VIDEHA — Issue 366 / अंक ३६६

Publication: VIDEHA · Issue: 366
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ISSN 2229-547X VIDEHA 𑒀 विदेह ३६६ म अंक १५ मार्च २०२३ (वर्ष १६ मास १८३ अंक ३६६) [विदेह ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) www.videha.co.in ] विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। ऐ पोथी‍क सर्वाधि‍कार सुरक्षि‍त अछि‍। कॉपीराइट (©) धारकक लि‍खि‍त अनुमति‍क बि‍ना पोथीक कोनो अंशक छाया प्रति ‍एवं रि‍कॉडिंग सहि‍त इलेक्‍ट्रॉनि‍क अथवा यांत्रि‍क, कोनो माध्‍यमसँ, अथवा ज्ञानक संग्रहण वा पुनर्प्रयोगक प्रणाली द्वारा कोनो रूपमे पुनरुत्‍पादन अथवा संचारन-प्रसारण नै कएल जा सकैत अछि‍। (c) २०००- २०२३. सर्वाधिकार सुरक्षित। भालसरिक गाछ जे सन २००० सँ याहूसिटीजपर छल http://www.geocities.com/.../bhalsarik_gachh.html , http://www.geocities.com/ggajendra आदि लिंकपर आ अखनो ५ जुलाइ २००४ क पोस्ट http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html केर रूपमे इन्टरनेटपर मैथिलीक प्राचीनतम उपस्थितक रूपमे विद्यमान अछि (किछु दिन लेल http://videha.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html लिंकपर, स्रोत wayback machine of https://web.archive.org/web/*/videha 258 capture(s) from 2004 to 2016- http://videha.com/ भालसरिक गाछ-प्रथम मैथिली ब्लॉग / मैथिली ब्लॉगक एग्रीगेटर)। ई मैथिलीक पहिल इंटरनेट पत्रिका थिक जकर नाम बादमे १ जनवरी २००८ सँ ’विदेह’ पड़लै। इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि, जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। (c)२०००- २०२३. विदेह: प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004). सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। Editor: Gajendra Thakur. In respect of materials e-published in Videha, the Editor, Videha holds the right to create the web archives/ theme-based web archives, right to translate/ transliterate those archives and create translated/ transliterated web-archives; and the right to e-publish/ print-publish all these archives. रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना/ संग्रह (संपूर्ण उत्तरदायित्व रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता मध्य) editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ पठा सकैत छथि, संगमे ओ अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो सेहो पठाबथि। एतऽ प्रकाशित रचना/ संग्रह सभक कॉपीराइट रचनाकार/ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि आ जतऽ रचनाकार/ संग्रहकर्त्ताक नाम नै अछि ततऽ ई संपादकाधीन अछि। सम्पादक: विदेह ई-प्रकाशित रचनाक वेब-आर्काइव/ थीम-आधारित वेब-आर्काइवक निर्माणक अधिकार, ऐ सभ आर्काइवक अनुवाद आ लिप्यंतरण आ तकरो वेब-आर्काइवक निर्माणक अधिकार; आ ऐ सभ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार रखैत छथि। ऐ सभ लेल कोनो रॉयल्टी/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै, से रॉयल्टी/ पारिश्रमिकक इच्छुक रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता विदेहसँ नै जुड़थु। विदेह ई पत्रिकाक मासमे दू टा अंक निकलैत अछि जे मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ www.videha.co.in पर ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। Videha eJournal (link www.videha.co.in) is a multidisciplinary online journal dedicated to the promotion and preservation of the Maithili language, literature and culture. It is a platform for scholars, researchers, writers and poets to publish their works and share their knowledge about Maithili language, literature, and culture. The journal is published online to promote and preserve Maithili language and culture. The journal publishes articles, research papers, book reviews, and poetry in Maithili and English languages. It also features translations of literary works from other languages into Maithili. It is a peer-reviewed journal, which means that articles and papers are reviewed by experts in the field before they are accepted for publication. Font/ Keyboard Source: https://fonts.google.com/ , https://github.com/virtualvinodh/aksharamukha-fonts , https://keyman.com/ Videha e-Journal: Issue No. 366 at www.videha.co.in समानान्तर परम्पराक विद्यापति- चित्र विदेह सम्मानसँ सम्मानित श्री पनकलाल मण्डल द्वारा मैथिली भाषा जगज्जननी सीतायाः भाषा आसीत्। हनुमन्तः उक्तवान- मानुषीमिह संस्कृताम्। अक्खर खम्भा (आखर खाम्ह) तिहुअन खेत्तहि काञि तसु कित्तिवल्लि पसरेइ। अक्खर खम्भारम्भ जउ मञ्चो बन्धि न देइ॥ (कीर्तिलता प्रथमः पल्लवः पहिल दोहा।) माने आखर रूपी खाम्ह निर्माण कऽ ओइपर (गद्य-पद्य रूपी) मंच जँ नै बान्हल जाय तँ ऐ त्रिभुवनरूपी क्षेत्रमे ओकर कीर्तिरूपी लत्ती केना पसरत। Do not judge each day by the harvest you reap but by the seeds that you plant. -Robert Louis Stevenson ... Videha: Maithili Literature Movement 𑒀 ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्ष ग्वंग शान्ति: 𑓇 𑒠𑓂𑒨𑒾: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑒢𑓂𑒞𑒩𑒱𑒏𑓂𑒭 𑓅 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱: अनुक्रम ऐ अंकमे अछि:- १.१.गजेन्द्र ठाकुर- नूतन अंक सम्पादकीय (पृ.२-९) १.२.अंक ३६५ पर टिप्पणी (१०-१०) २.गद्य खण्ड २.१.रमाकर चौधरी- किडनी आ ओकर संबंधित बीमारी/ किडनी बीमारी संबंधित अन्य आवश्यक बात/ किडनी सम्बन्धित बीमारी हेतु उपचार/ लिवर (यकृत) / जिगर/ लिवर बीमारीक सुरक्षा, ओकर जांच आ उपचार/ हृदय(Heart)/ हृदयक वाह्य संरचना/ हृदयक आंतरिक संरचना/ हृदय मे अवस्थित वाल्व(वाल्व)/ हृदय सँ सम्बन्धित बीमारी(अस्थिर एनजाइना)- हृदय सँ सम्बन्धित किछु सामान्य बीमारी आ बीमारी चिनहैक लेल अनेकानेक परीक्षण (पृ. १३-४४) ‍२.२.संतोष कुमार राय 'बटोही'- लघुकथा- कनफुस्सी (पृ. ४५-४८) २.३.आचार्य रामानन्द मण्डल- आदर्श पुत्र (पृ. ४९-५१) २.४.आचार्य रामानंद मंडल- सादा जीवन उच्च विचार (पृ. ५२-५६) २.५.आचार्य रामानंद मंडल- मैथिली साहित्य मे परिवर्तन से आस जागल (पृ. ५७-५९) २.६.रबीन्द्र नारायण मिश्र- सरिसव बाली काकी (पृ. ६०-६५) २.७.कुमार मनोज कश्यप- ढीठ (पृ. ६६-६७) २.८.निर्मला कर्ण- अग्नि शिखा (खेप-१५) (पृ. ६८-७२) २.९.जगदीश प्रसाद मण्डल- मोड़पर (धारावाहिक उपन्यास एगारहम पड़ाव) (पृ. ७३-७४) २.१०.जगदीश प्रसाद मण्डल- सिमानक झगड़ा (पृ. ७५-८२) २.११.रबीन्द्र नारायण मिश्र- मातृभूमि (उपन्यास)- २३ म खेप (पृ. ८३-८७) २.१२.नित नवल दिनेश कुमार मिश्र (लेखक गजेन्द्र ठाकुर) (पृ. ८८-९६) २.१३.नित नवल सुशील (लेखक गजेन्द्र ठाकुर) (पृ. ९७-९९) ३.पद्य खण्ड ३.१.राज किशोर मिश्र- थाकल छी मुदा थकलहुँ नहि (पृ. १०१-१०४) ३.२.आशीष अनचिन्हार- २ टा गजल (पृ. १०५-१०६) ३.३.उदय नारायण सिंह नचिकेता- २ टा कविता (पृ. १०७-१११) ४.विदेह पेटार VIDEHA ARCHIVE (५५६ पृष्ठ) ४.१.विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक Videha e journal's all old issues ४.२.मैथिली पोथी डाउनलोड Maithili Books Download ४.३.मैथिली वीडियोक संकलन Maithili Videos ४.४.मैथिली शिशु, बाल आ किशोर साहित्य Maithili Children Literature ४.५.विदेह स्त्री कोना ४.६.विदेह सूचना संपर्क अन्वेषण ४.७.विदेह ई-लर्निङ्ग ४.८.मिथिला रत्न ४.९.मिथिलाक खोज ४.१०.१. मैथिलीमे छद्म समीक्षा आ कमलानन्द झा (प्रसंग- चोर लेखक पंकज झा पराशरक नूतन साहित्य चोरिक खुलासापर पाठकीय टिप्पणी) ४.१०.२. प्रसंग- चोर लेखक पंकज झा पराशरक पुरान साहित्यिक चोरिक खुलासापर पाठकीय टिप्पणी आ किछु प्रमाण 𑒀 ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्ष ग्वंग शान्तिः पृथ्वी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति वनस्पतय: शान्तिर्विश्वे देवा: शान्तिर्ब्रह्म 𑓇 𑒠𑓂𑒨𑒾: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑒢𑓂𑒞𑒩𑒱𑒏𑓂𑒭 𑓅 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑓁 𑒣𑒵𑒟𑓂𑒫𑒲 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑒰𑒣: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑒼𑒭𑒡𑒨: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱 𑒫𑒢𑒮𑓂𑒣𑒞𑒨: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑓂𑒫𑒱𑒬𑓂𑒫𑒹 𑒠𑒹𑒫𑒰: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑓂𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧 ब्रह्मणसँ प्रार्थना जे द्युलोकमे, अंतरिक्षमे, पृथ्वीपर, जलमे, औषधमे, वनस्पतिमे, विश्वमे, सभ देवतागणमे आ ब्रह्ममे शांति हुअय। ॐ-ब्रह्मण, द्यौ-सूर्य-तरेगण, अंतरिक्ष- पृथ्वी आ द्यूलोकक बीच, आप:-जल, विश्वेदेवा- सभ देवता, ब्रह्म- सर्जक। 𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧𑒝𑒮𑒿 𑒣𑓂𑒩𑒰𑒩𑓂𑒟𑒢𑒰 𑒖𑒹 𑒠𑓂𑒨𑒳𑒪𑒼𑒏𑒧𑒹, 𑒁𑓀𑒞𑒩𑒱𑒏𑓂𑒭𑒧𑒹, 𑒣𑒵𑒟𑓂𑒫𑒲𑒣𑒩, 𑒖𑒪𑒧𑒹, 𑒎𑒭𑒡𑒧𑒹, 𑒫𑒢𑒮𑓂𑒣𑒞𑒱𑒧𑒹, 𑒫𑒱𑒬𑓂𑒫𑒧𑒹, 𑒮𑒦 𑒠𑒹𑒫𑒞𑒰𑒑𑒝𑒧𑒹 𑒂 𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧𑒧𑒹 𑒬𑒰𑓀𑒞𑒱 𑒯𑒳𑒁𑒨। 𑓇-𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧𑒝, 𑒠𑓂𑒨𑒾-𑒮𑒴𑒩𑓂𑒨-𑒞𑒩𑒹𑒑𑒝, 𑒁𑓀𑒞𑒩𑒱𑒏𑓂𑒭- 𑒣𑒵𑒟𑓂𑒫𑒲 𑒂 𑒠𑓂𑒨𑒳𑒪𑒼𑒏𑒏 𑒥𑒲𑒔, 𑒂𑒣:-𑒖𑒪, 𑒫𑒱𑒬𑓂𑒫𑒹𑒠𑒹𑒫𑒰- 𑒮𑒦 𑒠𑒹𑒫𑒞𑒰, 𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧- 𑒮𑒩𑓂𑒖𑒏। 𑒀 ॐ, स॒हस्र॑शीर्षा॒ पुरु॑षः। स॒ह॒स्रा॒क्षः स॒हस्र॑पात्। 𑓇, 𑒮↓𑒯𑒮𑓂𑒩↑𑒬𑒲𑒩𑓂𑒭𑒰↓ 𑒣𑒳𑒩𑒳↑𑒭𑓁। 𑒮↓𑒯↓𑒮𑓂𑒩𑒰↓𑒏𑓂𑒭𑓁 𑒮↓𑒯𑒮𑓂𑒩↑𑒣𑒰𑒞𑓂। स भूमिं॑ ग्वंग वि॒श्वतो॑ वृ॒त्वा। अत्य॑तिष्ठद् दशाङ्गु॒लम्॥ 𑒮 𑒦𑒴𑒧𑒱𑓀↑𑓅 𑒫𑒱↓𑒬𑓂𑒫𑒞𑒼↑ 𑒫𑒵↓𑒞𑓂𑒫𑒰। 𑒁𑒞𑓂𑒨↑𑒞𑒱𑒭𑓂𑒚𑒠𑓂 𑒠𑒬𑒰𑒓𑓂𑒑𑒳↓𑒪𑒧𑓂॥ हजार माथ, हजार आँखि, हजार पएर संग विश्वकेँ आच्छादित केने अछि, दस आंगुरक गनतीक वशमे नै अछि ओ। प॒द्भ्याग्ँ॑ शू॒द्रो अ॑जायत॥ 𑒣↓𑒠𑓂𑒦𑓂𑒨𑒰𑒑𑓂𑒿↑ 𑒬𑒴↓𑒠𑓂𑒩𑒼 𑒁↑𑒖𑒰𑒨𑒞॥ पएरसँ शूद्रक उत्पत्ति भेल॥ प॒द्भ्यां भूमि॒र्दिशः॒ श्रोत्रा᳚त्। 𑒣↓𑒠𑓂𑒦𑓂𑒨𑒰𑓀 𑒦𑒴𑒧𑒱↓𑒩𑓂𑒠𑒱𑒬𑓁↓ 𑒬𑓂𑒩𑒼𑒞𑓂𑒩𑒰↑↑𑒞𑓂। मुदा पएरेसँ भूमियोक उत्पत्ति। ❀ (White Florette- innocence and purity) ☸ (Wheel of Dharma) ࿕(Swastik) ꣼ (सिद्धिरस्तु, सिद्धम 𑒮𑒱𑒠𑓂𑒡𑒱𑒩𑒮𑓂𑒞𑒳, 𑒮𑒱𑒠𑓂𑒡𑒧 Devanagari Anji) 𑓅 (Gwang ग्वंग- two small circles connected by u and a dot placed over it, used in reference of Vedic texts) 𑒀 (Tirhuta Anji, Ankush of Ganeshji, placed at the beginning of something) 𑒀

१.१.गजेन्द्र ठाकुर- नूतन अंक सम्पादकीय १.२.अंक ३६५ पर टिप्पणी १.१.गजेन्द्र ठाकुर- नूतन अंक सम्पादकीय १ MAITHILI SIGN LANGUAGE (DEVANAGARI/ MITHILAKSHAR/ KAITHI/ NEWARI) मैथिली संकेत लिपि (संकेत भाषा) मैथिली संकेत लिपि मूक वधिर लेल सांकेतिक भाषा अछि। अमेरिका (American Sign Language- ASL) आ ब्रिटिश (British Sign Language- BSL) मे संकेत लिपि निर्माण भेल जे विश्व भरिमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। अमेरिका (American Sign Language- ASL) एक हाथसँ आ ब्रिटिश (British Sign Language- BSL) दुनू हाथसँ संकेत करैत अछि। भारत आ नेपालमे सेहो संकेत लिपिक निर्माण भेल। भारतक संकेत लिपिकेँ (Indian Sign Language- ISL) कहल जाइत अछि जे Indian Sign Language Research and Training Centre http://www.islrtc.nic.in/  द्वारा विकसित कएल गेल आ ओइमे एकरूपता आनल गेल। आइ.एस.एल. डिक्शनरी आ संकेत भाषामे किछु एन.सी.ई.आर.टी. केर पोथी उपलब्ध अछि लिंक https://www.youtube.com/@islrtcnewdelhi4069/playlists पर। कचटतप आधारित देवनागरी लिपिमे रमेश एम. कागलकर  http://rameshkagalkar.appspot.com  मराठीमे आ Nepal National Federation of the Deaf & Hard of Hearing (NFDH)  नेपालीमे एकरा विकसित केलन्हि।  एमपावर कान्फेरेन्स २०२१ मे अमल जूड आश्विन, सुनील कुमार कोप्पारापू आ वी. श्रीनिवास चक्रवर्ती तमिल आ आन इण्डिक लिपि लेल अपन संकल्पना प्रस्तुत केलन्हि। मूक-वधिर स्कूल सभमे मोटा-मोटी अमेरिकन साइन लैंगुएज पढ़ायल जाइत अछि मुदा इण्डिक स्क्रिप्ट ब्रिटिश साइन लैंगुएज द्वारा बेशी नीकसँ प्रदर्शित कएल जा सकैत अछि। मैथिली (देवनागरी, मिथिलाक्षर, कैथी, नेवाड़ी- चारू कचटतप आधारित) संकेत लिपि ब्रिटिश (British Sign Language- BSL) पर आधारित अछि आ दुनू हाथसँ संकेत करैत अछि। संकेत लिपि वीडियो मात्र पोथीक माध्यमसँ संकेत लिपि नै सीखल जा सकैत अछि। एन.सी.ई.आर.टी. २२ भाषामे संकेत लिपिक वीडीयो जारी केने अछि, जइमे मैथिली, नेपाली , मराठी आ तमिलक लिंक नीचाँ देल गेल अछि। शेष सभटा भाषाक लिंक ऐ पोथीक अन्तमे देल गेल अछि। मैथिली: https://youtu.be/Jo3T3E20JRM नेपाली: https://youtu.be/9_A3EK_fV24 मराठी: https://youtu.be/93BVVsJVUks तमिल: https://youtu.be/6ecBHlL_Hu4 ऐ वीडियो सभक विशेषता अछि: १.ऐ सभमे ध्वनि सेहो अछि, से ई मूक-वधिरक अतिरिक्त आनो लोक आ दृष्टि बाधित लोक लेल सेहो उपयोगी अछि। २.ध्वनिक संक वीडियोमे संकेत लिपिक प्रयोग भेल अछि। ३.वीडियोमे ट्रांस्क्रिप्ट सेहो देखाइत अछि जइमे ओइ भाषाक संग ओकर हिन्दी आ अंग्रेजी अनुवाद सेहो देल गेल अछि। ऐ लिक https://ncert.nic.in/bs-2021.php पर ऐ बाइसो भाषाक पी.डी.एफ. सेहो उपलब्ध अछि जइमे ओइ भाषाक लिपिक पाठक संगे ओइ भाषाकेँ देवनागरी आ रोमन लिपिमे सेहो लिखल गेल अछि, जे हिन्दी आ अंग्रेजी अनुवादक अतिरिक्त अछि। संकेत लिपि कोष संकेत लिपि कोष http://www.islrtc.nic.in/ लिंकपर उपलब्ध अछि। RESOURCES: Indian Sign Language Research and Training Centre based Projects of ISL http://www.islrtc.nic.in/ ISLRTC YouTube Channel (for ISL Dictionary and some NCERT Books):   https://www.youtube.com/@islrtcnewdelhi4069/playlists पर। Ramesh M. Kagalkar http://rameshkagalkar.appspot.com Nepal National Federation of the Deaf & Hard of Hearing (NFDH) Empowering Speech and Hearing Impaired: A Unified Fingerspelling System for Indic Scripts- (https://empower2021.iiitb.ac.in/paper2021/ )  Authors (1)AMAL JUDE ASHWIN F, Bhupat & Jyoti Mehta School of Biosciences, Department of Biotechnology, IIT Madras, India (2) SUNIL KUMAR KOPPARAPU, TCS Research, Tata Consultancy Services Limited, India & (3) V. SRINIVASA CHAKRAVARTHY, Bhupat & Jyoti Mehta School of Biosciences, Department of Biotechnology, IIT Madras, India SIGN LANGUAGE VIDEOS IN 22 LANGUAGES https://www.youtube.com/@videha_ejournal (courtesy:BHASHA SANGAM https://ncert.nic.in/bs-2021.php ) MAITHILI: https://youtu.be/Jo3T3E20JRM NEPALI: https://youtu.be/9_A3EK_fV24 MARATHI: https://youtu.be/93BVVsJVUks KONKANI: https://youtu.be/gTjPY_ebTfU GUJARATI: https://youtu.be/kEVuF08mYuM SAMSKRIT: https://youtu.be/IU6o_oNSckQ BANGLA: https://youtu.be/JTr0w8vVTtA ASAMIYA: https://youtu.be/MpX9d-NI7dg ODIYA: https://youtu.be/XROIdeGqnXk SANTHALI: https://youtu.be/3lxtfz3_R-c Hindi: https://youtu.be/2PoOrwsnY88 URDU: https://youtu.be/6UWTq5Z9U2c PUNJABI: https://youtu.be/gWw4IQFCZ2w DOGRI: https://youtu.be/DPKtPI9qJbY KASHMIRI: https://youtu.be/vIVr4E5H-6c BODO: https://youtu.be/DhRLfc-uWLA SINDHI: https://youtu.be/SJAmLreMz4s TAMIL: https://youtu.be/6ecBHlL_Hu4 MALAYALAM: https://youtu.be/nW9e5eO6a_E KANNADA: https://youtu.be/U0SdbM9Qs1w TELUGU: https://youtu.be/_Gz1Sudph3Q MANIPURI: https://youtu.be/WBHcO-wShJk २ 𑒀 KEYMAN TIRHUTA/ VEDIC SANSKRIT KEYBOARD FOR WINDOWS/ MAC OS/ LINUX UBUNTU-WASTA_LINUX-DEBIAN OS/ ANDROID PHONE/ APPLE IPHONE-IPAD/ WEB 𑓇 𑒠𑓂𑒨𑒾. 𑒭𑒰𑒢𑓂𑒙𑒱𑒩𑒢𑓂𑒙𑒩𑒱𑒏𑓂𑒭𑓅 𑒭𑒰𑒢𑓂𑒙𑒱𑓁 ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्ष ग्वंग शान्ति: I. FOR WINDOWS DESKTOP GO TO https://keyman.com/windows/download.php OR GO TO https://keyman.com/keyboards?q=tirhuta Download "Tirhuta" Keyboard from https://downloads.keyman.com/windows/stable/16.0.138/keyman-setup.tirhuta.exe?_ga=2.26983796.856782072.1678802904-87949676.1676042074 if you are comfortable with Remington Inscript Keyboard (it uses "Mithila Uni" font) otherwise Download "Malar Tirhuta" keyboard from https://downloads.keyman.com/windows/stable/16.0.138/keyman-setup.malar_tirhuta.exe?_ga=2.26983796.856782072.1678802904-87949676.1676042074  if you are comfortable with phonetic writing (it uses "NOTO SANS TIRHUTA" font). GO TO https://downloads.keyman.com/windows/stable/16.0.138/keyman-setup.itrans_devanagari_sanskrit_vedic.exe?_ga=2.267216455.856782072.1678802904-87949676.1676042074 (For Vedic Sanskrit phonetic keyboard) II. FOR APPLE MAC OS Go to https://keyman.com/mac/download.php and download the software. III. 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FOR ONLINE WEB TYPEWRITER GO TO https://keymanweb.com/ विदेह: प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) http://videha.co.in/ - Gajendra Thakur, editor, Videha (Be part of Videha www.videha.co.in -send your WhatsApp no to +919560960721 so that it can be added to the Videha WhatsApp Broadcast list.) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। १.२.अंक ३६५ पर टिप्पणी अंक ३६५ पर टिप्पणी आशीष अनचिन्हार सनेस थिक दूर्वादल, आशीर्वादक, माल-जाल अछि रकटल, अकरे सोआदक। उम्मेद अछि जे राजकिशोर मिश्रजी अपन रचनाशीलता बनेने रहताह। शम्भु कुमार सिंह आ रोशन जनकपुरी जी लागातर आबि रहल छथि से नीक। कुमार मनोज कश्यप जीक लघुकथा केर विषय ठीक अछि मुदा ओकर अंतकेँ आर ठोस बनाएल जा सकै छलै। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.गद्य खण्ड २.१.रमाकर चौधरी- किडनी आ ओकर संबंधित बीमारी/ किडनी बीमारी संबंधित अन्य आवश्यक बात/ किडनी सम्बन्धित बीमारी हेतु उपचार/ लिवर (यकृत) / जिगर/ लिवर बीमारीक सुरक्षा, ओकर जांच आ उपचार/ हृदय(Heart)/ हृदयक वाह्य संरचना/ हृदयक आंतरिक संरचना/ हृदय मे अवस्थित वाल्व(वाल्व)/ हृदय सँ सम्बन्धित बीमारी(अस्थिर एनजाइना)- हृदय सँ सम्बन्धित किछु सामान्य बीमारी आ बीमारी चिनहैक लेल अनेकानेक परीक्षण ‍२.२.संतोष कुमार राय 'बटोही'- लघुकथा- कनफुस्सी २.३.आचार्य रामानन्द मण्डल- आदर्श पुत्र २.४.आचार्य रामानंद मंडल- सादा जीवन उच्च विचार २.५.आचार्य रामानंद मंडल- मैथिली साहित्य मे परिवर्तन से आस जागल २.६.रबीन्द्र नारायण मिश्र- सरिसव बाली काकी २.७.कुमार मनोज कश्यप- ढीठ २.८.निर्मला कर्ण- अग्नि शिखा (खेप-१५) २.९.जगदीश प्रसाद मण्डल- मोड़पर (धारावाहिक उपन्यास एगारहम पड़ाव) २.१०.जगदीश प्रसाद मण्डल- सिमानक झगड़ा २.११.रबीन्द्र नारायण मिश्र- मातृभूमि (उपन्यास)- २३ म खेप २.१२.नित नवल दिनेश कुमार मिश्र (लेखक गजेन्द्र ठाकुर) २.१३.नित नवल सुशील (लेखक गजेन्द्र ठाकुर) २.१.रमाकर चौधरी- किडनी आ ओकर संबंधित बीमारी/ किडनी बीमारी संबंधित अन्य आवश्यक बात/ किडनी सम्बन्धित बीमारी हेतु उपचार/ लिवर (यकृत) / जिगर/ लिवर बीमारीक सुरक्षा, ओकर जांच आ उपचार/ हृदय(Heart)/ हृदयक वाह्य संरचना/ हृदयक आंतरिक संरचना/ हृदय मे अवस्थित वाल्व(वाल्व)/ हृदय सँ सम्बन्धित बीमारी(अस्थिर एनजाइना)- हृदय सँ सम्बन्धित किछु सामान्य बीमारी आ बीमारी चिनहैक लेल अनेकानेक परीक्षण रमाकर चौधरी, सेवानिवृत्त चीफ मैनेजर, भारतीय स्टेट बैंक किडनी आ ओकर संबंधित बीमारी/ किडनी बीमारी संबंधित अन्य आवश्यक बात/ किडनी सम्बन्धित बीमारी हेतु उपचार/ लिवर (यकृत) / जिगर/ लिवर बीमारीक सुरक्षा, ओकर जांच आ उपचार/ हृदय(Heart)/ हृदयक वाह्य संरचना/ हृदयक आंतरिक संरचना/ हृदय मे अवस्थित वाल्व(वाल्व)/ हृदय सँ सम्बन्धित बीमारी(अस्थिर एनजाइना)- हृदय सँ सम्बन्धित किछु सामान्य बीमारी आ बीमारी चिनहैक लेल अनेकानेक परीक्षण

१ किडनी आ ओकर संबंधित बीमारी

पाचन तंत्र मे किडनीक भूमिका अति महत्वपूर्ण होइत अछि। आइ काल्हि देखि रहल छी जे अधिकांश लोक किडनी सम्बंधित बीमारी सँ ग्रसित भ जाइत छथि। हम किडनी आ ओहि सँ सम्बंधित बीमारी आ ओकर सुरक्षा आ उपचार विषय मे चर्चा कय रहल छी। किडनीक भूमिका शरीर मे उपस्थित लवण, पोटासियम, फॉस्फोरस इत्यादि कें नियंत्रित करै मे मुख्य अछि। किडनिक बीमारी अहाँक खाइ-पिबैक आदैत , जीवन चर्या, आ वंशानुगत कारक इत्यादि कारण सँ होइत अछि। किडनी जोड़ा मे होइत अछि, ठीक पाँजारक निच्चा मे। ओकर आकार मुट्ठी जकाँ होइत अछि। ओ मेरुदंडक दुनू भाग मे रहैत अछि । एक टा एक भाग आ दोसर दोसर भाग मे। किडनी स्वस्थ रहैक लेल परम आवश्यक अंग होइत अछि। ओ रक्त के छानि शुद्ध करैत अछि। रक्त मे अवस्थित विषाक्त पदार्थ, व्यर्थ पदार्थ या अन्य सब दोषपूर्ण पदार्थ के छानि कें हटा दैत अछि। ई व्यर्थ पदार्थ सब थैली मे जमा भ जाइत अछि आ ओ पेशाव माध्यम सँ वाहर निकैल जाइत अछि। किडनी शरीरक पीएच(PH) नियंत्रित करैत अछि, ओ एक तरहक हॉर्मोन श्रावित करैत अछि जे रक्त चाप नियंत्रित करैत अछि, रक्त कोशिका निर्माणक प्रक्रिया मे सेहो किडनिक भूमिका अछि आ ओ एक तरहक विटामिन डी कें सक्रिय करैत अछि जे आँत द्वारा कैल्शियम अवशोषण मे सहायक होइत अछि। एहि तरहेँ किडनी अति महत्वपूर्ण अछि। अधिक रक्त चाप आ मधुमेह सँ किडनी क्रमिक रूप सँ खराव भ जाइत अछि। अधिक तर अनेक तरहेँ शरीर रुग्ण रहलाक कारण सँ सेहो किडनी पर असैर पड़ि जाइत अछि। किडनीक खराबी सँ अनेकानेक शारीरिक समस्या आबि जाइत अछि। हड्डी कमजोर, नस कमजोर, शरीर मे विटामिन आ पौस्टिक तत्व सभक बहुत कमी इत्यादि होमय लागैत अछि। अगर बहुत दिन तक किडनी खराब रहैत अछि त अंततः पूर्ण रूपेण किडनी काज केनाय बन्द क दैत अछि आ तखन मरीज कें डायलायसिस पर राखि रक्त के साफ शरीर सँ बाहर करय पड़ैत अछि। एहि सँ बीमारी छुटैत नहि अछि बल्कि किछु समय तक एहि उपचार सँ जिंदगी जरूर बाँचल रहैत अछि। तेँ हेतु किडनी केना स्वस्थ बनल रहय एहि पर प्रारम्भ सँ ध्यान देबाक चाही। किडनी सबन्धित अनेक तरहक बीमारी होइत अछि। 1. दीर्घकालिक किडनी बीमारी। जखन रक्तचाप बढ़ल रहैत अछि या मधुमेह रहैत अछि तखन धीरे धीरे ओ किडनी मे अवस्थित ग्लोमुरेलाई के क्षति पहुँचबैत अछि। ग्लोमुरेलाइ किडनी मे अवस्थित अत्यंत लघु रक्त वाहिका होइत अछि तथा इएह रक्त के छनैत अछि आ दोषपूर्ण पदार्थ के हटवैत अछि। क्रमसः धीरे धीरे अधिक रक्त चाप तथा मधुमेह सँ ओ अंततः पूर्णरूपेण क्षति भ जाइत अछि आ तखन कहैत छी जे किडनी काज केनाय बन्द क देलक अर्थात किडनी फेल। एहि तरहक किडनीक खराबी दीर्घकालीक बीमारी कहल जाइत अछि। 2. किडनी मे पाथर। जखन व्यर्थ पदार्थ तथा खनिज तत्व(minerals) सभक क्रिस्टिलीकरण किडनी मे भ जाइत अछि तखन ओ ठोस पाथर रूप मे किडनी मे खराबी करैत अछि। अक्सर छोट पाथर पेशाव माध्यम सँ निकलि जाइत अछि मगर नमहर तँ शल्य चिकित्सा सँ बाहर निकालल जाइत अछि। समय सँ उपचार कय पूर्ण रूपेण एहि सँ चंगा भेल जा सकैत अछि। 3. ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस जखन ग्लोमेरु अर्थात किडनिक अंदरक छोट नलवाहिका संक्रमित भs फुलि (inflamted) जाइत अछि , ओकरा "ग्लोमेरूलोनेफ्राइटिस" कहल जाइत अछि। कखनो काल बच्चाक जन्म काल ओ भ जाइत छैक परञ्च ओ अपने ठीक भ जाइत छैक। एकर उपचार एन्टीइन्फेक्शन दवाइ सँ भय जाइत अछि। 4.पॉलीसिस्टिक बीमारी। किडनी मे साधारण सिस्ट भ सकैत अछि। कखनो काल एहि सिस्ट सभक कारणे किडनीक कार्य वाधित होइत अछि। 5. मूत्र प्रणालीक संक्रमण ( Urinary tract infection) आ तत्पश्चात किडनी बीमारी। मूत्र प्रणाली मे रोगाणु द्वारा संक्रमण होयब सामान्य थिक। ई संक्रमण, बैक्टीरिया द्वारा होइत अछि। ई पूर्णतया दवाइ सँ ठीक भ सकैत अछि। अगर ओकरा संक्रमित छोड़ि देल जाइत अछि तखन संक्रमण किडनी धरि पहुँचि जाइत अछि। ताहि सँ क्रमिक रूपेण किडनी कार्य वाधित होइत अछि। अंततः किडनी फेल भ जाइत अछि। तेँ समय रहैत मूत्र प्रणालीक संक्रमण चिकित्सक सुझाव अनुरूप दवाइ खा पूर्णतया ठीक क लेबाक चाही। २ किडनी बीमारी संबंधित अन्य आवश्यक बात

*किडनी बीमारीक लक्षण*

जावत धरि लक्षण नहि अबैत अछि तावत धरि किछु पता नहि चलैत अछि जे किडनी क्रमिक खराब होइ के तरफ अछि। तें हेतु ओकर सुरक्षा (prevention) हेतु ध्यान रहक चाही आ समय समय पर जांच सेहो करेबाक चाही। छोट मोट लक्षण त पता सेहो नहि चलि पबैत अछि आ ओकरा लोक ध्यानों नहि द पबैत अछि। (क)छोट मोट लक्षण 1. अपन प्रति दिनक दिनचर्या पर , काज सभ पर फोकस नहि क पबैत छी आ चिकित्सक स्ट्रेस के अनुमान लगा दवाइ सेहो द दैत अछि। 2. थकान थकान के अनुभूति होइत अछि। शारीरिक स्फूर्ति कम भ गेल अछि ई अनुभूति कs आलस्य मे रहैत छी। 3. ठीक सँ सुतैत नहि छी। कहैत छी जे नीन्द मे दिक्कत भ रहल अछि। 4.अरुचि सेहो भ जाइत अछि। भोजन रुचि पूर्वक नहि करैत छी। 5.अनुभव करैत छी जगह जगह हमर माँश पेशी ऐंठ रहल अछि। 6. पैर और टखना फुलि जाइत अछि। 7.आँखि केर निचुलका हिस्सा सेहो फूलि जाइत अछि। 8. शरीरक त्वचा रुक्ष भ जाइत अछि। 9. देर रात्रि मे पेशाबक वेग किछु अधिके आबय लगैत अछि।

ई सब भेल छोट छोट लक्षण । मगर एहि सब लक्षण सँ एहि निष्कर्ष पर कदाचित नहि जा सकैत छी जे किडनी बीमारी भइये गेल। मगर संभावना त अछिये जे हो न हो कहीं किडनी बीमारी नहि त भ रहल अछि। तें जांच करा पक्का भ जाय ताहि मे कोन हर्जा।

(ख)किडनी बीमारीक किछु गम्भीर लक्षण जकरा पर ध्यान देनाय अति आवश्यक होइत अछि।

हर समय जी मिचलैत रहब, रद्द होयब, भोजन करबाक बिल्कुल इच्छा नहि होयब, पेशाब भेनाइ बिल्कुल कम भ जायब, लाल रक्त कोशिका कम भ जायब, शरीर मे पानि जमा भ जायब(fluid retention), शरीरक पोटासियम स्तर सामान्य सँ अधिक एकाएक भ जायब, हृदय(heart) के ऊपरी भाग पेरीकार्डियम फुलि जायब एहि तरहेँ ई सब गम्भीर लक्षण होइत अछि जाहि पर तुरन्त ध्यान द प्रतिकारक हेतु उपाय प्रारम्भ क देबाक चाही।

*संभाव्य कारक*

किडनी बीमारी किनका होइक अधिक संभावना होइत अछि।

1. अगर कियो मधुमेह सँ ग्रषित होइत छथि आ ओहि पर ओ ध्यान नहि दैत छथि तखन संभावना रहैत अछि जे क्रमिक रूपेन हुनकर किडनी खराब भ रहल छन्हि।

2. अगर किनको सदैव रक्त चाप बढ़ल रहैत छन्हि आ ओ एकर उपचार नहि करैत छथि तखन हुनको किडनी बीमारी हेबाक संभावना रहैत छन्हि।

3. परिवार में जँ किनको क्रोनिक किडनी बीमारी भेल छन्हि , तs किछु संभावना रहैत छैक किडनीक बीमारी लेल।

4.बहुत अधिक उम्रक लोक कें सेहो संभावना रहैत छैक किडनी संबंधित बीमारी लेल।

*परीक्षण*

चिकित्सक लोकनि विभिन्न तरहक परीक्षण कय पता करैत छथि जे किडनी बढियां जकाँ अपन कार्य क रहल छैक वा नहि। अगर नहि त की स्थिति छैक। आ तद अनुकूल उपचार करैत छथि।

1. GFR परीक्षण।

ई परीक्षण अछि "ग्लोमेरुलर फिल्टरेशन रेट"

एहि परीक्षण सँ पता चलि जाइत अछि जे किडनी कतेक नीक जकाँ अपन कार्य क रहल छैक। अर्थात किडनिक कार्यक वास्तविक स्थित की छैक।

2. अल्ट्रासाउंड / सी टी स्कैन

एहि सँ चिकित्सक देखि ई पता करैत छथि जे किडनिक आकार प्रकार (shape/size) ठीक अछि कि नहि, कोनो ट्यूमर नहि त छैक, पेशाब नली(Urinary tract) सेहो देखि लैत छथि। एहि तरहेँ देखि पता करैत छथि जे किडनी सामान्य अछि वा नहि।

3. बॉयोप्सी

एहि परीक्षण मे चिकित्सक मरीज कें बेहोश क एक टा छोट टुकड़ी किडनी मे सँ निकालि परीक्षण करैत छथि आ पता करैत छथि जे कोन तरहक बीमारी छैक आ किडनी के कतेक जोखिम पहुँचेने छैक।

4. पेशाब परीक्षण

एहि परीक्षण सँ चिकित्सक पता करैत छथि जे पेशाब मे कहीं एल्ब्यूमिन नहि त आबि रहल छैक। एल्ब्यूमिन एक तरहक प्रोटीन छैक आ ओकर पेशाब मे उपस्थित बतबैत छैक जे किडनीक क्षति भ रहल छैक। 5.रक्त क्रेटीन स्तर परीक्षण

ओकर सामान्य स्तर होइत अछि 0.5 सँ 1 .0 धरि। जँ सामान्य सँ बढ़ल अबैत अछि तखन ई इंगित करैत अछि जे किडनी के क्षति भ रहल छैक।

एहि तरहेँ ई सब विभिन्न तरहक परीक्षण होइत अछि जाहि सँ चिकित्सक लोकनि एहि निष्कर्ष पर पहुँचैत छथि जे किडनीक बीमारी छैक वा नहि। अगर छैक तँ कोन स्थिति मे छैक। तद अनुकूल उपचार करैत छथि।

३ किडनी सम्बन्धित बीमारी हेतु उपचार

वास्तविकता अछि जे एकर उपचार मे ई ध्यान देल जाइत अछि जे बीमारी होइक कारण की सब छलैक। कहीं शरीरक रक्त चाप नहि त बढ़ल रहैत छलैक, कहीं मधुमेह नहि त बढि गेल छलैक, कहीं कोलेस्ट्रॉल नहि त बढ़ल छलैक, ई सब ध्यान मे रखैत चिकित्सक ओहेन दवाइ दैत छथि जाहि सँ ई सब नियंत्रण मे रहैक आ किडनीक खराबी और नहि बढ़ै । किडनी अपन कार्य करैत रहैक ओकर ध्यान देल जाइत अछि, अर्थात ओकर कार्य करैक क्षमता संरक्षित रहैक। एहि मे चिकित्सक फूलनाइ कम होइ लेल तथा लाल रक्त कोशिका मे बृद्धि होइक लेल(जँ एनीमिया भ गेल छैक) दवाइ द सकैत छथि अगर एहि सब तरहक लक्षण देखा पड़ैत छैक।

समुचित डाइट या खानपानक महत्व दवाइ सँ कम नहि तें ओहि पर ध्यान देनाय अति आवश्यक भ जाइत छैक। किडनी संदर्भित बीमारीक कारण सभ कें दूर करवाक लेल नीचा लिखल किछु परामर्श अछि।

1. खान पान और दवाइ के प्रवन्धन ओहेन हेवाक चाही जे मधुमेह बिल्कुल नियंत्रण मे रहय।

2.अधिक कोलेस्ट्रॉलयुक्त पदार्थ नहि खेबाक चाही।

3. प्रति दिनक आहार मे नूनक मात्रा कम करी।

4. जे पदार्थ हृदय(heart) स्वास्थ्य लेल बढियां नहि छैक जेना तेल घी के आहार मे वर्जित या कम करू। ओहि लेल बढियां जे होइत छैक जेना फल सब्जी इत्यादि ओकरा पर ध्यान देवाक चाही।

5. मदिरा पान तथा सिगरेट बिल्कुल वर्जित।

6. प्रति दिन शरीर सँ कार्यशील

(active) रहू। हल्का टहलनाइ फायदा करत।

7. अपन शरीरक वजन नियंत्रित रहबाक चाही।

जँ एक बेर किडनी खराब भ गेल तँ ओ और अधिक खराब नहि हो ताहि लेल उपचार होइत अछि । आगाँ जँ खराब होइते जायत तँ अंततः किडनी अपन कार्य केनाय पूर्णतःबन्द कय दैत छैक। ओहना परिस्थिति मे मात्र डायलीसिस उपचार या किडनी ट्रांसप्लांट ई दू टा उपाय अछि। डायलीसिस मे रक्त के गंदगी के छानैक प्रक्रिया शरीर सँ बाहर मशीन द्वारा होइत अछि । 3-4 घंटा लागि जाइत छैक प्रक्रिया मे। अक्सर सप्ताह मे औसतन 3 बेर कराबय पड़ैत छैक।(मरीजक हालत जेहन होइत अछि तेहन उपचार)

ट्रांस्प्लांट मे जँ कियो डोनर तैयार होइत छथिन्ह तखन हॉस्पिटल तथा चिकित्सक कें सब तरहेँ किडनी मैचिंग संदर्भित संतुष्टि उपरान्त किडनी ट्रांसप्लांट कs देल जा सकैत अछि।

सर्वोत्तम तथ्य अछि जे सभ कियो के अपन स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हेबाक चाही। एक तँ ओहेन दिन चर्या, आहार - विहार हेबाक चाही जे किडनी खराब हेबाक संभावना बिल्कुल नहि वा बहुत कम होइक । दोसर संभाव्य कारण सँ प्रभावित छी वा नहि , कहीँ खराब भेनाइ प्रारम्भ नहि त भ गेल ताहि लेल नियमित जांच अवश्य करेबाक चाही ताकि समय रहैत प्रतिकार कs सकी।

विशेष ध्यान देवाक योग्य बात जाहि सँ किडनी संबंधित बीमारीक संभावना के कम कएल जा सकैत अछि।

1. जँ एस्पिरिन या आइब्रूफेन दवाइ खाय पड़ैत अछि तँ चिकित्सक परामर्श सँ ओकर खोराक़ प्रवन्धन हेतु अवश्य संपर्क करू। कारण ओ किडनी कें क्षति पहुँचबैत अछि। कोशिश करू कम खाय के प्रयोजन होइक। अपने मोने नहि। चिकित्सक केर अनुशंसा परम आवश्यक।

2.दिन भरि मे पानि उचित सँ कम कथमपि नहि पिबू। शरीरक मुताविक जे उचित अछि अवश्य पीबू।

3.रक्त चाप तथा मधुमेह बीमारी बिल्कुल नियंत्रण मे रहय ताहि लेल प्रवन्ध करवाक चाही।

4. सिगरेट आ मदिरा सँ परहेज केनाय नीक रहत।

5. खान पान मे नूनक मात्रा कम रहय ओकर प्रयास बढियाँ रहत।

6. अधिक नून, अधिक जानवर वला प्रोटीन(चिकन), पालक, बीट, सकरकंद मे ओहेन रसायन सेहो होइत अछि जाहि सँ किडनी मे पथरीक संभावना बढ़बैत अछि तेँ ओ सब समीचीन रूप सँ खेबाक चाही।

7. बिना चिकित्सक परामर्श अन्हाघाहिस कैल्शियम सप्लीमेंट सेहो ठीक नहि। कारण कोनो कोनो सप्लीमेंट किडनी पथरीक संभावना बढ़बैत अछि।

सब किछु के बाद ई श्रेयस्कर होयत जे समय समय पर सब किछु लेल नियमित जांच कराओल जाय ताकि समय पर समुचित खान पान और दिनचर्या सँ सभ किछु नियंत्रण कए सकी।

४ लिवर (यकृत) / जिगर

लिवर(Liver)

लिवरक नाम यकृत , जिगर , कलेजा सेहो अछि।

पाचन तंत्रक एक अत्यधिक महत्वपूर्ण अंग अछि। ई एक प्रकारक ग्रंथि छी।

शरीरक आंतरिक अंग में लिवर सबसँ

नमहर अंग /ग्रंथि होइत अछि। ओकर आकार फुटबॉल जकाँ होइत अछि। मुख्यतया ओ पेटक उपरका भाग मे दाहिना तरफ होइत अछि। डायफ्राम के निच्चा आ अमाशय(stomach) सँ ऊपर। एकर थोरे बहुत भाग पेटक बांयाँ तरफ तक सेहो रहैत अछि।

एकर वजन करीब डेढ़ किलो होइत अछि। शरीर मे पाचन क्रिया तथा शरीरक सुरक्षा(defence) मे लिवरक बहुत अधिक महत्व अछि। शरीरक अंदर सैकड़ों रासायनिक क्रिया मे लिवरक भूमिका महत्वपूर्ण अछि। शरीर मे आनो अंगक अवश्यकीय रसायन सभ लिवर द्वारा श्रावित होइत अछि तें ओकरा आवश्यक ग्रंथि कहल जाइत अछि।

सारांश मे लिवरक मुख्य कार्य अछि

1. पाचन तंत्र सँ अवै वला सभ रक्त कें शुद्ध क अन्य अंग कें आपूर्ति करैत अछि।

2. शरीरक अंदर रासायनिक प्रक्रिया मे जे कोनो हानिकारक(toxic) रसायन बनैत अछि तकरा हानिरहित(detoxify) करैत अछि।

3. दवाइ जे हम सब खैत छी ओकरा मेटाबोलाइज क शरीर द्वारा अवशोषित हेवाक योग्य रसायन मे परिवर्तित करैत अछि।

4.शरीरक अंदर विभिन्न तरहक कार्य हेतु विभिन्न तरहक प्रोटीनक आवश्यकता पड़ैत छैक जेना कि रक्तक थक्का बनवैक लेल प्रोटीन। ई प्रोटीन सव लीवरे बनबैत अछि।

5.शरीर मे जे उर्जाक उपयोग होइत अछि ग्लाइकोजन रूप मे। भोजन सँ प्राप्त ग्लूकोज़ सँ ग्लाइकोजन मे परिवर्तनक कार्य लिवर करैत अछि आ ई ग्लाइकोजन लिवर कोशिका एवं शरीरक मांशपेशी कोशिका मे जमा रहैत अछि। एहि संरक्षित ऊर्जा सँ शरीर जरूरत परला पर ऊर्जाक उपयोग करैत अछि।

6. कोलेस्ट्रॉल एवं ट्रायगलीसराइड निर्माण मे लिवर के भूमिका होइत अछि।

7.लिवर पित्त(bile) के निर्माण करैत अछि जे कएल गेल भोजन के पचवै मे सहायक होइत अछि।

8.लिवर इन्सुलिन हॉरमोन तथा अन्य हॉरमोन सब के तोरैत अछि आ ओकर उपयोग मे अनैक योग्य बनबैत अछि।

9. लिवर कएल गेल भोजन सँ विटामिन ( विटामिन ए , विटामिन डी, विटामिन ई, विटामिन के, विटामिन बी 12)आ खनिज सब( आयरन फेरी टीन रूप मे जाहि सँ नया रक्त कण बनैत अछि) कें संग्रहित करैत अछि आ आवश्यतानुसार ओकर सभक काज शरीर मे होइत रहैत अछि।

10. लिवर भोजन मे लेल गेल वसा (fat) के अलग केनाय आ ओकरा संग्रहित केनाय के कार्य करैत अछि। आवश्यतानुसार जखन आवश्यता होइत अछि, ओहि सँ शरीरक हेतु ऊर्जा निर्गत होइत अछि।

11. लिवर शरीर मे जरूरत होइ बला एंटीबाडी और एंटीजन सभक सेहो निर्माण करैत अछि।

एहि तरहें लिवर शरीर मे बहुत महत्वपूर्ण काज सभ करैत अछि। लिवर स्वस्थ रहय ताहि लेल उचित खान पान और दिनचर्या अति आवश्यक अछि।

लिवर विषय मे एक महत्वपूर्ण तथ्य अछि जे ओ बहुत शक्तिशाली होइत अछि। ओकरा अपन पुनर्निर्माण के क्षमता अद्भुद अछि। शरीरक करीब 10 प्रतिशत रक्त लिवर मे रहैत अछि।

५ लिवर बीमारीक सुरक्षा, ओकर जांच आ उपचार

*लिवरक बीमारी आ ओकर सुरक्षा एवं उपचार।*

जँ अपन खान पान और जागरूकता सुदृढ रहय तँ अधिकाधिक संभावना रहैत अछि जे लिवर सम्बन्धित बीमारी सँ बाँचल रही।

सुरक्षा हेतु की सब पर ध्यान देबाक चाही , किछु बात निच्चा बता रहल छी।

1. मदिरा पान बिल्कुल नहि करू आ जँ करबे करैत छी तँ बिल्कुल अल्प मात्रा एवं संजमित रूप सँ।

2. शरीरक वजन अगर बढि रहल अछि तँ ओहि पर ध्यान दियौक जे अधिक नहि बढ़ए।

3.मधुमेह बीमारी खास क टाइप 2 हेबा सँ बाँचल रहू। कम और समुचित ग्लायसेमिक लोड बला आहार सँ त एहि बीमारी सँ बाँचल रहल जा सकैत अछि।

4. शरीर पर कोनो तरहक टैटू नहि बनबेबाक चाही।

5. शरीर मे जँ सुइया लेबाक प्रयोजन पड़ैत अछि तँ ध्यान देबाक चाही जे जाहि सुइयाक प्रयोग भ रहल अछि ओ बिल्कुल दोसरा के सुइया दै मे प्रयोग नहि भेल हो। अर्थात बिल्कुल नया ।

6. दोसराक शरीरक रक्त या शरीर तरल सँ संपर्क सँ सुरक्षित रहबाक चेस्टा करू।

7. खून चढेवाक प्रयोजन पड़ला पर ध्यान देवाक चाही जे ई पूर्ण सुरक्षित अछि।

8. असुरक्षित सेक्स बिल्कुल नहि।

9. किछु ओहेन रसायन या टोक्सिन होइत अछि जाहि सँ लिवर बीमारीक संभावना रहैत अछि। एहि सँ सुरक्षित रहक चाही।

10. किछु कें पारिवारिक इतिहास रहैत छन्हि लिवर बीमारी कें। हुनका बिल्कुल सतर्क और सजग रहबाक चाही।

11. साफ सफाई पर ध्यान देबाक चाही। भोजन खेबा मे, बनेबा मे, पानि पिबैक मे इत्यादि सभ मे ताकि कोनो तरहक संक्रमण सँ दूर रही।

12. बिना चिकित्सक अनुशंसाक दवाइ अन्हाघाहिस नहि खेबाक चाही।

13. जँ संभावना हो जे हेपेटाइटिस वला लोकक संपर्क मे आबि सकैत छी तँ टीका ल लेब श्रेयस्कर।

*लिवर बीमारीक कारण आ ओकर विभिन प्रकार।*

1. *संक्रमण*

परजीवी (parasites) एवं वायरस सँ लिवरक संक्रमित हेबाक संभावना रहैत अछि। संक्रमण भेला पर लिवर मे सुजन भए जाइत छैक आ ओकर कार्य करैक क्षमता धीरे धीरे कम होमय लगैत अछि। जाहि व्यक्ति के लिवर ,वायरस सँ संक्रमित होइत अछि ओकर रक्त, सीमेन, जूठा भोजन, पानि आ संपर्क सँ ई पसरि सकैत अछि। सामान्यतया तीन तरहक हेपेटाइटिस वायरस होइत अछि।

हेपेटाइटिस A

हेपेटाइटिस B

हेपेटाइटिस C

2. *इम्यून सिस्टम आधारित*

शरीरक इम्यून सिस्टम प्रहार सँ व्यक्तिक कोनो अंग प्रभावित भए सकैत अछि जकरा ऑटो इम्यून डिसऑर्डर कहल जाइत अछि। एहि मे जँ लिवर प्रभावित होइत अछि ओकरा ऑटो इम्यून लिवर बीमारी कहल जाइत अछि। मुख्यतया तीन प्रकारक ई बीमारी होइत अछि।

1.ऑटो इम्यून हेपेटाइटिस

2.प्राइमरी बायलरी कोलनजायटिस

3.प्राइमरी स्कलेरोसिंग कोलनजायटिस

3. *वंशानुगत लिवर बीमारी*

जँ माता पिता दुनू में या कोनो एक मे लिवर बीमारी हेतु असामान्य जीन रहैत अछि तँ संभावना रहैत अछि जे ओकर बच्चा में ई वंशानुगत बीमारी होइक।

एहि बीमारिक नाम अछि

1.हिमोक्रोमेटोसिस

2.विल्सन लिवर बीमारी

3.अल्फा-1 एन्टीट्रिप्सिन कमी लिवर बीमारी।

4. *लिवर कैंसर*

5. *लिवरक अन्य बीमारी*

लिवर मे वसा केर जमाव(Non Alcoholic Fatty Liver Disease)

अल्कोहल सेवन आधारित लिवर बीमारी।

लिवर बीमारी कें जँ बिना उपचार छोड़ि देल जाइत अछि तखन लिवर शिरोसिस भए जाइत छैक आ अंततः ओ काज केनाय बिल्कुल बन्द कए दैत छैक। तें ओकर उपचार बिना देरी प्रारम्भ अवश्य करबाक चाही।

*लिवर बीमारीक लक्षण इत्यादि।*

एहि बीमारी मे सदैव रोग पहचान करै बला लक्षण हेबे करैत अछि कोनो जरूरी नहि। तेँ ओकर चिकित्सीय परीक्षण करबैत रहनाइ जरूरी अछि।

ओना कखनो काल किछु लक्षण सेहो देखा पड़ैत अछि जे हम निच्चा मे बता रहल छी।

1. त्वचा आ आँखि पीयर भ जायब।

2.पेट दर्द आ पेट फूलल रहब।

3.पैर आ टखनी मे सूजन

4.चमड़ी मे खुजलाहट।

5. पेशाबक आ पैखानाक रंग खूब पीयर।

6.अत्यधिक अरुचि

7.थकान थकानक अनुभूति

8. रद्द हेवाक प्रविर्त्ति

*लिवर बीमारीक पहचान हेतु जांच*

ओना तँ विशिष्ट रूप सँ जाँच हेतु अलग अलग जांच होइत अछि, मगर सामान्यतया एल एफ टी (Lever Function Test) सँ एक नजरि मे बहुत किछु पता चलि जाइत अछि जे लीवर बढियां सँ काज कए रहल अछि वा नहि। आगाँ अल्ट्रासाउंड, सी टी स्कैन, बाईऑप्सि , हेपेटिटिटिस परीक्षण कएल जाइत अछि , ई सुनिश्चित होइक लेल जे कोन तरहक लिवर बीमारी अछि।

*लिवर बीमारिक उपचार।*

लिवर बीमारीक जाँच मे कोन तरहक बीमारी पहचान मे आयल अछि एहि अनुरूप चिकित्सक उपचार करैत छथि। किछु तँ एहेन खराबी रहैत अछि जे मात्र दिनचर्या ठीक केला सँ दूर भए जाइत अछि जेना अल्कोहल बन्द कए देनाय, अपन वजन आहार एवं दैनिक व्यायाम सँ नियंत्रित केनाय।

किछु ओहेन लिवर बीमारी जेना संक्रमण आधारित बीमारी। एहि हेतु चिकित्सक दवाइक अनुशंसा करैत छथि।

किछु ओहेन लिवर बीमारी जाहि मे शल्य चिकित्सा एवं ट्रांसप्लांट हेतु आवश्यकता होइत अछि।

सारांश मे ई बात सत्य अछि जे लिवर शरीर मे अति महत्वपूर्ण एवं शक्तिशाली अंग अछि । किछु बीमारी ओकर शक्तिशाली हेबाक कारण सँ किछु परहेज मात्र सँ आराम भ जाइत अछि। ( जेना कि हेपेटाइटिस -A) लिवर एक मात्र अंग अछि जकरा पुनःसृजन(Regenerate) करैक क्षमता होइत अछि। ओहि सँ सम्बंधित बीमारी होइ लेल बाहरी कारक जकरा लोक अपन सावधानी राखि रोकि सकैत अछि। सावधानी रखला सँ बचाव बिल्कुल संभव अछि एवं उपचार सँ बचाव पर अधिक जोड़ देल जाय ओ श्रेयष्कर अछि।

६ हृदय(Heart)

*मानव हृदय*

हृदय मुट्ठी आकारक एक अंग होइत अछि जे सम्पूर्ण शरीर में सभ अंग के रक्त भेजैक लेल रक्तक पंप करैत अछि।

हृदय रक्त वहिका तंत्रक मुख्य और प्राथमिक अंग थिक आ ओकर चारि प्रकोष्ठ होइत होइत अछि । ई प्रकोष्ठ सभ मांशपेशी सँ बनल रहैत अछि तथा ओ विद्युतीय आवेग सँ संचालित होइत रहैत अछि।

हृदय वक्ष(thorax) के अंदर छातीक बाँयाँ भाग मे अवस्थित रहैत अछि। शरीरक सभ अंग सँ आयल रक्त के हृदय पंप कए लंग्स(Lungs) मे पहुँचबैत अछि आ ओतय सभटा रक्तऑक्सीजन सँ युक्त भए जाइत अछि। पुनः ई ऑक्सीजनयुक्त रक्त लंग्स सँ हृदय मे लौट अबैत अछि आ हृदय ई ऑक्सीजनयुक्त रक्त कें पम्प कए सम्पूर्ण शरीरक सभ अंग के पठबैत अछि। हृदयक विषय मे ई एक रोचक बात अछि जे मनुष्यक हृदय पूरा जिनगी मे औसत करीब साढ़े तीन अरव बेर धडकैत अछि। एकर वजन मात्र 200 सँ 425 ग्राम होइत अछि। रोज ओ 6000 सँ 7500 लीटर रक्त कें पम्प करैत अछि।

*हृदयक मुख्य कार्य*

1. पम्प कएऑक्सीजनयुक्त रक्त कें सभ अंग मे पठेनै।

2.शरीरक सभ अंग लेल आवश्यकीय तत्व आ हॉर्मोन संचरण हेतु कार्य करैत अछि।

3. शरीरक अंग सभ सँ न्यून ऑक्सीजनयुक्त रक्त कें प्राप्त केनाय आ ओकरा पम्प कए ऑक्सीजनयुक्त करैक लेल लंग्स मे पठेनै।

4. शरीर मे उपस्थित कार्बनडाई ऑक्साइड एवं बेकार पदार्थक परिवहनक (transporting) कार्य करैत अछि।

5. शरीरक रक्त चाप सामान्य बनेने रखैत अछि।

एहि तरहेँ हृदय, रक्त आ रक्त वहिका ई तीनू मिलि ह्रदय प्रणाली (cardio vascular system) कहबैत अछि आ ओ सदैव कार्य करैत रहैत अछि।

*हृदय आ परिसंचरण तंत्र*

हृदय कें अपन कार्य सुचारु रूप सँ करैक लेल परिसंचरण तंत्रक भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होइत अछि।

*ओकर विभिन्न प्रकार*

1. फुफ़्फ़सी(पल्मोनरी) परिसंचरण।

(Pulmonary Circulation)

एहि परिसंचरण में हृदयक दाहिना भागक वेंट्रिकल सँ ऑक्सीजन रहित रक्त(De-oxydised blood) फुफ्फुस (लंग्स) में जाइत अछि ऑक्सीजनयुक्त होइक लेल आ पुनः ओ ऑक्सीजनयुक्त रक्त फेर हृदय में अवैत अछि।

2. दैहिक परिसंचरण(systemic circulation)

एहि परिसंचरण माध्यम सँ ऑक्सीजनयुक्त रक्त कें हृदय द्वारा पम्प कए सम्पूर्ण शरीरक अंग सभ कें पहुँचायल जाइत अछि आ ओहि शरीरक अंग सँ ऑक्सीजनरहित (de-oxydised blood) कें पुनः हृदय में आनल जाइत अछि।

3. कोरोनरी परिसंचरण(coronary circulation)

स्वयं हृदय माँशपेशी सँ बनल होइत अछि आ ओ सम्पूर्ण शरीरक अंग सभ के ऑक्सीजनयुक्त रक्त लगातार क्रम में पहुँचबैत रहैत अछि ।ओकरा निरंतर कार्य करैक हेतु सेहो अलग सँ ऑक्सीजनयुक्त रक्त चाही।जाहि परिसंचरण माध्यम सँ ऑक्सीजनयुक्त रक्तक आपूर्ति हृदय कें होइत अछि ओकरा कोरोनरी परिसंचरण कहल जाइत अछि। ई अत्यंत जरूरी परिसंचरण होइत अछि।

ओही तरहेँ मस्तिष्क के अलग सँ बिल्कुल ताजा और शुद्ध ऑक्सीजनयुक्त रक्त निरन्तर कार्यशील रहैक लेल चाही जे कि परसंचारित होइत रहैत अछि।

७ हृदयक वाह्य संरचना

*हृदयक वाह्य संरचना।*

(1).हृदयक वाह्य संरचना मे सर्वप्रथम पेरीकार्डियम होइत अछि। ह्रृदय एक तरल सँ भरल कैविटी मे अवस्थित रहैत अछि। ओहि कैविटी कें पेरिकार्डियल कैविटी कहल जाइत अछि। एहि कैविटीक दीवाल और परत झिल्ली रूप मे रहैत अछि आ तकरे पेरीकार्डियम कहल जाइत अछि।

ई पेरीकार्डियम, हृदय कें फाइबर झिल्ली सँ चारु कात सँ घेरि सुरक्षित केने रहैत अछि।

ओ एक टा तरल श्रावित सेहो करैत रहैत अछि जे हृदय लेल चिकनई(Lubricant) पदार्थ थिक आ ओहि सँ हृदय अन्य अंगक घर्षण सँ सुरक्षित होइत अछि।

हृदय जे फैलइत सिकुरैत अछि ताहि लेल सेहो पेरीकार्डियम मे ओतेक खाली जगहक(hollow space) व्यवस्था रहैत अछि जाहि सँ हृदय कें अपन पूर्ण अधिकतम आकार लेबा मे आसानी रहैक । अर्थात हृदयक जगह समावेश (positioning) लेल पेरीकार्डियम युक्त रहैत अछि।

पेरीकार्डियम 2 परत मे होइत अछि। (क)पहिल बाह्य परत कें विसेरल परत कहल जाइत अछि। ई परत सीधा हृदय के बाहर तरफ सँ घेरने रहैत अछि।

(ख) विसेरल परत सँ ठीक बाद दोसर परत होइत अछि जे पेरीटल परत कहल जाइत अछि।

पेरिटल परत थैलीनुमा(sac) रूप मे होइत अछि जे हृदयक वाह्यतम भाग मे रहैत अछि । कैविटी युक्त एहि परत मे तरल रहैत अछि जे कि हृदय लेल चिकनई(lubricant) उद्देश्यक पूर्ति करैत रहैत अछि।

(2). हृदयक वाह्य संरचना मे आव हृदय भित्तिक (Heart wall) विषय मे चर्चा करैत छी।

हृदय भित्तिक तीन परत होइत अछि।

प्रथम परत एपिकार्डिम होइत अछि। ई वाह्यतम परत मे एक पातर झिल्ली वला परत सेहो रहैत अछि जे चिकनई (lubricant) प्रदत्त करैत रहैत अछि आ वाह्य भाग कें सुरक्षित रखैत अछि।

दोसर परत कें मायोकार्डियम कहल जाइत अछि। ई माँशपेशी उत्तक सँ बनल मोट परत रहैत अछि । पम्प करैक काज एही मायोकार्डियम द्वारा होइत अछि। ओकरा हृदय भित्तिक मध्य परत कहल जाइत अछि।

तेसर परत कें एंडोकार्डियम कहल जाइत अछि। सबसँ भितुरका परत होइत अछि जे हृदयक अंदर चैम्बर(प्रकोष्ठ) एवं वाल्व सभ कें अपन परतक अंदर रखने रहैत अछि। ई हृदयक अंदरूनी देवाल पर रक्त कें सटै(stick) सँ बचवैत छैक ताकि रक्त थक्का खतरा सँ सुरक्षित रहल जा सकै।

एहि तरहें ई भेल हृदयक वाह्य संरचना।

८ हृदयक आंतरिक संरचना

रक्त वहाव नियंत्रण हेतु हृदयक अंदर प्रकोष्ठ एवं वाल्व निरंतर कार्य करैत अछि। मानव हृदय मे चारि गोट प्रकोष्ठ(चैम्बर) होइत अछि। निच्चा चारुक नाम अछि।

1.वाम भागक एट्रियम

2.दहिना भागक एट्रियम

3. वाम भागक वेंट्रिकल

4.दहिना भागक वेंट्रिकल

एट्रियम/एट्रिया

एट्रिया वेंट्रिकल से छोट होइत अछि। एट्रियाक दीवाल वेंट्रिकल कें तुलना मे पातर आ थोड़ेक कम माँशपेशी वला होइत अछि।

एट्रिया रक्त प्राप्त करैक हेतु एक प्रकोष्ठ होइत अछि जे बड़ी नस(Large vein) सँ रक्त प्राप्त करैत अछि।

वेंट्रिकल

वेंट्रिकल नमहर प्रकोष्ठ होइत अछि संगहि ओ अधिक माँशपेशी

सँ बनल होइत अछि। ओ पम्प करैक काज करैत अछि। पम्प

कए ओ रक्त कें संचरण(सर्कुलेशन) हेतु धकेल दैत छैक।

ओ बड़ी धमनी सँ जुरल रहैत अछि जेकि रक्त परिसंचरण हेतु रक्त निर्गत करैत अछि।

दहिना एट्रियम एवं दहिना वेंट्रिकल वाम भागक प्रकोष्ठ(एट्रियम एवं वेंट्रिकल) सँ तुलनात्मक दृष्टि सँ छोट होइत अछि।

ओकर (दहिना भागक प्रकोष्ठ) दीवाल सेहो कनी पातर होइत छैक, आकार सेहो कम होइत छैक, कनी कम मांशपेशी वला होइत अछि कारण दहिना आ वाम भाग वला प्रकोष्ठक कार्य अलग अलग अछि।

जे दहिना तरफ सँ रक्त अवैत अछि ओ फुफुस (पल्मोनरी) परिसंचरण सँ मगर वाम भाग वला रक्त जे प्रकोष्ठ सँ अवैत अछि ओकरा पम्प कए सम्पूर्ण शरीरक सभ अंग मे पठौल जाइत अछि। प्रकोष्ठक कार्यक अनुरूप ओकर आकार एवं प्रकार होइत अछि।

रक्त वहिका(Blood vessels)

मनुष्य मे बन्द परिसंचरण तंत्र होइत अछि। ओकर अर्थ ई अछि जे एहि परिसंचरण तंत्र मे रक्त बन्द नलिका मे वहैत अछि।

रक्तक दवाव आ गति अधिक रहैत अछि। पदार्थक आदान प्रदान उत्तक तरल सँ होइत अछि।

एहि तरहक परिसंचरण मे वहिकाक(vessels) आकार प्रकार आवश्यतानुसार कत्तौ छोट आ कत्तौ पैघ होइत अछि।

हृदयक वाह्य संरचना मे अनेकानेक रक्त वहिका कार्य करैत अछि, और ओ हृदय अंतर्गत अन्य प्रमुख(major) रक्त वहिकाक संग मिलि एक नेटवर्क बनेने रहैत अछि तथा समग्र रूपेण पद्धति (systematic)सँ कार्य करैत रहैत अछि।

रक्त वहिका( Blood vessels) विभिन्न प्रकारक होइत अछि ।

1. नस(vein) : - नस द्वारा ऑक्सीजनरहित(De oxygenated) रक्त हृदय मे पहुँचैत अछि। हृदय मे पहुँचला सँ पहिले रक्त इन्फीरियर एवं सुपीरियर वेना कावा मे जाइत अछि आ ओतय सँ ओकर निकासी दहिना भागक एट्रियम मे होइत अछि।

2. केशिका(capillaries):- धमनी और नसक बीच एक रक्त वहिकाक नेटवर्क जे बहुत पातर ट्यूब जकाँ होइत अछि तकरा केशिका (capillary) रक्त वहिका कहल जाइत अछि।

3.धमनी(Arteries):- रक्त वहिका जकर दीवार(wall) मांशपेशी सँ बनल(Mascular) होइत अछि आ ओ एक ट्यूब जकाँ होइत अछि। हृदय सँ ऑक्सीजनयुक्त रक्त शरीरक विभिन्न अंग मे ओही रक्त वहिका द्वारा जाइत अछि। एहि रक्त वहिका कें धमनी कहल जाइत अछि।

सबसँ नमहर धमनी ऐरोटा कहल जाइत अछि जकर शाखा प्रशाखा विभिन्न अंग सँ छोट छोट धमनी सँ जुरल रहैत अछि। एहि छोट छोट धमनी सँ सभ अंग धरि ऑक्सीजनयुक्त रक्त आपूर्ति होइत रहैत अछि।

९ हृदय मे अवस्थित वाल्व(वाल्व)

वाल्व हृदयक चैम्बर सभ मे नस कें बीच फाइबर सँ बनल फ्लैप होइत अछि जे रक्त के सदैव आगाँ तरफ जाय , पाछाँ तरफ घुरि नहि अबैक ताहि लेल उपस्थित रहैत अछि। वाल्व सुनिश्चित करैत अछि जे रक्तक वहाव एक्के दिशा (Unidirection) मे होइक।

वाल्वक कार्यक अनुसार ओ दू प्रकारक होइत अछि।

1.एट्रियोवेंट्रिकुलर वाल्व:- एट्रिया और वेंट्रिकलक बीच जे वाल्व होइत अछि ओकरा एट्रियोवेंट्रिकुलर वाल्व कहल जाइत अछि। दहिना कातक एट्रिया आ वेंट्रिकल कें बीच जे वाल्व होइत अछि तकरा ट्रिकसपिड(Tricuspid) वाल्व कहल जाइत अछि।

ओही तरहें वामा तरफ एट्रिया आ वेंट्रिकल कें बीच जे वाल्व होइत अछि तकरा मिटरल(Mitral) वाल्व कहल जाइत अछि।

2.सेमिळूनर वाल्व(अर्ध चंद्राकार वाल्व):- वामा कातक वेंट्रिकल तथा ऐरोटाक बीच जे वाल्व होइत अछि तकरा सेमिळूनर वाल्व कहल जाइत अछि। ओही तरहेँ दहिना कातक वेंट्रिकल तथा

पल्मोनरी धमनीक बीच एक टा वाल्व रहैत अछि तकरो सेमिळूनर वाल्व कहल जाइत अछि।

१० हृदय सँ सम्बन्धित बीमारी(अस्थिर एनजाइना)- हृदय सँ सम्बन्धित किछु सामान्य बीमारी आ बीमारी चिनहैक लेल अनेकानेक परीक्षण

* *अस्थिर एनजाइना**

एहि मे छाती , बैंह, जबड़ा, कन्हा, गर्दैन मे दर्द एवं खिंचावक अनुभूति होमय लगैत अछि। आराम के स्थिति मे या कोनो मिहनत नहियों केलाक स्थित मे एहि तरहक दर्द होइत अछि।

साँस फुलनै,पसीना एनै, रद्द भेनै, पेट मे दर्द भेनै, चक्कर एनै, थकान लगनै,बेहोशी एनै इत्यादि सभ सेहो भ सकैत अछि। कखनो काल एहि सब लक्षण कें ठीक सँ नहि बूझि पबैत छथि। मगर एहि सब पर ध्यान देबाक चाही।

कखनो काल पेट मे गैसक कारण सँ सेहो छाती मे दर्द होइत अछि। ओ किछु खेला पिलाक कारण सँ होइत अछि आ ओ थोरे कालक बाद स्वयं ठीक भ जाइत अछि।

स्थिर एनजाइना मे दर्द शरीरक स्थिति बदलला पर आराम होइत अछि। समुचित दवाइ और आराम ओकर उपचार थिक। अस्थिर एनजाइना कें गंभीर मानि तुरन्त और शीघ्राति शीघ्र नीक चिकित्सक एवं चिकित्सालय सँ संपर्क करवाक चाही। एहि मे दर्दक अनुभूति शरीरक कोनो पैटर्न मे होइते रहैत अछि। शरीरक पैटर्न पर निर्भर नहि रहैत अछि ।

**अस्थिर एनजाइनाक वास्ते या अन्य हृदय सम्बन्धित बीमारी सभ लेल परीक्षण(Tests)*

1. रक्त परीक्षण:- रक्त परीक्षण कए चिकित्सक हृदयक ट्रोपोनिन(cardiac troponin) स्तर देखैत छथि। एहि स्तर कें देखि ओ सुनिश्चित करैत छथि जे छातीक दर्द हृदय घातक एनजाइनाक कारण सँ अछि या अन्य कारण सँ। चिकित्सक ओकर अलावा वसा, कोलेस्ट्रॉल, सरकरा एवं प्रोटीन सभक सेहो स्तर देखैत छथि जाहि सँ चिकित्सा करै मे सुविधा होनि। ट्रोपोनिन l केर सामान्य स्तर 0-0.04 मानल जाइत अछि।

2. इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम(ECG):-

एहि परीक्षण सँ ई पता चलैत अछि जे हृदयक अंदर विद्युतीय आवेगक(electrical impulse) की स्थिति अछि?हृदयक धड़कन कहीं काफी अधिक -कम नहि तँ छैक वा धड़कन छैहो वा नहि? हृदयक धड़कन (Heart rhyme) सँ एहि पैटर्न कें पता चलैत अछि जे हृदय मे रक्त प्रवाह मंद अछि या रुकैतो अछि?

एहि तरहें ई परीक्षण हृदयगत बीमारी मे महत्वपूर्ण होइत अछि।

3.छातीक एक्स- रे(X-ray):-

छातीक एक्स -रे सँ चिकित्सक ई सुनिश्चित करैत छथि जे कहीं अन्य कारण सँ त नहि छातीक दर्द अछि। ओहि सँ हृदय के आकार कें देखल जाइत अछि। लंग्स(फुफुस) सेहो देखल जाइत अछि।

4. तनाव परीक्षण(Stress Test):-

तनावक दरमियान हृदयक कार्य करैक स्थिति की रहैत अछि , ओहि दरमियान संदर्भित अन्य पैमाना सभक परीक्षण , हृदयक धड़कन इत्यादि हेतु तनाव परीक्षण कराओल जाइत अछि। एहि परीक्षण मे मरीज कें ट्रेडमिल , या चिकित्सीय साईकल पर चढ़ा कें जांच कएल जाइत अछि।

चिकित्सक ई देखैत छथि जे तनावक स्थिति मे हृदय केहेन प्रतिक्रिया करैत अछि।

5. इक्कोकार्डियोग्राम परीक्षण(Echo cardiogram Test):-

एहि परीक्षण मे ध्वनि तरंगक माध्यम सँ चलैत(moving) हृदयक चित्र प्राप्त होइत अछि। एहि सँ देखल जाइत अछि जे हृदय अंदर रक्तक वहाव सामान्य अछि वा नहि। ई परीक्षण तनाव स्थिति मे सेहो करायल जाइत अछि जकरा तनाव इकोकार्डियोग्राम(stress Echo Test) कहल जाइत अछि।

6.न्यूक्लियर तनाव परीक्षण(Nuclear Stress Test):-

एहि परीक्षण कें एमपीआई(MPI) परीक्षण सेहो कहल जाइत अछि। एमपीआई(MPI) अर्थात मायोकार्डियल परफ्यूजन इमेजिंग। एहि परीक्षण सँ हृदय मांशपेशी मे रक्तक प्रवाह आराम के स्थिति मे तथा तनावक स्थिति दुनू स्थिति मे केहेन अछि ई पता लगैत अछि। एहि परीक्षण मे एक रेडियोधर्मी अनुरेखक(radio active tracer) रक्त मे इन्जेक्शन द्वारा देल जाइत अछि। एकटा विशिष्ट स्कैनर सेहो लागल रहैत अछि जे देखैत अछि जे कोना कोना रेडियो एक्टिव ट्रेसर रक्त द्वारा हृदयक धमनी मे जाइत अछि। जतय ओकर उपस्थिति न्यून या बिल्कुल नहि रहैत अछि ओ दृष्टिगत भ जाइत अछि। एहि परीक्षण मे किछु समय तँ लगैत अछि मगर तनाव परीक्षण थोरे सटीक होइत अछि।

7.कार्डिएक कंप्यूटरीकृत टोमोग्राफी (CT) परीक्षण:-

एहि परीक्षण सँ ई पता चलैत अछि जे कहीं हृदयक आकार कहीं नमहर((enlarged) नहि तँ भए गेल अछि। इहो पता चलैत अछि जे हृदयक धमनी कतय पातर भ गेलैक अछि।

8.एमआरआइ(MRI) परीक्षण:- कार्डिएक मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग

एहि परीक्षण मे चुम्बकीय क्षेत्र एवं रेडियो तरंगक माध्यम सँ हृदयक एवं ओकर रक्त वहिका सभक विस्तृत फ़ोटो लेल जाइत अछि । नीक सँ पता चलैत अछि जे हृदयक संरचना एवं रक्त वहिकाक स्थिति केहेन अछि।

9. कोरोनरी एंजियोग्राफी:-

एहि परीक्षण मे हृदयक रक्त वहिकाक (Blood Vessels) अवलोकन एवं परीक्षण हेतु एक्स-रे केर प्रयोग होइत अछि। एहि परीक्षण कें कार्डिएक कैथीटेराइजेशन सेहो कहल जाइत अछि। एहि परीक्षण मे एक पातर ट्यूब जकरा कैथेटर कहल जाइत अछि, ओकरा बैंह वा ग्रोइन(जांघ आ पेटक बीचक स्थान) मे उपस्थित रक्त वहिकाक माध्यम सँ हृदयक धमनी मे प्रवेश करायल जाइत अछि। एक तरहक रंग(dye) कें कैथेटर मे इंजेक्ट कएल जाइत अछि। ओहना स्थिति मे एक्स रे द्वारा जे फ़ोटो खिंचल जाइत अछि ओ बहुत स्पष्ट बतबैत अछि जे कोना कोना रक्तक बहाव धमनी सभ मे भ रहल अछि। कोनो रक्त प्रवाह अवरुद्धता या न्यून अवरुद्धता कें पता चलि जाइत अछि एहि परीक्षण सँ। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ‍२.२.संतोष कुमार राय 'बटोही'- लघुकथा- कनफुस्सी संतोष कुमार राय 'बटोही' लघुकथा- कनफुस्सी

"कान बड़ कुकुयात अछि। बुझना जायत अछि जेना कान मे किछु कुरबुरायत अछि। कान मे काठी देला सँ नीक भs जायब " , इ फुसफुसायत बुढिया काकी आंगन सँ निकलीही।

मिथिला मे कहबी छै - "कान कौवा लs गेल ।" दोसरक गप करबै तँ ओहीना होएत । इ बरबरायत हमर काका गली दिस सँ दालान पर अबैत बजलाह, "बड़ दिन सँ तोरा कहैत छियौय , कनफुस्सी लकs नहि उड़, तँ तूँ हमरा बुरबक बुझैत छैं। 'हर बहै से खर खाय बकरी खाय अँचार' , तँ आब बुझही। ओकर हाथक तीमन तोरा बड़ नीक लगैत छलौह आओर खूब खो।"

काका काकी के दमैस कs कहैत छलथिन्ह, "अहाँ केँ कहने छलहुँ - कुबरा के भीन कs दियौ से तँ केलियै नहि ।"

काका केँ 'रेड बेल' बैज गेलन्हि- " कथी कहलीही , फेर बाज ; हमर गाछ-विरीछ , खेत-खलिहान, घर-घरारी वगैरह तोहर बाप कँ छियौय जे बाँटि दियौ ? आओर भीन कs दियौ ? धनमा केँ ससुर केँ अरजल छियैय । सिमरी वाली केँ भतार अरजने छै।"

आगाँ आओर बजैत काका क्लिन्टन , " हम भी नहि करबै। जकरा जतs जेबाक छौ से जो। खूब छिरहारा खेलै जो। काया मे जहिया घुन लागि जेतौ तँ अबिएऐँह । हमर ....उपारि-उपारि केँ खैंहें।"

काका काकी केँ कहैत बजलाह , " तूंहों घंघोर जो, बड़ दिन भs गेलौ राजकुमार कें ऐँठ चटला। आओर उहो दुनु सार केँ कही - हमर घर खाली करत। अपन- अपन दुनिया देखतै। ससुर आओरसार केँ सोधि केँ खेतै। बड़ भs चुकलै सरकारी सेवा। नै माधो केँ लेना नै उधो केँ देना।"

रेड बेल बजला देखि कs काकी घरारी दिस पड़ेलीह। काका किछु दुरि हुनका पाँछा दौड़ल गेलाह - " रुक मादर के....रुक....। रूक छिनरा केँ...रुक। "

काकी गाछी दिस निछोह भागि गेलीह। काका हकमैत ठाड़ भs गेलाह। बरबरैत चुप भेलाह। घरारी पर लकड़ी पर बैसलाह। कनेक देर सुस्ती क फेर दलान दिस विदा भेलाह।

अखनो धरि काका कुकुयैत छलाह , "सार सभ खाली खायत अछि आओर घर मे घुसिऐत अछि ।"

दलान सँ आंगन दिस विदा भेलाह। आंगन मे घुसैत बजलाह -" घर खाली कर तूँ दुनु । कोरोना कहिया नै खतम भेलै। परञ्च तोरा दुनु लेल करोना छेबे करै। भाग दुनु सार। दुनु झोंट केँ निकाल बाहर। बपौती नहि छन्हि दुनु केँ। सबहक लेल काम-धंधा छै आओर तोरा दुनु लेल कामे नहि छै ।"

कुबरा गाम पर अगहन 2020 सँ घर ओगरने छै आओर पलटु फागुन 2020 सँ बंबई सँ आयल तँ जै केँ नाम नहि लैत छै।

कुबरा कहैत अछि जे शहर मे काम-धंधा नहि छै। दिल्ली मे जै होटल मे काज करैत छल ओकर मालिक करोना सँ मरि गेलाह। होटल बन्न भs गेलै।

पलटु केँ अपन खिस्सा छै । उ आब बाहर नहि जै लेल चाहैत अछि। करोना काल मे ओकरा कोलकाता सँ पैरे आबs पड़लै तखन जाकs जान बचलै।

उ माय सँ कहैत छै -" चौक पर कही पापा केँ हमरा एकटा दोकान खोलि देत।"

काका कहैत छथिन्ह जे ओकरा दोकान नहि चलौल हेतै। ई लबड़ा -लुच्चा संगे उठैत-बैठैत छै । टाका बुरा देत।

ई एके जिद्द पर अड़ल अछि - " हम बाहर नहि जायब। किछु करब त करब घरे पर।

करोना काल मे मृत्युक- तांडव देखि कs पलटु घबड़ायल छै। नाना नहि मरहीऐं जे ओ आब शहर जायत। आब ओ मरत त गामे मे, जीबत त गामे मे। चाहे खाकs मरै चाहे बिन खाकs । शहर कें जिनगी कें नरक मानैत अछि ओ।

'बउआ कहै मौसी गाम जायब' ई कहबी कुबरा लेल सही छै। कुबरा बंगलोर, गुवाहाटी, बंबई , दिल्ली, लुधियाना, चेन्नई वगैरह घुमि-घाम कs घर ओगरने छै। ओकरा कतौ नीक नहि लगैत छै। ओ हरदम घरवाली के खोंचा मे नुकाल रहैत अछि। सभ काज ओकरा लेल बेकार छै। जियत त बिंदास सँ , मरत त बिंदास सँ। कमेनी-खटेनी चवन्नी खरचा रुपया। जयनगर क॓ सैफन पर बन्नूक-बन्नूक राति कs खेलाइत अछि।

ओकर कहब अछि- नाचू तँ टाका लेल। पढल-लिखल ढेला आओर फैशन नवाबी। चोर-चोर मसियौत। चालि-चलन नीक नहि छै। घरवाली केर गहना-गुड़िया बन्हक राखि कs लाल-हरियर पानि पीब रहल छै। खजौली-जयनगर करैत दिन काटि रहल छै। बाप केँ कमैत-कमैत हड्डी झलकती छै। तैँ सरिपहुँ काका केर 'रेड बेल' बजs लगैत छन्हि।

रतन केर काज नीक छेलै। मालिक नीक छेलै। अडानी ग्रुप सँ जुड़ल काज छेलै। अडानी के हिंडन रिपोर्टक बाद शेयर गिरs लगलै आओर ओकर मालिक दिवालिया भ गेलाह।

चलनी लकs पानि उघ्घू। ई भs रहल छै। फिरीशान भ कुबरा दर-दर केँ टोकर खा रहल छै, परञ्च मोन माफिक काज ओकरा नहि भेट रहल छै। एक बरख सँ सौंसे भारत घुमि रहल अछि आओर पिकनिक अपने आप मैन रहल छै।

नीक-नीक पढल-लिखल रस्ता पर बउआइत छथि।कोनो काज नहि भेटैत छै। महँगाई सभहक नौकरी खा रहल छै। निजीकरण नौकरी खा रहल छै। आब पेट भेल सभहक पहाड़ ।

काकी केँ कानफुस्सी कके सभ मउगी हुनका गलबजौनी बनौने रहैत छै। भरि टोल मे काकी आगि लगौने रहैत छै। के बेटखौकी हमरा घर मे नजर लगौलक। कमैत पुत घर ओगरलक। मिश्रौलिया वाला भगता सँ देखा कs बेटखौकी सभ केँ घर मे अगराही लगौबै।

