ISSN 2229-547X VIDEHA 𑒀 विदेह ३७१ म अंक ०१ जून २०२३ (वर्ष १६ मास १८६ अंक ३७१) [विदेह (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) www.videha.co.in ] विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। ऐ पोथीक सर्वाधिकार सुरक्षित अछि। कॉपीराइट (©) धारकक लिखित अनुमतिक बिना पोथीक कोनो अंशक छाया प्रति एवं रिकॉडिंग सहित इलेक्ट्रॉनिक अथवा यांत्रिक, कोनो माध्यमसँ, अथवा ज्ञानक संग्रहण वा पुनर्प्रयोगक प्रणाली द्वारा कोनो रूपमे पुनरुत्पादन अथवा संचारन-प्रसारण नै कएल जा सकैत अछि। (c) २०००- २०२३. सर्वाधिकार सुरक्षित। भालसरिक गाछ जे सन २००० सँ याहूसिटीजपर छल http://www.geocities.com/.../bhalsarik_gachh.html , http://www.geocities.com/ggajendra आदि लिंकपर आ अखनो ५ जुलाइ २००४ क पोस्ट http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html केर रूपमे इन्टरनेटपर मैथिलीक प्राचीनतम उपस्थितक रूपमे विद्यमान अछि (किछु दिन लेल http://videha.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html लिंकपर, स्रोत wayback machine of https://web.archive.org/web/*/videha 258 capture(s) from 2004 to 2016- http://videha.com/ भालसरिक गाछ-प्रथम मैथिली ब्लॉग / मैथिली ब्लॉगक एग्रीगेटर)। ई मैथिलीक पहिल इंटरनेट पत्रिका थिक जकर नाम बादमे १ जनवरी २००८ सँ ’विदेह’ पड़लै। इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि, जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। (c)२०००- २०२३. विदेह: प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004). सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। Editor: Gajendra Thakur. In respect of materials e-published in Videha, the Editor, Videha holds the right to create the web archives/ theme-based web archives, right to translate/ transliterate those archives and create translated/ transliterated web-archives; and the right to e-publish/ print-publish all these archives. रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना/ संग्रह (संपूर्ण उत्तरदायित्व रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता मध्य) editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ पठा सकैत छथि, संगमे ओ अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो सेहो पठाबथि। एतऽ प्रकाशित रचना/ संग्रह सभक कॉपीराइट रचनाकार/ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि आ जतऽ रचनाकार/ संग्रहकर्त्ताक नाम नै अछि ततऽ ई संपादकाधीन अछि। सम्पादक: विदेह ई-प्रकाशित रचनाक वेब-आर्काइव/ थीम-आधारित वेब-आर्काइवक निर्माणक अधिकार, ऐ सभ आर्काइवक अनुवाद आ लिप्यंतरण आ तकरो वेब-आर्काइवक निर्माणक अधिकार; आ ऐ सभ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार रखैत छथि। ऐ सभ लेल कोनो रॉयल्टी/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै, से रॉयल्टी/ पारिश्रमिकक इच्छुक रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता विदेहसँ नै जुड़थु। विदेह ई पत्रिकाक मासमे दू टा अंक निकलैत अछि जे मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ www.videha.co.in पर ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। Videha eJournal (link www.videha.co.in) is a multidisciplinary online journal dedicated to the promotion and preservation of the Maithili language, literature and culture. It is a platform for scholars, researchers, writers and poets to publish their works and share their knowledge about Maithili language, literature, and culture. The journal is published online to promote and preserve Maithili language and culture. The journal publishes articles, research papers, book reviews, and poetry in Maithili and English languages. It also features translations of literary works from other languages into Maithili. It is a peer-reviewed journal, which means that articles and papers are reviewed by experts in the field before they are accepted for publication. Font/ Keyboard Source: https://fonts.google.com/ , https://github.com/virtualvinodh/aksharamukha-fonts , https://keyman.com/ These are print-on-demand books, send your queries to editorial.staff.videha@gmail.com. The eBooks of some of these are available for sale on Google Play [(c) Preeti Thakur, sales.videha@gmail.com], send your queries to sales.videha@gmail.com. The contents and documents e-published by Videha (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) are periodically being checked for accessibility issues. People with disabilities should not have difficulty accessing these contents/ documents. © Preeti Thakur (sales.videha@gmail.com) Videha e-Journal: Issue No. 371 at www.videha.co.in समानान्तर परम्पराक विद्यापति- चित्र विदेह सम्मानसँ सम्मानित श्री पनकलाल मण्डल द्वारा मैथिली भाषा जगज्जननी सीतायाः भाषा आसीत्। हनुमन्तः उक्तवान- मानुषीमिह संस्कृताम्। अक्खर खम्भा (आखर खाम्ह) तिहुअन खेत्तहि काञि तसु कित्तिवल्लि पसरेइ। अक्खर खम्भारम्भ जउ मञ्चो बन्धि न देइ॥ (कीर्तिलता प्रथमः पल्लवः पहिल दोहा।) माने आखर रूपी खाम्ह निर्माण कऽ ओइपर (गद्य-पद्य रूपी) मंच जँ नै बान्हल जाय तँ ऐ त्रिभुवनरूपी क्षेत्रमे ओकर कीर्तिरूपी लत्ती केना पसरत। Do not judge each day by the harvest you reap but by the seeds that you plant. -Robert Louis Stevenson ... Videha: Maithili Literature Movement 𑒀 ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्ष ग्वंग शान्ति: 𑓇 𑒠𑓂𑒨𑒾: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑒢𑓂𑒞𑒩𑒱𑒏𑓂𑒭 𑓅 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱: अनुक्रम ऐ अंकमे अछि:- १.१.गजेन्द्र ठाकुर- नूतन अंक सम्पादकीय (पृ.२-२) १.२.अंक ३७० पर टिप्पणी (पृ.३-४) मिथिला स्टूडेण्ट यूनियन (एम.एस.यू.) विशेषांक २.१.प्रस्तुत विशेषांकक संदर्भमे (पृ.७-१८) २.२.एम.एस.यू. क संक्षिप्त परिचय (पृ.१९-२३) २.३.चंदना दत्त- MSU (पृ.२४-२५) २.४.हिमकर भारद्वाज- "एम.एस.यू (MSU)-मिथिला स्टूडेंट यूनियन"सँ "मिथिलावादी पार्टी" धरि (पृ.२६-३५) २.५.अजित कुमार झा- घटाटोप अन्हरिया मे उम्मीदक किरण: मिथिला स्टूडेंट्स युनियन (पृ.३६-४०) २.६.सच्चिदानंद सच्चू- मैथिल संगठन आ ओकर सामाजिक सरोकार (पृ.४१-४७) २.७.लक्ष्मण झा सागर- मिथिला स्टूडेंट यूनियन (पृ.४८-५१) २.८.प्रणव झा- मिथिला स्टूडेंट यूनियन (पृ.५२-५६) २.९.आचार्य रामानंद मंडल- मिथिला स्टूडेंट्स यूनियन बनाम मिथिला राज्य! (पृ.५७-५८) २.१०.डॉ कैलाश कुमार मिश्र-मिथिला स्टूडेंट यूनियन: दशा, दिशा आ नेतृत्व (पृ.५९-६४) २.११.लालदेव कामत- एम एस यू केर हश्र (पृ.६५-६६) २.१२.आशीष अनचिन्हार- MSU केर काज एवं हमर अपेक्षा (पृ.६७-६९) २.१३.प्रवीण कुमार झा- जनहित परिप्रेक्ष्य मे (पृ.७०-७१) ऐ अंकक अन्यान्य रचना ३.गद्य खण्ड ३.१.जगदीश प्रसाद मण्डल- सुचिता (धारावाहिक उपन्यास) (पृ.७३-९०) ३.२.जगदीश प्रसाद मण्डल-अपेछा टुटि गेल (लघुकथा) (पृ.९१-९७) ३.३.नन्द विलास राय-आवश्यक आवश्यकता (पृ.९८-९८) ३.४.रबीन्द्र नारायण मिश्र- मातृभूमि (उपन्यास)- ३६-४० म खेप (पृ.९९-११०) ३.५.कुमार मनोज कश्यप-आकाश-कुसुम (पृ.१११-११२) ३.६.निर्मला कर्ण- अग्नि शिखा (खेप-२०) (पृ.११३-११९) ३.७.आचार्य रामानन्द मण्डल-अन्हारक दीप/ बाल बैरागी (पृ.१२०-१२८) ३.८.डा. किशन कारीगर-मैथिलीमे गोंधियागिरी (पृ.१२९-१३०) ३.९.लालदेव कामत-महा प्रलयक लगीच छैक जनजीवन/ सामाजिक सरोकार केँ नव दिशा दैत उपन्यास/ कविवर बद्रीनाथ राय जीक मादे (पृ.१३१-१४२) ३.१०.परमानन्द लाल कर्ण- गीता माहात्म्य (पृ.१४३-१६०) ४.पद्य खण्ड ४.१.राज किशोर मिश्र-चिंता-फिकिर (पृ.१६२-१६५) ५. अनुलग्नक (पृ. १-३०७) १.विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक Videha e journal's all old issues (पृ. १-२०) २.मैथिली पोथी डाउनलोड Maithili Books Download (पृ. २१-५४) ३. मैथिली ऑडियो-वीडियोक संकलन Maithili Audios-Videos (पृ. ५५-६४) ४.मैथिली शिशु, बाल आ किशोर साहित्य Maithili Children Literature (पृ. ६५-७४) ५.विदेह स्त्री कोना (पृ. ७५-८१) ६. विदेह ई-लर्निङ्ग (पृ. ८२-९२) ७.विदेह सूचना संपर्क अन्वेषण (including Parallel Literature in Maithili and Videha Maithili Literature Movement) (पृ. ९३-१९७) ८.विदेह मिथिलाक खोज (पृ. १९८-२२४) ९.विदेह मिथिला रत्न (पृ. २२५-३०७) 𑒀 ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्ष ग्वंग शान्तिः पृथ्वी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति वनस्पतय: शान्तिर्विश्वे देवा: शान्तिर्ब्रह्म 𑓇 𑒠𑓂𑒨𑒾: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑒢𑓂𑒞𑒩𑒱𑒏𑓂𑒭 𑓅 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑓁 𑒣𑒵𑒟𑓂𑒫𑒲 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑒰𑒣: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑒼𑒭𑒡𑒨: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱 𑒫𑒢𑒮𑓂𑒣𑒞𑒨: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑓂𑒫𑒱𑒬𑓂𑒫𑒹 𑒠𑒹𑒫𑒰: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑓂𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧 ब्रह्मणसँ प्रार्थना जे द्युलोकमे, अंतरिक्षमे, पृथ्वीपर, जलमे, औषधमे, वनस्पतिमे, विश्वमे, सभ देवतागणमे आ ब्रह्ममे शांति हुअय। ॐ-ब्रह्मण, द्यौ-सूर्य-तरेगण, अंतरिक्ष- पृथ्वी आ द्यूलोकक बीच, आप:-जल, विश्वेदेवा- सभ देवता, ब्रह्म- सर्जक। 𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧𑒝𑒮𑒿 𑒣𑓂𑒩𑒰𑒩𑓂𑒟𑒢𑒰 𑒖𑒹 𑒠𑓂𑒨𑒳𑒪𑒼𑒏𑒧𑒹, 𑒁𑓀𑒞𑒩𑒱𑒏𑓂𑒭𑒧𑒹, 𑒣𑒵𑒟𑓂𑒫𑒲𑒣𑒩, 𑒖𑒪𑒧𑒹, 𑒎𑒭𑒡𑒧𑒹, 𑒫𑒢𑒮𑓂𑒣𑒞𑒱𑒧𑒹, 𑒫𑒱𑒬𑓂𑒫𑒧𑒹, 𑒮𑒦 𑒠𑒹𑒫𑒞𑒰𑒑𑒝𑒧𑒹 𑒂 𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧𑒧𑒹 𑒬𑒰𑓀𑒞𑒱 𑒯𑒳𑒁𑒨। 𑓇-𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧𑒝, 𑒠𑓂𑒨𑒾-𑒮𑒴𑒩𑓂𑒨-𑒞𑒩𑒹𑒑𑒝, 𑒁𑓀𑒞𑒩𑒱𑒏𑓂𑒭- 𑒣𑒵𑒟𑓂𑒫𑒲 𑒂 𑒠𑓂𑒨𑒳𑒪𑒼𑒏𑒏 𑒥𑒲𑒔, 𑒂𑒣:-𑒖𑒪, 𑒫𑒱𑒬𑓂𑒫𑒹𑒠𑒹𑒫𑒰- 𑒮𑒦 𑒠𑒹𑒫𑒞𑒰, 𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧- 𑒮𑒩𑓂𑒖𑒏। 𑒀 ॐ, स॒हस्र॑शीर्षा॒ पुरु॑षः। स॒ह॒स्रा॒क्षः स॒हस्र॑पात्। 𑓇, 𑒮↓𑒯𑒮𑓂𑒩↑𑒬𑒲𑒩𑓂𑒭𑒰↓ 𑒣𑒳𑒩𑒳↑𑒭𑓁। 𑒮↓𑒯↓𑒮𑓂𑒩𑒰↓𑒏𑓂𑒭𑓁 𑒮↓𑒯𑒮𑓂𑒩↑𑒣𑒰𑒞𑓂। स भूमिं॑ ग्वंग वि॒श्वतो॑ वृ॒त्वा। अत्य॑तिष्ठद् दशाङ्गु॒लम्॥ 𑒮 𑒦𑒴𑒧𑒱𑓀↑𑓅 𑒫𑒱↓𑒬𑓂𑒫𑒞𑒼↑ 𑒫𑒵↓𑒞𑓂𑒫𑒰। 𑒁𑒞𑓂𑒨↑𑒞𑒱𑒭𑓂𑒚𑒠𑓂 𑒠𑒬𑒰𑒓𑓂𑒑𑒳↓𑒪𑒧𑓂॥ हजार माथ, हजार आँखि, हजार पएर संग विश्वकेँ आच्छादित केने अछि, दस आंगुरक गनतीक वशमे नै अछि ओ। प॒द्भ्याग्ँ॑ शू॒द्रो अ॑जायत॥ 𑒣↓𑒠𑓂𑒦𑓂𑒨𑒰𑒑𑓂𑒿↑ 𑒬𑒴↓𑒠𑓂𑒩𑒼 𑒁↑𑒖𑒰𑒨𑒞॥ पएरसँ शूद्रक उत्पत्ति भेल॥ प॒द्भ्यां भूमि॒र्दिशः॒ श्रोत्रा᳚त्। 𑒣↓𑒠𑓂𑒦𑓂𑒨𑒰𑓀 𑒦𑒴𑒧𑒱↓𑒩𑓂𑒠𑒱𑒬𑓁↓ 𑒬𑓂𑒩𑒼𑒞𑓂𑒩𑒰↑↑𑒞𑓂। मुदा पएरेसँ भूमियोक उत्पत्ति। ❀ (White Florette- innocence and purity) ☸ (Wheel of Dharma) ࿕(Swastik) ꣼ (सिद्धिरस्तु, सिद्धम 𑒮𑒱𑒠𑓂𑒡𑒱𑒩𑒮𑓂𑒞𑒳, 𑒮𑒱𑒠𑓂𑒡𑒧 Devanagari Anji) 𑓅 (Gwang ग्वंग- two small circles connected by u and a dot placed over it, used in reference of Vedic texts) 𑒀 (Tirhuta Anji, Ankush of Ganeshji, placed at the beginning of something) 𑒀
१.१.गजेन्द्र ठाकुर- नूतन अंक सम्पादकीय १.२.अंक ३७० पर टिप्पणी १.१.गजेन्द्र ठाकुर- नूतन अंक सम्पादकीय मैथिली आ मिथिला लेल अस्सी-अस्सी हाथक कथित साहित्यकार आ कथित लिटेरेरी एसोसियेशन (साहित्य अकादेमी पोषित) आ अन्तर्राष्ट्रिय स्तरक कथित मिथिलावादी स्वघोषित नेता आ संस्थाक अछैत मिथिला स्टूडेण्ट यूनियनपर विशेषांक निकालबाक निर्णय भेल, तकर उद्देश्य छल ई चिन्हित केनाइ जे किछु काज रेकॉर्ड बनेबाले होइ छै आ किछु काज काज होइ छै। जेना कथित मिथिला/ मैथिलीक जातिवादी संस्था सभ जइमे मैथिलीक जातिवादी रंगमंचक संस्था सभ सेहो अछि केर मुख्य काज अछि माला आदि पहिरेनाइ, पत्रिका-स्मारिका आदि छपेनाइ, जे मात्र रेकॉर्ड बनेबाले होइ छै, तकर विदेहक नजरिमे कोनो महत्व नै छै। अहाँ अपन संस्थाक नाममे अन्तर्राष्ट्रिय बा ब्रह्माण्डीय लगा लिअ, विदेह लेल ओकर कोनो महत्व नै। कारण ऐ सभ संस्था द्वारा जातिवादी कट्टरता बढ़ाओल जा रहल अछि, कारण ई सभ पॉकेट संस्था अछि। विदेहक विशेषांक अभिनन्दन ग्रन्थ नै होइ छै। मिथिला स्टूडेण्ट यूनियनक विशेषांकमे बहुतो आलेखमे ओकरापर बहुत रास आक्षेप सेहो लागल छै। भऽ सकैए ई संस्था (एम.एस.यू.) आलोचनाक आलोकमे किछु सुधार करत, कारण ओ पॉकेट संस्था नै वरन् संस्था अछि आ तइमे कोनो संदेह नै। -Gajendra Thakur, editor, Videha (be part of Videha www.videha.co.in -send your WhatsApp no to +919560960721 so that it can be added to the Videha WhatsApp Broadcast List.) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। १.२.अंक ३७० पर टिप्पणी साकेत ठाकुर आदरणीय भ्रमर जी पर लिखल सब आलेख नीक लागल.विदेह पत्रिका स' संबंधित सब विद्वान जन के हार्दिक आभार। लक्ष्मण झा सागर समय के पक्का अछि विदेह। सुशील लाल दास सराहनीय कार्य। चैनसँ पढ़ब। बधाइ। उषाकिरण खान मेलपर देखलहुँ। विषय सूची बहुत विशिष्ट लागल। सुविधासँ पढ़बै। जगदीश चंद्र ठाकुर अनिल क्षमा करब, हम पटना नहि पहँचि सकलहुँ, आलेख नहि पठा सकलहुँ। आलेख बहुत अछि। सभ पढ़ब। नारायण जी आ० भ्रमरजी प्रकाशित विशेषांक हम थोड़ेक पढ़ल अछि।ताहि आधार पर कहब जे मैथिली साहित्यमे भ्रमरजीक रचनासँ पहिनहुँ 'घरमुँहा' शब्द आएल अछि,आ से आएल अछि पूर्णेन्दु चौधरीक कथा द्वारा। हुनकर एक टा कथाक शीर्षक थिक 'घरमुहाँ',जे हिंदीक कथा साहित्यक प्रसिद्ध पत्रिका 'सारिका'मे 'लौटे जो पांव ' शीर्षकसँ अनूदित भ' छपल अछि।हमहभ 'म'केँ सानुनासिक वर्ण मानैत छी।तेँ मैथिलीमे 'घरमुहाँ' लिखैत छी।शुभकामना। माधव प्रसाद उपाध्याय साहित्य सेवा र राष्ट्र सेवा एक आर्काका परिपुरक हुन साथै दुबै पक्षको सेवाको साक्षि ईतिहास=हुन्छ,जुन कहिले मर्दैन। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। मिथिला स्टूडेण्ट यूनियन (एम.एस.यू.) विशेषांक २.१.प्रस्तुत विशेषांकक संदर्भमे २.२.एम.एस.यू. क संक्षिप्त परिचय २.३.चंदना दत्त- MSU २.४.हिमकर भारद्वाज- "एम.एस.यू (MSU)-मिथिला स्टूडेंट यूनियन"सँ "मिथिलावादी पार्टी" धरि २.५.अजित कुमार झा- घटाटोप अन्हरिया मे उम्मीदक किरण: मिथिला स्टूडेंट्स युनियन २.६.सच्चिदानंद सच्चू- मैथिल संगठन आ ओकर सामाजिक सरोकार २.७.लक्ष्मण झा सागर- मिथिला स्टूडेंट यूनियन २.८.प्रणव झा- मिथिला स्टूडेंट यूनियन २.९.आचार्य रामानंद मंडल- मिथिला स्टूडेंट्स यूनियन बनाम मिथिला राज्य! २.१०.डॉ कैलाश कुमार मिश्र-मिथिला स्टूडेंट यूनियन: दशा, दिशा आ नेतृत्व २.११.लालदेव कामत- एम एस यू केर हश्र २.१२.आशीष अनचिन्हार- MSU केर काज एवं हमर अपेक्षा २.१३.प्रवीण कुमार झा- जनहित परिप्रेक्ष्य मे २.१.प्रस्तुत विशेषांकक संदर्भमे 1 पोथीक रूपमे तँ संस्थाक उपर काज भेल छै। पत्रिका सभमे सेहो छिटपुट रिपोर्ट वा संस्था सभहक सूची बला आलेख सभ छपैत रहलैए। मुदा एखन धरि कोनो पत्रिका कोनो संस्थापर विशेषांक नहि प्रकाशित केने छल। जीबित लेखके जकाँ एक बेर फेर विदेह एहन काज करए बलामे पहिल भऽ गेल। दिसम्बर 2022 मे विदेह "एम.एस.यू (MSU)-मिथिला स्टूडेंट यूनियन विशेषांक" प्रकाशित करबाक सार्वजनिक घोषणा केलक आ प्रस्तुत अछि ई विशेषांक। एहि सूचनाकेँ एहि लिंकपर देखि सकैत छी-घोषणा। MSU पर प्रस्तुत विशेषांकमे एहि संस्थाक प्रसंशा-आलोचना सभ भेटत। लोक जकरासँ अपेक्षा करैत छै तकरे बारेमे किछु कहैत छै वा लिखैत छै। तँइ MSU केर बारेमे जे लिखल गेल छै तकरा जँ ई संस्था वा आनो संस्था सभ अपना लेत तँ ओहि संस्थाक संगे-संग मिथिलाक कल्याण भऽ जेतै। आ तँइ विदेहक हरेक विशेषांक जजाँ ईहो विशेषांक अभिनंदनग्रंथ हेबासँ बाँचि गेल अछि। मुख्यधारा जकाँ विदेहकेँ अभिनंदनग्रंथ नहि चाही। अभिनंदनग्रंथ अहू दुआरे नै चाही जे ओहिसँ लेखक वा जिनकापर निकालल गेल छनि तिनकामे सुधारक गुंजाइश खत्म भऽ जाइत छै। तँइ विदेहक विशेषांकमे आलोचना-प्रसंशा सभ भेटत। जेना कि एहि विशेषांकसँ पहिने संस्थापर कोनो आयोजन नै भेल छै तँइ हमरा लग एकर कोनो निजगुत स्वरूप नै अछि। आ तँइ लेखक केर उपर जाहि स्वरूपमे विशेषांक अबैए ठीक तहिना ईहो भेटत। ई अलग बात जे हम सभ कतेक सफल वा असफल भेलहुँ से पाठक कहता। एहि विशेषांक केर शुरूआत विदेहक आने विशेषांक जकाँ अछि। संगे-संग ई क्रम ने तँ उम्रक वरिष्ठता केर पालन करैए आ ने रचनाक गुणवत्ताक। हँ, एतेक धेआन जरूर राखल गेल छै जे पाठकक रसभंग नहि होइन आ से विश्वास अछि जे रसभंग नै हेतनि। पहिने विदेहक सभ अंक नागरी, तिरहुता आ ब्रेल लिपिमे प्रकाशित होइत छल आब एहिमे कैथी, नेवाड़ी, एवं आइ.पी.ए. लिपि सेहो जोड़ल गेल अछि, मने एखन विदेह कुल छह लिपिमे प्रकाशित होइए। एकर अतिरिक्त विदेहक किछु अंक रंजना (नेवारी केर एक आर रूप), ब्राह्मी, खरोष्ठी, उर्दू, तिब्बती एवं तिब्बती-उमे लिपिमे सेहो छपल अछि। कुल मिला कऽ देखी तँ विदेह बारह लिपि अपना लेल रखने अछि जाहिमेसँ कुल छह टा लिपिमे विदेह लगातार प्रकाशित भऽ रहल अछि। 2 विदेह द्वारा लेखकपर विशेषांक 'जीबैत मुदा उपेक्षित' शृखंला रूपमे शुरू कएल गेल छल 2015 सँ जकरा आब "विदेहक जीवित मैथिलकर्मी, संगीतकर्मी, साहित्यकार-सम्पादक आ रंगमंचकर्मी-रंगमंच-निर्देशकपर विशेषांक शृंखला" नामसँ जानल जाइत अछि। मैथिलकर्मीसँ हमर सभहक आशय जिनकर काज मिथिला-मैथिली-मैथिली लेल कोनो माध्यमसँ भेल हो। ओ संगठनकर्ता सेहो भऽ सकै छथि, आन भाषाक लेखक सेहो। तहिना संगीतकर्मी मने गीत-संगीतसँ जुड़ल लोक। संगे-संग संस्था सेहो भऽ सकैए। एहन शृखंलामे, एहि विशेषांकसँ पहिने विदेह 10 टा विशेषांक प्रकाशित कऽ चुकल अछि आ एहिठाम आब हम कहि सकैत छी जे ई एकटा चुनौतीपूर्ण काज छै। अनेक संकट केर सामना करए पड़ैत अछि लेख एकट्ठा करएमे। मुदा संगहि ईहो हम कहब जे संकटसँ बेसी हमरा लग समर्थन अछि। हँ, ई मानएमे हमरा कोनो दिक्कत नहि जे जतेक लेख केर उम्मेद केने रहैत छी हम ततेक नै आबैए, जतेक लोक लिखबाक लेल गछैत छथि से सभ अंत- अंत धरि आबि चुप्प भऽ जाइत छथि। आ एकर कारणो छै, किनको ई लागै छनि जे आनपर लिखब से हम अपने रचना किए ने लीखि लेब, किनको लग पोथिए नै रहै छनि, जखन कि हम सभ पाठककेँ विकल्प रूपमे पोथीक पी.डी.एफ फाइल सेहो देबाक लेल तैयार रहैत छी। कियो विदेहक समावेशी रूपसँ दुखी छथि, तँ किनको मित्रकेँ विदेहसँ दिक्कत छनि तँइ ओ नहि देता। बहुत लोक तँ विदेहमे एहू लेल रचना नै पठबैत छथि जे कहीं हमरा अकादमी वा धनी संस्था सभ ने देखि लिए। अकादमी आ संस्था सभ विदेहकेँ अनेरे अपन शत्रु मानि बैसल अछि आ पुरस्कारक इच्छा रखनिहार तँइ विदेहमे रचना नै पठबै छथि। एकरो हम संकटे बुझै छियै जे सभ फेसबुकपर लंबा-लंबा लेख वा कमेंट टाइप कऽ लै छथि सेहो सभ विदेह लेल हाथसँ लिखल पठाबैत छथि। जे सभ कहियो काल फेसबुकपर टाइप कऽ लीखै छथि तिनकर आलेख हम सभ टाइप करिते छी। जिनकर रचना टाइप करैत छी ताहिमे स्वतः रूपसँ टाइप केनिहारक वर्तनी आबि जाइत छै। ई संकट लेखक वा कि संस्था दूनू लेल बराबर अछि। खएर पहिने कहलहुँ जे संकटसँ बेसी समर्थन अछि तँइ आइ पहिलसँ लऽ कऽ दसम विशेषांक धरि पहुँचलहुँ हम। निश्चिते समर्थन बेसी भेटल हमरा। जखन कि विदेहक ई 10 विशेषांक केर अलावे आनो विषयपर विशेषांक प्रकाशित भेल अछि। 3 पाठक जखन एहि विशेषांककेँ पढ़ताह तँ हुनका वर्तनी ओ मानकताक अभाव लगतनि। वर्तनीक गलती जे थिक से सोझे-सोझ हमर सभहक गलती थिक जे हम सभ संशोधन नै कऽ सकलहुँ मुदा ई धेआन रखबाक बात जे विदेह शुरुएसँ हरेक वर्तनी बला लेखककेँ स्वीकार करैत एलैए। तँइ मानकता अभाव स्वाभाविक। एकर बादो बहुत वर्तनीक गलती रहल गेल अछि जे कि हमरे सभहक गलती अछि। मैथिलीमे किछुए एहन पत्रिका अछि जकर वर्तनी एकरंगक रहैत अछि आ ई हुनक खूबी छनि मुदा जखन ओहो सभ कोनो विशेषांक निकालै छथि तखन वर्तनी तँ ठीक रहैत छनि मुदा सामग्री अधिकांशतः बसिये रहैत छनि। ऐतिहासिकताक दृष्टिसँ कोनो पुरान सामग्रीक उपयोग वर्जित नै छै मुदा सोचियौ जे 72-80 पन्नाक कोनो प्रिंट पत्रिका होइत छै ताहिमे लगभग आधा सामग्री साभार रहैत छनि, तेसर भागमे लेखक केर किछु रचना रहैत छनि आ चारिम भागमे किछु नव सामग्री रहैत छनि। मुदा हमरा लोकनि नव सामग्रीपर बेसी जोर दैत छियै। एकर मतलब ई नहि जे वर्तनीमे गलती होइत रहै। हमर कहबाक मतलब ई जे संपादक-संयोजककेँ कोनो ने कोनो स्तरपर समझौता करहे पड़ैत छै से चाहे वर्तनीक हो कि, मुद्राक हो कि विचारधारक हो कि सामग्रीक हो। हमरा लोकनि वर्तनीक स्तरपर समझौता कऽ रहल छी मुदा कारण सहित। प्रिंट पत्रिका एक बेर प्रकाशित भऽ गेलाक बाद दोबारा नै भऽ सकैए (भऽ तँ सकैए मुदा फेर पाइ लागि जेतै) तँइ ओकर वर्तनी यथाशक्ति सही रहैत छै। इंटरनेटपर सुविधा छै जे बीचमे (इंटरनेटसँ प्रिंट हेबाक अवधि) ओकरा सही कऽ सकैत छी मुदा सामग्रिए बसिया रहत तँ सही वर्तनी रहितो नव अध्याय नै खुजि सकत तँइ हमरा लोकनि वर्तनी बला मुद्दापर समझौता केलहुँ। हमरा लोकनि कएलनि, कयलनि ओ केलनि तीनू शुद्ध मानैत छी, एतेक शुद्ध मानैत छी एकै रचनामे तीनू रूप भेटि जाएत। आन शब्दक लेल एहने बूझू। उम्मेद अछि जे पाठक विदेहक आने विशेषांक जकाँ एकरा पढ़ताह आ पढ़ि एकर नीक-बेजाएपर अपन सुझाव देताह। विदेहक द्वारा जीवैत लेखक ओ संस्थाक विशेषांक शृखंलामे प्रकाशित भेल आन विशेषांक सभहक लिस्ट एना अछि (एहिठाम जे अंकक लिस्ट देल गेल अछि ताहि अंकपर क्लिक करबै तँ ओ अंक खुजि जाएत)- १) अरविन्द ठाकुर विशेषांक ०१ नवम्बर २०१५ अंक १८९ २) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक ०१ दिसम्बर २०१५ अंक १९१ ३) रामलोचन ठाकुर विशेषांक ०१ अप्रैल २०२१ अंक ३१९ ४) राजनन्दन लाल दास विशेषांक ०१ नवम्बर २०२१ अंक ३३३ ५) रवीन्द्र नाथ ठाकुर विशेषांक १५ जून २०२२ अंक ३४८ ६) केदारनाथ चौधरी विशेषांक १५ अगस्त २०२२ अंक ३५२ ७) प्रेमलता मिश्र 'प्रेम' विशेषांक ०१ नवम्बर २०२२ अंक ३५७ ८) शरदिन्दु चौधरी विशेषांक १५ नवम्बर २०२२ अंक ३५८ ९) अशोक विशेषांक १ मइ २०२३ अंक ३६९ १०) रामभरोस कापड़ि 'भ्रमर' विशेषांक १५ मइ २०२३ अंक ३७० विदेहक अरविन्द ठाकुर विशेषांक केर पोथी रूप "स्वतंत्रचेता- अरविन्द ठाकुर: व्यक्तित्व-कृतित्व" केर नामसँ प्रकाशित भेल उम्मेद जे भविष्यमे "एम.एस.यू (MSU)-मिथिला स्टूडेंट यूनियनपर केंद्रित एहि विशेषांक केर पोथी रूप सेहो आएत। ई तँ भेल जे काज हम सभ कऽ सकलहुँ तकर विवरण मुदा किछु एहनो घोषणा छै जे कि हम सभ नै कऽ सकलहुँ जेना २०१६ मे हम सभ परमेश्वर कापड़ि, कमला चौधरी आ वीरेन्द्र मल्लिक विशेषांक केर घोषणा कइयो कऽ नहि प्रकाशित कऽ सकलहुँ। पाठक एहि घोषणाकेँ एहि लिंकपर देखि सकै छथि- सूचना बादमे विदेहक "वीरेन्द्र मल्लिक विशेषांक" (जे कि प्रकाशित नै भऽ सकल) लेल वीरेन्द्र मल्लिक जीक साक्षात्कार जे नबोनारायण मिश्रजी से विदेहक ३३७म अंकमे प्रकाशित भेल पाठक एकरा एहि लिंकपर पढ़ि सकै छथि- १ जनवरी २०२२ अंक ३३७ 4 विदेहक एहि जीवित विशेषांक शृंखलामे किनकर चयन हो ताहि लेल मोटा-मोटी निच्चाक किछु बिंदुक पालन कएल जाइत अछि- १) लगभग पाँच-छह मास पहिनेसँ विदेह अपन पाठककेँ सुझाव देबा लेल लेल सूचना दैत अछि। २) आएल सुझावमेसँ विदेह मात्र जीबित लेखककेँ चयन करैत अछि। संस्था सेहो वर्तामनमे जीवंत हेबाक चाही। ३) सभ जीवित लेखकक बीचमे हुनकर लेखन एवं आचरणक साम्यता देखल जाइत अछि। जाहि लेखकक लेखन ओ आचरणमे बेसी साम्यता (कम फाँक) भेटैए तेहन छह टा नाम चयनित होइत अछि। ४) छह नाम एलापर ई तुलना कएल जाइत छै जे ई छहो लेखक अथवा संस्थाकेँ रचना लिखबाक वा समाजिक काज केलाक एवजमे समाजसँ की भेटलनि। ५) जिनका सभसँ कम भेटल बुझाइत अछि ताहि तीन लेखक-संस्थाकेँ अगिला चरण लेल राखि लैत छी। ६) एहि तीन चयनित जीबित लेखकक वा संस्थाक रचना, काज, हुनक उद्येश्य आदिक बीचमे परस्पर तुलना कएल जाइत अछि। ७) अंतिम रूपसँ विदेह द्वारा एकटा नाम चुनि सालक अंतमे घोषणा कएल जाइत अछि आ नियत समयपर ई विशेषांक निकालबाक प्रयास करैत छी। प्रश्न उठि सकैए जे कि उपरक नियम एहन छै जाहिमे अंतिम रूपसँ सभ सुयोग्य जीवित लेखक केर चयन समयपर भ़ऽ जेतनि? तऽ एकर उत्तर छै नै। विदेहक पाठक लग सेहो अपन सीमा छनि। मुदा अही सीमाक संगे हमरा सभकेँ अपन बेस्ट देबाक छै आ मैथिली लेल एकटा एहन रस्ता बना देबाक छै जाहिसँ आबए बला 500-600 बर्खक साहित्य विदेहक लीकसँ प्रेरणा पाबए। अही विचारक संग विदेह ओहन जीवित लेखकपर अपन धेआन सेहो केंद्रित कऽ रहल अछि जे कि सुयोग्य छथि मुदा जिनकापर विदेहक विशेषांक कोनो कारणवश नहि प्रकाशित भऽ सकल। एकर नाम भेल विदेहक "नित नवल सिरीज"। एहि नव विचारक मुख्य बिंदु एना अछि- 1) विदेहक संपादक गजेन्द्र ठाकुर एकटा कोनो जीवित लेखक वा कलाकारपर एकाग्र आलोचना करता मने ओहि लेखक केर उपल्बध सभ साहित्यपर। एहि पोथीक भाषा मैथिली अथवा अंग्रेजी कोनो एक भाषामे रहत। एहि पोथीक पहिल रूप ई-बुक केर रूपमे आएत आ प्रयास रहत जे एकर प्रिंट सेहो आबए जे कि परिस्थितिपर निर्भर करतै। 2) लेखक वा कलाकार केर चुनाव संपादक अपन रुचि वा विदेह टीमक रुचि केर हिसाबें करता। 3) एहिमे ओहने लेखक वा कलाकार केर चयन संभव हएत जिनकर उपल्बध हरेक पोथीक PDF रूपमे विदेहक माध्यमसँ सार्वजनिक भेल छनि। कलाकार लेल यूट्यूब एवं आन साइट सेहो मान्य हेतै। 4) एहि परियोजनाक लेल चयनित लेखक वा कलाकारपर काज संपादक केर समय केर अनुसारे हेतै। तँइ एकर समय सीमा कहब संभव नहि। नित नवल सिरीजमे:- (i) सुभाष चंद्र यादवपर केंद्रित "नित नवल सुभाष चंद्र यादव", (ii) राजदेव मंडलपर केंद्रित "Rajdeo Mandal- Maithili Writer" आ (iii) जगदीश प्रसाद मण्डल केन्द्रित "Jagdish Prasad Mandal- Maithili Writer" प्रकाशित भेल अछि। पहिल दुनू पोथीक लोकार्पण ३१ दिसम्बर २०२२ केँ १११म सगर राति दीप जरय मे कएल गेल। तेसर पोथीक लोकार्पण २५ मार्च २०२३ केँ ११२ म सगर राति दीप जरय मे कएल गेल। ऐ शृंखलामे:- (iv) "नित नवल दिनेश कुमार मिश्र" आ (v) "नित नवल सुशील" जारी अछि आ दूनूक पोथी रूप जल्दिये आएत। ऐ शृंखलाक आगाँक घोषणा लेल http://videha.co.in/investigation.htm देखैत रही। 5) ऊपरक विशेषांक आ नित नवल सिरीजक केर अतिरिक्त विदेहक आन विशेषांक केर सूची एना अछि (अंकक लिस्ट जे देल गेल अछि ताहि अंकपर क्लिक करबै तँ ओ अंक खुजि जाएत)- १) हाइकू विशेषांक १२ म अंक, १५ जून २००८ २) गजल विशेषांक २१ म अंक, १ नवम्बर २००८ ३) विहनि कथा विशेषांक ६७ म अंक, १ अक्टूबर २०१० ४) बाल साहित्य विशेषांक ७० म अंक, १५ नवम्बर २०१० ५) नाटक विशेषांक ७२ म अंक १५ दिसम्बर२०१० ६) समीक्षा विशेषांक ७) नारी विशेषांक ७७म अंक ०१ मार्च २०११ ८) अनुवाद विशेषांक (गद्य-पद्य भारती) ९७म अंक ९) बाल गजल विशेषांक विदेहक अंक १११ म अंक, १ अगस्त २०१२ १०) भक्ति गजल विशेषांक १२६ म अंक, १५ मार्च २०१३ ११) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक १४२ म, अंक १५ नवम्बर २०१३ १२) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ १३) विदेह सम्मान विशेषाक- २००म अक१ १५ अप्रैल २०१६/ २०५ म अक, १ जुलाई २०१६ १४) मैथिली सी.डी./ अल्बम गीत संगीत विशेषांक- २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ १५) मैथिली वेब पत्रकारिता विशेषांक-३१३म अंक १ जनवरी २०२१ १६) मैथिली बीहनि कथा विशेषांक-२, ३१७ म अंक १ मार्च २०२१ १७) कला-विमर्श विशेषांक (सन्दर्भ- संजू दास, कृष्ण कुमार कश्यप, शशिबाला, एस.सी.सुमन आ श्वेता झा चौधरी) अहू खंडमे किछु एहनो घोषणा छै जे कि हम सभ नै कऽ सकलहुँ जेना विदेहक "साहित्यिक भ्रष्टाचार विशेषांक" हमरा लोकनि एखन धरि नै प्रकाशित कऽ सकलहुँ अछि। एकर घोषणा हम २०१९ मे केने रही। एहि घोषणाक फेसबुक लिंक देखू। परिशिष्ट-1 परिशिष्ट-2 परिशिष्ट-3 विदेह अपन कोनो अंकमे "साहित्यिक भ्रष्टाचार विशेषांक" निकालत (लिंक कमेंटमे) ताहि लेल अपने सभसँ निम्नलिखित विषयपर आलेख आदि चाही। 1.साहित्य, कला एवं सरकारी अकादमीः- (क) पुरस्कारक राजनीति (ख) सरकारी अकादेमीमे पैसबाक गैर-लोकतांत्रिक विधान (ग) सत्तागुट आ अकादमी केर काजक तौर-तरीका घ) सरकारी सत्ताक छद्म विरोधमे उपजल तात्कालिक समानांतर सत्ताक कार्यपद्धति (1985सँ एखन धरि) ङ) अकादेमी पुरस्कारमे पाइ फैक्टरः मिथक वा यथार्थ 2.व्यक्तिगत साहित्य संस्थान आ पुरस्कारक राजनीति 3.प्रकाशन जगतमे पसरल भ्रष्टाचार आ लेखक 4. मैथिलीक छद्म लेखक संगठन आ ओकर पदाधिकारी सभहँक आचरण 5.मैथिली विभागमे पसरल साहित्यिक भ्रष्टाचारक विविध रूपः- (क) पाठ्यक्रम (ख) अध्ययन-अध्यापन (ग) नियुक्ति 6. साहित्यिक पत्रकारिता, रिव्यू, मंच, माला, माइक आ लोकार्पणक खेल-तमाशा 7.लेखक सभहँक जन्म-मरण शताब्दी केर चुनाव , कैलेंडरवाद आ तकरा पाछूक राजनीति 8.दलित एवं लेखिका सभहँक संगे भेद-भाव आ ओकर शोषणक विविध तरीका उपरक विषयक अतिरिक्त जँ कियो साहित्यिक भ्रष्टाचारक कोनो नव विषयपर लिखए चाहथि तँ ओकरो स्वागत रहत। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.२.एम.एस.यू. क संक्षिप्त परिचय एम.एस. यू. क संक्षिप्त परिचय एहि विशेषांकसँ पहिने विदेह मिथिला स्टूडेंट यूनियन केर रिपोर्ट २०१७ मे छपने छल जे कि बाढ़िमे ओकरा द्वारा कएल गेल काजपर छल। पाठक एकरा एहि लिंकपर पढ़ि सकै छथि- विदेह १५ अगस्त २०१७ अंक २३२ एहिठाम प्रस्तुत अछि "मिथिला स्टूडेंट यूनियन" केर संक्षिप्त परिचय। एहि परिचयक अधिकांश तथ्य सार्वजनिक अछि जकरा एहिठाम अपना अनुरूप प्रस्तुत केलहुँ अछि। एहि संस्थाकेँ "एम.एस.यू वा MSU केर नामसँ सेहो जानल जाइए। नामपर क्लिक केने क्रमशः एकर विकीपीडिया आ वेबसाइट खूजत। मिथिलावादी पार्टी नामक संस्थाकेँ MSU नैतिक समर्थन दैए। चित्र- 1 चित्र- 2 स्थापना- मार्च- 2015 संस्थापक सदस्य- अनूप मैथिल, रौशन मैथिल, नितीश कर्ण, राजा राय, कमलेश मिश्रा वृति- लाभरहित आ गैर राजनीतिक छात्र संगठन उद्देश्य- मिथिला-मैथिलीक सर्वांगीण विकास उपस्थिति- बिहार एवं देशक प्रमुख राज्य (मुख्यालय-दिल्ली) प्रतीक रंग एवं वस्त्र- पीयर रंग, पियरका टी शर्ट-गमछा, पीयर सलवार सूट-नूआ MSU सँ संबंधित आन चित्र जे कि विभिन्न अवसरक अछि आ विभिन्न माध्यमसँ लेल गेल अछि- चित्र- 3 चित्र- 4 चित्र- 5 चित्र- 6 चित्र- 7 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.३.चंदना दत्त- MSU चंदना दत्त MSU "मिथिला स्टूडेंट यूनियन" मिथिलाक जागरुक विद्यार्थी सभहक संगठन अछि जे सदिखन निःस्वार्थ भावनासँ मिथिलाक समस्या संग ठाढ़ रहैत अछि। MSU केर स्थापना २०१५ मे भेल। तखनसँ अनवरत ई संगठन अनेक समस्याक समाधान लेल संगठित रूपसँ अपन अवाज बुलंदीसँ उठा रहल अछि। मधुबनी, दरभंगा, पट्ना दिल्लीमे मिथिला राज्य लेल अपन अवाज दिल्ली धरि पहुँचा रहल अछि। बाढ़ पीड़ित सहायता, रक्तदान शिविर, दरभंगामे एयरपोर्टक सुचारु संचलान हेतु, मिथिला डेवलेपमेंटक बात, चिन्नी मिलक फेरसँ संचालन, नैंसी-प्रद्युम्न हत्याकांड लेल भेल आन्दोलनमे MSU सक्रिय रूपसँ काज केलक। MSU सदिखन क्षेत्र एवं छात्रह हितमे ठाढ़ रहैत अछि। मिथिलावादी पार्टी एकर दोसर रूपमे ठाढ़ भेल अछि जकर सहयोगसँ पंचायत चुनावमे कतेक मुखिया-सरपंच बनल छथि। दलित-पिछड़ा संवर्धन यात्रा MSU निकालि रहल अछि। MSU केर एकैटा उद्येश्य अछि जे अपन क्षेत्र आ छात्रक हितमे काज करैत रही। जाहिमे मिथिलाक चहुँमुखी विकास, सांस्कृतिक धरोहर आ पर्यटन स्थल केर विकास, अन्यायक विरुद्ध पीड़ित सहायता, अपन क्षेत्रमे रोजगार-स्वरोजगार आदि प्रमुख अछि। MSU एकटा गैर राजनीतिक छात्र संगठन अछि आ अपन उद्येश्यमे लगातार सफल भऽ रहल अछि। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.४.हिमकर भारद्वाज- "एम.एस.यू (MSU)-मिथिला स्टूडेंट यूनियन"सँ "मिथिलावादी पार्टी" धरि हिमकर भारद्वाज "एम.एस.यू (MSU)-मिथिला स्टूडेंट यूनियन"सँ "मिथिलावादी पार्टी" धरि बहुत दुखदायी आ खीज भरल काज होइत छै जखन अहाँक कल्पनाक फ्रेम बहुत पैघ हो आ अहाँकेँ स्टाम्प साइज फोटो दऽ कहल जाए जे फोटो तेना कऽ लगाउ जे छवि दूरेसँ देखार भऽ जाए। हमरा नजरिमे मिथिला-मैथिली आन्दोलनक यथार्थ आ कल्पनामे किछु एहने सन अंतर छैक। जून मासक पहिल सप्ताहमे मिथिलावादी पार्टीक राष्ट्रीय महासचिव उग्रनाथ भैयाक फोन आएल जे संगठन सर्वसम्मतिसँ निर्णय लेलक अछि जे अहाँ पार्टीक प्रदेश अध्यक्षक जिम्मेदारी ली। हम साफ-साफ मना करैत रहलियनि। कोरोना आ ओकर प्रभावक कारण कारोबार एकदम ठप्प भऽ गेल रहए। आर्थिक तंगीक बीच एहन निर्णय लेब बहुत कठिन आ सच पूछी तँ आत्मघाती सेहो होइत। भविष्यमे अपना माटि लेल किछु करबाक अवसरकेँ देखैत राति भरि तनावमे रहलहुँ। भोरे पहिलुक चाहक संग पत्नी (कविता) कहलनि- बाबू (मोहन भारद्वाज) लग की रहनि? सभ दिन दिक्कतेमे रहलाह सोचू ओहो जँ इएह सोचतथि तँ हमरा अहाँकेँ के चिन्हैत। संभावित डर एवं आशंकाकेँ बीच ओ अखबार दिस नजरि देने रहलीह आ चाह पिबैत रहलीह। हमरा लागल जेना जकड़न खुजि गेल हो। चाह पीलाक बाद पहिल काज कएल जे उग्रनाथ भैयाकेँ स्वीकृतिक मैसेज कऽ देल। कोनो योजनापर काज करबासँ पहिने रिसोर्स मैपिंग जरूरी होइत छै। से हम पहुँचि गेलहुँ मधुबनी कार्यालय। जखन हम पहुँचलहुँ ओतए तँ एम.एस.यू (MSU)-मिथिला स्टूडेंट यूनियन केर कोनो नीतिगत मामिलापर बैठक जारी रहए। एगारह बजेसँ शुरू भेल मीटिंग चारि बजे साँझमे समाप्त भेल। वैचारिक मतभिन्नताक बावजूद समाजिक जिम्मेदारी कतेक महत्वपूर्ण छैक से आइ देखबामे आएल। जखन एकटा गैर राजनीतिक छात्र संगठनकेँ विधानसभा चुनावमे कोन रूपें अपन भूमिका तय करबाक चाही ताहिपर विमर्श भऽ रहल छल। हमरा सभहक समझ चुनाव पूर्व सांगठनिक स्तरपर विमर्श लेल दू टा मुख्य विषय रहए- पहिल जे मिथिलावादी पार्टीक मूल संगठन एम.एस.यू (MSU)-मिथिला स्टूडेंट यूनियन जे कि घोषित रूपसँ एकटा गैर राजनीतिक संगठन छै ओकर विधान सभा चुनावमे कोन स्तरपर आ कतेक भूमिका होइक, दोसर- जे एम.एस.यू (MSU)-मिथिला स्टूडेंट यूनियन केर साथी विधानसभा चुनावमे अपन उम्मेदवारी प्रस्तुत करथि वा कि नहि। अइ विषयपर कोनो संशय नहि जे मिथिलावादी पार्टीक मूल आधार एम.एस.यू (MSU)-मिथिला स्टूडेंट यूनियन एकटा मजगूत छात्र संगठन छै, जकरा दमपर आ जकरा काजक आधारपर मिथिलावदी पार्टीक परिकल्पना कएल गेल। मिथिलावादी पार्टीकेँ एकटा राजनीतिक पार्टीक रूपमे मान्यता तँ भेटल परंतु चुनाव काल धरि एकर कोनो सांगठनिक आकार-आधार नहि लेने रहए। मिथिलावादी पार्टीक राष्ट्रीय अध्यक्ष हुकुमदेव यादव, महासचिव स्क्रीनिंग कमिटीक एग्यारह सदस्य, एम.एस.यू (MSU)-मिथिला स्टूडेंट यूनियनक राष्ट्रीय अध्यक्ष, महासचिव, संगठन मंत्री,, जिला अध्यक्षक संग कएक दिन कएक रांउड बैसारक बाद तय भेल जे पंचायत, प्रखंड, जिला आ विधानसभा स्तरपर चुनाव प्रभारीक संग बूथ प्रभारी तक पूरा चुनाव प्रचार आ राजनीति एम.एस.यू (MSU)-मिथिला स्टूडेंट यूनियन केर साथी मिथिलावादी पार्टी आ उम्मेदवारक कोर टीमक संग समन्वय बैसा कऽ निमाहता।समन्वय स्थापित करबाक पहिल जिम्मेदारी प्रखंड अध्यक्ष आ विधानसभा प्रभारीकेँ देल गेल। संगहि बहुत विमर्शक बाद ईहो निर्णय लेल गेल जे ई पद सभ विधानसभा चुनावक मतगणनाक दिन स्वतः समाप्त भऽ जाएत। हमरा सभहक दोसर जे विचारणीय विषय रहए ओहिपर निर्णय करबामे बहुत समय नहि लागल। एम.एस.यू (MSU)-मिथिला स्टूडेंट यूनियन एकटा छात्र संगठन छैक, एकटा संगठनक कार्यशैली आ एकटा राजनीतिक दलक कार्यप्रणालीमे बहुत अंतर होइत छै संगहि संग छात्र संघ चुनाव आ विधानसभा चुनावमे सेहो बहुत फर्क छै। तँइ अनुभवकेँ देखैत आ संगठनक साथी सभहक आर्थिक स्थितिकेँ देखैत सहज निर्णय भऽ गेल जे हमरा सभ चुनाव लड़बाक स्थितिमे नहि छी आ ने अनुभव अछि तँइ विधानसभा चुनावसँ अनुभव लऽ प्राथमिक स्तरक यानी पंचायत स्तरक चुनावमे हम सभ अपन दावेदारी प्रस्तुत करब ताकी संगठनकेँ जमीनी आ राजनीतिक दावेदारी सेहो मजगूतीक संग ठ़ाढ़ भऽ सकए। जखन एहि दुनू विषयपर निर्णय भऽ गेल तखन नव समस्या ठाढ़ भेल जे विधानसभा चुनावमे मिथिलावदी पार्टी दिससँ के? हम सभ सैद्धांतिक रूपें अहि बातपर सहमत रही जे हम सभ ओ उम्मेदवारक समर्थन करब जे कोनो मिथिला-मैथिलीसँ जुड़ल पार्टी दिससँ ठाढ़ होथि आ हुनकर प्राथमिकतामे पहिलुक नम्बरपर मिथिला-मैथिली होइन। दोसर हमरा सभहक सैद्धांतिक समर्थनक आधारपर ओ उम्मेदवार रहथि जे पहिनेसँ हमरा सभहक संगठनकेँ नैतिक समर्थन करैत रहलाह। अति विमर्शक दौरान फेर 'किंतु' लागल जे कि हम सभ ओहन कोनो दलक उम्मेदवारकेँ समर्थन करब जे पहिने हमरा सभकेँ सभ तरहे मदति करैत रहलाह अछि? एकर उत्तर आएल- जँ ओ निर्दलीय छथि तखने अन्यथा नहि। समर्थन माने की? सामान्य नियम छैक जे विचारधारापर सहमति आ चुनाव प्रबंधनमे एक-दोसराकेँ सहयोग। विशाल छात्र संगठन हेबाक कारणे मिथिला-मैथिली संगठन तँ छोड़ू बहुत रास राज्य स्तरीय संगठन सेहो हमरा सभहक सहयोग चाहि रहल रहए। बहुत एहनो उम्मेदवार भेटलाह जे कोनो पैघ दलसँ संबंद्ध छथि, ओ कतबो मूल्य दऽ टिकट चाहि रहल छलाह मुदा टिकट नहि भेटलनि तँ हुनक इच्छा जे हम सभ हुनका निर्दलीय रूपमे समर्थन कऽ दियौन। इएह मंशा रहैत छलनि। हुनका अनुसारे समर्थन माने- ओ हमर दलक सदस्यता नहि लेताह, बैनरपर नाम नहि देताह। हमरा दलकेँ कोनो तरहक आर्थिक सहयोग नहि करताह ताहिपरसँ हम सभ, छात्र साथी हुनका लेल मुफ्तमे काज कऽ दियौन। दू मास मोटरसाइकिलमे तेल दिया भोरसँ साँझ धरि भूखे खटब। एकटा छात्र लेल काज करब कोना संभव छैक से हुनका सोचमे नहि रहनि। जखन कि ओ ओहि दलसँ पचासो लाख दऽ टिकट किनबा लेल तैयार छलाह, जाहि दल लेल ओ पछिला पाँच बर्खसँ ओ भीड़ जुटबैत रहालह, झंडा ढोइत रहलाह। एहि मानसिकतापर जखन हम सोचब शुरू केलहुँ तँ लागल जेना हम मिथिला-मैथिली आंदोलनीकेँ ओ हँसेरी बुझैत छथि। आ बातो सही छै किएक तऽ मिथिलाक नामपर हमर पूर्वज सेन्टिमेंट जगा बेरपर कखनो भाजपा तँ केखनो कांग्रस वा कखनो आने दल संग सौदा कऽ मिथिलाक आन्दोलनकेँ दमित कऽ दैत छथिन। कोनो राजनैतिक संगठनक विस्तार एवं आयु एहि बातपर निर्भर करैत छैक जे ओ वैचारिक रूपसँ कतेक मजगूत संगठन अछि। हमरा सभकेँ एहि विषयपर विचार करऽ पड़त जे भाजपा, आर.जे.डी, कांग्रेस, जे.डी.यू सभ राजनीतिक दलकेँ पिछलग्गू भऽ मिथिला विकासक परिकल्पना करी वा मिथिलामे मिथिला लेल मिथिलावादी विचारधाराकेँ आगू बढ़ाबी। कोनो चुनाव लड़बा लेल जाहि रूपमे धनक उपयोग भऽ रहल छै या कही तऽ महत्व बढ़ि रहल छै से दिनानुदिन लोकतांत्रिक व्यवस्था लेल बेसी खतरनाक भेल जा रहल छै। छोट दल धनक अइ बड़का खेलकेँ खेलबामे सक्षम नहि छैक। एहना स्थितिमे हमरा सभ लेल रस्ता आर दुरूह लागल। कएक टा एहन क्षेत्रीय दल हमरा सभहक सांगठनिक तागतकेँ देखैत समझौता करबा लेल पहल केलक जकरा पाइ तँ खूबे रहै आ सीटक हिसाबसँ संगठनकेँ मनमाफिक पाइ सेहो देबा लेल तैयार रहए मुदा ओ अपना सुविधानुसार हमरा सभकेँ विधानसभा क्षेत्रक चयन कऽ उम्मेदवार ठाढ़ करबा लेल दबाब देबाक मानसिकतामे सेहो रहए, जाहिपर हम सभ तैयार नहि। अंततः बात दू-तीन रांउडसँ आगू नहि बढ़ि सकल। खएर धन बला विषय अनुउत्तरिते रहि गेल। हमर किछु साथिक मानब रहनि जे पार्टी नव अछि, चुनाव चिह्न नहि अछि तऽ एहना स्थितिमे हमरा सभकेँ पाइ बला उम्मेदवारक समर्थनमे आगू एबाक चाही आ पाइक डिमांड करबाक चाही ताकी अहिबेर नहि तँ अगिला बेर लेल मजगूत आधार तैयार भऽ सकए। अधिकतर साथी अइ विचारसँ असहमत रहथि। दोसर पक्षकेँ मानब रहनि जे हमरा ओहन निर्दलीय उम्मेदवारक समर्थन करबाक चाही जे शुरूसँ हमरा सभहक संग रहल छथि आ निर्दलीय उम्मेदवारी प्रस्तुत कऽ रहल छथि चाहे ओ धनवान होथि वा गरीब। हमरा सभ दोसर पक्षपर सहमति बना लेलहुँ। कतहुँ-कतहुँ अनुभवजन्य गलतियो भेल। मुदा.... अइ कम्रमे कएक गोटे फोनसँ चिन्ता जाहिर केलनि जे अहाँक टीमक सदस्य जँ पाइ बला संग लगातार दू मास काज करता तऽ स्वाभाविक तौरपर हुनकर झुकाव ओहि दिस भऽ जेतनि। चिन्ता स्वाभाविक रहनि मुदा सच इएह रहै जे लोकसभा चुनावमे तऽ हमरा सभहक साथी व्यक्तिगत तौरपर अलग-अलग दलक उम्मेदवारक संग छलखिन तकरा बादो ओ आइ धरि हमरा सभहक संग छथि आ संगे-संग अपना क्षेत्रक उचित मुद्दाक पक्षमे लड़ियो रहल छथि। इएह एहि संगठनक अनुशासन ओ ट्रेनिंग छै। एक विधानसभा क्षेत्रमे औसरन चालीस पंचायत होइत छैक। एक पंचायतमे औसतन तीन गाम। एहि बेर पछिला बेरक मुकाबले ४५ प्रतिशत बेसी बूथ बनाएल गेल रहै। मॅाक टेस्ट टाइम आ रियल भोटिंग टइमकेँ हिसाबसँ देखू तँ पाँच बजे भोरसँ सात बजे साँझ धरि पोलिंग बूथपर रहबाक चाही। यानी हरेक बूथपर दू पोलिंग एजेंट। बाहर पर्ची काटबा लेल कमसँ कम चारि आदमी यानी जँ हम एक विधानसभा मात्र खजौलीक बात करी तऽ ४८३ बूथ यानी ४८३X६=२८९८ कार्यकर्ताक भोटक दिन जरूरति छै। एकरा अतिरिक्त वार्डसँ अपना भोटरकेँ मोटिभेट कऽ पोलिंग बूथ धरि पहुँचेबाक लेल अलगसँ कार्यकर्ता आ साधनक जरूरति होइत छै से अलग। अतेक बर्खसँ मिथिला-मैथिलीक नामपर चुनावी राजनीतिक करऽ बला नेता सभ अइ मूल बातपर किएक नहि धेआन देलखिन, किएक ओतेक पुरान संस्था सभ जेबी संस्था बनि कऽ रहि गेल अछि। कारण तकबा लेल कोनो समुद्र मंथन करबाक जरूरति नै छैक। एक नजरिमे अंदाज भऽ जाएत जे हिनका लोकतांत्रिक व्यवस्थाक मध्यमे मिथिलाक बदलावकेँ कोनो इच्छा नहि छनि। हिनक उद्येश्य मिथिला-मैथिलीक नामपर चंदा उगाहब, अपन नाम चमकाएब बस अतबे छनि। मिथिलावादी पार्टीक मूल छात्र संगठन एम.स.यू लग ई तागति छैक जे ओ अपना साथी कार्यकर्ताक दमपर हर बूथपर अइसँ बेसी संख्यामे कार्यकर्ता ठाढ़़ कऽ सकैत अछि। चुनाव जतबा पैसाक खेल छै ततबा माइंड गेम सेहो। हमरा संगठनक इच्छा रहए जे पार्टी भने दस दिनक पुरान हो, चुनाव चिह्न नहि भेटल हो मुदा जँ हर बूथपर हम सभ पोलिंग एजेंट दऽ सकलहुँ तँ आन पार्टी सभकेँ मनोबलपर प्रभाव जरूर पड़तै, आगू ओकर राजनीति सेहो प्रभावित हेतै। मतलब जाहि मकिथिलासँ जितलाक बादो ओतुक्का जनप्रतिनिधि ओतुक्का सुपर स्ट्रक्चर वा स्ट्रक्चरक विकासपर धेआन नहि दैत छलाह हुनका आब धेआन देबऽ पड़तनि। आ से चुनावक बाद सांकेतिक रूपसँ देखबामे सेहो आएल। एतेक संख्यामे अइसँ पहिने कहियो मैथिलीमे शपथ नहि लेल गेल रहए। भने हमर फेसबुकिया मित्र सभ केखनो जातीय आधारपर आ केखनो दलगत आधारपर आँकड़ा प्रस्तुत कऽ ओकरा कमतर करबाक चेष्टा किएक ने केने होथि। हम सभ आठो विधानसभा क्षेत्रमे अपन सांगठनिक तागत देखेबामे सक्षम भेलहुँ। भने भोटकेँ अपना दिस अनबामे बहुत सफल नहि रहलहुँ मुदा सभ बूथपर हम सभ कार्यकर्ता देलियै। हम, हमर राष्ट्रीय अध्यक्ष सुजित यादव, रत्नेश्वरजी आ पूरा टीम पछिला चुनाव सभहक आँकड़ा लऽ कऽ बैसल रही। हम सभ आँकड़ा विश्लेषणक आधारपर अइ निष्कर्षपर पहुँचलहुँ जे लगभग तीन हजारसँ पाँच हजार भोट सुप्त अवस्थामे मिथिला-मैथिलीक नामपर लगभग सभ विधानसभामे छै। इतिहासक विश्लेषण भविष्यक मार्ग निर्माणमे बहुत सहायक होइत छैक। आब हम सभ अइ विषयपर चर्चा करब शुरू केलहुँ जे अइ आधार भोटसँ आगू बढ़ेबा लेल कोन रस्ता अपनाएल जाए। वर्तमानक लगभग सभ मिथिला-मैथिली संस्था समान्यतः दू बिंदुपर काज कऽ रहल अछि एकटा भाषा आ दोसर मिथिला राज्य। हमरा सभकेँ अइ बिन्दुसँ कनेको असहमति नै अछि जे मिथिला भाषाक विकास हेबाक चाही आ हमरा सभकेँ अपन सांस्कृतिक आ भूगोलक संग राज्य भेटबाक चाही। अइपर कोनो असहमति भइयो ने सकैत अछि। चुनावक क्रममे बहुतो लोकसँ गप्प भेल। किछु गोटेक आरोप रहनि जे अहाँक संगठन मैथिली भाषाक विकास लेल बहुत एग्रेसिव नहि अछि, मिथिला राज्यक माँग प्रमुखता संग किएक नहि रखैत अछि। हमरा सभ अपना संगठनमे बौद्धिक विलासितासँ बेसी बौद्धिक विज्ञानिकतापर जोर देलियै। हमरा सभकेँ वुझा गेल जे मैथिली भाषाक सहारे बहुत विशाल संगठन ठाढ़ नहि कऽ सकैत छी। १९१०क मैथिलक महासभाक माध्यमसँ मैथिलक जातीय आधारपर तोड़बाक जे प्रयास शुरू भेल ओ तथाकथित संस्कृतनिष्ठ प्रांजल मैथिलीक सहारे आइयो चलि रहल अछि। वर्तमान राजनीतिक दल जाति-धर्मक आधारपर हमरा सभहक समेकित प्रतिरोधक क्षमताकेँ कम तँ कइए रहल अछि संगहि अपन गोटी लाल करबामे सेहो सफल भऽ रहल छथि। हमरा सभहक समाज जातीय आधारपर बाँटल अछि आ तँइ कही तँ भाषाई आधारपर सेहो। हमरा सभहक जातीय विषमता प्रत्यक्ष रूपें भाषाई विषमताकेँ सेहो बढ़ाबा दैत रहल अछि। तँइ हमरा सभहक संगठन ई मानैत अछि जे विभिन्न जातीय स्वरूप बला मिथिला समाजकेँ अपन गौरवशाली भाषा-सांस्कृतिक आधारपर एक सूत्रमे बान्हल जेबाक चाही। हम सभ अपना संगठनमे अइ विषमताकेँ खत्म करबाक जे प्रयास शुरू कएल ओकर साकारात्मक परिणाम सामने आबि रहल अछि। हम सभ अपना संगठनक साथीकेँ सदैव अइ बात लेल प्रेरित करैत छियनि जे ओ सार्वजनिक रूपसँ वा अपना बीच सामान्य चर्चाक दौरान अपन स्थानीय बोलपर कायम रहथि। यानि ओ अपना घरमे जाहि टोन आ शैलीमे गप्प करै छथि सएह टोन आ शैली सार्वजनिक भाषण वा गप्प-सप्पमे सेहो जारी राखथि। तखने हम सभ साथी जिनकर जातीय आधार अलग-अलग छनि ओहि अइ पुरातनपंथी-दकियानूसी ब्राह्मणक भाषा मैथिली मानसिकतासँ दूर हेताह आ स्वीकार करता हजे पासवानोक भाषा मैथिली, सहरसोक भाषा मैथिली, बेगूसरायोक भाषा मैथिली छै। आ फेर स्वतः भाषाई आधापर एकसूत्रमे बान्हल चलि जेताह। अहिना सांस्कृतिक तौरपर सेहो हम सभ काज कऽ रहल छी। कएक टा क्षेत्रीय गायक-गायिकाकेँ हम सभ ओकर अपन गायन शैली आ ओ सभ सफल भऽ रहल छथि। आ हम सभ एक भऽ रहल छी। भने अइ प्रयासकेँ व्यापक रूपें देखार हेबामे समय लागत परंतु हएत जरूर। मिथिला भाषा आन्दोलन हो वा राज्य आन्दोलन कोनो आन्दोलन ताबत सफल नहि भऽ सकैत अछि जाबत एकटा स्पष्ट वैज्ञानिक सोचक संग मजगूत संगठनक निर्माण नहि होयत। कोनो आन्दोलन अपन समाजिक मान्यता तखने पबैत अछि जखन ओकर कोनो कानूनी आधार हो, कानूनी रूपसँ जे अधिकार अइ ओकर व्यावहारिक रूपें मान्यता सेहो भेटैक इएह सरकार दिससँ सेहो अपेक्षा अछि। पहिनेसँ आ एखनो शिक्षा नीति त्रिभाषा फार्मूलापर आधारित अछि। व्यावहारिक तौरपर हम सभ अनेकानेक रूपमे सरकारसँ माँग तऽ कइए रहल छी जे मैथिली माध्यमसँ पढ़ौनी शुरू हो परंतु हम सभ सांगठनिक रूपसँ ई निर्णय कएल जे स्कूल खुजलाक बाद सभ पंचायत यूनिट अपना-अपना पंचायतक आँगनबाड़ी आ प्राथमिक सह उत्क्रमित विद्यालयमे का सिक्षक सभकेँ एहि बातपर सहमत करी जे ओ G=Guava- अमरूद-लताम R=Rat-चूहा-मूस D=Dog-कुत्ता-कुक्कुर पढ़बाक अइ पद्धतिकेँ अपनाबथि जाहिसँ शूद्ध रूपें त्रिभाषा फार्मूला व्यावहारिक रूपें तत्क्षण लागू भऽ जाए भने बिहार सरकार मानूनी रूपें एकरा एखन धरि स्वीकार नहि केने हो। ओना एहन पुस्तकक खगता हमरा सभकेँ अनुभव भऽ रहल अछि। लोकनृत्य बला पाठमे डांडिया-भाँगड़ा भेटैए झिझिया नहि जे दुखद अछि। हम सभ सदरिकाल अपना खेतिहर संस्कृतिपर गर्व करैत रहलहुँ अछि। माछ-मखान हमरा सभहक संस्कृतिक मुख्य आधार अछि। खेती आ ओहिसँ जुड़ल पाबनि-तिहार हमरा सभहक संस्कृति केर मूल आधार रहल अछि। मुदा हमरा सभ एकटा आधार बना ने तऽ संपूर्ण मिथिलाकेँ एकसूत्रमे बान्हि सकलहुँ आ ने आर्थिक विकास कऽ सकलहुँ। माछ-मखानपर तऽ गर्व करैत छी मुदा पोखरि भरि कऽ मकान बनबैत छी, चाउमिन खा कऽ झिल्ली-कचरी-मुरही, कंसारकेँ छोड़ने जा रहल छी। पटुआक रस्सी छोड़ि प्लास्टिक धेलहुँ तऽ जूट उद्योगपर प्रभाव पड़ल, दलानपर गाए-महिस छोड़लहुँ तऽ सुधा केर दही जगह लेलक। आब तऽ गामक भोजमे बहुतो गोटे नामो लेबा जोगर दही पातपर नहि लैत छथि। जखन कि दही हमरा सभहक संस्कृतिक अभिन्न अंग रहल अछि। हम सभ भाँगड़ा आ डांडिया धेलहुँ तऽ झिझिया बिला गेल। मैथिल सभ झिझियापर रिसर्च करबा लेल आक्सफोर्ड यूनीवर्सिटीक सहारा लऽ रहल छथि। सोचू ने धनकटनीक बाद गहूँम, मसुरी बाउग करबा लेल जोतल खेतमे भाएकेँ बजा कऽ सामा-चकेवा पाबनि खेलब सेहो विलुप्त भऽ रहल अछि। हम सभ अपना पार्टीक संविधानमे स्पष्ट रूपसँ अइ बातकेँ लिखलियैक जे कोनो शर्तपर हम सभ धार्मिक वा जतीय प्रकोष्ठक निर्माण दलकेँ आधार बनेबा लेल नहि करब, उम्मेदवारक चयनक आधार जातीय मत संख्याक आधारपर नहि होयत। हमरा सभ मिथिला क्षेत्रमे आर्थिक गतिविधिकेँ बढ़ाबा देबा लेल सर्वप्रथम हमरा सभकेँ समाजिक आ आर्थिक मिथिलावदक भावनाकेँ विकास करऽ पड़त तखने हमरा सभ जाति-भाषा-धर्मकेँ आधारपर बँटल मिथिलाकेँ एकसूत्रमे बान्हि सकब आ जँ ई काज भऽ गेल तँ सरकार संग राज्यो अपने हएत, अपन मिथिला राज्य। आइ संविधानिक मर्यादामे रहैत सभ प्रदेश विकासक बाटपर आगू बढ़ि रहल अछि जतऽ भाषाई राष्ट्रीयताक भावना तेज अछि। अपना क्षेत्रक संस्कृतिपर गौरव करबाक भावना बलवती अछि आ एकर रक्षा लेल लड़बाक-मरबाक इच्छा अछि। परती पड़ल उपजाउ जमीन देखि कऽ कतेक दुखी होइ छै किसानक मोन तहिना हमरा-अहाँक हाल अछि। आउ वैज्ञानिक खेतीक माध्यमे जोत-कोड़ कऽ खेतमे हरियरी पसारि दी, खेत लहलहा दी। आशा जगबैत कुलानंद मिश्रक किछु पाँति- शीत त छँटबे करतै ओना किछु धाह अखन जगलैए किछु धाह अखन बाँकी छै भोर त हेबे करतै........ अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.५.अजित कुमार झा- घटाटोप अन्हरिया मे उम्मीदक किरण: मिथिला स्टूडेंट्स युनियन अजित कुमार झा- संपर्क-9472834926 घटाटोप अन्हरिया मे उम्मीदक किरण: मिथिला स्टूडेंट्स युनियन भारतवर्ष मे मिथिला मैथिलीक नाम पर कतेक संस्था अछि तकर सटीक जानकारी त' नहि अछि मुदा शायदे एहन कोनो शहर अछि जतय एक्कहुटा संस्था नहि हो। कतहु बाबा विद्यापति केँ नाम पर त' कतहु माँ जानकी केँ नाम पर। कतहु मिथिला मैथिलीक संग विकास, त' कतहु संस्कृति सँ जोड़ि कय। मात्र अपन देशे मे नहि विदेश मे सेहो मैथिल सब अपन अस्मिताक गौरव बोध केँ जागृत राखय लेल कोनो-न'-कोनो मंच केर गठन केने छथि। विश्व स्तर पर एहन जागरुकता त' मिथिला मैथिली लेल निस्संदेह शुभ संकेत मानल जयबाक चाही। शायदे कोनो मैथिल हेताह जे अहि तरहक संस्था सँ कोनो-न'-कोनो रुप मे जुड़ल नहि हेताह। केओ अध्यक्ष हेताह, त' केओ सचिव हेताह। केओ संगठन मंत्री हेताह, त' केओ कोषाध्यक्ष हेताह। कोनो संस्थाक कार्यकारिणी सबहक दल सेहो झमटगर होइत छैक। किछु संख्या मे आम सदस्य हेताह त' किछु संख्या मात्र कार्यक्रमे धरि सिमित हेताह अर्थात् दर्शक वृन्द। कोनो भी संस्था लेल आम सदस्य आ दर्शक बहुत खास मानल जयबाक चाही किएक त' पदधारी त' सहजे भेटि जेताह मुदा सुच्चा कार्यकर्ता भेटब बड्ड कठिन होइत छैक। ओना बहुत संस्था मात्र कागजे पर सेहो चलैत अछि। फौज मे कोनो तरहक संस्था नहि बना सकैत छी तखन अपन अपन संस्कृति ओ भाषाक आधार पर समूह बना क' किछु कार्यक्रम जेना कि पिकनिक क' सकैत छी। भारतीय वायु सेना मे नौकरी करबाक कारणे लगभग एहन समूह सँ निरंतर जुड़ल रहबाक सौभाग्य हमरो भेटल अछि। कोनो संस्था साल मे एकटा कार्यक्रम करैत अछि, त' कोनो संस्था दूटा। अधिकांश संस्था विद्यापति पर्व समारोहक आयोजन करैत अछि, त' किछु जानकी नवमी केर आयोजन करैत अछि। किछु संस्था नाटकक मंचन करैत अछि, त' किछु साहित्यिक गोष्ठी धरि सिमित रहैत अछि। किछु संस्था अथवा समूह मिथिला चित्रकला केँ क्षेत्र मे कार्य क' रहल अछि, त' किछु मिथिलाक्षर केर प्रचार प्रसार लेल। वास्तव मे जखन एहन कोनो खबर सुनैत अथवा पढ़ैत छी त' गर्वक अनुभूति होइत अछि। अपन भाषा ओ संस्कृति केर प्रति मैथिल सब जागृत छथि त' अहि बात पर गर्व भेनाइ स्वाभाविक अछि। ओना ई सिक्का केर मात्र एक पहलू अछि आ हकीकत त' ई छैक जे हर सिक्का केँ दूटा पहलू होइत छैक। हँ अपवाद मे हिन्दी सुपर डुपर हिट फिल्म 'शोले' केर सिक्का छल। हमर अभीष्ट ओ सिक्का नहि मुदा आम सिक्का अछि। सिक्का केर दोसर पहलू देखि दुःख केर साथ कहय पड़ि रहल अछि जे असीम पीड़ा होइत अछि। हरेक संस्था अथवा समूहक स्थापना विशुद्ध रूप सँ अपन सभ्यता ओ संस्कृति केँ ध्यान मे राखि क' कैल जाइत अछि जाहि सँ एकर उत्थान होइक मुदा नहि जानि कोना अहि मे राजनीति रूपी वायरस प्रवेश क' लैत अछि। अहि सँ कि होइत छैक जे ओ संस्था अपन उद्देश्य सँ भटकि जाइत अछि। एक तरहें कहल जा सकैत अछि जे ओ संस्था किछु लोगक हाथ केँ कठपुतरी बनि क' रहि जाइत अछि।बहुत बरख सँ विद्यापति पर्व समारोह मनाओल जाइत अछि। परम आदरणीय हरि मोहन झा जी केर उत्कृष्ट कविता ' विद्यापति पर्व महान हमर ' अवश्य पढ़ने होयब। नहि जानि कतेक साल पहिने ई परम्परा शुरु भेल छल आ स्नैः स्नैः मिथिलाक एकटा अति विशिष्ट पावनि बनि गेल। नबका बसात कि बहलै बुझू जे ई विशुद्ध रूप सँ एकटा व्यावसायिक आयोजन बनि गेल। आइ पी एल जँका एम पी एल अर्थात् मिथिला प्रीमियर लीग आधुनिकताक चकाचौंध मे बोहियाय लागल। परिवर्तन प्रकृति केर नियम छैक मुदा उम्मीद सँ बेसी परिवर्तन एकर मूल स्वरुप केँ नष्ट क' देलकै। आयोजन कोना करताह से त' आयोजक सबहक सोच पर निर्भर करैत छैक मुदा वर्तमान मे जाहि रुप मे अहि कार्यक्रमक आयोजन होइत अछि ताहि मे सँ बाबा विद्यापतिक नाम हटा लेबाक चाही। हिनकर ब्रांड केँ नाम पर जेहन एखुनका कार्यक्रमक फ्लेवर रहैत अछि से हमरा ई सोचय पर मजबूर क' दैत अछि जे बाबा विद्यापति मंचक एक कोन मे ठाढ़ भ' सिसकि रहल छथि। ई हमर व्यक्तिगत सोच अछि आ जरुरी नहि जे हमर बात सँ सब गोटे सहमत होथि। संस्थागत ईर्ष्या डाह त' आम बात अछि। अपन संस्थाक कार्यक्रम मे भीड़ कोना जुटि सकैत अछि आ दोसर संस्थाक कार्यक्रम केँ कोना भाँड़ल जा सकैत अछि वैह दाव-पेंच चलाबय मे सब अपस्याँत रहैत छथि। रटल रटायल वैह पुरने भाषण, किछु पोथीक विमोचन आ झमकौआ गीत नाद सँ मैथिल जागृत भ' जेताह कि? अहि सँ मिथिला मे विकास भ' जेतैक कि? पूरा भारतवर्ष मे मिथिला मैथिलीक जतेक भी संस्था अछि कमोबेश सबहक स्वाद एक्कहि भेटत। कोनो नवीनता नहि भेटत सिवाय फूहड़ता केँ। मिथिला मे कोन एहन संस्था अछि जे शिक्षा, स्वास्थ्य आ पर्यावरण लेल जागरुकता अभियान चला रहल अछि? अंधविश्वास एवं कुरीति सँ लड़बाक लेल निसभेर सूतल लोग केँ जगा रहल अछि? गाम-गाम घूमि नुक्कड़ सभा ओ नाटक केँ माध्यम सँ धरातल पर काज क' रहल अछि? शायदे कोनो एहन संस्था भेटत? बस विद्यापति पर्व समारोह केँ साल भरि मनाओल जा रहल अछि आ दिनानुदिन एकर ब्रांड वैल्यू सेहो बढ़ल जा रहल अछि। कहाँ कोनो संस्था केँ देखैत छियैक जे अपन समारोह मे रक्तदान केर आयोजन करैत हो? नशा मुक्ति हेतु समाज लेल किछु काज करैत हो? भ्रष्ट आचरण वाला केँ बहिष्कृत करैत हो? गामे गाम घूमि कय शिक्षाक अलख जगाबैत हो? अपन सबहक समाज मे जेहन जागरुकता केर प्रयोजन अछि ताहि दिशा मे कर्तव्य करैत कहाँ कोनो संस्था नजर आबि रहल अछि? अधिकार एवं कर्तव्य मे तालमेल जरुरी होइत छैक आ तकर अभाव अछि। अपन अधिकारक प्राप्ति हेतु कर्तव्य करहे पड़त। अभिमान एवं स्वाभिमान मे कि अन्तर छैक से बूझय पड़त। रुढ़िवादी विचार धाराक मकड़जाल सँ बाहर निकलय पड़त। मिथिलाक बहुमुखी विकास लेल माटि-पानि तैयार करय पड़त। तीन तिरहुतिया, तेरह पाक सँ काज नहि चलत। मुंडे मुंडे मतिर्भिन्नाक श्राप सँ मुक्त होबय पड़त आ निस्संदेह एकजुट होबय पड़त। कोनो भी संस्था अगर जिन्दा अछि त' क्रियाशील रहय पड़तै। सब सँ जरुरी बात ई अछि जे शो पीस वाला संस्था सब सँ ई उम्मीद राखब दिवा स्वप्न थिक। सिक्का केर दोसर पहलू इएह अछि जे निश्चित रूप सँ निराश करैत अछि। मुदा निराश भेला सँ कि सफलता भेटि सकैत अछि? यात्री जी केर ओ उक्ति मोन पड़ैत अछि- ' नबतुरिए आब आगू आबओ। ' एहन निराशा मे उम्मीदक एक्कहिटा किरण नजर आबि रहल अछि हँ नबतुरिया सबहक दल- मिथिला स्टूडेंट्स युनियन । अल्प काल मे ही एम एस यु केर प्रयास एवं उपलब्धि मोनक कोनो कोण मे एकटा उम्मीद जगाबैत अछि। सन् 2015 मे अस्तित्व मे आयल अहि छात्र संगठन केर नारा- ' एक डेग, विकास लेल' समय केर साथ सत्य होइत प्रतीत होइत अछि। दरभंगा मे एयरपोर्ट मिथिला केँ लेल कोनो वरदान सँ कम नहि अछि। एम्स केर आन्दोलन जारी अछि। बिहार सरकार जगह केँ ल' क' एखनहु भ्रम मे अछि। आन्दोलन केर धार तेज करय पड़तैक। सन् 2017 मे बाढ़िक विभीषिका झेलि रहल मिथिला मे छाती भरि पानि हेलि क' जाहि तरहें गाम-गाम मे भोजन एवं अन्य जरुरी सामग्री सब ल' क' अपन जानक परवाह छोड़ि पहुँचल रहथि एम एस यु केर नबतुरिया सेनानी सब से कोना बिसरि सकैत छी। बाढ़ि के बाद कपड़ा लत्ता ओ अन्य सामग्री पठेनाई एवं बाढ़ि पानि मे हेलि क' भोजन सामग्री पहुँचेनाई मे जमीन आसमान केर अन्तर छैक। मिथिला केर उपेक्षित ग्रामीण क्षेत्र मे बिजली केँ लेल सफल आन्दोलन चलेनाई कोनो छोट उपलब्धि नहि कहल जा सकैत अछि। दरभंगा मेडिकल कॉलेज मे व्याप्त अव्यवस्था लेल आन्दोलन, मिथिला विश्वविद्यालय मे पढ़ाई व्यवस्था ओ परीक्षा सत्र नियमित करबाक हेतु आन्दोलन, मिथिलाक अनेक शहर मे जामक स्थिति सँ निजात पाबय हेतु ओवर ब्रिज हेतु आन्दोलन, बंद पड़ल चीनि मिल मे इथेनॉल प्लांट बैसाबय एवं रोजगार हेतु आन्दोलन, मधुबनी मे केन्द्रीय विद्यालय हेतु जमीन लेल आन्दोलन, मिथिला राज्य लेल दिल्ली मे आन्दोलन, पूर्णिया मे हवाई अड्डा लेल आन्दोलनक सुर सार एवं अपन मिथिलाक सर्वांगीण विकास हेतु निरन्तर जन आन्दोलन ठाढ़ करबाक साहस देखि नबतुरिया सबहक प्रति मोन मे उम्मीद जागब स्वाभाविक अछि। हलाँकि एखन आरम्भे छैक आ एखन बहुते मीलक पाथड़ पार करब शेष छैक। एम एस यु केर नबतुरिया जौँ सार्थक प्रयास जारी राखथि, अभिमानी नहि स्वाभिमानी बनल रहैथ, अधिकारक प्राप्ति हेतुओहि केँ अनुरुप कर्तव्य पथ पर डटल रहैथ त' अन्य समस्त मिथिला मैथिली वाला संस्था सँ इतर अपन अलग पहचान बनाबय मे सफल हेताह आ मिथिलाक विकास हेतु उठाओल हिनकर डेग एक दिन मंजिल पर अवश्य पहुँचत मुदा यात्री जी केर ओ पंक्ति मोन राखय पड़त - नबतुरिए आबओ आगाँ!! उएह करत रुढ़िभंजन, आगू मूँहें बढ़त उएह... हमरा लोकनि दिअइ आशीर्वाद निश्छल मोने; घिचिअइ नहि टाङ पाछाँ.... ढेकी नहि कूटी अपनहि अमरत्वता'क अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.६.सच्चिदानंद सच्चू- मैथिल संगठन आ ओकर सामाजिक सरोकार सच्चिदानंद सच्चू मैथिल संगठन आ ओकर सामाजिक सरोकार हमरा सभ केँ स्वतंत्रता संग्राम मादे बुझल अछि। हमरा सभ केँ बुझल अछि जे स्वतंत्रता सेनानी लोकनिक उद्देश्य ने मात्र अंग्रेज केँ देश सँ भगाएब छलनि, अपितु हुनका लोकनिक उद्देश्य भारतीय समाज मे व्याप्त अनेक तरहक कुरीति केँ दूर करबाक सेहो रहनि। सामाजिक कुरीति पैरक सभ सँ पैघ बेड़ी अछि आ आम जनमास केँ गुलामीक अन्हार मे धकेलैत अछि। एहि कुरीति केँ दूर कयने बिना स्वतंत्रताक लेल आवश्यक चेतनाक निर्माण नहि भ' सकैत अछि। महात्मा गाँधी सँ ल' क' कतेको छोट-पैघ नेता कुरीति केँ दूर करबा मे दिन-राति लागल रहलाह। फलस्वरूप आइ हम सभ एकटा स्वतंत्र देशक स्वतंत्र नागरिक छी। जँ एकर चर्चा अहाँ मिथिला आ मैथिलीक संबंध मे करैत छी त' पबैत छी जे मिथिला समाज आइयो कतेको रंगक कुरीति सँ घेराएल अछि। व्यक्ति सँ ल' क' संस्था धरि अतीतजीवी अछि। अतीतक गौरवगान मे एतेक ने हम सभ मगन भ' जाइत छी वर्तमानक जे समस्या छै, वर्तमानक जे आवश्यकता छै, एकर जे चुनौती छै, ओकरो बिसरि जाइत छिऐक। अपन परंपराक गौरव बोध हैब नीक बात अछि। मुदा गौरवे आन्हर भ' जाएब एक तरहक कुरीति अछि जे भविष्यक प्रति आशंका उत्पन्न करैत अछि तें एहि कुरीति केँ दूर करब सेहो बहुत बेसी आवश्यक अछि। आइ मिथिला आ मैथिलीक नाम पर काज कयनिहार अधिकांश संस्था आ संगठन गौरवे आन्हर भ' गेल अछि आ इएह कारण छै जे एकर सबहक कोनो सामाजिक सरोकार नहि रहि गेल छैक। आइ गाम सँ ल' क' शहर आ शहर सँ ल' क' महानगर धरि मिथिला मैथिली सँ जुड़ल कतेको संस्था सब सक्रिय अछि। साल भरि मे कतेको कार्यक्रमक आयोजन सेहो होइत छैक। मुदा एहि आयोजन सबहक फलाफल की निकलैत अछि, एहि पर विचार होमक चाही। जहिया विद्यापति पर्व समारोहक परिपाटी शुरू भेल रहै, तहिया भ' सकैत अछि जे एकर आवश्यकता होइक। शहर आ महानगर मे भेल एहन आयोजन सभ सँ एतेक जरूर भेलैक जे देशक विभिन्न भागक लोक सब मिथिलाक संस्कृति सँ परिचित भेलाह मुदा एहि आयोजन सबहक प्रभाव मैथिल समाज पर कतेक पड़लैक, अहू बात पर विचार होमक चाही। आइ एहि विद्यापति पर्व समारोह सबहक की स्वरूप रहि गेल छैक? नाच-तमाशा आ भोज-भात सँ बेसी एकर कोनो उपयोगिता त' हमरा देखबा मे नहि अबैत अछि।देश-दुनियाँ मे एहन आयोजनक लेल मैथिल लोकनि लाखो-करोड़ो प्रति साल खर्च करैत छथि मुदा एकर बादो ई संस्था सब अपन समाज मे चेतनाक निर्माण करबा मे सर्वथा विफल रहल अछि। आ एकर कारण हमरा इएह बुझि पड़ैत अछि जे ई सब संस्था समाजिक सरोकार सँ सर्वथा कटल अछि। गौरव गान करैत-करैत सब गौरवे आन्हर भ' गेल अछि। चेतना समिति सन-सन नामी-गामी संस्था सँ ल' क' अन्य संस्था सब सेहो एकहि नाव पर सवार अछि। किछु दिन पहिने मिथिला स्टूडेंट यूनियन (एमएसयू) सँ हमर उमेद जागल छल। हमरा ई संगठन सामाजिक सरोकार सँ लबरेज बुझाइत छल। एकटा घटना मोन पड़ैत अछि। बरसातक मौसिम। सगरे मिथिला बाढ़ि सँ घेराएल छल। लोक त्राहि-त्राहि क' रहल छल। एहन स्थिति मे मिथिला मैथिलीक लेल संघर्ष केनिहार किछु संगठन सभ आगू अबैत अछि आ डूबि-भाँसि रहल लोकक प्राण रक्षक बनैत अछि। अन्न बेतरे काहि काटि रहल लोक धरि आवश्यक सामग्री पहुँचाओल जाइत अछि। तहन मिथिला वासी कें ई सभ देवदूत सन बुझाइ पड़ैत छनि। एना मिथिला मैथिलीक लेल भ' रहल आंदोलनक इतिहास मे पहिल बेर होइत अछि जे कोनो संगठन सभा जुलूस सँ अलग संकट मे पड़ल मैथिलक मदति अपन जान संकट मे द' क' करैत अछि। मिथिला मैथिलीक नाम पर संघर्ष केनिहार संगठन मे आएल सकारात्मक बदलावक प्रशंसा सेहो सभतरि खूब होइत अछि। हेबाको चाही एकर प्रशंसा। ऐ सँ पहिने मुजफ्फरपुर जिलाक यजुआर गाम मे मिथिलाक छात्र राजनीति मे सक्रिय मिथिला स्टूडेंट यूनियन (एमएसयू) द्वारा बिजलीक लेल संघर्ष कएल जाइत अछि। आजादीक बाद अखन धरि एहि गाम मे बिजली नहि पहुँच सकल छल। एमएसयूक कार्यकर्ता यजुआरक घर-घर मे जा क' लोक सभ केँ बिजलीक लेल जगबैत छथि। कार्यकर्ता सभ एहि गाम मे कैंप क' क' चरणबद्ध ढंग सँ बिजलीक लेल आंदोलन करैत छथि। परिणामस्वरूप एहि गाम मे बिजली लगेबाक काज सेहो शुरू होइत अछि आ पहिल बेर लोक ई जनैत अछि जे मिथिला मैथिलीक नाम पर संघर्ष केनिहार संगठन जन समस्या केँ ल' क' सेहो आंदोलन करैत अछि। स्पष्ट अछि जे ई संगठन छात्रक अछि आ युवा वर्गक सहभागिताक कारणें सोशल मीडिया पर सेहो एकर व्यापकता छै। सोशल मीडिया पर दमदार उपस्थितिक कारणें यजुआर आंदोलन जोर पकड़ैत अछि आ सफल होइत अछि। ई संगठन कॉलेज आ यूनिवर्सिटी मे छात्रक समस्या सभ कें ल' क' सेहो सक्रिय रहैत अछि। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय मे कतेको बेर एहि संगठन द्वारा छात्र हित मे आंदोलन कएल गेल। एकर किछु सकारात्मक परिणाम सेहो बाहर एलै। मुदा छात्रक समस्या सभ अखन धरि ओहिना अछि। विश्वविद्यालय मे संसाधनक अभाव छहिये। कॉलेज सभ मे पठन-पाठन व्यवस्था चौपट भ' गेल अछि। कॉलेज सभ मे जे संसाधन पहिने सँ उपलब्ध छलै, ओ सभ मृतप्राय भ' गेल अछि। छात्रक भीड़ बढ़ल जा रहल अछि आ संसाधन दिन प्रतिदिन घटल जा रहल अछि। वर्ग संचालन लगभग ठप भ' गेल अछि। एहन स्थिति मे छात्र संगठन सभ द्वारा एकटा जोरगर आंदोलनक खगता छलैक, जे नहि भ' रहल अछि। जँ एहि सभ मुद्दा कें ल' क' कतौ कोनो संगठन द्वारा आंदोलन भैयो रहल छै त' ओ अपन प्रभाव छोड़बा मे अखन धरि सफल नहि भ' सकल अछि। एहन स्थिति मे छात्र राजनीति छात्रक समस्या सँ हेंठ होइत बुझना जाइए। एहन स्थिति मे एमएसयू सनक क्षेत्रीय छात्र संगठन पर पैघ जिम्मेवारी छलैक जे ओ सभ अपन विश्वविद्यालय मे व्याप्त समस्या सभ केँ ल' क' जोरगर आंदोलन करैत आ अपन विश्वविद्यालय मे गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक माहौल स्थापित करैत मुदा से अखन धरि देखबा मे नहि आएल अछि। छात्र संघक चुनाव मे सेहो ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय मे एहि संगठनक दमदार उपस्थिति देखबा मे आएल। विभिन्न कॉलेज मे विभिन्न पद पर ने सिरिफ ऐ संगठनक उम्मीदवार अपन जीत दर्ज करौलनि, अपितु एहि संगठनक सक्रियता सँ कतेको नेशनल छात्र संगठन सभ मे घबराहटि नजरि आएल। ई सक्रियताक ओजह छल जे नेशनल छात्र संगठन सभ द्वारा चुनाव प्रचार मे अपन वरिष्ठ नेता सभ कें उतारल गेल। ई नेता लोकनि अपन - अपन पार्टी द्वारा समर्थित उम्मीदवार केँ जीतेबाक आह्वान केलनि। तें ई कहि सकै छी जे विभिन्न कॉलेज मे एहि संगठनक प्रत्याशी हारियो क' जीत गेल। नेशनल संगठन मे घबराहटि एमएसयूक सफलता छल। मुदा ई सफलता कते दिन धरि बनल रहत, से प्रश्न अछि। किएक त' मुख्य धाराक राजनीति सँ कनियों अलग आब छात्र राजनीति नहि रहि गेल अछि। मुख्य धाराक राजनीतिक केंद्र मे जना सत्ता आबि गेल अछि, तहिना छात्र राजनीतिक केंद्र मे सेहो सत्ता आबि गेल अछि आ जहन उद्देश्य महज सत्ता प्राप्ति रहि जाइत अछि त' परिवर्तनक गप्प गौण भ' जाइत अछि। क्षेत्रीय निष्ठा कें ल' क' सक्रिय भेल एमएसयू सँ ई उमेद रहैक जे ओ एहि व्यवस्था मे सकारात्मक बदलाव लाओत। किएक त' हालहि मे एहि संगठन द्वारा कएल गेल आंदोलन मे एकर झलकी देखबा मे आएल छल मुदा जहन एकर सांगठनिक ढांचा आ काज करबार रूप रेखा पर ध्यान दैत छी त' मोन मे ई शंका उत्पन्न होइत अछि जे ई सकारात्मक बदलाव आखरि कत्ते दिन धरि सकारात्मक रहत? अहाँ ध्यान देने हेबै जे एहि संगठनक विस्तार आ विकास मे सोशल मीडियाक अति महत्वपूर्ण भूमिका अछि। आ जहन एकर विस्तार आ विकास हम महज सोशल मीडिया सँ होइत देखैत छी त' हमरा मोन पड़ैत अछि अन्ना आंदोलन। दिल्लीक रामलीला मैदान। अहू आंदोलन कें महज सोशल मीडिया सँ ऊर्जा भेटल रहैक। एक्के बेर एहन आगि उठलै जे बुझेलै आब ई आंदोलन सभ किछु बदलि क' राखि देत। घपला-घोटाला आ भ्रष्टाचार आब इतिहास बनि क' रहि जाइत। पाँच अप्रैल 2011 सँ शुरू भेल एहि आंदोलनक व्यापक असरि देश भरि मे देखल गेल। अन्ना हजारेक समर्थन मे देश भरि धरना - प्रदर्शन कएल गेल आ जुलूस निकालल गेल। मुदा एकर बादो की भेल? बुढ़िया फूसि। जाहि लोकपाल विधेयक लेल आंदोलन कएल जा रहल छल, ओइ लोकपाल विधेयक केँ की भेल? हँ, ई आंदोलन जँ एकटा ठोस वैचारिक धरातल पर आगू बढ़ैत त' ई व्यापक असरि छोड़ि सकैत छल। एकर दूरगामी प्रभाव समाज आ राजनीति पर पड़ैत, जे नहि भ' सकल। सोशल मीडियाक प्रभाव क्षणिक होइत अछि आ अहू आंदोलन संगे सएह भेल। सोशल मीडिया सँ जे आंदोलनक धधरा उठल छल ओ किछुए समय मे पझा गेल। वैचारिक साम्य नहि रहला सँ आंदोलनकारी नेता लोकनि अलग-अलग संगठन मे बँटि गेला। अलग-अलग संगठनक उद्देश्य सेहो अलग-अलग भ' गेल। अन्ना हजारे 22 मार्च 2018 सं फेर दिल्लीक रामलीला मैदान मे अनशन शुरू करै छथि मुदा एहि बेरक आंदोलन मे पहिने बला समर्थन देखबा मे नहि आएल। कारण? कारण पहिनहि ई आंदोलन बिखरावक भेंट चढ़ि चुकल छल। अन्ना भले अपना केँ गांधीवादी कहथि मुदा हिनका सभ संगे अखन धरि ठोस वैचारिक पृष्ठभूमिक अभाव नजरि अबिते अछि। दोसर सोशल मीडिया पर विश्वसनीयताक संकट पहिने सँ बेसी गाढ़ भेल अछि। किछु एहने सन कमी हमरा मिथिला मैथिली लेल काज केनिहार एमएसयू आदि संगठन सभ लग नजरि अबैत अछि। एकर सांगठनिक ढांचा मे वैचारिक प्रतिबद्धताक अभाव त' खटकिते अछि, संगहि किछु युवा सभक अति उत्साह सेहो भविष्यक प्रति शंका उत्पन्न करैत अछि। ऐ संगठनक आलाकमान कोनो व्यक्ति नहि छथि। एकर नेतृत्व 11 सदस्यीय कमांडिंग टीम करैत अछि तें हम सभ ऐ बात स' आश्वस्त भ' सकै छी जे संगठन मे लोकतांत्रिक भावना बनल रहत। दोसर जे मूल कमी हमरा नजरि अबैत अछि ओ ई अछि जे संगठनक एजेंडा मे छात्र राजनीति केर अलावा क्षेत्रक विकास अछि। ई संगठन क्षेत्रीय समस्या कें ल' क' बेसी आंदोलनरत बुझाइत अछि मुदा हमरा हिसाबे एकरा शैक्षणिक समस्या पर बेसी ध्यान देबाक चाही। क्षेत्रक अन्य समस्या कें एजेंडा नंबर दू मे राखल जा सकै छल। संगहि क्षेत्रक समस्याक संगहि ई संगठन क्षेत्रीय भाषाक विकासक लेल बेसी जिम्मेदार नहि बुझाइत अछि। कम सँ कम संगठनक कार्यकर्ता सभक गतिविधि सँ त' ई नजरि नहि अबैत अछि। एकर अतिरिक्त युवा वर्गक किछु अन्य संगठन सेहो मिथिला मे सक्रिय अछि मुदा ई सभ कोनो पार्टी पोषित बुझाइत अछि, जकर राष्ट्रीय एजेंडा आ क्षेत्रीय एजेंडा मे विरोधाभास नजरि अबैत अछि। इहो कारण भ' सकैए जे एहि सभ संगठनक कोनो विशेष असरि मैथिल समाज मे अखन धरि देखबा मे नहि आबि सकल अछि। किछु छोट-छीन आंदोलन सभ सँ चर्चा मे आएल ई संगठन आब चुनावी राजनीति मे सेहो सक्रिय होइत देखाय पड़ि रहल अछि। पिछला साल भेल पंचायत चुनाव मे एमएसयूक किछु सदस्य जिला परिषदक किछु सीट जीतबा मे सफल भेलाह। संभावना व्यक्त कयल जा रहल अछि जे ई लोकनि आब विधानसभा चुनाव मे सेहो अपन प्रत्याशी उतारता। माने ओ सामाजिक सरोकार जे बाढ़ि आ की अन्य संकटक-समस्याक घड़ी मे देखबा मे आएल छल, से अही लेल जे चुनाव मे ई संगठन सब अपन जनाधार केँ मजगूत क' सकय। हम एकरा व्यावसायिक राजनीति मानैत छिऐ जे निष्ठापूर्ण राजनीति सँ एकदम फराक होइत अछि। क्षेत्रीय विकासक लेल निष्ठापूर्ण राजनीतिक आवश्यकता छलैक, व्यावसायिक राजनीति त' पिछला कतेको दशक सँ मिथिला मे भइये रहल अछि। मुदा अहू व्यावसायिक राजनीतिक 'सौदा' मे एमएसयू आ कि एमएसयू सन-सन आन संगठन सब एकटा गलती क' रहल अछि आ ओ गलती अछि मिथिला राज्यक माँग। अहाँ मिथिला राज्यक माँग करबै आ मिथिलाक आम जनमानस अहाँ सँ कटैत जाएत आ अहाँ केँ संदेहक दृष्टि सँ देखत। एकर बहुत रास सामाजिक आ राजनीतिक कारण छै। मिथिला राज्यक माँग केँ ल' क' दिल्ली मे भीड़ जुटायब ओतेक कठिन काज नहि छै, जतेक कठिन काज मिथिला राज्यक लेल जे चिह्नित जिला सभ अछि, ओहि जिला सभ मे जनसमर्थन जुटाएब। अहाँ ओहि जिला सबहक त' बात छोड़ू, जकरा मिथिलाक कथित हृदय स्थली मानल जाइत अछि, अहू ठाम मिथिला राज्यक लेल जनसमर्थन नहि अछि। अहू ठाम एकटा व्यापक समाज एहि आंदोलन केँ संदेहक नजरि सँ देखैत अछि। आ मिथिलाक आम जनमानसक ई संदेह हमरा निकट भविष्य मे खत्म होइत नहि बुझाइत अछि। आम जनमानसक एहि संदेह केँ दूर करबा लेल एहन संगठन सभ केँ सामाजिक सरोकार सँ जुड़य पड़तनि मुदा ई संगठन सभ त' पहिनहि सामाजिक सरोकार सँ च्युत भ' चुकल अछि। