाईर बेर कहअ परई छई। आहांक चेक बईन कअ राखल अईछ, लअ जाऊ। ओ कहत - आईब रहल छी। दोसर दिन पुछला पर कहत-रस्ता मे छी, तेसर दिन कहत-एराऊंड छी, चारिम दिन कहत-जाह बिसईर गेलऊं। आब लियह। आहां के जे करबाह के अई, से करु। ओहिना सड़कक नाम बदलबा के सोचा रहल छई। अखईन सड़क आ चौक सब पुरना कोलोनियल अधिकारी सबहक नाम पर अईछ। ईदी अमीन क समय मे क्षेत्रीय अस्मिता क नाम पर किछु नाम सब बदलल गेल छलई। भारत मे सेहो नाम बदलबाक काज शुरू भेल अईछ , लेकिन अखईन बहुत बाकी अईछ।ई सब गुलामी के चेन्हा के जल्दी सं जल्दी मिटबअ के चाही।नब पीढ़ी के स्वस्थ आ सार्वभौमिक बिकास लेल ई सब जरूरी मानल जाई छई। युगांडा मे जलखई मे स्थानीय लोक के पाकल कटहर के धीपा कअ खाईत देखलियई। ओई सब जगह, जतअ बहुत लोक काज करअ अबई छई, कटहरक ठीहा भेटत, ओतअ ओरहा जकां कटहर के पकबईत रहत। चिनिया बदाम सेहो खुब लोक खाईत अईछ। कनी आईग मे नोन संग भुजल भेटई छई। भात दाईल तरकारी जेकां ई सब खेनाई नई खायत, ओकर बदला ईयाह सब किछु किछु खाईत रहत। साऊथ अफ्रीका मे पैघ पद बाला के तअ कात करु, छोट छोट काज करअ बाला सब सेहो मौल मे जा कअ बनल बनायल नान वेज खायत। युगांडा मे कोनठा सब मे छोट छीन खाय पीयअ के दोकान बजार आ आफिस बला एरिया मे भेंट जायत। कम बिकसित देश भेलाक बादो युगांडा मे ट्रैफिक नियम तोड़ला पर फाईन बहुत देबअ के परई छई। ओहु डरे भारतीय सब अपने मोटर नई चलबईत छथि। कम पाई मे ड्राईवर भेंट जाई छईन। ओना भारत के ड्राइविंग लाइसेंस रहला पर अलग सं तीन बरखक ड्राइविंग लाइसेंस फीस देला पर बईन जाई छई। दक्षिण अफ्रीका मे भारतीय ड्राइविंग लाइसेंस के मान्यता छई। तखनों नाहक मे ओतुका पुलिस रोकत तअ परेशान करत। ओई सं बचबाक लेल भारतीय हाई कमीशन सं एकटा ड्राइविंग सर्टिफिकेट बनबावक प्रावधान छई। अई सर्टिफिकेट रहला पर तंग होबाक संभावना कम भअ जाई छई। ओना पुलिस त पुलिस छई, कतुको होई, आमना सामना भेला पर, भारते जेकां लागत। युगांडा के भारतीय मूलक लोक सब सेहो, स्थानीय लोक सब सं कम नई छथि। कयेक तअ, गुण मे एक डिग्री ऊपरे। बाकी कहियो आर। --x� केपटाउन, साऊथ अफ्रीका घुमबाक क्रम मे " डिस्ट्रिक्ट सिक्स " नामक एक टा म्युजियम टकरायल। ई "सिक्स " नम्बर , दिल्ली मे रहअ बाला के सुनल जानल बुझाई छई। दिल्ली के जखईन पिनकोड के हिसाब सं अंग्रेज बंटलकई तअ अजुका " पुरानी दिल्ली " दिल्ली-६ " छई। दिल्ली ६ के अपन अलग सभ्यता, संस्कृति, खान-पान, रहन- सहन, बात - बिचार, पहनावा- सुनावा, बोली- बानी छई।सब धर्म- सम्प्रदाय के लोक आपस मे मिल कअ एकटा अलगे ढंगक भाईचारा ओतअ भेटत। दिल्ली ६ बला आहां के अलगे सं बुझा जायत। एकटा हिन्दी मे सनीमा सेहो " दिल्ली छह " के नाम सं बनल छई।ओहिना ई डिस्ट्रिक्ट सिक्स हमरा अपना ओर खींचलक। ई डिस्ट्रिक्ट सिक्स अपना संग कयेक टा उजरनाई आ बसनाई के इतिहास समेटने अईछ।जतअ जतअ रंगभेद रहल अईछ, ओतुका सरकारक पहिलुक चाईल ईयाह रहई छई जे लोक के आपस मे नई घुलल- मिलल दियऊ।ज्यों संग रहत तअ , दोस्ती यारी हेतई, सुख दुख मे एक दोसर के लगीच आईब जेतई, फेर संगठन बईन जेतई,ओकर बाद ओकरा मे ताकत आईब जेतई, फेर मनमानी चलेनाई मोश्किल भअ जेतई- अही लेल रंगक नाम पर लोक के अलग अलग कैल गेलई। ओना अपनो समाज मे जाईत धर्मक नाम पर गाम सनक छोट युनिट मे सेहो विभाजन देखबई। गाम सब मे आहां के कैथटोली, बभनटोली, बढ़ईटोली, ततवाटोली, मलहाटोली, डोमटोली, दुसधाटोली,चमारटोली, सोनारपट्टी, लोहारपट्टी,कुम्हारपट्टी, मियांटोली........ भेंट जायत। अकर पाछु कारण उयाह, जे आपस मे बांईट कअ रखबाक छई। गाम नामक कोनो संस्था मजगुत नई भअ जाई।अकरा हम सब अपन अपन अस्मिता सं जोईड़ कअ , बांटल रहअ मे ही आनंद महसूस करई छी।ई सब अंगरेजिया चाईल हमरा बुझाईत अईछ, जकर लसाईर साऊथ अफ्रीका सं लअ कअ भारत तक मे देखा रहल अईछ। 1867 मे केपटाउन मे डिस्ट्रिक्ट सिक्स बनलई।अई क्षेत्र मे भारत सं आयल गिरमिटिया मजुर के अलावा आरो एशियाई लोक, अंग्रेज, मलेशियाई, इंडोनेशियाई, आ डच कालोनी के लोक सब रहईत छल।ककरो डच सब जबरदस्ती एतअ आईन कअ पटईक देलकई त कियो अपना मोने गिरमिटिया मजुर बईन कअ, तअ कियो कोनो आन कारणे एतअ आईब कअ रहअ लागल छल। 1901 मे पुरा साऊथ अफ्रीका मे प्लेग बीमारी फैललई।अई मे ई पुरा क्षेत्र तबाह भेलई। गांधीजी जोहानिसबर्ग मे ओई समय छलाह, ओतअ अई बीमारी सं लड़बा लेल बड्ड काज केलाह। उनकर संघर्ष जोहानिसबर्ग, प्रिटोरिया आ डर्बन के आसपास के क्षेत्र मे रहलईन। केपटाउन के तरफ रहअ बाला भारतीय सब छुईट गेलईन। अतुका भारतीय मूलक लोक सब गांधी जी के नटालक आ जोहानिसबर्ग क गांधी कहई छईन। एक देश के दोसर हिस्सा मे , उनकर योगदान नहिये के बराबर ओतुका लोक मानई छईन। 1905के आसपास ओना उनकर केपटाउन जेबाक चर्चा छईन। डिस्ट्रिक्ट सिक्स के लोकेशन बहुतही प्रमुख छलई। ओकरा सब के जगह ख़ाली करेबाक छलई।अई प्लेग बीमारी के एकटा मुख्य कारण गंदगी होई छई।अकरे आर मे जे अई सं बीमारी फईल रहल छई, लोक सब जुआ, नशा आ वेश्यावृत्ति कअ रहल अईछ..........ओतुका सरकार, सब के अतअ सं हटाईये नई देलकई........पुरा एरिया पर बुलडोजर चला देलकई। अकर बाद फेर सं ओई डिस्ट्रिक्ट सिक्स के बसेलकई।लोक के वर्गीकरण के आधार बुझबई तअ अजगुत लागत। ई छलई-"पेंसिल टेस्ट"। अई मे व्यक्ति के माथक केश मे पेंसिल घुसा कअ घुमाओल जाई।जकर केश मे आसानी सं पेंसिल घुईम जाई, ओकरा "श्वेतक" दर्जा भेंट जाई।अई डिस्ट्रिक्ट सिक्स मे ततेक ने आपसी समधियाना भेल छलई जे खाली देखला सं आहां निर्णय नई लअ सकई छलऊं।सब रंगक लोक मिल कअ अलगे रंग मे रंगा गेल छल। श्वेत वर्ग मे अबिते, ओई व्यक्ति के सब सरकारी सुविधा भेटअ लगई छलई।जेना सोईत सब के दरभंगा महाराज के समय मे भे़टबाक चर्चा छई।बाकी अश्वेत के डिस्ट्रिक्ट सिक्स सं हटा देल गेलई। करीब साईठ हजार अश्वेत, जई मे भारतीय मूलक नीक संख्या छलई, अतअ सं हटा देल गेलाह।हमरा अई "पेंसिल टेस्ट" सं भारत मे हाल तक चलईत " टु फिंगर टेस्ट" मोन पड़ल। ई टु फिंगर टेस्ट, बलात्कारक जांच के सिलसिला मे होईत छलई, जे अमानवीय आर बिना कोनो वैज्ञानिक आधार के छई। आब जा कअ सरकार सख्ती सं रोकलकई अईछ। ओहिना ई पेंसिल टेस्ट क कोनो वैज्ञानिक आधार नई छलई, लेकिन तहिया अही पर फैसला भेलई। अई निर्वासनक नियम के बड्ड सख्ती सं लागु कैल गेल छलई।ई पेंसिल टेस्ट सअ सांय बहु मे कियो श्वेत भअ गेल तअ कियो अश्वेत। एक दोसर कतअ जाई लेल परमिट लेबअ परई। बाद मे 1994 मे रंगभेद खत्म भेला पर डिस्ट्रिक्ट सिक्स म्युजियम बनलई।ओई समयक वस्तुजात , फोटो, अखबारक रिपोर्ट आर माईर रास चीज सब ओतअ राखल छई। हम जई वस्तु के देख कअ चौंकलऊं, ओ छल- गाम दिशक चौक चौराहा पर बनल केश कटाय बला- " सैलुन"।ओहिना बड़का चाईर टंगा लकड़ी बला कुर्सी , फिटकिरी, पुरना हजाम लग रहईत छोटकी शीशा, लकड़ीक छोटकी बक्शा आ कांसा सनक द्रव्यक कटोरी । ओकर बाद अन्न कुटअ बाला जांत,ऊखल- लोढ़ी, पीढ़िया आ किछु मऊगियाही श्रृंगारक आ भंसा घरक वस्तु सब हमरा देखायल।पुरनका भारतक गरीब गुरबाक गाम घर छल। अई म्युजियमक गाईड उयाह लोक सब छईथ जे या तअ अपने वा उनकर पुरखा अई विस्थापन के झेलने छथि।ईनकर सबहक मुंहकान तअ भारतीय जेकां लगईन, लेकिन ओ सब भारतीय मूलक सवालक ज़बाब मे हंईस कअ टाईर देलाह। हमरा ई देख कअ आश्चर्य लागल जे कतेक जल्दी रंगभेद खत्म भेलाक बाद ओतुका लोक अपना के बदईल लेलक आ नीक बेजाय सब के संग्रहालय बना कअ रखने अईछ। ई सब देखला के बाद, ओतुका नब पीढ़ी एहन कुकृत्य आब नई कअ सकईत अईछ।हम सब तअ गाम घर मे अखनो जाईतक टोल मे बांटल छी।कियो बाहरी ज्यों आईब जाई छईथ कोनो कारणवश, तं उनकर स्वीकार्यता बड मोश्किल। एकटा केपटाउन क डिस्ट्रिक्ट सिक्स अईछ जे पूर्व मे कयल गेल गलती के म्युजियम बना कअ रखने अईछ आ एकटा "दिल्ली छह " अपनो अईछ , जतअ अखईन पार्किंग विवाद मे मां दुर्गा क मूर्ति के खंडित कयल जाईत अईछ। पिछला गल्ती सुधारबा के जगह पर नब गलती हम सब करईत रहब, त समाज आ देश कतअ आगु बढ़त। अपनो सबहक समाज मे शान क बात बुईझ कअ अखनो लोक कहईत छई- फलां बाबु, फलमा के घरारी पर हर चलबा देने छलखिन।माने ओकरा घर छोड़अ पर मजबूर कअ देलखिन। देश - दुनिया संग चलबा लेल,अई सोच के बदलबाक जरुरत छई। साऊथ अफ्रीका सं अई लेल हमरा सब के सीख लेबाक जरुरत अईछ। आब सीख के बाद ई नबका ट्रेंडक बारे मे दोसर विषय वस्तु पर सुनु। डर्बन सं कनी हईट कअ " उमालांगा " एकटा नब शहर बिकसित भेल छई। आहां अतअ बेशी नबका धनिक सब के देखबई। अई नबका धनिक मे भारतीय मूलक लोक सेहो छथि। ओना अतअ रहअ बाला बेशी गोर चमरी बाला सब अईछ। समुद्र क कात मे फैलल ई शहर अपना आप मे खुब खुबसूरती समेटने अईछ। नई महानगर बाला हो हल्ला , आ नई भीड़भाड़। बहुमंजिला इमारत आ कोठी दुनु के नीक संख्या हमरा देखायल। समुद्र सेहो अतअ शांत बुझायल। जेना डर्बन सं हाईर थाईक कअ अतअ आराम कअ रहल हुआय। हम गीता, जे सुखलालक माय छईत, उनकर आग्रह पर ओतअ गेल रही। हमरा ओतअ अबई लेल दुराग्रह रहय। आहां अयबे करु। हम पहिने लिख चुकल छी जे प्रिटोरिया मे गीता हमर पड़ोसी रामलाल क साऊस छथि। गीता अधिककाल प्रिटोरिया मे बेटी कतअ रहई छथि। गीता के अपन अपार्टमेट ईयाह उमालंगा मे छईन। हम उनका ई नई बुझियईन जे ओ कोनो पाईयक दिगदारी लअ कअ बेटी कतअ रहई छथि........उनका भगवान सब किछु देने छथिन........आबेश लअ कअ ओ प्रिटोरिया मे छथि। ई सोभाव हमरा भारत मे सेहो देखाईत रहईत अईछ, जेतअ जे कियो बुढ़ा बुढ़ी, अपन बेटी कतअ रहता, ओ आहां के चाईर बेर जरूरे सुनेताह जे ओ मजबुरी मे अतअ नई छथि, उनका अपन गाम मे बड़का चास-बास छईन। गीता के बार बार आग्रह सं हमरा बुझा गेल छल जे ओ अपन चास बास देखेतिह। आखिर छईत तअ भारतीय मूलक ने। जेना कोठी बाला एरिया के लग मे झुग्गी-झोपड़ी उगिये जाई छई, ओहिना उमालंगा मे सेहो सर्वहारा लोकक किछु घर सब देखायल। स्थानीय अश्वेत सब बेशी दाई, रारिन आर अहिना छोट छीन काज मे लागल बुझायल। हमरा कम बैसक छौंड़ी सब सेहो काज करअबाली अभरल। ई कनी प्रिटोरिया सं अलग बुझायल। हमर ई जिज्ञासा पर बुढ़ी गीता जे हमरा टुटल फुटल भोजपुरी मे कहली से सुईन कअ हम अवाक रही गेलऊं। अतुका लड़की बच्चा सब बड्ड संख्या मे बिन बियाहल मां बईन रहल छई। ई पहिने अई देश मे नई छलई। ई नबका ट्रेंड छई।कनिये पैघ होईते ई छौंड़ी माय बईन जायत, फेर थोड़बे काज करत! टीवी इंटरनेट के लअ कअ तअ नई? नई नई। सरकार सब करवा रहल छई। स्कुल जाई छई लड़की सब अही लेल। बस बच्चा भअ गेल, पढ़ाई खत्म।ओकर बाद बईस कअ खाईत रहत।हमर बच्चा सब तअ पैघ भअ गेल। आब जे छईथ, धीया पुता बाली, से सब समारईथ। हम अकचका गेलऊं। एहन की सरकार केलकई। आहां फरीछा कअ कहु। ओ जे बतेलीह आ दोसरो लोक सब सं अई बारे मे गप भेल, ओई अनुसार साऊथ अफ्रीका मे रंगभेदक समाप्ति के बाद जे सरकार बनलई, ओ सब सामाजिक सुरक्षा क नाम पर किछु कदम नीक उद्देश्य सं उठेलकई। लेकिन ओकर दुष्परिणाम सेहो सोझां आईब रहल छई। बिनबियाहल बच्चा, नीक संख्या मे भअ रहल छई। अकर पाछु ईयाह " चाइल्ड सपोर्ट ग्रांट " छई।हम ई सब मिजोरम मे सेहो अनुभव केने रही। ओतअ बच्चा के बाप के बारे मे पुछला पर मऊगी ओई पुरूख के बर्दी के बारे मे बतबई छलई। अकर बाप सी आर पी एफ , त कियो कहत जे अकर बाप बी एस एफ, त कियो कहत एस एस बी, त कियो ग्रीफ , त कियो आर्मी। अईसं बेशी नई ओई मऊगी के बुझल रहई छई आ नई ओकरा बुझबअ के मतलब होई छई। ओकर समाज लेल ई सामान्य छई। ओहिना साऊथ अफ्रीका मे ई सब सामान्य छई। अकर अलावा ओतअ कयेक देशक खिचड़ी लोक सब सेहो भेटत। ओकर कागज पत्तर बाला नागरिकता कोनो देश के, माय कतऊ के, बाप कतऊ के, संगी कतऊ के, रहईत कतऊ अईछ। अपना सब जेकां गाम ठाम पुछला पर ओ सब ज़बाब देबअ मे लड़खड़ा जाइत अईछ। जखईन नई किछु फुरेतई तअ ठठा कअ हंईस पड़त। युगांडा मे सेहो अहिना बिन बापक नाम के संतान सब छई, लेकिन अतअ सरकार द्वारा कोनो तरहक मददक बेबसथा नई छई। सरकारी मदद भेटअ लगई, तअ लाइन लगा देतई। साऊथ अफ्रीका मे ओना कम बैस मे बच्चा सब सेक्सक प्रति आकर्षित भअ जाईत छई। जकरा "टीन एज फर्टिलिटी" कहल जाई छई- ओ अतुका बड्ड बेशी छई। अतुका बेशीतर १५/१६ बरखक बच्चा सब सहवास कअ चुकल रहई छई। अतबे नई, १८/ १९ के होईत होईत, ४०%के करीब लड़की गर्भधारण कअ लेने रहई छई। भारतीय मूलक लोक सब अई सब सं बड्ड बचल नई अईछ।ओना बियाहक पचड़ा मे सब फंसहो नई चाहईत अईछ। ओना अपनो देश मे पुरनका जमाना के हीरोईन सारिका बिन बियाहल बच्चा के माय बनल छल......... कमल हासन बाद मे अपन नाम देने रहई। ओहिना नीना गुप्ता सेहो बिन बियाहे माय बनल। बाद मे विवियन रिचर्ड्स के नाम लोक जनलकई। ई सब अभिजात्य वर्ग सं संबंधित छलई तैं अकरा देखबाक नजरिया लोक के दोसर भअ जाई छई। साऊथ अफ्रीका मे गरीब तबका के स्थानीय अश्वेत सं जुड़ल ई बिन बियाहल बच्चा बाला बात गाहे बेगाहे सामने अबईत रहई छई, तैं लोक अकरा व्यंग्य मे लई छई। हमरा जे मूल कारण अकर चर्चा के पाछु लगईत अईछ ,ओ नौकरानी के भेटबा मे होबअ बाला दिगदारी छई।अही सं नबका धनिक सब के बच्चा पोसई लेल जे अनुदान भेटई छई, ओई सं परेशानी छईन। ई सरकारी अनुदान छह टा बच्चा तक मे भेटई छई। जाबईत तक बच्चा अठारह बरखक नई होई छई, ताबईत पाई भेटईत रहई छई।ओना अई मे किछु बंधन सेहो लागल छई, जेना बच्चा के स्कुल पढ़बाक लेल पठेबाक छई, माय बापक आमदनी के एकटा सीमा छई। ई भारतक बी पी एल बुझु। जकरा कार्ड बईन गेलई ,ओकरा चाऊर गहुम चीनी मटिया तेल सब सस्त वा किछ मूफ्तऊओ भेटिये जाई छई। आब जखईन बिन देह डोलेने, पेट भरिये जाई छई, तखईन कोन काज छई काज करबाक। ईयाह छई सरकार के कल्याणकारी योजना के प्रतिफल। साऊथ अफ्रीका मे बहुत लोक अई कम बयसक अश्वेत बिन बियाहल बच्चा के जन्म देबाक बढ़ईत स़ख्या सं चिंतित बुझेलाह। --x� केपटाउन, साऊथ अफ्रीका के सबसं जीवंत शहर छई। अकर कारण अतऽ दुनु महासागरक संगम छई। जेना विक्टोरिया लेक आ नील नदी के संगम हमरा युगांडा मे लागल , ओहिना दुनु महासागरक मिलन केपटाउन मे छई। दुनु जगह मे जे अंतर छई, ओ छई केपटाउन मे दुनु महासागरक जलक रंग आ अतअ विक्टोरिया लेकक शांत जल आ नील नदीक बहईत धाराक संगम। केपटाउन मे " कैशल आफ गुड होप " पहिने समुद्र क कात मे डच सब सत्रहवीं शताब्दी मे बनबौने छल। कालक्रमेण ई समुद्र सं कने दुर भऽ गेल। ई ओहिना जेना दिल्ली क लालकिला पहिने जमुनाजी के कात मे छल, आब कने दुर भऽ गेल। हमरा जखईन ई पता चलल जे डच ईस्ट "इंडिया" कम्पनी, अकरा बनबौने अईछ, तखईन हमर जिज्ञासा अकरा प्रति बढ़ल। "इंडिया" नाम मे लागल शब्द आहां के परदेश मे खींचबे टा करत।ई साऊथ अफ्रीका के पहिल संरक्षित स्मारक अईछ। ईस्ट इंडिया कंपनी के नाम तअ हर भारतीय के बुझल छई।हमर सबहक गुलामी के सुत्रपात ईयाह ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी केने अईछ। व्यापारक नाम पर देश मे घुसल , बाद मे हमरे सब के धकिया कऽ राज केलक। ई ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी कनिकबा टा नई छल। अकर अपन निजी सेना छलई। कहल जाई छई जे ताहि जमाना मे भारत मे ढ़ाई लाख लोग ओकर सेना मे भर्ती छलाह।गाम गाम तक मे अकर सैनिकक प्रवेश छलई।तहिया ब्रितानी सेना मे अई सं आधे सैनिक छलई। कहबाक मतलब जे ई कम्पनी सब सरकार सं बेशी नई तअ कम्मो शक्तिशाली नई छल। ईयाह हाल पुर्तगाल के सेहो छलई। ओतुका बड़का बड़का लोकक अई कम्पनी सब मे हिस्सेदारी होई आ ओ सब बईसल राज करईत छल। ऐश मौज ओकर हिस्सा मे आ गुलामी एशियाई आ अफ्रीकी के भाग्य मे। जे भी कारण होई " इंडिया" नाम मे तअ किछु खास छेबे केलई। अई कैसल के आहां सब "किला" बुझु। ताहि जमाना मे ई पंचाकार बनावल गेल छल। सामने बड़का बड़का तोप राखल गेल छलई। अतअ अबई लेल ईयाह किनारा छलई। जखने कोनो जहाज के अबईत देखई, तोप सं ओकरा उड़ा दई। अकरा सब के होई जे ओ सब आक्रमण करऽ आईब रहल अईछ। केप टाउन के किनारा एहन छई जे जलमार्ग सं जायबाला भूतिया कऽ ईमहर आईब जाई छलाय।ओकरा सब के अतअ अयबा के नई रहई छलई। दुर सं बुझाई जे ई जहाजक रस्ते छई, लेकिन एतअ आईब कऽ ओ सब फंईस जाय।आहां केपटाउन मे समुद्र क कात मे जगह जगह "तोप" स्थापित कैल देखबई। ई तोप सब ऊयाह रस्ता भुलेलका जहाज सब पर आक्रमण मे धुराझार प्रयोग होई छलई। एकदम अहिना दु टा तोप बेतिया मे राजड्योढी मे पहिने राखल छलई। आब पता नई, छई या नई? हमरा केपटाउन क तोप अनमन बेतिया के तोप जेकां लागल। भअ सकईत छई, एक्के जगह बनल होई! अई किला के सबसं विशेख बेबसथा हमरा ई लागल जे पर्यटक के अतऽ पहिलुका राजा महाराजा जेकां आनल जाई छई। नियत समय पर बैंड बाजत, सेनाक टुकड़ी परेड करईत आयत, तखईन झंडा सब लअ कअ ओ सब रहत,फेर किला के बड़का गेट खुजत आ पर्यटक सब तखईन किला मे शानदार ढंग सं घुसई जेताह। ओकर बाद ओतऽ तोप के संरक्षित करअ बाला संस्था के लोक सब आओत। ओ सब आहां के सोझां मे तोप चलायत। आहां चाहु तअ तोप चलबअ मे ओकरा मददक नाम पर अकर आनंद लअ सकई छी।जेना अपना सब कतऽ जे सी बी के खुदाई मे किछु किछु एतिहासिक मूर्त्ति सब भेटईत रहईत अईछ, ओहिना अतअ तोप भेटाईत रहई छई। ओ सब एकटा तोप बचेबाक समाज बनौने अईछ।अही माध्यम सं तोप सब के सहेज कअ आ ज्यों संभव होई तअ ओकरा चालु हालत मे रखने अईछ। अई किला मे तखुनका राजा रानी सब के रहबाक घरक संग, विस्फोटक रखबाक अन्हार घर सब बनल छई। अकर अलावा कैदी सब के यंत्रणा कक्ष सेहो भेटल। जतअ कतऊ राजमहल जेकां किछु छई, ओतअ भंसाघर होई वा नई होई, यंत्रणा कक्ष जरूर भेंट जाईया। अही सबहक बले डच सब अतअ राज करई छल। ईयाह समुद्री रस्ता छलई युरोप सं भारत दिश जयबाक। आब डच सबहक चर्चा भऽ रहल अईछ, त बिन वास्कोडिगामा के ई कोना पुरा होयत। सबके बुझल अईछ जे वास्कोडिगामा , डच छल आ अही रस्ते भारत गेल छल।हिन्द महासागर बाटे भारत जेबाक रस्ता ओ तकलक। कहल जाई छई जे ओ मात्र तेईस दिन मे भारत पहुंच गेल छल।ओकर पुरा घरक लोक जहाजी सब छल। ओकरा भारत मे पुरा सम्मान भेटबे केलई, अकर अलावा ओकरा अपन देश घुरलो पर बड मान सम्मान भेलई। भारत मे रहईत रहईत ओ बाद मे अकच्छ भऽ गेल छल। मौसम प्रतिकुल रहलाक बादो ओकरा एहन ने घर घुरबाक मोन केलकई जे लाख लोक रोकईत रहलई, ओ विदा भअ गेल। घुरती मे एक तअ मौसम खराब, दोसर ओ रस्ता भूतिया गेल।तेईस दिन मे आयल छल आ एक सौ बत्तीस दिन मे घुरल। आधा सं बेशी ओकर जहाजी लोक सब रस्ते मे मईर खईप गेल छलई। अपने कहुना कअ पुर्तगाल पहुंचल। बाद मे अपने माईट पर मरल। ईयाह देशक माईटक लगाव छई। भारत मे ओ छोट छीन राजा जेकां छल, लेकिन सब छोईर छाईर कअ ओ अपन देश विदा भअ गेल। डच सब बड्ड साहसी आ दुर्गम यात्रा क प्रेमी संग, पराक्रमी आ दुर दृष्टि बला व्यापारी सब छल। नाना प्रकारक तोपक अलावा विस्फोटक बनबअ मे ओकरा सब के ताहि जमाना मे महारथ हासिल छलई। एतनी टा के छोटकी आ चालु हालत मे तोप हमरा ओतई टा देखबा मे भेटल। हजार सं ऊपरे तोप ओकर सबहक समाज मे अखनो सहेज कऽ राखल छई। किला सेहो अहन सुरक्षित आ अभेद्य बनौने अईछ। अकरा देख कअ हमरा कनी मनी गोलकुंडा, हैदराबाद के किला मोन पड़ल। गोलकुंडा मे सेहो गेट पर ताली बजाऊ त ऊपर महल लग आवाज गुंजईत पहुंच जाई छलई पहिने। ईस्ट इंडिया कंपनी के बनावल ई किला हमरा बेश आकर्षित केलक।सेहन्ता भेल जे अहिना पुरा सेरेमोनियल ढंग सं भारत मे एतिहासिक धरोहर के पर्यटक के देखाओल जाय तअ लोक के अपन इतिहास के बारे मे जानकारी हेतई आ विदेशी पर्यटक सं बढ़िया आमदनी सेहो हेतई। पुरा केपटाउन डचशैली मे बनल घर सं भरल अईछ। सुन्नर सुन्नर लोक, समुद्र क कात मे पेंग्विनक संग पटायल भेटत।हुजुम मे पेंग्विन सब, जतअ कतौ कनिको झाड़ झंखाड़ भेटत, ओई मे बसेरा बनेने अईछ। पेंग्विन बहुत ही कोमल, लजकोटर, सुकुमार आ मासुम जल- चिड़ई अईछ।अकरा संग किछु घंटा बितेनाई हमेशाक लेल यादगार रहत। ओना हजारों के संख्या मे समुद्र क भीतर टापु पर " सील " सेहो भेटल।अई पर बाद मे। --x�
पुर्वी अफ्रीका मे पुरूख सब के स्थिति अपन घर मे राजा बाला छई। जे भी घर मे पुरुष प्रधान छथि, उनकर ठाट बाट के खिस्सा अजगुत लागत। जतअ एक दिश पुरूख अतेक फायदेमंद स्थिति मे छथि, तअ अकर उल्टा दयनीय स्थान मऊगी सब के भेटत।पुरूख सब अपन पेट कईस कऽ भईर लेत, बाकी घरक बच्चा आ मऊगी सबहक लेल भोजन बचलो छई की नई? अई सं निफीकिर। जेना अपना सब मे प्रणाम, नमस्कार, गोर लगई छी, से सब कहीये कअ चलई छई, ओना अतअ सांय बहु के बीच ग्रीटींग्स के अजबे ढंग छई। कनिया रोज सुईत उईठ कअ, अपन घरवाला के अभिवादन करतई। अभिवादन करअ के तरीका पर ओना एतऊ बहस चईल रहल छई। कनिया अपन ठेहुन पर बईस कऽ, बर के अभिवादन करतई। ई ओकर बराबरी मे नई बईस सकईत अईछ। बर सेहो ओहिने अंईठल रहत घर मे, ओ एहन नमस्कारो भेटला पर, कनियो दया भाव मे नई रहत। ओ एकरा अपन अधिकार बुझईत अईछ। अई सब के पाछु जे ओतुका पुरूख सब के तर्क छई जे हम सब कनिया के कीन कऽ अनने छी। कमोबेश कनिया के हालत नऊरी बाला छई।आहां बंधुआ मजुर सेहो कहीं सकईत छी। बरागत के , कनिया के पिता के , लड़की के बदला गाय देबऽ परई छई।गायक संख्या लड़की के गुण पर निर्भर करई छई।ओहीं सं, बर , अपन अधिकार ताउम्र कनिया पर जतबई छई। देबलेब तऽ अपनो समाज मे अईछ। अपना कतऽ, कनिया सब दहेज दऽ कऽ, लड़का सऽ बियाह करईत अईछ। ज्यों लड़की सब अहिना अपन बर के बंधुआ बुझअ लागय,तऽ केहन मजेदार समाज बईन जायत। ओना समाज अपनोआप बदलईत रहईत छई। एहन स्थिति जल्दिये आईब जाय, अई मे संदेह नई। घर मे भोजन बनला पर सबसं पहिने घरबाला पुरुख के परसल जाई छईन। बेशीतर संयुक्त परिवार होई छई, ओई लऽ कऽ, पुरुख प्रधान आ सब वयस्क पुरुख सब के खेनाई देल जेतई। अई आन पुरूख सब मे वयस्क बेटा सेहो आईब जाई छई। पुरूख सब के खेला के बाद, स्त्रीगण आ बच्चा सब खाईत अईछ। लड़की बच्चा के सबदिना , पुरुख के बादे खयबाक बात मोन मे बईसायल जाई छई। दु टा पईघ बाऊल कहु या बड़का बट्टा, ओई मे एक्के जगह खेनाई बीच मे राईख देल जाई छई। एकटा बट्टा मे अन्न सं बनल या एहने किछु रहई छई, आ दोसर बट्टा मे झोर कहु या रस कहु या जुस कहुं, अहीना किछु तरी बला पदार्थ रहई छई। ओही झोर मे डुबा डुबा कऽ ओ सब खायत। ईस्लाम के मानऽ बाला के नीक संख्या अफ्रीका मे छई। अकरा सब मे ओना चाईर टा तक वियाह देखबई। बाकी जे अफ्रीकी जनजाति सब छई, ओ सब नियमतः एकटा कनिया रखईत अईछ। अकरे कानुनन मान्यता सेहो छई। ओना ओई पुरुख के क्षमता पर छईन, ओ कतबो मऊगी के अपना संग राईख सकईत छईथ। एक्सटेन्डेड परिवार के अतऽ सामाजिक परिपाटी आ मान्यता दुनु छई। अई मे सामाजिक सुरक्षा छई। दहेज दऽ कऽ जे औरत अनने अईछ, ओई लऽ कऽ सहज रूप मे पति के मरला पर, ओकरा पर घरे के बाकी लोग अधिकार जतबई छई। मऊगी सब एतअ पुरुख के नजर मे,संतान जन्म करई लेल ,घरक साफ सफाई आ खेनाई बनबऽ लेल छई। आहां वस्तु जेकां आ भोग्या बुईझ सकई छी।अतुका मऊगी सब शुरूये सऽ अई स्थिति सं समझौता कऽ लेने अईछ। ओ सब बहुतही मेहनती आ पुरूख के जीवन मे कम सं कम हस्तक्षेप करईत अईछ। गरीबी आ अशिक्षा के कारण ई सब प्रथा चईल रहल अईछ। घर मे बराबरी के स्थान भेटऽ मे समय लगतई, ओना आंतरिक संघर्ष चईल रहल छई। ठेहुन पर बईस कऽ अभिवादन केनाई तऽ हम अतुका पढ़ल लीखल समाज मे सेहो देखलियई। अई सब प्रथा के बादो, भारत मे जे क्रुरतम सती प्रथा छलई, ओई सऽ तऽ कम्मे छई। असली मे एतऽ पुरुष प्रधान समाज अखनो छई,जतऽ स्त्री के दोयम दर्जा देल गेल छई। अजगुत अफ्रीका-क्रमशः। पुर्वी अफ्रीका मे परिवार सर्वोपरि छई। पश्चिम सब जेकां एकल परिवार आहां के नई भेटत। अतुका जनजाति सब ओना आब नगर, महानगर मे सेहो रहऽ लागल छई। अकर बावजूद ओ सब अपन मूलगाम आ समाज सं जुड़ल अईछ। जेना मैथिल सबहक अपन मूल होई छईन, कूलदेवी/ देवता छथिन, ब्रह्म बाबा छथिन, देवी माई छथि, दीन भदरी आ राजा सलहेश के पुजा करई जाई छथि।पुजा के देवता आ पद्धति संऽ बहुत रास बात ओई व्यक्ति विशेष के बारे मे आहां जाईन सकई छी। ओहिना अतऊ छई। कयेक टा जनजाति छई आ सबहक किछु पृथक मानदंड आ लोकाचार छई। दुनिया मे अदौं सऽ चलईत सामाजिक व्यवस्था सब आब अर्रा कऽ खईस रहल छई, ओतऽ युगांडा मे आर बेशी मजगुती सं टीकल छई। सांय बहु मे छुट्टा- छुट्टी सरकारक हाथ मे नई भऽ कऽ, समाजक हाथ मे छई। बियाह के एकटा पवित्रता छई। आहां अपना मोने नई कईये सकई छी आ नई छोरिये सकई छी। ई पुर्णतः समाजिक दायित्व के अंदर अबई छई। जेना बर पक्ष जे उपहार, कनिया के दई छई,ओ मूख्यत: बरक बापक दिश सऽ देल जाई छई। ई बापक जिम्मेदारी छई जे बेटा के नीक कन्या संऽ बियाह हुआय। जखईन कखनो सांय बहु मे झंझट अतेक बईढ़ जाई छई,जे तलाकक नौबत आईब जाई छई। सबसं पहिने दुनु पक्षक नामचीन लोक सब बईसई छथि। बर कनिया के पृथक पृथक, आ जरूरत पड़ला पर आमने-सामने बईसा कऽ मामला के सुलझायल जाई छई। जकर गल्ती रहई छई, ओकरा समाज दंड सेहो दई छई। जेना मैथिल मे जघन्य गलती कयला पर, समाज सं बारऽ के प्रथा छलई(आब बिलुप्त), ओहिना अतऽ अखनो छई। अगर लड़की, लड़का के अपना मोन सं छोड़ई छई, तऽ ओही स्थिति मे ओकरा सनेश मे भेटल सबटा गाय आ आन सामग्री सब घुरबऽ पड़तई। अगर लड़का, लड़की के अपना मोन सं छोड़ईत अईछ, तऽ ओकरा द्वारा लड़की के देल सनेश, वापस नई भेटतई। सांय बहु मे झगड़ा भेला के नीक ओ सब नई मानई छई। जतऽ भी अई तरहक परिस्थिति रहई छई, अकरा सबहक अनुसार, अकर दुष्फल आबऽ बला संतान पर पड़ई छई।कलह आ प्रताड़ना सं देवता पितर नाराज भऽ जाई छथिन, फेर उनकर प्रकोप अनिष्ट कऽ दई छई। तैं अई सं बचबाक प्रयास ओ सब करईत अईछ। जेना अपना सब मे प्रवासी सब, सुख दुख मे अपन मूल गाम समाज के लोग के शामिल करई छईथ। मुंडन, उपनैन, बियाह, श्राद्ध आदि बाहर मे केलाक बादो गामो मे किछु भोज भात करई छथि, भगवती के पातईर, ब्रह्मबाबा के पुजा, देवी माई के आराधना, कुल देवी/देवता आ सत्यनारायण भगवान के पुजादि के परिपाटी छई, ओहिना अतुका जनजाति कोनो भी शुभ काज जेना संतानोत्पत्ति, बियाहादि नगर/महानगर मे केलाक बादो अपन कूलक लोग के भोज दईत अईछ। अफ्रीकी सब मे भोज सामुहिक होई छई। जे भी मांसाहार भोजन बनई छई, ओ सबसं पहिने गामक बुजुर्ग के खाई लेल देल जाई छईन। ओ खाईते टा नई छथि, एकर सुआद सेहो लई छथि। ज्यों ऊनकर मनोनुकूल भोजनक स्वाद रहतई, तखईन ओ एकरा पास करताह। फेर बाकी लोग क्रमानुसार भोज मे शामिल होयत आ खायत। अकरा सब मे बुजुर्ग के सामाजिक प्रतिष्ठा बहुत बेशी छई। ई समय के जरूरत छई। जई भी घर, परिवार आ समाज मे बुजुर्ग उपेक्षित छथि, ओतऽ शांति नई भेटत। ई अकर सबहक मान्यता छई आ हमहुं भारतीय समाज मे अई दृष्टिकोण सं देखई छी, तऽ बात पुरा सत्य लगईत अईछ। सामाजिक प्रतिष्ठा मे अर्थ के एक सीमा सं बेशी महत्व अतुका समाज मे नई छई। भारतक समाज पहिने अहिना छल, लेकिन आब तअ अर्थक ईर्द गिर्द सम्पुर्ण समाज रेंग रहल अईछ। बियाह दान मे जे गाम मे ई सब अपन समाज के भोज करईत अईछ, ओही बदला मे समाज अकरा सब के बैबाहिक जीवन मे ज्यों कोनो दिक्कत अबई छई, ओकरा सोझराबो मे समाज आगु अबई छई। समाजिक व्यवस्था बहुतही मजगुत छई। पुरुषप्रधान समाज भेलाक बादो स्त्रीगण मे परिवारक प्रति स्वतः समर्पणक भाव रहईत छई। ओ सब अपन स्थिति के शोषण नई बुईझ कऽ, घर परिवार लेल योगदान बुझईत अईछ। तलाक के ई सब निकृष्ट बुझईत अईछ। ओना एहन निकृष्ट लोकक संख्या बईढ़ रहल छई। मैथिल समाज मे आई सं पचास बरस पहिने, तलाक धोखो धोखी, नई सुनबा मे अबई छलई। आब एहन कोनो परिवार नई बांचल अईछ, जे अई सं मूक्त अईछ। संबंध त्यागे पर टीकल होई छई।घर परिवार के लेल अफ्रीकी सब, विशेष कअ स्त्रीगण सबहक त्याग स्तुत्य अईछ। अपनो सबहक समाज पहिने एहने छल, लेकिन पश्चिम के नकल आ फुसिया बराबरी के होड़ आ चलन, एकर आधार के धखोईर रहल अईछ। ई अफ्रीकी समाज बाहर सं जतबे खुजल बुझाई छई, भीतर सं ततबे बान्हल छई। परिवार के सही परिभाषा देखऽ मे आबत, लेकिन ओईला लगीच सं देखऽ पड़त। --x�
अफ्रीकी सब के आर किछु अंगरेजबा सब सीखेलकई की नई, एकटा के लत लगा देलकई। ई छई- पैंट शर्ट, कोर्ट आ टाई( गरदन लंगोट)। मौसम ठंडा होई वा गरम, ऊनी होई वा नाईलोन,पढ़ल होई वा सफाचट, साऊथ अफ्रीका होई वा पुर्वी अफ्रीका, सब जगह ई सुटबुट धारी लोग भेटायत। काज ओना कोनो छोट पईघ नई होई छई। रिक्शा चलबऽ बाला हुआय वा खेत मे काज करऽ बाला जन हुआय वा बोडा बोडा चालक हुआय वा कोनो छोटछीन मेहनत कश मजुर हुआय, सब ई सुट मे भेटत। भारत मे ज्यों कोई रिक्शा- टांगाबाला, आटो बाला, घरक भंसिया, जन मजुर आ कोनो कारीगर एना सुट बुट आ टाई मे भेटत,तऽ एकबेर हंसी अवश्ये छुटत। अनकट्ठल लगबे करऽत। टाई पहिने लोग ग्रैजुएट भेलाक बाद, लगबऽ के जोगड़ बुझल जाई छलई। बाद मे अंगरेजिया सकुल सबहक नकल मे आब बच्चे सं चुटपुटिया बटन बाला टाई प्राईवेट स्कूल क बच्चा सब पहिरई छई। टाई बाला बच्चा सबके लोग अंगरेजिया बाबू के भ्रम मे रहईत अईछ। टाई के नाॅट बान्हऽ अखनो अपन देश मे बेशी लोक के नई अबई छईन। कमोबेश, जतबा लोक के टाई के नाॅट बान्हब अबई छईन, ओतबे लोक अपने सं धोती पहिर सकई छथि। अहिना बुईझ सकई छी, जिनका टाई के नाॅट बान्ह अबई छईन, उनका धोती पहिरऽ नई अबई छईन आ जिनका धोती पहिरऽ अबई छईन, उनका टाई के नाॅट बान्ह नई अबई छईन। युरोपीयन सब ईनका सबके सुटेड बुटेड कऽ निकम्मा बना देने छईन। आहां सुट मे सब काज नई कऽ सकई छी। दोसर ई सब कनीके पाईन बुन्नी आ ठंडा भेलई की नई, चट सं सोईटर पहीर लेत। हमरा पुछला पर कहलक- हमरा सब के ठंडा के हीस्सक नई अईछ।भारत मे तऽ ठंडो अतीये आ गर्मीयो अतीये पड़ई छई। आहां सब के देह ई ठंडा गरमक आदी अईछ,हमर सबहक नई। जार मास भारत मे रऊद मे लोग ठार होईत अईछ।गाम घर मे नार- पुआर बीछा कऽ ओई पर सुतल लोग भेटियो जायत।जेना जेना रऊद दिन बीतलाक संग, भगईत रहत, ओहिना लोक अपन पटिया, चादर, दरी जे भी होई, ओकरो खिसकेबईत रहईत अईछ। पुरा रऊद के आनंद लेत । मंगनी के विटामिन डी भेट रहल छई, भईर छांक भोग करत। एकर उल्टा, साऊथ अफ्रीका मे जखने हम कनी मोसम ठंडा भेला पर रऊद मे ठार होई छलऊं, सहकर्मी सब डरा दई छलाह। एतऽ ओजोन लेयर बहुत पातर छई। सूर्य क किरण सं चमरा मे इन्फेक्शन भऽ जाई छई। चर्म रोग के आशंका, रऊद मे रहला सं प्रबल भऽ जाई छई।फेर की करितऊं,मोन मसोईस कऽ छाहईर मे चईल जाई। ई प्रिटोरिया के हाल छलाय। ऊयाह साऊथ अफ्रीका मे आहां केपटाउन आ डर्बन मे समुद्र क कात मे जाऊ, दोसरे हाल छई।डर्बन मे तऽ कम सम, मूदा केपटाउन मे समुद्र क बीच सब पर टहटहऊआ करकरऊआ रऊद मे, नंग-धड़ंग अंगरेजबा सब अखरे बालु पर पड़ल भेटत। अई सुतलाहा लोग मे हमरा दु तिहाई मऊगी बुझायल,आ एक्के तिहाई पुरूख। लऽग मे जा जाऽ कऽ नई देखलियई। ओना कनीक दुर सं मऊगीये सनक बेशी लागल। ओना मऊगी पुरूख मे अंतर बेशी नई छई। ऊपरका दिस निर्वस्त्र रहत आ उल्टा दिस पड़ल रहत। आब मूंहे नई देखायत तऽ चिन्हबई कतऽ सं। बहुत टुरिस्ट तऽ, समुद्र क सौंदर्य सं बेशी सुतल पड़ल लोग के देखईत रहत। टिकट बाला बीच पर बेशी निर्वस्त्र सुतल गोरका चमरी बाला भेटत। हमरा तऽ बुझाईत अईछ, जे पाई दऽ कऽ, मऊगी सब के ऊल्टा सुतवने रहई छई। ओकरे सब के देखई लेल टुरिस्ट तुफान मचवने रहईत छथि। असली बात जे हम बतबऽ चाहई छलऊं जे ई सब तऽ बिना कपड़ा के रऊद मे बालु पर पड़ल रहईत अईछ, तखईन कियैक ने, चर्म रोग एकरा सब के होई छई। हमरा पुछला पर बतायल गेल जे सनक्रीम होई छई, ई सब ओ पोतने रहई छई, जे सूर्यक किरण पड़ला सं आर देदीप्यमान भऽ जाई छई।जे भी होई, हम मोन भेलो पर रऊद मे कम ठार भेलऊं। ओजोन लेयर के भारी भरकम शब्द, हमरा अतेक साहस नई देलक, जे ओकर परीक्षा लईतियई। आब युगांडा आईब जाऊ। एतऽ जनजाति के संख्या बहुत बेशी, आ गोरका चमरी बाला सब भुलल भटकल भेटताह। अतऽ रऊद मे मौका बेमौका हम देह सेकलऊ, कियो मना नई केला अईछ अखईन तक।अतुका ओजोन लेयर के की हाल, से पता नई। युगांडा मे स्कीन ईन्फेक्शन के जगह पर एकटा दोसरे वायरस के खतरा। एतऽ बजार मे आलु माईट सहित भेटत। खेत सं सीधा ऊखारल। ओना माॅल सब मे धोवल धावल पैक कैल भेटऽ लगलईया। भारतीय सब आलु के तरकारी एतऽ, आलु के छीलला के बाद बनायत। मिथिला मे जेना सरसों मशाला बाला आलु के तरकारु बीन छिलले बनई छई। आलु भुजियो खोंईचा सहित बनई छई। अतऽ भूजिया हुआय वा कोनो आन आलु के तरकारी, छिल्का हटाईये कऽ भेटत। छोटकी आलु के खोंईचा सहित दु भाग मे मोश्किल सं काटल आलु भुजिया आहां के नई कियो खुआयत। आलु के माईट आ छिल्का मे वायरस आ ओई सं इन्फेक्शन- सत्त की फुईस, के फरिछौता करत।सीधा बात- छिल्का बाला आलु नई खाऊ। बाजार सं आलु कीनला के बाद लोग पहिने खुब पाईन मे रगईर रगईर कऽ धोअई अईछ। फेर आमक पाल जेकां, बिछा कऽ सुखबई अईछ। ओकर बाद निश्चिंत भऽ जे, वायरस के समुल धोला पर नष्ट भऽ गेल हेतई, तखईन तरकारी बनबईया। ओई सं पहिने फेर आलु के छिल्को छीलत। अतेक सावधानी भारतीय सब रखईत छथि। ई तऽ ओहिना भऽ गेल,जेना प्लेग सं पहिने अ़गरेजबा सब डेराय। इंग्लैंड मे फुसिये के अफवाह फईला देल जाई की फलां गाम मे प्लेग बीमारी फईल गेलई अईछ, गामक गाम अंगरेज सब घर छोड़ी कऽ पराऽ जाई। एतऽ कम्पाला मे कटहर के गाछ चारू कात छिरियाल छई।अतुका लोक सब खाली पाकल कटहर कोआ खाई छई, अकर तरकारियो होई छई, से अकरा सब के नई बुझल। हमर एकटा बंगाली सहकर्मी कहला जे ओ अतुका सरकारी अस्पताल गेल छलाह। ओतऽ सड़कक कात नीचा सं ऊपर तक लुधकल फरल कांच कटहर। ओ एकटा ओतई ठार स्थानीय लोग के पुछलखिन जे अई गाछ के मालिक के? ओ कहलकईन- कियो नई। हम आहां सब मालिक। आहां के कटहर चाही? ई कहलखिन- हं चाही। किछु हमरा बख्शीश दऽ दियऽ। हम तोईर कऽ दऽ देब। ई भारतक मात्र बीस रूपया बराबर अतुका करेंसी सीलिंग देलखिन, ओ कटहर तोईर कऽ मोटर मे राईख देलकईन। खुशी खुशी सस्ता मे भेटल कटहर लऽ कऽ घर घुरलाह। आब बड़का कटहर के काटल केना जायत। शहरुआ कनिया स़ं कटहर काटल नई भेलईन।हांसु घर मे छलईन नई आ छोटकी चक्कु सं ओ कटलई नई। परेशान भेलाह। दुनु बेगत मे ई कटहर अनला पर झंझट ऊपर सं भऽ गेलईन। फेर कटहर के बख्शीश के तेबर एकटा लोक के पाई देलखिन, तखईन ओ घर आईब कऽ कटहर काटलकईन।ओकर आबय जाय के चार्ज, काटऽ सं बेशी छलई। अतुका मौसम सब दिना एकरंगाहे, ओहीं सं सब चीज सालों भईर भेटई छई। ओहिना पोर्ट फोर्टल, युगांडा के रस्ता मे लतामक बगान सब छई। बड़की बड़की टा लताम पाईक कऽ खसल रहई छई। कियो देखऽ बाला नई। ओतुका स्थानीय लोक के किछु बख्शीश दियऊ, ओ टटका टटकी तोईर कऽ बिना मोल के दऽ देत। अहिना एक गोटे कहला कि उनका तऽ आमक गाछी भेटेलईन। ओहो ओतुका बच्चा सब के बख्शीश देलखिन। गोपी आम सं मोटर भईर देलकईन। साऊथ अफ्रीका मे अबाकोडा फलक गाछ सबतर भेटत। युगांडा मे कम छई। साऊथ अफ्रीका मे कियो अकरा पुछत नई, आ युगांडा वा भारत मे महंग फल मे ई आयत। अबाकोडा, प्रिटोरिया मे हमरा ओहिना लागल, जेना गाम मे देसिला लताम। युरोप मे ओहिना सेव के हाल छई। सगरो खसल पड़ल भेटत। भारत मे सब अफ्रीकी देश के लोग एक्के रंग लागत। देशक नाम पर चिन्हनाई मुश्किले टा नई, नामुमकिन।सब हब्शी कहायत या नाईजेरियन। हमरा जे अफ्रीकी सब मे अलग अलग रंग ढंग लागल ओ अईछ- नाईजेरियन सब बेशी ह्रष्टपुष्ट आ आक्रामक, इथियोपियाई सब के माथ मे थोड़ बहुत केश आ रंग कने साफ, यूगांडान सब कनी लंबाई कम आ हल्लुक डील-डौल, रंग बेशिये झामर आ सुस्त स्वभाव, भाषण देबऽ मे माहिर, रवांडन सब के नाक कनी ठार आ चेहरा ब्राउनीश, जिम्बाब्वे बाला सब दिमाग सं तेज आ लंबा, लेसेथो बाला कनी छोट छीन आ शांत। --x�
ब्रिटेन के जतऽ जतऽ उपनिवेश रहलई, ओतऽ ओतऽ कला, संस्कृति, साहित्य, नाटक, भाषा , पोशाक,सोच सब मे ओकर सबहक एकटा निच्छन्न प्रभाव हमरा देखाईत अईछ। साहित्य आ ओकर सब आन आन विधा पर तऽ अखनो ओही रस्ता पर डेग बढ़बईत देख रहल छी। किछु दिन पूर्व हमरा युगांडा के संग्रहालय मे " रोमियो आ जुलियट " नाटक होबाक बारे मे सुचना भेटल। ओई नाटकक टिकसक दाम सेहो आन जगह सं कनी बेशी छल। नाटक जे बाद मे आगु बढ़ईत सिनेमा भऽ गेलई, ओ ओई समयक सब सामाजिक व्यवस्था के दर्शऽबई छई। हम एकटा सहकर्मी संग रोमियो आ जुलियट के देखऽ नियत समय पर संग्रहालय पहुंचलऊं। ओतऽ बाहरे मे एकटा स्थानीय लोक ठार छलाह। ओ बड्ड उत्साहक संग हाथ मिलेलाह आ हमरा सब के लऽ जाऽ कऽ एकटा छोट छीन हाल मे बईसा देलाह। ओतऽ पहिने सं किछु भाषण भुषण चलई छलई। हमर ईच्छा जे पाछुये दिश बईसी, मूदा ओ अश्वेत आयोजक समिति के सदस्य हमरा सब के अगिला पांती मे बईसेला। ताबड़तोड़ हमर सबहक फोटो खींचाय लागल। माईक पर जे व्यक्ति छलाह ओ बहुत खुशी सं उद्घोषणा कयलाह जे हमर सबहक कार्यक्रम के विदेशी सब सेहो उपस्थित भऽ कऽ सहयोग कऽ रहल छथि। हमर कान ठार भेल।ई कोन नाटक छी। ताबईत एकटा महिला खाली फार्म अनलीह। ओई मे अपन बारे मे नाम, पता, फोन नम्मर सब लिखबा के छलई। आब हमरा बुझा गेल छल, जे भी होई, अतऽ नाटक तऽ कीन्नहु नई हेतई। हम धीरे सं ओई महिला सं पुछलियईन- रोमियो आ जुलियट के नाटक कतऽ होबऽ बाला छई। ओ कहली- आहां बईसु। हम पता कऽअबई छी। हमर सबहक खुसुर फुसुर सं बाकी लोक के भेलई जे हम सब पूर्व परिचित छी। ईयाह हमरा बजा कऽ अनलीह अईछ। ओ हमरा मदद करई लेल तैयार आ हमर जान एतऽ अवग्रह मे। हम कहुना ढंग सं विदा होबाक चाहई छलऊं। हम कहलियईन- आहां आयोजन देखु। हम घुईर कऽ अबई छी। ओ सहर्ष अनुमति दऽ देलीह। हम सब एखईन तक टिकस नई कटौने रही। अतऽ टिकसक के कोनो ऊचावर्चे नई छलई। तैं बुझा गेल जे गलत जगह चहुंपल छी। टिकस बाला जगह पर आहे - माहे नई होई छई। संग्रहालय मे थोड़ेक भीतर घुसलऊं, तऽ ईदी अमीनक समय फोटो सब चारू कात डरबईत टांगल छिरियाल छल।दरवज्जे लग एक गोटे टिकसक गड्डी लऽ बईसल छलाह। उनका रोमियो-जूलियट शो के बारे मे पुछारी केलियेन। ओ कहलाह- पहिने टिकस तऽ लऽ लियह। अखईन शो नई शुरू भेल अईछ। बाद मे पता लागल जे टिकस बाला गड्डी लऽ कऽ बईसऽ बाला लोक अई शो के कर्त्ता धर्त्ता छलाह। अकर बाद एकटा खियाल मियाल अंगरेजबा भेटायल। ओ दु टा खाली कुर्सी के तरफ इशारा केलक। ओतई जा कऽ बईस गेलऊं। बाद मे पता चलल जे ईयाह शो के निर्देशक छथि। थोड़ेक काल बाद एकटा ऊंचका टेबुल हमरे बगल मे लगेलक। कहलक - अतई कलाकार बईसताह। आहां उनकर बगले मे बईसब। ओई टेबुल पर एकटा छोटकी रैक जेकां राईख देलकई आ ओई मे थोड़ेक वाईनक बोतल सब सन्हिया देलकई। आब रोमियो जूलियट के खेला शुरू भेल। छह टा मांजल अश्वेत कलाकार छलाह।दु टा महिला छलीह आ चाईर टा पुरूख छलाह।ईयाह सब अलग अलग रोल मे बदलईत रहई छलाह।एक टा जुलियट, बाकी दु टा उनकर माय बाप, एक टा रोमियो,बाकी दु व्यक्ति आन आन रोल मे छलाह।ई सब युगांडा मे जगह जगह अई शो के आयोजन करईत रहई छथि। पहिल बेर हम श्वेत सब के अतेक बेशी संख्या मे एक जगह युगांडा मे देखलियई।गपशप सं पता लागल जे ओ सब अई तरहक शो देखईत रहईत अईछ। सोलहवीं सदी मे समाजक की प्रारूप छलई, ओ जानई बुझई आ ओई समय मे अपना के राईख कऽ देखबाक लेल, नाटक सं बढ़िया दोसर की भऽ सकईत छई। ओना अई नाटक मे किछु वयस्क दृश्य के सेहो अभिनय केलकई। मूदा ओई समय बच्चा बुतरु के आंईख पर हाथ राईख कऽ अढ़ कऽ दई छलई।बच्चो सब, सबटा बुझईत, हंसईत अपन आंईख मुईन लई छलाय।ओई समयक समाज मे हिंसा, क्रोध, छल-कपट, अपराध के प्रमुख स्थान छलई। अई सब के बहुतही सशक्त रूप सं अश्वैत सब युगांडा के धरती पर अभिनय कऽ कऽ देखबईत अईछ आ एकरा सहेज कऽ रखने अईछ- ई एकटा नीकक द्योतक अईछ। हम सुनने छी कि करीब सौ बरस पहिने मिथिला के गाम मे सेहो रोमियो-जूलियट के मंचन होईत छल। आब कतऊ नई भेटत।अमिताभ बच्चन के बारे मे सेहो कहल जाई छई जे ओ शिमला मे स्कुल मे पढ़बाक समय " रोमियो आ जुलियट " नाटक मे भाग लेने छलाह। उनकर मास्साहब ओई समय स्कुल मे शशि कपुरक ससुर छलखिन, उयाह नाटक केनाई बच्चा सब के सीखबई छलखिन। कहबाक तात्पर्य ई छल जे बच्चा मे नाटक मे भाग लेला सं ओकर भीतर नुकायल कलाकार बाद मे सामने उभईर कऽ आईब जाय के संभावना प्रबल रहई छई। ई बात नई छई जे पुरान नाटक सब नई लिखल छई। जरुरत छई जे जेना अंग्रेज सब जतऽ कतऊ अईछ, ओतऽ रोमियो जूलियट के मंचन कऽ कऽ अपन सभ्यता संस्कृति के जियेने अईछ। अपना के ओ सब अई नाटक सं जोईड़ कऽ देखईत अईछ।ओहिना पुरान एतिहासिक नाटक सब के मंचन फेर सं शुरू कयल जाय, तऽ किछु नब जरूर सामने एतई। हाल मे फेसबुक पर इंग्लैंड मे श्री हरिमोहन झा के खिस्सा पर आधारित मंचन देखऽ मे आयल आ नीक लागल। एही तरहक प्रयोग आन आन शहर मे जतऽ कतऽ मैथिल सब छथि, होई से अभीष्ट। आब हम किछु अतुका शिक्षण संस्थान सब के बारे मे बता रहल छी।अमेरिकन आ ब्रिटीश दु टा मूख्य पैटर्न छई। अई स्कुल सबहक फीस बुझ सुझऽ सं बाहर।एक टा बच्चा के एक महीना के स्कुलक फीस करीब दु लाख भारतीय रुपया के बराबर छई। आब सोईच लियह जे अतेक महीनवारी फीस देबऽ बाला कतेक गोटे भारत मे भेटताह। ओई स्कुल सब मे पढ़ऽ बला बच्चा सबहक एकटा भिन्ने वर्ग बईन जाई छई। पढ़ाई मे सामाजिक उत्तरदायित्व आ मानवीयता पर बहुत जोड़ रहई छई। ग्यारहवीं बारहवीं क्लास के बच्चा सब गरीब घरक बच्चा सब के पढ़बई छई। सामाजिक काज मे सहभागिता एकटा विषय होईत छई। बच्चा सब अही बहाने ई सब सं अवगत होईत छथि। दक्षिण अफ्रीका मे तऽ अई तरहक इन्टरनेशनल स्कुल सब मे स्थानीय बच्चा बहुत रास देखलियई, लेकिन युगांडा मे कम छई। अई सं ई निष्कर्ष निकाईल सकई छी जे पाई पढ़ाई-लिखाई पर खर्च करऽ बाला दक्षिण अफ्रीका मे बेशी छथि, युगांडा क तुलना मे। अई इन्टरनेशनल स्कुल पर एकटा गप मोन पड़ल।द्वारका, दिल्ली मे अहिना एकटा इन्टरनेशनल स्कुल छई। फीस आन स्कुल सं कनी बेशी। बिदेशक कतेक बच्चा स्कुल मे पढ़ईत अईछ? अकर ज़बाब भेटल- एक गोटे। ओ विद्यार्थी कोन देश के? नेपाल। ई तऽ हाल छई अपन देशक इन्टरनेशनल स्कुल आ विदेश क इन्टरनेशनल स्कुल के। अतुका इन्टरनेशनल स्कुलक पहील कलासक बच्चा के आत्मविश्वास आ सक्रियता के एकटा दृष्टांत बतबई छी। छह/ सात बरखक बच्चा घर सं पठायल टिफिन रोज घुराऽ कऽ अनईत छल। आईयो खेनाई घुरा कऽ अनलऊं? हं। समय नई भेटल। भूख नहीं लागल। ईयाह सब बात घर पर कही दई बच्चा। ओकर माय के भेलई जे ई पकवान नीक नई लागल हेतई। हर दिन बदईल कऽ खेनाई दई। तखनो उयाह हाल। किछु दिन बाद जखईन ओई बच्चा के माय बाप स्कुल गेलाह, तऽ पता लगलईन जे उनकर बेटा कैंटीन के नियमित भोजन करऽ बाला बच्चा मे अपन नाम लिखौने अईछ। ओ रोज कैंटीन मे भोजन कऽ लईत अईछ। ओकरा कतऽ सं भूख रहतई जे घरक टिफिन खायत। ओना बच्चा के माय बाप के नित्य कैंटीन मे खाई लेल स्वीकृति के औपचारिकता छई। मूदा छह बरखक छोट बच्चा कैंटीन मे खाई लेल चईल जेतई, तऽ ओकरा बिना खुऔने घुरेनाई मानवता के विरुद्ध भेलई। बाद मे ओई बच्चा के पिता कैंटीन के बकियौता पाई जमा केलाह आर ओई बच्चाक नाम नित्य कैंटीन मे खाय बला बच्चा मे जोड़वेलाह। आब अई कैंटीन के खेनाई पीनाई सुनु। सबदिनक अलग अलग मेन्यू छई। तरह तरह के निरामिष भोज्य पदार्थ रहई छई। ईयाह तरह तरह के मांसाहार सबहक लेल भारतीय सब अपन बच्चा के कैंटीन सं दूर रखने छलाह। हालही मे स्कुलक प्रबंध समिति, हफ्ता मे एक दिन बुध कऽ कैंटीन मे शाकाहारी भोजन खातिर नीयत केलकई। स्कुलक खातिर शाकाहार एकटा नब प्रयोग छलई। बच्चा सब अई एकदिनक शाकाहारी भोजन के जईम कऽ विरोध कऽ रहल छई। पर्ची, ई मेल, व्यक्तिगत रूप सं, बहस कऽ कऽ,बच्चा सबहक हस्ताक्षर लऽ कऽ,अई नियम के विरोध मे माहौल बना रहल छई। एखईन तक ओना प्रबंध समिति झुकलई नई अईछ।आर किछु होई वा नई होई, ई बच्चा सबहक स्कुलक समय सं ई विरोध क आवाज बुलंद करबाक मानसिकता बनबऽ मे स्कुल सफल तऽ भईये गेल अईछ। जेना भारत मे बहुत रास भाषा सब बाजल जाई छई, ओहिना साउथ अफ्रीका मे सेहो। अपना कतऽ संविधान क अष्टम सुची मे भाषा सब देल गेल छई। साऊथ अफ्रीका मे ग्यारह टा अधिकृत भाषा छई आर चालीस टा सं बेशी भाषा विभिन्न क्षेत्र मे बाजऽल जाई छई। ओतऽ जनजाति सबहक अपन अपन राज पाठ छई। थोड़ेक के ओतुका सरकार मान्यता दऽ देने छई। ओकरा सब के खोरिस जेकां किछु बजट भेटई छई।ओहीं सं अपन मंत्रालय, सहायक, कार्यालय, प्रोटोकॉल आ आन लटरम सटरम सब जोतने रहईत अईछ। हमरा एकबेर एहने जनजाति के राजा सं भेंट भेल। ओ अपन विशुद्ध आदिम जनजाति बाला भेष-भूषा मे छलाह। उनका संग एकटा निजी सहायक कहु वा गाईड कहुं, से भेटला। ई गाईडक मूंह कान अपने सबहक जेना छलईन। ओ कहला - हम ईनकर सहायक नई "पोसपुत " छियईन। हमरा ओ अपन वारिस बनौने छथि। ई कहीं ओ माईर अखबारक कतरन सब देखबऽ लगलाह। इ महाशय चलता पुर्जा बुझेलाह। ओ राजा के अंगरेजी बाजऽ नई अबई छलई। ई ओकर मार्केटिंग करई छलाह। उनकर प्रपितामह बिहार के छलखिन।जखईन बुझला कि हमहु ओतुके छी तऽ कनी बेशी हेम क्षेम जतबऽ लगलाह। दक्षिण अफ्रीका के सब जनजाति के मुखिया सब पारंपरिक पोशाक मे रहईत अईछ। हमरा लेसोथो के राजा, एकबेर हवाई जहाज मे सुट- बुट मे भेटल छल।ओ बहुतही भद्र लोक बुझायल। क्रमशः। अजगुत अफ्रीका-क्रमशः। पुर्वी अफ्रीका मे जंऊआ( जुड़वां) लोक बड्ड देखाईत अईछ। पहिने हमरा भेल की हमरे देखबा मे धोखा होईत अईछ, मूदा जखईन पुछपाछ लोक सब सं केलऊ, तऽ नब गप सब पता चलल। अतुका भारतीय सब के सेहो जंऊआ बच्चा सब सेहो खुब देखाईत अईछ। हर उत्सव सब, जई मे भारतीय सब सपरिवार शामिल होई छथि, ढेरी ढाकी जंऊआ बच्चा की, चेतन सब सेहो भेट जाई छथि। हमरा नाम कहऽ चिन्हऽ मे हमेशा गड़बड़ा जाई छलाय। तखईन ओ सब कहई छथि- आहां के कोनो दोष नई, फलमां हमर जंऊआ छथि। किछु अतुका माईट- पाईन मे छई ई गुण? कहीं इक्वेटर के तऽ नई कोनो करामात? जंऊए तक बात रही कऽ थईम जईतई तऽ नई कोनो अतेक अचरज। तीन, चाईर आ पांच पांच टा बच्चा अतऽ एक बेर मे जन्म लई छई। फर्टिलिटी खातिर हम पहिने लिख चुकल छी जे " वृहत्त पोन" अकर द्योत्तक भेलई।अतुका समाज मे बेशी बच्चा जन्म देबऽ बाला के महत्व छई, तैं विवाह योग्य कनिया के अई अंग के मोजर बेशी छई। अई पैघ पोनबाली जच्चा सं नवजात के स्वस्थ्य होबाक सेहो संभावना बेशी मानल जाई छई। हम एकटा चालीस बरखक स्थानीय अश्वेत मऊगी के खिस्सा बतबई छी। इनकर नाम " मरियम नबातांजी" छईन। इनका पुरा पूर्वी अफ्रीका मे सबसं फर्टाईल मऊगी के दर्जा देल गेल छईन। ई चौआलीस( 44) नवजात के जन्म दऽ चुकल छथि। मरियम, युगांडा के मुकोनो जिला मे रहईत छथि। मरियमक बियाह बारह(12) बरख मे एकटा चालीस( 40) बरखक अधेड़ सं 1993 ईस्वी मे भेल छलईन। बारह बरखक निरक्षर बच्चा के बियाह बारे मे तहिया बुझले कतेक होई छलई। उनकर कहल - " हमरा कतऽ किछु लोक आयल छलाह। हमर पिता खातिर किछु वस्तुजात अनने छलाह। पिता के ओ सब वस्तु देख कऽ बहुत प्रसन्नता भेल छलईन। हमर पीसी सेहो पहिने सं आयल छलीह।ओई लोक सब सं पीसी के पहिने सं जान चिन्ह रहईन। जखईन ओई आगंतुक सबहक जाय के समय भेलईन, हम अपन पीसी संग उनका सब के अरियातऽ गेल रही।थोड़ेक दूर आगु गेलाक बाद, पीसी हमरा ओकरा सबहक संग कऽ देलीह।" मरियम जखईन ओकरा सबहक संग ओकर घर पहुंचलीह, तखईन उनका पता चललईन जे उनकर बियाह अई मनुक्ख सं भऽ चुकलईन। उनकर बर पहिनेहे सं कै टा संग बियाहल , आ कयेक टा धीया पुता छलई।मरियम के ओई सब धीयापुता के देख रेख करऽ पड़ई छलई। कयेक टा बच्चाक माय जन्म देलाक बाद पराऽ चुकल छल। मरियम के बर बहुतही क्रुर स्वभावक छलई।ओ ओकरा बात बात पर मारई पीटई छलई। अकर पाछु तर्क ई छई जे ओ मरियम के कीन कऽ अनने छल। ओकर पुरा हक छलई, चाहे जे करई। किछु अनर्गल गप के बारे मे जखईन मरियम विरोध करई या सलाह दई, सेहो ओकर बर के बर्दाश्त नई छलई।ई तऽ भेल ओकर घरक हालात के पृष्ठभूमि। अहु स्थिति मे 1994 मे ओ सबसं पहिने जंऊआ बच्चा के जन्म देलक।ओकर दु साल बाद ट्रिपलेट आ फेर डेढ़ बरखक बाद चाईर टा बच्चा के एक्के बेर जन्म देलक। अकर बाद क्रम लगले रहलई। मरियम के पिता सेहो पैंतालीस ( 45) टा बच्चा के बाप छथि, मूदा ई बच्चा सबहक जन्म अलग अलग मऊगी सं भेल छलई। मरियम के बईमातर सब सेहो अहिना जंऊआ, तीन, चाईर आ पांच एक्के बेर मे भेल छलई। मरियम छठम बेर जच्चा बनलाक बाद डाक्टर लग रोकबाक लेल गेल छल। डाक्टरक कहब छई - "ई जेनेटिक छई। एकर ओवरी मे अंडा बनबा के संख्या दर, बहुत बेशी छई। अगर ओ जच्चा बनऽ सं बचऽ के प्रयास करतीह तऽ ई इनका लेल जान पर बईन जेतईन।" जीबाक ईच्छा तऽ सबके रहई छई, चाहे कहुना जीबी। जच्चा नई बनबाक विचार मरियम बदईल लेलीह। तेईस (23) बरखक होईत होईत ओ पच्चीस (25) बच्चा के जन्म दऽ चुकल छलीह। आई चालीस बरखक बयस मे चौआलीस टा धीया- पुता भऽ गेलईन। भारतीय सब मे कोनो जीनेटिक बाला गुण नई बुझाईत अईछ। तखनो ईहो सब जंऊआ बच्चा के खुब जन्म अतऽ दऽ रहल छथि। आन देश बाला संग की सेहो एहने ट्रेंड छई? अखईन पता कऽ रहल छी। जखईन किछु निष्कर्ष पर पहुंचब, अवश्ये सांझा करब। अखईन तक आहां सब के कयेक टा स्त्री सं अतुका पुरूख के बियाह करबाक बारे मे बतौने छी। एकटा मऊगी के तीनटा पुरूख सं बियाह केनाई आ संगे रखनाई के खिस्सा बड्ड तेजी सं एतऽ अखईन चर्चा मे अईछ। ई मऊगी के नाम छई " अगुती"।ई गाम अमुगगारा , जिला नगोरा, युगांडा छई। ई मऊगी, अपन तीनु बर के अलग अलग झोंपड़ी नुमा घर रहऽ वास्ते दऽ देने छई।अगुती के अपन घरक परिसर मे सात टा अलग अलग झोंपड़ी छई। ओहीं मे तीनटा के ई अपन घरवाला के रहबाक लेल देने छई। सबसं कमाल ई बात छई जे अई तीनु के कोनो परेशानी नई छई। ओ सब अगुती के अपन घरक मुखिया माईन लेने अईछ। अगुती कहिया केकरा घर मे सुततई, की खेनाई बनतई या आरो कोनो बात के, ई सब फैसला अगुती लेतई। ओ तीनु पुरूख सहर्ष स्वीकार बाला भूमिका मे रहईत छई।पहिने किछु आर " बर " के ओ रखने छल। मूदा ओ सब अनुशासन भंग केलखिन। अगुती के ई बर्दाश्त नई। ओ तखने उनका सब के भगेलक। लोकक अनुसार चाईर टा अखईन झोंपड़ी खाली छई। ई सप्ताह के सात दिनक हिसाब सं बनौने अईछ। हिसाब बाड़ी मे दिक्कत नई होई।जेना अपना दिस जकर सोम कऽ जनम भेल ओ सोमना, मंगल बाला मंगला, बुध बाला बुधिया........................... बिरहसपतिया, शुकराही, शनिचरी आ रबिया होई छलई। ई अगुती अपन "बर" सब कोना तकलक? अकरो खिस्सा अलगे छई। एक टा तऽ रिटायर पुलिसबाला छई।बगले के गाम मे ओ रहईत छलई। ओकरा दस (10) टा चेतन धीया पुता छई। एक बेर अगत्ती बैंक सऽ किछु काज कऽकऽ घर घुरईत छल।ओकर साईकिल रस्ता मे खराब भऽ गेल छलई। ई पुलिस बला मंसा ओकरा मदद लेल कहलकई आ ओकर साईकिल ठीक कऽ देलकई। अही मे माईर गप शप भेलई। फेर की छलई- अगत्तीक संग इहो मंसा ओकर घर आईब गेल। एकटा झोंपड़ी अकरो भेंट गेलई। तहिया सं ओ अतई अईछ। दोसर आदमी अगत्ती के गामक छई। ओ माल - जाल के चरबईत एकदिन अगत्ती सं भेंट भेलई। मजाके मजाक मे ओ कहलकई- " केकरा कहा दन रंखई छें। हमरो रखमे तऽ किछु घईट जेतऊ?" अगत्ती के अकर गप सड़क्का नीक लगलई। माल जाल के चरईत छोईर ओ अगत्ती के झोंपड़ी मे आईब गेल।एक बरख अकरो रहईत भऽ गेलई। अहिना तेसर सब सं पुरान अईछ। ओकरा लेखे अगत्ती सबसं बेशी ओकरे मानई छई। अई बीच मे कतेक अगत्ती के घरवाला बईन कऽ एलई आ गेलई। ई अपना के " सस्ता, सुन्नर आ टिकाऊ" बुझईत अईछ। अखईन अगत्ती छह महीना के गर्भ सं अईछ। तेसरकाक के होई छई जे उयाह अई आबऽ बला संतानक पिता छई। असली तऽ अगत्तिये बतायत? अगत्ती के गाम मे कियो वेश्या कही दई छई, से ओकरा पसिन्न नई। ओकर कहब छई- " हम तऽ पहिने ओकरे सं बियाह केलऊं, जतऽ समाज करेलक। हमरा मोन एहन " बरक" अईछ जे हमरा सं प्रेम करय, हमर सब जरूरत के वस्तु के बेबसथा करय आ कनिया जेकां राखय। हमर बर ई सब नई कऽ पयलाह। जखईन हमहीं उनका कमाऽ कऽ खुयेबईन, तऽ हम अपन पसिन्न के कीया नई बर करब। हमर तकनाई अखनो चालु अईछ।" अखनो नेपाल, चीन आ भारतक किछु जनजाति सब मे ई प्रथा चईल रहल छई। अफ्रीका मे अई प्रथा के ओतुका समाज निंदा करई छई। ओना चौदहम आ पन्द्रहम सदी मे अफ्रीका मे भुखमरी भेल छलई आ बहुत रास मऊगी मईर गेल छलई। तखईन एकटा मऊगी के एकटा सं बेशी पुरूख सं बियाहक प्रथा शुरू भेल छलई। बाद मे पुरूखक संख्या बड सं बड पांच( 5) निश्चित कैल गेलई। बाद मे समयक संग अई तरहक बियाह बन्न भऽ गेल छलई। सब जनजाति सबहक अपन प्रथा होई छई। सब समाज मे तालिबान होई छई।अगत्ती " टेसो" मूल के अईछ। अकरा सब मे एक तऽ अपन मूल मे बियाह नई होई छई आ दोसर मऊगी के एक स़ बेशी बियाह पर रोक छई। पुरूख कतबो मऊगी सं बियाह कऽ सकईत अईछ। अगत्ती के बाप आ भाई अपन गोत के मुखिया लग शिकायत लऽ कऽ गेल। पंचायत मे फैसला भेलई- " अगत्ती के अई सब बियाह के अनुमति नई भेटलई आ सब बर सब के अखने गाम छोड़अ के छई। ई फरमान लऽ कऽ अगत्ती के बाप , बेटी लग अयलाह। बापक कहब छईन- " ई सब अगत्ती के बर सब ओकर झोंपड़ी आ धनक लेल ओकरा संग छई। ई अनैतिक छई। हमर परिवार मे आर बेटी सब अईछ। ई सब नई हटत तऽ माईर कऽ भगेबई।" अगत्ती सं बहुत बहसा- बहसी भेलई। अगत्ती अपन बर सबहक ढाल बईन सामने ठाढ़ आ अड़ल रहल। अंत मे समाजक लोक फेर एलई। आब फैसला भेलई- " ई सब बर सब अखईन वापस अपन घर जास। तकर बाद बियाहक प्रस्ताव लऽ कऽ समाज आ अगत्तीक बापक सामने आबस। फेर विचार कैल जेतई।" अगत्तीक तीनु बर के कुमोन सं जाय पड़लई। अगत्ती ओकरा सब के विदा करऽ काल कहलकई- " हम आहां सब सं बहुत प्रेम करईत छी। आहां सब के हम नई भगा रहल छी। आहांके ससुर आ अतुका समाज आहां के भगा रहल अईछ।आहां सब कतऊ रहुं मूदा हमरा जुईन बिसरब।हमर अई घरक बड़ेरी छलऊं आहां सब, ओही पर हमर चाड़ टीकल छल।आहां सब अबईत जाईत हमर खोज पुछाड़ी करईत रहब , नई तऽ हम असकरूआ भऽ कऽ अई घर मे मईरे जायब"। ई एकटा खिस्सा नई हकीकत छलई।तीनुं ओकर घरवाला अतऽ सं गेल जे हम सब प्रस्तावक संग आयब। सबसं पहिने ओकर तेसरका बर जे सबसं पहिने सं रहईत छल आ गर्भक बच्चा के बाप अपना के बुझईत छल, से बियाहक प्रस्ताव लऽ कऽ आयल। ओ फेर सं अगत्ती के झोंपड़ी मे रहऽ लागल। क्रमशः। अजगुत अफ्रीका-क्रमशः 29 जुलाई, 2019 कऽ हम अई ग्रुप मे दक्षिण अफ्रीका मे चाईर पीढ़ी संऽ रहईत " रामलाल परिवार" के बारे मे लिखने रही। ओ हमरा आशंका जतौने रहईत � " अतऽ हमरा सब के चेहरा मोहरा आ पाबईन तेहार के लऽ कऽ दंश झेलऽ पईर सकईत अईछ। कयेक बेर अतुका स्थानीय सबहक आंईख मे हमरा सबहक प्रति विद्वेष देखाईत रहईत अईछ। रामलाल प्रवासी भारतीय कार्ड के धारक सेहो छथि। हरिद्वार मे अपन घर सेहो कीनने छथि। समय समय पर भारत जाईत अबईत रहई छथि। हिन्दी बाजऽ टा नई अबई छईन, बाकि हिंदू सभ्यता संस्कृति के संजो कऽ रखने छथि। रोमन लिपि मे अंगरेजिया टोन मे संस्कृत मे मंत्रोच्चार कऽ कऽ पुजा पाठ नियमित करईत छथि। ओ हमरा कहईत रहई छलाह- " हम बहुत जल्दी अपन व्यापार कोनो नीक लोक के दऽ कऽ, शेष जीवन भारत मे बितायब। ओतऽ हमरा शुकुन भेटइत अईछ। साऊथ अफ्रीका मे अतेक सुख सुविधा रहलाक बादो, ओ बात नई छई।" उनका लेखे, उयाह ई पीड़ा बुईझ सकई छई, जे विस्थापन के दंश झेलने हुआय। हमर आलेख लिखला के तीन महीना नई बीतल, उनका संग रंगभेद के घटना दिवाली मनबऽ काल घईट गेलईन। दूरक ढोल सोहावन लगई छई। चमक-दमक आ खुशहाली के पाछु बड़का दर्द रहईत छई। युगांडा तऽ 1972 मे ई सब भोईग चुकल अईछ। --x�
काईल खन गेल रही - "स्टेट हाऊस"।जेना भारतक राष्ट्रपति भवन भेलई, तहिना युगांडा के स्टेट हाऊस छई। जयबाक प्रयोजन छल- "दीया बाती"। पिछला आलेख मे हम बता चुकल छी जे अई बरखक दिवाली मे प्रिटोरिया मे भारतीय समुदाय के एकटा मरखाह लोक सं सामना भेलई। ई मरखहवा लोक, भारतीय समुदाय के पटख्खा फोरईत काल गाईर गंजन तऽ केबे केलकई, पटख्खो सब तोईर फोईर देलकई। ई देखबा मे रग्बी के खेलारी लगईत छलई। जेना अपना सब कतऽ ह्रष्ट पुष्ठ लोक के पहलमान कहल जाई छई, ओहिना साउथ अफ्रीका मे रग्बी के खेलारी कहल जाई छई।जतऽ ई घटना घटलई, ओ साऊथ अफ्रीका के राष्ट्रपति भवन के सटले महल्ला छई। आहां सब के बुझल हेबे करत जे भारत सं बाहर सबसं बेशी भारतीय मूल क लोग जई शहर मे रहईत अईछ- तकर नाम " डर्बन " छई। डर्बन ,साऊथ अफ्रीका के एकटा प्रमुख शहर छई। भारतीय मूलक लोग कम बेशी जे होई, दिवाली सबतर मनबई छथि। हं ! दिनक निर्धारण अपन सुविधानुसार करईत छथि। अतऽ युगांडा मे ढेरी ढाकी भारतीय सबहक संगठन छईन।कतेक राज्य के सेहो संगठन छईन। आ एक राज्य के सेहो कयटा संगठन छई। जेना गुजरात के लोहाना समाज, पटिदार संघ, पटेल समाज, बहावी समाज, गुजराती समाज, गुजराती ब्यवसायी संघ अहीना कतेक रास। ई सब संगठन इंडियन एसोसिएशन के छतरी के नीचा काज करईत अईछ। विदेश मे सब जगह " इंडिया डे " मनबऽ के फैशन छई। ई तहिना जेना मैथिल सब " विद्यापति पर्व" सब शहर मे मनबईत छथि। विद्यापति के बारे मे किछु ज्ञान होईन वा नई, पर्व जरूर मनौताह। ओहिना इंडियन एसोसिएशन बाला सब स्पौन्सरक दरीयादिली के विलाप करईत रहत। स्तुति गान मे अपन सब क्षमताक झोंकने रहत। अई बहाने चाईर लोक सं जान चिन्ह सेहो भऽ जाई छई। कनीक रमन चमन, रुसा फुली, नब लोक के परिचय पात सब भऽ जाई छई। ई सब होबाक चाही। सामाजिक काज विदेश मे केनाई अतेक आसान नई छई। तखनो छोट पैघ सब देश मे भारतीय सबहक संघ छईन आ ओ सब किछु किछु करईत रहई छथि। युगांडा मे अतुका राष्ट्रपति भवन मे राष्ट्रपति संग दिवाली मनावल जाई छई। अई बेर काईल नवंबर 7, 2019 कऽ मनावल गेल। पांच सौ सं बेशी भारतीय मूल के लोक सब अई मे सम्मिलित भेल छलाह। बरख मे ईयाह एक दिन अबई छई जहिया स्टेट हाऊस मे अयबाक नोत भेंटई छईन।सब गोटे नीक नुकुत भोज सेहो पबई छथि। राष्ट्रपति संग गप सड़क्का सेहो होई छईन। राजा-रंक के सम भाव मे हम अतई देखलियई। राष्ट्रपति के सामने तऽ सब लोक नोतिहारिये भेल। भारतीय सब के बरियातिये बुझु, तुलसीक पात। सबहक मान बरोबईर। सिनेमाक हीरोइन मुमताजक धनाढ्य सासुरबला होखस वा जुही चावला के, दिहारी भारतीय मजूर होईस वा परचुन चलबऽ बाला छोट कारोबारी, फैक्ट्रीक निजी सुरक्षाकर्मी होबस वा भारतीय बैंक प्रबंध निदेशक, सबके एकरंग मोजर। अतुका राष्ट्रपति ततेक ने सहज , भारतीय लोकक बीच छलाह जे बुझाई जे गाम मे कोनो जगक बीतलाक बाद घरबईया सब समांग कर कुटुम्ब संग बईसल होईथ।बहुतो भारतीय सब के ओ नाम सं चिन्हई छलखिन। किछु भारतीय मूलक खेलारी 1960 के करीब मे मेडल जीतने छलाह, उनकर सबहक नाम कंठस्थ छलईन। जहिया ओ स्कूल मे पढ़ई छलाह , तहिया अतुका स्थानीय लोक सब फुटबॉल खेलाईत छल, आर भारतीय बच्चा सब " हाकी " आ क्रिकेट। अहु बारे मे अपन अनुभव साझा केलाह। एकटा भारतीय मूल के लोक के भीड़ मे सं बजेलाह आ कहलखिन- " इनका आहां सब चिन्ह लियऊन। 1956 मे जहिया हम किछु नई छलऊं, हमरा ई आर्थिक रूप सं मदद केलाह आ आईयो कऽ रहल छईथ।" भारतक पूर्व प्रधानमंत्री सरदार मनमोहन सिंह संग दुनु देशक बीच व्यापार संबंधी वार्ताक चर्च सेहो केलाह। "अमेरिका 6500 वस्तु पर अफ्रीका सं आयात मे कोनो कर नई लगौने छई। अहिना भारतक संग सेहो संधि प्रगति पर छई। बस वस्तु के जाय लाबऽ मे खर्च बड्ड छई। सबसं सस्त जलमार्ग होई छई। ओही लेल अतुका सरकार प्रयासरत छई। जई सं व्यापार बढ़ौ आ खुशहाली आबई।" राष्ट्रपति कहलखिन- " हमर देश मे जनजाति के बाईढ़ अईछ। भारतीय सब सेहो अकर मांग कऽ रहल छईथ। हमरा अतेक स्थानीय जनजाति संग रहबाक हिस्सक अईछ। अहुं सब के अतुका जनजाति बनबाक मांग हम गछईत छी।हम सब एशियाई, अफ्रीकी आ अमेरिकी एक्के छी।भारत, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, श्रीलंका, नेपाल, म्यानमार सब एक भेलई। हम सब बहुतही शोषित रहृलऊं। ई बड़का समानता अईछ आ ईयाह हमरा सब के आपस मे जोड़ने अई।" अई आलेख लिखबाक अभिप्राय एक्के टा अईछ जे युगांडा क सरकारक विशाल ह्रदय देखियऊ।स्टेट हाऊस के भीतर गेलाक बाद भारत जेकां संऊसे संगीनक साया आ गमला जेकां स्थापित पुलिस कर्मी नई छल।ई बेबसथा माहौल के सहज बनबऽ मे मदईद करई छई। - हम सब की कोनो अफ्रीकी देश के लोक सब के जनजाति मे स्वीकार करबाक लेल तैयार हेबई? -भारत मे राष्ट्रपति भवन मे अफ्रीका के पाबईन मे ओकरा सब के नोत दऽ कऽ बजेबई? - हम सब कहिया " हबसी " कहनाई छोड़बई आ आदरसुचक शब्द प्रयोग करबई? सत्त मे अफ्रीका अजगुत अईछ। भारतीय सब सेहो एना ने हिलमिल गेल छईथ जे देख कऽ मोन प्रफुल्लित भऽ जाईत अईछ।दोसर देशक लोक आ समाज के आत्मसात अफ्रीकी समाज कऽ सकईत अईछ। हमर आहांक रूढ़िवादी सोच, अपन सब उर्जा खिन्नांसक पाछां बर्बाद करऽ मे लागल अईछ। अजगुत अफ्रीका-क्रमशः। अफ्रीका मे बहुत रास जनजाति सब छई। सबहक अपन फराक रीति रिवाज आ संस्कृति छई।अई सब मे सऽ किछु रिवाज, आजुक समय के देखईत विकृति छई।ई रिवाज छई-" बाल विवाह "। लड़की बच्चा के पढ़ौनी के अखनो विलासिता ओतुका समाज मानई छई।जखने विलासिता आईब गेलई, तऽ ई सिमईट कऽ किछु घरे मे रही गेलई।गाम घर कतऊके होई, सम्पन्न लोक कम्मे होईत छई। कानुन रहलाक बादो, अठारह साल सं कम अवस्था के लड़की बच्चा सब के बियाह भऽ रहल छई। ई कानुन ओहिना छई जेना मैथिल समाज मे सरकारक दहेज विरोधी कानून रहलाक बादो दहेज कोनो ने कोनो रूप मे अखनो चईल रहल अईछ। अतबे नई, बाल विवाह सेहो हाल तक खुले आम होईत छल। कानुनक पहुंच गाम गाम तक नई छलई। बहुत पुरान गप नई छई, एकटा भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी सेहो अठारह बरस सं कम बयसक कन्या सं विवाह केने छलाह। तहिया तर्क ई देल गेलई - " फलां बाबु आयल छलाह। नई कोना कहितियईन। उनको तऽ धीया भेलईन। ओ जे करथिन, से नीके करथिन। अपन बेटी के ओ अधलाह करथिन।" आई ऊयाह सब तर्क अतऽ अफ्रीकी समाज मे दईत सुनई छीयई। युगांडा के ग्रामीण समाज, हमरा पुरनका मैथिल समाज लगईत अईछ। जतऽ भोजक जुठ पर लुधकईत लोग देखाईत छलई। अकर पाछु छलई- " गरीबी"। आहां सब पुरनका मैथिल विशेष कऽ अशिक्षित सोलकनक आ कट्टरवादी बड़हनक, गाम घर के स्मृति मे आईन कऽ आगु पढ़ब, तखईन लिखबाक भाव बुझायत। अतुका गाम घर मे लड़की बच्चा के स्कुल भेजबाक बारे मे नई सोचल जाई छई।अकरा सब के किछू लिख पईढ़ कऽ अपन बियाह मे माय बाप के दहेज रूप मे बेशी सं बेशी धन दऽ जयबाक छई। पढौनी सं बेशी घरक काज धंधा सिखनाई, बजार गेनाई, बुढ़ - बच्चा के नीक सं डेबनाई, घर चलौनाई छई। अही लऽ कऽ लड़की बच्चा के स्कुलिया पढ़ाई छुईट जाई छई आ ओकर बियाह करा देल जाई छई। आजुक सुचना क्रांति के समय मे, पंचवां छट्ठा मे पढ़ईत लड़की सब अपन माय बाप के घर सं पराऽ कऽ कोनो शहरक संबंधी कतऽ चईल अबईत छई। कारण- ओ बच्चा आगु पढ़बाक चाहई छई। बियाह सं ओकर पढ़ाई छुईट जेतई। ओकर घरबाला के कहब छई- " ई आब समर्थ भऽ गेल छथि। बियाह आवश्यक छईन।" बाजु पांचम छट्ठम वर्ग मे पढ़ईत बच्चा समर्थ! गामक एतनी टा बच्चा के भाईग कऽ शहर एनाई आ रहनाई अतेक आसान हरदम नई होई छई।ओकरा अपन गाम घर, लोक वेद याद अबईत रहई छई। ओकर कहब छई- - " हमर गाम मे १२/१३ बरखक बुच्ची के अपन बच्चा के आहां कोरा मे लऽ कऽ घुमईत देख सकई छी।" एकटा अतुका बुच्ची के पिता के कहबाक छईन- " हमरा सब मे किछु लोक पर अर्थक दबाव बहुत रहईत अईछ। गरीबी एहन गुण/ अवगुण होई छई जे वो आहां सं कोनो निर्णय करबा सकईत अईछ, बिशेष कऽ जखईन आहां के कुमाईर बेटी अईछ।ओना आब हमरो समाज बदईल रहल अईछ, हम सब बेटी बेचनाई बन्न कऽ रहल छी। पढ़ल लिखल गुणल बेटी बेशी अवलम्ब होईत अईछ।" ओना बाल बियाह सं भागहो बला के संख्या कम नई छई। बहुत रास बुच्ची सब बियाह के बाद परा कऽ शहर अबई छथि आ फेर सं नब जिनगी शुरू करईत छईथ।शहर मे स्वयंसेवी संस्था के माध्यम सं कतेक बुच्ची पढौनी सेहो करईत छईथ। युगांडा के मराचा जिला मे एकटा सर्वे भेलई। ओई अनुसार 12-17 बयस के बीचक 11365 बुच्ची सब नब शिशु के जन्म देलखिन। ओहिना 10-17बयसक बीचक 1124 बुच्ची के बियाह भेलईन। कहबाक जे अतेक बाल विवाह साल भईर मे भेलई। बाल विवाह क संग संग बिन बियाहल माय बननाई सेहो बड़का सामाजिक समस्या भऽ गेल छई।अई लेल अतुका लोक के कहब छई- गाम मे पाईनक खातिर बेशीतरहां सांझु पहर दुर दुर जेबाक पड़ई छई। ओहीं रस्ता पेरा ईनका सबके गलत लोकक शारीरिक भूखक शिकार होबऽ पड़ई छईन। दुर्भाग्य क गप जे अतऊ लोक लाज सं घटना के रिपोर्ट नई करवबई छई। एकईसम सदी अयला के बादो अई तरहक कुमाईरक गर्भधारण कयला सं युगांडा के समाज आ सरकार दुनु व्यथित अईछ।ई गर्भवती बुच्ची सब अपन जीवन मे उड़ान लेबऽ सं बंचित रही जाईत छईथ।कयेक गोटे तऽ वयस कम रहबाक कारणे रोगी बईन बाकी जीवन बीतबई छईथ। जेना भारत मे बाल विवाह, सती प्रथा, दहेज प्रथा, विधवा विवाह सब पर काज भेलई, ओहिना बाल विवाह वा कम बयस मे गर्भ धारण पर युगांडा मे बहस छिड़ल छई।बुच्ची सबहक अधिकार के बारे मे विभिन्न प्लेटफार्म के माध्यम सं बात पहुंचावल जा रहल छई। कम बयस मे गर्भ धारण करबा सं होबऽ बाला खतरा सं सेहो आगाह कैल जा रहल छई। पुरा युगांडा मे देखबई तऽ 40% के करीब बुच्ची के बियाह अखनो 18सं कम बयस मे होई छई।पढ़ाई के जाबईत तक ई सब समयक बरबादी बुझईत रहतई, ताबईत ई स्थिति नई बदलतई। दक्षिण अफ्रीका के स्थानीय जनजाति सब मे सेहो ईयाह बिन बियाहल कम बयस मे गर्भधारण समस्या बनल जा रहल छई। ओतऽ तऽ भेटल सरकारी सुविधा अकरा बढ़ावा दई छई, मूदा युगांडा मे तऽ कानुन बनलाक बादो रूईक नई रहल छई। अतुका किछु जनजाति मे तऽ लड़की बच्चा के छाती मे उभार एनाई के बियाहक लेल तैयार मानल जाई छई। कुल मिला कऽ गरीब आ अशिक्षित लोक मे ई सब कुरीति बेशी देखाई देत। अतुका धनीक आ पढ़ल लिखल समाज मे ई सब कम देखायत। अई विषय पर ततेक तरह तर्क सुनबा मे अबई छई जे आहां ओई मे ओझरा जायब। किछु लोक के कहब छईन- " युगांडा, दुनिया के सबसं बेशी रिफ्युजी के आश्रय देबऽ बाला देश सुडान, कांगो आ इथियोपिया मे सं एक छई। ई रिफ्युजी सब के बियाह भेलाक बाद कानुनी स्थित मजगुत भऽ जाई छई। अठारह बरख सं कम बयसक लड़की सं सेक्स अपराध मानल जाई छई, ओही सं बचबा लेल बाल विवाह के प्रचलन बईढ़ गेल छई। जे भी होई, भारत मे आब बाल बियाह पुरा तरह सं बन्न भऽ गेल छई। युगांडा सेहो बाल बियाह आ बलात् बियाह दुनु के बन्न करबाक लेल संकल्पित अईछ। उम्मेद छई जे जल्दिये ई सामाजिक विकृति अतऽ सं खत्म भऽ जेतई। बाल विवाह क रंग-ढंग मिथिला बला हमरा लगईत अईछ। हमरा नई बुझाईत अईछ - जे मिथिला मे बाल विवाह के बिरोध मे कोनो आंदोलन भेल होई? कानुन बनलाक बादो बाल विवाह मे ककरो सजा भेटल होई? समयक संग लोक मे स्वतः जागरण एलई आ देखते देखते ई कुप्रथा अपने बंद भऽ गेलई। ओहिना हमरा लाईग रहल अईछ जे बहुतही जल्द युगांडा सं ई कुप्रथा समाप्त भऽ जेतई। --x�
युगांडा मे मऊगी सबहक प्रजनन क्षमता बहुत बेशी छई।बाल विवाह आ बिन ब्याहल माय बनबाक दृष्टांत अतऽ खुब भेटत। अतऽ लोक सब सं गप होयत तऽ ओ अई कुरीति सब के खत्म करऽ के बदला मे ओ ओई परिस्थिति के जिम्मेदार बतावत। ओकर सबहक गलती नई, समये एहन छलई जे एना भऽ गेलई। एकटा गप कहई छी ओ आर स्पष्ट करऽत। युगांडा मे माछ मारबाक बड्ड कहबी छई। ओना साऊथ अफ्रीका मे सेहो अंगरेजबा सब अकरा फैशन मे लई छई। एक बेर हम पिकनिक मनबऽ प्रिटोरिया सं सटले एकटा उद्यान मे गेल छलऊं। ओतऽ पहिल बेर बंशी सं माछ मारईत भारतीय मूलक परिवार भेटायल। ओतऽ माछ बंशी मे फंसलाक बाद घर नई आनल जाई छई। आनंद लेल माछक शिकार करू आ पकड़लाक बाद फेर ओकरा ओतई पाईन मे छोईर दियऊ। मैथिल लेल बंसी मे फंसल माछ के वापस छोड़नाई सं पैघ कष्टकर की हेतईन? युगांडा मे गाम गाम मे गड़हा गुड़ही, खत्ता, चभच्चा, पोखईर, झील सब जगह माछ मारईत देख कऽ मिथिला मोन पड़ल। अतऽ बड़का बड़का झील छई आ बहुत लोक के रोजगार माछे सं जुड़ल छई। झीलक लग पासक गाम बला तऽ बुझु अही पर निर्भर अईछ। जेना अपना कतऽ मलहा आ मलाहिन के काज बांटल रहई छई, ओहिना अतऊ देखलियई। मलहबा आर पुरूख बच्चा सब नाव लऽ कऽ भोरे माछ मारऽ चल जाई छई।मलाहिन आ लड़की बच्चा सब माछ सब के सुखायत, जाल के ठीक करऽत आ अहिना माछक मादे आर काज सब करई छई। जखईन सांझु पहर मलहबा सब घुरई छई तखईन ईयाह बुच्ची सब ओकर आगत स्वागत करई छई। अही सब मे नजदीकी पनईप जाई छई। किछु बुच्ची सब मलाह संग बियाह कऽ लई छई आ किछु बिन ब्याहले माय बईन जाई छई। अई बाल बियाह आ बिन बियाहल गर्भधारण, दुनु स्थिति मे बुच्ची सबहक पढ़ाई तऽ छुटिये जाई छईन। अई सब घटना के लेल, ओतुका लोक व्यक्ति के नई, परिस्थिति के जिम्मेदार बुझई छई। कखनो कऽ अपना के कारण नई बुझबा के मानसिकता फायदेमंदो रहई छई। अतऽ आत्महत्या के घटना बहुतही कम अभरई छई। ई तहिना भेल जेना अपना दिश राही दाही भेला सं जे फसलक नोकसान होई छई, ओकरा लोग भाग्य सं जोईर दई छई। भाग्य मे नई छलाय, तैं नई भेल। ई सोच नैराश्य भावना के नई पनपऽ दई छई। ओहीं सं लोक आत्महत्या कम करईत अईछ। भारत के दोसर भाग मे आत्महत्या के दर बिहारक मुकाबला मे बहुत बेशी छई। युगांडा मे मऊगी सब के फर्टिलिटी बेशी रहबाक कारणे एकटा नब धंधा अतऽ फलय फुलय लाईग रहल अई। ई धंधा छई- " किराया पर कोख देनाई"।अकरा सारा दूनिया "सरोगेसी " के नाम सं जनई छई। युगांडा मे गरीबी छई। गरीबी सं निकलई लेल ई कोख के किराया पर देबऽ मे लोक संकोच नई कऽ रहल छई। अकर सबसं पैघ बजार अखईन चीन भऽ गेल छई। आहां सब मे बहुत लोक के बुझलो होयत जे 2015 मे चीन मे एक बच्चा बाला सरकारक नियम बन्न भऽ गेल छई।आब जे चीनी "सांय - बहु" के बैस बेशी छईन ओ सब सरोगेट माय लेल युगांडा के मऊगी के चुनई छईथ। ओना पिछला बीस बरख मे चीनी मऊगी सबहक फर्टिलिटी दर कम भेल जा रहल छई। एकर की कारण छई? प्रदुषण या आर कोई वजह? ई सब चीनी लोक बतेताह। युगांडा मे तऽ चीनी के किरायाक कोखक बजार बईने गेल छई। युगांडा मे दु तरह सं ई कारोबार चलई छई। एक तऽ जईमे युगांडन मऊगी चीन वा आर दोसर देश जतअऽ सं प्रस्ताव आयल रहई छई, ओतई कोनो ने कोनो ढंग सं चईल जाईत अईछ। आ दोसर जे युगांडा मे रही कऽ ही सरोगेसी सं बच्चा के जन्म दईत अईछ। बच्चा के जन्मईते, ओकरा जन्म देबऽ वाली माय सं अलग कऽ देल जाई छई। कियैक ई सरोगेट माय बाला केस मे ई डर बनल रहई छई जे कखईन अकर ममत्व के भाव जाईग नई जाय। ओई सं अई धंधा सं जुड़ल लोक साकांक्ष रहईत अईछ। दुनिया के किछु धनिक लोक मे सरोगेसी के अपनाबऽ के एकटा चलन आईब गेल छई। ओ सब माय बनबाक प्रसव पीड़ा आ ओकर पुरा यात्रा सं कंछी काईट रहल छईथ। तेहन सोचक धनीक लोक सब के युगांडा मे बजार भेंट रहल छईन। अई मे मोल भाव सेहो होबऽ लगलई अईछ। जखईन " किराया के कोख " चिकित्सा विज्ञान मे आयल छलई तखईन अकर उद्देश्य किछु आर छलई। भारत मे सेहो शुरू मे अकर दुरूपयोग के बात सामने आयल छलई। बाद मे सरकार कठोर कानून बना कऽ अकरा पर नियंत्रण कयलक। अखनो कखनो काल किछु गैरकानूनी सरोगेसी के बात सामने आबिये जाई छई। ई धंधा पर रोक लगेनाई मे सबसं बाधा ई छई जे अई सं जुड़ल सब गोटे लाभान्वित होईत छथि, तैं शिकायत के करतई। युगांडा मे अखईन अई विषय पर कानुन नई छई। अतुका सरकार के एकर भऽ रहल व्यवसायिक इस्तेमाल के सुचना छई आ अई विषय पर कानुन बनबऽ के प्रक्रिया चईल रहल छई। जाबईत कानुन बनतई आ समाज अकरा अपनवतई ,ताबईत ई धंधा बदस्तुर जारी अईछ। युगांडे नई, कयेक आर अफ्रीकी आ एशियाई देश अकर जद मे आईब चुकल अईछ। ई धंधा मानवता के लेल एकटा धब्बा जेकां अईछ। उम्मेद अईछ जे जागरूकता संग अफ्रीकी समाज अई सं अपना के जल्दिये विलग करऽत। अजगुत अफ्रीका-क्रमशः। आई काईल युगांडा मे ई चर्चा जोड़ पकड़ने छई कि कियैक ने " स्मृति दिवस " अतऊ मनावल जाय। अकर समय ग्यारह बजे, ग्यारह तारीख आ ग्यारहवां महीना छई। जखईन हम ई 11 के बारे मे जानकारी लेलऊं तऽ पता चलल जे ई तऽ हमरो देशक संबंध मे सेहो ओहिना प्रासंगिक अईछ। तखईन हमरा कतऽ कियैक नई कईयो कोनो बहस वा चर्चा सुनलियई। हम सब स्थानीय राजनीति आ गाम घरक बुढियाक फुईस बिषय पर तऽ अपन उर्जा खुब बर्बाद करब, लेकिन देश दुनिया आ इतिहास सं हम सब दुर जा रहल छी। अखईन इंग्लैंड, कनाडा, आस्ट्रेलिया, न्युजीलैंड, साऊथ अफ्रीका आ केन्या मे स्मृति दिवस मनावल जा रहल छई।अई कार्यक्रम मे बुढ़ सं लऽ कऽ बच्चा सब भाग लईत छथि।अई मे प्रथम विश्व युद्ध, दोसर विश्व युद्ध आ आर कोनो महत्त्वपूर्ण युद्ध के बहादुर सिपाही सब के याद कैल जाई छई। संयुक्त राज्य अमेरिका ओई दिन " वेटरन डे " मनबईत अईछ। आहां सब के भऽ सकईत हुआय , बुझलो हैत, 11 बजे 11/11/1918 कऽ प्रथम विश्व युद्ध मे शांति समझौता पर हस्ताक्षर भेल छलई। तहिये सं कामनवेल्थ देश सब आ मित्र देश युद्धक हीरो सब के याद करईत दु मिनट के मौन उनकर सबहक सम्मान मे रखईत अईछ। कनाडा मे तऽ ओई दिन सरकारी कर्मचारी सब घरे पर रहईत अईछ। स्कुल सब अई सं खुजल रहई छई जे बच्चा सब " स्मृति दिवस " उत्सव मे भाग लऽ सकय आ सब शहीद के सम्मान मे श्रद्धा सुमन अर्पित कऽ सकय। अई दिन युद्ध सं जुड़ल कविता पाठ, देशभक्ति के गीत आ जीवित सैनिक के अनुभव आदि सांझा कयल जाई छई।बच्चा सब अपने उत्साह सं भाग लई छई। ओकरा सब पर थोपल नई जाई छई।ओ सब युद्धक हीरो सब के बारे मे बहुत रास बात जनईत रहई छई। युगांडा के हाल भारते जेकां छई। हमहु सब विश्व युद्ध क हीरो के बारे मे नहिंये बरोबईर जनई छी। भारत आ युगांडा दुनुं ब्रिटेन क उपनिवेश छल आ दुनुं देशक स्थानीय लोग विश्व युद्ध मे बईढ़ चईढ़ कऽ हिस्सा लेलक। युगांडा मे किंग्स अफ्रिकन राईफल आ भारत मे ब्रिटिश इंडियन आर्मी छलई। सबसं कमालक बात जे भारतीयक ब्रिटिश इंडियन आर्मी सब पुर्वी अफ्रीका मे सेहो आईब कऽ लड़़ल आ युगांडक किंग्स अफ्रिकन राईफल सब तहियाक सीलोन आब श्रीलंका, बर्मा आब म्यानमार आ ओकर आस पास जगह मे युद्ध मे भाग लेलक। युगांडा क बाम्बो बैरक के सेहो अतुका युद्धक इतिहास मे नीक स्थान छई। हमरा तऽ " बाम्बो " नाम एकरा बारे मे जानई लेल उत्सुक कैलक। भारतक बाम्बे आ अतुका बाम्बो मे की कोनो कनेक्शन? भारतक राष्ट्रपति भवन आ साऊथ अफ्रीका के राष्ट्रपति भवन ( युनियन बिल्डिंग ) हमरा एक्के डिजाइन मे लागल छल। बाद मे पता चलल जे एक्के वास्तुकार दुनु बनौने छई। युगांडा के बाम्बो बैरक मे तहिया युद्धबंदी सब के राखल जाई छलई। 1942 मे माल्टा जे ब्रिटेनक संरक्षित राज्य छल,ओतुका 47 टा युद्धबंदी के युगांडा मे निर्वासित कयल गेल छलई। ई सब इटालियन मूलक लोक छलाह।इनका सब पर अभियोग छलईन जे माल्टा के गुप्त बात सब दुश्मन देश के बता देथिन। इटालियन मूलक भेनाई इनकर सबहक ई त्रासदी के कारण बुझाईया छलई। माल्टा के संसद मे अई विषय पर बड्ड गरमा गर्मी संग बहस भेल छलई। माल्टाक पूर्व प्रधानमंत्री सर युगो मिफसुद अई निर्वासन के खिलाफ ओतुका संसद मे एतिहासिक आ भावनात्मक भाषण देने छलाह। ओ भाषण दईत ततेक भावुक भऽ गेल छलाह जे संसद के फ्लोरे पर उनका ह्रदयाघात भऽ गेलईन। अगिला दिन उनकर मृत्यु भऽ गेल छलईन। मात्र 53 बरखक अवस्था मे ओ शरीर छोईर देलाह। अई सब घटना के तहियाक ब्रिटिश सरकार पर कोनो असर नई भेलई।सैतालिसो निर्वासित के जहाज सं अलेक्जिंड्रिया भेज देल गेलईन। ओतऽ सं ट्रेन सं ई सब कैरो, ईजिप्ट जाई गेलाह। तखईन फेर नील नदी के रस्ता सं महीनो बाद युगांडा पहुंचई गेलाह।तकर बाद इनका सब के बाम्बो बैरक मे राखल गेलईन। भारत मे सेहो स्वतंत्रता सेनानी सब के अंडमान आ रंगुन, बर्मा भेजबाक दृष्टांत भेटत। हमरा सब के अंडमान आ रंगुन के निर्वासन बहुत कठोर बुझाई छल। जखईन ई बाम्बो बैरक मे माल्टा के इटालियन मूलक लोक के निर्वासनक पता लागल तऽ बुझायल दुनिया मे एक सं एक घटना घटल छई। ई माल्टाक युद्धबंदी सब बाम्बो बैरक मे अबिते मलेरिया ज्वर स़ं ग्रसित भऽ गेल। तखईन ईनका सब के "मुलागो अस्पताल" मे भर्ती करावल गेल।अई युद्धबंदी मे एकटा आर प्रमुख नाम जुईड़ गेलई। ई छलाह - बर्माक पूर्व प्रधानमंत्री यु साव।ईनका ईजीप्ट मे पकड़ल गेल रहईन। जापानक संपर्क मे रहबाक अभियोग लागल छलईन।ई सब युद्धबंदी सब मलेरिया के प्रकोप के कारण एक जगह सं दोसर जगह स्थानान्तरित होईत रहलाह। सुपकक भांटा जेकां डगरईत रहलाह। बाद मे सीरिया आ आर कय देश सं युद्धबंदी सब एतऽ आईब गेल छलई। जखईन 1945 मे विश्व युद्ध खत्म भेलई, तखईन माल्टा बला सब वापस अपन देश घुरल। ई अस्पताल हमर घर आ आफिस जाय के बीच मे पड़ईत अईछ। अबिते जाईत मुलागो अस्पताल देखते ओ समय के परिकल्पना घुमऽ लगईत अईछ। ब्रिटेन अपन सब उपनिवेश के युद्ध मे झोंईक दई छलई आ ओतुका सब साजो सामान आ सुविधा के फायदा उठबईत छल। युद्ध मे शहीद भारतीय सैनिक सबहक याद मे इंडिया गेट मे वार मेमोरियल बनल छई। ओहिना कंपाला, युगांडा मे कंस्टीट्यूशन स्कावयर मे दुनु विश्व युद्ध मे शहीद युगांडन सैनिक के याद मे स्मारक बनल छई। जेना युगांडा मे ग्यारह बजे, ग्यारह तारीख आ ग्यारहवां महीना ( नवंबर ) मे स्मृति दिवस के मांग जोड़ पकईर रहल छई, ओहिना भारत मे अई दिन विश्व युद्ध के अलावा भारत-चीन, भारत-पाक,कारगिल युद्ध सब मे भेल शहीद सैनिक के सम्मान मे मनावल जा सकई छई। युगांडा मे अई तऽरहक चर्चा बहस होईत देख नीक लागल। हम सब अफ्रीका कही कऽ अकरा सब के पिछड़ल मानई छी, मूदा ओतुका नब पीढ़ी बहुतही संवेदनशील आ विश्व के अग्रिम पंक्ति के देशक लोक जेकां सोच रखबाक प्रयास कऽ रहल अईछ। प्रति व्यक्ति आय भले ही कम होऊ, शहीदक प्रति श्रद्धा सुमनक मामला मे आगु रहबाक प्रयास तऽ कऽ रहल अईछ।"अफ्रीकन प्राईड " के फीलिंग बईढ़ रहल छई। अकर ईतर एशियन प्राईड टुकड़ा मे बंटल हमरा बुझा रहल अईछ। अजगुत अफ्रीका-क्रमशः। युगांडा मे राजधानी तऽ कम्पाला छई मूदा अन्तर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट " एन्टेबे " मे छई। अतुका स्टेट हाऊस( राष्ट्रपति भवन ) सेहो एन्टेबे मे छई। अहिना साऊथ अफ्रीका मे यूनियन बिल्डिंग ( राष्ट्रपति भवन ) तऽ प्रिटोरिया मे छई , मूदा अन्तर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट जोहानिसबर्ग मे छई। प्रिटोरिया मे एकटा छोट हवाईअड्डा लैन्सेरिया मे बनल छई। ई सब महानगर पर बोझ कम करबाक मे सहायक होई छई। अही लेल दुरगामी विजन के जरूरत छई। वोटक प्रमुखता अई सब मे नई होबाक चाही। भारत मे जेना जेवर,( दिल्ली लग) मे हवाई अड्डा बईन रहल छई। आगु देखबाक छई जे कतेक सफल होईत छई। एन्टेबे , युगांडा मे अपन अलग स्थान रखईत अईछ।एक तऽ अतुका राष्ट्रपति के रहबाक कारणे आ दोसर हवाईअड्डा होबाक कारणे सेहो छई। ई शहर के, दुनिया के इतिहास मे अपन अलग स्थान छई। एन्टेबे दु शब्द " ई" आ " न्टेबे " के मिला कऽ बनल छई। " लुआंडा " अतुका मूख्य भाषा छई जेना "जुलु " साऊथ अफ्रीका के भाषा छई। लुआंडा भाषा मे " ई " मतलब " एक " आ " न्टेबे " मतलब गद्दी ( सीट ) होई छई। अठारहवीं सदी मे " मुगुला " नामक एकटा स्थानीय जनजाति के प्रमुख अतई अपन गद्दी जमौने छल। ओ अतई विक्टोरिया लेक के पाथर पर बईसईत छल। ओकर समाजक लोग न्याय के गोहार लऽ कऽ ओकरा लग अबईत छलई। " मुगुला " के न्याय त्वरित होई छलई। ओकरा द्वारा देल गेल सजा मे आर्थिक दंड सं लऽ कऽ मृत्यु दंड तक होई छलई। ओकर सजा ऐलान के बाद कोनो अपील नई छलई। मृत्यु दंड तहिया एतऽ विक्टोरिया लेक मे डुबा कऽ मारनाई के रूप मे होई छलई। ओना एकटा " सेसे " नामक द्वीप सेहो छलई, जतऽ खातिर निर्वासित कऽ देल जाई छलई। सेसे द्वीपक नरभक्षी जानवर सब मनुख के अपन ग्रास बना लईत छल। आई " सेसे " द्वीप एकटा पर्यटन स्थल बनल अईछ। किछु भारतीय मूलक लोग आ ब्रिटिश सब सेहो ओतऽ जमीनक बंदोबस्ती करा कऽ विकसित केने अईछ। पर्यटक सब ओतऽ किछु दिन शेष दुनिया सं कईट कऽ समय बीतबऽ जाईत छईथ। ओई जमाना मे लोक सब जे ईमहर अबई छलई, पुछला पर कहई- " हम मुगुला के गद्दी पर जाई छी।" ईयाह मुगुला के गद्दी बाद मे लुआंडा भाषा मे बजईत बजईत " ई न्टेबे " सं " एन्टेबे " भऽ गेलई। अहिना दुनिया के आर शहर सबहक नामकरण भेल छई। हमेशा सं शहरक नामक पाछु के खिस्सा हमरा दिलचस्पी पैदा करईत अईछ। हमरा होईत छल जे कोनो अंग्रेजक नाम पर अई शहरक नाम एन्टेबे परल हेतई। ई शहर विक्टोरिया लेक के कात मे योजनाबद्ध ढंग सं बसल अईछ, आ रईस अ़ग्रेज सब अतऽ रहईत छल। ब्रिटिश शैली के पुरना घर सब अतऽ भेटत। ई ओहिना हमरा लागल जेना हिमाचल, गढ़वाल आ भारतक ठंडा मौसम बला क्षेत्र मे अंगरेजिया बाबु सबहक रिहाईश देखबा मे अबई छई। अंग्रेज सब के ई शहर अपन मौसम आ सुविधा के हिसाब सं बेश नीक लगलई। युगांडा के राजधानी ओ सब 1894 मे कम्पाला सं एन्टेबे कऽ देलकई। ई ओहिना जेना अंग्रेज सब भारतक राजधानी कलकत्ता सं दिल्ली कऽ देलकई। 1894 सं युगांडा के राजधानी एन्टेबे मे ही छलई। जखईन 1962मे युगांडा के आजादी भेटलई, तखईन ओ फेर अपन राजधानी कम्पाला अनलक। राष्ट्रपति भवन , एयरपोर्ट आ किछु आर सरकारी संस्था सबहक कार्यालय अखनो एन्टेबे मे ही छई। भारत सेहो आजादी के बाद अपन आवश्यकता के अनुसार राजधानी दोसर जगह बना सकईत अईछ। अखुनका प्रदुषण क समस्या एहन विकराल भेल जा रहल छई, जे ओ दिन दुर नई जखईन दुतावास सब दिल्ली सं बाहर चईल जाय। आतंकवाद के बारे मे देश दुनिया जानऽ बला लोक खातिर एन्टेबे एकटा बड़का अध्याय छई। 27 जुन, 1976 कऽ एयर फ्रांस क जहाज के अपह्रत कयल गेल छलई।तेल अबीब सं ई जहाज पेरिस के लेल उड़ान भड़लक।अई हवाई जहाज मे 258 टा यात्री छलाह। चाईर टा फिलिस्तीनी आ जर्मन, हवाईजहाज के अपहरण क कऽ एन्टेबे हवाईअड्डा पर लऽ एलई। अपहरण कर्ता सबहक मांग छलईन जे 40टा फिलिस्तीनी स्वतंत्रता सेनानी सब इजरायल आ आन आन देशक जेहल मे बन्न छईथ, उनका सब के छोड़ल जाईन। भारत मे सेहो हवाई जहाजक अपहृत कऽ कऽ आतंकवादी के छोड़बाक घटना भेल छई।दुनु जगह कोना एकरा डील कैल गेल, सेह तुलनात्मक दृष्टि सं देखबाक काज छई। आई एन्टेबे हवाईअड्डा के ओई जगह मे अतुका सेना आ संयुक्त राष्ट्र संघ के बेस बनल छई। तहिया अई सब अपहरण क योजना मे तत्कालीन राष्ट्रपति ईदी अमीन के संलिप्तता कहल जाईत छलईन। ई आतंकवादी सब गैर इजरायली सब के तऽ छोईड़ देलकई मूदा इजरायल के सरकार के चेतावनी देने रहई-" हमर मांग नई मानला ऊपर इजरायली अपह्रत सवारी के जान सं हाथ धोयब।" तत्कालीन इजरायली सरकार कोनो तरह के बातचीत के प्रस्ताल सं मना कऽ देने रहई।अकर परिणाम किछु भऽ जाई, आतंकवादी सं कोनो बातचीत नई हेतई। इजरायली सेना के सायरत मत्कल युनिट के कमांडो सब के अपन नागरिक के छोड़बऽ के आपरेशन के भार देल गेल छलई। ओ कमांडो सब तेल अबीब सं चाईर टा C-130 हवाई जहाज मे भईड़ कऽ एन्टेबे हवाईअड्डा पर 4 जुलाई, 1976 कऽ भोरु पहर पहुंचल। अई यात्रा मे कोनो तरहक रेडियो सिग्नल के प्रयोग नई कैल गेल छलई। इजरायली कमांडो सब अपना संग ब्लैक मर्सिडीज आ लैंड रोवर गाड़ी अनने छल। अही गाड़ी मे ओ सब हवाईअड्डा मे घुसल। युगांडा मे ईदी अमीन आ सेना के शीर्षस्थ अधिकारी सब ईयाह गाड़ी के उपयोग तहिया करई छलाह। ओही सं इजरायली कमांडो ईयाह गाड़ी के आपरेशन मे प्रयोग केलक। जईसं आसानी सं परिसर मे प्रवेश भऽ जाई। अतबे नई, जे इजरायली कम्पनी एयरपोर्ट के भवन बनने छलई, ओकरो सं कमांडो सब ब्रीफिंग आबऽ सं पहिने लेने छल। इजरायली कमांडो के ई योजना सफलो भेलई। अई आपरेशन के नाम इजरायली सरकार " आपरेशन थंडरबोल्ट " रखने छलाय।