VIDEHA — Issue 368 / अंक ३६८

Publication: VIDEHA · Issue: 368
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ISSN 2229-547X VIDEHA 𑒀 विदेह ३६८ म अंक १५ अप्रैल २०२३ (वर्ष १६ मास १८४ अंक ३६८) [विदेह (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) www.videha.co.in ] विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। ऐ पोथी‍क सर्वाधि‍कार सुरक्षि‍त अछि‍। कॉपीराइट (©) धारकक लि‍खि‍त अनुमति‍क बि‍ना पोथीक कोनो अंशक छाया प्रति ‍एवं रि‍कॉडिंग सहि‍त इलेक्‍ट्रॉनि‍क अथवा यांत्रि‍क, कोनो माध्‍यमसँ, अथवा ज्ञानक संग्रहण वा पुनर्प्रयोगक प्रणाली द्वारा कोनो रूपमे पुनरुत्‍पादन अथवा संचारन-प्रसारण नै कएल जा सकैत अछि‍। (c) २०००- २०२३. सर्वाधिकार सुरक्षित। भालसरिक गाछ जे सन २००० सँ याहूसिटीजपर छल http://www.geocities.com/.../bhalsarik_gachh.html , http://www.geocities.com/ggajendra आदि लिंकपर आ अखनो ५ जुलाइ २००४ क पोस्ट http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html केर रूपमे इन्टरनेटपर मैथिलीक प्राचीनतम उपस्थितक रूपमे विद्यमान अछि (किछु दिन लेल http://videha.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html लिंकपर, स्रोत wayback machine of https://web.archive.org/web/*/videha 258 capture(s) from 2004 to 2016- http://videha.com/ भालसरिक गाछ-प्रथम मैथिली ब्लॉग / मैथिली ब्लॉगक एग्रीगेटर)। ई मैथिलीक पहिल इंटरनेट पत्रिका थिक जकर नाम बादमे १ जनवरी २००८ सँ ’विदेह’ पड़लै। इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि, जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। (c)२०००- २०२३. विदेह: प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004). सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। Editor: Gajendra Thakur. In respect of materials e-published in Videha, the Editor, Videha holds the right to create the web archives/ theme-based web archives, right to translate/ transliterate those archives and create translated/ transliterated web-archives; and the right to e-publish/ print-publish all these archives. रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना/ संग्रह (संपूर्ण उत्तरदायित्व रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता मध्य) editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ पठा सकैत छथि, संगमे ओ अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो सेहो पठाबथि। एतऽ प्रकाशित रचना/ संग्रह सभक कॉपीराइट रचनाकार/ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि आ जतऽ रचनाकार/ संग्रहकर्त्ताक नाम नै अछि ततऽ ई संपादकाधीन अछि। सम्पादक: विदेह ई-प्रकाशित रचनाक वेब-आर्काइव/ थीम-आधारित वेब-आर्काइवक निर्माणक अधिकार, ऐ सभ आर्काइवक अनुवाद आ लिप्यंतरण आ तकरो वेब-आर्काइवक निर्माणक अधिकार; आ ऐ सभ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार रखैत छथि। ऐ सभ लेल कोनो रॉयल्टी/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै, से रॉयल्टी/ पारिश्रमिकक इच्छुक रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता विदेहसँ नै जुड़थु। विदेह ई पत्रिकाक मासमे दू टा अंक निकलैत अछि जे मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ www.videha.co.in पर ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। Videha eJournal (link www.videha.co.in) is a multidisciplinary online journal dedicated to the promotion and preservation of the Maithili language, literature and culture. It is a platform for scholars, researchers, writers and poets to publish their works and share their knowledge about Maithili language, literature, and culture. The journal is published online to promote and preserve Maithili language and culture. The journal publishes articles, research papers, book reviews, and poetry in Maithili and English languages. It also features translations of literary works from other languages into Maithili. It is a peer-reviewed journal, which means that articles and papers are reviewed by experts in the field before they are accepted for publication. Font/ Keyboard Source: https://fonts.google.com/ , https://github.com/virtualvinodh/aksharamukha-fonts , https://keyman.com/ These are print-on-demand books, send your queries to editorial.staff.videha@gmail.com. The eBooks of some of these are available for sale on Google Play [(c) Preeti Thakur, sales.videha@gmail.com], send your queries to sales.videha@gmail.com. The contents and documents e-published by Videha ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) are periodically being checked for accessibility issues. People with disabilities should not have difficulty accessing these contents/ documents. © Preeti Thakur (sales.videha@gmail.com) Videha e-Journal: Issue No. 368 at www.videha.co.in समानान्तर परम्पराक विद्यापति- चित्र विदेह सम्मानसँ सम्मानित श्री पनकलाल मण्डल द्वारा मैथिली भाषा जगज्जननी सीतायाः भाषा आसीत्। हनुमन्तः उक्तवान- मानुषीमिह संस्कृताम्। अक्खर खम्भा (आखर खाम्ह) तिहुअन खेत्तहि काञि तसु कित्तिवल्लि पसरेइ। अक्खर खम्भारम्भ जउ मञ्चो बन्धि न देइ॥ (कीर्तिलता प्रथमः पल्लवः पहिल दोहा।) माने आखर रूपी खाम्ह निर्माण कऽ ओइपर (गद्य-पद्य रूपी) मंच जँ नै बान्हल जाय तँ ऐ त्रिभुवनरूपी क्षेत्रमे ओकर कीर्तिरूपी लत्ती केना पसरत। Do not judge each day by the harvest you reap but by the seeds that you plant. -Robert Louis Stevenson ... Videha: Maithili Literature Movement 𑒀 ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्ष ग्वंग शान्ति: 𑓇 𑒠𑓂𑒨𑒾: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑒢𑓂𑒞𑒩𑒱𑒏𑓂𑒭 𑓅 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱: अनुक्रम ऐ अंकमे अछि:- १.१.गजेन्द्र ठाकुर- नूतन अंक सम्पादकीय (पृ. २-६) १.२.अंक ३६७ पर टिप्पणी (पृ. ७-७) कला विमर्श विशेषांक २.१.अटर-पटर, नाङट-उघार... शिव-शक्तिक पूजा लिङ-योनिक रुपमे (पृ. १०-१४) २.२.सोनी नीलू झा- आधुनिकताक परिवेश मे आधुनिक चित्रकला (पृ. १५-१८) २.३.संजू दास- कलाकृति मे अश्लीलता (पृ. १९-२२) २.४.गौरीनाथ- कुमार पवनक प्रसिद्ध कथा 'पइठ' क संग प्रकाशित संजू दासक कलाकृतिक सम्बन्धमे (पृ. २३-२५) २.५.मैथिलीक "उसने कहा था" माने कुमार पवनक दीर्घकथा "पइठ" (चित्रांकन संजू दास) (पृ. २६-४०) २.६.मुन्नी कामत- समकालीन चित्रकार संजू दास (पृ. ४१-४५) २.७.मुकेश दत्त- अपन शैली आ तकनीकक बलेँ आधुनिक कला मे अलग पहचान बना रहलीह संजू दास (पृ. ४६-५५) २.८.गोविन्द चन्द्र दास- कामसूत्र के बिना कोनो चित्र शैली नहि छैक- लोककला के साक्षात विश्वविद्यालय गुमनाम नायक कृष्ण कुमार कश्यप (आ शशिबाला)* (पृ. ५६-५९) २.९.रवीन्द्र कुमार दास- परिवारक सहयोग सबसऽ जरूरी (पृ. ६०-६३) २.१०.संजू दासक किछु बीछल कलाकृति (पृ. ६४-७०) २.११.गजेन्द्र ठाकुर- कृष्ण कुमार कश्यप आ शशिबाला- एकटा परिचय (पृ. ७१-७३) २.१२.जितेन्द्र झा, जनकपुर- मिथिला चित्रकला- नेपाल प्रसंग (पृ. ७४-७९) २.१३.गजेन्द्र ठाकुर- श्वेता झा चौधरी- एकटा परिचय (पृ. ८०-१०२) ऐ अंकक अन्यान्य रचना ३.गद्य खण्ड ३.१.डॉ. उदयनाथ झा 'अशोक'-गामक नामकरण: एक परिशीलन (पृ. १०५-११७) ‍३.२.संतोष कुमार राय 'बटोही'-मंगरौना (एगारहम खेप) (पृ. ११८-१२०) ३.३.संतोष कुमार राय 'बटोही'-समीक्षा- जिनगी भार बनि गेल (पृ. १२१-१२२) ३.४.रबीन्द्र नारायण मिश्र- मातृभूमि (उपन्यास)- २५ म खेप (पृ. १२३-१२६) ३.५.कुमार मनोज कश्यप-ओ दधीचि (पृ. १२७-१२८) ३.६.निर्मला कर्ण- अग्नि शिखा (खेप-१७) (पृ. १२९-१३३) ३.७.प्रणव झा- करमनेढ़ (पृ. १३४-१४२) ३.८.आचार्य रामानन्द मण्डल-मिथिला के लाल: उपन्यास सम्राट फणीश्वरनाथ रेणु आ पारो (पृ. १४३-१५०) ३.९.डाॅ. किशन कारीगर-लोंगी डैंस(हास्य कटाक्ष) (पृ. १५१-१५२) ३.१०.लाल देव कामत-मिथिलामे मांगैन खवाश छइ! (आगाँ)/ वर्णित रस/ चाह पोखता'क अर्थ जानि गेलहुँ (लघुकथा)/ लघुकथा- परचाक निहितार्थ/ चलला मुरारी छकबय (लघु कथा)/ लघु कथा- हलहौर/ मैथिली बिहैन कथा- -सापरपिट्टा/ भाग जागल- विहैन कथा/ सुनैना बेटी - मैथिली सामाजिक उपन्यास/ लिख पटापैट मारय दयह (लघुकथा)/ लघुकथा- ई गुड़ खेनै कान छेदौने/ अम्बोहि पानि उठल-लघुकथा (मैथिली)/ रोज सेन्टेड लिची (लघुकथा)/ लघुकथा -रानी केँ नँय छै राजा (पृ. १५३-१७२) ४.पद्य खण्ड ४.१.राज किशोर मिश्र-अंतस्-तम (पृ. १७४-१७७) ४.२.निर्मला कर्ण- जूड़ शीतल (पृ. १७८-१८१) ४.३.किशन कारीगर- आ रे सुग्गा आ आ (बाल कविता) (पृ. १८२-१८३) ४.४.कल्पना झा- व्यग्रता (पृ. १८४-१८५) ४.५.डा सुमंगला झा- मैथिल (पृ. १८६-१८७) 𑒀 ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्ष ग्वंग शान्तिः पृथ्वी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति वनस्पतय: शान्तिर्विश्वे देवा: शान्तिर्ब्रह्म 𑓇 𑒠𑓂𑒨𑒾: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑒢𑓂𑒞𑒩𑒱𑒏𑓂𑒭 𑓅 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑓁 𑒣𑒵𑒟𑓂𑒫𑒲 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑒰𑒣: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑒼𑒭𑒡𑒨: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱 𑒫𑒢𑒮𑓂𑒣𑒞𑒨: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑓂𑒫𑒱𑒬𑓂𑒫𑒹 𑒠𑒹𑒫𑒰: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑓂𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧 ब्रह्मणसँ प्रार्थना जे द्युलोकमे, अंतरिक्षमे, पृथ्वीपर, जलमे, औषधमे, वनस्पतिमे, विश्वमे, सभ देवतागणमे आ ब्रह्ममे शांति हुअय। ॐ-ब्रह्मण, द्यौ-सूर्य-तरेगण, अंतरिक्ष- पृथ्वी आ द्यूलोकक बीच, आप:-जल, विश्वेदेवा- सभ देवता, ब्रह्म- सर्जक। 𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧𑒝𑒮𑒿 𑒣𑓂𑒩𑒰𑒩𑓂𑒟𑒢𑒰 𑒖𑒹 𑒠𑓂𑒨𑒳𑒪𑒼𑒏𑒧𑒹, 𑒁𑓀𑒞𑒩𑒱𑒏𑓂𑒭𑒧𑒹, 𑒣𑒵𑒟𑓂𑒫𑒲𑒣𑒩, 𑒖𑒪𑒧𑒹, 𑒎𑒭𑒡𑒧𑒹, 𑒫𑒢𑒮𑓂𑒣𑒞𑒱𑒧𑒹, 𑒫𑒱𑒬𑓂𑒫𑒧𑒹, 𑒮𑒦 𑒠𑒹𑒫𑒞𑒰𑒑𑒝𑒧𑒹 𑒂 𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧𑒧𑒹 𑒬𑒰𑓀𑒞𑒱 𑒯𑒳𑒁𑒨। 𑓇-𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧𑒝, 𑒠𑓂𑒨𑒾-𑒮𑒴𑒩𑓂𑒨-𑒞𑒩𑒹𑒑𑒝, 𑒁𑓀𑒞𑒩𑒱𑒏𑓂𑒭- 𑒣𑒵𑒟𑓂𑒫𑒲 𑒂 𑒠𑓂𑒨𑒳𑒪𑒼𑒏𑒏 𑒥𑒲𑒔, 𑒂𑒣:-𑒖𑒪, 𑒫𑒱𑒬𑓂𑒫𑒹𑒠𑒹𑒫𑒰- 𑒮𑒦 𑒠𑒹𑒫𑒞𑒰, 𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧- 𑒮𑒩𑓂𑒖𑒏। 𑒀 ॐ, स॒हस्र॑शीर्षा॒ पुरु॑षः। स॒ह॒स्रा॒क्षः स॒हस्र॑पात्। 𑓇, 𑒮↓𑒯𑒮𑓂𑒩↑𑒬𑒲𑒩𑓂𑒭𑒰↓ 𑒣𑒳𑒩𑒳↑𑒭𑓁। 𑒮↓𑒯↓𑒮𑓂𑒩𑒰↓𑒏𑓂𑒭𑓁 𑒮↓𑒯𑒮𑓂𑒩↑𑒣𑒰𑒞𑓂। स भूमिं॑ ग्वंग वि॒श्वतो॑ वृ॒त्वा। अत्य॑तिष्ठद् दशाङ्गु॒लम्॥ 𑒮 𑒦𑒴𑒧𑒱𑓀↑𑓅 𑒫𑒱↓𑒬𑓂𑒫𑒞𑒼↑ 𑒫𑒵↓𑒞𑓂𑒫𑒰। 𑒁𑒞𑓂𑒨↑𑒞𑒱𑒭𑓂𑒚𑒠𑓂 𑒠𑒬𑒰𑒓𑓂𑒑𑒳↓𑒪𑒧𑓂॥ हजार माथ, हजार आँखि, हजार पएर संग विश्वकेँ आच्छादित केने अछि, दस आंगुरक गनतीक वशमे नै अछि ओ। प॒द्भ्याग्ँ॑ शू॒द्रो अ॑जायत॥ 𑒣↓𑒠𑓂𑒦𑓂𑒨𑒰𑒑𑓂𑒿↑ 𑒬𑒴↓𑒠𑓂𑒩𑒼 𑒁↑𑒖𑒰𑒨𑒞॥ पएरसँ शूद्रक उत्पत्ति भेल॥ प॒द्भ्यां भूमि॒र्दिशः॒ श्रोत्रा᳚त्। 𑒣↓𑒠𑓂𑒦𑓂𑒨𑒰𑓀 𑒦𑒴𑒧𑒱↓𑒩𑓂𑒠𑒱𑒬𑓁↓ 𑒬𑓂𑒩𑒼𑒞𑓂𑒩𑒰↑↑𑒞𑓂। मुदा पएरेसँ भूमियोक उत्पत्ति। ❀ (White Florette- innocence and purity) ☸ (Wheel of Dharma) ࿕(Swastik) ꣼ (सिद्धिरस्तु, सिद्धम 𑒮𑒱𑒠𑓂𑒡𑒱𑒩𑒮𑓂𑒞𑒳, 𑒮𑒱𑒠𑓂𑒡𑒧 Devanagari Anji) 𑓅 (Gwang ग्वंग- two small circles connected by u and a dot placed over it, used in reference of Vedic texts) 𑒀 (Tirhuta Anji, Ankush of Ganeshji, placed at the beginning of something) 𑒀

१.१.गजेन्द्र ठाकुर- नूतन अंक सम्पादकीय १.२.अंक ३६७ पर टिप्पणी १.१.गजेन्द्र ठाकुर- नूतन अंक सम्पादकीय १ दिल्ली साहित्य अकादमीक प्रख्यात मैथिली विभाग परामर्शदात्री समिति (२०२३-२०२८) १० मे ६ ब्राह्मण + १ नव-ब्राह्मणवादी आ समानान्तर धाराक एक्कोटा गएर-सवर्ण लेखक नहि छथि, जे गत १५ बर्ख सऽ सीमित आर्थिक संसाधनक अछैत मैथिली लेल जान-प्राण अरोपने छथि। नचिकेता जीक ई परामर्शदात्री समिति एलिट अछि, आ ई अगड़ा-पिछड़ा दुनूक एलिट लेल काज करत, साहित्यमे जे एलिट छथि से कतिआयले रहता, राजदेव मण्डल जीक रचना जूरी बाड़ने छथि से बाड़ले रहत। समानान्तर धाराक साहित्तकार लोकनि लेल ई खतराक अलार्म अछि आ से हुनका दुन्ना काज करय पड़तनि। लिस्टः उषाकिरण खान, सुभाषचन्द्र यादव, प्रमोद कुमार झा, देवशंकर नवीन, तारानन्द वियोगी, विद्यानन्द झा, रमण कुमार सिंह, अजय झा, वीणा ठाकुर, नचिकेता। २ कला आस्वादन आ कला समीक्षा- सैद्धांतिक पक्ष १ दिल्ली साहित्य अकादमीक प्रख्यात मैथिली विभाग परामर्शदात्री समिति (२०२३-२०२८) १० मे ६ ब्राह्मण + १ नव-ब्राह्मणवादी आ समानान्तर धाराक एक्कोटा गएर-सवर्ण लेखक नै छथि, जे गत १५ बर्ख सऽ सीमित आर्थिक संसाधनक अछैत मैथिली लेल जान-प्राण अरोपने छथि। नचिकेता जीक ई परामर्शदात्री समिति एलिट अछि, आ ई अगड़ा-पिछड़ा दुनूक एलिट लेल काज करत, साहित्यमे जे एलिट छथि से कतिआयले रहता, राजदेव मण्डल जीक रचना जूरी बाड़ने छथि से बाड़ले रहत। समानान्तर धाराक साहित्यकार लोकनि लेल ई खतराक अलार्म अछि आ से हुनका दुन्ना गतिसँ काज करय पड़तनि। लिस्टः उषाकिरण खान, सुभाषचन्द्र यादव, प्रमोद कुमार झा, देवशंकर नवीन, तारानन्द वियोगी, विद्यानन्द झा, रमण कुमार सिंह, अजय झा, वीणा ठाकुर, नचिकेता। २ कला आस्वादन आ कला समीक्षा- सैद्धांतिक पक्ष १ नर्तकी (!) बा महिलाक मूर्ति (२५०० बी.सी.ई.) भारतमे प्राचीनतम कलाकृति सिन्धु घाटी सभ्यतासँ प्राप्त सामग्री सभ अछि। नर्तकी (!) बा महिलाक मूर्ति जे धातु (कांस्य) क अछि से मोहनजोदाड़ोसँ भेटल। कलाकारक नाम अज्ञात अछि मुदा उत्कृष्टतामे ई मोहनजोदाड़ोक कलाक परिणिति अछि। मोटामोटी चारि इंची ऊँच, दू इंची चाकर आ एक इंची मोट ई कलाकृति आइ-काल्हि राष्ट्रीय संग्रहालय दिल्लीक सिन्धु घाटी सभ्यता गैलरीमे राखल अछि। (साभार जो रवि, विकी CC-BY-SA-3.0) कला आस्वादनक लेल आब देखी जे ऐमे की अछि जे एकरा उत्कृष्ट बनबैत अछि। १.ई एकटा पातर दुब्बर महिलाक अनुकृति अछि। २.महिला ठाढ़ अछि, वाम हाथ वाम जांघ आ दहिन हाथ डाँरपर पाछू दिश छै। ३.आँखि पैघ-पैघ छै। ४.केश औंठिया छै। ५.नाक थोपल छै। ६.महिला नग्न अछि मात्र गरामे कंठहार आ हाथमे चूड़ी देखा पड़ि रहल छै। वाम हाथमे २४ टा चूड़ी मुदा दहिन हाथमे मात्र ४ टा। ७.ककबा कएल केश पाछाँमे जूड़ी बान्हल छै। ८.माथ पाछाँ दिश उतान छै। ९.हाथ सापेक्ष रूपेँ नम्हर बुझि पड़ै छै। ई महिलाक अनुकृति अछि, एकरा नर्तकी किए कहल गेल? की अहाँकेँ ऐमे महिला नर्तकीक कोनो टा लक्षण देखा पड़ैए? राष्ट्रीय संग्रहालय आ इतिहासक पोथी पतरा सभमे ई नर्तकीक रूपमे वर्णित भेटत जे पुरुष मानसिकताक परिणाम अछि जइमे महिला लेखिका रोमिला थापड़ जे मात्र इतिहासकार छथि, सेहो अपनाकेँ ओझरा लेने छथि। कला-इतिहास आ पुरातत्वक अध्ययन अछैत ऐ तरहक भ्रम उत्पन्न होइत अछि। २ अजन्ताक पकिया रंगक राजकुमारी (२०० बी.सी.ई. सँ ४८० सी.ई.) अजन्ताक एकटा गुफापर भित्तिचित्र (सभसँ पुरान चित्रकला) एकटा पकिया रंगक अतिसुन्दर राजकुमारीक चित्रण, जे गहना पहिरने अछि आ केशमे सेहो गहना छै। ३ खजुराहो (९५० सी.ई. सँ १०५० सी.ई.) [खर्जुर (बिच्छू- वृश्चिकक संस्कृत)- एकटा अप्सरा अपन जांघ उघारि कऽ देखा रहल अछि जइपर वृश्चिक चित्रित छै, तही सँ खजुराहो नाम]। रोमिला थापड़ एतुक्का कलाकृतिकेँ पलायनक कला कहै छथि। तेरहम शताब्दीक जयदेवक गीत गोविन्द सेहो रोमिलाकेँ नव लगै छन्हि। कलाक इतिहासकार आ पुरातत्वविद रोमिलाक गपसँ असहमत छथि।  कला इतिहासकार देवांगना देसाइ कहै छथि जे योनि आ लिंग आर्येतर सभ्यतामे विद्यमान छल, वातस्यायनक काम सूत्र आ कालिदासक कुमारसम्भव खजुराहो आ गीत गोविन्दसँ बहुत पहिनहियेसँ अछि। ओ कहै छथि जे वृश्चिकक तुलना काम लोलुपता रूपी बिखसँ कएल जाइत अछि आ सएह संकल्पना अप्सराक जांघपर चित्रित अछि। - Gajendra Thakur, editor, Videha (Be part of Videha www.videha.co.in -send your WhatsApp no to +919560960721 so that it can be ad.0ded to the Videha WhatsApp Broadcast list.) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। १.२.अंक ३६७ पर टिप्पणी आशीष अनचिन्हार संतोष राय बटोही जीक डायरी नीक जा रहल अछि। मुदा हुनकर उपन्यास मंगरौना कने पाछू चलि रहल अछि। आशा अछि जे ओ अपन उपन्यासकेँ शीघ्र पूरा करता। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। कला विमर्श विशेषांक २.१.अटर-पटर, नाङट-उघार... शिव-शक्तिक पूजा लिङ-योनिक रुपमे २.२.सोनी नीलू झा- आधुनिकताक परिवेश मे आधुनिक चित्रकला २.३.संजू दास- कलाकृति मे अश्लीलता २.४.गौरीनाथ- कुमार पवनक प्रसिद्ध कथा 'पइठ' क संग प्रकाशित संजू दासक कलाकृतिक सम्बन्धमे २.५.मैथिलीक "उसने कहा था" माने कुमार पवनक दीर्घकथा "पइठ" (चित्रांकन संजू दास) २.६.मुन्नी कामत- समकालीन चित्रकार संजू दास २.७.मुकेश दत्त- अपन शैली आ तकनीकक बलेँ आधुनिक कला मे अलग पहचान बना रहलीह संजू दास २.८.गोविन्द चन्द्र दास- कामसूत्र के बिना कोनो चित्र शैली नहि छैक- लोककला के साक्षात विश्वविद्यालय गुमनाम नायक कृष्ण कुमार कश्यप (आ शशिबाला)* २.९.रवीन्द्र कुमार दास- परिवारक सहयोग सबसऽ जरूरी २.१०.संजू दासक किछु बीछल कलाकृति २.११.गजेन्द्र ठाकुर- कृष्ण कुमार कश्यप आ शशिबाला- एकटा परिचय २.१२.जितेन्द्र झा, जनकपुर- मिथिला चित्रकला- नेपाल प्रसंग २.१३.गजेन्द्र ठाकुर- श्वेता झा चौधरी- एकटा परिचय २.१.अटर-पटर, नाङट-उघार... शिव-शक्तिक पूजा लिङ-योनिक रुपमे अटर-पटर, नाङट-उघार... शिव-शक्तिक पूजा लिङ-योनिक रुपमे परमेश्वर कापड़ि ई अटर-पटर, नाङट-उघार, गंरि-मुडिया कलाकृति नइ, परम्परागत मिथिला आर्टक उत्तरआधुनिकता ओ वैश्विक कृति अइ, जेकरा सहाज आ गरहाज करैत सांस्कृतिक आयाम देब'मे परहेज करहि पडत ! (चित्र 'अंतिका' स' साभार )

राजेन्द्र बिमल परम्परासँ खेलबाड! परमेश्वर कापड़ि- राजेन्द्र बिमल -अधरम !

रंजू मिश्र मनमौजी भ गेल छै सब।

परमेश्वर कापड़ि- रंजू मिश्र- बेपर्द

रोशन चौधरी गरि-मुरिया।

बृषेश चंद्र लाल

हमरा लगैत अछि कलाकार किछु देखबए चाहैत छथि । एतए कदाचित् सम्पन्नताक दृष्टिमे आधुनिकता की थीक आ कोना ओकर सेवामे ओकरे इच्छा अनुसारक मांग समाजकेँ पूरएक बाध्यता बनि गेल छैक से देखबक प्रयत्न भेल अछि । हँ किछु आओर स्ष्पटता रहितै त नीक छलैक ।

परमेश्वर कापड़ि- बृषेश चन्द्र लाल- बलधौसीके कतेक लेबा लगएबै मीता !

बृषेश चंद्र लाल मीत, नव-नव कोण आबए दिऔक ने । आओर स्पष्ट आ विकसित होइक ताहिलेल सभ केओ प्रयास करी । हमर अर्थ ई नहि जे अटर-पटर, नाङटि, उघार होइक । हँ, ई जे मिथिला आर्ट परम्परागत चित्रकारीये टा मे सिमित नहि रहए । समय सापेक्ष अभिव्यक्तिक सशक्त माध्यम सेहो बनए ।

ईशनाथ झा के शिरोमणि छथि एकर संपादक ?(अन्तिकाक) मिथिलेश कुमार झा निंदनीय कुणाल एहि चित्र के ल क ' परंपरा भंजन ' एवं अधर्म प्रभृति कहइत एहिठाम एवं अन्य परंपरा रक्षी लोकनि द्वारा बेस बात भेलए। चित्रकार एवं संपादक के नाम किनको नइ बूझल छइन।अथवा नाम लेला पर जिह्वा अशुद्ध हेबाक खतरा हेतइन। एहि चित्र के अंतिका छपने अइ।संपादक - गौरीनाथ । चित्रकार - संजू दास। आउटलुक पत्रिका मे संजू दास के साक्षात्कार छपल छइन। ओत अन्य चित्र क संग इहो चित्र छइ। चित्रकार कृष्ण कुमार कश्यप के कतिपय चित्र सब गीत गोविंद ( जयदेव,) के पद सब पर आधारित छइन।कश्यप जी ओकरा कहियो सार्वजनिक नइ केलइन। कारण छइ इएह पोंगापंडित परम्परा रक्षी लोकइन जे स्वयं परम्परा क ज्ञान स रहित छइथ। विजयदेव झा कुणाल-कृष्ण कुमार कश्यप आप एहि धरती पर नहि छथि तैं हुनक नाम पर किछुओ झूठ चला दियौ। बामपंथ सदैव ओपन सेक्स चारित्रिक उच्चश्रृंखलताक पक्षधर रहल अछि। कलाक नाम पर सेक्स आ अश्लीलता पसारब बामपंथक चरित्र रहल अछि। कुणाल- विजयदेव झा- झूठ दक्षिणपंथ क विशेषता छी ।वामपंथ हरदम सत्य क पक्षधर अइ आ रहत । कश्यप जी क चित्र हमर देखल अइ। सेहो एसगर नइ, पूरा प्रोडक्शन टीम छल। कुमार पद्मनाभ एहि चित्र मे भारतीय परिधान मे कोल्ड्रिंक बेचैत स्त्री बेसी अश्लील अछि. नग्नता सबठाम खराप नहि होइत छैक. बिकनी स्वीमिंग पुल आकि बीच पर कोनो खराप नहि लागैत छैक. समस्या अछि जे नग्नता आधुनिकताक द्योतक किएक? जखन कि आधुनिकता अम्बानीक बेटीक आ लक्षमी मित्तलक बेटाक विवाह मे बारीक बनैत छैक आ अम्बानी आ मित्तलक परिवारक घोघ तानने स्त्रीगण केँ खाना खुआबैत छैक. सुनील कुमार मल्लिक

मिथिला चित्रक नव आयाम कहल जा सकैछ। एहिमे अश्लिलता देखनिहारके चश्मा बदलबाक चाही। रामचंद्र झा

सुनील कुमार मालिक-न्न, एक्केबेर एना नहि कहियौ

परमेश्वर कापड़ि- रामचंद्र झा- यौ की कहू! छगुनाइत एहि दुआरे छी जे ऐ बतकटौवलि मुहचोथौवलिमे नग्नता मातृत्व आ बेनङनपन सहीमे अर्थवता आ दृष्टि-दर्शन नहि पौलक अछि । हमरासबे कालीमाइ, सहस्रबाहु संहारनी सीता नग्न होइतो (बेनङन नइ छैथ) पूज्य छथि! शिव-शक्तिक पूजा लिङ-योनिक रुपमे; तान्त्रिक ओ शक्ति उपासक योनी महाशक्तिक दर्शन करिते छथि ! सबके अवोधिया/शिशु बहिन बेटी बेपर्दे रहैछ ।तब ई घोल घोङहाउज !? ठाम गुणे कजर, कुठाम गुणे करिखा ! जाहिठाम वस्त्र आ लिङके कीटल झापन/पर्दाक सामाजिक सांस्कृतिक व्यवहार छै ओतए ई एहन सेक्स नग्नताक गप्प उठैछ त' ऐमे वेदमे छेद नइ हुअए चाही । बियौहती कनिञाके घोघट(लाज-लेहाज) पडैत जे छन्हि, से चर्म-चक्षुए नहि मनसा विचारके आवरण/ बर्जन सेहो रहैछ !! ई नगनता दृष्टि-दर्शन सापेक्ष अइ । सुनील कुमार मल्लिक- परमेश्वर कापड़ि- सही कहल सर रामचंद्र झा अहाँक विलक्षण विश्लेषणक समाहार तँ ठाम गुणे कहिए देलिऐ---! समरथ कहुँ नहिं दोष गोसाईं। रवि पावक सुरसरि की नाईं।। ई विधिसम्मत वाक्यक परिधि नंघबाक उपक्रम नहि हुअए सएह नीक। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.२.सोनी नीलू झा- आधुनिकताक परिवेश मे आधुनिक चित्रकला सोनी नीलू झा आधुनिकताक परिवेश मे आधुनिक चित्रकला

मिथिलाक अनूठा चित्रकार छथि रविन्द्र दास जी आ संजु दास जी। जतय मधुबनी पेंटिंग चारु कात भेट जाएत हमरा अहाकें, ओतए हिनकर आधुनिक चित्रकला एकटा फराक शैली में भेटत मुदा बहुत कम देखैत होएब, से नहिए सन।

ई कला कोनो नव थिक से नहि अपना ओत लोक लेल नव भ' सकैछ। ओना जतय स्त्रीक मूक रहबाक परम्परा हो, ओहि ठामक ओहि परम्परा कें सभ्यता बुझनाहर लेल ई चित्र सभ अवश्य खटकतनि मुदा तखन, जखन ओ अर्थ बुझथिन। आ जा धरि ओ लोकनि बुझताह/ बुझतीह ता धरि ई आधुनिक चित्रकला बहुत आगु ल' गेल रहतीह संजु जी, से विश्वास अछि।

एहि बीच, बिहार सरकार द्वारा आयोजित "बिहार म्यूजियम पटना" मे "हर महिला कुछ खास" प्रदर्शनी सेहो चलि रहल छैक। जतय दर्शक लेल एकटा अद्भूत प्रदर्शनीक केन्द्र बनल छनि हिनक चित्र सभ।

बिहार संस्कृति विभाग पटना सहित आर आन-आन क्षेत्र सँ हिनक कला कें पुरस्कृत कएल गेल अछि। प्रत्येक क्षेत्र मे दर्जन सँ बेसी प्रदर्शनी मे हिनक सहभागिता छनि आ एकल प्रदर्शनी सेहो। दर्जन भरि सँ बेसी मैथिली, हिन्दी पोथी,पत्रिकाक कवर पर हिनक बनाओल चित्र अपन स्थान सुनिश्चित कएने अछि।

कला कें कलाकार जँ अपन जीवनक अध्याय बना लैत अछि तँ ओकर चित्र बजैत अछि,अपन परिचय दैत अछि। हँ ई सत्य गप जे ओहि लेल हमरा सभकेँ ओकर भाषा बुझबाक क्षमता होबाक चाही।

ओना तँ हिनका लोकनिक परिचय देबाक बेगरता नहि, प्रख्यात कलाकार छथि लेकिन तैयो हमरा लगैत अछि जे मिथिलाक लोक कें, कलाप्रेमी कें, हिनकर चित्रकला कें कनेक अपन दृष्टि कें विस्तार क' देखबाक बेगरता अछि। "साहित्य,कला" कखनो अश्लील नहि होइत छैक अश्लील होइत छैक, नजरि आ सोच।

कतेको अवार्ड पुरस्कार सँ पुरस्कृत आ सम्मान कएल गेल छनि संजुजी आ रविन्द्र दास जीकें। हमरा गर्व होइत अछि हम हिनका आस-पास रहैत छी हमर अपन मिथिलाक छथि, हम एकदोसरकेँ चिन्हैत छी।

संजु जीक चित्र मे गामक परिवेश मे ग्रामीन स्त्रीक जीवन शैली भेटैत अछि, हिनक कलाक माध्यम सँ हुनका लोकनिक विचार बुझैत छी। हिनक बनाओल बहुत रास एहन चित्र अछि जाहि चित्र कें हम सभ बैठक हॉल मे, सयनकक्ष मे,लगा सकैत छी।

सभसँ खुशीक गप जे एहि शैलीक चित्रक स्वप्रशिक्षित छथि एहि शैली मे चित्र बनाएब पुरुष प्रधान समाज मे ठीके एकटा चुनौती थिक। जतय सिखबैत हो सभ्यता मे, झांप-तोप आ अपन इच्छा कें दबा देबाक लेल, ओहन समाज मे ओहि ठाम हिनकर चित्र अनघोल करैत अछि, बहुत रास गप कहैत अछि।

हमरा मोन अछि हम सभ एकटा पुरस्कार प्रदान सभागार मे बैसल रही, हमरा बगल मे चित्रकला आदरणीय रविन्द्र दास जी आ संजु दास जी बैसल रहथि आ सामने मंचपर गंभीर विमर्श चलैत छल जतय, आदरणीय भैरव लाल दास जी संग आर भी बहुत गणमान्य व्यक्तिव सभ उपस्थित रहथि। हमरा प्रसन्नता भेल जखन सौ - दू सौ दर्शक आ स्रोता सँ भरल सभागार मे, आदरणीय गंगेश गुंजन जीक वक्तव्य चलि रहल छल सभ सुनि रहल छलथि, ई गप कतेक गोटेकें धिआन हेतनि से नहि कहि सकब। गंगेश गुंजन जीक कहब रहनि जे जखन कोनो कलाकार आ साहित्यकारकेँ अभिनय कला व लेखन लेल पुरस्कृत कएल जाइत छैक तँ अर्थक स्थान पर संजु दास आ रविन्द्र दास जी इशारा करैत ओ संकेत केलथिन जे हमरा सोझां प्रसिद्ध चित्रकार बैसल छथि हुनका लोकनिक चित्र सँ सेहो पुरस्कृत कएल जा सकैछ। ई गप हुनकर ठीके बहुत दूरक आ गहींर गप छल। ई बात मैथिल लोककें मोन रखबाक चाहियैन।

एत' हम हुनक दुनू गोटेक गप कहय चाहब, रविन्द्र जी आ संजु जी,मिथिला मे एकटा नव चीज सिखबाक परम्परा ठाढ़ करैत छथि।

हमरा सभकें दोसर पेंटिंग सभ जकाँ आधुनिक चित्रकला सेहो सिखबाक, बुझबाक चाही। दर्शक केँ सेहो कला, चित्रकला बुझब, सिखब चाही,हम सभ तखने आलोचना आ समीक्षा करबाक योग्य बनब। आलोचना आ समीक्षा सेहो आवश्यक मुदा तखने ने जखन बुझब,गुणब।

हमरा लगैत अछि मैथिली मिडिया लोकनिकेँ हिनका सभ संँ साक्षात्कार करबाक चाहियैन। एहि सभ विषय पर फैल सँ विमर्श होबाक चाहियै। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.३.संजू दास- कलाकृति मे अश्लीलता संजू दास कलाकृति मे अश्लीलता सबस पहिने त हम ई बात फरिछा दी जे हमरो विचार अछि की कला ,साहित्य आ फिल्म मे रचनाकार के किछु स्वतंत्रता देल जेबाक चाही नहि त नव विचार आ नव कला परंपरा के विकास समाप्त भय जायत l सब कलाप्रेमी लोकनि सों हमर आग्रह जे कोनो कलाकृति मे अश्लीलता अछि की नहि तेकरा ओहि कलाकृति के  विषय के मांग , आकृति के भाव भंगिमा आ कलात्मककता देखलाक बादे तय करू l एकटा आधुनिक कलाकार भेला के कारण हमर विचार स अश्लीलता मात्र एकटा विचार छियैक l जेना एकटा गरीब के फाटल नुआ मे ओकर गरीबी देखाई दैत छैक मुदा किछु लोक के ओहि मे अश्लीलता सेहो देखाई छनि l भारत आ भारतीयता पर गर्व करैबला लोक राजकपूर सन फिल्मकार पर गर्व करैत छथि मुदा हुनक फिल्म  राम तेरी गंगा मैली मे मन्दाकिनी के अपन बच्चा के दूध पियाबै काल मे किछु लोक के ओकर बेबसी देखाई पड़लै त किछु के अश्लीलता सेहो देखाई देलकनि l एखन धरि हम जे कला समाज स सिखलहुँ जे कला मे अश्लीलता नाम के कोनो विचार या कलाकृति नहि होइत छैक l  जेना साहित्य मे पाठक तय करैत छथिन की कोन कलाकृति नीक छै आ की बेजाय तहिना कला मे दर्शक , कला समीक्षक आ बाज़ार l  आब हमर प्रेरणा अमृता शेरगिल छथि से स्वयं अपन न्यूड चित्रण केने छलीह l आधुनिक कला के इतिहास मे कतेको नग्न चित्रण भेटत l बहुत रास भारतीय स्त्री कलाकार नग्न चित्रण करैत छथिन जेना अनुपम सूद अर्पिता सिंह ,मिथु सेन ,अंजलि इला मेनन l आब अहाँ लोकनि सों एकटा सवाल कि गीत गोविन्द के अश्लील कहब ,विद्द्यापति के सब रचना के अश्लील कहब ,कोहबर के अश्लील कहब ,तंत्र कला के अश्लील कहब ,खजुराहो के अश्लील कहब एतबे नहि कतेक गैर सनातनी लोक त शिव लिंग के सेहो अश्लील कहैत छथि l सनातन धर्म के स्थापित करय बला शंकराचार्य ई कहि क जे अपनेक विषय अश्लील अछि मंडन मिश्र के स्त्री उभय भारती केँ मना नए केने रहथिन काम शास्त्र संवाद करय लेल । कृष्ण के बियाह त रुक्मिणी स भेल रहैन मुदा राधा कृष्ण नाम जपैत काल कोनो मैथिल लोक के मैथिल संस्कारक याद नहि अबैत छनि l चर्चित साहित्य खट्टर काका के तरंग मे सबस बेसी परंपरा के खिधांस कयल गेल छैक त कि ओ नीक साहित्य नहि l हमर देश के चर्चित पत्रिका आउटलुक मे छपल किछु रेखांकन आ पेंटिंग मे मैथिल लोक के अश्लीलता देखाई दैत छनि मुदा ओकर विषय , भाव भंगिमा नहि , ओकर कलात्मकता नहि l एतय सबस पहिने हम अपन ओहि चित्र के चर्चा करय चाहब जेकरा एकटा साहित्यकार पद्मनाभ जी कला मे अश्लीलता कहि क सम्बोधित केलनि l एतबे नहि ओकरा ओ भगवती घर स सेहो जोड़ि के धार्मिक भावना भड़काबै के कोशिश केलनि l हमर चिंता मात्र ई अछि जे ओ बेसी पढ़ल लिखल विदेश मे नौकरी करय बला लोक छथि देश विदेश मे कतेको कलाकृति देखने हेताह l ओहि चित्र मे गोआ तट पर विदेशी पर्यटक के कोल्डड्रिक्स बेचैत एकटा स्त्री छैक l सनबाथ लेल बिकनी मे सुतल विदेशी स्त्री आ अपन आजीविकाक लेल कोल्डड्रिक्स बेचैत मैथिल स्त्री l आइयो धरि बेसी लोक मिथिला पेंटिंग के मात्र देवी देवता के चित्रण बला परंपरागत शिल्प बुझैत छथिन एकटा कला नहि l जखन कि आब मिथिला पेंटिंग विश्व प्रसिद्ध कला थिक जाहि मे आठ टा स्त्री के पद्मश्री सेहो भेटल छनि  l  कोनो कला व साहित्य जा धरि समकालीनता के समावेश नहि करैत छैक ता धरि ओकरा मे जीवंतता नहि आबि सकैत छै l पुष्पा देवी ,संतोष दास ,अविनाश कर्ण ,अमृता झा आर कतेको नव कलाकार सब एहि बात के नीक जकाँ बुझैत छथि l हुनका जानकारी लेल हम बता दी जे सबस पहिने पद्मश्री गंगा देवी गैर पारम्परिक विषय सब के मिथिला कला मे जगह देलनि रोलर कोस्टर ,हॉस्पिटल के दृश्य ,ट्रेन के दृश्य ई सब हुनक गैर पारम्परिक विषय छलनि  l पद्मश्री गोदावरी दत्त जे जीवन भरि पारम्परिक विषय बनबैत रहलीह एकटा अपन कलाप्रेमी ग्राहक लेल बुद्धा कार्निवाल सेहो बनौलनि l कतेक मैथिल लोक कहैत छथि एकटा मैथिल भय क  अहाँ मिथिला पेंटिंग कियैक नहि करैत छी l हम मैथिल छी त की मात्र मिथिले पेंटिंग करी , मॉडर्न पेंटिंग नहि कय सकैत छी l हमहू शुरुआत मे पारम्परिक मिथिला पेंटिंग करैत छलहुँ मुदा बियाह के बाद आधुनिक पेंटिंग करय लगलहुँ l आब हमर पेंटिंग मे आधुनिक कला आ समकालीन कला के विषयवस्तु आ तकनिकी सेहो देखाई देत l किछु गोटे कहैत छथि आई धरि कोनो आन ख्याति प्राप्त कलाकार मिथिला पेंटिंग मे बिकनी पहिरल स्त्रीक चित्र नहि बनाओलनि. मिथिला पेंटिंग मे अहाँ जिनकर नाम सुनने छी ओ सब बूढ़ पुरान लोक सब छथिन पहिने मिथिला पेंटिंग मात्र पारम्परिक बनैत छलै मुदा आब किछु परिवर्तन भय रहल छैक जेना पुष्पा देवी ,अविनाश कर्ण ,संतोष दास l हमहू अपन रेखांकन मे कोनो मैथिल महिला के बिकनी मे नहीं देखाउने छी हमर चित्र जाहि मे अश्लीलता के आरोप लगाओल गेल अछि ताहि मे .गोआ समुद्र तट के  दृश्य छै कोनो विदेशी पर्यटक के एकटा मिथिल स्त्री कोल्डड्रिक्स बेचीं रहल छथिन l पलायन के शिकार मैथिल ललना मानसिक वर्जना के तोड़ि क अपन रोजगार मे लागल छथि l अहीं सब जबाब दिय जे विदेशी पर्यटक की  कम्बल ओढिक  सनबाथ लेतीह  ? असल मे लोक परम्परा के ताबीज़ जकाँ गर्दैन मे टांग नेने छथि परम्परा बनैत बिगरैत रहलैया उदाहरण के लेल जयमाल अपन सबहक  परंपरा नहि छल मुदा आब समाज अपना लेलक  l अपन समाज मे आई जे नकली संस्कारवान लोक छथि ओ सब छद्म लबादा ओढ़ेने छथि l साहित्य, कला आ संस्कृति के नाम पर पुराणपंथी दुकान चला रहल छथि सबके कलई खुजि रहल छनि  । सोसल साईट पर विरोध के हम सामान्य रूप मे लेलहुँ कियैक त कोनो रचनाकार के ई सब सहय के क्षमता जरूर हेबाक चाही l गीत गोविन्द ,कालिदास आ विद्यापति के सौन्दर्य वर्णन पर बहुत लोक विरोध करैत छथिन । राजकमल चौधरी आ खट्टर कका के सेहो विरोध भेलै l -संजू दास मो 9899242017 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.४.गौरीनाथ- कुमार पवनक प्रसिद्ध कथा 'पइठ' क संग प्रकाशित संजू दासक कलाकृतिक सम्बन्धमे गौरीनाथ कुमार पवनक प्रसिद्ध कथा 'पइठ' क संग प्रकाशित संजू दासक कलाकृतिक सम्बन्धमे पन्द्रह साल पहिने 'अंतिका'क अप्रैल-जून 2008 अंक मे कुमार पवन क प्रसिद्ध कथा 'पइठ' क संग प्रकाशित संजू दास क कलाकृति पर जे टिप्पणी कयल जा रहल अछि ओकर संदर्भ मे किछु बात  मिथिला संस्कृतिक तथाकथित रक्षक ऐ चित्र के लऽ कऽ कऽ रहल छथि ओ अत्यंत अफसोसजनक आ निन्दनीय अछि। संजू दास हमरा लोकनिक समयक एकटा महत्वपूर्ण कलाकार छथि ।  संजू जी मे स्वस्थ आ गतिशील परंपराक प्रति जागरूक आ समृद्ध हेबाक अलाबे आइक बदलैत समय आ समाज के देखय आ परखय मे निपुण आधुनिक चित्रकारक नजरि छन्हि।  हुनक चित्रक पाँति बजैत अछि, स्वस्थ मनुक्खक मोन केँ चिंतनशील बना दैत अछि ।  निश्चित रूपसँ ओ स्वशिक्षित चित्रकार छथि, मुदा ओ एकटा कुशल कलाकार छथि, जिनकर कलाक राष्ट्रीय स्तरक कएकटा चित्रकार आ कला समीक्षक सराहना केने छथि।  बहुत रास महत्वपूर्ण सम्मानसँ सम्मानित संजू जी क पेंटिंग प्रतिष्ठित राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घा मे संग्रहित भेटत। दरभंगा जिलाक कमरौली गाममे जनमल संजू जी स्नातक छथि।  हुनक पेंटिंग क॑ छअ टा एकल आ दर्जन बेर समूह प्रदर्शनी कएल गेल अछि।  राष्ट्रीय स्तरक पत्रिका, अखबार आ किताबमे ऐ सब पर चर्चा भेल अछि।  नारीवादी दृष्टिक समर्थक संजूक मानब अछि जे आइयो महिलाकेँ समाजमे उचित सम्मान नै मिलल छै आर जाधरि ई सहज नै भऽ जेतै, ताधरि महिला अपन इच्छाक अभिव्यक्तिक तरीका ताकैत रहतै।  आइक नारीक संघर्षक संग-संग हुनक इच्छाक अभिव्यक्ति हुनक चित्रकला मे भेटैत अछि । संजू जीक विवाह आधुनिक चित्रकार रविन्द्र कुमार दाससँ भेल अछि ।  दुनू गोटे बहुत विचारशील कलाकार छथि जिनका पर कोनो समाज गर्व महसूस कऽ सकैत अछि ।  एहन चित्रकारकेँ कलाक बिना बुझने हुनकर चित्र पर ओछ टिप्पणी करय वाला लोक अपनाकेँ लेखक-कवि-चित्रकार, मिथिलाक संस्कृतिक रक्षक कहि सकैत छथि, मुदा संवेदनशील स्तर पर हुनका सब पर मनुष्य हेबाक बात पर संदेह भऽ सकैत अछि। 'अन्तिका' क संपादकक रूपमे हम एकर निंदा करैत छी जे एहेन टिप्पणी करैत छथि आ सभ जिम्मेदार सोच बला मित्र सँ उचित हस्तक्षेपक अपेक्षा करैत छी। संजू दास मिथिला संस्कृतिक तथाकथित रक्षककेँ आहत करयबला पेंटिंगक विषय मे कहैत छथि, "हम गोवा बीच क दृश्य देखलाक बाद ई ड्राइंग बनौने रही। मिथिलाक एकटा महिला विदेशी पर्यटककेँ कोल्ड ड्रिंक बेच/पड़ोसि रहल छथि। अर्धनग्न महिला बिकनीमे एकटा विदेशी पर्यटक अछि।" मतलब जे पलायनक शिकार मैथिल ललना भूगोलक संग संग मानसिक वर्जनाक देवाल पार कऽ रहल छथि। अश्लीलता ऐ चित्रमे नहि, अधलाह विचारक लोकक नजरिमे अछि।  अंग अश्लील नहि अछि आ ने ओकर चित्रण।  जँ एहन रहैत तँ कोहबरक चित्र नहि बनैत। (हिन्दीसँ मैथिली अनुवाद आशीष अनचिन्हार) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.५.मैथिलीक "उसने कहा था" माने कुमार पवनक दीर्घकथा "पइठ" (चित्रांकन संजू दास) मैथिलीक "उसने कहा था" माने कुमार पवनक दीर्घकथा "पइठ" (चित्रांकन संजू दास) मैथिलीक "उसने कहा था" माने कुमार पवनक दीर्घकथा "पइठ" (साभार अंतिका) । हिन्दीक पाठक, जे "उसने कहा था" पढ़ने हेता, केँ बुझल छन्हि जे कोना अहि कथाकेँ रचि चन्द्रधर शर्मा "गुलेरी" अमर भऽ गेलाह। हम चर्चा कऽ रहल छी, कुमार पवनक "पइठ" दीर्घकथाक। एकरा पढ़लाक बाद अहाँकेँ एकटा विचित्र, सुखद आ मोन हौल करैबला अनुभव भेटत, जे सेक्सपीरिअन ट्रेजेडी सँ मिलितो लागत आ फराको। मुदा ऐ रचनाकेँ पढ़लाक बाद तामस, घृणा सभपर नियंत्रणकेँ आ सामाजिक/ पारिवारिक दायित्वकेँ सेहो अहाँ आर गंभीरतासँ लेबै, से धरि पक्का अछि। मुदा एकर एकटा शर्त अछि जे एकरा समै निकालि कऽ एक्के उखड़ाहामे पढ़ि जाइ। ऐ कथाक चित्र सभकेँ लिखलनि अछि लिखिया संजू दास- सम्पादक अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.६.मुन्नी कामत- समकालीन चित्रकार संजू दास मुन्नी कामत

समकालीन चित्रकार संजू दास

कोनो कला सिखबाक लेल गुरु सँ बेसी लगन आऽ सतत् अभ्यास आवश्यक अछि।ई कहब अछि मिथिलाक धिया श्रीमति संजू दासक। हिनकर यैह हुबा हिनका सबल सफल बनौलक। १५ जनवरी १९७२ में जनमल ग्राम कमरौलीक (दरभंगा) श्री प्रभु नारायण आऽ श्रीमती देवकी दासक पुत्री गामक माटि सँ खेला आय राजधानीमे बैस सातो रंगक चितेरी बैन गेली। मिथिला संस्कारमे पोषित संजू दासक सफलताक पहिल अंश हुनकर मिथिलानी हेनाय अछि। मिथिलाक धिया जन्म संगे लुरी, व्यवहार, गुण विरासत मऽ लऽ अबैय य'।मुज -सिक्की कला,कुरुसिया,सब पाबैन -त्योहार मऽ घर -आंगन मऽ बनाओल अरिपन ,घरक देबाल पर आंकल विभिन्न कलाकृतिक दर्शन मिथिला में सहज अछि। संजू दास अहिसब कलामे निपूर्ण छलीह पर कहियो ई नै सोचने रहि जे अहि आधार पर ओऽ देशक नामी -गामी चित्रकार संगे अपनो स्थान सुनिश्चित करथिन।

गामक परिवेश मऽ पलल संजू दासक जीवन तखन दोसर मोर लेलक जखन हुनकर विवाह सन् १९९५में हाटी भोआर ग्रामक श्री रवीन्द्र दास सँ भेल।जे पटना आर्ट कॉलेज के प्रशिक्षित आधुनिक चित्रकार छल।यैह हिनकर गुरु आऽ सफलताक मूल कारण अछि। जखन हाथ पकैर बाट देखबैय लेल हमसफर संग होय तँ फेर मंजिल कहाँ दूर रहैत अछि ओकरा हासिल करैयक जुनून और बैढ़ जाइत अछि। संजू दास जी जखन महानगर में बसली तँ घुमैयक नाम पर पति संगे चित्रकला प्रदर्शनी मेँ बेसी जैत छलीह।कलाक बिया तँ हुनका भीतर अंकुरैल पहिने सँ छल बस ओहि अंकुरैल बिया केँ माटि आऽ प्रकाशक आवश्यकता छल जे पति श्री रवीन्द्र दास सँ प्राप्त भेल।आय पतियक संरक्षण मऽ वैह बिया प्रस्फुटित भऽ पौधक निर्माण केलक जकर उंचाई हमरा सबकें गौरवांवित करैत अछि।

संजू दास द्वारा बनाउल नीला आऽ हरियर पृष्ठभूमि पर हर उम्ररक आकृति मऽ प्रयोग कैल चटकिला रंगक कलाकृति अहाँ के अपना दिस खिचत। किछ देर लेल मात्र नै ,ठहरबाक बादों मनन लेल मजबूर करत। मिथिला कलाके आधुनिक कला सँ जोड़ि एगो अलग तरहक सृजन मात्र हिनके चित्रकला मऽ भेटैत अछि। हिनकर यैह शैली हिनका सबसँ विशेष बनबैत अछि। मैथिला शैलीक आत्मा अछि चटक रंग,बारिक रेखा,अलंकारिक झार-बूटि , आऽ प्रकृतिक चित्रण अहि शैलीकें आधुनिकताक आभूषण पहिरा संजू जी अपन कैनवास पर उतारैत रहलि।

हिनकर कला मात्र प्राकृतिक आऽ मानवीय सुंदरता तक सिमित नै अछि। चित्रकलाक अर्थ मात्र देबालक खुबसूरती नै बल्की ह्रदयक मनोभावके दृश्य एवं प्रदर्शनकारी कलाक विभिन्न रूपक माध्यम सँ प्रकट कैर ओकरा रंग द्वारा सुन्दर आऽ सजीव बनेनाइ कला अछि। हिनकर कला किछ एहने सन अछि।जहि मऽ स्त्रीक श्रम, स्त्रीक स्वप्न, स्त्रीक संघर्ष, स्त्रीक मनक उड़ान, स्त्रीक शोषण आदि एगो स्त्री सँ बेसी सजीवता ओयमे और के आनि सकत। हिनकर मनन दृष्टि बहुत गंभीर अछि जे हिनकर कलाकृति मऽ हम महसूस कऽ सकैत छी।

आदरणीय संजू दास २०बरख सँ लगातार पारिवारिक जिम्मेदारीयक निर्वाह करैत समाज मऽ प्रतिष्ठा प्राप्त कलैथ। हिनकर कला आब ग्राम आऽ राज्ये टा मऽ नै देश आऽ विदेशो मऽ शोभनीय अछि। अखन धैर ६टा एकल प्रदर्शनी हिनकर भेल अछि भारत कला संस्थानक संग्राहलय मऽ हिनकर कला संग्रहित छैन। विभिन्न संस्था द्वारा सम्मानित श्रीमति संजू दास अखन बस उठि ठार भेलखिन आगा चैल हुनका अन्तर्राष्ट्रिय स्तर पर अपन गाम,राज्य आऽ देशक नाम स्थापित करैयक अछि। बिहार सरकार द्वारा वरिष्ठ महिला कलाकार सँ सम्मानित अहि कलाधर्मी केँ स्वस्थ तन आऽ शसक्त मनक उड़ान लेल हमर ढ़ेरों शुभकामना। हिनका प्राप्त सम्मानक विवरण:- 2017-18 कुमुद शर्मा पुरस्कार (बिहार सरकार वरिष्ठ कलाकार पुरस्कार) एकल 1999 ग्रैंडलेज़ बैंक गैलरी (चाणक्यपुरी दिल्ली) 1999 रवींद्र भवन, ललित कला अकादमी, दिल्ली 2000 रवींद्र भवन, ललित कला अकादमी, दिल्ली 2002 नंद लाल बसु कला दीर्घा, पटना 2012 कॉन्वेनसन लॉबी हैबिटेट सेंटर 2013 कन्वेंशन लॉबी हैबिटेट सेंटर चयनित समूह प्रदर्शनियां 2022 नारी नारायणी तृतीया वसंत राव परियोजना 2022 गैलरी पायनियर द्वारा बिहार का विहंगम दृश्य 2021 राजेश चंद द्वारा क्यूरेट कैलऑनलाइन ड्राइंग प्रदर्शनी 2021 AIFACS अखिल भारतीय चित्रकला प्रदर्शनी 2000 पेस समूह प्रदर्शनी 2018 महिला चित्रकारक सामूहिक प्रदर्शनी एनजीएमए मैथिली भोजपुरी अकादमी द्वारा 2010 रंगपूर्वी समूह प्रदर्शनी 2003 अनशेकल्ड स्पिरिट 2001 उनकी कहानी (फ्रीडम आर्ट गैलरी द्वारा समूह प्रदर्शनी संगठन) 2001 एएन इवनिंग विथ फिगर्स ओआरजी बाय आर्ट जंक्शन भागीदारी उमा शंकर पाठक द्वारा संवर्धित 2021 समूह प्रदर्शनी एनआईवी आर्ट गैलरी 2018 डाइसिटी के हस्ताक्षर 2003 यूपीएलकेए द्वारा इंटर स्टेट एक्सचेंज प्रदर्शनी ओआरजी 2001 उत्तर प्रदेश राज्य प्रदर्शनी 2001 उत्तर प्रदेश राज्य ललित कला अकादमी द्वारा पश्चिमी क्षेत्र प्रदर्शनी संगठन 2001 लघु कला प्रदर्शनी गढ़ी 1997 ललित कला अकादमी द्वारा कला मेला संगठन 1997 AIFACS अखिल भारतीय चित्रकला प्रदर्शनी एआरटी शिविर 2022 यूपी ललित कला अकादमी और एमएसएम ट्रस्ट द्वारा अखिल भारतीय शिविर पटनातो पी जम्मू ओआरजी 2022 अर्थशिला कला संवाद बिहार कला शिविर प्रिवार्थन द्वारा आयोजित रवींद्र नाथ टैगोर विश्वविद्यालय द्वारा 2021 अखिल भारतीय शिविर संगठन 1998 ऑल इंडिया कैंप ओआरजी बाय पेस ग्रुप नोएडा 2007 ऑल इंडिया आर्ट कैंप देहरादून ओआरजी बाई रीच 2009 साहित्य कला परिषद दिल्ली द्वारा अखिल भारतीय शिविर संगठन कार्य संग्रह: एनजीएमए दिल्ली, आईटीडीसी दिल्ली, परिवर्तन बिहार और भारत और विदेश में कई निजी गैलरी स्लाइड शो संगोष्ठी और प्रस्तुति भारत की लोक कला यूपी ललित कला द्वारा आयोजित आईजीएनसीए दिल्ली में मैथिली साहित्य उत्सव 2002 पटना (पुनाश पटना द्वारा ओआरजी) 2018 मिथिला पेंटिंग पर लखनऊ ललित कला अकादमी।

प्रकाशन कवर पेज (आउटलुक अंग्रेजी और हिंदी, हंस, वर्त्तमान साहित्य और गृहशोभा) आदि सामकालीन कला (हिंदी), दैनिक जागरण, सखी पत्रिका, जनसत्ता, राष्ट्रीय सहारा, पटना हिंदुस्तान में लेख अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.७.मुकेश दत्त- अपन शैली आ तकनीकक बलेँ आधुनिक कला मे अलग पहचान बना रहलीह संजू दास मुकेश दत्त अपन शैली आ तकनीकक बलेँ आधुनिक कला मे अलग पहचान बना रहलीह संजू दास