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.७.लक्ष्मण झा सागर- मिथिला स्टूडेंट यूनियन लक्ष्मण झा सागर, संपर्क-9903879117 मिथिला स्टूडेंट यूनियन अर्थात् मिथिला छात्र संगठन। जेना कि नामेसँ लागि रहल अछि जे ई कोनो मिथिलाक छात्र सभक जमाबड़ा अछि। 1972- 73 ई.मे आर के कॅालेजमे पढ़ि रहल छलहुँ। एक दिन सी एम कॅालेजक एकटा छात्र नेता श्री बिमालानंद झा जी हमरा सभक कॅालेज मधुबनी आयल छलाह। हमरा कॅालेजमे मीटींग केलनि। श्री बैद्यनाथ चौधरी जीकें कोनो आन्दोलनक जुर्ममे बड़ मारि मारने रहनि आ जहलमे बन्द कय देने रहनि। तकरे प्रतिवाद सभा केने रहथि। हुनक भाषणमे ततेक ने ओजस्विता रहनि जे सब छात्र लोकनि उत्तेजित भऽ गेल रहथि। परिणाम भेल जे बैजू जीकें पुलिस छोड़ि देने रहनि। हमर जीवनक ई पहिल अनुभव छल जे छात्र संगठनक राजनीति के लगीचसँ देख सकल रही। दोसर प्रसङ अछि असामक छात्र राजनीतिक जकरो हम खूब नजदीकसँ देखने छी। एम एस यू के जनबाक लेल पहिने जानब जरूरी अछि ई सब तखने हम सबपरखि सकब जे छात्र संगठन समाजक बीचमे कोना फुलाइत छैक। कतेक फलप्रद होइत छैक। देशमे मंडल आयोगक जे आरक्षण लेल सुझाव आयल छल आ तकरा जखन केन्द्र सरकार लागू केने रहय तकर बाद जे देशव्यापी छात्र आन्दोलन भेल छल से एकटा अलग इतिहास अछि। जे पी आन्दोलन छात्र लोकनिक सहभागितासँ लड़ल गेल छल आ सफल भेल छल। परिणाम भेलैक जे भारत सरकार के काया पलट भऽ गेल रहय। हम 1974 ई.सँ 2006 ई धरि असममे रहल छी। ओतुक्का छात्र राजनीतिकेँ जनमैत, बढ़ैत आ सियान होइत अपना नजरिसँ देखने छी। आ एकर परिणति केहेन रहल से आइ समस्त विश्व देखि रहल अछि। असमक जलवायु समशीतोष्ण अछि। ओहिठामक लोककेँ भरि पेट खाना भेटैक चाही। टेंगा माछक झोड़ भेटल ताकय। अंडी सूतक गमछा पहीरि कऽ असम टाइपक घरमे खूब आरामसँ लोक जीवन बसर करैत रहय। जनसंख्या बढ़ल गेल। लोकक आवश्यकता बढ़य लगलैक। एक समय अयलैक जे शिक्षित युवा सब नोकरी लेल परेशान हुअय लागल। ओ सब असम छोड़ि बाहर जाय नै चाहय। जलवायु सेहो एकटा कारण रहय। ओहि युवा सबहक आँखि खुजलैक। तेलक भण्डार असममे। तेल कम्पनीक कार्यालय कलकत्तामे। चायक बगान असममे। टी बोर्ड कलकत्तामे। पुरा असमक व्यापारिक कारोबारी माड़बाड़ी समाज। छोट मोट नौआक काज,धोबीक काज,पुरहितिक काज, शिक्षक के काज बिहारी आ यू पीक लोक। रेलमे सब जगह बिहारी आ बंगाली जगह छेकने छल। असम के युवा समाजक लोक के उद्वेलित केलक। हमरा मोन अछि गौहाटीक कौटन कॅालेजमे एकटा बैसार भेल छात्र सभक। ओहि बैसारमे भाग लेने रहथि श्री प्रफुल कुमार महंत,श्री भ्रिगु कुमार फ़ुकन,श्री वृदांवन गोस्वामी,श्री सर्वानन्द सोनोवाल,श्री हेमंत विश्वशर्मा आदि। एहिमे उपरी आ नीचुलकी असमक प्रतिनिधित्व भेल छल। ओही मीटींगमे आल असम स्टुडेंट यूनिअनक ( आसू) गठन भेल छल। आ से आसू पहिने समाजक बीच गेल। माजक लेल जरूरी काज सब केलक। जेना, जतेक देशी शराबक भट्ठी सब जगह जगह छल सभटा के राताराती ढाहि देलक। जतेक सिनेमा हालमे हिन्दीक फिल्म लागल रहय सभक पोस्टर फाड़ि कऽ डाहि देलक। नोटीस टाँगि देलक जे असमिया फिल्म टा चलि सकैत अछि। हिंदी बहुल इलाकामे पम्पलेट साइट देने रहय जे "मोर अखमत थाकिले मोर भाखा हिखिते लागिबो"। क्रमश: ई सब सामाजिक काज करैत आसू अपन रौबिनहूड बला छवि बना लेलक। आ तकर बाद तऽ कठिन मुकाम पार करैत (उग्रवादी संगठन अल्फाक रूप अपनबैत) आइ सत्तासीन बनल अछि। आब एहि परिप्रेक्ष्यमे एम एस यूक कार्यप्रणाली आ कार्यपद्धतिक विवेचना करब सापेक्ष हैत। हम सबसँ पहिने मिथिलाक लाल आयुष्मान अविनाश भारद्वाज खूब मोनसँ आशीर्बाद दैत छियनि। बहुत बहुत शुभकामना रखैत छियनि जे ओ पहिल एहन मैथिल युवा भेलाह जिनका मोनमे ई सोच एलनि, एहन विचार अंकुरित भेलनि जे अपन माटि-पानि आ मातृभाषा मैथिलीक संरक्षण आ संवर्धन लेल आगू अयलाह। 2015 ईस्बीक मार्चमे एम एस यूक स्थापना कयलनि। हिनक सङबय भेलखिन श्री गोपाल चौधरी,श्री मनीष पांडे, श्री राज पासवान,श्री अमित आंकुर,श्री अनुप मैथिल,श्री सागर नवदिया आ श्री विकास पाठक आदि एहेन बहुतो गोटे हिनक सहयोगी बनल छथिन। पिछ्ला सात सालमे एम एस यू लगभग अपन एक लाख सदस्य जोड़लनि अछि। हिनका लोकनिक खातामे एखन धरि जे काज हमरा लोकनिक नजरिपर आयल अछि से बुझब आवश्यक अछि। एम एस यू एक बेर दिल्लीक जन्तर मंतर आ पटनाक मैदानमे मिथिला राज्यक माँग लेल प्रदर्शन कय चुकल छथि।दरभंगा आ मधुबनी जिलाक जिला परिषदक चुनावमे क्रमश: 3 आ 2 टा सीट जीति चुकल छथि।आ मिथिला प्रक्षेत्रक आन आन जिला सबमे अपन उपस्थिति दर्ज करेबा लेल राति दिन संघर्ष कऽ रहल छथि। एकर अलाबे आर कोन काज केने छथि से हमरा नजरिमे तऽ नै आबि रहल अछि। एम एस यूक सात सालके संघर्षक नतीजासँ खुश नै भेल जाय सकैत अछि। यदि एक लाख सदस्य संख्या सही अछि त एम एस यूके पासो अंक नै भेटक चाही। एक लाख युवा फोर्स कम नै होइत छैक। यदि नीति आ नियत साफ़ अछि तऽ चमत्कार भऽ सकैत अछि राता-राती मिथिलामे। यदि अहाँक संग एक लाख लोक छथि तऽ दिल्ली आ पटनाक प्रदर्शनमे एक्को हजार भीड़ कियैक ने जुटल महराज? चूँकि अहाँ लोकनिक संगठन के संग मिथिला लागल अछि तेँ एक मैथिल हेबाक नातेँ हम अहाँ लोकनिकें हतोत्साहित नै करय चाहैत छी। मुदा अहाँ लोकनि अपन मिशनमे कामयाब होइ तकर उपाय बताय रहल छी:- (१) मिथिलाक प्रत्येक उच्च विद्यालय आ महाविद्यालयमे सशुल्क अपन सदस्य बनाबी। (२) जे कोनो फरमान जारी हो तकर अनुपालन गाम स्तरीय सदस्य लोकनिक जिम्मा लगाबी। (३) कोनो संघटन अर्थक अभावमे काज नै कय सकैत अछि। एहि लेल मिथिलाक प्रत्येक व्यापारी समाज आ नोकरी पेशा केनिहार लोक सभसँ न्यूनतम चन्दा ओसूल करी। ताहि लेल रसीद छपाबी। आय व्यय केर औडिट कराबी। (४) पंचायत स्तरपर, प्रखंड स्तरपर सभा करी। लोक समाज के हितक बात करी। किएक चाही मिथिला राज्य तकर आवश्यकतापर भाषण करी वा भिज्ञ लोक सभसँ कराबी। (५) गामे गाम देबाल लेखन करबाबी। हमरा चाही मिथिला राज्य। भीख नै अधिकार चाही। हमरा मिथिला राज्य चाही। (६) गाम शहर आ नगर नगरमे होर्डींग आ विज्ञापन मैथिलीमे लिखबाबी। संगमे छात्र सभक हुजूम चाही। (७) जनगननामे मातृभाषाक कालममे मैथिली लिखबाबी। ताहि लेल गाम समाजक लोक के जागृत करी। (८) हिन्दी अखबार वा पत्र पत्रिका के मिथिलामे नै घुसय दी। लोक समाज के तकर दुष्परिणाम बताबी। (९) मिथिलाक कोनो सिनेमा हालमे हिन्दीक फिल्म नै लागय दी। एहिसँ अपन मैथिली फिल्मक विकास हैत। (१०) आफिस, कचहरी,रेलवे टीशनपर कर्मचारी लोकनि के आ बस अड्डापर उदघोषक सभ कें मैथिलीमे बजबाक लेल बाध्य करी। (११) गाम आ शहर के दोकान सबमे चोरीसँ बेचल जाय रहल दारू के जब्त करी आ नष्ट कय दी। गुटका, गाँजा,चरस आदि निसाँ वाला वस्तुक बिक्री नै हुअय दी। (१२) कोनो उत्सव आ त्योहारमे गाम आ शहरमे बजैत भोजपुरी,हिन्दी गीत के नै बाजय दी। (१३) गामक प्राइमरी विद्यालय के शिक्षक/ शिक्षिका के मैथिली माध्यमसँ नेना सबके पढ़ेबाक लेल बाध्य करियनि। आर जे जन उपयोगी काज सभ कय सकी से सब करी पहिने गाम घरमे। समाजक मोन जीतू। समाज के विश्वासमे ली पहिने। तखन अहाँ लोकनिक जे मनसूबा अछि से पूरा हेबामे सहूलियत हैत,हमरा बुझने। अन्यथा समय श्रम उर्जा नष्ट होइत रहत। हाथ आयत गोल गोल सुन्ना। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.८.प्रणव झा- मिथिला स्टूडेंट यूनियन प्रणव झा मिथिला स्टूडेंट यूनियन मिथिला स्टूडेंट यूनियन (एमएसयू)सँ हमर परिचय संभवतः वर्ष 2017 मे भेल छल। ताहि समय मे ई संस्था कदाचित मिथिलाक समाज मे अपन स्थापनाक प्रारम्भिक दौर मे छल। वर्ष 2017 केर अगस्त मास मे मिथिला क्षेत्र मे भयंकर बाढ़ि आयल छल। ऐ बाढ़ि के दौरान एमएसयू के युवा सदस्य सभ अपन सीमित क्षमता मे जमि कऽ राहत आ बचाव कार्य केने छल जाहि विषय मे हमरा सन सन लोक सब के सोशल मीडिया मे फोटो आ पोस्ट के माध्यम से ज्ञात भेल छल। हमरा याद आबि रहल अछि जे विदेह के कोनो अंक मे आशीष अनचिनहार जी के एकटा लेख सेहो आयल छल बाढ़ि राहत मे एमएसयू के योगदान शीर्षकसँ। एमएसयू के युवा टोली ऐ काज से (जे सोशल मीडिया द्वारा पता चलि रहल छल) हमहूँ प्रभावित भेलहुँ। हमरा बेसीखन सरकारी व्यवस्था पर भरोस रहैत अछि आ बाढ़ि या अन्य प्राकृति आपदा आदि मे जे कोनो सहयोग रहैए से हम सीएम रिलीफ़ फंड या पीएम रिलीफ़ फंड के माध्यमेसँ करैत छी। मुदा एमएसयू सदस्य के युवा जोश आ समर्पण देखि हमरा ऐ संस्था पर भरोस भेल आ हुनक मनोबल बढ़ाबऽ लेल एकटा अति छोट छीन सहयोग केने रही। तकरा बादसँ सोशल मीडियाक माध्यमसँ ऐ संस्था के लगातार मिथिलाक सामाजिक, आर्थिक मुद्दा पर सोशल मीडिया आ जमीन पर एक्टिव देखि रहल छी। ऐ संस्था के वर्तमान अध्यक्ष आ ओइ समय के मीडिया प्रभारी आदित्य मोहन जीसँ सोशल मीडियाक माध्यमसँ विभिन्न विषय पर कखनो काल चर्चा भऽ जाय। ओइ समय मे धीरे धीरे बढ़ैत एमएसयू लगातार प्रभावी मुद्दा जेना पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार आ सरकारी सेवा के ध्वस्त डिलीवेरी व्यवस्था, कानून व्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य रोजगार आदि मुद्दा। नवंबर 2017 मे एमएसयू, एलएनएमयू के जर्जर आ ध्वस्त व्यवस्थाक विरुद्ध आ व्यवस्था सुधार लेल एकटा आंदोलन चलेने छल जे ग्राउंड पर सेहो एमएसयू के हजारो कार्यकर्ता आ समर्थक द्वारा चलाओल गेल छल संगहि सोशल मीडिया पर सेहो जोरदार हैशटैग आंदोलन चलल छल। सच कही तऽ हम पहिल बेर कोनो मैथिल संस्था द्वारा मिथिला मे उच्च शिक्षा के जर्जर व्यवस्था के विरुद्ध कमीट्मेंट के संग सशक्त आंदोलन करैत देखि रहल छलहुँ अन्यथा तऽ मैथिल संस्था सब के मंच-माला आ पाग-डोपटासँ आगा बढ़ैत नै देखै छलियै। शिक्षा हमर प्रिय मुद्दा अछि आ हमर माननाइ अछि जे अपन परिवार, समाज, राज्य आ देश के प्रगति नीक शिक्षा व्यवस्थेसँ संभव छै, ताहि लेल हम ऐ आंदोलन के बहुत गर्मजोशी आ उत्साह के संग समर्थन देने रही। ई एकटा सफल आंदोलन कहल जा सकय अछि किए कि एकरा बाद एलएनएमयू के सत्र आ परीक्षा व्यवस्था मे सुधार देखल गेल छल। आब एमएसयू मिथिला के सामाजिक आ छात्र के रूप मे अपन विशिष्ट पहिचान बनाब' लागल छल आ दरभंगा एयरपोर्ट, रांची-जयनगर ट्रेन, रोजगार इन मिथिला, इन्वेस्ट इन मिथिला, चिन्नी मिल, दरभंगा एम्स आदि आदि विषय के लऽ कऽ लगातार एक्टिव होमय लागल आ सशक्त सेहो। अगस्त 2018 मे एमएसयू अपन विस्तार आभियान के तहत पंचायत जोड़ऽ के अभियान चलेलक जै मे मिथिलाक विभिन्न जिला के पंचायत सब मे प्रचार अभियान कऽ लोक सबकेँ विभिन्न मुद्दा के प्रति जागरूक करबाक आ लोक सब के संस्था से जोड़बाक सफल अभियान चलाओल गेल छल। ऐ दौरान एमएसयू के प्रसार आ नव उर्जा देखि वर्तमान राष्ट्रीय सत्तारूढ़ दल के नेता, कार्यकर्ता आ सपोर्टर सब मे एमएसयू मे एकटा पिछलग्गू संस्था बनबाक संभावना देखायल छल (एना हमरा प्रतीत होइ अछि)। 2019 मे आम चुनाव छल। एहन मे एमएसयू के उर्जा के दोहन के साइत कोनो रणनीति बनि रहल छल। मुदा एमएसयू चुनाव के दौरान अपन इंडिविजुअल स्टेटमेंट, आ मिथिला के मुद्दा के आधार पर सपोर्ट या विरोध के रुख देखा के नै सिर्फ हिनकर सबहक उम्मीद पर पानि फेरि देलक अपितु अपन अलग राजनैतिक पहचान आ पथ के संकेत सेहो दऽ देने छल। एकर परिणाम स्वरूप ई भेल जे बहुते एहन लोक सब जे एखन तक ऐ संस्था आ एकरा से जुडल सदस्य सब के प्रशंसा के पुल बान्हि रहल छलाह से सब आब हिनका सब के गरियाब' लगलाह, पीलिया रोग (पीयर रंगक वस्त्रक कारण) तऽ कि तऽ कहाँ कहनाइ शुरू कऽ देने छलाह। मुदा एमएसयू अपन अलग बाट धेने रहल। मई 2019 मे एमएसयू एकटा आर ज्वलंत मुद्दा (मिथिला मे जल संकट) आ पोखरि सब के अतिक्रमण के लऽ कऽ #पोखरि_बचाउ जन जागरूकता अभियान चलेने छल। इहो हमर कंसर्न के मुद्दा छल आ ऐ अभियान मे भाग नेने रही। अगस्त 2017 के बाढ़ि राहत के बाद एमएसयू के एकटा आर सराहनीय राहत कार्य जून 2019 मे चमकी बुखार के दौरान देखल गेल छल। फेर कोरोना आदि काल मे शनैः शनैः संस्था मिथिला के किछु क्षेत्र आ दिल्ली-मुंबई महानगर मे अपन प्रभाव आ कार्य से सामाजिक आ राजनैतिक दुनू क्षेत्र मे अपन हस्तक्षेप देखेबा मे सक्षम रहल। पिछला पंचायती चुनाव मे एमएसयू किछु जिला मे बढि-चढ़ि कऽ हिस्सा लेलक आ जिला पार्षद, सरपंच सहित अनेकों पद पर एमएसयू के आ एमएसयू समर्थित दर्जनो उम्मीदवार अपन विजय पताका फहरा कऽ साबित केलनि जे ऐ संस्था के राजनैतिक इच्छाशक्ति सेहो खूब मजगूत छैक आ राजनैतिक जन समर्थन भेटनाइ चालू भऽ गेल छैक। ऐ मेसँ धीरज कुमार आ सागर नवदिया सन हमर प्रिय नेता गण भी शामिल छथि। जै प्रकारे राजनैतिक रूपसँ ई संस्था मिथिलाक मुद्दा के लऽ कऽ आगू बढ़ि रहल छथि हमरा एकटा उम्मीदक रोशनी लागै अछि यदि भविष्य मे ई शिथिलता, भ्रष्टाचार, जातिवाद आदिक चंगुल मे नै पड़ै तऽ। एमएसयू द्वारा सामाजिक पुनर्जागरण के लेल भी कइएक टा सराहनीय प्रयोग कैल गेल जेना मिथिला के जे आइकनिक इतिहास पुरुष, देवता-पितर, स्वतंत्रता सेनानी आदि भेला हुनका सभ के विषय मे सोशल मीडिया आ जन अभियान के माध्यमसँ समाज मे जागरूकता पैदा करबाक प्रयत्न। 'जानकी नवमी' उत्सव के आयोजन ऐ संदर्भ मे मील के पाथर साबित भऽ रहल अछि। ई उत्सव मैथिल सभ मे एकजुटता, अपन पहिचान आ पुनर्जागरण हेतु एकटा नव पूलक निर्माण कऽ सकैए। एहि उत्सवक शुरुआत के तुलना हम लोकमान्य तिलक जी द्वारा महाराष्ट्र मे शुरू कैल गणेश उत्सव से करऽ चाहब। हम ऐ संस्था के शुभेच्छु छी तथापि वर्तमान मे ऐ संस्थाक किछु कमी जे हमरा नजरि मे अछि से उल्लेख करऽ चाहब: १) यद्यपि हमरा ऐ संस्था के पदाधिकारी या सदस्य सब के व्यवहार मे जातिवादी या सांप्रदायिक होबाक कोनो लक्षण नै देखाइ अछि आ नै हम एहन मानै छी, तथापि जे कारण होइक मुदा ऐ संस्था मे एखन समाज के विभिन्न वर्ग/संप्रदाय/महिला आदि के रिप्रेजेंटेशन ओइ अनुपात मे दृष्टिगोचर नै भऽ रहल अछि जे हेबाक चाही। अतः संस्था के ऐ पर विचार करबाक चाही जे ऐ मे समाज के विविध वर्ग के रिप्रेजेंटेशन बढ़ै आ कियौ एकरा विशिष्ट वर्ग या जातिवादी संस्था होबाक आरोप नै लगाबै। २) ठीक एहिना मिथिला के रिप्रेजेंट करबाक दावा करय बला ई संस्था वास्तव मे एखन धरि दरभंगा-मधुबनी-सहरसा आदि जिला तक ही अपन प्रभाव बना सकल अछि। मिथिला के बहुत रास जिला मे एखन एकर कोनो प्रभाव नै अछि। हमर गृह जिला बेगूसराय के लेल आदित्य मोहन जी बहुत दिन पहिने कहने छलाह जे बेगूसराय लिंक भेटि गेल जल्दीए संस्था ओतऽ प्रभावी बनत। मुदा एखनो बेगूसराय के गाँव मे लोक एमएसयू के नाम तक नै जानै छै। ऐ मामिला मे भी एमएसयू के मेहनत करबाक दरकार छैक आ अधिकाधिक जिला मे अपन मजबूत उपस्थिति दर्ज करबाक छैक। ३) एकटा आर समस्या जे हमरा नजरि मे छैक ओ ई कि कैक बेर कोनो गलती भेला पर संस्था स्टेप बैक करबा के स्थान पर अपन गलती के डिफ़ेंड करऽ मे लागि जाय छैक। उदाहरण के लेल किछ दिन पहिने मनीष कश्यप नाम के एकटा यूट्यूबर के द्वारा एकटा फेक वीडियो जै मे कहल गेल छल कि तमिलनाडू मे बिहारी मजदूर के काटल जा रहल छैक, एमएसयू ऐ मामला आ तमिलनाडु के विरोध करऽ लेल आंदोलनरत भेल। जल्दीए ई झूठ पकड़ल गेल। आजुक समय मे स्थिति ई छैक जे अक्सरहाँ कियौ फेक न्यूज के शिकार भऽ सकैए। मुदा एकबेर वास्तविकता के भान भेला पर स्टेप बैक करबा मे कोनो खरापी नै छल। मुदा संस्था तथापि नै सिर्फ तमिलनाडू भवन के घेराव पर अड़ल रहल अपितु मनीष कश्यप सन फेक न्यूज फैलबे बला के समर्थन मे आबि गेल। हमरा लागै अछि जे संस्था के ऐसँ बचबाक चाही। ४) किए कि वर्तमान मिथिला के भूमि जहाँ मिथिला के वास्तविक मुद्दा पर बात करय बला बहुत कम संस्था छैक। एमएसयू सन संस्था कदाचित भविष्य मे मिथिलाक राजनीति मे एकटा साकारात्मकता लाबऽ मे सफल सिद्ध भऽ सकै अछि आ एही आशा मे हमरा सन लोक सब एकर मुद्दा आधारित समर्थन करैत रहैत छी आ भविष्य मे बेसी वाइब्रेण्ट बेसी सशक्त आ बेसी प्रभावशाली आ रिजल्ट ओरिएंटेड होथि तकर शुभकामना दैत छी। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.९.आचार्य रामानंद मंडल- मिथिला स्टूडेंट्स यूनियन बनाम मिथिला राज्य! आचार्य रामानंद मंडल मिथिला स्टूडेंट्स यूनियन बनाम मिथिला राज्य! नाउ से बुझाय कि मिथिला स्टूडेंट्स यूनियन (एम एस यू)मिथिला यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स के कोनो यूनियन हय। धीरे धीरे जानकारी भेल कि २०१५ स्थापित ई मिथिला क्षेत्र के विद्यार्थी के गैर राजनीतिक स्टूडेंट्स यूनियन हय। परंतु ई यूनियन पूरा मिथिला के आच्छादित त नहिये करैय हय। विशेषकर मधुबनी -दरभंगा मे प्रभावित हय। स्टूडेंट्स यूनियन स्टूडेंट्स के लेल कम ,राजनीतिक आंदोलन के लेल ज्यादा सक्रिय दिखाई पड़ैत हय। उदाहरण के लेल मिथिला राज्य निर्माण आंदोलन। कुछ महिना पहिले दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कैले रहल। मिथिला के कुछ सांस्कृतिक संघ संगठन बिना बैनर के शामिल भेल रहय। परंतु प्रदर्शन प्रभावकारी साबित न भेल।एकर कारन ई कि एक त यूनिन मिथिला के सभ जिला के शामिल न कर पायल। संगठन विस्तार के अभाव खटकल। सर्वमान्य नेतृत्व न दिखाई पड़ल। यूनियन मे सर्ववर्ग के प्रतिनिधि के अभाव दिखल। कोनो यूनियन के आंदोलन के सफलता सभ वर्ग के भागीदारी आ विश्वास पर निर्भर करैय हय। उदाहरण स्वरूप झारखंड आ तेलंगाना। आंदोलन तब सफल भेलैय जब सभ वर्ग के भागीदारी, विश्वास आ सर्वमान्य नेतृत्व मिललय। भारत के आजादी तब मिललय जब गांधी जी के नेतृत्व मे आंदोलन भेलैय। ओना त आंदोलन १८५७ से होइत रहय, परंतु आजादी १९४७मे मिललय। आजादी के दोसर आंदोलन जे छात्र आंदोलन रहय। ओहो गुजरात के छोट सन छात्र आंदोलन। जब १९७४ मे लोकनायक जयप्रकाश नारायण जैसन नेतृत्व मिललय तब जाके आपातकाल के विरुद्ध रास्ट्रस्तरीय संपूर्ण क्रांति आंदोलन १९७७ मे सफल भेलैय। मिथिला स्टूडेंट्स यूनियन के राज्य निर्माण आंदोलन के सफलता के लेल पुनर्विचार करे के आवश्यकता जान पड़ैय हय। सभ से पहिले यूनियन के नारा -दे जान कि ले जान पर विचार। ओना ई हिंसात्मक लगैय हय। यूनियन के सभ जिला में प्रखंड स्तर तक गठन करे के आवश्यकता हय। तब सर्वसम्मति से राज्य कार्यकारिणी के गठन। मिथिला स्टूडेंट्स यूनियन के सांस्कृतिक आ राजनीतिक संगठन से मिलके एगो मजबूत मोर्चा बनाना आवश्यक हय। तब कार्यक्रम आ सबसे महत्वपूर्ण राज्यस्तरीय नेतृत्व जे छात्र से विलगो हो सकैय हय। जे सर्वमान्य आ प्रभावकारी व्यक्तित्व के होय। तबे जाके मिथिला स्टूडेंट्स यूनियन के मिथिला राज्य निर्माण आंदोलन के सफलता असंदिग्ध रहत। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.१०.डॉ कैलाश कुमार मिश्र-मिथिला स्टूडेंट यूनियन: दशा, दिशा आ नेतृत्व डॉ कैलाश कुमार मिश्र-संपर्क-9810326983 मिथिला स्टूडेंट यूनियन: दशा, दिशा आ नेतृत्व मिथिला स्टूडेंट यूनियन (एम एस यू) केर प्रयोग जड़ि परक मैथिल आ प्रवासी मैथिल लेल एक मिश्रित अनुभूति अनलक। अहि पर किछु लिखबा सँ पुर्व किछु बात स्पष्ट करब अनिवार्य। हमरा अगर पुछल जाय जे मिथिला आ मैथिल लेल कार्य करय बला संस्था सभ मे सभ सँ उत्तम अहां ककरा मनैत छी, त हमर उत्तर हएत "मिथिला स्टूडेंट यूनियन "। यद्यपि ई उत्तर अहि द्वारे होयत जे मिथिला आ मैथिली लेल कुनो संस्था बहुत गम्भीर नहि अछि। बीच मे सखी बहिनपा समूह सँ आश जागल छल मुदा ओ सभ रचनात्मक शुन्य आ पूर्णकालिक उत्सवजन्य समूह बनल जा रहल छथि। मिथिला स्टूडेंट यूनियन बाढि आ किछु हद तक विमारी आ कोरोना काल मे यथासंभव नीक काज केने अछि मुदा एकर दिशा जेना गम्भीर नहि रहल हो। व्यक्ति विशेष एकरा पर हावी रहल छथि। व्यक्ति विशेष मे अधिकांश लोक बिलो एवरेज स्तर केर छथि। ई विद्यार्थी केर एहेन संस्था अछि जाहि मे विद्यार्थी कम आ अन्य लोक अधिक छथि। नीक कॉलेज, स्थान केर विद्यार्थी, गम्भीर विद्यार्थी आ सब वर्गक विद्यार्थी एहि संस्था सँ सतत दूरी बनेने रहैत छथि। आरो बहूत बात सब अछि। चलू प्रारम्भ नीक द्रष्टव्य सँ करैत छी। एम् एस यू पहिल बेर एक सेतू बनल प्रवासी मैथिल आ जड़ि मे रहैत मैथिल केर बीच। पहिल बेर एहि संस्था केर सदस्य लोकनि मधुबनी, दरभंगा केर सीमा रेखा सं नैमित्तिक सही मुदा मिथिलाक आन सांस्कृतिक सह भौगोलिक क्षेत्रक लोक के प्रतिनिधि बनेलक। पहिल बेर गंभीरता संग थोड़बे संख्या मे सही मुदा ब्राह्मण आ कायस्थ जाति के अलावे अन्य जाति, अनुसूचित जाति आदि के लोकक समावेश केलक। शनैः - शनेः ई सब कार्यक विस्तार सेहो केलक। संस्था केर कार्यकारिणी संग अनुभवी, उद्योगपति, सांस्कृतिक आ सामाजिक लोक के अपन एडवाइजरी मण्डल मे नीतिगत बात आ विचार लेल रखलक। ई सभ प्रजातान्त्रिक ढांचा के मजबूत करैत ई निर्णय लेलक कोनो व्यक्ति एक बेर सं अधिक अध्यक्ष नहि रहत। नहुँ - नहुँ किछु स्त्रीगण सब सेहो एहि संस्था सँ जुड़े लगलीह। पहिल बेर ई संस्था समस्त मिथिला भू-भाग केर भाषा, साहित्य, संस्कृति, इंफ्रास्ट्रक्टरल डेवलपमेंट, रेल, सड़क, बिजली, हवाई जहाज, रोजगार, बंद पड़ल चीनी मील, जूट मील, वस्त्र मील आदि लेल माउथ पीस बनल। किताबी बात जन -जन लेल जनतब केर विषय बनल गेल। पहिल बेर एकर कार्यकर्त्ता अपना लेल ड्रेस कोड विकसित केलक (पियरका) आ पहिलबेर युवा जोश आ उग्रता प्रदर्शित केलक। ई दू डेग एम् एस यू लेल रामवाण भेलैक। पहिल बेर किछु करू अथवा मरू विचारधारा केर युवक एहि संस्था सं जुड़ल जाहि पंडौल सं पटना धरि आ दरभंगा सँ दिल्ली धरि लोक आ सरकारी तंत्र मे एक बात गेलैक जे ई सब अपन धरती, अपन लोक, अपन भाषा, संस्कृति, आ क्षेत्रक विकास लेल उग्रो रूप धारण करैत बहुत आगा धरि जा सकैत अछि। पहिल बेर अहि तरहेँ मैथिल सभक चूड़ा दही खाइत आ सुस्त रहैत इमेज सँ क्रन्तिकारी केर इमेज केर मेकिंग शुरू भेल। सब क्षेत्रक लोक उदार होइत एहि संस्था संग जुड़े लगलाह। यद्यपि विद्वान वर्ग नहिये जकाँ अएलाह। किछु एक्टिविस्ट्स सब जरूर आगा अएलाह। अहि संस्था केर कर्णधार सब नहुँ-नहुँ अन्य संस्था सब संग समन्वय बनाबय लगलनि। काज आगा बढ़ैत गेल। ई मिथिला स्टूडेंट यूनियन केर प्रभाव छल जे दिल्ली आ दरभंगा केर संस्था जे लोक सभ परिवार केर पॉकेट केर संस्था जकाँ सुस्त भेल चलबैत छलाह से सब एकाएक साकांक्ष भ गेलाह। अखिल भारतीय मिथिला संघक त बहुत हद धरि जीर्णोद्धार भ गेलैक। एतबे नहि मिथिला स्टूडेंट यूनियन केर सेनानी सब बिहार आ पूर्वी उत्तर प्रदेशक अन्य भाषा आ बोली जेना कि भोजपुरी, मगही, अवधी आदि लेल प्रमाण आ अनुकरणीय दृष्टान्त बनल गेल। किछु लोक एहि कारणे सेहो एहि संस्था केर सेनानी सब संग ईर्ष्या करय लागल मुदा, मिथिला स्टूडेंट यूनियन केर काज चलैत रहलैक। समय चलैत रहलैक। समय बढ़ैत रहलैक। चलैत आ बढ़ैत समयक गति सं संस्था गतिमान होइत रहल। बेगूसराय, सहरसा, सुपौल, कोशी अर्थात मिथिला केर पोर-पोर सं अपना आपके जोड़ैत रहल। आब किछु बात जे हमरा गलत लगैत अछि तकरा दिस ध्यान देब सेहो आवश्यक अछि। मिथिला स्टूडेंट यूनियन चाहियो क ब्रहमणकेंद्रित आ ब्राह्मण सँ सम्पोषित संस्था बनल रहल अछि। एखन धरि दरियादिली देखबैत एकौ टा अध्यक्ष अन्य जाति अथवा वर्ग किंवा समुदाय केर लोक केँ नहि देल गेल अछि। ब्राह्मणेतर जाति केर लोक आ विद्यार्थी मे एखनो ई बात घर केने छैक जे सांस्कृतिक गतिविधि पर ब्राह्मण आ ताहू मे दरभंगा मधुबनी केर ब्राह्मण केर एकक्षत्र राज्य छनि। दुर्भाग्य सँ एम एस यू एहि मान्यता के निरर्थक साबित नहि क सकल। उलटे स्थापना वर्ष सँ आई धरि केवल दरभंगा आ मधुबनी ज़िला केर ब्राह्मण एकर अध्यक्ष बनैत रहलनि। परिणाम ई भेल जे दरभंगा मधुबनी केर अलावे अन्य ज़िला केर लोक आ ब्राह्मणेतर जाति आ समुदाय एहि संस्था सँ अपना आपके सहजता सँ नहि जोड़ि पाबि रहल अछि। एक बात अवश्य भेल छैक जे साहित्य आ संस्कृति केर क्षेत्र मे ब्राह्मणेतर जाति केर लोक आब साकांक्ष भेल जा रहल छथि। साहित्य अकादमी केर संयोजक नचिकेता जी बनल छथि। पहिल बेर सहरसा (सुपौल आदि) केर लोक, सब वर्ग केर प्रतिनिधि केर चयन ओ केलनि अछि। जगदीश प्रसाद मण्डल केर साहित्य अकादमी भेटब सेहो एक नव सांस्कृतिक उन्नयन केर परिचायक अछि। पहिल बेर नव रत्न केर चयन मे लोक सही व्यक्तित्व केर आभा देख रहल अछि। स्वतंत्र मिथिला राज्य लेल सेहो आब ब्राह्मणेतर जाति केर लोक आगा आबि रहल छथि। विशेष रूप सँ जाहि तरहेँ श्री रोहित यादव एवं अन्य युवक मिथिला केर गामे गाम घूमि लोक सभक ध्यान स्वतंत्र मिथिला राज्य लेल जगा रहल छथि से अनुकरणीय लागि रहल अछि। मुदा एहि परिवर्तन मे मिथिला स्टूडेंट यूनियन केर कूनो महत्वपूर्ण योगदान नहि छैक। इमहर दू तीन वर्ष सँ मिथिला केर आइडेंटिटी के सीता सँग जोड़बाक प्रयास भ रहल अछि। एहि बेर जेना अनेक संस्था संग मिथिला स्टूडेंट यूनियन आ गाम घरक संस्था सब जानकी नवमी पर जे कार्य कएलनि अछि ताहि सं लगैत अछि जे बहुत शीघ्र जानकी नवमी भारत आ नेपाल केर मिथिला लेल कल्चरल आइडेंटिटी केर सर्वमान्य उत्सव बनि जाएत जेना बैशाखी पँजाब लेल। अगर तटस्थ भेल देखी त एहि कार्य लेल अनेक संस्था संग मिथिला स्टूडेंट यूनियन सेहो अछि। कुनो ई कल्पना एकरे मात्र नहि छैक। से जे हो, सहयात्री त बनिए रहल छैक। मिथिला स्टूडेंट यूनियन केर जखन निर्माण केर शैशव अवस्था रहैक त संविधान मे प्रावधान रहैक जे एक व्यक्ति मात्र एक साल लेल अध्यक्ष हेताह। दोसर साल अर्थात प्रति वर्ष नव लोकक चयन (चुनाव) द्वारे हएत। मुदा किछुए दिनक बात एहि अनुच्छेद मे संशोधन भेलैक आ लोक आब 2 वर्ष धरि चयनित भ रहल छथि। ई कुनो उत्कीर्णा बला बात नहि भेल। सखी बहिनपा केर विस्तार आ महिला वर्ग में उत्साह देखैत लागि रहल अछि जे मैथिलानी आगा आबि रहल छथि। मिथिला स्टूडेंट यूनियन मुदा एक एहेन महिला केर चयन नहि क सकल अथवा नहि करय चाहैत अछि जे मिथिला स्टूडेंट यूनियन केर भार वहन क सकथि। अगर कुनो महिला एकर अध्यक्ष भ जाथि त महिला वर्ग मे क्रान्ति आबि सकैत अछि संगहि संस्था केर काया पलट भ सकैत छैक। मिथिला मैथिली केर एक बिडंबना रहल अछि जे मैथिली साहित्य के छोड़ि अन्य विद्वान वर्ग जेना कि दर्शन शास्त्र, राजनीति विज्ञान, इतिहास, समाजशास्त्र, भूगोल, अर्थशास्त्र, अंग्रेजी (भाषा आओर साहित्य) प्रबंधन आदि कुनो तरहक साहित्यिक आ सांस्कृतिक गतिविधि सँ उदासीन रहैत छथि। दुर्भाग्य सँ कुनो संस्था हुनका सभके अनबाक विशेष यत्नो नहि केलक अछि। अगर दिल्ली केर बात करी त 56 साल सँ अखिल भारतीय मिथिला संघ काज क रहल अछि। दिल्ली केर प्रथम उपराजयपाल छलाह आदित्यनाथ झा। हुनकर मैथिली प्रेम सब जनैत छी तथापि अखिल भारतीय मिथिला संघ कुनो ढ़ंग केर स्थान पर संस्था लेल ज़मीन नहि आबंटित करा सकल। कॉमरेड भोगेन्द्र झा शुरू सँ अंत धरि अखिल भारतीय मिथिला संघ के पॉकेट केर संस्था बना मज़दूर यूनियन जकाँ चलबैत रहलनि। दिल्ली यूनिवर्सिटी, जे एन यू, आई आई टी आदि केर विद्वान सभ अहि संस्था लेल कुनो उपयोग केर प्राणी नहि बुझल गेलाह। बाद मे की स्थिति भेल आ एखन कोना अछि तकरा सभ कियोक जनैत छी। गलती यद्यपि दुनू पक्ष सँ अछि। अगर झारखण्ड, उत्तराखण्ड आदि केर स्वतंत्र राज्य मे आबय केर इतिहास पढ़ब त आश्चर्य लागत जे कोना विद्वान, मीडियाकर्मी, विद्यार्थी, प्रवासी आ देशी, स्त्री आ पुरुष सभ कियो 100 प्रतिशत मनोयोग सँ लागल छल। मुदा एहेन एकाग्रता हमरालोकनि मे नहि अछि। ई कमी अथवा दोख मिथिला स्टूडेंट यूनियन मे सेहो स्पष्ट दृष्टिगोचर भ रहल अछि। एक प्रवृत्ति इहो लागल जे मिथिला स्टूडेंट यूनियन सतत राज्य आ केंद्र सरकार केर विरोध आ खाश राजनैतिक दलक विरोधी रहल अछि। ई कने गंभीर मसला थिक। मैथिली आ मिथिला केर विकास के ध्यान रखैत एहेन बात सँ हमरा जनैत परहेज होबाक चाही। अगर अहाँ कुनो राजनैतिक दल सँ विरोधी तेवर रखबैक त भ सकैत अछि जे ओहि दल अथवा आइडियोलॉजी संग साम्य राखयबला विद्यार्थी आ लोक अहाँ सँ दूरी बना ले। मिथिला स्टूडेंट यूनियन मिथिला मूल केर उद्यमी संग सेहो बड्ड सुन्दर नेटवर्क नहि स्थापित क सकल अछि। एहि पर थोड़े गंभीर भय एकरा सुधारल जा सकैत अछि। परामर्शदाता सब तरहक होथि से ध्यान राखक चाही। अध्यक्ष बहुत गंभीर, वेल इन्फोर्मेड, नेतृत्व क्षमता सँ पूर्ण, सहिष्णु, सब संग तालमेल रखनिहार, विनम्र होथि। सतत सिखबाक आकांक्षी होथि त ई संस्था आगा बढ़ि सकैत अछि। ई सब हमर विचार अछि। सहमति आ असहमति पाठक लोकनि के ऊपर छनि। अंततः हमर त यैह सोच अछि जे अतेक कमी के बादो मिथिला स्टूडेंट यूनियन सब संस्था सँ नीक अछि। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.११.लालदेव कामत- एम एस यू केर हश्र लालदेव कामत, संपर्क-०७६३१३९०७६१ एम एस यू केर हश्र सन् २०१५ ई० मेँ दिल्ली स्थित कम्युनिस्ट खेमामे बड़ जोर-शोरसँ भीतरे भीतर एक चर्चा छलैक - एकटा छात्र संगठन मिथिला नाम पर हुअय। से किछ कामरेड लोक युवा वर्गमे एहि गप्पकेँ पसारयमे लागि गेलाह। संगहि ईहो मनमे रोपलनि जे परिवार आ सरकुटुममेसँ किछ नव पीढ़ीक नेतृत्व विकसित करी। एहि संदर्भ ओतयसँ घोषणा पत्र जारी भेल, घोषणापत्र तँ प्रायः बराबरे निकलैत छैक। मिथिला स्टूडेंट यूनियन नामसँ संगठन अनुप मैथिल, आदित्य मोहन,रौशन मैथिल आ नीतीश कर्ण आदि विद्यार्थीगण केँ ई संस्था चलेबाक दायित्व भेटलनि। ई छात्रक विशाल संगठनके रूपमे बिहार - झारखण्डसँ उभरि समक्ष आयल। एहि छात्र संघमे गैर-छात्र जुबक लोक सेहो जुटल रहल। जखन कम्युनिस्ट केर छात्र फेडरेशन मिथिलामे कमजोर पड़ल तँ ऐ संगठनक कर्ताधर्ता लोकनि के बीच किछु सदस्यता बढ़ल आ थोड़ेक छीजनो भेल रहैक। एहि संगठनक उतरोतर विकास होइत गेल। कारण विद्यार्थीगणक शिक्षण समस्यासँ ल' कऽ शिक्षा प्रणाली , रोजगार, मिथिला - मैथिल विषयके हर कालेज- यूनिवर्सिटी धरि चर्चाकेँ अभियान पूर्वक चलाओल जाइत रहलैक। आत्म गौरव बोध सेहो जन जनमे जगलैक। एहि संगठनक प्रभाव देख किछु भाजपाइ सेहो अपन बाल बच्चाकेँ विद्यार्थी हैसियतसँ ऐ मुहिममे ढुकेलक। आब भीतरे भीतर छात्र - छात्राक बीच दू राजनीतिक दलक सिद्धांत सेहो पुनगैत नेतृत्व क्षमताक बले आने संस्था जेंका चन्दा बेहरी दिश उन्मुख होइत देखल गेल। कोनो संघ सोसायटी चलेबाक लेल तँ आर्थिक सहयोग चाहबे करी। एहूमे किछु छात्र प्रवीण भ' गेला जे सार्वजनिक हित लेल चंदा चुटकी करैत अपन निजी लाभ बेशी कमेलनि। सबसँ पैघ उपलब्धि भेलैक जे पुरना जिल्दसँ अलख जगेबाक तथाकथित धन बटोरबाक काज ओरिया गेलनि। एहि प्रसादे निजी प्रसिद्ध आ नीक कन्वेन्ट स्कूल बिहारमे चलैत रहलैन अछि। मुदा ई सब अप्रत्यक्ष काज सुकार्यमे तखन आबि गेल जखन बड़का-बड़काके काजकेँ मिथिला स्टूडेंट्स यूनियन अपना हाथमे लेलक। दि० २१-८-२०२२ केँ पछिला साल संसद मार्गमे जन्तर मन्तरमे एक दिवसीय महाधरणाक कार्यक्रम सफलता पूर्वक सम्पन्न कयल। एहन तरहक " पृथक मिथिला राज्य निर्माण" लेल आइ धरि कोनो नव - पुरान समिति आयोजन नहि क' सकल छलैक। परोक्ष रूपेँ एहि गैर राजनीतिक संगठन केर नेतृत्वकर्ता गणमेसँ सक्रिय भाजपानुमा नेता बनय लेल तरे- तर जोर अजमाइश कय रहलैक अछि, से २०२४ केर लोकसभा आ ०२५ क' विधानसभा चुनावमे आगू देखमे आओत। मिथिला स्टूडेंट यूनियन केर समस्त टीम केँ हार्दिक शुभकामना आ बधाय दैत छीयैन जे मिथिलाक समस्याक समाधान लेल तैयार छथि। भावी पीढी छात्रक भाय आ परिजनके छियैन,ताहीमे सहायक होय लेल एहि तरहक संस्थाक उपयोगिता सराहनीय कहाओल जायत। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.१२.आशीष अनचिन्हार- MSU केर काज एवं हमर अपेक्षा आशीष अनचिन्हार-संपर्क-8876162759 MSU केर काज एवं हमर अपेक्षा विदेह बर्ख जनवरी २००८सँ प्रकाशित होइत अछि आ एहिठाम हरेक लेखक अपन वर्तनी, भाषा, टोनमे रचना लीखि पठाबैत छथि। आ अही कारणसँ विदेह हरेक वर्गमे पहुँचल अछि। विदेहक १५० अंक १५ मार्च २०१४ (पत्रिका लिंक) मे हमर एकटा आलेख छपल छल "तीन टा बिंदु" (फेसबुक लिंक) जाहिमे हम भाषाक मनोविज्ञानक सहारे ई साबित केने रही जे मिथिला-मैथिलीकेँ तोड़बामे पुरस्कारक की भूमिका छै ताहि हिसाबसँ ई मैथिलीमे पहिल प्रयास छलै। एहिसँ पहिने कोनो लेखक-विचारक एहन तथ्य उजागर नहि केने छलाह। बादमे पता चलल जे राजद केर नेता मनोज झाजी २०१८ मे अही बातकेँ उठेलाह तँ खुशी भेल हमरा जे कतहुँ ने कतहुँ हमर विचार जिंदा छै। ईहो खुशी भेल जे भने लोक क्रेडिट नहि दिअए मुदा सही विचार पसरिते छै। आब तँ ईहो देखि रहल छी जे विगत किछु बर्खसँ विदेहक विरोधी लोकनि सभ सेहो यत्र-कुत्र लीखि रहल छथि जे पुरस्कारक कारणे मिथिला-मैथिली टूटल। MSU एकटा छात्र संगठन अछि जकर स्थापना मार्च २०१५ मे भेलै मुदा उपरक बात केर कोन संबंध छै MSU सँ? आ ई संबंध जनबाक लेल MSU केर काज ओकर तौर-तरीका जानए पड़त से हम निच्चा दऽ रहल छी- १) एल एन.एम.यू. मे नियमित शैक्षणिक सत्र लेल आगू बढ़ब- बिहारक हरेक विश्वविद्यालय केर सत्र गड़बड़ रहैत छै जाहि कारणसँ छात्रक उम्र, पाइ आदिक नाश होइत छै। MSU मिथिला विश्वविद्यालयक सत्र ठीक करबाक लेल आगू बढ़ल आ वर्तमानमे सत्र पहिनेसँ बेसी नियमित अछि। २) दरभंगा एयरपोर्टसँ हवाइ सेवा लेल आगू बढ़ब- दरभंगामे एयरपोर्ट जनता लेल हो से बात बहुत पहिनेसँ छलै मुदा ओ मात्र भाषण धरि छलै। MSU एहि मुद्दापर आन्दोलन केलक आ ताही बले जनता लेल एयरपोर्ट सेवा २०२० मे शुरू भेल। ओना ई कहब आसान छै जे सरकार केलकै। मुदा प्रश्न तँ ई छै जे सरकार एतेक बर्खसँ की कऽ रहल छलै। अस्तु ई क्रेडिट MSU केर खातामे अछि। ३) मखान केर जी०आई० टैगिंग 'मिथिला मखान'क नामपर- बिहार सरकार "बिहार मखाना" केर नामसँ जी.आइ टैगिंग करबाक प्रस्ताव देने छल। MSU एहि मुद्दापर आन्दोलन केलक आ वर्तमानने ई "मिथिला मखाना" केर नामसँ देल गेलै। ४) मिथिलाक मूलभूत समस्या-आवश्यकतापर चरणबद्ध आंदोलन :- चिन्नी मिल आंदोलन, पेपर मिल आंदोलन, तमाम बंद पड़ल उद्योग धंधाकेँ चालू करब। मिथिला विकास बोर्ड लेल आंदोलन लेल एखनो ई संस्था आन्दोलन कऽ रहल अछि। उपरक किछु प्रमुख काजक संगे हरेक दिन किछु ने किछु ई संस्था करिते रहैत अछि जाहि कारणसँ जनताक नजरिमे भरोसा एलैए आ सत्ता सेहो एकर आन्दलोनकेँ गंभीरतासँ लैए। ई काज जे उपरमे देलहुँ जे कोना भेलै? ई की एक क्षेत्रक लोकक काज छै वा कि एक भाषाक काज छै वा कि एक जातिक काज छै। अहाँ जखन MSU केर संरचनापर धेआन देबै तँ लागत जे कम्मे स्पीडमे सही एकर संगठनमे हरेक जातिक लोक आबि रहल छै आ तँइ हरेक भाषा ओ क्षेत्र सेहो छै। आ इएह चीज एकरा विदेहसँ संबंधित करैत छै। आ तँइ MSU केर विशेषांक रहितो पहिने हम विदेहक चर्चा केलहुँ। ई तँ छल MSU केर काज आब हमरा सभकेँ MSU सँ जे अपेक्षा अछि से दऽ रहल छी- १) भाषा संबंधी अपेक्षा- MSU पर ई आरोप छै जे ओ मैथिली भाषाक स्थानपर ओ बेसी हिंदीक प्रयोग करैए। हमरा एहि आरोपमे दम नै बुझाइत अछि कारण ई आरोप लगेनिहार सभ अपने साहित्यमे मैथिली-हिंदीमे लिखै छथि अथवा दू भाषामे लिखए बला संग संबंध राखै छथि जाहिसँ हुनका मंच-पुरस्कार भेटैत रहनि। ओना MSU सँ हमर अपेक्षा अछि जे ओ हरेक जिलाक भाषायी टोन सीखए, ओकर शब्दावली सीखए आ ओहि जिला बला सभकेँ भरोसा दैए जे इएह मैथिली छै। एहिसँ भाषाक विस्तार तँ हेबे करतै संगे-संग आन राजनैतिक समस्याक समाधान ज्लदी हेतै। २) अकादमी आ पुरस्कार संबंधी अपेक्षा- जेना कि हम अपन आलेखमे लिखने छी जे कोना अकादमी मिथिलाकेँ खंडित केलकै। तँ मिथिलाक एकीकरण लेल दुइए टा रस्ता छै या तँ अकादमी केर पूरा लोप कऽ देल जाए अथवा मिथिलाक उपेक्षित जिला सभमे लगभग १०० बर्ख धरि पुरस्कार देल जाए (दरभंगा-मधुबनी समेत आन प्रमुख जिलाकेँ एहि १०० बर्खमे कोनो अकादमी पुरस्कार नहि देल जाए)। जा धरि एहन नै हेतै ता धरि MSU वा कि आनो संगठन आबि जेतै मुदा मिथिलाक एकीकरण नै हेतै। हमर सुझाव MSU अकादमी प्रसंगपर मंथन कऽ ओकरा बंद करबाए। ३) MSU अपन कार्यक्रममे न्यून्तम शिक्षा, व्यस्क शिक्षा एवं स्वरोजगारकेँ सभसँ उपर राखए। जँ MSU एहि तीन अपेक्षापर काज कऽ लेलक तँ मिथिला-मैथिली-मैथिलक जे समस्या छै से लगभग ८०-९० प्रतिशत खत्म भऽ जेतै। आ उम्मेद अछि जे ई सभ कहियो ने कहियो हेबे करतै। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.१३.प्रवीण कुमार झा- जनहित परिप्रेक्ष्य मे प्रवीण कुमार झा जनहित परिप्रेक्ष्य मे
प्रिय मैथिल, रोजी-रोटी आ रोजगार के तलाश में हम मैथिल दिल्ली मुंबई सन शहर में अपन घर स हजारों किलोमीटर दूर दोसर दर्जा के जीवन जीबय लेल मजबूर छी आ पैसा कमाय में लागल छी, आइ पलायन के अभिशाप हर... particle of Mithila.स्थिति ई अछि जे हमर गाम के 95% युवा गाम छोड़ि शहर में पलायन क गेल छथि, एकर पाछु मुख्य कारण अछि मिथिला में पूर्ण रोजगार, समुचित शैक्षणिक व्यवस्था आ समृद्ध स्वास्थ्य व्यवस्था के घोर अभाव।
मिथिला दशकों स राजनीतिक रूप स उपेक्षित रहल अछि, एहि स पूर्व कोनो पार्टी मिथिला क हित कए प्राथमिकता नहि देलक आ एकर कायाकल्प लेल जरूरी लागू नहि केलक, जाहि कारण स देश क अन्य भाग विकास क धारा मे आगू बढ़ैत रहल, जखन कि... उल्टा मिथिलाक समृद्धि घटैत गेल।
समस्त मिथिलाक कागज मिल, चीनी मिल, जूट मिल, कपास मिल जेना दर्जनों बंद उद्योग एकर जीवंत उदाहरण अछि, ई सब ओ उद्योग अछि जाहि माध्यमे एक समय मे पूरा मिथिला पनपैत छल आ एहि ठामक लोक किसान आओर समृद्ध भ रहल छल . समय के साथ राजनीतिक उपेक्षा के कारण सब उद्योग बंद भ गेल, जखन अन्य क्षेत्र में नव उद्योग के स्थापना भ रहल छल, ओहि समय मिथिला औद्योगिक विफलता के तरफ बढ़ि रहल छल आ आइयो स्थिति ओहिना अछि |
एहन स्थिति मे ई सोचबाक आवश्यकता अछि जे देशक राजधानी आ सत्ताक केंद्र बिंदु दिल्ली सन शहर मे ई नहि भ' सकैत अछि, जतय 30-35 लाख प्रवासी मैथिल छथि, जाहि मे दिल्ली में सेहो 20- 25 हजार लोक जमा भ जाइत छथि, के नॉर्थ साउथ ब्लॉक में पावर कॉरिडोर स पूछू, हमर इलाका के अधिकार कतय अछि, हमर मिथिला के अधिकार कतय अछि ।
2015 स मिथिला स्टूडेंट यूनियन नामक संस्था के स्थापना भेल जे क्षेत्र आ छात्र के बात करय लेल ई एहन सेना बनि गेल अछि शिक्षित युवा के, जे हाल के समय में एक-एक समस्या के प्रमुखता स उठाबैत आबि रहल अछि आ एहन तरहक विभिन्न सफलता सेहो प्राप्त भेल अछि | .ओना त हम सब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जेना ट्विटर, व्हाट्सएप, मैसेंजर, फेसबुक, टेलीग्राम, इंस्टाग्राम, आदि पर सक्रिय छी मुदा जरूरत अछि। कि हमरा सब क॑ संगठन के हित म॑, संगठनात्मक गतिविधि, संगठनात्मक विचार के प्रसार लेल ई मंचऽ के अधिकतम उपयोग करना चाहियऽ, हमरा ई काम करना चाहियऽ ताकि हम्मं॑ अपनऽ विचारधारा, दृष्टि, मिशन आरू एजेंडा प॑ स्मार्ट तरीका स॑ काम करी सकियै ।
-प्रवीण कुमार झा, जिला प्रधान महासचिव, मिथिला स्टूडेंट यूनियन दरभंगा संग संस्थापक सदस्य:- मिथिलावादी पार्टी, praveenjhakeoti1997@gmail.com, 8507875442 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ऐ अंकक अन्यान्य रचना ३.गद्य खण्ड ३.१.जगदीश प्रसाद मण्डल- सुचिता (धारावाहिक उपन्यास) ३.२.जगदीश प्रसाद मण्डल-अपेछा टुटि गेल (लघुकथा) ३.३.नन्द विलास राय-आवश्यक आवश्यकता ३.४.रबीन्द्र नारायण मिश्र- मातृभूमि (उपन्यास)- ३६-४० म खेप ३.५.कुमार मनोज कश्यप-आकाश-कुसुम ३.६.निर्मला कर्ण- अग्नि शिखा (खेप-२०) ३.७.आचार्य रामानन्द मण्डल-अन्हारक दीप/ बाल बैरागी ३.८.डा. किशन कारीगर-मैथिलीमे गोंधियागिरी ३.९.लालदेव कामत-महा प्रलयक लगीच छैक जनजीवन/ सामाजिक सरोकार केँ नव दिशा दैत उपन्यास/ कविवर बद्रीनाथ राय जीक मादे ३.१०.परमानन्द लाल कर्ण- गीता माहात्म्य ३.१.जगदीश प्रसाद मण्डल- सुचिता (धारावाहिक उपन्यास) जगदीश प्रसाद मण्डल सुचिता (धारावाहिक उपन्यास) 'सुचिता' धारावाहिक रूपेँ छपब प्रारम्भ भेल 'मिथिला दर्शन'मे, जे पहिने प्रिंटमे छपब बन्द भेल आ मात्र पी.डी.एफ. मे ई-प्रकाशित हुअय लागल आ फेर सेहो बन्द भऽ गेल। आ तेँ 'सुचिता'क सेहो छपब/ ई-प्रकाशित हएब बन्द भऽ गेल। अही आलोकमे ई उपन्यास धारावाहिक रूपेँ ई-प्रकाशित कएल जा रहल अछि।- सम्पादक। तेसर पड़ाव भुवनेश्वर एला राधारमणक आइ पनरह दिन छी। जहियासँ राधारमण कमलपुरसँ निकलला तहियासँ अखन धरि गाम बिसैर गेल छला। जे सोभाविको अछिए। किए तँ नव-नव जगहक संग नव-नव काजोक बेवस्था छेलैन्हे। जखन राधारमण घरसँ निकैल टेम्पुपर अपनाकेँ सवार केलैन तखनेसँ मनक विचार वर्तमान बास करए लगलैन, तँए घरक सभ किछु बिसैर अपन जीवन-यात्रा प्रारम्भ केलैन। ओना, नव राज्यक नव जगह भुवनेश्वर छीहे, मुदा ओहनो नव जगह भुवनेश्वर नहियेँ अछि जेकरा कमलपुरक लोक नहि जनैत होइथ। किए तँ छअ मासे बेंतक छड़ी नेने गाम-गामक लोक जगरनथिया गीत गबैत पीढ़ी-दर-पीढ़ी जगरनाथ जाइत-अबैत रहला अछि। तइमे कमलपुर छुटल रहल सेहो बात नहियेँ अछि। तँए भुवनेश्वर अपरिचित जगह कमलपुर-ले नहियेँ अछि। मुदा राधारमण-ले से नहि छैन, तेकरो केना नकारल जा सकैए। गप-सप्पक क्रममे कमलपुरबला एते जनिते छैथ जे भुवनेश्वर उड़ीसा राज्यक जिलो मुख्यालय छी आ राजधानियोँ छीहे। तही जिलामे जगरनाथपुरी सेहो अछि आ समुद्रक कातमे सुर्ज मन्दिर कोनार्क सेहो अछिए। तैसंग कबीरदासक खन्ती समुद्रक कातमे सेहो गाड़ल छैन। जगरनाथो बाबा तेहने छैथ जे सभ दिन नव अन्नक प्रसादो ग्रहण करिते छैथ। भुवनेश्वर पहुँच राधारमण अपन विधिवत जीवन धारण केलैन, जइसँ सरकारी सभ सुविधा भेटबे केलैन, तँए कोनो असुविधा नहियेँ भेलैन। मुदा सभ बेवस्था करैमे राधारमणकेँ एक पख लगिये गेलैन। आइ पनरहम दिन राधारमणकेँ गाम मोन पड़लैन। भाय, जीबैतमे लोक माए-बापकेँ किए ने बिसैर जाइ, मुदा कोनो चोट लगला कि अवघात भेलापर वा आफद-असमानी एलापर लोक सभ किछु बिसैर जाइए, एते तक कि रक्षक भगवानकेँ सेहो बिसैर जाइए, मुदा माए-गइ-माए, बाप-रौ-बाप मुहसँ फुटबे करैए। गाम दिस विचार बढ़िते राधारमण पत्नीपर नजैर खिरौलैन। पत्नीक नव रूप नव चेहरामे देखि पड़लैन। अपन बैसारीक महत्-केँ देखैत, पत्नी जैठाम बच्चा-ले दूध औंट रहल छेली, तइ लगमे पहुँचला। सुवासिनीक, दू सालक बच्चा सुचिता ले, दिन भरिक दूध तैयार होइते मन (विचार करैक) सभ छान-बान तोड़ि विचरण करैत अपन जन्मसँ आइ धरिक जीवनमे दौड़ए लगलैन। मुदा जहिना ओइ दिन माने पिताक मृत्यु दिन, सुवासिनी एतबे बुझने छेली जे माता-पिताक मृत्युमे बेटा-बेटी केना कानैए; तहिना कानि धीरे-धीरे बिसरए लगली। ओना, आइ सुवासिनी ओइ घटनाकेँ जीवनक एकटा घाट बुझि जीवन-बाट बनबए चाहि रहली अछि, तँए विचारक अपन धुन मनक विचारकेँ मथि रहल छेलैन...। तैबीच पत्नीकेँ अपन विचारी बुझि राधारमण बजला- "गामसँ बहरा गेलौं मुदा गामक किछु ने केलौं..! समाजो अड़ियाति कऽ विदा केलैन मुदा एतबो उपराग कियो ने देलैन जे गाममे अहाँक कएल किछु ने अछि। जे ता-जिनगी मन रहैत जाधैर जिनगी रहैत। सेहो ने भेल। आइ मनक बात माने मनमंत्र कहए चाहि रहल छी से सुनब?" जहिना अकसरहाँ लोककेँ ठोरपर बरी पकले रहै छै तहिना सुवासिनीक ठोरपर पकले रहैन। बजली- "अहाँक बात हम कहिया नइ सुनलौं जे एना शंकालु भेल बजै छी..?" ओना, जहिया सुवासिनी आई.ए.क छात्रा छल तहियेसँ राधारमण चिन्हलैन। सुवासिनीक पितासँ, कौलेजक शिक्षक (प्रोफेसर) आ छात्रक बीच जे सम्बन्ध होइए, बस तेतबे राधारमणक सम्बन्ध छेलैन। राधारमणक मनमे एकाएक उठि गेलैन जे गोविन्द बाबूक टुटैत परिवार देखि विचार जगल आकि हुनक मृत्यु? तँए मिरगा जकाँ मन नाचै छेलैन। ओना, नाचबो दू रंगक होइए। पहिल होइए सुर-तान मिला नाचब आ दोसर होइए अनधुन नाचब। मुदा राधारमणक मनक नाच दुनूमे सँ कोनो नहि छेलैन। किए तँ अखन तक माने गोविन्द बाबू ऐठाम जाइ तक, राधारमणक मनमे कोनो एहेन विचार नहि छेलैन जे केहेन परिवार छैन आ कोन स्थितिमे पहुँचत। आ ने यएह छेलैन जे अपनोमे कोनो तरहक बल (सबल) अछि जे किछु मदैत कऽ सकबैन। अन्होनी जकाँ घटना छल जे एकाएक परिस्थितिक सूत्र राधारमणकेँ अराधक बना देलकैन। आराधना (संकल्प) सेहो दू रंगक दू परिस्थितिमे कएल जाइए। एक परिस्थिति भेल जे शान्तचित्तसँ कोनो संकल्प (अराधना) करब आ दोसर होइए अशान्त परिस्थितिमे संकल्प (अराधव) करब। राधारमणक दोसर श्रेणीक छेलैन। पत्नीक मुहसँ माने सुवासिनीक मुहसँ खसल शंकालु शब्द सुनि राधारमण बजला- "कोनो शंकाक निवारने कहिया केलौं जे शंकालु नहि रहब?" ओना, विचारक दौड़मे, जे जीवनक संग दौड़ैए, तइ दृष्टिएँ राधारमण आंशिक परिपक्व भइये गेल छैथ जे सुवासिनी नहि छैथ। तेकर कारणो दुनूक अपन-अपन छैन्हे। विद्याध्ययनक क्रममे ध्रुव जकाँ राधारमण अपने मनकेँ संकल्पित कऽ नेने छला जे प्रशासनिक पद तँ गरथाहक पढ़ब छी मुदा एम.ए. करब तँ थाहल अछिए, तँए कोनो कौलेजे वा हाइये स्कूलक शिक्षक बनब तँ गरथाहमे नहियेँ अछि। जखने कोनो काजक फल आ ओइ काजक प्रक्रियाक बोध केकरो भऽ जाइ छै तखने ओकरो अपन बल जगिते छै जइसँ संकल्पक अनुकूल परिस्थित सेहो निरमित होइते अछि, जेकर उपयोग भेलासँ सफलताक सीढ़ी सेहो भेटते अछि। मुदा से सुवासिनीक जीवनमे घटित नहि भेल छेलैन। ओना, परिवारमे ओहन घटना घटित भेले छेलैन जइसँ परिवार मेटा जाइए। कहैकाल समाजमे हजारो समाजसेवी आ हजारो धर्मात्मासँ गाम भरले रहैए, मुदा परिवारो आ बेकतियो केना मेटा रहल अछि, से देखनिहार कियो ने...। जे बात-विचार राधारमणक मनमे नाचि रहल छेलैन, तँए अनुभवी आ अनअनुभवीक बीचक दूरी मनमे बनले छेलैन। तँए शंकालु हएब सोभाविक भइये जाइए, मुदा सुवासिनीक मनमे सामान्य पति-पत्नीक जे जीवन अछि से छेलैन। जैठाम पतियो बुझै छैथ जे कमजोरसँ कहलापर माने कोनो आदेश देलापर, जँ नहि करती माने पत्नी नहि निमाहती तँ गरमा कऽ माने जोरसँ कहलापर निमाहबे करती, तहिना पत्नियोँ बुझिते छैथ जे जखन दुनू गोरेकेँ जीवन भरि संगे-संग रहैक अछि, तैबीच जँ कोनो तीत-कसाइन होइए ओकरा सहि लेबा चाही। लोक तँ कोनो संकल्पक (व्रतक) पाछू भरि-भरि दिन सहि लइए, तहूमे अपन मिथिला तँ सहनमा देश छीहे जे हरिवासय सन पाबैन, जइमे तीन दिन सहल जाइए, सेहो लोक करिते अछि। ओना, सुवासिनीक विचारकेँ राधारमण सेहो मने-मन मापि रहल छला जे अखन धरिक जे हिनकर जीवन रहलैन, तही अनुकूल ने विचारक सभ प्रक्रिया निरमित भेल हेतैन...। अपन चिन्तन-मननमे राधारमण ओझराए लगला। राधारमणक मनमे उठलैन जे विचारक ओझरी तँ अमती काँट जकाँ झोंझगरो होइए आ खट-मधुर फलो दइयेबला होइए। तैठाम तँ तेहने ने बनि कऽ रहने पार-घाट लगि सकैए, नहि तँ धारक कातमे असगरे बैसल रहब। अपन आ पत्नीक विचारक दूरी राधारमणकेँ तेना झोंझिया देलकैन जे किछु करबो-ले आ किछु सीखबो-ले बाध्य कऽ देलकैन। ओना, राधारमण एक रस्तासँ चोटी (आई.ए.एस.) पर पहुँच गेल छैथ मुदा जिनगीक दोसर-तेसर हजारो बाट ओहन अछिए जेकरा चोटी धरि पहुँचबैक सामर्थ तँ छैन, मुदा से बुझल-गमल नहि छेलैन। ओना, राधारमण विज्ञानक विद्यार्थी कहियो ने रहला, बस ओतबे रहला जेते हाइ स्कूल तक सामान्य ज्ञानक विज्ञान अछि। मुदा तेतेक तँ पढ़ल छैन्हे। तइसँ एते मनमे गरिये गेल छैन जे कला (आर्ट) आ विज्ञानमे अन्तर बेवहारसँ अछि। जँ कोनो बात वा विचार बेवहारिक रूपमे देखल जाए तँ ओइमे ओते अनुपात अन्धविश्वासक जगह विश्वास लइते अछि...। एकाएक राधारमणक मन मनुखक जीवन लग पहुँच गेलैन। जीवन लग पहुँचते अपन कार्यालय मन्दिर जकाँ देखि पड़लैन। केते लोकक जीवन ओइ मन्दिरसँ माने कार्यालयसँ संचालित भऽ रहल अछि? मन आगू घुसैक ओइ सीमा लग पहुँच गेलैन जइ सीमापर कार्यालयक कार्यकर्त्ता ठाढ़ छल। जिनका माध्यमसँ कार्यालय चलि रहल अछि। सबहक अपन-अपन कार्यालय, सबहक अपन-अपन काज...। तैठाम अपनो तँ असगरे छी? हँ, एकटा ओगरवाहक रूपमे प्यून अछि। जे काजोमे आ अपन जीवनोमे सहयोग करिते अछि। जखन बारह बजेक दुपहरियामे रौदक तापसँ तपित भऽ मन घुमए लगैए आ काज करैसँ अनिच्छा होइए, तखन ओकरे माध्यमसँ माने प्यूनेक माध्यमसँ ने एकटा दबाइयक गोली मंगा खाइते छी...। जेना कोनो डकैतीक सुराक भेटने पुलिसक मन खुशी होइए तहिना राधारमणकेँ सेहो खुशी भेलैन। खुशी भेलैन माने राधारमणकेँ मनमे एलैन जे जइ कार्यालयमे छी तइमे सभसँ ऊपर भेलौं, जे एक छोर भेल, मुदा एकर दोसर छोर तँ वएह ने हएत जे ओकर विपरीत अछि। माने जहिना सभसँ ऊपर आई.ए.एस. अफसर भेला, तहिना सभसँ निच्चाँ चपरासी भेल। दरमाहा तँ बीचमे केतेको रंगक अछि, माने स्तरक हिसाबसँ रंग-रंगक। जे अन्तिम सीमा चपरासी लग पहुँच सभसँ कम भऽ जाइए..। अपन प्यून मनमे अबिते राधारमण सुवासिनीकेँ कहलैन- "आइ पएरे घुमैक मन होइए, से संगे चलब?" ओना, बिनु विचार केनहि सुवासिनी लगले-मुँह कहि देलकैन- "किए ने चलब..!" बजला पछाइत सुवासिनीक मन पाछू हटकए लगलैन। हटकैक कारण भेलैन जे पुरुखकेँ की छै, एकटा लूँगी, एकटा गंजी वा कुरता पहीरि केतौ चलि जेता, मुदा अपने केना जाएब। राधारमण सुवासिनीक मनक अत्स-वित्सपर धियान नहियेँ देब नीक बुझलैन। उठि कऽ ठाढ़ होइत बजला- "अहूँ चलू आ सुचिताकेँ सेहो नेने चलियौ। पएरे-पएरे दस डेग तँ ओहो चलिते अछि।" जाबे सुवासिनी विदा होइक नियार-भास केली तैबीच राधारमणक मन अपन प्यून हिम्मतलालपर पहुँच गेलैन। हिम्मतलाल आदिवासी परिवारक अछि। जहियेसँ कार्यालय खुजल तहियेसँ हिम्मतलालक परिवार ओइ कार्यालयसँ जुड़ल रहल अछि। हिम्मतलालक पिता बिसवासलाल नोकरी शुरू केलैन, जिनकर असामयिक निधनपर अनुशंसाक आधारपर हिम्मतलालक बहाली भेल छल। जहिया पितेक गारजनीमे हिम्मतलाल छल तहिये तीनटा धिया-पूता भऽ गेल छेलै, पछाइत दूटा आरो भेलै, कुल मिला कऽ, अखुनका जे परिवार-नियोजनक चार्ट अछि तइसँ ओभर ड्राफ्ट बनियेँ गेल अछि। जइसँ माए लगा आठ गोरेक परिवार छै। राधारमणक डेरासँ हिम्मतलालक घरक दूरी करीब डेढ़ किलो-मीटर अछि। आगू-आगू राधारमण, बीचमे सुचिता आ पाछू-पाछू सुवासिनी विदा भेली। हिम्मतलालक घर लग पहुँच राधारमण एक गोरेकेँ पुछलैन- "हिम्मतलालक घर कोन छिऐन?" तइ बिच्चेमे हिम्मतलाल घासक बोझ माथपर नेने खेतसँ घरपर पहुँचल। राधारमणकेँ देखि बाजल- "साहैब, यएह अपन घर भेल।" कहि घासक बोझ रखि हिम्मतलाल हाँइ-हाँइ कऽ दरबज्जा बहारए लगल। दरबज्जासँ बाहर राधारमण तीनू गोरे अपने, पत्नी आ बेटी ठाढ़ रहला। दरबज्जा बहारि, कुरसी सेरिया हिम्मतलाल राधारमणक बाँहि पकैड़ कऽ आनि कुर्सीपर बैसौलकैन। सुवासिनी सेहो बैसली मुदा सुचिता हिम्मतलालक धिया-पुताक संग ठाढ़ भऽ गेल। आठो गोरे माने हिम्मतलालक परिवारक सभ कियो दरबज्जापर पहुँचल छल। हिम्मतलाल पत्नियोँ आ बच्चोकेँ कहला- "साहैबकेँ प्रणाम करियौन। अपन माए-बाप सभ किछु यएह छैथ।" हिम्मतलालक पत्नी जहिना राधारमणकेँ पएर छुबि गोड़ लगलकैन तहिना सुवासिनीकेँ सेहो गोड़ लगलकैन। ओना, रूक्मिणीक एकछाहा कारी चेहरा देखि सुवासिनीक मन थोड़ेक भटकलैन, मुदा बजली किछु ने। तैबीच राधारमण कुरसीपर सँ सुभद्राकेँ हिम्मतलाल माएकेँ सेहो गोड़ लगैले उठला। जे बात हिम्मतोलाल बुझि गेल आ सुभद्रा सेहो बुझि गेली। आगू बढ़ैत सुभद्रा सेहो घुमिकऽ राधारमणक पएर छुबए चाहली मुदा बाँहि पकैड़ राधारमण बजला- "जहिना अहाँ हिम्मतलालक माए छिऐ तहिना ने हमरो भेलौं। हमर फर्ज बनैए जे हम पएर छुबी।"
ओना, विचारक क्रममे राधारमणकेँ अपन क्रम छेलैन मुदा सुवासिनीक क्रम तइसँ भिन्न छेलैन। राधारमणक विचारक्रम मनुक्खक सीमापर ठाढ़ छेलैन, जखन कि सुवासिनीक विचारमे जाति आ रंग-भेद थोड़ेक दूरी बनौने छेलैन। जइसँ सुवासिनीक मन कछमछाए लगलैन जे कखन ऐठामसँ उठि विदा भऽ जाइ। मुदा राधारमणक मनमे जहिना अपन ससुर माने पत्नीक पिताक परिवार दुर्घटनावस बिलटैक कगारपर पहुँच गेल छैलैन तहिना हिम्मतलालक परिवार सेहो पिताक (बिसवासलालक) अकालमृत्युसँ भेल छल। जइ कार्यालयमे बिसवासलाल काज करैत रहैथ, दू मंजिलाक सीढ़ीपर सँ खसने मृत्यु भेल छेलैन। सात गोरेक परिवारमे छअ गोरे बेसहारा भऽ गेल छेलैन। जखन कि सुवासिनीक परिवारमे, पिताक मृत्युक समय मात्र तीन गोरे सुवासिनी, भाए- मनोज आ माए छेली। राधारमणक मनमे दुनू परिवारक बात एकसंग नाचि रहल छेलैन। मनमे उठलैन- दुनू परिवार केना-केना आजुक सीमापर पहुँचल अछि, तइ विचारकेँ सबहक सोझ राखी, जइसँ एक-दोसर परिवारक सुख-दुख देखा-देखीसँ सीखा-सीखी करत। भाय, परिवार तँ परिवार छी, तहूमे मनुक्खक परिवार, जेकरा माल-जाल जकाँ छान-पगहा नहि लगल छै। सुवासिनीक मनोभावकेँ राधारमण आँकि नेने छला। मुदा शंका ई उठि गेल छेलैन जे बरे किदैन तँ जैतुक के लेत माने ई जे जइ सुवासिनीकेँ हिम्मतलालक परिवारक रंगे-रूप देखि मन भटैक गेल अछि से ओइ परिवारक सुख-दुखकेँ अपन सुख-दुख बुझि अङ्गेज केना सकैए? आ जँ से नहि भेल तँ केतए एलौं तँ केतौ ने सएह हएत...। तैबीच हिम्मतलाल तीनटा प्लेटमे जलखै अनलक। राधारमण दुनू परानीक प्लेट एकरंग सजल छल आ सुचिताक दोसर रंग। दुनू परानी राधारमणक प्लेट जहिना स्वादक हिसाबे मीठ-नमकीनसँ सजल तहिना सुचिताक प्लेट मीठ-मधुरक हिसाबसँ सजल छल। तइ बिच्चेमे हिम्मतलालक पत्नी सासु-ले माने हिम्मतलाल माए ले, सेहो आ पाँचो धिया-पुता-ले सेहो बड़का थारीए-मे आनि रखि देली। यएह तँ दुनियाँक खेल छी, जहिना हिम्मतलालक पूरा परिवार दुनू परानी राधारमणमे देवत्वपन देखि रहल छेलैन तहिना राधारमण हिम्मतलालक परिवारमे की मजमा अछि, तेकरा तजबीज कऽ रहल छला। एक दिस वैधव्य माए अपन पोता-पोतीक संग आ दोसर दिस राधारमण अपन परिवारक संग...। मुदा सुवासिनीक मन उखड़ल-उखड़ल सन छेलैन। अपन रणभूमिक रणकौशलकेँ राधारमण असफल होइक प्रक्रियामे देखि रहल छैथ। माने ई जे जिनका (पत्नीकेँ) जिनगीक भेद बुझबैत एलौं सहए तेहेन उखड़ल-उखड़ल सन भऽ गेली जे बुझि केना पौती? मनक विचारवाण छुटिते राधारमणक मनमे नव चेत एलैन। नवचेत ई एलैन जे पहिने सुवासिनियेक परिवारक वृतान्त उठौलासँ ओ एकाग्र हेती आ अपन प्रतिक्रिया बुझैले हिम्मतलालक परिवार दिस नजैर उठौती। जखने से भेल तखने हिम्मतोलालक परिवार सेहो अपन जीवनक तुलना करैत प्रतिक्रिया देबे करती। बीचमे दुनू गोरे भेलौं, माने अपने आ हिम्मतलाल, हमहूँ सभ अपन-अपन पक्ष रखैत सामंजसक सीमापर पहुँचब। राधारमण नमकीन खा रहल छला आ सुवासिनी नमकीनक कड़ू कम करैले मिठाइ खा रहल छेली। दुनूक विपरीत दिशा देखि हिम्मतलाल बाजल- "साहैब, हमरा सबहक परिवार तँ सहजे सबदिनसँ गरीब रहल आ अखनो अछि। अहाँ सन राजाकेँ केना दुआरपर सुआगत कऽ सकै छी, मुदा मिथिलाक धरणीधरक पुण्य कर्म रहलैन जे चाहे विदुरक साग हुअए आकि शबरीक बैर, दुनू बरबरि रहल अछि। तँए मनमे नइ बहुत तँ रतियो भरि खुशी तँ भइये रहल अछि।" ओना, हिम्मतलालक हाथक छुअल प्लेटक भोज्य विन्याससँ राधारमणक मन तृप्ति भऽ चुकल छेलैन जइसँ मनोभावमे थोड़ेक दलदली जरूर आबि गेल छेलैन। जलखै केलाक पछाइत हिम्मतलाल घासक बोझमे सँ एकटा सुखल खढ़ निकालि नहेसँ खरिका बना दुनू गोरेक हाथमे दैत बाजल- "चाह पीब लिअ पछाइत दिन-दुनियाँक गपो-सप्प हेतै आ रातुक रहैक बेवस्था सेहो हेतइ।" रौतुका रहैक नाओं सुनि सुवासिनीक मनमे झड़कवाहि उठलैन मुदा मिठाएल मुँह रहने शब्दे बदैल मुहसँ खसलैन- "जहिना मिथिलाक धरणीधरक चर्च केलौं तहिना चाहक पछाइत पान सेहो रहल अछि।" ओना, जहियासँ राधारमण कार्यालय पकड़लैन तहियासँ कार्यालयक सभ किछु देख-सुनि-गुनि नेने छला जे हिम्मतलालकेँ गुनले छल; किए तँ साल भरिसँ ओइ ऑफिसमे कार्यरत अछि। ओना, दुनियाँक खेलो विचित्र अछिए जे कियो दुनियाँकेँ देख-सुनि-बुझि छोड़ैए तँ कियो बिनु देखनहि छोड़ि दइए। राधारमण अपन कार्यालयकेँ जइ रूपेँ गुनलैन तइसँ विपरीत रूपेँ हिम्मतलाल देख-सुनि कऽ अँकने छल। मुदा अपन मन कहै जे ऐ कार्यालयमे हमर ओतबे भेल जेते उपयोग करै छी, एकटा स्टुल कार्यालयक मुँहक दरबज्जापर लगल अछि, तैपर बैसै छी। बस अपन तेतबे भेल। कार्यालयक सभ वस्तुकेँ गुनन-मनन केलाक पछाइत राधारमण जखन गेटपर बैसल हिम्मतलालक गुनन-मनन करए लगला तखन मनमे जगलैन जे जहिना एकटा खसैत परिवारकेँ सोंगर बनि, कहुना ठाढ़ केलौं, ओकर औझुका रूप की अछि तेकर साक्षी पत्नी छैथ। तहिना कार्यालयक जे चपरासी अछि जेकर वेतन कार्यालयमे सभसँ कम अछि तेकर साक्षी तँ हिम्मतलाले अछि...। मुदा परिवारक तँ ठेकान नहि अछि जे दुनूमे तीन अछि कि तेरह। यएह जिज्ञासा राधारमणक मनकेँ उत्प्रेरित केलकैन जइसँ एकाएक छुट्टी दिनक कार्यक्रम बना हिम्मतलालक घरपर एला। भाय, केकरो ऐठाम, बिना दिन-ठेकान बनौने जखन जाइ छिऐ तखन अपना मनमे ईहो अबधारि लिअ पड़त किने जे गेला पछाइत माने ओइठाम पहुँचला पछाइत जँ धरवारी अपन दुआर-दरबज्जा झाड़ए-बहारए लगैथ तँ बगैल कऽ कातमे ठाढ़ भऽ जाइ। ई नहि जे अपने ठाढ़ छी आ घरवारी ओरियान कऽ रहला अछि तँए अपमान भेल। दरबज्जाक बेवस्था बनत, जखन ओइठाम बैस परिवारक धाराक आदान-प्रदान हएत। भाय, दुनियाँ छी किने, रंग-रंगक नाच-तमाशा, रंग-रंगक मंचपर ठाढ़ भऽ तमसगीर अपन तमासा देखैबतो अछि आ आगूओ देखेबे करत। सुवासिनीक पान सुनि दिअर जकाँ हिम्मतलाल अनठा देलक। अनठबैक कारण भेलै जे जइ मिथिलांचलमे चाह पीआक बेसी अछि तइ मिथिलामे चाहक उपज (उत्पादन) नइ हुअए तखन अनका भरोसे केते दिन चलब? अपन उड़िया चाह पत्तीक चाह बना रूक्मिणी दुनू परानी राधारमणक हाथमे कप पकड़बैत बजली- "मेम सहाएब, उड़िया चाह छी।" ओना, पानसँ पहिने चाहक पूर्ति भेने सुवासिनीक मनमे नवचेत भेलैन। नवचेत ई भेलैन जे मिथिलांचल, जे अंग्रेजक चाह बगने छल आ पान हथियौने रहल, तैठाम पानक अपन उपजवारी सेहो ने छल। हिम्मतलालक पत्नीक मुहसँ सुनल मेम सहाएब अंगरेजीक प्रभाव छी, जे बदैल आइ मैडम भऽ गेल। पान भेला पछाइत हिम्मतलाल, दुनू गोरेक बीच माने राधारमण आ सुवासिनीक बीच बैसल। हिम्मतलालक पाछू पत्नियोँ आ माइयो आबि बैसली। ओना, भीतरे-भीतर जहिना राधारमण हिम्मतलालकेँ देखि रहल छला तहिना हिम्मतलाल सेहो अपना नजरिये राधारमण दुनू परानीकेँ देखैत रहैन। दुनू परिवारक सम्मलित रूप देखि राधारमण बजला- "हिम्मतलाल, परिवारमे के सभ छैथ?" हिम्मतलाल बाजल- "सर, जहिना अहाँकेँ पनरहे दिन ऑफिस-प्रवेशक भेल अछि तहिना हमहूँ कोनो पुरान नहि छी, पैछले सालसँ हमहूँ छी। जहिया नोकरी भेल तहियो आठ गोरेक परिवार छल आ अखनो अछि।" हिम्मतलालक बात सुनि सुवासिनी बजली- "बच्चा कएटा अछि?" हिम्मतलाल- "पाँचटा अछि। तीनटा बेटा आ दूटा बेटी। तैसंग पत्नियोँ अछि आ माइयो अछि।" हिम्मतलालक परिवारसँ सटैत सुवासिनीकेँ देखि राधारमणकेँ अनुकूल परिस्थिति बुझि पड़लैन। जइ अनुकूलताकेँ जीवनोपयोगी बनबैत राधारमण बजला- "हिम्मतलाल, नोकरी केना भेल?" ओना, राधारमणकेँ पछुआरसँ पता चलि गेल छेलैन जे हिम्मतलालक बहाली, पिताक मृत्युक पछाइत अनुशंसापर भेल अछि। हिम्मतलाल बाजल- "सर, जहियासँ कार्यालय बनल तहियेसँ पिताजी नोकरी करैत छेला। करीब बीस-पचीस बर्ख नोकरीकेँ भेल रहैन। कार्यालयेक दू-मंजिलाक सीढ़ीपर सँ खसने मृत्यु भेलैन, पछाइत हमरा नोकरी भेल।" अपन बेवहारिक अनुभवकेँ सबहक सोझमे अनैक खियालसँ राधारमण बजला- "अनुशंसाक बहालीमे बड़ लक्कड़-पेंच लगैए। से ने ते भेल?" ओना, सुवासिनी सेहो सुनबो करै छेली आ मने-मन अपन माएपर नजैर रखि सोचियो रहल छेली। मुदा मुहसँ किछु बाजि नहि रहल छेली। हिम्मतलाल बाजल- "सर, देखै छिऐ जे घर अदहेपर लसैक गेल छल। पिताक मृत्युक पछाइत जे नगद भेटल ओइसँ घर बनेबाक विचार केलौं। पजेबा तँ कीन लेलौं, मुदा नोकरीक दौड़-बरहा आ घूस-पेंचमे तेते चलि गेल जे घर बनाएब पहाड़ जकाँ भऽ गेल।" राधारमण बजला- "मायरामकेँ ते पेंशन भेटैत हएत?" हिम्मतलाल- "हँ सर, ओही पाइसँ तीनटा कोठरी आ दरबज्जा कहुनाकऽ ठाढ़ केलौं हेन। रहै जोकर भऽ गेल, आगू बुझल जेतइ।" कैरम बोर्डक अन्य गोटी जकाँ सुवासिनीक मनमे सेहो अपन परिवारक बेथा-कथा सुनबैक विचार आफन तोड़ए लगलैन। आफनो केना ने तोड़ितैन, सुखकेँ ने लोक चोराकऽ रखए चाहैए मुदा दुख तँ से नहि छी। ओ तँ सतैत मनकेँ दुखबैत रहैए जे दोसरकेँ देखले-सुनला आ कहले-सुनलासँ कमैए। ओना सुवासिनीक हाव-भावसँ राधारमण बुझि गेला जे हुनका मनमे (पत्नीक मनमे) अपन परिवारक घटना सेहो आफन तोड़ि रहल छनि तँए अपन आ हिम्मतलालक विचारक प्रवाह जे अछि ओकरा हिम्मतलाल आ सुवासिनीक माइक मुँहमिलान किए ने कऽ दिऐन जइसँ परिवारक एकरूपताक बोध हेतैन। मनुख कोनौं परिवार वा केहनो परिवारमे किए ने हुअए, अपन ओकातिक अनुकूल परिवारक रहन-सहन किए ने होउ, मुदा जीवन तँ जीवन छी। चाहे ओ मनुखक अपन जीवन माने असगरूआक, होउ आकि पारिवारिक होउ, ओकर तँ अपन बुनियाद छै। जेकरा पुरबैक वस्तु वा अन्य भावकेँ लोक बुनियादी जरूरत बुझैए, से तँ सभकेँ छइहे। रौद-वसातक प्रकोप होउ आकि पानि-पाथरक प्रकोप होउ, मानवीय होउ आकि दैवीय होउ, ओ तँ सभकेँ छइहे। क्रियाशील राधारमण सुवासिनी आ रूक्मिणीक मुँह-मिलानी करैत बजला- "हिम्मत, ऐठाम तोहर माइयो छथुन, जिनका पंच मानि लहुन, एम्हर तोहर पत्नी भेलखुन आ ओम्हर कार्यालयक हिसाबसँ भौजी आ उमेरक हिसाबसँ भावो सुवासिनी भेलखुन, बीचमे हम भलेँ जे होइ मुदा भेलौं तँ तोरा आगूमे बाले-बोध किने, तँए बजै छी, तोहर भौजियो हमरा सड़केपर भेटल छेली।" ओना, राधारमण ताना मारि बाजल छला, मुदा सुवासिनीकेँ तेकर मिसियो भरि कुवाथ नहि भेलैन। बिहुसैत बजली- "बौआ, माने हिम्मतलाल! केना अहाँ दिअरो भेलौं आ भैंसुरो भेलौ?" अपन जड़ियाएल मोटरीक भार उतारि हिम्मतलाल बाजल- "जखन पितातुल्य भाय सहाएब बैसले छैथ तखन हमर बाजब उचित नइ हएत। उचित एतबे हएत जे जिनगीक बतीसम बर्खमे नोकरी शुरू केलौं।" हिम्मतलालकेँ महिला जगतसँ फराक होइत देखि राधारमणक मनमे उठलैन जे नाँहकमे हम फँसि जाएब। जखन तुलसी बाबा हारि मानि कहलैन जे -सबै नचाबै राम गोसाइ- तैठाम अपने कोन खेतक मुड़ै छी..! अपन परिवारपर नजैर तड़ैप कऽ पहुँच गेलैन। पहुँचते मनमे उठलैन जे केते सुन्दर परिवार हिम्मतलालक अछि। भार-मुक्त माए छैन, दुनू परानी हिम्मलाल परिवारक पाछू चौबीसो घन्टा लागल रहैए, तैठाम अप्पन परिवार की अछि! दिन-राति पिताजी अधला छोड़ि नीक नहियेँ कहैत हेता। मुदा से कि अपनेटा बुझने हएत। मुदा ऐठाम तँ सभसँ श्रेष्ठ हमहीं छी। जँ अपन परिवार जकाँ वा अपना जकाँ हिम्मतलालकेँ मानै छी, तखन तँ परिवारो ने अपने जकाँ भेल। दू परिवारक ने समागम भेल अछि। मनमे अबिते राधारमणक मनक विचार फुलाइत निकललैन- "अपना मनक मौजी आ बहुकेँ कहलौं भौजी।" बजैक क्रममे राधारमण पत्नी दिस इशारा केने छला मुदा हिम्मतोलाल तँ कार्यालयक चपरासी सेहो छीहे। भलेँ ओकर विचारक मानि कार्यालयमे नहि होउ, मुदा कोनौं प्रश्नकेँ जँ हलसँ बुझौल जाए तँ ओ उचित नहि बुझि सकै, सेहो केना नइ कहल जाएत। बिजलोका जकाँ बिचमानि भऽ हिम्मतलाल लोकैत बाजल- "से केना यौ भाय सहाएब?" ओना, राधारमण केता दिन ऐ पाँतीक प्रयोग कऽ चुकल छला, तँए मनकथा सेहो एक दिन गाड़ीमे, माने ट्रेनमे बैसले-बैसल गढ़ि लेलैन। सएह बजला- "हिम्मत भाय! हम सब, माने मिथिलामे रहनिहार ऐ सूत्रकेँ मानै छी जे अपनासँ जे ऊपर जीवित छैथ, ओ एक सीमा भेला आ अपन आगू बढ़ैत पीढ़ी जे अछि, ओ भेल दोसर सीमा, मुदा अखन तँ जगरनाथ बाबाक धरतीपर छी, तँए दोसरो परिवारकेँ तँ ओहन स्थान अछिए। तेहने स्थानक दू परानी गाड़ीमे स्लीपर बोगीमे रहैथ। निच्चाँ-ऊपर यात्री चारूकात भरल छल। सभ अपन-अपन परिवारक संग हँसैत बजैत रस्ता काटि रहल छल। मुदा ओ बेचारे माने दुनू परानी, ऐ लोक लाजकेँ मानि जे पति-पत्नीक बीचक प्रेम अपन छी, तँए लोकक बीच प्रदर्शित हएब जरूरी नहि, ओ तँ एकनिष्ट प्रेम छी। तँए दुनू परानीक बीच हँसी-मजाकक कोनो एहेन वातावरणे नहि बनि रहल छल।" मुस्की दैत हिम्मतलाल बाजल- "भाय सहाएब, तखन तँ ओइ बेचाराकेँ औनैनी-पाद (औनाइक दिशा) निकलए लगल हेतइ।"
जहिना समदृष्टिकेँ आनन्द भवन मानल गेल अछि तहिना अपन दृष्टिकेँ एकनिष्ट करैत समेकित होइत राधारमण पत्नी दिस ताकि बजला- "जेहने परिवार हिम्मतलालक अछि तेहने ने अहूँक नैहरक परिवार अछि। हिम्मतलाल माएकेँ परिवारसँ मुक्त बनौने अछि जखन कि अहूँकेँ माए छैथ किने?" ओना, हिम्मतलालक अनुशंसाक नोकरी सुनि मने-मन सुवासिनी सहैम गेल छेली जे राधारमणेक कएल काज माएकेँ अनुशंसापर नोकरी दिआएब भेलैन। तैसंग राधारमण हमरा सन बिलटैत परिवारकेँ थामि जीवनक धारमे परिवारकेँ ठाढ़ कऽ देलैन, एहेन पुरुखकेँ केहेन पुरुख कहल जाए, से आइ धरि मनमे कहाँ उठल..। सुवासिनीक मनक भेल गति साँप-छुछुनैर जकाँ बनि गेलैन। मूस बुझि जँ खाएत तँ परान गमाएत, नहि जँ दाँतसँ पकैड़ छोड़ि देत तँ आन्हर हएत..! जखन आँखिये नइ रहत तखन देखत की। आँखिये ने दुनियोकेँ देखैए आ दुनियोकेँ आँखिये देखबैए। जखने मनुख दुनियेँ जकाँ अपनो दुनियाँ (माने भेल, एक बाहरी दुनियाँ, दोसर भीतरी दुनियाँ) केँ देखए लगत, तखने ने बाहरी दुनियाँक भीतरी दुनियाँ देखए लगत। तहिना जखन कियो भीतरी दुनियाँकेँ देखि लइए तखन बाहरी दुनियाँकेँ सेहो ने देखए चाहैए। भलेँ दुनू दुनियाँक दू रूप किए ने होउ। दू रूपमे भेल एकटा जहिना सत् अछि तहिना दोसर असत्य सेहो अछिए। भलेँ दुनूक रंग-रूप देखैमे एकरंगाहे अछि। ओना, मने-मन सुवासिनी अपनाकेँ भोथियाएल यात्री जकाँ बुझि पड़ि रहल छेली, मुदा जखन पतिक संग छी तखन भोथियाएब केना भेल। अपने विचारक धारमे सुवासिनी कखनो उगै छेली तँ कखनो डुमै सेहो छेली। जहिना तत्वज्ञानी पुरुख तात्विक भेलाक पूर्वक अपन अतात्विक दिशा देखि मने-मन हँसबो करै छैथ आ पश्चातापो करै छैथ जे एते समय माने जीवनक एतेक समय पानिमे दहा-भँसिया गेल, तहिना सुवासिनीक मन सेहो मानि लेलकैन। एकाएक मनमे जिज्ञासा जगलैन जे किए ने हिम्मतलालक जिनगीकेँ लगसँ अधिक-सँ-अधिक जनैक परियास करी। समतुल्य बनि सुवासिनी बजली- "जहियासँ सासुर बास भेल तहियासँ नैहर बिसैर गेलौं। अहाँ केते पढ़ल छी हिम्मत?" “पढ़ब”- सुनि हिम्मतलालक मन चढ़ि उठल। बाजल- "मेम सहाएब, जहिना अपने बी.ए. पास छी, तहिना घरोवाली बी.ए. पास अछि।" “बी.ए. पास”- सुनि सुवासिनी बजली- "तखन दुनू परानी नोकरीए किए ने करै छी?" हिम्मतलाल बाजल- "अहाँक जे प्रश्न अछि तेकर उत्तर दइमे बेसी समय लगत। तँए जँ हम उत्तर दिअ लगी आ बिच्चेमे भाय साहैब कहए लगैथ जे बिलम्म भऽ रहल अछि, चलू। तखन तँ अधमरु साँप जकाँ ने मनक विचार कछ-मछाए लगत। तँए पहिने भाय साहैबसँ पुछि लियौन।" ओना, राधारमणक मनक अभ्यन्तरमे रहैन जे हिम्मतलालक विचार जीवनक पूर्व अवस्थाक एकधुरीक विचार हएत, जे पढ़ल-लिखल रहनौं सुवासिनी नहि बुझि पेब रहली अछि तँए जीवनक जे सत्य अछि तइसँ परिचित भऽ जेती। मुदा एक्के दिनमे केते परिचय कएल जा सकैए। दुनू परिवारक बीच सम्बन्ध केना नीक-सँ-नीकतर बनैत चलत, से भेल मूल विचार। अखन सम्बन्ध स्थापितक प्रथम दिन छी। हिम्मतलालकेँ रोकैत राधारमण बजला- "हिम्मत, गप-सप्प करैक जँ बेसी मन (जिज्ञासा) होइत हुअ ते निचेनसँ आगूओ होइत रहत। तइ ले कोनो अगुताइ अछि। आइ पहिल दिन छी एतबे राखह।" ओना, सुवासिनीक मन कनी चोटेलैन मुदा आगू निचेनसँ गप-सप्प होइत रहत, सुनि शान्ते रहलैन। विचारकेँ बदलैत सुवासिनी बजली- "बाल-बच्चा सभकेँ पढ़बै छी किने?" हिम्मतलाल बाजल- "की पढ़ाएब मेम सहाएब, सोझे इस्कूल धरौने छी। जैठाम पढ़ाइ होइए तैठाम जाइक ओकाइत नहि अछि आ जैठाम अछि, तैठाम पढ़ाइ नइ अछि। तखन तँ लोक जे दुसत जे बेटा-बेटीकेँ इस्कूल देखौने छह कि नहि, तइ खानापूरी करै दुआरे महल्लेक इस्कूलमे पढ़बै छिऐ।" हिम्मतलालक बात सुनि सुवासिनीक मनमे मिसियो भरि हलचल नहि उठलैन। तेकर कारण भेलैन जे सामान्य पढ़ाइक रूप-रेखा जे अछि, बात तही अनुकूल बुझि पड़लैन। मुदा राधारमण हिम्मतलालक श्रमशक्तिकेँ जानि चुकल छला तँए बुझि पड़लैन, हिम्मतलाल अपन शक्तिकेँ छिपबैत बाजल अछि। फेर अपने मन गोहरियबैत विचार देलकैन जे जखन चेले बहीर-मतसून रहत तखन जँ गुरु अपन जान छोड़ा आन्हर बनल नहि रहैथ सेहो तँ नीक नहियेँ हएत। हिम्मतलालक विचारकेँ पोस्ट-मार्टम (चीर-फार) करैत राधारमण बजला- "हिम्मत भाय, किए ने मेम सहाएबकेँ खोलि कऽ कहि दइ छुहुन जे पाँचोमे कएटा स्कूल जाइए आ के कोन किलासमे पढ़ैए?"