अई मे 45 टा युगांडन सैनिक आ चारू फिलिस्तीनी आतंकवादी मारल गेल।चाईर टा अपह्रत इजरायली आ आपरेशन क इजरायली कमांडर सेहो अई मे मारल गेलाह।ई इजरायली कमांडर छलाह योनाथन नेतान्याहू। ईनकर छोट भाई बेंजामिन नेतन्याहू छईथ जे बाद मे इजरायल के प्रधानमंत्री सेहो भेलाह आ भारत के कतेक बेर राजकीय यात्रा केलाह। बेंजामिन नेतन्याहू आपरेशन थंडरबोल्ट के 40 बरखक बाद एन्टेबे थोड़बा काल लेल आयल छलाह आ ओ जगह देखलाह, जतऽ उनकर जेठ भाई अई आपरेशन मे शहीद भऽ गेल छलाह। गोली लगला के बाद उनकर मृत शरीर के सेहो, छोड़ायल अपहृत नागरिक सबहक संग हवाई जहाज मे राईख कऽ इजरायल लऽ जायल गेल छलईन। अई आपरेशन मे इजरायल अपन लगभग सब अपह्रत नागरिक के एन्टेबे हवाईअड्डा सं सुरक्षित लऽ जाय मे सफल रहल। मात्र चाईर टा ओकर नागरिक अई गोली बारी मे मारल गेल छलई।पुरा आपरेशन मात्र 53 मिनट के छलई। इजरायली कमांडो सब युगांडा वायु सेना के ओधबाध तहिया कऽ देने रहई। सोवियत संघ द्वारा देल गेल ग्यारह टा मिग 17 आ मिग 21 विमान के एयरपोर्ट पर नष्ट कऽ देल गेल छलई। अई थंडरबोल्ट आपरेशन पर तहिया संयुक्त राष्ट्र संघ मे बड्ड बहस भेल छलई। किछु सदस्य देश अई आपरेशन के युगांडा के संप्रभुता के खिलाफ मानई छलाह आ किछु सदस्य देश अकरा अपन रक्षा के लेल उठावल जरुरी कदम मानई छलाह। इजरायल के सरकार के आतंकवाद के खिलाफ उठायल कदम इतिहास के पन्ना मे दर्ज भऽ गेलई आ एकर गवाह बनल एन्टेबे हवाईअड्डा। अई तरहक आपरेशन के फैसला के लेल दृढ़ इच्छा शक्ति के आवश्यकता होई छई।अपन देश भारत सेहो आतंकवाद के दंश झेल रहल अईछ। जरुरत अईछ अहिना कार्यवाही के। अकर दुरगामी प्रभाव , निश्चित देशहित मे हेतई। अही तरहे एन्टेबे हवाई अड्डा, आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई के लेल दुनिया मे जानल जाई छई। अजगुत अफ्रीका क्रमशः। युगांडा मे विक्टोरिया लेक के विशालता के तऽ वर्णने नई करू। कतऊ सं कतऊ तक। जतऽ भी घुमऽ जाऊ, ओतई विक्टोरिया लेक भेट जायत। ओतुका लोकक अनुसार ज्यों अई मे सऽ नील नदी के उद्गम नई होईतई तऽ युगांडा के किछु आर भौगोलिक स्थिति होईतई।जे भी पाईन होई छई, से नील नदी अपना संग बहा कऽ मिश्र नेने जाई छईथ। अगर ई पाईन अतई रही जईतई तऽ ई सब टापु सबहक सुड्डाह भऽ जईतई। विक्टोरिया लेक के भीतर कयेक टा आईलैंड सब छई। अई मे स्थानीय जनजाति सब अद्दौं संऽ रही रहल छई। "एन्टेबे" के नामकरण के संग हम बतौने रही जे ओई समय मे सेहो जनजाति के मुखिया न्याय करबाक समय दोषी के ईयाह टापु सब पर पठा दई छलई। अई सब आईलैंड मे सबसं पैघ " सेसे आईलैंड" छई, जकर चर्च हम अघोषित जेल के रूप मे पहीने के भाग मे लिख चुकल छी। अई जेल सं मोन पड़ल जे अपनो देश मे अंगरेजबा सब " अंडमान-निकोबार द्वीप" के जेल बना देने छल। किछु लोक सजा पुरा केलाह के बाद भारतक मूख्य भूमि मे नई घुरलाह। ओही मे सऽ किछु लोक आई ओतुका प्रतिष्ठित लोक बनल छथि। ओहिना पुरा आस्ट्रेलिया के इतिहास सेहो कहल जाई छई। दक्षिण अफ्रीका मे नेल्सन मंडेला के अहिना राबिन आईलैंड के जेहल मे ओतुका रंगभेद सरकार बन्न कऽ कऽ रखने रहई। दुनिया मे अहिना टापु सब के जेल बना कऽ तखुनका सरकार सब रखलकई। आहां जेल सं भागब तऽ जायब कतऽ? सेसे आईलैंड मे ओना कोनो जेल हमरा नई भेटल, लेकिन ओतुका लोकक हाव-भाव आ अखुनका स्थित जरूर आकर्षित कयलक। विक्टोरिया लेक मे करीब 84 टा पैघ पैघ द्वीप सब छई। ओई मे सबसं पैघ " सेसे आईलैंड" छई।आई ई जगह जेना भारत मे अंडमान-निकोबार एकटा पर्यटन स्थल के रूप मे स्थापित भऽ गेल छई, ओही रस्ता मे बढ़ी रहल छई। पहिने तऽ नाव सं लोक ओतऽ जाय छलाय। आब पनिया जहाज चलई छई। रोज दिन मे 2 बजे कलांगा जहाज एंटेबे सं छुटई छई आर सांझ मे सेसे आईलैंड पहुंचई छई।अगिला दिन भोर मे 7 बजे ओतऽ सं घुरई छई। आहां के कम सं कम दु राईत ओतऽ रूकऽ के पड़त, ज्यों ओतुका आनंद लेबऽ चाहई छी। खाली जा कऽ छु कऽ आबऽ के अई तऽ एको राईत के कार्यक्रम बना सकईत छी। हमरा सब के जाय सं एक दिन पहिने ओतुका रिसोर्ट सं फोन आयल जे आहां भोरका सात बजे एंटेबे सं जहाज पकईर सकई छी? हम सब तऽ घुमऽ के कार्यक्रम मे जाई छलऊं। ई तऽ आर नीके मौका छल, बेशी समय रहबाक भेटत। हम सहर्ष आफर स्वीकार कऽ लेलऊं। ई कलांगला जहाज के रोज दु चक्कर ओही दिन सं पर्यटक के संख्या बढ़ला कारण कैल गेल छलई। भोरे पांचे बजे अपन कम्पाला सं बिदा भेलऊं। अतऽ सात बजे फरीछ होयत आ सात बजे सांझ होई छई। बुझु अन्हारे भोरूकबा मे घर सं चललऊं। एक घंटा मे कलांगला जहाज के घाट पर पहुंच गेलऊं। ओतऽ सं साढ़े तीन घंटा के पनिया जहाज के सफर छई।करीब साढ़े दस बजे सेसे आईलैंड पहुंचलऊं।कलांगला जहाज बड़की टा छई। करीब छह सौ सवारी आ आठ टा मोटर कार के ओ अपना संग ढो सकईत अईछ। हमहु सब अपन मोटर कार अई जहाज पर लऽ कऽ जाय चाहई छलऊं लेकिन बुकिंग पहिनेहे भईर गेल छल। मजबुरन ओतई पार्क करऽ पड़ल। सेसे आईलैंड के रस्ता देख कऽ केपटाउन के सील आईलैंड मोन पड़ल।पनिया जहाज के यात्रा के अपने अलगे लुत्फ होई छई। पहिने करीब एक महीना लाईग जाई छलई कलकत्ता सं डर्बन आबऽ मे।चारु कात पाईने पाईने देखईत मोन मे सद्भाव आबऽ लगई छई।पाईनक संग संग मोनक पापो धोआ जाई छई। कलांगला जहाज जखईन अपन रफ्तार पकड़लकई, तखईन ओ विक्टोरिया लेकक धार मे एकटा रूपरेखा बनाऽ रहल छलई। उपर सं डेक पर सं देखला मे लगई जे दुधक जलेबी छनाऽ रहल छई, बस चाशनी मे डुबावऽ के देरी छई। ईयाह सब देखईत सुनईत सोचईत सेसे आईलैंड पहुंच गेल रही। हमरा सबहक संग ओतुका पहिल रिसोर्टक मालिक इक्कासी वर्षीय विलियम्स सेहो छलाह। बाद मे उनकर कनिया जोईस सेहो संग भेलीह। केना उनका अतऽ रिसोर्ट खोलबाक भाव मोन मे एलईन आ अई सुनसान द्वीप पर अई व्यवसाय के सफल संचालन के सफर केहन रहलईन, ओई बारे मे दोसर अंक लिखब। हमर सबहक रिसोर्ट ओतुका चिड़िया घर के भीतर छई। तखनो सबसं पहिने जाईते चिड़िया घर सं बेशी जानवर घर कहु, से घुमलऊं। ओतऽ युगांडा के राष्ट्रीय पक्षी युगांडन क्रेन के स्वच्छंद घुमईत देखलऊं।अई पक्षी के माथ मे सुनहरा मुकुट जेकां रहई छई। अई बारे मे एकटा अजुबा जानकारी भेटल। अई नर-मादा क्रेन के आपसी संबंध समर्पण सं भरल रहई छई। एक तरह सं ई सब एक जोड़ा मे रहई छई। स्वच्छंद काम-क्रीड़ा ई पक्षी नई करत। मादा क्रेन,अपन नर क्रेन के मरलाक बाद दोसर नर क्रेन सं सहवास नई करत। ओना एकर सबहक औसत आयु 20बरस होईत छई, लेकिन जोड़ा मे एकटा के मरलाक बाद दोसर क्रेन बेशी दिन नई जीबई छई। ओ पक्षी विछोह नई सईह पबई छई। ओतुका गाईड बता रहल छलाह जे ई क्रेन अखईन कम सं कम पांच बरख आर जीयत, मुदा ज्यों नर क्रेन अखईन मईर जाई तऽ ई साल भईर के अंदर मईर जाईत। ई कखनो अपन गर्दन के नस झटका सं तोईर लईत अईछ आ आत्महत्या कऽ लेत।अतेक सुन्नर पक्षी के आत्महत्या करबाक बात हमरा दुखी कऽ देलक। सेसे आईलैंड मे पुरा सौर ऊर्जा के सुविधा छई। ओतऽ सातटा विभिन्न धर्मावलंबी सब रही रहल छथि। मस्जिद सेहो देखायल। ओतुका राजा जखईन सेसे आईलैंड पर अबई छईथ तऽ उनका लेल एकटा छोटछीन भवन बनल छईन, ओई मे उनकर रहबाक सं संबंधित सामग्री सब राखल छईन। ओना राजा खुला आसमान के नीचा रहई छईथ। ई परिपाटी अखनो ओतऽ चलई छई। करीब साल भर सं राजा अतुका आईलैंड पर नई अयलाह अईछ। स्थानीय जनजाति सबहक एकटा गुफानुमा जगह के अपन आस्था के प्रतीक बनौने अईछ। ई हमरा गामक ब्रह्मबाबा के स्थान जेकां लागल। गुफा के भीतर के फोटो लेनाई मना छलई। बाहर सं फोटो लऽ सकई छी। पवित्र जगह पर त्रिशूल जेकां लौहक किछु समान सब गाड़ल छलई। बलि प्रथा अतऽ चलई छई। तारक(पाम ) खेती अतऽ व्यवसायिक स्तर पर एकटा कंपनी कऽ रहल अईछ। तारक तेलक उत्पादन भऽ रहल छई। स्थानीय लोक सब सेहो अपन तारक फर के बेच कऽ धनार्जन करईत अईछ।तारक बगान मे कम्पोस्ट खाद बोरा मे बान्हल संऊसे छिड़ियाल राखल देखायल। पुछला पर पता चलल जे पाईन बेशी पड़ला के कारण खाद सब दहा जेतई । तै़ बोरा मे बाईन्ह कऽ राखल छई। धीरे धीरे गाछ सब मे पहु़चतई। अतुका बीच मे रेत/ बालु भेटत। जखईन कि एन्टेबे के बीच मे माईटक मात्रा बेशी छई। अतुका लोकक अनुसार अतऽ झीलक पाईन सबसं बेशी साफ छई। ओहिना काफी के सेहो खेती पैघ स्तर पर शुरू भेल छई। अई मे दिक्कत ईयाह छई जे बाहर के लोक टापु सब परहक जमीन के अपना नाम सं आबंटित करा लईत अईछ आ स्थानीय लोक मजुरी करईत अईछ। ग़रीबी तऽ बहुत छईये लेकिन संतुष्ट लोक सब अईछ। ओना माछक शिकार पर प्रतिबंध छई, लेकिन अपन खाई लेल माछ माईर सकई छी। ई ओहिना भेल जेना भारत मे जंगल के लकड़ी काटनाई मना छई, लेकिन ओतऽ रहनिहार जंगलक लकड़ी काईटते अईछ आ ओही सं खेनाई बनबईत अईछ। " तिलैपिया " माछ अतऽ खुब भेटई छई। माछक स्वाद बढ़िये कहबई।अतऽ बारी झाड़ी मे अरिकोंचक पात हमरा देखायल। ओ सब अकरा " यम " कहई छई।अरिकोंच हमरा साऊथ अफ्रीका मे सेहो भेटल छल । ओतऽ अकर " पुरी पत्ता " प्रसिद्ध छई। सबसं अजगुत अनुभव अतुका राईत छई। निःशब्द राईत आ तरह तरह के चिड़ई चुड़मुन आ जानवर के आवाज रोमांच भईर दई छई। अतेक शांति के अनुभव जीवन मे कहियो नई भेल रहय। ओना आब मोबाइल के कवरेज अतऊ भऽ गेल छई, ओई सं पुरा तरह सं दुनिया सं नई कईट सकई छी। तखनो शांति आ चिड़िया सबहक चहचहाहट मोन मोहि लेत। चारु कात विशाल विशाल जंगली गाछ सब राईत मे सांय सांय हवा बहला पर अलगे माहौल बनौने रहई छई। अतऽ सब किछु पैघे पैघे भेटत। मच्छर सब सेहो बड़की टटा, जानवर के सिंघ बड़का बड़का, गाछ सब विशाल विशाल, माछ सब सेहो पैघे, चिड़ई चुनमुन सेहो सामान्य सं पैघ मूदा आकर्षक, बरखाक बुन्नी सेहो बड़का।आब गोल्फ कोर्स सेहो बड़की टा बईन गेल छई। मोटर बोट सं करीब दु घंटा लगई छई जे सेसे आईलैंड के चारू कात घुमबई छई। विहंगम दृश्य सब आंईखक सोझा सब आयत, जई पर एकबेर मे विश्वास नई होयत। आब तऽ जर्मनी, फ्रांस, अमेरिका आ ब्रिटेन के लोक सेहो अपन घर अई सेसे आईलैंड पर बना लेने अईछ आ नियमित रहईत अईछ। ओना किछु आईलैंड पर मादक पदार्थक उपलब्धता सं लोक विदेशी सब के जोईड़ कऽ देखई छई। हमरा एको टा भारतीय या भारतीय मूलक लोक नई देखेला। जहिया घुरई छलऊं तऽ एकटा हैदराबाद के मुस्लिम परिवार सं भेंट भेल। ओ सब पिछला तीन बरख सं क्रिसमस के समय मे अई आईलैंड पर छुट्टी मनबऽ अबई छईथ। चुंकि हम " बिल्जेहरिया " बीमारी के बारे मे पहिने पईढ़ लेने छी, ओई सं विक्टोरिया लेक के पाईन संग खेलाय के साहस नई हम, आ नई हमर परिवार क लोक जुटा सकल। ओना ओतुका लोक सब विक्टोरिया लेक मे खुब धींगामुश्ती क कऽ हमरा सब के ललचबईत रहल। सच मे अफ्रीका अजगुत अईछ। सेसे आईलैंड के यात्रा यादगार रहल।विपासना करबाक लेल सेसे आईलैंड सं बेशी नीक हमरा हिसाबे कोनो आर जगह नई भऽ सकईत अईछ। अपना संग बहुत रास खुशनुमा पल के संग कंपाला घुईर गेलऊं। अजगुत अफ्रीका क्रमशः। अफ्रीका मे हाल के बरख मे पर्यटनक कयेक टा स्थान चिन्हित कयल गेलई आ ओकरा ओई अनुरुपे विकसित सेहो कैल गेलई। हमरा कय टा एहन जगह सब भेटल, जेकर विकास निजी व्यक्ति द्वारा कैल गेलई। ई सही छई जे अई मे हाथ लगेला, ओ दु पाई कमेबो केलाह। अपना सब दिस अई तरहक सब काज हम सब सरकार पर छोईड़ दई छियई। " गप्प लियह हमरा सं आ काज लियह फलमा सं " - अई सिद्धांतक लोक अपना दिस गामे गाम भेट जायत। गाम तऽ पैघ इकाई भऽ गेल, एहन व्यक्ति टोले टोल भेट जेताह। युगांडा मे सबसं धनिक लोक श्री सुधीर रूपरेलिया के कहब छईन - "अतऽ कोनो नब काज शुरू करबा सं पहिने ज्यों ओकर साध्यता, उपयोगिता आ लाभ- हानि पर विचार करब, तऽ कहियो काज शुरू नई कऽ सकब। जखने जतऽ जई क्षेत्र मे मौका बुझाय, सीधा काज शुरू कऽ दियऊ। तखने आगु बईढ़ पैब।" ओ अपनो ब्रिटेन सं अतऽ आईब कऽ शुन्य सं व्यवसाय शुरू केने छैथ। सेसे आईलैंड घुमबा के क्रम मे " सेसे आईलैंड बीच होटल " के मालकिन - मालिक सं गप सड़क्का भेल। ई आईलैंड के पर्यटन स्थल मे बदलनाई, कोनो पुरना समय के बात नई छई। 1991 मे तऽ जोईस पहिल बेर एतऽ आयले छलीह। ओकर बादे अई जगह के अतेक विकास भेलई। अतेक रमणीक जगह, कोना दुनिया के नजर सं छुटल रहई, सेह विश्वास नई भऽ रहल अईछ। जोईस एकटा इसाई मिशनरी सं जुड़ल छलीह।उनकर धार्मिक संस्था के एकटा बैसार सेसे आईलैंड पर होयबाक निश्चित भेलईन। उनका बच्चे सं पाईन सं डर लगईन। जखईन एतऽ जयबाक बात भेलई, तऽ ओ आर चिंता मे पईर गेल छलीह। एक सौ के करीब जोईस जेकां लोक आ पादरी सब नाव सं कहुना अतऽ आयल। एक भोर के घर सं चलल, दस बजे राईत मे ई सब गोटे सेसे आईलैंड पहुंचलीह। ओतेक नीक बेबसथा नई रहबाक कारण राईत भर जगले रहलीह। जखने कनीक फरीच बुझेलईन, ओ घर सं बाहर निकईल कऽ देखऽ लगलीह जे आखिर आयल कतऽ छी? कनीक आगु बढ़लीह तऽ नील कंचन विक्टोरिया लेकक पाईन देखेलईन। ओ चारु कातक प्रकृतिक अई दृश्य देखी कऽ आसक्त भऽ गेलीह।उनका मोन मे तखने भाव एलईन- ," की बाकी जीवन हम एतऽ नई गुजाईर सकई छी?" ओकर बाद ओ सभा स्थल पर घुईर आयल छलीह।ओतऽ की विमर्श होई छलई, ओई पर इनकर एको रत्ती ध्यान नई छलईन। ईनकर मोन मे तऽ कोना अतऽ रही, से नाईच रहल छलईन। कनी काल मे सभा के अध्यक्ष, लोक के शक शुबहा के बारे मे पुछलकई तऽ जोईस बाईज उठलीह- " हमरा अतुका जगह बड्ड सुन्नर लागल, हम कोना अतऽ जमीन लऽ सकई छी?" सभा मे सब लोक इनकर सवाल सुईन कऽ आश्चर्य मे पईर गेल। किछु लोक हंसऽ लागल। सभा के मूख्य अतिथि कहलखिन- " हम आहां सं जमीनक बारे मे नई पुछने रही। आहांक जबाब अप्रासंगिक अईछ।" फेर के की कहलकई, जोईस के किछु मोन नई छईन।अतबे याद छईन जे मूख्य अतिथि अलग सं उनका बजौने छलखिन। अध्यक्ष जे ओतुका अधिकारी छलाह, ईयाह सवाल फेर पुछलखिन- " आहां एतऽ जमीन कियैक चाहई छी? आहां के अतुका जमीन कोन काजक? जोईस के जवाब छलईन- " हम अतऽ होटल खोलब।" " कोन मनुक्ख अई सुनसान जगह पर आहां के होटल मे आयत?"- अधिकारी कहलखिन। " ई हमरा नई बुझल अईछ, मूदा भगवान लोक के हमर होटल मे पठेतिन।" - जोईस प्रत्युत्तर देलखिन। जोईस के दृढ़ संकल्प देखी कऽ ओ अधिकारी कहलखिन -" ठीक छई।आहां जगह ठेकनाऊ।" ओकर बाद जोईस हाथे सं एकटा जमीनक नक्शा बना कऽ ओई अधिकारी के दऽ देलखिन। इनकर दृढ़इच्छा देख कऽ, अधिकारी इनका आवेदन पत्र अतुका बोर्ड के समक्ष दई लेल कहलखिन जे स्वीकृत सेहो भऽ गेलईन। जोईस अपन होटल बनबऽ के काज मे लाईग गेलीह। बहुत दुर सं भवन निर्माण लेल बालु सब मजुर सं ढोआ कऽ जमा केलीह। अगिला दिन सं देवालक जोड़ाई शुरू होबाक छलईन। जखईन अगिला दिन भोर मे ओई निर्माण जगह पर जाई छईथ तऽ एको कनमा बालु ओतऽ नई छलईन। राईत मे भारी बरखा भेल छलई आर सब रेता दहा कऽ विक्टोरिया लेक मे चईल गेल छलई। जोईस अई सं बहुत दुखी भऽ गेलीह। ओई समय मे अई चौरासी टा आईलैंड मे संऽ सिर्फ सेसे आईलैंड पर एक टा टेलिफोन बुथ, पोस्ट आफिस मे छलई। ओतऽ बात करऽ बाला के बड़की टा लाईन लगई। आहां के जल्दी बात खत्म करबाक होई, कियैक तखने दोसर के मौका भेटतई।तहिया मोबाइल के बारे मे अतऽ लोक सोचितो नई छल। जोईस टेलिफोन पर अपन पति विलियम्स के सब गप कहलखिन आ होटल के निर्माण के विचार त्यागऽ के बात कहलखिन। विलियम्स उनका बोल भरोस देलखिन आ नई घबराई लेल कहलखिन। विलियम्स आई सं करीब साईठ बरस पहिने सोवियत संघ सं इंजीनियरिंग के पढ़ाई कऽ कऽ युगांडा घुरल छलाह आ अतुका सरकारी विभाग मे कार्यरत छलाह। ऊनकर उपनाम इंजीनियर विलियम्स भऽ गेल छलईन। विलियम्स इनका अपन निर्णय नई छोड़ऽ कहलखिन। आब ओ दुनु गोटे मिल कऽ होटल बनबऽ मे लाईग गेलाह। आब समस्या एलईन पाई के। बैंक मे कर्ज खातिर आवेदन केलाह। बैंक कर्ज दई लैह तैयार भऽ गेलईन। ई सब कर्ज नई लेलाह। सोचलाह कि देखई छी कतेक तक काज खींचा रहल अईछ।ज्यों कर्ज लऽ लीह आ काज नई सफल भेल, तऽ की होयत? आब सबसं पैघ समस्या ठार छलईन पाईनक रूप मे। ओतेक बजट छलईन नई, जे नब धातु के कुंआ खोदबईतईथ। विलियम्स अपन इंजीनियरिंग के दक्षता अई मे लगेलाह। विलियम्स कम्पाला मे पुरना ट्रेनक बोगी के दरवज्जा सब कबाड़ मे कीनलाह आ ओकरा सब के वेल्डिंग कऽ कऽ पाईनक टंकी बनेलाह।अई टंकी सं उनकर होटल तक पाईन आइबीये बला छलई कि ओतुका सरकारी जल निगम इनका सब के अई आईलैंड के किछु दुरस्थ भाग मे पाईन के पहुंचबई लेल सहयोग मंगलकईन। ई सब सहर्ष तैयार भऽ गेलाह।आब सेसे आईलैंड के आरो भाग मे चलईत पाईनक बेबसथा भऽ गेलई।बिना बिजली के पाईनक आपुर्ति एकटा नब घटना छलई। स्थानीय लोकक सहयोग आब आर बेशी इनका सब के भेटऽ लगलईन। अतुका दोसर परेशानी छलई रौशनी के अभाव। राईत मे ओ सब लालटेन सं काज चलबई छलीह। निर्माण काज धीरे धीरे चईल रहल छलउन।1994 मे एक दिन एक गोटे दरवज्जा खटखटेलकईन। कहलकईन- हम अमेरिका सं एलऊं अईछ सेसे आईलैंड मे ईजोत करऽ बास्ते। फलां जगह सेहो लगेने छी। आहां सब जा कऽ देख सुईन लियह। जोईस दौड़ल गेलीह विलियम्स के उठबई लेल।ओकर बाद ओई सोलर लैंप के लागल देखलीह।ओहो सब दु टा सोलर पैनल लगेलीह। राईत मे जखईन ईजोत भेलई तऽ दुर दुर सं लोक ईजोत देखऽ एलई। आश्चर्यक बात ई जे आईयो ओ दुनु सोलर पैनल काज कऽ रहल छईन। करीब चालीस एकड़ मे इनकर पुरा होटल छईन। बाद मे पर्यटक के दबाव बढ़ला पर 2013 मे गोल्फ कोर्स सेहो खोईल लेलीह। वाइल्डलाइफ सेन्टर सेहो परिसर मे ही छईन। एकर परिकल्पना उनका सब के कुआलालम्पुर, मलेशिया मे लंगकावी वाइल्डलाइफ पार्कक भ्रमण के दौरान बनलईन। अस्सी बरख सं बेशी दुनु के बयस छईन, तखनो कतऊ किछु देखाई छईन वा जानकारी मे अबई छईन तऽ ओ सब अपन होटल परिसर मे ओकर प्रयोग करई छईथ। जोईस युवावस्था मे छह महिना दिल्ली मे रहल छईथ। आब ओतेक दिल्ली के स्मृति मोन नई छईन। हमरा सब के ओ भारतीय बुईझ कऽ बहुत आदर सत्कार देलीह। ईनकर सब सखा-संतान सब विशेष कऽ ब्रिटेन आ आन युरोपीय देश मे सम्प्रति रहि रहल छईन। ई सब आहां सब सं सांझा करबाक अभिप्राय ई छल जे हम सब अस्सी बरखक बाद अपना के बेकार आ मृत्यु के इंतजार मे लाईग जाई छई। अफ्रीका के लोक जेकर बौद्धिक आ आद्यात्मिक स्तर हम सब अपना सा न्युन मानई छी, ओकरा मे ई समर्पण आ कर्मठता के देखी कऽ हम नतमस्तक छी। अपने ओ हमरा सब संग कम्पाला सं चईल कऽ सेसे आईलैंड आयल आ यथासाध्य सुविधा उपलब्ध करौलक।ओ सब अई काज के काज नई मिशन बुईझ कऽ करई छईथ। एकटा दम्पत्ति, एकटा आईलैंड के रूपरेखा बदईल देलकई। आब इनकर देखा-देखी कयेक टा आधुनिक रिसोर्ट सब अतऽ खुईज गेल छई। ई "पर्सनल टच" हमरा बहुत नीक लागल। तैं हम ईनकर सबहक संघर्ष गाथा आहां सब सं सांझा कऽ रहल छी। कोनो भी काज मनोयोग सं कयला सं आगु पाछु सफलता भेटिते टा छई। आई सेसे आईलैंड पर्यटन के क्षेत्र मे स्थापित नाम बईन गेल अईछ। अफ्रीका मे अहिना कतेक जगह पर अई तरहक संभावना तलाशल जा रहल अईछ। भीड़भाड़ बला देश सं पर्यटक सब अई तरहक निर्जन जगह पर रही कऽ एकान्तता के आनंद लऽ रहल छईथ। सच मे अफ्रीका आ ओतुका लोक अजगुत अईछ। --x� पुरा अफ्रीका मे दिसंबर महिना मे उत्सव बला माहौल रहई छई। विशेष कऽ क्रिसमस के समय , ई अपन चरम पर आईब जाई छई। सड़क सब सुनसान लागत। कहियो तऽ एहन बुझायत जे कहीं सड़क पर कर्फ्यु तऽ नई लाईग गेल छई।अई समय अतुका स्थानीय स्कुल सब मे सेहो छुट्टी रहई छई। सरकारी आ गैर सरकारी संस्थान सब मे उपस्थिति अपन न्यूनतम स्तर पर आईब जाई छई। बाकी सब तऽ बन्ने रहई छई। ई ओहिना भेल जेना अपना सब कतऽ दुर्गा पूजा सऽ लऽ कऽ छईठक परना तक जे छुट्टी होई छलई। माहौल बदलऽ मे छुट्टी के बड्ड पैघ योगदान होईत छई। छुट्टी होईते प्रवासी सब कियो गाम, तऽ कियो मातृक, तऽ कियो सासुर, तऽ कियो नैहर, तऽ कियो आन संबंधी कतऽ जाईत छलाय। अयला गेला सं संबंध मे सेहो गर्माहट रहईत छलई। कोनो जगहक मेला, कतऊ के नाटक, कतऊ के पुजा- पद्धत्ति, कतऊ के नटुआ , कतऊ के रसन- चौकी प्रसिद्ध रहई छलई। ओही बहाने लोक जाई- अबई छलाय, आ पाबईन तेहार लोक संग मनाबऽ के प्रथा छलई। हमरा अहिना साऊथ अफ्रीका मे लागल। दिसंबर मास मे सब शहरिया लोक , कोनो ने कोनो गाम मे चईल जायत। गाम सं अतऽ मतलब फार्म हाउस सऽ सेहो होई छई। श्वेत सब बेशीतर फार्म हाउस जायत आ स्थानीय अश्वेत सब अपन मूल गाम जायत। भारतीय मूलक लोक सब के पर्यटन स्थल जेना केपटाउन, डर्बन आ पोर्ट एलिजाबेथ जायत देखबई। बिदेशी सैलानी सब सेहो अई समय मे खुब अबई छई। श्वेत सब के अपन किछु अपने सनक लोकक अनौपचारिक वर्ग बनल छई। कोनो साल ईनकर फार्महाऊस तऽ कोनो साल उनकर फार्महाउस पर सब जमा होयत आ सामुहिक छुट्टी मनायत। जिनका अपन फार्म हाउस नई छईन, उनकर अवश्य कियो ने कियो संगी वा सहकर्मी वा रेफरेंस रहई छईन, जतऽ ओ छुट्टी मनबई छईथ। साऊथ अफ्रीका मे छुट्टी मनबऽ के एकटा आर नब ढंग देखलियई जे अपन सबहक पिकनिक सं कने हईट कऽ छई।ई सब कै कै दिन टेंट लगा कऽ बोन मे रहत। ओतऽ बहुत रास घर/ ठीया/ होटल सब छई जतऽ आहां के सर्व सुविधायुक्त भंसा घर सेहो भेटत। बर्तन बासन, चुल्हा चक्की, गैस सं लऽ कऽ थारी- बाटी चम्मच तक भेटत। आहां के जे खयबाक मोन करय, अपन बनाऊ आ खाऊ।अतुका लोक बेशी अही तरह सं छुट्टी मनबई अईछ।पिज्जा बर्गर , फास्ट फूड वा मांसाहार के अपना ढंग सं पकायत आ खायत। अपना सब जेकां सचार के आदत अकरा सब के नई छई। ओना छुट्टी के असर व्यक्ति के कार्यक्षमता पर बहुत असर डालई छई। दुनिया मे अई पर समय समय पर अध्ययन होईत रहई छई। सफ्ताह मे ओही सं दु दिनक अवकाश देबय जाय लगलई। अखईन फिनलैंड मे घोषणा भेलई छई कि ओतऽ हफ्ता मे चाईरे दिन काज हेतई, बाकि तीन दिन छुट्टी रहतई। आकलैंड मे एकटा प्रतिष्ठित कम्पनी ई प्रयोग कऽ चुकल अईछ। सोम मंगल काज करू, बुध कऽ छुट्टी रहत। ओहिना वृहस्पति आ शुक्र काज करू, शईन रईब छुट्टी। अई छुट्टी के नब फार्मुला अपनेला पर ओई कम्पनी के उत्पादन पैंतीस प्रतिशत बढ़बा के बात सुनने छी। ओ दिन कोनो आश्चर्य नई, जहिया अपनो देश मे अहिना छुट्टी भेटऽ लागय। ई छुट्टी सब हक बात ओकरे लेल प्रासंगिक छई जे सब नीक नौकरी मे छईथ। बाकि लोक खातिर तऽ मृग मरीचिका कहु वा दिवा स्वप्न। ओई मजुर के कल्पना करियऊ, जेकरा जीवन मे कोनो छुट्टी नई छई। काज नई करतई, तऽ की पेट मे ताला लगेतई। ओकरा लेखे तऽ रोज काज भेटबाक चाही। ओहिना घुमनाई फिरनाई के शौक एकटा वर्ग विशेष के शगल बईन कऽ रही गेल छई। खुशी आ दुःख, दुनु के मनबऽ के ढंग अपन सबहक देश आ विदेश मे फराक फराक छई। अई समय मे सब नीके नीक नई छई। अपराधक दर अई समय मे सबसं बेशी रहईत छई। अपना सब जेकां सोनक गहना वा आर कीमती वस्तु पहिरऽ आ देखाबऽ के लत एतऽ नई छई, मूदा छीना झपटी आ लुटमार के घटना अई समय मे बढ़ले जा रहल छई। अपराधी के सेहो नीक सं छुट्टी मनेबा के छई। ओई लेल पाई चाही। आसानी सं पाई तऽ अहिना भऽ सकई छई। अई समय मे दुरदराज के अपराधी सब सेहो अतुका महानगर मे डेरा खसौने रहईत अईछ।ओ सब सदिखन नीक शिकार के तलाश मे रहईत अईछ आ ओतुका पुलिस अई अपराधी सबहक खोज मे। दुनु मे लुकाछिपी होईत रहई छई। जेना अक्टूबर अपन सब पाबईनक महिना कहाईत अईछ, ओहिना अतुका दिसंबर भेल। दिसंबर मे बाहरी लोक के छुट्टी भेटनाई अतऽ कनेक मोश्किल रहईत छई। हमहुं जखईन साऊथ अफ्रीका मे रही तऽ छुट्टी आसानी सं नई भेटल छल। संशय बनल रहत जे भेटत की नई भेटत। घुमऽ जाय सं एक दिन पहिने छुट्टी भेटल छल।"अफ्रीका मे होटल भेटनाई अतेक आसान नई छई"- सुनई छलियई, मूदा पहिल बेर अनुभव भेल। अतऽ दिसंबर मे होटल, गेस्ट हाउस, रिसोर्ट सब महिनो पहिने बुक भऽ जाई छई। हमरा अपन देश बला आत्मविश्वास छल जे जेबी मे पाई रहबाक चाही, होटल तऽ भेटिये जायत। बहुत प्रयास कयलाक बाद केपटाउन मे होटल तऽ नई, मूदा एकटा अंग्रेजिन महिलाक घर B& B ( bed & breakfast ) के तहत न्युलैंड मे भेटल।ईहो एकटा ओतुका अपेक्षित लोकक अनुशंसा पर भेटल। ई अपेक्षित लोक हमरा बारंबार परिवार संग केपटाउन घुमबाक लेल आग्रह करई छलाह। हम अपन संभावित आगमनक तिथि बतौने रहियईन। उनका जखईन होटल नई भेटलईत, तऽ कहला - " हमर घर तऽ अईछे ने, अतऽ आहां रही जायब।" हमरा उनकर अई प्रस्ताव मे अपनापनक कमी बुझायल। हम कहलियईन- " नई, आहां होटल लेल प्रयास करु।" तखईन ई न्युलैंड बला घर भेटल।न्युलैंड क्रिकेट स्टेडियमक लेल जानल जाई छई आर केपटाउन के नवधनाड्यक क्षेत्र मे सऽ अबई छई। प्रिटोरिया सऽ केपटाउनक दुरी करीब पन्द्रह सौ किलोमीटर छई। अतऽ लांग ड्राइव पर लोग जाई छई। हमहुं अपने मोटरकार सं केपटाउन जाय के निर्णय लेलऊं। दुरी बेशी छलई, तैं रस्ता मे कतऊ रात्रि विश्रामक लेल बुकिंग करबाक प्रयास कयलऊं।अई मे सफलता नई भेल। अंत मे ईयाह सोईच कऽ की , रस्ता मे होटल भेटिये जायत, प्रिटोरिया सं भोरे भोर पुरा खेनाई पीनाई के इंतजामक संग सपरिवार विदा भेलऊं। अपन आत्मविश्वास छल, जे होटल भेटबे करऽत। अगर भाग्य मे सड़क पर राईत बितेबाक लिखल होयत तऽ अतेक लंबा जतरा मे हम बुकिंग कैल होटल पहुंचे नई सकब। जेना गाड़ी खराब भऽ जाय, एक्सीडेंट भऽ जाई, मौसम खराब भऽ जाई, रस्ता जाम भऽ जाई, ट्रैफिक जाम भऽ जाई, किनको मोन खराब भऽ जाय, राजनीतिक आंदोलन मे सड़क संपर्क बन्न भऽ जाई। ई सब संभावना छई। ऊपरवाला हम राईत कतऽ बितायब, ओ निश्चित कयने छईथ। हम अपन प्रयास करईत रहब। जतऽ भेंट जायत, ओतऽ रात्रि विश्राम कऽ लेब। जोहानिसबर्ग होईत N1 हाईवे पकड़लऊं। ई सीधा रस्ता ब्लुमफाऊंटेन तक जाई छई। ओतऽ सं एक रस्ता पोर्ट एलिजाबेथ के तरफ जाई छई आ दोसर केपटाउन। आहां पोर्ट एलिजाबेथ होईत भी केपटाउन गार्डेन रूट सं जा सकई छी। ई रस्ता लंबा पड़ई छई। हमरा सब के तऽ टार्गेट केपटाउन छलाय। तैं नजदीक बला रस्ता पकड़लऊं। अई हाईवे पर दु दु सौ किलोमीटर पर पेट्रोल पम्प कतऊ कतऊ छई। ओही लेल जखने गाड़ी के टंकी अधियाय, चट दं पेट्रोल पम्प अईबते फुल करवा लई छलऊं। जेना पेट भड़ल रहला पर मोन निश्चिंत रहई छई, ओहिना मोटर कारक टंकी के सुईया ऊठल देखी कऽ हमरो मोन निश्चिंत रहय। ब्लुमफाऊंटेन साऊथ अफ्रीका के एकटा महत्वपूर्ण, सुन्नर आ व्यवस्थित शहर छई। अतुका सर्वोच्च न्यायालय अतई छई। अकर अलावा ई फ्री स्टेट राज्यक राजधानी सेहो छई। अई शहर के बाहरे बाहर सं बाईपास रस्ता निकल जाई छई। रस्ता मे मोन मे कनीक चिंता सदिखन बनले छल जे अजुका रात्रि विश्राम कतऽ होयत। बीच बीच मे मोबाइल एप्प सं खाली कमरा भजियबईत छलऊं, मूदा सफलता नई भेंट रहल छल। सब जगह बुकिंग भरल छलई। एकटा मित्र कहने छलाह जे रस्ता मे कारु नेशनल पार्क छई। ओकर भीतर रहबाक बढ़िया काटेज सब छई, लेकिन ओई लेल कम सं कम दु महिना, नई तऽ छह महिना पहिने बुकिंग करेनाई नीक रहई छई। कारु नेशनल पार्क करीब एक हजार किलोमीटर दुर प्रिटोरिया सऽ पड़ई छलई। अई सं सटले ब्यूफोर्ट वेस्ट शहर छई। ओतऽ बहुत होटल सब छई। अही मे हम सब संभावना ताईक रहल छलऊं।सोचने रही जे अन्हार होबा सं पहिने विश्रामक जगह ठेकनाय लेब। सांझु पहर के करीब N1 के पर कारू नेशनल पार्क के तख्ती लागल देखलियई। बिन किछु सोचने बुझने सीधा ओकर गेट मे गाड़ी घुसा देलियई। उतईर कऽ सीधा रिसेप्शन तरफ बढ़लऊं। हमर आत्म विश्वास देखी कऽ रिसेप्शनिस्ट श्वेत महिला के भेलईन जे हमर बुकिंग पहिने सं भेल अईछ। ओ बुकिंग के बारे मे पुछऽ लगलीह। हम कहलियईन-" हमरा बुकिंग नई अईछ। हम तऽ बुकिंग के उम्मीद सं अयलऊं अईछ।" ओ मुस्कियाईत बजलीह- " आहां भाग्यक जोड़गर छी।" हम कहलियईन-" से तऽ हम छी।" ओ कहलीह- " अखने एकटा बुकिंग निरस्त करबाक सुचना आयल अईछ। वेटिंग मे तऽ कय लोक छईथ। आहां चुकि सद्यः ठार छी आ वास्तविक पर्यटक छी। ई बुकिंग आहां के नाम हम कऽ रहल छी।" हमरा लोकईन के ख़ुशी के ठेकान नई। अंजान शहर मे अतेक नीक बंदोबस्त अकस्मात भऽ जायत, प्रसन्नता के विषय छल। पाई ताई जमा कऽ जल्दी सऽ कमरा के चाभी लेलऊं। मोन मे भेल कि कहीं हमरो सं भाग्यक जोड़गर कियो आईब जाय, तऽ ओकरा ई कमरा नई भेंट जाय। ई एकटा जानकारी देबऽ चाहब जे विदेश मे छोटऽ कर्मचारी जे कही देलकई, ओकर बातक आदर ऊपर तक होईत छई। अपन देश जेकां नई जे फलां अधिकारी वा फलां बाबु आईब रहल छईथ, सबहक बुकिंग कैंसिल। आब अई मे ऊयाह रहताह। भारतक एकटा अनुभव बता रहल छी। एकटा सरकारी अतिथि गृह के सब कमरा पन्द्रह दिन तक अई लेल खाली राखल गेलई जे ओई विभाग के सर्वोच्च अधिकारी के बेटा के विवाह छईन। अगर पाहुन अतऽ रहऽ आईब जाई, तखईन कमरा खाली नई भेटई, से जुलुम ने। भेलई ई जे एको टा पाहुन अई सरकारी अतिथि गृह मे रहऽ नई एलई। कीछु समान सब गाड़ी सऽ उताईर कऽ कमरा मे अनलऊं ओकर बाद ओतुका दृश्य सबहक आनंद लेलऊं। पहिल दिन छल, तैं अपन खेनाई पीनाई के सृष्टजाम संगहि छल। आब बुझायल जे शुरुआत एहन अई, तऽ अई भ्रमणक पुर्णाहुति नीके होयत। भोरे " चाह- चाह " के आवाज पर निन्न खुजल। बाकी लोक सुतले छल। हम जिमहर सं आवाज अबई छल, ऊमहर बढ़लऊं। देखई छी किछु भारतीय सब ओतऽ हंसी ठिठोली कऽ रहलाह अईछ। हमरा देखीते ओ सब ठमईक गेलाह। परिचय पात भेल। ओ सब सम्प्रति बोत्सवाना मे रहई छथि आ गुजरातक मूल निवासी छईथ। पहिल बेर केपटाउन नववर्ष मनबऽ जा रहल छईथ। हमरा चाह पीबाक आग्रह करऽ लगलाह मूदा जल्दी निकलबाक छलाय। तैं आग्रह स्वीकार नई केलियइन। अखईन पांच सौ किलोमीटर आर दुर जयबाक छल। जखईन घुईर कऽ कमरा पर अयलऊं। घरक सदस्य सब चिंतित जे हम कतऽ गेलऊं? थोडंबा काल बाद तैयार तैयार भेल हम सब कारु सऽ आगु लेल विदा भेलऊं। आब हम सब जोश मे आईब गेल रही। रस्ता पेरा रूकईत, खाईत पीयईत केपटाउन के लगीच पहुंच गेल छलऊं। साऊथ अफ्रीका मे पेट्रोल पम्प जे होई छई से छोटछीन्ह बजारे होई छई। खेनाई पीनाई सऽ लऽ कऽ देह सोज करबाक सब बेबसथा। रस्ता मे बड़का बड़का अंगुरक बगान सब छलई। अतबे नई, हाईवे के कात मे जे चरागाह सब छलई , ओ सब तार सं घेरल। जतऽ कतऽ माल- मवेशी के सड़क पार करबाक छलई, ओतऽ पहिने सं निशान बनल छलई। अपना सब जेकां नई जे सड़कें पर धान गहुम के दऊनी होयत।जकर घरक सामने सड़क ओ अकरा खरिहान जेकां उपयोग करत। सब चीज सड़के पर सुखायत आ गहुमक गोलरी सेहो वाहन सबहक चक्का सं चिपायत चिपायत अलग भऽ जायत। अई लऽ कऽ कोनो एक्सीडेंट भऽ जाई, हम सब अहिना रहब।ई व्यवस्थित सड़क मार्ग देखी कऽ बड्ड नीक लागल। 120 किलोमीटर/घंटा के गति सं कम चलेनाई के धीरे गाड़ी चलबऽ बाला कहल जाई छलई। सही समय पर केपटाउन पहुंच गेलऊं। न्युलैंड मे ओ घर एकटा कोठी छलई। अधेड़ श्वेत दम्पत्ति ओकर मालिक छलाह। गर्मजोशी सं स्वागत केलुह।मेन गेट के एकटा स्वचालित रिमोट दऽ देलीह। बाद मे अपन घरबाला सं सेहो परिचय करेलीह ओ कमरा देखा देलाह। भोर मे जलखई के समय बता देलाह। स्वीमिंग पुल आ पुस्तकालय के बारे मे सेहो किछु बात बतेलाह। अगिला दिन जखईन जलखई लेल डायनिंग हॉल मे जाई छी तऽ देखई छी जे ऊयाह महिला नाश्ता सेहो परईस रहल छलीह। किछु भारतीय के स्वादक अनुसार ओ नाश्ता तैयार केने छलीह। किछु उनका सं गपशप भेल ओकर बाद हम सब घुमऽ निकईल गेलऊं। एकटा ओतई रहनिहार उड़ीसावासी भारतीय के हम घुमबा मे सहयोगक लेल आग्रह कयने रहियईन। ओ नियत समय आ जगह पर पहुंचल छलाह।हमर सबहक केपटाउन भ्रमण शुरू भऽ गेल। --x�
युगांडा मे एकटा बियाहक खुब चर्चा भऽ रहल छई।अपना तरहक ई अजुबा घटना छई। शेख मुतुम्बा, कयुंगा जिला के चैम्पिसी मस्जिद मे इमाम छईथ।ओई मस्जिद मे तीन टा इमाम छई। शेख मुतुम्बा पिछला चाईर बरस सं इमामक पद पर अईछ। ओकर बयस बढ़ल जा रहल छलई, मूदा बियाह नई भऽ रहल छलई। आब घरक लोक के भरोस छोईर, ओ अपने कनिया ताकऽ लागल छल। एक दिन हिजाब पहिरने एकटा सुन्नर स्त्री के ओ मस्जिद मे देखलक।मुतुम्बा ओई स्त्री के देखिते आकर्षित भऽ गेल। ओ स्त्री अपन नाम स्वाबुला नाबुकीरा आ अपना के अविवाहित बतेलकई। शेख मुतुम्बा के बुझेलई जे ईयाह ओ स्त्री छई, जकरा लेल ओ अखईन तक कुमार अईछ। मुतुम्बा, नाबुकीरा सं प्रेम निवेदन केलकई। नाबुकीरा अकरा स्वीकार केलकई। अकर बाद मुतुम्बा बियाहक प्रस्ताव देलकई, सेहो पर नाबुकीरा रजामंदी दऽ देलकई।ओ एकटा प्रतिज्ञा सुनेलकई - " सहवास बिना ओकरा मोन के नई हेतई।" मुतुम्बा सोचलक जे जखईन पत्नी भऽ जायत, तखईन कोन प्रतिज्ञा बाला बात। नाबुकीरा के आवाज बड्ड मधुर आ चाईल मे नजाकत छलई।ओ मुतुम्बा के कहलकई- " जाबईत तों हमर माय बाप के दहेज नई देबहक, ताबईत निकाह नई हेतई।" युगांडा मे वर पक्ष के तरफ सं दहेज देबऽ के प्रथा छई। मुतुम्बा विवाहक प्रस्ताव लऽ कऽ नाबुकीरा के आंटी नुबु नाबुकीरा लग गेल। ओकरा दु बोरा चीनी, दु टा बकरी, कपड़ा लत्ता आ किछु आर सनेश देलाक बाद स्वीकृति लेलक। मुतुम्बा के बियाह भऽ जाई, ओई लेल मस्जिद के आरो लोक दहेज जुटबऽ मे ओकर मदद केलकई। बहुत दिन सं ओ कुमार छल, तैं मस्जिद सं जुड़ल सबके अभीष्ट छलई जे अकर कहुना बियाह होई। बियाहक बाद दुनु संग रहऽ लागल। अगल बगल के लोकक कहब छई जे ओ सब नाबुकीरा के सामान्य पत्नी जेकां देखलकई। ओ घर मे झाड़ू पोंछा करई, कपड़ा लत्ता धोवई, खेनाई बनबईत आ बर्तन बाशन धोवईत देखाईत छलई।सहवास के बात अयला पर कोनो ने कोनो बहाना बना दई। करीब पन्द्रह दिन अकरा सब के संग रहईत भेल छलई। एक दिन अकर पड़ोसी ओतुका पुलिस थाना मे शिकायत दर्ज करेलकई- नाबुकीरा छड़देवाली टईप कऽ ओकर घर मे आईब कऽ चोरी केलकई। ओ ओकर घर सं टेलीविजन, कपड़ा आ किछु पाई के चोरी केलक अईछ। पुलिसबला जखईन एलई ओई समय नाबुकीरा असकरे छल। ओकरा पकईर कऽ पुलिस लऽ गेलई। जखईन नाबुकीरा के महिला वाला सेल मे लऽ जाय सऽ पहिने महिला सिपाही जांच केलकई, तऽ ओकरा किछु शक भेलई। फेर ढंग संऽ जांच केलकई। नाबुकीरा महिला नई बल्कि पुरूख छल। पुलिसक पुछताछ मे नाबुकीरा अपन अपराध गईछ लेलक।ओ पुरूख संऽ पईसा ठगबाक लोभ मे स्त्री के रूप बनेने छलाय।नाबुकीरा के असली नाम रिचर्ड तुमुसाबे छलई। ओ तऽ स्त्री के भऽल केने छल। रिचर्ड के जे आंटी नुरू नाबुकीरा छलई, ओकरो पुलिस गिरफ्तार केलकई। ओकर कहब छई जे दु महिना पहिने साबुला नाबुकीरा ओकर घर पुछईत पाछईत आयल छल।ओ कहलक-" ओकर स्वर्गवासी माय ओकरा कहने रहई जे नुरु नाबुकीरा के भाई ईशाक मतोऊ ओकर बाप छई।" आब नई ईशाक आ नई ओकर स्त्री जीवित छई, नुरू ओकरा पर विश्वास कऽ कऽ अपन घर मे राईख लेलकई। दुनु महिला होबाक कारण एक्के संग सुतबो कैल।साबुला ओहु समय बुर्का मे छल।एक हफ्ताह अतऽ रहला के बाद ओ चईल गेल। फेर एक महिना पहिने आयल छल।कहलक जे हमरा बियाह के प्रस्ताव अईछ। शेख मुतुम्बा के कहब छई जे अई नुरू नाबुकीरा के पीसी होबाक कारण प्रस्ताव लऽ कऽ गेल रही आ अकरे दु टा बकरी, दु बोरा चीनी, एक बोरा नुन, कपड़ा आ कुरान देने रहियई। आब शेख मुतुम्बा के खबर भेलई। ओ दौड़ल थाना आयल। ओकरा पहिने विश्वासे नई होई।तखईन पुलिसबाला सब नाबुकीरा के निर्वस्त्र कऽ कऽ देखा देलकई।आब मुतुम्बा के सामने आर कोनो चारा नई बांचल छलई। मस्जिद के समिति सब अलग सं अई घटना के जांच कऽ रहल छई। अई निकाह मे खींचल गेल फोटो आ उपस्थित लोक सब सं पुछताछ भऽ रहल छई। सब के आश्चर्य लाईग रहल छई जे मुतुम्बा कोना ठका गेल। अफ्रीका मे सच मे अजगुत घटना सब घटईत रहईत छई। अजगुत अफ्रीका क्रमशः । अफ्रीका मे बहुत रास द्वीप सब छई। अई द्वीप सब के अपन अपन व्यापारिक आ सामरिक महत्व सेहो छई। बहुत कम लोक के बुझल छई जे मारीशस सेहो अफ्रीके मे छई। भारतीय मूलक लोक आई मारीशस पर भारतीयता के अक्षुण्ण रखने अईछ।अहिना " जंजीबार " द्वीप के चर्चा अखईन अतुका अखबार मे चईल रहल अईछ। जंजीबार मे हिंदू देवी देवता के मंदिर आ हिंदू धर्मावलंबी सब सेहो रहईत छलाह। ई सब मूलतः गुजराती आ किछु दक्षिण भारतीय व्यापारी सब छलाह। भारतीय हिन्दू सबहक बारे मे अतुका स्थानीय अफ्रीकी लोकक ई कहब छई- " ई सब अपन धर्म के दोसरा पर थोपई नई छथिन।अकरा अपन निजी आ पारंपरिक रूप मे संजो कऽ रखने छईथ।" अई लऽ कऽ धर्मक आधार पर द्वेश इनका सब के नई झेलऽ पड़लईन। अखुनका चर्चाक मूल मे ११ जनवरी, १९६४ के घटना, जे एकटा युगांडा के स्थानीय लोक " जान ओकेलो " सं जुड़ल छई। स्थानीय अस्मिता एहन मूद्दा छई जे इतिहास के दिशा मोईर दई छई। जंजीबार द्वीप समूहक के बारे मे भारतक पाठयपुस्तक मे सेहो लिखल गेल छई। वास्कोडिगामा के समुद्री यात्रा के समय मे ई एकटा पड़ाव होईत छलई।अतऽ जखईन जंजीबार के बारे मे सुनलऊं, तऽ आर जनबाक उत्सुकता बढ़ल। जंजीबार के डाक व्यवस्था, ब्रिटिश भारत के डाक विभाग द्वारा शुरू कैल गेल छई। ताहि समयक भारतीय डाक टिकट सबहक प्रचलन अतऽ होईत छलई। जंजीबार के शाब्दिक अर्थ अश्वेतक भुमि भेलई। अतऽ पहिने अश्वेत सब रहईत छलई । बाद मे जेना भारत मे भेलई, ओहिना अफ्रीका युरोपीय देश सबहक गुलाम भऽ गेल छलई। पहिने पन्द्रहवीं शताब्दी के करीब पुर्तगाली सब अपन उपनिवेश अकरा बनेलक, फेर बाद मे ब्रिटिश हुकूमत के अधीन ओमानक सुल्तान के राज- पाट अतऽ रहलई।हिन्द महासागर के ई महत्वपूर्ण बंदरगाह छलई।अफ्रीकी, अरबी, फारसी, इंडोनेशियाई, मलेशियाई, भारतीय आ चीनी व्यापारी सब अतऽ अबई छलाह।अतुका लौंग विश्व प्रसिद्द होईत छल। भारतीय व्यापारी सब के प्रोत्साहन अतुका सुल्तान सेहो करईत छलईन।ईयाह भारतीय व्यापारी सब अपना संग अपन हिंदू धर्म आ संस्कृति सेहो अनलाह। कयेक लोक अपन ठीया अतऽ बना लेने छलाह। मसाला के व्यवसाय के संग संग ई जगह गुलाम आ हाथी दांत क सबसं पैघ बजार छल। अतऽ एकटा व्यापारी लग एक समय मे दस हजार तक गुलाम/ दास छलई। अतुका शासन अश्वेत के हाथ मे नई रहबाक कारण स्थानीय अश्वेत सब समय समय पर विरोध करईत छल। ओतुका आबादी ओई समय मे करीब तीन लाख छलई, मूदा अरबी सब ओई मे सं मात्र चालीस हजार छल।ई अरबी सबहक प्रभुत्व अई द्वीपक राजनीतिक, सामाजिक आ आर्थिक सब क्षेत्र मे रहई। स्थानीय अश्वेत के मजबुरी मे अरबी सबहक परंपरा अपनावऽ के परईत छलई।अई लऽ कऽ स्थानीय सब मे भारी असंतोष छलई। ओकेलो, द्वितीय विश्व युद्ध के खिस्सा सब सं बहुत प्रभावित छल।ई द्वीप युगांडा सं सटले रहई।ओकरा अरबी सबहक राज नई सोहाई।ओ जंजीबार के गाम गाम मे घुमई आ कहई- " भगवान जंजीबार अफ्रीकी के देने छलखिन, किछु लोक एकरा चोरा नेने अईछ। ई बुझबाक बात छई। लेकिन एखईन नई किछु करबाक काज छई। जखईन अंगरेजबा सब जंजीबार के स्वतंत्र कऽ देतई, तखईन हम सब अतऽ क्रांति करब।" १० दिसंबर,१९६३ कऽ अंगरेज जंजीबार के स्वतंत्र घोषित केलकई आ अरबी के ओतुका राजा बना देलकई। ठीक एक महीना बाद ११ जनवरी, १९६४ कऽ छह सौ के करीब अपन समर्थक संग ओकेलो, जंजीबार के अरबी सुल्तान के हवेली पर धावा कऽ देलक। किछुये घंटा मे ओकेलो के जंजीबार पर कब्जा भऽ गेलई।ओकेलो रेडियो पर बाजल- " आब अतऽ साम्राज्यवाद समाप्त भेल। अश्वेत सब जागु, हथियार उठाऊ, साम्राज्यवाद के सब निशानी के खत्म करु। हम अतुका सुल्तान के बीस मिनट के समय दई छियईन, जईमे ओ कनिया, बच्चा आ अपने आप के कत्ल कऽ लैस, नई तऽ हमरा हाथे ई भऽ जेतईन।" ओतुका सुल्तान बाल बच्चा सहित पराऽ गेल। सांझ होईत होईत बारह हजार के करीब अरबी सबहक कत्लेआम भऽ गेलई। बाकी बचल सब लोक ओकेलो के सामने आत्मसमर्पण कऽ लई गेलाह। ओकेलो अपने राष्ट्रपति नई बनल। ओतुका दु टा स्थानीय अश्वेत सेनानी, जे निर्वासित जीवन बिता रहल छलाह, के राष्ट्रपति आ प्रधानमंत्री बना देलक। ओकेलो जे ईसाई धर्मावलंबी छल, ई दुनु राष्ट्रपति आ प्रधानमंत्री जे इस्लाम के मानऽ बला लोक छलाह, के आंईखक किड़किड़ी बनऽ लागल। जंजीबार मे इस्लाम के मानऽ बला संख्या बहुत बेशी छलई,ओ सब अई बात के हवा देबऽ लगलई कि इस्लाम बहुल द्वीप पर इसाई कोना राज करऽत? ओकेलो के बढ़ईत प्रभाव देखी कऽ ओई समयक शक्तिशाली देश सब सेहो सशंकित भऽ गेल छल। तंजानिया के राष्ट्राध्यक्ष के आमंत्रण पर जखईन ओ तंजानिया गेल छल, तखने ओकरे बनावल जंजीबारक राष्ट्रपति, ओकेलो के , देशक दुश्मन घोषित कऽ देलकई। ओकेलो के जंजीबार घुरनाई पर प्रतिबंध लगा देलकई। ओकरा अवांछित अप्रवासी बना देल गेलई। कोनो भी पड़ोसी देश ओकेलो के संग नई देलकई। अंत मे ईमहर ओमहर डऊआईत ओ घुईर कऽ अपन देश युगांडा मे शरण लेलक। कयेक बेर दक्षिण अफ्रीका के रंगभेद के खिलाफ ओ संग्राम मे शामिल होवह चाहलक, लेकिन ओतऽ तक नई पहुंच पैल। १९७३ तक ओकरा देखल जाय के बात कहल जाई छई, मूदा ओकर बाद के कोनो समाचार ओकेलो के संबंध मे नई एलई। मात्र पच्चीस बरखक अवस्था मे अफ्रीकी अस्मिता के भाव लऽ कऽ ओ जंजीबार द्वीप पर सत्ता कब्जा केलक, मूदा ओकरा किछुये महिना मे अंतरराष्ट्रीय साज़िश के तहत निर्वासन भऽ गेलई। जान ओकेलो अगर सत्तासीन रहितै, तऽ पुर्वी अफ्रीका के इतिहास किछु आर लिखईतई। ११जनवरी कऽ हर बरख युगांडा के समाचार पत्र सब ओकेलो के बारे मे लिखि कऽ ओकरा जीवंत बनेने छई।ओकेलो जे अफ्रीकी योद्धा छल, इतिहास के पन्ना मे हरा गेल अई। --x� साऊथ अफ्रीका मे रंगभेद सरकारक समय भारतीय मूल के लोक के प्रिटोरिया सऽ उजाईर कऽ लौडियम नामक जगह पर बसायल गेल छलई। अई भारतीय मूलक लोग आब भारतीय आ पाकिस्तानी मे बेशी बंटल अईछ। बंगलादेशी हमरा लौडियम मे नई टकरेला।भऽ सकईत होई,कम संख्या मे होबाक कारण ई सब भारतीय वा पाकिस्तानी कोनो एक वर्ग सं मिल गेल होईस। आई भारतीय मूलक लोक सबहक खुन पसीना सं लोडियम सेहो नीक विकसित भऽ गेल छई। दक्षिण भारतीय बहुल क्षेत्र आई ई जानल जाईत छई। अतऽ दक्षिण भारतीय शैली के मंदिर आ भोज्य सामग्री सब भेट जाई छई। किछु विशेष तरहक तरकारी जेना रामतोरई, गोलका सजमईन, देशिला भांटा आ साग सब लेल भारतीय सब अतऽ जाईत अबईत छईथ। अतुका डोसा सेहो प्रसिद्ध अईछ। प्रिटोरिये टा नई, जोहानिसबर्ग सं सेहो भारतीय सब अतऽ दक्षिण भारतीय व्यंजन खाई लेल अबई छईथ। प्रिटोरिया सऽ लोडियम अबईत काल हम " नानासिता मार्ग" बला रस्ता सदिखन ली। ओना आरो रूट सब छलई। नानासिता भारतीय मूलक ओतुका स्वतंत्रता सेनानी छलाह। ओ महात्मा गांधी सं बहुत ही प्रभावित छलाह। अप्पन संपुर्ण जीवन रंगभेद के खिलाफ संघर्ष मे लगा देने छलाह। जखईन साऊथ अफ्रीका मे रंगभेद खत्म भेलई, तऽ ओतुका सरकार प्रिटोरिया के लोडियम सं जोड़ऽबला मूख्य सड़कक नाम " नानासिता " के नाम पर कऽ देलकई। 2017 मे हमरा नानासिता के करीब पचासी वर्षीय अविवाहित वृद्धा बेटी सं भेंट करबाक मौका लागल। ओ कहलीह-" हमर पिता नानासिता सदिखन भारतीय सब के ईयाह कहथिन जे आहां सब वास्तव मे भारतक राजदूत छी। एहन कोनो काज नई करब जईसं भारतक नाम मे बट्टा लागई।" अई वृद्धावस्था मे लोडियम मे ओतुका भारतीय लोक सब उनकर देखरेख करई छईन। हम जखईन कखनो ओई दिश जाई, अपनाआप पर भारतीय भेला के गर्व हुअय।ईयाह भावना ज्यों हर मैथिल के भऽ जाईन, जे अपन बात, बिचार, व्यवहार, भाषा आ संस्कृति के माध्यम सं अपना के सब ठाम प्रतिनिधित्व करईथ, तऽ अकरा आगु बढऽ आ समृद्ध होबाक मे कवनो टा भांगठ नई। अही तरहे हमर जिज्ञासा युगांडा अयलो पर भारतीय मूलक लोक सबहक अतुका देश समाज मे कैल गेल योगदान पर रहल। भारतीय एहन विवेकशील समुदाय छई, जे परिणामक चिंता सं ईत्तर, अन्याय के खिलाफ पहिल लाईन मे ठार भऽ कऽ लड़ाई लड़ल अईछ। गांधीजी के दक्षिण अफ्रीका मे कैल गेल संघर्ष आ ओकर बाद भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन मे क्रमिक योगदान उनका शिखर तक लऽ गेलईन। विदेश मे आनोआन भारतीय मूलक लोक के संघर्षक बारे मे जनबाक खगता छई।अई कड़ी मे "श्री यश टंडन " के बारे मे हमरा जानकारी भेटल, जे हम आहां सबसं सांझा कऽ रहल छी। यश टंडन के जन्म अतई युगांडा मे 1939 मे भेल छलईन। प्रारंभिक पढ़ाई अतऽ केला के बाद ,लंदन स्कुल आफ इकानिमिक्स सं ग्रेजुएट भेलाह। ओकर बाद मास्टर्स इन इकानॉमिक्स आ अंतरराष्ट्रीय संबंध विषय पर डाक्टरेट कैलाह। युगांडा घुरलाह पर 1964 सं 1972 तक अतुका मकरेरे विश्वविद्यालय मे अध्यापन के काज कैलाह।लोक उनका आई " गैंग आफ फोर " के सदस्य के रूप मे जनई छईन। भारत मे लोक " गैंग " के नकारात्मक अर्थ मे लईत अईछ। अतुका गैंगक संदर्भ देश के नवनिर्माण सं छई।अई गैंगक आर बाकी तीन सदस्य छलाह प्रोफेसर एडवर्ड रूगुमायो, ओमओनी ओजोक आ दानी नाबुदेरे। ईदी अमीन के शासन मे एशियाई सब के अतऽ सं निष्कासित कऽ देल गेल छलई। बहुत लोक तऽ सब बिसईर कऽ नब देश मे अप्पन रोजी-रोटी के जोगाड़ मे लाईग गेल छलाय। किछु लोक एहनो छलाय जे अई निष्कासन के स्वीकार नई कैलक, ओई मे सं यश टंडन सेहो छलाह। दिल्ली मे अखनो रिफ्युजी भऽ कऽ भारत घुरल बहुत लोक छईथ। ओ सब जखईन ओई समयक खिस्सा सब कहताह तऽ सुनिते सऊंसे देहक रोईयां सब भुलईक जायत। अहिना चम्पारण मे वर्मा, श्रीलंका आ बंगलादेश सं निष्कासित भेल रिफ्युजी सब के सरकार द्वारा बसावल गेल छईन। ओ सब अपना संग अपन संस्कृति के सेहो जियौने छईथ। अकर अनुभव करबाक हुअय तऽ स्थिर सं कखनो इनका सबहक बीच जाऊ आ सुख दुःख बांटु, तखईन निष्कासन के दंश बुझायत। यश टंडन अई निष्कासन के खिलाफ संघर्ष करबाक मोन बनेलाह।ओ युगांडा सं भाईग कऽ पहिने केन्या गेलाह। ओतऽ तीन महिना के करीब रहला बाद ब्रिटेन चईल गेलाह। ब्रिटेन मे नौ महिना रहला के बाद ओ पुर्वी अफ्रीका घुरलाह आ युगांडा आ तंजानिया मे भऽ रहल घटनाक्रम पर नजर गड़ौने रहलाह। तंजानिया मे उनका दारे-सलाम विश्वविद्यालय मे राजनीति शास्त्र विषय के व्याख्याता के नौकरी भेट गेलईन। ओ नौकरी के संग संग दुनिया भर मे बिखरल निष्कासित युगांडन के लेल नुकाछुपा कऽ राजनीतिक काज करऽ लगलाह। ईनकर सबहक मकसद छलईन - ईदी अमीन के शासनक अंत आ सब युगांडन के घर वापसी। संघर्षक समय मे ई सब देश मे निर्वासित युगांडन के बीच सेतु के रूप मे काज कऽ रहल छलाह।संघर्षक अंतिम समय मे पुर्वी अफ्रीका के देश सब, ब्रिटेन आ अमेरिका मे रहनिहार सब युगांडन लोक के नैरोबी मे जे सभा भेल छलई, ओकरो मूख्य कर्ता धर्ता यश टंडन छलाह। ईदी अमीन के शासन के बाद युगांडा के विकासक रोडमैप लेल युगांडा नेशनल लिबरेशन फ्रंट बनावल गेल। अकर दु भाग छलई। एकटा NCC( National Consultative Council) आ दोसर NEC ( National Executive Committee )। विधायिका काज NCC आ कैबिनेट काज NEC के जिम्मा देल गेल छलई।यश टंडन ईयाह NCC के सदस्य छलाह।अही समय ई गैंग फोर बनलई आ टंडन के प्रभुत्व युगांडा मे बहुत बेशी भऽ गेल छलईन। किछु समय ओ अतुका मंत्री मंडल मे सेहो रहलाह। टंडनक कयेक टा आलेख अफ्रीकी अर्थशास्त्र आ अंतरराष्ट्रीय संबंध विषय पर लिखलाह।अकर अलावा सौ सं बेशी लेख आ पोथी सब ईनकर प्रकाशित भेलईन।अपन कैरियर मे ई युगांडा आ तंजानिया के कयेक शैक्षणिक संस्था के महत्त्वपूर्ण पद पर रहलाह।अकर अलावा बहुत रास विश्व स्तरीय संपादकीय समिति के सदस्य सेहो रहलाह। उनकर एकटा बौद्धिक पहचान छलईन आ युगांडा के लेल कैल गेल संघर्ष के अतुका लोक याद रखने छईन। 1980 मे जखईन UNLF के सरकार के अपदस्थ कऽ देल गेलई तऽ टंडन अपना के युगांडा के सक्रिय राजनीति सं अलग कऽ लेलाह। तखुनका सबसं शक्तिशाली गैंग फोर के ईयाह एकटा सदस्य छईथ जे फेर राजनीति के पचड़ा मे नई पडलाह। ईनकर राजनीति सं विरक्ति सं हमरा भारतक महर्षि अरविंद मोन पड़लाह जे बाद मे अपन उर्जा के पांडिचेरी आश्रम के कार्यकलाप मे व्यस्त कऽ लेलाह। श्री टंडन सम्प्रति ब्रिटेन मे रही रहल छथि। अफ्रीकी विषय पर उनकर विचार के दुनिया के आन देश अखनो तवज्जोह दई छईन। अतुका लोकक कहब छईन जे युगांडा के प्रति अखनो उनका स्नेह छईन, तैं युगांडन पासपोर्ट ओ रखने छईथ। भारतीय मूलक लोक जिनकर विद्वता के सामने दुनिया के आन देशक लोक नतमस्तक अईछ, ओई बारे मे भारत मे सेहो लोक के जनबाक चाही।सच मे अफ्रीका के दोगे दोग मे भारतीय सब समाहित छईथ आ संबल बईन अतुका सामाजिक आ आर्थिक विकास मे योगदान कऽ रहल छईथ। अजगुत अफ्रीका क्रमशः । अतऽ कम्पाला मे रोज अबईत जाईत मुलागो अस्पताल रस्ता मे परईत अईछ। जाबईत युगांडा ब्रिटिश उपनिवेश छलई, अई अस्पताल मे राजनैतिक कैदी सब एक ने एक भर्ती रहिते छलई। बीमार होबाक सबसं पैघ कारण मलेरिया ज्वर छलई। ई मलेरिया तहिया की, अखनो अपन असर रखने अईछ। भारत मे जेना मलेरिया नियंत्रण केंद्र के एक समय मे सऊंसे जाल बिछा कऽ ओई पर बहुत हद तक नियंत्रण कऽ लेल गेलई, अफ्रीका मे अखनो अकर प्रकोप छई। अई मुलागो अस्पताल मे सबसं प्रमुख राजनैतिक बंदी के रूप मे बर्मा के पूर्व प्रधानमंत्री यु शाॅ के नाम अबई छईन। हम जखने मुलागो टपई छी, हमरा यु शाॅ कियै नई कियै मोन पड़ईत अईछ। ई मोन पड़िते, अपनो देशक एकटा सेनानी याद आईब जाई छईथ।दुनु मे एकटा बड़का समानता ई छल जे दुनु ब्रिटिश अधिपत्य के खत्म करबा लेल द्वितीय विश्व युद्ध के घटनाक्रम के आधार पर आगुक निर्णय लई छलाह आ दुनु के जीवनलीला मात्र 48 बरख के रहलईन। दुनु के अकाल मृत्यु भेलईन । जखईन उनका बारे मे पुरा पढ़ब, तऽ उमेद अईछ जे अहुं सब के भारतक ओ स्वतंत्रता सेनानी याद आईब जेताह। यु शाॅ के विद्वता के बारे मे बहुत तरहक खिस्सा सब छई। पंचमा क्लास तक पढला आ सीधा वकालत कैलाह।ओ बर्मा के प्रमुख दैनिक अखबार के सम्पादक आ स्वामी दुनु छलाह। यु शाॅ के बिना कानुनक डिग्री लेला के बादो, बर्मा के कोर्ट - कचहरी मे केश लड़बाक अनुमति छलईन।ओ ओतुका मंत्री मंडल के सेहो सदस्य रहलाह आ बाद मे 1940-42 के बीच मे ओतुका प्रधानमंत्री सेहो बनलाह। 1941 मे जखईन द्वितीय विश्व युद्ध भऽ रहल छलई,ब्रिटीश बर्माक प्रधानमंत्री के रूप मे यु शाॅ लंदन जा कऽ ओतुका प्रधानमंत्री चर्चिल सं किछु विशेष अधिकारक मांग कैने छलाह।ई कमोबेश ओहिना छल, जेना कनाडा के ब्रिटिश सरकार सं डोमिनियन भेटल छलई।दु घंटा धईर चर्चिल संग वार्ता चलईत रहलईन। चर्चिल अंत मे आश्वासन देलखिन-" विश्वयुद्ध जीतलाक बाद देखबई।" यु शाॅ अई सं बहुत निराश भेलाह। ओ ओतऽ सं अमेरिका गेलाह आ ओतुका राष्ट्रपति रूजवेल्ट के चर्चिल के बुझबं लेल कहलखिन। रूजवेल्ट अई मामला मे पड़बा सं मना कऽ देलखिन। ओकर बाद यु शाॅ लिस्बन,पुर्तगाल गेलाह।ओतह जापानक राजदूत सं हुनकर बर्मा के विषय मे बातचीत भेलईन। अई मे युद्धक दौरान जापान के मदद पहुंचेबाक बात छलई। ओतऽ सं घुरती मे हईफा जे आब इजरायल क हिस्सा छई, ब्रिटिश सेना द्वारा पकड़ल गेलाह आ ओतई सं उनका युगांडा मे युद्ध बंदी के रूप मे राखल गेल छलईन। विश्व युद्ध के बाद ओ घुरी कऽ बर्मा गेलाह आ ओतऽ के राजनीति मे फेर सं सक्रिय भऽ गेलाह। अही क्रम मे ओ एकटा समझौता लेल फेर 1947 मे लंदन गेलाह। ओतह समझौता के शर्त उनका मंजूर नई भेलईन। ओ ओईपर हस्ताक्षर करबा सं मना कऽ देलखिन।ओकर बाद वापस वर्मा आईब कऽ संघर्ष मे लाईग गेलाह। किछु दिन बाद उनका पर एकटा राजनीतिक हत्या मे शामिल होबाक आरोप लगलईन आ 1948 मे उनका मात्र 48 बरखक उमीर मे फांसी पर लटका देल गेल। यु शाॅ के देशभक्ति हमरा उनकर व्यक्तित्व के बारे मे जनबाक लेल आकर्षित कैलक। ओ युगांडा मे युद्ध बंदी के रुप मे रहलाक बादो अपन मिशन के कमजोर नहीं होबऽ देलकई।बर्माक अस्मिता आ स्वतंत्रताक लेल दुनिया के आन देश सबसं समझौता के प्रयास देखी कऽ, हमरा भारतक स्वतंत्रता सेनानी याद आईब गेलाह। भऽ सकईत छलई उनको विश्व युद्ध के समय पकडे़ला पर युद्ध बंदी के रूप मे अहिना अफ्रीका मे जरूर पठायल जईतईन। विश्व युद्ध मे निर्णय अंततः ब्रिटेनक पक्ष मे ही भेलई। की सही, की गलत - हम ओई पर नई जा रहल छी , मूदा भारतीय स्वतंत्रता संग्रामक इतिहास आई किछु आर लिखईतई आ अफ्रीका के ओई मे स्थान रहितई। मुलागो अस्पताल मे कोनो भारतीय युद्धबंदी जरूर राखल गेल होयत। हम लोक सब सं पुछईत आ अतुका पोथी सब मे भारतीयता के तकईत रहई छी। आई लेल अतबे। बकियौता दोसर किस्त मे। भारतक ओ स्वतंत्रता सेनानी के छलाह? --x� युगांडा मे भारतीय सबहक रहबाक इतिहास बहुत पुरान रहल अईछ। अतुका छोट- छोट कस्बा मे ई सब रहई छलाह। युगांडा मे भारतीय सबहक स्थिति कमोबेश बिहार मे मारवाड़ी सबहक जेना अईछ। जेना राजस्थान के मारवाड़ ईलाका के लोक सब व्यवसायक लेल बंगाल- बिहार सहित भारतक आन- आन भाग मे चहूंपल, ओहिना भारतीय सब सम्पुर्ण अफ्रीका मे जहां तहां गेल। कतऊ व्यवसाय मे सफलो भेल आ कतऊ सं बोरिया बिस्तर लऽ कऽ भागहो पड़लई।जहिना मारवाड़ी सबहक इतिहास मिथिला- मैथिल सं जुड़ल छई, ओहिना भारतीय सब अफ्रीकी जनमानस मे समायल छईथ। मारवाड़ी सबहक जेना ई सब अतुका भाषा- संस्कृति सब के सम्मान देबाक संग अप्पन भारतीयता के सेहो अक्षुण्ण रखने छईथ। युगांडा मे भारतीय अलीदिना विश्राम के नाम सबसं पुरान व्यापारी मे सं अबई छईन। बहुत लोकक अनुसार विश्राम पहिल भारतीय छलाह जे युगांडा मे दोकान खोलने छलाह। अलीदिना विश्राम के जन्म कच्छ, गुजरात मे 1851 मे भेल छलईन। मात्र 12 बरख के उमीर मे , जेबी मे बिना एक्को नबका पाई के ई 1863 मे जंजीबार पहुंचल छलाह।केना आ कोना पहुंचलाह, ई अपना आप मे अलगे कथा होयत।एत्ते कम ऊमीर मे जंजीबार मे अई दोकान सं ओई दोकान पर टेल्हवा वाला काज करईत पैघ होईत रहलाह।ओ काजक संग संग व्यवसाय के सफलता के पाछु के तकनीकी पक्ष सेहो सीखईत रहला। जखईन ओ 26 बरखक भेलाह तऽ अपन अलग दोकान खोललाह। बहुत जल्दिये इनकर दोकानक बिक्री बढ़ऽ लगलईन। ई मूख्यतःलौंग, मोम आ हाथी दांतक ब्यापार करई छलाह।अकर बदला ओ कपड़ा लई छलाह। ईनकर व्यवसाय दिन-दुना आ राईत चौगुना बढ़ऽ लगलईन।अखईन तक ओ बंदरगाह बाला जगह पर अपन व्यवसाय सीमित कैने छलाह। आब ओ अफ्रीका के भीतर भी अपन व्यवसाय के बढ़बऽ लगलाह। समय बलवान होई छई तऽ मौकों तेहने भेंट जाई छई। अही समय ब्रिटिश सरकार भारते जेना युगांडा-केन्या रेलवे लाईन बनेनाई शुरू केलकई। अही रेलवे परियोजना मे खेनाई-पीनाई सं जुड़ल वस्तु सं लऽ कऽ, ठेकेदार सब के बाकी समान के आपुर्ति ई करऽ लगलाह।अई परियोजना के मजदुर सब भारतीय छलाह। ओई मे बेशी सिख रहईत। पंजाबी सब मजुर बईन कऽ अफ्रीका आयल आ बेशी अतई रही गेल। भारतीय मजदूर के खान पीयन मे कोन वस्तु क उपयोग होई छई, विश्राम भारतीय होबाक कारण अई सं फायदा उठेलाह। हर रेलवे टीशन पर ई व्यवसायिक केन्द्र आ दोकान सब सेहो बनेलाह। रेलवे के ठीकेदारी सं हमरा मुजफ्फरपुर के लंगट सिंह याद आईब जाई छईथ। सुनल कहई छी-ओहो ब्रिटिश राज मे रेलवे के काज मे ठीकेदारी सं चीक्कन पाई कमेलाह। बाद मे उनकर योगदान सं लंगट सिंह कालेज मुजफ्फरपुर मे खुजल। ई महाविद्यालय शिक्षा जगत मे अपन भवन, विभाग, व्यवस्था आ विद्वानक लेल जानल जाईत अईछ। जखने रेलवे के परिचालन शुरू भऽ गेलई, ई अपन व्यापारक शाखा एंटेबे, जिंजा, मशाका आ कम्पाला मे खोललाह। अतऊ उनका सफलता भेटऽ लगलईन। फेर ओ अपन व्यापार के कांगो आ सुडान तक लऽ गेलाह। आब अलीदिन विश्राम तत्कालीन बाजार के देखईत अपन हाथ दोसरो दोसरो क्षैत्र मे आजमावह लगलाह।ओ तेल, साबुन, कपास आ फर्निचर उद्योग सेहो शुरू कयलाह।कपासक बीया सब भारत सं मंगबा कऽ बढ़िया मुनाफा कमेलाह।फर्निचरक लकड़ी के तऽ अतऽ खाने छलई। जखईन अहु मे नीक धनोपार्जन होबऽ लगलईन तऽ ओ बैंकिंग सेक्टर मे सेहो आईब गेलाह। ब्रिटिश औपनिवेशिक युगांडा क पहिल व्यवसायिक बैंक खोलबाह के गौरव ईनका भेटलईन।अपना जीबईत ओ 60टा के करीब बैंकक शाखा पुर्वी आर मध्य अफ्रीकी देश मे चलबई छलाह।उनकर बैंक सऽ बेशीतर कर्ज व्यवसाय आ व्यापार लेल देल जाईत छलई।ईनकर बैंक द्वारा देल कर्ज सं बहुत रास लोक बड़का व्यापारी सेहो भेल। सबसं बेसी फायदा तऽ भारतीय मूलक लोक सब के भेलई। ईनकर कम्पनी सब मे एशिया सं जे भी लोक नौकरी के तलाश मे ओतऽ तक पहुंच जाई छल, ओकरा योग्यतानुकुल नौकरी भेट जाई छलई। अतबे नई, जे अपन व्यवसाय करऽ चाहईत छलाह, उनका सब के बैंक सऽ आसान दर पर कर्जो भेंट जाई छलईन। अतुका लोकक अनुसार युगांडाक बिड़ला परिवार, माधवानी ग्रुपक फाउंडर मुजीब भाई माधवानी के कका विट्ठलदास हरिदास पांच बरख तक अलीदिना विश्रामक दोकान मे काज कैने छलाह।अतई काज करबाक दौरान "माधवानी ग्रूप " जन्म लेलक आ आई दुनिया के प्रतिष्ठित व्यापारिक प्रतिष्ठान मे गिनल जाईत अईछ। जखईन जिंजा शहर जाई छी आ ओतुका मूख्य शहरक नाम एकटा भारतीय अलीदिना विश्राम के नाम पर देखई छियई तऽ अपना आप पर भारतीय होबाक कारण गर्व होईत अईछ। अलीदिना विश्राम सामाजिक सरोकार सं सेहो जुड़ल छलाह। अतुका प्रमुख ईसाई अस्पताल आ शिक्षा संस्थान सबहक स्थापना मे ईनकर योगदान छईन। बहुत तरहक सम्मान ईनका ताहि समयक संस्था सब सं भेटल छईन। अखनो ईनकर परिवारक लोक ईनकर व्यवसायिक प्रतिष्ठान सब चला रहल अईछ। अकर अलावा आरो कयेक तरहक सामाजिक जिम्मेदारी अतुका स्थानीय जनजाति के लेल निभा रहल अईछ। भारतीय मूलक पहिल व्यवसाई जे मात्र बारह बरख मे घर द्वार के छोईर कऽ अई अंजान दूनिया मे आयल। क्रमशः संघर्ष करईत आगु बढ़ईत अई मुकाम पर पहुंचल, एकटा सिनेमा के पटकथा जेकां लगईत अईछ। अजगुत अफ्रीका क्रमशः ! दुनिया मे कहैक लेल अतेक बदलाव आ विकास भेल छई, तखनो मानव जाति आ जनजाति के आचार, विचार आ परम्पराक नाम पर बहुतही विभेद देखऽ मे अबई छई। युरोप तऽ बहुत हद तक अपने-आप के विसंगति सब सऽ अलग करबा मे सफल भऽ गेल अईछ, मूदा एशिया आ अफ्रीका मे अखनो कुरीति - कुप्रथा सब देखबा आ सुनबा मे अबईत रहई छई।अही सब मे सऽ सबसं वीभत्स प्रथा छई- " जनानी जननांग भंग ( Female Genital Mutilation) । दुनिया मे लिंगक आधार पर सबसं अमानवीय आ क्रुरतम हिंसा अकरा कहल जाई छई। युगांडा मे FGM के खिलाफ सख्त कानून बनल छई, तखनो ई भईये रहल छई। अई कानून मे दस बरखक तक सजा के प्रावधान छई, तईयो अकर ओतेक असर देखबा मे नई अबई छई। आखिर अकर पाछु एहन कोन अवधारणा छई, जकर सामने सब हरदी- चुना बाईज जाईया। एकटा पढ़ल लिखल स्त्री के कहब छईन - " जखईन उनकर विवाह भेल छलईन, तखईन ओ FGM नई करौने छलीह। उनकर बर आ सास, उनका पर जोड़ देलकईन आ नैहर पठा देलकईन जे आहां " ई " करा कऽ आऊ। ताबईत आहां घरक कोनो धार्मिक काज सं दूर रहु। ई स्त्री अपन विवाह निभावऽ चाहई छलीह। ओ नैहर गेलीह आ अई काज मे सम्मिलित लोक सं सम्पर्क कैलीह आ करा कऽ एलीह।" युगांडा मे " सबिनी " जनजाति मे ई सबसं बेशी प्रचलित छई।अकर अलावा " कारामोजा " क्षेत्र मे सेहो किछु जनजाति सब मे अकर चलन छई।ओना ई कुप्रथा सं युगांडा सहित तीस टा आर देश सेहो पीड़ित अईछ। अई मे बेशी अफ्रीकी देश अईछ आ किछु एशियाई आ मध्य पूर्व के देश सेहो अईछ। अई कुप्रथाक शिकार सयान होईत बुच्ची सब बेशी होईत छईथ।ओना बिबाहित स्त्री सब बारे मे सेहो सुनबा मे अबईत रहई छई। सबिनी जनजाति मे अई FGM , एकटा संस्कार छई। अई संस्कार के ओ सब " बेसिबेने " कहई छई।जाबईत तक स्त्री के बेसिबेने नई भेल रहई छई, ओ अपन समाजक जग परोजन मे शामिल नई भऽ सकईत अईछ। अकरा सब मे सेहो गायक गोबर के बहुत महत्त्व छई। अतऊ घास फुसक घर के गायक गोबर सं लेबल जाई छई। ई गोबर सं लेबनाई बाला काज स्त्रीक हिस्सा मे छई। अई मे समानता हम मिथिलो के समाज सं देखलियई। हमरा मोन नई पड़ईत अईछ, जे कहियो कोनो पुरूख के गोबर सं मड़ई लेबईत देखने होईयई।अतुका जनजाति मे गायक घारी मे उयाह स्त्री जा कऽ गोबर आईन सकईत अईछ, जकर "बेसिबेने" भेल होई।अई गोबरक चक्कर मे सेहो अई कुप्रथा के शिकार अतुका निर्दोष स्त्री सब भऽ जाईत अईछ। अकर पक्ष मे जे तर्क देल जाई छई, ओई अनुसारे बेसिबेने भेला सं यौनाचार, जवानी, बियाह सब मे मददे टा नई, अपितु सही स्त्रीत्व भेटई छई।अई सं स्त्री के सुंदरता आ आकर्षण बढ़बाक कुप्रचार सेहो जोर पर छई। स्त्री सब के अतिरिक्त वैवाहिक यौनेच्छा पर नियंत्रण होई छई।अहिना बेतुका आर आर बात सब। सामाजिक बंधन ततेक ने प्रभावी छई, जे जकर कनिया के बेसिबेने नई भेल रहई छई ओ अपन कोनो सगा संबंधी आ संगी कतऽ कनिया संग नई जा सकईत अईछ। अतऽ सांय बहु के संग जयबाक परिपाटी छई , तहु लऽ कऽ स्त्रीगण सब FGM करवा लईत छई।कतेक जगह मे तऽ पुरूखे सब अपन कनिया के ई करबाक लेल प्रोत्साहित करईत छई। ई जनजाति सब जई क्षेत्र मे बेशी रहईत अईछ, ओकर रस्तो बड्ड दुर्गम छई।ओतह सरकारी अमला के पहुंचनाई आसान नई छई। दोसर जे कियो अकर शिकायत सेहो नई करई छई। अतऽ अखनो घरे पर बच्चा जन्म लई छई। ओतेक नई अस्पताल छई आ नई अस्पताल मे ओतेक सुविधा छई। " चमाईन " जेकां अकरो सबहक समाज मे एकटा पारंपरिक स्त्री होई छई, जे नवजातक जन्मक प्रक्रिया अपन देखरेख मे आ ओई मे मदद करई छई। ई चमाईन सब बच्चा के जन्मक समय मे जच्चा के बेसिबेने कऽ दई छई। लोक एकरा जन्मक काल मे मददक प्रक्रिया बुझई छलई। सरकारक प्रतिनिधि सब आब अई चमाईन सब के सेहो अई कुप्रथा आ अकर स्वास्थ्य पर परऽ बला खराब असर के बारे मे बुझा रहल छई। चमाईन सब के दोसर तरहक काज मे प्रशिक्षित कैल जा रहल छई, जई सं ओ सब अपन आजीविका चला सकय। अतबे नई जच्चा सब के सरकारी अस्पताल मे प्रसवक लेल प्रोत्साहित कैल जा रहल छई।स्कुल सब मे सरकारी अधिकारी सब विद्यार्थी सब के अकर खतरा सं अवगत करैल जा रहल छई। सरकार अपना दिस सं पुरा लागल अईछ, मूदा सफलता मे अखईन समय लगतई। युगांडा मे सरकारी स्तर पर कुप्रथा सबहक खिलाफ सख्त कानुन सब बनल छई आ किछु पर बनबाक प्रक्रिया चईल रहल छई। असली दिक्कत , नाना तरहक जनजाति सब के पुर्वी अफ्रीका मे रहनाई छई। सब जनजाति के भिन्ने बथान छई। अई FGM के संपुष्टि कोनो भी धार्मिक पोथी सब नई केने छई, तखनो नई जाईन कतऽ सं अकर शुरुआत भऽ गेलई आ दुनिया के अतेक भाग मे पसईर गेलई। अई कुप्रथा के बारे मे अतऽ आबऽ सं पहिने सुननेहो नई रही। आई बस अतबे। अगिला भाग मे फेर कोनो आर विषय पर। अजगुत अफ्रीका क्रमशः ! क्रांतिकारी एहन शब्द छई जे सुनला मात्र सं, मोन के उद्वेलित कऽ दईत छई। सब देशक अपन इतिहास छई आ कोनो न कोनो रूप मे क्रांति सब जगह भेल छई। क्रांति हमेशा हिंसके नई भेलई अईछ। कयेक बेर विचारधारा सेहो क्रांति आईन दई छई। युगांडा के इतिहास पढबा- बुझबा के क्रम मे हमरा अतुका " हीरोज डे " के बारे मे जानकारी भेटल। सब बरख ९ जून कऽ अतऽ हीरोज डे मनावल जाई छई। ई दिन अतुका एकटा क्रांतिकारी के शहादत के दिन छई।देश आ समाज ऊयाह महान कहबई छई, जतऽ बलिदानी के याद कैल जाई छई।आई हम बात युगांडा के हीरो " एडिडियन लुट्टामगुजी उर्फ लट्टा " के शहादत के बारे मे करब। वर्तमान आ आधुनिक युगांडा के निर्माता योवेरी मुसेवनी छईथ।ईनका लंबा संघर्षक बाद सत्ता भेटल छईन।ओई संघर्ष गाथा मे लट्टा के योगदान अहम् छलई। एक समय एहन आईब गेल छलई, जखईन मुसेवनी तत्कालीन सेना के गिरफ्त मे आबऽ के करीब पहुंच चुकल छलाह। लट्टा ओई समय मे जिला मे पुलिस अधिकारी छलाह। ओ नौकरी क संग संग वैज्ञानिक ढंग सं खेती-बाड़ी सेहो करई छलाह।मुसेवनी के छापामार सेना के प्रभाव लट्टा के गामक क्षेत्र मे बढ़ल जा रहल छलई। लट्टा नौकरी तऽ तत्कालीन सरकारक अधीन करई छलाह, मूदा विचारधारा सं क्रांतिकारी छलाह। ओ अपन अपरोक्ष समर्थन मुसेवनी आ ओकर संघर्ष के दई छलखिन। सरकारक गुप्तचर सब मुसेवनी के पाछु लागल छलई। मुसेवनी अपन अड्डा, लट्टा के गामक फार्म मे बनौने छलाह।ई गाम शहर सं दूर बियाबान जगह मे छलई। ई गाम कमोबेश ओहिना छलई , जेहन जगह सं साऊथ अफ्रीका मे नेल्सन मंडेला पकड़ेलाह। आईयो ओई जगह के " मंडेला कैप्चर साईट " के नाम सं जानल जाई छई। डर्बन सं प्रिटोरिया बला उच्च पथ सं बहुत भीतर गेला पर ई जगह अबई छई। आब एकटा बेल्जियमक वास्तुकार ओतऽ लौहक एकटा कलाकृति बनौने अईछ , जईमे दुर सं मंडेलाक छवि देखाई छई लेकिन ओकर लग अयला पर लौहक खंभा मात्र बुझायत। अखनो ओ जगह अतेक दुरूह लगई छई, तहिया की स्थित हेतई, अंदाज लगा सकई छी। एक हजार सं बेशी तत्कालीन सेना के जवान सब ९जून १९८१ कऽ लटृटा के गांव घेर लेलकई। धीरे-धीरे सैनिक सब लट्टा के घर तक आईब गेलई। अई सेना सब के एकटा हाजी रस्ता देखा रहल छलई।अही "हाजी" के बाद मे लट्टा के हत्याक लेल फांसी देल गेलई। लट्टा समेत ग्यारह लोक के सेना सब पकड़लकई आर कहलकई-" या तऽ मुसेवनी के द दई जाऊ, नई त मरबा लेल तैयार भऽ जाऊ।" लट्टा सं कठोर पुछताछ कैल गेलई। अकरा सब सं मुसेवनी के बारे मे कोनो राज नई उगलवा सकलई। लट्टा के अपन सहयोगी सबसं साफ कहब छलई- " क्रांति के ज्यों जिंदा रखबाक अईछ, तऽ चुप रहबाक पड़त।" अंत मे जखईन लट्टा के लाश बाहर एलई तऽ ओकर माथ दु भाग मे कटल छलई। ११मे बाकी सब के माईर देल गेल छलई, बस एकटा के छोईर कऽ। ऊयाह एकटा जीवईत लोक के कहल गेलई जे तुं ई सब लहाश के एतऽ सं बाहर लऽ जो। मुसेवनी ओई समय लट्टा के ऊयाह घर मे नुकायल छलाह। अगर लट्टा अपन जानक परवाह करितय, तऽ मुसेवनीक संग ई क्रांति सेहो खत्म भऽ जईतई।उनकर सामने के सारा घटनाक्रम छलईन। लट्टा के शहादत सं प्रेरित भऽ कऽ मुसेवनी एकटा छापामार दस्ता बनेलाह, जकर नाम छलई- " लट्टा"।ई छापामार दस्ता के ओतुका संग्राम मे अहम योगदान रहलई। बाद मे जखईन १९८६ मे मुसेवनी के युगांडा मे सत्ता भेटलईन, तऽ ओ अई शहीद लट्टा के याद मे " हीरोज डे " मनेनाई शुरू कैलाह। युगांडा के धरती, जे विचारधारा के लड़ाई मे एहन वीर के जन्म देलक, ओ धन्य अईछ। अई तरहक समर्पित लोक जई देश मे रहतई, ओकर विकास के कोनो शक्ति रोईक नई सकईत अईछ। हमरा पुर्ण विश्वास अईछ कि आबऽ बला बरख मे, युगांडा एकटा शक्ति बईन कऽ अफ्रीका मे उभरत। आई अतबे, बाकी दोसर किस्त मे। अजगुत अफ्रीका क्रमशः ! कंपाला सं सटले शहर जिंजा छई। अई शहर मे घुसिते एकटा बड़की टा पेट्रोल पम्प भेटल। पुछला पर पता चलल जे एकरा मालिक भारतीय छथि। उनका सं गप शप भेल । ओ पहिले पीढ़ी के छईथ। अखईन भारतीय नागरिकता बचौने छईथ। अपने व्यवसाय ठाढ़ कैलाह अईछ। आब पुरा सुभ्यस्त भऽ गेल छईथ। ओकर बाद किछु आर भारतीय लोक सब भेटेलाह। एक गोटे तऽ कहलाह - " हम पचास बरिस उम्र तक मेहसाणा, गुजरात मे बैंक मे मैनेजर रही। ओकर बाद गुजरातक व्यवसाई हमरा एतऽ अनलाह। आई हम दु टा चीनी मिल, एल्युमिनियम फैक्ट्री आ कृषि आधारित उद्योग सब अतऽ ठार केलऊं। पिछला बीस बरस मे भारत सं आयल कयेक लोक अतऽ बढ़िया काज कऽ रहल छईथ। ई मैनेजर आब अपन भाई, भातिज, भागिन सहित नौ गोटे सं व्यवसाय मे दिन राईत लागल छईथ।उत्साह मे आईब कऽ अपन फैक्ट्री सब घुमेलाह आ बजलाह- " जे भी भारतीय हमरा अतऽ नौकरी लेल अबई छईथ, उनका हम ज्यों नौकरी नई दऽ पबई छियईन, तऽ चाय आ भोजन जरूर करा कऽ वापस करई छियईन।" ईनकर फैक्ट्री मे भारतीय मेस छलईन। भारतीय कर्मी सबहक रहऽ लेल डारमेट्री जेकां हौल सब बनल छलईन। आब ई सच बजलाह, की फुईस? ई हम पता लगा कऽ कहब। व्यवसाय के गप करी आ माधवानी ग्रुप के नाम नई लियह, तऽ बात अधुरा रहत। ई भारतक टाटा- बिड़ला भेल। अई ग्रुपक संस्थापक मुलजीभाई माधवानी छईथ। भारतीय सिनेमा के जानऽ बला लोक लेल, ई हीरोईन मुमताज के ससुर भेलाह। फरदीन खान क ददिया ससुर भेलाह। व्यवसाई आ फिल्मी दुनिया के घालमेल अद्भुत निराला छई। मुलजी जखईन चौदह बरखक छलाह, तऽ पढ़ाई छोईर कऽ बिजनेस मे कुईद परलाह। अकर ई मतलब नई जे पढ़बा मे भोथ छलाह। ईनकर पिता गुजरात मे तहिया दोकानदारी करईत छलखिन आ कका विट्ठलदास युगांडा मे दोकान खोलने छलखिन।मुलजी के जेठ भाई सेहो कका लग रहि कऽ काज कऽ रहल छलाह। विट्ठलदास १८९३ मे जिंजा शहर आयल छलाह। अतऽ किछु दोकान सब खुईज चुकल छलई। अतऽ सऽ ओ पैदले ईगांगा शहर विदा भऽ गेलाह आ पहुंचते दोकान खोललाह। थोड़ेक बरख बाद ई विट्ठलदास हरिदास &कम्पनी बनेलाह। अई कम्पनी के व्यापार ईगांगा,कलिरो आ जिंजा शहर मे फईल गेलई।ईनकर धंधा तेल, गुड़क चक्की, कपास,चीनी,साबुन आदि क्षेत्र मे मुख्यतः छलईन। विट्ठलदास अपन एकटा दोकान जे कलिरो मे छलईन, मुलजी के चलबऽ लेल दऽ देलखिन।ई बात १९११ के छई। तीन बरख तक मुलजी के काज देखलाक बाद, उनकर कका सब ईनका जिंजा मे अपन दोकान खोलबा लेल कहलखिन। मुलजी जखईन जिंजा अयलाह तऽ अतय अलीदिन विश्राम के कयेक तरहक व्यापारिक प्रतिष्ठान सब चईल रहल छलईन। अतई मुलजी आ विश्राम मे दोस्ती भेलईन। मुलजी के व्यक्तित्व पर विश्राम के बहुत प्रभाव पड़लईन। मुलजी विश्रामक बहुत रास सद्गुण के आत्मसात कैलाह। मुलजी सबसं पहिने कपासक काज शुरू कैलाह।ओही साल एतऽ सुखाड़ भऽ गेलई।काज ठप्प भऽ गेलईन। तखईन ओ भारत सं कुसियारक बीया अनलाह। पहिल बेर उगांडा के धरती पर कुसियारक खेती भेल। ई काज चईल पड़लईन। ओ गुड़क चक्की सब १९२२ मे लगेलाह। खेती-बाड़ी आ व्यापार दुनु मे ईनका दक्षता छलईन।आब ईनकर कम्पनी खुशहाली के तरफ बईढ़ रहल छलईन। १९३० मे ई चीनी मिल ककिरा मे खोललाह। पुरा पुर्वी अफ्रीका के ई पहिल चीनी मिल छलई। १९३३ अबईत अबईत ककिरा चीनी मिल के काज फईल गेलई। १९४७ मे जखईन विट्ठलदास हरिदास & कम्पनी के आपस मे बंटवारा भेलई, तऽ मुलजी के ई पुरा ककिरा चीनी मिल हिस्सा पड़लईन। आब मुलजी माधवानी, माधवानी ग्रुप के नाम सं अपन काज शुरू कैलाह। १९५० के आसपास केन्या मे प्लास्टिक आ स्टील रौलिंग मिल खोललाह। अतबे नई , भारत मे सेहो चाय बगान, चीनी मिल,नुन आ कपड़ा उद्योग ठार कैलाह। १९६० सं ७० के बीच मे माधवानी ग्रुप के व्यापार बहुत बेशी बईढ़ गेलई। पर्यटन, रीयल एस्टेट,पावर जेनरेशन, हार्टिकल्चर आ पैकेजिंग सब मे स्थापित भऽ गेल छलाह। अई कम्पनी के जे दर्शन छलई - "वर्टिकल इंटीग्रेशन"! माईन लियह आहां "बीयर" बनबई छी। बीयर लेल आहां के बोतल चाही। आहां कियैक ने बोतल आ प्लास्टिक क्रैट सेहो बनाऊ। अहिना दोसर दर्शन छलई जे जखन बीयर या बोतल या स्टील एक देश मे बढ़िया मुनाफा दऽ रहल अईछ,तऽ कियैक ने ईयाह बीयर या बोतल या स्टीलक कारखाना आनो आन देश मे खोली। अही नीति आ दर्शन पर चलईत मुलजी भाई के कम्पनी आगु बढ़ईत रहलई। ओना १९७२ मे माधवानी परिवार के युगांडा छोड़ऽ पड़ल छलई।मुलजी के बेटा के निष्कासन के आदेश नई मानला पर जेहल सेहो जाय पड़लई। ईदी अमीन के शासन खत्म भेला पर माधवानी परिवार फेर सं अपन व्यापार के स्वामित्व लेलक। ई परिवार के भारतक टाटा- बिड़ला परिवार जेकां युगांडा मे इज्जत शोहरत छई। अतुका स्थानीय जनजाति सबहक लेल बहुत रास कल्याणकारी काज अई कम्पनी के ट्रस्ट सब कऽ रहल अईछ। ओना माधवानी परिवार क बेशी लोक ब्रिटिश पासपोर्ट धारक सब छईथ। तखनो भारतीय मूलक लोक कहबईते छईथ। भारतक परम्परा सब निभावईत छईथ। चौदह बरखक मुलजी के सपना के उनकर तेसर चारिम पीढ़ी के कर्ता धर्ता सब आगु बढ़ा रहल छईथ। --x�
अफ्रीका मे जखन हम सफल भारतीय मूलक व्यवसाई सबहक बारे मे देखई छी, हमरा एकटा समानता देखाईत अईछ। विश्वास अईछ अहुं सब सहमत होयब। सब व्यवसाई सब बड्ड कम ऊम्र मे व्यापार के बारे मे सोचलाह। किनको लग कोनो खास शैक्षणिक योग्यता वा सर्टिफिकेट नई छलईन। सब लगन, जुनून, मेहनत आ अनुभवक बल पर आगु बढ़ईत गेलाह। आहां सब के हम बता चुकल छी जे पहिल भारतीय मूलक व्यापारी अलीदिना विश्राम मात्र १२ बरख मे गुजरात सं जंजीबार, अफ्रीका आयल छलाह। माधवानी ग्रुप के फाउंडर मूलजी माधवानी मात्र १४ बरख मे बिजनेस करबा लेल अपन कका लग अफ्रीका अयलाह। आई हम जिनकर चर्चा कऽ रहल छी,ओ जखईन १३ बरखक छलाह, तखने गोराना गाम, गुजरात सं विदेश लेल विदा भऽ गेलाह। ईनकर नाम ननजी भाई कालिदास मेहता छईन। हिनक जन्म १७ नवंबर १८८७ कऽ गुजरात मे भेल छलईन।आजूक विश्व विख्यात मेहता ग्रुपक संस्थापक ईयाह छईथ। १३ बरखक किशोर बच्चा ननजी पहिल पहिल भारत सं मेडागास्कर लेल विदा भेलाह।ओतह ईनकर जेठ भाई के दोकान छलईन। मेडागास्कर मे ओ व्यवसायक नीक- बेजाय अपन भाई के दोकान पर बईसला बाद बुझऽ सुझऽ लगलाह। अपन मोन लगा कऽ दोकान चलबई छलाह। किछू दिनक बाद मेडागास्कर मे प्लेग बीमारी फईल गेलई। प्लेग तहिया बीमारी नई, महामारी छलई। लोक सब ओतऽ सं पराय लागल। गामक गाम खाली भऽ गेलई। ननजी सेहो अपन भाई संग भाईग कऽ भारत घुईर गेलाह। भारत घुरलाह के बाद ईनकर मोन फेर विदेश जेबाक लेल बेचैन होबऽ लगलईन। घरक लोक अईबेर ईनका विदेश नई पठेबाक के पक्ष मे रहईन।कतबो लोक मना करईत रहलईन, अई बेर फेर ई विदेश मे व्यापार करबा लेल विदा भऽ गेलाह। ईनकर जेबी मे कतेक पाई छलईन, बिजनेस शुरू करबाक लेल? जानब तं, विश्वास नई होयत। मात्र ५५ टका। मूदा अई बेर ओ मेडागास्कर नई गेलाह।ओ अयलाह अफ्रीका। पनिया जहाज सं मोम्बासा पहुंचलाह। मोम्बासा आई केन्या के पैघ बंदरगाह छई। तहिया साऊथ अफ्रीका मे गुजरातक बहुत रास लोक रहईत छल। ई भारतीय सब ओतऽ व्यापार करईत छल। अही गुजराती मूलक एकटा व्यापारी के केश लड़ऽ गांधीजी गेल छलाह। ई पच्चीस बरखक मोहनदास गांधी ओतई एकईस बरस रही गेलाह। किछु भारतीय सब सुखी संपन्न सेहो साऊथ अफ्रीका मे भऽ गेल छलई। ई खिस्सा सब ननजी सेहो अपन गाम घर मे सुनने छलाह। ओही सं उनको ओतऽ जाय आ धन कमाय के मोन छलईन। साऊथ अफ्रीका जाय लेल तहियो परमिट लगईत छलई। ननजी पुरा प्रयास कैलाह, मूदा साऊथ अफ्रीका के परमिट नई भेंटलईन।कनेक निराश तऽ भेलाह, लेकिन हिम्मत नई हारलाह। ओ मोम्बासा सं जंजीबार द्वीप चईल गेलाह। जंजीबार के भारत मे जंगीबार द्वीप कहल जाई छलई। जंजीबार मे सेहो कतेक भारतीय सब व्यवसाय करईत छलाह। जंजीबार मे एकटा पैघ भारतीय कंपनी, केशवजी आनंदजी कम्पनी मे नौकरी भेट गेलईन। जेना आई काईल प्राईवेट कम्पनी मे " per annum salary " के चलन छई, तहिया सेहो ईयाह छलई। ईनकर तनख्वाह मात्र २०० भारतीय टका बरख भईर के छलईन। अकर बदला मे १८ घंटा रोज काज करबाक के छलईन। कोनो लेबर कोर्ट आ मानवाधिकार तहिया नई छलई। ईनकर दिमाग मे सदिखन अपन व्यवसाय करबाक विचार घुमईत रहई छलईन।अतेक १८ घंटा काज अपन व्यवसाय मे लगेला पर सफलता भेटबे करतई, ई ईनकर विश्वास भेल जा रहल छलईन। किछु बरख जंजीबार मे रहलाक बाद ईनकर लग किछु पाई सेहो जमा भऽ गेल छलईन। ओ फेर घुईर कऽ मोम्बासा अयलाह। अई बेर ओ मोम्बासा मे रूकलाह नई। ओ सीधा युगांडा के सुदूर गाम दिशक रूख कयलाह।ओई समय तक भारत जेकां ब्रिटिश सरकार अतऊ रेलवे के जाल फईला चुकल छल, ट्रेन पकड़लाह आ नैरोबी पहुंचलाह। नैरोबी अखुनका केन्या देशक राजधानी छई। नैरोबी सं किसुमी लेल विदा भेलाह। किसुमी आई युगांडा आ केन्या के बोर्डर चेकपोस्ट छई। सड़क सं ज्यों आहां कम्पाला सं मसईमारा सैंक्चुअरी जायब तऽ किसूमी चेकपोस्ट पर इमीग्रेशन करबावह पड़त। किसुमी मे एकटा पैघ गुरूद्वारा छई,जकर इतिहास बहुत प्राचीन कहल जाई छई। किसुमी सं नाव पकड़लाह आ फेर लंबा सफर करईत जिंजा शहर पहुंचलाह। जिंजा ऊयाह जगह छई, जतऽ " नील नदी " के उद्गम होई छईन। १९४८ मे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के अस्थि विसर्जन अतऊ भेल छलईन। जिंजा मे ननजी के एकटा कका के दोकान छलईन। ननजी अपन कका लग पहुंचलाह। ननजी अपन आत्मकथा " Dream Half -expressed " जे १९६६ मे प्रकाशित भेल छलईन,ओई मे स्पष्ट लिखने छईथ- " भाग्य मे जे लिखल रहई छई, से हाथ धरा कऽ करा दई छई।" कका कतऽ अयला के बाद ओ रूकलाह नई। उनका युगांडा के धरती पर अईबते बुझा गेलईन जे ईयाह हमर अंतिम पड़ाव रहत। अतई अबई लेल हम बऊआईत छलऊं। एतऽ हम जे चाहब, से करब। ईनकर सब बेचैनी आ मोनक उद्विगनता अतऽ अबिते शांत भऽ गैलईन। ओ निर्णय लेलाह - "हम अतई अपन व्यापार शुरू करब। " एक बरख तक ओ अपन कका के दोकान मे काज केलाह।ई दोकान कमुली मे छलईन। ननजी अपन दोकान सेहो कमुली मे खोललाह।ओ पहिले गुण अपना मे अनलाह- ओतुका स्थानीय जनजाति सबहक भाषा सीखलाह। दोसर ओतुका छोट आ पैघ, सब व्यवसाई सं जान-पहचान कैलाह। उनका कहब अनुसार जे ई दुई टा गुण व्यवसाय मे बड्ड मदद करई छई। आब कमुली मे ई बाहर सं समान मंगा कऽ बेचऽ लगलाह आ अकर संग ओतुका गामघर मे बनल समान सब खरीदऽ लगलाह। अई गाम घरक खरीदल समान के बेचई लेल ओ जिंजा मे सेहो दोकान खोललाह। आब ईनकर दोकान चलऽ लगलईन। अकर बाद ओ टेसो आ लेंगो, दूनु शहर मे अपन दोकानक शाखा खोललाह। अतबे पर ओ पुरा शांत चित्त नई भेलाह। व्यवसाय के जुनुन सफलता भेटला पर बईढ़ रहल छलईन। अतुका स्थानीय लोक सब सं किछु बेकार पड़ल जमीन लेलाह आ ओई मे तरकारी उपजावह लगलाह। जमीन ततेक ने उपजाऊ छलई, खुब तरकारी भेलईन। आब ओ भारत सं कपासक तरह तरह के बीया सब मंगेलाह।कपासक खेती सेहो सुतईर गेलईन। अतुका जमीन मे नाइट्रोजन के मात्रा बेश रहबाक कारणे, पैदावार नीक होबऽ लगलईन। असली सफलता तऽ उनका तखईन भेटलईन, जखईन ओ कुसियार के खेती शुरू केलाह। अकर बाद पहिने गुड़क चक्की आ फेर चीनी मिल बईसेलाह। सफलता जखईन भेटऽ लगई छई तऽ लोक जोखिम उठबऽ लगईत अईछ। आब ननजी चाह आ काफी के बगान दिश दिमाग घुमेलाह। अजुका लुगाजी मे इनकर बड़की टटा चाह आ काफीक बगान सब छईन। ननजीभाई कालिदास मेहता धीरे धीरे पूर्वी अफ्रीका के सफल व्यवसाई आ मेहता ग्रुप स्थापित ब्रांड भऽ गेलई। युगांडा आ केन्या मे लोकक खुशहाली, ईनकर सफलताक गवाही दऽ रहल छईन। तखुनका ब्रिटिश सरकार, ननजीभाई के " मेम्बर आफ द ब्रिटिश एम्पायर ( M.B.E.) " के मानद उपाधि सं सम्मानित कैने रहईन। हालांकि १९६९ मे ननजी के स्वर्गवास भऽ गेलईन, तखनो ईनकर बेटा सब मेहता ग्रुप के व्यवसाय आगु बढ़बऽ मे लागल रहलाह। ईनकर ग्रुप आई भारत आ ब्रिटेन सहित कतेक देश मे फईल चुकल छईन। मेहता ग्रुप हमरा भारतक टाटा- बिड़ला ग्रुप जेकां लगईत अईछ, जे व्यवसाय के संग संग सामाजिक जिम्मेदारी सेहो निभावईत अईछ। मेहता ग्रुप अतऽ कतेक तरहक चैरिटी के काज स्थानीय जनजाति लेल करईत अईछ। फिल्मी दुनिया के जानऽ बला लोक लेल ई परिवार फिल्म अभिनेत्री जुही चावला के सासुर भेलईन। ननजी के पोता जय मेहता सं जुही चावला के बियाह भेल छईन। व्यवसाय आ ग्लैमर दुनु के घालमेल अई परिवार मे देखायत। सबसं पैघ बात ई हमरा लागल जे अई भारतीय मूलक परिवार के अतुका लोक बहुतही आदर सं देखई छई। --x� भारतक टाटा- बिड़ला के जेकां युगांडा के भारतीय मूलक परिवार के बारे मे आहां सब जाईन चुकल छी। अतऽ भारतक अंबानी जेकां सेहो एकटा नबका धनिक भारतीय मूलक परिवार बड्ड तेजी सं उभरलई अईछ। ईनकर नाम छईन " सुधीर रूपारेलिया "। पुरा पुर्वी अफ्रीका मे आई ई सबसं धनिक लोक मे गिनल जाई छईथ। जेना धीरूभाई अंबानी के भारत मे लोक पेट्रोल पम्प पर सं काज शुरू करईत अतेक पैघ व्यापारिक साम्राज्य के बनबऽ के खिस्सा सब कहईत भेटत, ओहिना सुधीर के बारे मे पुर्वी अफ्रीका मे। हमरा जखईन भी ईनका सं भेट भेल, उज्जर पैंट शर्ट मे सींटल दाढ़ी मे भेटलाह। कखनो भी नई कोनो सुरक्षाकर्मी पूलिस आ नई निजी बाडीगार्ड संग देखेलाह।भारत मे अकर ईत्तर जहां दूं टा पाई ककरो भेलई, सबसं पहिने जोड़-तोड़ वा सिफारिश क कऽ अपन सुरक्षा मे पुलिस के राखत। ज्यों कोनो कारण सं सरकारी पुलिस के जवान नई भेटलई, तऽ निजी कंपनी सं बाड़ी गार्ड पाई द कऽ राखत। अफ्रीका के लोक पर सुधीर के अतेक विश्वास छई जे ओ ओहिना अबई जाई छईथ। अतबे नई,कम्पाला के ट्रैफिक जाम बड्ड बदनाम छई। लोकक कहब छईन जे कयेक बेर ट्रैफिक जाम मे सुधीर के विदेशी मोटरकार जखईन फंईस जाई छईन, तऽ ओ मोटर कार सं ऊतईर बोडा बोडा पर बईस कऽ चईल जाईत रहईत छईथ। बोडा बोडा भेल मोटरसाइकिल पर पाछु बईसबा के सवारी। बोडा बोडा एमहर ओमहर फुटपाथ पर सेहो जरूरत पड़ला पर चढ़ा कऽ आहां के गंतव्य पर पहुंचा देत। अई बोडा बोडा पर सुधीर के सवारी के विषय मे अतुका लोकक कहब छईन जे मीटिंग मे समय पर पहुंचबा लेल ओ अकर उपयोग करई छईथ। उनका देरी सं अयबा के कारण, बाकी सबहक समय नई बर्बाद होई। समय के महत्त्व के बारे मे ऊनकर ई अवधारणा छईन। भारत मे मोटरसाइकिल की, अई तरहक लोक के आहां कखनो असगर नई देखब। हरदम बरियाती संगे भेटत। बहुत बेर सुधीर के लोक कम्पाला मे बोडाबोडा पर पाछु मे असगर बईसल चईल जाईत देखने छई। अई सादगी के पाछु परिस्थित आ ओई सं उपजल बड़की टा सोच छई। सुधीर क पुरखा १९०३ मे भारत सं यूगांडा आयल छलईन।कसेसे शहर मे सुधीरक पिता के दुका छलईन। दोकान के अतुका भाषा मे दुका कहल जाई छई। साधारण ढंग सं गाड़ी खिंचा रहल छलईन। १९७२ के विश्वविदित घटना सं संभवतः आहां सब परिचित होयब, जईमे युगांडा के निरंकुश शासक ईदी अमीन सब एशियाई के देश निकाला दऽ देने रहई। चुंकि युगांडा पहिने ब्रिटिश सरकार क उपनिवेश छलई आ दसे बरख शासन छोड़ला के भेल छलई, ओही लेल ई निष्कासित एशियाई मे सऽ सबसं बेसी लोक ब्रिटेन मे शरण लेलक। बाकी लोक कनाडा, अमेरिका सहित आन आन देश मे शरणार्थी बनल। किछु लोक भारतो घुरल। शरणार्थी के जीवन बड्ड कठिन तहियो छलई आ आईयो छई। कोनो देश आहां के रखबाक लेल तैयार नई अईछ। डगरा के भांटा जेकां ईमहर सं ऊमहर डुगरईत रहु। सब देशक अपन अपन आंतरिक समस्या रहईत छई,जे अकरा आर जटील बना दई छई। अपनो देश मे अखुनका आंदोलन अकरे कड़ी मे देखल जा सकईत छई। जखईन ई हजारों भारतीय ब्रिटेनक धरती पर पहूंचल तऽ ओतुका लोक अकर खिलाफ आंदोलन केलकई। ब्रिटिश सरकार आंदोलनकारी के आश्वासन देलकई - " ई सब किछुये दिन लेल आयल छईथ, फेर चईल जेताह।" एना कऽ कऽ स्थानीय ब्रिटिश लोकक आंदोलन के डिफ्युज केलकई। ई निर्वासित एशियाई विशेष कऽ भारतीय सब ब्रिटेन मे दिन राईत मेहनत केलक। बाद मे ब्रिटिश सरकार ईनकर सबहक नीक बेबहार देख कऽ , ब्रिटेनक नागरिकता दऽ देलकईन। अही निर्वासित भारतीय मे सऽ सुधीर सेहो छलाह। सुधीर १९७२ मे जहिया यूगांडा छोड़लाह, संग मे एकटा सुटकेश आ जेबी मे २० ब्रिटिश पौंड छलईन। लंदन मे ओ ड्राईवरी सऽ लऽ कऽ सुपर मार्केट मे दैनिक मजुरी तक केलाह। दिन राईत भुत जेकां जे काज भेटलईन, केलाह। पाई जमा कऽ कऽ एकटा छोटछीन घर सेहो लंदन मे कीन लेलाह। अई सब भेलाक बादो ईनकर मोन युगांडे पर टीकल छलईन। सरकार के बदलला पर १९८५ मे ओ युगांडा घुरलाह। एतऽ ओ सबसं पहिने बीयर बेचनाई शुरू कैलाह। बीयर खरीदई लेल कम्पाला मे बेशी बिदेशी सब अबई आ ओकरा सब लग युगांडन सीलिंग नई रहई छलई। ओई बिदेशी करेंशी के स्थानीय करेंसी मे बदलबाव के झमेला छलई। सुधीर के ई एकटा मौका बुझेलईन। ओ बीयरक संग संग करेंसी सेहो अदला-बदली के काज करऽ लगलाह। युगांडा मे पहिल फारेक्स ब्युरो खोललाह। आब ओ बीयरक स्टाकिस्ट भऽ गेल छलाह। फारेक्स ब्युरो के काज सेहो चईल पड़लईन। १९९० मे प्रीमियर लाटरी के काज शुरू कैलाह। अहु मे चिक्कन पाई कमेलाह। अही समय ओ क्रेन बैंक खोललाह। प्रसिद्धि आ पैसा दुनू ईनका अई बैंक सऽ भेंट रहल छलईन। पुरा युगांडा मे क्रेन बैंक के जाल बिछ गेल छलई। आब ओ युगांडा सऽ बाहर सेहो अपन बैंक के बढ़बऽ चहलाह। पड़ोसी देश कांगो मे ईनका बैंक चलबऽ के अनुमति सेहो भेंट गेलईन। ईदी अमीन के शासन खत्म भेलाक बाद युगांडा के आर्थिक स्थित डगमगा गेल छलई। सुधीर बीयर,ब्यूरो आ बैंकक अलावा अतुका संभावित संपत्ति सब पर सेहो नजर रखलाह। शहर मे बहुत रास बेकार पड़ल जमीन सब कीनलाह। उनका अंदाजा छलईन जे आबऽ बला समय मे शहरक विकासक संग अई संपईतक महत्व बढ़बे टा करतई। शहर मे चारु तरफ सुधीरक प्लाट सब भऽ गेलईन।अई प्लाट सब पर मकान, आफिस आ दोकान बना कऽ किराया के रुप मे बढ़िया पाई आईब रहल छईन। आब उनकर व्यवसाय शिक्षा, बीमा,होटल, कंस्ट्रक्शन, हार्टीकल्चर, मीडिया, बैंक, रीयल एस्टेट सब मे फईल गेल छईन। अही समय २००७ मे कामनवेल्थ राष्ट्राध्यक्ष ( CHOGM) के सम्मेलन युगांडा मे भेलई। अई लेल उनकर मुन्योनो के होटल स्पीक रिसोर्ट के चुनल गेलई। अई सम्मेलन लेल ओ अपन रिसोर्ट मे एकटा अलगे विंग बना लेलाह। अई सं उनकर रिसोर्ट के दुनिया भईर मे पहचान भेटलईन। स्थानीय लोकक अनुसार तहिया एक महीना तक BBC, स्काई न्यूज, CNN आ अल- जंजीरा चैनल पर अई रिसोर्ट क विशेषताक समाचार अबिते रहलई। हमरो समय मे २०१९ मे कामनवेल्थ पार्लियामेट्री कांफ्रेंस अही स्पीक रिसोर्ट मे भेलई। ओतऽ गेलाह पर बहुत खुशी होई छई, जे एकटा भारतीय मूलक लोक के प्रतिष्ठान पर सब देशक लोक ठहरईत अईछ। अई रिसोर्टक अंदर हजार हजार लोकक मीटिंग, कांफ्रेंस आ रहबाक व्यवस्था छई। दिल्ली के विज्ञान भवन जेकां सब बड़का सरकारी मीटिंग अही रिसोर्ट मे होई छई। ई रिसोर्ट एकदम विक्टोरिया लेक के कात मे छई आ एंटेबे एयरपोर्ट सं लग सेहो पड़ई छई। अतऽ शिक्षा प्रतिष्ठान मे दिल्ली पब्लिक स्कूल इन्टरनेशनल, कम्पाला पैरेंट स्कुल, कम्पाला इन्टरनेशनल स्कूल, विक्टोरिया युनिवर्सिटी सहित कयेक टा आर संस्थान सब छईन। ओ अपने नित्य सब संस्थानक कार्यकलाप पर निगरानी रखई छईथ। CBSE स्ं संबद्ध स्कूल भेला सं भारतीय सब के राहत छईन। भारत बदली भेला पर बच्चा सब के आब पढ़ौनी के पद्धति मे परिवर्तन नई हेतईन।सब संस्थान सफलता क संग चईल रहल छईन। सुधीर क सबसं बेशी जोर अतूका स्थानीय लोक के रोजगार मुहैया करेबा पर छईन। ईनकर सब संस्थान आ प्रतिष्ठान मे संख्या बल बहुत भेटत। भारतीय सब सेहो खुब ईनकर कंपनी मे काज करई छईथ। सुधीर अपने अप्रवासी भारतीय कार्डधारक छईथ आ धुराजार हिंदी बजई छईथ। ओना पुर्वी अफ्रीका मे आहां के अंग्रेजी हिन्दी नई अबईत अईछ, तऽ कोनो बात नई। ज्यों गूजराती अबईत अईछ तऽ आहां के बिजनेस मे कोनो परेशानी नई होयत। मैथिली आ गुजराती मे बहुत समानता छई। मैथिली बजलो सं काज भऽ जायत। सफलता क शिखर पर पहुंचबा लेल सुधीर चलायमान छईथ। ---x----x----