काका केँ आंगन मे उत्तर-दक्खिन दिस लेटा देने छन्हि। माथा लग आगि जैर रहल छै। एकटा डाबा मे कुश राखल छै। काकी नोर पोछि रहल छथि।आब काका किनको नहि डटतिन्ह। आब ओ चुप्पी साधि लेलैथ। आब काकी केर कनफुस्सी बन्न भ गेलै। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.३.आचार्य रामानन्द मण्डल- आदर्श पुत्र आचार्य रामानंद मंडल आदर्श पुत्र गोपालपुर गाम मे दूगो परिवार रहे।पुरबारी टोला मे गरीबन दास अपन पत्नी जसोदा आ बेटा फूदन दास के संगे रहे।फूदन दास गाम के प्राइमरी स्कूल मे पंचायत शिक्षक रहे।वोकर बिआह भे गेल रहे।गरीबन दास छोट मोट गृहस्थ रहलन। अप्पन खेती बारी करे।जैइमे शिक्षक रहला के बाबजूद  फूदन अप्पन बाबू के खेती बारी मे संग देबे।फूदन के पत्नी अपन सास के संगे घर के काज संभाले।गरीबन दास भैंसी भी पाले। सुबह सांझ गरीबन भैंसी दूंहे त फूदन अपना गमछा से माछी के उड़ाबे आ डौंस के मारे।त जसोदा धुंआ धुकुर करे।शेष समय मे गरीबन दास भक्ति भजन करे।गरीबन दास कबीर पंथी रहलन दाढ़ी केश बढैले रहलन ।गला में तुलसी के कंठी रहे।कंठी मे एकेटा बड़का तुलसी के दाना रहे। उजर चनन नाक से उपर माथा तक रहे।आस पड़ोस मे कहीं भंडारा होय त दुनू बापते जाय। धीरे धीरे फूदन दास भी कबीर पंथ के अनुआयी भे गेल रहे।माय बाप के आज्ञाकारी रहे।वो स्कूल में भी बच्चा सभ के खूब पढाबे।वो व्यवहार कुशल रहे। पछियारी टोला मे रामपूजन शर्मा अपन पत्नी सुमित्रा आ बेटा आशुतोस संगे रहे। रामपूजन शर्मा बगल के गाम सोनपुर के वित्त रहित उच्च विद्यालय मे सहायक शिक्षक रहलन।वो एकटा संपन्न किसान भी रहलन। आशुतोस पढे में बड़ा तेज रहे। पटना इंजिनियरिंग कॉलेज से पास कैला के बाद अमेरिका के एगो कंपनी में काज करे लागल। बाद में वहीं अप्पन सहकर्मी से प्रेम बिआह क लेलन। वहीं रहे लगनन। मोबाइल से माय बाबू से बात करैत रहलन। रुपया भेजे के कहियो जरूरत न पड़ल। परंच  सेवा निवृत्तबुढ बाप आ माय के जे पुत्र से प्रेम आ सेवा मिले के चाही वो आशुतोस देबे में असमर्थ हो गेलन। बाबू माय मोबाइल से लाख कहलन कि आशुतोस तू अब इंहा आ जा। हमरा पुतोहु के भी ले आबा।हम तोरा आ अपन पुतोहु के देखे के चाहे छी। तोरा इंहा कोन कमी हौअ। तोरा कमाय के कोनो जरुरी न हौअ।परंच आशुतोस कहे कि पापा अंहा के पुतोहु लोलिता जाय के लेल तैयार न हैय। लोलिता कहै हए कि भारत के क्लाइमेट मे हम सरवाइभ न कर पायब आ पापा वो प्रिगमेंट भी हए। पापा हमरा माफ क दूं।हम भारत न आय पायब। रामपूजन शर्मा आ सुमित्रा बिमार पड़ गेल। बेटा पुतोहु से मोह तोरैत दुनिया से गुजर गेलन।गाम के देयाद मे के भाई संतोष मोबाइल से सभ समाचार आशुतोस के देलक। आशुतोस कहलक हम अभी बच्चा के हास्पीटल में छी। हमरा बेटा जनम लेलक हैय।एहन परिस्थिति मे तू सभ काम क्रिया कर दोहु।हम दू लाख रुपया तोरा खाता में ट्रांसफर क देउ छियौ।देयाद आ गाम के लोग सभ मिल के दुनू गोरे के एके चिता पर राखि के दाह संस्कार क देलक। मुखाग्नि देलक देयाद के भतिजा संतोष।खुब भोज भात भेल लेकिन रामपूजन शर्मा के एकलौता पुत्र आशुतोस न आयल।वोकर संपत्ति के देखरेख संतोष करैत हए।अन्न उपजा के बेच के संतोस, आशुतोस के खाता में ट्रांसफर क दैइत हए। कुछ दिन बाद गरीबन दास बिमार पर लन।फूदन दास अपना बाबू के खुब सेवा कैलन।स्कूल से छुट्टी लेके दिन रात एक टांगि पर खड़ा रहलन। लेकिन बाबू सतलोक चल गेलन।फूदन कबीर पंथ के अनुसार अपन बाबू गरीबन दास के समाधि देलन।  जैमे देयाद संगे गाम के सभ लोग भाग लेलन।साधु सत्संग भेल। भंडारा भेल।गाम के सभ लोग फूदन के बड़ाई करैत हए।भगवान फूदन जैसन बेटा सभ के देत परंच आशुतोस जैसन बेटा दुश्मनो के न देत।फूदन अपना पत्नी संग अपना माय के खूब सेवा करैत हए।फूदन आइ गाम मे आदर्श पुत्र मानल जाइत हए। -आचार्य रामानंद मंडल सामाजिक चिंतक सीतामढ़ी,सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक, माता-चन्द्र देवी, पिता-स्व०राजेश्वर मंडल, पत्नी-प्रमिला देवी, जन्म तिथि-०१ जनवरी १९६० योग्यता- एम-एससी (रसायन शास्त्र), एम ए (हिन्दी)। रूचि- साहित्यिक, मैथिली-हिन्दी कविता -कहानी लेखन आ आलेख। प्रकाशित पोथी - मैथिली कविता संग्रह भासा के न बांटियो। २०२२ प्रकाशित रचना - सझिया कविता संग्रह पोथी - जनक नंदिनी जानकी आ शौर्य गान। २०२२ पत्रिका -मिथिला समाज, घर -बाहर आ अपूर्वा (मैसाम)। अखबार -दैनिक मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश। सामाजिक-सामाजिक चिंतन, दायित्व- पूर्व जिला प्रतिनिधि, प्राथमिक शिक्षक संघ, डुमरा, सीतामढ़ी। स्थायी पत्ता- ग्राम-पिपरा विशनपुर थाना-परिहार जिला-सीतामढी। वर्तमान पता-पिपरा सदन,मुरलियाचक वार्ड-04 सीतामढ़ी पोस्ट-चकमहिला जिला-सीतामढी राज्य-बिहार पिन-843302 ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.४.आचार्य रामानंद मंडल- सादा जीवन उच्च विचार आचार्य रामानंद मंडल सादा जीवन उच्च विचार एक दिन कमाली जी भेट करे आयल रहथि। हम पुछली -जमशैद साहब कि हाल चल हए। कमाली जी बजलन-वो त कोरोने कालि मे कब्र मे चल गेलन। सरदी खांसी रहइ। हम नि: शब्द हो गेली।हम अतीत मे खो गेली। बीपीएससी के अनुशंसा पर प्राथमिक शिक्षक के पद पर मध्य विद्यालय, फूलवारी मे ज्वाइन कैली रहे। विद्यालय मे दूटा आउर शिक्षक ज्वाइन कैलन।इसराफिल जी आ कमाली जी।माने कि तीन टा शिक्षक ज्वाइन कैली।उंहा पहिले सं काज करैत रहलन। प्रधानाध्यापक के रूप मे चौधरी जी आ सहायक शिक्षक के रूप में राय जी,जमशैद साहब आ नैना कुमारी। ज्वाइन कैला के पहिलका विफेवार के प्रधान जी बतैलन आइ विद्यालय मे हाफ डे पढाई होयत आ काल्हि  शुकर हए।काल्हि विद्यालय मे साप्ताहिक बंदी रहत।हम अचकचैली।शुकर के बंदी।वो बतैलन कि अपन विद्यालय उर्दू विद्यालय हए।  शुकर के  मुसलमान लोग जुम्मा के विशेष रूप सं नमाज पढैत हए। तइला शुकर के बंदी रहइ हए ।  हिंदी विद्यालय मे शनि के हाफ डे पढाई होय हए आ रविवार के बंदी रहइ हए ।हम न जानइत रही इ सब नियम कानून। हिंदी आ उर्दू स्कूल।परंच इसराफिल जी आ कमाली जी इ सभ जनैत रहलन। सभ शिक्षक मे  ढीला ढीली कुर्ता पायजामा आ साधारण चप्पल पहिरे वाला जमशैद साहब ज्यादा लोकप्रिय रहे। गांव मे भी वो लोकप्रिय रहलन।हुनकर यही गांव मे ममहरा आ ससुरार रहे।मामी के वो ममानी बोलैत रहलन।  वो गांव के हिंदू लोग स यथोचित संबंध राखैत। किनको नाना-मामा कहैत रहलन त किनको सार सं संबोधित करैत रहलन।सार-बहनोई मे मिथिला के परम्परागत गारी-गरियोअल करैत रहथि। वो विद्यालय के वो बैंक मैंसेजर रहत। गुच्छान्तर्गत माने मध्य विद्यालय से संबद्ध दूटा प्राथमिक विद्यालय  के वेतन विपत्रों वोहै बनाबत आउर ट्रेज़री से लेके पेमेंट तक कराबथि। अइमे एक दिन ट्रेज़री में वितरण विपत्र जमा करे।दोसर दिन बैक से ड्राफ्ट लावे।तेसर दिन ड्राफ्ट पर प्रधानाध्यापक सं हस्ताक्षर करा के बैंक में जमा करावे। चौथा दिन बैंक सं भुगतान करावे। प्रधानाध्यापक आ जमशैद साहब कैशियर सं भुगतान लेके झोंरा मे रख के बैंक में एक जगह बैठ जाइत रहलन।सभ शिक्षक हुनका आगे अर्द्धवृताकार मे बैठ जाइत रहे। सबसे पहिले रूपया के गड्डी के गनतन। बाद मे भुगतान पंजी खोल के नाम पढतन आ नाम पुकार के भुगतान करैत आ नाम के आगा साटल राजस्व टिकट पर हस्ताक्षर लेइत रहलन। पैचा पालट के हिसाब करैत रहलन। बैक मे दोसरो गुच्छ विद्यालय के पेमेंट होइत रहे।शिक्षक सभ के भेंट घाट होइत रहे।।पुरनका शिक्षक सभ अपन पेमेंट ले के अपन अपन घर के रास्ता पकड़ लेथि।परंच जमशैद साहब नयका शिक्षक सभ के रोक के  नाश्ता,चाय आ पान खुआ के बाजथि -आबि अंहा सभ अपन घर जाउ।नयका शिक्षक सभ के कोनो तरहक दीक्कत न होय से हुनकर चिंता रहैय। कोनो गांव के गार्जियन आइल।हुनका सभ के नयका शिक्षक सभ के परिचय कराबथि आ गर्व सं कहैत कि इ सभ बीपीएससी प्रतियोगिता परीक्षा पास क के शिक्षक बनलन हए। विद्यालय आ गांव के लेल प्रतिस्ठा के बात हए। विद्यालय के साफ सफाई, पढ़ाई आ कार्यालय कार्य सभ पर हुनकर नजर रहइन।बच्चा सभ के खुब पढाबैत आ खेलाबैत।हं,उर्दू विद्यालय के रहितो पढाई के माध्यम हिंदी भे गेल रहे।इ हालत उर्दू वा उर्दू के जानकार शिक्षक के अभाव के कारन हो गेल रहे। मुसलमान के बच्चा सभ उर्दू गांव के प्राइवेट मदरसा मे पढे। मदरसा सरकारी विद्यालय के शैक्षनिक अवधि के पहिले वा बाद में संचालित होइत रहे। जमशैद साहब नयका शिक्षक सभ के वेतन विपत्र के तैयार करनाइ के साथ लेखा बही के संधारन संगे कार्यालय कार्य के करे के सिखावथि।आ बोलतन कि आगे अंहा सभ के काज देत। अंहा सभ उच्च योग्यताधारी छी। उच्च पद तक जायब।जमशैद साहब सादा जीवन आ उच्च विचार में विश्वास राखथि। कमाली जी टोकलन -दयानंद बाबू।कंहा खो गेली।हम कहलियन जमशैद साहब मे खो गेली।केते निक आदमी रहतन जमशैद साहब।कमाली जी बजलैन -हं।हुनका सन आदमी आबि मिलैत कंहा हए।हमरो वो याद अबै हति। हम पुछली -आइ कालि अंहा कंहा पोस्टेड छी।कमाली जी बजलैन - मध्य विद्यालय,हुसैना मे हेडमास्टर छी। हम पुछली -इसराफिल जी कंहा हतन। कमाली जी बजलैन -वो मध्य विद्यालय परिहार मे हतन। हम पुछली -प्रधानाध्यापक चौधरी जी कंहा हति। कमाली जी बजलैन -हमरा न पता हैय। हम पुछली -राय जी कंहा हतन। कमाली जी बजलैन -वो त स्वर्ग सिधार गेलन। हम कहली -रायो जी निक लोग रहथि। कमाली जी बजलैन -हं। हम पुछली -नैना जी कंहा हतिन। कमाली जी बजलैन -रिटायर्ड होके घर पर हतन। हम पुछली -जमशैद साहब के बेटी -बेटा के कि हाल चाल हए। कमाली जी बजलैन -बेटी के त बिआह हो गेलइ।आ बेटा उच्च शिक्षा प्राप्त क रहल हए। नास्ता पानी क के कमाली जी चल गेलन।आइ हम प्रधानाध्यापक से रिटायर्ड होके जीवन बिता रहल छी।परंच जमशैद साहब के याद न गेल। वो धार्मिक रहतन पर कट्टर नइ रहथि। रमजान मे रोज दिन गांव मे के मस्जिद में टिफिन में इसराफिल जी आ कमाली जी के संगे जाइत रहलन। हुनकर मधुर व्यवहार , सादा जीवन आ उच्च विचार मन मे याद रह गेल। -आचार्य रामानंद मंडल, सामाजिक चिंतक सीतामढ़ी,सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक, माता-चन्द्र देवी, पिता-स्व०राजेश्वर मंडल, पत्नी-प्रमिला देवी, जन्म तिथि-०१ जनवरी १९६० योग्यता- एम-एससी (रसायन शास्त्र), एम ए (हिन्दी)। रूचि- साहित्यिक, मैथिली-हिन्दी कविता -कहानी लेखन आ आलेख। प्रकाशित पोथी - मैथिली कविता संग्रह भासा के न बांटियो। २०२२ प्रकाशित रचना - सझिया कविता संग्रह पोथी - जनक नंदिनी जानकी आ शौर्य गान। २०२२ पत्रिका -मिथिला समाज, घर -बाहर आ अपूर्वा (मैसाम)। अखबार -दैनिक मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश। सामाजिक-सामाजिक चिंतन, दायित्व- पूर्व जिला प्रतिनिधि, प्राथमिक शिक्षक संघ, डुमरा, सीतामढ़ी। स्थायी पत्ता- ग्राम-पिपरा विशनपुर थाना-परिहार जिला-सीतामढी। वर्तमान पता-पिपरा सदन,मुरलियाचक वार्ड-04 सीतामढ़ी पोस्ट-चकमहिला जिला-सीतामढी राज्य-बिहार पिन-843302 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.५.आचार्य रामानंद मंडल- मैथिली साहित्य मे परिवर्तन से आस जागल आचार्य रामानंद मंडल मैथिली साहित्य मे परिवर्तन से आस जागल बात शुरू करब ज्योतिश्वर से अजित आजाद तक। ज्योतिश्वर आ महाकवि विद्यापति मैथिली मे साहित्य न रचलन।वो संस्कृत आ अवहट्ट मे साहित्य रचलन। महाकवि त अवहट्ट के देसिल बयना कहलन।वोइ समय मे मैथिली भासा नामो न रहय।बाद मे एकर नाम मैथिली भासा नाम परल।  अइमे  भासाविद अव्राहम ग्रियर्सन के भासा सर्वे रिपोर्ट के अहम योगदान हय। परन्तु वो मैथिली के विभिन्न बोली दक्षिनी मैथिली, पच्छमी मैथिली आ ठेठी आदि के चर्चा कैलन।बाद में राहुल सांकृत्यायन दक्षिनी मैथिली के अंगिका आ पच्छमी मैथिली के बज्जिका नाम देलन आ मैथिली से अलग मानलन।२००३ मे  मैथिली भासा संविधान के अष्टम सूची मे जुड़ल। हांलांकि आइ तक अंगिका-बज्जिका के भासा के दर्जा न मिलल हय। हालांकि भासा के लेल खडयंत्र जारी हय आ मैथिलियो में खडयंत्र जारी हैबे करे।महाकवि संस्कृत आ देसी बयना मे साहित्य रचलन त दूनू के प्रकृति भिन्न रखलन। परंतु बाद मे संपादन मे देसिल बयना के संस्कृतनिस्ठ बना देल गेल।कायथ आ बाभन मिल के मिथिला पर लगभग आठ सौ वर्ष शासन कैलन।बाद के शासक मैथिली आ मैथिल पर अधिपत्य जमैलन।माने कि बाभन आ कायथ के संस्कृतनिस्ठ बोली के मैथिली आ बाभन आ कायथ के मैथिल बनैलन। बाजाप्ता मैथिल महासभा एकर घोसना कैलक।दोसर जाति के मैथिल महासभा मे प्रवेश निसेध क देलक।एकर विरोध यादव महासभा कैलन परंतु अरन्य रोदन रह के रह गेल। सबसे महत्वपूर्न इ बात भेल जे हमर बोली भासा आ तोहर भासा बोली बना देल गेल।बाद मे साहित्य अकादमी मैथिली भासा विभाग अइ सिद्धांत के प्रश्रय देलन। साहित्य अकादमी के निर्मान से २०२२तक संयोजक पद पर गैर बाभन संयोजक न बन पायल आ २०२० तक गैर सवर्न के अकादमी के मूल पुरस्कार न भेंटल।२०२१के मूल अकादमी पुरस्कार पंगु उपन्यास पर जगदीश प्रसाद मंडल गैर सवर्न के काफी विरोध के बाद मिलल। आ २०२२ के मूल अकादमी पुरुस्कार निर्विवाद रुप से  बाभन अजित आजाद के मिलल। त २०२२ मे अकादमी के मैथिली भासा के संयोजक पद पर भारी मत से पहिलवार गैर बाभन भासाविद प्रो उदय नारायण सिंह नचिकेता से निर्वाचित भेलन।अब हिनका से मिथिला आ मैथिली भासी के बड आस हय। परंतु इ कांटक ताज हय। केना मैथिली के भासा आ बोली मे सामंजस्य बैठैयतन।कारन दूनू मे साहित्य रचल जा रहल हय। जानकारी के मुताबिक अंग्रेजी के पांच शैली में अंग्रेजी साहित्य रचल जा रहल हय। मैथिली मेयो बोली न कहके शैली कहल वा मानल जाय। अकादमी के सभ कोसांग समावेशी बनाबे के आवश्यकता हय।नचिकेता जी भासाविद हतन परंतु मानक,रार आ ठेठी के मिटाबे मे मैथिली भासाविद कौकस से निपटनाइ कांटा भरल राह हय। अइ के लेल मैथिल-मैथिली भासी के पूरजोर सहयोग के आवश्यकता हय। हालांकि संयोजक पद पर अइ परिवर्तन से मैथिली साहित्य साधक आ मिथिला -मैथिली अभियानी के आस जागल हय।नव संयोजक के बधाई संगे शुभकामना। -आचार्य रामानंद मंडल सामाजिक चिंतक सीतामढ़ी,सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक, माता-चन्द्र देवी, पिता-स्व०राजेश्वर मंडल, पत्नी-प्रमिला देवी, जन्म तिथि-०१ जनवरी १९६० योग्यता- एम-एससी (रसायन शास्त्र), एम ए (हिन्दी)। रूचि- साहित्यिक, मैथिली-हिन्दी कविता -कहानी लेखन आ आलेख। प्रकाशित पोथी - मैथिली कविता संग्रह भासा के न बांटियो। २०२२ प्रकाशित रचना - सझिया कविता संग्रह पोथी - जनक नंदिनी जानकी आ शौर्य गान। २०२२ पत्रिका -मिथिला समाज, घर -बाहर आ अपूर्वा (मैसाम)। अखबार -दैनिक मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश। सामाजिक-सामाजिक चिंतन, दायित्व- पूर्व जिला प्रतिनिधि, प्राथमिक शिक्षक संघ, डुमरा, सीतामढ़ी। स्थायी पत्ता- ग्राम-पिपरा विशनपुर थाना-परिहार जिला-सीतामढी। वर्तमान पता-पिपरा सदन,मुरलियाचक वार्ड-04 सीतामढ़ी पोस्ट-चकमहिला जिला-सीतामढी राज्य-बिहार पिन-843302 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.६.रबीन्द्र नारायण मिश्र- सरिसव बाली काकी रबीन्द्र नारायण मिश्र सरिसवबाली काकी हम जहिआसँ मोन पाड़ैत छी,सरिसवबाली काकीकेँ ओहिना देखलिअनि । उज्जर चक-चक नुआ पहिरने माथ झपने,बहुत नहू-नहू बजैत अपन बात कहितथि । अन्हरोखेमे अपन दियादिनी बरमाबाली काकीक संगे नवका पोखरिपर स्नान-पूजा करबाक हेतु जइतथि । रस्तामे एकाधगोटे आओर संग भए जइतथिन । सभगोटे घाटपर स्नान करैत घर-बाहरक गप्प-सप्प करितथि , महादेवकेँ जल ढारितथि आ वापस घर जखन आबि रहल होइतथि तखन गामक लोकसभ ओछाओन छोड़बाक उपक्रममे रहैत । जाड़क मास रहैत तँ अधिकांश लोक घूरक सेवन करैत रहैत। भोरे-भोर चाह पीबाक चलनि ओहि समय गामसभमे नहि रहैक । मुदा केओ-केओ चाह पीबैत छलाह,से सभ अड़ेरचौकपर पहुँचि जइतथि । किसानसभ जन अढ़बए चलि जइतथि । जँ अगहनक मास अछि तँ दरबजे-दरबजे दाउन होबए लगैत। क्रमशः मौसम बदलैत,लोकक दिनचर्या तदनुकूल बदलि जाइत । मुदा सरिसवबाली काकीकेँ नित्य ओहिना देखिअनि । माघोमासमे हुनका ओढ़ना ओढ़ने नहि देखिअनि । स्नान-पूजा कए लौटैत काल जाड़क मासमे थर-थर कपैत किछु-किछु मंत्र पढ़ैत ओ वापस अपन घर आबि जइतथि । हमसभ नेना रही, जबान भेलहुँ । मुदा सरिसवबाली काकी ओहिनाक-ओहिना रहथि । हुनका कहिओ भरिमोन हँसैत नहि देखलिअनि । जखन कखनो हुनकर आङन जाइ तँ ओ कोनो -ने -कोनो काजमे बाझल रहतथि। हुनकर हाथक बनाओल भोजनक प्रशंसा जतेक करी ततेक कम । कैकबेर हमरा हुनका ओहिठामसँ नोत होइत छल। आब सोचैत छी तँ सोचिते रहि जाइत छी । कतेक मनोयोगपूर्वक ओ भोजन बनबैत छलीह । आङनमे जाइते लगैत जेना कोनो बहुत पवित्र स्थानपर आबि गेल छी । सौंसे आङनमे एकटा खढ़ नहि देखाइत । सदिखन चमचम करैत रहैत छलनि हुनकर आङन । ओहि आङनमे गेलाक बाद एकटा अद्भुत शांतिपूर्ण वातावरण रहैत छल । कुलमिला कए चारिगोटे ओहिघरमे रहथि। भाइजी(स्वर्गीय अनुग्रह नारायण झा),सरिसवबाली काकी,बरमाबाली काकी, आ कामदेव भाइ। यद्यपि संबंधमे ओ काका लगितथि तथापि हमसभ नेनेसँ हुनका भाइजी कहैत छलिअनि । ओ काशीसँ संस्कृत पढ़ने छलाह । ज्योतिष रहथि । हमर गामक मुखिआ सेहो निर्विरोध चुनल गेल रहथि । भूदान आंदोलनमे विनोबा भावे संगे बहुत सक्रिय छलाह  । एकबेर तँ ओ अपनसभटा जमीन भूदान आंदोलनमे दान कए देने रहथि। हुनका लोकनिक ओएह जमीनसँ जीविका चलैत छलनि । तेँ लगैत अछि जे भवावेशमे ओ ई काज कए देने रहथि  बादमे बरमा बाली काकीक प्रयाससँ ओ जमीनसभ वापस भेल छल । हमर प्रपितामह स्वर्गीय गुमानी मिश्र बहुत संपन्न लोक रहथि । हुनका छओटा पुत्र आ दूटा पुत्री रहथिन । एकटापुत्र बिआहक बाद कमे बएसमे मरि गेलखिन ।  एकटाकेँ कोनो संतान नहि भेलनि। चारिटाकेँ संतानसभ भेलनि । एकटा कन्याक बिआह वभनगामा(जनकपुर लग ,नेपालमे} रहनि । दोसर कन्याकेँ बिआहक बाद गामे बसाओल गेलनि । ओहि समयमे बेटीकेँ बसेनाइ,गाममे भगिनमानकेँ राखब, गौरवक बात बूझल जाइत छल । हुनका जमीन,कलम,पोखरि सभचीजमे हिस्सा देल गेल रहनि । हुनका तीनटा  पुत्र भेलनि। ओहिमेसँ एकटा रहथि भाइजी। दोसर रहथि-स्वर्गीय जगदीश झा । ओ वाटसन इसकूल मधुबनीमे पढ़ैत रहथि । गेनखेलीमे नाम केने रहथि । मुदा कमे बएसमे टीबी बिमारीसँ हुनकर मृत्यु भए गेलनि। हुनके पत्नीकेँ हमसभ बरमा बाली काकी कहिअनि । (बरमा बेतिआ लग कोनो गाम छैक ।) हमसभ नेनामे हुनकर एकटा  ग्रूपफोटो देखने रही  जे हुनकर परिवार लगमे हुनकर एकटा निसान छल । गेनखेलीमे ओ बहुत रास तगमासभ जितने रहथि। सेहो हमसभ नेनामे देखने रही। बरमाबाली काकी बहुत जोगा कए ई दुनू बस्तु रखने रहथि । हुनका एकटा पुत्र छथि कामदेव भाइ । बाबाक बहिनक नाम रहनि दुर्गा दाइ । दुर्गा दाइक तेसर पुत्रक बिआह सरिसवबाली काकीसँ रहनि। हम कहिओ हुनका नहि देखलिअनि । लोकसभ कहैत जे ओ बिआहक किछुए दिनक बाद टीबी बिमारीसँ मरि गेलथि । तकरबाद सरिसवबाली काकी विधवा भए गेलीह । हुनकर सौंसे जीवन ओहिना उजरा सारी पहिरने बीति गेलनि। हम जखन कखनो ओहि आङन जाइ,सरिसवबाली काकीकेँ काजे करैत देखिअनि । घरक काजसँ जखन फुरसति होनि तँ चरखा काटथि । ओहि समयमे चरखा चलेबाक एकटा हवा बहल रहैक । हमरसभक गामेमे  खादी भंडार रहैक । ओहि माध्यमसँ कतेको गरीब महिलासभक गुजर होइत छलैक । महिला कत्तिनसभ महीन सँ महीन ताग काटथि । जतेक महीन ताग तकर ततेक बेसी दाम भेटितैक । ताग कतेक महीन भेल तकर निर्णय खादी भंडारक कार्यकर्ता करैत छलाह । चरखासभ सेहो कैक प्रकारक होइत छलैक । सभसँ पैघ चरखाकेँ अंबर चरखा कहल जाइक । ओहि चरखामे एकहि संगे कैकटा सूत निकलैत छल । ओकरा चलबएमे बेसी परिश्रम जरूर होइत छल मुदा सूतक उत्पादन सेहो कैक गुना बेसी होइत छल । कत्तिनसभ अपन-अपन सूत खादी भंडारमे  जमा कए देथि आ तकरा बदलामे बेसीकाल खादी कपड़ा देल जाइत छल । टाका कमे काल दैत छल । एहि तरहसँ कठोर परिश्रम कए ओ सभ अपन देह झपैत छलीह आ पेटो भरैत छलीह । सरिसवबाली काकी आ बरमा बाली काकी दुनूगोटे अंबरक चरखा चलबैत छलि । सरिसवबाली काकीक स्वरमे अद्भुत मधुरता रहनि । भगवतीक गीत,बिआहक समयक गीत ,वरक परिछन आ बेटीक जेबा काल समदाउन ओ ततेक  मधुर गबैत छलीह जकर वर्णन करब मोसकिल अछि । हुनकामे सामाजिक काजमे मदति करबाक जबरदस्त प्रबृति छलनि । ककरो घरमे बिआह,उपनायन होइत तँ ओ दिन-राति  एक कए दितथि । उपनयनक मरबामे लिखिआ-पढ़िआ करबामे हुनका महारत छल । सौंसे मरबामे तरह-तरहक चित्रसभ हाथसँ बनबैत छलीह । आजुक समय रहैत तँ हुनकर एहि प्रतिभासभकेँ समाजमे प्रचार होइत ,हुनका किछु आर्थिक लाभो होइतनि । मुदा ओहि समयमे से सभ तँ नहि रहैक । मधुबनी चित्रकलाक प्रचार-प्रसार भेलैक जरूर मुदा बहुत देरीसँ । ताबे हुनका सन-सन कतेको मौलिक कलाकारसभ साधना करैत-करैत एहि संसारकेँ छोड़ि देलथि। गाममे ककरो बेटीक बिआह होइतैक तँ मधुश्रावणीमे कनिआकेँ  खिस्सा कहबाक हेतु ओ जाइत छलीह । हुनका सभकिछु कंठाग्र रहनि । लग-पासक महिलासभ बैसितथि,कनिआ बैसितथि , जँ वर आएल छथि तँ ओहो बैसितथि आ सभगोटे नियमपूर्वक हुनकर खिस्सा सुनितथि । मधुश्रावणीक समाप्तिपर जे विध-व्यवहार होइक से सभ ओ करबैत छलीह । बदलामे हुनका की भेटैत छलनि? जँ कनिआक सासुरसँ हुनको  लेल नुआ आबि गेल तँ से हुनका भेटि जाइत छलनि नहि तँ फोकला । मुदा हुनका एहिसभसँ निर्लिप्त देखिअनि । जेना ओ एहि पृथ्वीपर चुपचाप सभकिछु सहि जेबाक हेतु आएल होथि । कहिओ ककरो कोनो तरहक प्रतिवाद नहि,आग्रह नहि,इच्छा-अभिलाषा नहि । कैकबेर पाबनिसभमे हुनका अपना ओहिठाम किछु-किछु बनबैत देखिअनि । जेना तिलासंक्रांतिमे चुरलाइ बनबएमे ओ हमर माएकेँ मदति करितथि । एहि काजमे तँ बरमाबाली काकी सेहो लागल देखिअनि । सभगोटे गप्प-सप्प करितथि आ चुरलाइओ बनबैत रहतथि । एहि तरहे छिट्टाक-छिट्टा चुरलाइ बनैत छल आ हमसभ तकरा कतेको दिन धरि खाइत रहैत छलहुँ । सरिसवबाली काकीकेँ अपन कोनो संतान नहि रहनि । भाइजीकेँ सेहो अपन कोनो संतान नहि रहनि । हुनकर पत्नी कहि नहि कहिआ शुरुएमे मरि गेलखिन । कहाँदनि हुनकासभकेँ एकटा पुत्र भेल रहनि जे दस वर्षक भए कए मरि गेलथि । बरमा बाली काकी सेहो शुरुएमे विधबा भए गेलथि । मुदा संयोगसँ हुनका एकटा पुत्र भेल रहथिन-कामदेव भाइ । तीनू फरिकेनमे  ओएहटा संतान रहथि । साल भरि पहिने अस्सीसालक बएसमे हुनकर मृत्यु भए गेलनि । । हुनका भरल-पुरल परिवार छनि । सरिसवबाली सभदिन हुनके अपन संतान बूझि जीबि गेलीह । कहिओ ककरोसँ किछु अपेक्षा नहि। भगवान छोड़ि केओ मदति केनहार नहि । कहिओ काल हुनका माएक लग नोर पोछैत देखिअनि । साइत मोनमे गड़ल कष्ट असह्य भए जाइत होनि। कतहुँ तँ ओकरा अभिव्यक्ति चाहैत छलैक । नौकरीक क्रममे हम बाहर चलि गेलहुँ । एकदिन सुनलिऐक जे सरिसवबाली काकी नहि रहलीह ।  सदा-सर्वदाक लेल एकटा दुखी आत्मा एहि संसारकेँ छोड़ि गेलीह । बिना किछु कहने,बिना किछु मंगने । -रबीन्द्र नारायण मिश्र, पिताक नाम: स्वर्गीय सूर्य नारायण मिश्र, माताक नाम: स्वर्गीया दयाकाशी देवी, बएस: ६९ वर्ष, पैतृक ग्राम: अड़ेर डीह, मातृक: सिन्घिआ ड्योढ़ी, वृति: भारत सरकारक उप सचिव (सेवानिवृत्त), स्पेशल मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट, दिल्ली(सेवानिवृत्त), शिक्षा: चन्द्रधारी मिथिला महाविद्यालयसँ बी.एस-सी. भौतिक विज्ञानमे प्रतिष्ठा : दिल्ली विश्वविद्यालयसँ विधि स्नातक, प्रकाशित कृति: मैथिलीमे: प्रकाशन वर्षः२०१७ १.भोरसँ साँझ धरि (आत्म कथा),२. प्रसंगवश (निवंध), ३.स्वर्ग एतहि अछि (यात्रा प्रसंग); प्रकाशन वर्षः२०१८ ४. फसाद (कथा संग्रह) ५. नमस्तस्यै (उपन्यास) ६. विविध प्रसंग (निवंध) ७.महराज(उपन्यास) ८.लजकोटर(उपन्यास); प्रकाशन वर्षः२०१९ ९.सीमाक ओहि पार(उपन्यास)१०.समाधान(निवंध संग्रह) ११.मातृभूमि(उपन्यास) १२.स्वप्नलोक(उपन्यास); प्रकाशन वर्षः२०२० १३.शंखनाद(उपन्यास) १४.इएह थिक जीवन(संस्मरण)१५.ढहैत देबाल(उपन्यास); प्रकाशन वर्षः२०२१ १६.पाथेय(संस्मरण) १७.हम आबि रहल छी(उपन्यास) १८.प्रलयक परात(उपन्यास); प्रकाशन वर्षः२०२२ १९.बीति गेल समय(उपन्यास) २०.प्रतिबिम्ब(उपन्यास) २१.बदलि रहल अछि सभकिछु(उपन्यास) २२.राष्ट्र मंदिर(उपन्यास) २३.संयोग(कथा संग्रह) २४.नाचि रहल छलि वसुधा(उपन्यास) २५.दीप जरैत रहए (उपन्यास)। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.७.कुमार मनोज कश्यप- ढीठ कुमार मनोज कश्यप १ टा लघुकथा ढ़ीठ ट्रेन खुजिते स्टेशन पर भीड़ खतम हुअs लागल छलै। एकटा महिला अपन नेना के कोरा मे लेने सुगा-मेना बना घुमा-घुमा कs खोएबाक यत्न कs रहल छलीह। मुदा नेना छलै कि खेबा लेल किन्नहुँ तैयार नहिं....   मुँहे छीप लै ... आ कोरा सँ उतरबाक हेतु प्रयासरत! खोएबाक प्रयास मे असफल भेला पर स्त्री के चेहरा पर कखनो-कखनो तामसक रेख बिजलौका जकाँ चमकि जाई; मुदा क्षणे मे विलोपित सेहो भ' जाई। ओ ओकरा नव-वस्तु वा लोक के देखा-देखा पोल्हबै जे कहुना एको-दू कौर आर खा लै। सफलता-असफलता के ई खेल चलिते छलै कि सहसा मैल सs कारी चिक्कट भेल अर्धनग्न देह, जाड़ सs दाँत कटकटबैत, बेर-बेर खसैत पोंटा सुड़कैत एकटा पाँच-छौ साल के छौंड़ा याचना मे आँजुर जोड़ने ओहि स्त्री के बाट छेकि लेलकै। "हट्ट .......कल्लर!!! केहन ढ़ीठ लगा कs ठाढ़ अछि! सपरतीभ ने देखियौ! भागै छैं कि नहिं ....... एखने लतिया देबौ। छुतहर नहिं तन!!  माय-बाप जनमा कs छोड़ि देलकनिहैं भीख माँगै लै। जो जे जनमेलकौ तकरे खो गs ...।" स्त्री तामसे बजैत रहलीह। मुदा ओ छौंड़ा ओहिना निर्विकार याचना मे ठाढ़। "मम्मी! हमरा भूख नै अछि तैयो आहाँ मुँह मे ठुसै छी। ओ खाई लै माँगैयै तैयो ओकरा नै दै छियै?'  नेनाक प्रतिवाद सुनि कुपित ओ स्त्री    'हुँह .........!!! ' कहैत नेना के कोर सs एक कात उतारि बाटी मे बाँचल सामग्री रेलक पटरी पर फेकs लागल रहथि। ओ छौंड़ा एखनो ओहिना एक टक बाटिये दिस देखि रहल छल। -कुमार मनोज कश्यप, सम्प्रति: भारत सरकार के उप-सचिव, संपर्क: सी-11, टावर-4, टाइप-5, किदवई नगर पूर्व (दिल्ली हाट के सामने), नई दिल्ली-110023 मो. 9810811850 / 8178216239 ई-मेल : writetokmanoj@gmail.com अपन मंतव्य editorial.ऽtaff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.८.निर्मला कर्ण- अग्नि शिखा (खेप-१५) निर्मला कर्ण (१९६०- ), शिक्षा - एम् ए, नैहर - खराजपुर,दरभङ्गा, सासुर - गोढ़ियारी (बलहा), वर्त्तमान निवास - राँची,झारखण्ड, झारखंड सरकार महिला एवं बाल विकास सामाजिक सुरक्षा विभाग मे बाल विकास परियोजना पदाधिकारी पद सँऽ सेवानिवृत्ति उपरान्त स्वतंत्र लेखन। मूल हिन्दी- स्वर्गीय जितेन्द्र कुमार कर्ण, मैथिली अनुवाद- निर्मला कर्ण अग्नि शिखा (भाग - १५)

पूर्व कथा: पुरंदर आ पुरूरवा क एक संग दानवगण सs युद्ध करवाक लेल मिलाप होय के सूचना भेटला पर पर दानवराज केशि अत्यंत कुपित होइत अछि l ओ एहि बेरक युद्ध में दुनू के पराजित कs अपन भृत्य बनेवाक दृढ़ निश्चय करैत अछि l आब आगू: मणि,माणिक,रत्न एवं स्वर्ण जड़ित पर्यंक पर सुतल सुतल पुरूरवा अन्यमनस्क सन होमय लगलाह l ओ एक भृत्य के माध्यम सs अमरपुर भ्रमणक अपन अभिलाषा इंद्र के प्रेषित कयलन्हि l इंद्र अत्यंत प्रसन्न भेलाह l ओ राजाक संगे स्वयँ चलवाक प्रस्ताव कयलन्हि l रथ प्रस्तुत भेल l दुनू गोटे ओहि रथ पर बैस गेलाह l अश्व तीव्र वेग सs चलs लागल l पहिले राजमार्ग पर रथ भागैत रहल,पुन:एक चौक आयल जाहि ठाम सs रथ एक अन्य दिशा में घूमि गेल l आब मार्ग के दुनू कात में उन्नत वृक्ष दृष्टिगत भs रहल छल l ओहि वृक्ष में पारिजात,कल्पवृक्ष समेत विभिन्न प्रकारक अन्य अनेकों वृक्ष छल,जे देखवा में अत्यंत मनोहर लागि रहल छल l रथ किछु देर तक चलैत रहल तत्पश्चात इन्द्रक संकेत पाबि ठमकि गेल। इन्द्र पुरूरवा के रथ सs उतरवाक संकेत कयलन्हि। पुरूरवा रथ सs उतरि गेलाह l दुनू आब नंदनकानन के दिशा में प्रस्थित भs रहल छलाह l इन्द्र मार्गक दुनू कात लागल वृक्ष सबहक फलपुष्प के विषय में जानकारी पुरूरवा के दs रहल छलाह l उद्यान के मध्य में अनेक स्वर्ण निर्मित सिंहासन अवस्थित छल l ओहि में सs दूटा सिंहासन पर ई दुनू बैस गेलाह l सारथी सs इन्द्र किछु कहलन्हि,सारथी चलि गेल l किछु देरी के बाद किछु दिव्य फल पुरूरवाक समक्ष सारथी प्रस्तुत कयलक l एक फल पुरूरवा खेलथि। फल खाइतहि मात्र ओ अपना में स्फूर्ति के अनुभव करs लगलन्हि l ई फल के खाइतहि मात्र हुनक शरीर में अपरिमित शक्ति के संचार होमय लागल l पुरूरवा एहि अनुभव सs आश्चर्यचकित भय गेल छलाह । इन्द्र के संग समसामयिक विषय पर चर्चा करैत रहलाह किछु काल धरि । तत्पश्चात ओ अपन समक्ष के रमणीक विहंगम दृश्य पर दृष्टिपात कयलन्हि। निकट में एक रमणीय सरोवर छल,जाहि में भांति-भांति के पुष्प मुकुलित छल। ओ सभ पुष्प पृथ्वीक पर अलभ्य छल l पुरूरवा ओहि सरोवरक दिशा में प्रस्थान केलथि, इन्द्र अपना स्थान पर बैसल एक पुष्पक सुरभि सs अपना के प्रफुल्लित करवा में व्यस्त छलाह l सरोवर के निकट पहुँचि पुरूरवा चारु दिशा में दृष्टिपात कएल,मुदा हुनका अन्य कोनो जीवक उपस्थिति के आभास नहि भेलन्हि l ओ पुष्कारिणी के घाट पर बैस अपन दुनू पैर के जल में डुबा लेलथि l हुनका अत्यन्त आनंदक अनुभूति भेलन्हि l पुष्कारिणीक मनोहर दृश्यावली के अवलोकन में व्यस्त पुरूरवा एहि बात सs अनभिज्ञ छलाह कि दूटा सुंदर नेत्र हुनका निर्निमेष निहारि रहल छल। ओहि नेत्रक स्वामिनी के मुग्ध दृष्टि हुनक शरीर के छू रहल छल l उर्वशी चित्रलेखा के संगे ओहि पुष्कारिणी में स्नान करवा हेतु आयल छलीह ,मुदा हिनका सबहक रथ के देखि एक झुरमुट के निकट चित्रलेखा के संग चुपचाप बैस गेलीह l उर्वशी अपन दृष्टि उठा कs जतेक बेरि पुरूरवा के देखथि हुनक सुंदरता में हुनका ओतबहि अधिक अभिवृद्धि दृष्टिगत होइन्ह। ओ भाव विमुग्ध भs उठलीह l चित्रलेखा उर्वशी के मोनक भाव पढ़वाक प्रयास कयलथि,मुदा असफल रहलथि l ओना उत्सुकता तs हुनको छलन्हि पुरुरवा के देखवाक l उर्वशी अपन स्वर केअत्यन्त धीमा करैत बजलीह चित्रलेखा संs - "वाह कतेक सुंदर रुप छन्हि ,कतेक बलिष्ठ दुनू भुजा l कतेक उन्नत हृदय-स्थल l पौरुष में तs पुरूरवा बढ़ल -चढ़ल छथि l देवर्षि नारदक प्रशंसा सs अधिकहि पाबि रहल छी सखि।" "हँ ! तों सत्ते कहलह सखि! एहन पुरुष तs हमहूँ आई धरि नहि देखने छलहुँ l अपन राजा इन्द्र पर्यन्त एहन नहि छथि।" चित्रलेखा सेहो अभिभूत छलीह। "हुँssss इन्द्र तs हिनक पगधूलि के बराबर नहि छथि।" किछु क्षण ओतह बैसला उपरान्त चित्रलेखा बाजि उठलीह- "हमसब कखन तक बैसल रहब एतह, चलs सखि मानसरोवर पर अपना सब स्नान कs ली।" " नहि-नहि! एतहि बैसs ने किछु देरी,आर दोसर ठाम किएक जयबह ?"  उर्वशी चित्रलेखा के रोकैत बाजि उठलीह। उर्वशी पुरूरवा के देखबा में अपना के विस्मृत केने छलीह । हुनक ह्रदय में मधुर-मधुर सन किछु दर्दक अनुभूति भs रहल छलन्हि l हुनक मोनक दशा विचित्र छल। एक मोन में इच्छा होइन्हि पुरूरवा के देखिते रsही। दोसर मोन कहन्हि शीघ्र पुरुरवा के हृदय सs लपटाय हुनका आलिंगनबद्ध कs लथि l ओहि दशा में समय व्यतीत होइत जाय l मुदा हुनक एहि इच्छाक पूर्ति भेनाई संभव नहि छल l ओ तs मात्र मोनक कल्पना छल!जे मोनहि में रहल! पुरूरवा उठि कs ठाढ़ भs गेलाह। ओ एक गोट सुंदर पुष्प अपन हाथ में नेने इन्द्र के दिशा में प्रस्थान केलथि - "अत्यन्त सुंदर उद्यान अछि अपनेक" - भाव विभोर होइत पुरूरवा इन्द्र सs कहलथि। इन्द्र मात्र बिहुँसैत रहलाह l तत्पश्चात पुरूरवा आपस जयवा हेतु उद्यत भs गेलाह l इन्द्र स्वयं आपस जयवा हेतु व्यग्र छलाह। ओ अपन अनेक आवश्यक कार्य छोड़ि कs एतह आयल छलाह l युद्धक तैयारी वास्ते उचित निर्देश जे देमs के छलन्हि हुनका अपन सेना के l दुनू गोटे रथ पर आरूढ़ भs पुनः आपस चलि भेलाह, - इन्द्रक नगरी अमरावतीक दिशा में l ------

सैन्य व्यूह रचल सुसज्जित देवतागणक रथ,घोड़ा,हाथी सभ प्रस्थान केलक l पुरूरवा अपन विष्णु प्रदत्त रथ पर विराजमान छलाह l ई रथ इन्द्रक रथ सs अधिक सुंदर छल l सेना के प्रयाणक काल शची इन्द्र के रोली,अक्षत,गोरोचन आदि के मंगल टीका लगौलन्हि l पुरूरवा सुंदर अप्सरा सभ के देखि रहल छलाह जे सभ प्रमुख देवगण के मंगलटीका लगा रहल छलीह l ओहि सितारा सम जगमगाइत अप्सराक झुण्ड में हुनक दृष्टि एक पर जाकs स्थिर भय गेल! जेकरा ओ मुग्ध दृष्टि संs देखिते रहि गेलाह - ओ छलीह विस्तृत व्योम में सिताराक मध्य चन्द्रमा सन जगमगाइत !अप्सरा सभ में श्रेष्ठ "उर्वशी"! उर्वशी मंगल टीका मात्र पुरूरवा के ललाट पर लगौलीह। उर्वशी सs मंगल टीका लगाबय हेतु पुरूरवा के झुकs पड़लन्हि। बिहुँसैत राजा उर्वशी के कहलथि - "ई नृप आई धरि कतहु नहि झुकल l मुदा अज्ञात अप्सरे ! एक मात्र आहाँ छी जनिकर सम्मुख ई राजा आई नतमस्तक भेल अछि।" उर्वशी राजा दिशि देखलथि दुनू के दृष्टि एक दोसर संs क्षण मात्र के लेल मिलल आ पुरूरवा अपन दिल उर्वशी के जादू भरलआँखि में डुबैत अनुभव करs लगलाह l उर्वशी मधुर स्वर में कहलनि - "कतहु नहि झुकs वला राजा के अपन सम्मुख झुकल पाबि हम अपना के अत्यंत सौभाग्यशालिनी मानैत छी। आई हम धन्य भs गेलहुँ | हम एकर सम्मान रखवाक पूरा प्रयास करब l हमर कामना रहत जे नृपति पुरूरवा हमर अतिरिक्त अन्य केकरो समक्ष नहि झुकथि।" नृप देखलथि,उर्वशीक नेत्र पनियायल छल! हुनक हृदय कसकि उठल! अन्तस् चित्कार करs लागल! दिल में इच्छा भेलनि ओहि सुंदरीक नेत्र कमल के मुक्तक के अपन उत्तरीय के शोभा बना लेथि! मुदा ई एखनि संभव नहि छल l दिल तs हुनक आर बहुत किछु कहैत छलनि - मुदा ओ सभ किछु समयोचित नहि छल। आई पुरूरवा अपना के लुटायल-हेरायल सन अनुभव कs रहल छलाह! एक बेर अपन समक्ष उठल उर्वशीक ओहि नयन में अपना वास्ते प्रेम,अपनापन,आर कतेको भाव देखि लेलथि पुरूरवा l आई पुरूरवाक ब्रम्हचर्य हुनका जीर्ण भवन सम धराशाई होइत अनुभव भेलनि l मात्र एक बेर उठल ओ नेत्र-कमल पुरूरवाक हृदय में प्रेमक सागर प्रवाहित कs देलक l उर्वशी के प्रति प्रेम हुनक दिल में हिलकोर मारs लागल। ओ अपन करेज के अपना हाथे थामि कs रथ में प्रविष्ट भेलाह l रथ में प्रविष्ट भेलाक पश्चात ओ देखs चाहलथि उर्वशी के ! मुदा ताs धरि ओ थाल एक मंच पर राखि अप्सराक भीड़ में कतहु गुमि गेल छलीह। एम्हर उर्वशीक हृदय अपन वश में नहि छलनि l ओ विरह-वेदना सs व्यथित भs उठल छलीह l हृदय में एक हूक सन उठि रहल छलनि l किछु काल धरि ओ अपना के संयत रखवाक प्रयास केलनि ,मुदा सब व्यर्थ भेल । ओ अपना के सम्हारि नहि सकलीह आ आखिर में चेतनाहीन भs धराशाई भय गेलीह l उर्वशीक स्थिति अत्यन्त सोचनीय भय गेल अछि, हुनक बीमारी गंभीर अछि,ई समाचार मात्र अप्सरा तक सीमित नहि रहल l सबहक संग पुरूरवाक कर्ण गोचर भेल ई बात l हुनका ज्ञात भs गेलनि ई प्रेम अग्नि के ज्वाला मात्र हुनके भस्म नहि कs रहल छनि,उर्वशी पर्यन्त एहि ज्वाला सs विदग्ध भेल छथि l ई प्रेमाग्नि दुनू के ह्रदय में एक समान प्रज्वलित अछि l एम्हर इन्द्र उर्वशीक ई स्थिति देख एक अप्सरा के हुनका उठाकs हुनक कक्ष में लs जाई के वास्ते एवं उचित चिकित्सा कराबय के संकेत केलनि l ओ एहि घटना के अमंगल सूचक बूझs लगलाह l परंच ओ युद्ध के स्थगित करवा में असमर्थ छलाह। किएक त युद्ध प्रयाणक उचित मंगल लग्न केर लग्न-संकेत पुरोहित केलनि l ताहि संs क्रोधाविष्ट इन्द्र सब के युद्ध हेतु प्रयाण करवाक वास्ते कहलनि l दु:ख में विह्वल होइतहूँ पुरूरवा इन्द्र के संगे-संगे युद्ध के वास्ते प्रयाण कयलथि l

क्रमशः अपन मंतव्य editorial.ऽtaff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.९.जगदीश प्रसाद मण्डल- मोड़पर (धारावाहिक उपन्यास एगारहम पड़ाव) जगदीश प्रसाद मण्डल मोड़पर (धारावाहिक उपन्यास) एगारहम पड़ाव सत्तैर बर्खक अवस्थामे कामेसर पहुँच गेला अछि। सरकारी सेवा तँ रहलैन नहि जे अवकाशक संग पेंशन भेटितैन। जेते वेतन तेते ड्यूटी तँ करइ पड़ि रहल छैन। लगातार बारह घन्टा ड्यूटी केलाक पछाइत कामेसर डेरा पहुँचला। चूरम-चूर जहिना देह भेल छैन तहिना काजक ओझराहटिसँ मनो भइये गेल छैन। परिवारमे मात्र दुइये गोरे छैथ, अपने आ पत्नी। पाँचो बेटी अपन-अपन सासुर बसै छैन आ समुचित जिनगी नहि भेटने बेटा, गुलाब दिल्लीमे रहै छैन। समुचित जिनगीक माने भेल जे जखन गुलाब स्कूलमे जाइ-जोकर भेल तखन कामेसरक आर्थिक स्थिति पतरा गेल छेलैन। ओना, बेटाक जन्मक उपलक्ष्यमे नीक जकाँ भोज-भात केने छला आ भोज खेनिहारो सभ माथपर हाथ दैत कहने रहबे करथिन जे 'बौआ पितोसँ पैघ पदो पेबह आ पैघ इंजीनियरो हेबह.!' मुदा जहिना वायु स्वरूप वचन छेलैन तहिना वायुमे मिलि वायुमण्डल बनि गेलैन। एकलौता बेटा होइक कारणेँ, दुनू बेकतीक माने माता-पिताक पूर्ण इच्छा रहैन जे गुलाबकेँ नीक रहन-सहन आ नीक शिक्षा दियाबी मुदा जीवनक आर्थिक प्रवाह तँ कामेसरक सुखि गेल छेलैन, तँए विचारक धार सेहो म्रियमाण होइत ओतए पहुँच गेलैन जैठाम बेटाक प्रति सेवाक भावना मनमे भरपूर रहितो कामेसर नहि कऽ सकला। डेरा पहुँचिते कामेसर देखलैन जे पत्नी दर्दसँ छटपटा रहली अछि, कियो देखनिहार नहि जे डॉक्टरो बजा अनितैन। थकानसँ कामेसरक देह अपने चूरम-चूर भेल, बेहोशीक अवस्थामे, दुनू आँखिसँ नोर टघरए लगलैन। अपने मन कहए लगलैन जे जिनगीक कोन मोड़पर, कोन रस्ता छुटल आ कोन पकड़ाएल से अखनो नहि बुझि पेब रहल छी। पुन: अपने मन कहलकैन, पचास बर्खसँ ऊपर धरिक ने अपन विचारक जिनगी छल, मुदा पछातिक तँ पत्नीक विचारक रहल। ओहो ने स्नातक छथिए। हारल-थाकल कामेसरक मुहसँ अपने निकललैन- "यएह छी जीवन, कानि जीबू कि हँसि जीबू.!" (समाप्त) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.१०.जगदीश प्रसाद मण्डल- सिमानक झगड़ा जगदीश प्रसाद मण्डल सिमानक झगड़ा आजुक एहेन परिवेश बनि गेल अछि जे जेमहर ताकू तेमहर सीमानेक झगड़ा उठि रहल अछि। से कहब जे अपने सभक बीच अछि आ दुनियाँक आन देशमे नहि अछि, सेहो बात नहियेँ अछि। सभकेँ अछि। कबीर दास यएह ने कहने छैथ, 'दो पाटन के बीचमे बाँकी बँचे ने कोइ।' जखने दूटा पाटन हएत तखने दुनूक अपन-अपन ओकाइतिक सीमा हेबे करत। कहब जे शून्य सीमा विहीन अछि। मुदा कोनो शब्द ओहिना नइ ने उठिकऽ ठाढ़ होइए, ओकरो आधार (वस्तु) चाही। जँ शून्य शून्य होइत तँ शून्य शब्द केना बनैत। खाएर जे से, अखन शून्यक प्रश्न नहि, अखन अंकक प्रश्न अछि। चाहे अपना लगसँ दुनियाँकेँ देखू आकि दुनियाँक बीचसँ अपनाकेँ देखू, बात बराबरे बुझि पड़त। ई तँ बुझल बात अछिए जे जैठाम अपने ठाढ़ छी तैठामसँ पूब दिस तकैत-तकैत पच्छिम होइत लगमे पहुँच जाएब तहिना पच्छिमसँ तकैत-तकैत पूब होइत पूबे-पूब होइत लगमे पहुँच जाएब। तहिना उत्तरो-दच्छिनक बीच सेहो अछिए...। दलानपर असगरे बैसल देवनाथक मन घोर-मट्ठा होइत रहइ। जहिना फरिच्छ पानिमे दुनियाँक शकल साफ देख पड़ैत, तहिना घोर-मट्ठा पानिमे घोराएल-मटियाएल देखाइये पड़ैए। एहेन घोराएल-मटियाएलमे अपनेकेँ देख लेब आकि आनेकेँ देख लेब, ओते असान थोड़े अछि जेते बुझै छिऐ। एकर माने ईहो नहि जे नहियेँ देख सकै छिऐ। तइले ओहन आँखिक इजोतक ने खगता अछि जे मटियाएलोकेँ फरिच्छ आँखिये फरिछा सकइ। ओना, कहबी छै जे 'जखन जागी तखने भोर', मुदा एहनो तँ सम्भव अछिए जे ओकरा बुझै-करैमे हजारो-लाखो बरख सेहो लगि सकैए। कहब जे एहनो अकरहर केतौ भेल अछि.? हँ भेले नइ अछि सोझोमे अछि। बुझल बात अछिए जे लाखो बरख पूर्व मनुक्ख ऐ धरतीपर आएल, सभ किछु लऽ कऽ आएल, माने मनुक्खक सभ अंग-प्रत्यंग। तैठाम की ई फूसि अछि जे ने मनुक्ख अपन देहक सभ अंग देख-बुझि सकल अछि आ ने दुखसँ निवृत्त हेबाक रोगेकेँ पकैड़ सकल अछि। कहब जे शरीरक की रोग? जेकर अनुसन्धान अखनो विद्वज्जन माने डॉक्टर सभ डॉक्टर भेला पछाइत पुन: अपनाकेँ शोधकर्ता बनि ताकि-ताकि अनै छैथ। विचारक बोनमे देवनाथ असगरे राम-लक्ष्मण-सीता जकाँ बोने-बोन वौआइत-ढहनाइत, मुदा ने बोनक ओर भेटइ आ ने छोड़ देखइ आ ने बनवासीएकेँ केतौ देख पबइ। देखियो पेब केना सकैत, बनि कऽ बास करब आकि बास करिकऽ बनब। ई प्रश्न तँ अछिए। सम्भवो आ सुलभो अछिए। सब देखते छी जे वएह सीमेन्ट-बालु पुरुखोक रूप बना ठाढ़ करैए आ मौगियोक रूप बनैबते अछि। एकर माने ई नइ बुझब जे पुरुखो मौगियाह होइए आ मौगियो पुरुखाह होइए। यएह दुनियाँक रीति ने प्रीत, बेपीरित, कुरीत, सुरीत सभ बनबैए। बुझल बात अछिए जे सीमेन्ट-बालु निरजीव अछि मुदा केहेन निर्माता अछि जे सजीवोकेँ निरजीव बना दइए आ निरजीवोकेँ सजीव। जेना विचारक बोनमे विचारीक सहयोग भेटने बनक विचारक बाट भेटैए, तहिना एक-दोसराक सहयोगक खगता आ ओकर पूर्ति भेला पछातिक पूर्ति, केना आ केहेन होइए से तँ वएह बुझै छैथ, जे पेलैन अछि। घोराएल-मटियाएल-नोनियाएल-बोनाएल आ सुखाएल विचारक वनमे देवनाथक मन एते उदिग्न भऽ गेलै जे एकाएक उठिकऽ विचारक कबुला करैत श्यामलाल काका ऐठाम विदा भेल। रस्तामे केतए कटारि-मटारि छल आकि खढ़-पात जमल छल आकि चलैत-चलैत जे चिक्कन बाट बनि जाइए, से छल, से सभ देवनाथ किछु ने बुझलक। श्यामलाल कक्काक समय प्रश्नोत्तरीक रहैन। प्रश्नोत्तरीक समयक माने भेल विचार-विमर्शक बीच, अहाँक प्रश्न आ श्यामलाल कक्काक उत्तर। एकर माने ई नइ भेल जे जँ अहाँक प्रश्न कोनो घटना-विशेषसँ अछि तँ ओइ घटनाक जीवन्त गवाह भेला। जीवन्त घटनाक गवाह ओ हेता जे आँखिसँ देखलैन। घटनाक प्रवाह अछि, जे केतौ-केतौ पाछूसँ अबैत ओकर विकसित रूप होइए तँ केतौ-केतौ वर्तमानक स्वरूप सेहो होइए। ओना, कल्पना स्वरूप भविष्योक अनुमान लगौनिहारक कमी सेहो नहियेँ अछि। सभ अपन-अपन अनुकूल भविष्य वक्ता सेहो अछिए। बुझल बात अछि जे अहाँ पान साए एकावन रूपैआक एकटा ताबीज कीनि डोराडोरिमे पहीरि लिअ, सरस्वती माता अहाँकेँ दहीन भऽ जेती, अखन बाम छैथ। खाएर जे अछि, जाबे तक भेड़ियाह बुधि रहत ताबे तक अहिना भेड़िया धसान होइते रहत। श्यामलाल काका आ रघुवीर भाय दरबज्जापर बैसल ठहाका मारि हँसि रहल छला। दुनूक हँसी देख देवनाथक मनमे सेहो दुनू रंगक विचार उठि गेलइ। पहिल उठलै जे हमरे देख दुनू गोरे हँसि रहला अछि। दोसर उठलै जे जँ कहीं गप-सप्पक क्रममे ओइ सीमानपर पहुँच हँसल होथि, जे हँसै-जोकर होइन। ओना, हँसबो-हँसबमे भेद अछिए। एकटा होइए तृप्तिक खुशीसँ हँसब आ दोसर होइए मजैक कऽ मजाक रूपमे हँसब। आधार दुनूक अपन-अपन अछिए। तँए आधारहीन नहियेँ कहल जा सकैए। देवनाथकेँ संयोग भेटलै। संयोग ई भेटलै जे तैबीच चाह आबि गेलइ। बुझल बात अछिए जे जैठाम देशक उत्थान-पतन सन समस्या रहैए, तहूठाम चाह देखते समाधानकर्ता चाह देखते अपन विचारकेँ रोकि पहिने चाह पीबिते छैथ। मुदा जहिना चाह-पानक दोकान परहक गप-सप्पक मोजर नइ अछि तहिना चाह-पान बेरमे दुआरो-दरबज्जाक गति तेहने अछिए। चाहे पीबैक क्रममे रघुवीर भाय बजला- "काका, अजीब गति दुनियोँक अछि.!" श्यामलाल काका बजला- "रघुवीर, अखुनका अप्पन समय तँ प्रश्नोत्तरीक अछि, मुदा बीचमे जाबे चाह चलैए तइ बीच किछु कहि दइ छिअ।" रघुवीर भाइक प्रश्नमे सह लगबैत देवनाथ बाजल- "चाहे-पान बेरक जखन प्रश्न छी तखन तँ चाहे-पानक बीच ने जवाबो भऽ जेबा चाही।" प्रश्नक दवाब देख श्यामलाल काका बजला- "की अजीव अछि रघुवीर। अजीवोकेँ सजीव आ सजीवोकेँ अजीव बनौले जाइए। तइ बीचमे तोरा की अजीब बुझि पड़ै छह? जखन अजीबे छी तखन अजीब-अजीब ढंगसँ लोक बुझबे करत।" मने-मन देवनाथो अपन विचारकेँ ठिकिया नेने छल जे जखने विचारक बेग चलत तइ बिच्चेमे अपनो विचार घोंसिया चुप-चाप अपन प्रश्नक जवाब टोहकीक माछ जकाँ टोहिया लेब। रघुवीर भाय बजला- "काका, चाह-पानक तँ समय उसैर गेल, तँए ऐ विचारकेँ एतइ छोड़ि अपन रूटिंगमे अबियौ। घरसँ बहार धरि एक्के झगड़ा सबतैर पसैर गेल अछि।" रघुवीर भाय झाँपले-तोपल प्रश्न उठौने छला मुदा श्यामलाल काका कृष्णक विराट रूप जकाँ प्रश्नकेँ बुझलैन। तँए प्रश्नकेँ सुपारीक टूक जकाँ बनबैत बजला- "की झगड़ा रघुवीर?" रघुवीरक मनमे प्रश्न जेना सरिया कऽ रखले छेलैन तहिना बजला- "सीमानक झगड़ा, काका।" चाहक पछातिक खेलहा पानक सिट्ठी मुहसँ फेक श्यामलाल काका बजला- "बौआ, सीमानक झगड़ाक विराट रूप अछि। तँए एक-एक प्रश्नक उत्तर, एक दिनक बैसारमे देब सम्भव नइ अछि।" बिच्चेमे देवनाथ बाजल- "काका, एहनो तँ देखबे करै छी जे एकटा शब्द माने शीर्षकक शब्द, रामायण-महाभारत सन मोट-मोट ग्रन्थक सभ बात कहि सकैए तखन सीमानक विचार कोन भारी भेल।" श्यामलाल काका बुझि गेला जे देवनाथक प्रश्न अबूझ मनक उपज छी, नहि कि सबूझ विचारक, तँए महत्व रहितो महत्वहीन अछिए। बजला- "रघुवीर अपना जगहपर आबह।" रघुवीर भाय बजला- "काका, पोरो सागक लत्ती जकाँ मनक विचार बिनु सिरेक छुछुआएल घुरैए मुदा आन लत्ती तँ से नहि अछि। ओकरा गिरह-गिरहमे सिर निकलै छै, तँए विचारक प्रश्न एहेन सिरबेधू होइए, तैठाम धाँइ-दे किछु बाजि देब आ किछु छोड़ि देब, तखन बुझनिहार बुझत की। बुझब तँ भेल जे ओइ शब्दक वस्तुक स्वरूप बुझि सकइ।" श्यामलाल काका बजला- "हँ।" बीचमे बैसल देवनाथ अकबका गेल। अकबकाइक कारण भेलै जे रघुवीर भाय की बजला आ श्यामलाल काका की जवाब देलखिन। ई बुझल रहितै जे 'हँ' आ 'नइ' कोनो प्रश्नक सभसँ पैघ जवाब होइए तखन ने, से तँ बुझल नइ रहइ। मनमे ईहो उठइ जे जखन तीनू गोरे समकश छी माने समकक्ष, तखन तीनूक विचारकेँ ने समतूल करब नीक हएत। फेर अपने मनमे उठलै जे जखन रघुवीर भाय आ श्यामलाल कक्काक बीचक प्रश्न-उत्तर चलि रहल अछि तखन बीचमे टोक-टाक करब, अनका जे होउ, मुदा अपन मन कहैए जे ई केतौसँ उचित नहि हएत। तँए, चुप्पे रहब सभसँ नीक। नीको केना ने, अनके गाइयक दूध मंगनीए भेटत। रघुवीर भाय बजला- "काका, जखन प्रश्नक विराट रूप अछि, तखन बाट-घाटक चर्चा कऽ दियौ, बाँकी सरोवर-झील, पोखैर धार-धुर टपला पछाइत कहबै।" रघुवीर भाइक विचार सुनि श्यामलाल कक्काक मन बिहुसलैन। बिहुसैक कारण भेलैन जे कम-सँ-कम एको गोरे तँ विचारक संगी भेट रहल अछि। श्यामलाल काका बजला- "जहिना चैतन्य स्वरूप जीव-जन्तुसँ लऽ कऽ महामानव धरि अछि, जे प्रवाहित अछि, तहिना अपन मनसँ लऽ कऽ दुनियाँक मनक बीच सेहो अछि। तँए, सीमानक झगड़ा हेबे करत किने।"

-जगदीश प्रसाद मण्डलजीक जन्म मधुबनी जिलाक बेरमा गाममे 5 जुलाई 1947 इस्वीमे भेलैन। मण्डलजी हिन्दी एवं राजनीति शास्त्रमे एम.ए.क अहर्ता पाबि जीवि‍कोपार्जन हेतु कृषि कार्यमे संलग्न भऽ रूचि पूर्वक समाज सेवामे लागि गेला। समाजमे व्याप्त रूढ़िवादी एवं सामन्ती व्यवहार सामाजिक विकासमे हिनका वाधक बुझि पड़लैन। फलत: जमीन्दार, सामन्तक संग गाममे पुरजोर लड़ाइ ठाढ़ भऽ गेलैन। फलत: मण्डलजी अपन जीवनक अधिकांश समय केस-मोकदमा, जहल यात्रादिमे व्यतीत केलाह। 2001 इस्वीक पछाइत साहित्य लेखन-क्षेत्रमे एला। 2008 इस्वीसँ विभिन्न पत्र-पत्रिकादिमे हिनक रचना प्रकाशित हुअ लगलैन। गीत, काव्य, नाटक, एकांकी, कथा, उपन्यास इत्यादि साहित्यक मौलिक विधामे हिनक अनवरत लेखन अद्वितीय सिद्ध भऽ रहलैन अछि। अखन धरि दर्जन भरि नाटक/एकांकी, पाँच साएसँ ऊपर गीत/काव्य, उन्नैस गोट उपन्यास आ साढ़े आठसाए कथा-कहानीक संग किछु महत्वपूर्ण विषयक शोधालेख आदिक पुस्तकाकार, साएसँ ऊपर ग्रन्थमे प्रकाशित छैन। मिथिला-मैथिलीक विकासमे श्री जगदीश प्रसाद मण्डलजीक योगदान अविस्मरणीय छैन। ई अपन सतत क्रियाशीलता ओ रचना धर्मिताक लेल विभिन्न संस्थासभक द्वारा सम्मानित/पुरस्कृत होइत रहला अछि, यथा- विदेह सम्पादक मण्डल द्वारा गामक जिनगी' लघु कथा संग्रह लेल 'विदेह सम्मान- 2011', 'गामक जिनगी व समग्र योगदान हेतु साहित्य अकादेमी द्वारा- 'टैगोर लिटिरेचर एवार्ड- 2011', मिथिला मैथिलीक उन्नयन लेल साक्षर दरभंगा द्वारा- 'वैदेह सम्‍मान- 2012', विदेह सम्पादक मण्डल द्वारा 'नै धारैए' उपन्यास लेल 'विदेह बाल साहित्य पुरस्कार- 2014', साहित्यमे समग्र योदान लेल एस.एन.एस. ग्लोबल सेमिनरी द्वारा 'कौशिकी साहित्य सम्मान- 2015', मिथिला-मैथिलीक विकास लेल सतत क्रियाशील रहबाक हेतु अखिल भारतीय मिथिला संघ द्वारा- 'वैद्यनाथ मिश्र 'यात्री' सम्मान- 2016', रचना धर्मिताक क्षेत्रमे अमूल्य योगदान हेतु ज्योत्स्ना-मण्डल द्वारा- 'कौमुदी सम्मान- 2017', मिथिला-मैथिलीक संग अन्य उत्कृष्ट सेवा लेल अखिल भारतीय मिथिला संघ द्वारा 'स्व. बाबू साहेव चौधरी सम्मान- 2018', चेतना समिति, पटनाक प्रसिद्ध 'यात्री चेतना पुरस्कार- 2020', मैथिली साहित्यक अहर्निश सेवा आ सृजन हेतु मिथिला सांस्कृतिक समन्वय समिति, गुवाहाटी-असम द्वारा 'राजकमल चौधरी साहित्य सम्मान- 2020', भारत सरकार द्वारा 'साहित्य अकादेमी पुरस्कार- 2021' तथा साहित्य ओ संस्कृतिमे महत्वपूर्ण अवदान लेल अमर शहीद रामफल मंडल विचार मंच द्वारा 'अमर शहीद रामफल मंडल राष्ट्रीय पुरस्कार- 2022'

रचना संसार : 1. इन्द्रधनुषी अकास, 2. राति-दिन, 3. तीन जेठ एगारहम माघ, 4. सरिता, 5. गीतांजलि, 6. सुखाएल पोखरि‍क जाइठ, 7. सतबेध, 8. चुनौती, 9. रहसा चौरी, 10. कामधेनु, 11. मन मथन, 12. अकास गंगा - कविता संग्रह। 13. पंचवटी- एकांकी संचयन। 14. मिथिलाक बेटी, 15. कम्प्रोमाइज, 16. झमेलिया बिआह, 17. रत्नाकर डकैत, 18. स्वयंवर- नाटक। 19. मौलाइल गाछक फूल, 20. उत्थान-पतन, 21. जिनगीक जीत, 22. जीवन-मरण, 23. जीवन संघर्ष, 24. नै धाड़ैए, 25. बड़की बहिन, 26. भादवक आठ अन्हार, 27. सधवा-विधवा, 28. ठूठ गाछ, 29. इज्जत गमा इज्जत बँचेलौं, 30. लहसन, 31. पंगु, 32. आमक गाछी, 33. सुचिता, 34. मोड़पर, 35. संकल्प, 36. अन्तिम क्षण, 37. कुण्ठा- उपन्यास। 38. पयस्विनी- प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना। 39. कल्याणी, 40. सतमाए, 41. समझौता, 42. तामक तमघैल, 43. बीरांगना- एकांकी। 44. तरेगन, 45. बजन्ता-बुझन्ता- बीहैन कथा संग्रह। 46. शंभुदास, 47. रटनी खढ़- दीर्घ कथा संग्रह। 48. गामक जिनगी, 49. अर्द्धांगिनी, 50. सतभैंया पोखैर, 51. गामक शकल-सूरत, 52. अपन मन अपन धन, 53. समरथाइक भूत, 54. अप्‍पन-बीरान, 55. बाल गोपाल, 56. भकमोड़, 57. उलबा चाउर, 58. पतझाड़, 59. गढ़ैनगर हाथ, 60. लजबि‍जी, 61. उकड़ू समय, 62. मधुमाछी, 63. पसेनाक धरम, 64. गुड़ा-खुद्दीक रोटी, 65. फलहार, 66. खसैत गाछ, 67. एगच्छा आमक गाछ, 68. शुभचिन्तक, 69. गाछपर सँ खसला, 70. डभियाएल गाम, 71. गुलेती दास, 72. मुड़ियाएल घर, 73. बीरांगना, 74. स्मृति शेष, 75. बेटीक पैरुख, 76. क्रान्तियोग, 77. त्रिकालदर्शी, 78. पैंतीस साल पछुआ गेलौं, 79. दोहरी हाक, 80. सुभिमानी जिनगी, 81. देखल दिन, 82. गपक पियाहुल लोक, 83. दिवालीक दीप, 84. अप्पन गाम, 85. खिलतोड़ भूमि, 86. चितवनक शिकार, 87. चौरस खेतक चौरस उपज, 88. समयसँ पहिने चेत किसान, 89. भौक, 90. गामक आशा टुटि गेल, 91. पसेनाक मोल, 92. कृषियोग, 93. हारल चेहरा जीतल रूप, 94. रहै जोकर परिवार, 95. कर्ताक रंग कर्मक संग, 96. गामक सूरत बदैल गेल, 97. अन्तिम परीक्षा, 98. घरक खर्च, 99. नीक ठकान ठकेलौं, 100. जीवनक कर्म जीवनक मर्म, 101. संचरण, 102. भरि मन काज, 103. आएल आशा चलि गेल, 104. जीवन दान तथा 105. अप्पन साती- लघु कथा संग्रह। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.११.रबीन्द्र नारायण मिश्र- मातृभूमि (उपन्यास)- २३ म खेप रबीन्द्र नारायण मिश्र मातृभूमि (उपन्यास)- २३ म खेप २३ गामक सीमासँ बाहर होइत काल जयन्तक आँखिसँ नोर झहर-झहर खसि रहल छल । जानकीधामसँ शिक्षा प्राप्त केलाक बाद ओ साइते सोचने हेताह जे फेर कहिओ गाम छोड़ि कए जानकीधाम जेताह। गाम जएबाक हेतु ओ ततेक उत्सुक छलाह जे अपन शोधग्रंथक उपसंहार लिखबाक हेतु ओतए नहि रुकलाह । सोचलाह -"गामक सुरम्य ओ स्नेहमयी वातावरणमे ई काज बेसी नीक होएत । ओहिमे अपन-माटि पानिक स्वाद रहत।" मुदा परिस्थिति तेहन भए गेल जे ओहिठामसँ अचानक हुनका बिदा होबए पड़लनि। यद्यपि मोनमे ई भावना छनिहे जे ओ एकदिन फेर अपन माटि-पानिमे घुरि अओताह । जानकीधाम जाएब तँ एकटा मात्र तात्कालिक समाधान छल । मुदा ई भेल बहुत कष्टकर घटना। जाहि ठाम माताक अनन्य सिनेह ओ पिताक पाण्डित्वपूर्ण सानिध्यमे हुनकर पालन भेल ताहिठामक ॠण बिना चुकओने ओ वापस जा रहल छलाह। एक हिसाबे हुनका ई बैमानी बुझाइनि । जान चलि जाइत से बेसी नीक । तथापि ओ जीबैत छथि आ अपन प्राणप्रिय मातृभूमिसँ वंचित भए एकबेर फेर दूर जा रहल छथि। हुनका नागबाबापर मोने-मोन कैकबेर तामसो होनि । मुदा फेर अपनाकेँ रोकथि । "धन्यकेँ नागबाबा जे हम आइ एहि जोगर भेलहुँ अछि.नहि तँ जयन्त नामक व्यक्ति कहिआ ने बागमतीक धारमे बहि गेल रहितथि आ ककरो एहि बातक पतो लगैत कि नहि । तेँ ने सुधाकर परेसान छथि । हुनका हिसाबे तँ हम खतम  रही । मुदा भावी प्रबल ।"- जयन्त गुमसुम इएह सभ सोचैत रहथि कि रस्ताक कातमे महादेवक मंदिर देखेलनि । मोनमे भेलनि जे दर्शन कए ली।" साइत महादेव हमर दुख कम कए सकथि।"  माधव सेहो हुनकर संगे गेलाह । महादेवक दर्शन कए ओ निकलले छलाह कि गोविंद डाक देलखिन- "गामसँ टुनटुन अएलाह अछि । किछु जरूरी समाद छनि।" जयन्त आ माधव ओमहरे बिदा भेलाह। एहिबीच गोविंद आ नागबाबा गप्प करए लगलाह । "बहुत अनर्थ भए गेल ।"- गोविंद बजलाह । "की भेलैक?"-नागबाबा पुछैत छथि। "बजबाक साहस नहि भए रहल अछि ।" "बजबहक नहि तखन बुझबैक कोना?" "टुनटुनेसँ गप्प कए लिअ ।" "कहाँ छथि टुनटुन?" "महादेवक दर्शन करए गेलाह अछि ।" "ठीक छैक । आबए दिअनु ।" गोविंद एहि दुर्घटनाक समाचार जयन्तकेँ नहि देबए चाहैत छलनि । हुनका डर रहनि जे ओ एकरा बरदास्त नहि कए सकताह। मुदा एकरा कतेक काल नुकओने रहितथि । टुनटुनकेँ देखितहि नागबाबा पुछैत छथि - "की बात छैक से फरिछा कए बाजह।" "सुधाकर आ ओकर लठैतसभ बुलडोजरसँ पाठशालाकेँ तोड़ि देलक । आब सुनैत छी ओहि जगहपर अपन घर बनाओत।" "गौंवासभ किछु नहि कहलकैक?" "के की कहितैक? केओ झंझटमे नहि पड़ए चाहलक । फेर ओकरा संगे तँ गुंडासभक झुंड छैक । सौंसे दछिनबारिटोलक युवकसभ ओकर पाछू-पाछू बेमत्त भेल अछि ।" "सएह कहू? केहन भए गेल गाम? न्यायक संग देनिहार केओ नहि?" "से नहि बाजू। उतरबारिटोल लोक जान लगा देलक । थाना धरि गेल । मुदा दरोगाजी सेहो ओकरे संग भए गेलैक । उनटे उतरबारिटोलक लोकसभकेँ धमका देलकैक । गोली-बारुद चलेबाक परिस्थिति भए गेलैक। सभ जान-बेजान भागल ।" जयन्त एहि समाचारकेँ बकर-बकर सुनैत रहि गेलाह । किछु बाजल नहि भेलनि । पाठशालाक दुर्गतिक समाचार सुनि हुनकर हृदय विदीर्ण भए गेलनि । हुनका मोन होइत छल जे तुरंते गाम घुरि जाइ। मुदा नागबाबा अड़ि गेलाह । "सभ किछुक समय होइत छैक । अखन अहाँकेँ गाम गेनाइ उचित नहि होएत । सबाल मात्र ओहिठाम जेबेक नहि अछि। कोनो ओहिठाम लोकक कमी थोड़े छैक । मुदा ओ सभ झूठ-मूठमे ओझराएल रहैत अछि। यदि अहूँ सएह करए लागब तखन की फरक भेलैक? एतेक पढ़ि-लिखि कए  अहाँ अपन क्षमताकेँ एहिसभमे नष्ट करी से उचित नहि होएत । अस्तु,धैर्यपूर्वक सही समयक प्रतीक्षा करू । संप्रति हमरा लोकनि पूर्वनियोजित कार्यक्रमक अनुसार जानकीधाम चली । ओहिठाम अहाँक शोधग्रंथक विमोचन कएल जाएत । संगहि विद्वान लोकनिसँ विमर्श कए आगूक कार्यक्रम बनाओल जाएत । गोविंद आ माधव पाठशालाक सुधि लेबाक हेतु पर्याप्त छथि । ई दुनूगोटे टुनटुनक संगे गाम लौटि जाथि आ स्थितिक जानकारी लेथि । मुदा बेसी फसाद नहि करथि । समय अएलापर पाठशाला बनिए कए रहत,एकरा रोकब ककरो वशक बात नहि अछि ।" "जे अहाँक विचार । "-जयन्त बजलाह । गोविंद आ माधवकेँ इच्छा रहनि जे ओ सभ जयन्तक संगे रहथि । तथापि नागबाबाक बात मानि हुनका प्रणाम कए टुनटुनक संगे गाम बिदा भए गेलाह । जाइत काल जयन्त कहलखिन- "चिंता नहि करब । हमहु अएबे करब ।" -रबीन्द्र नारायण मिश्र, पिताक नाम: स्वर्गीय सूर्य नारायण मिश्र, माताक नाम: स्वर्गीया दयाकाशी देवी, बएस: ६९ वर्ष, पैतृक ग्राम: अड़ेर डीह, मातृक: सिन्घिआ ड्योढ़ी, वृति: भारत सरकारक उप सचिव (सेवानिवृत्त), स्पेशल मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट, दिल्ली(सेवानिवृत्त), शिक्षा: चन्द्रधारी मिथिला महाविद्यालयसँ बी.एस-सी. भौतिक विज्ञानमे प्रतिष्ठा : दिल्ली विश्वविद्यालयसँ विधि स्नातक, प्रकाशित कृति: मैथिलीमे: प्रकाशन वर्षः२०१७ १.भोरसँ साँझ धरि (आत्म कथा),२. प्रसंगवश (निवंध), ३.स्वर्ग एतहि अछि (यात्रा प्रसंग); प्रकाशन वर्षः२०१८ ४. फसाद (कथा संग्रह) ५. नमस्तस्यै (उपन्यास) ६. विविध प्रसंग (निवंध) ७.महराज(उपन्यास) ८.लजकोटर(उपन्यास); प्रकाशन वर्षः२०१९ ९.सीमाक ओहि पार(उपन्यास)१०.समाधान(निवंध संग्रह) ११.मातृभूमि(उपन्यास) १२.स्वप्नलोक(उपन्यास); प्रकाशन वर्षः२०२० १३.शंखनाद(उपन्यास) १४.इएह थिक जीवन(संस्मरण)१५.ढहैत देबाल(उपन्यास); प्रकाशन वर्षः२०२१ १६.पाथेय(संस्मरण) १७.हम आबि रहल छी(उपन्यास) १८.प्रलयक परात(उपन्यास); प्रकाशन वर्षः२०२२ १९.बीति गेल समय(उपन्यास) २०.प्रतिबिम्ब(उपन्यास) २१.बदलि रहल अछि सभकिछु(उपन्यास) २२.राष्ट्र मंदिर(उपन्यास) २३.संयोग(कथा संग्रह) २४.नाचि रहल छलि वसुधा(उपन्यास) २५.दीप जरैत रहए (उपन्यास)। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.१२.नित नवल दिनेश कुमार मिश्र (लेखक गजेन्द्र ठाकुर) दिनेश कुमार मिश्र, मिथिलाक बाढ़ि, धार आ ओइपर बनाओल छहर/ बान्ह, सन्दर्भ हुनकर बन्दिनी महानन्दा, बागमतीक सद्गति!, दुइ पाटनक बीच.. (कोसी धारक कथा), ने घाट ने घर, बगावत पर मजबूर मिथिलाक कमला धार, भुतही धार आ तकनीकी झाड़ा-फूंकी। दिनेश क़ुमार मिश्रक सभटा पोथी आब हुनकर अनुमतिसँ उपलब्ध अछि विदेह आर्काइवमेः http://videha.co.in/pothi.htm (साहित्य अकादेमीक मैथिली परामर्शदात्री समितिक सदस्य पंकज झा पराशर द्वारा दिनेश कुमार मिश्र जीक पोथी सभसँ पैराक पैरा चोरा कऽ अपना नामे उपन्यास छपबाओल गेल अछि, जकरा छद्म समीक्षक कमलानन्द झा ऐ चोर लेखक पंकज झा पराशरक रिसर्च कहै छथि! लिंक http://videha.co.in/investigation.htm पर स्क्रीनशॉट अपडेट कएल गेल अछि।) बन्दिनी महानन्दा- दिनेश कुमार मिश्र (पछिला अंकसँ आगाँ) बाढ़ि आ ओकर ऐतिहासिक संदर्भ गंगा बेसिनक निर्माणक प्रक्रिया समुद्रसँ समुद्रमे पानिक यात्रा आ नदीक मार्ग बदलबाक कारणकेँ बुझलाक बाद एकटा बात स्पष्ट रूपसँ सोझाँ अबैए जे पृथ्वीक विस्थापनकेँ रोकबाक कोनो आशा नै अछि। बरखा होइत रहत आ जखन ई पानि माटिपर खसत तखन कटाव हएत, नदी अपन रस्ता बदलत आ बाढ़ि अबैत रहत। मनुष्य अपन बौद्धिक कौशलसँ माटीक कटाव, नदीक मार्ग परिवर्तन आ बाढ़िसँ कनी बदलाव आनि सकैए। ओकर हैसियत अखन धरि ऐसँ नै अछि। एतऽ एकटा बात ध्यान देबऽ योग्य अछि जे उत्तर बिहार बा गंगा घाटीक पूरा मैदान एकटा उपजाऊ क्षेत्र अछि, जकर उपजाऊ शक्ति बाढ़िक समय नदीक पानिक संग आयल गादक कारण निश्चित रूपसँ बढ़ल अछि। प्राचीन कालसँ कृषि समृद्ध क्षेत्र रहबाक कारण ऐ क्षेत्रमे विभिन्न सभ्यताक विकास भेल। प्रकृति मुदा भिक्षा नै बाँटैत अछि। जँ गुलाब अछि तँ संग-संग काँट सेहो। जतऽ-जतऽ बरखाक रूपमे मीठ पानिक समृद्ध स्रोत अछि, नदीक जाल किछु दूर धरि पसरल अछि, ओतऽ बाढ़ि, कटाव आ नदीक मार्ग परिवर्तन बेसी सुनबामे अबैत अछि। नदी एकटा पैघ क्षेत्रमे थाल/ बालू पसारि कऽ ओकरा समुद्रमे पहुँचेबाक एकटा सशक्त साधन अछि, जे बाढ़िक समय अपन उत्पत्तिसँ समुद्र तक पहुँचैत अछि। असलमे ऐ तरहक जमीनक निर्माण नदीक स्वाभाविक गुण अछि। गंगा घाटीक ई क्षेत्र एक समयमे समुद्रक बालु आ नमकीन पानिक क्षेत्र रहल हएत। मुदा बरखाक कारण उत्तरमे हिमालयक काँच माटि नीचाँ बहय लागल जइ कारण जमीन उपजाऊ होबऽ लागल। हम जइ ठामक गप्प कऽ रहल छी ओकर भूमि दुनियाँक सभसँ उपजाऊ जमीनमे गानल जाइत अछि आ ऐ नदीकेँ जल संसाधनक​​एकमात्र स्रोत मानल जाइत अछि। भौतिकवादी मान्यताक अलाबे हमरा सभक लेल नदीक महत्व एकटा जीवनदायी शक्ति सन रहल अछि। भारतक संस्कृतिक आधार नदी रहल अछि। एतेक सभ्यता ऐ नदी सभक कातमे अनादि कालसँ विकसित भेल अछि आ समयक संग प्रकृतिक कोखमे लीन भऽ गेल अछि, मुदा ऐ नदी सभक संग हमर सभक संबंध सदिखन शुद्ध आ प्रेम मातृशक्ति आ ओकर उपासक सन रहल अछि। जतऽ महर्षि वेद व्यास महाभारतमे नदी सभक प्रति अपन श्रद्धा व्यक्त केने छथि ओ 'विश्वस्य मातरः' अर्थात लोकमाता कहै छथि। कौटिल्य सन विद्वान एहन स्थानकेँ निवासक लेल वर्जित मानने छथि, जतऽ कोनो सुन्दर नदी निरंतर नै बहैत अछि। ओ नदीक महत्वकेँ रेखांकित केलनि 'न तत्र दिवसम् वसेत'- एहन स्थानपर एक्को दिन लेल नै रहबाक चाही। अपन सभक शुभ संस्कारमे भारतीय लोकनि देवता आ पूर्वजक संग-संग नदीक आह्वान करब कहियो नै बिसरै छथि। गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिन्धु आ कावेरीक स्मरणक बिना हमर सबहक कोनो शुभ कर्म पूर्ण नै होइत अछि। पवित्रताक उदाहरण देबऽ लेल नर्मदाकेँ मोन पाड़ै छी आ गंगाक संतान कहल जायमे गर्वित होइ छी। 'मृत्युपर गंगा प्राप्त करबाक' इच्छा कबीर सन साधकमे मात्र ऐ लेल नै भेल जे ओ अपन जीवनक अधिकांश समय गंगा तटपर बितेने छला। कोनो नदीकेँ भावसँ गंगा कहबाक परंपरा अखनो हमरा लोकनिक मोनमे जीवित अछि। भगवान श्रीकृष्णक चर्चा 'कालिन्दि कूल कदम्ब की डारन' केने बिना अपूर्ण रहि जाइए, तँ कतेक बेर वाल्मीकि भगवान रामकेँ सरयूक सोझाँ प्रणाम करैत देखलनि। क्षिप्रा कालिदासक लेखनकेँ लालित्य देलनि। तीर्थक अवधारणा (तीर्थक शाब्दिक अर्थ नदीक कात थिक) नदीक महिमाक मान्यताकेँ अभिव्यक्ति देलक अछि। एहन विशेष अवसरपर नदीमे स्नान करबाक हमरा लोकनिक अलग परंपरा अछि। गंगा दशहरा, माघ पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा, संक्रांति आदि बहुत रास एहन अवसर अछि जखन हमरा लोकनिक पूर्वज लोकनि लोककेँ नदीक समीप अनबाक व्यवस्था केने छला। नदीक शुद्धताक निर्वाहक लेल उत्सर्जन आदिक विरुद्ध शास्त्रमे सख्त दिशा निर्देश छल। बिहारक छठि पर्व सूर्य पूजाक संग-संग नदीक प्रति हमर सबहक श्रद्धाक उत्कृष्ट उदाहरण अछि। हमर ई समृद्ध धरोहरक एगो छोट कड़ी अछि उत्तर बिहार, किशनगंज, पूर्णिया आ कटिहार क पूर्वी जिलासँ बहयवाली महानंदा नदी। महाभारतमे कौशिकी (कोसी) नदीक समीप बहैत दूटा नदी नन्द आ ऊपरी नन्दक उल्लेख अछि, जतऽ पाण्डव लोकनि निर्वासन कालमे ऐल छला। मानल जाइए जे महाभारत कालक ऊपरी नन्द वर्तमानक महानन्दा अछि। महानन्दाक सहायक नदी कंकाईक वर्णन सेहो महाभारतमे ऐल अछि जतऽ एकरा कंकानन्द कहल गेल अछि। सभ साल कटिहार जिलाक दुर्गापुर आ कल्याणीमे माघ पूर्णिमाक दिन मेला लगा कऽ महानन्दाक प्रति श्रद्धा व्यक्त कएल जाइत अछि। ऐ दिन ऐ इलाकामे काढ़ा गोला लग गंगाक कातमे मेला सेहो लगैत अछि । महानन्दा नदी महानन्दा उत्तर बिहारक एकटा मुख्य नदी अछि। ऐ नदीक उद्गम पश्चिम बंगालक दार्जिलिंग जिलाक करसेओंगसँ ६ किमी उत्तरमे हिमालयक चिमले अछि, जतऽ सँ ई २०६२ मी. ऊँचसँ गंगा ल्ल ३७६ किमी.क यात्रा प्रारम्भ करैत अछि। कनकाईक संगमक बाद महानन्दा बागझोर लग बड़ही-गुवाहाटी राष्ट्रीय राजमार्ग ३१ (राष्ट्रीय राजमार्ग ३१) पार कऽ बागडोब पहुंचैए जतऽ ओकर धारा दू भागमे बँटैत अछि। बगडोबमे लगभग सीधा दक्षिण दिस बहयबला धाराकेँ झौआ शाखा कहल जाइ छै आ महानंदाक अधिकांश जल प्रवाह आइ-काल्हि ऐ धारासँ गुजरैत अछि। झौआ शाखा स्वयं आगू बढ़ैत पनार नदीक दहिना कात एकरा संग मिलैत अछि। ई शाखा आगू झौआक पास कटिहार-बरसोई रेल लाइन आ लाभा लग कटिहार-मालदा रेल लाइनकेँ पार करैत अछि। महानन्दाक झौआ शाखाक एकटा आर सहायक नदी घासिया एकरा लाभाक नीचाँ जोड़ैत अछि। एतऽसँ महानन्दाक झौआ शाखा पश्चिम बंगालक मालदा जिलामे प्रवेश करैत सुरमरा लग गंगा नदीमे मिलैत अछि। बगडोबमे महानन्दाक एगो आर शाखा जे दक्षिण-पूर्व दिशामे बहै छै, बरसोई लग कटिहार-बरसोई रेल लाइन पार करैए। बरसोईक नीचाँ ई धार सेहो दू भागमे बँटैत अछि। ऐमे सँ पूर्व दिस बहयबला धारा बेसी सक्रिय अछि, पश्चिम दिस बहय बला धारा उनटा-पुनटा भऽ गेल अछि आ ऐ मे गाद-बालूक जमाव अछि। ई धारा पुनः सुबरनापुर लग मुख्य धारामे जुड़ैए। आब ई संयुक्त धारा बांग्लादेशक गोदागिरी घाट लग गंगा संग मिलैत अछि। महानन्दाक कुल जलग्रहण क्षेत्र २४,७५३ वर्ग किलोमीटर छै, जइमेसँ ५२९३ वर्ग किलोमीटर नेपालमे, ६६७७ वर्ग किलोमीटर पश्चिम बंगाल मे, ७९५७ वर्ग किलोमीटर बिहारमे आ बाकी बांग्लादेशमे पड़ै छै। डेंगरा घाटक उत्तरमे ऐ नदीक तलहटीक ढलान अपेक्षाकृत अधिक छै, जे धनगरा घाटक नीचाँ आस्ते-आस्ते कम होइत जाइ छै, जइ कारण नदीक प्रवाह क्षमता धीरे-धीरे कम होइत जाइ छै, आ नदीक उपयोग अक्सर एकर किनारपर उमड़ि जाइ छै। निचला भागमे झौआ शाखाक बेड स्लोप ०.०९९ मीटर प्रति किलोमीटर अछि जखन कि बरसोई शाखाक बेड स्लोप ०.१४६ मीटर प्रति किलोमीटर अछि। साठिक दशक आ आगूक सरकारी रिपोर्टक अनुसार ऐ ढलानक अभावक परिणामस्वरूप महानन्दाक निचला भागमे करीब एक सप्ताह जल-भराब रहै छल, जकर परिणामस्वरूप तत्कालीन पूर्णिया (नवगठित कटिहार) क दक्षिणी भागक विनाश भेल। ऐ सभ रिपोर्टक अनुसार कटिहारक ऐ दुर्दशामे महानंदे नै वरन् कारी कोसी आ गंगा नदीक सेहो काफी योगदान छल। महानन्दाक सहायक नदीक विशेषता रहल अछि जे ओकर कोर्स बदलैत रहैत अछि, संगहि ओकर नाम सेहो ओहिना बदलैत रहैत अछि। जेना पनार नदीक अनेक नाम अछि जेना पनार, परमान, परमौन, कडवा, रीगा, कंकर, फुलहर बा गंगाजुरी। जेना-जेना जगह बदलैत अछि, नदीक नाम सेहो बदलैत रहैत अछि। तहिना बकरा नदीक नाम अलग-अलग स्थान पर बकरा, कटुआ धार वा देवनी भऽ जाइत अछि। एकर जलग्रहण क्षेत्रमे कनकाईक बहुत रास नव-पुरान धारा छिड़िआयल अछि। मेची, दाउक, रमजान, कुलिक, सुधानी आ नगर नदीक स्थिति सेहो लगभग एहने अछि। ऐ नदी सभक धार बँटैत रहैत अछि, ऐ मे बहैत पानिक मात्रामे परिवर्तन होइत रहैत अछि आ तहिना एकर महत्व सेहो बढ़ैत बा घटैत रहैत अछि। ऐ क्षेत्रक सर्वेक्षण पहिल बेर १७७९ मे ब्रिटिश शासनक स्थापनाक बाद जेम्स रेनेल नामक सैन्य अभियंता द्वारा कएल गेल छल। ओइ समयक महानन्दाक प्रवाह मार्गक आधिकारिक वर्णन रेनेलक नक्शासँ भेटैत अछि। तकर बाद डॉ. फ्रांसिस बुकानन हैमिल्टन (१८०९-१०), रॉबर्ट मॉन्टगोमरी मार्टिन (१८३८), आ डॉ. डब्ल्यू.डब्ल्यू.हंटर (१८७७) सेहो ऐ नदीक क्रमक विवरण देने छथि। महानन्दाक विषयमे ई कहल जाइ छै जे ई आर्य प्रभावक अंतिम पूर्वी छोड़ तँ छहिये, ऐ क्षेत्रक इतिहास पश्चिमसँ आबैबला आक्रमणकारी आ मूल निवासीक बीचक संघर्षक सेहो रहल छै। इम्पीरियल गजेटियर ऑफ इन्डिया (भारतीय शाही) राजपत्रक अनुसार 'महानन्दा पश्चिमक हिन्दी भाषी क्षेत्र आ पूर्वक बंगाली भाषी क्षेत्रक बीचक सीमाक काज करै छै। जनसंख्याक आंकड़ाक अनुसार हिन्दी भाषी आबादी ९४.६ प्रतिशत जखन कि मात्र ५ प्रतिशत बंगाली भाषी छै। मुदा डॉ. ग्रियर्सनक अनुमान छलन्हि जे लगभग एक तिहाइ लोक बांग्ला बजैबला हेतै आ ई बात सही लगैत अछि। महानन्दा सीमा रेखाक रूपमे सेहो काज करैत अछि। पूर्णिया जिलामे पूबमे दू तिहाइ आबादी मुसलमान छल, जखन कि पश्चिममे एक तिहाइसँ कम। मुदा महानन्दाक बिना कोसीक वर्णनक अपूर्ण रहत। कोसी नेपाल आ बिहारक एकटा बहुत महत्वपूर्ण नदी अछि, जे ५४०० मीटरक ऊँचाइपर हिमालय पर्वतक मुख्य श्रृंखलासँ निकलैत अछि, तिब्बत, नेपाल आ उत्तर बिहार होइत लगभग ७२५ किमी यात्रा केलाक बाद ई कुर्सेला (कटिहार) लग गंगामे मिलैत अछि। बिहारमे ऐ नदीक लम्बाइ २५४ किमी अछि जखन कि मैदानमे ऐ नदीक कुल लंबाई ३०७ किमी अछि। तीन धारा अर्थात सूर्य कोसी, तामा कोसी आ अरुण कोसीक संगमसँ बनल कोसी नदीक कुल जलग्रहण क्षेत्र ५८,५९४ वर्ग किलोमीटर छै जइमे ५,७०४ वर्ग किलोमीटर ग्लेशियर छै। पौराणिक लेख, किंवदंती, लोककथा आ लोकगीतक अलाबे कोसीक विषयमे लिखित जानकारी अंग्रेज लोकनि द्वारा तैयार कएल गेल छल। हुनकर सबक यात्रा-वृत्तांत आ सर्वेक्षण रिपोर्टमे ऐ नदी सभक विषयमे बहुत चर्चा भेल, ओना हुनकर मुख्य उद्देश्य छल ऐ क्षेत्रक प्राकृतिक संसाधनक दोहन कऽ राजस्व वसूली कएल जाय। फ्रांसिस बुकानन (१९०९-१०) आ रॉबर्ट मॉन्टगोमरी मार्टिन (१८३८) क यात्रा-वृत्तांत आ हंटरक "स्टैटिस्टिकल अकाउन्ट्स ऑफ बंगाल" (१८७७) मे ऐ नदीक विषयमे बहुत लिखल गेल छै। ऐ रिकॉर्डसँ पता चलै छै जे कोसी बहुत दिनसँ चैनल बदलै लेल बदनाम अछि, जकर कारण छै एकर अधिक गाद। १७३६ सँ १९५५ क बीच उपलब्ध अभिलेखसँ अनुमान अछि जे ऐ कालखंडमे ई नदी पूर्णियासँ पूर्व बहैत छल, से आब ११० किमी पश्चिम दिस शिफ्ट भऽ गेल अछि आ सुपौल, मधुबनी, सहरसा, खगड़िया जिलासँ गुजरैत अछि आ गंगासँ मिलैत अछि। स्थानीय लोकक कहब छनि जे कोसी कहियो मालदा (पश्चिम बंगाल) होइत बहैत छल आ बुकानन हैमिल्टनक अनुसार ई नदी मालदासँ पूब सेहो बहल हएत। बुकानन लिखै छथि- "कोसीक कातमे रहनिहार स्थानीय विद्वान बा पंडित लोकनि एते धरि कहै छथि जे प्राचीन कालमे कोसी दक्षिण पूर्व दिशामे ताजपुर धरि बहै छल। जकर बाद ई पूब दिस बहै छल आ अंततः ब्रह्मपुत्रसँ मिलै छल आ एकर गंगासँ कोनो संबंध नै छल। हमरा नै बुझल अछि जे ऐ कथनक आधार की अछि, लोककथा बा किंवदंती। जँ ई किंवदंती अछि तँ ई कनी बेसी विश्वास करय योग्य भऽ जाइत अछि, मुदा ई हएब एकदम संभव बुझाइत अछि। संभव अछि जे मालदाक पूर्व आ उत्तरमे अवस्थित पैघ-पैघ सरोवर कहियो कोसी आ महानन्दाक अवशेष छल। ... उपरोक्त परिवर्तनमे कोसीमे कमसँ कम कंपनीक सीमामे कोनो नदी बाम कात नै मिलैत अछि, मुदा ऐसँ कइएकटा धार जन्मैत अछि। उत्तरक पहाड़सँ आबयबला बहुत रास नदी आब महानंदासँ मिलैत अछि आ ई एकदम संभव अछि जे ई नदी पहिने कोसीसँ मिलैत छल जखन कि एकर धार पूर्वोत्तर दिस छल....।" हंटर (१८७७) मुदा बुकाननक विचारसँ सहमत नै छला आ कहलनि जे "डॉ. बुकानन हैमिल्टनक ई सुझाव जे कोसी ब्रह्मपुत्रसँ मिलै हेतै, हुनकर बाकी सिद्धांतक तुलनामे कनी कम संभावित लगैत अछि। लगैत अछि जे पूर्वमे ब्रह्मपुत्रक मार्ग मेमन सिंहक पूब छल। कोसी अपन पूब दिसक मार्गपर, पहिने करतुआ सँ मिलत, जे स्वयं एकटा नदी अछि, जे आत्रेयी आ तीस्ताक पानिसँ पुष्ट अछि। हम अपन पोथी अकाउन्ट ऑफ डिस्ट्रिक्ट बोगरा (खण्ड VIII पृ० १३९, १४२, १६२) मे हिन्दू कालक प्रारम्भसँ ऐ नदीक आकार आ महत्वक आधारपर महत्वकेँ रेखांकित केने छी आ कहने छी जे ई नदी स्पष्ट रूपसँ मानव प्रजातिक सीमा रेखाक काज करैत अछि जे आइयो देखबामे अबैत अछि। जँ ई मानी जे पहिने करतुआमे कोसी आ महानन्दाक भेंट होइ छल तखन पूर्व कालमे करतुआक पैघ आकारक कारण बुझि सकै छी आ तखन राजशाही जिलाक बरिन्द्रक जंगल आ मेमन सिंहक मधुपुरक बीचक रेतक मैदानक कारणा स्हो बुझि सकै छी। ऐ शताब्दीक प्रारंभमे जइ क्षेत्रमे ब्रह्मपुत्र बहै छल ओकर तर्क सेहो स्पष्ट भऽ जायत। असलमे पूर्णिया आ दरभंगाक बीच एक इंच जमीन एहन नै अछि जतऽ कोसीक धार कहियो नै बहल हुअय। एकर विभिन्न धाराक अनेक नाम छै- सौरा, बरंडी, करिकोसी, मराकोसी, तिलावे धार, हैयाधर, बोचाहा धार, मझरी धार, धेमुरा धार, मिर्चैया धार, लगुनिया धार आदि-आदि। जइ धारमे कोसीक मुख्य धार बहै छल से कोसी बनि गेल। ऐ तरहें कोसी आ महानन्दाक बीचक क्षेत्र सदिखन बाढ़ि आ जल कटावक क्षेत्र रहल अछि, जकर बहुत श्रेय कोसीकेँ जाइ छै। मुदा जतऽ धरि बाढ़िक प्रश्नक गप्प अछि, महानन्दाक शोर कोसीक शोरमे कखनो-काल सुनबामे अबैत अछि।" घनघोर जंगल, दुर्गम सड़क आ कम दूरीपर नदीक उपस्थिति- संभवतः ऐ सभ कारणसँ पाण्डव लोकनि अपन निर्वासन लेल ऐ क्षेत्रकेँ चुनने हेता जे पौराणिक कथामे बहुत महत्वपूर्ण स्थान रखैत अछि। कहल जाइत अछि जे महाभारत कालमे ई क्षेत्र कर्णक अधीन छल। कुर्सेला, जतऽ कोसी गंगासँ मिलैत अछि, कौरव राज्यमे पड़ल आ तखन कुरुशिलाक नामसँ जानल जाइ छल। एक समय मनिहारी (कटिहार) क मूल नाम मणिहारन छल जतऽ भगवान श्री कृष्णक औंठीक रत्न हेरा गेल छल। सिमल जंगल जतऽ अर्जुन अज्ञात निवासमे अपन हथियार नुका देने छला ओ वर्तमान सेमापुर अछि जे कटिहार-बरौनी सड़कपर एकटा रेलवे स्टेशन अछि। तहिना किशनगंज जिलाक ठाकुर गंज शहरक विषयमे एकटा किंवदंती अछि जे ई राजा विराटक राज्यक हिस्सा छल आ एत्तै भीम अपन निर्वासनमे भनसिया(ठाकुर) क रूपमे बितेने छला। ऐ टोलमे भटधला आ सगधला नामक दू टा पोखरि अछि, जइमे भीम चाउर आ साग राखैत छला। ठाकुरगंजसँ कनेक दूर ओ स्थान अछि जतऽ भीम कीचककेँ मारि देने छला। ऐ जिलासँ बाहर निकलयबलाक तुलनामे बाहर जेबाक परंपरा उल्लेखनीय अछि। पूर्णियाक लोक खेतमे मेहनतिसँ बचै छथि आ रोजी-रोटीक तलाशमे जिलासँ बाहर जेनाइ नीक नै लगै छनि। क्षेत्रफलकेँ देखैत जनसंख्या कम अछि, जमीन आसानीसँ उपलब्ध अछि आ श्रम कम। ई किछु एहन बात अछि जे पूर्णेयाक लोककेँ बाहर निकलैसँ रोकैत अछि। एत संख्यामे लोक खेतीक मौसममे अस्थायी रूपसँ बाहरसँ आबै छथि। ई बात १९६३ मे कहल गेल। ट्रेनक छतपर बैसलासँ एहन दुर्घटना होइत अछि जइमे लोकक मृत्यु भऽ जाइत अछि आ ऐ तरहक घटनामे कोसी, महानन्दा दोआबक लोकक मृत्यु भेल अछि। भवन ढहलासँ सेहो मरला आ खाड़कुसक हाथसँ सेहो। १९६३ सँ १९९३ क बीच किछु एहन निश्चित रूपसँ भेल जे पूर्णियाक खेतमे मेहनतिसँ बचयबला लोक आ रोजी-रोटीक तलाशमे जिलासँ बाहर जेनाइ पसिन नै करय बला लोक जानक कीमत चुका बाहर जा कऽ दोसराक खेतमे मेहनत करबा लेल मजबूर भेला। जखन कि कहियो स्थिति एहन छल जे कटाइक समय आ जखन असमक चाहक बगानमे मजदूरक जरूरत पड़ैत छल तँ कटिहार आ ओइसँ आगू जायबला ट्रेनमे उत्तर प्रदेश आ बिहारक अलग-अलग हिस्साक मजदूरक भीड़ रहै छल..। असलमे जँ एहन मजदूर कटनीक समय पूर्णिया नै जाइत तखन फसल खास कऽ जूटक कटाइ एकदम संभव नै होइतै। समृद्धिसँ दुर्दशा दिसक ई यात्रा पिछला तीस वर्षमे भेल। पछिला चारि दशकमे विकासक प्रभाव ऐ तरहेँ स्पष्ट रूपसँ देखबामे आबि रहल अछि। कोसी-महानन्दा दोआबक ई क्षेत्र अचानक मजदूरक मामलामे सरप्लस केना भऽ गेल? एकर एगो कारण छै जे ऐ क्षेत्रमे बाढ़िक कारणसँ बेशी जमीन बहुत दिन धरि पानीमे डूमल रहै छै आ खेती-बारी संभव नै छै। ओना ऐ सभ लेल खाली बाढ़ि एकमात्र कारण नै अछि, कारण आइ जँ उत्तर बिहारमे बाढ़ि आबि गेल अछि तँ दक्षिण बिहारमे रौदी अछि, मुदा ओतुक्का लोककेँ विकासक लगभग ओहिना खराप परिणाम भेटैत रहल अछि जतेक उत्तर बिहारक लोककेँ। ओतऽ बाढ़ि नै अछि, तैयो ई किए भऽ रहल अछि? ओतऽ सेहो बच्चा सभ स्कूल नै जाइत अछि, ओतऽ सेहो लोक मजदूरीक खोजमे निकलैत अछि।' मुदा संगे हमरा सभ लेल ई पचायब मुश्किल अछि जे ई सभटा जनसंख्या बढ़लाक कारण अछि। कृषि एहन क्षेत्र अछि जइमे रोजगारक अधिकतम संभावना अछि। तेँ जँ कोनो तरहेँ खेती-बाड़ी ठीक भऽ जाय तँ कतेको लोक जमीनसँ जुड़ि जायत आ ट्रेनक छतपर भीड़ कनेक कम भऽ जायत। महानन्दा नै, मुदा कोसीक बाढ़िपर चर्चा पछिला शताब्दीक उत्तरार्धसँ चलि रहल अछि। भारतक अन्य भागमे कोसीक उदाहरण बाढ़ आनैबला नदीक देल जाइत अछि आ ई नदी कोनो बाढ़िक चर्चाक केंद्रमे बनल रहैत अछि। स्वतंत्रताक बाद ऐ नदीपर नियंत्रण करबाक प्रयास भेल, आ ऐ संग लगभग पूरा गंगा आ ब्रह्मपुत्र घाटीमे नदीपर नियंत्रण करबाक प्रयास भेल आ ऐ क्रममे महानन्दाक सेहो आबि गेल। (अगिला अंकमे जारी) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.१३.नित नवल सुशील (लेखक गजेन्द्र ठाकुर) सुशीलक रचना संसार: हुनकर रचना संसार छन्हि- घराड़ी (उपन्यास) (१९७३), गामबाली (उपन्यास) (१९८२), भामती (नाटक) (पहिल मंचन १९९१, प्रकाशन २०१३) आ अस्मिता (लघुकथा संग्रह) (२०१६) आ ई चारू पोथी हुनकर अनुमतिसँ विदेह पेटारमे उपलब्ध अछि लिंक www.videha.co.in/pothi.htm पर। कमलानन्द झाक पोथी "मैथिली उपन्यास: समय समाज आ सवाल" (२०२१) मे लिखै छथि- "मैथिली उपन्यास-यात्राक लगभग सय वर्षक बाद मैथिल अन्तरजातीय विवाहक सपना, संघर्ष आ विडम्बना पर गरिमायुक्त उपन्यास लिखबाक श्रेय गौरीनाथकेँ जाइत छनि।" तँ की कमलानन्द झा सुशीलसँ ई श्रेय छीनि लेलनि? चलू अहाँकेँ लऽ चली कमलानन्द झा केर स्वार्थी दुनियाँसँ दूर, छल-छद्मसँ दूर सुशीलक जादूबला साहित्यक निश्छल दुनियाँमे। गामबाली (उपन्यास)- सुशील (पछिला अंकसँ आगाँ) सभक आँखिक काँट गामबाली आइ ओ बबूर सेहो कटि गेल! ओकरा चाहऽ बला, नै चाहऽ बला आ कात रहनिहार, तीनू तरहक लोक खुश अछि। ओकर अन्तिम संस्कार के करतै? जादव समाज आकि ब्राह्मण समाज। जादव समाज आ ब्राह्मण समाजक लोक पहुँचै छथि मालिक माने सोनमनि झा लग, ओ छथि पाउ-पाउ करैत, मसलनमे ओङठल। गामबालीक संस्कार जादव समाज मिलि कऽ करतै। गोअर टोलीक लोक ओकरा गामबाली कहब शुरू केलकै आ फेर बभनटोली, कैथटोली, जोलहा टोलीक लोक सेहो ओकरा गामबाली कहऽ लगलै। गामबालीक वर बूढ़, ओ तेसर बहु छली, पहिलसँ बच्चा नै भेलै तँ दोसर बियाह आ फेर दोसरोमे बच्चा आ पहिलोमे। आ फेर तेसर बियाह सौख लेल। बाबू पैरुखक गप छै, के कत्ते बहु डेबि सकैए। ज्ञानचन यादव माने ज्ञनचनमाकेँ लोक मरखाह बना देलकै, अपने बलजोरी ओकरा घरो कऽ दऽ जाइ गेलै आ तहन लाहेब मचा दइ गेलै गाममे। गामबाली जीवित रहलि, ओकर जिजीविषा आर प्रबल भऽ गेलै बादमे। बड़े शानसँ आवाजाही करैत रहलि, कोनो अरचन नै एलै। आमिल पिनहार समाङ लेल धनसन, कुलटा बुझिनिहार लेल कत्तौ किछु नै। जे ओकरा संगे भौजीक सम्बन्धे हँसी ठट्ठा करै तकर ओ जवाब दै हँसि कऽ। गुअरटोलीसँ ओकरा गामबाली कहबाक प्रचार भेलै आ सौंसे गाम पसरि गेलै। मुदा गामबालीक कोनो सम्बन्ध अपन ऐ गामक अपन पुरान सासुरक परिवारसँ नै रहलै। मुदा खान-पान, लेब देब सौंसे बाभन-गच्छसँ छूटल रहलै। आइ ओकर मृत्युक बाद ओकर प्रशंसक कम नै छै, शानसँ आयलि आ शानसँ चलि गेलि। धनक ऐंठल बूढ़ संगे गामबालीक बियाह भेल रहै, पतिक तेसर पत्नी। सखा-पात लेल बूढ़ दोसर बियाह केलनि फेर दोसरो आ पहिलोसँ बच्चा भेलनि। तेसर पत्नी सख लेल, लौल लेल केलन्हि। छिनरबा मनसा सभ ओकरा दूरि करऽ चाहलकै आ ज्ञानचनमाकेँ मरखाह बना देलकै। आ उपन्यासकार शुरू करै छथि ज्ञानचन यादवक खिस्सा। ओ पैघकेँ बाबा, काका, भाइ आ छोटकेँ बौआ, बच्चा आ नूनू कहय। कोनो आंगन नै रहै जतऽ ओकर प्रवेश नै रहै। दाइ, काकी, बहिन, बचियासँ ओकर मुँह टूटै। मुदा कनियाँ-पुतराक अंगनामे हठ दऽ जाइत साइते कियो देखने हेतै। बूढ़ि-पुरैनियाँक हठ केलोपर भावहुक अंगना ओ धखाइते जाइ छल। बाबी, माय आ पिउस श्रेणीक स्त्री कहितथिन- एहेन लजकोटर भऽ कऽ बैदगिरी केना करै छह। (अगिला अंकमे जारी) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.पद्य खण्ड ३.१.राज किशोर मिश्र- थाकल छी मुदा थकलहुँ नहि ३.२.आशीष अनचिन्हार- २ टा गजल ३.३.उदय नारायण सिंह नचिकेता- २ टा कविता ३.१.राज किशोर मिश्र- थाकल छी मुदा थकलहुँ नहि राज किशोर मिश्र, रिटायर्ड चीफ जेनरल मैनेजर (ई), बी.एस.एन.एल.(मुख्यालय), दिल्ली,गाम- अरेर डीह, पो. अरेर हाट, मधुबनी थाकल छी, मुदा थकलहुँ नहि

था कल छी , मुदा थकलहुँ नहि , घा म सँ ती तल, महकलहुँ नहि ।

पञ्चपा त्र सॅं दऽ अछि नजल, जा हि गा छक केलहुँ ति रपेच्छन, सुखा रहल अछि वृक्ष ओ, अरुदा के, ओकर केलक भक्षण?