राधारमणक विचार सुनि हिम्मतलाल मने-मन तुष्ट भेल जे अगर माए-बाप धिया-पुता-ले किछु समय निर्धारित कऽ पढ़ाएत, पढ़ाएबक अर्थ जीवनक पढ़ाइसँ अछि। तँ ओइ परिवारमे बिलम्मसँ उच्छृंखलता औत। नहियोँ आबि सकैए। मुदा से निर्भर करैए परिवेशपर। राधारमण बजला- "जहिना अखन दुनू परिवारक सभ एकठाम बैस जीवन गाथा गाँथि रहल छी तहिना आगूओ गथैत रहब। अखन चलैक बेर भऽ गेल तँए चलै छी।"
राधारमणक विचार सुनि हिम्मतलाल ‘हँ-हूँ’ किछु ने बाजल। मुदा आँखिक इशारासँ जेना पत्नीकेँ किछु कहि देलक। बैसकसँ उठि रूक्मिणी आँगन आबि अभ्यागतक सुआगतक पाछू लागि गेली। तैबीच हिम्मतलाल बच्चा सभकेँ पढ़बैक अपन बात बाजए लगल- "भरि दिन तँ घरसँ कार्यालयक कार्य तकमे व्यस्त रहै छी, मुदा राति तँ अपन हाथक ने भेल तइमे प्रतिदिन दू घन्टा पाँचो बच्चाकेँ पढ़बैमे लगबै छी। ओना, छोटका तँ अखन बड़ छोट अछि मुदा ओहो एकाध-घन्टा लगमे बैसल रहैए।" हिम्मतलालक बात सुनि सुवासिनीक मनमे सुचिताका प्रति जेना नव आकर्षणक संचार भेलैन। मनमे विचार घोराए लगलैन जे स्कूलमे किछु सीमित विषयक पढ़ाइ होइए, मुदा जिनगी तँ असीमित अछि। ओइ असीमितकेँ परिवारे ने सिखा-पढ़ा सीमित बना सकैए। भेल तँ यएह ने जे अखन तक जे सामाजिक धारामे परिवारक प्रवाह अछि ओइ प्रवाहकेँ, माने पैछला पीढ़ीसँ ऐगला पीढ़ी तक धारनुमा प्रवाहित होइक दायरा बना लेब। जइमे परिवारक संग-संग बेकतियोक जीवन प्रवाहित होइत रहत। जँ से नहि हएत तँ अनेरे परिवारमे विषमता बढ़ैत रहत। माने ई भेल जे जेहेन परिवारक आँट-पेट, आँट-पेटक माने सभ साधनसँ सम्पन्न, रहत तइ हिसाबसँ चलने समता बनल रहैए, मुदा जँ तइ हिसाबकेँ छोड़ि बहवाड़ि बाट पकड़ने विषमताक सम्भावनेटा नहि अनिवार्यता सेहो भइये जाइए।
सुवासिनीकेँ अपन परिवारक बुद्ध जगलैन। बुद्ध ई जगलैन जे जेना आन-आन पत्नीक जीवन अछि जे सोल्होअना पतिपर आश्रितो रहै छैथ आ हुकुमदारिनी (माने आदेश पालक) बनि सेहो जीवन बितबै छैथ, तइसँ तँ ई नीक ने भेल जे जखन पढ़ि-लिखि एक सीढ़ीपर पहुँच गेल छी, तैठाम तक बालो-बच्चाकेँ पढ़ाइये सकै छी। जखन ओकरा पढ़ाएब शुरू करब तखन ने गुरुत्वक बोध हएत...। ओना, विचारक दौड़मे सभ बुझै छी जे माता-पिता बेटा-बेटीक माते-पिता टा नहि, प्रथम गुरु सेहो छैथ। जखने माता-पिता गुरु सेहो बनि जेता तखने ने बाल-बच्चाक यादगार सेहो बनि जेता। ऐठाम एकटा प्रश्न अछि जे पिता आ गुरुमे किछु अन्तरो अछि वा एकरंगाहे भेल? अन्तर अछि! अन्तर ई अछि जे जैठाम माता-पिता पालकक रूपमे छैथ तैठाम गुरु प्रेरक भेला। खाएर जे भेला, मुदा माता-पिता बाल-बच्चाक गुरुआइ नहि कऽ सकै छैथ सेहो बात नहियेँ अछि। कइये सकै छैथ। केनिहार करितो छैथ।
घड़ी देखि राधारमण एकाएक उठि कऽ ठाढ़ होइत बजला- "हिम्मत, आब चलब।" तैबीच रूक्मिणी डालीमे तीनू गोटा-ले माने राधारमण, सुवासिनी आ सुचिता ले, देहक वस्त्र नेने पहुँच राधारमणक आगूमे रखि देली। ओना, सुवासिनी साड़ीक रंग-रूप देखए लगली, मुदा राधारमणक मनमे भादवक अन्हारक मेघौन जकाँ लटकए लगलैन। जहिना भादवमे एक दिस अकाससँ पानि झहरैए तँ दोसर दिस बिजलोका सन शक्तिवान प्रकाश (इजोत) सेहो चमैकते अछि आ तेसर दिस अन्हारो तँ ई कहिते अछि जे यएह तँ भादवक अन्हारक खेल छी, जइमे सबहक जीवन सेहो समाहित अछिए। राधारमण बजला- "हिम्मत भाय, हम तोरा दोसर नहि बुझै छिअ, तैठाम एकर माने वस्त्रक कोन जरूरत अछि..!" अपन परिवारक परम्पराकेँ सुनबैत हिम्मतलाल बाजल- "भाय साहैब, सभ परिवारकेँ अपन-अपन किछु धरोहर होइ छै, सएह छी।" हिम्मतलालक बात सुनि राधारमण अवाक भऽ गेला। अपना दिस तकैत विचारलैन जे हम किछु छी तैयो हिम्मतलालसँ आगू छी, तैठाम जँ एहेन सम्बन्ध ओ स्थापित करए चाहि रहल अछि तँ हमरो आगू बढ़ि सम्बन्धकेँ सुदृढ़ करक चाही। जेते कीमतक वस्त्र अछि तेते तँ अपनो देबा चाही। रस्तो अछिए। जखने धिया-पुता सभ गोड़ लागए लगत तखने ओकरा हाथमे पाइ दैत कहबै- “बौआ, मिठाइ खइहह।“ मुदा एक तँ दरमाहा जोकर काज नहि पूरल अछि, माने अधेमास भेल अछि, तइसँ वेतन नहि भेटल अछि। दोसर, अखन धरि जे परिवार चलि रहल अछि ओ दोसरे ओरियानसँ चलि रहल अछि। अपने तँ टहलैक खियालसँ चलल छेलौं, तँए हाथमे तँ किछु अछि नहि। अपन रस्ता की हएत? लगले राधारमणकेँ मिथिलानीक दृश्य मोन पड़लैन। मोन पड़िते गहना-जेबर-नगदपर धियान गेलैन। अखन तक सुवासिनी माइक देल धरोहर परिवारमे लगौली कहाँ अछि। आँखिक इशारासँ पत्नीकेँ पुछलैन। शिकारी सुवासिनी बुझि गेली। आने स्त्रीगण जकाँ सुवासिनी सेहो अपन नगद-नारायण सेहो संगहि अनने छेली। जहिना हिम्मतलाल-परिवारक नव वस्त्र सभकियो माने तीनू बेकती राधारमण ग्रहण केलैन तहिना वस्त्रक मूल्यक सवाइ लगा बच्चा सबहक हाथमे दैत सुवासिनी हिम्मतलालक घरसँ विदा लेलैन। रस्तामे, सुवासिनी कखनो अपन साड़ीक दाम लगबैत तँ कखनो बच्चा सुचिताक शर्ट-पेंटक, मुदा जखन मन (दाममे) ओझरा जानि तखन राधारमण दिस ताकए लगैत। राधारमण अपन अन्तिम विदाइ माने जइ दिन गामसँ नोकरी दिस विदा भेला, दिन जे सीतानाथ आ गीतानाथसँ गप-सप्प करैक विचार केने छला से मोन पड़लैन। विचारि लेलैन जे डेरापर गेला पछाइत दुनूसँ गप करब।
(जारी---) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.२.जगदीश प्रसाद मण्डल-अपेछा टुटि गेल (लघुकथा) जगदीश प्रसाद मण्डल अपेछा टुटि गेल अपेछा शब्दक प्रयोग अनन्त रूपमे होइए। जेना सामाजिक अपेछा, जतियारे अपेछा, राजनीतिक अपेछा, साम्प्रदायिक अपेछा, धार्मिक अपेछा इत्यादि-इत्यादि। मुदा अपनासभक समाजमे प्राय: दू रूपमे अपेछा शब्दक प्रयोग होइए, पहिल आशाक रूपमे आ दोसर सम्बन्धक रूपमे। आने दिन जकाँ रघुवीर भाय दच्छिनमुहेँक रास्ता पकैड़ भोरमे टहैल रहल छला। अप्पन निश्चित स्थानपर, जैठाम तक सभदिन जाइ छैथ, पहुँच रघुवीर भाय घुमि रहल छला। किछु दूर आगू एलापर शुभकान्तसँ भेँट भेलैन। ओना, शुभकान्तक संग रघुवीर भाइक बीच बेवहारिक कोनो सम्बन्ध नहि छैन। एक गामक पढ़ल-लिखल लोक दुनू छैथ, तँए उमेरक लेहाजसँ रघुवीर भाय थोड़े आगूएसँ बजला- "भाय, गोड़ लगै छी। बहुत दिनक पछाइत भेँट भेलौं, की हाल-चाल अछि?" जहिना बेपारीक एजेन्ट होइए तहिना सरकारी एजेन्ट सेहो होइते अछि, तँए गप-सप्प करैक ढर्रामे दुनूक बीच, दुनूक विशेष गुणक कारणेँ, अन्तर सेहो अछिए। सामान्य भाषामे माने सामाजिक भाषामे हँ-नइ वा नीक-बेजाएकेँ बेराएब आसान होइए, मुदा एजेन्सीक भाषा तँ से नहि होइ छै। ओतए हँ-नहिकेँ बेराएब कठिने नहि, महा कठिन भऽ जाइए। ..एजेन्सीक भाषामे शुभकान्त उत्तर दैत बजला- "भगवान सभकेँ आनन्द राखैथ। अहाँ सभ गाममे रहए दैतौं तखन ने एकठाम रहितौं आ बेसीकाल भेँट-घाँट होइत रहैत, से तँ रहए नइ देलौं। पाँच दिन सेवा निवृत्ति भेना भेल अछि, आब गामेमे रहब। यएह सभ हाल-चाल अछि।" शुभकान्तक विचार सुनि रघुवीर भाइक मनमे उठलैन जे एक गामक धरतीपर दुनू गोरेक जन्म भेल अछि। ऐसँ बेसी कोनो सम्बन्ध अछिए नहि, तखन बेसी गपे-सप्प की करब। रास्ता काटि आगू बढ़ए लगला कि शुभकान्त बजला- "जहिना नब चासक लटारम्भ होइए तहिना ने नब बासो आ बासियोक संग होइते अछि।" रघुवीर भाय बजला- "हँ, से तँ होइते अछि।" चारि दिनक बीच शुभकान्त घरमे रहैसँ लऽ कऽ खाइ-पीबै धरिक जोगार कऽ नेने छला। खाली उठौना दूधक भाँज पछुआएल छेलैन। जँ छपरा-सिवान दिसक नोकरीक जीवन बितौने रहितैथ, तखन दूधोक ओते खगता नहियेँ रहितैन मुदा पूर्णिया जिलामे जीवनक पूर्ण नोकरी बितौलैन तँए दूधो-दही आ माछोक चहैट लगिये गेल छैन। माछक ओरियान तँ भऽ गेल छेलैन जे माछ पहुँचा देतैन। मुदा दूधक जोगार नइ भेल छेलैन। एतबे भाँज लगल छेलैन जे गाममे आठेटा किसान एहेन छैथ जे दूध बेचै छैथ, जइमे रघुवीर भाय सेहो छैथ। रघुवीर भाय बी.ए. पास केलाक पछाइत गामेमे रहि किसानी जीवनकेँ अंगीकार केलैन। मध्यम कोटिक परिवार छैन, माने पाँच बीघा जमीनक जोतबला परिवार। ओना, कोनो तरहक जीवन एहेन नइ होइए जे ब्रह्मा जकाँ निर्माताक नइ होइए, सभ होइते अछि, मुदा किसानी जीवन तँ आरो बेसी सघन रूपमे अछि। खेतक अन्नसँ लऽ कऽ बेख-बुनियादि माने गाछ-बिरीछ आ माल-जालक संग मनुक्खक निर्माण सेहो किसानी जीवनमे अछिए। ऐठाम ई नइ बुझब जे बाप बेटाकेँ कहै छैथ जे तूँ हमर बेटा नइ छिऐँ। जेकर जवाब बेटो दइते छैन जे तोहूँ हम्मर बाप नइ छिअ। मुइला पछाइत ने सराध करबह आ ने गंगा-कोसी आकि पोखरियेमे जल-तर्पण करबह। ऐठाम मनुक्खक निर्माणक माने अछि जे हर माता-पिता, माने पुरुख-नारी दुनू,क दायित्व बनैए जे अप्पन निर्मित सन्तानकेँ नीक मनुक्खक रूपमे परिणत करैथ। खाएर जे से। शुभकान्तक अपन बेवहारिक जिनगी ओहन बनियेँ गेल छेलैन जे केतौ निधोख भऽ कऽ बजै छैथ, भलेँ नीक-बेजाए वा तड़ी-घटी ओइ शब्दक बुझैथ वा नहि। शुभकान्त बजला- "रघुवीर, आब तँ अहीं सभक आशामे गाममे रहब।" ओना, शुभकान्त कण्ठसँ ऊपरसँ बाजल छला, मुदा कण्ठक निच्चाँमे छिपले छेलैन जे गाममे सरकारी तंत्रसँ जुड़ल केते गोरे अछि, भेल तँ अपन सभ दियादी परिवार मिला सात गोरे आ गाम-समाजमे तीन गोरे, तोहूमे दूटा मुँहचोरे अछि। जइमे एकटा गामसँ बाहरे दरभंगामे मकान बना कऽ रहैए। माने भेल जे एहेन संस्कार, माने सत्ताक संस्कार, गामो-घर मे पसरले अछि। ओहने संस्कारक गछारमे शुभकान्त समय बितलैन, जइसँ हुनकर जीवने ओहन बनि गेलैन जे दू-दिसिया माल चोभैत रहला आ तँए दू-दिसिया बालीकक दिशा सेहो छैन्हे। खाएर.. शुभकान्त आखिर किछु छला मुदा भी.एल.डब्ल्यू तँ छेलाहे। शुभकान्तक बोली अकानिते रघुवीर भाइक मनमे जगि चुकल छेलैन जे अखन तक गाम-समाजमे किछु परिवार-विशेषक दब-दबा रहबे कएल अछि। ओना, दब-दबाक सेहो दू रूप अछि, एक अनुरागसँ आ दोसर विरागसँ। ऐठाम हम संन्यासीक चर्च नइ करै छी, तहूमे जे बिनु वैरागेक दिन-राति छिछियाएल घुरै छैथ। ओना, दियादी बँटवारामे शुभकान्तोक एहेन स्थिति बनियेँ गेल छैन जे रहै-जोकर अप्पन घराड़ियो ने छैन जे दुआर-दरबज्जा बन्हता। मुदा शुभकान्त सभ दिनसँ मुँहजोर रहबे केलाह, जइसँ दूटा दियादीक धनक लाभ, माने निवंश होइत परिवारक धन-सम्पैत झींटलैन तँए रहै-जोकर छैन। मिसियो भरि ज्ञान रहितैन तँ कहबो करितैथ आ करबो करितैथ जे दियादी धन दियादक भाग, दियादक हिस्सा। रघुवीर भाय महाभारतक रथक धुरीक चक्का जकाँ समाजक चक्काक धुरीकेँ उल्टाघुमान घुमा अपनाकेँ समाजक बीच ओइ रूपमे स्थापित कऽ नेने छैथ जे अप्पन हाथ-मुट्ठीक बलेँ समाजमे ठाढ़ छैथ। तँए आत्मबलसँ भरल अपन मन छैन्हे। ओना, रघुवीर भाइक मनमे ईहो उठि रहल छेलैन जे अनेरे गप-सप्पमे समय बिताएब उचित नहि, तहूमे अखन शिकारीक सैरपर छी। आगू बढ़ैत रघुवीर भाय बजला- "शुभकान्त भाय, समाजमे सभक आशापर सभ जीबै छैथ। मुदा...।" ओना, शुभकान्तक मनमे अपन पुस्तैनी विचार ठहैक गेलैन मुदा चटसार परक लोक शुभकान्त बिनु समय गमौने, चिल्होरि जकाँ, माने जहिना चिल्होरि वा कौआ छोट बच्चा हाथक रोटी झपैटकऽ उड़ि जाइए, तहिना बजला- "जँ से आशापर नहि जीबैत रहैत तखन एना अखन तक समाज ठाढ़ केना अछि।" बिनु जवाब देने रघुवीर भाय आगू बढ़ए लगला कि स्पष्ट शब्दमे शुभकान्त कहलकैन- "दू किलो दूध सब दिन दिअ।" दूधक नाओं सुनि रघुवीर भाय अप्पन दूधक हिसाबो बैसा आ समाजक दायित्व, समाजक दायित्वक माने नब परिवार वा नब लोककेँ पुरान परिवार वा समझदार बेकतीकेँ सहयोग करब, बुझि बजला- "जखन अप्पन घर वस्तु अछि आ अहाँ नब लोक छी, तखन केना नइ कहब।" जरूरत तँ जरूरत छी, जेकर प्रभाव जीवनपर पड़ैए, तँए मनमे छिलमिलाहट अनिते अछि। शुभकान्तक मनमे छिलमिलाहट छेलैन्हे, बजला- "अखन तँ दूधक समय अछिए, माने दूधो आ माछोक बिकरी-बट्टा भोरेमे शुरू होइए, आइयेसँ शुभ-शुभकऽ शुरू करू।" रघुवीरो भाइक मनमे उठि गेलैन जे दूध भोज्य-पदार्थ छी, अहीपर जीवन ठाढ़ अछि, तँए किए ने मानि ली। परिवारमे जँ दोसर हाथक काज रहैत तँ विचारैयोक समय लेल जा सकै छल। मुदा जे काज अप्पन हाथक अछि, ओकर अधिकार अपने ने राखए पड़त। समाजो तँ समाज छीहे। देखिते छिऐ जे केते घरक जुति मरदनमा अछि आ केते घरक मौगियाही। खाएर जे से। रघुवीर भाय बजला- "अपना ऐठाम चालीस रूपये किलो दूधक दर अछि, तइ हिसाबसँ अस्सी रूपैया प्रतिदिन भेल, एकर लेन-देन केना करब?" परजीवी चाइलिक लोक शुभकान्त छथिए, अप्पन गोड़ा-गफ्तर बैसबैत बजला- "जहियासँ नोकरी शुरू केलौं आ दूध उठौना लिअ लगलौं, तहियासँ महीनावारी हिसाब दैत एलौं हेन।" रघुवीर भाय बजला- "की हिसाब, कनी फड़िछा कऽ कहियौ। एकटा हिसाब अछि जे मास दिनक पाइ पहिने चीजबलाकेँ दऽ देलौं, जइसँ ओकरो जीवन-क्रियामे सुगमता अबैए, दोसर भेल दिनक-दिन लेन-देन आ तेसर भेल महीना दिन वस्तु लेलौं आ पछाइत पाइ देलौं।" जहिना चलाक लोक शास्त्र-पुराणक खिस्सासँ भाषण शुरू करै छैथ तहिना शुभकान्त भाय बजला- "रघुवीर की कहियह, ओइठाम माने पूर्णियामे जे आगत-भागत छल से जखन मोन पड़ैए तँ होइए जे जेना स्वर्गसँ धरतीपर आबि गेलौं हेन।" ओना, रघुवीर भाइक मनमे ठहकलैन जे सरकारी खजाना हाथसँ निकलला पछाइत जेना होइ छै, भरिसक तहिना हिनका भऽ रहल छैन। मुदा अप्पन विचारकेँ अपना मने समेट रघुवीर भाय बजला- "की स्वर्गसँ धरतीपर कहलिऐ भाय?" भाषणमे मोड़ दैत शुभकान्त बजला- "अपना सबहक जे माटि-पानि अछि से जहिना दूध जनमबैक क्षेत्र छी तहिना माछ-मखान सन अमृत वस्तुक क्षेत्र सेहो छीहे, तैठाम जे सुख पूर्णियामे छल से अपना ऐठाम भेटत की नहि.!" शुभकान्तक बोली रघुवीर भाय अकानिकऽ बजला- "रघुवीर भाय, विचारकेँ माने लेन-देनक विचारकेँ आगू बढ़ाउ।" शुभकान्त बजला- "अप्पन यैह सिद्धान्त रहल जे महीना दिन दूध लेला पूरि गेल, पछाइत पाइ देलौं।" रघुवीर भाइक मनमे थोड़ेक तिलमिलाहट एलैन। तिलमिलाहट ई एलैन जे मैट्रिक पास केलाक पछाइत भी.एल.डब्ल्यू.क नोकरी शुभकान्त घरसँ शुरू केलैन, साठि बर्खक पछाइत गाम एला अछि, हम सभ छोट किसानी जिनगीसँ जुड़ल छी, सदिकाल एक ने एक खगता परिवारमे रहिते अछि, तखन जँ अपन गतिशील पूजीकेँ बान्हि दिअए, ई केतौसँ उचित नइ हएत। मुदा नब लोकक संग नब सम्बन्धोक प्रश्न तँ अछिए। अप्पन ओकातिक सीमा देखैत रघुवीर भाय बजला- "महीना दिनक पछाइतिक जे पाइ देब कहै छिऐ, गाम अखनो गाम छी, शहर-बजारक लोक जकाँ नइ कहैए जे पैसा हो तँ चख, नहीं तो रोड पर जा के झख। तीस दिनक उधारकेँ पाँच दिनपर लऽ आनू। पाँच दिन पाइ रूकने हमरो बेसी नोकसान नइ हएत आ अहाँक संग लेन-देनक सम्बन्ध सेहो सभ दिन बनल रहत।" समाजक बेवहारे ने संस्कार निरमबैए। अखन तकक इतिहासक पन्ना यएह ने कहैत आबि रहल अछि जे समाजक विशाल समूह लूटाइत रहल अछि आ अल्प समूह ओकरा धर्म सन भयंकर हथियार आगूमे रखि डरबैत-धमकबैत भावनाक पानि बना पीबैत रहल अछि। खाएर ऐसँ रघुवीर भायकेँ कोन मतलब छैन, मतलब छैन मात्र अप्पन आ अप्पन परिवार भरिक। ओना, रघुवीर भाइक मनमे कृष्णक सुदर्शन चक्र जकाँ उठिये रहल छेलैन जे समाजक एक अंग तँ अपनो छीहे, समाज हम्मर विचार किए मानत, मानत तँ तखन जखन ओकरा बोध हेतै जे समाजक एक-एक बेकतीक जिनगी एकैसमी शताब्दीक होइ। बत्ती-खरहीक मड़बासँ आगू बढ़ि हवाइये जहाज परक विवाह-मण्डप किए ने बनइ। समाजक बीच बेकतीक एतेक तँ कर्तव्य अछिए ने जे समाजक बीच परिवार आ परिवारक बीच बेक्त क्रियाकेँ अपन पारिवारिक क्रिया बना समाजमे अपनो आ परिवारोकेँ ठाढ़ करैथ। ओना, रघुवीर भाइक मन कहबे करैन जे जइ परिवारक शुभकान्त भाय छैथ ओ परिवार सभदिनसँ चालबाज रहल अछि। मुदा इतिहासक पन्ना तँ वर्तमानक साहित्य नहि भऽ सकैए, ओ भविष्यमे हएत, मुदा तेकर ठेकाने कोन। आजुक जे परिवेश अछि ओइ परिवेशमे समाजक बीच मधुर सम्बन्ध केना बनत? बजैसँ बेसी मुड़ी डोलबैत शुभकान्त बजला- "महीना दिनपर पेंशन उठत तखन ने दूधबला, माछबला आकि तरकारीबलाक हिसाब चुकती करब।" ओना, रघुवीर भाइक मनमे तामस सेहो उठलैन। समाजमे एहेन जे बुड़िवान लोक छैथ जे एतबो नइ बुझै छैथ जे गाम-गाममे सड़क बनने गामक पाइनिक निकास प्रभावित भेल, जइसँ गाम-गाममे पाइनिक जमाव भऽ गेल अछि। पाइनिक जमाव भेने अन्न-पानिसँ लऽ कऽ बेख-बुनियादि, माल-जाल सभ प्रभावित भेल अछि। जखन कि गाए-महींसकेँ दूधारू बनबैमे घासक चारा अनिवार्य अछि, मुदा पानिक जमाव भेने चासक चास प्रभावित भेल अछि। एहना स्थितिमे किसानक मुहसँ की निकलतैन? रघुवीर भाय बजला- "शुभकान्त भाय, समाजमे कोनो बेवहार बिना दुनू पक्षक विचारसँ नहि चलत। मनमे एते जिज्ञासा बढ़बे कएल अछि जे अहाँकेँ गाम ऐने एकटा परिवारक वृद्धि भेल। मुदा जँ प्रतिदिनक लेन-देन करी तखन दूध लऽ जाएब नइ तँ नइ आएब।" आगू बिना किछु बजनहि रघुवीर भाय ओइठामसँ आगू बढ़ि गेला। आगू बढ़ला पछाइत की मन फुरलैन कि नइ, हमरा ऐठाम चलि एला। दरबज्जाक आगूमे रघुवीर भायकेँ देखिते बजलौं- "भाय, मन बड़ हरियर बुझि पड़ैए, केतौ जजमनिका हाथ लागल की?" अपना दुनू भाँइमे, माने हमरो आ रघुवीरो भाइक बीच एहेन विचारक सम्बन्ध बनियेँ गेल अछि जे कोन शब्दक माने हँसीक रूपमे अछि आ कोन शब्दक माने गहींरगर अछि, से अपने दुनू भाँइ बुझै छी। रघुवीर भाय कहलैन- "मनोहर, मन हरियर किए ने रहत। जे अपेछा कहियो बनबे ने कएल माने जे सम्बन्ध बेवहारिक रूप लेबे ने केलक, मात्र भावनामे रहल ओ टुटत की। टुटैत तँ अछि ओ जे टुटैबला अछि।" अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.३.नन्द विलास राय-आवश्यक आवश्यकता नन्द विलास राय आवश्यक आवश्यकता दसमा वर्गमे शिक्षक छात्रसभसँ प्रश्न पुछि रहल छला। एकटा छात्र जेकर नाओं दिलिप छल, पुछलखिन- "कहो जी आवश्यकता कितने प्रकार के होते हैं?" दिलिप खड़ा भऽ जवाब देलकैन- "जी, तीन प्रकारक?" शिक्षक बजला- "अच्छा तुम बैठ जाओ।" बगलक छात्रसँ फेर पुछलखिन- "रहीम तुम बतलाओ। तीन प्रकार का कौन-कौन आवश्यकता है?" रहीम खड़ा भऽ कऽ बाजल- "जी, आवश्यक आवश्यकता, आराम सम्बन्धी आवश्यकता आ विलासिता सम्बन्धी आवश्यकता।" शिक्षक बजला- "बहुत अच्छा। तुम बैठ जाओ।" शिक्षक ऐगला छात्रसँ पुछलखिन- "गौतम, तुम एक आवश्यक आवश्यकता का उदाहरण दो।" गौतम बाजल- "सर, मोबाइल रिचार्ज सभसँ पैघ आवश्यक आवश्यकता छी।" अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.४.रबीन्द्र नारायण मिश्र- मातृभूमि (उपन्यास)- ३६-४० म खेप रबीन्द्र नारायण मिश्र मातृभूमि (उपन्यास)- धारावाहिक खेप ३६-४० ३६ उतरबारिटोलक मंदिरसँ सटले नागबाबाकेँ समाधि देल गेल । एहि अवसरपर सौंसे इलाकाक लोक उलटि गेल छल । मास दिनसँ अनशनपर बैसल जयन्त डाक्टरी परामर्शक अवहेलना करैत नागबाबाक अंतिम संस्कारमे उपस्थित छलाह । कालीकान्त आ हुनकर समस्त परिवार सेहो चुपचाप सभकिछु देखैत रहलाह । एहि घटनाक्रमसँ उतरबारिटोल युवकसभ बहुत उत्तेजित रहथि । "नागबाबाक संगे एतेक अन्याय भए गेल आ हमसभ एहिना सहि लेब ,ई भए नहि सकैत अछि ।"-ओ सभ एक-दोसरकेँ कहैत छलाह । पाठशालासँ जुड़ल नव-पुरान समस्त विद्वानसभ ओतए पहुँचि गेल रहथि । दछिनबारिटोलक पढ़ल-लिखल अधिकांश लोक प्रवासी भए गेल रहथि । परदेशमे रहिकए अपन जीवन-यापन करैत छलाह । तथापि अपन गाम-घरक समाचारक टोह लैत रहैत छलाह । से सभ धराधर गाम पहुँचए लगलाह। "अपनसभक गाम एहन तँ नहि छल?"-एक दोसरकेँ ई प्रश्न करथि । मुदा उत्तर ककरो लग नहि छल । एतेक बात भए गेल, मुदा सुधाकरक कतहु पता नहि चलल । पुलिस खानापुरी करैत रहल । सभ बुझैक जे परदेशीसभ कतेक दिन रहतौक? दस दिन -पन्द्रह दिन ,जहाँ छुट्टी खतम हेतैक अपने घसकि जेतौक । तेँ ओकरासभकेँ कहबा-सुनबासँ किछु फरक नहि पड़एबला छलैक। नागबाबाक समाधि देलाक बाद श्रद्धांजलि देबाक हेतु सभसँ पहिने शीला मंचपर अएलीह । अत्यंत भावपूर्ण माहौलमे ओ एलान करैत छथि- "नागबाबाक प्रति सही श्रद्धांजलि इएह होएत जे हमसभ गाममे पाठशालाक स्थापनाक संकल्पकेँ शीघ्र साकार करी । एहि हेतु हम अपन समस्त पैतृक संपत्तिकेँ दान करैत छी । संगहि आजीवन एहि संस्थाक हेतु काज करबाक संकल्प लैत छी ।" शीलाक बात सुनि चारूकातसँ लोकसभ करतल ध्वनि करए लगलाह । तकरबाद कालीकान्त मंचपर अएलाह । ओ घोषणा करैत छथि- "हमर पूर्वज एही गामक छथि । ओ सभ जीविकाक हेतु बाहर भेलाह आ ओतहि बसि गेलाह । मुदा हमरो एहि माटि-पानिक प्रति किछु दायित्व अछि । हम एहिठाम पाठशाला नहि अपितु एकटा अत्यंत आधुनिक विश्वविद्यालयक स्थापनाक प्रस्ताव रखैत छी । ओहि हेतु समस्त आर्थिक सहयोग हम करब । संगे इहो प्रस्ताव करैत छी जे ओकर नाम नागबाबा विश्वविद्यालय राखल जाए ।“ सर्वसम्मतिसँ ई प्रस्ताव मानि लेल गेल । लोकसभ करतल ध्वनिसँ एकर स्वागत केलनि । सभक सहमति देखि कालीकान्त बहुत प्रसन्न रहथि । बातकेँ आगू करैत ओ कहैत छथि- "ई विश्वविद्यालय सभ तरहेँ सुविधा संपन्न होएत । एहिमे ज्ञान-विज्ञानक आधुनिक जानकारी भेटत । " चारूकात हर्षक माहौल छल। नागबाबाक आकस्मिक निधनसँ दुखीलोकसभक मोनमे आब संतोखक भाव छलनि । मुदा जयन्त अखनो ओहिना गंभीर छलाह । लोक हुनका अनशन तोड़बाक आग्रह कए रहल छल मुदा ओ किछु नहि बाजि रहल छलाह । ३७ जहिआसँ मंदिरपरक काण्ड भेल, सुधाकर गाम घुरि नहि आएल । एमहर-ओमहर नुकाइत रहल । यद्यपि पुलिस आ प्रशासनमे ओकर जबरदस्त पहुँचि छलैक,तथापि नागबाबाक आकस्मिक निधनक बाद केओ ओकरा देखए नहि चाहए । “एहि तरहेँ चारूदिस बौआइत ओ कतेक दिन रहि सकत? किछु समाधान तँ ओकरा करैक हेतैक ।“- ई बात ओ मोने-मोन सोचैत छल । एहि चिंतामे कैक राति ओ जगले रहि जाइत छल । निन्न हेबो करैक तँ भोरुकबामे । ओहिराति एहिना बहुत मोसकिलसँ ओ सुतल छल कि सपनाए लागल । ओकरा लगलैक जेना ओकर आत्मा देहसँ निकलि कए कहि रहल छैक- "आब हम तोरा संगे नहि रहि सकैत छी । अन्याय सहबोक एकटा सीमा होइत छैक । पहिने तूँ जयन्तक पाठशालक जगह हरपलह, फेर हुनकर जमीन-जथा लुटि लेलहुन, शीलाक पिताक बैदजीक अकाल मृत्युक कारण सेहो तूँही छलह । बात ओतबे पर नहि रुकल । नागबाबा सन उपकारी समाजसेवीकेँ तूँ झूठ-मूठक मोकदमामे फँसा कए जहल पठा देलहुन आ हालात तेहन भेल जे ओतहि हुनकर प्राण चलि गेल । एतेक अन्याय सहि कए हम तोहर देहमे नहि रहि सकैत छी । तोरा अपन कुकृत्यक दंड भेटबेक चाही।" "कम सँ कम तूँ तँ हमर संग दएह । तूँ हमर आत्मा छह । भरि जिनगी नीक-बेजाएमे हमरा संगे रहलह आ आब जखन सभसँ मोसकिलमे फँसि गेल छी तँ तूँ हमर संग छोड़ि रहल छह ।" "हम कोन उम्मीदसँ तोहर संगे रहू । तोरा केओ नीक बात कहतह से सुनबहक? नहि सुनबहक? दिन-राति लोकक क्षति करएमे लागल रहैत छह । एहनमे हम कोना रहि सकैत छी से तूँही कहह?" "तूँ रुकि जाह । हमरा जे कहबह सएह करब ।" "सही बजैत छह?" "एकदम सही, जे तूँ कहबह सएह करब मुदा तूँ रुकि जाह।" "तूँ तुरंत जयन्त लग जाह आ हुनकर जे जमीन-जायदाद लेने छहुन से वापस कए दहुन । पाठशालाक निर्माणमे सहयोग करहुन । तखने तोरा शांति भेटि सकैत छह ।" अपन आत्माक संग भेल एहि वार्तालापसँ ओकर निन्न एकाएक टुटि गेलैक । ताबे फरीछ भए गेल छल। सुधाकर चोट्टे गाम बिदा भेल । एकसुरे चलैत रहल आ उतरबारिटोलक मंदिरपर जयन्त लग पहुँचि हुनकर पैरपर खसि पड़ल । जे केओ ई दृश्य देखलक से आश्चर्यमे पड़ि गेल । "हमरासँ बहुत अपराध भेल । हम तकर पश्चाताप करए चाहैत छी । पाठशालाक जगह हम वापस करैत छी । अहाँक जे मरौसीक जमीन-जायदाद अछि सेहो वापस करैत छी । आगू अहाँ जे कहब सएह करब । मुदा हमरा मोनसँ माफ कए दिअ जाहिसँ हम शांतिसँ जीबि सकी ।"-सुधाकर बाजल । सुधाकरकेँ ओहिठाम देखि लोकक करमान लागि गेल छल । जयन्त सुधाकरक बात सुनितहुँ मौन छलाह । सभक ध्यान जयन्तपर केन्द्रित छल । ओ अड़ल रहथि। किछु बजबो नहि करथि। हुनकर स्वास्थ्य सेहो खराब भेल जा रहल छलनि। चारूकातसँ लोकसभ जयन्तपर आग्रहपर-आग्रह करैत रहलाह जे ओ आब अनशन तोड़ि देथि । ओ जे कहथिन सएह हेतैक । लोकसभ बहुत आग्रह केलकनि जे ओ किछु तँ कहथि जाहिसँ समाधानक रस्ता ताकल जाए । लोकक बढ़ैत आग्रह देखि जयन्त हाथसँ लिखि कए एकटा पत्र गोविंदक हाथमे देलखिन- "हम अहाँसभक सहयोग आ संघर्षसँ अभिभूत छी । हमरा आब दृढ़ विश्वास अछि जे हमरा लोकनिक संकल्प अवश्य सफल होएत। गाममे विश्वविद्यालयक निर्माण हेबे करत । मुदा हम चाहैत छी जे एहिमे सभ गोटे सामिल होअए, तखने सही मानेमे ई जन आंदोलनक सफलता कहल जा सकैत अछि ।" जयन्त एहि इच्छाक समर्थनमे ओहिठाम उपस्थित हजारों लोक एकस्वरसँ बाजि उठलाह- "हमसभ अहाँक इच्छाक अनुकूल सर्वस्व त्याग करबाक हेतु तैयार छी ।" तकरबाद सामनेमे राखल बड़का सतरंजीपर गहना,रुपैआ,एवम् अन्य मूल्यवान बस्तुसभक बरखा होबए लागल। जकरा लगमे जएह छलैक से निकालि-निकालि कए देबए लागल । देखिते-देखिते करोड़ों टाका जमा भए गेल । कतेको गोटे अपन जमीन-जायदाद दान देबाक हेतु आगू आबि गेलाह । एहन जन समर्थन देखि जयन्त दंग रहि गेलाह । "हम अपन अनशन तोड़ि रहल छी ।" आचार्यजीक हाथे नेबो आ चिन्नीक सरबत पीबि कए जयन्त अपन अनशन समाप्त केलाह । चारूकात लोकसभ प्रसन्न छल । गीत-नाद भए रहल छल । दुनूटोलक लोकसभ कालीकान्तक सहयोगसँ विश्वविद्यालयक स्थापनामे लागि गेलाह । देखिते-देखिते ओहिठामक दृश्य बदलि गेल । लगबे नहि करए जे ओ ओएह गाम अछि जतए जयन्त सन विद्वान लोककेँ ठाढ़ होएब मोसकिल छल । गाममे सबतरि एकहि आबाज प्रतिध्वनित भए रहल छल- “जय मातृभूमि़”! जय जयन्त ! ३८ लखनपुरमे घटल ई घटनासभ सभकेँ उद्वेलित कए देलक। जतए जे केओ प्रबासमे छलाह,गाम-घर छोड़ि आन-आनठाम रहि जीविकोपार्जन करैत छलाह, सभ गामक रुखि लेलाह । सुधाकर कोनो असगरे उदाहरण नहि रहथि । गाम-गाम एहन लोकसभ भरल छथि। कतेको प्रवासी लोकनिक हुनकर अपने लोक घर-घराड़ी,जमीन-जायदादसभपर बकोदृष्टि रखने रहैत छथि । इच्छा इएह रहैत छनि जे जे गेला से गेला ,आब गाम घुरि कए नहि आबथि । भने बाहर छथि । एहि बातक कनिको मात्सर्य नहि जे ओहो एही माटि-पानिक छथि । मिथिलाक संस्कार ओ संस्कृतिसँ ओकरो संतानक जुड़ाव बनल रहैक,तकर कोनो चेष्टा नहि । जखन जड़िए खतम भए जएतैक,बाप-पितामहक ओकर संपत्तिमे हिस्सा हरपि जएबाक हेतु अपने लोक लागल रहतैक, तखन ओ कथी लए कए ठाढ़ रहत । गाममे ककरा लग जाएत,कतए रहत? परिणाम भेल जे प्रवासी लोकनिक गाम आबाजाही क्रमशः समाप्त जकाँ भए गेल । धीया-पूताकेँ तँ गाममे केओ चिन्हबो नहि करैत छैक । ककरा लग बैसत,ककरा संगे खेलाएत। सही मानेमे आब गाम ओकरासभक हेतु परदेश भए गेल छैक । गाम गेलाक बाद मोन उबिआए लगैत छैक,होइत छैक जे कखन भागी । आखिर एना भेलैक किएक ? किछु लोहोक दोख,किछु लोहारोक । जाबे लोक नौकरी करैत रहल,ताबे ओहीमे लागल रहल। मुदा समय तँ बैसल नहि रहत । समय चक्र आगू बढ़ल। मानवीय संबंध शिथिल होइत गेलैक । एहन परिस्थिति गाम-गाम पसरि गेल। लखनपुरोक सएह हाल- चाल । मुदा ई घटनाक्रसँ सभक मोनमे जबरदस्त आघात भेलैक । प्रवासी सभ जतए जे रहए सभ अपन-अपन गाम आएल । पाठशालाक लड़ाइ जयन्तक व्यक्तिगत नहि रहि गेल । ई समाजक अस्मितासँ जुड़ि गेल। सभसँ कमाल केलाह राजीव । हुनकर पूर्वज लखनपुर उतरबारिटोलक छथि । हुनकर बाबा नेनेमे गाममे गरीबीसँ तंग भए भागि गेलखिन । तकरबाद कतए गेलाह,की केलाह ककरो किछु पता नहि चललैक। तकरबाद हुनकर पिता दिल्लीमे भरि जिनगी काज केलखिन आ ओतहि घर बनाए बसि गेलखिन । ओतहि राजीव पढ़ि-लिखि कलक्टर भए गेलाह । गामक बारेमे सुनबे करथि, कहिओ गेल नहि रहथि,किछु देखने नहि रहथि । तथापि अपन माटि-पानिक सिनेह तँ रहबे करनि । संयोग एहन जे हुनकर पोस्टींग लखनपुरक जिला मुख्यालयमे भए गेलनि । राजीवकेँ सुधाकरक खिस्सा नीकसँ बूझल रहनि । अखन धरि ओ जेना-तेना बँचैत रहल छल । पुलिस आ सरकारी महकमामे अपने जोगार बैसा कए गामक लोकसभकेँ परेसान केने रहैत छल। मुदा कहबी छैक जे कर्मक फल भोगहि पड़ैत छैक । सएह भेलैक। राजीव एसपीसँ गप्प कए सुधाकरक फाइलकेँ निकलबओलथि। ओहिमे लिखल रहैक" सुधाकर नामक आदमी कहि नहि कतए चलि गेल अछि, बहुत प्रयासक बादो ओकरा नहि ताकल जा सकल। अस्तु,एहि मामलाकेँ फिलहाल बंद राखल जाए। जखन ओ भेटताह तँ आगूक कारवाइ कएल जाएत ।" राजीवकेँ एसपी से बात कहलखिन । "ओ तँ अखनो गामेमे अछि । पुलिसकेँ नहि भेटबाक सबाले नहि छैक । जरूर केओ ओकरा बँचा रहल अछि।" "अहाँक अनुमान सही अछि श्रीमाऩ! -एसपी साहेब बजलाह। "के थिकाह ओ व्यक्ति जे एहन दुष्ट व्यक्तिकेँ बचा रहल छथि?" "अपने इलाकाक मंत्रीसँ सुधाकरक बहुत घालमेल छैक । सुनैत छी ओएह एकर मामलामे पुलिसकेँ दबाब दैत छथि ।" "आब अहाँसभ ककरो नहि सुनू । जे उचित छैक से हेबाक चाही।" "सही कहलिऐक श्रीमान! सएह हेतैक ।" तकरबाद तँ एसपी साहेब ओहि मामिलाकेँ अपना हाथमे लए लेलथि । तीन मास नित्यप्रति ओहि मामिलाक सुनबाइ कोर्टमे भेलैक । जज साहेब सेहो छगुन्तामे रहथि जे आखिर एहन अपराध केलाक बादो पुलिस किएक एकरा बँचओने छल । मामिलामे फैसला दैत जज साहेब कहलाह- " सुधाकरक अपराध बहुत पैघ अछि । ओ एकटा एकदम निर्दोष व्यक्तिकेँ सभतरहें तंग करैत रहलाह । हुनकर जान बँचनाइ मोसकिल भए गेल । अफसोचक बात अछि जे एहनो मामिलाकेँ पुलिस आ नेताक घालमेलसँ दबओल जा रहल छल । एहि मामिलामे सुधाकरक खिलाफ पर्याप्त सबूत अछि । न्यायक मांग अछि जे हुनका कठोर दंड देल जाए जाहिसँ काल्हि भेने फेर केओ एहन करबाक हेतु सोचबो नहि करए । अस्तु, सुधाकरकेँ दस सालक सश्रम कारावासक दंड देल जाइत अछि। संगहि इहो आदेश देल जाइत अछि जे दोषी पुलिससभक खिलाफ विभगीय कारवाइ केल जाए ।" ओहि दिन सौंसे लखनपुरमे एहि बातक चर्चा होइत रहल। सभ एतबे कहए जे सुधाकरकेँ अपन करनीक फल भेटलैक । साँझमे उतरबारिटोलक लोकसभ सबामोन लड्डु मंदिरमे प्रसाद चढ़ओलक । सौमसे गाम लड्डु बाँटल गेल । मुदा जयन्त दुखी रहथि। ओ तँ अपनाभरि सुधाकरकेँ माफ कए देने रहथि । मुदा कानून अपन काज केलक । गाममे एहि बातसँ लोक प्रसन्न छल । ३९ जयन्तकेँ अपन गाममे नागबाबा विश्वविद्यालयक स्थापनाक बादो मोनमे चैन नहि रहनि । "जा धरि एहि इलाकाक एक-एक व्यक्ति सुशिक्षित आ सभ तरहें संपन्न नहि भए जाएत ताबे विश्राम करबाक कोन औचित्य अछि?"-ओ मोने-मोन सोचथि। सोचबे नहि करथि अपितु ताहि उद्देश्यक प्राप्ति हेतु ओ संपूर्ण शक्ति सँ लागि गेलाह। एहिबातक ओ पूरा प्रयास केलाह जे-जे कष्ट हुनका भेलनि से आन ककरो नहि होइक । लखनपुर आ लग-पासक कोनो नेनाकेँ आर्थिक/ पारिवारिक कारणसँ परेसानी नहि होइक । गाम-गामसँ प्रतिभाशाली विद्यार्थी सभकेँ विश्वविद्यालयक छात्रावासमे रहबाक निःशुल्क व्यवस्था कएल गेल। जकरामे जे गुण छलैक तकर विकास हेतु पर्याप्त इंतजाम भेल। । हुनकर ई प्रयासक चमत्कारिक परिणाम भेल । देखिते-देखिते इलाकाक लोकक भविष्य बदलि गेल । युवकसभ सुशिक्षित भए परिवारक नक्सा बदलि देलनि । ओ इलाका विद्या आ धनसँ परिपूर्ण भए गेल । लखनपुरे नहि लग-पासक इलाकाभरिमे जयन्तक जयगान होबए लागल । एक आदमी कोना हजारों लोकक भाग्य बदलि सकैत अछि तकर ओ उदाहरण बनि गेलाह । जयन्त एतबे पर नहि रुकलाह । प्रवासी लोकनिक समस्यापर हुनकर ध्यान बहुत दिनसँ रहनि। तकर निराकरण हेतु ओ सही समयक प्रतीक्षा कए रहल छलाह । आब ओ समय आबि गेल छल । संयोगसँ राजीव सन उच्च सरकारी अधिकारी सेहो एहि काजमे रूचि लए रहल छलाह । लग-पासक लोकसभ तँ लागले रहए। एहि विषयपर ओ राजीवसँ चर्चा केलनि । राजीव स्वयं सेहो भुक्तभोगी छलाह। कैक पुस्तसँ हुनकर पूर्वजसभ बाहरे छलाह। परिणाम गामक घराड़ीओक नामो-निसान नहि रहि गेल छलनि । एहने खिस्सा बहुत रास प्रवासी लोकनिक छलनि । जयन्त सोचल करथि जे आखिर एहि समस्यासभक जड़ि कतए अछि । हुनका नीकसँ बुझा गेलनि जे जीविकाक प्रयासमे लोकसभकेँ अपन गाम-घर छोड़ि देलासँ ई समस्या बढ़ल । जयन्त आओर प्रावासी लोकनिक संग एहि समस्यापर विचार-विमर्श केलनि । ओसभ आपसमे बैसार कए गाम लौटि जएबाक निर्णय केलाह। "लखनपुरक लग-पासक जे केओ गाम वापस आबए चाहथि सभकेँ स्वागत छनि । हुनकासभकेँ आवासीय जमीन उपलब्ध कराओल जाएत । "- जयन्त आश्वासन देलखिन । असलमे विश्वविद्यालयक निर्माणक बाद बहुत रास चंदा फाजिल रहि गेल छल । ओहि टाकाक उपयोगसँ चालीस बिघा आबासीय जमीन कीनल गेल । तकरा नीकसँ विकसित कए सुबिधा संपन्न कएल गेल । एहि तरहें निर्मित छोट-छोट भूखंड प्रवासी लोकनिकेँ उपलब्ध कराओल गेल । किछुए दिनमे ओहिठाम पूर्व विकसित समस्त आधुनिक सुख -सुबिधा संपन्न टोल बसि गेल जकर नाम जयन्तपुर राखल गेल । लखनपुर दछिनबारिटोलक बहुत रास प्रवासी लोकनि एहि सुविधाक लाभ उठबैत गाम वापस आबि गेलाह । हुनकासभकेँ अपन-अपन घर बनि गेलनि । ओसभ फेरसँ अपन पूर्वजक गाममे बसि गेलथि । दियाद-बादसभ हुनकर जमीन-जायदाद वापस कए देलखिन। गाममे स्थापित विश्वविद्यालयमे इलाकाक हजारों लोककेँ छोटसँ पैघ सभ स्तरक जीविका भेटलैक । बहुत दिनक बाद लगलैक जे गाममे पुरान समय लौटि गेल अछि । ४० गाममे संपूर्ण आधुनिक सुविधासँ संपन्न विश्वविद्यालयक स्थापना भए गेलाक बाद जयन्तक प्रसन्नताक अंते नहि छल । संगहि प्रबासी लोकनिक जयन्तपुर टोल सेहो बसि गेल छल । कैक पुस्तसँ गाम-घरसँ बाहर रहि रहल लोकसभ अपन माटि-पानिसँ फेरसँ जुड़ि गेल रहथि । सभ किछु जखन भइए गेल तँ चंद्रिकाक बिआहे किएक लटकल रहैत? कालीकान्त बहुत दिनसँ एहि समयक प्रतीक्षा कए रहल छलाह । ई सभ काज भए गेलाक बाद कालीकान्त आचार्यजीक ओतए पहुँचलाह आ चंद्रिकाक जयन्तक संग बिआहक दिन तकबाक आग्रह केलथि । वसंतपंचमी लगीचे छल। ओहीदिन दुनूगोटेक बिआह होएब तय भेल । देखिते-देखिते वसंतपंचमीक दिन आबि गेल । चारूकात रसनचौकी बाजि रहल छल। लोकक प्रसन्नताक संगहि प्रकृति सेहो झुमि रहल छल । जयन्तक बिआह चंद्रिकाक संग धूमधामसँ संपन्न भेल। नवविवाहित दंपत्ति भगवतीकेँ गोर लगबाक हेतु उच्चैठ बिदा भेलाह। हुनकर समस्त परिवार संगे-संगे गीतनाद करैत पाछू-पाछू चलि रहल छलाह । एहि आनंदमय अवसरपर लखनपुरक लोकसभक प्रसन्नताक अंत नहि छल । (समाप्त) -रबीन्द्र नारायण मिश्र, पिताक नाम: स्वर्गीय सूर्य नारायण मिश्र, माताक नाम: स्वर्गीया दयाकाशी देवी, बएस: ६९ वर्ष, पैतृक ग्राम: अड़ेर डीह, मातृक: सिन्घिआ ड्योढ़ी, वृति: भारत सरकारक उप सचिव (सेवानिवृत्त), स्पेशल मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट, दिल्ली(सेवानिवृत्त), शिक्षा: चन्द्रधारी मिथिला महाविद्यालयसँ बी.एस-सी. भौतिक विज्ञानमे प्रतिष्ठा : दिल्ली विश्वविद्यालयसँ विधि स्नातक, प्रकाशित कृति: मैथिलीमे: प्रकाशन वर्षः२०१७ १.भोरसँ साँझ धरि (आत्म कथा),२. प्रसंगवश (निवंध), ३.स्वर्ग एतहि अछि (यात्रा प्रसंग); प्रकाशन वर्षः२०१८ ४. फसाद (कथा संग्रह) ५. नमस्तस्यै (उपन्यास) ६. विविध प्रसंग (निवंध) ७.महराज(उपन्यास) ८.लजकोटर(उपन्यास); प्रकाशन वर्षः२०१९ ९.सीमाक ओहि पार(उपन्यास)१०.समाधान(निवंध संग्रह) ११.मातृभूमि(उपन्यास) १२.स्वप्नलोक(उपन्यास); प्रकाशन वर्षः२०२० १३.शंखनाद(उपन्यास) १४.इएह थिक जीवन(संस्मरण)१५.ढहैत देबाल(उपन्यास); प्रकाशन वर्षः२०२१ १६.पाथेय(संस्मरण) १७.हम आबि रहल छी(उपन्यास) १८.प्रलयक परात(उपन्यास); प्रकाशन वर्षः२०२२ १९.बीति गेल समय(उपन्यास) २०.प्रतिबिम्ब(उपन्यास) २१.बदलि रहल अछि सभकिछु(उपन्यास) २२.राष्ट्र मंदिर(उपन्यास) २३.संयोग(कथा संग्रह) २४.नाचि रहल छलि वसुधा(उपन्यास) २५.दीप जरैत रहए (उपन्यास)। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.५.कुमार मनोज कश्यप-आकाश-कुसुम कुमार मनोज कश्यप १ टा लघुकथा आकाश-कुसुम राधाबाबू आ ऑफिसक फाईल मे तेहन ने प्रगाढ़ अन्योनाश्रय संबंध छल जे हुनका घर-परिवार के बारे मे सोचबाक पलखति कहाँ! भोर मे जे आठ बजे घर सs बहराईत छलाह से राति मे नौ बजे सs पहिने बिरले कहियो फिरैत छलाह। हरसठे तs ऑफिस सs फाईलक पुलिंदा बन्हने घर अबैत छलाह आ घरो मे ऑफिसेक काज। संयोग सs कहियो पलखति भेटलनि तs दू पल पोता-पोती संगे हँसि-बाजि लेला आ फेर टीवी पर समाचार देखबा मे निमग्न! छुट्टियो के दिन मे या तs ऑफिस जाथि वा फाईले घर लs आबथि। मुदा रिटायरमेंट के बाद हुनकर दिनचर्या तs बदलैके छलन्हिये। आब घर मे रहैत छथि तs पहर भरि अखबार पढ़ब, बाड़ी-झाड़ी, पोता-पोती के बैसा कs पढ़ायब एहि सभ मे दिन गुदस्त होईत छनि। हुनका मे एकाएक आयल ई परिवर्तन हुनकर पोती के नेनमति बुझि नहिं पाबि रहल छल। ओहि दिन अपन दादी सs सुतबा काल खिस्सा सुनैत पुछलकै - 'दादी! बाबा आब पापा जकाँ ऑफिस कियै नै जाई छथिन?' - 'तोहर बाबा आब नोकरी सs रिटायर भs गेल छथुन्ह --- तैं घरे मे रहैत छथुन्ह।' - 'रिटायर की होई छै दादी?' - 'जखन लोक बूढ़ भs जाई छै.... काज जोकरक नहिं रहै छै तखन ओकरा घर मे आराम करै लै कहल जाई छै। तकरे कहै छै रिटायर। ' - 'तोरो तs केश पाकि गेल छौ, तहुँ तs बूढ़ भेलैं। तों कहिया रिटायर हेबही दादी? ' - ' दुर्र जो! हम कोनो नोकरी करै छी जे रिटायर हैब। जल्दी सूत। बड़ काज पसरल अछि हमरा।' ओहि अबोध के ओ कोना बुझबितथि जे गृहिणी के काज सs कोन छुटकारा ! -कुमार मनोज कश्यप, सम्प्रति: भारत सरकार के उप-सचिव, संपर्क: सी-11, टावर-4, टाइप-5, किदवई नगर पूर्व (दिल्ली हाट के सामने), नई दिल्ली-110023 मो. 9810811850 / 8178216239 ई-मेल : writetokmanoj@gmail.com अपन मंतव्य editorial.ऽtaff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.६.निर्मला कर्ण- अग्नि शिखा (खेप-२०) निर्मला कर्ण (१९६०- ), शिक्षा - एम् ए, नैहर - खराजपुर,दरभङ्गा, सासुर - गोढ़ियारी (बलहा), वर्त्तमान निवास - राँची,झारखण्ड, झारखंड सरकार महिला एवं बाल विकास सामाजिक सुरक्षा विभाग मे बाल विकास परियोजना पदाधिकारी पद सँऽ सेवानिवृत्ति उपरान्त स्वतंत्र लेखन। मूल हिन्दी- स्वर्गीय जितेन्द्र कुमार कर्ण, मैथिली अनुवाद- निर्मला कर्ण अग्नि शिखा (भाग- २०)
पूर्व कथा: राजा पुरूरवा अमरावती जाई के क्रम में उर्वशी आ चित्रलेखा के अपहरण कs लs जाइत दानवराज केशि सs असगरे युद्ध करैत ओकरा पराजित कs दुनू अप्सरा के रक्षा करै छथि। पुनः हुनका लs कs ओ अमरावती पहुंचैत छथि। आब आगू: वैजयंत प्रासाद में रास-रंग में डूबल इन्द्र! स्वर्ग के कोन भाग में कथि भs रहल छैक एहि सभ सँs अनभिज्ञ छलथि। हुनका एहि सभ बात सs कुनो मतलब कहाँ छलनि! हुनका चाही मात्र रास-रंग आ उत्सव! सोमरस आ सौंदर्यक मेला! देव सभा में पुरूरवा एकसरे सिंहासन पर विराजमान छलथि। इन्द्र के पुरूरवाक आगमनक सूचना पठाओल गेल । किछु कालक बाद मंद मंद मुस्कुराइत पुरंदर देव सभा में आबि बैसबा हेतु अपन सिंहासन के दिशा में बढ़लथि । पुरूरवा के साथ अभिवादनक आदान-प्रदान भेलनि। गंभीर स्वर में पुरूरवा कहलथि - "देवेन्द्र के अमानत व स्वर्ग लोकक मर्यादा देवेन्द्र के सभा में प्रस्तुत कएल जाए"। एक सभासद उठि कs पुरूरवा के आदेशक पालन तुरंत कएलक । उर्वशी एवं चित्रलेखा के सभाकक्ष में आनल गेल। पुरंदर प्रश्नवाचक मुद्रा में पुरूरवा के देखलथि। "हिनका दुनू के दानवराज केशि अपहृत कयने जा रहल छल। संयोगवश हमर दृष्टि में आबि गेलथि। हम दानवराज केशि के यमपुरी पहुंचा कs अपनेक प्रतिष्ठा पुनः आहां के पहुंचाबय आबि गेलहुँ।" सम्पूर्ण वस्तु स्थिति सs अवगत भेला के बाद इन्द्र लज्जावनत भs गेलाह। ओ पुरूरवा के एहि असामयिक सहायता के लेल धन्यवाद ज्ञापित केलनि। मुदा पुरूरवा अत्यंत दु:खी आ क्रोधित छलाह। ओ किंचित रोष पूर्ण स्वर में कहलथि पुरन्दर सँs- "अपनेक लापरवाही के कारण कहियो हमरहु लज्जित होमय परि सकैत अछि स्वर्गाधिपति।" "अर्धासन के संचालन के नीक आ अधलाह दुनू पक्ष के उत्तरदायित्व मात्र हमर नहि। समान रूपें हम आहाँ दुनू प्रतिभागी छी। ताहि कारण ई निश्चित रूप सँs संभव भs सकैत छैक" - इन्द्र लापरवाही सs कहलथि। "मुदा अपने स्वर्गक सुरक्षा के कुनो चिंता नहि करैत छी। एना में स्वर्ग कतेक आ कोना सुरक्षित रहत,अहीं सोचु कने। हम एकसरे भूमंडल एवं स्वर्ग दुनू पर लगातार ध्यान कोना राखि पाएब ? हम सम्पूर्ण धरतीक शासन सम्हारि रहल छी,आहाँ स्वर्ग तs कम सs कम सम्हारि लिय । हमरा लेल संभव अछि कि धरतीक शासन देखैत अतहु के सम्पूर्ण देखभाल करी"? "ई बात तs आहाँ के अर्धासन ग्रहण करवाक पूर्व विचार केनाई उचित छल राजन्!" -इन्द्र के स्वर निर्लज्जता सँs परिपूर्ण छल। " बड्ड नीक बात अछि देवेंद्र,हम तखनि विचार नहि कएलहुँ तs आब कs लैत छी। हम स्वर्गक एहि अर्धासन के परित्याग कs रहल छी। हमरा एहन राज्य के आवश्यकता नहि अछि । हम स्वर्गक एहि राज्य के परित्याग कs रहल छी। हमरा आवश्यकता नहि अछि स्वर्गक ओहि अर्धासनके जेकर शासक एहेन निकम्मा एवं दम्भी होय । आई सs स्वर्ग के पूर्ण शासन व्यवस्था अपनहि के हाथ में रहत । एहि पर हमर उत्तरदायित्व आई सँs समाप्त भs गेल,किएक तs हम कुनो प्रचारक उच्छृंखलता एवं अव्यवस्था सहन नहि कs सकैत छी।" - अपन पैर पटकैत पुरूरवा सभाकक्ष सँs निकसि गेलाह । सभ देवगण आश्चर्यचकित भs देखैत रहि गेलथि राजा पुरूरवा के । उर्वशी इन्द्र के एहन असभ्यता पूर्ण व्यवहार सँs अत्यंत दुःखित भs गेल छलीह। हुनक दृष्टि में पुरूरवा महान!अत्यधिक महान भs गेलथि। इन्द्र के व्यवहार हुनका अत्यंत लज्जा जनक प्रतीत भेलनि। अपन प्रियतम पर ओ एक प्रकार सँs ग्रवोन्नत छलीह। मुदा संगहि ओ दूसर दिशि दुःखी सेहो छलीह,एहि विचार सँs कि आब पुरूरवा सs मिलन के मार्ग अवरुद्ध भs गेलनि। ओ प्रिय वियोगक सोचि अत्यंत दु:खी भs गेलथि। उर्वशी अधिक देर तक सभा भवन में रूकि नहि सकलथि। मेनका एवं चित्रलेखा के संग ओ निकलि गेलीह सभा कक्ष सs । बाहर ओ एम्हर-ओम्हर चारू दिशा में देखलथि पुरूरवा के रथ कतहु नहि छल । आब ओ राजा पुरूरवा सs भेंट करवा हेतु व्यग्र भs गेलथि। आब ओ शीघ्र अपन एहि दुनू सखी सँs विलग होयवाक प्रयास करवा में लागि गेलथि जाहि सँs पुरूरवा सs भेंट कs सकथि। हुनक हृदय में आशा-दीप प्रज्वलित छलन्हि,हुनका सँs बिना भेंट कएने पुरूरवा एतेक शीघ्र आपस नहि भs सकैत छथि।
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राजा पुरूरवा हरिचंदन जंगल में एकटा गाछक नीचा हरियर घास पर उदास भ' बैसल छलाह।हुनकर रथ किछु दूर पर अवस्थित छल। घोड़ा सभ मुक्त भs कs हरिचंदन गाछक पात खयवा मे व्यस्त छल। उर्वशी भागैत-भागैत कुनो प्रकारें अपसियांत भेल ओतs पहुंचलीह। राजा पुरूरवाक हृदय कमल फूल जकाँ फूलि गेलनि हुनका देखि । आँखि सेहो चमकि उठलनि । साँस तेजगति सँs चलि रहल छलनि उर्वशीक । सूरजक तीव्र इजोत में मुख पर श्वेद कण चमकि रहल छल । अव्यवस्थित साँसक तीव्र गति ! नम्हर कारी केश ! उर्वशी एहि रूप मे बहुत सुन्दर लगैत छलीह। पुरूरवा आगू दौड़लाह आ हुनका अपन बाँहि मे लपेटि लेलथि । उर्वशी केँ कान्ह पर ल' क' उर्वशी केँ गाछ लग अनलथि,फेर स्वयं बैसि गेलाह । हुनकर खिलल चेहरा तुरन्त अपार पीड़ा सँ लिप्त भय गेल।ओ उर्वशीक नोरक बूंद केँ हाथक आँगुर सँ पोछलथि,फेर चुम्बन लेलथि हुनक केश, गाल, कपार आ गरदनि में असंख्य ! उर्वशीक सिसकब रुकि गेलैन ।आब ओ एकदम शान्त बुझाइत छलीह । हुनकर चेहरा ओतबे साफ आ शान्त छलनि जेना बरखाक बाद आकाश साफ स्वच्छ भ' जाइत छैक। "अहाँ जा रहल छी प्रिय" - उर्वशी राजा पुरूरवा सँs बहुत शान्त स्वर मे पुछलखिन। "हँ, हम एतेक अपमान सहन क' एत' नहि रहि सकैत छी" - पुरूरवा गंभीरतापूर्वक उत्तर देलथि । "मुदा हमरा ककरा भरोसे छोड़ि जाइत छी?" उर्वशी पुरूरवाक चेहरा पर नजरि टिकबैत बजलीह । "अहाँ - अहाँ स्वर्गक थाती छी उर्वशी। हम अपन स्वार्थक लेल एहि सौन्दर्यक धन सँs स्वर्ग केँ रिक्त नहि क' सकैत छी" - राजा पुरूरवाक गहन गंभीर स्वर गूँजि उठल। "अहाँक बिना हम एतय जीवित नहि रहि पाएब"। "प्रिये,अहाँ केहन बात करैत छी,अहाँक संग हमर पवित्र प्रेम अछि। हमर प्रेम आहाँक सम्बल रहत उर्वशी"। "नहि,आब अहाँक अनुपस्थितिक कल्पना तक नहि क' सकैत छी हम" -कहि मौन धारण क' लेलीह उर्वशी। राजा सेहो मौन भ' गेलाह। हुनकर हृदय में तूफान जेना हिलोर मारि रहल छलनि। अत्यंत कठिनाई सँs ओ अपना के संयत रखने छलाह। किछु क्षण उपरांत उर्वशी अपना पर नियंत्रण करैत बजलीह - "की अहाँ हमरा भूमण्डल में नहि ल' जा सकैत छी"? "नहि उर्वशी नहि,हम से नहि क' सकैत छी"। "कियैक! ई किएक नहि क' सकैत छी"? "अहाँ कियैक नहि बुझैत छी हमर कठिनाई ! हँ उर्वशी! हमहूँ अहाँक बिना जीबs मे असमर्थ छी! मुदा जँs हम अहाँ केँ एहिना लs जायेब तखन केशि आओर हमरा मे की अंतर होयत? हम अहाँ केँ लs जयबा मे असमर्थ छी! हमर स्थिति के बुझू प्रियतमा! अहाँ छी 'नर-नारायण' ऋषि द्वारा रचल गेल एक गोट अनुपम रत्न! आ अहाँ स्वर्गलोक के लेल उपहार स्वरूप प्राप्त भेलहुँ ऋषिवर 'नर-नारायण' के द्वारा! एहि मर्यादाक सीमा के उल्लंघन कए हम पृथ्वी के माथ पर सदा-सर्वदा के लेल कलंकक एकटा धब्बा बनि जाएब । त्रिभुवन में हमर आ अहाँक यशगाथा नहि बल्कि कलंक-कथा पढ़ल जाएत। आहां ई कलंक-कथा सहन कs सकब ?" "हम अहाँक प्रेम के छोड़ि कोनो नीक-बेजाय बात बुझबाक स्थिति मे नहि छी प्रियतम s"-उर्वशी अत्यंत व्याकुल छलीह। पुरूरवा चुप रहि गेलाह,उर्वशी सेहो चुप भ' गेलीह। किछु काल धरि दुनू प्राणी अहिना मौन रहि एक दूसर के स्पर्श के अनुभव करैत रहलथि। किछु समयक बाद उर्वशी उठि गेलीह,ओ पुरूरवाक उन्नत वक्ष पर चुम्बन लेलनि। एखनि हुनकर साँसक गति अत्यंत तीव्र भ' गेल छलनि। "हम धरती पर अहाँ लग अवश्य जायब प्रिय। मुदा तखने जखन हम अहाँक विरहाग्नि में झुलसि राख होयबा के अवस्था में आबि जाएब। एहि सँ अहाँ केँ कोनो कलंक नहि होयत। जँ प्रेम करब पाप अछि तखन हम ई पाप कs चुकलहुँ । एहि पाप के हम भागीदार छी,तखन जिम्मेदारी किएक नहि लेब! हमरा कोनो मतलब नहि अछि त्रिभुवन में हमर यशगाथा गाओल जायत अथवा अपयश कथा के प्रसार होयत"। "जेना अहाँक इच्छा प्रिय। हम सदिखन अहाँक धरती पर स्वागत करबाक प्रतीक्षा मे रहब" - राजा पुरूरवा उर्वशी केँ आश्वासन देलनि। पुरूरवा के केशगुच्छ के अपन हाथ सँs सोझराबैत उर्वशी बजलीह - "की एहि सँ ओतय अहाँक अपयश नहि होयत?" "ओतय हमर यश होय अथवा अपयश! जे कुनो गति होय,हम ओत' स्वतंत्र रहब। प्रेमक लेल अपयश सेहो स्वीकार करब। मुदा इन्द्र सँ कोनो वैरभाव तs नहि होयत। पृथ्वीवासी स्वर्ग सँ दुश्मनी कहियो बर्दाश्त नहि क' सकैत अछि । हम अपन प्रजा के जीवन के कष्टप्रद नहि करय चाहैत छी। राजा हेबाक कारणे हमरा अपन व्यक्तिगत जीवन सs पहिने अपन प्रजा के सुख एवं प्रसन्नता के ध्यान राखs पड़त"। एकर बाद दुनू गोटे बहुत काल धरि एक दोसराक हृदय केर धड़कन सुनैत रहलाह। वातावरण हुनकर संभावित वियोग के दु:ख सँs स्तब्ध दु:खी छल! शीतल पवन मन्द-मन्द गति सँs विचरण कय अपन दु:ख प्रकट कs रहल छल। जाहि कारण वातावरण मे पूर्णतः शांति व्याप्त छल। कोमल सुगंधित समीर पर्यन्त ओहि दुनू प्राणी के दु:ख में दु:खी भय वतावरण केँ शांति भंग करबा मे असमर्थ छल। उर्वशी के गाल के अंतिम चुम्बन लेला के बाद पुरूरवा ठाढ़ भs गेलाह आ बजलाह - "आब हमरा जाय के अनुमति दिय प्रिये" | उर्वशी निराशाक घटाटोप मेघ मे डूबल छलीह।ओ दुःखित भय क्षुब्ध स्वर में बजलीह - "की हम अपने हाथ सँ अपन प्रेम केँ मारि देब! अपन प्राण अहाँ केँ अपन हाथ सँ दs देब। हम अहाँ के जाई के अनुमति कोना दिय! ई बात कोना कहलहुँ अहाँ !" "हमरा कमजोर नहि बनाउ प्रिय, हमरा भटकाउ नहि। अहाँ हमर प्रियतमा छी!पुरूरवाक प्रियतमा ! पृथ्वी के चक्रवर्ती सम्राट पुरूरवाक प्रियतमा! ओहिना व्यवहार करू प्रिये"। किछु क्षण उपरांत संयमित स्वर सँ उर्वशी बजलीह - . "ठीक छै, प्राणेश्वर जाउ! हमर आत्मा केँ संग लs जाउ! जखन एहि निर्जीव शरीर केँ आत्माक आवश्यकता होयत तखन ओ अहाँ के निकट पहुँचि जायत"! पुरूरवा उर्वशी के आँखि के नोर भरल आँखि के चुम्बन लेलथि।एहि तरहे ओ उर्वशी के बहैत नोर के पीबय के कोशिश केलथि । उर्वशी सेहो राजा के हाथ कें चुम्बन लs लेलनि । राजा पुरूरवा अपन रथ में सवार भय हुनका दिशि देखइत कृत्रिम मुस्कान के संग हाथ हिला देलिखिन। उर्वशी के उदास मुख पर क्षणिक मुस्कान रेखा काँपि उठल । ओहो जवाब में हाथ हिला देलखिन। धीरे-धीरे रथ दूर होइत उर्वशीक दृष्टिसँ ओझल भs गेल। क्रमशः अपन मंतव्य editorial.ऽtaff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.७.आचार्य रामानन्द मण्डल-अन्हारक दीप/ बाल बैरागी आचार्य रामानंद मंडल अन्हारक दीप/ बाल बैरागी १ अन्हारक दीप तमसो मा ज्योतिर्गमय के उद्घोष करैत अन्हारक दीप मैथिली कविता संग्रह कुमार विक्रमादित्य विरचित हय । कोशी नदी के बालूका राशि बनल सारा पर टिमटिमाइत दीप मृत्योमा अमृत गमयं के संगे तमसो मा ज्योतिर्गमय के उद्घोष करैत हय। एक एक टा दीप 'क अंतसक ज्वाला जगमगाइत आ एक्के बेर धधैक उठत अग्निशिखा आ दूर करत अन्हार कें -अन्हारक दीप कविता से अंहारक दीप एकटा दीर्घ कविता हय।अइ कविता मे कोशी के विनाशलीला के वर्णन के साथे समाज आ देश में होइत विनाशलीला पर कड़गगड़ प्रहार हय।कोशी माय आ फणीश्वरनाथ रेणु के शब्द में कोशी डाइन के विनाशकारी लीला कोरोना काल के प्रयाग राज स्थित मानव लाश से पटल बालूका गंगा तट के याद कराबैत हय। आजादी के अमृत महोत्सव उपलक्ष मे अप्पन ७६ कविता संग आजादी के ७६साल पर विभिन्न कविता मादे विचार प्रकट कैलन हय। जेना -आजादी,फूसिक गढेर, गांधी मैदान आदि। हमर खबास पुछलक मालिक अपन देश आजाद कहिया होतअ -आजादी कविता से हालांकि खबास आ मालिक वार्ता आजादी के लेल अप्रासंगिक लगैय हय परंतु आजादी पर प्रश्न चिन्ह उठबैत हय। फूसिक ढेर पर बैसल संसद रचैत अछि फूसियोका पुलिस फूसियोका न्यायक आस फूसियोका संविधान - -फूसिक ढेर कविता से गांधी मैदानक उपस्थिति जतय ठाढ़ तथा जुगपुरुष आ मोन पारैत छथि अपन ओहि भाषण में -गांधी मैदान कविता से दीर्घ कविता मे बदलैत सन गाम हमर आ टीस हय। बदलैत सन गाम हमर के माध्यम से सामाजिक ताना-बाना, सामाजिक प्रेम आ समाज पर राजनीतिक प्रभाव के निक शब्द चित्रण हय। मंडल कमिशनक असर हमरो गाम मे पड़े गुआर कें आब गुआर कहब पसिन नहि आब भेल ओ यादव आ बाभनो करय लागल परहेज ओहि शब्द से सामाजिक समरसताक खातिर - बदलैत सन गाम हमर कविता से कविता संग्रह में प्रथम कविता भगवान में कवि भगवान के खोजैत धार्मिक पाखंड पर प्रहार करैत हतन। जौं किनको भगवान टकरायात तो विनती अछि हमरो सं मिलायब। त मालिक भगवान में देश के लोकतांत्रिक आ प्रशासनिक व्यवस्था के खामी पर इशारा करैत हतन। उठा रहल अछि लोकतंत्र सं लोकक विश्वास असली भगवान में खराब चिकित्सा व्यवस्था पर प्रहार बिन पैसा देने लाशो नहि भेटल तं अहां बुझू अहांक समक्ष ठाढ़ अछि साक्षात असली भगवान। नारी के दुर्दशा ब्यथा पर शतरूपा,प्रसबपीड़ा आ हय। विधवा कविता से दर्शायल गेल हय। जंगली जानवर आबि रहल अछि पछोड़ धरने हपकऐक लेल शतरूपा भागि रहल अछि -शतरूपा से एकटा छटपटाइत स्री ठाढ छलीह अपन दर्द के रोकने -प्रसव पीड़ा से ओ पियाक सांस टूटिते उतरि गेल देह सं हाथक चूड़ि टूटि गेल -विधवा से कविता संग्रह में हकमैत शहर,कानैत शहर,भागैत शहर के मादे बदलैत शहर आ विभिन्न विसंगति पर प्रकाश डालैय हय त भखरैत समाज,पितृभोज,सुगरिक मादे सामाजिक चित्रण कैल गेल हय। मजदूर वर्ग के पीड़ा पर अर्द्ध मजूरी,ईट ऊघंनी आ महंथी के मादे शब्द चित्रित हय। अंतिम कविता हम लड़ैत छी में कवि हर समस्या से लड़ैत हतन। हम नित लड़ैत छी अपना सं अपन कएल गेल गलती सं चाहे वो सामाजिक, राजनीतिक आ आर्थिक कैल गेल गलती काहे न हो कविता संग्रह अन्हारक दीप वोइ सभ आयाम के अंधियारा पर प्रकाश डालैय हय।नवकवि अन्हार के अप्पन दीप से प्रकाशित करय मे सफल हतन। बधाई संगे शुभकामना। २ बाल बैरागी रामपुर गांव में एगो युवा साधु आयल रहे।लोग सभ उनकर नाम पुछलक त साधु बोलल-हमर नाम बाल बैरागी हैय। हमर घर युपी के एगो गांव हरिपुर में रहै। हमर बाबू माय बाल कालि में स्वर्गीय भे गेल।त हम एगो साधु के जौरे अयोध्या धाम चल गेली।बीस बरस तक एगो मंदिर में रहली।बाल बैरागी नाम हमर गुरु जी के धैल हैय। गुरु जी हमरा आदेश देलन कि गांव-गांव में जाकर सीताराम नाम का प्रचार-प्रसार करा। सीताराम नाम के यज्ञ कराबा। बाल बैरागी देखें में २६-२७ साल के सुदर्शन युवक लागे।वो अपन झोंटा आ दाढ़ी में खुब फबे।उजर रंग के सुती चौबंदी पेहने रहे।उजरे रंग के धोती लूंगी लेखा कमर में लपटले रहे।बम्मा हाथ में घड़ी आ पैर में खड़ाम पेहने रहे। लोग सभ कहलक-साधु जी,चलु हमरा गांव में एगो मंदिर हैय। वहीं रहब आ अपन पूजा-पाठ करब।बाल बैरागी कहलन-हम मंदिर में न रहब।हम अलगे कुटिया बना के रहब। हमरा सीताराम नाम जप यज्ञ करे के हैय।वै के जगह लेल पांच बीघा जमीन चाही। एगो सीताराम भगवान के मंडप,एगो यज्ञ मंडप,जैमै नौ दिवसीय चौबीसों घंटा सीताराम नाम के कीर्तन होतै।एगो साधु निवास कुटी,जैमे हम रहब।आ एगो बड़का पांडाल जैमे किर्तनीया मंडली सभ रहतै।फैर वोकरा सभ के खाये पीये के व्यवस्था।लोग सभ कहलन- सभ व्यवस्था हम सभ करबैय। पहिले मंदिर पर चलूं आ महंथ जी से बात करूं। जगह के लेल जमीन त महंथ जी देता।बाल बैरागी कहलन-चलू। मंदिर पर अयला पर मंहथ जी आ बाल बैरागी में दंड परनाम भेल। बैरागी जी अपन परिचय देत सीताराम नाम यज्ञ के लेल सभ बात बिस्तार से बतलैलन। महंथ जी बोललन-बैरागी जी, मंदिर के आगे के पांच बीघा जमीन यज्ञ के लेल दैय छी।आ और हम यथाशक्ति मदद करब।परोपटा से भी लोग सभ के मदद के लेल कहब। इ त भगवान के काज हैय।आशा हैय सभ समाज के मदद मिलत। बैरागी जी कहलन-महंथ जी,सभ से पहिले एगो भगवान् सीताराम के लेल एगो मंडप आ एगो साधु निवास के लेल एगो कुटिया बनाबै में सहयोग कैल जाय। महंत जी अपना करपरदाज के कहलन कि जाके बैरागी जी के काज सभ कर दा।लोग सभ भी लगभीर के मंडप आ कुटिया बना देलक दोसर दिन से एगो जीप भाड़ा करके भाड़ा परकें लाउडस्पीकर से प्रचार होय लागल। एक महिना में सभ तैयारी हो गेल। ठीक रामनवमी के रोज से सीताराम नाम जप यज्ञ शुरू हो गेल। नौ रोज के बाद यज्ञ समाप्त भे गेल। अइ नौ रोज कै यज्ञ में गांव के एगो अठ्ठारह बरस के नवयुवती सेहो रोज यज्ञ देखै अबैत रहे।उ सीता राम मंडप में भी पूजा करैत रहै।श्वैत कमल रंग के देह, चनरमा सन मुखरा, नारंगी के फांकि सन होंठ, चांदी सन चमकैत दांत, सुग्गा के चोंच सन नाक, खंजन सन आंखि,बादल सन करिया कमर तक केश, कमल पुष्प सन कूच,कोयली सन बोली आ हिरनी सन चाल रहे। बैरागी जी के नजर वोइ नवयुवती पर पड़ल त कनिका देर तक देखते रह गेल। कनिका झैपलन !फेर पुछलथिन-तोहर नाम कि हौ। नवयुवती बोललक-रंभा।हमर घर यही गांव में हैय। जग त समाप्त भ गेल हैय।परंच पूजा करे हम रोज दिन आयब। हमरा पूजा करै में मन लागैय हैय। बैरागी जी बोललन-पूजा त मानुस के करिए के चाही।बड़ा कठिन से लोग मानुस के देह पाबै हैय। यही के लैल हम जगह जगह सीताराम नाम जप यज्ञ करबै छी कि लोगक मन में भगवान के प्रति प्रेम आ श्रद्धा बढै। रंम्भा के इ सभ सुनि के भगवान के साथे बैरागी जी के लेल भी प्रेम आ श्रद्धा मन में उठे लागल।रम्भा बोललक-साधु जी।अब हम घरे जाइछी।काल्हि से रोज पूजा करे आयब। बैरागी जी कहलन-अच्छा । रम्भा फुलडलिया में पूजा के समान ध के सीताराम मंडप में पूजा करे आबे लागल। पूजा में बैरागी जी भी साथ देबै लगनन। रंभा आ बैरागी जी के हाथ आपस में छूआए लागल। कभी कभी देह में देह भी सटे लागल।दूनू में भगवान राम आ सीता के प्रेम प्रसंग सुनैत सुनैत रंभा आ बैरागी जी में प्रेम अंकुरित होय लागल।प्रेम अपन रंग चढावे लागल।अब प्रेम के अंतिम परिनति देह की कामना भी जगे लागल। एक दिन बैरागी जी रंभा से कहलन-रंभा अब इंहा रहनाइ ठीक नै हैय।दूनू गोरे आइ राते रात भाग चला। रंभा बोललक-हां। पहिले सांझ में हम घर से आ जायब। भगवान के सामने हम दूनू गोरे पहिले बिआह क लैब त राते राति भाग जायब। बैरागी जी कहलन -अच्छा। देर न करिहा। रंभा बोललन-जी। रंभा पहिले सांझ में सीताराम मंडप में आ गेल। बैरागी जी सेनुर लेके तैयार रहत। पहिले रंभा के मांग में पांच बेर सेनूर भर देलन।दूनू गोरे भगवान के परनाम कैलन। दूनू गोरे एक बार एक दोसर के आलिंगन कैलन।एक दोसर के अधरपान कैलन।तेकर बाद बैरागी जी कहलन-रंभा अब देर न करा।चला!भाग चला! अब दूनू गोरे एम पी के एगो होटल में रुम बुक करा के रहे लागल। बैरागी जी झोटा दाढ़ी पहिले ही कटा के सामान्य युवक लेका लुक करा लैलै रहे। रुपया पैसा के त कमिये न रहे। गांव में हल्ला हो गेल बाबाजी गांव के लड़की के लेके भाग गेल।लोग तरह तरह के बात करै लागल। लेकिन आश्चर्य इ कि लड़की के बाप बोललक भाग गेल त भाग गेल।परंच अपने जाति के ही बाबा जी रहे।आ बुढ न रहे। एकदम जवान बाबा जी रहे। बुझाए हैय भगवान जोरि बनैले रहै।एक दम सीता आ राम जैसन। बैरागी जी गांव के अपन खास चेला सभ से मोबाइल संपर्क बनैले रहे।ठोह लैत रहे।इंहा चेला सभ कहें। गुरु जी परेम कैलथिन आ शादी कैलथिन ।त कोना बुरा करम नै कलथिन।वोना त बाबा जी सभ रखैल रखै छथिन। लेकिन हमर गुरु महाराज वोना न कैलथिन। भगवान के दरबार में शादी कैलथिन। वो तो लोकक आक्रोश के डर से भाग गेलथिन।कि आक्रोश में लोग जान मार देय छैय। अब जौं वो शादी कै लेलथिन।त वो हमरा सभ के गुरु माता भेलथिन। हमरा गुरु माता आ गुरु जी से कोई घृना न हैय। अई बात के असर भेल।लोग सभ के बैरागी जी आ रंभा के लेल सहानुभूति प्रेम आ श्रद्धा जागे लागल। चेला इ सभ सूचना बैरागी जी के दैत रहे। दो बरस के बाद अनुकूल समय देखि के बाल बैरागी रम्भा सहित गांव में अइलन। बैरागी जी त अपना वेस में रहिते रहे।परंच रंभा के बेष कोतुहल के विसय रहै। एक दम उजर भेस में। रंभा बैरागिन (माइराम) लागै। चेला सभ रंभा के गुरु माता कहैत चरन छुए आ बाद में बैरागी जी के।रम्भा आ बैरागी जी आशीर्वाद के मुद्रा में हाथ उठैले खड़ा रहै। आइ रम्भा आ बैरागी जी वोही कुटिया में गृहस्थ रिसि परंपरा में रहैत भजन भाव के साथ गैया के सेवा करैत हैय। -आचार्य रामानंद मंडल सामाजिक चिंतक सीतामढ़ी,सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक, माता-चन्द्र देवी, पिता-स्व०राजेश्वर मंडल, पत्नी-प्रमिला देवी, जन्म तिथि-०१ जनवरी १९६० योग्यता- एम-एससी (रसायन शास्त्र), एम ए (हिन्दी)। रूचि- साहित्यिक, मैथिली-हिन्दी कविता -कहानी लेखन आ आलेख। प्रकाशित पोथी - मैथिली कविता संग्रह भासा के न बांटियो। २०२२ प्रकाशित रचना - सझिया कविता संग्रह पोथी - जनक नंदिनी जानकी आ शौर्य गान। २०२२ पत्रिका -मिथिला समाज, घर -बाहर आ अपूर्वा (मैसाम)। अखबार -दैनिक मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश। सामाजिक-सामाजिक चिंतन, दायित्व- पूर्व जिला प्रतिनिधि, प्राथमिक शिक्षक संघ, डुमरा, सीतामढ़ी। स्थायी पत्ता- ग्राम-पिपरा विशनपुर थाना-परिहार जिला-सीतामढी। वर्तमान पता-पिपरा सदन,मुरलियाचक वार्ड-04 सीतामढ़ी पोस्ट-चकमहिला जिला-सीतामढी राज्य-बिहार पिन-843302 मो नं-9973641075 ईमेल-ramanandmandal001@gmail.com ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.८.डा. किशन कारीगर-मैथिलीमे गोंधियागिरी डा. किशन कारीगर मैथिलीमे गोंधियागिरी ई गोंधियागिरी करनाहर सब त मैथिली भाषा के खंड बिखंड मे बांटि सुडाह क देलकै आ मिथिला मैथिली के नाम पर इ सब अपन पेट पोसै मे बेहाल रहल. परिणाम की भेल मैथिली अपने मे बंटा गेल आ तेकरा बंटनाहर वैह पेटपोसुआ मैथिल सब छै जे अपना फायदा दुआरे मैथिली के दफानने रहल आ मैथिली साहित्य के कहियो समाज स नै जोड़लक आ नै तेकर कहियो बेगरता बुझलकै? मैथिली भाषा के शुद्ध-अशुद्ध, पछिमाहा-दछिनाहा, मधेश-कोसिकन्हा, बाभन-सोलकन, अगुआ-पिछलगुआ, पुरूस्कारी-होहकारी के लकड़पेंच मे बाँटि देलकै आ आब भवडाह केहेन जे सबटा मैथिली छियै? आ लेखनी पुरूस्कार आयोजन बेर मे मानक छोड़ि? अनका राड़ सोलकन बना दुत्कारि दै छै किएक?? आस्ते आस्ते अंगिका, बज्जिका सब अलग भेल जा रहल अछि आ हैबो करब जरूरीए की ने? केकरो बोली के ई पेटपोसुआ मैथिल मोजर नै देलकै? मात्र अकादमी पुरूस्कार, मैथिली विभागक नोकरी लोभ, संयोजक पद दुआरे ई सब मैथिली मानक के ओझरी लगा मैथिली भाषा के खंड पाखंड मे बँटैत गेल? आ सब दिन ई पेटपोसुआ सब गोंधियागिरी खेला क भाषा साहित्य पर जबरदस्ती अप्पन कब्जा केने रहल? आ मिथिलाक जन समाज मैथिली सँ दूर होइत गेल। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.९.लालदेव कामत-महा प्रलयक लगीच छैक जनजीवन/ सामाजिक सरोकार केँ नव दिशा दैत उपन्यास/ कविवर बद्रीनाथ राय जीक मादे लालदेव कामत-महा प्रलयक लगीच छैक जनजीवन/ सामाजिक सरोकार केँ नव दिशा दैत उपन्यास/ कविवर बद्रीनाथ राय जीक मादे १ महा प्रलयक लगीच छैक जनजीवन
अपन बात केँ गद्य सँ अधिक राज किशोर मिश्र जी पद्दमे खूब मजगुति सँ राखैत छथि। फरबरी 2023 मेँ केन्द्रमे राखि प्रदूषण पर आधारित 20 गोट विभिन्न शिर्षक सँ कविता संग्रह "प्रलय - पाश " मैथिली पोथी 'क प्रकाशक - रचियता स्वयं छथि। एहि 132 पृष्ठक स्तरीय कागतमे बनल पोथीक दाम 250 टाका अछि। 62 वर्षीय कविवर श्री राजकिशोर मिश्र साकिन - अरेड़ डीह (मधुबनी) भारत संचार निगम लिमिटेड केर मुख्य महाप्रबंधक (विजुली) पद सँ सेवानिवृत्त भेल छथि। ई अनेकों पुरस्कार प्राप्त कय चुकलाह अछि। हिनक मैथिली साहित्यमे दर्जनभरि पोथी छपल छन्हि। विशेषत: ई काव्य रचैत छथि,जे कि दसगोट पोथी छपा चुकल छथि। ओना एक पोथी " मंथन" आलेख संग्रह आ एक पोथी "अष्टदल " गल्प संग्रह प्रकाशित सेहो भेल रहैन। हिन्दी जगतमे श्री मिश्रा जी कविता विधामे अपन दसटा सँ बेसिये पोथी सेहो निकालने छथि। उर्जा-वर्णन ' खंड काव्य - 2019 मेँ वर्ल्ड बुक आफ रिकार्डस द्वारा 'उर्जा' पर पहिल हिन्दी काव्य घोषित कयल गेल छैक। तहिना सन् 2020 मेँ प्रदूषण ' खंड काव्य ' हिन्दीके इण्डिया बुक आफ रिकार्डस द्वारा - काम्प्रेहिन्सिभ डिटेल्स आफ पाल्यूशन पर प्रथम हिंदी काव्य घोषित भेल छन्हि। ऐ बीच हिनक लिखल किछु मैथिली पोथी पढबाक सुअवसर भेटल हन्। जाहिमे हम 'प्रलय - पाश' के चर्चा करय चाहैत छी। ऐहि पोथीक कभर, पृष्ठ सज्जा आ अक्षर वाक्य शुद्धता लेल हुनक पत्नि श्रीमती अनीता देवी आओर सुपुत्री सुश्री शिक्षा मिश्रक कला आ टंकण कार्यक प्रति विशेष आकर्षण अनुराग केँ परैख सकलौंह अछि। अपन भूमिका लिखैत कविवर महोदय धरि ऐ तरहक सराहनीय सहयोग लेल प्रशंसा कयने छथि। एहि भूमण्डल पर जतेक जीव - जन्तु छैक ; सभक समक्ष एकटा महा विनाशकारी संकट अर्थात् खतरा मंडरा रहलैक अछि। प्रकृतिके असंतुलन सँ एहि तरहक जटिल समस्या एक प्रलयके रूपमे प्रत्यक्ष होइत जाई छैक। एकर आहट अकानि राजकिशोर बाबू अपन कलमक रफ्तार बढाबैत माय मैथिलिक अक्षय भंडार केँ आरो भरैक काज व्युत्पन्न तरहेँ कयलन्हि अछि। आ नव संदेश दैत समष्टिक परिशुद्धता ले आकुल देखाइत छथि। जौं समय सँ ई संसार प्रदूषण मुक्त नहिं होयत तँ मानवके संग- संग समस्त चर- चराचर प्रभावित होइत आक्रान्त भs उठत। ई जे भयावहता स्पष्ट रूप सँ हिनक काव्यमे परिलक्षित भेल हन् से समय सँ पूर्व समाजमे एक गंभीर चेतौनी कहल जा सकैछ। विश्व मानवकेँ एक छातातर मानि ली ,आ छातामे भुर ठाम-ठाम हुअय तँ रौदक किरीण अथवा बरखाक जलक चुबौठ सँ सगतर कोना बाँचि पाएब? तहिना आकाश केर ओजोन परत जे अंतरीक्षक कवच सहित धरती केँ अपन दुष्परिणाम परावैगनि कीरीण केँ छिरयबैत जीव - जन्तु पर प्रतिकूल असैर पसारि रहलैक,जाहि सँ अनेकों तरहक व्याधि उत्पन्न भ' रहलैक हय। कवि चिन्तित रहि पाठक के सजग करैत सतत् जागरूक रहबाक खगौट बुझैत छथि। एहि मादे हिनक काव्य रचना अत्यन्त सौष्ठव आ शव्दक चयन निठाहे देशज होईछ। यथा- पाँति द्रष्टव्य अछि -: ..... फैक्टरी सँ जहर - माहुर बाला धुआँ , पसरल जाइछ , प्रदूषण धूथूरमुहाँ । छाती फोड़ि - फोड़ि निकालए तेल , पतालक ' पानि, कहू कत्त गेल ? हिनक साहित्यिक पाँति समकालीन अर्थात् अजाद पध्दतिक होईत छन्हि, जे सहजे बुझैमे पाठक वर्गकेँ अबैत छन्हि। मौसम परिवर्तनक कारणेँ आब असमय बरखा बरसैत य। आब समुन्दरो स्वच्छ नहिँ रहलैक । कवि भावधारामे गबैत छथि - ..... पियासल घोंघा , सितुआ , डोका ताकि रहल छै मेघक वाट , पूरा सुखले रहलैक अरदरा रूसल छै मेघ, धेने छै खाट । कवि एहि तरहक जर्जर कुव्यवस्था देखि चित्कार क' उठैत छथि। पाँति देखल जाए -: ...... हमरा सभक समयमे सभटा छलै शुध्द , हवा, बसात ,भुमि, जल , अन्न - पानि , कोन सुख केँ अछि ताकि रहल मनुक्ख ? सभटा तs उनटे बना रहल अछि बानि । पर्यावरण'क खून पिबयमे , लागल अछि ,नव सभ्यता , एना मे तs बाँचब मोसकिल , कोना क' जीव - जन्तु जीता ? मानव शरीरमे 70% जल आ 30% दूनू रंगक रक्तक आंकड़ा य। से ईनार - पोखरि ,धार - नदी ,नाला सबुटा प्रभावित भेल छैक । बोरींन - चापाकलके जे पताल सँ जलस्रोत छैक ; कतौह - कतौह पेयजलमे आर्सेनीक ,फोलीक आ आयरन केर अधिक मात्रा सँ पेयजल अशुध्द छैक, जे रूग्नता बरहाबैछ। दूर्वाक्षत के अक्षत देखिऔ, भs गेल अछि मिरहिन्नी , शुध्द पानि लेल फिल्टर ,नहि तँs मिनरल वाटर कीनी। पृथ्वी दिवस पर हमसब हरसाल चिन्ता करैत छी। खेत - पथार आ तकर उपज लेल खाद आ किटनाशक'क प्रयोग कयके किसान अधिक पैदावार लेल आशान्वित रहैछ। मुदा सबिकहा सुआद आ तरकारी 'क गमक खत्म भ' गेलैक अछि। रसायन खाद खा - खा कय , बादल माटिक पेट, शक्ति सोआद घटल जाइत अछि,अन्ने भेsल ,आखेट। नव सभ्यता मेँ घरेलू कुटीर उद्योग,जता-ढेकी , सिलौठ - चन्द्रौटाक जगह आब औद्योगिकरण,मशीनीकरण लेने अछि।एहि के सुख साधन अपनाए केँ लोक सुस्त सेहो भेलैक। ठंढा करय लेल एसी मशीन, कs दैछ ओजोन परतमे भूर, विनाश नुकाएल विकास मे, वरदान लेने अछि भस्मासुर। आई वन प्रान्तर ,पहाड़-पठार ,भूगर्भ आ पृथ्वीधरि पर्यावरण प्ररदूषण सँ कराहि उठल छैक। आजुक परिवेशमे नगर सँ देहातधरि छे किछु दृष्टिमे अबैत अछि,से प्रदूषण सँ प्रभावित छैक। तेँ कविक ई पाँति मानवीय संवेदनाक लेल अपील करैत छैक। एखनहु, प्रदुषण रोकल जाए, जे सृष्टि क' अरूदा खेने जाए। मनुखके प्रदुषण बावत कठघारामे ठाढ़ कयल छैक। अन्वेषणकर्ता आ वैज्ञानिक वले विश्व मानव आधुनिक सभ्यतामे स्वयंके भोगी व्यक्ति बनल छै। हर वस्तुक उपभोग आ उपभोक्ता'क नाते मनुष्य विज्ञान युगमे नीक तरहेँ जीवन यापन करैत अछि। ओ विज्ञान जे एक चुटकी भरि माँटि नँय बना पबैत अछि। विश्व आ मानवताक उदघोषक कविवर श्री मिश्रजी ऐ धराधाम पर अवस्थित जड़ चेतन आ जलीय जीव जन्तुक उपर सनिकट अवघात करय बाला पैघ-पैघ रोग सन्दर्भ मे अपन काव्य माध्यम नूतन ढंगे अनुप्राणित कयलाह। आस्था आ विश्वास क' तथ्यके गायन सँ हिनक काव्य अनूगुंजीत अछि। एहन अदभुत परियास ले हुनक स्तुत्य अछि।आक्रान्त भs उठत। ई जे भयावहता स्पष्ट रूप सँ हिनक काव्यमे परिलक्षित भेल हन् से समय सँ पूर्व समाजमे एक गंभीर चेतौनी कहल जा सकैछ। विश्व मानवकेँ एक छातातर मानि ली ,आ छातामे भुर ठाम-ठाम हुअय तँ रौदक किरीण अथवा बरखाक जलक चुबौठ सँ सगतर कोना बाँचि पाएब? तहिना आकाश केर ओजोन परत जे अंतरीक्षक कवच सहित धरती केँ अपन दुष्परिणाम परावैगनि कीरीण केँ छिरयबैत जीव - जन्तु पर प्रतिकूल असैर पसारि रहलैक,जाहि सँ अनेकों तरहक व्याधि उत्पन्न भ' रहलैक हय। कवि चिन्तित रहि पाठक के सजग करैत सतत् जागरूक रहबाक खगौट बुझैत छथि। एहि मादे हिनक काव्य रचना अत्यन्त सौष्ठव आ शव्दक चयन निठाहे देशज होईछ। यथा- पाँति द्रष्टव्य अछि -: ..... फैक्टरी सँ जहर - माहुर बाला धुआँ , पसरल जाइछ , प्रदूषण धूथूरमुहाँ । छाती फोड़ि - फोड़ि निकालए तेल , पतालक ' पानि, कहू कत्त गेल ? हिनक साहित्यिक पाँति समकालीन अर्थात् अजाद पध्दतिक होईत छन्हि, जे सहजे बुझैमे पाठक वर्गकेँ अबैत छन्हि। मौसम परिवर्तनक कारणेँ आब असमय बरखा बरसैत य। आब समुन्दरो स्वच्छ नहिँ रहलैक । कवि भावधारामे गबैत छथि - ..... पियासल घोंघा , सितुआ , डोका ताकि रहल छै मेघक वाट , पूरा सुखले रहलैक अरदरा रूसल छै मेघ, धेने छै खाट । कवि एहि तरहक जर्जर कुव्यवस्था देखि चित्कार क' उठैत छथि। पाँति देखल जाए -: ...... हमरा सभक समयमे सभटा छलै शुध्द , हवा, बसात ,भुमि, जल , अन्न - पानि , कोन सुख केँ अछि ताकि रहल मनुक्ख ? सभटा तs उनटे बना रहल अछि बानि । पर्यावरण'क खून पिबयमे , लागल अछि ,नव सभ्यता , एना मे तs बाँचब मोसकिल , कोना क' जीव - जन्तु जीता ? मानव शरीरमे 70% जल आ 30% दूनू रंगक रक्तक आंकड़ा य। से ईनार - पोखरि ,धार - नदी ,नाला सबुटा प्रभावित भेल छैक । बोरींन - चापाकलके जे पताल सँ जलस्रोत छैक ; कतौह - कतौह पेयजलमे आर्सेनीक ,फोलीक आ आयरन केर अधिक मात्रा सँ पेयजल अशुध्द छैक, जे रूग्नता बरहाबैछ। दूर्वाक्षत के अक्षत देखिऔ, भs गेल अछि मिरहिन्नी , शुध्द पानि लेल फिल्टर ,नहि तँs मिनरल वाटर कीनी। पृथ्वी दिवस पर हमसब हरसाल चिन्ता करैत छी। खेत - पथार आ तकर उपज लेल खाद आ किटनाशक'क प्रयोग कयके किसान अधिक पैदावार लेल आशान्वित रहैछ। मुदा सबिकहा सुआद आ तरकारी 'क गमक खत्म भ' गेलैक अछि। रसायन खाद खा - खा कय , बादल माटिक पेट, शक्ति सोआद घटल जाइत अछि,अन्ने भेsल ,आखेट। नव सभ्यता मेँ घरेलू कुटीर उद्योग,जता-ढेकी , सिलौठ - चन्द्रौटाक जगह आब औद्योगिकरण,मशीनीकरण लेने अछि।एहि के सुख साधन अपनाए केँ लोक सुस्त सेहो भेलैक। ठंढा करय लेल एसी मशीन, कs दैछ ओजोन परतमे भूर, विनाश नुकाएल विकास मे, वरदान लेने अछि भस्मासुर। आई वन प्रान्तर ,पहाड़-पठार ,भूगर्भ आ पृथ्वीधरि पर्यावरण प्ररदूषण सँ कराहि उठल छैक। आजुक परिवेशमे नगर सँ देहातधरि छे किछु दृष्टिमे अबैत अछि,से प्रदूषण सँ प्रभावित छैक। तेँ कविक ई पाँति मानवीय संवेदनाक लेल अपील करैत छैक। एखनहु, प्रदुषण रोकल जाए, जे सृष्टि क' अरूदा खेने जाए। मनुखके प्रदुषण बावत कठघारामे ठाढ़ कयल छैक। अन्वेषणकर्ता आ वैज्ञानिक वले विश्व मानव आधुनिक सभ्यतामे स्वयंके भोगी व्यक्ति बनल छै। हर वस्तुक उपभोग आ उपभोक्ता'क नाते मनुष्य विज्ञान युगमे नीक तरहेँ जीवन यापन करैत अछि। ओ विज्ञान जे एक चुटकी भरि माँटि नँय बना पबैत अछि। विश्व आ मानवताक उदघोषक कविवर श्री मिश्रजी ऐ धराधाम पर अवस्थित जड़ चेतन आ जलीय जीव जन्तुक उपर सनिकट अवघात करय बाला पैघ-पैघ रोग सन्दर्भ मे अपन काव्य माध्यम नूतन ढंगे अनुप्राणित कयलाह। आस्था आ विश्वास क' तथ्यके गायन सँ हिनक काव्य अनूगुंजीत अछि। एहन अदभुत परियास ले हुनक स्तुत्य अछि २ सामाजिक सरोकार केँ नव दिशा दैत उपन्यास
सद्यप्रकाशित श्री रविन्द्र नारायण मिश्र जीके सामाजिक उपन्यास " हम आबि रहल छी" हालहिमे पढलौंह अछि। एहि 140 पृष्टक मैथिली भाषाक पोथी केँ ओ स्वयं ग्रेटर नोएडा (उ०प्र०) सँ 2021 ई0मेँ प्रकाशन कयलन्हि,जाहिक दाम 200 टाका छैक। पोथी 'क आवरण आकर्षक य जे पर्यावरण केर मनोरम दृश्य बुझाइछ। आखरि कभर पर रविन्द्र बाबूक रंगील हाफ फोटो लागल छै,आ एहिभाग उपन्यास मेँ महत्वपूर्ण तथ्य केँ अंश पाठकके अपन आचरण दिश धियान खिंचैत अछि। मधुबनीक अड़ेर डीह सँ दू गोटय सेवानिवृत्त रहितो मातृभाषा'क प्रति विशेष कय लेखन-रचना क्षेत्रमे खुब वेश सक्रिय छथि। एक श्री राजकिशोर मिश्र जीके काव्य सौष्ठव बड़ दिव्य होय छन्हि,तँ दोसर श्री रविन्द्र नारायण मिश्र जीके कथात्मक अभिव्यक्ति। 70 शालक अशोथकित उमेरमे ऐबेर बुढपुरानक प्रति कलयुगी पुत्र -पुत्रीक व्यवहार पर कलम चलाबैत सामाजिक तानाबाना कोना टुइट रहलैक से आख्यासलनि अछि। सब सँ बेशी प्रेरीत करैत छैक, शिर्षक केर ई वाक्य " हम आबि रहल छी " ! उपन्यासक नामकरण केँ सोझरुपेँ कहबाक जे अभिक्रम झलकैत छै,तकरा पाँतिमे ताकब सहजे नहिँ। पढ़ाकू लेल उत्सुकता बढाबैत रविन्द्र नारायण जी पहिले पराव सँ बढबैत-बढबैत पराव 27 धरि घींचलनि अछि। ओना औपन्यासिक जतरा पाठके अंतिममे मूर्धन्य विद्वान प्रोफेसर (डॉ ०) भीमनाथ झाक मनोदगार धरिक कथन पृष्ठ 138-139 पढला पर संतोष पाठकके होई छैन। एहि दुखान्त कथाक आरंभ आ अन्त अत्यन्त संवेदनशील छैक। रविन्द्र बाबूक दर्जनों मैथिली उपन्यास बहरा चुकल छन्हि। अनेकों मैथिली भाषाक उपन्यासकार भेलाह अछि ; मुदा हिनक कथ्य शिल्प सबसँ पृथक रहैत छन्हि। उपन्यासक रोचकताक सौन्दर्य बोध देहाती आ शहरी जीवन मेँ आयल उतार - चढाव सँ व्यक्तिगत रुपेँ सब पात्र मेँ निखार आनैत छैक। उपन्यासक विन्यास नीक लगैत आगूक तथ्य जानवाक उत्सुकता पाठक बीच पैसौने रहनाई रविन्द्र नारायण जीक विशेष कला थीक। सहजे समान्य पाठक ऐ वाक्य केँ तकबामे अथवा के किनका लेल ई वाणी भखै छथि, से गहींरपन सँ पता करब 'हम तँ अहीं लग आबि रहल छी' जीवटपन होएत। दुखित कथाक आरंभ सफदरजंग अस्पताल सँ आ समाप्ति गंगोत्री मेँ डुबि इहलीला खतम होई सँ छै। दरभंगा लगक हरिआरी गामक बाबा सेवानिवृत्त हेडमास्टर आ सकरवार निवासी गंगा - आउटो चालक जे दिल्लीमे शंकर,ओकर संगी दीपा आ दीपेन्दू के तरीघटी पूर्व सँ जनैत छैक। ओ तीनू एके कम्पनीक स्टाफ थिकैक। शंकर पिताजी केँ गाम सँ भोरमे बजा लैत छै आ अपने दूपहरमे गोआ जाई ले डेरा सँ निकैल जाईए। रुममे एसकर बुढाके हर्निया केर दर्द उखैर जाईछ। बेहोश हालतिमे पुष्प विहार सेक्टर एक सँ सफदरजंग हॉस्पिटल कियो इलाज ले बेड पर पुंगेने रहय। ओनय फोन पर बाबूके पुत्र खबेर करैत छैक ,जहाजक उड़ान रद्द भेलासन्ता गामे आबि गेलौंह। से ओ तँ एक बहन्ना बनाएल गेल छलैक। गामक मुखिया सँ दस लाख टाकामे डीह सहित सब जत्था जगहक पकिया बेचनामा कागज जाली हस्ताक्षर सँ बनौने रहय। पराकय गंगा संगे गाम आबि बुढहा बेटी डाक्टर निशा केँ कलकत्ता फौन सँ सब खेरहा बताबैत छथि। हुनकर पितियौत भाय ओकिल साहेब सान्तवना अवश्य दैछ , परंच ओकरो मोनमे मुखिया आ ऐ सेवानिवृत्त मास्टर साहेब सँ ठकपनी करबाक उत्कंठा प्रवल देखेबाक दृश्य स्पष्ट देखल गेल अछि। गामक तीर्थ जात्री सब संगे जे गंगोत्री क' चर्चा केलनि से आरो परिष्कार होइत। ओतय खराब मौसम सँ पहाड़ी इलाकामे संकट उपस्थित होइछ। धूईनमे गंगोत्री नहाति बुढ़ी ठंढि सँ थरथाइत जल बोझैतकाल खसि परैत छथिन,जलधारा सँ अगममे भासैत जाईत सब देखलक। धरि पूतौह ले एक निशानीपेटी पतिदेव केँ ईमानत द' गेलथिन। बेटा बिनु बियाहे धौरवी रुपें एक निशा क्रिश्चियन केँ डेरामे रखैत य। से विदेश (अमेरिका) जा नौकरी करैत य, आ शंकर केँ सेहो ओतय बजाकय धोखा दैत एक अंग्रेज के वियहुति कनियाँ बनि जाइछ। बेटा तँ बेटा ,बेटियो सँ पार लगाउल सक्य नहिं होईछ। कलकत्ता मेँ अपना डेरा पर भेंटघाट तकमे बेटी - जमाय आ नातीन सँ कमाफैत। से लेनय - लेनय मनोरोगी होस्पीटलमे राखि दैछ। ओतुका डाक्टर साहेब हुनका स्वस्थ्य पाबि एक मास पर छुट्टी करैत, गंगाक संग धराबैत गाम पठा दैछ। गामक पुश्तैनी डिह आ ओसारा पर वकील केँ अधिकार पूर्वक विराजमान देखि अचरज मे मुखियाजी पड़लाह। बुड़हा पत्निक कहब केँ मोन पाड़ि पुत्र मोहमे परैछ। गंगा अपन माय बाबुक श्राध कर्म ,भोजभात सम्पन्न कय फोन केएला तँ चार्ज आई रहने बात भ' जाए छैन। मोन हलुक रहने नीक जुइत फुराए छैक। उद्गिन भ' छरी हाथ मे लैत आवश्यक कागतपतर संगे रखैत डीहपर सँ निकैल पड़ैत छैथ। पेराकातेमे गंगा सँ भेंटवार्ता 'क दृश्य अबैछ। कियो बजा रहल अछि ई बजैत मास्टर जी झटकारिके आगू बढै चाहैत छै, तँ गंगा सह नायकके रूपमे पाठकके दृष्टिगोचर होयत। संगे दूनू गोटय केँ ओहि गंगोत्री धरिक यात्रा देखाउल गेनाई मिथिलाक संस्कृति आ संस्कार केँ परिलक्षित कयल गेल छैक। पेंटी केँ जलप्रवाह करय सँ पूर्व मनोहर जी दू लिफाफा जेबी सँ निकालि सुमझाबैत गंगा केँ कहैत देखाएल गेल जे दस लाख टकाक बैंक ड्राफ्ट मुखिया लेल आ अपन जगहजमीनक सहमति पत्र नूतन प्रभात वृद्धाश्रम ,बंगलागढ दरिभंगा ले लेल जाऊ। अहाँक सेवाभाव आ ईमानदारी पर गर्व होईछ। स्नान करैत बुड़हा त्रिवेणी संगम मेँ धसधसाए गेलाह। एकटक निहारैत गंगाधर केँ हठात् एक महात्मा जी माथठोकि आशिष दैत संतोष दैत छैन- जाऊ हिनक गंगालाभ सँ सद्गति सबसँ नीक भेलनि। सैकड़ों वृधाश्रमक लोकमे ई जनतब परोक्षरुपेँ होई सँ पहिले ,विक्षिप्त मालिक केँ एकमेव उतराधिकारी नातीन दीपाक मोटर दुर्घटना मेँ दुखद अंत भेल छलैक। आजुक युवावर्ग वा प्रौढ़ अपन भावभंगिमाक स्मिता जनिजात हाथे बन्हकि राखि, जन्मदाता केँ कोना आपत्तिजनक व्यवहार करैत अछि; से सुधारात्मक संदेश मैथिली साहित्य आन्दोलन सँ मिश्र जी उपन्यास गढि।के देलनि!हम हिनक हार्दिक अभिनन्दन करैत छियैन। ३
कविवर बद्रीनाथ राय जीक मादे कविवर बद्रीनाथ राय " अमात्य" जीके पाँच दर्जन काव्यके मैथिली पोथी " टटका गेयातत्मक कविता" मेँ एके शिर्षक ' गेयातत्मक नव कविता ' सँ अर्ध्द्शतक धरि देखलौं_पढलौह। श्रीराय जीक कविता वस्तुत: मंचीय - गेयातत्मक बुझाइछ। मिथिलाक किछु गीतकार अपना अंदाजमे एहिमे सँ गौउने छथि। हिनक काव्य रचना अत्यन्त सौष्ठव भेल छन्हि। प्रस्तुत पोथी 'टटका गेयातत्मक कविता ' संग्रहमे भावक अविरल आओर अजस्त्रधारा प्रवाहित भेल य। कलाके विचार भाव नैयका आ मौलिक दृष्टिगत होईछ। हिनक कविता केँ सम्पुष्टि दैत अनेको कविजनके लघु आ दीर्घाकार कविता सँ मूलभूत तुलना कयल जा सकैछ। एके शिर्षक सँ दीर्घ अथवा खंड काव्य अनेकों कविजीक छन्हि,परंच साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता प्रोफेसर (डा०) इन्द्र कान्त झा जीक कतेको कविताक शिर्षक 'क नाऊ एके छन्हि। मुदा ताहू सँ दू डेग आरो आगू बढि हिनक भेल अछि। पाठक केँ विविध शिर्षक सँ कविता पढहय मे आओत , जाहिमे रस अलंकार आ छंद लालित्य बुझाएत। एहि पोथीके हाथ लगेबाक माने भेल जे आद्य:उपरान्त शिघ्रे पढऐय बिना रुकि नै सकैत छी। एहि निहितार्थ वरेण्य साहित्यकार श्री नन्द बिलास राय जीक समीक्षात्मक तथ्य सेहो पुष्टि करैत छैक। स्वयं बद्रीनाथ बाबू अपन अभिमत सँ कविताक रचना संदर्भ मेँ सांगोपांग व्याख्या कयनहि छथि ।ताहि सँ पाठकवर्ग केँ कविताक रोचकता सेहो सहेजें बूझिमे आबि जाएत। समसामयिक विषय पर पांति गरहैत रायजी निमग्न भ' गबैत छथि। यथा पाँति देखल जाऊ :- पालक परम कठोर भेल अछि, मुदा विकासक शोर भेल अछि। अपने रान्हल तीसी तीमन , नोनगर करूगर जोर भेल अछि।। मिथिलाक समृद्धि तखने होएत जहन एतुका सर्वहारा वर्ग 'क लोकके बेरोजगारी खत्म होय :- हकन कनइए मिथिला धरती , जनमानस लाचार बहुत छै । बाउ विकाश विलम्ब जुनि करियौ , खाली हाथ बेकार बहुत छै।। मिथिलामे मैथिली'क नाम पर किछ जरदगव अपना वर्ग आ जाति'क नहिँ ,वरन् बिनु परवाह कयने अपन गोतिया आ गोधिंयापनिक चलाकी सँ एक गुट ठाढ केने छैक।ताहिक वर्चस्ववादी संस्कृति पर व्यंग करैत कवि पाँति लिखने छथि -: माला मंच माइकमे मिथिला, माथमे चाही ललका पाग । आब सुधरि जो निर्लज्जा तूँ , गत्तर गत्तर लगलौ दाग ।। मंच- माइक- माला पहिर खूब नितराइत, यशस्वी बनैत ,दीपके ईजोत पसारबाक आकर्षक पेनी देखू तँ अन्हारे आ हहाकारे केने छै । से व्यक्तिगतो जीवनमे कनेक यश बटोरने रहनाय मनुखता हैत! तेँ कवि कटाक्ष करैत ई पांति देलनि -: लात खाइतमे उमर बितल छौ गारि सुनैतमे पकलौ केस । तन्द्रा के तूँ त्याग पतितहा देहमे नञि छौ लाजक लेश।। भारतीय नागरिक केँ विशेष कय लेखकीय काजमेँ लागल कलमवीर केर दू गूट - एक वामपंथ तँ दोसर दक्षिण पंथमे बँटल देखल जाइछ,से हदघरी मानसिकता आधार पर बँटले बुझाइछ। मुदा संतुष्टि कतौ नै न छैक? यथा-: राजनीतिक दलदल के कारण, सबहक मनमे रार बहुत छै । अपना मनसँ सब सिन्धु छै , देखलहुँ सुख्खल धार बहुत छै।। मिथिलांचल प्रायः रौंदी (अकाल) आ वाढिमे त्रस्त रहैत छैक। सरकार दिशसँ सरकारी कर्मी आ त्रि-स्तरीय पंचायती राज क' जनप्रतिनिधि राहत सूची लाभार्थी लेल बनाबयमे घोर अनियमितता करैत खूब धन डेकारैत छैक। निगरानी जाँच दल सेहो वादमे मालामाल होईछ,आ हाथी तँ दहा जाइछ मुदा चीरै दू बूँन जल बिना बंचित रहि जाइछ। एहि मार्मिक दृश्यके चित्र खींचैत कवि समानताक लेल बेकल देखाईछ। यथा-: चास बास संसाधन रहितहुँ सब कनहापर भार बहुत छै। पीपड़ पाखरि के मोजर नञि छाँवहीनटा तार बहुत छै ।। छै समाजमे बहुत विषमता भ्रष्टाचार विकार बहुत छै । किछुए के चुनरी मलमल छै बाँकि लोक उघार बहुत छै ।। अपन कविताक उपयोगिता मादे कविजी घोषणा करैत छथि। यथेष्ट पढल- लिखल आ अफसर बनल मिथिलाक बेटा जे शहर नगरमे रहि पैघौत झाड़ैत छथि से आब गाम घरक मैथिल सन मैथिली बजनिहार नहिँ छथि।ओ आब अपन परिबारिक धियापुता सँ अंगरेजीये हिन्दीमे वार्तालाप करैत अपना केँ श्रेष्ठ बुझैछ आ मिथिला मंच पर मैथिली लेल नोर बहबैत रंगल नढ़िया बनल देखाईछ,से ऐ पांतिमे स्पष्ट लौकैत य -: माँ मैथिली हमरा कहलनि - जे पुत छथि पढल - लिखल नञि, खूबे ओ देलनि सम्मान । पूत हमर जे पढल लिखल छथि , माँ नँय बूझलनइ , बुझलनि आन।। मैथिली साहित्य आन्दोलन मेँ हिनक योगदान लेल हम अभिभूत छी। दिव्य - दृष्टि मैथिली भाषा पोथीमे सेहो हिनक काव्यके चर्चा हम कयने रही ; सेहो हुनक जन्मदिन 'के सुअवसर पर। इति।। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.१०.परमानन्द लाल कर्ण- गीता माहात्म्य परमानन्द लाल कर्ण- गीता माहात्म्य अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ४.पद्य खण्ड ४.१.राज किशोर मिश्र-चिंता-फिकिर ४.१.राज किशोर मिश्र-चिंता-फिकिर राज किशोर मिश्र, रिटायर्ड चीफ जेनरल मैनेजर (ई), बी.एस.एन.एल.(मुख्यालय), दिल्ली,गाम- अरेर डीह, पो. अरेर हाट, मधुबनी चिंता-फिकिर चि न्ता -गा छ पर की फड़ैत अछि ? डढ़, अनि श्चय, संशय, ना च करैछ मो न, घि रनी सन, बैसल ओकर केन्द्र मे ,भय ।
की हो इत छैक परि णा म एकर? कहू, करतैक की डरा एल मो न? अपन बऽल हा रल पहि ने सँ , टि नहा भेऽल जा इत अछि सो न।
उत्सा ह- उर्जा के सुड़कैत अछि ? सिं ह को ना नढ़ि आ बनैत अछि ?