जहिया आ जहिना गुलाम भारत मे विदेशी वस्त्र आ वस्तु के बहिष्कार क आंदोलन भ रहल छलई, ठीक ओही समय मे युगांडा मे सेहो अहीने आंदोलन चईल रहल छलई। स्वदेशी- विदेशी कहु वा स्थानीय- बाहरी कहु वा सुदेशी-विलैती, तात्पर्य एक्के जे बाहरबला के भगाऊ। लाठी डंडा स इ सब नई भागत, अकरा भगबई लेल अकर व्यापार क बहिष्कारे टा रस्ता छई। अही मनोभाव स भारत मे भी खुब जईम क ब्रिटेन क वस्तु जात के होलिका दहन कैल गेल।खादी आ आन आन स्थानीय वस्तु के उत्पादन भारत मे शुरू भेल । ब्रिटिश सरकार अपन उत्पाद के रक्षा लेल पुरा पुलिस बलक सहायता लेलक। पैघ स्तर पर गिरफ्तारी भेलई।धीरे धीरे आंदोलन नेपथ्य मे चईल गेल।आईयो हम सब " आत्मनिर्भर भारत " लेल संघर्षरत छी। भारत मे ब्रिटेन के खिलाफ आ युगांडा मे भारतीय व्यापारी के खिलाफ एक रंगाहे आंदोलन भेल छलई। अंग्रेजी हुकूमत ब्रिटेन मे वस्तु के उत्पादन करईत छल आ ओकरा भारत क बाजार मे उतारईत छल। भारत क विशाल जनसंख्या ओकरा बाजार देखाईत छलई। अई व्यापार मे विदेशी सब खुब मुनाफा कमाईत छल। विदेशी वस्तु के बहिष्कार सं ओकर व्यवसायिक हित प्रभावित होई छलई, ताहि लेल मजबूती सं आंदोलन के कुचईल देलकई। हालाँकि अई आंदोलन स भारत मे बहुत रास स्वतंत्रता सेनानी सब उभईर क सोझां अयलाह। अकर ईतर, युगांडा मे अधिकतर उत्पादन इकाई सब भारतीय मूलक लोक सबहक छलई। ओ सब ब्रिटिश सरकार के कर क रूप मे नीक पाई दई छलई। हालाँकि किछु कच्चा माल ब्रिटेन स सेहो अबईत छलई, तैयो प्रभुत्व भारतीय सबहक हाथ मे रहई। जखईन स्थानीयता के मुद्दा जोड़ पकड़लकई, ब्रिटिश साम्राज्य पुरा भारतीय सबहक संग देलकई।सब भारतीय कारखाना सब पर पुलिस बंदोबस्त बहुत दिन तक रहलई।हालाँकि भारत जेकां युगांडा मे सेहो स्वतंत्रता सेनानी सब अई आंदोलन मे जन्म लेलाह। ईयाह सब बाद मे युगांडा क भाग्य विधाता होई गेलाह। स्थानीयता एहन मुद्दा छई जे भावना सं जल्दी जुईर जाई छई। पुरा दुनिया मे नेता सब अपना अनुसार अकर उपयोग करईत छई। नई किछु भेल, स्थानीयता क मुद्दा छेड़ दियऊ। अकर दंश ततेक गहीर छई जे जतऽ भीतर-बाहर क आदान प्रदान नई भेल, ओ रेस मे बहुत पाछु चईल गेल। ओकर चर्चो केनाई आब मोनासिब नई बुझल जाई छई। ई बतबऽ के पाछु आशय ई छल जे ब्रिटिश साम्राज्य के उद्देश्य व्यवसाय आ मूनाफा छलई। ओ भारत मे भारतीय के खिलाफ आ युगांडा मे स्थानीय क खिलाफ आ भारतीय के पक्ष मे छल। अकरा भारतीय पक्ष नई कही कऽ, ब्रिटिश साम्राज्य क आर्थिक हित क रक्षा कही सकई छी। ईयाह व्यापार मे भारतीय मूलक लोकक पकड़ अकरा कतेक के दुश्मन बना देलकई। भारतीय के खिलाफ बाईज क कतेक स्थानीय राजनेता अपन राजनीति चमकौने छथि। ईदी अमीन के शासन काल मे भारतीय के खिलाफ कैल गेल जुल्म स सारा दुनिया वाकिफ अईछ। 1972 मे ओ भारतीय (एशियाई) सब के अत स निष्कासित कैने छल। बहुत कम लोक के ई बुझल हेतईन जे 1969 मे युगांडा क तत्कालीन राष्ट्रपति ओबोटे जखईन कामनवेल्थ कांफ्रेंस मे इंग्लैंड गेल छलाय त ओ भारतीय सबहक निष्कासन क बात कैने रहय। ओकर मनोरथ मोने मे रही गेलई आ ईदी अमीन ओकर सरकार के खसा क सत्ता पर कब्जा जमा लेलक। अखुनका सरकार भारत आ भारतीय सबहक हितचिंतक छई आ भारतीय सब दिन दुना आ राईत चौगुना तरक्की क रहल छथि। ओबोटे भारतीय सब के निष्कासन क साहस नई जुटा सकल रहय।मूदा ओकर मंसुबा जगजाहिर भ गेल छलई। सत्ता भेटलाक बाद आदमी क असलियत सामने अबई छई।ई मानसिकता पुरा अफ्रीका मे हमरा लागल। युगांडा क बगल तंजानिया मे जुलियस न्यरेरे राष्ट्रीयकरण क कऽ कतेक भारतीय व्यापारी के अपना समय मे सड़क पर आईन देने रहई। ओ बिना हो हल्ला मचेने भारतीय मूलक लोकक संपत्ति पर दखल क लेलक।राष्ट्रीयकरणक बाद ओतऊ स बहुत लोक परायल।जे जतेक विस्थापन देखलक, ओ ओतेक आगु बढ़ल। अंग्रेज सब अंचोके एकटा बड़का काज केलकई। ओ सब जखईन अफ्रीकाक अपन प्रभुत्व छोड़ऽ लागल, तखईन अपन लगुआ भगुआ सब के ब्रिटिश नागरिकता द देलकई। अई मे सबसं फायदा मे भारतीय मूलक लोक रहल। दरबारी मानसिकता वाला भारतीय सब मौकाक खुब फायदा ऊठेलाह। हमरा किछु दिन पूर्व बुरुंडी देश मे व्यापार केनिहार एकटा भारतीय मूलक भलमानुष ब्रह्मभट्ट भेटलाह।ईनकर पितामह तंजानिया मे सामान्य व्यापारी छलाह। अंग्रेज जखईन तंजानिया छोईड़ क जाय लागल त ईनकर पितामह के ब्रिटिश नागरिकता द देलकईन। अही नागरिकता क बले ईनकर परिवार व्यवसाय मे आगु बढईत गेलईन। आई ईनकर व्यापार कयेक अफ्रीकी देश मे पहुँच गेलईन।फर्राटेदार हिंदी आ गुजराती बजई छईत। हिंदु धर्म क पालन करई छईत।बुरुंडी के शीर्ष नेतृत्वमे सेहो दखल बनौने छईथ। ब्रिटिश, अमेरिका आ आन युरोपीय देश क नागरिकता भेटनाई कतेक दुरुह छई, ई बात जे प्रवासी ओतह रहई छईथ, ऊयाह बुईझ सकई छईथ। आदर्श वादी गप्प छोड़ईत हम सब भारतीय नागरिकता छोड़नाई क आलोचना क सकईत छी, मूदा ई सच छई जे पिछला पांच बरख मे लगभग पांच लाख स बेशी भारतीय दोसर देशक नागरिकता लेलाह अईछ। विदेश मे आर किछु होई वा नई होई, ई बईसल खिन्नांस वाला मानसिकता त नई छई। अखईन युगांडा मे त शीर्ष नेतृत्व के बेशी धीया पुता नई छईन, लेकिन बगले मे बुरुंडी के मौजूदा राष्ट्रपति के आठ टा धीया पुता छईन। जखईन की ई अखईन युवा छथि।अतेक धीया पुता एकटा पब्लिक फीगर के बारे मे सुनबा मे अजीब लागल। ओना बुरुंडी फ्रेंच कालोनी छलई। ओहिना तंजानियाक पहिल राष्ट्रपति जुलियस न्यरेरेक पिता क करीब दु दर्जन स बेशी कनिया छलईन।मूदा ओ समय किछु आर छलई। आब जनजाति मे भी सोच मे बहुत बदलाव भेल छई। जुलियस न्यरेरे जे तंजानियाक रहनिहार छलाह, विश्वविद्यालय शिक्षाक कम्पाला स पुरा कयलाह। पुर्वी अफ्रीका मे ई लोकक एक देश स दोसर देश मे जाय के परिपाटी हमरा भारत- नेपाल जकां लगईत अईछ। स्वतंत्रता आंदोलन होई वा शिक्षा दीक्षा,बहुत रास उदाहरण भेटत। ओना भारत के आजादी स पूर्व वर्मा( मयन्मार), सीलोन ( श्रीलंका), चीन आ जापान आदि स अही तरहक आदान प्रदान होईत रहईत छलई। जुलियस न्यरेरे जखईन कंपाला मे पढई छलाह, तखने उनकर " दांत भरायल " भेल छलईन। ई " दांत भराई " एकटा प्रथा छई जे अफ्रीका मे बदस्तुर जारी छई। भारतक मुड़न, उपनैन जेकां बुईझ लीयह। ओई मे केश कटाई छई आ अई मे दांत घीसाई छई ।अकरा आहां दांत चोख केनाई बुईझ सकई छी। सामने बला दांत के घईस क तिकोना नोखगर बनायल जाई छलई। जखईन ई पुरा भ जाई त दांत देखबा मे " V " आकारक लगई। जेना मिथिला मे हर रीति रिवाज क पाछु आध्यात्मिक तर्क सुनबा मे आयत, ओहिना अतऊ सुनबई। अकर सबहक मान्यता छई जे दांत भराई भेला स मनुक्ख मे लोभ, क्रोध, ईर्ष्या आदि विकार सब कम भ जाई छई।मनुक्खक भीतर विद्यमान जे पाशविक प्रवृत्ति होई छई, ओई स मूक्त भ जाईत छई। किछु जनजाति सब मे ईहो कहब छई जे दांत घिसाई यज्ञक बाद बच्चा, वयस्क भ जाईत अईछ। अकर बाद ओकरा सहवासक अनुमति आ विवाह क लेल योग्य घोषित क देल जाई छई। ई तिकोना दांत के सुंदरता क मानक ई सब मानई छई। ई भेलाक बाद स्त्रीगण के पुरूख प्रेमी भेटबाक संभावना बईढ जाई छई। ओहिना पुरुख के प्रेमिका भेटबाक। अई दांतक प्रथा मे जनजाति सब मे मतैक्य नई छई।कीछु मे कोनो दांत त कीछु मे कोनो आर। कीछु जनजाति सबहक कहब छई जे शरीर आ आत्मा, दुनु अलग अलग होईत छई। ज्यों शरीर, आत्मा के प्रसन्न नई करतई त आत्मा अई शरीर के छोईर दई छई।आ मनुक्खक मृत्यु भ जाईत छई। ओही लेल शरीर के आकर्षक होबाक चाही, तखने आत्मा ओईमे बास करतई। जूलियस न्यरेरे अतऽ ईसाई धर्म क बारे मे जानई बुझई लेल चौदह माईल दुर मिशन मे जाई छलाह। ई ओहिना बुझाईत अईछ जेना लाल बहादुर शास्त्री गंगा नदी हेल क पढऽ जाई छलाह।कष्ट स भेटल शिक्षा बेशी लाभप्रद बुझाईत अईछ। आजुक अफ्रीकी सब ई सब बात पुछला पर हंईस क टाईर देत। अखनो सुदूर क्षेत्र मे ई सब परिपाटी चईल रहल छई। अकर जईर बहुत गहीर छई। -�- ई सबके बुझल छई जे दशरथ मांझी" माउंटेनमैन" के पहाड़ काटबाक प्रेरणा, हुनक पत्नी के कारण भेलईन। ई प्रेरणा ककरा आ कतऽ स अबई छई, अकर आकलन पहिने सऽ केनाई समझ बुझ स बाहर छई। कखनो काल एकरंगाहे परिस्थित सोझां अबई छई। युगांडा मे एकटा स्थानीय लोक के बारे जानकारी भेटल कि ओ मगरमच्छ पकड़बा मे सिद्धहस्त छईत। ईनकर ई गुण हमरा उद्वेलित कैलक जे ई "महाशय" ईयाह क्षेत्र कियाह चुनलाह। जखईन ईनकर बारे मे पता केलऊं त ई जानकारी भेटल जे 2015 मे हिनक पत्नी के एकटा मगरमच्छ खा लेलकईन। ओकर बाद ई मताऽ गेलाह। ओई मगरमच्छ के खोज मे दिन राईत लाईग गेलाह। बड्ड मशक्कत आ लंबा मेहनत के बाद ई अपन मिशन मे सफल भेलाह।इनकर प्रयास स वो खुनी मगरमच्छ पकड़ल गेल आ ओकरा दोसर जगह विस्थापित कैल गेलई। ईनकर कहब छलईन जे ई मगरमच्छ ईनका विधूर आ तीन संतानके बिन माय बला बना देलकईन। ओकर स्त्री खेती- बाड़ी मे ओकरा संग दई छलई।अई स ओकर ऊपजा बारो खुब होई। आब ओ असकर की की करितय? सब घर गृहस्थी ओकर चौपट भ गेलई।अही ल कऽ वो नियाईर लेने छल जे अई मगरमच्छ के त नईये छोड़तई। ईयाह भेभो केलई। अदना सन लोक, जुनुनी भ कऽ मगरमच्छ पकड़ऽ के लेल अपना इलाका मे जनाय लागल। आब ओकरा आन- आन जगह स भी मगरमच्छ पकड़ई लेल बजाहट आबऽ लगलई। ई एक दिनक काज नई होई छई। अई मे जानक सदिखन खतरा आ कयेक दिन राईत के एक करऽ परईत छई ओ अतुका सरकार स जीवन यापन लेल मददक गुहार कैलक अछि। सरकारी अधिकारी के कहब छईन जे अई महानुभावक बारे मे हमहुं सब सुनलऊं अछि। ईनका एमहर - ओमहर झटहा फेकलाक जगह सही जगह पर आवेदन दईथ। फैसला त कागज पर हेतैक ने। कहला सुनला स सरकारी कागज थोड़हे बढ़ई छई। आब इनकर काज चर्चा मे आईब गेल छईन, किछु पारिश्रमिक भेटबे करतईन। ईहो लोक एहन ने मगरमच्छक शिकार मे डुबल छथि जे दोसर काज आब ई कऽ नई सकई छथि।ईनका किछु प्रोत्साहन राशि भेटईत रहतईन त सरकारो लेल नीक। निरीह गामक लोकक जीवन मगरमच्छक निवाला होबऽ स बचत। ई भारतक आदमखोर बाघ जकां भेल।जकर शिकार जंगल मे रहनिहार मनुक्ख होईत रहईत अईछ।अतऽ अखनो गामक लोक सब पाईनक लेल झील पर निर्भर अईछ। अही पाईन लेल जखईन गामक लोक झील मे घुसईत अईछ, ताक मे बईसल मगरमच्छ ओई मनुख के अपन भोजन बना लईत अईछ। अई परिस्थितिक मारल आ बनल मगरमच्छक शिकारीक नाम मुबारक मुनाफु आल्या छई। ई अपन काज मे सतत लागल अईछ। अकर प्रसिद्धि क रफ्तारक ग्राफ तेजी स बईढ़ रहल छई। ओ दिन दुर नई जहिया ईनका मगरमच्छक नामी शिकारीक तगमा नई भेट जाईन। ओना मगरमच्छक शिकारीक रुप मे युगांडा क पीटर आवांग के नाम सबस॔ ऊपर अबई छई। अतऽ किछु लोक के कहब छईन जे करीब 1200 मगरमच्छ छई, ओई मे 120 क करीब पीटर के पकड़ल छई। युगांडा मे स्थानीय लोकक आब ई कहब छई जे मगरमच्छ सब आब माछ खेनाई छोईर देने छई।ओ आब मनुक्खक तलाश मे रहईत अईछ। ई ओहिना भेल जेना बाघ जखईन एक बेर मनुक्खक शोणित चीख लईत अईछ त फेर ओ जानवरक शिकार छोईर दईत अईछ। पुर्वी अफ्रीका मे कतेक मगरमच्छ छई, तकर ठीक ठीक गनती अखनो नई भेल छई। अई मे आदमखोर मगरमच्छ कतेक, ई आर कठिन सवाल छई। ई आदमखोर मगरमच्छ सब बड्ड चुस्त आ चालाक होईत अईछ। ई गदहबेर, बीच राईत आ भरल दुपहरिया मे शिकार ताकऽ निकलईत अईछ।कियैक तऽ अई समय माहौल एकदम शांत रहईत छई। 2005 ईस्वी मे त एकटा एहन मगरमच्छ पकरायल छलई जकर वजन एक टन छलई। अकरा बारे मैं कहल जाई छई जे ई 83 टा मनुक्ख के पिछला 15 बरख मे खा चुकल अईछ। अई आदमखोर प्रवृत्ति क पाछु लोकक कहब छई जे अतुका झील सब मे माछ कम भ गेल छई आ आसपास मनुक्खक रहनाई बेशी भ गेल छई। अहिनो कही सकईत छी जे माछ महंग आ मनुक्खक जान सस्त भ गेल छई। मनुक्ख माछ खेलक आ मगरमच्छ मनुक्ख खा रहल अईछ। ओना त मगरमच्छक मुख्य भोजन माछ छई आ ई सब 90 स 100 बरख तक जीबईत अईछ। अकरा पकड़ऽ के तरीका अलग अलग छई। रतुका समय मे शिकारी सब नाव स झील मे जाईत अईछ आ बड़का टार्च स ईजोत चारु कात करईत अईछ। मगरमच्छक आंईख अई ईजोत पर नारंगी रंग मे चमकऽ लगईत छई। अकर बाद शिकारी सब जाल फेक क अकरा फंसबईत अईछ। दिन मे बेशीतर मगरमच्छ सब झीलक कातक भूमि पर परऽ आईब जाई छई।परले मे शिकारी सब अकर रस्सी स जकईर क भाईग जाई छैत। फेर कने काल बाद काबू क लई छैत। मुर्गा वा आन जानवर के लालच दिया कऽ अकरा शिकारी सब फंसबई छईत आ ऊपर - नीचा दुनु जबड़ा के बांईध क काबु करईत छईत। नील नदीक मगरमच्छ सबसं बेशी आदमखोर कहल जाईत छ्ई।हर साल करीब 200 मनुक्ख के जान ई नील नदीक मगरमच्छ सब लई छई। अई धरती पर भेटयबाला सब जानवर स बेशी " काटबाक" शक्ति मगरमच्छ मे होईत छई। ई शक्ति करीब 500 पाऊंड क बराबर कहल जाईत छई। किछु स्थानीय लोकक अनुसार अतुका मगरमच्छ सब पहिने जंगली हिरण आ जेब्रा के खाई छलाय। झीलक चारु कात ई जानवर सब खुब रहईत छलई।मनुक्खक मांस भी अहिनाहे होई छ्ई, तैं मगरमच्छ मनुक्खो के खेनाई शुरू क देलकई।कतेक एकरंगाहे छई? असली बात त ऊयाह कहत जिनका मनूक्ख आ जेब्रा आ हिरण सबहक स्वादक अनूभव होईन। ओना ईहो कहब छई , एकबेर जे मगरमच्छ भईर पेट खा लईत अईछ, त ओकरा महिना दिन किछु खयबाक जरुरत नई छई। ओकरा शरीर मे पाचन क्रिया धीरे धीरे होईत रहई छई। जेना ऊंटक पाईन पीबाक बारे मे भारत मे सुनल जाई छई। आई काईल तस्कर सबहक नजर सेहो अई पर छई। अकर चमड़ा, मांस आ लिंगक कीमत विश्व बाजार मे बहुत छई। अकर लिंगक मांस खेलाह स काम- शक्ति बढ़बाक बात चर्चा मे छई।अही सब लेल अतूका वन्य प्राणि विभाग अकर संरक्षण मे लागल अईछ। खाली आदमखोर मगरमच्छ के पकड़ई लेल कोनो हद तक जयबाक अनुमति देने छई। अई सब तरहे ई स्पष्ट बुझाईत छई जे मगरमच्छक समस्या पुर्वी अफ्रीका मे भयावह छई।अपन पत्नीक मृत्यु स आक्रोशित भ मुबारक मुनाफु मगरमच्छ पकड़ऽ के अभियान मे जुटल अईछ। ई काज "पहाड़ काईट क रस्ता बनबऽ " स कनियो कम सामाजिक सरोकार वाला नई अईछ। ओकरा अपन मिशन मे सफलता भेटई आ माउंटेन मैन जकां अकरो यश भेटई। _____________ अफ्रीका मे एकटा बड़का रोजगार क्षेत्र छई, ओ छई " सुरक्षा कर्मी क।" संसारक सब पैघ सुरक्षा कम्पनीक बजार अफ्रीका मे फल फुईल रहल छई। बहुत देश मे त इमरजेंसी नम्मर प्राइवेट सुरक्षा कम्पनी क देल जाई छई, नई की सरकारी पुलिस थाना क।ई प्राइवेट कम्पनी के सेवा भी तहिना बढ़िया रहई छई। अगर सुरक्षा कर्मी क आबऽ मे विलंब भेलई, त कान्ट्रेक्ट मे दंडक प्रावधान सेहो रहईत छई। जेहन सुरक्षा चाही, तेहन डांर ढील करऽ परत। ढऊआ खर्च करु आ सुरक्षित रहु।सरकारी पुलिस स बेशी दरमाहा आ सुविधा प्राइवेट सुरक्षा कम्पनी वाला दई छई। ओही स, पहिने प्राइवेट मे लोक प्रयास करईत अईछ, असफल रहला पर सरकारी मे आईब जाईत अईछ। भारत मे सेहो पुलिस सेवाक लोक निजी क्षेत्र मे जाय लगलाह अईछ। बेशी लोक सेवानिवृत्त भेलाक बाद निजी क्षेत्र मे जाईत छईथ। सरकारी पेंशन आ ऊपर सं नबका नौकरी क दरमाहा आ सुविधा ।हम जखईन दिल्ली मेट्रो मे पदस्थापित रही त तहिया जे निजी सुरक्षा कम्पनी मेट्रो मे लागल छलई, ओई मे सीमा सुरक्षा बल क सेवानिवृत्त महानिरीक्षक कार्यरत छलाह। दिल्ली मेट्रो क सुरक्षा विभाग मे सेहो दिल्ली पुलिस क सेवानिवृत्त निरीक्षक कार्यरत छलाह। ओतबे नई, भारतीय पुलिस सेवाक जे अधिकारी केन्द्रीय सतर्कता आयोग तरफ सं पदस्थ छलीह, ओ किछु बरखक बाद भारतीय पुलिस सेवा स इस्तीफा द अई निजी सुरक्षा कम्पनी मे ज्वाईन क लेलीह। अई तरहक नियुक्ति विदेश मे संदेह क दायरा मे अबईत छई। अपन देश मे " सब चलता है " क मानसिकता अई तरहक नियुक्ति प्रथाक बढ़ावा दई छई। अखनो दिल्ली मेट्रो मे सुरक्षा प्रमुख जे छईथ, वो भारतीय पुलिस सेवा स रिटायर्ड अधिकारी छईथ।हालक दिन मे कयेक टा दिल्ली पुलिस क निरीक्षक सब सेहो स्वेच्छिक सेवानिवृत्ति ल कऽ दिल्ली मेट्रो ज्वाईन कयलाह अईछ। अई पर रोक लगबाक चाही, कियैक भारत मे बेरोजगारी भी बहुत छई आ टैलेंट भी अपार छई। कहलो गेल छई जे डाक्टर, मंत्री आ सुरक्षा क प्रमुख ओई व्यक्ति के बनाबी जे निर्भीक होईथ। " सत्य" सलाह देबाक साहस होईन। सही नियुक्ति नई क कऽ, "यस मैन" के वरीयता देला स नाशक सिवा किछु नई होई छई। " जब नाश मनुज पर छाता है, बुद्धि विवेक सब मर जाता है ।"अफ्रीका मे अई तरहक "मोरल इंटीग्रिटी " पर बहुत जोड़ रहईत छई। जहिना नियुक्ति क प्रक्रिया आसान, ओही स बेशी बर्खास्तगी प्रक्रिया सरल देखबा मे अतऽ आयत।ई व्यवस्था समयक जरूरत छई। युगांडा मे शहरी क्षेत्र मे निजी सुरक्षा कर्मी चारु कात देखैत। एक त सस्त छई आ दोसर अकर रहला स कनीक सुरक्षा क भाव त अबिते टा छई। हमरा अई गार्ड सब स गप करबाक मे बड्ड नीक लगईत अईछ। ई सब अनुशासित आ हाजिर जवाब होईत अईछ। सब घर, कोठी आ आफिसक आगु, गार्ड रुम बनल भेटत। अतई अखबारक हाॅकर रोज अखबार द जाई छई। जाबईत घरबईया वा आफिसक लोक लग अखबार जेतई, ताबत सुरक्षा कर्मी सब अखबार के चाईट जाई छई। ई सब वैवाहिक विज्ञापन स ल कऽ शोक संदेश तक पढई छई। अकरा स अखबार क कोनो समाचार पुईछ लियह, पुरा अद्यतन जानकारी बतायत।जेना अपना सब कतऽ चाहक दोकान, सैलुन आदि पर लोक अखबार पढईत भेटत, ओहिना गार्ड रुम सब मे । अखबार पढई लेल, कनेक इमहर ओमहर ई सब चलियो जायत। ई देश दुनिया क बारे मे जनबाक जिज्ञासा अकरा सब के तार्किक सेहो बनबईत छई। सामान्य भारतीय क अफ्रीका क बारे मे ओतेक ज्ञान नई छईन, जतेक अकरा सब के भारत, पाकिस्तान, चीन सबहक बारे मे छई। गरीबी अलग बात होई छई आ ज्ञानी दोसर बात छई। अई मामला मे पुरा मैथिल बला हाल छई। मैथिलक विद्वता के कोनो सानी नई। आत्म विश्वास क बाते अलग। गाम सब मे हमरा कतेक एहन लोक स भेट अईछ, जे कहियो दिल्ली की, पटनो नई गेल छईथ आ ऊनका स नार्थ ब्लाक, साउथ ब्लॉक, संसद , लालकिला सब हक चर्चा एना सुनबईन जेना छह महीना दिल्ली मे हर साल रहई छईथ। अहिना युगांडा मे लोक सब के वर्णन क शैली अद्भुत छई। अई सबहक पाछु हमरा ईयाह समाचार पढबाक आ गुणबाक प्रवृत्ति लगईत अईछ। युगांडा मे स्थानीय अश्वेत सबहक खिलाफ सबसं पैघ दोषारोपण ई छई कि ई सब " पाई" क मामला पर ईमानदार नई छई। कहबाक तात्पर्य ई जे पाई देखते अकर सबहक ईमान डोईल जाई छई। पाई के हिसाब किताब " लेखा विभाग " करई छई।अई मे ईमानदारी बहुत जरूरी छई। भारतीय उद्योगपति सब अई काजक लेल भारतीय सब के नियूक्त करई छईत। तर्क ईयाह जे भारतीय कर्मी ईमानदार होयत आ पाई ल क नई भागत। अकर बदला मे नीक दरमाहा अतऽ भेटई छईन। अकाउंट क योग्यता गौण, आ ईमानदारी मूख्य पैमाना होई छई। अतऽ भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट ( CA) सब बहुत गोटे कार्यरत छईथ। अई बरख स सी ए क परीक्षाक केन्द्र कम्पाला सेहो भ गेल छई। बहुत लेखा विभाग मे कार्यरत भारतीय जे पुरा सी ए क परीक्षा नई पास कैने छईथ, ओ आब कम्पाला मे परीक्षा द क पास क सकई छईथ। ईनका सब लेल ई वरदान स कम नई छईन। सी ए बनबाक मौका हाथ मे आईब गेलईन। भारत मे पास सी ए सब के एकटा स्थानीय परीक्षा पास करऽ परई छईन, तकर बाद अतऽ निजी प्रैक्टिस क सकई छईत। अपन सी ए कम्पनी खोईल सकई छईत। जेना भारत मे आहां अपना नाम स सी ए कम्पनी खोईल सकईत छी, ओना युगांडा मे कम्पनी के नाम राखऽ मे किछु बंधन छई। आहां कैट, डाग आदि नाम पर कम्पनी राईख सकई छी। अमेरिका मे सेहो आहां घरक आगु " नेम प्लेट" नई लगा सकईत छी। खाली घरक नम्बर लिखु सकईत छी। भ सकईत होई नस्लीय कोनो कारण होई अकर पाछां। एक टा महिला सी ए भेटलीह। ओ तीन साल नौकरी आ दस साल सं प्रैक्टिस क रहल छईथ। भारतक दस लाख रूपया महिना स बेशी आमदनी छईन। अपन काज अ अतूका समाज स बहुत संतुष्ट छईथ। ऊनका युगांडा मे आबऽ बला समय मे अई क्षेत्र मे रोजगार क बहुत अवसर देखा रहल छईन। आई के तारीख मे तीन टा भारतीय महिला सी ए अतऽ स्वतंत्र रुपे प्रैक्टिस करईत छईत। ओ सब अपना जाॅब स॔ संतुष्ट छईथ। ऊनका सब के कवनो तरहक परेशानी अतऽ महिला भेलाक कारणे नई भेलईन। आनो लोक अतऽ आईब क अई क्षेत्र मे भाग्य अजमा सकई छईत। -�- ओई दिन बुंदा बुंदी दुपहरिये स भऽ रहल छलई। मिथिला मे जकरा " लधने" कहल जाई छई, से हाल छलई। ओना कम्पाला मे एना लधनाई नहिये बराबर होईत छई। घंटे घंटा मौसम बदलईत रहत। सांझ मे अतऽ बरखा क संभावना बड्ड कम रहई छई।रतुका बेशी पार्टी खुल्ले मे होई छई। जहिना खुलल मौसम, तहिने खुलल स्थानीय समाज ।उम्मीद छल जे सांझु पहर उबेर भ जेतई। मूदा ओई दिन से नई भेलई। कम्पाला के ट्रैफ़िक जाम दूनिया मे बदनाम छई। जहिना प्रिटोरिया मे ट्रैफ़िक व्यवस्था व्यवस्थित, ओहिना कम्पाला मे अकर उगरा भांर। कारण बहुत रास छई, लेकिन ओकर विवेचन कखनो आर।बरखा भेल, त बुझु जे महाजाम।आ अतऽ बरखा होईते रहई छई। इक्वेटर पर रहलाक प्रतिफल छई। अई महाजाम मे रेडलाईटक दुनिया अलबेला भ जाई छई। "रेडलाईट" शब्द सुनिते सब सं पहिने "वेश्या " स्मृति मे अबई छई।अतऊ रेडलाईट पर चारु कात छिड़ियायल युवक- युवती सब। वेश्यालय मे त शरीर बेचाई- कीनाई छई, लेकिन अई रेडलाईट पर समानक खरीद- बिक्री । ओहो खुईल कऽ, मोल- जोल सेहो।अकर ई मतलब नई निकाईल लेब जे सड़क पर समान बेचनाई वैद्ध छई।भारत जकां अतऊ ई खरीद- बिक्री गैरकानुनी छई। आ भारते जकां रेडलाईट पर बजार चलियो रहल छई। अतऊ सिविल विभाग छापा मारई छई, धर- पकड़ होई छई। रिजल्ट - ऊयाह ढाकक तीन पात। जहिया छापा पड़तई आ पड़ल हेतई, तहिया के गहमागहमी अलगे बुझा जायत। भारते जकां अतऊ छापाक सुचना अग्रिमे पहुँच जाई छई। भारतीय रेल होई वा चौक- चौराहा, सब जगह ई ध॔धा जीवंत भेटत। अनमन ओहिना कम्पाला मे आहां के अनुभव होयत। हम साउथ अफ्रीका सं पुर्वी अफ्रीका आयल छलऊं। ताहि लेल सुरक्षा खातिर बेशी सशंकित रही। पहिल एक बरख त हम कम्पाला मे रेडलाईट पर नई कहियो गाड़ी के शीशा खोललऊं आ नई किछु कीनलऊं। मुलागो रेडलाईट पर धीरे धीरे चेहरा सब चिनहाय लागल। मुस्का- मुस्की हुआय लागल। घंटा क करीब समय बितबऽ पड़तई, त मनुक्खक बीच गाड़ी क शीशा कतीक काल बाधक बनतई। हमरो सब चेहरा जानल चिन्हल लागऽ लागल। अई रेडलाईट पर गामक हाट जकां सब वस्तु जात बिकाईत छई जेना कपड़ा, जुता - चप्पल, बिजली आ इलेक्ट्रॉनिक समान, बर्तन, लकड़ी क कलाकृति सब, तरकारी आ तमाम तरहक फल, मोटर पार्ट्स, मसाला , खाय- पीयक सामग्री आदि। हमरो मोन पथिया मे राखल पाकल पाकल आम देखि क ललचाय लागल। एक दिन डराईते डराईते एकटा सं भईर पथिया आमक मोल पुछलियई। ओ आम बेचनिहार स्त्री , हमर सवाल सूईन क अकबका गेली। ओकरा त एकटा दु टा आम बेचबाक आदत छलई। ओ हमरा स॔ फेर स्पष्ट करेलक जे हम की पुईछ रहल छियई। हम जखईन ओकरा फेर आश्वस्त केलियई, तखईन ओ कनीकाल सोईच कऽ हमरा भईर छिट्टा आमक मोल बतेलक। हम ओतुका माॅल मे जे आम खरीदई छलऊं, ओई स बहुते सस्त हमरा लागल। आब ई कोन आम आ केहन स्वाद, खेलाक बादे पता चलत। हमरा त कलकतिया आ भदई आम सेहो नीक लगईत अईछ, ओही आत्म विश्वास पर जे केहनो स्वाद हेतई, हम आखिर सधाईये लेब। हम ओकर सबटा आम कीन लेलियई। घर घुरला पर अतेक आम देखला पर श्रीमतीजी पहिने त नाराज भेलीह, जखईन हम अतेक आमक " मोल" बतेलियईन आ आम खयला बाद सम भाव मे भ गेलीह। नई बराई आ नई बुराई । पति के खरीददारी क प्रशंसा हुआय, ई संभवे नई थीक। आलोचना नई भेनाई भी प्रशंसे भेल। अहिना हमर रेडलाईट पर खरीदारी के शुरुआत भेल। आब अपना अफसोस हुआय जे अतेक महंग कियैक आम अखईन तक किनईत छल॔ऊ। एक दिन अहिना सांझ मे घर घुरईत काल रेडलाईट पर रुकल रही। हमरा त ई रेडलाईट कृत्रिम लगईत छल। ई हाॅकर सब के ट्रैफ़िक पुलिस सं पक्का सांठ गांठ छई। जाईन बुईझ क मैनुअल ट्रैफ़िक चलबई छई। ओतुका स्थानीय लोक के समये समय छई। ओ सब आराम सं इंतजार करईत रहत। आब त आर मोबाइल भ गेल छई। ओही मे लागल रहत। भारत मे एना होई त ततेक ने हार्न बाजऽ लगतई, जे अंत मे ट्रैफ़िक चलबहे पडतई। देखई छी जे पच्चीस तीस बरखक स्वस्थ, आकर्षक आ अनचिन्हार युवती हमर गाड़ी के आगु मुस्कियाईत ठार अईछ । ओ किछु कही रहल छल। हम गाड़ी के शीशा कनेक नीचा केलऊं। सुनबा मे आयल- " ओई दिनक आमक स्वाद केहन लागल। हमरे स॔ आहां भईर छिट्टा आम कीनने रही।" आब हम गौर सं देखलियई। चिन्ह मे कनिको नई आयल। ओकर गप करबाक ढंग स बुझा गेल जे हमरे बारे मे कही रहल अईछ। ईयाह होई छई विदेश मे । छह महिना बादो कोनो दोकान मे जायब त ओ आहां के पहिचान जायत। ई ओहिना भेल जेना एकटा अंग्रेज कतऊ चईल जाय। सब मुरकेरी देने भेटत। आब बुझायल ओई दिन हमर नजईर त आम पर छल।ओहु मे सस्तऊआ पाकल आम। आब ओकरा दिस नजर स्थिर क देखलियई। बहुतही सहज मुस्कान ओकर चेहरा पर आईब गेल छलई। अन्जान देश मे एना अपनैती स भरल आम लेबाक आग्रह केलक। नई , नई कहल गेल। अहिना आब धीरे धीरे ओकरे स हम गाहे बेगाहे आम कीनऽ लगलऊं। अई आम के वो सब " एपल मैंगो" कहई छई। हमरो ई आम देखऽ आ खाय, दुनु मे नीक लागय लागल। ई नई छलई, जे मोल मोलई हम नई करी। कयेक बेर ओ पहिने मना करय, मूदा बाद मे हमर भाव पर द दियैह। नईयो आम कीनियई, तखनो हाय- हेलो आ परनाम पाती हेबे करय।ओ आब अपन आन संगी हाॅकर सब स सेहो भेट करबऽ लागल। ई सब किछु ओतबे काल मे होई, जतबा काल रेड लाईट पर हम रुकी। आब रेडलाईट हमरा बोझ नई लागय।आब हम मोने मोन अतुका ट्रैफ़िक व्यवस्था के गाईर नई पढियई। सब किछु सामान्य चलई छल। कयेक दिन पुरा ट्रैफिक निर्बाद्ध सेहो चलई छल। एक बरख सं बेशी अहिना बीत गेल छल।इमहर दू - तीन दिन सं ओ आमवाली हमरा रेडलाईट पर नई अभरईत छल। एक दिन अनायास हमरा ट्रैफ़िक जाम के शुरूये मे भेटल। आई ओकर आमक दाम महग छलई। हम जतबा रेट मे पहिने कीनई छलऊं, ऊयाह मोल कहलियई। ओ अई रेट पर नई तैयार भेल। कहलक-" ई रेट मुनासिब नई छई। आहां दोसरो आमवाली स पुईछ लियह। हमरा स कम रेट पर कियौ नई देत।" हम कहलियई- " आहां पहिनेहो अहिना बेशी दाम बतेने छी। बाद मे हमर दाम माईन लेने छी। आहां हमर दोस्त छी। पुरान ग्राहक छी। हम आहां क खुशी लेल आहां के द दई छी। विशेष छुट अपना दिस स हम द दई छी। हम आश्वस्त रही जे ई अई भाव मे माईने जायत। जखईन नई मानलक, हम किछु रेट बढेलियई। तखनो ओ नई मानलक। आब वो कहलक- " देखु। पहिने हम आहां के द दई छलऊं।आई हमर रेट स कम नई होयत। हमर हाथ देखु। तीन दिन पहिने घर जायकाल दुर्घटना मे चोटिल भ गेल छलऊं। अतऽ हम आम बेचऽ अबितो न्ई छलऊं। आइ एक्सीडेंट के बाद पहिले दिन ऐलऊं अईछ। देखु हाथ मे कतेक चोट अईछ।" हमरा देखु। हम ओकर बात पर कोनो ध्यान नई देलऊं। ताबईत ट्रैफ़िक आगू घसकलई। हमरा भेल कि वो पाछु स अयबे करत। हम गाड़ी के साईड मिरर मे ओकरा ताकई छलऊं। वो नई आयल। आब हम जांचक लेल दोसर आमवाली स भाव पुछलियई। अकर भाव त आर महंग। आब हमरा अपन आमवाली क कहल बात याद आबऽ लागल। " हमरा स सस्त कियो नई देत। आहां पुईछ लियऊ।" हमरा जेकां अविश्वासी देखु। चोरऊका मोल पतो क लेलऊं। आब अपना व्यवहार पर पश्च्ताप होबऽ लागल। वो अपन बुईझ कऽ एक्सीडेंट के बात कहलक आ हम दाम कम करबा रहल छलऊं।हम ओकर चोट क तरफ ध्यानो नई देलियई। बुझाईत अईछ वो दुखी भ गेल। हमर व्यवहार स आहत भ गेल अईछ। तैं नई घुईर क आयल। आई तक एना नई भेल छलई। वो कयेक बेर अबई छलाय। हम किछु चुहुल क दईत छलियई। वो हंसिते रहय आ अंत मे हमरा आम पकडाईये दई छलाय। हमर नजईर बार बार साईड मिररमे ओकरा तकई छलई। ओकर कोनो पता नई। हम मोने मोन निर्णय कैलऊं जे जखने भेटायत हम अपन व्यवहार पर क्षमा मंगबई आ आम ओकरे दाम पर कीन लेबई। भ सकईत हो, ओकरा भरल आमक छिट्टा ऊठबऽ मे तकलीफ होई, घर मे चुल्हा नई जड़ल होई, तैं आम बेचऽ आयल हुआय।हमरा ई दु टा पाई बचेला स की होयत। आब कहियो मोल मोलई नई करबई। वो आईब त जाय। मोन हुआय जे आन हाकर के कहियई ओकरा बजबई लेल। हमरा त ओकर नाम- गाम किछु नई बुझल अईछ। ओना लंबा कद आ निश्छल हंसी ओकर पहचान छई। हम त अही स चिन्हई छीयई। ओकर हंसी सबस॔ अलग छई। अतबा बतेबई त ओकरा लग समाद चईल जेतई। फेर लोकलाज ई सब करबा स रोईक देलक। ईयाह उधेरबुन मे फंसल रही। अजुका ट्रैफ़िक जाम आन दिन स बेशी छल। लेकिन आई मोन अकच्छ नई भेल। ओकर इंतजार मे रही कि आईब जाय आ हम आम बिन मोलौने कीन ली। ओ नईहे आयल। ट्रैफ़िक चईल पड़ल। हम कुमोने सिग्नल पार कय रहल छलऊं। तखने कतऽ स एकटा पुलिस वाला हमरा रुकय लेल इशारा कयलक। ईमहर हम रूकई छी कि ऊमहर स वो आमवाली आईब रहल छल। वो सीधा हमर गाड़ी लग आयल- " आहां अखईन तक अतई छी। आई के जाम बड्ड भयानक। हमरा भेल की आहां चईल गेल होयब।" हम कहलियई- " हम आहां क एक्सीडेंट क बारे मे नई पुछलऊं, ताहि लेल साॅरी फील क रहल छी। जल्दी स आम हमरा द दीयह। ई लीयह पुरा पाई। बिना मोल मोलई। वो हंसऽ लागल। कहलक " आहां बहुत नीक छी। अपन देश हमरा ल चलु।" ठीक छई। आहां के हम ल चलब। अखईन जल्दी स आम दीयह। वो हंसईत गाड़ी क डिक्की मे आम रखलक । ट्रैफ़िक पुलिस हमरा आगु बढबाक इशारा क रहल छल। हमर गाड़ी आगु बढ़ल आ माथ परहक पश्चातापक बोझ ऊतरल। एना बुईझ पड़ल जे मानो कोनो पूर्व जन्म क ऋण स उऋण भेलऊं । ______________ दुनिया के सब देश मे रंग भेदक परिभाषा अलग अलग छलई।नब पीढ़ी के लोक अकर गंभीरता क अंदाजो नई लगा सकई छथि। भारत मे ओना आन आन सामाजिक कुरीति सब छलई, जकर असर अखनो देखबा आ सुनबा मे आईब जाई छई। अंग्रेज सब भारत क किछु कुरीति सब पर अंकुश लगेबाक लेल कानुनो बनेलक आ ओई मे बहुत हद तक सफलो भेल। अहिना एकटा रंगभेदक अनोखा कानून क बारे मे हमरा युगांडा मे पता चलल। भ सकईत अईछ जे आरो देश सब मे ई कानून लागू होई। समय छलई 1931क ।डायोनाईसीयस बामुंडागा नामक एकटा अश्वेत डाक्टर , सरकारी अस्पताल, मोयो,वेस्ट नील क्षेत्र, युगांडा मे पदस्थापित छल । ओही समय मे नील नदी जकरा संसार क सबसा लंबा नदी सेहो कहल जाई छई, ओई पर अंग्रेजी हुकूमत पन बिजली परियोजना लगबऽ के बारे मे रिसर्च क रहल छलाय। पन बिजली संयंत्र कतऽ लगेनाई उचित, अई पर अग्रिम गहन चिंतन आवश्यक होईत छई। जल्दबाजी क हश्र की होई छई, से भारत क उतराखंड मे आयल त्रासदी स सीख लेल जा सकईत छई। ताहि सभय मे ब्रिटिश सरकार अई विषयक विशेषज्ञ सबहक दल युगांडा मे बजेने रहय। ओ टीम अपन दिन- राईत रिसर्च मे लागल रहय।अही दरम्यान एकटा दुर्घटना घईट गेलई आ ओई टीमक एकटा सदस्य गंभीर रूप स चोटिल भ गेलाह। कम्पाला ओतऽ स दुर छलई। आनन-फानन मे उनका लगीचक अस्पताल, मोयो ल जायल गेलईन।ओतई डाक्टर बामुंडागा पोस्टेड छलाह।ओ मरीज के जांच कैलखिन।खुनक रिसाव बेशी भ रहल छलई। आर कोनो उपाय नई देख, जेब्रा जानवरक केश सं स्टीच क देलखिन। अई स खुन बहनाई रूईक गेलई आ मरीज कम्पाला ल जाय जोगर भ गेलई। कम्पाला अस्पताल पहुंचला बाद ओतुका डाक्टर सब सर्जरी केलकईन आ मरीजक जान बांईच गेलईन। सब जगह सं अश्वेत डाक्टर बामुंडागा के वाहवाही भेटलईन आ उनकर द्वारा कयल प्राथमिक उपचार क प्रशंसा भेल। अतऽ तक त सब ठीके ठीक रहल। आब शुरू भेल अई काजक जांच- पड़ताल । ओई समय मे कानून छलई जे युरोपियन श्वेत मरीजक स्वास्थ्य क हालात कतबो खराब होई, अफ्रीकी अश्वेत डाक्टर ओकर इलाज नई क सकईत अईछ। ई गैरकानुनी छलई आ अई कृत्य लेल सजाक प्रावधान छलई। अंत मे उयाह भेलई। डाक्टर बामुंडागा पर कोर्ट मे मुकदमा चललईन आ आठ महीनाक जेलक सजा सुनावल गेलईन। जज साहब अपन फैसला मे लिखलाह - " हं ई सच छई जे ई एकटा जीवन के बचेलाह, मूदा युरोपियन मरीजक आपरेशन , अफ्रीकी द्वारा केनाई कानून क खिलाफ छई। अही कानून तोड़नाईक लेल डाक्टर के सजा देल जा रहल छईन।" पहिल बेर अपन ड्यूटी निभेला पर सजा भेटबाक बात अतऽ सुनल, तैं घटना सांझा क रहल छी। ओना मरीज के देखनाई डाक्टरक धर्म होईत छई आ हम सब सुनईत आईब रहल छी- " धर्म करईत ज्यों होबय हानि, तैयो नई छोड़ धर्म क माईन। आई त ओना बेशी डाक्टरक दीन- धर्म " टके " टा छई।ओकर नजईर मरीजक "नब्ज " पर नई भ कऽ, मरीजक "जेबी " पर रहईत छई। जाबईत पाई नई जमा करेबई, मरीज के छुअत नई। अहुं सब अई बात स सहमईत होयब। अई सौ बरख मे दुनिया कतेक बदईल गेलई। पहिने डाक्टर के इलाज कयला पर सजा भेटई छलई आ आब इलाज नई कयला पर भी ओकर खिलाफ किछु नई होईत देखाईत । --------------------- एन्टेबे हवाई अड्डा पर ओई दिन उतरईत सांझ भ गेल छल। हमहु चाहईत छलऊं कि दिन अछईते घर पहुँच जाई। कम्पाला शहरक स्थिति चुनाव क समय मे डगमगायल रहई छई।पिछला चुनावक समय कयेक दिन बिजली गुल रहलई।शहर मे कर्फ्यू जकां माहौल कहां दुन भ गेल छलई। लोक अग्रिमे खाय पीबाक सामग्री जमा क लेने छल। गैसक दु- तीन टा कनेक्शन तक लोक ल लेने छल। बिन गैस, चुल्हा कोना जड़तई। अही तरहे, जकरा जतेक दिमाग चललई, अपन-अपन तरह सं अनिष्ट समयक सामना करबाक तैयारी कैने छल। इयाह सब सुनईत छलऊं। एना भेलई........ओना भेलई.......जे पिछला चुनाव के समय छलाह, वो सब अई बेर अनुभवी मे गणल जाई छलाह। अई बेर त "कोरोना" ल क पहिनेहे स कयेक तरहक बंधन थोपल छई। नौ बजे के बाद स्थायी कर्फ्यू शहर मे कयेक महिना स घोषित छई। सेनाक जवान पुरा शहर मे गमला जकां सजावल छई। वो सब मूंह स बाद मे बजई छई, पहिने ओकर राईफल बजई छई।ऊपर स इंटरनेट सेवा सेहो कयेक दिन स बंद छई।कुल मिला कऽ माहौल प्रतिकूल छलई। एयरपोर्ट स बाहर अबई छी त देखई छी जे हमरा लेबई लेल महिला चालक आयल छईत। ओना एयरपोर्ट सुनसान जेकां लगई छलई। कोरोना ल क बेशी फ्लाईट सेवा शुरू नई भेल छलई। हाय हेलो भेला बाद गाड़ी मे बईसलऊं। पहिल बेर महिला चालक, ओई मे ई अकाल समय, ऊपर स कोरोनाक खौफ आ सामने बिकराल आ रौद्र रुप मे विक्टोरिया लेक। किछु चिंता क रेखा अभरल। हम चट सं दिमाग बहटेरऽ के प्रयास शुरू कयलऊं। अई लेल सबसं बढिया रस्ता छई जे सामने वाला स गप्प केनाई शुरू क दियऊ। अतऽ त "वाला नई", वाली छल। शहर के की हाल? मौसम केहन? चुनाव मे ककर पलरा भारी? कतऽ कतऽ स हिंसाक आश॔का? पिछला चुनाव क हाल? कोरोनाक स्थिति ? देश मे बेरोजगारी क समस्या? युगांडा क कोन भागक लोक बेशी लाभान्वित? भारतीय सबहक युगांडा मे उपस्थिति आदि आदि । ओकरा हम गप मे लटपटा देने रहियई। बीच- बीच मे ओहो कतऊ फोन करईत छल आ ओकरो फोनक घंटी घनघनाईत छलई। चिंताक रेखा ओकरो माथा पर स्पष्ट देखाईत छलई। युगांडा मे एन्टेबे हवाई अड्डा सं कम्पाला मात्र 45 किलोमीटर छलई। समय सवा घंटा कम स कम लगिते छल। साऊथ अफ्रीका मे जोहान्सबर्ग हवाई अड्डा स प्रिटोरिया 65 किलोमीटर छल आ समय कहियो 45 मिनट सं बेशी नई लागल।अई स दुनु देशक शहर, सड़क आ ट्रैफ़िक क अंदाज लगा सकई छी। भईर रस्ता जगह जगह जांच चौकी सब बनल। सब के पुरा खिस्सा फेर स सुनबियऊ। फलाँ काज लेल गेल रही, फलां जगह सं आईब रहल छी, फलां कारण देरी भ गेल, फलां समय सं अई देश मे छी, नियमक पालन करईत अयलंऊ अईछ, ई हमर कार्ड राखु, कहियो सेवाक मौका देब तऽ हमरा खुशी होयत आदि आदि । एक्के बात के बारम्बार बजला सं मोन खींज गेल छल। लेकिन उपाय की? नाटक करईत छलऊं। जबरदस्ती मुस्कियाईत आ साॅरी/ थैंक्यु कहईत घर घुईर रहल छलऊं। आई साते बजे तकक अनुमति छई। हम त नौ बजे के गुमान मे रही। ई गुमान, चारु तरफ पसरल खौफ स उतईर गेल छल। हमरो स बेशी खौफजदा वो महिला चालक छलीह । इनकर नाम "एनया" छलईन। वो ककरो फोन पर अपन भाषा मे निहोरा करईत छलीह- ई हमरा अखईन तक बुझा गेल छल। हम पुछलियईन " आहां विवाहित छी?" नई। आई पतिदेव रहितैत, त आहां नई , ओ परेशान रहितैत जे आहां कोना घर घुरब। हम विवाह पहिने कैने छलऊं। हमरा 14 बरखक बेटो अईछ। आहां तलाकशूदा छी की? हं। आहां तलाकशुदा कही सकईत छी। तलाक न्यायिक प्रक्रिया के तहत भेल होयत? समय बहुत लागल होयत? नई। कोनो कोर्ट कचहरी हम नई गेलऊं। ओतऽ जाय के कवनो अनिवार्यता अतऽ नई छई। तखईन। हम छोईर देलियई ओकरा। किछु लेब- देब करऽ पड़ल होयत? नई। कथी लेब- देब। हम छोईर देलियई। ओ चईल गेल। बस भ गेल आहांक भाषा मे तलाक। आहांक अई विवाह स॔ एकटा स॔तान भेल? हं। एकटा भेल। ईयाह 14 बरखक बेटा अईछ। अकरे संग हम रहईत छी। बेटा क कस्टडी ल कऽ आहां आ घरवाला मे विवाद न्ई भेल? कथीक विवाद होयत। ओकरा छोईर देलियई आ वो चईल गेल। आब कोनो आन स्त्री संग रहईत होयत। बेटा पर अधिकार लेल वो कौनो दबाव नई बनेलक? बेटा हमर तहिया छोट छल। ओकरा पालन पोषण जिम्मेदारी स भरल काज छई। हमर पति के त अई स मूक्ति भेटलई। वो खुशी खुशी गेल। ओना हमरा निजी प्रश्न नई पुछबाक चाही। आहां सबहक संबंध क बीच मे की कारण भेल अलगाव के? हमर पति के एकटा आर औरत सं सबंध छलई। हमरा पता चईल गेल छल। हम नई किछु कहलियई, कियैक वो हमर बेटाक बाप छल। दोसर बात अतऽ बेशी पति अहने भेटत। जखने कियो दोसर औरत भेट जेतई, ओतई मूंह मारऽ लागत। अई स हमरा दिक्कत नई छल। बाद मे वो कहऽ लागल जे आब हम ओई स्त्री के बियाह क कऽ घर आनबई। ई हमरा बर्दाश्त नई भेल। हम अपन घरवाला संग दोसर स्त्री के तर मे नई रही सकई छी। हम साफ साफ शब्द मे अपन पति के बुझा देलियई। वो नई मानलक। हम ओकरा छोईर देलियई। ओकरा होई की हम ओहिना कही रहल छी। आब भोईग रहल छईथ। नई हमरा सनक स्वस्थ आ आकर्षक ओकर शरीर छई आ नई हमरा जेकां मेहनतकशे अईछ। आब कयेक बेर हमर पहिलका पति हमरा संग रहबाक निवेदन कयलक अईछ। हम नई मानलियई। हम अप्पन हालात मे खुश छी। बेटा के नीक स पढा लिखा रहल छी। आहां अपन दोसर बियाहक पक्ष मे नई छी? हम बियाह के पक्ष मे छी। प्रस्ताव सेहो आयल अईछ। ई सब " हाजी" अईछ। ओतऊ फेर दोसर- तेसर स्त्री बईन क रहऽ पड़त। ईयाह मंजूर नई अईछ। हम एक नम्मर मे रहऽ चाहईत छी। एक नम्मर मे त पहिने रहबे करी आहां।अखईन कोनो एक नम्मर बला प्रस्ताव अईछ? जकरा सं अखईन फोन पर गप करईत छलऊं, वो हमर प्रेमी संगी अईछ। अखईन वो गाड़ी ल कऽ आयत। कर्फ्यू रहलो पर वो हमरा हमर घर पहुंचा देत। हमर सब गप वो मानईत अईछ।हम ओकरा ट्रायल पर रखने छी।ओकरो एकटा आर स्त्री संग अंतरंग दोस्ती छई। ईयाह हमरा परेशान क रहल अईछ। ओकरा तरफ स " हां" छई, हमर बेटा के अपनावह लेल सेहो तैयार अईछ। हमही प्रस्ताव लटकेने छी। एकबेर गलती क चुकल छी , तैं अई बेर जल्दबाजी नई करब। हमर शुभकामना आहां संग अईछ। हमर यात्रा लगचियाल जा रहल छल। अतेक दिलचस्प अंदाज मे एनया सब कहईत छल जे थोड़े काल खातिर कर्फ्यू आ कंपाला सब बिसरा गेल छल। हम मोटर ड्राईविंग विधा मे छी। ई पुरुख प्रधान फील्ड छई।सब तरहक पुरूख स हमरा दिन राईत वास्ता पड़इत रहईत अईछ।हम आब पुरूखक मनोभाव खुब बुझऽ लगलियई अईछ।हमर महिला मित्र सब अपन जीवनसाथी के फैसला करऽ स पहिने हमरा स ओकरा भेट करवबई छईथ आ हमर विचार क महत्व दईत छईत। जे नई देलईन, वो पछतेलईन। आहां कहु त हम कही दी जे आहांक मोन मे अखईन की अईछ? अकरा मोने मे रहऽ दियऊ। आहां शुभ शुभ अपन घर पहुँच जाऊ। आहां निश्चिंत रहू। हम घर पहुँच जायब। ईयाह कही हम ओई दिन ओकरा स विदा लेलऊं। सच मे युगांडाक स्त्री क ह्रदय बहुत पैघ होई छ्ई। परिवार आ बच्चा क पालन - पोषण ई सब अपन बूते करईत अईछ। ईयाह ऊमेद मे ई स्त्री सब बच्चाक परवरिश मे कोनो कमी नई छोड़ईत अईछ कि बाद मे ओ देखत। सामाजिक स्थिति देखियऊ जे माय बाप अतऽ बेटीक घर पर नई जाईत छई। रहतई त बेटे संग।बेटी नैहर एतई, मूदा जमायक सासुर अयनाई नीक नई मानल जाईत छई। माय बापक सेवा बेशी बेटी सब के अतऽ करईत देखई छियई, बिना अपना घर पर रखने। अजीब विरोधाभास छई, जहिना किछु मैथिल समाज मे बेटीक घरक अन्न पाईन ग्रहण ऊनकर मायबाप के लेल निषिद्ध कहल गेल छलई।सामाजिक मान्यता मे अतेक समानता दु महादेश के कतऊ ने कतऊ स जोईर रहल अईछ।
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पुरा पुर्वी अफ्रीका मे भारतीय क खिलाफ जे हवा पहिने बहल छई, से कमोबेश एकरंगाहे। केन्या मे 1982 मे एशियाई कहई लेल, वास्तव मे भारतीय के खिलाफ जबरदस्त हिंसा आ लुटपाट भेल छलई। एशियाई आ ओकर प्रतिष्ठान के ताईक ताईक क निशाना बनावल गेल छलई।बाद मे ई हिंसा बीभत्स रुप ल लेने छलई। थोड़बे पाछु जायब त 1980 क तंजानियाक राष्ट्रीयकरण क नाम पर एशियाई के संपत्ति स बेदखलीक बात याद आईब जायत। ओई स पाछु जायब त 1972 क युगांडा क ईदीअमीनक शासन काल मे भेल एशियाई सबहक सर्वविदित निष्कासन मोन पड़त। ई सब एकटा कड़ी मे भेलई आ अई घटना सबहक पाछु मे एकटा समानता देखायत। समय आ सोच आब बदईल गेल छई।केन्या मे संचालित एशियन अफ्रीकन हेरिटेज ट्रस्ट अई तरहक सोच आ समझ पर नजर रखने रहईत छई। अकर स्पष्ट कहब छई जे एशियाई सब अनमन तहिना छईत, जहिना स्थानीय अश्वेत जनजाति सब छई। नैरोबी क नेशनल म्यूजियम मे एशियन अफ्रीकन हेरिटेज प्रदर्शनी क माध्यम स सेहो मानव जाति क क्रमिक विकास आ एशियाई क योगदान क बारे मे दर्शावल जा रहल छई। आई जे आधुनिक केन्या छई, ओकर यात्रा कतऽ आ कोना शुरू भेलई, अई सब बात क जानकारी देल गेल छई। प्रदर्शनी मे, कोना भारतीय सब पहिल बेर पुर्वी अफ्रीका क धरती पर पैर रखलाह आ की की योगदान कयलाह, सब वर्णित छई। एकटा तिकोना नाव पर सवार भ कऽ मानसुन स दु दु हाथ करईत, हिंद महासागर क रस्ता स ई सब अत अयलाह, ईहो झांकी बना कऽ राखल छई। 19वीं सदी मे अई छोटकी नाव सं 34000 भारतीय सब केन्या मे गिरमिटिया मजुर बईन क अयलाह। ई सब ब्रिटिश ईस्ट अफ्रीकन रेल लाईन बनेलाह जे मोम्बासा स कम्पाला तक जाई छलई। कहबी छई जे अई रेलवे लाईन के बनबऽ मे हर एक माईल पर चाईर भारतीय मारल जाई छलाह। अई मे सऽ 28 गोटे अफ्रीकी शेरक ग्रास बनलाह। अही दिल दहलावह वाला बात पर 1996 मे " द घोस्ट एंड द डार्कनेस" नाम स सनीमा सेहो बनल छई। रेलवे लाईन बनलाक बाद भारतीय सब अतऽ तरकारी क खेती शुरू कयलाह। ई सब ओई जमीन मे खेती करई छलाह जे ब्रिटिश क बंदोबस्ती क लेल सुरक्षित राखल जमीन स फराक छलई। जे खेती नई कयलाह ओ भारतीय सब छोटछीन अपन व्यापार करऽ लागल छलाह। ओई समय स्थानीय अश्वेत जनजाति सब कनी मनी खेती आ चरवाहाक काज बेशी करईत छलाह। बाद मे ई स्थानीय लोक सब " अफ्रीका फोर अफ्रीकन्स" क नारा बुलंद करऽ लागल छलाह। नस्ल वाद, राष्ट्रीयता क एकटा मुख्य घटक रहलई अईछ। अगर आहां अंग्रेजक खिलाफ, एशियाई क खिलाफ, केन्या मे बजई छी त आहां राष्ट्रवादी छी।ई तहिना छई जेना आहां हिंदू धर्म क खिलाफ भारत मे बजई छी, त आहां धर्म निरपेक्ष आ बुद्धिजीवी कहायब। अई तरहक एकदिसाह पक्षपाती बेवजह सोच बनबाक जिम्मेदार ई भारतीये सब छईत।ओना आब अई मे सुधार आईन रहल छईत। एकटा खिस्सा प्रचलित भेटत जे अतऽ सब तरहक महग मोटर कार देखबई।पार्किंग लाॅट मे गाड़ी मे खाली अश्वेत बईसल भेटताह। ओना आन जगह, आगुक सीट पर अश्वेत आ पाछु भारतीय बईसल भेटत।कहबाक मतलब " ड्राइवर " स्थानीय अश्वेत सब आ मोटर कारक मालिक भारतीय सब छईत।ईयाह आगु- पाछु बईसबाक कहानी छई। ओना भारतीय मालिकक गाड़ी क चालक भेनाई भी अतऽ नीक नौकरी कहबई छई। अई मे भारतीय की करतई। स्थानीय सब अपने कोनो आर काजक लेल प्रयास नई करईत अईछ। भारतीय सब कयेक टा संस्था सब बना कऽ अतऽ आत्मनिर्भर भ गेल छईथ। लोकक कहब छई जे जखईन 1998 मे अमेरिकी दूतावास, नैरोबी मे आतंकवादी हमला भेल छलई, त ओतुका सरकार मे अकर सामना करबाक लेल कोनो आपदा प्रबंधन तहिया उपलब्ध नई छलई। घंटा क भीतर भारतीय उद्योगपति सब क्रेन आ सवारी ल कऽ घटना स्थल पहुँच गेल।हजारों घायल सब के अस्पताल सब मे पहुँचायल गेल आ आवश्यक सब व्यवस्था सब कैल गेल। ई तहिना छई जेना भारत मे सिक्ख धर्मावलंबी आ आर एस एस क लोक सेवा भावना स पहुँच जाईत छईत। केन्या क एहन कोनो क्षेत्र नई बांचल छई, जतऽ भारतीय क प्रभुत्व नई होई। एतऽ तक की माछ- मछुआरा स जुड़ल व्यापार मे भी भारतीय क कब्जा छई। आई केन्याक हर तरहक समाज, भारतीय सब पर निर्भर छई। अतुका भारतीय के जर्मन ज्यु स तुलना करई छई। कयेक बेर आहां के भारतीय सब के प्रति अपमानजनक काॅमेट सेहो सुनऽ पड़त। की सच, की फुईस। अफ्रीकी इतिहासकार क अनुसार प्रथम विश्व युद्ध मे भारतीय सब तरहे ब्रिटिश हुकूमत के संग रहय। ब्रिटिश सेनाक अधीन सुडान, मिडिल- ईस्ट आ युरोप मे युद्ध क दौरान भारतीय सब बईढ चईढ क हिस्सा लेने रहईत आ ब्रिटिश सरकार क विश्वास जीत लेने रहईत। हेनरी जानसन नामक व्यक्ति त ब्रिटिश विदेश मंत्रालय के सलाह देने रहथिन आ अई पर काज आगु बढलो रहई जे विश्व युद्ध क योगदान क ईनामक रूप मे भारतीय सब के पुर्वी अफ्रीकाक प्रभुत्व द देल जाईन। भारतीय क आखिर भेटलईन त किछु नई, ख्वामखाह स्थानीय अश्वेतक मोन मे नबका शोषक मे वर्गीकृत भ गेलाह। आई अतऊ जरूरत छई, इतिहास के सापेक्ष लिखेयबाक, जेना भारत मे शुरूआत भेल छई। -�-
भारत क तुलना मे अफ्रीका मे विकासक रफ्तार बहुत ही सुस्त छलई। ओहो मे पुर्वी अफ्रीका मे त आर धीरे- धीरे आधुनिकीकरण भेलई। हम सब बच्चा मे बैट्री मतलब " एक्साईड" बुझियई। ई अहिना छलई जेना गोदरेज माने अलमीरा, टाटा माने ट्रक आदि आदि । अई एक्साईड मोटर बैट्री के बारे मे युगांडा मे पता चलल जे पहिल बेर 1934 मे ई बैट्री के अतऽ मंगावल गेल छलई। ओई स पहिने बिन बैट्री अतऽ मोटर चलईत छलई। " अफ्रीका लिमिटेड " नामक एकटा ब्रिटिश कम्पनी छल जकर व्यापार युगांडा मे फईलल छलई, ऊयाह पहिल बेर एक्साईड बैट्री अतऽ आयात कयलक। बाद मे बजार बनला पर अतऽ अकर उत्पादन सेहो शुरू भ गेल। बिन बैट्री कोना मोटर स्टार्ट होईत हेतई , ई सोचऽ मे अजबे लगई छई। बैट्री अयलाक बाद मोटर कार क उद्योग मे एकाएक उछाल भेल छलई। ई 90 बरख मे अफ्रीका मे कतेक तरहक परिवर्तन, उद्योग जगत आ जीवन यापन मे देखबा मे आईब रहल छई, से कहऽ सुनऽ स बाहर। भारत मे तऽ राजा- रजवारा आ ओकर शान- शौकतक खिस्सा ककरो स छुपल नई छई। अई विषय मे सेहो अफ्रीका घुसकुनिये दईत बुझाईत अईछ। ओहिना शैक्षणिक दृष्टिकोण स भी युगांडा क रफ्तार बेश थम्हल छई।स्थानीय अश्वेतक पहिल पी एच डी डिग्री लेबाक बात 1932 मे कहल जाई छई। टिमोती सेमोग्रेरे आ जोसेफ किवानुका के पहिल पहिल डाक्टरेट आफ कैनन लाॅ, ग्रेगोरियन युनिवर्सिटी, रोम, इटली स भेटल छलईन।युगांडा मे उपलब्ध कैथोलिक आ औपनिवेशक रिकार्ड क अनुसार त ई दुनु गोटे युगांडे नई, पुरा अफ्रीका मे पहिल भेलाह जिनका कैनन लाॅ मे पी एच डी भेटलईन।बाद मे एक गोटे मसाका आ दोसर गोटे रुबागा चर्च मे बिशपक पद के ग्रहण कयलाह। ओई समय मे चर्चक सेवा मे रहनिहार क मान - मर्यादा बहुत बेशी होईत छलई। अही तरहे, युगांडा क पहिल ग्रेजुएट होबाक तगमा, बालाम जबेली मुकासा के भेटल छईन। 1929 ईस्वी मे ई मोरहाऊस कालेज, अमेरिका मे नाम लिखेला आ पढाई शुरू कयलाह। 1932 मे " राजनीतिक अर्थशास्त्र " विषय स ग्रैजुएट भेलाह। अकर बाद, अमेरिके मे बहुत रास कालेज सब मे अध्यापन कैलाह। 1937 मे याले विश्वविद्यालय स एम ए कयलाक बाद युगांडा घुरलाह। जेना भारत मे विदेश स पईढ क घुरला पर ताहि समय मे हाथे हाथ राखल जाई, ओहिना अतऊ भेलई। बूनयोरो राज्य मे इनका सीधा प्रधानमंत्री के पद भेटलईन। 1954 मे जखईन " रेडियो युगांडा " शुरू भेलई त ई पहिल समाचार वाचक आ बाद मे टाॅक शो के सेहो पहिल होस्ट भेलाह। 1958 मे अतुका लेजिसलेटिव काउंसिल क सदस्य सेहो मनोनीत भेलाह। किछु बरखक बाद जे डेमोक्रेटिक पार्टी क सरकार बनलई, त ओई मे कृषि मंत्री क पद पर सेहो मनोनीत भेलाह। ई सब ओहिना भ रहल छई, जेना भारतो मे सर्वोच्च योग्यता बला लोक सफलताक सीढी चढल जाईत छल। भारत मे नेवीक इतिहास त बहुत पुरान छई। अकर कारण महासागर क तट छई। युगांडा मे नेवीक स्थापना 1973 मे भेल छई।जखने 1973 भेल, ईदी अमीनक शासन याद करऽ परत। ईदी अमीन नेवीक महत्ता बुझईत छल।ओ अपने व्यक्तिगत दिलचस्पी ल कऽ 200 सैनिक क भर्ती कयलक आ ट्रेनिंग क लेल लीबिया पठेलकईन। अतबे नई, ई युगांडन नेवी सैनिक सब इजिप्ट- इजरायल युद्ध मे सेहो भाग लई गेलाह। कहल जाई छई जे ईदी अमीन अपने ओई समयक लीबियाक राष्ट्रपति गद्दाफी के युगांडन प्रशिक्षु सब के इजिप्ट पठबई लेल कहलकई। ओतऽ ई ट्रेनी सब इजरायलक खिलाफ जंग लड़ल। ट्रेनी क जंग स बढ़िया प्रैक्टिकल ट्रेनिंग कतऽ होईतईन। ओई समय अफ्रीका क आन कोनो देशक नौसेना क ई जंगक अनुभव नई भेटल छलई। अहिना युगांडा मे आंश्रु गैसक पहिल प्रयोगक बात 1945 मे कहल जाईत छई। अतुका पुलिस उपद्रवी भीड़ के तितर बीतर करई लेल मेगो, एन्टेबे आ नाकासिरो, कम्पाला मे आश्रु गैसक गोला छोड़ने छल। ओई समय तक युगांडा मे दंगा विरोधी पुलिस युनिटक गठन नई भेल छलई।स्थिति क निय॔त्रण करबाक लेल किंग अफ्रीकन राइफल के सैनिक टुकड़ी के नाकुरु, केन्या स बजावल गेल छलई। ई बतेनाई जरूरी बुझना जाईत अईछ कि अई दंगाक शुरुआत ब्रिटिश हुकूमत आ भारतीय व्यापारी क खिलाफ भेल छलई।स्थानीय अश्वेत क कहब छलई जे अंग्रेज आ भारतीय दुनु हमरा सबहक शोषण आ दोहन क रहल अईछ।आंदोलन बाद मे बुगांडा मे हिंसक भ गेल छलई। स्थानीय अश्वेत सब ओतुका जनजाति क प्रधान के सेहो खिलाफ छलई।ओकर सबहक कहब छलई जे ओकर प्रधान के ब्रिटिश आ भारतीय व्यापारी सब स॔ घालमेल छई।आंदोलनकारी सब उद्योग विशेष क कपास मे भारतीय आ ब्रिटिश क एकाधिकार के मानई लेल तैयार नई छलई। बड्ड मशक्कत क बाद दंगा पर रोकथाम भेलई। युगांडा के अई आंदोलन मे कयेक टा राजनेता जन्म लेलाह , बाद मे सत्ता क बागडोर हासिल कयलाह। अही सब तरहे ई स्पष्ट भेल जा रहल छई जे भारतीय सबहक खिलाफ एकटा माहौल हमेशा स पुर्वी अफ्रीका मे रहलई अईछ। किछु दिन पूर्व हमरा एकटा अश्वेत स्थानीय शिक्षित केन्याई स गप शप भेल। ओ कहलक -" ई सच छई जे भारतीय सब 100 बरख सं बेशी समय स अतऽ छईत, मूदा हम सब अखनो ईनका " एशियाई " कहईत छियईन। ईनकर चमरीक रंग, जीबाक ढंग, पाबईन तेहार आ धन, हमरा सब संग रहितो अलग अस्तित्व बनेने छईन। भारत मे त कई दशक पहिनेहे ई युनिट अस्तित्व मे आईब गेल छलई। युगांडन लोकक शांत प्रकृति क कारण ब्रिटिश हुकूमत के दंगा विरोधी दस्ता क आवश्यकता नई बुझेलई। अकर ईतर, भारत मे ब्रिटिश सरकार दंगा विरोधी युनिट बहुत पहिने गठन केलक आ आजादीक आंदोलन के कुचलबा मे खुब दुरुपयोग कैलक।
-�- अफ्रीका बिशेष कऽ पुर्वी अफ्रीका मे सुतऽ मे धुरंधर लोक भेटत। अतुका स्थानीय सब के कनियो काल के खाली समय भेटई छई, बस फोंफ कटनाई शुरू कऽ देत। सुतई लेल बिछान के कोनो जरूरत नई छई। रस्ता,पेरा, कुर्सी, टेबुल, यात्रा करईत, बईसल या भुमि पर कतऊ सुतल भेंट जायत। पांच मिनट आहां खाली छोईड़ दियऊ, हाफी लेनाई शुरू भ जेतई। नीक नींद भेनाई , एकटा गुणे छई। हमरा होई छलाय जे ई सब घर पर नई सुतई अईछ, तैं बाहर अबिते नींद आईब जाई छई। पुछला पर पता चलल, ई सब सुतबा मे बीर बांकुरा अईछ। घरों मे ओहिना सुतई अईछ आ बाहरो जतई मौका हाथ लाईग जाय। घर- बाहर मे दु रंग बेबहार ई सब नई सीखलक। मिथिला मे किछु भोजवीर सब बरियाती आ गंवई भोज मे सैकड़ा मे मीटर खींच लेताह, मूदा अपन घर मे नियंत्रित भोजन करताह। पुछला पर जवाब रहतईन- " चामक पेट होई छई, जतेक हुआय लमाईर लियह।" अफ्रीकी सब जेहने घर, तेहने बाहर भेटत। अई करोना के दौर मे सुतनाई सं संबंधित युगांडा क एकटा महामारी के बारे मे बता रहल छी। अकर विभीषिका के आकलन अही सं कऽ लियह जे तहिया यूगांडा मे ढ़ाई लाख लोक अई बीमारी सं जान धोने छल। अई बीमारी के नाम छई- " sleeping sickness ". आहां सब "नींद के बीमारी" कही सकई छी। जखईन १९०० ईस्वी मे युगांडा, ब्रिटेनक प्रोटेक्टोरेट घोषित भेलई, तखने ई बीमारी के प्रकोप सामने एलई। ई बीमारी अपन चरम पर १९१० मे पहुंचल आ फेर शनैः शनैः समाप्त होईत गेल। १९२० मे आईब कऽ पूरा खत्म भेल। आजुक जेना सुचना प्रोद्योगिकी अतेक विकसित नई छलई, तैं दूनिया के दोसर भागक लोक अई सं अनजान छलय। लोकक अबरजात सेहो नई छलई। ओही सं बीमारी नई फैलई। तखुनका ब्रितानी हुकूमत के अई बीमारी के रोकथाम करनाई आवश्यक छलई, कियैक अई सं मृत्यु दर बहुत बेशी भ गेल छलई। ताहि कारण अर्थव्यवस्था के ओधबाध भ रहल छलई। ब्रिटेनक सरकार अविलंब अई बीमारी लेल रिसर्च सेन्टर खोललक आ नियंत्रण लेल किछू कदम उठेलक। जेना ओई ग्रसित क्षेत्र सं लोक के जबर्दस्ती निर्वासित केलक, लोकक आवाजाही पर प्रतिबंध आ आर्थिक गतिविधि पर रोक लगेलक। स्लीपिंग सिकनेस बीमारी सं ग्रसित क्षेत्र छल- विक्टोरिया लेकक आसपास क एरिया।ओना ई बीमारी १९०१ सं पहिनेहो छलई, मूदा एकाएक बढंतीक कारण नब लोक के ओई क्षेत्र मे बढ़ल आवाजाही आ व्यापारक बढ़नाई छल। यूगांडा क लोकक कहब छईन जे ई बीमारी संभवतः कांगो दिस सं या सुडानी सैनिक जे ईमहर आयल छलाह, ऊयाह फैलेने अईछ।समाज कतुको होई, बीमारीक कारण अपना सं कमजोरबे पर लगई छई। ओना अई देश मे महामारी के अई सं पहिलुका इतिहास नई छई। अकर कारण ओ सब अपन बंद संस्कृति आ दुनिया सं कम संपर्क रहबाक दई छई। सबसं पहिने स्लीपिंग सिकनेस कमीशन १९०१ मे अई बीमारी के स्रोत के चिन्हित कैलक। नील नदी के ३०/४० माईलक क्षेत्र मे ई बेशी पसरलं बुझेलई। जतेक उद्गम स्थलक लग जाऊ, ओतेक बेशी रोगी भेटलई। अई सब सर्वे के आधार पर बुसोगा क्षेत्र , एंटेबे आ सेसे आईलैण्ड सबसं प्रभावित छलई। चिकित्सक क अध्ययन टीम अई निष्कर्ष पर पहुंचल जे एकटा मच्छर अई बीमारी के फैलबई छई। ई मच्छर लेक विक्टोरिया आ ओई मे बनल द्वीप सबहक गाछ बिरीछ, खेत पथार मे रहई छई। तखूनका डाक्टर सब कयेक तरह सं अकर रोगी सब के उपचार शुरू कैलक। मूदा सफलता नई भेटई। अलग तरहक बीमारी आ ओकर सिमटम सैहो किछु अलगे। शुरुआत मे सिमटम फ्लु आ मलेरिया सनक लगई, फेर बाद मे बिना कोनो विशेष लक्षण के रोगी के प्राणांत भ जाई। अंत मे हाईर कऽ, दोसर आन कोनो चारा नई भेटला पर,ओत सं लोक के हटेनाई शुरू कैलक। अतबे नई, ओई क्षेत्र मे कोनो भी काज केनाई के गैरकानूनी घोषित कयल गेलई। हर व्यक्ति के अनिवार्य जांच आ जांचोपरांत जिनकर लक्षण पोजिटिव उनका एकटा आइसोलेशन कैंप मे आगू के इलाज लेल राखल गेलईन। माछ मारनाई या माछक व्यवसाय केनाई, लकड़ी काटनाई, जंगली जानवर के शिकार केनाई वा लेकक दु माईलक क्षेत्र मे प्रवेश पर पुरा सख्ती सं प्रतिबंध लगाबल गेलई। १९०९ अबईत अबईत सब द्वीप परक लोक सब के ओत सं हटा लेल गेलई। स्थानीय लोक के सैकड़ों बरख सं एक जगह रहईत रहला पर, ओत सं हटेनाई ओतेक आसान निर्णय नई रहई। स्थानीय जनजाति आ ओकर प्रमुख सब ब्रिटेन के अई रिलोकेशन के निर्णय के विरोध केलकई। ओकर सबहक चिंता छलई जे नब जगह पर खाना पीना के बेबसथा के करतई, कोना हेतई आ कहिया ओ सब अपन पुरान घर/ डीह पर घुरत। जर्मनी सेहो अई बीमारी के इलाज लेल सेसे आईलैण्ड पर अपन रिसर्च टीम पठेलक।अई तरहे सेसे आईलैण्ड पर जर्मनी के पहिल पुर्वी अफ्रीकाक लेबोरेट्री खुजलई। ओतुका स्थानीय लोक सब पर ओकर शोध केन्द्रित रहलई। अंततोगत्वा जर्मनीक डाक्टर क टीम अई बीमारी के दवाई आ ओकर सफल परीक्षण क दावा केलक। रिलोकेशन सं बढ़ईत मृत्यु दर पर नियंत्रण भेलई। धीरे धीरे अई बीमारी के प्रकोप कम भेलई। फेर स्थानीय सब वापस अपन पुरना डीह पर जाई गेलाह। २००९ मे १०००० सं कम अई बीमारी सं लोक ग्रसित भेल। २०१८ मे संख्या घईट क ९७७ भ गेल छई।अई तरहे स्लीपिंग सिकनेस महामारी सं युगांडा निजात पैलक। अजुका परिपेक्ष्य मे १२० बरख पहिने युगांडा मे भेल महामारी आ ओई सं पार पैबाक तरीका मे बहुत रास समानता देखा रहल अईछ। -�- गाछ बिरीछ के जेना मिथिला के समाज मे पुजल जाई छई, ओहिना युगांडा क स्थानीय लोक सब सेहो किछु गाछ के भगवानक अंश मानईत अईछ।अपनो सब कतऽ ब्रह्मबाबाक स्थापना गाछक जईड़ लग मे भेटत। ब्रह्म बाबा के गाम समाज मे ग्राम देवताक रूप मे मान्यता छईन। कमोबेश सब गाम मे पुजा पद्धति मे भी समानता देखबई। युगांडा मे अपना सब कतऽ जे एकाहरा अड़हुल फूल होईत अईछ, ओकरा सुखा कऽ बिकाईत देखलियई। अतुका लोक सब सुखायल अड़हुल फूल के पैकेट बना बना कऽ बेचईत अईछ। ई सब अई फूल के पाईन मे राईख कऽ बारह घंटा करीब छोईर दई छई आ फेर ओ ललौन पाईन पीबई छई। अकर सबहक मान्यता छई जे ई पाईन पीला सऽ खुन साफ रहई छई आ रक्तजनित रोग सं बचाव होई छई ।किछु के कहब छई जे, अई लऽ कऽ शरीर मे बीमारी सऽ प्रतिरोधक क्षमता बईढ़ जाई छई। दोहारा अड़हुल हमरा बिकाईत नई देखायल अईछ। जखईन अड़हुल के फूल अतेक फायदेमंद छई, तऽ अकर गाछ आहां सब रोपई किया नई छी? तकर कोनो ज़बाब नई। मनमौजी सब होई छई। पाई रहलई जेबी मे, तऽ सुखायल फूल कीन लेलक। नई तऽ कोनो बात नई। अहिना पाकल केरा के तऽ " बनाना " कहत, मूदा कांच केरा के ओ सब " मटोके " कहत। ओना मटोके अतुका एकटा केराक बनल तरकारी के सेहो कहल जाई छई। कांच - पाकल मे नाम बदईल जाई छई, अकर पाछु की राज? से नई जाईन। हंसी तखईन लगईत अईछ, जखईन उत्तर भारतीय सब के मूंह सं केरा के, मटोके कहईत सुनई छी। अतऽ एकटा " नक्कीमा " गाछ छई, जकर दर्शन करई लेल युगांडे टा नई, रवांडा, बुरुंडी, तंजानिया, केन्या आ कांगो स भी श्रद्धालु अबई छई।अई गाछक जईड़ सब चारु कात करीब पचास मीटर दूर तक उभरल छई।ई जगह कम्पाला सं १७२ किलोमीटर पश्चिम आ मुबेंडे शहर सं सटले ३ किलोमीटर दुरी पर छई। अई गाछक जईड़ सब के नौ टा भाग मे बांटल गेल छई। आहां दु जईड़क बीचक ९ टा खोंधियां बुईझ सकई छी। ई नवों खोंधिया मे ९ टा स्थानीय देवताक वास मानल जाई छईन। पहिल खोंधिया के आहां रेस्तरां वा लाॅज के रिसेप्शन बुअईझ सकई छी। पुजारी आहां के सबसं पहिने अतई भेटत। ओकर बाद आहांक समस्या आ ईच्छा बुझलाक बाद अलग अलग देवता पितर के खोंधिया लग लऽ जायत। दोसर खोंधिया " राजा निदाहुराक" कहल जाई छई। ओतऽ राजा , पुजारी आ आन श्रद्धालु के वास्ते ताजा फल देल जाई छई। तेसर खोंधिया बियाह आ संतोनोत्पति के देवी " नबुजाना " के छईन। अतऽ बांझ स्त्री - पुरूख, संतानक कामना लऽ कऽ अबईत अईछ। चारीम खोंधिया मे जंऊआ संतानक ईच्छा बला लोक प्रार्थना करऽ जाईत अईछ।अतऽ दु वा तीन मुंह बला घईलनुमा माईटक बासन सब राखल रहई छई। अई घईल सब मे पाईन जेकां द्रव भरल रहई छई। ज्यों आहां जऊवां बच्चा चाहई छी, तऽ दु मूंह वला घईलक पाईन पीब लीयह। तहिना ज्यों एक बेर मे तीनटा संतान चाहई छी, तऽ तीनमूंहां घईलक पाईन पीब लीयह। ध्यान ई रहय, जे ई पवित्र पाईन पीबा सं पहिने देवता के गोहार जरूरे लगाबी। पाचम खोंधिया , बरखाक देवता " मुसोके " के छईन। अतऽ प्रार्थना कैलाक बाद आहां काॅफीक फर राईख दियऊ । अकर बाद बड़का कलश मे राखल पवित्र पाईन पीब लीयह। छट्ठम खोंधिया, युद्ध आ सेनाक कमांडरक देवता " किवनुका " के छईन। ई देवता पुरा राज्य मे सुरक्षा आ शांति बनेने रखई छथिन आ दुश्मन सं भीड़ल रहईत छथिन। सातम खोंधिया, पशुपालक के छईन।ईनका " कलीसा " कहल जाई छईन।कलीसा देवता, सब माल- मवेशी के देखभाल आ उपचार करई छथिन। ज्यों आहां के पास खराब नस्लक मवेशी अईछ, तऽ ई अभिशाप भेल। आहां के अतऽ आईब कऽ प्रार्थना करऽ पड़त, तखने नीक नस्लक मवेशी आहांक खुट्टा पर जन्म लेत। आठम खोंधिया, शिकारक देवता के छईन। ईनका एतऽ " ददंगु " कहल जाई छईन। जखईन युगांडा मे बकेजी राजतंत्र रहई तऽ शिकारी, शिकार पर जाय सं पहिने अतऽ प्रार्थना करई छल। ओ नीक जानवरक शिकार आ ओकर मांसक संग जीबईत घुरबाक गोहार अपन देवता सं करईत छल। आब शिकार तऽ बन्न भऽ गेल छई। ताहि लेल श्रद्धालु अपन बिजनेस मे बढ़न्तीक लेल अतऽ अबईत अईछ। नवम खोंधिया पाईन आ माछक देवता के छईन। अई देवता के " मुकासा " कहल जाई छईन।माछक स्थान कतेक बेशी युगांडन समाज मे छई, से सर्व विदित छई। एक नीक संख्या मछुआरा के अतऽ छई। ताहि लेल मुकासा के श्रद्धालु बहुसंख्यक छईथ। जखईन भी श्रद्धालु अपन मनौती लऽ कऽ अतऽ अबईत छईथ आ ओ पूर्ण भऽ जाई छईन, तखईन ओ सब वापिस अतऽ देवताक दरबार मे अबई छईथ।अपना संग ताजा फल आ भोज्य सामग्री अनई छईथ। ई भोज्य सामग्री के अतई पकावल जाई छई आ सब उपस्थित श्रद्धालु के बीच महाप्रसाद कही कऽ बांटल जाई छई। अई सब देखला सुनला सं हमरा भारतक सिद्धस्थ स्थान सब मोन पड़ल। अहिना परिपाटी त अपनो कतऽ छई। विशेष कऽ जनजाति, दूनिया मे कतऊ के हुअय, ओ प्रकृति के लगीच अईछ। भरल दुपहरिया आहां नक्कीमाक पवित्र गाछ लग जायब, ओतऽ सब उमीर के तीर्थयात्री भेटताह। कियो फुसफुसाईत, कियो जप करईत, कियो गीत गबईत, कियो ढोल बजबईत, कियो ताली बजबईत, कियो अपन भाषा मे किछु बजईत सब प्रार्थना करईत भेटत। बाकी लोक ओई गाछक नीचा जमीन पर ठेहुना टेकईत वा कोनो पटिया पर बईसल वा ओई गाछक फैलल जईड़ पर बईसल भेटताह। कखनो देखबई, कियो उत्साही भक्त ओई गाछ पर चईढ़ जायत, आर ओकर नीचला ठाईर पर लटईक जायत।ओकर बाद ओतई नाचऽ लागत। गाछ पर चईढ़ कऽ नचनाई के देखला पर एहन लागत जेना अंकोलाक पारंपरिक नाच " एकिटागुरिरो" भऽ रहल अईछ। अई गाछक आसपास क जमीन समाजक छई आ अकर इस्तेमाल सब माल- जाल के चरबई लेल होई छई। अई परिसर मे घुसिते दुआईर पर गायक गोबर सं प्रज्जवलित एकटा हवन कुंड जेकां भेटत।अकरा ई सब " ईकूटो " कहई छई। कियो भी श्रद्धालु अई कुंड मे गाय के गोबर द कऽ धधरा बढ़ा सकईत अईछ। अई गाछक सामने जखने कियो प्रार्थना करई छई, पहिने किरासन तेल मे दिया जकां ईजोत करतई। अकर सबहक मान्यता छई जे भगवान अन्हार मे नई, ईजोत मे काज करई छथिन। पुजारी, भक्त द्वारा आनल सबटा वस्तु के जमा करई छईथ। बेशीतर करेंसी, गाय, भेड़, बकरी आर केरा लोक चढ़बई लेल अनईत अईछ। जे भी श्रद्धालु दर्शन लेल अतऽ अऊताह, ओ अई गाछक पुवारी कात अपन चट्टी/ जुता निकाईल कऽ रखताह। ओकर बाद अपन मनौती लेल बईस कऽ भगवान के गोहरेताह। फेर अई सब लेल धन्यवाद कहथिन आ दक्षिण तरफ सं गाछ दिस जयताह आ तीन टा खोंदियानुमा कमराक चक्कर लगेताह। हमरा ई चारु कात चक्कर लगेनाई प्रदक्षिणा जेकां लागल। सब भक्तक आशय अलग अलग रहई छई। कियो आशीर्वाद बनल रहय ओई लेल, कियो घरक सदस्यक बीच मे शांति, प्रेम, सद्भाव, भाग्य आ खुशहाली बनल रहय, ओकर प्रार्थना करईत अईछ। पुजारी जेकां ओतऽ प्रवचन दईत लोक सेहो भेटायत। ओ बाजत- " बच्चा सब कियेक अपन माय बापक संग भोजन नई करईत अईछ, बच्चा स्कूल कियैक नई जाईत अईछ, परिवार मे जमीन- जायदाद क झगड़ा कियैक भऽ रहल अई," अई सबहक बारे मे देवता आहां के बतेताह। अतबे नई, की होबऽ बला छई, सेहो बतेताह। अतऽ बहुत एहनो भक्त सब अबई छईथ जे दिन की, हफ्ता हफ्ता अतई प्रार्थना आ उपचार मे समय बितबई छईथ। अई मे किछु लोकक विश्वास छईन -" हीलिंग/ उपचार राईते टा मे होई छई। ईयाह ओ समय रहई छई, जखईन भगवान श्रद्धालु के प्रार्थना सुनई छथिन। दिनक समय श्रद्धालु के दिमाग भटकईत रहई छईन। ओ ठीक सं भगवान पर ध्यान केन्द्रित नई क पबई छईथ। ओही सं दिन मे कैल उनकर प्रार्थना सफल नई होईत छईन। स्थानीय लोक सबहक कहब छई- "अई गाछक कृपा सं कतेक नेता सत्ता सुख भोईग रहल छईथ, कतेक बांझ दंपति के अतऽ अयलाक बाद संतान सुख भेटलईन अईछ, कतेक बेरोजगार के मनोनुकूल नौकरी भेटलईन आ कतेक व्यापारी आ महिला खुशहाल भेल छईथ।" सब श्रद्धालु एतऽ अयलाक बाद अपन अपन जीवन मे आयल बदलाव के बारे मे बताबऽ लागत। ई मार्केटिंग भेल।लोक भगवानक छाया मे अतऽ राईतक राईत बीतबईत अईछ। राईत मे जे ठंडा हवा बहई छई, ओई मे हीलिंग पावर होई छई। लोक जे प्रसाद अपना संग अतऽ आईन कऽ चढ़बईत अईछ, ओकरा " ईकिगाबिरो " कहई छई। जे भी लोक सही इरादा सं अतऽ अबईत अईछ, ओकर मनौती निश्चिते पुरा होई छई। अई सब बेबसथा के पाश्चात्य समाज अंधविश्वास कहई छई। अई गाछक वैज्ञानिक नाम " पर्टोटगोटा माइल्डब्रीडी ( स्टेरिकियासी)" छई। अनुमान कैल जाई छई जे ४०० सं ६०० बरखक गाछ छई।किछु के कहब छई जे एकटा ओतुके राजकुमारी के आत्मा अई गाछ पर छई।ओ उज्जर धब धब कपड़ा मे कखनो कऽ गाछ पर देखाईतो छई।अई गाछ सं खसल लकड़ी के ओतुका लोक नई जड़बईत अईछ। ओ अपने सईड़ गईल जाई छई। ओझा- गुणी के जगह सेहो लोक अकरा मानई छई।ओझा सब दारु सेहो चढ़बई लेल कहत। ओ सब एकटा विशेष तरहक पाईप सं धुआंक गुब्बार निकालत आ आत्मा सं गप्प करेबाक अनुमति जेकां देत। आश्चर्य जे मुस्लिम आ इसाई दुनु समाजक लोक अतऽ अबईत अईछ। ई सब बात जनला पर की अपनो सब कतऽ के देवता पितर नई मोन पड़ल हेताह। तेसर अदृश्य शक्ति पर अतुका लोक के बहुत बेशी विश्वास छई। आखिर किछु त शक्ति अवश्ये अई जगह मे छई जे अतेक श्रद्धालु अबई छई।ई एकटा पारंपरिक, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक आ विश्वस्त साधना शक्ति केन्द्र जेकां छई। अतऽ अयनिहार मे अतुका वर्तमान राष्ट्रपति मुसेवनी के नाम सेहो अबई छईन।सब कोई अपन समस्या के समाधान के ताक मे अतऽ अबईत अईछ।अपना अपना परंपरा के अनुसार जनजाति सब अपन आदर आ श्रद्धा अई गाछ के प्रति प्रकट करईत अईछ। किछु लोकक अनुसार चेचक बीमारी अतऽ पहिने बड्ड पसरई।नक्कीमा नाम के राजकुमारी अतऽ रहई आ ओ चेचक सं बचाव आ इलाज दुनु करई।बड़का सं ल कऽ छोटका तक, बांझपन आ सामान्य बीमारी लेल नक्कीमा लग अबई छलई आ ओकरा इलाज भेटई छलई। उयाह परम्परा अखनो कायम छई। युगांडन सब अलग अलग खिस्सा खुब मोन सं अई नक्किमा पर सुनबईत रहत। अफ्रीका के संग ई बड़का दुर्भाग्य छई जे अतुका इतिहास, घटना, परंपरा, संस्कृति, समाज आव्यक्तित्व सबहक बारे मे लिखल कम भेटत, बेशी गल्पे साहित्य छई माने सुनल।सच्चाई की आ कते छई, से त हम नई कही सकई छी, मूदा दिलचस्प हमरा लागल तैं साझां के रहल छी। -�- भारतक लोक दुनिया मे जतऽ कतऊ गेल, ओतूका सामाजिक आ राजनीतिक सरोकार सं जुड़ल रहल। अखईन तक आहां सब के लगईत होयत जे भारतीय मूलक लोक पुर्वी अफ्रीका मे खाली व्यवसाये केलक। ई सत्य नई छई। जेना दक्षिण अफ्रीका मे रंगभेद के खिलाफ भारतीय मूलक लोक संघर्षक अगिला पांईत मे ठार छलाह, ओहिना पूर्वी अफ्रीका मे सेहो बईढ़ चईढ़ कऽ हिस्सा लेलाह। आई हम चर्च करब भारतीय मूलक , युगांडा के संसद के पहिल गैर ब्रिटिश स्पीकर श्री नरेन्द्र पटेल के बारे मे। नरेन्द्र पटेल के जन्म गुजरातक खेड़ा जिला मे भेल छलईन। ओतई पढ़ला, लिखलाह आ बढ़लाह। कानुन के पढ़ाई लेल बम्बई गेलाह आ अतई सं १९४७ मे बैचलर आफ लाॅ केलाह। करीब एक बरख तक बम्बई हाई कोर्ट मे प्रैक्टिस सेहो कैलाह। नरेन्द्र पटेल के पिता मनुभाई सेहो वकील छलाह आ तहीया कम्पाला मे प्रैक्टिस करई छलाह। ईनकर अपन लाॅ फर्म छलईन। नरेन्द्र पटेल सेहो १९४८ मे अपन पिता के फर्म मे काज करऽ लगलाह।ओई समय युगांडा , ब्रिटेन क उपनिवेश छलई। अतई ईनका लगलईन जे ब्रिटेनक डिग्री आवश्यक छई। १९५४ मे नरेंद्र आगु के पढ़ाई लेल ब्रिटेन गेलाह आ बैरिस्टर भ कऽ युगांडा घुरलाह। ओई समय गुजरातक लोक कानुनक डिग्री भेटलाक बाद, गूजराती बहुल देश सब मे वकालत करऽ खुब जाईत छल। गांधी जी सेहो अहिना दक्षिण अफ्रीका गेल छलाह। नरेन्द्र क पिताक फर्म कम्पाला मे छलईने, अकरे शाखा ओ बाले शहर मे खोललाह। ओई समय मे स्थानीय लोक मे जागरण भऽ रहल छलई। अंग्रेजक अत्याचार के खिलाफ नरेन्द्र स्थानीय लोक क केश लड़ई छलाह। ओ फीसक जगह केशक मेरिट देखई छलाह। जई मे उनका बुझाईन जे अई केश मे अन्याय भेल छई, ओई मे ओ बिना फीसो के लड़ई छलाह। अई लऽ कऽ पाई तऽ बेशी नई होईन, मूदा स्थानीय लोकक बीच मे ईनकर लोकप्रियता बहुत बईढ़ गेलईन। कतऽ अंग्रेजक खिलाफ कियो बाजई लेल तैयार नई, ओतऽ नरेन्द्र स्थानीय लोकक तरफ सं केश पर केश फाईल कऽ रहल छलाह। नरेन्द्र के गरीब आ शोषित लोकक लेल काज करईत देख हमरा ब्रिटेनक एकटा प्रवासी पंजाबी याद आईब जाई छईथ। उनकर नाम हमरा मोन नई पईड़ रहल अईछ। कहल जाई छई जे लंदन मे जई कम्पनी मे ओ काज करई छलाह, ओकर बेबहार ईनका प्रति उपयुक्त नई छलईन। एतबे नई ओकर प्रबंधन लेबर कानुनक खिलाफ काज करई छल।ई भारतीय मूलक पंजाबी व्यक्ति ओई कम्पनी के खिलाफ मोकदमा केलाह आ केश जीतबो केलाह। सबटा बकियौता पाई ओई कम्पनी सं भेटलईन। ओई समय मे लंदन मे एशियाई के गोरा प्रबंधनक खिलाफ जीत बड़का बात छलई। ईनकर केश जीतलाक बात , ओतुका एशियाई लोक मे चारू कात पसईर गेलई। एशियाई लोक सब जे दबल कुचलल रहय, ईनका लग सलाह मांगऽ आबऽ लागल। ई पंजाबी लोक, सबके बिना फीस लेने कानुनी मदद पहुंचाबऽ लगलखिन। लोक सब जे पहिने चूप भऽ कऽ शोषण सहईत रहय, से आब कोर्ट कचहरी जाय लागल। धीरे धीरे ईनकर लोकप्रियता एशियाई समाज मे बईढ़़ गेलईन आ उनका ब्रिटेनक प्रमुख राजनैतिक दल चुनाव मे टिकट देलखईन। बढ़िया बहुमत सं ओ चुनाव जीतलो छलाह।अतऽ खाली देश बदलल, किरदार एकरंगाहे छल। अतबे नई, स्थानीय लोक के आर्थिक स्थित सुधारई लेल नरेन्द्र, कागज आ किताब बनबऽ के फर्म बनेलाह।अई मे अपन संगी सबहक सेहो मदद लेलाह। अई फर्म के तरफ सं स्थानीय लोक सब के नीक अर्थ उपार्जन होबऽ लगलई। नरेन्द्र भारतक गुलामी देख चुकल छलाह, ओही लेल ओ अतूका लोकक पक्ष मे हरदम दमखम सं लागल रहई छलाह। धीरे धीरे पुरा युगांडा मे राष्ट्रीयता के भावना जोड़ पकईर रहल छलई। एशियाई सब नरेन्द्र के अगुआई मे स्थानीय सबहक पक्ष मे ठार छल। नरेन्द्र, युगांडा पीपुल्स कांग्रेस के सदस्य छलाह आ १९६२ के आम चुनाव मे बाले सं ठार भेलाह। भारी बहुमत सं ओ चुनाव जीतलाह आ संसद सदस्य चुनेलाह। १९६२ मे जखईन युगांडा के आजादी भेटलई त अतुका संसद के चलबई लेल ब्रिटिश सरकार "सर जौन बाऊज ग्रिफिन " के अतई छोईर देने रहई। १९६३ मे ग्रिफिन वापस लंदन घुईर गेलाह। युगांडा के संसद सर्वसम्मति सं नरेन्द्र पटेल के स्पीकर चुनलकईन। अकर बाद ओ लगातार १९६३ सं १९७१ तक ओतुका संसदक स्पीकर रहलाह, जाबईत ईदी अमीन सत्ता नई हथियेलकई आ संसद के भंग नई केलक। किछु लोकक कहब छईन जे तत्कालिन राष्ट्रपति ओबोटे के नीक बेजाय सब कदम के नरेन्द्र समर्थन केलखिन। तहिया ई ततेक प्रभावशाली छलाह, जे ओबोटे के गैरसंवैधानिक काज पर रोक लगा सकई छलाह। ईनके स्पीकर रहबाक समय मे ओबोटे अपन छोईर बाकी सब राजनीतिक दल पर बैन लगा देने छलई। ओना ओतूका गोल्ड स्कैंडल मे ओ सरकार के क्लीन चिट नई देने छलखिन। ताहि लेल उनकर स्वविवेक पर कोनो प्रश्न चिन्ह उठेनाई उचित नई। समय समय पर ओ सरकार के चेतवईतो छलखिन। आबऽ बला समय, सबहक काजक लेखा जोखा अपना ढंग सं करई छई। नरेन्द्र पटेल बहुतही पढ़ल लिखल, गुणल, देश-दुनिया के सब घटना सं अवगत रहऽ बाला एकटा साकांक्ष आ निरपेक्ष बुद्धिजीवी छलाह। जतबे कानुन आ परम्परा के ज्ञाता छलाह, ओतबे ओजस्वी वक्ता छलाह। यूगांडा के प्रतिनिधि बईन कऽ दुनिया मे जतऽ कतऽ गेलाह, संसदीय संस्थाक मान बढ़ेलाह। ईदी अमीन के सत्तासीन भेला आ संसद के भंग केला के बाद ओ फेर सं ओतई अपन बैरिस्टरी के प्रैक्टिस करऽ लागल छलाह। १९७३ मे जखईन ईदी अमीन, एशियाई के देश निकाला कऽ देलकई, तऽ नरेन्द्र पटेल सपरिवार आस्ट्रेलिया चईल गेलाह आ ओतई वकालत करऽ लगलाह। १९८० मे अपन कनिया संग एकबेर युगांडा आयल छलाह आ सब पसंदीदा जगह पर भईर पोंख घुमलाह। अतुका इंडियन एसोसिएशन के ओ आजन्म सदस्य छलाह।बहुतो लोक के युगांडा मे स्थापित करबा मे योगदान देने छलाह। बाद मे निर्वासन के आदेश सं ततेक दुखी भेलाह जे युगांडा मे रहऽ नई एलाह। काफी वृद्ध भेलाक बाद भारत घुईर गेल छलाह आ ओतई हिनक मृत्यु भेलईन। आदमी अपन जीवन मे कतऽ कतऽ जाईया, रहईया आ की की ने योजना बनबईया। अंत मे अपन सोचल सब रहिये जाई छई आ विधाता के लिखल ही होईत छई। दूनिया याद सिर्फ कृतित्व के ही करई छई। नरेन्द्र पटेल आई दुनिया मे नई छईथ, मूदा उनकर बुद्धिमत्ता, व्यक्तित्व आ कृतित्वक चर्चा गाहे-बगाहे युगांडा मे सुनाईत रहईत अईछ। प्रवासी भारतीय, जे अई तरहक ऊंचाई पर पहुंचल छईथ, उनकर बारे मे जानकारी अवश्य रहबाक चाही। हम अखईन तक नरेन्द्र पटेल के संसदीय व्यवस्था मे योगदान सं अनभिज्ञ छलऊं। आब हमरा पता लागल, तऽ सोचलऊं अहुं सब किछु युगांडा के बारे मे ज्ञान बढ़ाऊ। -�-
व्यापार के अपन अलग तरहक दर्शन होई छई। मैथिल संस्कारवश या भावूक स्वाभावक होबाक कारण, व्यवसाय मे ओतेक सफल नई भेलाह, जतेक आन क्षेत्रक लोक भेल। हमरा अतुका अंबानी माने सुधीर रूपारेलिया के बेटा राजीव रूपारेलिया के व्यवसाय मे डेगाडेगी देबाक समय के बारे मे जे किछु पता लागल, ओ सांझा करई छी। नवतुरिया व्यवसाई वा ऊनकर परिवारक लोक के ज्यों अई सं किछु सीख भेंटतईन, तऽ हमरा उनको सं बेशी खुशी होयत। सुधीर रूपारेलिया के बारे मे अतुका भारतीय समुदाय के लोकक कहब छई -" अगर सुधीरक कनिया कोनो बिजनेस डील मे उनका सं किछु डिस्काउंट मंगतई, तऽ सुधीर ओकरो मना कऽ देतई ।" कहबाक जे पुरा प्रोफेशनल अंदाज बिजनेस मे ई परिवार रखईत अईछ। आब ईनकर सुपुत्र के केना की कहब छईन, से जानु। राजीव रूपारेलिया, पूर्वी अफ्रीका के सबसं बेशी धनिक लोक के इकलौता बेटा छईथ। जखईन ई कम्पाला के स्कुल मे सीनियर क्लास मे पढ़ई छलाह, तऽ अपन संगी सब संग अतुका एकटा क्लब मे जखईन तखईन जाई छलाह। क्लब मे सब दिनक लीला एक्के रंग ईनका लगईन। धीरे धीरे ई सब संगी के अई सं बोरियत होबऽ लगलईन। बोरियत लगला सं आम लोक सीधा अर्थ निकालतई- " बोर होई छी, तऽ ओतऽ नई जाऊ।" अतऽ बोरियत के भाव जगला मे सऽ व्यवसायक मौका निकललई। राजीव आ ईनकर संगी सब स्कुलिया बच्चा होबाक बावजूद, ई निर्णय कैलाह - " नब नाइटक्लब खोलबाक "। जे सब ईनका सब के तखुनका क्लब मे कमी बुझेलईन, ओई सब के अपन क्लब मे सुविधा देबाक विचार बनौने छलाह। राजीव घर घुईर कऽ अपन पिता सुधीर रूपारेलिया सं अपन क्लब खोलबाक योजना के बारे मे कहलखिन। सुधीरक कहब छलईन-" आहां विद्यार्थी छी। अखईन अपन पुरा ध्यान पढ़ाई आ स्कूल मे नीक नम्मर अनबा मे लगाऊ।" राजीव के जवाब छलईन-" हम कैक टा काज एक संग करबाक मादा रखई छी।हम स्कुल मे नीक करबे करब, संग मे अई नाईट क्लब व्यवसाय मे सेहो।" सुधीर शुरू मे बेटा के व्यवसाय करबाक प्रस्ताव के लेल तैयारे नई भेलखिन, ओ विरोधो केलखीन। बारम्बार बेटाक निवेदन कैलाक बाद, सुधीर क्लब खोलबाक स्वस्ति दऽ देलखिन। बड्ड धुमधाम सं " स्वे क्लब " के उदघाटन भेल। ओई समय के अतुका मार्केटिंग आ इन्टरटेनमेन्ट गुरु सब के मिला कऽ क्लब चलबऽ लेल टीम बनावल गेल।क्लबक बीच अपन स्थान बनबई लेल, ई फैसला लेल गेलई- " हम सब हर मौका पर नब आ जोरदार ढंग सं क्लब के आगु बढ़ेबई।" नब तरीका मे किछु ईवेंट्स करबाक बात अयलई।आब क्लब मे व्हाईट पार्टी, बीच पार्टी आ स्पोर्ट्स पार्टी के आयोजन शुरू कैल गेल। अकर डेकसी मे आनो क्लब सब ई पार्टी आयोजित करऽ लागल। दुनिया के नामी-गिरामी सितारा सब के सेहो क्लब मे बजावल जाय लगलईन।क्लब के धमाकेदार शुरुआत भऽ गेल छलई।कम्पाला मे आब ई क्लब नीक चईल रहल छलई। अही बीच मे राजीव के स्कूलिया पढ़ाई खत्म भऽ गेलईन आ उनका युनिवर्सिटी के पढ़ौनी लेल अमेरिका जाय पड़लईन। क्लब के संगी पार्टनर आ मैनेजर के भरोसे छोईर कऽ राजीव अमेरिका चईल गेलाह। दुर्भाग्यवश, क्लबक प्रबंध ईनका सब बुते गड़बड़ा गेलईन। आब नब नब प्रयोग केनाई क्लब के प्रबंधकर्ता लोकईन छोईर देलाह। काजो मे ओ जी जान लगबऽ बला मानसिकताक अभाव साफ देखाई पड़ऽ लगलई। मैनेजर आब क्लबक कागज पत्तर सब नई ओरिया कऽ रखई छलाह आ ऊपर सं उधारी मे ढेरों खरीददारी कऽ रहल छलाह। देखरेख के अभाव मे समानक चोरी सब सेहो होबऽ लागल छलईन। क्लबक मकान किराया तक नई चुकावल जा रहल छलई। ओना ई मकान राजीवक पिता सुधीर रूपारेलिया के ही छलईन। तखनो किराया बकाया होबाक कारण सुधीर अई क्लब के दरवज्जा पर अपन ताला लगा देलखिन। जखने ई तालाबंदी के समाचार राजीव के भेटलईन, ओ अपन पिता के अमेरिका सं फोन कैलाह- " किछु महिनाक समय दऽ दियऊ।" सुधीर रूपारेलिया एकबेर मे साफ मना कऽ देलखिन। फेर बेटा के आग्रह पर उनका अपन प्रोपर्टी मैनेजर सं बात करई लेल सलाह देलखिन। राजीव आब अपन बापक प्रोपर्टी मैनेजर सं गप कैलाह। ओ सब बात सुनलखिन आ किछु समय आर राजीव के किराया चुकबई लेल देलखिन। ईमहर राजीव अमेरिका के पढ़ाई सं एक बरख के डेड ईयर लेलाह आ अपन क्लब के ठीक करऽ कम्पाला आईब गेलाह।अतऽ अयला पर क्लब के बारे मे जे सोचने छलाह, ओई सं बेशी बदतर हालात रहईन।सब चीज अस्त व्यस्त। नई कोनो आमदनी के हिसाब आ नई खर्चे के। अई स्थित मे सबसं पहिने अपने नियुक्त कैल मैनेजर के हटेलाह।सब उधारी समान देबऽ बाला सं समय पर पाई नई देलाह के कारण माफी मंगलाह, आर किछु दिन के मोहलत लेलाह। सब पंसारी सब समान ईनकर क्लब के पठबईत रहलईन। राजीव अपन क्लब के खोवल प्रतिष्ठा आ सदस्य मे विश्वास जमबई के प्रयास मे जुटल छलाह।क्लबक घाटा बढ़ल जा रहल छलईन। अंत मे हाईर कऽ एक गोटे के किराया पर क्लब दऽ देलाह।ओ तऽ उल्टे क्लब के सफाचट करऽ लागल। किराया तक नई देलकईन।घाटाक ग्राफ सुरसाक मूंह जेकां बढ़ल जा रहल छलईन। आब आन कोनो रस्ता नई बचईत देखला पर अपन शुरू कैला पहिले बिजनेस के ओ बंद कऽ लेलाह। पहिल व्यापारक अनुभव बड्ड खराब रहलईन। राजीव हिम्मत हारऽ बला लोक नई छलाह।अई घाटा के सौदा उनका बहुत तरहक अनुभव देलकईन। आब ओ कोना समान खरीदल जाई छई आ अई डील मे कोना निगोसिएशन कैल जाई छई, से सीख लेने छलाह। स्वे क्लब बन्न भेला सं राजीव के हाथ मे समये समय छलईन। उनकर अनुसार सबसं बहुमूल्य " समय " छई, जे दोबारा वापस नई भेंट सकई छई। ओही लऽ कऽ किछु रचनात्मक काज होईत रहबाक चाही। राजीव आब अपन पिताक कम्पनी मे काज केनाई शुरू कैला। क्लबक भूत दिमाग सं ऊतईर गेल छलईन। ईनका पहिल जिम्मेदारी भेटलईन- एकटा स्कुलक भवन निर्माण। राजीव पुरा तरह सं अई काज मे अपना के झोंईक देलाह। अतऽ ओ समान के स्टोर मे कोना जमा कैल जाई छई, ओर्डर शीट के कोना जांचल जाई छई, स्टाक के कोना वेरिफाई कैल जेतई, कोना लेबर कान्ट्रेक्ट कैल जाई छई, केना अकर उपस्थिति सुनिश्चित कैल जाई छई, अहिना आन आन बात सब सीखलाह। राजीव के अनुसार ई सब थकाऊ आ बोरिंग काज होई छई, मूदा ज्यों बिजनेस मे सफल होबाक अईछ, तऽ ई सब सीखऽ पड़त। आहां ज्यों ई बुझई छी जे कियो आन आहां लेल ई काज कऽ देत, बड़का गलतफहमी मे छी। ईनकर कहब छईन जे जाबईत आहां के ई काज सब आयत नई, आहां दोसरा के ई काज केनाई कोना सीखा सखई छियई । सबसं असली गुण होबाक चाही जे आहां के अबईत रहय कि कोना, कोनो वस्तुजात देल जाई छई। माईन लियह कियो आहां सऽ बीस बोरी सीमेट मंगलक। जखईन कि जरूरत पांचे बोरी के छई। आब सवाल ई ऊठई छई जे ई पन्द्रह बोरी कतऽ जा रहल अईछ। कखनो कऽ लोकक कहब छईन - " ई छोट छोट चीज सब अतेक बड़का लोक के देखबा के नई छई।एक बोरी सीमेट क हिसाब खरबपति लोक कतऽ रखई।" ईनकर कहब छईन- " आहां के ओई सब वस्तु के महत्त्व देबऽ पड़त, जकर स्वामित्व आहां के अईछ।" अगर आहां अहिना छोट छोट बात पर ध्यान आ नियंत्रण नई राखब , तऽ आहां के प्रतिष्ठान सं समान सब गायब होईत रहत आ अंत मे आहां घाटा उठायब। ईयाह सीमेटक गड़बड़ी ज्यों पांच सै बेर हेतई, तऽ होबऽ बाला घाटा के अंदाज लगा लीयह। कहबाक जे अई तरहक प्रवृत्ति के कखनो नजरअंदाज नई करबाक चाही।अकर अलावा " खुब मेहनत करु आ सपना के पांछा करु। सफलता भेटबे करत।" बिजनेस मे पईसा बनबऽ के सीधा सिद्धांत छई- " बिक्री बढ़ाऊ आ लागत घटाऊ"। ओ अही सिद्धांत पर चईल कऽ अपन कम्पनी के प्रोजेक्ट मे खर्चा कम करऽ मे सफल भेलाह। ईनकर कहब छईन- " क्लब स्वे " के बिजनेस सं हम आर किछु सीखलऊं वा नई सीखलऊं, मोल भाव केनाई नीक सं सीख गेलऊं।" इनकर बिजनेस के अनुभव के देखईत, इनकर पिता सुधीर रूपारेलिया के इनका पर विश्वास बढ़लईन आ कंपनी के डायरेक्टर बना देलखिन। राजीव के कहब छईन- " आहां किछु मांगब, आहां के भेटत।ज्यों अई लेल चोरी करब, आ पकड़ा गेलऊं, आहां लेल ई चीज सबदिना खातिर हाथ सं निकईल गेल।आहां अपन प्रतिष्ठा सेहो खत्म कऽ लेलऊं।" कंपनी के डायरेक्टर बनलाक बाद राजीव अपन पारिवारिक ब्यापार के बढ़बऽ मे लागल छईथ।हालक दिन मे अपन पिताक संग अतुका इंडियन एसोसिएशन मे सेहो सक्रिय भेलाह अईछ। हमरा सब के अतबे सं खुशी जे भारतीय मूलक लोक अतेक तरक्की कऽ रहलाह अईछ। अई जगह पर एक राईत मे नहीं पहुंचलाह। निरंतर मेहनत आ अपन स्वप्न के पैबाक लग्न के बदौलत आई ई परिवार पुरा अफ्रीका मे सबसं धनिक कहा रहल अईछ। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। केशव भारद्वाज
खेलौना
जखनो गाम जाईत छलऊं, खेलौना भेट करबाक लेल आईबिये जाईत छल। हमरा ओकर अई तरह एनाई नीक नई लगईत छल। हम बिदेश सऽ गामक जिनगी क आनंद लेबऽ अबईत छलऊं, नई की पाई लुटाबऽ। अतऽ लोक के ककरो सऽ भेट करऽ स पहिने अनुमति लेबाक चाही। ई सब गाम मे एकदम्मे नई छलई। कियो मूंह उठेने कखनो आईब जाई छल आ भीतरी घर - आंगन मे कतऊ चईल जाईत छल। खेलौना एक तऽ बिन बजेने आईब जायत, फेर ताबईत तक बैसल रहत, जाबईत तक कीछु टका देल नई जेतई।
कयेक बेर तऽ बैठकखाना मे बिन चादर बिछेने ही चौकी पर निधंग जाकर सुईत रहईत छल। सुतले - सुतले जबरदस्त फोंफो काटऽ लागत। फोंफक आवाज सुनला पर पता चईलतय, खेलौना अखईन तक गेल नई अईछ, अतई घुरीया रहल अईछ। आहां पैसा दईयो देबई , तखनो इम्हर- ओम्हर मंडराईत रहत। जाय स पहीने हमरा अलग सऽ आईब कऽ पुछत- " आहां फलामा ट्रेन स ने जेबई?" मोन हमर ओहिना ओकरा देखीते खौंझायल रहईत छल , उपर सऽ बेतुका ई सवाल- जवाब? ओकर उम्रक लेहाज क कऽ हम चुप भऽ जाई। सोचई छलऊं, कोना गामक लोक अकरा झेलईत हेतई ? एक्के बात के कयेक बेर पुछत। अतबे सऽ संतोष कहां छलई , घरक आनो लोक सऽ अई विषय मे पहिने पुईछ चुकल रहईत छल। जाबईत तक हमर मूंह स जयबाक तारीख नई सुईन लेत, ओकरा चैन नई परई छलई ।
भऽ सकईत हो ? कन्फर्म करईत हुआय। अविश्वासी कहीं का!