हँ, हरि अर डा रि सभ सुखा रहल अछि , प्रदूषण मा था भुका रहल अछि ।

लक्ष्य -पथ केॅं पा वन बुझि , कर्तव्य सँ करैत रहलहुँ पूजन, अपना भरि तऽ चलि ते रहलहुँ, दुनु पा एर फुलल, ओहि मे सूजन।

छी ठा ढ़ , ध्येय सँ कि छु पहि ने, चलल ने हो इछ, तऽ छी ॲंटकल, कुंठा , अवसा द सभ केलक प्रहा र, परञ्च, कनेको नहि छी भटकल।

समस्या ,अजो ध -अजो ध ना ग बनि क' फुफका रि रहल अछि , का त-करो ट दऽ नि कलि ने सकै छी , ता कि -ता कि , खेहा रि रहल अछि ।

चलल जखन सँ हमर जि नगी , आ, पहुँचल एखन जा हि पड़ा ब, संघर्ष -घा म सँ ती तल, ओकरा , सदि खन,घेरने रहलैक ख्वा ब।

ललका रा सुनैत रहलहुँ चुनौ ती क, खो ली , मुह मुनल सफलता -पौ ती क।

जि नगी -युद्घक यो द्घा बनलहुँ, चक्रव्यूह के तो ड़ि ते रहलहुँ। हुँ

घुमि ते रहलहुँ संघर्ष -परि धि मे, लगअओने आँखि वि जय के नि धि मे।

जयका र कखनो ,

कखनो फटका र, को शि श सुफल , कखनो बेका र।

कखनो , पुरुषा र्थक भरी हुंका र, वि धुआइ कखनो , सुनि क'हुतका र।

सुनी कखनो क' मो न के वा द , ओकरे सँ, कखनो करी वि वा द।

बा हरो युद्ध ,अन्दरो युद्ध, रण- यो द्घा कखनो , कखनो बुद्ध।

भेटल कि छु , आ कि छु छूटल, भा ग, नी क, कखनो फूटल।

इएह सभ करैत -करैत जि नगी संग, आबि गेलहुँ एहि ठा म, कतहु बा ट सो झरा एल भेटल, कतहु तऽ भेटल ,जा म।

जि नगी , खएलक समय के, आ कि , समय खएलक जि नगी , रहस्य बनल अछि अपने मे, ओ, जड़ि सँ लऽ कऽ फुनगी ।

था कल मो न, आ'था कल देह, मुदा , घटल ने लक्ष्य सँ एखनो नेह।

था कि गेलहुँ तऽ की भेलै? जो द्घा छी बूढ़ ,मगर लड़ैत रहब, जी तब की हा रब, जा नि ने, मुदा , था कि ओक'हम बढ़ैत रहब। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.२.आशीष अनचिन्हार- २ टा गजल आशीष अनचिन्हार २ टा गजल १

किनको भेटै फूलक रंग किनको भेटै काँटक रंग

चुप्पे रहलै मंचक पात्र बदलल लागल नाचक रंग

पूरा पूरी मोनक चाह आधे रहलै आधक रंग

अपने रहलै हरियर गाछ पीयर भेलै पातक रंग

नीपल ढ़ौड़ल बहुते झूठ भखरल भखरल साँचक रंग

सभ पाँतिमे 22-22-22-21 मात्राक्रम अछि।

बेपारी छै ताल बैताल हाटक बड़का जाल बैताल

कारी कारी कर्मक बलपर गोटी भेलै लाल बैताल

इच्छा बनि गेलै भस्मासुर अपने बनलै काल बैताल

जा धरि दियाद गलि नै गेलै दबने रहलै माल बैताल

हुनकर मोनक हुनकर देहक हमरो कहलक हाल बैताल

बाँकी नै छै कोनो गाछी आबै साले साल बैताल

सभ पाँतिमे 22-22-22-22 मात्राक्रम अछि। दू टा अलग-अलग लघुकेँ दीर्घ मानल गेल अछि। ई बहरे मीर अछि। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.३.उदय नारायण सिंह नचिकेता- २ टा कविता उदय नारायण सिंह नचिकेता २ टा कविता अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। 112 || http://www.videha.co.in/ ISSN 2229-547X VIDEHA विदेह ३६६ म अंक १५ मार्च २०२३ (वर्ष १६ मास १८३ अंक ३६६)|| 111

अनुलग्नक ४.१०. : ४.१०.१. मैथिलीमे छद्म समीक्षा आ कमलानन्द झा (प्रसंग- चोर लेखक पंकज झा पराशरक नूतन साहित्य चोरिक खुलासा-विदेह अंक ३६२-३६३-३६४ आ ओइपर पाठकीय टिप्पणी)/ ४.१०.२: प्रसंग- चोर लेखक पंकज झा पराशरक पुरान साहित्यिक चोरिक खुलासापर पाठकीय टिप्पणी आ किछु प्रमाण अनुलग्नक ४.१०.१.विदेह: प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004). http://videha.co.in/ अंक ३६२-३६३-३६४ क रिपोर्ट आ सम्पादकीय आ ओइपर पाठक लोकनिक टिप्पणी मैथिलीमे छद्म समीक्षा आ कमलानन्द झा प्रसङ कमलानन्द झाक पोथी "मैथिली उपन्यास: समय समाज आ सवाल" (२०२१) क शीर्षक भ्रामक अछि। ई हुनकर किछु सवर्ण उपन्यासकारपर किछु सिण्डिकेटेड कथित समीक्षात्मक आलेखक संग्रह अछि, २६३ पन्नाक ई पोथी हार्डबाउण्डमे लाइब्रेरीकेँ मात्र बेचल जा सकत, जतऽ ई सड़ि जायत, अमेजनसँ हम ई चारि सय पाँच टाकामे किनलौं मुदा ऐमे पाँचो पाइक सामिग्री नै अछि। एतऽ एकटा भूल सुधार अछि, एकटा गएर सवर्ण लेखक सुभाष चन्द्र यादवक उपन्यास 'गुलो'केँ बिनु पढ़ने ओ दू पाँति लिखलन्हि आ निपटा देलन्हि, ओ दुनू पाँति हम एतऽ अहाँक मनोरंजनार्थ प्रस्तुत कऽ रहल छी। अहाँ गुलो पढ़नहिये हएब, जँ नै पढ़ने छी तँ पहिने पढ़ि लिअ, कारण तखन बेशी मनोरंजक अनुभव हएत, गुलो सुभाष चन्द्र यादव जीक अनुमति सँ उपलब्ध अछि विदेह आर्काइवपर ऐ http://videha.co.in/pothi.htm लिंकपर। "उपन्यासक कमजोरी अछि लेखकक राजनीतिक पूर्वाग्रह। राजनीति विशेषक पक्षधरता रचनाक संग न्याय नहि कऽ पबैत अछि।" जइ उपन्यासमे राजनीति दूर-दूर धरि नै छै ओतऽ 'राजनैतिक पूर्वाग्रह' आ 'राजनीति विशेषक पक्षधरता'क तँ प्रश्ने नै छै। राजनीतिक पूर्वाग्रह बा पक्षधरताक सोङर धूमकेतु आ यात्री प्रयुक्त केलन्हि। सुभाष चन्द्र यादव जीक 'भोट' जे २०२२मे आयल जे सुभाष चन्द्र यादव जीक अनुमति सँ उपलब्ध अछि विदेह आर्काइवपर ऐ http://videha.co.in/pothi.htm लिंकपर, से राजनीतिपर अछि मुदा ओतहुओ सुभाषजीक भगता शैलीकेँ राजनीतिक पूर्वाग्रह बा पक्षधरताक सोङरक आवश्यकता नै पड़लै। पढ़ू हमर पोथी 'नित नवल सुभाष चन्द्र यादव' जे उपलब्ध अछि ऐ http://videha.co.in/pothi.htm लिंकपर। कमलानन्द झाक बिनु पढ़ने सुभाष चन्द्र यादवक विरुद्ध ब्राह्मणवादी जातिगत पूर्वाग्रह एकटा खतराक घण्टी अछि। जइ हिसाबे ब्राह्मणवादकेँ आगाँ बढ़बैले कमलानन्द झा वामपंथक सोङर पकड़ै छथि आ सामाजिक न्यायक बलि चढ़बऽ चाहै छथि, तकर प्रति समानान्तर धारा सचेत अछि। ई अपन बायोडाटामे गएर सवर्णसँ छीनि कऽ, समानान्तर धाराक लोकक हककेँ मारि कऽ लेल साहित्य अकादेमीक मैथिल अनुवाद असाइनमेण्टक गर्वसँ चर्चा करैत छथि। आ ई असाइनमेण्ट हिनका मेरिटसँ नै जातिगत टाइटिलसँ भेटल छन्हि, अही सभ किरदानीक एवजमे भेटल छन्हि। हिनका सन लोक लेल मैथिली बायोडेटाक एकटा पाँति अछि, समानान्तर धारा लेल जीवन-मरणक प्रश्न। कमलानन्द झाकेँ हम किए छद्म समीक्षक कहलियनि? कारण ओ छद्म समीक्षक छथि। ओ लिखै छथि- "मैथिली उपन्यास-यात्राक लगभग सय वर्षक बाद मैथिल अन्तरजातीय विवाहक सपना, संघर्ष आ विडम्बना पर गरिमायुक्त उपन्यास लिखबाक श्रेय गौरीनाथकेँ जाइत छनि।" तँ की कमलानन्द झा सुशीलसँ ई श्रेय छीनि लेलनि? की ई हुनकर ब्राह्मणवादी संस्कारक अहंकार- जे हम ककरो चढ़ा सकै छिऐ आ ककरो उतारि सकै छिऐ- केर पराकाष्ठा थीक, आकि हुनकर अध्ययनक अभावक प्रमाण? चलू अहाँकेँ लऽ चली कमलानन्द झा केर स्वार्थी दुनियाँसँ दूर, छल-छद्मसँ दूर सुशीलक जादूबला साहित्यक निश्छल दुनियाँमे।अहाँक स्वागत अछि सुशीलक साहित्यक दुनियाँमे। प्रस्तुत अछि सुशीलक 'गामबाली' (१९८२) जे आब उपलब्ध अछि विदेह आर्काइवमे लिंक http://videha.co.in/pothi.htm पर। पहिल पाँतीमे उपन्यास आरम्भसँ पहिनहिये 'गामबाली' उपन्यासक सम्बन्धमे सुशील लिखै छथि- "विधवा विवाह आ अन्तर्जातीय विवाहक समर्थनमे।" आ उपन्यास आरम्भ। गामबालीक मृत्यु आ तखने झमेला, गामबालीक दाह संस्कार के करतै? ब्राह्मण समाज कि जादव समाज? कमलानन्द झा केर मस्तिष्क आ दृष्टि फरिच्छ करबा लेल दू टा पोथी हम रिकोमेण्ड कऽ रहल छी, ओ पढ़थु: पहिल अछि सुशीलक गामबाली (उपन्यास) (१९८२) आ दोसर अछि हमर दूषण पञ्जी- The Black Book, दुनू उपलब्ध अछि http://videha.co.in/pothi.htm पर। सुशीलपर जखन हमर समीक्षा शुरू हएत तँ कमलानन्द झा लेल राखल एकटा शिक्षा ओतऽ हम देब। दिनेश कुमार मिश्रक 'दुइ पाटन के बीच मे' कोसी नदीक ऐतिहासिक आत्मकथा थीक, ओ मिथिलाक आन धार सभक ऐतिहासिक आत्मकथा सेहो लिखने छथि जेना बन्दिनी महानन्दा, बागमती की सद्गति!, दुइ पाटन के बीच में.. (कोसी नदी की कहानी), न घाट न घर, बगावत पर मजबूर मिथिला की कमला नदी, भुतही नदी और तकनीकी झाड़-फूंक, The Kamla River and People On Collision Course, Bhutahi Balan- Story of a ghost river and engineering witchcraft, Refugees of the Kosi Embankments। साहित्य अकादेमीक मैथिली परामर्शदात्री समितिक सदस्य पंकज झा पराशर द्वारा हिनकर पोथी सभसँ पैराक पैरा मैथिली अनुवाद कऽ अपना नामे उपन्यास छपबाओल गेल अछि, जकरा छद्म समीक्षक कमलानन्द झा ऐ चोर लेखकक रिसर्च कहै छथि! एतऽ स्पष्ट कऽ दी जे ई चोर लेखक आ छद्म समीक्षक दुनू अलीगढ़ मुस्लिम विद्यालयक हिन्दी विभागमे छथि। ई रिसर्च दिनेश कुमार मिश्रक थीक, जे आइ.आइ.टी. खड़गपुरसँ सिविल इन्जीनियरिङ मे बी. टेक. १९६८मे आ स्ट्रक्चरल इन्जीनियरिङमे एम.टेक. १९७०मे केने छथि, आ ओइ रिसर्च लेल क्वालिफाइड छथि। जखन कोनो विषयमे नामांकन नै होइ छै तखन लोक हारि-थाकि हिन्दीमे नामांकन लइए, नै तँ कमलानन्द झा केँ बुझऽ मे आबि जइतन्हि जे ई रिसर्च कोनो सिविल इन्जीनियरेक भऽ सकैत अछि, भऽ सकैए बुझलो होइन्ह। हिन्दी मूल आ मैथिलीक स्क्रीनशॉट आँगा संलग्न अछि। (http://videha.co.in/investigation.htm लिंकपर आर स्क्रीनशॉट अपडेट कएल जायत।) दिनेश कुमार मिश्र मिथिलाक नै छथि मुदा मिथिलाक सभ धारक कथा ओ लिखने छथि, हम सभ हुनका प्रति कृतज्ञ छी आ हुनकर ऋणसँ मिथिलावासी कहियो उऋण नै भऽ सकता, मुदा मूलधाराक पुरस्कार आ पाइ लोलुप लोकसँ कृतघ्नते भेटत से फेर सिद्ध भेल। ऐ लेखककेँ दस बारह बर्ख पहिने सेहो तारानन्द वियोगी उद्धारक भेटल छलखिन्ह जे लिखने रहथिन्ह जे ओ कवितामे प्रभावित भऽ अनायासे अपन रचनामे दोसरक सामिग्री चोरि कऽ लइ छथि, एहने सन। आब ऐ कमलानन्द झा क आश्रय तकलन्हि मुदा दुर्भाग्य! जइ हिसाबे ब्राह्मणवादकेँ आगाँ बढ़बैले कमलानन्द झा वामपंथक सोङर पकड़ै छथि आ सामाजिक न्यायक बलि चढ़बऽ चाहै छथि, तकर प्रति समानान्तर धारा सचेत अछि। सीलिंगसँ बचबा लेल जमीन-जत्थाबला लोक कम्यूनिस्ट बनला आ आब ब्राह्मणवाद बचेबालेल वामपंथक शरण, एहेन लोक सभसँ कम्यूनिज्मकेँ बहुत नुकसान भेल छै। दिनेश क़ुमार मिश्रक सभटा पोथी आब हुनकर अनुमतिसँ उपलब्ध अछि विदेह आर्काइवमेः http://videha.co.in/pothi.htm एतऽ एकटा गप मोन पाड़ि दी जे जखन बिल गेट्सकेँ पूछल गेलन्हि जे की ओ एक्स बॉक्स भारतमे पाइरेशीक डरसँ देरीसँ आनि रहल छथि? तँ हुनकर उत्तर रहन्हि जे माइक्रोसॉफ्ट पाइरेशीक डरे कोनो उत्पाद देरीसँ नै उतारने अछि। से विदेह पेटारमे हम सभ ऐ तरहक रिस्क रहितो एकरा आर समृद्ध करैत रहब, कारण समानान्तर धारामे सड़ल माँछ द्वारे पोखरिक सभ माँछ नै सड़ैए, एतुक्का मलाह गोट-गोट कऽ सड़ल माँछ निकालैत रहल छथि, निकालैत रहता। ऐ छद्म समीक्षक कमलानन्द झा पर हमर नजरि रहत। सिण्डीकेटेड समीक्षापर अन्तिम प्रहार। मूल दिनेश कुमार मिश्र (दुइ पाटन के बीच में... २००६): यह ध्यान देने की बात है कि 1923 से 1946 के बीच कोसी क्षेत्र में मलेरिया से 5,10,000, कालाजार से 2,10,000, हैजे से 60,000 तथा चेचक से 3,000 मौतें (कुल 7,83,000) हुईं। चोर पंकज झा पराशर (साहित्य अकादेमीक मैथिली परामर्शदात्री समितिक सदस्य) [जलप्रांतर २०१७ (पृ. १०३)]: मूल दिनेश कुमार मिश्र (दुइ पाटन के बीच में... २००६): भारतवर्ष में बिहार में कोसी नदी को बांधने का काम 12वीं शताब्दी में किसी राजा लक्ष्मण द्वितीय ने करवाया था और इस काम के लिए उसने प्रजा से 'बीर' की उपाधि पाई और नदी का तटबन्ध 'बीर बांध' कहलाया। इस तटबन्ध के अवशेष अभी भी सुपौल जिले में भीम नगर से कोई 5 किलोमीटर दक्षिण में दिखाई पड़ते हैं। डॉ. फ्रांसिस बुकानन (1810-11) का अनुमान था कि यह बांध किसी किले की सुरक्षा के लिए बनी बाहरी दीवार रहा होगा क्योंकि यह बांध धौस नदी के पश्चिमी किनारे पर तिलयुगा से उसके संगम तक 32 किलोमीटर की दूरी में फैला हुआ था। डॉ. डब्लू.डब्लू. हन्टर (1877) बुकानन के इस तर्क के साथ सहमत नहीं थे कि यह बांध किसी किले की सुरक्षा दीवार था। स्थानीय लोगों के हवाले से हन्टर का मानना था कि अधिकांश लोग इसे किले की दीवार नहीं मानते और उनके हिसाब से यह कुछ और ही चीज थी मगर वह निश्चित रूप से कुछ कहने की स्थिति में नहीं थे। फिर भी जो आम धारणा बनती है वह यह है कि यह कोसी नदी के किनारे बना कोई तटबन्ध रहा होगा जिससे नदी की धारा को पश्चिम की ओर खिसकने से रोका जा सके। लोगों का यह भी कहना था कि ऐसा लगता था कि इस तटबन्ध का निर्माण कार्य एकाएक रोक दिया गया होगा। छद्म समीक्षक कमलानन्द झा द्वारा चोर उपन्यासकारक पीठ ठोकब, देखू छद्म समीक्षक कमलानन्द झा द्वारा उद्धृत चोर पंकज झा पराशर (मैथिली उपन्यास, समय, समाज आ सवाल पृ. २५७-२५८): चोर पंकज झा पराशर (साहित्य अकादेमीक मैथिली परामर्शदात्री समितिक सदस्य) [जलप्रांतर २०१७ (पृ. ३१)]: मूल दिनेश कुमार मिश्र (दुइ पाटन के बीच में... २००६): कोसी के प्रवाह कि भयावहता की एक झलकफिरोजशाह तुगलक की फौज के सन् 1354 में बंगाल से दिल्ली लौटने के समय मिलती है। बताया जाता है कि जब सुल्तान की फौजें कोसी के किनारे पहुँचीं तो देखा कि नदी के दूसरे किनारे पर हाजी शम्सुद्दीन इलियास की फौजें मुकाबले के लिए तैयार खड़ी हैं। यह वही हाजी शम्सुद्दीन थे जिन्होंने हाजीपुर तथा समस्तीपुर शहर बसाये थे। फिरोज की फौजें शायद कुरसेला के आस-पास किसी जगह पर कोसी के किनारे सोच में पड़ गईं। नदी की रफ्तार उन्हें आगे बढ़ने से रोक रही थी। आखिरकार फैसला हुआ कि नदी के साथ-साथ उत्तर की ओर बढ़ा जाय और जहाँ नदी पार करने लायक हो जाय वहाँ पानी की थाह ली जाये। सुल्तान की फौजें प्रायः सौ कोस ऊपर गईं और जियारन के पास, जो कि उसी स्थान पर अवस्थित था जहाँ नदी पहाड़ों से मैदानों में उतरती थी, नदी को पार किया। नदी की धारा तो यहाँ पतली जरूर थी पर प्रवाह इतना तेज था कि पाँच-पाँच सौ मन के भारी पत्थर नदी में तिनकों की तरह बह रहे थे। जहाँ नदी को पार करना मुमकिन लगा उसके दोनों ओर सुल्तान ने हाथियों की कतार खड़ी कर दी और नीचे वाली कतार में रस्से लटकाये गये जिससे कि यदि कोई आदमी बहता हुआ हो तो इस रस्सों की मदद से उसे बचाया जा सके। शम्सुद्दीन ने कभी सोचा भी न था कि सुल्तान की फौजें कोसी को पार कर लेंगी और जब उस को इस बात का पता लगा कि सुलतान की फौजों ने कोसी को पार करने में कामयाबी पा ली है तो वह भाग निकला। चोर पंकज झा पराशर (साहित्य अकादेमीक मैथिली परामर्शदात्री समितिक सदस्य) [जलप्रांतर २०१७ (पृ. १०५)]: Parallel Literature in Maithili and Videha Maithili Literature Movement Pseudo-criticism in Maithili and the case of Kamalananda Jha The title of Kamalanand Jha's book "Maithili Novel: Time, Society and Questions" (2021) is misleading. It is a collection of some syndicated so-called critical articles on some of his caste novelists. The 263-page book can only be sold in hardbound to libraries where it will rot. Here is a correction, a non-caste writer's work, i.e., Subhash Chandra Yadav's novel 'Gulo', has been dealt with by him in two lines, of course without reading it. I am presenting those two lines here for your entertainment. You must have read Gulo, if you haven't already, read it first because then you will have a more entertaining experience. Gulo is available on Videha Archive with the permission of Subhash Chandra Yadav at this link http://videha.co.in/pothi.htm. "The weakness of the novel is the author's political bias. The partisanship towards a particular politics does not do justice to the work." In a novel where politics is not remotely involved, there is no question of 'political bias and partisanship of a particular politics'. Dhumketu and Yatri used political bias or partisanship. Subhash Chandra Yadav's 'Vote' which came out in 2022 and is available with permission of Subhash Chandra Yadav on Videha Archive at this link http://videha.co.in/pothi.htm, is on politics but even there Subhashji's enchanting style obviates the need of any political bias... Read my book 'Nit Naval Subhash Chandra Yadav' which is available at this link http://videha.co.in/pothi.htm. On the other hand, Mr Kamlanand Jha sounds like a spokesperson of some political party or a casteist organisation rather than a literary critic. Kamalananda Jha's Brahministic bias against Subhash Chandra Yadav is an alarm bell. The parallel stream is conscious of how Kamalananda Jha takes the leftist stance to promote Brahminism and wants to sacrifice social justice. In his biodata, he proudly mentions the Maithili translation assignment bestowed on him by the Sahitya Akademi, and this assignment was allotted to him not on account of merit but solely on the ground of his caste title and in lieu of these deeds. For people like him, Maithili-related work is merely a line in their curriculum vitae, but it is a question of life and death for the people of the parallel stream. Why did I call Kamalananda Jha a pseudo-critic? Because he is a pseudo-critic. He writes: "After nearly a hundred years of journey, Gaurinath is credited with writing a dignified novel on the dreams, struggles and ironies of inter-caste marriage. So, did Kamalananda Jha take away this credit from Sushil? Is this the culmination of the arrogance of his Brahministic upbringing ("Through my whims and fancies I can place some literature on top and can downgrade some to the bottom") or is this the evidence of his lack of study? Let me take you away from the selfish world of Kamalananda Jha, away from deception and disguise to the sincere world of Sushil's magical literature. Welcome to the world of Sushil's literature. Here is Sushil's 'Gambali' (1982) which is now available in the Videha Archive at the link http://videha.co.in/pothi.htm. In the first line of this novel, even before the novel begins, Sushil writes about the novel 'Gambali': "In support of widow marriage and inter-caste marriage" and here begins the novel. The death of a village woman and then the trouble ensues, who will cremate this village woman? Brahmin community or Yadav community of the village? Dinesh Kumar Mishra's 'Dui Patan Ke Bich Me' is a historical biography of the Kosi River. He has also written historical biographies of other rivers of Mithila like 'Bandini Mahananda,' 'Bagmati Ki Sadgati!', 'Dui Patan Ke Bich Me... (Story of the Kosi River)', Na Ghat Na Ghar, Kamla River, 'Bhutahi River and Technical Herbalism', The Kamla River and People on Collision Course, Bhutahi Balan- Story of a Ghost River and Engineering Witchcraft, Refugees of the Kosi Embankments. Pankaj Jha Parashar, a member of the Maithili Advisory Committee of the Sahitya Akademi, Delhi has plagiarised paragraph after paragraph from his books and has published a novel in Maithili in his name, which pseudo-critic Kamalananda Jha mentions as research of this thief author Pankaj Jha Parashar! Let me clarify here that both the thief writer and the pseudo-critic are in the Hindi department of Aligarh Muslim University. This research is done by Dinesh Kumar Mishra, who is a graduate of IIT, Kharagpur in Civil Engineering (in 1968) and M. Tech in Structural Engineering (in 1970) and is qualified for that research. In Hindi, the cut-off for admission is the lowest across universities, otherwise, Kamalananda Jha would have known that this research could be done by a civil engineer only. The Hindi original and Maithili screenshots are attached below. Dinesh Kumar Mishra is not from Mithila, but he has authored the story of all the streams of Mithila. We are grateful to him, and the people of Mithila will remain indebted to him for this. This thief writer Pankaj Jha Parashar is a habitual offender. More than a decade ago he found a saviour in Mr Taranand Viyogi who wrote that he (thief writer Pankaj Jha Parashar) gets influenced involuntarily stole others' material in his works. Now he has found another saviour in Kamalananda Jha. The parallel stream is conscious of how Kamalananda Jha takes the leftist side to promote Brahminism and wants to sacrifice social justice. Communism has suffered a lot from people who became communists to escape the land ceiling. All books by Dinesh Kumar Mishra are now available in the Videha Archive with his permission: http://videha.co.in/pothi.htm Let us recall here that when Bill Gates was asked whether he was delaying the introduction of the X-Box in India for fear of piracy. His answer was Microsoft never delays the launch of products for fear of piracy. We will continue enriching Videha Archive (http://www.videha.co.in/archive.htm ), despite such risks because not all the fish in the pond rot by some rotten fish in parallel streams. The fishermen here have been and will continue to remove such rotten fish. The final blow to syndicated pseudo-literary criticism in Maithili. Original Dinesh Kumar Mishra (Dui Patan Ke Beech Me... 2006): It is noteworthy that between 1923 and 1946, 5,10,000 people died of malaria, 2,10,000 from Kala Azar, 60,000 of Cholera and 3,000 of smallpox in the Kosi region (783,000 total deaths). Thief Pankaj Jha Parashar (Member of Maithili Advisory Committee of Sahitya Akademi, Delhi) [Jalpranthar 2017 (p. 103)]: Original Dinesh Kumar Mishra (Dui Patan Ke Beech Me... 2006): On the Kosi River in Bihar, India, a dam was built by King Laxman II in the 12th century and for this, he received the title of 'Bir' from the people and the embankment of the river was called 'Bir Dam' The remains of this embankment are still visible in Supaul district, about 5 km south of Bhim Nagar. Dr Francis Buchanan (1810-11) speculated that the dam must have been an outer wall built to protect a fort as it stretched over a distance of 32 kilometres from Tilyuga to its confluence on the western bank of the Dhaus river. Dr W.W. Hunter (1877) did not agree with Buchanan's contention that the dam was the protective wall of a fort. Quoting locals, Hunter believed that most people did not consider it a fortress wall and according to him it was something else but he was not in a position to say anything. Yet the common impression is that it must have been an embankment built along the Kosi River to prevent the river's current from sliding westwards. People also said that it seemed that the construction of the embankment had suddenly stopped.

The pseudo-critic Kamalananda Jha's saviour of the habitual offender thief Pankaj Jha Parashar quoted the plagiarised work as follows: (Maithili Novel, Time, Society and Questions pp. 257-258): Thief Pankaj Jha Parashar (Member of Maithili Advisory Committee of Sahitya Akademi, Delhi) [Jalpranthar 2017 (p. 31)]: Original Dinesh Kumar Mishra (Dui Patan Ke Beech Me... 2006): A glimpse of the horrors of the Kosi River can be seen in the event when the army of Feroz Shah Tughlaq returned to Delhi from Bengal. It is said that when the troops of the Sultan reached the banks of the Kosi, they saw that on the other side of the river, the troops of Haji Shamsuddin Ilyas were waiting, ready for a battle. This was the same Haji Shamsuddin who founded the cities of Hajipur and Samastipur. Feroze's troops were stranded on the banks of the Kosi somewhere around Kursela. The speed of the river was preventing them from moving forward. It was finally decided to proceed northward along the river and to locate the water where it was navigable. The troops of the Sultan went up about a hundred kos and crossed the river near Ziaran, situated at the same place where the river descended from the mountains into the plains. The river was thin, but the flow was so fast that heavy stones weighing five hundred manas were floating like straws in the river. On either side of the river where it was found possible to cross it the Sultan erected a row of elephants, and ropes were hung in the bottom row so that if a man loses control he could be rescued with the help of these ropes. Shamsuddin never thought that Sultan's troops would be able to cross the Kosi and when he came to know that Sultan's troops had managed to cross the Kosi, he fled. Thief Pankaj Jha Parashar (Member of Maithili Advisory Committee of Sahitya Akademi, Delhi) [Jalpranthar 2017 (p. 105)]: (More screenshots will be updated at this link http://www.videha.co.in/investigation.htm  soon.) पाठकीय टिप्पणी …………………………….. उपन्यासकार के छथि, पंकज पराशर (जल प्रांतर उपन्यास) दुखद RabindraChaudhary …………………………………….. बड दुर्भाग्यपूर्ण, आपत्तिजनक आ आपराधिक कृत्य.. KumarManojKashyap ……………………………………….. ईसभ पढ़ि बहुत चिंतित छी। R N Mishra ……………………………….. दुर्भाग्यपूर्ण Kalpna JhaPatna …………………………………………………… आहिरेबा..! फेर ई के छैथ? पंकज पराशर (जल प्रांतर उपन्यास) हे भगवान..! ई ठीके चोरे छैथ। Umesh Mandal …………………………………………………….. Gaurinath: नीक। एहन चोर केर देखार करब जरूरी पंकज पराशर (जल प्रांतर उपन्यास) ओकर त लेखकीय जीवने चोरी पर टिकल छै आ तकरा प्रश्रय देब'वाला सेहो मैथिली मे कम नहि। ……………………………………. एहने चोर लोक सभ मैथिली आर मिथिला के अहित करय मे सदैव आगू रहैत छथि JhaPrasanna ………………………………….. एकरा कोर्ट मे लऽ जेबाक चाही य़ोगेन्द्र पाठक वियोगी +91 98310 37532 …………………………………………………………………. SubhashChandraYadav: I condemn it. The thief must be exposed. …………………………………… अति दुखद, निन्दनीय ManojPathak ………………………………………. सादर आभार। कोट कर सकैत हतन। परंतु श्रोत के चर्चा करनाई आवश्यक हय।न त साहित्यिक चोरी मानल जायत। RamanandMandal ……………………………………… धन्यवाद। VidehaKeshavBhardwajDelhi ……………………………………………… Nabo Narayan Mishra दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति …………………………………………….. Mukund Mayank Oh ……………………………………………… प्रदीप पुष्प बहुत खराप बात। ……………………………………………. Abhilash Thakur · घृणित कार्य! लज्जा जोग ……………………………………….. Ajit Kumar Jha पता नहि लाजो नहि लगैत छन्हि एहन प्रवृति वाला महानुभाव सब केँ। एहन लोग सब केँ लेल सेहो अलग सँ पुरस्कारक घोषणा होयबाक चाही। पर्दाफाश करबाक लेल अपने केँ साधु वाद । ………………………………………………….. Ramesh Kumar Sharma पुरस्कार पाबै के जल्दबाजी हेतै ………………………………………………… Kunal उपन्यास आ तकर लेखकक नाम घोषित करु ……………………………………………….. Ashish Anchinhar Kunal जी, जँ कोनो समान्य पाठक ई प्रश्न पुछने रहितथि तखन हमरा नीक लागैत। प्रबुद्ध पाठक ओ लेखक वर्गसँ ई प्रश्न एबाक मतलब छै जे स्थिति गंभीर भऽ गेल छै। ओना जखन पुछिये देलहुँ अछि तखन एकर उत्तर अछि- पोथी, जलप्रांतर, पंकज पराशर। एहि पोथीक गदगदी आलोचक, कमलानंद झा। ……………………………………………………… Kunal Ashish Anchinhar धन्यवाद । एना सार्वभौम जकां छइ जे बेस गंभीर आरोप लगाओल जाइ छइ मुदा नाम नइ लेल जाइ छइ।एना हमरा हाइपोक्रेसी क चरम लगइए। ई अनसोहांत छी ।......... आब नाम ल गेल छइ। त हमरा लगइए जे पंकज परासर (उपन्यासकार) आ कमलानंद झा ( आलोचक ) के बाजक चाही । ……………………………………………………………. Lakshman Jha Sagar एहेन चोरक सामाजिक बहिष्कार हेबाक चाही।आगि पानि ढ़ाइठ देबाक चाही।मुँह मे कारी चुन लेपि के गदहा पर सरेआम घुरेबाक चाही।एहेन कुदशा कय देबाक चाही जे फेर क्यो एहेन घृणित काज नै करय। ………………………………………………………… Chitragupta Chitragupta अत्यन्त दुखद …………………………………………………. जगदानन्द झा 'मनु' · मिथिला मैथिलीमे साहित्यक चोरी जगजाहिर अछि। मुदा आब साहित्य अकादमी आ ओकर लेकक द्वारा…. बहुत निंदनीय काज, एहेन एहेन लोककेँ अवश्य देखार करबा चाही ………………………………………………………….. श्रीधरम ई पंकज परासर, हम त' पढ़बाक आवश्यकता नहि बुझलहुं। प्रतिभाक नाम पर मात्र जुगाड़ छनि हिनका लग। …………………………………………………………….. आशीष अनचिन्हार नित नवल दिनेश कुमार मिश्र पढ़लहुँ आ एहि संदर्भमे हम अतबे कहब जे तारानंद वियोगी वा कमलानंद झा सन प्रबुद्ध लोक आगुओ पंकज पराशर एवं ओहने साहित्यिक चोरक संरक्षणमे अबिते रहताह। कारण ई जे ई प्रबुद्ध लोक सभ सेहो ओही मानसिकता केर छथि। ………………………………………………….. अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। अनुलग्नक ४.१०.२: प्रसंग- चोर लेखक पंकज झा पराशरक पुरान साहित्यिक चोरिक खुलासापर पाठकीय टिप्पणी आ किछु प्रमाण विदेह: प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004). http://videha.co.in/ अंक २६-५० क रिपोर्ट पर टिप्पणी (प्रसंग- चोर लेखक पंकज झा पराशरक पहिलुका साहित्य चोरि) ……………………… kellner@ucla.edu" Dear Gajendra, thanks for the detective work. was there a response? best regards, Douglas Kellner, Philosophy of Education Chair Social Sciences and Comparative Education, University of California-Los Angeles, Box 951521, 3022B Moore Hall, Los Angeles, CA 90095-1521, Fax 310 206 6293, Phone 310 825 0977 http://www.gseis.ucla.edu/faculty/kellner/kellner.html ………………………… dear Gajendraji, apnek mail milal. Pankajjik kritya janike bar dukh bhel. Ahi se maithilik nam kharab hoyat achhi. Apnek kadam ekdum uchit achhi.- Rajiv K Verma …………………………. These People are hellbent to bring down the literary discourse down to the gutter. Now you have been receiving mails like one. We are with you and i have forwarded your mails to Maithili speaking people all across the country. Sir I have sent the link of Parashar's duplicacy to several people along with Pranabh Bihari who had traslated that article. I had telephonic conversation with him also and he was quite upset over Parashar’s duplicay. Pranav is my junior and a good friend of mine. since you have referred Pranav who had traslated that article it is unfortunate that he was misused by Parashar. But i must congratulate you for exposing scam run by Parashar and his team. Parashar, though must not be blamed if he lifted the article of Nom Chomskey . Now i must doubt the artistic sensibility of Parashar who is now a pseudo-- intellectuals. I am amazed that how did he dare to publish the article of Nom Chomskey as his own. God bless him no more. - VIJAY DEO JHA ……………………………………… dhanyvad. muda ehne lok sabjagah aadar pabait achi. -shridharam ………………………………………………… अहां कें सूचनार्थ पठेने छी (किछु घृणित काज पंकज पराशरक) जे पंकज पहिनेहो इ सब काज करैत रहय छलैए।- aavinash ……………………………………………………… Dear Gajendra g, You are doing very well in the field of collecting all the documents related to the Maithili. Videha. Com realy a adventureous collection. I will also find some time to learm the article published through the videha. Now your detective style theft the sleeping of many of the so called literary personnel. Go a head. jai Maithili jai Mithila- Sunil Mallick, President, MINAP, Janakpur ………………………………………………….. your efforts are commendable. Anysuch ghost writer or fake identity holder must be boycotted from literature at once Thanks.- shyamanand choudhary ………………………………………………….. Namaskar. Chetna samitik sachiv ken mailak copy hastgat kara del achi.- Dr. Ramanand Jha' Raman' …………………………………………………. प्रिय गजेन्द्र जी , चेतना समिति हिनका सम्मानित कएलक अछि सेहो हमरा ज्ञात नहिं | यद्यपि हमहू चेतना क स्थाई सदस्य | जे हो. मुदा निंदास्पद घटना तं ई थिके तें दुखी कयलक | कतिपय नव मैथिल-प्रतिभाक आकलन-मूल्यानकनक हमर अपन स्नेग्रही स्वभाव, एहि दुर्घटनाक बाद तं आब चिंता मे ध' देलकय| देखी, हम अपने विस्मित भेलहुँ| बहुत दु:खद दृश्य | सृजन विरूद्ध साहित्यिक सन्दर्भ मे ई घटना आधुनिक मैथिलीक बहुत कुरूप प्रसंग क' क' स्मरण कैल जायत- सस्नेह,- गंगेश गुंजन. ………………………………………………. PRIYA MAITHILJAN, APPAN BHASHA- SANSKAR-SANSKRITI KE ASMARAN KARU AA EHAN VIVADAASAPAD LEKANI B KARANI KE VIRAM DIYA. ESWAR KE SAKCHI MANI - DIL PAR HATH RAKHI AA KULDEVI KE ASMARAN K-K YAD KARU KI SACHHAI KE KATEK KARIB CHHI.NIK BATAK LEL MANCH KE UPYOG KARI TA UTTAM. DHANYABAD.SAPREM- PK CHOUDHARY ………………………………………………………… Gajendra babu, pankaj puran chor achhi. Ham sab okar likhit ninda das sal pahine aarambh me kene rahi. Okra ban k kay ahan nik kayal. Chetna samiti ke seho samman wapas lebak chahi aa okar ninda karbak chahi.- subhash Chandra Yadav ………………………………………………………. प्रिय ठाकुरजी! (माननीय संपादक), “विदेह ई-पत्रिका” [मैथिली], एखन धरिक उपलब्ध साक्ष्यक आधार पर हम अपनहिक संग जाएब पसिन्न करब।- शंभु कुमार सिंह ………………………………………… Dear Gajendraji, I fully agree with you that we must fight against blatant cases of wrongful appropriation. हां अपन मेल में लिखने छी जे विदेह आर्काइव से संबंधित लेखक'क सबटा रचना हटा लेल जायत। अहि से आर्काइव सं ई प्रसंग सेहो, एकर साक्ष्य सेहो मेटा जायत। हमर मत ई जा साक्ष्यब रहबाक चाही निक आ अधलाह दुनु तरहक काज'क। अहां अप्पसन कामेंट आ र्निणय सेहो आर्काइव मे जा के संबंधित रचना के पोस्टा-स्क्रिाप्टर के रुप मे भविष्या'क पाठक'क लेल सुरक्षित राखि सकैत छियन्हि। ई दोहरेबाक बहुत औचित्यक नहि जे विदेह निक लागि रहल अछि आ अहांक परिश्रम एकदम देखा रहल अछि। ईति,सदन।- Sadan Jha ………………………………………. Thank you.- Nishikant Thakur …………………………………………… Thanx Gajendraji, for your immediate response. I must congratulate you for the work you have done to save the sanctity of the literature world as a whole. I feel proud for the person like you who shows the courrage to bell the cat. If the so called writers like Parasharji are there to spoil the sea, on the other side it is very hopeful sight to have a person like you who is alert enough to take care of such filth & keep the sea clean. Thanx for enlightening me on the subject. Regards- Bhalchandra Jha. ………………………………….. पंकज पराशरकेर एहन कार्य पर स्मरण अबैत अछि करीब बीस-पचीस साल पहिलुक घटना, जहिया आकाशवाणी दरभंगासँ म,म,डॉ, सर गंगानाथ झाक एकमात्र मैथिलीक कारुणिक पदकेँ एक गोट कवि द्वारा अपन कहि प्रसारित कए देल गेल छल, जे बादमे (सजग श्रोता द्वारा सूचना देलाक बाद) आजन्म बैन कए देल गेलाह । कहबाक तात्पर्य जे जँ हम मैथिल दरभैगा- मधुबनीमे गंगानाथ बाबूक पदकेँ अपन कहि सकैत छी तँ ई कोन बड़का गप। निश्चये एहन रचनाकारकेर सङ्ग कड़गर डेग उठाएब आवश्यक ।- ajit mishra …………………………………….. Dear Gajendrajee, We should take strong step to prevent such intellectual cheats. My support is always with you.- K N Jha ………………………………………………. This seems to be a dangerous trend and we should also try and refrain from publishing anything from such authors. Regards,- Prof. Udaya Narayana Singh ……………………………………………………….. प्रियवर ठाकुर जी, मैथिल साहित्यकार आब साइबर क्राइम सेहो क रहल छथि, ई जानि अपार प्रसन्नता भेल | पंकज पराशर के नकारात्मक बुद्धिक पूर्ण उपयोग करबाक लेल हम नोबेल प्राइज सा सम्मानित कराय चाहैत छी |- बुद्धिनाथ मिश्र ……………………………………………….. Sampadak Mahoday, Apne ehi prakarak durachar rokwak lel je prayash ka rahal chhee ohi lel dhanyabad.Ehen blackmailer sa maithili ken bachayab aawashyak achhi, Sadar- SHIV KUMAR JHA …………………………………………………. गजेन्द्र भाई, नमस्कार ! मैथिली मे एहि तरहक काज लगातार भ' रहल अछि । किछु व्यक्ति एहि धंधा मे अग्रसर छथि । मैथिलीक सम्पादक लोकनिक अनभिज्ञताक फायदा कतेको अंग्रेजी पढ़निहार तथाकथित साहित्यकार लोकनि उठा रहल छथि । पंकज जीक पहल मे छपल लेख के हम सेहो पढ़्ने र्ही आ किछुए दिनक बाद हम नेट पर मूल लेखकक आलेख के सेहो पढ़लहु । हमरा त' आश्चर्य लागल छल जे पंकज जी आलेखक कम स कम शीर्षक त' बदलि लैतथि मुदा हुनका एतेक ज्ञान रहितनि तखन की छल । एतबे नहि , हिनक बहुत रास कवितो अंग्रेजी साहित्य स' हेर-फेर कयल गेल अछि । खैर ! जे करथि ... । मुदा एहि बेर कहाबत ठीक होबाक चाही " सौ सोनार के त' एक लोहार के " । प्रकाशन मे जे भी कियो व्यक्ति गलती क' रहल छथि हुनका गंभीर क्रिमिनल बुझबाक चाही । धन्यवाद एहि लेल अहाँ के जे एतेक जोरदार तरीका स' एहि गप्प के उठैलहु ।- अहाँक- प्रकाश चन्द्र (प्रकाश झा, मैलोरंग) ………………………………………………. pankaj parashar vala prasang bar dukhad laagal. - kamini ……………………………………… Gajendr jee, maamailaa ke tool jatabe debainhi, sabhak oorjaa otabe svaahaa hetai. हमर मनतब एतबे, जे एक बेर अहां देखार क देलहुं, आब छोडि देल जाओ. हिन्दीयो मे एहिना भ रहल छै. बेर बेर आ खराब भाषा मे लिखल मोन के दुखी करैत अछि. फेर लागैत अछि जे अहि मे समय कियैक नष्ट करी? हिन्दुस्तान मे जाति आ सेहो मैथिली से जाति नयि जाएत. हम एकरा नयि मानैत छलहुं मुदा आब 30 बरख से मैथिली मे लिखनाक बाद आब देखल जे एक ओर 1 मैथिली साहित्य मे लिली जी, उषा जी आ शेफलिका जी के बाद यदि किओ नाम लैत अछि त हमर. 2 एखनो कोनो पत्रिका बै छै त हमरा लेल रचनाक आग्रह होइते छै. 3 एखनो हम ओतबे सक्रिय छी आ निरंतर लिखि रहल छी. 4 दुखद जे हमरा बाद (सुस्मिता पाठक आ ज्योत्स्ना मिलन के हम अपने तुरिया बुझैत छी) के बाद एहेन कोनो सशक्त कोन, महिला लेखने नयि आएलए. 5 ई स्थिति रहलाक बादो, आब जहन हम देखै छी, त पाबै छी जे हमरा पर, हमर रचना यात्रा अथव हमर रचना पर किछु नयि लिखल गेलए, चाहे ओ मोहन भारद्वाज रहथु अथवा आन किओ. जहन हमर दशक केर चर्च होइत छै, तीन चारिटा नाम पर सविस्तार चर्चा होइत छै, जाहि मे हमर नाम नयि रहैत छै. हमर नाम मात्र सन्दर्भ लेल जोडि देल जाइत छै. 6 एतेक दिन मे मात्र रमण जी हमरा पर एक गोट लेख लिखलन्हि. हम ओकरा पुन: टाइप करबा के अहां लग पठायब. 7 जाति पाति धर्म आ द्वेष पर कहियो ध्यान नयि देलाक कारणे त कही हमर ई स्थिति नयि छै, आब हमरा ई सोचबा मे आबि रहल अछि. 8 हमर शिक्षक, जे स्वयं हिन्दी के ख्यातिलब्ध कथाकार छथि, हमरा बुझेने रहलाह जे हम मैथिली मे लिखब बन्न क; दी, कियैक त हम गैर मैथिल (जाति विशेष) से नयि छी, तैं हमर लेखन के कहियो मैथिल सभ नयि नोटिस करताह, कहियो किछु नयि करता.. अपन भाषाक प्रति प्रेम के आगरह कारणे हम हुनकर बात नयि मानलियै, लिखैत गेलहुं, मुदा आब लागि रहलअए जे हुनकर कहबी सही छलन्हि की? 9 एखनो की हाल छै मैथिली मे, देखियो. ओकरा विरुद्ध किछु करियु. मैथिली मे जे पैघ पैघ संस्था चाइ, चेतना समिति सनक, सभ बेर विद्यापति पर्व मनबैत छथि. लाखो खर्च करै छथि, मुदा नीक लेखक केर पोथी सभ बेर 5-7 टा निकालैथु, से नयि होबैत छन्हि. 10 हमरा भेटल जानकारी के मोताबिक विद्यापति हॉल किराया पर चढै छै. तकरा मे कोनो आपत्ति नयि, यदो ओकरा से किछु आय होबै. मुदा ओकरा मैथिलीक काज अथवा नाटक आदि लेल मांगल जाएत, त; नयि भेटै छै. यदि ओकर शुल्क चुका दी, तहन त किरायाके रूप मे किऊ ल' सकि छै. एकरा सभ के उजागर करी. 11 व्यक्ति से संस्था पैघ होइत छै. जतेक संस्था सभ छै, तकरा पर लिखी, साहित्य अकादमीक मैथिली विभाग सहित. 12 लिली रेक सभटा रचनाक अनुवाद अधिकार हमरा देने छथि. हुनक साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त पोथी 'मरीचिका' केर हिन्दी अनुवाद लेल पिछला 2-3 साल से हम लिखि रहल छी. साहित्य अकादमीक पत्रिका 'समकालीन भारतीय साहित्य" मे हम पिछला 25 साल से अनुवाद सहित छपि रहल छी. मुदा हमरा से अनुवादक नमूना मांगल गेल. ओहि कुर्सी पर जे स्वनाम धन्य बैसल छथि, हुनका हमरा मादे नयि बूझल त कोनो मैथिल साहित्यकार से पूछि सकैत छलाह. ई तहिने भेलै, जेना एक बेर एक गोट चैनल ऋषिकेश मुखर्जी से हुनकर बायोडाटा मंगने छल आ एखनि पढल समाचारक अनुसारे आ. जानकी वल्लभ श्हस्त्री से हुनकर बायोडाटा पद्मश्री लेल मांअगल गेलैय. 13 अपन विनम्रता दर्शाबैत हम लिली जीक दू तीन टा कथाक हिन्दी अनुवाद हम पठा देलियन्हि. तैयो अई पर कोनो विचार नयि. लिखला के बाद हमरा कहल गेल जे हम लिली जी से साहित्य अकादमी के अनुवादक अधिकार दियाबे मे मददि करी. आरे भाई, अहां के अनुवाद से मतलब अछि ने, आ जहन हम अनुवाद क; के देब' लेल तैयार छी तहन अकादमी के किअयैक अधिकार चाही? अई लेल जे अकादमी अपन पसीनक आदमी के अनुवाद लेल द; सकय. एखनि धरि ओकरा पर निपटारा नयि भेलैये. अकादमी से फेर कोनो पत्र नयि आएल अछे. अनुवाद तैयार राखल छै. लिली जी आब बहुत बुजुर्ग भ; गेल छथि. हुनक मात्र इयैह इच्छा छै (आ बहुत स्वाभाविक) जे हुनकर पोथी सभ हुनका सोझा मे प्रकाशित भ; जाए. 14 लिली जी के पोथी हिन्दी मे आनबाक श्रेय हमरे अछि, ई मनितहुं ओकरा रेकॉर्ड केनाए मैथिल समीक्षक आवश्यक नयि बुझैत छथि. एकरा पर लडू. 15 मैथिली के भारतीय ज्ञानपीठ से पुस्तक प्रकाशन लेल हमही आगां एलहुं आ प्रभास जी आ लिली जी के पोथी बहार भेलै.भारतीय ज्ञानपीठ से मैथिली पुस्तक प्रकाशन के श्रेय हमरे छन्हि, ईहो मनैत ओकरा रेकॉर्ड केनाए मैथिल समीक्षक आवश्यक नयि बुझैत छथि. एकरा पर लडू. गजेन्द्र जी, मैथिलीक ई सभ मानसिकता पर आन्दोलन करी जाहि से रचनाकार आ वरिष्ठ रचनाकार सभ के अपमानित नयि होब' पडै. अहां चाही त' एकरा विदेह पर द' सकै छी. हम दोसर बात सेहो लिखि के पठायब. मुदा हम फेर कहब, जे हम व्यक्ति के नयि संस्था आ व्यक्ति के मानसिकता के दोष देबन्हि. लोक पढथु आ पूचाथु ई स्वनामधन्य सभ से जे जकरा से अहां के गोलौंसी अछे, तकरा पर अहां लिखब आ जकरा से नयि अछे, जे मौन भावे लिखि रहलए कोनो विविआद मे पडल बगैर, हुनका लेल ई व्यवहार? -विभा रानी. ………………………………………………. Shri gajendraji, good work. Anha sa ehina neer khshir vivekakak ummeed lagatar banal rahat. chor ke ehina dekhar kelak baad dandit seho karbak prayas karbaak chahi. anha bahut raas neek pahal ka rahal chhi. Saadhuvaad.- manoj pathak. …………………………………………… We should be greatful to Pankaj Parashar that he did not lay claim on the magnum opus of Kavi Vidyapati. I know him very well and his group as well. They have no love for Maithili in fact they are the moles planted by vested Hindi writers to damage maithili. Parashar and likes are the distructive lots and they are the culprits for agonising senior writers of Maithili those who dedicated their life for Maithili language and literature. I have no sympathy for him. I cant say, even, God bless them. - Chitra Mishra ………………………………………….. तारानन्द वियोगी: (मिथिला सृजन: जून-जुलाई २०१०, वर्ष-१, अंक-२): हुनक (पंकज पराशरक) अनेक रचना एहनो छनि जकर जन्म दोसरक काव्य रचना पढ़लाक अनन्तर भेलनि अछि। कविता ओ परिपूर्णतः हुनके थिकनि मुदा किछु गोटेकेँ ई कहबाक अवसर भेटि गेलनि जे ओ पंकज चोर-कवि थिकाह। हम देखैत छी जे चोर समीक्षक भने ओ होथु, चोर-कवि ओ कदापि नहि छथि। मुदा एना किएक भेल? एहि दुआरे भेल जे आनक रचना पढ़ि कऽ अपन अनुभूतिमे उतरैत काल ओ आनक आभामंडलसँ तेना आक्रान्त छलाह जे तकर छाप कविताक दृश्यमे देखार पड़ि गेल। ई वस्तुतः सिद्धताक कमी थिक, जकरा क्यो रचनाकार रचिते-रचिते सिद्ध कऽ सकैत अछि। ……………………………………………………….. गौरीनाथ (अनलकान्त)- सम्पादकीय अंतिका अक्टूबर-दिसंबर, 2009- जनवरी-मार्च, 2010- पंकज पराशर प्रसंगमे- हँ, दंद-फंद करैवला किछु लोक सब ठाम पहुँचि जाइ छै आ तेहन लोक एतहुँ अपन धूर्तता आ चोरि कला देखबै छथि। मुदा तकरो असलियत उजागर करब असंभव नइँ रहल। "विदेह"क गजेन्द्र ठाकुर एहन एक "युवा" (पंकज झा उर्फ पंकज पराशर) क असली चेहरा हाले मे देखोलनि। ………………………………………………….. ई पंकज झा पराशर पहिनहियेसँ एहि सभमे संलग्न अछि, हरेकृष्ण झाक कविताकेँ हिन्दीमे, बिना अनुमतिक, छपबै छथि; ई गप आर पुष्ट होइत अछि कारण विद्यानन्द झा जीक कविता सेहो ई पंकज झा पराशर एकटा हिन्दी पत्रिकामे बिना अनुमतिक छपबओलक (ई सूचना हरेकृष्ण झा जी द्वारा प्राप्त भेल, जे विदेहमे छपलाक बाद पंकज झा पराशर हुनका फोन कऽ कय टॉर्चर केलकन्हि जखन ओ बीमार रहथि। हरेकृष्ण झा जी फोन द्वारा सेहो सूचित केलन्हि, हम कहलियन्हि जे की ई सूचना विदेहसँ हटा दी? तँ हरेकृष्ण झा जी कहलन्हि, रहऽ दियौ, सत्य जे छै, से ईएह छिऐ- सम्पादक)। ई पंकज झा पराशर कएक बेर, केलक मुदा ऐ बेर तँ ओ अपने नामे दोसराक रचना छपबा लेलक, अनुवादक रूपमे नै।-सम्पादक) रमेशक आलेख-बहस-पंकज पराशरक साहित्यिक चोरि मैथिली साहित्यक कारी अध्याय थिक- पर किछु पाठकक विचार: SHIV KUMAR JHA TILLOO JAMSHEDPUR said... Ramesh jee ken dhanyavad,satya gapp bajwak saahas "MITHILA" me aabi rahal achhi neek laagal,chhadma lokpriyatak khatir lok kichu ka sakait achhi..Pankaj Parasharak..aab charch karab seho nahi sohay laagi rahal..jatek ninda kayal jay kum parat.Muda RAMESH BABU HU APNE SABH NINDA KARAY CHHEE AA KICHU LOK KAHAIT CHHATHI PANKAJ JEE JUG-JUG JIWATHU,ONA HAMHU HUNAK DIRGHA JEEVANAK KAAMNA KARAIT CHHEE,PARANCH SABHAK JE JUG-JUG JIWAK KAAMNA KAYAL JAY MATRA PANKAJ PARASHARAK LEL NAHI.."SARBE BHAWANTU SUKHINAH", RAMESH BABU APAN LEKHANI KEN GATI NIRANTAR RAKHAL JAY... Rama Jha said... ehi vyakti pankaj parasharak ekta ehane ghrinit message ekta mahila je hamar mitra chathi, ke bhetal chhai, etek ghrinit je etay nai likhi sakai chhi, apan rachna ke dosar bhasha me mool kahi prakashit kaenai chori te nai bhelai, muda okara svayam dvara anoodit kahi prakashit karebak chahe, mool maithili se dosar bhasha (hindi aadi me), va dosar bhasha (hindi aadi se) maithili me. आशीष अनचिन्हार said... जहाँ धरि पराशर- घटना अछि ओहि जतेक खिध्धाशं कएल जाए ततेक कम। मुदा रमेश भाइ विभारानीक कोन भाषा मे समीक्षा कएल जाए हिदीं मे की मैथिली मे । हमरा हिसाबे एकै रचना के दू- तीन भाषा मे मूल कहि प्रकाशित करब सेहो चोरि भेल। एहू पर धेआन देल जाए। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। रमेश बहस-पंकज पराशरक साहित्यिक चोरि मैथिली साहित्यक कारी अध्याय थिक विदेह-सदेह २ (२००९-१०) सँ पंकज पराशरक साहित्यिक चोरि आ साइबर अपराधक पापक घैलक महा-विस्फोट भेल अछि। ई पैघ श्रेय पत्रिकाक सम्पादक श्री गजेन्द्र ठाकुरकेँ जाइत छनि। हुनकर अपराध पकड़बाक चेतना केर जतेक प्रशंसा कयल जाय, कम होयत। “विदेह”क मैथिली प्रबन्ध-समालोचना- अंक, अइ पोल-खोल लेल कएक युग धरि विलम्बित भऽ कऽ निबद्ध रहत, से “समय केँ अकानैत” कहब कठिन अछि। साहित्योमे चौर्यकलाक उदाहरण पहिनहुँ अबैत रहल अछि गोटपगरा। मुदा एक बेरक चोरि पकड़ा गेलाक बाद प्रायः चोरिक आरोपी साहित्यकार मौन-व्रत धारण करैत रहलाह अछि आ मामिला ठंढ़ाइत रहल अछि। मुदा ताहि परम्पराक विपरीत अइ बेरक चोर ’सिन्हा चोर’ निकलल अछि आ विगत एक दशकसँ निरन्तर चोरि करैत जा रहल अछि- सेन्ह काटिकऽ। आ तेहेन महाचोरकेँ मैथिलीक साहित्यकार आ संस्था सभ तरहत्थीपर उठा-उठा कऽ पुरस्कृत केलक अछि आ समीक्षाक चासनीमे चोरायल कविता सबकेँ बोरि देल गेल अछि। विदेह-सदेह-२ प्रमाण-पुरस्सर अभियोगे टा नहि लगौलक, अपितु एहेन महत्वाकांक्षी असामाजिक तत्वक विरुद्ध साहित्यिक दण्ड आरोपित कऽ अपन “बोल्डनेस” सेहो प्रदर्शित केलक अछि। एक दशकमे तीन बेर पकड़ायल चोर प्रायः “डेयर डेभिल” होइत अछि आ अपन अनुचित। सीमाहीन महत्वाकांक्षाक पूर्ति लेल अपन वरीय संवर्गीय व्यक्तिकेँ सीढ़ीक रूपमे उपयोग करैत अछि आ स्वार्थ-सिद्धिक उपरान्त अपन पयर सँ ओही सीढ़ीकेँ निचाँ खसा दैत अछि। फेर ओकरा अपन ट्विटर-फेसबुक-नेट वा पत्रिकामे गारिक निकृष्टतम स्तरपर उतरऽ मे कनियों देरी नहि होइत छै। ओ नाम बदलि-बदलि कऽ गारि पढ़ैत अछि आ अपन प्रशंसामे जे.एन.यू.क छात्र-छात्राक पोस्टकार्ड लिखेबामे अपस्याँत भऽ जाइत अछि। ओ हिन्दीक कोनो बड़का साहित्यकारक बेटीक संग अपन नाम जोड़ि विवाहक वा प्रेम-प्रसंगक खिस्सा रस लऽ लऽ कऽ प्रचारित करैत अछि। एहेन प्रवृत्ति कएटा आओर तिकड़मबाजमे देखल गेल अछि जे हिन्दीक पैघ-पैघ नामक माला जपि कऽ मठोमाठ होअय चाहैत अछि। वस्तुतः ई चिन्ताजनक तथ्य थिक जे मैथिलीक नव-तूरकेँ हिन्दीक पैघ-पैघ नामक वैशाखीक एतेक जरुरति किऐक होइत छनि? “विदेहक” “इनक्वायरीक विवरण” पढ़ि कऽ रोइयाँ ठाढ़ भऽ जाइत अछि। पहल-८६ आ आरम्भ-२३ मे जे पोल खूजल छल, अइ तथाकथित साहित्यकारक, तकरा बादे मैथिली साहित्यसँ बारि देल जेवाक चाहैत छल। मुदा विडम्बना देखू जे चेतना समिति सम्मानित कऽ देलक। “मैथिल ब्राह्मण समाज”, रहिका (मधुबनी) सन अँखिगर संस्थाकेँ चकचोन्ही लागि गेल, जखनकि संस्थामे विख्यात साहित्यकार उदयचन्द्र झा “विनोद” आ पढ़ाकू प्रोफेसरगण छथि। ई संशयविहीन अछि जे पुरस्कृत करेबामे विनोदजीक महत्वपूर्ण भूमिका रहल हैत। “विदेह” द्वारा रहस्योद्घाटन केलाक बावजूद एखन धरि चेतना समिति अथवा मैथिल ब्राह्मण समाज, रहिकाकेँ अपन पुरस्कार आपस करेवाक वा आने कोनोटा कार्रवाई करवाक बेगरता नहि बुझा रहल छै आ सर्द गुम्मी लधने अछि। एहेन “जड़-संस्था” सभ मैथिली साहित्यक उपकार करैत अछि वा अपकार? ई केना मानल जाय जे पहल-८६ वा आरम्भ-२३ अइ दुनू संस्थाक कोनो अधिकारी वा साहित्यकारकेँ पढ़ल नहि छलनि? ई आश्चर्यजनक सत्य थिक जे मैथिलीक कएटा पैघ साहित्यकार पंकज पराशरक कृत्रिम काव्य आ आयातित शब्दावलीमे फँसि गेलाह अछि। “विलम्बित कएक युग मे निबद्ध” क भूमिकामे अनेरो विदेशी साहित्यकारगणक तीस-चालिस टा नाम ओहिना नहि गनाओल गेल अछि, अपन कविता केँ विश्वस्तरीय प्रमाणित करबाक लेल अँखिगर चोरे एना कऽ सकैत अछि। सम्भावना बनैत अछि जे डगलस केलनर जकाँ ओहू सभ कविक रचनाक भावभूमिक वा शब्दावलीक चोरिक प्रमाण एही काव्य-पोथीमे भेटि जाय। अंततः मि. हाइडक कोन ठेकान? मैथिलीमे तँ लोक विश्व-साहित्य कम पढ़ैत अछि। तकर नाजायज फायदा कोनो ब्लैकमेलर किऐक नहि उठाओत? आखिर टेक्नो-पोलिटिक्स की थिक- टेकनिकल पोलिटिक्स थिक, सैह किने? एकरा बदौलत झाँसा दऽ कऽ पाकिस्तानोक यात्रा कयल जा सकैत अछि। “टेक्नो-पोलिटिक्सक” बदौलत किरण-यात्री पुरस्कार, वैदेही-माहेश्वरी सिंह “महेश” पुरस्कार, एतेक धरि जे विदितजीक अकादमीयोक पुरस्कार लेल जा सकैत अछि। प्रदीप बिहारीक सुपुत्रक भातिज-कका सम्बन्धक मर्यादाक अतिक्रमण कयल जा सकैत अछि। प्रो. अरुण कमलक “नये इलाके में” सेंधमारी कऽ कऽ “समय केँ अकानल” जा सकैत अछि। आर तँ आर, अइ टेकनिकल पॉलिटिक्सक बदौलत जीवकान्तजी सन महारथी साहित्यकारसँ “विलम्बित कएक युग...” पोथीक समीक्षा लिखबा कऽ “मिथिला दर्शन” (५) सन पत्रिकामे छपवा कऽ स्थापित आ अमर भेल जा सकैत चछि। मैथिली साहित्यक सभसँ पैघ सफल औजार थिक “टेक्नो पोलिटिक्स”! ई मानल जा सकैत अछि जे मिथिला दर्शनक सम्पादककेँ आरम्भ-२३ आ पहल-८६ कोलकातामे नहि भेटल होइन्हि। मुदा जीवकान्तजी नहि पढ़ने हेताह से मानबामे असौकर्य भऽ रहल अछि। जीवकान्त जी तँ प्रयाग शुक्लक “चन्द्रभागा में सूर्योदय” आ एही शीर्षकक नारायणजीक कविता (चन्द्रभागामे सूर्योदय) सेहो पढ़ने हेताह जे छपल अछि मैथिलीमे। तखन पंकज पराशरक समुद्रसँ असंख्य प्रश्न पूछऽवला कविताक भावार्थ किऐक नहि लगलनि जे समीक्षामे कलम तोड़ि प्रशंसा करऽ पड़लनि वा करा गेलनि? एकरा “प्रायोजित समीक्षा” किऐक नहि मानल जाय? की प्रयाग शुक्ल वा नारायणजीक समुद्र विषयक कवितासँ वेशी मौलिकता पंकज पराशरक कवितामे भेटलनि जीवकान्तजीकेँ? ओइ सभ कविताक कनियोँ “छाया”क शंको नहि भेलनि समीक्षककेँ? “सभ्यताक सभटा मर्मान्तक पुकार”क नोटिस लेबऽवला समीक्षककेँ साहित्यिक चोरि असभ्य आ मर्मान्तक पीड़ादायक नहि लगलनि? आब जीवकान्तजी सन समीक्षकक “पोजीशन फॉल्स” भऽ जेतनि से अन्दाज तँ मिथिला दर्शनक सम्पादककेँ नहियें रहनि, उदय चन्द्र झा “विनोद” केँ सेहो नहि रहनि। ई अभिज्ञान तँ पंकजे पराशर टाकेँ रहल हेतनि? बेचारे “पराशर” मुनिक आत्मा स्वर्गमे कनैत हेतनि आ पंकसँ जनमल जतेक कमल अछि सब अविश्वसनीय यथार्थक सामना करैत हेताह। पराशर गोत्री भऽ कऽ तीन बेर चोरि केनाइ “पराशर” महाकाव्यक रचयिता स्व. किरणजीकेँ सेहो कनबैत हेतनि। आखिर जीवकान्तजी साहित्यिक चोरिक नोटिस किए ने लेलनि, जखनकि हुनका विचारेँ “मैथिलीक समीक्षक प्रायः मूर्खता पीबिकऽ विषवमन करैत अछि”(विदेह-सदेह-२-२००९-१०)/ विनीत उत्पल-साक्षात्कार आ जीवकान्तजी स्वयं पंकज पराशरक चोरिवला कविता-पोथीक समीक्षक छथि, अपितु चौर्यकला प्रवीण कविक घोर प्रशंसक छथि। तखन अइ समीक्षा-आलेखमे अन्तर्निहित असीम-प्रशंसा साकांक्ष-पाठककेँ “विष-वमन” कोना ने लगौक? हुनका सन “पढ़ाकू” समीक्षक-पाठककेँ “फॉल्स पोजीशन”मे अननिहार “एक्सपर्ट आ हैबिचुएटेड” साहित्य-चोरसँ प्रशंसा आ पुरस्कार दुनू पाबि जाय तँ मैथिली-काव्यक ई उत्कर्ष थिक वा दुर्भाग्य? अंततः विदेह-सदेह टा किऐक निन्दा केलक एहि घटनाक? आन कोनो पत्रिका किऐक नहि केलक? डॉ. रमानन्द झा “रमण” इन्टरनेटपर निन्दा करैत छथि तँ घर-बाहर पत्रिकामे किऐक नहि जकर ओ सम्पादक छथि? चेतना समिति, पटना सम्मानित करैत अछि एहने-एहने साहित्यकारकेँ तखन अपने पत्रिकामे कोना निन्दा करत, जखनकि पुरस्कार आपसो नहि लैत अछि, जानकारी भेलाक वा साकांक्ष साहित्यकारक अनुरोध प्राप्त भेलाक बादो? नचिकेताजी नेटपर निन्दा करताह आ “विदेह”मे छपत तँ “मिथिला दर्शन”मे किऐक नहि निन्दा वा सूचना छपल? कारण स्पष्ट अछि- जीवकान्तक समीक्षा पंकज पराशरक काव्य-पोथीपर छपत, तखन ओही पोथीक चोरि कयल कविताक निन्दा कोना छपत? चारु भाग साहित्यिक आदर्श, मर्यादा आ नैतिकताक धज्जी उड़ि रहल अछि- पितामह आ आचार्यगणक समक्ष आ (अनजाने मे सही) हुनको लोकनिक द्वारा। मैथिल ब्राह्मण समाज, रहिका; चेतना समिति, पटना आ साहित्य अकादेमी, नई दिल्लीमे अन्ततः कोन अन्तर अछि वा रहल? एहेन नामी पुरस्कारक संचालन आ चयनकर्ता महारथी सभकेँ नव लोककेँ पढ़बाक बेगरता किऐक नहि बुझाइत छनि? बिना पढ़ने पुरस्कारक निर्णय वा समीक्षाक निर्णय कतेक उचित, जखन कि ई चोरि तेसर बेरक चोरि थिक आ से छपि-कऽ भण्डाफोड़ भेल अछि। एकरा वरेण्य आ वरीय साहित्यकारगण द्वारा काव्य-चोरि, आलेख-चोरिकेँ प्रश्रय देल जायब किऐक नहि मानल जाय, जखनकि आरम्भ, मैथिल-जन, पहल आ विदेह-सदेह पहिनहि छापि चुकल छल? की साहित्यिक चोरिकेँ प्रश्रय देब, दलाल वर्गकेँ प्रश्रय देब नहि थिक? एहेन सम्भावनायुक्त नव कविकेँ प्रश्रय देब मैथिली साहित्य लेल घातक अछि वा कल्याणकारी, जकरा मौलिकतापर तीन बेर प्रश्न चेन्ह लागल होइक? की पोथीक आकर्षक गत्ता देखि वा विदेशी कविगणक नामावली (भूमिकामे) पढ़ि कऽ समीक्षा लिखल जाइत अछि वा पुरस्कारक निर्णय लेल जाइत अछि? जँ से भेल हो तँ सब किछु “ठिक्के छै भाइ”? अइ सबसँ तँ जीवकान्तजीक बात सत्य बुझाइत अछि जे समीक्षकगण दारू पीबि कऽ वा पैसा पीबि कऽ वा मूर्खता पीबि कऽ समीक्षा लिखैत छथि। डगलस केलनरक “टेक्नोपोलिटिक्स” तँ छपि गेल “पहल”मे चोरा कऽ। आब जीवकान्तजी, ज्ञान रंजनजी अथवा हिन्दी जगतक आन साहित्यकार-सम्पादकसँ पूछथु जे नोम चोम्स्कीवला रचना कतय गेल, की भेल, कोन नामें छपल? पंकज पराशरक नामें कि पदीप बिहारीजीक सुपुत्रक नामेँ (अनुवाद रूपमे)। ई रिसर्च एखन नहि भेल तँ भविष्यमे पुनः एकटा साहित्यिक चोरिक पोल खूजत? अंततः एकटा माँछकेँ कएटा पोखरिकेँ प्रदूषित करए देल जाय आ से कए बेर? उदय-कान्त बनि कऽ गारि पढ़वाक आदति तँ पुरान छनि डॉ. महाचोर केँ। ककरो “सरीसृप” कहि सकैत छथि (मैथिल-जन) आ कोनो परिवारमे घोंसिया कऽ विष वमन कऽ सकैत छथि। ऑक्टोपसक सभ गुणसँ परिपूर्ण डॉ. पॉल बाबाकेँ चोरिक भविष्यवाणी करवाक बड़का गुण छनि तेँ हिनका नामी फुटबॉल टीम द्वारा पोसल जाइत अछि, जाहिसँ “विश्व-कप”केँ दौरान अइ “अमोघ अस्त्रक” उपयोग अपना हिसाबेँ कयल जा सकय। सहरसा-कथागोष्ठीमे पठित हिनकर पहिल कथाक शीर्षक छल- हम पागल नहि छी। ई उद्घोषणा करवाक की बेगरता रहैक- से आइ लोककेँ बुझा रहल छैक। अविनाश आ पंकज पराशरक मामाजी तहिया हिनकर कथाकेँ “टिप्पणीक”क्रममे मैथिली-कथाक “टर्निंग प्वाइन्ट” मानने छलाह। आइ ओ “टर्निंग प्वाइन्ट” ठीके एक हिसाबेँ “टर्निंग प्वाइन्ट” प्रमाणित भेल, कारण कथाक ओहि शीर्षकमे सँ “नहि” हटि गेल अछि, हिनकर तेबारा चोरिसँ। हिनकर पहिल चोरि (अरुण कमलक कविता- नए इलाके में) क निन्दा प्रस्तावमे “मामाजी” आ डॉ. महेन्द्रकेँ छोड़ि, सहरसाक शेष सभ साहित्यकार हस्ताक्षर कऽ “आरम्भ”केँ पठौने छलाह। आइ ओ हस्ताक्षर नहि केनिहार सभ कन्छी काटि कऽ वाम-दहिन ताक-झाँक करवाक लेल बाध्य छथि। द्वैध-चरित्र आ दोहरा मानदण्डक परिणाम सैह होइत अछि। अविनाश तखन तँ देखार भऽ जाइत छथि जखन ओ विदेह-सदेह-२ मे लिखैत छथि जे “एकरा सार्वजनिक नहि करबै”। नुका कऽ सूचना देवाक कोन बेगरता? पंकज पराशरसँ सम्बन्ध खराब हेवाक डर वा कोनो “टेक्नोपोलिटिक्स”(?) केर चिन्ता? विदेह-सदेह-२ क पाठकक संदेश तँ कएटा साहित्यकारकेँ देखार कऽ दैत अछि। जतय राजीव कुमार वर्मा, श्रीधरम, सुनील मल्लिक, श्यामानन्द चौधरी, गंगेश गुंजन, पी.के.चौधरी, सुभाष चन्द्र यादव, शम्भु कुमार सिंह, विजयदेव झा, भालचन्द झा, अजित मिश्र, के.एन.झा, प्रो.नचिकेता, बुद्धिनाथ मिश्र, शिव कुमार झा, प्रकाश चन्द्र झा, कामिनी, मनोज पाठक आदि अपन मुखर भाषामे प्रखरतापूर्वक निन्दनीय घटनाक निन्दा केलनि अछि, ततहि अविनाश, डॉ. रमानन्द झा “रमण”, विभारानीक झाँपल-तोपल शब्द आश्चर्य-भावक उद्रेक करैत अछि। मुदा संतोषक बात ई अछि जे पाठकक “प्रबल भाव-भंगिमा” साहित्यकारोक “मेंहायल आवाज”क कोनो चिन्ता नहि करैत अछि। विभारानी तँ कमाले कऽ देलनि। एहि ठाम मैथिली भाषा-साहित्यक एक सय समस्या गनेवाक उचित स्थान नहि छल। ई ओनाठ काल खोनाठ आ महादेवक विवाह कालक लगनी भऽ गेल। कोनो चोर बेर-बेर अपन कु-कृत्यक परिचय दऽ रहल अछि आ हुनका समय नष्ट करब बुझा रहल छनि आ चोरकेँ देखार केलासँ दुःख भऽ रहल छनि? ओ अपन प्रतिक्रियामे कतेक आत्म श्लाघा आ हीन-भावना व्यक्त केलनि अछि से अपने पत्र अपने ठंढ़ा भऽ कऽ पढ़ि कऽ बूझि सकैत छथि। हिन्दीयोमे एहिना भऽ रहल अछि, तेँ मैथिलीमे माफ कऽ देल जाय? आब हिन्दीसँ पूछि-पूछि कऽ मैथिलीमे कोनो काज होयत? विभारानी ज्योत्सना चन्द्रमकेँ ज्योत्सना मिलन केना कहैत छथि? हुनकर उपेक्षा कोना मानल जाय? ओ सभ साहित्यिक कार्यक्रममे नोतल जाइत छथि, सम्मान आ पुरस्कार पबैत छथि, पाठक द्वारा पठित आ चर्चित होइत छथि। समीक्षाक शिकाइत की उच्चवर्णीय (?) साहित्यकारकेँ मैथिलीमे नहि छनि? समीक्षाक दुःस्थिति सभ जातिक मैथिली साहित्यकार लेल एके रंग विषम अछि। ओइ मे जातिगत विभेद एना भेलए जे ब्राह्मण-समीक्षक, आरक्षणक दृष्टिकोणेँ निम्न जाति (?)क साहित्यकारक किछु बेशीए समीक्षा (सेहो सकारात्मक रूपेँ) केलनि अछि। समीक्षा आ आलोचनाक विषम स्थितिक कारणें जँ नैराश्यक शिकार भऽ जाय लेखक, तँ लेखकीय प्रतिबद्धताक की अर्थ रहि जायत? विभाजीकेँ बुझले नहि छनि जे हुनका लोकनिक बाद मैथिली महिला लेखनमे कामिनी, नूतन चन्द्र झा, वन्दना झा, माला झा आदि अपन तेवरक संग पदार्पण कऽ चुकल छथि। हुनका ने कामिनीक कविता संग्रह पढ़ल छनि आ ने “इजोड़ियाक अङैठी मोड़”। हुनका अपन गुरुदेवक बात मानि हिन्दीमे जाइसँ के कहिया रोकलकनि? ओ गेलो छथि हिन्दीमे। मातृभाषाक प्रेरणा अद्वितीय होइत छै। मैथिलीक जड़ संस्था अथवा समीक्षक सभपर प्रहार करबामे हमरा कोनो आपत्ति नहि, मुदा अर्थालाभ तँ एतय नगण्य अछिए। सामाजिक सम्मान विभाजीकेँ अवश्य भेटलनि अछि। समाजमे “जड़”लोक छै तँ “चेतन” लोक सेहो छैक। हुनकासँ मैथिली भाषा-साहित्य आ मिथिला-समाजकेँ पैघ आशा छै, हीनभाव वा आत्मश्लाघासँ ऊपर उठि काज करवाक बेगरता छैक। सक्षम छथि ओ। हुनका श्रेय लेवाक होड़सँ बँचवाक चाही। अन्यथा साहित्य अकादेमी प्रतिनिधि, दिवालियापन केर शिकार जूरीगण आ मैथिलीक सक्षम साहित्यकारमे की की अन्तर रहि जायत? विभारानीक विचलनक दिशा हमरा चिन्तित आ व्यथित करैत अछि। ओ दमगर लेखिका छथि, सशक्त रचना केलनि अछि, आइ ने काल्हि समीक्षकगण कलम उठेबापर बाध्य हेबे करताह। समीक्षकक कर्तव्यहीनतासँ कतौ लेखक निराश हो? पंकज पराशरक श्रृंखलाबद्ध साहित्यिक चोरिपर सार्थक प्रतिक्रिया देब कोनो साहित्यकार लेल अनुचित नहि अछि कतहुसँ। साहित्यकार लेल साहित्यिक मूल्यक प्रति ओकर प्रतिबद्धता मुख्य कारक होइत अछि आ हेवाको चाही आ तकरा देखार करवाक “बोल्डनेसो” हेवाक चाही। “चाही”वला पक्ष साहित्यमे बेशीए होइत अछि। एहेन-एहेन गम्भीर विषयपर साहित्य आ समाजक “चुप्पी” एहेन घटनाकेँ प्रोत्साहित करैत अछि आ जबदाह जड़ताकेँ बढ़बैत अछि, भाषा-साहित्यकेँ बदनाम तँ करिते अछि। जाधरि पंकज पराशरक चोरि-काव्यक समीक्षा लिखल जाइत रहत, विभारानीक मूल-रचनाक समीक्षा के लिखत? ककरा जरूरी बुझेतैक? विभारानी अपने तँ समीक्षा प्रायोजित नहि करओती? सक्षम लेखकक व्यवहारोक अपन स्तर होइत छै। तेँ संगठित भऽ चोरिक भर्त्सना हेवाक चाही। राजकमल चौधरी आ आन लेखकक रचनाक चोरि पंकज पराशर प्रसंग पंकज पराशर उर्फ अरुण कमल उर्फ डगलस केलनर उर्फ उदयकान्त उर्फ ISP 220.227.163.105 , 164.100.8.3 , 220.227.174.243 उर्फ..... ParasharsIntellectualTheft पाठकक सूचनाक बाद ई पता चलल अछि (आ ओकर सत्यापन कएल गेल) जे एहि लेखकक ई एहि तरहक पहिल कृत्य नहि अछि। ई लेखक पहिने सेहो Douglas Kellner क Technopolitics क पंक्तिशः अनुवाद मूल लेखकक रूपमे नामसँ ज्ञानरंजनक हिन्दी पत्रिका "पहल"मे धोखासँ छपबओलक। तकर पता चललाक बाद "पहल"मे एहि लेखकक रचनाक प्रकाशन बन्द भऽ गेल। एहि सम्बन्धमे विस्तृत आलेख विदेहक अगला अंकक सम्पादकीयमे देल जाएत। २.एहि सभ घटनाक बाद पंकज पराशरकेँ विदेहसँ बैन कएल जा रहल अछि। विदेह आर्काइवसँ "विलम्बित कइक युगमे निबद्ध" पोथीकेँ हटाओल जा रहल अछि आ एकटा इनक्वायरी द्वारा एहि पोथीक ( डगलस केलनर बला घटनाक्रमक बाद) जाँच किछु चुनल लेखक-पाठक द्वारा कएल जएबा धरि रहत। प्रकाशककेँ सेहो उचित पुलिसिया कार्यवाही (यदि आवश्यक हुअए तँ) लेल एहि समस्त घटनाक्रमक सूचना दऽ देल गेल अछि। ३.पाठक डगलस केलनरसँ ई-मेल kellner@gseis.ucla.edu पर "पहल" पत्रिका वा तकर सम्पादक श्री ज्ञानरंजनसँ editor.pahal@gmail.com, edpahaljbp@yahoo.co.in वा info@deshkaal.com पर आ दैनिक जागरणसँ nishikant@jagran.com, response@jagran.com, mailbox@jagran.com, delhi@nda.jagran.com पर सम्पर्क कए विस्तृत जानकारी लऽ सकैत छथि। डगलस केलनरक आर्टिकल गूगल सर्चपर technopolitics टाइप कए ताकि सकै छी आ पढ़ि सकै छी। पहल पत्रिकाक वेबसाइट www.deshkaal.com पर सेहो पहल पत्रिकाक पुरान अंक सभ आस्ते-आस्ते देबाक प्रारम्भ भेल अछि। विस्तृत जानकारीक लेल सुधी पाठकगण अहाँक धन्यवाद। भविष्यमे सेहो एहि घटनाक पुनरावृत्ति नहि हुअए ताहि लेल अहाँक पारखी नजरिक आस आगाँ सेहो रहत। एहि तरहक कोनो घटनाक जानकारी हमर ई-पत्र ggajendra@gmail.com पर अवश्य पठाबी। VIDEHA GAJENDRA THAKUR said... अन्तर्जालपर ब्लैकमेलिंग विरुद्ध गूगल, चिट्ठाजगत आ ब्लोगवानीकेँ सूचित करू, साइबर क्राइम आ ब्लैकमेलिंग रोकबा लेल सेहो ढेर रास प्रावधान छै, विशेष जानकारी ggajendra@gmail.com पर सम्पर्क करू। अहाँसँ पत्रकार, न्यूजपेपर, पत्रिका आ हिन्दीक गणमान्य लेखकगण/ प्रोफेसर/ विश्वविद्यालय आदिकेँ एहि घटनासँ सूचित करेबाक अनुरोध अछि। विशेष जानकारी लेबाक आ देबाक लेल ggajendra@gmail.com पर सूचित करू। Reply 01/26/2010 at 01:56 PM 2 VIDEHA GAJENDRA THAKUR said... you may also brought this episode before sanjay@jagran.com Thanks readers. Reply 01/26/2010 at 12:25 AM 3 VIDEHA GAJENDRA THAKUR said... But this time he has not used his name as maithil, mithila aa subodhkant but as Pankaj Parashar pparasharjnu@gmail.com Reply 01/25/2010 at 09:48 PM 4 VIDEHA GAJENDRA THAKUR said... The same blackmail letter has been sent by the blackmailer to my email address which has been spammed through ISP ISP address 220.227.163.105 , 164.100.8.3 aa 220.227.174.243 and has been forwarded for taking Police action immediately. Reply 01/25/2010 at 09:45 PM 5 VIDEHA GAJENDRA THAKUR said... Professor Kellner has thanked me for this detective work, but it all your efforts dear reader. Reply 01/25/2010 at 08:21 PM 6 VIDEHA GAJENDRA THAKUR said... pahal=- 86, aarambh -23 aa arunkamalak naye ilake me ka sambandhit prishtha pathebak lel dhanyavad pathakgan. Reply 01/25/2010 at 08:16 PM 7 VIDEHA GAJENDRA THAKUR said... http://www.gseis.ucla.edu/courses/ed253a/newDK/intell.htm ehi link par douglas kellner ke lekhak anuvad pahal-86 ke page 125-131 par achhi- soochnak lel dhanyad pathakgan. Reply 01/24/2010 at 08:16 PM 8 VIDEHA GAJENDRA THAKUR said... ehi ghatnakram me kono pathak lag je Arun Kamal jik kavita "Naye Ilake Me" hoinh aa Aarambh (ank 23, maithili magazine editor Sh. Rajmohan Jha (March 2000) me prakashist maithili kavita "Sanjh Hoit Gam Me" te kripya ggajendra@gmail.com par soochit karathi- Dhanyavad. Reply 01/24/2010 at 08:02 PM 9 VIDEHA GAJENDRA THAKUR said... ehi ghatnakram me bahut ras aar jankari aa dher ras samarthan debak lel dhanyavad pathakgan. Reply 01/23/2010 at 11:40 PM 10 VIDEHA GAJENDRA THAKUR said... विदेहक पाठकक सूचनाक बाद ई पता चलल अछि (आ ओकर सत्यापन कएल गेल) जे एहि लेखकक ई एहि तरहक पहिल कृत्य नहि अछि। ई लेखक पहिने सेहो Douglas Kellner क Technopolitics क पंक्तिशः अनुवाद मूल लेखकक रूपमे नामसँ ज्ञानरंजनक हिन्दी पत्रिका "पहल"मे धोखासँ छपबओलक, प्रदीप बिहारीक बेटा प्रणव बिहारीसँ अनुवाद करबेलक आ कहलकै जे अनुवाद छपबा देब मुदा अपना नामसँ छपबा लेलक, प्रणवकेँ कहलकै जे अनुवाद रिजेक्ट भऽ गेल आ फेर हेरा गेल । तकर पता चललाक बाद "पहल"मे एहि लेखकक रचनाक प्रकाशन बन्द भऽ गेल। एहि सम्बन्धमे विस्तृत आलेख विदेहक अगला अंकक सम्पादकीयमे देल जाएत। २.एहि सभ घटनाक बाद पंकज पराशरकेँ विदेहसँ बैन कएल जा रहल अछि। विदेह आर्काइवसँ "विलम्बित कइक युगमे निबद्ध" पोथीकेँ हटाओल जा रहल अछि आ एकटा इनक्वायरी द्वारा एहि पोथीक ( डगलस केलनर बला घटनाक्रमक बाद) जाँच किछु चुनल लेखक-पाठक द्वारा कएल जएबा धरि रहत। प्रकाशककेँ सेहो उचित पुलिसिया कार्यवाही (यदि आवश्यक हुअए तँ) लेल एहि समस्त घटनाक्रमक सूचना दऽ देल गेल अछि। ३.पाठक डगलस केलनरसँ ई-मेल kellner@gseis.ucla.edu पर "पहल" पत्रिका वा तकर सम्पादक श्री ज्ञानरंजनसँ editor.pahal@gmail.com, edpahaljbp@yahoo.co.in वा info@deshkaal.com पर आ दैनिक जागरणसँ nishikant@jagran.com, response@jagran.com, mailbox@jagran.com, delhi@nda.jagran.com पर सम्पर्क कए विस्तृत जानकारी लऽ सकैत छथि। डगलस केलनरक आर्टिकल गूगल सर्चपर technopolitics टाइप कए ताकि सकै छी आ पढ़ि सकै छी। पहल पत्रिकाक वेबसाइट www.deshkaal.com पर सेहो पहल पत्रिकाक पुरान अंक सभ आस्ते-आस्ते देबाक प्रारम्भ भेल अछि। विस्तृत जानकारीक लेल सुधी पाठकगण अहाँक धन्यवाद। भविष्यमे सेहो एहि घटनाक पुनरावृत्ति नहि हुअए ताहि लेल अहाँक पारखी नजरिक आस आगाँ सेहो रहत। एहि तरहक कोनो घटनाक जानकारी हमर ई-पत्र ggajendra@gmail.com पर अवश्य पठाबी। Reply 01/22/2010 at 12:03 PM 11 VIDEHA GAJENDRA THAKUR said... out of these three addresses of the spammer i.e. pkjpp@yahoo.co.in, pparasharjnu@gmail.com and pkjppster@gmail.com the address pkjpp@yahoo.co.in, is fails verification test and addresses pparasharjnu@gmail.com and pkjppster@gmail.com stands verified and confirmed. Reply 01/21/2010 at 10:00 PM 12 VIDEHA GAJENDRA THAKUR said... the htpps host matches reliance communications and the corresponding email gamghar at gmail dot com and maithilaurmithila at gmail dot com is fake ids related with the actual spammers id i.e.pkjpp@yahoo.co.in, pparasharjnu@gmail.com and pkjppster@gmail.com Reply 01/21/2010 at 08:50 PM 13 VIDEHA GAJENDRA THAKUR said... The office premise has been located, the blackmailer works in Dainik Jagran, Process to file complaint against Cyber Crime Act is being initiated and the organisation being taken into confidence. Reply 01/21/2010 at 06:13 PM 14 VIDEHA GAJENDRA THAKUR said... maithil, mithila aa subodhkant nam se abhadra aa blackmail karay bala blackmailer ke cheenhi lel gel achhi,ISP address 220.227.163.105 , 164.100.8.3 aa 220.227.174.243 aa ban kayal ja rahal achhi, agan ohi organisation se seho sampark kayal jaayat jatay se ee email aayal achhi. Reply 01/18/2010 at 11:19 PM 15 VIDEHA GAJENDRA THAKUR said... comment moderation lagoo kayal ja rahal achhi Reply 01/18/2010 at 09:27 PM 16 सुबोधकांत said... अविनाशकेँ सेहो 220.227.174.243 आइ.एस.पी.सँ एहि प्रकारक ई-पत्र अबैत रहै मुदा ओ मामिला खतम कs देने रहथिन। ओ टिप्पणी सभ एतेक घृणित छैक तैयो एतए देल जा रहल अछि। पंकज पराशर उर्फ.....डगलस केलनर उर्फ अरुण कमल उर्फ... डगलस केलनरक नीचाँक आलेखकक पंकज पराशर द्वारा चोरि सिद्ध कएलक जे एक दशक पहिने एहि लेखक द्वारा अरुण कमलक चोरि सँ आइ धरि हुनकामे कोनो तरहक परिवर्तन नहि आएल छन्हि। हँ, आब ओ पटना विश्वविद्यालयक प्रोफेसरक रचना चोरेबासँ आगाँ बढ़ि गेल छथि आ कैलिफोर्निया वि.वि.क प्रोफेसरक रचना चोराबए लागल छथि। एहि सन्दर्भमे हमरा एकटा खिस्सा मोन पड़ैत अछि। २०-२२ बरख पुरान सत्य कथा। दरभंगामे रहैत रही, छतपर हम आ हमर एकटा पिसियौत भाइ साँझमे ठाढ़ रही। सोझाँमे सरवनजीक घरक बाअड़ीमे खूब लताम फड़ल छलन्हि। हमर पिसियौत भाइ हुनका इशारा दऽ कहलखिन्ह जे दस टा लताम आनू। ओ बेचारे दसटा लताम तोड़लन्हि आ आबि रहल छलाह आकि रस्तामे हमसभ देखलहुँ जे एकटा छोट बच्चा संग हुनका किछु गप भेलन्हि आ ओ पाँचटा लताम ओहि बच्चाकेँ दऽ देलखिन्ह। जखन सरवन जी अएलाह तँ कहलन्हि जे ओ बच्चा हुनका भैया कहि सम्बोधित कएलकन्हि आ पाँचटा लताम मँगलकन्हि- से कोना नञि दितियैक- सरवनजीक कहब छलन्हि। आब पंकज पराशर प्रसंगमे की भेल से देखी। प्रदीप बिहारीजीक बेटा प्रणवकेँ पंकज पराशर नोम चोम्स्की आ डगलस केलनरक रचना दैत छथिन्ह आ तकर अनुवाद करबा लेल कहै छथिन्ह। बेचारा जान लगा कऽ अनुवाद कऽ दैत छन्हि, ई सोचि जे जिनका ओ चच्चा कहै छथि- जे क्रान्तिकारी विचारक छथि (मार्क्सवादी!!!) से कोनो नीक पत्रिकामे ई अनुवाद छपबा देथिन्ह। मुदा छह मासक बाद चच्चाजी कहै छथिन्ह जे नोम चोम्स्की बला रचना हेरा गेल आ डगलस केलनर बला रचनाक अनुवाद नञि नीक रहए से रिजेक्ट भऽ गेल। मुदा क्रान्तिकारी कवि (चोरुक्का सेहो विवरण नीचाँमे अछि) दुनू रचना पहल पत्रिकामे पठा दै छथि- पहल-८६ मे डगलस केलनर बला रचना छपितो छन्हि (आ से अनुवादक रूपमे नहि वरन् मूल लेखकक रूपमे) आ ओ बैन सेहो कऽ देल जाइ छथि। हमर सरवन जी एकटा बच्चा द्वारा भैया कहलापर पाँचटा लताम ओकरा दऽ दै छथिन्ह मुदा हमर पराशरजी भातिजोक पाँचटा लताम निर्लज्जतासँ छीनि लैत छथि। आ हम हुनकर खिजबीन तखन करै छी जखन ओ विदेहमे आइडेन्टिटी बदलि हमरा गारि पढ़ैत छथि- हुनकर रियल आइडेन्टीटी नाङट करै छी। फेर सभसँ गप करै छी आ पाठकक सहयोगसँ आरम्भ, पहल क पुरान अंक भेटि जाइत अछि जतए हिनकर कुकृत्य छन्हि।। Douglas Kellner Philosophy of Education Chair Social Sciences and Comparative Education University of California-Los Angeles, Box 951521, 3022B Moore Hall, Los Angeles, CA 90095-1521, Fax 310 206 6293 Phone 310 825 0977, http://www.gseis.ucla.edu/faculty/kellner/kellner.html Intellectuals, the New Public Spheres, and Techno-Politics The category of the intellectual, like everything else these days, is highly contested and up for grabs. Zygmunt Bauman contrasts intellectuals as legislators who wished to legislate universal values, usually in the service of state institutions, with intellectuals as interpreters, who merely interpret texts, public events, and other artifacts, deploying their specialized knowledge to explain or interpret things for publics (1987; 1992). He thus claims that there is a shift from modern intellectuals as legislators of universal values who legitimated the new modern social order to postmodern intellectuals as interpreters of social meanings, and thus theorizes a depoliticalization of the role of intellectuals in social life. ....... अरुण कमल Arun lives in Patna where he teaches English at the Science College of Patna University. नए इलाके में जहाँ रोज बन रहे नये नये मकान मैं अक्सर रास्ता भूल जाता हूँ खोजता हूँ ताकता पीपल का पेड़ खोजता हूँ ढहा हुआ घर और ज़मीन का खाली टुकड़ा जहाँ से बायें मुड़ना था मुझे फिर दो मकान बाद बिना रंग वाले लोहे के फाटक का घर था इकमंजिला चल देता हूँ या दो घर आगे ठकमकाता रोज कुछ घट रहा है यहाँ स्मृति का भरोसा नहीं एक ही दिन में पुरानी पड़ जाती है दुनिया जैसे वसंत का गया पतझड़ को लौटा हूँ जैसे वैशाख का गया भादो को लौटा हूँ और पूछो - क्या यही है वो घर? आ चला पानी ढहा आ रहा अकास शायद पुकार ले कोई पहचाना ऊपर से देख कर मैथिली भाषा-साहित्य के पाठक आ लेखक बंधु केँ की एहि प्रश्न सबहक उत्तर अवश्य जानबाक चाही। पंकज झा पराशर उर्फ पंकज पराशर उर्फ अरुण कमल उर्फ डगलस केलनर उर्फ उदयकान्त उर्फ ISP 220.227.163.105 , 164.100.8.3 , 220.227.174.243 उर्फ..... नामक एहि व्यक्तिक बहुत रास कच्चा चिट्ठा –जेना एम.ए.मे प्रथम श्रेणीमे सर्वोच्च स्थान?? पत्रकारिताक कोर्स?? ई सभ नटबरलालक तर्जपर!! जे.एन.यू.क लड़कीसँ हिन्दी अनुवाद कराएब जे एहिसँ नोकरी भेटि जएतैक आ फेर तकरा अपना नामसँ छपबा लेब, प्रणवसँ डगलस केलनरक आ नोम चोम्स्कीक अनुवाद करबाएब आ अपना नामसँ छपबा लेब, अरुण कमल, श्रीकान्त वर्मा, इलारानी सिंह, गजेन्द्र ठाकुर आदिक रचना चोरि करब। ई सभ लेखक सभसँ हुनकर परिवारजनसँ कहै छन्हि जे अनुवाद लेल कथा-कविता दिअ आ फेर तकरा चोरा कऽ अपना नामसँ छपबा लैत अछि। हिन्दीमे बैन भेलाक बाद मैथिलीक सेवा! गौरीनाथकेँ पहिने गारि पढ़ै छन्हि आ फेर लिखित माफी मँगै अछि। पंकज झा पराशर उर्फ पंकज पराशर क ई हाल छै जे रमण कुमार सिंहकेँ ओकरापर कविता लिखै पड़ै छन्हि ..ककरासँ की चोरेने छी जे अनिद्रा पैसि गेल? अविनाश केँ गारि , श्रीधरम आ अनलकान्त केँ गारि , रामदेव झा केँ गारि , राजमोहन झा आ राजनन्दन लाल दास केँ गारि , सुभाषचन्द्रयादव-केदार कानन- तारानन्द झा तरुण- प्रोफेसर महेन्द्र- रमेश सभकेँ गारि- मैथिली सर्जनामे रामदेव झाकेँ गारि पढ़ैत सहरसा चिट्ठी आ सहरसा सभक साहित्यकारकेँ गारि पढ़ैत रामदेव झाकेँ चिट्ठी, ई दुनू चिट्ठी संगे छपल!! चोरक सीना जोड़बाक एहिसँ नीक उदाहरण भेटब मोश्किल। पंकज झा पराशर उर्फ पंकज पराशर उर्फ अरुण कमल उर्फ डगलस केलनर उर्फ उदयकान्त उर्फ ISP 220.227.163.105 , 164.100.8.3 , 220.227.174.243 उर्फ.....क यथार्थ। # आख़िरी सफ़र पर निकलने तक / # पुरस्कारोत्सुकी आत्माएँ / # बऊ बाज़ार # मरण जल / # रात्रि से रात्रि तक # साला सब हँसकर निकल जाता है अपुन को अकेला चीख़ता छोड़कर / # हस्त चिन्ह / उर्फ श्वान रूप संसार है भूंकन दे झख मार उर्फ कुफ्र कुछ चाहिए ...की रौनक के लिए उर्फ गोयबल्स उर्फ कारेल चापेक उर्फ अपन कारी मुँह उर्फ मोहल्ला लाइव उर्फ पतनुकान उर्फ उदय प्रकाश उर्फ पहल उर्फ रवि भूषण उर्फ निराला उर्फ वर्चुअल स्पेस। पंकज पराशर उर्फ अरुण कमल उर्फ डगलस केलनर उर्फ उदयकान्त उर्फ ISP 220.227.163.105 , 164.100.8.3 , 220.227.174.243 उर्फ..... हिनकर रियल आइडेन्टिटी हम नाङट करै छी आ ई आब अभिशप्त छथि अपन शेष जीवन मिस्टर हाइड रहि अपन कुकृत्यक सजा भुगतबाक लेल। एहि ब्लैकमेलरक डॉ. जेकील आ मिस्टर हाइड बला चरित्र मैथिल सर्जनाक विरोधमे मैथिल-जन पत्रिकामे एक दशक पहिने उजागर भऽ गेल छल मुदा लोक हिनका पोसैत रहल। आरम्भमे सेहो ई एकटा चिट्ठी मैथिलीक सम्पादकक विरोधमे देलन्हि जे छपि गेल आ ओकर घृणित भाषाक कारण भाइ साहेब राजमोहन झाकेँ माफी माँगए पड़लन्हि आ फेर ई मिस्टर हाइड सेहो ओहि सम्पादकसँ लिखितमे माफी मँगलन्हि। एकटा आग्रह आ आह्वान: सुभेश कर्ण आ समस्त मैथिली-प्रेमी-गण- एहि मिस्टर हाइडक ब्लैकमेलिंग आ एब्युजक द्वारे अहाँ सभकेँ मैथिली छोड़ि कऽ जएबाक आवश्यकता नहि अछि, कारण पापक घैला भरि गेलाक बाद ई आब अभिशप्त छथि अपन शेष जीवन मिस्टर हाइड रहि अपन कुकृत्यक सजा भुगतबाक लेल। जे.एन.यू.मे छात्र-छात्रा सभसँ पोस्टकार्ड पर साइन लऽ ओहिपर अपन रचना लेल प्रशंसा-पत्र पठबैत घुमैत अपस्याँत कथित गोल्ड मेडेलिस्ट(!!!)। पहिल कथा गोष्ठीमे जखन ई सहरसामे सभसँ पुछने फिरै छथि जे साहित्यकार बनबासँ की-की सभ फाएदा छै तखन ई एकटा पाइ आ पुरस्कारक लेल अपस्याँत मैथिल युवा-पीढ़ीक प्रतिनिधित्व करै छथि, जे राजमोहन झा जीक शब्दमे मैथिलीसँ प्रेम नञि करैत अछि। ई मिस्टर हाइड सेहो ओहि सम्पादकसँ लिखितमे माफी मँगलन्हि आ जखन ओ माफ कऽ देलखिन्ह तखन फेर हुनका गारि पढ़ब शुरु कऽ देलन्हि। हमरासँ लिखित मेल-माफी अस्वीकार भेलाक बाद मिस्टर हाइडक माथ नोचब स्वाभाविके। जे सरकारी नोकरी वा इन्कम-टैक्स, कस्टममे ई ब्लैकमेलर रहितए तँ देश जरूर बेचि दैतए। पंकज पराशर उर्फ अरुण कमल उर्फ डगलस केलनर उर्फ उदयकान्त उर्फ ISP 220.227.163.105 , 164.100.8.3 , 220.227.174.243 उर्फ राजकमल चौधरी.....उर्फ... कतेक उर्फ एहि लेखकक बनत नहि जानि... राजकमल चौधरीक अप्रकाशित पद्य (आब विदेह मैथिली पद्य २००९-१० मे प्रकाशित पृ.३९-४०) “बही-खाता”क एहि धूर्तता, चोरि कला आ दंद-फंद करैवला पंकज पराशर..उर्फ..उर्फ.. [गौरीनाथ (अनलकान्त)क एहि चोर लेखकक लेल प्रयुक्त शब्द- सम्पादकीय अंतिका अक्टूबर-दिसंबर, 2009- जनवरी-मार्च, 2010- पंकज पराशर प्रसंगमे-] द्वारा “हिसाब” नामसँ छपबाओल गेल- देखू राजकमल चौधरी बही-खाता एहि खातापर हम घसैत छी संसारक सभटा हिसाब ... ... हमर सभटा अपराध, ज्ञान...सँ लीपल पोतल अछि एक्कर सभटा पाता ई हम्मर लालबही थिक जीवन-खाता जीवन-खाता पंकज पराशर उर्फ अरुण कमल उर्फ डगलस केलनर उर्फ उदयकान्त उर्फ ISP 220.227.163.105 , 164.100.8.3 , 220.227.174.243 उर्फ राजकमल चौधरी.....उर्फ... द्वारा एकरा अपना नामसँ एहि तरहेँ चोराओल गेल हिसाब हिसाब कहिते देरी ठोर पर उताहुल भेल रहैत अछि किताब जे भरि जिनगी लगबैत छथि राइ-राइ के हिसाब- दुनिया-जहान सँ फराक बनल अंततः बनि कऽ रहि जाइत छथि हिसाबक किताब। २००६ एहि लेखकक खौँझा कऽ अपशब्दक प्रयोग बन्न नहि भेल अछि आ ई नाम बदलि-बदलि एखनो एहि सभ कार्यमे लिप्त अछि, आब ई अपन धंधा-चाकरी सेहो बदलि लेने अछि। स्पष्ट अछि जे एकरा विरुद्ध कड़गर डेग उठाओल जएबाक आवश्यकता अछि। उपरका समस्त जानकारी अहाँ गूगल, चिट्ठा जगतकेँ दी से आग्रह आ तकरा नीचाँ ई-पत्रपर सेहो अग्रसारित करी सेहो अनुरोध। vc.appointments@amu.ac.in, bisaria.ajay@gmail.com, vedprakas_s@yahoo.co.in, tasneem.Suhail@gmail.com, rajivshukla_hindi@yahoo.co.in, merajhindi@gmail.com, ashutosh_1966@yahoo.co.in, ashiqbalaut@yahoo.in, abdulalim_dr@rediffmail.com, zubairifarah@gmail.com, RameshHindi@gmail.com पंकज पराशर उर्फ अरुण कमल उर्फ डगलस केलनर उर्फ उदयकान्त उर्फ ISP 220.227.163.105 , 164.100.8.3 , 220.227.174.243 उर्फ..... DO YOU KNOW "Fake Sahityakar" PANKAJ KUMAR JHA ALIAS PANKAJ PARASHAR.DO YOU KNOW WHAT THIS FAKE GOLD MEDALIST DID AT VASANT MAHILA COLLEGE, KADAMBINI, DAINIK BHASKAR AND DAINIK JAGRAN ? DO YOU KNOW WHAT HE DID WITH HIS FAMILY, FRINDS AND COLLEAGUES. READ the following to believe it. this mentally corrupt should be treated in the same manner... pkjpp@yahoo.co.in, pparasharjnu@gmail.com and pkjppster@gmail.com besides other fake emails used by Pankaj Parashar on ISP 220.227.174.243” See his level. अहां कें सूचनार्थ पठेने छी जे पंकज पहिनेहो इ सब काज करैत रहय छलैए।- aavinash एहि चोर लेखक पंकज पराशरक दिमागी हालतिक असली रूप एतऽ सेहो भेटत जतए ओ नाम बदलि-बदलि अपन पुरना मालिकक कम्प्यूटरसँ घृणित पोस्ट करै छल (साभार-अविनाश)। Search Comments 220.227.174.243 · All · Pending (0) · Approved · Spam (0) Search Comments: Author Comment In Response To ranvijay ranvijay@rediff.com 220.227.174.243 Submitted on 2009/09/02 at 5:07pm क्यूँ बे मादरचोद, रंडी की औलाद जिसका gauravshaali इतिहास होगा वही श्रेष्ठ की बात करेगा न मादरचोद....तू साले आदिवासी मादरचोद क्या बात करेगा श्रेष्ठ की, साले vanmaanush अपनी शकल देखि है कितनी कुरूप लगती है तेरे सूअर साथी अविनाश की तरह, मादरचोद....bhaunkna बंद कर.... In Response To ranvijay ranvijay@rediff.com 220.227.174.243 Submitted on 2009/09/02 at 5:11pm अबे मादरचोद jagdeeshsvar चतुर्वेदी, उर्फ़ रंडी की औलाद, मादचोद किस naali में पैदा हुआ था सिवाय आलोचना और बकचोदी के तुझे कुछ आता है मके लौंडे.....कुछ काम कर जिससे सबका भला हो मादरचोद या तो नया नया कंप्यूटर चलाना सीखा है या अपने बलात्कारी दोस्त avinaash के साथ milkar चुदाई का धंधा चला रहा है इसीलिए इतना भौं रहा है माके लौंडे... जनसत्ता के बारे में अर्धसत्यों से बचो 22# चार्वाक सत्य binmst@yahoo.com 220.227.174.243 Submitted on 2009/08/31 at 3:42pm जो आदमी हर मर्ज की दवा जाति को ही समझता हो, जातिवाद के धंधे में ही गले-गले तक डूबा हो उसका क्या शेष कुछ बचा रह गया है क्या? ऐसे रंगे सियारों को कम से कम प्रभाष जोशी और आलोक तोमर जैसे सम्मानित और विद्वान पत्रकार की आलोचना करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। नफरत और जहरबुझी भाषा से इस कथित लेखक की मंशा समझी जा सकती है। आलोक तोमर जी, कहां से आती है यह भाषा? 8# चार्वाक सत्य binmst@yahoo.com 220.227.174.243 Submitted on 2009/08/29 at 4:59pm प्रभाष जी की आलोचना से या आलोक तोमर की आलोचना से कुछ हासिल नहीं होनेवाला है. इससे हिंदी समाज का क्या भला हो रहा है? इस तरह आरोप-प्रत्यारोप से पाठकों का क्या लेना-देना है? बहस को एक मुकाम पर पहुंचाकर, अगली यात्रा पर निकल जाना चाहिए. कौन है ये मवालि‍यों की भाषा बोलने वाला आलोक तोमर? 21# Pankaj Parashar pkjpp@yahoo.co.in 220.227.174.243 Submitted on 2009/08/28 at 6:21pm मृत्युंजय, कल लिखी मेरी प्रतिक्रिया की अंतिम पंक्तियां हैं- हां, एक तकनीकी बात यह हो सकती है कि इन लोगों को सामान्य कोटे से बहाल किया गया हो। मैंने यह अनभिज्ञता जाहिर की, कि हो सकता है उनकी नियुक्ति सामान्य श्रेणी में हुई हो, जिसकी कोई सूचना मुझे नहीं है. इसमें न तो किसी कथित प्राब्लम शब्द का जिक्र कहीं है और न मेरे चेतन या अवचेतन में वह बातें हैं, जो व्याख्या की पोलिमिक्स के तहत आप कह रहे हैं। मनचाही व्याख्या और अनचाही सलाह से बचना चाहिए. इस संदर्भ में अनायास मनमानी व्याख्या का विरोध करती सूसन सौंटेग की 1966 में प्रकाशित पुस्तक Against Interpretation and Other Essays. की याद आ गई। खुदा खैर करे. जेएनयू का सच : होता है शबो-रोज़ तमाशा मेरे आगे 16# Pankaj Parashar pkjpp@yahoo.co.in 220.227.174.243 Submitted on 2009/08/27 at 6:34pm बाकी सेंटर्स और स्कूल की सूचनाओं से फिलवक्त मैं अपडेट नहीं हूं, क्योंकि कैंपस गए हुए महीनों गुजर जाते हैं। पर भारतीय भाषा केंद्र से तो वाकिफ हूं. सूची में दिखाया गया है कि अनुसूचित जाति से एक भी एसोशिएट प्रोफेसर नहीं हैं, जबकि पी-एच.डी में मेरे शोध निर्देशक रहे डॉ.गोबिंद प्रसाद अनुसूचित जाति से हैं और वे बाकायदा रीडर हैं। दूसरी ओर सूची में दिखाया गया है कि एक भी ओबीसी असिस्टेंट प्रोफेसर नहीं हैं, जबकि रूसी केंद्र में हमारे एक साथी हैं। मेरा ख्याल है कि ऐसे नाम और भी कई हैं जो सूची की त्रुटियों को साफ-साफ उजागर करते हैं। हां, एक तकनीकी बात यह हो सकती है कि इन लोगों को सामान्य कोटे से बहाल किया गया हो। जेएनयू का सच : होता है शबो-रोज़ तमाशा मेरे आगे 16# Rafugar jinita@yahoo.com 220.227.174.243 Submitted on 2009/08/25 at 5:35pm यार मामला व्यक्तिगत होता जा रहा है . बहस कहाँ से कहाँ जा रही है? ब्राह्मणों, हज्जामों, ठाकुरों….यानी जातिवाद ही सत्य है …महज यही तो भारत का सत्य नहीं है. प्रभाष जी की मति भ्रष्‍ट हो गयी है, आप सब रहम करें 53# michal chandan chandan25s@gmail.com 220.227.174.243 Submitted on 2009/08/20 at 4:18pm भाई लोग, आप सब माने या ना माने परन्तु इस सत्य को आप अब स्वीकार करे की प्रभात जोशी नाम के वह महान पत्रकार-संपादक-चिंतक अब पूरी तरह से सठिया गए है। पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर आजकल उनका उजूल-फिजूल लिखना, कभी किसी अखबार और उनके मालिकों को टारगेट कर आलोचना करना, कभी झारखंड के एक अखबार के बारे में कसीदे लिखना और अब अपने मनुवादी भद्दे चेहरे को सबके सामने पेश कर चर्चा में बने रहना इनके सठियेपन की निशानी नहीं है तो क्या है। प्रभाषजी के विचार मानवताविरोधी हैं 30# Bottom of Form मैथिल आर मिथिला ब्लॉग मॉडेरेटर- ऊपरका सूचनाक अतिरिक्त चोरिक रचना जे हम एकटा ब्लॉगमे...मे पकरलौ तकर बाद ओ धूर्त लेखक एडिट कय ओकरा बदसूरत कविताक शक्ल द देलक, सम्पादक हमर प्रमाण के उरा देलक आ अपन जातिवादी हेबाक फेर प्रमाण देलक आ आब बशीर बद्र के एकटा कविता जातिवादी लोकनि द्वारा चोरा कय अपना नाम करबाक सूचना आयल अछि, ओ अपन गल्ति स्वीकरत वा फेर अपन रचना एडिट करत देखा चाही हम हाजिर होयब अहंक समक्ष शीघ्र... जातिवादी सोच के मारय टा परत मिथिलाक विकास लेल. जाबशीर बद्र के कविता जातिवादी लोकनि द्वारा चोरा कय अपना नाम करबाक सूचना आयल छल आ हम कहने रही जे ओ अपन गल्ति स्वीकरत वा फेर अपन रचना एडिट करत देखा चाही हम हाजिर भेल छी अहंक समक्ष, चोर महाराजक टटका रचनापर चोर महाराजक मौसेरा भाइक कमेंट आयल अछि जाहि से ई सिद्ध भेल जे ओ इशारा बुझि गेल जे ओकरो चोरि पकडा गेलैक। एकरे कहए छै चोर-चोर मौसेरा भाइ।- मैथिल आर मिथिला ब्लॉग सँ पंकज पराशरकेँ निकालल जा रहल अछि।- मैथिल आर मिथिला ब्लॉग मॉडेरेटर Recently Some Maithil Brahmin Samaj Organisation has started selling prizes in the name of Yatri (Vaidyanath Mishra, Nagarjun) and Kiran (Kanchinath Jha) . There has been trend recently to grant these prizes to those intellectual thiefs who are basically opposed to the ideology's of Kiran and Yatri (Nagarjun). The caste based organisations are killing the spirit of Yatriji and Kiranji, recently the fraud Pankaj Jha alias Pankaj Kumar Jha alias Pankaj Parashar alias Dr. Pankaj Parashar) was stage managed to get this casteist award, The lecturer of Hindi at Aligarh Muslim University, just appointed as adhoc staff, will teach now how to lift verbatim articles of Noam Chomsky and Douglas Kellner and poems of Illarani Singh, Rajkamal Chaudhary, Gajendra Thakur and Arun Kamal to his students. His Samay ke akanait (समय केँ अकानैत) is lifted from Magadh of Srikant Verma (श्रीकान्त वर्मा- मगध) and his Vilambit Kaik Yug me Nibaddha (विलम्बित कइक युग मे निबद्ध) is collection of pirated poems of Illarani Singh, Rajkamal Choudhary, Gajendra Thakur, Srikant Verma and others.ई संग्रह इलारानी सिंह, श्रीकान्त वर्मा, गजेन्द्र ठाकुर, राजकमल चौधरी आदि कविक पंकज पराशर द्वारा चोराएल रचनाक कारण बैन कए देल गेल। "रचना"पत्रिकाक कथित अतिथि सम्पादकक रूपमे पंकज पराशर द्वारा कवि-कहानीकार सभसँ रचना सेहो मँगबाओल गेल आ तकरा अपना नामसँ छपबाओल गेल। ई छद्म साहित्यकार पराशर गोत्रक (!!)पंकज कुमार झा उर्फ पंकज पराशर बहुतो लेखकक अप्रकाशित रचना अनुवाद करबा लेल सेहो लेलक आ अपना नामेँ छपबा लेलक। पाठकक आग्रहपर आर्काइवमे ई तथ्य राखल जा रहल अछि।– सम्पादक, विदेह अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। विदेह ३६६ म अंक १५ मार्च २०२३ (वर्ष १६ मास १८३ अंक ३६६)|| 209 210 || http://www.videha.co.in/ ISSN 2229-547X VIDEHA