मो नक सो नि त, पी जा इत अछि चि न्ता , पछतेता ,जे नहि शत्रु के चि न्हता ।
अनचि न्हा र भवि ष्य लेल, जे अछि एखन रस्ते मे, मनगढ़न्त बा त ओकरा दऽ, ओझरा दैत अछि , सस्ते मे।
अपन तऽ अछि वर्तमा न, कि ए सो चू ,केहेन भवि ष्य? पहि ने सँ कि ए डरि कऽ बैसू, जे आब बा ला अछि दृश्य।
जे आएल नहि ,कि ए ओते मा नदा न? आ, नि ष्क्रि य भऽ रहअओ वर्तमा न।
शक्ति क सो नि त पी बि जा इत अछि , मो न मे पैसल चि न्ता , बि ना तेल के जड़त ने टेमी , एहि बा तक कि एक छगुनता ?
के बुधि आर अपन घर मे, बसा ओत को नो पि शा च? चिं ता जतए रहत ,छो ड़त नहि , ओ तऽ नचा ओत ना च।
जोँ क रहैछ चुपचा प सटल, मुदा ,पी बि रहल नहि अछि ओ खून? बेका र बना दैत अछि ओहि के, पकड़ि लैत अछि जा हि मे घुन।
चि न्ता नहि ककरो कि छु देलक, मगर झि कलक, ओकर सभ गुण, जकर मा थ मे बैसि गेल जा कऽ , मन मे ओकर,भरि देलक ,गुनधुन।
का ल्हुक फि कि र मे गेल आइ, जे पो सलक चि न्ता ,तकरे खा इ।
डरल व्यथि त आ चि न्ति त मो न, जी तल जि नगी क युद्ध को न ?
हा रल मो न, हरा ओत ककरा ? चि न्ता ,शक्ति क' कएलक बखरा ।
ओ नहि छो ड़त, अपनहिँ छो ड़ू, मो नक चक्रव्यूह के तो ड़ू।
चि न्तन सँ ,मो नक' समा धि , चि न्ता दैत अछि अगबे आधि ।
जे छै भा वी , हेबे करतै, ओ तऽ अछि दुर्वा र, चि न्ता भरब जँ मा थ मे, चनकत अपन कपा र।
कि ओ टा रि सकैछ जँ भा वी के, तऽ, केवल कर्म, पुरुषा र्थ, उनटा सो च देत ने कहि ओ, सौ भा ग्य, कि नी क पदा र्थ।
जेहो कऽ सकैत छी ओहो कथमपि ने कऽ पा एब, जे सभ चि न्ता -फि कि र के ,चा ङ्गुर मे पकड़ा एब ।
फि कि र सँ ग्रसि त मो न बेमा र , ओ कि बदलत अपन कपा र?
चिं ता - मुक्त ,ओ स्वस्थ मो न , स्वतः ओहि मे भरतै उत्सा ह, चढ़त ओ उन्नति क शृङ्ग पर, मो न जकर छैक, बा दसा ह। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। विदेह ३७१ म अंक ०१ जून २०२३ (वर्ष १६ मास १८६ अंक ३७१)|| 1 2 || http://www.videha.co.in/ ISSN 2229-547X VIDEHA
५. अनुलग्नक (पृ. १-३०७) १.विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक Videha e journal's all old issues (पृ. १-२०) २.मैथिली पोथी डाउनलोड Maithili Books Download (पृ. २१-५४) ३. मैथिली ऑडियो-वीडियोक संकलन Maithili Audios-Videos (पृ. ५५-६४) ४.मैथिली शिशु, बाल आ किशोर साहित्य Maithili Children Literature (पृ. ६५-७४) ५.विदेह स्त्री कोना (पृ. ७५-८१) ६. विदेह ई-लर्निङ्ग (पृ. ८२-९२) ७.विदेह सूचना संपर्क अन्वेषण (including Parallel Literature in Maithili and Videha Maithili Literature Movement) (पृ. ९३-१९७) ८.विदेह मिथिलाक खोज (पृ. १९८-२२४) ९.विदेह मिथिला रत्न (पृ. २२५-३०७) 254 || http://www.videha.co.in/ ISSN 2229-547X VIDEHA विदेह ३७१ म अंक ०१ जून २०२३ (वर्ष १६ मास १८६ अंक ३७१)||
१.विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक Videha e journal's all old issues वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू। Always refresh the pages for viewing new issue of VIDEHA. Search within Old Issues of Videha https://books.google.com/ Top of Form Bottom of Form Videha Archive of Old Issues विदेह पुरान अंकक आर्काइव (पूर्णतः अव्यवसायिक उद्देश्य आ मात्र एकेडमिक प्रयोग लेल) विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक पी.डी.एफ. डाउनलोड लेल क्रमानुसार नीचाँक लिंकपर उपलब्ध अछि। All the old issues of Videha e journal are available for pdf download at the respective links below. ............. तिरहुता, नेवाड़ी आ कैथी फॉण्ट डाउनलोड Google's Noto Fonts project/ GitHub तिरहुता नोटो फॉण्ट कैथी ओटीएफ कैथी टीटीएफ नेवाड़ी ओ.टी.एफ. नेवाड़ी टी.टी.एफ. https://fonts.google.com/ (Google Open Fonts download) Tirhuta Offline Keyboard download Keyman Tirhuta/ Vedic Devanagari Keyboards Download https://malarproject.gitlab.io/tirhuta (Tirhuta Keyboard Online) .......... १ गजेन्द्र ठाकुर (सम्पादन) विदेह-सदेह १-२५ www.videha.co.in विदेह ई-पत्रिकाक अंक १-३५० सँ- मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ गद्य आ पद्यक एकटा समानान्तर संकलन देवनागरी मिथिलाक्षर विदेह:सदेह १ विदेह: सदेह १ तिरहुता विदेह:सदेह २ मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना विदेह: सदेह २ तिरहुता विदेह:सदेह ३ मैथिली पद्य विदेह: सदेह ३ तिरहुता विदेह:सदेह ४ मैथिली कथा विदेह: सदेह ४ तिरहुता विदेह मैथिली विहनि कथा [विदेह सदेह ५] विदेह: सदेह ५ तिरहुता विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५]- संस्करण-२ विदेह: सदेह ५ संस्करण-२ तिरहुता विदेह मैथिली लघुकथा [विदेह सदेह ६] विदेह: सदेह ६ तिरहुता विदेह मैथिली पद्य [विदेह सदेह ७] विदेह: सदेह ७ तिरहुता विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [विदेह सदेह ८] विदेह: सदेह ८ तिरहुता विदेह मैथिली शिशु उत्सव [विदेह सदेह ९] विदेह: सदेह ९ तिरहुता विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [विदेह सदेह १०] विदेह: सदेह १० तिरहुता विदेह:सदेह ११ विदेह: सदेह ११ तिरहुता विदेह:सदेह १२ विदेह: सदेह १२ तिरहुता विदेह:सदेह १३ विदेह: सदेह १३ तिरहुता विदेह:सदेह १४ विदेह: सदेह १४ तिरहुता विदेह:सदेह १५ विदेह: सदेह १५ तिरहुता विदेह:सदेह १६ विदेह: सदेह १६ तिरहुता विदेह:सदेह १७ विदेह: सदेह १७ तिरहुता विदेह:सदेह १८ विदेह: सदेह १८ तिरहुता विदेह:सदेह १९ विदेह: सदेह १९ तिरहुता विदेह:सदेह २० विदेह: सदेह २० तिरहुता विदेह:सदेह २१ विदेह: सदेह २१ तिरहुता विदेह:सदेह २२ विदेह: सदेह २२ तिरहुता विदेह:सदेह २३ विदेह: सदेह २३ तिरहुता विदेह:सदेह २४ विदेह: सदेह २४ तिरहुता विदेह:सदेह २५ विदेह: सदेह २५ तिरहुता विदेह-सदेह २६-३६ www.videha.co.in विदेह ई-पत्रिकाक अंक १-३५० सँ- थीम आधारित मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ मूल आ अनूदित गद्य आ पद्यक एकटा समानान्तर संकलन विदेह:सदेह २६ (डॉ शम्भु कुमार सिंह आ डॉ अरुण कुमार सिंह अंक १-३५० सँ) विदेह: सदेह २६ तिरहुता विदेह:सदेह २७ (गजेन्द्र ठाकुर आ रवि भूषण पाठकक आन भाषासँ अनूदित गद्य आ पद्य- अंक १-३५० सँ) विदेह: सदेह २७ तिरहुता विदेह:सदेह २८ (अनूदित गद्य आ पद्य- अंक १-३५० सँ) विदेह: सदेह २८ तिरहुता विदेह:सदेह २९ (रवि भूषण पाठक आ डॉ. कैलाश कुमार मिश्र- अंक १-३५० सँ) विदेह: सदेह २९ तिरहुता विदेह:सदेह ३० (स्कूल-कॉलेजक विद्यार्थी लेल- अंक १-३५० सँ) विदेह: सदेह ३० तिरहुता विदेह:सदेह ३१ (डॉ. कामिनी कामायनी आ कुमार मनोज कश्यप- अंक १-३५० सँ) विदेह: सदेह ३१ तिरहुता विदेह:सदेह ३२ (रचनात्मक गद्य-पद्य लेखन भाग-१- अंक १-३५० सँ) विदेह: सदेह ३२ तिरहुता विदेह:सदेह ३३ (रचनात्मक गद्य-पद्य लेखन भाग-२- अंक १-३५० सँ) विदेह: सदेह ३३ तिरहुता विदेह:सदेह ३४ (रचनात्मक गद्य-पद्य लेखन भाग-३- अंक १-३५० सँ) विदेह: सदेह ३४ तिरहुता विदेह:सदेह ३५ (रचनात्मक गद्य-पद्य लेखन भाग-४- अंक १-३५० सँ) विदेह: सदेह ३५ तिरहुता विदेह:सदेह ३६ (रचनात्मक गद्य-पद्य लेखन भाग-५- अंक १-३५० सँ) विदेह: सदेह ३६ तिरहुता ................... यू.पी.एस.सी. आ आन प्रतियोगिता परीक्षा लेल देखू: विदेह:सदेह १७ विदेह:सदेह २१ विदेह:सदेह २३ विदेह:सदेह २६ विदेह:सदेह २९ विदेह:सदेह ३० विदेह:सदेह ३२ विदेह:सदेह ३३ विदेह:सदेह ३४ विदेह:सदेह ३५ ................ २ विदेहक सभटा पुरान अंक (अंक १ सँ ३५४ आ आगाँ) विदेहक अंक १-१४९ (देवनागरी, मिथिलाक्षर आ ब्रेलमे) देवनागरी मिथिलाक्षर ब्रेल Videha_01_01_08 Videha_01_01_08_Tirhuta 1 Videha_15_01_08 Videha_15_01_08_Tirhuta 2 Videha_01_02_08 Videha_01_02_08_Tirhuta 3 Videha_15_02_08 Videha_15_02_08_Tirhuta 4 Videha_01_03_08 Videha_01_03_08_Tirhuta 5 Videha_15_03_08 Videha_15_03_08_Tirhuta 6 Videha_01_04_2008 Videha_01_04_2008_Tirhuta 7 Videha_15_04_2008 Videha_15_04_2008_Tirhuta 8 Videha_01_05_2008 Videha_01_05_2008_Tirhuta 9 Videha_15_05_2008 Videha_15_05_2008_Tirhuta 10 Videha_01_06_2008 Videha_01_06_2008_Tirhuta 11 Videha_15_06_2008 Videha_15_06_2008_Tirhuta 12 Videha_01_07_2008 Videha_01_07_2008_Tirhuta 13 Videha_15_07_2008 Videha_15_07_2008_Tirhuta 14 Videha_01_08_2008 Videha_01_08_2008_Tirhuta 15 Videha_15_08_2008 Videha_15_08_2008_Tirhuta 16 Videha_01_09_2008 Videha_01_09_2008_Tirhuta 17 Videha_15_09_2008 Videha_15_09_2008_Tirhuta 18 Videha_01_10_2008 Videha_01_10_2008_Tirhuta 19 Videha_15_10_2008 Videha_15_10_2008_Tirhuta 20 Videha_01_11_2008 Videha_01_11_2008_Tirhuta 21 Videha_15_11_2008 Videha_15_11_2008_Tirhuta 22 Videha_01_12_2008 Videha_01_12_2008_Tirhuta 23 Videha_15_12_2008 Videha_15_12_2008_Tirhuta 24 Videha_01_01_2009 Videha_01_01_2009_Tirhuta 25 Videha_15_01_2009 Videha_15_01_2009_Tirhuta 26 Videha_01_02_2009 Videha_01_02_2009_Tirhuta 27 Videha_15_02_2009 Videha_15_02_2009_Tirhuta 28 Videha_01_03_2009 Videha_01_03_2009_Tirhuta 29 Videha_15_03_2009 Videha_15_03_2009_Tirhuta 30 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VIDEHA_175 VIDEHA_176 VIDEHA_177 VIDEHA_178 VIDEHA_179 VIDEHA_180 VIDEHA_181 VIDEHA_182 VIDEHA_183 VIDEHA_184 VIDEHA_185 VIDEHA_186 VIDEHA_187 VIDEHA_188 VIDEHA_189 VIDEHA_190 VIDEHA_191 VIDEHA_192 VIDEHA_193 VIDEHA_194 VIDEHA_195 VIDEHA_196 VIDEHA_197 VIDEHA_198 VIDEHA_199 VIDEHA_200 VIDEHA_201 VIDEHA_202 VIDEHA_203 VIDEHA_204 VIDEHA_205 VIDEHA_206 VIDEHA_207 VIDEHA_208 VIDEHA_209 VIDEHA_210 VIDEHA_211 VIDEHA_212 VIDEHA_213 VIDEHA_214 VIDEHA_215 VIDEHA_216 VIDEHA_217 VIDEHA_218 VIDEHA_219 VIDEHA_220 VIDEHA_221 VIDEHA_222 VIDEHA_223 VIDEHA_224 VIDEHA_225 VIDEHA_226 VIDEHA_227 VIDEHA_228 VIDEHA_229 VIDEHA_230 VIDEHA_231 VIDEHA_232 VIDEHA_233 VIDEHA_234 VIDEHA_235 VIDEHA_236 VIDEHA_237 VIDEHA_238 VIDEHA_239 VIDEHA_240 VIDEHA_241 VIDEHA_242 VIDEHA_243 VIDEHA_244 VIDEHA_245 VIDEHA_246 VIDEHA_247 VIDEHA_248 VIDEHA_249 VIDEHA_250 VIDEHA_251 VIDEHA_252 VIDEHA_253 VIDEHA_254 VIDEHA_255 VIDEHA_256 VIDEHA_257 VIDEHA_258 VIDEHA_259 VIDEHA_260 VIDEHA_261 VIDEHA_262 VIDEHA_263 VIDEHA_264 VIDEHA_265 VIDEHA_266 VIDEHA_267 VIDEHA_268 VIDEHA_269 VIDEHA_270 VIDEHA_271 VIDEHA_272 VIDEHA_273 VIDEHA_274 VIDEHA_275 VIDEHA_276 VIDEHA_277 VIDEHA_278 VIDEHA_279 VIDEHA_280 VIDEHA_281 VIDEHA_282 VIDEHA_283 VIDEHA_284 VIDEHA_285 VIDEHA_286 VIDEHA_287 VIDEHA_288 VIDEHA_289 VIDEHA_290 VIDEHA_291 VIDEHA_292 VIDEHA_293 VIDEHA_294 VIDEHA_295 VIDEHA_296 VIDEHA_297 VIDEHA_298 VIDEHA_299 VIDEHA_300 VIDEHA_301 VIDEHA_302 VIDEHA_303 VIDEHA_304 VIDEHA_305 VIDEHA_306 VIDEHA_307 VIDEHA_308 VIDEHA_309 VIDEHA_310 VIDEHA_311 VIDEHA_312 VIDEHA_313 VIDEHA_314 VIDEHA_315 VIDEHA_316 VIDEHA_317 VIDEHA_318 VIDEHA_319 VIDEHA_320 VIDEHA_321 VIDEHA_322 VIDEHA_323 VIDEHA_324 VIDEHA_325 VIDEHA_326 VIDEHA_327 VIDEHA_328 VIDEHA_329 VIDEHA_330 VIDEHA_331 VIDEHA_332 VIDEHA_333 VIDEHA_334 VIDEHA_335 VIDEHA_336 VIDEHA_337 VIDEHA_338 VIDEHA_339 VIDEHA_340 VIDEHA_341 VIDEHA_342 VIDEHA_343 VIDEHA_344 विदेहक सभ अंक सम्बन्धी किछु आवश्यक पोथी/ जानकारी Learn Maithili Sign Language- Gajendra Thakur (2009/ 2023) मैथिली (मैथिली संकेत भाषा सहित- मैथिलीमे पहिल बेर) Learn Mithilakshar- Gajendra Thakur (2009/ 2023) Learn IPA through Mithilakshar- Gajendra Thakur (2009/ 2023) Learn Braille through Mithilakshar- Gajendra Thakur (2009/ 2023) Tirhuta Offline Keyboard download Keyman Tirhuta/ Vedic Devanagari Keyboards Download Learn Kaithi- Gajendra Thakur (2009/ 2023) कैथी लिपि (मैथिली साहित्य संस्थान डाउनलोड लिंक) Learn Newari- Gajendra Thakur (2009/ 2023) Learn Calligraphic Newari (Ranjana)- Gajendra Thakur (2009/ 2023) Learn Urdu Script- Gajendra Thakur (2009/ 2023) Learn Tibetan Script- Gajendra Thakur (2009/ 2023) Learn Japanese Script for Haiku- Gajendra Thakur (2009/ 2023) Learn Brahmi- Gajendra Thakur (2009/ 2023) Learn Kharoshthi- Gajendra Thakur (2009/ 2023) स्थायी स्तम्भ जेना मिथिला-रत्न, मिथिलाक खोज, विदेह ई-लर्निङ्ग, विदेह स्त्री-कोना, विदेह पेटार (विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक; विदेह पोथी डाउनलोड; विदेह मैथिली ऑडियो-वीडियोक संकलन आ विदेह शिशु, बाल आ किशोर साहित्य) आ सूचना-संपर्क-अन्वेषण (including Parallel Literature in Maithili and Videha Maithili Literature Movement) सभ अंकमे समान अछि, तइ हेतु ई सभ स्तम्भ सभ अंकमे नै देल जाइत अछि, ई सभ स्तम्भ देखबा लेल क्लिक करू विदेहक ३४६ म, ३४७ म, ३६६ म आ ३७१ म अंक। ऐ चारू अंकमे सम्मिलित रूपेँ ई सभ स्तम्भ देल गेल अछि। विदेहक ३४५म आ आगाँक अंक देवनागरी मिथिलाक्षर आइ.पी.ए. मैथिली ब्रेल VIDEHA_345 VIDEHA_345_Tirhuta VIDEHA_345_IPA VIDEHA_345_Braille VIDEHA_346 VIDEHA_346_Tirhuta VIDEHA_346_IPA VIDEHA_346_Braille VIDEHA_347 VIDEHA_347_Tirhuta VIDEHA_347_IPA VIDEHA_347_Braille VIDEHA_348 VIDEHA_348_Tirhuta VIDEHA_348_IPA VIDEHA_348_Braille VIDEHA_349 VIDEHA_349_Tirhuta VIDEHA_349_IPA VIDEHA_349_Braille देवनागरी मिथिलाक्षर आइ.पी.ए. मैथिली ब्रेल कैथी VIDEHA_350 VIDEHA_350_Tirhuta VIDEHA_350_IPA VIDEHA_350_Braille VIDEHA_350_KAITHI VIDEHA_351 VIDEHA_351_Tirhuta VIDEHA_351_IPA VIDEHA_351_Braille VIDEHA_351_KAITHI VIDEHA_352 VIDEHA_352_Tirhuta VIDEHA_352_IPA VIDEHA_352_Braille VIDEHA_352_KAITHI VIDEHA_353 VIDEHA_353_Tirhuta VIDEHA_353_IPA VIDEHA_353_Braille VIDEHA_353_KAITHI VIDEHA_354 VIDEHA_354_Tirhuta VIDEHA_354_IPA VIDEHA_354_Braille VIDEHA_354_KAITHI नागरी तिरहुता आइपीए ब्रेल कैथी रंजना नेवाड़ी खरोष्ठी ब्राह्मी 355 Tirhu IPA Brail KAI Ran Newa Kharo Brahmi नागरी तिरहुता कैथी रंजना प्रचलित ब्राह्मी IPA ब्रेल खरोष्ठी उर्दू तिब्बती तिब्बती-उमे 356 Tirhu Kai Ran Newa Brah IPA ब्रेल खरोष्ठी उर्दू Tib Ume 357 Tirhu Kai Ran Newa Brah IPA ब्रेल खरोष्ठी उर्दू Tib Ume नागरी तिरहुता कैथी रंजना प्रचलित ब्राह्मी IPA ब्रेल तिब्बती तिब्बती-उमे 358 Tirhu Kai Ran Newa Brah IPA ब्रेल Tib Ume 359 Tirhu Kai Ran Newa Brah IPA ब्रेल Tib Ume 360 Tirhu Kai Ran Newa Brah IPA ब्रेल Tib Ume नागरी तिरहुता कैथी नेवाड़ी आइ.पी.ए. ब्रेल 361 Tirhuta Kaithi Newari IPA Braille 362 Tirhuta Kaithi Newari IPA Braille 363 Tirhuta Kaithi Newari IPA Braille 364 Tirhuta Kaithi Newari IPA Braille 365 Tirhuta Kaithi Newari IPA Braille 366 Tirhuta Kaithi Newari IPA Braille 367 Tirhuta Kaithi Newari IPA Braille 368 Tirhuta Kaithi Newari IPA Braille 369 Tirhuta Kaithi Newari IPA Braille 370 Tirhuta Kaithi Newari IPA Braille ............. ३ विदेहक विशेषांक १) हाइकू विशेषांक Videha_15_06_2008 Videha_15_06_2008_Tirhuta 12 २) गजल विशेषांक Videha_01_11_2008 Videha_01_11_2008_Tirhuta 21 ३) विहनि कथा विशेषांक videha_01_10_2010 videha_01_10_2010_tirhuta 67 ४) बाल साहित्य विशेषांक videha_15_11_2010 videha_15_11_2010_tirhuta 70 ५) नाटक विशेषांक videha_15_12_2010 videha_15_12_2010_tirhuta 72 ६) समीक्षा विशेषांक videha_15_01_2011 videha_15_01_2011_tirhuta 74 ७) नारी विशेषांक videha_01_03_2011 videha_01_03_2011_tirhuta 77 ८) अनुवाद विशेषांक (गद्य-पद्य भारती) videha_01_01_2012 videha_01_01_2012_tirhuta 97 ९) बाल गजल विशेषांक videha_01_08_2012 videha_01_08_2012_tirhuta 111 १०) भक्ति गजल विशेषांक videha_15_03_2013 videha_15_03_2013_tirhuta 126 ११) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक videha_15_11_2013 videha_15_11_2013_tirhuta 142 १२) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक Videha_01_01_2015 १३) अरविन्द ठाकुर विशेषांक Videha_01_11_2015 स्वतंत्रचेता- अरविन्द ठाकुर: व्यक्तित्व-कृतित्व (सम्पादक आशीष अनचिन्हार) [विदेह अरविन्द ठाकुर विशेषांकक प्रिण्ट रूप] १४) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक Videha_01_12_2015 १५) विदेह सम्मान विशेषांक विदेह सम्मान: सम्मान-सूची (समानान्तर साहित्य अकादेमी, समानान्तर ललित कला अकादेमी आ समानान्तर संगीत-नाटक अकादेमी सम्मान/ पुरस्कार नामसँ विख्यात) साक्षात्कार/ समारोह साक्षात्कार videha_15_12_2011 videha_15_01_2012 videha_01_02_2012 videha_01_03_2012 videha_01_09_2012 videha_15_01_2013 videha_01_03_2013 Videha_15_04_2016 Videha_01_07_2016 १६) मैथिली सी.डी./ अल्बम गीत संगीत विशेषांक Videha_01_01_2017 १७) मैथिली वेब पत्रकारिता विशेषांक VIDEHA 313 १८) मैथिली बीहनि कथा विशेषांक-२ VIDEHA 317 १९) रामलोचन ठाकुर विशेषांक VIDEHA 319 २०) रामलोचन ठाकुर श्रद्धांजलि विशेषांक VIDEHA 320 २१) राजनन्दन लाल दास विशेषांक VIDEHA 333 २२) रवीन्द्र नाथ ठाकुर विशेषांक VIDEHA_348 VIDEHA_348_Tirhuta VIDEHA_348_IPA VIDEHA_348_Braille २३) केदार नाथ चौधरी विशेषांक VIDEHA_352 VIDEHA_352_Tirhuta VIDEHA_352_IPA VIDEHA_352_Braille VIDEHA_352_KAITHI २४) प्रेमलता मिश्र 'प्रेम' विशेषांक Videha_357 Videha_357_Tirhuta २५) शरदिन्दु चौधरी विशेषांक Videha_358 Videha_358_Tirhuta २६) कला-विमर्श विशेषांक (सन्दर्भ- संजू दास, कृष्ण कुमार कश्यप, शशिबाला, एस.सी.सुमन आ श्वेता झा चौधरी) Videha_368 Videha_368_Tirhuta २७) रचनाकार अशोक विशेषांक Videha_369 Videha_369_Tirhuta २७) राम भरोस कापड़ि 'भ्रमर' विशेषांक Videha_370 Videha_370_Tirhuta २८) मिथिला स्टूडेण्ट यूनियन (एम.एस.यू.) विशेषांक Videha_371 Videha_371_Tirhuta ............. ४ लेखकक आमंत्रित रचना आ ओइपर आमंत्रित समीक्षकक समीक्षा सीरीज १.कामिनीक पांच टा कविता आ ओइपर मधुकान्त झाक टिप्पणी Videha_01_09_2016 २.जगदानन्द झा "मनु"क "माटिक बासन"पर गजेन्द्र ठाकुरक टिप्पणी VIDEHA_353 ३.मुन्नी कामतक एकांकी "जिन्दगीक मोल" आ ओइपर गजेन्द्र ठाकुरक टिप्पणी VIDEHA_354 ४.कपिलेश्वर राउतक ५ टा कथा आ ओइपर गजेन्द्र ठाकुरक टिप्पणी VIDEHA_356 ५.उमेश मण्डलक ५ टा कथा आ ओइपर गजेन्द्र ठाकुरक टिप्पणी Videha_357 ६.राम विलास साहुक ५ टा कथा आ ओइपर गजेन्द्र ठाकुरक टिप्पणी Videha_358 ७.नित नवल सुभाष चन्द्र यादव- सुभाष चन्द्र यादवक समस्त साहित्य आ ओइपर गजेन्द्र ठाकुरक टिप्पणी नित नवल सुभाष चन्द्र यादव नित नवल सुभाष चन्द्र यादव (मिथिलाक्षर) ८.राजदेव मण्डलक साहित्यपर गजेन्द्र ठाकुरक टिप्पणी Rajdeo Mandal- Maithili Writer ९.आचार्य रामानन्द मण्डलक ५ टा कथा आ ओइपर गजेन्द्र ठाकुरक टिप्पणी Videha_360 १०.नन्द विलास रायक चारिटा कथा आ एकटा एकांकी आ ओइपर गजेन्द्र ठाकुरक टिप्पणी Videha_361 ११.जगदीश प्रसाद मण्डलक साहित्यपर गजेन्द्र ठाकुरक टिप्पणी JAGDISH PRASAD MANDAL- Maithili Writer १२.दुर्गानन्द मण्डलक पाँचटा कथा आ ओइपर गजेन्द्र ठाकुरक टिप्पणी Videha_363 १३.नारायण यादवक पाँचटा कथा आ ओइपर गजेन्द्र ठाकुरक टिप्पणी Videha_364 १४. नित नवल दिनेश कुमार मिश्र- दिनेश कुमार मिश्रक समस्त लेखन आ ओइपर गजेन्द्र ठाकुरक टिप्पणी नित नवल दिनेश कुमार मिश्र (जारी) १५. नित नवल सुशील- सुशीलक समस्त साहित्य आ ओइपर गजेन्द्र ठाकुरक टिप्पणी नित नवल सुशील (जारी) ................... ५ "पाठक हमर पोथी किए पढ़थि"- लेखक द्वारा अप्पन पोथी/ रचनाक समीक्षा सीरीज १. आशीष अनचिन्हार ०१ अगस्त २०२१ १.(a) आशीष अनचिन्हार ०१ मार्च २०२३ २. गजेन्द्र ठाकुर ०१ सितम्बर २०२२ ............... ६ एडिटर्स चोइस सीरीज एडिटर्स चोइस सीरीज-१ विदेहमे बलात्कारपर मैथिलीमे पहिल कविता प्रकाशित भेल छल। ई दिसम्बर २०१२ क दिल्लीक निर्भया बलात्कार काण्डक बादक समय छल। ओना ई अनूदित रचना छल, तेलुगुमे पसुपुलेटी गीताक कविताक हिन्दी अनुवाद केने छलीह आर. शांता सुन्दरी आ हिन्दीसँ मैथिली अनुवाद केने छलाह विनीत उत्पल। हमर जानकारीमे ऐसँ बेशी सिहराबैबला कविता ऐ विषयपर कोनो भाषामे नै रचल गेल अछि। कताक सालक बादो ई समस्या ओहने अछि। ई कविता सभकेँ पढ़बाक चाही, खास कऽ सभ बेटीक बापकेँ, सभ बहिनक भाएकेँ आ सभ पत्नीक पतिकेँ। आ विचारबाक चाही जे हम सभ अपना बच्चा सभ लेल केहन समाज बनेने छी। एडिटर्स चोइस सीरीज-१ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-२ विदेहमे ब्रेस्ट कैसरक समस्यापर विदेह मे मीना झा केर एकटा लघु कथा प्रकाशित भेल। ई मैथिलीक पहिल कथा छल जे ब्रेस्ट कैसर पर लिखल गेल। हिन्दीमे सेहो ताधरि ऐ विषयपर कथा नै लिखल गेल छल, कारण ऐ कथाक ई-प्रकाशित भेलाक १-२ सालक बाद हिन्दीमे दू गोटेमे घोंघाउज भऽ रहल छल कि पहिल हम आकि हम, मुदा दुनूक तिथि मैथिलीक कथाक परवर्ती छल। बादमे ई विदेह लघु कथामे सेहो संकलित भेल। एडिटर्स चोइस सीरीज-२ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-३ विदेहमे जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिलक किछु बाल कविता प्रकाशित भेल। बादमे हुनकर ३ टा बाल कविता विदेह शिशु उत्सवमे संकलित भेल जइमे २ टा कविता बेबी चाइल्डपर छल। पढ़ू ई तीनू कविता, बादक दुनू बेबी चाइल्डपर लिखल कविता पढ़बे टा करू से आग्रह। एडिटर्स चोइस सीरीज-३ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-४ विदेहमे जगदानन्द झा "मनु"क एकटा दीर्घ बाल कथा कहि लिअ बा उपन्यास प्रकाशित भेल, नाम छल चोनहा। बादमे ई रचना विदेह शिशु उत्सवमे संकलित भेल, ई रचना बाल मनोविज्ञानपर आधारित मैथिलीक पहिल रचना छी, मैथिली बाल साहित्य कोना लिखी तकर ट्रेनिंग कोर्समे ऐ उपन्यासकेँ राखल जेबाक चाही। कोना मॊडर्न उपन्यास आगाँ बढ़ै छै, स्टेप बाइ स्टेप आ सेहो बाल उपन्यास। पढ़बे टा करू से आग्रह। एडिटर्स चोइस सीरीज-४ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-५ एडिटर्स चोइस ५ मे मैथिलीक "उसने कहा था" माने कुमार पवनक दीर्घकथा "पइठ" (साभार अंतिका) । हिन्दीक पाठक, जे "उसने कहा था" पढ़ने हेता, केँ बुझल छन्हि जे कोना अहि कथाकेँ रचि चन्द्रधर शर्मा "गुलेरी" अमर भऽ गेलाह। हम चर्चा कऽ रहल छी, कुमार पवनक "पइठ" दीर्घकथाक। एकरा पढ़लाक बाद अहाँकेँ एकटा विचित्र, सुखद आ मोन हौल करैबला अनुभव भेटत, जे सेक्सपीरिअन ट्रेजेडी सँ मिलितो लागत आ फराको। मुदा ऐ रचनाकेँ पढ़लाक बाद तामस, घृणा सभपर नियंत्रणकेँ आ सामाजिक/ पारिवारिक दायित्वकेँ सेहो अहाँ आर गंभीरतासँ लेबै, से धरि पक्का अछि। मुदा एकर एकटा शर्त अछि जे एकरा समै निकालि कऽ एक्के उखड़ाहामे पढ़ि जाइ। एडिटर्स चोइस सीरीज-५ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-६ जगदीश प्रसाद मण्डलक लघुकथा "बिसाँढ़": १९४२-४३ क अकालमे बंगालमे १५ लाख लोक मुइला, मुदा अमर्त्य सेन लिखैत छथि जे हुनकर कोनो सर-सम्बन्धी ऐ अकालमे नै मरलन्हि। मिथिलोमे अकाल आएल १९६७ ई. मे आ इन्दिरा गाँधी जखन ऐ क्षेत्र अएली तँ हुनका देखाओल गेल जे कोना मुसहर जातिक लोक बिसाँढ़ खा कऽ ऐ अकालकेँ जीति लेलन्हि। मैथिलीमे लेखनक एकभगाह स्थिति विदेहक आगमनसँ पहिने छल। मैथिलीक लेखक लोकनि सेहो अमर्त्य सेन जेकाँ ओहि महाविभीषिकासँ प्रभावित नै छला आ तेँ बिसाँढ़पर कथा नै लिखि सकला। जगदीश प्रसाद मण्डल ऐपर कथा लिखलन्हि जे प्रकाशित भेल चेतना समितिक पत्रिकामे, मुदा कार्यकारी सम्पादक द्वारा वर्तनी परिवर्तनक कारण ओ मैथिलीमे नै वरण् अवहट्ठमे लिखल बुझा पड़ल, आ ओतेक प्रभावी नै भऽ सकल कारण विषय रहै खाँटी आ वर्तनी कृत्रिम। से एकर पुनः ई-प्रकाशन अपन असली रूपमे भेल विदेहमे आ ई संकलित भेल "गामक जिनगी" लघुकथा संग्रहमे। ऐ पोथीपर जगदीश प्रसाद मण्डलकेँ टैगोर लिटरेचर अवार्ड भेटलनि। जगदीश प्रसाद मण्डलक लेखनी मैथिली कथाधाराकेँ एकभगाह हेबासँ बचा लेलक, आ मैथिलीक समानान्तर इतिहासमे मैथिली साहित्यकेँ दू कालखण्डमे बाँटि कऽ पढ़ए जाए लागल- जगदीश प्रसाद मण्डलसँ पूर्व आ जगदीश प्रसाद मण्डल आगमनक बाद। तँ प्रस्तुत अछि लघुकथा बिसाँढ़- अपन सुच्चा स्वरूपमे। एडिटर्स चोइस सीरीज-६ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-७ मैथिलीक पहिल आ एकमात्र दलित आत्मकथा: सन्दीप कुमार साफी। सन्दीप कुमार साफीक दलित आत्मकथा जे अहाँकेँ अपन लघु आकाराक अछैत हिलोड़ि देत आ अहाँक ई स्थिति कऽ देत जे समानान्तर मैथिली साहित्य कतबो पढ़ू अहाँकेँ अछौं नै हएत। ई आत्मकथा विदेहमे ई-प्रकाशित भेलाक बाद लेखकक पोथी "बैशाखमे दलानपर"मे संकलित भेल आ ई मैथिलीक अखन धरिक एकमात्र दलित आत्मकथा थिक। तँ प्रस्तुत अछि मैथिलीक पहिल दलित आत्मकथा: सन्दीप कुमार साफीक कलमसँ। एडिटर्स चोइस सीरीज-७ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-८ नेना भुटकाकेँ रातिमे सुनेबा लेल किछु लोककथा (विदेह पेटारसँ)। एडिटर्स चोइस सीरीज-८ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-९ मैथिली गजलपर परिचर्चा (विदेह पेटारसँ)। एडिटर्स चोइस सीरीज-९ (डाउनलोड लिंक) ...................... विदेह सम्मान: सम्मान-सूची (समानान्तर साहित्य अकादेमी, समानान्तर ललित कला अकादेमी आ समानान्तर संगीत-नाटक अकादेमी सम्मान/ पुरस्कार नामसँ विख्यात) .................... मैथिलीक वर्तनी १ मैथिलीक वर्तनी- विदेह मैथिली मानक भाषा आ मैथिली भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम भाषापाक २ मैथिलीक वर्तनीमे पर्याप्त विविधता अछि। मुदा प्रश्नपत्र देखला उत्तर एकर वर्तनी इग्नू BMAF001 सँ प्रेरित बुझाइत अछि, से एकर एकरा एक उखड़ाहामे उनटा-पुनटा दियौ, ततबे धरि पर्याप्त अछि। यू.पी.एस.सी. क मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेल सेहो ई पर्याप्त अछि, से जे विद्यार्थी मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेने छथि से एकर एकटा आर फास्ट-रीडिंग दोसर-उखड़ाहामे करथि| IGNOU इग्नू BMAF-001 These are print-on-demand books, send your queries to editorial.staff.videha@gmail.com. The eBooks of some of these are available for sale on Google Play [(c) Preeti Thakur, sales.videha@gmail.com], send your queries to sales.videha@gmail.com. The contents and documents e-published by Videha (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) are periodically being checked for accessibility issues. People with disabilities should not have difficulty accessing these contents/ documents. २.मैथिली पोथी डाउनलोड Maithili Books Download विदेह पोथी वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू। Always refresh the pages for viewing new issue of VIDEHA. Search for Books (including Audio-Visual & Sign Language) relating to Mithila/ Maithili https://books.google.com/ Top of Form Bottom of Form Videha Archive of Maithili Books विदेह मैथिली पोथीक आर्काइव (पूर्णतः अव्यवसायिक उद्देश्य आ मात्र एकेडमिक प्रयोग लेल) सभ पोथी पी.डी.एफ. डाउनलोड लेल क्रमानुसार नीचाँक लिंक सभपर उपलब्ध अछि। All the books are available for pdf download at the respective links below .............. तिरहुता, नेवाड़ी आ कैथी फॉण्ट डाउनलोड Google's Noto Fonts project/ GitHub तिरहुता नोटो फॉण्ट कैथी ओटीएफ कैथी टीटीएफ नेवाड़ी ओ.टी.एफ. नेवाड़ी टी.टी.एफ. https://fonts.google.com/ (Google Open Fonts download) Tirhuta Offline Keyboard download Keyman Tirhuta/ Vedic Devanagari Keyboards Download https://malarproject.gitlab.io/tirhuta (Tirhuta Keyboard Online) ................. बौद्ध चर्यापद चर्यापद महाकवि डाक डाकवचन ज्योतिरीश्वर ठाकुर मैथिली धूर्तसमागम विद्यापति व्याडीभक्ति तरङ्गिणी गोरक्षविजयम् शंकरदेव पारिजातहरण रामविजय दैत्यारि ठाकुर श्यामंत हरण यात्रा (अंकिया नाट) लक्ष्मीदेव कुमारहरण नाट शत स्कंध रावण वध (अंकिया नाट) जगत्प्रकाशमल्ल प्रभावतीहरण नाटक सिद्ध नरसिंहमल्ल गीतावली सिद्धि जगत्ज्योतिर्रमल्ल हरगौरी विवाह नाटक कुञ्जविहार नाटक हर्षनाथ झा माधवानन्द नाटक उषाहरण हर्षनाथ काव्यग्रन्थावली (संकलन अमरनाथ झा १८९७-१९५५) रत्नपाणि उषाहरण नाटक श्रीकांत श्रीकृष्ण जन्म रहस्य नन्दीपति कृष्णकेलिमाला गीतमाला कान्हा रामदास गौरीस्वयंवर लाल गौरीस्वयंवर नाटक उमापति पारिजात हरण भानुनाथ प्रभावती हरण देवानन्द उषाहरण रमापति रुक्मणी परिचय उपाध्याय रामदास आनन्द विजयाभिदान नाटिका शिवदत्त गौरीपरिणय सीतास्वयंवर दुर्गाविजय पारिजात नाटक .................... कथा बौद्ध सिद्ध मेहथपा (बाल साहित्य केन्द्रित) मेंहथमे भेल ८२ म सगर राति दीप जरयमे पठित कथा सभक संकलन कथा बौद्ध सिद्ध मेहथपा सखुआवाली (नारी विमर्श केन्द्रित) भपटियाहीमे भेल ८३ म सगर राति दीप जरयमे पठित कथा सभक संकलन सखुआवाली मुंशी रघुनन्दन दास (१८६०-१९४५) (सौजन्य- राधाकृष्णन् दास) सुभद्रा हरण रासबिहारी लाल दास (१८७२-१९४०) (सौजन्य- रमानन्द झा "रमण") सुमति हरिनन्दन दास (सौजन्य- राधाकृष्णन् दास) सुदामा चरित पं रामजी चौधरी (१८७८-१९५२) (सौजन्य- श्री श्रीमोहन चौधरी) विविध भजनावली आचार्य रामलोचन शरण (१८८९-१९७१) (सौजन्य- मैथिली साहित्य संस्थान) जयन्ती-स्मारक ग्रन्थ धनुषधारी दास (१८९५-१९६५) (सौजन्य- पञ्जीकार विद्यानन्द झा) मैथिली में बिहारी हरिमोहन झा (१९०८-१९८४) (सौजन्य- मैथिली साहित्य संस्थान/ गौरीनाथ) अभिनन्दन ग्रन्थ अंतिका (हरिमोहन झा विशेषांक) ................ डॉ. राम भरोस कापड़ि 'भ्रमर' (सौजन्य- राम भरोस कापड़ि 'भ्रमर') महिषासुर मुर्दावाद एवं अन्य नाटक (१९९७) लोक नाट्य: जट जटिन (२००७) (शोध) हुगली ऊपर बहैत गंगा आ आन कथा (कथा संग्रह) (२००८) भ्रमर मैथिली दीर्घ कविता (हिन्दी अनुवाद-अब बस नहीं) (२००९) मैथिली लोक संस्कृति (नेपाली भाषामे) (२००९) भैया अएलै अपन सोराज (नाटक संग्रह) (२०१०) घरमुहाँ (उपन्यास) (२०१२)- ई बुक वर्जन घरमुँहा (उपन्यास) (२०१२)- प्रिंट वर्जन अनहरियाक चान (गजल संग्रह) (२०१३) चीन जे हम देखल (यात्रा संस्मरण) (२०१४) सूली पर इजोत एवं अन्य नाटक (२०१५) सीमाके आर-पार (यात्रा संस्मरण) (२०१६) युद्धभूमिक एसगर योद्धा (कविता संग्रह) (२०१७) एंटीवायरस (कथा संग्रह) (२०१९) कोरोनाक संत्रासमे ओझरायल जिनगी (लकडाउन डायरी) (२०२०) मिथिलाक लोकजीवन लोकसन्दर्भ (२०२२) सोन्हगर गन्धक अन्वेषी डा. प्रफुल्ल कुमार सिंह 'मौन' मैथिली लोक संस्कृति संगोष्ठी स्मारिका (२०१०) आंगन अंक-४ (२०१२) सलहेस विशेषांक आँजुर (अंक वर्ष ३६, अंक ३) सोमदेव विशेष गामघर-३०-०८-२०१८ गामघर-०४-१०-२०१८ गामघर-१६-०५-२०१९ गामघर-२७-०६-२०१९ रामभरोस कापड़ि "भ्रमर"क किछु नाटक मुन्नाजी द्वारा साक्षात्कार पृ. ३२१-३२८ देसिल बयनाक बहन्ने रामलोचन ठाकुर प्रसंग पृ. ३४७-३५७ हमर ज्ञान-पिपाशाक स्रोत: शरदिन्दु चौधरी पृ. ३१-३४ जट जटिन पृ. ५६८-७०५ भैया, अएलै अपन सोराज पृ. ५६८-७०५ आलेख कथा-फ्लैशबैक पृ. ८४-८८ आलेख पृ. पृ. ११७-१२५ आलेख पृ. १२७६-१२९० आलेख पृ. ९७-९८ रायपुर यात्रा प्रसंग पृ. १५०-१५४ सलहेस परिचर्चा रिपोर्ट पृ. ४१-४५ रिपोर्ट पृ. २३१-२४३ रिपोर्ट पृ. ४४५ रिपोर्ट पृ ५६८-६०५ रिपोर्ट पृ. ५८३-५८५ गंगा प्रसादक स्वायत्तता आ हुगलीपर बहैत गंगा पृ. २२३-२२६ गीत पृ. १४४९-१४५० गजल गीत पृ. २११ अन्हारक विरुद्ध आ आजाद गजल पृ. ६१९-६२१) विदेह राम भरोस कापड़ि 'भ्रमर' विशेषांक बृषेश चन्द्र लाल (सौजन्य- बृषेश चन्द्र लाल) आन्दोलन (कविता संग्रह) ढोलक (बाल कविता संग्रह) सुम्निमा (अनूदित उपन्यास) मोदिआइन (बी.पी.कोइरालाक कथा) माल्हो (कथा संग्रह) गोलबा (कथा संग्रह) परमेश्वर कापड़ि (सौजन्य- परमेश्वर कापड़ि) धूआ-धजा अंक ७ अंक १४ अंक १५ अंक १६ अंक १८ अंक १० जून २०१२ अंक २४ जून २०१२ २५ जुलाइ २०१२ ०५ अगस्त २०१२ २३ फरबरी २०१६ आसिन २०७३ सुजीत कुमार झा (सौजन्य- सुजीत कुमार झा) रिपोर्टर डायरी (रिपोर्ताज) चिड़ै (लघुकथा-संग्रह) जिद्दी (लघुकथा संग्रह) कोइली घूरि आउ (बाल लघु-विहनि कथा संग्रह) गन्ध (लघु कथा संग्रह) खजुरीबाली (लघु कथा संग्रह) बुलबुल (कथा संग्रह) दूधमती- (नेपाली आ मैथिलीमे) अंक ३१ अंक ३२ अंक ३३ अंक ३४ अंक 35 अंक 36 अंक 37 अंक 38 अंक 39 अंक 40 अंक 41 विन्देश्वर ठाकुर नेपालक नोर मरुभूमिमे विनीत ठाकुर (सौजन्य- विनीत ठाकुर) बाँकी अछि हम्मर दूधक कर्ज संतोष मिश्र (सौजन्य- संतोष मिश्र) पोसपुत (लघुकथा-संग्रह) उदास मोन (लघुकथा-संग्रह) एना-किए (कविता-संग्रह) अएना (संपादन- कविता-संग्रह) कनकमणि दीक्षित (मूल नेपालीसँ मैथिली अनुवाद रूपा धीरू आ धीरेन्द्र प्रेमर्षि, बाल साहित्य) (सौजन्य- धीरेन्द्र प्रेमर्षि) भगता बेङक देश-भ्रमण Ayodhyanath Choudhary (Courtesy- Ayodhyanath Choudhary) Varied Verses (Maithili Verses in English Translation) ... डॉ शशिधर कुमर आ सुप्रिया बेबी कुमारी भूकम्प (पृ. ६३८-६७४) अणिमा सिंह (सौजन्य- नचिकेता) शिशु गीत खेल इलारानी सिंह (सौजन्य- नचिकेता) प्रेम- एक कविता (अनूदित नाटक) अरुन्धती देवी (सौजन्य- रमानन्द झा "रमण") मिथिलाक विदुषी महिला डॉ. कमला चौधरी (सौजन्य- कमला चौधरी) मैथिलीक वेश-भूषा-प्रसाधन सम्बन्धी शब्दावली २००८ समय-संकेत (कथा-संग्रह) २०१० डॉ. ललिता झा (सौजन्य- ललिता झा) मैथिलीक भोजन सम्बन्धी शब्दावली २०११ सुस्मिता पाठक (सौजन्य- केदार कानन) परिचिति (कविता संग्रह) कनोजड़ि (कथा संग्रह) नन्दिनी पाठक (सौजन्य- केदार कानन) पाथरक शहर (कविता संग्रह) पन्ना झा (सौजन्य- नरेन्द्र झा) अनुभूति (लघुकथा संग्रह) कल्पना झा (सौजन्य- कल्पना झा) गोसाउनिक गीत नशामुक्ति हित गाबी गीत निनियाँ यायावरी- शेफालिका वर्मा (हिन्दी अनुवाद कल्पना झा) मुन्नी कामत (सौजन्य- मुन्नी कामत) सुखल मन तरसल आँखि (पद्य आ गद्य) सुखल मन तरसल आँखि (कविता) अंततः (कविता संग्रह) चुक्का (बाल कथा संग्रह) नीता झा (सौजन्य- नीता झा) बिलाइ मौसी (बाल लघुकथा संग्रह) शेफालिका वर्मा (सौजन्य- शेफालिका वर्मा) यायावरी (यात्रावृत्तान्त) यायावरी (हिन्दी अनुवाद- कल्पना झा) अर्थयुग (लघुकथा संग्रह) एकटा अकास (लघुकथा संग्रह) भावांजलि (गद्य गीत) किस्त-किस्त जीवन (आत्म कथा) आखर-आखर प्रीत नागफांस (उपन्यास) Naagphans (In English) विभा रानी विभा रानीक दूटा नाटक (भाग रौ आ बलचन्दा) सुशीला झा (सौजन्य- प्रभा खेतान/ सुशीला झा) छिन्नमस्ता- प्रभा खेतानक हिन्दी उपन्यासक मैथिली अनुवाद कुसुम ठाकुर प्रत्यावर्तन (आत्मकथा)(पृ. ४५९-५७२) डॉ. कामिनी कामायनी विदेह:सदेह ३१ (डॉ. कामिनी कामायनी आ कुमार मनोज कश्यप- अंक १-३५० सँ) प्रीति ठाकुर गोनू झा आ आन मैथिली चित्रकथा -पहिल मैथिली चित्रकथा (बाल साहित्य) मैथिली चित्रकथा (बाल साहित्य) मिथिलाक लोकदेवता (बाल साहित्य) विद्यापतिक पुरुष परीक्षा (बाल साहित्य) रेस (अनुवाद- बाल चित्रकथा) ए बी सी डी- प्रकृति अक्षर पोथी (अनुवाद- बाल चित्रकथा) सभ खाइत अछि (अनुवाद- बाल चित्रकथा) बो म्याउ बाह (अनुवाद- बाल चित्रकथा) रङ सभ (अनुवाद- बाल चित्रकथा) (०६) छोट आ पैघ (अनुवाद- बाल चित्रकथा) (०७) माल-जाल आ जानवर दिस देखू (अनुवाद- बाल चित्रकथा) (१७) हमर परिवार (अनुवाद- बाल चित्रकथा) जानवर (अनुवाद- बाल चित्रकथा) पोथी १३: १...२...३... (अनुवाद- बाल चित्रकथा) बाजाक अबाज (अनुवाद- बाल चित्रकथा) पंजी (११००० मूल मिथिलाक्षर ताड़पत्र) 11000 PALM LEAF PANJI INSCRIPTIONS (VOLUME I TO XXII) Compiled, Scanned & Catalogued by Preeti Thakur नीतू कुमारी मैथिली चित्रकथा ( बाल साहित्य) किरण चौधरी (अनूदित सचित्र मैथिली बाल कथा) हमर बाल-वाड़ी आर्या कॉकपिट मे दीपा करमाकर- सही संतुलन मे जंगल मे अहाँक स्वागत अछि व्हेल छथि आकाश मे भैया के मुस्कान के चोरौलक बीज संचयक अचंभित करय "फिबोनाची" शौचालयक खिस्सा लाल बरसाती गुल्लीक जादुई पेटी समीराक विकठ भोजन विवाह मे जाई छी प्रियंका झा (अनूदित सचित्र मैथिली बाल कथा) हमर माँछ! नै हमर माँछ! रश्मि प्रिया (अनूदित सचित्र मैथिली बाल कथा) कैयो सकै छी, नहियो कऽ सकै छी सुनीता ठाकुर (अनूदित सचित्र मैथिली बाल कथा) बण्टी आ बबली नीलिमा चौधरी (अनूदित सचित्र मैथिली बाल कथा) हमर सभसँ नीक संगी स्वास्तिका ठाकुर (अनूदित सचित्र मैथिली बाल कथा) गप्पू बुते नाचल नै होइ छै तूलिका (अनूदित सचित्र मैथिली बाल कथा) हमरा ओ चाही! मधूलिका मिश्र (अनूदित सचित्र मैथिली बाल कथा) ओंघाइत भीमा लक्ष्मी ठाकुर जानवर सभ संगे भेँट-घाँट पूनम मण्डल सुतै कालक खिस्सा .................. राधाकृष्ण चौधरी (१९२१-१९८५) (सौजन्य- प्रभात कुमार चौधरी/ IGNCA) मिथिलाक इतिहास A Survey of Maithili Literature The Political and Cultural Heritage of Mithila Mithila in the Age of Vidyapati सोमदेव (१९३४-२०२२) (सौजन्य- राम भरोस कापड़ि 'भ्रमर') आँजुर सोमदेव विशेष प्रभास कुमार चौधरी (१९४१-१९९८) (सौजन्य- अशोक) सन्धान प्रभास विशेष लल्लन प्रसाद ठाकुर (१९५३-१९९५) (सौजन्य- कुसुम ठाकुर) लौंगिया मिरचाइ नाटककार लल्लन प्रसाद ठाकुर समग्र रचनावली (५ टा नाटक, ४ टा एकांकी आ ३ टा गीति नाटिका सहित) सुभाष चन्द्र यादव (सौजन्य- सुभाष चन्द्र यादव) राजकमल चौधरी: मोनोग्राफ नित नवल राजकमल बनैत बिगड़ैत (लघुकथा संग्रह) गुलो गुलो (हिन्दी अनुवाद- रमण कुमार सिंह) रमता जोगी मडर भोट गुलो: कला आ भाषा (सम्पादक तारानन्द वियोगी आ केदार कानन) नित नवल सुभाष चन्द्र यादव (लेखक गजेन्द्र ठाकुर) नित नवल सुभाष चन्द्र यादव (मिथिलाक्षर) अशोक (सौजन्य- अशोक आ शिवशंकर श्रीनिवास) चक्रव्यूह (कविता संग्रह) (१९८६) त्रिकोण (कथा संग्रह) (१९८६) ओहि रातिक भोर (कथा संग्रह) (१९९१) मातबर (कथा संग्रह) (२००१) संवाद (साक्षात्कार संग्रह) (२००७) आँखिमे बसल (यात्रा कथा) (२०१३) बात-विचार (आलोचना) (२०१५) डैडीगाम (कथा संग्रह) (२०१७) अशोक-सेलेक्शन्स (विविध) अशोक-नव कविता नीक दिनक बाइस्कोप (व्यंग्य संग्रह) (२०१८) कथा-पाठ (मैथिली कथाक आलोचनात्मक अध्ययन) (२०२२) प्रतिमान (सम्पादन) किरण (प्रतिमान गोष्ठी- सम्पादक मोहन भारद्वाज) सन्धान १ (सम्पादन) सन्धान २ (सम्पादन) सन्धान ३ (सम्पादन) प्रभास विशेष सन्धान ४ (सम्पादन) मुन्ना जी द्वारा साक्षात्कार (पृ. ३८२-३८५) बनैत कम बिगड़ैत बेसी (पृ. २०२३-२०३१) सम्पादक राजनन्दन लाल दास आ कर्णामृत (पृ. ११९-१२२) रामलोचन ठाकुरक कविता पढ़ैत (पृ. ३२७-३४१) केदार नाथ चौधरीक उपन्यास (पृ. १०१-१०६) शरदिन्दुजी (पृ. ७०-७३) विदेह रचनाकार अशोक विशेषांक रामदेव झा (सौजन्य- शंकरदेव झा/ योगानन्द झा) सव्यसाची (अभिनन्दन ग्रन्थ) मैथिली शब्द संचय दत्त-वतीक वस्तु कौशल संकल्प अंक-५ (सम्पादक डॉ रामदेव झा, सहायक सम्पादक डॉ योगानन्द झा) १९८८ डॉ योगानन्द झा (सौजन्य- योगानन्द झा) लोकजीवन ओ लोकसाहित्य १९८६ संकल्प अंक-५ (सम्पादक डॉ रामदेव झा, सहायक सम्पादक डॉ योगानन्द झा) १९८८ आलेख सञ्चयन २००२ मैथिली शाक्त साहित्य- शास्त्रीय भगवती गीत (सम्पादन) २००२ मैथिली पत्रकारिता के सौ वर्ष २००६ लोक, साहित्य ओ शब्द-सम्पदा २००७ गहबर गीत (संकलन-सम्पादन) २००७ मैथिलीक पारम्परिक जातीय व्यवसायक शब्दावली २००९ कथा-लोककथा २०१० कपिलदेव ठाकुर 'स्नेहलता' कृत सीतावतरण (सम्पादन) २०११ मंगल-प्रभात गाँधीजी (अनुवाद) २०१३ भोरे-भोर (डॉ ए. कीर्तिवर्द्धनक हिन्दी कविता संग्रहक अनुवाद) २०१४ तारानन्द वियोगी (सौजन्य- तारानन्द वियोगी/ सुभाष चन्द्र यादव) प्रलय रहस्य (कविता संग्रह) धराशायी हेबाक समय (कविता मे कोरोना काल) दुनिया घर मेहमान (प्रेम कविता) अपन युद्धक साक्ष्य (गजल संग्रह) छियानत (कथा संग्रह) बहुवचन (आलोचना) गुलो: कला आ भाषा (सम्पादन) सुधांशु शेखर चौधरी (सौजन्य- शरदिन्दु चौधरी) शेखर रचित गजल ओ गीत शरदिन्दु चौधरी (सौजन्य- शरदिन्दु चौधरी) जँ हम जनितहुँ (२००२) बड़ अजगुत देखल (२००५) गोबरगणेश (२०११) करिया कक्काक कोरामिन (२०१६) बात-बातपर बात खण्ड-१ (२०१९) मर्मान्तक-शब्दानुभूति (बात-बातपर बात खण्ड-२) (२०२०) हमर अभाग: हुनक नहि दोष (बात-बातपर बात-३) (२०२१) साक्षात् (बात-बातपर बात-४) (२०२१) विदेह शरदिन्दु चौधरी विशेषांक काशीकान्त मिश्र मधुप विदेह काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक राजनन्दन लाल दास विदेह राजनन्दन लाल दास विशेषांक प्रेमलता मिश्र प्रेम विदेह प्रेमलता मिश्र प्रेम विशेषांक रवीन्द्र नाथ ठाकुर विदेह रवीन्द्र नाथ ठाकुर विशेषांक मायानन्द मिश्र (सौजन्य- केदार कानन) अवांतर (गजल-गीतल) कलानन्द भट्ट (सौजन्य- केदार कानन) कान्ह पर लहास हमर मैथिली गजल संग्रह अनुलग्नक-कोसी कॉलोनी सँ किशन कुटीर धरि रामकृष्ण झा 'किसुन' (सौजन्य- केदार कानन) किसुन समग्र-१ (सम्पादक केदार कानन आ रमण कुमार सिंह) किसुन समग्र-२ (सम्पादक केदार कानन आ रमण कुमार सिंह) मैथिलीक नव कविता (सम्पादन) बहुआयामी किसुनजी (सम्पादक महेन्द्र आ केदार कानन) केदार कानन (सौजन्य केदार कानन/ CIIL/ सुभाष चन्द्र यादव) अक्ष पर नचैत (संस्मरण: जीवकान्तक पत्रक बहाने) बहुआयामी किसुनजी (सम्पादन) गुलो: कला आ भाषा (सम्पादन) किसुन समग्र-१ (सम्पादन) किसुन समग्र-२ (सम्पादन) अपना नजरि मे (सम्पादन) सृजन केर दीप पर्व (सम्पादन) भारती मंडन अंक-१६ (सम्पादन) महेन्द्र (CIIL/ केदार कानन) जुआयल कनकनी बहुआयामी किसुनजी (सम्पादन) बाबा बैद्यनाथ (सौजन्य- बाबा बैद्यनाथ) पहरा इमानपर (गजल संग्रह) अरविन्द ठाकुर (सौजन्य- अरविन्द ठाकुर/ CIIL) परती टूटि रहल अछि (कविता संग्रह) अन्हारक विरोध मे (लघु कथा संग्रह) बहुरुपिया प्रदेश मे (गजल संग्रह) सबद मितारथ धाय्या रोशनाइक लोकपक्ष (कथेतर गद्य) जड़ताक प्रतिवाद मे (सोल्हकन-दीठक आरोहण गाथा- दीर्घ कविता) सृजन केर दीप पर्व (सम्पादन) विदेह अरविन्द ठाकुर विशेषांक स्वतंत्रचेता- अरविन्द ठाकुर: व्यक्तित्व-कृतित्व (सम्पादक आशीष अनचिन्हार) [विदेह अरविन्द ठाकुर विशेषांकक प्रिण्ट रूप] नरेन्द्र झा (सौजन्य- नरेन्द्र झा) चपल चरन चित चंचल भान विकास ओ अर्थतंत्र राजेश्वर झा (मैथिली साहित्य संस्थान आर्काइव) मिथिलाक्षरक उद्भव ओ विकास सुरेन्द्र झा सुमन (आर्काइव डॊट कॊम) दत्त-वती (मूल) गोविंद झा ((IGNCA Site आर्काइव) Maithili-English Dictionary डॊ शैलेन्द्र मोहन झा (आर्काइव डॊट कॊम/ CIIL) परिचय निचय मैथिली गद्य संग्रह- सं रमानाथ झा (CIIL Site आर्काइव) प्रबन्ध संग्रह रमानाथ मिश्र "मिहिर" (आर्काइव डॊट कॊम) मैथिली मुहावरा एवम् लोकोक्ति प्रकाश आनन्द मिश्र (सौजन्य- रमानन्द झा "रमण") मिथिला भाषाक सुबोध व्याकरण श्यामानन्द झा (सौजन्य- रमानन्द झा "रमण") मैथिली गीत चन्द्रिका मैथिली संदेश (विभिन्न कविक कविता-सम्पादित) पं लक्ष्मीपति सिंह (सौजन्य रमानन्द झा "रमण") हिन्दी-मैथिली-शिक्षक भवप्रीतानन्द ओझा (सौजन्य- रमानन्द झा "रमण") पदावली गणनाथ-विन्ध्यनाथ पदावली (सौजन्य- रमानन्द झा "रमण") गणनाथ-विन्ध्यनाथ पदावली रूपनारायण झा "राकेश" (सौजन्य- रमानन्द झा "रमण") मनमोहन लड्डू भोला लाल दास (आर्काइव डॊट कॊम) मैथिली सुबोध व्याकरण खड्ग वल्लभ दास 'स्वजन' (सौजन्य- हेमन्त दास "हिम") सीता-शील डॉ. मदनेश्वर मिश्र (सौजन्य- पञ्जीकार विद्यानन्द झा) एक छलीह महारानी यात्री (नागार्जुन) (सौजन्य- मिथिला सांस्कृतिक परिषद) बलचनमा कालीकान्त झा "बूच" कलानिधि- कविता-संग्रह उपेन्द्रनाथ झा "व्यास" (सौजन्य- मयंक झा) रूबाइयात-ए-ओमर खैयाम (मैथिली पद्यानुवाद) प्रतीक (कविता संग्रह) संन्यासी (काव्य) रमेश नारायण (सौजन्य- शेफालिका वर्मा) पाथरक नाव (लघुकथा संग्रह) गोपालजी झा "गोपेश" (सौजन्य- गोपालजी झा "गोपेश") गुम्म भेल ठाढ़ छी विजय नाथ झा (सौजन्य- विजय नाथ झा) अहींक लेल (गीत-गजल संग्रह) कामायनी (अनुवाद) नगेन्द्र कुमर (सौजन्य- प्रसन्न कुमार झा) ससरफानी प्रबोध नारायण सिंह (सौजन्य- नचिकेता) अन्हेर नगरी (अनुवाद) चयनिका (सम्पादन) वैजयन्ती (कविता) हाथीक दाँत टटका गप (सम्पादित कथा संकलन) प्रेमक रोग (नाटक) अमरनाथ (सौजन्य- अमरनाथ) क्षणिका- विहनि कथा संग्रह प्रफुल्ल कुमार सिंह 'मौन' पंचदेवोपासक भूमि मिथिला पृ. १००१-१०८० डॉ. गंगेश गुंजन (सौजन्य- गंगेश गुंजन) राधा (१-३०) पृ. १३७३-१५८० प्रथम-चौबटिया-नाटक (बुधिबधिया) नाटक आइ भोर कथा-संग्रह उचितवक्ता गीत-गजल दुखक दुपहरिया कमलधर दास (सौजन्य- कमलधर दास) मैथिल कर्ण कायस्थक गोत्र, प्रवर, मूल आ वैवाहिक सम्बन्ध कीर्तिनारायण मिश्र (सौजन्य- कीर्तिनारायण मिश्र) ध्वस्त होइत शान्ति स्तूप सीमान्त आदमीकेँ जोहैत अपन एकान्त मे स्मृतियात्राक एकान्तमे राजनाथ मिश्र Mithila_Painting-Modern Art-Photos प्रेमशंकर सिंह (सौजन्य- प्रेमशंकर सिंह/ मिथिला दर्पण प्रकाशन) मैथिली भाषा साहित्य:बीसम शताब्दी (आलोचना) विद्यापति कृत व्याडीभक्तितरङ्गिनी (सम्पादन) डॉ. रमण झा (सौजन्य- रमण झा) मैथिली काव्यमे अलङ्कार अलङ्कार-भास्कर मैथिली काव्यमे ज्योतिष भिन्न-अभिन्न अहिरावण-वध (खण्ड काव्य) पारिजात-मञ्जरी डॉ. रमानन्द झा 'रमण' (सौजन्य- रमानन्द झा "रमण"/ CIIL Site आर्काइव) हिआओल सगर राति दीप जरय राजू आ टाकाक गाछ (अनुवाद) अखियासल केदार नाथ चौधरी (सौजन्य- केदार नाथ चौधरी) चमेलीरानी माहुर करार अबारा नहितन अयना हीना विदेह केदार नाथ चौधरी विशेषांक योगेन्द्र पाठक "वियोगी" (सौजन्य- योगेन्द्र पाठक "वियोगी") विज्ञानक बतकही विज्ञानक बतकही भाग-२ नरक विजय (सम्पूर्ण) नरक विजय (संशोधित) हमर गाम (बाल उपन्यास) पिरामिडक देशमे अकटा मिसिया (कथा संग्रह) रोबोट (अनूदित साइंस-फिक्शन नाटक) किछु तीत मधुर (यात्रा वृत्तांत) सुशील (सौजन्य- सुशील) घराड़ी (उपन्यास) (१९७३) गामबाली (उपन्यास) (१९८२) भामती (नाटक) (पहिल मंचन १९९१, प्रकाशन २०१३) अस्मिता (लघुकथा संग्रह) (२०१६) कामेश्वर झा 'कमल' (सौजन्य- नबोनारायण मिश्र) कमल-ताल (गीत संग्रह) रामलोचन ठाकुर (सौजन्य- रामलोचन ठाकुर) जे कहब साँच कहब आँखि मुनने आँखि खोलने (संस्मरण) स्मृतिक धोखरल रंग (संस्मरण) अपूर्वा (कविता संग्रह) इतिहासहन्ता (कविता संग्रह) देशक नाम छलै सोन चिड़ैया (कविता संग्रह) लाख प्रश्न अनुत्तरित (कविता संग्रह) प्रतिध्वनि (विदेशी भाषाक कविताक मैथिली रूपान्तरण) पद्मानदीक माझी (अनूदित उपन्यास) मैथिली लोककथा आजुक कविता (सम्पादित कविता संग्रह) बेताल कथा (हास्य-व्यंग) देसिल बयना (अख़बार) विदेह रामलोचन ठाकुर विशेषांक डॉ. देवशंकर नवीन (सौजन्य- देवशंकर नवीन) आधुनिक साहित्यक परिदृश्य डॉ बचेश्वर झा निवन्ध-निकुञ्ज कीर्तिनाथ झा (सौजन्य- कीर्तिनाथ झा) कुरल: मैथिली भावानुवाद जगदीश चन्द्र ठाकुर "अनिल" (सौजन्य- जगदीश चन्द्र ठाकुर "अनिल") आँखिमे चित्र हो मैथिली केर (आत्मकथा- जारी) धारक ओइ पार (दीर्घ कविता) गीत गंगा (गीत संग्रह) गजल गंगा (गजल संग्रह) तोरा अंगना मे (गीत संग्रह) तोरा अंगना मे (गीत संग्रह)- मूल विदेह जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक राज किशोर मिश्र चाननि (कविता संग्रह) सप्तपर्ण (कविता संग्रह) रबीन्द्र नारायण मिश्र (सौजन्य- रबीन्द्र नारायण मिश्र) भोरसँ साँझ धरि (आत्म कथा) प्रसंगवश (निवंध) स्वर्ग एतहि अछि (यात्रा प्रसंग) फसाद (कथा संग्रह) नमस्तस्यै (उपन्यास) विविध प्रसंग (निवंध) महराज (उपन्यास) लजकोटर (उपन्यास) सीमाक ओहि पार (उपन्यास) समाधान (निवंध संग्रह) मातृभूमि (उपन्यास) स्वप्नलोक (उपन्यास) शंखनाद (उपन्यास) इएह थिक जीवन (संस्मरण) ढहैत देबाल (उपन्यास) पाथेय (संस्मरण) हम आबि रहल छी (उपन्यास) प्रलयक परात (उपन्यास) बीति गेल समय (उपन्यास) प्रतिबिम्ब (उपन्यास) बदलि रहल अछि सभ किछु (उपन्यास) राष्ट्र मंदिर (उपन्यास) संयोग (कथा संग्रह) नाचि रहल छलि वसुधा (उपन्यास) नन्द कुमार मिश्र 'नन्द' (सौजन्य- नन्द कुमार मिश्र 'नन्द') गामघर (कथा संग्रह) सुजाता (उपन्यास) महारानी कैकेयी (प्रवचनात्मक निबन्ध) गुदरीक लाल (उपन्यास) अनठिया कुकुर (उपन्यास) आडम्बर (कथा संग्रह) दिल्लीक पार्क (शब्द चित्र) सुकन्या (उपन्यास) स्वर्ण कमल (बाल उपन्यास) काव्य सरिता (मैथिली काव्य संग्रह) परिवार (संस्मरणात्मक उपन्यास) याचक के नञि (मैथिली शब्द-चित्र) सत्यानन्द पाठक (सौजन्य- सत्यानन्द पाठक) हमर गाम (उपन्यास) डॉ. उदय नारायण सिंह "नचिकेता" (सौजन्य- नचिकेता) नो एण्ट्री : मा प्रविश आन्दोलन एक छल राजा जनक आ' अन्यान्य एकांकी नाटक क लेल नायक क नाम जीवन प्रत्यावर्त्तन रामलीला प्रियंवदा (एकांकी) मैथिली कविता-त्रैमासिक (अप्रैल १९६९) मैथिली कविता-त्रैमासिक (जुलाइ १९६९) मिथिला दर्शन मार्च २०२१ मिथिला दर्शन नवम्बर २०२१ रवि भूषण पाठक रिहर्सल (नाटक) विदेह:सदेह २९ (रवि भूषण पाठक आ डॉ. कैलाश कुमार मिश्र- अंक १-३५० सँ) विदेह:सदेह २७ (गजेन्द्र ठाकुर आ रवि भूषण पाठकक आन भाषासँ अनूदित गद्य आ पद्य- अंक १-३५० सँ) डॉ. कैलाश कुमार मिश्र विदेह:सदेह २९ (रवि भूषण पाठक आ डॉ. कैलाश कुमार मिश्र- अंक १-३५० सँ) कुमार मनोज कश्यप विदेह:सदेह ३१ (डॉ. कामिनी कामायनी आ कुमार मनोज कश्यप- अंक १-३५० सँ) डॉ. शम्भु कुमार सिंह (तुकाराम रामा शेटक कोंकणी उपन्यासक मैथिली अनुवाद डॉ शम्भु कुमार सिंह द्वारा) पाखलो विदेह:सदेह २६ (डॉ शम्भु कुमार सिंह आ डॉ अरुण कुमार सिंह अंक १-३५० सँ) डॉ. अरुण कुमार सिंह विदेह:सदेह २६ (डॉ शम्भु कुमार सिंह आ डॉ अरुण कुमार सिंह अंक १-३५० सँ) कुमार पवन (सौजन्य- अंतिका) पइठ (मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ कथा) डायरीक खाली पन्ना केशव भारद्वाज अजगुत अफ्रीका (अफ्रीका डायरी) पृ. २१४-४६६ किछु पढ़ल आ किछु सुनल- ईदी अमीन पृ. ४८८-५४८ खेलौना पृ. ४६७-४८७ पैबन्द पृ. ५४९-७९८ किछु कथा ५०-४६३ गोपाल झा 'अभिषेक' (सौजन्य- गोपाल झा 'अभिषेक') आउ स्वप्न साझी करी (कविता संग्रह) आमोद कुमार झा (सौजन्य- आमोद कुमार झा) बिम्बक पथार (कविता संग्रह) किशन कारीगर (सौजन्य- किशन कारीगर) किछु फुरा गेल हमरा आशीष अनचिन्हार संदर्भ सहित (गजल-आलोचना) कुमारि इच्छा (गजल संग्रह) जंघाजोड़ी (गजल संग्रह) अनचिन्हार आखर (गजल, रुबाइ आ कताक संग्रह) मैथिली गजलक व्याकरण ओ इतिहास मैथिली वेब पत्रकारिताक इतिहास (अनुलग्नक: अंतिका आलेख:अंतर्जाल आ मैथिली: गजेन्द्र ठाकुर ) मैथिली गजलक रेडी रेकोनर शब्द-अर्थ-शक्ति स्वतंत्रचेता- अरविन्द ठाकुर: व्यक्तित्व-कृतित्व (विदेह अरविन्द ठाकुर विशेषांकक प्रिण्ट रूप)[सम्पादन] मुन्नाजी मोकाम दिस (बीहनि कथा संग्रह) प्रतीक (विहनि कथा संग्रह) माँझ आंगनमे कतिआएल छी (मैथिली गजल संग्रह) हम पुछैत छी (साक्षात्कार) तीन टा बाल नाटक (मैथिली बाल साहित्य) खुरलुच्ची (मैथिली बाल कविता- बाल साहित्य) घाह (हाइकू-टंका संग्रह) सन्दीप कुमार साफी बैशाखमे दलानपर ओम प्रकाश झा कियो बूझि नै सकल हमरा (गजल, रुबाइ आ कता संग्रह) अमित मिश्र नव अंशु (गजल-हजल, रुबाइ संकलन) चन्दन कुमार झा मोनक बात (गजल, हजल,बाल गजल, रुबाइ आ कताक संकलन) डॉ. अनमोल झा समय साक्षी थिक (विहनि कथा संग्रह) ई जे समय अछि (विहनि कथा संग्रह) बिनय भूषण (सौजन्य- आशीष अनचिन्हार) उजरा परवाक खोज (कविता संग्रह) आनन्द कुमार झा टाकाक मोल (नाटक) कलह (नाटक) बदलैत समाज (नाटक) धधाइत नवकी कनियाँक लहास (नाटक) हठात् परिवर्तन (नाटक) मुक्ति यात्रा (नाटक) शिव कुमार झा "टिल्लू" क्षणप्रभा-कविता-संग्रह अंशु-समालोचना देवांशु वत्स नताशा -मैथिली बाल चित्रशृंखला (कौमिक्स) डॉ. विनीत उत्पल हम पुछैत छी (कविता संग्रह) रेहन पर रग्घू - काशीनाथ सिंहक हिन्दी उपन्यासक विनीत उत्पल द्वारा मैथिली अनुवाद मन्त्रद्रष्टाऋष्यश्रृङ्ग- लेखक हरिशंकरश्रीवास्तव "शलभ" (हिन्दीसं मैथिली अनुवाद विनीत उत्पल द्वारा) मोहनदास- उदय प्रकाशक हिन्दी उपन्यासक विनीत उत्पल द्वारा मैथिली अनुवाद मोहनदास (मैथिली-देवनागरी) मोहनदास (मैथिली-मिथिलाक्षर) मोहनदास (मैथिली-ब्रेल) जगदानन्द झा "मनु" (सौजन्य- जगदानन्द झा "मनु") नढ़िया भुकैए हमर घराड़ीपर (गजल संग्रह) तोहर कतेक रंग (विहनि कथा संग्रह) चोनहा- (बाल उपन्यास) व्यथा- (कविता-गीत संग्रह) राजदेव मण्डल अम्बरा-कविता-संग्रह हमर टोल (उपन्यास) बसुंधरा(कविता संग्रह) जाल (पटकथा) लाज (एकांकी) जल भंवर (उपन्यास) त्रिवेणीक रंग (विहनि आ लघु कथा संग्रह) पंचैती (लघु पटकथा) वापसी Rajdeo Mandal- Maithili Writer by Gajendra Thakur दुर्गानन्द मण्डल संचयिका कथा कुसुम (विहनि आ लघु कथा संग्रह) चक्षु राम विलास साहु अंकुर- लघुकथा संग्रह रथक चक्का उलटि चलै बाट (कविता/ टनका संग्रह) कर्म बिनु जग सुन्ना (दोसर कविता/ टनका संग्रह) स्कूलक खिचड़ी (विहनि/ लघु कथा संग्रह) दूधबेचनी (लघु कथा संग्रह) मनक मैल नारायण यादव (सौजन्य- उमेश मण्डल) खाली घर रामदेव प्रसाद मण्डल "झारूदार" हमरा बिनु जगत सूना छै गीतांजलि झारू कपिलेश्वर राउत उलहन (विहनि - लघु कथा संग्रह) नंद विलास राय सखारी-पेटारी(लघुकथा संग्रह) मदन अमर (दोसर लघु कथा संग्रह) मरजादक भोज (तेसर लघुकथा संग्रह) भरदुतिया छठिक डाला हमर चारूधाम असल पूजा ललन कुमार कामत (सौजन्य- उमेश मण्डल) किछु विहनि आ लघुकथा उमेश पासवान वर्णित रस बेचन ठाकुर बेटीक अपमान आ छीनरदेवी (नाटक) बाप भेल पित्ती आ अधिकार (नाटक) बिसवासघात (नाटक) ऊँच-नीच (नाटक) भोँट (नाटक) डॉ. उमेश मण्डल जगदीश प्रसाद मण्डलक काव्य संसार (अनुसन्धान विश्लेषण) अभ्यन्तर (संकलन-सम्पादन) हेन्डबुक सँ फेसबुक धरि (संकलन-सम्पादन) जेतए ने जाए कवि ओतए जाए अनुभवी (संकलन-सम्पादन) निर्विकल्प (संकलन-सम्पादन) समस्या सँ समाधान धरि (संकलन-सम्पादन) निश्तुकी- कविता संग्रह मिथिलाक संस्कार गीत, विध-व्यवहार गीत आ गीतनाद (संकलन) मिथिलाक वनस्पति स्लाइड शो मिथिलाक जीव-जन्तु स्लाइड शो मिथिलाक जिनगी स्लाइड शो Mithila_Painting-Modern Art-Photos सगर राति दीप जरय- इतिहास सगर राति दीप जरय- आरती कुमारी फाइल दुध-पानि फराक-फराक (कथा एवं पाण्डुलिपि जगदीश प्रसाद मण्डल)-(छाया एवं सम्पादन- उमेश मण्डल) हिन्दुस्तानी मुसलमान और हिन्दुस्तानियत - मूल हिन्दी लेख- गीतेश शर्मा, मैथिली अनुवाद- उमेश मण्डल उमेश मण्डल द्वारा मैथिली लेखकक रचना संसारसँ बीछल विचारक पाम्फलेटक पोथी जगदीश प्रसाद मण्डल राजदेव मण्डल डॊ. शिव कुमार प्रसाद रामदेव प्रसाद मण्डल "झारूदार" राम विलास साहु नन्द विलास राय कपिलेश्वर राउत प्रीतम कुमार निषाद मिथिलाक सभ जाति आ धर्मक संस्कार, लोकगीत आ व्यवहार गीत (सौजन्य: उमेश मंडल) 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 32 33 34 35 36 37 38 39 40 41 42 43 अन्तर्ध्वनि (जगदीश प्रसाद मण्डलक १५ गोट बीछल कथा- चयन एवम् सम्पादन- उमेश मण्डल) ................ जगदीश प्रसाद मण्डल गामक जिनगी (लघुकथा संग्रह) मिथिलाक बेटी (नाटक) मौलाइल गाछक फूल (उपन्यास) जिनगीक जीत (उपन्यास) उत्थान-पतन (उपन्यास) जीबन-मरन (उपन्यास) जीवन-संघर्ष (उपन्यास) तरेगन (बाल प्रेरक विहनि कथा संग्रह) पंचवटी (एकांकी-संचयन) अर्द्धांगिनी..सरोजनी.. सुभद्रा.. भाइक सिनेह इत्यादि (लघुकथा संग्रह) कम्प्रोमाइज (नाटक) झमेलिया बिआह (नाटक) इन्द्रधनुषी अकास (पद्य संग्रह) शंभुदास (तीनटा दीर्घ कथा मइटुग्गर, शंभुदास आ फाँसी) गीतांजलि (गीत संग्रह) राति-दिन (कविता संग्रह) सतभैंया पोखरि (लघु कथा संग्रह) तीन जेठ एगारहम माघ (गीत संग्रह) बजन्ता-बुझन्ता (विहनि कथा संग्रह) रत्नाकर डकैत (नाटक) बड़की बहिन (उपन्यास) भकमोड़ (लघुकथा संग्रह) उलबा चाउर (लघुकथा संग्रह) सरिता (कविता संग्रह) सुखाएल पोखरिक जाइठ (गीत संग्रह) नै धाड़ैए (बाल उपन्यास) स्वयंवर (नाटक) पतझाड़ (लघु कथा संग्रह) फलहार (लघु कथा संग्रह) गामक शकल सूरत (लघु कथा संग्रह) लजबिजी (लघु कथा संग्रह) बटेसर काका (लघु कथा संग्रह) आमक गाछी अप्पन गाम दिवालीक दीप पंचदेव सीरीज पंचदेव-१ पंचदेव-२ पंचदेव-३ पंचदेव-४ पंचदेव-५ पंचदेव-६ पंचदेव-७ पंचदेव-८ पंचदेव-९ पंचदेव-१० पंचदेव-२० पंचदेव-३० पंचदेव-४० पंचदेव-५० पंचदेव-६० पंचदेव-७० पंचदेव-८० पंचदेव-९० पंचदेव-१०० दुध-पानि फराक-फराक (कथा एवं पाण्डुलिपि जगदीश प्रसाद मण्डल)- (छाया एवं सम्पादन- उमेश मण्डल) जगदीश प्रसाद मण्डल जीक ६५ टा पोथीक नव संस्करण विदेहक २३३ (Videha_01_09_2017) सँ २५० (Videha_15_05_2018 ) धरिक अंकमे धारावाहिक प्रकाशन नीचाँक लिंकपर पढ़ू:- VIDEHA_233 VIDEHA_234 VIDEHA_235 VIDEHA_236 VIDEHA_237 VIDEHA_238 VIDEHA_239 VIDEHA_240 VIDEHA_241 VIDEHA_242 VIDEHA_243 VIDEHA_244 VIDEHA_245 VIDEHA_246 VIDEHA_247 VIDEHA_248 VIDEHA_249 VIDEHA_250 पंगु (उपन्यास)- साहित्य अकादेमी मूल पुरस्कार २०२१ सँ सम्मानित पोथी पंगु (हिन्दी अनुवाद रामेश्वर प्रसाद मण्डल) अप्पन साती (लघुकथा संग्रह) मोड़पर (उपन्यास) सुचिता (उपन्यास) सेहन्ता सेहन्ते रहि गेल (लघुकथा संग्रह) डॉ. शशिधर कुमर उड़ि ने सकी पर चिड़ै छी हम (भाग १-२) (पृ. १०५४-१०९५) खिस्सा अण्टार्कटिका केर (पृ. १०५४-१०९५) बाल कविता (पृ. ९९३-१२१५) बाल कविता (पृ. १००४-११७३) सचित्र बाल कविता (पृ. ७४७-८३४) सचित्र बाल कविता (पृ. १४६८-१८५०) .................. गजेन्द्र ठाकुर तेलुगु कथा आ ओड़िया, तेलुगु, गुजराती, भोजपुरी आ कश्मीरी कविता तेलुगु कथा आ ओड़िया, तेलुगु, गुजराती, भोजपुरी आ कश्मीरी कविता (मिथिलाक्षर) मैथिली समीक्षाशास्त्र मैथिली समीक्षाशास्त्र (तिरहुता) मैथिली समीक्षाशास्त्र (भाग-२, अनुप्रयोग) मैथिली प्रतियोगिता प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना भाग-१ प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना भाग दू (कुरुक्षेत्रम अन्तर्मनक-२) प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना (भाग-२, कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक खण्ड-८) (संक्षिप्त) नित नवल दिनेश कुमार मिश्र नित नवल दिनेश कुमार मिश्र (मिथिलाक्षर) नित नवल दिनेश कुमार मिश्र (कैथी) नित नवल दिनेश कुमार मिश्र (नेवाड़ी) नित नवल दिनेश कुमार मिश्र (IPA) दूषण पञ्जी- The Black Book दूषण पञ्जी- The Black Book (मिथिलाक्षर) पर्वत ऊपर भमरा जे सूतल (बीहनि, लघु आ दीर्घ कथा संग्रह) पर्वत ऊपर भमरा जे सूतल (मिथिलाक्षर) पर्वत ऊपर भमरा जे सूतल (कैथी) पर्वत ऊपर भमरा जे सूतल (नेवाड़ी) पर्वत ऊपर भमरा जे सूतल (IPA) स्वप्नमे मिज्झर होइत The_Science_of_Words Rajdeo Mandal- Maithili Writer (Now with Supplement I & II) JAGDISH PRASAD MANDAL- Maithili Writer नित नवल सुभाष चन्द्र यादव नित नवल सुभाष चन्द्र यादव (मिथिलाक्षर) जगदीश प्रसाद मण्डल- एकटा बायोग्राफी जगदीश प्रसाद मण्डल- एकटा बायोग्राफी (हिन्दी अनुवाद रामेश्वर प्रसाद मण्डल) गंगा ब्रिज (नाटक) उल्कामुख (नाटक) संकर्षण (नाटक) धांगि बाट बनेबाक दाम अगूबार पेने छँ (रुबाइ, कता आ गजल संग्रह) सहस्रजित् (पद्य संग्रह) सहस्राब्दीक चौपड़पर (पद्य संग्रह) त्वञ्चाहञ्च आ असञ्जाति मन (दूटा गीत प्रबन्ध) सहस्रबाढ़नि (उपन्यास) सहस्रबाढ़नि_ब्रेल-मैथिली (मैथिलीक पहिल ब्रेल पोथी) सहस्रशीर्षा (उपन्यास) गल्प-गुच्छ (विहनि आ लघु कथा संग्रह) शब्दशास्त्रम् (लघुकथा संग्रह) बाल मण्डली/ किशोर जगत (बाल नाटक, लघुकथा, कविता आदि) कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक देवनागरी वर्सन तिरहुता वर्सन ब्रेल वर्सन Learn Maithili Sign Language Learn Mithilakshar Script Learn Braille through Mithilakshar Script Learn International Phonetic Script through Mithilakshar Script Learn Kaithi Learn Newari Learn Calligraphic Newari (Ranjana) Learn Urdu Script Learn Tibetan Script Learn Japanese Script for Haiku Learn Brahmi Learn Kharoshthi मिथिला रत्न/ मिथिला चित्रकला/ मिथिलाक पाबनि तिहार (कथा) आ मिथिलाक संगीत जलोदीप (बाल-नाटक संग्रह) अक्षरमुष्टिका (बाल-लघुकथा संग्रह) बाङक बङौरा (बाल-पद्य संग्रह) नाराशंसी (गीत-प्रबन्ध) मचण्ड (नाटक) बाल साहित्य (मूल)- गजेन्द्र ठाकुर भऽ जाएब छू(मैथिलीक २०१२ मे प्रकाशित पहिल क्लाइमेट-फिक्शन प्ले- Maithili's first climate-fiction play originally published in 2012) कमलाक भगता तरहरिमे परीलोक बेसी छुट्टी कम इसकूल बड़द करैए दाउन ने यौ बाल गजल फिनिश लाइन अनूदित साहित्य (आन भाषासँ)- गजेन्द्र ठाकुर विदेह:सदेह २७ (गजेन्द्र ठाकुर आ रवि भूषण पाठकक आन भाषासँ अनूदित गद्य आ पद्य- अंक १-३५० सँ) बाल साहित्य (अनुवाद- द्विभाषिक- मैथिली-अंग्रेजी)- गजेन्द्र ठाकुर मसाई केर परिवर्तनकारी रेबेका शेष ४० टा बाल चित्र-पोथी नीचाँक लिंकपर:- सुनू घर सभ एकटा नीक दिन चलू हम तँ ठीक छी ने! की अहाँ ऐ चिड़ै सभकेँ देखने छी? टोस्ट बड़ीटा! कनियेटा! एतऽ हम सभ रहै छी भारतोल्लक राजकुमारी भारतोल्लक राजकुमारी (बिनु शब्दक) वुयो कच-कच कचाक चुन्नू-मुन्नूक नहेनाइ नेना जे बैलूनसँ डेराइत छल अद्भुत फिबोनाची अंक-शृंखला हारू अखन नै, अखन नै! जन्मदिनक उत्सव भोज मोट राजा पातर-दुब्बड़ कुकुड़ बचिया जे अपन हँसी नै रोकि सकैत छलि अंग्रेजी हम सूंघि सकै छी छोट लाल-टुहटुह डोरी करू नीक, भोगू नीक ई सभटा बिलाड़िक दोख अछि! चोभा आम! हमर टोलक बाट जखन इकड़ू स्कूल गेल माछी फेर आउ टाटा! अमाचीक जुलुम मशीन सभ टिंग टोंग पाउ-म्याऊ-वाह कुकुड़क एकटा दिन हमरा नीक लगैए रीताक नव-स्कूलमे पहिल दिन कनी हँसियौ ने! लाल बरसाती भूत-प्रेतक नाट्यशाला आउ पएर गानी कतऽ अछि ई अंक ५? विदेह मैथिली-अंग्रेजी टॉकिंग रीड-अलाउड ऑडियो बुक https://bloomlibrary.org/player/Wcf6zr5CoF (मसाई केर परिवर्तनकारी रेबेका) https://bloomlibrary.org/player/p3sHdYBgiT (चलू हम तँ ठीक छी ने!) https://bloomlibrary.org/player/f19pSdhGMo (एकटा नीक दिन) https://bloomlibrary.org/player/b2l5wesxCp (घर सभ) https://bloomlibrary.org/player/dAzC0Fubt7 (की अहाँ ऐ चिड़ै सभकेँ देखने छी?) NTA-UGC/ UPSC/ BPSC Maithili Optional- गजेन्द्र ठाकुर मैथिली समीक्षाशास्त्र मैथिली समीक्षाशास्त्र (तिरहुता) मैथिली समीक्षाशास्त्र (भाग-२, अनुप्रयोग) मैथिली प्रतियोगिता [Place of Maithili in Indo-European Language Family/ Origin and development of Maithili language (Sanskrit, Prakrit, Avhatt, Maithili) भारोपीय भाषा परिवार मध्य मैथिलीक स्थान/ मैथिली भाषाक उद्भव ओ विकास (संस्कृत, प्राकृत, अवहट्ट, मैथिली)] (Criticism- Different Literary Forms in Modern Era/ test of critical ability of the candidates) (ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददास सिलेबसमे छथि आ रसमय कवि चतुर चतुरभुज विद्यापति कालीन कवि छथि। एतय समीक्षा शृंखलाक प्रारम्भ करबासँ पूर्व चारू गोटेक शब्दावली नव शब्दक पर्याय संग देल जा रहल अछि। नव आ पुरान शब्दावलीक ज्ञानसँ ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददासक प्रश्नोत्तरमे धार आओत, संगहि शब्दकोष बढ़लासँ खाँटी मैथिलीमे प्रश्नोत्तर लिखबामे धाख आस्ते-आस्ते खतम होयत, लेखनीमे प्रवाह आयत आ सुच्चा भावक अभिव्यक्ति भय सकत।) (बद्रीनाथ झा शब्दावली आ मिथिलाक कृषि-मत्स्य शब्दावली) (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोरिक गाथामे समाज ओ संस्कृति) (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- विद्यापति) (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- पद्य समीक्षा- बानगी) (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोक गाथा नृत्य नाटक संगीत) (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- यात्री) (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली रामायण) (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली उपन्यास) (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- शब्द विचार) (तिरहुता लिपिक उद्भव ओ विकास) अनुलग्नक-१-२-३ अनुलग्नक- ४-५ (मैथिली आ दोसर पुबरिया भाषाक बीचमे सम्बन्ध (बांग्ला, असमिया आ ओड़िया) [यू.पी.एस.सी. सिलेबस, पत्र-१, भाग-"ए", क्रम-५]) [मैथिली आ हिन्दी/ बांग्ला/ भोजपुरी/ मगही/ संथाली- बिहार लोक सेवा आयोग (बी.पी.एस.सी.) केर सिविल सेवा परीक्षाक मैथिली (ऐच्छिक) विषय लेल] मैथिली बांग्ला असमिया ओड़िया हिन्दी उर्दू नेपाली संस्कृत संथाली NTA_UGC_NET_Maithili_01- गजेन्द्र ठाकुर NTA_UGC_NET_Maithili_02- गजेन्द्र ठाकुर Test Series-1- गजेन्द्र ठाकुर Test Series-2- गजेन्द्र ठाकुर GS (Pre) Topic 1 - गजेन्द्र ठाकुर गजेन्द्र ठाकुर (सम्पादन) विदेह-सदेह १-२५ www.videha.co.in विदेह ई-पत्रिकाक अंक १-३५० सँ- मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ गद्य आ पद्यक एकटा समानान्तर संकलन देवनागरी मिथिलाक्षर विदेह:सदेह १ विदेह: सदेह १ तिरहुता विदेह:सदेह २ मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना विदेह: सदेह २ तिरहुता विदेह:सदेह ३ मैथिली पद्य विदेह: सदेह ३ तिरहुता विदेह:सदेह ४ मैथिली कथा विदेह: सदेह ४ तिरहुता विदेह मैथिली विहनि कथा [विदेह सदेह ५] विदेह: सदेह ५ तिरहुता विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५]- संस्करण-२ विदेह: सदेह ५ संस्करण-२ तिरहुता विदेह मैथिली लघुकथा [विदेह सदेह ६] विदेह: सदेह ६ तिरहुता विदेह मैथिली पद्य [विदेह सदेह ७] विदेह: सदेह ७ तिरहुता विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [विदेह सदेह ८] विदेह: सदेह ८ तिरहुता विदेह मैथिली शिशु उत्सव [विदेह सदेह ९] विदेह: सदेह ९ तिरहुता विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [विदेह सदेह १०] विदेह: सदेह १० तिरहुता विदेह:सदेह ११ विदेह: सदेह ११ तिरहुता विदेह:सदेह १२ विदेह: सदेह १२ तिरहुता विदेह:सदेह १३ विदेह: सदेह १३ तिरहुता विदेह:सदेह १४ विदेह: सदेह १४ तिरहुता विदेह:सदेह १५ विदेह: सदेह १५ तिरहुता विदेह:सदेह १६ विदेह: सदेह १६ तिरहुता विदेह:सदेह १७ विदेह: सदेह १७ तिरहुता विदेह:सदेह १८ विदेह: सदेह १८ तिरहुता विदेह:सदेह १९ विदेह: सदेह १९ तिरहुता विदेह:सदेह २० विदेह: सदेह २० तिरहुता विदेह:सदेह २१ विदेह: सदेह २१ तिरहुता विदेह:सदेह २२ विदेह: सदेह २२ तिरहुता विदेह:सदेह २३ विदेह: सदेह २३ तिरहुता विदेह:सदेह २४ विदेह: सदेह २४ तिरहुता विदेह:सदेह २५ विदेह: सदेह २५ तिरहुता विदेह-सदेह २६-३६ www.videha.co.in विदेह ई-पत्रिकाक अंक १-३५० सँ- थीम आधारित मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ मूल आ अनूदित गद्य आ पद्यक एकटा समानान्तर संकलन विदेह:सदेह २६ (डॉ शम्भु कुमार सिंह आ डॉ अरुण कुमार सिंह अंक १-३५० सँ) विदेह: सदेह २६ तिरहुता विदेह:सदेह २७ (गजेन्द्र ठाकुर आ रवि भूषण पाठकक आन भाषासँ अनूदित गद्य आ पद्य- अंक १-३५० सँ) विदेह: सदेह २७ तिरहुता विदेह:सदेह २८ (अनूदित गद्य आ पद्य- अंक १-३५० सँ) विदेह: सदेह २८ तिरहुता विदेह:सदेह २९ (रवि भूषण पाठक आ डॉ. कैलाश कुमार मिश्र- अंक १-३५० सँ) विदेह: सदेह २९ तिरहुता विदेह:सदेह ३० (स्कूल-कॉलेजक विद्यार्थी लेल- अंक १-३५० सँ) विदेह: सदेह ३० तिरहुता विदेह:सदेह ३१ (डॉ. कामिनी कामायनी आ कुमार मनोज कश्यप- अंक १-३५० सँ) विदेह: सदेह ३१ तिरहुता विदेह:सदेह ३२ (रचनात्मक गद्य-पद्य लेखन भाग-१- अंक १-३५० सँ) विदेह: सदेह ३२ तिरहुता विदेह:सदेह ३३ (रचनात्मक गद्य-पद्य लेखन भाग-२- अंक १-३५० सँ) विदेह: सदेह ३३ तिरहुता विदेह:सदेह ३४ (रचनात्मक गद्य-पद्य लेखन भाग-३- अंक १-३५० सँ) विदेह: सदेह ३४ तिरहुता विदेह:सदेह ३५ (रचनात्मक गद्य-पद्य लेखन भाग-४- अंक १-३५० सँ) विदेह: सदेह ३५ तिरहुता विदेह:सदेह ३६ (रचनात्मक गद्य-पद्य लेखन भाग-५- अंक १-३५० सँ) विदेह: सदेह ३६ तिरहुता ................ यू.पी.एस.सी. आ आन प्रतियोगिता परीक्षा लेल देखू: विदेह:सदेह १७ विदेह:सदेह २१ विदेह:सदेह २३ विदेह:सदेह २६ विदेह:सदेह २९ विदेह:सदेह ३० विदेह:सदेह ३२ विदेह:सदेह ३३ विदेह:सदेह ३४ विदेह:सदेह ३५ ............ Videha-Sadeha भाषापाक -विदेह मैथिली मानक भाषा आ मैथिली भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम विदेह पुरान अंकक आर्काइव Videha 1-50 Videha 51-100 Videha 101-149 Videha 150-250 Videha 251-Onwards Audio Archive Folder Mithila_Painting-Modern Art-Photos Videha Old Issues Folder Videha Classical Sites Folder .................. गजेन्द्र ठाकुर आ आशीष अनचिन्हार (सम्पादन) मैथिलीक प्रतिनिधि गजल मैथिली गजल: आगमन ओ प्रस्थान बिंदु (गजलक आलोचना-समालोचना-समीक्षा) ................ गजेन्द्र ठाकुर, नागेन्द्र कुमार झा आ पञ्जीकार विद्यानन्द झा (सम्पादन) जीनोम मैपिंग (४५० ए.डी.सँ २००९ ए.डी.)--मिथिलाक पञ्जी प्रबन्ध जीनियोलोजिकल मैपिंग (४५० ए.डी.सँ २००९ ए.डी.)--मिथिलाक पञ्जी प्रबन्ध -भाग-२ पंजी (११००० मूल मिथिलाक्षर ताड़पत्र) 11000 PALM LEAF PANJI INSCRIPTIONS (VOLUME I TO XXII) Compiled, Scanned & Catalogued by Preeti Thakur MAITHILI-ENGLISH DICTIONARIES Maithili-English Dictionary Vol.I Maithili-English Dictionary Vol.II ENGLISH-MAITHILI DICTIONARIES Videha English Maithili Dictionary English-Maithili Computer Dictionary .................. दिनेश कुमार मिश्र (सौजन्य दिनेश कुमार मिश्र) बन्दिनी महानन्दा बागमती की सद्गति! दुइ पाटन के बीच में.. (कोसी नदी की कहानी) न घाट न घर बगावत पर मजबूर मिथिला की कमला नदी भुतही नदी और तकनीकी झाड़-फूंक The Kamla River and People On Collision Course Bhutahi Balan- Story of a ghost river and engineering witchcraft Refugees of the Kosi Embankments ................ पत्रिका-जर्नल-स्मारिका मैथिली कविता-त्रैमासिक (सौजन्य- नचिकेता) मैथिली कविता-त्रैमासिक (अप्रैल १९६९) मैथिली कविता-त्रैमासिक (जुलाइ १९६९) मिथिला दर्शन (सौजन्य- नचिकेता) मार्च २०२१ नवम्बर २०२१ कौशिकी (सौजन्य- पञ्जीकार विद्यानन्द झा) कौशिकी (१९७१-७२) देसिल बयना (अखबार) (सौजन्य- रामलोचन ठाकुर) देसिल बयना (अख़बार) Society Today (सौजन्य- सुमित आनन्द) अंक ११ संकल्प (सौजन्य- योगानन्द झा) अंक ५ १९८८ अंतिका (सौजन्य- गौरीनाथ) जुलाइ-सितम्बर २००८ (हरिमोहन झा विशेषांक) अक्टूबर २०१०सँ मार्च २०११ अक्टूबर २०११ सँ मार्च २०१२ भारती मंडन (सौजन्य- केदार कानन) अंक-१६ सन्धान (सौजन्य- अशोक) सन्धान १ सन्धान २ सन्धान ३ प्रभास विशेष सन्धान ४ मिथिलांगन (सौजन्य मुकेश दत्त) अप्रैल-सितम्बर २०२२ मैलोरंग (सौजन्य- प्रकाश झा) अंक२-३ धूआ-धजा (सौजन्य- परमेश्वर कापड़ि) अंक ७ अंक १४ अंक १५ अंक १६ अंक १८ अंक १० जून २०१२ अंक २४ जून २०१२ 23February2016 २५ जुलाइ २०१२ ०५ अगस्त २०१२ आसिन २०७३ स्मारिका (सौजन्य- रामभरोस कापड़ि भ्रमर) स्मारिका (२०१०) आंगन (सौजन्य- रामभरोस कापड़ि भ्रमर) आंगन अंक-४ (२०१२) सलहेस विशेषांक आँजुर (सौजन्य- रामभरोस कापड़ि भ्रमर) आँजुर (अंक वर्ष ३६, अंक ३) सोमदेव विशेष गामघर (सौजन्य- रामभरोस कापड़ि "भ्रमर") गामघर-३०-०८-२०१८ गामघर-०४-१०-२०१८ गामघर-१६-०५-२०१९ गामघर-२७-०६-२०१९ दूधमती- (नेपाली आ मैथिलीमे) (सौजन्य- सुजीत कुमार झा) अंक ३१ अंक ३२ अंक ३३ अंक ३४ अंक 35 अंक 36 अंक 37 अंक 38 अंक 39 अंक 40 अंक 41 घर-बाहर (सौजन्य- चेतना समिति) अप्रैल-जून २०११ रचना (सौजन्य- सुभाष चन्द्र यादव) दिसम्बर "०५ मार्च "०६राजकमल चौधरी: मोनोग्राफ पल्लव (सौजन्य- धीरेन्द्र प्रेमर्षि) पल्लव- १ गजल अंक पूर्वोत्तर मैथिल (सौजन्य- प्रेमकान्त चौधरी) अप्रैल-जून 2010 जुलाइ-सितम्बर 2010 जनवरी सँ मार्च 2011 अप्रैल-जून २०११ जुलाइ-सितम्बर २०११ लालदास भावांजलि स्मारिका २०२२ (सौजन्य डॉ संजीव शमा) .................. किछु मैथिली पोथी डाउनलोड साइट (ओपन सोर्स) NCERT BHASHA SANGAM NCERT (Maithili-English-Hindi Conversations) मैथिली-हिन्दी वार्तालाप (३ घण्टा) मैथिली (मैथिली संकेत भाषा सहित- मैथिलीमे पहिल बेर) https://www.youtube.com/@videha_ejournal https://youtu.be/TebuC-lrSs8 https://ncert.nic.in/bs-2021.php Sahitya Akademi प्रकाशन डिजिटल-पोथी CIIL अखियासल (रमानन्द झा रमण) जुआयल कनकनी- महेन्द्र प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) सृजन केर दीप पर्व- सं केदार कानन आ अरविन्द ठाकुर मैथिली गद्य संग्रह- सं शैलेन्द्र मोहन झा Archive.Org (विजयदेव झा) Videha Maithili eBooks/ eJournals/ Audio-Video Archive IGNCA Maithili English Dictionary विज्ञान रत्नाकर मिथिला दर्शन तीरभुक्ति OLE Nepal's e-Pustakalaya पोथीक लिंक IGNCA-ASI (search keyword Mithila) History of Navya-Nyaya in Mithila Studies in Jainism and Buddism in Mithila Mithila in the Age of Vidyapati Cultural Heritage of Mithila Mithila under the Karnatas Temple Survey Project ASI- English आ Hindi मैथिली साहित्य संस्थान दर्शनीय मिथिला (मैथिली साहित्य संस्थान लिंक) Brochure 1 (मैथिली साहित्य संस्थान लिंक) Brochure 2 (मैथिली साहित्य संस्थान लिंक) Brochure 3 (मैथिली साहित्य संस्थान लिंक) Brochure 4 (मैथिली साहित्य संस्थान लिंक) Brochure 5 (मैथिली साहित्य संस्थान लिंक) ब्लूम लाइब्रेरी मैथिली अरिपन फाउण्डेशन Pratham Books Maithili Storyweaver मैथिली ऑडियो बुक्स Videha Read Aloud Talking Maithili Audio Books (including Maithili Sign Language- Ist time in Maithili) पोथी डॉट कॉम I Love Mithila (पोथी डाउनलोड लिंक) online maithili journal owner I Love Mithila प्यारे मैथिल चैनल- किरण चौधरी आ संगीता आनन्द मिथिला चैप्टर खिस्सा-पिहानी नेना भुटका लेल जानकी एफ.