जखईन हम घुरबाक तारीख आ ट्रेन क नाम बतेबई, तखने ओकर चेहरा पर मुस्की अबईत छलई। ओकर बाद, धीरे- धीरे टुघरईत हमर घर स विदा होईताय।
जाईतो काल कयेक बेर पाछु मुईड़ कऽ हमर घर के तरफ तकीताह। पता नई, की देखबाक लिप्सा ओकरा लागल छलई?
जखईन हमरा सऽ नजईर मिलतई, फेर भोलापन वाला मुस्कान ओकर चेहरा पर सद्यः छुईट जईतई। हमरो हंसी छुईट जईताय।
वो त चईला जईताय, हम सोचईत रही जाईत छलऊं- " की जरूरत छलई खेलौना के अयबाक ? अकरा चलल तऽ जा नई रहल छई, आंईख सऽ ओकरा कीछु देखाईत नई छई, तखनो आईब जाईत अईछ।"
ओकर आंईख मे मोतियाबिन्न भ गेल छई । राईत मे ओकरा देखबा मे बेशी परेशानी भ जाईत छई। दिन मे कखनो आईब जायत, मुनहाईर सांझ होबा स पहिने अपना घरक लेल विदा भ जाईत चल।
ओ एक आ़ंईखक आपरेशन त " धरान " मे जा कऽ करा लेलक । दोसर आंईख मे तखईन मोतियाबिंद पाकल नई छलई, तैं आपरेशन नई केलकई।
इहो अचरजक बात लगईत छई - सारा दुनिया स लोक इलाजक लेल भारत अबईत अईछ , अतऽ देखु , बिहारक गामक गाम उईठ कऽ " धरान, नेपाल " जा रहल अईछ- इलाजक लेल ।
सुनई छीयई , ओतुका व्यवस्था चाक- चौबंद छई । बड भारी भीड़ उमड़ई छई , ककरो कोनो भी परेशानी नई होई छई।ज्यादातर रोगी भारतीय होईत छईथ। एक छेदामक फीस नई लगईत छई। उपर सऽ रहनाई आ खान- पीनक भी बढ़िया निःशुल्क प्रबंध रहई छई। अतबे नई, गरीब- गुरबा के मंगनी मे चश्माक फ्रेम आर लेन्स दुनु देल जाईत छई। अई सबहक लेल कोनो सर्टिफिकेट नई जमा करबऽ पड़ईत छई।
गरीबक सर्टिफिकेट त देखले स बुझा जाईत छई।
की भारत मे किनको एहन आजादी छईन ? बिन कागज- पत्तरक पेट भरने, चाही कऽ भी, केतबो उपरक स्तरक अधिकारी या संस्थाक पदाधिकारी होईत, ऐना मदद कऽ सकईत छईत ? जखनो कियो लीक स हईट कऽ मदद करबाक कोशिश कयलक- विवाद भेलई, आलोचना भेलई, अखबारों क हेडलाईन बनलई- शुचिताक बात उठलई - मंशा पर सवाल उठलई - अंततोगत्वा सेवा भावना या त छोड़ देलाह या छोड़ऽ पड़लईन ।
धरान मे कोना ई सब भ पाईब रहल छई ? नेपाल त अतेक साधन- संपन्न देशो नई छई।
अतऽ कहक लेल अपन सरकार, आर इलाजक कोनो इंतजाम नई । हालो मे बिहारक मुख्य मंत्री ईयाह मोतियाबिंदक आपरेशनक लेल दिल्ली गेल छलाह। अतेक पुरान इतिहास वाला राज्य आ मोतियाबिंदक आपरेशन लेल बड़का छोटका सब आन ठाम जा रहल अईछ।
खेलौनाक जखईन शरीर मे शक्ति छलई, बड़का नेता बनल घुमईत छल। अपन समाज मे ओकर कहल बात अंतिम होईत छलई। किनको पर भी हाथ उठाबऽ मे ओकरा एको मिनट भी सोचऽ के नई पड़ई छलई।
गाम मे सब कहई- " अकर हाथ छुटल छई । ई हाथ एकदिन मे नई छुटलई। अकर शुरुआत रामजीवन सिंह कतऽ सऽ शुरू भेल छलई ।"
रामजीवन सिह कलामी व्यक्ति छलाह। गाम मे सबसऽ बेशी गाछी उनके छलईन। अही गाछी के रास्ता सऽ सब सोलकन दिशा- मैदानक लेल बाध मे जाईत छल। जे भी सोलकन, कनीको तरी- भिरी केलखिन, उनकर बाध मे जायबाक रास्ता बंद भऽ जाईत छलईन।
आई के जेकां शौचालयक कोनो प्रबंध गरीब घर मे नई होईत छलई। सुरक्षा भी एकटा दृष्टिकोण होईत छलई। समुह मे गरीब घरक महिला सब दिशा- मैदानक लेल अन्हार होबा स पहिने निकईल जाईत छल। अही रास्ताक फायदा रामजीवन सिंह उठबईत छलाह ।
सबसऽ पहीने गाम मे धनरोपनी रामजीवन सिंहक खेत मे ही होईत छलईन , ओकर बादे कीनको खेत मे मजुर सब हाथ लगबईत छल । ओनाही धन-कटनीक समय भी होईत छलई।ऐना लगई, जेना गामक सब मजुर रामजीवन सिंहक खेतक लेल ही आरक्षित छईन। खेत भी उनकर अतेक बेशी छलईन, शुरू होई- खत्म होबाक नामे नई लई।
एक बेर उनकर खेत मे खेलौनाक महीस चईल गेल छलई। कनी टा फसल जीयान भेल छलई।अही बातक लऽ कऽ खेलौना स रामजीवन सिंहक बेटा कॆ बहस भ गेलई ।
रामजीवन सिंहक बेटा के कोनो सोलकन उल्टा जवाब दई, ई शानक खिलाफ छलई। जमींदारक बेटाक खीस सातम आसमान पर आईब गेलईन। आव देखलकई नई ताव, दु थापड़, खेलौना के खींच देलकई ।
ओतई लगीचे मे खेलौनाक संघतिया, रमरतिया बान्ह पर घास गढ़ई छल। रमरतियाक घर खेलौना के टोले मे छलई । रमरतियाक बाप रामजीवन सिंहक हरवाह छल,तैं ओकरा घास छीलबाक अनुमति छलई।
बात अपन विरादरीक छलई। खेलौना के माईर खाईत देखी कऽ रामरतिया दौर पड़लई बचबई लेल।
आब की छलई, रमरतिया के देखीतेह , खेलौना के की नई जाईन की भेलई । पहीने तऽ चुपचाप थापड़ खा चुकल छल। बात खत्मे जेकां भऽ गेल छलई। ओकर महीस , खेत- मालिकक फसल बर्बाद केने छलई, अकर जुर्माना मे माइर खेनाई तऽ बनीते छलई।ई पाठ ओ बच्चे स ही पइढ़ चुकल छल।
लेकिन ओई दिन तऽ दोसरे ग्रह- लग्न छलई। खेलौनाक हाथ मे महीस के चरबऽ के समय नियंत्रण मे रखबाक लेल एक टा डंटा छलई। ओ सटासट चाईर डंटा, रामजीवन सिंह के बेटे के उपर चला देलकई ।
अई लाठीक चोट सऽ ओ बिलबिला ऊठल। बाबू- भैया के बेटा तऽ स्कुलो मे कखनो मास्टरक चांटा नई खेने रहईत अईछ।
कनईत चिल्लाईत रामजीवन सिंह क बेटा ओतऽ स परायल। ओकर कननाई पर उपर सऽ रमरतिया के हंसी भी छुईट गेलई ।
ओ जीवन मे पहील बेर सीयान बाबू- भैय्या के पिटाईयक बाद जोर- जोर सऽ कनईत सुनने छल। रमरतिया क समाज मे तऽ दस- बीस डंडा खेलाक बाद थोड़- बहुत मिमियेनाईक आवाज अबई अबई आ नईयो अबई छलई।
एत्तऽ तऽ एक्के लाठी पर छटपटाय लागल छल।तखईन कोन बातक मर्द भेल? सिर्फ गरीब पर डंटा चलबई लेल!
डंटा सहबाक जेकरा शक्ति नई होई , ओ दोसरा पर नई चलाबय।
रमरतिया के ई सीन देखबा मे बड्ड मजा अयलई।
ओकरा मोन पईर गेलई, एक बेर ओकरो बाप के भी छोटे उमीरक रामजीवनक भाई बेवजह मारने छलई । तखनो ओकरा बड्ड दुख भेल छलई । ओही राईत ओकर घर मे खेनाई नई बनल छलई। ओकर बाप के राईत मे काका सब पासीखाना ल गेल छलई। दु लबनी ताड़ी पीकर ओकर बाप घर घुरल रहई। दुख बीसराबई लेल अई सऽ बढ़िया दोसर रास्ता ओकर समाज मे नई छलई।
भोर भेलई, निशा टुटलई, फेर रमरतियाक बाप रामजीवन सिंहक खेती करऽ चईल गेल छलई। गाम मे इनका सब सऽ बिगाईड़ कऽ नई रहल जा सकईत छलई।
आई रमरतिया मोन सऽ खुश छलाय। अपन टोल मे दौड़ल गेल। सबके मजा लऽ लऽ कऽ खेलौनाक बहादुरीक खिस्सा कयेक बेर सुनेलकई।
पुरा गाम मे ई पिटाई वाली बात आईग जेकां पसईर गेल छलई।
खेलौनाक बाप हमरा कतऽ भागईत आयल छल। पर - पंचयती भेल छलई।
सवाल बेर- बेर अही पर आईब कऽ अटइक जाई छलई - "पहील हाथ के उठेलकई"?
जमाना बदईल गेल छलई। खेलौनाक समाज मे कयेक टा लाठी भऽ गेल छलई । आब गल्ती सहीक फैसला होबऽ लागल छलई। पंचायती मे एकतरफा निर्णय नई होई छलई , चाहे फरियादी कीयो होखस?
अही पहील हाथ उठाबऽ के बात के आधार पर खेलौना पंचायती मे बांइच गेल छल । माफी मांइग कऽ ओकर जान छुटल छेलई।
आब ओकरा रामजीवन सिंहक पट्टीदारी सऽ भीतरघाती दुश्मनी भऽ गेल छलई। ओना अई घटना क बाद गामक हीरो खेलौना भऽ गेल छल ।
अकर बाद किनको की मजाल , कोनो कमजोर पर हाथ ऊठा दईथ?
खेलौना अगल बगल गांव मे आब पंचायती मे जाय लागल छल। आसपासक कयेक गामक लोक ओकरा जानय लागल छलई।
अई माईर- पिटाईक घटनाक बाद रमरतिया जे नैहरा मे ओनाही मोन बदलई लेल आयल छल , अतई के भ कऽ रही गेल।
आब ओ खेलौनाक संगही रहऽ लागल छल। के ककरा रखलकई ? ई बात गाम मे स्पष्ट नई भ सकल छलई।
ओना गामक लोक के कहब छलई - " खेलौनाक रामजीवन सिंह के बेटा क मारऽ वाला करेज देख कऽ, रमरतिया अपना के ओकरा लेल निहुछ देने रहई । "
रमरतियाक घरवाला, ओकरा सासुर वापस ल जाई लेल कयेक बार अयबो केलकई।ओ ओकर संग नई गेलई। बाद मे गंऊआ सब रमरतियाक साथ देलकई, ओकर बर के एक तरह से खदेड़ कऽ भगा देने रहई। फेर ओकर घरवाला कहीयो घुईर कऽ नई अयलई।
ई रमरतिया कऽ पहील वला घरवालाक सासुर मे सब बांझिन कहईत छलई। अतऽ चाईर टा बेटा भेलई खेलौना सऽ।
रमरतियाक स्वभाव एहन छलई , नई अपने सास तर बसल आ नई ओकर पुतोहुये सब ओकर संग रही पेलई।
ओकर दु बेटा ड्राइवरी करऽ लागल छलई, एक टा चौक पर घरभुजाक दुकान खोलने छल।चारीम बेटा , जे सबसऽ बेशी पढ़ल छलई , शहरक चिरान - मिल मे मुंशी भऽ गेल छलई । चारू बेटा अलगा- अलगी मे रहई छलई। जाबईत तक रमरतिया जिंदा छलई, खेलौना के कोनो परेशानी नई होबऽ देलकई। ओ कीछु ना कीछु रोपनी- कटनी मे दिहारी मे कमाईये लईत छल। ऊपर सऽ बकरी सेहो पोसने छल। एकटा माल- मवेशी सबदिना रखलक। दुध क अलावा गोबरक खादर बिकाई छलई। मूंजक डलिया बुनईत छल - हाथ संधल छलई। अही सऽ बदलेन मे समान दोकानदार सऽ भेटीये जाई छलई। कीछु खेत भी बटाई मे लेने छल। सब सही चईल रहल छलई।
नई जाईन रमरतिया के कोन बीमारी भ गेलई ? खेलौना कीछु समईझ नई पैलक ........दस दिन क ही जाड़- बुखार मे ओ चईल गेलई । खेलौना सोईचते ही रही गेल छल , प्राईवेट मे नहींये देखा पायल ओकरा?
सरकारी अस्पताल मे देखबई मे सारा- सारा दिन लाईग जाई छलई । तखनो खेलौना संग जाई । इमहर माल- मवेशी भुखले रही जाई छलई। अही चिंता सऽ रमरतिया अपन समाजक कोनो आर काकी क संग अस्पताल चईल जाई छल। नई बचबा के छलई, नहींये बचलई रमरतिया।
गरीब गुरबा के कहीयो भी बड़का बीमारी भेल छई, कियो आई तक सुनने अईछ ? बड़का बीमारी ओ भेल , जकर ईलाज मंहग!
बीमारी क पता त जांचे स ही होई छई । जतबे बड़का बीमारी, ओकर जांच ओतबे ही मंहग।
गरीब लोग तऽ डाक्टरक फीस कऽ इंतजाम ही बड मुश्किल स कऽ पाबईत अईछ , महंग जांच सब त ओकर औकातक बाहरक बात भ गेलई । ईयाह भेल छलई रमरतियाक संग। डाक्टर स तऽ खेलौना देखबा देलकई , लेकिन जांच नई करा सकल छलई। करा भी लईतई त की ओ दिल्ली बम्बई ल कऽ जा सकईत छल? ओतेक जथा - जमीन छई?
ई जे मोन मे बम्बई मे नई देखबई क अफसोस होईतई, ओई स नीक त रमरतियाक चुपके स चईल जेनाईये भेलई।
खेलौना काज केनाई रमरतिया के जीबते छोईर देने छल। आब खेलौनाक बेटा सब कतऽ जा कऽ खाय के पारी बन्हायल छई।
भोजन त दुनु समयक भेट जाई छई। चुन-तमाकु के ओकरा बच्चे स तलब छई । अही मे दिकदारी होबऽ लागल छई।
देह आब चलई नई छई। बेटा सब खेनाई के अलावा कीछु दई लेल तैयार नई छई । ओना सरकारी लाल कार्ड ओकरो बनल छई। अही कार्ड पर चाऊर, गेहूँ आर अनाज सब राशन सऽ भेटई छई। जखईन जकर हिस्सा मे ओ रहईत अईछ , ऊयाह बेटा ई कोटा उठबईत अईछ।
सरकारक सौ दिनक रोजगार करऽ वाला मे खेलौनाक नाम भी दर्ज छई । सरकारी पोखईर के साफ-सफाई क नाम पर चेक बईन चुकल छलई। आब बस पैसा बैंक खाते मे आबहे वाला छलई । तखने कोनो कमीना मूंहझौसा , कलक्टर के गड़बड़ी के शिकायत कऽ देलकई। कलक्टर साहेब जांच बईसा देने छई। आब जांच चईले रहल छई । पैसा फंईस गेलई । अही कारण कनीक दिकदारी मे खेलौना अईछ।
हम सोचऽ पर मजबूर भऽ गेल छलऊं।की बाईज रहल अईछ खेलौना? कोन पैसा अकर फंसलई?
चलल त जाई नई छई, आर श्रमिक सुची मे नाम छई ? पोखईरक सफाईक कोनो काजे नई भेल छई। आत्मविश्वास अकर देखियऊ - "देर सबेर पैसा भेटबे करतई ।" बस ताबईत चुन तमाकुक लेल कीछु चाही।
खेलौना कही रहल छल - " हम आहांक घर के छोईड़ कऽ, गाम मे दुसर घर नई पकड़लऊं। अतऊ आब पहीने वाला चुहचुही नई छई। पहीले कतेक तरहक काज सब अतऽ होईत छलई। मालिक के अपनो नौकरी नई छलईन , तहियो दु लोक के रोजगार देने छलखिन। आहां सब पइढ़- लिखी कऽ हाकिम - हुकुम भ गेलऊं, ककरो रोजगार नई द पेलियई। कोन बातक हाकिम तखईन भेलऊं ?
हम सोचऽ लगलऊं- अकर कतेक उपदेश सुनुं। हमरे दरवज्जा पर बैस कऽ हमरे सुना रहल अईछ , " पहीले वाला चुहचुही अतऽ नई छई । कोई जन बनिहार ईहां काम नई कऽ रहल छई । सारा जमीन त आहां मनखब पर उठा रखने छी। काम बचलई कहाँ? "
के काज करायत ? खेतिहर मजदूर क दिहारी ततेक ने बइढ़ गेल छई कि के खेती करवा सकईत अईछ ? आब खेती फायदाक सौदा कतऊ स नई रहलई।
हम खेलौना के कहबाक आशय धीरे धीरे बुईझ रहल छलऊं । पहीने खेती सौदा नई, धर्म छलई, गरीब मजदूरक रोजगार छलई, गामक संस्कृति आर परिवारक अपन मान होई छलई। हालात बदईल गेलई, हमहु सब भी बदईल गेलऊं, आब उपदेश सुनना बस के बाहर भऽ रहल छल। हम ओकरा सऽ पिंड छोड़ाबऽ चाहइत छलऊं।
हम झुंझलाईत बेमन स कहलीयई - " ई पैसा लीयह। चुन तमाकु खरीद लेब। आहां आब बुढ़े भऽ गेल छी। स्टेशन अयबाक काज नई छई। "
हमर सलाह पर खेलौना कीछु जवाब नई देने छल। परनाम पाती केला बाद चईल गेल छल।
घुरती टिकटक दिन हम सपरिवार समय सऽ स्टेशन लेल घर सऽ विदा भऽ गेल रही। जखईन रेलवे स्टेशनक गुमतीक करीब पहुंचई छी, खेलौना ओतई स्टेशनक तरफ स लौटईत देखा गेल।
हम ओकरा देखते ही रंज स भईर गेलऊं ।हमर पुरा मूड खराब भऽ गेल। फेर अकरा पैसा चाहियई, घरक लोक केहन केहन आदमी पाईल रखने अईछ। कोना अकरा अतेक दिन सम्हालने हेताह ..................... हमरा ई नई छोड़त.......थेथर भऽ गेल छई .......ऐहने लोकक कारणे अफसर बनला के बाद लोक गाम अयनाई छोइड़ देईत अईछ ............. साफ साफ कहने रहीयई , स्टेशन नई आबई लेल , तखनो आईब गेल ।अतेक बुढ़ के कोना कटु वचन कहीयई ..........हुं हां हम करईत रहलऊं ।
खेलौना बजलक- " ढेबराक बेटा अतई स्टेशन पर टिकस काटई छई।ओकरे लग सऽ ओ आईब रहल अईछ। ट्रेन दु घंटा लेट छई। हम ईयाह बतबऽ आहां कतऽ जा रहल छलऊं ।आब आहां अतऽ तक आईये गेल छी, चलु स्टेशने पर ही बैसब।
स्टेशन पर ट्रेन लेट होबाक कारणे काफी भीड़ छलई। ठसाठस प्लेटफार्म मुसाफिर सऽ भरल- पड़ल छल। जमीनो पर कयेक लोक चादर बिछा कऽ बैसल छलाह। पांच आदमी के कुर्सी पर आरा- तिरछा भ कऽ आठ- दस लोक बैसल छलाह। कयेक तरहक खाय- पीयक अवैध खोमचा सब अतऽ ततऽ लागल छल। स्टेशन पर ऊयाह बाबा आदम क जमानाक सीलिंग पंखा अपन धीमा- चाल मे पुरा आवाजक संग उपस्थितिक अहसास करा रहल छल। जिमहर सुन्दर महिला आर युवती सब ठार छलीह , कीछु लोफर टाईपक लड़का ओतई मंडरा रहल छल। हमर नजर, प्लेटफार्म पर किमहर ठार भ कऽ इंतजार करु, उयाह जगहक तलाश मे चौकन्ना छल। असकर रहीतऊं , कतऊ भी इंतजार क लईतऊं। परिवारक संग रहला सऽ , प्राथमिकता बदईल जाईत छई। खेलौना तेज डेग स हमरे साथ तईन कऽ चईल रहल छल।
जेनाईये टिकट काउंटर वाला कमरा सऽ हम आगु निकललऊं, खेलौना के देखीते ढेबराक बेटा अंदर सऽ एक व्यक्ति के इशारा केलकई। हम हाव भाव सऽ बुईझ गेलऊं, ईयाह साहब, डेबरा बेटा अईछ। खेलौना , हमरा सब के अतई रुकबाक लेल कहलक ।
हमरा सब लेल तीन टा मोल्डेड कुर्सी कतऊ स तपाक स आईब गेल छलई । गर्मीक मौसम छल। बैसते ही लस्सी। फेर थोड़ेक समय बाद चाह सेहो। बच्चा क लेल कुरकुरेक चाईर टा पैकेट आर फ्रिजक ठंडा कैल सौफ्ट ड्रिंक्स।
हम पैसा देबाक पुरजोर प्रयास कयलऊं , ओ सब एको पैसा भी नई लेलक।
खेलौनाक समाज क चाईर व्यक्ति अतऽ स्टेशन पर दोकान खोलने अईछ। खेलौना ओकरा सब के हमरा जाय के बारे मे पहीने स ही कही चुकल अईछ।लोक एकाएकी आईब रहल छल। गामक संस्कारक नाते हमरा आ हमर पत्नी क पैर छुकर आशीष ल रहल छल। हमर पत्नी आ बच्चा अई आदर के देखी कऽ अभिभुत भऽ गेल छलाह।
अखईन दु घंटा स ज्यादा वक्त अतऽ स्टेशन पर बितबऽ के छल। हम पत्नी आ बच्चा के रेलवे के बारे मे पुरना, बिना सत्यापित जानकारी बतेनाई शुरू कयलऊं- " स्टेशन पर ट्रेन अयबा स आधा घंटा पहीने घंटी बजई छलई आर पन्द्रह मिनट पहिने सिगनल होईत छलई। ई सब काम मैन्युअल होईत छलई। मुजप्फरपुर स बेतिया के तरफ आबऽ वाला ट्रेन के " डाउन " आर बेतिया सऽ मुजप्फरपुर के तरफ जाय वाला ट्रेन के " अप " कहल जाई छलई। अप आ डाऊन ट्रेन के घंटी के धुन मे तकनीकी अंतर होई छलई। अई ध्वनि क अंतर के पकड़नाई आम लोकक वश क बात नई होईत छलई। ई एक तरह क शास्त्रीय संगीत छल, जेकरा जानऽ- समझऽ वाला हमेशा स कम रहला अईछ । अहीना रेलवे के सिस्टमक गुढ़ रहस्य सब के समझनाई सबहक बस के बात नई छलई।ट्रेन पर सवार भेनाई आ ट्रेन के समझनाई, दुनु अलग- अलग बात थीक। पैसेंजर, फास्ट पैसेंजर, एक्सप्रेस आर सुपरफास्ट एक्सप्रेस ई चाइर तरह क ट्रेन पहीने होईत छलई।
हमर पत्नी , बच्चा आ खेलौना चुपचाप हमर प्रवचन सुइन रहल छल। अगर हम कनीको गलत होईतऊं, मैथिल पत्नीक जेकां खेलौना के भी हमरा सही करबाक लेल टोकऽ मे कोनो गुरेज नई होईतई। ई सब संबंध परस्पर विश्वास पर निर्भर करईत छई। आजुक समय मे की कियो अधीनस्थ कर्मी अपन अधिकारी क कमी के इंगित करबाक साहस कऽ सकईत अईछ ? कदापि नई । समय पुरा बदइल चुकल छई ।
ओकरा सबहक लेल हम बिदेशिया मालिक छलीयई। ट्रेन क आबऽ के जखने समय भेलई, हमर हाथ अपन पाकेट मे चइल गेल । जे भी नोट हम रस्ता - पेरा के खर्चक लेल अलग स रखने रही , ओ सारा रुपया हमर बंद मुट्ठी मे आइब गेल। हम अपन अई बंद मुट्ठी के खेलौना क जेबी मे हाथ डाइल कऽ खोइल देलीयई ।
प्लेटफार्म पर कीछु लोक पटरी पार क कऽ दोसर तरफ चइल गेल छलाह । इनकर सबहक गिनती बेशी बुधियार मे सदा स होइत अयलईन अईछ। ट्रेन एला पर भीड़ प्लेटफार्म क तरफक दरवाजे पर होईत छई , ओ लोक धीरे स दोसर तरफ स ट्रेन मे एक मिनट पहीने चइढ़ जेताह।इयाह एक मिनटक लेल अतेक जोखिम उठबईत छईथ।
खेलौनाक समाज क लोक ट्रेन मे हमर बर्थ पर सब सामान हाथों हाथ सुरक्षित राइख देने छल। खेलौना कहलक- " हम आब अ़ंतिमे छी बबुआजी, जे आहां के स्टेशन पर छोड़ऽ आयल छी । अही लेल हमर बेटा सब नाराज रहइत अईछ। हमरा सऽ अई अंत काल मे हीस्सक छोड़ल जायत ? हम पैसा क लेल नई, स्नेह क लेल अबईत छी। ओई बुढ़ा मालिक- मलिकाईन के याद मे अबई छी। उनकर कर्जा चुका रहल छी। आब हमर उमीर भ चुकल अईछ। परलोक मे ओ सब भेटताह, हम की कहबईन।" ओकर आँइख भइर आयल छलई।
ई सब देख सुईन हमर पत्नी आ बच्चा भी गामक पैघ बुजुर्ग के जेना पैर छु कऽ आशीर्वादी लेल जाईत छई, ओहीना खेलौनाक पैर छु कऽ आशीष लई गेलाह।
खेलौना क आंइखे अई पैर छुला पर आखिरकार छलछलाइये गेलई।
" जाऊ जुग जुग जीबई जाऊ। हमरा सब के खाली बीसरब नई। गलती- सलती माफ कऽ देब। भ सकय तऽ घुरी आऊ गाम, ठेकानु अपन लोक वेद आ ठाम। "
खेलौना ठीके कही रहल छल। जाबईत वो अईछ, ताबीते "बबुआ मालिक "।
आब गाम अयला पर दोसर ऐहन कहऽ वाला के अईछ ? चुन तमाकुल की ? ककरो केतबो पैसा देला पर अतेक स्नेह स बबुआ मालिक कहत ? ई ओई पीढ़ी क अंतिम प्रतिनिधि अईछ । आबऽ वाला जमाना, किताबक पन्ना मे ही पइढ़ सकतई, खेलौना जेना लोक अई समाज मे होईत छलई।
स्टेशन पर हमरा बिदा करबाक लेल सिर्फ खेलौना ही ठार अईछ। गाम- परिवार स आर कीयो नई आयल अईछ।
जखईन हम ककरो विदा करऽ काल स्टेशन जेबई, तखने तऽ हमरो छोड़ऽ ओ लोक आयत ? अतऽ तऽ बराबरी वाली बात छई । पैसा स ही सही, आखिर खेलौना मे एतबा माश्चर्य त भेलई। खेलौना , सच मे हम चाह कऽ भी तोरा आ तोहर बात के भूला नई पेबऊ।
ट्रेन मे अपन सीट पर बैसलाक बाद भी खेलौना ही हमर मोन मे घुइम रहल छल। की युनिक नाम छई खेलौना? सच मे ई सब के खेलौना के जेना " खुशी " ही त दइत अईछ । लोक अकरा सऽ खेलाई छई , तोइड़ो दइत छई , खीस पीत मे पटइको दईत छई, तखनो ई खुशी देबाक अपन मर्म सऽ विमुख नई होईत अईछ । "
अगला जतरा मे गाम घुरला पर मोने मन खेलौनाक लेल कीछु गिफ्ट अनबाक निर्णय हम कऽ लइत छी।
हम वापस विदेश पहुँचला पर अपन काजक दुनिया मे लऊट चुकल छी।सब सोचलाहा बिसईर गेल अईछ। कीछु महीना पहीने घरक लोक सऽ फोन पर बात भऽ रहल छल। तखने पता चलल- " खेलौना " मइर गेल । अई समाचार स हम सकता मे आइब गेलऊं। कहलीयईन- " कीछु पाई-कौड़ी ओकर घर वाला के भेजवेलीयई की नई ?
जवाब भेटल- " आहां कोन दुनिया मे रहइत छी ? कोई अईतई, तखने ने पैसा दईतीयई। ओकरा सब के कोनो कमी छई ? खेलौनाक बेटा सब बड्ड धुमधाम स ओकर दाह- संस्कार केलकई। श्मशान जाइत काल शहर स बच्चा ब्रास बैंड पार्टी के बजेने छल। पुरा गाम मे आगु- आगु बैंड पार्टी आर खेलौनाक मृत शरीर के घुमावल गेलई।रामजीवन सिंहक पोता , खेलौनाक मृत शरीर के कंधा देबऽ वाला मे स एक छलाह। अगला विधायकी क चुनाव लड़ऽ वाला छईथ, ऐहन मौका कोना हाथ स जाईत देथीन। अंतिम दर्शन करऽ लेल कयेक गाम स लोक जुटल छलई। अखुनका विधायकजी के तरफ स पुरा इंतजाम छलई।अतेक भीड़ आइ तक गांव मे नइ देखल गेल छलई। रेलवे के माल- गोदाम आर मझौलिया चीनी मिलक कामगार सब खेलौना क सम्मान मे एक दिनक काज बंद रखने छल ।"
खेलौना के "शोषणक खिलाफ" आवाज उठबऽ वाला अई एरियाक पहील व्यक्ति कहल गेलई। ओकर कयेक पृष्ठक जीवनी छइप कऽ घर- घर मे बांटल गेलई।
सुनबा मे आईब रहल छई , पटना सऽ निकलऽ वाला एकटा दैनिक अखबार, " खेलौनाक कृतित्व और व्यक्तित्व " विषय पर व्याख्यानमाला आयोजित केने छल।
हमहु अपन अंतर्मन सऽ खेलौना के श्रद्धांजलि द देलीयई। वो अपने आप मे अकेला छल। जनसंपर्क आर योजनाक क्रियान्वयनक ओकर एक उदाहरण हम स्टेशन पर देख चुकल रही । ऐहन लोक धरती पर बार बार जन्म नई लईत अईछ।
खेलौनाक इच्छा छलई- " हम गाम घुरु। ओतई रहु।" हम मोने मोन फैसला लऽ चुकल छलहुं। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। केशव भारद्वाज किछु पढ़ल आ किछु सुनल- ईदी अमीन। --------------------------------- जहिया हमर बदली युगांडा भेल, हमरा कोनो खास एतऽ के बारे मे पता नई छल। गाम फोन कयलऊं। बाबूजी कहलाह- " ई त ईदी अमीनक देश छई। ओ तऽ मनुकखक मास खाई छलई। ठीक स रहियह।" आब हमरा याद परल- " ईदी अमीन।" जिज्ञासा भेल अकरा बारे मे । युगांडा मे सबसं बढ़िया बात हमरा लागल- � अफ्रीकी प्राईड�। ओतुका लोक के अफ्रीकी होबा मे गर्व क बोध छलई। हम अपन आफिस मे कहियो भी दु टा अफ्रीकी के लड़ाई करईत नई देलियई। जनजातीय कबीलाई आ धार्मिक आधार पर विशेष हेमक्षेम छलई, मूदा गोलबंदी नई छलई।एक सुर्यास्त अफ्रीकी मे दोसर अश्वेत क प्रति सद्भाव क बात हमरा हमेशा अभरल। ईदी अमीन के भी धार्मिक मान्यता पर अफ्रीकी गर्व वाला भाव हावी रहलई। ताहि ल कऽ ओ अतेक शक्तिशाली भेल, जकर परिणति निरंकुश राज मे भेलई। अई मे कोनो दु मत नई, दुनिया मे सबसं बेशी चर्चित तानाशाह मे स एक ईदी अमीन छल। सरल शब्द मे कही सकईत छीयई जे सैनिक तख्तापलट स ओ 25 जनवरी 1971 कऽ सत्ता हथियौलक। अकर शासन अप्रैल 1979 तक चलईत रहलई। युगांडा क निर्वासित लोक, तंजानियाक सेनाक संग मील कऽ अकरा गद्दी पर सऽ 11 अप्रैल कऽ हटेलक। 8 बरखक अकर शासन रहलई।अई मे नीक- बेजाय सब रंगक काज भेलई। निरंकुश बला काज लेल ओ बेशी जानल गेल। आई जे युगांडा क जनईत अईछ, ओ ईदी अमीनक खौफनाक खिस्सा सेहो कनियो ने कनियो जनित अईछ। ईदी अमीनक बारे मे जतबे जिज्ञासा बढत , ओतबे नब बात पता चलत।भारतीय लोकक जबान पर तरह तरहक खिस्सा सब उपलब्ध छई। लब्बोलुआब ई जे किरदार दिलचस्प छल। किछु नीक काज जेना युगांडा एयरलाइंस क स्थापना, खेल- कुद के बढावा,एंटेबे एयरपोर्ट क विस्तार, किबिंबा चाऊरक योजना, न्युयार्क मे यूगांडा भवनक बननाई, युगांडा हाउस कम्पालाक बननाई आदि छई। ओहिना दोसर तरफ अकर शासनकाल मे कतेक लोकक नृशंस हत्या करबाक बात सामने अयलई। जेना- चर्च आफ युगांडा क प्रधान, अतुका मुख्य न्यायाधीश, कयेक टा म॔त्रीगण आ आन आन नामी लोक सब। ईदी अमीन अतेक निरंकुश एक दिन मे नई भेल छलई। दैनन्दिन क घटना सबहक प्रतिफल छलई ओकर क्रुर व्यक्तित्व । ओ अपने ई सब बात सार्वजनिक रूप स सेहो कहने अईछ। प्रशासन के बेशी जिम्मेदार बनबई लेल ओ युगांडा के 9 टा राज्य मे बंटने छल। अकर गवर्नर सबहक शपथ ग्रहण ग्रैंड इम्पीरियल होटल मे भ रहल छलई। ओ शपथ ग्रहण समारोह क उद्घाटन काल मे संबोधित करईत कहलकई- " हम अई होटल मे कियैक समारोह रखलऊं आ कोना सेना मे नियुक्ति भेलऊं? अकर पाछु कारण छई। सैनिक बननाई ओकर सपनो मे नई छलई। परिस्थिति एहन बनईत गेलई। ओकरा सेना मे बहाली भ गेलई। 1946क करीब ओ ग्रैंड इम्पीरियल होटल के बगल स गुजरईत छल। ई क्षेत्र अंग्रेज ( श्वेत) सबहक लेल रहई। अतबे गलती क लेल ओकरा 6 महीना खातिर जेल मे डाईल देल गेलई। ओ कहईत रहलई, हमरा ई नई बुझल छल। कियो नई पतियेलकई। अमीन के धुआ काया बेश बलिष्ट छलई। जेले मे ओकरा अधिकारी सब कहलकई जे तु सेना मे बहाल भ जो। मरता क्या न करता। जेल स छुटई लेल ओ सेना मे बहाल भ गेल । आ आई सर्वोच्च पद पर पहुँचल अईछ।" अमीन के सेनाक यात्रा अतेक आसान नई छलई। बहुत दिन तक ओ " भंसिया" के काज करईत रहल। बाद मे मऊ मऊ विद्रोह जखईन केन्या मे भेलई, ओ ओकरा दबाबई लेल जे सेनाक टुकड़ी गेल छलई, अमीन सेहो ओई मे छल। अई विद्रोह क अगुआ छल " जोमो केन्याटा"। ई बाद मे आजाद केन्या के राष्ट्रपति सेहो बनल। अमीनक कहब छलई जे केन्याटा कोयला स भरल ट्रक मे नुका क परा रहल छल। अमीन ओकरा देखलकई, मूदा दया आईब गेलई आ छोईर देलकई। अई तरह स केन्याटा ब्रिटिश सेनाक पकड़ मे नई आयल। 1959 अबईत अबईत अमीन ब्रिटिश सेना मे स्थानीय अश्वेत अफ्रीकी लेल निर्धारित सबसं पैघ पद पर आईब गेल छल। 1961 मे प्रोक्टोरेट ब्रिटिश सरकार अफ्रीकी सैनिक खातिर कमीशंड अधिकारी पद शुरू केलकई। अमीन सेहो प्रोन्नति पाईब लेफ्टिनेंट भ गेल। युगांडा क इतिहास पर थोड़ेक नजर दौड़ेबई। 9 अक्टूबर 1962 क युगांडा आजाद भेल। पहिल प्रधानमंत्री मिल्टन ओबोटे आ बुगांडाक राजा एडवर्ड मुटेशा ll सेरेमोनियल राष्ट्रपति भेलाह। किछु महिना बाद ब्रिगेडियर शबा अपोलो सेना प्रमुख नियुक्त भेलाह। इनकर डिपुटी के पद इदी अमीन के भेटलईन। अई बीच मे बहुत रास सैन्य पद आ नीति सब मे बदलाव कैल गेलई। राष्ट्रपति मुटेशा आ प्रधानमंत्री ओबोटे के बीच सत्ता खातिर राजनैतिक रस्सा कस्सी चईल रहल छलईन। ओबोटे के होई छलईन जे सेना प्रमुख ओपोलो , राष्ट्रपति मुटेशाक विश्वस्त लोक छईथ। प्रधानमंत्री आ राष्ट्रपति एक दोसराक खिलाफ साजिश मे लागल छलाह। जखईन भी नब कोनो देश आजाद होई छई, सत्ता क असली हकदार क सवाल पर दावेदार सबहक बीच साजिश क खेला होईत रहइ छई। प्रधानमंत्री ओबोटे तखुनका संविधान के निरस्त क देलखिन। अकर पाछु राष्ट्रपति मुटेशा के खत्म करबाक मंशा छलईन।आब नबका संविधान युगांडा मे लागू भेलई। ओबोटे अतुका कार्यकारी राष्ट्रपति भ गेलाह। सारा शक्ति इनका लग आईब गेलईन। ओबेटे आब ईदी अमीन के मुटेशाक घर पर छापा मारबाक आदेश देलखिन। मुटेशा परा कऽ लंदन चईल गेलाह। ओतई 1969 मे मरियो गेलाह। ओबोटे एक एक कऽ अपन प्रतिद्वंद्वी सब के खात्मा मे लागल छलाह। अकर बाद ओ सेनाध्यक्ष ओपोलो के बर्खास्त क देलाह। नब सेनाध्यक्ष क रुप मे ईदी अमीन के ताजपोशी कैल गेलईन। ओपोलो अपन बर्खास्तगी के खिलाफ तखुनका न्यायालय मे अपील कैने छलाह। जज रसेल छलाह। ओ बर्खास्तगी के जायज मानलाह। अई तरह स ईदी अमीन के सेनाध्यक्ष बनला पर सब बाधा समाप्त भ गेल छलईन। पदक तृष्णा बढल जा रहल छलईन। सत्ता क सीढ़ी पर आगु बढल जा रहल छलाह। 25 जनवरी 1971 क राष्ट्रपति ओबोटे सिंगापुर मे राष्ट्रमंडल देशक सभा मे भाग लई लेल गेल छलाह। इमहर युगांडा क सेनाध्यक्ष ईदी अमीन अपन विश्वस्त सैनिक सबहक बले तख्तापलट क देलक। अई समय अमीन 43 बरखक छल। अमीन सबस पहिने तखुनका संविधान के निरस्त आ संसद के भंग कयला। शासन चलबई लेल मंत्रीमंडल के गठनक घोषणा केलाह। मंत्री सब के बदलह मे ईदी अमीन के कनिको देरी नई लगई छलई। जहां कोनो नकारात्मक खबर ओकरा लग अबई, चट दऽ ओई मंत्री के बर्खास्त क दई। ई बात नई छलई जे ईदी अमीन ही खाली मंत्री सब के हटबथिन, मंत्री अपनो त्याग पत्र दई। प्रोफेसर रूगुमायो के नाम अई लेल बार बार अबई छईन। ई शिक्षा मंत्री छलाह। अपन त्याग पत्र मे लिखलाह- " देश काल के वर्तमान स्थिति क देखईत, मंत्री पद स त्याग पत्र देबाक हम निर्णय कयलऊं अईछ। अकर कारण हमर व्यक्तिगत आ नैतिक अईछ। देश क अई माहौल मे हमरा अपन कर्तव्य निभावह मे कठिनाई बढले जा रहल अईछ। अकर अलावा, हमर सोच अईछ जे हमरा पद छोड़ला स दोसर उपयुक्त व्यक्ति के इ पद भेटतईन। ओ नीक जकां हमरा सं बढ़िया ढंग स काज करत आ देश के आगु ल जायत।" अकर बाद प्रोफेसर बनागे भी त्याग पत्र द क निर्वासित भ लुसाका, जाम्बिया चईल गेलाह। अमीन अई स बड्ड खिसियाल, मूदा आब कईये की सकताह। ओ अई दुनु गोटे के साम्राज्यवादी शक्ति क दलाल कहलक। ओकर अनुसार ई दुनु गोटे मंत्री के शपथ कालक गोपनीयता रखबाक जे मानदंड छई, ओकर उल्लंघन कयलाह अईछ। देशक अंदरूनी बात जाम्बिया स सांझा कयलाह अईछ। के नैतिक आ के अनैतिक, अकर फैसला त समय करतई। इदी अमीन अपन कैबिनेट क सब मंत्री सबहक मेडिकल जांच करबेने छल। तखुनका विदेश मंत्री नैरोबी मे बेहोश भ गेल छलाह। अई सबहक पाछु काजक दबाव के कारण बतायल गेलई। कैबिनेट मंत्री सब के ईदी अमीन जबर्दस्ती छुट्टी पर पठा देलकई। ओकरा अनुसार छुट्टी मनेला स काजक दबाव कम हेतईन। मंत्री के छुट्टी रहला पर विभाग क सचिव सब मंत्री के काज सम्हारलकई। विभागीय सचिव के अतऽ परमानेंट सेक्रेटरी कहल जाई छई। अई छुट्टी क बाद कयेक टा मंत्री के ईदी अमीन हटाईयो देलकईन। अकर सरकार मे कखईन ककर दिन पुईर जेतई, कियो नई जनईत छलई। कर्नल ओडांगा विदेश मंत्री छलाह। बाद मे उनकर अपहरण भ क हत्या भ गेलईन। लहाश नील नदीक कात मे भेटलई। ओहिना कृषि मंत्री ओकवारे के सेहो हत्या भ गेलईन। मंत्री सबहक फेरबदल होईत रहल। भारते जकां युगांडा मे कयेक टा स्वतंत्र राज्य सब छलई। स्वतंत्र युगांडा क पहिल राष्ट्रपति मुटेशा क चर्चा हम क चुकल छी। ई बुगांडा राज्यक " कबाका" छलाह। कबाका अतूका राजा के कहल जाईत छलई। अंग्रेजी सरकार भी अकर अस्तित्व के मान्यता देने छलई। बाद मे ओबोटे के संग सत्ता संघर्ष मे मूटेशा निर्वासित भ लंदन चईल गेल छलाह। अहिना "टोरो " राज्य छलई। अकर राजकुमारी एलिजाबेथ बगाया छल। अकर नाम संग कयेक टा रिकार्ड बनल छलई। विदेश मे पढल लिखल आ माडलिंग स जुड़ल छलीह। अपना समयक सर्वगुण सम्पन्न सुन्दरी छलीह।लोकक कहब छई जे ईदी अमीन अकरा स बियाह करबा लेल पाछु परल छलई। सच्चाई जे भी होई। ई पहिल अफ्रीकी युगांडन महिला वकील भेलीह। वकालत करईत ई एकटा इंश्योरेंस के केश यूगांडा मे जीतलीह,बगाया के ईदी अमीन युगांडा क विदेश मंत्री बनेलकई। अकर शपथ ग्रहण समारोह मे बगाया के भविष्य आ जिम्मेदारी क बारे मे अमीन बहूत रास बात कहलकई। जेना- " हमरा अई स बहुत प्रसन्नता भ रहल अईछ जे हम अफ्रीका क पहिल महिला विदेश मंत्री के देख रहल छी।हम चाहई छी जे आहां तेहन मजबुत बनी, जेहन इजरायलक गोल्डा मीर, भारतक इंदिरा गाँधी, श्रीलंका क भंडारनायके आ वियतनामक मैडम वीन छलीह। ई सब लोक अहीं जकां पहिने विदेश मंत्री रहल छईथ। अगर आहां क कर्तव्य क निर्वहन मे कियो बीच मे अबईया, सीधा उनका हमरा लग पठा दियऊन। " अमीन ईहो बजलाह जे हमरा बगाया स पहिल भेट लंदन मे 1964 मे भेल छल।तहिया ई ओतऽ कानून क पढाई करईत छलीह। शपथ ग्रहण क बाद 7 दिनक छुट्टी पर बगाया के अमीन पठा देलकईन। अही 7 दिन के भीतर अमीन इस्लामी कांफ्रेंस मे भाग लई लेल लाहौर, पाकिस्तान गेल छल। जखईन बगाया छुट्टी स घुरलीह त समाद ल कऽ उनका केन्या क राष्ट्रपति केन्याटा लग पठेलकईन।ई ऊयाह केन्याटा छलाह जिनका ईदी अमीन कोयला क ट्रक मे भगबा काल पकरने छलईन आ फेर छोईर देने रहईन। बगाया जखईन केन्या स घुरलीह त पता लगलईन जे उनका स पहिलुका विदेश मंत्री कर्नल ओन्डोगाक हत्या भ गेल छई। सरकारी खबरक अनुसार साम्राज्यवादी शक्ति अकर हत्या क पाछु छई। किछु समय बाद पीटर सेडलिज नामक पत्रकार जे जर्मन छल, ईदी अमीनक बारे मे अधलाह खबर लिखलक आ छपलक। बगाया ओई पत्रकार क अई गलती क लेल निंदा केलखिन। इनकर कहब छलईन- " कियो विदेशी अगर अतुका राष्ट्रपतिक जे निर्विवाद रुपे युगांडा क गौरवक प्रतीक छईथ, सब बुझईत उपहास करईत अईछ, ई नई चलतई।" बगाया तखुनका जर्मन राजदूत डाक्टर काप्फ के बजेलखिन आ अपन विरोध दर्ज कैलखिन। अई तरहक काज स युगांडा आ जर्मनी क संबंध पर खराब असर होबाक बात सेहो कहलखिन। जर्मन राजदूत अई कृत्य लेल खेद व्यक्त क अपन जान छोड़ऊला। उनकर कहब छलईन - "नैरोबी क एशियाई कम्पनी सब ई लिखबेलक अईछ।" अमीन निर्णय लेबऽ मे धरफरिया छल। क्षण मे चट आ क्षण मे पट। 28 नवम्बर 1974 क बगायाक मंत्रीमंडल स बर्खास्तगीक घोषणा ईदी अमीन कैलक। बगायाक अंदेशा पहिने स छलई। ओ भाईग कऽ नैरोबी, केन्या आईब गेल छल। लोकक कहब छई जे बगाया के अमीन रखैल बना कऽ राखऽ चाहईत छलई। ई अपने राजकुमारी आ ब्रिटेन मे पढल लिखल छल। अई लेल ई तैयार नई भेल। सच जे भी होई। बगाया के अपन जान पर खतरा बुझेलई आ ओ परायल। ओ पूर्व क विदेश मंत्री के हश्र आ अंततोगत्वा हत्या देख चुकल छल। देश छोड़नाईये उचित बुझेलई। ईदी अमीन क समाद बगाया के एलई। विदेश मंत्रालय क संपत्ति सब के घुरेबाक बारे मे । आरो कयेक टा निराधार आरोप बगाया के बारे मे अमीन लगेलकई।बगाया क बदनाम करबा लेल तरह तरह क फोटो सब हक प्रकाशन भेलई। बगाया सेहो कमजोर माईटक बनल नई छल। जई युरोपीयन अखबार ओकर गलत फोटो छपलकई, ओकर खिलाफ बगाया मोकदमा दायर कैलक। ई दाईल जखईन नई गललई त अमीन बगायाक माँ ओमुगो आर मौसी के बजेलकई।ओकर मां क माध्यम स बगाया स फोन पर गप्पो केलक। बगाया के युगांडा घुरई लेल नेहोरा केलकई। ईहो कहलकई - "आहां अपन माँ स त भेट करऽ आईब जाऊ।" बगाया नीक स अमीन के चिन्हई छल । ओ नई आयल। तखईन अमीन, बगाया के मां के नैरोबी जा कऽ बगाया के युगांडा आबई लेल बुझबई खातिर जाय लेल कहलकई। बहलाबऽ फुसलाबऽ के खुब खेला चललई। अई तरहक अमीनक बगाया के बजबऽ के प्रयास ओकर हताशा के दर्शऽबईत छल। जाबईत अमीन सत्ता मे रहल, बगाया युगांडा नईये घुरल। जखईन अमीन सत्ता स हटल, तखईन बगाया 1980 क चुनाव मे अपन भाई के प्रचार मे युगांडा आयल छल। ओना ओई चुनाव मे ओकर भाई नई जीतल छल। अई तरहे ईदी अमीन पुराणक बगाया अध्याय खत्म भेल। मुटेशा ---------- ओबोटे जखन पुरा सत्ता पर कब्जा क लेलकई, तखईन बुगांडाक कबाका( राजा) मुटेशा जे राष्ट्रपति छलाह, भाईग कऽलंदन आईब गेल छलाह।ईदी अमीन तहिया ओबोटे क आदेश पर मुटेशाक महल पर छापा मारने छल। मुटेशा क निधन लंदन मे 1969 मे ही भ गेलईन। ओई समय युगांडा मे ओबोटे क शासन छलई। अही लेल मुटेशा क मृत शरीर के लंदनक कब्रिस्तान मे सुरक्षित राखल गेलईन। सोच ई छलई जे आई ने काईल्हि अकरा बुगांडा आनल जायत। मुटेशा क दफनावह स पहिने जे लोकाचार विध भेल छलई, ओई मे बहुत रास पादरी आ बुगांडा राज स जुड़ल लोक सब भाग लेने छलाह। मुटेशाक एकटा विधवा सारा , दफनावह समय नई उपस्थित रहय। कहल जाई छई, मुटेशाक मौतक समाचार सुईन ओकर मोन बेशी खराब भ गेल छलई। बुगांडा राजपरिवार के ओतुका लोक मे बहुत सम्मान छलई। ईदी अमीन जखईन 25 जनवरी 1971 मे सत्तासीन भेल, लंदन मे गिरवी राखल मुटेशाक दफनायल शरीर के युगांडा मे अनबाक आ पुरा सैनिक सम्मान क संग, जेना एकटा राष्ट्राध्यक्ष के होबाक चाही, तेनाहे करबाक घोषणा कयलक। अई सबहक तैयारी लेल मंत्री सबहक समिति बनेलक।कार्यक्रम पैघ छलई। कयेक टा उपसमिति सेहो बनल। मुटेशाक परिवार क लोक सेहो अई सब उपसमिति क सदस्य छलाह।मंत्री क समिति, ब्रिटिश सरकार के अधिकारी सब स आवश्यक मंजूरी सब लेलक। मुटेशाक विधवा नाबागेरेका अई सब लेल ब्रिटिश सरकार के अपन सहमति देलकई। अही सब तैयारी के बीचे मे मुटेशाक छोट भाई प्रिंस जीको के गला मे कोनो संक्रमण क कारणे मृत्यु भ गेलई। तखनो तैयारी चलईत रहलई। जखईन एन्टेबे हवाई अड्डा पर ताबुत उतरलई, पुरा राजकीय सम्मान क संग स्वागत भेलई।अमीन अपने हवाई अड्डा पर अगवानी लेल उपस्थित छल। ताबुत के संसद भवन मे आम लोक के दर्शनार्थ राखल गेल। कसुबी शाही मकबरा मे दफनावल गेल। अमीनक सत्ता मे जखईन आयल, तखईन मुटेशाक बेटा प्रिंस मुटेबी 16 बरखक छल आ निर्वासित भ इंग्लैंड मे पढाई करईत छल। अमीन, मुटेबी के युगांडा आबऽ के प्रस्ताव देलकई।समाद छलई- " आहां के जखईन मोन करय, अपन घर घुईर आयब। आहांक स्वागत अईछ।" ईदी अमीन के ई समाद केऽ मुटेबीक इंग्लैंड क अभिभावक स्वागत कयलाह। ओतुका मीडिया क कहलाह- "ई बड्ड नीक समाचार अईछ, मूदा अखईन प्रिंस के अई विषय मे किछु आर नई करबाक छईन आ नई विचारे छईन। अखईन उनका ब्रिटेन मे रही कऽ "O"लेवल क पढाई पुरा करबाक छईन।" बुगांडा राजक पुरान शुभचिंतक सबहक कहब छलईन- " ठीक छई, पढाई पुरा करऊथ। स्कूल क छुट्टी मे त युगांडा आईब सकईत छईत।" अपन पिता मुटेशाक अंतिम संस्कार मे प्रिंस मुटेबी शामिल होई लेल युगांडा आयल छलाह। ईदी अमीन स भेट भेल छलईन।तकर बाद लंदन घुईर गेल छलाह। अई स पहिने ईदी अमीन प्रिंस मुटेबीक माय सारा स भेट कयलाह।उनका प्रिंस मुटेबी के स्कूल क एक महीनाक छुट्टी मे कम्पाला अयबाक बारे मे बतेलकिन। सारा आ प्रिंसक लेल एकटा घर कम्पाला मे सेहो देबाक वादा केलखिन। जखईन प्रिंस मुटेबी युगांडा अयलाह , उनकर स्वागत मे लुजीरा मे एकटा कार्यक्रम आयोजित छल। अई मे अमीन अपने एकटा अत्याधुनिक नावक चाभी मुटेबी के देलखिन। ई नाव असल मे मुटेबीक पिता मुटेशाक छलईन। ओबोटे के सरकार अई नाव के अपन कब्जा मे ल लेने छल। अमीन इहो बजलाह- " हम चोर नई छी। अगर से रहितऊं, त नाव घुरईतऊं नई।" अकर अलावा अमीन बुगांडाक संभ्रांत लोक के सेहो चेतावनी दईत कहलाह- " आहां सब ई बच्चा( प्रिंस मुटेबी) के भ्रमित नई करियऊ।अखईन पढाई पुरा करऽ दीयऊ।अगर आहां सब झुठ- फुस अकरा कान मे दईत रहबई,ई ठीक स नई पईढ पैत।" ओई नाव पर अमीन आ मुटेबी दुनु गोटे सैर कैलाह। युगांडा स विदा होबऽ स पहिने प्रिंस मुटेबी बजलाह- "हम ह्रदय स सब के धन्यवाद क रहल छी। विशेष कऽ ईदी अमीन के दयालुता के , जे ओ हमरा आ हमर परिवार के खातिर कयलाह अईछ। हमर जे हार्दिक स्वागत आहां सब कैलऊं, तकर आभार। हम अतुका लोक के कही रहल छी जे युगांडा के बनबऽ आ मजबूत करऽ मे ईदी अमीन के सहयोग करू। धार्मिक आ राजनीतिक भिन्नता क बिसईर कऽ, आपस मे भाईचारा बढाऊ। सामाजिक आ आर्थिक स्थिति मे सुधार अनई लेल खुब मेहनत करई जाऊ। हम जल्दिये दोबारा युगांडा आयब।" एशियाईक निष्कासन --------------------------- 12/ 13 अगस्त क अमीन, एशियाई मुलक ब्रिटिश नागरिक आर भारत, पाकिस्तान आ बंगला देश क नागरिक के बारे मे देशक नाम संदेश देने छल।ओ कहलकई- " आहां सब के बुझल अईछ, एशियाई मुलक ब्रिटिश नागरिक आ भारत, पाकिस्तान आ बंगला देश क लोक के 90 दिनक भीतर युगांडा छोड़बाक ऐतिहासिक निर्णय सरकार लेने अईछ।" अई निर्णय लेबाक पाछु की कारण छैक, से आहां सब के जनबाक चाही- " सरकार क मानब छई, अकर मुख्य काज समाजक भलाई छई।अकर सीधा अर्थ भेलई जे समाजक कोनो भी वर्ग विशेष जेना एशियाई के अतूका व्यापार पर हावी,नियंत्रण आ एकाधिकार नई होबाक चाही।कोनो भी देश ई नई बर्दाश्त करतई, ओकर अर्थ व्यवस्था बाहरी लोकक हाथ मे होऊ।विदेशी ओई देशक आर्थिक हालात के तहस नहस करई । अतबे नई, ओ सब कयेक तरहक भ्रष्टाचार मे सेहो लिप्त हुआय।" अमीन उद्घोषणा केलकई- " 9 अक्टूबर 1962 क युगांडा राजनैतिक रुप स आजाद भ गेल अईछ।युगांडा देश असल मे युगांडनक लेल छई।अई पर नियंत्रण युगांडने के होबाक चाही। हमर सरकारक मुख्य दायित्व आ कर्तव्य अईछ कि युगांडा के आर्थिक आ सामाजिक क्षेत्र मे भी आजादी भेटई। ईयाह असली आजादी छई।" अमीन अफसोस जाहिर कयलक- " हमर देश आर्थिक रुप सं स्वतंत्र नई भेल अईछ।अकर अर्थ व्यवस्था विदेशी एशियाई सबहक हाथ मे छई।पिछला 70 साल मे, आर्थिक आ सामाजिक क्षेत्र मे एशियाई आ अफ्रीकी लोकक बीचक खाई कम होबाक जगह पर बढ़िते जा रहल छई। हम सब जाईन रहल छी, कम्पाला, जिन्जा,बाले, फोर्ट पोर्टल, लीरा आदि शहर मे सब व्यवसाय एशियाई क हाथ मे छई। सरकार आब निर्णय कैलक अईछ, देशक आर्थिक जीवन सही हाथ मे राखल जेतई।ई छई, अतुका स्थानीय अश्वेत।" अमीन अपन अई निर्णय क पाछु भगवान क हवाला सेहो देलक। "हम आहां सब के बार बार कहने छी, हम या हमर सरकार जे भी निर्णय करईत अईछ, भगवान क निर्देश रहईत अईछ। आहां सब सुनने होयब, ईहो निर्णय हम भगवाने के कहला पर लेलऊं। हम साउथ कारामोजा मे एकटा उद्घाटन मे गेल रही।3 अगस्त 1972 क हमरा सपना आयल।एशियाई समस्या प्रचंड विस्फोटक भेल जा रहल छई।भगवान हमरा निर्देश देलाह, आहां जल्दी स अई स्थिति स बचबियऊ।हमरा कहल गेल जे भगवान मे आस्था राखु। युगांडा अई आर्थिक युद्ध मे विजयी होयत।" एशियाई के निष्कासन क फैसला पर सब तरहक प्रतिक्रिया अयलई।1973 मे एशियाई के निष्कासन क पक्ष मे एकटा स्थानीय अश्वेत हमादान ओकेन, 337 किलोमीटर पैरे चईल कऽ एलई , अमीन के भेट कऽ आभार व्यक्त केलकई। अई तरहक प्रतिक्रिया स अमीन बहुत ही उत्साहित भ गेल।ओ आम लोकक नब्ज पकईर चुकल छल। अकरे इशारा ओ अई पदयात्रा मे बुझलकई। युगांडा क मुख्य न्यायाधीश के उत्सव मे अश्वेत हमादान भी सम्मिलित आ सम्मानित भेल। एशियाई विरोधी भावना युगांडा के सुदूर भाग मे भी पहिने स फैलल छलई। आजादी स पहिने भी ब्रिटिश आ एशियाई के समानक बहिष्कार क आंदोलन युगांडा मे भ चुकल छल। जखईन युगांडा स एशियाई के निष्कासन भेलई, त ई सब केन्या के रस्ता स बाहर जाय के चाहला। केन्या मे ओई समय केन्याटा के सरकार छलई। ओ एशियाई सब लेल बोर्डर सील क देलकई। ओतुका उपराष्ट्रपति कहलकई- " दोसर देशक नागरिक लेल केन्या कुड़ा क मैदान नई अईछ।" निष्कासित एशियाई मे करीब 50000 ब्रिटिश पासपोर्टधारी आ 23000 युगांडा क नागरिक छलाह।शुरू मे त ब्रिटिश सरकार ई निष्कासित ब्रिटिश पासपोर्टधारी के स्वीकार करऽ लेल अनिच्छुक छल। बाद मे रिसेट्लमेट बोर्ड बनेलक आ 27200 एशियाई लोक के अपना कतऽ बसेलक। अखुनका ब्रिटेनक गृह मंत्री प्रीति पटेल क पुर्वज ईयाह निष्कासित एशियाई युगांडन छलैथ। ई एशियाई सब दुनिया मे जतऽ कतऽ गेल, बहुत तरक्की कैलक। अमीन अपन सब भाषण मे एशियाई क निष्कासन क उद्देश्य युगांडा क वाणिज्य आ उद्योग मे अश्वेतक वर्चस्व कहईत छल।निष्कासित एशियाई क सम्पत्ति स्थानीय अश्वेत के देल जेतई।ओ इहो कहलकई- " सरकार चाही रहल अईछ की जे भी युगांडन दुनिया के आन देश मे व्यवसाय करईत छईत,ओ सब युगांडा घुईर जास आ निष्कासित एशियाई क व्यवसाय सम्हारस।निष्कासित एशियाई ज्यों अतऽ किछु पट्टा पर लेने छईत, ओकरा नवीकरण नई होयत। ई अपने आप अतुका सरकार क नामे भ जायत। अमीनक कहब छलई - स्थानीय अश्वेत सब के पहिने बिजनेस के ट्रेनिंग देल जेतईन। जखईन अई विधा मे प्रशिक्षित आ पारंगत हेताह, तखने उनकर नाम संपत्ति क स्थानांतरण हेतईन। बिजनेस प्रशिक्षण खातिर छोट-छोट कोर्स सरकार तैयार केलकई। खुदरा विक्रेता, थोक विक्रेता, डिस्ट्रीब्युटर, आयातक आवश्यकतानुसार कोर्स बनलई।बाद मे किराना, दवाई, हार्डवेयर आदि खातिर सेहो प्रशिक्षण कोर्स शुरू भेलई। अमीन अपन देशवासी सब के नीक स बिजनेस बला कोर्स के पढाई करबा लेल कहलकई। बिजनेस के तरी- भीट्टी बुझनाई सफलता लेल नितांत जरूरी छलई। तखने देशक आर्थिक विकास संभव छलई। 3 महिना क बिजनेस प्रशिक्षण कोर्स अतुका टेलीविजन आ रेडियो पर शुरू भेल छलई।कोर्स करबाक लेल लोकक हुईल माईल भ गेल छलई। सम्पत्ति के स्थानांतरण लेल एकटा बोर्ड बनेलकई। अमीन के स्पष्ट निर्देश छलई- " सम्पत्ति क आबंटन योग्यता क आधार पर ही होई।जनजाति, धर्म, क्षेत्र आदि कोनो पुर्वाग्रह नई रहतई। अगर एशियाई अपन संपत्ति के युगांडन के द देने छई, अकर सुचना सरकार के देनाई जरूरी छई। पुरा देश स आवेदन दई बाला भीड़ कम्पाला मे जमा भ गेल छलई। बहुत लोक के बिजनेस शुरू करई लेल पाई चाहियई। युगांडा विकास बैंक क स्थापना भेलई। ई कर्ज देनाई शुरू केलकई। अमीनक उद्देश्य त नीक छलई, मूदा ई योजना सफल नई भेलई। प्रांतक पुनर्गठन -------------------- अमीनक स्पष्ट कहनाई छलई जे ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रशासनिक प्रांत सब बनल छई, ई बेतरतीब छई। किछु जिला , राज्यो स पैघ छई। अहिनो कतऊ होई। नीक प्रशासन खातिर प्रांत सब के पुनर्गठन आवश्यक छई। टैक्स दई बला व्यक्ति के अपेक्षित सेवा भेटबाक चाही।पिछला 70 साल मे राज्य सब के पुनर्गठन नई भेल छलई। अमीन पुरा युगांडा के 9 राज्य मे विभाजित कयलक।पुनर्गठन, प्रशासनिक आवश्यकता क आधार पर कैल गेल रहई, नई की जनजाति, भाषा आ धर्म क आधार पर । हर राज्यक प्रमुख गवर्नर होईत छलाह। सब निर्णय उनके लेबाक रहईत छलईन। सफलता आ असफलता दुनु के जिम्मेदारी उनके छलईन। एक तरह स प्रशासन क युक्तिसंगत विकेन्द्रियकरण छलई। ई सफलो भेलई।अहिना केन्द्रीय स्तर पर सेहो निगरानी आ सुपरवाईजरी जिम्मेदारी देल गेल छलई।शराब आ कालाबाजारी पर नियंत्रण छलई।अहिना शहर सब मे मेयर बनेलकई आ जिम्मेदारी देलकई। प्रशासन मे सुधार धरातल पर देखाय लागल छलई।अमीन के आब युगांडा क रक्षा समिति, फील्ड मार्शल क उपाधि देलकई। जई आधार पर देलकई, ओ छल- युगांडा आ दुनिया मे अमीन के कैल नीक काज, युगांडा मे एकता अनबाक लेल। आब सब अपना के एक परिवार क बुझईत अईछ, चाहे कोनो जनजाति, धर्म आ हैसियत होईन। आर्थिक दोहन आ शोषण करऽ बला एशियाई क निष्कासन । स्टेट रिसर्च ब्युरो -------------------- अमीन स पहिलुका ओबोटे के समय मे मुख्य सुरक्षा विभाग जेनेरल सर्विस युनिट, स्पेशल ब्रांच आ सी आई डी छलई। राजनीतिक आ आर्थिक डाटा बनबई लेल रिसर्च विभाग छलई। अई डाटा क उपयोग, ओबोटे क भाषण तैयार कर्ऽ मे कैल जाई छलई। अमीन जखईन सत्ता मे आयल तऽ जेनेरल सर्विस युनिट के भंग कऽ देलकई।ओ ब्रिटिश, अमेरिका आ इजरायल के सुरक्षा विभाग के अध्ययन करई लेल अधिकारी के पठौलकई आ ओही आधार पर " स्टेट रिसर्च ब्युरो" नामक एकटा विभाग बनेलक।अकर अधिकारी सब के मोसाद ( इजरायल), सी आई ए ( यु एस ए) आ एम15, एम16 ( ब्रिटेन) स प्रशिक्षण देबेलकई। मेजर ओजी अई विभाग के स्थापना करऽ बाला अधिकारी छलाह। संयोग देखियऊ, विभाग बनलाक किछुये महिना बाद, मेजर ओजी अपन जान पर खतरा बुईझ कऽ सुडान मे एसाईलम लेल अपील कैलाह।ओजी, अमीनक विश्वस्त मे मानल जाई छलाह। बाद मे अमीन उनका इस्ट अफ्रीकन रेलवे के एकटा अधिकारी के माध्यम स पोलहा कऽ युगांडा बजेलकईन। तकर बाद ओजी ककीरा चीनी मिल मे काज करऽ लागल छलाह। अमीन स्टेट रिसर्च ब्युरो के अधिकारी के बादो मे ब्रिटेन, घाना, यु एस ए,ग्रीस आदि देश मे सुरक्षा विषय पर कोर्स करबई लेल पठबईत रहल। मेजर ओजी के बाद फ्रांसिस ईटाबुका अई ब्युरो के प्रमुख भेलाह।ईनको पर किछु संदेह अयलाक कारण, हटा देल गेला। अमीन ब्युरो मे अत्याधुनिक टेलीफोन निगरानी संयंत्र लगबेलक। अकर प्रभारी सी आई ए एजेंट के बनौने छलाह। ताहि सभय के ई बहुत महंग व्यवस्था छलई। कहबाक जे सुरक्षा मद पर कवनो भी समझौता अमीन नई करईत छलाय। ईदी अमीन के प्रभाव दिन पर दिन बढले जा रहल छलई। 22 जुन1976 क ओतुका सुरक्षा समिति अमीन के जीवन पर्यन्त राष्ट्रपति बना देलकई। अई लेल जे तर्क देल गेल छलई- ई अपन जीवन देश खातिर न्योछावर कैने छईत। आजादी क बाद आन कोनो शासक स बेशी ई काज कैने छईथ। किछुए साल मे इनकर काज , पिछला 100 साल मे कायल काज क सामने बेमिसाल छईन। अही तरहक भाषा दुनिया के आनो तानाशाह क पक्ष मे अहिना लिखल भेटत। ईदी अमीनक परिवार --------------------------- अतुका अभिलेखक अनुसार अमीन क कयेक टा कनिया छलई। किछु के नाम सारा कयोलाबा, मदीना नजेम्बा, मरयामु मुटेशु आ काय अडरोआ छई। ई कैक मामला मे अपन कनियो के नई छोड़ई छलई। एकटा अपन कनिया के त गिरफ्तारो करबा देने छलई। तस्करी के अमीन खिलाफ छल। अकर कनिया मरयामु केन्या- युगांडा सीमा पर सरकारी कंपनी क कपड़ा क थान संग पकड़ल गेल छल। अई विषय पर अमीन कहलकई- " किछु लोक युगांडा क कानून तोड़बाक प्रयास क रहल छईत। जखईन की कयेक बेर कहल जा चुकल छई जे तस्करी नई हेतई।" जेल स छुटला पर जई गाड़ी स ओ अबई छलीह, तकर दुर्घटना भ गेलई।पैर टुईट गेल छलईन। अमीनक कहब छलई- " ई दारु पीबि कऽ मोटर चला रहल छलीह।" ओना अमीन अस्पताल मे कनिया के देखऽ गेल छलाय। एकटा प्रत्यक्ष दर्शीक अनुसार अमीन मरियामु के कहलकई- " आहां के जीवन मे आर समस्या अखईन आयत, कियैक त आहां ईसाई स मुस्लिम धर्म परिवर्तन कयलऊं अईछ। आहां के सच्चा मुसलमान बनबाक नई अईछ, आहां त हमरा स बियाह करई लेल धर्म परिवर्तन कैने छी।" अमीन, मरियामु के मक्का भी ल गेल छलई। ओकरा अपन ओई फैसला पर आब पछतावा होई छलई। मरियामू के एक टा दोकान अमीन पहिने आबंटित कैने छलई। जखईन अस्पताल स ठीक भ कऽ मरियामू दोकान पर गेल, पता चललई जे दोसरा गोटे के ई दोकान आबंटित भ गेल छई। आब मरियामु क अपन जान के डर भेलई। ओ विदेश भाईग गेल। अकर छोट भाई सेहो लंदन भाईग गेलई। अमीन बाद मे ई दोकान मरियामु के बाप के दान मे द देलकई। अमीन के अपन सास- ससुर स नीक संबंध देखबा मे बुझाई छलई। सास बीमार परलई, ओकर अस्पताल क सब खर्च अमीन देने रहई। अमीन अपन सास- ससुर स शिकायत कैने छल- " आहांक धीया- पुता विदेश मे हमरा बारे मे अनर्गल प्रलाप करईत रहईत छईथ। तखनो अतऽ हम आहां के देखभाल क रहल छी। हम भगवान स डरऽ बाला लोक छी। अपन फर्ज निभा रहल छी।" अई तरहक पारिवारिक बात , ईदी अमीनक व्यक्तित्व क विपरीत छई। मूदा ई सत्य थीक। कयोलाबा स बियाह ------------------------- 1975 मे अमीन, सारा कयोलाबा स बियाह केलक।सारा सेनाक बैंड मे नचनिया छल। मशाका मे एकटा उत्सव मे दुनु के भेट भेलई। अगिला दिन सारा के अमीन कतऽ बजाहट भेलई। फेर दुनु गोटे मे बियाहक सहमति बनलई।अमीन साराक बाबा स भेट करऽ गेल छल। अई बियाह मे फिलिस्तीन क यासिर अराफात, ईदी अमीनक संगी होबाक नाते सक्रिय छलाह। आरो कयेक अफ्रीकी नेता सब आयल छल। सारा अपन पिता लेल एकटा रेस्टोरेंट खोईल देने रहई। अमीन सेहो मर्सिडीज बेंज कार ससुर के उपहार मे देने छल। जखईन 1979 मे अमीन के सरकार पर पकड़ मे कमी बुझाय लगलई, सारा के पहिनेहे बच्चा सब हक संग लीबिया पठा देने रहई।बाद मे अपनो ओतई गेल। निर्वासित जीवन मे अमीन आ सारा मे झगड़ा- झांटी बेशी होबऽ लगलई। सारा ओतऽ स जर्मनी चईल गेल। बाद मे ब्रिटेन मे रहऽ लागल।ब्रिटेन मे ओ मौडलिंग करईत छल।2014 आ 2015 मे ओ वापस युगांडा आबऽ के सोचलक। किछु ने किछु कारणे नई आईब सकल। 2015 मे ओ लंदन मे बीमार पईर गेल आ ओही साल ओतई मईर गेल। बाद मे नश्वर शरीर के अंश के युगांडा आनल गेलई। अमीनक पिता ------------------ 1971 मे अमीन टेशो राज्य गेल छल। ताहि समय ओकरा समाद अयलई जे ओकर बहिन अकिशु के देहांत भ गेलई। ई दुनिया के बुझल छई, अमीन मुसलमान छल। अकर बहिन अकिशु ईसाई छलई।ओकरा ईसाई धर्म क अनुसार अरुआ मे दफनावल गेलई।धर्मानुसार प्रार्थना सभा सब भेलई। ओतुका बिशप आ बुगांडा राज परिवार स सेहो लोक सम्मिलित भेल छलई। बतबऽ के मकसद जे अमीन व्यक्तिक धार्मिक मत पर उदार बुझा रहल अईछ। अमीनक पिता दादा सीनियर, अकिशुक मृत्यु क समय वयोवृद्ध आ बीमार छलाह।निमोनियाक ईलाज चईल रहल छलईन।अई हालात मे ओ एकटा जबान लड़की स फेरो बियाह कैलाह।अई कनिया स एकटा बेटा भेलईन। 1975 ईस्वी क बात छई। जहिया बेटा क जन्म भेलई, तहिये दादा सीनियर ( अमीनक पिता) क मृत्यु भ गेलईन। ओही दिन ईदी अमीन राष्ट्रपति बनला के अपन 4 बरस पुरला पर उत्सवक आयोजन कैने छल। दिने मे अमीन अपन पिता के देखई लेल मुलागो अस्पताल गेल छल। दुनू बाप- बेटा मे घर- परिवार, देश- दुनिया सब तरहक गप भेलई। बाप, अमीनके कहलखिन- " अगर हम मईर जायब, हमर कोबोको कब्रिस्तान मे दफना देब- ई हमर इच्छा अईछ।" अमीन अपन पिताक इच्छानुसार उनका दफनावक लेल अपन छोट भाई राजब के कहलकई। दादा सीनियर क दाह - संस्कार, राष्ट्राध्यक्षक पिताक हैसियत अनुसार कैल गेलई।कयेक देश स प्रतिनिधि सब आयल छल। अपन संबोधन मे अमीन कहलकई- " सब गोटे के अपन धर्म पर गर्व करबाक चाही। अपन धर्म नुकेनाई नीक बात नई छई।" अपन पिताक अई बियाह, बच्चा ई सब बात पर अमीन कोनो तरहक नकारात्मक प्रतिक्रिया नई देने छल। ई बात ओकर पक्ष मे जाईत बुझा रहल छई। विदेशी संबंध ----------------- दुनिया के किछु देश स अमीन के बड्ड सौहार्द पुर्ण सम्बन्ध रहलई। ओहिना किछु स एको रत्ती नई बनलई। किछु के चर्चा क रहल छी- इजरायल ------------ जखईन ईदी अमीन तख्ता पलट कैने रहय त बहुत कम ही देश ओकरा मान्यता देने रहई। इजरायलक तखुनका सरकार ओकर समर्थन मे छलई। सत्ता मे अयलाक कनिये दिन बाद अमीन इजरायल जयबाक सोचलक। अमीन बेशी भाया मीडिया नई करईत छल।ओ सीधा इजरायल के तखुनका रक्षा मंत्री के फोन केलकई आ जाई लेल एकटा हवाई जहाज क व्यवस्था करबाक आग्रह केलकई। इजरायली सरकारी तुरत्ते एकटा जहाज पठा देलकई। 11 जुलाई 1971 क अपन कनिया मरियामु आ विदेश मंत्री संग अमीन इजरायल गेल। मरयामु उयाह कनिया छलई, जकरा बाद मे जेल मे बन्न केने रहई। बाद मे ई लंदन परायल। अमीन जेरुसलम गेल आ ओतऽ इजरायली प्रधानमंत्री गोल्डा मीर संग द्विपक्षीय वार्ता कयलक। ई ऊयाह गोल्डा मीर छईथ, जिनकर उल्लेख बगाया के विदेश मंत्री क शपथ ग्रहण काल अमीन कैने छल। अमीन कुटनीति मे भी माहिर छल। अई उदाहरण स आर स्पष्ट भ जायत। अमीन , प्रधानमंत्री गोल्डा मीर स सैनिक साज्जो समान जेना फाईटर जेट मंगनी मे मंगलकई। अकर बदला मे संयुक्त राष्ट्र संघ आ ओ ए यु मे इजरायल के समर्थन क वादा केलकई। गोल्डा मीर के जवाब छलई- " हम सब बहुत महंग दाम मे फैंटम जेट, अमेरिका स कीनने छी। अकरा दान मे नई द सकई छी।" ईदी अमीन के " नई " सुनबाक आदत नई छलई। बेशी तर " तानाशाह " सब के ईयाह मानसिकता रहई छई। ओ अई पर इजरायल स बहुत खिसिया गेल। ओतऽ स सीधा ब्रिटेन गेल।ओतऊका सरकार स द्विपक्षीय वार्ता भेलई। ओबेटे आ आर निष्कासित युगांडा के नेता सब तंजानिया मे छल आ ओतुका सरकार क मदद स युगांडा पर जखन तखन हमला क दईत छलई। अमीन, तंजानिया के ई रोग काटऽ चाहईत छल। अही लेल ओकरा फाईटर जेट सब चाहई छलई। किछु महिना बाद ओ जर्मनी गेल।ओतऊ द्विपक्षीय वार्ता केलक। जर्मनीक राष्ट्रपति, अमीन के सलाह देलकई- " आहां लीबियाक नेता कर्नल गद्दाफी स भेंट करु। ओ आहां के अई विषय मे मदद करताह।" अमीन ओतऽ स लीबिया गेल आ कर्नल गद्दाफी के सब बात कहलकई।गद्दाफी सैन्य सहायताक भरोसा त देलकई, मूदा ऐकटा शर्त राईख देलकई- "पहिने आहां इजरायली सब के युगांडा स निर्वासित करू, तखईन हम मदद करब।" अही बीच मे इजरायलक अखबार मे एकटा सनसनीखेज आलेख छपलई- " लीबिया आ ईजिप्ट , युगांडा क पायलट के मिराज एयरक्राफ्ट क प्रशिक्षण क लेल पेशकश केलकई अईछ।" अई आलेख के छपला पर अमीन के खीस सातवाँ आसमान पर आईब गेलई। ओ घोषणा केलक- " आब सैन्य वा आर्थिक कोनो संधि इजरायल संग नई होयत। आब हमरा सबहक दोस्ती लीबिया संग रहत। लीबिया आ इजिप्टक लोक हमर सबहक संगिये नई, भाई- बहिन जेकां अईछ। अगर लीबिया आ इजिप्ट हमर पायलट के मिराज एयरक्राफ्ट क प्रशिक्षण देत, हमरा सबहक लेल ई खुशी क गप होयत।" इजरायली राजदुत के अमीन बजेलकई आ कहलकई- " 4 दिनक भीतर युगांडा क सेना व गुप्तचर विभाग मे जतेक भी इजरायली छईथ , युगांडा छोईर कऽ चईल जाऊथ। अकर अलावा इजरायली दुतावास मे 4 स बेशी लोक नई रहत।" इजरायलक बहुत रास कंपनी सब युगांडा मे सरकारी ठेका लेने छल आ काज कऽ रहल छल। अमीन अकरो सब के अविलंब काज बन्न क कऽ, युगांडा छोड़ई लेल कहलकई। अतबे स अमीन के खीस शांत नई भेलई। 4 दिन बाद ओ इजरायल दुतावास के बोरिया- बिस्तर समेट कऽ जाई लेल कहलकई। इजरायल क सरकार अई आदेशक अनुपालन केलकई। अई तरहे 1960 मे जे ईदी अमीन पारा ट्रुपरक प्रशिक्षण इजरायल मे लेने छल, आई युगांडा- इजरायलक संबंध पर पूर्ण विराम लाईग गेलई। इजरायल स संबंध टुटला पर फिलिस्तिनक नेता यासर अराफात स अमीन दोस्ती बढ़ेलक। इजरायलक राजदूत क जे आवास कम्पाला मे छलई, ओ PLO के दान मे द देलकई। तकनीकी, आर्थिक आ वैज्ञानिक सहयोग विषय पर PLO संग द्विपक्षीय समझौता भेलई। पहिने लिख चुकल छी जे अमीन आ अराफातक दोस्ती ततेक गहीर भ गेल छलई जे 1975 मे कियोलाबा संग अमीनक बियाह मे अराफात भी सक्रिय रुपे शामिल भेल छलाह। अराफात सार्वजनिक रुप स अमीनक उदारताक प्रशंसा कयेक बेर कऽ चुकल छलाह। अमीन दान मे 5150 एकड़ जमीन फिलिस्तिनी सब के देने छलई।जकर उपजा स ओकर सबहक परवरिश होईत छलई। अमीन अई तरहे फिलिस्तिनी सबहक मदद क रहल छल। ओही समय मे PFLP नामक उग्रवादी संगठन फ्रांसक जहाज के अपह्रत क लेलकई। 28 जुन1976क घटना छई। ई हवाई जहाज तेल अबीब स उड़ान भरने छल। हवाई जहाज के एंटेबे हवाई अड्डा पर उतारल गेल छलई। अई मे इजरायली सब छल। अमीन ओई समय मे मारीशसक यात्रा पर छलाह। ऊनकर युगांडा मे अयलाक संगे इजरायली कमांडो एंटेबे एयरपोर्ट पर आपरेशन केलक आ इजरायली लोक के सुरक्षित घुरा ल गेल। अई आपरेशन मे युगांडा सेना के जेट लड़ाकू विमान आ हवाई अड्डा तहस नहस भ गेल छलई। अई पर हम एकटा आलेख पूर्व मे लिखि चुकल छी। लीबिया ----------- सितम्बर 1972 मे जखईन तंजानिया तरफ स युगांडा क निर्वासित नेता ओबोटे आक्रमण कयलकई। लीबियाक सेना अमीनक तरफ स जवाबी कार्रवाई मे संग देलकई।लीबिया स आरो लड़ाकू विमान सब मदद लेल युगांडा आईब रहल छलई। बीचे मे सुडान अई विमान सब के रोईक लेलकई। ओई समय मे सुडान मे जफर निमेरी राष्ट्रपति छलई। जफर के मित्रवत संबंध युगांडा क निर्वासित पूर्व राष्ट्रपति ओबोटे संग छलई। कयेक दौरक वार्ता क बाद लीबियाक लड़ाकु विमान सब युगांडा एलई। लीबिया क सरकार लंबा समयक लेल भारी कर्ज युगांडा क देलकई। अतबे नई, युगांडा क काॅफी क भी नीक दाम मे कीनबाक आर्डर देलकई। अई उदारता पर युगांडा भी पाछु नई रहल। कम्पाला मे मूख्य जगह परहक जमीन लीबियाक नाम कऽ देलकई। 300 युगांडा क सैनिक के लीबिया छात्रवृत्ति देलकई। अतबे नई, बहुत रास सैन्य साजो समान भी लीबिया देलकई। कर्नल गद्दाफीक आग्रह पर अमीन युगांडा क पासपोर्ट मे अरबी भाषा के भी शामिल क लेलक। ओना गैर मुस्लिम देश, जई मे भारत भी शामिल अईछ, पासपोर्ट मे अरबी भाषा सम्मिलित छलई। लीबिया स घुरती काल अमीन, सुडान सेहो गेल। युगांडा आ सुडानक बीच संबंध कोना प्रगाढ़ होई, अई पर चर्चा कैलक। गद्दाफी युगांडा क मुसलमान के इस्लाम धर्म क प्रचार- प्रसार लेल अपील कैने छल। ओकर कहब छलई- " जखईन हम इस्लाम क प्रसार लेल कहई छी, त अकर ई मतलब नई भेलई जे दोसर धर्म स दुश्मनी करू।कुरान कहई छई जे आहां जा कऽ दोसर लोक के अपन आस्था क बारे मे बतबियऊ। अकर मतलब समझबियऊ।" गद्दाफी एकटा भव्य मस्जिद कम्पाला मे बनेलक। अकरा गद्दाफी मस्जिद कहल जाईत छई। लीबियन अरब युगांडन बैंक क स्थापना भेलई। अई माध्यम स लोक के कर्ज देल गेलई। अई बैंक क आफिस, भारतक बैंक आफ इंडिया के परिसर मे खोलल गेल छलई। अहिना कपासक उपजा क खरीददारी मे लीबिया सहयोग केलकई। गद्दाफी आ अमीनक दोस्ती पारिवारिक स्तर पर सेहो भ गेल छलई। लीबिया स डाक्टर सब अमीनक धीया पुताक ईलाज लेल आयल छलई। रूस ------ 1965 मे ओबोटेक समय मे ही युगांडा आ सोवियत संघक बीच सांस्कृतिक सहयोग क संधि भेल छलई। अमीन अकरा आगुओ जारी रखलक। सोवियत संघ, युगांडा क छात्रवृत्ति क संख्या 20 स बढ़ा 40 क देलकई। अमीनक समय मे जे असली संधि भेलई, ओ छलई सैन्य क्षेत्र मे । सोवियत संघ स 100 सैन्य प्रशिक्षक आईब कऽ युगांडा क सैनिक के प्रशिक्षित करतई। 800 युगांडा क सैनिक, सोवियत संघ मे जा कऽ प्रशिक्षित हेतई।सब ठीक चलई छलई। 1974 मे युगांडा क किछु वरिष्ठ सैन्य अधिकारी सब सोवियत संघ प्रशिक्षण मे गेल छलाह। ओतऽ स घुरला पर एकटा अधिकारी युगांडा मे तख्तापलटक प्रयास कयलाह। अतई स दुनु देशक संबंध डगमगा गेलई। अमीन के शक छलई जे अई मे रुसक हाथ छई। अंगोला संग युगांडा क युद्ध मे भी रुस सैन्य सामग्री पठेबा मे देरी केलकई। अमीन के संबंध अमेरिका संग खराब भ चुकल छलई। ओकरा किछु कागज- पत्र भेटलई, जई मे युगांडा क अस्थिर करबाक योजना छलई। अकर कारण रूस आ युगांडा के बीच नजदीकी के मानल गेल छलई। अई आधार पर अमेरिका स रक्षा खातिर, अमीन अविलंब रूस स सैन्य मदद मांईग रहल छलई। रुस टाल मटोल क रहल छल। अमीन के ई बर्दाश्त स बाहर लगलई। ओ 11 नवम्बर 1975 क रुस क राजदूत के निष्कासित क देलकई । अपनो राजदूत के वापस बजा लेलक। अई सब स रूसक सरकार अपना के अपमानित बुझलक। कहल जाई छई जे जखईन अमीन अपन सत्ता मे अयबाक पांचम वर्षगाँठ मनबई छलाय, KGB ओकर हत्या क योजना बना रहल छलाय।एकटा हेलीकाप्टर , जई स अमीन के यात्रा करबाक छलई , ओई मे बम बिस्फोट भेलई। अमीन नई गेल, तैं बांईच गेल। कुटनीति विशेषज्ञ सबहक कहब छलईन- " तंजानिया मे चीनक प्रभाव के जवाब दई लै, रुस के युगांडा मे दिलचस्पी छलई।" जखईन अमीन सत्ता स हटलाह, रूसक सैन्य सामग्रीक कर्जा युगांडा पर बहुत भ गेल छलई। ओबोटे, रुस स कर्ज चुकबई लेल आर समय लेलाह। अही तरहे बहुत उतार- चढ़ाव क समय दुनु देशक बीच रहलई। तंजानिया ------------ युगांडा क निर्वासित पूर्व राष्ट्रपति ओबोटे भाईग कऽ तंजानिया मे ही रही रहल छलाह। ओतुका न्यरेरे सरकार अमीन के मान्यता नई देने रहई। तंजानिया के मदद स ही अमीन के तख्तापलट भेलई। अमीनक पुरा कार्यकाल तंजानिया संग संबंध दुश्मन देश बला रहलई। अमीनक अंत ------------------ अक्टूबर 1978 मे निर्वासित युगांडन आ TPDF संयुक्त रुप स युगांडा पर चढाई कैने छल। अमीन के सत्ता पर पकड़ कमजोर भेल जा रहल छलई। ओकरा अपन स्थिति क अहसास भ गेल छलई।आब ओ निर्वासित जीवन क तैयारी मे लाईग गेल छल। ओ अपना संग सदिखन एकटा पिस्तौल रखईत छल।अकरा ओ कयालानी कहईत छल। ई पिस्तौल ओकरा यासिर अराफात सनेश मे देने छलई। ओ मर्सिडीज बेंज मे सवारी करईत छल। अई गाड़ी के बोनट आ ऊपर दिसक रंग कारी छलई।गाड़ी क दुनु तरफ धुसर रंग स रंगल छलई।ओ अपन गाड़ी मे ड्राइवर क बगल बला सीट पर बईस रहल।ओकर वायरलेस आपरेटर पिछला सीट पर बईस रहलई।दु टा आर एस्कोर्ट मर्सिडीज कार संग चललई। मुनयोनो मे ओ रहईत छल। ओतऽ स चलल। ओकर विरोधी सब युगांडा क भीतर प्रवेश कऽ चुकल छलई। अमीन के अखनो उम्मीद छलई जे केन्या क सरकार ईंधन आपुर्ति के आबऽ देतई। अई सं युगांडा सेनाक जहाज प्रहार करई लेल सक्षभ भ जेतई। ओकर सोचल नई भ रहल छलई।ओना रस्ता मे एकाध जगह अवरोध एलई, मूदा एस्कोर्ट जवाबी कार्रवाई क कऽ आगु बढल। अरुआ पहुँचला पर ओ सीधा अपन फ्लैट मे गेल।ओतऽ शिक्षा मंत्री ब्रिगेडियर कीली पहिने स इंतजारी मे बईसल छलाह।निर्वासन मे जाय स पहिने अमीन, ब्रिगेडियर कीली के कार्यकारी राष्ट्रपति नामित कऽ देलखिन। 23 अप्रैल क अमीन, अपन नबकी पत्नी जम जम नबीरये क संग अरुआ स हवाई जहाज मे इराक लेल विदा भेला। जखईन अमीन राष्ट्रपति छल त अंतिम बियाह नबरिये स केने छल।अई समय नबरिये गर्भवती छलीह।इराक पहुँचला पर नबरिये के अस्पताल मे दाखिल करायल गेल। अही अस्पताल मे पहिने स अमीनक दोसर पत्नी नजीम्ब आंईखक आपरेशन लेल भर्ती छल। अकर बाद अमीन सीरिया गेल। ओतऽ हवाई जहाज मे इंधन भरा सीधा लीबिया पहुँचल। ओतऽ स मदीना अल सियाहिया, त्रिपोली गेल। अतऽ तेसर पत्नी कयोलाबा, अमीनक 35 टा बच्चा संग रहईत छल। कयोलाबा आ ई धीया- पुता सब पहिनेहे मार्चे मे अतऽ आईब गेल छल। 16 जुलाई क नजेमबाक फोन अमीन के एलई। इराक मे सद्दाम हुसैन सत्ता पर कब्जा जमा लेने छलई।नजेमबा के आब सेन्ट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक मे स्थानांतरित करबाक योजना बईन रहल छलई।20 सितंबर क फेर नजेमबा, अमीन के सुचित केलकई, ओकरा फ्रांस मे स्थानांतरित कैल गेलई।ओकरा संग बोकासाक कनिया कैथरीन सेहो छलई।संयोग देखियऊ, बोकासा जे सेन्ट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक क शासक छलाह, ओतऊ तख्तापलट भ गेलई। अकर बाद नजेमबे के जैरे पठा देल गेलई। ओतऽ ओ अपन बेटा संग रहई छल। जैरे कऽ राष्ट्रपति मोबुटु, नजेमबे के मिंज मे रहबाक व्यवस्था क देलकई। जैरे मे पहिने स अमीनक एकटा आर कनिया नबीरये रहईत छल।नबीरये बाद मे घूईर कऽ युगांडा चईल गेल।नबीरयेक बेटी कसफा, नजेमबे लग रहऽ लगलई। कर्नल गद्दाफी, अमीनके त्रिपोली स हटा कऽ ट्युनीशिया क सीमा लग एक जगह रखलकई। अमीन के ई जगह नई पसिन्न परलई। तखईन ओ सउदी अरब स निर्वासनक लेल सम्पर्क केलक। सउदी अरब क राज परिवार, अमीन के विशेष जहाज स मंगेलकई। एकटा आलीशान घर आ लिमोजिन गाड़ी देलकई। अई गाड़ी क एकटा ड्राइवर पाकिस्तानी छल। ई ड्राईवर 1960 मे युगांडा मे रहल छलाय। आब देखु,सउदी अरब के निर्वासित जीवन मे भी अमीन एकटा आर बियाह केलक। ओकर अई नबकी कनियाक नाम साऊया लैला नसाली कबेजा किगुंडु छलई। अतुका शेख शरीफ अबु आलम अई बियाह मे उपस्थित रहलाह। खाली समय मे अमीन संगीत सुनई छल।" राॅक एन रौल" ओकर पसंदीदा छलई।" बीच ब्वाय्स " बैंड सेहो ओकरा बहुत नीक लगई। ओ युगांडा क सब घटना पर नजईर रखई छलाय। ओकर सुरक्षा सहयोगी मेजर लुका युमा, केन्या लग रहईत छल। बेशी खबर ओकरे माध्यम स अमीन लग पहुँचई। 2001 मे अमीन क शरीर बहुत भारी भ गेल छलई। 200 किलो स बेशी ओकर वजन भ गेल छलई। आब ओ बीमार रहऽ लागल छलाय । हाईपर टेंशन आ डायबीटिजक बीमारी ओकरा भ गेल छलई। पहिने ओकर इलाज किंग फहद आर्म्ड फोर्सेस होस्पिटल मे भेलई। ओतेक सुधार नई भेला पर किंग फैसल स्पेशलिस्ट होस्पिटल मे भर्ती करावल गेलई। ओकर कार्बन डेट टेस्ट करावल गेलई। अकर अनुसार अमीनक जन्म 1928 मे भेल छलई। 18 जुलाई 2003 क ओ कोमा मे चईल गेल। कोमा मे जाय स पहिने स्वाहिली भाषा मे अमीन अपन किछु संतान सबके कहलकई- " हमर बच्चा सब, आहां सब मे ककरो स हमरा कोनो समस्या नई अईछ।हम आहां सब स ईयाह चाहई छी जे एक दोसर स आहां सब आबेश करू।अगर आहां सब मिल जुल कऽ रहब, सब किछु भेटत। भविष्य सेहो उज्ज्वल होयत। हम चाहई छी जे प्रार्थना करबा समय मे हमेशा उपवास राखु। हम आहां सब स दुलार करई छी।" 16 अगस्त 2003 क ओकर मृत्यु भ गेलई। ओना बहुत रास विरोधी के मृत्यु क कारण अमीन अपने छल। बहुत ही वीभत्स ढंग स युगांडा मे ओकर शासन काल मे महत्वपूर्ण लोक के मारल गेलई। किछु लोक के चर्चा हम पहिने क आलेख मे कऽ चुकल छी। आर्चबिशप जनानी लुऊम -------------------------------- 7 मई 1974 क 16 टा युगांडा क बिशप मील कऽ लुऊम के आर्कबिशप बनेलकईन।आर्कबिशप ताजपोशी उत्सव मे अमीन आ ओकर दु टा बेटा सेहो उपस्थित छल। लुऊम स्थानीय अश्वेत छलाह। लुऊम मुलतः शिक्षक छलाह। इनकर पढ़ाई लिखाई युगांडा आ लंदन मे भेल छलईन।लुऊम अपन धार्मिक दायित्व के अपन बुद्धिमत्ताक आधार पर निर्वहन क रहल छलाह। 14 फरवरी 1977 क लुऊम आ ऊनकर पत्नी के स्टेट हाऊस बजाहट भेलईन। ओतऽ अमीन के कहब छलई जे चाईनीज निर्मीत हथियार, गोला- बारुद सब लुऊम के नमीरेंबे बला घर स बरामद भेल छई। किछु आर हथियार दोसर जगह के बिशपक घर स भेटलई अईछ। अई सबहक पाछु निर्वासित पूर्व राष्ट्रपति ओबोटे छईथ।ई सब हमर सरकार के खसाबऽ लेल कैल जा रहल अईछ। अमीन किछु देशविरोधी कागज सब सेहो लुऊम के देखेलखिन। अई कागज मे मानवाधिकार के हनन पर भर्त्सना सेहो कैल गेल छलई। लुऊम द्वारा सब बिशप के सभा बजेनाई स भी अमीन नाराज छल।ओना मीटिंग क बाद अमीन सबहक लुऊम आ ओकर पत्नी संग ग्रुप फोटो सेहो खीचवेलक। लुऊम के छोईर कऽ आन लोक सब के असलाहा मामला मे गिरफ्तारी भ गेल छलई। अई मे कैबिनेट मंत्री सब सेहो छलाह। ओतऽ स लुऊम के स्टेट ब्युरो क मुख्यालय मे आनल गेल। पाछु स अमीन भी ओतऽ आयल। अबिते ओ लुऊम के गाईर- फज्झईत करऽ लागल। कनी काल बाद लुऊम आ दु टा मंत्री मरल पावल गेलाह। सरकार क अनुसार ई सब भागऽ के प्रयास करईत छलाह। मोटर स पीचा गेलाह आ मौत भ गेलईन। आई अपनो देश मे गाड़ी पलईट जाई छई आ अभियुक्त के मृत्यु भ जाई छई। लोकक कहब छई, अमीन अपने लुऊम पर गोली चलेने छल। सच्चाई जे होई। अई तरहक घटना दुनिया मे सदैव घटईत रहलई अईछ। अमीनक सरकार हटला बाद अइ घटना क जांच मानवाधिकार आयोग कैने छल।ओई मे गोली स मारबाक बात प्रत्यक्ष दर्शी कयने छल।पोस्टमार्टम रिपोर्ट के भी तखुनका सरकार अपना अनुसार बनवा नेने छल। लुऊमक मृत्यु पर पुरा दुनिया मे हल्ला मचल छलई। तखुनका संयुक्त राष्ट्र संघ क महासचिव, युगांडा क राजदूत के आर्कबिशप लुऊमक मृत्यु के अंतर्राष्ट्रीय समिति स जांच करवबई लेल कहलखिन। कनाडा, ब्रिटेन आ आस्ट्रेलियाक सरकार अई मृत्यु क जांचक पक्षधर छल। अमीन अई जांचक प्रस्ताव क खारिज क देलकई। " ई जरूरी नई छई जे कियो भी युगांडा आईब कऽ अपना मोने अत्याचार क जांच करय लागय। अगर दुर्घटना मे कियो मरलई, ओकर जांच पुलिस करतई।" दुनिया क आन - आन देशक बिशप सब सेहो अई घटनाक निंदा केलकई। जगह जगह लुऊम लेल प्रार्थना सभाक आयोजन कैल गेलई। अई हत्या क 18 दिन बाद अफ्रीका- अरब सभा मे भाग लई लेल अमीन इजिप्ट गेल। अतऊ ओ लुऊमक हत्या क आरोप के एकसिरा स नकाईर देलक। अही दौरान बिशप फेस्टो किवेन्गेरे सामने अयलाह। ओ अमीनक सब दावाक हवा निकाईल देलकिन। बिशप फेस्टो ओई समय निर्वासित भ न्युयार्क मे रहईत छलाह। न्युयार्कक चर्च मे ओ प्रेस कांफ्रेंस कयलाह। ओ कहलखिन- " लुऊम अमीन के ठांय पर ठांय सुनबई छलखिन। तैं उनकर हत्या कैल गेलईन।" युगांडा मे मानवाधिकार क रक्षा करबाक ओ अपील कैलाह।अंतर्राष्ट्रीय समुदाय स अमीन के देल जा रहल मदद के ओ बंद करई लेल आग्रह केलखिन।फेस्टाक अपील क पुरा दुनिया मे असर भेलई। उनका अंतर्राष्ट्रीय स्वतंत्रता पुरस्कार देल गेलईन। अही समय मे ईदी अमीनक मंत्री मंडल क सदस्य कयेम्बा युगांडा स भाईग गेलाह आ निर्वासित जीवन जीयह लगलाह।लंदनक संडे टाइम्स मे अमीनक नृशंस कृत्य पर रशेल मीलर संग उनकर साक्षात्कार प्रकाशित भेल छलईन।ओ एकटा सवालक जवाब मे इहो कहलखिन- " हमरा ई स्वीकार करबा मे घिन्न लाईग रहल अईछ, अमीन आदमीक मांस खाईत अईछ।" अमीन पर कयेम्बाक एकटा किताब सेहो प्रकाशित भेल छलईन। अई पोथीक नाम छलई- " ए स्टेट आफ ब्लड।" अई किताबक 5 लाख कापी हाथो हाथ बिका गेल छलई। अकर बाद कयेम्बा अमेरिका गेल छलाह। ओतऊ अमीनक अत्याचार क खिस्सा सब कहलखिन। दुनिया मे आन आन मंच स अमीनक कृत्य पर निंदा प्रस्ताव पारित होईत रहलई। 18 जुन1977 क अमीनक हत्या क प्रयास एन्टेबे रोड, कम्पाला पर भेल छलई। ई प्रयास विफल भ गेल छलई। तखुनका महाशक्ति अमेरिका आ ब्रिटेन, अमीनक खिलाफत करीते रही गेलाह, मुदा अमीनक अत्याचार कम नई भेलई। अपन विरोधी संग ओ बड्ड नृशंस ढंग स पेश अबईत छल। अकर लंबा श्र॔खला छई। लिखब त कयैक किताब लिखा जायत। अलेक्स ओजेरा ------------------- अलेक्स ओजेरा, निर्वासित पूर्व राष्ट्रपति ओबोटेक छात्र जीवनक साथी छल। बाद मे राजनीति मे अयला पर कैबिनेट मंत्री बनल। बहुत ही प्रभुत्वशाली लोक मे गिनती छलई। अमीनक शासनकाल मे शुरू मे ओ युगांडा मे रहल। बाद मे जानक खतरा बुईझ तंजानिया भाईग गेल छल।ओतऽ ओ ओबोटे संग मील कऽ युगांडा क अमीनक शासनक खिलाफ लोक के प्रशिक्षित करईत छल। एक दिन ओ अमीनक सेनाक हाथ लाईग गेल। ओ सब अकरा पकईर क अमीन लग अनलक। अमीन, ओजेरा के OAUक महासचिव आ विदेशी राजदूत सब हक सामने पेश केलकई। ओई समय ओजेराक बेगाय छलई- " नंगे पैर, ऊघारे देह, डांर मे पैंट लटकल, हुक टुटल, चैन खुलल आ डांराडोईर जकां कोनो ताग स पैंट डांर मे बान्हल। " ओजेरा सनक हस्ती क की हाल छई, ई सब देखा कऽ विदेशी राजनयिक सबहक मोन मे डर पैदा करबवई छलई। अकर बाद ओजेराक हत्या भ गेलई।ओकर लाशो नई भेटलई। अमीनक शासन खत्म भेलाक बाद ओबोटे सरकार ओजेराक दाह- संस्कार राजकीय सम्मान क संग खाली ताबुत के केलकई। फेबियन ओकवारे ---------------------- अहिना फेबियन ओकवारे, ओबोटे क समय मे युगांडा क जेलक आयुक्त छलाह।अमीन इनका कैबिनेट कृषि मंत्री बनेलकईन। नीक काज कऽ रहल छलाह। बाद मे इनका किछु निजी कंपनी स सांठ- गांठक आरोप लगलईन। मंत्री स हटा कऽ इनका लुगाजी चीनी मिलक महाप्रबंधक बना देलकईन। ई चीनी मिल बालीवुडक सिने तारिका जुही चावलाक ददिया ससुरक छलई।ओकवारे के चीनी क उत्पादन दुगुन्ना करबाक आ मशीन सब के दुरुस्त करबाक टास्क देलकईन। किछु दिनक बाद ओकवारे पाई क दिक्कत आ पुरान मशीनक बात अमीन के अपन रिपोर्ट क माध्यमे बतेलखिन। तखुनका वित्त मंत्री के अमीन कहलकई, पाई क बेबसथा लेल।ओकवारे के अमीन , चीनी मिल क नीक मशीन खरीदई लेल भारत आ जापान पठेलकईन। भारत स घुरलाक बाद ओकवारे , अमीन स भेंट कैलाह। भारत सरकार क्रैडिट पर युगांडा के नब चीनी मीलक मशीन दई लेल राजी छल। अई मीटिंग क बाद सब काज चईले रहल छलई। लोकक कहब अनुसारे, अमीनक एजेंट , ओकवारे के हत्या क देलकई। जोसेफ मुबीरू ------------------- युगांडा आ न्युयार्क मे पढल लिखल मुबीरू, संयुक्त राष्ट्र संघ क आर्थिक आयोग मे कार्यरत छलाह।अफ्रीकी विकास बैंक क स्थापना मे हिनकर महत्व पुर्ण योगदान रहल छईन। निर्वासित पूर्व राष्ट्रपति ओबोटेक समय मे ई बैंक आफ युगांडा क गवर्नर छलाह। जखईन अमीन सत्ता मे आयल तऽ मुबीरू के बैंक आफ युगांडा स बर्खास्त क देलकईन आ चार्ज दोसरा के दई लेल कहलकईन। मुबीरू बजलाह- " हम अई जिम्मेदारी स मूक्त भ बहुत खुश छी।" पदमूक्त भेला बाद मुबीरु, हीरोईन मूमताजक ससुरक कंपनी माधवानी ग्रुप मे कंसलटेंट नियुक्त भेलाह। किछु दिनक बाद अमीनक लोक इनकर अपहरण क कऽ हत्या क देलकईन। मुबीरु के परिवार के आई तक मृत शरीर क नामोनिशान नई भेटलई। जेम्स बुवेम्बो ---------------- जेम्स बुवेम्बो, निर्वासित पूर्व राष्ट्रपति ओबोटेक सार छलाह। 9 जुन1972 क अमीन, ओबोटेक घरक लोक सब स भेट केलकई।ओबोटेक कनिया मीरिया आ तीनु बच्चा छलई।मीरिया आ तीनु बच्चा के ओबोटे लग त॓जानिया जायक अनुमति, अमीन द देलकई। अई भेटक करीब 3 महिनाक बाद जेम्स के अमीनक एजेंट सब अपहरण कऽ माईर देलकई। अकर मृत शरीर लेक विक्टोरिया मे भेटलई। जेम्स स्काटलैंड स पढने छल।अतुका स्वास्थ्य विभाग मे अधिकारी छल। ओना अमीन एक बेर बाजल छल जे ओकरा ओबोटेक घरक लोक स कोनो दुराभाव नई छई।ओ ओबोटेक माय- बाप के अपन सरकारी निवास पर बजेनहो छलईन। उनका सब के 2000 सीलिंग, 4 कम्बल,2 बोरा चीनी, 20 किलो नुन, 2 टीन तेल आ 2 टा सलाई के डिब्बा जाय काल मे देने रहईन। जखईन जेम्स क माय ( ओबोटेक सास) युगांडा मे ह्रदयाघात स मरलई, अमीन दुख प्रकट करई लेल ओकरा कतऽ गेल छल। ओबोटे जखईन दोबारा सत्ता मे आयल, तखईन जेम्सक मृत शरीर क भाग लेक विक्टोरिया क एकटा द्वीप पर भेटलई। फेर जेम्स क दाह संस्कार कैल गेलई। लियोनार्ड कीगोनया ------------------------- ओकवारे कऽ हटा कऽ अमीन, कीगोनया के जेल आयुक्त नियुक्त कैलक। तख्तापलट क समय किछु सैनिक के अमीनक संग नई देबाक कारण जेल मे बन्द कैल गेल छलई।कीगोनयाक समय अई कैदी सब के सामुहिक दोषमुक्त क कऽ बरी कैल गेलई। अही सब प्रकरण मे अमीन के कीगोनाया पर शक पैदा भेलई।ओकरा अनुसार ब्रिटिश सरकार कीगोनाया के अमीनक सरकार के खसबई लेल मतिभ्रष्ट कैने छलई। अमीन कीगोनाया के जेल आयुक्त क पद स हटा कऽ, जेले मे बंद कऽ देलकई। करीब महिना दिन बाद अकरा जेल स बाहर केलकई। अमीन आब कीगोनाया के बिजनेस करबाक सलाह देलकई। निष्कासित एशियाई सबहक संपत्ति लई लेल कहलकई। अमीन क कहब छलई- " अगर तुं माधवानीक चीनी मील लेबऽ चाहई छऽ, त ल लैय।हमरा बुझने माधवानी अतुका नागरिक नई अईछ। ओना ओ हमरा नागरिकता दई लेल कहने अईछ, लेकिन हम ओकरा नई देबई।" कीगोनया अपन निजी व्यवसाय शुग कैलक। 1977 मे अही प्रकरण मे ओ केन्या गेल छल।ओतऽ प्रिंस कीमेरा स ओकरा भेट भेलई।प्रिंस, अमीनक विरोधी छल।ओ कीगोनया के अई लड़ाई मे संग दई लेल कहलकई। ओ कीगोनया के युगांडा घुरबा स सेहो मना केलकई। कीगोनया, प्रिंसक सलाह पर कान- बात नई देलकई। ओ घुईर कऽ युगांडा आईब गेल।जखईन ओ अपन दोकान स कार मे निकलई छलाय, अमीनक एजेंट सब ओकरा अपह्रत क लेलकई।ओकर मृत शरीर के आई तक पता नई चललई। कैप्टन पैट्रिक इसाबिरये ----------------------------- पिता के जल्दी मृत्यु भेला सं, एकटा अनाथ जेका पैट्रिक जीवन जीलक । पढऽ मे तेज छल। छात्रवृत्ति भेटलई आ इंजीनियरिंग पढऽ लेल रूस चईल गेल। पढाई पुरा कऽ युगांडा घुरल। अबिते सेना मे नौकरी भेट गेलई। अकर पत्नी सेहो टाउन काउंसिल मे कार्यरत छलई। 18 जुन 1977 कऽ, एयरफोर्सक सैनिक सब अमीन के हत्याक प्रयास कैने रहई। अमीन अकर पाछु ब्रिटेन आ अमेरिका क हाथ बतेने छल। अई षड्यंत्र मे स्टेट रिसर्च विभाग के ईसाबिरयेक नाम सेहो भेटलई। अकर दोस्त सब अकरा देश छोईर कऽ भागऽ लेल कहलकई। अकरा अनुसार, ई निर्दोष अईछ।तैं कियैक भागत। 30 नवम्बर क कैप्टन ईसाबिरयेक गिरफ्तारी कैल गेलई। कैप्टन क कनिया के पता लगलई जे कैप्टन आ 12 टा आरो सैनिक सब के नील मैन्सन, कम्पाला मे टार्चर कैल गेलई आ ओकर बाद ककुजे मे हत्या कऽ देल गेलई। कैप्टन क विधवा ओई जगह पर गेलीह।ओतऽ कैप्टन क अर्धनग्न सड़ल गलल शरीर भेटलईन।कहुना जंगल स उठा कऽ मृत शरीर के मुख्य सड़क पर अनलीह। जिनका संग जंगल गेल छलीह, ओ मृत शरीर क हालात देखी डईर कऽ भाईग गेल छलाह। कहूना ओ विधवा ओई शरीर के एकटा ट्रक मे घर अनलीह आ कैप्टन ईसाबिरये के दाह संस्कार कैल गेलईन। जौली जोई कीवानुका -------------------------- आजादी क बाद जौली जोई, नेशनल एसेम्बलीक सदस्य छलाह।ई बुगांडाक राजा आ पहिल राष्ट्रपति मुटेशाक नजदीकी संगी सेहो छलाह। अमीन के शासनकाल मे जौली के अपन जान पर खतरा बुझेलईन। ओ निर्वासित भ केन्या आईब गेलाह।नित्य संध्या काल ओ पैन अफ्रीकी होटल जाईत छलाह। ओना ई खबर उनको लग आयल छलईन जे पैन अफ्रीकी होटल मे किछु निर्वासित युगांडन के पकड़ल जेतई। जौली अई सुचना पर बेशी ध्यान नई देला। सांझ मे रोज जेका होटल पहुँचलाह। ईनका पकईर कऽ सीमा पर युगांडा क अधिकारी क सुपुर्द क देल गेलईन। अकर बाद जौलीक हत्या भ गेलईन। कैप्टन सैम असवा ----------------------- अमीनक तख्तापलट कैला पर रेडियो युगांडा पर जे व्यक्ति अई बातक उद्घघोषणा कैने छलाह, ओ छलाह सैम असवा। ई अमीनक प्रियपात्र भ गेल छल। बहुत रास प्रोन्नति सेहो पवलाह आ कैप्टन बना देल गेलाह। बाद मे सरकार क ज्यादती सं इ अपन असहमति जतौलाह आ भाईग कऽ केन्या चईल गेलाह। ओतुका हिल्टन होटलक लाबी मे अक्सरहां अपन संगी आ आनो लोक सब सं गप शप लेल जाईत रहई छलाह। अहिना एक दिन केन्या क सुरक्षा कर्मी इनका पकईर कऽ युगांडा क अधिकारी के सोंईप देलकईन। अकर बाद ईनकर हत्ये कऽ खबर अयलई। जौन बापटिस्ट कसासा ---------------------------- जौन अमेरिकन युगांडन इंश्योरेंस कंपनी क प्रबंधक छलाह। एक दिन भोजन लेल आफिस स ईगन हाऊस जाय छलाह। संग मे मैकरेरे युनिवर्सिटी क एकटा इन्टर्न सेहो रहईन। रस्ते मे सुरक्षा कर्मी सब इनकर गाड़ी के रोईक कऽ, उताईर लेलकईन आ अपना संग सेनाक बैरक तलफ ल गेलईन।दु बरख तक इनकर घरक लोक त तईकते रही गेलईन। कौनो पता नई लगलईन। बीच मे अमीनक एकटा दोस्त छोड़बऽ के नाम पर किछु पाईयो इनकर घर बाला स ठगलकईन। लापते रही गेलाह। शक छई जे अमीनक एजेंट माईर कऽ फेंक देने छईन। पौलिनो वमाला ------------------- वमाला, अमीनक डाक्टर छलाह। ई अतुका बड़का होटलक मालिक सेहो छलाह। ईनका पता चललईन जे राष्ट्रपति आ एक दु गोटे इनकर हत्या करा कऽ होटल पर कब्जा करऽ चाही रहल छईथ। ई जान बचबऽ दूआरे भाईग कऽ केन्या चईल गेलाह। केन्या मे दवाईक दोकान खोललाह। ओई समय अमीनक बहुत रास विरोधी सब निर्वासित भ केन्या मे रहईत छल। ई सब लोक आपस मे भेट गांठ करईत छल। अमीन अपन गुप्तचर के इनकर सबहक बीच मे प्लांट क चुकल छल। इनका सब के अकर कौनो अंदेशे नई छलईन। ई सब निश्चिंत छलाह। एकटा गुप्तचर, वमाला के बिजनेस डीलक नाम पर बहला फुसला क युगांडा क बोर्डर तक ल अनलकईन। अई फायदा बला डील खातिर वमाला बैंक स नगदी भी निकाईल लेने छलाय। ओना जखईन ओ सीमा पर होटल मे छलाह, एकटा परिचित संदेहास्पद लोक सब के सीमा पर ठार हेबाक बारे मे बतेने छलईन। कहल गेल छई, होनी हाथ धरा कऽ करबई छई।वमाला, एजेंट क बात मे आईब " नो मैंस लैंड" मे भेट करऽ गेलाह। ओतह पहुँचते युगांडन सुरक्षा कर्मी सब इनका पकईर कऽ गाड़ी मे बंडल बना फेक देलकईन। पहिने ओकर सबहक योजना मबीराक जंगल मे हत्या क कऽ लाश फेकबाक छलई। रस्ता मे विचार बदईल गेलई।ओ सब वमाला के ओकर कम्पालाक आफिस मे अनलकई आ पाई मंगलकई। ओई स पहिने वमाला के ओकरा घर पर नहाय- धोय आ कपड़ा बदलऽ देलकई। आफिस मे वमालाक बेटा पौल सेहो उपस्थित छल। वमाला के बाद मे बाम्बो रोड पर गोली माईर क ओकर लाश के फेक देल गेल छलई। जंगली जानवर सब ओकर लाश के नोईच नोईच खेलकई। वमालाक घरक लोक आ बिजनेस पार्टनर ओकर लाश के तकिते रही गेल। कहल जाई छई, एक दिन वमाला , अपन बेटा के सपना मे कहलकई- " हमर निशानी के तकनाई आहां सब छोईर दीयह।हमर हत्या भ गेल अईछ आ जानवर हमर शरीर के खा चुकल अईछ।हमरा लेल एकटा घर बना दीयह, कियैक अबईत जाईत गाड़ी सब बड्ड हल्ला करईत अईछ।" अं ईयाह सपना मे वमालाक बेटी जापान मे सेहो देखलकई। आब वमाला के घरक लोक ओकर गाम नामागोमा, मशाका मे दाह संस्कार क मकबरा बना देने छई। बेन कीवानुका। ------------------ अमीन सत्ता मे अयला पर 54 टा राजनैतिक कैदी के रिहाई देलकई। बेन कीवानुका सेहो अही रिहा हुवऽ वाला लोक मे स छल। 1961 मे आंतरिक सरकार मे बेन कीवानुका मुख्य मंत्री आ प्रधानमंत्री दुनु रही चुकल छल। 1962क चुनाव मे ओ हाईर गेल छल। स्वतंत्रता भेटला पर ओबोटे पहिने प्रधानमंत्री आ बाद मे 1966 मे राष्ट्रपति बईन गेलाह। ओ युगांडा मे एकदलीय व्यवस्था लागू क देलखिन। बेन, दोसर दलक नेता छलाह, इनकर गिरफ्तारी भ गेल छलईन। अही राजनैतिक गिरफ्तारी स अमीन इनका रिहा कैलखिन। रिहाईक बाद बेन कीवानुका, जे पेशा स वकील छलाह, वकालत करऽ लगलाह। इनकर वकालत नीक चईल रहल छलईन। जखइन बेन मुख्य मंत्री छलाह,अपन संगी वकील कजुरा के संसद सदस्य मनोनीत कैने छलाह। आई कजुरा, अमीनक करीबी छल। ईयाह दोस्ती नीभभईत, ओ बेन कीवानुकाक नाम अमीन के चीफ जस्टिस क लेल सुझेलकई। कजुराक आग्रह पर अमीन, बेन कीवानुका के चीफ जस्टिस बना देलकई। अपन छोट- छीन कार्यकाल मे बेन कीवानुका, अमीन आ ओकर सहयोगी द्वारा मानवाधिकार क खिलाफ कैल जा रहल काज पर जईम कऽ बजलकई। अमीन के ई बर्दाश्त होई कतऊ। 21 सितंबर 1972 क चीफ जस्टिस बेन कीवानुकाक गिरफ्तारी भ गेलई। ओकर बाद हत्या भ गेलई। घरक लोक के बेनक लाशो क पता नई चललई। अही तरहक हजारो हजार खिस्सा युगांडा मे लोकक जबान पर छई। अमीनक परिवार क लोक सब सेहो युगांडा मे रही रहल अईछ।