चोर पंकज पराशर अही आर्टिकलक अनुवाद अपना नामे छपबा लेलक, धोखासँ प्रदीप बिहारीक बेटासँ अनुवाद करबेलक आ अपना नामे अनुवादक नै मूल लेखक रूपमे पहल ८६ मे छपबा लेलक। Intellectuals, the New Public Spheres, and Techno-Politics Douglas Kellner (http://www.gseis.ucla.edu/faculty/kellner/) The category of the intellectual, like everything else these days, is highly contested and up for grabs. Zygmunt Bauman contrasts intellectuals as legislators who wished to legislate universal values, usually in the service of state institutions, with intellectuals as interpreters, who merely interpret texts, public events, and other artifacts, deploying their specialized knowledge to explain or interpret things for publics (1987; 1992). He thus claims that there is a shift from modern intellectuals as legislators of universal values who legitimated the new modern social order to postmodern intellectuals as interpreters of social meanings, and thus theorizes a depoliticalization of the role of intellectuals in social life. I, however, want to make another distinction between functional intellectuals who serve to reproduce and legitimate the values of existing societies contrasted to critical-oppositional intellectuals who oppose the existing order. Sometimes oppositional intellectuals voice their criticisms in the name of existing values which they claim are being violated (i.e. truth, rights, rule by law, justice, etc.) and sometimes in the name of values or ideas which are said to be higher potentialities of the existing order (i.e. participatory democracy, socialism, genuine equality for women and blacks, ecological restoration, etc.). Functional intellectuals were earlier the classical ideologues, whereas today they tend to be functionaries of parties or interest groups, or mere technicians who devise more efficient means to obtain certain ends, or who apply their skills to increase technical knowledge in various specialized domains (medicine, physics, history, etc.) without questioning the ends, goals, or values that they are serving, or the social utility or disutility of their activities. Functional intellectuals are thus servants of existing societies who are specialists in legitimation and technical knowledge, while oppositional intellectuals are critics who struggle to create a better society. Critical intellectuals were traditionally those who utilized their skills of speaking and writing to denounce injustices and abuses of power, and to fight for truth, justice, progress, and other universal values. In the words of Jean-Paul Sartre (1974: 285), "the duty of the intellectual is to denounce injustice wherever it occurs." For Sartre, the domain of the critical intellectual is to write and speak within the public sphere, denouncing oppression and fighting for human freedom and emancipation. On this model, a critical intellectual's task is to bear witness, to analyze, to expose, and to criticize a wide range of social evils. The sphere and arena of the critical/oppositional intellectual is the word, and his or her function is to describe and denounce injustice wherever it may occur. The modern critical intellectual's field of action was what Habermas (1989) called the public sphere of democratic debate, political dialogue, and the writing and discussion of newspapers, journals, pamphlets, and books. Of course, not all intellectuals were critical or by any means progressive. With the rise of modern societies, there was a division between physical and mental labor, and intellectuals became those who specialized in mental labor, producing and distributing ideas and culture, with some opposing and some legitimating the established forms of society. Thus, intellectuals were split into those critical and oppositional individuals who opposed injustice and oppression, as contrasted to functional intellectuals who produced technical knowledge that served the existing society and those producers of ideology who legitimated the forms of class, race, and gender domination and inequality in modern societies. In the following reflections, I want to discuss some challenges from postmodern theory to the classical conceptions of the critical-oppositional intellectual and some of the ways that new technologies and new public spheres offer new possibilities for democratic discussion and intervention, which call for a redefinition of the critical intellectual. Consequently, I will discuss some changes in the concept of the public sphere and how new technologies and new spheres of public debate and conflict suggest some new possibilities for redefining intellectuals in the present era. The Public Sphere and the Intellectual Democracy involves a separation of powers and popular participation in governmental affairs. During the era of the Enlightenment and 18th century democratic revolutions, public spheres emerged where individuals could discuss and debate issues of common concern (see Habermas 1989). The public was also a site where criticism of the state and existing society could circulate. The institutions and spaces of the 18th century democratic public sphere included newspapers, journals, and a press independent from state ownership and control, coffee houses where individuals read newspapers and engaged in political discussion, literary salons where ideas and criticism were produced, and public assemblies which were the sites of public oratory and debate. Bourgeois societies split, of course, across class lines and different class factions produced different political parties, organizations, and ideologies with each party attracting specialists in words and writing known as intellectuals. Oppressed groups also developed their own insurgent intellectuals, ranging from representatives of working class organizations, to women like Mary Wollstonecraft fighting for women's rights, to leaders of oppressed groups of color, ethnicity, sexual preference, and so on. Insurgent intellectuals attacked oppression and promoted action that would address the causes of oppression, linking thought to action, theory to practice. Thus, during the 19th century, the working class developed its own oppositional public spheres in union halls, party cells and meeting places, saloons, and institutions of working class culture. With the rise of Social Democracy and other working class movements in Europe and the United States, an alternative press, radical cultural organizations, and the spaces of the strike, sit-in, and political insurrection emerged as sites of an oppositional public sphere. Intellectuals in modern societies were thus conflicted beings with contradictory social functions. The classical critical intellectual -- represented by figures like the French Enlightenment ideologues, Thomas Paine, Mary Wollstonecraft, and later figures like Heine, Marx, Hugo, Dreyfus, Du Bois, Sartre, and Marcuse -- was to speak out against injustice and oppression and to fight for justice, equality, and the other values of the Enlightenment. Indeed, the Enlightenment itself represents one of the most successful discourses of the critical individual, a discourse and movement which assigns intellectuals key social functions. And yet conservative intellectuals attacked the Enlightenment and its prodigy the French Revolution and produced discourses that legitimated every conceivable form of oppression from class to race, gender, and ethnic domination. Against the EN and Sartre's model of the committed intellectual who is engaged for freedom (engagé), Michel Foucault complained that Sartre represented an ideal of the universal intellectual who fought for universal values such as truth and freedom, and assumed the task of speaking for humanity (1977). Against such an exalted and in his view exaggerated conception, Foucault militated for a conception of the specific intellectual who intervened on the side of the oppressed in specific issues, not claiming to speak for the oppressed, but to intervene as an intellectual in specific issues and debates. Foucault's conception of the specific intellectual has been accompanied within a new postmodern politics with a turn toward new social movements as the domain of contemporary politics (Laclau and Mouffe 1985), replacing the state and the national realm of party politics. For a postmodern politics, power is diffuse and local and not merely to be found in macroinstitutions like the workplace, the state, or patriarchy. Macropolitics that goes after big institutions like the state or capital is to be replaced by micropolitics, with specific intellectuals intervening in spheres like the university, the prison, the hospital, or for the rights of specific oppressed groups like sexual or ethnic minorities. Global and national politics and theories are rejected in favor of more local micro politics, and the discourse and function of the intellectuals is seen as more specific, provisional, and modest than in modern theory and politics, subordinate to local struggles rather than more ambitious projects of emancipation and social transformation. In my view, such a binary distinction between macro and micro theory and politics is problematical, as are absolutist commitments to either modern or postmodern theory tout court (Best and Kellner 1991 and 1997). Using the example of the events of 1989 that saw the collapse of communism, for instance, it is clear that the popular offensives against oppressive communist power combined micro and macropolitics, moving from local and specific struggles rooted in union halls, universities, churches, and small groups to mass demonstrations forcing democratic reforms and even classical mass insurrection aiming at an overthrow of the existing order, as in Romania. In these struggles, intellectuals played a variety of roles and deployed a diversity of discourses, ranging from the local and specific to the national and general. Thus, whereas I would argue that postmodern theory contains important criticism of some of the illusions and ideologies of the traditional modern intellectual, it goes too far in rejecting the classical role of the critical intellectual. Moreover, I shall suggest that some of the modern conception of the critical and oppositional intellectual remains useful. I would, in fact, reject the particular/universal intellectual dichotomy in favor of developing a normative concept of the critical public intellectual. The public intellectual -- on this conception -- intervenes in the public sphere, fights against lies, oppression, and injustice and fights for rights, freedom, and democracy à la Sartre's committed intellectual. But a democratic public intellectual on my conception does not speak for others, does not abrogate or monopolize the function of speaking the truth, but simply participates in discussion and debate, defending specific ideas, values, or norms or principle that may be particular or universal. But if universal, like human rights, they are contextual, provisional, normative and general and not valid for all time. Indeed, rights are products of social struggles and are thus social constructs and not innate or natural entities -- as the classical natural rights theorists would have it. But rights can be generalized, extended, and can take universal forms -- as with, for instance, a UN charter of human rights that holds that certain rights are valid for all individuals -- at least in this world at this point in time. Consequently, one does not need all of the baggage of the universal intellectual to maintain a conception of a public or democratic intellectual in the present era. Intellectuals may well seek to occupy a higher ground than particularistic interests, a common ground seeking public interests and goods. But intellectuals should not abrogate the right to speak for all and should be aware that they are speaking from a determinate position with its own biases and limitations. Moreover, intellectuals should learn to get out of their particular frame of reference for more general ones, as well as to be able to take the position of the other, to empathize with more marginal and oppressed groups, to learn from them, and to support their struggles. To perpetually criticize oneself, to develop the capacity for self-reflection and critique -- as well as selfexpression -- is thus part of the duty of the democratic intellectual. New Technologies, New Public Spheres, and New Intellectuals In the following discussion, I will argue that although the public intellectual should assume new functions and activities today, the critical capacities and vision of the classical critical intellectual are still relevant, thus I suggest building on models of the past, rather than simply throwing them over, as in some types of postmodern theory. I want to suggest that rethinking the intellectual and the public sphere today requires rethinking the relationship between intellectuals and technology. In a certain sense, there was no important connection between the classical intellectual and technology. To be sure, intellectuals -- especially scientific scholars like Leonardo de Vinci, Galileo, or Darwin -- deployed technologies and entire groups like the British Royal Society were concerned with technologies and were indeed often inventors themselves. Some intellectuals used printing presses and were themselves printers and many, though not all, of the major intellectuals of the 20th century probably used a typewriter, though I personally know of no major studies of the relationship between the typewriter and intellectuals. Yet a classical intellectual did not have to intrinsically deploy any specific technology and there was thus no intimate connection between intellectuals and technology. I now want to argue that in the contemporary high-tech societies there is emerging a significant expansion and redefinition of the public sphere and that these developments, connected primarily with media and computer technologies, require a reformulation and expansion of the concept of critical or committed intellectual, as well as a redefinition of the public intellectual. Earlier in the century, John Dewey envisaged developing a newspaper that would convey "thought news," bringing all the latest ideas in science, technology, and the intellectual world to a general public, which would also promote democracy (see the discussion of this project in Czitrom 1982: 104ff). In addition, Bertolt Brecht and Walter Benjamin (1969) saw the revolutionary potential of new technologies like film and radio and urged radical intellectuals to seize these new forces of production, to "refunction" them, and to turn them into instruments to democratize and revolutionize society. Sartre too worked on radio and television series and insisted that "committed writers must get into these relay station arts of the movies and radio" (1974: 177; for discussion of his Les temps modernes radio series, see 177-180). Previously, radio, television, and the other electronic media of communication tended to be closed to critical and oppositional voices both in systems controlled by the state and in private corporations. Public access and low power television, and community and guerilla radio, however, open these technologies to intervention and use by critical intellectuals. For some years now, I have been urging progressives to make use of new communications broadcast media (Kellner 1979; 1985; 1990; 1992) and have in fact been involved in a public access television program in Austin, Texas since 1978 which has produced over 600 programs and won the George Stoney Award for public affairs television. My argument was that radio, television, and other electronic modes of communication were creating new public spheres of debate, discussion, and information and that intellectuals who wanted to engage the public, to be where the people were at, and who thus wanted to intervene in the public affairs of their society should make use of these new media technologies and institutions, and develop new communication politics and new media projects. In fact, one can argue that the victory of Reagan and the Right in the United States in 1980 was related to the Right's effective mobilization of conservative intellectuals and their use of television, radio, fax and computer communication, direct mailings, telephones, and other sophisticated political uses of new technologies, as well as more traditional print media. Furthermore, one could argue that Clinton's victory over Bush in 1992, and the surprising success of the Perot campaign, were related to effective uses of communication technologies. And more recently in the U.S., the Republican and rightwing success in the 1994 elections can be related to their use of talk radio, computer bulletin boards, and other technologies. Indeed, Newt Grinrich, William Bennett, and other conservatives have made very effective use of public access television, radio, computer networks, book promotion tours with high media exposure, and other technologies to promote their ideas. Yet it is generally acknowledged that the Clinton administration deployed much more effective communications politics in the 1996 election than the Dole campaign. Effective CU politics are thus now essential to political success in national and local conflicts and often which side has the most effective politics of CU wins the struggle in question. Consequently, I would argue that effective use of technology is essential in contemporary politics and that intellectuals who wish to intervene in the new public spheres need to deploy new communications media to participate in democratic debate and to shape the future of contemporary societies and culture. My argument is that first broadcast media like radio and television, and now computers have produced new public spheres and spaces for information, debate, and participation that contain both the potential to invigorate democracy and to increase the dissemination of critical and progressive ideas -- as well as new possibilities for manipulation, social control, and the promotion of conservative positions. But participation in these new public spheres -- computer bulletin boards and discussion groups, talk radio and television, and the emerging sphere of what I call cyberspace democracy require critical intellectuals to gain new technical skills and to master new technologies. I am thus suggesting that intellectuals in the present moment must master new technologies and that there is thus a more intimate relationship between intellectuals and technology than in previous social configurations. To be an intellectual today involves use of the most advanced forces of production to develop and circulate ideas, to do research and involve oneself in political debate and discussion, and to intervene in the new public spheres produced by broadcasting and computing technologies. New public intellectuals should attempt to develop strategies that will use these technologies to attack domination and to promote education, democracy, and political struggle -- or whatever goals are normatively posited as desirable to attain. There is thus an intrinsic connection in this argument between the fate of intellectuals and the forces of production which, as always, can be used for conservative or progressive ends. Toward a Radical Democratic Techno-Politics A revitalization of democracy in capitalist societies will therefore require a democratic media politics. Such a politics could involve a two-fold strategy of, first, attempting to democratize existing media to make them more responsive to the "public interest, convenience, and necessity." In the United States, the media watchdog group FAIR (Fairness and Accuracy in Media) has developed this alternative, criticizing mainstream media for failing to assume their democratic and journalistic responsibilities and calling for an expansion of voices and ideas within the media system. Another strategy involves the development of oppositional media, alternatives to the mainstream, developed outside of the established media system. On my view, both strategies are necessary for the development of a democratic media politics and it is a mistake to pursue one at the neglect of the other. Developing a radical democratic media politics thus involves continued relentless criticism of the existing media system, attempts to democratize and reform it, and the production of alternative progressive media. On my account, democratizing our media system will require expansion of the alternative press, a revitalization of public television, an increased role for public access television, the eventual development of a public satellite system, democratized computer networks, and oppositional cultural politics within every sphere of culture, ranging from music to visual to print culture. Community and Low-Power Radio Community radio has long provided an alternative set of voices to the highly commercialized mainstream radio. Citizen-band (CB) and short-wave radio allows individuals to directly communicate with each other. Many countries have also experimented with low-power community radio, which enables groups to actually bring individuals out of their homes to public places to engage in discussion or communal activity. Low-power radio enables individuals to directly communicate with their neighbors through call-in telephone connections, or through discussions in nearby studios, and thus provide democratic and participatory institutions (see Box 3). Low-power radio, however, is subject to quick suppression by the state, as happened in Japan which had an extensive low-power radio culture in play that was shut-down almost overnight when the state outlawed low-power broadcasting. In the U.S., there have been some low-power radio experiments, but the government too has cracked down on these local attempts to democratize radio. A democratic media politics should thus struggle for low-power radio and to increase the possibilities of direct communication through radio technology. Ironically, despite the higher costs of television technology, there are probably more immediate possibilities for democratic alternative television than in radio. As mentioned, while low-power radio technologies are relatively inexpensive, they are easily suppressed by a state which opposes democratic and free-wheeling communication. Community radio has been curtailed by saturation of FM and AM frequencies and in most places there is simply not room for legal community radio stations. During the early 1990s in Austin, Texas, for instance, a vicious battle took place between the University of Texas and a local community-based co-op radio group for the remaining FM frequency band. Hence, it has been difficult to develop new radio outlets for public communication with the previous limited spectrum allotment, although fiber-optic community cable system and the Internet also make possible a dramatic expansion of community and alternative road which could make possible Brecht's vision of a radio system with every individual a sender. Public Access Television Public access television has been for some decades now an established venue for alternative democratic communication. The rapid expansion of public access television in the 1970s in the U.S. provided new possibilities for progressive individuals and groups to produce video programming that cuts against the conservative programming which dominates mainstream television in the United States. Progressive access programming is now being cablecast regularly in such places as New York, Los Angeles, Boston, Chicago, Atlanta, Madison, Urbana, New Orleans, Austin, and perhaps as many as 2,000 other towns or regions of the country. Public access television, in most cases, provides free equipment and airtime to individuals and groups who want to make their own programming. Usually, one must take a course to actually use studio and editing equipment and a few systems lease the equipment and airtime, but, for the most part, where there are public access channels, the cable systems make them available for public use and they are usually managed by an independent body, answerable to the community, and often financed by the cable system. When cable television began to be widely introduced in the early 1970s, the Federal Communications Commission mandated in 1972 that "beginning in 1972, new cable systems {and after 1977, all cable systems} in the 100 largest television markets be required to provide channels for government, for educational purposes, and most importantly, for public access." This mandate suggested that cable systems should make available three public access channels to be used for state and local government, education, and community public access use. "Public access" was construed to mean that the cable company should make available equipment and air time so that literally anybody could make noncommercial use of the access channel, and say and do anything that they wished on a first-come, first-served basis, subject only to obscenity and libel laws and prohibitions against advertising and pitches for money. Creating an access system required, in many cases, setting up a local organization to manage the access channels, though in other systems the cable company itself managed the access center. In the beginning, however, few, if any, cable systems made as many as three channels available, but some systems began offering one or two access channels in the early to mid 1970s. The availability of access channels depended, for the most part, on the political clout of local governments and committed, and often unpaid, local groups to convince the cable companies, almost all privately owned, to make available an access channel. Here in Austin, for example, a small group of video activists formed Austin Community Television in 1973 and began broadcasting with their own equipment through the cable system that year. Eventually, they received foundation and CentertainmentA government grants to support their activities, buy equipment, and pay regular employees salaries. A new cable contract signed in the early 1980s called for the cable company to provide $500,000 a year for access and after a difficult political struggle, which I shall mention later, were able to get at least $300,000-$400,000 a year to support Austin Community Television activities. A 1979 Supreme Court decision, however, struck down the 1972 FCC ruling on the grounds that the FCC did not have the authority to mandate access, an authority which supposedly belongs to the U.S. Congress. Nonetheless, cable was expanding so rapidly and becoming such a high-growth competitive industry that city governments considering cable systems were besieged by companies making lucrative offers (20 to 80 channel cable systems) and were able to negotiate access channels and financial support for a public access system. Consequently, public access grew significantly during the early 1980s. Where there are operative public access systems, individuals have promising, though not sufficiently explored, possibilities to produce and broadcast their own television programs. In Austin, Texas, for example, there have been weekly anti-nuclear programs, black and chicano series, gay programs, countercultural and anarchist programs, an atheist program, feminist and women's programs, labor programming, and a weekly progressive news magazine, Alternative Views, with which I am involved, that has produced over 470 hour-long programs from 1978 to the present on a wide variety of topics. We combine news reports from alternative sources with discussion, documentaries, and video-footage from alternative sources. Paper Tiger Television in New York combines critique of corporate media by media critics with imaginative sets, visuals, editing, and so on. A labor-oriented program, The Mill Hunk News, in Pittsburgh used to combine news reports of labor issues with documentary interviews with workers, music-videos, and other creative visuals, while Labor Beat in Chicago also uses documentary footage, music, drama, and collages of images, as well as interview and talking head formats, to present alternative information (see Box 4). There have been some experiments with national progressive satellite networks, although they have suffered from inadequate funding and the failure of often conservative-owned cable systems to carry progressive programming. While public access television is still in a relatively early stage of development in the U.S. and Europe, it contains the promise of providing a different type of alternative television. Despite obstacles to its use, public access provides the one institution in the commercial and state broadcasting systems that is at least potentially open to progressive intervention. It is self-defeating simply to dismiss broadcast media as tools of manipulation and to think that print media are the only tools of communication and political education open to progressives. Surveys have shown that people take more seriously individuals, groups, and politics that appear on TV; thus the use of television could help progressive movements and struggles gain legitimacy and force in the shifting and contradictory field of U.S. politics. The Right has been making effective use of new technologies and media of communication, and for progressives to remain aloof is a luxury that they can no longer afford. Of course, many will claim that democratic politics involves face-to-face conversation, discussion, and producing consensus. But for intelligent debate and consensus to be reached, individuals must be informed and radio, television, and computers are important sources of information in the present age. Thus I am not proposing that media politics supplement all political activity and organizing, but am suggesting that a media politics should be developed to help activist groups and individuals obtain and disseminate information. In Austin, Texas, for instance, a group, Council for Public Media, has been working to inform activist groups how they can get information through the new computer technologies and how they can use the press, broadcast media, and other methods of communication to get their messages out. Activist groups are coming to see that media politics is a key element of political organization and struggle and thus more work on developing institutions and strategies for media politics is necessary. Indeed, if progressive groups and movements are to produce a genuine alternative to the Right, they must increase their mass base and circulate their struggles to more segments of the population. After all, most people get their news and information from television, and the broadcast media arguably play a decisive role in defining political realities, shaping public opinion, and determining what is or what is not to be taken seriously. If progressives want to play a role in local and national political life, they must come to terms with the realities of electronic communication and computer technologies in order to develop strategies to make use of new technologies and possibilities for intervention. The Democratization of Computers and Information Other possibilities for expanding a system of democratic techno-politics reside in new computer and information technologies. It appears that there will be a merger of entertainment and information centers in the homes of the future with all possible print media information accessible by computer and all visual media entertainment and information resources available for home computer/entertainment center access. But the threat--and likelihood if alternative concepts are not developed and disseminated--is that this information and entertainment material will be thoroughly commodified, available only to those who can afford to pay. Consequently, it is necessary to begin devising public alternatives to these private/corporate information and entertainment systems of the future. Given the growing importance of computers and information in the new techno-capitalist society, producing new information networks and systems must therefore be an essential ingredient of a progressive media and information politics. The computerization of the world is well underway and possibilities are growing for new information networks and computer communication systems. To avoid corporate and government monopolization and control of information, new public information networks and centers are also necessary so that citizens of the future can have access to the information needed to intelligently participate in a democratic society. For computers, like broadcasting, can be used for or against democracy. Indeed, computers are a potentially democratic technology. While broadcast communication tends to be one-way and unidirectional, computer communication is potentially bi-, or even omni-, directional. Individuals can use computers to do word-processing to communicate with other individuals, or can directly communicate with others via modems which use the telephone to link individuals with each other. Modems can tap into community bulletin boards, web sites, or computer conference programs, that make possible a new type of public communication and progressives should intervene in these information modes as well as participating in public debate and discussion. For instance, many computer bulletin boards and web sites have a political debate conference where individuals can type in their opinions and other individuals can read them and if they wish respond. This constitutes a new form of public dialogue and interaction. Computer data bases and web sites provide essential sources of information and new technologies that tremendously facilitates information-searching and research. Mainstream data bases include Lexis/Nexis and Dialogue which contain a tremendous array of newspapers, magazines, journals, transcripts of TV programs, news conferences, congressional hearings, and newsletters, reproduced in full. Alternative data bases include Peacenet which has over 600 conferences on topics of ecology, war and peace, feminism, and hundreds of other topics. Here progressives put in alternative information and some of the conferences have lively debates. Between the mainstream and alternative computer data bases, individuals and groups can access a tremendous amount of information in a relatively short time. I was able to research my book on the media and the Gulf war, for instance, because I was able to access information on various topics from a variety of sources simply by punching in code words which enabled me to discern the conflicting media versions of the Gulf war and to put in question the version being promoted by the Bush administration and Pentagon. Eventually, the lies and disinformation promoted by the U.S. government in the war were thoroughly exposed by a variety of sources, accessible to computer data base searches. Corporations, government institutions, the major political parties, and other groups are taking advantage of these computer data bases and progressive must learn to access and use them to produce the information necessary to prevail in the public debates of the future. But the politics of information in the future must struggle to see that alternative information is accessible in mainstream computer data bases, as well as alternative ones. Many data bases and information services omit leftist, feminist, environmentalist, and other alternative information sources from their listings, thus in effect shutting out radical alternatives in information sources, much as the broadcasting networks exclude dissident voices from broadcast communication. Progressive groups and alternative publications should struggle to make sure that their information sources and services are listed in data base bibliographies and source material. Yet the proliferation of the World Wide Web enables independent and alternative groups and individuals to creat their own web sites, to make their information available to people through the globe, often free of charge. In the next section, I will give some examples of how computer techno-politics have deployed web sites, bulletin boards, mailing lists, and email campaigns to promote a variety of political struggles. First, however, I want to conclude this section by noting that a synergy is emerging between the new sources of information, new media and technologies, and political organization and struggle. Print and broadcast media organs can obtain information from computers and disseminate it to the public. Political groups can obtain information from these sources and disseminate it back through print, broadcast, and computer technologies. Information critical of, say, transnational corporate policies can be disseminated through a multiplicity of sites, so political groups need to be aware of the potential for the transmission of information through a variety of media in the contemporary era. Moreover, the Internet may be a vehicle for new forms of alternative radio, television, film, art, and every form of culture as well as information and print material. New multimedia technologies are already visible on web sites and Internet radio and television is now in its infancy. This would truly make possible Brecht's dream of a communications system where everyone was a sender and receiver and would greatly proliferate the range and diversity of voices and texts and would also no doubt give a new dimension of the concept of information/cultural overload. Indeed, we must obviously gain a whole set of new literacies to use and deploy the new technologies (see Kellner, forthcoming). But in conclusion, I want to limit my focus on new technologies and techno-politics of the present day. Techno-Politics and Political Struggle Since new technologies are in any case dramatically transforming every sphere of life, the key challenge is how to theorize this great transformation and how to devise strategies to make productive use of the new technologies. Obviously, radical critique of dehumanizing, exploitative, and oppressive uses of new technologies in the workplace, schooling, public sphere, and everyday life are more necessary than ever, but so are strategies that use new technologies to rebuild our cities, schools, economy, and society. I want to focus, therefore, in the remainder of this section on how new technologies can be used for increasing democratization and empowering individuals. Given the extent to which capital and its logic of commodification have colonized ever more areas of everyday life in recent years, it is somewhat astonishing that cyberspace is by and large decommodified for large numbers of people -- at least in the overdeveloped countries like the United States. In the U.S., government and educational institutions, and some businesses, provide free Internet access and in some cases free computers, or at least workplace access. With flat-rate monthly phone bills (which I know do not exist in much of the world), one can thus have access to a cornucopia of information and entertainment on the Internet for free, one of the few decommodified spaces in the ultracommodified world of technocapitalism. Obviously, much of the world does not even have telephone service, much less computers, and there are vast inequalities in terms of who has access to computers and who participates in the technological revolution and cyberdemocracy today. Critics of new technologies and cyberspace repeat incessantly that it is by and large young, white, middle or upper class males who are the dominant players in the cyberspaces of the present, and while this is true, statistics and surveys indicate that many more women, people of color, seniors, and other minority categories are becoming increasingly active. Moreover, it appears that computers are becoming part of the standard household consumer package and will perhaps be as common as television sets by the beginning of the next century, and certainly more important for work, social life, and education than the TV set. Moreover, there are plans afoot to wire the entire world with satellites that would make the Internet and communication revolution accessible to people who do not now even have telephones, televisions, or even electricity. However widespread and common -- or not -- computers and new technologies become, it is clear that they are of essential importance for labor, politics, education, and social life, and that people who want to participate in the public and cultural life of the future will need to have computer access and literacy. Moreover, although there is the threat and real danger that the computerization of society will increase the current inequalities and inequities in the configurations of class, race, and gender power, there is the possibility that a democratized and computerized public sphere might provide opportunities to overcome these inequities. I will accordingly address below some of the ways that oppressed and disempowered groups are using the new technologies to advance their interests and progressive political agendas. But first I want to dispose of another frequent criticism of the Internet and computer activism. Critics of the Internet and cyberdemocracy frequently point to the military origins of the technology and its central role in the processes of dominant corporate and state powers. Yet it is amazing that the Internet for large numbers is decommodified and is becoming more and more decentralized, becoming open to more and more voices and groups. Thus, cyberdemocracy and the Internet should be seen as a site of struggle, as a contested terrain, and progressives should look to its possibilities for resistance and circulation of struggle. Dominant corporate and state powers, as well as conservative and rightist groups, have been making serious use of new technologies to advance their agendas and if progressives want to become players in the political battles of the future they must devise ways to use new technologies to advance a progressive agenda and the interests of the oppressed and forces of resistance and struggle. There are by now copious examples of how the Internet and cyberdemocracy have been used in progressive political struggles. A large number of insurgent intellectuals are already making use of these new technologies and public spheres in their political projects. The peasants and guerilla armies struggling in Chiapas, Mexico from the beginning used computer data bases, guerrilla radio, and other forms of media to circulate their struggles and ideas. Every manifesto, text, and bulletin produced by the Zapatista Army of National Liberation who occupied land in the southern Mexican state of Chiapas in 1994 was immediately circulated through the world via computer networks. In January 1995, the Mexican government moved against the movement and computer networks were used to inform and mobilize individuals and groups throughout the world to support the Zapatistas struggles against repressive Mexican government action. There were many demonstrations in support of the rebels throughout the world, prominent journalists, human rights observers, and delegations travelled to Chiapas in solidarity and to report on the uprising, and the Mexican and U.S. governments were bombarded with messages arguing for negotiations rather than repression; the Mexican government accordingly backed off their repression of the insurgents and as of this writing in August 1997, they have continued to negotiate with them. Earlier, audiotapes were used to promote the revolution in Iran and to promote alternative information by political movements throughout the world (see Downing 1984). The Tianenaman Square democracy movement in China and various groups struggling against the remanents of Stalinism in the former communist bloc and Soviet Union used computer bulletin boards and networks, as well as a variety of forms of communications, to circulate their struggles. Opponents involved in anti-nafta struggles made extensive use of the new communication technology (see Brenner 1994 and Fredericks 1994). Such multinational networking and circulation of information failed to stop nafta, but created alliances useful for the struggles of the future. As Witheford (forthcoming) notes: "The anti-nafta coalitions, while mobilizing a depth of opposition entirely unexpected by capital, failed in their immediate objectives. But the transcontinental dialogues which emerged checked -- though by no means eliminated--the chauvinist element in North American opposition to free trade. The movement created a powerful pedagogical crucible for cross-sectoral and cross-border organizing. And it opened pathways for future connections, including electronic ones, which were later effectively mobilized by the Zapatista uprising and in continuing initiatives against maquilladora exploitation." Thus, using new technologies to link information and practice, to circulate struggles, is neither extraneous to political battles nor merely utopian. Even if material gains are not won, often the information circulated or alliances formed can be of use. For example, two British activists were sued by the fastfood chain McDonald's for distributing leaflets denouncing the corporation's low wages, advertising practices, involvement in deforestization, harvesting of animals, and promotion of junk food and an unhealthy diet. The activists counterattacked, organized a McLibel campaign, assembled a website with a tremendous amount of information criticizing the corporation, and assembled experts to testify and confirm their criticisms. The five-year civil trial, ending ambiguously in July 1997, created unprecedented bad publicity for McDonald's and was circulated throughout the world via Internet websites, mailing lists, and discussion groups. The McLibel group claims that their website was accessed over twelve million times and the Guardian reported that the site "claimed to be the most comprehensive source of information on a multinational corporation ever assembled" and was indeed one of the more successful anticorporate campaigns (February 22, 1996; visit http://www. envirolink.org/mcspotlight/home.html). Many labor organizations are also beginning to make use of the new technologies. Mike Cooley (1987) has written of how computer systems can reskill rather than deskill workers, while Shosana Zuboff (1988) has discussed the ways in which high-tech can be used to "informate" workplaces rather than automate them, expanding workers knowledge and control over operations rather than reducing and eliminating it. The Clean Clothes Campaign, a movement started by Dutch women in 1990 in support of Filipino garment workers has supported strikes throughout the world, exposing exploitative working conditions (see their website at http://www. cleanclothes.org/1/index.html). In 1997, activists involved in Korean workers strikes and Merseyside dock strike in England used websites to gain international solidarity (for the latter see http://www.gn.apc.org/lbournet/docks/). Most labor organizations, such as the North South Dignity of Labor group, note that computer networks are useful for coordinating and distributing information, but cannot replace print media that is more accessible to more of its members, face-to-face meetings, and traditional forms of political struggle. Thus, the trick is to articulate one's communications politics with actual political movements and struggles so that cyberstruggle is an arm of political battle rather than its replacement or substitute. The most efficacious Internet struggles have indeed intersected with real struggles ranging from campaigns to free political prisoners, to boycotts of corporate projects, to actual political struggles, as noted above. Hence, to capital's globalization from above, cyberactivists have been attempting to carry out globalization from below, developing networks of solidarity and circulating struggle throughout the globe. To the capitalist international of transnational corporate globalization, a Fifth International of computer-mediated activism is emerging, to use Waterman's phrase (1992), that is qualitatively different from the party-based socialist and communist Internationals. Such networking links labor, feminist, ecological, peace, and other progressive groups providing the basis for a new politics of alliance and solidarity to overcome the limitations of postmodern identity politics (on the latter, see Best and Kellner 1991, 1997, and forthcoming). Moreover, a series of struggles around gender and race are also mediated by new communications technologies. After the 1991 Clarence Thomas Hearings in the United States on his fitness to be Supreme Court Justice, Thomas's assault on claims of sexual harassment by Anita Hill and others, and the failure of the almost all male US Senate to disqualify the obviously unqualified Thomas, prompted women to use computer and other technologies to attack male privilege in the political system in the United States and to rally women to support women candidates. The result in the 1992 election was the election of more women candidates than in any previous election and a general rejection of conservative rule. Many feminists have now established websites, mailing lists, and other forms of cybercommunication to circulate their struggles. Likewise, African-American insurgent intellectuals have made use of broadcast and computer technologies to advance their struggles. John Fiske (1994) has described some African-American radio projects in the "techostruggles" of the present age and the central role of the media in recent struggles around race and gender. African-American "knowledge warriors" are using radio, computer networks, and other media to circulate their ideas and counter-knowledge on a variety of issues, contesting the mainstream and offering alternative views and politics. Likewise, activists in communities of color -- like Oakland, Harlem, and Los Angeles -- are setting up community computer and media centers to teach the skills necessary to survive the onslaught of the mediazation of culture and computerization of society to people in their communities. Obviously, rightwing and reactionary groups can and have used the Internet to promote their political agendas. In a short time, one can easily access an exotic witch's brew of ultraright websites maintained by the Ku Klux Klan, myriad neo-Nazi groups including Aryan Nations and various Patriot militia groups. Internet discussion lists also promote these views and the ultraright is extremely active on many computer forums, as well as their radio programs and stations, public access television programs, fax campaigns, video and even rock music production. These groups are hardly harmless, having promoted terrorism of various sorts ranging from church burnings to the bombings of public buildings. Adopting quasi-Leninist discourse and tactics for ultraright causes, these groups have been successful in recruiting working class members devastated by the developments of global capitalism which have resulted in widespread unemployment for traditional forms of industrial, agricultural, and unskilled labor. The Internet is thus a contested terrain, used by Left, Right, and Center to promote their own agendas and interests. The political battles of the future may well be fought in the streets, factories, parliaments, and other sites of past struggle, but all political struggle is already mediated by media, computer, and information technologies and will increasingly be so in the future. Those interested in the politics and culture of the future should therefore be clear on the important role of the new public spheres and intervene accordingly 2 || गजेन्द्र ठाकुर विदेह ३६६ म अंक १५ मार्च २०२३ (वर्ष १६ मास १८३ अंक ३६६)|| 1