एम समाचार आकाशवाणी दरभंगा यू ट्यूब चैनल ............ JNU मैथिली मैथिली लेक्सिकन ............... Videha e-Learning YouTube Channel ................. विदेह सम्मान: सम्मान-सूची (समानान्तर साहित्य अकादेमी, समानान्तर ललित कला अकादेमी आ समानान्तर संगीत-नाटक अकादेमी सम्मान/ पुरस्कार नामसँ विख्यात) ................ मैथिलीक वर्तनी १ मैथिलीक वर्तनी- विदेह मैथिली मानक भाषा आ मैथिली भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम भाषापाक २ मैथिलीक वर्तनीमे पर्याप्त विविधता अछि। मुदा प्रश्नपत्र देखला उत्तर एकर वर्तनी इग्नू BMAF001 सँ प्रेरित बुझाइत अछि, से एकर एकरा एक उखड़ाहामे उनटा-पुनटा दियौ, ततबे धरि पर्याप्त अछि। यू.पी.एस.सी. क मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेल सेहो ई पर्याप्त अछि, से जे विद्यार्थी मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेने छथि से एकर एकटा आर फास्ट-रीडिंग दोसर-उखड़ाहामे करथि| IGNOU इग्नू BMAF-001 These are print-on-demand books, send your queries to editorial.staff.videha@gmail.com. The eBooks of some of these are available for sale on Google Play [(c) Preeti Thakur, sales.videha@gmail.com], send your queries to sales.videha@gmail.com. The contents and documents e-published by Videha (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) are periodically being checked for accessibility issues. People with disabilities should not have difficulty accessing these contents/ documents. ३. मैथिली ऑडियो-वीडियोक संकलन Maithili Audios-Videos विदेह ऑडियो-वीडियो वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू। Always refresh the pages for viewing new issue of VIDEHA. Search for Audio-Video related information (including Print, Audio-Visual & Sign Language) relating to Mithila/ Maithili https://books.google.com/ Top of Form Bottom of Form "Videha" Ist Maithili Fortnightly ejournal Archive of Audios-Videos 'विदेह' प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका ऑडियो-वीडियो आर्काइव मैथिली ऑडियो-वीडियोक संकलन (पूर्णतः अव्यवसायिक उद्देश्य आ मात्र एकेडमिक प्रयोग लेल)ऑडियो-वीडियो देखबाक लेल सबधित लिककें क्लिक करू। For viewing audios-videos click the respective links. ...................... मिथिलाक सभ जाति आ धर्मक संस्कार, लोकगीत आ व्यवहार गीत (सौजन्य: उमेश मंडल) 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 32 33 34 35 36 37 38 39 40 41 42 43 ...................... गुवाहाटी विद्यापति पर्व २०१० पहिल भाग दोसर भाग तेसर भाग चारिम भाग पाँचम भाग गुवाहाटी अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन आ विद्यापति पर्व २०११ 01 02 03 04 05 06 07 08 09 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 25 26 27 28 29 30 31 32 33 34 35 36 37 38 39 40 41 42 43 44 45 46 ................ मैथिली फिल्म ममता गाबय गीत (सौजन्य- Saregama) कन्यादान (सौजन्य- BEJOD) Maithili Movies on Rent BEJOD गामक घर धुइन चौबटिया (सौजन्य- धीरेन्द्र प्रेमर्षि) चौबटिया सौभाग्य मिथिला ललका पाग भाग-१ ललका पाग भाग-२ ................ मिनाप-१ बुधियार छौड़ा आ राक्षस मिनाप-२ भाग-१ भाग-२ भाग-३ भाग-४ ............... NCERT BHASHA SANGAM NCERT (Maithili-English-Hindi Conversations) पं लक्ष्मीपति सिंह (सौजन्य रमानन्द झा "रमण") हिन्दी-मैथिली-शिक्षक मैथिली-हिन्दी वार्तालाप (३ घण्टा) मैथिली (मैथिली संकेत भाषा सहित- मैथिलीमे पहिल बेर) https://www.youtube.com/@videha_ejournal https://youtu.be/TebuC-lrSs8 https://ncert.nic.in/bs-2021.php प्यारे मैथिल चैनल- किरण चौधरी आ संगीता आनन्द मिथिरंग लोक तरंग मिथिला चैप्टर खिस्सा-पिहानी नेना भुटका लेल मिनाप मैलोरंग मिथिलांगन भंगिमा मैथिली रंगमंच कोकिल मंच मिथिला दर्शन मिथिला मिरर स्मृति एंटरटेनमेंट BEJOD अचल चित्र नीलम मैथिली मैथिली गंगा मिथिला जंक्शन मैथिली क्लास मैथिली समाचार (जनता टेलीविजन) मैथिली टॉक्स अप्पन टी.वी. टी.वी. टुडे, जनकपुर दृश्यम मीडिया संस्कार मिथिला सारेगामा मैथिली नवरस मीडिया ज्योति एंटरटेनमेंट इजोरिया फिल्म्स अयोध्यानाथ चौधरी रेडियो जनकपुर मिथिला टी.वी. मधुर मैथिली मैथिली-नेपाली सीखू अपन मैथिली मैथिली पाठ सुरेन्द्र राउत मिथिलांचल अमित झा प्रवेश मल्लिक आदित्य फिल्म्स एण्ड म्यूजिक नेपाल टेलीविजन आकाशवाणी मैथिली समाचार आकाशवाणी अमृत महोत्सव रश्मि दत्त प्रिया मल्लिक अनामिका झा रफ कट्स, नचिकेता कुञ्ज बिहारी राम बाबू झा वी. जे., विकास झा तिरहुत मिथिला आइ लव मिथिला लोक कला केन्द्र रजनी पल्लवी पूनम मिश्र रंजना झा जूली झा मैथिली ठाकुर ब्लूम लाइब्रेरी मैथिली अरिपन फाउण्डेशन Pratham Books Maithili Storyweaver मैथिली ऑडियो बुक्स Videha Read Aloud Talking Maithili Audio Books (including Maithili Sign Language- Ist time in Maithili) https://bloomlibrary.org/player/Wcf6zr5CoF (मसाई केर परिवर्तनकारी रेबेका) https://bloomlibrary.org/player/p3sHdYBgiT (चलू हम तँ ठीक छी ने!) https://bloomlibrary.org/player/f19pSdhGMo (एकटा नीक दिन) https://bloomlibrary.org/player/b2l5wesxCp (घर सभ) https://bloomlibrary.org/player/dAzC0Fubt7 (की अहाँ ऐ चिड़ै सभकेँ देखने छी?) जानकी एफ.एम समाचार आकाशवाणी दरभंगा यू ट्यूब चैनल I Love Mithila online maithili journal owner I Love Mithila ................ बृखेश चन्द्र लाल, जनकपुरक सौजन्यसँ झिझिया ढोल-पिपही पवनकान्त झा (काश्यप कमल), भटसिमरि, मधुबनीक सौजन्यसँ रसनचौकी ................ विद्यापति गीत तूलिका गीत-गोविन्ददास (गायन दीक्षा भारती) गोविन्ददास-१ गोविन्ददास-२ गोविन्ददास-३ गोविन्ददास-४ गोविन्ददास-५ गोविन्ददास-६ ................... मैथिली गजल (गजल- गजेन्द्र ठाकुर, गायन दीक्षा भारती) बहरे मुतकारिब गजल-२ गजल-३ गजल-४ ................. ७१म सगर राति दीप जरए (०२ अक्टूबर २०१०), गाम बेरमा , जिला मधुबनी (संयोजक- जगदीश प्रसाद मंडल) भाग-१ भाग-२ भाग-३ भाग-४ भाग-५ भाग-६ 82 म सगर राति दीप जरए, स्थान- गजेन्द्र ठाकुर जीक निज आवास, गाम- मेंहथ, जिला- मधुबनी। दिनांक- 31 मई 2014 (शनि दिन), समए- संध्या छह बजेसँ। गोष्ठीक नाओं- कथा बौद्ध सिद्ध मेहथपा सगर राति दीप जरए। आयोजनक खेप- ८२ म आयोजन, संयोजक- गजेन्द्र ठाकुर। विशेषता- बाल साहित्यपर केन्द्रित। ............... मैलोरंग-१ (सौजन्य- प्रकाश झा) नचिकेताक एक छल राजा - भाग-1 नचिकेताक एक छल राजा - भाग- 2 काठक लोक- महेन्द्र मलंगिया भाग-1 काठक लोक- महेन्द्र मलंगिया भाग-2 मैलोरंग-२ कोसी सेमीनार 12 सितम्बर 2008 भाग-१ कोसी सेमीनार 12 सितम्बर 2008 भाग-२ ................. मिथिलांगन विदेह मैथिली नाट्य उत्सव यू ट्यूब लिंक विदेह मैथिली साहित्य/ नाट्य/ कविता/ परिचर्चा उत्सव विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी सम्मान समारोह जनकपुर- विद्यापति पर्व जितेन्द्र झा, जनकपुर रामभद्र सामा चकेवा 1 सामा चकेवा 2 मैथिली कवि सम्मेलन (मिथिला कल्चरल ऑर्गेनाइजेशन, यू.के.) रिपब्लिक डे 2009 (भारत) सगर राति दीप जरए, कबिलपुर, जून २०१० भाग-१ भाग-२ कृष्ण कुमार कश्यपसँ गजेन्द्र ठाकुर द्वारा लेल साक्षात्कार भाग-१ भाग-२ भाग-३ भाग-४ भाग-५ भाग-६ भाग-७ प्रबोध सम्मान: राजमोहन झा (स्लाइडरकेँ बीचमे ल' जाउ, अदहाक बाद राजमोहन झासँ विनीत उत्पलक साक्षात्कार छन्हि।) साहित्य अकादमी पुरस्कार: मन्त्रेश्वर झा मिथिलाक खोज 1.गौरीशकर भाग-१ भाग-२ 2. बाइसी-बसैटी वर्षकृत्य भाग-१ भाग-२ भाग-३ भाग-४ भाग-५ भाग-६ भाग-७ भाग-८ भाग-९ भाग-१० समन्वय २-४ नवम्बर २०१२ इण्डिया हैबीटेट सेन्टर भारतीय भाषा महोत्सव Samanvay 2-4 November 2012 IHC Indian Languages' Festival. Venue: India Habitat Centre, Lodhi Road, New Delhi -- 110 003. 3rd November 2012 Maithili- Love's Own Language/ Brahminism in Maithili/ Pre-Jyotirishwar Non-Brahmin Vidyapati भाग-१ भाग-२ भाग-३ भाग-४ भाग-५ भाग-६ भाग-७ भाग-८ भाग-९ भाग-१० भाग-११ भाग-१२ 2nd November 2012 Ugna Re- By Shovna Narayan (Pre-Jyotirishwar Non Brahmin Vidyapati's Life Episode) भाग-१ भाग-२ भाग-३ भाग-४ भाग-५ भाग-६ भाग-७ भाग-८ ७५म सगर राति दीप जरए मे मुन्नाजीक पहिल विहनि कथा पोस्टर प्रदर्शनी मिथिलाक मूड़न- (रसनचौकीक स्वरक संग) हृदयनारायण झा भाग-१ भाग-२ भाग-३ रंजन चौधरी आ हनी मिश्र (तबला) भाग-१ भाग-२ भाग-३ भाग-४ भाग-५ भाग-६ भाग-७ भाग-८ भाग-९ ललित रंग आ हनी मिश्र (तबला) भाग-१ भाग-२ भाग-३ दीक्षा भारती भाग-१ भाग-२ भाग-३ भाग-४ सुषमा बटगमनी नन्द कुमार मिश्रक गजल पाठ नन्द कुमार मिश्र जीक कविता पाठ भाग-१ भाग-२ मैथिली- भोजपुरी अकादमी, नई दिल्ली भाग-१ भाग-२ भाग-३ भाग-४ भाग-५ मैथिली- भोजपुरी अकादमी, नई दिल्ली सेमीनार 29 मार्च 2009 भाग-१ भाग-२ भाग-३ भाग-४ भाग-५ भाग-६ भाग-७ भाग-८ भाग-९ मैथिली- भोजपुरी अकादमी, द्वारका, नई दिल्ली सेमीनार भाग-१ भाग-२ भाग-३ भाग-४ भाग-५ भाग-६ .................. विदेह सम्मान: सम्मान-सूची (समानान्तर साहित्य अकादेमी, समानान्तर ललित कला अकादेमी आ समानान्तर संगीत-नाटक अकादेमी सम्मान/ पुरस्कार नामसँ विख्यात) .................. मैथिलीक वर्तनी १ मैथिलीक वर्तनी- विदेह मैथिली मानक भाषा आ मैथिली भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम भाषापाक २ मैथिलीक वर्तनीमे पर्याप्त विविधता अछि। मुदा प्रश्नपत्र देखला उत्तर एकर वर्तनी इग्नू BMAF001 सँ प्रेरित बुझाइत अछि, से एकर एकरा एक उखड़ाहामे उनटा-पुनटा दियौ, ततबे धरि पर्याप्त अछि। यू.पी.एस.सी. क मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेल सेहो ई पर्याप्त अछि, से जे विद्यार्थी मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेने छथि से एकर एकटा आर फास्ट-रीडिंग दोसर-उखड़ाहामे करथि| IGNOU इग्नू BMAF-001 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ४.मैथिली शिशु, बाल आ किशोर साहित्य Maithili Children Literature विदेह शिशु, बाल आ किशोर उत्सव वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू। Always refresh the pages for viewing new issue of VIDEHA. Search for Children Literature (including Audio-Visual & Sign Language) relating to Mithila/ Maithili https://books.google.com/ Top of Form Bottom of Form Videha Archive of Maithili Children Literature विदेह मैथिली शिशु, बाल आ किशोर साहित्यक आर्काइव (पूर्णतः अव्यवसायिक उद्देश्य आ मात्र एकेडमिक प्रयोग लेल) सभ पोथी पी.डी.एफ. डाउनलोड लेल क्रमानुसार नीचाँक लिंक सभपर उपलब्ध अछि। All the books are available for pdf download at the respective links below ................. NCERT BHASHA SANGAM NCERT (Maithili-English-Hindi Conversations) पं लक्ष्मीपति सिंह (सौजन्य रमानन्द झा "रमण") हिन्दी-मैथिली-शिक्षक मैथिली-हिन्दी वार्तालाप (३ घण्टा) मैथिली (मैथिली संकेत भाषा सहित- मैथिलीमे पहिल बेर) https://www.youtube.com/@videha_ejournal https://youtu.be/TebuC-lrSs8 https://ncert.nic.in/bs-2021.php विदेह मैथिली शिशु उत्सव कथा बौद्ध सिद्ध मेहथपा (बाल साहित्य केन्द्रित) मेंहथमे भेल ८२ म सगर राति दीप जरयमे पठित कथा सभक संकलन कथा बौद्ध सिद्ध मेहथपा नेना भुटकाकेँ रातिमे सुनेबा लेल किछु लोककथा भोला लाल दास (आर्काइव डॊट कॊम) मैथिली सुबोध व्याकरण डॉ. रमानन्द झा 'रमण' (सौजन्य- रमानन्द झा "रमण") राजू आ टाकाक गाछ (अनुवाद) योगेन्द्र पाठक "वियोगी" (सौजन्य- योगेन्द्र पाठक "वियोगी") विज्ञानक बतकही विज्ञानक बतकही भाग-२ नरक विजय (सम्पूर्ण) नरक विजय (संशोधित) हमर गाम (बाल उपन्यास) पिरामिडक देशमे रोबोट (अनूदित साइंस-फिक्शन नाटक) रामलोचन ठाकुर (सौजन्य- रामलोचन ठाकुर) मैथिली लोककथा कीर्तिनाथ झा (सौजन्य- कीर्तिनाथ झा) कुरल: मैथिली भावानुवाद जगदीश चन्द्र ठाकुर "अनिल" (सौजन्य- जगदीश चन्द्र ठाकुर "अनिल") बाल कविता मुन्नाजी तीन टा बाल नाटक (मैथिली बाल साहित्य) खुरलुच्ची (मैथिली बाल कविता- बाल साहित्य) देवांशु वत्स नताशा -मैथिली बाल चित्रशृंखला (कौमिक्स) जगदानन्द झा "मनु" (सौजन्य- जगदानन्द झा "मनु") चोनहा (बाल उपन्यास) जगदीश प्रसाद मण्डल तरेगन (बाल प्रेरक विहनि कथा संग्रह) नै धाड़ैए (बाल उपन्यास) नन्द कुमार मिश्र 'नन्द' (सौजन्य- नन्द कुमार मिश्र 'नन्द') स्वर्ण कमल (बाल उपन्यास) बृषेश चन्द्र लाल (सौजन्य- बृषेश चन्द्र लाल) ढोलक (बाल कविता संग्रह) सुजीत कुमार झा (सौजन्य- सुजीत कुमार झा) कोइली घूरि आउ (बाल लघु-विहनि कथा संग्रह) डॉ. शशिधर कुमर उड़ि ने सकी पर चिड़ै छी हम (भाग १-२) (पृ. १०५४-१०९५) खिस्सा अण्टार्कटिका केर (पृ. १०५४-१०९५) बाल कविता (पृ. ९९३-१२१५) बाल कविता (पृ. १००४-११७३) सचित्र बाल कविता (पृ. ७४७-८३४) सचित्र बाल कविता (पृ. १४६८-१८५१) डॉ शशिधर कुमर आ सुप्रिया बेबी कुमारी भूकम्प (पृ. ६३८-६७४) कनकमणि दीक्षित (मूल नेपालीसँ मैथिली अनुवाद रूपा धीरू आ धीरेन्द्र प्रेमर्षि, बाल साहित्य) (सौजन्य- धीरेन्द्र प्रेमर्षि) भगता बेङक देश-भ्रमण अणिमा सिंह (सौजन्य- नचिकेता) शिशु गीत खेल कल्पना झा (सौजन्य- कल्पना झा) नशामुक्ति हित गाबी गीत निनियाँ मुन्नी कामत (सौजन्य- मुन्नी कामत) चुक्का (बाल कथा संग्रह) प्रीति ठाकुर गोनू झा आ आन मैथिली चित्रकथा -पहिल मैथिली चित्रकथा (बाल साहित्य) मैथिली चित्रकथा (बाल साहित्य) मिथिलाक लोकदेवता (बाल साहित्य) विद्यापतिक पुरुष परीक्षा (बाल साहित्य) रेस (अनुवाद- बाल चित्रकथा) ए बी सी डी- प्रकृति अक्षर पोथी (अनुवाद- बाल चित्रकथा) सभ खाइत अछि (अनुवाद- बाल चित्रकथा) बो म्याउ बाह (अनुवाद- बाल चित्रकथा) रङ सभ (अनुवाद- बाल चित्रकथा) (०६) छोट आ पैघ (अनुवाद- बाल चित्रकथा) (०७) माल-जाल आ जानवर दिस देखू (अनुवाद- बाल चित्रकथा) (१७) हमर परिवार (अनुवाद- बाल चित्रकथा) जानवर (अनुवाद- बाल चित्रकथा) पोथी १३: १...२...३... (अनुवाद- बाल चित्रकथा) बाजाक अबाज (अनुवाद- बाल चित्रकथा) नीतू कुमारी मैथिली चित्रकथा ( बाल साहित्य) नीता झा (सौजन्य- नीता झा) बिलाइ मौसी (बाल लघुकथा संग्रह) किरण चौधरी (अनूदित सचित्र मैथिली बाल कथा) हमर बाल-वाड़ी आर्या कॉकपिट मे दीपा करमाकर- सही संतुलन मे जंगल मे अहाँक स्वागत अछि व्हेल छथि आकाश मे भैया के मुस्कान के चोरौलक बीज संचयक अचंभित करय "फिबोनाची" शौचालयक खिस्सा लाल बरसाती गुल्लीक जादुई पेटी समीराक विकठ भोजन विवाह मे जाई छी प्रियंका झा (अनूदित सचित्र मैथिली बाल कथा) हमर माँछ! नै हमर माँछ! रश्मि प्रिया (अनूदित सचित्र मैथिली बाल कथा) कैयो सकै छी, नहियो कऽ सकै छी सुनीता ठाकुर (अनूदित सचित्र मैथिली बाल कथा) बण्टी आ बबली नीलिमा चौधरी (अनूदित सचित्र मैथिली बाल कथा) हमर सभसँ नीक संगी स्वास्तिका ठाकुर (अनूदित सचित्र मैथिली बाल कथा) गप्पू बुते नाचल नै होइ छै तूलिका (अनूदित सचित्र मैथिली बाल कथा) हमरा ओ चाही! मधूलिका मिश्र (अनूदित सचित्र मैथिली बाल कथा) ओंघाइत भीमा लक्ष्मी ठाकुर जानवर सभ संगे भेँट-घाँट पूनम मण्डल सुतै कालक खिस्सा गजेन्द्र ठाकुर बाल साहित्य (मूल)- गजेन्द्र ठाकुर बाल मण्डली/ किशोर जगत (बाल नाटक, लघुकथा, कविता आदि) Learn Mithilakshar Script जलोदीप (बाल-नाटक संग्रह) अक्षरमुष्टिका (बाल-लघुकथा संग्रह) बाङक बङौरा (बाल-पद्य संग्रह) भऽ जाएब छू(मैथिलीक २०१२ मे प्रकाशित पहिल क्लाइमेट-फिक्शन प्ले- Maithili's first climate-fiction play originally published in 2012) कमलाक भगता तरहरिमे परीलोक बेसी छुट्टी कम इसकूल बड़द करैए दाउन ने यौ बाल गजल फिनिश लाइन बाल साहित्य (अनुवाद- द्विभाषिक- मैथिली-अंग्रेजी)- गजेन्द्र ठाकुर मसाई केर परिवर्तनकारी रेबेका सुनू घर सभ एकटा नीक दिन चलू हम तँ ठीक छी ने! की अहाँ ऐ चिड़ै सभकेँ देखने छी? टोस्ट बड़ीटा! कनियेटा! एतऽ हम सभ रहै छी भारतोल्लक राजकुमारी भारतोल्लक राजकुमारी (बिनु शब्दक) वुयो कच-कच कचाक चुन्नू-मुन्नूक नहेनाइ नेना जे बैलूनसँ डेराइत छल अद्भुत फिबोनाची अंक-शृंखला हारू अखन नै, अखन नै! जन्मदिनक उत्सव भोज मोट राजा पातर-दुब्बड़ कुकुड़ बचिया जे अपन हँसी नै रोकि सकैत छलि अंग्रेजी हम सूंघि सकै छी छोट लाल-टुहटुह डोरी करू नीक, भोगू नीक ई सभटा बिलाड़िक दोख अछि! चोभा आम! हमर टोलक बाट जखन इकड़ू स्कूल गेल माछी फेर आउ टाटा! अमाचीक जुलुम मशीन सभ टिंग टोंग पाउ-म्याऊ-वाह कुकुड़क एकटा दिन हमरा नीक लगैए रीताक नव-स्कूलमे पहिल दिन कनी हँसियौ ने! लाल बरसाती भूत-प्रेतक नाट्यशाला आउ पएर गानी कतऽ अछि ई अंक ५? विदेह मैथिली-अंग्रेजी टॉकिंग रीड-अलाउड ऑडियो बुक https://bloomlibrary.org/player/Wcf6zr5CoF (मसाई केर परिवर्तनकारी रेबेका) https://bloomlibrary.org/player/p3sHdYBgiT (चलू हम तँ ठीक छी ने!) https://bloomlibrary.org/player/f19pSdhGMo (एकटा नीक दिन) https://bloomlibrary.org/player/b2l5wesxCp (घर सभ) https://bloomlibrary.org/player/dAzC0Fubt7 (की अहाँ ऐ चिड़ै सभकेँ देखने छी?) गजेन्द्र ठाकुर (सम्पादन) विदेह मैथिली शिशु उत्सव [विदेह सदेह ९] विदेह: सदेह ९ तिरहुता गजेन्द्र ठाकुर, नागेन्द्र कुमार झा आ पञ्जीकार विद्यानन्द झा (सम्पादन) English-Maithili Computer Dictionary डॉ. कमला चौधरी (सौजन्य- कमला चौधरी) मैथिलीक वेश-भूषा-प्रसाधन सम्बन्धी शब्दावली २००८ डॉ योगानन्द झा (सौजन्य- योगानन्द झा) मैथिलीक पारम्परिक जातीय व्यवसायक शब्दावली २००९ डॉ. ललिता झा (सौजन्य- ललिता झा) मैथिलीक भोजन सम्बन्धी शब्दावली २०११ गोविंद झा ((IGNCA Site आर्काइव) Maithili-English Dictionary रामदेव झा (सौजन्य- शंकरदेव झा) मैथिली शब्द संचय ................ किछु मैथिली पोथी डाउनलोड साइट (ओपन सोर्स) Videha Maithili eBooks/ eJournals/ Audio-Video Archive विज्ञान रत्नाकर OLE Nepal's e-Pustakalaya पोथीक लिंक IGNCA-ASI (search keyword Mithila) History of Navya-Nyaya in Mithila Studies in Jainism and Buddism in Mithila Mithila in the Age of Vidyapati Cultural Heritage of Mithila Mithila under the Karnatas Temple Survey Project ASI- English आ Hindi मैथिली साहित्य संस्थान दर्शनीय मिथिला (मैथिली साहित्य संस्थान लिंक) Brochure 1 (मैथिली साहित्य संस्थान लिंक) Brochure 2 (मैथिली साहित्य संस्थान लिंक) Brochure 3 (मैथिली साहित्य संस्थान लिंक) Brochure 4 (मैथिली साहित्य संस्थान लिंक) Brochure 5 (मैथिली साहित्य संस्थान लिंक) ब्लूम लाइब्रेरी मैथिली अरिपन फाउण्डेशन Pratham Books Maithili Storyweaver मैथिली ऑडियो बुक्स Videha Read Aloud Talking Maithili Audio Books (including Maithili Sign Language- Ist time in Maithili) पोथी डॉट कॉम खिस्सा-पिहानी नेना भुटका लेल जानकी एफ.एम समाचार आकाशवाणी दरभंगा यू ट्यूब चैनल ................. विदेह सम्मान: सम्मान-सूची (समानान्तर साहित्य अकादेमी, समानान्तर ललित कला अकादेमी आ समानान्तर संगीत-नाटक अकादेमी सम्मान/ पुरस्कार नामसँ विख्यात) ................ मैथिलीक वर्तनी १ मैथिलीक वर्तनी- विदेह मैथिली मानक भाषा आ मैथिली भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम भाषापाक २ मैथिलीक वर्तनीमे पर्याप्त विविधता अछि। मुदा प्रश्नपत्र देखला उत्तर एकर वर्तनी इग्नू BMAF001 सँ प्रेरित बुझाइत अछि, से एकर एकरा एक उखड़ाहामे उनटा-पुनटा दियौ, ततबे धरि पर्याप्त अछि। यू.पी.एस.सी. क मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेल सेहो ई पर्याप्त अछि, से जे विद्यार्थी मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेने छथि से एकर एकटा आर फास्ट-रीडिंग दोसर-उखड़ाहामे करथि| IGNOU इग्नू BMAF-001 These are print-on-demand books, send your queries to editorial.staff.videha@gmail.com. The eBooks of some of these are available for sale on Google Play [(c) Preeti Thakur, sales.videha@gmail.com], send your queries to sales.videha@gmail.com. The contents and documents e-published by Videha (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) are periodically being checked for accessibility issues. People with disabilities should not have difficulty accessing these contents/ documents. ५.विदेह स्त्री कोना विदेह स्त्री कोना वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू। Always refresh the pages for viewing new issue of VIDEHA. Search for Works (including Audio-Visual & Sign Language) relating to Mithila/ Maithili by Female Writers/ Artists https://books.google.com/ Top of Form Bottom of Form (पूर्णतः अव्यवसायिक उद्देश्य आ मात्र एकेडमिक प्रयोग लेल) सभ पोथी पी.डी.एफ. डाउनलोड लेल क्रमानुसार नीचाँक लिंक सभपर उपलब्ध अछि। All the books are available for pdf download at the respective links below. .... सखुआवाली (नारी विमर्श केन्द्रित) भपटियाहीमे भेल ८३ म सगर राति दीप जरयमे पठित कथा सभक संकलन सखुआवाली अणिमा सिंह (सौजन्य- नचिकेता) शिशु गीत खेल इलारानी सिंह (सौजन्य- नचिकेता) प्रेम- एक कविता (अनूदित नाटक) अरुन्धती देवी (सौजन्य- रमानन्द झा "रमण") मिथिलाक विदुषी महिला डॉ. कमला चौधरी (सौजन्य- कमला चौधरी) मैथिलीक वेश-भूषा-प्रसाधन सम्बन्धी शब्दावली २००८ समय-संकेत (कथा-संग्रह) २०१० डॉ. ललिता झा (सौजन्य- ललिता झा) मैथिलीक भोजन सम्बन्धी शब्दावली २०११ सुस्मिता पाठक (सौजन्य- केदार कानन) परिचिति (कविता संग्रह) कनोजड़ि (कथा संग्रह) नन्दिनी पाठक (सौजन्य- केदार कानन) पाथरक शहर (कविता संग्रह) पन्ना झा (सौजन्य- नरेन्द्र झा) अनुभूति (लघुकथा संग्रह) कल्पना झा (सौजन्य- कल्पना झा) गोसाउनिक गीत नशामुक्ति हित गाबी गीत निनियाँ यायावरी- शेफालिका वर्मा (हिन्दी अनुवाद कल्पना झा) मुन्नी कामत (सौजन्य- मुन्नी कामत) सुखल मन तरसल आँखि (पद्य आ गद्य) सुखल मन तरसल आँखि (कविता) अंततः (कविता संग्रह) चुक्का (बाल कथा संग्रह) नीता झा (सौजन्य- नीता झा) बिलाइ मौसी (बाल लघुकथा संग्रह) शेफालिका वर्मा (सौजन्य- शेफालिका वर्मा) यायावरी (यात्रावृत्तान्त) यायावरी (हिन्दी अनुवाद- कल्पना झा) अर्थयुग (लघुकथा संग्रह) एकटा अकास (लघुकथा संग्रह) भावांजलि (गद्य गीत) किस्त-किस्त जीवन (आत्म कथा) आखर-आखर प्रीत नागफांस (उपन्यास) Naagphans (In English) विभा रानी विभा रानीक दूटा नाटक (भाग रौ आ बलचन्दा) सुशीला झा (सौजन्य- प्रभा खेतान/ सुशीला झा) छिन्नमस्ता- प्रभा खेतानक हिन्दी उपन्यासक मैथिली अनुवाद कुसुम ठाकुर प्रत्यावर्तन (आत्मकथा)(पृ. ४५९-५७२) डॉ. कामिनी कामायनी विदेह:सदेह ३१ (डॉ. कामिनी कामायनी आ कुमार मनोज कश्यप- अंक १-३५० सँ) प्रीति ठाकुर गोनू झा आ आन मैथिली चित्रकथा -पहिल मैथिली चित्रकथा (बाल साहित्य) मैथिली चित्रकथा (बाल साहित्य) मिथिलाक लोकदेवता (बाल साहित्य) विद्यापतिक पुरुष परीक्षा (बाल साहित्य) रेस (अनुवाद- बाल चित्रकथा) ए बी सी डी- प्रकृति अक्षर पोथी (अनुवाद- बाल चित्रकथा) सभ खाइत अछि (अनुवाद- बाल चित्रकथा) बो म्याउ बाह (अनुवाद- बाल चित्रकथा) रङ सभ (अनुवाद- बाल चित्रकथा) (०६) छोट आ पैघ (अनुवाद- बाल चित्रकथा) (०७) माल-जाल आ जानवर दिस देखू (अनुवाद- बाल चित्रकथा) (१७) हमर परिवार (अनुवाद- बाल चित्रकथा) जानवर (अनुवाद- बाल चित्रकथा) पोथी १३: १...२...३... (अनुवाद- बाल चित्रकथा) बाजाक अबाज (अनुवाद- बाल चित्रकथा) पंजी (११००० मूल मिथिलाक्षर ताड़पत्र) 11000 PALM LEAF PANJI INSCRIPTIONS (VOLUME I TO XXII) Compiled, Scanned & Catalogued by Preeti Thakur नीतू कुमारी मैथिली चित्रकथा (बाल साहित्य) किरण चौधरी (अनूदित सचित्र मैथिली बाल कथा) हमर बाल-वाड़ी आर्या कॉकपिट मे दीपा करमाकर- सही संतुलन मे जंगल मे अहाँक स्वागत अछि व्हेल छथि आकाश मे भैया के मुस्कान के चोरौलक बीज संचयक अचंभित करय "फिबोनाची" शौचालयक खिस्सा लाल बरसाती गुल्लीक जादुई पेटी समीराक विकठ भोजन विवाह मे जाई छी प्रियंका झा (अनूदित सचित्र मैथिली बाल कथा) हमर माँछ! नै हमर माँछ! रश्मि प्रिया (अनूदित सचित्र मैथिली बाल कथा) कैयो सकै छी, नहियो कऽ सकै छी सुनीता ठाकुर (अनूदित सचित्र मैथिली बाल कथा) बण्टी आ बबली नीलिमा चौधरी (अनूदित सचित्र मैथिली बाल कथा) हमर सभसँ नीक संगी स्वास्तिका ठाकुर (अनूदित सचित्र मैथिली बाल कथा) गप्पू बुते नाचल नै होइ छै तूलिका (अनूदित सचित्र मैथिली बाल कथा) हमरा ओ चाही! मधूलिका मिश्र (अनूदित सचित्र मैथिली बाल कथा) ओंघाइत भीमा लक्ष्मी ठाकुर जानवर सभ संगे भेँट-घाँट पूनम मण्डल सुतै कालक खिस्सा कनकमणि दीक्षित (मूल नेपालीसँ मैथिली अनुवाद रूपा धीरू आ धीरेन्द्र प्रेमर्षि, बाल साहित्य) (सौजन्य- धीरेन्द्र प्रेमर्षि) भगता बेङक देश-भ्रमण डॉ शशिधर कुमर आ सुप्रिया बेबी कुमारी भूकम्प (पृ. ६३८-६७४) .... लेखकक आमंत्रित रचना आ ओइपर आमंत्रित समीक्षकक समीक्षा सीरीज १. कामिनीक पांच टा कविता आ ओइपर मधुकान्त झाक टिप्पणी Videha_01_09_2016 ३. मुन्नी कामतक एकांकी "जिन्दगीक मोल" आ ओइपर गजेन्द्र ठाकुरक टिप्पणी VIDEHA_354 पसुपुलेटी गीता एडिटर्स चोइस सीरीज-१ मीना झा एडिटर्स चोइस सीरीज-२ जगदीश चन्द्र ठाकुर (३ टा बाल कविता जइमे २ टा कविता बेबी चाइल्डपर) एडिटर्स चोइस सीरीज-३ .... विद्यापति गीत तूलिका गीत-गोविन्ददास (गायन दीक्षा भारती) गोविन्ददास-१ गोविन्ददास-२ गोविन्ददास-३ गोविन्ददास-४ गोविन्ददास-५ गोविन्ददास-६ मैथिली गजल (गजल- गजेन्द्र ठाकुर, गायन दीक्षा भारती) बहरे मुतकारिब गजल-२ गजल-३ गजल-४ प्यारे मैथिल चैनल- किरण चौधरी आ संगीता आनन्द सौम्या झा रश्मि दत्त प्रिया मल्लिक अनामिका झा रजनी पल्लवी पूनम मिश्र रंजना झा जूली झा दीपशिखा झा मैथिली ठाकुर These are print-on-demand books, send your queries to editorial.staff.videha@gmail.com. The eBooks of some of these are available for sale on Google Play [(c) Preeti Thakur, sales.videha@gmail.com], send your queries to sales.videha@gmail.com. The contents and documents e-published by Videha (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) are periodically being checked for accessibility issues. People with disabilities should not have difficulty accessing these contents/ documents. ६. विदेह ई-लर्निङ्ग विदेह ई-लर्निङ्ग [संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री] [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल सेहो] ................. मैथिलीक वर्तनी १ मैथिलीक वर्तनी- विदेह मैथिली मानक भाषा आ मैथिली भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम भाषापाक २ मैथिलीक वर्तनीमे पर्याप्त विविधता अछि। मुदा प्रश्नपत्र देखला उत्तर एकर वर्तनी इग्नू BMAF001 सँ प्रेरित बुझाइत अछि, से एकर एकरा एक उखड़ाहामे उनटा-पुनटा दियौ, ततबे धरि पर्याप्त अछि। यू.पी.एस.सी. क मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेल सेहो ई पर्याप्त अछि, से जे विद्यार्थी मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेने छथि से एकर एकटा आर फास्ट-रीडिंग दोसर-उखड़ाहामे करथि| IGNOU इग्नू BMAF-001 ................... Maithili (Compulsory & Optional) UPSC Maithili Optional Syllabus BPSC Maithili Optional Syllabus मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. (ऐच्छिक) मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. (अनिवार्य) मैथिली प्रश्नपत्र- बी.पी.एस.सी.(ऐच्छिक) .................. यू. पी. एस. सी. (मेन्स) ऑप्शनल: मैथिली साहित्य विषयक टेस्ट सीरीज यू.पी.एस.सी. क प्रिलिमिनरी परीक्षा सम्पन्न भऽ गेल अछि। जे परीक्षार्थी एहि परीक्षामे उत्तीर्ण करताह आ जँ मेन्समे हुनकर ऑप्शनल विषय मैथिली साहित्य हेतन्हि तँ ओ एहि टेस्ट-सीरीजमे सम्मिलित भऽ सकैत छथि। टेस्ट सीरीजक प्रारम्भ प्रिलिम्सक रिजल्टक तत्काल बाद होयत। टेस्ट-सीरीजक उत्तर विद्यार्थी स्कैन कऽ editorial.staff.videha@gmail.com पर पठा सकैत छथि, जँ मेलसँ पठेबामे असोकर्ज होइन्हि तँ ओ हमर ह्वाट्सएप नम्बर 9560960721 पर सेहो प्रश्नोत्तर पठा सकैत छथि। संगमे ओ अपन प्रिलिम्सक एडमिट कार्डक स्कैन कएल कॉपी सेहो वेरीफिकेशन लेल पठाबथि। परीक्षामे सभ प्रश्नक उत्तर नहि देमय पड़ैत छैक मुदा जँ टेस्ट सीरीजमे विद्यार्थी सभ प्रश्नक उत्तर देताह तँ हुनका लेल श्रेयस्कर रहतन्हि। विदेहक सभ स्कीम जेकाँ ईहो पूर्णतः निःशुल्क अछि।- गजेन्द्र ठाकुर संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सर्विसेज (मुख्य) परीक्षा, मैथिली (ऐच्छिक) लेल टेस्ट सीरीज/ प्रश्न-पत्र- १ आ २ Test Series-1- गजेन्द्र ठाकुर Test Series-2- गजेन्द्र ठाकुर ........................... NTA-UGC/ UPSC/ BPSC Maithili Optional- गजेन्द्र ठाकुर मैथिली समीक्षाशास्त्र मैथिली समीक्षाशास्त्र (तिरहुता) मैथिली समीक्षाशास्त्र (भाग-२, अनुप्रयोग) मैथिली प्रतियोगिता [Place of Maithili in Indo-European Language Family/ Origin and development of Maithili language (Sanskrit, Prakrit, Avhatt, Maithili) भारोपीय भाषा परिवार मध्य मैथिलीक स्थान/ मैथिली भाषाक उद्भव ओ विकास (संस्कृत, प्राकृत, अवहट्ट, मैथिली)] (Criticism- Different Literary Forms in Modern Era/ test of critical ability of the candidates) (ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददास सिलेबसमे छथि आ रसमय कवि चतुर चतुरभुज विद्यापति कालीन कवि छथि। एतय समीक्षा शृंखलाक प्रारम्भ करबासँ पूर्व चारू गोटेक शब्दावली नव शब्दक पर्याय संग देल जा रहल अछि। नव आ पुरान शब्दावलीक ज्ञानसँ ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददासक प्रश्नोत्तरमे धार आओत, संगहि शब्दकोष बढ़लासँ खाँटी मैथिलीमे प्रश्नोत्तर लिखबामे धाख आस्ते-आस्ते खतम होयत, लेखनीमे प्रवाह आयत आ सुच्चा भावक अभिव्यक्ति भय सकत।) (बद्रीनाथ झा शब्दावली आ मिथिलाक कृषि-मत्स्य शब्दावली) (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोरिक गाथामे समाज ओ संस्कृति) (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- विद्यापति) (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- पद्य समीक्षा- बानगी) (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोक गाथा नृत्य नाटक संगीत) (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- यात्री) (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली रामायण) (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली उपन्यास) (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- शब्द विचार) (तिरहुता लिपिक उद्भव ओ विकास) अनुलग्नक-१-२-३ अनुलग्नक- ४-५ (मैथिली आ दोसर पुबरिया भाषाक बीचमे सम्बन्ध (बांग्ला, असमिया आ ओड़िया) [यू.पी.एस.सी. सिलेबस, पत्र-१, भाग-'ए', क्रम-५]) [मैथिली आ हिन्दी/ बांग्ला/ भोजपुरी/ मगही/ संथाली- बिहार लोक सेवा आयोग (बी.पी.एस.सी.) केर सिविल सेवा परीक्षाक मैथिली (ऐच्छिक) विषय लेल] मैथिली-हिन्दी वार्तालाप (३ घण्टा) मैथिली बांग्ला असमिया ओड़िया हिन्दी उर्दू नेपाली संस्कृत संथाली NTA_UGC_NET_Maithili_01 NTA_UGC_NET_Maithili_02 GS (Pre) Topic 1 ........................ यू.पी.एस.सी. आ आन प्रतियोगिता परीक्षा लेल देखू: विदेह:सदेह १७ विदेह:सदेह २१ विदेह:सदेह २३ विदेह:सदेह २६ विदेह:सदेह २९ विदेह:सदेह ३० विदेह:सदेह ३२ विदेह:सदेह ३३ विदेह:सदेह ३४ विदेह:सदेह ३५ ....................... General Studies NCERT-Environment Class XI-XII NCERT PDF I-XII Sansad TV http://prasarbharati.gov.in/ http://newsonair.com/ ................... Other Optionals IGNOU eGyankosh ................... पेटार (रिसोर्स सेन्टर) ................. मैथिली मुहावरा एवम् लोकोक्ति प्रकाश- रमानाथ मिश्र मिहिर (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) डॉ. कमला चौधरी-मैथिलीक वेश-भूषा-प्रसाधन सम्बन्धी शब्दावली (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) डॉ योगानन्द झा- मैथिलीक पारम्परिक जातीय व्यवसायक शब्दावली (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) डॉ. ललिता झा- मैथिलीक भोजन सम्बन्धी शब्दावली (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) मैथिली शब्द संचय- डॉ श्रीरामदेव झा (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) दत्त-वतीक वस्तु कौशल- डॊ. श्रीरामदेवझा परिचय निचय- डॊ शैलेन्द्र मोहन झा English Maithili Computer Dictionary (Complete)- Gajendra Thakur Maithili English Dictionary- गोविंद झा अणिमा सिंह -शिशु गीत खेल आनन्द मिश्र (सौजन्य श्री रमानन्द झा 'रमण')- मिथिला भाषाक सुबोध व्याकरण मैथिली सुबोध व्याकरण- भोला लाल दास राधाकृष्ण चौधरी- A Survey of Maithili Literature राधाकृष्ण चौधरी- मिथिलाक इतिहास राजेश्वर झा- मिथिलाक्षरक उद्भव ओ विकास (मैथिली साहित्य संस्थान आर्काइव) (यू.पी.एस.सी. सिलेबस) दत्त-वती (मूल)- श्री सुरेन्द्र झा सुमन (यू.पी.एस.सी. सिलेबस) प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) CIIL Site सुभाष चन्द्र यादव-राजकमल चौधरी: मोनोग्राफ शिव कुमार झा 'टिल्लू' अंशु-समालोचना डॉ बचेश्वर झा- निवन्ध-निकुञ्ज डॉ. देवशंकर नवीन- आधुनिक साहित्यक परिदृश्य प्रेमशंकर सिंह- मैथिली भाषा साहित्य:बीसम शताब्दी (आलोचना) डॉ. रमानन्द झा 'रमण' हिआओल अखियासल CIIL Site दुर्गानन्द मण्डल-चक्षु फेर एहि मनलग्गू फाइल सभकेँ सेहो पढ़ू:- रामलोचन ठाकुर- मैथिली लोककथा कुमार पवन (साभार अंतिका) पइठ (मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ कथा) डायरीक खाली पन्ना केदारनाथ चौधरी अबारा नहितन चमेलीरानी माहुर करार अयना हीना डॉ. रमण झा भिन्न-अभिन्न मैथिली काव्यमे अलङ्कार अलङ्कार-भास्कर मैथिली काव्यमे ज्योतिष अहिरावण-वध पारिजात-मञ्जरी योगेन्द्र पाठक 'वियोगी' विज्ञानक बतकही विज्ञानक बतकही भाग-२ अकटा मिसिया (कथा संग्रह) नरक विजय (सम्पूर्ण) नरक विजय (संशोधित) किछु तीत मधुर (यात्रा वृत्तांत) हमर गाम पिरामिडक देशमे रोबोट (अनूदित साइंस-फिक्शन नाटक) अनूदित साहित्य (आन भाषासँ)- गजेन्द्र ठाकुर विदेह:सदेह २७ (गजेन्द्र ठाकुर आ रवि भूषण पाठकक आन भाषासँ अनूदित गद्य आ पद्य- अंक १-३५० सँ) बाल साहित्य (अनुवाद- द्विभाषिक- मैथिली-अंग्रेजी)- गजेन्द्र ठाकुर मसाई केर परिवर्तनकारी रेबेका शेष ४० टा बाल चित्र-पोथी नीचाँक लिंकपर:- सुनू घर सभ एकटा नीक दिन चलू हम तँ ठीक छी ने! की अहाँ ऐ चिड़ै सभकेँ देखने छी? टोस्ट बड़ीटा! कनियेटा! एतऽ हम सभ रहै छी भारतोल्लक राजकुमारी भारतोल्लक राजकुमारी (बिनु शब्दक) वुयो कच-कच कचाक चुन्नू-मुन्नूक नहेनाइ नेना जे बैलूनसँ डेराइत छल अद्भुत फिबोनाची अंक-शृंखला हारू अखन नै, अखन नै! जन्मदिनक उत्सव भोज मोट राजा पातर-दुब्बड़ कुकुड़ बचिया जे अपन हँसी नै रोकि सकैत छलि अंग्रेजी हम सूंघि सकै छी छोट लाल-टुहटुह डोरी करू नीक, भोगू नीक ई सभटा बिलाड़िक दोख अछि! चोभा आम! हमर टोलक बाट जखन इकड़ू स्कूल गेल माछी फेर आउ टाटा! अमाचीक जुलुम मशीन सभ टिंग टोंग पाउ-म्याऊ-वाह कुकुड़क एकटा दिन हमरा नीक लगैए रीताक नव-स्कूलमे पहिल दिन कनी हँसियौ ने! लाल बरसाती भूत-प्रेतक नाट्यशाला आउ पएर गानी कतऽ अछि ई अंक ५? विदेह मैथिली-अंग्रेजी टॉकिंग रीड-अलाउड ऑडियो बुक https://bloomlibrary.org/player/Wcf6zr5CoF (मसाई केर परिवर्तनकारी रेबेका) https://bloomlibrary.org/player/p3sHdYBgiT (चलू हम तँ ठीक छी ने!) https://bloomlibrary.org/player/f19pSdhGMo (एकटा नीक दिन) https://bloomlibrary.org/player/b2l5wesxCp (घर सभ) https://bloomlibrary.org/player/dAzC0Fubt7 (की अहाँ ऐ चिड़ै सभकेँ देखने छी?) ...................... किछु मैथिली पोथी डाउनलोड साइट (ओपन सोर्स) NCERT BHASHA SANGAM NCERT (Maithili-English-Hindi Conversations) पं लक्ष्मीपति सिंह (सौजन्य रमानन्द झा "रमण") हिन्दी-मैथिली-शिक्षक मैथिली-हिन्दी वार्तालाप (३ घण्टा) मैथिली (मैथिली संकेत भाषा सहित- मैथिलीमे पहिल बेर) https://www.youtube.com/@videha_ejournal https://youtu.be/TebuC-lrSs8 https://ncert.nic.in/bs-2021.php Sahitya Akademi प्रकाशन डिजिटल-पोथी CIIL अखियासल (रमानन्द झा रमण) जुआयल कनकनी- महेन्द्र प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) सृजन केर दीप पर्व- सं केदार कानन आ अरविन्द ठाकुर मैथिली गद्य संग्रह- सं शैलेन्द्र मोहन झा Archive.Org (विजयदेव झा) Videha Maithili eBooks/ eJournals/ Audio-Video Archive IGNCA Maithili English Dictionary विज्ञान रत्नाकर मिथिला दर्शन तीरभुक्ति OLE Nepal's e-Pustakalaya पोथीक लिंक IGNCA-ASI (search keyword Mithila) History of Navya-Nyaya in Mithila Studies in Jainism and Buddism in Mithila Mithila in the Age of Vidyapati Cultural Heritage of Mithila Mithila under the Karnatas Temple Survey Project ASI- English आ Hindi मैथिली साहित्य संस्थान दर्शनीय मिथिला (मैथिली साहित्य संस्थान लिंक) Brochure 1 (मैथिली साहित्य संस्थान लिंक) Brochure 2 (मैथिली साहित्य संस्थान लिंक) Brochure 3 (मैथिली साहित्य संस्थान लिंक) Brochure 4 (मैथिली साहित्य संस्थान लिंक) Brochure 5 (मैथिली साहित्य संस्थान लिंक) ब्लूम लाइब्रेरी मैथिली अरिपन फाउण्डेशन Pratham Books Maithili Storyweaver मैथिली ऑडियो बुक्स Videha Read Aloud Talking Maithili Audio Books (including Maithili Sign Language- Ist time in Maithili) पोथी डॉट कॉम I Love Mithila (पोथी डाउनलोड लिंक) online maithili journal owner I Love Mithila प्यारे मैथिल चैनल- किरण चौधरी आ संगीता आनन्द मिथिला चैप्टर खिस्सा-पिहानी नेना भुटका लेल जानकी एफ.एम समाचार आकाशवाणी दरभंगा यू ट्यूब चैनल आकाशवाणी मैथिली समाचार आकाशवाणी अमृत महोत्सव सुरेन्द्र राउत ................. JNU मैथिली मैथिली लेक्सिकन .................. Videha e-Learning YouTube Channel ........... विदेह सम्मान: सम्मान-सूची (समानान्तर साहित्य अकादेमी, समानान्तर ललित कला अकादेमी आ समानान्तर संगीत-नाटक अकादेमी सम्मान/ पुरस्कार नामसँ विख्यात) ......... Maithili eBooks/ eJournals/ Audios-Videos can be downloaded from: Maithili eBOOKS/ eJournals/ Audios-Videos अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ७.विदेह सूचना संपर्क अन्वेषण (including Parallel Literature in Maithili and Videha Maithili Literature Movement) विदेह सूचना संपर्क अन्वेषण (including Parallel Literature in Maithili and Videha Maithili Literature Movement) वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू। Always refresh the pages for viewing new issue of VIDEHA. Search for Information relating to Mithila/ Maithili https://books.google.com/ Top of Form Bottom of Form Top of Form Bottom of Form सूचना Do not judge each day by the harvest you reap but by the seeds that you plant. - Robert Louis Stevenson ............................................ Videha: Maithili Literature Movement Videha eJournal (link www.videha.co.in) is a multidisciplinary online journal dedicated to the promotion and preservation of the Maithili language, literature and culture. It is a platform for scholars, researchers, writers and poets to publish their works and share their knowledge about Maithili language, literature, and culture. The journal is published online to promote and preserve Maithili language and culture. The journal publishes articles, research papers, book reviews, and poetry in Maithili and English languages. It also features translations of literary works from other languages into Maithili. It is a peer-reviewed journal, which means that articles and papers are reviewed by experts in the field before they are accepted for publication. १ "विदेहक जीवित साहित्यकार-सम्पादक आ रंगमंचकर्मी- रंगमंच-निर्देशक पर विशेषांक शृंखला" विदेह अरविन्द ठाकुर विशेषांक स्वतंत्रचेता- अरविन्द ठाकुर: व्यक्तित्व-कृतित्व (सम्पादक आशीष अनचिन्हार) [विदेह अरविन्द ठाकुर विशेषांकक प्रिण्ट रूप] विदेह जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक विदेह रामलोचन ठाकुर विशेषांक विदेह राजनन्दन लाल दास विशेषांक विदेह रवीन्द्र नाथ ठाकुर विशेषांक विदेह केदार नाथ चौधरी विशेषांक विदेह प्रेमलता मिश्र प्रेम विशेषांक विदेह शरदिन्दु चौधरी विशेषांक विदेह कला-विमर्श विशेषांक (सन्दर्भ- संजू दास, कृष्ण कुमार कश्यप, शशिबाला, एस.सी.सुमन आ श्वेता झा चौधरी) विदेह रचनाकार अशोक विशेषांक विदेह राम भरोस कापड़ि 'भ्रमर' विशेषांक विदेहक एहि जीवित विशेषांक शृंखलामे किनकर चयन हो ताहि लेल मोटा-मोटी निच्चाक किछु बिंदुक पालन कएल जाइत अछि- १) लगभग पाँच-छह मास पहिनेसँ विदेह अपन पाठककेँ सुझाव देबा लेल लेल सूचना दैत अछि। २) आएल सुझावमेसँ विदेह मात्र जीबित लेखककेँ चयन करैत अछि। संस्था सेहो वर्तामनमे जीवंत हेबाक चाही। ३) सभ जीवित लेखकक बीचमे हुनकर लेखन एवं आचरणक साम्यता देखल जाइत अछि। जाहि लेखकक लेखन ओ आचरणमे बेसी साम्यता (कम फाँक) भेटैए तेहन छह टा नाम चयनित होइत अछि। ४) छह नाम एलापर ई तुलना कएल जाइत छै जे ई छहो लेखक अथवा संस्थाकेँ रचना लिखबाक वा समाजिक काज केलाक एवजमे समाजसँ की भेटलनि। ५) जिनका सभसँ कम भेटल बुझाइत अछि ताहि तीन लेखक-संस्थाकेँ अगिला चरण लेल राखि लैत छी। ६) एहि तीन चयनित जीबित लेखकक वा संस्थाक रचना, काज, हुनक उद्येश्य आदिक बीचमे परस्पर तुलना कएल जाइत अछि। ७) अंतिम रूपसँ विदेह द्वारा एकटा नाम चुनि सालक अंतमे घोषणा कएल जाइत अछि आ नियत समयपर ई विशेषांक निकालबाक प्रयास करैत छी। प्रश्न उठि सकैए जे कि उपरक नियम एहन छै जाहिमे अंतिम रूपसँ सभ सुयोग्य जीवित लेखक केर चयन समयपर भ़ऽ जेतनि? तऽ एकर उत्तर छै नै। विदेहक पाठक लग सेहो अपन सीमा छनि। मुदा अही सीमाक संगे हमरा सभकेँ अपन बेस्ट देबाक छै आ मैथिली लेल एकटा एहन रस्ता बना देबाक छै जाहिसँ आबए बला 500-600 बर्खक साहित्य विदेहक लीकसँ प्रेरणा पाबए। अही विचारक संग विदेह ओहन जीवित लेखकपर अपन धेआन सेहो केंद्रित कऽ रहल अछि जे कि सुयोग्य छथि मुदा जिनकापर विदेहक विशेषांक कोनो कारणवश नहि प्रकाशित भऽ सकल। एकर नाम भेल विदेहक "नित नवल सिरीज", जकर विवरण नीचाँ "नित नवल सिरीज"मे देल जा रहल अछि। -गजेन्द्र ठाकुर, सम्पादक विदेह, whatsapp no +919560960721 HTTP://VIDEHA.CO.IN/ ISSN 2229-547X VIDEHA २ "विदेह द्वारा एक बेरमे कोनो एकटा संस्था/ पत्रिकाक समग्र मूल्याकंन शृंखला" विदेह अंक ३७१ (०१ जून २०२३) "मिथिला स्टूडेंट यूनियन (एम.एस.यू.)" विशेषांक -गजेन्द्र ठाकुर, सम्पादक विदेह, whatsapp no +919560960721 HTTP://VIDEHA.CO.IN/ ISSN 2229-547X VIDEHA ३ "विदेह मोनोग्राफ" शृंखला विदेह अपन जीवित रचनाकार/ कलाकर्मी पर विशेषांक शृंखलाक अन्तर्गत (१)अरविन्द ठाकुर, (२)जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल, (३)रामलोचन ठाकुर, (४) राजनन्दन लाल दास, (५)रवीन्द्र नाथ ठाकुर, (६) केदार नाथ चौधरी, (७) प्रेमलता मिश्र 'प्रेम', (८) शरदिन्दु चौधरी, (९) रचनाकार अशोक आ (१०) राम भरोस कापड़ि 'भ्रमर' विशेषांक निकालने अछि। अही सन्दर्भमे हिनका सभपर "विदेह मोनोग्राफ" शृंखला अन्तर्गत "मोनोग्राफ" आमंत्रित कयल जा रहल अछि। "विदेह मोनोग्राफ" शृंखलाक विवरण निम्न प्रकार अछि: (१) इच्छुक लेखक ऊपरमे कोनो एक गोटेपर अपन मोनोग्राफ लिखबाक इच्छा editorial.staff.videha@gmail.com पर पठा सकै छथि। (२) विदेह लेखकक नाम मोनोग्राफ लिखबाक लेल चयनित कऽ ओकर सार्वजनिक घोषणा करत। "विदेह मोनोग्राफ" लिखबाक निअम: (१) मोनोग्राफ पूर्ण रूपेँ रचनाकार/ कलाकर्मीपर केन्द्रित हुअय। साहित्य अकादेमी, एन.बी.टी. आ किछु व्यक्तिगत रूपेँ लिखल मोनोग्राफ/ बायोग्राफीमे लेखक संस्मरण आ व्यक्तिगत प्रसंग जोड़ि कय रचनाकार/ कलाकर्मीक बहन्ने अपन-आत्म-प्रशंसा लिखै छथि। "विदेह मोनोग्राफ" फीफा वर्ल्ड कप फुटबाल सन रहत। फीफा वर्ल्ड कप फुटबाल एहेन एकमात्र टूर्नामेण्ट अछि जतय कोनो "ओपेनिंग" बा "क्लोजिंग" सेरीमनी अलगसँ नै होइ छै, पहिल आ अन्तिम मैचक सङे होइ छै आ तकर कारण छै जे अलगसँ कएल "ओपेनिंग" बा "क्लोजिंग" मे टूर्नामेण्टमे नै खेला रहल लोक मुख्य अतिथि/ अतिथि होइ छथि आ फोकस खिलाड़ी सँ दूर चलि जाइ छै। फीफा मात्र आ मात्र फुटबाल खिलाड़ीपर केन्द्रित रहैत अछि से ओकर टूर्नामेण्ट "ओपेनिंग सेरीमनी" नै वरन् सोझे "ओपेनिंग मैच" सँ आरम्भ होइत अछि आ ओकर समापन "क्लोजिंग सेरीमनी"सँ नै वरन् "फाइनल मैच आ ट्राफी"सँ खतम होइत अछि आ फोकस मात्र आ मात्र खिलाड़ी रहैत छथि। तहिना "विदेह मोनोग्राफ" मात्र आ मात्र ऐ रचनाकार/ कलाकर्मीपर केन्द्रित रहत आ कोनो संस्मरण आदि जोड़ि कऽ फोकस रचनाकारसँ अपनापर केन्द्रित करबाक अनुमति नै रहत। (२) मोनोग्राफ लेल "विदेह पेटार"मे उपलब्ध सामग्रीक सन्दर्भ सहित उपयोग कएल जा सकैए। (३) विदेहमे ई-प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि। सम्पादक 'विदेह' ई-पत्रिकामे प्रकाशित रचनाक प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ मूल आ अनूदित आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार रखैत छथि। ऐ ई-पत्रिकामे कोनो रॉयल्टी/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै। (४) "विदेह मोनोग्राफ"क फॉर्मेट: रचनाकारक परिचय (रचनाकारक जन्म, निवास-स्थान आ कार्यस्थलक भौगोलिक-सांस्कृतिक विवेचना सहित) आ रचनावली (समीक्षा सहित)। घोषणा: "विदेह मोनोग्राफ" शृंखला अन्तर्गत (१) राजनन्दन लाल दास जी पर मोनोग्राफ निर्मला कर्ण, (२) रवीन्द्र नाथ ठाकुर पर मुन्नी कामत आ (३) केदार नाथ चौधरी पर प्रेम मोहन मिश्र द्वारा लिखल जायत। शेष ७ गोटेपर निर्णय शीघ्र कएल जायत। -गजेन्द्र ठाकुर, सम्पादक विदेह, whatsapp no +919560960721 HTTP://VIDEHA.CO.IN/ ISSN 2229-547X VIDEHA ४ (१) विदेहक "नित नवल सिरीज" विदेह द्वारा जे विशेषांक प्रकाशित होइ छै तकर संगे विदेह ओहन लेखक-साहित्यपर अपन धेआन सेहो केंद्रित करत जिनकापर विदेहक विशेषांक कोनो कारणवश नै प्रकाशित भऽ सकल। ऐ नव विचारक मुख्य बिंदु एना अछि- १) हम एकटा कोनो लेखक वा कलाकारपर एकाग्र आलोचना करब जकर भाषा मैथिली अथवा अंग्रेजी रहत। ऐ पोथीक पहिल रूप ई-बुक केर रूपमे ऐत आ प्रयास रहत जे एकर प्रिंट सेहो आबए जे कि परिस्थितिपर निर्भर करत। २) ऐ शृंखलामे:- (i) सुभाष चंद्र यादवपर केंद्रित "नित नवल सुभाष चंद्र यादव", (ii) राजदेव मंडलपर केंद्रित "Rajdeo Mandal- Maithili Writer" आ (iii) जगदीश प्रसाद मण्डल केन्द्रित "Jagdish Prasad Mandal- Maithili Writer" प्रकाशित भेल अछि। पहिल दुनू पोथीक लोकार्पण ३१ दिसम्बर २०२२ केँ १११म सगर राति दीप जरय मे कएल गेल। तेसर पोथीक लोकार्पण २५ मार्च २०२३ केँ ११२ म सगर राति दीप जरय मे कएल गेल। (iv) "नित नवल दिनेश कुमार मिश्र" आ (v) "नित नवल सुशील" जारी अछि। आगाँक घोषणा लेल http://videha.co.in/investigation.htm देखैत रही। पूर्वपीठिका: कमलानन्द झाक पोथी "मैथिली उपन्यास: समय समाज आ सवाल" (२०२१) क शीर्षक भ्रामक अछि। ई हुनकर किछु सवर्ण उपन्यासकारपर किछु सिण्डिकेटेड कथित समीक्षात्मक आलेखक संग्रह अछि, २६३ पन्नाक ई पोथी हार्डबाउण्डमे लाइब्रेरीकेँ मात्र बेचल जा सकत, जतऽ ई सड़ि जायत, अमेजनसँ हम ई चारि सय पाँच टाकामे किनलौं मुदा ऐमे पाँचो पाइक सामिग्री नै अछि। एतऽ एकटा भूल सुधार अछि, एकटा गएर सवर्ण लेखक सुभाष चन्द्र यादवक उपन्यास 'गुलो'केँ बिनु पढ़ने ओ दू पाँति लिखलन्हि आ निपटा देलन्हि, ओ दुनू पाँति हम एतऽ अहाँक मनोरंजनार्थ प्रस्तुत कऽ रहल छी। अहाँ गुलो पढ़नहिये हएब, जँ नै पढ़ने छी तँ पहिने पढ़ि लिअ, कारण तखन बेशी मनोरंजक अनुभव हएत, गुलो सुभाष चन्द्र यादव जीक अनुमति सँ उपलब्ध अछि विदेह आर्काइवपर ऐ http://videha.co.in/pothi.htm लिंकपर। "उपन्यासक कमजोरी अछि लेखकक राजनीतिक पूर्वाग्रह। राजनीति विशेषक पक्षधरता रचनाक संग न्याय नहि कऽ पबैत अछि।" जइ उपन्यासमे राजनीति दूर-दूर धरि नै छै ओतऽ 'राजनैतिक पूर्वाग्रह' आ 'राजनीति विशेषक पक्षधरता'क तँ प्रश्ने नै छै। राजनीतिक पूर्वाग्रह बा पक्षधरताक सोङर धूमकेतु आ यात्री प्रयुक्त केलन्हि। सुभाष चन्द्र यादव जीक 'भोट' जे २०२२मे आयल जे सुभाष चन्द्र यादव जीक अनुमति सँ उपलब्ध अछि विदेह आर्काइवपर ऐ http://videha.co.in/pothi.htm लिंकपर, से राजनीतिपर अछि मुदा ओतहुओ सुभाषजीक भगता शैलीकेँ राजनीतिक पूर्वाग्रह बा पक्षधरताक सोङरक आवश्यकता नै पड़लै। पढ़ू हमर पोथी 'नित नवल सुभाष चन्द्र यादव' जे उपलब्ध अछि ऐ http://videha.co.in/pothi.htm लिंकपर। कमलानन्द झाक बिनु पढ़ने सुभाष चन्द्र यादवक विरुद्ध ब्राह्मणवादी जातिगत पूर्वाग्रह एकटा खतराक घण्टी अछि। जइ हिसाबे ब्राह्मणवादकेँ आगाँ बढ़बैले कमलानन्द झा वामपंथक सोङर पकड़ै छथि आ सामाजिक न्यायक बलि चढ़बऽ चाहै छथि, तकर प्रति समानान्तर धारा सचेत अछि। ई अपन बायोडाटामे गएर सवर्णसँ छीनि कऽ, समानान्तर धाराक लोकक हककेँ मारि कऽ लेल साहित्य अकादेमीक मैथिल अनुवाद असाइनमेण्टक गर्वसँ चर्चा करैत छथि। आ ई असाइनमेण्ट हिनका मेरिटसँ नै जातिगत टाइटिलसँ भेटल छन्हि, अही सभ किरदानीक एवजमे भेटल छन्हि। हिनका सन लोक लेल मैथिली बायोडेटाक एकटा पाँति अछि, समानान्तर धारा लेल जीवन-मरणक प्रश्न। आब अहाँ पुछब जे तकर प्रतिकार समानान्तर धारा केना केलक, ओ तँ कन्नारोहट नै करैए, तँ तकर उत्तर अछि हमर ३ टा पोथी जे १११म सगर राति दीप जरय मे लोकार्पित भेल ३१ दिसम्बर २०२२ केँ, वएह सगर राति दीप जरय जकरा साहित्य अकादेमी गत दस बर्खसँ गीड़ि लेबाक प्रयास कऽ रहल अछि। अहाँसँ ऐ तीनू पोथीपर टिप्पणी ई-पत्र सङ्केत editorial.staff.videha@gmail.com पर आमंत्रित अछि। पहिल दू पोथी मे राजदेव मण्डल आ सुभाष चन्द्र यादवक साहित्यक समीक्षा अछि जे हमर तेसर पोथी मैथिली समीक्षशास्त्रक सिद्धांतक आधारपर कएल गेल अछि। तकरा बाद जगदीश प्रसाद मण्डल जी पर पोथी लिखल गेल (११२ सगर राति दीप जरय मे लोकार्पण) सभटा पोथीक लिंक नीचाँ देल गेल अछि। 'नित नवल दिनेश कुमार मिश्र' आ 'नित नवल सुशील' जारी अछि। Rajdeo Mandal- Maithili Writer (Now with Supplement I & II) नित नवल सुभाष चन्द्र यादव नित नवल सुभाष चन्द्र यादव (मिथिलाक्षर) JAGDISH PRASAD MANDAL- Maithili Writer नित नवल दिनेश कुमार मिश्र (जारी) नित नवल सुशील (जारी) मैथिली समीक्षाशास्त्र मैथिली समीक्षाशास्त्र (तिरहुता) संगमे पढ़ू कमलानन्द झा क ब्राह्मणवादपर प्रहार: दूषण पञ्जी- The Black Book दूषण पञ्जी- The Black Book (मिथिलाक्षर) -गजेन्द्र ठाकुर, सम्पादक विदेह, whatsapp no +919560960721 HTTP://VIDEHA.CO.IN/ ISSN 2229-547X VIDEHA ४(२) नित नवल दिनेश कुमार मिश्र दिनेश कुमार मिश्रक 'दुइ पाटन के बीच मे' कोसी नदीक ऐतिहासिक आत्मकथा थीक, ओ मिथिलाक आन धार सभक ऐतिहासिक आत्मकथा सेहो लिखने छथि जेना बन्दिनी महानन्दा, बागमती की सद्गति!, दुइ पाटन के बीच में.. (कोसी नदी की कहानी), न घाट न घर, बगावत पर मजबूर मिथिला की कमला नदी, भुतही नदी और तकनीकी झाड़-फूंक, The Kamla River and People On Collision Course, Bhutahi Balan- Story of a ghost river and engineering witchcraft, Refugees of the Kosi Embankments। साहित्य अकादेमीक मैथिली परामर्शदात्री समितिक सदस्य पंकज झा पराशर द्वारा हिनकर पोथी सभसँ पैराक पैरा मैथिली अनुवाद कऽ अपना नामे उपन्यास छपबाओल गेल अछि, जकरा छद्म समीक्षक कमलानन्द झा ऐ चोर लेखकक रिसर्च कहै छथि! एतऽ स्पष्ट कऽ दी जे ई चोर लेखक आ छद्म समीक्षक दुनू अलीगढ़ मुस्लिम विद्यालयक हिन्दी विभागमे छथि। ई रिसर्च दिनेश कुमार मिश्रक थीक, जे आइ.आइ.टी. खड़गपुरसँ सिविल इन्जीनियरिङ मे बी. टेक. १९६८मे आ स्ट्रक्चरल इन्जीनियरिङमे एम.टेक. १९७०मे केने छथि, आ ओइ रिसर्च लेल क्वालिफाइड छथि। जखन कोनो विषयमे नामांकन नै होइ छै तखन लोक हारि-थाकि हिन्दीमे नामांकन लइए, नै तँ कमलानन्द झा केँ बुझऽ मे आबि जइतन्हि जे ई रिसर्च कोनो सिविल इन्जीनियरेक भऽ सकैत अछि, भऽ सकैए बुझलो होइन्ह। हिन्दी मूल आ मैथिलीक स्क्रीनशॉट आँगा संलग्न अछि। दिनेश कुमार मिश्र मिथिलाक नै छथि मुदा मिथिलाक सभ धारक कथा ओ लिखने छथि, हम सभ हुनका प्रति कृतज्ञ छी आ हुनकर ऋणसँ मिथिलावासी कहियो उऋण नै भऽ सकता, मुदा मूलधाराक पुरस्कार आ पाइ लोलुप लोकसँ कृतघ्नते भेटत से फेर सिद्ध भेल। ऐ लेखककेँ दस बारह बर्ख पहिने सेहो तारानन्द वियोगी उद्धारक भेटल छलखिन्ह जे लिखने रहथिन्ह जे ओ कवितामे प्रभावित भऽ अनायासे अपन रचनामे दोसरक सामिग्री चोरि कऽ लइ छथि, एहने सन। आब ऐ कमलानन्द झा क आश्रय तकलन्हि मुदा दुर्भाग्य! जइ हिसाबे ब्राह्मणवादकेँ आगाँ बढ़बैले कमलानन्द झा वामपंथक सोङर पकड़ै छथि आ सामाजिक न्यायक बलि चढ़बऽ चाहै छथि, तकर प्रति समानान्तर धारा सचेत अछि। सीलिंगसँ बचबा लेल जमीन-जत्थाबला लोक कम्यूनिस्ट बनला आ आब ब्राह्मणवाद बचेबालेल वामपंथक शरण, एहेन लोक सभसँ कम्यूनिज्मकेँ बहुत नुकसान भेल छै। दिनेश क़ुमार मिश्रक सभटा पोथी आब हुनकर अनुमतिसँ उपलब्ध अछि विदेह आर्काइवमेः http://videha.co.in/pothi.htm एतऽ एकटा गप मोन पाड़ि दी जे जखन बिल गेट्सकेँ पूछल गेलन्हि जे की ओ एक्स बॉक्स भारतमे पाइरेशीक डरसँ देरीसँ आनि रहल छथि? तँ हुनकर उत्तर रहन्हि जे माइक्रोसॉफ्ट पाइरेशीक डरे कोनो उत्पाद देरीसँ नै उतारने अछि। से विदेह पेटारमे हम सभ ऐ तरहक रिस्क रहितो एकरा आर समृद्ध करैत रहब, कारण समानान्तर धारामे सड़ल माँछ द्वारे पोखरिक सभ माँछ नै सड़ैए, एतुक्का मलाह गोट-गोट कऽ सड़ल माँछ निकालैत रहल छथि, निकालैत रहता। सिण्डीकेटेड समीक्षापर अन्तिम प्रहार। मूल दिनेश कुमार मिश्र (दुइ पाटन के बीच में... २००६): यह ध्यान देने की बात है कि 1923 से 1946 के बीच कोसी क्षेत्र में मलेरिया से 5,10,000, कालाजार से 2,10,000, हैजे से 60,000 तथा चेचक से 3,000 मौतें (कुल 7,83,000) हुईं। चोर पंकज झा पराशर (साहित्य अकादेमीक मैथिली परामर्शदात्री समितिक सदस्य) [जलप्रांतर २०१७ (पृ. १०३)]: मूल दिनेश कुमार मिश्र (दुइ पाटन के बीच में... २००६): भारतवर्ष में बिहार में कोसी नदी को बांधने का काम 12वीं शताब्दी में किसी राजा लक्ष्मण द्वितीय ने करवाया था और इस काम के लिए उसने प्रजा से 'बीर' की उपाधि पाई और नदी का तटबन्ध 'बीर बांध' कहलाया। इस तटबन्ध के अवशेष अभी भी सुपौल जिले में भीम नगर से कोई 5 किलोमीटर दक्षिण में दिखाई पड़ते हैं। डॉ. फ्रांसिस बुकानन (1810-11) का अनुमान था कि यह बांध किसी किले की सुरक्षा के लिए बनी बाहरी दीवार रहा होगा क्योंकि यह बांध धौस नदी के पश्चिमी किनारे पर तिलयुगा से उसके संगम तक 32 किलोमीटर की दूरी में फैला हुआ था। डॉ. डब्लू.डब्लू. हन्टर (1877) बुकानन के इस तर्क के साथ सहमत नहीं थे कि यह बांध किसी किले की सुरक्षा दीवार था। स्थानीय लोगों के हवाले से हन्टर का मानना था कि अधिकांश लोग इसे किले की दीवार नहीं मानते और उनके हिसाब से यह कुछ और ही चीज थी मगर वह निश्चित रूप से कुछ कहने की स्थिति में नहीं थे। फिर भी जो आम धारणा बनती है वह यह है कि यह कोसी नदी के किनारे बना कोई तटबन्ध रहा होगा जिससे नदी की धारा को पश्चिम की ओर खिसकने से रोका जा सके। लोगों का यह भी कहना था कि ऐसा लगता था कि इस तटबन्ध का निर्माण कार्य एकाएक रोक दिया गया होगा। छद्म समीक्षक कमलानन्द झा द्वारा चोर उपन्यासकारक पीठ ठोकब, देखू छद्म समीक्षक कमलानन्द झा द्वारा उद्धृत चोर पंकज झा पराशर (मैथिली उपन्यास, समय, समाज आ सवाल पृ. २५७-२५८): चोर पंकज झा पराशर (साहित्य अकादेमीक मैथिली परामर्शदात्री समितिक सदस्य) [जलप्रांतर २०१७ (पृ. ३१)]: मूल दिनेश कुमार मिश्र (दुइ पाटन के बीच में... २००६): कोसी के प्रवाह कि भयावहता की एक झलकफिरोजशाह तुगलक की फौज के सन् 1354 में बंगाल से दिल्ली लौटने के समय मिलती है। बताया जाता है कि जब सुल्तान की फौजें कोसी के किनारे पहुँचीं तो देखा कि नदी के दूसरे किनारे पर हाजी शम्सुद्दीन इलियास की फौजें मुकाबले के लिए तैयार खड़ी हैं। यह वही हाजी शम्सुद्दीन थे जिन्होंने हाजीपुर तथा समस्तीपुर शहर बसाये थे। फिरोज की फौजें शायद कुरसेला के आस-पास किसी जगह पर कोसी के किनारे सोच में पड़ गईं। नदी की रफ्तार उन्हें आगे बढ़ने से रोक रही थी। आखिरकार फैसला हुआ कि नदी के साथ-साथ उत्तर की ओर बढ़ा जाय और जहाँ नदी पार करने लायक हो जाय वहाँ पानी की थाह ली जाये। सुल्तान की फौजें प्रायः सौ कोस ऊपर गईं और जियारन के पास, जो कि उसी स्थान पर अवस्थित था जहाँ नदी पहाड़ों से मैदानों में उतरती थी, नदी को पार किया। नदी की धारा तो यहाँ पतली जरूर थी पर प्रवाह इतना तेज था कि पाँच-पाँच सौ मन के भारी पत्थर नदी में तिनकों की तरह बह रहे थे। जहाँ नदी को पार करना मुमकिन लगा उसके दोनों ओर सुल्तान ने हाथियों की कतार खड़ी कर दी और नीचे वाली कतार में रस्से लटकाये गये जिससे कि यदि कोई आदमी बहता हुआ हो तो इस रस्सों की मदद से उसे बचाया जा सके। शम्सुद्दीन ने कभी सोचा भी न था कि सुल्तान की फौजें कोसी को पार कर लेंगी और जब उस को इस बात का पता लगा कि सुलतान की फौजों ने कोसी को पार करने में कामयाबी पा ली है तो वह भाग निकला। चोर पंकज झा पराशर (साहित्य अकादेमीक मैथिली परामर्शदात्री समितिक सदस्य) [जलप्रांतर २०१७ (पृ. १०५)]: (... शीघ्र अही लिंकपर आर स्क्रीनशॉट अपडेट कएल जायत।) विदेहक ३६३ म अंक दिनांक ०१ फरबरी २०२३ सँ प्रारम्भ... नित नवल दिनेश कुमार मिश्र http://videha.co.in/ विदेह: प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) पर। -गजेन्द्र ठाकुर, सम्पादक विदेह, whatsapp no +919560960721 HTTP://VIDEHA.CO.IN/ ISSN 2229-547X VIDEHA ४ (३) नित नवल सुशील कमलानन्द झाकेँ हम किए छद्म समीक्षक कहलियनि? कारण ओ छद्म समीक्षक छथि। ओ लिखै छथि- "मैथिली उपन्यास-यात्राक लगभग सय वर्षक बाद मैथिल अन्तरजातीय विवाहक सपना, संघर्ष आ विडम्बना पर गरिमायुक्त उपन्यास लिखबाक श्रेय गौरीनाथकेँ जाइत छनि।" तँ की कमलानन्द झा सुशीलसँ ई श्रेय छीनि लेलनि? की ई हुनकर ब्राह्मणवादी संस्कारक अहंकार- जे हम ककरो चढ़ा सकै छिऐ आ ककरो उतारि सकै छिऐ- केर पराकाष्ठा थीक, आकि हुनकर अध्ययनक अभावक प्रमाण? चलू अहाँकेँ लऽ चली कमलानन्द झा केर स्वार्थी दुनियाँसँ दूर, छल-छद्मसँ दूर सुशीलक जादूबला साहित्यक निश्छल दुनियाँमे। अहाँक स्वागत अछि सुशीलक साहित्यक दुनियाँमे। प्रस्तुत अछि सुशीलक 'गामबाली' (१९८२) जे आब उपलब्ध अछि विदेह आर्काइवमे लिंक http://videha.co.in/pothi.htm पर। पहिल पाँतीमे उपन्यास आरम्भसँ पहिनहिये 'गामबाली' उपन्यासक सम्बन्धमे सुशील लिखै छथि- "विधवा विवाह आ अन्तर्जातीय विवाहक समर्थनमे।" आ उपन्यास आरम्भ। गामबालीक मृत्यु आ तखने झमेला, गामबालीक दाह संस्कार के करतै? ब्राह्मण समाज कि जादव समाज? मैथिलीक सिण्डीकेटेड समीक्षापर अन्तिम प्रहार। विदेहक ३६३ म अंक दिनांक ०१ फरबरी २०२३ सँ प्रारम्भ... नित नवल सुशील http://videha.co.in/ विदेह: प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) पर। -गजेन्द्र ठाकुर, सम्पादक विदेह, whatsapp no +919560960721 HTTP://VIDEHA.CO.IN/ ISSN 2229-547X VIDEHA ५ विदेहक "साहित्यिक भ्रष्टाचार विशेषांक" विदेह "साहित्यिक भ्रष्टाचार विशेषांक" लेल निम्नलिखित विषयपर आलेख ई-मेल editorial.staff.videha@gmail.com पर आमंत्रित अछि। १. साहित्य, कला आ सरकारी अकादमीः- (क) पुरस्कारक राजनीति (ख) सरकारी अकादेमीमे पैसबाक गएर-लोकतांत्रिक विधान (ग) सत्तागुट आ अकादमी केर काज करबाक तरीका (घ) सरकारी सत्ताक छद्म विरोधमे उपजल तात्कालिक समानांतर सत्ताक कार्यपद्धति (ङ) अकादेमी पुरस्कारमे पाइ फैक्टरः मिथक बा यथार्थ २. व्यक्तिगत साहित्य संस्थान आ पुरस्कारक राजनीति ३. प्रकाशन जगतमे पसरल भ्रष्टाचार आ लेखक ४. मैथिलीक छद्म लेखक संगठन आ ओकर पदाधिकारी सबहक आचरण ५. स्कूल-कॉलेजक मैथिली विभागमे पसरल साहित्यिक भ्रष्टाचारक विविध रूप- (क) पाठ्यक्रम (ख) अध्ययन-अध्यापन (ग) नियुक्ति ६. साहित्यिक पत्रकारिता, रिव्यू, मंच-माला-माइक आ लोकार्पणक खेल-तमाशा ७. लेखक सबहक जन्म-मरण शताब्दी केर चुनाव , कैलेंडरवाद आ तकरा पाछूक राजनीति ८. दलित एवं लेखिका सबहक संगे भेद-भाव आ ओकर शोषणक विविध तरीका ९. कोनो आन विषय। ६ विदेह ब्रॉडकास्ट लिस्ट विदेह WWW.VIDEHA.CO.IN सम्बन्धी सूचना लेल अपन whatsapp नम्बर हमर whatsapp no +919560960721 पर पठाउ, ओकर प्रयोग मात्र विदेह सम्बन्धी समाचार देबाक लेल कएल जाएत। -गजेन्द्र ठाकुर, सम्पादक विदेह, whatsapp no +919560960721 HTTP://VIDEHA.CO.IN/ ISSN 2229-547X VIDEHA ...................... मैथिली आ मिथिलासँ संबंधित किछु मुख्य साइट:- आन लिंकक विषयमे सूचना editorial.staff.videha@gmail.com केँ ई मेलसँ पठाबी। http://www.videha.co.in/ ("विदेह" प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका) http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html (इंटरनेटपर मैथिली भाषाक प्राचीनतम उपस्थिति/ मैथिलीक पहिल ब्लॉग- मैथिली भाषा ब्लॉगक एग्रीगेटर, ५ जुलाइ २००४) http://videha.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html (इंटरनेटपर मैथिली भाषाक प्राचीनतम उपस्थिति/ मैथिलीक पहिल ब्लॉग- मैथिली भाषा ब्लॉगक एग्रीगेटर, ५ जुलाइ २००४) भालसरिक गाछ जे सन २००० सँ याहूसिटीजपर छल http://www.geocities.com/.../bhalsarik_gachh.html, http://www.geocities.com/ggajendra आदि लिंकपर आ अखनो ५ जुलाइ २००४ क पोस्ट http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html (किछु दिन लेल http://videha.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html लिंकपर, स्रोत wayback machine of https://web.archive.org/web/*/videha 258 capture(s) from 2004 to 2016- http://videha.com/ भालसरिक गाछ-प्रथम मैथिली ब्लॉग / मैथिली ब्लॉगक एग्रीगेटर) केर रूपमे इन्टरनेटपर मैथिलीक प्रचीनतम उपस्थितिक रूपमे विद्यमान अछि। ई मैथिलीक पहिल इंटरनेट पत्रिका थिक जकर नाम बादमे १ जनवरी २००८ सँ "विदेह" पड़लै।इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब "भालसरिक गाछ" जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA पल्लवमिथिला (धीरेन्द्र प्रेमर्षि) २०५९ माघे संक्रान्ति- २००३ जनवरी मैथिलीक दोसर इंटरनेट पत्रिका अछि जे ऐ लिंक www.pallavmithila.mainpage.net पर छल मुदा आब ई उपलब्ध नै अछि। ई टिप्पणी मात्र इतिहास शुद्धता लेल अछि। ................. http://videha-aggregator.blogspot.com/ (मैथिली भाषा ब्लॉगक एग्रीगेटर) http://www.videha.com/ (इंटरनेटपर मैथिली भाषाक सभसँ पुरान उपलब्ध उपस्थिति/ लोकप्रिय ब्लॉग- मैथिली भाषा ब्लॉगक एग्रीगेटर ५ जुलाइ २००४ www.gajendrathakur.blogspot.com ) http://esamaad.blogspot.com/ (पूनम मंडल आ प्रियंका झाक पहिल मैथिली न्यूज पोर्टल, ९ अगस्त २००४ सँ) http://prakarantar.blogspot.com/ (प्रकारांतर मैथिलीक लोकप्रिय ब्लॉग, फरबरी २००५) http://vidyapati.blogspot.com/ (मैथिलीक लोकप्रिय ब्लॉग, अगस्त २००५) http://www.vidyapati.org/ (मैथिलीक लोकप्रिय ब्लॉग, अगस्त २००५) http://hellomithila.blogspot.com/ (हेलो मिथिला- धीरेन्द्र प्रेमर्षि, सम्पादक-प्रकाशक, रूपा झा, सम्पादन सहयोग, पल्लव, मैथिली साहित्यिक, ३ मइ २००६) http://pallav.blogsome.com/ (हेलो मिथिला- धीरेन्द्र प्रेमर्षि, सम्पादक-प्रकाशक, रूपा झा, सम्पादन सहयोग, पल्लव, मैथिली साहित्यिक, १७ मइ २००६) http://hellomithilaa.blogspot.com/ (मैथिली न्यूज पोर्टल, सितम्बर २००७) http://www.hellomithila.com/ (मैथिली न्यूज पोर्टल, सितम्बर २००७) http://shampadak.wordpress.com/ (मैथिली न्यूज पोर्टल, जनवरी-फरबरी २००८) http://www.esamaad.com/ (मैथिली न्यूज पोर्टल, जनवरी-फरबरी २००८) http://hellomithilaa.wordpress.com/ http://premarshi.wordpress.com/ (धीरेन्द्र प्रेमर्षि) .................... http://anchinharakharkolkata.blogspot.com/ (मैथिलीक लोकप्रिय गजलक ब्लॉग) https://mithilastudentunion.com/ (Mithila Student Union) ....................... https://vigyanprasar.gov.in/vigyan-ratnakar/ (विज्ञान रत्नाकर) JNU http://sanskrit.jnu.ac.in/maithili/index.jsp http://sanskrit.jnu.ac.in/student_projects/lexicon.jsp?lexicon=maithili ........................... ALL INDIA RADIO DOORDARSHAN आकाशवाणी दूरदर्शन http://prasarbharati.gov.in/ http://newsonair.com/ https://doordarshan.gov.in/ आकाशवाणी मैथिली पोडकास्ट http://prasarbharati.gov.in/podcast.php?filterlang=Maithili&from=1947-08-15&fromwp=2020-08-29&to=2050-12-31&search=GO आकाशवाणी पटना/ दरभंगा मैथिली रेजनल न्यूज टेक्स्ट डाउनलोड-1 http://newsonair.com/RNU-NSD-Audio-Archive-Search.aspx आकाशवाणी पटना/ दरभंगा मैथिली रेजनल न्यूज टेक्स्ट डाउनलोड-2 http://newsonair.com/Regional-Text.aspx आकाशवाणी दरभंगा http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=282 आकाशवाणी दरभंगा यू ट्यूब चैनल https://www.youtube.com/channel/UCGdNveEFmv4pPolWiTEMxVA आकाशवाणी भागलपुर http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=359 आकाशवाणी पूर्णियाँ http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=256 आकाशवाणी पटना http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=122 ALL INDIA RADIO ENGLISH NEWS ALL INDIA RADIO NEWS ARCHIVE ALL INDIA RADIO TALKS AND CURRENT AFFAIRS RAJYA SABHA TV NEWS DISCUSSIONS SANSAD 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http://videha-braille.blogspot.com/ विदेह गूगल-ग्रुप https://groups.google.com/g/videha गजेन्द्र ठाकुर इडेक्स http://gajendrathakur123.blogspot.com नेना भुटका http://mangan-khabas.blogspot.com/ Videha Radio विदेह रेडियो:मैथिली कथा-कविता आदिक पहिल पोडकास्ट साइट http://videha123radio.wordpress.com/ http://videha.listen2myradio.com/ विदेह मैथिली नाट्य उत्सव http://maithili-drama.blogspot.com/ समदिया http://esamaad.blogspot.com/ मैथिली फिल्म्स http://maithilifilms.blogspot.com/ मैथिली हाइकू http://maithili-haiku.blogspot.com/ मानक मैथिली http://manak-maithili.blogspot.com/ विहनि कथा http://bihanikatha.blogspot.com/ मैथिली कविता http://maithili-kavita.blogspot.com/ मैथिली कथा http://maithili-katha.blogspot.com/ मैथिली समालोचना http://maithili-samalochna.blogspot.com/ Maithili Literature in English http://madhubani-art.blogspot.com/ तिरहुता- कैथी फॉण्ट/ मैथिल ब्राह्मणक पञ्जी आधारित इतिहास https://deepblue.lib.umich.edu/bitstream/handle/2027.42/110341/pandey_1.pdf?sequence=1 (उत्तर-बिहारक मैथिल ब्राह्मणमे जाति) https://www.unicode.org/L2/L2009/09329-maithili.pdf (यूनीकोड तिरहुता फॉण्ट लेल आवेदन ३० सितम्बर २००९- विदेहक सहयोग) https://www.unicode.org/L2/L2011/11175r-tirhuta.pdf (यूनीकोड तिरहुता फॉण्ट लेल आवेदन ५ मई २०११- विदेहक सहयोग) http://www.tirhutalipi.4t.com/ (देवनागरी-तिरहुता फॉण्ट- वेस्टर्न आधारित) http://www.anujha.co.cc/ (देवनागरी यूनीकोड आधारित तिरहुता फॉन्ट-मिथिला) "विकीपीडिया"मे मैथिली http://translatewiki.net/wiki/Project:Translator http://meta.wikimedia.org/wiki/Requests_for_new_languages/Wikipedia_Maithili http://translatewiki.net/wiki/Special:Translate?task=untranslated&group=core-mostused&limit=2000&language=mai http://incubator.wikimedia.org/wiki/Wp/mai http://translatewiki.net/wiki/MediaWiki:Mainpage/mai अंतिम पाँचू साइट विकी मैथिली प्रोजेक्टक अछि। एहि लिंक सभ पर जा कय प्रोजेक्टकेँ आगाँ बढ़ाऊ। यूनीकोड तिरहुता फॉण्ट, "विकीपीडिया"मे मैथिली आ आब मैथिली "गूगल ट्रान्सलेट"मे सेहो। अगिला लक्ष्य "अमेजन अलेक्सा" गूगल ट्रान्सलेट गूगल ट्रान्सलेटक लिंक https://translate.google.com/?sl=en&tl=mai&op=translate गूगल ट्रान्सलेटकेँ आर पुष्ट करबाक खगता छै तइ लेल अगिला काज अढ़ा रहल छी: https://translate.google.com/about/contribute/ Crowdsource Maithili Community Please fill the form Next Step Download the Crowdsource app from android play store and start contributing or go to web on the following link for contributing: https://crowdsource.google.com/about/ Crowdsource by Google is a gamified platform that empowers users to directly train Google's artificial intelligence systems and make Google products work equally well for everyone, everywhere. प्रारम्भ: विकीपीडिया ०१ फरबरी २००८ लिंक https://books.google.co.in/books?id=VC-BD5Ad6z4C&lpg=PA1&pg=PA1#v=onepage&q&f=false (मैथिली देवनागरी) https://books.google.co.in/books?id=cTezCU59bJwC&lpg=PP1&pg=PP1#v=onepage&q&f=false (मैथिली तिरहुता) https://books.google.co.in/books?id=3zKudz6wAO8C&lpg=PP1&pg=PP1#v=onepage&q&f=false (मैथिली ब्रेल) गूगल ट्रन्सलेट २३ जून २०११क लिंक https://www.facebook.com/groups/videha/permalink/138489416229195/ गूगल ट्रांसलेशन टूलमे "बिहारी" भाषाक बदलामे मैथिली लेल अलग ट्रांसलेशन टूल बनेबाक आवेदन विदेहक सदस्यगण द्वारा देल गेल अछि। अपन योगदान गूगल ट्रांसलेट लेल करू, आ कएल सम्पादन बदलबा काल कारण मे (अंग्रेजीमे) "बिहारी" नाम्ना कोनो भाषा नै हेबाक चर्चा करू। ऐ लिंकपर अनुवाद करू; गूगल एकाउंटसँ लॉग इन केलाक बाद । http://www.google.com/transconsole/giyl/chooseProject http://www.google.com/transconsole/giyl/chooseActivity?project=gws&langcode=bh (link closed) मिथिलाक्षर (तिरहुता) फॉण्ट लेल आवेदन ३० सितम्बर २००९ आ फेर संशोधित आवेदन ५ मई २०११ केँ श्री अंशुमन पाण्डेय द्वारा देल गेल आ दुनू बेर ऐमे विदेहक सहयोगक वर्णन भेल। ११ जूनकेँ श्री अंशुमन पाण्डेय एकर स्वीकृतिक सूचना विदेहक फेसबुक ग्रुपपर देलनि। आब ई फॉण्ट बनि कऽ तैयार अछि आ नीचाँक लिकपर डाउनलोड लेल उपलब्ध अछि। तिरहुता, नेवाड़ी आ कैथी फॉण्ट डाउनलोड Google's Noto Fonts project/ GitHub तिरहुता नोटो फॉण्ट कैथी ओटीएफ कैथी टीटीएफ नेवाड़ी ओ.टी.एफ. नेवाड़ी टी.टी.एफ. https://fonts.google.com/ (Google Open Fonts download) Tirhuta Offline Keyboard download Keyman Tirhuta/ Vedic Devanagari Keyboards Download https://malarproject.gitlab.io/tirhuta (Tirhuta Keyboard Online) https://keymanweb.com/?_ga=2.7155890.1818820209.1675749426-2042013574.1675749426#mai-tirh,Keyboard_tirhuta https://keymanweb.com/?