मिथिला प्रदेशक दरभंगा जिलाक कमरौली गाम मे जनमल, आधुनिक शैलीमे अपन कलाकृतिक लेल चर्चित, पहिल लोक कलाकार संजू दास भारतक चर्चित चित्रकार छथि। एहि कलाकारक कलाकृतिक समीक्षा आइ देशक चर्चित पत्र-पत्रिकामे छपैत रहल अछि। हिनक एखन धरि छह गोट एकल प्रदर्शनी आयोजित भऽ चुकल अछि अओर हिनक कलाकृति देशक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घामे सेहो संग्रहित अछि। बिहार सरकारक प्रकाशित 'बिहार की समकालीन कला' आ 'सौ साल मे बिहार की कला-कला और कलाकार' दूनू पुस्तकमे हिनका नव पीढ़ीक प्रतिभावान कलाकारक रूपमे उल्लेख कएल गेल छैन्ह। बिहार सरकारक वरिष्ठ महिला कलाकारक सम्मान 'कुमुद शर्मा पुरस्कार' सँ सम्मानित संजूजीक प्रदर्शनी एखन बिहार सरकारक पटना स्थित बिहार म्यूजियममे लागल छैन्ह। समकालीन कलामे हर कलाकारक अपन खास शैली होइत अछि, मिथिला पेंटिंगक दुनियासँ आधुनिक कलाक दुनियामे कदम राखयवाली पहिल कलाकार संजूजीक पेंटिंगकेँ क्यो आसानी सँ चिन्ह आ वर्गीकृत कऽ सकैत छथि। हिनक चित्रमे ग्राम्य जीवनक व्यथा आ नारी जातिक आंतरिक करूण गाथाक झलक भेटैत अछि। संजूजी वएह चित्र बनएवा मे रूचि राखैत छथि जकर सीधा सम्बन्ध मानवीय मूल्य आ वास्तविकतासँ होए, प्राकृतिक विषय पर चित्र बनाएब हिनका सेहो खूब पसिन्न छैन्ह। एकटा ग्राम्य जीवनसँ अपन शुरूआत आ स्वप्रशिक्षित चित्रकार भेलाक वावजूदो हिनक कलाकृति मे नारीवादी कलाकार जेना धार सेहो देखबा मे आबैत अछि। ऑल इंडिया फाइन आर्ट एंड क्राफ्ट्स सोसाइटी, ललित कला अकादमी आदि कतेको प्राइवेट गैलरी सबमे हिनक कलाकृति प्रदर्शित भऽ चुकल छैन्ह। हिनक चित्रकेँ एकटा नवीन तरहक शैली कहल जा सकैत अछि जाहिमे मॉडर्न आर्ट आ पारम्परिक मिथिला शैली दूनूक नीक प्रयोग देखबामे आबैत अछि। उखरि-मूसर, सोन चिरईया, दौनी-ओसौनी, नदी-नाला, खेत-खरिहान, धन-रोपनी, झूमर-टिकुली, चौपाल-पंचायत सभ किछु एकटा कैनवस पर उपस्थित कऽ दैत छथिन संजूजी। हिनक सौम्यता आ कलाक प्रति समर्पण हिनक प्रसिद्धिक मुख्य कारण बुझना जाइत अछि। माए देवकी देवीसँ लेल प्रेरणा हिनक ऊर्जा थिकैन्ह जे स्वयं एकटा गृहस्थ महिला छलीह मुदा कला-कौशलमे निपुण। हुनके सँ ई सुजनी कला, अरिपन देनाय आ मिथिला पेंटिंग बनेनाय सिखलीह। हिनक पिता श्री प्रभु नारायण दास ब्लॉक मे ग्रामसेवक छलाह। जतय धरि हिनक शिक्षा-दीक्षाक गप्प अछि तऽ अपन गामेक स्कूलमे पढ़ी आ गामेमे रहि प्राइवेट सँ ग्रैजुएसन केलैन्ह। विवाह हाबीभौआर निवासी आधुनिक चित्रकार रवीन्द्र दाससँ भेलैन्ह। दूइ पुत्रीक माए संजूजी गृहस्थाश्रम सम्हारैत अपन कलाक प्रति सदिखन समर्पित रहैत छथि। बाल्येकालसँ मिथिला पेंटिंग बनबैत आबि रहलीह संजूजीक रंग लगेबाक तरीका आ संयोजनमे सेहो आब परिवर्तन देखबामे आबैत अछि। आब हिनक आकृतिमे रेखाक नहि बल्कि रंगक प्रमुखता होइत छैन्ह। पहिने ई लोककला शैलीमे काज करैत छलीह मुदा विवाहक बाद लोक-कलासँ प्रभावित आधुनिककला शैलीमे काज करय लगलीह। ई बदलाव दिल्ली एलाक किछु दिन बाद राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घामे महिला कलाकारक प्रदर्शनी देखलाक बाद अयलैन्ह। ओहि प्रदर्शनीमे कतेको आधुनिक कलाकार सभहक काजमे लोककलाक प्रभाव छल, तऽ ई सोचय लगलीह जे हमहुँ तऽ एकटा लोककलाकार छीहे हमरा तऽ मात्र आधुनिककलाक किछु बारीकी टा सीखबाक जरूरत अछि। ओकर बादे सँ हिनक आधुनिककलाक यात्रा शुरू होइत छैन्ह। हिनक सभ कलाकृतिमे विषय स्त्रीक जीवन आ हुनक आकांक्षा होइत छैन्ह जे मात्र आकृतिमूलक कले मे संभव भऽ सकैत अछि। ग्रामीण जीवन तऽ रंग-बिरंगा होइते छैक, शायद तैँ हिनका चटख रंगसँ किछु बेसी स्नेह छैन्ह। आइ एकटा स्वप्रशिक्षित कलाकारक रूपमे अपन कला यात्रासँ बेहद खुश भऽ कहैत छथिन, "जाहि कला महाविद्यालयमे हमर नामांकन नहि भेल आइ ओतुका छात्र-छात्रा आ शिक्षक लोकनि सेहो हमरा एकटा कलाकारक रूपमे सम्मान दैत छथि, हमरा लेल एहिसँ बढ़ि कऽ आर खुशी की होयत।" देशक लगभग सभ महानगरमे हिनक काज प्रदर्शित भऽ चुकल अछि आ कतेको कला शिविरमे हिनका आमंत्रित कएल जा चुकल छैन्ह। हिनक पहिले प्रदर्शनीसँ काम बिकय लागल छलैन्ह, दोसर प्रदर्शनीक बाद हिनकर कलाकृति आधुनिक कला दीर्घामे संग्रहित भेलैन्ह। प्रिंट आ इलेक्ट्रानिक मीडियामे हिनका आ हिनक कलाकेँ खूब जगह भेटैत छैन्ह। हिनका नजरिमे कला जीवनक प्रतिबिम्ब अछि, तैँ हिनक किछु कलाकृतिमे साहित्यक प्रभाव देखल जा सकैत अछि। किएक तऽ हिनका कविता आ नाटक सेहो खुब पसंद छैन्ह। हिनक शुरूआती कलाकृति सब बेसी ग्रामीण जीवनशैली पर आधारित होइत छल, मुदा आइ-काल्हि ई नारी मनक आकांक्षा पर काज कऽ रहल छथि। अणुशक्ति सिंह, अनामिका आ केदार नाथ सिंह केर कविता हिनका खुब पसंद छैन्ह। कला हिनका लेल आम दिनचर्या छल किएक तऽ मिथिलाक हर स्त्री कलाकार होइ छथिन, मुदा ई कहियो ई नहि सोचने रहथि जे आगाँ चलि ओ स्वयं एकटा कलाकार बनतीह। चूँकि हिनकर पति सेहो एकटा प्रसिद्ध कलाकार छथिन तऽ हिनको मनमे भेलैन्ह जे हिनको कलाक विधिवत शिक्षा लेबाक चाही मुदा से संभव नहि भऽ सकलैन्ह। हिनका जनतबे दुनिया भरिक कोनो आर्ट कॉलेज कलाकृति बनेनाय नहि सिखाबैत छैक। एकटा कलाकार बनबाक लेल तकनिकी शिक्षाक अलावे निजी चिंतन आ सामाजिक-राजनीतिक स्थितिक जानकारी सेहो जरूरी होइत अछि। दिल्लीसँ प्रकाशित होएवला मैथिली त्रैमासिक पत्रिका 'मिथिलांगन' लेल देल अपन एकटा साक्षात्कार मे पुछल प्रश्न "अहाँकेँ कलाकारे बनकाक मन किएक भेल?" केर उत्तर मे कहने छलीह, "जेना मिथिलाक आम स्त्रीगण विवाह आ पर्व-त्यौहारक अवसर पर कागज, कपड़ा आ दीवार पर थोड़-बहुत चित्रकारी करैत छथि तहिना हमहुँ करैत रही। मुदा कहियो हम सोचने नहि रही जे हमहुँ एक दिन कलाकार बनब, किएक तऽ तखन हमरा ई बात नञि बूझल छल जे शहर मे गामक एहि कलाकेँ लोक एतेक पसिन करैत छथि आ कलाकार लोकनिक एतेक सम्मान आ पाई देल जाइत छैन्ह। शुरूआत मे हम कागजे पर जलरंगसँ छोट-छोट पेंटिंग बनाबी ताहि पर आयल पेस्टल लऽ कऽ ओकरा फिनिशिंग टच दैत रही। जलरंग आ आयल पेस्टलकेँ बाद हमरा ऐक्रेलिक रंगसँ कैनवास पर काम करबाक मन भेल। मुदा हम छोटे आकार मे बेसी पेंटिंग बनौलहुँ। मात्र एकटा पैघ आकारक बनौलहुँ जेकरा पहिल एकल प्रदर्शनी मे प्रदर्शितो कएलहुँ। किछु पेंटिंग बीकायल जाहिमे ओ बड़का पेंटिंग सेहो छल, ओहिसँ हमर आत्मविश्वास बढ़ल। तकर बाद हम पैघ-पैघ आकार पेंटिंग बनेनाय शुरू कऽ देलहुँ। हमर पति हमरा सदिखन सहयोग केलैन्ह आ उत्साह बढ़ौलैन्ह। दिल्लीक खुलल माहौल हमर कलात्मक अभिरुचिकेँ नव दिशा देलक।" एहिये साक्षात्कारमे "आधुनिक कलाक प्रति कोना आकर्षित भेलहुँ?" केर जवाब दैत कहलैन्ह, "चूँकि हमर विवाह एकटा आधुनिक कलाकारसँ भेल तैं विवाहक बाद हमरा बेसी भेंट-घाँट कलाकारे लोकनिसँ भेल। एतेक धरि जे घूमनाई-फिरनाइयो बेसी कलादीर्घे आ कला प्रदर्शनिये मे भेल। ओहि समय राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय मे भारतीय महिला कलाकार सभहक एकटा प्रदर्शनी देखबाक अवसर भेंटल ओकरे बाद हम आधुनिक कलाक प्रति आकर्षित भेलहुँ। हम सोचलहुँ किएक नञि मिथिलाक लोक कलाकेँ आधुनिक कलासँ जोड़ल जाए। तकर बाद हमर कलामे एकटा निखार आबि गेल। जखन हमर पेंटिंग राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय लेल चयनित भेल तखन कतेको कलाकार कहलाह जे आब अहुँ आधुनिक कलाकार भऽ गेलहुँ।" अपन सबल पक्षमे, नव-नव क्षेत्रक लोक सबसँ गप्प केनाए हिनका नीक लागैत छैन्ह, तऽ स्त्रीक शोषण वा स्त्रीक बुराई पसंद नहि छैन्ह। अपन पेंटिंग मे सेहो एहि विषयकेँ ओ प्रमुखतासँ चित्रित करैत छथि। साहित्य आ नाटक खूब पसंद छैन्ह जकर उपयोग ओ अपन कलाकृतिक पात्र-चित्रण करबामे करैत छथि। तऽ दोसर दिश दुर्बल पक्षमे हुनका कजोट छैन्ह जे, हमरा अंग्रेजी नहि आबैत अछि आ कला क्षेत्रमे बेसी किताब, सेमीनार आ खरीददारक वार्ता अंग्रेजी मे हेबाक कारणें दिक्कत होइत अछि। अपन पेंटिंगक बारे मे बताबैत कहैत छथि, "पॉल गोगवां आ मार्क शैगालक रंग योजना हमरा बड्ड पसिन अछि, हमर पेंटिंगकेँ देखलासँ अहाँकेँ ई बुझा जायत। हमर शुरुआती प्रदर्शनीक चित्र सबमे मिथिलाक ग्राम्य जीवनक सुन्दर झलकी छल, ताहि मे बेसी ग्रामीण महिला सभहक दैनिक क्रियाकलाप पर आधारित चित्रण छल। ओकर बाद स्त्री मनक संवेदना आ आकांक्षाक चित्रण केनाए शुरू कएलहुँ मुदा प्रतीक आ बिम्ब गामक स्मृतिये पर आधारित छल। हालाँकि अपन चित्रक संयोजन मे हम कोशिश करैत छी जे मधुबनी पेंटिंगक खुशबू बाँचल रहय, जेना- पूरा सतह पर अलंकारिक बेल बूटा, रेखांकन आ छोट-छोट आकार सबकेँ सजावट जकाँ उपयोग करैत छी। बेसी चित्रकार स्त्री देहक सुंदरताक चित्रण करैत छथि। मुदा, हम एकटा स्त्री छी तैं हमर कोशिश रहैत अछि जे स्त्रीक श्रम, ओकर प्रेम, ओकर आकांक्षा आ ओकर मोनक भावना आदिकेँ सेहो चित्रित कएल जाए। हमर कलाकृति पहिल नजर मे लोककला जकाँ आभास दैत छै मुदा, ओकर संयोजन, रंग लगाबयकेँ तरीका आ विषय समकालीन होइत छैक। वएह कारण छैक जे हम समकालीन कलाक सब मुहावरा इस्तेमाल करैत छी खासकर उत्तर आधुनिकतावाद आ नारीवादी कलाकृतिक। एतेक धरि जे डिजिटल कला मे सेहो बड्ड संभावना देखि रहल छी।" मिथिला पेंटिंग आ आधुनिक कलामे फरक करैत कहैत छथि, "देखबा मे जरूर अलग लगैत छै, मुदा सब कला एक्के रंगक छैक। हमरा जनितबे आधुनिक कला आ लोक कलामे बेसी फरक नहि छैक खाली माध्यमक फरक छैक। आधुनिक कला फाइन आर्टक विकसित रूप कहल जा सकैत अछि। बेसी लोक यथार्थवादी शैली मात्रकेँ फाइन आर्ट बूझैत छथिन आ हुनका कठिन बूझना पड़ैत छैन्ह आ किछु गोटे आधुनिक कलाकेँ उटपटांग काज बुझैत छथि। आधुनिक पेंटिंग मे अमूर्तता आनबक प्रयासमे एक रंगमे कतेको रंग आ आकारकेँ ऊपर आकार देखबा मे भेटत। ओना आधुनिक कलाक बेसी प्रयोग शैली आ माध्यमक भेल छैक। महासुंदरी देवीकेँ रेखांकन देखिक कतेको कलाकार पिकासोसँ तुलना करय लागैत छथि। कोनो कलाकारकेँ अपन शैली छैन्ह आ नव विषय पर काजो कऽ रहल छथि खाली माध्यमक फरक भेलासँ कोना नहि हुनका आधुनिक कलाकार कहबैन्ह। रहल बात समकालीनताक तऽ मिथिला पेंटिंगमे आब कतेको कलाकार दहेज, आतंकवाद, स्त्री-पुरुखक संबंध, भ्रूण हत्या, पर्यावरण सन आजुक समसामयिक विषयसँ जुड़ल नव सोच आ नव संयोजनमे काज कऽ रहल छथि। समकालीन कलाकारो सब एहने विषय पर काज करैत छथि।" मिथिला कलाक मिथिलामे स्थिति पर ओ कहैत छथि, "कहल जाइत छैक जे संपूर्ण मिथिलाक जन-जनमे ई कला रचल-बसल छैक। मुदा हमरा देखबामे एहेन बात नहि आयल। मात्र मधुबनी शहरकेँ नजदीकवला गाम सब व्यावसायिक रूपसँ सफल भेलाक कारणेँ पूरा गामक लोक चित्रकारीमे लागल छथि। आन गाम सबकेँ बेसी प्रचार-प्रसार नहि भेलै। तैं ओ लोकनि मात्र पाबनि-तिहार धरि एहि कलाकेँ सीमित केने छथि। शहरकेँ दिश बेसी आकर्षण भेलाक कारण आबक लोक एहि कलाकेँ नहि सीखय चाहैत छथि। शहरमे जे मैथिल परिवार रहैत छथि हुनको ड्राइंग रूममे मिथिला पेंटिंग नहि भेटत, एतबै नहि गामो-घरमे आब देवाल पर सीनरी भेट जाएत, मुदा मिथिला पेंटिंग नहि भेटत। एखन धरि एहि कलाक लेल संग्रहालयक मिथिला आ देशक आन भागमे कमी अछि। दोसर कारण अछि मिथिला कलामे रोजगारक संभावना, सम्पूर्ण मिथिला तऽ नहि मुदा किछ गाममे अवश्य ई कला रोजगारक प्रमुख साधन बनि गेल अछि। कोनो कलाकेँ रोजगार बनेबाक लेल कलाकारकेँ लगातार काज करय पड़ैत छैन्ह आ अपनाकेँ कलाकार जकाँ प्रचारित सेहो करए पड़ैत छैन्ह, एतबै नहि ओकर बिक्री लेल सेहो प्रयत्नशील रहय पड़ैत छैन्ह।" संजू जी मिथिला पेंटिंगक व्यवसायीकरण पर अपन विचार राखैत एकटा संगोष्ठी मे कहने छलीह जे, "व्यवसायीकरण शब्दकेँ लोक गलत नजरिसँ व्यवहार करैत छथि। मुदा हमर अपन विचार जे कोनो कलाक विकासक लेल व्यवसायीकरण जरूरी छैक। व्यवसायीकरणक लाभ छै, तऽ किछु हानि सेहो छै। लाभ ई भेल जे मिथिलाक स्त्रीगण आर्थिक रूपसँ सबल भेलीह बिनु पढ़लो-लिखलो स्त्रीगण देश-विदेश घुमि एलीह। हानि ई भेल जे आब बेसी कलाकार मौलिक काज नहि कऽ कऽ नकल करैत छथि। बेसी चर्चित कलाकार लोकनि दोसरासँ काज कराबय लगलाह। किछु कलाकारक नीक स्थिति छैन्ह जिनका संपर्क छैन्ह, मुदा बेसी कलाकार एकरा मजदूरीसँ नीक बुझिक काज कऽ रहल छथि आ कलाकार बला सम्मानो भेटैत छैन्ह।" एकटा परिचर्चामे, एहि क्षेत्र मे आबय लेल आवश्यक प्रशिक्षण आ संस्थानक विषयमे अपन विचार राखैत कहने छलीह, "अपन समाजमे सभहक माए-बहीने एहि कलाक प्रशिक्षण दैत छथिन। मुदा, एखन धरि मधुबनी स्थित मिथिला आर्ट इन्स्टीच्यूट नीक कला संस्थान मानल जाइत छैक। किएक तऽ ओतय नीक शिक्षक, कलाक सामग्री आ नीक कलाकारक चित्र खरीदबाक व्यवस्था सेहो छैक। सिखबा लेल कोनो नीक कलाकारसँ सिख सकय छी मुदा सरकारी नौकरी लेल कला महाविद्यालयमे शिक्षा आवश्यक अछि। ओतय पाँच सालक डिग्रीक संग बेसी कलाकारक ज्ञान लेबाक मौका भेटैत अछि। भारतमे सभ राज्यमे तऽ नै मुदा पटना, बनारस, लखनऊ, मुंबई, बड़ौदा, शांति निकेतन आदिमे एकर नीक पढ़ाई मानल जाइत अछि।" मैथिली-भोजपुरी अकादमी, दिल्लीक त्रैमासिकी पत्रिका 'परिछन' के देल अपन साक्षात्कारमे "अपनेक चित्रमे बेस चटख रंगक प्रयोग देखबामे अबैत अछि। अहाँ अपन कलाक अन्तर्वस्तुक संबंधमे बतबियौक?" प्रश्नक उत्तर दैत कहलैन्ह, "हमर कलाकृतिमे स्त्रीक भूमिका बेस सकारात्मक रहैत अछि। किछु दिन पहिने स्त्री-मनोदशा आ ग्रामीण स्त्रीक सक्रिय भूमिका पर एकटा प्रदर्शनी आयोजित कयने छलहुँ। हमर मान्यता अछि जे जौँ पुरुष आर्थिक जिम्मेवारीक निर्वाह करैत अछि तऽ स्त्री सेहो सामाजिक जिम्मेवारी निर्वाह करबामे सहयोग दैत छथि। गाम-घरक अशिक्षित स्त्रीगण सेहो शहरक कामकाजी स्त्री लोकनि जकाँ आर्थिक सहयोग दैत छथि। एकर अतिरिक्त हम स्त्री-पुरुष संबंधक जटिलताकेँ सेहो अपन चित्रक विषय बनौने छी। आरम्भ भनहिं हम पारंपरिक अरिपन आ कोहबर आदिक रचनासँ कयलहुँ मुदा एखन धरि हम कतेको श्रृंखला (सीरीज) पर काज कयलहुँ अछि हमर पहिल प्रदर्शनी ग्रामीण जीवनक क्रिया-कलाप पर केन्द्रित छल। हमर 'मिड नाइट टॉक' चित्र बेस चर्चित रहल। जकरा जर्मनीक एकटा कला संग्राहक खरीदने छलाह। छटम प्रदर्शनीमे हम 'श्वेत-श्याम चित्रक प्रदर्शनी लगौने छलहुँ। आइ-काल्हि ग्रामीण दृश्य पर आधारित चित्र बना रहल छी। कुल मिला कऽ अहाँ कहि सकैत छी जे हमर कला ग्रामीण जीवनक सकारात्मक पक्षकेँ चित्रित करैत अछि, कारण जीवनक आरंभिक बीस साल हम गामे मे रहलहुँ जकर प्रभाव आइ धरि हमर काज पर अछि। अहाँ चाहि तऽ हमर कलाकेँ 'यादि मे बसल गाम' कहि सकैत छी। हम मूलतः आकृतिमूलक चित्रे बनबैत छी। चित्र बनयबासँ पहिने रेखांकनक रूपमे कोनो दृश्य वा आकृतिक रचना करैत छी। फेर कतेको रेखांकनक संयोजनसँ संपूर्ण चित्रक कल्पना करैत छी। किछु कला मर्मज्ञ लोकनि हमर चित्रकेँ देखि कऽ जिज्ञासा प्रकट कयलैन्ह जे कैमरा सँ सेहो एतेक दूर अओर एतेक निकटतम चित्र एक संगे नहि झीकल जा सकैत अछि तऽ अपनेक व्यू-प्वाइंट की होइत अछि। हम हुनका बतौलियैन्ह जे दरअसल हम कलाक दृश्यकेँ एक संगे क्रममे जोड़ैत छी। बस यात्राक क्रममे देखल गेल दृश्य हमर व्यू-प्वाइंट होइत अछि। एखन धरि हम जलरंग रेखांकन, एकेलिक व मिश्रित माध्यम सबसँ काज कयलौंह मात्र आयल कलरमे काज करब बाँकी अछि। अनुमान लगा सकैत अछि जे मिथिलाक लोक-कला से हमर आत्यांतिक जुड़ाव अछि हमर चित्रमे मानवाकृतिक आँखि आ मुखमंडल बनावटि मिथिला पेंटिंगसँ प्रभावित अछि। चिड़ै, पशु इत्यादि हम मिथिला चित्रकलाक मूल स्वस्पहिं जकाँ बनबैत छी। हँ, रंग भरबाक ढंग व संयोजन आधुनिक कलासँ प्रभावित अछि। विषयक झुकाव संपूर्ण पुरबिया संस्कृति दिस अछि। कोनो कला संपदाक संरक्षण व्यक्तिक स्तर पर नहि होइत छैक। व्यक्तिगत स्तर पर अहाँ अपन कलाकेँ निखारू आ ओकरा विकसित करत रहियौ तऽ निश्चित रूपसँ क्षेत्र विशेषक कला संपदा समृद्ध हेतैक आ ओकर विकास स्वतः हेतैक।" तऽ एकटा आन प्रश्न, "समकालीन भारतीय कला परिदृश्ये संबंधमे अपने किछु कहय चाहब? अहाँक कला-रचना समकालीन कला परिदृश्यमे कोन तरहें हस्तक्षेपऽ रहल अछि?" केर प्रतिउत्तर मे कहलने छलीह, "समकालीन परिदृश्य मे भारतीय कला संपूर्ण विश्वक केंद्र बिंदु बनय जा रहल अछि। विश्वक सबसँ पैघ नीलामीमे भारतीय कला आ पारंपरिक कलाक नीलामी जोर-शोर सँ भऽ रहल अछि। दुनिया भरि मे भारतीय कलाक प्रति उत्सुकता बढ़ल अछि। दुनियाक सबसँ पैघ संग्रहमे मिथिला कला अओर पुरबिया क्षेत्रक कलाकार लोकनिक कलाकृति संग्रहित कएल जा रहल अछि। हमर कला समकालीन कला परिदृश्यमे हस्तक्षेप करैत अछि, एहि संबंधमे हम की कहू, ई तऽ कला समीक्षक बतौताह। मुदा हमरा पहिल बेर अपन काजक महत्त्व तखन बुझबा मे आयल, जखन कलाकृति नेशनल गैलरी मॉर्डन आर्ट द्वारा खरीदल गेल। किछु विदेशी कला समीक्षक लोकनि सेहो हमर कलाकृति खरीदलैन्ह। माधवी पारेख, पिलोपोच खानवाला सन कतेको महिला कलाकार जे स्वयं प्रशिक्षित छथि, हमर कलाकृति सँ प्रेरणा भेटैत छैन्ह से जतौलैन्ह। हमर किछु रेखांकन हंस आ समकालीन भारतीय साहित्य सन साहित्यक पत्रिका मे प्रकाशित भेल अछि।" आजुक कलाक ट्रेंड केर बारे मे पुछला पर कहैत छथि जे हमरा बुझने आइ-काल्हि दू तरहक कलाक ट्रेंड छैक - फोटो रियलिज्म आ दोसर इंस्टॉलेशन कला। एकटाक कारण बाजार छैक तऽ दोसरक बाजार मे अपनाकेँ स्थापित करब। समकालीन कलाक दुनिया मे बाजार हावी छैक। जे कलाकारक कृति जतबा मे बिकैत छैक ओ ओतेक पैघ कलाकार मानल जाइत छैक। हालाँकि हम बाजारवादकेँ नीक मानैत छी, किएक तऽ जौँ हमर कलाकृति नहि बिकल रहैत तऽ भरिसक हम अपन छटा एकल प्रदर्शनी नहि कऽ पबितहुँ। अखन किछु दिन पहिने सोशल मिडिया पर हिनक कलाकृति बेस चर्चामे रहल, कारण छल हिनक कलाकृतिकेँ अश्लील वा कलाकृतिमे अश्लीलता। एहि मादे हमर एतबे कहब अछि जे कोनो कलाकारक कलाकृति वा रचना पर अपन विचार रखनाय अति उत्तम विषय अछि, मुदा अपन विचार राखब सँ पूर्व ओहि विषयक जानकार भेनाय अति आवश्यक अछि। जाहि विषय मे ज्ञान नै अछि ओकर ज्ञान आ जानकारी लेलाक बादे अपन विचार राखब उचित। संजु दास जीक पेंटिंग केँ ष्व्नजसववाष् सदृश्य अंतरराष्ट्रीय पत्रिका अपन कवर पर स्थान देलक (जकर चहूँदिश प्रशंसा कएल गेल), ई अपना सभ लेल गौरवक बात अछि। रहल अश्लीलताक बात, तऽ प्रत्येक व्यक्तिक नजर, देखबाक-सोचबाक-विचारबाक अपन-अपन दृष्टिकोण होइत अछि। जखन कियो अपन माएकेँ, अपन बहिनकेँ, अपन प्रेमीकेँ, अपन पत्नीकेँ, अपन बेटीकेँ देखैत छथि तऽ आँखि तऽ एक्के रहैत अछि मुदा सबकेँ देखबाक नजरि बदलि जाइत अछि। एक्के आँखिसँ लोक अपन माए, अपन पत्नी दूनूकेँ देखैत छथि, मुदा हृदय मे माए लेल श्रद्धा आ सम्मान तऽ पत्नी लेल प्रेम आबैत अछि। ई हमर व्यक्तिगत माननाय अछि जे अश्लीलता प्रकृति वा रचना मे नै व्यक्तिक दृष्टिकोण मे होइत अछि। अपन दृष्टि नीक तऽ संसारक सभ वस्तु नीक। संगहिं नीक कामक सदिखन प्रोत्साहन हेबाक चाहि, नै की ओहिमे नीम-नुक्स निकालबाक चाहि। जेना कोनो चित्रकार साहित्यिक रचना पढ़ि कऽ चित्र बनाबैत छथि, तऽ ओहि रचनामे समायल भावकेँ ओ अपन तूलीका सेँ गढ़ैत छथि। ठीक तहिना कतेको रास कवि कोनो चित्र आ मूर्तिशिल्प देखि अपन कविताक रचना करैत छथि आ अपन रचना मे ओहि मूर्तिशिल्पक हुबहु वर्णन प्रस्तुत करबाक प्रयास करैत छथि, तखने तऽ हुनक रचना ओकर (चित्र आ मूर्तिशिल्पक) प्रतिरूप बनत। संभवतः संजूजी सेहो अपन चित्रकारी मे सएह गुण आनय लेल एहि तरहक प्रयोग करैत हेतीह। -मुकेश दत्त, मो 9910952191 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.८.गोविन्द चन्द्र दास- कामसूत्र के बिना कोनो चित्र शैली नहि छैक- लोककला के साक्षात विश्वविद्यालय गुमनाम नायक कृष्ण कुमार कश्यप (आ शशिबाला)* गोविन्द चन्द्र दास कामसूत्र के बिना कोनो चित्र शैली नहि छैक- लोककला के साक्षात विश्वविद्यालय गुमनाम नायक कृष्ण कुमार कश्यप (आ शशिबाला)* मिथिला लोककला आर संस्कृति केर महान केन्द्र थीक। मुदा एकरा वैश्विक पटल पर अनबा मे कृष्ण कुमार कश्यप कें विशिष्ट योगदान छन्हि। ओना त ई एकटा समाज सुधारक, नारी उत्थान केर संस्कृति दूत छलाह, मुदा विवाद सेहो हिनक संग लागल रहल। कश्यप जी आई कोनो परिचयक मोहताज नहि छथि। मिथिलाक संस्कृति विशेष क कला के संदर्भ मे हिनक अवदान के कोई बिसरि नहि सकैछ आओर नहि बिसरबाक चाही। एकर बावजूद समाज आर समालोचक कश्यप जीक संग न्याय नहि केलनि। हिनक मूल्यांकन उचित ढंग सं नहि कएल गेल। हिनका प्रति समाजक दृष्टिकोण बेस कठोर रहलैक। ओना त मिथिला कला संस्कृति अखनो समालोचनाक दृष्टि सं वंचित जकां अछि। मुदा सोशल मीडिया केर युग मे यदा-कदा नीक-बेजाय के विमर्श होमय लागल अछि। हालांकि कश्यप जी कें कामकाज केर आलोचना त भए सकैछ, मुदा ताहि स्तरक कोनो अथॉरिटी नहि बुझना जाइछ, जे हिनक उचित आकलन कए सकैथ।समाजक वास्ते कश्यप जी कें कतेक पैघ योगदान छन्हि से बुझनाई अत्यंत आवश्यक अछि। मुदा से नहीं, हिनक बनाओल चित्रकारी मे बेस सहजता सं अश्लीलताक अन्वेषण क लेल जाइछ। मुदा एतबे बात नहि छैक। पहिल बात जे कला रसविहीन नहि भए सकैछ। भारतीय मानस मे नवरसक अवधारणा छैक। ताहि कोनो कलाकार रस सं विरत भए नहि सकैछ। दोसर बात जे प्रत्येक कलाकार आर कथाकार के अपन शैली होइत छैक आ तेकर पहचान समाज के करय पड़तै। बातचीत के क्रम में एक बेर हम कश्यप जी कें कथित आपत्तिजनक पेंटिंग पर प्रश्न केलियन्हि त हुनक कहनाम रहैन जे बहुजन के जनतब मे मिथिला चित्र तखन एलै जखन एकर बाजार शुरू भेल रहैक। चाहे कोनो जाति के महिला एकरा बनबथि होथि चाहे कायस्थ समाज मे एकर बेसी चलन छैक त सबके बुझबा मे तखने एलैक जखन 30-35 बरख पहिने बाजार मे समान गेलैक। एकर मतलब ई नहि छैक जे एकर परम्परा मे कामसूत्र नहि छैक। कामसूत्र के बिना कोनो चित्र शैली नहि छैक। हुनक कहनाम रहनि जे पहिने कोहबर घर मे जाहिठाम कोठी राखल रहए ताहिठाम एकटा पार्टीशन होइत रहैक। सुनै छियै जे शब्द अछि कोनी-खोन्ही। ओ खोन्ही कोहबर घरक एकटा गुप्त भाग छैक। जाहिठाम सबहक आवाजाही नहि रहैत रहैक तेकरे खोन्ही कहल जाएत रहैक। ताहि खोन्ही मे नवरस कामदेवक चित्र रहैत रहैक। त कामसूत्र जे छैक ताहि सं वंचित कोनो कला शैली नहि छैक। आओर जखन मिथिला चित्र के बाजारीकरण भेलैक त एकरा बाजार मे अनलथिन के?... गंगा देवी, सीता देवी, जगदम्बा देवी। ओ सब वृद्ध स्त्री, विधवा स्त्री चाहे ताहि एज मे जे श्रीरामक भजन बेसी आओर दोसर चीज के चर्च-बर्च बेसी नहि कए सकैत छलथिन। कश्यप जी कें नाम सं विवाद कें वितंडावाद ठाढ़ कएल गेल से उचित नहि। जाहि मिथिला चित्रकला कें ओ आजीविका आओर उपयोगितावाद सं जोड़बाक प्रयास केलैथ ओकरा नजरंदाज नहि कएल जा सकैछ। हिनक कृतित्व मे प्रतीक आर बिम्ब के माध्यमे निर्भीकता आर आत्मविश्वास सं चित्रण साहस के बात छैक। कश्यप जी कें लेखन वा चित्रकारी पर प्रश्न उठाओल जाइत अछि, मुदा ओ समाजक सच छैक। आर सत्य केर प्रकटीकरण केनाइ कोनो कलाकारक अधिकार छैक। ताहि विषय पर वाद विवाद भए सकैछ, मुदा एहि मे केवल अश्लीलता देखनाइ कोनो कलाकार के संग अन्याय छैक। ताहि कश्यप जी कें काम कें अश्लीलताक संज्ञा दए खारिज नहि कएल जा सकैछ। यदि इएह बात छैक त कालिदास केर कालजयी रचना कुमार संभव आओर काशीनाथ सिंह कें "काशी का अस्सी" के खारिज कएल जा सकैछ की? कश्यप जी जाहि पृष्ठभूमि सं छथि, ताहि मे ई बड़ साहसक बात छै। जाहि अभावक जिनगी (फीस जमा नहि करबाक कारणे स्कूल सं निकालि देल गेला) सं गुजरलाक बादो निजी स्वार्थ कें छोड़ि क समाज कें जे देलखिन ओ स्वयं मे एकटा उपन्यास छथि। हुनक मोन मे ई एकदम स्पष्ट रहनि जे नारी उत्थानक आ ओकरा स्वावलंबी बनेबाक काज करब। ओ गाम गाम घूमि मिथिला पेंटिंग के केंद्र स्थापित कए महिला सब कें जोड़ि हुनका सब के स्वावलंबी बनौलनि। पेंटिंग कें महज सजावटी वस्तु केर सोच सं बाहर निकालि क ओकरा उपयोगिताक सामग्री के रूप मे मान्यता दियाब केर प्रयोग हिनके देन छनि आर ई प्रयोग मिथिला केर बहुत परिवार कें संबल बनल। एहि सच के क्यो नकारि नहि सकैछ। बाद मे ओ आत्मकथा लिखला बासमती जाहि कें अध्ययन केला पर लोकक भृकुटी तनि सकैछ मुदा एतेक बेबाकी आर ईमानदारी सं अपन सच लिखनाई बड़ हिम्मत के बात छैक। लोकतांत्रिक समाज मे आलोचना केर अधिकार त सबकें छैक, मुदा आलोचना आओर आरोप मे फर्क होइत छैक। एतबा धरि नहि, कश्यप जी जाहि पहचान आओर सम्मान कें हकदार छलाह, ओ हुनका नहि भेटलनि। मुदा मोनक कोनो कोण मे टीस रहबे करैत छैक। सौराठ मे पहिल मिथिला लोक कला विश्वविद्यालयक स्थापना कएल गेलैक। विश्वविद्यालय त बनि गेल, मुदा सबसं पैघ संकट रहै जे एकर पाठ्यक्रम की होयत आओर के बनेता? त कश्यप जी कें योग्यता आओर अनुभव के देखैत ई काज हिनके सुपुर्द कएल गेल। एकर अलावा गरीब बच्चा या भिखमंगनी सबहक बच्चा के पढ़ेनाई हिनक लक्ष्य रहनि। ताहि मे सेहो विरोधक सामना करऽ पड़लनि। कुल मिलाकऽ कहल जा सकैछ जे महिला, दलित, पिछड़ल आर वंचित कें उत्थानक लेल सदिखन अथक प्रयास करैत दुनिया सं विदा भए गेलाह। *(आ शशिबाला)*- सम्पादक द्वारा जोड़ल गेल। ऐ आलेखमे जतऽ जतऽ कश्यप जीक नाम अछि ओतऽ *आ शशिबाला सेहो पढ़ल जाय, कारण कश्यप जीक जिबैत कोनो चित्र एहेन नै अछि जे मात्र कश्यप जी आ शशिबाला संयुक्त रूपे नै बनेलनि।- सम्पादक अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.९.रवीन्द्र कुमार दास- परिवारक सहयोग सबसऽ जरूरी रवीन्द्र कुमार दास परिवारक सहयोग सबसऽ जरूरी कहबी छैक “जे हर सफल पुरुष के पाछू कोनो नै कोनो स्त्री के हाथ छैक“ एहि कथन स हम सहमत छी मुदा स्थिति एकर विपरीत सेहो देखबा मे आबि रहल अछि l संजू के कहानी हमरा जीवन मे हमर बियाहक लेल चर्चा सों शुरू होइत अछि l हमर बाबूजी कमरोली गामक एकटा कथा फ़ाइनल केलनि तेकर मूल आधार छल कन्या चित्र लिखैत छलखिन l हमरो सेहन्ता छल जे लड़की चित्र बनबैत होइथ नहि त कम स कम चित्रकार स घृणा नहि करैत होइथ कियैक त एखनहु अपन समाज मे चित्रकार के लोक पागल बुझैत छथिन l द्विरागमन के बाद हमर मौसी संजू दिस ताकि क हमरा कहलीह जे अपने जकाँ पागल नै बना दिहेन l जहांतक पागलपन आ जूनून के गप्प छै त आई हुनका मे अपन कलाक लेल जूनून देखिक मोन हर्षित होइत अछि l आई हमरा ख़ुशी होइत अछि जखैन क्यो कला लेखक वा चित्रकार हिनका स भेंट घाँट करबा लेल अबैत छथिन आ पुछैत छथिन चित्रकार संजू दास एतय रहैत छथिन हुनका स भेंट करबाक अछि l हमरा जनितबे मात्र पढ़ाइये मे नहि बल्कि चित्र ,अभिनय ,संगीत ,नृत्य वा साहित्य कोनो विधा मे सफलताक लेल जूनून भेनाइ जरूरी छै l हमरा मोन अछि जे प्रथम मिलन मे हम हिनका स्केचबुक पेन्सिल आ कलर बॉक्स भेंट केने रही कोनो गहना जेवर नहि l विवाह के किछ दिन बाद संजू हमरा कहलैन हमरो मोन होइत अछि जे हमहू आर्ट कालेज मे पढि क कला के विधिवत शिक्षा ली l हम कहलियैन तैयारी करू ,टेस्ट दियौ एड्मिसन भय जाइत अछि त पटने मे रहू ,डेरा डांटा त अछिये l टेस्ट देलनि मुदा एड्मिसन जोकर तैयारी नहि छलैन एड्मिसन नहि भेलैन  l हम कहलियैन जे अहाँ दुखी नहि होऊ कलाकार बनबा लेल मात्र जूनून आ लगातार प्रैक्टिस चाही l दुनिया भरि मे आ एहि देश मे कतेको कलाकार आर्ट कालेज स नहि छथि l एतेक पद्मश्री सम्मान स सम्मानित मिथिला पेंटिंग के कलाकार सब कोनो आर्ट कालेज मे थोड़े ने पढ़ने छथिन l संजू दिल्ली एलीह तेकर बाद स्थिति बदलल l हम पटना आर्ट कालेज स फ़ाईन आर्ट के कोर्स केलहुँ आ एकटा अखबारक कला विभाग मे नौकरी जॉइन केलहुँ l तखन हम नोयडा मे रहैत रही l हमर जतेक मित्रगण छथि ताहि  बेसी आधुनिक कलाकार छथि l घर मे बैसल छोट छोट पेंटिंग बनबैथ आ मित्रगण के देखबैथ l हमरा घर मे बेसी आधुनिक कला पर चर्चा होइत छल l नहु नहु हिनको आधुनिक कला मे रूचि लैत देखलहुँ l मॉडर्न आर्ट गैलरी मे एकटा भारतीय समकालीन महिला कलाकारक प्रदर्शनी देखलाक बाद ई निर्णय केलनि जे आब हम आधुनिक कला शैली सीखब आ ओहि शैली मे काज करब l धीरे धीरे करय लगलीह आ प्रदर्शनी सब मे पठबय लगलीह l मित्र लोकनि कहलैन जे नीक काज करैत छथिन अहाँ हिनकर एकल प्रदर्शनी आयोजित करू l दुनू गोटे विचार केलहुँ आ हिनक पहिल प्रदर्शनी निशुल्क भेटलाक कारण ग्रीनलेज बैंक के चाणक्यपुरी शाखा मे लगाओल गेल l ओतय प्रसंशा त खूब भेलनि मुदा एकहु त पेंटिंग बिकल नहि मुदा हम दुनू गोटे निराश नहि भेलहुँ l एक साल तक किछु आर पेंटिंग केलीह जाहि मे एकटा बड़का कैनवास सेहो छलैन l सबटा पेंटिंग के दोसर प्रदर्शनी मंडी हॉउस स्थित रवींद्र भवन ललित कला अकादमिक गैलरी मे आयोजित भेल  l एहि प्रदर्शनी मे पहिल दिन हिंदुस्तान टाइम्स के रंगीन पेज मे हिनकर पेंटिंग छपल आ साँझ तक मे बड़का कैनवास बला पेंटिंग बिका गेल l कोनो कलाकारक लेल ओकर पेंटिंग बिका जाए एहि स बड़का ख़ुशी आर की हेतैक l तेकर बाद हिनका मे हम अद्भुद उत्साह देखलहुँ  l आई धरि  कतेको पुरस्कार भेटलैंन ,कतेको प्रदर्शनी आ कला शिविर मे भाग लेने हेतीह मुदा पहिल पेंटिंग के बिकनाई जीवन मे बहुत महत्पूर्ण होइत छैक l आई अपन सर -कुटुंब नैहर आ सासुरक  लोक गर्व स हिनका स भेंट करैत छथिन फोटो खिंचबैत छथिन l हमरा यद् अछि जहिया पहिल बेर ई टेलीविजन के समाचार मे आयल रहैथ जेकरा देखिक हिनक मां खुश भय गेल रहथिन  l हम दुनू गोटे सेहो क्षण नहि  बिसरि सकैत छी जहिया  हिनका बिहार सरकारक वरिष्ठ महिला कलाकार सम्मान भेटलैन  हमर बाबूजी आ मां दुनू गोटे ओहि कार्यक्रम मे जेबाक लेल उत्साहित रहैथ lXZ * एक त अपन समाज मे कला ,रंगमंच ,साहित्य ,संगीत आ नृत्य के सबस अधलाह काज बुझल जाइत छैक एहि विषय पर चर्चो केनाइ सेहो अधलाह बात अछि l हमर विचार स हर स्त्री मे कोनो ने कोनो प्रतिभा अवश्य होइत छैक आ हुनको मे लालसा होइत छनि जे हमरा मौका भेटैत त हमहू किछु करितहुँ मुदा अपन समाज मे आइयो धरि हुनकर परिवार आ पतिदेब स सहयोग नै भेटैत छनि l हाल मे हिंदी आउटलुक पत्रिका के पूरा अंक स्त्री देह विशेषांक छपल छल ताहि मे सँजुके कतेको रेखांकन छपलइन l पूरा अंक फेसबुक पर शेयर केलनि त किछु लोक लिखलाह जे जानि बुझिक संजू चर्चा मे एबाक लेल अश्लील चित्र बनबैत छथि l  एम्हर किछु दिन पहिने 2008 के  मैथिली पत्रिका अंतिका मे छपल एकटा रेखांकन पर खूब चर्चा भेल l किछु गोटे लिखलाह जे संजू दास आ कृष्ण कुमार कश्यप दुनू मिथिला कला मे अश्लीलता पसाइर रहल छथि l किछु गोटे लिखलइन जे मात्र चर्चा मे एबाक लेल एहि तरहक चित्र बनबैत छथि l हम संजू के एक्के त गप्प कहैत छियैन जे लोक पिकासो आ फ्रांसिस न्यूटन सूजा के कलाकृति देखते त पता नै की कहते  l भारत के सबस प्रतिष्ठिक महिला कलाकार अमृता शेरगिल अपन सेल्फ न्यूड बनौने छथि मैथिल समाज के सेहो देखबाक चाही जे दिल्ली मे राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घा मे संग्रहित अछि l -रवीन्द्र कुमार दास, मो. 9811712398 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.१०.संजू दासक किछु बीछल कलाकृति अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.११.गजेन्द्र ठाकुर- कृष्ण कुमार कश्यप आ शशिबाला- एकटा परिचय गजेन्द्र ठाकुर कृष्ण कुमार कश्यप आ शशिबाला- एकटा परिचय कृष्ण कुमार कश्यप- जन्म १५ सितम्बर १९४९ ई.। मृत्यु- १२ अगस्त २०२० ई.। पिता- कवि-उपन्यासकार स्व. इन्द्रनारायण लाल "सँवलिया"। जनबरी १९६५ ई. मे नेना सभ लेल "नाइट स्कूल", १९८१ ई. मे "कला आधारित जीवन आ शिक्षण पद्धति"क प्रवर्तन आ तकर कार्यान्वयन लेल शिवा कश्यप आ शशिबालाक सहयोगसँ "भारती विकास संस्था"क स्थापना। रचना: शशिबालाक संग "मेघदूत" आ "गीत-गोविन्द"क मैथिली अनुवाद; माछ-भात; मिथिला चित्र प्रवेशिका भाग-१-२; मिथिला चित्र-कोर, भाग-३; मिथिला अरिपन भाग-४; गोदना चित्र-शैली- भाग-५; मिथिला लोकचित्र। शशिबाला- पिता श्री उग्र नारायण लाल, पति श्री उमेश कुमार कण्ठ (बिसहथ)। रचना: कृष्ण कुमार कश्यपक संग "मेघदूत" आ "गीत-गोविन्द"क मैथिली अनुवाद; माछ-भात; मिथिला चित्र प्रवेशिका भाग-१-२; मिथिला चित्र-कोर, भाग-३; मिथिला अरिपन भाग-४; गोदना चित्र-शैली- भाग-५; मिथिला लोकचित्र। कृष्ण कुमार कश्यप जी सँ लेल हमर साक्षात्कार साक्षात्कार-२ मे कृष्ण कुमार कश्यप जी कलाक विभिन्न पक्षपर अपन विचार रखने छला। मिथिला चित्रकलाक नाम मधुबनी चित्रकला करबापर ओ चिन्तित छला। जितवारपुर स्कूल आ आन ठामक मिथिला चित्रकलाकारक बीचक फाँटि सेहो उजागर भेल। "जखन लोक बाहरसँ अबैए तँ पूछैए जे अहाँक गाम कोन जिलामे अछि, आ से बुझने जे हम सभ मधुबनी नै दरभंगा जिलाक छी ओ बजैए 'यू आर नॉट फ्रॉम द ओरिजिनल प्लेस'- माने ओकरा होइ छै जे हमर चित्रकला असली मधुबनी चित्रकला नै छी आ से जितवारपुर स्कूलकेँ सूट करै छै।" नरेन करुणाकरण अपन आलेख "मिथिलाज वूमन पेण्ट देयर वे आउट ऑफ पोवर्टी" मे लिखै छथि- "बिहारक बरहेता गाममे भारती विकास मंच गरीब महिलाकेँ चित्रकलाक मिथिला पद्धति सिखा रहल अछि, जइसँ बहुत रास महिला गरीबी भगेबामे अपनाकेँ समर्थ कऽ सकल छथि।" नरेन करुणाकरण लिखै छथि जे कृष्ण कुमार कश्यपक पहिल शिष्या शशिबाला, जे आब ओत्तै शिक्षिका छथि, हुनका कहलखिन जे "एकटा गरीब मुशहर समुदायक हाथीक थीम आधारित चित्र अति सुन्दर होइत अछि।" शशिबाला हुनका ईहो कहलखिन्ह जे जोन बोनिहार महिलाक हाथ कने करगर होइ छै आ जखन ओइमे सँ किछु गोटे कोमलतासँ कुच्ची नै प्रयुक्त कऽ सकली तँ हुनका चित्रसँ अलग दोसर कला जेना टोकड़ी, टेबुलक्लॉथ आदि बनेनाइ मे लगाओल गेल। मुदा बहुत गोटे आस्तेसँ कुच्चीक प्रयोग केनाइ सीखि गेली। क्षिति जल पावक गगन समीरा आधारित पाँच टा रंगक अतिरिक्त दलित-आदिवासीक कलाक रेखा आ काट संग ओकर थीमक प्रवेश मिथिला चित्रकलामे गोधना शैलीकेँ प्रवेश दियेने अछि। कृष्ण कुमार कश्यप अपन स्कूलमे एकटा डोम छात्राक प्रवेश देने छलखिन्ह, दोसर छात्रा सभ हुनकर सहयोग केने छलखिन्ह मुदा गौँआ सभ हुनकर विरोध केने छलन्हि। हुनकर स्कूलमे किछु मुस्लिम छात्रा सेहो रहथि आ ओ लोकनि हिन्दू थीमक चित्रांकन करबामे कहियो संकोच नै केलन्हि। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.१२.जितेन्द्र झा, जनकपुर- मिथिला चित्रकला- नेपाल प्रसंग जितेन्द्र झा, जनकपुर मिथिला चित्रकला- नेपाल प्रसंग १ अपने घरमे उपेक्षित मिथिला चित्रकला मिथिलाञ्चलक घरक भितमे बनाओल जाएबला मिथिला लोकचित्रकला विश्वभरि ख्याति कमओने अछि । मुदा एखत अपने भूमिमे एकरा पहिचान खोजबाक स्थिति छैक । मिथिला चित्रकलाके सरकार बेवास्ता कएने अछि, तें ई व्यवसायिक रुप नहि लऽ सकल अछि । एकर व्यावसायिक प्रबद्र्धन नहि भऽ सकल अछि । ग्रामीण क्षेत्रक महिलाके जीवनस्तर सुधार करबाक लेल बडका साधन भऽ सकैत अछि ई चित्रकला । कियाक त खासकऽ मैथिल ललनेक हाथमे नुकाएल रहैत अछि ई चित्रकलाक जादुगरी । आर्थिक, सामाजिक आ सांस्कृतिक समृद्धिक अथाह सम्भावना अछि मिथिला चित्रकलामे । लोकचित्रकलाके व्यवसायिक स्वरुप देलासं आर्थिक आ सांस्कृतिक दुनू लाभ उठाओल जा सकैत अछि । परम्परागत मिथिला चित्रकला जीवनक अंग अछि मिथिलामे । लोकचित्रकला संस्कारक द्योतक सेहो अछि । मुदा बढैत आधुनिकताक कारणे विस्तार प्रभावित भेल छैक । राज्य मिथिला चित्रकलाके एखनधरि चिन्ह नई सकल आरोप चित्रकारसभक छन्हि । नेपाल सरकार कलाके बढावा देबालेल ललितकला प्रज्ञा प्रतिष्ठान खोलने अछि । जत्तऽके प्राज्ञ परिषद्मे मिथिला चित्रकलास सम्बद्ध एक्कहु गोटे नहि अछि । ई एकटा प्रमाण मात्र अछि, आन बहुतो ठाम मिथिला चित्रकलासंग सौतिनिञा व्यवहार होइत आएल छैक । एना ललितकला प्रज्ञा प्रतिष्ठानक कुलपति किरण मानन्धर कहैत छथि जे मिथिला चित्रकलाके विशेष स्थान देने छी । मिथिला चित्रकलामे विशेष दखल भेनिहारि महिलाके स्थान देल जाएत से कुलपतिक कहब छन्हि । हिनक कथनी आ करनीमे कतेक समानता अछि, आबऽ बला दिने बताओत । जत्तऽ समग्र कलाक उन्नतिक बात होइक ओत्तऽ मिथिला पेन्टिङक चित्रकार नईं अछि, एकरा विडम्बने कहबाक चाही । मिथिला चित्रकलासं सम्बद्ध चित्रकारके उचित अवसर भेटबाक चाही । नेपाल पर्यटन वर्ष २०११ मना रहल अछि, एहनमे मिथिला चित्रकलाक मादे सेहो पर्यटकके आकर्षक कएल जा सकैत अछि । एहिबीच काठमाण्डूक बबरमहलस्थित सिद्धार्थ आर्ट ग्यालरीमे एस. सी. सुमनक मिथिला चित्रकला प्रदर्शनी मिथिला कसमस हालहि सम्पन्न भेल अछि । एहि प्रदर्शनीमे कलाप्रेमी मिथिला चित्रकलाक आधुनिक आयामसभसं परिचित भेलथि । सिद्धार्थ आर्ट ग्यालरीमे हुनक ११ म् प्रदर्शनी छल ई । मिथिला क्षेत्रक जीवनशैलीक झल्काबऽ बला चित्रकलासभ देखलासं ग्यालरी मिथिलामय भऽ गेल छल । एस. सी. सुमन मिथिला चित्रकला क्षेत्रमे परिचित नाम छथि । हिनक चित्रकलासभ बेस प्रशंसा पओलक । मिथिला चित्रकला सम्बन्धमे अध्ययन अनुसन्धानक सेहो बहुत खगता छैक । मिथिला लोक चित्रकलाक कुनो खास नियम वा सिद्धान्त नहि होइत अछि । तें ई स्वच्छन्दताक पर्याय सेहो अछि । मिथिलाक समृद्ध संस्कृतिक परिचायक सेहो अछि । २ एस.सी सुमन, चित्रकार, मिथिला चित्रकला सरकार कएलक सौतिनिञा व्यवहार मिथिला पेन्टिङ परम्परागत कला अछि, ई कला कोनो पाठशालामे नहि सिखाओल जाइत अछि । पीढीदर पीढी ई अपने आप सिखबाक काज होइत छैक । हमहु अपन दाइसऽ सिखलहु । कतउ सासुसऽ पुतोहु सिखैत अछि त कखनो मायसऽ बेटी । ताहि परिवेशमे हमहुं अपन दाइसऽ मिथिला चित्रकला सिखलहु ।मिथिला पेन्टिङके अन्तर्राष्ट्रिय बजारमे बहुत माग अछि । ई त हट केक अछि । कलाकारके कलाकारितामे निर्भर करैत छैक ओकर मोल । जेना हमर पेन्टिङ १७ हजारसऽ लऽकऽ ८० हजारधरिक अछि । जे सहजे बिका जाइत अछि । मिथिला पेन्टिङ व्यावसायिक रुप लेबा दिस उन्मुख अछि । कमर्सियल मार्केटमे देखी त सेरामिकमे, ब्यागमे कपडा आदिमे एकर प्रयोग भऽ रहल अछि । तें नीक बजार छैक एकर । जऽ अपन बात करी त जहन हम बजारमे अबैत छी त प्रदर्शनी लऽ कऽ हमरा कोनो दिक्कति नई होइत अछि । मिथिला चित्रकलाक विकासके जे आधारसभ अछि से किछु कमजोर भऽ रहल अछि जेना पहिने माटिक घर होइत छलै । भितके घरमे मिथिला चित्रकलाके नीक अभ्यास होइत छलै । माटिक घरक ठाममे आब क्रंक्रिटके जंगल अछि भऽ गेल । सामाजिक संस्कार आदिमे सेहो भितमे लिखबाक चलन छलै । मुदा आब बच्चा जऽ पेन्सिलसऽ देबाल पर किछु लिखि दैत छैक त मायबाप डांटिदैत छैक । तें भितमे लिखबाक चलन प्रभावित भेल अछि । तैइयो तराईक मुसहर वस्ती, थारु आ झांगड जातिक वस्तीमे माटिक घरमे मिथिला चित्रकला देखल जा सकैत छैक । नेपाल सरकार एखनधरि किछु नई कऽ सकल अछि, मिथिला पेन्टिङके लेल । मिथिला पेन्टिङ जत्तऽ अछि अपने बुतापर, अपन स्थान अपने बनौने अछि । मिथिला चित्रकलामे लागल कलाकारसभ अपने मेहनतिसऽ आगु बढल अछि । ललितकला प्रज्ञा प्रतिष्ठानके गठन करैत काल प्राज्ञ परिषदमे मिथिला चित्रकलासऽ सम्बद्ध एक्कहु गोटेके नहि राखल गेल । नामके लेल सभामे मिथिला पेन्टिङसं जुडल एकगोटेके जगह देल गेलै, बादमे विवाद भेलै आ ओहो पद छोडि देलनि । व्यक्तिगत रुपमे हमरा पुछी त राज्य मिथिला चित्रकलाक लेल ने किछु कएने अछि आ ने किछु कऽ सकैया । (सुमनकसंग जितेन्द्र झा द्वारा कएल गेल बातचीतपर आधारित) ३ धीरेन्द्र प्रेमर्षि- साहित्यकार प्रगतिक पथपर मिथिला चित्रकला गुणँत्मक दृष्टिकोणसं सेहो मिथिला पेन्टिङमे बहुत काज भऽ रहल अछि । परम्परा आ आधुनिकता दुनूके जोडिकऽ एच.सी सुमन मिथिला पेन्टिङके आगू बढा रहल छथि । मदनकला देवी कर्ण, श्यामसुन्दर यादवसहितके व्यक्तिसभ परिमाणात्मक आ गुणात्मक दुनू तरहें मिथिला पेन्टिंगके आगू बढा रहल छथि । सुमनक पेन्टिङ आधुनिकताक आकाशमे सेहो भरपुर उडान भरने अछि मुदा धर्ती बिन छोडने, जे एकदम महत्वपूर्ण बात अछि । मिथिला पेन्टिंगके साधनाके रुपमे लऽ कऽ आगु बढनिहार सभ अपने आप आगु बढि रहल छथि ।राज्यके दिससऽ मिथिला पेन्टिङके लेल कोनो खास काज नहि भऽ सकल अछि । राष्ट्रिय स्तरमे चित्रकारसभके मूल्यांकन करैत काल मिथिला पेन्टिङसऽ जुडल व्यक्तित्वके जे स्थान आ सम्मान देल जएबाक चाही, से नहि भऽ सकल अछि । जनस्तर आ अन्तर्राष्ट्रिय स्तरमे मिथिला पेन्टिङ नीक सम्मान पओने अछि ।  देशमे मिथिला पेन्टिङके स्थापित कएल जाए । खास कऽ महिला सभ एकरा जोगाकऽ रखने अछि । मैथिल महिलासभ किशोर अवस्थेसं अरिपन लिखब शुरु करैत अछि । तुसारी पावनि आदि सभ सेहो मिथिला पेन्टिङ सिखएबाक अवसर अछि । विविध पूजाक माध्यमे ओ सभ चित्रकलामे प्रवेश करैत छथि । राज्यके दिससऽ मिथिला पेन्टिङके स्वीकार्यता बढाएब, व्यावसायीक सम्भावनाके खुला करब, एहिमे लगनिहारसभके सम्मानके वातावरण बनएबाक काज करबाक चाही । तहन ई राष्ट्रिय स्तरमे स्थापित भऽ सकत । एहिमे अन्तरनिहीत वैशिष्टय जे अछि ताहिसऽ ई अपने अन्तर्राष्ट्रिय रुपमे स्थापित भ जाएत, व्यापक भऽ जाएत । (जितेन्द्र झा द्वारा कएल गेल बातचीतपर आधारित) (विदेह सदेह ३६) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.१३.गजेन्द्र ठाकुर- श्वेता झा चौधरी- एकटा परिचय गजेन्द्र ठाकुर श्वेता झा चौधरी- एकटा परिचय श्वेता झा चौधरी, गाम सरिसव-पाही, ललित कला आ गृहविज्ञानमे स्नातक। मिथिला चित्रकलामे सर्टिफिकेट कोर्स। कला प्रदर्शिनी: एक्स.एल.आर.आइ., जमशेदपुरक सांस्कृतिक कार्यक्रम, ग्राम-श्री मेला जमशेदपुर, कला मन्दिर जमशेदपुर ( एक्जीवीशन आ वर्कशॉप)। कला सम्बन्धी कार्य: एन.आइ.टी. जमशेदपुरमे कला प्रतियोगितामे निर्णायकक रूपमे सहभागिता, २००२-०७ धरि बसेरा, जमशेदपुरमे कला-शिक्षक (मिथिला चित्रकला), वूमेन कॉलेज पुस्तकालय आ हॉटेल बूलेवार्ड लेल वाल-पेंटिंग। प्रतिष्ठित स्पॉन्सर: कॉरपोरेट कम्युनिकेशन्स, टिस्को; टी.एस.आर.डी.एस, टिस्को; ए.आइ.ए.डी.ए., स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया, जमशेदपुर; विभिन्न व्यक्ति, हॉटेल, संगठन आ व्यक्तिगत कला संग्राहक। हॉबी: मिथिला चित्रकला, ललित कला, संगीत आ भानस-भात। १ ई चित्र धानक कटनी कालक मिथिलाक गामक चित्रण करैत अछि। पुरुख-पात खेतसँ फसिल घर अनैत छथि तँ महिला ओहि फसिलकेँ तैयार कऽ चाउर बनबैत छथि। अपन दैनिक जीवनसँ हटि कऽ एहि अवधिमे महिला एकट्ठा होइ छथि आ गप-सरक्का करै छथि। २ जखन कखनो प्रेमक गप अबैत अछि तखन सभसँ पहिने मोनमे राधाकृष्णक ध्यान आबि जाइत अछि। ई चित्र ओहि प्रेमकेँ देखेबाक एकटा प्रयास..। ३ सावन मासमे बरखाक फूहीसँ भीजल माटिक सुगन्ध लैत झूला झुलैक आनन्दक कोनो सीमा नहि ..। ४ डोली कहार सासुर जाइत काल नव कनियाँक मोनक दुविधा- नैहरक छुटैक दुख आ नव जीवनक उत्साह। ई सभसँ अनजान कहार सभ उमंगपूर्वक कनियाँकेँ सासुर पहुँचाबैत... ५ करिया झुम्मरि मिथिलाक लड़की सभमे करिया-झुम्मरि खेलक खूब चलनि अछि। छोट आ पैघ सभ एहि खेलक आनन्द लैत छथि... ६ साधुबाबा साधुबाबाक चित्रण मिथिला चित्रकलामे आधुनिक रूपेँ करबाक प्रयास... ७ दुर्गापूजा ८ काली माँ ९ पनिभरनी १० ११ १२ चित्रक विषयमे: सूर्य आशाक आ संकल्पसिद्धिक प्रतीक अछि, अन्हारक बादक प्रकाशक प्रतीक अछि। ई पृथ्वीक जीवनक जड़ि अछि, दैवत्वक आशीर्वादक प्रतीक अछि। तेँ विश्वक सभ संस्कृतिमे ई पूजित अछि, खास कऽ मैथिल संस्कृतिमे (छठि आ मकर संक्रान्ति)। ई चित्र ऐ सभकेँ चित्रित करबाक प्रयास अछि। १३ चित्रक विषयमे: सूर्य आशाक आ संकल्पसिद्धिक प्रतीक अछि, अन्हारक बादक प्रकाशक प्रतीक अछि। ई पृथ्वीक जीवनक जड़ि अछि, दैवत्वक आशीर्वादक प्रतीक अछि। तेँ विश्वक सभ संस्कृतिमे ई पूजित अछि, खास कऽ मैथिल संस्कृतिमे (छठि आ मकर संक्रान्ति)। ई चित्र ऐ सभकेँ चित्रित करबाक प्रयास अछि। १४ १५ १६ १७ १८ १९ २० २१ (विदेह सदेह ३५) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ऐ अंकक अन्यान्य रचना ३.गद्य खण्ड ३.१.डॉ. उदयनाथ झा 'अशोक'-गामक नामकरण: एक परिशीलन ‍३.२.संतोष कुमार राय 'बटोही'-मंगरौना (एगारहम खेप) ३.३.संतोष कुमार राय 'बटोही'-समीक्षा- जिनगी भार बनि गेल ३.४.रबीन्द्र नारायण मिश्र- मातृभूमि (उपन्यास)- २५ म खेप ३.५.कुमार मनोज कश्यप-ओ दधीचि ३.६.निर्मला कर्ण- अग्नि शिखा (खेप-१७) ३.७.प्रणव झा- करमनेढ़ ३.८.आचार्य रामानन्द मण्डल-मिथिला के लाल: उपन्यास सम्राट फणीश्वरनाथ रेणु आ पारो ३.९.डाॅ. किशन कारीगर-लोंगी डैंस(हास्य कटाक्ष) ३.१०.लाल देव कामत-मिथिलामे मांगैन खवाश छइ! (आगाँ)/ वर्णित रस/ चाह पोखता'क अर्थ जानि गेलहुँ (लघुकथा)/ लघुकथा- परचाक निहितार्थ/ चलला मुरारी छकबय (लघु कथा)/ लघु कथा- हलहौर/ मैथिली बिहैन कथा- -सापरपिट्टा/ भाग जागल- विहैन कथा/ सुनैना बेटी - मैथिली सामाजिक उपन्यास/ लिख पटापैट मारय दयह (लघुकथा)/ लघुकथा- ई गुड़ खेनै कान छेदौने/ अम्बोहि पानि उठल-लघुकथा (मैथिली)/ रोज सेन्टेड लिची (लघुकथा)/ लघुकथा -रानी केँ नँय छै राजा ३.१.डॉ. उदयनाथ झा 'अशोक'-गामक नामकरण: एक परिशीलन डॉ. उदयनाथ झा 'अशोक' गामक नामकरण: एक परिशीलन ईसे हमरा लोकनि जनिते की, आईने अनेकानेक ग्राम देखा हो, मुदा पहिने गामक संख्या एक हिरक जे-जे पाळू जाएब, गाम काख्या वृद्धि लगाम वा नगर गेल । मुदा गामक नामकरण कोना भेलैक, तकर कि विचार एए हम कर चाह । प्राचीनकालमे जहिया राजा-महाराज लोकनिक युग की महाभारत काल क परवर्ती कालभरि हरेक राज्यमे अपन-अपन सैन्य व्यवस्था लेक इतिहासाशी अछि जे प्रत्येक ५०० हाथी ५०० रथ, १५०० घोड़ा आ २५० पदाति (पैर चलता अवश्य छोट सामन्त होइत छलाह तनिक लग कि--किछु सेना अवश्य रहेत छलनि। महाभारत कमानीतं पदाति सेनामे क्रमश: 'पति', 'गुल्म' आ 'गण' होइत छलैक। जत ५५ व्यक्ति 'पति' होत छल ओहि तीन पति मिलाकै एक 'गुल्म' बनेत छल तथा तीन गुल्म लए एक 'गण' होइत छल आन नियम एक्के रङ अलि, मुदा शुक्रनीति पति के लक्षण किन्तु भित्र भेटेछ । एकर अनुसार २५४०) पाँच-छ सैनिकक टुकड़ी 'पति' कहबैत अछि । आजुक भांति पहिनहुँ छावनी छलैक, किन्तु अलग-अलग, कहुँ पतितं कहुँ गुल्म आउ कतहुँ गण गण, जेना कहल अछि नव पतिक अर्थात् तीन गुल्मक होइत छल आ से गणक संख्या कम होइत रहैक । जाहि-जाहि स्थानमे पति वा गुल्म रहेत छल, तकरा बादमे ओही आधारपर नाम देल आइत छलैक। अर्थात् पतिक स्थानके पति वा पत्ती ओ गुल्मक स्थानकें गुल्म । पछाति इह पत्ती 'पट्टी मे परिवर्तित भए गेल अथवा एही शब्द व्यवहत होमय लागल । इएह सभ चिक आजुक शुगापट्टी, कलापट्टी, जयदेवपट्टी, लालापट्टी, किसनीपट्टी, अललपट्टी, बेनीपट्टी, लालमणिपट्टी, मनहरपट्टी, कामेपट्टी, सीतापट्टी आदि । पट्टीक संख्या बेशी रहने उदाहरणो बेशी भेटेछ । एहिना जतए-जताए 'गुल्म' छल, से आई गुल्मा, गुल्मरिया, गुलमन्ती, गुलमिया आदिक नामसँ जानल जाइत अछि । सुनल थिक जे एक गुल्मक प्रधान रहथि बल्लोझा किन्तु हुनक असावधानीवश अथवा आने कोनो कारण ओहि गुल्ममे चोरी भए गेल । संयोगसं चोर पकड़ायल आ ओकरा राजाक सम्मुख आनल गेल । राजा निर्णय देलनि जे' 'गुल्मा-चोर बल्लोझाक कपार' । अभिप्राय ई जे एकर निर्णय हम नहि बल्लोझा करताह । अस्तु । प्रत्येक राज्य ओ राजाक लेल सेनाक होएब नितान्त आवश्यक मानल गेल अछि, ई सभ जनिते छी, तें राजाकै 'चारचक्षुषाः' कहलो गेल अछि । 'चार' मात्र चाकरे नहि थिक, आजुक CID, CBI एवं सैन्यकेँ सेहो कहल जाइत छलैक, अस्तु । मुदा ई बड़ कम लोक जनैत होएताह जे पहिने सेना कतोक प्रकारक होइत छल । जेना आई सेनाक जल-थल नभ रूपमे पहिने तीन भेद देखल जाइत अछि तत: पर BSF, CISF. कमाण्डो आदि उपभेदें कतोक भेद देखबामे अबैछ । तहिना प्राचीन कालमे सेनाकै केयो चारि से केयो छः भेदक स्वीकार करैत छथि । महाभारतक अनुसार (महाभारत, शान्तिपर्व-५९/४१/४१) एकर आठ अंग कहल गेल अछि हस्ती, अशी, रथी, पदाति, विष्टि, नाव, चर एवं देशिक । आने देशक भाँति मिथिलहुँक राजाकै एहि सभ प्रकारक सैन्य छलनि, जकर रहबाक स्थानके सैन्य-भेदहिक नामपर नामकरण कएल गेल छल । यथा हथौड़ी, हतगढ़ा, असवैया, रथनाहा, रोधान, रथीटोल, रथवाड़ा (रतवाड़ा), दाति (दाती), बिष्टुपुर, बिष्टशैल, नवेल, नवस्थ, चरमा, चरमपट्टी (घरमापट्टी), दिशौल, दशका आदि । ई सभ आधुनिक ग्राम ओही प्राचीन इतिवृत्तकें देखा रहल अछि । स्मरणीय थिक जे जेना पहिने सेनामे पथप्रदर्शककै 'देशिक' कहल जाइत छलैक, तहिना विशेष आयुध-सञ्चालन- दक्षव्यक्तिकें 'विष्टि' कहल जाइत छलैक से इतिहाससिद्ध प्रसिद्ध कथा थिक । गामक नामकरण मात्र सैन्य छावनियैक नामपर नहि, अपितु आयुधहुँक नामपर अस्त्र-शस्त्रहुक नामपर राखल जाइत छल । नीतिप्रकाशिकामे बहुतो रास आयुधक वर्णन भेल अछि (अध्याय दूस पाँच धरि), जकरा चारि श्रेणी ओतए विभाजित कएल गेल छैक मुक्त, अमुक्त, मुक्तामुक्त आऽ मन्त्रमुक्त । एहि सभ आयुधक की परिचय वा लक्षण से फरिछाएब हमर प्रबन्धक उद्देश्य नहि थिक आड़ से जैं करय लागव तं प्रबन्ध विस्तारक भय, तें तकरा छाड़ि देल अछि । किन्तु ई कहब आवश्यक जे उपर्युक्त चारू कोटिक आयुध एक ठाम नहि रहैत छल । आयुधक सञ्चालको अपन अपन आयुध-क्षेत्रहिं रहैत छलाह । आवश्यकता पड़लापर ओ लोकनि अपन-अपन अस्त्र-शस्त्र हाथ लएनिर्धारित स्थानपर जाइत छलाह जे हो, मुदा स्मर्तव्य धिक मे, जे आयुध जतए रहैत छल, तकरा अर्थात् ओहि स्थानके, ओहे आयुधक आधारपर नामकरण होइत रहेक। जेना कि 'मुक्तायुधपुर' एहिमे 'युध पद आई लुप्तभए आकार मुक्तपदक संग मोलि (सन्धि संयोग) 'मुक्तापुर' भए गेल अछि हमरा जनैत 'मुक्ताम' (मोताम) वा "मुक्तामा" के सम्बन्ध सेहो रही मुक्तायुध रहल होएत । धर्मशास्त्र, अर्थशास्त्र ओ शिलालेख समे भाँति भौतिक 'कर' के उल्लेख भेटैत अछि। एहिने 'कर' लेनिहार, देनिहारक पृथक-पृथक स्थान छलैक। किछु गाम एहनो छल, जाहिपर राजाद्वारा विशेष कर लगाओल गेल रहैक । कि ग्राम करमुक्तो छ कोनो-ने-कोनो कारण ओहि गामक लोक राजा कर नहि लैत रहथि। एही प्रकारक गाममे अकरिया, अकौह, अकड़ी, अकरमपुर (मकरमपुर) आदि धिक। मुदा जाहि गामपर कर लागल जल अथवा जाहि गामक वासी कर दैत छलाह अथवा जाहि गाममे कर असूलनिहार राजाक प्रतिनिधि रहेत छलाह, ताहि गामक संख्या आपेक्षिक अधिक छ एहि कोटिक गाममे पुरानो गामसभ अबैत छल, जकर नामकरण 'कर'क आधारपर नहि भेल. रहेक। परन्तु नव नव गाम से बसल वा बसल छल, तकर नामकरण एही 'कर के आधारपर भेल। यथा-करडिया, करहरा, करिहर, करुभरि, करैया, केरमा आदि। राजाकै दातव्य 'कर मे एक प्रकारक कर छल 'बलि' । ऋग्वेदमे एही कारण साधारण व्यक्तिक लेल 'बलिहत' शब्दक प्रयोग भेल अछि./६/१०/१७३६) जकर अर्थ राजाक लेल बलि अननिहार। तैत्तिरीय ब्राह्मणहुँमे 'हरन्त्यस्मै विशो बलिम्' (-२/७/१८/३) र प्रयोग देखल जाइत अति । ऐतरेय ब्राह्मणक अनुसार (ऐ.बा.३/३) 'बलिकृत' वैश्यमात्रे होइत छलाह, जे बलि दैत छलाह । बलि, सामान्यतः व्यापार किंवा आयात-निर्यातहिपर लगैत छल । ब्राह्मण वा क्षत्रिय विशेष परिस्थितिकै छोड़ि कर मुक्त होइत रहत्थे । अतएव जाहि गामक वासी बलि दातव्य होइत छलनि, तकर नामकरण एही बलिक कारण भेल होएत। यथा बलिगाँव, बालो, बलाल, बलिया, बलियाही, बलिनगर, बल्लीपुर आदि किन्तु किछु एहनो लोक सभ रहथि जे राज- दरवारमे अथवा प्रतिनिधि लग जाए स्वयं बलि जमा नहि करैत रहथि । ई लोकनि 'हस्तबलि के माध्यमे अपन बलि (क) राजकोशमे जमा करैत छलाह। एहि हस्तबलिक नियुक्ति स्वयं राजा करैत छलाह । सम्भव धिक जे ई "हस्तबलि' जाहि गाममे रहैत छलाह, तकरा हुनके नाम वा पदनामपर जानल जाय लागल। जेना आजुक 'हतबलिया ओ 'हेठीबाली' ओकरे आभास दिया रहल अछि । नगर, पुर, पुरी, पत्तनक अर्थमे 'हट्ट' शब्दहुँक प्रयोग देखल जाइत अछि । राजनीतिप्रकाशमे देवीपुराणक वाक्य उधृत भेल अछि, जे एकर प्रमाण धिक । श्रीधरो अपन भागवत व्याख्यानमे कहैत छथि 'ग्रामा हट्टादिशून्याः, पुरो हट्टादिमत्यः, ता एव महत्य: पत्तनानि.... (भाग भाष्य- ४ / १८/३१) । कदाचित् एही हट्टक कारणें मिथिलहुँमे ग्रामक नामकरण कएल गेल हो । यथा हटनी, हटरिया, हाटी, सिरपुर हाटी, बगड़हट्टी आदि । ऋग्वेदमे 'ग्राम शब्दक प्रयोग बहुश: भेल अछि, यथा ग्रामजितो नरः' (ऋ. ५/५४/८), 'यथा शमसद् द्विपदे चतुष्पदे विश्वं पुष्टं ग्रामे अस्मिन्ननातुरम्' (क. १/१९४/१) आदि (ऋ. १०/६२/११. १०/१०९/५)। तैत्तिरीय संहितहुँमे "विद्वान् ब्राह्मणग्रामणी' (तै.सं.-२/५/४/४) आदि कहल गेल अछि। एतए स्मर्तव्य धिक जे 'ग्राम' शब्दक अर्थ गामे नहि छल, अपितु नगर सेहो होइत छल। ओना तँ नगर, पुर, पुरा, पत्तन, गाँव आदि शब्द कोनो गामक नाममे रहिते अछि, किन्तु एतए पर्यायवाची नहि बूझि नगरक अर्थ शहर वा छोट मोट शहर बुझबाक थिक ग्राम प्रमुखकै 'ग्रामणी' वा 'ग्रामिक' (७/११५-१६), ग्रामाधिपति (कौटिल्य ३/३०), ग्रामकूट (एपिण्डिका, जिल्द-७, ५.३९. १८३. १८८०. १९ पू.३०४. ३१०) आठ पट्टकिल (इमिड एण्टीक्वेरी, जिल्द-६, पृ. ५१, ५३: जिल्द - १८, पृ.३२२) कहल जाइत छलैक। इएह शब्द आई मुखिया आऽ मेयर दुह् कहबैछ । पट्टकिलक सन्तान जाहि-जाहि गाममे बसैत रहथि, ताहू गामक संग 'पट्टी' जुड़ैत छल । तें स्मरणीय चिक जे पट्टीयुक्त गामक नामकरण मात्र पत्ति, पत्तीक कारणहिं नहि, प्रत्युत पट्टकिलक हेतुजे सेहो भेल अछि । शुक्रनीतिक अनुसार एक 'ग्राम' विस्तारमे एक कोशक होइत छल (शु.नी. - १ / १२३) । गामक आधा भाग 'पल्ली' कहबैत छल, जकर उदाहरणमे 'सरिसब' गामक आर्द्धभाग 'पाही के लेल जा सकैछ, जे किछु गोटेक मतमे पल्लीक अपभ्रंशो थिक । परन्तु एक अन्य अवधारणा वा प्राकृत वैयाकरणक अनुसार गामक अर्द्धभाग 'पल्ली क उदाहरण जगदलपल्ली, मलकानपल्ली, रूपाली, पाली आदि तं भए सकैछ, परन्तु 'पाही' नहि । हेमाद्रि अपन दानखण्डमे मार्कण्डेयपुराणके उधृत करैत पुर, खेट, खवंट एवं ग्रामक परिभाषा प्रस्तुत करने थि । जखनि कि हिनकहुँस पूर्व महर्षि याज्ञवल्क्यक अनुसार चारागाहक विस्तारकै ध्यानमे राखि ग्राम, खर्वट, नगर सभ एक्के अर्थ द्योतित करैत अछि, मात्र एकर क्षेत्रफल ओ नागरिकक स्तरमे भेद पाओल जाइत अछि। एहीसभक कारणें प्रायः संस्कृतक अलङ्कारशास्त्री लोकनि 'पाम्य दोष देखओने होएताह हमरा जनैत एही सभमे कोनो 'खर्वट' पछाति 'खरंख' (खड़रख) भए गेल होएत। हमर एक मित्र एक समय कहने र जे पहिने एतय खड़क बोन छल अकरा काटि लोक बसल ते 'खरख' आठ कालान्तरमे 'खर' भए गेल जेना सर्वप सरिसबक कल्पना तहिना खदखदरक, जे हो हमरा एहिमे कि हास्य उपहास्यक पुट बुझना जाइल जे गाम वा भूमि खड़कें रखलक से भेल खरख आबादमे खहरख । एहिना चोर-चपाटीर्स रक्षा करब, चोर-डाकू समा दिएव 'चौरोद्धरणिक' वा 'कोपाल (काल) कार्य होइत ११३५.१ ३.४) जखनि कि कौटिल्य मते कार्य 'धीररज्जुक' करैत छलाह (३)। अधिकारी बोरीक क्षतिपूर्तियो करबैत रहथि। सम्भव क्षेत्र विशेषक 'चौररज्जुक' तयरत लाह से कालान्तरमे रजीह, रज्जुका (रजुका), रजुआही, बोड़जबा आदि भए गेल हो । किन्तु गाम जातिक नामपर सेहो बसल वा बसाओल गेल, जाहिमे बनियाम, सिंहवार, तेलियाना, तेलिया तेलगामा, भीर, नौआ-वाखरि, कैथवार, कैचिनियाँ, एकम्मा, बरही, राजपाम, उगमारा, कर्णपुर, सिसवारि आदिकें लेल जा सकैछ 'घर' जातिक क्षत्रियबहुल गाम 'भोर' छल, जे बादमे खण्डवला कुलक राजा लोकनिक गाम भेने 'राजपाम' सेहो कहओलक सिसवा क्षत्रिय, जकर शाखा सिसोदिया धिक, तकरा भगाए, जतय गाम वा वस्ती बसल, सैह भेल सिसवारि (सिसवा अरि) । एही तरहैं व्यक्तिक नामपर सेहो कतोक गामक नामकरण भेल अछि, जेना सीताजीक नामपर सीतामढ़ी, सीतापट्टी: गौरीक नामपर गौरिया: उमाक नामपर उमगाँव, मधुसिंहक नामपर मधुबनी धर्मनाथ ठाकुरक नामपर धर्मपुर: कल्याण झाक नामपर कल्याणपुर: माखनसिंहक नामपर माखनपुरा, राजा कसनारायणक नामपर कंसी (सिमरी); एक अज्ञात शुक्लाक नामपर शुक्लाराही आदि । एतय इहो स्मर्तव्य थिक जे' एक्के नामक अनेको गाम अनेको ठाम छैक, ताहि सभक नामकरणक पाछू कोनो एक कारण वा इतिहास नहि रहलैक अछि जेना लोहनारोडक सनिकट धर्मपुर मात्र धर्मनाथ ठाकुर बसओलन्हि, जखनि कि आनो ठाम धर्मपुर पाओल जाइत अछि एहिना सरिसब-पाहीक निकटक 'कल्याणपुर' मात्र कल्याण झाक द्वारा बसाओल गाम अछि, आन नहि बक्सर जिलामे स्थित 'अहरौली' के अहल्याक नामपर स्थापित कहल जाइत अछि, जखनि कि इएह कारण 'अहियारी 'क संग सेहो देल जाइत रहल अछि । मिथिलाक किछु एहनो गाम अछि, जकर नामकरणक पाछू एक इतिहास रहलैक अछि, भारतीय राजनीतिक वा सांस्कृतिक इतिहास । जेना विराटपुर, विराटनगर, बनाटपुर, वैराटीक नामकरणक पाछाँ मिथिलहिक एक भागक अर्थात् मत्सदेशक राजा विराटक सम्बन्ध जुड़ल छनि, जनिक दरवारमे पाण्डव लोकनि अपन अज्ञातवासक अवधि बितओने रहथि । मिथिलाक तत्कालीन जनपद सभमे विदेह, वैशाली, मत्स्य आदि देश प्रमुख छल । जखनि कि पाण्डवहिक बसाओल वर्तमान 'पण्डौल' अछि, जे पाण्डवालयक अपभ्रंश थिक । परम्परया ई श्रुत थिक जे अज्ञात वास हेतु जएबाकाल पाण्डव लोकनि एतहुँ रात्रि विश्राम कएने रहथि बेनीपट्टी थानामध्य जे वनाटपुर गाम अछि, तकर सुनैत छी प्राचीन नाम विराटपुरे रहैक । एकर निकटहि अछि 'उत्तरा' नामक गाम, जे विराटराजक पुत्री ओ अभिमन्युक पत्नीक नामपर बसल अछि । उत्तरासँ किछु हटि 'कीचकवाहा' नामक स्थान अछि, जतए विराटक सार कीचककें घिसिया-घिसिया मारल गेल छल । ओना ओकर वासस्थान छलैक किछु हटिकें, जे आई 'कछरा' कहवैत अछि । कीचकसँ किचरा, पुनः कचरा आऽ अन्तमे कछरा भेल होएत, जे सभ मत्सदेशमे अबैत छल। एकरे लगपासमे अछि विष्णुपुर आ मधवापुर, जतए माधव (श्रीकृष्ण) अपन विष्णुरूप देखओने रहथि । स्मरणीय अछि जे ई सभ गाम 'भाला' प्रगन्नामे पड़ैत अछि। एही विष्णुपुर लग अर्जुन अपन अज्ञातवासक समय गाण्डीव आऽ बाण नुकओने रहथि जाहि स्थानपर आई 'गाण्डीवेश्वर महादेव' एवं 'बाणेश्वर महादेव' क मन्दिर अवस्थित अछि । एहिना नेपालक मोरंग जिलामे वर्त्तमान विराटनगर ओ चम्पारणक वैराटी गामक सम्बन्ध सेहो विराटराजहिसँ जुड़ल अछि, जे ऊपर कहि आएल छी । राजा सीरध्वज जनकक पुष्पोद्याने आजुक फुलहर गाम थिक, जतए गिरिजामन्दिर 'गिरिजास्थान'सँ प्रसिद्ध अछि आओर एतहि जगज्जननी सीताक भेंट श्रीरामसँ भेल रहन्हि। एही ठाम हरलाखी थानामे विश्वामित्रक शिविर छल, जे आई 'विशौल' कहबैत अछि । सौराठ ओ रहिकाक सन्निकटे विद्यमान 'कपिलेश्वरस्थान' भगवान् कपिलक आश्रम स्मरण करा रहल अछि, संगहि इहो परम्परया श्रुत अछि जे एहि शिवक स्थापना स्वयं कपिले मुनि कएने रहथि । गौतमऋषिक जतए आश्रम छल, से ब्रह्मपुर आई विकृत भएकै 'बदमपुर' भए गेल अछि, जखनि कि कमतौलक एही परिसरमे अहल्यापुरीस प्रसिद्ध प्राचीन नगरीक नाम अपभ्रंश भए 'अहियारी' भए गेल अछि । सीतामढ़ी जनपद सीताजीक उद्भवस्थान लक्ष्मणानदीक तटपर अवस्थित तत्कालीन 'पुण्य ऊर्वी' आई विकृतभए 'पुनौरा' नामे प्रसिद्ध अछि। एही ठाम पुण्डरीक ऋषिक आश्रम सेहो छल, जनिका नामपर पुनरी-सरोवर (पुण्डरीक सरोवर) प्रख्यात अछि । एकरे बगलमे स्थित गिरभिशानी नामक गाममे खथि पुराण प्रसिद्ध 'हलेश्वरनाथ महादेव', जनिक अनतिदूरेमे प्राचीन कालक 'उर्विजा वारिजा', उरिया बेरिया नामे प्रसिद्ध अछि। सुरसण्ड ओ जनकपुर रोडपर आई जे 'पन्ध-पाकड़ि' पाओल जाइल, सुनैत छी वह स्थान धिक, जतए पाकड़िक गाछतर सीताजीके अयोध्या लए जयबाक क्रममे कहार सभ सुस्तेबाक हेतु रखने रहनि । नेपालक महोत्तरी जिलामे जलेश्वर महादेवस्थानक बगलहिमे एकटा गाम अछि सुग्गा । एतहि राजर्षि जनकक द्वारा व्यासपुत्र शुकदेवजीक आवास व्यवस्था कराओल गेल छल । बादमे इएह शुकाश्रम शुकासँ 'शुक्का' होत 'सुम्मा' भए गेल अछि । शुकदेवजी मिथिला अएवाकाल रास्तामे चम्पारणक बेतिया लग सेहो स्कूल रहथि जे स्थान आई 'सुगाओ" से जानल जाइत अछि । जनकपुरसं दश मील दूर हटि 'धनुषा' नामक स्थान जतए रामचन्द्रजीक द्वारा कएल गेल धनुषभंगक कथा स्मरण दियचैत अछि, ओतहिं मुजफ्फरपुरक 'रोगा' ओ रेवारी (ऋग्वारि), सीतामढीक 'अथरी", "यजुआर आर मधुवनीक समौल क्रमशः ऋग्वेद, अथर्वेद, यजुर्वेद ओ सामवेदक तत्कालीन अध्ययन- अध्यापनक स्थानकै स्मृति पटलपर अनैत अछि । धनुषा जिलामे अवस्थित 'कुसुमा' ग्राम यद्यपि किछु गोटे याज्ञवल्क्य ऋषिक आश्रमस्थल मानैत छथि, मुदा ओहि गाममे वाजश्रवा ऋषिक आश्रम छलनि से बहुतो प्रमाणसं प्रमाणित अछि, हिनके पुत्र रहथिन नचिकेता । याज्ञवल्क्यक आश्रम तं योगिवनमे छल, जे आई हीरापट्टी- जगवन कहबैत अछि । ई गाम अछि मधुबनी जिलाक बेनीपट्टी थानामे । मधेपुरा जिलाक सिंहेश्वरस्थानक सम्बन्ध रामायणकालीन ऋषि शृंगीसँ रहल अछि, जनिक आश्रम एतए छलन्हि आ जनिका द्वारा स्थापित 'शृंगीश्वरनाथ महादेव' आई सिंहेश्वरसँ प्रसिद्ध छथि । भागलपुरक कहलगाँवमे एकटा पहाड़पर दुर्वासाऋषिक आश्रम छल आओर सुलतानगञ्जमे गङ्गानदीक पार्श्वमे एकगोट पहाड़पर जह्रुरुषिक आश्रम रहन्हि, जे आई जह्नुगिरिक अपभ्रंश भए 'जहाँगिरा' कहबैत अछि । विद्वान् अन्वेषकक ई धारणा रहलन्हि अछि जे पालवंशीय सुप्रसिद्ध विक्रमशिला विश्वविद्यालय, एही जह्न-आश्रमक निकटमे छलैक । दरभंगाक नाम कोना पड़ल से विवाद एखनो हल नहि भए पाओल अछि, कारण 'मुण्डे मुण्डे मतिभिंत्रा' । तथापि अनेक किंवदन्तीमेस किछुके एतए उधृत करैत छी । जेना किछु गोटे द्वारबंग (बंगालक द्वार) सँ दरभंगाक कल्पना करैत छधि त केयो दरभंगीखाँ नामक कोनो पैघ व्यक्तिकें आनि बैसाओल आठ कहल जे इएह दरभंगाक निर्माण कएलन्हि । जँ १८म शतकक सुबेदार दरभंगीखाँक नामपर दरभंगाक स्थापना मानि ली तँ एहिसँ पूर्व 'दरभंगा क चर्चा कोना भेटैत अछि ? तहिना यदि बंगालक द्वारसँ 'द्वारबंग 'क कल्पना करी तँ 'बंगद्वार' होएबाक चाही, न कि द्वारबंग, संगहि दरभंगाक कोन स्थानसँ बंगालमे प्रवेश कएल जा सकैछ, सेहो एक प्रश्न अछि । किनको- किनको अनुसार इहो श्रुत अछि जे राजा शिवसिंहक दल (सेना) के मुश्लिम आक्रान्ता जखनि भंग (नाश) कएलक, तकर बादे एकर नाम 'दलभंगा' भेल आ संस्कृतक 'रलयोरभेद के मानि ई दरभंगा कहओलक अथवा उच्चारण- सौविध्यक कारणें दरभंगा भेल । शिवसिंहक एतूका तत्कालीन पड़ाव स्थलकें आइयो लोकसब 'शिवधारा'सँ जनैत अछि । परन्तु एहि शहरक नामकरणमे उपर्युक्त कोनोटा कारण समुपयुक्त प्रतीत नहि होइछ । हमरा जनैत आठम-नम शदीमे जे चौरासी गोट सिद्धलोकनि भेलाह, ताहिमध्य मिथिलहुँक कतोक सिद्ध प्रसिद्ध रहथि। हुनके सभक नामपर हुनक स्थान- विशेषर्के परवर्ती कालमे नामकरण कएल गेल होएत, जेना दरिःपाद' (दरिपा) सँ दरिभंगा ओ 'हरि पाद' सँ हरिभंगा, 'भर: पाद' सँ भरभंगा (आजुक नाम भरंगा), 'शंकरपाद' सँ शकरी वा सकरी, एहिना शबरपा से सबौर आदि। विभाण्डकमुनिक आश्रम रहनि कालीवनमे, जे पछाति करियन कहओलक आ आई ई समस्तीपुर जिलामे 'करियन- बलहा 'सं प्रसिद्ध अछि। स्मरणीय थिक जे' एही गाममे परवर्ती कालमे उदयनाचार्य, गोवर्धनाचार्य आदि मिथिला-विभूति भेल रहथि। एही कालखण्डमे, मुदा किछु पूर्व भेल छथि 'रत्नकीर्ति' नामक प्रसिद्ध आऽ निविष्ट बौद्धविद्वान्, जे धर्मपालक शिष्य ओ विक्रमशिला विश्वविद्यालयक आचार्यो रहथि । हिनक परोक्ष भेलापर हिनकास प्रभावित समाज हिनक गामक नाम राखि देलक 'रत्नपुर', जे आई बिगरिकें 'रतनपुर' भए गेल अछि । एकरे अनति दूरपर स्थित अछि 'किरतिनिया', जे हिनकहिं नामार्धक लए बसाओल गेल प्रतीत होइछ आऽ 'रतनपुर-किरतिनियाँ' कहबैत अछि । मिथिलाञ्चलक किछु गामक नामकरण ओतूका राजा वा जमीनदारक कारणें सेहो भेल अछि, एहने गाम वा स्थानसभमे सुप्रसिद्ध अनि राजर्षि जनकक 'जनकपुर', राजा बलिक राजधानी- स्वरूप 'बलिराजपुर (बाबूबरही लग), अलर्कक सम्पत्ति राजा बननिहार कर्णाटवंशीय राजा नान्यपदेवक नामपर सीतामढ़ीक 'नानपुर' राजा कंशनारायणक नामपर 'कसी' (कसी-सिमरो) आदि । तहिना ओइनिवार मूलक राजा कामेश्वर ठाकुरक पूर्वज ओएनठाकुरक स्थापित 'ओइनी' (ओएनी) गाम आई-काल्हि समस्तीपुरक ताजपुर थानामे पुसारोड स्टेशनलग ओइनी-बैनीस प्रसिद्ध अछि। एही वंशक राजा शिवसिंहक पिता देवसिंह अपन नामपर 'देवकुली' गाम स्थापित कएल, जे आई लहेरियासराय लग 'देकुली से जानल जाइत अछि । शिवसिंह, पचसिंह सभक बाद भेल राजा धीरनारायणक भाई कुमार लक्ष्मीनारायण सेहो अपन नामपर एक ग्राम बसाओल, जे' देकुलिये लग 'लक्ष्मीनारायणपुर' से प्रसिद्ध अछि । धीरनारायणक पात् राजा भेनिहार रामभद्रनारायण ओ कसनारायण दुनू गोटे अपन-अपन नामपर गाम वा राजधानी बनाओल वै चिक 'रामभद्रपुर' आ 'कंसनरैनी' किंवा 'कंसी-सिमरी', जकर चर्च पहिने कए चुकल छी । तहिना 'महेशपट्टी', 'शुभंकरपुर' ओ 'सुन्दरपुर के सम्बन्ध क्रमशः महेशठाकुर, शुभङ्करठाकुर ओ सुन्दरठाकुरक संग रहल अछि । बेगूसराय जिलामे राजा जयसिंह अपन ओ पत्नी मङ्गलादेवीक नामपर जतय 'जय मङ्गलागढ़ के स्थापना कएल, ओतहि नौलागढ़ (बेगूसराय), अलौलीगढ़ (खगड़िया), कटरागढ़ (मुजफ्फरपुर) आदिक सम्बन्ध सेहो ओतूका राजा लोकनिक संग रहल अछि बिहारक मिथिलाक्षेत्र, मगध ओ भोजपुरक्षेत्र अथवा बिहारक बाहर राजस्थान प्रभृतिमे स्थित 'पाली', 'पाल' वा 'पाल' शब्दयुक्त गामसभक सम्बन्ध कदाचित् प्राचीनकालक पालवंशीय राजासभक संग रहल होइन्हि, ताहू सम्भावनाकै नकारल नहि जा सकैछ एहीमे अछि मिथिलाक 'पाली', 'जगदलपाली', 'घनश्यामपुर पाली', 'रानीपाल' आदि गाम । 'सुगौना' पहिने सुगौनमूलक ब्राह्मण जमीनदार लोकनिक गाम छल, जतय बादमे ओइनिबारमूलक एक ब्राह्मण शाखा सेो आदि बसल । ई ग्राम मधुबनी जिलामे कपिलेश्वरस्थान लग अवस्थित अछि । एकर पूबमे भामतीकार बृद्धवाचस्पति मिश्रक आश्रयदाता नवम शताब्दीक राजानृगक राजधानी 'नगवार से प्रसिद्ध अछि, जे' ओहि समय नृगपट्टी आदि नामक रहल होएत। एही कोटिक गामसभमे अबैत अछि जगतसिंह, शक्तिसिंह, लखिमारानी, गंगदेव, राघवसिंह, माधवसिंह, दुलारसिंह, महिनाथ ठाकुर आदिद्वारा संस्थापित जगतपुर, शक्तिपुर (शकतपुर), रानीपुर, गंगद्वार (गंगदुआरि), गंगोली (गनोली-पहटन), राघवपुर (राघोपुर), माधवपुर (माधोपुर), दुलारपुर, महिनाथपुर आदि मिथिला ओ मिथिलाक बाहरक किछु गाम वा स्थान एहनो अछि, जकर नामकरण सनातनधर्मक साम्प्रदायपर राखल गेल अछि । यथा-विष्णुपुर, हरिपुर, हरिनगर, हरिदासपुर, हरियाहरि, नारायणपुर, गोविन्दपुर, मोहनपुर, चक्रधरपुर, माधवपुर मधवापुर, श्यामपुर (मोजा), दामोदरपुर, रामपुर, रामभद्रपुर, रामनगर, रामचन्द्रपुर, रामदयालपुर, रामदयाल, राघवपुर, जयदेवपट्टी, बेलमोहन, घनश्यामपुर, चकरिया (भगवान्क चक्रपर राखल गेल नाम), लक्ष्मणपुर, भरतपुर आदि जतय वैष्णवनाम थिक, ओतहिं शैवनाममे प्रमुख अछि शिवपुर, शिवनगर, शङ्करपुर, शङ्करसराय, शम्भुआर, महादेवनगर, महादेवपुर, महदेवा, रुद्रपुर, ईशानचक, ईशपुर आदि एही तरहें शिवपञ्चायतन नामपर राखल गेल नाम धिक कुमारपुरा (कार्तिकेयक नामपर ), गनपतिया (गणेशक नामपर ), बरदहट्टा (बसहा बरद वा नन्दीक नामपर ), गंगजला (गंगाजल पर) आदि । तहिना शाक्त-साम्प्रदायिक गाममे परिगणनीय धिक भवानीपुर, भगवतीपुर, लक्ष्मीपुर, शारदापुर, शक्तिपुर, दुर्गापुर, दुर्गागञ्ज, गंगापुर, कमलापुर (कमलपुर-बिठुआर भिन्न अछि), उमगाँव (उमागाँव), अपर्णा (अपरना), पारोगाँव (ई पार्वतीगाँवक अपभ्रंश बुझाइत अछि), कालीपुर, कालिकापुर, सीतापट्टी, शेरपुर आदि सौरग्राममे सूरजगढ़ा, भानुपुरा, सूरजनगर, रवियाही आदि जतय उल्लेखनीय अछि ओतहि 'बहिनपुरा' नामक गामकै 'वह्निपुर'क अपभ्रंश मानि सकैत छी । जखनि कि हनुमाननगर, मदना, मदनपुरा, ब्रह्मपुर, ब्रह्मपुरा, ब्रह्मोत्तरा, चानपुर, चानपुरा, चनौर आदि सेहो जतय हनुमानजी, कामदेव, ब्रह्मा ओ चन्द्रमाक नामपर बसल ग्राम प्रतीत होइछ, ओतहि देवहार, भगवानपुर आदि सामान्य देवतापर आधारित गाम कहल जा सकैछ । किछु गामक नाम तँ अस्त्र-शस्त्र अथवा धातुपर आधारित कोनो विशेष कारणें राखल गेल होएत, जेना कि भालपट्टी (भाला), करौच (किरीच), तलवारि (तरुआरि), कुरहरिया (कुरहरि), लोहा (सौराठ), लोहार (भवानीपुर), सोनाली (सोना), रुपौली (रूपा), रजतपुर (चान्दी), रजतपुरा (चान्दी), सोनपुर (स्वर्ण) आदि । -डॉ. उदयनाथ झा 'अशोक'- वरीय आचार्य, केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, श्रीसदाशिव परिसर  पुरी (ओडीशा) ७५२००१ (मो.- ८८९५१२२३१२) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ‍३.२.संतोष कुमार राय 'बटोही'-मंगरौना (एगारहम खेप) संतोष कुमार राय 'बटोही' मंगरौना (एगारहम खेप)