४.विदेह पेटार VIDEHA ARCHIVE ४.१.विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक Videha e journal's all old issues ४.२.मैथिली पोथी डाउनलोड Maithili Books Download ४.३.मैथिली वीडियोक संकलन Maithili Videos ४.४.मैथिली शिशु, बाल आ किशोर साहित्य Maithili Children Literature ४.५.विदेह स्त्री कोना ४.६.विदेह सूचना संपर्क अन्वेषण ४.७.विदेह ई-लर्निङ्ग ४.८.मिथिला रत्न ४.९.मिथिलाक खोज ४.१०.१. मैथिलीमे छद्म समीक्षा आ कमलानन्द झा (प्रसंग- चोर लेखक पंकज झा पराशरक नूतन साहित्य चोरिक खुलासापर पाठकीय टिप्पणी) ४.१०.२. प्रसंग- चोर लेखक पंकज झा पराशरक पुरान साहित्यिक चोरिक खुलासापर पाठकीय टिप्पणी आ किछु प्रमाण ४.१.विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक Videha e journal's all old issues वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू। Always refresh the pages for viewing new issue of VIDEHA. Top of Form Search above & below within more than 350 old issues of Videha eJournal विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् www.videha.co.in Bottom of Form https://books.google.com/ Top of Form Bottom of Form Videha Archive of Old Issues विदेह पुरान अंकक आर्काइव (पूर्णतः अव्यवसायिक उद्देश्य आ मात्र एकेडमिक प्रयोग लेल) विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक पी.डी.एफ. डाउनलोड लेल क्रमानुसार नीचाँक लिंकपर उपलब्ध अछि। All the old issues of Videha e journal are available for pdf download at the respective links below. ............. तिरहुता, नेवाड़ी आ कैथी फॉण्ट डाउनलोड Google's Noto Fonts project/ GitHub तिरहुता नोटो फॉण्ट कैथी ओटीएफ कैथी टीटीएफ नेवाड़ी ओ.टी.एफ. नेवाड़ी टी.टी.एफ. https://fonts.google.com/ (Google Open Fonts download) Tirhuta Offline Keyboard download Keyman Tirhuta/ Vedic Devanagari Keyboards Download https://malarproject.gitlab.io/tirhuta (Tirhuta Keyboard Online) .......... १ गजेन्द्र ठाकुर (सम्पादन) विदेह-सदेह १-२५ www.videha.co.in  विदेह ई-पत्रिकाक अंक १-३५० सँ- मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ गद्य आ पद्यक एकटा समानान्तर संकलन देवनागरी मिथिलाक्षर विदेह:सदेह १ विदेह: सदेह १ तिरहुता विदेह:सदेह २ मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना विदेह: सदेह २ तिरहुता विदेह:सदेह ३ मैथिली पद्य विदेह: सदेह ३ तिरहुता विदेह:सदेह ४ मैथिली कथा विदेह: सदेह ४ तिरहुता विदेह मैथिली विहनि कथा [विदेह सदेह ५] विदेह: सदेह ५ तिरहुता विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५]- संस्करण-२ विदेह: सदेह ५ संस्करण-२ तिरहुता विदेह मैथिली लघुकथा [विदेह सदेह ६] विदेह: सदेह ६ तिरहुता विदेह मैथिली पद्य [विदेह सदेह ७] विदेह: सदेह ७ तिरहुता विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [विदेह सदेह ८] विदेह: सदेह ८ तिरहुता विदेह मैथिली शिशु उत्सव [विदेह सदेह ९] विदेह: सदेह ९ तिरहुता विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [विदेह सदेह १०] विदेह: सदेह १० तिरहुता विदेह:सदेह ११ विदेह: सदेह ११ तिरहुता विदेह:सदेह १२ विदेह: सदेह १२ तिरहुता विदेह:सदेह १३ विदेह: सदेह १३ तिरहुता विदेह:सदेह १४ विदेह: सदेह १४ तिरहुता विदेह:सदेह १५ विदेह: सदेह १५ तिरहुता विदेह:सदेह १६ विदेह: सदेह १६ तिरहुता विदेह:सदेह १७ विदेह: सदेह १७ तिरहुता विदेह:सदेह १८ विदेह: सदेह १८ तिरहुता विदेह:सदेह १९ विदेह: सदेह १९ तिरहुता विदेह:सदेह २० विदेह: सदेह २० तिरहुता विदेह:सदेह २१ विदेह: सदेह २१ तिरहुता विदेह:सदेह २२ विदेह: सदेह २२ तिरहुता विदेह:सदेह २३ विदेह: सदेह २३ तिरहुता विदेह:सदेह २४ विदेह: सदेह २४ तिरहुता विदेह:सदेह २५ विदेह: सदेह २५ तिरहुता विदेह-सदेह २६-३६ www.videha.co.in  विदेह ई-पत्रिकाक अंक १-३५० सँ- थीम आधारित मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ मूल आ अनूदित गद्य आ पद्यक एकटा समानान्तर संकलन विदेह:सदेह २६ (डॉ शम्भु कुमार सिंह आ डॉ अरुण कुमार सिंह अंक १-३५० सँ) विदेह: सदेह २६ तिरहुता विदेह:सदेह २७ (गजेन्द्र ठाकुर आ रवि भूषण पाठकक आन भाषासँ अनूदित गद्य आ पद्य- अंक १-३५० सँ) विदेह: सदेह २७ तिरहुता विदेह:सदेह २८ (अनूदित गद्य आ पद्य- अंक १-३५० सँ) विदेह: सदेह २८ तिरहुता विदेह:सदेह २९ (रवि भूषण पाठक आ डॉ. कैलाश कुमार मिश्र- अंक १-३५० सँ) विदेह: सदेह २९ तिरहुता विदेह:सदेह ३० (स्कूल-कॉलेजक विद्यार्थी लेल- अंक १-३५० सँ) विदेह: सदेह ३० तिरहुता विदेह:सदेह ३१ (डॉ. कामिनी कामायनी आ कुमार मनोज कश्यप- अंक १-३५० सँ) विदेह: सदेह ३१ तिरहुता विदेह:सदेह ३२ (रचनात्मक गद्य-पद्य लेखन भाग-१- अंक १-३५० सँ) विदेह: सदेह ३२ तिरहुता विदेह:सदेह ३३ (रचनात्मक गद्य-पद्य लेखन भाग-२- अंक १-३५० सँ) विदेह: सदेह ३३ तिरहुता विदेह:सदेह ३४ (रचनात्मक गद्य-पद्य लेखन भाग-३- अंक १-३५० सँ) विदेह: सदेह ३४ तिरहुता विदेह:सदेह ३५ (रचनात्मक गद्य-पद्य लेखन भाग-४- अंक १-३५० सँ) विदेह: सदेह ३५ तिरहुता विदेह:सदेह ३६ (रचनात्मक गद्य-पद्य लेखन भाग-५- अंक १-३५० सँ) विदेह: सदेह ३६ तिरहुता ................... यू.पी.एस.सी. आ आन प्रतियोगिता परीक्षा लेल देखू: विदेह:सदेह १७ विदेह:सदेह २१ विदेह:सदेह २३ विदेह:सदेह २६ विदेह:सदेह २९ विदेह:सदेह ३० विदेह:सदेह ३२ विदेह:सदेह ३३ विदेह:सदेह ३४ विदेह:सदेह ३५ ................ २ विदेहक सभटा पुरान अंक (अंक १ सँ ३५४ आ आगाँ) विदेहक अंक १-१४९ (देवनागरी, मिथिलाक्षर आ ब्रेलमे) देवनागरी मिथिलाक्षर ब्रेल Videha_01_01_08 Videha_01_01_08_Tirhuta 1 Videha_15_01_08 Videha_15_01_08_Tirhuta 2 Videha_01_02_08 Videha_01_02_08_Tirhuta 3 Videha_15_02_08 Videha_15_02_08_Tirhuta 4 Videha_01_03_08 Videha_01_03_08_Tirhuta 5 Videha_15_03_08 Videha_15_03_08_Tirhuta 6 Videha_01_04_2008 Videha_01_04_2008_Tirhuta 7 Videha_15_04_2008 Videha_15_04_2008_Tirhuta 8 Videha_01_05_2008 Videha_01_05_2008_Tirhuta 9 Videha_15_05_2008 Videha_15_05_2008_Tirhuta 10 Videha_01_06_2008 Videha_01_06_2008_Tirhuta 11 Videha_15_06_2008 Videha_15_06_2008_Tirhuta 12 Videha_01_07_2008 Videha_01_07_2008_Tirhuta 13 Videha_15_07_2008 Videha_15_07_2008_Tirhuta 14 Videha_01_08_2008 Videha_01_08_2008_Tirhuta 15 Videha_15_08_2008 Videha_15_08_2008_Tirhuta 16 Videha_01_09_2008 Videha_01_09_2008_Tirhuta 17 Videha_15_09_2008 Videha_15_09_2008_Tirhuta 18 Videha_01_10_2008 Videha_01_10_2008_Tirhuta 19 Videha_15_10_2008 Videha_15_10_2008_Tirhuta 20 Videha_01_11_2008 Videha_01_11_2008_Tirhuta 21 Videha_15_11_2008 Videha_15_11_2008_Tirhuta 22 Videha_01_12_2008 Videha_01_12_2008_Tirhuta 23 Videha_15_12_2008 Videha_15_12_2008_Tirhuta 24 Videha_01_01_2009 Videha_01_01_2009_Tirhuta 25 Videha_15_01_2009 Videha_15_01_2009_Tirhuta 26 Videha_01_02_2009 Videha_01_02_2009_Tirhuta 27 Videha_15_02_2009 Videha_15_02_2009_Tirhuta 28 Videha_01_03_2009 Videha_01_03_2009_Tirhuta 29 Videha_15_03_2009 Videha_15_03_2009_Tirhuta 30 Videha_01_04_2009 Videha_01_04_2009_Tirhuta 31 Videha_15_04_2009 Videha_15_04_2009_Tirhuta 32 Videha_01_05_2009 Videha_01_05_2009_Tirhuta 33 Videha_15_05_2009 Videha_15_05_2009_Tirhuta 34 Videha_01_06_2009 Videha_01_06_2009_Tirhuta 35 Videha_15_06_2009 Videha_15_06_2009_Tirhuta 36 Videha_01_07_2009 Videha_01_07_2009_Tirhuta 37 Videha_15_07_2009 Videha_15_07_2009_Tirhuta 38 videha_01_08_2009 videha_01_08_2009_tirhuta 39 videha_15_08_2009 videha_15_08_2009_tirhuta 40 videha_01_09_2009 videha_01_09_2009_tirhuta 41 videha_15_09_2009 videha_15_09_2009_tirhuta 42 videha_01_10_2009 videha_01_10_2009_tirhuta 43 videha_15_10_2009 videha_15_10_2009_tirhuta 44 videha_01_11_2009 videha_01_11_2009_tirhuta 45 videha_15_11_2009 videha_15_11_2009_tirhuta 46 videha_01_12_2009 videha_01_12_2009_tirhuta 47 videha_15_12_2009 videha_15_12_2009_tirhuta 48 videha_01_01_2010 videha_01_01_2010_tirhuta 49 videha_15_01_2010 videha_15_01_2010_tirhuta 50 videha_01_02_2010 videha_01_02_2010_tirhuta 51 videha_15_02_2010 videha_15_02_2010_tirhuta 52 videha_01_03_2010 videha_01_03_2010_tirhuta 53 videha_15_03_2010 videha_15_03_2010_tirhuta 54 videha_01_04_2010 videha_01_04_2010_tirhuta 55 videha_15_04_2010 videha_15_04_2010_tirhuta 56 videha_01_05_2010 videha_01_05_2010_tirhuta 57 videha_15_05_2010 videha_15_05_2010_tirhuta 58 videha_01_06_2010 videha_01_06_2010_tirhuta 59 videha_15_06_2010 videha_15_06_2010_tirhuta 60 videha_01_07_2010 videha_01_07_2010_tirhuta 61 videha_15_07_2010 videha_15_07_2010_tirhuta 62 videha_01_08_2010 videha_01_08_2010_tirhuta 63 videha_15_08_2010 videha_15_08_2010_tirhuta 64 videha_01_09_2010 videha_01_09_2010_tirhuta 65 videha_15_09_2010 videha_15_09_2010_tirhuta 66 videha_01_10_2010 videha_01_10_2010_tirhuta 67 videha_15_10_2010 videha_15_10_2010_tirhuta 68 videha_01_11_2010 videha_01_11_2010_tirhuta 69 videha_15_11_2010 videha_15_11_2010_tirhuta 70 videha_01_12_2010 videha_01_12_2010_tirhuta 71 videha_15_12_2010 videha_15_12_2010_tirhuta 72 videha_01_01_2011 videha_01_01_2011_tirhuta 73 videha_15_01_2011 videha_15_01_2011_tirhuta 74 videha_01_02_2011 videha_01_02_2011_tirhuta 75 videha_15_02_2011 videha_15_02_2011_tirhuta 76 videha_01_03_2011 videha_01_03_2011_tirhuta 77 videha_15_03_2011 videha_15_03_2011_tirhuta 78 videha_01_04_2011 videha_01_04_2011_tirhuta 79 videha_15_04_2011 videha_15_04_2011_tirhuta 80 videha_01_05_2011 videha_01_05_2011_tirhuta 81 videha_15_05_2011 videha_15_05_2011_tirhuta 82 videha_01_06_2011 videha_01_06_2011_tirhuta 83 videha_15_06_2011 videha_15_06_2011_tirhuta 84 videha_01_07_2011 videha_01_07_2011_tirhuta 85 videha_15_07_2011 videha_15_07_2011_tirhuta 86 videha_01_08_2011 videha_01_08_2011_tirhuta 87 videha_15_08_2011 videha_15_08_2011_tirhuta 88 videha_01_09_2011 videha_01_09_2011_tirhuta 89 videha_15_09_2011 videha_15_09_2011_tirhuta 90 videha_01_10_2011 videha_01_10_2011_tirhuta 91 videha_15_10_2011 videha_15_10_2011_tirhuta 92 videha_01_11_2011 videha_01_11_2011_tirhuta 93 videha_15_11_2011 videha_15_11_2011_tirhuta 94 videha_01_12_2011 videha_01_12_2011_tirhuta 95 videha_15_12_2011 videha_15_12_2011_tirhuta 96 videha_01_01_2012 videha_01_01_2012_tirhuta 97 videha_15_01_2012 videha_15_01_2012_tirhuta 98 videha_01_02_2012 videha_01_02_2012_tirhuta 99 videha_15_02_2012 videha_15_02_2012_tirhuta 100 videha_01_03_2012 videha_01_03_2012_tirhuta 101 videha_15_03_2012 videha_15_03_2012_tirhuta 102 videha_01_04_2012 videha_01_04_2012_tirhuta 103 videha_15_04_2012 videha_15_04_2012_tirhuta 104 videha_01_05_2012 videha_01_05_2012_tirhuta 105 videha_15_05_2012 videha_15_05_2012_tirhuta 106 videha_01_06_2012 videha_01_06_2012_tirhuta 107 videha_15_06_2012 videha_15_06_2012_tirhuta 108 videha_01_07_2012 videha_01_07_2012_tirhuta 109 videha_15_07_2012 videha_15_07_2012_tirhuta 110 videha_01_08_2012 videha_01_08_2012_tirhuta 111 videha_15_08_2012 videha_15_08_2012_tirhuta 112 videha_01_09_2012 videha_01_09_2012_tirhuta 113 videha_15_09_2012 videha_15_09_2012_tirhuta 114 videha_01_10_2012 videha_01_10_2012_tirhuta 115 videha_15_10_2012 videha_15_10_2012_tirhuta 116 videha_01_11_2012 videha_01_11_2012_tirhuta 117 videha_15_11_2012 videha_15_11_2012_tirhuta 118 videha_01_12_2012 videha_01_12_2012_tirhuta 119 videha_15_12_2012 videha_15_12_2012_tirhuta 120 videha_01_01_2013 videha_01_01_2013_tirhuta 121 videha_15_01_2013 videha_15_01_2013_tirhuta 122 videha_01_02_2013 videha_01_02_2013_tirhuta 123 videha_15_02_2013 videha_15_02_2013_tirhuta 124 videha_01_03_2013 videha_01_03_2013_tirhuta 125 videha_15_03_2013 videha_15_03_2013_tirhuta 126 videha_01_04_2013 videha_01_04_2013_tirhuta 127 videha_15_04_2013 videha_15_04_2013_tirhuta 128 videha_01_05_2013 videha_01_05_2013_tirhuta 129 videha_15_05_2013 videha_15_05_2013_tirhuta 130 videha_01_06_2013 videha_01_06_2013_tirhuta 131 videha_15_06_2013 videha_15_06_2013_tirhuta 132 videha_01_07_2013 videha_01_07_2013_tirhuta 133 videha_15_07_2013 videha_15_07_2013_tirhuta 134 videha_01_08_2013 videha_01_08_2013_tirhuta 135 videha_15_08_2013 videha_15_08_2013_tirhuta 136 videha_01_09_2013 videha_01_09_2013_tirhuta 137 videha_15_09_2013 videha_15_09_2013_tirhuta 138 videha_01_10_2013 videha_01_10_2013_tirhuta 139 videha_15_10_2013 videha_15_10_2013_tirhuta 140 videha_01_11_2013 videha_01_11_2013_tirhuta 141 videha_15_11_2013 videha_15_11_2013_tirhuta 142 videha_01_12_2013 videha_01_12_2013_tirhuta 143 videha_15_12_2013 videha_15_12_2013_tirhuta 144 videha_01_01_2014 videha_01_01_2014_tirhuta 145 videha_15_01_2014 videha_15_01_2014_tirhuta 146 videha_01_02_2014 videha_01_02_2014_tirhuta 147 videha_15_02_2014 videha_15_02_2014_tirhuta 148 videha_01_03_2014 videha_01_03_2014_tirhuta 149 विदेहक अंक १५०-३४४ VIDEHA_150 VIDEHA_151 VIDEHA_152 VIDEHA_153 VIDEHA_154 VIDEHA_155 VIDEHA_156 VIDEHA_157 VIDEHA_158 VIDEHA_159 VIDEHA_160 VIDEHA_161 VIDEHA_162 VIDEHA_163 VIDEHA_164 VIDEHA_165 VIDEHA_166 VIDEHA_167 VIDEHA_168 VIDEHA_169 VIDEHA_170 VIDEHA_171 VIDEHA_172 VIDEHA_173 VIDEHA_174 VIDEHA_175 VIDEHA_176 VIDEHA_177 VIDEHA_178 VIDEHA_179 VIDEHA_180 VIDEHA_181 VIDEHA_182 VIDEHA_183 VIDEHA_184 VIDEHA_185 VIDEHA_186 VIDEHA_187 VIDEHA_188 VIDEHA_189 VIDEHA_190 VIDEHA_191 VIDEHA_192 VIDEHA_193 VIDEHA_194 VIDEHA_195 VIDEHA_196 VIDEHA_197 VIDEHA_198 VIDEHA_199 VIDEHA_200 VIDEHA_201 VIDEHA_202 VIDEHA_203 VIDEHA_204 VIDEHA_205 VIDEHA_206 VIDEHA_207 VIDEHA_208 VIDEHA_209 VIDEHA_210 VIDEHA_211 VIDEHA_212 VIDEHA_213 VIDEHA_214 VIDEHA_215 VIDEHA_216 VIDEHA_217 VIDEHA_218 VIDEHA_219 VIDEHA_220 VIDEHA_221 VIDEHA_222 VIDEHA_223 VIDEHA_224 VIDEHA_225 VIDEHA_226 VIDEHA_227 VIDEHA_228 VIDEHA_229 VIDEHA_230 VIDEHA_231 VIDEHA_232 VIDEHA_233 VIDEHA_234 VIDEHA_235 VIDEHA_236 VIDEHA_237 VIDEHA_238 VIDEHA_239 VIDEHA_240 VIDEHA_241 VIDEHA_242 VIDEHA_243 VIDEHA_244 VIDEHA_245 VIDEHA_246 VIDEHA_247 VIDEHA_248 VIDEHA_249 VIDEHA_250 VIDEHA_251 VIDEHA_252 VIDEHA_253 VIDEHA_254 VIDEHA_255 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सम्बन्धी किछु आवश्यक पोथी/ जानकारी Learn Maithili Sign Language- Gajendra Thakur (2009/ 2023) मैथिली (मैथिली संकेत भाषा सहित- मैथिलीमे पहिल बेर) Learn Mithilakshar- Gajendra Thakur (2009/ 2023) Learn IPA through Mithilakshar- Gajendra Thakur (2009/ 2023) Learn Braille through Mithilakshar- Gajendra Thakur (2009/ 2023) Tirhuta Offline Keyboard download Keyman Tirhuta/ Vedic Devanagari Keyboards Download Learn Kaithi- Gajendra Thakur (2009/ 2023) कैथी लिपि (मैथिली साहित्य संस्थान डाउनलोड लिंक) Learn Newari- Gajendra Thakur (2009/ 2023) Learn Calligraphic Newari (Ranjana)- Gajendra Thakur (2009/ 2023) Learn Urdu Script- Gajendra Thakur (2009/ 2023) Learn Tibetan Script- Gajendra Thakur (2009/ 2023) Learn Japanese Script for Haiku- Gajendra Thakur (2009/ 2023) Learn Brahmi- Gajendra Thakur (2009/ 2023) Learn Kharoshthi- Gajendra Thakur (2009/ 2023) स्थायी स्तम्भ जेना मिथिला-रत्न, मिथिलाक खोज, विदेह पेटार आ सूचना-संपर्क-अन्वेषण सभ अंकमे समान अछि, तइ हेतु ई सभ स्तम्भ सभ अंकमे नै देल जाइत अछि, ई सभ स्तम्भ देखबा लेल क्लिक करू विदेहक ३४६ म, ३४७ म आ ३६५ म अंक। ऐ तीनू अंकमे सम्मिलित रूपेँ ई सभ स्तम्भ देल गेल अछि। विदेहक ३४५म आ आगाँक अंक देवनागरी मिथिलाक्षर आइ.पी.ए. मैथिली ब्रेल VIDEHA_345 VIDEHA_345_Tirhuta VIDEHA_345_IPA VIDEHA_345_Braille VIDEHA_346 VIDEHA_346_Tirhuta VIDEHA_346_IPA VIDEHA_346_Braille VIDEHA_347 VIDEHA_347_Tirhuta VIDEHA_347_IPA VIDEHA_347_Braille VIDEHA_348 VIDEHA_348_Tirhuta VIDEHA_348_IPA VIDEHA_348_Braille VIDEHA_349 VIDEHA_349_Tirhuta VIDEHA_349_IPA VIDEHA_349_Braille देवनागरी मिथिलाक्षर आइ.पी.ए. मैथिली ब्रेल कैथी VIDEHA_350 VIDEHA_350_Tirhuta VIDEHA_350_IPA VIDEHA_350_Braille VIDEHA_350_KAITHI VIDEHA_351 VIDEHA_351_Tirhuta VIDEHA_351_IPA VIDEHA_351_Braille VIDEHA_351_KAITHI VIDEHA_352 VIDEHA_352_Tirhuta VIDEHA_352_IPA VIDEHA_352_Braille VIDEHA_352_KAITHI VIDEHA_353 VIDEHA_353_Tirhuta VIDEHA_353_IPA VIDEHA_353_Braille VIDEHA_353_KAITHI VIDEHA_354 VIDEHA_354_Tirhuta VIDEHA_354_IPA VIDEHA_354_Braille VIDEHA_354_KAITHI नागरी तिरहुता आइपीए ब्रेल कैथी रंजना नेवाड़ी खरोष्ठी ब्राह्मी 355 Tirhu IPA Brail KAI Ran Newa Kharo Brahmi नागरी तिरहुता कैथी रंजना प्रचलित ब्राह्मी IPA ब्रेल खरोष्ठी उर्दू तिब्बती तिब्बती-उमे 356 Tirhu Kai Ran Newa Brah IPA ब्रेल खरोष्ठी उर्दू Tib Ume 357 Tirhu Kai Ran Newa Brah IPA ब्रेल खरोष्ठी उर्दू Tib Ume नागरी तिरहुता कैथी रंजना प्रचलित ब्राह्मी IPA ब्रेल तिब्बती तिब्बती-उमे 358 Tirhu Kai Ran Newa Brah IPA ब्रेल Tib Ume 359 Tirhu Kai Ran Newa Brah IPA ब्रेल Tib Ume 360 Tirhu Kai Ran Newa Brah IPA ब्रेल Tib Ume नागरी तिरहुता कैथी नेवाड़ी आइ.पी.ए. ब्रेल 361 Tirhuta Kaithi Newari IPA Braille 362 Tirhuta Kaithi Newari IPA Braille 363 Tirhuta Kaithi Newari IPA Braille 364 Tirhuta Kaithi Newari IPA Braille 365 Tirhuta Kaithi Newari IPA Braille ............. ३ विदेहक विशेषांक १) हाइकू विशेषांक Videha_15_06_2008 Videha_15_06_2008_Tirhuta 12 २) गजल विशेषांक Videha_01_11_2008 Videha_01_11_2008_Tirhuta 21 ३) विहनि कथा विशेषांक videha_01_10_2010 videha_01_10_2010_tirhuta 67 ४) बाल साहित्य विशेषांक videha_15_11_2010 videha_15_11_2010_tirhuta 70 ५) नाटक विशेषांक videha_15_12_2010 videha_15_12_2010_tirhuta 72 ६) समीक्षा विशेषांक videha_15_01_2011 videha_15_01_2011_tirhuta 74 ७) नारी विशेषांक videha_01_03_2011 videha_01_03_2011_tirhuta 77 ८) अनुवाद विशेषांक (गद्य-पद्य भारती) videha_01_01_2012 videha_01_01_2012_tirhuta 97 ९) बाल गजल विशेषांक videha_01_08_2012 videha_01_08_2012_tirhuta 111 १०) भक्ति गजल विशेषांक videha_15_03_2013 videha_15_03_2013_tirhuta 126 ११) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक videha_15_11_2013 videha_15_11_2013_tirhuta 142 १२) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक Videha_01_01_2015 १३) अरविन्द ठाकुर विशेषांक Videha_01_11_2015 १४) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक Videha_01_12_2015 १५) विदेह सम्मान विशेषा‍ंक विदेह सम्मान: सम्मान-सूची (समानान्तर साहित्य अकादेमी, समानान्तर ललित कला अकादेमी आ समानान्तर संगीत-नाटक अकादेमी सम्मान/ पुरस्कार नामसँ विख्यात) साक्षात्कार/ समारोह साक्षात्कार videha_15_12_2011 videha_15_01_2012 videha_01_02_2012 videha_01_03_2012 videha_01_09_2012 videha_15_01_2013 videha_01_03_2013 Videha_15_04_2016 Videha_01_07_2016 १६) मैथिली सी.डी./ अल्बम गीत संगीत विशेषांक Videha_01_01_2017 १७) मैथिली वेब पत्रकारिता विशेषांक VIDEHA 313 १८) मैथिली बीहनि कथा विशेषांक-२ VIDEHA 317 १९) रामलोचन ठाकुर विशेषांक VIDEHA 319 २०) रामलोचन ठाकुर श्रद्धांजलि विशेषांक VIDEHA 320 २१) राजनन्दन लाल दास विशेषांक VIDEHA 333 २२) रवीन्द्र नाथ ठाकुर विशेषांक VIDEHA_348 VIDEHA_348_Tirhuta VIDEHA_348_IPA VIDEHA_348_Braille २३) केदार नाथ चौधरी विशेषांक VIDEHA_352 VIDEHA_352_Tirhuta VIDEHA_352_IPA VIDEHA_352_Braille VIDEHA_352_KAITHI २४) प्रेमलता मिश्र 'प्रेम' विशेषांक Videha_357 Videha_357_Tirhuta २५) शरदिन्दु चौधरी विशेषांक Videha_358 Videha_358_Tirhuta ............. ४ लेखकक आमंत्रित रचना आ ओइपर आमंत्रित समीक्षकक समीक्षा सीरीज १.कामिनीक पांच टा कविता आ ओइपर मधुकान्त झाक टिप्पणी Videha_01_09_2016 २.जगदानन्द झा "मनु"क "माटिक बासन"पर गजेन्द्र ठाकुरक टिप्पणी VIDEHA_353 ३.मुन्नी कामतक एकांकी "जिन्दगीक मोल" आ ओइपर गजेन्द्र ठाकुरक टिप्पणी VIDEHA_354 ४.कपिलेश्वर राउतक ५ टा कथा आ ओइपर गजेन्द्र ठाकुरक टिप्पणी VIDEHA_356 ५.उमेश मण्डलक ५ टा कथा आ ओइपर गजेन्द्र ठाकुरक टिप्पणी Videha_357 ६.राम विलास साहुक ५ टा कथा आ ओइपर गजेन्द्र ठाकुरक टिप्पणी Videha_358 ७.नित नवल सुभाष चन्द्र यादव- सुभाष चन्द्र यादवक समस्त साहित्य आ ओइपर गजेन्द्र ठाकुरक टिप्पणी नित नवल सुभाष चन्द्र यादव नित नवल सुभाष चन्द्र यादव (मिथिलाक्षर) ८.राजदेव मण्डलक साहित्यपर गजेन्द्र ठाकुरक टिप्पणी Rajdeo Mandal- Maithili Writer ९.आचार्य रामदेव मण्डलक ५ टा कथा आ ओइपर गजेन्द्र ठाकुरक टिप्पणी Videha_360 १०.नन्द विलास रायक चारिटा कथा आ एकटा एकांकी आ ओइपर गजेन्द्र ठाकुरक टिप्पणी Videha_361 ११.जगदीश प्रसाद मण्डलक साहित्यपर गजेन्द्र ठाकुरक टिप्पणी Videha_362 १२.दुर्गानन्द मण्डलक पाँचटा कथा आ ओइपर गजेन्द्र ठाकुरक टिप्पणी Videha_363 १३.नारायण यादवक पाँचटा कथा आ ओइपर गजेन्द्र ठाकुरक टिप्पणी Videha_364 ................... ५ "पाठक हमर पोथी किए पढ़थि"- लेखक द्वारा अप्पन पोथी/ रचनाक समीक्षा सीरीज १. आशीष अनचिन्हार ०१ अगस्त २०२१ १.(a) आशीष अनचिन्हार ०१ मार्च २०२३ २. गजेन्द्र ठाकुर ०१ सितम्बर २०२२ ............... ६ एडिटर्स चोइस सीरीज एडिटर्स चोइस सीरीज-१ विदेहमे बलात्कारपर मैथिलीमे पहिल कविता प्रकाशित भेल छल। ई दिसम्बर २०१२ क दिल्लीक निर्भया बलात्कार काण्डक बादक समय छल। ओना ई अनूदित रचना छल, तेलुगुमे पसुपुलेटी गीताक कविताक हिन्दी अनुवाद केने छलीह आर. शांता सुन्दरी आ हिन्दीसँ मैथिली अनुवाद केने छलाह विनीत उत्पल। हमर जानकारीमे ऐसँ बेशी सिहराबैबला कविता ऐ विषयपर कोनो भाषामे नै रचल गेल अछि। कताक सालक बादो ई समस्या ओहने अछि। ई कविता सभकेँ पढ़बाक चाही, खास कऽ सभ बेटीक बापकेँ, सभ बहिनक भाएकेँ आ सभ पत्नीक पतिकेँ। आ विचारबाक चाही जे हम सभ अपना बच्चा सभ लेल केहन समाज बनेने छी। एडिटर्स चोइस सीरीज-१ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-२ विदेहमे ब्रेस्ट कैसरक समस्यापर विदेह मे मीना झा केर एकटा लघु कथा प्रकाशित भेल। ई मैथिलीक पहिल कथा छल जे ब्रेस्ट कैसर पर लिखल गेल। हिन्दीमे सेहो ताधरि ऐ विषयपर कथा नै लिखल गेल छल, कारण ऐ कथाक ई-प्रकाशित भेलाक १-२ सालक बाद हिन्दीमे दू गोटेमे घोंघाउज भऽ रहल छल कि पहिल हम आकि हम, मुदा दुनूक तिथि मैथिलीक कथाक परवर्ती छल। बादमे ई विदेह लघु कथामे सेहो संकलित भेल। एडिटर्स चोइस सीरीज-२ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-३ विदेहमे जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिलक किछु बाल कविता प्रकाशित भेल। बादमे हुनकर ३ टा बाल कविता विदेह शिशु उत्सवमे संकलित भेल जइमे २ टा कविता बेबी चाइल्डपर छल। पढ़ू ई तीनू कविता, बादक दुनू बेबी चाइल्डपर लिखल कविता पढ़बे टा करू से आग्रह। एडिटर्स चोइस सीरीज-३ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-४ विदेहमे जगदानन्द झा "मनु"क एकटा दीर्घ बाल कथा कहि लिअ बा उपन्यास प्रकाशित भेल, नाम छल चोनहा। बादमे ई रचना विदेह शिशु उत्सवमे संकलित भेल, ई रचना बाल मनोविज्ञानपर आधारित मैथिलीक पहिल रचना छी, मैथिली बाल साहित्य कोना लिखी तकर ट्रेनिंग कोर्समे ऐ उपन्यासकेँ राखल जेबाक चाही। कोना मॊडर्न उपन्यास आगाँ बढ़ै छै, स्टेप बाइ स्टेप आ सेहो बाल उपन्यास। पढ़बे टा करू से आग्रह। एडिटर्स चोइस सीरीज-४ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-५ एडिटर्स चोइस ५ मे मैथिलीक "उसने कहा था" माने कुमार पवनक दीर्घकथा "पइठ" (साभार अंतिका) । हिन्दीक पाठक, जे "उसने कहा था" पढ़ने हेता, केँ बुझल छन्हि जे कोना अहि कथाकेँ रचि चन्द्रधर शर्मा "गुलेरी" अमर भऽ गेलाह। हम चर्चा कऽ रहल छी, कुमार पवनक "पइठ" दीर्घकथाक। एकरा पढ़लाक बाद अहाँकेँ एकटा विचित्र, सुखद आ मोन हौल करैबला अनुभव भेटत, जे सेक्सपीरिअन ट्रेजेडी सँ मिलितो लागत आ फराको। मुदा ऐ रचनाकेँ पढ़लाक बाद तामस, घृणा सभपर नियंत्रणकेँ आ सामाजिक/ पारिवारिक दायित्वकेँ सेहो अहाँ आर गंभीरतासँ लेबै, से धरि पक्का अछि। मुदा एकर एकटा शर्त अछि जे एकरा समै निकालि कऽ एक्के उखड़ाहामे पढ़ि जाइ। एडिटर्स चोइस सीरीज-५ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-६ जगदीश प्रसाद मण्डलक लघुकथा "बिसाँढ़": १९४२-४३ क अकालमे बंगालमे १५ लाख लोक मुइला, मुदा अमर्त्य सेन लिखैत छथि जे हुनकर कोनो सर-सम्बन्धी ऐ अकालमे नै मरलन्हि। मिथिलोमे अकाल आएल १९६७ ई. मे आ इन्दिरा गाँधी जखन ऐ क्षेत्र अएली तँ हुनका देखाओल गेल जे कोना मुसहर जातिक लोक बिसाँढ़ खा कऽ ऐ अकालकेँ जीति लेलन्हि। मैथिलीमे लेखनक एकभगाह स्थिति विदेहक आगमनसँ पहिने छल। मैथिलीक लेखक लोकनि सेहो अमर्त्य सेन जेकाँ ओहि महाविभीषिकासँ प्रभावित नै छला आ तेँ बिसाँढ़पर कथा नै लिखि सकला। जगदीश प्रसाद मण्डल ऐपर कथा लिखलन्हि जे प्रकाशित भेल चेतना समितिक पत्रिकामे, मुदा कार्यकारी सम्पादक द्वारा वर्तनी परिवर्तनक कारण ओ मैथिलीमे नै वरण् अवहट्ठमे लिखल बुझा पड़ल, आ ओतेक प्रभावी नै भऽ सकल कारण विषय रहै खाँटी आ वर्तनी कृत्रिम। से एकर पुनः ई-प्रकाशन अपन असली रूपमे भेल विदेहमे आ ई संकलित भेल "गामक जिनगी" लघुकथा संग्रहमे। ऐ पोथीपर जगदीश प्रसाद मण्डलकेँ टैगोर लिटरेचर अवार्ड भेटलनि। जगदीश प्रसाद मण्डलक लेखनी मैथिली कथाधाराकेँ एकभगाह हेबासँ बचा लेलक, आ मैथिलीक समानान्तर इतिहासमे मैथिली साहित्यकेँ दू कालखण्डमे बाँटि कऽ पढ़ए जाए लागल- जगदीश प्रसाद मण्डलसँ पूर्व आ जगदीश प्रसाद मण्डल आगमनक बाद। तँ प्रस्तुत अछि लघुकथा बिसाँढ़- अपन सुच्चा स्वरूपमे। एडिटर्स चोइस सीरीज-६ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-७ मैथिलीक पहिल आ एकमात्र दलित आत्मकथा: सन्दीप कुमार साफी। सन्दीप कुमार साफीक दलित आत्मकथा जे अहाँकेँ अपन लघु आकाराक अछैत हिलोड़ि देत आ अहाँक ई स्थिति कऽ देत जे समानान्तर मैथिली साहित्य कतबो पढ़ू अहाँकेँ अछौं नै हएत। ई आत्मकथा विदेहमे ई-प्रकाशित भेलाक बाद लेखकक पोथी "बैशाखमे दलानपर"मे संकलित भेल आ ई मैथिलीक अखन धरिक एकमात्र दलित आत्मकथा थिक। तँ प्रस्तुत अछि मैथिलीक पहिल दलित आत्मकथा: सन्दीप कुमार साफीक कलमसँ। एडिटर्स चोइस सीरीज-७  (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-८ नेना भुटकाकेँ रातिमे सुनेबा लेल किछु लोककथा (विदेह पेटारसँ)। एडिटर्स चोइस सीरीज-८ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-९ मैथिली गजलपर परिचर्चा (विदेह पेटारसँ)। एडिटर्स चोइस सीरीज-९ (डाउनलोड लिंक) ...................... विदेह सम्मान: सम्मान-सूची (समानान्तर साहित्य अकादेमी, समानान्तर ललित कला अकादेमी आ समानान्तर संगीत-नाटक अकादेमी सम्मान/ पुरस्कार नामसँ विख्यात) .................... मैथिलीक वर्तनी १ मैथिलीक वर्तनी- विदेह मैथिली मानक भाषा आ मैथिली भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम भाषापाक २ मैथिलीक वर्तनीमे पर्याप्त विविधता अछि। मुदा प्रश्नपत्र देखला उत्तर एकर वर्तनी इग्नू BMAF001 सँ प्रेरित बुझाइत अछि, से एकर एकरा एक उखड़ाहामे उनटा-पुनटा दियौ, ततबे धरि पर्याप्त अछि। यू.पी.एस.सी. क मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेल सेहो ई पर्याप्त अछि, से जे विद्यार्थी मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेने छथि से एकर एकटा आर फास्ट-रीडिंग दोसर-उखड़ाहामे करथि| IGNOU  इग्नू       BMAF-001 These are print-on-demand books, send your queries to editorial.staff.videha@gmail.com. The eBooks of some of these are available for sale on Google Play. ४.२.मैथिली पोथी डाउनलोड Maithili Books Download वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू। Always refresh the pages for viewing new issue of VIDEHA. Top of Form Search above & below within more than 350 old issues of Videha eJournal विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् www.videha.co.in Bottom of Form https://books.google.com/ Top of Form Bottom of Form Videha Archive of Maithili Books विदेह मैथिली पोथीक आर्काइव (पूर्णतः अव्यवसायिक उद्देश्य आ मात्र एकेडमिक प्रयोग लेल) सभ पोथी पी.डी.एफ. डाउनलोड लेल क्रमानुसार नीचाँक लिंक सभपर उपलब्ध अछि। All the books are available for pdf download at the respective links below .............. तिरहुता, नेवाड़ी आ कैथी फॉण्ट डाउनलोड Google's Noto Fonts project/ GitHub तिरहुता नोटो फॉण्ट कैथी ओटीएफ कैथी टीटीएफ नेवाड़ी ओ.टी.एफ. नेवाड़ी टी.टी.एफ. https://fonts.google.com/ (Google Open Fonts download) Tirhuta Offline Keyboard download Keyman Tirhuta/ Vedic Devanagari Keyboards Download https://malarproject.gitlab.io/tirhuta (Tirhuta Keyboard Online) ................. बौद्ध चर्यापद चर्यापद महाकवि डाक डाकवचन ज्योतिरीश्वर ठाकुर मैथिली धूर्तसमागम विद्यापति व्याडीभक्ति तरङ्गिणी गोरक्षविजयम् शंकरदेव पारिजातहरण रामविजय दैत्यारि ठाकुर श्यामंत हरण यात्रा (अंकिया नाट) लक्ष्मीदेव कुमारहरण नाट शत स्कंध रावण वध (अंकिया नाट) जगत्प्रकाशमल्ल प्रभावतीहरण नाटक सिद्ध नरसिंहमल्ल गीतावली सिद्धि जगत्ज्योतिर्रमल्ल हरगौरी विवाह नाटक कुञ्जविहार नाटक हर्षनाथ झा माधवानन्द नाटक उषाहरण हर्षनाथ काव्यग्रन्थावली (संकलन अमरनाथ झा १८९७-१९५५) रत्नपाणि उषाहरण नाटक श्रीकांत श्रीकृष्ण जन्म रहस्य नन्दीपति कृष्णकेलिमाला गीतमाला कान्हा रामदास गौरीस्वयंवर लाल गौरीस्वयंवर नाटक उमापति पारिजात हरण भानुनाथ प्रभावती हरण देवानन्द उषाहरण रमापति रुक्मणी परिचय उपाध्याय रामदास आनन्द विजयाभिदान नाटिका शिवदत्त गौरीपरिणय सीतास्वयंवर दुर्गाविजय पारिजात नाटक .................... कथा बौद्ध सिद्ध मेहथपा (बाल साहित्य केन्द्रित) मेंहथमे भेल ८२ म सगर राति दीप जरयमे पठित कथा सभक संकलन कथा बौद्ध सिद्ध मेहथपा सखुआवाली (नारी विमर्श केन्द्रित) भपटियाहीमे भेल ८३ म सगर राति दीप जरयमे पठित कथा सभक संकलन सखुआवाली मुंशी रघुनन्दन दास (१८६०-१९४५) (सौजन्य- राधाकृष्णन् दास) सुभद्रा हरण रासबिहारी लाल दास (१८७२-१९४०) (सौजन्य- रमानन्द झा "रमण") सुमति हरिनन्दन दास (सौजन्य- रमानन्द झा "रमण") सुदामा चरित पं रामजी चौधरी (१८७८-१९५२) (सौजन्य- श्री श्रीमोहन चौधरी) विविध भजनावली धनुषधारी दास (१८९५-१९६५) (सौजन्य- पञ्जीकार विद्यानन्द झा) मैथिली में बिहारी ................ डॉ. रामभरोस कापड़ि "भ्रमर" (सौजन्य- रामभरोस कापड़ि भ्रमर) महिषासुर मुर्दावाद एवं अन्य नाटक (१९९७) लोक नाट्य: जट जटिन (२००७) (शोध) हुगली ऊपर बहैत गंगा आ आन कथा (कथा संग्रह) (२००८) भ्रमर मैथिली दीर्घ कविता (हिन्दी अनुवाद-अब बस नहीं) (२००९) मैथिली लोक संस्कृति (नेपाली भाषामे) (२००९) भैया अएलै अपन सोराज (नाटक संग्रह) (२०१०) घरमुहाँ (उपन्यास) (२०१२)- ई बुक वर्जन घरमुँहा (उपन्यास) (२०१२)- प्रिंट वर्जन अनहरियाक चान (गजल संग्रह) (२०१३) चीन जे हम देखल (यात्रा संस्मरण) (२०१४) सूली पर इजोत एवं अन्य नाटक (२०१५) सीमाके आर-पार (यात्रा संस्मरण) (२०१६) युद्धभूमिक एसगर योद्धा (कविता संग्रह) (२०१७) एंटीवायरस (कथा संग्रह) (२०१९) कोरोनाक संत्रासमे ओझरायल जिनगी (लकडाउन डायरी) (२०२०) मिथिलाक लोकजीवन लोकसन्दर्भ (२०२२) सोन्हगर गन्धक अन्वेषी डा. प्रफुल्ल कुमार सिंह 'मौन' मैथिली लोक संस्कृति संगोष्ठी स्मारिका (२०१०) आंगन अंक-४ (२०१२) गामघर-३०-०८-२०१८ गामघर-०४-१०-२०१८ गामघर-१६-०५-२०१९ गामघर-२७-०६-२०१९ आँजुर (अंक वर्ष ३६, अंक ३) रामभरोस कापड़ि "भ्रमर"क किछु नाटक मुन्नाजी द्वारा साक्षात्कार पृ. ३२१-३२८ देसिल बयनाक बहन्ने रामलोचन ठाकुर प्रसंग पृ. ३४७-३५७ हमर ज्ञान-पिपाशाक स्रोत: शरदिन्दु चौधरी पृ. ३१-३४ जट जटिन पृ. ५६८-७०५ भैया, अएलै अपन सोराज पृ. ५६८-७०५ आलेख कथा-फ्लैशबैक पृ. ८४-८८ आलेख पृ. पृ. ११७-१२५ आलेख पृ. १२७६-१२९० आलेख पृ. ९७-९८ रायपुर यात्रा प्रसंग पृ. १५०-१५४ सलहेस परिचर्चा रिपोर्ट पृ. ४१-४५ रिपोर्ट पृ. २३१-२४३ रिपोर्ट पृ. ४४५ रिपोर्ट पृ ५६८-६०५ रिपोर्ट पृ. ५८३-५८५ गंगा प्रसादक स्वायत्तता आ हुगलीपर बहैत गंगा पृ. २२३-२२६ गीत पृ. १४४९-१४५० गजल गीत पृ. २११ अन्हारक विरुद्ध आ आजाद गजल पृ. ६१९-६२१) बृषेश चन्द्र लाल (सौजन्य- बृषेश चन्द्र लाल) आन्दोलन (कविता संग्रह) ढोलक (बाल कविता संग्रह) सुम्निमा (अनूदित उपन्यास) मोदिआइन (बी.पी.कोइरालाक कथा) माल्हो (कथा संग्रह) गोलबा (कथा संग्रह) परमेश्वर कापड़ि (सौजन्य- परमेश्वर कापड़ि) धूआ-धजा अंक ७ अंक १४ अंक १५ अंक १६ अंक १८ अंक १० जून २०१२ अंक २४ जून २०१२ २५ जुलाइ २०१२ ०५ अगस्त २०१२ २३ फरबरी २०१६ आसिन २०७३ सुजीत कुमार झा (सौजन्य- सुजीत कुमार झा) रिपोर्टर डायरी (रिपोर्ताज) चिड़ै (लघुकथा-संग्रह) जिद्दी (लघुकथा संग्रह) कोइली घूरि आउ (बाल लघु-विहनि कथा संग्रह) गन्ध (लघु कथा संग्रह) खजुरीबाली (लघु कथा संग्रह) बुलबुल (कथा संग्रह) दूधमती- (नेपाली आ मैथिलीमे) अंक ३१ अंक ३२ अंक ३३ अंक ३४ अंक 35 अंक 36 अंक 37 अंक 38 अंक 39 अंक 40 अंक 41 विन्देश्वर ठाकुर नेपालक नोर मरुभूमिमे विनीत ठाकुर (सौजन्य- विनीत ठाकुर) बाँकी अछि हम्मर दूधक कर्ज संतोष मिश्र (सौजन्य- संतोष मिश्र) पोसपुत (लघुकथा-संग्रह) उदास मोन (लघुकथा-संग्रह) एना-किए (कविता-संग्रह) अएना (संपादन- कविता-संग्रह) कनकमणि दीक्षित (मूल नेपालीसँ मैथिली अनुवाद रूपा धीरू आ धीरेन्द्र प्रेमर्षि, बाल साहित्य) (सौजन्य- धीरेन्द्र प्रेमर्षि) भगता बेङक देश-भ्रमण ... डॉ शशिधर कुमर आ सुप्रिया बेबी कुमारी भूकम्प (पृ. ६३८-६७४) अणिमा सिंह (सौजन्य- नचिकेता) शिशु गीत खेल इलारानी सिंह (सौजन्य- नचिकेता) प्रेम- एक कविता (अनूदित नाटक) अरुन्धती देवी (सौजन्य- रमानन्द झा "रमण") मिथिलाक विदुषी महिला कल्पना झा (सौजन्य- कल्पना झा) गोसाउनिक गीत नशामुक्ति हित गाबी गीत निनियाँ यायावरी- शेफालिका वर्मा (हिन्दी अनुवाद कल्पना झा) मुन्नी कामत (सौजन्य- मुन्नी कामत) सुखल मन तरसल आँखि (पद्य आ गद्य) सुखल मन तरसल आँखि (कविता) अंततः (कविता संग्रह) चुक्का (बाल कथा संग्रह) नीता झा (सौजन्य- नीता झा) बिलाइ मौसी (बाल लघुकथा संग्रह) शेफालिका वर्मा (सौजन्य- शेफालिका वर्मा) यायावरी (यात्रावृत्तान्त) यायावरी (हिन्दी अनुवाद- कल्पना झा) अर्थयुग (लघुकथा संग्रह) एकटा अकास (लघुकथा संग्रह) भावांजलि (गद्य गीत) किस्त-किस्त जीवन (आत्म कथा) आखर-आखर प्रीत नागफांस (उपन्यास) Naagphans (In English) विभा रानी विभा रानीक दूटा नाटक (भाग रौ आ बलचन्दा) पन्ना झा (सौजन्य- नरेन्द्र झा) अनुभूति (लघुकथा स‍ंग्रह) सुशीला झा (सौजन्य- प्रभा खेतान/ सुशीला झा) छिन्नमस्ता- प्रभा खेतानक हिन्दी उपन्यासक मैथिली अनुवाद डॉ. ललिता झा (सौजन्य- ललिता झा) मैथिलीक भोजन सम्बन्धी शब्दावली डॉ. कामिनी कामायनी विदेह:सदेह ३१ (डॉ. कामिनी कामायनी आ कुमार मनोज कश्यप- अंक १-३५० सँ) प्रीति ठाकुर गोनू झा आ आन मैथिली चित्रकथा -पहिल मैथिली चित्रकथा (बाल साहित्य) मैथिली चित्रकथा (बाल साहित्य) मिथिलाक लोकदेवता (बाल साहित्य) विद्यापतिक पुरुष परीक्षा (बाल साहित्य) रेस (अनुवाद- बाल चित्रकथा) ए बी सी डी- प्रकृति अक्षर पोथी (अनुवाद- बाल चित्रकथा) सभ खाइत अछि (अनुवाद- बाल चित्रकथा) बो म्याउ बाह (अनुवाद- बाल चित्रकथा) रङ सभ (अनुवाद- बाल चित्रकथा) (०६) छोट आ पैघ (अनुवाद- बाल चित्रकथा) (०७) माल-जाल आ जानवर दिस देखू (अनुवाद- बाल चित्रकथा) (१७) हमर परिवार (अनुवाद- बाल चित्रकथा) जानवर (अनुवाद- बाल चित्रकथा) पोथी १३: १...२...३... (अनुवाद- बाल चित्रकथा) बाजाक अबाज (अनुवाद- बाल चित्रकथा) नीतू कुमारी मैथिली चित्रकथा ( बाल साहित्य) किरण चौधरी (अनूदित सचित्र मैथिली बाल कथा) पिसी संग हम हमर बाल-वाड़ी आर्या कॉकपिट मे दीपा करमाकर- सही संतुलन मे जंगल मे अहाँक स्वागत अछि व्हेल छथि आकाश मे भैया के मुस्कान के चोरौलक बीज संचयक अचंभित करय "फिबोनाची" शौचालयक खिस्सा लाल बरसाती गुल्लीक जादुई पेटी समीराक विकठ भोजन विवाह मे जाई छी प्रियंका झा (अनूदित सचित्र मैथिली बाल कथा) हमर माँछ! नै हमर माँछ! रश्मि प्रिया (अनूदित सचित्र मैथिली बाल कथा) कैयो सकै छी, नहियो कऽ सकै छी सुनीता ठाकुर (अनूदित सचित्र मैथिली बाल कथा) बण्टी आ बबली नीलिमा चौधरी (अनूदित सचित्र मैथिली बाल कथा) हमर सभसँ नीक संगी स्वास्तिका ठाकुर (अनूदित सचित्र मैथिली बाल कथा) गप्पू बुते नाचल नै होइ छै तूलिका (अनूदित सचित्र मैथिली बाल कथा) हमरा ओ चाही! मधूलिका मिश्र (अनूदित सचित्र मैथिली बाल कथा) ओंघाइत भीमा लक्ष्मी ठाकुर जानवर सभ संगे भेँट-घाँट पूनम मण्डल सुतै कालक खिस्सा .................. राधाकृष्ण चौधरी (सौजन्य- प्रभात कुमार चौधरी/ IGNCA) मिथिलाक इतिहास A Survey of Maithili Literature The Political and Cultural Heritage of Mithila Mithila in the Age of Vidyapati सुभाष चन्द्र यादव (सौजन्य- सुभाष चन्द्र यादव) राजकमल चौधरी: मोनोग्राफ (नित नवल राजकमल) बनैत बिगड़ैत (लघुकथा संग्रह) गुलो रमता जोगी मडर भोट गुलो: कला आ भाषा (सम्पादक तारानन्द वियोगी आ केदार कानन) नित नवल सुभाष चन्द्र यादव (लेखक गजेन्द्र ठाकुर) नित नवल सुभाष चन्द्र यादव (मिथिलाक्षर) अशोक (सौजन्य- अशोक आ शिवशंकर श्रीनिवास) चक्रव्यूह (कविता संग्रह) (१९८६) त्रिकोण (कथा संग्रह) (१९८६) ओहि रातिक भोर (कथा संग्रह) (१९९१) मातबर (कथा संग्रह) (२००१) संवाद (साक्षात्कार संग्रह) (२००७) आँखिमे बसल (यात्रा कथा) (२०१३) बात-विचार (आलोचना) (२०१५) डैडीगाम (कथा संग्रह) (२०१७) अशोक-सेलेक्शन्स (विविध) अशोक-नव कविता नीक दिनक बाइस्कोप (व्यंग्य संग्रह) (२०१८) मुन्ना जी द्वारा साक्षात्कार (पृ. ३८२-३८५) बनैत कम बिगड़ैत बेसी (पृ. २०२३-२०३१) सम्पादक राजनन्दन लाल दास आ कर्णामृत (पृ. ११९-१२२) रामलोचन ठाकुरक कविता पढ़ैत (पृ. ३२७-३४१) केदार नाथ चौधरीक उपन्यास (पृ. १०१-१०६) शरदिन्दुजी (पृ. ७०-७३) सुधांशु शेखर चौधरी (सौजन्य- शरदिन्दु चौधरी) शेखर रचित गजल ओ गीत शरदिन्दु चौधरी (सौजन्य- शरदिन्दु चौधरी) जँ हम जनितहुँ (२००२) बड़ अजगुत देखल (२००५) गोबरगणेश (२०११) करिया कक्काक कोरामिन (२०१६) बात-बातपर बात खण्ड-१ (२०१९) मर्मान्तक-शब्दानुभूति (बात-बातपर बात खण्ड-२) (२०२०) हमर अभाग: हुनक नहि दोष (बात-बातपर बात-३) (२०२१) साक्षात् (बात-बातपर बात-४) (२०२१) विदेह शरदिन्दु चौधरी विशेषांक काशीकान्त मिश्र मधुप विदेह काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक राजनन्दन लाल दास विदेह राजनन्दन लाल दास विशेषांक प्रेमलता मिश्र प्रेम विदेह प्रेमलता मिश्र प्रेम विशेषांक रवीन्द्र नाथ ठाकुर विदेह रवीन्द्र नाथ ठाकुर विशेषांक कलानन्द भट्ट (सौजन्य- केदार कानन) कान्ह पर लहास हमर मैथिली गजल संग्रह अनुलग्नक-कोसी कॉलोनी सँ किशन कुटीर धरि मायानन्द मिश्र (सौजन्य- केदार कानन) अवांतर (गजल-गीतल) केदार कानन (सौजन्य केदार कानन/ CIIL) सृजन केर दीप पर्व- सं किशुन समग्र-१ (सम्पादक केदार कानन आ रमण कुमार सिंह) किशुन समग्र-२ (सम्पादक केदार कानन आ रमण कुमार सिंह) महेन्द्र (CIIL) जुआयल कनकनी बाबा बैद्यनाथ (सौजन्य- बाबा बैद्यनाथ) पहरा इमानपर (गजल संग्रह) अरविन्द ठाकुर (सौजन्य- अरविन्द ठाकुर/ CIIL) परती टूटि रहल अछि (कविता संग्रह) अन्हारक विरोध मे (लघु कथा संग्रह) बहुरुपिया प्रदेश मे (गजल संग्रह) सृजन केर दीप पर्व- सं सबद मितारथ धाय्या रोशनाइक लोकपक्ष (कथेतर गद्य) जड़ताक प्रतिवाद मे (सोल्हकन-दीठक आरोहण गाथा- दीर्घ कविता) विदेह अरविन्द ठाकुर विशेषांक नरेन्द्र झा (सौजन्य- नरेन्द्र झा) विकास ओ अर्थतंत्र राजेश्वर झा (मैथिली साहित्य संस्थान आर्काइव) मिथिलाक्षरक उद्भव ओ विकास सुरेन्द्र झा सुमन (आर्काइव डॊट कॊम) दत्त-वती (मूल) गोविंद झा ((IGNCA Site आर्काइव) Maithili-English Dictionary रामदेव झा (सौजन्य- शंकरदेव झा) सव्यसाची (अभिनन्दन ग्रन्थ) मैथिली शब्द संचय दत्त-वतीक वस्तु कौशल डॊ शैलेन्द्र मोहन झा (आर्काइव डॊट कॊम/ CIIL) परिचय निचय मैथिली गद्य संग्रह- सं रमानाथ झा (CIIL Site आर्काइव) प्रबन्ध संग्रह रमानाथ मिश्र "मिहिर" (आर्काइव डॊट कॊम) मैथिली मुहावरा एवम् लोकोक्ति प्रकाश आनन्द मिश्र (सौजन्य- रमानन्द झा "रमण") मिथिला भाषाक सुबोध व्याकरण श्यामानन्द झा (सौजन्य- रमानन्द झा "रमण") मैथिली गीत चन्द्रिका मैथिली संदेश (विभिन्न कविक कविता-सम्पादित) भवप्रीतानन्द ओझा (सौजन्य- रमानन्द झा "रमण") पदावली गणनाथ-विन्ध्यनाथ पदावली (सौजन्य- रमानन्द झा "रमण") गणनाथ-विन्ध्यनाथ पदावली रूपनारायण झा "राकेश" (सौजन्य- रमानन्द झा "रमण") मनमोहन लड्डू भोला लाल दास (आर्काइव डॊट कॊम) मैथिली सुबोध व्याकरण खड्ग वल्लभ दास 'स्वजन' (सौजन्य- हेमन्त दास "हिम") सीता-शील डॉ. मदनेश्वर मिश्र (सौजन्य- पञ्जीकार विद्यानन्द झा) एक छलीह महारानी यात्री (नागार्जुन) (सौजन्य- मिथिला सांस्कृतिक परिषद) बलचनमा कालीकान्त झा "बूच" कलानिधि- कविता-संग्रह उपेन्द्रनाथ झा "व्यास" (सौजन्य- मयंक झा) रूबाइयात-ए-ओमर खैयाम (मैथिली पद्यानुवाद) प्रतीक (कविता संग्रह) संन्यासी (काव्य) रमेश नारायण (सौजन्य- शेफालिका वर्मा) पाथरक नाव (लघुकथा संग्रह) गोपालजी झा "गोपेश" (सौजन्य- गोपालजी झा "गोपेश") गुम्म भेल ठाढ़ छी विजय नाथ झा (सौजन्य- विजय नाथ झा) अहींक लेल (गीत-गजल संग्रह) नगेन्द्र कुमर (सौजन्य- प्रसन्न कुमार झा) ससरफानी प्रबोध नारायण सिंह (सौजन्य- नचिकेता) अन्हेर नगरी (अनुवाद) चयनिका (सम्पादन) वैजयन्ती (कविता) हाथीक दाँत टटका गप (सम्पादित कथा संकलन) प्रेमक रोग (नाटक) अमरनाथ (सौजन्य- अमरनाथ) क्षणिका- विहनि कथा संग्रह प्रफुल्ल कुमार सिंह 'मौन' पंचदेवोपासक भूमि मिथिला पृ. १००१-१०८० डॉ. गंगेश गुंजन (सौजन्य- गंगेश गुंजन) राधा (१-३०) पृ. १३७३-१५८० प्रथम-चौबटिया-नाटक (बुधिबधिया) नाटक आइ भोर कथा-संग्रह उचितवक्ता गीत-गजल दुखक दुपहरिया कमलधर दास (सौजन्य- कमलधर दास) मैथिल कर्ण कायस्थक गोत्र, प्रवर, मूल आ वैवाहिक सम्बन्ध कीर्तिनारायण मिश्र (सौजन्य- कीर्तिनारायण मिश्र) ध्वस्त होइत शान्ति स्तूप सीमान्त आदमीकेँ जोहैत अपन एकान्त मे लल्लन प्रसाद ठाकुर (सौजन्य- कुसुम ठाकुर) लौंगिया मिरचाइ कुसुम ठाकुर प्रत्यावर्तन (आत्मकथा)(पृ. ४५९-५७२) राजनाथ मिश्र Mithila_Painting-Modern Art-Photos प्रेमशंकर सिंह मैथिली भाषा साहित्य:बीसम शताब्दी (आलोचना) डॉ. रमण झा (सौजन्य- रमण झा) मैथिली काव्यमे अलङ्कार अलङ्कार-भास्कर मैथिली काव्यमे ज्योतिष भिन्न-अभिन्न अहिरावण-वध (खण्ड काव्य) पारिजात-मञ्जरी डॉ. रमानन्द झा 'रमण' (सौजन्य- रमानन्द झा "रमण"/ CIIL Site आर्काइव) हिआओल सगर राति दीप जरय राजू आ टाकाक गाछ (अनुवाद) अखियासल केदार नाथ चौधरी (सौजन्य- केदार नाथ चौधरी) चमेलीरानी माहुर करार अबारा नहितन अयना हीना विदेह केदार नाथ चौधरी विशेषांक योगेन्द्र पाठक "वियोगी" (सौजन्य- योगेन्द्र पाठक "वियोगी") विज्ञानक बतकही विज्ञानक बतकही भाग-२ नरक विजय (सम्पूर्ण) नरक विजय (संशोधित) हमर गाम (बाल उपन्यास) पिरामिडक देशमे अकटा मिसिया (कथा संग्रह) रोबोट (अनूदित साइंस-फिक्शन नाटक) किछु तीत मधुर (यात्रा वृत्तांत) सुशील (सौजन्य- सुशील) घराड़ी (उपन्यास) (१९७३) गामबाली (उपन्यास) (१९८२) भामती (नाटक) (पहिल मंचन १९९१, प्रकाशन २०१३) अस्मिता (लघुकथा संग्रह) (२०१६) कामेश्वर झा 'कमल' (सौजन्य- नबोनारायण मिश्र) कमल-ताल (गीत संग्रह) रामलोचन ठाकुर (सौजन्य- रामलोचन ठाकुर) आँखि मुनने आँखि खोलने (संस्मरण) स्मृतिक धोखरल रंग (संस्मरण) अपूर्वा (कविता संग्रह) इतिहासहन्ता (कविता संग्रह) देशक नाम छलै सोन चिड़ैया (कविता संग्रह) लाख प्रश्न अनुत्तरित (कविता संग्रह) प्रतिध्वनि (विदेशी भाषाक कविताक मैथिली रूपान्तरण) पद्मानदीक माझी (अनूदित उपन्यास) मैथिली लोककथा आजुक कविता (सम्पादित कविता संग्रह) बेताल कथा (हास्य-व्यंग) देसिल बयना (अख़बार) विदेह रामलोचन ठाकुर विशेषांक डॉ. देवशंकर नवीन (सौजन्य- देवशंकर नवीन) आधुनिक साहित्यक परिदृश्य डॉ बचेश्वर झा निवन्ध-निकुञ्ज कीर्तिनाथ झा (सौजन्य- कीर्तिनाथ झा) कुरल: मैथिली भावानुवाद जगदीश चन्द्र ठाकुर "अनिल" (सौजन्य- जगदीश चन्द्र ठाकुर "अनिल") आँखिमे चित्र हो मैथिली केर (आत्मकथा- जारी) धारक ओइ पार (दीर्घ कविता) गीत गंगा (गीत संग्रह) गजल गंगा (गजल संग्रह) तोरा अंगना मे (गीत संग्रह) तोरा अंगना मे (गीत संग्रह)- मूल विदेह जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक राज किशोर मिश्र चाननि (कविता संग्रह) सप्तपर्ण (कविता संग्रह) रबीन्द्र नारायण मिश्र (सौजन्य- रबीन्द्र नारायण मिश्र) भोरसँ साँझ धरि (आत्म कथा) प्रसंगवश (निवंध) स्वर्ग एतहि अछि (यात्रा प्रसंग) फसाद (कथा संग्रह) नमस्तस्यै (उपन्यास) विविध प्रसंग (निवंध) महराज (उपन्यास) लजकोटर (उपन्यास) सीमाक ओहि पार (उपन्यास) समाधान (निवंध संग्रह) मातृभूमि (उपन्यास) स्वप्नलोक (उपन्यास) शंखनाद (उपन्यास) इएह थिक जीवन (संस्मरण) ढहैत देबाल (उपन्यास) पाथेय (संस्मरण) हम आबि रहल छी (उपन्यास) प्रलयक परात (उपन्यास) बीति गेल समय (उपन्यास) प्रतिबिम्ब (उपन्यास) बदलि रहल अछि सभ किछु (उपन्यास) राष्ट्र मंदिर (उपन्यास) संयोग (कथा संग्रह) नाचि रहल छलि वसुधा (उपन्यास) नन्द कुमार मिश्र 'नन्द' (सौजन्य- नन्द कुमार मिश्र 'नन्द') गामघर (कथा संग्रह) सुजाता (उपन्यास) महारानी कैकेयी (प्रवचनात्मक निबन्ध) गुदरीक लाल (उपन्यास) अनठिया कुकुर (उपन्यास) आडम्बर (कथा संग्रह) दिल्लीक पार्क (शब्द चित्र) सुकन्या (उपन्यास) स्वर्ण कमल (बाल उपन्यास) काव्य सरिता (मैथिली काव्य संग्रह) परिवार (संस्मरणात्मक उपन्यास) याचक के नञि (मैथिली शब्द-चित्र) तारानन्द वियोगी (सौजन्य- तारानन्द वियोगी) प्रलय रहस्य सत्यानन्द पाठक (सौजन्य- सत्यानन्द पाठक) हमर गाम डॉ. उदय नारायण सिं‍ह "नचिकेता" (सौजन्य- नचिकेता) नो एण्ट्री : मा प्रविश आन्दोलन एक छल राजा जनक आ' अन्यान्य एकांकी नाटक क लेल नायक क नाम जीवन प्रत्यावर्त्तन रामलीला प्रियंवदा (एकांकी) मैथिली कविता-त्रैमासिक (अप्रैल १९६९) मैथिली कविता-त्रैमासिक (जुलाइ १९६९) रवि भूषण पाठक रिहर्सल (नाटक) विदेह:सदेह २९ (रवि भूषण पाठक आ डॉ. कैलाश कुमार मिश्र- अंक १-३५० सँ) विदेह:सदेह २७ (गजेन्द्र ठाकुर आ रवि भूषण पाठकक आन भाषासँ अनूदित गद्य आ पद्य- अंक १-३५० सँ) डॉ. कैलाश कुमार मिश्र विदेह:सदेह २९ (रवि भूषण पाठक आ डॉ. कैलाश कुमार मिश्र- अंक १-३५० सँ) कुमार मनोज कश्यप विदेह:सदेह ३१ (डॉ. कामिनी कामायनी आ कुमार मनोज कश्यप- अंक १-३५० सँ) डॉ. शम्भु कुमार सिंह (तुकाराम रामा शेटक कोंकणी उपन्यासक मैथिली अनुवाद डॉ शम्भु कुमार सिंह द्वारा) पाखलो विदेह:सदेह २६ (डॉ शम्भु कुमार सिंह आ डॉ अरुण कुमार सिंह अंक १-३५० सँ) डॉ. अरुण कुमार सिंह विदेह:सदेह २६ (डॉ शम्भु कुमार सिंह आ डॉ अरुण कुमार सिंह अंक १-३५० सँ) कुमार पवन (सौजन्य- अंतिका) पइठ (मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ कथा) डायरीक खाली पन्ना केशव भारद्वाज अजगुत अफ्रीका (अफ्रीका डायरी) पृ. २१४-४६६ किछु पढ़ल आ किछु सुनल- ईदी अमीन पृ. ४८८-५४८ खेलौना पृ. ४६७-४८७ पैबन्द पृ. ५४९-७९८ किछु कथा ५०-४६३ गोपाल झा 'अभिषेक' (सौजन्य- गोपाल झा 'अभिषेक') आउ स्वप्न साझी करी (कविता संग्रह) आमोद कुमार झा (सौजन्य- आमोद कुमार झा) बिम्बक पथार (कविता संग्रह) आशीष अनचिन्हार संदर्भ सहित (गजल-आलोचना) कुमारि इच्छा (गजल संग्रह) जंघाजोड़ी (गजल संग्रह) अनचिन्हार आखर (गजल, रुबाइ आ कताक संग्रह) मैथिली गजलक व्याकरण ओ इतिहास मैथिली वेब पत्रकारिताक इतिहास (अनुलग्नक: अंतिका आलेख:अंतर्जाल आ मैथिली: गजेन्द्र ठाकुर ) मैथिली गजलक रेडी रेकोनर शब्द-अर्थ-शक्ति मुन्नाजी मोकाम दिस (बीहनि कथा संग्रह) प्रतीक (विहनि कथा संग्रह) माँझ आंगनमे कतिआएल छी (मैथिली गजल संग्रह) हम पुछैत छी (साक्षात्कार) तीन टा बाल नाटक (मैथिली बाल साहित्य) खुरलुच्ची (मैथिली बाल कविता- बाल साहित्य) घाह (हाइकू-टंका संग्रह) सन्दीप कुमार साफी बैशाखमे दलानपर ओम प्रकाश झा कियो बूझि नै सकल हमरा (गजल, रुबाइ आ कता संग्रह) अमित मिश्र नव अंशु (गजल-हजल, रुबाइ संकलन) चन्दन कुमार झा मोनक बात (गजल, हजल,बाल गजल, रुबाइ आ कताक संकलन) डॉ. अनमोल झा समय साक्षी थिक (विहनि कथा संग्रह) ई जे समय अछि (विहनि कथा संग्रह) बिनय भूषण (सौजन्य- आशीष अनचिन्हार) उजरा परवाक खोज (कविता संग्रह) आनन्द कुमार झा टाकाक मोल (नाटक) कलह (नाटक) बदलैत समाज (नाटक) धधाइत नवकी कनियाँक लहास (नाटक) हठात् परिवर्तन (नाटक) मुक्ति यात्रा (नाटक) शिव कुमार झा "टिल्लू" क्षणप्रभा-कविता-संग्रह अंशु-समालोचना देवांशु वत्स नताशा -मैथिली बाल चित्रशृंखला (कौमिक्स) डॉ. विनीत उत्पल हम पुछैत छी (कविता संग्रह) रेहन पर रग्घू - काशीनाथ सि‍ंहक हिन्दी उपन्यासक विनीत उत्पल द्वारा मैथिली अनुवाद मन्त्रद्रष्टाऋष्यश्रृङ्ग- लेखक हरिशंकरश्रीवास्तव "शलभ" (हिन्दीसं मैथिली अनुवाद विनीत उत्पल द्वारा) मोहनदास- उदय प्रकाशक हिन्दी उपन्यासक विनीत उत्पल द्वारा मैथिली अनुवाद मोहनदास (मैथिली-देवनागरी) मोहनदास (मैथिली-मिथिलाक्षर) मोहनदास (मैथिली-ब्रेल) जगदानन्द झा "मनु" (सौजन्य- जगदानन्द झा "मनु") नढ़िया भुकैए हमर घराड़ीपर (गजल संग्रह) तोहर कतेक रंग (विहनि कथा संग्रह) चोनहा- (बाल उपन्यास) व्यथा- (कविता-गीत संग्रह) राजदेव मण्डल अम्बरा-कविता-संग्रह हमर टोल (उपन्यास) बसुंधरा(कविता संग्रह) जाल (पटकथा) लाज (एकांकी) जल भंवर (उपन्यास) त्रिवेणीक रंग (विहनि आ लघु कथा संग्रह) पंचैती (लघु पटकथा) वापसी Rajdeo Mandal- Maithili Writer by Gajendra Thakur दुर्गानन्द मण्डल संचयिका कथा कुसुम (विहनि आ लघु कथा संग्रह) चक्षु राम विलास साहु अंकुर- लघुकथा संग्रह रथक चक्का उलटि चलै बाट (कविता/ टनका संग्रह) कर्म बिनु जग सुन्ना (दोसर कविता/ टनका संग्रह) स्कूलक खिचड़ी (विहनि/ लघु कथा संग्रह) दूधबेचनी (लघु कथा संग्रह) मनक मैल नारायण यादव (सौजन्य- उमेश मण्डल) खाली घर रामदेव प्रसाद मण्डल "झारूदार" हमरा बिनु जगत सूना छै गीतांजलि झारू कपिलेश्वर राउत उलहन (विहनि - लघु कथा संग्रह) नंद विलास राय सखारी-पेटारी(लघुकथा संग्रह) मदन अमर (दोसर लघु कथा संग्रह) मरजादक भोज (तेसर लघुकथा संग्रह) भरदुतिया छठिक डाला हमर चारूधाम ललन कुमार कामत (सौजन्य- उमेश मण्डल) किछु विहनि आ लघुकथा उमेश पासवान वर्णित रस बेचन ठाकुर बेटीक अपमान आ छीनरदेवी (नाटक) बाप भेल पित्ती आ अधिकार (नाटक) बिसवासघात (नाटक) ऊँच-नीच (नाटक) भोँट (नाटक) डॉ. उमेश मण्डल जगदीश प्रसाद मण्डलक काव्य संसार (अनुसन्धान विश्लेषण) अभ्यन्तर (संकलन-सम्पादन) हेन्डबुक सँ फेसबुक धरि (संकलन-सम्पादन) जेतए ने जाए कवि ओतए जाए अनुभवी (संकलन-सम्पादन) निर्विकल्प (संकलन-सम्पादन) समस्या सँ समाधान धरि (संकलन-सम्पादन) निश्तुकी- कविता संग्रह मिथिलाक संस्कार गीत, विध-व्यवहार गीत आ गीतनाद (संकलन) मिथिलाक वनस्पति स्लाइड शो मिथिलाक जीव-जन्तु स्लाइड शो मिथिलाक जिनगी स्लाइड शो Mithila_Painting-Modern Art-Photos सगर राति दीप जरय- इतिहास सगर राति दीप जरय- आरती कुमारी फाइल दुध-पानि फराक-फराक (कथा एवं पाण्डुलिपि जगदीश प्रसाद मण्डल)-(छाया एवं सम्पादन- उमेश मण्डल) हिन्दुस्तानी मुसलमान और हिन्दुस्तानियत - मूल हिन्दी लेख- गीतेश शर्मा, मैथिली अनुवाद- उमेश मण्डल उमेश मण्डल द्वारा मैथिली लेखकक रचना संसारसँ बीछल विचारक पाम्फलेटक पोथी जगदीश प्रसाद मण्डल राजदेव मण्डल डॊ. शिव कुमार प्रसाद रामदेव प्रसाद मण्डल "झारूदार"  राम विलास साहु नन्दविलास राय कपिलेश्वर राउत प्रीतम कुमार निषाद मिथिलाक सभ जाति आ धर्मक संस्कार, लोकगीत आ व्यवहार गीत (सौजन्य: उमेश मंडल) 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 32 33 34 35 36 37 38 39 40 41 42 43 ................ जगदीश प्रसाद मण्डल गामक जिनगी (लघुकथा संग्रह) मिथिलाक बेटी (नाटक) मौलाइल गाछक फूल (उपन्यास) जिनगीक जीत (उपन्यास) उत्थान-पतन (उपन्यास) जीबन-मरन (उपन्यास) जीवन-संघर्ष (उपन्यास) तरेगन (बाल प्रेरक विहनि कथा संग्रह) पंचवटी (एकांकी-संचयन) अर्द्धांगि‍नी..सरोजनी.. सुभद्रा.. भाइक सिनेह इत्‍यादि (लघुकथा संग्रह) कम्प्रोमाइज (नाटक) झमेलिया बिआह (नाटक) इन्द्रधनुषी अकास (पद्य संग्रह) शंभुदास (तीनटा दीर्घ कथा मइटुग्गर, शंभुदास आ फाँसी) गीतांजलि (गीत संग्रह) राति-दिन (कविता संग्रह) सतभैंया पोखरि (लघु कथा संग्रह) तीन जेठ एगारहम माघ (गीत संग्रह) बजन्ता-बुझन्ता (विहनि कथा संग्रह) रत्नाकर डकैत (नाटक) बड़की बहिन (उपन्यास) भकमोड़ (लघुकथा संग्रह) उलबा चाउर (लघुकथा संग्रह) सरिता (कविता संग्रह) सुखाएल पोखरिक जाइठ (गीत संग्रह) नै धाड़ैए (बाल उपन्यास) स्वयंवर (नाटक) पतझाड़ (लघु कथा संग्रह) फलहार (लघु कथा संग्रह) गामक शकल सूरत (लघु कथा संग्रह) लजबिजी (लघु कथा संग्रह) बटेसर काका (लघु कथा संग्रह) आमक गाछी अप्पन गाम दिवालीक दीप पंचदेव सीरीज पंचदेव-१  पंचदेव-२  पंचदेव-३  पंचदेव-४  पंचदेव-५  पंचदेव-६  पंचदेव-७  पंचदेव-८  पंचदेव-९  पंचदेव-१०  पंचदेव-२०  पंचदेव-३०  पंचदेव-४०  पंचदेव-५०  पंचदेव-६०  पंचदेव-७०  पंचदेव-८०  पंचदेव-९०  पंचदेव-१०० दुध-पानि फराक-फराक (कथा एवं पाण्डुलिपि जगदीश प्रसाद मण्डल)- (छाया एवं सम्पादन- उमेश मण्डल) जगदीश प्रसाद मण्डल जीक ६५ टा पोथीक नव संस्करण विदेहक २३३ (Videha_01_09_2017) सँ २५० (Videha_15_05_2018 ) धरिक अंकमे धारावाहिक प्रकाशन नीचाँक लिंकपर पढ़ू:- VIDEHA_233 VIDEHA_234 VIDEHA_235 VIDEHA_236 VIDEHA_237 VIDEHA_238 VIDEHA_239 VIDEHA_240 VIDEHA_241 VIDEHA_242 VIDEHA_243 VIDEHA_244 VIDEHA_245 VIDEHA_246 VIDEHA_247 VIDEHA_248 VIDEHA_249 VIDEHA_250 पंगु (उपन्यास)- साहित्य अकादेमी मूल पुरस्कार २०२१ सँ सम्मानित पोथी पंगु (हिन्दी अनुवाद रामेश्वर प्रसाद मण्डल) डॉ. शशिधर कुमर उड़ि ने सकी पर चिड़ै छी हम (भाग १-२) (पृ. १०५४-१०९५) खिस्सा अण्टार्कटिका केर (पृ. १०५४-१०९५) बाल कविता (पृ. ९९३-१२१५) बाल कविता (पृ. १००४-११७३) सचित्र बाल कविता (पृ. ७४७-८३४) सचित्र बाल कविता (पृ. १४६८-१८५०) .................. गजेन्द्र ठाकुर तेलुगु कथा आ ओड़िया, तेलुगु, गुजराती, भोजपुरी आ कश्मीरी कविता तेलुगु कथा आ ओड़िया, तेलुगु, गुजराती, भोजपुरी आ कश्मीरी कविता (मिथिलाक्षर) मैथिली समीक्षाशास्त्र मैथिली समीक्षाशास्त्र (तिरहुता) मैथिली समीक्षाशास्त्र (भाग-२, अनुप्रयोग) मैथिली प्रतियोगिता प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना भाग-१ प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना भाग दू (कुरुक्षेत्रम अन्तर्मनक-२) प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना (भाग-२, कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक खण्ड-८) (संक्षिप्त) नित नवल दिनेश कुमार मिश्र नित नवल दिनेश कुमार मिश्र (मिथिलाक्षर) नित नवल दिनेश कुमार मिश्र (कैथी) नित नवल दिनेश कुमार मिश्र (नेवाड़ी) नित नवल दिनेश कुमार मिश्र (IPA) दूषण पञ्जी- The Black Book दूषण पञ्जी- The Black Book (मिथिलाक्षर) पर्वत ऊपर भमरा जे सूतल (बीहनि, लघु आ दीर्घ कथा संग्रह) पर्वत ऊपर भमरा जे सूतल (मिथिलाक्षर) पर्वत ऊपर भमरा जे सूतल (कैथी) पर्वत ऊपर भमरा जे सूतल (नेवाड़ी) पर्वत ऊपर भमरा जे सूतल (IPA) The_Science_of_Words Rajdeo Mandal- Maithili Writer (Now with Supplement I & II) नित नवल सुभाष चन्द्र यादव नित नवल सुभाष चन्द्र यादव (मिथिलाक्षर) जगदीश प्रसाद मण्डल- एकटा बायोग्राफी गंगा ब्रिज (नाटक) उल्कामुख (नाटक) संकर्षण (नाटक) धांगि बाट बनेबाक दाम अगूबार पेने छँ (रुबाइ, कता आ गजल संग्रह) सहस्रजित् (पद्य संग्रह) सहस्राब्दीक चौपड़पर (पद्य संग्रह) त्वञ्चाहञ्च आ असञ्जाति मन (दूटा गीत प्रबन्ध) सहस्रबाढ़नि (उपन्यास) सहस्रबाढ़नि_ब्रेल-मैथिली (मैथिलीक पहिल ब्रेल पोथी) सहस्रशीर्षा (उपन्यास) गल्प-गुच्छ (विहनि आ लघु कथा संग्रह) शब्दशास्त्रम् (लघुकथा संग्रह) बाल मण्डली/ किशोर जगत (बाल नाटक, लघुकथा, कविता आदि) कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक देवनागरी वर्सन तिरहुता वर्सन ब्रेल वर्सन Learn Maithili Sign Language Learn Mithilakshar Script Learn Braille through Mithilakshar Script Learn International Phonetic Script through Mithilakshar Script Learn Kaithi Learn Newari Learn Calligraphic Newari (Ranjana) Learn Urdu Script Learn Tibetan Script Learn Japanese Script for Haiku Learn Brahmi Learn Kharoshthi मिथिला रत्न/ मिथिला चित्रकला/ मिथिलाक पाबनि तिहार (कथा) आ मिथिलाक संगीत जलोदीप (बाल-नाटक संग्रह) अक्षरमुष्टिका (बाल-लघुकथा संग्रह) बाङक बङौरा (बाल-पद्य संग्रह) नाराशंसी (गीत-प्रबन्ध) मचण्ड (नाटक) बाल साहित्य (मूल)- गजेन्द्र ठाकुर भऽ जाएब छू(मैथिलीक २०१२ मे प्रकाशित पहिल क्लाइमेट-फिक्शन प्ले- Maithili's first climate-fiction play originally published in 2012) कमलाक भगता तरहरिमे परीलोक बेसी छुट्टी कम इसकूल बड़द करैए दाउन ने यौ बाल गजल फिनिश लाइन अनूदित साहित्य (आन भाषासँ)- गजेन्द्र ठाकुर विदेह:सदेह २७ (गजेन्द्र ठाकुर आ रवि भूषण पाठकक आन भाषासँ अनूदित गद्य आ पद्य- अंक १-३५० सँ) बाल साहित्य (अनुवाद- द्विभाषिक- मैथिली-अंग्रेजी)- गजेन्द्र ठाकुर मसाई केर परिवर्तनकारी रेबेका शेष ४० टा बाल चित्र-पोथी नीचाँक लिंकपर:- सुनू घर सभ एकटा नीक दिन चलू हम तँ ठीक छी ने! की अहाँ ऐ चिड़ै सभकेँ देखने छी? टोस्ट बड़ीटा! कनियेटा! एतऽ हम सभ रहै छी भारतोल्लक राजकुमारी भारतोल्लक राजकुमारी (बिनु शब्दक) वुयो कच-कच कचाक चुन्नू-मुन्नूक नहेनाइ नेना जे बैलूनसँ डेराइत छल अद्भुत फिबोनाची अंक-शृंखला हारू अखन नै, अखन नै! जन्मदिनक उत्सव भोज मोट राजा पातर-दुब्बड़ कुकुड़ बचिया जे अपन हँसी नै रोकि सकैत छलि अंग्रेजी हम सूंघि सकै छी छोट लाल-टुहटुह डोरी करू नीक, भोगू नीक ई सभटा बिलाड़िक दोख अछि! चोभा आम! हमर टोलक बाट जखन इकड़ू स्कूल गेल माछी फेर आउ टाटा! अमाचीक जुलुम मशीन सभ टिंग टोंग पाउ-म्याऊ-वाह कुकुड़क एकटा दिन हमरा नीक लगैए रीताक नव-स्कूलमे पहिल दिन कनी हँसियौ ने! लाल बरसाती भूत-प्रेतक नाट्यशाला आउ पएर गानी कतऽ अछि ई अंक ५? विदेह मैथिली-अंग्रेजी टॉकिंग रीड-अलाउड ऑडियो बुक https://bloomlibrary.org/player/Wcf6zr5CoF (मसाई केर परिवर्तनकारी रेबेका) https://bloomlibrary.org/player/p3sHdYBgiT (चलू हम तँ ठीक छी ने!) https://bloomlibrary.org/player/f19pSdhGMo (एकटा नीक दिन) https://bloomlibrary.org/player/b2l5wesxCp (घर सभ) https://bloomlibrary.org/player/dAzC0Fubt7 (की अहाँ ऐ चिड़ै सभकेँ देखने छी?) NTA-UGC/ UPSC/ BPSC Maithili Optional- गजेन्द्र ठाकुर मैथिली समीक्षाशास्त्र मैथिली समीक्षाशास्त्र (तिरहुता) मैथिली समीक्षाशास्त्र (भाग-२, अनुप्रयोग) मैथिली प्रतियोगिता [Place of Maithili in Indo-European Language Family/ Origin and development of Maithili language (Sanskrit, Prakrit, Avhatt, Maithili) भारोपीय भाषा परिवार मध्य मैथिलीक स्थान/ मैथिली भाषाक उद्भव ओ विकास (संस्कृत, प्राकृत, अवहट्ट, मैथिली)] (Criticism- Different Literary Forms in Modern Era/ test of critical ability of the candidates) (ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददास सिलेबसमे छथि आ रसमय कवि चतुर चतुरभुज विद्यापति कालीन कवि छथि। एतय समीक्षा शृंखलाक प्रारम्भ करबासँ पूर्व चारू गोटेक शब्दावली नव शब्दक पर्याय संग देल जा रहल अछि। नव आ पुरान शब्दावलीक ज्ञानसँ ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददासक प्रश्नोत्तरमे धार आओत, संगहि शब्दकोष बढ़लासँ खाँटी मैथिलीमे प्रश्नोत्तर लिखबामे धाख आस्ते-आस्ते खतम होयत, लेखनीमे प्रवाह आयत आ सुच्चा भावक अभिव्यक्ति भय सकत।) (बद्रीनाथ झा शब्दावली आ मिथिलाक कृषि-मत्स्य शब्दावली) (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोरिक गाथामे समाज ओ संस्कृति) (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- विद्यापति) (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- पद्य समीक्षा- बानगी) (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोक गाथा नृत्य नाटक संगीत) (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- यात्री) (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली रामायण) (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली उपन्यास) (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- शब्द विचार) (तिरहुता लिपिक उद्भव ओ विकास) अनुलग्नक-१-२-३    अनुलग्नक- ४-५ (मैथिली आ दोसर पुबरिया भाषाक बीचमे सम्बन्ध (बांग्ला, असमिया आ ओड़िया) [यू.पी.एस.सी. सिलेबस, पत्र-१, भाग-"ए", क्रम-५]) [मैथिली आ हिन्दी/ बांग्ला/ भोजपुरी/ मगही/ संथाली- बिहार लोक सेवा आयोग (बी.पी.एस.सी.) केर सिविल सेवा परीक्षाक मैथिली (ऐच्छिक) विषय लेल] मैथिली बांग्ला असमिया ओड़िया हिन्दी उर्दू नेपाली संस्कृत संथाली NTA_UGC_NET_Maithili_01- गजेन्द्र ठाकुर NTA_UGC_NET_Maithili_02- गजेन्द्र ठाकुर Test Series-1- गजेन्द्र ठाकुर Test Series-2- गजेन्द्र ठाकुर GS (Pre) Topic 1 - गजेन्द्र ठाकुर गजेन्द्र ठाकुर (सम्पादन) विदेह-सदेह १-२५ www.videha.co.in  विदेह ई-पत्रिकाक अंक १-३५० सँ- मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ गद्य आ पद्यक एकटा समानान्तर संकलन देवनागरी मिथिलाक्षर विदेह:सदेह १ विदेह: सदेह १ तिरहुता विदेह:सदेह २ मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना विदेह: सदेह २ तिरहुता विदेह:सदेह ३ मैथिली पद्य विदेह: सदेह ३ तिरहुता विदेह:सदेह ४ मैथिली कथा विदेह: सदेह ४ तिरहुता विदेह मैथिली विहनि कथा [विदेह सदेह ५] विदेह: सदेह ५ तिरहुता विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५]- संस्करण-२ विदेह: सदेह ५ संस्करण-२ तिरहुता विदेह मैथिली लघुकथा [विदेह सदेह ६] विदेह: सदेह ६ तिरहुता विदेह मैथिली पद्य [विदेह सदेह ७] विदेह: सदेह ७ तिरहुता विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [विदेह सदेह ८] विदेह: सदेह ८ तिरहुता विदेह मैथिली शिशु उत्सव [विदेह सदेह ९] विदेह: सदेह ९ तिरहुता विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [विदेह सदेह १०] विदेह: सदेह १० तिरहुता विदेह:सदेह ११ विदेह: सदेह ११ तिरहुता विदेह:सदेह १२ विदेह: सदेह १२ तिरहुता विदेह:सदेह १३ विदेह: सदेह १३ तिरहुता विदेह:सदेह १४ विदेह: सदेह १४ तिरहुता विदेह:सदेह १५ विदेह: सदेह १५ तिरहुता विदेह:सदेह १६ विदेह: सदेह १६ तिरहुता विदेह:सदेह १७ विदेह: सदेह १७ तिरहुता विदेह:सदेह १८ विदेह: सदेह १८ तिरहुता विदेह:सदेह १९ विदेह: सदेह १९ तिरहुता विदेह:सदेह २० विदेह: सदेह २० तिरहुता विदेह:सदेह २१ विदेह: सदेह २१ तिरहुता विदेह:सदेह २२ विदेह: सदेह २२ तिरहुता विदेह:सदेह २३ विदेह: सदेह २३ तिरहुता विदेह:सदेह २४ विदेह: सदेह २४ तिरहुता विदेह:सदेह २५ विदेह: सदेह २५ तिरहुता विदेह-सदेह २६-३६ www.videha.co.in  विदेह ई-पत्रिकाक अंक १-३५० सँ- थीम आधारित मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ मूल आ अनूदित गद्य आ पद्यक एकटा समानान्तर संकलन विदेह:सदेह २६ (डॉ शम्भु कुमार सिंह आ डॉ अरुण कुमार सिंह अंक १-३५० सँ) विदेह: सदेह २६ तिरहुता विदेह:सदेह २७ (गजेन्द्र ठाकुर आ रवि भूषण पाठकक आन भाषासँ अनूदित गद्य आ पद्य- अंक १-३५० सँ) विदेह: सदेह २७ तिरहुता विदेह:सदेह २८ (अनूदित गद्य आ पद्य- अंक १-३५० सँ) विदेह: सदेह २८ तिरहुता विदेह:सदेह २९ (रवि भूषण पाठक आ डॉ. कैलाश कुमार मिश्र- अंक १-३५० सँ) विदेह: सदेह २९ तिरहुता विदेह:सदेह ३० (स्कूल-कॉलेजक विद्यार्थी लेल- अंक १-३५० सँ) विदेह: सदेह ३० तिरहुता विदेह:सदेह ३१ (डॉ. कामिनी कामायनी आ कुमार मनोज कश्यप- अंक १-३५० सँ) विदेह: सदेह ३१ तिरहुता विदेह:सदेह ३२ (रचनात्मक गद्य-पद्य लेखन भाग-१- अंक १-३५० सँ) विदेह: सदेह ३२ तिरहुता विदेह:सदेह ३३ (रचनात्मक गद्य-पद्य लेखन भाग-२- अंक १-३५० सँ) विदेह: सदेह ३३ तिरहुता विदेह:सदेह ३४ (रचनात्मक गद्य-पद्य लेखन भाग-३- अंक १-३५० सँ) विदेह: सदेह ३४ तिरहुता विदेह:सदेह ३५ (रचनात्मक गद्य-पद्य लेखन भाग-४- अंक १-३५० सँ) विदेह: सदेह ३५ तिरहुता विदेह:सदेह ३६ (रचनात्मक गद्य-पद्य लेखन भाग-५- अंक १-३५० सँ) विदेह: सदेह ३६ तिरहुता ................ यू.पी.एस.सी. आ आन प्रतियोगिता परीक्षा लेल देखू: विदेह:सदेह १७ विदेह:सदेह २१ विदेह:सदेह २३ विदेह:सदेह २६ विदेह:सदेह २९ विदेह:सदेह ३० विदेह:सदेह ३२ विदेह:सदेह ३३ विदेह:सदेह ३४ विदेह:सदेह ३५ ............ Videha-Sadeha भाषापाक -विदेह मैथिली मानक भाषा आ मैथिली भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम विदेह पुरान अंकक आर्काइव Videha 1-50 Videha 51-100 Videha 101-149 Videha 150-250 Videha 251-Onwards Audio Archive Folder Mithila_Painting-Modern Art-Photos Videha Old Issues Folder Videha Classical Sites Folder पंजी (११००० मूल मिथिलाक्षर ताड़पत्र १७ टा पी.डी.एफ. फाइलमे) दूषण पंजी मोदानन्द झा शाखा पञ्जी मंडार- मरड़े कश्यप-प्राचीन प्राचीन पंजी (लेमीनेट कएल) उतेढ़ पंजी पनिचोभे बीरपुर दरभंगा राज आदेश उतेढ आदि छोटी झा पुस्तक निर्देशिका पत्र पंजी मूलग्राम पंजी मूलग्राम परगना हिसाबे पंजी मूल पंजी-२ मूल पंजी-३ मूल पंजी-४ मूल पंजी-५ मूल पंजी-६ मूल पंजी-७ .................. गजेन्द्र ठाकुर आ आशीष अनचिन्हार (सम्पादन) मैथिलीक प्रतिनिधि गजल मैथिली गजल: आगमन ओ प्रस्थान बिंदु (गजलक आलोचना-समालोचना-समीक्षा) ................ गजेन्द्र ठाकुर, नागेन्द्र कुमार झा आ पञ्जीकार विद्यानन्द झा (सम्पादन) जीनोम मैपिंग (४५० ए.डी.सँ २००९ ए.डी.)--मिथिलाक पञ्जी प्रबन्ध जीनियोलोजिकल मैपिंग (४५० ए.डी.सँ २००९ ए.डी.)--मिथिलाक पञ्जी प्रबन्ध -भाग-२ MAITHILI-ENGLISH DICTIONARIES Maithili-English Dictionary Vol.I Maithili-English Dictionary Vol.II ENGLISH-MAITHILI DICTIONARIES Videha English Maithili Dictionary English-Maithili Computer Dictionary .................. दिनेश कुमार मिश्र (सौजन्य दिनेश कुमार मिश्र) बन्दिनी महानन्दा बागमती की सद्गति! दुइ पाटन के बीच में.. (कोसी नदी की कहानी) न घाट न घर बगावत पर मजबूर मिथिला की कमला नदी भुतही नदी और तकनीकी झाड़-फूंक The Kamla River and People On Collision Course Bhutahi Balan- Story of a ghost river and engineering witchcraft Refugees of the Kosi Embankments ................ पत्रिका-जर्नल-स्मारिका मैथिली कविता-त्रैमासिक (सौजन्य- नचिकेता) मैथिली कविता-त्रैमासिक (अप्रैल १९६९) मैथिली कविता-त्रैमासिक (जुलाइ १९६९) कौशिकी (सौजन्य- पञ्जीकार विद्यानन्द झा) कौशिकी (१९७१-७२) देसिल बयना (अख़बार) (सौजन्य- रामलोचन ठाकुर) देसिल बयना (अख़बार) Society Today (सौजन्य- सुमित आनन्द) अंक ११ अंतिका (सौजन्य- गौरीनाथ) जुलाइ-सितम्बर २००८ (हरिमोहन झा विशेषांक) अक्टूबर २०१०सँ मार्च २०११ अक्टूबर २०११ सँ मार्च २०१२ मिथिलांगन (सौजन्य मुकेश दत्त) अप्रैल-सितम्बर २०२२ मैलोरंग (सौजन्य- प्रकाश झा) अंक२-३ धूआ-धजा (सौजन्य- परमेश्वर कापड़ि) अंक ७ अंक १४ अंक १५ अंक १६ अंक १८ अंक १० जून २०१२ अंक २४ जून २०१२  23February2016 २५ जुलाइ २०१२ ०५ अगस्त २०१२ आसिन २०७३ स्मारिका (सौजन्य- रामभरोस कापड़ि भ्रमर) स्मारिका (२०१०) आंगन (सौजन्य- रामभरोस कापड़ि भ्रमर) आंगन अंक-४ (२०१२) गामघर (सौजन्य- रामभरोस कापड़ि "भ्रमर") गामघर-३०-०८-२०१८ गामघर-०४-१०-२०१८ गामघर-१६-०५-२०१९ गामघर-२७-०६-२०१९ आँजुर (सौजन्य- रामभरोस कापड़ि भ्रमर) आँजुर (अंक वर्ष ३६, अंक ३) दूधमती- (नेपाली आ मैथिलीमे) (सौजन्य- सुजीत कुमार झा) अंक ३१ अंक ३२ अंक ३३ अंक ३४ अंक 35 अंक 36 अंक 37 अंक 38 अंक 39 अंक 40 अंक 41 घर-बाहर (सौजन्य- चेतना समिति) अप्रैल-जून २०११ रचना (सौजन्य- सुभाष चन्द्र यादव) दिसम्बर "०५ मार्च "०६राजकमल चौधरी: मोनोग्राफ पल्लव (सौजन्य- धीरेन्द्र प्रेमर्षि) पल्लव- १ गजल अंक पूर्वोत्तर मैथिल (सौजन्य- प्रेमकान्त चौधरी) अप्रैल-जून 2010 जुलाइ-सितम्बर 2010 जनवरी सँ मार्च 2011 अप्रैल-जून २०११  जुलाइ-सितम्बर २०११ लालदास भावांजलि स्मारिका २०२२ (सौजन्य डॉ संजीव शमा) .................. किछु मैथिली पोथी डाउनलोड साइट (ओपन सोर्स) NCERT BHASHA SANGAM NCERT (Maithili-English-Hindi Conversations) मैथिली (मैथिली संकेत भाषा सहित- मैथिलीमे पहिल बेर) https://www.youtube.com/@videha_ejournal https://youtu.be/TebuC-lrSs8 https://ncert.nic.in/bs-2021.php Sahitya Akademi प्रकाशन डिजिटल-पोथी CIIL अखियासल (रमानन्द झा रमण) जुआयल कनकनी- महेन्द्र प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) सृजन केर दीप पर्व- सं केदार कानन आ अरविन्द ठाकुर मैथिली गद्य संग्रह- सं शैलेन्द्र मोहन झा Archive.Org (विजयदेव झा) Videha Maithili eBooks/ eJournals/ Video Archive IGNCA Maithili English Dictionary विज्ञान रत्नाकर मिथिला दर्शन तीरभुक्ति OLE Nepal's e-Pustakalaya पोथीक लिंक IGNCA-ASI (search keyword Mithila) History of Navya-Nyaya in Mithila Studies in Jainism and Buddism in Mithila Mithila in the Age of Vidyapati Cultural Heritage of Mithila Mithila under the Karnatas Temple Survey Project ASI- English आ Hindi मैथिली साहित्य संस्थान दर्शनीय मिथिला (मैथिली साहित्य  संस्थान लिंक) Brochure 1 (मैथिली साहित्य  संस्थान लिंक) Brochure 2 (मैथिली साहित्य  संस्थान लिंक) Brochure 3 (मैथिली साहित्य  संस्थान लिंक) ब्लूम लाइब्रेरी मैथिली अरिपन फाउण्डेशन Pratham Books Maithili Storyweaver मैथिली ऑडियो बुक्स Videha Read Aloud Talking Maithili Audio Books (including Maithili Sign Language- Ist time in Maithili) पोथी डॉट कॉम I Love Mithila (पोथी डाउनलोड लिंक) online maithili journal owner I Love Mithila प्यारे मैथिल चैनल- किरण चौधरी आ संगीता आनन्द- मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय यू ट्यूब चैनल मिथिला चैप्टर खिस्सा-पिहानी नेना भुटका लेल जानकी एफ.एम समाचार आकाशवाणी दरभंगा यू ट्यूब चैनल ............ JNU मैथिली मैथिली लेक्सिकन ............... Videha e-Learning YouTube Channel ................. विदेह सम्मान: सम्मान-सूची (समानान्तर साहित्य अकादेमी, समानान्तर ललित कला अकादेमी आ समानान्तर संगीत-नाटक अकादेमी सम्मान/ पुरस्कार नामसँ विख्यात) ................ मैथिलीक वर्तनी १ मैथिलीक वर्तनी- विदेह मैथिली मानक भाषा आ मैथिली भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम भाषापाक २ मैथिलीक वर्तनीमे पर्याप्त विविधता अछि। मुदा प्रश्नपत्र देखला उत्तर एकर वर्तनी इग्नू BMAF001 सँ प्रेरित बुझाइत अछि, से एकर एकरा एक उखड़ाहामे उनटा-पुनटा दियौ, ततबे धरि पर्याप्त अछि। यू.पी.एस.सी. क मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेल सेहो ई पर्याप्त अछि, से जे विद्यार्थी मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेने छथि से एकर एकटा आर फास्ट-रीडिंग दोसर-उखड़ाहामे करथि| IGNOU  इग्नू       BMAF-001 These are print-on-demand books, send your queries to editorial.staff.videha@gmail.com. The eBooks of some of these are available for sale on Google Play. ४.३.मैथिली वीडियोक संकलन Maithili Videos वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू। Always refresh the pages for viewing new issue of VIDEHA. "Videha" Ist Maithili Fortnightly ejournal Archive of Videos 'विदेह' प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका वीडियो आर्काइव मैथिली वीडियोक संकलन (पूर्णतः अव्यवसायिक उद्देश्य आ मात्र एकेडमिक प्रयोग लेल) वीडियो देखबाक लेल सबधित लिककें क्लिक करू। For viewing videos click the respective links. ...................... मिथिलाक सभ जाति आ धर्मक संस्कार, लोकगीत आ व्यवहार गीत (सौजन्य: उमेश मंडल) 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 32 33 34 35 36 37 38 39 40 41 42 43 ...................... गुवाहाटी विद्यापति पर्व २०१० पहिल भाग  दोसर भाग  तेसर भाग  चारिम भाग  पाँचम भाग गुवाहाटी अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन आ विद्यापति पर्व २०११ 01 02 03 04 05 06 07 08 09 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 25 26 27 28 29 30 31 32 33 34 35 36 37 38 39 40 41 42 43 44 45 46 ................ चौबटिया (सौजन्य- धीरेन्द्र प्रेमर्षि) चौबटिया सौभाग्य मिथिला ललका पाग भाग-१ ललका पाग भाग-२ ................ मिनाप-१ बुधियार छौड़ा आ राक्षस मिनाप-२ भाग-१  भाग-२  भाग-३  भाग-४ ............... NCERT BHASHA SANGAM NCERT (Maithili-English-Hindi Conversations) मैथिली (मैथिली संकेत भाषा सहित- मैथिलीमे पहिल बेर) https://www.youtube.com/@videha_ejournal https://youtu.be/TebuC-lrSs8 https://ncert.nic.in/bs-2021.php प्यारे मैथिल चैनल- किरण चौधरी आ संगीता आनन्द- मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय यू ट्यूब चैनल मिथिला चैप्टर खिस्सा-पिहानी नेना भुटका लेल ब्लूम लाइब्रेरी मैथिली अरिपन फाउण्डेशन Pratham Books Maithili Storyweaver मैथिली ऑडियो बुक्स Videha Read Aloud Talking Maithili Audio Books (including Maithili Sign Language- Ist time in Maithili) https://bloomlibrary.org/player/Wcf6zr5CoF (मसाई केर परिवर्तनकारी रेबेका) https://bloomlibrary.org/player/p3sHdYBgiT (चलू हम तँ ठीक छी ने!) https://bloomlibrary.org/player/f19pSdhGMo (एकटा नीक दिन) https://bloomlibrary.org/player/b2l5wesxCp (घर सभ) https://bloomlibrary.org/player/dAzC0Fubt7 (की अहाँ ऐ चिड़ै सभकेँ देखने छी?) जानकी एफ.एम समाचार ममता गाबय गीत (सौजन्य- श्री केदारनाथ चौधरी) गीत आकाशवाणी दरभंगा यू ट्यूब चैनल I Love Mithila online maithili journal owner I Love Mithila ................ बृखेश चन्द्र लाल, जनकपुरक सौजन्यसँ झिझिया ढोल-पिपही पवनकान्त झा (काश्यप कमल), भटसिमरि, मधुबनीक सौजन्यसँ रसनचौकी ................ विद्यापति गीत तूलिका गीत-गोविन्ददास (गायन दीक्षा भारती) गोविन्ददास-१ गोविन्ददास-२ गोविन्ददास-३ गोविन्ददास-४ गोविन्ददास-५ गोविन्ददास-६ ................... मैथिली गजल (गजल- गजेन्द्र ठाकुर, गायन दीक्षा भारती) बहरे मुतकारिब गजल-२ गजल-३ गजल-४ ................. ७१म सगर राति दीप जरए (०२ अक्टूबर २०१०), गाम बेरमा , जिला मधुबनी (संयोजक- जगदीश प्रसाद मंडल) भाग-१  भाग-२  भाग-३  भाग-४  भाग-५  भाग-६ 82 म सगर राति‍ दीप जरए, स्‍थान- गजेन्‍द्र ठाकुर जीक नि‍ज आवास, गाम- मेंहथ, जि‍ला- मधुबनी। दि‍नांक- 31 मई 2014 (शनि‍ दि‍न), समए- संध्‍या छह बजेसँ। गोष्‍ठीक नाओं- कथा बौद्ध सि‍द्ध मेहथपा सगर राति‍ दीप जरए। आयोजनक खेप- ८२ म आयोजन, संयोजक- गजेन्‍द्र ठाकुर। वि‍शेषता- बाल साहि‍त्‍यपर केन्‍द्रि‍त। ............... मैलोरंग-१ (सौजन्य- प्रकाश झा) नचिकेताक एक छल राजा - भाग-1 नचिकेताक एक छल राजा - भाग- 2 काठक लोक- महेन्द्र मलंगिया भाग-1 काठक लोक- महेन्द्र मलंगिया भाग-2 मैलोरंग-२ कोसी सेमीनार 12 सितम्बर 2008 भाग-१ कोसी सेमीनार 12 सितम्बर 2008 भाग-२ ................. मिथिलांगन विदेह मैथिली नाट्य उत्सव यू ट्यूब लिंक विदेह मैथिली साहित्य/ नाट्य/ कविता/ परिचर्चा उत्सव विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी सम्मान समारोह जनकपुर- विद्यापति पर्व जितेन्द्र झा, जनकपुर रामभद्र सामा चकेवा 1 सामा चकेवा 2 मैथिली कवि सम्मेलन (मिथिला कल्चरल ऑर्गेनाइजेशन, यू.के.) रिपब्लिक डे 2009 (भारत) सगर राति दीप जरए, कबिलपुर, जून २०१० भाग-१ भाग-२ कृष्ण कुमार कश्यपसँ गजेन्द्र ठाकुर द्वारा लेल साक्षात्कार भाग-१  भाग-२  भाग-३  भाग-४  भाग-५ भाग-६  भाग-७ प्रबोध सम्मान: राजमोहन झा (स्लाइडरकेँ बीचमे ल' जाउ, अदहाक बाद राजमोहन झासँ विनीत उत्पलक साक्षात्कार छन्हि।) साहित्य अकादमी पुरस्कार: मन्त्रेश्वर झा मिथिलाक खोज 1.गौरीशकर भाग-१ भाग-२ 2. बाइसी-बसैटी वर्षकृत्य भाग-१ भाग-२  भाग-३  भाग-४  भाग-५ भाग-६  भाग-७  भाग-८  भाग-९  भाग-१० समन्वय २-४ नवम्बर २०१२ इण्डिया हैबीटेट सेन्टर भारतीय भाषा महोत्सव Samanvay 2-4 November 2012 IHC Indian Languages' Festival. Venue: India Habitat Centre, Lodhi Road, New Delhi -- 110 003. 3rd November 2012 Maithili- Love's Own Language/ Brahminism in Maithili/ Pre-Jyotirishwar Non-Brahmin Vidyapati भाग-१  भाग-२  भाग-३  भाग-४  भाग-५ भाग-६  भाग-७  भाग-८  भाग-९  भाग-१० भाग-११  भाग-१२ 2nd November 2012 Ugna Re- By Shovna Narayan (Pre-Jyotirishwar Non Brahmin Vidyapati's Life Episode) भाग-१  भाग-२  भाग-३  भाग-४  भाग-५ भाग-६  भाग-७  भाग-८ ७५म सगर राति दीप जरए मे मुन्नाजीक पहिल विहनि कथा पोस्टर प्रदर्शनी मिथिलाक मूड़न- (रसनचौकीक स्वरक संग) हृदयनारायण झा भाग-१  भाग-२  भाग-३ रंजन चौधरी आ हनी मिश्र (तबला) भाग-१ भाग-२  भाग-३  भाग-४  भाग-५ भाग-६  भाग-७  भाग-८  भाग-९ ललित रंग आ हनी मिश्र (तबला) भाग-१  भाग-२  भाग-३ दीक्षा भारती भाग-१ भाग-२  भाग-३  भाग-४ सुषमा बटगमनी नन्द कुमार मिश्रक गजल पाठ नन्द कुमार मिश्र जीक कविता पाठ भाग-१  भाग-२ मैथिली- भोजपुरी अकादमी, नई दिल्ली भाग-१  भाग-२  भाग-३  भाग-४  भाग-५ मैथिली- भोजपुरी अकादमी, नई दिल्ली सेमीनार 29 मार्च 2009 भाग-१  भाग-२  भाग-३  भाग-४  भाग-५ भाग-६  भाग-७  भाग-८  भाग-९ मैथिली- भोजपुरी अकादमी, द्वारका, नई दिल्ली सेमीनार भाग-१  भाग-२  भाग-३  भाग-४  भाग-५ भाग-६ .................. विदेह सम्मान: सम्मान-सूची (समानान्तर साहित्य अकादेमी, समानान्तर ललित कला अकादेमी आ समानान्तर संगीत-नाटक अकादेमी सम्मान/ पुरस्कार नामसँ विख्यात) .................. मैथिलीक वर्तनी १ मैथिलीक वर्तनी- विदेह मैथिली मानक भाषा आ मैथिली भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम भाषापाक २ मैथिलीक वर्तनीमे पर्याप्त विविधता अछि। मुदा प्रश्नपत्र देखला उत्तर एकर वर्तनी इग्नू BMAF001 सँ प्रेरित बुझाइत अछि, से एकर एकरा एक उखड़ाहामे उनटा-पुनटा दियौ, ततबे धरि पर्याप्त अछि। यू.पी.एस.सी. क मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेल सेहो ई पर्याप्त अछि, से जे विद्यार्थी मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेने छथि से एकर एकटा आर फास्ट-रीडिंग दोसर-उखड़ाहामे करथि| IGNOU  इग्नू       BMAF-001 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ४.४.मैथिली शिशु, बाल आ किशोर साहित्य Maithili Children Literature वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू। Always refresh the pages for viewing new issue of VIDEHA. Top of Form Search above & below within more than 350 old issues of Videha eJournal विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् www.videha.co.in Bottom of Form https://books.google.com/ Top of Form Bottom of Form Videha Archive of Maithili Children Literature विदेह मैथिली शिशु, बाल आ किशोर साहित्यक आर्काइव (पूर्णतः अव्यवसायिक उद्देश्य आ मात्र एकेडमिक प्रयोग लेल) सभ पोथी पी.डी.एफ. डाउनलोड लेल क्रमानुसार नीचाँक लिंक सभपर उपलब्ध अछि। All the books are available for pdf download at the respective links below ................. NCERT BHASHA SANGAM NCERT (Maithili-English-Hindi Conversations) मैथिली (मैथिली संकेत भाषा सहित- मैथिलीमे पहिल बेर) https://www.youtube.com/@videha_ejournal https://youtu.be/TebuC-lrSs8 https://ncert.nic.in/bs-2021.php विदेह मैथिली शिशु उत्सव कथा बौद्ध सिद्ध मेहथपा (बाल साहित्य केन्द्रित) मेंहथमे भेल ८२ म सगर राति दीप जरयमे पठित कथा सभक संकलन कथा बौद्ध सिद्ध मेहथपा नेना भुटकाकेँ रातिमे सुनेबा लेल किछु लोककथा भोला लाल दास (आर्काइव डॊट कॊम) मैथिली सुबोध व्याकरण डॉ. रमानन्द झा 'रमण' (सौजन्य- रमानन्द झा "रमण") राजू आ टाकाक गाछ (अनुवाद) योगेन्द्र पाठक "वियोगी" (सौजन्य- योगेन्द्र पाठक "वियोगी") विज्ञानक बतकही विज्ञानक बतकही भाग-२ नरक विजय (सम्पूर्ण) नरक विजय (संशोधित) हमर गाम (बाल उपन्यास) पिरामिडक देशमे रोबोट (अनूदित साइंस-फिक्शन नाटक) रामलोचन ठाकुर (सौजन्य- रामलोचन ठाकुर) मैथिली लोककथा कीर्तिनाथ झा (सौजन्य- कीर्तिनाथ झा) कुरल: मैथिली भावानुवाद जगदीश चन्द्र ठाकुर "अनिल" (सौजन्य- जगदीश चन्द्र ठाकुर "अनिल") बाल कविता मुन्नाजी तीन टा बाल नाटक (मैथिली बाल साहित्य) खुरलुच्ची (मैथिली बाल कविता- बाल साहित्य) देवांशु वत्स नताशा -मैथिली बाल चित्रशृंखला (कौमिक्स) जगदानन्द झा "मनु" (सौजन्य- जगदानन्द झा "मनु") चोनहा (बाल उपन्यास) जगदीश प्रसाद मण्डल तरेगन (बाल प्रेरक विहनि कथा संग्रह) नै धाड़ैए (बाल उपन्यास) नन्द कुमार मिश्र 'नन्द' (सौजन्य- नन्द कुमार मिश्र 'नन्द') स्वर्ण कमल (बाल उपन्यास) बृषेश चन्द्र लाल (सौजन्य- बृषेश चन्द्र लाल) ढोलक (बाल कविता संग्रह) सुजीत कुमार झा (सौजन्य- सुजीत कुमार झा) कोइली घूरि आउ (बाल लघु-विहनि कथा संग्रह) डॉ. शशिधर कुमर उड़ि ने सकी पर चिड़ै छी हम (भाग १-२) (पृ. १०५४-१०९५) खिस्सा अण्टार्कटिका केर (पृ. १०५४-१०९५) बाल कविता (पृ. ९९३-१२१५) बाल कविता (पृ. १००४-११७३) सचित्र बाल कविता (पृ. ७४७-८३४) सचित्र बाल कविता (पृ. १४६८-१८५१) डॉ शशिधर कुमर आ सुप्रिया बेबी कुमारी भूकम्प (पृ. ६३८-६७४) कनकमणि दीक्षित (मूल नेपालीसँ मैथिली अनुवाद रूपा धीरू आ धीरेन्द्र प्रेमर्षि, बाल साहित्य) (सौजन्य- धीरेन्द्र प्रेमर्षि) भगता बेङक देश-भ्रमण अणिमा सिंह (सौजन्य- नचिकेता) शिशु गीत खेल कल्पना झा (सौजन्य- कल्पना झा) नशामुक्ति हित गाबी गीत निनियाँ मुन्नी कामत (सौजन्य- मुन्नी कामत) चुक्का (बाल कथा संग्रह) प्रीति ठाकुर गोनू झा आ आन मैथिली चित्रकथा -पहिल मैथिली चित्रकथा (बाल साहित्य) मैथिली चित्रकथा (बाल साहित्य) मिथिलाक लोकदेवता (बाल साहित्य) विद्यापतिक पुरुष परीक्षा (बाल साहित्य) रेस (अनुवाद- बाल चित्रकथा) ए बी सी डी- प्रकृति अक्षर पोथी (अनुवाद- बाल चित्रकथा) सभ खाइत अछि (अनुवाद- बाल चित्रकथा) बो म्याउ बाह (अनुवाद- बाल चित्रकथा) रङ सभ (अनुवाद- बाल चित्रकथा) (०६) छोट आ पैघ (अनुवाद- बाल चित्रकथा) (०७) माल-जाल आ जानवर दिस देखू (अनुवाद- बाल चित्रकथा) (१७) हमर परिवार (अनुवाद- बाल चित्रकथा) जानवर (अनुवाद- बाल चित्रकथा) पोथी १३: १...२...३... (अनुवाद- बाल चित्रकथा) बाजाक अबाज (अनुवाद- बाल चित्रकथा) नीतू कुमारी मैथिली चित्रकथा ( बाल साहित्य) नीता झा (सौजन्य- नीता झा) बिलाइ मौसी (बाल लघुकथा संग्रह) किरण चौधरी (अनूदित सचित्र मैथिली बाल कथा) पिसी संग हम हमर बाल-वाड़ी आर्या कॉकपिट मे दीपा करमाकर- सही संतुलन मे जंगल मे अहाँक स्वागत अछि व्हेल छथि आकाश मे भैया के मुस्कान के चोरौलक बीज संचयक अचंभित करय "फिबोनाची" शौचालयक खिस्सा लाल बरसाती गुल्लीक जादुई पेटी समीराक विकठ भोजन विवाह मे जाई छी प्रियंका झा (अनूदित सचित्र मैथिली बाल कथा) हमर माँछ! नै हमर माँछ! रश्मि प्रिया (अनूदित सचित्र मैथिली बाल कथा) कैयो सकै छी, नहियो कऽ सकै छी सुनीता ठाकुर (अनूदित सचित्र मैथिली बाल कथा) बण्टी आ बबली नीलिमा चौधरी (अनूदित सचित्र मैथिली बाल कथा) हमर सभसँ नीक संगी स्वास्तिका ठाकुर (अनूदित सचित्र मैथिली बाल कथा) गप्पू बुते नाचल नै होइ छै तूलिका (अनूदित सचित्र मैथिली बाल कथा) हमरा ओ चाही! मधूलिका मिश्र (अनूदित सचित्र मैथिली बाल कथा) ओंघाइत भीमा लक्ष्मी ठाकुर जानवर सभ संगे भेँट-घाँट पूनम मण्डल सुतै कालक खिस्सा गजेन्द्र ठाकुर बाल साहित्य (मूल)- गजेन्द्र ठाकुर बाल मण्डली/ किशोर जगत (बाल नाटक, लघुकथा, कविता आदि) Learn Mithilakshar Script जलोदीप (बाल-नाटक संग्रह) अक्षरमुष्टिका (बाल-लघुकथा संग्रह) बाङक बङौरा (बाल-पद्य संग्रह) भऽ जाएब छू(मैथिलीक २०१२ मे प्रकाशित पहिल क्लाइमेट-फिक्शन प्ले- Maithili's first climate-fiction play originally published in 2012) कमलाक भगता तरहरिमे परीलोक बेसी छुट्टी कम इसकूल बड़द करैए दाउन ने यौ बाल गजल फिनिश लाइन बाल साहित्य (अनुवाद- द्विभाषिक- मैथिली-अंग्रेजी)- गजेन्द्र ठाकुर मसाई केर परिवर्तनकारी रेबेका सुनू घर सभ एकटा नीक दिन चलू हम तँ ठीक छी ने! की अहाँ ऐ चिड़ै सभकेँ देखने छी? टोस्ट बड़ीटा! कनियेटा! एतऽ हम सभ रहै छी भारतोल्लक राजकुमारी भारतोल्लक राजकुमारी (बिनु शब्दक) वुयो कच-कच कचाक चुन्नू-मुन्नूक नहेनाइ नेना जे बैलूनसँ डेराइत छल अद्भुत फिबोनाची अंक-शृंखला हारू अखन नै, अखन नै! जन्मदिनक उत्सव भोज मोट राजा पातर-दुब्बड़ कुकुड़ बचिया जे अपन हँसी नै रोकि सकैत छलि अंग्रेजी हम सूंघि सकै छी छोट लाल-टुहटुह डोरी करू नीक, भोगू नीक ई सभटा बिलाड़िक दोख अछि! चोभा आम! हमर टोलक बाट जखन इकड़ू स्कूल गेल माछी फेर आउ टाटा! अमाचीक जुलुम मशीन सभ टिंग टोंग पाउ-म्याऊ-वाह कुकुड़क एकटा दिन हमरा नीक लगैए रीताक नव-स्कूलमे पहिल दिन कनी हँसियौ ने! लाल बरसाती भूत-प्रेतक नाट्यशाला आउ पएर गानी कतऽ अछि ई अंक ५? विदेह मैथिली-अंग्रेजी टॉकिंग रीड-अलाउड ऑडियो बुक https://bloomlibrary.org/player/Wcf6zr5CoF (मसाई केर परिवर्तनकारी रेबेका) https://bloomlibrary.org/player/p3sHdYBgiT (चलू हम तँ ठीक छी ने!) https://bloomlibrary.org/player/f19pSdhGMo (एकटा नीक दिन) https://bloomlibrary.org/player/b2l5wesxCp (घर सभ) https://bloomlibrary.org/player/dAzC0Fubt7 (की अहाँ ऐ चिड़ै सभकेँ देखने छी?) गजेन्द्र ठाकुर (सम्पादन) विदेह मैथिली शिशु उत्सव [विदेह सदेह ९] विदेह: सदेह ९ तिरहुता गजेन्द्र ठाकुर, नागेन्द्र कुमार झा आ पञ्जीकार विद्यानन्द झा (सम्पादन) English-Maithili Computer Dictionary डॉ. ललिता झा (सौजन्य- ललिता झा) मैथिलीक भोजन सम्बन्धी शब्दावली गोविंद झा ((IGNCA Site आर्काइव) Maithili-English Dictionary रामदेव झा (सौजन्य- शंकरदेव झा) मैथिली शब्द संचय ................ किछु मैथिली पोथी डाउनलोड साइट (ओपन सोर्स) Videha Maithili eBooks/ eJournals/ Video Archive विज्ञान रत्नाकर OLE Nepal's e-Pustakalaya पोथीक लिंक IGNCA-ASI (search keyword Mithila) History of Navya-Nyaya in Mithila Studies in Jainism and Buddism in Mithila Mithila in the Age of Vidyapati Cultural Heritage of Mithila Mithila under the Karnatas Temple Survey Project ASI- English आ Hindi मैथिली साहित्य संस्थान दर्शनीय मिथिला (मैथिली साहित्य  संस्थान लिंक) Brochure 1 (मैथिली साहित्य  संस्थान लिंक) Brochure 2 (मैथिली साहित्य  संस्थान लिंक) Brochure 3 (मैथिली साहित्य  संस्थान लिंक) ब्लूम लाइब्रेरी मैथिली अरिपन फाउण्डेशन Pratham Books Maithili Storyweaver मैथिली ऑडियो बुक्स Videha Read Aloud Talking Maithili Audio Books (including Maithili Sign Language- Ist time in Maithili) पोथी डॉट कॉम खिस्सा-पिहानी नेना भुटका लेल जानकी एफ.एम समाचार आकाशवाणी दरभंगा यू ट्यूब चैनल ................. विदेह सम्मान: सम्मान-सूची (समानान्तर साहित्य अकादेमी, समानान्तर ललित कला अकादेमी आ समानान्तर संगीत-नाटक अकादेमी सम्मान/ पुरस्कार नामसँ विख्यात) ................ मैथिलीक वर्तनी १ मैथिलीक वर्तनी- विदेह मैथिली मानक भाषा आ मैथिली भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम भाषापाक २ मैथिलीक वर्तनीमे पर्याप्त विविधता अछि। मुदा प्रश्नपत्र देखला उत्तर एकर वर्तनी इग्नू BMAF001 सँ प्रेरित बुझाइत अछि, से एकर एकरा एक उखड़ाहामे उनटा-पुनटा दियौ, ततबे धरि पर्याप्त अछि। यू.पी.एस.सी. क मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेल सेहो ई पर्याप्त अछि, से जे विद्यार्थी मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेने छथि से एकर एकटा आर फास्ट-रीडिंग दोसर-उखड़ाहामे करथि| IGNOU  इग्नू       BMAF-001 These are print-on-demand books, send your queries to editorial.staff.videha@gmail.com. The eBooks of some of these are available for sale on Google Play. ४.५.विदेह स्त्री कोना वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू। Always refresh the pages for viewing new issue of VIDEHA. Top of Form Search above & below within more than 350 old issues of Videha eJournal विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् www.videha.co.in Bottom of Form https://books.google.com/ Top of Form Bottom of Form (पूर्णतः अव्यवसायिक उद्देश्य आ मात्र एकेडमिक प्रयोग लेल) सभ पोथी पी.डी.एफ. डाउनलोड लेल क्रमानुसार नीचाँक लिंक सभपर उपलब्ध अछि। All the books are available for pdf download at the respective links below. .... सखुआवाली (नारी विमर्श केन्द्रित) भपटियाहीमे भेल ८३ म सगर राति दीप जरयमे पठित कथा सभक संकलन सखुआवाली अणिमा सिंह (सौजन्य- नचिकेता) शिशु गीत खेल इलारानी सिंह (सौजन्य- नचिकेता) प्रेम- एक कविता (अनूदित नाटक) अरुन्धती देवी (सौजन्य- रमानन्द झा "रमण") मिथिलाक विदुषी महिला कल्पना झा (सौजन्य- कल्पना झा) गोसाउनिक गीत नशामुक्ति हित गाबी गीत निनियाँ यायावरी- शेफालिका वर्मा (हिन्दी अनुवाद कल्पना झा) मुन्नी कामत (सौजन्य- मुन्नी कामत) सुखल मन तरसल आँखि (पद्य आ गद्य) सुखल मन तरसल आँखि (कविता) अंततः (कविता संग्रह) चुक्का (बाल कथा संग्रह) नीता झा (सौजन्य- नीता झा) बिलाइ मौसी (बाल लघुकथा संग्रह) शेफालिका वर्मा (सौजन्य- शेफालिका वर्मा) यायावरी (यात्रावृत्तान्त) यायावरी (हिन्दी अनुवाद- कल्पना झा) अर्थयुग (लघुकथा संग्रह) एकटा अकास (लघुकथा संग्रह) भावांजलि (गद्य गीत) किस्त-किस्त जीवन (आत्म कथा) आखर-आखर प्रीत नागफांस (उपन्यास) Naagphans (In English) विभा रानी विभा रानीक दूटा नाटक (भाग रौ आ बलचन्दा) पन्ना झा (सौजन्य- नरेन्द्र झा) अनुभूति (लघुकथा स‍ंग्रह) सुशीला झा (सौजन्य- प्रभा खेतान/ सुशीला झा) छिन्नमस्ता- प्रभा खेतानक हिन्दी उपन्यासक मैथिली अनुवाद डॉ. ललिता झा (सौजन्य- ललिता झा) मैथिलीक भोजन सम्बन्धी शब्दावली डॉ. कामिनी कामायनी विदेह:सदेह ३१ (डॉ. कामिनी कामायनी आ कुमार मनोज कश्यप- अंक १-३५० सँ) प्रीति ठाकुर गोनू झा आ आन मैथिली चित्रकथा -पहिल मैथिली चित्रकथा (बाल साहित्य) मैथिली चित्रकथा (बाल साहित्य) मिथिलाक लोकदेवता (बाल साहित्य) विद्यापतिक पुरुष परीक्षा (बाल साहित्य) रेस (अनुवाद- बाल चित्रकथा) ए बी सी डी- प्रकृति अक्षर पोथी (अनुवाद- बाल चित्रकथा) सभ खाइत अछि (अनुवाद- बाल चित्रकथा) बो म्याउ बाह (अनुवाद- बाल चित्रकथा) रङ सभ (अनुवाद- बाल चित्रकथा) (०६) छोट आ पैघ (अनुवाद- बाल चित्रकथा) (०७) माल-जाल आ जानवर दिस देखू (अनुवाद- बाल चित्रकथा) (१७) हमर परिवार (अनुवाद- बाल चित्रकथा) जानवर (अनुवाद- बाल चित्रकथा) पोथी १३: १...२...३... (अनुवाद- बाल चित्रकथा) बाजाक अबाज (अनुवाद- बाल चित्रकथा) नीतू कुमारी मैथिली चित्रकथा (बाल साहित्य) किरण चौधरी (अनूदित सचित्र मैथिली बाल कथा) पिसी संग हम हमर बाल-वाड़ी आर्या कॉकपिट मे दीपा करमाकर- सही संतुलन मे जंगल मे अहाँक स्वागत अछि व्हेल छथि आकाश मे भैया के मुस्कान के चोरौलक बीज संचयक अचंभित करय "फिबोनाची" शौचालयक खिस्सा लाल बरसाती गुल्लीक जादुई पेटी समीराक विकठ भोजन विवाह मे जाई छी प्रियंका झा (अनूदित सचित्र मैथिली बाल कथा) हमर माँछ! नै हमर माँछ! रश्मि प्रिया (अनूदित सचित्र मैथिली बाल कथा) कैयो सकै छी, नहियो कऽ सकै छी सुनीता ठाकुर (अनूदित सचित्र मैथिली बाल कथा) बण्टी आ बबली नीलिमा चौधरी (अनूदित सचित्र मैथिली बाल कथा) हमर सभसँ नीक संगी स्वास्तिका ठाकुर (अनूदित सचित्र मैथिली बाल कथा) गप्पू बुते नाचल नै होइ छै तूलिका (अनूदित सचित्र मैथिली बाल कथा) हमरा ओ चाही! मधूलिका मिश्र (अनूदित सचित्र मैथिली बाल कथा) ओंघाइत भीमा लक्ष्मी ठाकुर जानवर सभ संगे भेँट-घाँट पूनम मण्डल सुतै कालक खिस्सा कनकमणि दीक्षित (मूल नेपालीसँ मैथिली अनुवाद रूपा धीरू आ धीरेन्द्र प्रेमर्षि, बाल साहित्य) (सौजन्य- धीरेन्द्र प्रेमर्षि) भगता बेङक देश-भ्रमण डॉ शशिधर कुमर आ सुप्रिया बेबी कुमारी भूकम्प (पृ. ६३८-६७४) .... लेखकक आमंत्रित रचना आ ओइपर आमंत्रित समीक्षकक समीक्षा सीरीज १. कामिनीक पांच टा कविता आ ओइपर मधुकान्त झाक टिप्पणी Videha_01_09_2016 ३. मुन्नी कामतक एकांकी "जिन्दगीक मोल" आ ओइपर गजेन्द्र ठाकुरक टिप्पणी VIDEHA_354 पसुपुलेटी गीता एडिटर्स चोइस सीरीज-१ मीना झा एडिटर्स चोइस सीरीज-२ जगदीश चन्द्र ठाकुर (३ टा बाल कविता जइमे २ टा कविता बेबी चाइल्डपर) एडिटर्स चोइस सीरीज-३ .... विद्यापति गीत तूलिका गीत-गोविन्ददास (गायन दीक्षा भारती) गोविन्ददास-१ गोविन्ददास-२ गोविन्ददास-३ गोविन्ददास-४ गोविन्ददास-५ गोविन्ददास-६ मैथिली गजल (गजल- गजेन्द्र ठाकुर, गायन दीक्षा भारती) बहरे मुतकारिब गजल-२ गजल-३ गजल-४ प्यारे मैथिल चैनल- किरण चौधरी आ संगीता आनन्द- मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय यू ट्यूब चैनल These are print-on-demand books, send your queries to editorial.staff.videha@gmail.com. The eBooks of some of these are available for sale on Google Play. ४.६.विदेह सूचना संपर्क अन्वेषण वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू। Always refresh the pages for viewing new issue of VIDEHA. Top of Form Search above & below within more than 350 old issues of Videha eJournal विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् www.videha.co.in Bottom of Form https://books.google.com/ Top of Form Bottom of Form Top of Form Bottom of Form सूचना Do not judge each day by the harvest you reap but by the seeds that you plant. - Robert Louis Stevenson ............................................ Videha: Maithili Literature Movement Videha eJournal (link www.videha.co.in) is a multidisciplinary online journal dedicated to the promotion and preservation of the Maithili language, literature and culture. It is a platform for scholars, researchers, writers and poets to publish their works and share their knowledge about Maithili language, literature, and culture. The journal is published online to promote and preserve Maithili language and culture. The journal publishes articles, research papers, book reviews, and poetry in Maithili and English languages. It also features translations of literary works from other languages into Maithili. It is a peer-reviewed journal, which means that articles and papers are reviewed by experts in the field before they are accepted for publication. १ "विदेहक जीवित साहित्यकार-सम्पादक आ रंगमंचकर्मी- रंगमंच-निर्देशक पर विशेषांक शृंखला" विदेह अपन ३६९ म (०१ मई २०२३) अंकमे मैथिली लेखक अशोक पर आ ३७० म (१५ मई २०२३) अंकमे मैथिली लेखक राम भरोस कापड़ि 'भ्रमर' पर विशेषांक निकालत। विशेषांक लेल रचनाकार/ कलाकर्मीक काज, रचना-संपादन, संस्मरण आ अन्य रचनात्मक कार्यपर सभ प्रकारक रचना (संस्मरण, आलोचना, समालोचना, समीक्षा आदि) आमंत्रित अछि। अहाँ अपन रचना ३६९म अंकक विशेषांक लेल २४ अप्रैल २०२३ धरि आ ३७०म अंकक विशेषांक लेल ८ मई २०२३ धरि वर्ड फाइलमे ई-पत्र सङ्केत editorial.staff.videha@gmail.com पर पठा सकै छी। विदेह अरविन्द ठाकुर विशेषांक विदेह जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक विदेह रामलोचन ठाकुर विशेषांक विदेह राजनन्दन लाल दास विशेषांक विदेह रवीन्द्र नाथ ठाकुर विशेषांक विदेह केदार नाथ चौधरी विशेषांक विदेह प्रेमलता मिश्र प्रेम विशेषांक विदेह शरदिन्दु चौधरी विशेषांक -गजेन्द्र ठाकुर, सम्पादक विदेह, whatsapp no +919560960721 HTTP://VIDEHA.CO.IN/ ISSN 2229-547X VIDEHA २ "विदेह द्वारा एक बेरमे कोनो एकटा संस्थाक समग्र मूल्याकंन शृंखला" विदेह अपन ३७१ म (०१ जून २०२३) अंकमे "मिथिला स्टूडेंट यूनियन (एम.एस.यू.)" पर विशेषांक निकालत। मिथिला स्टूडेंट यूनियन (एम.एस.यू.) पर निच्चा लीखल बिंदुपर मैथिलीमे आलेख आमंत्रित अछि। १) एम.एस.यू. केर गठनक प्रमाणिक इतिहास, २) एम.एस.यू. आ मिथिला केर नव चेतना, ३) एम.एस.यू. आ विभिन्न जाति केर समन्वय, ४) एम.एस.यू. द्वारा भेल विभिन्न आंदोलन आ तकर लेखा-जोखा एवम् ओकर प्रभाव बा ५) एम.एस.यू. संदर्भित आन कोनो लेख। ३७१म अंकक विशेषांक लेल अहाँ अपन रचना २५ मई २०२३ धरि वर्ड फाइलमे ई-पत्र सङ्केत editorial.staff.videha@gmail.com पर पठा सकै छी। -गजेन्द्र ठाकुर, सम्पादक विदेह, whatsapp no +919560960721 HTTP://VIDEHA.CO.IN/ ISSN 2229-547X VIDEHA ३ "विदेह मोनोग्राफ" शृंखला विदेह अपन जीवित रचनाकार/ कलाकर्मी पर विशेषांक शृंखलाक अन्तर्गत (१)अरविन्द ठाकुर, (२)जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल, (३)रामलोचन ठाकुर, (४) राजनन्दन लाल दास, (५)रवीन्द्र नाथ ठाकुर, (६) केदार नाथ चौधरी, (७) प्रेमलता मिश्र 'प्रेम' आ (८) शरदिन्दु चौधरी विशेषांक निकालने अछि। अही सन्दर्भमे आठो साहित्यकार पर "विदेह मोनोग्राफ" शृंखला अन्तर्गत "मोनोग्राफ" आमंत्रित कयल जा रहल अछि। "विदेह मोनोग्राफ" शृंखलाक विवरण निम्न प्रकार अछि: (१) इच्छुक लेखक ऊपरमे कोनो एक रचनाकार पर अपन मोनोग्राफ लिखबाक इच्छा editorial.staff.videha@gmail.com पर पठा सकै छथि। मोनोग्राफ लिखबाक अवधि सामान्यः एक मास रहत। (२) विदेह आठ रचनाकारपर आठ लेखकक नाम मोनोग्राफ लिखबाक लेल चयनित कऽ ओकर सार्वजनिक घोषणा करत। "विदेह मोनोग्राफ" लिखबाक निअम: (१) मोनोग्राफ पूर्ण रूपेँ रचनाकारपर केन्द्रित हुअय। साहित्य अकादेमी, एन.बी.टी. आ किछु व्यक्तिगत रूपेँ लिखल मोनोग्राफ/ बायोग्राफीमे लेखक संस्मरण आ व्यक्तिगत प्रसंग जोड़ि कय रचनाकारक बहन्ने अपन-आत्म-प्रशंसा लिखैत छथि। "विदेह मोनोग्राफ" फीफा वर्ल्ड कप फुटबाल सन रहत। फीफा वर्ल्ड कप फुटबाल एहेन एकमात्र टूर्नामेण्ट अछि जतय कोनो "ओपेनिंग" बा "क्लोजिंग" सेरीमनी नै होइत छै आ तकर कारण छै जे "ओपेनिंग" बा "क्लोजिंग" मे टूर्नामेण्टमे नै खेला रहल लोक मुख्य अतिथि/ अतिथि होइत छथि आ फोकस खिलाड़ी सँ दूर चलि जाइत अछि। फीफा मात्र आ मात्र फुटबाल खिलाड़ीपर केन्द्रित रहैत अछि से ओकर टूर्नामेण्ट "ओपेनिंग सेरीमनी" नै वरन् सोझे "ओपेनिंग मैच" सँ आरम्भ होइत अछि आ ओकर समापन "क्लोजिंग सेरीमनी"सँ नै वरन् "फाइनल मैच आ ट्राफी"सँ खतम होइत अछि आ फोकस मात्र आ मात्र खिलाड़ी रहैत छथि। तहिना "विदेह मोनोग्राफ" मात्र आ मात्र ऐ "सातो रचनाकार"पर केन्द्रित रहत आ कोनो संस्मरण आदि जोड़ि कऽ फोकस रचनाकारसँ अपनापर केन्द्रित करबाक अनुमति नै रहत। (२) मोनोग्राफ लेल "विदेह पेटार"मे उपलब्ध सामग्रीक सन्दर्भ सहित उपयोग कयल जा सकैए। (३) विदेहमे ई-प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि। सम्पादक 'विदेह' ई-पत्रिकामे प्रकाशित रचनाक प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ मूल आ अनूदित आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार रखैत छथि। ऐ ई-पत्रिकामे कोनो रॊयल्टीक/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै। (४) "विदेह मोनोग्राफ"क फॉर्मेट: रचनाकारक परिचय (रचनाकारक जन्म, निवास-स्थान आ कार्यस्थलक भौगोलिक-सांस्कृतिक विवेचना सहित) आ रचनावली (समीक्षा सहित)। घोषणा: "विदेह मोनोग्राफ" शृंखला अन्तर्गत (१) राजनन्दन लाल दास जी पर मोनोग्राफ निर्मला कर्ण, (२) रवीन्द्र नाथ ठाकुर पर मुन्नी कामत आ (३) केदार नाथ चौधरी पर प्रेम मोहन मिश्र द्वारा लिखल जायत। मैथिली पुत्र प्रदीप पर "विदेह मोनोग्राफ" लिखताह प्रेमशंकर झा "पवन"। शेष ५ गोटेपर निर्णय शीघ्र कएल जायत। घोषणा २: ओना तँ मैथिली पुत्र प्रदीप पर विदेह विशेषांक नै निकालने अछि, मुदा हुनकर अवदान केँ देखैत प्रेमशंकर झा "पवन"क हुनका ऊपर "विदेह मोनोग्राफ" लिखबाक विचार आयल तँ ओकरा स्वीकार कयल गेल। -गजेन्द्र ठाकुर, सम्पादक विदेह, whatsapp no +919560960721 HTTP://VIDEHA.CO.IN/ ISSN 2229-547X VIDEHA ४ (१) विदेह द्वारा जे विशेषांक प्रकाशित होइ छै तकर संगे विदेह ओहन लेखक-साहित्यपर अपन धेआन सेहो केंद्रित करत जिनकापर विदेहक विशेषांक कोनो कारणवश नै प्रकाशित भऽ सकल। ऐ नव विचारक मुख्य बिंदु एना अछि- १) हम एकटा कोनो लेखक वा कलाकारपर एकाग्र आलोचना करब जकर भाषा मैथिली अथवा अंग्रेजी रहत। ऐ पोथीक पहिल रूप ई-बुक केर रूपमे ऐत आ प्रयास रहत जे एकर प्रिंट सेहो आबए जे कि परिस्थितिपर निर्भर करत। २) ऐ शृंखलामे सुभाष चंद्र यादवपर केंद्रित "नित नवल सुभाष चंद्र यादव" एवं राजदेव मंडलपर केंद्रित "Rajdeo Mandal- Maithili Writer" प्रकाशित भेल अछि। दुनू पोथीक लोकार्पण ३१ दिसम्बर २०२२ केँ १११म सगर राति दीप जरय मे कएल गेल। ३)आगाँक घोषणा लेल http://videha.co.in/investigation.htm देखैत रही। कमलानन्द झाक पोथी "मैथिली उपन्यास: समय समाज आ सवाल" (२०२१) क शीर्षक भ्रामक अछि। ई हुनकर किछु सवर्ण उपन्यासकारपर किछु सिण्डिकेटेड कथित समीक्षात्मक आलेखक संग्रह अछि, २६३ पन्नाक ई पोथी हार्डबाउण्डमे लाइब्रेरीकेँ मात्र बेचल जा सकत, जतऽ ई सड़ि जायत, अमेजनसँ हम ई चारि सय पाँच टाकामे किनलौं मुदा ऐमे पाँचो पाइक सामिग्री नै अछि। एतऽ एकटा भूल सुधार अछि, एकटा गएर सवर्ण लेखक सुभाष चन्द्र यादवक उपन्यास 'गुलो'केँ बिनु पढ़ने ओ दू पाँति लिखलन्हि आ निपटा देलन्हि, ओ दुनू पाँति हम एतऽ अहाँक मनोरंजनार्थ प्रस्तुत कऽ रहल छी। अहाँ गुलो पढ़नहिये हएब, जँ नै पढ़ने छी तँ पहिने पढ़ि लिअ, कारण तखन बेशी मनोरंजक अनुभव हएत, गुलो सुभाष चन्द्र यादव जीक अनुमति सँ उपलब्ध अछि विदेह आर्काइवपर ऐ http://videha.co.in/pothi.htm लिंकपर। "उपन्यासक कमजोरी अछि लेखकक राजनीतिक पूर्वाग्रह। राजनीति विशेषक पक्षधरता रचनाक संग न्याय नहि कऽ पबैत अछि।" जइ उपन्यासमे राजनीति दूर-दूर धरि नै छै ओतऽ 'राजनैतिक पूर्वाग्रह' आ 'राजनीति विशेषक पक्षधरता'क तँ प्रश्ने नै छै। राजनीतिक पूर्वाग्रह बा पक्षधरताक सोङर धूमकेतु आ यात्री प्रयुक्त केलन्हि। सुभाष चन्द्र यादव जीक 'भोट' जे २०२२मे आयल जे सुभाष चन्द्र यादव जीक अनुमति सँ उपलब्ध अछि विदेह आर्काइवपर ऐ http://videha.co.in/pothi.htm लिंकपर, से राजनीतिपर अछि मुदा ओतहुओ सुभाषजीक भगता शैलीकेँ राजनीतिक पूर्वाग्रह बा पक्षधरताक सोङरक आवश्यकता नै पड़लै। पढ़ू हमर पोथी 'नित नवल सुभाष चन्द्र यादव' जे उपलब्ध अछि ऐ http://videha.co.in/pothi.htm लिंकपर। कमलानन्द झाक बिनु पढ़ने सुभाष चन्द्र यादवक विरुद्ध ब्राह्मणवादी जातिगत पूर्वाग्रह एकटा खतराक घण्टी अछि। जइ हिसाबे ब्राह्मणवादकेँ आगाँ बढ़बैले कमलानन्द झा वामपंथक सोङर पकड़ै छथि आ सामाजिक न्यायक बलि चढ़बऽ चाहै छथि, तकर प्रति समानान्तर धारा सचेत अछि। ई अपन बायोडाटामे गएर सवर्णसँ छीनि कऽ, समानान्तर धाराक लोकक हककेँ मारि कऽ लेल साहित्य अकादेमीक मैथिल अनुवाद असाइनमेण्टक गर्वसँ चर्चा करैत छथि। आ ई असाइनमेण्ट हिनका मेरिटसँ नै जातिगत टाइटिलसँ भेटल छन्हि, अही सभ किरदानीक एवजमे भेटल छन्हि। हिनका सन लोक लेल मैथिली बायोडेटाक एकटा पाँति अछि, समानान्तर धारा लेल जीवन-मरणक प्रश्न। आब अहाँ पुछब जे तकर प्रतिकार समानान्तर धारा केना केलक, ओ तँ कन्नारोहट नै करैए, तँ तकर उत्तर अछि हमर ३ टा पोथी जे १११म सगर राति दीप जरय मे लोकार्पित भेल ३१ दिसम्बर २०२२ केँ, वएह सगर राति दीप जरय जकरा साहित्य अकादेमी गत दस बर्खसँ गीड़ि लेबाक प्रयास कऽ रहल अछि। अहाँसँ ऐ तीनू पोथीपर टिप्पणी ई-पत्र सङ्केत editorial.staff.videha@gmail.com पर आमंत्रित अछि। पहिल दू पोथी मे राजदेव मण्डल आ सुभाष चन्द्र यादवक साहित्यक समीक्षा अछि जे हमर तेसर पोथी मैथिली समीक्षशास्त्रक सिद्धांतक आधारपर कएल गेल अछि। तीनू पोथीक लिंक नीचाँ देल गेल अछि। Rajdeo Mandal- Maithili Writer (Now with Supplement I & II) नित नवल सुभाष चन्द्र यादव नित नवल सुभाष चन्द्र यादव (मिथिलाक्षर) मैथिली समीक्षाशास्त्र मैथिली समीक्षाशास्त्र (तिरहुता) संगमे पढ़ू कमलानन्द झा क ब्राह्मणवादपर प्रहार: दूषण पञ्जी- The Black Book दूषण पञ्जी- The Black Book (मिथिलाक्षर) -गजेन्द्र ठाकुर, सम्पादक विदेह, whatsapp no +919560960721 HTTP://VIDEHA.CO.IN/ ISSN 2229-547X VIDEHA ४(२) नित नवल दिनेश कुमार मिश्र दिनेश कुमार मिश्रक 'दुइ पाटन के बीच मे' कोसी नदीक ऐतिहासिक आत्मकथा थीक, ओ मिथिलाक आन धार सभक ऐतिहासिक आत्मकथा सेहो लिखने छथि जेना बन्दिनी महानन्दा, बागमती की सद्गति!, दुइ पाटन के बीच में.. (कोसी नदी की कहानी), न घाट न घर, बगावत पर मजबूर मिथिला की कमला नदी, भुतही नदी और तकनीकी झाड़-फूंक, The Kamla River and People On Collision Course, Bhutahi Balan- Story of a ghost river and engineering witchcraft, Refugees of the Kosi Embankments। साहित्य अकादेमीक मैथिली परामर्शदात्री समितिक सदस्य पंकज झा पराशर द्वारा हिनकर पोथी सभसँ पैराक पैरा मैथिली अनुवाद कऽ अपना नामे उपन्यास छपबाओल गेल अछि, जकरा छद्म समीक्षक कमलानन्द झा ऐ चोर लेखकक रिसर्च कहै छथि! एतऽ स्पष्ट कऽ दी जे ई चोर लेखक आ छद्म समीक्षक दुनू अलीगढ़ मुस्लिम विद्यालयक हिन्दी विभागमे छथि। ई रिसर्च दिनेश कुमार मिश्रक थीक, जे आइ.आइ.टी. खड़गपुरसँ सिविल इन्जीनियरिङ मे बी. टेक. १९६८मे आ स्ट्रक्चरल इन्जीनियरिङमे एम.टेक. १९७०मे केने छथि, आ ओइ रिसर्च लेल क्वालिफाइड छथि। जखन कोनो विषयमे नामांकन नै होइ छै तखन लोक हारि-थाकि हिन्दीमे नामांकन लइए, नै तँ कमलानन्द झा केँ बुझऽ मे आबि जइतन्हि जे ई रिसर्च कोनो सिविल इन्जीनियरेक भऽ सकैत अछि, भऽ सकैए बुझलो होइन्ह। हिन्दी मूल आ मैथिलीक स्क्रीनशॉट आँगा संलग्न अछि। दिनेश कुमार मिश्र मिथिलाक नै छथि मुदा मिथिलाक सभ धारक कथा ओ लिखने छथि, हम सभ हुनका प्रति कृतज्ञ छी आ हुनकर ऋणसँ मिथिलावासी कहियो उऋण नै भऽ सकता, मुदा मूलधाराक पुरस्कार आ पाइ लोलुप लोकसँ कृतघ्नते भेटत से फेर सिद्ध भेल। ऐ लेखककेँ दस बारह बर्ख पहिने सेहो तारानन्द वियोगी उद्धारक भेटल छलखिन्ह जे लिखने रहथिन्ह जे ओ कवितामे प्रभावित भऽ अनायासे अपन रचनामे दोसरक सामिग्री चोरि कऽ लइ छथि, एहने सन। आब ऐ कमलानन्द झा क आश्रय तकलन्हि मुदा दुर्भाग्य! जइ हिसाबे ब्राह्मणवादकेँ आगाँ बढ़बैले कमलानन्द झा वामपंथक सोङर पकड़ै छथि आ सामाजिक न्यायक बलि चढ़बऽ चाहै छथि, तकर प्रति समानान्तर धारा सचेत अछि। सीलिंगसँ बचबा लेल जमीन-जत्थाबला लोक कम्यूनिस्ट बनला आ आब ब्राह्मणवाद बचेबालेल वामपंथक शरण, एहेन लोक सभसँ कम्यूनिज्मकेँ बहुत नुकसान भेल छै। दिनेश क़ुमार मिश्रक सभटा पोथी आब हुनकर अनुमतिसँ उपलब्ध अछि विदेह आर्काइवमेः http://videha.co.in/pothi.htm एतऽ एकटा गप मोन पाड़ि दी जे जखन बिल गेट्सकेँ पूछल गेलन्हि जे की ओ एक्स बॉक्स भारतमे पाइरेशीक डरसँ देरीसँ आनि रहल छथि? तँ हुनकर उत्तर रहन्हि जे माइक्रोसॉफ्ट पाइरेशीक डरे कोनो उत्पाद देरीसँ नै उतारने अछि। से विदेह पेटारमे हम सभ ऐ तरहक रिस्क रहितो एकरा आर समृद्ध करैत रहब, कारण समानान्तर धारामे सड़ल माँछ द्वारे पोखरिक सभ माँछ नै सड़ैए, एतुक्का मलाह गोट-गोट कऽ सड़ल माँछ निकालैत रहल छथि, निकालैत रहता। सिण्डीकेटेड समीक्षापर अन्तिम प्रहार। मूल दिनेश कुमार मिश्र (दुइ पाटन के बीच में... २००६): यह ध्यान देने की बात है कि 1923 से 1946 के बीच कोसी क्षेत्र में मलेरिया से 5,10,000, कालाजार से 2,10,000, हैजे से 60,000 तथा चेचक से 3,000 मौतें (कुल 7,83,000) हुईं। चोर पंकज झा पराशर (साहित्य अकादेमीक मैथिली परामर्शदात्री समितिक सदस्य) [जलप्रांतर २०१७ (पृ. १०३)]: मूल दिनेश कुमार मिश्र (दुइ पाटन के बीच में... २००६): भारतवर्ष में बिहार में कोसी नदी को बांधने का काम 12वीं शताब्दी में किसी राजा लक्ष्मण द्वितीय ने करवाया था और इस काम के लिए उसने प्रजा से 'बीर' की उपाधि पाई और नदी का तटबन्ध 'बीर बांध' कहलाया। इस तटबन्ध के अवशेष अभी भी सुपौल जिले में भीम नगर से कोई 5 किलोमीटर दक्षिण में दिखाई पड़ते हैं। डॉ. फ्रांसिस बुकानन (1810-11) का अनुमान था कि यह बांध किसी किले की सुरक्षा के लिए बनी बाहरी दीवार रहा होगा क्योंकि यह बांध धौस नदी के पश्चिमी किनारे पर तिलयुगा से उसके संगम तक 32 किलोमीटर की दूरी में फैला हुआ था। डॉ. डब्लू.डब्लू. हन्टर (1877) बुकानन के इस तर्क के साथ सहमत नहीं थे कि यह बांध किसी किले की सुरक्षा दीवार था। स्थानीय लोगों के हवाले से हन्टर का मानना था कि अधिकांश लोग इसे किले की दीवार नहीं मानते और उनके हिसाब से यह कुछ और ही चीज थी मगर वह निश्चित रूप से कुछ कहने की स्थिति में नहीं थे। फिर भी जो आम धारणा बनती है वह यह है कि यह कोसी नदी के किनारे बना कोई तटबन्ध रहा होगा जिससे नदी की धारा को पश्चिम की ओर खिसकने से रोका जा सके। लोगों का यह भी कहना था कि ऐसा लगता था कि इस तटबन्ध का निर्माण कार्य एकाएक रोक दिया गया होगा। छद्म समीक्षक कमलानन्द झा द्वारा चोर उपन्यासकारक पीठ ठोकब, देखू छद्म समीक्षक कमलानन्द झा द्वारा उद्धृत चोर पंकज झा पराशर (मैथिली उपन्यास, समय, समाज आ सवाल पृ. २५७-२५८): चोर पंकज झा पराशर (साहित्य अकादेमीक मैथिली परामर्शदात्री समितिक सदस्य) [जलप्रांतर २०१७ (पृ. ३१)]: मूल दिनेश कुमार मिश्र (दुइ पाटन के बीच में... २००६): कोसी के प्रवाह कि भयावहता की एक झलकफिरोजशाह तुगलक की फौज के सन् 1354 में बंगाल से दिल्ली लौटने के समय मिलती है। बताया जाता है कि जब सुल्तान की फौजें कोसी के किनारे पहुँचीं तो देखा कि नदी के दूसरे किनारे पर हाजी शम्सुद्दीन इलियास की फौजें मुकाबले के लिए तैयार खड़ी हैं। यह वही हाजी शम्सुद्दीन थे जिन्होंने हाजीपुर तथा समस्तीपुर शहर बसाये थे। फिरोज की फौजें शायद कुरसेला के आस-पास किसी जगह पर कोसी के किनारे सोच में पड़ गईं। नदी की रफ्तार उन्हें आगे बढ़ने से रोक रही थी। आखिरकार फैसला हुआ कि नदी के साथ-साथ उत्तर की ओर बढ़ा जाय और जहाँ नदी पार करने लायक हो जाय वहाँ पानी की थाह ली जाये। सुल्तान की फौजें प्रायः सौ कोस ऊपर गईं और जियारन के पास, जो कि उसी स्थान पर अवस्थित था जहाँ नदी पहाड़ों से मैदानों में उतरती थी, नदी को पार किया। नदी की धारा तो यहाँ पतली जरूर थी पर प्रवाह इतना तेज था कि पाँच-पाँच सौ मन के भारी पत्थर नदी में तिनकों की तरह बह रहे थे। जहाँ नदी को पार करना मुमकिन लगा उसके दोनों ओर सुल्तान ने हाथियों की कतार खड़ी कर दी और नीचे वाली कतार में रस्से लटकाये गये जिससे कि यदि कोई आदमी बहता हुआ हो तो इस रस्सों की मदद से उसे बचाया जा सके। शम्सुद्दीन ने कभी सोचा भी न था कि सुल्तान की फौजें कोसी को पार कर लेंगी और जब उस को इस बात का पता लगा कि सुलतान की फौजों ने कोसी को पार करने में कामयाबी पा ली है तो वह भाग निकला। चोर पंकज झा पराशर (साहित्य अकादेमीक मैथिली परामर्शदात्री समितिक सदस्य) [जलप्रांतर २०१७ (पृ. १०५)]: (... शीघ्र अही लिंकपर आर स्क्रीनशॉट अपडेट कएल जायत।) विदेहक ३६३ म अंक दिनांक ०१ फरबरी २०२३ सँ प्रारम्भ... नित नवल दिनेश कुमार मिश्र http://videha.co.in/ विदेह: प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) पर। -गजेन्द्र ठाकुर, सम्पादक विदेह, whatsapp no +919560960721 HTTP://VIDEHA.CO.IN/ ISSN 2229-547X VIDEHA ४ (३) नित नवल सुशील कमलानन्द झाकेँ हम किए छद्म समीक्षक कहलियनि? कारण ओ छद्म समीक्षक छथि। ओ लिखै छथि- "मैथिली उपन्यास-यात्राक लगभग सय वर्षक बाद मैथिल अन्तरजातीय विवाहक सपना, संघर्ष आ विडम्बना पर गरिमायुक्त उपन्यास लिखबाक श्रेय गौरीनाथकेँ जाइत छनि।" तँ की कमलानन्द झा सुशीलसँ ई श्रेय छीनि लेलनि? की ई हुनकर ब्राह्मणवादी संस्कारक अहंकार- जे हम ककरो चढ़ा सकै छिऐ आ ककरो उतारि सकै छिऐ- केर पराकाष्ठा थीक, आकि हुनकर अध्ययनक अभावक प्रमाण? चलू अहाँकेँ लऽ चली कमलानन्द झा केर स्वार्थी दुनियाँसँ दूर, छल-छद्मसँ दूर सुशीलक जादूबला साहित्यक निश्छल दुनियाँमे। अहाँक स्वागत अछि सुशीलक साहित्यक दुनियाँमे। प्रस्तुत अछि सुशीलक 'गामबाली' (१९८२) जे आब उपलब्ध अछि विदेह आर्काइवमे लिंक http://videha.co.in/pothi.htm पर। पहिल पाँतीमे उपन्यास आरम्भसँ पहिनहिये 'गामबाली' उपन्यासक सम्बन्धमे सुशील लिखै छथि- "विधवा विवाह आ अन्तर्जातीय विवाहक समर्थनमे।" आ उपन्यास आरम्भ। गामबालीक मृत्यु आ तखने झमेला, गामबालीक दाह संस्कार के करतै? ब्राह्मण समाज कि जादव समाज? मैथिलीक सिण्डीकेटेड समीक्षापर अन्तिम प्रहार। विदेहक ३६३ म अंक दिनांक ०१ फरबरी २०२३ सँ प्रारम्भ... नित नवल सुशील http://videha.co.in/ विदेह: प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) पर। -गजेन्द्र ठाकुर, सम्पादक विदेह, whatsapp no +919560960721 HTTP://VIDEHA.CO.IN/ ISSN 2229-547X VIDEHA ५ संजू दास जीक चित्रकलापर बहस चलि रहल अछि। किछु गोटे एकरा अश्लील मानि रहल छथि तँ किछु गोटे एकरा कलाक स्वतंत्र हेबाक परिचायक मानै छथि। विदेह दूनू पक्षसँ टाइप कएल आलेखक अपील कऽ रहल अछि, आलेख तथ्यपरक हेबाक चाही। व्यक्तिगत लगाव बा दुश्मनी बला आलेख नै हुअय। अपन आलेख editorial.staff.videha@gmail.com पर सेहो पठाउ। ६ विदेहक "साहित्यिक भ्रष्टाचार विशेषांक" विदेह "साहित्यिक भ्रष्टाचार विशेषांक" लेल निम्नलिखित विषयपर आलेख ई-मेल editorial.staff.videha@gmail.com पर आमंत्रित अछि। १. साहित्य, कला आ सरकारी अकादमीः- (क) पुरस्कारक राजनीति (ख) सरकारी अकादेमीमे पैसबाक गएर-लोकतांत्रिक विधान (ग) सत्तागुट आ अकादमी केर काज करबाक तरीका (घ) सरकारी सत्ताक छद्म विरोधमे उपजल तात्कालिक समानांतर सत्ताक कार्यपद्धति (ङ) अकादेमी पुरस्कारमे पाइ फैक्टरः मिथक बा यथार्थ २. व्यक्तिगत साहित्य संस्थान आ पुरस्कारक राजनीति ३. प्रकाशन जगतमे पसरल भ्रष्टाचार आ लेखक ४. मैथिलीक छद्म लेखक संगठन आ ओकर पदाधिकारी सबहक आचरण ५. स्कूल-कॉलेजक मैथिली विभागमे पसरल साहित्यिक भ्रष्टाचारक विविध रूप- (क) पाठ्यक्रम (ख) अध्ययन-अध्यापन (ग) नियुक्ति ६. साहित्यिक पत्रकारिता, रिव्यू, मंच-माला-माइक आ लोकार्पणक खेल-तमाशा ७. लेखक सबहक जन्म-मरण शताब्दी केर चुनाव , कैलेंडरवाद आ तकरा पाछूक राजनीति ८. दलित एवं लेखिका सबहक संगे भेद-भाव आ ओकर शोषणक विविध तरीका ९. कोनो आन विषय। ७ विदेह ब्रॉडकास्ट लिस्ट विदेह WWW.VIDEHA.CO.IN सम्बन्धी सूचना लेल अपन whatsapp नम्बर हमर whatsapp no +919560960721 पर पठाउ, ओकर प्रयोग मात्र विदेह सम्बन्धी समाचार देबाक लेल कएल जाएत। -गजेन्द्र ठाकुर, सम्पादक विदेह, whatsapp no +919560960721 HTTP://VIDEHA.CO.IN/ ISSN 2229-547X VIDEHA ...................... मैथिली आ मिथिलासँ संबंधित किछु मुख्य साइट:- आन लिंकक विषयमे सूचना editorial.staff.videha@gmail.com केँ ई मेलसँ पठाबी। http://www.videha.co.in/ ("विदेह" प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका) http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html (इंटरनेटपर मैथिली भाषाक प्राचीनतम उपस्थिति/ मैथिलीक पहिल ब्लॉग- मैथिली भाषा ब्लॉगक एग्रीगेटर, ५ जुलाइ २००४) http://videha.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html (इंटरनेटपर मैथिली भाषाक प्राचीनतम उपस्थिति/ मैथिलीक पहिल ब्लॉग- मैथिली भाषा ब्लॉगक एग्रीगेटर, ५ जुलाइ २००४) भालसरिक गाछ जे सन २००० सँ याहूसिटीजपर छल http://www.geocities.com/.../bhalsarik_gachh.html, http://www.geocities.com/ggajendra आदि लिंकपर आ अखनो ५ जुलाइ २००४ क पोस्ट http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html (किछु दिन लेल http://videha.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html लिंकपर, स्रोत wayback machine of https://web.archive.org/web/*/videha  258 capture(s) from 2004 to 2016- http://videha.com/ भालसरिक गाछ-प्रथम मैथिली ब्लॉग / मैथिली ब्लॉगक एग्रीगेटर) केर रूपमे इन्टरनेटपर मैथिलीक प्रचीनतम उपस्थितिक रूपमे विद्यमान अछि। ई मैथिलीक पहिल इंटरनेट पत्रिका थिक जकर नाम बादमे १ जनवरी २००८ सँ "विदेह" पड़लै।इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/  पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब "भालसरिक गाछ" जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA पल्लवमिथिला (धीरेन्द्र प्रेमर्षि) २०५९ माघे संक्रान्ति- २००३ जनवरी मैथिलीक दोसर इंटरनेट पत्रिका अछि जे ऐ लिंक www.pallavmithila.mainpage.net पर छल मुदा आब ई उपलब्ध नै अछि। ई टिप्पणी मात्र इतिहास शुद्धता लेल अछि। ................. http://videha-aggregator.blogspot.com/ (मैथिली भाषा ब्लॉगक एग्रीगेटर) http://www.videha.com/ (इंटरनेटपर मैथिली भाषाक सभसँ पुरान उपलब्ध उपस्थिति/ लोकप्रिय ब्लॉग- मैथिली भाषा ब्लॉगक एग्रीगेटर ५ जुलाइ २००४ www.gajendrathakur.blogspot.com ) http://esamaad.blogspot.com/ (पूनम मंडल आ प्रियंका झाक पहिल मैथिली न्यूज पोर्टल, ९ अगस्त २००४ सँ) http://prakarantar.blogspot.com/ (प्रकारांतर मैथिलीक लोकप्रिय ब्लॉग, फरबरी २००५) http://vidyapati.blogspot.com/ (मैथिलीक  लोकप्रिय ब्लॉग, अगस्त २००५) http://www.vidyapati.org/ (मैथिलीक  लोकप्रिय ब्लॉग, अगस्त २००५) http://hellomithila.blogspot.com/  (हेलो मिथिला- धीरेन्द्र प्रेमर्षि, सम्पादक-प्रकाशक, रूपा झा, सम्पादन सहयोग, पल्लव, मैथिली साहित्यिक, ३ मइ २००६) http://pallav.blogsome.com/  (हेलो मिथिला- धीरेन्द्र प्रेमर्षि, सम्पादक-प्रकाशक, रूपा झा, सम्पादन सहयोग, पल्लव, मैथिली साहित्यिक,  १७ मइ २००६) http://hellomithilaa.blogspot.com/ (मैथिली न्यूज पोर्टल, सितम्बर २००७) http://www.hellomithila.com/ (मैथिली न्यूज पोर्टल, सितम्बर २००७) http://shampadak.wordpress.com/ (मैथिली न्यूज पोर्टल, जनवरी-फरबरी २००८) http://www.esamaad.com/  (मैथिली न्यूज पोर्टल, जनवरी-फरबरी २००८) http://hellomithilaa.wordpress.com/ http://premarshi.wordpress.com/ (धीरेन्द्र प्रेमर्षि) .................... http://anchinharakharkolkata.blogspot.com/  (मैथिलीक लोकप्रिय गजलक ब्लॉग) ....................... https://vigyanprasar.gov.in/vigyan-ratnakar/ (विज्ञान रत्नाकर) JNU http://sanskrit.jnu.ac.in/maithili/index.jsp http://sanskrit.jnu.ac.in/student_projects/lexicon.jsp?lexicon=maithili ........................... 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मैथिल ब्राह्मणमे जाति) https://www.unicode.org/L2/L2009/09329-maithili.pdf (यूनीकोड तिरहुता फॉण्ट लेल आवेदन ३० सितम्बर २००९- विदेहक सहयोग) https://www.unicode.org/L2/L2011/11175r-tirhuta.pdf (यूनीकोड तिरहुता फॉण्ट लेल आवेदन ५ मई २०११- विदेहक सहयोग) http://www.tirhutalipi.4t.com/ (देवनागरी-तिरहुता फॉण्ट- वेस्टर्न आधारित) http://www.anujha.co.cc/ (देवनागरी यूनीकोड आधारित तिरहुता फॉन्ट-मिथिला) "विकीपीडिया"मे मैथिली http://translatewiki.net/wiki/Project:Translator http://meta.wikimedia.org/wiki/Requests_for_new_languages/Wikipedia_Maithili http://translatewiki.net/wiki/Special:Translate?task=untranslated&group=core-mostused&limit=2000&language=mai http://incubator.wikimedia.org/wiki/Wp/mai http://translatewiki.net/wiki/MediaWiki:Mainpage/mai अंतिम पाँचू साइट विकी मैथिली प्रोजेक्टक अछि। एहि लिंक सभ पर जा कय प्रोजेक्टकेँ आगाँ बढ़ाऊ। यूनीकोड तिरहुता फॉण्ट, "विकीपीडिया"मे मैथिली आ आब मैथिली "गूगल ट्रान्सलेट"मे सेहो। अगिला लक्ष्य "अमेजन अलेक्सा" गूगल ट्रान्सलेट गूगल ट्रान्सलेटक लिंक https://translate.google.com/?sl=en&tl=mai&op=translate गूगल ट्रान्सलेटकेँ आर पुष्ट करबाक खगता छै तइ लेल अगिला काज अढ़ा रहल छी: https://translate.google.com/about/contribute/ Crowdsource Maithili Community Please fill the form Next Step Download the Crowdsource app from android play store and start contributing or go to web on the following link for contributing: https://crowdsource.google.com/about/ Crowdsource by Google is a gamified platform that empowers users to directly train Google's artificial intelligence systems and make Google products work equally well for everyone, everywhere. प्रारम्भ: विकीपीडिया ०१ फरबरी २००८ लिंक https://books.google.co.in/books?id=VC-BD5Ad6z4C&lpg=PA1&pg=PA1#v=onepage&q&f=false  (मैथिली देवनागरी) https://books.google.co.in/books?id=cTezCU59bJwC&lpg=PP1&pg=PP1#v=onepage&q&f=false  (मैथिली तिरहुता) https://books.google.co.in/books?id=3zKudz6wAO8C&lpg=PP1&pg=PP1#v=onepage&q&f=false  (मैथिली ब्रेल) गूगल ट्रन्सलेट २३ जून २०११क लिंक https://www.facebook.com/groups/videha/permalink/138489416229195/ गूगल ट्रांसलेशन टूलमे "बिहारी" भाषाक बदलामे मैथिली लेल अलग ट्रांसलेशन टूल बनेबाक आवेदन विदेहक सदस्यगण द्वारा देल गेल अछि। अपन योगदान गूगल ट्रांसलेट लेल करू, आ कएल सम्पादन बदलबा काल कारण मे (अंग्रेजीमे) "बिहारी" नाम्ना कोनो भाषा नै हेबाक चर्चा करू। ऐ लिंकपर अनुवाद करू; गूगल एकाउंटसँ लॉग इन केलाक बाद । http://www.google.com/transconsole/giyl/chooseProject http://www.google.com/transconsole/giyl/chooseActivity?project=gws&langcode=bh  (link closed) मिथिलाक्षर (तिरहुता) फॉण्ट लेल आवेदन ३० सितम्बर २००९ आ फेर संशोधित आवेदन ५ मई २०११ केँ श्री अंशुमन पाण्डेय द्वारा देल गेल आ दुनू बेर ऐमे विदेहक सहयोगक वर्णन भेल। ११ जूनकेँ श्री अंशुमन पाण्डेय एकर स्वीकृतिक सूचना विदेहक फेसबुक ग्रुपपर देलनि। आब ई फॉण्ट बनि कऽ तैयार अछि आ नीचाँक लिकपर डाउनलोड लेल उपलब्ध अछि। तिरहुता, नेवाड़ी आ कैथी फॉण्ट डाउनलोड Google's Noto Fonts project/ GitHub तिरहुता नोटो फॉण्ट कैथी ओटीएफ कैथी टीटीएफ नेवाड़ी ओ.टी.एफ. नेवाड़ी टी.टी.एफ. https://fonts.google.com/ (Google Open Fonts download) Tirhuta Offline Keyboard download Keyman Tirhuta/ Vedic Devanagari Keyboards Download https://malarproject.gitlab.io/tirhuta (Tirhuta Keyboard Online) https://keymanweb.com/?_ga=2.7155890.1818820209.1675749426-2042013574.1675749426#mai-tirh,Keyboard_tirhuta https://keymanweb.com/?_ga=2.241635586.1818820209.1675749426-2042013574.1675749426#mai-tirh,Keyboard_malar_tirhuta https://aksharamukha.appspot.com/converter (Script/ Website Convertor) https://aksharamukha.appspot.com/keyboards [Input (IME] https://github.com/virtualvinodh/aksharamukha-fonts (fonts- opensource) https://www.cdac.in/ (Tirhuta/ Unicode Typing Tool) अमेजन अलेक्सा मैथिली (शीघ्र....) किछु मैथिली विकिपिडिया पेजक लिंक: विदेह (पत्रिका) https://mai.wikipedia.org/s/kgv इन्टरनेटक संसारमे मैथिली भाषा https://mai.wikipedia.org/s/s6h भालसरिक गाछ https://mai.wikipedia.org/s/ipm विदेह https://mai.wikipedia.org/s/ie1 विदेहक फेसबुक भर्सन https://mai.wikipedia.org/s/iu1 विदेह सम्मान https://mai.wikipedia.org/s/jc2 विदेह आर्काइभ https://mai.wikipedia.org/s/jc0 विदेह मिथिला रत्न https://mai.wikipedia.org/s/jc3 विदेह मिथिलाक खोज https://mai.wikipedia.org/s/jc4 विदेह सूचना संपर्क अन्वेषण https://mai.wikipedia.org/s/jc5 श्रुति प्रकाशन https://mai.wikipedia.org/s/iu7 अनचिन्हार आखर https://mai.wikipedia.org/s/ion मैथिली गजल https://mai.wikipedia.org/s/idz मैथिली बाल गजल https://mai.wikipedia.org/s/iex मैथिली भक्ति गजल https://mai.wikipedia.org/s/if1 ...................... किछु मैथिल पोथी, ऑडियो-वीडियो, कलाकृति/ यू ट्यूब चैनल डाउनलोड साइट (ओपन सोर्स) NCERT BHASHA SANGAM NCERT (Maithili-English-Hindi Conversations) मैथिली (मैथिली संकेत भाषा सहित- मैथिलीमे पहिल बेर) https://www.youtube.com/@videha_ejournal https://youtu.be/TebuC-lrSs8 https://ncert.nic.in/bs-2021.php SAHITYA AKADEMI http://sahitya-akademi.gov.in/publications/e-books.jsp http://sahitya-akademi.gov.in/general/Digitalbooks.jsp CIIL http://corpora.ciil.org/maisam.htm अखियासल (रमानन्द झा रमण) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI1.pdf जुआयल कनकनी- महेन्द्र http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI2.pdf प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI3.pdf सृजन केर दीप पर्व- सं केदार कानन आ अरविन्द ठाकुर http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI4.pdf मैथिली गद्य संग्रह- सं शैलेन्द्र मोहन झा http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI5.pdf ARCHIVE.ORG (विजयदेव झा) https://archive.org/details/%40vijay_deo_jha?&sort=-publicdate&page=2 Videha Maithili eBooks/ eJournals/ Video Archive http://videha.co.in/archive.htm IGNCA http://ignca.nic.in/coilnet/mithila.htm http://ignca.nic.in/coilnet/kalyani.htm (MAITHILI ENGLISH DICTIONARY) मिथिला दर्शन https://mithiladarshan.com/ (online pdf of Maithili journal) तीरभुक्ति https://archive.org/details/@teerbhukti_journal OLE NEPAL's E-PUSTAKALAYA (https://pustakalaya.org/en/) पोथीक लिंक आइ.जी.एन.सी.ए.- ए.एस.आइ. https://ignca.gov.in/divisionss/asi-books/ https://ignca.gov.in/Asi_data/16612.pdf (History of Navya-Nyaya in Mithila) https://ignca.gov.in/Asi_data/42365.pdf (Studies in Jainism and Buddism in Mithila) https://ignca.gov.in/Asi_data/63227.pdf (Mithila in the Age of Vidyapati) https://ignca.gov.in/Asi_data/64994.pdf (Cultural Heritage of Mithila) https://ignca.gov.in/Asi_data/72754.pdf (Mithila under the Karnatas) ए.एस.आइ.अंग्रेजी https://tspasibhopal.nic.in/assets/pdf/publication/temples_of_mithila_english.pdf ए.एस.आइ.हिन्दी https://tspasibhopal.nic.in/assets/pdf/publication/temple_of_mithila_hindi.pdf मैथिली साहित्य संस्थान https://www.maithilisahityasansthan.org/resources दर्शनीय मिथिला (मैथिली साहित्य  संस्थान लिंक) Brochure 1 (मैथिली साहित्य  संस्थान लिंक) Brochure 2 (मैथिली साहित्य  संस्थान लिंक) Brochure 3 (मैथिली साहित्य  संस्थान लिंक) https://bloomlibrary.org/language:mai (ब्लूम लाइब्रेरी मैथिली) अरिपन फाउण्डेशन (http://www.aripanafoundation.org/) PRATHAM BOOKS MAITHILI STORYWEAVER https://www.youtube.com/playlist?list=PLAT74nNc2fmYaW29mRVAIgzRq63_9zWbI (मैथिली ऑडियो बुक्स) https://www.youtube.com/channel/UCE1HEUJEzc-NUbMsHzklHLw (विदेह मैथिली-अंग्रेजी टॉकिंग रीड-अलाउड ऑडियो बुक आ संगमे मैथिली संकेत भाषा- दुनू मैथिलीमे पहिल बेर) https://bloomlibrary.org/player/Wcf6zr5CoF (मसाई केर परिवर्तनकारी रेबेका) https://bloomlibrary.org/player/p3sHdYBgiT (चलू हम तँ ठीक छी ने!) https://bloomlibrary.org/player/f19pSdhGMo (एकटा नीक दिन) https://bloomlibrary.org/player/b2l5wesxCp (घर सभ) https://bloomlibrary.org/player/dAzC0Fubt7 (की अहाँ ऐ चिड़ै सभकेँ देखने छी?) पोथी डॉट कॉम https://store.pothi.com/browse/free-ebooks/?language=Maithili I LOVE MITHILA https://www.ilovemithila.com/maithili-books-pdf-free-download/ (पोथी डाउनलोड लिंक) https://www.ilovemithila.com/  (online maithili journal) https://maithili.com.np/ (owner I Love Mithila) प्यारे मैथिल https://www.youtube.com/channel/UCq30Llck2tNw8BI4t8jjzQg (प्यारे मैथिल चैनल- किरण चौधरी आ संगीता आनन्द- मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय यू ट्यूब चैनल) https://www.youtube.com/MithilaChapter (मिथिला चैप्टर) https://www.youtube.com/soumyajha (खिस्सा-पिहानी नेना भुटका लेल) जानकी एफ.एम समाचार https://www.youtube.com/user/Janakifm/videos (जानकी एफ.एम समाचार) Videha e-Learning https://www.youtube.com/channel/UC4abVKqMj2pDWIAkXiOHp7A संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल सेहो] ....................... http://www.youtube.com/user/ggajendra71(विदेह) https://www.youtube.com/gunjanshree http://www.youtube.com/user/Maithilinews http://www.youtube.com/user/jitumaithil (जितेन्द्र झा, जनकपुर) http://www.youtube.com/user/sobhagya8 (सौभाग्य मिथिला) http://www.youtube.com/user/rajnipallavi  (रजनी पल्लवी) http://www.youtube.com/user/bhaskaranjha  (भाष्कर झा) http://www.youtube.com/user/mahakalijha http://www.youtube.com/user/karia1885 http://www.youtube.com/user/omuniv http://www.youtube.com/user/sumankumar137 http://www.youtube.com/user/gyansjha http://www.youtube.com/user/bclalan http://www.youtube.com/user/gareri1986 http://www.youtube.com/user/avinashjha84 http://www.youtube.com/user/chandankumarjha1 http://www.youtube.com/user/mailorang http://www.youtube.com/user/chandanmishra2010 http://www.youtube.com/user/nirmaana http://www.youtube.com/user/Janakifm1 http://www.youtube.com/watch?v=XpSuVHtbaQ8&feature=mfu_in_order&list=UL http://www.youtube.com/user/gxcng http://www.youtube.com/user/gautamkrishna85 http://youtu.be/3i3OG5Nf3y8 http://youtu.be/sJnxSe-ckmo http://www.youtube.com/user/jitmohanjha http://www.youtube.com/user/MiTJnPNN http://www.youtube.com/watch?v=-9KaC8ji9t4 http://www.youtube.com/user/luvvivek2k7 http://www.youtube.com/user/bindassatyandra http://www.youtube.com/user/rustymind1 http://www.youtube.com/user/MrDeveshKarna http://www.youtube.com/user/rambabushah http://www.youtube.com/user/mukeshjha84 http://www.youtube.com/user/Mauahi www.youtube.com/user/MrBasantjha http://www.youtube.com/user/themadan http://www.youtube.com/user/sentukhu http://www.youtube.com/user/yarowjha http://www.youtube.com/user/mkoxp http://www.youtube.com/user/luvvick21 http://www.youtube.com/user/njyclubashok http://www.youtube.com/user/MrRamkisor http://www.youtube.com/user/pratyushsangita/ http://www.youtube.com/user/hellomithilaa http://www.youtube.com/user/mariyoshj http://www.youtube.com/user/dearshantanu/ www.youtube.com/user/RajuPrasadRajbanshi www.youtube.com/user/premarshi http://www.youtube.com/user/Dhipre (धीरेन्द्र प्रेमर्षि) http://www.youtube.com/user/TheShubhaprabhat http://www.youtube.com/user/njyclubashok http://www.youtube.com/user/mithilaconnect http://www.youtube.com/user/NAYAKSAURABH80 http://www.youtube.com/user/Rabindra888 http://www.youtube.com/user/uday88mandal http://www.youtube.com/user/nimesdeath http://www.youtube.com/user/pawanks6102 http://www.youtube.com/user/sahayogee http://www.youtube.com/user/sunilkumarpawan http://www.youtube.com/user/videhuk http://www.dailymotion.com/video/xjophq_documentary-kosi-katha_shortfilms#from=embed http://blackbuddhas.com/ http://youtu.be/CPwpkn5YI1I Top of Form Bottom of Form अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ४.७.विदेह ई-लर्निङ्ग [संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल  मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री] [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल सेहो] ................. मैथिलीक वर्तनी १ मैथिलीक वर्तनी- विदेह मैथिली मानक भाषा आ मैथिली भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम भाषापाक २ मैथिलीक वर्तनीमे पर्याप्त विविधता अछि। मुदा प्रश्नपत्र देखला उत्तर एकर वर्तनी इग्नू BMAF001 सँ प्रेरित बुझाइत अछि, से एकर एकरा एक उखड़ाहामे उनटा-पुनटा दियौ, ततबे धरि पर्याप्त अछि। यू.पी.एस.सी. क मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेल सेहो ई पर्याप्त अछि, से जे विद्यार्थी मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेने छथि से एकर एकटा आर फास्ट-रीडिंग दोसर-उखड़ाहामे करथि| IGNOU  इग्नू       BMAF-001 ................... Maithili (Compulsory & Optional) UPSC Maithili Optional Syllabus BPSC Maithili Optional Syllabus मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. (ऐच्छिक) मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. (अनिवार्य) मैथिली प्रश्नपत्र- बी.पी.एस.सी.(ऐच्छिक) .................. यू. पी. एस. सी. (मेन्स) ऑप्शनल: मैथिली साहित्य विषयक टेस्ट सीरीज यू.पी.एस.सी. क प्रिलिमिनरी परीक्षा सम्पन्न भऽ गेल अछि। जे परीक्षार्थी एहि परीक्षामे उत्तीर्ण करताह आ जँ मेन्समे हुनकर ऑप्शनल विषय मैथिली साहित्य हेतन्हि तँ ओ एहि टेस्ट-सीरीजमे सम्मिलित भऽ सकैत छथि। टेस्ट सीरीजक प्रारम्भ प्रिलिम्सक रिजल्टक तत्काल बाद होयत। टेस्ट-सीरीजक उत्तर विद्यार्थी स्कैन कऽ editorial.staff.videha@gmail.com पर पठा सकैत छथि, जँ मेलसँ पठेबामे असोकर्ज होइन्हि तँ ओ हमर ह्वाट्सएप नम्बर 9560960721 पर सेहो प्रश्नोत्तर पठा सकैत छथि। संगमे ओ अपन प्रिलिम्सक एडमिट कार्डक स्कैन कएल कॉपी सेहो वेरीफिकेशन लेल पठाबथि। परीक्षामे सभ प्रश्नक उत्तर नहि देमय पड़ैत छैक मुदा जँ टेस्ट सीरीजमे विद्यार्थी सभ प्रश्नक उत्तर देताह तँ हुनका लेल श्रेयस्कर रहतन्हि। विदेहक सभ स्कीम जेकाँ ईहो पूर्णतः निःशुल्क अछि।- गजेन्द्र ठाकुर संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सर्विसेज (मुख्य) परीक्षा, मैथिली (ऐच्छिक) लेल टेस्ट सीरीज/ प्रश्न-पत्र- १ आ २ Test Series-1- गजेन्द्र ठाकुर Test Series-2- गजेन्द्र ठाकुर ........................... NTA-UGC/ UPSC/ BPSC Maithili Optional- गजेन्द्र ठाकुर मैथिली समीक्षाशास्त्र मैथिली समीक्षाशास्त्र (तिरहुता) मैथिली समीक्षाशास्त्र (भाग-२, अनुप्रयोग) मैथिली प्रतियोगिता [Place of Maithili in Indo-European Language Family/ Origin and development of Maithili language (Sanskrit, Prakrit, Avhatt, Maithili) भारोपीय भाषा परिवार मध्य मैथिलीक स्थान/ मैथिली भाषाक उद्भव ओ विकास (संस्कृत, प्राकृत, अवहट्ट, मैथिली)] (Criticism- Different Literary Forms in Modern Era/ test of critical ability of the candidates) (ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददास सिलेबसमे छथि आ रसमय कवि चतुर चतुरभुज विद्यापति कालीन कवि छथि। एतय समीक्षा शृंखलाक प्रारम्भ करबासँ पूर्व चारू गोटेक शब्दावली नव शब्दक पर्याय संग देल जा रहल अछि। नव आ पुरान शब्दावलीक ज्ञानसँ ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददासक प्रश्नोत्तरमे धार आओत, संगहि शब्दकोष बढ़लासँ खाँटी मैथिलीमे प्रश्नोत्तर लिखबामे धाख आस्ते-आस्ते खतम होयत, लेखनीमे प्रवाह आयत आ सुच्चा भावक अभिव्यक्ति भय सकत।) (बद्रीनाथ झा शब्दावली आ मिथिलाक कृषि-मत्स्य शब्दावली) (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोरिक गाथामे समाज ओ संस्कृति) (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- विद्यापति) (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- पद्य समीक्षा- बानगी) (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोक गाथा नृत्य नाटक संगीत) (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- यात्री) (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली रामायण) (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली उपन्यास) (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- शब्द विचार) (तिरहुता लिपिक उद्भव ओ विकास) अनुलग्नक-१-२-३    अनुलग्नक- ४-५ (मैथिली आ दोसर पुबरिया भाषाक बीचमे सम्बन्ध (बांग्ला, असमिया आ ओड़िया) [यू.पी.एस.सी. सिलेबस, पत्र-१, भाग-'ए', क्रम-५]) [मैथिली आ हिन्दी/ बांग्ला/ भोजपुरी/ मगही/ संथाली- बिहार लोक सेवा आयोग (बी.पी.एस.सी.) केर सिविल सेवा परीक्षाक मैथिली (ऐच्छिक) विषय लेल] मैथिली बांग्ला असमिया ओड़िया हिन्दी उर्दू नेपाली संस्कृत संथाली NTA_UGC_NET_Maithili_01 NTA_UGC_NET_Maithili_02 GS (Pre) Topic 1 ........................ यू.पी.एस.सी. आ आन प्रतियोगिता परीक्षा लेल देखू: विदेह:सदेह १७ विदेह:सदेह २१ विदेह:सदेह २३ विदेह:सदेह २६ विदेह:सदेह २९ विदेह:सदेह ३० विदेह:सदेह ३२ विदेह:सदेह ३३ विदेह:सदेह ३४ विदेह:सदेह ३५ ....................... General Studies NCERT-Environment Class XI-XII NCERT PDF I-XII Sansad TV http://prasarbharati.gov.in/ http://newsonair.com/ ................... Other Optionals IGNOU eGyankosh ................... पेटार (रिसोर्स सेन्टर) ................. मैथिली मुहावरा एवम् लोकोक्ति प्रकाश- रमानाथ मिश्र मिहिर (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) डॉ. ललिता झा- मैथिलीक भोजन सम्बन्धी शब्दावली (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) मैथिली शब्द संचय- डॉ श्रीरामदेव झा (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) दत्त-वतीक वस्तु कौशल- डॊ. श्रीरामदेवझा परिचय निचय- डॊ शैलेन्द्र मोहन झा English Maithili Computer Dictionary (Complete)- Gajendra Thakur Maithili English Dictionary- गोविंद झा अणिमा सिंह -शिशु गीत खेल आनन्द मिश्र (सौजन्य श्री रमानन्द झा 'रमण')- मिथिला भाषाक सुबोध व्याकरण मैथिली सुबोध व्याकरण- भोला लाल दास राधाकृष्ण चौधरी- A Survey of Maithili Literature राधाकृष्ण चौधरी- मिथिलाक इतिहास राजेश्वर झा- मिथिलाक्षरक उद्भव ओ विकास (मैथिली साहित्य संस्थान आर्काइव) (यू.पी.एस.सी. सिलेबस) दत्त-वती (मूल)- श्री सुरेन्द्र झा सुमन (यू.पी.एस.सी. सिलेबस) प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) CIIL Site सुभाष चन्द्र यादव-राजकमल चौधरी: मोनोग्राफ शिव कुमार झा 'टिल्लू' अंशु-समालोचना डॉ बचेश्वर झा- निवन्ध-निकुञ्ज डॉ. देवशंकर नवीन- आधुनिक साहित्यक परिदृश्य प्रेमशंकर सिंह- मैथिली भाषा साहित्य:बीसम शताब्दी (आलोचना) डॉ. रमानन्द झा 'रमण' हिआओल अखियासल CIIL Site दुर्गानन्द मण्डल-चक्षु फेर एहि मनलग्गू फाइल सभकेँ सेहो पढ़ू:- रामलोचन ठाकुर- मैथिली लोककथा कुमार पवन (साभार अंतिका) पइठ (मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ कथा) डायरीक खाली पन्ना केदारनाथ चौधरी अबारा नहितन चमेलीरानी माहुर करार अयना हीना डॉ. रमण झा भिन्न-अभिन्न मैथिली काव्यमे अलङ्कार अलङ्कार-भास्कर मैथिली काव्यमे ज्योतिष अहिरावण-वध पारिजात-मञ्जरी योगेन्द्र पाठक 'वियोगी' विज्ञानक बतकही विज्ञानक बतकही भाग-२ अकटा मिसिया (कथा संग्रह) नरक विजय (सम्पूर्ण) नरक विजय (संशोधित) किछु तीत मधुर (यात्रा वृत्तांत) हमर गाम पिरामिडक देशमे रोबोट (अनूदित साइंस-फिक्शन नाटक) अनूदित साहित्य (आन भाषासँ)- गजेन्द्र ठाकुर विदेह:सदेह २७ (गजेन्द्र ठाकुर आ रवि भूषण पाठकक आन भाषासँ अनूदित गद्य आ पद्य- अंक १-३५० सँ) बाल साहित्य (अनुवाद- द्विभाषिक- मैथिली-अंग्रेजी)- गजेन्द्र ठाकुर मसाई केर परिवर्तनकारी रेबेका शेष ४० टा बाल चित्र-पोथी नीचाँक लिंकपर:- सुनू घर सभ एकटा नीक दिन चलू हम तँ ठीक छी ने! की अहाँ ऐ चिड़ै सभकेँ देखने छी? टोस्ट बड़ीटा! कनियेटा! एतऽ हम सभ रहै छी भारतोल्लक राजकुमारी भारतोल्लक राजकुमारी (बिनु शब्दक) वुयो कच-कच कचाक चुन्नू-मुन्नूक नहेनाइ नेना जे बैलूनसँ डेराइत छल अद्भुत फिबोनाची अंक-शृंखला हारू अखन नै, अखन नै! जन्मदिनक उत्सव भोज मोट राजा पातर-दुब्बड़ कुकुड़ बचिया जे अपन हँसी नै रोकि सकैत छलि अंग्रेजी हम सूंघि सकै छी छोट लाल-टुहटुह डोरी करू नीक, भोगू नीक ई सभटा बिलाड़िक दोख अछि! चोभा आम! हमर टोलक बाट जखन इकड़ू स्कूल गेल माछी फेर आउ टाटा! अमाचीक जुलुम मशीन सभ टिंग टोंग पाउ-म्याऊ-वाह कुकुड़क एकटा दिन हमरा नीक लगैए रीताक नव-स्कूलमे पहिल दिन कनी हँसियौ ने! लाल बरसाती भूत-प्रेतक नाट्यशाला आउ पएर गानी कतऽ अछि ई अंक ५? विदेह मैथिली-अंग्रेजी टॉकिंग रीड-अलाउड ऑडियो बुक https://bloomlibrary.org/player/Wcf6zr5CoF (मसाई केर परिवर्तनकारी रेबेका) https://bloomlibrary.org/player/p3sHdYBgiT (चलू हम तँ ठीक छी ने!) https://bloomlibrary.org/player/f19pSdhGMo (एकटा नीक दिन) https://bloomlibrary.org/player/b2l5wesxCp (घर सभ) https://bloomlibrary.org/player/dAzC0Fubt7 (की अहाँ ऐ चिड़ै सभकेँ देखने छी?) ...................... किछु मैथिली पोथी डाउनलोड साइट (ओपन सोर्स) NCERT BHASHA SANGAM NCERT (Maithili-English-Hindi Conversations) मैथिली (मैथिली संकेत भाषा सहित- मैथिलीमे पहिल बेर) https://www.youtube.com/@videha_ejournal https://youtu.be/TebuC-lrSs8 https://ncert.nic.in/bs-2021.php Sahitya Akademi प्रकाशन डिजिटल-पोथी CIIL अखियासल (रमानन्द झा रमण) जुआयल कनकनी- महेन्द्र प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) सृजन केर दीप पर्व- सं केदार कानन आ अरविन्द ठाकुर मैथिली गद्य संग्रह- सं शैलेन्द्र मोहन झा Archive.Org (विजयदेव झा) Videha Maithili eBooks/ eJournals/ Video Archive IGNCA Maithili English Dictionary विज्ञान रत्नाकर मिथिला दर्शन तीरभुक्ति OLE Nepal's e-Pustakalaya पोथीक लिंक IGNCA-ASI (search keyword Mithila) History of Navya-Nyaya in Mithila Studies in Jainism and Buddism in Mithila Mithila in the Age of Vidyapati Cultural Heritage of Mithila Mithila under the Karnatas Temple Survey Project ASI- English आ Hindi मैथिली साहित्य संस्थान दर्शनीय मिथिला (मैथिली साहित्य  संस्थान लिंक) Brochure 1 (मैथिली साहित्य  संस्थान लिंक) Brochure 2 (मैथिली साहित्य  संस्थान लिंक) Brochure 3 (मैथिली साहित्य  संस्थान लिंक) ब्लूम लाइब्रेरी मैथिली अरिपन फाउण्डेशन Pratham Books Maithili Storyweaver मैथिली ऑडियो बुक्स Videha Read Aloud Talking Maithili Audio Books (including Maithili Sign Language- Ist time in Maithili) पोथी डॉट कॉम I Love Mithila (पोथी डाउनलोड लिंक) online maithili journal owner I Love Mithila प्यारे मैथिल चैनल- किरण चौधरी आ संगीता आनन्द- मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय यू ट्यूब चैनल मिथिला चैप्टर खिस्सा-पिहानी नेना भुटका लेल जानकी एफ.एम समाचार आकाशवाणी दरभंगा यू ट्यूब चैनल ................. JNU मैथिली मैथिली लेक्सिकन .................. Videha e-Learning YouTube Channel ........... विदेह सम्मान: सम्मान-सूची (समानान्तर साहित्य अकादेमी, समानान्तर ललित कला अकादेमी आ समानान्तर संगीत-नाटक अकादेमी सम्मान/ पुरस्कार नामसँ विख्यात) ......... Maithili eBooks/ eJournals/ Videos can be downloaded from: Maithili eBOOKS/ eJournals/ Videos अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। विदेह ३६६ म अंक १५ मार्च २०२३ (वर्ष १६ मास १८३ अंक ३६६)|| 117 116 || http://www.videha.co.in/ ISSN 2229-547X VIDEHA