_ga=2.241635586.1818820209.1675749426-2042013574.1675749426#mai-tirh,Keyboard_malar_tirhuta https://aksharamukha.appspot.com/converter (Script/ Website Convertor) https://aksharamukha.appspot.com/keyboards [Input (IME] https://github.com/virtualvinodh/aksharamukha-fonts (fonts- opensource) https://www.cdac.in/ (Tirhuta/ Unicode Typing Tool) अमेजन अलेक्सा मैथिली (शीघ्र....) किछु मैथिली विकिपिडिया पेजक लिंक: विदेह (पत्रिका) https://mai.wikipedia.org/s/kgv इन्टरनेटक संसारमे मैथिली भाषा https://mai.wikipedia.org/s/s6h भालसरिक गाछ https://mai.wikipedia.org/s/ipm विदेह https://mai.wikipedia.org/s/ie1 विदेहक फेसबुक भर्सन https://mai.wikipedia.org/s/iu1 विदेह सम्मान https://mai.wikipedia.org/s/jc2 विदेह आर्काइभ https://mai.wikipedia.org/s/jc0 विदेह मिथिला रत्न https://mai.wikipedia.org/s/jc3 विदेह मिथिलाक खोज https://mai.wikipedia.org/s/jc4 विदेह सूचना संपर्क अन्वेषण https://mai.wikipedia.org/s/jc5 श्रुति प्रकाशन https://mai.wikipedia.org/s/iu7 अनचिन्हार आखर https://mai.wikipedia.org/s/ion मैथिली गजल https://mai.wikipedia.org/s/idz मैथिली बाल गजल https://mai.wikipedia.org/s/iex मैथिली भक्ति गजल https://mai.wikipedia.org/s/if1 ...................... किछु मैथिल पोथी, ऑडियो-वीडियो, कलाकृति/ यू ट्यूब चैनल डाउनलोड साइट (ओपन सोर्स) NCERT BHASHA SANGAM NCERT (Maithili-English-Hindi Conversations) मैथिली-हिन्दी वार्तालाप (३ घण्टा) मैथिली (मैथिली संकेत भाषा सहित- मैथिलीमे पहिल बेर) https://www.youtube.com/@videha_ejournal https://youtu.be/TebuC-lrSs8 https://ncert.nic.in/bs-2021.php SAHITYA AKADEMI http://sahitya-akademi.gov.in/publications/e-books.jsp http://sahitya-akademi.gov.in/general/Digitalbooks.jsp CIIL http://corpora.ciil.org/maisam.htm अखियासल (रमानन्द झा रमण) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI1.pdf जुआयल कनकनी- महेन्द्र http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI2.pdf प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI3.pdf सृजन केर दीप पर्व- सं केदार कानन आ अरविन्द ठाकुर http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI4.pdf मैथिली गद्य संग्रह- सं शैलेन्द्र मोहन झा http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI5.pdf ARCHIVE.ORG (विजयदेव झा) https://archive.org/details/vijay_deo_jha Videha Maithili eBooks/ eJournals/ Audio-Video Archive http://videha.co.in/archive.htm IGNCA http://ignca.nic.in/coilnet/mithila.htm http://ignca.nic.in/coilnet/kalyani.htm (MAITHILI ENGLISH DICTIONARY) मिथिला दर्शन https://mithiladarshan.com/ (online pdf of Maithili journal) तीरभुक्ति https://archive.org/details/@teerbhukti_journal OLE NEPAL's E-PUSTAKALAYA (https://pustakalaya.org/en/) पोथीक लिंक आइ.जी.एन.सी.ए.- ए.एस.आइ. https://ignca.gov.in/divisionss/asi-books/ https://ignca.gov.in/Asi_data/16612.pdf 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https://www.youtube.com/playlist?list=PLAT74nNc2fmYaW29mRVAIgzRq63_9zWbI (मैथिली ऑडियो बुक्स) https://www.youtube.com/channel/UCE1HEUJEzc-NUbMsHzklHLw (विदेह मैथिली-अंग्रेजी टॉकिंग रीड-अलाउड ऑडियो बुक आ संगमे मैथिली संकेत भाषा- दुनू मैथिलीमे पहिल बेर) https://bloomlibrary.org/player/Wcf6zr5CoF (मसाई केर परिवर्तनकारी रेबेका) https://bloomlibrary.org/player/p3sHdYBgiT (चलू हम तँ ठीक छी ने!) https://bloomlibrary.org/player/f19pSdhGMo (एकटा नीक दिन) https://bloomlibrary.org/player/b2l5wesxCp (घर सभ) https://bloomlibrary.org/player/dAzC0Fubt7 (की अहाँ ऐ चिड़ै सभकेँ देखने छी?) पोथी डॉट कॉम https://store.pothi.com/browse/free-ebooks/?language=Maithili I LOVE MITHILA https://www.ilovemithila.com/maithili-books-pdf-free-download/ (पोथी डाउनलोड लिंक) https://www.ilovemithila.com/ (online maithili journal) https://maithili.com.np/ (owner I Love Mithila) मैथिली फिल्म https://youtu.be/4jhaQ3Nw38I (ममता गाबय गीत, सौजन्य- Saregama) https://youtu.be/V3KWthhB6Kg (कन्यादान, सौजन्य- BEJOD) 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https://www.youtube.com/@LokKalaKendra (लोक कला केन्द्र) https://www.youtube.com/@rajnipallavi (रजनी पल्लवी) https://www.youtube.com/@PoonamMishra (पूनम मिश्र) https://www.youtube.com/@ranjanajhasangeetdivyam2908 (रंजना झा) https://www.youtube.com/@julijhaofficial8057 (जूली झा) https://www.youtube.com/@maithilithakur (मैथिली ठाकुर) जानकी एफ.एम समाचार https://www.youtube.com/user/Janakifm/videos (जानकी एफ.एम समाचार) https://www.youtube.com/@AmitJhaOfficial (Amit Jha) https://www.youtube.com/@PMPCORNER (Pravesh Mallick) https://www.youtube.com/@AdityaFilmsandmusic (Aditya Films & Music) https://www.youtube.com/@NepalTelevision (Nepal Television) https://www.youtube.com/playlist?list=PLEqde8-nxNTHL78RKSiuTGeeTJXot3YrY (AIR MAITHILI NEWS) https://www.youtube.com/playlist?list=PLJuuojdiqz3NMKxKUbbcO7cT3sPrgRejS (AIR AMRIT MAHOTSAV) https://www.youtube.com/@Mithilanchal (Mithilanchal) https://www.youtube.com/channel/UCsB8UkEYLZe471GrcAlcG1A (Rashmi Dutt) https://www.youtube.com/channel/UCVYE4fcasReMXTpbXWgp2mg (Priya Mallick) https://www.youtube.com/@AnamikaJhaOfficial (Anamika Jha) Videha e-Learning https://www.youtube.com/@videha-elearning संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल सेहो] Videha Read Aloud Talking Maithili Audio Books (including Maithili Sign Language- Ist time in Maithili) https://www.youtube.com/@videha_ejournal ....................... http://www.youtube.com/user/ggajendra71(विदेह) https://www.youtube.com/gunjanshree http://www.youtube.com/user/Maithilinews http://www.youtube.com/user/jitumaithil (जितेन्द्र झा, जनकपुर) http://www.youtube.com/user/sobhagya8 (सौभाग्य मिथिला) http://www.youtube.com/user/bhaskaranjha (भाष्कर झा) http://www.youtube.com/user/mahakalijha http://www.youtube.com/user/karia1885 http://www.youtube.com/user/omuniv http://www.youtube.com/user/sumankumar137 http://www.youtube.com/user/gyansjha http://www.youtube.com/user/bclalan http://www.youtube.com/user/gareri1986 http://www.youtube.com/user/avinashjha84 http://www.youtube.com/user/chandankumarjha1 http://www.youtube.com/user/chandanmishra2010 http://www.youtube.com/user/nirmaana http://www.youtube.com/user/Janakifm1 http://www.youtube.com/watch?v=XpSuVHtbaQ8&feature=mfu_in_order&list=UL http://www.youtube.com/user/gxcng http://www.youtube.com/user/gautamkrishna85 http://youtu.be/3i3OG5Nf3y8 http://youtu.be/sJnxSe-ckmo http://www.youtube.com/user/jitmohanjha http://www.youtube.com/user/MiTJnPNN http://www.youtube.com/watch?v=-9KaC8ji9t4 http://www.youtube.com/user/luvvivek2k7 http://www.youtube.com/user/bindassatyandra http://www.youtube.com/user/rustymind1 http://www.youtube.com/user/MrDeveshKarna http://www.youtube.com/user/rambabushah http://www.youtube.com/user/mukeshjha84 http://www.youtube.com/user/Mauahi www.youtube.com/user/MrBasantjha http://www.youtube.com/user/themadan http://www.youtube.com/user/sentukhu http://www.youtube.com/user/yarowjha http://www.youtube.com/user/mkoxp http://www.youtube.com/user/luvvick21 http://www.youtube.com/user/njyclubashok http://www.youtube.com/user/MrRamkisor http://www.youtube.com/user/pratyushsangita/ http://www.youtube.com/user/hellomithilaa http://www.youtube.com/user/mariyoshj http://www.youtube.com/user/dearshantanu/ www.youtube.com/user/RajuPrasadRajbanshi www.youtube.com/user/premarshi http://www.youtube.com/user/Dhipre (धीरेन्द्र प्रेमर्षि) http://www.youtube.com/user/TheShubhaprabhat http://www.youtube.com/user/njyclubashok http://www.youtube.com/user/mithilaconnect http://www.youtube.com/user/NAYAKSAURABH80 http://www.youtube.com/user/Rabindra888 http://www.youtube.com/user/uday88mandal http://www.youtube.com/user/nimesdeath http://www.youtube.com/user/pawanks6102 http://www.youtube.com/user/sahayogee http://www.youtube.com/user/sunilkumarpawan http://www.youtube.com/user/videhuk http://www.dailymotion.com/video/xjophq_documentary-kosi-katha_shortfilms#from=embed http://blackbuddhas.com/ http://youtu.be/CPwpkn5YI1I Top of Form Bottom of Form अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। Parallel Literature in Maithili and Videha Maithili Literature Movement Issue No. 88 (November-December 2019) of Muse India at http://museindia.com/ displays Maithili literature in an extremely poor light. Moreover, it wrongly claims to be a representative review of Maithili Literature, whereas it was only in line with the Sahitya Akademi, Delhi; a mere representation of the so-called "dried main drain". It is expected that Muse India will correct itself by announcing an issue exclusively devoted to the parallel tradition of Maithili literature. T.K. Oommen writes in the "Linguistic Diversity" Chapter of "Sociology", 1988, page 291, National Law School of India University/ Bar Council of India Trust book: "... the Maithili region is found to be economically and culturally dominated by Brahmins and if a separate Maithili State is formed, they may easily get entrenched as the political elite also. This may not be to the liking and advantage of several other castes, the traditionally entrenched or currently ascendant castes. Therefore, in all possibility the latter groups may oppose the formation of a separate Maithili state although they also belong to the Maithili speech community. This type of opposition adversely affects the development of several languages." T.K. Oomen further writes: "... even when a language is pronounced to be distinct from Hindi, it may be treated as a dialect of Hindi. For example, both Grierson who undertook the classic linguistic survey of India and S. K. Chatterjee, the national professor of linguistics, stated that Maithili is a distinct language. But yet it is treated as a dialect of Hindi". (Ibid, page 293) Do not judge each day by the harvest you reap but by the seeds that you plant. - Robert Louis Stevenson ... Videha: Maithili Literature Movement Parallel Literature The references to parallel literature are found in Vedas, where Narashanshi is referred to as parallel literature. Parallel Literature in Maithili The need for parallel literature in Maithili arose due to the constant onslaught on literature and dignity by the Public and Private Academies, for example, Maithili-Bhojpuri Akademi of Delhi, Maithili Akademi of Patna, Sahitya Akademi of Delhi, Nepal's Prajna Pratishthan, all of which are government Academies. In addition to these Academies, the onslaught on Maithili Literature and dignity was constantly done by the so-called literary associations which were recognised by the Sahitya Akademi and were the main tool for usurping all the literary space meant for this language. Besides these, the funding to these and other parochial associations and organisations led to the presentation of an interface in the name of Maithili, which was mediocre and non-representative. The Book of Bihari Literature (Abhay K. Editor) This book contains five translations from non-representative Maithili short stories into English by Vidyanand Jha. Nagarjun (Maithili's Yatri) and Usha Kiran Khan are from the Hindi quota though both got the Sahitya Akademi prize from the Maithili quota. Vibha Rani and Rajkamal Chaudhary are from the Maithili quota though both wrote in Hindi also. This book is edited by Abhay K. who has read Samskrit only up to high school. Yet he pretends to translate Arthashastra directly from Samskrit into English. I am Kovid in Samskrit and from the quality of the translation, I can presume that he has used some intermediary language in translating Samskrit texts into English. It is a matter of ethics to acknowledge the source. Vidyanand Jha's translation is below par, for example, he has no inkling what would be the English word for 'olak sanna', and there are plenty of such instances. I have some suggestions for him: First, read A Bird's Eye View on Mithila by Rajnath Mishra, it mentions all the terms for which you could not find English equivalents. Then go to the Videha archive (www.videha.co.in) and look for Umesh Mandal's Picture Dictionary containing vegetation, animals and skill sets of Mithila, here you will find the actual photographs too. Further, under A Parallel History of Maithili Literature (Videha www.videha.co.in), you will find sample English translations of some Maithili short stories. Therefore, what Vidyanand Jha is presenting as exotic is the original thing of the Maithili Language (but not that of Maithili literature, as was two decades ago). Interestingly his choice of short stories reminds me of Contemporary Maithili Short Stories (Maithili short stories translated into English) edited by Murari Madhusudan Thakur and published by the Sahitya Akademi in 2005. It seems that the stories in this selection are leftover material from that collection. Rip Van Winkle awoke after two decades but Vidyanand Jha is still in slumber not realizing the changes that have happened during the period. If you compare the translation of this selection vis-a-vis the English translation of Latin American Spanish literature, you would be able to understand the difference. But these types of selections are not known for their literary excellence, Harper Collins publishes these types of selections for five-star hotels and Airport lounges. The publishers announced this book on March 22, 2022. So, in 6-7 months, you will get old materials only. The Bride: The Maithili Classic Kanyadan by Harimohan Jha (1908-1984) translated into English by Lalit Kumar (Assistant Professor, Department of English, Deen Dayal Upadhyaya College, University of Delhi)- Harper Perennial (Harper Collins Publishers) I had pre-ordered the book, which was scheduled to be delivered to my kindle account on the 1st of December 2022, but the delivery date was postponed, and it was delivered to my account on the 14th of December 2022. When Maithili was recognised by the Sahitya Akademi (National Academy of Letters- of India) way back in 1965, Late Ramanath Jha stated that his Maithili language is saved now (Maithilik Vartman Samasya, Ramanath Jha). Sh. Harish Trivedi has committed the same mistake. In his foreword Harish Trivedi writes- "In Hindi, the language to which Maithili is the closest (and of which it was indeed an integral part until it was granted recognition as a separate language by the constitution in 1993) ..." Harish Trivedi refers to the inclusion of Maithili in the eighth schedule of the constitution of India. Here the year mentioned should be 2003 instead of 1993. Moreover, Maithili was a separate language in 2003, 1993, and 1965 and during the time of pre-Jyotirishwara Vidyapati. The status granted to Maithili by Sahitya Akademi and the Constitution of India, on the other hand, strengthened the hands of the obscurantist elements like Ramanath Jha, Shardananda Jha (he is not a famous person but why I have taken his name, I will explain it later) and others who gaslighted Harimohan Jha. Harimohan Jha's Khattar Kakak Tarang, Pranamya Devata, Rangshala and Charchari all these books were eligible for the Sahitya Akademi Award initiated in 1966 for Maithili (because of recognition given to Maithili by Sahitya Akademi in 1965. But a philosophy treatise was awarded the prize in 1966, this philosophy book itself is a horrific one, and if one has read the book to understand the nuances of Indian Philosophy, then he will have to unlearn first to be able to grasp the philosophical concepts from a new book on Indian Philosophy. In 1967 no award was given for the Maithili Language. Ramanath Jha's obscurantism vis-a-vis Panji is evident from one example (because Lalit Kumar also seems to have followed in his footstep, though he gives credit for his ignorance to some other writers). He was casteist, conservative and confused. The inter-caste marriage in Panji was well known to him (but he chose to keep the Dooshan Panji secret- which has been released by us on google books in 2009), and it was apparent that the great navya-nyaya philosopher Gangesh Upadhyaya married a "Charmkarini" and was born five years after the death of his father (see our Panji Books Vol I & II available at http://videha.co.in/pothi.htm ). Sh. Dinesh Chandra Bhattacharya writes in the "History of Navya-Nyaya in Mithila"- "The family which was inferior in social status is now extinct in Mithila- Gangesha's family is completely ignored and we are not expected to know even his father's name.", which is a total falsehood. He writes further that all this information was given to him by Prof. R. Jha. So how would this casteist-conservative-confused allow the award to be given to Sh Harimohan Jha? So, the Sahitya Akademi saved the Maithili Language by recognizing it, as asserted by Prof. R. Jha, is wrong and so is the assertion made by Sh. Harish Trivedi. Mr Lalit Kumar is a young person, but he is being misused by some obscurantist elements, who gaslighted Harimohan Jha. Harimohan Jha stopped writing in Maithili following the recognition of it by Sahitya Akademi and was awarded the Sahitya Akademi prize for his autobiography in 1985, after his death, which means nothing. Mr Lalit Kumar writes- "Yoganand Jha's Bhalmanusha (1944) and Shardananda Jha's Jayabara (1946) attack such social divisions that played a decisive role in marriages." Yoganand Jha's Bhalmanusha (1944) was indeed a pathbreaking novel, but Shardananda Jha's novel was reactionary. Prof Radha Krishna Choudhary rightly observes- "Yoganand Jha's 'Bhalamanusa' deals with the social problems connected with the problem of marriage. As a reply to this novel, Shardanand Jha wrote a second-rate novel 'Jayabara,' having little literary merit. (RADHAKRISHNA CHOUDHARY A Survey of Maithili Literature) Mr Lalit Kumar for his Panji-related ignorance gives credit to Mm. Parmeshwar Jha's ''Mithila Tattva-Vimarsha." Prof Radha Krishna Choudhary rightly observes- "Mm. Parmeshwar Jha's 'Mithila Tattva-Vimarsha' is the history of Mithila in Maithili prose and is based mainly on tradition. Mm. Mukunda Jha Bakshi's 'Mithilabhashamaya Itihas' gives an account of the Khandawala dynasty. From the point of view of modern Maithili prose, these two works are important, though from the historical point of view, are unreliable. (RADHAKRISHNA CHOUDHARY A Survey of Maithili Literature) The following excerprt from Our Panji Paband ((part I&II) is being reproduced below for ready-reference: - महाराज हरसिंहदेव- मिथिलाक कर्णाट वंशक। ज्योतिरीश्वर ठाकुरक वर्ण-रत्नाकरमे हरसिंहदेव नायक आकि राजा छलाह। 1294 ई. मे जन्म आ 1307 ई. मे राजसिंहासन। घियासुद्दीन तुगलकसँ 1324-25 ई. मे हारिक बाद नेपाल पलायन। मिथिलाक पञ्जी-प्रबन्धक ब्राह्मण, कायस्थ आ क्षत्रिय मध्य आधिकारिक स्थापक, मैथिल ब्राह्मणक हेतु गुणाकर झा, कर्ण कायस्थक लेल शंकरदत्त, आ क्षत्रियक हेतु विजयदत्त एहि हेतु प्रथमतया नियुक्त्त भेलाह। हरसिंहदेवक प्रेरणासँ- आ ई हरसिंहदेव नान्यदेवक वंशज छलाह, जे नान्यदेव कार्णाट वंशक १००९ शाकेमे स्थापना केने रहथि- नन्दैद शुन्यं शशि शाक वर्षे (१०१९ शाके)... मिथिलाक पण्डित लोकनि शाके १२४८ तदनुसार १३२६ ई. मे पञ्जी-प्रबन्धक वर्तमान स्वरूपक प्रारम्भक निर्णय कएलन्हि। पुनः वर्तमान स्वरूपमे थोडे बुद्धि विलासी लोकनि मिथिलेश महाराज माधव सिंहसँ १७६० ई. मे आदेश करबाए पञ्जीकारसँ शाखा पुस्तकक प्रणयन करबओलन्हि। ओकर बाद पाँजिमे (कखनो काल वर्णित १६०० शाके माने १६७८ ई. वास्तवमे माधव सिंहक बादमे १८०० ई.क आसपास) श्रोत्रिय नामक एकटा नव ब्राह्मण उपजातिक मिथिलामे उत्पत्ति भेल। So, the Srotriyas as a sub-caste arose around 1800 CE as per authentic panji files. Sh. Anshuman Pandey [Gajendra Thakur of New Delhi provided me with digitized copies of the genealogical records of the Maithil Brahmins. The panjīkara-s whose families have maintained these records for generations are often reluctant to allow others to pursue their records. It is a matter of 'intellectual property' to them. I was fortunate enough to receive a complete digitized set of panjī records from Gajendra Thakur of New Delhi in 2007. [Recasting the Brahmin in Medieval Mithila: Origins of Caste Identity among the Maithil Brahmins of North Bihar by Anshuman Pandey, A dissertation submitted in partial fulfilment of the requirements for the degree of Doctor of Philosophy (History) in the University of Michigan 2014]. Later these Panji Manuscripts were uploaded to google books in 2009). The so-called Maharajas of Darbhanga were permanent settlement zamindars of Cornwallis, and there were so many in British India, but in Nepal there were none. In the annexure of our book (Panji Prabandh vol I&II), we have attached copies of genealogy-based upgradation orders (proof of upgradation for cash). So, before 1800 CE, there was no srotriya sub-caste in British India and there is no such sub-caste within Maithil Brahmins in Nepal part of Mithila even today. Srotriya before that referred to following some education stream in British India, in Nepal it still has that meaning. Mr Lalit Kumar further tries to put his agenda by writing- "Harimohan choose a middle ground in his reformist agenda." He gives laughable reasons for his contention viz. "he espouses the significance of local traditions, languages, scripts, education system, and moral values" thereby meaning that these are conservative values! (All the referred books are available for free pdf download from the link http://videha.co.in/pothi.htm ) VIDEHA MAITHILI LITERATURE MOVEMENT AND A PARALLEL HISTORY OF MAITHILI LITERATURE Therefore, the missing portions, the ignored and non-represented aspects of society, started to be chronicled. It led to the depiction marked by the richness of vocabulary and experiences and was a revolution in literature and art as far as people speaking Maithili are concerned. The quality now has not remained mediocre. The real power of the Maithili language was realised by the native speakers, mediocrity was replaced by excellence. This attempt at the writing of History of Parallel Literature for the Maithili Language arose as the mediocre agency (private and governmental) funded so-called mainstream literature, which has no readership, and no acceptance among the speakers of Maithili continued to be presented by these Akademies as representative literature. The mediocre interface of Maithili literature was presented by the government radio and television stations also. Literary journals like Museindia (www.museindia.com ) & Publishers like Harper Collins were also used for their sinister design. Pseudo-criticism in Maithili and the case of Kamalananda Jha The title of Kamalanand Jha's book "Maithili Novel: Time, Society and Questions" (2021) is misleading. It is a collection of some syndicated so-called critical articles on some of his caste novelists. The 263-page book can only be sold in hardbound to libraries where it will rot. Here is a correction, a non-caste writer's work, i.e., Subhash Chandra Yadav's novel 'Gulo', has been dealt with by him in two lines, of course without reading it. I am presenting those two lines here for your entertainment. You must have read Gulo, if you haven't already, read it first because then you will have a more entertaining experience. Gulo is available on Videha Archive with the permission of Subhash Chandra Yadav at this link http://videha.co.in/pothi.htm. "The weakness of the novel is the author's political bias. The partisanship towards a particular politics does not do justice to the work." In a novel where politics is not remotely involved, there is no question of 'political bias and partisanship of a particular politics'. Dhumketu and Yatri used political bias or partisanship. Subhash Chandra Yadav's 'Vote' which came out in 2022 and is available with permission of Subhash Chandra Yadav on Videha Archive at this link http://videha.co.in/pothi.htm, is on politics but even there Subhashji's enchanting style obviates the need of any political bias... Read my book 'Nit Naval Subhash Chandra Yadav' which is available at this link http://videha.co.in/pothi.htm. On the other hand, Mr Kamlanand Jha sounds like a spokesperson of some political party or a casteist organisation rather than a literary critic. Kamalananda Jha's Brahministic bias against Subhash Chandra Yadav is an alarm bell. The parallel stream is conscious of how Kamalananda Jha takes the leftist stance to promote Brahminism and wants to sacrifice social justice. In his biodata, he proudly mentions the Maithili translation assignment bestowed on him by the Sahitya Akademi, and this assignment was allotted to him not on account of merit but solely on the ground of his caste title and in lieu of these deeds. For people like him, Maithili-related work is merely a line in their curriculum vitae, but it is a question of life and death for the people of the parallel stream. Why did I call Kamalananda Jha a pseudo-critic? Because he is a pseudo-critic. He writes: "After nearly a hundred years of journey, Gaurinath is credited with writing a dignified novel on the dreams, struggles and ironies of inter-caste marriage. So, did Kamalananda Jha take away this credit from Sushil? Is this the culmination of the arrogance of his Brahministic upbringing ("Through my whims and fancies I can place some literature on top and can downgrade some to the bottom") or is this the evidence of his lack of study? Let me take you away from the selfish world of Kamalananda Jha, away from deception and disguise to the sincere world of Sushil's magical literature. Welcome to the world of Sushil's literature. Here is Sushil's 'Gambali' (1982) which is now available in the Videha Archive at the link http://videha.co.in/pothi.htm. In the first line of this novel, even before the novel begins, Sushil writes about the novel 'Gambali': "In support of widow marriage and inter-caste marriage" and here begins the novel. The death of a village woman and then the trouble ensues, who will cremate this village woman? Brahmin community or Yadav community of the village? Dinesh Kumar Mishra's 'Dui Patan Ke Bich Me' is a historical biography of the Kosi River. He has also written historical biographies of other rivers of Mithila like 'Bandini Mahananda,' 'Bagmati Ki Sadgati!', 'Dui Patan Ke Bich Me... (Story of the Kosi River)', Na Ghat Na Ghar, Kamla River, 'Bhutahi River and Technical Herbalism', The Kamla River and People on Collision Course, Bhutahi Balan- Story of a Ghost River and Engineering Witchcraft, Refugees of the Kosi Embankments. Pankaj Jha Parashar, a member of the Maithili Advisory Committee of the Sahitya Akademi, Delhi has plagiarised paragraph after paragraph from his books and has published a novel in Maithili in his name, which pseudo-critic Kamalananda Jha mentions as research of this thief author Pankaj Jha Parashar! Let me clarify here that both the thief writer and the pseudo-critic are in the Hindi department of Aligarh Muslim University. This research is done by Dinesh Kumar Mishra, who is a graduate of IIT, Kharagpur in Civil Engineering (in 1968) and M. Tech in Structural Engineering (in 1970) and is qualified for that research. In Hindi, the cut-off for admission is the lowest across universities, otherwise, Kamalananda Jha would have known that this research could be done by a civil engineer only. The Hindi original and Maithili screenshots are attached below. Dinesh Kumar Mishra is not from Mithila, but he has authored the story of all the streams of Mithila. We are grateful to him, and the people of Mithila will remain indebted to him for this. This thief writer Pankaj Jha Parashar is a habitual offender. More than a decade ago he found a saviour in Mr Taranand Viyogi who wrote that he (thief writer Pankaj Jha Parashar) gets influenced involuntarily stole others' material in his works. Now he has found another saviour in Kamalananda Jha. The parallel stream is conscious of how Kamalananda Jha takes the leftist side to promote Brahminism and wants to sacrifice social justice. Communism has suffered a lot from people who became communists to escape the land ceiling. All books by Dinesh Kumar Mishra are now available in the Videha Archive with his permission: http://videha.co.in/pothi.htm Let us recall here that when Bill Gates was asked whether he was delaying the introduction of the X-Box in India for fear of piracy. His answer was Microsoft never delays the launch of products for fear of piracy. We will continue enriching Videha Archive (http://www.videha.co.in/archive.htm ), despite such risks because not all the fish in the pond rot by some rotten fish in parallel streams. The fishermen here have been and will continue to remove such rotten fish. The final blow to syndicated pseudo-literary criticism in Maithili. Original Dinesh Kumar Mishra (Dui Patan Ke Beech Me... 2006): It is noteworthy that between 1923 and 1946, 5,10,000 people died of malaria, 2,10,000 from Kala Azar, 60,000 of Cholera and 3,000 of smallpox in the Kosi region (783,000 total deaths). Thief Pankaj Jha Parashar (Member of Maithili Advisory Committee of Sahitya Akademi, Delhi) [Jalpranthar 2017 (p. 103)]: Original Dinesh Kumar Mishra (Dui Patan Ke Beech Me... 2006): On the Kosi River in Bihar, India, a dam was built by King Laxman II in the 12th century and for this, he received the title of 'Bir' from the people and the embankment of the river was called 'Bir Dam' The remains of this embankment are still visible in Supaul district, about 5 km south of Bhim Nagar. Dr Francis Buchanan (1810-11) speculated that the dam must have been an outer wall built to protect a fort as it stretched over a distance of 32 kilometres from Tilyuga to its confluence on the western bank of the Dhaus river. Dr W.W. Hunter (1877) did not agree with Buchanan's contention that the dam was the protective wall of a fort. Quoting locals, Hunter believed that most people did not consider it a fortress wall and according to him it was something else but he was not in a position to say anything. Yet the common impression is that it must have been an embankment built along the Kosi River to prevent the river's current from sliding westwards. People also said that it seemed that the construction of the embankment had suddenly stopped.
The pseudo-critic Kamalananda Jha's saviour of the habitual offender thief Pankaj Jha Parashar quoted the plagiarised work as follows: (Maithili Novel, Time, Society and Questions pp. 257-258): Thief Pankaj Jha Parashar (Member of Maithili Advisory Committee of Sahitya Akademi, Delhi) [Jalpranthar 2017 (p. 31)]: Original Dinesh Kumar Mishra (Dui Patan Ke Beech Me... 2006): A glimpse of the horrors of the Kosi River can be seen in the event when the army of Feroz Shah Tughlaq returned to Delhi from Bengal. It is said that when the troops of the Sultan reached the banks of the Kosi, they saw that on the other side of the river, the troops of Haji Shamsuddin Ilyas were waiting, ready for a battle. This was the same Haji Shamsuddin who founded the cities of Hajipur and Samastipur. Feroze's troops were stranded on the banks of the Kosi somewhere around Kursela. The speed of the river was preventing them from moving forward. It was finally decided to proceed northward along the river and to locate the water where it was navigable. The troops of the Sultan went up about a hundred kos and crossed the river near Ziaran, situated at the same place where the river descended from the mountains into the plains. The river was thin, but the flow was so fast that heavy stones weighing five hundred manas were floating like straws in the river. On either side of the river where it was found possible to cross it the Sultan erected a row of elephants, and ropes were hung in the bottom row so that if a man loses control he could be rescued with the help of these ropes. Shamsuddin never thought that Sultan's troops would be able to cross the Kosi and when he came to know that Sultan's troops had managed to cross the Kosi, he fled. Thief Pankaj Jha Parashar (Member of Maithili Advisory Committee of Sahitya Akademi, Delhi) [Jalpranthar 2017 (p. 105)]: A Parallel History of Maithili Literature I Introduction FESTIVAL OF LETTERS OR FESTIVAL OF SHAME SAHITYA AKADEMI AND the DOWNFALL OF INDIAN LANGUAGES (IN SPECIAL CONTEXT OF MAITHILI LANGUAGE) When Maithili was recognised by the Sahitya Akademi (National Academy of Letters- of India) way back in 1965, Late Ramanath Jha stated that his Maithili language is saved now (Maithilik Vartman Samasya, Ramanath Jha). He was wrong on this on two counts. What he referred to as applicable, if it applied at all, only to the part of Maithili speaking area, geographically located in India. Maithili is spoken, natively, in India and Nepal. After the treaty of sugauli (ratified in 1816), which was in the aftermath of the Anlo-Nepalese war of 1814-16, the hilly regions were incorporated in British India, including the Nepalese-speaking Darjeeling Area. Similarly in 1816 and 1860, the Britishers ceded some Terai region to Nepal. As a result, part of Maithili speaking Area, which was earlier ruled by Malla Kings (when Maithili was an official language of the region), was ceded to Nepal. Even today some Maithili scholars (!!) refer to the golden period of Maithili as the period of "Nepali (!!)" Malla Kings (Ramanath Jha, Introduction to Maithili Sahityak Itihas by Dr Durganath Jha "Shreesh"). Ramanath Jha himself admits that during his visit to "Vir Library" of Nepal (Kathmandu) he came to know about the Nepal legacy (his monograph on kirtaniya Natak, which he wrongly presents as Kirtaniya Nach) in respect of Maithili. So, he cannot be blamed for his lack of knowledge in this respect. He was wrong on the second count also, and this second count was an artificial creation. He began a tradition of elitism and conservatism in Sahitya Akademi, as the first convener of the Maithili language. The tradition got stronger and stronger in the last 55 years of the Existence of Maithili in that Akademi. So, he ensured that liberal writers, like Sh. Harimohan Jha, attacking casteism and conservatism did not get the award, even though the year 1967 went unrewarded and the Ist award in 1966 was given to a non-literary book in Maithili (academic book of Philosophy!!!). He was casteist, conservative and confused. The inter-caste marriage in Panji was well known to him, and it was apparent that the great navya-nyaya philosopher Gangesh Upadhyaya married a "Charmkarini" and was born five years after the death of his father. But he informed Sh. Dinesh Chandra Bhattacharya in a distorted way. Sh. Dinesh Chandra Bhattacharya writes in the "History of Navya-Nyaya in Mithila". "The family which was inferior in social status is now extinct in Mithila-Gangesha's family is completely ignored and we are not expected to know even his father's name.", and he writes further that all this information was given to him by Prof. R. Jha. So how would this casteist-conservative-confused allow the award to be given to Sh? Harimohan Jha. So, the Sahitya Akademi saved the Maithili Language by recognizing it, as asserted by Prof. R. Jha, was wrong on those two counts. Now come to Nepal, the Prajna Pratisthan and other organizations often recognize Indian Maithili writers, but Sahitya Akademi of India does not recognize Nepalese Maithili writers, be it the Seminars or the poets meet, be it an anthology of poems or prose published by the Akademi. Regarding the treatment of Nepalese Maithili writers by Sahitya Akademi Sh. Ram Bharos Kapari "Bhramar" laments that there is demand in Nepal that they should also not award Indian Maithili writers/ publish them in their anthologies as reciprocity demands this. The narrow-mindedness of the Maithili advisory board of the Indian Sahitya Akademi has its origin in the organizations that are recognized by the Sahitya Akademi, the basis of which is extra-literary credentials. These are pseudo-organizations running on paper, political organizations or casteist organizations pocket-run by a few. The complete list is: MAITHILI LITERARY ASSOCIATIONs (!!!) RECOGNIZED by SAHITYA AKADEMI 1. The Secretary, All India Maithili Sahitya Samiti, Tirbhukti, 1/1B, Sir P.C. Banerjee Road, Allahabad-211 002. 2. The General Secretary, Akhil Bharatiya Maithili Sahitya Parishad, C/o Dr. Ganapati Mishra, Lalbag, Darbhanga-846 004. 3. The Secretary, Chetna Samity, Vidyapati Bhawan, Vidyapati Marg, Patna-800 001. 4. The Secretary, Mithila Sanskritik Parishad, 6 B, Kailash Saha Lane, Kolkata-700 007. 5. The Secretary, Vidyapati Seva Sansthan, Mithila Bhavan Parishar, Darbhanga-846 004. 6. The Secretary, Centre for the Study of Indian Traditions, Tantrabati Geeta Bhavan; Ranti House, Ranti, Madhubani-847 211 Now the Literary Association lists read as under. Serial no. 1 & 6 above have been derecognised and has been replaced by other non-literary associations at sr no 5, 6 & 7 below. (1) The General Secretary, Akhil Bharatiya Maithili Sahitya Parishad, Professors' Colony, Digahi West, Opp. of Primary School, Darbhanga-846 004, (Bihar) 2) The Secretary, Chetna Samiti, Vidhya Pati Bhavan, Vidyapati Marg, Patna-800 001 (Bihar) 3) The Secretary, Mithila Sanskritik Parishad, 6B, Kailash Saha Lane, Kolkata-700 007, (West Bengal) 4) The Secretary, Vidhya Pati Sewa Sansthan, Mithila Bhavan Parishar, Darbhanga-846 004, (Bihar) 5) The Secretary, Anand, Samajik Sanskritik Sahityik Manch, Rajkumarganj (Mirzapur Chowk), Darbhanga-846 004, (Bihar) 6) The General Secretary, Mithila Sanskritik Parishad, Rosebery 5032, Sahara Garden City, Adityapur-2, Jamshedpur-831 014, (Jharkhand) 7) The General Secretary, Akhil Bharatiya Mithila Sangh, G-6, Hans Bhavan, Wing 2 I.T.O., Bahadurshah Zafar Marg, New Delhi-110 002, (Delhi) What is the literary credential of the Centre for the Study of Indian Traditions (now recognised and replaced by another pocket association)? Chetna Samiti and Vidyapati Seva Sansthan are casteist political outfits, vehemently displaying the casteist attire of a great ancient poet, whose caste is still uncertain (VIDYAPATI), but who was certainly not Brahmin. All India Maithili Sahitya Samiti (now derecognised and replaced by a non-literary association) became non-existent even during the lifetime of the Late Jaykant Mishra, same is the case with Akhil Bhartiya Maithili Sahitya Parishad. Mithila Sanskritik Parishad has done a crime through an investiture ceremony of the great Vidyapati, they tried to convert Vidyapati and "Maithili" language to the language of only the Brahmins (the name of the artist who sketched the Vidyapati has still not been disclosed by this organisation). When these non-existent organizations exercise voting powers granted by Sahitya Akademi and chose a convener, it is not a coincidence that for successive times only conservative people among the Maithil Brahmin caste, are chosen. The complete list is: 1. Ramanath Jha, 2. Jaykant Mishra, 3. Surendra Jha Suman, 4. Sureshwar Jha, 5. Ramdeo Jha, 6. Chandranath Mishra Amar, 7. Vidyanath Jha Vidit, 8. Veena Thakur, 9. Prem Mohan Mishra, 10. Ashok Avichal. The result is now for everybody to see. The complete list of Sahitya Akademi awards (till 2019) is: Total booty distribution- 50 times, Maithil Brahmins- 42 times, Kayasthas- 6 times, Rajpoots- 3 times; Others- 0 times!!! (Now in 2021 Sh. Jagdish Prasad Mandal has been awarded this prize for his novel "Pangu", so the count is now not zero but one. The result is not based on the quality of the books but solely upon the caste-based other considerations and the disease has its root in the faulty seedling that the Sahitya Akademi of India found through the faulty literary associations. What were the objectives of the setting of this Akademi? Sahitya Akademi was established (National Academy of Letters to be called Sahitya Akademi) by Government of India resolution No F-6-4/51G2(A) dated December 1952 "to set high literary standards, to foster and co-ordinate literary activities in all the Indian languages and to promote through them all the cultural unity of the country; to promote good taste and healthy reading habits, to keep alive the intimate dialogue among the various linguistic and literary zones and groups through seminars, lectures, symposia, discussions, readings and performances, to increase the pace of mutual translations through workshops and individual assignments and to develop a serious literary culture through the publications of journals, monographs, individual creative works of every genre, anthologies, encyclopedias, dictionaries, bibliographies, who's who of writers and histories of literature." The Akademi boasts of publishing "one book every thirty hours" and holding "at least thirty seminars every year" at regional, national, and international levels, " along with the workshops and literary gatherings-about two hundred in number per year". The Akademi recognises " Besides the twenty-two languages enumerated in the Constitution of India", English and Rajasthani as languages. Sahitya Akademi has constituted twenty-four language Advisory Boards "to render advice for implementing literary programmes in these 24 languages". The Akademi gives prizes in twenty-four languages recognised by it for original and translated works. It gives " special awards called Bhasha Samman to a significant contribution to the languages not formally recognized by the Akademi as also for contribution to classical and medieval literature"; "It has also a system of electing eminent writers as Fellows and Honorary Fellows and has also established a fellowship in the names of Dr Anand Coomaraswamy and Premchand". FESTIVAL OF LETTERS (SHAME)!!!! In February every year, Sahitya Akademi "holds a week-long Festival of Letters; It begins with the ceremony to present the Akademi's Annual Awards for creative writing". In February every year, there is a need to examine whether Sahitya Akademi is fulfilling its objective and whether Sahitya Akademi is aware of the rich cultural and linguistic variety prevalent in India. On scrutiny it is revealed that Sahitya Akademi believes in "forced standardisation of culture through a bulldozing of levels and attitudes" and it is not "conscious of the deep inner cultural, spiritual, historical and experiential links that unify India's diverse manifestations of literature". The Akademi boasts of publishing "one book every thirty hours" and holding "at least thirty seminars every year" at regional, national, and international levels, "along with the workshops and literary gatherings-about two hundred in number per year". If we see the data in respect of Maithili it comes out that every year around twelve books should have been published in Maithili and the Maithili writers might have attended thirty seminars every year at regional, national, and international levels and might have participated in eight literary gatherings every year. The number of Maithili books published by the Akademi is pathetically low, and when we see the assignments, through which these books get artificially prepared (be it translation, anthology or monograph), then the people getting these assignments are often related to the members of the advisory board (as the answer to RTI application by Sh. Vinit Utpal brings forth). The quality suffers, and as a result, there is no readership. How this Akademi failed? And why this Akademi failed? And what action should be taken against Akademi for its intentional failure? Firstly, Akademi is not the name of a man or woman. Akademi or its member of the Advisory Board consists of persons, and if the group of persons is failing the Akademi, that language itself is to blame! But again, the language is not the name of a man or woman. So, the people speaking that language are to be blamed for the failures of the Akademi. Really!! Even if it is partially true, the Sahitya Akademy cannot shirk its responsibilities. How an advisory committee can be considered representative of Maithili-speaking people (even that of India), when the Convener of that language is nominated by six organisations (recognised by the Sahitya Akademi for reasons best known to it), having no remote connection with literature? Sahitya Akademi sowed seeds of Acacia and expected Mango fruit. Having said that it is also true that the Akademi or any organisation can transform itself, but only when the conservative people representing these find pressure from the literary fraternity, change themselves or are replaced. What is the solution? The literary fraternity has already taken initiative by establishing parallel Sahitya Akademi awards and parallel literary meets. It should be taken further. All legal means should be explored to take the Akademi to the task. On all available forums, the fact is made clear that the literature being prepared by Sahitya Akademi through assignments is not grammatically correct, that it is not up to mark and is of inferior quality. On all available forums, it should be made clear that the thin, casteist-looking (quantitatively and qualitatively) and pale Maithili literature, which is being shown by the Sahitya Akademi of India to the world, has no readership or respect in its native speaking area of India and Nepal. And that Maithili has moved not because of Sahitya Akademi but despite it. Demand The six organisations representing Maithili should be derecognized with immediate effect and an inquiry initiated to ascertain their genuineness. A committee should be set up to scrutinize the work done by the Sahitya Akademi (in respect of Maithili) in the last 55 years. The awards should be kept in abeyance till the results of the inquiry are made public and corrective steps are taken. II THE CELEBRATION BEGINS Videha Ist Maithili Fortnightly International e-journal has e-published more than three hundred issues to date. Meanwhile, we will enumerate the problems faced and the solutions found by us. The Journey began in the year 2000 at yahoo Geocities- the first words on the internet in Maithili were written by me on the yahoo Geocities sites (now yahoo has discontinued Geocities) towards the end of 2000 when I suffered a major accident which kept me confined to crutches for one and a half years. But that shaped my destiny. I could concentrate on my Maithili writings and my research on Tirhuta Manuscripts. On 5th July 2004, the first blog in Maithili came (gajendrathakur.blogspot.com) as "Bhalsarik Gachh", which was rechristened as Videha ejournal from 1st January 2008. From Ist January 2008 it came to be published as a fortnightly journal. The first rechristened issue brought the story of the life and creations of a forgotten Maithili poet Late Ramji Choudhary (1878-1952). Till the eighth issue of Videha the columns on Music, Mithila Painting, Children column, learn samskrit through Maithili got strengthened. Moreover, the projects on digitalisation of Maithili Classics and Panji Manuscript-leafs got started. The searchable dictionary (Maithili-English_Maithili) was designed and strengthened. From the eighth issue, a latest unpublished Maithili Play of Nachiketa "No Entry Maa Pravish" began its e-publication in Videha. Nachiketa, the greatest dramatist of Maithili Literature was silent for the last 25 years, as far as the drama was concerned. Technology has two aspects, bad (its chances of misuse) and good (its effective use). It is a great leveller; it challenges status quo forces. It is applicable in all areas of knowledge. So, school-going children today have a clearer understanding of the universe and atoms than the Aryabhata or Sir Issac Newton had. After mass-scale use of printing education and literature expanded its wings, but only after the "Internet and electronic transformation of tools of knowledge", it has become universal, it has jumped geographical boundaries. All shackles unfurled, the weak links of the chain were identified, and the chain which tried to capture knowledge, which tried to thwart its expansion, started breaking down. And the greatest beneficiary became the Maithili Literature. What is Videha, nothing, it is only its commitment to the Maithili Language, which helped it expand its base, and Videha became the means that were able to bind together the Maithili-speaking areas in both parts of the boundary (India & Nepal). Videha gave Maithili a batch of committed writers and a batch of committed readers. It challenged the status quo and casteist forces. It challenged confused writers, who were using Maithili as a tool to ride the ladder of Hindi. The lack of criticism, the lack of teeth in criticism was the reason that some writers and dramatists were using Hindi-Mix Maithili for cheap popularity, they were using derogatory language for the so-called lower castes of their society (some were finding plea in Natyashastra- when even the modern-day Samskrit Drama is not using Prakrit etc.!!), and for their mimicry, those castes started keeping distance with this kind of literature. And once the confusion of the confused thinned, a new type of awakened literature, stage, and drama (top-class) became the norm. Videha is regularly getting some excellent brains. Since its inception, Videha, the idea factory, is dependent upon them. As far as their versatile qualities are concerned, people associated with Videha are different. All are known for their perseverance and resilience. All are known for their arduous work. All are known for their quality work. All are known for their discipline. And all are committed; committed to Maithili and the Mithila. The cumulative force resulted in a natural revolution. A revolution in the field of Maithili Literature, art, music, craft, stage, and drama. The only international e-journal in Maithili started this quality movement in Maithili. Nothing less than world standard was acceptable. The awards were instituted to recognize the parallel field of Maithili Literature, art, music, craft, stage, and drama. Only the best was selected, there was no scope for the second best. The participation of readers in the decision-making processes was encouraged. The readers got full access to the digitalised Maithili Literature. More than five hundred Maithili books and around 11000 palm-leaf mithilakshar manuscripts were digitalised and made available online under the "Videha Archive" section of www.videha.co.in (and the number is increasing every day). The audio-video-paintings-photographs were archived, and all these archived "art and lifestyle" of the people of Mithila were then placed online. The Videha Archive is a unique gift to the world. So, what is the ideology of people associated with Videha? Is it collective thinking? No, of course not. In Videha all are welcome. Here all are welcome to discuss their respective ideology. Having said this, it needs emphasis that there are some basic human principles where no compromise is possible. The casteists, those having genetic superiority complex (which is another name for an inferiority complex), the practitioners of plagiarism, those who are unable to take part in a healthy discussion and persons who are not able to withstand the criticism of their creation, Videha is not a platform for them. The ideology of people associated with Videha may have different tinges, not all need to toe the line taken by any member of the editorial board. Videha believes in the individuality of ideas and the editorial board never imposes its ideology upon its members. At the same time, it is being emphasized that each member of the Videha editorial board has a strong ideological leaning, the ideology of humanism is practised by all. Videha-Maithili Literature Movement has its roots in the year 2000 when I started making Maithili Websites on Yahoo Geocities. After Yahoo Closed Geocities these sites were automatically deleted. However, the early form of Videha "Bhalsari Gachh" was started on 5 July 2004, and it is the earliest presence of Maithili on the internet. Videha and its vibrant members did their utmost in translating lacs of words on Wikipedia, and they successfully opposed the nomenclature "Bihari Languages" (Gerard M accepted the role of Umesh Mandal, the co-editor of Videha, go to Gerard M's blog and click the Dasipat Aripan photo from Videha archive (Preeti Thakur) placed at his blog, you will reach http://videha.co.in/). In Google translate/Wikipedia localisation drive, in Tirhuta and Kaithi script research and the localisation of Braille in consonance with the Maithili Language, Videha shouldered the responsibility as a pioneer in technology viz-a-viz Maithili Language. It was a pioneer in many respects. It started for the first time a Maithili Websites Aggregator at http://videha-aggregator.blogspot.com/, the first braille site in Maithili, the first mithilakshar site in Maithili among others (total list). Videha has organised several dozen Maithili book fairs to date. The 16th Videha Maithili book fair was held at Sagar Rati Deep Jaray, Patna on 10-11th December 2011 and the 17th Videha Maithili book fair was held at Guwahati, on 22-23 December next year at the Vidyapati Parv organised by Mithila Sanskritik Samanvay Samiti. The detailed list of all the venues (datewise). Videha also organised a parallel Sahitya Akademi Kavi Sammelan, besides awarding parallel Sahitya Akademi prizes, as corrective measures, as the awards and Kavi Sammellans of Sahitya Akademi were awarded/ organised in a unilateral manner where merit took a beating. Videha has, thus, fulfilled its obligation by interfering in the murky affairs of government organisations. Videha cannot remain a silent spectator, be it plagiarism or copyright violations. So, the authors like Pankaj Parashar, and Ashok Sahu, who were engaged in lifting other articles/ stories/ poems were banned after verifying the sources and target writings. Literature in translation is a major issue with Videha. Lack of translation in America resulted in Americans lagging in quality literature. We practise literature in translation in both directions- from Maithili into English and from other languages into Maithili. As far as translations from other languages into Maithili are concerned English, Nepali, Sanskrit and Hindi function as buffer languages in the process. Direct translations into Maithili are limited; and it is done directly only from English, Sanskrit, Hindi, Nepali and Bengali, although there are some exceptions. As far as the question of translations from Maithili into other languages is concerned, directed translations are again limited; and it is again done directly only into English, Hindi, Sanskrit, Bengali and Nepali, barring some exceptions. Videha contacted some notable personalities of class literature, took permission, and translated that literature into Maithili. Most of the time English was used as a buffer language and translation work from English, Hindi, Konkani, Telugu, Gujarati, Odia, Kannada, Nepali and Telugu into Maithili was completed; and these works were regularly published in Videha. Maithili novels, poems, and short stories, on the other hand, were translated from Maithili into English and were published regularly in Videha. VIDEHA became a Maithili Literature movement. No, VIDEHA was from day one of the Maithili Literature movement. Many established misconceptions got cleared through VIDEHA. The well-known facts, the not-so-obvious plot of some people to kill Maithili through its twin institutions the Sahitya Akademi and the CIIL was unearthed. The Right to Information came in handy. Sri Vinit Utpal asked for information from Sahitya Akademi through his RTI application dated 23.09.2011 (file no. RTI-125) and sought information on "Assignment assigned by Maithili Advisory Board, Sahitya Akademi under the convener ship of Sri Vidyanath Jha 'Vidit'". The information included a proposal received, a proposal rejected, and a proposal kept in abeyance." The statutory mandatory information supplied by the Sahitya Akademi unearthed a vicious circle of Maithili-speaking so-called litterateurs, hell-bent upon making Maithili a language- "of the Maithil Brahmin, for the Maithil Brahmin and by the Maithil Brahmin". More than 90% of the assignments went to the friends, relatives, and acquaintances of the 10-member Maithili Advisory Board. No assignment to Sh. Jagdish Prasad Mandal, Sh. Rajdeo Mandal, Sh. Bechan Thakur (the greatest Short-story-novel writer of Maithili, the greatest living poet of Maithili and the greatest living Maithili dramatist; respectively), Sh. Umesh Paswan, Sh. Umesh Mandal, Sh. Ramdev Prasad Mandal "Jharudar", Sh. Durganand Mandal, Sh. Sandeep Kumar Safi or to Sh. Anand Kumar Jha. When every member of the Maithili advisory board is hand in glove with the Sahitya Akademi to kill the Maithili language then where lies the hope? The demand for Mithila state by these people will see that 10 Maithil Brahmin families would loot the Mithila state. Then where lies the hope? Here lies hope. Sh. Bechan Thakur has created a parallel Maithili stage and theatre, a slap on the existing slapstick humouristic Maithili theatre. Sh. Umesh Paswan is a discovery of the Parallel Sahitya Akademi Poetry festival organised by Videha. Sh. Jagdish Prasad Mandal, Sh. Rajdeo Mandal, Sh. Jharudar, Sh. Sandeep Kumar Safi and Sh Umesh Mandal have pumped their energy, wealth, and time into our Maithili Language. This language will live...proofs are given below: - Google Translate: http://www.google.com/transconsole/giyl/chooseProject then Wikipedia translate: http://translatewiki.net/wiki/Special:Translate?task=untranslated&group=core-mostused&limit=2000&language=mai http://translatewiki.net/wiki/Project:Translator http://translatewiki.net/wiki/Project:Translator http://meta.wikimedia.org/wiki/Requests_for_new_languages/Wikipedia_Maithili http://translatewiki.net/wiki/Special:Translate?task=untranslated&group=core-mostused&limit=2000&language=mai http://incubator.wikimedia.org/wiki/Wp/mai http://translatewiki.net/wiki/MediaWiki:Mainpage/mai http://ultimategerardm.blogspot.com/2011/05/bihari-wikipedia-is-actually-written-in.html) [Monday, May 09, 2011 The #Bihari #Wikipedia is written in #Bhojpuri This is the kind of article that has many people's eyes glazed over. It is about standards and scientific documents, and it is about languages most of my readers have never heard about. For the people that do speak one of the languages that are considered Bihari, it is extremely relevant, and it has implications for Wikipedia. This is information provided by Umesh Mandal that explains the "Bihari group of languages" with the Maithili language: Kellogg (1876/1893) and Hoernle (1880) regarded Maithili as a dialect of Eastern Hindi; Beames (1872/reprint 1966: 84-85), regarded Maithili as a dialect of Bengali, Grierson has done a great service to the Maithili language, however, he erred when he gave a false notional term of "Bihari" language after that western linguists started categorizing Maithili as a dialect of "Bihari" language; although there is nothing known as "Bihari Language" and both Maithili and Bhojpuri are spoken in Bihar (of India) as well as in Nepal. Umesh is working on the localisation of MediaWiki for the Maithili language and as this language is currently in the Incubator, the language committee does its due diligence and trying to understand if Maithili can have a place in the Bihari Wikipedia. The information provided by Umesh makes it quite clear: "no". This still leaves us with the misnomer that is the Bihari Wikipedia. The language used for the localisation and the articles is Bhojpuri. Bhojpuri has the ISO-639-3 code "bho". Are you still following all this? Ok, there is one question I am not asking: How about the Kaithi script? Thanks, GerardM] Excerpt from a Maithili e-journal published as PDF (from Videha 2011: 22; Videha: A fortnightly Maithili e-journal. Issue 80 (April 15, 2011), Gajendra Thakur [ed]. http://www.videha.co.in/."Gajendra Thakur of New Delhi graciously met with me and corresponded at length about Maithili, offered valuable specimens of Maithili manuscripts, printed books, and other records, and provided feedback regarding requirements for the encoding of Maithili in the UCS."