भुकभुकिया लाईट जैर रहल छै मंदिर पर। रस्ता मे बाँस पर मरकरी लागल छै। मंदिर पर लाइटिंग ततेक नीक लागि रहल छै तकर ठिकान नहि। मोन हरखित भs गेल देखि कs । माँ दुर्गा मंदिर मे आयल छथि। मंदिर केर भव्यता बेजोर छै। अइ बेर मेला जमतै। सरिपहुँ माँ आयल छथि।

अइ बेर माँ केँ माटि-मंगल मे देर भs गेलन्हि। राम हृदय बाबा केँ मुइला सँ माटि-मंगल केँ तिथि मे हेरफेर करs पड़लै। कलश स्थापन सँ किछु दिन पहिने माटि-मंगल केर काज केल गेल । मंदिर तँ बनि गेल छैन्ह माय केँ , परञ्च पलस्तर बाकी छन्हि। टाकाक कमी केर कारण मंदिर में पलस्तर नहु-नहु गति सँ भs रहल छै। माँ शेरावाली अपन काज करबा केँ छोड़तिन्ह। देर हेतै , परञ्च पलस्तर पूरा भs के रहतै।

मेला लेल जगह केँ कमी भs रहल छै। मंदिर केँ समीप वाला खेत मे खेत वाला सभ प्याज, गेहूं, खेरही बाग कs दैत छथिन्ह। जनसंख्या बढ़ला सँ खेतक कमी भs रहल छै। तँ जिनकर खेत छियैन्ह ओ अपन खेत मे फसल बौ करबे करतिन्ह चाहे दुर्गा पूजा समिति केँ नीक लगैन्ह वा नहि।

अखनो धरि केस खत्म नहि भेलै। सताइस लोकनि केँ केस मे नाम छन्हि। आइ नहि काल्हि जहल जाय पड़तन्हि। नवदुर्गा पूजा समिति केँ पक्ष कमजोर भs रहल छन्हि। दोसर पक्ष खेला कs रहल छथि। जे कियो हिनका दिस सँ छिटकि गेल छलाह, हुनका कम्बल दsके मनौल जा रहल छन्हि। इ नीक गप छियैय जे किछु लोकनि कंबल पाबि कs फेर मालिक-मालिक कहअ लगताह।

इ छथि जिला पार्षद 'रामानंद राय' । इ कयम साल सँ कहैत छथिन्ह मेला नहि लगौ, परञ्च हिनकर गपक कोनहु भेलुएशन नहि छन्हि। आन गाम मे जिला पार्षद केर आगा-पाँछा दस लोकनि रहैत छन्हि , परञ्च हिनका आगा-पाँछा शून्यता छन्हि। राजनीति केकरा कहैत छै से सभ कियो अखनो धरि भ्रम मे छथि। चुनावक बाद जनता केँ काज केनिहार जीत जेताह से संभव नहि रहि गेल छै ।

अइ बेर संतोष पचपन हजार टाका मूरति खरच लेल देलथिन्ह। सभ किछु लेल लोक अलग-अलग चंदा दैत छै। माटि-मंगल लेल अलग , कलश यात्रा पूरा भेला पर कलश भरनिहारीन सभ के शरबत पीअबै लेल अलग । हर दिन आचार्यजी, दुर्गासप्तशती पाठ केनिहार पठैत, पुजेगरी, वगैरह लेल फलाहारक खरच लेल अलगे चंदा लोक देत छै। सभ किछु लेल चंदा देनिहार लोक अपन-अपन बरख बुक कऽ लेने छथि आओर बुक कऽ रहल छथि। माँ दुर्गा किनको निराश नहि करैत छथिन्ह। माँ केर शक्ति अपरमपार छन्हि।

''श्रद्धालुगण , धेयान देबै ! मनिहारा मे पुरुष केँ परवेश वर्जित छै। नवदुर्गा पूजा समिति केँ जतेक कारकरता छी, सभ कियो अपन-अपन ड्यूटी मे लागि जाऊ । मेला मे भीड़ बढ़ि रहल छै। इ दाता छथि - सुरेश राम पिता कालीदास घोंघड़रिया निवासी, माँ शेरावाली केँ चरण मे एक सैअ टाका अर्पित केलखिनऐँ ,माँ दुर्गा हुनका सभ परिवार केँ खुश करतिहिन दुर्गा पूजा समिति मंगरौना इएह कामना करैत अछि।'' एके साँस मे किशनदेव जी बजलाह।

मंगरौना गामक मेला नामी छै । मेला मे मैर हेबेटा करत। किछु लफुआ छौड़ा लड़की सभ केँ छेड़ दैत छै। अइ लेल ओकरा भरपेटा मैर लगैत छै। पोर-पोर केँ तोड़ल जाएत छै। मेला मे तोड़ण द्वार बनौल जाएत छै। अइ बेर तोड़ण द्वार मे पोस्टर लागल छेलै जाहिर मे नवदुर्गा पूजा समिति लिखल छेलै। इ 'नवदुर्गा' शब्दकोश पीछा किछु राज छुपल छै , नहि तँ पहिने सँ इ शब्द रहितैक । अइ पोस्टर मे तीन गोटेक फोटो छै - दुर्गापूजा समिति केँ अध्यक्ष साहेब केँ , सचिव साहेब केँ आओर कोषाध्यक्ष साहेब केँ। आब दुर्गा पूजा मे 'आईडेंटिटी' केर लड़ाई भऽ रहल छै। 'मुँहपुरखी' केर लेल गाम मे शीतयुद्ध छिड़ल छै।

शान्ति कलश केँ जल लेल मैर भऽ सकइए । श्रद्धा-भक्ति सभहक ततेक ने जोर मारऽ लगलैए से 'अहिंसा परमो धर्म:' सभ कियो भुलि गेल छथिन्ह। मारधाड़ मे लोक केँ विश्वास बढ़ि रहल छै।

-संतोष कुमार राय 'बटोही', ग्राम - मंगरौना अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.३.संतोष कुमार राय 'बटोही'-समीक्षा- जिनगी भार बनि गेल संतोष कुमार राय 'बटोही' समीक्षा- जिनगी भार बनि गेल कथा :- जिनगी भार बनि गेल-कथाकार :- जगदीश प्रसाद मंडल समीक्षक :- संतोष कुमार राय 'बटोही'

जगदीश प्रसाद मंडल जीक कथा 'जिनगी भार बनि गेल' एकटा मार्मिक कथा अछि। सेवा-निवृत्तिक बाद हेमंत कुमार आओर हुनकर पत्नीक चिंता कि बुढ़ाड़ी मे कतs जाय, ई सही छन्हि। भूमंडलीकरण के अई दौर मे टाका सभ किछु भs गेल छै। लोक टाका केँ चिन्हैत छथिन्ह। मनुक्खक वेवहार बदलि रहल छै। वृद्ध भेलाक बाद किनको कियो देखिनिहार नहि रहि जायत छै। ई पैघ सामाजिक समस्या बनि गेल अछि।ई चिंता हिनकर जायज छन्हि। एकटा माय-बाप केँ देखिनिहार कियो नहि आओर एकटा माय-बाप अपन सभ संतान केर हगनी-मूतनी सँ लsकs सभ किछु करैत छथि। 'जिबैत जी गुँहा-भत्ता आओर मुइला पर दुधा भत्ता' कहवी सरिपहुँ सच भs रहल अछि।

हेमंत कुमार आओर रश्मि बाँझ नहि छथि। हिनका दूटा बेटी छन्हि जिनकर ब्याह भs गेल छन्हि। परञ्च ओ दुनू परानी चिंतित छथि जे बुढ़ाड़ी मे हम कतs जाऊ। आन देसक नहि बुझल , लेकिन मिथिला मे आओर भारत मे ई बड़ पैघ समस्या बनि गेल अछि जे माय-बाप संतान लेल बोझ बनि रहल अछि। अबै वाला समय मे ई समस्या आओर विकराल रूप धारण करत। ई समस्या सभ वर्ण, जाति आओर क्षेत्र मे नहु-नहु गति सँ फैल रहल अछि।

टाकाक कमै केर आपाधापी मे माय-बाप के भुलि जेनाय कतौ उचित नहि कहल जा सकए। मनुक्खक मूल्य बदलि रहल अछि। टाकाक आगा मे लोक परिवार आओर समाज केँ भुलि रहल छै। समाज मे अतेक विख घुलल छै जे कियो किनको गलती पर किछु कहनिहार नहि। मगनी केर झगड़ा केँ मोल लेत। बेटा माय-बाप के मारि रहल छै आओर समाज ओकर विडिओ बना रहल अछि।

अगर संपत्ति मे संतानक अधिकार होएत छै , तँ बुढ़ाड़ी मे माय-बापक सेवा-टहल करनै, अंतिम साँस धरि देखभाल करनै संतान केर कर्तव्ये टा नहि छन्हि, बल्कि ई कानूनन होमक चाही जे माय-बापक सेवा करनै अनिवार्य हुएह। संविधान मे नैतिक कर्तव्य केर रूप मे ई जोड़ल जेबाक चाही आओर माय-बापक सेवा नहि केनिहार केँ लिखित वा मौखिक शिकायत पर कम-स-कम दु-चारि सालक सजा हेबाक चाही।

-संतोष कुमार राय 'बटोही', ग्राम - मंगरौना अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.४.रबीन्द्र नारायण मिश्र- मातृभूमि (उपन्यास)- २५ म खेप रबीन्द्र नारायण मिश्र मातृभूमि (उपन्यास)- धारावाहिक २५ जानकीधाम पहुँचलाक बाद जयन्त नागबाबाक संगे रहए लगलाह । शारदाकुंजमे आचार्यजीकेँ ई बात पता लगलनि । ओ प्रतीक्षामे रहथि जे जयन्त अपने अएताह । मुदा कैक दिन बीति गेलाक बादो जखन आचार्यजीसँ भेंट करए नहि गेलाह तँ हुनका रहल नहि गेलनि । ओ स्वयं शिष्यसभक संगे जयन्तसँ भेंट करबाक हेतु नागबाबाक स्थानपर पहुँचलाह । नागबाबा ओहि समय ओतहि रहथि । जयन्त अपन शोधग्रंथकेँ विमोचन हेतु प्रस्तुत करबामे व्यस्त छलाह । आचार्यजीकेँ सामनेसँ अबैत देखि हुनकर हर्षक सीमा नहि छल । ओ तुरंत उठि हुनका दण्डवत भए प्रणाम केलनि । " क्षमा करब आचार्यवर! हम अपनेसँ अखन धरि भेंट नहि कए सकलहुँ । सोचैत रही जे पुस्तकक विमोचन करबाक अवसरेपर अपनेसँ भेंट होएत ।" "कहिआ छैक विमोचन?" "अपनेक सुविधानुसारे तिथि तय कएल जाएत ।" "बढ़िआँ होएत जे कालीकान्तोसँ पुछि लेल जाए । अहाँक गेलाक बाद ओ कए बेर पुछारी करैत छलाह।" " आचार्यवर! सत्य पुछल जाय तँ हम संकोचवश ने अपनेसँ भेंट कए सकलहुँ ने कालीकान्तक सामने जएबाक साहस भेल?" "से की?" "हम तँ जानकीधाम छोड़ि कए गाम चलि गेल रही । मुदा परिस्थिति एहन भेल जे हमरा नागबाबाक बात मानि एतए आबए पड़ल ।" "जे भेलैक, से भेलैक । जानकीधाम अएबाक हेतु ककरोसँ पुछबाक काज नहि होइत छैक । ई तँ सभहक स्थान अछि।" "आचार्यवर पुस्तकक विमोचनक सभ भार अपनेपर अछि। अपने जखन उपयुक्त बूझी तखने एहि कार्यकेँ संपन्न कएल जाएत ।" " एहि शुभकाज केँ जतेक जल्दी कएल जाए ततेक नीक।" "फेर अपने कालीकान्तसँ विमर्श कए आगूक कार्यक्रमक आदेश देल जाए ।" "ठीक छैक । हम आइए भेंट करबनि । " तकरबाद आचार्यजी कालीकान्तसँ भेंट कए सभबात कहलखिन । कालीकान्त एहि बातसँ बहुत प्रसन्न रहथि जे जयन्त जानकीधाम लौटि गेलाह । "मुदा जयन्त अपने किएक नहि अएलाह? " "ओ अपनो आबए चाहैत रहथि । मुदा..." "मुदा की? एहिठाम अएबामे हुनका कोन अवरोध?" "से सभ की रहतनि । ओ पुस्तकक विमोचनमे व्यस्त रहि गेलाह । हमरोसँ भेंट नहि कए सकल रहथि।" “ओ! आब बुझलिऐक ने असली बात । चलू हम अखने अहीं संगे चलैत छी ।" कालीकान्त चंद्रिकाकेँ बजओलनि आ तीनूगोटे जयन्तसँ भेंट करबाक हेतु नागबाबाक स्थान पर पहुँचि गेलाह । संयोगसँ नागबाबा कतहु गेल रहथि । कालीकान्त संगे चंद्रिकाकेँ देखि जयन्तकेँ तँ जेना करेंट लागि गेलनि । ओ अध्ययन छोड़ि ठाढ़ भए गेलाह । कालीकान्तकेँ अभिवादन करैत छलाह कि चंद्रिका टोकि देलखिन- "अहाँ तँ हमरा साफे बिसरि गेलहुँ ।" जयन्त किछु नहि बाजि सकलाह । चंद्रिकाक सौंदर्य देखैत बनैत छल । जयन्तक इच्छा भेलनि जे हुनका कनी नीकसँ देखी । एतेक दिनपर भेंट भेल रहनि। मुदा संकोचवश मुड़ी नहि उठा सकलाह । हुनका दुनूकेँ गप्प करैत देखि कालीकान्त आ आचार्यवर सहटि गेलाह । "अपनेक आज्ञा होइ तँ काल्हि अपनेक सभा मंडपमे एहि पुस्तकक विमोचन संपन्न कएल जाए । "- आचार्यवर बजलाह । "अवश्य कएल जाए । "- कालीकान्त सहमति दैत बजलाह । -रबीन्द्र नारायण मिश्र, पिताक नाम: स्वर्गीय सूर्य नारायण मिश्र, माताक नाम: स्वर्गीया दयाकाशी देवी, बएस: ६९ वर्ष, पैतृक ग्राम: अड़ेर डीह, मातृक: सिन्घिआ ड्योढ़ी, वृति: भारत सरकारक उप सचिव (सेवानिवृत्त), स्पेशल मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट, दिल्ली(सेवानिवृत्त), शिक्षा: चन्द्रधारी मिथिला महाविद्यालयसँ बी.एस-सी. भौतिक विज्ञानमे प्रतिष्ठा : दिल्ली विश्वविद्यालयसँ विधि स्नातक, प्रकाशित कृति: मैथिलीमे: प्रकाशन वर्षः२०१७ १.भोरसँ साँझ धरि (आत्म कथा),२. प्रसंगवश (निवंध), ३.स्वर्ग एतहि अछि (यात्रा प्रसंग); प्रकाशन वर्षः२०१८ ४. फसाद (कथा संग्रह) ५. नमस्तस्यै (उपन्यास) ६. विविध प्रसंग (निवंध) ७.महराज(उपन्यास) ८.लजकोटर(उपन्यास); प्रकाशन वर्षः२०१९ ९.सीमाक ओहि पार(उपन्यास)१०.समाधान(निवंध संग्रह) ११.मातृभूमि(उपन्यास) १२.स्वप्नलोक(उपन्यास); प्रकाशन वर्षः२०२० १३.शंखनाद(उपन्यास) १४.इएह थिक जीवन(संस्मरण)१५.ढहैत देबाल(उपन्यास); प्रकाशन वर्षः२०२१ १६.पाथेय(संस्मरण) १७.हम आबि रहल छी(उपन्यास) १८.प्रलयक परात(उपन्यास); प्रकाशन वर्षः२०२२ १९.बीति गेल समय(उपन्यास) २०.प्रतिबिम्ब(उपन्यास) २१.बदलि रहल अछि सभकिछु(उपन्यास) २२.राष्ट्र मंदिर(उपन्यास) २३.संयोग(कथा संग्रह) २४.नाचि रहल छलि वसुधा(उपन्यास) २५.दीप जरैत रहए (उपन्यास)। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.५.कुमार मनोज कश्यप-ओ दधीचि कुमार मनोज कश्यप १ टा लघुकथा ओ दधीचि वसीयत करब कोनो आम बात तs छै नहिं; ताहू मे अपन मुइला के बाद ओकरा पंचायतक बीच पूरा परिवार के उपस्थिति मे खोलि सार्वजनिक करबाक बात लोकक कौतुहल संगे जिज्ञासा बढ़ा देने छलै। आ सैह कारण छलै जे कर्ता-माछ-मासु के प्रात लाल-कका के दलान पर लोक सह-सह करय लागल। जुगे भाई आ हुनक कनियाँ के कोनो उन्टा-पुन्टा के सहज ज्ञान भs गेल छलनि तैं मोन खड़ुछायल -भन-भन करैत! भरल सभा बीच लिफाफ खोलल गेल आ सरपंच वसीयत पढ़ि सभके सुनबs लगलाह - "हम अपन सम्पूर्ण होशोहवास मे वसीयत करैत छी जे हमर सम्पूर्ण संपत्ति मे हमर बेटा-बेटी के बरोबरि के भागीदारी हेतै .......।" सुनिते किछु लोक थपड़ी बजेलक, केयो कनफुसकी शुरू केलक। जुगे भाई फक्क पड़ि गेलाह; मुदा कनियाँ सs आवेग सम्हारल नहिं भेलनि - "हम तs जनिते छलियै जे बुड़हा दू-चालि छैथ.....गुँह-मूत करै लै बेटा-पुतोहू आ ...... " अपन मोनक भड़ास ओ आओर निकालतथि ओहि सs पहिने उर्मि अपन हाथ सs हुनक मुँह बन्न कs देलक - " बस्सssss ... भौजी आब नहिं! “. बाबू ने हमरा अपन संपत्ति मे हिस्सा देलनि; मुदा हम भरल पंचायत मे अपन सभ हिस्सा आहाँ के दै के घोषणा करैत छी..। हमरा कोनो संपत्ति के लोभ नहिं .... लोभ अछि एतबे जे हमर नहिरा बनल रहै।" ओ हबोढ़कार हिचुकि-हिचुकि कनैत रहलीह । थोपड़ी के गड़गड़ाहट .. किछु काल चुप्पी..... फेर कनफुसकी। भरि गाम मे चर्चा छलै तs बस एकरे। -कुमार मनोज कश्यप, सम्प्रति: भारत सरकार के उप-सचिव, संपर्क: सी-11, टावर-4, टाइप-5, किदवई नगर पूर्व (दिल्ली हाट के सामने), नई दिल्ली-110023 मो. 9810811850 / 8178216239 ई-मेल : writetokmanoj@gmail.com अपन मंतव्य editorial.ऽtaff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.६.निर्मला कर्ण- अग्नि शिखा (खेप-१७) निर्मला कर्ण (१९६०- ), शिक्षा - एम् ए, नैहर - खराजपुर,दरभङ्गा, सासुर - गोढ़ियारी (बलहा), वर्त्तमान निवास - राँची,झारखण्ड, झारखंड सरकार महिला एवं बाल विकास सामाजिक सुरक्षा विभाग मे बाल विकास परियोजना पदाधिकारी पद सँऽ सेवानिवृत्ति उपरान्त स्वतंत्र लेखन। मूल हिन्दी- स्वर्गीय जितेन्द्र कुमार कर्ण, मैथिली अनुवाद- निर्मला कर्ण अग्नि शिखा (भाग - १७)

पूर्व कथा: राजा पुरूरवा के विलक्षण वीरताक कारण देवताक विजय दानव राज केशि पर भेल। एहि कारण सप्तऋषिय के सम्मति एवं भगवान विष्णु के आकाशवाणी सन्देशक कारण राजा पुरूरवा के स्वर्गक अर्द्धासन प्राप्त भेलनि l मुदा पुरूरवाक आकांक्षा तs उर्वशी छलीह l आब आगू: अमरावती के विशाल मनोरंजन कक्ष,! एहि समय सद्य:परिणीता सन अलंकृत छल l देवताक दानव पर भारी विजय के उपलक्ष में आई एहि प्रेक्षागृह में लक्ष्मी-स्वयंवर नाटिका के प्रदर्शन भेनाई निर्धारित छल l अप्सरा रंभा के नृत्य सँग आर बहुत रास मनोरंजक कार्यक्रम होमय के छैक l भरत मुनि विचार केला उपरांत एहि नाटिका के चयन केलनि। चयन उपरांत अत्यंत परिश्रम संs पात्र के चयन करैत हुनका सभ संs अभ्यास करौलथि ओ। नाटिका के प्रदर्शन त्रुटि हीन होइ एकरा पर विशेष ध्यान रहनि भरत मुनि के । ओ स्वयं लक्ष्मी-स्वयंवर नाटिकाक सभ पात्र के चयन एहि अवसर हेतु कएने रहथि l संगहि ओ स्वयं एकर निर्देशन के दायित्व सम्हारलथि l एक-एक पात्र के चयन ओ योग्यता अनुरूप कएने रहथि। "लक्ष्मी" के अभिनय हेतु उर्वशी के चयन कएने रहथि l ओना तs एहि कार्यक्रम में ओ भाग लेमय नहि चाहैत रहथि, किएक तs ओ अपन एखुनका स्थिति में अभिनय करवा लेल समर्थ नहि रहथि l मुदा भरतमुनि के द्वारा हुनक चयन कएल गेल छल उपयुक्त पात्र मानि ,आ इन्द्रक पूर्ण सहमति छलनि एहि में।एहि परिस्थिति में ओ विरोध नहि कs सकलीह। ओ अनिच्छा पूर्वक एहि कार्य हेतु प्रस्तुत भेल छलीह l सभ देवतागण के बैसवा हेतु उचित आसनक व्यवस्था कएल गेल छल l भरतमुनि के वास्ते विशेष सिंहासन राखल गेल छल l अभिनय मंच के निर्माण हेतु स्वयं विश्वकर्मा उपस्थित भेल छलाह l संपूर्ण दिन एकर व्यवस्था में व्यतीत भेल l सभ देवतागण एवं ऋषिगण निश्चित समय पर मनोरंजन कक्ष में उपस्थित भs गेल छलाह l अपन-अपन निर्धारितआसन पर सभ देवतागण के बैसलाक उपरान्त कार्यक्रम के प्रारंभ कएल गेल l कार्यक्रम के प्रारंभ में देवतागणक विजय-गाथा के ओजपूर्ण वर्णन राजा पुरूरवा अपन वक्तव्य में केलथि l तत्पश्चात इन्द्र अपन वक्तव्य देलखिन। वक्तव्य के उपरांत दुनू गोटे एकहि सिंहासन पर विराजमान भs गेलाह l देवर्षि नारद अपन वक्तव्य में पुरूरवा के संपूर्ण जीवन गाथा कहि देलन्हि l एकर उपरांत भरतमुनि अपन लक्ष्मी-स्वयंवर नाटक के विषय वस्तु के में प्रारंभिक किछु शब्द कहलन्हि | नाटिका के पात्रक परिचय देलन्हि ,तत्पश्चात ओ अपन आसन पर बैस गेलाह l नाटक के पूर्व रंभा के मंगल नृत्य भेल l नेपथ्य में बैसल सौंदर्यवती उर्वशी राजा पुरूरवा के देखवा हेतु आकुल-व्याकुल भs रहल छलीह l मुदा ओ नेपथ्य में रहवा लेल विवश छलीह l अभिनय प्रदर्शन के पूर्व हुनका बाहर निकलs के अनुमति नहि छलन्हि,एहि कारण ओ अपन मोन मसोसने बैसल रहलीह। मंगल नृत्य के बाद देव विजय केर भावोत्पादक गान नृत्य शैली में मेनका प्रस्तुत केलन्हि l उपस्थित सभ दर्शक एहि नृत्य के माध्यम संs युद्धक झांकी मुग्ध भs देखs लगलथि l कतेक वास्तविक रूप संs युद्धक दृश्य प्रस्तुत भेल छल - मेनकाक नृत्य शैली में! सब दर्शक "वाह-वाह" कs उठलथि l मुदा राजा पुरूरवा के मुख पर कोनो विशेष भाव परिवर्तन नहि भेलैन्हि l ओ बहुत गंभीर दृष्टिगत भs रहल छलाह l इन्द्र नृत्य पर विमुग्ध होइत जोरदार ताली बजा उठलथि l ओ अपन दृष्टि घुमा पुरूरवा के देखलथि,मुदा हुनका अत्यंत गंभीर देखि आश्चर्यचकित भाव संs पूछs लगलाह - "कहां गुमि गेलहुँ भू-मंडलेश्वर! आहाँ तs अति गंभीर प्रतीत भs रहल छी! की कोनो विशेष बात अछि ? अथवा पृथ्वीवासीक चिंता होमय लागल अपने के ?" "नहि देवाधिप ! हमरा पृथ्वी वासी के प्रति कोनो चिंता नहि अछि हम ओतुका शासन व्यवस्था संs पूर्णतया संतुष्ट छी l एहना स्थिति में हमरा प्रजाक चिंता किएक होयत ? बस मोन नहि लागि रहल अछि,एहि कार्यक्रम में" - पुन:दुनू के मध्य मौन घनीभूत भs उठल l आब लक्ष्मी-स्वयंवर नाटकक प्रारंभ होमय जा रहल छल l एहि नाटिका में भाग लेम वाली मुख्य अभिनेत्री उर्वशीक सर्वप्रथम रंगमंच पर प्रवेश भेल। ओ इन्द्र एवं राजा पुरूरवा के बेरा-बेरी देखलथि। पुन: हुनक दृष्टि पुरूरवा पर केंद्रित भs गेल l पुरूरवा एवं उर्वशीक दृष्टि आपस में एक-दूसर संs एक बेर किछु क्षण लेल एहन मिलल कि दुनू गोटे एक-दूसर के देखैत रहि गेलाह l पुरूरवा के लागल जेना ओ अपना के बिसरायल जा रहल छथि l भाव विभोर भs गेलाह ओ l उर्वशी के हृदय में प्रेमक प्रसुप्त चिंगारी भड़कि उठल l ओ अपना के अभिनय करवा में असमर्थ अनुभव करs लगलथि। ओ लक्ष्मी चरित्र एवं अपन संवाद पूर्ण रूप सs बिसरि गेलथि। पुरूरवा के अतिरिक्त हुनका किछु याद नहि रहलनि। अपन सुधि-बुधि बिसारि ओ असहाय सन एम्हर-ओम्हर दृष्टि घुमा देखलथि, पुनः टकटकी लगा पुरूरवा के देखs लगलीह l भरत मुनि नेपथ्य में जा हुनका संवाद के स्मरण संकेतक द्वारा कराओल l उर्वशी अपना के आब संभारि लेलथि l तत्पश्चात मेनका एवं रम्भाक प्रवेश मंच पर भेल l आब तीनू कलाकार के सम्मिलित रूप संs नृत्य के विभिन्न भाव भंगिमा द्वारा अपन-अपन भाव के दर्शक वृंद तक प्रेषित करवाक छलन्हि l सब कुशल एवं भाव प्रवण अभिनेत्री छलीह l ताहि संs अत्यंत कुशलता पूर्वक अपन-अपन अभिनय करैत रहलथि। उर्वशी के कनिको असुविधा होइन अथवा अन्यमनस्क देखि रम्भा हुनका अपन भ्रू-भंगिमा के द्वारा अभिनय के स्मरण करवा देथिन। आब मेनका एवं रम्भा नेपथ्य में गेली। मंच पर उर्वशी एकसरे रहलथि । आब लक्ष्मी-रूप धारण कएल उर्वशी के एकसरे लक्ष्मी के चरित्र के अनुरूप लय पूर्वक नृत्य करवाक छलन्हि l मुदा ई कथि भs गेल! एहन अनर्थ ! अपन सुधि-बुधि बिसारने उर्वशी ! लक्ष्मी-रूप धारण कएल उर्वशी! ओ तs अपन नेत्र में अनुराग भरि अपलक पुरूरवा के निहारि रहल छलीह l भरत मुनि द्वारा बताओल अभिनय व संवाद ओ प्रायः विस्मृत कs चुकल छलीह l ई देखि नाटक के आविष्कर्ता मुनि भरत के मोन खिन्न भs गेलन्हि l पुरूरवा एवं उर्वशीक आंतरिक भावना के हुनक अनुभवी दृष्टि क्षण मात्र में परखि लेलक। अपन अंतर्दृष्टि द्वारा ओ सब ज्ञात कs लेलथि l उर्वशीक एहि असामयिक धृष्टता सँs ओ क्रोधाविष्ट भs गेलथि l क्रोधक वशीभूत भs ओ झट श्राप दs देलन्हि - "उर्वशी आहाँ के उनसठ वर्ष तक स्वर्ग सs च्युत होमय परत एवं ओकरे प्रेम में विदग्ध रहब जेकर छवि एखनि आहाँ के नेत्र एवं हृदय में अंकित अछि! आहाँक ओ प्रिय मानव स्वयं आहाँ के विरह में संतप्त रहत!" 'हा दैव! ई की भेल ! एहन अनर्थ ! आब की होयत ! हमरा कारण राजा पुरूरवा के अपमानित होमय परल "' - भरत मुनि के श्राप सुनितहि उर्वशी दु:ख सs विह्वल भs गेली | उर्वशी अत्यन्त दु:खी भs गेली l ओ सोचि रहल छलथि,हुनके गलती के कारण निर्दोष पुरूरवा के संग-संग श्राप के भागी बनs पड़लन्हि l हुनक मोन बेकल भs कानि उठल l मूर्छित भय मंच पर धराशाई भs गेली l देवता गण में केओ-केओ ई घटना के बुझलथि,अधिकांश नहि बूझि पओलथि l अनेक दर्शक एहि घटना के तs नाटकेक एक अंश बुझलथि l इन्द्र पर्यन्त एहि घटना के नहि बूझि पओलथि l राजा पुरूरवा पर्यन्त किछु बुझलथि किछु नहि। हुनका ई अवश्य बुझना में आए ऋषिवर भरतमुनि स्वयं राजा एवं उर्वशी पर क्रोधित छलाह। मुदा पूर्ण जानकारी हुनको नहि भेट सकल। नाटक में श्रापक ई अंश संभवत: लक्ष्मी आ भगवान विष्णु के वास्ते छल - यैह इन्द्र एवं अन्य अधिकांश देवतागण के बूझि पड़लन्हि l उर्वशी शब्द हुनका सभ के कर्ण गोचर नहि भेल रहन्हि l हठात् स्थिति के सम्हारि लेलथि मेनका l किनको एहि बातक अभिज्ञान नहि भs सकलन्हि कि नाटक के मध्य कतेक पैघ दुर्घटना उर्वशी आ पुरूरवा के जीवनक सँग भs गेल l