स्थानीय लोक बिना कोनो पूर्वाग्रह क अतऽ रहईत अईछ। आब युगांडा हर तरहक नीक बेजाय देख चुकल अईछ। अतऽ लोकतंत्र अपन जगह मजबूती स बनेने अईछ। ई देश सही मायने मे "बसुधैव कुटुम्बकम् " क सिद्धांत पर चईल रहल अईछ। सब देशक लोक व्यवसाय मे अतऽ लागल भेटताह। भारतीय सर्वोपरि छईथ। भारतीय मूलक लोक आनरेरी कांसुल जनरल कयेक देशक जेना श्रीलंका, फिलीपींस, नेपाल, कोलंबिया आदि छईथ। युगांडा क ऊज्जवल भविष्यक कामना संग आलेख के विराम दई छी। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। केशव भारद्वाज पैबंद। आई भोरे भोर छोटी बहु अग्निश्च वायुश्च भऽ गेल छलीह। इनकर आवाज क टनक्का सं घरक माहौलक पता सबके लाईग जाई छलई। जखनो इनकर घरक बगल सऽ निकलु, सदिखन इनकर टन टन आवाज सुनेबे करत। आई तक कियो इनका भंसाघर मे खेनाई बनबईत नई देखने हेतईन? कियो कखनो धोखा- धोखी एक झलक गप्प लड़बईत संग तरकारी कटईत भले देखने होईन। कखईन ई सुतई छईथ? कखईन जगईत छईथ? कियो नई कही सकईत अईछ? आई तक पते नई चईल सकलई। सब अंजादे मगजमारी करईत भेटत। ओना उनकर दरवज्जा एक तरह स॔ गामक सुचना केन्द्र छल। एक तऽ सड़कक कात उनकर घर छलईन , दोसर सब आगंतुक के चाहक संग स्वागत उनका कतऽ होई छलई। भईर दिन लोकक आवाजाही लगले रहई छलई। इनकर भानसघर मे चाहक केटली चढ़ले रहई छलई । ई नई बुझब जे मंगनी मे पीयाबई छलखिन। सुद समेत वसुलई छलखिन। एना वसुलाई छलई, दोसर के अकर हवो नई लाईग पबई छलई। अई गाम मे उयाह लोक बांचल छल, जे कोनो काजक नई बुझल जाईत छल। काजक लोक सब तऽ शहर धऽ लेने छल।बुढ़, बेमार, बेगार आ निखट्टु सबहक गाम भऽ गेल छल। ई बिना महत्वक लोक के छोटी बहु कऽ दरवज्जा पर जे स्वागत होई छलईन , ओ सब अपना के उपकृत मानई छलाह। चाह पीबी कऽ तिरपित तिरपित भऽ जाईत छलाह। इनकर सब के अपन घर मे की पुछ छलईन, से जनबा- सुनबा सऽ बाहरक बात भेल। एक गिलास पाईनो ईनका सब के अपना घर मे कियो देबऽ लेल तैयार नई छल। भईर दिन "ताना" क सिवाय , घर मे किछु सुनबाक नई भेटई छलईन। सब टोलबईया लोक दिन मे एक बेर जरूर छोटी बहु कतऽ चकल्लस मे अबिते छलाह। किछु लोकक घर मे चाह बनिते नई छलईन। कतऊ चाहक पटले नई छल। ओना सोमना मलाहक बेटा चाहक दोकान खोलने छल। मूदा ओतऽ एक तऽ मोल लगतईन, दोसर मलहटोली बला सब अनकठले कीछु अनाप- सनाप सेहो जखईन तखईन सुना दईत छलईन। ओकरा सब के अखईन सिंग निकलल छलई। हरदम लड़बा लेल रेर मारने रहईत छलई। तैं इनका सब के जखईन चाह पीबाक मोन जोर करईत छलईन - छोटी बहु के हां मे हां मिला लई छलाह - चाह पीलाह - फेर धीरे सऽ ससईर गेलाह। ओना गाम मे सब लोक पीठ- पाछु छोटी बहु के खिन्नांशे करत। चटखारा ल लऽ कऽ इनकर बारे मे आपस मे गप करऽत, मूदा उनकर दरबार मे हाजरी लगबऽ रोज एक बार अयबे करईत छल। तरह- तरह के चरहटगर गप- शप सऽ भी छोटी बहु के कोनो परहेज नई छलईन । बिना लाग- लपेट के खुईल कऽ अपन बात रखईत छलीह। सब तरहक बात मे माईंजन बनई छलीह। कतऊ के लसफसिया सेक्सी गप उठा लीयह, ईनका सबटा बुझले रहईत छलईन। केकरा कोन चक्कर छई, के कतऽ फंसल अईछ- ऐना बजतीह, जेना ओ सब घटना इनकर सोझें भेल होईन। अही लोकक अफरजात ल कऽ डाह सऽ जरईत टोलक आन स्त्रीगण सब इनका " पुरखाह" कहईत छलईन। कियो कहतीह- "पाईनक जेकां गप पीयई छईथ बात , जोंक जेकां खुन चुसई छईत ।" मार मुंह धऽ कऽ, ई कोन खुन छई?- ईहो कहऽ बाला के टोल मे कमी नई छलई। स्त्री गण सब के तऽ ईहो कहब छईन- " असकर पुरुख पाती के देखी कऽ छोटी बहु जाईन बुईझ कऽ टांग पर सऽ नुआ कोनो ने कोनो बहाने उपर क लेतीह। फेर अगिला के जीह लपलपाईत देखईत रहतीह। अही मे इनकर मोन तिरपित भऽ जाईत छईन। जखने एक सऽ दु पुरुख भेल, नुआ अपन ठाम पर चईल जाई छलईन।सब झंपा जाई छलई। किछु के कहब छईन-" असगर पुरुख बेर मे छाती पर सऽ भी नुआ खसले रहईत छईन। अखनो देहक कसाव नबकनिये जेकां छईन। जखने दोसर गोटा अयलाह , फेर नुआक अढ़ मे छातीक उभार झांईप लई छलीह ।" ओना आना- जाना ई बाजऽ बाली सबहक सेहो लगले रहईत छईन। पुरुख सब असगरे मे छोटी बहु कतऽ आबऽ के जोगार मे लागल रहईत छल।कयेक बेर ओकरा सब मे बहसा- बहसी होईत, अही लकऽ बजरा- बजरी भी भऽ जाईत छलई। ओना गाम मे सबसं बेशी संपईत भी इनके छलईन। देह आ जेबी दुनु भारी। वक्त बेवक्त लोकक काजो ईयाह अबई छलखिन। बदलेन मे , बाद मे एकक चाईर वसुईल लई छलखिन, समय पर इज्जत तऽ बचाईये दई छलखिन। वक्तक बोखार नापऽ मे उनकर थर्मामीटर अचूक छलईन। आईयो जे भी उनकर दरवज्जा पर जाईत छलईन , सबके एक्के बात कहथिन- " बदरिया नाक कटा देलकई। " हाईर कऽ बचन मिसिर पुछिये लेलखिन - " की कऽ देलकई? " भोर मे त ओकरा दिशा- मैदानक लेल बाध दिश जाईत देखने रहियई। उम्हरे कीछु गुल खिलेलकई की? " अई सवाल पर विफर पड़लीह छोटी बहु- " की कऽ देलकई?"। तुं सब आब हद करईत छह। बेशी होशियार भ जाई गेलह अईछ। हाल- फिलहाल मे स्टेशन क दिश गेल छलह? बचन मिसिर फेर बजलाह - " हं। गेल छलऊं। तीन- चार दिन पहिने । नारायणपट्टी वाला पीसा के छोड़ई लेल। " कीछ देखलहक? नई । तोहर गत्तर गत्तर हम जनई छीयह। नजर त कतऊ आर रहल हेतह। ओतह मऊगी सब के तारईत हेबह। तोरा अकर सिवा की देखेतह? बचन मिसिर एकदम सऽ लजा गेलाह। की बजताह? ककरो कीछु बुझा नई रहल छलई, ई भोरे भोर , आखिर बात की भेलई ? तखने छोटी बहु, जीतन मिसिर के सड़क स जाईत देखलखिन। उनको शोर पारलखीन। फेर ईयाह सवाल ? " तोहर सबहक बाप - दादा क नाक कईट गेलह। बड्ड शान स जे कहई छलह , हम फलां, हम चिल्लां परिवार के छी, आब के विश्वास करतह? बदरिया त सब टा नाश कऽ देलकह।" धीरे धीरे मिसरटोला के कयेक लोक छोटी बहु के दरवज्जा पर जमा भऽ गेल छलई। पुरा बात अखनो कीनको बुझल नई छलईन। सबहक हाल अटक्कर पचे डेढ़ सौ बला छलई। बदरियाक कारस्तानी जनबाक जिज्ञासा बढल जा रहल छलई। ई त अंजाद सब के लाईग गेल छलई, , बदरी कीछु गरबर कैने अईछ। फेर सब सोचऽ लागल, बदरी आखिर एहन की क देलकई जे छोटी बहु टा के ही बुझल छईन। टोल मे कयेक टा तीसमार खां सब छईत, उनका सब के अकर हवो नई लगलईन। आंईखे- आंईख मे मिसिर टोला के लोग एक- दोसरा सऽ पुईछ रहल छल - "आखिर माजरा छई की ?" गांव मे सब नामक पाछु ओकर दर्शन रहईत छई। जेना जिनकर नाम पढ़ुआ काका, उनका बुईझ लीयह बेशी पढ़ल लिखल। साहेब काका माने बड़का सरकारी पद पर छईथ। बिड़ला काका माने नबका धनीक । मालिक काका माने जमीन बेचकऽ फुटानी कर ऽ वाला। बाऊ काका मतलब शांत- गंभीर लोक । लाल काका माने गोर- नार लोक । छोटका काका माने सब भईयारी मे छोट। जर्मन काका माने अंगरेज बाला रंग। बायां हाथ से जे लिखय, ओ लटेरी काका। अही तरह सऽ परिवार मे नामकरण होईत छलई। छोटी बहु के भी नाम अही सिद्धांत क तहत रखायल छलईन। इनकर बर, दियाद मे सभ भाइ मे छोट छलखिन। जखईन ई बियाहक बाद अई गाम मे पैर रखने छलीह, इनकर बर सऽ स पैघ त जाऊत- जईधी सब छलईन। शुरू मे " छोटी बहु" सुनबा मे अनकट्ठल बुझाईन। आब ई इन्टरनेशनल छोटी बहु भ गेल छलीह। कीछु रसभरल संबोधन छलई, इनको धीरे धीरे नीक लागऽ लगलईन। उम्र बढ़लाक बाद, बहु शब्द सुनला पर कखनो काल शर्माय के अदा सेहो करईत छलीह। नटकिया पुरा छईथ, ई कहतईन के ? तुलसीक पत्ता छोट वा पैघ । ओकर महत्व पुजा मे एकही जेकां रहईत छई। ओहिना संबंधक महत्व होई छई । उम्र कीछु होई, फर्क नई पड़ईत छई । एक बार जे नाम पईड़ गेलई " छोटी बहु", ईयाह पुरा गाम मे चईल परलई। आब त छोटी बहु क पुतोहु सब गाम मे बसऽ लगलीह अईछ , मूदा ई नाम आर कीनको संग नई जुड़लई। ई नाम ईनका बबुआ मिसिर देने छलखिन। बबुआ मिसिर कोनो मामुली आदमी नई छलाह। उनकर राखल नाम के गाम मे कियो माई के लाल बदईल दे? ई हैसियत कीनको नई छलईन। गामक लोक के कहब छई , बबुआ मिसिर नाम सुनईत देरी छोटी बहु क मुंह और कान दुनु लाल भऽ जाई छईन। इनकर पुरा शरीर मे जेना शोणितक बहाव धमनी मे तेज भऽ जाईत होई। सांसक गति भी तेजी सऽ ऊपर नीचा होबऽ लगईत छलईन। अई सब सऽ छोटी बहुक गुलाबी गाल लाल भऽ जाईत रहईन।ऐना बुझाई जे गाल छु देबईन तऽ शोणित बाहर आईब जेतईन। ऊपर सऽ फेर कियो गंऊआ टीपला- " आब ई हाल छईन, तहिया केहन हेतईन ? " बबुआ मिसिर मिश्रौली गामक रहनिहार छलाह। बड़का इकबाली लोक छलाह । इनकर पुरखा के बेतिया राज अतऽ बसेने छलईन। ई सब अपना के दिल्ली संगीत घराना स जोड़ईत छईत ।दिल्ली घराना आईयो शास्त्रीय संगीतक जानल घराना छई।एक जमाना मे शास्त्रीय संगीतक मिश्रौली गाम केन्द्र छलई। जाबईत तक बेतिया राजक चला- चली रहलई, सब ठीक चलईत रहलई। मिश्रौली गांव बेतिया शहर स चाईर किलोमीटर उत्तर- पुर्व मे छई।मिसिर लोक सबहक प्रभुत्व अई गाम मे रहल हेतई, ई बात गामक नाम सुनीते लाईग जाई छई। संभव छई अई मिश्र स ही मिश्रौली नाम भेल हेतई । पहीने कहियो चन्द्रावत नदीक एकटा धारा अई गामक बगल सऽ बहई छलई। अई धार मे नाव चलई छल ।अही नाव पर चांदनी राईत मे मिसिर टोला के गवैय्या शौकिया गीत- नाद वाद्य यंत्रक संग गबई छलाह । आसपासक कयेक कोसक गामक लोग धारक कात ठार भ कऽ गीतक आनंद लईत छलाह।ओ टोप- टहंकार आ तान अद्भुते होईत छलई। आब चन्द्रावत नदीये खत्म भऽ गेल छई , फेर ओकर धाराक की हश्र? मिश्रौली मे इयाह धारक लगीच सऽ आब नारायणी नहर निकलल छई । चन्द्रावत उयाह नदी छई, जकर कात मे बेतिया शहर कहियो बसल छल।आब नदी क वजुद बचबई लेल पर्यावरणविद् सब संघर्ष करईत देखाईत छईत। ई संघर्ष असली अछि वा सिर्फ फोटो सेशनक लेल , स्पष्ट कहल नई जा सकईत छई। आई तक तऽ नदी दॆखबा मे अयलई नई। कतऊ कतऊ गंदा नाला देखाईत छई। बबुआ मिसिर अही मिश्रौली गामक संगीत घरानाक सबसं दुरदर्शी व्यक्ति निकललाह। ऊनका बच्चे मे भान भऽ गेल छलईन , संगीत कलाकार भावुक होईत अईछ। भावना सऽ संपत्ति नई अर्जित कैल जा सकईत अईछ ? अही लेल साम- दाम- दंड- भेद क नीति अपनावह परईत छई। सबसं पहिने ओ संगीत सऽ विदा लेलाह। बच्चे मे ही हिनकर कारस्तानीक कारण संगीतक उस्ताद अपने इनकर पिताक आगु समर्पण कऽ देलक। कल जोईर ईनकर पिता के कहलकईन - " इनका हम की , कीयो भी संगीत नई सीखा सकईत छईन।" अंत मे घरक लोक हाईर कऽ संगीत सीखेबाक प्रयास छोईड़ देलक। बबुआ मिसिर रसिक स्वभावक छलाह । उनका " गंज नम्बर-2" क लत किशोरावस्थे मे ही लाईग गेल छलईन। जे भी चम्पारन कहियो गेल हेताह वा ओतुका बारे मे ज्ञान हेतईन, ओ "गंज नम्बर-2 " के बारे मे भली - भांति परिचित हेबे करताह । बेतिया राजड्योढी स सटले ई बस्ती छई। स्थानीय लोकक अनुसार एक समय मे जेकरा कतऊ मोक्ष नई भेटई छलई , अकर तलाश मे अतई अबईत छल। पहीने " गंज नम्बर 2 " मे संगीतज्ञ नर्तकी सब रहईत छल। बेतिया राज क दुर्दिन भेला पर मुजरा वाली के कोठा क रुप मे ई बदइल गेल। आब लोक रंडीखाना कहईत छई । जेना आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्रीक स्तरक लोक चतुर्भुज स्थान मुजप्फरपुर मे रहईत छल, ओहिना बेतिया क कीछु नामी लोक गंज नम्बर 2 मे पहिने रहईत छलाह । बाद मे अतऽ अपराधी सबहक आपसी वर्चस्वक लेल खुन- खराबा होबऽ लगलई। सब नामी लोक घर बेच कऽ दोसर जगह चईल गेलाह। बबुआ मिसिरके मिश्रौली स गंज नम्बर 2, जाय मे दुर पड़ई छलईन। केस - मोकदमाक पैरवीक नाम पर बेतिया कचहरी लग एकटा घर खरीदल गेल छल। अही मे बेशी काल बबुआ मिसिर रहई छलाह। ई केश मोकदमा के पैरवी वाला भेद गामक लोक के बहुत बाद मे पता चललई। बबुआ मिसिरक बेतिया वाला घर पर खेनाई बनबई के लेल एकटा खबास परीछन रहईत छल। एक बेर सांझक समय मे अई घर मे आईग लाईग गेलई। परीछन के ई त बुझल छलई , बबुआ मिसिर रंडीखाना गेल छईथ। वो धोती डांड़ मे बन्हलक आ दौड़ल रंडी मोहल्ला चईल गेल । अतऽ पहुँचला बाद बड़का आफत। कोन कोठा मे खटखटाय? चारु तरफ रंडी सब बहरी मे बईसल छल । परीछन के कीछु बुझऽ मे नई अयलई। ओ बबुआ मिसिर क नाम ल कऽ चीकरऽ लागल। सब बाईजी सब बाहर आईब कऽ परीछन के देखऽ लागल।कठमस्त शरीर बला परीछन के देखी रंडी सब लपलपाय लागल। बबुआ मिसिर अखईन बाईजी स अपन खर्चा वसुल कईये रहल छलाह , परीछनक आवाज ईनको कान मे पड़लईन। जल्दी स आधा- अधुरा कपड़ा पहिरईत बाहर अयलाह। परीछन जल्दीस घर मे आईग लगबाक बात बतेलकईन। दुनु जन दौड़ल घर लौटलाह। ताबईत काल तक आसपड़ोसक लोक इनकर घर क आईग बुझा देने छलईन। ई आईग त बुईझ गेलई , बबुआ मिसिर के रंडीखाना जाय के बात, आईग जेकां पुरा शहर मे फईल गेलई । परीछन क आईग नई बुझा क , बबुआ मिसिर के बजबई के खातिर जेनाई, बाईजी सबहक दुलार - एकटा हंसी क सबब गांव- जेवार मे बहुत दिन तक चलईत रहलई । अई बदनामीक बाद बबुआ मिसिर के बेतिया वाला घर मे रहनाई छुईट गेल छलईन। आब फेर स वो मिश्रौली मे रहऽ लागल छलाह। जे कारनामा करबाक छलईन , ओ तो अखईन तक कऽ चुकल छलाह। मिसिर टोला क सहन्थ मिसिर इलाकाक का नामी तबलची छलाह। बबुआ मिसिर इनका एहन रंडीखानाक हवा लगा देलखिन, सब सुड्डाह भेलाक बादे भूत उतरल छलईन। सहन्थ मिसिर के एकटा बाईजी स बड्ड नजदीकी भ गेल छलईन। ई बाईजी , बबुआ मिसिर क शागिर्द छल। अही चेली क माध्यम स बबुआ मिसिर , सहन्थ मिसिर क सारा जमीन धीरे- धीरे बिकवाईत रहला आ अपन संपईत्त बढईत रहलईन। अहने कयेक टा बाईजी के बबुआ मिसिर चेली बना रखने छल। अही सबहक इस्तेमाल अपन फायदाक लेल गाहे- बेगाहे करईत छलाह। सहंथ मिसिर के तऽ अही शौक ल कऽ घर मे भारी कलह होईत रहईत छलईन। बाद मे कनियो उनकर परा कऽ नैहरा चईल गेलईन। मिसिर टोला क युवक संगीतज्ञ सब मे रंडीखाना क एहन नशा चढ़लई, सब सम्पत्ति एकाएकी सुड्डाह भेलाक बादे शांत भेलई। ई सब मिसिर टोला के लोकक जमीन, कोनो न कोनो रुप मे बबुआ मिसिरक मल्कियत मे आईब गेल छलई। गाम मे सुद पर पैसा देबाक का धंधा बबुआ मिसिर करईत छल। अई धंधा स अपार पैसा कमेलक आर संपत्ति भी खुब बनेलक। धन- संपत्ति भेला पर मान- सम्मान आगु- पाछु भेटीये जाई छई। अई संपईतक पाछुक कहानी जनबाक मतलब आर फुरसत ककरा रहईत छई। अगलगी बला घटना क बाद बेतिया वाला घर किराया पर चढ़ा देल गेल छलई। बबुआ मिसिर गाम सऽ बेतिया जाय के लेल घोड़ा रखने छलाह। छोटी बहु ईयाह बबुआ मिसिर क दुलारु पुतोहु छलीह। बबुआ मिसिर क पत्नीक निधन बहुत पहिने भ गेल छलईन। अही मृत्यु के भी गाम क कयेक लोक दबल जुबान मे आत्महत्या कहईत छई । छोटी बहु के बर के जल्दी त नई कहबई , लेकिन संदेहास्पद मौत भेले छलई। अहु मे कहनिहार, बबुआ मिसिर क हाथ बतबई छई । ओना बापे, अपन बेटा क हत्या करवेतई, ई बात आसानी स हजम नई होई छई। जतऽ अनैतिक संबंधक गंध रहईत छई, ओतऽ कीछुयो असंभव नई छई। बबुआ मिसिर क चाईर बेटा छलईन । ओ अधिकांश जमीन सिर्फ छोटी बहुक नाम कबाला कऽ देने रहईथ। पति क मृत्यु पर बेशी दिन क शोक छोटी बहु नई मनेने छलीह । कीछुये दिनक बाद छोटी बहु सम्पत्ति क देखभाल केनाई शुरू कऽ देने छलीह। बबुआ मिसिर स विशेष प्यार वाला संबंध कहऽ वाला लोक अई सब बात के जोईर दई छलई। समय क खेल देखियऊ, छोटका बेटा क मरला क कीछुये महीना बाद बबुआ मिसिर सेहो मईर गेलाह।मरबाक रंग ढंग छोटी बहुक घरे बला जेकां छलई। अहु मृत्यु मे दबल जुबान मे छोटी बहु के ही नाम आयल छलईन। अंतिम बार उनकर कमरा मे छोटी बहु के जाईत देखल गेल छलईन। बबुआ मिसिरक कर्म एहन छलईन , बेटों सब मृत्यु क कारण जननाई नईा चाही कऽ, जमीनक कागजात आर भरना पर राखल गेल गहना सबहक बारे मे बेशी दिलचस्पी देखेलकईन । बाप के जीते जी बेटा- बहु सबहक कोनो मल्कियत नई छलईन , सिवाय छोटी बहु के छोईड़ कऽ । बबुआ मिसिर क मरला बाद संपत्ति पर कब्जा क लेल सब घरवाला क बीच होड़ सन मचल छलई। कोई कोनो घर मे अपन ताला मारलक आ कियो कोनो भंडार मे । कियो खेत मे अपन खुट्टा - खुट्टी हलेलक। बड्ड कुशलता स छोटी बहु अई स्थिति क सामना कैलीह। बबुआ मिसिर ऐहन पक्का कागज छोटी बहु के पक्ष मे तैयार कयने छलाह , दोसर बेटा सबहक दावा क हवा निकल गेलईन। सब परिणाम छोटी बहु के पक्ष मे आयल छल । बबुआ मिसिर क हश्र देखकऽ, उनकर तीनों बेटा मन ही मन छोटी बहु स भयाक्रांत छलाह। ओ सब लोग छोटी बहु के सामने एक तरह से सरेंडर कऽ गेल छलाह। आब छोटी बहु क निष्क॔टक मलिकाना भ गेल छलईन। विधवा भेलाक बाद छोटी बहु सफेद परिधान मे रहऽ लागल छलीह। सारा खेत पथार देखऽ लगलीह। उपजा बारी क हिसाब राखऽ लगलीह। बबुआ मिसिर क बनल बनायल सुद क धंधा पर अपन कब्जा जमा लेलीह। एक के दु पैसा, कोना बनायल जाईत छई , अई कला मे निपुणता आईब गेल छलईन । पैसा लग भेला स आगु- पाछु घुमऽ बला लोक भेटीये जाईत छई। छोटी बहु क इकबाल इलाका मे बढ़ल जा रहल छलईन। आब ओ पुरा मिश्रौलीक जमींदार भऽ गेल छलीह आ बाकी दियाद बाद उनकर रैयत बुझाईत छल। आई सब मिसिर टोला क लोक इयाह गुनधुन मे लागल छल - " बदरी आखिर की केलकई ? " ओना बदरी के लोक "त्रिकाल" कहईत छलई। त्रिकाल क परिभाषा गांव क शास्त्र के अनुसार तीनों पहर भांग सेवन करऽ वाला स होईत छई। जे व्यक्ति भोर, दुपहर आ सांझ, तीनु समय भांग पीबईत अईछ , त्रिकाल कहेबाक पात्रता ओकरा तखने भेटईत छई। छोटी बहुक दरवज्जा पर बच्चन मिसिर अपन चाह का अंतिम घुंट पीबईत बजलाह -" कीछु कहबो करबई वा पहेलिये बुझबईत रहबई।" बच्चन मिसिर छोटी बहु क विश्वस्त लोक मे जानल जाईत छईथ। हमर बेटा स्टेशनक लग बदरी के रिक्शा चलबईत देखलकईन अछि। कहु तऽ, ऐना कतऊ करबाक चाही? आई तक मिसिर टोला क कियो रिक्शा चलेलक? आहां सबहक पुरखा क नाक कटल की नई? दलान पर बईसल सब लोक सोचऽ लागल- " कीयो रंडीखाना मे बाजा बजा रहल छईथ, कीयो घर घर जाकर पंडिताई कऽ रहल छईथ , कीयो दोकान मे मजदुरी कऽ रहल छईथ, कीयो ट्युशन पढाकऽ जीविका चला रहल छईथ , कीयो शहर मे दलाली कऽ रहल छईथ , कीयो हेराफेरी कऽ रहल छईथ , कीयो मारवाड़ी क गद्दी पर मुनीमगिरि कऽ रहल छईथ, कीयो स्टेशन पर मटरगश्ती क रहलाह अईछ, कीयो तारी-दारु पी कऽ दिने मे टुन्न छईथ , कीयो माय- बाप आ पत्नी के हमेशा अनादर करईत रहईत छईथ , कीयो पेटपोसुआ के जेकां संबंधी कतऽ देह खसेने परल रहईत छईथ , कीयो निठल्ला आ निकम्मा बनल छथि। अई सब स कीछु नई, आ रिक्शा चलेला स पुरखा क नाक कईट गेलईन! मिसिरटोली वाला सब बुईझ रहल छल जे छोटी बहु के जरूर कोनो चाईल छईन, तैं सब के भरका रहल छथिन- " आहां सब लोक मील कऽ बदरी के भगबई जाऊ अई गाम सऽ। अगर ओ अतऽ रही गेल, आर की की गुल खिलायत से नई जानी? कखनो बदरी कही कऽ संबोधन करतीह, फेर बदरिया कहऽ लगतीह। जखईन खीस बेशी भऽ जाईत छलईन, मूंह स बदरिया निकलह लगईत छईन। ओना संबंध मे बदरी छोटी बहु क ससुर लगतईन, लेकिन गरीब व्यक्ति संबंधी कहाँ होईत छई ? अकर तऽ पुरा नाम क उच्चारण करहो मे भी जोर पड़ई छई । चाहक दु दौड़ भऽ गेल छलई। आब मिसिर टोला वाला सब बात बुईझ कऽ खिसकनाई शुरु कऽ देने छल। गरीबी मे बड्ड दोस्ती रहईत छई ।छोटी बहु के छोईड़, सबहक माली हालत पातर छलई। ई सब लोकक मौन समर्थन हमेशा स बदरी क साथ ही रहल छई। छोटी बहु के बनल ई अट्टालिका कहियो अई गरीब टोलबईयाक पुरखाक संपत्ति कहबईत छलई। बबुआ मिसिर सब ठग आर प्रपंच स अपन नाम करा लेने छलई। तखनो जमीनक हवस कम नई भ रहल छलई। बदरी जखईन सांझ मे घर वापस घुरल, जितिन मिसिर ओकरा कोनठी मे ल जाकऽ सब टा राम कहानी सुना देलकई। थोड़े काल मे मिसिर टोला के कयेक लोक बदरी क पक्ष जनबा लेल जमा भऽ गेल छल। बदरी कनी जोर स ही बाजल- " ओकर घरारी आ बगीचा, छोटी बहु खरीदऽ चाहई छलीह । कयेक बेर प्रस्ताव द चुकल छलखिन । जखईन ओ नई मानलकईन , ओई जमीन क बदला मे दोसर जमीन लेबाक प्रस्ताव सेहो देने छलखिन। ई बदलेन सेहो बदरी नई मानलकईन। तखईन ओकरा अपन घर नोत दऽ भोजन लेल सेहो बजेलखिन। बड्ड दिव्य भोजन करेलखिन। भांग क भी उत्तम व्यवस्था छल। बदरी के ससुर- पुतोहु बला संबंधक हवाला सेहो देल गेल छलई। बदरी भोजन त सब खा लेलक , बेचऽ बला बात ओकर मोन मे अयबे नई कयलई। बदरीक बाप सब टा जमीन पहिनेहे बेच चुकल छईथ । ईयाह दु कट्ठा घरारी, एक कट्ठा से कनीक बेशी आम क बगीचा आ दस धुर बंसबिट्टी ओकरा बांचल छई। ओ भुखे मईर जायत, अई जमीन के नई बेचत। ओकरा पांच साल क एक बेटा छई। मायक संग कलकत्ता मे रहईत छई। सब दिन की ओ गरीबे रहत? काईल क ओकर बेटा के पास पैसा भ जाई, ओ घर कहाँ बनायत? चाईर पीढ़ी क बाद समय घुमई छई । तेसर पीढ़ी भईये गेल छई। भांग क नशा मे त्रिकाल बदरी बजने जा रहल छल - " चौथा पीढ़ी आबहे बला छई। ओ अपन घरारी नई बेचत। छोटी बहु क कोठा क सामने, ओकर कच्चा ईटा आर फुस क घर उनका पैबंद लगईत छईन । ओ कोनो ने कोनो बहाना स ओकरा बेदखल कऽ अपन परिसर बढ़बऽ चाहईत छईथ। बदरी कलकत्ते मे रहईत अईछ। ओतऊ त अतेक दिन सऽ ओ रिक्शे चला रहल अईछ। पेट क आईग बुझबई लेल कीछु त करहे पड़तई । मृदंग बढ़िया बजेला सऽ की भुख मीट जेतई ? ककरा लेल बजेतई? कीनका सुनेतई? बजाईयो लेत त सुनतई के? कलकत्ता मे जखईन ओकर कलाकार मोन अजबजा जाईत छई , अपन गाम ओ आईब जाईत अईछ। खुब असगर राईत- राईत भईर मृदंग बजबईत रहईत अईछ। अई सऽ छोटी बहु के नींद मे खलल त नई पईड़ जाईत छईन? नई नई। ढोल- मृदंग बजबऽ वाला गरीब, उनकर पड़ोसी कोना भ सकईत अईछ। ईयाह संगीत बदरी के पुरखाक पहचान छलई, आई ईयाह इनका अभिशाप लाईग रहल छईन । गाम मे एक्को दिन भी अई गरीब के, के खुवायत? गाम मे आईब कऽ बांस बेचने छल। जाबईत तक पैसा हाध मे छलई, बईस क मृदंग बजेलक आर मनमाफिक भोजन कैलक। आब पैसा खत्म भऽ गेल छई । आसानी स त रिक्शे चला कऽ पेट भरल जा सकईत छई ने। ओकरा पास ईयाह हुनर बचल छई , मृदंग बजेला स पेट तऽ नई भरतई। मिश्रौली वाला आब समईझ गेल छलाह। छोटी बहु क ई कुचक्र चाल। ओ परिवार क झुठ प्रतिष्ठा क नाम पर, गरीब बदरी के पैबंद समईझ उजारऽ चाहई छलीह। अई जतरा बेशी दिन गामे मे रहि गेल छल बदरी। पर पंचैती आ किदन-कीदन सब होईते रहलई। ओई सब मे ओझरायल रहल ओ। कतेक बेर मोन मे अयलई जे बेच बिकीन क परा जाय गाम सं। फेर डीहक एहन मोह भ जाई , सब पर भारी परई। जखने डीह बेचअ के गप चलई त छोटी बहु टा नई, आरो लोक सब थाह लेबअ लागई। ओना ओकर समांग सब झखिते रहई छलाय पाई लेल, मुदा डीह कीनबा मे सब ताराउपरी तैयार। आनो टोलक लोक ओकर हाल चाल पुछह लगलई। एक गोटे तऽ ओकरा अतेक तक कहलकई जे छोटी बहु के नई बेचमे त नई बेच, हमरा द दे। कियो कहई जे ओ कनिया बाबी के एजेंट छईन। जमीन कबाला तोरा स अपन नाम करोतऊ आ बाद मे उनका नाम लिख देतईन। ओकरा अतेक पाई कतअ स एतई। ओ त उनकर बले फऊंकई अई। अही सब मे तीन महीना स ऊपर लाईग गेलई। बदरी किछु भऽ गेलई, डीह नई बेचलक।जिदीया गेल छलई। गाम मे कयेक बेर उड़न्ती गप फैल जाई-" आई बदरी रजिस्ट्री आफिस गेल छल।" कतऊ सुनबा मे अबई- " बदरी के भांग पीया कऽ जमीन लीखा लेल गेल छई।" कियो कहई- " जमीन पर पाई बदरी ऊठा लेलक। कतऽ स सधा पायत। जमीन गेलई हाथ सऽ। मिसिर टोली स एक घर उजईर गेल।" अई अफवाह सब मे किशोर मिसिर सब स॔ आगु रहईत छलाह। किशोर मिसिरक बाप ध्रुपदक बड़का गवैय्या छलाह। बबुआ मिसिरक चक्कर मे सब लुटा लेलाह। ओ तऽ धन कही बेतिया के तखुनका कलक्टर साहेब के। ओ शास्त्रीय संगीत क शौकीन छलाह। किशोर मिसिरक बापक हालत देखी कऽ दया आईब गेलईन। ऊनका तऽ अई बुढारी मे नई किछु कैल जा सकईत छलईन। किशोर मिसिर के चपरासी मे बहाल कऽ देलखिन। अई सऽ भुखमरी त खत्म भ गेलईन। जखने हाथ मे दु टा पाई अयनाई शुरू भेलईन, पीबाक आदत फेर लाईग गेलईन।कनिया पीनाई के बिरोध करईन। ईनकर कलाकारी देखु। अपन कनियो के पीबाक लत लगा देलखिन। लोक पुछईन त कहथिन- " डाक्टर कहने अईछ।" आब दुनु परानी मे पीनाई ल कऽ झंझट खत्म भ गेल छलईन। ईनका अपन बुद्धिक बड्ड दावा छलईन। अहिना मनगढंत फुचक्का सब बदरी के बारे मे छोरईत रहईत छलाह। बदरी गाम मे अही सब मे लटपटायल छल।चर्चा क केन्द्र मे ओ आ ओकर घरारी। जेना पैर फीसलल जनानाक पाछु सारा गाम दीवाना रहईत छई, ओहिना बदरीक घरारी छलई। सबहक नजईर अही पर गिद्ध जकां गड़ल रहई। उमहर दिन पर दिन बीतल जाई, बदरीक कोनो खबर नई पहुँचलई कलकत्ता मे। ओकर कनिया ईमहर ओमहर स हथपईंच ल कऽ कहुना बच्चा के पेट भरई छल। अपने ओ कखनो क भुखलो सुअईत जाई। ओकर कलोनी जे जे कलोनी कहबई। जे जे माने झुग्गी झोपड़ी। अई कलोनी सब मे सब के सबहक हाल पता रहई छलई। सब किछु खुल्ले मे होअई। दुलार मलार आ घिन्न घुनाईज आ मारा पिटी आ गारा गारी आ बेटी पेटखऊंकी-सब बिना अढ़ के। बदरी के कनिया के सेहो अपना देसक किछु लोक स अबरजात रहई। ओतअ मरदे मऊगी बच्चा सब काज करई। बदरी के ई पसंद नई कि ओकर कनिया काज करई। ताहि लेल ओकर कनिया काज पर नई जाई। कयेक मऊगी सब ओकरा बोलियो दई -"ई जे महंथाईन बनल बईसल रहई छें, देह के हिलो डोलो, काज हेतऊ तखने। हरकत करमे तखने बरकत हेतऊ।" ओ किनको जाबत जरूरत नई होअई, नई किछु कहई। ओना कियो कियो बुझिये गेलई जे ओकर सैंय मना केने छई। अई पर ओ सब कहई तोरा मे कोन सुरखाबक पर लागल छऊ जे हमरा मे नई अई। जो धेकरी बनल रह। बाद मे बुझेतऊ? आब बदरी के कनिया के पैंच उधारी सेहो भेंटनाई बंद भ गेल छलई। राशनक दोकान बला सेहो सीद्धा उधारी मे देबअ स मना क देलकई। ओना ओ दु के चाईर लई उधारी के बदला मे, मुदा ओहो मना क देलकई। ओकरा दोसर झुग्गी बला कही देलकई जे कोन ठीक बदरिया कतऊ मईर खईप त नई गेल। ओ दोकान बला के कहबो केलकई-" नई देबअ त नई दैय। ऐना अलच्छ बात नई बाजअ।" दुखी भऽ घर घुरल। मोन करई जे जहर- माहुर खा कऽ मईर जाय। ई ननकीरबा के देखला पर विचार बदईल जाई। घर मे एक्को कनमा अन्न नई। कतऊ स किछूके उम्मेदो नई। अपन पेटे टा रहितई त भुखले सुईत रहितै। लेकिन भगवान एकटा ननकीरबो द देने छथिन। ओ केना भुखले रहतई। किछु चटरंगी मऊगी सब अपन धंधा मे आबई लेल कहबो केलकई- "बियाहल छैं- चामक देह छई- की फरक परई छई।चईल क देख ने।" बदरी के कनिया नीक सं चिन्हई छलाय ई सब छिनाईर के। आब करय त की करय। सांझ भेल जाई छलई, ओ मोनेमोन अपन सोखाबाबा के गोहराबय लागल। अहीं रस्ता देखायब। आंईख स नोर सेहो बहईत छलई। नोर बहिते बहिते निन्न भ गेलई। ओकरा किछु पता नई लगलई। बेहोश जेकां ओकर हाल छलई। जखईन आंईख खोलईत अईछ त देखईत अईछ जे ओकर ननकीरबा ओकर देह पर लटकल छई। बगल के एकटा ओकरे देशक मऊगी ओकर माथ पर पाईन छींटई छल। ओ दुनु के भईर पांईज कअ पकरलकई। कनी काल बाद मोन हल्लुक भेलई। ओ सब बात बुझलकई। दुनु मे किछु गप भेलई।गपक बाद बदरीक कनिया मे आत्म विश्वास क भाव जगलई। की समझौता भेल रहई, से रहस्य छलई। ओई राईत ऊयाह मऊगी अपन झुग्गी कहुं या घर कहुं, ओतई स पनपीयाई बना क अनलकई। बदरीक ननकीरबा बगलबाला मऊगी के घर पर छोईर देल गेल। ओ ओई मऊगी संग एकटा घर मे दुनुं सांझ खेनाई बनबअ के काज करअ लागल। ततेक नीक ओ खेनाई बनबय , ओ मालिक अपन संबंधी कतअ सेहो लगा देलकई। दुनु घर लगीचे छलई। अई मालिक के बुटीकक दोकान बाजार मे रहई। बदरी के कनिया त अखनो हाथे सं चट दं अपन ननकीरबा के सब जामा लता सीब दई छलई। झुग्गी मे सेहो नुकऊआ कीछु कपरा सीब क कखनो किछू कमा लई छलाय। ओकर हाथ कपरा सीबअ मे बड्ड साफ छलई। किछु महीना अहुना बीत रहल छलई। बदरी के बेटा बिजईया मुसपैलटी के सकुल मे पढ़ाई शुरू क देने छल। ईमहर जखईन बदरी कलकत्ता पहुंचईया त कलोनी मे घुसिते राशनक दोकान बाला ओकरा कनिया के कतअ कतअ जाय बला गप कहलकई। कनी घर तरफ बढ़ल त फेर कियो किछु आर कहलकई। ओकर दिमाग भिन्ना गेलई। झुग्गी पहुंचल त ओतअ ताला लागल छलई। बेटा बिजईया खेलअ धुपअ गेल छलाय।बगल के झुग्गी बाली चाभी द क चईल गेलई। घर मे जखईन घुसल त सामने देखलक नबका बटलोही आ केटली। देखते मातर ओकर पारा ऊपर चईढ़ गेलई। एक तअ राकस दोसर नोतल। पहिनेहे राशनबाला आ के के सब की की कहने रहई, ओई पर घर मे नब बरतन। देखते ओकरा ऊर्री बिर्री लागअ लगलई। बटलोही आ केटली के पटईक पटईक क पचका देलक। सब सामान ईमहर ओमहर फेंक फाईक देलक। जे जे कलोनी मे टेलीगरामो स जल्दी समाद पसरई छई। बिजईया लग खबर पहुंचलई कि ओकर बाबु आईब गेलई। ओ लंके दंके दौरल घर आयल। ओकरा कयेक टा गप बाबु के कहअ के रहई। सकुल के, नबका दोस के, चश्मील्ली मस्टरनी के, खुसठ बुढबा लमनचुस बेचनिहार के, नबका मायक मेमसाब - साहेब के, तरह तरह के खेनाई के परकार सब के। अतअ बापक रौद्र रूप देख क डरा गेल आ केवारी के बाहरे नुका गेल। माय के अयबाक इंतजार करअ लागल। सांझ मे माय के जखने अबिते देखलकई बिजईया। दौर कअ सब गप बाबु बला रस्ते मे कहीं देलकई। जेना बदरी के महल्ला बला रस्ते मे कहलकई, ओहिना बिजईया अपन माय के । ई आजुक अफसरक ब्रीफिंग जकां भेल। माय संगे डराईते डराईते ओ हो घुसल। बदरी के खीस फेर कनिया के देखते बईढ गेलई। खुब चिल्ला चिल्ला क बजई छल।गाईरे पढ्अ लागल छलाह। बिजईया दिस तकबो नई केलकई।ततेक खीस मे छल। जखईन बजिते बजिते शांत भेल।तखन कनिया सब टा गप कहलकई। कतेक दिन भुखले अपने सुतल। बदरी त कोनो खबरों नई लेलकई। कहलकईन जे आहां सोचलऊं जे हम बेटा के मुंह मे जाबी लगा देबई? ओ की खेतई? सब वस्तुस्थिति सं बदरी अवगत भेल। बदरी, बिजईया आ ओकर माय दुनु के एक्के संगे पांजा मे कसलक। कतेक काल तक सब अहिना रहलई। फेर बदरी के कनिया उठल। खेनाई पिनाई बनेलक। बिजईया त बाबुक कोरे मे सुअईत गेल छलाय। माय ओकरा उठेलकई। नई खाई छलाय त माय कहलकई -"भुखले सुतमे त एक बगेरी के बरोबईर माउस कम भ जेतऊ।" बिजईया त बगेरी देखनेहे नई अई। अंदाज लगेलक एहन ओहन होयत। बाद मे अपन बाबु स पुईछ लेत। भोर भेलई। सब अपन काज मे लाईग गेल। बिजईया सकुल गेल। माय अपन मेमसाब कतअ खेनाई बनबअ। मेम त अंगरेजक घरबाली सब होई छलई। आब त करिया भुजंग मऊगी सब सेहो मेमसाब भ गेल छलई। जे होअई। बदरी के कनिया ओकरा मेमसाब कहई। ओ अई स कहई जे जहिया ओ पहिल बेर ओकरा कतअ काज करअ गेल छलाय त ओकरा जे मउगी काज दियौने रहई से सीखेने रहई। पुरूख के साब आ मऊगी के मेमसाब कहबाक छई। तैं ओहो कहई छलाय। बदरी लेल खेनाई बना क गेल छलई ओकर कनिया। अपन घरक त बदरियो साहेबे अईछ। अतअ त ओकरे जुईत।आई भईर दिन ओ साहेब सब के रईब जेकां आरामे केलक। अगिला दिन स ओहो अपन पुरनका काज पर लाईग गेल। रिक्शावाला के काज मे कहियो बेरोजगारी नई छई। नई कोनो सर्टिफिकेट आ नई डिग्री क काज। आई काल्हि गारेन्टर सेहो मांगई छई। ओ त कोनो रिक्शा बाला बईन जाई छई। ओकरा लग छईये कि जे बदला मे ल जेताह। नई हराय के डर, आ नई चोरी क खतरा। बदरीक कनियांक नाम रामरति रहई। मेमसाब के ई बरकी टा आ पुरान नाम लगलईन।ओ रति कहअ लगलखिन। उनका बुटीक काज मे करीगर छुट्टी मे घर चईल गेल रहईन।ओ रति के किछु कपरा सीबाक लुईर सीखा देलखिन।ओ झट स सीख लेलक। ओ आब रति के अपन बुटीक पर ल जाय लगलखिन आ खेनाई बनबअ लाय रति दोसर के ठीक क देलकईन। बिजईया तेहन ने चंसगर छलई पढ्अ मे जे पंचमे पास करईत ओकरा अगिला बरख चश्मा बाली मैडम नबोदय के फारम भरा देलखिन। अपने संगे ल गेलखिन परीक्षा दियौलखिन। बिजईया पासो क गेल। ईमहर बुटीक बढ़िया चलई छलईन। किछु बदमाश सब ओकर बाहर मे अड्डा जमावअ लागल छलाय। बदरी के देह दशा त बलंठ छलई। ओ एकदिन बुटीक पर रति के कोनो समाद कहई लेल गेल छल। ओकर चाईल मे अकर छलई। पुलिसक सिपाही जकां ओ चलई छल। ओकरा अबिते देख क ओ दोकानक बाहर ठार छौंरा सब ससईर गेल। ई सब रति के मेमसाब शीशा क तर स देखई छलीह। जखईन बदरी, रति सं भेंट क क चईल गेल। तखईन ओ रति के कहलखिन जे रिक्शा के जगह ज्यो गार्डक काज करईत त की बेजाय? रति अपन महादेव के चिन्हई छलीह। आब उनका नीक पाई बुटीक स भेंटई छईन। ऊनको रिक्शा उघनाई ठीक नई लगईन। दोसर आब बयस सेहो बईढ़ रहल छलईन। कहने रहथिन बदरी के। ओ त ततेक सनियल जे कहलकई -"ओ,आब हम बहु के कमायल खायब। हमर देह मे कि घुण लागल अईछ। ओ तहिया नई तैयार भेल छल।" फेर अई बेर डराईते डराईते कहलखिन। ओ हंसअ लागल आ तैयार भ गेल। कहलकई- " आब रिक्शा मे ओ बात नई रहलई।" समय बड बलवान होई छई। जखईन जे करेबाक होईत छई, तेहने हाथ धरा कऽ करा दईत छई। बदरी के जेना- जेना आर्थिक स्थिति सुधईर रहल छलई, तहिना खीसो पीत कम भेल जा रहल छलई। आब ओ फुरसत मे भोलेनाथक नचारी मोन सऽ गबईत रहईत छल। जहिया बेशी खुश भऽ जाय, मृदंग बजबऽ लागय। ओकर मृदंगक थाप सुईन कऽ लोक बुईझ जाई, बदरी प्रसन्न अईछ। कतेक काल तक ओ मृदंग बजबईत रहईत छल, ओकरो अंजाद नई होई। कयेक बेर तऽ बजबईत बजबईत आंगुर सऽ शोणित बहऽ लगई। तखईन आंगुर मे बांसक क॔ईची बाईन्ह क बजबय लागय। एक तऽ भांगक नशा, उपर स भगवान क भक्ति मे तल्लीन बदरीक भाव- भंगिमा अद्भुते भ जाईत छलई। अगल - बगलक स्त्री गण सब ओकर घर आब आईब कऽ अकर भजन सुनऽ लागल छलीह। जखईन अकर संगीत- अध्याय खत्म होई, लोक बराई त करबे करई, उपर सऽ बदरी स खर्चो करबई। बदरी ई बुझईत जे ओकरा चढ़ा कऽ लोक खा - पी रहल अईछ, तखनो ओ सबके खुआ दई। ओकर कहब छलई- " हमरा भगवान आई अर्थ देलाह अईछ, अई मे सबहक हिस्सा छई। कियो कहलक तखने ने हम खुयेलियई। कीयो हमरा बुरबक बुझय त बुझय। हमरा कोनो फर्क नई परईत अईछ।" रामरति , बदरीक अई उदारता स खौंजायल रहईत छल। ओकरा होई की बदरी के सब मुर्गा बना रहल छई। बदरी एहन जे मुर्गा बनलो पर खुश छल। खुयेला - पीयेला सऽ बदरी के अपन संतोष होईत छलई। मस्तमौला बनल ओ निस्पृह भाव मे रहईत छल। के की सोचईत अईछ, अकर कोनो परवाह ओ नई करईत छल। कखनो कोनो बात जखईन ओकर ह्रदय के बेध दई, भांगक डोज ओई दिना बढ़ा दई। लोक सब ओकरा एकभगाह कहई छलई। भांग पीबईत पीबईत ओकर सोचबाक अपन अलग अंदाज पनईप गेल छलई।भोलानाथक गण अपना क बदरी मानईत छल। आब ओ बाबा बैद्यनाथ क घर देवघर, कांवर ल कऽ जाय के बारे मे सोचईत छल। एक दिना अहिना पता लगलई जे ओकरे समाजक लोक समुह मे कलकत्ता स सुल्तानगंज अगिला दिन ट्रेन स जा रहल अईछ। बदरी बिना ककरो पुछने पाछने जाय के तैयारी मे लाईग गेल। बजार जा कऽ सीयल - सीयाल गेरुआ अधकट्टी गंजी आ गमछा कीनने आयल। कांवर ल जाय बला बांसक फट्टी सेहो बजार मे देखा गेलई। दुटा बांसक छोटकी टोकरी जे सपेरा सब रखईत अईछ, सेहो मोल कीनने आयल। एक्के दिन मे पुरा तैयारी क लेलक। रामरति के सेहो मोन हर्षित छलई। ओहो बदरी के जाय मे पुरा सहयोग केलकई। अगिला दिन ओ काज सऽ छुट्टी ल लेने छल। बदरी के बट्ट खर्चा पुरा बना कऽ देलकई। भोरे सऽ सिलौट- लोढ़ी अजबारने छल। बदरी के सात दिनक भांगक कोटा पीस कऽ तैयार कऽ देने रहई। घर स निकलऽ सऽ पहिने एक लोटा भांग बदरी पीलक। आई भांग महीन पीसल छलई। बदरी के महीक्का पीसल भांग नीक लगईत छलई। ओकरा बुझल छलई, रामरति के महीक्का भांग पीसऽ अबई छई, मूदा ई नई पीसत। जहिया महीन भांग बदरी के भेटई छलई, ओ बुईझ जाईत छल जे रामरति प्रसन्न छईथ। ओकरा बीतल राईत झट स मोन पईर जाईत छलई। मोने मोन बदरी मुस्कियाई लागय। पुरा कांवरिया के भेष मे आई बदरी घर स नीकलल छल। घर स बहरी पैर रखिते लोक ओकरा " बोल बम बोल बम " कहऽ लगलई। बदरी भी जवाब मे बोल बम कही दई। आई अलगे टशन मे बदरी छल। अपन ईष्ट देव भोले नाथ स सीधा भेट करबा लेल बदरी निकईल चुकल छल। स्टेशन पहुँच कऽ बदरी सुल्तानगंजक टिकट कटा लेने छल। थोड़े काल बाद ओकरो समाजक लोक बाबाधाम जाई लेल स्टेशन आईब गेल। बदरी उनके सबहक संग भ गेल। अई समुह मे सब लोक कयेक बेर बाबाधाम भऽ आयल छल। जखईन सब के ई पता लगलई जे बदरी पहिल बेर बाबाधाम जा रहल अईछ, अकरा सब " लाल बम " कहऽ लगलई। पहिल कांवर तीर्थ यात्री के " लाल बम " कहल जाईत छलई। फेर की छलई, बदरी आब पुरा समुहक लाल बम छल। सब अकरा लाल बम कहई। ई पुरान समूह छलई, सबहक अनुभव पहिने स छलई। कतेक बजे जल भरब, कतऽ विश्राम करब, कतऽ भोजन करब, आ कतऽ राईत बितायब- ई सब तैयारी पहिनेहे स भेल छलई। बदरी त ततेक जोश मे छल, ओ सब स॔ पहिने अपन ठांव पर पहुँच जाईत छल। एक दु दिनक बाद ओकरा सब कांवरक रुटीन भी बुझऽ मे आईब गेल छलई। ओ पहिने पहुँच कऽ सबहक लेल बेबसथा क लईत छल। अई सऽ सब सहयात्री लोकईन अई लाल बम स खुश रहथिन। दोसर सांझ मे जखईन कांवरक आरती होई, बदरी के गीत सुईन सब भाव - विभोर भ जाई।धर्मशाला सब मे ठहरल आनो लोक सब बदरी के भजन- कीर्तन समय सुनऽ लेल आईब जाई छलई। गेरुआ वस्त्र, खिचरी दाढ़ी बढल आ कान्ह पर कांवर, बदरीक धार्मिक यात्रा भ रहल छलई। पुरा भक्ति क दुनिया बईस गेल छलई। बदरी ओई मे रईम गेल छल। ओकरा एक्को बेर कनिया आ बेटाक यादो नई अयलई। पुरा मनोयोग स ओ अपन भोलेनाथ के जल चढ़ेलक। ओना भीड़ आ धक्कम - धुक्का बड छलई। बदरी के की फरक परई छई। ओ तऽ पहिनेहे स त्रिकाल छल। कलकत्ता क सब लोग संगे फेर घुईरो गेल। अई मे ओकर नब नाम सबहक जबान पर चईढ गेल छलई। बच्चा , बुढ़, जवान, स्त्री, पुरुख सब ओकरा " लाल बम " ही कहई। बदरीक बुटी " भांग " सुपरहिट रहलई। सब ओकरा स मांईग मांईग क भांग लईत छल। धनी - गरीब, पढल- निरक्षर सबहक भेद भांगक सामने मीटा गेल छल। ओना कांवर मे नाम लेबाक परिपाटी नई छई। सब सिर्फ " बम " होईत छई। अई कांवर यात्रा स बदरी क धार्मिक आस्था आर बईढ गेल छलई।ओकर बात बिचार बेबहार मे स्पष्ट अंतर रामरति के देखा रहल छलई। बदरी कलकत्ता आईब फेर अपन काज मे लाईग गेल छल। कनीक टा मोछ बढ़ा लेलक आ एक टा जोरगर लाठी सेहो कीनलक।ओकरा महावीरी अखाड़ा मे लाठी भंजबाक अनुभव छलईये। कोना कान्ह पर लाठी राखल जाय, कोना आक्रमण स अपना क बचाबी, कोना दुश्मन पर वार करी, ई सब ओ गाम मे सीखने छल। आब फेर स ओकर अभ्यास करऽ लागल। ओकरा अपना पर आश्चर्य लगलई, लाठी भजनाई ओ अखनो नई बीसरल छल। कनीक अभ्यास क बाद पहिनेहे जेकां लाठी भाजऽ लागल। आब मोछ पर ताव दईत, लाठी हाथ मे ल क ओ बूटीकक बाहर स्टुल पर कखनो बईसय, नई त ठारे रहई छलाय। कखनो कऽ लाठी मे तेल पीयाबईत छल। अई मे त कोनो काज नई, आ पाई महीना पुरिते चिक्कन भेट जाई। ईहो कोनो काज छई। रिक्शा चलबऽ मे एक त अतेक मेहनत, दोसर भाड़ा काल मे हील- हुज्जत, तेसर सवारीक इंतजार मे घंटो टकटकी लगा कऽ बईसल रहु, तेसर घर घुरबाक काल ज्यों उलटा मूंहक सवारी के ल जाई लेल मना करू- गाईर फज्जईत ऊपर स सुनु। अई काज मे देखु। बईसल रहबाक पैसा भेटई छई। पहिने बुझल रहितई तऽ ईयाह नौकरी बदरी करीताह। मजा आईब रहल छलई आब ओकरा जिनगी मे। गाम आब मोनो नई परई। कखनो कऽ अतबे दिमाग मे अबई, गाम मे जे ओकर दियाद बाद नौकरीक तलाश मे ढढिया रहल छईथ, भोलेनाथ ऊनको अहने आरामक नौकरी द दईतथिन? ईमहर बदरी के बेटा बिजईया के नवोदय मे नाम लिखा देल गेल छलई। ओ आब ओतई रहय। कहियो काल बदरी आ रति मेमसाब क गाड़ी मे नबोदय स्कुल जाई छलाय।नवोदय की स्कुल छई। खेनाई- पीनाई- रहनाई सब फोकट मे । बाह रे सरकार । बदरीक समय मे एहन स्कूल रहीतई, ओ पढ़ी लिखी गेल रहीतय।समय कतेक बदईल गेल छई। गरीब- अमीर सबहक बच्चा के एक्के रंग पढाई। बदरी जहिया नवोदय अबईत छल, जोशा जाईत छल। कीछु अनर्गल बात मूंह सऽ नीकईले जाईत छलई। आब दु प्राणीक खर्चा आ आमदनी दुगुना। पाई जमा होईत छलई। लगे मैं एकटा जनता फ्लैट बिकयबाक खबर रति के भेटलई। मकान तऽ पहिनेहो बिकाईत छलई। तहिया ई समाद रति लेल कोनो काजक नई छलई। आई ओई लायक बुईझ कऽ ओकरो लग खबर अयलई। ओ सब अपन समाजक कमिटी स पाई उठा कऽ ई जनता फ्लैट कीनलक। बदरी कलकत्ता मे मकान मालिक भ गेल। आब अप्पन घर मे रहई छलाय। गऊंआ सब जे संबंध तोरने छलखिन, कहीं बदरी किछु मांगि नई लय? आब अबई जाय लागल छलखिन। अपन लोक सब सं अबरजात शुरू भ गेल छलई। एक दिन बदरी के दोकानक बाहर एक टा पुरान बैग खसल लावारिस हालत मे भेटलई। पहिने त ओकरा भेलई जे कहीं बम नई होई। फेर की नई फुरेलई- त्रिकाल त छलाये, बम भोले के नाम ल कऽ ओई बैग के खोईल देलकई। ओई बैग मे रुपये रूपया आ कतेक रास कागज सब। बदरी बैग ल जा कअ मेमसाब के देलकई। ओ ओई कागज पर लिखल फोन नम्बर सब पर फोन कऽ कऽ ओकर मालिक के बजेलकई। ओकरा पाई सऽ भरल बैग सोईप देलकई। बैगक मालिक ईनाम मे बहुत रास पाई बदरी के देबअ चाहलकई। बदरी पाई लेबअ स साफ मना क देलकई। ओकर कहबाक छलई -" चौकिदारी तऽ हमर काज अईछ। अकर हमरा दरमाहा भेटई अछि। हम कोनो अलग काज नई कयलऊं। ई हमर कर्तव्य थीक।" ईनाम नईंहे टा लेलक बदरी। अई घटना के पुरा बजार मे चर्चा खुब भेलई। आई तक कीयो ईनाम लेबा सऽ मना नई कयने छलई। अखईन तक बरका अफसर सब के ईमानदार आ कर्त्तव्य किछु होई छई, सैह बजार वाला सब सुनने छल। बदरी त हद्दे क देलकई। सब कहई पता नई, कोन माईट पाईन के बनल छई।ओकर मेमसाब के एकटा पत्रकार जान चिन्ह क छलई। ओ बदरी के फोटो ल कऽ अखबार मे ई सब ईमानदारी आ इनाम नई लेबाक बात छाईप देलकई। खुब लोक ओकर बाद आईब कऽ बदरी के शाबाशी देलकई। रामरति के सेहो मेमसाब अखबार बला बात बतेलकई। बदरी अपन फोटो छपल अखबार कीनलक। ओ अखबार के दोकानदार के सेहो अपन छपल फोटो देखेलकई। दोकान वाला के पहिने त आश्चर्य लगलई। फेर फोटो स मूंह मीलेलकई। फेर बदरी के पीठ ठोईक देलकई। राईत मे जखईन बदरी घर घुरल छल, अपन फोटो बला अखबार संग नेने आयल छल। रस्ता पेरा जे भेटाई, सब के अपन फोटो देखाबय। घर अयला पर रामरति फेरो महीक्का भांग बदरी के पीयेलकई। बदरी के थाह लाईग गेलई, आंगन प्रसन्न छईथ। अई अखबार छपला स एक टा भेलई। बदरी क चर्चा खुब भेलई। एकटा बरका बनिया अपन ओफिस मे नजर राखई के काज लेल बदरी के ओकर मेमसाब सऽ मांअईग लेलकई। अतेक पैघ बनिया के बात कटनाई ओकर मेमसाबक बस क बात नई छलई। मेमसाब हाथ जोईर लेलकई बदरी के सामने। बदरी आब शीशाबला घरक बाहर सऽ भीतर, बरका बनिया के आफिस मे एसी मे ड्युटी करअ लागल। दरमाहा दुगुना भऽ गेलई।कीछु फंड सब मे सेहो पाई जमा होईत छलई। अई फंडक बेसी पता अकरा नई छलई। मूदा ई पाई कटला सऽ बजार मे वेल्यु बढ़ल बुझाई। कियो कियो अकरा पक्का नौकरी कहई। एसी मे ड्युटी स रंग सेहो साफ होबअ लगलई। खेला पीला स चिक्कन भईये गेल छल। आब बदरी " गरीब दीन हीन " देखला स नई बुझाई छल आ नई ओ आब छलाये। समयक बहाव देखु। बिजईया छुट्टी मे ही बदरी लग आबय। ओकर पढाई के सब खर्चा सरकार दईये रहल छलई। दसमी के बाद दक्षिण भारत क स्कुल मे नवोदय क विद्यार्थी के अदला बदली योजना मे पढअ बिजईया चईल गेल। ओत रहि क अंग्रेजी बड्ड सुन्नर सेहो बाजअ लागल।बिजइया भूख, गरीबी, विपन्नता, सामाजिक भेदभाव, शोषण, अपमान, तिरस्कार, जाईत भेद, आर्थिक आधार, झुग्गी झोपड़ी क जीवन, रंग भेद, संबंध के अपने भुक्तभोगी छल। ओ अई सब सच्चाई के अपन कलमक माध्यम स स्कुलक मैगजीन मे पठबई छलई। ततेक ने सच्चाई क करीब ओकर आलेख होई, सब टा मैगजीन मे छपई। आब उम्र के संग संग ओकर सामाजिक सरोकार क भाव भी प्रबुद्ध भेल जा रहल छलई। अपन घरक माली हलात ओकरा बुझल छलई। स्कुली शिक्षा पुरा कैलाक बाद ओ अपन ट्युशन कऽ कऽ आर्थिक उपार्जन करईत छल। संग संग कालेजी शिक्षा सेहो ल रहल छल। समय समय पर ओकर आलेख सेहो समसामयिक विषय पर छईप जाईत छलई। अई सब स पाई आ पहचान दुनु भऽ रहल छलई। बिजईया जतऽ ट्युशन पढबऽ जाईत छल, जखने ओई बच्चा क पिता के पता चललईन जे ई मास्टर के आलेख अई प्रमुख अखबार मे छपलई, ओ बीन कीछु कहने पाई बढ़ा देने छलखिन। इज्जत भी बिजय के ओ सब बहुत करऽ लागल छलखिन। ओहो अहिना संघर्ष कऽ कऽ अई मुकाम पर पहुँचल छलाह। समय भेटते, अपन संघर्ष क खिस्सा सुना बिजय के मनोबल बढबईत रहईत छलखिन। बंगलोर क कालेज स बिजय ग्रेजुएशन केलक आ घुरती बरख सिविल सर्विसेज मे IAS मे ओकर चयन भ गेलई। नम्मर बेशी रहबाक कारण अपन पसंदक कैडर , सेहो बिहारे भेटलई। जिला के कलक्टर आ पुलिस कप्तान ओकर गाम तकईत घर पहुंचलकिन। बधाई देबअ बाला के लाईन लागल छई। बदरी त कयेक बरख स गाम नई आयल छल। लोक सब ओकरा बीसरहो लागल छलई। अई बीच मे बिजईया क ई धमाका पुरा गाम - समाज के गनगना देलकई। जे सब बदरी के चिन्हबा स इनकार करईत छलाह ओ सब आई संबंधी होबाक दंभ भईर छलाह। " बदरी " कही कऽ सम्मानजनक संबोधन जे कहियो नई कैने छल, से आई ओकरा संग बीतल समय सार्वजनिक रुप स याद कऽ रहलाह अईछ। छोटी बहु घर पर दऊर दऊर क सब के चाह जलखई क बेबसथा करई छथि। टेलिविज़न बाला सब टोलक लोक के इंटरव्यू ल रहल छई।छोटी बहु के सेहो इंटरव्यू दईत एक झलक टीवी पर आयल छलईन। बदरी के गामक कच्चा माईटक भीतक घर के ईमानदारी के प्रतीक मानल जा रहल छई। बदरी क त्यागक खिस्सा चईल रहल छई। जे घर पैबंद छल से आब ओई गामक पहचान भ गेल। बिजईया आब बिजय बाबु भ गेल छथि। पुरा गाम बिजयक गाम भ गेल। छोटी बहु सड़क पर जाईत मिसिर टोला के लोक सब के फेर शोर पाईर क बजा रहल छथिन आ टेलिविज़न पर के इंटरव्यू देखा रहल छथिन। ____ बिजय के IAS मे चयनक समाचार गाम-गाम फईल गेलई।भदबाईरक बाईढ़ सऽ भी बेशी तेजी सऽ ई खबर गाम- गाम मे फईल गेलई। बदरी आ ओकर कनिया के त खुशी के ठिकाने नई। दऊर कऽ बजार गेल। मधुर किनलक आ महाबीर मंदिर मे चढ़ेलक। गामो मे समाद देलकई जे सोखाबाबा आ भगबती के मधुर चढ़ा दईलाय। भरी टोल मे परसादी मे मधुर बटवेलक। आब ओकरा छोटी बहु के बेटा-पुतोहु सं घुट्टा-सोहार भऽ गेल छई। फोन पहिनेहु सं उनके कतअ छलईन। ओ जखईन पहिने फोन करय त ओकर गप्प पर कियो धेयान नई दई। उल्टा कयेक बेर ओ फोन पर सुनने रहय- � ई भंगेरी के हम सब समदिया छी। एकर सपरतिब ने देखु, हमरा कतअ फोन करई अछि-जेना अकर बापक गुलाम होईयई। अकरे ले जेना फोन लगेने होई। कोनो काज नई छई- समाद कहबा के। परईक गेल अईछ।� ताहि दुआरे रामरति, कहियो फोन कऽ कऽ बदरी के हाल नई लई। कयेक बेर करई लेकिन ओ सब कोनो कान- बात नई दई छलखिन। तखईन आजिज भऽ कऽ फोन केनाई छोईर देलक। आब त उल्टे गंगा बहअ लगलखिन अईछ। उनके सब के फोन आबअ लगलईन। तैं रामरति मिठाई लेल कहियो देलकईन छोटी बहु के पुतोहु सं। से ठीके। ओ बारह सै रूपया के मिठाई कीनली, भगवान भगवती के ऊसरगा क भरी टोल लोक पिछु एक एक टा बंटवेली। ऐना त आई तक नई भेलई। दु टा क मधुर बैनक चलन छलई। छोटी बहु त महो महो क देलखिन। लोक गईन गईन क मधुर पठबेलखिन। अबसरे एहन छलई।लोकक कहब छई जे अतेक खुश तऽ छोटी बहु अपन पहिल संतानक जन्म समय सेहो नई छलीह। मधुर खेलाक बाद बदरी के टोलक लोग के सेहो फोन एलई। ओकरा सब के कहब छलई �� छोटी बहु बुढ़ारी मे टेलीविजन पर आयल छलीह, ओकरा बदला मे ई मधुर छई।� दियादी होईते सैह छई।हर बात मे तेसरे खिस्सा भ जाई छई। तैं ज्यों संयम रहय त किछु करी वा नई करी, किछु शगुफा छोईर दी। देखु ओ घुमईत घमाईत, नाना परकारक एक्सपर्ट कौमेट आहां के मंगनीये मे सुनअ के भेट जायत। उयाह भेलई अहि बेर। बदरी समाद देलकई मधुर चढ़बअ के- �लोक छोटी बहु के टेलिविज़न स जोईर देलकई।� कोई त नबका दोस्ती पर किछु आरे तंज। त कियो लल्लो चप्पो के तेसरे कारण- बिन कारण टिटही नई बाजय। आहां रोईक नई सकई छी सबके अपन विश्लेषण करबा सं। लोक जे भी कहई। बदरी त निश्चित क लेने अईछ जे मधुरक एक एक पाई जोअईर क द देतईन छोटी बहु के। जेना भदबारी अबैत, बेंग सब कतअ ने कतअ स आईब क टर्र टर्र करअ लगई छई, ओहिना बदरी के संबंधी सब ऊपर होबअ लगलई।अखईन तक सब निपत्ता रहई। अहन मीठगर गप्प सप्प सब करई जे बदरी के बिसवासे नई होई कि ओकरे कान ई सब सुईन रहल छई। कयेक बेर भेलई कि सपना त नई छई। अपना जांघ मे बिट्ठु काईट क देखलक। ठीके सब सद्यः भ रहल छलई। बिजय ट्रेनिंग मे मसुरी चईल गेलई। जाय स पहिने कलकत्ता मे सब संगी साथी स भेंट गांठ केलकई। जेजे कालोनी वाला संगी सब के पार्टी देलकई। मुस्पैलिटी बाला सकुल के मास्टरनी के मधुर जा क द एलकई। आरो किछु नबोदय बाला संगी सब कतअ गेल। रामरति के साहेब जेकर गाड़ी मे नबोदय जाई, ओकरो कतअ गेलई। सब सं हिलल मिलल रहल। लोक ओकर सोभाव के प्रशंसा करई छलई। बदरी के परोछ मे बेटा के प्रशंसा सुनअ मे बड्ड नीक लगई। सीना ओकर बईढ़ क 56 इंचक भ जाई।बिजय अकदम्मे सरल छल। घमंडक एको मिसिया लेश नई। बदरी के आब ओकर बाबु जे चारिम पीढ़ी बला गप्प कहथिन, ओई पर बिसबास होबअ लगलई। ओ याद करई छल � � आर कोन कोन गप्प कहई छलखिन।� मुदा किछु याद नई परलई। आब खाढ़ी बला चारिम चक्र पुरा भ गेल छलई। ओकर दिन घुईर गेलई। आब कतऊ ओ जाय, ओकरा अनकट्ठल मोजर भेटअ लगलई। ई सब ओकरा सोहाई नई। ओकरा पहिलके जिनगी नीक लगई छलई। आब ई सब ओकर हाथ मे थोड़े छलई। सोचनाई छोईर देबअ चाहई छलाय, लेकिन फेर उयाह उधेरबुन। माथक ओधबाध भ जाई छलई ओकर। आब एकटा तेसरे खेला शुरू भ गेल छलई।अई मे ओहो खुब खेलाय लागल।ओकर हाल ओहन भ गेल छलई जेना जखईन बुनी परई छई तो राही बटोही, भीजअ स बचई लेल गाछ-बिरीछ के अढ़ लईया। जखईन भीजअ स नई बईच पबईया वा बुनछेक नई होई छई त ओई मुसलीधार बरखा मे आगु निधोख बईढ़ जाईया-अगिला ठिकाना दिस। आब बरखा मे भिजनाअई वा भीज कऽ तर भेनाई ओकरा नीक लगई छई। ऊयाह हाल बदरी के भ गेल छई। ई खेल छई- �कथा-वार्ताक खेल�। आब बदरी लग कन्यागतक लाईन लाईग गेल छई। एक पर एक परिचय सब। बदरी के बुझेबे नई करई- � ई बाबु भैया सब के की जबाब दई।� सब ओकर सामने दीन-हीन जकां कल सेहो जोईर लई।कयेक लोक स त ओकरा अई ल क टेना मेनी तक भ गेलई। रामरति ओकरा सीखबई । -" एना नई उसठल जकां जबाब देल जाई छई। भागक गप्प जे तोरा दुआरी ई लोक सब अबई छह। चुप रहल करअ।" -फेर बदरी के किछु अनटोटल बजाऽ जाई। ओ अई जिनगी स़ अनघुआर रहल अईछ।ई नबका जिनगी छलई- �पेट मे किछु आ ज़बान पर किछु�। लोक सब सं गप्प सब करिते आब ओहो अई मे रेहल खेहल भ गेल अईछ। सीख गेल बदरी कि केना ज़बाब देल जाई छई। आब ओकरा लग सौ टा स बेशी कन्याक परिचय जमा भ गेल छई। सब थाह लगबई जे कतऊ कथा ठीक त नई भेल छई। आब अप्पन भीतरका गप्प ओ किनको नई कहय। अई सौ टा स बेशी परिचय मे सऽ दस टा ओ अलग केलक। कोन आधार पर छंटाई केने छल ओ रामरति के सेहो नई बुझअ देने छलईन। कियो जं पुछई त कहई जे उपरका दस मे आहांक नम्बर नई अई। सामने वाला मुंह छोट क क चईल जाय। ईयाह नंबर ओकर तकिया कलाम छलई। अही मे ओ सबके ओझरेने छल। जेना नेना सब खेल मे माईटक महल बनबई आ सांझु पहर घर जयबाक काल ओकरा ढाहि दई छई। फेर दोसर दिन नब घर, आ सांझ होईते ओकरे पहिलुका दिनक बाला हाल। ई क्रम चलिते रहई छलई, भईर गर्मी छुट्टी। ओहिना बदरी रोज ख्याली महल बनबय आ भोर नीन टुटीते सब ढही जाई। लालाजी के ओफिस मे जाय के तैयारी शुरू भ जाई। आई काल्हि लेटो भ जाई त मनेजर नई किछु कहय। अतऊ बेबहार मे अंतर ओकरा देखाय लागल छलई। अही सब मे ओ लागल रहई छलाय।एक दिन त गाड़ी वाला ओकरा धक्का सेहो माईर देलकई। ऊपर से उपराग सेहो - " मरअ के छह त कतऊ आर जा? हमर गाड़ी स नई मरऽ।" लोक सब कहलकई � � ओ गाड़ी बला कतेक बेर हार्न देलकई।माय ओकर खरजितिया केने छलई तांय ओ बईच गेल।� बदरिये के गलती रहई। जे भी हो। बदरी के ई बुझाई लगलई कि ओ बेशी सोचअ लागल अई। दिमागक खर्च ओकरा बईढ़ गेल छलई। बदरी आ दिमाग, अपने पर हंसी आबई। बदरी आ सोचनाई। सोचअ स बचई लेल त ओ भांग पीबई छल। जखने दिमाग पर जोर बूझाई ओ झट स दु गिलास खींच दई। फेर मस्ती मे चईल जाई छल। कयेक बरख स ओ भांग छोईर देने छल। आई ओकरा बुझेलई जे अजुका एक्सीडेंट भांग छोरबा के कारण भेल छई।मोन मे फैसला ल लेलक जे आई भांग पीयत। रसते मे दोकान छलई पान बला के, ओ चोरा क भांगो बेचई छल। ओतई स किनलक। ओकरा आब रामरति पर जोर कम चलई छलई। ओ त किन्नऊ ने भांग पीसतय ओकरा लेल। ऊपर स चाईर टा पुरखा के सुनाईयो दईतई। घर जा कअ भांगक छुटल कोटा अपन पुरा केलक। आब ओ सीधा अपन पुरनका दुनिया मे चईल गेल। अतअ दिमागक कोनो वार्ता नई। जे देलकई कनिया, अपन खेलक आ बिचरण करअ लागल अहि लोक-ओहि लोक।भांगक नशा मे अपन सनक लगई छलई बदरी के। बिजयक फोन अबई त रामरति कहई कथा सबहक बारे मे। बिजय कीछु ज़बाब नई दई। - "एकटा कन्यागत त खाली चेक ल आयल छलखिन। -जे भरबा के अईछ भरी लियह। हमरा ई लड़का द दियअ।" अहिना कोनो कोनो गप्प सब। बदरी आ रामरति के ई पुरा भरोसा छलई जे बिजयक बिबाह ओकरे अनुसार हेतई। तही मांदे कनी चुर, दुनु बेकती रहअ लागल रहय। एक दिन बिजयक फोन एलईन। फलां बाबु दिल्ली स अऊताह। ओ जे जे कहताह, आहां सब क लेब। बदरी घर मे दु दु फीट खीस मे कुदअ लागल। बेटा हमर, जनम हम देलियई आ ओ जे कहताह से क लेब? दु चाईर दिन दिमागक खर्च बुझाय परलई। तखने बदरी भांगक घुंट द दई। सोचबाक काजे खतम। दिल्ली स फल्लां बाबु अयलाह। कहलखिन- � सब गप्प बिजय बाबु स हमरा भ गेल अईछ। हमरा दु टा कन्या छथि। बरका जमाय, बिजय बाबु जकां पद पर छथि। ऊयाह मध्यस्थ छलाह। आई स हम आहां कुटुम्ब भेलऊं। ओहि धराने एक दोसर के शुभचिंतक।� एक हफ्ता नई बितलई कि गाम सऽ समाद अयलई � � फलां बाबू (दिल्ली वालाक ) के मनेजर पुरा ताम झामक संग आयल छल। बिजयक भीतक घर ढाहि देलकईन। ओहि पर तीन तल्ला नबका डिजाइन बाला घर बननाई शुरू छई। थानाक दु टा सिपाही राईत दिन चौकिदारी मे लागल अईछ। अतरे दिन थाना स छोटा बाबु सेहो काज देखअ अबई छथि।� चाईर महीना मे घर की, कोठी कहियऊ, बईन क तैयार भ गेल। गाछी मे एकटा बंगली सेहो बनलई। फलां बाबू सेहो अंत मे आईब क देख लेलाह।कीछु आर आर्किटेक्ट के सलाह संग जल्दी पुरा करबाक हिदायत देलखिन। कतबो छोटी बहु आवभगत करऽ चाहलखिन, ओ एक कप चाह की? पान सुपारी तक नई छुअलखिन। बिबाहक दिन निश्चित भ गेल छलई। आब बरियातीक लिस्ट बनई छलई। कतेक काट-पीट के बाद बदरी लिस्ट फाईनल केने छल। ओई लिस्ट मे उधारी सीद्धा देबअ बाला बनियाक नाम सबसं ऊपर रहई, ओकर बाद जेकरा सं रिक्शा भारा पर लई छलाय-ओकर नाम, फेर रिक्शा गारेन्टर जे बनई-ओकर नाम, जे रामरति के पहिल नौकरी दियेलकई-ओकर नाम,फेर जे मास्टरनी बिजय के मुसपेलटी स्कुल मे बिन कागज के नाम लिखलकई-ओकर नाम, जेकर गाड़ी से नबोदय जाई-ओकर नाम, छोटी बहु के बेटा सबहक नाम, अपन दियाद सबहक नाम। अहिना बरकी टा लिस्ट रहई। दिल्ली बाला फलां बाबू बदरी के कहनेहो रहथिन � � जतेक लोक के आईन सकी, से आईन लेब। भगबती के देल हमरा सब किछु अई। आहां अशौकर्य नई करब।� बिजय अई लिस्ट स सहमत नई छलाह। घर मे घमर्थन भेलई। ओ नाम कम करअ कहलखिन। कलकत्ता बाला लोक के अतई बड़का होटल मे भोज देबअ पर सहमति भेलाह। गाम स घर पिछु एक आदमी पर तैयार भेलाह। बिबाहक कार्ड थानाक छोटाबाबु गाम मे बंटला।उनके भार छलईन जे सब बरियाती के हवाई जहाज सं दिल्ली अनबाक लेल। सात दिन पहिने एकटा गेस्ट हाउस मे बदरी आ रामरति चईल गेल छलि। छोटी बहु के लिआन क क बजावल गेल रहईन। बदरी के अतबे जिम्मेदारी देल गेल रहईन जे किछु बाजई लेल नई। से ओ जखने बाजअ के मोन करईन जेबी सं भांग गोली निकालईथ आ सुखले घोअईंठ जाईथ। बिबाह बड्ड धुमधाम स भेलई। सब बरियाती के एक नम्बर के धोती कुर्ता,तऊनी, पाग, डोपटा, मिठाई क डिब्बा आ जनऊ सुपारी संग पाईक लिफाफा भेटलईन। सब कियो जय जय करईत गाम घुरलाह। आई फेर बदरी भांग के नशा मे बाईज रहल अईछ - " ठीके चारिम खाढ़ी मे ओकर दिन घुरलई। कोठा बईन गेलई। कथुक कमी नई छई। बस अतबे छई - किछु बाजय नई। " आब बदरी के पहिलुके दिन याद पईर रहल छई। मोनक गप त क सकई छल। आब त ओकरा ई सब घर ,दुआर, लोक,बेद,पावर, पैसा जीबनक पैबंद लगई छई। बदरी अर्र बर्र अहिना बरबरा रहल अईछ। बदरी के लोक बेद दुखीत कहऽ लागल छलई। होश अयला पर देखईत अईछ- �डाक्टर माथ लग आ रामरति पैर लग ठार छई।� सब बुझिते कियो किछु बाईज नई सकईत अईछ। जे बदरी अपन घरक साहेब छल, आई पाबंदी मे जीब रहल अईछ। _______ बिजय बिबाहक बाद घुमई फिरई लेल कनिया संग बिदेश चईल गेल छलाह। ई परिपाटीये भ गेल छई , सोहाग राईत आब कोबरा घर मे नई, बिदेश जा क मनावल जाई छई। नई कोनो उपाय त लोक काठमांडू वा पोखरा ओतई चईल जाईत अईछ। ईयाह भेल "नई मामा त कनहा मामा।" कोनो भी बिधकरी के आब जरुरत नई छई। कनिया सब अपने पाकल परोर रहई छई। पहिनेहो त बिधकरी, कनिये के मददक लेल होई छलई। पुरूख के त बियाबान सासुर मे असगर धकेल क छोईर दई जाई छई। जेना माल-जाल के बच्चा के हेलल नई सिखावल जाई छई, सीधा जलकर मे हुला दियऊ, अपने चारू पैर मारईत, उबुक-डुबुक करईत, कात लाईग जाईया वा पार क जाईया? ओहिनाहे हाल पुरूख के सासुर मे होई छई।बिजय अपन ऊबडुब करईत बिदेश मे हनीमून मना रहल छलाह। ईमहर बदरी के दिमाग मे हलचल बईढ़ गेल छलई। किछु भांगक असर सेहो। त्रिकाल जे पहिने छलाह, ओहो त अपन रंग देखेतई। शरीर कमजोर पड़ला पर चारू तरफ स बीमारी सब खेहारई छई। कयेक टा जांच सब भेलई। किछु के रिपोर्ट तखने भेटलई आ किछु के लटकल रहलईन। रामरति, बदरी के बेमारी ल क बुटीक गेनाई छोईर देने छलीह। बिजय के कोनो फोन- फान नई अबई छलईन। पाई कौड़ी लग मे रामरति के रहईन। तैं सब निबहल जा रहल छलईन। कखनो क मोन मे होईन, जे कोन लगन मे ई बियाह भेल। जहिया स भेल, किछु ने किछु अटपट भईये रहल छई। ककरो नजर गुजर त नई लाईग गेलई। घर मे भगबानक पुजा सेहो बड्ड दिन स नई भेल छई। बदरी ठीक हेताह त सत्तनारायण भगबानक पुजा करबे टा करब। मोने मोन रामरति ई निश्चय क लेने छलीह। रामरति के बिजयक सासुरक रंग-ढंग नई ठीक लगईन। कोना बिजय ईनकर चक्कर मे फंईस गेलाह, से नई बुझाई छलईन। जन्म, बियाह आ मरण ककर हाथ मे रहलई, से ठीके। कतअ दोसर दोसर कथा, कतअ ई टप स फाईनले भ गेलई। बिजयक ससुरक खिस्सा बड्ड रोचक छईन। नाम छईन रामबाबू। ई दु भाई छथि।हिनकर जेठ भाई बिदेश मे नौकरी करई छथि। उनकर बच्चा सबहक रंग दुधिया गोराई छईन। ऊपर स बरका हाकिम सेहो छलाह। कयेक बरख पहिने ओ रामबाबू के कहलखिन जे तोहर दुनु बेटी के रंग झामर छह।ऊपर सं तो हाकिम सेहो नई छह। तोरा बेटी के नीक कथा मे दिक्कत हेतह। जैह भेटतह, क लियह। बेशी मीन मेख नई निकालियह। रामबाबू कहलखिन- -"भैया। सब अपन अपन भाग ल क अबई छई। जे लिखलाहा हेतई, सैह ने हेतई।" बात आयल गेल, चईल गेल। सब बिसईर गेल लेकिन रामबाबू नई बिसरलाह। ओ बेबसाई छलाह। दबाईयक कम्पनी हिमाचल मे खोलने छलाह। ओ चईल गेलईन। बड्ड पाई बनेलाह। अठारह टा त उनका महानगर सब मे घरे छलईन। जकरा छु दई छलखिन सोना भ जाई। मकान खरीद बिक्री मे सेहो खुब कमेलाह। जखईन जेठकी बेटी बियाह जोगर भेलईन त अपने मसुरी के IAS के ट्रेनिंग सेन्टर के बाहर ठार भ क अपन बिरादरी के "कुमार लड़का" सब के ठेकनबईत छलाह। देखबाक मे सुन्दर हुआय, तकरे फिराक मे रहई छलाह। जेठका जमाय अहिना भेठलखिन। आब बिजय बेर मे त ऊयाह ई भार ऊठालेलकिन। दुनु जमाय देखबा मे सिनेमाक हीरो सब जकां लगईन। रामबाबू के भाई के जमाय त देखअ मे केहने दन छलईन। एक त अपन समाजक नई, दोसर रांची के आदिवासी। कनिको मेल नई। रामबाबू एकसुत्री कार्यक्रम मे लागल छलाह, आ सफलो भेलाह। नौ टा घर त उनकर कनिया बेटी के खोंईछ मे देलखिन। ओना सब उनके सबहक। तखनो अपन मान मनोरथ पुरा केलीह। बदरी क मोन ठीक भेलईन।बिजय सासुर स सीधा पोस्टिंग पर चईल गेलाह। ऊनकर जनता फ्लैट मे पुतोहु केना अयतिन। रामबाबू कलकत्ता मे एक टा मकान भाड़ा पर लेलाह। ओही मे बदरी आ रामरति सेहो रहअ लगलीह। सब सेट भेला के बाद पुतोहु सेहो एलखिन।तीन प्राणी ई सब घरबईया, आ पांच टा बहरिया। ड्राईवर, माली, भंसिया, झाड़ू पोंछा बाली आ मनेजर। ई आठ लोकक खेनाई बनई। सब ओतई रहई। रहबाक घर ओकर सबहक अलग स बनल रहई। बिजयक आग्रह आ बीमारी के देखईत बदरी दुनु प्राणी नौकरी छोईर देलाह। कोनो सरकारी नौकरी त छेलइ ने जे ग्रेच्युटी आ पेंशन। गेनाई बंद, नौकरी खत्म। रिजाईन देबाक कोनो काजे नई। जेबिये मे रिजाईन आ ज्वाईन। काज पर गेलऊं त नोकरी नई त छुट्टी। आब सब दिना छुट्टी। बदरी के त कलकत्ता के हीर हीर बुझल। मनेजर जे रहई से महग महग सामान सब खरीदई। आखिर पाई त ओकरे पुतहु के लगई छलई। ओ मनेजर स सामानक लिस्ट लई आ अपने बस पकईर क चईल जाय आ सस्त चीज सब ल आबय। कतऊ चाईर घंटा लाईन मे लागय पड़ई त ओहो लाईग जाय। घर मे परल परल की करिताह।समय ऐना बीत जाई आ अपना मोने दु टा पाई बचेबो करय। बिजय के ट्रेनिंग खतम भ गेल छलईन। आब पोस्टिंग पर जाय के रहईन। ई लंबा छुट्टी छलई। कलकत्ता अयला पर लोक उनका शिकायत केलकईन- " आहां क बाबु समानक लाईन मे लागल देखलियईन अईछ त कखनो कांख पर झोड़ा ढ़ोईत। घर मे गाड़ी ड्राईवर, तखनो बदरी ई सब काज अपने करय। पुतोहु के ई सब नीक नई लागईन। ओ मनेजर के बिगड़थिन। मनेजर बेचारा की करय। ओकर त नौकरी छई।अपन सईह लय सबके।बिजय के ई सब गप्प बढा चढा कऽ कहलकिन कनिया- " हम सब कतबो आगु बढ़ेबा क प्रयास करब, ई नई भ सकत। जतऽ मैनुफैक्चरिंग डिफेक्ट रहईत छई, ओई मे सुधार संभव नई छई।" बिजय कनियाक शब्द क आशय बुईझ गेल छलाह। ई �मैनुफैक्चरिंग डिफेक्ट� त उनका कनियो मे देखाईत छईन। आधुनिकता क लबादा मे ई डिफेक्ट छिपा गेल छई। अन्हार वा अढ़ क कारण कोनो चीज नई देखाय, अकर मतलब ई त नई जे ओ छईये नई। ई त दृष्टि आ परिस्थितिक दोष भेलई, मनुक्खक अई मे कोन रोल? बिजय सब कीछु देखई बुझई आ समझय के बाद चुपे रहनाई उचित बुजलाह। व्यक्ति क मानसिक विकास आ सोच मे परिस्थिति के बहुत योगदान रहईत छई। ईनकर सोच क अनुसार अपराध भी तुलनात्मक आ परिस्थिति जन्य होईत छई। अई लेल सजा क जगह सुधार पर ओ बल दई छलाह। जे अपराध निरन्तरता मे करय वा सुधार के मौका देलाक बादो अपराधी प्रवृत्ति स इत्तर नई जाय, ओकरा कठोरतम सजाक पक्ष मे विजय प्रारम्भिक समय स छलाह। एकैडमी मे भी उनकर अई विचार पर बहुत बहस भेलई आ उपरांत सहमति बनलई। बिजय के परम्परा आ आधुनिकता क बीचक समन्वय पर अपन अभिमत छलईन। अई मतक लेल उनका प्रशंसा आ पुरस्कार भी यथोचीत जगह स भेटल छलईन। आई जखईन दु विपरीत परम्परा मे पलल - बढल संबंधक बीच सामंजस्य व सौहार्द बनेबाक बात इनका समक्ष अयलईन, अपना के अक्षम बुईझ रहल छईत। जकरे कहथिन उयाह नराज। अई कशमकश क स्थिति के ओ अपन साढ़ु के समक्ष रखलाह। ओ अपन अनुभवक आधार पर निदान बतेलकीन। उनका ई स्थिति कोनो समस्या नई बुझेलईन। उनका अनुसार- " दु घुंट अंग्रेजी ब्रांड सांझ मे नित्य ल लीयह। अई स नींद भी नीक होयत, भोर मे तरो ताजा रहब, पिछला दिनक कटु बात विस्मरण भ जायत, फेर आगु आनंदे आनंद। सब दिनक भोर मे बराबरे ताजगी भेटत।" बिजय के ई रस्ता स तत्काल मदद भेटबाक उम्मीद जगलईन। पत्नी अकर पक्ष मे पहिनेहे स छलखिन। जीवन आनंद लेल छई, जीबाक लेल छई, भोग लेल छई। भाग्य मे जे लीखल होयत सैह होयत, तनाव के दूर राखु आ परमानंद लीयह। जखईन व्यक्ति अपना के कर्ता बुझऽ लगईत अईछ, परेशानी तखने जन्म लईत छई। बहाव मे जीनगी के छोईर दीयऊ।" पत्नीक ई दार्शनिक बात सुईन बिजय उनकर प्रभाव मे आर आईब गेलाह। के कहईत छई- " पाई बला के बच्चा के उच्च विचार नई होई छई? संस्कार नई होई छई? सोचबाक शक्ति नई होई छई? समाधान निकालबा मे निपुण नई होईत अईछ? बिजय पर अंग्रेजी शराब अपन असर देखा रहल छलईन। आब ओ पूर्ण रुपे पत्नी क आगोश मे होशो हवास रहलाक बादो मदहोश भ गेल छलाह । ओ सब समाधानक लेल पत्नी के अधिकृत कऽ देलखिन। आई बदरी जेकां बिजय के भी महीक्का पीसल भांग बला जेहन मजा भेटलईन। बुईझ गेलाह जे पत्नी प्रसन्न छईथ आई। आब पत्नी आ बिजय मील कऽ एक टा रस्ता निकाललाह। बदरी आ रामरति के गाम रहबाक कहलखिन आ कनिया के अपना संगे पोस्टिंग पर ल गेलखिन। बदरी के पास नई कहबाक कोनो चारो नई छलईन। आब त नौकरियो छुईट गेल छलईन। बिजयक पाई सऽ सब काज करईत छलाह। नई कहबाक मोन होईतो, खुशी खुशी बिजयक प्रस्ताव क हां मे हां मिलेलाह। रामरति के विचार पुछबाक बारे मे बिजय सोचबो नई कैलाह। पुरा जोश- जोश मे बदरी आ रामरति गाम घुरई गेलाह। बदरी के आब कलकत्ता मे नौकर चाकर संग रहबाक आदत भ गेल छलईन। पुतोहु के रोब दाब करईत सेहो देख लेने रहथिन।आब ओ गामो मे तकरे नकल करअ लगलाह।उनका आब छोटी बहु के ढहल कोठा सं सांप छुछुंदर के आबअ के आशंका लगईन। ऊनकर घोठा पर जे मालजाल रहईन, ओकर दुर्गंध लगईन, काज करअ लेल जे दाई अबईन ओकरो कोनो ने कोनो बहाने दुरगईत करईत रहई छलाह।अपन बंगली लग ककरो टपअ नई दई छथिन। काज तेहार मे कयेक लोक मंगलकईन मुदा नई देलखिन। निहोरा पर टस से मस नई भेलाह। बदरी अपना के कथी दुन बुझअ लागल छलाह।सुख दुख मे ककरो कतअ जाईतो नई छलाह। गाम मे से छजितईन? कनी दिन त लोक बर्दाश्त केलकईन। देनाई एक पाई ने आ रोब सऊंसे। ई कतअ चलत। बदरी के खिन्नांश भेनाई गाम मे शुरू भेल। अई बीच मे गामक एक दु लोक बदरी कतऽ कलकत्ता गेल छल। ओकरा रखबाक बात त अलग, एक सांझ खाईयो लेल नई पुछलखिन। ई सब बात गाम मे फईल गेल छलई। ओहिना गामक किछु बेरोजगार युवा सब बिजय लग नौकरी क उम्मीद स गेल छलईन। एक त ओकरा सब के कयेक घंटा भेट करबा मे इंतजार करेलखिन ओकर बाद दु मिनट मे " नई संभव अईछ " कही कऽ विदा कऽ देने रहथिन। ईहो बात ओई युवक सबहक घरक लोक के नई नीक लागल छलई। सब मौका क तलाश मे छल। बदरी सऽ खुंदक निकालई लेल गाम मे माहौल बनल जा रहल छलई। अही मे एकटा घटना घईट गेलई। बिजय अपन पत्नीक संग माय - बाप सऽ भेट करई लेल गाम आईब रहल छलाह।बरसातक समय छलई।चाईर - पांच दिन सऽ झमाझम बरखा भ रहल छलई। गामक सड़क थाल- कादो सऽ भईर गेल छलई। नब भरांठ छलई। गाम मे मिसिरटोली स थोड़बे पहिने बिजयक गाड़ी ओई बीच थाल मे फंईस गेलईन। ड्राइवर कतबो प्रयास केलकई। गाड़ी टस स मस नई भेलई। ओई थाल मे कोना बिजय आ उनकर कनिया उतरती। ग॔ऊआ सब ओतऽ जमा भऽ गेल छल। ओ सब तमाशा देखईत छल। ड्राइवर गाड़ी के धक्का दई के निहोरा केबो केलकई, ई गंऊआ सब नई किछु सुनलकई। अई भीड़ मे ऊयाह युवक छल जे बिजय लग नौकरी क आवेदन ल कऽ गेल छल। हाईर कऽ बिजय अपने थाल मे उतरलाह आ घर गेलाह। कनिया गाड़ी स नीचा नई उतरलखिन। ई सब बात जनला उत्तर बदरी गाड़ी लग जा कऽ गंऊआ सब के अंट शंट बाजऽ लगलाह। तखईन तऽ नई किछु जवाब भेटलईन। बाद मे भारी प्रतिक्रिया भेलई। बिजय अतुका कलक्टर जे उनकर मित्र छलखिन, ऊनका गाड़ी फंसबा बला बात कहलखिन। कलक्टर साहेब तखईन पुलिस अधीक्षक के कहलखिन। पुलिस अधीक्षक तखईन अतुका थाना पर खबर केलखिन। ओतऽ सऽ चाईर टाऽ सिपाही आ दु टा होमगार्ड आयल। ओ सब धक्का द कऽ फंसल गाड़ी के थाल स बाहर करई गेल। बिजयक कनिया के अई सब सऽ अतेक ने मोन भिन्ना गेल छलईन, ओतई सऽ बिजयक संग पटना घुईर गेलीह। जे गाम मे रहबाक प्रोग्राम छलईन, से समय पटना मे बीतेलीह। अई गाड़ी बला एपिसोड पर भईर गऊंआ मील कऽ मीटिंग कैलक। जे सब बदरी आ बिजय सऽ कोनो ने कोनो कारण खिसियाल छल, अई मीटिंग मे अपन भड़ास बाईज कऽ निकाललक। सर्वसम्मति स ई फैसला लेल गेल- " बदरी के गाम समाज स बाईर देल जाय।" आब बदरी के गाम मे भतबरी भ गेलईन सब सं। ओकरा सबहक लेल बदरी फेर अछोप भ गेलाह। गामक पैबंद छथि बदरी आ मुफ्ते मे मारल गेलीह रामरति जिनका लोकक अते सनेह। बदरी के बारला पर सबसऽ दिक्कत भांग के होबऽ लगलईन। पहिने गाम मे चारु कात भांगक गाछ अनैरुआ जनमल रहईत छलई। आब कम्मे जगह भांग बांचल रहई। सब भांग बला पहिलुका जगह पर खेती बारी वा घर सब बईन गेल छलई। किछु जगह जतऽ भांगक गाछ बांचल छलई, ओकर पात बदरी के आब गंऊआ सब " बारलाक " कारणे छुअऽ नई देतईन। भांग लेल फेर स्टेशन लग जाय परतईन। स्टेशन पर कियो देख लेलकईन वा पुलिस पकईर लेलकईन, फेर भऽ जेतईन बड़का आफत। आब ई " त्रिकाल " क की होयत? _______ बदरी आब जतबे प्रयास करई छलाह, गंऊआ सब सऽ सुलह करक लेल, ओतबे मामिला ओझरा जाई छलईन। ततेक ने बदरी मे अईठन आईब गेल छलईन, लोक के लोक नई बुझथिन। मृदंग बजेनाई कहिया ने छुईट गेल छलईन। गीत नाद तऽ इतिहास भ गेल छलई। आब बाबाधाम जयबाक सेहो कोनो चर्चा नई। धर्म कर्म पर अतेक आस्था राखऽ बला बदरी आब सब लोक मे कमीये निकालईत रहईत छलाह। अपन बुद्धि पर दावा बढईत जा रहल छलईन। बेशी बुद्धि बाद मे " व्याधि " भ जाईत छई। ईयाह भ गेल छलईन। अही व्याधि सऽ ओ ग्रस्त भेल जा रहल छलाह। धीरे- धीरे छोटी बहु सऽ अबरजात शुरू भ गेल छलईन। छोटी बहु के ल कऽ आनो लोक अयनाई - गेनाई शुरू केलकईन।अई सब बात मे नई बिजय के दिलचस्पी छलईन आ नई कोनो जानकारी ही देल गेलईन। समय अपन गति सं चईल रहल छल। बिजय आब गामक बगल बाला जिलाक कलक्टर भ गेल छलाह। बिजईया स बिजय, आ बिजय स आब बी एन भ गेल छलाह। अधिकारी वर्ग मे हुनका लोक आब बी एन कहई छल। नबका फैशन छई ईहो नाम बदलबाक। बिजय नारायण आब बी एन। घरबाली सेहो BN कहई छलखिन। गरीब गुरबा के त बी एन सं "बियन" भ जईतई। ऊयाह बियन जे हथ पंखा के कहई छियई। बियन डोलबईत अखनो लोक गाम घर मे भेंट जायत। ज्यों गरमी के मौसम होई आ बिजली गुल हुअय, त देख लियअ ई बियनक चलती। एक हाथ सं दोसर हाथ घुमिते ईनकर दिन बिततईन। बड्ड भाव बईढ़ जाई छईन बियन के। कियो ईनका छोड़अ नई चाहई अछि। सुतअ बाला घर तक मे इनकर पहुंच अईछ। मुदा अखन जे BN के चर्च भ रहल अईछ ओ कलक्टर बिजयक नबका नाम अईछ।आब बी एन जे बच्चा मे कंचा आ गुल्ली डंडा खेलाई छलाह से बिलियर्ड्स आ स्नुकर खेलाई छथि। एक बेर बिलियर्डस मे बड़का मेडल सेहो दिल्ली बजा कऽ भेटलईन। BN कयेक टा पोस्टिंग क लेलाह अईछ। सुखल आ तरिगर बिभागक थाह लाईग गेल छईन। पोस्टिंग केना होई छई, सेहो बुईझ गेल छथि। अतुका पोस्टिंग त उनका एकटा MP करबेलकईन अईछ।ओना ओ ईमानदार मे गनल जाई छथि। शुरू मे जखईन पोस्टिंग भेलईन त लत्ती फत्ती जोईर क कयेक लोक, संबंधी भ गेलखिन। आब पहिनेहे BN कही देथिन जे पुरा जिले हमर संबंधी अई। अयबाक मूल बात बताऊ। सब कियो कोनो ने कोनो काजे सं अबई छलाह। ई नई किनको मददे लेल कहलखिन नई बाधे बनलखिन। तखनो लोक के सही काज भ जाई। उनका तक पहुंच, लोकक लेल बड़का उपकार छलई। नहियो चाहिते, जश बढ़ईत गेलईन। पहिल बेर राखी मे एकटा गामक बहिन एलखिन। आई तक तऽ बिजयक हाथ सुन्ने छलईन राखीक लेल। कहियो कोनो बहिन नई आयल छलईन आ ने बजेने रहईन। ईहो बहिन के संबंध उनका फरिछायल नई छलईन।तैयो नीक लगलईन। बहिन के जाई काल किछु टाका जे जेबी मे रहईन से देलखिन आ पी ए के कहलखिन जे ईनका घर छोड़बा दियउन। अफसर सबहक जेबी मे कखनो बेशी पाई नई भेटत। बिजयक सेहो उयाह हाल। पाई के जरूरत परला पर अपन पी ए स लई छलाह। बहिनक मोन खुशी सं फुलल जाई छलईन। लाल बत्ती बाला गाड़ी मे पहिल बेर जीबन मे बईसली।मोने मोन खुब आशीर्वाद देलखिन बिजय के। आब देखु अगिला बरख राखी मे कयेक गोटे आईब गेलखिन। अई बेर पी ए के कहलखिन जे टेम्पु वा रिक्शा पर बईसबा दियऊन। किराया हमरा स ल लेब। बिजय के आब बुझाय लागल छलईन जे सब संबंध पद आ पाई स जुड़ल छई। कतेक नेता, अफसर, डाक्टर, ईन्जीनियर, ठेकेदार, प्रोफेसर , पत्रकार सब उनका स कोनो ने कोनो संबंध जोईर लेने छलाह। उनको सरकारी काज मे टटका सुचना सब अई नबका संबंधी सब स भेट जाई छलईन।दुनु एक दोसर के उपयोग करई छलाह। बरका लोक अपन इर्द गिर्द रहअ बाला के केना काज लई छई, तई मे बिजय निपुण भ गेल छलाह। उनकर गामक लग एक टा राज्य क मंत्री के सेहो गाम छलईन। ओ ओतुका बिधायक सेहो छलाह। अपन बेटी के बिबाह गामे स क रहल छलाह। अई बहाने सब वोटर के भोज सेहो भ जेतईन। ई नेता सब सदिखन, की केलाह स फायदा होयत, ओकरे जोगार मे रहईत अईछ। अई बिबाह मे पटना सं विभागीय सचिव सेहो आईब रहल छलाह। तैं बिजय के उपस्थिति अनिवार्य छलईन। बिजय गेलाह आ घुरती मे सोचलाह जे गामो चईल जाई। बहुत दिन स माय-बाप सऽ भेट नई भेल रहईन। गाम बिना खबर के पहुंचलाह। बदरी आ रामरति के खुशी के ठेकाने नई।बिजय असगरे आयल छलाह। कनिया दिल्ली गेल छथिन। बिजय किछु कालक लेल आयल छलाह। माय कहलखिन जे आयल छह त रुईक जा।किछु गप्प करबाक अईछ। थोड़े कालक बाद दुनु माय बेटा एकांती मे बैसलीह। रामरति सब गाम घर के गप्प कहलकिन। बिजय सेहो अनुभव क रहल छलाह जे पहिने गाम पहुंचते कतेक लोक उनका स भेट करअ पहुंचई छल। अई बेर भईर दिन बीत गेलई कोनो कऊओ तक पुछारी करअ नई अयलईन। बिजय के कारणक अंजाद भ गेल छलईन।ओ अई संबंधक गांठ के खत्म करऽ चाहईत छलाह। एक - दु दिन लेल आऊ। आ ओहु मे अतेक दुराव, ई नीक बिजय के नई लगलईन। दोसर माय - बाप गाम मे असगरे रहई छथिन। सामाजिक सुरक्षा क दृष्टि स भी लोक अबरजात जरूरी बुझना गेलईन। सांझु पहर, बिजय सबहक घर भेंट करअ गेलाह। उनका देखते देरी सबके मोन गदगद भेलई। अगिला दिन बिजय के जाई काल भईर गऊंआ छोरअ अयलईन। बिजय त दिन राईत तरह तरह के लोकक बीच मे रहई छलाह। ओ बुझी गेल छलाह � � ईलाज की छई?� अई बेर अपना संग माय बाप के सेहो नेने अयलाह। बिजय जखईन नौकरी मे आयल छलाह त उनका एक टा जनता फ्लैट कलकत्ता मे रहईन। आब जे ओ सरकार के सलाना सुचना देलखिन ओई मे महानगरक आठ टा घरक बिबरण छलई।ई घर तक ऊनकर कनिया के खोईंछ मे भेटल छलईन। आब जे सब ईनकर बिरोधी छलईन ओकरा सब के मौका भेंट गेलई। बिजय के आब बुझेलईन जे कतेक लोग उनका सं खार खा कअ बईसल अईछ। अकर मूल छल- बिजयक बिबाह। उनकर जाईतक मंत्री, अफसर, बिधायक, बेबसायी आरो कतेक शक्तिशाली लोक कथा पठेने रहईन।ओ सब कथा नई भेला सं, अपन बेइज्जती बुझलक। आ कारण तकई छल। ओना आरो कारण सब सेहो छलईन। ई सम्पत्तिक लेखा जोखा रोज अखबार मे छपअ लगलई। टेलिविज़न पर बिजयक आमद खर्च पर बहस होबअ लगलई। उनकर खिलाफ नारेबाजी आ हो हल्ला शुरू भ गेल छल। अई आईग मे घी के काज केलकई ओहो भ्रष्ट लोग सब, जेकर गलत काज मे बिजय साझेदार नई छलाह आ किछु उनके अफसर वर्ग क लोक, जे ईनकर प्रसिद्धि स जड़ई छल। अतेक ईमानदार रहलाह के बादो बिजयक खिलाफ राज्य मे माहौल बईन गेल छलईन। बिजय केन्द्र मे डेपुटेशन पर आईब गेलाह। बदरी आ रामरति सेहो दिल्ली मे इनके संग रहअ लगलीह। बिजय गाम समाज के त आब नीक सं बुझअ लागल छलाह लेकिन बदरी त अई सब सं अंजान। बदरी त गामो मे असगरुआ भ गेल छल। तैं अई बेर ओ खुशी खुशी दिल्ली मे रहअ लागल। दुनु बेकत मे ज्यों घरबाला बेशी सुन्नर रहई छई त एहन मे ओकर कनिया बड्ड आज्ञाकारी आ देखभाल करअ बाला भ जाई छई। अतऊ बिजय देखिते ततेक सुन्नर छथि आ कनिया ऊनका सामने बेश दऽब। बिजयक कनिया अई कमी के अपन बेबहार स भरने छथि। कियो कही नई सकईत अईछ कि अतेक पाई बाला के बेटी। जेकरा कहई छई ".सर्वस्य समर्पित" से हाल छलईन। बिजय के पुरा खुश रहबाक प्रयास करई छलखिन। बिजय आब पिछला जिनगी बिसरल जा रहल छलाह। आब कियो कहलकई �� चारिम पीढ़ी मे दिन त घुमत मुदा संग संग डीह सेहो बदलत।� आब कि बिजयक बच्चा घुईर क गाम जेतई। कथमपि नई। आब बिजय दिल्ली बाला भ गेलाह। ईयाह ऊनकर डीह डाबर भेलईन। पीढ़ी के चक्र, ई सांप सीढ़ी के खेल जकां भ गेल छई । क्षण मे ऊपर, क्षण मे नीचा। बदरी के मोन गाम सऽ पहिनेहे टुटल छलईन। आब बिजय सेहो बिहारक अखबार मे अई तरहक रिपोर्टिंग स दुखी भ गेल छलाह। अखबार सब भ्रष्ट तंत्र क हाथक खेलौना बईन गेल छल। बिजय आब बिहार स पुरा पुरी पलायन करबाक निर्णय क लेलाह। बगल के गामबला जे मंत्रीजी छलखिन, उनका बिजय अपन घर आ बंगली के बेचबाक भार द देलखिन। डीह नई, आब घर भ गेल छई। सही दामक इंतजार छईन। घरारी के बोली लाईग गेलई।तरह तरह के लोक घर के देखऽ लेल आबईत छल । घरक देवाल पर कियो लिखियो देलकई- " यह घर बिकाऊ है। खरीदने के लिए संपर्क करें- ----------" आब छोटी बहु के बहुत बयस भ गेल छईन। सुद लेनाई - देनाई पर सरकार कानून बना देने छई। बैंक स ही आहां कर्ज ल सकईत छी। ईनकर दुनु बेटा निकम्मा भ गेल छईन। छोटी बहु के जमीन सब बिका रहल छईन। घरक पोचारा बीस बरस स ऽ ऊपर भ गेलई, नई भेल छई। पहिने सब साल दिवारी मे घरक पोचारा होईत छलई। घर जे चमकईत रहईत छलई , आब सऊंसे कजरी जमल दुरे सऽ देखाईत रहईत छई। छोटी बहु आब बदरी के घरक खरीददार सब के टुकुर टुकुर देखईत रहईत छईत। आब ईनका बजेलो पर लोक नई टघरईत छईन। मिसिरटोला क हालात आब बदईल गेल छलई।पहिलुका समीकरण आब बदईल गेल छई।गामक लोक दिल्ली- बम्बई- गुजरात मे नौकरी क रहल छल। दु टा पाई सबहक घर मे आईब रहल छई। बिजय आब दिल्ली मे रहनाई शुरू क देने छलाह। अई महानगर क उनका अनुभव नई छलईन। कलकत्ता आ बंगलोरे उनका जीवन्त शहर लगईन। अतअ आईब क त ओ गुम भ गेलाह। आब बुझेलईन कि लोक दिल्ली अबई लेल किया आफन तोड़ने रहईया। गाम बला घर आ गाछी सब बिका गेलईन। अई मे ओ मंत्री बड़का गेम खेलेलक। पिछला चुनाव मे बिजय के दियादी स ओकरा वोट नई पड़ल रहई। अखनो जाईतक समीकरण मे ओकरा ओतऽ सऽ वोट भेटअ बाला नई छई। ओ बिजय के नीक गहकी के बारे मे बतेलकईन आ सब पाई पहिनेहे द देलकईन। पाई, बजार भाव स बेशी छलई, तैं बिजय पुछताछ केनाई उचित नई बुझला। जखईन रजिस्ट्री करअ पहुंचला त देखलाह कि ओ त उनके गामक छट्टल बदमाश सोलकन अईछ। अकरा पर कै कीत्ता मोकदमा चईल रहल छलई। गलत काज क क पाई जमा क नेने अईछ। एको टा कुकर्म सं ई बाचल नई अईछ। आब मुदा अपन समाज मे पाई खर्चक बदला मे जगह बना नेने अईछ। मंत्री जी के चमचा - बेलचा छल ओ। अकर ईनाम ओ दिया देलकिन। पढ़ल लिखल लोक सेहो कयेक बेर कनीक फायदा लेल अई सब मे फंईस जाईत अईछ। चिट-फंड कंपनी सब ईयाह छई ने। बेशी फायदा शुरू मे दई छई। बस अपन सर्वस्य लोक बेशी फायदा लेल फंसा दईया। ओकर बाद कम्पनी बंद- घोटाला उजागर। अऊ बाबु, जखने कियो बेशी फायदा दियय त बुअईझ जाऊ, किछु राज छई। बिन कारण टिटही नई बाजय। मुदा सब किछु बुझितो लोक तात्कालिक फायदा क ल क फंईस जाईत अईछ। अतअ देखु ने, बिजय स बड़का अफसर ईलाका मे के? पाई कौड़ी के सेहो कोनो कमी नई। तखनो एहन आदमी सं कबाला क रहल छईथ जे कतऊ सं उनका लेल सही नई। रजिस्ट्री अफसर के सेहो आश्चर्य लगलई जे साहेब ककरा हाथे बेच रहल छथि। आब ऊपाये की? मंत्रीजी अपन एकटा आदमी के पठौने छलाह- ओई सोलकनक संग। बिजय रजिस्ट्री आफिस सं सीधा पटना लेल घुरी गेलाह। गाड़ी मे बईसते चट दं दुनू शीशा उठा लेलाह आ किछु पढ़अ के नाटक करअ लगलाह - ककरो सं आंईख नई मिल जाय। आब बिजयक घर मे ओ सोलकनमा रहत। ई घर सब दियादक बीच मे परई छई। आई तक कियो दोसर जाईत अई मे एको धुर नई कीनने छल। ज्यों किछु बिकेबो करई त आपसे मे सब क लई छलाय। मंत्रीजी बदला लेलक कसिया कअ। बिजय दिल्ली आईब गेल छलाह- डीहक रजिस्ट्री सोलकन सं क क। बदरी सं पुछनाईयो उचित नई बुझला। फोन पर के गप्प सुअईन क बदरी आ रामरति के ई बुझा गेल छलईन जे बेचअ जा रहल छथि। आब ऊनकर सबहक सबटा भार त बिजय उठेने छथिन- तखईन कथी के पुछा-पुछी। घर मे सन्नाटा पसरल छई। बिजय आई तक किछु बेचने नई छलाह। ई काज उनको ठीक नई बुझेलईन। पाई ल क की करताह? कथी के कमी छलईन। रामबाबू कतेक जतन सं ई सुन्नर घर, बेटी जमाय ले बनबौने छलाह। सब वस्तु एक नम्बर के लागल छलई। अकर नक्शा अपने इंजीनियर साहेब कतअ जा क फाइनल केने छलाह। रामबाबू के ई निशानी छलईन। बिजयक कनिया तनुजा के सेहो दुख भेलईन। ओहो घर मे कहियो बेचअ बाला गप्प नई सुनने छलीह। सब के अपन अपन याद जुड़ल छलई। रामरति केना दुरागमन क कऽ अई घर मे आयल छलीह। पहिने रिक्शा पर नैहर स बिदा भेलीह। फेर घर लग आईब क महफा मे बईसल छलीह।ओना नैहर सं सीधा महफो सं आईब सकई छलीह। ओ महफा बाला बेशी पाई मंगलकई। ताई लेल रिक्शा कयल गेलई। रामरति के नैहर अर्थक हिसाब सं बड पातर। सौराठ सभा स बिबाह ठीक भेल छलईन। शुद्धक अंतिम दिन छलई। नई बदरी के कोनो कथा आयल रहईन आ नई रामरति के बाबू के कोनो ठेहगर कथा अभरलईन। अंतिम दिन एकटा घटक कहलखिन जे ई बदरी बाला काज क लियअ। बिबाहक खर्च टा लागत। रामरति के बाबू के जेबी मे एको नबका पाई नई। फेर जेना तेना सब भेलई। अहिना होई ओई जमाना मे । ककरो बेटी कुमाईर नई छुटई-सबके घर बर होई। बाकी त अपन भाग। एक बहिन सासुर हाथी पर जाई आ दोसर कतअ सब दिन चुलहो नई जड़ई। रामरति क नैहर मे भीतक घर रहई। अतअ त कच्चा ईंटाक घर छलई। नैहर मे बाबू के दुटा घर भीतक अलावा किछु नई, अतअ त छोटे छिन गाछी त रहई, बंसबिट्टी सेहो छलई। ओना संझिया पोखईर मे दु पाई ओकरो सब के हिस्सा छलई। लेकिन फरछायल नई रहई। सभा मे कियो कहलकई ओकर बाबु के जे बर के जथा पात नई छईन। ओई पर ओकर बाबु झट द कहलकई- " दुत्ती बर त नई छई, कोनो अंग भंग त नई छई, सऊतिन तर मे त नई रहबाक छई। देह-दशा स स्वस्थ छई। अपने कमेतई खेतई। बाकी अपन भाग।" आई सब टा गप रामरति के याद परई छलई। आंईख मे नोर भईर जाई। ऊयाह हाल बदरी के रहई। कनिया बाबी बाला सब गप याद परई छलई। आब अफसोस होई की उनके लिख देतियईन। बिजयक बिबाह मे त ऊयाह एक पैर पर ठाढ़ भ क सब समहारलीह। आब लोक की कहईत हेतई-गाम मे। सब थु थु त करीते हैत। ई सब काज बिजय भाबना मे बहि क केलाह। दु चाईर दिन कनी मातम जेकां छलई। सब दुखी छल। कियो अई बिषय मे ककरो सं चर्च नई करई। सब के सब गप बुझल। ओना मंगनी त कियो देलकई नई आ नई कियो जबरदस्ती छिनलकई। अपने सोईच समईझ क निर्णय लेल गेल, फेर अतेक पश्चाताप कियैक। ईयाह छई लगाव। जतअ जतेक स्नेह ओतअ टुटला पर ओतेक टीस। समय सं पैघ किछु नई।सब आब ओई बात के बिसईर गेल। जीवनक पहिया आगु बईढ़ रहल छल। बिजय आब गोल्फ खेलाय लगलाह अईछ। शूरू मे त शईन आ रईब क खेलाई छलाह। आब त बेशी काल औफिस स सीधा गोल्फ कोर्स चईल जाईत छईथ। ओतअ स देरी सं घर घुरईत छईथ। कनिया तनुजा सेहो किट्टी पार्टी सब मे सदिखन जाईत रहईत छईथ। कहियो क ईनको घर पर सब अबई छईन। जहिया क ईनकर घर पर पार्टी होई छई तहिया त बुझु बदरी आ रामरति के जेलो मे जेल। एक कोना मे चुपचाप परल रहई छथि दुनु गोटे। बिजय के दु टा बेटा भेलईन। जन्मो ओकर सबहक मातृक मे भेलई आ लटकल सेहो ओम्हरे बेशी रहईत अईछ। जखईन बिहार मे पोस्टिंग रहईन त उनका सबहक हिसाबे ओतअ स्कुले नई छई। जतअ नाना के फैक्ट्री छईन हिमाचल मे, उम्हरे कतऊ ओहो सब पढ़ई छथि। बिजय लग कम अबई छथि। छुट्टी मे सेहो मातृके। बदरी लेल सब धन सन। जतअ रहैथ नीके रहैथ। कलकत्ता मे कतेक नौकर चाकर रहईन। अतअ त एक्के टा छईन, उयाह खेनाईयो बनबई छईन आर बजारो हाट करई छईन। कयेक बेर बिजयक ससुर चाहलकिन जे किछु नौकर चाकर पठा दईलाय। बिजय अकर सख्त बिरोधी। बिहार मे जे उनकर खिलाफ अखबार बाजी भेलईन, ओई सं ओ हरदम सचेत रहई छथि। बेटा सब पैघ भ रहल छईन। बिजयक बारे मे कोनो भी अनट सनठ समाचार, ओकरा सब के दिमाग पर खराब असर करतई। ओ तनुजा के बुझबईत रहई छथिन जे ओ ऐना नई करु। बदरी आ रामरति, बऊक बहीर जकां परल रहई छथि। आब जाईथ त कतअ जाईथ। कलकत्ता वाला जनता फ्लैट तहिये बेच लेने रहईत। गाम सेहो सुड्डाह। आब की रास्ता। कोना मे परल रहई छथि। चलनाई फिरनाई छुअईट गेल छईन। मोनो खराबे रहअ लगलईन। उनका सब के हिदायत छलईन -" जखईन बाहर के लोक वा किट्टी पार्टी होई तखईन बहरी घर मे नई अबई लाय। " ओना, नई कोनो रोक छलईन। असली गप जे समये नई छलई ककरो लग। बदरी आ रामरति अपना के आब बिजयक घरक पैबंद बुझअ लागल छलाह। _____ बिजय आब बेशी काल घर स बाहरे रहई छलाह। तनुजा सेहो अपन सखी बहिनपा मे व्यस्त छलीह। कहियो काल गाम समाज क हरायल भुतियाल कियो पहुंच जाई छलईन- बदरी आ रामरति के जिगेसा मे। ज्यों आगंतुक किछु सलाह तनुजा के बदरी के बारे मे दई छलखिन त उनकर नाक कान लाल भ जाई छलईन- आ उनका चाहो पर आफत। एहन देहक स्थिति रामरति के नई रहईन जे ओ अपने उईठ क बना लईतईथ। नौकरबा त अपने देहचोर रहईन। जाबईत कियो कहितई नई -ओ नई उठितय। दस बेर त तमाकुए खाय बालकोनी मे जाई छलाय। ओना सामने बला घरक काजबाली सं ओकरा घुट्टा सोहार छलई। जखने मौका लगई, गप्प करबाक मे लाईग जाय। घर मे के ओकरा किछु कहितई? ओ बुईझ गेल छल जे बदरी आ रामरति के जेहने रहने, ओहने नई रहने। नौकर चाकर के ई बुझबा के शक्ति भगबान तरफ सं अद्भुत भेटल छई- "कोन पाहुन के केहन आगत स्वागत होईन।" कयेक लोक के त बिना चाहे के जाय परई छईन। आर नई किछु त तखने बाथरूम मे घुअईस रहथ आ जखईन बुझा जेतई जे पाहुन गेलाह, तखने निकलत। ऊपर स बजबो करत- �जाह चईल गेलाह। हम त काफी बनबअ जाई छलऊं।