-Anshuman Pandey.] । TIRHUTA UNICODE See the final UNICODE Mithilakshara Application (May 5, 2011) by Sh. Anshuman Pandey at Page 23 of the Videha 80th issue (Tirhuta version) is attached"Figure 11: Excerpt from a Maithili e-journal published as PDF (from Videha 2011: 22" and at Page 12 Videha is included in References Videha: A fortnightly Maithili e-journal. Issue 80 (April 15, 2011), Gajendra Thakur [ed]. http://www.videha.co.in/. and role of Videha's editor is acknowledged on Page 12 "Gajendra Thakur of New Delhi graciously met with me and corresponded at length about Maithili, offered valuable specimens of Maithili manuscripts, printed books, and other records, and provided feedback regarding requirements for the encoding of Maithili in the UCS."] The Maithili Speaking area is shrinking. It is shrinking due to a conscious-subconscious policy of the Governments of India and Nepal, and the situation became critical due to the invasion of Hindi and Nepali media and the biased educational system in Maithili-speaking areas, and due to the large-scale migration, which has happened in one single generation. The question of Hindi saw to it that Vajjika, Angika and now Thethi, Surjapuri etc. languages should get the tacit support of supporters of Hindi, first in the name of religion and second in the name of caste. Through this they did not support Vajjika, Angika, Thethi or Surjapuri; but they tried to weaken Maithili, which resulted in the weakening of Vajjika, Angika, Thethi and Surjapuri. For all this, the Maithili-speaking people, more so the officials (I will explain it later), are also responsible, as they tried to delimit Maithili within the two castes and four districts. All other people and areas, than these, were considered northern, southern, eastern, and western deviations of so-called pure Maithili, which was fictitiously considered as being spoken by these Maithil Brahmins/ Karna Kayasthas of Madhubani, Darbhanga, Saharsa and Supaul districts. For the last 45 years the officials, yes, I call them officials, the officials of the Maithili Department of Sahitya Akademi, did not try to accommodate the people outside this fictitiously delimited domain. But the major problem lies somewhere else. The slow poisoning was given in many disguises, be it the faulty top-heavy education system, which neglected primary and middle school education through the Mother Language Maithili, or be it through the concept of dialect, which initially conveniently declared languages like Maithili as dialects. Elementary education through Maithili was a non-starter because the Maithili books published by the Bihar State Textbook Publishing Corporation Limited seemed to be in Avahatt, it was not fit for children. Further, the authors and subjects selected for these books had a casteist bias. Maithili became a tool for caste-based politics, as once Hindi had been a tool for religion-based politics. Still, these officials, of the Maithili Department of Sahitya Akademi, are residing in their own built ghetto, bereft of any thinking or vision. Another reason for the present plight of Maithili is the policy undertaken by the tax collectors of Mithila (permanent settlement Zamindars of Cornwallis), whom the sycophants call King or the great king (Raja/ Maharaja) or Mithilesh (King of Mithila) these were mere tax collectors, the right for which were given to the highest bidders permanently; and there was not one such Mithilesh (tax collectors), but many within the borders of Mithila. These tax collectors employed mostly those two castes from four districts in their merchandise venture, and as the selection was based on sycophancy, so the work suffered. So, they imported the lathiyals from outside the Mithila region. The masses of Mithila suffered a blow from the double-edged weapon. First, from their people who did not consider them as their own and second, the outsiders looted them. Now after some time these outsiders, the non-Maithili speaking people, found it convenient to declare the masses (not belonging to the two castes from four districts) as non-Maithili speaking people, and the officials/ sycophants from those two castes from four districts tacitly agreed to it. Now these outsiders, the non-Maithili speaking people, formed a majority in many places of Mithila, and they led the rumour that Maithili, like Samskrit, is an upper-caste phenomenon, and thus they legitimized their anti-Maithili stance (all these facts have been brilliantly dealt with in the Maithili Novels of Sh. Jagdish Prasad Mandal) and they propagated the case of Hindi, first based on religion and second based on caste. But why our people fell into their trap, why these tax-collector Maharajas did not consider the masses of Mithila as their own and imported the perpetrators to loot their masses? The simple answer is that merit took a downward leap in auction-based tax collection rights allocation. We started from one and reached number three, then thirty and now three hundred!! and we are growing-... and are three hundred not out and are creating a grand history. http://www.videha.co.in/ Videha Ist Maithili Fortnightly e-Journal ISSN 2229-547X has e-published its 300th issue recently. When I began this venture in the year 2000 with a Samsung TV net appliance, and when the existing was posted on 5th of July 2004, I moved all alone. Then on 31st January 2007, I suddenly thought to include the public, as after some groundwork I was ready for it. I decided to e-publish Videha and did publish it, on a fortnightly basis, the first issue that came on 1st January 2008 tried to include all the previous posts. From all corners of this planet earth, the people tried to change the destiny of Mithila and Maithili. Now Sh. Ashish Anchinhar, Sh. Munnaji (Manoj Kumar Karn), are part of our team; and together we are three hundred not out now. With three hundred plus issues, 30,000 pages of Maithili literature (one hundred lac words corpora) creation and 11000 Tirhuta manuscript transcription we maintained a 50000-word Maithili-English vocabulary database. Now we are 350 strong, with 350 authors. Videha has faced challenges and has withstood them. We never shirk from any question and/ or problem. The question of the state of Mithila is one such question which often comes calling. We are in favour of the states of Mithila within the sovereign borders of India and Nepal. We are in favour of Mithila. But which type of Mithila, that type that we had during the Zamindari Raj, where means of sustenance and avenues of existence remained limited for a few castes? Or that culture that existed within "Aryavarta-Indian Nation newspaper" and other Industries during that Raj. A dozen families of Mithila galloped all these mostly from a single caste!! No, we are not in support of that Mithila, that Mithila where Maithili would be swallowed, as it is being swallowed by the Sahitya Akademi and the CIIL, swallowed by another dozen families. We are not in favour of that Mithila where the proceeding of the legislative assembly would be held in a language other than Maithili. Till the misgivings of the people of Mithila are addressed, we cannot support any Mithila state movement. So the people striving hard for Mithila state should sit on a protest before the advisory board members of the Sahitya Akademi/ CIIL and sing patriotic songs in front of their houses, and pressurise them not to misuse government funds by unscrupulously awarding functions of Akademi outside Mithila and not to misuse the power of assigning translation and other rights to themselves and to those people who are hell-bent upon destroying our language. The RTI application by Sh. Vinit Utpal has thwarted an attempt to strangulate Maithili, but if the supplementary work is not done the sinister design would resurface again. We request the Maithili advisory board members of Sahitya Akademi immediately return their assignments taken in their name and the name of the members of their family. Otherwise, pressure should be mounted to force these 10-member Maithili Advisory Board members to voluntarily resign from their membership in the larger interest of Maithili. So, what is our answer viz-a-viz demand of Mithila state: it is a categorical Yes. The technology-centric venture called Videha became a success. The native speakers of Maithili reside in Bihar (of India) and South-East Nepal. The net connectivity had been extremely poor in these areas. Then how the authors, new and old, started using Unicode for writing for Videha. The Nepal Side of Mithila had been using Preeti, Kantipur, Himala etc. fonts, the Kolkata Maithili-speaking population had been using the Marathi fonts and the rest had been using the fonts based on the old Remington keyboard. All these three types of fonts are ASCII fonts. We researched these fonts and provided font converters to our Nepal-based authors. We also provided phonetic and Remington-based Unicode writers to all Maithili authors, who asked for them. We asked the authors if they may send their creations in any font, but at the same time, we encouraged them to use Unicode fonts. The technical support that we provided resulted in numerous receipts of typed entries from persons like Sh. Gangesh Gunjan, who in earlier stages had been sending their creations in their handwritings. As Sh. Gangesh Gunjan was well versed in Remington keyboard typing, so he made wonderful use of the Remington Unicode typewriter. He sent that software to some of his friends too and he was courteous enough to intimate about this to us, although there was no need for that. Sh. Saketanand also used that software and sent his short story कालरात्रिश्च दारुणा in Unicode, and it was published in one of the issues of Videha. The technology-centric venture called Videha became a success because we made it simple and intelligible at a time when even the technologists were not sure about the future of this Unicode. The virtual medium was being seen with anxiety by the literary fraternity, and the copy-paste system of theft was rampant in those days. But we assured the authors that with Videha they may rest assured that the copyright thieves would not be spared, while at the same time we were firm, that only for fear of misuse of technology we should not stop our venture midway. With the internet and technology, the geographic barrier became non-existing. The end of the problem of distribution in Maithili literature became possible due to our technology-friendly attitude and it proved a boon for our Maithili language. And it made the technology-centric venture called Videha a success... It is the success of the parallel Maithili literature movement. III HONOUR KILLING OF GANGESH UPADHYAYA (FIRST BY RAMANATH JHA, THEN BY UDAYANATH JHA 'ASHOK' (A PARALLEL HISTORY OF MITHILA AND MAITHILI LITERATURE, WHY TODAY ITS NEED BEING FELT MORE INTENSELY?) I was not surprised, though I must have been when I saw a monograph on Gangesh Upadhyaya, whose copyright is being held by Sahitya Akademi, the author of the monograph is Udayanath Jha ' Ashok'. I thought that Udayanath Jha ' Ashok', who has been given Bhasha Samman also, by the same Sahitya Akademi, would do some justice. But truth and research seem elusive in Sahitya Akademi monographs, at least that I found in this monograph. I searched and searched through chapters, that now the author will show courage. But the author like Ramanath Jha seems ashamed of the roots and offspring of Gangesh Upadhyaya. He tries to confuse the issue, but there is no confusion now at least since 2009. But in 2016 Sahitya Akademi seems to carry out the casteist agenda. Udayanath Jha mockingly pretends to search his name, lineage etc, where nothing is there to search for, yet he could not muster the courage, to tell the truth, and ends up just repeating the facts in 2016 that Dineshchandra Bhattacharya already has published way back in 1958. The honour killing of Gangesh Upadhyaya by Prof. Ramanath Jha is being taken forward by Sahitya Akademi, Delhi in a most hypocritical way. Ramanath Jha's obscurantism vis-a-vis Panji is evident from one example. The inter-caste marriage in Panji was well known to him (but he chose to keep the Dooshan Panji secret- which has been released by us in 2009), and it was apparent that the great navya-nyaya philosopher Gangesh Upadhyaya married a "Charmkarini" and was born five years after the death of his father (see our Panji Books Vol I & II available at http://videha.co.in/pothi.htm ). Sh. Dinesh Chandra Bhattacharya writes in the "History of Navya-Nyaya in Mithila". (1958) "The family which was inferior in social status is now extinct in Mithila----- Gangesha's family is completely ignored and we are not expected to know even his father's name-----...As there is no other reference to Gangesa we can assume that the family dwindled into insignificance again and became extinct soon after his son's death." [1958, Chapter III pages 96-99), which is a total falsehood. He writes further that all this information was given to him by Prof. R. Jha, and he seemed thankful to him. The following excerpt from Our Panji Prabandh (parts I&II) is being reproduced below for ready reference: - महाराज हरसिंहदेव- मिथिलाक कर्णाट वंशक। ज्योतिरीश्वर ठाकुरक वर्ण-रत्नाकरमे हरसिंहदेव नायक आकि राजा छलाह। 1294 ई. मे जन्म आ 1307 ई. मे राजसिंहासन। घियासुद्दीन तुगलकसँ 1324-25 ई. मे हारिक बाद नेपाल पलायन। मिथिलाक पञ्जी-प्रबन्धक ब्राह्मण, कायस्थ आ क्षत्रिय मध्य आधिकारिक स्थापक, मैथिल ब्राह्मणक हेतु गुणाकर झा, कर्ण कायस्थक लेल शंकरदत्त, आ क्षत्रियक हेतु विजयदत्त एहि हेतु प्रथमतया नियुक्त्त भेलाह। हरसिंहदेवक प्रेरणासँ- आ ई हरसिंहदेव नान्यदेवक वंशज छलाह, जे नान्यदेव कार्णाट वंशक १००९ शाकेमे स्थापना केने रहथि- नन्दैद शुन्यं शशि शाक वर्षे (१०१९ शाके)... मिथिलाक पण्डित लोकनि शाके १२४८ तदनुसार १३२६ ई. मे पञ्जी-प्रबन्धक वर्तमान स्वरूपक प्रारम्भक निर्णय कएलन्हि। पुनः वर्तमान स्वरूपमे थोडे बुद्धि विलासी लोकनि मिथिलेश महाराज माधव सिंहसँ १७६० ई. मे आदेश करबाए पञ्जीकारसँ शाखा पुस्तकक प्रणयन करबओलन्हि। ओकर बाद पाँजिमे (कखनो काल वर्णित १६०० शाके माने १६७८ ई. वास्तवमे माधव सिंहक बादमे १८०० ई.क आसपास) श्रोत्रिय नामक एकटा नव ब्राह्मण उपजातिक मिथिलामे उत्पत्ति भेल। So, the Srotriyas as a sub-caste arose around 1800 CE as per authentic panji files. Sh. Anshuman Pandey [Gajendra Thakur of New Delhi provided me with digitized copies of the genealogical records of the Maithil Brahmins. The panjikara-s whose families have maintained these records for generations are often reluctant to allow others to pursue their records. It is a matter of 'intellectual property' to them. I was fortunate enough to receive a complete digitized set of panji records from Gajendra Thakur of New Delhi in 2007. [Recasting the Brahmin in Medieval Mithila: Origins of Caste Identity among the Maithil Brahmins of North Bihar by Anshuman Pandey, A dissertation submitted in partial fulfilment of the requirements for the degree of Doctor of Philosophy (History) in the University of Michigan 2014]. Later these Panji Manuscripts were uploaded to Videha Pothi at www.videha.co.in and google books in 2009). The so-called Maharajas of Darbhanga were permanent settlement zamindars of Cornwallis, and there were so many in British India, but in Nepal there were none. In the annexure of our book (Panji Prabandh vol I&II), we have attached copies of genealogy-based upgradation orders (proof of upgradation for cash). So, before 1800 CE, there was no srotriya sub-caste in British India and there is no such sub-caste within Maithil Brahmins in Nepal part of Mithila even today. Srotriya before that referred to following some education stream in British India, in Nepal it still has that meaning. ORIGINAL PANJI REFERENCES ARE PLACED BELOW: DOOSHAN PANJI- THE BLACKBOOK ४९. १८८/२ चर्मकारिणी माण्डर वभनियाम छादन तत्त्वचिंतामणि कारकगंगेश छादनगंगेशक नाँई रत्नाकरक-मातृक (अज्ञात) गंगेश वल्लभा भवाइ माहेश्वर जीवे २१//१० छादनसँ तत्व चिन्तामणि कारक जगद्गुरु गंगेश छादनसँ तत्व चिन्तामणि कारक गंगेशक वल्लभा चर्मकारिणी पितृ परोक्षे पञ्च वर्ष व्यतीते तत्व चिन्तामणि कारक गंगेशोत्पत्ति- चर्मकारिणी मेधाक सन्तानक लागिमे छलन्हि छादन सँ तत्व चिन्तामणि कारक मōमō गंगेश ''तत्व चिन्तामणि कारक म. म. पा. गंगेशक विषयक लेख प्राचीन पञ्जीसँ उपलब्ध�।। पितृ परोक्षे पंच वर्ष व्यतीते गंगेशोत्पत्तिः इति प्राचीन लेखनीय: कुत्रापि देवानन्द पञ्जी ३९-२ छादनसँ जगदगुरू गुंरू गंगेश सुताय वभनियामसँ जयादित्य सुत साधुकर पत्नी देवानन्द पञ्जी ३३९-३ जगदगुरू गंगेश सुत सुपन दौ भण्डारिसमसँ हरादित्य दौ.।। पुत्र सुताच गोरा जजिवाल सँ जीवे पत्नी ए सुत सन्दगहि भवेश्वर। अत्रस्थाने सुपनभ्रातृ हरिशर्म्म दारिति क्वचित् जजिवाल ग्राम देवानन्द पञ्जी ३०=५ छादनसँ उपायकारक म.म. पा. वर्द्धमान सुताच खण्डवलासँ विश्वनाथ सुत शिवनाथ पत्नी गंगेश- म.म. वर्द्वमान/ सुपन/ हरिशर्म्म Gangesh, the author of the Tattvachintamani, wrote one text equivalent to 12,000 texts. Now come to the fact mentioned in the Panji- it clearly states that Gangesh of Tattvachintamani was born five years after the death of his father and he married a tanner, so why did Ramanath Jha hide this from Dinesh Chandra Bhattacharya? Vardhamana, son of Gangesh, calls Gangesh sukavikairavakananenduh. But the conspiracy under which the poems of a famous scholar like Gangesh are not available today is clear from the example given above. Vasudev of Bengal was a classmate of Pakshadhar Mishra of Mithila, he came to study in Mithila, passed the shalaka examination and received the title of sarvabhaum. Vasudeva memorised the tattvachintamani of Gangesh and the nyayakusumanjali karika of Udayana. Pakshadhar and other Mithila teachers did not allow writing (copying) tattvachintamani. Raghunath Shiromani, a disciple of Vasudeva, took the right of certification after he defeated his guru Pakshadhar Mishra in a scriptural debate (shastrartha). The Navya Nyaya school was founded in Navadvipa by Vasudeva-Raghunath. Pakshadhar Mishra was a contemporary of Vidyapati (distinct from the Padavali writer who was of the pre-Jyotirishwar period) who wrote in Sanskrit and Avahatta. And the arrival of Mithila students of Bengal from Bengal stopped after Raghunath Shiromani. Gangesh Upadhyaya enjoyed 'param guru' as well as 'jagad guru' titles, the highest titles of the time and as per Panji only Vacaspati Mishra II was the other person who enjoyed the title of 'param guru'. The extinction of Navya-Nyaya School from Mithila, as described above, was a revenge of nature against the honour killing of Gangesh Upadhyaya and his family. [Translation of the Maithili Short Story, 'Shabdashastram' (based on the true Panji records of Gangesh Upadhyaya) was done by the author Gajendra Thakur himself: published as 'The Science of Words' Indian Literature Vol. 58, No. 2 (280) (March/April 2014), pp. 78-93 (16 pages) Published By: Sahitya Akademi] 3 Kamlanand Jha has written a book on Nagarjun (Maithili's Yatri) where he credits him with giving a new direction to Maithili literature. Chandradhar Sharma Guleri wrote 'Usne kaha tha', a marvellous short story in Hindi, the best one of its time. But his literary corpora is very little in quantity, so if anyone tried to give him credit for giving direction to Hindi short story writing would make himself a laughing stock. And Yatri's Maithili literary corpora is even thinner than Guleri's. Moreover, Rajkamal Chaudhary calls him of the medieval age (Rajkamal Monograph, Subhash Chandra Yadav, Page no 14). He wrote Chitra (25 poems). He wrote, rather hurriedly published his 'Patrahin Nagn Gachh' (44 poems) for Sahitya Akademi Award in Maithili, which he got in 1968. After that he stopped writing in Maithili, so how can he influence anybody when after getting the award one stops writing in that language? This is one example of his instability so far as his ideology is concerned. He became a Buddhist monk when he left for Sri Lanka and became a Brahmin again when he returned after a 2nd sacred thread ceremony performed in his village. This is another example of his instability so far as his ideology is concerned. Kamlanand Jha does not know Maithili literature. His comments should be exposed, as he tries to give a bad name to the great tradition of Maithili literature. There were mainstream writers, but there were writers of parallel tradition also (see below Annexures 1 & 2). He has confused the Sanskrit and Avahatt Vidyapati Thakkurah with the Padavali writer pre-Jyotirishwar Vidyapti. He should read the writing of Vijay Kumar Thakur, a leftist historian, who has given ample light on pre-Jyotirishwar Vidyapati. [My article on Vidyapati in Prabandh Nibandh Samalochna Vol.II (available in Videha Archive) covers all these, the logo of Videha is the photograph of Pre-Jyotirishwar Vidyapati, sketched by Panak Lal Mandal, recipient of Videha Samman for fine arts.] Annexure 1 चन्दा झा (१८३१-१९०७), मूलनाम चन्द्रनाथ झा, ग्राम- पिण्डारुछ, दरभंगा। कवीश्वर, कविचन्द्र नामसँ विभूषित। ग्रिएर्सनकेँ मैथिलीक प्रसंगमे मुख्य सहायता केनिहार। कृति- मिथिला भाषा रामायण, गीति-सुधा, महेशवाणी संग्रह, चन्द्र पदावली, लक्ष्मीश्वर विलास, अहिल्याचरित आऽ विद्यापति रचित संस्कृत पुरुष-परीक्षाक गद्य-पद्यमय अनुवाद। १ न्यायक भवन कचहरी नाम। सभ अन्याय भरल तेहि ठाम॥ सत्य वचन विरले जन भाष। सभ मन धनक हरन अभिलाष॥ कपट भरल कत कोटिक कोटि। ककर न कर मर्यादा छोटि॥ भन कवि 'चन्द्र' कचहरी घूस। सभ सहमत ककरा के दूस। २ रतिया दिन दुरगतिया हे भोला! गैया जगतक मैया हे भोला कटय कसैया हाथ हाकिम भेल निरदैया हे भोला कतय लगायब माथ बरसा नहि भेल सरसा हे भोला अरसा कए गेल मेह रतिया दिन दुरगतिया हे भोला जन तन जिवन संदेह मुखिया बड़ बड़ सुखिया हे भोला अन्नबक दुखिया डोल के सह कान कनखिया हे भोला सुखिया बिरना टोल ३ अस्त्र शस्त्र रोक आब मामिलाक मारि। भाइ भाइकेँ पढ़ैछ नित्य नित्य गारि॥ ठक्क लोक हक्क पाब साधु कैँ उजारि। दैव जे ललाट लेख के सकैछ टारि? चाही नहि धन, ललितवाम, पकवान जिलेबी, मनोविनोदक हेतु अमरपति सदन न टेबी। ई अन्तर अभिलाष हमर करुणामयि देवी भक्ति भाव सँ सतत अहिंक पदपंकज सेवी॥ अन्न महग, डगमग अछि भारत, हयत कोना निस्तारा उत्तर पश्चिम भूमि अगम्या पर्वत असह तुषारा। धर्म-विरोधी सहसह करइछ, कुमत कथा विस्तारा करथु कृपा जगजननी देवी महिसीवाली तारा॥ मिथिला की छलि की भय गेलि, याज्ञवल्क्य मुनि, जनक नृपतिवर ज्ञान भक्ति सौं गेलि। वाचस्पति मिश्रादि जगद्गुरु निर्जित बौद्ध झमेलि से शारदा स्वर्ग जनि गेली बढ़ल कुविद्या केलि। वर्णाश्रम विधि ककरहु रुचि नहि श्रुति श्रद्धाकेँ ठेलि पूजा पाठ ध्यान वकमुद्रा सभटा वंचन खेलि। कह कविचन्द्र कचहरी भरिदिन बहुत भोग कर जेलि, कलह कराय धर्म धन नाशे कलिक दरिद्रा चेलि। ४ मय केहन भेल घोर हे शिव! गोधन विपति, धरम अवनति देखि कत हिय करब कठोर॥ साधु समाज राजसँ पीड़ित अति हरषित-चित चोर। अकुलिन लोकेँ धरणि परिपूरित कुलिन समादर थोड़॥ धरम सुनीति प्रीति ककरहु नहि, खलहिक चलइछ जोर। कन्द-मूल-फल सेहो अब दुरलभ अन्न गेल देशक ओर॥ किछु शुभ साधन बनि नहि पड़इछ थाकल मन, मति भोर। कह कवि चन्द्र हमर दुख मेटत होयत कृपा शिव तोर॥ ५ सुमरु सुमरु मन! शंकर समय भयंकर जानि। ककर हृदय नहि कलुषित शासन कलि नृप पानि॥ केवल शिव करुणाकर सेवयित नहि जन हानि॥ भक्ति कल्पलति जानह परम परशमनि खानि॥ कतहु विषयमे न लागह त्यागह अनुचित मानि। सुखसौँ अन्त विलसबह 'चन्द्र' चूड़ रजधानि॥ ANNEXURE 2 १ फतुरीलालक अकाली कविता/ अकाली कवित्त फतूरीलालक फसली बर्ख १२८१ (१८७३-७४ ई. सन) सालक अकाली कविता [ग्रियर्सन (मैथिली क्रेस्टोमैथी एण्ड वोकाबुलेरी)] साल एकासिक वर्णन सुनू/ चौदिस पड़ल अकाल भेल बरिसात खिन्न ऐ सालक/ कहाँ लगि वरनौँ हाल रोहिणि आदि थीक बरिसातक/ जेहिँ एला तेहिँ गेला म्रिगिसिरा मन पुरल मनोरथ/ दै झीसा किछु गेला अरदड़ा आडम्बर भारी/ गरजत हैं चहु ओर पुख रुख राखल धरती केर/ भेल बरखा केर ओर पुनर्वसु थिक बड़ पुनीता/ ओहो बड़ा कसरेस बिआ बिड़ारक जे किछु उपटल/ धनि बरिसल असरेस मघा भेल मंगाहिआ कल्लर/ जगभरि के नै जान पुरबा पूर पछ नै राखल/ ककरा करब बखान उत्तरा आइ जाय घर बैसल/ सपतौं लै नै बून हथिआ शृंग मुँड़ दै मूनल/ तनिकौं लागल घून चितरा चित मित नै राखल/ ओहो भेल डाकू धाती नाक रंगौलन्हि सभै नछत्तर/ दोम नुकौलन्हि खाती जोतिष पढ़ि-पढ़ि जे जन ऐलाह/ साधि-साधि भूगोल रेखागणित बीजसौँ ओआकिफ/ तनि कौँ कच्ची बोल श्रीराम कृपागति ओहो ने जानथि/ जाहि कृपा सभ काज पानिक प्रश्न कबौं जौं पुछिऐन्हि/ सेहो कहैत होइन्हि लाज जेहिखन नदी नाल नै भरले/ तेहिखन रौदी सरती बिना जले जग किछु नै उपजल/ दगध भेल छथि धरती ते नर रौदीक आगम बूझल/ जे छल कृषि किसान दैव बेपच्छ पच्छ नै राखल/ जड़ि कटौलक धान कोदो मड़ुआ एको ने उपजल/ नै उपजल किछु साम गम्भड़ी गद्दरि खेतहि सुखाएल/ भेल विधाता वाम मर्तभुवनमे के कर रच्छा/ कहाँ जाइ केँ भागि सुखल पताल हाल नै ओतहुँ/ सगरहुँ लागल आगि धृक जीवन ओइ नृपति इन्द्रकेँ/ जे रोकल गहि पानि जीवा-जन्तु विकल पुहमीमे/ ताकेँ हो नै आनि रवी-राय एको नै उपजल/ ने खेढ़ी औ चीन घर-घर सोच करै नर-नारी/ दुरदिन भेल अब बीन धनिक लोक सभ मनहि मगन छथि/ राखथि बहुतो ढेरि हसोथि रुपैया घर कै राखथि/ महगी भेल अब सेर केओ कुरथी खेत मासु बेसाहल/ जाहि कौड़ि छल अपना कतेक जना हरिवासर ठानल/ भात बहुत कै सपना कतेक जना मिलि जनेर बेसाहल/ निरधन बैसल तकइ भेल धनन्तिरि दूइ फसिल जग/ राहड़ि आओर मकइ काल पड़ल तिरहुतिमे भारी/ तेँ ई बहि गेल हावा घर-घर मगन करै नर-नारी/ फाँकि मकइ केर लावा मालिक और महाजन सभकेँ/ घर-घर ढेरी अन्न लोक बुझाओन ओहो तकै छथि/ मूँह गरीबक सन समै देखि बनिआँ सभ सनकल/ डरेँ लगौलक टट्टी सुन्न दोकान सहरमे परि गेल/ सुन्न भेल सभ चट्टी सूखल गात बात भौ लटपट/ कतेक बात अब सहना नर नारी सभ सान तेआगल/ बिकरी भेल अब गहना मँगटीका खूटी औ तड़की/ नकमुन्नी नै नाक कटसरि बिछिआ औ झिमझिमिआँ/ बाजूबन्द औ बाक चन्द्रहार, हैकल औ सिकड़ी/ और घमौरिक दाना सूति, नवग्रह औ पचखँड़ी/ लशुनी भेल निदाना तापर दर्बजात नै बचले/ करम भेल निखट्ट तमघैल, अढ़ैआ औ पिकदानी/ नै तसला औ तटू बाटी, बट्टा औ पनबट्टा/ भोजन करैक थारी माधव सीहि सहित सोबरना/ नै बचले घर झाड़ी धन संपति घर किछु नै बचले/ सभटा पड़ि गेल बंधक तैओ भूख छुटल नै ककरो/ एहन पेट भेल खंधक दैब अंश अबतरल कम्पनी/ जा पर राम सहाए मिथिलापुर बूड़न जब लागय/ से सुनि पहुँचल धाए खरिद अनाज जहाजहिँ बोझल/ भरती करि करि बोरा सदर तिलंगा ओआ पर भरती/ और ओलाइति गोरा हाजीपुरमे लाख हजारम/ कै लाखन हइ पटना बाजितपुर सुलतानपुर गोला/ नै जानत हौँ केतना गाड़ी, बैल, छकड़, ऊँट बिहारे/ उबहत हइ सभ दाना मिसर कन्हैआ केँ पोखरन मे/ पहिलुक अड़ी ठेकाना श्री लक्ष्मीश्वर सिंह नृपति/ महाराज मिथिलेश अचल राज दड़िभंगा/ श्रीपति हरहिं कलेश गाड़ी बैल लाखन हजारन/ ताकेँ परे घड़ेर पहिलुक गोला मधुबन, भौड़ा/ जफरा और अड़ेर बेनीपट्टी, औ पचमहला/ कुम्हरौल औ कमतौल हरिहरपुर, पिड़ारुछ बरनौं/ कारज केतेकाँ बरिऔल बारि पोखरि, बिरसायर बरनौं/ पण्डौल को नै जान नवहद, सरिसो ओ भटपुरा, ता सोँ दक्षिण उजान झंझारपुर, महरैल, कन्हौली/ मधेपुर हइ खास बेनीपुर, कमान, नरैहिओ/ बरनौं फूलपरास झमना हइ जगजानित जगमे/ महथा और बछौर दुहबी औ महिनाथपुर/ और जैनगर तक हइ दौर बलदेबपुर औ ढंगा बरनौं/ मिरजापुर लघु हाट सीबीपटी औ कपसीआ/ सदर गोला सौराठ गुरबाकेँ परबरसी हाकिम/ कर तिरहुतमे आके नै तो मरते कत नर नारी/ बाले बचे सुखा के कत मुरदा गरदा मै मिलते/ असंख जीव चल जाता सर समधी केँ संभा ने लम्भन/ नै बचते जलदाता सभकेँ सभ उपछै भै गेल/ धुर पोखर औ सड़क रहि गेल ब्राह्मण सोती पण्डित/ कायथ पछिमा ठाकुर फरक केओ ओरसिअर नाम लिखाओल/ केओ मोहर्रिर भेँट धर्म्मकार्यमे लुटथि रुपैआ/ तेँ भेल सभ केर भेँट केओ जमानत दैकेँ बचलाह/ जिनका अमला नेही ककरो मारि केँत पिठि तोड़ैन्हि/ उतरैन्हि जन्मक ठेही ककरहुँ गारत गात सुखाओल/ बहुतो होअय चलाना मातुपिता घर परिजन रोवय/ बाबू गेलाह जहलखाना ककरहुँ घर भेल खानातलासी/ भेट मोहर्रिर घोँछ केओ अदालतिमे डिड़िआइ छथि/ ककरहुँ उपरैन्हि मोँछ एतना सुनि हाकिम रिसिआओल/ तेँ लागल जन ठीका नाक रंगौलन्हि सभै मोहर्रिर/ लागल चूनक टीका जोग, बिकौआ,लौकिक वंशक/ किरिआमंत सुकूल गाछी, बाँस, बैल औ महिसि/ जगह कैल भकफूल ताहि रुपैआ सौँ करा गजर/ लै कोरट सौँ रीन तेँ कारन बहुतो घर झगड़ा/ भाइ भतीजा भीन आए लाट बहादुर/ औ दड़िभंगा धाम बाबू औ बबुआन सहित मिलि/ कीन्ह कुमैटी खान ...... ...... ...... एह सभ संग बैठि कै/ जाय कुमैटी भेल अजब कार सरकार के/ तिरहुत पहुँचल रेल बाजितपुरसँ सड़क निकालै/ आये दौड़िह दौड़ी हहेया गंडक पुल बन्हाए/ आए चौरही चौरी धर्म्मधीर, बलबीर, कम्पनी/ जानत हइ जगदीशन लछमी सागर के पोखरिमे/ ताहि कीन्ह इसटीसन बड़ा लाट कलकत्तेवाले/ श्रीदुर्गा होए संग आगरा के छोटा लाल बहादुर/ बैठे सभ एकरंग जुटे कमिश्नर और कलट्टर/ बोलहिं बात नेअंट एह पाचो इजलास पर बैठे/ संग जात ऐह जंट खबरि गए अखबार मौँ/ मैथिल के एह हाल सुनहु फिरंगी अवण दैकेँ/ मेटहु दुख के जाल हुकुम दीन्ह दोउ लाट को/ सुनहु हमारे बैन मदति करहु रेआआनको/ क्या बैठे हौ चैन बड़ा लाट दोउ बीर उठाए/ साहेब औ जरनैल मेजर मजिस्टर और कलट्टर/ संगजात करनैल देस देससौँ अन्न मंगाओल/ दीन्ह सभनि के दाम महामूँग, गहुम औ चाउर/ बजड़ा और बदाम डोली, पटना औ भटसारे/ दीली औ अजमेर आगरा और कान्हपुर ढाका/ जहाँ अन्न के ढेर भए रमाना अन्न तिरहुतिमे/ लादि गाड़ी और बैल गज, तुरंग, गदहा औ छकड़/ संग सिपाही छैल छत्री औ पैठान मोगल सभ/ बाँकाबीर रजपूत सोभा बरनि नजात हइ/ जैसे हनुमन्त दूत आगे सफर ओ मैना/ पलटन वीर जमान बरछी औ तरुआरि गहै/ कर गहै तीर कमान चढ़ि तुरंग पर करै कवाइत/ जमादार होए संग सोभा बरनि न जात हइ/ देखि तखनुक रंग करत काम सभ धाममे/ टूट अट सभ लूट ढाहि भीड़ गाछी सहित/ बान्धै सड़क औ पूल जिले पटने औ भटसारे/ प्रगन्ना महिसौर तहाँ बसहिँ एक सज्जन/ तेहि घर जा लक्ष्मी दौड़ श्री द्वारिका प्रशादित/ धर्म्मधीर बुद्धिमान तहसीलदार कोरट के खासा/ जानहिं सकल जहान बाबु इसरी प्रसाद दियौटी/ सो मधुबनमे आए हुकुम दीन्ह सुपरनडेंटकेँ/ टोले टोले होए जाए मन पँचा मनगर भै लिए/ बहुतो लिए खैरात धन्य धन्य अंगरेज बहादुर/ सभकेँ जूटल गात गरिब, गनी, गुरबा, करु जै, जै/ ब्राह्मण देत असीस श्री रघुनाथ बढ़ै बदसाही/ गदी लाख बरीस फतुर लाल कवि बरनत हैँ/ एह रौदी के हाल गौरमिंट गौरनल बहादुर/ तिरहुति राखहिँ बहाल २ राधाकृष्ण चौधरी (मिथिलाक इतिहास) (विदेह पेटारमे उपलब्ध) "१७७० क अकाल मिथिलाक इतिहासमे अद्वितीय छल आ मिथिलाक जनसंख्या घटिकेँ एक दम्म कम्म भऽ गेल छल। १८७३-७४ मे पुनः एकटा ओहने अकाल मिथिलामे भेल छल जकर विवरण हमरा फतुरी लाल कविक अकाली कवित्तसँ भेटइयै, अकाली कवित्त अप्रकाशित अछि। अकालकेँ दूर करबाक हेतु आ मजूरकेँ रोजी देबाक हेतु ताहि काल रेलगाड़ीक योजना चलाओल गेल जकरा सम्बन्धमे फतुरीलाल लिखैत छथि- 'कम्पनी अजान जान कलनको बनाय शान। पवन को छकाय मैदानमे धरायो है॥ छोड़त है अड़ादार बड़ा बीच धाय धाय। सभेलोग हटाजात केताजात खड़ा है॥ तारकी अपारकार खबरि देत वार वार। चेत गयो टिकसदार रेल की उवाई है॥ करत है अनोर शोर पीछे कत लगत छोर। जोर की धमाक से मशीन की बड़ाई है॥ कम्पूसन पहरदार कोथी सब अजबदार। कोइला भर करल कार धूआँसे उड़ायो है॥ बाजा एक बजन लाग हाथी अस। पिकन लाग जैसा जो चढ़नदार वैसाधर पायो है॥ गंगाकेँ भरल धार उतरि गयो फतूर पार गाड़ीकी। अजबकार कवित्त यह बनाया है॥' " -Gajendra Thakur, editor, Videha (be part of Videha www.videha.co.in -send your WhatsApp no to +919560960721 so that it can be added to the Videha WhatsApp Broadcast List.) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ८.विदेह मिथिलाक खोज विदेह मिथिलाक खोज वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू। Always refresh the pages for viewing new issue of VIDEHA. प्रस्तुत अछि विदेह, मिथिला, तीरभुक्ति आ तिरहुतक नामसँ विख्यात वर्त्तमान भारत आ नेपालमे पसरल माटिक प्राचीन आ नव स्थापत्य, चित्रांकित अभिलेख आ मूर्त्तिकलाक एकटा छोट संग्रह। ऐ संग्रहकेँ पूर्ण करबाक हेतु अपन बहुमूल्य संग्रह editorial.staff.videha@gmail.com केँ पठाउ। आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार, सम्बन्धित फोटोग्राफर आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। फोटो सभ पठेबा लेल धन्यवाद पाठकगण। साभार। विशेष विवरण देखबा लेल क्लिक करू, दर्शनीय मिथिला, Brochure 1, Brochure 2, Brochure 3 , Brochure 4, Brochure 5 (मैथिली साहित्य संस्थान लिंक), IGNCA ASI (Cultural Heritage of Mithila- search keyword Mithila), Temple Survey Project ASI- English आ Hindi .पूर्णतः अव्यवसायिक उद्देश्य आ मात्र एकेडमिक प्रयोग लेल। भुवनेश्वरी भगवतीपुर (Madhubani, Bihar) बौद्ध तारा सँ समानता नाकमे कुण्डल देखू सूर्य भगवतीपुर (Madhubani Bihar) विष्णु भगवतीपुर (Madhubani, Bihar) दुर्गा, पोखरिसँ भेटल, ओतहि बहेरी मन्दिर (बजारसँ दक्षिण)मे स्थापित हरद्वार मन्दिर घनश्यामपुर (दरभंगा)- चोरि भऽ गेल गौरीशंकर, जमथरि, हैंठी बाली, मधुबनी गौरीशंकर, जमथरि, हैंठी बाली, मधुबनी गौरीशंकर, जमथरि, हैंठी बाली, मधुबनी गौरीशंकर, जमथरि, हैंठी बाली, मधुबनी गौरीशंकर, जमथरि, हैंठी बाली, मधुबनी गौरीशंकर, जमथरि, हैंठी बाली, मधुबनी बाइसी-बसैटी, अररिया मिथिलाक्षर ताम्रलेख बाइसी-बसैटी, अररिया मिथिलाक्षर ताम्रलेख बाइसी-बसैटी, अररिया मिथिलाक्षर ताम्रलेख बाइसी-बसैटी, अररिया मिथिलाक्षर ताम्रलेख धरहरा, बनमनखी, पूर्णियाँ, नरसिंह अवतार धरहरा, बनमनखी, पूर्णियाँ, नरसिंह अवतार पूरणदेवी, पूर्णियाँ बिदेश्वर स्थान अभिलेख, मधुबनी अन्ध्राठाढी अभिलेख, मधुबनी बुद्ध अष्टधातु, सिसव बसंतपुर, बगहा 12 शताब्दी, कोइलख, मधुबनी अग्नि बिदेश्वर स्थान, मधुबनी बुद्ध, मुंगेर अहिल्या स्थान अन्ध्राठाढी, मधुबनी अशोक स्तंभ, बसाढ, वैशाली बुद्ध अवलोकितेश्वर तारा, भागलपुर बसाढ, वैशाली बुद्ध भूमिस्पर्श बुद्ध, ताम्र बुद्ध मस्तक, सुलतानगंज वैशाली मूर्त्ति चामुण्डा नाग-नागिनी, मुंगेर मुकुटधारी बुद्ध, अंतीचक, भागलपुर नाचैत गणेश, 10म शताब्दी, दरभंगा दरभंगा म्युजियम दरभंगा म्युजियम दुर्गा, कार्त्तिकेय 10म शताब्दी, भीट भगवानपुर, अन्ध्रा ठाढी गणेश बुद्ध गौतम बुद्ध, वैशाली हरिहर बुद्ध चिड़ैकेँ खुआबैत महिला, राजमहल लौरिया नन्दनगढ, अशोक स्तंभ लोमश सुदामा गुफा मुंगेर नागराज तीर्थंकर कुमारिल भटट फेकेलाह, नालन्दा विक्रमशिला विश्वविद्यालय, भागलपुर ठाढ बुद्ध पार्वती रामायण रामपुरवा वृषभ रामपुरवा बुद्धक अवशेष संकिसा सप्तमातृका सर्वतो भद्र मण्डल सूर्य सूर्य सूर्यक संगी सूर्य, मधुबनी आ भागलपुर मूर्त्ति मूर्त्ति मूर्त्ति, वैशाली उमा माहेश्वर, कल्याणसुन्दर वैशाली वृषभ शीर्ष वैशाली, शालभंजिका भागलपुर विष्णु बुद्धा पाँखियुक्त्त महिला अहिल्या अष्टयोगिनी मन्दिर, सहरसा बनगंगा दरभंगा दरभंगा नगर, 1934 दरभंगा मेडिकल कॉलेज दुल्हदुल्हिन मन्दिर, जनकपुर गण्डीश्वर गंगासागर पोखरि, मधुबनी हनुमान मन्दिर, मधुबनी हरिहरस्थान मधुबनी हॉस्पीटल जनकपुर जानकी मन्दिर जानकी मन्दिर जानकी मन्दिर, सीतामढी जानकी मन्दिर, सीतामढी जिला स्वास्थ्य कार्यालय राजबिराज, नेपाल कलनेश्वर बाबा कपिलेश्वर कोषलेखाकार्यालय, राजबिराज, नेपाल मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा लक्ष्मीश्वर पैलेस, 1934 माध्यमिकविद्यालय , जनकपुर महेन्द्र चौक, जनकपुर जनकपुर मंडप मिथिला, 1988 भूकम्प पगलाबाबा धर्मशाला, जनकपुर, नेपाल पंडौल अहल्या मधुबनी बस स्टैंड राज हेड ऑफिस, 1934 राज हॉस्पीटल, दरभंगा, 1934 सौराठ सभा शिव मन्दिर, 1934 शिवशंकर सिनेमा, मधुबनी श्यामा मन्दिर विद्यापति मूर्त्ति, बिस्फी उग्रतारा, तारास्थान, महिषी, सहरसा विद्यापति स्मारक, बिस्फी विस्फी, उदना महादेव बिस्फी, विश्वेश्वरी भगवती अहल्या मन्दिर, अहियारी अशोक स्तंभ, वैशाली स्तूप अशोक स्तंभ, वैशाली बलिराजपुर किला पूर्वी गेट बलिराजपुर किला मीनार चण्डी स्थान, बिराटपुर, सहरसा गाँधी पोखरि, ढाका, मोतिहारी गाँधी विद्यालय, ढाका, मोतिहारी गिरिजा स्थान, मधुबनी हरिहर मन्दिर, सोनपुर जैन मन्दिर, भागलपुर जैन मन्दिर, वैशाली कमलादित्य स्थान कपिलेश्वर शिव मन्दिर लौरिया नन्दनगढ मदनेश्वर शिव मन्दिर मन्दार पर्वत, बाँका मोतिहारी सत्याग्रह स्मारक परमेश्वरी मन्दिर, ठाढी, मधुबनी रामजानकी मन्दिर, सीतामढी सत्याग्रह स्मारक, सीतामढी शांति स्तूप, वैशाली उच्चैठ भगवती उच्चैठ मन्दिर सिंघेश्वर स्थान, मधेपुरा सूर्यधाम, परसा उग्रतारा मन्दिर, महिषी, सहरसा वैशाली स्तूप विक्रमशिला विश्वविद्यालय, भागलपुर विराटपुर मन्दिर, मधेपुरा वृषभ शीर्ष, रामपुरवा सिंह शीर्ष, रामपुरवा शरभ, नेपाल पाँखियुक्त्त देवी, वैशाली बाबा बडेश्वर, देवना, बनगाँव वट वृक्ष, बनगाँव भगवान विष्णु, देवना, बनगाँव शास्त्रार्थ स्थल,तारास्थान महिषी शास्त्रार्थ स्थल,तारास्थान महिषी तारास्थान महिषी माता तारा, तारास्थान महिषी उग्रतारा (खादर वाणी तारा) मूर्ति, महिषी वशिष्ठ मुनि, तारास्थान महिषी आवर्धित काली उच्चैठ बौद्धदेवी तारा वारी समस्तीपुर भगवती देकुली भगवती गिरिजा फुल्हर भगवती मृणमूर्ति गन्धबारि भगवती वारी समस्तीपुर भुवनेश्वरी कोर्थ देवीकाली कोर्थ गंगामूर्ति नगरडीह दरभंगा गोसाउनि मन्दिर कोर्थ हैहट्ट देवी हाबीडीह काली उच्चैठ महिषासुरमर्दिनी बहेरी दरभंगा महिषासुरमर्दिनी हाबीडीह महिषासुरमर्दिनी नाहर-भगवतीपुर उमा म्लेच्छमर्दिनी मिर्जापुर दरभंगा यमुना भैरव बलिया मधुबनी भैरव, भैरव-बलिया नटराज, तारालाही शिव-पार्वती मन्दिर, कपिलेश्वरस्थान शिव-पार्वती मन्दिर, कपिलेश्वरस्थान शिव मन्दिर, सिंगिया, विस्पी उमामाहेश्वर, महादेवमठ उमामाहेश्वर, तिरहुत विष्णु, भवानीपुर विष्णु, भीठ भगवानपुर विष्णु, जयनगर विष्णु, लदहो विष्णु, साहो-पररी, हाबीडीह शेषशायी विष्णु, सवास, मुजफ्फरपुर वराह मूर्ति, तिलकेश्वरस्थान मिथिलाक्षर अभिलेख, विष्णु बुद्ध मूर्ति भगवती उच्चैठ, बेनीपट्टी भगवती वाणेश्वरी, भंडारीसम चामुण्डा मन्दिर, कटरा, मुजफ्फरपुर अष्टभुज गणेश, हाबीडीह अष्टभुज गणेश, कोर्थ गंगा, आन्ध्रा-ठाढ़ी महिषासुरमर्दिनी, दुर्गा म्लेच्छमर्दिनी मन्दिर, मिर्जापुर, दरभंगा नटराज राममन्दिर, अहिल्यास्थान सेहनी, वैशाली, विष्णु तिलक-यज्ञोपवीतधारी रूपनगर शिव मन्दिर सूर्य, देकुली सूर्य मूर्ति, डिलाही सूर्य मूर्ति, विष्णु, बरुआर उमामाहेश्वर यमुना, आन्ध्रा-ठाढ़ी सिमरौनागढ़ मूर्ति आदि काली, चैनपुर सहरसा चैनपुर सहरसा- मिथिलाक एकमात्र नीलकंठ मन्दिर, संगमे आदिकालीन भव्य काली-मन्दिर सेहो एहि गाममे अछि। महाशिवरात्रि आ कालीपूजा बड़ धूमधामसँ चैनपुरमे होइत अछि। त्योथागढ़क स्वामी माध्वानन्द कौलाचार्य काली मन्दिर त्योथा गढ़ लग। पुरान गढ़। एकर पूबमे ब्रह्मपुराक बाबा हरिहरनाथ महादेव मन्दिर आ दक्षिणमे उच्चैठ भगवती छथि। त्योथागढ़क दसमुखी काली त्योथा गढ़ लग। पुरान गढ़। एकर पूबमे ब्रह्मपुराक बाबा हरिहरनाथ महादेव मन्दिर आ दक्षिणमे उच्चैठ भगवती छथि। कोइलख (मधुबनी) देवीक मन्दिर अकौर, बेनीपट्टी, भगवती दुर्गा, भगवतीपीठ अकौर, बेनीपट्टी, भगवती दुर्गा, भगवतीपीठ १.अष्टभुज गणेश, कोर्थ २.शिव मन्दिर, सिंघिया, बिस्फी १. बौद्ध देवी तारा, वारी, समस्तीपुर २.उग्रतारा मन्दिर, महिषी, सहरसा १.भगवती, वारी २.भगवती, देकुली १. भगवती गिरिजा, फुलहर २.काली, उच्चैठ १. भैरव, भैरव बलिया २. उमामाहेश्वर, महादेवमठ १. देवीकाली, कोर्थ २. गुसाउनि स्थल मन्दिर, कोर्थ १. गणेश, लहेरियासराय २.उमामाहेश्वर ३. नटराज, ४. विष्णु, तिलक, जनउ धारी, सेहान, वैशाली १. गंगा मूर्ति, नगरडीह, दरभंगा २. भगवती मृण्मूर्ति, गन्धवारि १. हैहट्ट देवी, हाबीडीह २.भुवनेश्वरी, कोर्थ १. कथित काली, उच्चैठ, २.अष्टभुज गणेश, कोर्थ १. महिषासुर मर्दिनी, हाबीडीह, २.उमा, म्लेच्छमर्दिनी, मिर्जापुर, दरभंगा १.महिषासुरमर्दिनी, भगवतीपुर, नाहर, महिषासुर मर्दिनी, बहेरी, दरभंगा १. म्लेच्छमर्दिनी भगवती, मिर्जापुर, दरभंगा २. राम मन्दिर, अहिल्यास्थान १. म्लेच्छमर्दिनी भगवती, मिर्जापुर, दरभंगा २.सिंहेश्वर स्थान, मधेपुरा १. नटराज, तारालाही २. उमामाहेश्वर १_शेषसायी, सवास, मुजफ्फरपुर, २_नटराज_तारालाही ३_ भगवती ४_ उमा माहेश्वरी १-शिव पार्वती मन्दिर, कपिलेश्वर स्थान २. सूर्य मूर्ति डिलाही १_ सूर्यमूर्ति, विष्णु बरुआर २. गंगा, आन्ध्रा ठाढ़ी १_उच्चैठ भ्हगवती, बेनीपट्टी २_महिषासुरमर्दिनी, दुर्गा ३_ चामुण्डा मन्दिर, कटरा, मुजफ्फरपुर ४._भगवती वानेश्वरी, भण्डारिसम १. वराहमूर्ति, तिलकेश्वरस्थान, २.विष्णु, भवानीपुर १. विष्णु, जयनगर २.विष्णु, भीठ भगवानपुर १_विष्णु, लदहो, २.सूर्य, देकुली १_विष्णु_साहो परड़ी, स्थापित-हाभीडीह २.बुद्ध-विष्णु मूर्ति अभिलेख १_विष्णु, सेहान, २_वराह ३_गणेश ४.शिव मन्दिर_रूपनगर १_यमुना, आन्ध्रा ठाढ़ी, २.अष्टभुज गणेश, हाबीडीह १_यमुना, भैरव बलिया, २_शेषसायी, सवास, मुजफ्फरपुर, ३_नटराज_तारालाही ४_ भगवती ५_ उमा माहेश्वरी कथित, काली, उच्चैठ, बेनीपट्टी मूर्ति (मिथिला क्षेत्र) सम्भवतः सूर्य वेणुगोपाल, मिथिला विष्णु, जाले, दरभंगा विष्णु विष्णु, ओझौल, दरभंगा मिथिलाक खोज ई आलेख हमर दशकसँ ऊपरक मिथिलाक यात्राक उपरान्तक सूत्र-वृत्तान्त अछि आ ऐमे ऐ सभ स्थानक स्थानीय निवासी आ गाइड सभक अकथनीय योगदान छन्हि । कखनो कालतँ भाड़ाक गाड़ीक ड्राइवर लोकनि सेहो नीक गाइड सिद्ध भेला।-गजेन्द्र ठाकुर "मिथिलायदयश्च मध्यंते रिपवो इति मिथिला नगरी" - मिथिला जतऽ शत्रुकेँ मथल जाइत अछि- पाणिनीक विवरण। किला आ गढ़ बलिराजपुर किला- मधुबनी जिलाक बाबूबरही प्रखण्डसँ ५ किलोमीटर पूब बलिराजपुर गाम अछि। एकर दक्षिण दिशामे एकटा पुरान किलाक अवशेष अछि। किला चारि किलोमीटर नमगर आ एक किलोमीटर चाकर अछि। दस फीटक मोट देबालसँ ई घेरल अछि। असुरगढ़ किला- मिथिलाक दोसर किला मधुबनी जिलाक पूब आ उत्तर सीमा पर तिलयुगा धारक कातमे महादेव मठ लग ५० एकड़मे पसरल अछि। जयनगर किला- मिथिलाक तेसर किला अछि भारत नेपाल सीमा पर प्राचीन जयपुर आ वर्त्तमान जयनगर लग। दरभंगा लग पंचोभ गामसँ प्राप्त ताम्र अभिलेख पर जयपुर केर वर्णन अछि। नन्दनगढ़- बेतियासँ १२ मील पश्चिम-उत्तरमे ई किला अछि। तीन पंक्त्तिमे १५ टा ऊँच डीह अछि। लौरिया-नन्दनगढ़- नन्दनगढ़सँ उत्तर स्थित अछि, एतऽ अशोक स्तंभ आ बौद्ध स्तूप अछि। देकुलीगढ़- शिवहर जिलासँ तीन किलोमीटर पूब हाइवे केर कातमे दू टा किलाक अवशेष अछि। चारू दिस खधाइ अछि। कटरागढ़- मुजफ्फरपुरमे कटरा गाममे विशाल गढ़ अछि, देकुली गढ़ जकाँ चारू कात खधाइ खुनल अछि। नौलागढ़-बेगुसरायसँ २५ किलोमीटर उत्तर ३५० एकड़मे पसरल ई गढ़ अछि। जयमंगलगढ़- बेगूसरायमे बरियारपुर थानामे काबर झीलक मध्य एकटा ऊँच डीह अछि। एतऽ ई गढ़ अछि। नाओकोठी (मझौल) गाम लग ई गढ़ अछि। मंगलगढ़- समस्तीपुर जिलामे हसनपुर ब्लॉकमे दुधपुरा बजार लग देओढ गाम लग। भगवान बुद्धक उपदेश एतऽ भेल, स्थानीय राजा मंगलदेवक आग्रहपर बुद्ध किछु दिन एतऽ निवास सेहो केलन्हि। अलौलीगढ़- खगड़ियासँ १५ किलोमीटर उत्तर अलौली गाम लग १०० एकड़मे पसरल ई गढ़ अछि। कीचकगढ़- पूर्णिया जिलामे डेंगरघाटसँ १० किलोमीटर उत्तर महानन्दा नदीक पूबमे ई गढ़ अछि। बेनूगढ़- टेढ़गाछ थानामे कवल धारक कातमे ई गढ़ अछि। वरिजनगढ़- बहादुरगंजसँ छह किलोमीटर दक्षिणमे लोनसवरी धारक कातमे ई गढ़ अछि। नेऊरी- दरभंगाक बिरौल प्रखण्डसँ १३ किलोमीटर पश्चिममे एकटा गढ़ अछि जे लोरिकक मानल जाइत अछि। बुद्ध कुन्दग्राम- हाजीपुरसँ बत्तीस किलोमीटर उत्तर-पूर्वमे बसाढ़-वैशाली आ लगमे वासोकुण्ड लग गाम गढ़-टीलासँ २ कि.मी. उत्तर-पूर्व अछि कुन्दग्राम , जतऽ जैनक २४म तीर्थंकर महावीरक जन्म भेल छलन्हि। एतऽ बुद्धक छाउर, अभिषेक पुषकरणी (राजा अभिषेकसँ पूर्व एतऽ नहाइत रहथि), अशोक स्तम्भ आ संसद-भवन (राजा विशालक गढ़) अछि। पजेबागढ़ वनही टोल- एतऽ एकटा बुद्ध मूर्त्ति भेटल छल, मुदा ओकर आब कोनो पता नै अछि। ई स्थल सेहो रखबारी गामक लगे अछि। मंगलगढ़- समस्तीपुर जिलामे हसनपुर ब्लॉकमे दुधपुरा बजार लग देओढ गाम लग। भगवान बुद्धक उपदेश एतऽ भेल, स्थानीय राजा मंगलदेवक आग्रहपर बुद्ध किछु दिन एतऽ निवास सेहो केलन्हि। मुसहरनियां डीह- अंधरा ठाढ़ीसँ ३ किलोमीटर पश्चिम पस्टन गाम लग एकटा ऊँच डीह अछि। बुद्धकालीन एकजनियाँ कोठली, बौद्धकालीन मूर्त्ति, पाइ, बर्त्तनक टुकड़ी आ पजेबाक अवशेष एतऽ अछि। अकौर- मधुबनीसँ २० किलोमीटर पश्चिम आ उत्तरमे अकौर गाममे एकटा ऊँच डीह अछि, जतऽ बौद्धकालक मूर्त्ति अछि। लौरिया-नन्दनगढ़- नन्दनगढ़सँ उत्तर स्थित अछि, एतऽ अशोक स्तंभ आ बौद्ध स्तूप अछि। विक्रमशिला- भागलपुरमे स्थित प्राचीन विश्वविद्यालय। भागलपुर जिलाक अंतीचक गाममे राजा धर्मपालक बनाओल बुद्ध विश्वविद्यालय अछि। १०८ व्याख्याता लेल रहबाक स्थान आ बाहरसँ पढ़य बला लेल सेहो स्थान एतऽ निर्मित अछि। चम्पानगर- भागलपुरक पश्चिममे, आब नगरसँ सटि गेल अछि। ई जैन लोकनिक एकटा पवित्रस्थल अछि, एतऽ महावीर तीनटा बस्सावास केने रहथि। दू टा जैन मन्दिर एतऽ अछि, जे जैनक बारहम तीर्थंकर वासुपूज्य नाथकेँ समर्पित अछि। महावीर विदेहमे छह टा बस्सावास बितेलन्हि। बर्खा ऋतुमे चारि मास एक ठाम निवासकेँ बस्सावास कहल जाइ छल। बुद्ध एकोटा बस्सावास विदेहमे नै बितेलन्हि, मुदा वैशाली नगरीमे आम्रपालीक उद्यानमे लिच्छवीगणकेँ सन्देश देने छला। आम्रपालीसँ भिक्षा ग्रहण कऽ बुद्ध गेला वेणुमती करय चारि मासक बस्सावास। अभिलेख गौरी-शंकर स्थान, मधुबनी जिलाक जमथरि गाम आ हैंठी बाली गामक बीच ई स्थान गौरी आ शङ्करक सम्मिलित मूर्त्ति आ ऐपर मिथिलाक्षरमे लिखल पालवंशीय अभिलेख। बिदेश्वरस्थानसँ २-३ किलोमीटर उत्तर दिशामे ई स्थान अछि। भीठ-भगवानपुर अभिलेख- राजा नान्यदेवक पुत्र मल्लदेवसँ संबंधित अभिलेख एतऽ अछि। मधुबनी जिलाक मधेपुर थानामे ई स्थल अछि। भगीरथपुर- पण्डौल लग भगीरथपुर गाममे अभिलेख अछि जइसँ ओइनवार वंशक अंतिम दुनू शासक रामभद्रदेव आ लक्ष्मीनाथक प्रशासनक विषयमे सूचना भेटैत अछि। मंदार पर्वत- बांका स्थित स्थलमे मिथिलाक्षरक गुप्तवंशीय ७म् शताब्दीक अभिलेख अछि। समुद्र मंथनक हेतु मंदारक प्रयोग भेल छल। निकटमे बौंसीमे जैनक बारहम तीर्थंकर वासुपूज्य नाथक दूटा मूर्त्ति अछि, पैघ मूर्ति लाल पाथरक अछि तँ दोसर काँसाक जकर सोझाँ दूटा पदचिन्ह अछि। जैनक बारहम तीर्थंकर वासुपूज्य नाथक जन्म चम्पानगरमे आ निर्वाण एत्तै भेल छलन्हि। बिदेश्वर- मधुबनी जिलामे लोहनारोड स्टेशन लग स्थित शिवधामक स्थापना महाराज माधवसिंह केलन्हि। तइ युगक मिथिलाक्षरक अभिलेख सेहो एतऽ अछि। बसैटी (बाइसी-बसैटी), अररिया अभिलेख - पूणियाँमे श्रीनगर लग मिथिलाक्षरक ई अभिलेख मिथिलाक पहिल महिला शासक रानी इद्रावतीक राज्यकालक वर्णन करैत अछि। रानी इन्द्रावती (१७८४-१८०२) जे अकालक समय फूड-फॉर-वर्क आ अन्य कल्याणकारी कार्यक प्रारम्भ केने रहथि। जयनगर किला- मिथिलाक तेसर किला अछि भारत नेपाल सीमा पर प्राचीन जयपुर आ वर्त्तमान जयनगर लग। दरभंगा लग पंचोभ गामसँ प्राप्त ताम्र अभिलेख पर जयपुर केर वर्णन अछि। विष्णु हुलासपट्टी- मधुबनी जिलाक फुलपरास थानाक जागेश्वर स्थान लग हुलासपट्टी गाम अछि। कारी पाथरक विष्णु भगवानक मूर्त्ति एतऽ अछि। पिपराही- लौकहा थानाक पिपराही गाममे विष्णुक मूर्त्तिक चारू हाथ भग्न भऽ गेल अछि। मधुबन- पिपराहीसँ १० किलोमीटर उत्तर नेपालक मधुबन गाममे चतुर्भुज विष्णुक मूर्त्ति अछि। कमलादित्य स्थान- अंधरा ठाढ़ी लगमे कमलादित्य स्थानक विष्णु मंदिर कर्णाट राजा नान्यदेवक मंत्री श्रीधर दास द्वारा स्थापित भेल। झंझारपुर अनुमण्डलक रखबारी गाममे वृक्षक नीचाँ राखल विष्णु मूर्त्ति, गांधारशैली मे बनाओल गेल अछि। मटिहानी- विष्णु मन्दिर जनकपुर- बृहद् विष्णुपुराणमे मिथिलामाहात्म्यमे जनकपुर क्षेत्रक वर्णन अछि। सत्रहम शताब्दीमे संत सूर किशोरकेँ अयोध्यामे सरयू धारमे राम आ जानकीक दू टा भव्य मूर्त्ति भेटलन्हि, जकरा ओ जानकी मन्दिर, जनकपुरमे स्थापित कऽ देलन्हि। वर्त्तमान मन्दिरक स्थापना टीकमगढ़क महारानी द्वारा १९११ ई. मे भेल। नगरक चारूकात यमुनी, गेरुखा आ दुग्धवती धार अछि। राम नवमी (चैत्र शुक्ल नवमी),जानकी नवमी (वैशाख शुक्ल नवमी) आ विवाह पंचमी (अगहन शुक्ल पंचमी) पर एतऽ मेला लगैए। अंधरा-ठाढ़ीक स्थानीय वाचस्पति संग्रहालय- गौड़ गामक यक्षिणीक भव्य मूर्त्ति एतऽ राखल अछि। गौतम तीर्थ- कमतौल स्टेशनसँ ६ किलोमीटर पश्चिम ब्रह्मपुर गाम लग एकटा गौतम कुण्ड पुष्करणी अछि। मुंगेरक पूब 'सीता-कुण्ड'गर्म कुण्ड अछि, सीता जी एत्तै पृथ्वीमे समाहित भेल छली। ठंढ़ा जलक कुण्ड 'रामकुण्ड', लक्ष्मण कुण्ड, भरत कुण्ड, आ शत्रुघ्न कुण्ड सेहो अछि, भैयारीमे बड्ड मिलान। से मिलान बाबू गढ़ नारिकेलमे सेहो छै, बेसी पढ़ल लिखल गाममे से आब कहाँ? हलावर्त्त- जनकपुरसँ ३५ किलोमीटर दक्षिण पश्चिममे सीतामढ़ी नगरमे हलवेश्वर शिव मन्दिर आ जानकी मन्दिर अछि। एतसँ डेढ़ किलोमीटर पर पुण्डरीक क्षेत्रमे सीताकुण्ड अछि। हलावर्त्तमे जनक द्वार हर चलेबा काल सीता भेटलि छली। राम नवमी (चैत्र शुक्ल नवमी) आ जानकी नवमी (वैशाख शुक्ल नवमी) पर एतऽ मेला लगैए। फुलहर-मधुबनी जिलाक हरलाखी थानामे फुलहर गाममे जनकक पुष्पवाटिका छल जतऽ सीता फूल लोढ़ै छली। धनुषा- जनकपुरसँ १५ किलोमीटर उत्तर धनुषा स्थानमे पीपरक गाछक नीचाँ एकटा धनुषाकार खण्ड पड़ल अछि। रामक तोड़ल ई धनुष अछि। ऐसँ पूब वाणगंगा धार बहैए जे लक्ष्मण द्वारा वाणसँ उद्घाटित भेल छल। सुग्गा- जनकपुर लग जलेश्वर शिवधामक समीप सुग्गा ग्राममे शुकदेवजीक आश्रम अछि। शुकदेवजी जनकसँ शिक्षा लेबाक हेतु मिथिला ऐल छला- ऐ ठाम हुनका ठहरेबाक व्यवस्था भेल छल। सिंहेश्वर- मधेपुरासँ ५ किलोमीटरपर गौरीपुर गाम लग सिंहेश्वर शिवधाम अछि। कपिलेश्वर- कपिल मुनि द्वार स्थापित महादेव मधुबनीसँ ६ किलोमीटर पश्चिममे अछि। कुशेश्वर- समस्तीपुरसँ उत्तर-पूब, लहेरियासरायसँ ६० किलोमीटर दक्षिण-पूब आ सहरसासँ २५ किलोमीटर पश्चिम ई एकटा प्रसिद्ध शिवस्थान अछि। एतऽ चिड़ै-अभ्यारण्य सेहो अछि जतऽ उज्जर आ कारी गैबर, लालसर, दिघौछ, मैल, नकटा, गैरी, गगन, सिल्ली, अधानी, हरिअल, चाहा, करन, रतबा चिड़ै सभ नवम्बरसँ मार्च धरि देखबामे अबैए। सिमरदह- थलवारा स्टेशन लग शिवसिंह द्वारा बसाओल शिवसिंहपुर गाम लग ई शिवमन्दिर अछि। सोमनाथ- मधुबनी जिलाक सौराठ गाममे सभागाछी लग सोमदेव महादेव छथि। मदनेश्वर- मधुबनी जिलाक अंधरा ठाढ़ीसँ ४ किलोमीटर पूब मदनेश्वर शिव स्थान अछि। चण्डेश्वर- झंझारपुरमे हरड़ी गाम लग चण्डेश्वर ठाकुर द्वारा स्थापित चण्डेश्वर शिवस्थान अछि। शिलानाथ- जयनगर लग कमला धारक कातमे शिलानाथ महादेव छथि। उग्रनाथ- मधुबनीसँ दक्षिण पण्डौल स्टेशन लग भवानीपुर गाममे उगना महादेवक शिवलिंग अछि। विद्यापतिकेँ प्यास लगलन्हि तँ उगनारूपी महादेव जटासँ गंगाजल निकालि जल पियेलखिन्ह। विद्यापतिक हठ केलापर ऐ स्थान पर उगना हुनका अपन असल शिवरूपक दर्शन देलखिन्ह। उच्चैठ छिन्नमस्तिका भगवती- कमतौल स्टेशनसँ १६ किलोमीटर पूर्वोत्तर उच्चैठमे कालिदास भगवतीक पूजा करैत छला। भगवतीक मौलिक मूर्त्ति मस्तक विहीन अछि। उग्रतारा- मण्डन मिश्रक जन्मभूमि महिषीमे मण्डनक गोसाउनि उग्रतारा छथि। भद्रकालिका- मधुबनी जिलाक कोइलख गाममे भद्रकालिका मंदिर अछि। चामुण्डा- मुजफ्फरपुर जिलामे कटरागढ़ लग लक्ष्मणा वा लखनदेइ धार लग दुर्गा द्वारा चण्ड-मुण्डक वध कएल गेल। ओइ स्थानपर ई मन्दिर अछि। परसा सूर्य मन्दिर- झंझारपुरमे सग्रामसँ पाँच किलोमीटर पूर्व परसा गाममे साढ़े चारि फीटक भव्य सूर्य मूर्त्ति भेटल अछि। चैनपुर सहरसा- मिथिलाक एकमात्र नीलकंठ मन्दिर, संगमे आदिकालीन भव्य काली-मन्दिर सेहो ऐ गाममे अछि। महाशिवरात्रि आ कालीपूजा बड़ धूमधामसँ चैनपुरमे होइत अछि। धरहरा, बनमनखी, पूर्णियाँमे नरसिंह अवतारक स्थान अछि, एकटा खोह जकाँ पैघ पाया अछि जइमे जे किछु फेकबै तँ बड़ी काल धरि गों-गोँ अबाज होइत रहत। ई स्थान आब नरसिंह भगवानक मूर्ति आ मन्दिरक कारणसँ बेस विकसित भऽ गेल अछि। एत्तै नरसिंह पाया फाड़ि अवतरित भेल छला। बिसफी- मधुबनी जिलाक बेनीपट्टी थानामे कमतौल रेलवे स्टेशनसँ ६ किलोमीटर पूब आ कपिलेश्वर स्थानसँ ४ किलोमीटर पश्चिम बिसफी गाम अछि। ज्योतिरीश्वर पूर्व महाकवि विद्यापतिक जन्म-स्थान ई गाम अछि। मिथिलाक बीस टा सिद्ध पीठ- १.गिरिजास्थान (फुलहर, मधुबनी), २.दुर्गास्थान (उचैठ, मधुबनी), ३.रहेश्वरी (दोखर, मधुबनी), ४.भुवनेश्वरीस्थान (भगवतीपुर, मधुबनी), ५. भद्रकालिका (कोइलख, मधुबनी), ६.चमुण्डा स्थान (पचाही, मधुबनी), ७.सोनामाइ (जनकपुर, नेपाल), ८.योगनिद्रा (जनकपुर, नेपाल), ९.कालिका स्थान (जनकपुर स्थान), १०.राजेश्वरी देवी (जनकपुर, नेपाल), ११.छिनमस्ता देवी (उजान, मधुबनी), १२.बनदुर्गा (खररख, मधुबनी), १३.सिधेश्वरी देवी (सरिसव, मधुबनी), १४.देवी-स्थान (अंधरा ठाढ़ी, मधुबनी), १५.कंकाली देवी (भारत नेपाल सीमा आ रामबाग प्लेस, दरभंगा), १६.उग्रतारा (महिषी, सहरसा), १७.कात्यानी देवी (बदलाघाट, सहरसा), १८.पुरन देवी(पूर्णियाँ), १९.काली स्थान (दरभंगा), २०.जैमंगलास्थान(मुंगेर), ५२. जनकपुर परिक्रमाक १५ स्थल आ ओतुक्का मुख्य देवता १. हनुमाननगर- हनुमानजी, २.कल्याणेश्वर- शिवलिंग, ३.गिरिजा-स्थान- शक्ति, ४.मटिहानी- विष्णु मन्दिर, ५.जालेश्वर- शिवलिंग, ६.मनाई- माण्डव ऋषि, ७. श्रुव कुण्ड- ध्रुव मन्दिर, ८.कंचन वन- कोनो मन्दिर नै मात्र मनोरम दृश्य, ९.पर्वत- पाँच टा पर्वत, १०.धनुषा- शिव धनुषक टुकड़ी, ११.सतोखड़ी- सप्तर्षिक सात टा कुण्ड, १२.हरुषाहा- विमलागंगा, १३. करुणा- कोनो मन्दिर नै मात्र मनोरम दृश्य, १४. बिसौल- विश्वामित्र मन्दिर आ १५.जनकपुर। दरभंगा कैथोलिक चर्च- १८९१मे स्थापित ई चर्च १८९७ केर भूकम्पमे क्षतिग्रस्त भऽ गेल। एकरा होली रोजेरी चर्च सेहो कहल जाइए। सेंट फांसिस ऑसिसी चर्च मुजफ्फरपुरमे अछि। भिखा सलामी मजार- गंगासागर पोखरि दरभंगाक महारपर ई मजार अछि। मकदूम बाबाक मजार:ललित नारायण मिथिला विश्ववविद्यालय आ कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय दरभंगाक बीच स्थित ई मजार हिन्दू आ मुस्लिम मतावलम्बीक एकटा पावन स्थान अछि। दरभंगा टावर मस्जिद इस्लाम मतावलम्बीक एकटा भव्य मस्जिद आ धार्मिक स्थल अछि। ९.विदेह मिथिला रत्न विदेह मिथिला रत्न वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू। Always refresh the pages for viewing new issue of VIDEHA. भारत आ नेपालक माटिमे पसरल मिथिलाक धरती प्राचीन कालेसँ महान पुरुष ओ महिला लोकनिक कर्मभूमि रहल अछि। प्रस्तुत अछि मिथिला रत्नक एकटा छोट संग्रह। ऐ संग्रहकेँ पूर्ण करबाक हेतु अपन बहुमूल्य संग्रहकेँ editorial.staff.videha@gmail.com केँ पठाउ। आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार, सम्बन्धित फोटोग्राफर आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। फोटो सभ पठेबा लेल धन्यवाद पाठकगण। साभार। पूर्णतः अव्यवसायिक उद्देश्य आ मात्र एकेडमिक प्रयोग लेल। विशेष विवरण देखबा लेल क्लिक करू VIDEHA_346, VIDEHA_347, VIDEHA_366 आ मिथिला रत्न/ मिथिला चित्रकला/ मिथिलाक पाबनि तिहार (कथा) आ मिथिलाक संगीत । वैदिक जनक 'वैदेह राजा' ऋगवेदिक कालक नमी सप्याक नामसँ छलाह, यज्ञ करैत सदेह स्वर्ग गेलाह, ऋगवेदमे वर्णन अछि। ओ इन्द्रक संग देलन्हि असुर नमुचीक विरुद्ध आ ताहिमे इन्द्र हुनका बचओलन्हि।शतपथ ब्राह्मणक विदेघमाथव आ पुराणक निमि दुनू गोटेक पुरोहित गौतम छथि से दुनू एके छथि आ एतएसँ विदेह राज्यक प्रारम्भ। माथवक पुरहित गौतम मित्रविन्द यज्ञक/ बलिक प्रारम्भ कएलन्हि आ पुनः एकर पुनःस्थापना भेल महाजनक-२ क समयमे याज्ञवल्क्य द्वारा। निमि गौतमक आश्रमक लग जयन्त आ मिथि -जिनका मिथिला नामसँ सेहो सोर कएल जाइत छन्हि, मिथिला नगरक निर्माण कएलन्हि। निमीक जयन्तपुर वर्तमान जनकपुरमे छल, मिथीक मिथिलानगरीक स्थान एखन धरि निर्धारित नहि भए सकल अछि, अनुमानित अछि जनकपुरक लग । �सीरध्वज जनक� सीताक पिता छथि आ एतयसँ मिथिलाक राजाक सुदृढ़ परम्परा देखबामे अबैत अछि। �कृति जनक� सीरध्वजक बादक 18म पुस्तमे भेल छलाह। कृति हिरण्यनाभक पुत्र छलाह आ जनक बहुलाश्वक पुत्र छलाह। याज्ञवलक्य हिरण्याभक शिष्य छलाह, हुनकासँ योगक शिक्षा लेने छलाह। कराल जनक द्वारा एकटा ब्राह्मण युवतीक शील-अपहरणक प्रयास भेल आ जनक राजवंश समाप्त भए गेल (संदर्भ अश्वघोष-बुद्धचरित आ कौटिल्य-अर्थशास्त्र)। वाल्मीकि सीतापति राम लव कुश विदेघ माथव शतपथ ब्राह्मणक विदेघ माथवक विदेह आगमन, आगिक सदानीरासँ आगाँ नहि बढ़बाक चर्च। शतपथ ब्राह्मणक विदेघमाथव आ पुराणक निमि दुनू गोटेक पुरोहित गौतम छथि से दुनू एके छथि आ एतएसँ विदेह राज्यक प्रारम्भ। वाजसनेयी याज्ञवल्क्य याज्ञवल्क्य मिथिलाक दार्शनिक राजा कृति जनकक दरबारमे छलाह। हुनकर माताक वा पिताक नाम सम्भवतः वाजसनी छलन्हि। ओना हुनकर पिता देवरातकेँ मानल जाइत छन्हि। याज्ञवल्क्य १. शुक्ल यजुरवेद, २. शतपथ ब्राह्मण, ३.बृहदारण्यक उपनिषद आ ४.याज्ञवल्क्य स्मृतिक दृष्टा/लेखक छथि। अंगराज कर्ण वैशेषिक दर्शन कणाद वैशेषिक दर्शन कणाद महावीर जैन 599-527 महावीर विदेहमे छह टा बस्सावास बितेलन्हि। गौतम बुद्ध BC 563-483 ओना तँ महावीर विदेहमे छह टा बस्सावास बितेलन्हि मुदा बुद्ध एकोटा नै मुदा मिथिलामे बौद्ध धर्मक प्रभाव पछाति बढ़ल। बुद्ध वैशाली नगरीमे आम्रपालीक उद्यानमे लिच्छवीगणकेँ सन्देश देने छलाह। चाणक्य BC 350-283 धर्म आ विधिक क्षेत्रमे कौटिल्यक अर्थशास्त्र आ याज्ञवल्क्य स्मृतिमे बड्ड समानता अछि जे चाणक्यक मिथिलावासी होयबाक प्रमाण अछि।
अर्थशास्त्रमे(१.६ विनयाधिकारिके प्रथमाधिकरणे षडोऽध्यायः इन्द्रियजये अरिषड्वर्गत्यागः) कराल जनकक पतनक सेहो चर्चा अछि।
तद्विरुद्धवृत्तिरवश्येन्द्रियश्चातुरन्तोऽपि राजा सद्यो विनश्यति- यथा दाण्डक्यो नाम भोजः कामाद् ब्राह्मण कन्यायमभिमन्यमानः सबन्धराष्ट्रो विननाश करालश्च वैदेहः,...। चन्द्रगुप्त मौर्य चाणक्यक शिष्य BC 340-293 चाणक्यक शिष्य आर्यभट्ट वैज्ञानिक 476-550 पञ्जीमे आर्यभट्टक विवरण- (२७) (३४/०८) महिपतिय: मंगरौनी माण्डैर सै पीताम्ब र सुत दामू दौ माण्ड्र सै वीजी त्रिनयनभट्ट: ए सुतो आर्यभट्ट: ए सुतो उदयभट्ट: ए सुतो विजयभट्ट ए सुतो सुलोचनभट (सुनयनभट्ट) ए सुतो भट्ट ए सुतो धर्मजटीमिश्र ए सुतो धाराजटी मिश्र ए सुतोब्रह्मजरी मिश्र ए सुतो त्रिपुरजटी मिश्र ए सुत विघुजटी मिश्र ए सुतो अजयसिंह: ए सुतो विजयसिंह: ए सुतो ए सुतो आदिवराह: ए सुतो महोवराह: ए सुतो दुर्योधन सिंह: ए सुतो सोढ़र जयसिंहर्काचार्यास्त्रस महास्त्र विद्या पारङगत महामहोपाध्या य: नरसिंह:।। सिद्ध सरहपाद 700-780 सरहपाद-�सिद्धिरत्थु मइ पढ़मे पढ़िअउ ,मण्ड पिबन्तोँ बिसरउ एमइउ�।मिथिलामे अक्षरारम्भ सिद्धिरस्तु जकर पूर्वमे सिद्धिरस्तु, गणेशजीक अंकुश आँजी, लिखल जाइत अछि। मिथिलामे ई धारणा जे माँड़ पिलासँ स्मरण शक्ति क्षीण होइत अछि; ई सरहपादक मिथिलावासी होएबाक प्रमाण अछि। आदि शंकराचार्य 788-820 मंडन मिश्रसँ शास्त्रार्थ म.म.गोनू झा 1050-1150 करमहे सोनकरियाम गोनू झाक वर्णन पञ्जीमे अछि- महामहोपाध्याय धूर्तराज गोनू। पञ्जीक अनुसार पीढ़ीक गणना कएलासँ गोनूक जन्म ( गोनूक सोनकरियाम करमहे-वत्समे २४म पीढ़ी चलि रहल अछि) आर्यभट्टक बाद (आर्यभट्टक माण्डर-काश्यपमे ३९ म पीढ़ी चलि रहल अछि) आ विद्यापतिक पहिने (विद्यापतिक विषएवार बिस्फी-काश्यपमे १४म पीढ़ी चलि रहल अछि) लगभग १०५० ई.मे सिद्ध होइत अछि। कारण एहि तरहेँ एक पीढ़ीकेँ ४० सँ गुणा केला सँ आर्यभट्टक जन्म लगभग ४७६ ई. आ विद्यापतिक जन्म लगभग १३५० ई. अबैत अछि जे इतिहाससम्मत अछि। कृष्णाराम आ हाथी सुबरन मिथिलाक यादव (गुआर) जातिक लोकदेवता कृष्णाराम अपन हाथी सुबरनपर सवार। वंशीधर ब्राह्मण छेछन महराज मिथिलाक डोम जातिक लोकदेवता दीना- भदरी मिथिलाक मुसहर जातिक लोकदेवता ज्योति पँजियार राजा सलहेस मिथिलाक दूधवंशी (दुसाध) जातिक लोकदेवता दुलरा दयाल गोनू झाक गाम भरौड़ाक राजकुमार, "बहुरा गोढिन नटुआ दयाल" लोककथाक मलाह कथानायक। भरौड़ामे एखनो हिनकर गहबर छन्हि। कालिदास बोधि कायस्थ विद्यापतिक पुरुष-परीक्षामे मृत्युकालमे गंगा नदीक आयब आ बोधि-कायस्थकेँ अपनामे समेबाक खिसा वर्णित अछि जे बादमे विद्यापतिकेँ लऽ कऽ सेहो प्रचलित भेल। राधाकृष्ण आ करताराम मल्लिक मिथिलाक अमता घरेनक प्रारम्भिक गबैय्या महाराज नान्यदेव मिथिलाक कर्णाट वंशक 1097 ई. मे स्थापना। 1147 ई. मे मृत्यु। मल्लदेव मिथिलाक कर्णाट वंशक संस्थापक नान्यदेवक पुत्र। मिथिलाक गंधवरिया राजपूत मल्लदेवकेँ अपन बीजीपुरुष मानैत छथि। महाराज हरसिंहदेव मिथिलाक कर्णाट वंशक। ज्योतिरीश्वर ठाकुरक वर्ण-रत्नाकरमे हरसिंहदेव नायक आकि राजा छलाह। 1294 ई. मे जन्म आ 1307 ई. मे राजसिंहासन। घियासुद्दीन तुगलकसँ 1324-25 ई. मे हारिक बाद नेपाल पलायन। मिथिलाक पञ्जी-प्रबन्धक ब्राह्मण, कायस्थ आ क्षत्रिय मध्य आधिकारिक स्थापक, मैथिल ब्राह्मणक हेतु गुणाकर झा, कर्ण कायस्थक लेल शंकरदत्त, आ क्षत्रियक हेतु विजयदत्त एहि हेतु प्रथमतया नियुक्त्त भेलाह। हरसिंहदेवक प्रेरणासँ- आ ई हरसिंहदेव नान्यदेवक वंशज छलाह, जे नान्यदेव कार्णाट वंशक १००९ शाकेमे स्थापना केने रहथि- नन्दैद शुन्यं शशि शाक वर्षे (१०१९ शाके)... मिथिलाक पण्डित लोकनि शाके १२४८ तदनुसार १३२६ ई. मे पञ्जी-प्रबन्धक वर्तमान स्वरूपक प्रारम्भक निर्णय कएलन्हि। पुनः वर्तमान स्वरूपमे थोडे बुद्धि विलासी लोकनि मिथिलेश महाराज माधव सिंहसँ १७६० ई. मे आदेश करबाए पञ्जीकारसँ शाखा पुस्तकक प्रणयन करबओलन्हि। ओकर बाद पाँजिमे (कखनो काल वर्णित १६०० शाके माने १६७८ ई. वास्तवमे माधव सिंहक बादमे १८०० ई.क आसपास) श्रोत्रिय नामक एकटा नव ब्राह्मण उपजातिक मिथिलामे उत्पत्ति भेल। मंत्री गणेश्वर मिथिलाक कर्णाट वंशक नरेश हरसिंहदेवक मंत्री। सुगतिसोपानमे मिथिलाक सांवैधानिक इतिहासक वर्णन। मीरां साहेब मिथिलाक मुस्लिम लोकनिक बीच प्रसिद्ध लोकगाथाक नायक। अमर बाबा मिथिलाक मलाह जातिक लोकदेवता। गरीबन बाबा मिथिलाक धोबि जातिक लोकदेवता। लालबन बाबा मिथिलाक चर्मकार जातिक लोकदेवता। बंठा चमार कारिख पजियार लोरिक राय रणपाल अयाची मिश्र पन्द्रहम शताब्दीक भवनाथ मिश्र बड पैघ नैय्यायिक छलाह आ कहियो ककरोसँ कोनो वस्तुक याचना नहि कएलन्हि, ताहि लेल सभ हुनका अयाची मिश्र कहए लगलन्हि। शंकर मिश्र "बालोऽहं जगदानन्द न मे बाला सरस्वती। अपूर्णे पंचमे वर्षे वर्णयामि जगत्त्रयम् ॥" क वक्ता। पन्द्रहम शताब्दीमे भवनाथ मिश्रक घरमे मधुबनी जिलाक सरिसव ग्राममे शंकर मिश्रक जन्म भेल।शंकर मिश्र महाराज भैरव सिंहक कनिष्ठ पुत्र राजा पुरुषोत्तमदेवक आश्रित छलाह। एकर वर्णन रसार्णव ग्रंथमे भेटैत अछि। शंकर मिश्र कवि, नाटककार, धर्मशास्त्री आ न्याय-वैशेषिकक व्याख्याकार रहथि।शंकर मिश्र ग्रंथावली- १.गौरी दिगम्बर प्रहसन २.कृष्ण विनोद नाटक ३.मनोभवपराभव नाटक४.रसार्णव५.दुर्गा-टीका६.वादिविनोद७.वैशेषिक सूत्र पर उपस्कार८.कुसुमांजलि पर आमोद९.खण्डनखण्ड-खाद्य टीका १०.छन्दोगाह्निकोद्धार ११.श्राद्ध प्रदीप १२.प्रायश्चित प्रदीप। पक्षधर मिश्र विद्यापतिक समकालीन जयदेव मिश्र, जे अपन अकाट्य तर्कक कारण पक्षधर मिश्रक नामसँ जानल गेलाह। मैथिलीक आदिकवि विद्यापति (ज्योतिरीश्वर पूर्व) मैथिलीक आदिकवि विद्यापति ( विद्यापतिक चित्र: विदेह चित्रकला सम्मानसँ पुरस्कृत पनकलाल मण्डल द्वारा) कवीश्वर ज्योतिरीश्वर(लगभग १२७५-१३५०)सँ पूर्व (कारण ज्योतिरीश्वरक ग्रन्थमे हिनक चर्च अछि), मैथिलीक आदि कवि। संस्कृत आ अवहट्ठक विद्यापति ठक्कुरःसँ भिन्न। सम्भवतः बिस्फी गामक बार्बर कास्टक श्री महेश ठाकुरक पुत्र। समानान्तर परम्पराक बिदापत नाचमे विद्यापति पदावलीक (ज्योतिरीश्वरसँ पूर्वसँ) नृत्य-अभिनय होइत अछि।ज्योतिरीश्वर पूर्व विद्यापति:- कश्मीरक अभिनव गुप्त (दशम शताब्दीक अन्त आ एगारहम शताब्दीक प्रारम्भ)- ग्रन्थ �ईश्वर प्रत्याभिज्ञा- विभर्षिणी� मे विद्यापतिक उल्लेख करै छथि। श्रीधर दासक सदुक्तिकर्णामृत, (रचना ११ फरबरी १२०६, मध्यकालीन मिथिला, वि.कु. ठाकुर)- श्रीधर दास विद्यापतिक पाँच टा पद उद्धृत केने छथि जे विद्यापतिक पदावलीक भाषा छी। �जाव न मालतो कर परगास तावे न ताहि मधुकर विलास।� आ �मुन्दला मुकुल कतय मकरन्द� ज्योतिरीश्वर (१२७५-१३५०) षष्ठः कल्लोल- ॥अथ विद्यावन्त वर्णना॥ अष्टमः कल्लोलः- ॥अथ राज्य वर्णना॥ मे उल्लेख। महाराज शिव सिंह मिथिला नरेश विद्यापतिक आश्रयदाता ओइनवार वंशक महाराज शिव सिंह। उगना महादेव महादेव विद्यापतिक अहिठाम गीत सुनबा लेल उगना नोकर बनि रहैत छलाह। महाकवि विद्यापति ठाकुर 1350-1435 (मैथिलीक आदि कवि ज्योतिरीश्वर-पूर्व विद्यापतिसँ भिन्न, संस्कृत आ अवहट्ठमे लेखन) महाकवि विद्यापति ठाकुर 1350-1435 विद्यापति ठक्कुरः 1350-1435 विषएवार बिस्फी-काश्यप (राजा शिवसिंहक दरबारी) आ संस्कृत आ अवहट्ठ लेखक। कीर्तिलता, कीर्तिपताका, पुरुष परीक्षा, गोरक्षविजय, लिखनावली आदि ग्रंथ समेत विपुल संख्यामे कालजयी रचना। ई मैथिलीक आदिकवि विद्यापति (ज्योतिरीश्वर पूर्व)सँ भिन्न छथि। (चित्रक आधार मिथिला सांस्कृतिक परिषद, कोलकाता द्वारा कोनो कलाकारसँ बनबाओल , कलाकारक नाम ६०-७० सालसँ अज्ञात कारणसँ गुप्त राखल गेल अछि।) शंकरदेव 1449-1569 पारिजातहरण। जगज्ज्योतिर्मल्ल १६१३-३७ हरगौरी विवाह नाटक, कुञ्ज विहार नाटक। सुनीति कुमार चटर्जी मैथिली प्रेमी 1890-1977 अरविन्द घोष मैथिली प्रेमी 1872-1950 विद्यापति गीतक अंग्रेजीमे अनुवाद डॉ. सर आशुतोष मुखर्जी मैथिली प्रेमी 1864-1924 सर जी. ए. ग्रियर्सन मैथिली प्रेमी 1851-1941 कवि चन्दा झा 1831-1907 मूलनाम चन्द्रनाथ झा, ग्राम- पिण्डारुछ, दरभंगा। कवीश्वर, कविचन्द्र नामसँ विभूषित। ग्रिएर्सनकेँ मैथिलीक प्रसंगमे मुख्य सहायता केनिहार।