... नंदनकानन में आई एकसरे पुरूरवा आबि गेल छलाह l हुनक ह्रदय अत्यंत दु:खी छलैन्हि,अन्य किनको ओ अपन सँग नहि आबs देलखिन l इन्द्र हुनका सँग आबs चाहलखिन,मुदा एकसरे में अपन ह्रदय केर स्थिति पर विचार करवाक छलन्हि,ताहि कारण ओ इन्द्र के आबs लेल बरजि देलखिन l संतान वृक्ष के नीचाँ सुंदर हरिताभ तृण पर ओ मूक बैसल छलाह, शून्य में अपलक दृष्टि सँs देखैत l क्रमशः अपन मंतव्य editorial.ऽtaff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.७.प्रणव झा- करमनेढ़ प्रणव झा करमनेढ़ सदर अस्पताल बेगूसराय के दृश्य नित दिन जेका सौंसे गहमा गहमी पसरल अछि। ओपीडी मे लंबा लाइन लागल, ओपीडी कक्ष मे डॉक्टर सब जल्दी जल्दी अपन मरीज निबटाब' मे लागल अछि। डॉक्टर कक्ष के बाहर लाइन मे धक्कम-मुक्की चली रहल अछि। किछू गोटे जोगार से लाइन तोड़ी के डायरेक्ट अपन मरीज के दखाबय मे लागल अछि। वार्ड मे मरीज सब से भेंट करय बला संबंधी सब के एनाय जेनाय लागल अछि। कतौ कोनो मरीज के नर्स इंजेक्शन लगा रहल छथीन कतौ कोनो मरीज कराहि रहल अछि। एहिना एकटा ओपीडी कक्ष मे डॉ० प्रवीण अपन ट्रेनी संगे अपन मरीज सब के निबटा रहल छलाह। डॉ० प्रवीण पोरकें साल सदर अस्पताल मे सीनियर कंसल्टेंट कम पीजी टीचर के रूप मे ज्वाइन केने छलाह। डॉ० प्रवीण शुरुए से कुशाग्र बुद्धि आ  मेहनती छलाह। चंडीगढ़ पीजीआई से एमडी केलाक बाद फ़रीदाबाद के एकटा फाइव स्टार कॉर्पोरेट अस्पताल मे कंसल्टेंट के रूप मे  कार्यरत छलाह। तेसरा साल डॉ० प्रवीण छईठ मे गाम आयल छलाह। भोरका पहर जखन टहलs लेल गाछी दिस बिदा भेल छलाह त रस्ता मे यार कक्का भेंट गेलखिन। "गोर लगई छी यार कक्का की समाचार नीके छी की ने" प्रवीण यार कक्का के पैर छू प्रणाम करैत बजलाह। "खुश रहु बौआ रहु आबाद...... गाम रहु कि फरीदाबाद" यार कक्का आशीर्वाद दैत बजलाह। यार कक्का बिहार सरकार से रिटायर भेल पूर्व कार्मिक छलाह आ आब सामाजिक कार्य सब मे लागल रहई छईथ। पढबा-लिखबाक सेहो बेस शौख छैन आ बात बात पर छंद मिलेनाई मे विशिष्टता राखई छईथ। आगा  प्रवीण से कुशल क्षेम पुछईथ यार कक्का बजलाह "की हौ भोरे भोर कातिक मास के शीतल बसात के आनंद लेब' लेल निकलल छह की?" "हाँ कक्का गाछी-वृक्षि के शीतल बसात के आनंद त गामे मे ने भेंटत" प्रवीण बजलाह - हौ प्रवीण भने तू ई बात उठेलह हम तोरा से एहि मैटर मे किछ बात कर चाहई रही। देखह तों जे एकटा प्रस्ताव पर विचार करह त ई गाछी बला शीतल बसात के आनंद बारहो महीना छतीसो दिन ल सकई छह। देखहक एनबीईएमएस राज्य सरकार सबके जिला अस्पताल मे डीएनबी आ पीजी मेडिकल डिप्लोमा कोर्स चलेबाक प्रोग्राम आनने अछि जै से कि देश के जिला जिला मे सस्ता आ निक गुणवत्ता बला मेडिकल केयर आ पीजी मेडिकल प्रशिक्षण उपलब्ध कराओल जा सकई। एहि क्रम मे हमरा सन किछू जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता सब बिहार सरकार के कहि-सुनि के बेगूसराय सदर अस्पताल मे सेहो ई प्रोग्राम चलाब' लेल राजी केलहू। आवेदन प्रक्रिया मे छैक मुदा अस्पताल मे योग्य  पीजी टीचर के कमी के चलते किछ विभाग के आवेदन अटकल छैक। तों शिशुरोग विशेषज्ञ छहक ने आ तोरा अनुभव सेहो भ गेल छौ। तै हमर प्रस्ताव छल जे यदि तों ऐ पद के ग्रहण कर लेल स्वीकार करह त हम सरकार से बात करी आ कम से कम शिशुरोग विभाग मे डीएनबी शुरू करबाक एकटा बड़का बाधा खतम हेतैक। - प्रवीण के ई प्रस्ताव पर किछु थकमकाइत देख यार कक्का पुनः बजलाह "हौ हम बुझई छी से ई डीसीजन तोरा लेल आसान नई हेत' किए कि आदर्शवादी बात कहनाई आ कर' मे अंतर होइत छैक। ताहि लेल हम तोहर निर्णय लेब' के प्रक्रिया के प्रेक्टिकली किछ आसान क दैत छियह। देखह बिहार सरकार से तोरा ओहन दरमहा त नई भेंटतह जे फ़रीदाबाद के बड़का अस्पताल मे भेंट रहल छ। मुदा एतय तो सदर अस्पताल मे काज के संगे अपन क्लीनिक या अस्पताल सेहो चला सकई छहक। तोरा सन योग्य डॉक्टर के क्लीनिक खूब निक चलत तै मे कोनो शक नई। सक्षम लोक के तोहर चिकित्सा लाभ प्राइवेट प्रेक्टिस से आ गरीब लोक सब के सदर अस्पताल के माध्यम से भेंटई ऐ से निक आर की बात हेतई। आ सब मिला के तोरा आर्थिक रूप से कोनो नोकसान नई हेतौ से हमर गारंटी छैक। तकरा बात तोरा मोन मे होइत हेत' लाइफ स्टाइल के ल क त देखह आब सब तरहक दोकान दौरी , मॉल-सिनेमा शॉपिंग, रेस्टोरेन्ट आदि सबटा अपना शहर कस्बा मे सेहो उपलब्ध अछि। बाल-बच्चा लेल निक गुणवत्ता बला प्राइवेट स्कूल सब सेहो उपलब्ध छैक आ दसमा के बाद त ओहुना बच्चा सब आब घर से बाहर कोनो कोचिंग के लेल जाइते छैक। बदला मे तोरा आ बाल-बच्चा के भरि साल गामक हवा, गाम-घरक आनंद, नाँव , इज्जत, प्रतिष्ठा सब भेंटतौ। - कक्का अहांक बात काट' बला नै अछि, हम निश्चित ऐ प्रस्ताव पर गंभीर छी। मुदा हमरा ऐ मादे निर्णय तक पहुँच लेल किछ समय चाही, घरक लोक से सेहो विमर्श करय पडत। आ जे जेना होयत हम शीघ्र अहाँ के सूचित करब ई कहि प्रवीण कक्का से विदा लेलखिन। ~सोना शटकुनिया हो दीनानाथ हे घूमय छ संसार........ लाउडस्पीकर पर शारदा सिन्हा के आवाज मे बजईत ई  गीत के स्वर छठि घाट पर ठाढ़ डॉ० प्रवीण के कान मे पहुँच रहल छल आ मोन मे यार कक्का के प्रस्ताव पर तीव्रता से विचार चलि रहल छलइन्ह। करीब एक महिना बाद यार कक्का लग प्रवीण के फोन आयल छल, ई बताब' लेल जे हुनका यार कक्का के प्रस्ताव स्वीकार छैन। बस फेर की वातावरण मे साकारात्मकता आ उत्साह के बयार बहि निकलल। आनन फानन मे सबटा प्रक्रिया शुरू भेल, डॉ० प्रवीण आब सदर अस्पताल बेगूसराय के शिशुरोग विभाग मे पीजी टीचर के रूप मे ज्वाइन क नेने छलाह आ ओहि साल से अस्पताल मे डीएनबी पीडियाट्रिक्स कोर्स सेहो शुरू भ गेल छल। चलू आब वर्तमान पर आबी। डॉ० प्रवीण के सामने एकटा अधेर उमरि के आदमी बैसल छल आ डॉक्टर साहब के एकटा डीएनबी ट्रेनी ओकर पोती के देख रहल छल। ओ बैसल छल मुदा सामने राखल स्टूल पर नई अपितु जमीन पर उकड़ू बैसल छल। श्याम वर्णीय आ घनगर मोछ राखने, ललाट पर ललका टिक्का लगौने ओकर चेहरा पर गोटैक बेर बात कर के क्रम मे मुस्कान आबि जाय छल। खास क के जखन ओ अपन पोती के बात करय छल। ओकर चहरा आ आंखि पर परल झुर्री ओकर जीवन संघर्ष के गाथा कहि रहल छल। मुदा शरीर से बलिष्ठ आ फिटफ़ाट छल ओ आदमी। डॉक्टर साहब के बुझना गेल रहैन जे ट्रेनी के मर्ज समझ मे नई आबि रहल अछि ताहि से ओ ओकरा से पुछने छलखिन जे "ई बचिया अहांक के य ?" "पोती हइ साहेब " "की भेलई य एकरा?" महिना-दु महिना से पेट हहाइत रहई हइ साहेब दरद से छटपटा जाय हइ। "की करय छि? कत' रहय छी?" "चेरिया बरियारपुर गाँव है साहेब, एतई स्टेशन लग चाह-पकौड़ी के खोपचा लगबई छी।" "पहिने अहाँ कुर्सी पर बैस जाऊ  प्रवीण खाली कुर्सी दिस इशारा करैत बजलाह "नई साहेब हम ठीक छी  जमीन पर उकडु बैसल ओ बाजल "नै पहिले कुर्सी पर बैसु ऐ बेर प्रवीण कनी तेज आवाज मे बजलाह आ ओ सकुचाईत कुर्सी पर बैस रहल छल। तदुपरांत अपन ट्रेनी डॉक्टर के केस के विषय मे किछ समझेला के बाद प्रवीण पुनः ओकरा दिस तकैत बजलाह चेरिया बरियारपुर बहुत दूर छैक एत से  त फेर एतेक दूर बेगूसराय काज कर आबै छी? ओतहि कोनो काज किए नै करई छी। साइकिल से आबय छी साहेब। हमर बाबूए ई खोमचा खोलने रहई। नेनपने से  हुनका जौरे साइकिल पर आबईत रहि, हुनके से ई काज सिखल आ तहिया से यैह ठाम ई काज करई हियइ। ई सब कहईत ओकरा चेहरा पर कोनो दुख या पछतावा के भाव नै छल अपितु अपन पिता के संग बीतेने अपन नेनपन के अनुभूति, पिता के वात्सल्य के स्वाभाविक गौरव अनुभूति ओकरा चेहरा पर और ओकर आंखि के चमक मे पढ़ल जा सकई छल। डॉ० प्रवीण फेर पुछलखिन एनाई-जेनाइ लगा क लगभग 45-50 किलोमीटर त भ जाय हेत, त गामे दिस किए ने किछ करय छह। ओमहर दिस ओहन मजूरी नै भेटई छई साहेब। एत बाबू के जमायल काज है 500-600 के दिन दिहाड़ी बनि जाय है। बच्चा सब की करय ये  "बेटी सब बियाहि देलियइ साहेब बेटा सब दिल्ली मे कमाय है।" डॉ0 प्रवीण के प्रश्न के जवाब मे ओ बाजल छल। "कुन क्लास मे पढ़य छहक नुनु" एबरी डॉ प्रवीण ओय बचिया से पुछने छलाह "पंचमा मे" ओ छौड़ी तमइक के बाजल छल ई सुनि ओ आदमी अपन मोछ पर ताऊ दैत बाजल, बड्ड चंट हय साहेब, सबटा हिसाब किताब फटाफट क लई है। अच्छा एकटा बात बताब' नाती-पोता सब के पढेबहक की नै" डॉ० प्रवीण के साइत ओकरा से बात कर' मे निक लागि रहल छल। संजोग से रोगी के भीड़ सेहो कम छलय। "हाँ साहेब पढेबई किए नै" "अपन बच्चा सब के किए नै पढेलहक" तोरा सब के त आरक्षण सेहो भेटई हेत' । दसमा तक पढ़ने हय बच्चा सब साहेब, सरकारी इसकुल मे पढ़ाईए कहन होय छय, दुगो-चारगो फारम सेहो भरने रहय लेकिन कुछ भेटले नय त दिल्ली कमाय लेल गेलय। हम्मे आर हरिजन मे नै आबय हियइ।" "तैयो ओबीसी मे आबय हेबहक नै त ईडबल्यूएस कोटा मे त एबे करबहक। तोहर धिया पूता सब निक से फारम नै भरने हेत'। तोरा कोनो ने कोनो आरक्षण के लाभ भेटत' तोरा पता छह तोहर ई पोती बहुत कम पाई मे सरकारी कॉलेज से पढ़ि-लिखि क हमरा सन डॉक्टर सेहो बनि सकई छह।" "हाँ साहब एकरा और के खूब पढेबै हम्मे" किछू आर गप सप केला के बाद आ पोती के विषय मे दबाय आ सलाह लेला के बाद ओ अपन पोती के ल क गेट पर अपन आ पोती के उतारल चप्पल पहिरि गेट से बाहर गेल। ओकरा गेला के बाद डॉ० प्रवीण अपन पीजी स्टूडेंट से पुछलखिन "बताऊ उ कुर्सी खाली रहईत ओ निच्चा किए बैसल छल" स्टूडेंट के थकमकाइत देख ओ कहलाह जे हम बस पूछि रहल छी। ट्रेनी के किछ उत्तर सूझलो होय तथापि ओ चुप्पे रहल। "अच्छा ई बताउ जे एतेक रास सरकारी योजना सब के बावजूद ई अपन बच्चा सब के पढ़ेनाई- नौकरी दिएनाई किए नै क पेले" "सर आलस...बुद्धि... करमनेढ़ सब छै" "अहाँ के लागे य जे 45-50 किलोमीटर रोज साइकिल चलाब'बाला लोक करमनेढ़ हेतय! ककरो टांग टुटल होय आ ओकर शानदार ट्रैक पर कहि देल जाय जे दौरू त कि ओ दौग पेतय? चलु पहिल सवाल पर घुरई छी। किए कोनो शर्ट-पेंट बला निच्चा नै बैसई छै, किए खाली गरीब-गुरबे टा निच्चा मे बैसय छै? किएकि ओकरा सब के बरसो-बरस यैह समझायल गेल छै जे तोहर पहिरन-ओढ़न, रहन-सहन यैह लाइक छौ जे कुर्सी पर नै बैस सकय छहि। ओकरा ऐ बात के डर बनल रहे छै जे कुर्सी पर बैसने कहीं ओकरा दुत्कारल नै जाय जै से ओकर आत्मसम्मान के ठेस लागतई। तै  ओ पहिनेने निच्चा मे बैस रहल छल। हम ओकरा से एत्ती काल गप्प क रहल छलहू जैसे अहाँ सब के बता सकि जे जै मरीज सब के डॉक्टर सब मशीन के जेका देखे छय कनिके काल ओकरा से गप्प केला पर कतेक रास बात बुझना मे आबय छय। ओकरा खोपचा मे चाह पीबईत कतेक लोक के मोन मे ई आबईत हेतय जे ई रोज 50 किलोमीटर साइकिल चला के ओ चाह दुकान चला रहल छै। एहन मरीज के एकटा व्यर्थ जांच लिख देनाइ मतलब भेल जे एक दिन ओकर जांच के व्यर्थ चक्कर मे बर्बाद केनाइ आ ओकर दिहाड़ी मरनाई। डॉक्टर के सदिखन एकटा केयरगिवर बनि के मरीज के इलाज करबा के चाहिए। यदि अहाँ कुर्सी पर बैसल छी आ कियौ आहाँ के सामने अछईत कुर्सी निच्चा मे बैसल अछि त ई बात अहाँ के कचोटबा के चाहिए। जे भी मरीज होय ओकरा पहिने अपना समानता के स्तर पर महसूस करबीयौ फेर ओकर इलाज करियौ आ अफ्नो  अंदर समानता के भाव राखियौ नै छोट नै पइघ। चाहे कलक्टर-नेता होय कि आम गरीब लोक सबके एक भाव से इलाज करबा के चाहिए। अहाँ आ ओकरा मे कोनो विशेष फर्क नै थिक। अहाँ इलाज द्वारा केकरो केयर द रहल छी ओ चाह पिया के । बेसी डॉक्टर सब साहित्य, संवेदना, दर्शन आदि के फालतू आ चिकित्सा प्रैक्टिस के लेल हास्यास्पद मानय छैथ मुदा ई बात के गांठ बाइन्ह लिय जे साहित्य, संवेदना, दर्शन के सबसे बेसी आवश्यकता विज्ञान के कोनो शाखा के सबसे बेसी छैक त ओ चिकित्साशास्त्र छैक। किएकि चिकित्सा खाली शरिरे टा के ठीक करब के नाम नै थिक अपितु मन आ आत्मा के भी आरोग्य क देबाक नाम थिक।" संजोग से डॉ० प्रवीण जाखन अपन पीजी ट्रेनी के ई सब बुझा रहल छलाह तखने यार कक्का सेहो कोनो लाथे प्रवीण के केबिन मे पहुंचल छलाह। डॉ० प्रवीण द्वारा अपन ट्रेनी के देल सलाह सुनि यार कक्का के प्रवीण सन आयुर्विज्ञान पीजी टीचर पर बहुत गर्व के अनुभूति भेलइन आ अपन समाज के डॉ० प्रवीण सन चिकित्सक आ शिक्षक देबाक अपन कृतित्व के लेल अपना मे घोर संतोष आ तृप्ति प्राप्त भेलइन। इति। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.८.आचार्य रामानन्द मण्डल-मिथिला के लाल: उपन्यास सम्राट फणीश्वरनाथ रेणु आ पारो आचार्य रामानंद मंडल मिथिला के लाल: उपन्यास सम्राट फणीश्वरनाथ रेणु आ पारो १ मिथिला के लाल: उपन्यास सम्राट फणीश्वरनाथ रेणु विश्व प्रसिद्ध आंचलिक उपन्यास मैला आंचल के शिल्पकार फणीश्वरनाथ रेणु के जनम बिहार राज्य के मिथिलांचल स्थित अररिया जिला के औराही हिंगना गांव में शिलानाथ मंडल आ पानो देवी के पुत्र रूप में ०४ मार्च १९२१ में भेल रहे। विश्व साहित्य के यथार्थ ग्रामीण पीड़ा के संवदिया, पारिवारिक सत्य, गृहस्थ जीवन के दर्पण आ राजनीतिक योद्धा रूपी एकटा मिसाल। कहीं कोई झोल पट्टी नै,धन धरती के मोह नै,बस,तन आ कपड़ा से देखे में ऐरेस्टोक्रेट,मन सं कोसी के धूसर बंजर आ बांझ धरती के अनमोल छौड़ा आ भावना सं क्रांतिकारी रेणु के अइसन दर्जन विशेषता हैय जे हुनका अमर बनबैत हैय। मैला आंचल,परती परिकथा, जुलूस, कितने चौराहे,दीर्घतपा,कंलक मुक्ति,ठूमरी, आदिम रात्रि की महक आ अग्निखोर आदि के सृजनकर्ता रेणु साहित्य जगत में तहलका १९५४मे मच गेल रहै मैला आंचल के उपरांत। रेणु जी तीन भाइ रहैत, फणीश्वरनाथ,हरिनाथ आ महेन्द्र नाथ। फणीश्वरनाथ के तीन शादी भेल रहे।पहिल पत्नी रेखा देवी रहे।एगो लैइकी कविता के जनम देला के बाद चल बसल रहे। रेणु के दोसर विआह पद्मा देवी स भेल रहे। रेणु आजादी के लड़ाई में जीवंत हिस्सेदारी निभैलन। जुलूस जैसन रचना वोकर स्पष्ट प्रमाण हैय। लड़ाई के बीच में १९४२ में जेहल गेलन।पहिल कटिहार जेहल आ बाद में भागलपुर जेहल में रखल गेल रहै।उंहे हुनका यक्ष्मा के शिकायत भेल आ चिकित्सा के लेल पीएमसीएच पटना भेज देल गेल। चिकित्सा के अवधि में उंहा के एकटा नर्स लतिका के समर्पण आ सेभाभाव सं रेणु आ लतिका में प्रेम भ गेलै। हजारीबाग में जा के दूनू गोरे विआह कैं लेलन। पद्मा रेणु सं सात संतान भेल।तीनटा लैइका आ चारटा लैइकी।मूल्य: इहे संतान सभ रेणु के पारिवारिक धूरी हैय।लैइका सभ हैय- पद्मपराग राय वेणु,अपराजित राय आ दक्षिणेश्वर राय।लैइकी सभ हैय-नवनीता, निवेदिता,अणपूर्णा आ वहीदा। लतिका रेणु सं कोनो संतान नै हैय। पिता शिलानाथ मंडल के साहित्यिक रूझान आ राजनीतिक जागरूकता के अमिट छाप रेणु पर पड़लैन।आगे चल के रामदेनी तिवारी हुनका राजनीतिक आ साहित्यिक दिशा देखैलथिन।अइ के कारण रेणु कोनो विद्यालय में नै टिकला। कहियो फारविसगंज, कहियो सिमखन्नी, कहियो विराटनगर (नेपाल) के चक्कर लगवैत रहलन। नेपाल के कोइराला परिवार के संगति हुनका क्रांतिकारी बनैलन त बंगला के प्रख्यात साहित्यकार के संगति हुनका कहानीकार बना देलथिन। काशी विद्यापीठ के पढाई के अवधि में समाजवादी आचार्य नरेन्द्र देव के संगति पैलन।आ अंत में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के कंधे से कंधा मिलाके अइसन साहित्यकार बन लन कि बिहार के वोइ सभ बुद्धिजीवी आ साहित्यकार के उद्वेलित कैलन जे मूलतः नपुंसक भे गेल रहे। राजनीतिक रूझान के चलते १९७२ में रेणु जी फारविसगंज विधानसभा सं चुनाव लड़लैन परंच हार गेलन। १९८७ में मैला आंचल पर निर्माता किशोर डंग आ निर्देशक अशोक तलवार धारावाहिक बनैलन आ जेकर टेलीकास्ट भेल रहै। रेणु जी के कृति मारे गए गुलफाम पर तीसरी कसम फिल्म बन चुकल हैय।जेकर नायक राजकपूर आ नायिका वहीदा रहमान हैय। रेणु जी अपन पद्मश्री के उपाधि श्रीमती इंदिरा गांधी के द्वारा आपातकाल लगैला पर बिरोध में लौटा देलन। आपातकाल के विरुद्ध लड़ाई में जेल गेलन। अपेंडिक्स के चिकित्सा के दौरान कौमा में चल गेलन आ अइ संसार से सदा के लेल विदा हो गेलन। राहुल सांकृत्यायन आ प्रेमचंद के श्रेणी के लेखक आ क्रांतिकारी के निधन ११अप्रैल १९७७ के भे गेल। अइसन वीर साहित्यकार पर मिथिला के गर्व हैय। २ पारो रामू छोट सन कसबा मे एगो जलपान के दूकान चलबैत रहय।वो अपन घरवाली लाडो संग दूकान के पीछे वाला घर मे रहय। सुबह सात बजे से दस बजे आ दू पहर तीन बजे से सात बजे साम तक मुरही,घुघनी आ कचरी -चप बेचे से फूर्सत न रहय।वोकर घुघनी आ कचरी चप बड़ा स्वादिष्ट रहय।लोग मल्हान के पता के दोना में सुसुआ सुसुआ के खाय।माने करूगर आ तपत तपत घुघनी आ कचरी चप।लोग घर सनेश के रूप मे मुरही कचरी चप खरीद के ले जाय। रामू के एगो बेटा भी तीन साल के रहे।वोकर घरवाली लाडो के फेर से पांव भारी भे गेल। जौं सात महिना बीत गेल त लाडो के काज करे मे दिक्कत होय लागल।लाडो अप्पन घरबाला रामू से बोलल -सुनैय छी। रामू -बाजू न। लाडो -आबि हमरा से काज न होयत। हमरा उठे -बैठे मे बड़ा दिक्कत होइअ। रामू -त कि करू। दूकान केना बंद कर दूं।जीये के त इहे आसरा हय। दूकानों खूब चल रहल हय। लाडो -एगो बात करू न। रामू -कि। लाडो -हमर छोटकी बहिन पारो के बुला लूं न। रामू -बात त ठीके कहय छी। लाडो -काल्हिय चल जाउ।काल्हि दूकान बंद रहतैय। रामू -अच्छे। गाहक -कि हो रामू।आइ दूकान काहे बंद कैला छा हो। लाडो -आइ न छथिन।वो हमर नहिरा गेल छथिन। गाहक -कि बात। लाडो -हमरा देखैय न छथिन। हमरा मदत के लेल हमरा छोटकी बहिन के बुलावे ला गेल छथिन। गाहक -अच्छे। काल्हिये से दूकान चलतैय न। लाडो -हं। रामू सबरे दस बजे ससुरार पंहुच गेल। रामू ससुर -सास के गोर छू के परनाम कैलक। छोटकी सारी पारो अपन बहनोई रामू के गोर छू के परनाम कैलक।आ गोर धोय ला एक लोटा पानी देलक। रामू अपन गोर धोय लक। ताले पारो अंखरा चौकी पर जाजिम बिछा देलक। रामू वोइ पर बैठ गेलक। ससुर बुझावन बाजल -मेहमान । लाडो के हाल चाल बताउ। रामू बाजल -हम  लाडो के मदत के लेल पारो के बुलाबे आयल छी। बुझावन बाजल -कि बात। रामू -लाडो के सातम महीना चल रहल हय।घर आ दूकान के काज करय मे दिक्कत हो रहल हय। रामू के सास बाजल -हं। पारो के ले जाउ।इ मदत करतैय। बुझावन बाजल -अच्छा। पारो अपना बहिन तर जतय। रामू बाजल -हम आइए लौट जायब। बुझावन बाजल -हं। पहिले भोजन त क लू। पारो -चलू। जीजा।भोजन लगा देले छी। रामू बाजल -चलू। रामू भोजन कैलक।आ कुछ देर लोट पोट क के पारो के लेके घरे चल देलक।सांझ छौअ बजे घरे पहुंच गेल। पारो अपन बड बहिन लाडो से गला लिपट गेल। पारो अठ्ठारह बरिस के गोर युवती रहय।सुनरता वोकरा अंग- अंग से टपकैत रहय। लाडो अपना काज मे मगन रहय।आबि लाडो राहत के सांस लैत रहय। रामूओ काज मे ब्यस्त रहय। दूकानो खूब चलय। गाहको पारो के देखे के लेल ललायित रहय। लेकिन सभ देखिय भर तक सीमित रहय। अइ बीच होरी बीत गेल। लाडो एगो सुन्नर बेटी के जनम देलक। पारो अपन बहिन आ बहिंदी के सेवा सुसुर्सा मे लागल रहय।एनी पारो मे शारीरिक परिवर्तन होय लागल।वोकर पेट मे उभार देखाय लागल। कानाफूसी होय लागल।लाडो पुछैय त पारो कोनो जबाब न देय।बात उड़ैत उड़ैत पारो के बाप बुझावन तक पहुंच गेल। बुझावन अपन बेटी लाडो इंहा भागल -भागल आयल। बुझावन बाजल -मेहमान।इ कि सुनय छीयै। रामू बाजल -हमरो आश्चर्य लगैय हय। लाडो बाजल -हमरा कुछ न बुझाइ हय। पारो कुछ न बोलय  हय।खाली गुमकी मारले हय। बुझावन बाजल -मेहमान ।हम अंहा पर पंचायती बैठायब। अंहा पारो के बुला के लयली आ अंहा सुरक्षा न कै पैली।हम आबि मुंह केना देखायब।आ पारो से बिआह के करतैय। बात हवा में फैइल गेल। काल्हिये भोरे पंचैती बैठल। सरपंच बाजल -पारो बेटी।डरा न।साफ साफ बोला। तोरा साथ इ काम कोन कैलन हय। पारो निचा मुंहे मुंह कैले रहे।कुछ न बोले।कुछ देर के बाद पारो बाजल -कि कहु सरपंच काका।इ जीजा के काम हय। रामू बाजल -पारो इ तू कथी बोलय छा। कैला हमरा बदनाम करैय छा। पारो बाजल -जीजा हम झूठ न बोलय छी।अंहू झूठ न बोलू। होरी के रात अंहा हमर सलवार के छोड़ी न खोल देले रही।हम होश मे त रही। लेकिन विरोध करैय के ताकत न रहय। अंहा होरी के बहाने भांगवाला पेड़ा खिला देले रही। बहिनो के खिला देले रही।अपनो खैलै रही। हमरा कुछ ज्यादा खिला देले रही। रामू कुछ न बाजल।अपन मुंह निचा क ले लेलक। सरपंच बाजल -एकर एकेटा इंसाफ हय। रामू के पारो से विआह करे के पड़तैय।सारी से बहनोई के बिआह करे पर सामाजिक बंधन न हय।इ अच्छा भी होतैय। लाडो बाजल -जौ हमर साईं इ गलती क लेलन हय।त हिनका पारो से बिआह करे के पड़तैय।कि करब।विधना के इहे मंजूर हय तो हमरो मंजूर हय।हम दूनू सौतिन न,बहिने लेखा रहब। रामू बाजल -सरपंच काका के इंसाफ हमरा मंजूर हय। बुझावन बाजल -सरपंच साहब के फैसला हमरा मंजूर हय। सरपंच बाजल -त चलू गांव के महादेव स्थान मे। सभ लोग महादेव स्थान मे गेलन। अपन साईं से लाडो बाजल -लूं सेनूर आ महादेव बाबा के साक्षी मानैत पारो के मांग भर दिऔ। रामू महादेव बाबा के साक्षी मानैत पारो के मांग मे सेनूर भर देलक। हर हर महादेव के आवाज से महादेव स्थान गूंजायमान हो गेल। नौ महीना बाद पारो एगो सुन्नर लड़िका के जनम देलक। आइ दूनू पत्नी लाडो आ पारो के संगे रामू खुश आ खुशहाल हय। -आचार्य रामानंद मंडल सामाजिक चिंतक सीतामढ़ी,सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक, माता-चन्द्र देवी, पिता-स्व०राजेश्वर मंडल, पत्नी-प्रमिला देवी, जन्म तिथि-०१ जनवरी १९६० योग्यता- एम-एससी (रसायन शास्त्र), एम ए (हिन्दी)। रूचि- साहित्यिक, मैथिली-हिन्दी कविता -कहानी लेखन आ आलेख। प्रकाशित पोथी - मैथिली कविता संग्रह भासा के न बांटियो। २०२२ प्रकाशित रचना - सझिया कविता संग्रह पोथी - जनक नंदिनी जानकी आ शौर्य गान। २०२२ पत्रिका -मिथिला समाज, घर -बाहर आ अपूर्वा (मैसाम)। अखबार -दैनिक मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश। सामाजिक-सामाजिक चिंतन, दायित्व- पूर्व जिला प्रतिनिधि, प्राथमिक शिक्षक संघ, डुमरा, सीतामढ़ी। स्थायी पत्ता- ग्राम-पिपरा विशनपुर थाना-परिहार जिला-सीतामढी। वर्तमान पता-पिपरा सदन,मुरलियाचक वार्ड-04 सीतामढ़ी पोस्ट-चकमहिला जिला-सीतामढी राज्य-बिहार पिन-843302 ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.९.डाॅ. किशन कारीगर-लोंगी डैंस(हास्य कटाक्ष) डाॅ. किशन कारीगर लोंगी डैंस (हास्य कटाक्ष) बाबा बड़बड़ाइत बजैत रहै जे एहनो कहू डैंस भेलैए? कहअ त जेकरा देखियौ सैह कहैयै जे यौ बाबा लोंगी डैंस लोंगी डैंस. आइ भिंसरे स बसहो बरद ताल मात्रा खेलाइए? कहै छियै जे चल बाध बोन दिस चैर लिहें बलू हमहूँ खेत पथार देखने आएब. बसहा बरद पर बैस बिदा हैब की काबे इहो रमैक जाइए लोंगी डैंस. छौंड़ा मारेर सब भींसरे स लाउडिस्पीकर पर घनघनौने छै आ इ बसहो बरद नचैए त एकरो दू सटकन दै छियै एकरो मन सौझ भऽ जेतै की.

ताबे हम बाबा लक पहुँचली हिनका स पुछली जे बाबा की समाचार है क? बाबा बजलै हौ कारीगर समाचार की कहियै देखै छहक ने बसहा बरद पर स धरफरा के खैस परलहुँ? हम पुछली जे बाबा से केना हो गेल? बाबा बोललकै एह की कहियअ बसहा बरद पर बैसल बिदा होइत रही की ताबे लाउडिस्पीकर पर अवाज एलै जे लोंगी डैंस लोंगी डैंस की बसहो बरद रमैक रमैक डांस करअ लगलै आ हम धरफरा के धांई भटका खसलौं की. भागेसरो पंडा के हल्ला केलियै जे दौगअ हौ त उहो भगेसरा बाजल यौ बाबा लोंगी डांस? कहअ तऽ हमर जान अवग्रह भेल रहै आ तोरा सब के अलगे ताल छह. अच्छा पहिने एक जूम तमाकुल खुआबह त फेर कनि गप सप करै छी.

ताबे बाबा के हम खैनी चुना के देली बाबा खैनी खाइत देरी बोललकै जे अंई हौ कारीगर इ कहअ तऽ जे पमरीया नाच, घोरा नाच, नटुआ नाच, अल्ला रूदल नाच से सब त सुनबो देखबो केलियै? आ ई लोंगी डैंस से केहेन होइ छै? हमरा त कोनो भांजे नै लगैए? हौ कारीगर तोरा कोनो भांज बूझहल छह? हम बोललियै जे हमरा कहां इ डांस फांस बूझहल यै क? बाबा हां हां क हँसैत बोललकै हौ कारीगर तोरा मीडिया वला सब के तऽ सबटा बूझहल रहै छह की जे फलां हिरोईन के बेबी बंप दिखा, त फलां हहीरो किसींग सीन केना किया त चिलां हीरो के बेटा ड्रगस कांड मे जेल स रीहा त फलां हीरोइन के बिकनी ड्रेस पर फैंस फिदा. आ लोंगी डैंस दिया नै बूझहल छह? कनि हमरो जल्दी कहअ?

बाबा के बुझबत हम गाबे लगली मोछ के मधमनी दिस घुमा देब? लहान मे आँखि के अपरेशन करा देब? पामर बला चशमा पहिरा देब? यौ बाबा हम छी अहाँ के फैंस मिस ने करू डिल्ली बम्बई कमाई के चैंस? लोंगी डैंस लोंगी डैंस. बाबा गीत सुन झूमे लगलै आ बजलै सबटा गप त बुझबा मे आएल आ इ मोछ के मधमनी दीस किए घूमा देबहक. हम कहलियै यौ बाबा मैथिली पुरस्कार जेंका मनमाना वला गप छै. बाबा बोललकै हं हौ कारीगर हमरो भांज लागल जे सबटा मैथिली पुरस्कार मनमाने पर सर कुटमारे के दरभंगे मधमनी वला के दै छै? कोसिकन्हा बला के सब आवेदक के सब ज्यूरी आ के सब पुरूस्कृत आ किएक? सै केकरो कोनो भांज नै लागअ दै जाइ छै? आ लाथ केहेन करतह जे मैथिली मे एहिना होइत एलैए? एहेन साहित्यिक दलाली स नीक त लोंगी डैंस जे लोक सब स्पष्ट रूपे कारणो बुझहै छै की. त आई सब मिल करह लोंगी डैंस लोंगी डैंस. अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.१०.लाल देव कामत-मिथिलामे मांगैन खवाश छइ! (आगाँ)/ वर्णित रस/ चाह पोखता'क अर्थ जानि गेलहुँ (लघुकथा)/ लघुकथा- परचाक निहितार्थ/ चलला मुरारी छकबय (लघु कथा)/ लघु कथा- हलहौर/ मैथिली बिहैन कथा- -सापरपिट्टा/ भाग जागल- विहैन कथा/ सुनैना बेटी - मैथिली सामाजिक उपन्यास/ लिख पटापैट मारय दयह (लघुकथा)/ लघुकथा- ई गुड़ खेनै कान छेदौने/ अम्बोहि पानि उठल-लघुकथा (मैथिली)/ रोज सेन्टेड लिची (लघुकथा)/ लघुकथा -रानी केँ नँय छै राजा लाल देव कामत मिथिलामे मांगैन खवाश छइ! (आगाँ)/ वर्णित रस/ चाह पोखता'क अर्थ जानि गेलहुँ (लघुकथा)/ लघुकथा- परचाक निहितार्थ/ चलला मुरारी छकबय (लघु कथा)/ लघु कथा- हलहौर/ मैथिली बिहैन कथा- -सापरपिट्टा/ भाग जागल- विहैन कथा/ सुनैना बेटी - मैथिली सामाजिक उपन्यास/ लिख पटापैट मारय दयह (लघुकथा)/ लघुकथा- ई गुड़ खेनै कान छेदौने/ अम्बोहि पानि उठल लघुकथा (मैथिली)/ रोज सेन्टेड लिची (लघुकथा)/ लघुकथा -रानी केँ नँय छै राजा १ मिथिलामे मांगैन खवाश छइ! (आगाँ) रामा अहाँ के सुनइली , हम्मर सुनू। ऐ तरहेँ सभ क्षेत्र में बाँकियौता बाइकलाग कहियाधरि पूरा होयत। अपन त्याग देखेबाक एखनो रस्ता देल जा रहल य,परंच जम्मा ढेरी कियो नहिँ ढाहत! उदारवादी होयव बड़े कठीण बुझाछ। तेँ कविजीक पाँति समाजके अन्हारो मे इजोतक बाट देखय ले वाद्य करैत छैक। हुनक एक कविता पढू :- मिथिला राज्य लेल,बियाकुल मोर जीयरा । मिथिला राज लेल, पियासल मोर हियारा । मिथिला राज्य लेल ,भुखल मोर मनवां । मैथिल भाषा सँ ,अघायल मोर जीयरा । मैथिली सनमान सँ , अघायल मोर हियरा। मैथिली पाग मे। ,समायल मोर मनवां। बज्जिका भासा सँ डराय मोर जीयरा। अंगिका भासा सँ घबरायल मोर हियरा। बोली माने मे हुलसाय मोर मनवां.............. सदरिकाल सँ आबोधरि हम गुलाम छी,हमरा वर्तमान व्यवस्था एखनो गुलामीक जींझिर सँ कसिकय जकड़ने अछि। मुदा खूब जोड़गर झटका धीरे सँ अकान्त करैत य।जेना कि आचार्य जी पाँति गढलैन हन् :- हम कइसे गुलाम छी! कहियो हम मुगल के गुलाम छी। कहियो हम अँग्रेज के गुलाम छी। कहियो हम राजा के गुलाम छी। हम कइसे गुलाम छी। आइयो हम नेता के गुलाम छी। आइयो हम पार्टी के गुलाम छी। आइयो हम राजनीतिक के गुलाम छी। हम कइसे गुलाम छी। आइयो हम जाति के गुलाम छी। आइयो हम समाज के गुलाम छी। आइयो हम अर्थ के गुलाम छी। हम कइसे गुलाम छी। आइयो हम धरम के गुलाम छी। आइयो हम राजवंशी भगवान के गुलाम छी। आइयो रामा हम राजा के गुलाम छी ! औजको परिस्थिति मे लोक अपने मने आजादी कतय एहसास करा पाएत।तेँ हर पात-पात पर गुलिस्तां तँ बैसले छैक किनै? ऊँच नीच क' भावना समाजमे विद्यमान छैक, संविधान मे अश्पृश्यता - घृणा केर विरूद्ध कारगर कायदा कानून बनल रहलाक वादो लोक कतेक सुरक्षित छैक! ई हमरा एकटा यक्ष प्रश्न ठाढ ,सुरसाक मुँह बौने फरीछ बुझाइछ। एखन तँ एक लेखकीय समाज गुटबंदी कय पचमनियां लिखल के आँय-बाँए मानि रद्दीक टोकरीक शोभा बढवय बाला स्तरहीन रचना कहिकय ,सोसल मीडिया मे छिरयबैत छै। मनोवैज्ञानिक आपत्ति थीक जे ज्ञानक ई पैघ कटोरी अपनहिटा लग बूझैत मानैत , संघर्षरत तबका केँ हतोत्साहित कय अधबटियामे लटकौने चन्द तरहेँ वाधक रुपेँ देखार होईछ। कवि महोदय जनमानस मे उर्जा भरैत उपेक्षित वंचित केँ अपन हक - अधिकार लेल सतत् सजग आ जागरुक रहय ले कहैत अपील धरि कविता विधा माध्यम सँ कयने छथि-: आई कि होई रहल हैय । असहमति के अधिकार छीनल जा रहल हैय। आई कि होय रहल हैय। बोलई के अधिकार छीनल जा रहल हैय। आई कि हो रहल हैय। असहमति के अधिकार देस द्रोह बन रहल हैय। आई कि हो रहल हैय। अमीरी गरीबी के खाइ बढ़ल जा रहल हैय।...,... आचार्य रामानंद जीक स्पष्ट कथन छैन,पाँति दोसरो देखल जाए :- भाषा के सरहद मे न बांटियो। मैथिली के, बज्जिका अंगिका मे न बांटियौ। मैथिली के, संस्कृत - असंस्कृत मे न बांटियो। मैथिली के , राड़ मानक मे न वाटियो। मैथिली के, ऊँच - नीच मे न बांटियो। मैथिल के , बाभन सोलकन मे न बांटियो। मैथिल के , छूत अछूत में न.................... जेना कि सर्व विदित अछि मिथिला मिहिर पत्रिका कविता विशेषांक रूपेँ सितम्बर १९७४ मे एकसय जीबीत कविजीक टटका कविता छापिकय काव्य सौष्टव धाराके गतिमान बनौने रहैक।आ आब तँ दीपा मिश्र (मध्यप्रदेश) १५१ कवियत्री क' एक - एक गोट कविता ' मैथिली ' नामे पोथी छपौलीह आ काव्य धाराके आगू बढौलीह अछि।एहनामे कविताक पोथीक बाढि कए कियो रोकि नँय सकत। आचार्य जीके कविता केँ गुणय केर आवश्यकता छैक। संक्षेपमे ई कहब जे हमरा मंडल जीक मैथिली साहित्य क्रान्ति सँ घनिष्ठ संबंध भ' गेल अछि। आनन्दानुभूति एतेक धरि बढ़ल जे मैथिली भाषा क' अक्षय भंडारके भरैक लेल अनेकों समीक्षकक ऐ पोथी मादे  अखबार मे प्रकाशित भेलो उपरान्त , हमहूं अपनाके नहिं रोकि पबैत छी। एहि तरहक सृजन के आलोचना करैत ई अनुभूति होइत रहल जे शनिचरा लेखक कवि के अतिरिक्त अद्यतन अन्य केर पोथी सर्वथा कम छैक।सम्यक विचार करब अँखिगर लोकक काज होयत।जाहिपर प्रकाशक गण सेहो अनुकम्पा देखाबथि। प्रधानाध्यापक पद सँ विज्ञान शिक्षक आचार्य रामानन्द मंडल जी सेवा निवृत्त भेलासन्ता चारि सालसँ अहर्निस माय मैथिली क' सेवा कय रहलाह अछि। सोसल साइट पर सेहो सक्रिय छथि। सबसँ हिनक पैघौत इयह जे सरकारी स्तर पर मैथिली केँ धकियेबाक षढयन्त्र केँ पर्दाफाश केलनि। सीमान कातक बज्जिका आ अंगिका नामे फुट सँ भाषायी  बेपार करय बाला मैथिली विरोधी शक्ति केँ चिन्हबाक खगौट दिश मैथिली आन्दोलनीक आँखि फोललनि अछि। हिनक पोथी विविध आयाम के समेटने भाषा विमर्श लेल अपेक्षित रहत। आश य दोसरो  पोथी शिघ्र छपत। २ "वर्णित रस" पोथी समीक्षा-: लाल देव कामत मैथिली भाषा मेँ कवि उमेश पासवान एक बहुचर्चित नाम अछि। हिनक जन्म लौकही थानाक औरहा गाममे खखन पासवान आ अमेरिका देवी'क घर १३ अक्टूवर १९८४ क ' भेलनि अछि। मैथिली साहित्य'क कविता विधामे हिनक श्रुति प्रकाशन दिल्ली सँ काव्य संग्रह २०१२ई० मेँ १२० पृष्टक पोथी छपल रहनि। सद्यप्रकाशित वर्णित रस ''पोथी' केर किमत २०० टाका निर्धारित कयल गेल छैक,जाहिमे ८७ गोट नव कविता संग्रहित कयल गेल छैक। ओना आमुख ओ सेहो एक कविता रूपेँ गढ़ने छथि। हिनक काव्य सौष्टव केर विषयमे विस्तार सँ पाठकके प्रसिद्ध साहित्यकार गजेन्द्र ठाकुर जीक लिखल "वर्णित रस " मादे सुविचार पढबाक तथ्य भेटैत अछि। युवा पुरस्कार मैथिली साहित्य अकादमी'क भेटला सन्ता आब कोनू विशेष परिचय के मोहताज ई नहिं छथि। पेशा सँ ग्रामीण पुलिस रुपेँ स्थानीय ख्यातिमे अतिरिक्त विशेषता जुटलनि हन्। हिनक कोनू कविताक शिर्षक 'वर्णित रस' नहिं छन्हि,आ नै कोनू पाँतिक ई वाक्य थीक। परंच पोथीक गत्ता  आकर्षक मिथिला चित्रकला आ प्रकाशनक लोगो सहजे पृष्टसज्जा दिश पाठकक धियान घीचैत य।हिनक ' वसन्त ' कविताक पाँति एहि तरहेँ  होईछ -: आयल वसंत नव जीवन ल' क' हर प्राणीमे उमंग भरिकय गाछ -  वृक्षमे नव कनोजरिक संग मोजर फूल निकलैत अछि। खेतमे गहुम - खेसारी तिसी - मसुरी तोरीक फुल सँ समुच्चा बाध गमकैत अछि। मौधमाछी लगौने सेनुरिया आमक गाछ पर छत्ता........... एकटा दोसर कविताक गरहैन "मैना" केर पाँति देकल जाऊ -: एलै एहेन अन्हर - विहाड़ि जइ डारि पर छलै मैनाक खोंता वएह टुटि गेलै ठाढि डारिक संगे खोंता गिरलै (खसलै) खोंतामे रहैत बच्चा संग जोड़ों मरलै पलक झपकिते मैनाक जीनगी देलकै उजाड़ि एलै एहेन............ मिथिला महान "कविता" मेँ चर्चित कवि पासवान जी खेतमे हड़बाहाक वर्षाकालीन खेत परहक हालसुरति सेहो मरूआ रोटी पर अखरा नून धूरझार पछीया वसातके दृश्य क' अवलोकैन कराबैत , अढ़ाई मोड़ हर जोतैक प्राचीन झाँखि दिश अन्त:कथा केँ समेटने महानता देखेबामे समर्थ भेल छथि। यथा -: टाट पर लतरल तिलकोर पोखरिमे मखान अखार मासमे झूमि - झूमिकय किसान रौपैए धान जगमे सबसँ सुन्दर अछि हमर मिथिला धाम भाषा आ संस्कृति देखि लोभाएल श्रीराम वारीमे भेटय पान घर - घरमे होइए चूड़ा - दही क' जरए जलपान मैथिल मिथिला महान ............................. हिनक कविताक शिर्षक सँ पाठक मिथिलाक प्रमुख पावैन - तिहार सँ सेहो महिमा मंडित रुपे निम्नाकिंत पाठ मेँ पढि सकैत अछि-: पूर्णिमा,फागुन मे, जिजिया,भरदुतीया आ गबहा संक्रांति। कवीजी केँ नव युवा पीढ़ी पर बढ बेशी आवेश जगैत छन्हि,तेँ जुवातुर्क केँ आह्वान करैत गबैत छथि - : रहैए युवा के उमंग मोनमे जौं पहाड़ सँ लड़ि लेब हम संघर्षक जीवन अहिंसा चलतै जीवनक अंतिम समैमे किछु करि लेब हम जोश जतय कम नै हुअय युवा के तँ परिस्थिति सात समुंदर पार क' लेब हम हमरा नै रोकू कियो दलितक बरदके हर संभव कम कय लेब हम लड़ए किएक नै पड़त हमरा अही दुश्मनक संग दुश्मनक छाती चीर कए देखा देव हम ..... उमेश जीके कविताक भावमे करारा प्रहार भेल छन्हि। ओ सोझ रूपेँ अपन बात कहैमे सक्षम भेला हन। जाति - थरमक आ मजहबक नामपर आतंकवादक गाछ रोपय बालाके देखार कयल गेल अछि। देशक युवा पीढ़ी केँ गोली - वारूद ,खंजर - तलवार दैत दुश्मनी आधारित जोश भरैक उत्कण्ठा रखनिहार सँ सतत् सावधान होयब पर बल देलनि अछि। दलित समाजके जे उपर मन सँ नूनू बौआ आ भीतरे भीतर ढहलेल बुझि उपेक्षा कयल गेल,ताहि पर चिंता प्रकट कयल छैक। कोसी नदीक भयावहता आ भीषण वाढिक कारणेँ जे अबरजात पुरब आ पछिम क्षेत्र रुपेँ मिथिला बँटल रहय से आब कोसी महासेतु आओर बड़ीरेल मार्ग जुड़ला सँ सुगम भेल। शिक्षित आ दमीत दलित लोक जे अपना पछुआयल समाज सँ मुँह मोड़ि अनदेखी करैत छैक , ताहिसँ दुखी होइत छथि। जहनकि मेहनत मजदूरी करय बाला व्यक्तिक प्रति सहानुभूति'क आवश्यकता जतौलनि अछि। पंगू उपन्यासक रचियता कवि जगदीश बाबू आ मैथिली कर्मी डा० उमेश मंडल क' विषयमे सेहो अपन कवीत रसधारा बहौने छथि। नारी विमर्श, दलित दमित विमर्श आ सुविधा वंचित जमात लेल हिनक कविताक सौन्दर्य वोध फरीच्छ रूपेँ दिग्दर्शन कराबैछ। कृष्ण आ सुदामा क' मैत्रीभाव अखन समाजक बीच सँ निपत्ता जेकाँ छैक , जखनकि एहन उत्कर्षक निहितार्थ आवश्यकता अकानल गेलैक अछि। समाज साहित्य क' दर्पण छी;तेँ साहित्य समाजक ऐना कहाबैछ। से अभिजात वर्गक धरि मुखाकृति क' आभा मलीन देखेबाक चेष्टा एहि पोथीमे देखाईछ। विद्रुप चित्रण करैत सचेत होयबाक अभिप्रेरणा क़ोशल सँ भरल ई दीर्घ कविता संग्रह देखि कय कियो पाठक अपन पाई बुड़ैत नहिँ बूझत। पुनः पुनः संस्करण दोसरो  प्रकाशक करथि जै सँ ऐ पोथीक उपादेयता जन जागरूकता लेल बढय। ३ चाह पोखता'क अर्थ जानि गेलहुँ लघुकथा   _ लाल देव कामत आजुक ४५ जिला परिषद क'पूर्व प्रत्याशी ४५शाल पहिले अपना गाम सँ पैरे अम्मा संग दूनू भाय-बहिण ममागाम जाई छलहुँ।वाटमे मौआही बस्तीक उतरवारिकात रौह माछक दू उकेरल पैघचित्र ईनारमे देखबाक प्रतियोगिता लेल दौड़कय आगू बढलौंह।ईमारा पर आब दाहा नै आबय छैक ,तेँ पक्का ईनार सझिया बनल रहैक ओहिठाम।से ताहि जगह केर नाम मूल खतियान मेँ गैरमजरूआ खास किस्म आ कैफियतमे चाह पोखता दर्ज छलैक।एहि शव्दक अर्थ बुझय लेल ,जानबाक अभिलाषा मोनकेँ औंटने-पौरने धरि रहैत छल।जगह-जमीन बाली बात तँ कियो बुढे-पुरान वा अमीने बता सकैत छैक,से जानय भ्रमण पर साग-सातु बान्हि बहरेलौंह।ता नेना अवस्था सँ सेहो कने छेंटगर भेल जाई।पँचमा वर्गमे नावों लिखल रहय आ ऐकिक नियम गणित विषय केर हिसाब-किताब पढय लागल छलहुँ।निरमली हायस्कूलमे परसाक सुभकी जी पढैत रहथि,हुनक भेंट आ सतलरायण भैयाक संग शंकर मकई बीया सेहो लेबाक रहय।सुभकजी हमर परीचय धरि हेडमास्टर लाल साहेब सँ करौलनि।ओ बजलथि हम शिक्षक बनय सँ पहिले अमानत करैत छलौंह।ओ जे हमर प्रश्नक अर्थ बतेलनि तँ कने होंसी लागि गेल_"कहलनि चाय पौधा ओहिठाम सरबे कालमे रहल हेतैक।एक अमीन झाजी कोशी कैनाल सँ सेवानिवृत्त भ' हमरा भेटेलाह,ओ कहलनि-"ओतय चाह केर फ्री पसल(अंग्रेजक टी दोकान) भेल हेतैक।असली तथ्य एक चकबंदी सर्वे सँ रिटायर खाँ साहेब बुझेलनि-"चाह माने पानि,पोखता माने होईछ-कुआँ।" आब शव्दार्थ धरि जानि गेल छलहुँ। ४ लघुकथा परचाक निहितार्थ सरपंच चुनावमे ठाढ भेलाह लालबहादुर बाबू।औरो लोक उम्मीदवार घोषित भेलाह।सब अपन-अपन सिम्बोलक पर्चा पर उपरेमे नारा सेहो तरह-तरहके प्रेस सँ छपाकय दैत निर्वाचन क्षेत्र मेँ बाँटल। लाल बहादुर जीक पर्चा पर लिखल रहैक- जय जवान, जय किसान.....l ताही परचा परहक नारा जय किसानसँ अर्थ बुझाबैत हर(हल) छापक अभ्यर्थी आ जोरा बरद छापक प्रत्याशी लोककेँ फुसूर-फुसूर, अलग-अलग कहथिन ,देखू न हमरा समर्थन देलाह अछि लाल बहादुर बाबू ।दूनूक प्रतीक किसानी काजक द्योतक छलैक।से बास्तविकमे हुनक किछ बोटर प्रभावित भेलैक।ओना हुनका पिछरा वर्गक  बाहुल्य बूथ सबपर सय- सय आ सवर्ण बूथ पर सहानुभूतिपूर्वक पचास-पचासटा वोट भेटलैन। सर्वाधिक एगारह सय भोट पाबी विजयी श्री अपना नामे नमाबेरमे पुराधरि लेलथि लाल बहादुर बाबू।थपरी खुब बाजलैक। ५ चलला मुरारी छकबय लघु कथा  - लालदेव कामत सखी-बहिनफाक बीच नायिका स्नान करय जेबाक लेल यमुना तीर दिश विदा हेबाक अभिक्रम मेँ रहथीन।एकटा गोपी योजनानुसारे पछुआयल छलीह।से हुनके ओतय गामक अन्तिम छोर पर चलैत सब कियो जाय गेलीह आ उलहन देरी भेलाक लेल दै जाइ गेलीह।ताही बीच एक अत्यन्त आकर्षक महिला गोधपारणी जुमलनि।बहिणा जोड़ैक ले आग्रह करैत नि:शुल्क बाँहि ,गरा आ छाती पड़ेबाक अर्थात् गोदना (टाइटो) चित्रकारी देहक बाह्य अंगमे पड़ेबाक जिद्द ठानैत देखल।गोदना बाली पहिले राधा पर केन्द्रित होइत कहय लगलीह-बहिना हैैय सुइयाक बिख झारि हम अहाँक गोदनामे कृष्ण छापि दै छी।लाबु गट्टा,दोसर सब अविवाहित तरुणी सबकेँ हँसी करैत गोदना बाली बजलीह -अहूँ सबके गोदनाक रंग करिखा संगे-संगे घोरि लैत छी ,से सब कियो अपन दुध बिध ले दिअ! चौल देख घरवारी नवजुवती पड़ेलीह  परोसनि चिलकौर लग,दूध आनय।राधाकेँ गोदनाबालीक हाथ करगर बुझाय आ असहज पिड़ा सेहो खुबे।अधहे छापी छोरबाक कौलैत करय लगलीह राधा।संगे संगी सबके गोदना नहिँ गोदेबाक भाखा बकय लगलीह।अपसिँयात देख गोदनाबाली गीत उठौलिह" कहमा तोर नैहरा गै गोरी,कहमा तोर सासूर रे जान.. जान रे!!",तँ दरदो कनेक केँ कमैत सहाज जोकरक आसान भेलैक।बौसली बजबैत कृष्णक विलक्षण छवि छपल देखि गोरिसब हरखीत भेलीह।सब सँ बहिना लगाउल नटनियाँ केँ जहन लघुशंका लगलैक तँ कने अभटमे गेलै आ अनावश्यक देरी लगेलनि।तखन दूगोट सखी बजलीह-हय राधा कने देखै छी नटी बहिना केँ कियाक रावण बाला लघी बढलैह।जाकय देखल तँ अजगुत,ठामे अझखे देख घुमलीह,आ बजलीह -नटीन तँ कोनो पुरूषसन हिजरा तँ नै छी। सब गोटे कूतूहलवश निछोहे अयलीह आ एक गोटे हूनक चुनरीक खूंट पकैर घीच लेलीह।अ...आब तँ... अर्ध्दनारीश्वर।पीताम्बरी आ बौसली साफ-साफ झलकैत राधाकेँ चिन्ह पहिचिन्हमे कृष्ण चित्रकारिसन एनमेन लौकलनि।तँ सम्बोधन करैत बजलीह -हे मुरारी कतय चलल छलौह हीरो बनय.....।ओना केँ छकै.....के...छकधुम..,..lछकेबाक कोन प्रयोजन?ठकपनीक हद्द केलौ अपने!ता दोसर बहिणा बाँकेक पोशाक सेहो खीचलीह।सब कियो सम्पुर्ण कृष्ण लीला देख हतप्रभ होइत,हुनक छाती पर गोदैत कालक विस्मकारी मुखाकृतिक आभा केँ अन्यथा एहसास केलनि।मुरारी बजलाह!हमरा जे छकेने रही राजकुमार छद्म भेष धरिकय,से हमहूँ बदला सधायल।आई पनघट पर नहाई ल' गेनाई अबेर होई छलैक,एहि लटारहम मेँ। ६ लघु कथा हलहौर एहिबेर भोंटक गनति जिलाजवारमे होइत देख लालजी केँ भेलनि हमहूँ मधुबनी जा कनि देखितियैक रंगत।से एकटा सरपंच उम्मेदवारक मतगणना अभिकर्ता धरि विधिवत बनि गेलथि।वाड सदस्यक घोषणा मैक सँ जहन होइत रहैक, ताहिघरि ओ आर के कालेजक मीनाबजार बाला गेट लग उत्तरभाग पुंगलाह।अपनो पंचायतक बहुतों गोटे तमशगीर केँ देखलनि। ओहिठाम गार्ड सँ पता चललैक जे मेनगेट पुवारिकात सँ कतारमे जाकय लागू।फेर पदयात्रा करैत झटकैर केँ आरो दू एजेंट आ अभ्यर्थी संग दक्षिणी भाग गेटलग आबय चाहलनि,ओतय असंख्य भीड़केँ कतारमे देखतहि ,पुलिस प्रहरी सँ बुझय लेल अपन गेटपास कागत देखबैत कहलैन महोदय!मैक पर सुनियौ ने हमरे ग्राम कचहरीके पुकार भ रहलैक अछि। ओ बाजलैक जाऊ कतारमे लागू,अन्यथा हम-सब मनुख कि जे पंछियों केँ ओना नै ढुकय देबैक-मजिसटेट साहेबक करा आदेश भेल छैक।आब कि हो!एकटा प्रो०साहेबसँ राहीरूपे गप्प भेलैक ,तँ हुनके सुझाव सँ कनिकाटिकेँ रहिका मार्गधरैत पछिम सँ फेर गेटलग धरि आबैत देखते पुलिशबा निछोह छुटल आ सोंटियबैत गारिफज्जैत करैत तमसा कय गरजलैक" ऐ तेरो को कहता हुँ,तभी से मतसुन है क्या?भोंटमे पगला गया है।"से आब मतगणना काज छोरि दू गोटे सँ दरभंगा डी एम सी एच०भरतीभेल लालजी।तखन अर्ध्दमिरीत दशा सँ उबरल।धरि ताउमेरक लेल डांर कजिये रहि गेलैक।औषधि चलि रहलैक अछि। पुलिसिया रौब भरकल रहैक हुनकर भाजपानुमा कुरता आ बण्डी पर । ७ मैथिली' बिहैन कथा'- -सापरपिट्टा खेरहिक खेरहा मोन पाड़ैत छी।उमाजी ऐबेर दलहनमे पछुआए गेलाह।पचता खेरहीक जजात हाथ नै लागलैक।फुलबाति चैलते किटनाशक दबाय स्प्रैधरि कयने छलैक।पाकल खेरही'क कारी छिमैर तोरबाक समय घनघोइर पानि पड़य लगलैक।सैनीमैनी गाछ लगक खेतपथार बरिदुर पूभर छलैक।गामक सब किसान अपन आ बटैया खेतमे दू-तीन छोहनि छिमी तोड़िए लेने रहैक।उमाजी एमरी एसकरूआ रहने,अपना टोला पड़ोसाक सब गोटेकेँ कहलक अदहाअधि पर हमर खेरही पहिले छौनी तोइर आनि दै जाऊ।दुरौसक नयका खेत सस्तेमे एहिबेर किनने रहै।जनिजात जोनसब बजलीह- अधिया पर तँ लगोक बाधमे खेरही तोरबै ले कतेको गीरहत कहि गेलथिन अछि।से एहन दुरहकाल मेँ ओतेक दुर कथि ले, के जेतन्हि।पचताइत बजलथि -जाई जाऊ सोलहनी खेरही तोइर आनि लै जाउ!  दाइल खाइत काल नामों तँ लेब न? तैयो हुनके भायक रहिपरहक लगक कोला रहने सब जेड़ बान्हि हाईं-हाईं बुनछेक भेलासंता खेरही तोरलक ।खेती सभके पानि सँ उबडुबि भेल रहैक।खेरहीक हरियरी कारी दागमे बदलि गेलै।सहरबावाली नफेएल बजलीह खेरही तँ सापरपिटा छलैक।करिहरक मौगि तँ हमरा खेतमे पैसय नै दै छल।सेय तँ तीन दिन-राति घरमाघट बरखा, बरसैत थम्हिये गेलैक। ८ भाग जागल विहैन कथा बेघर एक दिव्यांग श्रमिकक गहुँम बाउग पाई अभाबे पछुआयल जाइत रहैक।डीएपी खाधक उपर सँ से किल्लत छलैक।ताबीच बेमौसम ओकर छौरा नव कनियाँ विआहि अनलक।गाम भड़िक लोक लग जे बिलौकी आ मुँहदेखनाक टाका घरवारिक लागल रहैक,से डुबैत देखगमि एकटा जुकति सोचलक।रिशेप्शन(बहूभात)केर नाम पर मंदिरे लगक हकार सौसेंगाम माइक सँ छिरियेलक।अनुन-विशनुन रहलो पर भोजन खेनहार ग्रामीत उपहार रुपेँ नगदी टाका बरसाबय लागल।आब फैल सँ खाद बीजक जोगारधरि पूईर गेलैनि।कतौ सँ अभाग्य तँ नँय रहल। ९ सुनैना बेटी - मैथिली सामाजिक उपन्यास समीक्षक - लालदेव कामत मैथिली साहित्य क' दीर्घ कथा केर आंशिक रूप थीक उपन्यास। उपन्यास विधा मेँ वरेण्य साहित्यकार श्री जगदीश प्रसाद मंडल जी अगूआयल छथि। हिनक दर्जनों उपन्यासमे ' पंगू' केँ मैथिली भाषा मूल पुरस्कार साहित्य अकादमी द्वारा भेट चुकल छन्हि। सद्यप्रकाशित "सुनैना बेटी"  उपन्यास पढबाक सौभाग्य प्राप्त भेल अछि। पल्लवी प्रकाशन सँ बहराएल एहि 116 पृष्टक पोथीक किमत 250 टाका छैक। ई एकटा नव इतिहासिक सामाजिक उपन्यास थीक। ऐ तरहक अभिजात वर्गक वा कहू पैघौत परिवार क' व्यथा-कथा पर आधारित उपन्यास क' चलन मिथिलामे आबि रहल अछि। स्वयं मंडल जीक कतेको उपन्यासक कथ्य विम्व एके तरहक देखमे आयल अछि। ऐ उपन्यासमे  नव बात देखयमे जे आएल अछि से मानसिक भिन्नता केँ मनोवैज्ञानिक रुपेँ देखाओल गेल अछि। कथानक आगू बढैत एक परिवारक' तीन पिढिधरि क' किस्सामे समाएल अछि। किर्तपुर गाममे एक रुपकांत बाबू आ हुनक पत्नी सरिता रहैत छथीन। रुपकांत जीक अपन शिक्षा- दीक्षा मातृकेएमे भेल रहनि। ओ लोअर प्राइमरी स्कूलक मास्टर रहथि। अपने किसानक बेटा मास्सेव गामसँ पाँवपैदले नीतरोज 5 किमी0 चलिकय आध घंटा पहिले जाथि आ पढौनीके आध घंटा वाद ओतय सँ प्रस्थान करथि। पेरामे हित अपेक्षित सँ सेहो तमाकुले लाथे सेहो कुशलक्षेममे समय ओझरानि। एहन स्फूर्ति जकाँ दैनिक दिनचर्या नइमआहऐत आभा रहल छथि। हुनका पुतरत्न रुपेँ रविशंकर जन्म लैत छन्हि। जे पढि-लिखकय उच्चतम शिक्षा पटना बीएन कॉलेज सँ सेकेण्ड क्लास एम ए करय छैक। एक नव कालेजमे प्रोफेसर क' नौकड़ी कमे वेतन पर करैत छैक। से प्रो०जीक वियाह विधिवत डाक्टरनी सुभद्रा सँ होइत छैन। डाक्टरनी केँ सरकारी नौकरी आ अपन प्राइवेट क्लीनिक सँ खुब चिकन आमदनी होइत छैक। डां०सुभद्रा केँ पुत्र भेलनि जकर नाम पड़ल भवनाथ। भवनाथ जीक पढाय - लिखाय आरम्भे सँ नीक स्कूलमे बाहर होअय लगलैक।ओतय अधलाह आदैत शराव पीबाक चसक लगलैक। माय बाबू डाक्टर बनेबाक अभिक्रम मेँ लागल। ताहि बीच शहरके देखा-देखी अपनों घर परिवारमे वर्थडे आ मैरेज डे नहिँ मनौने रहैक से एहिबेर विवाह केर पन्द्रहम् वर्षगांठ मनेबाक ओरियानमे जुटलीह। कारणों रहय , जिनकर भोज खायब तँ खुऐबाक सेहो चांकि राखय पड़ैत छैक। आब डाक्टर सुभद्रा चाहैत छथीन, पर्दाक भीतर सँ संकेत रूपेँ अपन असल विचार राखथि जै पति बैसल - बैसल डेरामे समय बितबैत छथि से ताहि समयक उपयोग विद्यार्थी गणकेँ ट्यूशन पढाकय वेतनों सँ बेशी कैंचा कमाबथि। मुदा प्रो० साहेब तुष्टिकरण के लेल ओ एक शिक्षक पुत्र आ अपना केँ एक अलग बेढप छाप छोड़यबाला साबित करयमे अपन संकल्प केँ तिरोहित नहिं करय चाहैथ । प्रतिष्ठित लोक प्राईवेट ट्यूशन पढौनाई केँ आखिर अपराध बुझैत छथि। ओना पत्नी सँ सम्मानों भेटनि , सुभद्रा हुनकामे अर्धनारीश्वर केर परतिरुप आंकने रहथिन। मुदा गाड़ी क' चालक आ नौकर सह कम्पाउन्डर केर पगार स्वंय दैत रहलीह। एक गरीब घरक सुनयना सँ भवनाथक वियाह घटकक विचारे समय सँ सम्पन्न भेल। सुनैनासन पुतोह पाबि सासु-श्वसुर नेहाल भेलैक। पति के थथमारैत घर - परिवार मे सुनयनाक लक्षण कर्तव्य बढ सुन्नर रहल। पाठक उपन्यास पढैत-पढैत जहन आठम पराव पर पहुँचता तहन सुनैना बेटी विषयमे जानबाक प्रसंग भेटत। एक दिन प्रोफेसर साहब मायके निछोह उदारता सँ बहकल बेटाक प्रति चिंतित होईत जे सोचलाह; शराब अफरजए पीबके बौआ भवनाथ बेसुध बाट- नालीमे खसल पड़ल देखाएत तँ लोकलाज सँ  गड़ि जाएब,मुँह ककरो देखा पाएब! इयह सोचैत स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ैत छैन।पूतौह केँ सुनयना बेटी सम्बोधित करैत अपन व्यग्र मनक आकुलता धरि कहने रहथि। एक दिन बेटाक किरदानी पर सोचैत आ अलमीरा वो घरक तहस- नहस स्थिति पर नजर थिर नहिँ कय पौलीह डाक्टर साहिबा। आ मूर्छित परि गेलीह तँ पूतौह सम्हारलखिन। उपन्यासमे 55*60 साल पछुलका समाजक परिवेश कें एक आकलन मूल्यांकन रूपेँ कयल गेल अछि। एहिमे ग्रामीण क्षेत्रक रितिरेवाज क' चर्चा भेल छैक। कोशिकन्हाक टाँट माटिक खेतमे परल दड़ारि जाहिमे चोर आ हाथीके चलनाई बहुत कष्टप्रद वार्ता - दृश्य उपस्थित भेल अछि। खेत पटौनीक साधन देहातमे करीण आ तकर सब पाटपुर्जा के चर्च भेलैक अछि। ऐ शव्द सब सँ नव पिढिक लोक अपरिचित होइत जा रहलैक हन्। कारण आब सिँचाईक साधन बोरिंग पम्प सेट ,स्टेट बोरिंग आ चैनीज दमकल आ विद्युत मोटर सँ गाममे गाम उपलब्ध छैक। ऐ उपन्यासमे सुखान्त अध्याय सँ आरंभ कथा दुखान्त अध्यायमे जाकय समाप्त होईछ। देशमे अथवा मिथिला मे 50 साल सँ कम वयक्रम के 75% आवादी छैक। तकरा ई उपन्यास पढिकय किछ नैका संदेश नहिँ उत्प्रेरीत करैछ। शेष बाँचल 25% जे अधवयसू आ वृधजन  छथि , हुनक निजी जीवन रुग्णावस्था मेँ छैन। आ ओहिमे साक्षरता दर लगधक 50% रहितो  महिला तँ महिला जे पुरूष वर्ग सेहो पोथी, पत्र -पत्रिका सँ उबाऊपन मेँ रहैछ। अपवादमे सेवानिवृत्त लोक स्तरीय आओर विशेष कय हिन्दी -अंग्रेजी उपन्यास पढैमे रमल रहय छैक। तेँ सुनैना बेटी सन मैथिली उपन्यासक' बढ़ थोर पढ़ाकू पाठक पढैत गुनैत छथि। ओना पुस्तकालय केर शोभा बढाबय लेल एहि प्रभृतिक उपन्यासकार सभक पोथी जाक लागल अवश्य रहैछ। तेँ जगदीश बाबू क' प्रकाशित पोथी सभ "सगर राति दीप जरय" कथा गोष्ठीक अवसर पर हर तीन मासे मास आगन्तुक बीच बेन बिलहल जाईछ। एहि सँ पोथीक उपादेयता बढैछ , दलान दुरापर राखल पोथी देख परपाहुन मोबाइल राखि हुलैसके नवपोथी उत्सुकता सँ देखैत अछि। १० लिख पटापैट मारय दयह लघुकथा करकरौआ रौदमे गंगिया अपन बिटुवा संगे खेरही तोड़ैत छलीह।बरखा असमय भेला सँ सबकेँ अपने ताल बजैर गेल रहैक।से जनों नँय भेटैक।आधाआधी मुंगक छीमी फोंक भेल छलैक।कारण अगता खेती भेने दोसरो कोलाक किड़ा - मकोरा एकरे दलहन खेतीके निछोहे चपेट मेँ लेने रहय।बरखा दिन खुब जोरगर बिहारि सेहो उठल रहैक।से कीट छीमी पकरि फकसियारी काटने बकुटके पकरने मरल परल देखाय।दिनकर कने काल ले  झपाउन भेल।तँ बेटी बिटुआ केँ माय कहलैन पटहा पाकल करिया छिमी जुनि तोड़।आ कनपटी मेँ छाड़ने छौक लीख,आ एने पटापैट बिछ दियौ।आ लागल लीख पटापैट मारय।ता फेर भुकसिन सूरूज माथे सामने उगलैन।पहिलुके छोन्हिमे अदहा मुन्ही दालि रहै,से गाम गमाईत पठायत तँ दूसले जेतैक आ बीया ल' राखल जायत तँ मोन नै मानै छन्हि। ११ लघुकथा ई गुड़ खेनै कान छेदौने मिथिलांचल क' एकटा गाममे लालजी नामक ज्ञानी पुरूक रहधि।ओ अपना गामक नवाहके बैसारमे गौआँ सबके कहलक हौ मोन होईछ पंचायतक चुनाव में ठाढ होई से छहटा मेँ एकटा कोनू बैलेट हमरो नामे बनय दहक। लाल जी धरि बेर-बेर सब तरहक भोंटमे ,जे सामने आबै- लरय लगलाह।लोक मनेमन नियारलनि एकोबेर जीतय नहिँ देबैक।सयह भेलैक, नौबेर लड़ैत-लड़ैत अपन गरीबीधरि खुबे बढेलनि,तैयो कोनू तरहक सहानुभूति नहिँ।उपर सँ मतगणनाक कतारमे एकटा सनकी पुलिस प्रहरी केँ लाठिक मारि सँ भक खुजलनि जे विपक्षी क' ईशारा पाबि ओ तरगुपती पाईके प्रयोग सँ पुलिसिया जूलूम बरसल रहैक।तकरो हँसैत सहैत मोन मजगूत कय कानहाथ धेलनि लालजी।आ काबिल लोक जेकाँ स्वगत बड़बरेलथि"ई गुड़ खेयने,कान छेदेने!" १२ अम्बोहि पानि उठल लघुकथा (मैथिली) गाम सँ हाट-बाजार जाएब - आयब महामोश्किल भेल छलैक।नेपाली बीशवा समुहक बरसाति नदीक पानि उफान तोड़ैत मिथिला मेँ आबि गेलैक।पोसुआ माछ कचहरी लगक पोखरिमे उछैल-कूद क'रहल छैक।बिनोद मोबाइल पर गप्प करैत जलिया सबके बजौलक।शिकरमाहिमे एकटा आध मनक' जंगली बुआरि सेहो बझलैक।ओकरा पोखरि सैरात सँ बनोब्स लै मेँ सेन साहेब बढ असैर पर मदैत केने रहनि।ओ हँसैत ईहो बाजल छलाह जे सबसँ नम्हरका फरी सनेशमे देब किनै?से विचारलक हुनके ई पैघ बुआरी माछ शुभ-शुभके स्वंय पहुँचाबी।जुगूत साहेबके बिनोद कहलनि चाचा यौ अगम - अथाह बाढि सँ तँ सर्कल जेबाक रस्तापेरा डुबल छैक, से कने कहियौ न मलाह रामी केँ पार कय देता।ता आरो यात्री ओहि चौखुटा नाहमे चढैत सबार भेल। बुआरी केँ जीबैत ओहिपार ल'जेबाक जोगार ले गलजोरके बुआरिक गलफरमे भुण्डी लगेलक रामी।सब  केओ बिहुल-- बलान माताक जयनामा करैत जयकार लगेलक-जाय होय. ।खुजल नाह एकबाइग दुर्गा गाछीमे लागल ,तँ बाईरमे बान्हल बुआरिक पते नहिँ,भुण्डी छिटैक गेल रहय।आब रामी हाकीम लेल कतय सँ माछ आनि पुराओत!सभक गंजन सहैत रामी बिनोदक गाराक माला लपकि बाहर करैत अपना मुरीमे कंठी पैसबैत सर्वजनिक प्रतिज्ञा कयलक जे आब साकठ नहिँ रहब आ नै माछक फेरामे पड़ब।वाढिक समयमे बैशनो  एहिनो भेलैक अछि? १३ रोज सेन्टेड लिची लघुकथा लालोजीक आमगाछीमे एकटा रोज सेन्टेड लिची'क गाछ फरल छैक।खिच्चेमे कीटव्याधि सँ बचाऊ लेल कीट नाशक रोगर छिरकाऊ कयने रहय । दुपहरियामे आई जा देखय य तँ असंख्य मधुआ फर्र-फर्र उड़ै छलैक।भरिसक जलमे नीक जेकाँ दवाय नँय घोरल गेल रहय।उपरका दुधियासन दवाय जाहिठाम पड़ल(मित्र किड़ा)से तँ जड़िकय सुड्डाह छलैक।आ तरका दवाय जलमे निराल रहला सँ बेअसर कीट हहाकय हँसि रहल छल।से देख ओ माथहाथ द' ठामहि झमान भ' बैसि रहल।ता पूभर सँ सुपरिया आ लुतिया छौरी एम्हरे गाछी दिश अबैत देखेलई  ।ओ लिची गाछक मोटगर डायर पर  चढि बैस गेलाह।ताहिखन उतरवारिकात सँ सूगिया आ जमुनी ,लालमनि संगे दूनू बहिना लिची गाछ पर दुरौसे सँ पजेबाक टुकरी फेकलक।काँच-डम्हायल गोटेक पाँचटा लूचिफल खसलैक।"जहन लिचिये चोरवय तोंसब एलसी हन तँ लेह"कहि ओ गाछ केँ खूबजोर सँ झखेलनि।नीचा पाकल लिची झहैर पथार लागि गेल।ओ पाँचू गोरे कहलक ओगरवाहि करैक बनसव्त लूटाईये देलहक।तखने सियान लालमैन बजलीह- तीन शाल स तँ क्रिकेटक खेलारि सभके अजादे कयने छथि ,ऐबेर उ सब पढाय आओर परीक्षाक तैयारीमे लागल छैक ने।तेँ अपने महिला मंडल मेँ सदावरथ लुटेलनि अछि।ओहिठामक दोसर गोटे अपन बेदाना लिचीक फल आठसय टाकामे हूण्डा बेचलक । १४ लघुकथा  -रानी केँ नँय छै राजा महतो जीके भेलनि जे देशी श्रमिक मौधमाछी केँअपना चुम्बकीय आभा सँ ईटायलिएन रानी घींच आनत।से ओ कुशवाहा जी लग जा बाजल -अपने कोन तरहेक मौधमाछी काठक बाकसमे पोसलौंह अछि? कुशवाहा जी कहलकैन यौ भजार! यूरोपियन एपिल मेलीफेरा प्रजाति सरकारी नियम सँ जेना-तेना भेटल हन। आब के एपिल फ्लोरिया ,एपिस डोरसटा आ एपिस सेनेला इंडिका पालत।से की यौ,कोनू खास विशेषता बुझाइत य।ताहि पर महतो जी बजलाह हे देखू जंगली आ भारतीय मौधमाछी पोस नँय मानैत छैक।आओर नरसरिया लगाकय तकरा खोताके मगैहिया लोक खोंचारि मौध तँ लैत य,से देखियौ ककरो घर टुटैत छै त बड दुःख होई छै।मौध आ खोंता अपना लेल न मौधमाछी सहेजैत अछि।लोक स्वार्थी केहेन जे तकरा अपना लेल अमृत बूझि ओरियाबैत छैक।हे यौ पहिले खादीबोड आ आब केन्द्र सरकार किसानोक आमदनि दूगुणी करैक लेल मौधमाछीके पोसब प्रोत्साहन योजना सँ अनुदानों दैत छथिन।भजार यौ! आइ बहुत गप्प -सप भेल एकटा बात कहब- घरमाछी केँ तँ अपनो देह हाथ पर  बैसैत देखने होयब लटापटि करैत ।ई कहू जे मौधमाछी केँ तेना अवस्थामे पौलहुँ कहियो। कुशवाहा जी कहलखिन यौ भजार रानी मधुमक्खी आकाश वियाह करैत मात्रे एक नर सँ गमन करैत छैक।जखनकि ८-१० टा नर पछोर करैत समुहमे खेहारैत छैक।हँ जे नर एटैच भेला ओ सेक्शरिलेशनशीप करैत मरि जाइछ।एकटा कोनू नर केँ अपन जीवन आहुति देनाय निश्तुकीये बुझू। -मो०७६३१३९०७६१ अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ४.पद्य खण्ड ४.१.राज किशोर मिश्र-अंतस्-तम ४.२.निर्मला कर्ण- जूड़ शीतल ४.३.किशन कारीगर- आ रे सुग्गा आ आ (बाल कविता) ४.४.कल्पना झा- व्यग्रता ४.५.डा सुमंगला झा- मैथिल ४.१.राज किशोर मिश्र-अंतस्-तम राज किशोर मिश्र, रिटायर्ड चीफ जेनरल मैनेजर (ई), बी.एस.एन.एल.(मुख्यालय), दिल्ली,गाम- अरेर डीह, पो. अरेर हाट, मधुबनी अंतस्-तम कि एक हमरा ला गि रहल अछि ? आइ मा र्तण्ड भेल छथि मलि न , पूर्णि मा रा ति क रा का पति , छथि चा ननि ही न, मुदा शा ली न।