४.८.मिथिला रत्न ४.९.मिथिलाक खोज ४.८.मिथिला रत्न वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू। Always refresh the pages for viewing new issue of VIDEHA. भारत आ नेपालक माटिमे पसरल मिथिलाक धरती प्राचीन कालेसँ महान पुरुष ओ महिला लोकनिक कर्मभूमि रहल अछि। प्रस्तुत अछि मिथिला रत्नक एकटा छोट संग्रह। ऐ संग्रहकेँ पूर्ण करबाक हेतु अपन बहुमूल्य संग्रहकेँ editorial.staff.videha@gmail.com केँ पठाउ। आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार, सम्बन्धित फोटोग्राफर आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। फोटो सभ पठेबा लेल धन्यवाद पाठकगण। साभार। पूर्णतः अव्यवसायिक उद्देश्य आ मात्र एकेडमिक प्रयोग लेल। विशेष विवरण देखबा लेल क्लिक करू  VIDEHA_346, VIDEHA_347, VIDEHA_365 आ  मिथिला रत्न/ मिथिला चित्रकला/ मिथिलाक पाबनि तिहार (कथा) आ मिथिलाक संगीत । वैदिक जनक 'वैदेह राजा' ऋगवेदिक कालक नमी सप्याक नामसँ छलाह, यज्ञ करैत सदेह स्वर्ग गेलाह, ऋगवेदमे वर्णन अछि। ओ इन्द्रक संग देलन्हि असुर नमुचीक विरुद्ध आ ताहिमे इन्द्र हुनका बचओलन्हि।शतपथ ब्राह्मणक विदेघमाथव आ पुराणक निमि दुनू गोटेक पुरोहित गौतम छथि से दुनू एके छथि आ एतएसँ विदेह राज्यक प्रारम्भ। माथवक पुरहित गौतम मित्रविन्द यज्ञक/ बलिक प्रारम्भ कएलन्हि आ पुनः एकर पुनःस्थापना भेल महाजनक-२ क समयमे याज्ञवल्क्य द्वारा। निमि गौतमक आश्रमक लग जयन्त आ मिथि -जिनका मिथिला नामसँ सेहो सोर कएल जाइत छन्हि, मिथिला नगरक निर्माण कएलन्हि। निमीक जयन्तपुर वर्तमान जनकपुरमे छल, मिथीक मिथिलानगरीक स्थान एखन धरि निर्धारित नहि भए सकल अछि, अनुमानित अछि जनकपुरक लग । �सीरध्वज जनक� सीताक पिता छथि आ एतयसँ मिथिलाक राजाक सुदृढ़ परम्परा देखबामे अबैत अछि। �कृति जनक� सीरध्वजक बादक 18म पुस्तमे भेल छलाह। कृति हिरण्यनाभक पुत्र छलाह आ जनक बहुलाश्वक पुत्र छलाह। याज्ञवलक्य हिरण्याभक शिष्य छलाह, हुनकासँ योगक शिक्षा लेने छलाह। कराल जनक द्वारा एकटा ब्राह्मण युवतीक शील-अपहरणक प्रयास भेल आ जनक राजवंश समाप्त भए गेल (संदर्भ अश्वघोष-बुद्धचरित आ कौटिल्य-अर्थशास्त्र)। वाल्मीकि सीतापति राम लव कुश विदेघ माथव शतपथ ब्राह्मणक विदेघ माथवक विदेह आगमन, आगिक सदानीरासँ आगाँ नहि बढ़बाक चर्च। शतपथ ब्राह्मणक विदेघमाथव आ पुराणक निमि दुनू गोटेक पुरोहित गौतम छथि से दुनू एके छथि आ एतएसँ विदेह राज्यक प्रारम्भ। वाजसनेयी याज्ञवल्क्य याज्ञवल्क्य मिथिलाक दार्शनिक राजा कृति जनकक दरबारमे छलाह। हुनकर माताक वा पिताक नाम सम्भवतः वाजसनी छलन्हि। ओना हुनकर पिता देवरातकेँ मानल जाइत छन्हि। याज्ञवल्क्य १. शुक्ल यजुरवेद, २. शतपथ ब्राह्मण, ३.बृहदारण्यक उपनिषद आ ४.याज्ञवल्क्य स्मृतिक दृष्टा/लेखक छथि। अंगराज कर्ण वैशेषिक दर्शन कणाद वैशेषिक दर्शन कणाद महावीर जैन 599-527 महावीर विदेहमे छह टा बस्सावास बितेलन्हि। गौतम बुद्ध BC 563-483 ओना तँ महावीर विदेहमे छह टा बस्सावास बितेलन्हि मुदा बुद्ध एकोटा नै मुदा मिथिलामे बौद्ध धर्मक प्रभाव पछाति बढ़ल। बुद्ध वैशाली नगरीमे आम्रपालीक उद्यानमे लिच्छवीगणकेँ सन्देश देने छलाह। चाणक्य BC 350-283 धर्म आ विधिक क्षेत्रमे कौटिल्यक अर्थशास्त्र आ याज्ञवल्क्य स्मृतिमे बड्ड समानता अछि जे चाणक्यक मिथिलावासी होयबाक प्रमाण अछि।

अर्थशास्त्रमे(१.६ विनयाधिकारिके प्रथमाधिकरणे षडोऽध्यायः इन्द्रियजये अरिषड्वर्गत्यागः) कराल जनकक पतनक सेहो चर्चा अछि।

तद्विरुद्धवृत्तिरवश्येन्द्रियश्चातुरन्तोऽपि राजा सद्यो विनश्यति- यथा दाण्डक्यो नाम भोजः कामाद् ब्राह्मण कन्यायमभिमन्यमानः सबन्धराष्ट्रो विननाश करालश्च वैदेहः,...। चन्द्रगुप्त मौर्य चाणक्यक शिष्य BC 340-293 चाणक्यक शिष्य आर्यभट्ट वैज्ञानिक 476-550 पञ्जीमे आर्यभट्टक विवरण- (२७) (३४/०८) महिपतिय: मंगरौनी माण्डैर सै पीताम्ब र सुत दामू दौ माण्ड्र सै वीजी त्रिनयनभट्ट: ए सुतो आर्यभट्ट: ए सुतो उदयभट्ट: ए सुतो विजयभट्ट ए सुतो सुलोचनभट (सुनयनभट्ट) ए सुतो भट्ट ए सुतो धर्मजटीमिश्र ए सुतो धाराजटी मिश्र ए सुतोब्रह्मजरी मिश्र ए सुतो त्रिपुरजटी मिश्र ए सुत विघुजटी मिश्र ए सुतो अजयसिंह: ए सुतो विजयसिंह: ए सुतो ए सुतो आदिवराह: ए सुतो महोवराह: ए सुतो दुर्योधन सिंह: ए सुतो सोढ़र जयसिंहर्काचार्यास्त्रस महास्त्र विद्या पारङगत महामहोपाध्या य: नरसिंह:।। सिद्ध सरहपाद 700-780 सरहपाद-�सिद्धिरत्थु मइ पढ़मे पढ़िअउ ,मण्ड पिबन्तोँ बिसरउ एमइउ�।मिथिलामे अक्षरारम्भ सिद्धिरस्तु जकर पूर्वमे सिद्धिरस्तु, गणेशजीक अंकुश आँजी, लिखल जाइत अछि। मिथिलामे ई धारणा जे माँड़ पिलासँ स्मरण शक्ति क्षीण होइत अछि; ई सरहपादक मिथिलावासी होएबाक प्रमाण अछि। आदि शंकराचार्य 788-820 मंडन मिश्रसँ शास्त्रार्थ म.म.गोनू झा 1050-1150 करमहे सोनकरियाम गोनू झाक वर्णन पञ्जीमे अछि- महामहोपाध्याय धूर्तराज गोनू। पञ्जीक अनुसार पीढ़ीक गणना कएलासँ गोनूक जन्म ( गोनूक सोनकरियाम करमहे-वत्समे २४म पीढ़ी चलि रहल अछि) आर्यभट्टक बाद (आर्यभट्टक माण्डर-काश्यपमे ३९ म पीढ़ी चलि रहल अछि) आ विद्यापतिक पहिने (विद्यापतिक विषएवार बिस्फी-काश्यपमे १४म पीढ़ी चलि रहल अछि) लगभग १०५० ई.मे सिद्ध होइत अछि। कारण एहि तरहेँ एक पीढ़ीकेँ ४० सँ गुणा केला सँ आर्यभट्टक जन्म लगभग ४७६ ई. आ विद्यापतिक जन्म लगभग १३५० ई. अबैत अछि जे इतिहाससम्मत अछि। कृष्णाराम आ हाथी सुबरन मिथिलाक यादव (गुआर) जातिक लोकदेवता कृष्णाराम अपन हाथी सुबरनपर सवार। वंशीधर ब्राह्मण छेछन महराज मिथिलाक डोम जातिक लोकदेवता दीना- भदरी मिथिलाक मुसहर जातिक लोकदेवता ज्योति पँजियार राजा सलहेस मिथिलाक दूधवंशी (दुसाध) जातिक लोकदेवता दुलरा दयाल गोनू झाक गाम भरौड़ाक राजकुमार, "बहुरा गोढिन नटुआ दयाल" लोककथाक मलाह कथानायक। भरौड़ामे एखनो हिनकर गहबर छन्हि। कालिदास बोधि कायस्थ विद्यापतिक पुरुष-परीक्षामे मृत्युकालमे गंगा नदीक आयब आ बोधि-कायस्थकेँ अपनामे समेबाक खिसा वर्णित अछि जे बादमे विद्यापतिकेँ लऽ कऽ सेहो प्रचलित भेल। राधाकृष्ण आ करताराम मल्लिक मिथिलाक अमता घरेनक प्रारम्भिक गबैय्या महाराज नान्यदेव मिथिलाक कर्णाट वंशक 1097 ई. मे स्थापना। 1147 ई. मे मृत्यु। मल्लदेव मिथिलाक कर्णाट वंशक संस्थापक नान्यदेवक पुत्र। मिथिलाक गंधवरिया राजपूत मल्लदेवकेँ अपन बीजीपुरुष मानैत छथि। महाराज हरसिंहदेव मिथिलाक कर्णाट वंशक। ज्योतिरीश्वर ठाकुरक वर्ण-रत्नाकरमे हरसिंहदेव नायक आकि राजा छलाह। 1294 ई. मे जन्म आ 1307 ई. मे राजसिंहासन। घियासुद्दीन तुगलकसँ 1324-25 ई. मे हारिक बाद नेपाल पलायन। मिथिलाक पञ्जी-प्रबन्धक ब्राह्मण, कायस्थ आ क्षत्रिय मध्य आधिकारिक स्थापक, मैथिल ब्राह्मणक हेतु गुणाकर झा, कर्ण कायस्थक लेल शंकरदत्त, आ क्षत्रियक हेतु विजयदत्त एहि हेतु प्रथमतया नियुक्त्त भेलाह। हरसिंहदेवक प्रेरणासँ- आ ई हरसिंहदेव नान्यदेवक वंशज छलाह, जे नान्यदेव कार्णाट वंशक १००९ शाकेमे स्थापना केने रहथि- नन्दैद शुन्यं शशि शाक वर्षे (१०१९ शाके)... मिथिलाक पण्डित लोकनि शाके १२४८ तदनुसार १३२६ ई. मे पञ्जी-प्रबन्धक वर्तमान स्वरूपक प्रारम्भक निर्णय कएलन्हि। पुनः वर्तमान स्‍वरूपमे थोडे बुद्धि विलासी लोकनि मिथिलेश महाराज माधव सिंहसँ १७६० ई. मे आदेश करबाए पञ्जीकारसँ शाखा पुस्तकक प्रणयन करबओलन्हि। ओकर बाद पाँजिमे (कखनो काल वर्णित १६०० शाके माने १६७८ ई. वास्तवमे माधव सिंहक बादमे १८०० ई.क आसपास) श्रोत्रिय नामक एकटा नव ब्राह्मण उपजातिक मिथिलामे उत्पत्ति भेल। मंत्री गणेश्वर मिथिलाक कर्णाट वंशक नरेश हरसिंहदेवक मंत्री। सुगतिसोपानमे मिथिलाक सांवैधानिक इतिहासक वर्णन। मीरां साहेब मिथिलाक मुस्लिम लोकनिक बीच प्रसिद्ध लोकगाथाक नायक। अमर बाबा मिथिलाक मलाह जातिक लोकदेवता। गरीबन बाबा मिथिलाक धोबि जातिक लोकदेवता। लालबन बाबा मिथिलाक चर्मकार जातिक लोकदेवता। बंठा चमार कारिख पजियार लोरिक राय रणपाल अयाची मिश्र पन्द्रहम शताब्दीक भवनाथ मिश्र बड पैघ नैय्यायिक छलाह आ कहियो ककरोसँ कोनो वस्तुक याचना नहि कएलन्हि, ताहि लेल सभ हुनका अयाची मिश्र कहए लगलन्हि। शंकर मिश्र "बालोऽहं जगदानन्द न मे बाला सरस्वती। अपूर्णे पंचमे वर्षे वर्णयामि जगत्त्रयम् ॥" क वक्ता। पन्द्रहम शताब्दीमे भवनाथ मिश्रक घरमे मधुबनी जिलाक सरिसव ग्राममे शंकर मिश्रक जन्म भेल।शंकर मिश्र महाराज भैरव सिंहक कनिष्ठ पुत्र राजा पुरुषोत्तमदेवक आश्रित छलाह। एकर वर्णन रसार्णव ग्रंथमे भेटैत अछि। शंकर मिश्र कवि, नाटककार, धर्मशास्त्री आ न्याय-वैशेषिकक व्याख्याकार रहथि।शंकर मिश्र ग्रंथावली- १.गौरी दिगम्बर प्रहसन २.कृष्ण विनोद नाटक ३.मनोभवपराभव नाटक४.रसार्णव५.दुर्गा-टीका६.वादिविनोद७.वैशेषिक सूत्र पर उपस्कार८.कुसुमांजलि पर आमोद९.खण्डनखण्ड-खाद्य टीका १०.छन्दोगाह्निकोद्धार ११.श्राद्ध प्रदीप १२.प्रायश्चित प्रदीप। पक्षधर मिश्र विद्यापतिक समकालीन जयदेव मिश्र, जे अपन अकाट्य तर्कक कारण पक्षधर मिश्रक नामसँ जानल गेलाह। मैथिलीक आदिकवि विद्यापति (ज्योतिरीश्वर पूर्व) मैथिलीक आदिकवि विद्यापति ( विद्यापतिक चित्र: विदेह चित्रकला सम्मानसँ पुरस्कृत पनकलाल मण्डल द्वारा) कवीश्वर ज्योतिरीश्वर(लगभग १२७५-१३५०)सँ पूर्व (कारण ज्योतिरीश्वरक ग्रन्थमे हिनक चर्च अछि), मैथिलीक आदि कवि। संस्कृत आ अवहट्ठक विद्यापति ठक्कुरःसँ भिन्न। सम्भवतः बिस्फी गामक बार्बर कास्टक श्री महेश ठाकुरक पुत्र। समानान्तर परम्पराक बिदापत नाचमे विद्यापति पदावलीक (ज्योतिरीश्वरसँ पूर्वसँ) नृत्य-अभिनय होइत अछि।ज्योतिरीश्वर पूर्व विद्यापति:- कश्मीरक अभिनव गुप्त (दशम शताब्दीक अन्त आ एगारहम शताब्दीक प्रारम्भ)- ग्रन्थ �ईश्वर प्रत्याभिज्ञा- विभर्षिणी� मे विद्यापतिक उल्लेख करै छथि। श्रीधर दासक सदुक्तिकर्णामृत, (रचना ११ फरबरी १२०६, मध्यकालीन मिथिला, वि.कु. ठाकुर)- श्रीधर दास विद्यापतिक पाँच टा पद उद्धृत केने छथि जे विद्यापतिक पदावलीक भाषा छी। �जाव न मालतो कर परगास तावे न ताहि मधुकर विलास।� आ �मुन्दला मुकुल कतय मकरन्द� ज्योतिरीश्वर (१२७५-१३५०) षष्ठः कल्लोल- ॥अथ विद्यावन्त वर्णना॥ अष्टमः कल्लोलः- ॥अथ राज्य वर्णना॥ मे उल्लेख। महाराज शिव सिंह मिथिला नरेश विद्यापतिक आश्रयदाता ओइनवार वंशक महाराज शिव सिंह। उगना महादेव महादेव विद्यापतिक अहिठाम गीत सुनबा लेल उगना नोकर बनि रहैत छलाह। महाकवि विद्यापति ठाकुर 1350-1435 (मैथिलीक आदि कवि ज्योतिरीश्वर-पूर्व विद्यापतिसँ भिन्न, संस्कृत आ अवहट्ठमे लेखन) महाकवि विद्यापति ठाकुर 1350-1435 विद्यापति ठक्कुरः 1350-1435 विषएवार बिस्फी-काश्यप (राजा शिवसिंहक दरबारी) आ संस्कृत आ अवहट्ठ लेखक। कीर्तिलता, कीर्तिपताका, पुरुष परीक्षा, गोरक्षविजय, लिखनावली आदि ग्रंथ समेत विपुल संख्यामे कालजयी रचना। ई मैथिलीक आदिकवि विद्यापति (ज्योतिरीश्वर पूर्व)सँ भिन्न छथि। (चित्रक आधार मिथिला सांस्कृतिक परिषद, कोलकाता द्वारा कोनो कलाकारसँ बनबाओल , कलाकारक नाम ६०-७० सालसँ अज्ञात कारणसँ गुप्त राखल गेल अछि।) शंकरदेव 1449-1569 पारिजातहरण। जगज्ज्योतिर्मल्ल १६१३-३७ हरगौरी विवाह नाटक, कुञ्ज विहार नाटक। सुनीति कुमार चटर्जी मैथिली प्रेमी 1890-1977 अरविन्द घोष मैथिली प्रेमी 1872-1950 विद्यापति गीतक अंग्रेजीमे अनुवाद डॉ. सर आशुतोष मुखर्जी मैथिली प्रेमी 1864-1924 सर जी. ए. ग्रियर्सन मैथिली प्रेमी 1851-1941 कवि चन्दा झा 1831-1907 मूलनाम चन्द्रनाथ झा, ग्राम- पिण्डारुछ, दरभंगा। कवीश्वर, कविचन्द्र नामसँ विभूषित। ग्रिएर्सनकेँ मैथिलीक प्रसंगमे मुख्य सहायता केनिहार।