� सुईन क त आईग लाईग जाईन बदरी के। मूदा उपाये की। बुझई छलाह जे कतेक परेशानी कऽ कऽ दिल्ली मे कियो अबई छई। अपन बुझलक तखने ने आयल। आ अतबो स ओ गेल। आब कम्मे उमेद जे ओ फेर आऊत। ईयाह त तनुजा आ नौकरबा दुनु चाहई छलाह। बिजय के ईमहर अपन साढ़ु कतअ उपनैन मे जाय के मौका लगलईन। बड्ड नीक लगलईन ओतअ।दुनु दिशक लोक आयल छलईन। जगक सफलता अही पर ने, कतेक दुरक कुटुम्ब अयलाह। उनको सेहन्ता भेलईन कि हमरो बेटा सब के उपनैन अहिना करी। जखईन बेटा के स्कुल मे छुट्टी हेतईन, ओई समयक दिन देखेबाक लेल पंडी जी के कहलखिन। बदरी-रामरति त खुशी के मारे पागल भेल छईथ। पहिल खुशी जे बेटा उपनैन बुझलखिन, दोसर अई मे कतेक लोक सं भेट होयत। बिजय के उपनैन त ओ कपलेशर मे जा क करौने छलाह। या त मनौती रहई छई या खगता रहई छई- ऊमहरका लोक कपलेशरे मे करईया। के सब आयत, कतअ रहत? केना भोज? की बिदाई? के बनत ब्रह्मा , हजमा के बेबसथा? केशक भसान आरो कतेक तरहक गप्प। पंडीजी ततेक चलता पुर्जा छल जे ओ सबहक संपर्क मे। ओकरे बेशी ईमहरका भार देल गेलई। बदरी के सासुर दिश स आयल छल, तैं तनुजा के ओकर योग्यता मे कोनो संशय नई छलईन। आब एकटा समस्या आईब क सोझा ठार भ गेलईन। बरुआ के आचार्य के बनत। कतअ दन अपने खानदानक लोक बईन सकई छई। बदरी के त गाम स संबंधे नई। ओना पंडी जी कहलखिन जे शास्त्र मे सबहक बेबसथा छई। कुशक आचार्य बईन जेताह। ऊपर सं सीताजी बला खिस्सा सेहो सुना देलखिन जे कोना कुशक बनाओल गेल छलई। ई पंडीजी त संकटमोचन बनल जाई छलाह। सब समस्या क समाधान अपन पतरा मे रखने छलाह। उनकर मोजर हर जतरा मे बढ़ल जा रहल छलईन। रामरति एक दिन जखईन नई कियो रहई त पंडीजी के कहलखिन-" एहन कतऊ भेलई अईछ। कुशक आचार्य।" -आहां करौने छी एहन उपनैन। पंडीजी चुप। रामरति आगु बिजली -"आहां अपन जे मोन होईया करू बिजयक संग। मुदा कुशक आचार्य बाला सलाह नई दियऊन। आचार्य के अलग स्थान होई छई। ओकरा मरला पर कर्ते जेकां चेला के सेहो कयेक कर्मक बिधान छई। एक बेर गाम मे समाद देथिन बिजय। कियो ने कियो आचार्य लेल गछबे करतईन।" पंडीजी त बुझिते छलाह ई सब। पंडित लग ज्यों समाधान नई त लोक पंडित बदईल लईत अईछ। पंडीजी जजमानक खुशी के लोकाचार कहई छथिन। बिजय के अयलाह पर पंडीजी कहलखिन- "कियो अपन लोक आचार्य भ जाय त उत्तम।कुश वाला अंतिम, ओना निखिद्ध नई।" बिजय तखने छोटी बहु के बेटा के फोन केलखिन आ आचार्य क भार देलखिन। ओ सहर्ष गईछ लेलखिन। आरो दियाद बाद के उनके जिम्मा देलखिन ल क अबई लेल दिल्ली। सासुरबाला बरका लिस्ट छलईन। गाम स लोक आयत आ दिल्ली मे जे सब संबंधी छैत ओ नई रहताह त केना दन लगतई। सबहक कतअ बिजय दुनु बेकत गेलाह आ उपनैन के लियौन कैलाह। असली बात त ई रहई जे ऊनकर साढ़ु के गऊंआ बड्ड आयल रहईन उपनैन मे। बिजय ओई सं कोन कम? डेकसी आ ईरखा, मनुक्खक सोभाव छई।सब मे कमोबेश रहई छई। नीके कहु एकरा। अही बहाने सब सं भेट भेलईन। पहिल बेर संबंधी सबहक घर गेल छलाह। कियो नीको स्थिति मे छलाह आ कियो लचरलो त कियो संघर्षो मे । किछु जगह त गाड़ी जयबाक रस्तो नई छलईन। ड्राईवर कहबो केलकईन- " साहब पता नहीं कहां कहां संबंधी का घर ढुंढ के जाते हैं।" बिजय के जाईते मातर देखल सुनल एरिया लगलईन।बुझेलईन जे ओ एतअ आयल छथि। दिमाग पर जोर देलाह त याद आईब गेलईन जे अहिना त उनकर कलकत्ता के जे जे कलोनी छल। जे जे कलोनी कलकत्ता के होअई या दिल्ली या बंगलोर, एक्के रंग लोक आ एक्के रंग सब ताम झाम बेबसथा। कोठी बाला मोहल्ला मे से समानता नई भेटत। "मुंडे मुंडे मतिर्भिन्ना " वाला हाल रहई छई। नई दु लोकक बिचार मिलतई आ नई घर। उपनैनक दिन आईब गेलईन। एकटा घरे लगक मंदिर मे उपनैनक जगह निश्चित छलईन।सासुर बला आ अपन गाम बला दुनु पाहुन के रहअ के फराक बेबसथा छलईन। ई सब मंदिरक लगे छलई। टहलईतो आईब सकई छी। तखनो दु टा गाड़ी दूनु जगह लागल रहई- पाहुन सबहक सुविधा लेल।पंडी जी एक्के दिन मे उद्योग, चरकुट्टा चरकुट्टी, माईट मांगर, कुमरम स ल कअ उपनैन तक करा देलखिन। एकऊ टा बिधि छुटअ नई देलखिन। जयंती जनता एक्सप्रेस बनल छलाह पंडी जी। ऊपर सं कोल्ड ड्रिंक ब्रेक्स सेहो। सब खुशी खुशी भेल। आई कम्मे ब्राह्मण भोजन छलईन। पंडी जी विद्यापीठ स ब्राह्मण सब बजौने छलाह। गाड़ी पठौलकिन, आ सब एक संगे आईब गेल। बरूआ हाथे सब ब्राह्मण के दक्षिणा सेहो दियेलखिन। ब्राह्मण सब दक्षिणा भेटला के बाद खुब प्रशस्त मंत्रोच्चार क संग आशीर्वाद देलखिन आ बिदा भेलाह। बिजय अपने एकटा आचार्य बईन गेल छलाह ई सब झंझट सं बचबा लेल। तनुजा, पंडीजी आ बिजयक एकटा सासुरक लगुआ भगुआ सब बेबसथा स जुड़ल छल। असली गप त काजक बाद निकलई छई। आब ई भेद खुजलई जे बिजयक सासुरक लोक लेल एसी गेस्ट हाउस आ ईमहरका संबंधी लेल धर्मशाला जेकां होटल। ऊमहर नौ छौ के बेबसथा आ ईमहर सुखा-सुख्खी। उमहर बाला सब के बिदाई मे पटोर आ ब्रासलेटक धोती आ ईमहर चांदनी चौकक फुटपाथी कपड़ा लत्ता। उमहर बाला के पुछारी पर पुछारी, इमहर कोनो ऊचावर्च नई। नई खाई के कोई पुछअ बाला आ नई कोनो आरे बार्ता। बदरी आ रामरति निरीह जकां बईसल देखई छलीह। ओ सब त अतबे स प्रसन्न जे हमर पोता के उपनैन त भेल। चारिम दिन रातिम छल। ओहि दिन दिल्ली बाला आन समाज आ बिजयक अतुका लोकबेद के भोज नई, पार्टी छलई। अई मे सब तरहक बेबसथा रहई। गाम बला लोक सब सेहो शामिल भेल अई पार्टी मे। जेना घुरती बरियाती के कियो पुछई नई छई। भेल बियाह मोर करताह की? आब त उपनैन भ गेलैन। शोभा सुनर अपना अनुसारे पुरा छलईन। आब किनको कुनो पुछारी नई। लोक बिजय कतअ स बिदा भ क, आन आन संबंधी कतअ चईल गेल। बिजय सेहो गामक लोकक भावनाक ख्याल नई राईख सकलाह। छोटी बहु के बेटा के आचार्य बनबा काल कहलखिन - " जेना छोटी बहु हमर बिबाह कलकत्ता आईब क सम्हाईर देली, ओहिना आहां आईब क हमर बेटा के उपनैन क जग सम्पन्न कराऊ। हमरा आहां के छोईर क, के अप्पन अई?" आई तक बिजय किनको काज मे बिहार मे रहितो नई उपस्थित भेल छलाह। कोन मुंहे ककरो अयबाक अपेक्षा रखितईथ। सब किछु बुझितो, गामक लोक आयल। फेर ओकरा सब के उपयोग, अपना सेहन्ता पुरबई लेल, क लेल गेलई। अई उपनैनक बाद फेर कहियो कोनो संबंधी कतअ बिजय वा उनकर परिवार नई गेलईन। किछु लोक जे आदत सं मजबुर अईछ, हांजी हांजी करअ मे, ऊयाह सब के एकदिसाह संबंध छईन। गामक लोक अई उपनैन मे अपना के पैबंद जेकां बुझई छल।फेरो छला गेल ओ सब। ईयाह छई समाज।आईये नई, सबदिना ईयाह रहिलई अईछ। कहियो छोटी बहु लेल बदरी के जे स्थित छलईन, उयैह आई बदरी के बेटा के लेल, छोटी बहु के बेटा के स्थित छईन। जेकरा जेतअ, जे भेटई छई, दोसर सं फायदा उठबअ के ताक मे रहई छई।ई अर्थे तक सीमित नई अईछ, अकर दायरा बढ़ल जा रहल अईछ।कहावत छई- "मतलब निकल गया तो पहचानते नहीं"। आब बिजय आ तनुजा,किनको नई चिन्हई छथिन। बिजय त टोकला पर लोक लाजे हाल चाल गऊंआ के पुछियो लई छथिन। तनुजा त टोकलो पर कहई छथिन- "हम नई चिन्हई छी"। लोक कहई छई जे तनुजा के असली रुप आब बाहर एलईन अई। ओ त बिजयक कारण, बदलल बदलल छलीह।आब बिजय के समग्र स काईट क अपन आंगुर पर नचा रहल छथि। भोजपुरी मे सेहो तनुजा जेकां लोक पर कहल गेल छई- " सियरा उहे बा, रंग बदलले बा"। बदरी के होई छईन जे अई जीबन स मरले नीक। जे सब कहियो नई सोचलाह, से सब भगबान पुरा क देलखिन। आब जे चाहई छईथ, ओई पर किछुओ नई। भगबानो के लीला अपरम्पार। केकरा परतापे सब नीक भेलईन, आ केकरा सरापे ई दुर्दिन भेलईन- सोचईत दिन घसियारई छथि। चुपचाप दुनु प्राणी बदरी आ रामरति दिन काईट रहल छईथ। उपनैन स पहिने भुलल भटकल कियो अपन लोक आईबो जाई छलईन। आब त कियो नई। अबई छई खाली तनुजाक चमको संगी सब। ई सब रामरति के एक रती सोहाई नई छईन। बदरी पहिने भांग पी कऽ मस्त रहईत छल। आब अतऽ ई गरीबहा नशा के करऽ देतई। ओना अंग्रेजी बोतलक खर्च घर मे खुब छईन। जखईन कबाड़ी बला स बेचई लेल खाली बोतल सब निकलई छई, तखईन बुझाई छई अकर खपत अई घर मे । हांजक हांज बोतल एक महीना मे जमा भ जाई छई। बदरी असगर आब बईसल रहईत अईछ। आंईख स नोर खसईत रहई छई। तनुजा अई नोर के पाईन कहई छथिन। रामरति बुझई छथि-" ई पाईन नई शोणित छई शोणित। बदरी के आंईख स नोर? ई ककरो सऽ नई डराय बला मर्द छल। बबुआ मिसिर स ल कऽ छोटी बहु के चक्र चाईल स जे नई हाईर मानलक, ओकर आंईख स अतेक नोर कतऊ खसई। ई सब बेबसी क नोर छई।" ओना दुखी रामरति कम नई छईथ। मूदा जखईन ओ मनमौजी बदरी के हाल देखई छथिन, अपन दुख बिसईर जाई छईन। बिन मृदंगक बदरी ठुंठ जकां लगईत छई। बेशी खुश भेल आ दुखी भेल, ओकर हाथ मे मृदंग आईब जाई छलई। मृदंग देखिते बदरी बच्चा जेकां हंसऽ लगीतय। ओकर ओ हंसी हरा गेलई। अई शहरक कोलाहल मे ओ दुनु एक कोना मे परल दिन गिन रहल अईछ। आपसो मे बाजा भुकी नई छई। आंईखे स सब गप बदरी आ रामरति मे होईत रहई छई। कखनो कऽ मृदंगक ताल जेकां बदरी कऽ आंगुर मे हरकत होबऽ लगईत छई। ई देख रामरति के भीतर स मोन जुड़ा जाई छई। पुरा मिसिर टोला मे असगर बदरी टा एहन पुरूख भेल जे "पर स्त्री गमन" नई कैलक। अई टोलक सब पुरूख रंडीखाना कम बेस जाईत छल। किछु शौक पुरा करबाक लेल आ किछु संगीतक संगत लेल। बदरी के भी कयेक बेर गंज नम्बर दु स बजाहट भेल छलई। ओ रिक्शा चलेलक, लेकिन देह बेचबा मे साझीदार नई बनल। अकर ईयाह गुण रामरति के बड्ड नीक लगई। भांग पीब कऽ बौराईयो जाई, फेर रामरति स गलतियो माईंग लई। ओकरा ई बौरहबा कहई। ओ मानबो अकरा अगाध करई आ फज्जईत सेहो तहिना। एहन बौरहबा चुपचाप टुअर जेकां तकईत रहई छई, रामरति के मोन छोट भ जाईत छई। जखन कोनो उपाये नई। की कैल जा सकई छई। बुढापा अतेक कस्टकारी होईत छई, कनिको अंजाद नई छलई। भोरे उईठ कऽ होई छई जे एक दिन बीतल। अहिना समय चलल जा रहल छई। _____ बिजय घर मे कम्मे काल रहअ लगला अईछ।देर राईत घर अबई छथि। पैर डगमगाईत रहईत छईन। कखनो क ड्राईवर सेहो हाथ धेने रहई छईन। आईब क सीधे बेडरूम मे चईल जाई छथि।बेशी तर रतुका खेनाई बाहरे खा क अबई छथि। तनुजा सेहो कयेक बेर इंतजार क क सुईत रहई छथि। बिजय लेल एक्के लोग जागल रहई छईन घर मे। ओ छथि रामरति।आखिर माय क ह्रदय छई ने। आंईख स बेटा के अबईत खिड़की स देख लई छईथ। बच्चे सं जाबईत बिजय नई अबई छलाह, ओ अपनो नई खाई छलीह। अखनो खिड़की के शीशा सं तकईत रहई छथि। जखन बिजय आईब जाई छथि, तखने बिछान पर परअ जाई छथि। बिन बिजय के देखने निन्ने नई होई छईन। बिजय, रामरति के घरक बत्ती जरईत देख क बुईझ जाई छथि, मां जागल छथि। तनुजा के सुतल देख क त पहिने फझईत करई छलखिन लेकिन धीरे-धीरे किनको किछ नई कहई छथिन। रामरति के बुझाई छईन जे बिजय, बदरी जेकां नशा करअ लगला अईछ। बदरी जहिया नशा क क घर घुरय त सटक सीताराम भ जाय। चुप्पी सधने रहय। बाजत त मुंह महकतई, तैं चुप्पे रहय। बिजय पर ओकरा बिशबास नई होई छई जे ओ निशा करताह। तनुजा बेटा सब लग गेल रहईत। सुतली राईत बदरी के छाती मे दर्द उठलई। रामरति तेल मालिश क देलकिन। किछु आराम भेलई। फेर कनी काल बाद बड़का उल्टी बिछाने पर भ गेलई। रामरति जाय लागल बिजय के ऊठबई लेल त बदरी ओकरा मना क देलकई। ओकर बाद ओकर हाथ पकईर क कानअ लगलई। आई कतेक दिन पर बदरी बाजल- " आब हम जा रहल छी। जमराज ठार छथि। तौं बिजय के देखियौन।" ई अनट बिनट गप सुअईन क रामरति डरा गेल। कहबो केलकई -" ऐना किया बजई छं। ठीक भ जेबह। पहिल बेर कोनो दुखित परलह अईछ। गैस भ गेल हेतह। तैं ऐना उल्टी भेलह।" बाईज त देलक रामरति, मुदा ओकरा लक्षण ठीक नई बुझेलई। ओ बिजय के जा कअ सुतल सऽ उठेलकईन। बिजय कहुना उईठ क एलाह। नौकर सेहो ऊठल। बिजय तुरत्ते डाक्टर के फोन केलखिन। ओ आयल लेकिन ताबईत बदरी देह छोईर चुकल छलाह। तखने तनुजा के फोन स खबर भेलईन। भईर राईत रामरति आ बिजय, बदरी के लाश लग बईसल रहल। आंईख स नोर झहरई लेकिन दुनु गोटा मे ककरो मुंह नई खुजई। मोन करई रामरति के भोकासी पाईर क कनई के, अतअ के सुनतई। बिजय के अपने दहो बहो नोर खईस रहल छलईन। बड़का अफसर बिजय ठीक सऽ काईनीयो नई सकईत छईत। ई मजबुरी ऊनका देखला स साफ बुझा रहल छलई। अंदरक छटपटाहट बाहर आईब रहल छलई। भोर भेल। किछु बिजयक कलोनी बाला आ आफिसक लोक आयल। तनुजा असगरे घुरलीह। बेटा सब के नई अनलखिन या नई अयलईन, से के पुछतईन? दस-बारह लोक श्मशान घाट गेल। ओ उपनैन बाला पंडी जी सेहो पाछु स दौरल एलाह। बिजयक कन्हा पर उतरी परल छईन। बिजय के मोन भेलईन जे गाम मे सब के खबर त क दी। तनुजा चट ज़बाब देलखिन - " देखलियई उपनैन मे केहन लीला ओ सब केने रहय। कुनु काज नई छई- ओकरा सब के बजबय के। बिजय मौन भ गेलाह। रामरति स के पुछईया?" पंडीजी फेर संस्कृत बिद्यापीठ स ब्राह्मण सब के बजेलाह। एकादशा-द्वादशा मे ऊयाह सब आयल। कहुना क दरिद्र सबहक जेना कर्म सम्पन्न भेल। रामरति त एकदम्मे असकरुआ भ गेलीह। बदरी के टहल टिकोरा मे समय बीत जाईत छलईन। ऐना जीबन पहाड़ लगईन। बदरी के पहिल बरखी स पहिनेहे रामरति मईर गेलीह। उनका ई चिंता छलईन जे बिजय, बापक बरखी करताह की नई? ओ पंडीजी उनका बुझबई छलईन - " जे बरखीक बजट होईन , से बिजय उनके द दऊथ। ओ अपन क देतईन।" रामरति के ई सब ठीक नई बुझना जाई छलईन। ओही स परेशान रहई छलीह। उनका त ई पंडित एक रत्ती नई सोहाईन। तनुजा के ओ ओहिना प्रिय। बजई जे छलीह-हंईस हंईस क- " बाह रे पंडीजी, आहां त हमरा सब समस्या स ऊबाईर लई छी।" रामरति मोन मे बजईत- कपार उबारतईन। बिजयक पाई ठगई छईन ई पंडितबा। बिजय के साफ कहब छलईन जे माय घर मे असकर नई रहत। अई ल क तनुजा, बहिन कतअ वा नैहर नई जा पबई छलीह। आई स ऊनका रामरति के अरूदा, पहाड़ लगई छलईन। फोन पर कतेक बेर बजईत रामरति सुनने छलीह - " ई बुढ़ी नई जानी कहिया टघरती। कतेक के अंकुरी खेतीह।" रामरति के देह सिहईर जाईन ई सब सुअईन क। सोखा बाबा आ भगबती के गोहरबईत जे आब ल चलु। ज्यों बिछान पर पईर जायब त ई पुतोहु जीते माईर देत। भगबती सुनलकीन। सुतले रही गेली रामरति। चलिते फिरते चईल गेलीह।अगल बगल बाला उनका भागमंत कहईन। असली त उनके बुझल। बिजय के बापक श्राद्धक अनुभव छलईन। अई बेर सब चटपट भ गेलईन। पंडीजी के जे संग छलईन। बिजय के बेटा सब बाबा-बाबी के किनको काज मे नई आयल। ओ सब नाना नानी आ मौसा मौसी के अलावा कोनो आर संबंधी होई छई, से बुझबे नई केलकई। बाकी सब लोक के अंकल आंटी मे ओ राईख लई छेलाह। दुनु बेटा पारा पारी बिदेश गेल। एक टा पढ़ई लेल आ दोसर नौकरी क लेल। छोटका जे पढ़अ गेल छलईन से ओतई के अपना स पैघ लड़की सं बियाह क लेलकईन। बिबाहक बाद बिजय के खबर केलकईन। अतबे नई, भारतक नागरिकता सेहो छोअईर देलक ओ। जेठका बेटा के बियाह बाद मे भेलईन। अई मे अतबे संतोख जे लड़की भारतीय त कम सं कम रहईन। अई बिबाह मे बिजय गेल छलाह। बिजय के ई सब बेटा के फैसला सही नई लगई छलईन। तनुजा के सब बुझल छलईन ओ बिजय के नई बतबईत छलखिन। उनकर पुर्व सहमईत छलईन। आब तनुजा, दिल्ली आ बिदेश अबईत जाईत रहईत। बिजय पर उनकर कोनो ध्यान नई। कखनो अई बेटा त कखनो ओई बेटा। आई ई देश त काईल ओई देश, अही मे ओझरायल रहलीह। बिजय अबसाद मे चईल गेलाह। लंबा छुट्टी पर जाय परलईन।ककरो मोनक गप कही नई सकई छलाह। तनुजा बेटा पर ध्यान देलीह लेकिन बर के गांठ नई बुअईझ पेलीह। ईयाह सब के बीच,बिजय असगर अस्पताल क बेड पर, अई दुनिया के छोईर क चईल गेलाह। एकटा उठईत घर, धरधरा क ढही गेल। अई भीड़ मे सब ई परिवार के बिसईर गेल। ______ बिजय बाबु के मरला के बाद आब एकटा नब समस्या सोंझा एलई। सासुरक जे अतेक सम्पईत छलईन .......ओकर व्यवस्था केना होई? तनुजा त ललबबुनी छलीह। उनका लोक ठकनाई शुरू क देने छल। नई ठीक सं मकान सब सं किराये अबई छलईन आ नई नैहरक जमीन सं उपजा बारी। जे कमतिया आ देबानजी सब छलखिन सब झूठ फुस कही क बहलबई लागल छलखिन। बिजय बाबु के रूतबाक आगु सब ठीक सं चईल रहल छलई। आब कखनो अई जमीन पर झंझट त कखनो ओई जमीन पर, ईयाह सब समाद गाम सं अबईत छलईन। नैहर जाईते सब समस्या ल कअ आईब जाई छलईन। तंग भ गेल छलीह तनुजा। होईन जे बिजय के जाईते सब श्रेयंश खत्म भ गेल होई जेना? बिजयक मृत्यु क दुख स समस्या सब ऊबरऽ दईये नई रहल छलईन। एक बेर त हद्दे भ गेलईन। समाद एलईन जे पटना बला मकानक किरायादार घर खाली क देने अईछ। दोसर आयत त घर किराया पर उठायल जेतई? तनुजा दिल्ली अयला के बाद कहियो पटना वाला मकान देखहो नई गेल छलीह। एकटा सबंधिये किराया वसूल कअ आगु- पाछु पाई पठा दई छलखिन। दस महीनाक बाद ओहिना मोन भ गेलईन, त पटना गेलीह। घर पर जाई छईथ त देखईत छथि, किरायेदार त अछिहे। अगल बगल सं पता लगलईन जे घर कहियो खालीये नई भेलईन। आब त उनका संबंधी सब पर सं बिसवासे उठअ लगलईन। सब लुटहे लागल छलईन। एहन बिसवासी लोक , एना झुठ बाईज क पैसा ठगत.....सोईच क परेशान भ गेल छलीह।पचासो बरखक पुरान संबंध आ विश्वास अई पाई ल कऽ खत्म भ गेलई। सब बात दुनु बेटा के कहलखिन। बड़का बेटा बिपुल के गाम घर सं लगाव बुझेलईन।छोटका विनय के ओतेक मतलब नई, अई सब सं। महीना दिनक भीतर बिपुल सपरिवार भारत अयलाह। तनुजा क संग बिपुल आ उनकर कनिया सब संपईत सब देखलाह। ओकर बाद मातृक गेलाह। गाम मे त किछु छलहेने नई, तैं नई गेलाह। आब अफसोस भेलईन जे एकटा ठांवो रहितै गामो मे। "जब चिड़िया चुग गई खेत, फिर क्या पछताने।" आब ऊपाये की! मातृक मे बंटवारा के बादो बड्ड संपईत छलईन। बिपुल सं बेशी उनकर कनिया के गांव नीक लगलईन। बिदेशो मे कोनो बढ़िया स्थित मे ओ सब नई छल। गामक जीवन ओकरा शुकुन वाला लगलई। पहिले बेर ओ बिशनपुर गाम आयल छल। ततेक ने लोक भेंट करअ अयलई। लोकक आबेश देख कअ ओ अभिभुत भ गेल छल। बिपुल आ उनकर कनिया दीप्ति निर्णय केलक जे ओ सब आब बिशनपुर मे रहत आ अतई स सब संपईत के देखभाल करत। तनुजा के खुशी के ठेकाने नई। अपना लेल त उनका पेंशने बहुत छईन। संपईत के जे छीछालेदर होई छलईन, तई सं ओ दुखी छलीह।आब सब सम्हईर जेतईन, से उनका भरोस छलईन।माय -बाप के मरला के बाद बहिन -बहिनोई संपईत के चक्कर मे ईनका दियाद बुझअ लागल छलखिन। बिपुल आ दीप्ति एक महीना रही कअ बिदेश गेलाह आ ओतअ सं बोरिया बिस्तर बांईध क भारत घुईर गेलाह। आब अप्पन आशियाना बिशनपुर मे बनेला। गाम मे खेती वैज्ञानिक तरीका सं शुरू कयलाह। सबसं पहीने माईट आ पाईनक जांच करेलाह जे की उपजा सकई छईथ। ओकर बाद ओही अनुसारे फसल सब बाऊ कयलाह। जन सबहक संग अपने दुनु बेकती खेत मे रहई छलाह। गामक लोक के त एकटा खिन्नांश करबाक मौका भेटलई। बिपुल अई सब सं कनियो नई विचलित भेलाह। बिपुल सं बेशी दीप्ति अपन निर्णय पर डटल छलीह। धीरे धीरे सब शांत भ गेलई। ततेक ने उपजा भेलईन जे खिन्नांश करअ बाला सब बिपुल लग सलाह मांगअ आबअ लगलाह। बिपुल आ दीप्ति यथासंभव सब के मदद करअ लगलखिन। अई परोपाटा मे ई नब प्रयोग छल। कियो आई तक माईटक जांच करा क खेती नई कयने छल। बिपुल के सफलता देख कअ दोसरो गाम सं लोक आबअ लगलईन। बीच बीच मे बिपुल दोसरो शहरक संपईत सब के देख सुअईन अबई छलाह। सारा दिन त खेती नई होई छई। बाकी समय मे दीप्ति गामक स्कुल मे बिना पाई के अंग्रेजी बिषय पढ़बअ लगलीह। लड़की बच्चा सब के घर पर अलग सं बिना पाई के पढ़बई छलखिन। गामक आर सामाजिक काज मे बईढ़ चईढ़ क दीप्ति भाग लेबअ लगलीह।चाहे स्कुलक समिति होई वा अस्पतालक, चाहे सड़क बनईत होई वा पुलिया, चाहे गरीब गुरबा के कोनो कष्टक समय होई वा धनिकहा के कोनो सलाहक काज- सब जगह दीप्ति क सेवा हाजिर रहई छलईन। दीप्ति-बिपुलक जोड़ी के प्रसिद्धि चहुंओर बईढ़ रहल छलईन। अई मे चाईर चांद लाईग गेलई जखन बिपुल दीप्ति अपन बेटा के नाम गामक सरकारी स्कुल मे लिखेलाह।स्कुलक पढ़ाई के स्तर बढ़ईत जा रहल छलई। उनकर सबहक काज आब समाजक सोंझा आबअ लागल छलई।कयेक छोट पैघ अखबार मे उनकर सबहक जीवनी आ कार्यकलाप के बारे मे लिखल छपल। जिलाक अधिकारी सब सेहो ईनकर सबहक बुद्धिमता के गाहे-बगाहे उपयोग करअ लगलाह। आब इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के सेहो ईनका सब पर नजर गेलई। आब टेलीविजन पर ईनकर बिषय मे समाचार अबई। गामक प्रसिद्धि सेहो होबअ लगलई। अखबार आ टेलिविज़न मे समाचार अयला के बाद बिजयक गामक लोक अलग सं संपादक सब के चिट्ठी लिख क कहई जे बिपुल आ दीप्ति उनके गाम मिश्रौलीक छथिन। बिजय के वोटरलिस्ट बाला कागजक कापी ल कअ छोटी बहु के बेटा टेलिविज़न पर इंटरव्यू देने छलाह। ईनकर सबहक नाम गाम देख कअ ओतुका नेता सब के खतरा बुझाय लगलई। ओ सब किछु किछु षड़यंत्र ईनकर सबहक खिलाफ करअ लागल। बिजय दीप्ति खुईल क ओकरा सब के कहलखिन - " राजनीति सं उनका कोनो लेना देना नई छईन।" तखईन ओतुका नेता सब ईनका सब के सहयोग केनाई शुरू कयलक।नेता सब के त दोसर के समाज सेवा करईत देखीते सिंहासन डोलऽ लागई छई। ततेक ने ईनका सबके ऊपर ओतुका लोक के विस्वास भ गेल छलई , आब पर पंचैती मे सेहो बजबई छलईन। जिलाक अस्पताल मे दवाई आ खेनाई के बेबसथा सेहो दीप्ति क अगुवाई मे संपन्न भ रहल छल। आब ईनका सब हक व्यस्तता बईढ़ गेल छलईन । नियमित खेत पर नई जा पाईब रहल छलाह। आब दीप्ति खेती सम्हारने छलखिन। कहियो खेती के ए बी सी डी नई बुझअ वाली आब खेती पथारी के हीर हीर जानअ बुझअ लगलीह। अतबे नई, कोन नक्षत्रक बाद कखईन पाईन बुन्नी परबाक संभावना प्रबल रहई छई- सेहो उनका बुझल। उनका मे जे परिवर्तन भेल छलईन से सब अचंभित छल। छोट भाई विनय सेहो बीच बीच मे आईब क मनोबल बढ़बई छलखिन। बिपुल आ दीप्ति फेर सं ओई परिवार के ऊंचाई पर ल जाई लेल प्रयत्नशील छलाह। कियो बिनोबा कहईन त कियो बाबा आमटे कहई छलईन । सद्भावनाक संग समाजक सेवा ओ सब कअ रहल छलाह। नब डीह आ नब सोचक संग, नब समाजक निर्माण भ गेल छल। जे परिवार कतऊ के पैबंद छल......कतेक के संबल अईछ। ________ बिपुल के गाम मे रहबाक फैसला एक बेर मे नई भेल छलईन। अही फैसलाक पाछु खेलौना सनक लोकक स्नेह छई। अही आबेशक गुलाम भ कऽ बिपुल बिदेश सऽ गाम घुरल छलाह।बिपुलक नाना राम बाबु विश्वस्त सेवक खेलौना छल। खेलौनाक मृत्यु क बाद ओकर याद मे प्रकाशित पोथी मे शोक संदेश क संग अपन पुरा याद ओ लिखने छलाह। ई आलेख प्रमुखता सऽ तहिया प्रकाशित भेल छलई। बिजयक बेटा सब नानीगाम बिशनपुरे के अपन गाम बुझईत छल। बिजयक मृत्यु क बाद भी बिपुल समय समय पर बिशनपुर अबिते छलाह। अतेक संपईत के छोड़लो नई जा सकल छलई। बिपुल के खेलौनाक बारे मे सब बीतल � भोगल- सुना बात ओहिना स्मृति मे छईन- � जखनो बिशनपुर जाईत छलऊं, खेलौना भेट करबाक लेल आबिये जाईत छल। हमरा ओकर अई तरह एनाई नीक नई लगईत छल। हम बिदेश सऽ गामक जिनगी के आनंद लेबऽ अबईत छलऊं, नई की पाई लुटाबऽ। लोक के ककरो सऽ भेट करऽ स पहिने अनुमति लेबाक चाही। ई सब गाम मे एकदम्मे नई छलई। कियो मूंह उठेने कखनो आईब जाई छल आ भीतरी घर मे कतऊ चईल जाईत छल। खेलौना एक त बिन बजेने आईब जायत, फेर ताबईत तक बैसल रहत, जाबईत तक कीछु देल नई जेतई। कयेक बेर त बैठकखाना मे बिन चादर बिछेने ही चौकी पर निधंग जाकर सुईत रहईत छल। सुतले - सुतले जबरदस्त फोंफो काटऽ लागत। फोंफ क आवाज सुनला पर पता चलत, खेलौना अखईन तक गेल नई अईछ, अतई घुरीया रहल अईछ। आहां पैसा दईयो देबई , तखनो इम्हर- ओम्हर मंडराईत रहत। जाय स पहीने हमरा अलग स आईब कऽ पुछत- " आहां फलामा ट्रेन स ने जेबई?" मोन हमर ओहिना ओकरा देखते खौंझायल रहईत छल , उपर स बेतुका ई सवाल- जवाब? ओकर उम्रक लेहाज क कऽ हम चुप भऽ जाई। सोचई छलऊं, कोना गामक लोक अकरा झेलईत हेतई ? एक्के बात के कयेक बार पुछत। अतबे नई, घर क आनो लोक सऽ अई विषय मे पहिने पुईछ चकल होयत। जाबईत तक हमर मूंह स जयबाक तारीख नई सुईन लेत, ओकरा चैन नई परई छलई । भ सकईत हो ? कन्फर्म करईत हुआय। अविश्वासी कहीं का। जखईन हम घुरबाक तारीख आ ट्रेन क नाम बतेबई, तखने ओकर चेहरा पर मुस्की अबईत छलई। ओकर बाद, धीरे- धीरे टुघरईत हमर घर स विदा होईताय। जाईतो काल कयेक बेर पाछु मुईड़ कऽ हमर घर के तरफ तकीता। पता नई, की देखबाक लिप्सा ओकरा लागल छलई? जखईन हमरा स नजईर मिलतई, फेर भोलापन वाला मुस्कान ओकर चेहरा पर सद्यः छुईट जईतई। हमरो हंसी छुईट जईताय। वो त चईला जईताय, हम सोचईत रही जाईत छलऊं- " की जरूरत छलई खेलौना के अयबाक ? अकरा चलल त जा नई रहल छई, आंईख स ओकरा कीछु देखाईत नई छई, तखनो आईब जाईत अईछ।" ओकर आंईख मे मोतियाबिन्न भ गेल छई । राईत मे ओकरा देखबा मे बाशी परेशानी भ जाईत छई। दिन मे कखनो आईब जायत, मुनहाईर सांझ होबा स पहिने अपना घर क लेल विदा भ जाईत चल। ओ एक आ़ंईख क आपरेशन त " धरान " मे जा क करा लेलक । दोसर आंईख मे तखईन मोतियाबिंद पाकल नई छलई, तैं आपरेशन नई केलकई। इहो अचरज के बात लगईत छई - सारा दुनिया स लोक इलाज क लेल भारत अबईत अईछ , अतऽ देखु , बिहार क गामक गाम उईठ कऽ " धरान, नेपाल " जा रहल अईछ- इलाज क लेल । सुनई छीयई , ओतुका व्यवस्था चाक- चौबंद छई । बड भारी भीड़ उमड़ई छई , ककरो कोनो भी परेशानी नई होई छई।ज्यादातर रोगी भारतीय ही होईत छईथ। एक छेदाम पैसा क फीस नई लगईत छई। उपर स रहनाई आ खान- पीनक भी बढ़िया निःशुल्क प्रबंध रहई छई। अतबे नई, गरीब- गुरबा के मंगनी मे चश्मा क फ्रेम और लेन्स दुनु देल जाईत छई। अई सबहक लेल कोनो सर्टिफिकेट नई जमा करबऽ पड़ईत छई। गरीब क सर्टिफिकेट त देखले स बुझा जाईत छई। की भारत मे किनको एहन आजादी छईन ? बिन कागज- पत्तर क पेट भरने, चाहकऽ भी, केतबो उपर क स्तर क अधिकारी या संस्था क पदाधिकारी होईत, ऐना मदद कऽ सकईत छईत ? जखनो कियो लीक स हईट कऽ मदद करबाक कोशिश कयलक- विवाद भेलई, आलोचना भेलई, अखबारों क हेडलाईन बनलई- शुचिता क बात उठलई - मंशा पर सवाल उठलई - अंततोगत्वा सेवा भावना या त छोड़ देलाह या छोड़ऽ पड़लईन । धरान मे कोना ई सब भ पाईब रसल छई ? नेपाल त अतेक साधन- संपन्न देशो नई छई। अतऽ कहक लेल अपन सरकार, आर इलाज क कोनो इंतजाम नई । हालो मे बिहारक मुख्य मंत्री ईयाह मोतियाबिंदक आपरेशनक लेल दिल्ली गेल छलाह। अतेक पुरान इतिहास वाला राज्य आ मोतियाबिंदक आपरेशन लेल बड़का छोटका सब आन ठाम जा रहल अईछ। खेलौना क जखईन शरीर मे शक्ति छलई, बड़का नेता बनल घुमईत छल। अपन समाज मे ओकर कहल बात अंतिम होईत छलई। किनको पर भी हाथ उठाबऽ मे ओकरा एको मिनट भी सोचऽ के नई पड़ई छलई। गाम मे सब कहई- " अकर हाथ छुटल छई । ई हाथ एकदिन मे नई छुटलई। अकर शुरुआत रामजीवन सिंह कतऽ सऽ शुरू भेल छलई ।" रामजीवन सिह कलामी व्यक्ति छलाह। गाम मे सबसऽ बेशी गाछी उनके छलईन। अही गाछी के रास्ता स सब सोलकन दिशा- मैदान क लेल बाध मे जाईत छल। जे भी सोलकन, कनीको तरी- भिरी केलखिन, उनकर बाध मे जायक रास्ता बंद भ जाईत छलईन। आई के जेकां शौचालय क कोनो प्रबंध गरीब घर मे नई होईत छलई। सुरक्षा भी एकटा दृष्टिकोण होईत छलई, समुह मे गरीब घर क महिला सब दिशा- मैदान क लेल अन्हार होबा स पहिने निकईल जाईत छल। अही रास्ताक फायदा रामजीवन सिंह उठबईत छलाह । सबसऽ पहीने गाम मे धनरोपनी रामजीवन सिंह क खेत मे ही होईत छलईन , ओकर बादे कीनको खेत मे मजुर सब हाथ लगबईत छल । ओनाही धन-कटनी के समय भी होईत छलई।ऐना लगई, जेना गामक सब मजुर रामजीवन सिंह क खेत क लेल ही आरक्षित छईन। खेत भी उनकर अतेक ज्यादा छलईन, शुरू होई- खत्म होबाक नामे नई लई। एक बेर उनकर खेत मे खेलौना क महीस चईल गेल छलई। कनी टा फसल जीयान भेल छलई।अही बात क लऽ कऽ खेलौना स रामजीवन सिंह क बेटा कॆ बहस भ गेलई । रामजीवन सिंह क बेटा के कोनो सोलकन उल्टा जवाब दई, ई शान क खिलाफ छलई। जमींदारक बेटाक खीस सातम आसमान पर आईब गेलई । आव देखलकई ना ताव, दु थप्पड़, खेलौना के खींच देलकई । ओतई लगीचे मे खेलौना के संघतिया, रमरतिया घास गढ़ई छल। रमरतिया क घर खेलौना के टोले मे छलई । रमरतिया के बाप रामजीवन सिंह क हरवाह छल। बात अपन विरादरी क छलई। खेलौना के माईर खाईत देखी कऽ रामरतिया दौर पड़लई बचबई लेल। आब की छलई, रमरतिया के देखीते , खेलौना के की नई जाईन की भेलई । पहीने त चुपचाप थप्पड़ खा चुकल छल। बात खत्मे जेकां भ गेल छलई। ओकर महीस , खेत- मालिकक फसल बर्बाद केने छलई, अकर जुर्माना मे माइर खेनाई त बनीते छलई।ई पाठ ओ बच्चे स ही पइढ़ चुकल छल। लेकिन ओई दिन त दोसरे ग्रह- लग्न छलई। खेलौना क हाथ मे महीस के चरबऽ के समय नियंत्रण मे रखबाक लेल एक टा लाठी छलई। ओ सटासट चाईर डंडा, रामजीवन सिंह के बेटे के उपर चला देलकई । अई लाठी क चोट सऽ ओ बिलबिला ऊठल। बाबू- भैया के बेटा तऽ स्कुलो मे कखनो टीचरक चांटा नई खेने रहईत अईछ। क-नईत चिल्लाईत रामजीवन सिंह क बेटा ओतऽ स परायल। ओकर कननाई पर उपर स रमरतिया के हंसी भी छुईट गेलई । ओ जीवन मे पहील बेर सीयान बाबू- भैय्या के पिटाई क बाद जोर- जोर से कनईत सुनने छल। रमरतिया क समाज मे त दस- बीस डंडा खेला क बाद थोड़- बहुत मिमियेनाई क आवाज अबई अबई आ नईयो अबई छलई। एत्तऽ तऽ एक्के लाठी पर छटपटाय लागल छल।तखईन कोन बात क मर्द भेल? सिर्फ गरीब पर डंडा चलबई लेल । डंडा सहबाक जेकरा शक्ति नई होई , ओ दोसरा पर नई चलाबय। रमरतिया के ई सीन देखबा मे बड्ड मजा अयलई। ओकरा मोन पईर गेलई, एक बेर ओकरो बाप के भी छोटे उमीर के रामजीवन क भाई बेवजह मारने छलई । तखनो ओकरा बड्ड दुख भेल छलई । ओही राईत ओकर घर मे खेनाई नई बनल छलई। ओकर बाप के राईत मे काका सब पासीखाना ल गेल छलई। दु लबनी ताड़ी पीकर ओकर बाप घर लौटल रहई। दख बीसराबई लेल अई स बढ़िया दुसर रास्ता ओकर समाज मे नई छलई। भोर भेलई, निशा टुटलई, फेर रमरतिया क बाप रामजीवन सिंह क खेती करऽ चईल गेल छलई। गाम मे इनका सब सऽ बिगाईड़ कऽ नई रहल जा सकईत छलई। आई रमरतिया मोन स खुश छलाय। अपन टोल मे दौड़ल गेल। सबके मजा ल लऽ कऽ खेलौना क बहादुरी क खिस्सा कयेक बेर सुनेलकई। पुरा गाम मे ई पिटाई वाली बात आईग जेकां पसईर गेल छलई। खेलौना क बाप हमरा कतऽ भागईत आयल छल। पर - पंचयती भेल छलई। सवाल बार- बार अही पर आईब कऽ अटइक जाई छलई - पहील हाथ के उठेलकई? जमाना बदईल गेल छलई। खेलौना क समाज मे कयेक टा लाठी भऽ गेल छलई । आब गल्ती सही क फैसला होबऽ लागल छलई। पंचायती मे एकतरफा निर्णय नई होई छलई , चाहे फरियादी कीयो होखस? अही पहील हाथ उठाबऽ के बात के आधार पर खेलौना पंचायती मे बइच गेल छल । माफी मांइग कऽ ओकर जान छुटल छेलई। आब ओकरा रामजीवन सिंह क पट्टीदारी स भीतरघाती दुश्मनी भऽ गेल छलई। ओना अई घटना क बाद गामक हीरो खेलौना भऽ गेल छल । अकर बाद किनको की मजाल , कोनो कमजोर पर हाथ ऊठा दईथ? खेलौना अगल बगल गांव मे आब पंचायती मे जाय लागल छल। आसपास के कयेक गामक लोक ओकरा जानय लागल छलई। अई मार- पिटाई क घटना क बाद रमरतिया जे नैहरा मे ओनाही मोन बदलई लेल आयल छल , अतई के भ कऽ रही गेल। आब ओ खेलौना क संग ही रहऽ लागल छल। के ककरा रखलकई ? ई बात गाम मे स्पष्ट नई भ सकल छलई। ओना गामक लोक के कहब छलई - " खेलौना क रामजीवन सिंह के बेटा क मारऽ वाला करेज देख कऽ, रमरतिया अपने को ओकरा लेल निहुछ देने रहई । रमरतिया क घरवाला, ओकरा सासुर वापस ल जाई लेल कयेक बार आयबो केलकई।ओ ओकर संग नई गेलई। बाद मे गंऊआ सब रमरतिया क साथ देलकई, ओकर बर के एक तरह से खदेड़ कऽ भगा देने रहई। फेर ओकर घरवाला कहीयो घुईर कऽ नई अयलई। ई रमरतिया कऽ पहील वला घरवाला के सासुर मे सब बांझिन कहईत छलई। अतऽ चाईर टा बेटा भेलई खेलौना सऽ। रमरतिया क स्वभाव एहन छलई , नइ अपने सास तर बसल आ नई ओकर पुतोहुये सब ओकर संग रही पेलई ओकर दु बेटा ड्राइवरी करऽ लागल छलई, एक टा चौक पर घरभुजा क दुकान खोलने छल।चारीम बेटा , जे सबसऽ बेशी पढ़ल छलई , शहर क चिरान - मिल मे मुंशी भऽ गेल छल । चारू बेटा अलगा- अलगी मे रहई छलई। जाबईत तक रमरतिया जिंदा छलई, खेलौना के कोनो परेशानी नई होबऽ देलकई। ओ कीछु ना कीछु रोपनी- कटनी मे दिहारी मे कमाईये लईत छल। ऊपर से बकरी सेहो पोसने छल। एकटा माल- मवेशी सबदिना रखलक। दुध क अलावा गोबर क खादर बिकाई छलई। मूंज क डलिया बुनई छल - हाथ संधल छलई। अही सऽ बदलेन मे समान दोकानदार सऽ भेटीये जाई छलई। कीछु खेत भी बटाई मे लेने छल। सब सही चईल रहल छलई। नई जाईन रमरतिया के कौन बीमारी भ गेलई ? खेलौना कीछु समईझ नई पैलक ........दस दिन क ही जाड़- बुखार मे ओ चईल गेलई । खेलौना सोईचते ही रही गेल छल , प्राईवेट मे नहींये ही देखा पायल ओकरा? सरकारी अस्पताल मे देखबई मे सारा- सारा दिन लाईग जाई छलई । तखनो भी खेलौना संग जाई । इमहर माल- मवेशी भुखले रही जाई छलई। अही चिंता स रमरतिया अपन समाजक कोनो आर काकी क संग अस्पताल चईल जाई छल। नई बचबा के छलई, नहींये बचलई रमरतिया। गरीब गुरबा के कहीयो भी बड़का बीमारी भेल छई, कियो आई तक सुनने अईछ ? बड़का बीमारी ओ भेल , जकर ईलाज मंहग! बीमारी क पता त जांचे स ही होई छई । जतबे बड़का बीमारी, ओकर जांच ओतबे ही मंहग। गरीब लोग त डाक्टर क फीस कऽ इंतजाम ही बड मुश्किल स कऽ पाबईत अईछ , महंग जांच सब त ओकर औकात क बाहर क बात भ गेलई । ईयाह भेल छलई रमरतिया क संग। डाक्टर स तऽ खेलौना देखबा देलकई द , लेकिन जांच नई करा सकल छलई। करा भी लईतई त की ओ दिल्ली बम्बई ल कऽ जा सकईत छल? ओतेक जथा - जमीन छई? ई जे मोन मे बम्बई मे नई देखबई क अफसोस होईतई, ओई स नीक त रमरतिया क चुपके स चईल जेनाईये भेलई। खेलौना काज केनाई रमरतिया के जिंदा रहीते ही छोईर देने छल। आब खेलौना क बेटा सब कतऽ जा कऽ खाय के पारी बन्हायल छई। भोजन त दुनु समय क मिल जाई छई। चुन-तमाकु के ओकरा बच्चे स तलब छई । अही मे दिकदारी होबऽ लागल छई। देह आब चलई नई छई। बेटा सब खेनाई के अलावा कीछु दई लेल तैयार नई छई । ओना सरकारी लाल कार्ड ओकरो बनल छई। अही कार्ड पर चावल, गेहूँ आर अनाज सब राशन सऽ भेटई छई। जखईन जकर हिस्सा मे ओ रहईत अईछ , ऊयाह बेटा ई कोटा उठबईत अईछ। सरकार क सौ दिनक रोजगार करऽ वाला मे खेलौना क नाम भी दर्ज छई । सरकारी पोखईर के साफ-सफाई क नाम पर चेक बईन चुकल छलई। आब बस पैसा बैंक खाते मे आबहे वाला छलई । तखने कोनो कमीना मूंहझौसा , कलक्टर के गड़बड़ी के शिकायत कऽ देलकई। कलक्टर साहेब जांच बईसा देने छई। आब जांच चईल ही रहल छई । पैसा फंस गेलई । अही कारण कनीक दिकदारी मे खेलौना अईछ। हम सोचऽ पर मजबूर भऽ गेल छलऊं।की बाईज रहल अईछ खेलौना? कोन पैसा अकर फंसलई? चलल त जाई नई छई, आर श्रमिक सुची मे नाम छई ? पोखईरक सफाई क कोनो काजे ही नई भेल छई। आत्मविश्वास अकर देखियऊ - "देर सबेर पैसा भेटबे करतई ।" बस ताबईत चुन तमाकु क लेल कीछु चाही। खेलौना कही रहल छल - " हम आहांक घर के छोईड़ कऽ, गाम मे दुसर घर नई पकड़लऊं। अतऊ आब पहीने वाला चुहचुही नई छई। पहीले कतेक तरहक काज सब अतऽ होईत छलई। मालिक के जहिया अपनो नौकरी नई छलईन , तहियो दु लोक के रोजगार देने छलखिन। आहां सब पइढ़- लिखी कऽ हाकिम - हुकुम भ गेलऊं, ककरो रोजगार नई द पेलियई। कोन बातक हाकिम तखईन भेलऊं ? हम सोचऽ लगलऊं- अकर कतेक उपदेश सुनुं। हमरे दरवज्जा पर बैस कऽ हमरे सुना रहल अईछ , " पहीले वाला चुहचुही अतऽ नई छई । कोई जन बनिहार ईहां काम नई कऽ रहल छई । सारा जमीन त आहां मनखब पर उठा रखने छी। काम बचलई कहाँ? " के काज करायत ? खेतिहर मजदूर क दिहारी ततेक ने बइढ़ गेल छई कि के खेती करवा सकईत अईछ ? आब खेती फायदाक सौदा कतऊ स नई रहलई। हम खेलौना के कहबाक आशय धीरे धीरे समईझ रहल छलऊं । पहीने खेती सौदा नई, धर्म छलई, गरीब मजदूर क रोजगार छलई, गामक संस्कृति आर परिवार क अपन मान होई छलई। हालात बदईल गेलई, हमहु सब भी बदईल गेलऊं, आब उपदेश सुनना बस के बाहर भऽ रहल छल। हम ओकरा सऽ पिंड छोड़ाबऽ चाहइत छलऊं। हम झुंझलाईत बेमन स कहलीयई - " ई पैसा लीयह। चुन तमाकु खरीद लेब। आहां आब बुढ़े भऽ गेल छी। स्टेशन अयबाक काज नई छई। " हभर सलाह पर खेलौना कीछु जवाब नई देने छल। परनाम पाती केला बाद चईल गेल छल। घरती टिकटक दिन हम सपत्नीक समय सऽ स्टेशन लेल घर सऽ विदा भऽ गेल रही। जखईन रेलवे स्टेशन क गुमती के करीब पहुंचई छी, खेलौना ओतई स्टेशन क तरफ स लौटईत देखा गेल। हम ओकरा देखते ही रंज स भईर गेलऊं ।हमर पुरा मूड खराब भऽ गेल। फेर अकरा पैसा चाहियई, घरक लोक केहन केहन आदमी पाईल रखने अईछ। कोना अकरा अतेक दिन सम्हालने हेताह ..................... हमरा ई नई छोडत.......थेथर भऽ गेल छई .......ऐहने लोकक कारणे अफसर बनला के बाद लोक गाम अयनाई छोइड़ देईत अईछ ............. साफ साफ कहने रहीयई , स्टेशन नई आबई लेल , तखनो आईब गेल ।अतेक बुढ़ के कोना कटु वचन कहीयई ..........हुं हां हम करईत रहलऊं । खेलौना बजलक- " ढेबरा क बेटा अतई स्टेशन पर टिकस काटई छई।ओकरे लग सऽ ओ आईब रहल अईछ। ट्रेन दु घंटा लेट छई। हम ईयाह बतबऽ आहां कतऽ जा रहल छलऊं ।आब आहां अतऽ तक आईये गेल छी, चलु स्टेशने पर ही बैसब। स्टेशन पर ट्रेन लेट होबाक कारणे काफी भीड़ छलई। ठसाठस प्लेटफार्म मुसाफिर स भरल- पड़ल छल। जमीनो पर कयेक लोग चादर बिछा कऽ बैसल छलाह। पांच आदमी के कुर्सी पर आरा- तिरछा भ कऽ आठ- दस लोक बैसल छलाह। कयेक तरह क खाय- पीयक अवैध खोमचा सब अतऽ ततऽ लागल छल। स्टेशन पर ऊयाह बाबा आदम क जमानाक सीलिंग पंखा अपन धीमा- चाल मे पुरा आवाजके संग उपस्थितिक अहसास करा रहल छल। जिमहर सुन्दर महिला आर युवती सब ठार छलीह , कीछु लोफर टाईप क लड़का ओतई मंडरा रहल छल। हमर नजर, प्लेटफार्म पर किमहर ठार भ कऽ इंतजार करु, उयाह जगह के तलाश मे चौकन्ना छल। असखर रहीतऊं , कतऊ भी इंतजार क लईतऊं। परिवारक संग रहला सऽ , प्राथमिकता बदईल जाईत छई। खेलौना तेज डेग स हमरे साथ तईन कऽ चईल रहल छल। जेनाईये ही टिकट काउंटर वाला कमरा सऽ हम आगु निकललऊं, खेलौना के देखीते ही ढेबरा क बेटा अंदर स एक व्यक्ति के इशारा केलकई। हम हाव भाव स समईझ गेलऊं, ईयाह साहब, डेबरा बेटा अईछ। खेलौना , हमरा सब के अतई रुकबा के लेल कहलक । हमरा लेल तीन टा मोल्डेड कुर्सी कतऊ स तपाक स आईब गेल छलई । गर्मी क मौसम छल। बैसते ही लस्सी। फेर थोड़ेक समय बाद चाह सेहो। बच्चा क लेल कुरकुरे क चाईर टा पैकेट आर फ्रिजक ठंडा कैल सौफ्ट ड्रिंक्स। हभ पैसा देबाक पुरजोर प्रयास कयलऊं , ओ सब एको पैसा भी नई लेलक। खेलौना क समाज क चाईर व्यक्ति अतऽ स्टेशन पर दोकान खोलने अईछ। खेलौना ओकरा सब के हमरा जाय के बारे मे पहीने स ही कही चुकल अईछ।लोक एकाएकी आईब रहल छल। गामक संस्कार क नाते हमरा आ हमर पत्नी क पैर छुकर आशीष ल रहल छल। हमर पत्नी आ बच्चा अई आदर के देखी कऽ अभिभुत भऽ गेल छलाह। अखईन दु घंटा स ज्यादा वक्त अतऽ स्टेशन पर बितबऽ के छल। हम पत्नी आ बच्चा के रेलवे के बारे मे पुरना, बिना सत्यापित जानकारी बतेनाई शुरू कयलऊं- " स्टेशन पर ट्रेन अयबा स आधा घंटा पहीने घंटी बजई छलई आर पन्द्रह मिनट पहिने सिगनल होईत छलई। ई सब काम मैन्युअल होईत छलई। मुजप्फरपुर स बेतिया के तरफ आबऽ वाला ट्रेन के " डाउन " आर बेतिया सऽ मुजप्फरपुर के तरफ जाय वाला ट्रेन के " अप " कहल जाई छलई। अप आ डाऊन ट्रेन के घंटी के धुन मे तकनीकी अंतर होई छलई। अई ध्वनि क अंतर के पकड़नाई आम लोकक वश क बात नई होईत छलई। ई एक तरह क शास्त्रीय संगीत छल, जेकरा जानऽ- समझऽ वाला हमेशा स कम रहला अईछ । अहीना रेलवे के सिस्टमक गुढ़ रहस्य सब के समझनाई सब हक बस के बात नई छल।ट्रेन पर सवार भेनाई आ ट्रेन के समझनाई, दुनु अलग- अलग बात थीक। पैसेंजर, फास्ट पैसेंजर, एक्सप्रेस आर सुपरफास्ट एक्सप्रेस ई चाइर तरह क ट्रेन पहीने होईत छलई। हमर पत्नी , बच्चा आ खेलौना चुपचाप हमर प्रवचन सुइन रहल छल। अगर हम कनीको गलत होईतऊं, मैथिल पत्नी क जेकां खेलौना के भी हमरा सही करबाक लेल टोकऽ मे कोनो गुरेज नई होईतई। ई सब संबंध परस्पर विश्वास पर निर्भर करईत छई। आजुक समय मे की कियो अधीनस्थ कर्मी अपन अधिकारी क कमी के इंगित करबाक साहस कऽ सकईत अईछ ? कदापि नई । समय पुरा बदइल चुकल छई । ओकरा सबहक लेल हम बिदेशिया मालिक छलीयई। ट्रेन क आबऽ के जखने समय भेलई, हभर हाथ अपन पाकेट मे चइल गेल । जे भी नोट हम रस्ता - पेरा के खर्च क लेल अलग स रखने रही , ओ सारा रुपया हभर बंद मुट्ठी मे आइब गेल। हम अपन अई बंद मुट्ठी के खेलौना क जेबी मे हाथ डाइल कऽ खोइल देलीयई । प्लेटफार्म पर कीछु लोक पटरी पार क कऽ दोसर तरफ चइल गेल छलाह । इनकर सबहक गिनती ज्यादा समझदार मे सदा स होइत अयलईन अईछ। ट्रेन एला पर भीड़ प्लेटफार्म क तरफक दरवाजे पर होईत छई , ओ लोक धीरे स दोसर तरफ स ट्रेन मे एक मिनट पहीने चइढ़ जेताह।इयाह एक मिनट क लेल अतेक जोखिम उठबईत छईथ। खेलौना क समाज क लोक ट्रेन मे हमर बर्थ पर सब सामान हाथों हाथ सुरक्षित राइख देने छल। खेलौना कहलक- " हम आब अ़ंतिमे छी बबुआजी, जे आहां के स्टेशन पर छोड़ऽ आयल छी । अही लेल हमर बेटा सब नाराज रहइत अईछ। हमरा सऽ अई अंत काल मे हीस्सक छोड़ल जायत ? हम पैसा क लेल नई, स्नेह क लेल अबईत छी। ओई बुढ़ा मालिक- मलिकाईन के याद मे अबई छी। उनकर कर्जा चुका रहल छी। आब हमर उमीर भ चुकल अईछ। परलोक मे ओ सब भेटताह, हम की कहबईन।" ओकर आँइख भइर आयल छलई। ई सब देख सुईन हमर पत्नी आ बच्चा भी गामक पैघ बुजुर्ग के जेना पैर छु कऽ आशीर्वादी लेल जाईत छई, ओहीना खेलौना क पैर छु कऽ आशीष लई गेलाह। खेलौना क आंइखे अई पर आखिरकार छलछलाइये गेलई। " जाऊ जुग जुग जीबई जाऊ। हमरा सब के खाली बीसरब नई। गलती- सलती माफ कऽ देब। भ सकय तऽ घुरी आऊ गाम, ठेकानु अपन लोक वेद आ ठाम। " खेलौना ठीके कही रहल छल। जाबईत वो अईछ, ताबीते "बबुआ मालिक "। आब गांव अयला पर दोसर ऐहन कहऽ वाला के अईछ ? चुन तमाकुल की ? ककरो केतबो पैसा देला पर अतेक स्नेह स बबुआ मालिक कहत ? ई ओई पीढ़ी क अंतिम प्रतिनिधि अईछ । आबऽ वाला जमाना, किताब क पन्ना मे ही पइढ़ सकतई, खेलौना जेना लोक अई समाज मे होईत छलई। स्टेशन पर हमरा बिदा करबाक लेल सिर्फ खेलौना ही ठार अईछ। गाभ- परिवार स आर कीयो नई आयल अईछ। जखईन हम ककरो को विदा करऽ काल स्टेशन जेबई, तखने तऽ हमरो छोड़ऽ ओ लोक आयत ? अतऽ तऽ बराबरी वाली बात छई । पैसा स ही सही, आखिर खेलौना मे एतबा माश्चर्य त भेलई। खेलौना , सच मे हम चाह कर भी तोरा आ तोहर बात के भूला नई पेबऊ। ट्रेन मे अपन सीट पर बैसलाक बाद भी खेलौना ही हमर मोन मे घुइम रहल छल। की युनिक नाम छई खेलौना? सच मे ई सब के खेलौना के जाना " खुशी " ही त दइत अईछ । लोक अकरा सऽ खेलाई छई , तोइड़ो दइत छई , खीस पीत मे पटइको दईत छई, तखनो ई खुशी देबाक अपन मर्म सऽ विमुख नई होईत अईछ । अगला जतरा मे गांव लौटला पर मोने मन खेलौनाक लेल कीछु गिफ्ट अनबाक निर्णय हम कऽ लइत छी। ओ वापस विदेश पहुँचला पर अपन काजक दुनिया मे लऊट चुकल छलाह। कीछु महीना पहीने घरक लोक से फोन पर बात भऽ रहल छलईन। तखने पता चललईन- " खेलौना " मइर गेल । अई समाचार स सकता मे आइब गेलाह। कहलखीन- " कीछु पाई-कौड़ी ओकर घर वाला के भेजवेलीयई की नई ? जवाब भेटलईन- " आहां कोन दुनिया मे रहइत छी कोई अईतई, तखने ने पैसा दईतीयई। ओकरा सब के कोनो कमी छई ? खेलौना क बेटा सब बड्ड धुमधाम स ओकर दाह- संस्कार केलकई। श्मशान जाइत काल शहर स बच्चा ब्रास बैंड पार्टी के बजेने छल। पुरा गाम मे आगु- आगु बैंड पार्टी आर खेलौना क मृत शरीर के घुमावल गेलई।रामजीवन सिंह क पोता , खेलौना क मृत शरीर के कंधा देबऽ वाला मे स एक छलाह। अगला विधायकी क चुनाव लड़ऽ वाला छईथ, ऐहन मौका कोना हाथ स जाईत देथीन। अंतिम दर्शन करऽ लेल कयेक गाम स लोक जुटल छलई। विधायकजी के तरफ स पुरा इंतजाम छलई।अतेक भीड़ आइ तक गांव मे नइ देखल गेल छलई। रेलवे के माल- गोदाम आर मझौलिया चीनी मिल क कामगार सब खेलौना क सम्मान मे एक दिन क काज बंद रखने छल ।" खेलौना के "शोषण क खिलाफ" आवाज उठबऽ वाला अई एरिया क पहोल व्यक्ति कहल गेलई। ओकर कयेक पृष्ठक जीवनी छइप कऽ घर- घर मे बांटल गेलई। सुनबा मे आईब रहल छई , पटना से निकलऽ वाला एकटा दैनिक अखबार, " खेलौना क कृतित्व और व्यक्तित्व " विषय पर व्याख्यानमाला आयोजित केने छल। विपुल अपन अंतर्मन स खेलौना के श्रद्धांजलि द देलाह। वो अपने आप मे अकेला छल। जनसंपर्क आर योजना क क्रियान्वयन क ओकर एक उदाहरण स्टेशन पर देख चुकल छलाह । ऐहन लोक धरती पर बार बार जन्म नई लईत अईछ। खेलौनाक इच्छा छलई- " हम गाम जायब। ओतई रहब।" बिपुल मोने मोन फैसला लऽ चुकल छलाह। बिपुल के ई बुझबा मे कोनो भांगठ नई लगलईन जे रामजन्म सिंह आर उनके सनक सोच बला लोक अई गाम - समाज क पैबंद अईछ। अई मे बदलाव अत्यंत जरूरी छई। ई तखने संभव छई, जखईन सर्वशिक्षा सुलभ होई। सरकारी कार्यक्रम सबहक क्रियान्वयन ततेक ने दुरुह छई, योजना मूर्त रुप मे नई सफल भऽ पाईब रहल छई। अई सब काज के ओ अपन प्राथमिकता मे लेलाह। बिपुल के विचार छलईन जे कीछु सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी सब ज्यों ऊनकर अई मिशन सऽ जुड़इन तऽ आम लोक के बेशी मदद कैल जा सकईत छई। अही क्रम मे उनका बगलक गामक दहन बाबू नामक सेवानिवृत्त पदाधिकारी क बारे मे जानकारी भेटलईन। दहन बाबू नई सामाजिके छलाह आ नई असमाजिके। नई ककरो लीक स हईट कऽ मददे कैलखिन आ नई ककरो विरोधो केलखिन।लोकक गपक आधार पर बिपुल के ईनकर सिद्धांत बुझेलईन - " न ऊधो को लेना, न माधो को देना।" ईहो कोनो नकारात्मक सोच नई छलई। बिपुल समय ल कऽ एक दिन दहन बाबू स भेट करऽ गेलाह। दुनु गोटेक बीच समाजक पैबंदक बारे मे खुईल कऽ गप शप भेलईन। बिपुल कनीक बेशिये जोश मे छलाह। इनकर भावना आ विदेश प्रवास के देखईत, दहन बाबु एकटा वाक्याक विवरण केलखिन आ बिपुल के कहलखिन अई मे " पैबंद " के अईछ? आहां गहन सोच करु आ अपन विचार सऽ अवगत कराऊ। वाक्या एना अईछ- दहन बाबु के आंगन सं बड्ड ईच्छा रहईन - " एक बेर कल्पवास करितऊं "। उनकर नैहरे- सासुर सब मास दिनक लेल कल्पवास केने छलईन।ओई कल्पवासक समय भोगल जिनगी, संत महात्मा के बोल- वचन, लोकक भीड़, सात्विक जीवन, साधु संतक बड़का बड़का टेंट, कुंभ मे लोकक रेला, ओ मोरक पंख, लोहाक हांसु, लोक के हरेनाई आ हरेला पर तकनाई, सरकारक बेबसथा, हड्डी गलबअ बाला जार, भीजल जारईन, ईंटाक चुल्हा, सांझक बजार, तरकारी बाली सबहक मोल मोलई , ओ मोटरा- मोटरी, ओ ठगहा स्वामी, ओ वस्तुजातक चोरी, अहीना कतेक रास खिस्सा पिहानी ओ सुनने छईथ। सासुर के लोक गेल होईथ वा नैहर के, खिस्सा एकरंगाहे। कल्पवास उनका अपना दिश सम्मोहित करई छलईन। ओ एक दु बेर पहिनेहो मोने मोन जाय के तैयारी केनहो छलीह, लेकिन ऐन मौका पर कोई न कोई विघ्न बाधा सामने ठार भअ गेलईन। नई जा सकलीह, मोन मसोईस कअ रही गेलीह। अपने के मनेलीह- ओना अखईन तेहन बुढ़ थोरबे भेल छईथ, कल्पवास कोन भागल जाई छई। आब सब जिम्मेदारी सं मुक्त भेली अईछ। ओना त भईर जीवन किछु ने किछु लगले रहई छई।दुनु बेटी अपन सासुर बसई छईन। बेटा के नीक नौकरी छईन। दु बरखक पोतो छईन। दिल्ली मे बेटा-पुतोहु रहई छईन।नाईत, नतनी आ पोता भेलाक बाद उनका लागअ लगलईन, आब बुढ़ भअ रहल छईथ। ओना देह- दशा सं नीक छईथ। कियो नई कहतईन , घरबाला नौकरी सं रिटायर कअ गेल छथीन। ओना ई दहन बाबु के उपराग मे कहितो छथिन- आहां रिटायर भेल छी, हम नई। से मोन राखु। कहलो गेल छई जे पोता भेलाक बाद स्वर्गक रस्ता सीधा खुईज जाई छई। ईयाह स्वर्ग सुनला पर तअ कल्पवासक धुन सवार भेल छलईन।अई बेर सोईच लेने छलीह, किछु भअ जाय माघ मे प्रयागराज जेबे करतीह।एक दु टा धरम करम बाली बुढ़ी सब के दोसराईत लेल पुछबो केलखिन, लेकिन ओ सब नई तैयार भेलखिन।अंत मे हाईर कअ दहन बाबु के कहलखिन- " आहां हमरा कल्पवास मे जा कअ छोईर देब आ फेर एक महीना बाद लअ आनब"। से कियैक? हम कै गोटे के कहलियनि, कियो संग दई लेल नई तैयार भेल। अरे हम छी ने। हम संग देब! सकारात्मक ज़बाब भेटला पर दहन बाबु के कनिया कनी आर जोशेली। बजलीह- से तअ हमरा बुझल अईछ जे आहां संग हमर देबे करब।ओही सं त कहलऊं। मूदा हम छोईर कअ नई आयब? कियैक? डर होईया। आहां कोनो बहुरूपिया साधु के नई पिछोड़ धअ लेबई। आब कतअ जायब। ओतअ हम धरम करअ जाई छी। एहनो नई छी जे कियो बहला फुसला लेत हमरा। बात बात मे दहन बाबु अपनो कल्पवास जयबाक ईच्छा जतेलखिन। आब की छलई। उनकर कनिया तअ खुशी सं झुमअ लगलीह। सब बेटा - बेटी के अपन जाय के बारे मे बतेलखिन। सब बयस भेला पर बदलईत अईछ।दहन बाबु घरो मे कहियो पुजा पाठ नई केलाह, ओ मास दिनक लेल कल्पवास करअ जा रहल छथि। सब के अचरज लगलई। अगिले दिन इलाहाबाद बाला ट्रेन मे रिजर्वेशन के टिकट अबिती- जयती के करा लेलाह। समान सबहक लिस्ट बनअ लागल। जे बुढ़ी सब पहिने कल्पवास केने छथि, उनका सब सं ब्रीफिंग पर ब्रीफिंग दहन बाबु के कनिया लअ रहल छलीह।जाय सं एक हफ्ता पहिनेहे सब जरूरत के समान कीना गेल छलईन। इलाहाबाद मे एकटा सीधा संबंधी तअ नई, लेकिन जोड़ुआ तअ अबस्से कहबईन, ऊनकर पता आ फोन नम्बर सब लअ लेने छलाह। उनका सं एकदिन फोन पर गप्प सेहो भअ गेल छलईन। हुनका अपन आबअ के प्रोग्राम बता देने छलखिन। कोना की स्टेशन सं गंगा कात जेबाक छई, कतेक की भाड़ा लगतई, कोना आ कत्ते पाई मे टेंट भेंटतई, सब बुईझ- सुईझ लेने छलाह। दहन बाबु के कनिया के होईन की आब तअ ओ सोझे स्वर्गे जेतीह। ओकरे लेल रस्ता सब बईन रहल छईन। जाय सं एकदिन पहिने सब धीया- पुता के " आल द बेस्ट आ हैप्पी जर्नी" बाला फोन सेहो एलईन। आई ओ नानी-दादी बाला खाड़ी मे अपना के असली मे बुईझ रहल छलीह। जखईन घर सं बिदा भेलीह, तअ भईर दियाद बिदा करअ आयल छलईन।बुझा रहल छलईन जे कोनो जंग मे जा रहल छईथ। लोक सब कुंभ आ कल्पवासक सुनल सुनायल गप कहईन आ डरबईतो रहईन। दहन बाबु के कनिया पर अकर एक नबको असर नई छलईन। उनका दहन बाबु के अफसर बाला रौब पर भरोसा छलईन। जे काज ओ हाथ मे लई छलाह, सफलता भेंटते छलईन। चाहे बच्चा सबहक एडमिशन होई, ट्रेन मे जतरा होई, बेटी सबहक कथा वार्ता होई, सब जगह ई गोटी लाल क कअ घुरल छलाह। रेलवे टीशन पर छोड़अ लेल एकटा भातिज आ उनकर कनिया मोटर सं आयल छलखिन।एसी बोगी मे रिजर्वेशन छलईन। बेशी भीड़भाड़ नई छलई। अपन आराम सं दुनु बेकती रिजर्व सीट पर बईस गेलाह। जखईन अगिला दिन भोरे इलाहाबाद पहुंचलाह त देखईत छईथ जे एक गोटे उनका सब के लेबई लेल स्टेशन पर ठार छथि। ई ऊयाह व्यक्ति छलाह जिनकर पिता सं दहन बाबु के गप भेल रहईन।ओतअ सं ओ सब सीधा संगम गेलाह, जतअ कल्पवासक लेल टेंट सब लागल छलई। पहिनेहे सं इनका सबहक लेल एकटा टेंट ठेकनायल रहईन।ओ व्यक्ति फाइनल अई सं नई केने छलाह, ईनका सब के केहन की नीक लगतईन? बढ़िया जगह पर ओ टेंट लागल छलई। सब जगह ओतअ सं लगे छलई।थोड़ेक काल मे ईनका सब के व्यवस्थित केलाह के बाद ओ व्यक्ति चईल गेलाह। उनकर अनुसार कल्पवासी के किछु काज आईब कअ ओ अपन खाता मे धर्म के डेबिट कअ रहल छलाह। कतऊ भी स्थानीय अपन लोक रहलाह पर सब किछु आसान भअ जाई छई। अखईन प्रत्यक्ष मे ई सब देखलाह।थोड़ेक काल मे चुल्हा जड़ा कअ चाह बना कऽ पीयई गेलाह। भानस भअ गेल, तअ बुझु सब भअ गेल। बदली बला सरकारी नौकरी मे उनका सब के अकर अनुभव छलईन। सब सं पहिने, घर मे घुसिते देरी ओ भंसे घर मे जाई छलीह आ जै चुल्हा रहई, ओकरा पजाईर कअ चाह बनबईत छलीह। अतऊ ओहिना भेलई। अगिला दिन स़ं अपन अई बालु परहक दुनिया शुरू भअ गेल छलईन। गंगाजी मे प्रातः स्नान सं दिनचर्या शुरू होईन। दिनभर पुजा पाठ, भजन, खेनाई बनेनाई, आ गप्प सरक्का मे बीतई। अद्भुते अनुभव रहलईन। केना भोर सं सांझ भअ जाई, कनियो नई बुझाई। कोनो तरहक विकार मोन मे नई अबई। सुआईत ने लोक मास करअ अतअ अबई छई। दिन हो या राईत, चारु कात इजोते -इजोत, अलगे दुनिया छलई। कोनो ओहन सुविधा नई रहनेहो, खुब नींद होई आ भुख सेहो लगई। गंगा माई के कृपा ठीके अपरम्पार छईन, ओहिने उनकर महिमा। सुर्यास्त सं पहिनेहे अतअ लोक रतुका भोजन कअ लई छल। ओकर बाद साधु संतक प्रवचन सब सुनईत छल। कतऊ कतऊ भंडारा सेहो लागल छलई। ईनका सब के पूर्वक संस्कार के कारण लंगर मे के खेनाई खाईत ठीक नई बुझेलईन। ओना खाय बला प्रसादे कहई छल। ओ सब अपने बनबईत आ खाई छलाह। पांचे सात दिनक बाद त कैक परिचित लोक भेटा गेलखीन। आब त सब कियो एकदोसरक टेंट मे जाय आबअ लागल छलाह। ई कल्पबासीक नब दुनिया बईन गेल छलई। कियो साते दिन लेल आयल छल त कियो दु हफ्ता लेल, कियो किनको पहुंचाबई लेल त कियो कुशल क्षेम लेबअ लेल। सब अपन दुनिया मे रमल छल। दहन बाबु के कनिया के तअ कयेक टा मैथलानी चिन्हार परिचयबाली सब भेटा गेल छलखिन। पईंच उधारी सेहो गाम जेकां मऊगी महाल मे शुरू भअ गेल छल। दहन बाबु चुपचाप सब देखईत रहई छलाह। उनका होईन जे अतऊ ऊनकर कनिया के सब ठईग रहल छईन।ऊमहर कनिया ऊनकर कल्पवास मे दान-पुण्य करबाक चाही, सैह सोईच कअ देब लेब करई छलीह। सांझ मे एकटा संत के प्रवचन मे ओ सब जाईत। ओ कहई- ई संसार मिथ्या थीक। बेटा-बेटी,अपन आन सब भ्रम छई। जे सच छई। ओ आत्मा छई। ईयाह अचर, अजर, अमर छई। कहियो ओ संत प्रवचन मे कहई छई- ई सब माया छई। आहां संग ई लोक तकने तक सटल अईछ, जाबईत ओकर स्वार्थ आहां सं जुड़ल छई। जहिये मतलब खत्म,ओ घुरियो नई ताकत।संग के रहत? ओ रहत अपन सद्कर्म। अही सद्कर्म के रस्ता पर कोना चलब? ओईलेल अपन सर्वस्व समर्पण के भाव जगाऊ भगवानक प्रति। अहिना ओ संत तरह तरह के खिस्सा पिहानी सब कहई। ओकरा अनुसारे "अप्पन " किछु नई छई। जखन अई देहे के भरोस नई त आर दोसर कथी के,? ओ संतक बाणी मे तअ मिठास घोरल छलई लेकिन ओकर शब्द दहन बाबु के कनिया के लोहछा दई छलईन।बाकी सब पर ओतेक रंज नई होईन, जखईन ओ बेटा-बेटी पर कहई, त ओ इनका कनिको नई गिराईन। एकदिन ओ प्रवचन मे कहई छल- " मनुक्ख अपन स्वार्थ लेल ई माय- बाप आ संतानक जाल बनबईत अईछ। जाल के फेर पोखईर मे फेंकईत अईछ.......... जाबईत धईर ओकरा माछ फंसईत रहईत छई............जाल नीक बुझाई छई। जखने जाल मे माछ नई फंसलई, ओ जाल के ऊल्टबअ- पल्टबअ लगईत अईछ। ओकरा होई छई जे जाल मे कोनो दोख छई, ताहि लेल माछ नई फंसल। दोसर - तेसर जाल बदलईत रहईत अईछ।ओ पोखईर मे नई तकईत अईछ जे ओई मे माछ छई वा नई। माछ नई जाल मे फंसलाक कारण पोखईर मे माछक नई भेनाई सेहो भअ सकईत छई। ओहिना ई संसार छई। जाल भेल स्वार्थ। जाबईत माछ जाल रूपी स्वार्थ मे भेंटईत रहई छई.........ताबईत सब नीके छई। जखने नई भेटलई, ओ बदईल लईत अईछ।अतअ पोखईर अईछ आहांक सद्कर्म। ऊयाह आहांक काज पुरा करबईत अईछ। दोसर कियो किछ नई करईत अईछ।आहां ई झुठहा के मोह-माया सं निकलु। अई लोक के ज्यों नई सम्हाईर सकलऊं, त ओई लोक के सम्हारू। आहां जरूरतमंद के दियऊ, नई की अपन कहल सखा- संतान के। आहा़ं अखनो देख सकई छी। मूदा आहांके आंईख पर संतानमोहक पर्दा लागल अईछ.........ओ नई किछु देखअ देत। अहिना ओई महात्मा के प्रवचन सुईन कअ दहन बाबु के कनिया के मोन कनी काल लेल हिल-डुल जाई छलईन।फेर मोन मे अबईन, भअ सकईत होई अई सधुबा संगे बीतल होई, तैं अपन राग अलापईत रहईत अईछ। दहन बाबु त प्रवचनक समय टेंट मे आराम कअ कअ बीतबई छलाह। ओ नई अई पचरा मे फंसई छलाह। समय कतऊ रूकलईया। कल्पवासक मास बीत गेलईन। आबअ काल मे बैग मे भंसाक समान भरल आ आब सनेश सं भरल। मोरक पंख, लोहाक वस्तुजात,कयेक जगहक निर्माल, प्रसाद, गंगाजल सं भरल बैग लअ कअ टीशन आयल छथि, ट्रेन पकड़ई लेल। तखईन पता चललईन जे ऊनकर ट्रेन तअ कुंभ लअ कअ कैंसिल भअ गेल छईन। आर जे कीछु चिन्हल जानल लोक सब छलखिन, ओ सब दिल्ली जा रहल छलाह। उनकर सबहक ट्रेन मे रिजर्वेशन छलईन। ओ सब आग्रह सेहो केलखिन। दहन बाबु सोचलाह जे दिल्ली मे उनको बेटा छथिने। अखईन अतई चईल जाई छी.......संगत अईछ। मास दिन नीक सं बीतल........ जतरो नीक रहत।ई जे सनेश सब छई, अखने दअ देबईन। ओ मंदिरक निर्माल माथ पर सब के टटका टटकी लाईग जेतईन।टिकट लेलाह आ दिल्ली ऊनकर सबहक संग आईब गेलाह। आब दहन बाबु के कनिया दिल्ली टीशन पर सं बेटा के फोन केलखिन जे हम सब टीशन पर आयल छी।आईब कअ लअ जाऊ। बेटा तामसे घोर भअ कअ फोने पर ज़बाब देलखिन- "हम सब दक्षिण भारत आई घुमई लेल जा रहल छी। आहां सब के पहिने बतबअ के छलाय।एना कतऊ हुलेले होई छई। हमर सबहक ई टूर छह महीना पहिने बनल छल। आहांके गामक टिकट छल त ईमहर किया एलऊं। जे बुझाईत अईछ करु।हम अपन यात्रा नई कैंसिल कअ सकईत छी।फोन पर पाछु सं पुतोहु के बरबराईत अस्पष्ट बात सेहो सुना रहल छलईन।" दहन बाबु के कनिया के चेहराक भाव देख कअ पता लाईग चुकल छलईन, की ज़बाब भेटल छईन? पटना के दोसर ट्रेन लागल छलई। दहन बाबु ओकर टीटी लग गेलाह। अपन परिचय दईत दु चाईर टा रेलवे अधिकारी सबहक बारे मे कहलकिन। ओ टीटी, पटनाक टिकट दुनु गोटे के बना देलकईन आ अपनबाला सीट एसी बोगी मे दअ देलकईन। दहन बाबु के कनिया कहलखिन- हमरा आहां पर भरोसा छल जे आहां रस्ता निकालबे करब। हम आहांके नेने छोड़ब।अतऊ गोटी लाल करबे केलऊं। आब दहन बाबु के कनिया के ओई साधु के प्रवचनक सब शब्द मोन पईर रहल छईन। सब स्वार्थक संग छई- संतान सेहो।कियो ककरो संग तखने तक छई, जाबईत स्वार्थ पूर्ति भअ रहल छई। निश्वार्थ ऊयाह परम ब्रह्म अईछ।ओकरा पर यश अपयश, नीक बेजाय, उचित अनुचित , लाभ हान सब छोईर दियऊ आ जतअ जेना जहीया तक राखय.....खुशी खुशी रहु।जीवन रेतक टीला अईछ, अई पर नई कोनो घमंड आ नई राखु कोनो भ्रम। कल्पवास इनका सब के जीवनक पाठ पढ़ा देने छलईन। आब मोह माया सं अपना के परे बुझईत गाम घुईर गले छलाह। कहिया तक ई कल्पवासक प्रभाव रहतईन, से नई जाईन। दहन बाबू, बिपुल के सोईच कऽ जवाब देबऽ के बारे मे कहलखिन, हरबरा क नई। बिपुल के ई प्रसंग अंदर तक हिला देने छलईन। ओ अपन घरो मे अई बातक चर्चा कैलाह। अंत मे ओ अई निष्कर्ष पर अयलाह- " दहन बाबू क बेटा, अई एपिसोड मे पैबंद छईथ। माय - बापक भावना के बिन बुझने अपन तत्काल घुमबाक भाव के प्राथमिकता देलाह। अई सब तरहक सोच के सामुहिक रुप स॔ ज्यों भर्त्सना कैल जाय, तऽ दोसर कियो अई तरहक डेग ऊठेला सऽ बचत।" दहन बाबू, बिपुलक सुझाव सऽ सहमईत नई रखई छलाह। ऊनकर अनुसारे अई सऽ ऊनकर बेटाक बदनामी आ परिवारक प्रतिष्ठा क ठेस पहुंचतई। नीक - बेजाय काज समाज मे अहिना होईत रहल छई। ई सब चीज सापेक्ष होईत छई। आहां अपन काज केने जाऊ। समय अकर मूल्यांकन करत। दहन बाबू शुभकामना त विपुल के देलखिन मूदा अपन सहयोग देबा सऽ हाथ खींच लेलखिन। बिपुल हारऽ बला लोक नई छलाह। ओ आनो लोक सब सऽ अपन मिशन मे जोड़बा लेल प्रयासरत छला।बदलाव खातिर एकटा जुझारू टीमक आवश्यकता होईत छई, ताहि लेल विपुल लागल छलाह। एक स एक परिस्थित सोझां आईब जाईत छलईन। अही मे स एक आईछ- _______ बिपुल के बिशनपुर रहबाक क्रम मे एकटा वाट्सएप मैसेज एलईन। ओ एना छलई- प्रिय सजल। शुभाशीष। आहां के हमर मैसेज देख क नीक नहिये लागल हैत। आहां हमर नम्मर ब्लॉक नई कयने छी, से जाईन नीक लागल। तैं जाय सं पहिने आहां के मोनक बात लिख दई छी। हम अस्पताल क बेड पर असकर परल छी। आहांक नानीमां के हम बिगईर क भगा देने छियईन। अहिनो कतऊ होई छई, सदिखन कनिते रहिती। अखईन अस्पताल क प्राथना कक्ष मे काईन रहल छथि।नर्स आयल छलाह, ऊयाह कहलक। अतुका डाक्टर जबाब द देने अईछ। कहलकई जे घर ल जईयऊन।हम कत जायब। हमर घर कोन? पप्पा सेहो आब नई रहलाह। आहां सुनने होयब। आहांक धवल मामाजी लग केपटाउन गेल छलाह।ओतई हार्ट अटैक भ गेलईन। देश नई घुईर सकलाह। अफ्रीके मे दाहसंस्कार भेलईन। आहांक नानी माँ सेहो क्रिया कर्म मे नई शामिल भ सकलीह। ओना धवल पुछने रहथिन। हमहुं कहने रहियईन। मूदा हमर सुनईया के? पप्पा के मृत्यु क कारण हमहीं छियईन। हमरे बारे मे ओ सोचईत सोचईत मरल हैताह। कहई छलाह-" हम छी ने। हम आहां के राखब। जतऽ रहब, दुनु गोटे संगे रहब।" आब उनके लग जा रहल छी। हम कोन कथा ल क बईस रहलऊं। आहां के इंजीनियरिंग मे एडमिशन भ गेल।होस्टल सेहो भेट गेल। ई बात नानी माँ के दास अंकल स पता लगलईन। ओ अस्पताल लग जे हनुमान मंदिर छई, ओई मे पांच किलो लड्डू चढेलीह।पुरा वार्ड मे बंटलीह। एक रत्ती हमरो चटेलीह। सुगर बहुत बढल छलाय।मीठ कहिया स बन्न अईछ। हम फेर भसिया रहल छी। दिमाग क सब नस काज नई कऽ रहल अईछ। मैसेज टाईप कहुना भेल जा रहल अईछ। बड्ड मोन करईत अईछ, आहां के देखबाक लेल। प्रोफाईलक फोटो देखईत रहई छी। बेटु ! आहां हीरो सब स बेसी सुन्नर छी। से कियैक नई होयब। ईयाह सुन्दरता पर आहां के मम्मी के बियाह भेल छल।आहांक मम्मी- पापा दुनु सुन्नर। हमरो अकर गुमान भ गेल छल। जकर ज्वाला मे हमर परिवार भस्म भ गेल। बेटु ! फेर कहईत छी। एक बेर आहां अबितऊं। हम सब गप्प आहां स कहितंऊ। ककरा कहबई मोनक बात । हम ओतेक खराब नई छी, जतेक कहल गेल। आहां के हमरा प्रति विरक्ति अईछ। हमरा सब बुझल अईछ। आहां के जे गप्प कहल गेल अईछ- नई सब सच्चे आ नई सब झुट्टे। एक बेर हमरो पक्ष सुईनतऊं। बुझाईत अईछ देरी भ गेल छई। सच कहु- कहियो मम्मी मोन नई पड़ईत छथि। झुठफुसियो कहि दियह- हं मम्मी । खुब याद अबईत अईछ। आब ई जन्म त पुरा भईये गेल।अगिला मे हम सब गोटे ओरिया क रहब आ संबंध जोगा कऽ राखब। अंतिम बात- एक बेर आऊ ने बेटु। मम्मी जाने अनजाने मे गलती कयने हेतीह, "माफी दे दो"। याद होयत बच्चा मे खिस्सा सुनौने रही-"माता कुमाता न भवति।" आहां लेल कोनो गलती जाने अनजाने मे नई कयने छी- अतबे बुईझ लियह। मरऽ काल मनुक्ख सच बजिते टा अईछ- ई आहां मानु वा नई मानु, हम मानईत छी। ढेर रास दुलार आ आशीर्वाद । हं एक बात आर। मम्मी के मुखाग्नि दी वा नई दी। नानी माँ के अपना संग राईख सकी त बढिया, नई त ध्यान जरूर रखबईन। अभागल मम्मी । विपुल अई मैसेज क पाछु क मर्म पता कयलाह। ई बिशनपुरक अनुभाक जीवन सं जुड़ल घटना छईन। अनुभा क मरलाक बाद उनकर मोबाइल के मैसेज बाक्स मे ई सुरक्षित ड्राफ्ट मैसेज भेटलई।आब ई मैसेज फारवार्ड भेनाई शुरू भेल । पहिने संबंधी क बीच। फेर अनुबंधीक बीच। फेर ईष्ट मित्र। ओकर बाद मैसेज वायरल भ गेलई। बिपुलो लग मैसेज अयलईन। सब लोक उनकर दुख स दुखी छलाय। खोदबेद कैला पर कियो बजबा लेल तैयार नई। मैथिल बन्न समाजक बात बाहर कोना अबितई। सब अतबे बजई- " अनुभा बड्ड दुख सहलीह। अतेक कम बैस मे चईल गेलीह।पुरा जीवन बांचल छलईन। बियाह त आब कतेक लोक के नई चईल पबई छई। तलाक भेलईन त भेलईन, बेटा सजल त संग रहितईन। सासुर बला सब एना ने सजल के ब्रेनवाश केलकई जे ओ माय के नाम तक सुनबा लेल तैयार नई छई। अनुभा के घरवाला दोसर बियाह क मजा मे रही रहल अईछ। पढल लिखल अनुभा, तलाकक बाद प्राइवेट स्कूल मे नौकरी कर लागल छलीह। देखबा मे अतेक सुन्दर लगई छलीह जे अतेक टा बेटा उनकर छईन, विश्वास स परे छलई।कुमाईरे जकां लगई छलीह। माय बाप संग रहई छलखिन। साल भईर के भीतर पप्पा आ अनुभा( बेटी) दुनु के मृत्यु के समाचार पुरा समाज के झकझोईर देने छलई। अनुभा के मां केपटाउन जाय लेल तैयार नई आ धवल (कनिया के दबाव आ कैरियर) भारत घुरबाक लेल मानलखिन नई। " अनुभाक नैहरा, बिपुलक गामे मे दोसर टोल मे छलईन। ओई परिवार के बिपुल गाम मे रहबाक कारणे आब जानऽ लागल छलाह।मानवीय संबंध आ संवेदना क नब नब परिभाषा गढल जा रहल छई। अई मे सामाजिक काज मे आगु बढनाई कठिन लाईग रहल छलईन। अई बारे मे पता कैला पर जानकारी भेलईन- "ई मैसेज घुमईत फिरईत सजल लग सेहो पहुँचलईन। जे सजल माय के श्राद्ध कर्म तक नई कयने छलाह,ओ मैसेज उनकर अन्तर्रात्मा के झकझोईर देलकईन। आब ओ जीवन मे घटित सब घटना के बदलल नजरिया सं देखऽ लगलाह। अपन परिवारक तटस्थ संबंधी आ शुभेच्छु सब सं माय बाप क बीच घटित घटना सबहक बारे मे जानकारी लेलाह।आब ओ होस्टल छोईर क अप्पन नानी माँ के संग रही रहल छथि। सोशल मीडिया के एहन सकारात्मक परिणाम हेतई, आब चर्च अही पर चईल रहल छई।" ई परिणाम कतेक स्थायी हेतई, ई के कही सकईत अईछ। अई मे पैबंद के अईछ- सजल वा उनकर पिता वा अनुभा वा उनकर परिवारक लोक? बिपुल अई पैबंदक चक्कर मे दिन पर दिन ओझरा रहल छईथ। ______ गाम मे बिपुलक व्यस्तता बईढ़ रहल छलईन। ओ एकटा स्वस्थ समाज क निर्माण करऽ चाहईत छलाह।अपन गाम मे ओ अपन विचारक पहल प्रयोग कर चाहईत छलाह। समाज मे व्याप्त विसंगति सब सुरसा सन मूंह बाईब कऽ सामने ठार भऽ जाईत छईन। कतऽ ई परिवार क परंपरा, कतऊ जाईत आधारित मान्यता, कतऊ आर्थिक विपन्नता, कतऊ अशिक्षा, कतऊ आधुनिकताक अंध दौड़, कतऊ गलत तरीका सऽ कमायल पाई त कतऊ अतृप्त एमबिसन, ई सब बिपुल के अपन राहक रोड़ा लगईत छईन।जाबईत ओ अई सब सऽ अनभिज्ञ छलाह, मार्ग सुगम बुझाईन। आब जखईन अई मे भीतर पईसलाह अईछ, रोज कोनो ने कोन नब बात सोझां अबईत छईन।ओ बुईझ रहल छलाह- एक परिवार वा गाम के विकास समस्या क समाधान नई छई।तैं ओ बेशी स बेशी समस्या सब के पहिने उजागर करऽ चाहईत छलाह। इनकर मानब छलईन, हर समस्या क संग ओकर समाधान छुपल रहईत छई। जरूरत छई अकरा स्वीकार करबाक।ओ आसपास क घटना स अनभिज्ञ नई रहई चाहईत छलाह। किछु घटनाक जिक्र आवश्यक छई जे विचार के प्रभावित कऽ रहल छलईन। ईनकर बगलेक गामक ई घटना छई। बिपुल भी रामनबाबू के मृत शय्या पर परल देखी कऽ घुरलाह अईछ। कारण अपरोक्ष रूप सं संज्ञान मे अयलईन अईछ। अकर बाद मोन विचलित छईन। बात एना छई- आई फेर रामनबाबू के तुलसी पीड़ा लग स उठा कऽ घर मे घुरा क राखल गेलईन्हि।भईर गामक लोके नई, अगलो बगलक गामक लोक उनका आईब कअ देख अयलईन। कियो गोर लाईग अयलईन त कियो थोड़ेक काल ओतअ बईस क आईब गेल। देखनिहार सभ के चाह- पान सेहो उनका कतअ भेंट जाई छईन। ताहिक लोभे सेहो किछु लोक नियमित चईल जाईत अईछ।ओना रामनबाबू आ उनकर घरक लोकक बेबहार एहन छलईन जे भईर गाम मे लोक याद करईत छईन। बिना कवनो लोभ लालच के, जे भी याद केलकईन, कम- बेशी मदद केलखिन। ओही परतापे, सब धीया पुता सुख मे छलईन। लोक कहईन जे फलमां आयल छथि- आहां के देखई लेल। बड्ड दुर सं। रामनबाबू उनका दिस ताईक लेथिन। किनको देख क मुस्कियाईयो दई छलखिन। ओ अपना के भागमंत बुझईत जे हमरा देख क मुस्कियेलाह। फेर चर्चा होई जे फलां फलां के देख क खुशी भेलईन। बजई किछु नई छलखिन। मुदा बुझाई जे किनको ताईक रहल छईन उनकर आंईख। आई फेर तुलसी पीड़ा लग सं जखईन घुरावल गेलईन त सब कहअ लगलई, किनको देखई लेल हिनकर प्राण अटकल छईन। आई त गऊदान सेहो करा देल गेलअईन हांई हांई मे। रामनबाबू के कनिया सब बुझई छलीह, रामनबाबू किनका जान सं बेशी चाहई छथिन।उनकर आंईख किनका ताईक रहल छईन? ओ आर कियो नई उनकर बड़की बेटी चान दाई छथि। दस बरख रामनबाबू के बिबाहक बाद चानदाई पहिल संतान जन्म लेलखिन। रामनबाबू के माय कतबो कहथिन, दोसर बियाह क लई लेल मुदा रामनबाबू मना क देलखिन। चान दाई के बाद पांच टा आर संतान भेलईन मुदा अंखिदेखउआ दुलारु चान दाई रहलीह। सोलह बरखक जखईन चानदाई भेलीह त तखुनका बड़का घर मे कथा ल कऽ रामनबाबू अपन बहनोई संग गेल छलाह। ओतऽ वरागत जे सब कहलखिन, रामनबाबू सब शर्त एक्के बेर मे माइन लेलखिन्ह। घुरती मे बहनोई कहबो केलखिन्ह - "आहां सब कियैक गईछ लेलियई।" रामनबाबू के ज़बाब छलईन- "आई काल्हि बाजारवाद छई।जखईन बाजार जाई आ कवनो सामान नीक लाईग जाय त ओकर मोल भाव नई करीह।" घुईर क ननदोईस सब बात सरहोईज के कहलखिन। आब उपाय की? रामनबाबू जमीन बेच कऽ बिबाह केलाह। तहिया ईलाका मे सब कहईन , अतेक कियो नई देने छल बेटी के। बिबाहक बाद चानदाई के बिदागरी मे सब बेर संशय। पहिल बेर रामनबाबू अपने गेल छलाह बिदागरी लेल। बिदागरी त नईये केलकईन, बेटी स भेंट सेहो नई भेलईन। गाम घुइर कऽ झुट्ठे चानदाई के माय के कहलकिन - " सास के मोन खराब छलईन ताय नई अयलीह।" फेर कहियो रामनबाबू चान दाई के सासुर नई गेलाह। बाकि पांच धीयापुता के बियाह दान मे सेहो चानदाई कनीक काल लेल आयल छलीह। बड़का घर बड़का व्यवहार।नैहरबाला सं सीधा भेटगांठक परम्परा नई। चान दाई कहियो सासुरक कवनो शिकायत नई केलीह।ओही दुनिया मे ओझरायल छलीह। नैहर आबस तऽ बाकि भाई बहिनक सासुर बलाक बेबहार देख कऽ सेहन्ता होईन, उनको सासुरक लोक के वालों का एहने आबेशी होईतईन? उनकर बिदागरी लेल कियो नैहर स आबई लेल तैयार नई होईत छल। बिन बिदागरी के पठबअ के परम्परा नई छलई। अई बीच मे झुला झुलईत चान दाई। एक बेर मोन हल्लुक करक लेल माय के कहबो केलखिन, बराबरी वाला कथा नीक। धन सम्पईत्त सब किछु नई होई छय। माय आशय बुझी गेल छलखिन। आब उपाय की? जखन चान दाई रामनबाबू के सोंझा जाई छलीह। दु चाईर टा नोर दुनु गोटा के आंखि सऽ टपईके जाईन। निःशब्द सब। गाम समाज मे एकतरफ लोक कहई, बेटी कऽ बिबाहक मे रामनबाबू स बेशी कियो खर्च नई कयलक? दोसर हूनकर मोन कहईन, बड़का मे संबंध क कऽ नीक नय केलाह? सब बेर सोचईत, चानदाई सऽ गलती क लेल माफी मांगब? मुदा सामने अबईन तऽ ज़बान मौन भऽ जाईन। चान दाई पढ़अ चाहई छलीह तहिया। सोलहम बरख तहिया बड बुझाई छलय। आई छब्बीसम सेहो कम। अकर बाद कवनो बेटी के ओ बड़का घरक बहुरिया नई बनअ देलखिन। बहुरिया आ मलकाईन मे अंतर सबके बुझबतिन। बहुरिया मे सास ससुर के राजबाला...बर- घर आ मलकाईन मे लायक घरबाला। सब धीया- पुता, भाई, बहिन, भातिज भतीजी, सखा - संबंधी नौकर चाकर, गंउआ सब आईब क देख गेलईन मुदा चानदाई अखनो नई अयलीह। माय चोरऊका समाद कयेक बेर पठा देने रहथिन- " आईब कऽ देख लियऊन।" चान दाई कतऽ सऽ खबास फलक मोटरी ल कऽ आईब गेल, ओ नई अयलीह। कहलकई - " बहुरिया पठेलीह अइछ।" आब माय के से हो बुझाय लगलईन , रामनबाबू क प्राण बिना बहुरिया के देखने छुईट जेतईन।ऊयाह भेलई राईत मे बहुरिया के इंतजार मे रामनबाबू बिन माफी मंगने गोकुल धाम चईल गेलाह। एक कान- दु कान होईत ई वृतांत बिपुल छोईर, सब के बुझल छल। अई मे के पैबंद भेल? बिपुलक अनुसारे परंपरा अई मे पैबंद अईछ। अकरा हटेने बिना आगु बढनाई असंभव छई। ______ गाम समाजक अखनो बहुत रास समय अहिना फुसियाही बात सब मे बीत जाईत छई। जतेक मानव संसाधन छई, ज्यों ओकरा कोनो सृजनात्मक काज मे लगावल जाय के चाही। कपड़ा पर आधारित छपाई- रंगाई उद्योग सबहक बारे मे बिदेश मे कार्यरत सफल संस्था सबहक नियमित संपर्क मे बिपुल छलाह। बहुत जल्दी ओई संस्थाक भारत मे पदस्थ प्रतिनिधि अई बारे मे विस्तृत चर्चा क लेल गाम मे आबऽ बला छल। एक तरफ नब प्रयोग आ दोसर तरफ गामक पुरातन रुढ़िवादी मानसिकता। कईस कऽ द्वंद्व मचल छलईन। अही बीच मे गाम मे एकटा नबका अनघोल भऽ रहल छलई। ई एना छलई- आई फेर भोरे स गाम मे फुसफुसी चईल रहल अईछ।कियो ककरो सीधा किछु नई कहि रहल छई। पुछला पर कहत -" नई कोनो बात।" मुदा सब व्यस्त। दिन सं सांझ भ गेल।स्त्रीगण सब कानों फलां बाबू के घरक दुमुंहा लग, तऽ कखनों महावीर मंदिर मे सांझ देबाक काल एकदोसरा सऽ पुछई छथिन? सब निरूत्तर। सबहक कान ठार। ऐना बुझाई छलई जेना चुनाव के गिनती भ रहल छई। के जितत आ के हारल? किनकर सरकार बनत-तेहने जिज्ञासा। जेना चुनाव मे पोलिंग एजेंट आ किछु पाई पर काज करअ बाला लोक के छोईर कऽ कियो नई कहत - " किनका तरफ सऽ आहां छी, ओहिना आई कियो अपन बिचार नई द रहल छल , ओ कोन दिस ? सबाले एहन छलई। पहिल बेर एहन गप्प सामने आयल छलई। गाम त गाम छी। अपना घर मे किछु हुआय, मुदा दोसरक घर पर सबहक नजर। सब उचितवक्ते आ सब ज्ञानिये। कियो कहई, हमर नैहर मे ऐना भेल रहई, कियो अपन सासुर, कियो अप्पन मातृक, कियो कोनो आर गामक। अई गामक त पहिल घटना छल। अनघोल मचल छल। की हेतई? आखिर एहन कोन गप्प छई, सब हक ध्यान अही पर। रासबाबू अई गामक सबसं कलामी लोक छलाह। हुनका जीबईत किनको हिम्मत नई भेलईन, हुनका घरक बिशेषकऽ स्त्रीगणक कियो चर्चा करय। समय बदईल गेल छई। आब कियो ककरो मुंह पर जाबी लगा सकई छई? सब स्वतंत्र। आई रासबाबू रहितईथ, तखनो गप्प नोन तेल लगा क होईबे करतई? नीक भेलईन,चईल गेलाह। बाजु, हुनकर पुतहु के लोक मुद्दा बना देने छईन। जहिया अई गाम आयल छलीह ओ, कतेक मान- दान भेल छलईन। सुन्नईर त ओहिना छलीह, पढ़लो लिखल सेहो। सब गामक लोक चाहई छलाय, कहियो ओ उनको कतअ आबस। कम्मे दिनक लेल गाम अबय छलीह। अबितो छलीह तअप्पन मोटर मे। तहिया गाम मे ककरो मोटर नई छल। कियो कियो नबका धनिक भाडा पर ल कऽ अबई छलाह।कहबाक, अलगे उनकर अंदाज छलईन। रासबाबू के बेटा राजा बाबू असम मे चाहक गार्डन मे मैनेजर छलाह। ओतई ओ रहई छलीह। ओतेक सुन्नर रहलाक बादो घरवाला उनका पर विशेष ध्यान नई दई छेलखिन। ई बात रासबाबू के बुझल छलईन। ताहि लेल देख क पुतोहू चुनने छलाह। ई सोचने छलाह- बाद मे सब ठीक भ जेतई? लेकिन से नई भेलई। तखनो संग रहलाह सऽ एक टा बेटी भेलईन। ओकरा राजा बाबू बड मानई छलाह। घरक माहौल अनुकूल नई रहबाक कारणे बेटी के हिमाचल मे बोर्डिंग स्कूल मे पढबई छलाह। झांपल तोपल सब चईल रहल छलईन। ईमहर रासबाबू के परलोक सिधार भऽ गेला पर माय के सेवा के नाम पर कनिया के पठा देलखिन। कनिया जहिना देश, तहिने परदेश। अपन हालत बुझिते छलीह। गामे आईब कऽ रहअ लगलीह। ईमहर राजा बाबू के आजादी भेंट गेलईन। जे किछु चोरा छुपा कऽ करई छलाह, आब खुल्ला करअ लगलाह। बात के पसरह मे कतऊ समय लगई छई? कंपनी क मालिक नोटिस थमा देलकईन। नौकरी छुईट गेलईन। गाम घुईर अयलाह। किछु दिन क बाद मोन उचटअ लगलईन। बहिनोई गुजरात मे अधिकारी छलखिन। ओत गेलाह। सब ठीक छलईन। नब नौकरी के सेहो जोगार भऽ गेल छलईन। एक दिन राईत मे शराब पी कऽ आयल छलाह। बहिनोई के ई ठीक नई लगई छलईन। ओ ईनकर बहिन के किछु नैहर पर कटाक्ष केलखिन। बहिन ई सब खीस राजाबाबू पर उताईर देलखिन। राजा बाबू बहुत दुखी भेलाह। राईत मे सब के सुतले छोअईर कऽ चईल गेलाह। भोर भेलाह पर सब बुझलकई। बहुत खोजबीन भेल। पुलिस मे सेहो रिपोर्ट भेल। अखबार, टीबी मे सेहो फोटो छपवावल गेल। मूदा सब फेल। उम्मेद सब के छलई , राजाबाबू बेटी के जन्मदिन पर फोन करबे करथिन? ओहो बीत गेल। कतऊ स कोनो समाचार नई। आई बारह बरख भऽ गेलइन, राजाबाबू के निपत्ता भेलाह। आब जे कानाफूसी भऽ रहल छई, से उनके श्राद्धक बारे मे। लोक के उनकर कनिया के पहिरल ओढल आ सधवा वाला खान पियन पईच नई रहल छई। राजा बाबू के कनिया तऽ असगर जीवनक पहिनेहे सऽ आदी छईथ, से त सबके नई बुझअ देलखिन। आब अनघोल मचल छई गाम मे, बारह बरख बीतलई, आब की हेतई? की भईर जीवन राजाबाबू के कनिया सधवा रहतिह या विधवा? अकरे कहई छई फुसिये के घमर्थन। मुदा अनघोल त मचले छई। गामक लोक के अखनो रोजगारपरक शिक्षाक जगह ई सब बात मे बेशी दिलचस्पी छलईन। ई सब घटना बिपुल के कमजोर बना रहल छईन। राजा बाबू के कनिया मान्या पढ़ल लिखल आ गुणल महिला छईथ। बिपुलक कपड़ाक छपाई प्रोजेक्ट मे आगु बईढ कऽ हिस्सा लऽ रहल छलीह। ऊनकर सक्रियता गामक कीछु लोक के नई देखल गेलई। ओ सब सधवा वा विधवा? ई नब शगुफा समाजक बीच छोईर कऽ छपाई प्रोजेक्ट के ओझरा रहल अईछ। बिपुल बुझईत छईथ- " नीक आ क्रान्तिकारी काज के सबदिना अई सब षड्यंत्र क बाट सऽ गुजरऽ परल छई। तखनो, बिपुलो मनुक्खे छईथ। आब ओ पैबंदक ईलाज छोईर वापस विदेश जयबाक बारे मे कखनो काल सोचऽ लागल छईथ। ______ बिजयक मित्र वर्ग बरकी टा दिल्ली मे छलईन। ब्युरोक्रैट्स मे उनकर अपन एकटा अलग सम्मानजनक स्थान छलईन। मानव जीवनक हर पक्षक ओ अनुभव कैने छलाह, अई ल कऽ उनकर कहल बात आ बनायल रिपोर्ट सब अखनो प्रासंगिक छलई। बिजयक करीबी मित्र मे सऽ स्वजातीय हेमबाबू छलाह। ओ सेवानिवृत्तिक बाद दिल्लीये मे रहईत छलाह। बिपुल बहुत दिनक बाद अपन प्रोजेक्ट क बारे मे दिल्ली गेल छलाह। ओतऽ ओ हेमबाबू सऽ सेहो भेट कैलाह। उनका स जे गप शप भेलईन, ओई अनुसार परिवारक परिभाषा के फेर सऽ परिभाषित करबाक आवश्यकता छई। वृतांत ऐना छई- हेमबाबू भारत सरकार मे पैघ पद स सेवानिवृत भेलाक बाद दिल्ली मे रही रहल छलाह। किछु दिन पूर्व दिल्ली मे उनका स भेंट करअ गेलऊं। बड खुश भेलाह। हुनक धीया- पुता क हाल चाल पुछला पर ओ तऽ मौन छलाह, मूदा हंसिते हुनक श्रीमती जी जे कहलीह से सुईन लियअ। बात आगु बढ़ाबअ सं पहिने हिनक घर परिवार के बारे मे कनी बुईझ लियअ। हेमबाबू के तीन टा बेटा छलईन। जेठ बेटा कनिक बेशी प्रगतिशील छलखिन। ओ पहिने लिव इन, बाद मे अपना सऽ संतान नई करबाक वादा देलाक बाद, विवाहित जीवन अलग रही कऽ बितबई छथि। दोसर बेटा विदेश मे रहई छलईन आ ओतई सड़क दुघर्टना मे अकाल मृत्यु भ गेलईन। तेसर बेटा , डाक्टर छलईन,के जल्दिये नीक कुल-शील देख कऽ मैथिल परिवार मे विवाह करा देने छलखिन। तेसर बेटा - पुतोहु संगही रहई छलईन।एक टा पोता सेहो भेलईन। सब दुख बिसईर क हेमबाबू पोता संग खुशी सऽ समय बितबई छलाह। की भेलई? से ककरो नई बुझल। एक दिन छोटका बेटा कैरियर आ नीक मौका बता कऽ बम्बई सपरिवार जाय के अनुमति माय बाप सऽ मंगलाह। घर मे मातम जेकां हाल भअ गेल छलईन। हाईर कअ हेमबाबू परिस्थिति सऽ समझौता क कऽ अनुमति दऽ देलखिन। फोन पर पोता सऽ भोर सांझ गप्प सप्प होईत छलईन। एक दिन पुतोहु के फोन, सास के एलईन -" मुड़न के नीक दिन तका दई लेल?" हेमबाबू के कनिया तुरंत पण्डित जी के बजा कऽ, तीन टा दिन तका कऽ पुतोहु के बता देलखिन। आब हेमबाबू सब तैयारी मे लाईग गेलाह - "फलां फलॉ के बजेबई, एना भोज करब...। " मोने मोने लिस्ट बजट सब बना नेने रहईत। रोज दुनु बेगत मे घमर्थन होईन - " ओकरा बजेबई। ओकरा नई। फलां के मूंहछुआन कहीं देबईन।ओहो तअ जनऊ मे अहीना कहने रहईत।" रोज दुटा नाम जुड़ईन आ एक टा कटईन। किछु अपन लोक के ओहिना नोतो दऽ देने छलखिन। अपन सोईच सोईच कअ हेम बाबू दुनु बेगत रमन चमन करईत छलाह। कनिया जखईन तखईन कहई छलखिन -" आहां बेशी मधुर नई खाय लागब। हम तऽ पाहुन मे व्यस्त रहब आ आहां अपन मौका सुतारअ लगई छी। चीनी आहां के बहुत बढ़ल अईछ।" हेमबाबू कहलखिन- " पहिल पोता के मुड़न होयत आ हम मधुर नई खाई, से नई भअ सकईत छई। " कनिया बजलखिन- "बेशी नई खायब?" अंत मे दुनु गोटे मे समझौता भेलईन - "एकटा भोर आ एकटा सांझ मधुर खेताह।" हेमबाबू के कनिया के तअ चीनी के बीमारी नई छलईन। ओ कहलखिन -" हमरा मधुर खाईत देख कअ आहां डेकसी नई करअ लागब।" अहिना गप सरक्का दुनु मे होईत रहई छलईन। जे बाजा भुक्की आपस मे बन्न भअ गेल छलईन, से कतअ दन बिला गेलईन। जखईन मोन नई लगईन, मुड़न के चर्चा शुरू कअ लई जाई छलाह। अही बीच बम्बई सऽ पुतोहु के फोन सास के एक दिन अयलईन- " मुड़न वाला केश के कोना भसबल जाई छई?" सुनी कऽ दुनु गोटे स्तब्ध भऽ गेलाह। सास, पुतोहु के विधि बता देलखिन।मोनक मनोरथ मोने रही गेलईन। पोता के मुड़न के मनोरथ। ई सब कहअ मे कनिको हेमबाबू के कनिया के चेहरा मलिन नई भेलईन। हंसिते कहलिह-" ईयाह हाल छईन। आब की गामबाली आ की भदेश। सब एक्के।" कही कऽ ठहक्का मारलिह। ई सब सुईन कऽ बिपुल फेर भावुक भऽ गेल छलाह। ऊनको बेटा के मुड़न अखईन नई भेल छलईन। उनकर मां तनुजा अई लेल चर्चा कैने छलखिन। बिपुल ओई पर ध्यान नई देने छलखिन। इनका ई सब व्यर्थ मे आडम्बर लगईत छलईन। आई ओ अकर दोसरो सामाजिक पक्ष जनलाह। सामाजिक परंपरागत व्यवस्था के बिना ध्वस्त कयने समाजक नवनिर्माण कोना कैल जाय, विपुल के प्राथमिकता मे छलईन।कयेक बेर ओ जल्दबाजी मे तात्कालिक घटना स प्रभावित भय निर्णय ल लईत छलाह। अहु मे ईयाह भेलईन। दिल्ली स ही मां तनुजा के फोन केलखिन आ बेटाक मुड़नक आयोजन अपना अनुसारे करबाक निहोरा कैलखिन। तनुजाक प्रसन्नता क अंदाज फोने पर बिपुल के लाईग गेल छलईन। ________ बिसनपुर मे बीस टा टोल छई। ओही ल कऽ अकर नाम बीसन पुर भेल छई। कियो अकर गामक विष्णु मंदिर सऽ सेहो जोईर कऽ कहईत छई। बरकी टा गाम आ बारहो वर्ण अई गाम मे भेटत। सरस्वती आ लक्ष्मी दुनुक वास अई गाम मे छईन। ई वर्ण व्यवस्था के बारे मे बिपुल के कीछुयो ज्ञान नई छलईन। आब गाम मे रहबे टा नई, सामाजिक काज मे पुरा जोर शोर सऽ घुसलाक बाद बहुत बातक पता लगलईन। अखनो इनकर छोट भाई विनय के ई सब नई किछु बुझल छईन आ नई जनबाक जिज्ञासे छईन। आई फेर बगलक टोल मे नब बात सामने उभईर कऽ आयल छई। आई स पहिने बिपुलो के ई बात सब नई बुझल छलईन। पुरा वृतात ऐना छलईन- आई पुरा डीह टोल मे चहल पहल छई। नरेन मिसरक पोता महेंद्र विदेश सं आईब रहल छईन। ओ गाम मे कुलदेवी के पातईर सेहो देतई। सब इंतजाम बात भअ गेल छई।ओ पहिनेहे सऽ कनिया काकी के बेटा के बैंक एकाउंट मे पाई पठा देने छई। आब देरी छई त बस ओकरा पहुंचबाक।भईर डब्बुक तसमई बनल छई। पुरी छना रहल छई। रसगुल्ला पहिनेहे बजार सं आईब गेल छई। कयेक बेर लोकक क गिनती भेल छई। सब मुड़ी पाछु दु टा कअ रसगुल्ला आयल छई। जड़दा आम सेहो कटा कअ राखल छई। थोड़े काल पहिने फोन आयल छलई -" ओ पहुंचअ बाला अईछ।" पुरा हुईल माल मचल छई। कियो ओकरा देखनेहो नई छई। फेसबुक पर किछु लोक देखलकई आ वाट्सएप पर गप्प सड़क्का भेल छई। मऊगी महाल मे बेशी बेगरता छई। कोइलख वाली कहलकिन -"उनकर कनिया सेहो संग छईन?" ओई पर धमौरा बाली टिपलकिन- "ओ तअ आन जाईत छई?" रानीपुर वाली कहलकिन- "आहां के त सब बुझल अईछ। कहियो भेंटो भेल अईछ? बजेबो केने छल?" धमौरा वाली - "हमरा किया बजैत। हम तीन मे की तेरह मे। जिनका सं अपेक्षा रहईन, ओ ने जेताह। हम त जे सुनल से कहल। हमरा तीन पांच नई रहईत अईछ। किनको नीक लागय त लागय, अधलाह लागय त सेहो हमरा नई परवाह। दु कौड़ अपना घर मे ओ बेशी खेतीह।" जबदौल वाली बजलीह- "छोड़ु ई जाईत आ अनजाईत बाला गप्प। गाम मे त आब अनजाईत कनिया सब आईब गेल छई। ओ सब तं सद्यः विदेश मे रहई छथि। सबदिना बाहरे बाहर पढ़ई आ रहई गेलाह। आब की कोनो घर बांचल अईछ। रामजी आ सीताजी के की एक जाईत छलईन?" बस शुरू भअ गेलई। सब गामक अही तरहक विवाह आ नबकी कनिया सबहक चर्चा।