साँ झ पड़ैत सन्ताॅं अबैत छथि , व्यो म मे ,अनगनि त तरेगन, टि मटि मा इत छथि बा ती सन, मुदा , हुलसि त नहि , हुनकर छन्हि मन।

आका स आइ उदा स अछि , लगैछ ने ओहि मे हा स -परि हा स, एकटक ता कि रहल हमरा दि स, ओकरा मे, को नो ने अछि हुला स।

अवि च्छि न्न व्यो म, कि ए लगैत अछि टूटल -भा ङ्गल? चनकल, दरा रि पड़ल जेना , फा टल ति रपा ल सन टा ङ्गल।

केरा के भा लरि शुष्क भेल, जी र्ण -शी र्ण ,गा छी मे तरु, लहलहा इत जजा ति , खेत मे, लगैत अछि हमरा ,जनु मरु।

केओला क सुगंध सूँघए लेल , आएल ,गरल सँ भरल ,गहुमन, सुगंधि ओ कि एक प्रभा वि त नहि , कऽ पा बि रहल अछि हमर मन?

सुंदर संगी त सँ, कहल जा इछ, जरय लगैत अछि बा ती क टेमी , बि सरि जा इत छथि वि रह -वेदना , गी त -तरङ्ग, सुनि , को नो प्रेमी ।

कि ए भेल बेअसर, गां धर्व -वि द्या ? कि ए हमर मो न, गेल अछि जि दि आ?

हरि अर कचो र अरण्य बी च मे, झि हि र -झि हि र झहरैत अछि झरना , बि ढ़नी सन ओ भि नभि ना इत, आ, का न मे झऽर पड़ैत हो अए जेना ।

कल-कल ध्वनि , करैत बहैत अछि , मनो हा रि णी सरि ता , ला गि रहल ओ अल्हड़ सन , आ, गौ रबा हि भेलि को नो बनि ता ।

चि ड़ै -चुनमुनक खग -ध्वनि मे, चुम्बक सन हो इत अछि आकर्षण, कि ए लगैत अछि गी त ओ? हो अए ओ को नो , तुमुल क्रन्दन।

देखय गेलहुँ ,जलनि धि को ना , क्री ड़ा करैत छथि जो आरि सँ, ला गल, सिं धुक मो न अपने बेकल, उत्फा ल नि ज वा रि सँ।

सा रस -झुण्ड, फा नल नदी के,

आ उड़ल अनन्त अका स मे, को शि श ओकर उनटे ला गल,

भुतला ने जा ए ,प्रया स मे।

सि हकल एहन सुन्दर बसा त, कि ए नहि स्पर्श मे स्फुरण? मो न के नहि दऽ रहल अछि , शां ति शी तलता -त्वरण।

चिं तन , अन्वेषण केलहुँ, कतए अछि ई अन्हा र? अछि ई अंतस्- तम ,किं वा , पसरल अछि ई, बहा र?

घो र शो धक बा द बुझलहुँ,

रवि नहि मलि न ,ने कनैछ अका स, धरती , चा न, रवि , व्यो म, तरेगन, सभ मे भरल उज्ज्वल प्रका श।

गा छ -बि रि छ, सिं धु,धुतरंगि णी , झरना , खग, संगी त, बसा त, सभ मे ऊर्जा भरल अछि ओहि ना , तरु अछि हरि अर, हरि अर पा त।

ई अछि हमर दृष्टि क दो ष, मो न मे पसरल अछि अन्हा र, ऋणा त्मकता -तम मो न मे पैसल, तेँ लगैत अछि ,दुनि आ बेका र।

सका रा त्मक सो च सँ, जखन भगअओलहुँ मो नक भी तर अन्हा र, वि लक्षण ला गि रहल वएह दुनि आ, मन मे बहए ला गल सुख -धा र।

सभटा तऽ सो चक फेरा छै, सुख -दुख ओकरे खेड़ा छै ।

सदि खन ,वि चा र सका रा त्मक, रहय पसरल मन मे ओकरे इजो त, वएह अछि शुभ, सुभग, स्वा स्ति , जि नगी मे जी तक,वएह अछि स्त्रो त। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ४.२.निर्मला कर्ण- जूड़ शीतल निर्मला कर्ण जूड़ शीतल

मिथिलाक पावन त्यौहार जूड़ शीतल, अद्भुत अलौकिक दिव्य अनुभूति | प्रातः काल नींद में माथ पर बासि, शीतल झलक सँग स्नेहिल थपकी | बहुत याद अबैत अछि आई हमरा, माय काकी क आशीर्वादक निर्झरिणी | जहिया सँ शहर में बसलहुँ, पूर्णतया बिसरि गेल छलहुँ | अपन बच्चा सभ के दैत रही, हमहुँ ओहिना जल सौं थपकी | मुदा अपने में लगैत छल, किछु अपूर्णताक आभास | जाबे धरि हम जल लय जाई, ओकरो सबहक निन्न खुलि जाय | कारण वैह एकमात्र रहल, शहरक आपाधापी सँ घेरायल | पहिने स्कूल फेर कॉलेज, आब प्रातः ऑफिस में ओझरायल | बिछान पर शीतल जल सँ, जुरायब बिसारि देल हमहुँ | कनि बिछान भिजवाक चिन्ता, सेहो रहैक जागरूक सन्तान के l आब आवश्यक बुझना जाइछ, समझदार जागरूक भेलाक बाद l अपन कीमती बिछान के, भीजs सs बचेनाई सहेजनाइ l आब पाबनि अधूरा कोना, नहि रहत अहिं कहु l सब पाबनि के केलहुँ, अपना हिसाबेँ शहरीकरण l फेर पाबनिक पूर्णता, आनब कोन विधि l पूर्णताक लेल परम आवश्यक, अछि निश्छलता जे अछि l हमरा सबहक जीवन सँ, आब विलुप्त भय गेल l आधुनिक भेलहुँ हम मुदा, माय दादीक पुरातन वैह सँस्कार l अंत:स्थल में बसल अछि, आब बुझाइत अछि हमरा l नहि आधुनिक बनि पयलहुँ, नहि बिसरलहुँ अपन सँस्कार l आधुनिक जीवन सँ ओझरायल, प्रिय पुरातन हमर अपन सँस्कार l प्राचीन अर्वाचीन भेल एकसार, हम दुनूकेँ बीच भेल छी गड्डमड्ड l भँवर में फँसल प्राणी सन , बेकल सोचैत छी किम्हर जाऊ | आधुनिकता छोड़ि नहि सकैत छी, सँस्कार बिसैर नहि सकैत छी | आई एतेक व्यकुलताक सँग, किएक हमरा याद अबैत अछि | अपन पाबनिक निश्छलता, दिव्यता अपन दबल सँस्कार | सब याद दिएलक हमरा, एहि बेरक जूड़ शीतल पाबनि | एहि पाबनि में हम गेल छलहुँ, अपन गाम अपन जन्मस्थान | बहिन भौजी भतीजा भतीजी, सभक भेल छल घर में जुटान | आखिर अवसर छल भातिजक, शुभ विवाहक पावन संस्कार | गोष्ठी जमल छल बहिनक सँग, बीत गेल रातिक तीन प्रहर | प्रातः कालक मन्द मनोरम, वातावरण में रही निन्न में डूबल | माथ पर भेल मधुर स्पर्श शीतल, आँखि खुजल देखैत छी ओतs | ठाढ़ छैथ हमर बड़की भौजी नेने, अपन एक हाथ में जल भरल लोटा | दोसर हाथक शीतल जल माथ पर, हमर केश सँग बिछान तकिया भिजबैत | आशीर्वादक निर्झरणी सेहो बहबैत, हम विमुग्ध भय हुनका रहलहुँ देखैत | याद आबि गेल अपन बाल्यावस्था, अहिना त माय सेहो दैत छल | सब साल शीतल आशीष, रहैत छल सँग मायक हाथ हमर शीश | माय के याद कय आँखि नोरा गेल, भौजी में माय के दर्शन पाबि l हिया में जागल श्रद्धा हमर हाथ, झट हुनकर चरण पर पहुँचि गेल l मष्तके टा नहि आत्मा तक, हमर भय गेल शीतल निर्मल l आधुनिकता के त्यागि हम, पुनः भेलहुँ अपन मायक संस्करण l आब हमर जूड़ शीतल नहि रहत, कहियो आधुनिकता भरल अपूर्ण l सदिखन होयत मायक नेने सँस्कार, शीतल सरल सौम्य सम्पूर्ण l अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ४.३.किशन कारीगर- आ रे सुग्गा आ आ (बाल कविता) किशन कारीगर आ रे सुग्गा आ आ (बाल कविता)

आ रे कौआ आ आ आ रे सुगा आ आ

आ रे मैना आ आ आ रे बगरा तहूं आबि जो

चिड़ै चुनमुन सब आ आ दौगा गौगी बौआ संगे खेलो जो

हे सुग्गा तूं बौआ के रोटी नै खैहियै हम तोलो लै रोटी रखने छियौ.

है मैना आइ तूं कतअ रैह गेलही हमर बौआ तोरा तकै छेलौ

आ रे बगरा जल्दी आबि जो हमर बुच्ची कटोरी मे पानि रखने छौ

चिड़ै चुनमुन सब चूं चूं चीं चीं करै हमला बौआ के कते नीक लगलै

आ सब मिल के खेलै जाइ जो हे खेलाइत खेलाइत झगड़ा नै करै जाहियैं

आ रे सुग्गा आ आ बौआ संगे खेलो जो अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ४.४.कल्पना झा- व्यग्रता कल्पना झा व्यग्रता

अनमन ओहिना लगै छल जेना चुल्हि क आगी, झबरल केश के बीच जेना आंखि के डिम्बा तर सं किछु मोन के खगता ! एहन व्यग्रता ? ने अपन ने आन, तयौ जीबैत रहै मोन क प्राण, टिस टिस करैत रहै ओ मोन क कोन, ककरा कहू कतय धरु बडु ओछाहि अछि इ समय क पात्र, ने बाट ने बटोही भेटल , तिल तिल क ओ मोन क खगता बिलाईत रहल, शब्द क रचल श्रृंगार सं पांति पांति गमकैत छल, जूहि जाहि सब सजल तयौ मोन कटाह बोन में छिछियैत रहल। -कल्पना झा, बोकारो अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ४.५.डा सुमंगला झा- मैथिल डा सुमंगला झा मैथिल आपन आँङन आपन बाड़ी, अपनहि खेत के साग-खेसाड़ी। जीभ म स्वाद! गड़ल अछि एहैन, पाँचों-सितारा में, पाओल न तेहेन। कदीमा-फूल,  तिलकोड़क तरुआ, बड़ी-भात संग! करैला के भरुआ। पटुआ-साग-तिम्मन,अल्हु के सन्ना, मिथिला प्रसिध्द अछि खीर-मखाना। छुटपन, पियै छलहुँ सुराही के नीर, हरदमें रहैत छल,दुआरो पर भीड़। बेल,पुदीना आओर नेबो के शरबत, कहियौ न बुझलों,छाछ के माहत । आब जों बसल छौं,कंक्रीट क देश में, बिसलरी बोतल किनू, रहू विदेश में। फोन स समय लिय, तखन करु भेंट, बिन बतैने पहुँचब त बंद भेटत गेट। गप-शप, गीत-नाद, भोर-साँझ झगड़ा, बूझै में न कहियो आएल की छल बखड़ा। बुढ़ारी में अलगे स दिन काटू असगर, रहि रहि बुध्दि भाँसत, सौसें देह लड़बड़। अंतकाल मन पड़त, पुरनका ओ अंङना! गोतिया-नेना, बाड़ी-झाड़ी, छनकैत कँङना। प्रगति विशेष भेल, ललना सब विदेश गेल, मिथिला के धिय-पूत, दुनियाँ में पसैर गेल। कोणनिचिवा, गुटेनमॉन, नि हाओ, हैलो-हाय! जापानी, अंग्रेजी, जर्मन-चीनी सीख जाय, पूजा-पाठ,कर्मकाण्ड! संस्कृति छुइट गेल, आन भाषा सीख-पढ़ि, मैथिली बिसरि गेल। डॉ सुमंगला झा। (डा सुमंगला झा, PhD, हसनत महिला कॉलेज बंगलुरु के सेवा निवृत्त हिंदी विभागाध्यक्ष छथि) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। 186 || http://www.videha.co.in/ ISSN 2229-547X VIDEHA विदेह ३६८ म अंक १५ अप्रैल २०२३ (वर्ष १६ मास १८४ अंक ३६८)|| 187

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4 z Les e 2b ae eet पर देओर-भैंसुर के छोड़िक' wa: सभ केँ सैह we 2." Ss रन We a |) IN अभ्यास भ' गेल seat.” पं दर We We «रु: 2 | दाइ (दादी) कहैत छलीह जे कनिजा काकी wae t py we, wet eee : oF पाँच बहीन छलीह | भाइ 'एक्को टा नहि । दरिद्र | WES me Ty. ta ge | पिता ag स'ख सँ नाम रखने रहथिन, जानकी | nee न हि रस , ww ig f i 4 oh पाँचो बहिन मे सभ सँ पैघ छलीह । अपना yar / रु“ | |! पाछाँ चारि गोट बहिन केँ a! अनबाक दोखी . (| A है Y सर छलीह। खिसिआयलि माय सदिखन दुरजरु ै; r Las 0 Carer A <= > की | wah ta छलथिन, *' अलच्छी! केहन जरल ९ vA aay iy भाग ae! आयल जे... ।" DS EZ a! aw | जानकीक जीवन-संघर्ष छठमें वर्ख में प्रारंभ 7 xy oe Ps = Fu भ' गेल रहनि। पिता भोरे स्नानक बाद शालिग्राम Ne 2: Gg की kes, पूजन क' निकलि जाइत छलथिन जजमानक के aaa oa A: गाम। deft चौक लग भीष्मक टोलक वासी “ कि... गा ba. | श्यामानंद पुरोहित केँ जजुआर गाम धरि नित्य WS दि reek Wy wat जाय पड़ैत छलनि। हुनक दिनचर्या चारिं aa भोर सँ शुरू भ' जाइ छलनि...आ संगहि दिनचर्या शुरू भ' जाइ छलनि जानकीक... । भोरे मारने छलाह से चुक्की मारि लेलनि अछि। करबाक अछि? ककरा धँसतै ? मायक करेज ! उठिक' फूल लोढ़ब...पूजाक बासन माँजब...ठाँव आसन बदलि क' सभ दही सुड़कि रहल ओ किछु खा लेबाक हठ करय लागलि रहय। करब...। आ तकर बाद मायक काज। रतुका छथि... । ओकरा टारय लेल अनेरे कनेक कठोर होइत अपैत-औँइठ बासन सभ माँजब... । घर-आँगन «अरे के खुअबैत अछि आइ-काल्हि, एतेक हमर कंठ अवरुद्ध भ' गेल रहय आ आँखि मे. बहारब...चूल्हि नीपब. ..तरकारी काटब...चाउर हृदय Gites?” नोर सेहों ढबढबा गेल रहय... । कहुना ओ अपन बीछब... । एतेक॑ भेलाक बाद माय तैँ लागि जाइत “apron काकी छलीह qe भागमंत!”” हठ छोड़ि देलक । हमरा ककरो सँँ गप्प करबाक छलथिन भानस-भात मे... एम्हर 'छोट-पैघ काज **आह ! ताहू में कोनो संदेह ? एहन सपूत . मोन नहिं होइत रहय। ...एहिं मन:स्थिति मे जखन ay 'जानकीए केँ कर ' पड़ैत छलनि--जेना इनार सभ केँ जन्म देनिहार भागमंत नहि ते आर की हम अपन कोठली मे आबि पड़ल रही तखन पर सँ जल भरि क' आनब...छोट-छोट बहिन 'कहल जयतीह?'' efron काकीक ue अनपेक्षित आ भीषण सभ केँ सम्हारब... । घरक लगे मे प्राइमरी स्कूल *देखियनु पुण्यक प्रताप जे मर' सँँ पहिने . परिणति पर सोचैत-सोचैत लागि रहल छल जे. रहनि तथापि ओ 'कहियो स्कूलक मुँह नहिं देखि 'ककरो सेवा करबाक कष्टो देलथिन 2” ma wife जायत...। ई होयबाक नहिं चाहत. tee... | “Sade कहैत छी । एक तैँ उत्तयणक छलै...। काकी एतेक दुर्बल तँँ नहिं रहलीह जानकी केँ दू गोटे सँ भरपूर fate आ समय, दोसर मृत्यो कोना क्षण मे क्षणाक भेलनि। कहियो... eg सुनल आ किछु देखल wa वात्सल्य भेटलनि...। एक a पिता ag मानैत amt wer d नहि Fafa...” जे जिनगीक हिंसक आँखि मे आँखि गड़बैत रहथिन। नाम रखने रहथिन जानकी, मुदा Ta 'एक कात में ठाढ़ हम चौंकि पड़ैत छी...। कनिजा काकीक मुखाकृति पर कहियो संभावित कखनो वैदेही तेँ कखनो मैथिली कहि सेहों सोर मोन dea अछि जे fre बाजी। मुदा, एखन पराजयक आशंकाक लेशो धरि नहिं झलकल aT ।दोसर गोटे छलथिन बड़की पितिआइन। बाजिक' लाभे की ? आ ई टिप्पणी तँ मगन मोनक salt. । तखन ई काज ? कहीं एहन तँ नहि... ? . गाम भरि में कथकहिनी on गितगाइनक रूप में असहज टिप्पणी अछि। एहिं पर प्रतिक्रिया की 'एतनी टा रहथिन कहाँदन जहिया व्यास प्रसिद्ध। कनेक कड़गड़ सुभावक। APT अपन करब? आ कोन फूसि कहलकै? ठीके ने कका बिआहि क' अनने रहथिन हुनका। हुनका Ue बड़की देयादिनी सँ कनेक डेराइत छलथिन। 'कहलकै... । की कष्ट भेल हेतनि... ? दू सै चारि dda df जाउत-जइधी सभ छलथिन। साड़ी. ते” जानकी पर तनल बड़की 'काकीक स्नेह- मिनट मे सभ समाप्त...। aie! हुनका we धरि नहि सम्हारि पबैत छलीह । aca सुरक्षा-क्षत्र केँ देखि मोनहि मोन सुनगैत a ag कहिया भेलनि? यदि भेलो होनि deed cere खसि पड़थि। जाउते-जइधी सभ नाम. छलीह, मुदा प्रकटत: लहकि नहि Vea छलीह | 'कहलथिन नहि... । कहबो कयलथिन तैँ कष्टक देलकनि--कनिजा wet hed सभक ah कनिजे काकीक मुँहें हम सुनने रही जे गीत aR नहि--निसाफ करय लेल...आ से...। ... कनिजे काकी बनि गेलीह। नेनपन मे हमरा गयबाक लूरि आ जितिया, सप्ता-विपता, ओहिं दिन अंत्येष्टि-संस्कार सँँ घुरल रही । आश्चर्य लागय जे हम तँँ हुनका कनिजा काकी seer, Aart आदिक कथा कहबाक आँगनक मुँह पर माय भरि लोटा जल, नीमक कहिते छियनि हमर बाबूजी Set सैह Hea आकर्षक-मोहक ढंग ओ अपन ओही बड़की aa आ ललका सुखायल मिरचाइ राखि देने छथिन। ई कोना भ' सकैत छै? ई तँँ पढछाति जा. काकी a सिखने रहथि... । wa मिरचाइ केँ दाँत सँ काटि...थुकड़ि...नीमक क' स्पष्ट भेल रहय जे वस्तुतः टोलक संबंधे हुनका स्परण नहि रहनि जे नेनपन में कहियो पात चिबा जल सँ pes कयलहूँ आ पयर ओ हमर बानुए जीक काकी लगधिन। जें कि 'कनिजा पुतरा, सतघरा वा कितकित खेलबाक deg) चापाकल पर जाय फेर सँ स्नान हमर घरक बगलवला आँगन मे ओ रहैत ete अवसर भेटल होनि । जनमिते परिस्थितिक ea ware... जाह ! दतमनि तँँ आइ करबे नहि. ते सभ केँ कनिजा काकी कहैत देखि हमरो वैह . वयस्क बना देल गेल छलीह | धूआ बालिकाक 'कयलहूँ... । कखन करितहूँ ? छोड़ ! कोन भोजन कहबाक अभ्यास भ' गेल रहय। हमरे किऐ? आ मोन वयस्कक । प्राय: TIRE वर्खक रहल ns 22 | 2iAco!, अप्रैल-जून, 2008

हेतीह तँ पंचपुत्रीक पिता केँ हुनक fares नचैत रहल...। गोर दपदप छौंकी सन छरहर दिन fet Sra दिन कतहु gra होइ ? सप्ता- चिन्ता सवार Fah... । जजमान परमेश्वर ठाकुर धूआ...छूरी सन पातर ठोर...कनेक भरल-भरल विप्ताक कथा मे सेहो रानी ad पुछने रहथि देवी, लग चर्च कयलथिन तैँ किछु दिनुका बाद at गाल...पैथ-पैघ किछु बजैत जीवन-रस सँ भरल “sant दुःख लेबैं कि बुढ़ारी दुःख? दुःख a कहलथिन, “'मुरैठ मे हमर पिसियौतक aaa आँखि...अँउठिया केस...कुल मिलाक' सोहनगर are हालति में भोगहि पड़तहु । अपराध भेल 'एक टा लड़का छै। दू भाइक भइयारी । पैघ भाई. चेहरा... | हुनका कहियो हम लहक-चहक वला de dre पति सँ। yar, det आत्मा छौक विवाहित । छोट कुमार छै। कनेक पंडित प्रकृतिक कपड़ा पहिरने नहिं देखलियनि... । भ' wee शुद्ध। ते इच्छा पूछि रहल छियौक | बाज ! नवारी अछि। सत्यनारायण पूजन, मूड़न, उपनयन, कम उमिर में TA होथि । मुदा, हुनक जे पुरान- Fs लेबैं कि बुढ़ारी दुःख ?'', देवीक प्रकोप fore करा लैत अछि । देख'-सुन' मे बड़ बेस। . सँ-पुरान छवि हमर मानस मे अंकित अछि che सँँ भयभीत रहितहूँ रानी बुधियारी सँ सोचैत थोड़ेक जमीनों छै। यदि cies होअय dee में एवकों टा एहन नहिं अछि जे ओ एकपढ़िया विनम्र-चिंतित स्वर मे चयन कयने रहथि, प्रयास करी। हम जनैत छी जे हाँ के कैंचाक ise’ कोनो दोसर साड़ी मे A. “नवारी ged सहियो लेब मुदा बुढ़ारी दुःख fee अछि। तँ चिन्ता नहिं कयल जाओ। जजमनिका मे कहियो काल पति केँ ढंगगर रंगीन. तेँ सहलों ने जायत।'' सप्ता-विष्ताक कथा में बिआह रातुक खर्चों देवा देव... । श्रीविहीन संत्रस्त . साड़ी भेटि जाइन dea में जोगा क' सैंति लैत रानी केँ तँँ 'तथास्तु' केर आश्वस्ति भेटि गेल श्यामानंद पुरोहित के लागल रहनि जेना केओ छलीह--ई सरबन बाबूक कनिजा लेल...ई राघव रहनि, मुदा कनिजा काकी केँ ? ओ स्वयं कहैत थापड़ मारने होनि ya hem ओ ' बेटी बेचना जीक कनिजा लेल...आ ई गुंजाक लेल...। _. छलीह, '' 'बौआ, हमरा लगैत रहय जे आब किछु 'कहयबाक संभावित कलंक के अवधारैत अप्पन इच्छा-अभिलाषा-लालसा के. ad आर... जीवनक अभिशप्त दीर्घ कालखंड जानकीक बिआह क' देलथिन। आ एहिं ae” अनठियबैत cada ik सँ राति at अखंड बीतय वला अछि... । aI, कहाँ जनैत रही जे बालवधू af जानकी उर्फ कनिजा काकी एहिं. मेहनति करैत ओ कोनों तरहेँ अपन घर केँ कथा कथा छैक आ जीवन जीवन... । कहाँ जनैत गाम में अयलीह... । सम्हारैत रहलीह...पाइ-पाइ केँ जोड़ैत ects रही जे बसात के मुट्ठी मे पकड़बाक मायक उमिरक जेठ देयादिनी आ सिनेही en संतान सभ केँ पढ़यबाक प्रयास करैत ware... |” afte छत्रछाया मे कनिजा काकीक stores रहलीह। बड़का बी.ए, क' ट्रेनिंग कयलथिन aa! कनिजा काकी कहाँ जनैत रहथि जे नव अध्याय पहिलुके अध्याय जकाँ छलनि । फेर. आ हाइ स्कूल मे शिक्षक बनि गेलथिन। seas फसिल लगा क' संभावित उपजाक सपना देखैत ae कड़ाचूर मेहनतिक दिनचर्या...निरन्तर...। सँ बेसी प्रखंडक राजनीति में रुचि लैत मिथिलाक कृषक लोकनिक सपना जेना प्रतिवर्ष प्राय: बारह ade बाद देयादिनी के लाग' अनौपचारिक रूपे सक्रिय रहनिहार सरबन बाबू बाढ़ि में बहि जयबाक लेल अभिशप्त छनि, 'लगलनि जे भीन होयब जरूरी छनि। grata कँँ आइ के नहिं चिन्हैत छनि? छोटका राघव aie हुनको सपना मात्र सपने aa’ रहि बेसी हुनक Wig सभ केँ। निरन्तर sees मुदा दिशा भटकि गेलथिन। हाइए स्कूल मे रहथि . जयबाक aa अभिशप्त of... । से जनितथि तँ 'परिणति अन्तत: भीन-भिनाउज में भेलै। जेठ कि गामक गँजेड़ी सभक संपर्क मे आबि गेलाह।. जेठ पुत्र केँ शिक्षक बनैत on छोट केँ पेट्टी जन जेठांशक नाम पर नीक-नीक खेत-पथार. पढ़ाइ मे कम आ चिलम सँ एक बीत ऊँच धधरा area रूप में amit बढ़ैत देखि एक at सभ चुनि लेलथिन। कनिजा काकी छटपटा क' sera’ में बेसी मोन लाग' लगलनि... । Afar मृगतृष्णा में नहि फैसितथि... । afe गेलीह... । मुद्दा, पैघ भाय केँ पिताक आदर. नहिं क' सकलधिन। एखन ठीकेदारी मे लागल पोता-पोती केँ तेल मालिश करैत...स्नान देनिहार dda धनी व्यास कका हुनका एतबे a छथिन। बेटी गुंजा बेस चंसगर रहथिन। करबैत...सुग्गा कौर, मैना कौर खुअबैत...रंग- 'कहथि, “हाँ fag ae ag भगवान पर. फर्स्ट डिवीजन सँ सप्तम बोर्ड कयलघिन, तथापि. बिरंगक खिस्सा-पिहानी सुनबैत ओ निरंतर मगन भरोस राखू। सभ ठीक भ' FT" बेटी रहथि। इच्छा vied पाँच किलोमीटर दूर रह' लागल Belle | आब तँँ हुनका UF टा आर की कयलनिं कनिजा काकी? अप्पन कमतौल बालिका उच्च विद्यालय मे पढ़य नहिं cer छलनि। बस...किछु दिन नीक wat मेहनतिक अतिरिक्त भगवाने पर date जा सकलीह... । आब तँँ सासुरों बसना ate सुख भोगि ली... । आ तकर बाद farsa में सेनुर कयलनि। कड़ाचूड़ मेहनति क' अपन गृहस्थी. aed भ' गेलनि... । नेने आँखि मूनि ली... । सुनिक' एक दिन कतेक के सम्हारलनि। तीन साढ़े तीन बीघा जमीन... 'नहि जानि कनिजा काकी हमरा एतेक नीक . कातर भ' उठल रहथिन व्यास कका... | जेना बाढ़िक मारल। उपजाक नाम पर नामे लेल. feed लगैत छलीह? भ' सकैए हुनक वत्सल कोनों बच्चा केँ अपन माय सँ बिछुड़ि जयबाक ae... कने-मने पड़िताइ सँ होइत पतिक que हमरा अपना दिस टनैत होअय। खाहे आशंका FEI’ देने Oe... आमदनी... । एहन स्थिति में गृहस्थीक wet कोनों आन कारण होइक, मुदा हमरा हुनका T प्राय: सत्तर वर्षक एहि बच्चा केँ की कहल ससरब मोश्किल रहनि। fg करब जरूरी. पटैत खूब छल। हुनका सँ नहू-नहू स्वर मे aT जाय? दिन-राति 'जानकी-जानकी रटैत रहयवला 'छलनि। हारिक' लाज-धाक केँ ताख पर रखलनि . लोकगीत वा कोनो कथा सुनब हमरा ag नीक . ई बच्चा कोना रहि पाओत हमरा बिना? एगारह ahi बड़की काकी सँ सीखल बिद्या art लगैत छल । एकर अतिरिक्त हुनक नेनपनक स्मृति ada उमेर सँ ओ देखैत आबि wa छथि अपन देलकनि। अँगने-अँगने जाक' कथा-पिंहानी. हुनके मुँहें सुनैत हमरा लगैत छल जेना ar एहिं बच्चा केँ। दुनियादारी सँँ प्राय: अनवगत 'कहब...गीत गायब...दनौरी, तिलौरी, चरीड़ी पाड़ि रहस्यमय प्रदेशक यात्रा क' रहल होइ... । एहन ई बच्चा कथू लेल कहियो चिन्तित नहिं भेल। देब...अहिपन-पुरहर-कोबर लिखि देब...धान- wer मे कखनों क' हुनक जीवन-संघर्ष आ fag जरूरी होइक तँँ जानकी ! कतहु सँ घुरिक' गहूम फटकि-बना देब आदि-आदि काज सँ वर्तमान मानसिक स्थितिक झलक सेहो Ba आबय तँँ जानकी! बड़की पुतोहु के ay fag आमदनी भ' जाइत छलनि... । गाड़ी HET . छल... । जेना-जेना घिया-पूता सभ पैघ भ' रहल अनसोहाँत लगनि। बुढ़ारी मे Hag लोक a ससर' लागल रहनि। 'छलनि...पढ़ि Wa छलनि... तेना-तेना SAH एतेक...। जानकी...जानकी...जानकी ! वाह दे ओहि दिन कोठली में पड़ल-पड़ल हमरा. लाग' लागल रहनि जे आब किछु बर्ख आर! जानकी! 'कहलकै जे हम सुनरी कि पिया सुनरा आँखिक आगाँ कथा कहैत कनिजा काकीक छवि. तकर बाद सभ किछु ठीक भ' जायत। सबहक गामक लोक बनरी-बनरा! Tig केँ जे मोन es Ce अतिका, अप्रैल-जून, 2008 / 23

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'ऐन एही अवसर पर सरबन बाबू आ राघव cee मखानक ? रसगुल्ला मँगा दियनु... ?'' तात्पर्य ada कालखंड में बेटा-पुतोहुक व्यक्तित्वक प्रवेश एहिं लंका कांड में भेलनि। ओहों दुनू ई जे एक टा सच्च: विधवा जे-जे वस्तु खा सकैत. जाहि अनपेक्षित पक्ष सँ ओ नहू-नहू परिचित गोटे परस्पर वाचिक आक्रमणक क्रम मे ई बिसैत अछि वा जे-जे उपलब्ध भ' सकैत छलै, सबहक Acie अछि ताहिं सँ आजुक पक्षक सामंजस्य cafe गेलाह जे एक-दोसराक सहोदर छथि...। नाम गना देल TS... मुदा कनिजा काकीक. कोना बैसाबथि? ओ टुकुर-टुकुर तकैत ares आधिक्य में समक्ष ce शत्रु ewe रट, “aie बौआ! नहि कनिजा! हमरा. रहलीह...। दुनू ae सटल Wah... | हुनक अगम्यागमनक आरोपी घोषित करैत एक टा. भूख नहिं afer” ot dae नहि बूझि wf चुप्पी केँ स्वीकृति बूझल गेल... । हिंसक संतुष्टि सँ तृप्त होइत tee... । कलह. रहल छलीह जे जाहि आँगन मे आइ एते ‘on’ ओही दिन सँ प्रारंभ भेलै। पहिल बढ़त गेलै... बढ़ैत गेलै। नौबति मारि -पीटि धरि अट्ठाबज्जर खसल होइक ओत' ककरों कंठ मे. पार भेटलनि जेठ पुत्र सरबन बाबू केँ, हुनके vets गेलै... । ई तँ रच्छ wa जे हल्ला सुनि fey कोना aie सकैत छै? इच्छाक आदार करैत । ई घोषणा करैत पंचलोकनि fang लोक आँगन में gfe गेलाह आ दुनू भाड़ ‘der दिन भोरे अधिकांश पाहुन विदा a? पंचैती समेटबाक लेल उद्यत होइते रहथि कि के अलग कयल गेलनि। तथापि दुनू देयादिनी गेल रहथिन। टोलक दू-चारि टा लोक आ एक- आँगन दिस हल्ला Sod... | हल्लाक केन्द्र पर अपन नेनपन सँ ल'क' ag धरि freee दू टा पाहन केँ ल' दुनू भाँड दलान पर श्राद्ध नजरि पड़िते सभ स्तब्ध रहि गेलाह...। माँझ दी Tat सभक बरखा करिते रहलीह... | wis हिसाब-किताब करव लेल बैसलाह। आँगन मे दुनू देयादिनी परस्पर भिड़ल छलीह... । झगड़ा तँँ कहुना शांत भेल, मुदा लोक ay मामिला फेर ओझराय लगलै। ओझराइत- असल मे भेलै ई जे पारक घोषणा होइतहि जेठ- कारण जानि क' चकित छलाह । एतेक साधारण. ओझराइत पहिने गारिक अध्याय चललै...फेर set दुरुखाक केबाड़क पाछाँ सँ चूड़ी खनका बात लेल एतेक झगड़ा? त्रयोदशा होयबाक लाठी चलबाक नौबति आबि गेलै... । आब एहन क' सरबन बाबू के इशारा कयलथिन। ओ लग कारण ag राति घर में माछ वा माउस बनब स्थिति देखि लोको सभ बाँट-चूट कइए देव. गेलाह तँँ देखलनि जे पत्नीक हाथ मे मायवला स्वाभाविके छलै। मुदा माछ आनल जाय वा. उचित बुझलनि। ओहि fer ad नहि, मुद्दा दोसर gon टिनही बाकस छनि। हुनके दिया कनिजा माउस, से निर्णय नहि भ' पाबि रहल छलै। दिन पंच सभ जुटलाह आ भीन-भिनाउजकं.. काकी केँ अपन घर चलबाक समाद अगुतायल- सरबन बाबूक सार केँ माछ बेसी नीक ata प्रक्रिया प्रारंभ भेल। प्राय: सभ चल-अचल हड़बड़ायल स्वर मे देलथिन जेठ जनी। समाद vera राघव ललाक ससुर केँ माउस fen | संपत्तिक बखरा लागि गेलाक उपरान्त एक aT सुनियो क' कनिजा काकी *की-करी, की- 'एतहि ओझरा गेलै आ बतकुच्चनि होइत-होइत एहन वस्तु बाँचि गेलै जकरा बाँटब असंभव नहि 'क सोच मे पड़ल रहलीह...। संपूर्ण ua’ धरि पहुँचि गेल रहै... । आब तँँ eae छलै...। ओ वस्तु wag, टेंगाड़ी, gest वा. घटनाक्रम हुनका लेल भीषण बेदनादायी cafe tere जे चूल्हि साझी रहि ate सकैए,..। आरी माने कोनो प्रकारक हथियार सँ काटिक' salt... । एहिं विखंडन केँ रोकबाक art बाट आइए आ एखनहिं बाँट-चूट भ' जाय। वा तराजू सँ जोखि केँ बाँटल नहि जा wa aie सूझि Wa छलनि। आब विखंडन केँ we कलह कोनो नव बात नहिं छलै। we आखिर ओहि वस्तु के बाँटल जाय do रोकबाक कोन कथा? ओ तँँ भ' चुकल रहै। 'पहिनहूँ कतोक बेर दुनू भाँड टकरा चुकल छलाह। कोना बाँटल जाय? दोसर, दुनू भाँइ मे सँँ कोनो.. संपूर्ण वीभत्सताक संग! ओ स्वयं की करथि? दुनू के एक-दोसराक नेत पर शंका छलनि। दुनू ओहि वस्तु केँ बाँटय नहि चाहैत छलाह । दुनूक कि एतबहिं मे आँगन में अनघोल मचल... । के होनि जे दोसर महाबेइमान अछि । एम्हर हम इच्छा eh जे दोसर गोटे अपन दावा छोड़ि 'प्रतिवन्द्वी देयादिनी जकाँ छोट जनीक सेहो 'घर लेल खटैत-खटैत aR रहल छी आ ओम्हर देअय आ ई पूराक पूरा हमरे भेटि जाय... st नजरि प्रत्येक घटनाक्रम पर आ कान प्रत्येक स्वर ओ चोरा-चोरा क' पाइ जमा करैत अछि। एहिं. वस्तु छलीह कनिजा काकी ! पर रहनि। जेठजनी दुरुखाक केबाड़ लग UE शंकाक आगि केँ लहकयबाक काज दुनू देयादिनी पंच लोकनि चकित vere! वाह रे छलीह छोट जनी दलानक कोठलीक खिड़की समय-समय ag योग्यतापूर्वक करत आबि . मातृभक्ति ! ! ang काल्हि एहन मातृभक्त कत' लग तत्पर! पारक घोषणा होइतहिं छोटजनी ea Bahr... मुदा आइ, आइ तँँ हद भ'. tae पड़ैत अछि? पुतोहुक dad sista जेठजनी केँ लपकि क' सासुक कोठली में गेलै। कदाचित दुनू पक्ष oe दिनक प्रतीक्षा मे जाय। पुत्रों सभ मे एहन मातृभक्ति दुर्लभ भ' जाइत...सासुवला टिनहीं बाकस ल'क' 'छल। कनिजा काकी अपन परिवार में होइत oe गेल अछि । ag भागमंत छथि एहन माय। ठीके, . धड़फड़ाइत दुरुखाक ars लग अबैत...चूड़ी घिनाउन विस्फोट केँ टुकुर -टुकुर देखैत रहलीह व्यास stag सोचि के नाम रखने हेताह अपन. खनकबैत...आ पति केँ किछु फुसफुसा क' कहैत q आ सोचैत रहलीह जे की हमर खून मे एतेक. दुनू पुत्रक। नामक प्रभाव किछु ने किछु तँँ पड़िते देखलनि। निमिष मात्र मे ओ सभ बात बुझि स्वार्थ भरल छल... । Baar! गेलीह... tag ! ई बात छैक ? फुर्ती ने देखियौ! ओहिं दिन तैँ बूढ़-पुरान सभ जेना-तेना अंततः पंचलोकनि दुनू is के एक दोसराक eel लगैए हम छोड़ि 24 आँखि आगाँ अपन बुझा-सुझा Gye केँ शांत कयलनि, ee मातृभक्ति केँ सम्मान देबाक उपदेश दैत एहिं आशा-अभिलाषाक अपहरण देखि जे चुप रहि. ‘4 भानस एक ठाम नहि भेलै। दुनू घर मे लोक सभ बात पर राजी क' लेलनि जे ओ सभ ' पार' लगा. जाय से एक बापक बेटी नहिं।' ओ झपट्टा मारिक' अपन-अपन इच्छानुसार भोजन बनौलनि। एम्हर लेथि। एक-एक सप्ताहक पार। माने ई aT बाकस के ध' लेलनि। छीना-झपटी में दुनू रहि गेलीह माय। तँँ ओहिं दिन दुनू aig Sa काकी बेरा-बेरी सप्ताह भरिक लेल दुनू परिवार देयादिनी असंतुलित भ' दुआरि पर सँ आँगन में मातृ-भक्तिक आदर्श प्रस्तुत करय लेल तत्पर रहल करतीह आ बेटा-पुतोहु के सेवाक अवसर खसलीह । चोट भरपूर लगलनि... । पंच सभक रहथि। पुतोहु ard आओर आगाँ -पाछाँ , “or! दैत रहतीह । की ? shor काकी ? कोनो आपत्ति. नजरि जखन पड़ल रहनि तखन दुनू गोटे बाकसक ई एक बेर कहथुन तैँ जे की aside aie? at की बजितथि? किछु बाजय aa कड़ी केँ पकड़ने अपना-अपना दिस घीचि 'छनि? ई निश्चिन्त wey मा! एकदम अमनिजा एक टा निष्कर्ष पर पहुँचब जरूरी छलनि। हुनक लेबाक प्रयास & रहल छलीह... । संगहि वाकू- Tah कनिको संदेह नजि yes eel माथ पर चकरघिननी भेल छलनि...। ओ बूझि. युद्ध चालू छल...निरंतर। एक-दोसराक बेटा, से बना देबनि । सेबैयक खीर बना दियनु ? ants aie पाबि wa छलीह जे विगत eae घरवला, भाय, बाप सभ केँ सोझे गीड़ि जयबाक भौपिका, अप्रैल-जून, 2008 | 25

धमकी देल जा We छल... | 'बाकस केँ फोललनि | ताहि खन कनिजा काकीक Taree प्रत्यक्ष आक्रमणक क्रम चलैत sare कनिजा काकी दुनू पृतोहु आ हुनका चेहरा मारकीन जकाँ मलिन-मटियौन भ' गेल. रहल...चलैत रहल... । सभक मध्य योजक चिह्न जकाँ वर्तमान संदर्भ छलनि...नीरक्त...निर्भाव...निष्प्रभ! आँखिक बुझबाक प्रयास क' रहल छलीह... | 'चारूकात असंख्य बादुर उड़ैत...कनपट्टी पर पंच सभ दुनू देयादिनी केँ डॉटिक' ware गिरगिट चलैत... । बाकस मे सँँ बहार भेलै...दू- अपूर्ण आशाक साइड इफेक्ट... 'कयलनि आ बाकस केँ सबहक मध्य मे आनल तीन या पुरान साड़ी...सेनुरक एक टा गद्दी जे आ ओही दिन सँ शुरू भ' गेलनि कनिजा काकीक गेल। कोन रहस्य छै Ue बाकस में? कि दुनू कदाचित साड़ी मे सन्हिआयल रहि गेल रहै...। जीवनक एक टानवीन क्रम... । कड़ाचूर मेहनतिक देयादिनी एहि बाकस केँ हथियाब' लेल एतेक व्यास ककाक एक या पुरान मैलछौँह फोटो, . क्रम... । ओना तँ ओ अपनहिं बैस क' खायवाली आफन तोड़ने छथि ?ई बाकस तँ कनिजा काकीक ale एक टा पुरान दुत्ती चद्दरि...आ एक कहियो नहि रहलीह, मुदा आबक कथा किछु दुरगमनिजा बाकस छनि जे हुनक बाबूजी ag जोड़ा पुरना खराम जे मृत्यु सँँ पूर्व व्यास कका. आने छलै... । जाहि बेटाक पार मे ओ रहथि, 'सख सँ देने रहथिन । तहिया जेहन रहल हो, मुदा Weta रहथि...बस्स ! दुनू देयादिनी केँ विश्वास घरक कोन काज नहि करथि? चाठर बिछब, aad भ' गेल अछि पुरान... बिझायल...प्राय: ate Sati दुरुखाक मुँह लग ठाढ़ि ओ लोकनि | चिवकस चालब, घर-आँगन बहारब, बच्चा सभ जर्जर सन... | ताहि लेल एतेक तमाशा। पहिने नहू स्वर में फेर जोर सँ निर्देश tale | केँ सम्हारब...माने ई जे कोनो-ने-कोनों काज में असल मे, दुनू बेटा-पुतोहुक मोन मे एक. जे बाकस केँ उनटि-पुनटि क' देखल जाय। लागले tea छलीह...। TAF केओ कमी 'टा अदूभूत आशा बहुत दिन सँ सुगबुगा wa मौलायल आस नेने दुनू भाँड सेहो एहि बात पर निकालि-निकालि क' फज्झति कर' पर तुलल vat... ई सभ जनैत अछि जे ओ सभ दिन. जोर देलनि। पंच मे सँ एक गोटे ईहो क' के wads कयल जाय? दुनू पुतोहु अपन-अपन मितव्ययी रहलीह अछि... । कहियो हाथ देखा देलथिन। किछु नहि ead! सभ टा वस्तु पार में हुनका पर ge रहैत छलथिन। हुनका खोलिक' खर्च नहि कयलनि। तखन तँ ओ. ओही मे राखि क' ताला लगा बाकस कनिजा. aH केँ शंका नहि विश्वास छलनि जे ओ अवश्य किछु-ने-किछु जमा करैत हेतीह । हुनका काकी लग राखि देल गेलनि। कुँजी सेहो हुनके महाबेइमान छथि...नमक हराम छथि ।जेठजनीक पास अवश्य कोसलिया हेतनि। एहन गुम्मी छथि द' ta गेलनि। एक टा पंच आग्रह करैत पार मे छोटजनीक दुआरि पर बैसि जायब वा जे बेटा-पुतोहु केँ हवा लागय देतीह... । जरूर कहलथिन, SIS सरबन बाबू, आब माय के हुनक बच्चा केँ दुलारब तथा छोटजनीक पार में बेटी लेल जोगाक' रखने हेतीह...। ओहो जे ल' जइयनु।'' हताश सरबन बाबू मरल मोन सै. जेठजनी सँ बतिआयब वा हुनक कोनो सौदा गुंजा अछि ने से माये जकाँ गहींर अछि... । मुदा बाकस उठां माय a क' आँगन गेलाह। .. दोकान a आनि देब कनिजा काकौक बेइमानी ताहि सँ की ? छोड़बनि थोड़े । आ गहना? भला “$ sora किऐ उठा क' ल' अनलहूँ। AAC जाइत छलनि... । रहरहाँ घुमा-फिराक' Tet छोड़ल जाय? फेंकि दितिये डबरा में वा द' fea ओकरे सभ व्यंग्य d कयले जाइत छलनि जे ओ अपन सभ WAT आ हुनक पत्नी केँ आशा छलनि | केँ जकरा सभक करेज फटैत wa एहिं Ga” टा कोसलिया बेटी केँ द' देलनि... ।एहन अवसर जे जेंकि राघव छोट बेटा छथि ते मायक. आँगन मे ठाढ़ि पत्नी हुनका डाँटय लगलथिन। पर बेटी आ नातिक लेल होइत गारि-सरापक Safer आ गहना पर हुनके सभक अधिकार ओ कनेक थकमका Tene ओम्हर छोट जनी . बरखा ETH आत्मा केँ हेहरु क' दैत छलनि... | 'छनि। ओम्हर सरबन बाबू दुनू व्यक्तिक सोचब . केँ ई बात खबखबा केँ लगलनि। Fd की safe क' उत्तर देव वा आपत्ति करब हुनक pati जे एक dah जेठ छथि, दोसर ae aaa अछि? ओ खौंराक बेटी अछि तँँ हमहू स्वभाव कहियों नजि रहलनि। मोनहिं मोन कूहीं माय सरबने बाबू केँ 'बौआ' कहैत छथिन तँ जलबारक बेटी छी। घुमा-फिराक' He करत होइत ओ एतबे सोचथि जे ओइ बेचारीक कोन स्वाभाविके हुनक अधिकार बेसी मजगूत छनि। Fea नजि awa? आ हम छोड़ि ea की? dea? ओ तैँ अपनहिं दैवक डाँग सँ थकुचायलि मुद्दा, दुनू पक्ष मे सँ कोनो एहिं मादे प्रकटत: “on सभक करेज fl wea? फटतै अछि । एकमात्र बारह बर्खक बेटा केँ कहुना क' चर्च नहि क' रहल छल। दुनू पक्षक कान पर ओक्कर सभक जकरा अपन बेटाक सराध लेल.. पोसैत ओ कतेक कष्ट सँँ जीवन बिता रहल 'एहि आशंकाक उल्लू बैसल छलै जे जैं बात. ढेउआक कमी होइ आ जे निर्लज्ज जकाँ बाकस अछि, से कोनो नुकायल छै ? केकरा नजि बूझल खुजि गेल तँँ दोसर पक्ष अपन हिस्सा ने माँगि. चोराक' as)” 'छै? तैयो एतेक गारि-सराप। 'लेअय! चतुर कुटनीतिक जकाँ प्रयास कयल जा ue ston आक़मण सँ जेठजनी 'जखन कखनों गुंजाक मादे सोचैत छलीह 'रहल छल जे अपार मातृभक्तिक प्रदर्शनक बले छिलमिला गेलीह । ओ आँचर उठाक' सूर्य दिस कनिजा काकी date छलनि जेना केओ करेज माय केँ अपना संग राखि लेल जाय... । एक बेर तकैत बजलीह, MS दिनकर दिनानाथ! जनिह'. केँ पकड़ि क' निचोड़ि दैत होनि... । कतेक दुलारू माय अपन पक्ष मे, अपन हिस्सा मे आबि गेलीह did... । जरल उगै छह...जरल डुबै छह... । धोंछी रहय बापक! पतिक sit बेटी केँ डाँटय के तँँ बाकसों अपनहिं आबि arm... te Ga सभ हमर बेटा केँ नजरि पर चढ़ौने रहैए,.. । तोंही seat हिम्मति नहि भेलनि हुनका। से आइ... | दुनू पक्ष साकांक्ष, सतर्क आ as oa...) निसाफ करिंह ' । हे नाथ! गुँहखौंकी सभ केँ मुँह कखनों क' अपन बेटी पर गर्व सेहो होइत छलनि। ven खिड़की लग ठाढ़ि छोटजनी देखलनि,जे a खदखद पिलुआ फरबिह' हे दिनानाथ!'' .. लगैत छलनि जे बेटी हुनको सँ बेसी साहसी दुरुखाक मुँह लग ठाढ़ि जेठजनी की क' wa aaa छोटजनी के सनसना के लगलनि। छनि। अपना नवारी मे लाख कष्ट WA 'छथि तँँ ओ जेना सेन्हे पर चोर केँ पकड़ि लेबाक wer घिनौन आक्रमण! नजि। आब अप्रत्यक्ष होनि...कम-सँ-कम सिनेही पतिक छाँह तँ अंदाज मे झपट्टा मारलनि आ पतिक कान फूकि | आक्रमण सँ काज नहि aera प्रत्यक्ष आक्रमण उपलब्ध रहनि...आ गुंजा केँ? 'पहिल पार अपन माथे सहर्ष स्वीकार करबाक | बेसी चोटगर, “हमरा किऐ पिलुआ फरत ? फरतौ wat भाग मे की लिखल tea छै, से के चलल चालि खाली जाइत देखि जेठजनी पर da सभ केँ। तोहर बेटा केँ...तोहर चाँद सन. जनैए? जहिया व्यास कका बेटीक लेल वर देखि खिसिया क' रहि गेल रहथि...। 'घरवला केँ...भाय केँ...बाप केँ...आ सेहो नेडरिया क' आयल रहथि तहिया कनिजा काकी केँ ay पंच लोकनि कनिजा काकी सँँ कुँजी a पिलुआ... ।”' संतोष भेल रहनि जे बेटी मात्र पौने कोस दूर i प्रानाननमानननानानाानाधनााा्र्रकान 26 / अिका, अप्रैल-जून, 2008