कृति- मिथिला भाषा रामायण, गीति-सुधा, महेशवाणी संग्रह, चन्द्र पदावली, लक्ष्मीश्वर विलास, अहिल्याचरित आऽ विद्यापति रचित संस्कृत पुरुष-परीक्षाक गद्य-पद्यमय अनुवाद। महाकवि लालदास 1856-1921 हिनक जन्म खड़ौआ ग्राममे १८५६ ई. मे तथा मृत्यु १९२१ ई. मे भेलन्हि । हिनक अनेक रचना उपलब्ध होइत अछि, यथा�रमेश्वर चरित रामायाण,� स्त्री शिक्षा,� �सावित्री-सत्यवान,� �चण्डी चरित,� �विरुदावली,� �दुर्गा सप्तशती,� तन्त्रोक्त मिथिला माहात्म्य� आदि । मैथिलीक अतिरिक्त ई संस्कृत, हिन्दी तथा फारसीक ज्ञाता छलाह । कविताक अतिरिक्त गद्यमे सेहो ई रचना कएल । रमेश्वर चरित रामायण हिनक सभसँ विशिष्ट ग्रन्थ अछि । राम-कथाक उल्लेखमे सीताक महिमाक महत्त्व दए मिथिला तथा मैथिलीक प्रति ई अपन श्रद्धा तथा भक्तिकेँ व्यक्त कएल अछि । म. म. परमेश्वर झा 1856-1924 जन्म 1856 ई. मे तरौनी ग्राम (दरभंगा) जिलामे भेल छलन्हि तथा निधन 1924 ई. मे । संस्कृत व्याकरणक ई दिग्गज विद्वान् छलाह तथा �वैयाकरण केशरी� क उपाधिसँ विभूषित छलाह । मैथिली साहित्यमे अपन कृति �मिथिलातत्त्व विमर्श� तथा �सीमंतिनी आख्यायिका�क कारणे महत्त्वपूर्ण स्थान रखैत छथि । ई महाराज रमेश्वर सिंहक दरवारमे राज-पंडितक पदपर अनेको वर्ष धरि सुप्रतिष्ठित छलाह । अवध बिहारी प्रसाद शाही 1859-1929 सर्वतंत्र स्वतंत्र बच्चा झा 1860-1921 मधुबनी जिलांतर्गत लवाणी(नवानी) गाममे हिनकर जन्म भेलन्हि।हिनक कृति सभ अछि। 1. सुलोचन-माधव चम्पू काव्य, 2.न्यायवार्त्तिक तात्पर्य व्याख्यान, 3.गूढ़ार्थ तत्त्वलोक(श्री मदभागवतगीता व्याख्याभूत मधुसूदनी टीका पर) 4.व्याप्तिपंचक टीका 5.अवच्छदकत्व निरुक्त्ति विवेचन 6.सव्यभिचार टिप्पण 7.सतप्रतिपक्ष टिप्पण 8.व्याप्तनुगन विवेचन 9.सिद्धांत लक्षण विवेक 10.व्युत्पत्तिवाद गूढार्थ तत्वालोक 11.शक्त्तिवाद टिप्पण 12.खण्डन-ख़ण्ड खाद्य टिप्पण 13. अद्वैत सिद्धि चन्द्रिका टिप्पण 14.कुकुकाञ्जलि प्रकाश टिप्पण। म. म. शशिनाथ झा 1860-1930 मुंशी रघुनन्दन दास 1860-1945 गाम-सखबार, ज़िला-मधुबनी। "मिथिला नाटक" आ "दूतांगद व्यायोग"क लेखक। मधुसूदन ओझा 1866-1939 म.म. मुरलीधर झा १८६८-१९२९ जन्म- गाम- भराम (जिला मधुबनी), अपन मातृक श्यामसीधपमे बसि गेलाह। काशीसँ १९०६ ई. मे ई "मिथिलामोद" नामक मासिक मैथिली पत्रिकाक प्रकाशन शुरु केलन्हि। हितोपदेश (अनुवाद), मैथिली व्याकरण, "अर्जुन तपस्या" (उपन्यास) प्रकाशित। मुकुन्द झा "बख्शी" 1869-1936 जन्म हरिपुर बख्शी टोल ग्राम (मधुबनी जिला) मे 1869 ई. मे भेल तथा हिनक निधन काशीमे 1937 ई. मे भेलन्हि । हिनक लिखल संस्कृत मे अनेक ग्रंथ अछि । मैथिलीमे हिनक महत्त्वपूर्ण कृति अछि �मिथिला भाषामय इतिहास� । एकर अतिरिक्त मैथिलीमे हिनक स्फुट निबन्ध सभ सेहो प्रकाशित भेल । मिथिलाक ऐतिहासिक वर्णन सभसँ पहिने हिनके प्रकाशित भेल । एहि इतिहासमे मिथिलाक सर्वतोमुखी परिचय प्रस्तुत कएल गेल अछि । डॉ. सर गंगानाथ झा 1871-1941 जन्म मधुबनी जिलाक सरिसब-पाही ग्राममे 1871 ई. मे भेल तथा निधन प्रयागमे 1941 ई. मे । ई अपना समयक संस्कृतक प्रकाण्ड विद्वान म. म. चित्रधर मिश्र, म. म. जयदेव मिश्र तथा म. म. शिवकुमार शास्त्नीसँ मीमांसा एवं दर्शनक अध्ययन कएलन्हि तथा दर्शनक विभित्र दुरूह ग्रंथक अङरेजीमे अनुवाद कए पाश्चात्य संसारक ध्यान आकृष्ट कएलन्हि । ई गवर्नमेन्ट संस्कृत कॉलेज बनारसमे 1917 सँ 1923 धरि प्रिसिपल छलाह तथा एलाहाबाद विश्वविद्यालयक 1923 सँ 1932 पर्यन्त कुलपति रहलाह । मैथिलीमे हिनक सम्पादित चन्दा झाक �महेशवाणी संग्रह� तथा �गणनाथ-विन्ध्यनाथ पदावली� प्रकाशित अछि । मैथिली साहित्य परिषद् द्वारा प्रकाशित हिनक �वेदान्त दीपक� (दर्शन) विषयक अपूर्व ग्रंथ अछि । एहिसँ भिन्न हिनक निबंध सभ सामयिक मैथिली पत्न-पत्निकामे प्रकाशित अछि । जनार्दन झा जनसीदन 1872-1951 रासबिहारी लालदास 1872-1940 "मिथिला दर्पण" क लेखक। रामचन्द्र मिश्र "चन्द्र" 1873-1937 मैथिल प्रभा महावैय्याकरणाचार्य पं दीनबन्धु झा 1878-1955 भवनाथ मिश्र 1879-1933 मैथिली शब्दकोष "मिथिला शब्द प्रकाश"क लेखक। कीर्त्यानन्द सिंह टंकनाथ चौधरी 1884-1928 भवप्रीतानन्द ओझा 1886-1970 कपिलेश्वर मिश्र 1887-1987 गाम सलेमपुर, थाना- उजियारपुर, जिला समस्तीपुर। �सीतादाइ� पुस्तक भंडारसँ प्रकाशित। बालकृष्ण मिश्र 1888-1948 बलदेव मिश्र 1890-1975 हिनक जन्म सहरसा जिलाक वनगाँव ग्राममे 1890 ई. मे एवं निधन फरवरी, 1975मे भेलन्हि । प्रारम्भमे पं. गेनालाल चौधरीसँ ज्यौतिष पढ़ि ई काशीमे पं. सुधाकर द्विवेदीजीक शिष्य भेलाह । बहुत वर्ष धरि सरस्वती भवन (वाराणसी) मे हस्तलिखित विभागमे कार्य कएल । पश्चात् पटनाक काशीप्रसाद जयसवाल रिसर्च संस्थानमे अनेक प्राचीन तिब्बती हस्तलिपिकेँ देवनारीमे लिप्यन्तरित कएल। �मिथिलामोद� प्रकाशन एवं म.म. मुरलीधर झाक प्रोत्साहनसँ ज्यौतिषीजी १९१० ई.सँ �मोद�मे लिखए लगलाह। हिनक प्रकाशित रचना अछि��रामायण शिक्षा�, �चन्दा झा�, �संस्कृति�, �भारत शिक्षा�, �गप्प-सप्प विवेक�, �समाज� आदि । पण्डितजी यावत् धरि पटना रहलाह बराबरि �मिहिर�मे लिखैत रहलाह । आचार्य रामलोचन शरण 1889-1971 सीतामढ़ीमे जन्म आ दरभंगामे मृत्यु। "मैथिली रामचरित मानस" सहित तुलसीदासक समस्त रचनाक मैथिलीमे लेखन। मिथिलाक्षरमे मैथिलीक प्रकाशनक प्रारम्भ केनिहार। प्रकाशन संस्था "पुस्तक भण्डार", लहेरियासराय, पटनाक संस्थापक। सीताराम झा 1891-1975 जन्म चौगामा ग्राममे १८९१ ई.मे तथा निधन १९७५ ई. मे भेलन्हि । संस्कृतमे ज्योतिष शास्त्रक अनेक रचनाक .अतिरिक्त मैथिलीमे हिनक �अम्ब चरित� (महाकाव्य), �सूक्ति सुधा,� लोक लक्षण,� �पढ़ुआचरित,� �पूर्वापर व्यवहार,� उनटा बसात,� �अलंकार दर्पण�, �भूकम्प वर्णन�, �काव्य षट-रस�, �मैथिली काव्योपवन�, आदि ग्रन्थ उपलब्ध अछि । हिनक गीताक मैथिली अनुवाद सेहो उपलब्ध अछि । मिथिला मोदक सम्पादन १९२० ई.सँ १९२७ ई. धरि ई कएल । ताराचरण झा 1892-1928 बद्रीनाथ झा 1893-1973 जन्म मधुबनी जिलाक सरिसव ग्राममे १८९३ ई. मे भेलन्हि तथा १९१४ ई. मे ई काशी लाभ कएलिन्ह । बहुत दिन धरि ई मुजफ्फरपुरक धर्म्म समाज संस्कृत कॉलेजमे साहित्यक अध्यापक छलाह । मैथिलीक विख्यात कवि लोकनि यथा सुमनजी, मधुपजी, मोहनजी आदि हिनक शिष्य छथिन्ह । संस्कृत साहित्यमे हिनक अनेक रचना अछि । जाहिमे राधा परिणय� (महाकाव्य) क स्थान विशिष्ट अछि । मैथिलीमे हिनक �एकावली परिणय� (महाकाव्य) एक नवीन कीर्तिमान स्थापित कएलक। कोनो अलंकारक दृष्टान्त तकबाक हेतु �एकावली परिणय� पर्याप्त अछि । जीवनाथ राय 1893-1964 उमेश मिश्र 1895-1967 जन्म मधुबनी जिलाक गजहरा ग्राममे 1895 ई. मे भेल छलन्हि । ई एकहतरि वर्षक आयुमे १९६७ ई. मे प्रयागमे स्वर्गवासी भेलाह । ई अपन स्वनाम-धन्य पिता म. म. जयदेव मिश्र तथा म. म. डा. गंगानाथ झाक सान्निध्यमे विद्यार्जन कएल। १९२३ सँ १९५९ धरि मिश्रजी एलाहाबाद विश्वविद्यालयमे संस्कृतक प्राध्यापक छलाह । दरभंगा �मिथिला शोध संस्थान�क निदेशक पदपर किछु समय कार्य कए १९६२ सँ ६५ धरि कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालयक कुलपति रहलाह ।म. म. मुरलीधर झासँ प्रभावित भए �मिथिलामोद�मे ई लिखब प्रारम्भ कएलन्हि तथा अपन विविध प्रकारक रचनासँ मैथिलीक गद्यकेँ समृद्ध् कएलन्हि । मैथिलीमे हिनक प्रसिद्ध ग्रन्थ अछि��कमला� (शेक्सपीयरक �टेम्पेस्ट�क भावानुवाद), �नलोपाख्यान�, �मैथिली-संस्कृति� तथा अनेक वर्णनात्मक एवं आलोचनात्मक निबन्ध; मनबोधक कृष्णजन्मक सम्पादन, विद्यापतिक कीर्तिलता, कीर्तिपताका, गोरक्ष विजय आदिक अनुवाद-सम्पादन सेहो कएल। बाबू धनुषधारी दास 1895-1965 मैथिलीमे बिहारी कविक अनुवाद प्रकाशित। अमरनाथ झा 1897-1955 सरिसब पाहीटोल ग्राममे १८९७ ई. मे भेल । हिनक निधन पटनामे जखन ई बिहार लोक सेवा आयोगक अध्यक्ष छलाह, १९५५ मे भेलन्हि । ई एलाहाबाद विश्वविद्यालयक नओ वर्ष धरि कुलपति रहि पश्चात् हिन्दू विश्वविद्यालयक सेहो कुलपतिक पदकेँ सुशोभित कएलन्हि । ई अंगरेजीक प्रकाण्ड विद्वान् छलाह, ताहि संग हिन्दी, उर्दू, फारसी, संस्कृत, बङला एवं मैथिलीक सेहो अद्भुत विद्वान् छलाह ।मैथिलीमे हिनका द्वारा सम्पादित �हर्षनाथ काव्य ग्रन्थावली� तथा �गोविन्ददासक श्रृग्ङारभजन� महत्त्वपूर्ण अछि । एहिसँ भिन्न हिनक मैथिली साहित्य परिषदक अध्यक्षीय भाषण तथा अन्य लेख प्रकाशित अछि । भोलालाल दास 1897-1977 हिनक जन्म दरभंगा जिलाक कसरौर मे भेलन्हि । साहित्य सर्जनाक अतिरिक्त अपन संगठन क्षमता तथा मैथिली साहित्यक सर्वतोमुखी विकासक हेतु सतत तत्पर रहबाक कारणेँ भोला बाबू मैथिली संसारक एक स्तम्भक रूपमे रहलाह । हिनक निधन 1977 ई. मे भेल । मैथिलीक प्रचार-प्रसारमे ई अपन जीवन समपित कएने छलाह। पाठ्यक्रममे मैथिलीकेँ स्थान हो ताहि हेतु ई बीड़ा उठओलन्हि । विद्यालय स्तरक अनेक पोथीक निर्माण कएल । मैथिली साहित्य परिषदक ई संस्थापक मण्डलक सदस्य छलाह । 1931 सँ 1940 ई. पर्यन्त ओकर प्रधान मन्त्नी रहलाह । हिनक मन्त्नित्वकालमे �भारती� नामक मासिक पत्नक प्रकाशन भेल । एहिसँ पूर्व (१९२९-३१) कुशेश्वर कुमरजीक संग संयुक्त सम्पादनमे �मिथिला� नामक पत्न चलाओल । ई नवीन एवं प्रगतिशील विचारक लोक छलाह । ननव लेखककेँ प्रोत्साहित करब, शैलीमे एकरूपता आनब, नव प्रकाशनसँ मैथिलीक साहित्य भंडारक पूर्त्ति करब हिनक कर्त्तव्य बनि गेल छल । हिनक लिखल �मैथिली व्याकरण� तथा हिनकहि द्वारा सम्पादित �गद्यकुसुमांजलि बहुत दिन धरि विद्यालयमे पढ़ाओल जाइत रहल । हिनक लिखल अनेक निबन्ध समालोचना, कविता, संस्मरण, जीवनी-साहित्य मैथिलीक पत्र-पत्निकामे छिड़िआएल अछि । कुमार गंगानन्द सिंह 1898-1971 जन्म�बनैली राजपरिवारमे 24-9-1898, मृत्यु:-श्रीनगर पूर्णिञा 17-1-1970 । भूतपूर्व शिक्षामंत्नी, बिहार एबं कुलपति, कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय ।रचना�अगिलही (अपूर्ण उपन्यास) तथा अनेक कथा एवं एकांकी । युगक अनुरूप सामाजिक कुरीति आदिकेँ आधार बनाए सुधारवादी दृष्टिएँ कथा सभहिक रचना । ब्रजमोहन ठाकुर 1899-1977 भुवनेश्वर प्रसाद 1902- दरभंगा जिलाक बनौली गाम, निवास रायसाहेब पोखरि लहेरियासराय। सरस्वती स्कूल लहेरियासरायमे १९३०-१९६४ ई. धरि अध्यापन। मैथिलीमे "बाल रामायण� प्रकाशित। जयनारायण झा 'विनीत' 1902-1991 नरेन्द्र नाथ दास विद्यालंकार १९०४-१९९३ सुधाकर झा "शास्त्री" 1904-1974 दामोदर लाल दास विशारद 1904-1981 बबुआजी झा 'अज्ञात' 1904-1996 २००१- बबुआजी झा �अज्ञात� (प्रतिज्ञा पाण्डव, महाकाव्य)लेल साहित्य अकादमी पुरस्कार। श्रीवल्लभ झा हाटी 1905-1940 रमानाथ झा 1906-1971 जन्म दरभंगा जिलाक उजान (धर्मपुर) ग्राममे 1906 ई. मे एवं हिनक निधन दरभंगामे १९७१ ई. मे भेलन्हि । 1930 ई. मे अङरेजीमे एम. ए. कएलाक बाद ई कतोक वर्ष धरि मधेपुर उच्च विद्यालयक प्रधानाध्यापक छलाह, तकरा बाद दरभग्ङा-राज-लाइब्रेरीक पुस्तकालयाध्यक्षक रूपमे 1936 सँ अन्तिम समय धरि रहलाह । 1952 सँ 62 चन्द्रधारी मिथिला कॉलेजमे प्रो. झा अङरेजीक प्राध्यापक रूपेँ काजka पश्चात् ओही कॉलेजमे मैथिली विभागाध्यक्ष बनाओल गेलाह । 1965 मे रमानाथ बाबू साहित्य अकादमीक मैथिलीक प्रतिनिधि निर्वाचित भेलाह जाहि पद पर ओ जीवनक अन्त समय तक रहलाह । हिनक रचनाक क्षेत्न बहुत व्यापक छल । हिनक अनुसंधानात्मक निबंक दू गोट संग्रह �निबन्धमाला� तथा �प्रबंध संग्रह� प्रकाशित अछि । संकलित सम्पादित पुस्तक सभमे �मैथिली पद्य-संग्रह�, �मैथिली गद्य-संग्रह�, �प्राचीन गीत�, �कथा काव्य�, �नवीन गीत�, �कविता कुसुम�, �कथा संग्रह� आदि अछि । �कथासरित्सागर�क आधार पर प्राञ्जल गद्य शैलीमे हिनक �उदयन-कथा� तथा �बररुचि-कथा� बेश ख्याति पओलक । व्याकरणक �मिथिला भाषा प्रकाश�, �अलक्ङारप्रवेश� आदि अनेक ग्रन्थ प्रकाशित अछि । �मैथिली साहित्य पत्र� त्नैमासिक पत्रिकाक संपादक। काशीकान्त मिश्र "मधुप" 1906-1987 १९७०- काशीकान्त मिश्र �मधुप� (राधा विरह, महाकाव्य) पर साहित्य अकादेमी पुरस्कार प्राप्त मैथिलीक प्रशस्त कवि आ मैथिलीक प्रचार-प्रसारक समर्पित कार्यकर्ता �झंकार� कवितासँ क्रान्ति गीतक आह्वान कएलनि । प्रकृति प्रेमक विलक्षण कवि । �घसल अठन्नी कविताक लेल कथ्य आ शिल्प-संवेदना�दुहू स्तर पर चरम लोकप्रियता भेटलनि। लक्ष्मीनाथ गोसाई 1793-1872 मेही दास धरहरा कोठी_बनमनखी_असली नाम_रामानुग्रहलाल दास_आश्रम_मायामोहल्ला, कुप्पाघाट, भागलपुर बुचन भगत, संत 1928-1991 अभिराम दास मिथिलाक प्रसिद्ध भागवत वाचक। स्नेहलता 1909-1993 गाम- डरोड़ी, समस्तीपुर। पूर्ण नाम- कपिलदेव ठाकुर "स्नेहलता"। रामाश्रयी रसिक सम्प्रदायक संत। हिनकर रचित वैदेही विवाह संकीर्तन, विनय पदावली, शिववाणी, चेतावनी, झूला-संकीर्तन, सीतावतरण प्रबन्धकाव्य आ स्नेहशतक- दोहावली-कवित्त आदि मिथिलाक महिला वर्ग आ संकीर्तनकार लोकनिक कंठमे परिव्याप्त अछि आ लोकमंगलक अनुष्ठानमे व्यापक रूपेँ व्यवहृत अछि। हिनक "वैदेही विवाह" मिथिलाक कीर्तनिया नाट्य परम्पराकेँ लोकरुचिक अनुकूल बनौने अछि। स्वतंत्रता सेनानी स्व. रामफल मण्डल सुन्दर झा "शास्त्री" 1930-1998 जनकपुर, नेपाल, युवावस्थाक जेलक दुर्लभ फोटो।नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानक मानद सदस्यता- स्व. सुन्दर झा शास्त्री। कांञ्चीनाथ झा "किरण" 1906-1988 जन्म स्थान-धर्मपुर,लोहना रोड, दरभंगा बिहार । मैथिली भाषा आंदोलनमे महत्वपूर्ण भूमिका। �पराशर� महाकाव्य लेल साहित्य अकादमी ओ �कथा किरण� लेल वैदेही पुरस्कारसँ सम्मानित । प्रकाशित कृति: चंद्रग्रहण (उपन्यास), वीर-प्रसून (बालकथा), जय जन्मभूमि (एकांकी), विजेता विद्यापति (नाटक), कथा-किरण (कथा-संग्रह), किरण-कवितावली, कतेक दिनक बाद (कविता-संग्रह), पराशर (महाकाव्य) ओ किरण-निबंधावली (निबंध-संग्रह) आदि।१९८९- काञ्चीनाथ झा �किरण� (पराशर, महाकाव्य)पर मैथिली मे साहित्य अकादमी पुरस्कारसँ सम्मानित। श्यामानन्द झा 1906-1949 रमाकांत झा, नेपाल 1907-1971 ईशनाथ झा 1907-1965 बहुमुखी प्रतिभाक कवि । प्राचीन आ नवीन पद्धतिक काव्य-रचनाक विलक्षण संयोग हिनकर कवितामे भेटैत अछि । दलित वर्ग, शोषणक समस्या, स्वदेश प्रेमक यथार्थवादी रचनाक संग संग व्यक्तिनिष्ठ कल्पनाक अनेक विशिष्ट कविता मैथिलीमे लिखलनि । भुवनेश्वर सिंह 'भुवन' 1907-1944 अपन खाढ़ीक बहुमुखी प्रतिभाक कवि । प्राचीन आ नवीन रीतिक कविताक रचना विपुल संख्यामे कएलनि । �भुवन भारती� कविता संकलन प्रकाशनसँ मैथिली ओज आ नव चेतनाक शंख फुकलनि। हरिमोहन झा 1908-1984 हिनकर मैथिली कृति १९३३ मे �कन्यादान� (उपन्यास), १९४३ मे "द्विरागमन�(उपन्यास), १९४५ मे �प्रणम्य देवता� (कथा-संग्रह), १९४९ मे �रंगशाला�(कथा-संग्रह), १९६० मे �चर्चरी�(कथा-संग्रह) आऽ १९४८ ई. मे �खट्टर ककाक तरंग� (व्यंग्य) अछि। मृत्योपरांत १९८५मे (जीवन यात्रा, आत्मकथा)पर मैथिलीक साहित्य अकादमी पुरस्कारसँ सम्मानित। कालीकान्त झा 1909- मूल गाम ढंगा (हरिपुर), मधुबनी। फेर मातृक बरदबट्टा,पो. उरलाहा, भाया- मदनपुर, जिला-पूर्णियामे बसि गेलाह। सतघरा (मधुबनी), मदनपुर आ काशीमे पाणिनी व्याकरणक अध्ययन। "हनुमान चरित"क लेखक। तंत्रनाथ झा 1909-1984 जन्म १९०९ ई मे दरभंगा जिलाक धर्मपुर ग्राममे भेलन्हि मुत्यु ४-५-�८४,चन्द्रधारी मिथिला कॉलेजमे अर्थशास्त्नक प्राध्यापक छलाह । अवकाश ग्रहण क काव्य साधनामे लागल रहलाह । महाकाव्य, मुक्तक, एकांकी सभ विधामे ई सिद्ध हस्त छलाह । हिनक �कीचक वंध� महाकाव्य अङरेजीक �ब्लैक्ङ भर्स� (अमित्नाक्षर छन्द) म लिखल अछि । मैथिलीमे �सौनेट� एवं ब्लैक्ङ भर्स�क ई प्रथम प्रयोक्ता थिकाह । संस्कृत परम्परामे काव्य रचना करितहुँ पाश्चात्य शैलीक नवीनता हिनका रचनामे भेल । हिनक �कीचक वध� ओ �कृष्ण चरित� महाकाव्य��मङ्गल-पञ्चाशिका� एवं �नमस्या� मैथिली साहित्यमे अपन विशिष्ट स्थान रखैछ । तकर अतिरिक्त मुक्तक काव्यमे विषय वस्तुक व्यापकता एवं शिल्प शैलिक प्रचुरता अबैत अछि । एक दिश यदि प्राचीन ढंगक ईश्बर वन्दनाक रचना कएलन्हि तँ दोसर दिस �सौनेट� (चतुर्दशपदी) �बैलेड� आदि लिखबामे पूर्ण सफलता प्राप्त कएलन्हि ।�कृष्ण चरित� महाकाव्य पर हिनका 1979 ई क साहित्यक अकादमी पुरस्कार भेटलन्हि । 1980 ई. मे हिनका अभिनन्दन ग्रन्थसमर्पित कएल गेलन्हि । जीवनाथ झा 1910-1977 सुरेन्द्र झा 'सुमन' 1910-2002 जन्म: ग्राम : बल्लीपुर, जिला-समस्तीपुर । प्रकाशित कृति: प्रतिपदा, अर्चना,साओन-भादव,अंकावली, अन्तर्नाद, पयस्विनी, उत्तरा आदि तीससँ अधिक मौलिक कविता-पुस्तक;पुरुष-परीक्षा, अनुगीतांजलि, ऋतु श्रृंगार तथा वर्णरत्नाकर, पारिजात-हरण, कृष्णजन्म, आनन्द-विजय आदि कतिपय ग्रन्थक अनुवाद-संपादन; �मैथिली काव्य पर संस्कृतक प्रभाव� नामक समीक्षा-ग्रंथ। �पयस्विनी� लेल १९७१ मे साहित्य अकादेमी पुरस्कार तथा �उत्तरा� पर १९१८ मे मैथिली अकादेमीक विद्यापति पुरस्कार प्राप्त । मैथिलीक प्रथम दैनिक पत्र �स्वदेश�क लब्धप्रतिष्ठ सम्पादक।१९९५- सुरेन्द्र झा �सुमन� (रवीन्द्र नाटकावली- रवीन्द्रनाथ टैगोर, बांग्ला)लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार। २००० ई.- पं.सुरेन्द्र झा �सुमन�, दरभंगा;यात्री-चेतना पुरस्कार। पं. रामचन्द्र झा 1910- गाम तरौनी। काशी मिथिला ग्रन्थमालाक सम्पादक। 'नागार्जुन' वैद्यनाथ मिश्र 'यात्री' 1911-1998 जन्म अपन मामागाम सतलखामे भेलन्हि, जे हुनकर गाम तरौनीक समीपहिमे अछि, जिला-दरभ्गा । मूल नाम: वैद्यनाथ मिश्र । हिन्दीमे नागार्जुन नामे प्रख्यात । प्रकाशित कृति: चित्रा, पत्रहीन नग्न गाछ (मैथिली कविता-संग्रह); पारो, बलचनमा, नवतुरिया (मैथिली उपन्यास); युगधारा, सतरंगे पंखोंवाली, प्यासी पथराई आंखें, खिचड़ी विप्लव देखा हमने, तुमने कहा था, हजार हजार बाहो वाली, पुरानी जूतियो का कोरस, रत्नगर्भा, ऐसे भी हम क्या ! ऐसे भी तुम क्या ! (हिन्दी कविता-संग्रह); रतिनाथ की चाची, बलचनमा, नई पौध, बाबा बटेसरनाथ, वरुण के बेटे, दुखमोचन, कुम्भीपाक, अभिनन्दन, उग्रतारा, इमरतिया (हिन्दी उपन्यास); आसमान में चन्दा तैरे (कहानी संग्रह); भस्मांकुर (हिन्दी खण्ड काव्य); अन्नहीनम् क्रियाहीनम् (निबन्ध-संग्रह); गीत गोविन्द; मेघदूत; विद्यापति के गीत, विद्यापति की कहानियां (अनुवाद) । �पत्रहीन नग्न गाछ� लेल १९६८ मे साहित्य अकादेमी पुरस्कार प्राप्त । यायावरी जीवन । मैथिली प्रतिनिधिक रूपमे रूस भ्रमण । नागार्जुन (स्व. श्री वैद्यनाथ मिश्र �यात्री� ), हिन्दी आ मैथिली कवि, १९९४ ई.मे साहित्य अकादेमीक फेलो (भारत देशक सर्वोच्च साहित्यक पुरस्कार)। आरसीप्रसाद सिंह 1911-1996 जन्म: ग्राम-एरौत, जिला-समस्तीपुर । प्रकाशित कृति: माटिक दीप, पूजाक फूल, सूर्यमुखी (कविता-संग्रह), मेघदूत (अनुवाद), आरसी, नन्ददास, संजीवनी (हिन्दी काव्य संग्रह)। �सूर्यमुखी� लेल १९८४ मे साहित्य अकादेमी पुरस्कार प्राप्त । गुरु जयदेव मिश्र 1911-1991 शिष्य गंगानाथ झा यशोधर झा मिथिला वैभव, दर्शन मैथिली पोथीपर 1966 मे पहिल साहित्य अकादमी पुरस्कार मैथिली लेल प्राप्त। वैद्यनाथ मल्लिक 'विधु' 1912-1987 १९७६- वैद्यनाथ मल्लिक �विधु� (सीतायन, महाकाव्य) लेल मैथिलीक साहित्य अकादमी पुरस्कार। भीम झा 1912- पूर्णिया जिलाक मदनपुर गामक। जन्म ५ नवम्बर १९१२ ई.। बनैलीक श्री श्यामानन्द सिंहक अध्यक्षतामे �नारायण संकीर्तन महामण्डली�क स्थापना। राधानाथ दास १९१२- उपेन्द्र ठाकुर 'मोहन' 1913-1980 जन्म १९१३ ई. मे दरभंगा जिलाक चतरिया ग्राममे भेलन्हि । मृत्यु २४-५-१९८० । संस्कृत शिक्षामे साहित्याचार्य ओ बड़ौदा राजक विद्वत्-परीक्षासँ �साहित्य-रत्न�क उपाधिसँ विभूषित भेलाह । दैनिक आर्यावर्तमे आदिअहिसँ, पश्चात् १९६० सँ मिथिला मिहिरक उप-सम्पादक एवं सह-सम्पादक रूपेँ कार्य करैत १९७७ मे सेवा निवृत भेलाह ।मोहनजी करीब पचास वर्ष साहित्य साधनामे लागल रहलाह । विजयानन्द, कुंजरंजन, सुदर्शन, पुण्डरीक, शास्त्नी, बामन आदि छद्म नामसँ पत्न-पत्निकामे विविध विषयपर हिनक लेख सभ प्रकाशित भेल अछि ।मोहन जीक �बाजि उठल मुरली�मे १०१ गोट कविताक संकलन अछि जाहिमे हिनक सुदीर्घ काव्य-आराधनाक विभित्र विचारधाराक ओ विभित्र अनुभूतिक सामग्री उपलब्ध अछि । एहि पुस्तकपर मोहन�जीकेँ १९७८ मे साहित्य अकादम् पुरस्कार भेटलन्हि। एहिसँ बहुत पूर्व हिनक �फुलडाली� नामक कविता संग्रह सेहो प्रकाशित भेल छल । जयनाथ मिश्र 1913-1985 श्रीकांत ठाकुर "विद्यालंकार" पञ्जीकार मोदानन्द झा 1914-1998 लब्ध धौत पञ्जीशास्त्र मार्त्तण्ड पञ्जीकार मोदानन्द झा, शिवनगर, अररिया, पूर्णिया। पिता-स्व. श्री भिखिया झा। गुरु- पञ्जीकार भिखिया झा। पूर्णिया जिलाक बनैली लगक शिवनगर गामक। जन्म २२ सितम्बर १९१४ ई.।सौराठमे अपन मौसा स्व. लूटनझा सँ पंजीशास्त्रक अध्ययन। १९४८-१९५१ ई. धरि दरभंगामे रहि आचार्य रमानाथ झाकेँ पाँजि पढ़ओलनि।शास्त्रार्थ परीक्षा- दरभंगा महाराज कुमार जीवेश्वर सिंहक यज्ञोपवीत संस्कारक अवसर पर महाराजाधिराज(दरभंगा) कामेश्वर सिंह द्वारा आयोजित परीक्षा-1937 ई. जाहिमे मौखिक परीक्षाक मुख्य परीक्षक म.म. डॉ. सर गंगानाथ झा छलाह। आनन्द झा 1914-1988 टोक्यो हासेगावा, निदेशक मिथिला म्यूजियम, निगाटा माँगनि खबास 1908-1943 संगीतज्ञ पचगछियामे जन्म आ अल्प बएसमे मृत्यु। पचगछियाक रायबहादुर लक्ष्मीनारायण सिंहक शिष्य। रामाश्रय झा 'रामरंग' अभिनव भातखण्डे 1928-2009 जन्म ११ अगस्त १९२८ ई. तदनुसारभाद्र कृष्णपक्ष एकादशी तिथिकेँ मधुबनी जिलान्तर्गत खजुरा नामक गाममे भेलन्हि। अभिनव गीतांजलि, हुनकर उच्चकोटिक शास्त्र रचना अछि।मिथिलावासी श्री रामरंग राग तीरभुक्त्ति, राग वैदेही भैरव, आऽ राग विद्यापति कल्याण केर रचना सेहो कएने छथि आऽ मैथिली भाषामे हिनकर खयाल �रंजयति इति रागः� केर अनुरूप अछि। रामचतुर मल्लिक ध्रुपद संगीत 1905-1990 अभयनारायण मल्लिक कुमार तारानन्द सिंह, संगीतज्ञ संगीताचार्य रायबहादुर लक्ष्मीनारायण सिंह पंडित परमानन्द चौधरी, संगीतज्ञ हृदयनारायण झा संगीत भाष्कर राजकुमार श्यामानन्द सिंह १९१६-१९९४ मिथिलेश कुमार झा, तबला वादन नागेश्वर लाल कर्ण, तबला वादक बाबू साहेब चौधरी 1916-1998 दरभंगा जिलाक दुलारपुर गामक। १९४३ ई. मे जीविकार्थ कलकत्ता अएलाह। नवम कक्षामे स्वराज्य आन्दोलनमे बाझि कए शिक्षाक इतिश्री। कलकत्तामे स्थानीत मैथिल संघमे प्रवेश। कलकक्तामे मैथिली आर्ट प्रेस. ९/१, खिलात घोष लेन, कलकत्ता-७००००६ सँ मैथिली-मिथिला आन्दोलनमे सक्रिय। �कुहेस� आ �चाणक्य� दूटा नाटक। १९७१-७९ धरि �मिथिला दर्शन� आ �मैथिली दर्शन� मैथिली मासिकक सम्पादन। लक्ष्मण (लखन) झा 1916-2000 मिथिला राज्य अभियानी। शुद्धदेव झा 'उत्पल' 1916- गोड्डा जिलाक अलखदत्त-महेनपुरक निवासी। जन्म १६ अक्टूबर १९१६ ई.। रामचरित्र पाण्डेय "अणु" १९१७-२०१० लक्ष्मीनाथ झा मिथिला चित्रकला 1917-1990 उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' 1917-2002 जन्म स्थान-हरिपुर वकशीटोल, मधुबनी, बिहार । १९६९- उपेन्द्रनाथ झा �व्यास� (दू पत्र, उपन्यास) लेल साहित्य अकादेमी पुरस्कारसँ सम्मानित । साहित्य अकादेमीक अनुवाद पुरस्कार प्राप्त । प्रकाशित कृति: कुमार, दू पत्र (उपन्यास), विडंबना, भजना भजले (कथा-संग्रह), पतन संन्यासी, प्रतीक (काव्य), महाभारत (पहिल दू पर्व) आदि। मनमोहन झा 1918-2009 जन्म सरिसबमे, अश्रुकण, वीरभोग्या, मिथिलाक निशापुरमे।२००९- स्व.मनमोहन झा (गंगापुत्र, कथासंग्रह)पर मृत्योपरांत साहित्य अकादमी पुरस्कार। ब्रजकिशोर वर्मा 'मणिपद्म' 1918-1986 जन्म स्थान-बहेड़ा, दरभंगा बिहार । १९७३- ब्रजकिशोर वर्मा �मणिपद्म� (नैका बनिजारा, उपन्यास) लेल साहित्य अकादेमी पुरस्कारसँ सम्मानित । उपन्यासकार, कथाकार ओ कवि । प्रकाशित कृति: कोब्रागर्ल, कनकी, अर्द्धनारीश्वर, लोरिक विजय, नैका-बनिजारा, लवहरि-कुशहरि, राय रणपाल, आदिम गुलाम आदि उपन्यास ओ कंठहार (नाटक) आदि। पं. सहदेव झा १९१९- "मिथिला की धरोहर" पोथी प्रकाशित। बुद्धिधारी सिंह रमाकर 1919-1991 जन्म मधुबनीमे 1919 ई. मे भेल । अपन पिता स्व. क्षेमधारी सिंहसँ विभित्र विषयक शिक्षा ग्रहण कएलन्हि । ई रामकृष्ण कॉलेज, मधुबनीक मैथिली विभागाध्यक्ष छलाह । जतएसँ अवकाश प्राप्त कएलन्हि । बाल्या-वस्थहिसँ ई कविकार्यमे लागल रहलाह अछि । संस्कृत तथा मैथिली दुनू भाषामे हिनक रचना प्रकाशित अछि । यथा�मैथिलीमे �प्रयास� (कथा-संग्रह), �मधुमती�, �अमरबापू� (कविता-संग्रह), �शरशय्या� (खंड-काव्य) �स्मृति साहस्री� (महाकाव्य) आदि । आद्याचरण झा 1920- चन्द्र भानु सिंह 1922- २००४- चन्द्रभानु सिंह (शकुन्तला, महाकाव्य)लेल साहित्य अकादमी पुरस्कार। सुधांशु शेखर चौधरी 1922-1990 जन्म दरभंगाक मिश्रटोलामे 1922 ई. मे भेलन्हि तथा मृत्यु 1990 ई. मे भेलन्हि । किछु दिन विभिन्न जीविकामे रहि पश्चात् साहित्यकारक जीवन प्रारम्भ कएल । किछु दिन �बैदेही�क सम्पादन श्री सुमनजी एवं श्री कृष्णकान्त मिश्रजीक संग कएल तत्पश्चात् 1960 ई. सँ 1982 ई. धरि पटनामे �मिथिला मिहिर��क सफल सम्पादन कएल ।हिनक दू गोट नाट्यकृति-�भफाइत चाहक जिनगी�, लेटाइत आँचर�, तथा �पहिल साँझ� हिनक नाटकक नीक व्यावहारिक अनुभवक परिचायक अछि ।छद्मनामसँ हिनक दू गोट उपन्यास मिहिर� मे प्रकाशित भेल अछि । हिनक उपन्यास ई वतहा संसार� जे मैथिली अकादमी द्वारा प्रकाशित भेल आ जाहि पर 1980 क साहित्य अकादमीक पुरस्कार देल गेल । गोविन्द झा 1923- जन्मस्थान- इसहपुर, सरिसब पाही, मधुबनी, बिहार । सिद्ध कथाकार, उपन्यासकार, नाटककार, भाषा वैज्ञानिक ओ अनुवादक। साहित्य अकादेमी पुरस्कार, साहित्य अकादेमी अनुवाद पुरस्कारसँ सम्मानित। बिहार सरकारसँ कामिल बुल्के पुरस्कार, ग्रियर्सन पुरस्कार आदिसँ सम्मानित । प्रकाशित कृति: उपन्यास, नाटक, कथा, कविता, भाषा विज्ञान आदि विभिन्न विधामे अड़तीस टा पोथी प्रकाशित । प्रकाशन: सामाक पौती,नेपाली साहित्यक इतिहास (अनु) आदि । १९९३- गोविन्द झा (सामाक पौती, कथा)पुस्तक लेल सहित्य अकादेमी पुरस्कारसँ सम्मानित ।१९९३- गोविन्द झा (नेपाली साहित्यक इतिहास- कुमार प्रधान, अंग्रेजी) लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार। प्रबोध सम्मान 2006 सँ सम्मानित। विदेह सम्पादकक समानान्तर साहित्य अकादेमी फेलो पुरस्कार २०१० (समग्र योगदान लेल) योगानन्द झा 1923-1986 हिनक जन्म मधुबनी जिलाक कोइलख ग्राममे 1923 ई. मे भेलन्हि । मृत्यु 1986 मे भेलनि । अग्रेजीमे एम. ए. कएलाक पश्चात् ई किछु दिन चन्द्रधरी मिथिला कॉलेजमे प्राध्यापक रहलाह । बिहार प्रशासनिक सेवामे 1981 धरि विभिन्न पदपर कार्य कएल । तत्पश्चात्मैथिली अकादमीक निदेशक �84 धरि ।योगानन्द झाजी मैथिली साहित्यमे अपन उपन्यास �भलमानुस� एवं �पवित्ना�क हेतु ख्यात छथि । हिनक नाटक �मुनिक मतिभ्रम� एवं कथा संग्रह �उड़ैत वंशी� यथेष्ट प्रतिष्ठा प्राप्त कएने अछि । एकर अतिरिक्त ई महात्मा गान्धीक आत्मकथाक अनुवाद एवं �आमक जलखरी� नामक एक कथा संग्रहक सम्पादन सेहो कएने छथि । रामकृष्ण झा 'किसुन' 1923-1970 आधुनिक धाराक विशिष्ट कवि, कथाकार, चिन्तक । प्रकाशित कृति: आत्मनेपद (कविता संग्रह), मैथिली नवकविता (सम्पादन)। उमानाथ झा 1923-2009 जन्म:-01-01-1923, मृत्यु 07-12-2009 महरैल, भधुबनी ।भूतपूर्व अङरेजी विभागाध्यक्ष एवं प्रति-कुलपति मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा । रचना:-रेखाचित्न, अतीत (कथा संग्रह); मैथिली नवीन साहित्य, इन्द्र धनुष, विद्यापति गीतशती (सम्पादन)।१९८७- उमानाथ झा (अतीत, कथा) पर मैथिलीक साहित्य अकादमी पुरस्कारसँ सम्मानित। ज़टाशंकर दास 1923-2006 प्रबोध नारायण सिंह 1924-2005 हिन्दी, संस्कृत, मैथिली, पाली एवं फारसीक विद्वान्। मिथिला, मैथिल एवं मैथिलीक ई अनन्य भक्त छथि । कलकत्ता रहि मिथिला दर्शन�, मैथिली कविता�, मैथिली रंगमंच� आदि पत्निकाक प्रकाशनक माध्यमसँ श्री प्रबोधजी मैथिलीक जे सेवा कएल अछि तकर वर्णन थोड़मे सम्भव नहि । अनेक बङला कृतिक ई अनुवाद सेहो कएल अछि ।हिन्दीमे सेहो हिनक �कविता संग्रह� प्रकाशित अछि ।कलकत्ता विश्वविद्यालयमे हिन्दीक पूर्व अध्यक्ष। २००२- डॉ. प्रबोध नारायण सिंह (पतझड़क स्वर- कुर्तुल ऐन हैदर, उर्दू) लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार। मदनेश्वर मिश्र 1924-2004 "एक छलीह महारानी" प्रकाशित। अमोघ नारायण झा "अमोघ" 1924- मुरलीधर सिंह, ब्रजमोहन ठाकुर, शुभंकर झा, मदनेश्वर मिश्र 1924-2004, ललित नारायण मिश्र, देवनाथ राय मतिनाथ मिश्र मतंग 1924- आनन्द मिश्र 1924-2007 डॉ. जयमन्त मिश्र १९२५-२०१० जन्म १५-१०-१९२५ मृत्यु ०७-०९-२०१०, गाम-ढंगा-हरिपुर-मजरही। १९९५- जयमन्त मिश्र (कविता कुसुमांजलि, पद्य) लेल साहित्य अकादेमी पुरस्कार- मैथिली। चन्द्रनाथ मिश्र अमर 1925- जन्म: खोजपुर, मधुबनी । वरिष्ठ कवि, कथाकार-उपन्यासकार । हास्य-व्यंग्यक कवितामे बेजोड़। मैथिलीक लेल समर्पित व्यक्तित्व । पांच दर्जनसं बेसी कथा आ विदागरी, वीरकन्या (उपन्यास) जल समाधि (कथा संग्रह) प्रकाशित ।१९८३- चन्द्रनाथ मिश्र �अमर� (मैथिली पत्रकारिताक इतिहास) लेल साहित्य अकादमी पुरस्कारसँ सम्मानित। एम. एल. एकेडमी, लहेरिरियासरायसं शिक्षकक रूपमे अवकाश प्राप्त। आशा दिशा, गुदगुदी, युगचक्र, उनटा पाल आदि कविता संग्रह प्रकाशित। १९९८- चन्द्रनाथ मिश्र �अमर� (परशुरामक बीछल बेरायल कथा- राजशेखर बसु, बांग्ला) लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार। चन्द्रनाथ मिश्र अमर २०१० मे मैथिली साहित्य लेल साहित्य अकादेमीक फेलो (भारत देशक सर्वोच्च साहित्यक पुरस्कार)। मुक्तिनाथ झा (1926-2009) शुभंकर झा 1926- दीनानाथ पाठक 'बन्धु' 1928-1962 अनंत बिहारी लाल दास "इन्दु" 1928-2010 २००७- अनन्त बिहारी लाल दास �इन्दु� (युद्ध आ योद्धा-अगम सिंह गिरि, नेपाली)लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार। कृष्णकान्त मिश्र १९२८-२००० जगदानन्द झा 1928- दुर्गानाथ झा "श्रीश" हिनकर जन्म मधुबनी जिलाक विट्ठो गाममे १९२९ ई. मे भेलन्हि। हिन्दी आ मैथिलीमे एम.ए. आ बी.एड. केलाक बाद किछु दिन स्कूलमे अध्यापन, फेर मिल्लत कॉलेज, लहेरियासरायमे मैथिली आ हिन्दी विभागक अध्यक्ष। मैथिली भाषामे पहिल पी.एच. डी.। "श्रीश" जीक मैथिलीमे प्रकाशित रचना अछि- "मैथिली साहित्यक इतिहास", "भुवन भारती" (सम्पादन), "महामत्स्य ओ मनु" (कविता), "नाट्य कथा सार"(सम्पादन), "पुरुषार्थ"(पद्य नाटक) आ अनेक कविता, एकांकी आ आलोचनात्मक निबन्ध। राजकमल चौधरी 1929-1967 महिषी, सहरसा। रचना:- आदि कथा, आन्दोलन, पाथर फूल (उपन्यास), स्वरगंधा (कविता संग्रह), ललका पाग (कथा संग्रह), कथा पराग (कथा संग्रह सम्पादन)। हिन्दीमे अनेक उपन्यास, कविताक रचना, चौरङ्गी (बङला उपन्यासक हिन्दी रूपान्तर) अत्यन्त प्रसिद्ध। विश्वनाथ झा "विषपायी" 1929-2005 "राम सुयश सागर" (मैथिली रामायण) १९८० ई. मे प्रकाशित। २५ जनवरी २००५ केँ मृत्यु। जयधारी सिंह 1929-2007 समीक्षक, कवि । प्रकाशन: बौद्धगानमे तांत्रिक सिद्धांत, समीक्षा शास्त्रा अदि । रामकृष्ण कॉलेज, मधुबनीमै मैथिली विभागक पूर्व अध्यक्ष । शैलेन्द्र मोहन झा 1929-1994 १९९२- शैलेन्द्र मोहन झा (शरतचन्द्र व्यक्ति आ कलाकार-सुबोधचन्द्र सेन, अंग्रेजी)लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार। विजयनाथ ठाकुर 1929-2008 रमेशचन्द्र वर्मा 1930- गोपालजी झा 'गोपेश' 1931-2008 जन्म मधुबनी जिलाक मेहथ गाममे १९३१ ई.मे भेलन्हि।हिनकर रचित �सोन दाइक चिट्ठी�, �गुम भेल ठाढ़ छी�, �एलबम� �आब कहू मन केहन लगैए�, "मखानक पात" प्रकाशित भेल जाहिमे सोनदाइक चिट्ठी बेश लोकप्रिय भेल।२००६ ई.-श्री गोपालजी झा गोपेश, मेंहथ, मधुबनी;यात्री-चेतना पुरस्कार। विवेकानन्द ठाकुर 1931- २००५- विवेकानन्द ठाकुर (चानन घन गछिया, पद्य)मैथिली लेल साहित्य अकादमी पुरस्कार। ताराकांत मिश्र 1931- ललित 1932-1983 जन्म स्थान बसैठ चानपुरा मधुबनी, बिहार । प्रसिद्ध कथाकार ओ उपन्यासकार । प्रकाशित कृति: प्रतिनिधि, (कथा संग्रह), पृथ्वी-पुत्र (उपन्यास) आदि। मुरारि मधुसूदन ठाकुर 1932- ताराशंकर बंदोपाध्यायक बंगला उपन्यास "आरोग्य निकेतन"क मैथिली अनुवाद लेल साहित्य अकादमीक अनुवाद पुरस्कार 1999 भेटल छन्हि। विद्यानारायण ठाकुर 1933- धूमकेतु 1932-2000 जन्म स्थान कोइलख, मधुबनी, बिहार । प्रसिद्ध कथाकार, उपन्यासकार ओ कवि । प्रकाशित कृति : दू टा कथा संग्रह ओ एक टा उपन्यास । राजमोहन झा 1934- जन्म स्थान कुमरबाजितपुर, वैशाली, बिहार । प्रख्यात कथाकार ओ संपादक । आइ काल्हि परसू (कथा-संग्रह) लेल १९९६ मे साहित्य अकादेमीसँ सम्मानित । प्रकाशित कृति : एक आदि एकांत, झूठ साँच, एकटा तेसर, अनुलग्नक, आइ काल्हि परसू (कथा संग्रह), गलतीनामा, भनहि विद्यापति, टीप्पणीत्यादि (आलोचना)। �आरम्भ� पत्रिकाक संपादन।प्रबोध सम्मान 2009 सँ सम्मानित। डॉ. धीरेन्द्र 1934-2004 जन्म स्थान लोहना, मधुबनी, बिहार । प्रसिद्ध कथाकार,उपन्यासकार ओ कवि । प्रकाशित कृति: कुहेस आ किरण, पझाइत घूरक आगि, शतरूपा ओ मनु अपन मन्दिर (कथासंग्रह) हैंगरमे टाँगल कोट, काल्हि ओ आइ (कविता संग्रह) सहित कैक विधामे विभिन्न पोथी। रमेश नारायण १९३४- २०११ नाम- रमेश नारायण दास, जन्म १५ मार्च १९३४ केँ मधुबनीक बहेरा गाममे। पिता-श्री हरिवल्लभ लाल दास। शिक्षा मधेपुर, मधुबनी आ पटनामे। १९६१ ई.सँ १९९४ ई. धरि ए.एन. कॉलेज, पटनामे हिन्दी विभागमे अध्यापन। पाथरक नाव (मैथिली कथा संग्रह, १९७२) प्रकाशित। मृत्यु १२ जनवरी २०११ केँ पटनामे। बाबू श्री सत्यनारायण सिंह आ राघवाचार्य मायानन्द मिश्र 1934- हिनक जन्म १७ अगस्त १९३४ ई. केँ सुपौल जिलाक बनैनियाँ गाममे भेलनि।भाङ्क लोटा, आगि मोम आ� पाथर आओर चन्द्र-बिन्दु- हिनकर कथा संग्रह सभ छन्हि। बिहाड़ि पात पाथर , मंत्र-पुत्र ,खोता आ� चिडै आ� सूर्यास्त हिनकर उपन्यास सभ अछि॥ दिशांतर हिनकर कविता संग्रह अछि। एकर अतिरिक्त सोने की नैय्या माटी के लोग, प्रथमं शैल पुत्री च,मंत्रपुत्र, पुरोहित आ� स्त्री-धन हिनकर हिन्दीक कृति अछि।१९८८- मायानन्द मिश्र (मंत्रपुत्र, उपन्यास)पर मैथिलीक साहित्य अकादमी पुरस्कारसँ सम्मानित। प्रबोध सम्मान 2007सँ सम्मानित। तारानन्द तरुण १९३५-२०११ सोमदेव 1934- उपन्यासकार ओ कवि । साहित्य अकादेमी पुरस्कारसँ सम्मानित । प्रकाशित कृति: चानोदाइ, होटल अनारकली (उपन्यास), काल ध्वनि (कविता संग्रह), चरैवेति (गीति नाट्य) सोम सतसइ (दोहा)।२००२- सोमदेव (सहस्रमुखी चौक पर, पद्य) लेल साहित्य अकादमी पुरस्कार। २००१ ई. - श्री सोमदेव, दरभंगा;यात्री-चेतना पुरस्कार, प्रबोध साहित्य सम्मान २०११। राजनन्दन लाल दास 1934- "कर्णामृतक"क सम्पादन। "चित्रा-विचित्रा" प्रकाशित। रमानन्द रेणु 1934-2011 जन्म स्थान उसमामठ, दरभंगा, बिहार । वरिष्ठ कवि, कथाकार ओ उपन्यासकार। साहित्य अकादेमी पुरस्कारसँ सम्मानित। प्रकाशित कृति: कचोट, त्रिकोण, अंतहीन आकाश (कथा-संग्रह), दूधफूल (उपन्यास), अंतत:, ओकरे नाम (कविता-संग्रह)। २०००- रमानन्द रेणु (कतेक रास बात, पद्य)लेल साहित्य अकादमी पुरस्कार। विदेह सम्पादकक समानान्तर साहित्य अकादेमी फेलो पुरस्कार २०११ (समग्र योगदान लेल) कालीकांत झा "बूच" 1934-2009 हिनक जन्म, महान दार्शनिक उदयनाचार्यक कर्मभूमि समस्तीपुर जिलाक करियन ग्राममे 1934 ई. मे भेलनि । पिता स्व. पंडित राजकिशोर झा गामक मध्य विद्यालयक प्रथम प्रधानाध्यापक छलाह । माता स्व. कला देवी गृहिणी छलीह । अंतरस्नातक समस्तीपुर काॅलेज, समस्तीपुरसँ कयलाक पश्चात् बिहार सरकारक प्रखंड कर्मचारीक रूपमे सेवा प्रारंभ कयलनि । बालहिं कालसँ कविता लेखनमे विषेश रूचि छल । मैथिली पत्रिका - मिथिला मिहिर, माटि - पानि, भाखा तथा मैथिली अकादमी पटना द्वारा प्रकाशित पत्रिकामे समय - समय पर हिनक रचना प्रकाशित होइत रहलनि । जीवनक विविध विधाकेँ अपन कविता एवं गीत प्रस्तुत कयलनि । साहित्य अकादमी दिल्ली द्वारा प्रकाशित मैथिली कथाक विकास (संपादक डाॅ बासुकीनाथ झा ) मे हास्य कथा कारक सूची मे डाॅ विद्यापति झा हिनक रचना ��धर्म शास्त्राचार्यक उल्लेख कयलनि । मैथिली अकादमी पटना एवं मिथिला मिहिर द्वारा प्रशंसा पत्र भेजल जाइत छल ।श्रृंगाररस एवं हास्य रसक संग-संग विचार मूलक कविताक रचना सेहो कयलनि । डाॅ दुर्गानाथ झा श्रीश संकलित मैथिली साहित्यक इतिहासमे कविक रूपमे हिनक उल्लेख कएल गेल अछि । प्रकाशित कृति (मृत्योपरांत) : कलानिधि- कविता-संग्रह। श्याम चन्द्र 1934- उपन्यास "रूपा दीदी" प्रकाशित। गाम मलंगिया, जिला- मधुबनी। डोरीलाल शर्मा "श्रोत्रिय" १९३५- "मिथिला की पाण्डित्य परम्परा" पोथी प्रकाशित। रामभद्र, धनुषा, नेपाल १९३५-२०२० साहित्य तथा अन्यान्य क्षेत्रक कतोक सफल व्यक्तिसभ अपन प्रेरणास्रोत आ पथ-प्रदर्शक मानैत छथि । मैथिली साहित्य-क्षेत्रमे हिनक परिचयक मादे एतबाए कहब पर्याप्त होएत जे मैथिलीक मूर्द्धन्य साहित्यकार डा. धीरेन्द्र हिनका मैथिली साहित्यक सर्वश्रेष्ठ कथाकार मानैत छथि ।हिनक कथामे प्रतीकात्मकताक अदभुत प्रयोगहिटा नहि, अपितु एकटा आदर्श कथाक समस्त वैशिष्टसभविद्यमान रहैत अछि । कथाकारक अतिरिक्त ई उत्कृष्ट समालोचक, नाटककार आ कवि सेहो छथि । नेपालमे मैथिलीक पहिल मोनोड्रामा लिखबाक श्रेय सेहो हिनका जाइत छनि ।सामाजिक कुरीतिसभकँ कुशलतासँ चित्रण करबामे, चिन्तनीय बनएबामे आ मन-मस्तिष्कपर अमिट छाप छोड़बामे रामभद्र सिद्धहस्त छथि । धनुषा जिलाक कुर्था गाममे जनमल रामभद्रक पूर्ण नाम रामभद्र कर्ण छनि । अग्ङरेजी विषयक अवकाशप्राप्त शिक्षक रामभद्र व्याकरण, पाठयपुस्तक आ सहायक पुस्तकसभ लिखबाक काजमे निरन्तर सक्रिय छथि। केदारनाथ चौधरी (१९३६-) मैथिलीक पहिल फिल्म 'ममता गाबय गीत' केर निर्माता द्वयमेसँ एकटा निर्माता छथि केदारनाथ चौधरी आ दोसर मदनमोहन दास। बादमे आर्थिक मजबूरीवश तेसर सहनिर्माता भेलखिन उदयभानु सिंह। माता-स्व. कुसुमपरी देवी, पिता- स्व. किशोरी चौधरी, जन्म: ०३/०१/१९३६ ग्रा.+पत्रा. नेहरा (दरभंगा), अन्य पारिवारिक सदस्य-पत्नी-श्रीमती कुमुद चौधरी, संतान- प्रथम पुत्री-श्रीमती किरण झा, द्वितीय पुत्री-श्रीमती अर्चना चौधरी, शिक्षा- १९५८ ई.मे अर्थशास्त्रमे स्नातकोत्तर, १९५९ ई.मे लॉ। १९६९ ई.मे कैलिफोर्निया वि.वि.सँ अर्थस्थास्त्र मे स्नातकोत्तर, १९७१ ई.मे मार्केटिंग एंड डिस्ट्रीब्यूशन विषयमे गोल्डेन गेट यूनिवर्सिटी, सानफ्रांसिस्को, USA सँ एम.बी.ए., १९७८ मे भारत आगमन। १९८१-८६ क बीच तेहरान आ प्रैंकफुर्तमे। फेर बम्बई, पुणे होइत रिटायरमेंटक बाद २००० सँ लहेरियासराय, दरभंगामे निवास।६ टा उपन्यास- चमेलीरानी २००४, करार २००६, माहुर २००८, अबारा नहितन २०१२, हीना २०१३, अयना २०१८. सम्मान- १) विदेह साहित्य सम्मान, बर्ख-२०१३ (झारखंड मैथिली मंच, राँची द्वारा), २) प्रबोध साहित्य सम्मान, बर्ख-२०१६ आ ३) केदार सम्मान, बर्ख-२०१६,'अबारा नहितन' लेल। जीवकांत 1936- नाम- जीवकान्त झा,पिता-गुणानन्द झा, माता-महेश्वरी देवी, जन्म-२५.०७.१९३६ अभुआढ़, जिला-सुपौल। नौकरी-विज्ञान शिक्षक (उ.वि.खजौली १९५७-८१), हिन्दी शिक्षक (उ.वि.डेओढ़ एवं उ.वि.पोखराम १९८१-९८)।पहिल रचना-इजोड़िया आ टिटही (कविता, जनवरी १९६५ मिथिला मिहिर)।पहिल छपल पोथी- दू कुहेसक बाट (उपन्यास १९६८)।नूतन पोथी-खिखिरक बीअरि (२००७ बाल पद्य कथा), अठन्नी खसलइ वनमे (पद्य-कथा संग्रह) आ पंजरि प्रेम प्रकासिया (जीवन-वृत्तक अंश)।पुरस्कार-साहित्य अकादेमी 1998 तकै अछि चिड़ै, पद्य , किरण सम्मान (१९९८), वैदेही सम्मान (१९८५)।प्रकाशित पोथी- कविता संग्रह:नाचू हे पृथ्वी (७१), धार नहि होइछ मुक्त (९१), तकैत अछि चिड़ै (९५), खाँड़ो (१९९६), पानिमे जोगने अछि बस्ती (९८), फुनगी नीलाकाशमे (२०००), गाछ झूल-झूल (२००४), छाह सोहाओन (२००६), खिखिरिक बीअरि (२००७) कथा-संग्रह:एकसरि ठाढ़ि कदम तर रे (७२), सूर्य गलि रहल अछि (७५), वस्तु (८३), करमी झील (९८) उपन्यास:दू कुहेसक बाट(६८), पनिपत(७७), नहि, कतहु नहि (७६), पीयर गुलाब छल (७१), अगिनबान (८१) हिन्दी अनुवाद- निशान्त की चिड़िया (तकैत अछि चिड़ै, साहित्य अकादमी, दिल्ली २००३)। प्रबोध सम्मान 2010 सँ सम्मानित। देवकांत झा 1936- डॉ अमरेश पाठक 1936- हिनक जन्म सीतामढ़ी जिलाक अन्तर्गत सामारि ग्राममे १९३६ मे भेलन्हि । १९५७ मे पटना विश्वविद्यालयसँ मैथिलीक एम. ए. परीक्षामे प्रथम श्रेणीमे प्रथमस्थान पाओल । १९५७ सँ १९६० धरि रामकृष्ण महाविद्यालय, मधुबनीमे व्याख्याता रूपेँ तकरा बाद पटना विश्वविद्यालयमे व्याख्याता रूपमे कार्य करए लगलाह । पटना विश्वविद्यालयमे मैथिली विभागाध्यक्ष रूपेँ । मैथिली उपन्यासक आलोचनात्मक अध्ययन� शोध प्रबन्धपर हिनका बिहार विश्व-विद्यालय द्वारा डि. लिट्क उपाधि भेटलन्हि । ई शोध प्रबन्ध पुस्तकाकार रूपेँ सेहो प्रकाशित भेल अछि बिहार राष्ट्रभाषा परिषदक विद्यापति ग्रन्थावलीक सम्पादक मण्डलक सदस्य । हिनक अन्य प्रकाशित रचना अछि �निबन्ध संकलन� । एकरा छोड़ि विभित्र पत्न-पत्निकामे हिनक कतेको निबन्ध प्रकाशित छन्हि । मैथिली अकादमी द्वारा प्रकाशित कथा-संग्रहक इहो एक सम्पादक छथि । ई अधिकतर उच्च स्तरीय आलोचनात्मक निबन्ध लिखैत छथि । २०००- डॉ. अमरेश पाठक, (तमस- भीष्म साहनी, हिन्दी)लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार। बलराम 1936-2008 जन्म स्थान पचही, मधुबनी, बिहार । विशिष्ट कथाकार । प्रकाशित कृति : दकचल देबाल (कथा-संग्रह)। मैथिलीपुत्र प्रदीप 1936- ग्राम- कथवार, दरभंगा। प्रशिक्षित एम.ए., साहित्य रत्न, नवीन शास्त्री, पंचाग्नि साधक। हिनकर रचित "जगदम्ब अहीं अवलम्ब हमर" आ "सभक सुधि अहाँ लए छी हे अम्बे, हमरा किए बिसरै छी यै" मिथिलामे लेजेंड भए गेल अछि। रामदेव झा 1936- कथाकर, समीक्षक, अनुवादक, ग्रंथ सम्पादक । साहित्य अकादेमीक मूल एवं अनुवाद पुरस्कार प्राप्त कर्त्ता ल. ना. मिथिला विश्वविद्यालय दरभंगाक मैथिली विभागक पूर्व प्राचार्य । प्रकाशन: पसिझैत पाथर, (अनु.) आदि । १९९१- रामदेव झा (पसिझैत पाथर, एकांकी)लेल साहित्य अकादमी पुरस्कारसँ सम्मानित ।१९९४- रामदेव झा (सगाइ- राजिन्दर सिंह बेदी, उर्दू) लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार। रवीन्द्र नाथ ठाकुर 1936- जन्म पूर्णिञा जिलाक धमदाहा ग्राममे 1936 ई. मे भेलन्हि । नेने अवस्थासँ गीत गएबामे एवं कविता लिखबामे विशेष रुचि । कोनो मंच पर ठाढ़ भेला पर ई सहजहि श्रीताकेँ आह्लादित करैत छथि । हिनक सात गोट मैथिलीक गीत संग्रह, एक मिनी महाकाव्य, एक प्रयोगधर्मी काव्य, एक उपन्यास, एक नाटक �एक राति� एवं एक हिन्दी नाटक, प्रकाशित भेल छन्हि । बिनोद बिहारी वर्मा 1937-2003 मैथिल करण कायस्थक पाँजिक सर्वेक्षण, बलानक बोनिहार ओ पल्लवी तथा अन्य कथा (कथा संग्रह) वीरेन्द्र मल्लिक 1937- जन्म- 3 जनबरी 1937 ई. परसौनी, मधुबनीमे।कवि, सम्पादक, समीक्षक । आखर, अगनिपत्रक सम्पादन ।अग्नि-शिखा (कविता संग्रह)। कीर्तिनारायण मिश्र 1937- जन्म १७ जुलाई १९३७ ई. केँ ग्राम शोकहारा (बरौनी), जिला बेगूसरायमे भेलन्हि। हुनकर प्रकाशित कृति अछि सीमान्त,महानगर (दीर्घ कविता), हम स्तवन नहि लिखब, ध्वस्त होइत शांति स्तूप (एहि पोथीपर साहित्य अकादमी 1997 पुरस्कार), आदमीकेँ जोहैत (कविता संग्रह)। संस्मरण-अपन एकांतमे, स्मृति यात्रा, पत्रक दर्पणमे। सम्पादन- आखर मासिक पत्रिका, आधुनिक मैथिली साहित्य, '63, राजकमल जीवन आ साहित्य, '68, कथा-संकलन- काल कोठरी। आलोचना- अर्थांतर-2004 गौरीकांत चौधरीकांत 1937-2001 युगल किशोर मिश्र १९३८-२००७ मैथिली शब्दकोष। प्रफुल्ल कुमार सिंह 'मौन' 1938- ग्राम+पोस्ट- हसनपुर, जिला-समस्तीपुर।मैथिलीमे १.नेपालक मैथिली साहित्यक इतिहास(विराटनगर,१९७२ई.), २.ब्रह्मग्राम(रिपोर्ताज दरभंगा १९७२ ई.), ३.�मैथिली� त्रैमासिकक सम्पादन (विराटनगर,नेपाल १९७०-७३ई.), ४.मैथिलीक नेनागीत (पटना, १९८८ ई.), ५.नेपालक आधुनिक मैथिली साहित्य (पटना, १९९८ ई.), ६. प्रेमचन्द चयनित कथा, भाग- १ आऽ २ (अनुवाद), ७. वाल्मीकिक देशमे (महनार, २००५ ई.)।२००४- डॉ. प्रफुल्ल कुमार सिंह �मौन� (प्रेमचन्द की कहानी-प्रेमचन्द, हिन्दी) लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार। महेश्वरनाथ मल्लिक 1938- परशुराम झा १९३८- गाम- मेंहथ (मधुबनी), कृति- डाइमेन्शन्स ऑफ पीस इन इन्गलिश ड्रामा,क्रिश्चियन पोएटिक ड्रामा। कुलानन्द मिश्र 1940-2000 जन्म पकड़ी कोठी, सीतामढ़ी, बिहार। सुविख्यात कवि,, संपादक, समालोचक। प्रकाशित कृति- तावत एतबे, भोरक प्रतीक्षामे (कविता संग्रह), भारतक भाषा सर्वेक्षण, पारो, राजकमल चौधरी की ग्यारह कहानियाँ (अनुवाद)। बिलट पासवान 'विहंगम' 1940- जन्म मधुबनी जिलाक एकहत्था ग्राममे १९४० ई. मे भेलन्हि। फजलुर रहमान हासमी 1940-2011 जन्म-पटना जिलाक बराह गाममे। वृत्ति अध्यापक। हिन्दी कविता संग्रह "रश्मि राशि" आ मैथिली कविता संग्रह "निर्मोही" प्रकाशित। १९९६मे अबुलकलाम आजाद- अब्दुलकवी देसनवी, उर्दूसँ मैथिली अनुवादपर साहित्य अकादमीक मैथिली अनुवाद पुरस्कार। गुणनाथ झा गुणनाथ झा "लोक मञ्च" मैथिली नाट्य पत्रिकाक संचालन- सम्पादन केने छथि। मैथिलीमे आधुनिक नाटकक प्रणयन। हुनकर नाटक सभ अछि: मधुयामिनी: एकाङ्क नाट्य शैलीमे दूटा पात्र, पुरुष संयुक्त परिवारक पक्ष लेनिहार आ स्त्री तकर विरोधी। पाथेय: एकाङ्क नाट्य शैलीमे रचित, मुदा पूर्णाङ्कक सभ विशेषता ऐमे भेटत। मुख्य अभिनेता मिथिलाक अधोगतिसँ दुखी भऽ गामकेँ कर्मस्थली बनबैत छथि, स्वजन विरोध करै छथि। लाल-बुझक्कर: एकाङ्क नाट्य शैलीमे रचित। दाही रौदीसँ झमारल निम्न आ मध्य-निम्न वर्ग स्वतंत्रताक पहिनहियो आ बादो जीविकोपार्जन लेल प्रवास करबा लेल अभिशप्त छथि। सातम चरित्र: एकाङ्क नाट्य शैलीमे रचित। मैथिली रंगमंचपर महिला अभिनेत्रीक अभाव, सातम चरित्रक प्रतीक्षामे पूर्वाभ्यास खतम भऽ जाइत अछि। शेष नञि: आधुनिक सामाजिक पूर्णाङ्क नाटक। पिता-माताक मृत्युक बाद अग्रजक अनुजक प्रति पितृवत व्यवहार। आजुक लोक: पूर्णाङ्क नाटक। विषय निम्नमध्यवर्गीय बेरोजगारी आ बियाहक दायित्वक बोझ। जय मैथिली: पूर्णाङ्क नाटक। मिथिलाक भाषिक-सांस्कृतिक समस्या एकर कथावस्तु अछि। महाकवि विद्यापति: विद्यापतिक नव विश्लेषण। प्रभास कुमार चौधरी 1941-1998 गाम- पिंडारुछ, जिला- दरभंगा ।प्रख्यात कथाकार ओ उपन्यासकार । प्रभासक प्रकाशित कृति : कथा-प्रभास, प्रभासक कथा, नव घर उठय पुरान घर खसय, दिदवल (कथासंग्रह), अभिशप्त, युगपुरुष, हमरा लग रहब, नवारम्भ, राजा पोखरिमे कतेक मछरी (उपन्यास) । विभिन्न महत्वपूर्ण पत्रिकाक सम्पादन । त्रैमासिक कथा गोष्ठी 'सगर राति दीप जरय' केर प्रारम्भ।१९९०- प्रभास कुमार चौधरी (प्रभासक कथा, कथा) लेल साहित्य अकादमी पुरस्कारसँ सम्मानित । साकेतानन्द 1940- वरिष्ठ कथाकार, गणनायक (कथा-संग्रह) लेल साहित्य अकादेमी पुरस्कारसँ सम्मानित। प्रकाशित कृति: मैथिली कथा साहित्यमे 1962 स� सक्रिय । गोडेक चालिस_पचास टा कथा, रिपोर्ताज. संस्मरण, यात्रा_विवरण मैथिलीमे प्रकाशित अधिकांश पत्र_पत्रिकामे छपल । पहिल मैथिली कथा �ग्लेसियर� 1962मे �मिथिलामिहिर�मे प्रकाशित । हिन्दियोमे दू दर्जन कथा आदि प्रकाशित । सन 99मे छपल पहिल कथा_संग्रह �गणनायक� के ओही वर्ष �साहित्य अकादमी पुरस्कार। पैघ बान्ध� स� अबैबला विपत्तिके रेखांकित करैत, पर्यावरण के कथा वस्तु बना क� राजकमल प्रकाशन स� प्रकाशित एवं अत्यंत चर्चित उपन्यास (�डौकूमेंट्री फिक्शन�) �सर्वस्वांत� ।आकाशवाणीक राष्ट्रीय कार्यक्रममे प्रसारित दू टा उल्लेखनीय वृत्त रूपक_ �महानन्दा अभयारण्य� पर आधारित �जंगल बोलता है� एवं झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रक ज्वलंत डाइनक समस्या पर आधारित वृत्तरूपक � नैना जोगन � चर्चित एवं प्रसिद्ध । गंगेश गुंजन 1942- जन्म स्थान- पिलखबाड़, मधुबनी।श्री गंगेश गुंजन मैथिलीक प्रथम चौबटिया नाटक बुधिबधियाक लेखक छथि आ हिनका उचितवक्ता (कथा संग्रह) क लेल साहित्य अकादमी पुरस्कार भेटल छन्हि। एकर अतिरिक्त्त मैथिलीमे हम एकटा मिथ्या परिचय, लोक सुनू (कविता संग्रह), अन्हार- इजोत (कथा संग्रह), पहिल लोक (उपन्यास), आइ भोर (नाटक)प्रकाशित। हिन्दीमे मिथिलांचल की लोक कथाएँ, मणिपद्मक नैका- बनिजाराक मैथिलीसँ हिन्दी अनुवाद आ शब्द तैयार है (कविता संग्रह)।१९९४- गंगेश गुंजन (उचितवक्ता, कथा)पुस्तक लेल सहित्य अकादेमी पुरस्कारसँ सम्मानित । प्रेमशंकर सिंह 1942- ग्राम+पोस्ट- जोगियारा, थाना- जाले, जिला- दरभंगा।मौलिक मैथिली: १.मैथिली नाटक ओ रंगमंच,मैथिली अकादमी, पटना, १९७८ २.मैथिली नाटक परिचय, मैथिली अकादमी, पटना, १९८१ ३.पुरुषार्थ ओ विद्यापति, ऋचा प्रकाशन, भागलपुर, १९८६ ४.मिथिलाक विभूति जीवन झा, मैथिली अकादमी, पटना, १९८७५.नाट्यान्वाचय, शेखर प्रकाशन, पटना २००२ ६.आधुनिक मैथिली साहित्यमे हास्य-व्यंग्य, मैथिली अकादमी, पटना, २००४ ७.प्रपाणिका, कर्णगोष्ठी, कोलकाता २००५, ८.ईक्षण, ऋचा प्रकाशन भागलपुर २००८ ९.युगसंधिक प्रतिमान, ऋचा प्रकाशन, भागलपुर २००८ १०.चेतना समिति ओ नाट्यमंच, चेतना समिति, पटना २००८। २००९ ई.-श्री प्रेमशंकर सिंह, जोगियारा, दरभंगा यात्री-चेतना पुरस्कार। मार्कण्डेय प्रवासी 1942-2010 जन्म ग्राम: गरुआर, जिला: समस्तीपुर । प्रकाशित कृति: अगस्त्यायिनी (महाकाव्य); एतदर्थ (कविता संग्रह), अक्षर चेतना (काव्य संग्रह)। अभियान, हम कालिदास (उपन्यास)। �अगस्त्यायिनी� लेल १९८१मे साहित्य अकादेमी पुरस्कार प्राप्त। देवेन्द्र झा १९४३- गाम- चानपुरा (मधुबनी), कृति- विद्यापतिक श्रृंगारिक पदक काव्यशास्त्रीय अध्ययन, लालदास, सुधाकर झा "शास्त्री", अनुभव, बदलि जाइछ घरे टा। डॉ. भीमनाथ झा 1945- जन्म:कोइलख, मधुबनी, बिहार । प्रखर कवि, समालोचक, प्राध्यापक । �विविधा�निबन्ध पुस्तक लेल सन् १९९२मे सहित्य अकादेमी पुरस्कारसँ सम्मानित । प्रकाशित कृति: त्रिधारा, वीणा, की फुरैए की नहि, नाम तँ थिक ओएह (कविता संकलन), परिचायिका, सीताराम झा, कवि चूड़ामणिक काव्य साधना, विविधा (निबंध, आलोचना),टावर चौकसँ आदि । महेन्द्र मलंगिया 1946- गाम- मलंगिया, जिला- मधुबनी । मैथिलीक सुपरिचित नाटककार, रंग निर्देशक एवं मैलोरंगक संस्थापक अध्यक्ष । लोक साहित्य पर गंभीर शोध आलेख । मैथिलीमे 13टा नाटक, 19टा एकांकी, 14टा नुक्कड़ आ 10टा रेडियो नाटक प्रकाशित आ आकाशवाणी सँ प्रसारित । सीनियर फेलोशिप (भारत सरकार), इंटरनेशनल थिएटर इंस्टिच्यूट (नेपाल), प्रबोध साहित्य सम्मान आदि सँ सम्मानित । संप्रति ज्योतिरीश्वर लिखित मैथिलीक प्रथम पुस्तक वर्णरत्नाकर पर शोध कार्य । श्री महेन्द्र मलगियाक जन्म २० जनबरी १९४६ मे मधुबनी जिलाक मलंगिया गाममे भेलन्हि। मलंगियाजी मैथिली हिन्दी, अंग्रेजी आ नेपाली भाषाक जानकार आ थियेटर शिक्षण, पटकथा लेखन आ तत्सम्बन्धी शोधक फ्रीलान्स शिक्षक छथि।२००२ ई.- श्री महेन्द्र मलंगिया, मलंगिया;यात्री-चेतना पुरस्कार। प्रबोध सम्मान 2005 सँ सम्मानित। डॉ राम दयाल राकेश, सर्लाही, नेपाल 1942- मैथिली मातृभाषा, हिन्दीक प्राध्यापक आ नेपालीक लेखक ई तीनू भाषा �राकेश�क व्यक्तित्वमे एना ने मिझराएल छैक जे कोनहुसँ हिनका भिन्न नहि कएल जा सकैत अछि । ई विशेषत: नेपालीमे लिखैत छथि, मुदा लेखनक विषय मूलत: मैथिलीए संस्कृति रहैत छनि । ओना मैथिली, हिन्दी आ अग्ङरेजीमे सेहो ई अनेक रचना कएने छथि ।नेपालक राजकीय-प्रज्ञा-प्रतिष्ठानक सदस्य �राकेश� दिल्ली विश्वविद्यालयसँ पीएचडी आ अमेरिकास्थित इण्डियाना यूनिभर्सिटीसँ पोस्ट डाक्टरल रिसर्च कएने छथि । डा. �राकेश�क जन्म २५ जुलाइ १९४२ ई. कऽ सर्लाही जिलाक सिसौटियामे भेल छनि । नेपाली, मैथिली, हिन्दी आ अग्ङरेजीमे मौलिक, सम्पादित आ अनूदित कऽ करीब दू दर्जन पोथी प्रकाशित , दर्जनभरि देशक भ्रमण सेहो कएने छथि । नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानक सदस्यता- श्री राम दयाल राकेश (1999)। उपेन्द्र दोषी 1943-2001 जन्म स्थान रामपुर-कोरिगामा, दरभंगा । कवि-कथाकार, गीत-गजलकार । प्रकाशित कृति: यंत्रणाक क्षणमे (कविता संग्रह)। हिन्दीमे अनेक पोथी प्रकाशित। ओड़ियासँ मैथिली अनुवाद हेतु मृत्युपरान्त साहित्य अकादेमीसँ पुरस्कृत। २००३- उपेन्द दोषी (कथा कहिनी- मनोज दास, उड़िया) लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार। उदयचन्द्र झा "विनोद" 1943- जन्म 5 अप्रैल 1943 ई.। गाम- रहिका, मधुबनी । जन्म-ग्राम- दुलहा, मधुबनी । प्रकाशित कृति: संक्रान्ति, मौसम अयला पर, एहना स्थितिमे, भरि देह गौरा, एहि जनपदमे, दोहा तीन सय दू, कहलनि पत्नी, सहरजमीन, अपक्ष, प्रश्नवाचक (कविता-संग्रह), धूरी (सहयोगी कविता संग्रह); जाँत (कथा संग्रह), उदास गाछक वसंत (नाटक)। �माटि पानि�क वरेण्य सम्पादक।२००५ ई.-श्री उदय चन्द्र झा �विनोद�, रहिका, मधुबनी;यात्री-चेतना पुरस्कार। रेवती रमण लाल, जनकपुर 1943- मंत्रेश्वर झा 1944- जन्म ६ जनवरी १९४४ ई.ग्राम-लालगंज, जिला-मधुबनीमे। प्रकाशित कृति: खाधि, अन्चिनहार गाम, बहसल रातिक इजोत (कविता संग्रह); एक बटे दू (कथा संग्रह), ओझा लेखे गाम बताह (ललित निबन्ध)। मैथिली कथा संग्रहक हिन्दी अनुवाद �कुंडली� नामसँ प्रकाशित। दि फूल्स पैराडाइज (अंग्रेजीमे ललित निबन्ध)। २००८ ई.-श्री मंत्रेश्वर झा, लालगंज,मधुबनी यात्री-चेतना पुरस्कार। २००८- मंत्रेश्वर झा (कतेक डारि पर, आत्मकथा) पर साहित्य अकादमी पुरस्कार। रत्नेश्वर मिश्र 1945- अनुवादक, निबंधकार । प्रकाशन: तमिल साहित्यक इतिहास,भवभूति (दुनू अनुवाद)। जगदीश प्रसाद मंडल गाम-बेरमा, तमुरिया, जिला-मधुबनी। एम.ए.।कथाकार (गामक जिनगी-कथा संग्रह आ तरेगण- बाल-प्रेरक लघुकथा संग्रह), नाटककार(मिथिलाक बेटी-नाटक), उपन्यासकार(मौलाइल गाछक फूल, जीवन संघर्ष, जीवन मरण, उत्थान-पतन, जिनगीक जीत- उपन्यास)। मार्क्सवादक गहन अध्ययन। हिनकर कथामे गामक लोकक जिजीविषाक वर्णन आ नव दृष्टिकोण दृष्टिगोचर होइत अछि। विदेह सम्पादकक समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार २०११ मूल पुरस्कार- श्री जगदीश प्रसाद मण्डल (गामक जिनगी, कथा संग्रह)।मैथिली उपन्यास 'पंगु' लेल साहित्य अकादमी पुरस्कार २०२१ राज महाराजाधिराज लक्ष्मीश्वर सिंह 1858-1898 महाराजाधिराज रमेश्वर सिंह 1860-1929 महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह 1907-1962 सर हरगोविन्द मिश्र, अलीगढ़ आ कामेश्वर सिंह बिनोदानन्द झा 1895-1971 ललित नारायण मिश्र 1922-1975 डॉ. रामबरन यादव, नेपाल राष्ट्रपति स्वर्गीय विन्ध्येश्वरी प्रसाद मंडल, राजनेता 1919-1982 भूपेन्द्र नारायण मण्डल कर्पूरी ठाकुर 1921-1988 रामविलास पासवान १९४६- जन्म ५ जुलाइ १९४६, गाम- शहरबन्नी, जिला खगड़िया। भारतीय राजनीतिज्ञ। राम लषण राम "रमण" भोगेन्द्र झा चतुरानन मिश्र रमाकांत मिश्र रमानाथ मिश्र "मिहिर" "मैथिली मुहावरा एवम् लोकोक्ति प्रकाश" प्रकाशित। गजेन्द्र नारायण चौधरी, पत्रकार 1929-2008 मोहन भारद्वाज 1943- गाम- नवानी, जिला- मधुबनी । मैथिलीक प्रखर समालोचक।२००७ ई.-श्री आनन्द मोहन झा, भारद्वाज, नवानी, मधुबनी;यात्री-चेतना पुरस्कार। प्रबोध सम्मान 2008 सँ सम्मानित। योगानन्द झा 1955- २००५- डॉ. योगानन्द झा (बिहारक लोककथा- पी.सी.राय चौधरी, अंग्रेजी)लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार। प्रकाशित कृति: लोकजीवन ओ लोक साहित्‍य (निबन्‍ध) 1986, परिणीता (कथाकव्‍यांश) 1987, फकीर मोहन सेनापति (अनुवाद) 2000, आलेख सञ्चयन (निबन्‍ध) 2002, बिहारक लोककथा (अनुवाद) 2003, स्‍नेहलता (विनिबन्ध) 2006, मैथिली पत्रकारिताकेँ सौ वर्ष (निबन्‍ध) 2006, गहबरगीत (निबन्‍ध) 2007, लोक-साहित्‍य ओ शब्‍द-सम्‍पदा (निबन्‍ध) 2007, मैथिलीक पारम्‍परिक जातीय व्‍यवसायक शब्‍दावली (शोघ-ग्रन्‍थ) 2009 हीरानन्द झा "शास्त्री" ,पत्रकार दीनानाथ झा, पत्रकार नरेन्द्र झा, अर्थशास्त्र-पत्रकार "विकास ओ अर्थतंत्र" प्रकाशित। प्रेमशंकर झा, पत्रकार शरदिन्दु चौधरी, पत्रकार राजेश्वर झा (१९२३-१९७७) जन्म- सहरसा जिलाक रसुआर गाम (आब सुपौल जिला)। कृति- मिथिलाक्षरक उद्भव ओ विकास, अवहट्ठ: उद्भव ओ विकास, मैथिली साहित्यक आदिकाल, विद्यापतिक संगीतमे वर्णित नायक-नायिका भेद एवं राग-रागिनी वर्गीकरण। महाकवि विद्यापति नाटक, शास्त्रार्थ नाटक, कन्दर्पीघाट नाटक, एकादशी, विद्याधर-कथा, उर्वशी, धर्मव्याध- कथा, मेनका। एस.एन.सत्यार्थी मिथिलाक कला आ शिल्पकलापर लेखन। राधाकृष्ण चौधरी, इतिहासकार 1921-1985 मिथिलाक इतिहास, A Survey of Maithili Literature, THE POLITICAL AND CULTURALHERITAGE OF MITHILA प्रकाशित। प्रो. रामशरण शर्मा १९२०-२०११ विजयकान्त मिश्र इतिहासकार 1927-1994 डॉ. विजयकांत मिश्रक जन्म १० अगस्त १९२७ मंगरौनी गाम - जे नव्य न्याय आ तांत्रिक साधनाक जन्म-स्थली अछि- (जिला मधुबनी) मे भेलन्हि। ओ 1948 मे प्राचीन भारतीय इतिहास आ संस्कृति विषयमे एलाहाबाद विश्वविद्यालयसँ सनात्तकोत्तर उपाधि कएलाक बाद कतेक बरख धरि बिहार सरकार आ पटना विश्वद्यालयसँ सम्बद्ध रहलाह आ 1957 ई. सँ भारतीय पुरात्तत्व विभागमे काज कएलन्हि आ ओकर शिशुपालगढ़, कौशाम्बी, वैशाली, हस्तिनापुर, कुम्हरार, पाटलिपुत्र, करियन, सोनपुर, बिलावली, नालन्दा, राजगीर, चन्द्रवल्ली, आ हम्पी खुदाइमे विभिना भूमिकामे भाग लेलन्हि।हिनकर लिखल-सम्पादित पोथी सभमे अछि: 1.वैशाली,1950 2.कुम्हरार एक्सकेवेशंस: 1950-1957 3.पुरातत्व की दृष्टिमे वैशाली 4.नागेश भट्टाज पारिभाषेन्दुशेखर 5.मिथिला आर्ट एण्ड आर्किटेक्चर (सम्पादित) 6.कल्चरल हेरिटेज ऑफ मिथिला 7.श्रृंगार भजनावली- एक अध्ययन 8.क्षेत्र पुरातत्वविज्ञान- 9.पुरातत्व शब्दावली। द्विजेन्द्र नारायण झा, इतिहासकार सुरेश्वर झा, राजनीति विज्ञान २००१- सुरेश्वर झा (अन्तरिक्षमे विस्फोट- जयन्त विष्णु नार्लीकर, मराठी)लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार। भागीरथ लाल दास भारतक कएक देशमे राजदूत रहल छथि आ जी.ए.टी.टी. मे भारतक प्रतिनिधि सेहो छलाह। लक्ष्मीकान्त झा रिजर्व बैंक गवर्नर 1913-1988 एन. एन. झा डिप्लोमेट कामेन्द्रनाथ झा "अमल" 1938- जन्म- 4 जनवरी 1938, गाम कोइलख (मधुबनी)। ग्रिभांस (कथासंग्रह) प्रकाशित। भाग्यनारायण झा 1941- रमाकांत राय "रमा" 1947 जन्‍म- भादो पूर्णिमा सम्‍वत् 2003, प्रथम रचना- बटुक, बाल मासिक प्रयाग, कथा वि‍शेषांक द्वि‍तीय भागमे 1964ई., प्रकाशि‍त कृति‍(क) ती‍नटा बाबाजी-(रूसीसँ मैथि‍लीमे मैथि‍लीमे टाल्‍स्‍टायक कथाक अनुवाद-1967ई.मे, (ख) फूलपात, कवि‍ता संग्रह 1978, (ग) भांगक गोला (2004 ई.मे), (घ) कटैत पाँखि‍: हँसैत आँखि‍, कथा संग्रह-2005, शीघ्र प्रकाश्‍य- कृष्‍णकान्‍त मि‍श्र (विनि‍बन्‍ध) साहि‍त्‍य अकादेमी नई दि‍ल्‍ली। प्राय: डेढ़ सए रचना (कथा-नि‍बन्‍ध कवि‍ता) मैथि‍ली हि‍न्‍दीक पत्र-पत्रि‍का, आकाशवाणी एवं दूरदर्शनसँ प्रकाशि‍त/ प्रसारि‍त। साहि‍त्‍य अकादेमी द्वारा आयोजि‍त कवि‍ सम्‍मेलनक आयोजनक क्रममे रेलक चपेटमे पड़ि‍दहि‍ना पएर छाबा धरि‍गमा वि‍कलांग। सेवा नि‍वृत अध्‍यापक (उच्‍च वि‍द्यालय) सम्‍पर्क- श्री रमानि‍वास, मानाराय टोल पो. नरहन (समस्‍तीपुर)। प्रोफेसर महेन्द्र 1947- जन्म: भेलाही, सुपौल, बिहार । प्रसिद्ध कवि, कथाकार, आलोचक । वृत्ति: भू.ना. विश्वविद्यालयक स्नातकोत्तर केन्द्र, सहरसामे मैथिली विभागाध्यक्ष। प्रकाशित कृति साहित्य अकादेमीसँ प्राकाशित मोनोग्राफ शैलेन्द्र मोहन झा । सहयोगी संकलन-संकल्प । �राजकमल जयन्ती प्रसंगक संपादन। महेन्द्र 1944-2009 जन्म मधुबनी जिलाक जमसम गाममे। प्रसिद्ध मैथिली गीतकार आ गायक। सुभाषचन्द्र यादव 1948- जन्म ०५ मार्च १९४८, मातृक दीवानगंज, सुपौलमे। पैतृक स्थान: बलबा-मेनाही, सुपौल।घरदेखिया (मैथिली कथा-संग्रह), मैथिली अकादमी, पटना, १९८३, हाली (अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद), साहित्य अकादमी, नई दिल्ली, १९८८, बीछल कथा (हरिमोहन झाक कथाक चयन एवं भूमिका), साहित्य अकादमी, नई दिल्ली, १९९९, बिहाड़ि आउ (बंगला सँ मैथिली अनुवाद), किसुन संकल्प लोक, सुपौल, १९९५, भारत-विभाजन और हिन्दी उपन्यास (हिन्दी आलोचना), बिहार राष्ट्रभाषा परिषद्, पटना, २००१, राजकमल चौधरी का सफर (हिन्दी जीवनी) सारांश प्रकाशन, नई दिल्ली, २००१, बनैत-बिगड़ैत (कथा-संग्रह) २००९। मैथिलीमे करीब सत्तरि टा कथा, तीस टा समीक्षा आ हिन्दी, बंगला तथा अंग्रेजी मे अनेक अनुवाद प्रकाशित। सुभद्र झा 1909-2000 "फॉर्मेशन ऑफ मैथिली लैंगुएज"क लेखक। १९८६- सुभद्र झा (नातिक पत्रक उत्तर, निबन्ध)पर मैथिलीक साहित्य अकादमी पुरस्कारसँ सम्मानित। रामावतार यादव, मैथिली भाषिकी, नेपाल 1942- देश-विदेशक भाषाविज्ञान जर्नलमे पचासो आलेखक द्वारा मैथिलीक विशिष्टताकेँ उजागर केनिहार। मैथिली ध्वनिशास्त्र 1984 ई. मे जर्मनीसँ आ मैथिलीक सन्दर्भ व्याकरण 1996 ई. मे बर्लिन आ न्यूयार्कसँ प्रकाशित। 2000 ई..मे लंदनसँ प्रकाशित भारतीय आर्यभाषा पुस्तक मे संकलित हिनकर मैथिली भाषा संबंधी आलेख विशेष उल्लेखनीय। नेपाल राजकीय प्रज्ञा-प्रतिष्ठानसँ पासाङ ल्हामु प्रज्ञा-पुरस्कारसँ सम्मानित। योगेन्द्र प्रसाद यादव, भाषिकी,सिरहा, नेपाल 1946- 1998 ई. मे जर्मनीसँ प्रकाशित इशुज इन मैथिली सिंटैक्स आ टॉपिक्स इन नेपालीज लिग्विस्टिक्स, रीडिंग्स इन मैथिली लंगुएज- लिटरेचर एण्ड कल्चर आ लेक्सीग्राफी इन नेपाल (सम्पादित) प्रकाशित। नेपाल राजकीय प्रज्ञा-प्रतिष्ठानमे भाषा-विभागक प्राज्ञ रहि कतोक महत्वपूर्ण कार्यक सम्पादन। नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानक सदस्यता श्री योगेन्द्र प्रसाद यादव (1994)। नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान आजीवन सदस्यता श्री योगेन्द्र प्रसाद यादव। रमानन्द झा 'रमण' 1949- जन्म: 02 जनबरी 1949, शिक्षा-एम.ए., पीएच.डी., आजीविका-भारतीय रिजर्व बैंक, पटना (सेवा निवृत्त)। प्रकाशन: 1. नवीन मैथिली कविता,1982, 2. मैथिली नऽव कविता,1993, 3. मैथिली साहित्य ओ राजनीति, 1994, 4. अखियासल, 1995, 5. बेसाहल,2003, 6. भजारल, 2005., 7. निर्यात कैसे शुरू करें? हिन्दी- रिजर्व बैंक, पटनाक प्रकाशन सम्पादित 8. मैथिलीक आरम्भिक कथा, 1978 समीक्षा, 9. श्यामानन्द रचनावली, 1981, 10. जनार्दन झा जनसीदन कृत निर्दयीसासु (1914) आ पुनर्विवाह (1926), 1984, 11. चेतनाथझाकृत श्रीजगन्नाथपुरी यात्रा (1910), 1994, 12. तेजनाथ झाकृत सुरराजविजय नाटक (1919), 1994, 13. रासबिहारीलाल दासकृत सुमति (1918), 1996, 14. जीबछ मिश्रकृत रामेश्वर (1916), 1996, 15. भेटघॉंट (भेटवार्ता), 1998, 16. रूचय तँ सत्य ने तँ फूसि, 1998, 17. पुण्यानन्द झाकृत मिथिला दर्पण (1925), 2003, 18. यदुवर रचनावली (1888-1934) 2003, 19. श्रीवल्लभ झा (1905-1940) कृत विद्यापति विवरण, 2005, 20. मैथिली उपन्यासमे चित्रित समाज, 2003। अनुवाद लेल भाषा-भारती सम्मान 2004-05 (सी.आइ.आइ.एल., मैसूर) छओ बिगहा आठ कट्ठा- फकीर मोहन सेनापतिक ओड़िया उपन्यासक मैथिली अनुवाद लेल प्राप्त। रामलोचन ठाकुर 1949- श्री रामलचन ठाकुर, जन्म १८ मार्च १९४९ ई.पलिमोहन, मधुबनीमे। वरिष्ठ कवि, रंगकर्मी, सम्पादक, समीक्षक। भाषाई आन्दोलनमे सक्रिय भागीदारी। प्रकाशित कृति- इतिहासहन्ता, माटिपानिक गीत, देशक नाम छल सोन चिड़ैया, अपूर्वा (कविता संग्रह), बेताल कथा (व्यंग्य), मैथिली लोक कथा (लोककथा), प्रतिध्वनि (अनुदित कविता), जा सकै छी, किन्तु किए जाउ(अनुदित कविता), लाख प्रश्न अनुत्तरित (कविता), जादूगर (अनुवाद), स्मृतिक धोखरल रंग (संस्मरणात्मक निबन्ध), आंखि मुनने: आंखि खोलने (निबन्ध)। अनुवाद लेल भाषा-भारती सम्मान 2003-04 (सी.आइ.आइ.एल., मैसूर) जा सकै छी, किन्तु किए जाउ- शक्ति चट्टोपाध्यायक बांग्ला कविता-संग्रहक मैथिली अनुवाद लेल प्राप्त। विदेह सम्पादकक समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार २०१२ अनुवाद पुरस्कार- श्री रामलोचन ठाकुर- (पद्मानदीक माझी, बांग्लासँ मैथिली अनुवाद, बांग्ला-उपन्यास - मानिक बंद्योपाध्याय) गंगा प्रसाद मंडल "अकेला", नेपाल 1944- पं सुन्दर झा शास्त्री राष्ट्रिय प्रतिभा पुरस्कारसँ सम्मानित। मिथिलांचलक किछु लोक कथा (संकलन आ सम्पादन) आ शिरीषक फूल (अनुवाद) प्रकाशित। महेन्द्रनारायण निधि, धनुषा, नेपाल परमेश्वर कापड़ि, धनुषा, नेपाल जयनारायण झा "जिज्ञासु", नेपाल सुरेश झा, नेपाल 1920-1995 रोहिणी रमण झा 1950- डॉ. कमलाकान्त भण्डारी 1952- कबीर (मैथिली) पर शोध। विनोद बिहारी लाल 1953- जन्म स्थान पचही, मधुबनी, बिहार ।चर्चित कथाकार । सयसँ ऊपर कथा प्रकाशित । अरविन्द ठाकुर 1954- परती टूटि रहल अछि (कविता संग्रह), अन्हारक विरोधमे (कथा संग्रह), बहुरुपिया प्रदेश मे (गजल संग्रह)। श्याम दरिहरे 1954- जन्म स्थान बरहा, बेनीपट्टी मधुबनी, बिहार । कवि, कथाकार । प्रकाशित कृति : सरिसोमे भूत (कथा संग्रह) अनूदित कृति : कनिप्रिया (धर्मवीर भारती) दिनेश कुमार झा मैथिलीक इतिहासपर लेखन। अशोक कुमार ठाकुर जन्म 2 जनवरी 1944 ई.। गाम बड़ागाँव (पंडौल)। नागमंडल (नाटक-अनुवाद), निशांत, वसुधाक संसार (उपन्यास) प्रतापनारायण झा, नेपाल शीतल झा, नेपाल उग्रनारायण मिश्र "कनक" डॉ. शम्भूनाथ चौधरी 1920-2008 इन्द्रकांत झा पंचानन मिश्र प्रोफेसर गुरमैता ज्योतिरीश्वरपर लेखन। महेन्द्र नारायण सिंह "मगन" सूर्यकांत झा, जनकपुर रमण झा (1957- ) रचना: पश्चात्ताप (कथा-संग्रह)-1995, काव्य-वाटिका (कविता-संग्रह)- 1999, अलंकार-भास्कर (पूर्व-खण्ड) - 2002, अलंकार-भास्कर (अलंकार शास्त्र)- 2003, भिन्न-अभिन्न (समीक्षा)- 2008, संग सम्पादन: मैथिली (मिथिला विश्वविद्यालय, मैथिली विभागक शोध-पत्रिका) - 1996, सम्पादन: मैथिली (मिथिला विश्वविद्यालय, मैथिली विभागक शोध-पत्रिका)- 2007,2008 विजयनाथ झा "अहींक लेल" (गीत-गजल संग्रह प्रकाशित)। योगानन्द हीरा बाबा बैद्यनाथ पहरा इमानपर (गजल संग्रह) जगदीश चन्द्र ठाकुर "अनिल" १९५०- मूल नाम जगदीश चन्द्र ठाकुर, जन्म: 27.11.1950,शंभुआर, मधुबनी । सेवा निवृत बैंक अधिकारी। मैथिलीमे प्रकाशित पोथी-1. तोरा अडनामे -गीत संग्रह-1978; 2. धारक ओइ पार-दीर्घ कविता-1999, गीत गंगा (गीत संग्रह), गजल गंगा (गजल संग्रह)। विद्यानन्द झा 1965- बुद्धपूर्णिमा, १९६५कें कैथिनियाँ, झंझारपुर मुधुबनीमे जन्म। पराती जकाँ, बिछड़ल कोनो पिरीत जकाँ, दनुफक फूल जकाँ (कविता संग्रह) प्रकाशित । मूलतः कवि, थोड़ कथा लिखलनि, जे अपन मार्मिक अभिव्यक्तिक कारण बेस चर्चित भेल । विडम्बनापूर्ण परिस्थितिक पाछू जिम्मेवार समाजार्थिक कारणक खोज हिनकर मूल सृजन प्रेरणा थिक । हरेकृष्ण झा 1950- जन्म १० जुलाई १९५० ई. गाम- कोइलखमे। अभियंत्रणक अध्ययण छोड़ि मार्क्सवादी राजनीतिमे सक्रिय। अनेक कविता आ आलोचनात्मक निबन्ध प्रकाशित। अनुवाद एवं विकास विषयक शोध कार्यमे रुचि। स्वतंत्र लेखन। प्रकृति एवं जीवनक तादात्म्य बोधक अग्रणी कवि। "एना त� नहि जे" (कविता संग्रह)।२००८ ई. - श्री हरेकृष्ण झाकेँ कविता संग्रह �एना त नहि जे�लेल कीर्तिनारायण मिश्र साहित्य सम्मान। उदय नारायण सिंह नचिकेता 1951- जन्म-१९५१ ई. कलकत्तामे।पहिल काव्य संग्रह �कवयो वदन्ति�। १९७१ �अमृतस्य पुत्राः� (कविता संकलन) आऽ �नायकक नाम जीवन� (नाटक)| १९७४ मे �एक छल राजा�/ �नाटकक लेल� (नाटक)। १९७६-७७ �प्रत्यावर्त्तन�/ �रामलीला�(नाटक)। १९७८मे जनक आऽ अन्य एकांकी। १९८१ �अनुत्तरण�(कविता-संकलन)। १९८८ �प्रियंवदा� (नाटिका)। १९९७-�रवीन्द्रनाथक बाल-साहित्य�(अनुवाद)। १९९८ �अनुकृति�- आधुनिक मैथिली कविताक बंगलामे अनुवाद, संगहि बंगलामे दूटा कविता संकलन। १९९९ �अश्रु ओ परिहास�। २००२ �खाम खेयाली�। २००६मे �मध्यमपुरुष एकवचन�(कविता संग्रह। २००८ ई. मे नाटक "नो एण्ट्री: मा प्रविश" सम्पूर्ण रूपेँ "विदेह" ई- पत्रिकामे धारावाहिक रूपेँ ई-प्रकाशित भए एकटा कीर्तिमान बनेलक।२००९ ई.-श्री उदय नारायण सिंह �नचिकेता�केँ नाटक नो एण्ट्री: मा प्रविश लेल कीर्तिनारायण मिश्र साहित्य सम्मान। आशीष अनचिन्हार मूल लेखन: कुमारि इच्छा (गजल संग्रह), जंघाजोड़ी (गजल संग्रह), अनचिन्हार आखर (गजल, रुबाइ आ कताक संग्रह), मैथिली गजलक व्याकरण ओ इतिहास, मैथिली वेब पत्रकारिताक इतिहास, मैथिली गजलक रेडी रेकोनर, शब्द-अर्थ-शक्ति। गजेन्द्र ठाकुर आ आशीष अनचिन्हार (सम्पादन): मैथिलीक प्रतिनिधि गजल, मैथिली गजल: आगमन ओ प्रस्थान बिंदु (गजलक आलोचना-समालोचना-समीक्षा) कुमार पवन 1958 गाम मुरैठा। कथा संग्रह, कविता संग्रह आ व्यंग्य संग्रह शीघ्र प्रकाश्य। मैथिलीमे १९९० ई सँ विरल लेखन। २००८ ई. सँ दस सालक मौन भंगक बाद पुनः रचनाक दोसर पालीक प्रारम्भ। कीर्तिनाथ झा 1955- कुरल: मैथिली भावानुवाद महेन्द्र हजारी स्व. चन्द्रकान्त मिश्र, आसी, दरभंगा स्व. महेन्द्र नारायण झा, बेलौंजा, मधुबनी स्व.राजकुमार मल्लिक, सोहराय (पोखरिभीड़ा), मधुबनी लक्ष्मीपति सिंह फूलचन्द्र मिश्र रमण किशोरनाथ झा गाम- विट्ठो, पो. सरिसवपाही, मधुबनी। "लोकवेद" पोथी प्रकाशित। सूर्यनारायण झा "सरस" पोथी "मैथिली श्री सीतारामचरितमानस" प्रकाशित। कलानन्द भट्ट कान्ह पर लहास हमर मैथिली गजल संग्रह दयानाथ झा गाम नागदह, मधुबनी। मैथिली रंगमंडल मिथि-यात्रिक, कोलकाता। डॉ. सुधाकर चौधरी १९४६- जन्म १५ मार्च १९४६ ई.। प्रकाशित पोथी: काजर, तीन रंग तेरह चित्र (कथा संग्रह), पंडी जी छत्ता (प्रहसन), विप्लवी सुभाष (नाटक)। स्व. चुनचुन मिश्र, रहिका, मधुबनी। मिथिला राज्यक आन्दोलन कर्मी। सत्यनारायण लाल कर्ण मिथिला चित्रकला ले. कर्नल मायानाथ झा 1945- जन्म 1 अप्रैल 1945 ई.। गाम- भराम (मधुबनी)। जकर नारि चतुर होइ (मैथिली लोक कथा संग्रह) प्रकाशित। विदेह सम्पादकक समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार २०११ बाल साहित्य पुरस्कार- ले.क. मायानाथ झा (जकर नारी चतुर होइ, कथा संग्रह) श्याम किशोर सिंह सचिन्द्रनाथ झा मिथिला लोक चित्रकला कालीनाथ ठाकुर ग्राम सर्वसीमा राजेन्द्र विमल, जनकपुर, नेपाल 1949- मैथिली, नेपाली आ हिन्दी भाषाक प्राज्ञ विमल शिक्षाक हकमे विद्यावारिधि (पी.एच.डी.)क उपाधि प्राप्त कएने छथि।कम्मो लिखिकऽ यथेष्ट यश अरजनिहार डा. विमलक लेखनीक प्रशंसा मैथिलीक सङ्गसङ्ग नेपाली आ हिन्दी साहित्यमे सेहो होइत रहलनि अछि। त्रिभुवन विश्वविद्यालयअन्तर्गत रा.रा.ब. कैम्पस, जनकपुरधाममे प्राध्यापन कएनिहार डा. विमलक पूर्ण नाम राजेन्द्र लाभ छियनि। हिनक जन्म २६ जुलाई १९४९ ई. कऽ भेल अछि। साहित्यकारक नव पीढ़ीकेँ निरन्तर उत्प्रेरित करबाक कारणे ई डा.धीरेन्द्रक बाद जनकपुर-परिसरक साहित्यिक गुरुक रूपमे स्थापित भऽ गेल छथि। नरेश कुमार विकल 1950- जन्म २७ जुलाइ १९५० भगवानपुर देसुआ (समस्तीपुर)। काव्य- अरिपन, महुआ मदन रस टपकय, बिन बाती दीप जरय। कथा-संग्रह- भरि गेल दर्दक इनार। उपन्यास- टहकैत टीस। नाटक- चोखगर खौंच। जनक किशोर लाल दास कृष्णचन्द्र झा "मयंक" लक्ष्मण झा "सागर" 1953- "उचरि बैसू कौआ" मैथिली कविता संग्रह प्रकाशित। रघुवीर मोची शारदानन्द दास "परिमल" शशिबोध मिश्र "शशि" 1946- सुरेन्द्रनाथ अमरनाथ १९७५ ई. मे "क्षणिका" लघुकथा संग्रह प्रकाशित। हास्य कथाकार। बच्चा ठाकुर बुद्धिनाथ मिश्र राजाराम सिंह राठौर, धनुषा वैद्यनाथ विमल 1955- डॉ वासुकीनाथ झा 1940- जितेन्द्र मिश्र "जीवन" वीरेन्द्र नारायण झा वीरेन्द्र झा 1956- गोनू झा पर लेखन। वैकुण्ठ झा 1954- पिता-स्वर्गीय रामचन्द्र झा, जन्म-२४ - ०७ - १९५४ (ग्राम-भरवाड़ा, जिला-दरभंगा), शिक्षा-स्नात्कोत्तर (अर्थशास्त्र), पेशा- शिक्षक। मैथिली, हिन्दी तथा अंग्रेजी भाषा मे लगभग २०० गीतक रचना। गोनू झा पर आधारित नाटक ''हास्यशिरोमणि गोनू झा तथा अन्य कहानी" क लेखन। एकर अलावा हिन्दीमे लगभग १५ उपन्यास तथा कथाक लेखन। वैकुण्ठ झा विद्यानन्द झा 'पञ्जीकार' 1957- जन्म-09.04.1957,पण्डुआ, ततैल, ककरौड़(मधुबनी), रशाढ़य(पूर्णिया), शिवनगर (अररिया) आ सम्प्रति पूर्णिया। पिता लब्ध धौत पञ्जीशास्त्र मार्त्तण्ड पञ्जीकार मोदानन्द झा, शिवनगर, अररिया, पूर्णिया| पितामह-स्व. श्री भिखिया झा। पञ्जीशास्त्रक दस वर्ष धरि 1970 ई.सँ 1979 ई. धरि अध्ययन, 22 वर्षक बएससँ पञ्जी-प्रबंधक संवर्द्धन आ संरक्षणमे संलग्न। कृति- पञ्जी शाखा पुस्तकक लिप्यंतरण आ संवर्द्धन। महेन्द्र नारायण कर्ण डॉ. विश्वेश्वर मिश्र अर्जुन नारायण चौधरी नरेन्द्र गजलकार। महेन्द्र मिश्र, नेपाल कमल कांत झा 1943- महाप्रकाश 1946- जन्म: बनगांव, सहरसा, बिहार । वरिष्ट कवि ओ कथाकार। प्रकाशित कृति: कविता संभवा, संग समय के (कविता संग्रह)। कीर्तिनारायण मिश्र साहित्य सम्मान २०१० ई.- श्री महाप्रकाश (कविता संग्रह �संग समय के�)। छत्रानन्द सिंह झा 1946- अयोध्यानाथ चौधरी, धनुषा, नेपाल 1947- मूलत: कविक रूपमे परिचित छथि । नेपालक आधुनिक कविताक क्षेत्रमे हिनक नाम उल्लेखनीय अछि । श्री चौधरीक लेखनमे मानवीय संवेदनाक प्रतिबिम्ब पाओल जाइत अछि । कविताक संग कथा आ निबन्धमे सेहो ई कलम चलबैत छथि । फड़िछाएल लेखन हिनक विशेषता थिकनि ।धनुषा जिलाक दुहबी गामक रहनिहार श्री चौधरीक जन्म ६अक्टुबर १९४७कऽ भेल छनि । हिनक क्षितिजक ओहिपार नामसँ एक कविता-सग्ङप्रह प्रकाशित छनि । विद्यानाथ झा 'विदित' सियाराम झा "सरस" 1948- जन्म स्थान मेंहथ, मधुबनी बिहार । प्रसिद्ध गीतकार, बादमे कथा लेखन प्रारम्भ केलनि । प्रकाशित कृति आंजुर भरि सिंगरहार, शोणिताएल उगैत सूर्यक धम्मक (कथा संग्रह)। अग्निपुष्प 1948- जन्म: तरौनी, दरभंगा। मूलनाम : महेन्द्र झा । मैथिलीमे सहस्त्रबाहु कविता संग्रह प्रकाशित । मुक्ति प्रसंगक अनुवाद प्रकाशित । वामपंथी आन्दोलनमे सक्रिय। शिक्षा, सम्वाद आदि पत्रिकाक सम्पादन । वामपंथी विचारधाराक सशक्त कवि। मधुकांत झा 1949- वीनू भाइ सत्यानन्द पाठक योगीराज कुणाल 1951- राम भरोस कापड़ि भ्रमर, धनुषा, नेपाल 1951- जन्म-बघचौरा, जिला धनुषा (नेपाल)।बन्नकोठरी: औनाइत धुँआ (कविता संग्रह), नहि, आब नहि (दीर्घ कविता), तोरा संगे जएबौ रे कुजबा (कथा संग्रह, मैथिली अकादमी पटना, १९८४), मोमक पघलैत अधर (गीत, गजल संग्रह, १९८३), अप्पन अनचिन्हार (कविता संग्रह, १९९० ई.), रानी चन्द्रावती (नाटक), एकटा आओर बसन्त (नाटक), महिषासुर मुर्दाबाद एवं अन्य नाटक (नाटक संग्रह), अन्ततः (कथा-संग्रह), मैथिली संस्कृति बीच रमाउंदा (सांस्कृतिक निबन्ध सभक संग्रह), बिसरल-बिसरल सन (कविता-संग्रह), जनकपुर लोक चित्र (मिथिला पेंटिङ्गस), लोक नाट्य: जट-जटिन (अनुसन्धान)। नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानक सदस्यता- श्री राम भरोस कापड़ि 'भ्रमर' (2010)। धीरेन्द्रनाथ मिश्र शिवेन्द्रलाल कर्ण, धनुषा, नेपाल 1951- लेखकसँ अधिक शिक्षकक रूपमे परिचित आ प्रतिष्ठित छथि । त्रिभुवन विश्वविद्यालयअन्तर्गतरा. रा. ब. कैम्पस, जनकपुर-धामक सह-प्राध्यापक श्री कर्णक ऐतिहासिक विषय-वस्तुपर लिखल कतोक लेख मैथिली, हिन्दी आ अग्ङरेजी भाषामे प्रकाशित अछि । स्वान्त-सुखाय ई कहियो कालकऽ कविता-कथा सेहो लिखि लैत छथि । हिनक लेखन ज्ञानवर्द्धक, जानकारीमूलक एवं सोझारएल रहैत अछि । देखलापर बुझना जाइत अछि जे ई हिनक गम्भीर अध्ययनक परिणति थिक ।सामाजिक तथा साहित्यिक सङ्घ-संस्थासभमे सेहो सक्रिय प्राध्यापक कर्णक जन्म धनुषा जिलाक देवडीहा गाममे २ जनवरी १९५१ ई. कऽ भेल छनि । ब्रह्मदेव लाल दास चण्डेश्वर खान गाम- पट्टीटोल, जिला मधुबनी। लघुकथा लेल चर्चित प्रशंसित। दयाकान्त झा गजेन्द्र नारायण सिंह, नेपाल पद्मश्री श्री गजेन्द्र नारायण सिंह हरिकान्त झा इन्द्रनारायण झा प्रवासी साहित्यालंकार सीताराम सिंह तुलानन्द मिश्र शैलेन्द्र कुमार झा 1952- जन्म स्थान हरिपुर, वकशी टोल, मधुबनी बिहार। प्रकाशित कृति: आरोह अवरोह, दशम खुट्टी (कथा संग्रह), इकोनोमिक हिस्ट्री ऑफ मिथिला (अंग्रेजी) । शिवशंकर श्रीनिवास 1953- जन्म स्थान लोहना मधुबनी, बिहार । चर्चित कथाकार ओ आलोचक । गीत ओ कविता सेहो कहियो काल लिखैत छथि । प्रकाशित कृति : त्रिकोण, अदहन, गाछ-पात, गामक लोक (कथा संग्रह)। अशोक 1953- जन्म स्थान लोहना, मधुबनी, बिहार। चर्चित कथाकार, कवि ओ सम्पादक । प्रकाशित कृति : चक्रव्यूह (कविता संग्रह) त्रिकोण (सहयोगी कथा संग्रह), ओहि रातिक भोर (कथा-संग्रह), मातवर (कथा संग्रह)। विभूति आनन्द 1953- जन्म: शिवनगर, मधुबनी, बिहार। चर्चित कवि, कथाकार, संपादक । प्रकाशित कृति टूटा उपन्यास टूटा समीक्षा, तीन टा कथ संग्रह, टूटा गीत-गजल संग्रह ओ चारिटा कथा-संग्रह प्रकाशित।२००६- विभूति आनन्द (काठ, कथा)मैथिली लेल साहित्य अकादमी पुरस्कार । केदार कानन 1959- जन्म स्थान सुपौल, बिहार। चर्चित कवि, कथाकार ओ संपादक। प्रकाशित कृति : आकार लैत शब्द (कविता संग्रह), अनूदित कृति राजा राम मोहन राय, प्रायश्चित। सम्पादन संकल्प, भारती मंडन (पत्रिका)। डॉ. शशिनाथ झा 1954- गाम-दीप, जिला- मधुबनी। मैथिली, बांग्ला, नेवारी आ देवनागरी पांडुलिपिक विशेषज्ञ। साहित्य अकादमीक भाषा सम्मान 2007 क्लासिकल आ मध्यकालीन साहित्य लेल। धनुर्धर झा गाम- विशौल। "वाक्यार्थविवेचनम्" लेल श्रीवाणीयुवालंकरण पुरस्कार 2010 प्राप्त। शिवकान्त पाठक डॉ. योगेन्द्र पाठक "वियोगी" , वैज्ञानिक "विज्ञानक बतकही" प्रकाशित। राजनन्द झा २००६- राजनन्द झा (कालबेला- समरेश मजुमदार, बांग्ला)लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार। आद्यानाथ झा "नवीन" अमलतास 1956- यंत्रनाथ मिश्र दिगम्बर ठाकुर गणेश झा 1950- कन्दर्पनारायण लाल कर्ण शैलेन्द्र आनन्द 1955- कमलाकांत झा अध्यक्ष, मैथिली अकादमी, पटना लल्लन प्रसाद ठाकुर 1951-1995 जन्म ५ फरबरी १९५१ मुंगेर मे श्रीमती सुभद्रा देवी आ श्री हीरानंद ठाकुरक द्वितीय बालक । हिनक ग्राम- समौल,जिला-मधुबनी। सिविल इंजीनियर, टाटा स्टीलमे चाकरी। प्रकाश झाक फ़िल्म "कथा माधोपुर की" मे मुख्य भुमिका। नाटककार आ मंच अभिनेता। हुनक लिखल किछु प्रसिद्ध मैथिली नाटक छन्हि :बडका साहेब,मिस्टर निलो काका, लोंगिया मिरचाई,बकलेल आदि वा अंत। डॉ. कमलानन्द झा लोकनाथ मिश्र डॉ. रवीन्द्र कुमार चौधरी 1966- जन्म:5 मार्च 1966 ई. गनपतगंज, सुपौल। मैथिलीक प्राध्यापक। रक्षामंत्रीक पदक आ बिहार आ झारखण्ड सरकार द्वारा पुरस्कृत। झारखण्डक मैथिली आन्दोलनमे अग्रणी। अशोक अविचल जन्म- ५ जनवरी १९६७, गाम- रहुआ संग्राम, जिला मधुबनी। मैथिली प्राध्यापक। रचना: एक बनू नेक बनू (लघु नाटक), मैथिली भाषा: सर्वेक्षण आ विश्लेषण, हमरा देशक भागमे (मैथिलीक प्रथम असंगत नाटक), सम्पादन: झारखण्डक सनेश, कचोट (नौ अंक), झारखण्ड वाणी (हिन्दी साप्ताहिक), सम्मान: अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलनमे सम्मान (२०००), परमहंस लक्ष्मीनाथ गोस्वामी समिति सम्मान (२००८) डॉ. श्रीपति सिंह १९४४- "उमंग-तरंग" कविता-संग्रह प्रकाशित। डॉ. उमाकान्त मैथिली व्यंग्य-आलेखक पोथी "अपन बात" प्रकाशित। सुशील 1942- अस्मिता (लघुकथा संग्रह), भामती (नाटक) प्रकाशित। श्रीदेव मूल नाम- वागेश्वर झा। कथा-सँग्रह "हिलकोर", नाटक "लोहक कङना", गीत-प्रबन्ध "पुलोमा" प्रकाशित। सुकांत सोम 1950- जन्म दरभंगा जिलाक तरौनी गाममे 1950 ई. मे भेलन्हि । बी. ए. पास कए ई पटनाक दैनिक �जनशक्ति�क सहायक सम्पादक छलाह । फेर नव भारत टाइम्स, पटनामे।बाल्यवस्थासँ अपन पैतृक (पिता यात्नीजी) गुण कविता करबाक तथा कथा लिखबामे सेहो यश अर्जन कएलन्हि अछि । वर्त्तमान राजनीति सामाजिक विषयसँ सम्बद्ध व्यंग्यात्मक, सरल भाषामे लिखल नव कविता हिनक विशेषता छन्हि । गामघरक परिवेश तदनुकूल शब्द एवं बिम्ब रचनामे क्रमहि सिद्ध छथि । डॉ. देवकांत मिश्र 1952- पिता कविचूड्क्षामणि पं. काशीकांत मिश्र "मधुप", "बेनीपुर अनुमण्डलमे मैथिली" पोथी प्रकाशित। डॉ. नित्यानन्द लाल दास पिता स्वर्गीय सूर्यनारायण दास। फारबिसगंज कॉलेज, फारबिसगंज सँ अंग्रेजी विभागाध्यक्ष पदसँ १९९८ मे अवकाशप्राप्त। डॉ. सुरेन्द्र झा "सुमन"क संयोजकत्वक कार्यकालमे "मैथिली परामर्शदातृ समिति" (साहित्य अकादेमी, दिल्ली)क सदस्य। मैथिली पत्रिका सभ जेना बटुक, प्रयाग; मिथिला मिहिर, पटना; स्वदेश, दरभंगा; पहुँच, पटना आ परती पलार, अररियामे रचना प्रकाशित। १९६७ ई. सँ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मे सक्रिय। प्रांतीय प्रतिनिधि २००४ धरि जिला सरसंघचालक। जे.पी.आन्दोलनमे लोकतंत्र सेनानी। डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलामक अंग्रेजी पोथी "इग्नाइटेड माइण्ड्स"क मैथिलीमे "प्रज्वलित प्रज्ञा" नामसँ अनुवाद। साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार २०१०- डॉ. नित्यानन्द लाल दास- (इग्नाइटेड माइण्ड्स- डॉ.ए.पी.जे. कलाम, अंग्रेजी) लेल। राजनाथ मिश्र 1950- "अ बर्ड्स आइ व्यू ऑन मिथिला" प्रकाशित। पशुपतिनाथ झा, महोत्तरी, नेपाल 1954- हिनक लेखन विवरणात्मक होइत अछि आ सम्बद्ध विषयमे नीकजकॉ जानकारी दैत अछि । विभिन्न पत्र-पत्रिकामे हिनक लेख-रचना बरोबरि देखबामे अबैत रहैछ ।रा.रा.ब. कैम्पस, जनकपुरधाममे मैथिली विषयक प्राध्यापनमे संलग्न श्री झा मैथिलीसम्बन्धी सग्ङठनात्मक गतिविधिसँ सेहो जुड़ल छथि । मैथिली भाषाक लोपोन्मुख अवस्थामे रहल अपन लिपि तिरहुतामे विशेषज्ञता रखनिहार श्री झा एकर संरक्षण-सम्बर्द्धनक दिशामे सेहो क्रियाशील छथि ।प्रध्यापक झा मैथिली महाकाव्यमे रस निरूपण विषयपर विद्यावारिधि कएने छथि आ शिक्षा तथा कानून विषयमे सेहो स्नातक छथि । महोत्तरी जिलाक एकरहिया रहनिहार श्री झाक जन्म ४ दिसम्बर १९५४ कऽ भेलछनि ।चेन्नैमे मिथिला रत्नसँ सम्मानित। अनिलचन्द्र ठाकुर 1954-2009 जन्म 13 सितम्बर 1954 ई.केँ कटिहार जिलाक समेली गाममे भेलन्हि। 1982 ई.मे हिन्दी साहित्यमे स्नातकोत्तर केलाक बाद नवम्बर '93 सँ नवम्बर '94 धरि "सुबह" हस्तलिखित पत्रिकाक सम्पादन-प्रकाशन कएलन्हि आ कोशी क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकमे अधिकारी रहथि। मैथिली, अंगिका, हिन्दी आ अंग्रेजीमे समानरूपेँ लेखन। मृत्युक पूर्व ब्रेन ट्यूमरसँ बीमार चलि रहल छलाह। प्रकाशित कृति: आब मानि जाउ(मैथिली उपन्यास)- पहिने भारती-मंडन पत्रिकामे प्रकाशित भेल, फेर मैलोरंग द्वारा पुस्तकाकार प्रकाशित भेल।; कच( अंगिकाक पहिल खण्ड काव्य,1975); एक और राम (हिन्दी नाटक,1981); एक घर सड़क पर (हिन्दी उपन्यास, 1982); द पपेट्स (अंग्रेजी उपन्यास, 1990); अनत कहाँ सुख पावै (हिन्दी कहानी संग्रह,2007)। आब मानि जाउ (मैथिली उपन्यास) - एहि उपन्यासमे एक एहन युवतीक संघर्ष-गाथा अंकित अछि जे अपन लगनसँ जीवन बदलैत अछि। असंख्य गामक ई कथा कुलीनताक अधःपतनक कथा, संस्कारविहीनताक उद्घाटन आ भविष्यक पीढ़ीकेँ बचएबाक चेतौनी छी। बृषेश चन्द्र लाल जन्म 29 मार्च 1955 ई. केँ भेलन्हि। पिताः स्व. उदितनारायण लाल,माताः श्रीमती भुवनेश्वरी देव। हिनकर छठिहारक नाम विश्वेश्वर छन्हि। मूलतः राजनीतिककर्मी । नेपालमे लोकतन्त्रलेल निरन्तर संघर्षक क्रममे १७ बेर गिरफ्तार । लगभग ८ वर्ष जेल ।सम्प्रति तराई�मधेश लोकतान्त्रिक पार्टीक राष्ट�ीय उपाध्यक्ष । मैथिलीमे किछु कथा विभिन्न पत्रपत्रिकामे प्रकाशित । आन्दोलन कविता संग्रह आ बी.पीं कोइरालाक प्रसिद्ध लघु उपन्यास मोदिआइनक मैथिली रुपान्तरण तथा नेपालीमे संघीय शासनतिर नामक पुस्तक प्रकाशित । ओ विश्वेश्वर प्रसाद कोइरालाक प्रतिबद्ध राजनीति अनुयायी आ नेपालक प्रजातांत्रिक आन्दोलनक सक्रिय योद्धा छथि। नेपाली राजनीतिपर बरोबरि लिखैत रहैत छथि। नारायणजी 1956- जन्म: घोघरडीहा (मधुबनी)। मैथिली भाषा-साहित्यमे एम. ए., पी-एच. डी. कामेश्वर लता संस्कृत विद्यालय, घोघरडीहामे अध्यापन । प्रकाशित कृति: �घरि घुरि रहल छी� (काव्य-संग्रह)। डॉ. श्री श्रीशंकर झा 1952- जगदीपनारायण "दीपक" राजदेव मंडल शिक्षा- एम.ए.द्वय, एल एल बी.,पता- ग्राम-मुसहरनियाँ, रतनसारा (निर्मली, मधुबनी)। प्रकाशित कृति- अम्बरा-कविता-संग्रह, हमर टोल (उपन्यास), बसुंधरा(कविता संग्रह), जाल (पटकथा), लाज (एकांकी), जल भंवर (उपन्यास), त्रिवेणीक रंग (विहनि आ लघु कथा संग्रह), पंचैती (लघु पटकथा), वापसी। शिवप्रसाद यादव हीरेन्द्र कुमार झा 1958- जन्म 30 अगस्त 1958,गाम- कोइलख (मधुबनी), पिता श्री कामेन्द्र नाथ झा। ट्रांसफर्मर (मैथिली कथा संग्रह) प्रकाशित। मानेश्वर मनुज 1958- जन्म गम्हरिया (मानपौर, मधुबनी)मे, 1978सँ 1992 धरि नौसेनामे विभिन्न जहाजपर कार्यरत, फेर यात्री रेलमे। सम्बन्ध (कथा संग्रह) प्रकाशित। नबोनाथ झा महेन्द्र नारायण राम 1958- तारानन्द वियोगी 1966- महिषी, सहरसामे जन्म। पहिल पोथी अपन युद्धक साक्ष्य (गजल संग्रह) १९९१ मे प्रकाशित। अन्य पुस्तक हस्तक्षेप, प्रलय रहस्य(कविता-संग्रह), अतिक्रमण (कथा-संग्रह), शिलालेख (लघुकथा संग्रह), कर्मधारय। राजकमल चौधरीक कथाकृति एकटा चंपाकली एकटा विषधर संकलन-स‍पादन। साहित्य अकादेमी मैथिली बाल साहित्य पुरस्कार २०१०-तारानन्द वियोगीकेँ पोथी "ई भेटल तँ की भेटल" लेल। यात्री-चेतना पुरस्कार २०१० ई.- डॉ. तारानन्द वियोगी। भालचन्द्र झा ए.टी.डी., बी.ए., (अर्थशास्त्र), मुम्बईसँ थिएटर कलामे डिप्लोमा। मैथिलीक अतिरिक्त हिन्दी, मराठी, अग्रेजी आ गुजरातीमे निष्णात। १९७४ ई.सँ मराठी आ हिन्दी थिएटरमे निदेशक। महाराष्ट्र राज्य उपाधि १९८६ आ १९९९ मे। आइ.एन.टी. केर लेल नाटक �सीता� क निर्देशन। �वासुदेव संगति� आइ.एन.टी.क लोक कलाक शोध आ प्रदर्शनसँ जुड़ल छथि आ नाट्यशालासँ जुड़ल छथि विकलांग बाल लेल थिएटरसँ। निम्न टी.वी. मीडियामे रचनात्मक निदेशक रूपेँ कार्य।लेखन-बीछल बेरायल मराठी एकांकी(अनुवाद), सिंहावलोकन (मराठी साहित्यक १५० वर्ष), आकाश (जी.टी.वी.क धारावाहिकक ३० एपीसोड), जीवन सन्ध्या( मराठी साप्ताहिक, डी.डी, मुम्बई), धनाजी नाना चौधरी (मराठी), स्वयम्बर (मराठी), फिर नहीं कभी नहीं( हिन्दी), आहट (हिन्दी), यात्रा ( मराठी सीरयल), मयूरपन्ख ( मराठी बाल-धारावाहिक), हेल्थकेअर इन २०० ए.डी.) (डी.डी.)।२००९ मे- भालचन्द्र झा (बीछल बेरायल मराठी एकाँकी- सम्पादक सुधा जोशी आ रत्नाकर मतकरी, मराठी)लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार। मनमोहन झा कुमार शैलेन्द्र रमेश 1961- जन्म स्थान मेंहथ, मधुबनी, बिहार। चर्चित कथाकार ओ कवि । प्रकाशित कृति: समांग, समानांतर, दखल (कथा संग्रह), नागफेनी (गजल संग्रह), संगोर, समवेत स्वरक आगू, कोसी धारक सभ्यता, पाथर पर दूभि (काव्य संग्रह), प्रतिक्रिया (आलोचनात्मक निबंध)। मेघन प्रसाद 1961- प्रदीप बिहारी 1963- जन्म स्थान कन्हौली मल्लिक टोल, खजौली, मधुबनी, बिहार। चर्चित कथाकार, उपन्यासकार ओ रंगकर्मी । प्रकाशित कृति: गुमकी ओ बिहाड़ि, विसूवियस (उपन्यास), औतीह कमला जयतीह कमला, खण्ड-खण्ड जिनगी, सरोकार (कथा संग्रह)। २००७- प्रदीप बिहारी (सरोकार, कथा)मैथिली लेल साहित्य अकादमी पुरस्कार । चन्द्रमोहन झा पर्वा डॉ. सुरेन्द्र लाभ, नेपाल रोशन जनकपुरी, नेपाल डॉ. अरविन्द अक्कू 1957- फूलचन्द्र झा "प्रवीण" 1961- गाम तुमौल दरभंगा, आयल नवल प्रभात, पांगल गाछक छाहरि, हमरा मोनक खजन चिड़ैया, बसंतक बजनिञा (कविता संग्रह), भूत होइत भविष्य़ (कथा संग्रह)। देवशंकर नवीन 1962- ओ ना मा सी (गद्य-पद्य मिश्रित हिन्दी-मैथिलीक प्रारम्भिक सर्जना), चानन-काजर (मैथिली कविता संग्रह), आधुनिक (मैथिली) साहित्यक परिदृश्य, गीतिकाव्य के रूप में विद्यापति पदावली, राजकमल चौधरी का रचनाकर्म (आलोचना), जमाना बदल गया, सोना बाबू का यार, पहचान (हिन्दी कहानी), अभिधा (हिन्दी कविता-संग्रह), हाथी चलए बजार (कथा-संग्रह)। कुमार मनीष अरविन्द 1964- बदरी नारायण बर्मा राजेन्द्र किशोर, नेपाल श्याम सुन्दर शशि, नेपाल श्याम सुन्दर शशि, जनकपुरधाम, नेपाल। पेशा-पत्रकारिता। शिक्षा: त्रिभुवन विश्वविद्यालयसँ,एम.ए. मैथिली, प्रथम श्रेणीमे प्रथम स्थान। मैथिलीक प्रायः सभ विधामे रचनारत। बहुत रास रचना विभिन्न पत्र-पत्रिकामे प्रकाशित। हिन्दी, नेपाली आऽ अंग्रेजी भाषामे सेहो रचनारत आऽ बहुतरास रचना प्रकाशित। सम्प्रति- कान्तिपुर प्रवासक अरब ब्यूरोमे कार्यरत। हिमांशु चौधरी, नेपाल पिता : स्वर्गीय कामेश्र्वर चौधरी,माताः श्रीमती चन्द्रावती चौधरी,जन्मः वि स २०२०/६/५ लहान, सिरहा,शिक्षाः स्नातकोत्तर(नेपाली),पेशाः पत्रकारिता (सम्प्रति : राष्ट्रिय समाचार समिति ),कृति : की भार सांठू ? (मैथिली कविता संग्रह ),विगत दू दशकसं नेपाली आ मैथिली लेखन तथा अभियानमे निरन्तर क्रियाशील आ विभिन्न संघ संस्थासं आबद्ध । सत्यनारायण मेहता भुवनेश्वर पाथेय राजेन्द्र झा, धनुषा अशोक कुमार मेहता धर्मेन्द्र विह्वल, सिरहा, नेपाल 1967- रस्ता तकैत जिनगी, एक सृष्टि एक कविता, एक समयक बात, धुअनाएल आकृति सभ (मैथिली कविता संग्रह), भ्रमरका उत्कृष्ट नाटकहरु, गोनूझाका कथाहरु (मैथिलीसँ नेपाली अनुवाद), मैथिलीक कक्षा 1 सँ 5 आ बाल-साहित्य संदर्भक तीनटा पोथीक सह-लेखक। पत्रकारिताक मूल सिद्धांत (मैथिली, प्रेसमे), दलित रिपोर्टिंग मैनुअल (नेपाली, प्रेसमे)। धीरेन्द्र कुमार झा निमिष झा, नेपाल गौरीनाथ (अनलकान्त) "अन्तिका"क सम्पादन। आनन्द कुमार झा 1977- जन्म स्थान: मेंहथ, झंझारपुर; पिता स्व. अभयकांत झा, माता श्रीमती इन्द्रकाली देवी, प्रकाशन- "धधाइत नवकी कनियाँक लहास", "हठात् परिवर्तन", "बदलैत समाज", "टाकाक मोल", "कलह" (पाँचू मैथिली नाटक) प्रकाशित। विदेह सम्पादकक समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार २०११ युवा पुरस्कार- आनन्द कुमार झा (कलह, नाटक) वनदेवीपुत्र भवनाथ, नाटककार चन्द्रेश राम सेवक सिंह शहीद दुर्गानन्द झा, नेपाल उदयनाथ झा "अशोक" कपिलेश्वर राउत उलहन (विहनि - लघु कथा संग्रह) प्रकाशित। कपिलेश्वर साहू डॉ. शम्भु कुमार सिंह जन्म: 18 अप्रील 1965 सहरसा जिलाक महिषी प्रखंडक लहुआर गाममे। आरंभिक शिक्षा, गामहिसँ, आइ.ए., बी.ए. (मैथिली सम्मान) एम.ए. मैथिली (स्वर्णपदक प्राप्त) तिलका माँझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर, बिहार सँ। BET [बिहार पात्रता परीक्षा (NET क समतुल्य) व्याख्याता हेतु उत्तीर्ण, 1995] �मैथिली नाटकक सामाजिक विवर्त्तन� विषय पर पी-एच.डी. वर्ष 2008, तिलका माँ. भा.विश्वविद्यालय, भागलपुर, बिहार सँ। मैथिलीक कतोक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिका सभमे कविता, कथा, निबंध आदि समय-समय पर प्रकाशित। वर्तमानमे शैक्षिक सलाहकार (मैथिली) राष्ट्रीय अनुवाद मिशन, केन्द्रीय भारतीय भाषा संस्थान, मैसूर-6 मे कार्यरत। कृष्णचन्द्र यादव, नेपाल शिवकान्त ठाकुर शोभाकान्त झा उमाकान्त झा आ प्रियंका, मैथिली रंगमंच श्यामानन्द ठाकुर हरिकांत लाल दास, नेपाल शशिनाथ ठाकुर, नेपाल दुर्गानन्द मंडल संचयिका, कथा कुसुम (विहनि आ लघु कथा संग्रह), चक्षु प्रकाशित। शिव कुमार झा 1973- शिव कुमार झा ��टिल्लू��,पिताक नामः स्व. काली कान्त झा ��बूच��, माताक नामः स्व. चन्द्रकला देवी,जन्म तिथिः 11-12-1973,शिक्षाः स्नातक (प्रतिष्ठा),जन्म स्थानः मातृक- मालीपुर मोड़तर, जि. - बेगूसराय, मूलग्रामः ग्राम-पत्रालय - करियन, जिला - समस्तीपुर, पिन: 848101,संप्रतिः प्रबंधक, संग्रहण,जे. एम. ए. स्टोर्स लि.,मेन रोड, बिस्टुपुर जमशेदपुर - 831 001, अन्य गतिविधिः वर्ष 1996 सँ वर्ष 2002 धरि विद्यापति परिषद समस्तीपुरक सांस्कृतिक ,गतिवधि एवं मैथिलीक प्रचार-प्रसार हेतु डॉ. नरेश कुमार विकल आ श्री उदय नारायण चौधरी (राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक) क नेतृत्वमे संलग्न। प्रकाशित कृति: क्षणप्रभा-कविता-संग्रह, अंशु-समालोचना। राम विलास साहु मनक मैल, अंकुर- लघुकथा संग्रह, रथक चक्का उलटि चलै बाट (कविता/ टनका संग्रह), कर्म बिनु जग सुन्ना (दोसर कविता/ टनका संग्रह), स्कूलक खिचड़ी (विहनि/ लघु कथा संग्रह), दूधबेचनी (लघु कथा संग्रह) प्रकाशित। महाकान्त ठाकुर बचेश्वर झा, निर्मली "निबन्ध-निकुञ्ज" प्रकाशित। धीरेन्द्र कुमार, निर्मली चन्द्रशेखर कामति 1959- मैथिली कवि। शि‍क्षा- एम.ए. (राजनीति‍शास्‍त्र)‍, पि‍ता- स्‍व. योगेन्‍द्र कामति‍, गाम-पोस्‍ट- करि‍यन, भाया- इलमास नगर, थाना- रोसड़ा, जि‍ला- समस्‍तीपुर, बि‍हार। संप्रति‍प्रखण्‍ड सहकारि‍ता प्रसार पदाधि‍कारी (बेनीपट्टी)। नन्द विलास राय "भरदुतिया", "छठिक डाला", "हमर चारूधाम" प्रकाशित। बिनय भूषण उजरा परवाक खोज (कविता संग्रह) सुधाकर झा, महोत्तरी , नेपाल सएसँ बेशी सड़क नाटकमे मंचन। सदरे आलम "गौहर" गाम-पुरसौलिया, भाया- जयनगर, जिला मधुबनी। डॉ. भुवन किशोर मिश्र "भुवनेश" मैथिली कथा संग्रह- गोबरछत्ता। दिनकर कुमार "पूर्वोत्तर मैथिल"क सम्पादन। डॉ. विनय विश्वबन्धु रामदेव प्रसाद मण्डल झारूदार मैथिलीक भिखारी ठाकुरक नामसँ प्रसिद्ध मैथिलीक पहिल जनकवि रामदेव प्रसाद मण्‍डल �झारूदार�। "हमरा बिनु जगत सूना छै" आ "गीताञ्जलि झाड़ू" प्रकाशित। उमेश पासवान "वर्णित रस" प्रकाशित। ओम प्रकाश झा घोघरडीहा (मधुबनी)। "कियो बूझि नै सकल हमरा" (गजल, रुबाइ आ कता संग्रह) प्रकाशित। जगदानन्द झा मनु नढ़िया भुकैए हमर घराड़ीपर (गजल संग्रह), तोहर कतेक रंग (विहनि कथा संग्रह), चोनहा- (बाल उपन्यास), व्यथा- (कविता-गीत संग्रह)। अच्छेलाल शास्त्री डॉ अमोल राय नन्द कुमार मिश्र नन्द डॉ. नन्द कुमार मिश्र शिव कुमार प्रसाद दिलीप कुमार झा डॉ ताराकान्त झा अमरकान्त, नेपाल मुरलीधर झा कबिलपुर, दरभंगा। बाल कथा संग्रह "पिलपिलहा गाछ" (2010) प्रकाशित। कमलधर दास "मैथिल कर्ण कायस्थक गोत्र, प्रवर, मूल आ वैवाहिक सम्बन्ध" पोथी प्रकाशित। श्रीकान्त मण्डल, मैथिली रंगमंच बेचन ठाकुर गाम: चनौरागंज, मधुबनी। प्रकाशित कृति: बेटीक अपमान आ छीनरदेवी (नाटक), बाप भेल पित्ती आ अधिकार (नाटक), बिसवासघात (नाटक), ऊँच-नीच (नाटक), भोँट (नाटक); एक दर्जनसँ बेशी नाटक प्रकाशनक प्रतीक्षामे। गंगा झा मैथिली रंगमंडल कोकिल मंच, कोलकाता। कोलकाता आ गाम पजुआरिडीह टोलमे मैथिली रंगमंच निर्देशन। नबोनारायण मिश्र 1955- पिता-श्री गोबिन्द मिश्र, माता- श्रीमति अढ़ूला देवी। गाम- कुशमौल,पो.नागदह-बलाइन, भाया-अरेड़हाट, जिला-मधुबनी। मैथिली रंगमंचसँ सम्बद्ध "कोकिल मंच" संस्थाक माध्यमसँ। कमलेश कुमार दास, रंगमंच कलाकार किशोर केशव, मैथिली रंगमंच कुमार गगन, मैथिली रंगमंच अशोक दत्त, जनकपुर मदन ठाकुर चर्चित रंगकर्मी, जनकपुरक चर्चित संस्‍था मिथिला नाट्यकला परिषदक संस्‍थापक । तीन दशकसँ बेसी समयसँ रंगक्षेत्रमे सक्रिय। करीब ३०�४० गोट मंचीय नाटकक सयो प्रस्‍तुति , २०�२५ गोट सड़क नाटकक हजारसँ बेसी प्रदर्शनमे अभिनय ।२० गोट टेली-सीरियल आ आधा दर्जन मैथिली फीचर फिल्‍ममे अभिनय । पुरस्‍कार: सप्‍तम अन्‍तर्राष्‍ट्रिय महोत्‍सवमे सर्वश्रेष्‍ठ अभिनेता २०४९ वि.स., क्षेत्रीय प्रतिभा पुरस्‍कार (नेपाल सरकार) २०६३ वि.स.। अभय कुमार यादव, मैथिली रंगमंच आशुतोष यादव अभिज्ञ कृष्ण कुमार कश्यप 1949- जन्म १५ सितम्बर १९४९ ई.। पिता- कवि-उपन्यासकार स्व. इन्द्रनारायण लाल "सँवलिया"। जनबरी १९६५ ई. मे नेना सभ लेल "नाइट स्कूल", १९८१ ई. मे "कला आधारित जीवन आ शिक्षण पद्धति"क प्रवर्तन आ तकर कार्यान्वयन लेल शिवा कश्यप आ शशिबालाक सहयोगसँ "भारती विकास संस्था"क स्थापना। रचना: शशिबालाक संग "मेघदूत" आ "गीत-गोविन्द"क मैथिली अनुवाद, माछ-भात, मिथिला चित्र-शिक्षा, भाग-१, मिथिला चित्र-कोर, भाग-३। ललित कुमुद बटोही झा, मिथिला चित्रकला प्रवीण कुमार ठाकुर जन्म तिथि -31 दिसम्बर 1977; जन्म स्थान -कन्हौली , सकरी , मधुबनी ; शिक्षा- सूर्य नारायण हाई स्कूल - नरपतिनगर , बी . एस . सी - मेमोरिअल कॉलेज - दरभंगा , डिप्लोमा इन फैशन डिजाईन (नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ फैशन डिजाईन - नयी दिल्ली ) , चित्रकला �आओर फैशन पूर्वानुमानमे विशेष योग्यता, निवास स्थान- दिल्ली , इंडिया; पिता- श्री सत्य नारायण ठाकुर , सकरी - कन्हौली� ; माता- श्रीमती मालती ठाकुर , सकरी - कन्हौली । वर्तमानमे अपन एक्सपोर्ट बिज़नस एस्थेट ) �क नामसँ शुरुआत , पूर्वमे प्रोडक्ट डेवेलोप्मेंट आओर मर्चंटक रूपमे कार्यरत। लाला पंडित, मिथिला मूर्तिकला राजेन्द्र पंडित, मिथिला मूर्तिकला गिरीश चन्द्र लाल नवेन्दु कुमार झा, पत्रकार चन्द्र किशोर लाल, पत्रकार, नेपाल उपेन्द्र भगत नागवंशी, नेपाल सड़क नाटक। रमेश रंजन, परवाहा, नेपाल 1966- परवाहा, नेपालमे जन्म । नेपालीय कथा-जगतक नवीन मुदा सम्मानित नाम । जनपक्षधर कथा-दृष्टि आ मोहक शिल्प । थोड़ लिखलनि, मुदा बेर-बेर चर्चित रहलाह । विनीत ठाकुर "बाँकी अछि हम्मर दूधक कर्ज" प्रकाशित। सुजीत कुमार झा, नेपाल जिद्दी (लघुकथा संग्रह), चिड़ै (लघुकथा-संग्रह), रिपोर्टर डायरी (रिपोर्ताज), गन्ध (लघु कथा संग्रह), खजुरीबाली (लघु कथा संग्रह), कोइली घूरि आउ (बाल लघु-विहनि कथा संग्रह), दूधमती- (सम्पादन- नेपाली आ मैथिलीमे)। सरोज खिलाड़ी नेपालक पहिल मैथिली रेडियो नाटक संचालक देवांशु वत्स जन्म- तुलापट्टी, सुपौल। मास कम्युनिकेशनमे एम.ए., हिन्दी, अंग्रेजी आ मैथिलीक विभिन्न पत्र-पत्र्रिकामे कथा, लघुकथा, विज्ञान-कथा, चित्र-कथा, कार्टून, चित्र-प्रहेलिका इत्यादिक प्रकाशन। विशेष: गुजरात राज्य शाला पाठ्य-पुस्तक मंडल द्वारा आठम कक्षाक लेल विज्ञान कथा �जंग� प्रकाशित (2004 ई.), नताशा: मैथिलीक पहिल-चित्र-श्रृंखला (कॉमिक्स) प्रकाशित। संतोष मिश्र, नेपाल पोसपुत (लघुकथा-संग्रह), उदास मोन (लघुकथा-संग्रह), एना-किए (कविता-संग्रह), अएना (संपादन- कविता-संग्रह)। सुनील कुमार मल्लिक, गायक, जनकपुर, नेपाल 1968- मैथिलीक गायक-सग्ङीतकारक रूपमे प्रसिद्ध छथि । मैथिली भाषाक गीतसभमे मौलिक तथा सार्थक सग्ङीतक सृजनमे हिनक सक्रियता प्रशंसनीय छनि । सुनीलक गायन तथा सग्ङीतमे कैसेट एलबमसभ सेहो बाहर भेल अछि ।लेखनदिस हिनक सक्रियता परिमाणात्मक रूपमे कम रहितहुँ गुणात्मक दृष्टिएँ हृदयस्पर्शी मानल जाइत अछि ।पेशासँ विज्ञान-शिक्षक छथि । धीरेन्द्र प्रेमर्षि, सिरहा, नेपाल 1967- वि.सं.२०२४ साल भादब १८ गते सिरहा जिलाक गोविन्दपुर-१, बस्तीपुर गाममे जन्म लेनिहार प्रेमर्षिक पूर्ण नाम धीरेन्द्र झा छियनि।कान्तिपुरसँ हेल्लो मिथिला कार्यक्रम प्रस्तुत कर्ता जोड़ी रूपा-धीरेन्द्रक धीरेन्द्रक अबाज गामक बच्चा-बच्चा चिन्हैत अछि। �पल्लव� मैथिली साहित्यिक पत्रिका आ �समाज� मैथिली सामाजिक पत्रिकाक सम्पादन। रबीन्द्र नारायण मिश्र पिताक नामःस्वर्गीय सूर्य नारायण मिश्र, माताक नामःस्वर्गीया दयाकाशी देवी, पैतृक ग्रामःअडेर डीह, मातृकःसिन्घिआ ड्योढी। वृतिःयोजना आयोगक उप सचिव, दिल्लीमे स्पेशल मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट। आब सेवा निवृत्त। शिक्षा: चन्द्रधारी मिथिला महाविद्यालयसँ बी.एस-सी. भौतिकी विज्ञानमे प्रतिष्ठा; दिल्ली विश्वविद्यालयसँ विधि स्नातक। प्रकाशित कृति : मैथिली:- १. �भोरसँ साँझ धरि� (आत्म कथा), २. �प्रसंगवश� (निवंध), ३. �स्वर्ग एतहि अछि� (यात्रा प्रसंग), ४. �फसाद� (कथा संग्रह) ५. `नमस्तस्यै� (उपन्यास) ६. विविध प्रसंग (निवंध ) ७.महराज (मैथिली उपन्यास) ,८.लजकोटर (मैथिली उपन्यास) ,९.सीमाक ओहि पार (मैथिली उपन्यास) १०.समाधान(निवंध संग्रह) ११.मातृभूमि(उपन्यास) १२.स्वप्नलोक(उपन्यास) १३.शंखनाद(उपन्यास)। कुमार भास्कर अमरेन्द्र यादव, नेपाल रघुनाथ मुखिया प्रदीप पुष्प संदीप कुमार साफी "बैशाखमे दलानपर" प्रकाशित। उमेश मंडल निश्तुकी- कविता संग्रह, मिथिलाक संस्कार गीत, विध-व्यवहार गीत आ गीतनाद (संकलन), "मिथिलाक वनस्पति स्लाइड शो मिथिलाक जीव-जन्तु स्लाइड शो मिथिलाक जिनगी स्लाइड शो", सगर राति दीप जरय- इतिहास, दुध-पानि फराक-फराक (कथा एवं पाण्डुलिपि जगदीश प्रसाद मण्डल)-(छाया एवं सम्पादन- उमेश मण्डल), हिन्दुस्तानी मुसलमान और हिन्दुस्तानियत - मूल हिन्दी लेख- गीतेश शर्मा, मैथिली अनुवाद- उमेश मण्डल। चन्द्रमणि स्व. हेमकान्त झा, गायक मुरलीधर, मैथिली फिल्म निर्देशक कुंज बिहारी, मैथिली गायक रामबाबू झा, गायक बि.पि.उदासी जितेन्द्र सहयोगी उदितनारायण फिल्म गायक प्रकाश झा, फिल्म निर्देशक कीर्ति आजाद क्रिकेट श्रीराम झा शतरंज अभिषेक झा गोल्फ अशोक कुमार 1981- साधारण काष्ठकारक परिवारमे समस्तीपुर जिलाक मोखियारपुर सखलानी गाममे जनमल अशोक कुमार कहियो स्कूल नहि गेलाह। दिनमे पचास टाका कमेनिहार दिल्लीक एकटा गोल्फ क्लबक एहि कैडीकेँ 1994 ई. मे चोरिक मिथ्यारोप लगा कए गोल्फ कोर्ससँ बाहर कए देल गेल। वैह कैडी दस सालक भीतर भारतक नम्बर एक गोल्फर बनि गेल। राजेश रंजन, मैथिली फेडोरा प्रोजेक्ट संजय झा सुल्तानगंज, भागलपुर। मोटोरोलाक सी.ई.ओ.। बिन्देश्वर पाठक बिनोद मिश्र डॉ. बिनोद मिश्र सम्प्रति आई आई टी रूडकी, उत्तराखंडमे अंग्रेजी पढ़बैत छथि आ हिनक रचनाb अंग्रेजी आ हिंदी मे प्रकाशित भेल छन्हि। अहि वर्ष हिनक कविता संग्रह Silent Steps and Other Poems प्रकाशित भेल छन्हि। एकर अतिरिक्त ई अंग्रेजीमे आलोचनाक क्षेत्रमे आठ टा पोथी संपादित केने छथि। हिनक पोथी Communication Skills for Engineers and Scientists बहुतो इंजीनियरिंग संस्थानमे पाठ्य पुस्तक रूपमे पढ़ाओल जाइत अछि। राजकमल झा, अंग्रेजी लेखक, पत्रकार हिनकर अंग्रेजी उपन्यास "द ब्लू बेडस्प्रेड" , "इफ यू आर अफरेड ऑफ हाइट्स" आ "फायरप्रूफ" प्रकाशित छन्हि। "द ब्लू बेडस्प्रेड" (१९९९)पर हुनका "कॉमनवेल्थ राइटर्स प्राइज फॉर बेस्ट फर्स्ट बुक- यूरेशिया" भेटल छन्हि। राजकमल झा श्री मुनीश्वर झा आ श्रीमती रंजना झाक पुत्र छथि, "आइ.आइ.टी.खड़गपुर"सँ बी.टेक.छथि, आ आइ काल्हि दिल्लीमे रहै छथि, जतए ओ "इण्डियन एक्सप्रेस" मे एडिटर छथि। मानस बिहारी वर्मा, वैज्ञानिक फणीश्वर नाथ 'रेणु' मिथिला रत्न 1921-1977 रामधारी सिंह 'दिनकर' मिथिला रत्न 1908-1974 रामवृक्ष बेनीपुरी 1899-1967 डॉ. हरिवंश तरुण 1927-2009 जन्म 21 जून 1927 ई.। गाम- चकसलेम, पो.- पटोरी, जिला- समस्तीपुर। तीन दर्जन सँ बेशी हिन्दी पोथी जाहिमे काव्य-कथा-प्रबन्ध सम्मिलित अछि। हरिशंकर श्रीवास्तव "शलभ" 1934- स्व. जनार्दन प्रसाद झा 'द्विज' हिन्दीक साहित्यकार। रामेश्वर प्रेम हिन्दीक नाटककार। डॉ. नवल किशोर दास "नवल" मोहनानन्द झा 1955- रामाज्ञा शशिधर गणेश चंचल १९३०-२०११ डॉ. अमरेन्द्र गोरेलाल मनीषी कुन्दन अमिताभ शंभु अगेही जन्म ८ जनवरी १९४१, प्रकाशित कृति:ओझराएल डीह (कथा-काव्य) १९९८, सतंजा (कथा संग्रह)१९९९, तेसरी बेरिआ (कथा काव्य)२००३, बज्जिका छंद विभास २००७ पोद्दार रामावतार अरुण १९२३-१९९९ मजहर इमाम १९३०-२०१२ अरुण प्रकाश १९४८-२०१२ अंशुमन पाण्डेय तिरहुता यूनीकोडक आवेदनकर्ता। दिनेश कुमार मिश्र मिथिलाक बाढ़िक एक्स्पर्ट। मिथिलाक मोटा-मोटी सभ धारपर किताब प्रकाशित। उत्तर बिहार की व्यथा कथा (१९९०), कोसी- उम्र कैद से सजा-ए-मौत तक (१९९२) बंदिनी महानंदा (१९९४), बोया पेड़ बबूल का- बाढ़ नियंत्रण का रहस्य (२०००), बगावत पर मजबूर मिथिला की कमला नदी (२००४), भुतही नदी और तकनीकी झाड़- फूक (२००५), , दुई पाटन के बीच में- कोसी नदी की कहानी (२००६) तथा बागमती की सद्गति (२०१०)। ओमप्रकाश भारती १९६८- कोसी नदीक लोक सांस्कृतिक अध्ययन - नदियाँ गाती हैं, बिहार के पारम्परिक नाट्य आ मैथिलीक लोक नाट्य प्रकाशित वैदेही सीता याज्ञवल्क्य पत्नी मैत्रेयी याज्ञवल्क्यक दू टा पत्नी छलथिन्ह पहिल कात्यायनी आ दोसर मैत्रेयी। मैत्रेयी ब्रह्मवादिनी छलीह। कात्यायनीसँ हुनका तीनटा पुत्र छलन्हि- चन्द्रकान्ता, महामेघ आ विजय। मोतीदाइ मिथिलाक रजक (धोबि) जातिक लोकदेवता बिहुला चम्पानगरक बिहुला। गांगो देवी मिथिलाक मलाह जातिक लोकदेवता। गांगोदेवीक भगता अखनो मिथिलाक मलाह लोकनिमे प्रचलित अछि। रेशमा, कुसुमा, फुल्वा मोरंगक मोतीसायर विन्ध्यवासिनी देवी मैथिली लोकगीत 1920-2006 कामेश्वरी देवी 1922- मधुबनी जिलाक नवानी गामक। जन्म १९२२ ई. मे अपन मातृक नाहरमे भेलनि। पति पं मदनमोहन झा। बरौनीवासी प्रसिद्ध तान्त्रिक पण्डित केशव मिश्र हिनक पिता छलथिन। "मिथिला संस्कार गीत" पोथी। कुसुमलता कर्ण अणिमा सिंह 1924- समीक्षिका, अनुवादिका, सम्पादिका । प्रकाशन: मैथिली लोकगीत, वसवेश्वर (अनु.), शिशु खेल गीत आदि। लेडी ब्रेबोर्न कॉलेज, कलकत्तामे पूर्व प्राध्यापिका। लिली रे 1933- जन्म:२६ जनवरी, १९३३,पिता:भीमनाथ मिश्र,पति:डॉ. एच.एन्.रे, दुर्गागंज, मैथिलीक विशिष्ट कथाकार एवं उपन्यासकार । मरीचिका उपन्यासपर साहित्य अकादेमीक १९८२ ई. मे पुरस्कार । मैथिलीमे लगभग दू सय कथा आ पाँच टा उपन्यास प्रकाशित । विपुल बाल साहित्यक सृजन। अनेक भारतीय भाषामे कथाक अनुवाद-प्रकाशित। पहिल प्रबोध सम्मान 2004 सँ सम्मानित। चित्रलेखा देवी 1935- मोहिनी झा 1937- डॉ. सावित्री झा कविता देवी 1942- प्रमिला झा शान्ति सुमन 1942- जन्म 15 सितम्बर 1942, कासिमपुर, सहरसा, बिहार, प्रकाशित कृति, �ओ प्रतीक्षित, परछाई टूटती, सुलगते पसीने, पसीने के रिश्त, मौसम हुआ कबीर, समय चेतावनी नहीं देता, तप रेहे कचनार, भीतर-भीतर आग, मेघ इन्द्रनील (मैथिली गीत संग्रह), शोध प्रबंध: मध्यवर्गीय चेतना और हिन्दी का आधुनिक काव्य, उपन्यास: जल झुका हिरन। सम्मान: साहित्य सेवा सम्मान, कवि रत्न सम्मान, महादेवी वर्मा सम्मान। अध्यापन कार्य। प्रभावती झा 1945-1999 स्व. इलारानी सिंह 1945-1993 इलारानी सिंह: जन्म 1 जुलाई, 1945, निधन : 13 जून, 1993, पिता : प्रो. प्रबोध नारायण सिंह सम्पादिका : मिथिला दर्शन, विशेष अध्ययन : मैथिली, हिन्दी, बंगला, अंग्रेजी, भाषा विज्ञान एवं लोक साहित्य । प्रकाशित कृति : सलोमा (आस्कर वाइल्डक फ्रेंच नाटकक अनुवाद 1965), प्रेम एक कविता (1968) बंगला नाटकक अनुवाद, विषवृक्ष (1968) बंगला नाटकक अनुवाद, विन्दंती (1972), स्वरचित: मैथिली कविता संग्रह (1973), हिन्दी संग्रह। उषाकिरण खान 1945- जन्म:२४ अक्टूबर १९४५,कथा एवं उपन्यास लेखनमे प्रख्यात । मैथिली तथा हिन्दी दूनू भाषाक चर्चित लेखिका ।प्रकाशित कृति:अनुंत्तरित प्रश्न, दूर्वाक्षत, हसीना मंज़िल, भामती (उपन्यास) । २०१०-श्रीमति उषाकिरण खान (भामती, उपन्यास) लेल साहित्य अकादेमी पुरस्कार- मैथिली। नीरजा रेणु 1945- जन्म: ११ अक्टूबर १९४५,नाम: कामाख्या देवी,उपनाम:नीरजा रेणु,जन्म स्थान:नवटोल,सरिसबपाही ।शिक्षा: बी.ए. (आनर्स) एम.ए., पी-एच.डी.,गृहिणी ।प्रकाशित रचना : ओसकण (कविता मि.मि., १९६०) लेखन पर पारिवारिक, सांस्कृतिक परिवेशक प्रभाव । मैथिली कथा धारा साहित्य अकादेमी नई दिल्लीसँ स्वातन्त्र्योत्तर मैथिली कथाक पन्द्रह टा प्रतिनिधि कथाक सम्पादन ।सृजन धार पियासल कथा संग्रह,आगत क्षण ले कविता संग्रह,ऋतम्भरा कथा संग्रह,प्रतिच्छवि हिन्दी कथा संग्रह,१९६० सँ आइधरि सएसँ अधिक कथा, कविता, शोधनिबन्ध, ललितनिबन्ध,आदि अनेक पत्र-पत्रिका तथा अभिनन्दनग्रन्थमे प्रकाशित ।मैथिलीक अतिरिक्त किछु रचना हिन्दी तथा अंग्रेजीमे सेहो।२००३- नीरजा रेणु (ऋतम्भरा, कथा)लेल साहित्य अकादमी पुरस्कार। वीणा ठाकुर 1954- जन्म- भवानीपुर, पण्डौल (मधुबनी)। पिता श्री श्रीमोहन ठाकुर। प्रकाशित कृति: मैथिली रामकाव्यक परम्परा, इतिहास-दर्पण (समीक्षा), विद्यापतिक उत्स (समालोचना), भारती (उपन्यास) ज्ञानसुधा मिश्र भारतक उच्चतम न्यायालयक चारिम महिला न्यायाधीश आ पहिल मैथिलानी। जस्टिस मृदुला मिश्र वीणा कर्ण 1946- जन्म 3 नवम्बर 1946, गाम- पटोरी, पो.पंचगछिया, जिला- सहरसा। सदस्य, मैथिली साहित्य अकादेमी परामर्शदातृ समिति 1987-1993, सदस्य, भाषा परामर्शदातृ समिति (मैथिली), भारतीय ज्ञानपीठ। अवकाशप्राप्त विश्वविद्यालय आचार्य आ अध्यक्ष, मैथिली विभाग, पटना विश्वविद्यालय। प्रकाशित कृति- अर्गला, भावनाक अस्थिपंजर (मैथिली काव्य संग्रह), शंखनाद, तुभ्यमेव समर्पये, अनुबन्ध (हिन्दी काव्य संग्रह)। प्रकाश्य: सप्तपदी (मैथिली निबन्ध संग्रह), चारित्रिक पृष्ठभूमिमे मैथिलीक प्रसिद्ध उपन्यास, मैथिली-उपन्यासक कथा किछु कहैत अछि (मैथिली आलोचना); जिन्दगीनामा (हिन्दी काव्य संग्रह), क्रमशः (हिन्दी आलोचना)। शेफालिका वर्मा 1943- जन्म:९ अगस्त, १९४३,जन्म स्थान : बंगाली टोला, भागलपुर । शिक्षा:एम., पी-एच.डी. (पटना विश्वविद्यालय), ए. एन. कालेज, पटना मे हिन्दीक प्राध्यापिका पदसँ सेवानिवृत्त । नारी मनक ग्रन्थिकेँ खोलि:करुण रससँ भरल अधिकतर रचना। प्रकाशित रचना:झहरैत नोर, बिजुकैत ठोर; विप्रलब्धा (कविता संग्रह), स्मृति रेखा (संस्मरण संग्रह), एकटा आकाश (लघुकथा संग्रह), यायावरी (यात्रा-वृत्तान्त), भावाञ्जलि (काव्य-प्रगीत) , किस्त-किस्त जीवन (आत्मकथापर साहित्य अकादेमी पुरस्कार)। अर्थयुग (लघुकथा संग्रह)आखर-आखर प्रीत, नागफांस (उपन्यास)। २००४ ई.- डॉ. श्रीमती शेफालिका वर्मा, पटना;यात्री-चेतना पुरस्कार। नीता झा 1953- जन्म : २१-०१-१९५३,व्यवसाय:प्राध्यापिका । लेखन पर समाजक परम्परा तथा आधुनिकताक संस्कार सँ होइत विसंगतिक प्रभाव।प्रकाशित कृति : फरिच्छ, कथा संग्रह १९८४, कथानवनीत १९९०,सामाजिक असन्तोष ओ मैथिली साहित्य शोध समीक्षा । बिलाइ मौसी (बाल लघुकथा संग्रह)। आशा मिश्र 1950- जन्म:६-७-१९५० ई.,प्रकाशित कथा मे मैथिकीक संग हिन्दी मे सेहो । सभसँ पैघ विजय मैथिली कथा संग्रह । डॉ. सुनीति झा प्रेमलता मिश्र 'प्रेम' 1948- जन्मस्थान:रहिका,माता:श्रीमती वृन्दा देवी,पिता:पं. दीनानाथ झा,शिक्षा:एम.ए., बी.एड.,प्रसिद्ध अभिनेत्री दू सयसँ बेशी नाटकमे भाग लेलनि ।भंगिमा (नाट्यमंच) क भूतपूर्व उपाध्यक्षा, पत्रिकाक सम्पादन, कथालेखन आदिमे कुशल । �अरिपन� आदि अनेक संस्था द्वारा पुरस्कृत-सम्मानित। डॉ. इन्दिरा झा 1957 मेनका मल्लिक 1966- शारदा सिन्हा मैथिली लोकगीत 1953- लालपरी देवी शकुंतला चौधरी गोदावरी दत्ता, मिथिला चित्रकला उषा वर्मा 1948- कमला चौधरी 1953- कृति- मैथिलीक वेश-भूषा-प्रसाधन सम्बन्धी शब्दावली, प्रकाशनाधीन: बाटे बिलायल पानि (कथा संग्रह), पिया मधुमास (कविता संग्रह), आशापूर्णा देवीक बंगला लघु उपन्यास मन मंजूषाक मैथिली अनुवाद। मुजफ्फरपुरसँ प्रकाशित मैथिली साहित्यिक पत्रिका स्वातीक सम्पादन (१९८४-८५)। सीता देवी, मिथिला चित्रकला सरस्वती चौधरी, जनकपुर डॉ. अरुणा चौधरी विभा रानी 1959- मैथिली क 3 साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता लेखकक 4 गोट किताब "कन्यादान" (हरिमोहन झा), "राजा पोखरे में कितनी मछलियां" (प्रभास कुमार चाऊधरी), "बिल टेलर की डायरी" व "पटाक्षेप" (लिली रे) हिन्दीमे अनूदित छन्हि।2 गोट लोककथाक पुस्तक "मिथिला की लोक कथाएं" व "गोनू झा के किस्से"। मैथिली कथा संग्रह "खोहसँ निकसैत"। ज्योत्सना चन्द्रम 1963- जन्मतिथि: १५ दिसम्बर, १९६३,जन्मस्थान : मरूआरा, सिंधिया खुर्द, समस्तीपुर,पिता : श्री मार्कण्डेय प्रवासी,माता: श्रीमती सुशीला झा,अध्यापन ।सुपरिचित कवयित्री, कथाकार । प्रकाशित कृति: बोनसाई (कविता संग्रह), झिझिरकोना (कथासंग्रह)। सुस्मिता पाठक 1962- जन्म: सुपौल, बिहार । परिचिति कविता संग्रह प्रकाशित । कथावाचक, कथासंग्रह प्रकाशनाधीन । राजनीति शास्त्रमे एम.ए.। संगीत, पेंटिंगमे रुचि । मैथिलीक पोथी पत्रिका पर अनेक रेखाचित्र प्रकाशित । समकालीन जीवन, समय, आ तकर स्पंदनक कवयित्री । अनेक भाषामे रचनाक अनुवाद प्रकाशित। उर्मिला देवी, मिथिला चित्रकला यमुना देवी, मिथिला चित्रकला यशोदा देवी, मिथिला चित्रकला रमा झा, सम्पादक मिथिला दर्पण पन्ना झा अनुभूति (लघुकथा स‍ंग्रह)। सुधा कर्ण नूतन दास सम्पादिका, मिथिलांगन राधिका झा, अंग्रेजी लेखिका हुनकर अंग्रेजी उपन्यास "स्मेल" आ "लैन्टर्न्स ऑन देयर हॉर्न्स" आ अंग्रेजी लघु कथा संग्रह "द एलीफेन्ट एण्ड द मारुति" प्रकाशित अछि। उपन्यास "स्मेल" लेल हुनका "फ्रेन्च प्रिक्स गुएरलेन" पुरस्कार भेटल छन्हि आ ई पोथी सोलह भाषामे अनूदित भेल अछि। राधिका "एमहर्स्ट कॉलेज"सँ "एन्थ्रोपोलोजी" पढ़ने छथि आ "शिकागो विश्वविद्यालय"सँ राजनीति विज्ञानमे मास्टर्स डिग्री लेने छथि। ओ "हिन्दुस्तान टाइम्स" आ "बिजनेस वर्ल्ड"मे काज केने छथि आ संगमे "राजीव गांधी फाउन्डेशन, दिल्ली" मे सेहो, जतए ओ आतंकवादसँ पीड़ित बच्चा सभ लेल सम्पर्क कार्यक्रमक प्रारम्भ केने रहथि। आइ काल्हि ओ अपन पति आ बच्चीक संग टोक्योमे रहै छथि। स्वयंप्रभा झा 1970- रूपा धीरू 1973- रूपा धीरू- जन्मस्थान-मयनाकडेरी, सप्तरी, श्रीमती पूनम झा आ श्री अरूणकुमार झाक पुत्री।स्थायी पता- अञ्चल- सगरमाथा, जिल्ला- सिरहा। प्रथम प्रकाशित रचना-कोइली कानए, माटिसँ सिनेह (कविता),भगता बेङक देश-भ्रमण (कनक दीक्षितक पुस्तकक धीरेन्द्र प्रेमर्षिसँग मैथिलीमे सहअनुवाद,सङ्गीतसम्बन्धी कृति- राष्ट्रियगान, भोर, नेहक वएन, चेतना, प्रियतम हमर कमौआ (पहिल मैथिली सीडी), प्रेम भेल तरघुस्कीमे, सुरक्षित मातृत्व गीतमाला, सुखक सनेस। सम्पादन-पल्लव, मैथिली साहित्यिक मासिक पत्रिका, सम्पादन-सहयोग,हमर मैथिली पोथी (कक्षा १, २, ३, ४ आ ५ आ कक्षा 9-10 क ऐच्छिक मैथिली विषय पाठ्यपुस्तकक भाषा सम्पादन)। रंजना झा, विद्यापति संगीत गायिका रश्मि दत्त, गायिका, जनकपुर कामिनी कामायनी मुन्नी झा युवा रचनाकार कामिनी 1978- युवा कवियित्री रुक्साना सिद्दीकी कल्पना मिश्र, मैथिली रंगमंच ज्योति झा, , मैथिली रंगमंच किरण झा, मैथिली रंगमंच प्रियंका झा, मैथिली रंगमंच ऋतु कर्ण, मैथिली रंगमंच ज्योति वत्स, रंगमंच नेहा वर्मा, रंगमंच सविता अनुप्रिया मृदुला प्रधान अरुण मिश्र, महिला बॉक्सिंग राखी दास, मिथिला चित्रकला बनारसी पंडित,मिथिला चित्रकला, धनुषा, नेपाल देवकला देवी कर्ण,मिथिला चित्रकला, नेपाल मदनकला कर्ण,मिथिला चित्रकला, नेपाल महासुन्दरी देवी,मिथिला चित्रकला निर्जला झा, मिथिला चित्रकला, नेपाल फुलो साह, मिथिला चित्रकला, महोत्तरी, नेपाल रजनी पल्लवी संगीता कुमारी, मैथिली फेडोरा प्रोजेक्ट विन्देश्वरी दास गौरी सेन सीमा झा वाणी मिश्र, कवियित्री १९५३-१९९६ कोइलख, मधुबनी। जन्मस्थान तिलाठी, नेपाल। मौसमी बनर्जी, कवियित्री शैल झा शान्ति देवी शशिबाला पिता श्री उग्र नारायण लाल, पति श्री उमेश कुमार कण्ठ (बिसहथ)। शिवा कश्यप आ कृष्ण कुमार कश्यपक सहयोगसँ "भारती विकास संस्था"क स्थापना। रचना: कृष्ण कुमार कश्यपक संग "मेघदूत" आ "गीत-गोविन्द"क मैथिली अनुवाद, माछ-भात, मिथिला चित्र-शिक्षा, भाग-१, मिथिला चित्र-कोर, भाग-३। मुन्नी कामत सुखल मन तरसल आँखि (कविता संग्रह)। प्रेरणा झा मिथिला लोक कला अंशुमाला मैथिली लोकगीत। श्वेता झा चौधरी, चित्रकार गाम सरिसव-पाही, ललित कला आ गृहविज्ञानमे स्नातक। मिथिला चित्रकलामे सर्टिफिकेट कोर्स।कला प्रदर्शिनी: एक्स.एल.आर.आइ., जमशेदपुरक सांस्कृतिक कार्यक्रम, ग्राम-श्री मेला जमशेदपुर, कला मन्दिर जमशेदपुर ( एक्जीवीशन आ वर्कशॉप)।कला सम्बन्धी कार्य: एन.आइ.टी. जमशेदपुरमे कला प्रतियोगितामे निर्णायकक रूपमे सहभागिता, २००२-०७ धरि बसेरा, जमशेदपुरमे कला-शिक्षक (मिथिला चित्रकला), वूमेन कॉलेज पुस्तकालय आ हॉटेल बूलेवार्ड लेल वाल-पेंटिंग।प्रतिष्ठित स्पॉन्सर: कॉरपोरेट कम्युनिकेशन्स, टिस्को; टी.एस.आर.डी.एस, टिस्को; ए.आइ.ए.डी.ए., स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया, जमशेदपुर; विभिन्न व्यक्ति, हॉटेल, संगठन आ व्यक्तिगत कला संग्राहक। हॉबी: मिथिला चित्रकला, ललित कला, संगीत आ भानस-भात। श्वेता झा मिथिला चित्रकला, सम्प्रति सिंगापुरमे निवास। रानी झा मोती कर्ण मिथिला चित्रकला निक्की प्रियदर्शिनी प्रज्ञा झा डॉ. नलिनी चौधरी नीलम चौधरी, कथक नृत्यांगना इरा मल्लिक पिता स्व. शिवनन्दन मल्लिक, गाम- महिसारि, दरभंगा। पति श्री कमलेश कुमार, भरहुल्ली, दरभंगा। गुंजन कर्ण राँटी मधुबनी, सम्प्रति यू.के.मे रहै छथि। www.madhubaniarts.co.uk पर हुनकर कलाकृति देखि सकै छी। पूनम मंडल प्रियंका झाक संग मैथिली न्यूज पोर्टल "समदिया" www.esamaad.blogspot.com क संचालन । प्रियंका झा पूनम मंडलक संग मैथिली न्यूज पोर्टल "समदिया" www.esamaad.blogspot.com क संचालन । स्तुति नारायण डॉ. ललिता झा १९५१ जन्म पनिचोभ, दरभंगामे। "मैथिलीक भोजन सम्बन्धी शब्दावली" प्रकाशित"। आरती कुमारी १९६७- "मैथिली मुक्तक काव्यमे नारी" प्रकाशित। मीना झा ब्रेस्ट कैसरक समस्यापर विदेह मे मीना झा केर एकटा लघु कथा प्रकाशित भेल। ई मैथिलीक पहिल कथा छल जे ब्रेस्ट कैसर पर लिखल गेल। हिन्दीमे सेहो ताधरि एहि विषयपर कथा नहि लिखल गेल छल। अनुपमा प्रियदर्शिनी पति डॉ. रतन कर्ण, गाम- उजान (बड़कागाम), पो. लोहना रोड, जिला दरभंगा। सम्प्रति लोजियाना (संयुक्त राज्य अमेरिकामे), शिक्षा- एम.एस.सी. (जंतु विज्ञान), ल.ना. मिथिला वि.वि., दरभंगा; बी.एस.सी. बी.आर. अम्बेडकर वि.वि. मुजफ्फरपुरसँ, हॉबी, मिथिला चित्रकला, कमप्यूटराइज्ड चित्रकला, ललित कला। उपलब्धि: अखिल भारतीय कला आ दस्तकारी प्रतियोगिताक पुरस्कार 1995 मे; संस्कार भारती भाव नृत्य प्रतियोगिता 1989 मे सहभागी। आराधना मल्लिक मैथिली रंगमंच। शिखा मैथिली रंगमंच। प्रीति ठाकुर गाम- जगेली, भाया तारानगर, पूर्णियाँ। मैथिली बाल साहित्यमे "गोनू झा आ आन चित्र कथा २००८", "मैथिली चित्रकथा २००९" आ "मिथिलाक लोकदेवता २०१०", विद्यापतिक पुरुष परीक्षा (बाल साहित्य) २०१४ प्रकाशित। अनुपमा झा ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल, भारत। विनीता मल्लिक रेवती मिश्र अनामिका राज आभा झा प्रियंवदा तारा झा डॉ अपर्णा शान्ति लक्ष्मी चौधरी ग्राम गोविन्दपुर, जिला सुपौल निवासी आ राजेन्द्र मिश्र महाविद्यालय, सहरसा मे कार्यरत पुस्तकालयाध्यक्ष श्री श्यामानन्द झाक जेष्ठ सुपुत्री, आओर ग्राम महिषी (पुनर्वास आरापट्टी), जिला सहरसा निवासी आ दिल्ली स्कूल ऑफ इकानोमिक्स सँ जुड़ल अन्वेषक आ समाजशास्त्री श्री अक्षय कुमार चौधरीक अर्धांगिनी छथि। प्राणीशास्त्र सँ स्नातकोत्तर रहितो शिक्षाशास्त्रक स्नातक शिक्षार्थी आ एकटा समाजशास्त्री सँ सानिध्यक चलिते आम जीवनक सामाजिक बिषय-बौस्तु आ खास कऽ महिलाजन्य सामाजिक समस्या आ प्रघटनामे हिनक विशेष अभिरूचि स्वभाविक। अनुपम रैना डॉ चित्रलेखा डॉ कल्पना मणिकान्त मिश्र पिता डॉ शिव कुमार झा, गाम राटी, सासुर- गजहारा। मेडिकल शिक्षा जे. जे. हॉस्पीटल/ ग्रान्ट हॉस्पीटलसँ सम्पन्न कय स्त्री-रोग विशेषज्ञ। मुम्बइसँ १९८०-८२ मे प्रकाशित होइबला मैथिली पत्रिका "विदेह"क पति डॉ मणिकान्त मिश्र (निर्माता- मैथिली फिल्म- आउ पिया हमर नगरी) संग सम्पादन। ४.९.मिथिलाक खोज वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू। Always refresh the pages for viewing new issue of VIDEHA. प्रस्तुत अछि विदेह, मिथिला, तीरभुक्ति आ तिरहुतक नामसँ विख्यात वर्त्तमान भारत आ नेपालमे पसरल माटिक प्राचीन आ नव स्थापत्य, चित्रांकित अभिलेख आ मूर्त्तिकलाक एकटा छोट संग्रह। ऐ संग्रहकेँ पूर्ण करबाक हेतु अपन बहुमूल्य संग्रह editorial.staff.videha@gmail.com केँ पठाउ। आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार, सम्बन्धित फोटोग्राफर आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। फोटो सभ पठेबा लेल धन्यवाद पाठकगण। साभार। विशेष विवरण देखबा लेल क्लिक करू, दर्शनीय मिथिला, Brochure 1, Brochure 2, Brochure 3  (मैथिली साहित्य  संस्थान लिंक), IGNCA ASI (Cultural Heritage of Mithila- search keyword Mithila), Temple Survey Project ASI- English आ Hindi .पूर्णतः अव्यवसायिक उद्देश्य आ मात्र एकेडमिक प्रयोग लेल। भुवनेश्वरी भगवतीपुर (Madhubani, Bihar) बौद्ध तारा सँ समानता नाकमे कुण्डल देखू सूर्य भगवतीपुर (Madhubani Bihar) विष्णु भगवतीपुर (Madhubani, Bihar) दुर्गा, पोखरिसँ भेटल, ओतहि बहेरी मन्दिर (बजारसँ दक्षिण)मे स्थापित हरद्वार मन्दिर घनश्यामपुर (दरभंगा)- चोरि भऽ गेल गौरीशंकर, जमथरि, हैंठी बाली, मधुबनी गौरीशंकर, जमथरि, हैंठी बाली, मधुबनी गौरीशंकर, जमथरि, हैंठी बाली, मधुबनी गौरीशंकर, जमथरि, हैंठी बाली, मधुबनी गौरीशंकर, जमथरि, हैंठी बाली, मधुबनी गौरीशंकर, जमथरि, हैंठी बाली, मधुबनी बाइसी-बसैटी, अररिया मिथिलाक्षर ताम्रलेख बाइसी-बसैटी, अररिया मिथिलाक्षर ताम्रलेख बाइसी-बसैटी, अररिया मिथिलाक्षर ताम्रलेख बाइसी-बसैटी, अररिया मिथिलाक्षर ताम्रलेख धरहरा, बनमनखी, पूर्णियाँ, नरसिंह अवतार धरहरा, बनमनखी, पूर्णियाँ, नरसिंह अवतार पूरणदेवी, पूर्णियाँ बिदेश्वर स्थान अभिलेख, मधुबनी अन्ध्राठाढी अभिलेख, मधुबनी बुद्ध अष्टधातु, सिसव बसंतपुर, बगहा 12 शताब्दी, कोइलख, मधुबनी अग्नि बिदेश्वर स्थान, मधुबनी बुद्ध, मुंगेर अहिल्या स्थान अन्ध्राठाढी, मधुबनी अशोक स्तंभ, बसाढ, वैशाली बुद्ध अवलोकितेश्वर तारा, भागलपुर बसाढ, वैशाली बुद्ध भूमिस्पर्श बुद्ध, ताम्र बुद्ध मस्तक, सुलतानगंज वैशाली मूर्त्ति चामुण्डा नाग-नागिनी, मुंगेर मुकुटधारी बुद्ध, अंतीचक, भागलपुर नाचैत गणेश, 10म शताब्दी, दरभंगा दरभंगा म्युजियम दरभंगा म्युजियम दुर्गा, कार्त्तिकेय 10म शताब्दी, भीट भगवानपुर, अन्ध्रा ठाढी गणेश बुद्ध गौतम बुद्ध, वैशाली हरिहर बुद्ध चिड़ैकेँ खुआबैत महिला, राजमहल लौरिया नन्दनगढ, अशोक स्तंभ लोमश सुदामा गुफा मुंगेर नागराज तीर्थंकर कुमारिल भटट फेकेलाह, नालन्दा विक्रमशिला विश्वविद्यालय, भागलपुर ठाढ बुद्ध पार्वती रामायण रामपुरवा वृषभ रामपुरवा बुद्धक अवशेष संकिसा सप्तमातृका सर्वतो भद्र मण्डल सूर्य सूर्य सूर्यक संगी सूर्य, मधुबनी आ भागलपुर मूर्त्ति मूर्त्ति मूर्त्ति, वैशाली उमा माहेश्वर, कल्याणसुन्दर वैशाली वृषभ शीर्ष वैशाली, शालभंजिका भागलपुर विष्णु बुद्धा पाँखियुक्त्त महिला अहिल्या अष्टयोगिनी मन्दिर, सहरसा बनगंगा दरभंगा दरभंगा नगर, 1934 दरभंगा मेडिकल कॉलेज दुल्हदुल्हिन मन्दिर, जनकपुर गण्डीश्वर गंगासागर पोखरि, मधुबनी हनुमान मन्दिर, मधुबनी हरिहरस्थान मधुबनी हॉस्पीटल जनकपुर जानकी मन्दिर जानकी मन्दिर जानकी मन्दिर, सीतामढी जानकी मन्दिर, सीतामढी जिला स्वास्थ्य कार्यालय राजबिराज, नेपाल कलनेश्वर बाबा कपिलेश्वर कोषलेखाकार्यालय, राजबिराज, नेपाल मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा लक्ष्मीश्वर पैलेस, 1934 माध्यमिकविद्यालय , जनकपुर महेन्द्र चौक, जनकपुर जनकपुर मंडप मिथिला, 1988 भूकम्प पगलाबाबा धर्मशाला, जनकपुर, नेपाल पंडौल अहल्या मधुबनी बस स्टैंड राज हेड ऑफिस, 1934 राज हॉस्पीटल, दरभंगा, 1934 सौराठ सभा शिव मन्दिर, 1934 शिवशंकर सिनेमा, मधुबनी श्यामा मन्दिर विद्यापति मूर्त्ति, बिस्फी उग्रतारा, तारास्थान, महिषी, सहरसा विद्यापति स्मारक, बिस्फी विस्फी, उदना महादेव बिस्फी, विश्वेश्वरी भगवती अहल्या मन्दिर, अहियारी अशोक स्तंभ, वैशाली स्तूप अशोक स्तंभ, वैशाली बलिराजपुर किला पूर्वी गेट बलिराजपुर किला मीनार चण्डी स्थान, बिराटपुर, सहरसा गाँधी पोखरि, ढाका, मोतिहारी गाँधी विद्यालय, ढाका, मोतिहारी गिरिजा स्थान, मधुबनी हरिहर मन्दिर, सोनपुर जैन मन्दिर, भागलपुर जैन मन्दिर, वैशाली कमलादित्य स्थान कपिलेश्वर शिव मन्दिर लौरिया नन्दनगढ मदनेश्वर शिव मन्दिर मन्दार पर्वत, बाँका मोतिहारी सत्याग्रह स्मारक परमेश्वरी मन्दिर, ठाढी, मधुबनी रामजानकी मन्दिर, सीतामढी सत्याग्रह स्मारक, सीतामढी शांति स्तूप, वैशाली उच्चैठ भगवती उच्चैठ मन्दिर सिंघेश्वर स्थान, मधेपुरा सूर्यधाम, परसा उग्रतारा मन्दिर, महिषी, सहरसा वैशाली स्तूप विक्रमशिला विश्वविद्यालय, भागलपुर विराटपुर मन्दिर, मधेपुरा वृषभ शीर्ष, रामपुरवा सिंह शीर्ष, रामपुरवा शरभ, नेपाल पाँखियुक्त्त देवी, वैशाली बाबा बडेश्वर, देवना, बनगाँव वट वृक्ष, बनगाँव भगवान विष्णु, देवना, बनगाँव शास्त्रार्थ स्थल,तारास्थान महिषी शास्त्रार्थ स्थल,तारास्थान महिषी तारास्थान महिषी माता तारा, तारास्थान महिषी उग्रतारा (खादर वाणी तारा) मूर्ति, महिषी वशिष्ठ मुनि, तारास्थान महिषी आवर्धित काली उच्चैठ बौद्धदेवी तारा वारी समस्तीपुर भगवती देकुली भगवती गिरिजा फुल्हर भगवती मृणमूर्ति गन्धबारि भगवती वारी समस्तीपुर भुवनेश्वरी कोर्थ देवीकाली कोर्थ गंगामूर्ति नगरडीह दरभंगा गोसाउनि मन्दिर कोर्थ हैहट्ट देवी हाबीडीह काली उच्चैठ महिषासुरमर्दिनी बहेरी दरभंगा महिषासुरमर्दिनी हाबीडीह महिषासुरमर्दिनी नाहर-भगवतीपुर उमा म्लेच्छमर्दिनी मिर्जापुर दरभंगा यमुना भैरव बलिया मधुबनी भैरव, भैरव-बलिया नटराज, तारालाही शिव-पार्वती मन्दिर, कपिलेश्वरस्थान शिव-पार्वती मन्दिर, कपिलेश्वरस्थान शिव मन्दिर, सिंगिया, विस्पी उमामाहेश्वर, महादेवमठ उमामाहेश्वर, तिरहुत विष्णु, भवानीपुर विष्णु, भीठ भगवानपुर विष्णु, जयनगर विष्णु, लदहो विष्णु, साहो-पररी, हाबीडीह शेषशायी विष्णु, सवास, मुजफ्फरपुर वराह मूर्ति, तिलकेश्वरस्थान मिथिलाक्षर अभिलेख, विष्णु बुद्ध मूर्ति भगवती उच्चैठ, बेनीपट्टी भगवती वाणेश्वरी, भंडारीसम चामुण्डा मन्दिर, कटरा, मुजफ्फरपुर अष्टभुज गणेश, हाबीडीह अष्टभुज गणेश, कोर्थ गंगा, आन्ध्रा-ठाढ़ी महिषासुरमर्दिनी, दुर्गा म्लेच्छमर्दिनी मन्दिर, मिर्जापुर, दरभंगा नटराज राममन्दिर, अहिल्यास्थान सेहनी, वैशाली, विष्णु तिलक-यज्ञोपवीतधारी रूपनगर शिव मन्दिर सूर्य, देकुली सूर्य मूर्ति, डिलाही सूर्य मूर्ति, विष्णु, बरुआर उमामाहेश्वर यमुना, आन्ध्रा-ठाढ़ी सिमरौनागढ़ मूर्ति आदि काली, चैनपुर सहरसा चैनपुर सहरसा- मिथिलाक एकमात्र नीलकंठ मन्दिर, संगमे आदिकालीन भव्य काली-मन्दिर सेहो एहि गाममे अछि। महाशिवरात्रि आ कालीपूजा बड़ धूमधामसँ चैनपुरमे होइत अछि। त्योथागढ़क स्वामी माध्वानन्द कौलाचार्य काली मन्दिर त्योथा गढ़ लग। पुरान गढ़। एकर पूबमे ब्रह्मपुराक बाबा हरिहरनाथ महादेव मन्दिर आ दक्षिणमे उच्चैठ भगवती छथि। त्योथागढ़क दसमुखी काली त्योथा गढ़ लग। पुरान गढ़। एकर पूबमे ब्रह्मपुराक बाबा हरिहरनाथ महादेव मन्दिर आ दक्षिणमे उच्चैठ भगवती छथि। कोइलख (मधुबनी) देवीक मन्दिर अकौर, बेनीपट्टी, भगवती दुर्गा, भगवतीपीठ अकौर, बेनीपट्टी, भगवती दुर्गा, भगवतीपीठ १.अष्टभुज गणेश, कोर्थ २.शिव मन्दिर, सिंघिया, बिस्फी १. बौद्ध देवी तारा, वारी, समस्तीपुर २.उग्रतारा मन्दिर, महिषी, सहरसा १.भगवती, वारी २.भगवती, देकुली १. भगवती गिरिजा, फुलहर २.काली, उच्चैठ १. भैरव, भैरव बलिया २. उमामाहेश्वर, महादेवमठ १. देवीकाली, कोर्थ २. गुसाउनि स्थल मन्दिर, कोर्थ १. गणेश, लहेरियासराय २.उमामाहेश्वर ३. नटराज, ४. विष्णु, तिलक, जनउ धारी, सेहान, वैशाली १. गंगा मूर्ति, नगरडीह, दरभंगा २. भगवती मृण्मूर्ति, गन्धवारि १. हैहट्ट देवी, हाबीडीह २.भुवनेश्वरी, कोर्थ १. कथित काली, उच्चैठ, २.अष्टभुज गणेश, कोर्थ १. महिषासुर मर्दिनी, हाबीडीह, २.उमा, म्लेच्छमर्दिनी, मिर्जापुर, दरभंगा १.महिषासुरमर्दिनी, भगवतीपुर, नाहर, महिषासुर मर्दिनी, बहेरी, दरभंगा १. म्लेच्छमर्दिनी भगवती, मिर्जापुर, दरभंगा २. राम मन्दिर, अहिल्यास्थान १. म्लेच्छमर्दिनी भगवती, मिर्जापुर, दरभंगा २.सिंहेश्वर स्थान, मधेपुरा १. नटराज, तारालाही २. उमामाहेश्वर १_शेषसायी, सवास, मुजफ्फरपुर, २_नटराज_तारालाही ३_ भगवती ४_ उमा माहेश्वरी १-शिव पार्वती मन्दिर, कपिलेश्वर स्थान २. सूर्य मूर्ति डिलाही १_ सूर्यमूर्ति, विष्णु बरुआर २. गंगा, आन्ध्रा ठाढ़ी १_उच्चैठ भ्हगवती, बेनीपट्टी २_महिषासुरमर्दिनी, दुर्गा ३_ चामुण्डा मन्दिर, कटरा, मुजफ्फरपुर ४._भगवती वानेश्वरी, भण्डारिसम १. वराहमूर्ति, तिलकेश्वरस्थान, २.विष्णु, भवानीपुर १. विष्णु, जयनगर २.विष्णु, भीठ भगवानपुर १_विष्णु, लदहो, २.सूर्य, देकुली १_विष्णु_साहो परड़ी, स्थापित-हाभीडीह २.बुद्ध-विष्णु मूर्ति अभिलेख १_विष्णु, सेहान, २_वराह ३_गणेश ४.शिव मन्दिर_रूपनगर १_यमुना, आन्ध्रा ठाढ़ी, २.अष्टभुज गणेश, हाबीडीह १_यमुना, भैरव बलिया, २_शेषसायी, सवास, मुजफ्फरपुर, ३_नटराज_तारालाही ४_ भगवती ५_ उमा माहेश्वरी कथित, काली, उच्चैठ, बेनीपट्टी मूर्ति (मिथिला क्षेत्र) सम्भवतः सूर्य वेणुगोपाल, मिथिला विष्णु, जाले, दरभंगा विष्णु विष्णु, ओझौल, दरभंगा मिथिलाक खोज ई आलेख हमर दशकसँ ऊपरक मिथिलाक यात्राक उपरान्तक सूत्र-वृत्तान्त अछि आ ऐमे ऐ सभ स्थानक स्थानीय निवासी आ गाइड सभक अकथनीय योगदान छन्हि । कखनो कालतँ भाड़ाक गाड़ीक ड्राइवर लोकनि सेहो नीक गाइड सिद्ध भेला।-गजेन्द्र ठाकुर "मिथिलायदयश्च मध्यंते रिपवो इति मिथिला नगरी" - मिथिला जतऽ शत्रुकेँ मथल जाइत अछि- पाणिनीक विवरण। किला आ गढ़ बलिराजपुर किला- मधुबनी जिलाक बाबूबरही प्रखण्डसँ ५ किलोमीटर पूब बलिराजपुर गाम अछि। एकर दक्षिण दिशामे एकटा पुरान किलाक अवशेष अछि। किला चारि किलोमीटर नमगर आ एक किलोमीटर चाकर अछि। दस फीटक मोट देबालसँ ई घेरल अछि। असुरगढ़ किला- मिथिलाक दोसर किला मधुबनी जिलाक पूब आ उत्तर सीमा पर तिलयुगा धारक कातमे महादेव मठ लग ५० एकड़मे पसरल अछि। जयनगर किला- मिथिलाक तेसर किला अछि भारत नेपाल सीमा पर प्राचीन जयपुर आ वर्त्तमान जयनगर लग। दरभंगा लग पंचोभ गामसँ प्राप्त ताम्र अभिलेख पर जयपुर केर वर्णन अछि। नन्दनगढ़- बेतियासँ १२ मील पश्चिम-उत्तरमे ई किला अछि। तीन पंक्त्तिमे १५ टा ऊँच डीह अछि। लौरिया-नन्दनगढ़- नन्दनगढ़सँ उत्तर स्थित अछि, एतऽ अशोक स्तंभ आ बौद्ध स्तूप अछि। देकुलीगढ़- शिवहर जिलासँ तीन किलोमीटर पूब हाइवे केर कातमे दू टा किलाक अवशेष अछि। चारू दिस खधाइ अछि। कटरागढ़- मुजफ्फरपुरमे कटरा गाममे विशाल गढ़ अछि, देकुली गढ़ जकाँ चारू कात खधाइ खुनल अछि। नौलागढ़-बेगुसरायसँ २५ किलोमीटर उत्तर ३५० एकड़मे पसरल ई गढ़ अछि। जयमंगलगढ़- बेगूसरायमे बरियारपुर थानामे काबर झीलक मध्य एकटा ऊँच डीह अछि। एतऽ ई गढ़ अछि। नाओकोठी (मझौल) गाम लग ई गढ़ अछि। मंगलगढ़- समस्तीपुर जिलामे हसनपुर ब्‍लॉकमे दुधपुरा बजार लग देओढ गाम लग। भगवान बुद्धक उपदेश एतऽ भेल, स्थानीय राजा मंगलदेवक आग्रहपर बुद्ध किछु दिन एतऽ निवास सेहो केलन्हि। अलौलीगढ़- खगड़ियासँ १५ किलोमीटर उत्तर अलौली गाम लग १०० एकड़मे पसरल ई गढ़ अछि। कीचकगढ़- पूर्णिया जिलामे डेंगरघाटसँ १० किलोमीटर उत्तर महानन्दा नदीक पूबमे ई गढ़ अछि। बेनूगढ़- टेढ़गाछ थानामे कवल धारक कातमे ई गढ़ अछि। वरिजनगढ़- बहादुरगंजसँ छह किलोमीटर दक्षिणमे लोनसवरी धारक कातमे ई गढ़ अछि। नेऊरी- दरभंगाक बिरौल प्रखण्डसँ १३ किलोमीटर पश्चिममे एकटा गढ़ अछि जे लोरिकक मानल जाइत अछि। बुद्ध कुन्दग्राम- हाजीपुरसँ बत्तीस किलोमीटर उत्तर-पूर्वमे बसाढ़-वैशाली आ लगमे वासोकुण्ड लग गाम गढ़-टीलासँ २ कि.मी. उत्तर-पूर्व अछि कुन्दग्राम , जतऽ जैनक २४म तीर्थंकर महावीरक जन्म भेल छलन्हि। एतऽ बुद्धक छाउर, अभिषेक पुषकरणी (राजा अभिषेकसँ पूर्व एतऽ नहाइत रहथि), अशोक स्तम्भ आ संसद-भवन (राजा विशालक गढ़) अछि। पजेबागढ़ वनही टोल- एतऽ एकटा बुद्ध मूर्त्ति भेटल छल, मुदा ओकर आब कोनो पता नै अछि। ई स्थल सेहो रखबारी गामक लगे अछि। मंगलगढ़- समस्तीपुर जिलामे हसनपुर ब्‍लॉकमे दुधपुरा बजार लग देओढ गाम लग। भगवान बुद्धक उपदेश एतऽ भेल, स्थानीय राजा मंगलदेवक आग्रहपर बुद्ध किछु दिन एतऽ निवास सेहो केलन्हि। मुसहरनियां डीह- अंधरा ठाढ़ीसँ ३ किलोमीटर पश्चिम पस्टन गाम लग एकटा ऊँच डीह अछि। बुद्धकालीन एकजनियाँ कोठली, बौद्धकालीन मूर्त्ति, पाइ, बर्त्तनक टुकड़ी आ पजेबाक अवशेष एतऽ अछि। अकौर- मधुबनीसँ २० किलोमीटर पश्चिम आ उत्तरमे अकौर गाममे एकटा ऊँच डीह अछि, जतऽ बौद्धकालक मूर्त्ति अछि। लौरिया-नन्दनगढ़- नन्दनगढ़सँ उत्तर स्थित अछि, एतऽ अशोक स्तंभ आ बौद्ध स्तूप अछि। विक्रमशिला- भागलपुरमे स्थित प्राचीन विश्वविद्यालय। भागलपुर जिलाक अंतीचक गाममे राजा धर्मपालक बनाओल बुद्ध विश्वविद्यालय अछि। १०८ व्याख्याता लेल रहबाक स्थान आ बाहरसँ पढ़य बला लेल सेहो स्थान एतऽ निर्मित अछि। चम्पानगर- भागलपुरक पश्चिममे, आब नगरसँ सटि गेल अछि। ई जैन लोकनिक एकटा पवित्रस्थल अछि, एतऽ महावीर तीनटा बस्सावास केने रहथि। दू टा जैन मन्दिर एतऽ अछि, जे जैनक बारहम तीर्थंकर वासुपूज्य नाथकेँ समर्पित अछि। महावीर विदेहमे छह टा बस्सावास बितेलन्हि। बर्खा ऋतुमे चारि मास एक ठाम निवासकेँ बस्सावास कहल जाइ छल। बुद्ध एकोटा बस्सावास विदेहमे नै बितेलन्हि, मुदा वैशाली नगरीमे आम्रपालीक उद्यानमे लिच्छवीगणकेँ सन्देश देने छला।  आम्रपालीसँ  भिक्षा ग्रहण कऽ बुद्ध गेला वेणुमती करय चारि मासक बस्सावास। अभिलेख गौरी-शंकर स्थान, मधुबनी जिलाक जमथरि गाम आ हैंठी बाली गामक बीच ई स्थान गौरी आ शङ्करक सम्मिलित मूर्त्ति आ ऐपर मिथिलाक्षरमे लिखल पालवंशीय अभिलेख। बिदेश्वरस्थानसँ २-३ किलोमीटर उत्तर दिशामे ई स्थान अछि। भीठ-भगवानपुर अभिलेख- राजा नान्यदेवक पुत्र मल्लदेवसँ संबंधित अभिलेख एतऽ अछि। मधुबनी जिलाक मधेपुर थानामे ई स्थल अछि। भगीरथपुर- पण्डौल लग भगीरथपुर गाममे अभिलेख अछि जइसँ ओइनवार वंशक अंतिम दुनू शासक रामभद्रदेव आ लक्ष्मीनाथक प्रशासनक विषयमे सूचना भेटैत अछि। मंदार पर्वत- बांका स्थित स्थलमे मिथिलाक्षरक गुप्तवंशीय ७म् शताब्दीक अभिलेख अछि। समुद्र मंथनक हेतु मंदारक प्रयोग भेल छल। निकटमे बौंसीमे जैनक बारहम तीर्थंकर वासुपूज्य नाथक दूटा मूर्त्ति अछि, पैघ मूर्ति लाल पाथरक अछि तँ दोसर काँसाक जकर सोझाँ दूटा पदचिन्ह अछि। जैनक बारहम तीर्थंकर वासुपूज्य नाथक जन्म चम्पानगरमे आ निर्वाण एत्तै भेल छलन्हि। बिदेश्वर- मधुबनी जिलामे लोहनारोड स्टेशन लग स्थित शिवधामक स्थापना महाराज माधवसिंह केलन्हि। तइ युगक मिथिलाक्षरक अभिलेख सेहो एतऽ अछि। बसैटी (बाइसी-बसैटी), अररिया अभिलेख - पूणियाँमे श्रीनगर लग मिथिलाक्षरक ई अभिलेख मिथिलाक पहिल महिला शासक रानी इद्रावतीक राज्यकालक वर्णन करैत अछि। रानी इन्द्रावती (१७८४-१८०२) जे अकालक समय फूड-फॉर-वर्क आ अन्य कल्याणकारी कार्यक प्रारम्भ केने रहथि। जयनगर किला- मिथिलाक तेसर किला अछि भारत नेपाल सीमा पर प्राचीन जयपुर आ वर्त्तमान जयनगर लग। दरभंगा लग पंचोभ गामसँ प्राप्त ताम्र अभिलेख पर जयपुर केर वर्णन अछि। विष्णु हुलासपट्टी- मधुबनी जिलाक फुलपरास थानाक जागेश्वर स्थान लग हुलासपट्टी गाम अछि। कारी पाथरक विष्णु भगवानक मूर्त्ति एतऽ अछि। पिपराही- लौकहा थानाक पिपराही गाममे विष्णुक मूर्त्तिक चारू हाथ भग्न भऽ गेल अछि। मधुबन- पिपराहीसँ १० किलोमीटर उत्तर नेपालक मधुबन गाममे चतुर्भुज विष्णुक मूर्त्ति अछि। कमलादित्य स्थान- अंधरा ठाढ़ी लगमे कमलादित्य स्थानक विष्णु मंदिर कर्णाट राजा नान्यदेवक मंत्री श्रीधर दास द्वारा स्थापित भेल। झंझारपुर अनुमण्डलक रखबारी गाममे वृक्षक नीचाँ राखल विष्णु मूर्त्ति, गांधारशैली मे बनाओल गेल अछि। मटिहानी- विष्णु मन्दिर जनकपुर- बृहद् विष्णुपुराणमे मिथिलामाहात्म्यमे जनकपुर क्षेत्रक वर्णन अछि। सत्रहम शताब्दीमे संत सूर किशोरकेँ अयोध्यामे सरयू धारमे राम आ जानकीक दू टा भव्य मूर्त्ति भेटलन्हि, जकरा ओ जानकी मन्दिर, जनकपुरमे स्थापित कऽ देलन्हि। वर्त्तमान मन्दिरक स्थापना टीकमगढ़क महारानी द्वारा १९११ ई. मे भेल। नगरक चारूकात यमुनी, गेरुखा आ दुग्धवती धार अछि। राम नवमी (चैत्र शुक्ल नवमी),जानकी नवमी (वैशाख शुक्ल नवमी) आ विवाह पंचमी (अगहन शुक्ल पंचमी) पर एतऽ मेला लगैए। अंधरा-ठाढ़ीक स्थानीय वाचस्पति संग्रहालय- गौड़ गामक यक्षिणीक भव्य मूर्त्ति एतऽ राखल अछि। गौतम तीर्थ- कमतौल स्टेशनसँ ६ किलोमीटर पश्चिम ब्रह्मपुर गाम लग एकटा गौतम कुण्ड पुष्करणी अछि। मुंगेरक पूब 'सीता-कुण्ड'गर्म कुण्ड अछि, सीता जी एत्तै पृथ्वीमे समाहित भेल छली। ठंढ़ा जलक कुण्ड 'रामकुण्ड', लक्ष्मण कुण्ड, भरत कुण्ड, आ शत्रुघ्न कुण्ड सेहो अछि, भैयारीमे बड्ड मिलान। से मिलान बाबू गढ़ नारिकेलमे सेहो छै, बेसी पढ़ल लिखल गाममे से आब कहाँ? हलावर्त्त- जनकपुरसँ ३५ किलोमीटर दक्षिण पश्चिममे सीतामढ़ी नगरमे हलवेश्वर शिव मन्दिर आ जानकी मन्दिर अछि। एतसँ डेढ़ किलोमीटर पर पुण्डरीक क्षेत्रमे सीताकुण्ड अछि। हलावर्त्तमे जनक द्वार हर चलेबा काल सीता भेटलि छली। राम नवमी (चैत्र शुक्ल नवमी) आ जानकी नवमी (वैशाख शुक्ल नवमी) पर एतऽ मेला लगैए। फुलहर-मधुबनी जिलाक हरलाखी थानामे फुलहर गाममे जनकक पुष्पवाटिका छल जतऽ सीता फूल लोढ़ै छली। धनुषा- जनकपुरसँ १५ किलोमीटर उत्तर धनुषा स्थानमे पीपरक गाछक नीचाँ एकटा धनुषाकार खण्ड पड़ल अछि। रामक तोड़ल ई धनुष अछि। ऐसँ पूब वाणगंगा धार बहैए जे लक्ष्मण द्वारा वाणसँ उद्घाटित भेल छल। सुग्गा- जनकपुर लग जलेश्वर शिवधामक समीप सुग्गा ग्राममे शुकदेवजीक आश्रम अछि। शुकदेवजी जनकसँ शिक्षा लेबाक हेतु मिथिला ऐल छला- ऐ ठाम हुनका ठहरेबाक व्यवस्था भेल छल। सिंहेश्वर- मधेपुरासँ ५ किलोमीटरपर गौरीपुर गाम लग सिंहेश्वर शिवधाम अछि। कपिलेश्वर- कपिल मुनि द्वार स्थापित महादेव मधुबनीसँ ६ किलोमीटर पश्चिममे अछि। कुशेश्वर- समस्तीपुरसँ उत्तर-पूब, लहेरियासरायसँ ६० किलोमीटर दक्षिण-पूब आ सहरसासँ २५ किलोमीटर पश्चिम ई एकटा प्रसिद्ध शिवस्थान अछि। एतऽ चिड़ै-अभ्यारण्य सेहो अछि जतऽ उज्जर आ कारी गैबर, लालसर, दिघौछ, मैल, नकटा, गैरी, गगन, सिल्ली, अधानी, हरिअल, चाहा, करन, रतबा चिड़ै सभ नवम्बरसँ मार्च धरि देखबामे अबैए। सिमरदह- थलवारा स्टेशन लग शिवसिंह द्वारा बसाओल शिवसिंहपुर गाम लग ई शिवमन्दिर अछि। सोमनाथ- मधुबनी जिलाक सौराठ गाममे सभागाछी लग सोमदेव महादेव छथि। मदनेश्वर- मधुबनी जिलाक अंधरा ठाढ़ीसँ ४ किलोमीटर पूब मदनेश्वर शिव स्थान अछि। चण्डेश्वर- झंझारपुरमे हरड़ी गाम लग चण्डेश्वर ठाकुर द्वारा स्थापित चण्डेश्वर शिवस्थान अछि। शिलानाथ- जयनगर लग कमला धारक कातमे शिलानाथ महादेव छथि। उग्रनाथ- मधुबनीसँ दक्षिण पण्डौल स्टेशन लग भवानीपुर गाममे उगना महादेवक शिवलिंग अछि। विद्यापतिकेँ प्यास लगलन्हि तँ उगनारूपी महादेव जटासँ गंगाजल निकालि जल पियेलखिन्ह। विद्यापतिक हठ केलापर ऐ स्थान पर उगना हुनका अपन असल शिवरूपक दर्शन देलखिन्ह। उच्चैठ छिन्नमस्तिका भगवती- कमतौल स्टेशनसँ १६ किलोमीटर पूर्वोत्तर उच्चैठमे कालिदास भगवतीक पूजा करैत छला। भगवतीक मौलिक मूर्त्ति मस्तक विहीन अछि। उग्रतारा- मण्डन मिश्रक जन्मभूमि महिषीमे मण्डनक गोसाउनि उग्रतारा छथि। भद्रकालिका- मधुबनी जिलाक कोइलख गाममे भद्रकालिका मंदिर अछि। चामुण्डा- मुजफ्फरपुर जिलामे कटरागढ़ लग लक्ष्मणा वा लखनदेइ धार लग दुर्गा द्वारा चण्ड-मुण्डक वध कएल गेल। ओइ स्थानपर ई मन्दिर अछि। परसा सूर्य मन्दिर- झंझारपुरमे सग्रामसँ पाँच किलोमीटर पूर्व परसा गाममे साढ़े चारि फीटक भव्य सूर्य मूर्त्ति भेटल अछि। चैनपुर सहरसा- मिथिलाक एकमात्र नीलकंठ मन्दिर, संगमे आदिकालीन भव्य काली-मन्दिर सेहो ऐ गाममे अछि। महाशिवरात्रि आ कालीपूजा बड़ धूमधामसँ चैनपुरमे होइत अछि। धरहरा, बनमनखी, पूर्णियाँमे नरसिंह अवतारक स्थान अछि, एकटा खोह जकाँ पैघ पाया अछि जइमे जे किछु फेकबै तँ बड़ी काल धरि गों-गोँ अबाज होइत रहत। ई स्थान आब नरसिंह भगवानक मूर्ति आ मन्दिरक कारणसँ बेस विकसित भऽ गेल अछि। एत्तै नरसिंह पाया फाड़ि अवतरित भेल छला। बिसफी- मधुबनी जिलाक बेनीपट्टी थानामे कमतौल रेलवे स्टेशनसँ ६ किलोमीटर पूब आ कपिलेश्वर स्थानसँ ४ किलोमीटर पश्चिम बिसफी गाम अछि। ज्योतिरीश्वर पूर्व महाकवि विद्यापतिक जन्म-स्थान ई गाम अछि। मिथिलाक बीस टा सिद्ध पीठ- १.गिरिजास्थान (फुलहर, मधुबनी), २.दुर्गास्थान (उचैठ, मधुबनी), ३.रहेश्वरी (दोखर, मधुबनी), ४.भुवनेश्वरीस्थान (भगवतीपुर, मधुबनी), ५. भद्रकालिका (कोइलख, मधुबनी), ६.चमुण्डा स्थान (पचाही, मधुबनी), ७.सोनामाइ (जनकपुर, नेपाल), ८.योगनिद्रा (जनकपुर, नेपाल), ९.कालिका स्थान (जनकपुर स्थान), १०.राजेश्वरी देवी (जनकपुर, नेपाल), ११.छिनमस्ता देवी (उजान, मधुबनी), १२.बनदुर्गा (खररख, मधुबनी), १३.सिधेश्वरी देवी (सरिसव, मधुबनी), १४.देवी-स्थान (अंधरा ठाढ़ी, मधुबनी), १५.कंकाली देवी (भारत नेपाल सीमा आ रामबाग प्लेस, दरभंगा), १६.उग्रतारा (महिषी, सहरसा), १७.कात्यानी देवी (बदलाघाट, सहरसा), १८.पुरन देवी(पूर्णियाँ), १९.काली स्थान (दरभंगा), २०.जैमंगलास्थान(मुंगेर), ५२. जनकपुर परिक्रमाक १५ स्थल आ ओतुक्का मुख्य देवता १. हनुमाननगर- हनुमानजी, २.कल्याणेश्वर- शिवलिंग, ३.गिरिजा-स्थान- शक्ति, ४.मटिहानी- विष्णु मन्दिर, ५.जालेश्वर- शिवलिंग, ६.मनाई- माण्डव ऋषि, ७. श्रुव कुण्ड- ध्रुव मन्दिर, ८.कंचन वन- कोनो मन्दिर नै मात्र मनोरम दृश्य, ९.पर्वत- पाँच टा पर्वत, १०.धनुषा- शिव धनुषक टुकड़ी, ११.सतोखड़ी- सप्तर्षिक सात टा कुण्ड, १२.हरुषाहा- विमलागंगा, १३. करुणा- कोनो मन्दिर नै मात्र मनोरम दृश्य, १४. बिसौल- विश्वामित्र मन्दिर आ १५.जनकपुर। दरभंगा कैथोलिक चर्च- १८९१मे स्थापित ई चर्च १८९७ केर भूकम्पमे क्षतिग्रस्त भऽ गेल। एकरा होली रोजेरी चर्च सेहो कहल जाइए। सेंट फांसिस ऑसिसी चर्च मुजफ्फरपुरमे अछि। भिखा सलामी मजार- गंगासागर पोखरि दरभंगाक महारपर ई मजार अछि। मकदूम बाबाक मजार:ललित नारायण मिथिला विश्ववविद्यालय आ कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय दरभंगाक बीच स्थित ई मजार हिन्दू आ मुस्लिम मतावलम्बीक एकटा पावन स्थान अछि। दरभंगा टावर मस्जिद इस्लाम मतावलम्बीक एकटा भव्य मस्जिद आ धार्मिक स्थल अछि। विदेह ३६६ म अंक १५ मार्च २०२३ (वर्ष १६ मास १८३ अंक ३६६)|| 209 210 || http://www.videha.co.in/ ISSN 2229-547X VIDEHA