कियो आटा साईन रहल अई, कियो परथन दअ रहल छई, कियो मैन मे कंजूसी नई करबाक लेल कही रहल छई, कियो पुरी बेल रहल अई, कियो गिट्टी बना रहल अई, कियो पुरी छाईन रहल अई। सऊंसे टोलक स्त्रीगण अपने लागल अईछ। आखिर ईयाह खानदानक लोक आईब रहल छई।कनिया काकी सब के थम्हने छथि। ताबिते मोटर के हार्न बजलई। सब माथ पर नुआ लईत दलान दिश लपकल। देखते अंदाज लाईग गेलई -" महेंद्र, उनकर कनिया आ कोरा मे बच्चा छई।" महेंद्रक चेहरा अनमन रबिन्द्रक जेकां छलईन।" देह पर भुलकी रोईयां"- ई डीह टोलक चिन्हासी छई। महेन्द्र के देखते बुझा गेलई - "ओ अई परिवारक अंश अईछ। महेन्द्र आ उनकर कनिया सबके गोर लागअ झुकलई, तखने झट दं सुगांव वाली कहलखिन- "पहिने भगवती घर चलु। ऊनका गोर लगियऊन, फेर सबके लगईत रहब। कियो भागल नई जाई छईथ। " सुगांव वाली मौका देख कअ अपन बुधियारी के दावा जता दई छथिन। जतअ भगवान भगवती के बात बीच मे आईब जाई छई, ओतअ मऊगी मेहर विरोध नई करत। सब हां मे हां मिलेलक आ विदा भेल भगवती घर। पुरना घर सबहक चौखट बेशी जगह नीचे रहई छई। कनिको ध्यान इमहर ओमहर भेल, की माथ मे चोट लागल? आब खान-पान पर बेशी ध्यान लोक बच्चे सं देबअ लगलईया। नई तं पहिने ई छह फीट्टा लोक कहां होई छलई। घरक चौखट गिरहथक लंबाई सऽ चाईर आंगुर बेशी रहई छलई।अतऊ भगवती घरक चौखट कम्म ऊंच छलई। पुरना गिरहथ छोटे ऊंचाई के हेताह। ईहो भअ सकई छई जे भगवान भगवती लग माथ झुका कअ जाई, तैं जाईने बुईझ कऽ दरवज्जा छोटे रहईत होई। जे भी सच होई, नब लोक के माथा मे चोट लईगते टा छईन। पहिनेहे महेन्द्र के चेताऽ देल गेलईन -" माथ झुका कअ जायब। " तखने पाछु सं सरयां बाली बजलीह- "अतेक काल थम्हलऊं त कनी आरो थम्ह जाऊ। पातईर चढ़अ दियऊ, तकर बादे भगवती के गोर लागु?" ईहो प्रस्ताव एकमत सऽ पारित भअ गेल। आई कियो ककरो विरोध नई कअ रहल छई। कहीं कोनो विचार दी आ ओ नई मानल जाय। तखईन तअ बेजती भअ जायत। महेन्द्र क कनिया की बुईझ लेत?सब अपन अपन वेल्यु बढ़बअ मे लागल अई। आब पातईरक ओरियान शुरू भेल । ईमहर खुसुर फुसुर चईल रहल छल। जे सब महेंद्रक कनिया सं कने दुर मे छलीह ओ सब आंईखे आंईख मे सब गप्प कअ रहल छलीह।आंईख सअ ओकर एक्सरे लिया रहल छलई। आरो टोल के बच्चा आ पुरूख पातर सब बहरी मे जमा छल। पातईर भेल। परसादी बंटायल। रमेश मिसर बजलाह- ई बंगलिया कतअ के रसगुल्ला छई। महेश ज़बाब देलखिन- हं। हमरा कतअ त ओकरे सं अबईत अईछ। रमेश मिसर- आब बंगलियो के ओ बात नई रहलई अईछ? ओकर बाप जे बनबई छल- "अद्भुत"। तखने जीवेन्द्र बजलाह- "कका रहअ दियऊ। हम सब त अकरे मिठाई खाईत बढ़लऊं अईछ। जखईन ओकर बाप के बनायल खेनहे नई छी, तअ चर्चा कअ कअ की फायदा?" रमेश मिसर- "कमाल करई छं तों सब। तु नई खेलह तऽ ओई मे हम की करियह? हम खेने छी, तैं बजलऊं। तोहर बाप तअ रोज सांझ मे बंगलिया कतअ जाईते छलखुन।" जीवेन्द्र- " देखु बाप पर नई जाऊ। हम आहां के देखई छी, आई काईल बात बात पर आहां बाप के बीच मे घुसा दईत छी। कका छी तैं? नई तं हम देखा दईतऊं?" रमेश मिसर- " तुं की देखेबह? हम तोरा सऽ पुईछ कअ बाजब! एलाह आय बड़का। तोहर बाप के तऽ मुंह हमर सामने खुजिते नई छलईन। ई दु टा पाई ठीकेदारी मे कमा लेलाह अईछ, त हमरे सीखबई छईथ - की बाजु आ की नई बाजु।" जीवेन्द्र- " देखु कका हम अंतिम बेर आहां के कही रहल छी।आब अततः भअ रहल अईछ। हमर संयम के परीक्षा नई लियह।" ईयाह गर्मा गर्मी भअ रहल छलई। बेचारे महेंद्र अपसियांत भअ सब देख सुईन रहल छलाह। जोर सऽ बहस सुईन आंगन सं कनिया काकी दौड़लीह। फेर थोड़थाम लागल। सब परसादी खेलक। किछु लोक विदा भेल आ किछु बईसले रहल। महेन्द्र के ई महानगरक " रोडरेज" जकां लगलईन। क्षण मे क्षणाक भअ जाई छई। अखने लड़ाई होईत होईत बचलई। महेन्द्र ताबईत देखईत छईथ - " रमेश मिसर आ जीवेन्द्र कोनो गप्प पर कोना मे ठार भअ कअ ठहक्का माईर रहल छईथ।" महेन्द्र त बहसक शब्द सुईन कअ घबरा गेल छलाह। बाकी लोक खातिर धन सन। सब सामान्य भअ गेल छलई।देख कअ बुझेबे नई करीतय , अखने मारा पीटी के नौबत एतऽ भेल छलई। महेन्द्र अतुका लोकक आबेश देख कऽ अभिभुत भअ गेल छलाह। ओ अपना के अई भीड़क हिस्सा बुझऽ लागल छलाह। कनिये काल मे ओ ओतऽ घुईल मिल गेल छलाह। बुझेबे नई करई, पहिले बेर ओ अयलाह अईछ।ओ कतअ सं अबितैथ? उनकर पिता हरेन्द्र मिसर, अंतिम बेर बाबा नरेन्द्र मिसरक श्राद्ध मे आयल छलाह। ओई समय महेंद्र क जन्मो नई भेल छलईन। आखिर कोन एहन टीस छलई , हरेन्द्र मिसर के अपन पितृ भूमि सऽ विरक्ति भअ गेल छलईन। बात तहिया के छई, जहिया असली मे जमींदारी चईल गेल छलई, मूदा खूनक जमींदारी नई गेल छलई। ई खुनक जमींदारी सऽ किनको हत्याक बात नई छलई, अकर अर्थ छलई - " फुसियाही शान। " ई नरेन बाबु के सब किछु लअ कअ डुबा देलकईन। नरेन बाबु क बियाह अपना सऽ पैघ जमींदारक बेटी सऽ भेल छलईन। नरेन बाबु दु भाई छलाह। छोटे मे टुगर भअ गेल छलाह। जेठ भाई चमन बाबु इनकर पालन पोषण केलखिन। नरेन बाबु अपन भाई भौजाई के परम भक्त भऽ गेल छलाह।ई भक्ति के किछु लोक आने रंग दऽ देने छलईन। नरेन मिसर आ उनकर भौजी के संबंध पर कयेक टा खिस्सा पिहानी उनकर सासुरो मे घुमईत लुटन बाबु के कान तक पहुंच चुकल छलईन। नरेन बाबु के कनिया के, अतेक भाई भौजाई के आगांपाछु घुमनाई नीक नई लगई छलईन। उनका अनुसार आहांक भाई तऽ घरक धन सऽ आहां के पलला पोसला। अहुं के तऽ आधा हिस्सा भेल। अई मे उपकार की? सत्त की छलई, ई तऽ उनकर सबहक संग दुनिया सं विदा भअ गेल छई। अहिना छोट छीन गप्प पर टेना मेनी होईत छलईन। एकबेर नरेन बाबु के कनिया अपन तीन टा छोट छोट संतान संग नैहर गेल छलखिन। विदागरी लेल खबास गेलईन। नरेन बाबु के ससुर लुटन बाबु विदागरी सं मना कअ देलखिन। फेर की छलई। नरेन बाबु के चट्ट सं उनकर भाई दोसर बियाह करा देलखिन।अई सं लुटन बाबु के अपन शान मे गुस्ताख़ी लगलईन। ओ अपन बेटी के ओतई बसा लेलाह। चाईर बेटा आ एक बेटी छलईन। ओ अपन बेटी के बेटा बुईझ पाचम हिस्सा द देलकिन।पाचम हिस्सा बक्तम छलई, लिखतम नई। नरेन बाबु क्षणिक शान मे आईब कऽ दोसर बियाह कऽ तऽ लेलाह, लेकिन अपन पहिल कनिया आ बच्चा सब के बिसईर नई सकलाह। जमींदारी त पहिनेहे खत्म भअ गेल छलईन। ऊपर सं अई तरहक परिवार के छिन्न भिन्न होईत देख कऽ नरेन बाबु अर्द्धविक्षिप्त जकां बाद मे भऽ गेल छलाह। सब संपईत विलाय लागल छलईन। ऊमहर नैहर मे संपईतक बल पर हरेंद्र आ आर बच्चा सब नीक पढ़लकईन लिखलकईन। बापक जगह तऽ आर कियो नई लअ सकईत छलई ? ई कमी ओकरा सब दिन लगले रहलई। उपर सऽ " भगिनमानक" तगमा। लुटन बाबु जाबईत जीलाह, ताबईत तऽ पाचम हिस्सा भेंटलईन। बाद मे माम सब दियाद बईझ परेशान करऽ लागल छलखिन। हरेंद्र बाद मे विदेश मे नौकरी करऽ लगलाह।उनकर आर भाई सब सेहो जतऽ जतऽ नौकरी केलाह, लालाभाई जकां ओतई बईस गेलाह। आपसी कोनो हेमक्षेम भेबे नई केलईन। हरेंद्र अई सब दुखक कारण अपन पिता नरेन बाबु आर कका चमन बाबु के बुझई छलाह। किछु बरख बीतला बाद नरेन बाबु तऽ अपन सासुर एनाई गेनाई शुरू कऽ देने छलाह, लेकिन उनकर कनिया फेर कहियो सासुर नई गेलीह। सऊतीन तर बसनाई उनका मंजुर नई छलईन? तहिया दु तीन बियाह सामान्य गप छलई। लेकिन ओ बड्ड स्वाभिमानी छलीह। ओ नरेन बाबु के जीबईत सासुर नईये एलीह। जखईन नरेन बाबु मरलाह, तऽ ओ ऊनकर श्राद्ध मे एलीह। हरेंद्र के जेठ बेटा होबाक कारण बापक मुखाग्नि कऽ अधिकार भेंटलईन। माछ मासक परात जे हरेंद्र, उनकर भाई सब आ माय नैहर घुरलीह, से फेर कहियो सासुर नई गेलीह। हरेंद्र के ततेक ने कुंठा घेरने रहईन, ओ मातृक मे सेहो माय के मरला के बाद माम सब सऽ संबंध नई निभा सकलाह। सब भाई सब मिल कअ जमीन जथा बेच लेलाह।ओई सऽ ओतुका समाज सेहो ईनका सब के निरईस देलकईन। पैतृकक आर्थिक स्थिति नरेन बाबु के मरलाह के बाद जर्जर भऽ गेल छलईन। अई पचड़ा सऽ बचऽ लेल ओ सब अपना के अलग थलग कऽ लेने छलाह।बाकी भाई के त नई, लेकिन हरेंद्रक कनिया के बड्ड मोन करईन सासुरक गाम जयबाक। लेकिन , हरेंद्र कहियो अनुमति नई देलखिन। हरेंद्रक कनिया मरऽ काल अपन बेटा सब के कहलखिन - " आहां सब अपन कुलदेवी के दर्शन जरूर कअ लेब, भअ सकाय तअ ओतऽ पातईर देब।" जीवन उतार चढ़ाव संग चईल रहल छलईन। आपसी सामंजस्य क अभाव परिवार मे देखाईत छलईन। कीयो मध्यस्थ करऽ बाला नई छलईन। मुंडे मुंडे मतिर्भिन्ना बाला हाल छलईन। हरेंद्र आ उनकर भाई सब के कियो सीखेबे नई केलकई, कका काकी , गाम घर आ सखा संबंधी भी किछु होई छई? ओ सब संबंधी बुझबे नई केलकई। माय आ भाई सऽ सबहक कुचेष्टे सुनलकई। ईयाह सब मोन मे भरलई आ ककरो प्रति ममत्वक भाव नई पनपलई। समयक अपन बहाव होई छई। उनकर पैतृक परिवार बहुतही आगु बईढ़ गेल छलईन। हरेंद्र क घर मे पद आ पैसा भेलाक बावजुदो भाबंश नई बुझा रहल छलईन। महेन्द्र के उयाह मायक गप्प सुतला मे झकझोरईत रहई छलईन। आब गाम जाय सऽ रोकअ बाला पिता हरेंद्र सेहो नई जीबई छथिन। गाम आईब अपना के बीच पाईब महेंद्र सब पहिलुका गला शिकवा बिसईर गेल छईथ। अफसोस होई छईन, मायक जीबिते किया नई एलाह। आई नई एला गेलाक कारण बहुत रास संबंध मे गांठ पईर गेल छलई। आब सब गांठ खुईल गेल छई। आब अफसोस ईयाह होई छईन, कियैक ने एकटा ठांव उनको अपन पैतृक गाम मे छईन? जखने अकर चर्चा होई छई,नरेन मिसरक अई घरक पुतोहु , जे आब कनिया काकी भअ गेल छथि, तिनकर कान ठार भअ जाई छईन, जे कहीं ई दियाद बईन संपईत ने बंटा लियाय? ई सोचिते सब आबेश फुर्र भअ जाई छईन।होई छईन , कहीं ई रहअ लेल तअ नई आयल अईछ? जाय के चर्चा नई कअ रहल अईछ? दियाद बाद त चढ़ेबे करतई। हमर संपईत बंटबाईये कअ मानत? ईयाह सब सोचिते छलीह की तखने मोटर फेर आईब गेलई। महेन्द्र मोटर मे सपरिवार बईसल अपन डीह टोल के देखईत वापस जा रहल छलाह।ओकरा अपन पिताक निर्णय पर पछतावा भऽ रहल छई। एकटा बिदागरी सनक छोट बातक कारण ओ अपन खानदान सं कईट गेल आ झुठक शानक बलि वेदी पर चईढ़ गेल।पछतावा तऽ नरेन मिसर के सेहो भेल छलईन दोसर बियाहक बाद, लुटन बाबु के सेहो भेल छलईन बेटी के घर उजरला के बाद, हरेंद्र के सेहो भेल छलईन सबसं कटला के बाद। आई महेंद्र के पछतावा भअ रहल छईन, सबसं जुड़ला के बाद। पुरान कहबी छैक- "अब पछतावे होत क्या, जब चिड़िया चुग गई खेत", एहने लेल कहल गेल छई। एहन आबेश तऽ अपने सं भेंट सकई छई, विदेश मे के केकरा चिन्हई छई? ओतअ तअ आबेशो के मोल छई। भारी मोन सं महेंद्र घुईर रहल छलाह। अई संग संग किछु निर्णय सेहो लेबाक भाव अबईत जाईत रहल छलईन। अई सबहक साक्षी बिपुल छईथ। ओ अई मे अपना के एकटा पात्र बुईझ रहल छईथ। उनको स्थिति अनमन एहने छलईन। आई ज्यों बिदेश मे बईस जईतईथ? फेर कोना एहन जिनगी भेटतईन। कनीक जल्दबाजी सऽ मिश्रौली छुटिये गेलईन। आब ओ सोईच रहल छईथ, एक बेर पैतृक गाम जाई। की अहिना ओतुको लोक उनका देखी कऽ खुश हेतईन? उनको कुलदेवी आ कुलदेवता हेतिन? अहिना भुलकी रोईयां बला कोनो चिन्हासी छई? ओ उत्तेजना मे आईब गेल छईथ। कीछु निर्णय लेबाक समय आईब गेल छईन। ________ तनुजा पोताक मुड़न प्रस्ताव पर तऽ उत्साहित छलीह, मूदा जखईन जगहक निर्धारणक सवाल ऊठलई, ऊनकर मोन हुस्स भऽ गेलईन। तनुजा दिल्ली मे मुड़नक आयोजन करऽ चाहईत छलीह। ओ रहितो दिल्लीये छथि आ अपन सब काज दिल्लीये मे कयने छलीह। ऊनकर संगी- साथी, लोक- वेद आ किट्टी पार्टी सब तऽ दिल्ली मे ही छईन। बिपुल गाम मे मुड़न करऽ पर अरल छलाह। बिपुलो स बेशी उनकर कनिया गामक पक्ष मे छलीह। बड्ड घमर्थन भेलई जगहक पाछु। तनुजाक होईन, बिपुल कनियाक कहला सऽ गाम लेल एना जिद्द कऽ रहलाह अईछ। पहिने तऽ एना नई करईत छलाह। ओ विनय के सेहो सब बात कहलखिन। विनय के जेतबा बईन परलईन, बिपुल के बुझबऽ के प्रयास कैलाह।कनीक दुनु भाई मे मतांतर सेहो अई ल कऽ भऽ गेलईन। बिना बातक बतंगर भऽ गेल छलई। बात की तऽ बुढ़ियाक फुईस। अंत मे मुड़न गामे मे भेलई। विनय नई आईब सकल छलाह। तनुजो दुईये दिन लेल गाम आयल छलीह। मुड़नक प्रात दिल्ली घुईर आयल छलीह। सामान्ये स्तर पर मुड़नक आयोजन भेल छलई। ओना ई सांकेतिके छलई। बरुआ के तऽ केश कहिया ने आ कय बेर कईट चुकल छलईन। अपन कहबाक लेल मुड़नक विध भऽ गेलई। बिपुल के ओतेक समर्थन आब गाम - समाज मे नई भेट रहल छलईन। अखनो लोक गाम मे रहबाक लेल तैयार नई छल। लोक सब बिदेश कोना जाई, ओही लेल जोगार मे बिपुल लग अबईत छल।बिपुलक बात गामक लोक के कोरा भाषण बुझाईत छलईन। ओ सब विदेश जाय चाहईत छल आ विपुल ओकरा सब के गाम मे रहई लेल कही रहल छलाह। अही बीच एक दिन विनयक फोन बिपुल के अयलईन। विनयक संगीक पिता विदेश सऽ आब बिहार मे रहबाक लेल जा रहला अईछ। ओ ओना इंजीनियर छलाह। जल संरक्षण पर उनका विशेष अध्ययन छलईन। संयुक्त राष्ट्र संघ आ विश्व बैंक क कयेक प्रयोजना मे सलाहकार रही चुकल छलाह। ऊनकर भीतर अखनो बिहारक गाम बईसल छलईन। ओ अपन अनुभव सऽ बिहार क समाज के निस्वार्थ आ निःशुल्क सेवा करऽ चाहईत छलाह। अही लेल उचित प्लेटफार्म क तलाश मे छलाह। बिपुल ओई व्यक्ति क संपर्कक पता ल लेलाह। इनको तऽ एहने लोक चाहई छलईन। ईनकर नाम दमन छलईन। बिपुलक जिलाक ओ वासियो छलाह। एक दिन दमन बाबू अपने बिपुल सऽ समय ल कऽ इनकर घर पर आयल छलाह। ओ अपन अनायास भारत घुरबाक आ युवावस्था क बीतल याद के बारे मे बिपुल के कहलखिन। ईनकर कहबाक शैली भी बहुत आकर्षक छलईन।ऊनकर अयबाक पहिल प्रयोजन अपन बहिनक उपराग क निवारण छलईन।पुरा वृतांत एना छलई- दमन बाबु बीसो पच्चीस बरखक बाद बहिनक सासुर अयलाह अईछ। कतअ सअ अबितैथ? बहिन अपने शहर मे डेरा पर रहई छलीह। पहिने बहिनोई मिसर के जतअ जतअ बदली होईन, ओतअ रहई छलीह। बाद मे जखईन बच्चा सब पैघ भेलईन तऽ ओकर पढ़ाई दुआरे रांचिये धअ कअ रहलीह। बहनोई अपन असगरे बदली बला शहर मे रहई छलाह। जखईन शहर लग रहईन, तअ शईन- रईब मे रांची आईब जाई छलाह........मूदा बाद मे जखईन बदली दूर भऽ गेलईन.........तखईन दरमाहा लअ कऽ महीने महीना रांची अबईत छलाह। कष्ट त होईन लेकिन धीया पुता के पढ़ाई आ भविष्य क लेल माय बाप के त्याग तऽ करहे पड़तई।अहिना दिन बितईत छलईन। दमन बाबु सिन्दरी सऽ इंजीनियरिंग केलाक बाद बाहर निकईल गेल छलाह। कोनो भी जग परोजन मे शामिल नई होई छलाह। आई जेकां सस्त हवाई यात्रा तहिया नई रहई। दमन बाबु के सोच छलईन, जतबा आबऽ जाय मे खर्चा होयत, ओतबा जे घरबईया के पठा देबई तऽ बेशी मदद हेतई। शुरू मे तअ संबंधियो सब के डालर भेटईन तऽ नीक लगईन। किनको दमन बाबु सं कोनो शिकायत नई छलईन। जहिया ओ दिल्ली अबई छलाह......सब सगा संबंधी भेंट करअ अबईन। सब के जाईत काल किछु ने किछु दमन बाबु देबो करथीन। खुब जश छलईन। नब नब कुटुम्ब सब सेहो डालर के चक्कर मे भेंट करअ अबिते छलईन।सब ठीक चईल रहल छलई। दमन बाबु के बिदेश कहियो सं नई सोहाई छलईन। दु टा पाई बेशी भेटलईन, तैं ओतअ गेल छलाह। बाद मे धीया पुता आ आंगन सं, भारत घुरबाक तैयार नई भेलकिन, तैं ओतई रही गेलाह। जखने बच्चा सब व्यवस्थित भेलईन, भारत घुरबाक सोचऽ लगलाह।बहुत रास बदलाव के बारे मे पढ़ईत सुनईत रहई छलाह। अई बीच मे बहिन सेहो एकदिन बड्ड उपराग सं भरल चिट्ठी पठेलखिन- "तुं सब बड़का लोक भऽ गेल छऽ। हमर कोनो काज/ करदेवता मे नई उपस्थित भेलह।गाम मे घर बनेलऊं, सेहो नई देखबाक सेहंता भेलह। हमरा तोहर डालर नई चाही। हम तअ पहिनेहे तोहर पठाओल पाई के घुरेबाक चाहई छलऊं..... मूदा तोरा तकलीफ हेतह, तैं नई वापस केलियह। बहिन लेल, भाई के काज मे सदेह ठार रहनाई , सबल बनबई छई। हम सब कोनो भिखारी छी? पाई पठा दई छऽ। कहियो तोरा छगुन्ता नई भेलऽ, भगिन जमाय के देखी?.....बहिनक पुतोहु आ पोता पोती सं भेंट करी? ओकरा आईब कअ जे आशीर्वाद देबअ, ओई सं बईढ़ कअ किछु नई छई। मिसर तोहर दुखिताह रहई छथुन, से त? बुझले छह। आब गाम मे ओतेक दवाई - दारु नई भऽ रहल छईन। आईब कऽ भेंट कऽ जहुन। हमर बियाहक बाद तोहर जन्म भेल छह। अपने बच्चा जेकां तोरा मानई छलकुन...... से तों अबरजात बन्ने कऽ देलह। हमरा पाई कौड़ी नई चाही। मिसर के पेंशन तऽ हम खर्चे नई कअ पबई छी। पाई बचिये जाईत अईछ। पहिने तऽ बच्चा सबहक पढ़ाई-लिखाई के कारण हाथ शिकस्त भऽ गेल छल। तैं तोहर पढ़ाई के खर्चा नई उठा सकलियअ। मुजौना बाला तोहर ससुर ज्यों पढ़ाईयक खर्चा उठेलकुन, तऽ बदला मे एहन सुन्नर हमर भाई सन जमाय भेटलईन। बेशी सासुर के लटर शटर मे नई पड़ऽ। बस एक बेर आईब जाह।देखबा के बड्ड मोन कअ रहल अई। तोहर दीदी।" ईयाह चिट्ठी पढ़ला क बाद दमन बाबु बहिनक सासुर आयल छलाह।बाहरो रहला क बाद दमन बाबु मे लंफलंफा नई आयल छलईन।ओ अखनो गाम एलाह पर पैसेंजर ट्रेन मे चढ़ई छलाह। गाम सऽ तऽ दुईये टीशन पर उनकर बहिनक सासुर छलईन।कतेक बेर ओ आयल गेल छथि। बड्ड भीड़ जखईन ट्रेनक बोगी मे भअ जाई छलई, ओ पौदान पर लटईक कऽ जाई छलाह। ज्यों एक ट्रेन छुईट जाई, दोसर ट्रेन कखईन आयत? ओकर कोनो ठेकान नई छलई......ओहो सऽ बेशी जे ओई मे अई ट्रेन सं कम भीड़ हेतई, तकर कोन गारंटी? किछु भअ जाई, दमन टीशन पर ट्रेन नई कहियो छोड़लाह। एकबेर त ट्रेन छुईट गेला पर ओ चड़ुचन या एहने कोनो पाबईन मे सनेशक मोटरी कनहा पर उठा कऽ ट्रेनक पटरी धेने धेने बहिनक सासुर चईल गेल छलाह। बाद मे बुझला पर गाम मे सब बिगड़नेहो रहईन अई लेल। तहिया एत्ते कहां सोचाई छलई।जाय के अई त जाय के अई। जे सवारी भेटल, पकड़ु आ पहुंच जाऊ। नई किछु भेटल त " चरणदासक कार" छईये। अई कारक ओ खुब उपयोग करई छलाह। ओ पैरे चलला सऽ उनका " चीनी" क बीमारी नई भेलईन। अखनो उयाह पहिलुका आत्मविश्वास पर कतऊ आ कखनो विदा भअ जाई छथि। बहिनक सासुर मे बितायल गप शप सब मोन पईर रहल छईन।उनकर मिसरक माय ( बहिनक सास ) बड्ड कड़गर रहथिन। तहिया जे बुढ़ी कड़क होई छलई, उनका सब इंदिरा गांधी कहई। एक बेर गाम मे कोनो गप चललई त दमन बाबु के भागिन कहलखिन - " हमर बाबी लग बंदुक छई। आहां सब के उनकर डर नई होईया। हमर मां त बाबी सं खुब डराई छथिन।" दमन बाबु भागिन के बयस के छलाह, मूदा छलाह त माम। ओ चट सं बजलाह- " हमरा लग तोप अईछ। जा कअ कही दियउन अपन बाबी के। हम सब नई डराई छी।" तहिया दमन बाबु तोप देखनेहो नई छलाह। गाम मे सुनथिन जे तोप, बंदुक सं भईरगर, तऽ बाईज देलाह। किछु महीना क बाद जखईन बहिनक सासुर गेलाह, तऽ ओ बुढ़ी सास इंदिरा गांधी एलीह। कहलखिन- " ईयाह तोपबाला पुरूख छथि। अई बेर ईनकर बिछान राईत मे हमरे घर मे कअ देबैन कनियां।हम देखई छियईन ईनकर तोप"। आब डरक मारे सकदम छलाह बच्चा दमन। बुईझ गेलाह जे भगिना, ईमहर सं ऊमहर बात केलाह अईछ। गामक सुनल फकरा याद आईब गेलईन- "धी, जमाय आ भगिना, ई तीनु नई अपना"। ओ त जे छई से छई, अखईन ई बुढ़ी सं कोना निबटल जाय।आब राईत होबअ मे बेशी देरी नई छलई। डरक मारे दमनक हाल पातर भऽ रहल छलईन। खने मिसर लग जाईथ, खने बहिन लग जाईथ, हम तऽ मजाक मे कहलियईन। हमरा लग कोनो तोप नई अईछ। लेकिन एतअ पाहुन के सुनईया के? सब ईनकर गप सुईन कऽ मुस्किया रहल छल।अगर बुढ़ी राईत मे बंदुक निकाईल लेतीह, त दमन की करताह? ऊयाह चिंता बेगड़ता मे बिन खेनहे दलान पर सुईत रहलाह। बाद मे लोक उठा कअ खुयेलकईन। बुढ़ी सऽ बाद मे दोस्ती भऽ गेल छलईन। ओ कहथिन - " आखिर ऊनकर बेटाक सासुर मे एकटा शेर जन्म लेलक जे ज़बाब देलक।" बच्चा दमन अपना के शेर बुईझ गर्वान्वित होईत छलाह। खटिया पर पड़ल दमन, कने ऊंघाईत छलाह। ताबईत सुनईत छईथ जे बहिन बाईज रहल छलखिन- " कोन काज छलई ट्रेन सं ऐबा के। उपर सं अतेक दुर पैरे। हरही सुरही सब तऽ मोटर सऽ अबईत अईछ। हमर अफसर भाई पैरे आईब गेल। आब तोहर देह पहिलुका थोड़े छह। बड्ड थाईक गेल छह।पईर रहअ।जखईन सांझु पहर उठबअ त एक बेर मिन्नी दाई सं भेंट कअ लियहुन। तोरा बड्ड मोन पारई छथुन। मोन जुड़ा जाई छई, जखईन नैहरक लोकक सासुर मे नीक लेल चर्चा होई छई। मिन्नी दाई के नाम लईते दमन बाबु के अपन हुनका संग बितायल दिन याद आईब गेलईन। बहिन कही रहल छथिन- " मिन्नी दाई अपन जीबन इज्जत क संग अई गाम मे बिता लेलीह। कहियो सुख नई भेंटलईन। दु दु टा बियाहो भेलईन। नई जाईन ककर नजईर लगलईन वा कोन नक्षत्र मे जन्म भेलईन। ओतेक टा घर नई हवेली कहअ, ओई मे असगर पड़ल रहईत छईथ। राईत बिराईत किछु भअ जेतईन त के देखतईन। याद हेतह, दुसधा हजरा, ओकरे बेटा राईत कअ दलान पर सुतई छईन।" मिन्नी दाई, बखारी चौधरी के बेटी छलीह। बखारी चौधरी के असली नाम दमन के नई बुझल छलईन। एतबा जनई छलाह , उनकर दलान पर कयेक टा बखारी छलईन। गाम की, पुरा परोपट्टा मे ओतेक बखारी किनको नई छलईन। ओही सं उनका सब " बखारी चौधरी" कहईन। अतेक बखारी रहईन, तैं बुईझ लियअ जे कतेक अन्न पाईन होईन? बखारी चौधरी बड़का कलामी लोक छलाह, लेकिन दमनक मिसर आ ऊनका मे दुगोला छलईन। दुगोला मतलब खान पीन आपस मे बन्न। अबरजातो नई। कर कुटुम्ब के एक दोसरा कतअ एला पर पाबंदी नई छलई। बाकी सब पर लागू छलई। बखारी चौधरी के दु टा बियाह छलईन। बड़की कनिया ओतेक नीक देखबा मे नई छलखिन। तखईन अपने देख कअ सुन्नर दोसर कनिया केलाह। ओना तअ नबकी कनिया बेशी दुलारु होई छई, लेकिन बखारी चौधरी कतअ उल्टा छलई। चलती बड़की कनिया के बेशी छलईन। बखारी चौधरी के दुनु कनिया सं धीया पुता भेलईन। छोटकी कनिया सं भेल धीया पुता सब चिक्कन चुनमुन आ बड़की कनिया स़ं भेल धीयापुता सब जमुनिया रंगक छलईन। जखईन धीया सब बियाह जोगर भेलईन तं बखारी चौधरी बर तकनाई शुरू केलाह। मिन्नी दाई बड़की कनिया स़ं भेल छलीह।उनके समवयस्क छोटकी कनिया सं चुन्नी दाई छलीह। चुन्नी दाई के कथा सुन्दरता लअ कअ एक जगह स्थिर भेलईन। लड़का धन सम्पईत बला छलई। बड़की कनिया के जखईन पता लगलईन जे ऊनकर सऊतीन के बेटी के अतेक नीक कथा भअ रहल छईन.......ओ अट्ठाबज्जर खसा देलकिन। उनकर बात बखारी चौधरी माईनतो बेशी रहथिन, फेर की छलई। ओई लड़का सं मिन्नी दाई के बियाह भअ गेलईन। सिन्दुरदानक बाद जखईन बर के ई धोखा पता लगलई त ओ कोनो बहाने चतुर्थी सं पहिनेहे परा कअ अपन गाम चईल गेल। ओतअ सब के ई बात बतेलकई। ओ सब अपने लंगा छल। कहलकईन जे आब सासुर जेबाक नई काज, हम सब देख लेबईन। ईमहर बखारी चौधरी सब ई सोचईत - " भेल बियाह मोर करता की। धीया छोईर कअ लेता की।" कयेक बेर पर पंचयती के सेहो प्रयास भेलई, लेकिन बर पक्ष टस सं मस नई भेलई। ईयाह सब तेला बेला सं मिन्नी दाई के बर ततेक ने परेशान भेलई जे एकदिन माहुर पी कअ मईर गेलई। उड़न्ती समाचार बखारी चौधरी तक सेहो पहुंचलईन। मिन्नी दाई के सासुर सं नई कोनो खबर एलईन। नैहरे मे चुड़ी तुड़ी फोरल गेलईन आ जे कनी मनी लोकाचार छई, से सब भेलईन। ऊमहर चुन्नी दाई के दोसर जगह कथा भअ गेलईन। अई बियाह ल कअ दुनु सौतीन मे बड्ड ऊकटापैंची भेलईन। बखारी चौधरी के कयेक बेर थोर थाम करअ पड़लईन। बखारी चौधरी के देह आब उमर बढ़ला सं खईस रहल छलईन। ओ चाहईत छलाह, कहुना कोनो सुपातरक हाथे मिन्नी दाई के बांईध दी? मौकाक तलाश मे सब बेर सभा गाछी जाई छलाह। एक बेर कनीक बयसगर बर भेटलईन। बेशी ओकर खोज खबर नई लेलकिन आ सोंझे सभागाछी सं ऊठा कअ लअ अनलखिन। लड़का के अतबे बतेलकिन जे बेटी के बियाह राईत मे जमाय छोईर कअ चईल गेलई। नई चतुर्थी भेलई आ नई मधुश्रावणी। शास्त्र आ लोकाचार दुनु लेखे ई बिबाह पूर्ण नई मानल जेतई आ ऊपर सं लड़का सेहो मईर गेलई।ओ बयसगर बर के फुसलां कअ आ धनक लोभ द कअ गाम पर ल अयलाह। मिन्नी दाई सं पुछबाक काजो नई। कपड़ाक गुड़िया जेकां मिन्नी दाई के फेर बियाह दान भेलईन। सब ठीक-ठाक बुझाई छलई। दस दिन बाद बिदाई लअ कअ लड़का ओतअ सं चलल। जखईन ओतअ सं पहुंचनामा आ कोनो खोज पुछारी नई एलई त ईमहर चिंता भेलई। मिन्नी दाई के मोन त पहिनेहे सं सशंकित छलईन।जखईन बखारी चौधरी लड़का बारे मे पता लगेला त भेद खुललई। ओ बर पहिनेहे सं बियाहल नई, चौदह बरखक बेटो छई। कोनो काज नई करई छई आ सब अवगुण सं आगर छई। बहु बेटा जे मना केलकई त खींस मे दोसर बियाह कअ लेलकई। बाद मे जखईन घर गेल त सब भूत ऊतईर चुकल छलई।कानुनन सेहो नबका बियाह मान्य नई छलई। मिन्नी दाई के जीवन फेर ओहिना सुन्न भअ गेल छलईन। बाद मे बखारी चौधरी थोड़ेक जमीन खोड़िसक रूप मे लिख देने छलखिन। बाकी भाई सब बड़का बड़का हाकिम भअ महानगर सब मे रहईत छईन। सब के फड़ाक फड़ाक बड़का बड़का घर बनल छईन। मिन्नी दाई एक बेर कअ सांझ बाती देखा अबई छथिन। ईयाह गप्प सब बहिन , दमन के सुना रहल छलखिन। तखने लाठी के सहारे घिसियाईत मिन्नी दाई जोड़ सं बजईत एलीह- " के आयल छथि। पार्टनर की?" दमन आ उनकर बहिन मिन्नी दाई के देखिते, दुनु गोटे ठार भअ गेलाह। उनकर लाठी हटा कअ दमन हाथ सं सहारा दअ कअ खटिया पर बईसलकिन। मिन्नी दाई के ताशक गोंधिया हरदम दमने रहई छलखिन। तैं ओ दमन के आबेश सं "पार्टनर " कहई छलखिन। अतेक बरख के बादो आवाज सुईन कअ आईब गेलखिन। दमन उनकर हाल पुछलखिन। मिन्नी दाई ज़बाब देलखिन- " हमर छोड़। हमर हाल त भईर दुनिया जनईत अईछ। तु अपन कह पार्टनर।" दमन के किछु कहल नई भेलईन।मिन्नी दाई के बयस सं बेशी देह खईस गेल छलईन। थोड़े काल बाद सांझबाती देबाक समय भअ गेल छलई। ओ चईल गेल छलीह। दमन बाबु, बहिन सं पुछलखिन आबो दुगोला छऊ। बहिन ज़बाब देलखिन-" धुर्र छी। आब लोके कहां जे दुगोला।" मरला पर कांध देबई लेल मजुरी पर लोक बजावल जाई छई।हमरा जखईन समय भेटइत अईछ, तं हम उनका कतअ चईल जाई छी। दु दिन नई जेबईन त तेसर दिन टुघरईत ई अपने पहुंच जेतीह। दमन बाबु के बहिन के सब उपराग आब खत्म भअ गेल छलईन। दमन बाबु सोईच रहल छलाह कि दुगोला रहलो पर मिन्नी दाई कहियो पाहुन बुईझ कअ , कहियो खेलबा सं आ ताशक गोंधिया बनबा सं मना नई केलखिन। कनीक रंग दब उनकर दुखक कारण त नहिये भअ सकई छईन, पिछले जन्मक किछु लेखा जोखा मे बचल छईन, उयाह हिसाब भअ रहल छईन।आब उपराग ककरा सं। आब बहिनक उपराग खत्म भऽ गेल छलईन। दमन बाबू आब समाजक नीक काज मे योगदान करबाक अपन विचार सऽ बिपुल के अवगत कराऽ चुकल छलखिन। सर्वविदित छल, पुरा उत्तर बिहार बाईढ़ सऽ ग्रसित अईछ। अही जलक परियोजना पर दमन बाबू के अपन रिपोर्ट बनेबाक आग्रह बिपुल केलखिन। बाकी बिपुल सरकार सऽ अई विषय मे गप करबाक बात रखलखिन। अई मे बिहारक कयेक जिला आ नेपालक सेहो प्रभावित होबाक बात छलई। दमन बाबू कीछु काज पहिने सऽ कैने छलाह। ओ सब बिहारक प्रशासनिक अधिकारी आ जल संचय स जुड़ल विभागक समक्ष प्रोजेक्ट रिपोर्ट राईख देलाह। आब अई पर कोना काज आगु बढतई, ओई पर सरकार के निर्णय लेबाक छलई। दमन बाबू क सरल व्यक्तित्व सऽ बिपुल बहुत प्रभावित भऽ गेल छलाह। बहुत जल्दी व्यक्तित्व स प्रभावित भेलाक नतीजा की होईत छई, भोगलाक बादे समझ मे अबईत छई। _______ ई बिशनपुर गाम नई, विपुल लेल प्रयोगशाला बईन गेल छल। एक स एक घटना सब जन्म ल रहल छल। एकटा आर वृतांत देखु- बिशनपुर गाम मे सुतले रहईथ रमन, कि "बिपता" के शोर पारईत सुनला- उठु ने, "घुरन बाबु" अपने आयल छथि- आहां स भेट करबाक लेल। राईते रमन अयलाह आ भोरे घुरन बाबु आईब गेलाह। कतेक मजगुत उनकर खुफिया तंत्र गाम मे छईन- से बुझु। बिना कतऊ गेने- सब खबर रही छईन। किछु खास लोक उनकर सब टोल मे छईन। पुरा घर मे दलमल मचल अईछ। लोक सब पर्दा हटा क बहरी दलान दिश ताईक रहल अईछ। पाईन ओ पीब चुकला आ चाह उनकर सामने राखल छईन। कतबो ओ कहलखिन जे हम चाह अखने पी कऽ आईब रहल छी, तैयो चाह उनका लेल बईने गेलईन। जगक आंगन रहई। कयेक लोक घुरन बाबु के देखने नई छईन-नाम त सब सुनने छईन। स्त्रीगण महाल मे तऽ बेशीये फुस्सा फुस्सी।कियो कोनठा लग ठार तऽ कियो खिड़की सऽ बहरी दिश नजर गरौने छल। पुरूख पाहुन सब सेहो नमस्कार नमस्कार करईत घुरन बाबु लग पहुंच गेल छलाह। अहु बयस मे अतेक भव्य लगई छलाह। दुरे स लगई , कियो बईसल छइथ। दरबज्जा भरल बुझाई। सब धनिकाहा के अहिना चेहरा मोहरा भऽ जाई छलई। चेहरा देखिये कऽ लाईग जईता, कते समपईत हिनका हेतईन? एकटा हैदराबाद क निजामे एहन छलाय, जेकरा देखला पर बुझईता, कतेक दरिद्र अईछ। घुरनबाबु बड्ड कम बजई छथि- सुनई आ मुस्कियाई बेशी छईथ। ई मुस्की बड्ड मारूक छई, थाहे नई लागय दई छलखिन, खुश भेलाह आ किछु आर। कम बजनाई, सेहो धनिकाहाक गुण छई। आब ई गुण ससईर कऽ आईब गेल छई- अफसर सब मे। जतेक बड़का अफसर, ओ ओते कम बजताह। आहां बजबा सऽ अंदाज लगा सकई छी, कोन पद पर छईथ? एना चुप रहई जेता, जेना बजला सं दु कठ्ठा जमीन ककरो दिया जेतई। घुरन बाबु चुप्पे मुंहे सबसऽ परिचय पात कऽ रहल छलाह। बिपता, बच्चे सऽ उनके घर धेने छल। आब उमहर गड़बड़ेलई तऽ ईमहर धेने अईछ। आब त सीधा सादा फर्मुला छई- "बाबू बड़ा न भैया, सबसे बड़ा रुपैया।" जे बेशी पाई देतई, ओकरे काज करतई। बिपता क पुरना मालिक छलखिन तऽ ओहो- लल्लो चप्पो मे लागल छल। तैं रमन के उठबअ आयल। घुरन बाबु के " हरि अनन्त हरि कथा अनंता" बाला खिस्सा सब छलईन। आजुक समय मे सरकार दु टा बियाह करअ मे , ने रोक लगेने छई- राखअ मे त नई। ओ अही सिद्धांतक छलाह। शहर मे एकटा के रखलखिन आ ओकर पुरा भार ताउम्र उठेलखिन। गाम मे सेहो एकटा नर्स के पहिने रहई लेल कोठली देलखिन आ बाद मे घरे मे आईन लेलकिन। लोकक लेल ओ नर्स, मोन खराब मे सेवा करबा लेल आयल छलईन, बाद मे तऽ सबदिना उनके कतऽ रहअ लगलईन। ओहो नर्सनिया जब्बर छल- पुरूख कियो किछु कहथिन से तऽ हिम्मते नई, स्त्रीगण मे सऽ कियो किछु कहई, तऽ उनका तेहन ने ज़बाब दईन, मुंहे बंद भऽ जाईन। ई नर्स तऽ हाल तक छलईन।सबसं कमाल ई छलई, कहियो कियो शिकायत नई केलकईन। पीठ पाछु लोक मस्ती मे कहई- घुरन बाबु के बड्ड सूनर " डेबअ" अबई छईन। ईयाह 'कला " के कारण सबहक जिज्ञासाक केंद्र बनल छलाह। उठऽ पड़लईन रमन के। घुरन बाबु त कतऊ जाय बला लोक नई।ओ त अपन कोनो बहिनक सासुरो तक नई गेल छईथ। अपन सासुर, बिबाहक बाद कतऽ सऽ जयताह।अही तरहक कयेक टा गुणक भंडार छलाह, तैं ने चुट्टी जेकां सऊंसे लोक ऊनकर लग ससईर कऽ आईब गेल-बिन बजौने। ईयाह त छई "आकर्षण"। रमन जा कऽ गोर लगलखिन। हाल चाल पुछलाक बाद घुरन बाबु कहलखिन- "आहां हमर घर अबितऊं- त बड्ड खुशी होईताय।" - कियैक नई। हम कनीके काल मे अबई छी। बस घुरन बाबु उठलाह। सबके नमस्कार केलाह आ चलईत बनलाह। रमन बुझई छलाह जे ओ कियैक अयलाह अछि। आई तक तऽ कहियो घर पर बजेला नई। उनकर घरो जादुगरक तिलिस्म छई। कतेक तरहक खिस्सा। कियो कहई, सब देबालक बीच मे घर गरम करबाक बेबसथा छई। जारईन ओई मे दईत रहु, आर माघो मास उघारे देह सूतु। ततेक गर्म, घर भऽ जाई छई। कियो कहई, ऊनकर घर मे जे बंदुक छईन ओकर मुठ "सोना" क छई। उनकर दियाद तऽ कहियो उनका कतऽ जाईये नई सकई छथि-रमन तऽ सद्य दोसर टोलक। गामक लोक अंदाज लगा लेलक, की बात छई? कियो कियो तुरूपा फेंकई छलाह - अही लेल?- त कियो दोसर लेल? अंदाज लगेनाई शुरू भऽ गेल छलई। उटक्कर पचे डेढ़ सै। घुरन बाबु आ रमनक समीकरण सबहक बुझबा सऽ दुर छलई लेकिन मानतई के? घुरन बाबुक बेटी किरण आ जमाय सुधीर बिदेश मे रहई छलखिन।किरण ओतऽ दुखताई भऽ गेल छलखिन। आब उनका देश मे रहबाक शौक जागल छलईन। भेलईन जे, पाईन बदलत तऽ भऽ सकईत अईछ, मोन ठीक भऽ जाय। ओतअ सऽ दिल्ली आयल छलाह आ अतई घर कीनबाक उधेरबुन मे छलाह। कतऊ कतऊ घर देखतो छलाह। अतुका समाज सऽ सबदीना कटले रहलाह। दुखित तऽ किरण पहिनहे सऽ छलखिन, ऊपर सऽ दिल्ली मे अई गर्मी मे मुहल्ले मुहल्ले छिछियेनाई। प्रोपर्टी एजेंट सब घुमबईत रहलईन। किरण के लू लाईग गेलईन। अस्पताल मे भर्ती भेलीह , लेकिन बईच नई सकलीह। सुधीर के दिल्ली मे कियो नई अपन। घुरन बाबु के खबर भेल। ओ कयेक लोक के सुचना देलखीन- मदद लेल कोना कहथिन।कियो नई टघरलईन। तखने ओ बिपुल के अपन परेशानी बतेलखिन। गऊंआ हिसाबे बिपुल , रमन के जनई छलखिन। रमन के सामाजिक काज सब मे दिलचस्पी सेहो देखने रहथीन। बिपुल अपना दिश सऽ रमन के घुरन बाबूक मदद लेल कहलखिन। घुरन बाबू के ई बातक पता नई छलईन। रमन अस्पताल गेलाह। ओतऽ सुधीर सऽ भेंट भेलईन। सुधीरक दुनू बेटा सेहो बिदेश सऽ आईब चुकल छलईन। दुखिते के खबर ओकरा सब के छलई।ओही पर ओ सब आयल छल। अस्पताले मे बाप सऽ लड़अ लागल। अहीं मारलऊं हमर माय के। कोन काज छल हुनका भारत अनबाक लेल। आहां के अपन मोन भेल तऽ आहां जाऊ। आहां के छी अपन बिचार थोपअ बाला।व्यक्तिगत आजादी के आहां सीमा लंघलऊं। अपराधी छी आहां ...... अहिना कतेक उपराग।........ हम सब पुलिस के रिपोर्ट करबई।.............. अहां योजना बना कऽ माय के मारलऊं।आरो आरो बात सब। सुधीर माथ पर हाथ देने गुम्म बैसल। अस्पताल मे आरो मरीजक तीमारदार सब ई तमाशा देखई छलाय।रमन तऽ किनको चिन्हईतो नई छलाह। भीड़ देख कऽ उम्हर गेलाह तऽ सब बुझा गेलईन। रमण सीधा सुधीर लग गेलाह आ बिशनपुरक ग्रामीण होबाक बारे मे बतेलखिन। सुधीर बजलाह- "ईयाह लीला छल हमर घर के। तैं पराअ कऽ अतऽ अयलऊं। भाग्य हमर साथ नई देलक। किरण संग छोईर देलीह। हमरा तऽ दाह संस्कारक कोनो ज्ञान नई। आहां कहुना करबाअ दिय-कही क-कलजोईर कऽ ठार भऽ गेलखिन। -हमर कोनो भी निर्णय पर कहियो सबाल नई उठेली आ ऊपर सऽ संग सेहो देलीह। देश घुरऽ के हमरे ईच्छा छल, जेकरा ओ अपन कहलीह।हम ठीके दोषी छी। जे सजा दई जैब से दीयह, मुदा पहिने उनकर दाह संस्कार अपना सबहक बिधि सऽ करबाऊ"- दहोबहो कनईत सुधीर बाईज रहल छलाह। रमन दिल्ली मे तऽ तीस बरख सऽ रही रहल छलाह। बहुत रास संस्था सब सऽ सेहो जुड़ल छलाह। लोक सब के खबर केलखिन। दस लोक करीब भऽ गेलाह। सुधीरक बेटो सब, मोनक बिकार निकलला क बाद शांत भेल। सब कियो निगमबोध घाट जाई गेलाह। ओतई चिता पर लकड़ी के बीच मे किरणक देह के जखईन राखल गेल छलईन तखने सुधीर बजलाह- - "आब हमरा के सहारा अई। हमर अंतिम इच्छा अईछ, किरणक दाह संस्कार नीक सऽ भऽ जाईन।" सुधीर बाकी संस्कार हरिद्वार मे कयलाह।हरिद्वार मे सब बेबसथा घुरनबाबु करवा देने रहथिन। हरिद्वार सऽ सुधीर सासुर गेल छलाह। ओतऽ अद्योपांत सब बात घुरन बाबु के कहलखिन। रमन सब बात संस्कार क बाद बिपुल के कही चुकल छलखिन। बिपुलक मार्फत घुरन बाबू के सब समाचार भेट गेल छलईन। अकरे धन्यबाद दई लेल घुरन बाबु गेल छलाह। पहिले पहिल रमन सेहो उनकर गर्म घर मे बईसलाह। ईयाह त "डेबअ" बाला कला छलई , जईमे घुरन बाबु माहिर छलाह- रमन सेहो आई बुझिये गेलाह। आब घुरन बाबू सऽ भी बिपुल के बढ़िया संबंध भऽ गेल छलईन। अई सऽ पहिने ओ बिपुलक प्रयास के " हवा- बसात" कहई छलखिन। एक एक क कऽ बिपुल गामक सब धरा सऽ समीकरण बना रहल छलाह। अई मे सफलता सेहो भेट रहल छलईन। एहन ने संयोग सब बईन जाई छलई, बिपुलक योगदान लोक के देखाय लागल छलई। आब सब ईनका गंभीरता सऽ लऽ रहल छलईन। ओना घुरन बाबू मुखिया वा प्रमुख नई छलाह। ओ दलगत राजनीति सऽ अपना के अलग रखने छलाह। मूदा उनकर प्रभाव ओई ईलाका मे जबरदस्त छलईन। कोनो भी सरकारी अमला ऊमहर जाई, पहीने हाजिरी उनके कतऽ दई छलई। अंचोके मे बिपुल के , रमनक ल कऽ घुरन बाबू क आशीर्वाद भेट गेल छलईन।घुरन बाबू सनक शख्सियत सब गाम मे भेटई छई। विपुल के गाम सबहक प्रकृति आ ओकर संरचनावाद पर अध्ययन गहन भेल जा रहल छलईन। ईयाह जानकारीक आतुरता कखनो काल विचार मे विशृंखलता आईन दई छलईन। अई सब ल कऽ दीप्ति संग कटु वचन आदान-प्रदान क श्रृंखला शुरु भऽ चुकल छलईन। ________ गाम मे रहलाक फैसला क बाद बिपुल पुरा गाम घर के पढई चाहई छलाह।ऊनका जखने मौका भेटई छलईन, गाम मे भेल सब परिवर्तन क बारे मे जानऽ लेल जुईट जाई छलाह। ईनका गामक एकटा आर किरदार मिहिरक बारे मे भी बहुत कीछु सुनल छलईन। भेट नई कहियो भेल छलईन। बिजयक बारे मे गाम मे ततेक ने नकारात्मक खिस्सा गंऊआ सब फईला देने रहई, एक शहर मे रहलाक बादो बिपुल सब सऽ अनभुआर छलाह। समाज मे आधारभुत परिवर्तन क लेल पूर्व मे घटल कारक घटनाक अध्ययन आ ओकर विश्लेषण निहायत जरूरी होईत छई।पश्चिमी देश क तर्ज पर भारत मे प्रयोग कखनो भी सफल नई भेल सकईत अईछ, मूदा ई विपुल के कहतईन के? विपुल जिद्दी भेल जा रहल छलाह। लोक तमाशाक किरदार जकां इनका लईत छलईन, ओ अई सब सं अनभिज्ञ छलाह। विपुल अपने बिशेष कऽ मिहिर क गाम अयलाक समाचार भेटला पर उनका सऽ भेट करऽ गेलाह आ ओकर उपलक्ष्य बतेलखिन। बात एना भेल छलई- " मिहिर गाम गेल छलाह।हाथ- पैर धोलाक बाद निश्चिंत सं बईसला। चाह- जलखई सब भऽ गेल छलईन। भौजी उनकर किछु परेशान बुझेलखिन।मिहिर ई बात बुझई छलाह जे बेरोजगारक कनिया के भाग्य मे परेशानी लिखैले रहई छई।नीक रहितई तऽ ओकरो घरवाला के नौकरी रहितई।मिहिर के पुछलो पर नई किछु जवाब भेंटलईन। मिहिर के अपन भौजी के ओ हंसईत चेहरा याद आईब गेलईन।जखईन मिहिर के भाईजी सुधीरक विवाह के गप्प इनका सं चलई छलईन। एक दिन चुपचाप मिहिर भौजी के देखबा लेल उनकर छात्रावास चईल गेल छलाह। ओतऽ सब लड़की मे सुन्नर उनकर भौजिये छलखिन। बाद मे मिहिर के भौजी कहलखिन - " से बात नई छलई। लड़की सब एक सं एक सुन्नर छलई। आहां हमरा देखऽ आयल छलऊं, हमर होस्टलक वार्डेन बुईझ गेल छलीह।ओतऽ जाईन बुईझ कऽ सुन्नर लड़की सब अपने बाहर नई निकलई छई, जखईन ककरो कियो देखऽ आबई छई। ई एकटा अघोषित परिपाटी छई।" अच्छा ! से बात छलई। हं! तऽ आर की। सुधीर कनी काल बाद ताश खेला कऽ घर घुरलाह।ताबईत मिहिर माय सं गपशप करईत छलाह। बीच बीच मे टोल पड़ोस के लोक सब अयलईन।उनको सब सं कनी मनी बात भेलईन। सुधीर अबिते हाल चाल पुछलखिन।छोट भाई के देखी कऽ प्रसन्न भेलाह। गाम मे तऽ अहिना दिन बीतई छई। सांझु पहर पेठिया सं अपने जा कऽ बोआरी माछ अनलाह। बोआरी माछ मिहिर के नीक लगई छईन। ई सुधीरे टा के बुझल छलईन। मिहिर के तऽ सब माछे पहिने एक्के जेकां लगईन। बोआरी सस्त भेटई, तैं मिहिर बजार सं ईयाह खरीदई छलाह। दोसर कनीक देखऽ मे ई माछ गोर लगईन। गोरका रंग के प्रति आशक्ति बच्चे सं छलईन। अपन पीरसियाम छलाह।तैं मधुरो मे रसगुल्ले नीक लागईन। कियैक तऽ ई उज्जर होई।मीठ तऽ अतेक नीक लगईन जे गुड़क भेल्लिये खा लई छलाह आ चीनी तऽ कयेक फक्का, जकर गिनती नई। रंगक प्रति एहन ने धुनी छलाह जे कतऊ सुईन लेलकिन- " गर्भवती स्त्री के नारियल खेलाह सं संतान गोर होई छई।" अपन कनिया जखईन माय बनऽ बाला रहथिन तऽ नारियल खुआ खुआ कऽ उनकर मोन अकच्छ कऽ देने रहथिन। गाम मे एकटा भातिज नमन छलखिन। ओकरा लेल कपड़ा लत्ता लऽ कऽ आयल छलाह। नमन देखते बड्ड खुश भेल। ओ चट्ट सं नबका कपड़ा पहिरलक आ खेलऽ विदा भऽ गेल। नमन पढ़बा मे ठीके छल। गामे मे आब अंग्रेजी मीडियम प्राईवेट स्कूल खुईज गेल छलई। ओही मे पढ़ई छलाह। एकटा रिक्शा अबई छलई। ओही मे दसियों बच्चा लदा कऽ स्कुल जाई। ओना स्कुल गामे मे छलई। दुर तऽ कतऊ सं नई कहल जा सकईत छलई, तखनो रिक्शा सं नमन जाई छलाह। एतनी दुर लेल रिक्शा? हं। आब सब बच्चा रिक्शे सं जाई छई। एतबा दुर पैदल या साइकिल सं जाय के चाही। स्वास्थ्य सेहो ठीक रहतईन। मोन तऽ रिक्शो पर गेला सं ठीके रहई छईन। स्कुल मे सब के बतेनाई जरूरी थोड़े छई जे नमनक बाप गरीब छथिन। अई मे गरीबी आ अमीरी के कोन बात? कियैक ने। खुब बात छई। खतबे टोली के सेहो सबटा बच्चा रिक्शे सं अबई छई। ओहु सं गैर गुजरल हमर नमन? नई नई। से नई कहलऊं। आब जमाना बदईल गेल छई। सब अहिना स्कुल जाई छई। हमरो बेटा तहिना जायत। बात के दोसर दिश जाईत देख मिहिरक माय बीच मे बजलीह- छोड़ह ई सब बात। आर कहऽ। अखईन रहबऽ ने? हं चाईर दिनक छुट्टी अईछ। रईब कऽ चईल जायब। फेर सोम सं आफिस पकड़ा जायत। मिहिर के बुझल छईन जे गामक सब खर्चा मायक पेंशन सं चलई छईन। च्यवनप्राश, टानिक,किछु फल आ दवाई सब माय लेल मिहिर लेने आयल छलाह। माय के सब पाई घरे मे लाईग जाई छईन।फल, दुध, दवाई कतऽ सऽ हेतईन? मिहिर दुध ऊठौना ठीक कऽ देने छथिन।माय कोना सब दुध अपने पी लेथिन। सब तऽ उनकर संताने छईन। ओई मे नमन तऽ बीन दुध- दही के एक्को सांझ नई खा सकईत अईछ। सुधीरक जीह सेहो पातर छईन। घरक जेठ बेटा मांगल चांगल छलाह। ओ किछु बजई नई छईथ, मूदा बिन दुध- दही के ससरईत नई रहई छईन। गारा धऽ लई छईन। हफ्ता मे एक दिन नोनई हाट पर जेबे करताह आ घुरती मे करिया पन्नी मे कांट कुश रहबे करतईन। अकर मात्रा जेबी के गर्मी देख कऽ । दुपहरिया मे माय सं मिहिर के एकांती भऽ रहल छईन। कतबो मिहिर माय के अपना संग दिल्ली चलय लेल कहई छथिन, ओ तैयार नई भऽ रहल छथिन। उनका ई भान छईन- पेंशनक पाई सं सुधीर के आश्रम चलई छईन। अगर माय नई रहथिन तऽ कशमकश भऽ जाई छईन। पाई के दिगदारी भेला सं घर मे कल्लह सेहो होबऽ लगई छईन। एक बेर दु महिना लेल मिहिर कतऽ गेल छलीह। घुरला पर सतलखा बाली सब हाल बतेलखिन। सुधीर तऽ हरखन तैयारे रहता- " तोरा जेतऽ जेबाक होई, तों जो।" माय बुझई छथिन ई ऊयाह स्वाभिमानी बापक बेटा छईथ ।ओ भुख लगबा पर घर मे जखईन नई किछु देखथिन तऽ कलम दिश चईल जाई छलाह आ दु चाईर लग्गा कुसियार खा कऽ क्षुधा शांत कऽ लई छलाह। घर मे केकरा की कहथिन? सब स्थिति सबके बुझले छईन। सुधीर कखनो माय सं पाई नई मंगई छलखिन। माय के तऽ जे संतान कष्ट मे रहई छई, ओकरे प्रति ओकर ममत्व देखाईत छई।माय, सुधीर के ओगईर कऽ अपन छांव मे रखने छलखिन। तुं कपड़ा लत्ता कियैह अनई छहुन। ओकर बदला मे पाईये सुधीर के दऽ देल करहुन। पाई तऽ दईते रहई छियईन। अत्ते नीक कपड़ा इनका सब के अपना सं नई कीनल हेतईन? तैं लेने अबई छी। नीक कपड़ा? तोहर भौजी के गाम के कोन - दन भाई आयल छलईन। ओ कहलकईन- " ई तऽ दिल्ली मे रेहरी पर बिकाई छई" बस! फेर की छलईन। तोहर देल,नमन के पहिरल टी-शर्ट के उतरबेलकिन आ पोंछा बना देलखिन। आंय। ओ पोंछा बईन गेलई। ओ तऽ ब्रांडेड कपड़ा छलई। छये महिना पहिने तऽ अनने रहियईन।ओतेक दामी कपड़ा के ई हाल? दाम कहां लिखल छलह? दाम बला लेबल तऽ जाईन बुईझ कऽ हटा देलियई। ईनका सब के होईतईन जे दाम देखा कऽ अहसान कऽ रहल छईथ। कंपनी के लेबल तऽ लागल छलई। ओई कंपनी के कपड़ा तऽ तीन हजार रूपया सं शुरूये होई छई। सेह सुधीर के कहईत सुनने छलियई-" ब्रांडेड कंपनी छई। हमहुं सब अखईन तक देखने छी, पहिरने नई छी।" ओ जे मुंहझौंसा भाई आयल छलईन, से कहलकईन-" दिल्ली मे नकली लेबल लाईग जाई छई। असली रहितईन तऽ दाम बला लेबल सेहो रहितई की ने? मिहिर के ई सब जाईन कऽ बड्ड दुख भेलईन। फेर सोचलाह- भाई तऽ भाईये होई छई। आई भाई, ज्यों अपना संग शहर मे नई रखने रहितईथ, तऽ अई स्थित मे मिहिर थोड़बे पहुंचतईथ। गाम मे रहला सं केना बुद्धि भ्रष्ट भऽ जाई छई। जहिया पढ़ई छलाह भाई, कतेक प्रगतिशील सोच छलईन। आई गाम मे रहईत रहईत सब सोचो मे घुण लाईग गेलईन। माय फेर मिहिर के बुझेलखिन। बाकी सब छोड़ऽ। सब घर मे अहिना होई छई।गाछ के कतऊ पात भारी लगई छई। जहिना सुधीर लोकईन रखताह, हम रहबईन। चाईर दिन लेल अयलाह अईछ। खुशी खुशी अपन जाह।देखियह ने, नमन किछु बईन जेतईन। कतेक चंसगर देखबा मे लगई छई। तुहों नेना मे अहिना लगई छलह।दुनु भाई अहिना मिलजुल कऽ रहई जाऽ। माय के तऽ अपन बेटा केहनो देखबा मे होई, सुन्दरे लगई छई। मिहिर बच्चा मे कतऊ सं सुन्दर नई छलाह। आब कनी मोटेलाह आ पदक गौरव माथ पर एलईन, तऽ कपार चमकऽ लगलईन। ई नमन के मैट्रिक पास करिते अपना लग राईख लहुन। तोरा लग रहतुन तऽ आदमी बईन जेताह। नई तऽ गाम मे रही कऽ उजियागर नई हेथुन। पहिने ईयाह गाम सं अतेक लोक पईढ़ लिखि कऽ हाकिम हुकुम बनल। नबका मे तऽ मुश्किले लगईत अईछ। मिहिर हां ना, किछु नई कहलखिन। मैट्रिक केलाक बाद मिहिर, नमन के अपना संग दिल्ली लऽ एलखिन।अतऽ ग्यारहवीं मे नाम लिखाबऽ सं पहिने स्कुल सब मे परीक्षा होई छई। ओई परीक्षा मे नमन पास नई कऽ सकलाह। आब दुईये टा रास्ता बचलईन, घुईर कऽ गाम मे आगु के पढ़ाई करस वा दिल्ली मे केहनो स्कुल मे नाम लिखावल जईन। नमन अपने निर्णय लेलाह जे आब हम गाम मे नीक सं पढ़ाई करब आ बारहवीं के बाद दिल्ली मे रहब।पढ़ाई के माध्यम सेहो एकटा समस्या के रूप मे आयल छलईन। ईयाह भेलई। नमन के परीक्षा मे असफलता उनका पढ़बाक ओर उन्मुख केलकईन। गामे सं बारहवीं केलाह। ओही साल इंजीनियरिंग मे एडमिशन सेहो भऽ गेलईन। सुधीर गामक अंगरेजिया स्कुल मे कम्मे पाई पर पढ़बऽ लागल छलाह। नमन के पढ़ाई के खर्चा दादी के पेंशन सं जाई छलईन। नमन के इंजीनियरिंग के अंतिम साल मे कैम्पस सेलेक्शन भऽ गेलईन।दादी के ईच्छा लऽ कऽ नमनक विवाह गाम सं भेनाई तय कैल गेल छलईन। मिहिर सेहो सपरिवार ओई विवाह मे शामिल होई लेल गाम गेल छलाह। भौजी के गोर लागऽ गेलाह। "हमर बेटा के लोक तऽ दु सांझ खाई लेल नई देलकई।अपन घर सं घुरा देलकई। आई हमर भगवान सुनलाह। " ई बात सुनिते नमन बजलाह- " मां। ईयाह कका छईथ जिनका लऽ कऽ हम अतऽ तक पहुंचलऊं।ओ हमरा दिल्ली डेरा पर रखबाक लेल तैयार छलाह, हमही नई मनलियईन। हमरा इंजीनियरिंग मे हर महिना पढ़ई लेल पाई पठबई छलाह। ईनकर निर्देश छलईन जे ई बात आहां ककरो नई कहबई।हमर असफलता, आंईख खोललक। समय समय पर हमरा रस्ता देखबईत छलाह।" मिहिर के किछु देर बाद अई बातक आशय बुझबा मे एलईन। ओ सन्न रही गेलाह। नमन तऽ बच्चे सं अपन माय के बाजल ऊकटा पैंची सुनईत सुनईत पैघ भेल छल।ओकरा होई छलई जे समयक संग ओकर माय के कटुवाणी के धार मद्धिम हेतई, मूदा ई बढ़िते गेलई। मिहिरक माय सेहो उईठ कऽ एलीह। " हम तोरा कहने रहियह। मोन छह। ई नमन बड्ड चंसगर देखऽ मे लगई छई। देखह , आई सच्च सबहक सोझां मे रखलक।" मिहिर के भौजी अतेक बरख सं विकार अपन मोन मे रखने ढोअईत छलीह। आई उनकर सब विकार धोआ गेलईन। ओ नोर सं डबडबाईत आंईख सं मिहिर के तरफ देखईत बजलीह- " हमरा माफ कऽ दियह। अतेक कष्ट सहलो पर आहां के परिवारक मान मर्यादा रखबाक प्रयास कयलऊं। ग़रीबी के कारण हमर सोचऽ के तरीका बदईल गेल छलाय। जहिया आहां हमरा देखऽ होस्टल मे आयल रही, तहिये आहां के भोलापन देखी कऽ हमरा बुझा गेल छल जे आहां के भाई आ परिवार केहन भेटत। आहां सबहक सोच सच मे हमर नैहरो सं नीक अईछ।" सुधीर सेहो आंगन मे ठार भेल सब देख सुईन रहल छलाह। ओ भईर पांजि कऽ मिहिर के पकईर कऽ कानऽ लगलाह। मिहिर के माय के आंईख सं सेहो नोर खईस रहल छलईन। ईमहर दुनु बेटा के बीच बढ़ल जाईत दुरी के देखला सं उनकर आंईख सं हरदम पाईन खईसिये जाईन।लोको सब जाईन बुईझ कऽ एहने एहने गप करऽ आईब जाई छलईन। " आब हम मरबो करब तऽ चैन सं। अपन संतानक बीच मे मतांतर के हम अपन कमी बुझई छलऊं। ई सबहक पाछु गरीबी छई। ईयाह मनुक्खक दिमाग के खराब कऽ दई छई।" तई पर नमन बजलाह- " सब कियो कनिते रहब तऽ हमर बियाह के ओरियान कोना होयत।" ई सुनिते हंसी के ठहक्का आंगन मे छुईट गेलई।" आब बिपुल बुईझ गेल छलाह- " संबंध मे समय के बहुत महत्व छई। उपकार केनाई महत्वपूर्ण नई छई, अकरा क कऽ पचेनाई जरूरी छई। ज्यों बतेनाई अवश्यम्भावी भ गेलई, तखनो अपना तरफ सऽ प्रयास नई करी। अकरा भाग्य पर छोईर दी। बदलाव होबाक रहतई, ई अपने ककरो माध्यम सऽ प्रकट भऽ जयतई। तखने अकर पुरा सकारात्मक परिणाम आईब सकई छई आ समाज लाभान्वित होईत छई। _________ बिशनपुर मे गाम बला सब लछमी बहुरिया के याद मे किछु करबाक खातिर बैसार केने अईछ। बिपुल आ ऊनकर कनिया के सेहो बजाहट भेल छईन। कियो कहई की मूर्ति बनावल जाय, तऽ कियो छोट छीन स्वास्थ्य केन्द्र, तऽ कियो पढबाक लेल वजीफा, तऽ कियो बेटी क बिबाहक लेल बिन सुदक कर्ज, तऽ कियो स्कुल, कियो धर्मशाला आदि आदि। सब कियो अप्पन विचार क पक्ष मे तर्क दई छलाह। फैसला नई भ सकल। मूदा ई निश्चित भेल जे किछु ने किछु होयबे करत। आब धीरे- धीरे बिपुल के बुझा रहल छलईन, ओ पहिले लोक नई छईथ। नीक काज करऽ बला सब गाम समाज मे सदा सऽ होईत रहल छई। अई लेल नई स्कुलिया डिग्री आ संपईते के जरूरत छई। बस सोच आ इच्छा शक्ति होबाक काज छई। बिपुल के अपन स्थिति क अहसासो करबई लेल गंऊआ सब अई तरहक मीटिंग मे बजबई छईन। कतेक पाईन मे आहां छी, देख लीयह? आई गाम समाज मे लछमी बहुरिया के याद मे किछु करबाक किया जरूरत बुझेलई? नबका लोक के तऽ किछु बुझले नई। के छलीह ओ? उनको किछु नाम हेतईन जे माय बाप रखने हेतईन। किनको नई बुझल? लछमी बहुरिया तऽ सासुरक नाम छईन। वोटरलिस्ट मे सेहो ईयाह नाम छईन। खेत खलिहान क दस्तावेज मे सेहो ईयाह नाम। सुनई छियई - " कोनो नबकी चुहुलबाज पुतोहु पुछलकईन की आहां के किछु त नाम होयत? माय बाप हेताह तखने धरती पर अयलहुं ने। हमरे टा कान मे कहीं दियह। हम ककरो नई कहबई।" लछमी बहुरिया कनी काल सोचली, फेर कहलकिन -" ठीके नई मोन अईछ। ईयाह नाम अईछ।कहीं क मुसका देलखिन।" कियो सासुर मे अहनो रईच बईस जाई छई , नामों बिसईर जाई। बिसवास ककरो नई लेकिन भेल छई। ओ छलीह लछमी बहुरिया। आई दुनिया सऽ एतेक बरख गेला क बादो लोक नई बिसरलईन अई।आब तऽ ओहन लोक बननाईये भगवान बंद कऽ देने छथिन। अतेक तऽ बिपुल के बुझाईये गेल छलईन जे लछमी बहुरिया अई गाम मे पुतोह बईन के आयल रहईत। ई नाम उनकर ससुर देने रहथिन। उनका अयला क बाद ओई बरख बड्ड धान भेल रहई। लोक के राखई लेल कयेक टा कोठी बनबअ परल छलई। ओई साल बाईढ मे एहन माईट आयल छलई जे अन्न पाईनक संग आमो बड्ड फरल रहई। जे भी भेल हो, नाम परलईन लक्ष्मी, खुशहाली के ल कऽ। बाद मे लक्ष्मी सं लछमी बहुरिया भऽ गेलीह। कहल जाई छई, कालाजार सऽ उनकर घरबालाक मृत्यु कम्मे बयस मे भऽ गेल छलईन। तहिया अई बीमारी के इलाज नई छलई। लछमी बहुरिया निसंतान छलीह लेकिन भईर गाम के माय जेना आबेश करई छलीह। उनकर भंसा घरक आईग मिझाई नई छलई। तहिया सलाई के प्रचलन नई छल। लोक एक दोसर कतअ सऽ आईग लऽ जाई छलाय। लछमी बहुरिया कतऽ स लोक सब आईग टुटल खपरा मे सम्हाईर कऽ लऽ जाईत छल। ओई संगे किछु दुख सुख सेहो सांझा करई छल। उनका अपना मे तऽ कते खर्चा? लोक सबके कोठी मे सऽ धान निकाईल कऽ दई छलखिन। दई तऽ छलखिन पईंचे, मुदा तगेदा कहियों नई। खेनाई कम सऽ कम पांच लोकक बनबई छलखिन। जे रहई छलई खाय काल, सबके आबेश कऽ कऽ खुआबई छलखिन। बियाह दान मे सब बिध उनके सऽ पुईछ कऽ सब करय। पंडित पुरहित स बिबाद भेला पर लछमी बहुरिया के कहल अंतिम मानल जाई। पुरहित सब सेहो हिनकर ज्ञान क आदर करईत छलाह। कियो बीमार पईर जाय त घर स ल क डागदर आ अस्पताल तक संग दई छलखिन। किनको कतऽ कोनो करदेवता हुअय, ओ असगर दु सय तीन सय लोक के खेनाई बना दई छलखिन। कतऊ किनको घर सं सैंय बहु के बेशी लड़ाई पर ओतअ पहुंच कऽ धमकाऽ दई छलखिन। अपने कहियो तीर्थाटन पर नई गेलीह, लेकिन जौं पता लगई छलईन , फलां जा रहल अईछ, त उनका रूपया कौड़ी दई छलखिन आ कहई छलखिन जे हमरो लेल किछु मांईग लेब। कियो पढअ बाला बच्चा के कापी किताब, नाम लिखाबअ मे दिक्कत होई तऽ ओकरा मदद करई छलखिन। परसौती के खातिर तऽ ओ डागदर स कम नई छलखिन। कतेक बच्चा उनके देख रेख मे दुनिया मे आयल। ओ डागदर, दाई आ पंडित तीनु भुमिका मे रहई छलीह। बेटी सबहक खातिर त ओ बरका आश्रय छलीह। बच्चा सबहक लड़ाई मे ओ हरदम नाईत- नातिन, भागिन- भगिनी के पक्ष मे रहई छलीह। उनकर घर , घर नई सराय छल। भोर सऽ ल कऽ राईत धईर लोक स भरल रहई छलीह।के बरका, के छोटका, के धनिक, के निर्धन, के पढ़ल, के बिनपढ़ल, के शहरी, के गाम बला, के काबिल, के चपाट सबके लेल उनकर दरबज्जा खुजल रहई छल। कयेक लोक त लोकाचार बिध बेबहार खातिर आन शहरों मे लऽ गेलईन। ओ सबहक सुख-दुख मे शामिल भेलीह। ओ बाप जे बेटी के बिबाहक लेल प्रयास नई करई छलाह, उनका ओ एक दशा नई छोरई छेलखिन। उनकर बिगराई के कियो खराब मनबो नई करई। जे उनकर सबसं बरका गुण छलईन जे ओ उपकार के ककरो नई कहई छलखिन आ नई किनको उपरागे देलखिन। कतेक लोक पईढ़ लिख कऽ बनल अईछ ओई मे उनकर योगदान सेहो छईन। ओ सब आब उनका याद मे किछु करबाक लेल लागल अईछ। एक्के लोक मे अतेक गुण की भ सकई छई? सबसं कमाल देखु। किनको स कोनो सेवा नई करेलीह। चईलतेफिरते दुनिया सऽ चईल गेलीह। चहुंओर उनकर चर्चा भऽ रहल अईछ। आजुक कलयुग मे अहनो लोक भेल। अप्पन सब बिसईरकअ समाज के उपकार करअ बाली लछमी बहुरिया के बिपुल प्रणाम कऽ विदा भऽ गेलाह। अई सबहक कार्यक्रम गाम मे एकाएक जोड़ पकईर लेने छलई। ई सब बिपुलक प्रयास के कमतर आंकऽ लेल कैल जा रहल छलई। आब बिपुल के गाम सऽ मोहभंग भेनाई शुरू भऽ गेल छलईन।दहन बाबू हाथ खींच लेने छलाह, घुरन बाबू अपने घुरंती दिश छलाह, दमन बाबू क प्रोजेक्ट बहुत व्यवहारिक नई बुझा रहल छलईन, गामक युवक- युवती सब बिदेश जाई लेल अपसियांत बुझा रहल छलईन, स्थानीय सरकारी अधिकारी सब सेहो विरोधी भऽ गेल छलईन, मुखिया आ विधायक के अपन गद्दी हिलईत बुझा रहल छलई, माय तनुजा सेहो असंतुष्ट छलखिन, भाई विनय के अई सब मे कोनो दिलचस्पी नई छलईन। बिपुल कखनो कऽ अपन मूहिम मे असगर महसूस करऽ लागल छलाह। होईन की छोईर - छार कऽ परा जाई।ओना आसानी सऽ हाईर माननाई इनकर खुने मे नई छलईन। बदरी भी दबाव मे डीह नई बेचने छल, विजय भी राज्य सरकार क सामने आत्मसमर्पण नई कऽ प्रतिनियुक्ति मे केंद्रीय सरकार क सेवा मे चईल गेल छलाह। विपुल भी हरदी- चुना बजबा लेल तैयार नई छल। ______ एक दिन ततेक ने स्थानीय घटना सब सऽ बिपुल परेशान भऽ गेलाह, शांति क तलाश मे ऋषिकेश आईब गेलाह। ओना ओ अतऽ आबईत जाईत रहई छईथ। अकर पाछु दु टा कारण छई- एक तऽ गामक राजनीतिक प्रदुषण सं मुक्ति आ दोसर गंगा माई के कोरा मे रहबाक सौभाग्य। विदेशो मे नदी सब के माय जकां बुझल जाई छई। ओतुको सब नदी उनका गंगेजी बुझाई छलईन...... अतअ त असली गंगा माई छथिन। ओ कोनो ने कोनो बहाने उनका लग जाईत अबईत छलाह। ऋषिकेश क दिल्ली सदन ईनकर अड्डा भऽ गेल छलईन। दिल्ली सदन एकदम सऽ गंगा कात मे छलई। दुर सऽ देखला पर बुझईता जे गंगेजी अपन अंचरा मे अकरा लेने छथिन। अतऽ निश्छल गंगाजी बहईत रहई छईथ। ओ धारा बहऽ के जे कलकल ध्वनि छई- से बिपुल के सम्मोहित कयने छईन। ओ अतऽ आर किछु नई करई छईथ.......बस दिल्ली सदनक जे गंगा कात मे बेंच लागल छई.......ओई पर असगरे बईसल ओ धुन सुनईत रहई छईथ।उनका ई धुन सब समयक अनुसार अलग अलग सुनाईत छईन। जेना शास्त्रीय संगीत मे भोरूका,दुपहरिया, संझुका, रतुका सब मे अलग अलग राग गाबल जाई छई, ओहिना हिनका सब बेर मे अलग अलग राग सुनाईत रहई छईन। नदी उयाह, धारा उयाह, गति उयाह, वेग उयाह,स्थान उयाह, समय उयाह आ व्यक्ति उयाह........तखईन एना किया पाईनक बहाव उनका राग मे डुबल गीत लगईत छईन। सबके एक्के आवाज हहअ.....हहअ....हहअ लगई छई, इनके किया राग लगई छईन। जे भी अकर पाछु के कारण विधान होई......बिपुल के अपना नीक लगई छईन आ ओ अबईत रहई छईथ।एक्को राईत अतऽ बिता लईत छईथ, त अपना के उर्जावान बुझाय लगई छलईन।आब तऽ दिल्ली सदन क लोकसब ईनका चिन्हो गेल छलईन। कयेक बेर नई कमरा खाली रहला पर ओ सब अलगो सऽ इनका लेल व्यवस्था कअ दई छलईन। अतअ जलखई, चाह आ दुनु समय भोजन, सबहक इंतजाम छलई। कहियो कऽ बाहरो के दीन- दुखिया के अतऽ खेनाई खुआवल जाई छलई। बेशी लोक तऽ घुमऽ वा किछु काजे ऋषिकेश अबई छल.......बिपुल एहन छलाह जे लोकक अनुसार ओहिना दिल्ली सदन अबई छलाह।भईर भईर दिन गंगा कात मे बेंच पर बईसल बिता दई छलाह। नई कतऊ जाई छलाह आ नई कियो भेंट करऽ अबई छलईन।अतुको लोकक लेल पहेली बनल जा रहल छलाह। एक दुपहरिया मे बैसल देख रहल छईथ, किछु भगवाधारी साधू संत सब दौरल खेनाई खाय लेल आईब रहल छईथ।एना ओ पहिनेहो अतऽ देखने छलाह जे दीन दुखिया सब लेल कहियो काल भण्डारा लगई छलई।अई बेर ओई भीड़ मे एक गोटे पर उनकर नजर टीक गेलईन। ओना भगवा वस्त्र मे उनका पहिने नई देखने छलखिन....... लेकिन मूंह कान कतऊ बदलई छई! बिपुल उनका चिन्ह गेला।अखईन जे उनका टोईक दईतथिन तऽ भऽ सकईत छलई, ताबईत खेनाई खत्म भ जाई। पहिने आऊ आ पहिने पाऊ बाला हाल छलई। दोसर भरल पेट मे पुछपाछ केनाई ठीक रहई छई। आब ओ इंतजार करअ लगलाह.....उनकर घुरबाक। घंटा भईर के बाद ओ साधू जाय लगलाह तऽ बिपुल उनका बजेलखिन। - आहां दिल्ली वला पंडीजी थिकौंह? - हं । छी नई, छलौंह। आहां के छी? हमरा केना चिन्हई छी? हम की आहांक बगल मे बईस सकई छी? - हं हं पंडीजी एकदम बैसु। आहां सं हम आशीर्वादी लेने छी।चिन्हु हमरा! कतेक बेर भेंट भेल अईछ। कतबो जोर ओ साधू लगेला मूदा नई चिन्ह सकलाह। - आहां कोनो धरफरी मे तऽ नई छी? अई साधू सबहक संग तऽ नई कतऊ जयबाक अईछ? -नई नई? ई सब तऽ भोजनक संगी छईथ। अई शहर मे भण्डारा लगईत रहई छई। जकरा पता लाईग जाई छई ओ दोसरा के सुचित कऽ दई छई। कियो ककरो संगी नई छई। पापी पेटक सवाल छई, ततबे तक साथ छई। देखबई ने- दस मिनट मे खाली भऽ जायत। सब अपन अपन अड्डा पर पहुंच जायत। - चलु हमर कमरा मे। ओतअ आराम सऽ गप्प करब। - हं हं। चलु। दुन गोटे कमरा मे अयलाह। आब बिपुल अपन परिचय देलखिन.......छक दं ओ साधू चिन्ह गेलखिन। - आहां पंडीजी सं साधू कहिया भेलऊं? - नई हम पंडिये जी छलऊं आ नई साधुये छी। सब कर्मक फल छई।ओ जेना रखने छईथ.....जीब रहल छी। जहिया अरूदा पुरा भअ जायत, अपना लग बजा लेताह। - हम त अई सदन मे अबईत रहई छी। आहां के कहियो नई देखलऊं। - हमरे गल्ती। हम आहांक सोझा नई अयलऊं। - नई नई। से नई कहई छी। हम त हुजुम मे अबई छलऊं। कयेक बेर बेशी लोक भऽ जाई छलई तअ बिना खेने घुराअ दई छलाय। आब आहां छी त एना नई भगायत। - आब आहांक कहियो नई भगायत। निश्चिंत रहु। बिपुल के हिनकर छायावाद क बात आर अतीत जनबा लेल उत्साहित कअ रहल छलईन। ई दिल्ली वला ऊयाह पंडीजी छलाह, जे उनकर माय तनुजा के प्रियपात्र छलाह। बिपुलक उपनैन आ पिता बिजयक श्राद्ध ईयाह करौने छलाह। सब समस्या क समाधान ई जेबी मे रखने चलईत छला।कयेक टा हिनकर खिस्सा रहईन। एक बेर एकटा अधिकारी के प्रोमोशन बड्ड दिन सं बाधित छलई। ई पंडीजी, जहिया के तारीख कहलखिन, तहियो उनकर प्रोमोशन भेलईन। ओ अधिकारी इनकर चेला भ गेल छलाह। पंडीजी के रात्रि विश्राम उनके कतअ होईन।ओ चाईर लाईन ईनकर प्रशंसा मे लिखबो केने छलखिन। प़डीजी ओकरा शीशा क फ्रेम मे लगा कअ अपन झोड़ी मे रखई छलाह- कहला पर निकाईल कअ देखबई छलाह। एकटा प्रतिष्ठित ब्यापारी के धीयापुता नई होई छलई तऽ पंडीजी के ओ अपना कतअ बजेने छलाह।जे तारीख कहलखिन- ओही दिन बेटा भेलई। ओ व्यवसाई अपन हाथक घड़ी खोईल कअ प़डीजी के ईनाम मे देलकईन। पंडीजी के हाथ मे उयाह घड़ी बान्हल छईन। अहिना कतेक ईनकर भविष्यवाणी के सत्य होबाक बात फैलल छलई। बिपुल के अपनो याद पड़ई छलईन जे एक बेर पंडीजी उनको कतअ आयल छलाह। बिपुल के कहना छलखिन - " आहां क बिदेशक योग अईछ।" पुजा पाठ, ज्योतिष,भविष्यवक्ता, हस्तरेखा पढ़अ बाला- ई सब कयेक प्रकार छलई- कहाई छलई सब...." पंडिते।" जेना सत्यनारायण भगवान, अनन्त आ सरस्वती पूजा क लेल एक पंडित! मुड़न, जनऊ आ दुर्गा पूजा के लेल दोसर पंडित! बियाह, गरूड़ पुराण आ श्राद्धक लेल तेसर पंडित !आ टिपईन, ग्रह महादशा आ एकादशी यज्ञ लेल अलग पंडित होईत छल। कियो लोकाचार क ज्ञाता होईत छलाह त कियो ज्योतिष क त कियो हाथक लकीरक त कियो ललाट पढ़अ बाला त कियो संस्कृतक विद्वान। ई पंडीजी अई सब मे सऽ किछु नई छलाह- मूदा जे कहई छलखिन से सत्त भ जाई छलई। ईहो कहल जाई पहिने जे एक निश्चित संख्या मे जे गायत्री मंत्र क जाप कअ लईया, ओकरा मे अतेक प्रभाव भ जाईत छलई जे ओ कहई छई- से भअ जाई छई।ई गायत्री मंत्र पढ़ई छलाह वा नई- संदेहे। पंडीजी कहलखिन जे लोक उनका पकईर पकईर कऽ अपन घर ल जाईन आ कहअ लेल दबाव बनाबईन। ओहो जजमानक खुशी के देखईथ, कही दई छलखिन। जखईन ओकरा अनुसार फल नई होई त ईनका अनाप शनाप कहअ लगलईन। ई पंडीजी नई ककरो सं किछु मंगिते छलखिन आ नई देला पर घुरईबते छलखिन। बाद मे ईनकर स्थिति खराब होबअ लगलईन। जे बजेला पर जाई छलाह पहिने , से बिन बजौने घरे घर जाय लगलाह। भीखमंगा जेकां लोक व्यवहार करअ लगलईन। " जे नगर राज करी, से नगर भीख नई मांगी"- ईयाह सोईच कअ ओ अउआईत बऊवाईत ऋषिकेश पहुंचल छईथ। अतअ एकटा बनिया के छोट छीन मंदिर छई। ओई मे ठाकुरजी के दुनु सांझ पुजा करई छईथ। मंदिरक संग चाईर टा दोकान सेहो छई।ओकर किराया के किछु भाग पंडीजी के सेहो भेटई छईन। ओही मे दुनु सांझ पुजा पाठ,प्रसाद, सांझ अगरबत्ती सब छई। ज्यों भंडारा मे भोजन भ जाई छईन तं ओई पाई सं बढ़िया सं ठाकुरजी के भोग लगा लई छईथ। ततेक ने पंडित ऋषिकेश मे भ गेल छई जे "एक बुलाये, दस आये" बाला हाल छई। ज्यों बनिया के कम पाई बाला बात कहथिन तअ ओ तखने हटा देतईन। ओकरा त एहन पंडित चाही जे अई स्थानक बदला किछू ओकरे दई। भगवा वस्त्र के अई शहर मे चलती छई आ "औल रुट पास " सेहो भलई। कतऊ जाय आबअ मे टिकस नई लेबअ पड़ई छईन, तैं ई चोला ग्रहण केने छईथ। उजरा धोती मे तअ धांई सने धअ लेतईन।पंडीजी समयक संग ढ़ईर गेल छलाह। सब बात बतबईत पंडीजी निर्मगन भ गेल छलाह। पहिले बेर कियो उनकर हाल पुछलकईन। जे हाथक लकीर मे खींचल रहई छई- से होईते टा छई। जन्म आ मरण- ईयाह सत्य थीक। पंडीजी भावुक भ गेल छलाह। मंदिर मे सांझ देबाक समय भ गेल छलईन।जाईत काल बजलाह- "आहां बहुत ऊंचाई पर जायब- हम आहांक प्रशस्त ललाट देख रहल छी। हम अई सं नई कहलऊं जे आहां हमरा अहु हाल मे चिन्हलऊं, हम जे देख रहल छी- से कही रहल छी।" बिपुल, पंडीजी के भोजन लेल दिल्ली सदन वाला के कही देलखिन।जहिया आहां के मोन करत आहां आईब कअ भोजन कअ लेब। आई राईत मे जखईन गंगा कात मे बिपुल बईसलाह त उनका कोनो" राग " नई सुनाई छलईन। खाली हहअ.....हहअ......हहअ के आवाज अबई छलईन।पंडीजी सं भेंट होबा खातिर ई सब सृष्टि रईच रहल छलीह। बुझेलईन जे आब ऋषिकेश क अध्याय खत्मे जेकां छईन। अपन मोन के कहलखिन- " हे कतऊ आर चलु।" उईठ बिदा भअ गेलाह- कोनो आर ठेकाना के तलाश मे। बिपुल बिशनपुर सऽ वापस अयबाक निर्णय ल लेलाह। आब ओ अपना के ही व्यवस्था क पैबंद बुझऽ लागल छलाह। _________ बिपुल के दिमाग मे हरदम गाम घरक बेतुका बात सब घुमईत रहईत छलईन। जेना गाम मे आमक समय अबिते, डीह टोलक शांति खत्म भअ जाई छलई। जखने हवा बिहाईर अयलई...... झगड़ा शुरू। कथी लेल त "टिकोरा"।आन्ही पानी कयेक बेर खत्म होई छलई, फेर हो-हल्ला भेनाईये छई। ई सबसाला भ गेल छलई। डीहटोल मे सब एक्के दियाद छईथ..... तखनो छोट छीन बात पर छोटहा सब जेकां लड़ई छईथ। सब पढ़ल लिखल .....चाड़ पर चईल जाई छईन।पहिने कियो कियो माहौल शांत करबई लेल बीच मे अबितो छल....... बाद मे नई सुनला पर सब छोईड़ देलकईन।बिपुल भी एक दु बेर झगड़ा फरीछाबऽ गेल छईथ। जा...कटई मरई जास। जखन ककरो कोनो होशे नई......छोट पैघ के कोनो बिचारे नई.... त के पड़तईन? सैह भेलई....... बाद मे अपने चिकड़ा चिकड़ी करई छलाह......लड़ई छलाह.....कपार फोड़ा फोड़ी सेहो करई गेलाह....... अपने शांतो भेलाह। थाना पुलिस भेलईन। दुनु पक्ष मे कियो झुकबाक लेल राजी नई। तखईन तऽ ईयाह हैत ने।नाम गाम सब घिनेलईन- तकर तअ पुछुए नई। बात की, से सुनु- सब डीहटोल बाला हरिनाथ बाबु के सखा संतान छईथ। अपन जीवनक अंतिम काल मे हरिनाथ बाबु अपन घर छोईर देने छलाह। दलान पर एकटा कुटी बना क ओतई रहई छलाह। सब सम्पईत बेटा सब के दऽ देने छलाह। अही समय मे ओ बदरीबिशालक दर्शन करऽ गेल छलाह। अजुका जेकां नई छई जे बद्रीनाथ मंडिलक बाहर तक चईरपहिया सऽ चईल जायब। ओई समय मे हरिद्वार सं लोक पैरे बद्रीनाथ जाई छल। एक पेरिया रस्ता छलई। महीना सऽ ऊपर लाईग जाई रस्ता मे। ओही जतरा हरिनाथ बाबु के बद्री बिशालक दर्शन क कऽ घुरती मे कियो साधु भेंट भेल छलईन। ओ दु टा आम देने रहईन खाई लेल। हरिनाथ बाबु के आमक स्वाद अलौकिक लगलईन। ओ एकटा आमक आंठी संग नेने अयलाह......अपन कुटी के बाहर माईट मे गाईर देलाह। ओई मे सऽ आमक पोपिला निकललई। बाद मे ओ धीरे धीरे बड़की टा "बिज्जु" गाछ भ गेलई- सब "बदरी भोग" कहई। ओ आम जे एकबेर खाई छल, स्वाद नई बिसरई छल। पातर पातर ओकर खोईया आ छोटे आंठी होई छलई। बिज्जु आम मे ओना आंठी बेशी, गुदा कम आ रस बेशी होई छई। ई "बदरी भोग" त अलगे छल। ऊपर सं सब साल लदईर क फरई। सड़कक कात मे छलई, तैं राही बटोही के सेहो मौका लाईग जाई। अकर सामने " कलमी " आम सब फेल।कर कुटुम्ब सब सेहो अई आम के चाव सऽ खाई छलाह। सब खाय काल मे कहबो करत-" बिज्जु आम सुपाच्य होई छई, तैं खाई छी।" औ जी महाराज, तं दोसरो बिज्जु आम खाऊ ने........से नई। हरिनाथ बाबु के चाईर बेटा छलईन। सबसं जेठ यदुनाथ आर छोट महिनाथ। दुनु भाई मे बयस के बड्ड अंतर छलईन। यदुनाथ के बेटा अपन पित्ती महीनाथ सं जेठे छलाह। तहिया अहिना होई।हरिनाथ बाबु जखईन कुटी पर रहअ लागल छलाह तखने सं उनकर बेटा सब संपईत के बंटवारा के चक्कर मे छलाह। खाली महिनाथे टा छलाह-जे बंटवारा नई चाहई छलाह। सब भाई के एकटा दिन तय भेलईन जे ओई दिन सऽ बंटवारा के सुर सार शुरू होयत। ओतेक संपईत के बांट बखरा मे महीना सं ऊपर लगतई। जे दिन तय भेलईन ......ओई दिन महिनाथ पराअ गेलाह गाम सं। उनका ई बांट बखरा नीक नई लगई छलईन। भाई सबहक बड़प्पन देखियऊन- जे सबसं नीक आ महग जमीन रहईन,से महिनाथ के हिस्सा मे पहिने कैल गेलईन- ई नई होई जे महिनाथ नई छलाह ओई सं उनका खराब जमीन सब हिस्सा मे पड़लईन। बाकी मे तीनु भाई बंटला। बंटवाराक कागज पर तखनो महिनाथ अपन हस्ताक्षर नई केलाह। अही तरहक प्रेम भाव डीह टोल मे आपस मे रहई। कहियो धन संपईत के , संबंध पर हावी नई होबअ देलकई। हरिनाथ बाबु के साबिक आंगन जेठांश मे यदुनाथ के भेटलईन आर बाकी तीनु भाई आंगन के तीनु कात। आब चारु भाई के अलग अलग चारू दिश घर आंगन बईन गेल छलईन। साबिक आंगन स सब जुड़ल आ बहरी सं दलान।कुटी साबिक मे छलई, तैं ओ यदुनाथ के हिस्सा मे रहईन। समय बीत रहल छलई। आब संबंध पर संपईत भारी परऽ लागल छलई। त्याग के आब "मूर्खता " आ "हारनाई" कहअ जाय लागल छलई। यदुनाथ आ महिनाथ दुनु परलोक जा चुकल छलाह। आब डीहटोल मे रहई छलाह- यदुनाथ क पोता भबनाथ आ महिनाथक बेटा रामनाथ।बाकी आर दियाद। भबनाथ सरकारी नौकरी मे छलाह। रामनाथ कोनो काज ढंग स नई केलाह। छोट मोट नौकरी लगबो केलईन तं कतऊ मच्छर काटईन त कतऊ जानवरक आवाज सं डर लागईन। घर पर कहलखिन त ऊनकर माय बजा लेलखिन। तहिया त आबेशे सैह होई छलई। नौकरी छोड़ाअ क घर घुरा लेल गेल- मतलब बड्ड दुलारू। बाद मे जे दशा भेलईन -नौकरी छोड़बो बलाअ के आ छोड़ाबो बलाअ के। चुल्हो सबदिना नई जड़ईन- सैह हाल भेलईन। भबनाथक स्थिति ठीक छलईन आ रामनाथ क दिन ब दिन जर्जर। ओ "बिज्जु" आमक गाछ आब बड़का बिशाल भ गेल छलई।ओकर थोड़े भाग भबनाथ मे आ बेशी भाग रामनाथ क दिश रहईन। भबनाथ अपन सब गाछी के आम पहिनेहे बेच लई छलाह आ रामनाथ तं सब गाछी जमीन सहित बेच लेने छलाह।ईयाह बदरीभोगक टिकोरा खंसई, आ ओ जे रामनाथ क कतअ के लोक बीईछ लई.......फेर शुरू लड़ाई। हर बरखक ऊयाह हाल। दियाद बाद सब ईमहर रामनाथ के कही दईन-"ई गाछ त अंही मे अईछ। हम त देखने छियईन महिनाथ कका के आम तोड़बा क अपन घर ल जाईत।" आब की छई " मुर्खक लाठी बिच्चे कपार।" रामनाथ लाठी ल क ठार-आम ल जाई लेल। ऊमहर भबनाथ, धन संपईत स जब्बर छलाह......अपना सं कमजोर रामनाथ के कोना आम ल जाय देथिन....... ई त उनकर बेज्जती भ जेतईन। दियाद सब ईनको आईब कअ चढ़ा दईन-" आहां त मुईत देबई, त रामनाथ दहा जेताह। उनकर सपरतित देखियऊन। लाठी ल कअ ठार छईथ।" ओना संबंध मे रामनाथ, भबनाथक पित्ती भेलखीन......मूदा संबंधक बीच त आब हैसियत आईब गेल छई....... भबनाथ कहियो सं रामनाथ के कका नई कहई छथिन।ऊपर सं खुल्ला लाठी भजनाई -ई त भबनाथक ईज्जत के बात भ गेलईन। ऊयाह भेल जकर डर छल। दुनु दिशक लोक के चोट लगलई। रामनाथ संग ओकर मोचंड्ड भाई कमलनाथ सेहो छलई। अकर सब के आंगनबाली सब सेहो सैह छलई। सब बापे पुते लाठी फट्ठा जे भेटलई, आईब गेल छलाय। माथा पिटी मे रामनाथ सब भारी पड़लईन। थाना -पुलिस आयल। सब के संग ल गेलईन। पाई द देबाअ क छुटई गेलाह। केश कोर्ट मे फाइल कैल गेल। फैसला तक गाछ लग जाय मे दुनु पक्ष के रोक लाईग गेलईन। मोकदमा चलिते छईन। लोक कहईन जे की हेतई- दु टा आम खाईये लेत त आहां के की घटत। कका छईथ। बाप ददा के लगाओल गाछ छल आ से एक्के छईथ। भबनाथ के से गप्प तहिया नई बुझाईन। अई लड़ाई मे निकलल शोणित ओई गाछो पर खसलई। महीना बितईत बितईत ओतेक भारी विशाल गाछ सुखा गेलई। पुरा गाछ मे चुट्टी लाईग गेलई। बड़का बड़का डाईढ़ सब हहा कअ खसअ लगलई। गामक लोकसब खसल लकड़ी उठा क ल गेल। चौकीदार, गाछक सील बड़ा बाबु के नाम पर एक दिन ऊठौने चलईत बनल। हरिनाथ बाबु के अपन हाथक रोपल गाछ, जेकरा सं ओ अतेक प्रेम करई छलाह। बच्चा जकां ओ अई गाछ के पोसने छलाह। ऊयाह प्रेम सं भरल,ई बदरीभोग अतेक मीठ छल।राही बटोही, चिड़ई-चुनमुन, अपन बंशज त सद्यै, अकर भोग करई छलाह। अकर छाहईर मे सब बईसईत छल ..... .सुसताईत छल। कहलो जाई छई-जेकर फर जतेक बेशी लोक खाई छई, ओ ततेक बेशी फरई छई। ओई गाछ सं लोकक लगाव खत्म भ गेल छलई। सब ओई पर मल्कियत क लेल संघर्ष क रहल छलाह। गाछो मे अपन जान प्राण होई छई। भईर गाम कही रहल छई- प्रेमक पियासल ई गाछ छल। जहिया तक भेटलई......लहलहाईत रहल.......जखने अई लेल लड़ाई भेल.......निष्प्राण भ गेल। ई सब घटना सऽ बिपुल अंदर सऽ हिल गेल छलाह। आई तक ओ अपना के कर्ता बुझई छलाह। कीछ भी ऊनकर मोनक अनुसार नई भऽ रहल छलईन।आब ज्यों भाग्य पर छोईर दी, ई मोन नई मानई छलईन।अपना के बदरी भोग आम विपुल बुझअ लागल छलाह।दुनु क हश्र एके रंग बुझाय लागल छलईन। ई सब बात ओ लोक सब सऽ पुछऽ लगलाह। लोक ऊनका " पगला " कहऽ लागल छलईन। कखनो कऽ कीयो पाछु सऽ ढेपा सेहो देह पर फेंक दईन। चोट लगईन, तखईन खीस बड़ईन। दुख सऽ ओकरा सब के गाईर पढ़ऽ लगथिन। आब नई नहाय धोय के होश रहईन। इनकर ई हाल देखी कऽ दीप्ति इनकर ईलाज करेबाक प्रयास कैलक। ई अपना के असामान्य मानबा लेल तैयार नई छलाह। ईनका गामक ततेक ने गप दिमाग मे घुईस गेल छलईन, ओ सब घोरनक छत्ता जकां मोन के उद्वेलित करईन। हरदम दिमाग मे हलचल मचल रहईत छलईन। कखनो कहथिन- " हमरा मिश्रौली लऽ चलु। हम बाबा बला मृदंग बजायब। " एक दिन अपने बजार जा कऽ मृदंग कीनने एलाह। घर आईब कऽ लगलाह बजाबऽ। अतेक सुन्नर थाप निकलऽ लगलईन, बुझाई जेना सीखने रहईथ। जे भी मिश्रौलीक संगीत घराना के जनई छलई, सब के सुनय मे अनमन तेहने लगई। आखिर किया नई ई नीक बजेताह, खुने मे इनकर संगीत रचल- बसल छईन। आब मृदंग बजबऽ के भुत बिपुल पर सवार भऽ गेल छलईन। बजबईत- बजबईत हाथ सऽ शोणित ओहिना बहऽ लगईन, जेना कहियो बदरी के भेल छलईन। ई सब देखी कऽ बिपुलक कनिया दीप्ति परेशानी मे पईर गेल छलीह। गाम एलीह कथी लेल? आ भऽ गेलईन कथी दुन? अही बीच मे इनकर जीवन मे दमन बाबू क पदार्पण भेलईन। दमन के स्थिति " न आगु नाथ आ नई पाछु पगहा " बला छलईन। ओ स्त्री धीया- पुता सब के बिदेश मे छोईर कऽ आईब गेल छलाह। अकरो पाछु बरकी टा खिस्सा छलई। अई सऽ बिशनपुरक लोक अंजान छल।दमन एक तरह सऽ बिदेश सऽ भगावल गेल छलाह। अतऽ बिपुल आ दीप्ति उनका त्यागी लोक मानबाक गलती कऽ चुकल छलाह।बिपुलक संस्था मे योगदान क नाम पर ओ बिशनपुर मे बिपुले संग रहऽ लगलाह। दमन स्त्री मनोदशा पढ़बा मे सिद्धहस्थ छलाह। ओ दीप्तिक मोनक खालीपनक,आर्थिक समृद्धि आ सामाजिक ओहदाक अंजाद लगा लेने छलाह। बातो बड्ड लच्छादार आ व्यक्तित्व भी प्रभावी छलईन। दीप्ति ईनकर जाल मे फंसल जा रहल छलीह। दीप्ति संग दमनक नजदीकी देखी कऽ बिपुल मे नैराश्य भाव बढल जा रहल छलईन। अही स ऊबरई लेल ओ बार बार हरिद्वार दिश जाईत छलाह।कतेक दिन बिपुल आब घर सऽ बाहर रहईत छईत, अई सब सऽ दीप्ति के कोनो फर्क नई परईत छईन। ऊनका आब दमन राजदार भेट गेल छलखिन। दीप्ति त उल्टे, बिपुल के हरिद्वार जाय के सलाहे दईत रहईत छलखिन। बिपुल सब बुझईत, अंजान होबाक नाटक करईत रहलाह। बाद मे बिपुल, दीप्ति सऽ बदला लेबऽ के बारे मे सोचलाह। कपड़ाक छपाई बला काजक सिलसिला मे ऊनका राजा बाबूक कनिया स बेश हेमक्षेम भऽ गेल छलईन। दुनुक बीच कम्फर्ट लेवल पहिले दिन सऽ भ गेल छलईन। दुनु गोटे वयस्क आ अपन जीवन संगीक सतायल छलाह। दु दुखी मे दोस्ती बड्ड जल्दी गाढ़ भऽ जाईत छई। ईयाह अतऽ भेलई। आब दीप्ति , बिपुल के राजा बाबू क कनिया सऽ अलग होई लेल दबाव बनबऽ लगलखिन। बिपुल, दमन के हटबऽ लेल कहलखिन। अई लेल दीप्ति तैयार नई भेलखिन। घर मे कलह बढल जा रहल छछईन। बिपुल आब मृदंगक नशा मे डुबल जा रहल छलाह। तनुजा दिल्ली मे असगर रही रहल छलीह। उनका घर मे नई काजेवाली आ नई ड्राइवरे टीकई छलईन। तनुजा पुरा चिड़चिड़ा भऽ गेल छलीह। उच्च रक्तचाप, थायरायड आ चीनीक बीमारी सऽ ग्रसित भऽ गेल छलीह। मुड़न मे जगह ल कऽ उनका बिपुल सऽ देखार मतांतर भऽ गेल छलईन। घर मे दु ग्रुप भऽ गेल छलई। तनुजा आ विनयक एक ग्रुप आ बिपुलक दोसर ग्रुप। अही सब मे बिजय जेकां, बिपुल अवसाद मे सेहो चईल गेलाह। ई सुईन कऽ तनुजा तनाव मे आईब गेल छलीह। एक दिन भोरे टहलऽ काल तनुजा के एकटा स्कुटी वाला ठोकईर माईर देलकईन। लोक सब अस्पताल लऽ गेलईन। चोट बेशी नई रहईन। मूदा बामा पैर टुईट गेल छलईन। _____ जखने एक्सरे रिपोर्ट देखी कऽ डाक्टर कहलकईन- " पैरक हड्डी टुटल छईन।प्लास्टर चढतईन।" ई सुनिते तनुजा तनाव मे आईब गेलीह। कोना आब रही पेती? ईयाह सोचईत- सोचईत ह्रदयाघात भऽ गेलईन। ततेक ने गंभीर दिलक दौड़ा परल छलईन, तत्क्षण अस्पताल क बेडे पर मृत्यु भऽ गेलईन। कहुना कऽ लोक सब बिपुल के ई दुखद समाचार देलकईन। बिनय के सेहो खबर भेलईन। बिनय के इच्छा रहईन जे दु दिन मृत शरीर के ऊनकर इंतजार मे राखल जाय । बिपुल एक दिन सऽ बेशी मृत शरीर रखबाक पक्ष मे नई छलाह। बिपुल दिल्ली आईब गेल छलाह। एक दिनक इंतजार क बाद दाह संस्कार निगमबोध घाट पर कऽ देलखिन। अही ल कऽ बिनय- बिपुल मे फोने पर बहुत विवाद भेलईन।बिनय , बिपुल सऽ संबंध तोड़बाक घोषणा कऽ देलाह। दाह संस्कार क सात दिन बाद बिनय गाम अयलाह। बिशनपुर मे चढबो बढबो बला के कमी नई छलई।दुनु भाई के बीच कियो मध्यस्थता नई केलकई। बिनय बिशनपुर मे आ बिपुल हरिद्वार मे मायक श्राद्ध कर्म कयलाह। पुरा परिवारक प्रतिष्ठा तहस- नहस भऽ गेलई। ई दुनु भाई के गामक पैबंद गऊंआ बुईझ कऽ कहुना बईलेबाक जतन मे लाईग गेल छल। गाम मे अंईखदेखार दु ग्रुप बईन गेल छलई। दुनु भाई के अलग - अलग सलाहकार सब टपईक परल छलाह। घर मे बिपुल के अपन जुईत कम्मे चलई छलईन।सब निर्णय दमन लऽ रहल छलाह। गाम मे अई विषय मे खुसुर- पुसुर शुरू भऽ गेल छलई। कीछु युवा सब के लोक सब चढ़ा बढ़ा कऽ दमनक संग माईर - पीट करबा लेल ऊकसा रहल छलईन। अई मे बिनयक मौन समर्थन सेहो छलईन। बिपुल के गाम मे रहबा सऽ जकरा सब के परेशानी आ घाटा भेल छलई, ओ सब एकबट गेल छलई। बिपुलक कारण ककरो दाईल नई गईल पबईत छलई। बात सब के बढ़ा बढा कऽ बिनय के सामने राखल जा रहल छलईन। दीप्ति के चरित्र क छीछालेदर खुब कैल जा रहल छल। दमनक संग ऊनकर संबंध पर बहुत रास चश्मदीद सब सेहो सामने आईब गेल छलाह। दाई - माई सब के सेहो अई सब मे बड मोन लगईत छलईन। गाम मे आब दोसर कोनो गप्पे नई छलई। सब कियो अपना तरहे अई समस्या क समाधानक लेल नोन - तेल लगा कऽ विचार दई छलाह। डीही आ भगिनमानक बात सामने आनल गेल छलई। घुरन बाबू भी डीहीक तरफ सऽ छलाय।रामजीवन सिंह क परिवार पहिनेहे स खिलाफ छलईन। खेलौना के ल कऽ सेहो किछु धरा विरोध मे छलईन। गामक अस्मिता क बात सब सऽ सर्वोपरि मानल जा रहल छलई। ऊमहर बिपुल, दीप्ति आ दमन हरिद्वार मे श्राद्ध मे व्यस्त छलाह, ईमहर गाम मे रोज नब नब योजना बईन रहल छलई। लोक सब तऽ दमनक हत्या तक करबाक लेल बाजऽ लागल छलाह। रामबाबू के पुतोहु के सबक सीखाबऽ के बारे मे सेहो षड्यंत्र रचल जा रहल छल। अखईन तक कोनो सबुत ककरो लग नई छलई। ई कहला, ओ कहला, ई देखलाह, ओ देखलाह अही सबहक आधार पर कयेक लोक के चरित्रहीनक दर्जा देल जा चुकल छलई। ई सब बात छईन छईन कऽ हरिद्वार सेहो पहुँच रहल छल। दमन स्थिति क गंभीरता के देखईत हरिद्वारे सऽ अपन गाम चईल जेबाक बारे मे सोचलाह। दीप्ति के ई पागल बिपुल संग रहबा मे डर लाईग रहल छलईन। हरिद्वारो मे बिपुल मृदंग जखईन मोन करईन, गंगा घाट पर बजबई छलाह। दिल्ली सदन बला सब बिपुलक ई रुप देखी कऽ बहुत दुखी भऽ गेल छल। तनुजाक विश्वस्त पंडीजी जे आब साधु बईन हरिद्वार मे रही रहल छलाह, अई श्राद्ध कर्म मे अपना दिश सऽ पुरा सहयोग कऽ रहल छलाह। दिल्ली मे जजमान सब सऽ ठगल सब सम्पईत बिला गेल छलईन। श्राद्ध कर्म मे तनुजाक किछु भुलल- भटकल ईस्ट मित्र आ संबंधी सब उपस्थित भेल छलाह। ओ सब बिपुलक स्थिति देखी कऽ ऊनका दिल्ली मे मानसिक ईलाज क लेल अस्पताल मे भर्ती करवेलखिन। दमन के ओतई सऽ टाटा- बाई बाई कैल गेलईन। तनुजा क दिल्ली बला फ्लैट मे दीप्तिक रहनाई निश्चित कैल गेल। बिनय सऽ भी फोन पर संपर्क कैल गेलई। गामक संपईत एकमुश्त बेचबाक फैसला सेहो लेल गेलई। बाकी महानगरक मकान आ फैक्टरी सबहक बारे मे चार्टर अकाउंटेंट के रस्ता बतबई लेल कहल गेलई। साते दिनक ईलाजक बाद बिपुल मे बहुत सुधार भऽ गेल छलईन। ओ अस्पताल सऽ डिस्चार्ज भेला क बाद दिल्ली बला फ्लैट मे दीप्ति आ बेटा संग रहऽ लगलाह। बेटा के दिल्ली मे स्कूल मे नाम लिखा देल गेल छलईन। बिनय सेहो गाम सऽ घुरला पर कागज सब पर हस्ताक्षर करई लेल दिल्ली आयल छलाह। अतऽ बिपुलक स्थित देखी कऽ कोढ़ फाईट गेलईन। गर लाईग कऽ दुनु भाई कनलाह।बात सब स्पष्ट होबईत गेलईन। किछु क्षुद्र लोक अपन स्वार्थ सिद्धि क लेल अई घर मे आईग लगेने छलई। सब गलतफहमी दुनु भाई मे दुर भऽ गेल छलईन। बिनय खुशी खुशी बिदेश लेल बिदा भेलाह। एयरपोर्ट पर बिपुल, दीप्ति आ प्रिय भातिज छोड़ई लेल आयल छथिन। माथ पर जे बरका बोझ छलईन, ओ ऊतईर गेलईन। जीवन मे आगु भी कोनो बात भेला पर सीधा विमर्श करबाक निर्णय भऽ गेल छलईन। घर सऽ बिजय आ तनुजा क बडका फ्रेम करायल फोटो बिनय अपना संग बिदेश ल जा रहल छईथ। बिपुल आ दीप्ति एयरपोर्ट स सीधा घर आबई गेलाह। दुनु के अपन अपन गलती पर पछतावा भऽ रहल छलईन। आब ओहो सब आपस मे सब बात के सोझरेबाक दिश प्रयासरत छईथ डाक्टरक अनुसार बिपुल जल्दिये सामान्य जीवन व्यतीत कऽ सकईत छईथ। दीप्ति, बिपुल के पुरा सेवा कऽ रहल छथिन। सब दवाई समय पर आ समस्या सब सऽ बिपुल के अलग रखई छथिन। बेटा भी आब चेतन भऽ रहल छलईन। ओहो माय बापक संघर्ष मे उम्र स पहिनेहे बुझनुख भऽ गेल अईछ। ओहो अपना तरहे घरक माहौल के सामान्य रखबा मे पुरा जतन करईत रहईत अईछ। ओकर बचपना त कहिये खत्म भऽ गेलई, ई बिपुल आ दीप्ति अपन अपन दंभक चक्कर मे ध्यान नई राईख पायल छलीह। आब फेर सऽ संबंधक परिभाषा पईढ़ रहल छईथ आ ओही अनुसार अपन आचरण करबाक जोगार मे सब रहईत छईथ। बिपुल आब मृदंग बजेनाई छोईर देने छलाह। बेटा के संगीत सीखबा लेल एकटा गुरुजी के ठीक कयलाह अईछ। उम्रक ओई दौर मे आब आईब गेल छईथ, जई मे समझौता क कऽ ही आगु बढल जा सकईत छई। एक टा आर फैसला बिपुल आ दीप्ति लेलाह अईछ। घर मे कोनो नौकर- चाकर आ ड्राइवर के नई रखबाक लेल। दीप्ति अपने घरक काज मे भईर दिन लागल रहईत छथि। झाड़ु पोछा सऽ लऽ कऽ बर्तन तक अपने मंजई छथि। ओकर बाद खेनाई बनेनाई, फेर बेटा के स्कूल क होमवर्क। अही सब मे देहो थाईक जाई छईन आ खाली समयो नई भेटई छईन। आब खुब नींद सेहो होबऽ लागल छईन। बिपुल भी गमला सबहक देखरेख सऽ काज शुरू कयलाह अईछ। अपन नब नब भोजन बनबऽ बला शौक फेर सऽ पुरा कऽ रहल छईथ। अई सब काज मे अपना के व्यस्त रखला सऽ दिमाग भी जल्दी सामान्य भऽ जाईत छई। पंद्रह दिन बाद फेर डाक्टर कतऽ बिपुल आ दीप्ति आयल छईथ। बिपुलक रिकवरी देखी कऽ डाक्टर आश्चर्य चकित छलाह। आई ओ बिपुल के पुर्ण स्वस्थ घोषित कऽ देलखिन अईछ।बिपुल आई अपने ड्राइविंग कऽ रहलाह अईछ।दुनु गोटे खुशी खुशी फ्लैट मे घुरलाह। बेटा के स्कूल स अयबा मे अखईन सभय बाकी छई। बिपुल के आई दीप्ति के देह सऽ प्रेम जाईग रहल छईन। दुनु अपन देहक नेह एक दोसरा के समर्पित कैलाह।दुनुक चेहरा पर तृप्ति आ संतुष्टिक भाव छईन। आई जेना बदरी के महीक्का भांग अगिला दिन भेटई छलई, ओहिना बिपुलक पसंदक भोजन बनबऽ मे दीप्ति लाईग गेल छईथ। बिजयक नवोदयक संगी अय्यरजी छलखिन। ओ इनकर चार्टर अकाउंटेंट सेहो छलखिन। ऊनके कंपनी सबहक सुचारु व्यवस्था क भार देल गेल छलईन। ईनका सऽ बिजयक पारिवारिक रिश्ता छलईन। बिपुल आ बिनय , अय्यर अंकल के गार्जियन बुजई छलखिन। ओहो अपन अई फर्ज के नीक सऽ निर्वहन कऽ रहल छलाह। सब फैक्टरी अपने ओ गेल छलाह आ कागज - पत्तर के गहन अध्ययन कयने छलाह।अही सबहक आधार पर अपन रिपोर्ट बना कऽ बिपुल आ बिनय दुनु के पठा देलकिन अईछ। भारतक लेखे नीक पाई सब महिना बिपुल के हाथ मे आईब जाईन, अकर ओ अई मे उल्लेख कैने छलाह । बिनयक हिस्सा क पाई अपन सीधा ऊनकर डालर अकाउंट मे चईल जेतईन। पाई तऽ कहियो सऽ बिजयक धीया - पुता लेल समस्या नई छलई। ओ तऽ एकटा नीक उद्देश्य सऽ मातृभुमिक लेल बिपुल अपन लागल छलाह। ई कोई जरूरी नई छई, आहां अपन सब उद्देश्य के पाईये ली? कयेक मे असफलतो भेटई छई। मूदा असफलता भी बहुत कीछु सीखा दई छई। ई सीख जीवन मे दोसर प्रयास मे बहुत मददगार होईत छई। असफलता सऽ नई टुटबाक चाही आ नई निजी संबंध मे बाहरी क हस्तक्षेप क आजादी दी। संबंधक अपन मर्यादा होईत छई, ओकर रक्षा सब के करबाक चाही। निजी स्वार्थ आ शौक जखईन संबंध के कमजोर करऽ लागय, स्वार्थ आ शौक दुनु के तिलांजली द दी। बिपुल आ दीप्ति जीवनक झंझावत स दु दु हाथ करईथ, बहुत कीछु सीखी चुकल छईथ। आब एक दोसर के पैबंद बुईझ कऽ ओई सऽ मूक्त होबाक जगह, संबल बनबा मे लाईग जाई। आब ई दुनु ओना खुश छईथ , जेना दोसर जनम भेल होईन। कियो व्यक्ति गाम- समाज के सरोकार के नई बदईल सकईत अईछ। समाज क अपन प्रक्रिया छई, ई स्वतः अपन स्वरूप मे बदलाव अनई छई। व्यक्ति विशेष क प्रयास अमूमन निरर्थक रही जाईत छई। अपना के बदईल सकी त बदलु, गाम- समाज क चिंता छोड़ु।चरैवेत्ति- चरैवेत्ति। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। डा. किशन कारीगर कथाकार- मुकेश आनन्द- समीक्षा
मुकेश आनंद अपना कथा पैघ कवि के लाइब मे एकदम यथार्थ ईशारा क मैथिली कवि के फेसबुकिया लाइब सन जिनगी दिस तका नीक चित्रण केने यै.