पद, रहत। एहिं गाम सँ पूब थोड़ेक दूरी पर खिरोइ a en aa ‘Ga ee gad प्र | -आ तकर बाद ढढ़िया... । ढढ़ियाक पंडित उमाधर /.0व0छें/' tral लीन JA: r-le // झा के के नहि चिन्हैत छनि? परोपट्टा में 7 रहा कि किक मिला नामी...प्रसिद्ध वैदिक ! तिनक पोता। गोर aR j || os \ हा ay cai, न जी चकैठ सन धूआ | बी.ए. पास । की हेतै जे एखन दी... की LOWS कोनो नोकरी afe भेलनि अछि? तत्काल ॥ Vy wv k डा | उत्साहपूर्वक खेतिए मे लागल। संगहि गामक गण Wy i (०) ER =| सार्वजनिक काज सभ में आगाँ-आगाँ रहनिहार (| | au lt ] A eee | दुस्साहसी युवक । के जनैत रहय जे यैह दुस्साहस से fit " Oy oS Hi काल भ' जेतै। — UNG RG LEN | सतासीक age बाढ़ि मे लगनमा पुल लग 00; sy fi | | fates उफनैत धार मे हेलबाक दुस्साहस al La i" Aan a | | । 'ढढ़ियाक तीन टा नवयुवक के गीड़ि गेल रहै... । V4 की 3) * गा = fae ee we r\ @ fil) ओही मे ओहो रहथि। सात दिनुका बाद जखन wy [ ih ae a \ पानि उतरल रहै ते कोस भरि दूर ततैला लग «| हुक, सी न 0 AS) 0 बबूरक via मे ओझरायल लहास भेटल me pe fr rs es 2) \ रहै...फूलल-फूलल...किछु-किछु सड़ल सन। मा —_a ais baal 'कहुना क' संस्कार कयल गेल रहै। एहीक संग गुंजाक सभ टा स'ख-मनोरथ जेना बाढ़िक संग बहि गेल रहै... । आब तैँ कहुना क' taeda केँ कनी मदति करय लेल कहिअहुन... । मुदा कुंड, अहिल्या स्थान वा बेसी-सँ-बेसी गंडेसर... जीबाक छलै... । से बस संघर्ष करैत जीबि रहल. भैया सभ gy सुनिते मातर अपन-अपन रोदना पयरे. «दर्शन-पूजा क' fag कैंचा खर्च कयने अछि... ततेक ने पसारि बैसलथिन जे मायक मुँहक बात. आपस... | सदा Uae टा लक्ष्य! घिया-पुता गुंजा Sag प्रेम आ भरोस छलै अपन Fe a रहि गेल रहनि... । सम्हरि जाय...मनुक्ख बनि जाय...आर की ? कत' भाय सभ पर। भाय सबहक विरुद्ध ओ किछु तैयो गुंजा साहस नजि छोड़ने अछि... । की कसरि रहि गेलनि प्रयास में? सत्य कही तँ ओ सुन' लेल तैयार ae रहल कहियो। नेनपनो में. भेलै जे नैहर आयब छोड़ि देने अछि? बापोक यदि कमी कयबो 'कयलनि तँँ बेटिए संग... । झगड़ा भेला पर यदि कोनों संगी ओकरा भायक श्राद्ध मे. नहिं आयलि... । खूब जनैत छथि st sitet dam बेटी! कतेक इच्छा रहै ओकरा गारि पढ़ि दैक sit किटकिटा क' संगीक मुँह अपन बेटी केँ। अपन दुर्दशा माय केँ देखाब' year मुद्दा कोना जाय दितथिन कमतौल....। नोंचि लेअय। आर जे गारि देबाक हो से दे, मुदा नहि चाहैत अछि... । जो गै बेटी! हम अपन पाँच किलोमीटर दूर...केओ संगी नहि, बेटी यदि हमर भाय सभ केँ किछु aed ते sted अभागक अतिरिक्त atu feg नहि द' जाति... ओह! यदि ओ पढ़ि-लिखि गेल रहितनि नजि, से बूझि ले। भायक प्रति ई प्रेम बिआहक wafer... । यदि हमरा पास किछु रहैत तैँ तोरा. aan... दुनू बेटक बिआह बड्ड स ख सँ कयने are) बनल रहलै। ते ने ओ सभ साल दुर्गापूजा एना बेललला नहि होब' दितियौ... । रहथि। कहाँ जनैत रहथि जे बिआहक लेल में जे नैहर आबय तँ भरदुतिया मे भाय सभ केँ आ एम्हर बेटा पुतोहु के होइत छनि जे प्रस्थान करैत बेटा सभ केँ परिछनक उपरान्त ag सिनेह सँ नोतैत छलि...आ टोलक छोट-. बेइमान बुढ़िया सभ किछु बेटी He! देलक... । 'परम्परानुसार जे छाती सँ लगौतीह से जेना माय पैघ बेटी-धी सभ के प्रेरित करैत WR सभ किछु? कथी-कथी? स्वार्थक आवेग में सँँ बेयक विमुखताक प्रस्थान-पर्व सिद्ध हेतनि... । ओरिआओन संँ सामा-चकेबा खेलैत छलि। हुनका लोकनि केँ एतबों स्मरण नहि रहैत छनि अपना जनतबे Wig ay के कोनो कम सिनेह कतेक विश्वास oak छलै ओकर आत्मा सँ जे हमरा पास रहबे की करय 2 गहनाक नाम पर देलथिन? दुनू पुतोहु के हुलास सँ नव-नव नाम 'जखन ओ बेस टहंकार सँ गबैत छलि-- मायक देल एक जोड़ी माकड़ी। ओहि में सँँ देने REN सुन्नरि आ फूल FAR जेना गाम के अधिकारी अहाँ सरबन भैया a एक य केँ तोड़बा क' बड़कौक बेटा केँ हनुमानी आन-आन सासु लोकनि करैत जाइत छथि तेना अहाँ waa भैया at बनवा देलथिन तँँ दोसर पर नजरि गड़ि गेल ओ कहियो Wie ay के कसिक ' ate भैया गोठ ate प्रोखारि gear fea’ रहनि छोटकीक। ओहि सँ ओ बाली बनवा रखलथिन (ae देवादिनी छलथिन ' अरेरवाली wan फुल लगा fea! यौ... / लेलनि। रहल टका ! a यदि से रहैत तखन यैह बहिन' । ओ कहबो करथिन, “fran एना ढील मुद्दा, कहाँ सुनिसकलधिन Manatee दुर्दशा रहैत हमर oT हमर बेटीक... ? देबै ते पछतायब। कहबी छै, हल्लुक सवार घोड़ा 'करुण हाक केँ। बहिनोइक श्राद्ध मे जे sig | सोचैत-सोचैत wien काकी अपन wee ait" परंच एहन अवसर पर कनिजा नोत पूरि क' अयलाह, से जेना तकर बाद ढढ़ियाक विगतजीवनक छानबीन करय लगैत छलीह...। काकी खाली हँसि क' रहि जाथि। 'कहियो भारी बाटेबिसरि गेलाह... ।राजनीतिक काज सँ बौआइत aa! गलती भ' गेलनि? we! चूकि ete? war होयबाक प्रयत्न नहि कयलनि। किछु- 'सरबन बाबूक लिस्ट मे ढढ़ियाक नामे नहि छलनि जे fg जहिया आमदनी dea छलनि तकर ने-किछू हेर-फेर क' कोसलिया जमा करबाक आ राघव लला, तेँ सहजहिं एक टा अलगे दुनिया. पाइ-पाइ ओ परिवार केँ बनाब' में खर्च करैत . लुतुक रहैत छनि स्त्रीगण में । कोनो-कोनो चतुरी मे मस्त रहैत छलाह। अभावग्रस्त गुंजा एक बेर रहलीह... । सख-सधोरि केँ कोठीक कन्हा पर. से चुपचाप लहनो लगबैत छथि। मुदा ओ कहियो Wi पूर्णिमाक अवसर पर गौतम कुंडक मेला मे. रखने छलीह... । तीर्थ यात्रा Sa कहैत छै ot Ue दिशा मे सोचनो ale कयलनि... । ककरा माय सँ भेट क' कय कहने रहनि जे भैया सभ. कहियो नहिं जानि सकलीह lag tata सँ चोर 'बितथि? आ आइ हुनका पर आरोप मढ़ल idol, अप्रैल-जून, 2008 / 27

जाइत छनि...। आरोप नहि जेना कलंकक मुट्ठी बान्हि क' खर्च करैत जाइत छलथिन। Sra, खरहरा देल जायत तावत स्त्रीगण केँ टीका...। अपन हाड़-हाड़ निकलल देह के खास क' सासुक लेल तँँ हुनकर सभक मुट्ठी . पारस देल जेतनि। पूरा आँगन भरल अछि...टोल 'निहारैत हुनका लगैत छलनि जे कदाच टूटि क' किछु आर कसि जाइत छलनि... । ओ सभ किछु भरिक बेटी-धी आ बूढ़-पुरान स्त्री सभ सँ... । fe गेल अपन निराधार आशा-अपेक्षा केँ देखि. देखैत रहैत छलीह...बुद्दैत रहैत छलीह आ सहैत सबहक हाथ मे थारी आ बट्टा। ककरो-ककरो at लोकनि wie खिसिया क' रहि गेल of रहैत छलीह... । हाथ में बट्टाक बदला लोटा। पारस परसल जा जे...। कदाच एही SRN” जिनक पार मे ओ गामक स्त्रीगण सभ प्राय: एहि बात Sat रहल Bay केँ पहिने ल' लेबाक हड़बड़ी Tea छथिन तिनक तामस हरदम लहरल रहैत निवसइत्त रहैत छथि जे ओ चारि-चारि टा. लागल छै। दुनू देयादिनी अतिव्यस्त छथि। oa. कदाच ते ओहि सप्ताह भरि ओइ घर. हरिबासर कयने छथि। मुदा, Ue दू बर्ख में “Sat छूटथि नहि। सभ के भरि इच्छा में भात बहुत कम बनैत छै... । आ जतबा बनैत Shion काकी कतेक _हरिवासर क' चुकल faq हे ae सभ, पहिने पारस ल'क' अपन- 3a ator gate da नहि रहैत छनि...। छलीह, से के जानय... । अपना के साधिक ' राखि अपन आँगन ध' अबै जाउ। आ है, आँगने में हुनका लेल मकइ वा बड़ भेल तँँ गहुमक जनहा. देने रहथि ओ... । एम्हर हम कहियो हुनका मुख नहि रहि जायब। जल्दी सँ घुरि क' अबै जाठ रोटी आ तरकारीक नाम पर किच्छो वा नोन- oR तृप्तिक लेशो नहिं देखि सकल wee) आ भरि इच्छा भोजन करै जाउ। अहाँ सभ तेल । हुनका माछ-माउस वा पियाजु-लहसुन a सदिखन जेना free छाउर aaa... te! कुमारि-बारि छी...भगवती स्वरूपा छी। अहाँ दिक्कति होइत oft | होइत छनि तूँ होइत रहनु...। SEEN aston केस रहनि हुनक । से आब aN जे भरि पोख खा लेब आ भगवती केँ कहबनि ओहि सप्ताह AS क' तीन-चारि दिन बनबे asus क' पकैत-ओझराइत बगड़ाक Gin FB अवस्स पइठ हेतनि... |" जेठजनी अपन करते... । a गेल छलनि... । बोल के आर मधुर बनबैत आग्रह करैत छथिन। भीन भिनाउजक बादे सँ दुनू भाँड दनादन 8-8 fat नहि ! जीबैत रह dye भात प्रगति क ' रहल छलाह... । गामक लोक के देखि इमलीक आ मुइला पर दूध भात। इह ! नाटक ने देखू ! ! 'क' ठकमूड़ी लागि जानि। दुइए साल मे दुनू इमलीक बूढ़ भूतहा गाछ... 'एहने पड़ठ भगवान अहूँ सभ केँ देथि |! चठदह sig दड़िभंगा मे लक्ष्मी सागर मोहल्ला में छपकी .. ““हैँ-हैँ ! चल' दियौ...चल' fed..." ate बर्खक मुँहफट बुचियाक टिप्पणी केँ सुनैत मातर पर डेढ़-डेढ़ कट्ठा जमीन ल' A छलाह आ बेर दही परसल जा रहल अछि...। दहीक ओकर बड़की बहिन कामिनी घबड़ा जाइत ate 'एतय गाम पर तीन-तीन कोठली पक्का ae बारिकक संगे चीनी, डालना, आ बुनियाँक बारिक ओ बुचियाक मुँह पर तरहत्थी waa Sea अछि, बना नेने रहथि। बस दलानवला भाग टा पुराने सेहो गतिशील-सक्रिय छथि... । बेसी लोकक ““बुचिया तोरा बाज' के ठेकान नहि छौ। तोहर 'छलै... । माटिक भीतवला एक टा पैघ कोठली। पेट भरि चुकल छनि। dt रसना मानि aie Se बड़ी ag पाक' लागल छौक। हरदम ue कोठली सँँ आँगन दिस os de’ awa छनि...। छीलल माथ...चानन लेपल Gaga करत रेत छे”। बेसी उचितवक्‍्ताक सारि ओत' aft दुआरि जकर एक fea एक at कपार...पीयर धोती, पीयर os आ भागलपुरी नजि बन।'' ई कहिं कामिनी एक ठुनका 'एकचारी कोठली । एहिं मे ston काकी रहैत. दोपटा सँ शोभित सरबन बाबू आ राघव cen बुचियाक गाल पर दैत अछि। 'छलीह। दलानवला ta कोठली में एक दिस हाथ जोड़ि-जोड़ि क' आग्रह क' रहल छथिन, ई जेना बडडु अनसोहाँत लगैत छै गितिया चारि-पाँच टा माटिक कोठी सभ जे आब प्राय: ““हड़बड़ाइ नहि जाइ जाउ। सभ केँ इच्छा भरि. केँ। बुचिया ओकर संगी छै। दुनू मे “फूल ' लागल खालिए रहैत छलै...कहियो तोड़ि क' फेंका भोजन करय दियनु। कोनो बस्तुक ada..." छै। आब कामिनी केँ tag कोना कहौक गितिया, 'जयबाक प्रतीक्षा में। एहि कोठली मे केओ form पेट भरि चुकल छनि से मोने ae मुदा ओकर अप्पन जीह के के रोकि लेतै, “et 'बाढ़नि-सोढ़नि नहि दैत छलै...। साझी चीज अपन एहि मूर्खता पर पछता-खिसिया रहल छथि . यै जलबार वाली भौजी ! गुंजा दीदी केँ नहि देखे साँग पर...। कहियो क' मोन होनि तँ कनिजे. जे पहिने चूड़े बेसी ल' लेलाह। एतबे नहि, छियनि। एहू बेर नहिए बजौलियनि ? जाय feat काकी बहारि-सोहारि दैत छलथिन--पारवालीक Use वा दोसरे बेर मे दही अहगर क' ल'. आबि क' की करितथि? माय केँ तँ चिबाइए 'उलहन सुनियो क' । कोठली सँ बाहर आउ Fo लेलाह । ईहो नहि ध्यान देलनि जे गर्मीक पुरान गेलियनि अहाँ सभ... ।”' गितियाक एहिं कथन दलानक RST एक टा पुरना चौकी राखल...।. दहीं खटगर होइत Ss आ भोज मे a पहिने पुराने. पर आस-पासक सभ चौंकि पड़ैत अछि। केओ गर्दा सँ भरल । दलानक काजे कोन ? सरबन बाबू दही परसल जाइत छै। आब असली खायवला बजैत तँँ नहिं अछि few, मुदा सभ के तामस केँ गाम-गाम राजनीति करय सँ पलखति नहि .. दही परसल जा रहल अछि... । मुदा, MYA? ay होइत छै। ई दुनू धोंछी सभ लाहेब करत। आ राघव ललाक दलान छलनि गामक टीसन पेट मे जगह कहाँ wh? आ बुनियाँ कोना. जै जलबारवाली वा खौंरावाली grad पता नजि वा ब्रह्मस्थान वा पंचायत भवन जतय संगी सभक खयताह ? अपना केँ संसारक सभ सँ बड़का at हैत? भोज खाइते रहि जयतीह छिछिआहों Wen होइत छलनि...। के देखैए दलान केँ ? _ उलूकनन्दन बुजजैत ओ लोकनि मुँह लटकौने किछू॒ सभ ! qa, लगैए, दुनू देयादिनी कदाच बुचिया SF अपन-अपन परिवारक बेसी चिन्ता बेसी अग्रचेती सभ केँ देखि जरि रहल छथि जे. वा गितियाक टिप्पणी नहि सुनि पौलनि अछि। . ** 'छलनि... । कहुना प्रगति करी... । से दुनूक प्रगति कोना ओ सभ पहिने तँँ हाथ बारने were आ. यदि Great कयने हेतीह तँ संभवत: अनठिया 'देखि कनिओ काकी चकित छलीह । जे लोकनि sa हाथ-मुँह चारिम गेयर मे चला रहल छथि..। देलनि अछि... । 'बापक श्राद्ध मे एक बीघा खेत बेच लेलनि... । हम सहटि क' कनिजा काकीक आँगन हम दलान पर आबि जाइत छी। बस्स। से एही बीच मे एतेक पाइ कत' Tahaan? दिस बढ़ि जाइत छी। एत' अलगे अनघोल मचल fg काल आर। पहिल खेपक भोज सम्पन्न 'एहन अवसर पर ओ अपन कान छूबि बाबा अछि... । बाहर पुरुष वर्गक पहिल खेपक भोज भ' जेतै। आ फेर पान-सुपारी लेल घमासान वैद्यनाथ सँ माफी माँगि लेथि... । क्षमा करब आब लगिचायल Si योजनानुसार स्त्रीगणक मचत...। हम सहटैत-सहटैत अपन दलान पर हे बाबा ! हमर नजरि ae लगौक । काकीक बेटा fat भ' गेल अछि। आब यावत पुरुष वर्ग आबि जाइत छी। आँगनक गेट a अछि । माय daa, gig सभ तँ आर होशियार छलथिन। भोजन क' कय उठत, औइठ-कूठ Basia सरबन बाबूक आँगन गेल अछि | हम दलानक 28 / ten, अप्रैल-जून, 2008

विस्मयजनक! लगैत oe जेना केओ ठोढ़ीक कि ARG बबूर तर जाइत रहओ...अनुचित अवांछित नीचाँ सँ सटाक' घेंट कटने होइक आ ओरिया ie) SBN DAE, \ कलंक आ दंश सहैत रहओ...मुदा समय पर 'क' रोड़ाक ढेर पर राखि देने होइक--उर्ध्वमुख | गा Le i हे tall Been अलगाब 'वला नहि...सभ अपना- मुंडक केस माथ सँ एकदम सटल छल... । Bs RR S ly अपना मे लिप्त आ जखन ओ टूटि जाय...टूटिक' Fore पीयर चेहरा पर सामने देखैत पथरायल व 'छिड़िया जाय a ओकरा फूकि-फाकि क' सुड्डाह निर्जीव निर्वाक आँखि में उदासी Sar जमि गेल iy iy i) क' feat आ एक चुटकी तिल माथ पर ल' हो... ret सँ कोनो कोण सँ देखतिये तँ हरायल ov न डुबकी द' दियौ...बस भ' गेलै तिल बहब... । आँखि जेना Gal अहीं केँ देखैत अनुभव होइत... | मी... 4 fia बहबाक अर्थ आर की होइत BH? 'उपरका चारि a दाँत निचला ठोर मे धँसल... । की कारी मड़र सूचना ल' क ' आयल छल आश्चर्य! शोणितक दर्श fe... | लगैए बरखा wn जे नेता जी आपस आबि गेलाह अछि। सभ टा बाद मे आयल रहल हेतै...। धोल-पखारल मैनेज भ' गेलै... । चिन्ताक कोनो बात नह... । 'लहास आर भयावह लागि a BM... जी सोझे मोटरसाइकिल संँ थाना भागल ae! सूचना द' ओ नरौछ लेल विदा भ' गेल...। आनन-फानन मे खबरि पसरि गेलै। कनिजा सरबन बाबूक आग्रह पर भमरपुरा सँ GRE | महापात्र के सेहो खबरि करबाक छलै ने ! मैनेज 'काकीक दुनू पुत्र आ ig माथ-छाती पीटैत यादव केँ सेहो संग क' नेने हेथिन । एक नम्बरक . भ' गेलै। माने ई जे आब कोनो डर नजि | निधोख आबि चुकल छलथिन । दुनू भाँड रेलवे पर ऑघरा- . खच्चड़ अछि चौकीदार । तुरंत साइकिल सँ थाना. गाम जायल जा सकैत छल। तथापि पता नहि site a! कानि रहल छलाह। ओम्हर दुनू लेल विदा भ' गेल हैत। मुदा नेता जी तँँ मोटर fare कठियारी लोकनिक समूह मूड़ी गॉतने देयादिनी सेहो छाती पर दुहत्थड़ मारैत घना क' . साइकिल सँ गेलाह अछि! ओ अबस्स पहिनहि सड़क धयने गाम दिस जा रहल छल खेत में wast. ।लछमी आब दुनू के सम्हार' पर. पहुँचि गेल हेताह... । तथापि यावत्‌ ओ घुरिक' . काज करैत ज'न-बोनिहार सभ ठमकि क' पन्द्रहो 'लागलि छलि... । बहुत कारुणिक दृश्य छलै...। aie अओताह तावत्‌ की कहल जाय... । 'पराक्रमी व्यक्तिक समूह & देखि रहल छल...मुदा आब जखनकि स्थिति प्राय: स्पष्ट भ' चुकल 'कतेक समय fa we हेतै? बेसी-सँ- हमरा सभ मे सँ केओ एम्हर-ओम्हर देखय ae 'छल तूँ त्वरित निर्णय लेब ' मे माहिर लोक सभक . बेसी दस... । मुद्दा बरखाक बाद स्वच्छ भ' गेल. चाहैत छल... । पता नहिं के किछु पूछि देअय ! विचार भेलनि जे ve सँ पहिने कि थाना में अकास सँ एखनहिं fea de बरस' लागल . रौद ag तिक्ख भेल जा रहल छलै... । सबहक 'खबरिं होइक आ गुंडा बैंकक मैसेनजर जकाँ दारोगा. छलै। लागि रहल छलै जेना चानि चनकि जेतै...। ah चनकय लागल छलै...। ओम्हर पता 'सदल-बल आबि जुमय, दाह संस्कारक काज सभ गोटे एक टा गाछी मे विलमि गेल। केओ नहिं किएक एक टा टिटही ay व्याकुल स्वर सम्पन्न क' लेल जाय... । एक बेर cee ककरो सँ नजरि नहिं मिला रहल छल... ।वर्तमान में टिटिया we छल... । 'छाउर भ' गेल तँ फेर दारोगा की क' Ga? चलू प्रसंग पर केओ चर्च aie करय चाहैत छल। aor age आँगन में राखल आगि- आब जे भेलै से भेलै। शीघ्रता Stas...) अनर्थक भीषण विशिष्टता आ मात्रा कँँ ay पानि-लोह-पाथर केँ gaa काल देखल जे टोल फेर जल्दी-जल्दी मे लोक सभ लहासक अटकारिरहल छल ।दाह-संस्कारक गैर-कानूनी _ भरिक स्त्रीगण सभ जमा छलीह आ दुनू देवादिनी टुकड़ी सभ के बीछि-बीछि a बोरा a पक्षो के सभ जानि रहल छल... ।'“चलै जाह हौ। ऑघरिया दैत चिकरि-चिकरि क' लयात्मक ढेंगें ुँसलक...खाट पर लादि उठौलक...मटिया तेलक vin et जाह । आब सोझे fete I कानि रहलि छलीह...जेना कोनो हदयबिंदारक et लेल गेल...बाड़ी-झाड़ी में जे बाँस-राहठ जेठक कड़कड़ायल te में लहालोट भेलि | करुण गीत गाबि रहलि होथि... । गीतक प्रत्येक feat से उठबैत गेल...आ भागल श्मशान।. fate पस्त पड़लि छलि... । धार कहाँ se. पाँति मे श्रद्धेया सासु माक विशिष्ट दुर्लभ गुण आनन-फानन मे डेढ़-दू घंटा मे कनिजा काकी . एक तँँ ओहिना प्रतिवर्ष बाढ़िक संग आयल बालू आ ताहि सँ आब सदाक लेल वंचित भ' जयबाक केँ फूकि-फाकि क' age क' देल गेलनि... ।. Pade ओ उत्थर भ' गेल छलैँ। दोसर अफसोसक मर्मस्पर्शी वर्णन आरोह-अवरोहक 'पैचकठिया फेंकलाक बाद कठियारी सभ बाघे- ule साल एखन धरि ठीक सँ बरखा कहाँ भेल day’ रहल छल... । कोनहु सहदय केँ द्रवित ae बढ़ल...खिरोइ दिस... धूर पकड़ने... आगाँ- . छल... । पुलक दक्खिन एक टा पैघ सनक खाधि क' देबा में समर्थ एहिं रोदनाक ade प्रभाव पाछाँ...पंक्तिबद्ध oR जइह' । सम्हरिक'। . मे जे जल छल सैह...बाकी कतहु जलक निशान. त्वरित-रुदन मे प्रवीण जनी-जाति सभ पर स्पष्ट 'दोसराक पयर पर पयर नहि लाग' । ...आ केओ नहिं। खाली नामें टा धार... । रातुक बरखा सँ.. गोचर भ' रहल छल... । ओ सभ कनितो छलीह We घुरिक' तकिह' नहि । अकाल a पेटी महक बालुका-राशि जैँ भिजलो we हेतै आ दुनू देयादिनी केँ भरोस तथा साहस रखबाक मामिला छै...नहिं त॑ अपनहिं ae... बड़का fa आब एखन हालक नाम नहिं। wee | weit द' रहल छलीह... । सघन उदासी आ 'कक्काक निर्देश केँ सभ चुपचाप सुनि लेलक... । Ass wa छल... । भोरे जे महिसबार सभ eT स्वर केँ अनुभव करैत कठियारी सभ 'कुल्लम पन्‍्द्रह ted रहबे करी । दुनू भाँड सरबन fees धोबाक क्रम मे खाधि महक जल के. आगि-पानि-लोह-पाथर छूलक... । कर्ता दुनू Hg बाबू आ बाकी हम सभ तेरह गोटे। ककरो मुँह॒ घोंकने छल से एखनो साफ नहिं भेल छलै। के छोड़ि सभ अपन-अपन आँगनक लेल विदा 'फोलबाक साहस नहि भ' we छल... । जोश. ...ओहिना घोर मट्ठा। ओही जल मे सभ गोटे होइत गेल... । में, संस्कार में सम्मिलित होयबाक लेल, safe नहाइत गेल... । कनिजा काकी केँ तिलांजलि a गेल छल लोक मुदा आब एक य विशेष देलक...। पन्द्रद a लोक तिल बहि देलक ्ि . 'प्रकारक अदंक करेज केँ दलकौने BS... AY कनिजा काकीक... । नवारी दुःख कि gerd दुःख...? खेते-खेते धूर पकड़ने जा रहल छल... । सड़क Ba काल हम बाट मे सोचैत रही... । की “जय हो...जय हो...महीं-महों भ' गेलै... '' दही 'पकड़बाक साहस नहिं भ' रहल छलै। यदि तिल बहबाक यैह अर्थ होइत कै ? नजरिक समक्ष तेबारा परसल जा रहल अछि जे चुक्की मारने 'युलिस आबि गेल होइक तखन... ? ओना नेता. लोक तरसैत रहओ...तड़पैत रहओ...बेल तरक छलाह से पलथी मारि लेलनि अछि आ जे पलथी 2edt, अप्रैल-जून, 2008 / 24

सभ अलम्यूनियमक ot आ बट्टा नेने प्रतीक्षा जरूरी छै जे कोनो चोरे केँ देखि क' भूकल weiss" पाछाँ-पाछाँ एत' धरि आबि गेल छलि। मे ठाढ़ अछि...जे कखन लोक सभ भोजन समाप्त होअय? भ' सकैए दोसर टोलक कुकुर पर नजरि “a? चिन्ता नहि कर। हम तुरंत आबि 'क' कय उठत आ ओकरा सभ के go पड़ल हेतै कि शुरू भ' गेल हैत...। सोचैत- जायब। आ हमरा किछु नहि हैत। आब हम दस 'लोकक sige उठयबाक अवसर Fed... । भूखक Tt फेर प'ल भरिआय लागल...। कखन वर्खक ओ समीर नहि St जे शोणित देखिक' ane लोकक एहि भीड़ मे सेहो कैक टा छोट- बरखा अयलै...हम Peg ale बूझि सकलियै...। रद्द भ' Sra”, हम आगाँ बढ़ि गेल छलहूँ। 'छोट वर्ग है... । अपना सँ तथाकथित निम्न वर्गक जेना एक टा झटका खाक" Fre zea हमर पाछाँ-पाछाँ लछमी सेहो ओही दिस लोक केँ कनेक फराके रहबाक निर्देश tore होअय... | बाहर सड़क दिस गुलगाल भ' रहल जा रहल छलि। ओकर यैह रस्ते छलै। एही द' प्रकृति ug वर्गक लोक सभ में छै--से स्पष्ट छल... । क्रमश: तेज होइत... । कोठली सँ बाहर क' ओ नित्त हीरा बाबूक ओत' बर्तन-बासन देखाइ पड़ि रहल अछि... | 'दलान पर अयलहूँ। भोर भ' चुकंल रहै मुदा कर' जाइत छलि। सामने सँ पप्पू आबि wa 'पच्छिम भर अकास मे लौका लौकब शुरू _ एखन सूर्योदय हेबा मे किछु विलम्ब रहै। हमर छल। पूछलिये fat कहलक, “UTE तँँ भ' गेलैए। नहू-नहू मेघ ऊपर उठि रहल अछि... . घरक पूब द'क' जे रेल लाइन गेल अछि--. निश्चित अछि जे कोनों स्त्री कटल अछि । पैघ- dete a! लौकति लौका भोज wafer दख़िन-पूब सँ उत्तर-पच्छिम दिस--तेम्हरे लोक. पैघ केस छै। हमर हिम्मत ale Us कयलक आ खुयनिहार दुनू पक्ष के कनेक हड़बड़ा देलक HA जा रहल छल... | की बात छै? हम किछू . जे लग जाक' देखियै। देखै नजि fot जे ककरो अछि fag गोटे लोक सभ कें शांतिपूर्वक भोजन. आगाँ बढ़लहूँ... । ओकील ककाक दलान पर. लग जयबाक साहस भ' रहल छै? सभ दस करबाक आग्रह क' रहल छथि। लगैए इन्द्र फेर. fag लोक ठाढ़ भेल रेल लाइन दिस इशारा हाथ फटकिए सँ देखि रहल अछि...आ देखिक' आइ गड़बड़ी पर उतारू छथि... । करैत बतिया We छलाह...। हुनकर BIH अपन-अपन ae ध' रहल अछि... । एहन ओम्हर गाम भरिक एकत्रित कुकुर ae WHS पाछाँ करैत हमर नजरि देखलक जे. भयानक दृश्य नहि देखल भाइ... । हमर तँ मोन आपस मे कटाउझ क' रहल ais i कटाउझ मे रेल लाइनक आस-पास किछु महिसवार, हाथ. कोनादन wh’ रहल अछि... । हमरा जाय जे कुकुर हारि जाइत अछि से कनेक sew’ मे लोटा नेने ' पोखरिं दिस ' जयबा लेल बहरायल, fea’. पप्पू घर दिस बढ़ि गेल। विचित्र विलम्बित स्वर मे भूक' cid अछि... किछु भलेमानुस आ ज'न-बोनिहार केँ अढ़ृयबाक 'तावत लछमी हमरा सँ आगाँ निकलि रेल जेना कानि wa हो...। ओह! ओहने oa.) लेल विदा भेल, किछु कृषक लोकनि विस्मय लाइन पर घटनास्थल लग पहुँचि चुकल छलि... | जेना ओहिं राति कानि wa छल... । ओहि रातुक आ दुःखक मुद्रा मे बहस क' रहल छथि...।. आगाँ ada हम देखलहूँ जे ओ पुरुष सभक सघन fren Fata कुकुर सभक रुदनक wa फरकी सँ बात बूझब कठिन छल...।.... गोल केंँ चीरैत भीतर गेलि... ।'* अरे बाप रे बाप! ah थरथराइत बिझायल छुरी... । “ot Fae?” हम gate दैबा रे दैबा! ई की भेलै रे दैबा। कनिजा काकी “orig क्यो कटि Fea” अय कनिजा काकी ! ई की कयली अय कनिजा 2" 'काकी ?”', लोकसभक गोल में घेरायल लछमी आगि-पानि-लोह-पाथर:.. *'हौ, हमरा d लगैए जे काल्हि मैट्रिकक भोकरि रहलि छलि...। ओ देखाइ ale ofS ahd रातुक बाद आयल छल ओ जेठक एक. रिजल्ट बहार भेलै। कहाँदन ag खराब रिजल्ट रहलि fe, मुदा ओकर करुण-तीक्ष्ण स्वर गूँजि 'टा पचपचायल भोर... । उसीन क' राखि देव बला. भेलैए। अबस्स SH फेल केलहा छौंड़ा wl Wa छल... । आब कोनों संदेह नहिं रहि गेल dare कारी रातुक बादक ओ भोर... । गेल हेतै।'' 'छलै... । हम लपकलहूँ... । गोल मे पैसलहूँ... । diate सँ सड़ल गुमकी छलै... । पसेना- “ste हौ, कोनो विद्यार्थी नहिं wea हेतै हे भगवान! हिला क' राखि देब'वला भीषण 'पसेना देह...कखनों सुखयबाक नाम नहि... । ऊपर ओ। आइ-काल्हि ट्रेनक छत पर चढ़बाक बड्ड Sha दृश्य छल... । सँँ लाखनि सँ भरल डबराक मच्छरक प्रकोप... । . चलन भ' गेलैए। ओही में सँ कोनो अगत्ती टपकति 'कनिजा काकी, ओ कनिजा काकी, जे 'एम्हर-सँ-ओम्हर दौगैत...गुम्हरैत...भूकैत...कनैत . पड़ल Ba" 'वृद्धावस्था दिस डेग बढ़ा चुकलाक बादो सबहक BRAY... । एक्को रत्ती चैन नहि... । छटपट- “$ अहाँ कोना कहैत fod भाइ? ईहो तँँ लेल कनिजे काकी छलीह...जे बाट पर चलैत were करैत राति बहुत नहू-नहू बीति रहल भ' सकैए जे कोनो तड़िपिब्बा वा गँजपिब्बा काल एना लगैत छलीह जेना धरती सँ पूछि- छल... | कखनो-कखनों डबरा महक जलमुर्गी आँघरा गेल हैत रेल लाइन HT.” पूछि क' डेग बढ़ा रहलि होथि... । जे धरतीए wa चियों-चियों क' उठैत छल। ककरो चैन जतेक मुँह ततेक बात। ओम्हर ओकील जकाँ सर्वसहा on अन्तर्मुखी छलीह...जे प्रत्येक af... कोना होइतै ? जेठ खतम होब ' मे प्राय: _ कका Ue सभ सँ निरपेक्ष मनोयोगपूर्वक अपन. जूड़शीतलक भोरे टोल भरिक नवयुवक लोकनिक 'छओ दिन रहि गेल रहै परंच बुन्न पड़बाक नाम. बड़द केँ सानी gen wa छलाह । चानि ठंडा ta’ Ga बासि जलक लोटा नेने नहि... । भरि दिन अकास सँ आगि बरिसैत wet “al कका, के कटि गेलैए 2” आबि gata छलीह... । जे fren सँकराँति दिन आ साँझहि सँ जे बोकर' लगैत छल पृथ्वी Set **पता afe!” ओ हमरा दिस तकबों afew केँ ताकि-ताकि क' तिल-चाउर हाथ में aia से राति भरि उसिनाइत रहैत छल कयलनि। नादि पर नजरि गाड़ने रहलाह । हुनक . थमा दैत पूछैत छलथिन, “alan तिल बहब' 'प्राणिमात्र... । पता ae कहिया aA पड़तै... ? . ई निरपेक्षता हमरा कनेक विचित्र जकाँ लागल। ने?'' से कनिजा काकी आइ रेलक पटरीक हम ठेकानि aie सकलियै जे कतेक राति लागल जे हिनका जरूर बूझल छनि। कदाचू आस-पास रोड़ा सभक ढेर पर खंड-खंड भेलि भेल हेतै... । प्राय: डेढ़...नहि दू... । कनेक पुरबा जानि-बूझि क' अपना केँ कोनो काज मे ओझरा छिड़िआयल पड़लि छलीह... । ओह ! हे भगवान! सिहकलै... । पसेना सँ भीजल देह ठंडायल at aH’ रखने छथि। हम रेल लाइन दिस बढ़लहूँ । रेलक yatta पटरीक ओइ पार दुनू Wa भरिआय लागल...। FE सभक तेज “Scher, di ओम्हर नहि ae dee टाँग...दुनू पटरीक बीच में धड़ on पछबरिया झौहटि सँँ निन्‍न टूटल... । एतेक किऐ लागि रहल. करेज एतेक मजगूत ae छह...बर्दाश्त नहिं.. पटरीक एहिं पार मुंड... । आन-आन अंग जत' छै...? wen! कुकुरो के कोनो ठेकान 3? हेतह... ।' ई हमर माय छलि जे पता नहि कखन छिड़िआयल oe ओतहि मुंडक स्थिति कनेक 20 / अपिका, अप्रैल-जून, 2008

we बूझय वा ate | जमीनक ओइ cast पर सभ केँ सोझे बथाने पर जा पकड़लनि SIRT स्वाद वा डालना मे नोनक मात्राक मादे पूछि बहुत दिन सँ नजरि छनि ठीकेदार ater st बाबू, “हौ भाइ सभ, साल UR देहातक दूध रहल छथि, तँ कखनहूँ बारिक लोकनि केँ कोनो sia’ मार्केट कॉम्पलेक्स बनाब' चाहैत छथि। एकत्र क'...पानि मिला...ड्राम मे भरि...विदाउट . खास जगह पर खास वस्तु ल' क' पहुँचबाक सामान्य स्थिति ta तँँ सरबन बाबू ठीकेदारक टिकट जनता ट्रेन सँ जाक' दड़िभंगा में बेचिते निर्देश उछालि wer छथि... । ue कूटनीतिक चालिक जबरदस्त जवाब छह...चानी कटिते छह... । कहियो क' fare मूड़ी गाड़ि तन्मय भ' भोजनलीन लोक दित 'धनि... । मुदा, एखन तेहन ने उलंग Her We कमाबह। बस चारि दिनुका दूध दएह। wae लगन देखि जेना...जेना किछु मोन पड़ि छथि जे कोनो आन ae ने सूझि wa छनि। ag’ जे हमरे दैत छह । चारिम दिन एक-एक. रहल अछि... । हैं...कनिजे काकी कहैत छलीह के देत डेढ़ लाख रुपैया ? जे देत से बदला मे. टा पाइ गनबा ae..." सोगारथ यादवक flee... । मैथिल सभक भोजनपटुताक मादे सुनि 'किछु-ने-किछु चाहबे करत॑। Feared मदति निशाना कतहु खाली जानि। ततेक ने दूध aa इंद्रक घमंड फड़कि उठल रहनि। agar भोजन आब के ककरा करैत छै ? कम-सँ-कम ई समय. जे सय तौला...नहि-नहि, den afe GRA भट्ट छथि मैथिल सभ तँ हमरा ओतय आबधु। Re ते रहल अछि। सरबन बाबू चारू दिस. पौरल गेल दही... । हम नोत दैत छियनि । हमर व्यवस्थानुरूप भोजन 'तकलनि... | सबहक दृष्टि मे एक्के टा आग्रह । “agg सय खोर... ।'” a कय देखाबथु तँँ हम इन्द्रासन हारि जायब। हैँ कहि दियौक ने। सपूत बनू...अपन नाम केँ OG तोरा माने की ? अट्ठारह मन अरवा. स्वीकार करताह? अप्पन पसिन्नक क्षेत्र मे आबि सार्थक करू... ! aR आ बीस मन चूड़ा खयनिहार गाम मे Ue | haa शत्रु के देखि जेना योद्धा केँ हँसी लागि “oq d तैयार Giga, एक बेर राघव संँ कम में की होइतै?'' aed छै तहिना set अहंकारी देवराजक Ue जी केँ et पूछि लियनु।'' से दुनू भाइक आग्रह जे मोन भरि खाइ Aare चुनौती पर मुसकिया देलनि मैथिल “at wea जी?” 'जाउ आ कामना करै जाउ जे कनिजा काकी के लोकनि। स्वीकार क' लेल गेल चुनौती... । 'ठीकेदार साहेब आ हुनक मुंशी भोगी aves होइन... । पंक्तिबद्ध आसन जमौने भोज aia इन्द्रो ते पक्का खिलाड़ी were! के बेछिल्‍ले बाँस धाँसि tore योजना मोनहि . खयनिहार सभ... । एक टा पाँति पच्छिम eT भोजक जबरदस्त आयोजन कयलनि। अपार मोन बनबैत आ तत्काल स्थगित करत wes दोसर पाँति पूब मुँहे... । एहिना तेसर पाँति पश्चिम . खाद्य-सामग्री qa, आहि रौ बा! ई की? 'ललाकेंँ प्रश्न सुनितहि लगलनि जेना केओ हुनक मुँहे तेँ चारिम पाँति पूब मुँहे...। सम्मुखक दू . परम्परानुसार सम्मुख पाँति बनाक' बैसल मैथिल पौरुष के ललकारि रहल होनि । क्रोध बाट बदलि . पाँतिक बीच मे बारिक लोकनि के अयबा-जयबा लोकनिक दहिन हाथ पर काँखि सँ ल' क' 'क' सरबन बाबू पर केन्द्रित भ' गेलनि--... लेल रस्ता। एत' सँ ओत' धरि पाँति-पाँति मे. पहुँचाधरि बाँसक फराठी राखि जउड़ सँ लपटि "देखे जाइ जा । हम कोनों मउगीक साया. कुम्भकोपरिदधिचिपटान्नशर्करालवणव्यंजनानिम- क' ahs देल गेलनि। आब भोजन क' में घुसिया क' wana ae छी । सभ केँ धुराणि च सँ aa लोक सभ... । चलैत मुँहक Saray... मुद्दा वाह रे मैथिल! ओ मैथिल अपन फिकिर ae’ लेल कहियौ। राघव मर्द चपर-चपर... । बारिक लोकनिक 'ई लाबह हौ', केहन जे कोनहु परिस्थिति मे भोजन क' कय अछि आ मर्द वला बात कहत। आ मर्दवला 'ओ लाबह हौ' केर गुंजित स्वर... । सघन भ' . नहिं देखाबय ? सम्मुखक पाँति सभ कनेक लगीच an वैह अछि जे लागय से देआइ, मुदा बाजय da अन्हार सँ asa जेनरेटरक पचासो ट्यूब- घुसुकि आयल आ आमने-सामने बैसल मैथिल 'रसनचौकी... ।'' 'लाइट...जगमग...जगमग...सभ किछु जगमग... । लोकनि एक दोसरा कँ एक-दोसराक पात पर पित्त ते सरबन बाबूक सेहो लहरलनि, मुद्दा wane पैघ-पैघ नाकवला लोकसभ में. सँ खाद्य-सामग्री ल' fag दहिन हाथ मोड़ने गरा में उतरी तँँ हुनके छलनि। दबा गेलाह...।. अपना केँ अग्रगण्य बुझनिहार seat बाबू st खोआबे लगलाह... | जल पीबाक लेल वाम हाथ weal बाबू लोकनि पहिल खेप मे नहि बैसलाह | aT मुक्त छलनिहे । इन्द्र चारू नाल चित्त! अजेय योद्धा सभक पराक्रम... ही ।ओ 'लोकनि दोसर वा तेसर खेप में. भोजनोपरान्त गर्वित मैथिल लोकनिक समक्ष ठाढ़ सताह | एखन Gat ay पाँति सबहक मध्य नतशीश इन्द्र अपन इन्द्रासन ग्रहण करबाक से आइ द्वादशाक जबरदस्त भोज भ' wa मेटहलैत कखनहूँ भोज खयनिहार सभ a दहीक निवेदन कयलथिन...। मैथिलिक अछि... । लगैए पूरा गाम safe आयल उदार गर्वोक्ति भेलनि, “sae अछि... । हाथ जोड़ि क' सबहक स्वागत Sh अपनहि राखल जाओ। हम सभ ल' ata दुनू भाडक आग्रह, “ti भरि के 2 'क' की करब ? मुदा, स्मरण रहय GE जाउ। जे वस्तु जतेक चाही से 8 जे पुन: हमरा लोकनिक भक्षण- 'लिय' । कोनो वस्तुक कमी fe”? कमी ae सामर्थ्य के चुनौती देबाक भूल ate fend Wed? ठीकेदार साहेबक सहयोग SN Le 'होअय ।ई हमर सबहक क्षेत्र थिक | देखि भरि गामक युवक लोकनिक JL fle 4 MoS ie | एहि क्षेत्र मे हम ay अजेय उत्साह फरकि उठल छलनि... । संगहि A us| my a 8 wm." सहयोग छलनि भमरपुराक सोगारथ नव a? 5\ 7 से आइ एक कात मे ठाढ़ हम यादवक। का ae ts | टी \ 'एहन अजेय योद्धा सभक पराक्रम सोगारथ यादव। सरबन बाबूक की मी वि, 5 i ge देखि wa छी...। नजरि परम मित्र। प्रखंड राजनीतिक संगी। cee ‘cree भोजस्थलक कात मे पाँति सभक 'ढढ़िया, feat, खजुबारा, भभरपुरा, Wek. Ae ‘ fas) oR पर स्थित सड़क दिस जाइत खेरिया टोल, WAN ई जे परोपट्टाक Pierce i अछि... | ओत' समाजक दीन-हीन सभ गाम छनि मारल गेल... । महिसबार मन NHR वर्गक महिला, पुरुष, छौंड़ा, छौंड़ी i i eee अपिका, अप्रैल-जून, 2008 / 9

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दीर्घ कथा कुमार पवन प्रायः एक युग बाद कुमार पवन फेर सँ लेखन मे सक्रिय भेल छथि । विगत शतान्दीक नवम दशकक शुरुआत सँ लेखन ANA कर वला कुमार पवन मैथिलीक सुपरिचित कवि, कथाकार आ व्यंग्यकार छथि। किछुए कथा आ तीन चारि दर्जन कविताक बल पर मैथिली ये अपन फराक पहिचान राख बला ई एक टा विशिष्ट कवि-कथाकार छथि। हिनक नव दौरक प्रारंध एक टा यादगार Se कथा आ पाँच Me कविताक संग or! रहल छानि। प्राय: कतेको वर्ष सँ मैथिली में एहन सशक्त कथा पढ़बा लेल ag deer अछि। हयरा विश्वास अछि जे मैथिलीक व्यापक पाठक वर्ग a ड स्परणीय शुरुआत बुझ्ेतनि। aes aren मे gaa खिरोइ... ee cence litt se 2 i. जेना-जेना गाम दिस बढ़ल जा रहल x S (ee renee yoog भेज ये 2 छी अन्हार आर सघनायल जा रहल मोन मे औनाइत जाहि बेचैनी a Re AB ite — ps अछि... । माल-जाल केँ चराक' बाध यारि देबाक फेर मे हम एत' प्राय: Y ) eee aie aa sone गतिँ भागि क' आयल Beg, से एखनहूँ ) tf DN VIBE 6 ib i. ! कर गतिएँ © i ae / shi =< N 7 ~N > yee चलैत, पजु , महीस सभ कहाँ छोड़ि रहल अछि... ईंटाक a, आप See Sa सम पाया आ काठक गार्डरवला we ANS oe 6 ae ° Hy सड़कक एक दिस सँ जा रहल जर्जर पुल पर ठाढ़ ata of 0... *.. Om Eos अछि | सामने गाछी सभक पच्छिम सुखायल मिरतुबकी खिरोइ आचारू ._. > «Ee I@ दा © रेलवे आतकर ओइ पार गाम। गाछी _ दिस गर्द-गर्द भेल चातावरण केँ हि J WIR EO EZ) an बँसबारिक कारणें अन्हार आर देखि मोन हल्लुक क' लेबाक आशा... aM y. Se घनगर जुझा we अछि। गाछी करब ae व्यर्थे बुझा रहल रस : Pips Yi Cages है ONE Eee सभक विरल भाग द' क' इजोत अछि... । fats, जे हमर गामक NS 0 EEN ONS हुलकी द' रहल अछि आ संगहि पूर्वी सीमान पर अदौ सँ बहैत हमरा Sy सुनाइ fs wa अछि जेनरेटरक लोकनि केँ एक टा परिचिति दैत आबि रहल सिलौट पर ताधरि tte Rae जाधरि at Hehe He फट... अनवरत... | अछि, आइ केहन se पातरि सनटिटही सन सिलौट ने aie न गेल हेतै गाछी पार क' रेलवे लाइन पर aA छी... | भेलि अपन अस्तित्वक लेल संघर्ष क' रहल ख़ीराक बीया,. सौंफ, दछिनी, Whe सँँ स्पष्ट बुझाइत अछि--व्यापक ब्राह्मण अछि, से देखनहि जानल जा सकैए। एक Tas आदि-आदि कैक तरहक मसालों। बैन्यू समाज जुटि रहल अछि... । पुआरक सैकड़ी बीड़ा दीर्घ निसास छोड़ैत हम चारू दिस नजरि खिरबैत sa टीसन | नवीन झाक चाहक Geran पंक्तिबद्ध राखल जा चुकल अछि... । बैसइ जइयौ छी। सूर्य ढरकि चुकल छथि... । खूने खुनाम . ne कहने छलथिन नवीन झा केँ, ST केर आग्रह सुनबाक लेल उताहुल बूढ़-सेयान- पश्चिमाकाश... | घुरिभयल परिवेश... । नहू- हालति मे दस किलों दूध राखय लेल। दूध- बच्चा-बुतरु-छंड़ा-छौंडीक भीड़... । भोज्य ae उतरैत अन्हार...। आ अन्हार मे डूबैत. -ीनीक संग घोरल गेल हैत भाँग। गिलास-पर-. पदार्थ पर टूटि पड़बाक लेल Ws Hees faa... | हि गिलास देने हैत BY... | सबहक मोन आब. लोक... । हम एत' की क' रहल छी ? एखन ते गाम ey चुकल हेतै...। एखन धरि a सबहक रेललाइन सँ सड़कक लभानी पर उतरि पर रहबाक चाही । ओत' धमगज्जर मचल हेतै। संपर्क भ' चुकल हेतै बाबा बौरहबा सँ--सोझे जहिना हम आगाँ बढ़ैत छी कि आग्रह भ' जाइत कल्हुका HS तेहन रहै जे अजुका भोज लेल . हॉटलाइन पर। आब aT एक्कहिं टा काज बाकी... | Sa | की रेलम पेल! लोक सभ बीड़ा लूझ' लोक सभ ants संँ उत्साहित अछि | जटावला सरबन बाबूक दलानक विस्तृत अगुअइत लेल टूटि पड़ैत अछि। केओ चारि-चारि टा बीड़ा भाँगक पत्ती ake मे फूलय लेल ध' देल गेल. में नोतल ब्राह्मण सभक जुटान भ' रहल हेतनि...। Tee पलथी मारिक' बैसैत अछि तँँ केयो छलै। कमलू भाइक खास आग्रह छलनि। A ओत' एखन हमरो रहबाक चाहैत छल... | आ बीड़ाक अभाव मे चप्पले पर आसन जमा लैत छनि। गाम मे भोज रहौक तँ ओ दड़िभंगा मे हम एत' ce पुल पर ठाढ़ छी... । की क' रहल अछि। दब्बू प्रकृतिक लोक बीड़ाक लूटि मे अटकि नहि सकैत छथि । ओ काल्हिए दसबजिया छी हम एत'? सभ हमरा ओत' ताकि wa TEST गेला संतां हारि क' चुकिए माली बैस ट्रेन सँ आबि गेल छलाह । उत्साहपूर्वक भनसिया . हैत... । कमलू भाइ खास क' आ हम... ? तखन . जाइत अछि... | ओम्हर जे कनेक हमर-झाँटि- सभक संग aft दिन लागल रहलाह। बैह ft? GF aden बेर गाम दिस विदा होब' चाहलहूँ पर-झूलय-बड़का-बड़का-लोक वला dea बहुतो लोक आयल ate कॉलेजिया नवयुवक अछि, मुदा डेगे नहिं उठि रहल अछि... । हिम्मति लैस अछि से बलजोरी सरबन बाबूक टाल सँ au later सँँ हरित क्रांतिक योजना पर अमल. dais पड़त... । सामाजिक बन्हन केँ अनठिया झीकि-झीकि पुआरक मोटका बीड़ा बना बैस भ' wa छैक। भोर सँ फुलैत भाँग केँ मीजि- देब उचित नहि...। जाय तँँ पड़बे AW... | SET अछि आ गर्व सँ गर्दनि तानि चारू दिस मीजिक' पाँच पानि सँ धोने हेताह शोभन... | नदीक छरकी...लचका...जरलाहा पीपर... Ther रहल अछि जेना कि कहि रहल हो, ' मर्दक oR अविका, अप्रैल-जून, 2008 / 7

Oe बेटा अछि क्यो तँ टोकि क' देखओ नेज ।' ce wa तकरा गरा मे मरल पशुक-जडड़ लटकौने aK करय लगलाह... । खूब ane भेल... । wed gus रहल अछि परंच केक्कर wafer tg घरे-घरे दयनीय मुद्रा मे मौन fe sera: निर्णय देल गेल-- हिम्मति के जे समक्ष मे आबिक' dea...) ha माँगैत देखि चुकल छलाह...। आइ दुनू *"एकादशा दिन यदि संभव होअय a तुलसी आब पात परसल जा रहल अछि...पुरइनक is अपना-अपना के किछु ओहने सन स्थिति. फूल वा कनकजीर वा करिया कामोदक पुरना Ua अद्भुत! आब जखनकि प्राय: सभ भोज. मे पाबि रहल छलाह... | एम्हर पागधारी नक्षत्र अरवा चाउर। जैँ से उपलब्ध नहि भ' सकय eT में लोक दड़िभंगा वा पुपरी सँ पातक रेडीमेड मंडली विचार क' रहल छल-- 'बासमती तँ अबस्से होअय। फेर राहडिक प्लेट आ बाटी ल' अनैत अछि तखन पुरइनक “org ar होअब? 'दालि...सात टा तीमन...बड़, बड़ी, पापड़, दही, Ua? सरबन बाबूक हठ छलनि। खजुरबाराक *'बैदिकी 2"? चीनी, सकड़ौरी आदि-आदि।'' ak सँ आनल गेल छलै बोझक बोझ... । *पंचदान?'' “on greg दिन पूड़ी-जिलेबीक भोज की सरबन बाबूक तँँ खाली हठ आ इच्छा छलनि। (Gp बजलाह पंचदानक नाम? वजबाक करबह हो सरबन! जखन एतेक भेबे केलै तैँ असल व्यवस्था सँ कयलनि राघव लला। से. गति नहि अछि d कम-सँ-कम चुप तेँ रहू। बनियाँवला भोज की करबह। ओहुना कनिजा oft लोकक हुनका कमी नहिं छनि...। बस. आहाँ केँ ई नजि बूझल अछि जे शास्त्रक अनुसार काकीक भोज लेल सबहक मोन टॉगल है... । 'एक बेर हाक देबाक काज... । बैदिकी श्राद्ध भेने मुइनहार Auge होइत wht? से दही-चूगाक करह। भगलपुरिया कतरनी चूरा... आ सरबन बाबू दुनू ies कोनो are हिलैत wa सँ-कम चारि बेर अहगर क' छल्हिगर छनि? कथीक अभाव Bt?” दही...चीनी...डालना...तीलक अँचार...आलुक EVAR रसनचौकी... "हैँ यौ! अभाव किऐ रहतनि? dren, . अँचार...नोन-मिस्चाइ आ अंत में बुनियाँ...की ?”” से आब भोज शुरू भ' गेल अछि... । चूरा-दहीक . प्रतिष्ठो किछु अर्थ रखैत छैक कि नहि ? प्रखंड “Se छै ने सरबन aq?” भोज... । नहिं -नहिं, दही -चूराक भेज... । कहियो.. भरिक कोन गाम में के नहि चिन्हैत छनि सरबन “a, इस्टीमेट ?'” क्रेज रहै पक्की भोजक माने - पूड़ी जिलेबीक . बाबू 32” “aera हौ गोपाल । तों तेँ हिसाब-किताब भोजक। नामे सुनैत मातर बच्चा सभ किलोल “on राघवेजी कोन कम BAA?” में माहिर छह | ASH HHH आ भुटकुन बाबा ara लगैत छल... । स्त्रीगण अनेरे प्रसन्न भ' “Ss से ते de! ! कोन गामक wages सँ पूछि लहुन। आ ae लोकनि विचार-सहयोग अपन नेना केँ कोरा में ल' चुम्मा लैत पति केँ नहिं चिन्हैत छनि राघव केँ?'' दियनु मास्टर साहेब आ नेता जी... ।'' Ast tea लगैत छलीह... । पुरुखवर्गक “gree में चिलमक सम्बन्धे ततेक विस्तृत whic बनल। श्राद्ध आ भोज दुनू daa कोन? we दुर्लभ लोके शरीराणि ea Se...” 'मिलाक' प्राय: डेढ़ लाखक ! सरबन बाबूक हवा पुन: पुन: केँ गीरह में बन्हेने ओ लोकनि भाँगक Se. की बाजि देलहूँ अहाँ? जखन ABT आ राघव लला सटकदम्म...। पुरना पत्ती पीसि देबाक लेल कनिजाक free मुँह खोलब जुड़ित्वे बोकरब। भतृहरि कहने “की सरबन बाबू, भेल ने 2” Pe लगैत छलाह... । मुदा, आब ओकर क्रेज छथि...।'' 'सरबन बाबू दुनू भाँइ केँ चुप देखि ठीकेदार गेलै। आब के पुछैए पूड़ी-जिलेबी-तरकारी केँ ? “ang age केँ एखन रहय दियनु। ट्रैक साहेब Hale रहल गेलनि, “oT चुप किऐ. ओ तूँ रहरहाँ होइते tas आब तँँ माघ नहाय.. dee नहि जाइ as!” 'छी? टकाक दिक्कति ate? ई दिक्कति कोनो से मर्द कहाय। माने जे दही-चूराक भोज क' *“ठीके कहैत छी । उचित तँ ae जे वैदिकी दिवकति छै? असल बात fe जे अहाँ सभ 'पाबय से मर्द । बड़का-बड़काक Gat ढील भ' ess” चाहैत की छी? जँँ चाहैत छी तैँ व्यवस्था भ' जाइत oft...) हँस्सी-ठट्ठा ऊँ की? पसेरी *'हैं...हैं... । वैदिकीए होउक ।...की सरबन Ba हम कोनों समाज सँँ बाहर थोड़े ST? aT afte’ ata होयबाक चाही। आ चाही. बाबू?” जैं अवसर पर काज नजि आबय तँँ धन बेकार । मनीपावरक संग मैन पावर... । से आब लगैए, जगमगाइत नक्षत्र मंडलीक मध्य सकुचायल | कथी? सधयबाक चिन्ता? va! अरे माय- afr काकीक दुनू बेटा मे ue दुनू चीजक सकर्पज-निष्प्रभ बैसल सरबन बाबूक बुद्धि जेना . बाप फेर घुरिक' नहि अबैत छथिन। ओ पुत्र के कमी नहिं। दुनू बेटा पौरुष देखौलथिन ale... हेरायल सन भ' गेल छलनि। आब जेना झुकल A art लेल दैत छथिन? एही लेल ने जे आ से भरपूर देखौलथिन अछि... । 'माथ उठयबाक अवसर आ बाट देखाइ पड़ि we पुत्र समय पर पुरुषार्थ देखाबय ? एहन श्राद्ध vier ते ओ लोकनि देखबिते रहैत छथि। छलनि... । कनेक महग अवश्य छलै, मुदा दोसर करय... एहन Ta करय जे उद्धार क' aa ओही दिनुका बात लिय' ने । अरे, सरझप्पी उपाये कोन छलनि... ? देअय... स्वर्गक फाटक फोलि देअय। आ से दिनुका । अस्थिसंचयक बाद are हेतु योजना “ठीक छे । हमरा दिस सँ हर्ज नहिं। कनेक अवसर उपस्थित अछि अहाँ सभक समक्ष । आब बनाब' लेल गामक पागधारी लोकनिक बैसार Trash संँ Sel पूछि frag!” आवश्यकता अछि पुरुषार्थ देखबबाक |" भेल छलनि... | सरबन बाबू दुनू tg ओना तैँ “fap राघवजी?”” “Sep तँँ wea छथि भाइ। बेसी सोचल 'एक दोसरा सँ कटल-कटल रहैत छलाह... । एक 'सबहक नजरि राघव लला पर आबि स्थिर. नहिं जाओं। अरे, समय पर पाइ आपस कक गोटे ईर घाट तैँ दोसर वीर घाट ! परंच एखन दुनू a गेल रहनि। धुआँयल मुखाकृति... झड़कल- सकबनि a बेस, ae तँँ टीसन लग सड़कक aie अपना के एक टा विशेष प्रकारक अपराध झड़कल। कारी झामर SL... | तमाकुलक am कात महक जे दसकठवी गाछी अछि सैह लिखि भाव dan SY ca अनुभव क' wa सँ गनगनायल गाँजाक लाली Wa sofad देवनि ang केँ। ओहुना आब गाम महक जमीनक pare! लागि tea छलनि जेना कि vies आँखिक डिम्हा a हुलकी देव ' लागल रहनि... | प्रति मोह बेकारे। गाछिओ तँँ उजड़िए गेल लागल होनि। पतिया लागब की होइत छै, से “Ses sae विचार से हमरो...।'' sw... ओ लोकनि नेनपने में देखि चुकल छलाह | जकरा ora भोज। नक्षत्र मंडलीक अनुभवी 'ठीकेदार साहेबक मुंशी भोगी झाक मंतव्य हाथे खुट्टा पर बान्हल गाय-बड़द मरि जाइत 'पाकशास्त्री सभ उनटि-पुनटि क' एहिं मुद्दा पर नीक जकाँ बूझि रहल छलाह सरबन बाबू। गँजेड़ी i 48 / 2c, अप्रैल-जून, 2008

ant भालसरीक छाँह मे कुर्सी ध' बैसि जाइत कम मात्रा मे भात बनौलनि। एतबहिं जे हुनक *' ...बनैत जायत सभ धनना सेठ...आ...एक Gi...) अकास साफ अछि... । कूदि-फानि we अपनहूँ नेना सभ लेल अपर्याप्त रहनि...। ओ a पाहनु केँ दू मुट्ठी भात खुअबैत हींग चूब' मेघ सभ दखिन-भर चलि गेल अछि। भ' सकैए . ओहिं बारह बर्खक पाहुनक आगाँ मकइक रोटी. लगैत छै!”” afer मे बरसल होअय। एहि am af आ रामतरोइक तरकारी परसि देलथिन आ नहाय 'छोटजनी केँ लेसि देलकनि । तरबाक लहरि अयबाक साहस नहि क' सकल । संभवत: इन्द्र लेल बाड़ी मे चलि गेलीह... । एम्हर ओ बच्चा मगज पर चढ़ि गेलनि... । ओ खरमासक आगि के अपन पराजय मोन पड़ि गेल हेतनि...। sens दू कौर खयलक आ नानीक fe sat लहकि उठलीह...। ओ Gee अन्हरियाक पंचमीक उदास चान रेलबेक ताकय लागल...। काकीक करेज मे हुक. सायाक डोरी केँ छाती पर कसलनि आ कनिजा ओइ पार आमक गाछीक उपर उगि आयल अछि। TSA... | हुनक आत्मा कलपि उठलनि...। काकी संग व्यास ककाक सात पुश्तक उद्धार नहू-नहू रेलवे आ तकर ओइ पार बल्‍ला मे ठाढ़॒ हुनका लगलनि जेना अन्तस मे जमल कोनो वस्तु sta लपकलनि। हुनक झौंटा पकड़ि क' इमलीक qe भूतहा गाछ देखाइ पड़ि wea पिघलि रहल होनि आ गरा बकौर लागि wa घिचलनि। कनिजा काकी तलमला क' खसि अछि... ! नहि जानि कतोक भूत-प्रेतक बास कै होनि... । ओ अपना क' कहुना क' wena पड़लीह... ora ओ दुनू हाथें कसि क' set aie गाछ पर... । ई कोनो हम नहि कहि ea आ एक a निर्णय लेलनि... । लाज तेयागि क'. के ध' लेलथिन on घिसिअबैत-घिसिअबैत छी। कतेक लोक देखि चुकल छथि। कोनो- जेठजनीक दुआरि दिस बढ़लीह...कनेक अपन gant लग आनि पटकि देलथिन... । ort महिसवार के ते पसर चरबैत काल Shea थकमकयलीह...आ चढ़ि गेलीह दुआरि पर... । Cong आब' दे मुन्ना के पप्पा केँ ते भात नेने रहै आ नकिआयल स्वर मे तमाकुल मंँगने “Saga, एक मुट्ठी भात देब ?'' ई. खुअबैत fed... । तोरो आ तोहर नाति Fae... । रहै... । सुनै छियै, ओहि इमली गाछ पर जतेक. सुनिते हीरा Galt किटकिटा serie गै रॉड़ी...बुढ़ौरी ! तो गेलय की करय मुदइ के भूत-प्रेत अछि से प्राय: वैह अछि जे कोनो-ने “Sail कमा क' राखि गेल छै की ? ge! दुआरि पर? हमरा बदनाम करय A? AE -कोनो ati रेल सँ कटल अछि... । afer अंगोर राखिक' पटपरा वहि देबै जे-भात देबै ?”' thet भथियान-ने-वहका देलियो तैँ हमहू भोला ई रेल लाइन बनल हेतै तहिया के सोचने हैत “after, हमर जे दुर्दशा करबाक होअय, मिसरक एक बूँदक नहि... ।"” जे कतेक लोकक लेल अंतिम प्रस्थानक कतेक. से क' लेब...मुदा ओहि अबोध केँ... ?'' पहिल एवं wat सासुक इलाज कय ओ अपन सहज-सुलभ-सस्त-साधन उपलब्ध कयल जा. बेर कनिजा काकीक स्वर मे आपत्ति प्रकट भेल घर मे कपड़ा पहिरय चलि गेलीह आ ओत्तहि Wa है... । मुदा नहि ! कहाँ प्रस्थान क' पबैत रहनि। सँ गरियबैत रहलीह... । अछि केओ? कहाँदन सभ केँ ओही इमली पर *' अरे, वाह रे अबोध ! ककरो बापक किछु ar SATE भोजन लेल बैसल नाति नानीक वास लेब' पड़ैत है... । की कनिआ काकी Seles fea की? केओ खराँत राखि गेल अछि दुर्दशा देखि पहिने ते हकबकायल...फेर किछु ओही पर... ? मुद्दा, Ue ग्यारह-बारह दिन मे. की ? एतबे दरेग छनि ते निकालथुन ने कोसलिया aie फुरयलै तँ कानय लागल...। आ कनिजा कहाँ ag नजरि आयल अछि हुनक धूआ? आ खुअबथुन रसगुल्ला... ।'' ret! ओ ने fag बाजि wa छलीह आ ने खाली ओहि राति... । देयादिनीक चिकरब सुनि छोटजनी बाड़ी कानि we छलींह। बस चितांग पड़ल शुन्य मे सँ प्रकट भेलीह...सच्य:स्नाता...सही अर्थ मे. दृष्टिएँ अकास दिस तकैत रहलीह...। नातिक 'एकवस्त्रा...भीजल केस नग्न पीठ पर लहराइत... . कानब सुनि चेत भेलनि...। जेना-तेना उठलीह एक मुदूढी भात... साया केँ छाती पर वामा हाथें सम्हारने... । स्थिति. आ नाति केँ पौंजिया क' कानय लगलीह...। ओहि राति हमरा लग सूतलि माय फॉफ कटैत . केँ अँटकॉरेत-अँटकारैत हुनक कान में जेठजनीक ओही दिन बेरू पहर नाति अपन गाम चलि 'रहय । बेटा केँ वात्सल्यक सुरक्षा दैत... । की हम संवादक अंतिम अंश नीक जकाँ पड़लनि, = गेलनि। संयोग सँ हम खरदाहाक खेत देखि सुरक्षित भ' गेल रही ? खिड़की पर सँ कनिजा लायक 'काकीक मुंड जरूर निपत्ता भ' गेल रहनि...परंच RIE 2222225:>. राम मोन मे afer हुनक आँखि ओ बेधक ag J a oe (OO pe eal दृष्टि..। की कहय चाहैत रहय ओ दृष्टि..? 2 Lend OP LL ee की अर्थ ए ओकर...? ओना किए देखने रहोंथ.. .. ०४002: Ege, नि | ye. 'कनिजा काकी हमरा ओइ दिन? 2. fe i See "| Ves ओइ दिन कनिजा काकीक नाति आयल Mee I oe Ne *¢ रहनि--नानी केँ देखय। माय सँ जिद क' st A दर 4 कूद cgi LANNY la Baa S कतबों मजगूत हृदयक होथि गुंजा परंच मायक (८2) Bie... ta oe ey) Eide कप लेल दरेग F छलनिहें ने। की करितथि? aie mee: ate), 4 दि ee रोकि सकलधिन बेटा केँ । कहने रहथिन जे ate | Bale wy gf हक cus | & ana” i जो मुदा साँझ धरि घुरि अबिहेँ । 2... i (ey ie KE NN. दर 'तहिया काकी छोटजनीक पार मे छलीह। | ही के. कि राम, NN भोरे-भोर आबि जुमल ओहि बारह बर्खक पहन... 3 #. *<ं ५; के नि = २०५ केँ देखिते छोटजनीक पारा चढ़ि गेलनि। फल... हू. न कि Gr jh भोग' पड़लनि घिया-पुता केँ। ara RS th कि मारि खाइत ओ सभ हकबका गेल जे ओकर lee, DIE i Be i oa 8 a 'सभक अपराध की छै? तामसे छोटजनी बहुत पद CE WM SEE Ec IE Abedt, अप्रैल-जून, 2008 / 29