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USA HA WS गप के AM बढ़बेत कहलखिन, ' फूल बाबू, कोसी नदीक बेसिन प्राचीन काल सँ मनुक्खक निवास लेल उपयुक्त स्थान रहल अछि। बारहम-तेरहम सदी मे भारत मे जखन कइक टा नदी सुखा गेल, तँ ओहि ठामक पशुचारक समाजक लोक एतय आबि कए बसलाह। तहिये सँ बढ़ैत जनसंख्या आ कोसी नदीक बदलैत प्रवाहक मध्य टकराहटि होमय लागल | नदीक अनियंत्रित धारा केँ लोक बाढ़ि बूझय लागल | पहिल बेर बारहम शताब्दी मे लक्ष्मणसेन द्वितीय कोसी ade पुबरिया किनार दिस ore बनौलनि | लक्ष्मणसेन द्वितीय बंगाल के सेन वंशक शासक छलाह, F778 सँ 7205 Heat धरि शासन कयनेँ छलाह। Ue बान्हक अवशेष sel एखनो भीमनगर सँ दू कोस पश्चिम मे देखि wha छी। एकटा पश्चिमी विद्वान फ्रांसिस बुकानन के अनुमान रहनि, जे ई are संभवत: कोनो किला के रक्षा हेतु बनाओल गेल होयत | मुदा बुकानन के मत SF Se, डब्लू. हंटर सहमत नहि भेलखिन। ओ साफ कहलखिन, जे कोसीक किनार पर are एहि दुआरे बनाओल गेल होयत, जे नदी पच्छिम दिस नहि ae’ लागय।' पढ़आ कका सँ मुँहजबानी wie रास ऐतिहासिक तथ्य सुनियो कए फूल बाबू सहमति मे मूड़ी नहि डोलेलखिन | जाहि सँ ओतय बैसल लोक सबहक उत्सुकता और बढ़ि गेलनि, जे गप मे एहेन कोन तथ्य Ue गेलै जे फूल बाबू संतुष्ट नहि भेलखिन ? लोक के बुझेलनि जे फूल बाबू शास्त्रार्थ के अखड़हा पर माटि फेकि teat छथिन। पढ़आ कका केँ आइ जोड़ीदार भेटि गेलनि! जलप्रांतर / 3l

* ब्ेश, तँँ सुनू । 7354 से फिरोजशाह grees के wits जस्बन व्वंगात्त सँँ faecit aR tect wer, ते कोसीक vere aga तेज रतन greet Sar sre कोसी के किनार पर पहुँचत्त, तँँ कोसीक otf पार से हाजी शम्सखद्दीन इत्नियास से सेना ुगल्लकी सेना सै सोकाव्यस्ता sare Aer उसस्तर-शस्त्र or कप लैयार we aS हाजी शम्सऊद्दीन were, जे छाजीपुर डा समस्तीपुर नगर व्वसौनें Teles | Forester चुगलक के सेना संभवत: कुरसेत्ता के उ्मास-पास कोसी के तेज ae Sa ae सोच्च से पड़ गेल after रफ्तार Sf aoe लुगल्तकी सेना केँ नदी पार ्करव्वाक fsa afr भ' रहत्न Se! staat: लुगत्तकी सेनापति तय sacs, जे नदीक किनारे- किनार उत्तर दिस eget जाय । जलय जा कप नदीक पा करने कस व्यूझि पड़, sie पानिक ere ret जायल । एक्ठि sien से फौज उतर दिस aga रहत्न ETT aaa ate sunt गेस्ताक व्वाद व्कोसी के पेट at शिकस्त geet कोसी उ्मोलक्ि पहाड़ a नीचाँ sate sf पानिक सैर के ora ufe ef कसत्त जा सकैए, जे पाँच-पाँच सय सनक ores ere Aare creat व्यक्ति रत्न wer । तुगात्तव्की सेनासति के जलय सदी पार ae करें Sram aaah, sity एक cnet से सैकड़ों टा हाथी केँ org ae’ देस्त Fer Aral aren लाइन से ages - व्वडकका रस्सा cee ket Fret, जे St seit पानि से भास् जायत, team के safer सँँ निकात्ति Ger जायत। ule तरहेँ फिरोजशार लुगत्नकव्क सेना कोसी पार कक गेल । हाजी शम्सखद्दीन सपनों से fe सोचने च्ल,जे तुगत्नकी सेना ra पार क' जायत | Shas हाजी शस्सठद्दीन BF पता लगलनै जे तुगत्तककी सेना HA पार ae? set उसक्छि, F sit St से पड़ा गेल । ले ae Sreftes से ज enc से wt’ seu waar aneaieears करे wer रखी जय पर ग |”

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भारतवर्ष में बिहार में कोसी नदी को बांधने का काम | Ze शताब्दी में किसी राजा लक्ष्मण द्वितीय ने करवाया था. और इस काम के लिए उसने प्रजा से ‘aie: की उपाधि पाई और नदी का तटबन्ध 'बीर बांध' कहलाया। इस 'तटबन्ध के अवशेष अभी भी सुपौल जिले में भीम नगर से कोई 5 किलोमीटर दक्षिण में दिखाई पड़ते हैं। डॉ. फ्रांसिस बुकानन (80-7) का अनुमान था कि यह बांध किसी किले की सुरक्षा के लिए बनीं बाहरी दीवार रहा होगा क्योंकि यह बांध धौस नदी के पश्चिमी किनारे पर तिलयुगा से उसके संगम तक 32 किलोमीटर की दूरी में फैला हुआ था। डॉ. Sexy, Sey, हन्टर (877) बुकानन के इस तर्क के साथ सहमत नहीं थे कि यह बांध किसी किले की सुरक्षा दीवार था। स्थानीय लोगों के हवाले से हन्टर का मानना था कि अधिकांश लोग इसे किले की. दीवार नहीं मानते और उनके हिसाब से यह कुछ और ही चीज थी मगर वह निश्चित रूप से कुछ कहने की स्थिति में नहीं थे। फिर भी जो आम धारणा बनती है वह यह है कि यह कोसी नदी के किनारे बना कोई तटबन्ध रहा होगा. जिससे नदी की धारा को पश्चिम की ओर खिसकने से रोका जा सके। लोगों का यह भी कहना था कि ऐसा लगता था. कि. इस. ce का... निर्माण... कार्य एकाएक te दिया... गया... होगा।

गे पंकज पराशरक पहिल उपन्यास “जतप्रांतर' (20i7) शोधपरक _ sore अछि। मैथिलीमे शोधपरक उपन्यास लिखबाक परम्परा Ale रहल _अछि। एहि दुआरे ई उपन्यास रेखांकन योग्य अछि । पराशरजी ue _उपन्यासमे कोसी नदीक aren इतिहास-कथा लिखलनि अछि। उपन्यासक बैशिष्ट्य ई जे बारहम शताब्दीसँ ल' क' आधुनिक काल धरि कोसी पर बान्ह ah दुसाध्य प्रयत्न, प्रशासनिक उठा-पटक, राजनीतिक cata Mee विस्तृत व्योरा रोचक कथाक माध्यम कहलनि aS | ध्यान देबाक तल ई जे सभटा सूचना आ व्योरा अत्यन्त विश्वसनीय oft पड़ल अछि। का आ फूल बाबू सदृश्य पढ़ल-लिखल आ सचेत पात्रक माध्यम नुसन्धानकें रखलनि अछि। दलान पर बैसल लोकक जिज्ञासाकें कका कहैत छथिन, “पहिल बेर बारहम शताब्दीमे लक्ष्मणसेन fe पुबरिया किनार दिस are बनौलनि। लक्ष्मण सेन बुंशक शासक छलाह जे L78e 205 ई. धरि शासन

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2 | | http://www.videha.co.in/ ISSN 2229-547X VIDEHA £ aE g wee पु हक =| कं gE i oe ] ‘debe. , E 4 fu & Ee का wo) a “Be eee Te Se es भारतवर्ष मं बिहार में कोसी नदीं को बॉयने का काम tae शताद्द में किसी राजा लक््ण दितीय ने करवाया था और इस काम के लिए उसने प्रजा से 'बीर' की उपाधि पाई और नदी का ae 'बीर a कहलाया। इस memes के अवशेष अभी भी ute जिले में भीम नगर से कोई 5 किलोमीटर दक्षिण में दिखाई पड़ते हैं डॉ. फ्रासिस बुकानन (780-02) का अदुमान था कि यह बाँध किसी किले की सुरक्षा के लिए बनी बाहरी दीवार रहा होगा क्योंकि पह बॉय che नदी के पश्चिमी किनारे पर तिलयुगा से उसके संगम तक 32 किलौमीरर की दुरी में a हुआ था। डॉ. डब्लू ब्लू ree | 87) बुकानन के इस तर्क के साध सहमत नहीं थे कि यह बांध फिसी किले की सुरक्षा दीवार था। स्थामीय लोगों के हवाले से हन्टर का मानना था कि अधिकांग लोग इंसे किले की दीवार नहीं मानते और उनके हिसाब से यह कुछ और ही चीज थी मगर वह निश्चित रूप से कुछ कहें की स्थिति मेंनहीं थे। फिर भी जो आम धारणा बनती है चह पह है कि Ma कोसी नदी के किनारे बना कोई तत्वत्व रहा होगा जिससे नदी की धारा को पश्चिम की ओर खिसफने से रोका जा seh लोगों का यह भी कहना था कि ऐसा लगता. था. कि. इस. तटबन्ध का... निर्माण. कार्य. एकाएक .. रोक. दिया. गया... होगा।

| पंकज पराशर fs बुद्धिजीवी, लोक वृत्त और coat पॉलिटिक्स है बौद्धिक जगत में इन दिनों बुद्धिजीवियों का वर्गीकरण भी विवाद का विषय बनता जा रहा है। जिगमेंट बोमन बुद्धिजीवियों को समाज की एक ऐसी इकाई के रूप में देखते हैं जो सामाजिक संस्थाओं की सेवा करने के लिए वैश्विक मूल्यों का विधेयन करते हैं । इस वर्ग के बुद्धिजीवियों के बारे में ऐसा माना जाता है किये बुद्धिजीवी अपनी योग्यता के आधार पर आम जनमानस के लिए मानवाकृतियों, लोक में घटित घटनाओं आदि की बेहतर व्याख्या प्रस्तुत करते हैं । अमेरिकी बौद्धिक जगत में इन दिनों बुद्धिजीवियों की भूमिका को लेकर जो गरमा-गरम बहस छिड़ी हुई है उनमें से एक धड़े का मानना है कि फिलवक्त जो सामाजिक और वैश्विक हालात हैं उसमें बुद्धिजीवियों की स्थिति में आधुनिक बुद्धिजीवियों से लेकर उत्तर आधुनिक बुद्धिजीवियों तक में बदलाव आया है । दिलचस्प यह है कि पश्चिम के बुद्धिजीवियों में जैसे ही यह बदलाव आया उसका त्वरित असर हिंदी के उन उत्तर-आधुनिक बुद्धिजीवियों पर भी पड़ा, जो कुछ साल पहले तक उत्तर- आधुनिकता के भारतीय प्रवक्ता होने का दावा करते नहीं अघाते थे। जहाँ एक ओर आधुनिक बुद्धिजीवी वैश्विक मूल्यों के कार्यकारी इकाई के तौर पर नई आधुनिक समाज-व्यवस्था का विधेयन करते हैं वहीं दूसरी ओर इस प्रकार सामाजिक जीवन में बुद्धिजीवियों की भूमिका के राजनीतिक विकेन्द्रीकरण के सिद्धांत का भी प्रतिपादन करते हैं । नोम चोम्स्की के बाद की पीढ़ी में वामपंथी रुझान के कवियों/विचारकों और बुद्धिजीवियों की संख्या में निरंतर बढ़ोत्तरी जारी है । लुश प्रशासन अपनी तमाम नीतियों को लेकर पनप रहे असंतोष और मुखर होते ग्रतिरोधी स्वर को लेकर भी हैरान-परेशान है । गौरतलब है कि 2003 में इराक हमले की पीठिका बनते समय भी वहां के बुद्धिजीवियों ने बुश प्रशासन की आलोचना की थी और आज आम जनता वहाँ से अमेरिकी सैनिकों की अविलंब वापसी की मांग कर रही है । मगर राष्ट्रपति जार्ज डब्ल्यू. बुश के सिपहसालारों ने इन 'विरोधों की न तब परवाह की और न अब ऐसा लगता है कि उन पर कोई खास असर पड़ा है । अमेरिका स्थित कोलंबिया यूनिवर्सिटी में दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर डगलस कैलनर ने कुछ वर्ष पूर्व, 2005 के आखिर में छपी अपनी किताब ' मीडिंया स्पेक्टैकल्स एंड द क्राइसिस ऑफ डेमोक्रेसी ' में इन मुद्दे पर जोरदार बहस की है कि इन दिनों मीडिया में जिन मुद्दों को जनहित के नाम पर उठाया जा रहा है वह असल में जनहित के वास्तविक मुद्दों से लोगों का ध्यान हटाने की एक शातिर चाल है 9/7 के बाद मीडिया ने जिस तरह से अपना चेहरा और चाल दोनों को बदला है - कैलनर खास तौर पर इससे चिंतित होते हैं और बुद्धिजीवियों के बीच खास- पहल - 86 25

खास बिन्दुओं पर चिंतन का आह्वान करते हैं । इसी तरह “द वार फॉर द व्हाइट हाउस' किताब में वे अमेरिकी विदेश, रक्षा और आर्थिक नीतियों की गंभीरता से नये-नये तथ्यों की रोशनी में न सिर्फ आलोचना करतें हैं बल्कि खासी मज़म्मत भी करते हैं । अभी हाल ही में छपी वाशिंगटन Shalt. के बाशिंदे मिखाइल मैकडोनाल्ड की 'द अमेरिकन sete नामक छपी किताब में खास तौर पर अमरीकी हितों और वैशिवक परिदृश्य की पड़ताल की गई है । उन्होंने एक और बेहद दिलचस्प किताब “द स्ट्रेंजर इन क्राउफोर्ड' में जार्ज बुश और कालजयी फ्रेंच उपन्यासकार A कामू के बीच तुलना करते हुए एक किताब ही लिख मारी है । बहरहाल, असली मुद्दा यह है कि मीडिया की बदली प्राथमिकता और चाल की बेहतर समीक्षा प्रस्तुत करते हुए डगलस कैलनर ने ‘cal पॉलिटिक्स' जैसी शब्दावली के सहारे बुद्धिजीवियों की भूमिका और नई-नई आने वाली चुनौतियों को रेखांकित किया है । बुद्धिजीवियों को दो वर्गों में वर्गीकृत करते हुए कैलनर कार्यकारी बुद्धिजीवी (फंक्शनल इंटेलेक्चुअल ) के बारे में कहते हैं, ये स्थापित सामाजिक मूल्यों का उत्पादन और विधेयन करते हैं । जबकि इसके ठीक विपरीत विरोधी खेमे के बुद्धिजीवी (फ्रिटिकल-अपोजीशनल इंटेलेक्चुअल ) स्थापित सामाजिक व्यवस्था का विरोध करते हैं । कभी -कभी विरोधी खेमे के बुद्धिजीवी समाज में मौजूद मूल्यों के खिलाफ ही अपनी आवाज बुलंद करते हैं और ऐसा मानकर चलते हैं कि इन मूल्यों का समाज में दबदबा बढ़ रहा है | मसलन कानून, न्याय, सत्य और अधिकार आदि। ऐसे बुद्धिजीवी कई बार और भी गंभीर मुद्दों का विरोध करते हैं - जैसे लोकतंत्र, समाजवाद, अश्वेत लोग और स्त्रियों की समानता आदि। कार्यकारी बुद्धिजीवी पहले रूढ़ और काफी हद तक आदर्शवादी थे, जबकि आज उन वर्गों और तकनीकविदों के हितों के संरक्षक बने हुए हैं जो परिणामों तक पहुँचने के लिए समर्थ साधनों का इस्तेमाल करते हैं । ये बुद्धिजीवी अपनी क्षमताओं को विभिन्न क्षेत्रों, जैसे दवा, भौतिक विज्ञान और अतीत में मौजूद तकनीकी ज्ञान को बढ़ाने के लिए करते हैं । बिना नतीजे की ओर उँगली उठाये और किसी चीज की परवाह किये बगैर वे जिन मूल्यों की स्थापना और वापसी के लिए प्रयत्नशील रहते हैं - उसकी उपयोगिता और अनुपयोगिता पर आज विमर्श करना बहुत आवश्यक है । कार्यकारी बुद्धिजीवी समाज को बेहतर बनाने ( अपने तरीके से ) के लिए तकनीकी जानकारियों में दक्षता हासिल करते हैं, वहीं विरोधी खेमे के बुद्धिजीवी आलोचक सामाजिक बेहतरी के लिए संघर्षरत हैं । देश-विदेश में ऐसे बुद्धिजीवियों की एक लंबी thefts है जिन्होंने आंदोलनों में न सिर्फ शिरकत की, बल्कि ता-उम्र के लिए उससे जुड़ ही गए । तेलुगू में वरवर राव, अंग्रेजी में अरुंधति राय, बांग्ला में महाश्वेता देवी आदिं लेखकों-बुद्धिजीवियों को भारतीय परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है । विरोधी खेमे के बुद्धिजीवी परंपरागत तौर पर अपने ज्ञान और लेखन का प्रयोग अन्याय, शक्ति के दुरुपयोग, सत्य के लिए संघर्ष और अन्य वैशिवक मूल्यों के खिलाफ आवाज उठाने के लिए करते हैं । ज्याँ पॉल सार्त्र के शब्दों में कहें तो, '' विरोधी खेमे के बुद्धिजीवी का कार्यक्षेत्र आम जनता तक सीमित है ।'' सारत्र के इस कथन के आधार पर एक विरोधी खेमे के बुद्धिजीवी का काम समाज की विभिन्न कुरीतियों का विश्लेषण करना तथा उनको और अधिक FSU प्रदान करना है । यह बुद्धिजीवी के शाब्दिक हथियार हैं जिनके जरिये उन्हें समाज में कहीं भी हो रहे अन्याय का विरोध करना है | हेबरमास (989) के कथन की रोशनी में अगर देखें at आधुनिक समय में विरोधी खेमे के बुद्धिजीवी का कार्यक्षेत्र आम जनता से जुड़े मुद्दे राजनीतिक वाद-विवाद और विभिन्न किताबों, पत्र-पत्रिकाओं में छपी चीजों पर लिखना और विमर्श करना है ।'' हालांकि सभी विरोधी खेमे के बुद्धिज्नीवी वैचारिक रूप से प्रगतिशील नहीं हैं, बावजूद इसके समाज के आधुनिक होने से बुद्धिजीवियों की भौतिक और मानसिक दशाओं में तब्दी लियाँ आई हैं । इन दिनों बुद्धिजीवी वे लोग हैं जो नये विचारों और नये 26 पहल - 86

| संस्कारों को पैदा करने में माहिर होते हैं । इनमें से भी कुछ बुद्धिजीवी वर्तमान समाज का समर्थन करते हैं तो कुछ उसका विरोध करते हैं । शायद इन वजहों से भी बुद्धिजीवी, कार्यकारी और विरोधी खेमे के बुद्धिजीवी के रूप में de गए । कार्यकारी बुद्धिजीवी जहाँ एक तरफ समाज की सेवा तकनीकी जानकारियों से करते हैं वहीं नये आदर्श पैदा करके वर्ग, रंग और लिंग को वैधता प्रदान करते हैं । कहना न होगा कि अपने देश में भी सांप्रदायिक शक्तियों के सत्तासीन होते ही ऐसे-ऐसे ay खाँ, * बुद्धिजीवी ' का बिल्ला लगाये हुए कभी “वाजपेयी aera’ बना रहे थे, तो कभी उनकी कविताओं को नये-नये ' रागों ' में गाकर सत्ता की आराधना में aaa दिखा रहे थे - अभूतपूर्व समाजवादियों के समर्थन पर टिकी भाजपा राज के समय। विरोधी खेमे के बुद्धिजीवी अन्यायी और शोषकों के खिलाफ आवाज बुलंद करते हैं । जबकि विरोधी खेमे के परंपरागत बुद्धिजीवी उत्तर आधुनिक सिद्धांतों द्वारा पैदा की गई चुनौतियों के साथ-साथ नई तकनीकों द्वारा तलाशी गई लोकतांत्रिक बहसों की संभावनाओं पर चर्चा करना मुफीद समझते हैं । यह सारी बातें विरोधी खेमे के बुद्धिजीवी और उनकी भूमिका को ठीक से पुनर्परिभाषित करने की माँग करता है । लोकक्षेत्र ( पब्लिक स्फीयर ) और बुद्धिजीवी अगर मूल परिभाषा पर नजर दौड़ाएं तो लोकतंत्र मूलतः सत्ता के विकेन्द्रीकरण के साथ-साथ सरकारी मामलों में जनता की भागीदारी का नाम है । पुनर्जागरण और 8 वीं शताब्दी की राजनीतिक क्रांति के काल में एक ऐसा लोकक्षेत्र उभरकर सामने आया जहाँ आम आदमी अपने से जुड़े मुद्दों पर बहसें कर aerator दिलचस्प यह है कि उस काल में सरकार की आलोचना खास तौर पर आम जनता तक पहुँचाई जाती थी । खुद को अभिव्यक्त करने का साधन बना अखबार और पत्र-पत्रिकाएं । उस वक्‍त तत्कालीन प्रेस | की आजादी आम जन को काफी कुछ सही रूप से चीजों को जानने-समझने का रास्ता फराहम कराती थी । वैचारिक आदान-प्रदान के लिए लोग कॉफी हाउस, पान की दुकान, नाई की दुकान आदि जगहों पर बैठा करते थे और वहीं विभिन्न मुद्दों पर चर्चाएं छिड़ जाती थीं । दुखद यह है fH Gai समाज के टूटने के बाद | तमाम लोगों ने अपनी-अपनी पार्टियाँ बना लीं, संस्थाएं बना लीं और विचारधाराएं विकसित कर लीं । बकौल | डगलस कैलनर, “* आम जनता को रिझाने के लिए विभिन्न पार्टी और संस्था के लोग लिखने लगे और खुद को | खुद के ही द्वारा बुद्धिजीवी का दर्जा दे दिया । देखते-देखते शोषित वर्गों ने भी अपने बुद्धिजीवी पैदा कर लिए | | हालांकि ये बुद्धिजीवी विद्रोही विचारधारा के थे और शोषकों के मुकाबले शोषितों के बुद्धिजीवियों में खास ara यह थी, वे समाज के सारे तबके का प्रतिनिधित्व करते थे।'' ध्यान रहे कि मेरी वोलेस्टोनक्राफ्ट जैसी | महिलाओं ने महिला अधिकारों के लिए आवाज बुलंद की थी । शोषित वर्ग के विद्रोही विचारधारा वाले इन |... बुद्धिजीवियों ने दमन और उनके कारणों के खिलाफ तो आवाज बुलंद की ही साथ ही इसके हल के लिए | > इनके समाधानों को सिद्धांत से उठाकर वास्तविकता के धरातल पर प्रयोग करने की बात कही | इसलिए 9 वीं शताब्दी में कर्मचारी वर्ग के लोगों ने शोषकों के खिलाफ अपना एक अलग ही लोकक्षेत्र विकसित किया। यूनियन हॉलों, दफ्तरों, सार्वजनिक स्थानों में इनकी सभाएं, चर्चाएं होने लगीं । इसी दौर में बकौल जुरगेन हेबरमास, “' अमेरिका और यूरोप में पनप रहे लोकतंत्र और श्रमिक आंदोलनों ने एक वैकल्पिक प्रेस को जन्म दिया। इसके साथ ही हड़ताल और बैठकों जैसी चीज ने शोषक-विरोधी लोकक्षेत्र को एक नया मंच ... प्रदान किया।'' आधुनिक समाज के बुद्धिजीवियों में विरोधाभासी रूप से सामाजिक कार्यों को लेकर हमेशा एक मतभेद बना रहा । पारंपरिक रूप से विरोधी खेमे के बुद्धिजीवियों जैसे टॉमस पेन, मेरी वोलेस्टोनक्राफ्ट और बाद में मार्क्स, ह्यूगो, act और मा्क्वेज जैसे लोगों ने पुनर्जागरण के दरम्यान अन्याय और शोषण के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की । इसके बावजूद संकीर्ण विचारों के बुद्धिजीवियों ने पुनर्जागरण और पहल - 86 प27

फ्रांसीसी क्रांति की कामयाबियों पर हमला करते हुए कुछ इस तरह का इजहार-ए-खयाल किया जिसके तहत वर्ग, लिंग और रंग के नाम पर दमन और उत्पीड़न को जायज ठहराया गया। इन बुद्धिजीवियों के विरोध में मिशेल फूकों ने शिकायत की थी, “ant ने एक आदर्शवादी नमूना प्रस्तुत किया है, जो बुद्धिजीवियों को वैश्विक मूल्यों, मसलन, सत्य, अहिंसा, आजादी और मानवता आदि के लिए लड़ने की सलाह देता है।'' फूको ने इसके विरोध में विशेष बुद्धिजीवी का प्रस्ताव किया जो बिलकुल तटस्थ होकर शोषितों-उत्पीड़ितों के सवालों से जुड़े खास मुद्दों के लिए अपनी आवाज बुलंद करे। फूको का यह विचार उत्तर-आधुनिक राजनीति में प्रासंगिक हो गया और राजनीति को पार्टी की राजनीति से हटाकर सामाजिक आंदोलनों की तरफ मोड़ दिया गया | उत्तर-आधुनिक राजनीति के लिए शक्ति का विकेन्द्रीकरण जरूरी है। डगलस कैलनर कहते हैं, ''मैं यह मानता हूँ कि आलोचक बुद्धिजीवी या कहें विरोधी खेमे के बुद्धिजीवियों के कुछ विचार उपयोगी हैं । आम बुद्धिजीवी वैश्विक मूल्यों के हनन के खिलाफ आवाज sara हैं, जबकि आम लोकतांत्रिक बुद्धिजीवी दूसरों के लिए आवाज उठाने के बदले व्यक्तिगत या वैश्विक मुद्दों से जुड़े खास मुद्दों पर ही अपनी राय जाहिर करते हैं।'' नतीजा यह होता है कि वर्तमान परिवेश में | लोकतांत्रिक बुद्धिजीवी कहलाने के लिए वैश्विक बुद्धिजीवी के पूरे गुण होने की आवश्यकता नहीं है | कहना न होगा कि बुद्धिजीवियों को व्यक्तिगत इच्छाओं/अनिच्छाओं से ऊपर उठकर सोचना चाहिए | बिना किसी पक्षपात के अपनी 'बात कहनी चाहिए - तमाम पूर्वग्रहों को छोड़कर । इसके साथ-साथ अपनी सीमाएं जानते हुए खुद को दूसरे की जगह रखकर सोचना चाहिए। नई तकनीक, लोकक्षेत्र और नये बुद्धिजीवी कुछ मामलों में बुद्धिजीवियों और तकनीक में कोई खास संबंध नहीं होता । आज के उच्च तकनीक से संपन्न समाज में कंप्यूटर और त्वरित मीडिया युग में प्रतिबद्ध आम बुद्धिजीवियों को परिभाषित करने की जरूरत है । बीसवीं सदी की शुरुआत में जॉन fed ने ' थॉट =a नामक एक ऐसे अख़बार की परिकल्पना की थी जिसमें विज्ञान की नवीनतम खोजों और विचारों को जगह दी जाए। इसके अलावा बर्टोल्ट ब्रेख़ और वाल्टर बेंजामिन ने सिनेमा और रेडियो के क्रांतिकारी परिणामों को देखा था और दूसरे बुद्धिजीवियों से यह अपील की, कि वे इन साधनों का इस्तेमाल समाज को और अधिक लोकतांत्रिक बनाने और उसे बदलने में करें । ज्यॉँ पॉल सार्त्र ने भी रेडियो धारावाहिकों का अध्ययन किया और इस बात पर बल दिया कि प्रतिबद्ध लेखकों को भी रेडियो और सिनेमा का इस्तेमाल करना चाहिए | इससे भागना ठीक नहीं है। पहले रेडियो, टेलीविजन और दूसरी इलैक्ट्रानिक मीडिया पर तमाम तरह की बंदिशें आयद थीं | रेडियो और टेलीविजन का विवाद, बहसें, जानकारियां आदि एक नये लोक वृत्त का निर्माण करते दिखाई दे रहे हैं। डगलस कैलनर जोर देकर कहते हैं कि, ** बुद्धिजीवियों को चाहिए कि वे इन माध्यमों का उपयोग करके जन मामलों में सीधे जनता की भागीदारियों को सुनिश्चित करें और एक नयी संचार राजनीति और मीडिया-परियोजनाओं का निर्माण करें "7 ः यह तथ्य अब धीरे-धीरे असलियत को काफी हद तक स्पष्ट करता जा रहा है कि आज की राजनीति में यदि कोई बुद्धिजीवी लोकवृत्त (पब्लिक स्फीयर ) में अपनी पैठ बनाना चाहता है, समाज को नई दिशा देना चाहता है - तो नई तकनीकों का उन्हें अधिक से अधिक इस्तेमाल करना चाहिए। पहले रेडियो और टेलीविजन ने एक लोकक्षेत्र का या कहें लोकवृत्त का निर्माण किया था लेकिन अब कंप्यूटर और इंटरनेट ने अपने अलग लोकवृत्त बनाये हैं । जानकारियां, aed, लोकतांत्रिक सहभागिता और विचारों को पहुँचाने के. 28 पहल - 86

| | लिए नई संभावनाओं को भी पैदा किया है । ...और यह कहना शायद गैर-जरूरी है कि इस्तेमाल में लाने से पूर्व इन तकनीकों का बारीकी से अध्ययन जरूरी है । आज के समय में बुद्धिजीवी होने का मतलब है नई तकनीकों का उपयोग करके विचारों के क्षेत्र में नई और ऊर्जस्वी विचारों की खोज, उसका संपूर्ण वितरण और इससे तैयार हुए लोकवृत्त में अपनी पूरी भागीदारी | डगलस कैलनर इस मुद्दे पर अपनी राय साफ-साफ जाहिर करते हैं, कुछ इस तरह, ** आज के | नये बुद्धिजीवियों को चाहिए कि वह अपनी नीतियां इस तरह से बनाएं कि शिक्षा, लोकतांत्रिक विकास के साथ ही अपनी नीतियों को बेहतर ढंग से प्रसारित करने के लिए नई तकनीक का बेहतर इस्तेमाल करें । भविष्य में जो वक्‍त आएगा उसमें बुद्धिजीवियों और नई तकनीक के बीच नाभिनालबद्ध रिश्ता बनाना अनिवार्य हो जाएगा।'' इसके बगैर नई तकनीक से भागने वाले लोग अपनी मेधा का सही इस्तेमाल कर ही नहीं पाएँगे और तब वें कैसा लोकवृत्त बनाएँगे और किस तरह के बुद्धिजीवी रह जाएंगे, यह मुद्दा बहसतलब है। नव पूँजीवादी समाज में लोकतंत्र की मजबूती के लिए यह और भी आवश्यक है कि लोकतांत्रिक मीडिया राजनीति (डेमोक्रेटिक मीडिया पॉलिटिक्स) नई रणनीति के तहत की जाए | मीडिया की लोकतांत्रिक राजनीति में दो तरह की नीतियां होती हैं - पहली कार्यरत मीडिया को लोकतांत्रिक बनाना और दूसरी आम | जनता की सुविधाओं, इच्छाओं और जरूरतों के प्रति मीडिया को जिम्मेवार बनाना। मुख्य धारा की मीडिया के विकल्प के तौर पर एक विपक्षी मीडिया को तैयार करना भी आने वाली ‘Se पॉलिटिक्स ' का मुकाबला करने के लिए आवश्यक है । लोकतांत्रिक मीडिया राजनीति के लिए मुख्य धारा की पूँजीवादी मीडिया समर्थित नीतियों की तीखी आलोचना, उसमें सुधार और वैकल्पिक मीडिया का | विकास, इसकी जरूरी शर्तें हैं । मीडिया को लोकतांत्रिक बनाने का प्रयास तभी संभव है जब एक वैकल्पिक |. प्रेस का निर्माण हो। आम जनता की पहुँच में टेलीविजन हो और एक सकारात्मक विपक्षी राजनीति के | साथ-साथ ऐसी वैचारिक gear से सम्पन्न नीतियां हों जो मुख्यधारा की मीडिया को प्रभावित करें । उसकी | नीतियों की परत-दर-परत पड़ताल करके उपयुक्त भाषा-शैली और अंदाज में बेनकाब करने का बेहतर | एजेंडा हो। | पिछले कुछ दशकों में टेलीविजन संचार माध्यम के एक बेहतर विकल्प के रूप में देखा जाने लगा है। 970 में अमेरिका में हुए टेलीविजन के विकास में प्रगतिशील बुद्धिजीवियों के लिए नई संभावनाएं पैदा की थीं । उसने इस तरह के कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जो तत्कालीन संकीर्ण समाज की कठोर आलोचनाएं करता था - उन दिनों मुख्यधारा की मीडिया में इसकी भरमार थी | 970 में जब टेलीविजनों की संख्या में इजाफा होने लगा तब वहाँ ' फेडरल कम्युनिकेशन कमीशन ' का एक आदेश आया जिसके अंतर्गत 972 के बाद के नए ' केबल सिस्टम' को कम-अज़-कम एक चैनल सरकार को शिक्षा और आम आदमी को नई जानकारियां मुहैया कराने के लिए देने होंगे। शुरुआती दौर में कुछ कंपनियों ने एक चैनल मुहैया कराई तो कुछेक ने दो या तीन | ...... कई लोग ऐसा मानते हैं कि लोकतांत्रिक राजनीति में आम सहमति बनाने के लिए आमने-सामने बैठकर बातचीत करना जरूरी है लेकिन एक चतुराई पूर्ण सहमति के लिए जनता का जागरूक और जानकार दोनों होना बेहद आवश्यक है । कहना न होगा कि वर्तमान संदर्भ में यह रेडियो और टेलीविजन के * द्वारा ही मुमकिन है । यह जरूरी नहीं है कि मीडिया वर्तमान राजनीति की पूरक बने लेकिन मीडिया राजनीति Hl बढ़ावा अवश्य दिया जाना चाहिए ताकि इसके माध्यम से जागरूक और जानकार लोग सूचनाओं को | पहल - 86 429

अधिक-से-अधिक लोगों तक प्रसारित कर सकें | अमेरिका के टेक्सास राज्य में * काउंसिल फॉर पब्लिक मीडिया' अपने कार्यकर्ताओं और आमजनों को यह बताता है कि नई तकनीक और कम्प्यूटर वगैरह का इस्तेमाल अपने विचारों को ज्यादा-से-ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए कैसे करें ? मीडिया राजनीति में ज़्यादा लोगों की भागीदारी, राजनैतिक संरचना की इसकी आवश्यकताओं को दर्शाती है । इसलिए आज नव | पूँजीवाद और भूमंडलीकृत शोषण के हथियारों को मात देने के लिए मीडिया राजनीतिं को और अधिक विकसित करने की जरूरत है - साथ ही इसके लिए और अधिक मेहनत करने की जरूरत भी है । | अगर कोई विकासशील समूह या आंदोलन से जुड़े आंदोलनकर्मी वर्तमान राजनीतिक माहौल में | * अधिकारों ' का कोई विकल्प तलाश करना चाहते हैं तो हर हाल में उन्हें अपनी बात अधिक-से-अधिक | लोगों तक पहुँचानी होगी और खुद से ज़्यादा-से-ज्यादा लोगों को जोड़ना होगा। आखिर ज्यादातर लोग | समाचार और अन्य अनेक सूचनाएं टेलीविजन से ही प्राप्त करते हैं । प्रसार माध्यम ही आम जनता के विचारों | को बनाने में एक अहम भूमिका निभाता है और यह तय करता है कि किस चीज को गंभीरता से लें और. किसको गंभीरता से नहीं लें । अगर वैकल्पिक विकास के यूटोपिया से लैस लोग राष्ट्रीय राजनीति में अपनी पैठ बनाना चाहते हैं तो उन्हें नई तकनीकों को ध्यान में रखकर ही अपनी नीतियों का निर्माण करना पड़ेगा । लोकतांत्रिक समाज. के निर्माण और विकास में ' टैक्नो पॉलिटिक्स' को बढ़ावा देने के लिए कंप्यूटर और सूचना प्रौद्योगिकी नई-नई संभावनाएं पैदा करता जा रहा है । ऐसा लगता है कि आने वाले समय में घर- घर में मनोरंजन और जानकारियों का भंडार होगा - मगर वे भारतीय नागरिक हर चीज की तरह इससे भी stad: वंचित रह जाएंगे जो आज भी दो वक़्त की रोटी के लिए संघर्षरत हैं और कल भी संघर्ष से शायद नहीं उबर पाएंगे। यह सारा ताम-झाम अंतत: इन मध्यवर्गीय नागरिकों को फायदा पहुँचाएगा जिन्हें मूलभूत आवश्यकताओं के लिए कुछ करने की जरूरत नहीं है । दूसरी चिंता इसके साथ यह जुड़ी हुई है कि अगर वैकल्पिक विचारों वाले मीडिया का विकास नहीं हुआ तो इसका उपयोग वही कर पाएंगे जो आर्थिक रूप से बेहद मजबूत स्थितियों में होंगे । नतीजा यह होगा कि गरीब मुल्कों के लोग किसी भी तरह इसका लाभ नहीं उठा पाएंगे | नाइजीरिया, कांगो गणराज्य और दक्षिण अफ्रीकी मूल के लोगों की इस तक पहुंच हो ही नहीं सकेगी | भारत के ' हिंदी पट्टी ' के लोग तो आज भी छोटी-से-छोटी जानकारियां नहीं पा सकते हैं । फलस्वरूप, इन निजी मनोरंजन माध्यमों का विकल्प Gor जरूरी होता जा रहा है । आज के इस cat पूँजीवादी समाज में कंप्यूटर और प्रौद्योगिकी की बढ़ती महत्ता विकासशील मीडिया की जरूरत के रूप में उभरा है । पूरी दुनिया कंप्यूटरीकृत होने जा रही है और आनें वाले वक्‍त में जिस देश के नागरिक की इस दुनिया तक पहुँच और दखल नहीं होगी वे हर तरीके से दुनिया में रहकर भी किसी और दुनिया के वासी में तब्दील होते चले जाएंगे | गरीब मुल्कों की सरकारें जिस तरीके से बहुराष्ट्रीय पूँजी के आकाओं और पूंजीवादी मीडिया के सेठों को अपने यहाँ बुलाकर मनचाहे तरीके से काम करने के लिए सारी . सुविधाएं उपलब्ध करवा रही हैं उसके कारण भी जनता अपनी मूलभूत जरूरत की चिंताओं में ही गर्क है। उन्हें यह सोचने और जानने का मौका ही उपलब्ध नहीं करवाया जा रहा है कि हमारा आनेवाला वक्‍त कैसा होगा और हमारी सरकारें किस तरह की दुनिया बनाने वालों के साथ हैं, सहयोगी हैं ? इसलिए निजी कंपनियों और सरकारों के एकाधिकार से बचने के लिए यह जरूरी हो जाता है कि नये-नये जानकारी केन्द्रों की *. स्थापना की जाए ताकि लोकतांत्रिक समाज में अपनी सहभागिता को सुनिश्चित किया जा सके | कंप्यूटर अपनी क्षमताओं के कारण अंततः एक लोकतांत्रिक तकनीक है, जहां प्रसारण के माध्यम मात्र "बन वे ट्रैफिक ' हैं वहीं कंप्यूटर और इंटरनेट द्विपक्षीय माध्यम है | कंप्यूटर, इंटरनेट, चैटिंग आदि का उपयोग आम जनता एक दूसरे से बातचीत करने के लिए कर सकती है। मोडेम और टेलीफोन लाइनों की 430 पहल - 86

सहायता से तमाम लोग - जो इससे जुड़े हैं, जुड़ सकते हैं - वे लोग तमाम मुद्दों पर विमर्श कर सकते हैं । इस तरह यह एक नये संसार और प्रतिक्रियाओं को जन्म देता है । वर्तमान समय में जन सरोकारों से जुड़े लोगों के | लिए यह और भी जरूरी हो जाता है कि वे ऐसे कार्यक्रमों से जुड़कर, इस दुनिया में प्रवेश करके गरीब मुल्कों ।..... की व्याख्या प्रस्तुत करें, जिससे उन दमित और शोषित तबकों तक भी इसका लाभ पहुंच सके - जो आज | तक तो वंचित हैं ही और सरकार की जैसी नीतियाँ हैं, राजनीतिज्ञों की जो कार्य शैली और प्रतिबद्धताएं हैं | उससे आगे भी दुनिया में हो रही हलचलों से वे वंचित रहेंगे । ' टेवनो पॉलिटिक्स' में शामिल विरोधी खेमे के | बुद्धिजीवियों पर ही अंतत: यह जिम्मेदारी आयद होती है कि वे एक वास्तविक लोकवृत्त के निर्माण के लिए | जन-जन तक सूचनाएं अपने-अपने तरीके से पहुँचाएं। सहायक ग्रंथ . . फ्रेडरिक जेमसन : ए क्रिटिकल रीडर, सं. डगलस कैलनर एंड सीन होमर, 2004 2. मीडिया स्पेक्टेकल्स एंड द क्राइसिस ऑफ डेमोक्रेसी : डगलस कैलनर, 2005 3. मीडिया कल्चर : कल्चरल स्टडीज, आइडेंटिटी एंड पॉलिटिक्स बिटवीन द मॉडर्न एंड द पोस्ट मॉडर्न : डगलस कैलनर (7995) | 4. . द रोल ऑफ पब्लिक इंटेलेक्चुअल : एलन लाइटमैन । | 5. © स्ट्रक्चरल ट्रांसफॉरमेशन ऑफ द पब्लिक स्फीयर : एन इनइविवटी इंटू ए कैटेगरी ऑफ बुूर्ज्वाजी सोसाइटी, जुरगेन | हेबरमास, 997, अनुवाद : थॉमस बर्जर, एम.आई.टी. प्रेस । 6. ARS, Fras, एंड द पब्लिक स्फीयर : माइक हिल, वारेन AM, Fal, 2007 7. पावर एंड पॉलिटिक्स इन ग्लोबलाइजेशन : द इंडिस्पेंसबल स्टेट : होवार्ड wa. लैन्टर, 2004 8. रूल ऑफ एक्सपर्ट्स : इजिप्ट, teh पॉलिटिक्स, मॉडर्निटी : टिमोथी मिथेल, यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया प्रेस, 2002 | | | | पंकज पराशर प्रायः, महत्वपूर्ण किताबों को लेकर ‘see’ में लिख रहे हैं। नोम चोम्स्की के बाद पूंजीवादी दुनिया में वामपंथी रूझान बढ़ने के दृश्य पर वे विस्तृत काम कर रहे हैं । नोम चोम्स्की की ताज़ा किताब ‘thes स्टेट्स' पर अगले अंक में संपादकीय टिप्पणी पाठक पढ़ सकेंगे। पहल - 86 3

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आ Way se at निरन्तर अस्पष्ट Wa जा रहेल-ए निरन्तर बाढ़िमे आस्ते-आस्ते saa al अंतत: चक्कड़म होइत घर जकाँ al atise Fa जा रहल-ए | ata खत wWaF | गाममे साँझे wa at fadta Fa जा रहल-ए ) आस्ते - आस्ते = ) aed ~ atta = | aed = ater जा

नये इलाके में इन नये बसते इलाकों में जहाँ रोज बन रहे हैं नये नये मकान मैं अक्सर रास्ता भूल जाता हूँ धोखा दे जाते हैं पुराने निशान खोजता हूँ ताकता पीपल का पेड़ खोजता हूँ ढहा हुआ घर और जमीन का खाली टुकड़ा जहाँ से बायें मुड़ना था मुझे फिर दो मकान बाद बिना रंग वाले लोहे के फाटक का घर था इकमंजिला और मैं हर बार एक घर पीछे चल देता हूँ या दो घर आगे ठकमकाता यहाँ रोज कुछ बन रहा है रोज कुछ घट रहा है यहाँ स्मृति का भरोसा नहीं एक ही दिन में पुरानी पड़ जाती है दुनिया जैसे FIT का गया पतझड़ को लौटा हूँ नये इलाके में : 74

जैसे बैशाख का गया भादों को लौटा हू अब यही है उपाय कि हर दरवाजा खटखटाओ और पूछो- कया यही है वो घर ? समय बहुत कम है तुम्हारे पास आ चला पानी ढहा आ रहा अकास शायद पुकार ले कोई पहचाना ऊपर से देख कर 4: नये इलाके में द्