हइ यौ हमरा नै चिनेहलौं? मुकुन्द बाबू अपना मने पैघ कवि छथि तइयो फेसबुक लाइब मे थोड़बे लोक जुड़ै छै त तामसे खौंजा क एडमीन के फोन करै छथि?
औ जी अनकर लेखनि के चर्च करै बेर अहाँ पैघ कवि हेबाक फुफकारे रहबै आ अपना लाइब बेर कम लोक जुटल त तामसे अघोर भऽ जेबै त लाइब मे कहियो बेसी दर्शक जुटतै? स्वयं अपना पर प्रशन करू स्पष्ट जवाब सोझहा आबि जाएत.
लागि जाउ आइ स लाइब के खेल मे लेखक मुकेश आनंद करगर व्यंग्य कऽ मैथिली कवि सबके सचेत क रहलाह. नीक बेजाए नै देखियौ. लाइक कमेंट करैत रहियौ वला चरित्र मैथिली गिरोहबादी कवि सबहक पाखंड पर एकदम दमगर प्रहार.
यौ श्रीमान लोक लाइब मे तखने जुड़ै छै जखन अहाँ अनकर लाइब सुनबै देखबै एक नीक तंज आ सलाह बुझना गेल. एकटा सबक सेहो जे मैथिली लेखक कवि अनकर लेखनी वा लाइब के चर्च किए ने करै चाहैए. मैथिली कवि अपना गिरोह तक सिमटल रहबाक कारणे दर्शक पाठक स जुड़बा मे असफल रहैए जइ स मैथिली लेखक के स्वयं घाटा अछि.
कवि के अपने गिरोहक लोक के लाइब पर बेमतलबो हं मे हं मिला जबरदस्त, वाह वाह, बड बढिंया लिखि उहो नेहाल आ कवि सेहो गुमाने फूइल के तुम्मा? से किए यौ? लेखक मुकेश आनंद अपन कथा मे दर्शक पाठक स जुड़बाक लेल सामूहिक प्रयास दिसि सेहो देखा रहलाह. अइ कथा मे मैथिली कवि आ लाइब प्रोग्राम के असलियत नीक जेंका देखार भऽ रहल अछि. अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। भुवनेश्वर चौरसिया "भुनेश" उ लपट एमहरो ऐत
गर्मीक दिन आ पण्डी जी दुपहरिया मे आम चूरा खायत रहथिन। पण्डी जी केर अगल बगल ढ़ेर फुसक मकान आ पण्डी जी केर यजमानी केर कमायल पाय सं निर्मित दुमहला। ककरो फुसक खोपरी मे आगि लागि गेल तखन सौंस गांव हो हल्ला हौ आगि लागि गेलय फलनमाक घॅंर मे पानी लाबै जाय जाव यौ। एक मात्र कुआं पण्डी जी केर दलान पर चापाकल कहां पायब। पण्डी जी केर पंडिताइन छिपा छिनैत हे यौ एखन खेयनाय छोड़ू आ जाऊ आगि बुझाबु। पण्डी जी पेट मे जे आगि लागल ऐछ ओकरा बुझायब तखने जायब टस सं मस नै पलथी मारने। आकि एकटा नमहर लपट पण्डी जी केर पक्का पर गिरल। पक्का पर धानक झंट्टा बिराजैत छल आगि ध लेलक धंधरा उठैत लपक देखि कऽ पंण्डी जी पानिक बाल्टी उठैयलेन दौड़लाह मुदा आगिक लपट केर आगू बेबस। कुछ नै चलल धू धू क के पक्को जड़ि गेल, पंडिताइन आब पेटक आगि बुझाबैत रहू। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। कुमारी आरती (जमशेदपुर) यात्रा वृत्तांत
हम आय यात्रा वृत्तांतमे मालदीव केर यात्राक वर्णन करि रहल छी. समय २०१६ के जुनक महीना छल. गर्मी केर छुट्टी भेलय बेटीक स्कूल मे. हम सब केतऊ घुमय के योजना बनाबय लगलऊ. मालदीव केर बारे मे बहुत सुनने रही आओर गूगल मे ओकर चित्र सेहो देखने रही. हम सब ओतय जाय लेल निश्चय केलऊ. भोरे जमशेदपुरसँ कोलकाता के लेल रेलगाड़ीसँ विदा भेलऊ. हमरा सबके हवाई जहाज पकरय लेल कोलकाता जाय पड़ैत अछि. कोलकातासँ पहिने श्रीलंका केर राजधानी कोलंबोक लेल हवाई जहाज केर यात्रा केलऊ. तीन घंटा केर यात्रा छल.इ यात्रा खाइत पीबैत बीत गेल. कोलंबो एयरपोर्टसँ फेर दू घंटाक बाद मालदीव केर राजधानी माले लेल हवाई यात्रा शुरू भेल. बस एकहि घंटाक यात्रा रहय.माले एयरपोर्ट पहुँचइत रात्रि भय गेल. माले मे उतरि के रिसॉर्ट जाय कऽ लेल आधा घंटाक समुद्र यात्रा करय पड़ल. घुप्प अन्हार राति रहय आ पानिक जहाज मे खाली होम तीन गोटे वर कनियाँ आ बच्चा..मोने मोन डऽर सेहो हुए. जखनि बीच समुद्र मे जहाज गेल त आर डऽर हुआ लागल. हीनका कहलियनि त कहलथि डरू नय टापू पर जाय छी ने तांय केतहू किछु नय देखाइत अछि. कनि काल मे हम सब स्थान पर पहुँच गेलऊ. मोन चैन भेल. स्थानक नाम छल वेल्लासुरू. राति मे ओतय बहुत कम इजोत केने रहय. लाइट सब भुक- भुक करैत। चारु कात पानिये पानि देखाय. पूरा सुनसान एकोटा मनुष नय बस स्वागत करय लेल एक गोटे रिसेप्शन पर आ एक गोटे समान लऽ कऽ कमरा तक पहुंचाबय लेल. बहुत शान्त जगह. हम सब अपन कमरा मे गेलऊ. पानिक ऊपर हमर सबहक रूम छल जेकरा वाटर विला कहय छय. रातिक दस बाजि गेल. कमरासँ बाहर बाल्कनीमे गेलऊ मुदा केतहु किछु नय देखायल सिवाय पानिकेँ. वापस आबि खाय पीबिकेँ सुति रहलऊ. थाकि गेल रही. भोरे उठि कऽ पर्दा हटेलऊ तऽ एतेक सुन्दर दृश्य देखायल मोन खुश भय गेल.चारु कात पानिक बीच मे हम रही. पानि एकदम शान्त, छोट-छोट मांछसँ भरल.रूम एतेक सुन्दर खूब ऐल-फैल ओय परसँ बाथरूम सेहो किछु कम नहिं छल. हम सब बाहर निकलि चारु कातक भ्रमण पर चलि पड़लहुँ. पहिने जलपान करि फेर बीच पर गेलऊ. एतेक साफ सुथरा पानि छल समुद्र केर, भीतर तक सबटा साफ देखाय छल. नेटवर्क केर सिस्टम एतेक हाइटेक जे बीच समुद्रमें सेहो wifi खूब स्पीडमे चलय. आजुक जमानामे खाय,रहय लेल ठीकसँ भेटऽ चाहे नय नेट केर सुविधा नीक हेबाकेँ चाही. वाटर स्पोर्ट्स सेहो छल. चारि दिन कोना बीत गेल पता नहिं चलल.बहुत नीक स्थान लागल हमरा मालदीव. एकदम शान्त आ रमणीक दृश्य से सुसज्जित. अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। डॉ प्रमोद कुमार, पांडिचेरी
पवना माय- (संस्मरण)
ई बात प्रायः १९७०-७१ई. के हेतय। पवना (हम) आब आठमां मे चलि गेल रही। किलास ऊंच भ" गैलय आ बयसो बारह तेरह के भ" गेलै मुदा पवना के मोन त" ओहने। दुध पीवा बच्चा सन केराक वीर जकां छल छल, निश्छल। अकिल बुद्धिक दरस नै।हं पहिने माय लग गामे मे रहैत छलै मुदा आव किछु साल सं बाबू लग पंडौल में रहैत छै। शनि दिन क" गाम अबिते शुरू भ" जायत छै। माय ई कीन दे न त" ओ किन दे न! पवना माय के वारे मे प्रसिद्ध रहै जे हुनका आइ तक क्यो सुतैत कि उठैत नहिं देखलकैन्ह। एसगर जान। धान उसननाइ, सुखेनाइ,कुटनाइ, तीसी,खेसारी,मौसरी, मरुवा कोठी मे जोगेनाइ, बड़हारावाली, बसुहानी वाली गुआरि सब सं बात चित कैनाइ, कतहु नहिं बिकायल गुआरिक कलहा दही त" उधारी किन लेनाइ,भिखमंगनी के हालचाल पुछनाइ, आ सबसं बेसी जं ककरो घाव-घोस, गूर भ" जाइ त" ओकरा बहेनाइ, कातिक, माघ आ बैसाख नहेनाइ, संक्रांति,एकादसीक उपास कैनाइ, गोबर के गोइठा आ गोरहा बनौनाइ,पवना के बाबू मात्र राहरिक दालि खाइ छलखिन, त" हुनका लेल हफ्ता भरिक दालि दड़डनाइ, रंग बिरंगक तरुआ तरकारी बनौनाइ! हुनकर हाथक मारा माछक झोड़ आ भात, सब बेटा बेटी के आइयो याद अबै छैन्हि! गरीब मुदा कर्मठ तेहेन जे निराशा छू नहिं गेल छलैन्ह! पति आर बच्चा सभक संग, पंडौल स्कूल के होस्टल मे रहै छलखिन। गाम में पवना, एक छोट बहिन आ एक छोट भाय आ पवनाक माय, एतबे लोक। पवनाक नाम आव बदलल छै। पवन सं पैघ एकटा भाय रहै ! बड्ड नीक! पिता ओकरा बड्ड दुलाड़ करथिन ! मुदा बाल्यावस्थहि में...! पिता ओकरे नाम पवना के द देलखिन। मुदा इ पवना त" एकदम्मे बताह- बेलगोबना। भरि दिन रणे- वणे बौआइ। हाथ मे हरदम खुरपी, कोदारि आ कि कुरहरि! क्रिकेट खेलय मे पास। माय कहथिन " बाप नाम बदलि देलखिन तहिं कि ई त" मुर्ख भ" जेतै!
छैठक भिनसुरका अरग रहै। तिने बजे उठि, नहा सोना क" माथ पर सबसं भारी ढ़किया ल" पवना घाट पर चलि गेलै। मात्र पानि मे ठढ़ भेनिहारि सब आयल रहथिन । पाछा सब जुटैत गेलै । अरग उठै सं कनिञें पहिने मैलाम बला बबाजी नबका चूरा बेचै लय ऐलै। रहै मलाह मुदा वैष्णव। कण्ठी धारी । कहियो चूरा त" कहियो पुरैनक पात आ नञ त" करहर आ बिच्ची। सब चूरा किन" लगलै। पवनों अपन माय सं कहलकै ," मां हमरो नवका चूरा किन दे।" इहो पवना अजीव बालक ! बयस यैह बारह तेरह मुदा निठट्ठ! किछु ज्ञाने नञ ! कहियो भोरे भोरे कमला सं पकरि क" बड़का बड़का रहु माछ बिकाय ले अबै तैयो कहै, " मां गै, माछ कीन दे न! केहेन चानी जकां चमकै छै। मायक फेर ओहने जबाव, " कमबिहें त" किन लिहैं !" पवना मुंह तकिते रहि जाय!
" छैठ देख... ! छैठ ... ! अखने कनि काल मे अरग उठ" लगतै ! खूब मोन सं गोर लगिहें ! कहियौन्ह छैठ परमेसरी सं अगिला जनम मे धनिक माय के बेटा बनौथुन। तोरा माय के पैसा नहिं छौ। पवना त" अवाक ! माय केर मुंह ताकि लेलक आ बौक बनि छैठ देख" लागल । जत जत केओ फटक्का फोरै आ कि रौकेट छोड़ै, ओत्तहि पहुंच जाय ! आह ! आइ जे ओकरो जेबी मे पाइ होइतै ! दिया बाती मे संठी के जरा क" अंडी पत्ता के पोटरी मे ओकरा ठुसि क" भरि, फेर सुतरी सं कसि क" बान्हि एकटा छुरछुरी बनौने रहै, वैह घुमब" लगै। छुर ... छुर ...लुत्ती निकलै। आ पवना गोल गोल घूमै । लुत्तियो गोल वृत्त मे नचै । अद्भुद दृष्य ...! अहि पवना के एत्तेक फुरेबो केना करै छै। लगैत रहै छै बेलगोबना जकां आ बुद्धि ने देखियौ ! पाइ नहिं छै तें कि, सब के पछारि देलकै ! ओमहर सं बिगरु कका ( सब के बिना बातो भरि दिन कान ऐंठ बिगरैत रहैत छलखिन, टहल टिकौरा करबथिन तें छौड़ा सब बिगरू काका कहनि) जीह ऐंठ क" कहलखिन। हुनका केकरो नीक कहां देखल जायत छैन्ह ! पवना सं कोन दुश्मनी छैन्ह से नहिं जानि ! भरि दिन टहलो करेथिन्ह, कखनो धोबिया ओत्त जो त" कखनों बजार आ नहिं त" दलाने बहारि दही। हरदम किछु ने किछु। पवना के माय कखनि घाट पर सं चलि गेलखिन से क्यो नहिं बुझलकै। अरग उठनाइ शुरुवे भेल रहै कि गोर लागि अंगना दिश चलि गेलखिन! जखन सब छैठक भिनसुरका अरग समाप्त भेलाक बाद घर अबै गेलै त" अंगनाक दृष्य देखि सबके अचंभा लागि गेलै। पवनाक माय एसगरे खापड़ि मे धान उलबै छथि, उक्खरि मे समाठ सं कुटै छथि, ठोकरा सेहो दैत छथि । कनियें कालक बाद एकटा डगरी मे लगभग पाव भरि चूरा आ एकटा गूंरक ढ़ेला लावि पवना के हाथ मे देलखिन ! पवना त" तकिते रहि गेलै ! लौफा वाली चाची पुछलखिन त" कहलकै, " अहि पवना के कहिया अकिल हेतै यै बहिनी ! बुझै छै माय" के पाइ नहिं रहै छै तैयो कहतै माछ किन दे त" चुड़ा किन दे। ऊ त" बाजि क" चुप भ" जाइ छै, मुदा हमर करेजा फाटि जाइत अछि। केहेन माय" छियै जे नेनाक एकटा छोट छिन इच्छा नहिं पूर क" पबैत छियै । जखने ओ घाट पर हमरा चूरा किन" कहलक, हमर करेज फाटि गेल ! बाड़ी के सटलाहा खेत मे धान रोपने छै मुलका, बंटाइ में । ओ आव पाक" लगलैया। छब्बीस नम्बर छियै ने ! आन धान सबसं पहिने पाकि जाइत छै । मुलका के कहि, एक पांझ काटि अनलियै। फेर झांटि क" चुड़ा कुटि देलियै । वैह चुड़ा पवना खा रहल छै! पवना सबटा सुनि लेलकै ! एकाएक बेलगोबना आइ अकिलगर भ" गेलै। आंखि भीजि गेलै ! आइ पहिल बेर बुझलकै माय" सं बढि क" क्यो नहिं। बेलगोवना पवना मोने मोन सोचि लेलकै," माय तों देखिहैं ! हम एक दिन आफिसर बनबौ !
आइ पवना के कोनों कमी नहिं छै।आव त" रिटायर कर" बला छै। क्लास वन आफिसर सं नौकरी शुरु कैलकै। दू महला मकान, दू दू टा कार, बच्चा सब एक सं एक पढ़ल-लिखल । कार ल"क" माछ कीन" गेल रहै । पांच-पांच, सात- सात किलो के रहु माछ बिकाइत छलै। पवना एकटा एक किलो बला रहु किनि लेलक। आ किछु सोच" लागल ! " देखही मां...! पाइ सं जेब भरल छौ तोहर पवना के! तैयो एक्के किलो बला माछ किनलकौ । आव पाइ छै त" पचबे नहिं करै छै। आ दोसर बात अपने सं किनि क" खाइ मे कहां आनन्द अबै छै ! आइ तों जे रहितैं ! पांच किलो बला माछ हम जरूर किनतहुं आ पचबो करितै" " मालिक पाइ दियौ ने" मलाह टोकलकैन्ह! " ऊंह! हं हं लयह ! कहि पवन बाबू हारल खेलाड़ी जेकां कार दिस चलि पड़लाह ! अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। सुषमा ठाकुर
बोझ
अखुनका जे समय चैल रहल अछि ओहि में सब कोई कोनो ने कोनो बोझ से अपना के दबा लेने छी। जेना पढई के बोझ,आधुनिक रहन -सहन कोना जीवी तेकर बोझ असिमित इच्छाक बोझ।
1- पढ़ई के बोझ - बच्चा सब पर माय-बाप के बहुत जोर रहै छैन,बौआ ऐतेक काल अहां के पढबाक ऐछ।पैघ भेला पर डाक्टर -ईनजिनियर बनबाक ऐछ। बहुतो बच्चा पढ़ई के बोझ उठबै में समर्थ रहै छथि,मुदा बहुतो पढई के बोझक भार उठबै में असमर्थ भ जाय छैथ। माय-बाप के चाही बच्चा पर बेसी पढई के जोर नय देबाक चाही। अपन बच्चा के खुबी के चिन्हैत आओर ओकरा ओही क्षेत्र में आगू बढै लेल प्रेरित करैथ।एहि से बच्चा बोझ मुक्त आओर प्रसन्नता से अपन लक्ष्य के प्राप्त करतैन।
2 -आधुनिक रहन-सहन कोना जीवी तेकर बोझ - समाज में जे आर्थिक रूप से संपन्न लोक सब छी ओ अपन जीवन में आधुनिक रहन-सहन के आनंद लऽ रहल छी , मुदा जे लोक सब आर्थिक रूप से संपन्न नहि छी ओ दोसरक देखा-देखी आधुनिक जीवन हम कोना जीवी तेकर बोझ अपना उपर लैद लेने छी।जे आर्थिक रूप से जतबे सक्षम छी ओ ओतबे में अपन जिनगी प्रसन्नता से जीवी। संतुष्टता मनुष के बोझ रहित रखै छै आओर नित दिन नव प्रयास क के जीवन के आधुनिक रहन-सहन से संपन्न कएल जा सकै छै नै कि पहाड़ सन बोझ उठा के।
3 - असिमित इच्छा के बोझ - इच्छा केनाइ कोनो अधला नै होइ छै। इच्छा मनुष के ऊर्जावान रखै छै।मुदा एक्के संगे बहुत रास इच्छा केनाइ आओर कोना तुरंत सबटा पुरा भऽ जाए तेकर बोझ उठा लेनाइ , से अधला । अपन -अपन इच्छा पुरा करै के लेल जिनगी अस्त व्यस्त कऽ लेने छी। परिणाम सबहक सुख-चैन हेरा गेल ऐछ। यदि इच्छा के एक-एक क के पुरा करै के प्रयास करी तऽ जिनगी बोझ रहित आओर प्रसन्नचित्त रहत । अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। रबीन्द्र नारायण मिश्र मातृभूमि (उपन्यास)- ९म खेप ९
जयन्त द्वारा कालीकान्तक भेल उपेक्षासँ आश्रमबासी चिंतितरहथि । बेसक ओ सभ निर्लोभ छलाह मुदा रहथितँ कालीकान्तक आश्रिते। आश्रमक खरचा हुनकेओहिठामसँ अबैत छल । ततबे नहि ओहिठाम काज केनिहार सेवकसभ हुनके द्वारा राखल गेल रहथि । एहन हालतमे कालीकान्तककेँ अप्रसन्न करब उचित नहि छल ।
कालीकान्तकेँ एहि बातक गुमान रहनि जे हुनकर बात ओहिठाम केओ नहि काटत। हुनका पूरा विश्वास रहनि जे घुरतीमे जयन्तहुनका संगे रहबे करथिन । तेँ ने शारदाकुंज हेतु बिदा हेबासँ पहिने ओ जयन्तक स्वागतक हेतु सभटा ओरिआनकए लेने रहथि ।
आश्रमसँवापसजाइतकाल रस्ताभरि आचार्यजी कालीकान्तकेँमनबैत रहलथि ।
" क्षमा कएल जाए । जयन्त बहुत अज्ञानी अछि । ओ अपनेक महत्व की जाने गेलथि । हमसभ अपनेकेँ यथासाध्य सेवा करक हेतु सदरिकाल प्रस्तुत छी । तेँ अपने हमरा लोकनिपर अपन कृपा बनओने रहू । "
कतबो आचार्यजी फदका पढ़लथि कालीकान्त किछु बजबे नहि करथि । ओ रस्ता भरि गुमसुम रहि गेलथि । किछु जबाब नहि देलखीन । एहि बातसँ आचार्यजीक चिंता आओर बढ़ि गेल । मुदा समाधान किछु नहि फुरा रहल छलनि ।तखन तँ विद्वान छलाह । ईश्वरमे विश्वास छलनि । मोने-मोन हनुमानजी कैँ गोहरबैत रहलाह ।आखिर ओ रस्ता बीति गेल । कालीकान्तक सबारी त्रिकुट भवन लग आबि कए ठाढ़ भेल । कालीकान्तसंगे आचार्यजी त्रिकुट भवन दिस बिदा भए गेलाह ।
"ओहि समयमे जयन्त तँ साधनामेलीनरहथि । हमसभ ओहिठाम रही से ओ बुझिओ नहि सकलाह । तखनहुनकर कोन दोख?"-कालीकान्तक गप्प सुनि आचार्य आश्वस्त भेलाह ।
कालीकान्तक त्रिकुट भवनक शोभादेखैत बनैत छल । त्रिकुट भवनक द्वार लगएक सँ एक सुन्दरि युवतीसभ हाथमे जलसँ भरल कलश लेने ठाढ़ि छलीह । भवनक द्वारसँ अंदरधरि नाना प्रकारक चित्रकारी कएल गेल छल ।
" ई चित्रसभ तँ मिथिलाक लगैत अछि?"
"सही बुझलहुँ ।"
"मुदा..."
"ओ किछु बजितथि ताहिसँ पहिने कालीकान्त बात लोकि लेलखिन-
"आचार्यवर! हमर परिवार मिथिलाकमाटि-पानि सँ सभदिन जुड़ल रहल अछि । शारदाकुंजमे कार्यरत मिथिलाक आचार्य लोकनिक विद्वताक बलेँ ई आश्रम समस्त विश्वमे यश प्राप्त करैत रहल ।"
कालीकान्तसँ मिथिला आ ओहिठामक आचार्य लोकनिक गुणगान सुनि आचार्य बहुत प्रसन्न भेलाह । असलमे ओहोतँ मिथिलेक छलाह ।
दुनूगोटे संगहि त्रिकुट भवनमे प्रवेश केलनि । गौरी स्वयं आचार्यक स्वागत केलथि ।त्रिकुट भवनक वैभव गौरीक देहपर सद्यः प्रकट भए रहल छल । जाबे गौरी आचार्यकेँ प्रणामकए बैसबाक हेतु उद्यत भए रहल छलीह ,कालीकान्त लगेमे राखल संदूक केँ खोलि ओहिमेसँ एकटा पुस्तक निकालि आचार्यक हाथमे राखि देलखिन ।
"आचार्य अपने एकरा शारदाकुंज लेने जाउ आ निचैनसँ पढ़ब ।एहिमे मिथिलाक विद्वान लोकनिक बारेमे एवम् हुनका सभक हमर परिवारसँ संपर्कक बहुत रास जानकारी भेटत ।जयन्तक कुलक विद्वान लोकनिक जानकारी सेहोभेटतसंगहि इहो बुझबामे आओत जे हुनकासभकेँ हमर परिवारपर कतेक उपकार छनि । "
आचार्य ओहि पुस्तककेँ सम्हारि कए राखि शारदाकुंज वापसजएबाक हेतु कालीकान्तसँआज्ञामाङलथि ।
"अपनेकआज्ञाहोइतँ हम शारदाकुंज वापस जाइ । विद्यार्थी लोकनिक अध्यापनक समय छैक तेँ ओतए हमर उपस्थिति अनिवार्य थिक।"
"किछु भोजन तँ कए लेल जाए । ओना केना वापस जाएब ।"
"हम तँ नवरात्राक व्रत कए रहल छी ।तेँ क्षमा कएल जाए । "
"से नहि कहू । हम तँ मात्र अपन कर्तव्यक पालन कए रहल छी ।"
आचार्य बिदाभेलथि । कालीकान्त आ गौरी बहुत दुर धरि हुनका अरिआति देलखिन ।
आचार्यकेँ शारदाकुंज लौटबामे किछु विलंब भए गेल रहनि। सायंकालक आरतीक समय भए गेल छल। समस्त विद्यार्थी लोकनि उत्सुकतासँ आचार्यक प्रतीक्षा कए रहल छलाह। आचार्य अबिते एमहर-ओमहर देखलनि मुदा जयन्त कतहु नहि रहथि । आचार्य पुछलखिन-
"जयन्त नहि देखाइत छथि?"
"ओ तँ अहाँक गेलाक बादे कतहु चलि गेलाह।"
"किछु कहलथि नहि?"
"किछु नहि आचार्य! मुदा जाइत काल ओ बहुत चिंतित लागि रहल छलाह।-आश्रमवासी विद्यार्थी लोकनि एक स्वरसँ बजलाह। शायंकालीन आरतीक समय भए गेल छल। आचार्य सहित शिष्य लोकनि आरतीमे लागि गेलाह। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। गजेन्द्र ठाकुर ५ टा बीहनि कथा १.रिक्शाक सवारी आ लूटिक डर बस पंक्चर भऽ गेल रहि से बारह बजे रातिमे दुनू संगी पटनाक हार्डिङ्ग पार्क बस स्टैण्डपर उतरलौं। "पुनाइचक चलब, समानो किछु नै अछि खाली दू गोटे छी आ दूटा हैण्डबैग अछि"। हमर संगी रिक्शाबलासँ नेहोरा केलन्हि। "से तँ ठीक मुदा ओइ मोहल्लामे जे किराया देब से घुरति कालमे उचक्का सभ छीन लै छै"। रिक्शाबला मोटामोटी मना कऽ देलक जेबासँ। "धुर, तकर चिन्ता छोड़ू, हमहीं सभ तँ छीनै छिऐ, आ जखन हमहीं सभ जा रहल छी तँ के छीनत्"?- संगीक नेहोरा आत्मविश्वासमे बदलि गेलन्हि। आ रिक्शाबला जयबाले तैयार भऽ गेल। २.नकली नोटक चिन्हासी बड्ड पुरान गप्प। जखन १००० क रूपा होइ छलै मुदा असली कम नकली बेशी। पटना एयरपोर्टपर उतरिते टैक्सीबला पछोड़ धऽ लेलक समान उठा गाड़ीमे धऽ देलक आ कहलक जे ६०० टका किराया भेल मुदा पार्किङ्गक ८० रूपा अलगसँ देमऽ पड़त। हमरा लग वएह एक हजरिया नोट रहय, असली की नकली से नै जानि। से पुछलिऐ जे खुदरा पार्किङ्गबला कऽ देत ने। ओ आत्मविश्वाससँ कहलक जे भऽ जायत। गाड़ी रुकल, नोट पार्किङ्गबलाकेँ देलिऐ, ओ नोटकेँ उनटि-पुनटि कऽ देखऽ लागल आ एम्हर हम सर्द भेल जाइ जे दोसर नोट अछिये नै, जँ नकली बहार भेल तँ सुनै छिऐ ई क्राइम सेहो छिऐ। टैक्सीबला कमेण्ट्री शुरू केलक। "अमदीकेँ नै छिन्है छेँ, देखै नै छहीं कथीसँ एलखिनहेँ, तोरा नकले नोट देथुन्ह"। आ पार्किङ्गबला आजिज भऽ कऽ खुदरा गानऽ लागल आ हमर जानमे जान आयल। ३.पानिबला रोड हमर पटनाबला सङ्गीक पोस्टिङ्ग मनसाघाट ब्लॉक कुशेश्वरस्थानमे भेलै, बा्ढ़िक इलाका, कहियो देखने नै। ओकरा बुझल छलै जे बर्खा-बुन्नीमे आवाजाहीमे दिक्कत होइ छै, सोझ लोक। हमर एकटा दोसर सङ्गीक मामागाम मनसेघाटमे रहै, से एकटा चिट्ठी लिखबा कऽ हम ओकरा दऽ देलिऐ। हमर सङ्गी काली- भगवती भक्त, ब्लॉकेमे लोक सभ मामाजीक पैघ लोक हेबाक गप कहि देलकै। जे हुनका दू-दू टा नाह छन्हि, एकटा घर-परिवारक उपयोग लेल आ एकटा सर-कुटुम-दोस-महीम लेल। आ उग्रतारा भगवती, जिला तँ दोसर सुपौल कि सहरसा छै मुदा लगे छै। सङ्गी पहुँचल मामाजी लग, आ उग्रतारा जेबाक ब्योंत धरबऽ लागल। "अखन तँ बाढ़ियो नै आयल छै से जँ कोनो सवारी-घोड़ाक रूट छै जइसँ माँ उग्रताराक दर्शन भऽ जइतय"। "अहाँ पटना हिसाबे सोचि रहल छी, इम्हर उनटा छै, अखन रोडपर पानि नै छै मुदा टूटल भाङ्गल छै, ५-६ घण्टा बससँ लागि जायत। बाढ़ि आब दियौ, नाहसँ २० मिनटक रस्ता छै, बेशीसँ बेशी ३० मिनटक"। ४.जी सर "यौ यादव जी सभ गपपर अहाँ जी सर किए कहै छी"। "जी सर, जीहे जी सर-जी सर ऑफिसमे बजैत बजैत मोचड़ा गेल अछि। आब तँ बेटा कहैए जे डैडी ई समान आनि दिअ तँ मुँहसँ निकलैए, जी सर"। ५. दू टा कैदी "ई सार जेलरबा बड्ड मारैए, बहन्ना चाही ऐ सारकेँ खाली मारबा लेल"। "आब चोरि आ छीना झपट्टीक केस लगलापर मारतौ नै तँ की आरती उतारतौ। देखहीं उम्हर उदनाक शान, जेलर साहेब समाचार पूछि रहल छथिन्ह, कि किनो तरी-घट्टी तँ स्टाफ सँ नै रहि जाइ छै। बाबू, चोरि आ छीना झपट्टीक केस नै मर्डरक केस लागल छै ओकरापर। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। गजेन्द्र ठाकुर गढ़-नारिकेल उपन्यास-त्रयीक पहिल उपन्यास "सहस्रशीर्षा" क बाद दोसर उपन्यास द ........ फाइल्स १ हमर नाम छी...........आ गाम "गढ़ नारिकेल" शुक्र दिन ऑफिससँ दस बजे रातिमे घुरलहुँ तँ डेरा पहुँचिते बेटी स्वागत केलक। बुझा गेल जे रूसल अछि। पुछलिऐ जे की भेल तँ ओ मोन पाड़लक जे अझुका सिनेमा देखबाक प्रोग्राम छलै। हमर एहि जवाबपर कि देरी भऽ गेल अछि आ थाकल छी, ओ सोफापर मुँह घुमा कऽ बैसि गेल आ कथुक उत्तरे नै दिअए। कनियाँकेँ कहलियन्हि जे काल्हि सिनेमा चलै चलब से नै हेतै कारण ८-११ बला शो तँ खतम भऽ गेल हेतै। ओ बेटीसँ पुछि कऽ ओतहियेसँ चिकरि कऽ कहलन्हि जे अहाँ अझुका प्रॉमिस केने रहिऐ। हँ प्रॉमिस तँ केने रहिऐ, तकरा पूरा तँ करैये पड़त। फेर मोन पड़ल जे सरकार नाइट शो देखेबाक अनुमति थियेटर सभकेँ देने छै, से आइ काल्हि ११ सँ २ बजेक शो सेहो देखि सकै छी। "बूक माइ शो" साइटपर ऑनलाइन टिकट कटेलौं आ से देखि बेटीक रुसब खतम भेलै। बेटा, कनियाँ आ माँ तीनू गोटे तैयार भऽ जाइ गेला आ सिनेमो जे पड़ि लागल सेहो सनगर। सालमे एक्के दू टा तँ नीक सिनेमा बनै छै बॉलीवुडमे। दू बजे रातिमे सिनेमा देखि कऽ घुरि रहल छलौं, रस्तामे गाड़ीक लाइट एकटा बड़का होर्डिंगपर पड़लै, आ ओहने बहुत रास होर्डिंग अबैत गेल। ओइ होर्डिंग सभपर राज्यक महिला मुख्यमंत्रीक कनी अगरायल सन अभयमुद्राबला फोटो छलै। ओना तँ बेटीसँ बेशी रनिंग कमेण्ट्री हमहीं करै छी, रस्ताक सभटा चीजक विस्तृत विवरण दैत गाड़ी चलबै छी, कखनो काल जखन दुनू हाथ छोड़ि खिस्सा आगू बढ़बै छिऐ तँ ओ टोकितो अछि आ सड़कक सभटा कानून, रेड-लाइट, ग्रीन लाइट, जेब्रा क्रॉसिंग, सभटा ओ बुझबऽ लगैए। मुदा ऐ होर्डिंग सभकेँ हम अनठा देलिऐ ई सोचिकऽ जेजँ कहबै तँ उनटे सुना देत जे ई सभ हमरा बुझले अछि। मुदा ऐबेर से नै भेल। शीसा खोलि कऽ ओ अचरजसँ हमरासँ पुछलक- "ई ककर फोटो छिऐ डैडी?" "ईहो नै बूझल अछि, फलना दीदी मुख्यमंत्रीक फोटो छियन्हि ई"। "मरि गेलखिन्ह की? कहिया?" कनी काल तँ हमरा बुझबामे नै आएल आ जखन आयल तँ ततेक हँसी लागल जे गाड़ी चलेनाइ मुश्किल। माँ कनियाँ आ बेटाकेँ कहलियन्हि जे ई किताबमे पढ़ैए जे मुइलाक बाद बड़का फोटो आ मूर्ति बनै छै से एकरा भेलै जे मरि गेलीह मुख्यमंत्री आ स्कूलमे एक्को दिनक छुट्टी नै भेटल। मुदा आइ काल्हि तँ जिबितेमे बड़का फोटो आ मूर्ति सभ बनऽ लागल छै। हमरा संगे सभ पेट पकड़ि कऽ हँसऽ लगला। बेटी हतप्रभ सभकेँ देखैत रहल। तखने हमर फोनक घण्टी बाजल आ हम जेबीसँ फोन निकालनहिये रही तखने ओ हमरा दिस इशारा कऽ कय स्टीयरिंगपर ध्यानदेबा लऽ कहलक तँ हम गाड़ीकेँ सड़कक कात लगा कऽ गाड़ी ठाढ़ कऽ लेलौं। "सूतल छलौं की, उठा देलौं।"- फोनमेसँ अबाज बहराइए। "नै, एते जल्दी कहाँ सूतै छी, कि कोनो जरूरी गप अछि?", दू बजे राति कऽ ऑफिसक हाकिम बिना काजेक फोन किए करत, से जकरा इंस्टिंक्ट कहै छै तहिना पुछा गेल छल। "एम्सक ट्रॉमा सेन्टर आबि सकै छी, आउ तँ फेर आगाँ गप हेतै"। डेरा पहुँचि, कपड़ा बदलि कऽ ऊबरकेँ बजबै छी, अपन गाड़ी लऽ जायब तँ पार्किंग भेटत आकि नै से सोचि कऽ। गेटपर उतरि कऽ जखने ट्रॉमा सेन्टरक भीतर जाइ छी तँ अबाज अबैए- "सर, एम्हर छी हम"। हमर इंस्पेक्टर सहैब गालकेँ हाथसँ साटने हमरा शोर करै छथि। "अहूँ एतै छी, हाकिम बजेने छथि, तेँ हम आयल छी"। "हमरे दुआरे बजेने छथि, अटैक कऽ देलक गुण्डा सभ"। "कतऽ, कोना?" ओ अपन गालपरसँ हाथ हटबै छथि तँ गाल दू टुकड़ी दुनू दिस भेल देखाइत अछि। हमर "हाँ, हाँ"कहला उत्तर ओ धड़फड़ा कऽ अपन हाथसँ गालकेँ साटि लै छथि। हम कहै छिएन्हि- "अहिना केने रहू, अहाँकेँ अपन गाल देखा नै पड़ि रहल अछि तेँ अहाँकेँ पता नै अछि जे ...."। चुप भऽ जाइ छी। "कते कालसँ एतऽ छी?" "एक घण्टासँ छी। जखन आइ.जी., डी.आइ.जी. सहैब सभ कनी काल पहिने एला तखनसँ कनी ध्यान देलकहेँ। ईहो सभ की करतै, देखै नै छिऐ भीड़"। एकटा डॉक्टर हुनका बजाकेँ लऽ जाइ छन्हि एकटा कोठलीमे। ओइ कोठलीक बाहर सभ हाकिम जमा छथि, सभ गम्भीर मुद्रा बनेने छथि। लोकल थाना बला सभ सेहो आबि गेल अछि। थाना बला सभ सहटि कऽ हमरा लग आबि गेल। दरोगाजी हमरा अपन मोबाइल निकालि एकटा वी.डी.ओ. देखबै छथि। "देखू ऐ गुण्डा सभकेँ, हमरेपर पाथर फेकि रहल अछि"। हवलदार सहैब टिपलखिन्ह जे ओइ सारकेँ हुजूर जेल पठा देलखिन, सभटा गजेरी-चरसी सभ छै। कोनो डरे-भर नै होइ छै। हुजूरे कऽ मोटरसाइकिल थानेपरसँ चोरा लेलकन्हि, तकर अखनि धरि पते नै चलल छै। हम दरोगाजीसँ पुछलियन्हि- "अहाँकेँ की लगैए, की ई लॉ एण्ड ऑर्डरक गप छै आकि ऑफिसक काजसँ एकर कोनो सम्बन्ध छै"? ओ कहै छथि जे मामिलामे पेंच छै। तहकीकात तँ जबरदस्त ढंगसँ हेतै। मुदा ओ सेहो कहै छथि जे मोटा-मोटी ई "लॉ आ ऑर्डरे"क समस्या छिऐ। मुदा देखू तहकीकातमे की निकलैए... इंसपेक्टर सहैबक गाल सीबि देल गेल छन्हि। इन्सपेक्टर सहैब हमरा कहै छथि जे गाल तँ दू टुकड़ी भऽ गेल छलै से हुनका बुझले नै छलन्हि, सीलाक बाद डॉक्टर अएना देखेने छलन्हि से देखि कऽ पता चललन्हि। सभ हाकिम अपना-अपना घर दिस बिदा भेला। सरकारी गाड़ी इंस्पेक्टर साहैब कऽ लऽ गेलन्हि आ हम ऊबरकेँ फोन लगेलौं। ..................................................................................... अगिला दिन भोरे-भोर ऑफिस गेलौं तँ अर्दली इशारामे कहलक जे एकटा इनफॉर्मर आयल अछि। हम कहलिऐ जे ककरोसँ भेँट करा दैतिऐ, एतेक गोटे ऑफिसमे अछि तँ कहलक जे कहैए जे अहींसँ भेँट करत, कहैए जे हमर इलाकाक हाकिम छथि, अनकापर ओकरा भरोस नै छै। "हमर इलाकाक छी? कतुक्का छी? नामो-गाम बता देलक की?" "नाम तँ नै बतेलक मुदा कहलक जे गामक नाम कहि दियौन्ह हाकिमकेँ, अपने बजा लेता। गामक नाम जे कहलक से विचित्रे.... किदन तँ ... "गढ़ नारिकेल"!" २ कएक दिन बीति गेल, डेटा, डेटा, डेटा... बैलेंस शीट, एक्सेल फाइल, फेक अकाउण्ट, फेक इनवोइस.. फेर सभ फेक अकाउण्ट लेल एकटा कनसोलिडेटेड इनवोइस..आ तइसँ बनल ट्रायल बैलेंस... आ से डेटा गेल चार्टर्ड अकाउण्टेण्ट लग। आ तखन बनल ऑडिटेड बैलेंस शीट.. पकिया बला! "एतेक सामग्री अहाँ लग अछि, अहाँ कोनो पैघे लोक छी, कारण कोनो संगठनक छोट-छीन लोकक हाथमे एतेक डेटा नै एतै। गढ़-नारिकेल एकटा रहस्य छै आ ई रहस्ये छिऐ ई दुनियाँ"। "हमहूँ छी एकटा रहस्ये। गढ़-नारिकेलक कर्ज। हम सभटा गप कहब, किछुओ नुकाएब नै अहाँसँ, से समए आएत। एकबेर जखने शुरू कऽ देलौं अहाँ ई काज, तखने हम निश्चिन्त भऽ गेलौं। हमरा बुझल छल जे अनका ई डेटा देखेबै तँ ओ बुझबो करत आकि नै, आ जँ बुझि कय डेरा बा बिका जाय। आइक बाद हमरा आ अहाँक भेँट नै हएत, कोनो सूचनाक आदान-प्रदान आइक बाद आब डार्क-वेब टा पर हएत"। ... आ ओ चलि गेल। ओकरा जिताएब हम। ओ जीतत तँ जीतब हम। एतेक सूचना, एतेक धरि खसि गेल लोकक सूचना? सूचना आ डेटा बनि गेल अछि बड़का खेल। सभकेँ बूझल छै सभटा गप आ सभ गबदी मारने अछि बैसल। डर.. कियो एकर कारण घर्-द्वार-परिवारकेँ बचाएब कहैए, फैमिली बला छी, अपन नै तँ परिवारक चिन्ता तँ करैए पड़त, तँ अपना लेल नै परिवारक लेल डेराइत छी... ओकरा की छै, ने आगू नाथ ने पाछू पगहा.. आ कियो-कियो होइत अछि बताह, ने अपन चिन्ता आ ने परिवारक... बौआइत छै ओकर परिवार... कियो कनी कालमे थम्हि जाइत अछि कियो कोनो पैघ दुर्घटनाक बाद थम्हैत अछि आ कियो किछुअ भऽ जाउ थम्हिते नै अछि... आ एहनो लोक सभ अछि जकरा संग दुर्घटना होइते नै छ... से ओ किए थम्हत... बुझाइ छै जे ओकर बड़कति होइत छै अधलाह काज केने... लागि रहल अछि जे कोनो अन्हार तरहड़ि मे उतरल जा रहल छी, सीढ़ी नीचाँ दिसि जाइ छाइ, पहिने कनी-मनी इजोत, फेर झलफल, फेर राति सन अन्हार आ फेर अन्हार गुज-गुज, आगिपरक खापड़िक अधोभाग.. इजोत कोनो आस नै? आ जँ आबि जाएत इजोत तँ भऽ नै जाइ आन्हर... इजोतसँ डेरा रहल लोक? अन्हारेमे लागि रहल छै मोन आकि लगा रहल अछि मोन... आ जे अछि बताह? शोनितक रङ देखा पड़ि रहल अछि डेटामे, शोनित-शोनितामे... मुदा शोनितक रङ सेहो कारी, अन्हार-गुज्ज... शोनित तँ होइत अछि लाल टुह-टुह... मुदा ऐ डेटाकेँ हमरा लग अबैत-अबैत देरी भऽ गेलै.. लाल-रङ बेसी गाढ़ भेने कारी भऽ जाइ छै, आ देरी भेने सेहो... देरी किए भेलै? बताह लोकक कमी तँ कहियो नै छलै ऐ लोकमे... मुदा लगैए जे आब भऽ गेल छै, आ से नै रहितै तँ एतेक शोनित युक्त डेटा, एतेक मात्रामे कोना थकिया जइतैक? आ जँ रहबो करितैक तँ तकर रङ लाल रहितैक, गरम रहितैक, कारी-पपड़ी पड़ल नै रहितैक। सीढ़ी पहुँचि गेल अछि तरहड़िमे... तेहन ब्लैक-होलमे जतऽ जा कऽ सभ किछु गुरुत्वाकर्षणक अधीन भऽ जाइत अछि, जकर मध्य विचित्र आकृति अछि जन्म लऽ लेने, डेराओन आ ध्वनि उत्पन्न करैत... जेना समुद्रमे उठल अछि चक्रवात... सभ आकृति घेर लैत अछि हमरा... पहिने हमर गप सुनू तँ पहिने हमर... हॉस्पीटलमे जे हालत होइत छै डॉक्टरक, रोगी सभ जखन घेरने रहै छइ ओकरा... ओतऽ तँ रोगीक सङ ओकर परिवारक लोक सेहो रहै छै, मुदा एतऽ तँ मात्र रोगीये टा छै.. पहिल फाइल "सभ मानैए जे एकटा दैवीय शक्ति होइ छै, सभ तरहेँ नीक, सभसँ बेशी जानकार आ सभसँ बेशी शक्तिशाली, जकरामे कोनो अवगुण नै होइ छै, जे सभ ठाम अनुभव कएल जा सकैए आ जे सभ बौस्तुक ज्ञाता अछि। मुदा फेर दुष्ट शक्तिक कोन तरहेँ व्याख्या हएत? फेर कोना होइए दुष्ट कृति, किए होमए दैत अछि ओ ई दुष्कृति"? अन्हारसँ निकलि रहल ई अबाज, दर्शनक एकटा समस्याकेँ अकानैत अछि। नाम छिऐ गोप कुमार। "सभ हमरे दोखी मानैत अछि, मुदा दोखी कइएक तरहक होइत अछि, एकटा होइ छै गैंगस्टर, एकटा नक्सल आ एकटा आतंकवादी आ एकटा हमरो सभ सन लोक"। "तीनूमे हमरा लेखेँ कोनो अन्तर नै छै, जे राज्यक विरुद्ध शस्त्र उठेलक से भेल दोखी, आ तकरा भेटतै सजा"। "मुदा जँ गैंगस्टर कहए जे ओ देशभक्त अछि आ अहाँकेँ नक्सल आ अतंकवादीक विरुद्ध अपन सहयोग दिअए, तखन"? "तखन ओकर सहयोग लैत छी हम, मुदा ओइसँ ओकर केलहा माफ नै होइ छै। हँ, ओकरा पश्चातापक एकटा अवसर भेटै छै। आ से तँ नक्सली आ आतंकवादीकेँ सेहो भेटै छै"। आ ओ कथा शुरू करैत अछि, सत्यकथा। मानवक समस्त प्रकृतिपर विजयक पश्चात, मानवक मानवसँ संघर्षक कथा। दोसर महाभारतक प्रारम्भ, वैश्विक कुरुक्षेत्रक युद्धस्थलपर। देखा चाही कतेक निअम टुटैत अछि ऐ महाभारतमे, कतेक नव निअम बनैत अछि ऐ क्रीड़ाक। कएकटा आशाक संचार होइत अछि आ कएकटा निराशाक। गढ़ नारिकेल बला ओ इन्फॉर्मर फेरसँ हमरा भीतर कृष्णक चपलता आनि देने अछि। "जे अहाँ करबै सएह सही हएत आ जकर अहाँ विरोध करबै से गलत हएत"। यएह कहने रहए गढ़ नारिकेलक बसिन्दा आ यएह कहि रहल अछि गोप कुमार। हमर बड़ाइ कऽ कय जान लऽ जाइ जो- हम सोचैत छी। "बड़ाइ नै अछि ई। दुष्ट शक्तिक कोन तरहेँ व्याख्या हएत? बुझू जे ई छी प्रारब्ध जे अहाँकेँ अतए आनल गेल अछि। सर्वज्ञानी, सर्वशक्तिमान आ सभठाम उपस्थित शक्तिक अछैत दुष्ट शक्तिक व्याख्याक द्वार खुजत"। हमर सोचलाहो गपक उत्तर दऽ रहल अछि गोप कुमार। ई एकटा नव अनुभूति अछि हमरा लेल। आइसँ पहिने हमर सोचलाहा गपक उत्तर स्वप्नमे बा अर्द्ध-चेतनावस्थामे कोनो शक्ति दऽ दइ छल। अर्द्ध-चेतनावस्थामे माने जखन हम सोचब बन्द करैत छी, थाकि जाइ छी जे आब एकर उत्तर नै भेटत, तखने कइएक घण्टाक बाद कोनो ट्रैफिक जाममे बा सिनेमा देखैत काल बा खाइत काल, कइएक बेर सरल समाधान भेटि जाइत अछि। स्वप्नक समाधानकेँ तँ हम दैवीय हस्तक्षेप मानैत छलौं मुदा अर्द्ध-चेतनावस्थामे भेटल सरल समाधानकेँ शुरुहमे अपने ताकल समाधान मानैत छलौं। आर तँ आर अर्द्ध-चेतनावस्थाकेँ चेतनावस्थे मानैत छलौं शुरुहमे। मुदा स्वप्न कालक बढ़ैत सरल समाधान अर्द्ध-चेतनावस्थाकेँ परिभाषित केलक आ अर्द्ध-चेतनावस्थामे भेटल सरल समाधानकेँ सेहो दैवीय हस्तक्षेप सिद्ध केलक। "मुदा हमरा सभकेँ सिखाओल जाइत अछि जे ठाढ़ नाक, गोर-नार आ नमगर लोक नीक, जँ ककरो सभ अंग सही छै तखनो ओ असुन्दर अछि। आ जँ कोनो अंग सही नै छै, कोनो पअए छै, तँ ओकरामे दुष्टता भरल हेतै। आ जँ ओकर मोन खराप भऽ गेलै बा बेमारी भऽ गेलै तँ सुन्दर-असुन्दरक भेद आ पअए केर अतिरिक्त वर्तमान बा पूर्व-जन्मक कोनो दोख आबि जेतै। से हमरा सभकेँ एक दोसरासँ तुलना करब सिखाओल जाइत अछि। ओ तोरासँ कम सुन्दर बा बेशी सुन्दर। ओ तोरासँ बेशी बलगर बा कम बलगर, बेशी काजुल बा कम काजुल। हमर देश दोसरा देशसँ कमजोर बा मजगूत, हमर संस्कृति दोसरसँ नीक बा अधला। मुदा जँ अहाँ दोसर संस्कृति, दोसर नाक-मुँहबला लोकक सम्पर्कमे आयब तँ अहाँकेँ लागत जे ई सभ झुट्ठेक भेद अछि, ओहो अहिन सोचैत अछि। जँ कियो सुन्दर-असुन्दर अछि बा बेशी-कम काजुल आ जँ तकर कोनो नपनाकेँ सत्य मानियो ली तँ ओइमे अहाँक कोन योगदान?" "तँ तकर कोन उपाय? स्कूल कॉलेजमे नामांकनसँ लऽ कऽ नोकरी-चाकरी, कृषि-उद्योग सभ ठाम नीक-अधला कोना तय-तमन्ना हएत, तकनीक उत्कृष्ट अछि बा नै तकर कोना निर्धारण करब"? "तुलना अपनासँ करू, अनकासँ नै, काल्हि आ आइ, पुरान आ नव, अपन आ अपन देश-समाजक तुलना अपनेसँ। आ से नै केने हिंसाकेँ अहाँ नै रोकि सकब"। "अहाँ तँ हिंसा छोड़ि देब, मुदा जँ अहाँक प्रति हिंसा हएत तँ से केना रोकब"? "जँ अहाँ अपनेसँ अपन तुलना करब बा जखन अहाँ अनकासँ अपन तुलना करब तँ अहाँ देखब जे पहिल स्थितिमे धनात्मक वृद्धि हएत, नीक भाव रहलापर प्रगतिमे कोनो बाधा नै होइ छै। दोसर स्थितिमे अहाँक प्रगति ऋणात्मक वृद्धि बाधित करत, अहाँ मात्र दोसराक अनुसरण करब, ओ जे रस्ता निर्धारित करत तहीपर अहाँ आगाँ बढ़ब। अहाँक रस्ते जखन अनकर अछि तँ कखनो ओइमे ओ खधाइ खुनि देत आ अहाँक प्रगति बाधित कऽ देत। आ सएह भेल ऐ पहिल फाइलमे... ... एकटा कम्पनीमे हम काज करैत छलौं। पढ़ि लिखि कऽ नोकरी भेटि गेल। आ ई कम्पनी बड्ड नीक लागल। एतेक सुन्दर वेबसाइट छै एकर। वेब टेक्नोलोजीक सभसँ आधुनिक स्वरूपक उपयोग केने अछि। कम्पनीक विषयमे जानकारी लेबाक हुअए तँ एकर वेबसाइटपर जाउ, मल्टीनेशनल कम्पनी, सत्य हरिचन्द्रक कम्पनी संस्करण, मोन प्रसन्न भऽ जायत। ऑफिसो चकमक। ओना हमर गामोपर साफ-सफाइ जबरदस्त छल, मुदा ओतऽ अंगनामे माय बाढ़निसँ आ दलानपर बाबू खरड़ासँ जे काज करै छला से एतऽ कर्मचारीक एकटा नव वर्ग करैत छल। चतुर्वर्णक मल्टीनेशनल संस्करण ऐ फिरंगी कम्पनीमे छल। डिसीप्लीन तँ पूरा, अनुशासन देशकेँ महान बनबैत अछि से तँ कतौ लिखल नै छलै मुदा चारू वर्गक कर्मचारी एक दोसरासँ छोड़ू आपसोमे गप-सप्प कम्मे करैत रहथि। किछु तँ काजक बोझक दुआरे आ दोसर कोनो सूचना-लीक होयबाक बा निंदा शिकाइतक आरोप लगबाक डरक दुआरे। मुदा ओइ डरकेँ डिसीप्लीनक नाम देल गेल छल। सालक अन्तमे सभक कएल काजक समीक्षा होइ छलै, तही समीक्षाक आधारपर दरमाहामे बढ़ोत्तरी होइ बा नै होइ छलै, मुदा ककरा कतेक भेटलै से एक-दोसरासँ गुप्त रखबाक शर्त रहै छलै। आ नव साल फेरसँ शुरू... भरि साल मेहनति करू, ओइ सालक-अन्तक कार्य-समीक्षा लेल। भागा-दौड़ी दोकान-दौड़ी सन। सभ दिनुका काज। कोन परियोजना केना बनत, पी.पी.टी., एक्सेल सीट, बार-पाइ चार्ट, प्रोजेक्ट प्रपोजल, भागा-दौड़ी। सेमीनार राष्ट्रीय आ अन्तर्राष्ट्रीय विश्विद्यालयमे, हावर्डमे सेहो। सत्य हरिचन्द्र-कम्पनी आ हमर कंट्री-हेड कम्पनीक सभटा डेटा बनेनाइ हमर अखतियारमे छल। मुदा डेटाक सोर्स-डोक्यूमेण्ट हमरा लग नै आबै छल। माने हमर काज शुरू होइ छलय "ट्रायल बैलेंस" बनलाक बाद। मुदा ओ ट्रायल बैलेंस कोन सोर्स-डोक्यूमेण्टसँ बनलै से काज आन-आन लोकक हाथमे रहै, आ ओ सभ हमर कण्ट्री-हेड सँ जुड़ल लोक सभ रहथि। कण्ट्री-हेडक विदेशक यात्रामे वएह लोक सभ संगमे रहैत छलथि। ओहीमे सँ एक गोटेकेँ कोनो काज पड़ि गेलै आकि ओकरा घरमे ककरो मोन खराप भऽ गेलै से ओ अमेरिकाक हावर्ड विश्वविद्यालय मे होइबला "बिजनेश एथिक्स" विषयक सेमीनारमे नै जा सकल आ पहिल बेर हमरा विदेश जेबाक अवसर भेटल। हमर कंट्री-हेड केर भाषण भेल रहै ओतय, सत्य हरिचन्द्रक कम्पनी संस्करणक जे विवरण अन्तर्जालपर रहय तहूसँ बेशी नीक विवरण देलन्हि ओ। अमेरिका तँ बाबू अमेरिका छलै, एहेन-एहेन सत्य हरिचन्द्र-कम्पनी सभ, एक-दूटा नै हेँजक हेँज रहै, सभ एक-दोसरासँ बेशी बड़का सत्य-हरिचन्द्र कम्पनी। एकटा गप ओइ दिन सेहो हमरा टोकारा मारने रहय- सेमीनारक कएक टा सत्य-हरिचन्द्र कम्पनीक वक्ता सेमीनारमे कहने रहथि- "अमेरिकाक बाहर सेहो हम नैतिकताक पालनक प्रयास करै छी मुदा अमेरिकामे तँ हमरा सभक अनैतिकताक प्रति "शून्य-सहिष्णुता" अछि"। माने?... प्रभाकरन सुन्दरम रहथि हमर कंट्री हेड। ओ कम्पनीयो नव छल, हमहूँ नव छलौं आ हमर कम्पनीक नव-कण्ट्री हेड रहथि प्रभाकरन सुन्दरम। हम आ ओ संगे-संगे ऐ नव कम्पनीमे आयल रही बर्ख भरि पहिने। आब जा कऽ हुनकासँ हमर भेँट भेल। हम गोप कुमार। हमरा दुनू गोटे संग बहुत रास लोक गेल रहथि ओइ सेमीनारमे। ऐ यात्राक बाद हमर जिनगी पी.पी.टी. एक्सेल सीट, बार-पाइ चार्ट, प्रोजेक्ट प्रपोजलसँ आगाँ बढ़ैबला छल। कम्पनीक दूटा टेरीटरी छै, पहिल छै ओतऽ जतऽ छै हावर्ड विश्वविद्याल। आ से छै अनैतिकता लेल ""शून्य-सहिष्णुता" बला क्षेत्र आ हमर देशमे कम्पनीक जे शाखा छै आ जतऽ हम काज कऽ रहल छी से अछि "नैतिकताक पालनक प्रयास"बला टेरीटरी। प्रभाकरन सुन्दरम हमरासँ हिलि-मिलि गेल रहथि। हमर काज करबाक गति आ काजक गुणवत्ता रहै आकि "नइ नै" कहबाक हमर आदति। आकि कोनो काज एला पर खाइतो काल खेनाइ छोड़ि हाथ धो कऽ ओइ काजकेँ कइये कऽ आ तखने फेर खेनाइ पर बैसबाक आदति। आकि कोनो काज आगाँ लेल नै छोड़बाक आदति। आकि "हँ" आ "नै" केर भेदक पूर्ण ज्ञान आ "हँ तँ हँ" आ "नै तँ नै" बला आदति। आकि कोन काज ठीक छै आ कोन काज नै तइ मे कोनो तरहक कोनो अस्पष्टता नै हेबाक गुण। आकि घरक आ ऑफिसक कार्यकेँ फराक-फराक रखबाक हमर आदति। आकि ऑफिसक लोकसँ गॉशिप नै करबाक हमर आदति.. प्रभाकरन सुन्दरमकेँ सम्भवतः हमर चाहपर गप-सरक्का बला ग्रुपसँ हमर दूरी बेशी पसिन्न पड़लन्हि, कारण हमर बॉसक बॉससँ ओ हमर ऐ सभटा गुणक चर्च केलन्हि, मुदा अन्तिम गुणपर बेशी जोर देलन्हि। आ भारत घुमिते हम सोझे कंट्री हेड प्रभाकरन सुन्दरमकेँ रिपोर्ट करय लगलौं। प्रभाकरन सुन्दरम छल ओ नाम जे ऐ कम्पनीकेँ कतऽ सँ कतऽ लऽ जाइबला छल। एन.आइ.टी. तिरुअनन्तपुरम् सँ बी.टेक आ आइ.आइ.टी. मद्राससँ एम.टेक छल प्रभाकरन सुन्दरम। भारतक "इन्फ्रास्ट्रक्चर बूस्ट"मे ओकरा ऐ कम्पनीमे आनल गेल रहै, एकटा पैघ पैकेजपर। ई अमेरिकन कम्पनी भारतकेँ काज सिखेतै, कोना काजक गुण-दोख देखल जाइ छै, कोना सड़कपर आ फैक्ट्रीमे दुर्घटना कम कयल जाइ छै। कोना समयपर काज कयल जाइ छै। प्रभाकरन सुन्दरमक भारतमे काज ओइ सेमीनारसँ भारत घुरलाक बाद प्रभाकरन सुन्दरमक सभ काजमे हम संग जाय लगलौं। ओ बेशी काल सरकारी ऑफिसमे प्रेसेण्टेशन आ भाषण दै छला। हमरा ओ विभाग आ विषयक जानकारी दऽ दइ छला आ हम हुनका लेल प्रेसेण्टेशन आ भाषण बनबै छलौ.। कखनो ऑफिसमे, कखनो फ्लाइटमे आ कखनो तँ ओइ विभागक रिसेप्शनमे ओ हमरासँ सभटा प्रेसेण्टेशन आ भाषण बुझै चला। फेर कखनो काल जखन हुनका प्रेसेण्टेशन आ भाषण बुझबाक समय नै भेटै छलन्हि तँ ओ हमर परिचय दैत प्रेसेण्टेशन आ भाषण लेल हमर नाम पुकारि दैथि। प्रभाकरन सुन्दरमक भाषणक नोट: प्रभाकरन सुन्दरम हमरा बुझबैत रहथि जे केना सरकारकेँ अर्थव्यवस्थामे हस्तक्षेप करबाक चाही। आ से नै केने भारत २ सँ ३ प्रतिशत विकास दर सँ आगाँ नै बढ़ि सकत, जकरा व्यंग्यमे अर्थशास्त्री राज कृष्णा "हिन्दू विकास दर" कहै छथि। हिन्दू विकास दर ९-१० प्रतिशत करय पड़त आ तखने ई व्यंग्यक विषय नै रहत, तखने विश्व हमरा सभकेँ चीन्हत। आ तइ लेल कर-व्यवस्था, लाइसेन्स व्यवस्था सभमे परिवर्तन चाही। आ अही लाइनपर हम भाषण तैयार करै छलौं। आ हमर ओइ बनायल भाषणपर थोपड़ी पड़ै छल। प्रभाकरन सुन्दरमक ऐ गप लेल हम ऋणी रहब जे ओ हमरामे आत्म्विश्वास भरलन्हि। हम असगर कोनो काज नै कऽ पबै छलौं, हमरा लागै छल जे हमरा बहुत रास गपक जनतब नै अछि, बा कम अध्ययन अछि। मुदा प्रभाकरन सुन्दरम हमरे सँ पूछि कऽ हमरेसँ उत्तर लैत रहथि आ देखबै छलथि जे "जे ज्ञान हमरा लगै छल जे हमरामे अध्ययन बा अनुभवक अभावमे नै अछि" से "हमरामे ततेक अछि जे बाजि प्रभाकरन सुन्दरम थोपड़ी बजबाबैत छथि"। आ फेर हमरामे असगरे काज करबाक आत्मविश्वास आयल। पहिने हमरा लागै छल जे हमर तथ्यमे कोनो कमी तँ नै? मुदा प्रभाकरन सुन्दरमसँ सम्पर्कक बाद तँ हमर "एक्सपर्ट एडवाइस" लेल जाय लागल। हमर अनुभवक कमी खूबी बनि गेल कारण हम अपने पढ़ल-सोचल लिखै-बाजै छलौं, आ दोसराक गपसँ प्रभावित नै होइ छलौं। हमर सामाजिक आ कर्यस्थलपर असगर काज केनाइ हमर खूबी बनि गेल। आ तकर श्रेय जाइत अछि प्रभाकरन सुन्दरमकेँ। एक दिन वार्ताक क्रममे प्रभाकरन सुन्दरम "सप्लाइ साइड" पॉलिसीक चर्चा केलन्हि जे केना बजार "डिमाण्ड"क आधारपर "सप्लाइ"क निर्धारण करैत अछि। सरकार ऐमे की करत? भारत सरकारकेँ बजारकेँ छूट देबैये पड़तै आ नै तँ राज कृष्णाक हिन्दू विकास दरक व्यंग्य सहैये पड़तै। आ ऐ लेल सरकारकेँ "निजीकरण" करय पड़त आ सरकारी नियंत्रणकेँ समाप्त करय पड़त। "मुदा प्रभाकरन, जँ भारत सन विकासशील देश "इन्फ्रास्ट्रकचर बूस्ट" नै देत तँ निजी क्षेत्रकेँ नहिये एत्ते पाइ छै ने इन्फ्रास्ट्रकचर उद्योगमे कोनो लाभे होइ छै जे ओ सभ ऐ मे आओत। फेर जँ सरकार प्रशिक्षणमे खर्च करय तँ सेहो तँ "सप्लाइ साइडे" भेल ने!" ऐ अन्तर्देशीय कम्पनी सभमे "सर", "महानुभाव" "प्रभाकरन सर" आदि कहबाक चलन नै छै। से ओहो हमरा गोप कुमार कहै छला आ हमहूँ हुनका प्रभाकरन कहै छलौं। हमरा तँ लागल जे हम कोनो सामान्य गप कहने छलौं, मुदा प्रभाकरन कने काल गुम्म रहि गेला। फेर ओ हमरा कहलनि जे अगिला भाषण अही टॉपिकपर बनाउ। जँ सभ ठीक रहल तँ अहाँक ई आइडिया ऐ कम्पनीक सभसँ पैघ परिणाम आनत। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। महाकान्त प्रसाद, नौआबाखर, मधुबनी, सम्प्रति : वाट्सन +२उच्च विद्यालय, मधुबनी दूटा बीहनि कथा बीहनि कथा- चिड़िया घर
-कतए गेल रही भजार? बहुत दिन सँऽ देखलहुँ नहि। -दिल्ली गेल रही मीत। धिया-पुता सभ तंग कएने छल चिड़िया घर देखबा लेल। -नीक कएलहुँ घमाफिरा देलियैक, एहिसँऽ नेनासभक बुद्धि बढ़ै छै आ पशु-पंछीक प्रति नेह-छोह ओ दयाभाव विकसै छैक। -ऊँह, मुदा से भैले कहाँ? चिड़िया घरक द्वारहि पर सर्कसक बोर्ड लागल छलै।ओहिमे कोनहुँ जानवरक चित्र नहि, एकटा टोपयुक्त दाढ़ीबला जादूगरक फोटो रहै,नेनासभ कहलक - एहि जादूगर केँ तऽ सभतर देखै छियै,आब ई एहूठाम अप्पन ऊल्लूपना देखबै लागल। चलू आपस। -तखन? -तखन की? नेनासभकेँ आई टी ओ लग सांईंस म्यूजियम देखा आपस चलि अएलहुँ।
बीहनि कथा- चिक्कस
-सुनीता, एक तम्मा चिक्कस दिअऽ, सठि गेल अछि। -हमरो सठि गेल अछि, थम्हु,बासन मे देखै छियै। हे लिअ,परथन आ बासन महक मिला कऽ एक तम्मा भैये गेल। आँगन जा कऽ नौआबाखरवाली चिक्कस सानऽ के ओरियान करए लगलीह।पाञि ढारिते रहै कि पाछाँ सँऽ ननदि ओहि मे आओरो पाञि ढारि देलकै आ अपन दुनू हाथ मे लगा भाउजक मुँह पर लेपि पड़एलीह- ऊबटन लगा देलौं..। -ईह, मँहगी मे आटा गील,थम्ह तोँ पतलोहिया..। ओ पीतै माहुर भऽ गेलैक। मुदा ननदिक एहि अबोध चौल सँऽ क्षणे मे मोन चिक्कस सन उज्जर आ स्निग्ध भऽ उठलैक। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। निर्मला कर्ण (१९६०- ), शिक्षा - एम् ए, नैहर - खराजपुर,दरभङ्गा, सासुर - गोढ़ियारी (बलहा), वर्त्तमान निवास - राँची,झारखण्ड, झारखंड सरकार महिला एवं बाल विकास सामाजिक सुरक्षा विभाग में बाल विकास परियोजना पदाधिकारी पद सँs सेवानिवृत्ति उपरान्त स्वतंत्र लेखन मूल हिन्दी- स्वर्गीय जितेन्द्र कुमार कर्ण/ मैथिली अनुवाद- निर्मला कर्ण अग्नि शिखा (भाग - ४) पूर्व शेष - उर्वशी पुरुर्वाक लेल एकटा पत्र छोड़ि हुनका सुतले खन चलि भेलैथि l निन्न फुजला उपरान्त पुरूरवा व्यग्र भय हुनक तलाश करैत छैथ l पत्र पाबि ओ पढ़ैत छैथ l
आब आगुक कथा सुव्यवस्थित एवँ सुरम्य भूमि जेकरा नर्मदा नदीक उज्ज्वल हीरक जलधार तीन दिश सँ घेर अपन मधुर सँगीत वायु में घोरि वीणा सन स्वर रस सँओहि क्षेत्रक बसनिहार के अहर्निश बारहोमास पान करबैत रहैत अछि l ओतय के निवासी अत्यन्त परिश्रमी एवँ निश्छल रहैथ l ओहि क्षेत्र स्थित वन में एक बरगद वृक्षक छाँह में पुरूरवा बैसल रहैथ l हुनक मुख पर गहन चिन्ता व्याप्त छलैन्ह l विरह वेदनाक तीव्र लहरि व्याप्त छलैन्ह हुनक मुखमण्डल पर l हठात ओ मानसिक वेदना सँ प्रमत्त भय आँखि सँ नोर बहबैत उन्मत्त सन प्रलाप करय लगलाह - " हा प्रिये अहाँ एतेक निठुर कोना भs गेलहुँ l आई धरि नहि देखल आ ने सुनल जे केओ प्रेयसी अपन प्रियतम के दुःखी छोड़ने वा देखबो केने होइथि l ओहना स्थिति में अहाँक ई क्रूर निठुर व्यवहार l ओह हमरा किछु नहि बुझाइत अछि l अहाँ फेर सँ हमरा छोड़ि गेलहुँ l अहाँ भरि संसारक दुःख-दर्द दs दिय, मुदा हमरा अपना सँ बिलगाउ नहि ....बिलगाउ नहि आबि जाऊ...आबि जाऊ.... ओह नहि आयब ...ओह.... आउ.... अहिना बड़-बड़ करैत ओ उठलाह आ फेर अपन हृदय में तीव्र पीड़ाक अनुभव करैत अपन छाती पकड़ने ओ भूलुंठित भय गेलाह l हुनक चेतना विलुप्त भय गेल रहैन्ह l कतेको कालक उपरान्त हुनक चेतना वापस एलन्हि तs ओ उठि कs बैसि रहलाह l ओ वन में चहुँ दिशि विस्मय पूर्ण दृष्टि घुमेलैथि, कतहु किछु नहि देखेलैन्ह l ओ निर्जन वनस्थली सन्ध्या रानीक गहन कज्जल कालिमा युक्त आँचर सँs आच्छादित भेल छल l आकाश मार्ग सँ अपन घोंसला में वापस आयल विहङ्गक कलरव सँ वातावरण गुन्जरित भेल छल l भूमि पर बैसि पुरूरवा अपन आँखि मूनि लेलथि l हुनकर मोन कल्पना लोक में विचरण करैत दूर बहुत दूर चलि गेलनि आ मानस पटल पर चलचित्र सन अनेको चित्र बनैत मेटाइत हुनक आँखिक समक्ष हुनक पूर्व जीवनक गाथा आबय लगलैन्ह आ ओ अपन सुधि बुधि बिसरि अपन भूतकालक जीवन में गमन करय लगलाह l
शक्ति आ ऐश्वर्य्क कतेको स्तम्भ पर टिकल प्रतिष्ठानपुरक नृपति पुरूरवाक गगनचुम्बी प्रासाद सूर्यक उज्ज्वल प्रकाश में उद्भासित भs रहल छल l पार्श्व में कल कल निनाद करैत भागिरथी गँगाक उज्ज्वल जलधार प्रवाहित छल l नगरक दोसर छोर पर यमुनाक शीतल जलधार नगरवासी केँ अपन शीतलता सँ सौम्य वातावरणक उपहार दैत छल आगू जा दुनू नदीक सँगम विहँगम दृश्य उत्पन्न करैत छल l राजमहलक निकट अपूर्व छटा युक्त एकटा सुरम्य वाटिका अवस्थित छल l एखनि राजदरबार लागल छल l सभ सभासद गण अपन अपन आसन पर विराजमान छलथि, मुदा पुरूरवाक आसन रिक्त छल l राजाक प्रतीक्षा करैत सभासद गण भीतरे भीतर खिन्न होइत रहैथ कारण जे राजा राज-कार्य के प्रति उदासीन भय गेल छलथि l राजा निष्क्रियता व आलस्य सँ युक्त भय गेल रहथि l मातृ-पितृ विहीन राजा के कोनो काज में मोन नहि लगैत छलैन्ह l मन्त्री गण अपन अपन आसन पर बैसल राजा प्रतीक्षा में अधीर होमय लागल छलाह तखने प्रहरी आबि सूचित केलक - " मन्त्री प्रवर! ऋषि राज अत्रिक आगमन भेल अछि"| " हुनका सादर आनह आ महाराज कें सेहो सूचित करह"| "जेहन आज्ञा अपनेक" - कहैत प्रहरी आपस चलि गेल l किछुए क्षण में पुरूरवा के ई समाद भेटलैन l सुनिते ओ ऋषिवर केँ स्वागत में दौड़ परलाह l अत्यधिक श्रद्धापूर्वक महर्षिक चरण-वन्दना कय हुनका उच्च आसन पर बैसेलनिआ स्वयं हुनक चरण पखारि हुनक अनेकों प्रकार सँs सेवा सत्कार केलनि l हुनक सेवा सँ प्रसन्न ऋषि पुछलखिन- "राजन अहाँ एतेक सज्जन विनयशील आ सत्यनिष्ठ पुरुष छी, मुदा राज्य कार्य में अहाँ के रूचि नहि बुझना जाइत अछि l अहाँ राज्य कार्य के बोझ बुझैत छी आ प्रजाजन सँs सेहो उदासीन छी, एकर कोन कारण अछि"? राजा - " माननीय ऋषिवर हम मातृ-पितृ हीन,नेतृत्व विहीन छी l हमरा अपन माता-पिताक मार्गदर्शन नहि भेटल ताहि सँ हमरा किछु ज्ञान नहि अछि जे राज्य केर सञ्चालन कोना करवाक चाही"| ऋषि अत्रि - " राजन अहाँ प्रत्येक जन्म में शासक रहलहुँ, शासन सञ्चालनक पूर्ण अभ्यास अहाँकेँ अछि, मुदा मातृ-पितृ दुःखक कारण अहाँ राजकार्य सँ विमुख भेल छी"| राजा - " ऋषिवर हमर कोन दोषक कारणे माता-पिताक प्रेम सँs हम वञ्चित रहलहुँ, कृपा कs हमर जिज्ञासा के शाँत कएल जाय एहि सँs हमर शोक सन्तप्त हृदय के किछु सान्त्वना होयत तखनि हम कुशल शासके टा नहि कुशल प्रशासक आ सम्राट बनि अहाँ के अवश्य देखायब, ई हम वचन दैत छी, आ अपनेक समक्ष ई प्रतिज्ञा करईत छी"| अत्रि ऋषि - "ओह राजन, माने कि अहाँ अपन माता-पिताक सम्बन्ध में जानकारी चाहैत छी"? राजा - " जी ऋषि प्रवर"| अत्रि ऋषि - "ठीक अछि राजन, तखनि आब सुनू, हम अहाँक माता-पिता एवँ अहाँक पूर्व जन्मक पूर्ण कथा सुनबैत छी- शब्दसः ओहिना जेना घटित भेल छल"| महर्षि अत्रि ध्यानमग्न भेला आ पूनः गम्भीरतापूर्वक हुनक मुख सँ शब्दक मोती वातावरण में बिछैत गेल आ राजा पुरूरवा ओहि मोती केँ अपन कर्ण रन्ध्र सहित अपन हृदय में सेहो सम्हारैत गेलाह l सरवन दस योजन विस्तार बला अत्यंत मनोरम तथा कल्पद्रुम, लतागुल्म सँs परिपूर्ण सुरम्य वन प्रांत छल l नाना प्रकारक पुष्प सँs सुवासित एहि वन के भगवान चंद्रमौलि शिव अपन अर्धांगिनी पार्वती के साथ क्रीड़ा करैक हेतु संरक्षित केने छलाह l आन कोनो पुरुषक प्रवेश ओहि वन में वर्जित छल l अन्य पुरुष के आगमन सँ बाधा उत्पन्न नहीं हुए, अहि लेल शिव एक व्यवस्था निर्धारित केने छलैथ - जे केओ पुरुष जीव ओहि वन में आयत ओ स्त्रीत्व के प्राप्त कय लेत l महाराज मनु के जेष्ठ पुत्र इल दिग्विजय करैत एक दिन अहि उपवनक निकट आबि गेलथि l ओहि उपवनक सुंदरता सँs विमोहित ओ वन में प्रवेश कय गेला l वन में प्रवेश करिते मात्र ओ स्त्रीत्व के प्राप्त भय गेलाह अश्व सेहो अश्वा में परिवर्तित भय गेल l राजाक चेतना किछु काल के लेल विलुप्त भय गेलनि l जखन चेतना वापस अयलनि अपन पूरा जीवन के विस्मृत कय चुकल रहैथ l आश्चर्यचकित ओ स्त्री रूप में वन में भ्रमण करय लगलाह l स्त्री रूप में ओ इला नाम सँs प्रसिद्ध भेलीह l इला अत्यंत सौंदर्यवती छलीह l हुनक नेत्र कमल सन पैघ आ सुंदर छलनि l छवि मनोहर, मुखक कान्ति पूर्णिमाक चंद्रमा सन, केशराशि नीलवर्ण एवं घुरमल घुरमल रहनि l गंभीर एवं मृदु स्वर, शरीरक रंग श्याम-गौर मिश्रित, हंस और हस्ति सन चालि रहनि l भौंह धनुषाकार एवँ नेत्र चँचल रहन्हि l ओ वन में एम्हर ओम्हर भ्रमण करैत अपन मोने-मोन सोचैत रहैथ - के छथि हमर माता-पिता, हम कोन कुल-खानदानक छी, हमर पति के छथि l चन्द्रदेव एवँ ताराक पुत्र बुध हुनका वन में विचरण करैत देखल आ हुनक सुंदरता पर ओ विमुग्ध भय गेलाह l हुनक मानसिक स्थितिक भान सेहो हुनक मुखमण्डल के देखि होमय लगलनि l आब बुध हुनका प्राप्त करवा हेतु प्रयत्नशील भय गेलाह l ओ एक विशिष्ट वेशभूषा बला दंडीक रूप धारण कय लेलनि l हुनक हाथ में कमंडल एवं पुस्तक रहनि, बाँसक एक गोट लाठी में अनेकों पवित्र वस्तु के बान्हि कs रखने रहथि l ब्राह्मण वेश में लंबा मोट शिखा धारण कयने रहथि l समिधा, पुष्प, कुश एवं जल लेने वेद पाठ करैत ओ एना प्रकट करैत जेना कि ओ वन में किछु तलाश कय रहल होथि एम्हर-ओम्हर देखैत वनक बाहर भाग में एक झुरमुट में बैस कs ओ इलाके अपना दिशि बजबै लगलाह l इला के निकट अयलाक बाद ओ अकस्मात कृत्रिम क्रोध प्रकट करैत बजलाह - सुंदरी अग्निहोत्र आदि सेवा सुश्रुषाक परित्याग कय अहां हमरा घर सs अतs घूमि रहल छी से कियेक"? ई बात सुनि इला कहलखिन्ह - हे तपोधन, हम अपन कुल, परिवार, पति सबके बिसरि गेल छी, हमरा किछु याद नहीं अछि l हे निष्पाप, आहां अपन आ हमर कुलक परिचय दिय"| एहि प्रकार पूछला पर बुध झूठ झूठ बाजय लगलाह - "सुंदरी आहां इला छी, आ हम बहुत विद्या में पारंगत बुध नाम सs प्रसिद्ध छी l हम परम तेजस्वी कुल में जन्म लेलहुँ अछि l हमर पिता ब्राह्मण के अधिपति छथि"l बुध के एहि कथन पर विश्वास कय इला बुध के ओहि भवन में प्रविष्ट भय गेलथि जाहि में रत्न जड़ित खंभा लागल छल एवँ निर्माण दिव्य मायाक द्वारा कयेल गेल छल l ओहि भवन में पहुंचि इला अपना के कृतार्थ मानय लगली l बहुत दिन तक सुख ऐश्वर्यक उपभोग करैत दुनू पति-पत्नी केँ रूप में जीवन यापन केलैन l बहुत दिन तक इल केँ राजधानी नहि लौटना पर हुनक अनुज इक्ष्वाकु हुनक तलाश में निकललाह l सर वन के निकट मार्ग में एक अनुपम घोड़ी के देखलैथ, जेकर शरीर रत्न निर्मित जीन के किरण सँ सुदीप्त होइत छल l निकट गेला पर जीन के चीन्ह इक्ष्वाकु बहुत आश्चर्यचकित भेला l हुनका पुछला पर कुल गुरु महर्षि वशिष्ठ ध्यान लगाकय अपन दिव्य दृष्टि सँ देखि पूर्ण वृत्तान्त स्पष्ट कएल l इल के पुनः पुरुष रूप में प्राप्त करवा लेल शिव पार्वतीक प्रार्थना एवं आराधना सबसs सुगम उपाय बतौलखिन महर्षि वशिष्ठ l इक्ष्वाकु भगवान शिवक आराधना कय हुनका प्रसन्न केलथि l भगवान शिव प्रगट भय कहलखिन - "अश्वमेघ यज्ञ करूं आ ओकर फल हमरा समर्पित कय दिय l एकर फलस्वरूप इल पुनः पुरुषत्व के प्राप्त होयता l मुदा ई अस्थाई होयत l ओ एक महीना पुरुष एवँ एक महीना स्त्री भाव में रहता"| अश्वमेध यज्ञ के कयला उपरांत इल पुनः पुरुष रूप प्राप्त कयलन्हि l एहि सँ खिन्न भय बुध इल केँ छोड़ि स्वर्ग लोक आपस चलि गेला l स्त्री रूप में बुध के संसर्ग सँs इला के एक पुत्र रत्न उत्पन्न भेल रहनि, ओहि बालकक नाम पुरूरवा राखल गेल l अपन किमपुरुषत्वक कारण लज्जित भय इल एवं अपन चोर व्यवहार के कारण बुध कहियो अपन पुत्र पुरुरवा के निकट नहीं आयल l पुरूरवा केँ मायक ममता एवं पिताक स्नेह सँs वंचित रहय परलैन्ह l एहि में नहि त पुरूरवाक माता-पिताक कोनहुना दोष छल आ ने पुरूरवाक l परोक्ष रूप सँ इल पुरुरवा कें प्रतिष्ठान पूरक अधिपति बनेलथि l ओहि पुरूरवा के कहियो जिनका मष्तक अथवा कन्हा पर कोनो बलिष्ठ हाथक संबल प्राप्त नहि भेल l क्रमशः अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। पद्य राज किशोर मिश्र, रिटायर्ड चीफ जेनरल मैनेजर (ई), बी.एस.एन.एल.(मुख्यालय), दिल्ली,गाम- अरेर डीह, पो. अरेर हाट, मधुबनी धा न
डुमरि क फूल सन भेल, मेघ, बनि पा हुन, आएल जेठ -मा स, बरसल त' एके अछा र, मुदा शुष्क खेत मे आएल साँ स।
श्रा न्त भेल गा म, मे बढ़ि गेल, हा ल सँ हलचल खूब जो र, हर -बड़द वा ट्रेक्टर लए,
कृषक -गण चलला , भो रे -भो र।
खेत चा सल गेल, तखन खसा ओल गेल धा नक बी आ, समा रला के बा द खतम भेल, बी आ बा ओग करक'क्रि या ।
बी आ, मा टि क सा हचर्य सँ, पा दप बनि बा हर आएल, जेना छल, अँकुरा एल भवि ष्य वर्त्तमा न बनए लेल, अगुता एल।
ओहि छो ट -छि न बी आक गा छ
मे पुष्ट धा न नुका एल छल, ओकर दि व्य सुन्दरता सँ, मा टि क हृदय जुड़ा एल छल।
खेत जनै ,नमहर भ' क'
चलि जा एत छो ड़ि , बी आ हमरा , जहि ना , फूल के दो स बना
छो ड़ि , उड़ल जा इत अछि भमरा ।
भवि ष्य क' बि छो ह के सो चि -सो चि ,
बि धुआएल छल,खेतक'मा टि , मुदा , ओकर सुंदर जी वन लेल शक्ति -सम्पदा , देलक 'साँ ठि ।
नभ मे बा दरि , घुमड़ि -घुमड़ि
गर्जन कए पठबैत छल समा द, जल -सनेस हम लएलहुँ अछि , छी पठा रहल, कि छु का लक बा द।
नृत्य करैत पा बस चलि आएल, अहर्नि श बरस' ला गल पयो द, सभक खेत मे एक रंग सँ, परसए बरखा , पा नि क' मो द।
रो पा गेल सभ खेत धा न सँ, सँ
उपरा ड़ि , गहीं रका , चओर -चाँ चर, हरि अरी क नूआ पहि र बा ध सभ, का ढ़ि लेलक हरि अर आँचर।
लि बल, शनैः -शनैः , सी स,
लगचि आए गेल, धा नक 'पा कब, रुखि बदलल, बा ध -बो नक, देखा इत धा न, जेम्हरे ता कब।
कतेक वि लक्षण, खेत लगैत छलै,
पसरल, पा कल धा न,
बरसि रहल, सबतरि , श्री -शो भा ,
बा ध-बो न, खरि हा न।
धा न कटल, दरबज्जा आएल,
को ठी , भरल बखा री सभहक मो न हर्षि त छलै, लै
बा ल -वृद्ध, नर -ना री ।
धा न पा बि कतेको धनि क देखबै छथि , धन क' अभि मा न,
धा ने सँ ओ दैत छथि ,
नमहर चा स -प्रमा ण।
तुलसी फूलक 'चा उर के जतए ,बनैत अछि भा त, गम -गम करए लगैत अछि , परसा ओल जखने पा त।
भा त -दा लि -तरका री , आओर, चूड़ा -दही -ची नी , ई भो जन सभ, सब सँ बेसी धा ने के अछि ऋणी ।
भ' जा इत अछि , अमृत -भो जन
जखन बनैत अछि खी र, खी र खा ए, पुरुषा र्थ देखा बथि ,
कतेको भो जन -वी र।
झटृा सँ छा रल जा इछ, चा र, आ, शय्या कतहु बनैछ, पो आर, बनैत अछि भो जन पशुक 'लेल, धा नक पो आर, धा नेक ना र।
चा उर, दूर्वा क्षत क' अंग भए,
बनि जा इत अछि मंत्र द्वा रा आशी ष, आशी र्वा द पबैत छथि ओ सभ
पड़ैत अछि जि नकर -जि नकर शी श।
हो इछ खों छि मे दूभि -धा न,
आशी र्वा द -प्रती क , बेटी के सौ भा ग्य बढ़ओ, हो उक सभटा नी क।
धा न जी वन -आधा र अछि ,
धा ने सँ धन -धा न्य, धा न सँ बनि जा इत छथि , सा मा न्य सँ गण्यमा न्य।
अर्थतंत्र मे धा न के, नमहर छै यो गदा न, बजा रक सूचकां क मे, धा नक मा न, प्रधा न।
दा ना अछि त' धा न अछि , नहि त' अछि ई खखड़ी , सुंदर फूल लगैत छै केहन, उजड़ि जा ए जँ पँखुड़ी ?
अछि धा नक स्वा गत, सभ दो आरि ,
धनि क, किं वा हो नि र्धन, भो जनक मुख्य आधा र छै, ई सुंदर अन्न, तंडुल -कण।
खेत जनैत अछि , धा न कतेक हो इत छै ओकरा , प्रि यगर, कटनी के बा द, सजल शो भा सँ ही न, हो इत अछि एसगर।
जी वन -धन -आशी र्वचन, सभ सँ जुड़ल अछि धा न, एहि ना थो ड़े भेटल छै, ओकरा , ओहन सम्मा न ? अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। गजेन्द्र ठाकुर शुनः शेपक मृत्युदण्ड वा बलि २ आ आब त्याग करबाक समय आबि गेल अछि भय केर त्याग, लोभ केर त्याग भोजन केर त्याग आ ग्रहण करबाक समय सेहो अछि वएह जकरा कैएक बर्ख धरि राखने रही नुका कऽ, बझा कऽ हाथ जोड़लौं, नै करू तंग हमरा, नै तँ बुझि जायत ई बड्ड आदर करैए ई हमर जँ ओकरा बुझि पड़तै जे अहाँ कऽ रहल छी हमर अपमान तँ फेर ई हमरो गप नै मानत अखन हम हाथ जोड़ने नेहोरा कऽ रहल छी फेर अहाँ करब नेहोरा जखन ई शुरू करत नाराशंसी अखन तँ एक्केटा खिस्सा सुनेलौं अछि आ अहाँ कहै छी जे एकर ऐ मामिलासँ की छी सम्बन्ध तँ फरिछा दइ छी ऐ सम्बन्धकेँ आइ। शुनः शेपकेँ देल गेल रहै मृत्युदण्ड बा ई रहै बलि? उत्तर दिअ, हम छी प्राश्निक आ अहाँकेँ सुना कऽ खिस्सा परीक्षाक लेल तैयार केलौं अछि ई पहिल प्रश्न, आ एकर उत्तर निर्धारित करत जे कतेक बुझनुक छी अहाँ आ तखने हम अही खिस्सासँ नब प्रश्न पूछब बा भऽ सकैए कोनो नब खिस्से सुना दी अहाँकेँ जँ हमरा लागत जे ऐ खिस्सासँ नब प्रश्न पुछला सँ कोनो फाएदा नै। शुनः शेपकेँ देल गेल रहै मृत्युदण्ड बा ई रहै बलि? आ बाजब आस्ते, कारण ओ हमरा बड्ड मानैत अछि। जँ कनियो ओकरा बूझि पड़तै अहाँक हमरा प्रति क्रूर आचरण तँ ओ बर्दास्त नै कऽ सकत, हमरो रोकलापर नै रोकि सकत अपनकेँ। तँ आस्तेसँ दिअ उत्तर- शुनः शेपकेँ देल गेल रहै मृत्युदण्ड बा ई रहै बलि? (अनुवर्तते) ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। कुमारी आरती प्रकृति काल नाच करैत अछि सबहक उपर आयु लेलक छीन प्रकृति सँ खिलवाड़ जुनि करू नय बुझु अपनासँ हीन
बेसी काबिल जँ बनव त देत पछाड़ धोबिया पाट चारू खाने चित भऽ जायब उड़ि जायत होश हवाश
हृदय विदारूण दृश्य अछि सब तरि मरण केर तांडव पसरल अछि लील गेलय कते केर जिनगी इ केहेन प्रकोप आयल अछि
आबो नहि जौं चालि सुधारब प्रकृति कऽ जौं नहि सम्हारब होइत रहत एनाहि दुर्गति चाहबो न होयत कबहु प्रगति
अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। सुषमा ठाकुर
आस
मनुष्यक जीवनक आधार अछि आस शिथिल मोन के ऊर्जावान करैत अपन लक्ष्य तक पहुंचै के मार्ग देखाबैत अछि आस संगी बनि सदिखन संगे रहैत अछि स्वच्छ सोचक विचार भरैत निष्प्राण शरीरक औषधि अछि आस दुःख में ढाढस बैन मौलाएल मोन के उत्साहक खाद द जीवन में आगू बढबैत अछि आस नीरसता के दूर करैत मोन में हर्षक दीप जराबय जाबेत धरि चलैये स्वास ताबेत धरि बनल अछि आस अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। 848 || http://www.videha.co.in/ ISSN 2229-547X VIDEHA 'विदेह' ३५२ म अंक १५ अगस्त २०२२ (वर्ष १५ मास १७६ अंक ३५२)|| 849
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