होनि से सोचथि an बाजधि। मुदा, ओ स्वयं डोलबैत...नहिं जानि किएक माय सँ आँखि waa छल...मुदा हिलबाक साहस... ? आँखि wr छथि जे प्राय: दसे बर्ख मे टुग्गर भ' गेल. मिलयबा सँ बँचैत चापाकल दिस बढ़ि गेल मूनि चिचिअयबाक प्रयास कयलहूँ, ई बच्चा पुन: टुग्गर भ' जयबाक आशंका सँ रही... । *माय...माय... !"' ग्रस्त अछि... । ओहि दिन पतिक भीतर सँ हुलकी चाह पीबैत रही तैँ माय कहने रहय, “Te! *'बौआ...बौआ ! की भेलह ? डर होइत छह दैत आ फेर सम्पूर्ण मुखाकृति पर पसरैत एक. कने घूमि-फिरि आबह । मोन बहटि ae..." की ?”', माय Hare फोलि देलक। ई केबाड़ aan कातरता केँ देखि हुनका लागल रहनि fara गेल रही मुदा, कोम्हर जाइ से निर्णय. फोलि देलाक बाद मायक कोठली सँ हमर जेना फेर सँ ब्लाउज भीजि गेल होइन आ एक बाधित wer! रेल लाइन दिस? नहि! fads Hach जुड़ि जाइत अछि। ओ हमर चौकी पर a दुधिया gis पसरि गेल sem... दिस? नहि-नहि ! ! तखन टीसन ? हैँ चली...।. आबि बैसलि। माथ पर हाथ देलक। आँचर सँ फेर कहियो व्यास कका लग ई बात. टीसन पर चाहक दौकान पर लोक सभक चर्चक हमर माथ पोछैत जल पिऔलक। 'बजबाक साहस नहि भेलनि...। आ एक दिन. विषय वैह छल जाहि सँ हम ata’ चाहैत “at dere?" माघ मासक कुहेसल भोर मे व्यास कका अपनहिं | छलहूँ...। हम ओत' सँ उठि अरुणक पानक “qa, खिड़की पर कनिजा काकी आँखि मूनि लेलथिन। हुनका आँखि मुनिते जेना . दोकान लग जा ठाढ़ भ' गेलहूँ । हम नित्त जतेक oe!” ror काकी अपना के कटाह एकाकीपनक भाँग खाइत रही ताहि संँ प्राय: तिगुना हमरा *'दुर्‌ बताह! ओ बेचारी कथी aa feria sig मे daa अनुभव कयलनि। खाइत देखि अरुणक site विस्मय सँ फाटि अओतीह ? ई तोहर अपने मोनक डर छलह... । ओह! ओहि दिनुका हुनकर कानब... ! तुलसी गेल रहै... । हम ओकरा दिस ध्याने नहि देलहूँ ae कहने छलियह भोर मे जे रेलवे दिस नहि 'चौरा लग व्यास ककाक शव पर माथ पटकि-. आ विदा भ' Hee ae दिस। बौआइत Heid अपना केँ जतेक ale चिन्हैत छह ताहि 'पटकि क', करेज फाड़ि कनैत कनिजा काकीक | रहलहूँ...बौआइत रहलहूँ... कहुना सम्पूर्ण प्रसंग सँ बेसी हम तोरा जनैत छिअह। ओ fre ओ छवि... । के बिसरि जयबाक प्रयास ata रहलहूँ...। | अओतीह Fant? एहिं ठाम हुनक की छनि? Wet पतिक शव के लोक श्मशान a" प्राय: साढ़े आठ बजे राति में घर घुरलहूँ _ जैँ रहितनि fer जयबे eee?” गेलनि on ओम्हर ओ अचाँचके मौन भ' dare खोंचारैत प्रश्न सँ बचबाक एक्के aT पता aie किएक हम ओहि क्षण बिसरि गेलीह...। जेना एकदम निस्पंद...जड! टोल- उपाय छल जे चुपचाप दू-चारि टा सोहारी खाक' गेल रही जे आब प्राय: चौबीस बर्खक भ' चुकल afte स्त्रीगण सभ जे-जे करबैत गेलथिन ओ अपन ओछाओन ध' ली... । आइ फेर निन्‍न निपत्ता छी... । मायक कोर मे मूड़ी गाड़ि ठोहिं पाड़ि ata गेलीह। चूड़ी फोड़ि देल गेलनि... । मौन छल... । क्रमश: जेना-जेना राति बीति रहल छलै. क' कनैत रहलहूँ... । निर्विकार चेहरा नेने ओ सहयोग दैत गेलथिन...। तेना-तेना निसबद्ध भेल जा रहल छल... । दूर “Sere SST | आब सुतबाक प्रयास करह। फेर कोना-कोना अस्थि-संचय सँ ल'क' श्राद्ध दछिनबारी टोल दिस सँ कुकुर सभक झौहटि बहुत राति भ' गेलै। अच्छा, कने घुसकह, हमहूँ afte ओरिआओन भेलै, काकी के किछु gga «gag पड़ि रहल छल... मुदा एम्हर एकदम एतहिं पड़ि रहैत STI” fe भेलनि। दुनू भाँड के जेना जे फुरयलनि... . Peer... । कुकुर सभ निपत्ता...जलमुर्गी मुँह हमरा माय सँ अपन कोठली मे जाक' सूति लोक ay जेना जे परामर्श देलकनि...करैत . सीने...कतहु कोनो चूलचाल नहि...। पशुपति रहबाक आग्रह करबाक साहस नहि भेल। हम Tene... TH धड़धड़ायल पास क' गेल...फेर पुन: . गुबदी मारि लेलहूँ... । हमरा सूतल जानि नहू...नहूं सननाय... । अचानक लागल जेना हमर कोठलीक माय फॉफ काटय लागलि...। आ एम्हर हम अगुअइत मे fag खड़खड़ायल होअय... eet सोचैत रही...माय कहैत अछि जे ओ हमरा ET ~ — भ' सकैए? हेतै कथू। के आँखि खोलओ 2...फेर ae जनैत अछि। की सबहक माय अपन VS WY 'लागल जेना खिड़की दिस fag भरिआयल सन। . संतान केँ एहिना जनैत हेथिन ? की कनिजा काकी < > oy aif खुजि गेल...। नजरि खिड़की fea अपन बेटा सभ के एहिना जनैत रहथि... ? ro के )) 'उठल... । खिड़की पर कनिजा काकी छलीह... | (t ( (का । ) i) 'कनिजा काकी ae, कनिजा काकीक मुंड...। निरर्धक योजक-चिह्न. \ x ag निपत्ता... | खाली Fs... । उपरका चारि टा =~ ei तने Cy iy ie दाँत निचला ठोर मे धँसल...भीजल केस माथ. ओहि दिन व्यास ककाक त्रयोदशा रहनि। प्राय: NF) y) में सटल...चैंछायल रक्‍तहीन धोल-पखारल दस-एगारह बाजि रहल हेतै। कनिजा काकी XS z 'निष्प्रभ चेहरा...सोझे हमरा दिस तकैत आँखि... | अपन कोठली में पड़ल-पड़ल आब सदाक लेल सी Se! भ्रम थिक। भाँगक यैह लच्छन ठीक aie) अनुपस्थित भ' चुकल पतिक विगत स्मृति केँ 'एकभगाह क' दैत अछि । झुट्े । कहाँ क्यो अछि? सहेजबा मे लागल रहथि कि आँगन मे हल्ला 5 orien क' सुतबाक प्रयास कयलहूँ ते अनुभव. भेलै... । दुनू पुतोह आपस मे लड़ि रहल छलथिन। खिड़की पर अऑँटकल aes भेल जे हृदयक गति तेज भ' गेल अछि...धक्‌ oie ot लोकनि एक दोसरा केँ हीन प्रमाणित **बौआ...बौआ ! उठह ने हौ ! कतेक सुतबह 2", TL. TEL हम डरबूक नहिं छी । कहाँ केओ कयलनि... । फेर एक दोसराक नैहर के गर्हित माय हमर कोठलीक केबाड़ tie रहल छलि। अछि... ? हमर आँखि फक्‌ सँ खुजल...खिड़की . घोषित कयलनि... । संतोष नहि भेलनि ते एक- हमरा लागल जेना कोनो यात्रा सँ घुरि क' आयल size मुँड हमरा ओहिना निहारि we दोसराक भाय-बाप केँ चिबा जयबाक धमकी Ogi संभवत: माय बूझि wea छलि जे बेटा छल... । एक बेर, दू बेर, कैक बेर यैह क्रम देलनि... । तथापि fag कसरि रहि जयबाक संदेह सूतल अछि। “चाह बना fea?" मायक Ue चलल... । पसेना-पसेना भ' गेलहूँ... । तरासे कंठ भेलनि तँँ एक-दोसराक अंग-विशेष केँ खच्चारि प्रश्नक उत्तर मे हम स्वीकृतिसूचक a सुखा रहल छल... । चौकीक नीचाँ लोटा में जल. केँ stan भरि देबाक दावा ठोकय लगलनि... । 24 / ऑपिका, अप्रैल-जून, 2008

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आपस होइत रही तँँ देखलिये जे रेलवेक ओइ उपकार क' कय फँसत ग' । जाय दियौ। फेर तँँ. भेलै। ओ तँँ माय छथिन । बिसरि जाथु सभ fg! पार जें गाछी सभक बाद डिस्ट्रिक्ट बोर्डबला . माय-बेटा, सासु-पुतोहु was हैत...। बुड़बक हमरा विश्वास wea जे ओ हमर बात मानि 'साबिकक सड़क 8 ततहि कनिजा काकी नाति | बनब हम सभ। छोड़ह-छोड़ह । हमरा सभ केँ wae... । मुदा, ओ टस-सँ-मस नहि भेलीह। केँ विदा क' wa छथि... । विदा करबाक ढंग. कुकुर कटने अछि की ? जानय जौ जानय जाँत। alee’ हम पुनः भोर मे अयबाक बात कहि ale विचित्रे सन... । भरि पाँज क' नाति के हमरा सभ के अपने कोन कम समस्या अछि? चलय लगलहूँ...। अचानक देखल जे हुनक पकड़ने ओकर मुँह, आँखि, कान, कपार सभ आ जत' दू टा बासन रहैत छै ओतहि ने ढनमन che कंपन बन्‍न भ' गेल रहनि आ आँखि एक केँ धड़ाधड़ चूमि रहल छलीह । नानीक tsa होइत छै... । तखन घरक बात ल'क' दरबज्जे- टा विचित्र प्रकारक चमक सँ चमकय लागल hoe नाति कसमसा रहल छल, मुदा ओ ओकरा IS अँगने-अँगने बौआयब... ।ई कोन नीक . रहनि... । जेना मुक्त कर' लेल तैयार नहि रहथिन...।. बात भेलै? नजि अपने चैन सँ रहतीह आ ने 'कननमुँह भेल नाति के गसियाक' पकड़ने विह्लल. हमरा सभ केँ रह' देतीह गुंजाक माय। लगैए केस । भेलि कनिजा काकी अचक्के हमरा समक्ष मे. ईहो सनकल जाइत छथि... । रोगाह इजोरिया सँँ झँपाइत गाम...! aig देखि ठमकि गेल रहथि... । नाति मुक्त भ' “ug! थइ-थइ भ' गेलैक...। महो-महो भ' पैघ-पैघ साँस लेब' लगलनि... । तखन कनिजा गेलैक... । कनिजा काकीक दुनू बेय कमाल क' काकीक आँखि विचित्र छलनि। नजरि झुक भोर जे कहियो नजि भेलै... देलनि... । कतेक नीक जकाँ अपन कर्तव्य निमाहि गेल रहय हमर... । नाति विदा भ' te हमरा. सनकि तँ गेले रहथि ओ। तखन ने ओहन विचित्र देलनि... ।'' भोज खयनिहार लोकनिक अघायल ama जे ओ आब गाम घुरतीह । पुछलियनि a रूप धारण क' नेने रहथि...। ओहिं राति ओ टिप्पणी चलि wa अछि... । खुशीक आवेग्‌ में ओ हमरा बढ़ि जयबाक संकेत कयलनि आ अपने. घुरिक' आँगन नहि गेलीह । दलानवला कोठली किछु गोटे sigs YR नारा लगाब' लगलाह जाइत नाति केँ पाछाँ सँ देखैत रहलीह...देखैत मे कोठी सभक दोग मे जाक' पड़ि रहलीह...। Safe... 'रहलीह... । की ओ वस्तुत: नातिए केँ देखि रहल एक दिन...दू दिन...तीन दिन... । हम एहिं बीच *'कनिजा काकीक?'' 'छलीह वा आर किछु... ? हम पच्छिम दिस अपन मे दड़िभंगा गेल रही। तेसर दिन जखन “sal”? गाम जा रहल छलहूँ...। कतेक बेर Ute’ utara सँ गाम अयलहूँ Ga भेल जे “Sear बाबूक 2" 'तकलहूँ ते देखल जे ओ ओहिना ae पूब दिस. तीन दिन सँ ओ ओही अवस्था मे fay खयने- “sat? देखि wa छथि...लगातार... । पीने ओही om wart daa, तँ कखनो पड़ल *'राघव बाबूक ? ओहि दिन जखन ओ गाम पर घुरि क'. tea छथि...। ने d किछु बजैत छथि आ ने “sql? अयलीह ¢ अपन दुःख की कहितथि बेटा सँ? Ha बातक उत्तर दैत छथिन। निकासो लेल “nd केर 2” aid पहिनहि सँ तैयार भेल बैसल रहनि. बाहर जाइत केओ नहि देखलकनि अछि । भ' “जय हो!” स्वागतक हेतु। एक टा हाथ छोड़ब रहि TA सकैए रातिक' एकांत मे जाइत होथि। सभ sept 2" नहिं daar दुर्दशा बाकी रखलकनि राघव cen! समझा-बुझा क' हारि गेल अछि...हुनका पर “नाश हो!" बेटाक मुँहें ओहन घिनौन-घिनौन गारि सुनिक' . कोनों असरि नहि... । “प्राणी सभ में 7” arnt & लागि रहल छलनि जे हाड़ टा रहि हम जखन पहुँचल रही तखन तुरंत सूर्य “agement हो!” 'जायत नहि तँँ tea माउस गलि गलि क' खसि. ret भेल छलाह। दलानक कोठली अपेक्षाकृत “विश्व केर?”' WS... | इच्छा Fah जे जैँ Ue काल धरती फइल रहलाक बादो fg भरिआयल सन aT "कल्याण हो! ''... 'फाटि जाइत a ओहि मे समा SEAS... । मुदा से अन्हार सन लागि wa छल । कदाचू कोठी सभक fea खेपक भोज समाप्त भ' गेल अछि। संभव कहाँ छलनि... ? कारणें...। आँखि गड़ाक' देख' पड़ल रहय चन्द्रमा नहू-नहू अकास मे चढ़ि रहल छथि...मुदा 'सरबन बाबू एहि सभ a निरपेक्ष। हुनक हमरा...। हम मृदुल स्वर मे टोकलियनि, इजोरिया साफ नहि अछि...। धूसर मटिआह प्रत्येक भंगिमा जेना यैह कहि wa छलनि, “कनिजा काकी !'' दू-तीन बेर टोकलाक बादो . रंगक...जेना रोगाह होअय...जांडिस सँ पीड़ित... | *“हमरा नहिं कह fag । हमर पार मे तो एखन ओ उठिक' देबालक सहारा ल' बैसलीह... आ We रोगाह इजोरिया सँ आच्छादित गाम क्रमश: नहि छे। ओकरे कही जकर पार में we..." नजरि उठाक' तकलनि...। wee घसकल शांत भ' रहल अछि... । amen ओहि दिन कनिजा काकी साँझ ae खपड़ा सँ बनल fox wy द'क' तुरंते डूबल aR सरबन बाबूक दलान पर पहिल aa’ राति ot टोल-पड़ोस आ गामक कोन. सूर्यक ललौन प्रकाश कोठली मे जत'-तत' safe खेपक ब्राह्मण-लोकनि पान-सुपारी ल'क' जा अल्लाँ बाबू आ फल्लाँ बाबूक ओत' ae We छलै... । प्रकाशक एहने एक टा टुकड़ा. चुकल छथि... | खरहरा देल जा रहल अछि... । गेलीह...किनकर-किनकर खुशामद af कनिजा काकीक बगल मे देबाल nse आ दोसर खेप मे बैसबाक लेल प्रतीक्षारत बुभुक्षु aaah... हमर निसाफ करै जाउ... !'' मुदा, Be... ओहि मद्धिम होइत ललौन प्रकाश में. ब्राह्मण लोकनि तत्पर छथि... । 'कोनो गोटे दोसराक घरेलू मामिला मे बजबाक At लागल देबाल आ कोठी सभक जर्जर स्थिति आ एत' हम एहिं कुर्सी पर जेना जमि क' जरूरति नहिं बुझलनि... । दिन भरि दोसराक घरेलू पर नजरि गेल... संगहि नजरि गेल wher fe गेल छी...की करी? जाइ कि नजि जाइ? बात केँ कौचर्यक स्थायी विषय बना क' मजा. काकीक चेहरा पर... । जनम-जनम के उदासी [- लेनिहार स्त्री-पुरुष प्रत्यक्ष: हिनक मामिला मे. जेना हुनक आँखि मे जमि क' रहि गेल रहै... | a क. नि, ii ee : द्वारा-डॉ. पी. के. झा हस्तक्षेप करब अनुचित ...। असल में. नहुए कंपित ठोर जेना किछु कहय चाहैत होअय, distal. ( हिंदी ), केंद्रीय विद्यालय, सरबन बाबूक ब्रह्ममेंच आ राघव ललाक लंठइ Hal कहि नहि पाबि रहल होअय... । हम आग्रह कटिहार, बिहार-85405 सँ सबहक fied चमकि रहल छलनि...। के कयने रहियनि जे अनशन तोड़थि। जे भेलै से मो. 9430038969 | 30 / 2am, अप्रैल-जून, 2008

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4 | | http://www.videha.co.in/ ISSN 2229-547X VIDEHA (साभार जो रवि, विकी CC-BY-SA-3.0)

विदेह ३६८ म अंक १५ अप्रैल २०२३ (वर्ष १६ मास १८४ अंक ३६८) | | 27 ad कथा कुमार पवन प्रा एक युग बाद कुसार पवन फेर सेँ लेखन में सक्रिय थेल छचि । विगत शताब्दी क नवम दशकक शुरुआत सं लेखन आरभ कर चला कुमार यवन मैथिलीक सुपरिचित कवि; कथाकार आ व्वग्यकार wht | किछुए कथा आ तीन चारि दर्जन कवित्ताक बल पर मैथिली से अपन फराक यहिचान राख चला हैं एक टा विशिष्ट कवबि-कथाकार छाथि। हिंचक नव दौरक प्रारंभ तक er यादगार ad कथा आ पाँच योट कविताक संग भा रहल WP प्राय: कतेकों वर्ष सँ गैथिली में एहन TT कथा Tega लेल AE भेटल अछि। हमरा विश्वास भछ्ि जें मैथिलीक व्यायक पाठक वर्ग कें f त्मरणीय रुरुआत are! “संपादक aren में gaa fats... & re जेना-जेना गाम दिस बढ़ल जा रहल 3 दस जे सवरों Kee eZ G Ex Bh अन्हार आर सषतायल जा रहल न में ate जाहि रस ABE Ga हि... अष...।माल-जालकें चयक' aT aR Gare फेर में हम UT’ wT: i: Been Wr, O\ से घुरत लोक सभ...। मंथर गतिएँ भागिक' आयल उलहेँ, से एबनहें (Neo! कि ON चलेत, पजुआहि करत, महीस सम कहाँ जोड़ि हल अछि... tas हू ee Die ©) sate पर बैसल चरबाह सभ पाया आ काठक गार्डरकला एहिं ( पर re llc Baia fal i dae atom f Y, er (Os ae ©) आडि। सामने गाछी सपक पच्छिम gare पिलुक्की खिरेइ आ चर... १": RS game EEC) of astra ओर पारगाम।गाछी -. दिस गर्द-गर्द भेल वातावरण केँ हीं नि ue) ME), आ Aran कारणें अन्हार आर देखिमोन हल्तुक क' लेबाक आशा. OP रद रा 4, नगर बुझा रहल अछि। गाछी करब आब व्यर्थे बुझा tee Ro GE Re oe विस भाग द' क' ie अछि...। fats, जे हमर गामक Nt IRN, NS हुलकी द' रहल अछि आ संगहि पूर्व सीमान ee से बहैत हमरा हलक ड़ ea ate ate लौकनि के एक टा परिचिति दैत आबि TES . सिलौट पर ताधारें पिसने हेताह जाधारि why FEE TE TR. अनबरत...। अछि, आइ केहन कला सन. सिलौट ने छोड़ि देने हैंत+भांग में देल गेल ee गाछो पार क' रेलवे लाइन पर चढ़ैत Bh... | भेलि अपन अस्तित्वक लेल संघर्ष क' रहल . खीराक नीया, गुलावक पत्ते, सौंफ, .द्िगी, ee स्पष्ट ger fe व्यापक ब्राह्मण अछि, से देखनहिं जानल जा सकैए। एक Sy आदिं-आदि कैक तरहक मसालों वैन्यू समाज जुटिरहल ay... पुजारक सैकड़ो बीड़ा दीघ निसास छोड़ैत हम चारू दिस नजरि खिस्वैत सै टीसन । तनीन झाक चाहक दौकान । कमलू Fees राखल जा चुकल af. |e Te 'छी। सूर्य दरके चुकल छाथ-..। खूने खुनाम age साफ कहने warn नवीन झा के, कोना. केर आग्रह सुनबाक लेल उताहल बढ़ TT 'पर्चिमाकाश-..। घुरिआयल परिवेश... । नहू- हालति में दस किलो दूध राखय लेल। gu बच्चा-बुतरु-छौंडा-छौंडीक ig... ee more अन्हार...। आ अन्हार में EAT ete संग घोरल गेल हैत भाँग। गिलास-पर-. पदार्थ पर टूटि पड़बाक लेल IS अटाठद्ठ | treme देने हैत सभ...। सबहक मोन आब लोक... हम एत' को क' रहल छी? SAT गुनगुना चुकल हेतै...। एखन aa wae Tae से सड़कक लभानी पर sat पर रहबाक चाही । ओत' धमगण्जर मचल हेतै। संपर्क भ' चुकल हेहैं बाबा बौरहबा सँ--सोझे SET हम आगाँ aga छी कि आप्रह भ' जाइत कल्हका भोजें तेहन रहै जे अजुका भोज लेल gene आब हैं एक्कहिं टा काज बाकी...।. ऊँक। की रेलम पेल! लोक सभ बीड़ा लूझ' लोक सभ भोरहिं सैं उत्साहित अछि। जटावला ger बाबूक दलानक चिस्ृत oT लैल टूटि पड़ैत अछि। केओ चारि-चारि टा बीड़ा aires पत्ती भोरहि में फूलय लेल ध' देल गेल. श्र नोतल ब्राह्मण सभक जुटान भ' रहल हेतनि...।. लूझि-ओछा पलथी मारिक ' बैसैत अछि a केयो wa कमलू भाइक खास आग्रह छलनि। से ater एख़न हमरो रहबाक चाहत छल...। on बीढ़ाक अभाव मे चप्पले पर आसन जमा लैत shim में भोज रहौक तैँ ओ दढ़िभंगा में हम एत' एहिं पुल पर ठाढ़ छी... । की क'रहल Ae प्रकृतिक लोक बीड़ाक लूटि में अरकिनहिं सकैत aru ah काल्हिए दसबजिया gh हम ua"? सभ हमरा औत' ताकि Ter TEA गेला संतों हारि क' चुकिए माली बैस ट्रेन से आबि गेल छलाह । उत्साहपूर्वक भनसिया . हैत... । कमलू भाइ खास क' आ हम... ? aaa जाइत अछि... ओम्हर जे कनेक हमर-झाँटि- 'सधक संग भरि दिन लागल रहलाह anf? सें कतोक बेर गाम दिस विदा होव' चाहलहूँ पर-शूलय-बड़का-बढ़का-लोक वला 2 सैं बहुतों लोक आयल अछि । कॉलेजिया नवयुवक ae, मुदा डेगे नहिं stews अछि... हिम्मति. लैस अछि से बलजोरी सरनन बाबूक टाल सूँ qr eed हरित क्रांतिक योजना पर अपल . तँँ करहिं पड़त... । सामाजिक बन्हन कें अनठिया जीकि-ज्ञीकि gore मोटका बीड़ा बना बैस a रहल छैक। भर से फुलैत भाँग के मीजि- देव उचित नहिं...। जाय हैँ पड़बे करत...। eT अछि आ गर्व सै गर्दन तानि चारू दिस मीजिक' पाँच पानि a धोने हेताह शोभन...। नदीक छरकी...लचका...जसलाहा पीपर... . ताकि रहल अछि जेना कि कहिं रहल हो, 'मर्दक vee ee ee Oe abot, अप्रैल-जून, 2008 /7

28 | | http://www.videha.co.in/ ISSN 2229-547X VIDEHA लि. बेटा अछि क्यो तेँ टोकि क' देखओं नेज।' लोक छलैँ तकरा गरा में मरल पशुक-जठड़ लटकौने . विचार करय लगलाह... । खूब बमर्थन मेल... । worden we अछि पंच केवकर weiss tg घरे-घरे दयनीय मुद्दा में मौन रहि ore: निर्णय देल गेल--- feat 6a समझ में आबिक' tam.) भीख aie देखि चुकल उलाह...। eT HE दिन यदि संभव होअय हूँ तुलसी आब पात परसल जा रहल अछि...पुखनक sig अपना-अपना के किछु ओहने सन स्थिति. फूल वा कनकजौर वा करिया कामोदक पुरना यात। अदभुत! आब जखनकि प्राय: सभ भोज. मे पाषि रहल छलाह... । एम्हर पागधारी नक्षत्र oe ETT से उपलब्ध नहिं भ' सकव तैँ में लोक दड़िभंगा वा पूपरी सँँ पातक रेडीमेड मंडली विचार क' रहल छल-- 'बासमती तैँ अबस्से होअय। फेर राहड़िक प्लेट आ बाटी ल' अनैत अछि तखन gee “ श्राद्ध कोन होअय?"” दालि...सात रा तीमन...बड़, बड़ी, TG, दही, a? सरबन बाबूक हठ छलनि। खजुरवाराक “ara?” चौनी, सकड़ौरी आदि-आदिं।'” पौखरि सै आनल गेल wa बोझक He.) “पंचदान?” **आ द्वादशा दिन पूड़ी-जिलेबीक भोज की सरबन aoe तैँ खाली हठ आ इच्छा छलनि। .... “के बजलाह पंचदानक नाम? waar करबह हीं सरवन! जखन एतेक भेबे केले तैँ असल व्यवस्था a कयलनि राघव लला। से. गति नहिं अछि तेँ कम-सँ-कम चुप तँँ रहू। . वनियाँवला भोज की करबह। औहना कनिजा छनि। लोकक हुनका कमी नहिं of. बस. अहाँ केँ ई नजि बूझल अछि जे शास्तरक अनुसार _ काकीक भोज लेल सबहक मोन Zire हैं... । एक बेर हाक देवाक काज... | वैदिक श्राद्ध मेने नुइनहार केँ पहठ होइत छति ? dat qe करह । भगलपुरिया कतरनी चूत आ सरबन बाबू दुनू wigs Sh हाड़ हिलैत कस सँ-कम चारि बेर अहगर क' छल्हिगर ofr? क्थीक अभाव छनि?"' दही...चीनी...डालना...तीलक अँचार...आलुक मुद्दा बाजय रसनचौकी... ५. चौ। अभाव कि रहतनि? दोसर, Sa A reg आ अंत में बुनियों.. की 7" से आब भोज शुरू भ ' गेल अछि... । चूरा-दहीक wire फिछ अर्थ रखैत छैक कि नहिं? प्रखंड... ““ठौक छै ने सरबन बाबू?” भोज... । नहिं-नहिं, दही -चूराक भी ज... । कहियों .. भरिक कोन गाम में के नहि चिन्हैत ewe ““सुदा, इस्टीमेट ?” क्रेज रहैं पक्की भोजक माने पूड़ी जिलेबीक arg 2” ogee है गोपाल। तों ते हिंसाब-किताब 'भोजक। नामे सुनैत मातर बच्चा सभ किलौल "झा राघवेजी कोन कम wa?” में माहिर छह । बड़का ककका आ भुटकुन बाबा करय लगैत ल... | स्त्रीगण tga “हैं! से हैँ ठीके ! कोन गामक नवपुवक Fyfe लहुन। आ अहूँ लोकनि बिचार-सहयोग अपन नेना के कोरा में ल' चुम्मा लैत पति Fate Redo छनि राघव केँ?"' 'दियनु मास्टर साहेब आ नेता SH. "” wait aaa लगैत छलौह... eis “असल में चिलमक सम्बन्ध ततेक विस्तृत... एस्टीमेर बनल। श्राद्ध आ भोज दुनु, हैँ कथे कोन? wes दुर्लभ लोके शरीराणि des छैक...।"” मिलाक ' प्राय: डेढ़ लाखक ! सरबन बाबूक हवा पुनः पुनः के गौरह में aes ot लोकनि wre. की बाजि Reg अहाँ? eT गुम्म आ a सला Tee. | पुरना पत्ती पौसि tare लेल कनिआाक Pert मुँह here बुड़ित्े बोकरब। geht कहने... “की सत्बन बाबू, मेल ने?” ee लगैत छलाह... | मुदा, आब ओकर क्रेज. छथि...।"' सरबन जाबू दुनू भाई केँ चुप देखि ठीकेदार गेलै। आब के पुरैए पूढ़ी- डिलेबो-तरकारी के ? .. .. ““आब भद्हर के एखन रहय दिवनु। ट्रैक सहेब केँ नहि रहल गेलनि, “एन जुप कि ओ तैँ रहरहों होइते रहेत ले । आय doer सँँ हट ae जाइ जाठ |" 'छी? टकाक दिक्कति ove? ई दिक्कति कोनों से मर्द कहाय। माने जें दही-चूरक भोज क' .... ““ौके कहैत छी । उचित तैं यैह जे वैंदिकी . दिवकति छै? असल बात तैँ ई जे अहाँ सभ 'पाबय से सर्द । बड़का-बड़काक दौढ़ी ढौल भ' Ta" चाहैत की A? जैं चाहैत छी तैँ व्यवस्था भ' wed छनि...। हैस्सी-ठट्ठा ऊँ की? THT ""है... है... ।वैदिकीए होठक ata जेतै। हम कोनों समाज a बाहर थोड़े छी ? आ भरिक' करेज होयबाक arti आ चाही. बाबू?” जैं अवसर पर काज नजिं आवय हूँ धन बेकार। सनीपावरक संग मैन पाबर...। से आब aie, | उगमगइत नशतत्र मंडलौक मध्य सकुचायल aah? सधयवाक चिन्ता? भक्क! अरे माय किया काकीक दुनू बेटा ने एहि दुदू-चीजक सकपंज-निष्मंभ बैसल सरबन बाबूक बुद्धि जेना.. बाप फेर घुरिक' नहिं अवैत छथित । ओ पुत्र के कमी नहिं। दुनू बेटा पौरुप देखौलथिन afe.. tore सन भ' गेल छलनि। आब जैना झुकल SA कथी लेल दैत छथिन? एही लेल ने जे जा से भरपूर देखौलथिन अछि... । साथ उठयवाक अवसर आ बार देखाइ पड़ि रहल पुत्र समय पर पुरुषार्थ देखाबय ? WT श्राद्ध चौरुष ते जो लोकनि देखबिते रहैत छथि। छलनि... । कनेक महग अवश्य छलै, मुदा दौसर करय... एन ब्रह्ममोज करय जे उद्धार क' oa आओही दिनुका बात लिय ' ने । अरे, सरझप्पी उपाये कोन छलनि... ? देअय... स्वर्गक फाटक फोलि देअव। आ से 'दिनुकां। अस्थिसंचपक बाद श्राइक हेतु योजना... “ठोक ऊै । हमरा दिस सँ हर्ज नहिं। कनेक अवसर उपस्थित अछि ol सभक समक्ष oO बनाब' लेल गामक पागधारी लोकनिक बैसार TH साँ सेहो fe fea” आवश्यकता अछि पुरुषार्थ देखबबाक |” मेल छलनि...। सरबन बाबू दुनू भा ओना ते... “कि ग़ाघवजी?”” “ais @ कहैत छथि भाइ | बेसी सोचल एक दौसा से कटल-कटल रहैत छलाह...। एक... सबहक नजर राथव लला पर आवि स्थिर. नहिं जाओ। अरे, समय पर पाइ आपस क' गोटे ईर घाट हैं दोसर वीर घाट ! परंच एखन दुनू भ' गेल रहनि। भुआँयल मुखाकृति... झड़कल- . सक्बनि तैँ बेस, ate तैँ टीसन लग सड़कक गोटे अपना केँ एक टा विशेष प्रकारक अपराध झड़कल। कारी झामर ठोर... | तमाकुलक योग. कात महक जै दसकठवी गाछी अछि सैह लिखि भाव से समाने रूप दबल अनुभव क' रहल सै गनगनायल गाँजाक लाली प'ल उठविते. देवनि भार कें। ओहुना आब गाम महक जमीनक were) लागि रहल छलनि जेना कि arn sith डिम्हा सँँ हलकी देव ' लागल रहनि...।.. प्रति मोह बेकारे। गाछिओ f उजड़िए गेल लागल होनि। पतिया लागब की होइत छै, से “Sess race विचार से हमे...” अछि... ।'' ओ लोकनि नेनपने में देखि चुकल छलाह sera आब भोज। नक्षत्र मंडलीक अनुभवी... ठौकेदार सहेबक मुंशी भोगी झाक ces Fi खुदरा पर बान्हल गाय-बड़द ARS पाकशास्त्री सभ sale ae क ' एहिं पुद्ा पर. नौीक जकों बूझि रहल छलाह सरबन बाबू TT a पाक, अल जून, 2008

विदेह ३६८ म अंक १५ अप्रैल २०२३ (वर्ष १६ मास १८४ अंक ३६८) | | 29 Tea बूझय वा नहिं । जमीनक ओइ टुकड़ी पर. सभ केँ सोझे बथाने पर जा पकड़लनि सोगारथ स्वाद वा डालना में नोनक मात्राक मादे Ws बहुत दिन से नजरि छनि ठीकेदार साहिबक । ओ aaa भाइ सभ, साल भर हूँ देशातक दूध रहल छधि, ते कखनहूँ बारिक लोकनि केँ कोनी ae! मार्केट कॉम्पलेक्स बनाव' चाहत छथि। एकत्र क'...पानि मिला... ड्राम में धरि...विदाउट . खास जगह पर खास वस्तु ल' क' पहुँचबाक सामान्य स्थिति रहैत तेँ सरवन बाबू ठीकेदारक टिकट जनता ट्रेन से जाक' दड़िधंगा में बेचिते .. निर्देश उछालि रहल छथि... । vie कूटनीतिक चालिक जबरदस्त जवाब छह...चानों कटिते छह... । कहियो क' कि... मूड़ी गाड़ि a भ' भोजनलीन लोक दित'थनि... । मुद्दा, एखन तेहन ने उलंग फसल पुण्यों कमाबह। बस aft दिंनुका दूध दएह। सबहक लगन देखि जेना...जेना किछु मोन पड़ि of जे कोनो आन बाटे ने सूझि रहल छनि। बूझ' जे हमरे दैत छह। चारिम दिन एक-एक रहल अछि... | हैं...कनिजे काकी कहँत छलीह के देत डेढ़ लाख रुपया? जे देत से बदला मे. टा पाइ गनबा लए...” सोगारथ यादवक fae. । मैथिल सभक भोजनपटुताक मारे सुनि किछु-ने-किछ चाहबे करत। नि:स्वार्थ at निशाना कह्हु खाली जानि। त्रतेक ने दूध ad इंद्रक घर्मड फड़कि उठल रहनि। बड़का भोजन aa के ककरा करैत छै ? कम-सँ-कम ई समय. जे सय तौला...नहिं-नहि, den नहि खोर मे. भट्ट छथि मैथिल सभ तँ हमरा ओतव आबथु। पर द' awe अछि। सरबन बाबू are fea पौरल गेल दही... । हम te दैत छियनि। हमर व्यवस्थानुरूप भोजन 'तकलनि... ware दृष्टि में एक्के टा आग्रह । = “ अढ़ाइ wah.” क' कय देखाबथु हूँ हम इद्धासन हारि जायब। हैं कहि दियौक ने । सपूत बनू...अपन नाम केँ “Fd माने की ? अट्ठारह मन अरवा स्वीकार करताह ? अप्पन पसिन्‍नक क्षेत्र मे आबि साथंक करू... | aR आ बीस मन चूड़ा ख़यनिहार गाम aus | फैँसल शत्रु केँ देखि जेना योद्धा केँ हँसी लागि “aad तैयार छी । मुदा, एक बेर राघव सँ कम में की eet?" 'जाइत है तहिना sed अहंकारी देवराजक एहिं जी कें सेहो पूछि freq” से दुनू भाइक आग्रह जे मोन भरि खाई. मूर्खतापूर्ण चुनौती पर मुसकिया देलनि मैंथिल “at राघव जी?” TE आ कामना कर जाउ जे कनिजा काकी के लोकनि। स्वीकार क' लेल गेल चुनौती...। उीकेदार साहेब आ हुनक मुंशी धोगी झा. पइठ होइन...। पंक्तिबद्ध आसन जमौने भोज... पंच eat ते पक्का खिलाड़ी छलाह। केँ बेछिल्ले बाँस धाँसि देबाक योजना मोनहि eaten सभ...। एक रा पाँतिं पच्छिम ded भोजक जबरदस्त आयोजन कयलनि। अपार मोन बनबैत आ तत्काल स्थगित करैत wee दोसर पाँचि पूव मुँहे...। एहिना तेसा पाँति पश्चिम , खाद्य-सामग्री। मुदा, आहि री बा! ई की? 'लला वें प्रसव सुनितहिं लगलनि जेना केओ हनक ae से चारिम sie पृ मुँहे...। सम्मुखक दू . परम्परानुसार सम्मुख पाँति बनाक ' बैंसल मैथिल पौरुष के ललकारि रहल होनि। क्रोध वाट बदलि .. पाँपिक बीच में बारिक लोकनि के अयबा-जयबा state दहिन हाथ पर काँखि सँ ल' क' क' सरब बाबू पर केन्द्रित Ae de रस्ता। एत' से ओत' aft पाँति-पाँति मे. पहुँचाधरि stew फराठी राखि जठड़ सँँ लपटि “aan जाउ । हम कोनों मठगीक साया... कुम्मकोपरिद्घिचिपटान्नशर्करालवणव्यंजनानिम- a बान्हि देल गेलनि। आब भोजन क' में घुसिया क' रह 'बला मर्द नहि sia धुराणि च सँँ aaa लोक सभ... | चलैत मुँहक देखाबथु... । मुद्दा वाह रे मैथिल ! ओ मैथिल अपन फिकिर कर' लेल कहेयीं। wea ee चपर-चपर... | बारिक लोकनिक 'ई लाबह ही', केहन जे कोनहु परिस्थिति मे भोजन क' कय अछि आ मर्द बला बात कहत। आ मर्दवला ‘sh लाबह a केर गुंजित स्वर... । सघन भ' ae देखाबय ? सम्मुखक पाँति सभ कनेक लगीच बात बैह अछि जे लागय से देआइ, मुदा बाजय . गेल अन्हार सँँ लड़ैत जेनरेटरक पचासों ट्यूब- gals आवल आ आमने-सामने बैसल मैधिल writ.” लाइट...जगपग....जगमग...सध Pay जगमग...। लोकनि एक दौसरा केँ एक-दोसराक पात पर पित्त ते सरबन बाबूक सेहो लहस्लनि, मुदा .... समाजक fat नाकवला लोकसभ में. से खाद्य-सामग्री ल' fag दहिन हाथ मोड़ने गा में उतरी हैं हुनके छलनि। दवा गेलाह...। अपना केँ अप्रगण्य बुझनिहार seal बाबू a खोआबे लगलाह... । जल पीबाक लेल बाम हाथ 'फल्लाँ बामू लोकनि पहिल खेप मे नहिं बैसलाह. तेँ युक्त छलनिहें । इन्द्र चारू नाल चित्त! अछि। of cet दोसर वा तेसर खेप में. भोजनोपरान्त गर्वित मैथिल लोकनिक area अजेय योद्धा सभक पराक्रम... बेलताट। एडन एँ ओ सम पाँति सबहक HOE नतशीश FH अपन FHT ग्रहण करबाक से आई द्वादशाक जबरदस्त भोज भ' we मेटहलैत कखनहूँ भोज खयनिहार ard दहीक निवेदन arate... मैथिलक अछि...। लगैए पूरा गाम उनटि आयल उदार गर्वोक्ति भेलनि, ose अछि... | हाथ जोड़ि क'सबहक स्वागत sf अपनहि राखल जाओ ।हमसभ ल' ata दुनू view आग्रह, ''मोन भरि कि 2a we! की करब? मुद्दा, स्मरण रह खाद जार । जे वस्तु जतेक चाही से 428 जे पुन: हमरा लौकनिक भक्षण- लिय'। कोनों वस्तुक कमी नहिं | at ae सामर्थ्य केँ चुनौती देबाक भूल नहिं किए रहते? ठीकेदार साहेबक सहयोग 27225 होअय।ई हमर सबहक क्षेत्र धिक। देखि भरि गामक युवक date oS Gs oN ie wie क्षेत्र मे हम सभ अजेय उत्साह फर्क उठल छलनि... (संगहि.. ही / (fell Q छो।..." सहयोग छलनि भमरपुराक aims: ge | AP ४ टी है से आइ एक का में ढाढ़ हम Re ry y be A\ \V ae अजेय योद्धा सभक पराक्रम See यादव ao बावक मै we ON कु देखि रहल छीं...। नजरिं परम मित्र। प्रखंड राजनीतिक संगी। री » i भोजस्थलक कात में पाँति सभक cigar, feat, खजुबारा, भभरपुरा, ।' NOS ei ees | छोर, पर स्थित सड़क दिस जाइत खेर्वा टोल, गढ़ माने Sains, Recto] कि... । औत' समामक पीग-हीन सभ गाम छनि मारल गेल... । महिसबार | 5 TR वर्गक महिला, पुरुष, छँडा, Bist idol, अप्रैल-जून, 2008 /9

30 | | http://www.videha.co.in/ ISSN 2229-547X VIDEHA सभ अलम्यूनियमक थारी आ बट्टा नेने प्रतीक्षा जरूरी छै जे कोनों चौरे केँ देखि क' yt सहटिं क' पाछाँ-पाछां एत' uh आबि गेल छलि | में ठाढ़ अछि...जे कखन लोक सभ भोजन समाप्त होअब ? भ' सकैए दोसर टीलक कुकुर पर नजरि “ae चिन्ता नहिं कर। हम तुरंत आबि 'क' कय उठत आ ओकरा सभ केँ saver हेतै कि शुरू भ' गेल हैत...। सोचैत- era) आ हमरा किछु ale हैत । आब हम दस 'लोकक अँइठ उठयबाक अवसर भेटतै... । भूखक Maa फेर प'ल भरिआय लागल...। कखन gee ओ समीर नहि छी जे शोणित देखिक' ane लोकक एहि भीड़ मे सेहो कैक टा छोट- ae अयलै...हम Pag नहिं बूज्ि सकलियै...। रद्द भ' जायत।'', हम आगाँ बढ़ि गेल छलहूँ । 'छोट वर्ग है... । अपना सँँ तथाकथित निम्न वर्गक जेना एक टा झटका खाक' निन्‍न टूटल हमर पाछाँ-पाछाँ लछमी Bal ओही दिस लोक के कनेक फराके ware निर्देश देबाक होअय... । बाहर सड़क दिस गुलगाल भ' रहल जा रहल छलि। stat ae रस्ते छलै। एडी द' प्रकृति ug वर्गक लोक सभ में छै--से स्पष्ट. we. क्रमश: तेज होइत... । sleet Taree क' ओ नित्त हीरा बाबूक ओत' ब्तन-बासन देखाइ पड़ि we a... दलान पर अयलहूँ। भोर भ' चुकल रहे मुद्दा कर' जाइत छलि। सामने सँँ पप्पू आषि रहल पच्छिम भर अकास मे लौका लौकब शुरू war सुर्वोदय हेबा मे fg विलम्ब रहै। हमर. छल। gated Fst कहलक, “एतेक तैँ भगेलैए। नह-नहू मेष ऊपर उठि रहल अछि...। घरक Ta द'क' जे रेल लाइन गेल afe— निश्चित अछि जें कोनों स्त्री कटल अछि te रहि-रहि क' लौकति लौका भोज eaten दखिन-पृब से उत्त-पच्छिम दिस--तेम्हर लोक. te केस है। हमर हिम्मत नहि es कपलक आ खुबनिहार दुनू पक्ष केँ कनेक हड़बड़ा देलक सभ जा रहल छल... । की बात छै? हम ey जे लग जाक' देखियै। देखे नजि छियै जे ककरो fe fing गोटे लोक सभ के शांतिपूर्वक भोजन. आगाँ बढ़लहूँ...। ओकील ककाक दलान पर लग जयबाक साहस भ' रहल 8? सभ दस 'करबाक आग्रह क' रहल छथि। लगैए इन्द्र फेर flee लोक oe भेल रेल लाइन दिस इशारा. हाथ फटकिए a देखि रहल अछि...आ देखिक' ae गड़बड़ी पर उतारू wie... | करत बतिया रहल छलाह...। हनकर सभक. अपन-अपन वाट थ' tect अछि...। एहन ओम्हर गाम site एकत्रित कुकर सभ. तर्जनी के पाछाँ करैत हमर नजरि देखलक जे. भयानक दृश्य नहिं देखल भाइ... । हमर हूँ मोन आपस मे कटाउज्ञ क' रहल अछि | कटाठश्ञ में रेल लाइनक आस-पास किद्चु महिसवार, हाथ. कोनादन क' रहल अछि...। हमरा जाय जे कुकर हारि जाइत अछि से कनेक हटि क' Actes 'पोखरिं दिस 'जयना लेल बहरावल, fee. पप्पू घर दिस बढ़ि गेल। fates facies स्वर में मूक' on अछि... किलव भलेमानुस आ ज 'तःबोनिहार केँ aera | cea लछमी हमरा सँ et Prefer or जेना कानि रहल हो...। ओह ! ओहने सन... लेल विदा भेल, किछ कृषक लोकनि fem लाइन पर घटनास्थत लग पहुँचि चुकल छलि... | जेना ओहिं राति कानि रहल छल... । ओहिं UTR आ दु:खक मुद्रा में बहस क' रहल छथि...। aR बढ़ैत हम देखलहूँ जे ओ पुरुष सभक सपन निस्तव्थता केँ चीरेत कुकर सभक रुदवक ta फरकी सँँ बात ase कठिन oe.) ha Sait भीतः गेलि...। “ओर बाप रे बाप! ओ धरथराइत बिज्ञायल चुरी... । “an भेलैए?" हम पुछलिये। दा रे dan! ई की भेलै रे दैवा। कनिजा काकी “otha क्यों कटि Ata” अब कनिजा काकी ! ई की कयली अय कनिजा a" काकी?", लोकसभक गोल में घेरायल लछमी आगि-पानि-लोह-पाथर... Og हमरा हे लगैए जे काल्ति मैट्रिक. भोकरि रहलि of. ot देखाइ नहिं पढ़ि ste रातुक बाद आयल va ओ जेठक एक. रिजल्ट बहार भेलै। कहाँदन ay खराब रिजल्ट. रहलि छलि, मुद्दा ओकए करुण-तीकण स्वर गूँजि 'टा पचपचायल भोर... । उसीन क' राखि देव 'वला | भेलैए। अबस्स कोनो फेल केलहा छौंड़ा कटि wa छलै....। आब कोनो संदेह नहिं रहि गेल theme कारी age बादक ओ भोर...। .... गेल हेतै।” 'छलै...। हम aaa... । गोल में पैसलहूँ...। साँसहि सँँ सड़ल गुमकी छल... । पसेना “'नहि ही, कोनों विद्यार्थी नहिं रहल हेते हे भगवान! हिला क' राखि देव बला भीषण चसेना देह...कखनो सुखयबाक नाम नहि...। ऊपर ओ। आइ- काल्हि Fe छत पर चढ़बाक बड्ड बीभत्स दृश्य छल...। doh सँँ भरल डबराक मच्छरक प्रकोप... । चलन भ' गेलैए। ओही मे सँँ कोनो अगत्ती टपकि afer काकी, ओ कतनिजा काकी, जे 'एम्ठर-सै-ओम्हर दौगैत...गम्हौ...भूकैत...कमैत ea Ba" Ferra दिस डेग बढ़ा चुकलाक बादों सबहक कुकुर सभ... । एक्को रत्ती af... छटपट- *'ई अहाँ कोना कहैत fea भाई ? ईहो तेँ aa sh काकी छलीह...जे बाट पर चलैत pore vio राति बहुत TEE बीति et! whe जे कोनों तड़िपिन्ना वा गैजपिब्ना . काल एना लगैत छलीह जेना धरती साँ ye Va. कखनो-कखनों डबरा महक जलपुर्गी औघरा गेल हैत रेल लाइन aoe डेग बढ़ा रहलि होथि...। जे धरतीए ay चियों-चियों क' उठैत छल। ककरों चैन 'जतेक मुँह ततेक बात। sine stata जकाँ सर्वसहा आ अत्तर्मुखी छर्लीह...जे प्रत्येक aft. कोना होते? जेठ खतम होब ' में प्राय: कका एहिं सभ सेँ निरपेश्ष मनोथोगपूर्षक अपन. जूडशीतलक भरे टोल भरिक नब्युबक लोकनिक 'छभों दिन रहि गेल रहे पंच बुन्त पड़बाक नाम. बड़द कें सानी खुआ रहल छलाह। चानि ठंडा देव' लेल बासि जलक Stet नेने नहि...। भरि दिन अकास a आगि बरिसैत छलै “की कका, के af aq?" आवि afta छलीह... । जे fren daria दिन an diate सँँ जे बोकर' लगैत छल पृथ्वी er “var afe!” ओ हमरा दिस तकलों नहिं as ताकि-ताकि क' तिल-चाउर हाथ में ate से राति भरि उसिनाइत tea छल कयलनि। नादि पर नजरिं गाड़ने रहलाह । हुनक . थमा ea PSs छलथिन, “बौआ तिल बहब' 'ग्राणिमात्र,.. । पता नहिं कहिया qa पड़तै...? Eee हमरा कनेक विचित्र जकाँ लागल। ने?" से aera काकी आइ रेलक पटरीक हम ठेकानि aie सकलिये जे कटेक राति लागल जे हिनका जरूर que छनि। कदाचू आस-पास रोड़ा सभक ढेर पर खंड-खंड थेलि चेल हेतै...। प्राय: ढेढ़...नहिं दू..। कनेक पुरवा wae अपना के कोनो काज में ओझा छिंडिआयल पड़लि लौह... । ओह ! है भगवान ! frend... पसोना में 'भीजल देह ठंडायल sow रखने छथि। हम रेल लाइन दिस age) .. .. रेलक gator पटरीक ओइ पार दुनू पल भरिआय लागल... । कुकुर सभक तेज... “हो बौआ, तों ओप्हर नहि जाह । तोहर dag wets बीच में ae आ पछबरिया झौहि से निनन टूटल...। एतेक किए लागि हल. करेज एतेक यजगूत नहिं छह... बर्दाश्त ae wie एहिं पार मुंड... । आन-आन अंग जत' कै...? भवक! कुकुरो के कोनो ठेकान छै? te. ।''ई हमर माय छलि जे पता नहिं कखन छिंड़िआयल od औतहिं मुंडक स्थिति कनेक 20 | sien, अप्रैल-जून, 2008

FARE ३६८ म अंक १५ अप्रैल २०२३ (वर्ष १६ मास १८४ अंक ३६८) | | 37 विस्मयजनक ! att छलै Sar केओ ठोढ़ीक मारल बबूर तर जाइत रहओ...अनुचित अवांछित नीचाँ सँ सटाक' घेंट कटने होइक आ ओरिया जिम PNG E>. कलंक आ दंश सहैतत रहओ...मुदा समय पर Bite ढेर पर राखि देने होइक- उर््वमुख। iss Bes केओ कल्ला अलगाब चला नहिं...सभ अपना- ee केस माथ सँँ एकदम सटल छलै...। LR CR Se अपनामे लिप्त आ जखन ओ ट्रटि जाव...दूटिक' dora पीयर चेहरा पर सामने देखैत पथरायल j | 'छिड़िया जाय तँ ओकरा फूकि-फाकि gee fra Pais आँखि मे उदासी जेना जमि गेल a/ Ro fet आ एक चुटकों तिल माय पर ल' Softener OMY, get Fah wt भ' गेले era आँख जेना सोजे one केँ देखैत अनुभव होइत... । Zo तिल बहबाक अर्थ आर की होइत छैक? Se ae आश्चर्य! शोणितक दर्श नहिं...। लगैए बरखा ने नेता जी आपस आबि गेलाह अछि aH टा बाद में जायल रहल हेतै...। धोल-पखारल मैनेज भ' गेलै... । चिन्ताक कौनो बात ae... | Ce आर भयावह लागि wet wa... जी सोझे मोटरसाइकिल सँँ थाना भागल हेताह । सूचना द' att ate लेल fae भ' गेल... । आनन-फानन में खबरि पसरि गेलै।कनिजा AR बाबूक आग्रह पर भमरपुरा सँ सोगारथ . महापात्र के सेहो खबरि करबाक छल ने ! मैनेज wate दुनू पुत्र आ पुतौहु माथ-छाती पीटैत यादव वें सेहो संग क' eer एक नम्बरक . भ' गेलै। माने ई जे आब कोनों डर नजि ।निधोख ofa चुकल छलथिन ।दुनू भौँद रेलवे पर ऑघरा- weg अछि चौकीदार । तुरंत साइकिल सँ थाना गाम जायल जा सकैत छल । तथापि पता नहिं sien क' कानि रहल छलाह। ओम्हर दुनू Aa विदा भ' गेल हैत। मुददा नेता जी तैँ मोटर किएक कठियारीं लोकनिक समूह मुड़ी गॉतने देवादिनी सेहो छाती पर दुहत्थड़ मारैत घना क' . साइकिल सँ गेलाह अछिं। ओ अबस्स पहिनहि wes धयने गाप दिस जा रहल छल । खेत में रहल छलीह... ।लछमी आब दुनू कें सम्हार ' ta हेताह... । तथाषि यावत्‌ ओ घुरिक' . काज करत ज 'त-बोनिहार सभ उमकि कर Ta 'लागलि छलि...। बहुत कारुणिक दृश्य छलै...। नहिं अओताह तावतू की कहल जाय...। .... Tambor समूह के देखि रहल छल...मुदा आबजखनकि स्थिति प्राय: स्पष्ट भ' चुकल wre समय भेल रहल हेतै? बेसी-सँ- हमरा सभ मे सँ केओ एम्हर-ओम्हर देख नहि 'उलैतेँ त्वरित निर्णय लेब मे माहिर लोक सभक . बेसी दस... । मुददा बरखाक बाद स्वच्छ भ' गेल. चाहत छल... । पता नहि के Peg पूछि देजय ! fran भेलनि जे ue सँ पहिने कि थाना में अकास सँ एखनहि foes te बरस' लागल रौद ag free भेल जा रहल छलै...। सबहक wt आ गुंडा बैंकक मैसेन्जर जकाँ दारोगा छलै। लागि रहल छलै जेना चानि चनकि जेतै...। फेर चानि चनकय लागल we... | ओम्हर पता सदल-बल आबि जुमय, दाह संस्कारक काज. सभ गोटे एक टा गाछी में विलमि गेल। aot नहिं किएक एक टा टिटही ag व्याकुल स्वर सम्पन्न क' लेल जाय...। एक बेर जैँ लहास ककरो सँ नजरि नहिं मिला रहल छल... ।वर्तमान .. में टिटिया रहल छल... । 'छाडर भ' tad फेर दारोगा की क' ले? ae, प्रसंग पर केओ चर्च नहिं करय चाहैत wat) सरबन बाबूक ऑगन में राखल आगि- आब जे भेलै से भेलै। शीघ्रता करै जाउ...। | अनर्थक भीषण विशिष्टता आ मात्रा के सभ. पानि-लोह-पाधर केँ gaa काल देखल जे टोल फेर जल्दी-जल्दी मे लोक सभ लहासक . अटकारि रहल छल ।दाह-संस्कारक गैर-कानूनी .. भरिक स्त्रीगण सभ जमा छलीह amg देयादिनी टुकड़ी सभ के बीछि-बीछि क' बोरा में. पक्षी केँ सम जानि रहल छल... ।'“चलै जाह हीं। . ऑघरिया दैत चिकरि-चिकरिं क' लयात्मक दंगें दुँसलक... खाट पर लादि उठौलक...मरिया तेलक ahaa करें जाह । आब सोझे fete we!" कानि रहलि छलीह...जेना कोनो हदयविदारक कंटर लेल गेल...बाड़ी-झाड़ी में जे बँस-राहठ «= जेठक कड़कड़ायल रौद में लहालोट भेलि करण गीत गाबि रहलि होथि... । गीतक प्रत्येक fed से sede गेल...आ भागल इमशान। . खिरोइ पस्त पड़लि छलि... । धार कहाँ छल... पाँति में श्रद्धेया सासु माक विशिष्ट दुर्लभ गुण आनन-फानन में डेढ़-दू घ॑स मे कनिआ काकी . एक ते ओहिना प्रतिवर्ष बाढ़िक संग आयल बालू aad आब सदाक लेल बंचित भ' जयबाक केँ फूकि-फाकि sage क' देल गेलनि...।. सँ भथैत-भथेत ओ उत्थर भ' गेल छलँँ। दोसर अफसोसक मर्मस्पर्शी वर्णन आरोह-अवरोहक heer फेंकलाक बाद कठियारी सध बाधे- ee साल एखन sft ठीक सँँ बरखा कहाँ ta संग भ' रहल छल... | कोनहु सहदय बेँ द्रबित बाघे बढ़ल...खिरोइ दिस... धूर पकड़ने... आगाँ - . छलै... । पुलक Hat सनक खाधि क' देना मे समर्थ एहिं रोदनाक यथेष्ट प्रभाव 'पाछं...पंक्तिबद्ध। '' देखै जाइ जइह' । सम्हरिक'।. में जे जल छल सैह...बाकी aay जलक निशान. त्वस्ति-रुदन में प्रवीण जनी-जाति सभ पर स्पष्ट tera पयर पर पयर नहि लाग'। ...आ केओ नहिं। खाली नामे टा धार... । रातुक बरखा A गोचर भ' रहल छल... । ओ सभ कनितो छलीह गोटे घुरिक' तकिह ' नहिं। अकाल age पेटी महक बालुका-राशि जं भिजलों wert आ दुनू देवादिनी के भरोस तथा साहस रखबाक मामिला छै...नहि है अपनहिं ate"... reat हैँ से आब एखन हालक नाम नहिं। एखनहिं .. परामर्शों द' wer wells... सघन उदासी aT are निर्देश के सभ चुपचाप सुनि tem.) बालु उड़ि रहल छलै... । भोरे जे महिसबार aH करुण स्वर के अनुभव करैत कठियारी सभ कुल्लम पन्द्रह गोटे ते रहबे करी । दुनु भौड सरबन seas धोबाक क्रम मे खाधि महक जल के . आगि-पानि-लोह-पाथर छूलक....। कर्ता दुनू भाँड बाबू आ बाकी हम सभ तेरह गोटे। ककरो मुँह Wie छल से एखनो साफ नहिं भेल ws) कें छोड़ि सभ अपन-अपन ऑँगनक लेल बिदा फोलबाक साहस नहिं भ' रहल छाल... । जोश .....ओहिना घोर मट्ठा। ओही जल में सभ गौटे . होइत गेल... । में, संस्कार में सम्मिलित होयबाक लेल, आबि Fees गेल...। Shon काकी केँ तिलांजलि aie छल लौक मुद्दा आब एक टा विशेष देलक...। Tae टा लोक तिल बहिं देलक दि दि प्रकारक अदंक करेज के दलकौने छलै...। सम. कमियां काकौक...। ai ge gel दस खेते-खेते धूर पकड़ने जा रहल छल... । सड़क... PAs हम वाट में सोचैत रहीं... । की “जय हो...जय हो...मही-महों भ ' गले... ” दही 'पकड़बाक साहस नहि भ' wa wel यदि तिल बहबाक te अर्थ होइत है? नजरिंक समक्ष तेबारा परसल जा रहल अछि। जे चुक्की मारने पुलिस आबि गेल होइक तखन... ? ओना नेता. लोक तररौत रहओ...तड़पैत रहओ...बेल तरक छलाह से पलथी मारि लेलनि अछि आ जे पलथी ihe, अप्रैल-जून, 2008 / 24

32 | | http://www.videha.co.in/ ISSN 2229-547X VIDEHA ig Lee » 2“ २ S| | देओर-पैंसुर के छोड़िक' प्राय: सभ के सैह ८. <:< St eee |) अभ्यास भ' गेल eh. | ऐ We We «सना } दाइ (दादी) कहैत छलीह जे कनिजा काकी. ‘ eo 2 Ad eer शा पाँच बहीन छलीह | भाइ एक्को टा नहि। दर we a ° so ZS पिता बहु aa सँँ नाम रखने रहथिन, TAT el ee wr © We) tated ed acter q se MY f पाछाँ चारि गोट बहित # ल' अनबाक दोखी fi 4 ९ हि क्री en pete | खिसिआयलि माय सदिखन दुरजरु <)> tae ||... कप रत उलधिन, “'अलच्छी! केहन जरत a a LY अंक gy भाग लक' आयल जे...” कि er en Al 'जानकीक जीवन- संघर्ष wa वर्ख मे प्रारंभ «८ सी = fs, भ' गेलरहनि। पिता sce बाद सालिग्राम के... पूजन क' निकलि जाइत छलथिन जजमानक Rie Bo Ba 4 Aa गाम। बंशी चौक लग भीष्मक टोलक बासी ् के Jd big 4 श्यामानंद पुरोहित के जजुआर गाम aft नित्य हि कर eer we set जाय vin छलनि। हुतक दिनचर्या चारि बजे भोर सैँ शुरू भ' जाइ छलनि...आ संगहिं दिनचर्या शुरू भ' जाइ छलनि जानकीक... । भौरे मारने छलाह से चुवकी मारि aah अछि। करबाक अछि? ककरा ea? मायक करेज! _ उठिक' फूल लोढ़ब...पूजाक बासन मॉजब...ठॉँव आसन बदलि क' सभ दही सुड़कि रहल at किछ खा लेबाक हठ करय लागलि रहय। TL. | आ तकर बाद मायक काज। RT ft. ओकरा area लेल अनेरे ae कठोर thea ate shes बासन सभ माँजब,..। घर-ऑगन “ship खुअवैत अछि आइ-काल्हि, We हमर कंठ अवरुद्ध भ' गेल रहय आ आँख में. बहारब...चूल्हि नीपब...तरकारी काटब...चाउर हृदय ater?” FRA ढबढबा गेल रहय... । कहना ओ अपन. बीछब... ।एतेक भेलाक बाद माय तैँ लागि जाइत Agta काकी wate मुदा aria!” हठ छोड़ि देलक । हमरा ककरो सँँ गप्प कर्बाक छलधिन भानस-भात मे...एम्हर छोट-पैघ काज «आह ! ताहू में कोनो संदेह ? एहन सपूत Aaa होइत रहय। ...एहिं मन/स्थिति eer सभ्‌ जानकीए के कर' पढ़ैत छलनि-जेना इनार सभ के जन्म देनिहार omnia sed आर की हम अपन कोठली में आबि पड़ल रही तखन पर सँ जल भरि क' आनब...छोट-छोट बहिन कहल wate?” efor काकीक एहि अनपेक्षित आ भीषण. सभकेँ सम्हारब... । घरक लगे मे प्राइमरी स्कूल +*देखियनु पुण्यक प्रताप जे सर' Ta परिणति पर सोचैत-सौचैत लागि रहल छल जे. रहनि तथापि ओ कहियो स्कूलक मुँह ale देखि werd सेवा करबाक wel eee” माथ फाटि जायत...। ई होयबाक नहिं ita पौलीह...। «हूँ वी ठीके कहैत छी । एक ते उत्तायणक ve.) काकी Ge Ga aoe रहलीह | जानकी के दू गोटे सेँ भरपूर सिनेह आ समय, दोसर मृत्यो कोना क्षण मे क्षणाक भेलनि। . कहियो...। किछ सुनल आ किछु देखल छल. वात्सल्य भेटलनि...। एक तैँ पिता बहु मानैत Bat wel Tale भेलनि...।”” जे जिनगीक हिंसक आँखि में आँखि गड़बैत रहथिन। नाम रखने रहथिन जानकी, I TE एक कात में ठाढ़ हम चौंकि vee छो...। कनिना काकीक मुखाकृति पर कहियो संभावित. कखनो बैदेही ते कखनों मैथिली कहि सेहो सोर मोन होइत अछि जें किछू बाजी। मुदा, एखन Tere आशंकाक लेशों SR नहिं झलकल weer । दोसर गोटे छलथिन बढ़की पितिआइन। ates लाभे की ? आई टिप्पणी तैँ मगन मोनक . छलनि... । तखन ई काज ? कहीं wera नहिं...? . गाम भरि में कथकहिनी आ गितगाइनक रूप में असहज टिप्पणी अछि। एहिं पर प्रतिक्रिया की... एतनी टा रहथिन कहाँदन जहिया व्यास. प्रसिद्ध, कनेक कड़गड़ सुभावक। मायों अपन करन? आ कोन फूसि कहलकै ? ठीके ने कका बिआहि क' अनने रहथिन हुनका। Ere We बढ़की देयादिनी सेँ कनैक डेराइत छलबिन। कहलके... । को कष्ट भेल हेतनि... gaa ada तेँ जाउत-जइधी सभ vot साड़ी. ते” जानकी पर तनल बड़कीं काकीक स्नेह- मिनट में सभ समाप्त... ae] हुनका weft ale सम्हारि पबैत छलौह । aa Mea ae देखि मोनहि मौन सुनगैत a ag कहिया भेलनि? यदि भेलो होनि feed लटपटाक” खसि पड़थि। जाउते-जइधी सभ नाम. छलौह, मुद्दा प्रकटत: लहकि नहिं पतैत छलीह। कहलथिन नहिं...। कहबों कयलधिन तैँ कष्टक देलकनि--कनिजा काकी।। फेर ते सभक ot aS arate मुंहें हम सुनने रही जे गीत मादे नहि--निसाफ करय लेल...आ से...। ... कनिने काकी बनि गेलीह। नेनपन में हमरा गयबाक aE आ जितिया, सप्ता-विपता, aig दिन अंत्वेष्टि-संस्कार सैं घुरल रही। . आश्चर्य लागय जे हम तूँ हुनका कनिजा काकी . बडसाइत, मधुश्राबणी आदिक कथा कहबाक ऑआँगनक मुँह पर माय भरि cet जल, नीमक shed छियनि हमर बाबूजी सेहो सैह wer आकर्षक-मोहक ढंग ओ अपन ओही बड़की सात आ ललका सुखायल मिरचाइ राखि देने छथिन। ई कोना भ' सकैत के? ई तैँ पछाति जा. काकी सँँ सिखने wee... ज्हब। मिरचा केँ दाँत सें कादि...शुकड़ि...नीमक क' स्पष्ट भेल रहय जे age dow ddd हनका स्परण नहिं रहनि जे नेनपन में कहियों cam fam जल सं कुरुड़ कयलहूँ आ et ओ हमर बालुए जीक sat लगधिन। ae कनिजा पुतरा, सतपरा वा कितकित खेलबाक धोलहूँ । चापाकल पर जाय फेर से स्नान. हमर घरक बगलवला आँगन में ओ रहैत छलीह . अवसर भेटल होनि। जनसिते परिस्थितिक a reg. जाह! दतमनि dang करबे नहिं.तें' सभ के कनिजा काकी कहैत देखि हमर वैह वयस्क बना देल गेल छलीह । धूआ बालिकाक Sree, wer करित्हूँ ? छोड़! कोन भोजन कहबाक अभ्यास भ' गेल रहय। हमरे किए? _ आ मोन वयस्कक। प्रा: एगारह वर्खक रहल a fe कद कद 22 / भौतिक, अप्रैल-जून, 2008

विदेह ३६८ म अंक १५ अप्रैल २०२३ (वर्ष १६ मास १८४ अंक ३६८) | | 33 हेतीह हूँ पंचपुत्रीक पिता के हुनक बिआहक Tan रहल...। गोरं दपदप छौंकी सन छरहर दिन फिर ठै। सभ दिन wag दुक्खे होह ? सप्ता- चिन्ता सवार भेलनि...। जजमान परमेश्वर ठाकुर UST सन पातर ठोर...कनेक भरल-भरल . विप्ताक कथा में सेहो रानी सें पुछने रहथि देवी, लग चर्च कयलबिन deg दिनुका वाद at गाल...पैघ-पैघ किछ बजैत aed sad दुःख लेबें कि नुढ़ारी दुःख? दुःख ते कहलथिन, “'मुँठठ में हमर पिसिवीतक टोल मे. आँखि...अठठिया केस...कल मिलाफ ' सोहनगर aie हालति मे भोगहि Tag | अपराभ भेल 'एक टा लड़का कै। दू भाइक भइयारी। tee चेहरा... | हुनका कहियो हम लहक-चहक वला She te पति सँ। मुदा, te आत्मा छौक विवाहित ide RS कनेक पंडित प्रकृतिक कपड़ा पहिरने नहिं देखलियनि...। भ' सकैए.. gee इच्छा पूछि रहल छिवौक। बाज ! नवारी अछि। सत्यनारायण पूजन, WE, उपनयन, कम उमिर में पहिरे होथि । मुद्दा, हुक जे पुरान- .. दुःख लेबैं कि बढ़ारी ga?” देवीक प्रकोप बिआह करा लैत अछि । देख'-सुन' मे बहू बेस। . सें-पुरान छवि हमर मानस में अंकित अछि alte से भयभीत vend रानी खुवियारी सैं सोचैत थोड़ेक ote ठै। यदि vies होअय तैँ हम. Aree रा एहन नहिं अछि जे ओ एकपढ़िया .. बिनम्र-चिंतित स्वर मे चयन कयने रहथि, प्रयास करों। हम जनैत छी जे आहाँ के कैंचाक छोड़िक' St दोसर साड़ी में Tite.) “sed ged सहियो लेब मुद्दा बुढ़ारी दु:ख दिक्कति अछि तैँ fra aie कयल जाओ। जजपनिका में कहियों काल पति के ढंगगर रंगीन. J सहलों ने जायत।”” सप्ता-विष्ताक कथा में बिआह रातुक खर्चो देया देव... । श्रीविहीन संत्रस्त . साड़ी भेटि जाइन तैँ पेटी में जोगा क' सैति लैत TT Sd 'तथास्तु' केर आश्वस्ति Ae गेल श्यामानंद पुरोहित के लागल रहनि जेना केओ छलीह--ई सरबन बाबूक कनिजा लेल...ईं राघव _ रहनि, मुदा कनितरा काकी के? ओ स्वयं कहैत थापड़ मारने होनि । मुदा निरुपाय ओ “बेटी बेचना' she कनिजा लेल...आ ई गुंजाक लेल...। _. छलीह, “dean, हमरा लगैत रहय जे आब Pa कहयबाक संभावित कलंक के अवधारैत .... अप्पन इच्छा-अधिलाषा-लालसा के. ad आर... stare अभिशप्त de कालखंड जानकीक बिआह क' देलथिन। आ एहिं तरहे अनठियबैत cade भोर से राति aft अखंड. बीतय वला अछि... मुदा, कहाँ जनैत रही जे बालवधू af जानकी oh efron काकी oe मेहनति करैत ot कोनों तरहें अपन घर के कथा कथा लैक आ जीवन जीवन... । कहाँ जनैत गाम में अयलीह... सम्हारैत रहलौह...पाइ-पाइ केँ जोड़ैत रहलीह॒ रही जे बसात के मुद्ठी में पकड़बाक मायक ठभिरक जेठ देवादिनी आ सिनेही om संतान सभ केँ पढ़यबाके प्रयास करत. प्रयास... !!"” vies छत्रछाया में कनिजा काकीक terse रहलीह। बड़का बी.ए. क' ट्रेनिंग कयलथिन सत्ते! कनिजा काकी कहाँ जनैत रहथि जे नव अध्याय पहिलुके अध्याय Sat छलनि । फेर. आ हाइ स्कूल में शिक्षक बनि गेलथिन । अध्यापन . फसिल लगा क ' संभावित उपजाक सपना देखैत ae कड़ाचूर मेहनतिक दिनचर्या...निरनतर...। सै बेसी प्रखंडक राजनीति में रुचि aa मिथिलाक कृषक लोकनिक सपना जेना प्रतिवर्ष प्राय: बारह बर्खक बाद देयादिनी के लाग' अनौपचारिक रूपे सक्रिय रहनिहार सरबन बाबू बाढ़ि में बहि जयबाक लेल अभिशप्त oF, 'लगलनि जे भीन होयब जरूरी oe gard . के आइ के नहिं चिन्हैत छनि? छोटका wes तहिना ETH सपना मात्र सपने भ'क' te Ad हुनक Tig सभ कें। fen कलहक . मुदा दिशा भटक्ति गेलथिन। हाइए स्कूल मे रहथि. जबबाक लेल अभिशण्त छति...। से जनितधि ते 'परिणति अन्त: भीन-भिनाउज में भेलै। जेठ कि गामक गैजेड़ी सभक संपर्क में आबि गेलाह ।. जेठ पुत्र के शिक्षक बनैत on छोट केँ पेट्टी जन जेठांशक नाम पर नीक-नीक खेत-पथार. पढ़ाइ मे कम आ चिलम सं एक बीत कैँच धधरा areas रूप में आगाँ बढ़ैत देखि एक टा सभ चुनि लेलथिन। कनिया काकी were क' . उठाब' मे बेसी मोन लाग' लगलनि... Aga मृगतृष्णा में नहिं फैंसितथि...। 'रहि गेलीह... । मुद्दा, पैर भाव केँ पिताक आदर. नहि क' सकलबिन । एखन ठी केदारी में लागल पौता-पोती केँ तेल मालिश करैत...स्नान देनिहार वैर्थक धनी व्यास कका हुनका एतबें tea छथिन। बेटी गुंजा बेस चंसगर रहथिन। ea aT कौर, मैना कौर खुअबैत...एंग- canta, ‘set fag नहिं बाजू। भगवान पर. फर्स्ट डिवीजन सँ सप्तम बोर्ड कयलथिन, तथापि बिरंगक खिस्सा-पिहानी सुनबैत ओ निरंतर मगन भरोस राखू। सभ ठीक भ' Sa”? बेटी रहथि। इच्छा रहितो पाँच किलोमीटर दूर रह' लागल Bote | आब हूँ हुनका एक्के टा आर की कयलनि कनिआ काकी? अप्पन कमतौल बालिका उच्च विद्यालय मे पढ़य नहिं . लालसा छलनि। बस...किछु दिन नीक wat fete अतिरिक्त भगवाने पर तैँ भरोस जा सकलीह...। आब dt सासु्े बसना कतोक सुख भोगि ली... । आ तकर बाद fade सेनुर 'कयलनि। कड़ाचूड़ मेहनति क' अपन गृहस्थी.. बर्ख भ' गेलनि...। नेने आँखि मूनि ली... । सुनिक ' एक दिन कतेक केँ सम्हारलनि। तीन साढ़े तीन बीघा जमीन... नहि जानि कनिआ काकी हमरा एगेक नीक कातर भ' उठल रहथिन व्यास कका...। SAT 'बादिक मारल। उपजाक नाम पर नामे aa fet लगैत छलीह? भ' सकैए हनक ee कोनो बच्चा केँ अपन माय सेँ बिछुड़ि जयबाक अन्न...। कने-मने पढ़िताइ से होइत पतिक सुभाव हमरा अपना दिस टनैत होअथ। खाहे.. आरांका ज्स्त क' देने होइक...। आमदनी...। एहन स्थिति में गृहस्थीक et कोनो आन कारण होइक, मुद। हमरा हुनका सै... प्राय: सत्तर वर्षक एहिं बच्चा केँ की कहल ससरब मीरिकल रहनि। fg करब जरूरी. पटैत खूब छल। हुनका से नहू-नहू स्वर aay ara? दिन-राणि जानकी -जानकी रटैत रहयबला 'छलनि। हारिक' लाज- धाक के ताख पर रखलनि लोकगीत वा कोनी कथा सुनब हमरा ag नीक ई बच्चा कोना रहि पाओत हमरा बिना? एगारह at) बड़की काकी से सीखल विद्या कान. लगैत छल। एकर अतिरिक्त हुनक नेनपनक स्मृति ade sid ओ tan orf रहल छथि अपन देलकनि। अँगने-अँगने जाक' कथा-पिहानी. हुनके मुँहें gis हमरा ata छल Sar art Ue बच्चा केँ। दुनियादारी सै प्राय: अनवगत कहब...गीत गायन...दनौरी, तिलौरी, चौड़ी पाढ़ि रहस्यमय प्रदेशक यात्रा क' रहल होइ....। एहन.. ई बच्चा कथू लेल कहियो चिन्तित नहिं मेल। देब...जहिपन-पुरहर-कोबर लिखि देव...धान- प्रसंग में कखनों क' हुनक जीवन-संघर्ष आ faguad dead जानकी ! कतह a घुरिक' गम फर्टकि-बना देव आदि-आदि काज लँ वर्तमान मानसिक स्थितिक झलक सह a आबय तैँ जानकी! बढ़की पुतोह के बड़ किक आमदनी भ' जाइत छलनि...। गाड़ी कहना. oa... जेना-जेना घिया-पूता सभ पैभ भ' रहल . अनसोहाँत लगनि। बुढ़ारी में कतह लोक a ससर' लागल रहनि। छलनि...पढ़ि Wa छलनि... तेना-तेना FST एतेक...। जानकी... जानकी...जानकी! वाह रे ओहि दिन कोठली मे पड़ल-पड़ल हमरा. लाग' लागल रहनि जे आब fag ae आर! जानकी ! कहलकै जे हम सुनरी कि पिया खुनरा sites आगाँ कथा कहैत कनिजा काकीक छवि. तकर बाद सभ fre ठीक भ' जायत। सबहक गामक लोक बनरी-वनरा! gig केँ जे मोन पिन, अप्रैल-जून, 2008 / 23

34 | | http://www.videha.co.in/ ISSN 2229-547X VIDEHA होनि से सोचथि आ बाजधि। qa, ated डोलबैत...नहिं जानि किएक माय सँ aie wae छल...मुदा हिलबाक साहस... ? आँखि जनैत छथि जे प्राय: दसे बर्ख मे दुग्गर भ' गेल. मिलयबा ofa चापाकल दिस बढ़ि गेल मूनि चिचिअयबाक प्रयास कयलहूँ, ई बच्चा पुनः टुग्गर भ' जयबाक आशंका सँँ रही... । “oH, APE." ग्रस्त अछि... । ओहिं दिन पतिक भीतर सै हुलकी चाह पीबैत रही तैँ माय कहने रहय, “STE! **बौआ...बौआ! की भेलह ? डर होइत छह दैत आ फेर सम्पूर्ण मुखाकृति पर पसरैत एक. कने घूमि-फिरि आबह । मोन बहटि Saw..." की ?”', माय केबाड़ फोलि देलक। ई केबाड़ Agen कातरता केँ देखि हुनका लागल रहनि .. विदा तेँ भ ' गेल रही मुद्दा, कोम्हर जाइ से निर्णय फोलि देलाक बाद मायक कोठली सँँ हमर जेना फेर ef ब्लाउज भीजि गेल होइन आ एक. बाधित छल। रेल लाइन दिस? नहि! fate कोठली Gs जाइत अछि । ओ हमर चौकी पर. 'य aftr सुर्गंध पसरिं गेल होइक...। दिस? नहिं-नहिं !! तखन टीसन? हैं चली...। anf बैसलि। माथ पर हाथ देलक। आँचर से फेर कहियों व्यास कका लग ई बात. टीसन पर चाहक दोकान पर लोक सभक चर्चक हमर माथ de जल पिऔलक। बजबाक साहस नहिं भेलनि...। आ एक दिन विषय वैह छल जाहिं सें हम ate’ चाहैत की भेलह?”' माघ मासक कुहेसल भर मे व्यास कका अपनहिं sae. हम ओत' dae अरुणक पानक a, खिड़की पर कनिआ काकी athe मूनि लेलथिन। हुनका आँखि मुनिते जेना . दोकान लग जा ठाढ़ भ' गेलहूँ । हम नित्त se elie!” 'कनिजा काकी अपना केँ कटाह एकाकीपनक vin खाइत रहीं ताहि सँँ प्राय: तिगुना हमरा... gt बताह! ओ बेचारी कथी लेल fonts चाँगुर में hea अनुभव कयलनि। खाइत देखि अरुणक आँखि विस्मय सँ फाटि . अओतीह ? ई तोहर अपने मोनक डर छलह... । ओह! ओहिं दिनुका हुनकर कानब... ! तुलसी. गेल रहै...। हम ओकरा दिस ध्याने नहिं देलहूँ _ पहिने कहने छलियह भोर में जे रेलवे दिस नहिं चौरा लग व्यास ककाक शब पर माथ प्टकि- . आ चिदा भ' गेलहूँ बाध दिस। Somes जाह।तों अपना केँ जतेक नि चिन्हैत छह ताहि 'पटकि क', Saag ste कनिआ काकोक . रहलहूँ...बौआइत रहलहूँ... कहुना सम्पूर्ण प्रसंग सै बेसी हम da जनैत fase of किए. at छवि... के बिसरि जयबाक प्रयास करत रहलहूँ...। _. अओतीह बेचारी? एहिं ठाम हुनक की छनि? we पतिक शब केँ लोक श्मशान ल' ..... प्राय: साढ़े आठ बजे राति में घर घुरलहूँ जैं रहितनि तैँ एना जयबे See?” गेलनि on ओम्हर ओ अचाँचके मौन a तँ मायक खॉचरित प्रश्न सै बचबाक एक्के टा..... पता नहिं किएक हम ओहिं क्षण बिसरि Fete... जेना एकदम निस्पंद...जड! टोल- . उपाय छल जे चुपचाप दू-चारि टा सोहारी खाक' . गेल रही जे आव प्राय: चौवीस बर्खक भ' चुकल भरिक स्त्रीगण सभ जे-जे करबैत गेलथिन ओ अपन ओछाओन ध' ली... । आइ फेर निन fem oh. मायक कोर में मूड़ी गाड़ि ठोहिं पाड़ि aa गेलीह। चूड़ी wife देल गेलनि... । मौन छल... । क्रमश: जेना-जेना राति बीति eas कनैत रहलहूँ...। 'निर्विकार चेहरा नेने ओ सहयोग ta tate... तेना-तेना निसबद्ध भेल जा रहल छल... । दूर... ““चलह बौआ! आब सुतवाक प्रयास करह | फेर कोना-कोना अस्थि-संचय से o's! श्राद्ध. दछिनबारी टोल दिस सैँ कुकुर संभक tele बहुत राति भ' गेलै। अच्छा, कने घुसकह, हमहूँ 'धरिक ओर्आओन भेलै, काकी केँ किछु age | सुनाइ Vig रहल छल... Yer एम्हर एकदम. एतहिं पढ़ि रहैत STI" afe भेलनि। दुनू भा के जेना जे फुरयलनि... . निस्तव्धता...। कुकुर सभ निपत्ता...जलमुर्गी मुँह... हमण माय से अपन कोठली में जाक ' ght लोक सभ जेना जे परामर्श देलकनि...करैत. सीने...कतहु कौनों चूलचाल ie... पशुपति ware आग्रह करबाक साहस नहिं भेल। हम गेलाह...। एक्सप्रेस धड़धड़ायल पास क' गेल...फेर पुनः gad मारि लेलहूँ... । हमरा सूतल जानि नहू...नहू TAR, । अचानक लागल जेना हमर कोठलीक AT फॉफ HT लागलि...। आ एम्हर हम अगुअइत मे किछ खड़खड़ायल होअय... eet सोचैत रही... माय कहैत अछि जे ओ हमरा हमरो A. LBRAX भ' सकैए? हेते कथू। के आँखि खोलओ 2...फेर dae ia अछि। की सबहक माय अपन न 7 SS लागल जेना खिड़की दिस Rag भरिआयल aa) संतान केँ एहिना जनैत हेथिन? की कनिजा काकी < आँखि खुजि te... नजरि खिड़की दिस. अपन बेटा सभ केँ एहिना जनैत रहथि...? { « % fe “J y) ; ») ) उठल...। खिड़की पर कनिजा काकी छलीह...। KK 7. J )) ‘afro काकी ft, Fon काकौक मुंड...। निरर्धक योजक-चिढ्व... a ag निपत्ता... । खाली मुंड...। उपरका चारि टा a b) *\) दाँत निचला ठोर में धँंसल...भीजल ame hfe दिन व्यास ककाक त्रयोदशा रहनि | प्रायः जद Wy] में सटल...चैंछायल रक्‍्तहीन severe दस-एगारह बाजि रहल हेतै। कनिजा काकी Se निष्रभचेहर..सोज्ञ हम दिस तकैत aie. अपन कोठली मे पडल-पड़ल आब सदाक लेल गदर Se! भ्रम थिक। भाँगक Ae लच्छन ठीक नहिं। अनुपस्थित भ' चुकल पतिक विगत स्मृति के 'एकभगाह we अछि । झु्े। कहाँ क्यो अछि? सहेजबा में लागल रहथि कि आँगन में हल्ला है लि अनठिया क' सुतबाक प्रयास कयलहूँ तँ अनुभव. AS... दुनू पुतोह आपस में लड़ि रहल छलथिन। खिड़की पर अँडकल मुंड.. मेल जे हृदयक गति तेज भ' गेल अछि...धक्‌. पहिंने ओ लौकनि एक दौसरा केँ हीन प्रमाणित **बौआ...बौआ! उठह ने ही! कतेक सुतबह ?"”, _. ...धक्‌ !... भक्‌! हम डरबूक नहिं छी । कहाँ केओ कयलनि... । फेर एक दोसराक नैहर केँ गर्हित माय हमर कोठलीक arg पीटि रहल छलि। ae... हमर आँखि फक्‌ सँ खुजल...खिड़की . घोषित कयलनि... । संतोष नहिं भेलनि हैँ एक- हमरा लागल जेना कोनों यात्रा सं घुरि क' आयल पर अँटकल fe हमरा ओहिना निहारि we दोसराक भाय-बाप केँ चिवा जयबाक धमकी Oy) संभवत: माय बूझि We छलि जे a छल... । एक बेर, दू बेर, कैक बेर वैह क्रम देलनि...।तथाषि किछु कसरि रहि जयबाक संदेह ape अछि। “चाह बना fea?" मायक एहिं sere. पसेना-पसेना भ' गेलहूँ... ।तरासे कंठ. भेलनि तेँ एक-दौसराक अंग-बिशेष केँ weet wee उत्तर में हम स्वीकृतिसूचक माथ. सुखा रहल छल... । चौकीक नीर्चीं लोटा मे जल. केँ share at देबाक दावा ठोकय लगलनि...। 24 / भपिका, अप्रैल-जून, 2008

विदेह ३६८ म अंक १५ अप्रैल २०२३ (वर्ष १६ मास १८४ अंक ३६८) | | 35 'ऐन एहीं अवसर पए सखबन बाबू आ राधव ललाक FEAR? रसगुल्ला मैंगा दियनु... ?”' तात्पर्य ade कालखंड में बेटा-पुतोइक व्यक्तित्वक प्रवेश एहि लंका कांड में भेलनि। ओहो दुनू EA एक टा सच: विधवा जे-े वस्तु aaa wile अनपेक्कित पक्ष सै ओ नहू-नहू परिचित गोटे परस्पर वाचिक आफ्रमणक फ्रम में ई विसरैत अछि या जे-जे उपलब्ध भ' सकैत छल, wen भेलीह अछि ताहिं सै आजुक as सामंजस्य चलि गेलाह ने एक-दोसाक सहोदर छथि...। TET देल गेलै...। a काकीक कोना aera? ओ gE ERT तकैत are आधिवय में समक्ष ag शत्रु owe रट, “'नहिं बौआ! नहिं ater! हमरा. रहलीह...। gah सटल रहलनि... ! हुनक अगम्यागपनक आरोपी sifte ste एक या. भूख नहिं afer state नहिं ga पाबि चुप्पी के स्वीकृति बूझनल गेल...। हिंसक संतुष्टि age tea गेलाह...। कलह. रहल छलौह जे जाहि आँगन में आइ Ta 'पार' ओही दिन से प्रारंभ भेलै। पहिल Wate. ware नौबाति मारि-पीटि ot अट्ठाबन्जर खसल होइक औत ' ककरों कंठ में. पार भेटलनि जेठ पुत्र सरबन बाबू के, हुनके veh गेलै...। ई तैँ ew रहलै जे हल्ला सुनि. Pg कोना चैसि सकैत छै? इच्छाक आदार staf घोषणा कौत पंचलोकनि किछ लोक आँगन में जुटि गेलाह भा दुनू भा... दोसर दिन भरे अधिकांश पाहन ct’ पंचैती समेटबाक लेल sam होइते रहथि कि के अलग कपल गेलनि। तथापि gaat गेलरहथिन ।टोलक दू-चारि दा लोक आ एक- ate दिस हल्ला seth. हल्ताक केन्द्र पए आपन ira fas! आइ eR feat दू य पाहुन के ल' दुनू भार दलान पर mew Fah पढ़ते सभ स्तब्ध रहि गेलाह...। साँझ + nf सभक बरखा करिते रहलीह...। ade हिसाल-किताब करय लेल बैसलाह। आँगन मे दुनू देयादिनी wen fires छलीह...। हगढ़ा ते कहुना शांत भेल, सुदा लोक ae often फेर ओझराय लगलै। ओझराइत- असल में भेले ई जे पारक घोषणा होइतहि जेठ- कारण जानि क' चकित छलाह। एतेक साधारण... ओझराइत पहिने गारिक अध्याय चल... फेर. जन Geers केवाड़क wal सँँ चूड़ी खनका बात लेल wis झगड़ा ? जवोदशा होयबाक . लाठी चलबाक नौबति आबि गेल... । आब एहन . क' सरबन बाबू केँ इशारा कयलिन। ओ लग wet आई राति घर में माछ वा माउस बनब स्थिति देखि लोकों सभ बाँट-चूट कइर देव. गेलाह मैं देखलनि जे पलनीक हाथ में माववला स्वाभाविके छलै। मुदा माछ आनल जाय वा. उचित बुझलनि। ओहि दिन तैँ नहि, cere पुरता टिनहीं बाकस eh rete दिया aT माउस, से निर्णय नहिं भ' fe रहल छलैं। दिन पंच सभ जुटलाह on भीन-भिनाउजक pat केँ अपन घर चलबाक समाद अगुवायल- सरबन आवक सार केँ साछ बेसी नौक लौत प्रक्रिया mie भेल । प्राय: सप चल-अचल Teme स्वर थे देलथिन जेठ जनी। समाद part ललाक ससुर के सास । मामिला. संपत्तिक बखग लागि गेलाक उपयान्त एक टा. सुनियो ्त' wor काकीं ' की -करी, की- 'एलहिं ओझरा गेलें आ बतकुल्चनि होइव-होइत WET वस्तु ate गेलै जकरा बाँख असंभव aie 'क सोच में पड़ल रहलौह... । संपूर्ण we! धर पहुँच गेल रहै...। rad Ge we. ओ वस्तु चक्कू, ST, Fee घटनाक़म हुनका लेल भीषण बेदनादायी अड़ि गेलाह tate साझी teat सकैए...। ant माने कोन प्रकारक हथियार सै काटिक' wath. एहिं विखंडन केँ tare कोनों बाट आइए आ एखनहिं siege wor वा त्ाजू सँँ जोखि के बाँटल नहि जा सकैत aie a रहल छलनि। आब विखंडत केँ wet फलह कोनो नव बात नहिं od ad आखिर ओहि वस्तु केँ जॉटल जाय a tears कोत कथा? otf भ' चुकल रहै। पहिनहूँ कतक बेर दुनू भा टकण चुकल छलाह। . कोना बाँटल जाय ? दोसर, qe Aa Set संपूर्ण वीभत्सताक aia! ओ स्वयं की करथि? दुनू वें एक-दोसराक नेत पर शंका छलनि। दुनू. ओहिं बस्ु Fae नहिं चाहैत vee दुनुक कि Wale थे आँगन में अनधोल wee. के होनि जे दोसर महाबेइमान अछि। एम्हर हम. इच्छा रहनि जे awe अपन दावा छोड़े... Weed देयादिनी oa छोट जनीक संहौ घर लेल खैत-खरैत मरिं रहल जी आ ae देअय आ ई पूरक पूरा हमे भेटि जाय... hh नजर प्रत्येक घटनाक्रम पर आ कान प्रत्येक स्वर ओ चोश-चौरा क' पाइ जमा sta अछि। एहिं. वस्तु छलीह कनिजा ae! पर रहनि। जेठजनी दुरुखाक केबाड़ लग TAS शंकाक आिकें लहकयबाक काज दुनू देवादिनी.... पंच लोकनि चकित were! वाह रे. छलीढ छोट जनी दलानक कोठलीक खिड़की समय-समय पए बड़ योग्यतापूर्णक करैत safe मादुभकित !! आइ afte एहन मातुभक्त कत' . लग तत्पर! पारक घोषणा होइतहिं छोटननी हल छत्तथित...। मुद्दा आइ, TS देखाइ पढ़ेत अछि? पुतोहुक तैँ बाते seta जेठजनी के लपकि क' सासुक कोठली मे Fa कबाचित दुतू पक्ष एहिं दितक प्रतीक्षा में. जाय। पुत्रों सभ मे एहन सातृधक्ति gee! . जाइत....सासुवला टिनहीं बाकस लक 'छल। कनिना काकी आपन परिवार पे होइत एहिं . गेल अछि। बहू भागर्मत ofa एहन माय । टौके, भड़फड़ाइत दुरुखाक केबाड़ लग अबैत... चूड़ी fiers विस्फोट के gee gq देखेत रहलीह one जी बहु सोचि कें नाम रखने हेताह अपन. खनकबैत...आ पति Ree फुसफुसा क ' कहैत आ सौचैत रहलीह जै की हमर खून Te दुनू पुत्रक। नामक प्रभाव किल्न ने tases देखलनि। निमिष मात्र में ओ सभ बात बुझि *... स्वार्थ भरत छल...। Oia! गेलीह... मै दाइ !ई बात छैक? फु्ती ने देखियी! ओहि दिन तैँ बूढ़-पुरान सभ Sater sine: पंचलोकनि दुतू भौद कें एक दोसराक इह! लगैए हम छोड़ि देबै। आँखि आगों अपन जुझ्ा-सुझा क' दुनू पक के शांत कपलनि, पंच. माएृभक्ति केँ सम्मान देवाक उपदेश दे एहिं. आशा-अभिलाधाक अपहरण देखि जे चुप रहि + भानस एक ठाम नहिं भेलै । दुनू घर में लोक सभ.. बात पर राजी क' लेलनि जे ओ सभ ' पार' लगा. जाय से एक बापक बेटी नहिं।' ओ झपट्टा मारिक' अपन-अपन इच्छानुसार भोजन बनौलनि। एप्हर लेघि । एक-एक सप्ताहक पार। माने ई जे कनिया.. बाकस Sa! लेलनि। छीना-झपरी में दुनू ie गेलौह माय। हे ओहि दिन दुनू ate Ty काकी बेरा-बेरी सप्ताह wha लेल दुनू परिवार. देवादिनी असंतुलित भ ' दुआरि पर सें आँगन में मातू-भक्तिक आदर्श प्रस्तुत करय लेल तत्पर. रहल करतौह आ बेटा-पुतोहु के सेवाक अवसर. eh चौट भरपूर लगलनि... | पंच सभक रहथि।पुतोह सभतेँ आओर आाँ-पाछों, “मा! .. दैत रहतीह । की aT काकी ? a आपत्ति. नजर जखन पड़ल रहनि तखन दुनू गोटे बाकसक ई एक बेर कहबुन हैँ जे की खाय के मोन होइत.. ते नहिं? ओ की बजिवधि? fog बाजय लेल.. कड़ी के पकड़ने अपना-अपना दिस fe छनि? ई निरिचन्त रहथु मा! एकदम अमनिया we निष्कर्ष पर पहुँचय जरूरी छलनि। हुक. लेबाक प्रयास क* रहल छलीह...। संगहि बाक्‌- TR संदेह नलि करवु। ई जे कहथित ae पर चकरघिली भेल छलनि...। ओ बूकि. युद्ध चालू छल...निरंतर। एक-दोसराक Fa, से बना देवनि। tts खीर बना दियनु? आकि ae पाबि एहल छलीह जे विगत दस-वारह Teer, भाय, बाप सध कें सोते गीड़ि जयबाक alas, अप्रैल-जून, 2008 / 25

36 || http://www.videha.co.in/ ISSN 2229-547X VIDEHA धमकी देल जा रहल BTL... 'बाकस केँ फोललनि | ताहि खन कनिजा काकीक Tarai प्रत्यक्ष आक्रमणक क्रम चलैत अवाक्‌ कनिया काकी दुनू पुतोहु आ हुनका Seu मास्कीन wal मलिन-मटियौन भ' गेल. रहल...चलैत रहल... । सभक मध्य योजक चिह्न जकाँ वर्तमान संदर्भ छलनि...नीरकत...निर्भाव...निष्प्रभ! आँखिक बुझबाक प्रयास क' wa छलीह... । Trea असंख्य बादुर उड़त...कनपट़ी पर RONG MAS oie’ won Mheate, raeea amen aa... CUT आशाक साइड इफेक्ट... 'कयलनि आ बाकस के सबहक मध्य मे आनल. तीन टा पुरान साड़ी...सेनुरक एक या गद्दी जे. आओही दिन सै शुरू भ 'गेलनि कनिजा काकीक गेल। कोन रहस्य छे एहिं बाकस में ? किए दुनू कदाचित साड़ी में सन्हिआयल रहिं गेल रहै...। . जीवनक एक टानवीन क्रम... ।कड़ाचूर मेहनतिक देयादिनी एहिं बाकस केँ हथियाब' लेल we व्यास ककाक एक टा पुरान मैलछौंह फोटो, क्रम...। ओना तँ ओ अपनहि बैस क' खायवाली आफनतोड़ने छथि ?ई बाकस तँँ कनिजा काकीक . खाटीक एक टा पुरान दुहत्ती चदरि...आ एक कहियों नहि रहलीह, मुद्दा आवक कथा fey Gis बाकस oh जे हुक aay जोड़ा पुरना खराम जे मृत्यु े पूर्व व्यास कका oni छल... aie बेठाक पार में ओ whe, सख सें देने रहथिन । तहिया जेहन रहल हो, मुद्दा पहिरेत रहथि...बस्स ! दुनू देयादिनी केँ विश्वास घरक कोन काज ae करथि? चाठर fae, आब हैँ भ' गेल अछि पुरान... बिझायल...प्राय: _ नहिं भेलनि। दुरुखाक मुँह लग ठाढ़ि ओ लोकनि . चिवकस चालब, घर- आँगन बहारब, बच्चा सभ जर्जर सन... । ताहि लेल एतेक तमाशा। 'पहिने नहू स्वर में फेर जोर a fda cafes केँ सम्हारब...माने ई जे कोनो -ने-कोनो काज में असल में, दुनू बेटा-पुतोहक मोन में एक. जे बाकस केँ उनटि-पुनटि क' देखल ae लागले tee छलीह...। तैयो जैं केओ कमी a अदूभूत आशा बहुत दिन से सुगबुगा wa मौलायल आस नेने दुनू भाँड ae एहि बात पर निकालि-निकालि क' फ्डति कर' पर तुलल sof. ease अछि जे ओ सभ दिन... जोर देलनि। पंच में से एक गोटे इंहो क* के रहयतँ की कथल जाय? दुनू पुतोह अपन-अपन मितव्ययी रहलीह अछि...। कहियों हाथ. देखा देलथिन। किछु नहिं aed! सभ टा वस्तु पार में हुनका पर क्षुब्ध रहैत छलथिन। हुनका खोलिक' खर्च afe कयलनि। तखन doh ओही में राखि क' ताला लगा बाकस SPT सभ केँ शंका नहि विश्वास छलनि जे ah अवश्य किछ्ु-ने-किछ जमा करैत हेतीहं। हुनका art लग राखि देल गेलनि । कुँजी सेहो हुनके . महाबेइमान छथि...नमक हराम चथि। जेठजनीक पास अवश्य कोसलिया हेतनि। एड़न गुम्मी oto! देल गेलनि। एक टा पंच आग्रह ata पार में छोटजनीक दुआरि पर बैसि जायब वा जे बेटा-पुतोहु वे हवा लागय देतीह... se कहलथिन, “SS सरबन a, आब माय के _ हुनक बच्चा कें दुलारब तथा छोटजनीक पार मे बेटी da sine’ रखने हेतीह...। ओहो जे. ल' जइयनु।'' हताश सरबन बाबू मरल ia जेठजनी सँँ बतिआयन वा हुनक कोनों सौदा गुंजा अछि ने से माये set गहींर अछि... । मुदा wee उठां माय के ल' क' ऑँगन tee) दोकान सैँ आनि देव कनिजा काकीक बेइमानी ताहि सँँ की ? छोड़बनि थोड़े। आ गहना va Siow किऐ उठा क' ल' ae) में गगल जाइत छलनि... । रहरहाँ घुमा-फिराक' TEN छोड़ल जाय? This दितिये डबरा मे वा द' दितिये ओकरे सभ cia ते कयले जाइत छलनि जे ओ अपन सभ राचव ललां आ हुनक पत्नी के आशा छलनि .. केँ जकरा सभक करेज फरटैत छलै एहि Se टाकोसलिया बेटी केँ द' देलनि... ET अवसर जे जेंकि use छोट बेटा छथि ते ae आँगन में ठाढ़ि पत्नी हुनका डाँटय लगलबिन। पर बेटी आ नातिक लेल होइत गारि-सरापक 'कोसलिया आ गहना पर हुनके सभक अधिकार ओ कनेक थकमका गेलाह sie छोट जनी aca हुनक आत्मा कें हेहरु क' दैत छलनि...। छनि। ओम्डर सरबन बालू दुनू व्य्तिक सोचब के ई बात खबखबा केँ लगलनि। ई रॉडी a उनटि क' उत्तर देव वा आपत्ति करब हुनक wat जे एक हैँ atte छथि, dee oh gan अछि? ओ daw बेटी अछि तेँ हमहू स्वभाव कहियो नजि रहलनि । मौनहिं मौन कूही माय सरबने बाबू के sha’ कहैत छथिन ते जलबारक बेटी छी। घुमा-फिराक' कूट करत. होइत ओ एतबे सोचथि जे ओइ बेचारीक कोन स्वाभाविके हुनक अधिकार बेसी मजगूत sh तँँ हम नजि aed? आ हम छोड़ि देने की ? dea ओतें अपनहिं दैवक डॉग से थकुचायलि मुद्दा, दुनू पक्ष में से ahh एडिं मादे प्रकटतः "हमर सभक करेज किए wea? फरतै अछि । एकमात्र बारह बर्खक बेटा केँ कहुना क' चर्च नहिं क' रहल छल। दुनू पक्षक कान K ओक्‍्कर सभक जकरा अपन बेटाक साध लेल.. पोसैत ओ कतेक कष्ट सैँ जीवन बिता रहल 'एहिं आशंकाक उल्लू बैसल छलै जे जैं बात ढेठआक कमी होइ आ जे निर्लज्ज जकॉं बाकस अछि, से कोनो नुकायल छै ? केकरा नजि बूझल खुजि गेल a दोसर पक्ष अपन हिस्सा ने माँगि. चोराक' भागय।”” 3? तैयो We गारि-सराप। लेअय! चतुर कुटनीतिक जकीँ प्रयास कयल जा... एहिं जोरगर आक्रमण सँ जैंठजनी | जखन कखनो गुंजाक मादें सोचैत whe 'रहल छल जे अपार मातृभवितक प्रदर्शनक बले*. छिलमिला गेलीह । ओ आँचर उठाक' सूर्व दिस कनिजा काकी तँ लगैत छलनि जेना केओ करेज माय केँ अपना संग राखि लेल जाय... । एक बेर. तकैत बजलीह, '' हे दिनकर दिनानाथ! जनिह' . कें पकड़ि क' निचोड़ि दैत होनि... । कतेक दुलारू माय अपन पक्ष मे, अपन हिस्सा मे आबि गेलीह . तौंही... । जल उगे छह... जरल डुबै छह... । घोंछीं रहय बापक! पतिक ort बेटी केँ डॉटय के हूँ बाकसों अपनहिं आबि जायत... । एहिं Ga सभ हमर बेटा केँ नजरिं पर चढ़ौने रहैए,.. । ताही Heat हिम्मति नहि भेलनि हुनका। से आई... । हुनू पक्ष साकांक्ष, सतर्क आ सन्नद्ध Be.) निसाफ करिंह । हे नाथ ! गुँहखीँकी सभ कें मुंह कखनों क' अपन बेटी पर गर्व सेहों होइत छलनि। wen खिड़की लग ठाढ़ि छोटजनी techs a खदखद पिलुआ फरबिह' हे दिनानाथ!'” ota छलनि जे बेटी हुनको से बेसी साहसी 'दुरुखाक मुँह लग ठाढ़ि जेठजनी की क' wa 9 आब तूँ छोटजनी केँ सनसना केँ लगलनि। छनि। अपना नवारी में लाख कष्ट रहल 'छथि हूँ ओ जेना सेन्हे पर चोर के पकड़ि लेबाक एहन घिनौन आक्रमण! नजि। आब अप्रत्यक्ष होनि...कम-सँ-कम सिनेहीं पतिक ote तैँ अंदाज में झपट्टा मारलनि आ पतिक कान फूकि . आक्रमण सँँ काज नहिं चलत | प्रत्यक्ष आक्रमण उपलब्ध रहनि...आ गुंजा केँ? 'पहिल पार अपन माथे सहर्ष स्वीकार करबाक . बेसी चोटगर, “हमरा किऐ पिलुआ फरत ? we wet भाग में की लिखल रहैत है, से के sere चालि खाली जाइत देखि जेठजनी we तोरा सभ केँ। तोहर बेटा tee चाँद सन. जनैए? जहिया व्यास कका बेटीक लेल बर देखि 'खिसिया क' रहि गेल रहथि...। we के... भाय केँ...बाप कैँ...आ सेहो नेडरिया क' आयल रहथि तहिया कनिजा काकी केँ ay पंच लोकनि efron काकी सँँ कुँजी ल'. Pre" संतोष भेल रहनि जे बेटी मात्र पौने कोस दूर 26 / ऑतिका, अप्रैल-जून, 2008

विदेह ३६८ म अंक १५ अप्रैल २०२३ (वर्ष १६ मास १८४ अंक ३६८) | | 37 Se रहत। एहिं गाम सेँ पूब थोड़ेक दूरी पर Ro ep नया, OS oy ज्ञा के के नहिं चिन्हैत छनि? परोपड्ा में ग्ग पास Rie कि पिला नामी...प्रसिद्ध वैदिक ! तिनक पोता। गोर ae किन \ | / . चकैठ सन धूआ। बी.ए, पास । को हेतै जे एखन कि EL) दर aN कोनों नोकरी नहि dati अछि? तत्काल a Way | | DA N | उत्माहपूर्वक खेतिए में लागल। संगहि गामक Ww ff © x | सार्वजनिक काज सभ में आगाँ-आगां रहनिहार a NY hi I A aes दुस्साहसी युबक । के जनैत रहय जे बैह दुस्साहस 0 a vn: ee सतासीक चढ़ल बाढ़ि मे लगनमा पुल लग Sa & yr =~ | खिरोइक उफनैत धार मे हेलबाक दुस्साहस पा SR i fins ce व । ढढ़ियाक तीन टा नबयुवक के गीड़ि गेल रहै...। Li Z Ms fe 5 i जिन ex || et ओहो रहथि। सात दिनुका बाद जखन पर भू शा] iy AS) \ oA उतरल रहे ते कोस भार दूर ततैला लग ( 4 Lay Yi कुछ eo | बबूरक झॉझ में ओशरायल लहास भेदल TED ONES | रहे...फूलल-फूलल,..किछु-किछु सड़ल सन। = a a कम कहना क' संस्कार कयल गैल रहै। एहीक संग गुंजाक सभ टा स 'ख-मनोर॑थ जेना बाढ़िक संग वहिं गेल रह... आवततं कहना क' बेटाक लेल . केँ कनी मदति करय लेल woe. सुदा कुंड, atten स्थान बा बेसी-सँ-चेसी गंढेसर... जीबाक छल... से बस संघर्ष करैत जीवि रहल भैया सभ हैँ सुनिते मातर अपन-अपन tet Wey कर faq Hay जल oe अछि... ततैक ने पसारि बैसलॉथिन जे मायक मुँदक बात. आपस...। सदा एक्के टा लक्ष्य Fa ge, गुंजा केँ ay प्रेम आ भरोस wa अपन सुँहे में रहि गेल रहनि...। सम्हरि जाय...मनुक्ख बनि जाय...आर की 7 कत' आय सभ पर। भाय सबहक विरुद्ध ओ fog तैयो गुंजा साहस नानि छोड़ने ay. कसरि ae dai warm में? aoa eel हा सुन! लैल तैयार aft रहल कहियो। नेनपनो मे. भेले जे मैहर आयब छोड़ि देने अछि? ate ae कमी कयबों कयलानि है बॉल सा We मेला पर यदि कोनो संगी ओकरा भावक ore मे. नहिं आयलि...। खूब जनैत छाथि ah ओहन चंसगर बेटी! कक an th chee गारि पढ़ दैक तें ओ किटकिटा क' संगीक मुँह _ अपन बेटी Mi अपन दु्दशा माय के देखाब' पढ़बाक। मुद्दा कोना जाय Rafer erate | tem आर जे गारि देबाक हो से दे, a नहिं चाहत अछि...। जो मे बेटी! हम अपन. पाँव किलोमाटर सुर. hed Hoe ae यदि हमर भाय सभ केँ किह कहने goes अभागक अतिरिक्त तोरा fag ate द' जाति... औह! यदि भी यह hae हि लि से बलि ले। भावक प्रतिइ प्रेम ones _ सकलियी...! यदि हमर पास faethe ते आए... दुनू बेदक ene बहु सतह ae बनल रहलै। ते ने ओ सभ साल Grigor एना बेलल्ला aie होब' दितियी...। रहथि। कहाँ जनैत रहथि जे बिआहक लेल मे जे नैहर ead wagon मे भाव ay आ एम्हर dar Gy thea Oa प्रस्थान ate बेटा सभ के aoe oe FRR से As छलि...आ टोलक छोट- arr gfe सभ fog aA के द' देलक...।. परम्परनुसार जे छाती से लगती, ले जेल 85 acd सभ कें प्रेरित करेत भरपूर सभ fag? कथी-कथी? canis आवेग में. से बेटाक विशुखताक यम ice औरिमाओन सेँ सामा-चकेया ae छलि। इनका लोकनि के एतबो स्मरण नि रहैत oh अपना जनतमे yay राम के at ow Re कतेक विश्वास oot छलै ओकर आत्मा सें जे हमरा पासरहबे की करय ? गहनाक नाम पर. tah? Gye हुल्‍लस से भर oe जखन ओ Seated wie oie are देल एक जोड़ी माकड़ी। fe मे से देने रहधिन-'हीस सुर जा फूल GAR we के अधिकारी ऊहाँ सन मैया वी... Uma तोड़बा क' बड़कौक बेर के हनुमानी आन-आन सासु CIE wa wa जहाँ aa भैया at बनवा देलघिन तैँ दौसर पर नजरि गड़ि गेल ओ कहियों lg सभ के कसिक' नहिं मैया गोत चाहि ete gr fea’ aah छोटकौक। ओहि a ओ वाली बनवा. रखलबिन | येलेक Gate ache ako em फूल लगा Fea" यौ... लेलनि। रहल टका! हू यदि से रहैत carte बहिन' । ओ कहबों करथिन, “कनिजा एना ढील सदा कहाँ सनिसकलबिन भाइसभ बहिनक . दुदेशा रहैत हमर आ हमर बेटीक...? .... देवैतें पठतायब। कहबी है हल्शुक nade करण हाक कें। बहिनोइक श्राद्ध मे जे give ' सोचेत-सोचैत efron काकी अपन फठद atu" wea एहन amen wot Jayson सेजेनातकर बाद ढढ़याक Reavers छानबीन करय लगैत sete... mat खाल हँसि क' रह जा ot SPUR Tea. राजनीतिक कान atone कर गलती भ' गेलनि? कत' चूकि गेलॉह ? ware होयबाक ae नहिं कमल किक सरबन जाबूक लिस्टमे ढढ़ियाक नामे नहिं छलनि _. जे fing जहिया आमदनी होइत छलनि तकर . ने-किछु हेर-फर क' फोसलिया am का मा रपबलला ते सहजहि एक अलगे दिया. पाइ-पाइ ओ परिवार कें बनाव' मे खर्च करत. लुतुक ta छनि aor मे। कोनो सील age मै मस्त रहैत छलाह । अभावग्रसत for एक a रहलौह...। सख-सधोर के कोठीक कन्हा पर. चुपचाप लहनो लगबैत छा नाक ve मुसी पूर्णिमक अवसर पर गौतम कुंडक मेला में. रखने छलीह... । तीर्थ यात्रा करा कैत के at एहि दिशा में सौचबो नाहे कल ता माय से भेट क' कब कहने रहनि जे era कहियो नहिं siete ag tara गौतम से चौर a? मा आइ pr anata aiken, अप्रैल-जून, 2008/ 27

38 | | http://www.videha.co.in/ ISSN 2229-547X VIDEHA जाइत छनि...। आरोप नहि जेना eras ag बान्हि क' खर्च करत जाइत weir) we, खरहरा देल जायत ताबत स्त्रीगण केँ टीका...। अपन हाइ-हाड़ निकलल देह के खास क' सासुक लेल हैँ हुनकर सभक मुट्ठी . पारस देले जेतनि। पूरा आँगन भरल अछि... रोल feta हुनका लगैत छलनि जे कदाच टूटि क' . किल् आर कसि जाइत छलनि... ।ओ सभ किल्लू॒ भरिक बेटी-धी आ बूढ़-पुरान स्त्री सभ सं... 'रहि गेल अपन निराधार आशा-अपेक्षा केँ tha देखैत रत wee. gaa रत छलौह आ सहैत सबहक हाथ में थारी आ बट्टा। Raa ओ लोकनि एतैक खिसिया क' रहि गेल छथि tha Bele. हाथ में arm बदला लौटा। णस्स परसल जा जे...। कदाच एहीं कारणें' जिनक पार में ne स्त्रीगण सभ प्राय; एहिं बात at रहल Bi सभ केँ पहिने ल' लेबाक हड़बड़ी रहैत छथिन fires तामस हरदम लहरल रहैत Bones tea छथि जे ओ चारि-चारि zr लागल छै। दुनू देवादिनी अतिव्यस्त छथि। oR. कदाच ते sie सप्ताह भरि ओइ घर. हरिबासर कयने छथि। मुदा, एहिं दू बख में... “केओ छूटथि ARI सभ के भरि इच्छा में भात बहुत कम बनैत छै...। आ जतबा बनैत BAST काकी कतेक_हरिवासर क' चुकल दियनु। हैं दाइ सभ, पहिने पारस लक ' अपन- छै से कनिजा काकीक लेल नहिं रहैत छनि...।. see से के जानय... । अपना कें सांधिक ' राखि अपन ऑँगन ध' अब जाट । आ है, आँगने में हुनका लेल मकड़ वा बड़ भेल तूँ गहुमक जनहा. देने रहथि ओ... । एम्डर हम कहियी हनका मुख नहिं रहिं जायब। जल्दी से घुरि क' अब जाड रोटी on तस्कारीक नाम पर किच्छो वा नोन-. पर तृप्तिक लेशो नहि देखि सकल छलहूँ। आ भरि इच्छा भोजन कौ जाउ । अहाँ सभ तेल। हुनका माछ-माउस वा फियाजु-लहसुन ad ater जेना गिल्ल wet adem... fe! gaa छी...भगवती स्वरूपा छी। at दिक्कति der oft । होइत og होइत रहनु...।.. की gat अठँटिया केस रहनि हुनक। से आब aT ने भरि पोख खा लेब आ भगवती कँ कहबनि ओहि सप्ताह मे उपेतति क” तीन-चारि दिन बनने. धड़घड़ा क' पकैत-ओज्राइत बगड़ाक cit fare seer पइठ हेतनि... "Sanit अपन करते...। भ' गेल छलनि...। बोल केँ आर मधुर बनबैत आग्रह करैत छथिन। भीन मिनाठजक बादे सैँ shoe 8-8 ft नहि! जौबैत रह तूँ गृह भात प्रगति क' रहल wen. गामक लोक केँ देखि आ मुइला पर दूध भात। इह ! नाटक ने देखू !! ae! ठकमूड़ी लागि जानि। Gee साल में दुनू इमलीक बूढ़ भूतहा गाछ... ने पइठ भगवान अहूँ सभ के देधि |" चढदह भॉइ दड़िभंगा मे लक््मीसागर मोहल्ता में छपकी “Galva! दिवी...चल' दियौ... aR ener बुचियाक टिप्पणी केँ सुनैत सातर पार डेढ़-डेढ़ कटठा जमीन ल' नेने छह on बेर दही परसल जा रहल अछि... । दहीक . ओकर बड़की बहिन कामिनी घबडा जाइत अछि 'एतय गाम पर तीन-तीन कोठली पक्का घर aR बारिकक संगे चीनी, डालना, आ बुनियाँक बारिक ओ बुचियाक मुँह पर meet रखैत डँटैत अछि, बना नेने रहथि । बस दलानवला भाग टा पुराने. सेहो गतिशील-सक्रिय छथि...। बेसी लोकक gfe dra बाज' के ठेकान नहिं छ। तोहर 'छलै... । माटिक भीतबला एक टा पैघ कोठली। te भरि चुकल Ber तैयो रसना मानि नहिं Sis पर बड़ी ay पाक' ore छैक। हरदम Ue कोठली dain दिस जार तैँ एव awa छनि...। छीलल माथ...चानन लेपल GaGa ears बसी उचितबक्ताक सारि ata! धर दुआरि जकर एक दिस एक 2 कपार...पीयर धोती, पीयर जनेठ आ भागलपुरी afa ari” ई कहिं कामिनी एक ठुनका 'एकचारी कोठली। एहि मे कमिमा काकी te दोपटा सँँ शोधित सस्बन बाबू आ राघव ae बुचियाक गाल पर दैत अछि। vote दलानवला ta कोउली मे एक दिस. हाथ जोड़ि-नोड़ि क” आग्रह eee छथिन, ... ई जेना बड्ड अनसोहाँत ata कै गितिया चारि-पाँच रा मादिक कोठी सभ जे आब प्राय: ““हड़बड़ाइ नहिं जाइ जाउ। सभ कें इच्छा oe केँ। जुचिया ओकर संगी है। दुनू मे 'फूल' लागल खालिए रहैत छलै...कहियो तोड़ि a! फेंका. भोजन करय दियनु । कोतो बस्तुक wise..." Si आब कामिनी केँ किल्ु कोना कहौक गितिया, जयबाक प्रतीक्षा मे। एहिं कोठली ये केओ fre पेट भरि चुकल छनि से योने मीन. मुदा ओकर अप्पन sie SS रोकि लेतै, “ort 'बाढ़नि-सोढ़नि ae दैत ऊलै...। साझी चीज अपन एहि मूर्खता पर पछता-खिसिया रहल छथि ये जलबार लाली भौजी! गुंजा दौदी के नहि देखे साँग पर...। कहियो क' मोन होनि ते A जे पहिने चूढ़े बेसी ल' लेलाह। एतबे नहि, छियनि। एडू बेर नहिए नजौलियनि ? जाय दियों। 'काकी बहारि-सोहारि दैत छलचिन--पास्वालीक . पहिले वा eet बेर मे दही अहगर कर a! ona क' की afte? माय कँ हूँ चिलाइए. seer सुनियो क' । कोठली सेँ बाहर sre a लेलाह eet नहि ध्यान देलनि जे गर्मीक GOT गेलियनि अहाँ सभ... ।' शितियाक एहिं कथन 'दलानक बरंडा पर एक टा पुरना चौकी राखल... ।. een होइत ठै आ भोज ये तैँ पहिने पुराने. पर आस-पासक सभ चौंकि पड़ैत as केओ गर्दा से भस्ल । दलानक काने कोन ? सस्बन बाबू _ दही परसल जाइत कै । आब असली खायवला whe Tale ale eg, मुदा सभ केँ तापस के गाम-गाम राजनीति करय से पलखति नहिं .. दही परसल जा रहल अछि... । मुदा, खाथु कोना? ay होइत छै। ई Gy धोंछी सभ लाहेब करत। आ राघव ललाक दलान छलनि गामक टीसन पेट में जगह कहाँ छानि? आ बुनियाँ कोना. जैं जलबारवाली वा खौंगवाली सुनत तें पता aa 'वा ब्रह्स्थान वा पंचायत भवन जतय संगी सभक GE? अपना कें संसारक सभ से बड़का . की हैत? भोज ened रहि जयतीह छिछिआड़ों जुटान होइत छलनि... । के देखैए दलान कें ? _ उलूकनन्दन gaa ओ लोकनि मुँह aes hg सभ | मुद्दा, लगैप, दुनू देयादिनी कदाच खुचिया दुनू के अपन-अपन परिवारक बेसी चिन्ता बेसी अग्रचेती सभ केँ देखि जरि रहल छथि जे. वा गितियाक रिप्पणी नहि सुनि पौलनि ote) ** Bett. । कहुना प्रगत्ति की... | से दुनुक प्रगति. कोना ओ सभ पहिने ते हाथ बासने रहलाह आ a सुनबो कयने Red संभवत: अनठिया te stot wat चकित छलीह । जे लौकनि . आब हाथ-मुँह चारिम गेयर में चला रहल रथि..।. देलनि अछि... ama श्राद्ध मे एक बौघा खेत बेच लेलनि...। ee सहाटि क' कनिजां काकीक आँगन... हम दलान पर आबि जात छीं। बस्स। से एही बीच मे एतिक पाइ कत' सँँ आनि लेलनि ? . दिस बढ़ि जाइत छी। एत' अलगे अनधोल मचल PE काल आर। पहिल खेपक भोज सम्पन 'एडन अवसर पर ओ अपन कान छूबि बाबा. aA... बाहर पुरुष वर्गक पहिल खेपक भोज. भ' जेतै। आ फेर पान-सुपारी लेल घमासान वैधनाथ सेँ माफी माँगि लेथि... | क्षमा करब are लगिचायल छै। योजनानुसार स्त्रीगणक RG... हम सहटैत-सहटैत अपन दलान पर हे बाबा! हमर नजरि नहि लगीक | काकीक बेटा... बिझो भ' गेल अछि। आब यावत पुरुष वर्ग. आबि जाइत छी । आँगनक गेट बन अछि। माय dae, gig सभ 7 आर होशियार छलथिन। ies क' कय उठत, औइठ-कूठ उठाओल TOR बाबूक आँगन गेल अछि । हम दलानक 28 / 2A, अप्रैल-जून, 2008

विदेह ३६८ म अंक १५ अप्रैल २०२३ (वर्ष १६ मास १८४ अंक ३६८) | | 39 आगाँ भालसरीक छाँह में कुर्सी थ' बैसि जाइत कम मात्रा में भात बनौलनि । एतबहिं जे ge “...बनैत जायत सभ धनना सेठ...आ...एक 'छो...। अकास साफ अल्ि...। कूदि-फानि क' ome नेना सभ लेल अपर्याप्त रहनि...। sh रा पाहनु केँ दू मुट्ठी भात खुअबैत हींग चूब' मेष सभ दखिन-भर चलि गेल अछि । भ' whe ओहि बारह बर्खक पाहुनक आगाँ मकइक रोटी. लगैत By" vier में बरसल dsr एहिं गाम धरि . आ रामतरीइक तरकारी परसि देलथिन sae | छोटजनी कें लेसि देलकनि। तरबाक लहरि अयबाक साहस नहिं क' सकल | संभवत: Se लेल बाड़ी में चलि che... एम्हर ओ बच्चा. मगज पर चढ़ि गेलनि...। ओ खरमासक आगि San पराजय मोन ve गेल हेतनि...। | कहुना क' दू कौर खयलक आ नानीक मुँह wal लहकि उठलीह...। A wee अन्हरियाक पंचमीक उदास चान रेलबेक ताकय लागल...। काकीक करेज में हुक. सायाक डोरी के छाती पर कसलनि आ कनिजा SRT आमक गाछीक उपर उगि आयल अछि। FSSA. हुनक आत्मा कलपि उठलनि...।. काकी संग व्यास ककाक सात पुश्तक उद्धार नहू- नहू रेलवे आ तकर ओइ पार बल्‍्ला में ठाढ़ हुनका लगलनि जेना अन्तस में जमल कोनो वस्तु ste लपकलनि। हुनक झौंटा पकड़ि क' इमलीक बूढ़ भूतहा गाछ देखाइ पड़ि we पिघलि रहल दौनि आ गरा बकौर लागि रहल Rear कनिजां काकी तलमला क' खसि अछि... । नहि जानि कतोक yew बास के... होनि... । ओ अपना क' कहुना क' सम्हारलनि . पड़लीह...। आब sh Gy हाथें कसि क' Ser ate गाछ पर... । ई कोनों हम नहिं कहिं रहल one टा निर्णय लेलनि... । लाज तेयागि क' . के थ' लेलथिन on चिसिअबैत-घिसिअबैत छी। कतेक लोक देखि चुकल छथि। कोनो- जेठजनौक दुआरि दिस बढ़लीह...कनेक अपन दुआरि लग आनि पटकि देलथिन...। 'कोनो महिसवार केँ ते पसर चरबैत काल She थकमकयलीह...आ चढ़ि गेलीह दुआरि पर... | “SR आब' दे मुन्ना के पप्पा केँ ते भात नेने रहैं आ नकिआयल स्वर में तमाकुल TT “ea सुन्नरि, एक मुट्ठी ata?" खुअबैत छियी... । तोरो आ तोहर नाति Fae. | रहै...। सुनै छियै, ओहि इमली me wwe सुनिते हीरा सुननरि किटकिटा gece) AS. gaa! तो” गेलय की करय ye के भूत-प्रेत अछि से प्राय: de अछि जे कोनो-ने “haus राखि गेल छे की ? ge! दुआरि पर? हमरा बदनाम करय a? आइ -कोनों कारेणें रेल सँ कटल अछि... । जहिया .. अंगौर राखिक' newer चड़ि देबै जे भात देबै?'' chee भथियान-ने-चहका देलियों A हमहू भोला ई रेल लाइन बनल हेतै तहिया के सोचने हैत | ““कनिजा, हमर जे दु्देशा करबाक होअय, fa एक बूँदक नहिं... ।”” जे कतेक लोकक da अंतिम प्रस्थानक ste से क' लेब...मुदा ओहि अबोध केँ.... 2” पहिल wh vant सासुक इलाज कय ओ अपन सहज-सुलभ-सस्त-साधन उपलब्ध कयल जा. बेर कनिजा काकीक स्वर में आपत्ति प्रकट Ge घर में कपड़ा पहिरय चलि गेलीह आ ओत्तहि रहल है... । मुदा नहिं! कहाँ प्रस्थान क' vat रहनि। सैँ गरियबैत रहलीह... । आछि केओ ? कहाँदन सभ Said इमली पर... “रे, बाद रे अबोध! aad बापक fag soe भोजन लेल बैसल नाति नानीक. बास लेब' पढ़ैत है... । की कनिजा काकी Se area छिये की ? केओ खराँत राखि गेल afe दु्देशां देखि पहिने ते हकबकायल...फेर fag ओही पर... ? मुद्दा, एहिं ग्यारह-बारह दिन में. की ? एतबे दरग छनि ते निकालशुन ने कोसलिया ae फुरयलै A कानय लागल...। आ कनिजा कहाँ gag नजरि आयल अछि हुनक Yon? आ खुअबधुन रसगुल्ला...।”” काकी! ओ ने fing बाजि रहल छलीह आ ने खाली ओहिं राति...। देयादिनीक Fara सुनि छोटजनी बाड़ी कानि wa छलींह । बस चितांग पड़ल शुन्य में सैँ प्रकट भेलीह...सदय:स्नाता...सही अर्थ में. दृष्टिएँ अकास दिस तकैत रहलौह...। नातिक 'एकवस्तरा..भीजल केस नग्न पीठ पर लहराइत... . कानब सुनि चेत भेलनि... । जेना-तेना उठलीह चुका eS भात> सायाकें छाती पर वामा हाथ सम्हारने...। स्थिति. आ नाति के पैजिया क' कानय लगलीह...। site राति हमरा लग सूतलि माय फॉफ करैत . केँ अँटकॉरैत-अँटकारैत हुनक कान मे जैठजनीक ओही दिन बेरू पहर नाति अपन गाम चलि. eq । बेटा के वात्सल्यक सुरक्षा दैत...। की हम. संबादक अंतिम अंश नीक जकाँ पड़लनि, | गेलनि। संयोग ad हम खरदाहाक खेत देखि सुरक्षित भ' गेल रही? खिड़की पर सँँ कनिजा नरम 'काकीक मुंड जरूर निपत्ता भ' गेल रहनि...पर॑च Sit CBP appa iret Cs ee es re ra gh मोन में सस्मायल हुनक आँखि ओ बेधक ee PO es पर aie. की कहय चहित रहय ah दृष्टि..? wee “ed 25. भू की अर्थ रहै ओकर... ? ओना किऐ देखने रह... हि) ee Zs A Sa ys LON कनिजा काकी हमय ओइ दिन? ogg PO | a ‘ en a ee (i oO A oe रहनि--नानी केँ देखय। माय सँ जिद क' कय।.. A दर BN Ll ae 'कतबों मजगूत हृदयक होथि गुंजा परंच मायक IN fe ma eae Jae i SR | लेल दंग ते छलनिहें ने। की करितथि? नहिं = MET oe रोकि सकलचिन बेट के । कहने रहथिन जे नहिं ... fy दि € @ मानबें dot ar ata oft घुरि अबिहें। Bi: ESN, sero (us cae : तहिया काकी छोटजनीक पार में उलीह। .. a Ee aS « Www भोरे-भोर आबि जुमल ओहि बारह बर्खक पाहुन OO ee ८ 2 4 les ¥ देखिते छोटजनीक पारा चढ़ि thief in Say नए aN भोग' पढ़लनि घिया-पुता केँ। अनेरे माय सै... का सकने ७९५! 4 'सभक अपराध की है? तामसे छोटजनी बहुत <b LE ERIE ee: EAM रद Deol, अप्रैल-जून, 2008 / 29

64 | | http://www.videha.co.in/ ISSN 2229-547X VIDEHA २.१०.संजू दासक किछु बीछल कलाकृति ©ec = we 3 . @ 3 ~ , « e A =F Fe 3 ao aie make he eaten का दे थक — eae x=. a तक v7 SY ae 2 shear “ om कै

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