कृति- मिथिला भाषा रामायण, गीति-सुधा, महेशवाणी संग्रह, चन्द्र पदावली, लक्ष्मीश्वर विलास, अहिल्याचरित आऽ विद्यापति रचित संस्कृत पुरुष-परीक्षाक गद्य-पद्यमय अनुवाद। महाकवि लालदास 1856-1921 हिनक जन्म खड़ौआ ग्राममे १८५६ ई. मे तथा मृत्यु १९२१ ई. मे भेलन्हि । हिनक अनेक रचना उपलब्ध होइत अछि, यथा�रमेश्वर चरित रामायाण,� स्त्री शिक्षा,� �सावित्री-सत्यवान,� �चण्डी चरित,� �विरुदावली,� �दुर्गा सप्तशती,� तन्त्रोक्त मिथिला माहात्म्य� आदि । मैथिलीक अतिरिक्त ई संस्कृत, हिन्दी तथा फारसीक ज्ञाता छलाह । कविताक अतिरिक्त गद्यमे सेहो ई रचना कएल । रमेश्वर चरित रामायण हिनक सभसँ विशिष्ट ग्रन्थ अछि । राम-कथाक उल्लेखमे सीताक महिमाक महत्त्व दए मिथिला तथा मैथिलीक प्रति ई अपन श्रद्धा तथा भक्तिकेँ व्यक्त कएल अछि । म. म. परमेश्वर झा 1856-1924 जन्म 1856 ई. मे तरौनी ग्राम (दरभंगा) जिलामे भेल छलन्हि तथा निधन 1924 ई. मे । संस्कृत व्याकरणक ई दिग्गज विद्वान् छलाह तथा �वैयाकरण केशरी� क उपाधिसँ विभूषित छलाह । मैथिली साहित्यमे अपन कृति �मिथिलातत्त्व विमर्श� तथा �सीमंतिनी आख्यायिका�क कारणे महत्त्वपूर्ण स्थान रखैत छथि । ई महाराज रमेश्वर सिंहक दरवारमे राज-पंडितक पदपर अनेको वर्ष धरि सुप्रतिष्ठित छलाह । अवध बिहारी प्रसाद शाही 1859-1929 सर्वतंत्र स्वतंत्र बच्चा झा 1860-1921 मधुबनी जिलांतर्गत लवाणी(नवानी) गाममे हिनकर जन्म भेलन्हि।हिनक कृति सभ अछि। 1. सुलोचन-माधव चम्पू काव्य, 2.न्यायवार्त्तिक तात्पर्य व्याख्यान, 3.गूढ़ार्थ तत्त्वलोक(श्री मदभागवतगीता व्याख्याभूत मधुसूदनी टीका पर) 4.व्याप्तिपंचक टीका 5.अवच्छदकत्व निरुक्त्ति विवेचन 6.सव्यभिचार टिप्पण 7.सतप्रतिपक्ष टिप्पण 8.व्याप्तनुगन विवेचन 9.सिद्धांत लक्षण विवेक 10.व्युत्पत्तिवाद गूढार्थ तत्वालोक 11.शक्त्तिवाद टिप्पण 12.खण्डन-ख़ण्ड खाद्य टिप्पण 13. अद्वैत सिद्धि चन्द्रिका टिप्पण 14.कुकुकाञ्जलि प्रकाश टिप्पण। म. म. शशिनाथ झा 1860-1930 मुंशी रघुनन्दन दास 1860-1945 गाम-सखबार, ज़िला-मधुबनी। "मिथिला नाटक" आ "दूतांगद व्यायोग"क लेखक। मधुसूदन ओझा 1866-1939 म.म. मुरलीधर झा १८६८-१९२९ जन्म- गाम- भराम (जिला मधुबनी), अपन मातृक श्यामसीधपमे बसि गेलाह। काशीसँ १९०६ ई. मे ई "मिथिलामोद" नामक मासिक मैथिली पत्रिकाक प्रकाशन शुरु केलन्हि। हितोपदेश (अनुवाद), मैथिली व्याकरण, "अर्जुन तपस्या" (उपन्यास) प्रकाशित। मुकुन्द झा "बख्शी" 1869-1936 जन्म हरिपुर बख्शी टोल ग्राम (मधुबनी जिला) मे 1869 ई. मे भेल तथा हिनक निधन काशीमे 1937 ई. मे भेलन्हि । हिनक लिखल संस्कृत मे अनेक ग्रंथ अछि । मैथिलीमे हिनक महत्त्वपूर्ण कृति अछि �मिथिला भाषामय इतिहास� । एकर अतिरिक्त मैथिलीमे हिनक स्फुट निबन्ध सभ सेहो प्रकाशित भेल । मिथिलाक ऐतिहासिक वर्णन सभसँ पहिने हिनके प्रकाशित भेल । एहि इतिहासमे मिथिलाक सर्वतोमुखी परिचय प्रस्तुत कएल गेल अछि । डॉ. सर गंगानाथ झा 1871-1941 जन्म मधुबनी जिलाक सरिसब-पाही ग्राममे 1871 ई. मे भेल तथा निधन प्रयागमे 1941 ई. मे । ई अपना समयक संस्कृतक प्रकाण्ड विद्वान म. म. चित्रधर मिश्र, म. म. जयदेव मिश्र तथा म. म. शिवकुमार शास्त्नीसँ मीमांसा एवं दर्शनक अध्ययन कएलन्हि तथा दर्शनक विभित्र दुरूह ग्रंथक अङरेजीमे अनुवाद कए पाश्चात्य संसारक ध्यान आकृष्ट कएलन्हि । ई गवर्नमेन्ट संस्कृत कॉलेज बनारसमे 1917 सँ 1923 धरि प्रिसिपल छलाह तथा एलाहाबाद विश्वविद्यालयक 1923 सँ 1932 पर्यन्त कुलपति रहलाह । मैथिलीमे हिनक सम्पादित चन्दा झाक �महेशवाणी संग्रह� तथा �गणनाथ-विन्ध्यनाथ पदावली� प्रकाशित अछि । मैथिली साहित्य परिषद् द्वारा प्रकाशित हिनक �वेदान्त दीपक� (दर्शन) विषयक अपूर्व ग्रंथ अछि । एहिसँ भिन्न हिनक निबंध सभ सामयिक मैथिली पत्न-पत्निकामे प्रकाशित अछि । जनार्दन झा जनसीदन 1872-1951 रासबिहारी लालदास 1872-1940 "मिथिला दर्पण" क लेखक। रामचन्द्र मिश्र "चन्द्र" 1873-1937 मैथिल प्रभा महावैय्याकरणाचार्य पं दीनबन्धु झा 1878-1955 भवनाथ मिश्र 1879-1933 मैथिली शब्दकोष "मिथिला शब्द प्रकाश"क लेखक। कीर्त्यानन्द सिंह टंकनाथ चौधरी 1884-1928 भवप्रीतानन्द ओझा 1886-1970 कपिलेश्वर मिश्र 1887-1987 गाम सलेमपुर, थाना- उजियारपुर, जिला समस्तीपुर। �सीतादाइ� पुस्तक भंडारसँ प्रकाशित। बालकृष्ण मिश्र 1888-1948 बलदेव मिश्र 1890-1975 हिनक जन्म सहरसा जिलाक वनगाँव ग्राममे 1890 ई. मे एवं निधन फरवरी, 1975मे भेलन्हि । प्रारम्भमे पं. गेनालाल चौधरीसँ ज्यौतिष पढ़ि ई काशीमे पं. सुधाकर द्विवेदीजीक शिष्य भेलाह । बहुत वर्ष धरि सरस्वती भवन (वाराणसी) मे हस्तलिखित विभागमे कार्य कएल । पश्चात् पटनाक काशीप्रसाद जयसवाल रिसर्च संस्थानमे अनेक प्राचीन तिब्बती हस्तलिपिकेँ देवनारीमे लिप्यन्तरित कएल। �मिथिलामोद� प्रकाशन एवं म.म. मुरलीधर झाक प्रोत्साहनसँ ज्यौतिषीजी १९१० ई.सँ �मोद�मे लिखए लगलाह। हिनक प्रकाशित रचना अछि��रामायण शिक्षा�, �चन्दा झा�, �संस्कृति�, �भारत शिक्षा�, �गप्प-सप्प विवेक�, �समाज� आदि । पण्डितजी यावत् धरि पटना रहलाह बराबरि �मिहिर�मे लिखैत रहलाह । आचार्य रामलोचन शरण 1889-1971 सीतामढ़ीमे जन्म आ दरभंगामे मृत्यु। "मैथिली रामचरित मानस" सहित तुलसीदासक समस्त रचनाक मैथिलीमे लेखन। मिथिलाक्षरमे मैथिलीक प्रकाशनक प्रारम्भ केनिहार। प्रकाशन संस्था "पुस्तक भण्डार", लहेरियासराय, पटनाक संस्थापक। सीताराम झा 1891-1975 जन्म चौगामा ग्राममे १८९१ ई.मे तथा निधन १९७५ ई. मे भेलन्हि । संस्कृतमे ज्योतिष शास्त्रक अनेक रचनाक .अतिरिक्त मैथिलीमे हिनक �अम्ब चरित� (महाकाव्य), �सूक्ति सुधा,� लोक लक्षण,� �पढ़ुआचरित,� �पूर्वापर व्यवहार,� उनटा बसात,� �अलंकार दर्पण�, �भूकम्प वर्णन�, �काव्य षट-रस�, �मैथिली काव्योपवन�, आदि ग्रन्थ उपलब्ध अछि । हिनक गीताक मैथिली अनुवाद सेहो उपलब्ध अछि । मिथिला मोदक सम्पादन १९२० ई.सँ १९२७ ई. धरि ई कएल । ताराचरण झा 1892-1928 बद्रीनाथ झा 1893-1973 जन्म मधुबनी जिलाक सरिसव ग्राममे १८९३ ई. मे भेलन्हि तथा १९१४ ई. मे ई काशी लाभ कएलिन्ह । बहुत दिन धरि ई मुजफ्फरपुरक धर्म्म समाज संस्कृत कॉलेजमे साहित्यक अध्यापक छलाह । मैथिलीक विख्यात कवि लोकनि यथा सुमनजी, मधुपजी, मोहनजी आदि हिनक शिष्य छथिन्ह । संस्कृत साहित्यमे हिनक अनेक रचना अछि । जाहिमे राधा परिणय� (महाकाव्य) क स्थान विशिष्ट अछि । मैथिलीमे हिनक �एकावली परिणय� (महाकाव्य) एक नवीन कीर्तिमान स्थापित कएलक। कोनो अलंकारक दृष्टान्त तकबाक हेतु �एकावली परिणय� पर्याप्त अछि । जीवनाथ राय 1893-1964 उमेश मिश्र 1895-1967 जन्म मधुबनी जिलाक गजहरा ग्राममे 1895 ई. मे भेल छलन्हि । ई एकहतरि वर्षक आयुमे १९६७ ई. मे प्रयागमे स्वर्गवासी भेलाह । ई अपन स्वनाम-धन्य पिता म. म. जयदेव मिश्र तथा म. म. डा. गंगानाथ झाक सान्निध्यमे विद्यार्जन कएल। १९२३ सँ १९५९ धरि मिश्रजी एलाहाबाद विश्वविद्यालयमे संस्कृतक प्राध्यापक छलाह । दरभंगा �मिथिला शोध संस्थान�क निदेशक पदपर किछु समय कार्य कए १९६२ सँ ६५ धरि कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालयक कुलपति रहलाह ।म. म. मुरलीधर झासँ प्रभावित भए �मिथिलामोद�मे ई लिखब प्रारम्भ कएलन्हि तथा अपन विविध प्रकारक रचनासँ मैथिलीक गद्यकेँ समृद्ध् कएलन्हि । मैथिलीमे हिनक प्रसिद्ध ग्रन्थ अछि��कमला� (शेक्सपीयरक �टेम्पेस्ट�क भावानुवाद), �नलोपाख्यान�, �मैथिली-संस्कृति� तथा अनेक वर्णनात्मक एवं आलोचनात्मक निबन्ध; मनबोधक कृष्णजन्मक सम्पादन, विद्यापतिक कीर्तिलता, कीर्तिपताका, गोरक्ष विजय आदिक अनुवाद-सम्पादन सेहो कएल। बाबू धनुषधारी दास 1895-1965 मैथिलीमे बिहारी कविक अनुवाद प्रकाशित। अमरनाथ झा 1897-1955 सरिसब पाहीटोल ग्राममे १८९७ ई. मे भेल । हिनक निधन पटनामे जखन ई बिहार लोक सेवा आयोगक अध्यक्ष छलाह, १९५५ मे भेलन्हि । ई एलाहाबाद विश्वविद्यालयक नओ वर्ष धरि कुलपति रहि पश्चात् हिन्दू विश्वविद्यालयक सेहो कुलपतिक पदकेँ सुशोभित कएलन्हि । ई अंगरेजीक प्रकाण्ड विद्वान् छलाह, ताहि संग हिन्दी, उर्दू, फारसी, संस्कृत, बङला एवं मैथिलीक सेहो अद्भुत विद्वान् छलाह ।मैथिलीमे हिनका द्वारा सम्पादित �हर्षनाथ काव्य ग्रन्थावली� तथा �गोविन्ददासक श्रृग्ङारभजन� महत्त्वपूर्ण अछि । एहिसँ भिन्न हिनक मैथिली साहित्य परिषदक अध्यक्षीय भाषण तथा अन्य लेख प्रकाशित अछि । भोलालाल दास 1897-1977 हिनक जन्म दरभंगा जिलाक कसरौर मे भेलन्हि । साहित्य सर्जनाक अतिरिक्त अपन संगठन क्षमता तथा मैथिली साहित्यक सर्वतोमुखी विकासक हेतु सतत तत्पर रहबाक कारणेँ भोला बाबू मैथिली संसारक एक स्तम्भक रूपमे रहलाह । हिनक निधन 1977 ई. मे भेल । मैथिलीक प्रचार-प्रसारमे ई अपन जीवन समपित कएने छलाह। पाठ्यक्रममे मैथिलीकेँ स्थान हो ताहि हेतु ई बीड़ा उठओलन्हि । विद्यालय स्तरक अनेक पोथीक निर्माण कएल । मैथिली साहित्य परिषदक ई संस्थापक मण्डलक सदस्य छलाह । 1931 सँ 1940 ई. पर्यन्त ओकर प्रधान मन्त्नी रहलाह । हिनक मन्त्नित्वकालमे �भारती� नामक मासिक पत्नक प्रकाशन भेल । एहिसँ पूर्व (१९२९-३१) कुशेश्वर कुमरजीक संग संयुक्त सम्पादनमे �मिथिला� नामक पत्न चलाओल । ई नवीन एवं प्रगतिशील विचारक लोक छलाह । ननव लेखककेँ प्रोत्साहित करब, शैलीमे एकरूपता आनब, नव प्रकाशनसँ मैथिलीक साहित्य भंडारक पूर्त्ति करब हिनक कर्त्तव्य बनि गेल छल । हिनक लिखल �मैथिली व्याकरण� तथा हिनकहि द्वारा सम्पादित �गद्यकुसुमांजलि बहुत दिन धरि विद्यालयमे पढ़ाओल जाइत रहल । हिनक लिखल अनेक निबन्ध समालोचना, कविता, संस्मरण, जीवनी-साहित्य मैथिलीक पत्र-पत्निकामे छिड़िआएल अछि । कुमार गंगानन्द सिंह 1898-1971 जन्म�बनैली राजपरिवारमे 24-9-1898, मृत्यु:-श्रीनगर पूर्णिञा 17-1-1970 । भूतपूर्व शिक्षामंत्नी, बिहार एबं कुलपति, कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय ।रचना�अगिलही (अपूर्ण उपन्यास) तथा अनेक कथा एवं एकांकी । युगक अनुरूप सामाजिक कुरीति आदिकेँ आधार बनाए सुधारवादी दृष्टिएँ कथा सभहिक रचना । ब्रजमोहन ठाकुर 1899-1977 भुवनेश्वर प्रसाद 1902- दरभंगा जिलाक बनौली गाम, निवास रायसाहेब पोखरि लहेरियासराय। सरस्वती स्कूल लहेरियासरायमे १९३०-१९६४ ई. धरि अध्यापन। मैथिलीमे "बाल रामायण� प्रकाशित। जयनारायण झा 'विनीत' 1902-1991 नरेन्द्र नाथ दास विद्यालंकार १९०४-१९९३ सुधाकर झा "शास्त्री" 1904-1974 दामोदर लाल दास विशारद 1904-1981 बबुआजी झा 'अज्ञात' 1904-1996 २००१- बबुआजी झा �अज्ञात� (प्रतिज्ञा पाण्डव, महाकाव्य)लेल साहित्य अकादमी पुरस्कार। श्रीवल्लभ झा हाटी 1905-1940 रमानाथ झा 1906-1971 जन्म दरभंगा जिलाक उजान (धर्मपुर) ग्राममे 1906 ई. मे एवं हिनक निधन दरभंगामे १९७१ ई. मे भेलन्हि । 1930 ई. मे अङरेजीमे एम. ए. कएलाक बाद ई कतोक वर्ष धरि मधेपुर उच्च विद्यालयक प्रधानाध्यापक छलाह, तकरा बाद दरभग्ङा-राज-लाइब्रेरीक पुस्तकालयाध्यक्षक रूपमे 1936 सँ अन्तिम समय धरि रहलाह । 1952 सँ 62 चन्द्रधारी मिथिला कॉलेजमे प्रो. झा अङरेजीक प्राध्यापक रूपेँ काजka पश्चात् ओही कॉलेजमे मैथिली विभागाध्यक्ष बनाओल गेलाह । 1965 मे रमानाथ बाबू साहित्य अकादमीक मैथिलीक प्रतिनिधि निर्वाचित भेलाह जाहि पद पर ओ जीवनक अन्त समय तक रहलाह । हिनक रचनाक क्षेत्न बहुत व्यापक छल । हिनक अनुसंधानात्मक निबंक दू गोट संग्रह �निबन्धमाला� तथा �प्रबंध संग्रह� प्रकाशित अछि । संकलित सम्पादित पुस्तक सभमे �मैथिली पद्य-संग्रह�, �मैथिली गद्य-संग्रह�, �प्राचीन गीत�, �कथा काव्य�, �नवीन गीत�, �कविता कुसुम�, �कथा संग्रह� आदि अछि । �कथासरित्सागर�क आधार पर प्राञ्जल गद्य शैलीमे हिनक �उदयन-कथा� तथा �बररुचि-कथा� बेश ख्याति पओलक । व्याकरणक �मिथिला भाषा प्रकाश�, �अलक्ङारप्रवेश� आदि अनेक ग्रन्थ प्रकाशित अछि । �मैथिली साहित्य पत्र� त्नैमासिक पत्रिकाक संपादक। काशीकान्त मिश्र "मधुप" 1906-1987 १९७०- काशीकान्त मिश्र �मधुप� (राधा विरह, महाकाव्य) पर साहित्य अकादेमी पुरस्कार प्राप्त मैथिलीक प्रशस्त कवि आ मैथिलीक प्रचार-प्रसारक समर्पित कार्यकर्ता �झंकार� कवितासँ क्रान्ति गीतक आह्वान कएलनि । प्रकृति प्रेमक विलक्षण कवि । �घसल अठन्नी कविताक लेल कथ्य आ शिल्प-संवेदना�दुहू स्तर पर चरम लोकप्रियता भेटलनि। लक्ष्मीनाथ गोसाई 1793-1872 मेही दास धरहरा कोठी_बनमनखी_असली नाम_रामानुग्रहलाल दास_आश्रम_मायामोहल्ला, कुप्पाघाट, भागलपुर बुचन भगत, संत 1928-1991 अभिराम दास मिथिलाक प्रसिद्ध भागवत वाचक। स्नेहलता 1909-1993 गाम- डरोड़ी, समस्तीपुर। पूर्ण नाम- कपिलदेव ठाकुर "स्नेहलता"। रामाश्रयी रसिक सम्प्रदायक संत। हिनकर रचित वैदेही विवाह संकीर्तन, विनय पदावली, शिववाणी, चेतावनी, झूला-संकीर्तन, सीतावतरण प्रबन्धकाव्य आ स्नेहशतक- दोहावली-कवित्त आदि मिथिलाक महिला वर्ग आ संकीर्तनकार लोकनिक कंठमे परिव्याप्त अछि आ लोकमंगलक अनुष्ठानमे व्यापक रूपेँ व्यवहृत अछि। हिनक "वैदेही विवाह" मिथिलाक कीर्तनिया नाट्य परम्पराकेँ लोकरुचिक अनुकूल बनौने अछि। स्वतंत्रता सेनानी स्व. रामफल मण्डल सुन्दर झा "शास्त्री" 1930-1998 जनकपुर, नेपाल, युवावस्थाक जेलक दुर्लभ फोटो।नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानक मानद सदस्यता- स्व. सुन्दर झा शास्त्री। कांञ्चीनाथ झा "किरण" 1906-1988 जन्म स्थान-धर्मपुर,लोहना रोड, दरभंगा बिहार । मैथिली भाषा आंदोलनमे महत्वपूर्ण भूमिका। �पराशर� महाकाव्य लेल साहित्य अकादमी ओ �कथा किरण� लेल वैदेही पुरस्कारसँ सम्मानित । प्रकाशित कृति: चंद्रग्रहण (उपन्यास), वीर-प्रसून (बालकथा), जय जन्मभूमि (एकांकी), विजेता विद्यापति (नाटक), कथा-किरण (कथा-संग्रह), किरण-कवितावली, कतेक दिनक बाद (कविता-संग्रह), पराशर (महाकाव्य) ओ किरण-निबंधावली (निबंध-संग्रह) आदि।१९८९- काञ्चीनाथ झा �किरण� (पराशर, महाकाव्य)पर मैथिली मे साहित्य अकादमी पुरस्कारसँ सम्मानित। श्यामानन्द झा 1906-1949 रमाकांत झा, नेपाल 1907-1971 ईशनाथ झा 1907-1965 बहुमुखी प्रतिभाक कवि । प्राचीन आ नवीन पद्धतिक काव्य-रचनाक विलक्षण संयोग हिनकर कवितामे भेटैत अछि । दलित वर्ग, शोषणक समस्या, स्वदेश प्रेमक यथार्थवादी रचनाक संग संग व्यक्तिनिष्ठ कल्पनाक अनेक विशिष्ट कविता मैथिलीमे लिखलनि । भुवनेश्वर सिंह 'भुवन' 1907-1944 अपन खाढ़ीक बहुमुखी प्रतिभाक कवि । प्राचीन आ नवीन रीतिक कविताक रचना विपुल संख्यामे कएलनि । �भुवन भारती� कविता संकलन प्रकाशनसँ मैथिली ओज आ नव चेतनाक शंख फुकलनि। हरिमोहन झा 1908-1984 हिनकर मैथिली कृति १९३३ मे �कन्यादान� (उपन्यास), १९४३ मे "द्विरागमन�(उपन्यास), १९४५ मे �प्रणम्य देवता� (कथा-संग्रह), १९४९ मे �रंगशाला�(कथा-संग्रह), १९६० मे �चर्चरी�(कथा-संग्रह) आऽ १९४८ ई. मे �खट्टर ककाक तरंग� (व्यंग्य) अछि। मृत्योपरांत १९८५मे (जीवन यात्रा, आत्मकथा)पर मैथिलीक साहित्य अकादमी पुरस्कारसँ सम्मानित। कालीकान्त झा 1909- मूल गाम ढंगा (हरिपुर), मधुबनी। फेर मातृक बरदबट्टा,पो. उरलाहा, भाया- मदनपुर, जिला-पूर्णियामे बसि गेलाह। सतघरा (मधुबनी), मदनपुर आ काशीमे पाणिनी व्याकरणक अध्ययन। "हनुमान चरित"क लेखक। तंत्रनाथ झा 1909-1984 जन्म १९०९ ई मे दरभंगा जिलाक धर्मपुर ग्राममे भेलन्हि मुत्यु ४-५-�८४,चन्द्रधारी मिथिला कॉलेजमे अर्थशास्त्नक प्राध्यापक छलाह । अवकाश ग्रहण क काव्य साधनामे लागल रहलाह । महाकाव्य, मुक्तक, एकांकी सभ विधामे ई सिद्ध हस्त छलाह । हिनक �कीचक वंध� महाकाव्य अङरेजीक �ब्लैक्ङ भर्स� (अमित्नाक्षर छन्द) म लिखल अछि । मैथिलीमे �सौनेट� एवं ब्लैक्ङ भर्स�क ई प्रथम प्रयोक्ता थिकाह । संस्कृत परम्परामे काव्य रचना करितहुँ पाश्चात्य शैलीक नवीनता हिनका रचनामे भेल । हिनक �कीचक वध� ओ �कृष्ण चरित� महाकाव्य��मङ्गल-पञ्चाशिका� एवं �नमस्या� मैथिली साहित्यमे अपन विशिष्ट स्थान रखैछ । तकर अतिरिक्त मुक्तक काव्यमे विषय वस्तुक व्यापकता एवं शिल्प शैलिक प्रचुरता अबैत अछि । एक दिश यदि प्राचीन ढंगक ईश्बर वन्दनाक रचना कएलन्हि तँ दोसर दिस �सौनेट� (चतुर्दशपदी) �बैलेड� आदि लिखबामे पूर्ण सफलता प्राप्त कएलन्हि ।�कृष्ण चरित� महाकाव्य पर हिनका 1979 ई क साहित्यक अकादमी पुरस्कार भेटलन्हि । 1980 ई. मे हिनका अभिनन्दन ग्रन्थसमर्पित कएल गेलन्हि । जीवनाथ झा 1910-1977 सुरेन्द्र झा 'सुमन' 1910-2002 जन्म: ग्राम : बल्लीपुर, जिला-समस्तीपुर । प्रकाशित कृति: प्रतिपदा, अर्चना,साओन-भादव,अंकावली, अन्तर्नाद, पयस्विनी, उत्तरा आदि तीससँ अधिक मौलिक कविता-पुस्तक;पुरुष-परीक्षा, अनुगीतांजलि, ऋतु श्रृंगार तथा वर्णरत्नाकर, पारिजात-हरण, कृष्णजन्म, आनन्द-विजय आदि कतिपय ग्रन्थक अनुवाद-संपादन; �मैथिली काव्य पर संस्कृतक प्रभाव� नामक समीक्षा-ग्रंथ। �पयस्विनी� लेल १९७१ मे साहित्य अकादेमी पुरस्कार तथा �उत्तरा� पर १९१८ मे मैथिली अकादेमीक विद्यापति पुरस्कार प्राप्त । मैथिलीक प्रथम दैनिक पत्र �स्वदेश�क लब्धप्रतिष्ठ सम्पादक।१९९५- सुरेन्द्र झा �सुमन� (रवीन्द्र नाटकावली- रवीन्द्रनाथ टैगोर, बांग्ला)लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार। २००० ई.- पं.सुरेन्द्र झा �सुमन�, दरभंगा;यात्री-चेतना पुरस्कार। पं. रामचन्द्र झा 1910- गाम तरौनी। काशी मिथिला ग्रन्थमालाक सम्पादक। 'नागार्जुन' वैद्यनाथ मिश्र 'यात्री' 1911-1998 जन्म अपन मामागाम सतलखामे भेलन्हि, जे हुनकर गाम तरौनीक समीपहिमे अछि, जिला-दरभ्गा । मूल नाम: वैद्यनाथ मिश्र । हिन्दीमे नागार्जुन नामे प्रख्यात । प्रकाशित कृति: चित्रा, पत्रहीन नग्न गाछ (मैथिली कविता-संग्रह); पारो, बलचनमा, नवतुरिया (मैथिली उपन्यास); युगधारा, सतरंगे पंखोंवाली, प्यासी पथराई आंखें, खिचड़ी विप्लव देखा हमने, तुमने कहा था, हजार हजार बाहो वाली, पुरानी जूतियो का कोरस, रत्नगर्भा, ऐसे भी हम क्या ! ऐसे भी तुम क्या ! (हिन्दी कविता-संग्रह); रतिनाथ की चाची, बलचनमा, नई पौध, बाबा बटेसरनाथ, वरुण के बेटे, दुखमोचन, कुम्भीपाक, अभिनन्दन, उग्रतारा, इमरतिया (हिन्दी उपन्यास); आसमान में चन्दा तैरे (कहानी संग्रह); भस्मांकुर (हिन्दी खण्ड काव्य); अन्नहीनम् क्रियाहीनम् (निबन्ध-संग्रह); गीत गोविन्द; मेघदूत; विद्यापति के गीत, विद्यापति की कहानियां (अनुवाद) । �पत्रहीन नग्न गाछ� लेल १९६८ मे साहित्य अकादेमी पुरस्कार प्राप्त । यायावरी जीवन । मैथिली प्रतिनिधिक रूपमे रूस भ्रमण । नागार्जुन (स्व. श्री वैद्यनाथ मिश्र �यात्री� ), हिन्दी आ मैथिली कवि, १९९४ ई.मे साहित्य अकादेमीक फेलो (भारत देशक सर्वोच्च साहित्यक पुरस्कार)। आरसीप्रसाद सिंह 1911-1996 जन्म: ग्राम-एरौत, जिला-समस्तीपुर । प्रकाशित कृति: माटिक दीप, पूजाक फूल, सूर्यमुखी (कविता-संग्रह), मेघदूत (अनुवाद), आरसी, नन्ददास, संजीवनी (हिन्दी काव्य संग्रह)। �सूर्यमुखी� लेल १९८४ मे साहित्य अकादेमी पुरस्कार प्राप्त । गुरु जयदेव मिश्र 1911-1991 शिष्य गंगानाथ झा यशोधर झा मिथिला वैभव, दर्शन मैथिली पोथीपर 1966 मे पहिल साहित्य अकादमी पुरस्कार मैथिली लेल प्राप्त। वैद्यनाथ मल्लिक 'विधु' 1912-1987 १९७६- वैद्यनाथ मल्लिक �विधु� (सीतायन, महाकाव्य) लेल मैथिलीक साहित्य अकादमी पुरस्कार। भीम झा 1912- पूर्णिया जिलाक मदनपुर गामक। जन्म ५ नवम्बर १९१२ ई.। बनैलीक श्री श्यामानन्द सिंहक अध्यक्षतामे �नारायण संकीर्तन महामण्डली�क स्थापना। राधानाथ दास १९१२- उपेन्द्र ठाकुर 'मोहन' 1913-1980 जन्म १९१३ ई. मे दरभंगा जिलाक चतरिया ग्राममे भेलन्हि । मृत्यु २४-५-१९८० । संस्कृत शिक्षामे साहित्याचार्य ओ बड़ौदा राजक विद्वत्-परीक्षासँ �साहित्य-रत्न�क उपाधिसँ विभूषित भेलाह । दैनिक आर्यावर्तमे आदिअहिसँ, पश्चात् १९६० सँ मिथिला मिहिरक उप-सम्पादक एवं सह-सम्पादक रूपेँ कार्य करैत १९७७ मे सेवा निवृत भेलाह ।मोहनजी करीब पचास वर्ष साहित्य साधनामे लागल रहलाह । विजयानन्द, कुंजरंजन, सुदर्शन, पुण्डरीक, शास्त्नी, बामन आदि छद्म नामसँ पत्न-पत्निकामे विविध विषयपर हिनक लेख सभ प्रकाशित भेल अछि ।मोहन जीक �बाजि उठल मुरली�मे १०१ गोट कविताक संकलन अछि जाहिमे हिनक सुदीर्घ काव्य-आराधनाक विभित्र विचारधाराक ओ विभित्र अनुभूतिक सामग्री उपलब्ध अछि । एहि पुस्तकपर मोहन�जीकेँ १९७८ मे साहित्य अकादम् पुरस्कार भेटलन्हि। एहिसँ बहुत पूर्व हिनक �फुलडाली� नामक कविता संग्रह सेहो प्रकाशित भेल छल । जयनाथ मिश्र 1913-1985 श्रीकांत ठाकुर "विद्यालंकार" पञ्जीकार मोदानन्द झा 1914-1998 लब्ध धौत पञ्जीशास्त्र मार्त्तण्ड पञ्जीकार मोदानन्द झा, शिवनगर, अररिया, पूर्णिया। पिता-स्व. श्री भिखिया झा। गुरु- पञ्जीकार भिखिया झा। पूर्णिया जिलाक बनैली लगक शिवनगर गामक। जन्म २२ सितम्बर १९१४ ई.।सौराठमे अपन मौसा स्व. लूटनझा सँ पंजीशास्त्रक अध्ययन। १९४८-१९५१ ई. धरि दरभंगामे रहि आचार्य रमानाथ झाकेँ पाँजि पढ़ओलनि।शास्त्रार्थ परीक्षा- दरभंगा महाराज कुमार जीवेश्वर सिंहक यज्ञोपवीत संस्कारक अवसर पर महाराजाधिराज(दरभंगा) कामेश्वर सिंह द्वारा आयोजित परीक्षा-1937 ई. जाहिमे मौखिक परीक्षाक मुख्य परीक्षक म.म. डॉ. सर गंगानाथ झा छलाह। आनन्द झा 1914-1988 टोक्यो हासेगावा, निदेशक मिथिला म्यूजियम, निगाटा माँगनि खबास 1908-1943 संगीतज्ञ पचगछियामे जन्म आ अल्प बएसमे मृत्यु। पचगछियाक रायबहादुर लक्ष्मीनारायण सिंहक शिष्य। रामाश्रय झा 'रामरंग' अभिनव भातखण्डे 1928-2009 जन्म ११ अगस्त १९२८ ई. तदनुसारभाद्र कृष्णपक्ष एकादशी तिथिकेँ मधुबनी जिलान्तर्गत खजुरा नामक गाममे भेलन्हि। अभिनव गीतांजलि, हुनकर उच्चकोटिक शास्त्र रचना अछि।मिथिलावासी श्री रामरंग राग तीरभुक्त्ति, राग वैदेही भैरव, आऽ राग विद्यापति कल्याण केर रचना सेहो कएने छथि आऽ मैथिली भाषामे हिनकर खयाल �रंजयति इति रागः� केर अनुरूप अछि। रामचतुर मल्लिक ध्रुपद संगीत 1905-1990 अभयनारायण मल्लिक कुमार तारानन्द सिंह, संगीतज्ञ संगीताचार्य रायबहादुर लक्ष्मीनारायण सिंह पंडित परमानन्द चौधरी, संगीतज्ञ हृदयनारायण झा संगीत भाष्कर राजकुमार श्यामानन्द सिंह १९१६-१९९४ मिथिलेश कुमार झा, तबला वादन नागेश्वर लाल कर्ण, तबला वादक बाबू साहेब चौधरी 1916-1998 दरभंगा जिलाक दुलारपुर गामक। १९४३ ई. मे जीविकार्थ कलकत्ता अएलाह। नवम कक्षामे स्वराज्य आन्दोलनमे बाझि कए शिक्षाक इतिश्री। कलकत्तामे स्थानीत मैथिल संघमे प्रवेश। कलकक्तामे मैथिली आर्ट प्रेस. ९/१, खिलात घोष लेन, कलकत्ता-७००००६ सँ मैथिली-मिथिला आन्दोलनमे सक्रिय। �कुहेस� आ �चाणक्य� दूटा नाटक। १९७१-७९ धरि �मिथिला दर्शन� आ �मैथिली दर्शन� मैथिली मासिकक सम्पादन। लक्ष्मण (लखन) झा 1916-2000 मिथिला राज्य अभियानी। शुद्धदेव झा 'उत्पल' 1916- गोड्डा जिलाक अलखदत्त-महेनपुरक निवासी। जन्म १६ अक्टूबर १९१६ ई.। रामचरित्र पाण्डेय "अणु" १९१७-२०१० लक्ष्मीनाथ झा मिथिला चित्रकला 1917-1990 उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' 1917-2002 जन्म स्थान-हरिपुर वकशीटोल, मधुबनी, बिहार । १९६९- उपेन्द्रनाथ झा �व्यास� (दू पत्र, उपन्यास) लेल साहित्य अकादेमी पुरस्कारसँ सम्मानित । साहित्य अकादेमीक अनुवाद पुरस्कार प्राप्त । प्रकाशित कृति: कुमार, दू पत्र (उपन्यास), विडंबना, भजना भजले (कथा-संग्रह), पतन संन्यासी, प्रतीक (काव्य), महाभारत (पहिल दू पर्व) आदि। मनमोहन झा 1918-2009 जन्म सरिसबमे, अश्रुकण, वीरभोग्या, मिथिलाक निशापुरमे।२००९- स्व.मनमोहन झा (गंगापुत्र, कथासंग्रह)पर मृत्योपरांत साहित्य अकादमी पुरस्कार। ब्रजकिशोर वर्मा 'मणिपद्म' 1918-1986 जन्म स्थान-बहेड़ा, दरभंगा बिहार । १९७३- ब्रजकिशोर वर्मा �मणिपद्म� (नैका बनिजारा, उपन्यास) लेल साहित्य अकादेमी पुरस्कारसँ सम्मानित । उपन्यासकार, कथाकार ओ कवि । प्रकाशित कृति: कोब्रागर्ल, कनकी, अर्द्धनारीश्वर, लोरिक विजय, नैका-बनिजारा, लवहरि-कुशहरि, राय रणपाल, आदिम गुलाम आदि उपन्यास ओ कंठहार (नाटक) आदि। पं. सहदेव झा १९१९- "मिथिला की धरोहर" पोथी प्रकाशित। बुद्धिधारी सिंह रमाकर 1919-1991 जन्म मधुबनीमे 1919 ई. मे भेल । अपन पिता स्व. क्षेमधारी सिंहसँ विभित्र विषयक शिक्षा ग्रहण कएलन्हि । ई रामकृष्ण कॉलेज, मधुबनीक मैथिली विभागाध्यक्ष छलाह । जतएसँ अवकाश प्राप्त कएलन्हि । बाल्या-वस्थहिसँ ई कविकार्यमे लागल रहलाह अछि । संस्कृत तथा मैथिली दुनू भाषामे हिनक रचना प्रकाशित अछि । यथा�मैथिलीमे �प्रयास� (कथा-संग्रह), �मधुमती�, �अमरबापू� (कविता-संग्रह), �शरशय्या� (खंड-काव्य) �स्मृति साहस्री� (महाकाव्य) आदि । आद्याचरण झा 1920- चन्द्र भानु सिंह 1922- २००४- चन्द्रभानु सिंह (शकुन्तला, महाकाव्य)लेल साहित्य अकादमी पुरस्कार। सुधांशु शेखर चौधरी 1922-1990 जन्म दरभंगाक मिश्रटोलामे 1922 ई. मे भेलन्हि तथा मृत्यु 1990 ई. मे भेलन्हि । किछु दिन विभिन्न जीविकामे रहि पश्चात् साहित्यकारक जीवन प्रारम्भ कएल । किछु दिन �बैदेही�क सम्पादन श्री सुमनजी एवं श्री कृष्णकान्त मिश्रजीक संग कएल तत्पश्चात् 1960 ई. सँ 1982 ई. धरि पटनामे �मिथिला मिहिर��क सफल सम्पादन कएल ।हिनक दू गोट नाट्यकृति-�भफाइत चाहक जिनगी�, लेटाइत आँचर�, तथा �पहिल साँझ� हिनक नाटकक नीक व्यावहारिक अनुभवक परिचायक अछि ।छद्मनामसँ हिनक दू गोट उपन्यास मिहिर� मे प्रकाशित भेल अछि । हिनक उपन्यास ई वतहा संसार� जे मैथिली अकादमी द्वारा प्रकाशित भेल आ जाहि पर 1980 क साहित्य अकादमीक पुरस्कार देल गेल । गोविन्द झा 1923- जन्मस्थान- इसहपुर, सरिसब पाही, मधुबनी, बिहार । सिद्ध कथाकार, उपन्यासकार, नाटककार, भाषा वैज्ञानिक ओ अनुवादक। साहित्य अकादेमी पुरस्कार, साहित्य अकादेमी अनुवाद पुरस्कारसँ सम्मानित। बिहार सरकारसँ कामिल बुल्के पुरस्कार, ग्रियर्सन पुरस्कार आदिसँ सम्मानित । प्रकाशित कृति: उपन्यास, नाटक, कथा, कविता, भाषा विज्ञान आदि विभिन्न विधामे अड़तीस टा पोथी प्रकाशित । प्रकाशन: सामाक पौती,नेपाली साहित्यक इतिहास (अनु) आदि । १९९३- गोविन्द झा (सामाक पौती, कथा)पुस्तक लेल सहित्य अकादेमी पुरस्कारसँ सम्मानित ।१९९३- गोविन्द झा (नेपाली साहित्यक इतिहास- कुमार प्रधान, अंग्रेजी) लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार। प्रबोध सम्मान 2006 सँ सम्मानित। विदेह सम्पादकक समानान्तर साहित्य अकादेमी फेलो पुरस्कार २०१० (समग्र योगदान लेल) योगानन्द झा 1923-1986 हिनक जन्म मधुबनी जिलाक कोइलख ग्राममे 1923 ई. मे भेलन्हि । मृत्यु 1986 मे भेलनि । अग्रेजीमे एम. ए. कएलाक पश्चात् ई किछु दिन चन्द्रधरी मिथिला कॉलेजमे प्राध्यापक रहलाह । बिहार प्रशासनिक सेवामे 1981 धरि विभिन्न पदपर कार्य कएल । तत्पश्चात्मैथिली अकादमीक निदेशक �84 धरि ।योगानन्द झाजी मैथिली साहित्यमे अपन उपन्यास �भलमानुस� एवं �पवित्ना�क हेतु ख्यात छथि । हिनक नाटक �मुनिक मतिभ्रम� एवं कथा संग्रह �उड़ैत वंशी� यथेष्ट प्रतिष्ठा प्राप्त कएने अछि । एकर अतिरिक्त ई महात्मा गान्धीक आत्मकथाक अनुवाद एवं �आमक जलखरी� नामक एक कथा संग्रहक सम्पादन सेहो कएने छथि । रामकृष्ण झा 'किसुन' 1923-1970 आधुनिक धाराक विशिष्ट कवि, कथाकार, चिन्तक । प्रकाशित कृति: आत्मनेपद (कविता संग्रह), मैथिली नवकविता (सम्पादन)। उमानाथ झा 1923-2009 जन्म:-01-01-1923, मृत्यु 07-12-2009 महरैल, भधुबनी ।भूतपूर्व अङरेजी विभागाध्यक्ष एवं प्रति-कुलपति मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा । रचना:-रेखाचित्न, अतीत (कथा संग्रह); मैथिली नवीन साहित्य, इन्द्र धनुष, विद्यापति गीतशती (सम्पादन)।१९८७- उमानाथ झा (अतीत, कथा) पर मैथिलीक साहित्य अकादमी पुरस्कारसँ सम्मानित। ज़टाशंकर दास 1923-2006 प्रबोध नारायण सिंह 1924-2005 हिन्दी, संस्कृत, मैथिली, पाली एवं फारसीक विद्वान्। मिथिला, मैथिल एवं मैथिलीक ई अनन्य भक्त छथि । कलकत्ता रहि मिथिला दर्शन�, मैथिली कविता�, मैथिली रंगमंच� आदि पत्निकाक प्रकाशनक माध्यमसँ श्री प्रबोधजी मैथिलीक जे सेवा कएल अछि तकर वर्णन थोड़मे सम्भव नहि । अनेक बङला कृतिक ई अनुवाद सेहो कएल अछि ।हिन्दीमे सेहो हिनक �कविता संग्रह� प्रकाशित अछि ।कलकत्ता विश्वविद्यालयमे हिन्दीक पूर्व अध्यक्ष। २००२- डॉ. प्रबोध नारायण सिंह (पतझड़क स्वर- कुर्तुल ऐन हैदर, उर्दू) लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार। मदनेश्वर मिश्र 1924-2004 "एक छलीह महारानी" प्रकाशित। अमोघ नारायण झा "अमोघ" 1924- मुरलीधर सिंह, ब्रजमोहन ठाकुर, शुभंकर झा, मदनेश्वर मिश्र 1924-2004, ललित नारायण मिश्र, देवनाथ राय मतिनाथ मिश्र मतंग 1924- आनन्द मिश्र 1924-2007 डॉ. जयमन्त मिश्र १९२५-२०१० जन्म १५-१०-१९२५ मृत्यु ०७-०९-२०१०, गाम-ढंगा-हरिपुर-मजरही। १९९५- जयमन्त मिश्र (कविता कुसुमांजलि, पद्य) लेल साहित्य अकादेमी पुरस्कार- मैथिली। चन्द्रनाथ मिश्र अमर 1925- जन्म: खोजपुर, मधुबनी । वरिष्ठ कवि, कथाकार-उपन्यासकार । हास्य-व्यंग्यक कवितामे बेजोड़। मैथिलीक लेल समर्पित व्यक्तित्व । पांच दर्जनसं बेसी कथा आ विदागरी, वीरकन्या (उपन्यास) जल समाधि (कथा संग्रह) प्रकाशित ।१९८३- चन्द्रनाथ मिश्र �अमर� (मैथिली पत्रकारिताक इतिहास) लेल साहित्य अकादमी पुरस्कारसँ सम्मानित। एम. एल. एकेडमी, लहेरिरियासरायसं शिक्षकक रूपमे अवकाश प्राप्त। आशा दिशा, गुदगुदी, युगचक्र, उनटा पाल आदि कविता संग्रह प्रकाशित। १९९८- चन्द्रनाथ मिश्र �अमर� (परशुरामक बीछल बेरायल कथा- राजशेखर बसु, बांग्ला) लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार। चन्द्रनाथ मिश्र अमर २०१० मे मैथिली साहित्य लेल साहित्य अकादेमीक फेलो (भारत देशक सर्वोच्च साहित्यक पुरस्कार)। मुक्तिनाथ झा (1926-2009) शुभंकर झा 1926- दीनानाथ पाठक 'बन्धु' 1928-1962 अनंत बिहारी लाल दास "इन्दु" 1928-2010 २००७- अनन्त बिहारी लाल दास �इन्दु� (युद्ध आ योद्धा-अगम सिंह गिरि, नेपाली)लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार। कृष्णकान्त मिश्र १९२८-२००० जगदानन्द झा 1928- दुर्गानाथ झा "श्रीश" हिनकर जन्म मधुबनी जिलाक विट्ठो गाममे १९२९ ई. मे भेलन्हि। हिन्दी आ मैथिलीमे एम.ए. आ बी.एड. केलाक बाद किछु दिन स्कूलमे अध्यापन, फेर मिल्लत कॉलेज, लहेरियासरायमे मैथिली आ हिन्दी विभागक अध्यक्ष। मैथिली भाषामे पहिल पी.एच. डी.। "श्रीश" जीक मैथिलीमे प्रकाशित रचना अछि- "मैथिली साहित्यक इतिहास", "भुवन भारती" (सम्पादन), "महामत्स्य ओ मनु" (कविता), "नाट्य कथा सार"(सम्पादन), "पुरुषार्थ"(पद्य नाटक) आ अनेक कविता, एकांकी आ आलोचनात्मक निबन्ध। राजकमल चौधरी 1929-1967 महिषी, सहरसा। रचना:- आदि कथा, आन्दोलन, पाथर फूल (उपन्यास), स्वरगंधा (कविता संग्रह), ललका पाग (कथा संग्रह), कथा पराग (कथा संग्रह सम्पादन)। हिन्दीमे अनेक उपन्यास, कविताक रचना, चौरङ्गी (बङला उपन्यासक हिन्दी रूपान्तर) अत्यन्त प्रसिद्ध। विश्वनाथ झा "विषपायी" 1929-2005 "राम सुयश सागर" (मैथिली रामायण) १९८० ई. मे प्रकाशित। २५ जनवरी २००५ केँ मृत्यु। जयधारी सिंह 1929-2007 समीक्षक, कवि । प्रकाशन: बौद्धगानमे तांत्रिक सिद्धांत, समीक्षा शास्त्रा अदि । रामकृष्ण कॉलेज, मधुबनीमै मैथिली विभागक पूर्व अध्यक्ष । शैलेन्द्र मोहन झा 1929-1994 १९९२- शैलेन्द्र मोहन झा (शरतचन्द्र व्यक्ति आ कलाकार-सुबोधचन्द्र सेन, अंग्रेजी)लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार। विजयनाथ ठाकुर 1929-2008 रमेशचन्द्र वर्मा 1930- गोपालजी झा 'गोपेश' 1931-2008 जन्म मधुबनी जिलाक मेहथ गाममे १९३१ ई.मे भेलन्हि।हिनकर रचित �सोन दाइक चिट्ठी�, �गुम भेल ठाढ़ छी�, �एलबम� �आब कहू मन केहन लगैए�, "मखानक पात" प्रकाशित भेल जाहिमे सोनदाइक चिट्ठी बेश लोकप्रिय भेल।२००६ ई.-श्री गोपालजी झा गोपेश, मेंहथ, मधुबनी;यात्री-चेतना पुरस्कार। विवेकानन्द ठाकुर 1931- २००५- विवेकानन्द ठाकुर (चानन घन गछिया, पद्य)मैथिली लेल साहित्य अकादमी पुरस्कार। ताराकांत मिश्र 1931- ललित 1932-1983 जन्म स्थान बसैठ चानपुरा मधुबनी, बिहार । प्रसिद्ध कथाकार ओ उपन्यासकार । प्रकाशित कृति: प्रतिनिधि, (कथा संग्रह), पृथ्वी-पुत्र (उपन्यास) आदि। मुरारि मधुसूदन ठाकुर 1932- ताराशंकर बंदोपाध्यायक बंगला उपन्यास "आरोग्य निकेतन"क मैथिली अनुवाद लेल साहित्य अकादमीक अनुवाद पुरस्कार 1999 भेटल छन्हि। विद्यानारायण ठाकुर 1933- धूमकेतु 1932-2000 जन्म स्थान कोइलख, मधुबनी, बिहार । प्रसिद्ध कथाकार, उपन्यासकार ओ कवि । प्रकाशित कृति : दू टा कथा संग्रह ओ एक टा उपन्यास । राजमोहन झा 1934- जन्म स्थान कुमरबाजितपुर, वैशाली, बिहार । प्रख्यात कथाकार ओ संपादक । आइ काल्हि परसू (कथा-संग्रह) लेल १९९६ मे साहित्य अकादेमीसँ सम्मानित । प्रकाशित कृति : एक आदि एकांत, झूठ साँच, एकटा तेसर, अनुलग्नक, आइ काल्हि परसू (कथा संग्रह), गलतीनामा, भनहि विद्यापति, टीप्पणीत्यादि (आलोचना)। �आरम्भ� पत्रिकाक संपादन।प्रबोध सम्मान 2009 सँ सम्मानित। डॉ. धीरेन्द्र 1934-2004 जन्म स्थान लोहना, मधुबनी, बिहार । प्रसिद्ध कथाकार,उपन्यासकार ओ कवि । प्रकाशित कृति: कुहेस आ किरण, पझाइत घूरक आगि, शतरूपा ओ मनु अपन मन्दिर (कथासंग्रह) हैंगरमे टाँगल कोट, काल्हि ओ आइ (कविता संग्रह) सहित कैक विधामे विभिन्न पोथी। रमेश नारायण १९३४- २०११ नाम- रमेश नारायण दास, जन्म १५ मार्च १९३४ केँ मधुबनीक बहेरा गाममे। पिता-श्री हरिवल्लभ लाल दास। शिक्षा मधेपुर, मधुबनी आ पटनामे। १९६१ ई.सँ १९९४ ई. धरि ए.एन. कॉलेज, पटनामे हिन्दी विभागमे अध्यापन। पाथरक नाव (मैथिली कथा संग्रह, १९७२) प्रकाशित। मृत्यु १२ जनवरी २०११ केँ पटनामे। बाबू श्री सत्यनारायण सिंह आ राघवाचार्य मायानन्द मिश्र 1934- हिनक जन्म १७ अगस्त १९३४ ई. केँ सुपौल जिलाक बनैनियाँ गाममे भेलनि।भाङ्क लोटा, आगि मोम आ� पाथर आओर चन्द्र-बिन्दु- हिनकर कथा संग्रह सभ छन्हि। बिहाड़ि पात पाथर , मंत्र-पुत्र ,खोता आ� चिडै आ� सूर्यास्त हिनकर उपन्यास सभ अछि॥ दिशांतर हिनकर कविता संग्रह अछि। एकर अतिरिक्त सोने की नैय्या माटी के लोग, प्रथमं शैल पुत्री च,मंत्रपुत्र, पुरोहित आ� स्त्री-धन हिनकर हिन्दीक कृति अछि।१९८८- मायानन्द मिश्र (मंत्रपुत्र, उपन्यास)पर मैथिलीक साहित्य अकादमी पुरस्कारसँ सम्मानित। प्रबोध सम्मान 2007सँ सम्मानित। तारानन्द तरुण १९३५-२०११ सोमदेव 1934- उपन्यासकार ओ कवि । साहित्य अकादेमी पुरस्कारसँ सम्मानित । प्रकाशित कृति: चानोदाइ, होटल अनारकली (उपन्यास), काल ध्वनि (कविता संग्रह), चरैवेति (गीति नाट्य) सोम सतसइ (दोहा)।२००२- सोमदेव (सहस्रमुखी चौक पर, पद्य) लेल साहित्य अकादमी पुरस्कार। २००१ ई. - श्री सोमदेव, दरभंगा;यात्री-चेतना पुरस्कार, प्रबोध साहित्य सम्मान २०११। राजनन्दन लाल दास 1934- "कर्णामृतक"क सम्पादन। "चित्रा-विचित्रा" प्रकाशित। रमानन्द रेणु 1934-2011 जन्म स्थान उसमामठ, दरभंगा, बिहार । वरिष्ठ कवि, कथाकार ओ उपन्यासकार। साहित्य अकादेमी पुरस्कारसँ सम्मानित। प्रकाशित कृति: कचोट, त्रिकोण, अंतहीन आकाश (कथा-संग्रह), दूधफूल (उपन्यास), अंतत:, ओकरे नाम (कविता-संग्रह)। २०००- रमानन्द रेणु (कतेक रास बात, पद्य)लेल साहित्य अकादमी पुरस्कार। विदेह सम्पादकक समानान्तर साहित्य अकादेमी फेलो पुरस्कार २०११ (समग्र योगदान लेल) कालीकांत झा "बूच" 1934-2009 हिनक जन्म, महान दार्शनिक उदयनाचार्यक कर्मभूमि समस्तीपुर जिलाक करियन ग्राममे 1934 ई. मे भेलनि । पिता स्व. पंडित राजकिशोर झा गामक मध्य विद्यालयक प्रथम प्रधानाध्यापक छलाह । माता स्व. कला देवी गृहिणी छलीह । अंतरस्नातक समस्तीपुर काॅलेज, समस्तीपुरसँ कयलाक पश्चात् बिहार सरकारक प्रखंड कर्मचारीक रूपमे सेवा प्रारंभ कयलनि । बालहिं कालसँ कविता लेखनमे विषेश रूचि छल । मैथिली पत्रिका - मिथिला मिहिर, माटि - पानि, भाखा तथा मैथिली अकादमी पटना द्वारा प्रकाशित पत्रिकामे समय - समय पर हिनक रचना प्रकाशित होइत रहलनि । जीवनक विविध विधाकेँ अपन कविता एवं गीत प्रस्तुत कयलनि । साहित्य अकादमी दिल्ली द्वारा प्रकाशित मैथिली कथाक विकास (संपादक डाॅ बासुकीनाथ झा ) मे हास्य कथा कारक सूची मे डाॅ विद्यापति झा हिनक रचना ��धर्म शास्त्राचार्यक उल्लेख कयलनि । मैथिली अकादमी पटना एवं मिथिला मिहिर द्वारा प्रशंसा पत्र भेजल जाइत छल ।श्रृंगाररस एवं हास्य रसक संग-संग विचार मूलक कविताक रचना सेहो कयलनि । डाॅ दुर्गानाथ झा श्रीश संकलित मैथिली साहित्यक इतिहासमे कविक रूपमे हिनक उल्लेख कएल गेल अछि । प्रकाशित कृति (मृत्योपरांत) : कलानिधि- कविता-संग्रह। श्याम चन्द्र 1934- उपन्यास "रूपा दीदी" प्रकाशित। गाम मलंगिया, जिला- मधुबनी। डोरीलाल शर्मा "श्रोत्रिय" १९३५- "मिथिला की पाण्डित्य परम्परा" पोथी प्रकाशित। रामभद्र, धनुषा, नेपाल १९३५-२०२० साहित्य तथा अन्यान्य क्षेत्रक कतोक सफल व्यक्तिसभ अपन प्रेरणास्रोत आ पथ-प्रदर्शक मानैत छथि । मैथिली साहित्य-क्षेत्रमे हिनक परिचयक मादे एतबाए कहब पर्याप्त होएत जे मैथिलीक मूर्द्धन्य साहित्यकार डा. धीरेन्द्र हिनका मैथिली साहित्यक सर्वश्रेष्ठ कथाकार मानैत छथि ।हिनक कथामे प्रतीकात्मकताक अदभुत प्रयोगहिटा नहि, अपितु एकटा आदर्श कथाक समस्त वैशिष्टसभविद्यमान रहैत अछि । कथाकारक अतिरिक्त ई उत्कृष्ट समालोचक, नाटककार आ कवि सेहो छथि । नेपालमे मैथिलीक पहिल मोनोड्रामा लिखबाक श्रेय सेहो हिनका जाइत छनि ।सामाजिक कुरीतिसभकँ कुशलतासँ चित्रण करबामे, चिन्तनीय बनएबामे आ मन-मस्तिष्कपर अमिट छाप छोड़बामे रामभद्र सिद्धहस्त छथि । धनुषा जिलाक कुर्था गाममे जनमल रामभद्रक पूर्ण नाम रामभद्र कर्ण छनि । अग्ङरेजी विषयक अवकाशप्राप्त शिक्षक रामभद्र व्याकरण, पाठयपुस्तक आ सहायक पुस्तकसभ लिखबाक काजमे निरन्तर सक्रिय छथि। केदारनाथ चौधरी (१९३६-) मैथिलीक पहिल फिल्म 'ममता गाबय गीत' केर निर्माता द्वयमेसँ एकटा निर्माता छथि केदारनाथ चौधरी आ दोसर मदनमोहन दास। बादमे आर्थिक मजबूरीवश तेसर सहनिर्माता भेलखिन उदयभानु सिंह। माता-स्व. कुसुमपरी देवी, पिता- स्व. किशोरी चौधरी, जन्म: ०३/०१/१९३६ ग्रा.+पत्रा. नेहरा (दरभंगा), अन्य पारिवारिक सदस्य-पत्नी-श्रीमती कुमुद चौधरी, संतान- प्रथम पुत्री-श्रीमती किरण झा, द्वितीय पुत्री-श्रीमती अर्चना चौधरी, शिक्षा- १९५८ ई.मे अर्थशास्त्रमे स्नातकोत्तर, १९५९ ई.मे लॉ। १९६९ ई.मे कैलिफोर्निया वि.वि.सँ अर्थस्थास्त्र मे स्नातकोत्तर, १९७१ ई.मे मार्केटिंग एंड डिस्ट्रीब्यूशन विषयमे गोल्डेन गेट यूनिवर्सिटी, सानफ्रांसिस्को, USA सँ एम.बी.ए., १९७८ मे भारत आगमन। १९८१-८६ क बीच तेहरान आ प्रैंकफुर्तमे। फेर बम्बई, पुणे होइत रिटायरमेंटक बाद २००० सँ लहेरियासराय, दरभंगामे निवास।६ टा उपन्यास- चमेलीरानी २००४, करार २००६, माहुर २००८, अबारा नहितन २०१२, हीना २०१३, अयना २०१८. सम्मान- १) विदेह साहित्य सम्मान, बर्ख-२०१३ (झारखंड मैथिली मंच, राँची द्वारा), २) प्रबोध साहित्य सम्मान, बर्ख-२०१६ आ ३) केदार सम्मान, बर्ख-२०१६,'अबारा नहितन' लेल। जीवकांत 1936- नाम- जीवकान्त झा,पिता-गुणानन्द झा, माता-महेश्वरी देवी, जन्म-२५.०७.१९३६ अभुआढ़, जिला-सुपौल। नौकरी-विज्ञान शिक्षक (उ.वि.खजौली १९५७-८१), हिन्दी शिक्षक (उ.वि.डेओढ़ एवं उ.वि.पोखराम १९८१-९८)।पहिल रचना-इजोड़िया आ टिटही (कविता, जनवरी १९६५ मिथिला मिहिर)।पहिल छपल पोथी- दू कुहेसक बाट (उपन्यास १९६८)।नूतन पोथी-खिखिरक बीअरि (२००७ बाल पद्य कथा), अठन्नी खसलइ वनमे (पद्य-कथा संग्रह) आ पंजरि प्रेम प्रकासिया (जीवन-वृत्तक अंश)।पुरस्कार-साहित्य अकादेमी 1998 तकै अछि चिड़ै, पद्य , किरण सम्मान (१९९८), वैदेही सम्मान (१९८५)।प्रकाशित पोथी- कविता संग्रह:नाचू हे पृथ्वी (७१), धार नहि होइछ मुक्त (९१), तकैत अछि चिड़ै (९५), खाँड़ो (१९९६), पानिमे जोगने अछि बस्ती (९८), फुनगी नीलाकाशमे (२०००), गाछ झूल-झूल (२००४), छाह सोहाओन (२००६), खिखिरिक बीअरि (२००७) कथा-संग्रह:एकसरि ठाढ़ि कदम तर रे (७२), सूर्य गलि रहल अछि (७५), वस्तु (८३), करमी झील (९८) उपन्यास:दू कुहेसक बाट(६८), पनिपत(७७), नहि, कतहु नहि (७६), पीयर गुलाब छल (७१), अगिनबान (८१) हिन्दी अनुवाद- निशान्त की चिड़िया (तकैत अछि चिड़ै, साहित्य अकादमी, दिल्ली २००३)। प्रबोध सम्मान 2010 सँ सम्मानित। देवकांत झा 1936- डॉ अमरेश पाठक 1936- हिनक जन्म सीतामढ़ी जिलाक अन्तर्गत सामारि ग्राममे १९३६ मे भेलन्हि । १९५७ मे पटना विश्वविद्यालयसँ मैथिलीक एम. ए. परीक्षामे प्रथम श्रेणीमे प्रथमस्थान पाओल । १९५७ सँ १९६० धरि रामकृष्ण महाविद्यालय, मधुबनीमे व्याख्याता रूपेँ तकरा बाद पटना विश्वविद्यालयमे व्याख्याता रूपमे कार्य करए लगलाह । पटना विश्वविद्यालयमे मैथिली विभागाध्यक्ष रूपेँ । मैथिली उपन्यासक आलोचनात्मक अध्ययन� शोध प्रबन्धपर हिनका बिहार विश्व-विद्यालय द्वारा डि. लिट्क उपाधि भेटलन्हि । ई शोध प्रबन्ध पुस्तकाकार रूपेँ सेहो प्रकाशित भेल अछि बिहार राष्ट्रभाषा परिषदक विद्यापति ग्रन्थावलीक सम्पादक मण्डलक सदस्य । हिनक अन्य प्रकाशित रचना अछि �निबन्ध संकलन� । एकरा छोड़ि विभित्र पत्न-पत्निकामे हिनक कतेको निबन्ध प्रकाशित छन्हि । मैथिली अकादमी द्वारा प्रकाशित कथा-संग्रहक इहो एक सम्पादक छथि । ई अधिकतर उच्च स्तरीय आलोचनात्मक निबन्ध लिखैत छथि । २०००- डॉ. अमरेश पाठक, (तमस- भीष्म साहनी, हिन्दी)लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार। बलराम 1936-2008 जन्म स्थान पचही, मधुबनी, बिहार । विशिष्ट कथाकार । प्रकाशित कृति : दकचल देबाल (कथा-संग्रह)। मैथिलीपुत्र प्रदीप 1936- ग्राम- कथवार, दरभंगा। प्रशिक्षित एम.ए., साहित्य रत्न, नवीन शास्त्री, पंचाग्नि साधक। हिनकर रचित "जगदम्ब अहीं अवलम्ब हमर" आ "सभक सुधि अहाँ लए छी हे अम्बे, हमरा किए बिसरै छी यै" मिथिलामे लेजेंड भए गेल अछि। रामदेव झा 1936- कथाकर, समीक्षक, अनुवादक, ग्रंथ सम्पादक । साहित्य अकादेमीक मूल एवं अनुवाद पुरस्कार प्राप्त कर्त्ता ल. ना. मिथिला विश्वविद्यालय दरभंगाक मैथिली विभागक पूर्व प्राचार्य । प्रकाशन: पसिझैत पाथर, (अनु.) आदि । १९९१- रामदेव झा (पसिझैत पाथर, एकांकी)लेल साहित्य अकादमी पुरस्कारसँ सम्मानित ।१९९४- रामदेव झा (सगाइ- राजिन्दर सिंह बेदी, उर्दू) लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार। रवीन्द्र नाथ ठाकुर 1936- जन्म पूर्णिञा जिलाक धमदाहा ग्राममे 1936 ई. मे भेलन्हि । नेने अवस्थासँ गीत गएबामे एवं कविता लिखबामे विशेष रुचि । कोनो मंच पर ठाढ़ भेला पर ई सहजहि श्रीताकेँ आह्लादित करैत छथि । हिनक सात गोट मैथिलीक गीत संग्रह, एक मिनी महाकाव्य, एक प्रयोगधर्मी काव्य, एक उपन्यास, एक नाटक �एक राति� एवं एक हिन्दी नाटक, प्रकाशित भेल छन्हि । बिनोद बिहारी वर्मा 1937-2003 मैथिल करण कायस्थक पाँजिक सर्वेक्षण, बलानक बोनिहार ओ पल्लवी तथा अन्य कथा (कथा संग्रह) वीरेन्द्र मल्लिक 1937- जन्म- 3 जनबरी 1937 ई. परसौनी, मधुबनीमे।कवि, सम्पादक, समीक्षक । आखर, अगनिपत्रक सम्पादन ।अग्नि-शिखा (कविता संग्रह)। कीर्तिनारायण मिश्र 1937- जन्म १७ जुलाई १९३७ ई. केँ ग्राम शोकहारा (बरौनी), जिला बेगूसरायमे भेलन्हि। हुनकर प्रकाशित कृति अछि सीमान्त,महानगर (दीर्घ कविता), हम स्तवन नहि लिखब, ध्वस्त होइत शांति स्तूप (एहि पोथीपर साहित्य अकादमी 1997 पुरस्कार), आदमीकेँ जोहैत (कविता संग्रह)। संस्मरण-अपन एकांतमे, स्मृति यात्रा, पत्रक दर्पणमे। सम्पादन- आखर मासिक पत्रिका, आधुनिक मैथिली साहित्य, '63, राजकमल जीवन आ साहित्य, '68, कथा-संकलन- काल कोठरी। आलोचना- अर्थांतर-2004 गौरीकांत चौधरीकांत 1937-2001 युगल किशोर मिश्र १९३८-२००७ मैथिली शब्दकोष। प्रफुल्ल कुमार सिंह 'मौन' 1938- ग्राम+पोस्ट- हसनपुर, जिला-समस्तीपुर।मैथिलीमे १.नेपालक मैथिली साहित्यक इतिहास(विराटनगर,१९७२ई.), २.ब्रह्मग्राम(रिपोर्ताज दरभंगा १९७२ ई.), ३.�मैथिली� त्रैमासिकक सम्पादन (विराटनगर,नेपाल १९७०-७३ई.), ४.मैथिलीक नेनागीत (पटना, १९८८ ई.), ५.नेपालक आधुनिक मैथिली साहित्य (पटना, १९९८ ई.), ६. प्रेमचन्द चयनित कथा, भाग- १ आऽ २ (अनुवाद), ७. वाल्मीकिक देशमे (महनार, २००५ ई.)।२००४- डॉ. प्रफुल्ल कुमार सिंह �मौन� (प्रेमचन्द की कहानी-प्रेमचन्द, हिन्दी) लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार। महेश्वरनाथ मल्लिक 1938- परशुराम झा १९३८- गाम- मेंहथ (मधुबनी), कृति- डाइमेन्शन्स ऑफ पीस इन इन्गलिश ड्रामा,क्रिश्चियन पोएटिक ड्रामा। कुलानन्द मिश्र 1940-2000 जन्म पकड़ी कोठी, सीतामढ़ी, बिहार। सुविख्यात कवि,, संपादक, समालोचक। प्रकाशित कृति- तावत एतबे, भोरक प्रतीक्षामे (कविता संग्रह), भारतक भाषा सर्वेक्षण, पारो, राजकमल चौधरी की ग्यारह कहानियाँ (अनुवाद)। बिलट पासवान 'विहंगम' 1940- जन्म मधुबनी जिलाक एकहत्था ग्राममे १९४० ई. मे भेलन्हि। फजलुर रहमान हासमी 1940-2011 जन्म-पटना जिलाक बराह गाममे। वृत्ति अध्यापक। हिन्दी कविता संग्रह "रश्मि राशि" आ मैथिली कविता संग्रह "निर्मोही" प्रकाशित। १९९६मे अबुलकलाम आजाद- अब्दुलकवी देसनवी, उर्दूसँ मैथिली अनुवादपर साहित्य अकादमीक मैथिली अनुवाद पुरस्कार। गुणनाथ झा गुणनाथ झा "लोक मञ्च" मैथिली नाट्य पत्रिकाक संचालन- सम्पादन केने छथि। मैथिलीमे आधुनिक नाटकक प्रणयन। हुनकर नाटक सभ अछि: मधुयामिनी: एकाङ्क नाट्य शैलीमे दूटा पात्र, पुरुष संयुक्त परिवारक पक्ष लेनिहार आ स्त्री तकर विरोधी। पाथेय: एकाङ्क नाट्य शैलीमे रचित, मुदा पूर्णाङ्कक सभ विशेषता ऐमे भेटत। मुख्य अभिनेता मिथिलाक अधोगतिसँ दुखी भऽ गामकेँ कर्मस्थली बनबैत छथि, स्वजन विरोध करै छथि। लाल-बुझक्कर: एकाङ्क नाट्य शैलीमे रचित। दाही रौदीसँ झमारल निम्न आ मध्य-निम्न वर्ग स्वतंत्रताक पहिनहियो आ बादो जीविकोपार्जन लेल प्रवास करबा लेल अभिशप्त छथि। सातम चरित्र: एकाङ्क नाट्य शैलीमे रचित। मैथिली रंगमंचपर महिला अभिनेत्रीक अभाव, सातम चरित्रक प्रतीक्षामे पूर्वाभ्यास खतम भऽ जाइत अछि। शेष नञि: आधुनिक सामाजिक पूर्णाङ्क नाटक। पिता-माताक मृत्युक बाद अग्रजक अनुजक प्रति पितृवत व्यवहार। आजुक लोक: पूर्णाङ्क नाटक। विषय निम्नमध्यवर्गीय बेरोजगारी आ बियाहक दायित्वक बोझ। जय मैथिली: पूर्णाङ्क नाटक। मिथिलाक भाषिक-सांस्कृतिक समस्या एकर कथावस्तु अछि। महाकवि विद्यापति: विद्यापतिक नव विश्लेषण। प्रभास कुमार चौधरी 1941-1998 गाम- पिंडारुछ, जिला- दरभंगा ।प्रख्यात कथाकार ओ उपन्यासकार । प्रभासक प्रकाशित कृति : कथा-प्रभास, प्रभासक कथा, नव घर उठय पुरान घर खसय, दिदवल (कथासंग्रह), अभिशप्त, युगपुरुष, हमरा लग रहब, नवारम्भ, राजा पोखरिमे कतेक मछरी (उपन्यास) । विभिन्न महत्वपूर्ण पत्रिकाक सम्पादन । त्रैमासिक कथा गोष्ठी 'सगर राति दीप जरय' केर प्रारम्भ।१९९०- प्रभास कुमार चौधरी (प्रभासक कथा, कथा) लेल साहित्य अकादमी पुरस्कारसँ सम्मानित । साकेतानन्द 1940- वरिष्ठ कथाकार, गणनायक (कथा-संग्रह) लेल साहित्य अकादेमी पुरस्कारसँ सम्मानित। प्रकाशित कृति: मैथिली कथा साहित्यमे 1962 स� सक्रिय । गोडेक चालिस_पचास टा कथा, रिपोर्ताज. संस्मरण, यात्रा_विवरण मैथिलीमे प्रकाशित अधिकांश पत्र_पत्रिकामे छपल । पहिल मैथिली कथा �ग्लेसियर� 1962मे �मिथिलामिहिर�मे प्रकाशित । हिन्दियोमे दू दर्जन कथा आदि प्रकाशित । सन 99मे छपल पहिल कथा_संग्रह �गणनायक� के ओही वर्ष �साहित्य अकादमी पुरस्कार। पैघ बान्ध� स� अबैबला विपत्तिके रेखांकित करैत, पर्यावरण के कथा वस्तु बना क� राजकमल प्रकाशन स� प्रकाशित एवं अत्यंत चर्चित उपन्यास (�डौकूमेंट्री फिक्शन�) �सर्वस्वांत� ।आकाशवाणीक राष्ट्रीय कार्यक्रममे प्रसारित दू टा उल्लेखनीय वृत्त रूपक_ �महानन्दा अभयारण्य� पर आधारित �जंगल बोलता है� एवं झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रक ज्वलंत डाइनक समस्या पर आधारित वृत्तरूपक � नैना जोगन � चर्चित एवं प्रसिद्ध । गंगेश गुंजन 1942- जन्म स्थान- पिलखबाड़, मधुबनी।श्री गंगेश गुंजन मैथिलीक प्रथम चौबटिया नाटक बुधिबधियाक लेखक छथि आ हिनका उचितवक्ता (कथा संग्रह) क लेल साहित्य अकादमी पुरस्कार भेटल छन्हि। एकर अतिरिक्त्त मैथिलीमे हम एकटा मिथ्या परिचय, लोक सुनू (कविता संग्रह), अन्हार- इजोत (कथा संग्रह), पहिल लोक (उपन्यास), आइ भोर (नाटक)प्रकाशित। हिन्दीमे मिथिलांचल की लोक कथाएँ, मणिपद्मक नैका- बनिजाराक मैथिलीसँ हिन्दी अनुवाद आ शब्द तैयार है (कविता संग्रह)।१९९४- गंगेश गुंजन (उचितवक्ता, कथा)पुस्तक लेल सहित्य अकादेमी पुरस्कारसँ सम्मानित । प्रेमशंकर सिंह 1942- ग्राम+पोस्ट- जोगियारा, थाना- जाले, जिला- दरभंगा।मौलिक मैथिली: १.मैथिली नाटक ओ रंगमंच,मैथिली अकादमी, पटना, १९७८ २.मैथिली नाटक परिचय, मैथिली अकादमी, पटना, १९८१ ३.पुरुषार्थ ओ विद्यापति, ऋचा प्रकाशन, भागलपुर, १९८६ ४.मिथिलाक विभूति जीवन झा, मैथिली अकादमी, पटना, १९८७५.नाट्यान्वाचय, शेखर प्रकाशन, पटना २००२ ६.आधुनिक मैथिली साहित्यमे हास्य-व्यंग्य, मैथिली अकादमी, पटना, २००४ ७.प्रपाणिका, कर्णगोष्ठी, कोलकाता २००५, ८.ईक्षण, ऋचा प्रकाशन भागलपुर २००८ ९.युगसंधिक प्रतिमान, ऋचा प्रकाशन, भागलपुर २००८ १०.चेतना समिति ओ नाट्यमंच, चेतना समिति, पटना २००८। २००९ ई.-श्री प्रेमशंकर सिंह, जोगियारा, दरभंगा यात्री-चेतना पुरस्कार। मार्कण्डेय प्रवासी 1942-2010 जन्म ग्राम: गरुआर, जिला: समस्तीपुर । प्रकाशित कृति: अगस्त्यायिनी (महाकाव्य); एतदर्थ (कविता संग्रह), अक्षर चेतना (काव्य संग्रह)। अभियान, हम कालिदास (उपन्यास)। �अगस्त्यायिनी� लेल १९८१मे साहित्य अकादेमी पुरस्कार प्राप्त। देवेन्द्र झा १९४३- गाम- चानपुरा (मधुबनी), कृति- विद्यापतिक श्रृंगारिक पदक काव्यशास्त्रीय अध्ययन, लालदास, सुधाकर झा "शास्त्री", अनुभव, बदलि जाइछ घरे टा। डॉ. भीमनाथ झा 1945- जन्म:कोइलख, मधुबनी, बिहार । प्रखर कवि, समालोचक, प्राध्यापक । �विविधा�निबन्ध पुस्तक लेल सन् १९९२मे सहित्य अकादेमी पुरस्कारसँ सम्मानित । प्रकाशित कृति: त्रिधारा, वीणा, की फुरैए की नहि, नाम तँ थिक ओएह (कविता संकलन), परिचायिका, सीताराम झा, कवि चूड़ामणिक काव्य साधना, विविधा (निबंध, आलोचना),टावर चौकसँ आदि । महेन्द्र मलंगिया 1946- गाम- मलंगिया, जिला- मधुबनी । मैथिलीक सुपरिचित नाटककार, रंग निर्देशक एवं मैलोरंगक संस्थापक अध्यक्ष । लोक साहित्य पर गंभीर शोध आलेख । मैथिलीमे 13टा नाटक, 19टा एकांकी, 14टा नुक्कड़ आ 10टा रेडियो नाटक प्रकाशित आ आकाशवाणी सँ प्रसारित । सीनियर फेलोशिप (भारत सरकार), इंटरनेशनल थिएटर इंस्टिच्यूट (नेपाल), प्रबोध साहित्य सम्मान आदि सँ सम्मानित । संप्रति ज्योतिरीश्वर लिखित मैथिलीक प्रथम पुस्तक वर्णरत्नाकर पर शोध कार्य । श्री महेन्द्र मलगियाक जन्म २० जनबरी १९४६ मे मधुबनी जिलाक मलंगिया गाममे भेलन्हि। मलंगियाजी मैथिली हिन्दी, अंग्रेजी आ नेपाली भाषाक जानकार आ थियेटर शिक्षण, पटकथा लेखन आ तत्सम्बन्धी शोधक फ्रीलान्स शिक्षक छथि।२००२ ई.- श्री महेन्द्र मलंगिया, मलंगिया;यात्री-चेतना पुरस्कार। प्रबोध सम्मान 2005 सँ सम्मानित। डॉ राम दयाल राकेश, सर्लाही, नेपाल 1942- मैथिली मातृभाषा, हिन्दीक प्राध्यापक आ नेपालीक लेखक ई तीनू भाषा �राकेश�क व्यक्तित्वमे एना ने मिझराएल छैक जे कोनहुसँ हिनका भिन्न नहि कएल जा सकैत अछि । ई विशेषत: नेपालीमे लिखैत छथि, मुदा लेखनक विषय मूलत: मैथिलीए संस्कृति रहैत छनि । ओना मैथिली, हिन्दी आ अग्ङरेजीमे सेहो ई अनेक रचना कएने छथि ।नेपालक राजकीय-प्रज्ञा-प्रतिष्ठानक सदस्य �राकेश� दिल्ली विश्वविद्यालयसँ पीएचडी आ अमेरिकास्थित इण्डियाना यूनिभर्सिटीसँ पोस्ट डाक्टरल रिसर्च कएने छथि । डा. �राकेश�क जन्म २५ जुलाइ १९४२ ई. कऽ सर्लाही जिलाक सिसौटियामे भेल छनि । नेपाली, मैथिली, हिन्दी आ अग्ङरेजीमे मौलिक, सम्पादित आ अनूदित कऽ करीब दू दर्जन पोथी प्रकाशित , दर्जनभरि देशक भ्रमण सेहो कएने छथि । नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानक सदस्यता- श्री राम दयाल राकेश (1999)। उपेन्द्र दोषी 1943-2001 जन्म स्थान रामपुर-कोरिगामा, दरभंगा । कवि-कथाकार, गीत-गजलकार । प्रकाशित कृति: यंत्रणाक क्षणमे (कविता संग्रह)। हिन्दीमे अनेक पोथी प्रकाशित। ओड़ियासँ मैथिली अनुवाद हेतु मृत्युपरान्त साहित्य अकादेमीसँ पुरस्कृत। २००३- उपेन्द दोषी (कथा कहिनी- मनोज दास, उड़िया) लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार। उदयचन्द्र झा "विनोद" 1943- जन्म 5 अप्रैल 1943 ई.। गाम- रहिका, मधुबनी । जन्म-ग्राम- दुलहा, मधुबनी । प्रकाशित कृति: संक्रान्ति, मौसम अयला पर, एहना स्थितिमे, भरि देह गौरा, एहि जनपदमे, दोहा तीन सय दू, कहलनि पत्नी, सहरजमीन, अपक्ष, प्रश्नवाचक (कविता-संग्रह), धूरी (सहयोगी कविता संग्रह); जाँत (कथा संग्रह), उदास गाछक वसंत (नाटक)। �माटि पानि�क वरेण्य सम्पादक।२००५ ई.-श्री उदय चन्द्र झा �विनोद�, रहिका, मधुबनी;यात्री-चेतना पुरस्कार। रेवती रमण लाल, जनकपुर 1943- मंत्रेश्वर झा 1944- जन्म ६ जनवरी १९४४ ई.ग्राम-लालगंज, जिला-मधुबनीमे। प्रकाशित कृति: खाधि, अन्चिनहार गाम, बहसल रातिक इजोत (कविता संग्रह); एक बटे दू (कथा संग्रह), ओझा लेखे गाम बताह (ललित निबन्ध)। मैथिली कथा संग्रहक हिन्दी अनुवाद �कुंडली� नामसँ प्रकाशित। दि फूल्स पैराडाइज (अंग्रेजीमे ललित निबन्ध)। २००८ ई.-श्री मंत्रेश्वर झा, लालगंज,मधुबनी यात्री-चेतना पुरस्कार। २००८- मंत्रेश्वर झा (कतेक डारि पर, आत्मकथा) पर साहित्य अकादमी पुरस्कार। रत्नेश्वर मिश्र 1945- अनुवादक, निबंधकार । प्रकाशन: तमिल साहित्यक इतिहास,भवभूति (दुनू अनुवाद)। जगदीश प्रसाद मंडल गाम-बेरमा, तमुरिया, जिला-मधुबनी। एम.ए.।कथाकार (गामक जिनगी-कथा संग्रह आ तरेगण- बाल-प्रेरक लघुकथा संग्रह), नाटककार(मिथिलाक बेटी-नाटक), उपन्यासकार(मौलाइल गाछक फूल, जीवन संघर्ष, जीवन मरण, उत्थान-पतन, जिनगीक जीत- उपन्यास)। मार्क्सवादक गहन अध्ययन। हिनकर कथामे गामक लोकक जिजीविषाक वर्णन आ नव दृष्टिकोण दृष्टिगोचर होइत अछि। विदेह सम्पादकक समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार २०११ मूल पुरस्कार- श्री जगदीश प्रसाद मण्डल (गामक जिनगी, कथा संग्रह)।मैथिली उपन्यास 'पंगु' लेल साहित्य अकादमी पुरस्कार २०२१ राज महाराजाधिराज लक्ष्मीश्वर सिंह 1858-1898 महाराजाधिराज रमेश्वर सिंह 1860-1929 महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह 1907-1962 सर हरगोविन्द मिश्र, अलीगढ़ आ कामेश्वर सिंह बिनोदानन्द झा 1895-1971 ललित नारायण मिश्र 1922-1975 डॉ. रामबरन यादव, नेपाल राष्ट्रपति स्वर्गीय विन्ध्येश्वरी प्रसाद मंडल, राजनेता 1919-1982 भूपेन्द्र नारायण मण्डल कर्पूरी ठाकुर 1921-1988 रामविलास पासवान १९४६- जन्म ५ जुलाइ १९४६, गाम- शहरबन्नी, जिला खगड़िया। भारतीय राजनीतिज्ञ। राम लषण राम "रमण" भोगेन्द्र झा चतुरानन मिश्र रमाकांत मिश्र रमानाथ मिश्र "मिहिर" "मैथिली मुहावरा एवम् लोकोक्ति प्रकाश" प्रकाशित। गजेन्द्र नारायण चौधरी, पत्रकार 1929-2008 मोहन भारद्वाज 1943- गाम- नवानी, जिला- मधुबनी । मैथिलीक प्रखर समालोचक।२००७ ई.-श्री आनन्द मोहन झा, भारद्वाज, नवानी, मधुबनी;यात्री-चेतना पुरस्कार। प्रबोध सम्मान 2008 सँ सम्मानित। योगानन्द झा 1955- २००५- डॉ. योगानन्द झा (बिहारक लोककथा- पी.सी.राय चौधरी, अंग्रेजी)लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार। प्रकाशित कृति: लोकजीवन ओ लोक साहित्य (निबन्ध) 1986, परिणीता (कथाकव्यांश) 1987, फकीर मोहन सेनापति (अनुवाद) 2000, आलेख सञ्चयन (निबन्ध) 2002, बिहारक लोककथा (अनुवाद) 2003, स्नेहलता (विनिबन्ध) 2006, मैथिली पत्रकारिताकेँ सौ वर्ष (निबन्ध) 2006, गहबरगीत (निबन्ध) 2007, लोक-साहित्य ओ शब्द-सम्पदा (निबन्ध) 2007, मैथिलीक पारम्परिक जातीय व्यवसायक शब्दावली (शोघ-ग्रन्थ) 2009 हीरानन्द झा "शास्त्री" ,पत्रकार दीनानाथ झा, पत्रकार नरेन्द्र झा, अर्थशास्त्र-पत्रकार "विकास ओ अर्थतंत्र" प्रकाशित। प्रेमशंकर झा, पत्रकार शरदिन्दु चौधरी, पत्रकार राजेश्वर झा (१९२३-१९७७) जन्म- सहरसा जिलाक रसुआर गाम (आब सुपौल जिला)। कृति- मिथिलाक्षरक उद्भव ओ विकास, अवहट्ठ: उद्भव ओ विकास, मैथिली साहित्यक आदिकाल, विद्यापतिक संगीतमे वर्णित नायक-नायिका भेद एवं राग-रागिनी वर्गीकरण। महाकवि विद्यापति नाटक, शास्त्रार्थ नाटक, कन्दर्पीघाट नाटक, एकादशी, विद्याधर-कथा, उर्वशी, धर्मव्याध- कथा, मेनका। एस.एन.सत्यार्थी मिथिलाक कला आ शिल्पकलापर लेखन। राधाकृष्ण चौधरी, इतिहासकार 1921-1985 मिथिलाक इतिहास, A Survey of Maithili Literature, THE POLITICAL AND CULTURALHERITAGE OF MITHILA प्रकाशित। प्रो. रामशरण शर्मा १९२०-२०११ विजयकान्त मिश्र इतिहासकार 1927-1994 डॉ. विजयकांत मिश्रक जन्म १० अगस्त १९२७ मंगरौनी गाम - जे नव्य न्याय आ तांत्रिक साधनाक जन्म-स्थली अछि- (जिला मधुबनी) मे भेलन्हि। ओ 1948 मे प्राचीन भारतीय इतिहास आ संस्कृति विषयमे एलाहाबाद विश्वविद्यालयसँ सनात्तकोत्तर उपाधि कएलाक बाद कतेक बरख धरि बिहार सरकार आ पटना विश्वद्यालयसँ सम्बद्ध रहलाह आ 1957 ई. सँ भारतीय पुरात्तत्व विभागमे काज कएलन्हि आ ओकर शिशुपालगढ़, कौशाम्बी, वैशाली, हस्तिनापुर, कुम्हरार, पाटलिपुत्र, करियन, सोनपुर, बिलावली, नालन्दा, राजगीर, चन्द्रवल्ली, आ हम्पी खुदाइमे विभिना भूमिकामे भाग लेलन्हि।हिनकर लिखल-सम्पादित पोथी सभमे अछि: 1.वैशाली,1950 2.कुम्हरार एक्सकेवेशंस: 1950-1957 3.पुरातत्व की दृष्टिमे वैशाली 4.नागेश भट्टाज पारिभाषेन्दुशेखर 5.मिथिला आर्ट एण्ड आर्किटेक्चर (सम्पादित) 6.कल्चरल हेरिटेज ऑफ मिथिला 7.श्रृंगार भजनावली- एक अध्ययन 8.क्षेत्र पुरातत्वविज्ञान- 9.पुरातत्व शब्दावली। द्विजेन्द्र नारायण झा, इतिहासकार सुरेश्वर झा, राजनीति विज्ञान २००१- सुरेश्वर झा (अन्तरिक्षमे विस्फोट- जयन्त विष्णु नार्लीकर, मराठी)लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार। भागीरथ लाल दास भारतक कएक देशमे राजदूत रहल छथि आ जी.ए.टी.टी. मे भारतक प्रतिनिधि सेहो छलाह। लक्ष्मीकान्त झा रिजर्व बैंक गवर्नर 1913-1988 एन. एन. झा डिप्लोमेट कामेन्द्रनाथ झा "अमल" 1938- जन्म- 4 जनवरी 1938, गाम कोइलख (मधुबनी)। ग्रिभांस (कथासंग्रह) प्रकाशित। भाग्यनारायण झा 1941- रमाकांत राय "रमा" 1947 जन्म- भादो पूर्णिमा सम्वत् 2003, प्रथम रचना- बटुक, बाल मासिक प्रयाग, कथा विशेषांक द्वितीय भागमे 1964ई., प्रकाशित कृति(क) तीनटा बाबाजी-(रूसीसँ मैथिलीमे मैथिलीमे टाल्स्टायक कथाक अनुवाद-1967ई.मे, (ख) फूलपात, कविता संग्रह 1978, (ग) भांगक गोला (2004 ई.मे), (घ) कटैत पाँखि: हँसैत आँखि, कथा संग्रह-2005, शीघ्र प्रकाश्य- कृष्णकान्त मिश्र (विनिबन्ध) साहित्य अकादेमी नई दिल्ली। प्राय: डेढ़ सए रचना (कथा-निबन्ध कविता) मैथिली हिन्दीक पत्र-पत्रिका, आकाशवाणी एवं दूरदर्शनसँ प्रकाशित/ प्रसारित। साहित्य अकादेमी द्वारा आयोजित कवि सम्मेलनक आयोजनक क्रममे रेलक चपेटमे पड़िदहिना पएर छाबा धरिगमा विकलांग। सेवा निवृत अध्यापक (उच्च विद्यालय) सम्पर्क- श्री रमानिवास, मानाराय टोल पो. नरहन (समस्तीपुर)। प्रोफेसर महेन्द्र 1947- जन्म: भेलाही, सुपौल, बिहार । प्रसिद्ध कवि, कथाकार, आलोचक । वृत्ति: भू.ना. विश्वविद्यालयक स्नातकोत्तर केन्द्र, सहरसामे मैथिली विभागाध्यक्ष। प्रकाशित कृति साहित्य अकादेमीसँ प्राकाशित मोनोग्राफ शैलेन्द्र मोहन झा । सहयोगी संकलन-संकल्प । �राजकमल जयन्ती प्रसंगक संपादन। महेन्द्र 1944-2009 जन्म मधुबनी जिलाक जमसम गाममे। प्रसिद्ध मैथिली गीतकार आ गायक। सुभाषचन्द्र यादव 1948- जन्म ०५ मार्च १९४८, मातृक दीवानगंज, सुपौलमे। पैतृक स्थान: बलबा-मेनाही, सुपौल।घरदेखिया (मैथिली कथा-संग्रह), मैथिली अकादमी, पटना, १९८३, हाली (अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद), साहित्य अकादमी, नई दिल्ली, १९८८, बीछल कथा (हरिमोहन झाक कथाक चयन एवं भूमिका), साहित्य अकादमी, नई दिल्ली, १९९९, बिहाड़ि आउ (बंगला सँ मैथिली अनुवाद), किसुन संकल्प लोक, सुपौल, १९९५, भारत-विभाजन और हिन्दी उपन्यास (हिन्दी आलोचना), बिहार राष्ट्रभाषा परिषद्, पटना, २००१, राजकमल चौधरी का सफर (हिन्दी जीवनी) सारांश प्रकाशन, नई दिल्ली, २००१, बनैत-बिगड़ैत (कथा-संग्रह) २००९। मैथिलीमे करीब सत्तरि टा कथा, तीस टा समीक्षा आ हिन्दी, बंगला तथा अंग्रेजी मे अनेक अनुवाद प्रकाशित। सुभद्र झा 1909-2000 "फॉर्मेशन ऑफ मैथिली लैंगुएज"क लेखक। १९८६- सुभद्र झा (नातिक पत्रक उत्तर, निबन्ध)पर मैथिलीक साहित्य अकादमी पुरस्कारसँ सम्मानित। रामावतार यादव, मैथिली भाषिकी, नेपाल 1942- देश-विदेशक भाषाविज्ञान जर्नलमे पचासो आलेखक द्वारा मैथिलीक विशिष्टताकेँ उजागर केनिहार। मैथिली ध्वनिशास्त्र 1984 ई. मे जर्मनीसँ आ मैथिलीक सन्दर्भ व्याकरण 1996 ई. मे बर्लिन आ न्यूयार्कसँ प्रकाशित। 2000 ई..मे लंदनसँ प्रकाशित भारतीय आर्यभाषा पुस्तक मे संकलित हिनकर मैथिली भाषा संबंधी आलेख विशेष उल्लेखनीय। नेपाल राजकीय प्रज्ञा-प्रतिष्ठानसँ पासाङ ल्हामु प्रज्ञा-पुरस्कारसँ सम्मानित। योगेन्द्र प्रसाद यादव, भाषिकी,सिरहा, नेपाल 1946- 1998 ई. मे जर्मनीसँ प्रकाशित इशुज इन मैथिली सिंटैक्स आ टॉपिक्स इन नेपालीज लिग्विस्टिक्स, रीडिंग्स इन मैथिली लंगुएज- लिटरेचर एण्ड कल्चर आ लेक्सीग्राफी इन नेपाल (सम्पादित) प्रकाशित। नेपाल राजकीय प्रज्ञा-प्रतिष्ठानमे भाषा-विभागक प्राज्ञ रहि कतोक महत्वपूर्ण कार्यक सम्पादन। नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानक सदस्यता श्री योगेन्द्र प्रसाद यादव (1994)। नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान आजीवन सदस्यता श्री योगेन्द्र प्रसाद यादव। रमानन्द झा 'रमण' 1949- जन्म: 02 जनबरी 1949, शिक्षा-एम.ए., पीएच.डी., आजीविका-भारतीय रिजर्व बैंक, पटना (सेवा निवृत्त)। प्रकाशन: 1. नवीन मैथिली कविता,1982, 2. मैथिली नऽव कविता,1993, 3. मैथिली साहित्य ओ राजनीति, 1994, 4. अखियासल, 1995, 5. बेसाहल,2003, 6. भजारल, 2005., 7. निर्यात कैसे शुरू करें? हिन्दी- रिजर्व बैंक, पटनाक प्रकाशन सम्पादित 8. मैथिलीक आरम्भिक कथा, 1978 समीक्षा, 9. श्यामानन्द रचनावली, 1981, 10. जनार्दन झा जनसीदन कृत निर्दयीसासु (1914) आ पुनर्विवाह (1926), 1984, 11. चेतनाथझाकृत श्रीजगन्नाथपुरी यात्रा (1910), 1994, 12. तेजनाथ झाकृत सुरराजविजय नाटक (1919), 1994, 13. रासबिहारीलाल दासकृत सुमति (1918), 1996, 14. जीबछ मिश्रकृत रामेश्वर (1916), 1996, 15. भेटघॉंट (भेटवार्ता), 1998, 16. रूचय तँ सत्य ने तँ फूसि, 1998, 17. पुण्यानन्द झाकृत मिथिला दर्पण (1925), 2003, 18. यदुवर रचनावली (1888-1934) 2003, 19. श्रीवल्लभ झा (1905-1940) कृत विद्यापति विवरण, 2005, 20. मैथिली उपन्यासमे चित्रित समाज, 2003। अनुवाद लेल भाषा-भारती सम्मान 2004-05 (सी.आइ.आइ.एल., मैसूर) छओ बिगहा आठ कट्ठा- फकीर मोहन सेनापतिक ओड़िया उपन्यासक मैथिली अनुवाद लेल प्राप्त। रामलोचन ठाकुर 1949- श्री रामलचन ठाकुर, जन्म १८ मार्च १९४९ ई.पलिमोहन, मधुबनीमे। वरिष्ठ कवि, रंगकर्मी, सम्पादक, समीक्षक। भाषाई आन्दोलनमे सक्रिय भागीदारी। प्रकाशित कृति- इतिहासहन्ता, माटिपानिक गीत, देशक नाम छल सोन चिड़ैया, अपूर्वा (कविता संग्रह), बेताल कथा (व्यंग्य), मैथिली लोक कथा (लोककथा), प्रतिध्वनि (अनुदित कविता), जा सकै छी, किन्तु किए जाउ(अनुदित कविता), लाख प्रश्न अनुत्तरित (कविता), जादूगर (अनुवाद), स्मृतिक धोखरल रंग (संस्मरणात्मक निबन्ध), आंखि मुनने: आंखि खोलने (निबन्ध)। अनुवाद लेल भाषा-भारती सम्मान 2003-04 (सी.आइ.आइ.एल., मैसूर) जा सकै छी, किन्तु किए जाउ- शक्ति चट्टोपाध्यायक बांग्ला कविता-संग्रहक मैथिली अनुवाद लेल प्राप्त। विदेह सम्पादकक समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार २०१२ अनुवाद पुरस्कार- श्री रामलोचन ठाकुर- (पद्मानदीक माझी, बांग्लासँ मैथिली अनुवाद, बांग्ला-उपन्यास - मानिक बंद्योपाध्याय) गंगा प्रसाद मंडल "अकेला", नेपाल 1944- पं सुन्दर झा शास्त्री राष्ट्रिय प्रतिभा पुरस्कारसँ सम्मानित। मिथिलांचलक किछु लोक कथा (संकलन आ सम्पादन) आ शिरीषक फूल (अनुवाद) प्रकाशित। महेन्द्रनारायण निधि, धनुषा, नेपाल परमेश्वर कापड़ि, धनुषा, नेपाल जयनारायण झा "जिज्ञासु", नेपाल सुरेश झा, नेपाल 1920-1995 रोहिणी रमण झा 1950- डॉ. कमलाकान्त भण्डारी 1952- कबीर (मैथिली) पर शोध। विनोद बिहारी लाल 1953- जन्म स्थान पचही, मधुबनी, बिहार ।चर्चित कथाकार । सयसँ ऊपर कथा प्रकाशित । अरविन्द ठाकुर 1954- परती टूटि रहल अछि (कविता संग्रह), अन्हारक विरोधमे (कथा संग्रह), बहुरुपिया प्रदेश मे (गजल संग्रह)। श्याम दरिहरे 1954- जन्म स्थान बरहा, बेनीपट्टी मधुबनी, बिहार । कवि, कथाकार । प्रकाशित कृति : सरिसोमे भूत (कथा संग्रह) अनूदित कृति : कनिप्रिया (धर्मवीर भारती) दिनेश कुमार झा मैथिलीक इतिहासपर लेखन। अशोक कुमार ठाकुर जन्म 2 जनवरी 1944 ई.। गाम बड़ागाँव (पंडौल)। नागमंडल (नाटक-अनुवाद), निशांत, वसुधाक संसार (उपन्यास) प्रतापनारायण झा, नेपाल शीतल झा, नेपाल उग्रनारायण मिश्र "कनक" डॉ. शम्भूनाथ चौधरी 1920-2008 इन्द्रकांत झा पंचानन मिश्र प्रोफेसर गुरमैता ज्योतिरीश्वरपर लेखन। महेन्द्र नारायण सिंह "मगन" सूर्यकांत झा, जनकपुर रमण झा (1957- ) रचना: पश्चात्ताप (कथा-संग्रह)-1995, काव्य-वाटिका (कविता-संग्रह)- 1999, अलंकार-भास्कर (पूर्व-खण्ड) - 2002, अलंकार-भास्कर (अलंकार शास्त्र)- 2003, भिन्न-अभिन्न (समीक्षा)- 2008, संग सम्पादन: मैथिली (मिथिला विश्वविद्यालय, मैथिली विभागक शोध-पत्रिका) - 1996, सम्पादन: मैथिली (मिथिला विश्वविद्यालय, मैथिली विभागक शोध-पत्रिका)- 2007,2008 विजयनाथ झा "अहींक लेल" (गीत-गजल संग्रह प्रकाशित)। योगानन्द हीरा बाबा बैद्यनाथ पहरा इमानपर (गजल संग्रह) जगदीश चन्द्र ठाकुर "अनिल" १९५०- मूल नाम जगदीश चन्द्र ठाकुर, जन्म: 27.11.1950,शंभुआर, मधुबनी । सेवा निवृत बैंक अधिकारी। मैथिलीमे प्रकाशित पोथी-1. तोरा अडनामे -गीत संग्रह-1978; 2. धारक ओइ पार-दीर्घ कविता-1999, गीत गंगा (गीत संग्रह), गजल गंगा (गजल संग्रह)। विद्यानन्द झा 1965- बुद्धपूर्णिमा, १९६५कें कैथिनियाँ, झंझारपुर मुधुबनीमे जन्म। पराती जकाँ, बिछड़ल कोनो पिरीत जकाँ, दनुफक फूल जकाँ (कविता संग्रह) प्रकाशित । मूलतः कवि, थोड़ कथा लिखलनि, जे अपन मार्मिक अभिव्यक्तिक कारण बेस चर्चित भेल । विडम्बनापूर्ण परिस्थितिक पाछू जिम्मेवार समाजार्थिक कारणक खोज हिनकर मूल सृजन प्रेरणा थिक । हरेकृष्ण झा 1950- जन्म १० जुलाई १९५० ई. गाम- कोइलखमे। अभियंत्रणक अध्ययण छोड़ि मार्क्सवादी राजनीतिमे सक्रिय। अनेक कविता आ आलोचनात्मक निबन्ध प्रकाशित। अनुवाद एवं विकास विषयक शोध कार्यमे रुचि। स्वतंत्र लेखन। प्रकृति एवं जीवनक तादात्म्य बोधक अग्रणी कवि। "एना त� नहि जे" (कविता संग्रह)।२००८ ई. - श्री हरेकृष्ण झाकेँ कविता संग्रह �एना त नहि जे�लेल कीर्तिनारायण मिश्र साहित्य सम्मान। उदय नारायण सिंह नचिकेता 1951- जन्म-१९५१ ई. कलकत्तामे।पहिल काव्य संग्रह �कवयो वदन्ति�। १९७१ �अमृतस्य पुत्राः� (कविता संकलन) आऽ �नायकक नाम जीवन� (नाटक)| १९७४ मे �एक छल राजा�/ �नाटकक लेल� (नाटक)। १९७६-७७ �प्रत्यावर्त्तन�/ �रामलीला�(नाटक)। १९७८मे जनक आऽ अन्य एकांकी। १९८१ �अनुत्तरण�(कविता-संकलन)। १९८८ �प्रियंवदा� (नाटिका)। १९९७-�रवीन्द्रनाथक बाल-साहित्य�(अनुवाद)। १९९८ �अनुकृति�- आधुनिक मैथिली कविताक बंगलामे अनुवाद, संगहि बंगलामे दूटा कविता संकलन। १९९९ �अश्रु ओ परिहास�। २००२ �खाम खेयाली�। २००६मे �मध्यमपुरुष एकवचन�(कविता संग्रह। २००८ ई. मे नाटक "नो एण्ट्री: मा प्रविश" सम्पूर्ण रूपेँ "विदेह" ई- पत्रिकामे धारावाहिक रूपेँ ई-प्रकाशित भए एकटा कीर्तिमान बनेलक।२००९ ई.-श्री उदय नारायण सिंह �नचिकेता�केँ नाटक नो एण्ट्री: मा प्रविश लेल कीर्तिनारायण मिश्र साहित्य सम्मान। आशीष अनचिन्हार मूल लेखन: कुमारि इच्छा (गजल संग्रह), जंघाजोड़ी (गजल संग्रह), अनचिन्हार आखर (गजल, रुबाइ आ कताक संग्रह), मैथिली गजलक व्याकरण ओ इतिहास, मैथिली वेब पत्रकारिताक इतिहास, मैथिली गजलक रेडी रेकोनर, शब्द-अर्थ-शक्ति। गजेन्द्र ठाकुर आ आशीष अनचिन्हार (सम्पादन): मैथिलीक प्रतिनिधि गजल, मैथिली गजल: आगमन ओ प्रस्थान बिंदु (गजलक आलोचना-समालोचना-समीक्षा) कुमार पवन 1958 गाम मुरैठा। कथा संग्रह, कविता संग्रह आ व्यंग्य संग्रह शीघ्र प्रकाश्य। मैथिलीमे १९९० ई सँ विरल लेखन। २००८ ई. सँ दस सालक मौन भंगक बाद पुनः रचनाक दोसर पालीक प्रारम्भ। कीर्तिनाथ झा 1955- कुरल: मैथिली भावानुवाद महेन्द्र हजारी स्व. चन्द्रकान्त मिश्र, आसी, दरभंगा स्व. महेन्द्र नारायण झा, बेलौंजा, मधुबनी स्व.राजकुमार मल्लिक, सोहराय (पोखरिभीड़ा), मधुबनी लक्ष्मीपति सिंह फूलचन्द्र मिश्र रमण किशोरनाथ झा गाम- विट्ठो, पो. सरिसवपाही, मधुबनी। "लोकवेद" पोथी प्रकाशित। सूर्यनारायण झा "सरस" पोथी "मैथिली श्री सीतारामचरितमानस" प्रकाशित। कलानन्द भट्ट कान्ह पर लहास हमर मैथिली गजल संग्रह दयानाथ झा गाम नागदह, मधुबनी। मैथिली रंगमंडल मिथि-यात्रिक, कोलकाता। डॉ. सुधाकर चौधरी १९४६- जन्म १५ मार्च १९४६ ई.। प्रकाशित पोथी: काजर, तीन रंग तेरह चित्र (कथा संग्रह), पंडी जी छत्ता (प्रहसन), विप्लवी सुभाष (नाटक)। स्व. चुनचुन मिश्र, रहिका, मधुबनी। मिथिला राज्यक आन्दोलन कर्मी। सत्यनारायण लाल कर्ण मिथिला चित्रकला ले. कर्नल मायानाथ झा 1945- जन्म 1 अप्रैल 1945 ई.। गाम- भराम (मधुबनी)। जकर नारि चतुर होइ (मैथिली लोक कथा संग्रह) प्रकाशित। विदेह सम्पादकक समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार २०११ बाल साहित्य पुरस्कार- ले.क. मायानाथ झा (जकर नारी चतुर होइ, कथा संग्रह) श्याम किशोर सिंह सचिन्द्रनाथ झा मिथिला लोक चित्रकला कालीनाथ ठाकुर ग्राम सर्वसीमा राजेन्द्र विमल, जनकपुर, नेपाल 1949- मैथिली, नेपाली आ हिन्दी भाषाक प्राज्ञ विमल शिक्षाक हकमे विद्यावारिधि (पी.एच.डी.)क उपाधि प्राप्त कएने छथि।कम्मो लिखिकऽ यथेष्ट यश अरजनिहार डा. विमलक लेखनीक प्रशंसा मैथिलीक सङ्गसङ्ग नेपाली आ हिन्दी साहित्यमे सेहो होइत रहलनि अछि। त्रिभुवन विश्वविद्यालयअन्तर्गत रा.रा.ब. कैम्पस, जनकपुरधाममे प्राध्यापन कएनिहार डा. विमलक पूर्ण नाम राजेन्द्र लाभ छियनि। हिनक जन्म २६ जुलाई १९४९ ई. कऽ भेल अछि। साहित्यकारक नव पीढ़ीकेँ निरन्तर उत्प्रेरित करबाक कारणे ई डा.धीरेन्द्रक बाद जनकपुर-परिसरक साहित्यिक गुरुक रूपमे स्थापित भऽ गेल छथि। नरेश कुमार विकल 1950- जन्म २७ जुलाइ १९५० भगवानपुर देसुआ (समस्तीपुर)। काव्य- अरिपन, महुआ मदन रस टपकय, बिन बाती दीप जरय। कथा-संग्रह- भरि गेल दर्दक इनार। उपन्यास- टहकैत टीस। नाटक- चोखगर खौंच। जनक किशोर लाल दास कृष्णचन्द्र झा "मयंक" लक्ष्मण झा "सागर" 1953- "उचरि बैसू कौआ" मैथिली कविता संग्रह प्रकाशित। रघुवीर मोची शारदानन्द दास "परिमल" शशिबोध मिश्र "शशि" 1946- सुरेन्द्रनाथ अमरनाथ १९७५ ई. मे "क्षणिका" लघुकथा संग्रह प्रकाशित। हास्य कथाकार। बच्चा ठाकुर बुद्धिनाथ मिश्र राजाराम सिंह राठौर, धनुषा वैद्यनाथ विमल 1955- डॉ वासुकीनाथ झा 1940- जितेन्द्र मिश्र "जीवन" वीरेन्द्र नारायण झा वीरेन्द्र झा 1956- गोनू झा पर लेखन। वैकुण्ठ झा 1954- पिता-स्वर्गीय रामचन्द्र झा, जन्म-२४ - ०७ - १९५४ (ग्राम-भरवाड़ा, जिला-दरभंगा), शिक्षा-स्नात्कोत्तर (अर्थशास्त्र), पेशा- शिक्षक। मैथिली, हिन्दी तथा अंग्रेजी भाषा मे लगभग २०० गीतक रचना। गोनू झा पर आधारित नाटक ''हास्यशिरोमणि गोनू झा तथा अन्य कहानी" क लेखन। एकर अलावा हिन्दीमे लगभग १५ उपन्यास तथा कथाक लेखन। वैकुण्ठ झा विद्यानन्द झा 'पञ्जीकार' 1957- जन्म-09.04.1957,पण्डुआ, ततैल, ककरौड़(मधुबनी), रशाढ़य(पूर्णिया), शिवनगर (अररिया) आ सम्प्रति पूर्णिया। पिता लब्ध धौत पञ्जीशास्त्र मार्त्तण्ड पञ्जीकार मोदानन्द झा, शिवनगर, अररिया, पूर्णिया| पितामह-स्व. श्री भिखिया झा। पञ्जीशास्त्रक दस वर्ष धरि 1970 ई.सँ 1979 ई. धरि अध्ययन, 22 वर्षक बएससँ पञ्जी-प्रबंधक संवर्द्धन आ संरक्षणमे संलग्न। कृति- पञ्जी शाखा पुस्तकक लिप्यंतरण आ संवर्द्धन। महेन्द्र नारायण कर्ण डॉ. विश्वेश्वर मिश्र अर्जुन नारायण चौधरी नरेन्द्र गजलकार। महेन्द्र मिश्र, नेपाल कमल कांत झा 1943- महाप्रकाश 1946- जन्म: बनगांव, सहरसा, बिहार । वरिष्ट कवि ओ कथाकार। प्रकाशित कृति: कविता संभवा, संग समय के (कविता संग्रह)। कीर्तिनारायण मिश्र साहित्य सम्मान २०१० ई.- श्री महाप्रकाश (कविता संग्रह �संग समय के�)। छत्रानन्द सिंह झा 1946- अयोध्यानाथ चौधरी, धनुषा, नेपाल 1947- मूलत: कविक रूपमे परिचित छथि । नेपालक आधुनिक कविताक क्षेत्रमे हिनक नाम उल्लेखनीय अछि । श्री चौधरीक लेखनमे मानवीय संवेदनाक प्रतिबिम्ब पाओल जाइत अछि । कविताक संग कथा आ निबन्धमे सेहो ई कलम चलबैत छथि । फड़िछाएल लेखन हिनक विशेषता थिकनि ।धनुषा जिलाक दुहबी गामक रहनिहार श्री चौधरीक जन्म ६अक्टुबर १९४७कऽ भेल छनि । हिनक क्षितिजक ओहिपार नामसँ एक कविता-सग्ङप्रह प्रकाशित छनि । विद्यानाथ झा 'विदित' सियाराम झा "सरस" 1948- जन्म स्थान मेंहथ, मधुबनी बिहार । प्रसिद्ध गीतकार, बादमे कथा लेखन प्रारम्भ केलनि । प्रकाशित कृति आंजुर भरि सिंगरहार, शोणिताएल उगैत सूर्यक धम्मक (कथा संग्रह)। अग्निपुष्प 1948- जन्म: तरौनी, दरभंगा। मूलनाम : महेन्द्र झा । मैथिलीमे सहस्त्रबाहु कविता संग्रह प्रकाशित । मुक्ति प्रसंगक अनुवाद प्रकाशित । वामपंथी आन्दोलनमे सक्रिय। शिक्षा, सम्वाद आदि पत्रिकाक सम्पादन । वामपंथी विचारधाराक सशक्त कवि। मधुकांत झा 1949- वीनू भाइ सत्यानन्द पाठक योगीराज कुणाल 1951- राम भरोस कापड़ि भ्रमर, धनुषा, नेपाल 1951- जन्म-बघचौरा, जिला धनुषा (नेपाल)।बन्नकोठरी: औनाइत धुँआ (कविता संग्रह), नहि, आब नहि (दीर्घ कविता), तोरा संगे जएबौ रे कुजबा (कथा संग्रह, मैथिली अकादमी पटना, १९८४), मोमक पघलैत अधर (गीत, गजल संग्रह, १९८३), अप्पन अनचिन्हार (कविता संग्रह, १९९० ई.), रानी चन्द्रावती (नाटक), एकटा आओर बसन्त (नाटक), महिषासुर मुर्दाबाद एवं अन्य नाटक (नाटक संग्रह), अन्ततः (कथा-संग्रह), मैथिली संस्कृति बीच रमाउंदा (सांस्कृतिक निबन्ध सभक संग्रह), बिसरल-बिसरल सन (कविता-संग्रह), जनकपुर लोक चित्र (मिथिला पेंटिङ्गस), लोक नाट्य: जट-जटिन (अनुसन्धान)। नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानक सदस्यता- श्री राम भरोस कापड़ि 'भ्रमर' (2010)। धीरेन्द्रनाथ मिश्र शिवेन्द्रलाल कर्ण, धनुषा, नेपाल 1951- लेखकसँ अधिक शिक्षकक रूपमे परिचित आ प्रतिष्ठित छथि । त्रिभुवन विश्वविद्यालयअन्तर्गतरा. रा. ब. कैम्पस, जनकपुर-धामक सह-प्राध्यापक श्री कर्णक ऐतिहासिक विषय-वस्तुपर लिखल कतोक लेख मैथिली, हिन्दी आ अग्ङरेजी भाषामे प्रकाशित अछि । स्वान्त-सुखाय ई कहियो कालकऽ कविता-कथा सेहो लिखि लैत छथि । हिनक लेखन ज्ञानवर्द्धक, जानकारीमूलक एवं सोझारएल रहैत अछि । देखलापर बुझना जाइत अछि जे ई हिनक गम्भीर अध्ययनक परिणति थिक ।सामाजिक तथा साहित्यिक सङ्घ-संस्थासभमे सेहो सक्रिय प्राध्यापक कर्णक जन्म धनुषा जिलाक देवडीहा गाममे २ जनवरी १९५१ ई. कऽ भेल छनि । ब्रह्मदेव लाल दास चण्डेश्वर खान गाम- पट्टीटोल, जिला मधुबनी। लघुकथा लेल चर्चित प्रशंसित। दयाकान्त झा गजेन्द्र नारायण सिंह, नेपाल पद्मश्री श्री गजेन्द्र नारायण सिंह हरिकान्त झा इन्द्रनारायण झा प्रवासी साहित्यालंकार सीताराम सिंह तुलानन्द मिश्र शैलेन्द्र कुमार झा 1952- जन्म स्थान हरिपुर, वकशी टोल, मधुबनी बिहार। प्रकाशित कृति: आरोह अवरोह, दशम खुट्टी (कथा संग्रह), इकोनोमिक हिस्ट्री ऑफ मिथिला (अंग्रेजी) । शिवशंकर श्रीनिवास 1953- जन्म स्थान लोहना मधुबनी, बिहार । चर्चित कथाकार ओ आलोचक । गीत ओ कविता सेहो कहियो काल लिखैत छथि । प्रकाशित कृति : त्रिकोण, अदहन, गाछ-पात, गामक लोक (कथा संग्रह)। अशोक 1953- जन्म स्थान लोहना, मधुबनी, बिहार। चर्चित कथाकार, कवि ओ सम्पादक । प्रकाशित कृति : चक्रव्यूह (कविता संग्रह) त्रिकोण (सहयोगी कथा संग्रह), ओहि रातिक भोर (कथा-संग्रह), मातवर (कथा संग्रह)। विभूति आनन्द 1953- जन्म: शिवनगर, मधुबनी, बिहार। चर्चित कवि, कथाकार, संपादक । प्रकाशित कृति टूटा उपन्यास टूटा समीक्षा, तीन टा कथ संग्रह, टूटा गीत-गजल संग्रह ओ चारिटा कथा-संग्रह प्रकाशित।२००६- विभूति आनन्द (काठ, कथा)मैथिली लेल साहित्य अकादमी पुरस्कार । केदार कानन 1959- जन्म स्थान सुपौल, बिहार। चर्चित कवि, कथाकार ओ संपादक। प्रकाशित कृति : आकार लैत शब्द (कविता संग्रह), अनूदित कृति राजा राम मोहन राय, प्रायश्चित। सम्पादन संकल्प, भारती मंडन (पत्रिका)। डॉ. शशिनाथ झा 1954- गाम-दीप, जिला- मधुबनी। मैथिली, बांग्ला, नेवारी आ देवनागरी पांडुलिपिक विशेषज्ञ। साहित्य अकादमीक भाषा सम्मान 2007 क्लासिकल आ मध्यकालीन साहित्य लेल। धनुर्धर झा गाम- विशौल। "वाक्यार्थविवेचनम्" लेल श्रीवाणीयुवालंकरण पुरस्कार 2010 प्राप्त। शिवकान्त पाठक डॉ. योगेन्द्र पाठक "वियोगी" , वैज्ञानिक "विज्ञानक बतकही" प्रकाशित। राजनन्द झा २००६- राजनन्द झा (कालबेला- समरेश मजुमदार, बांग्ला)लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार। आद्यानाथ झा "नवीन" अमलतास 1956- यंत्रनाथ मिश्र दिगम्बर ठाकुर गणेश झा 1950- कन्दर्पनारायण लाल कर्ण शैलेन्द्र आनन्द 1955- कमलाकांत झा अध्यक्ष, मैथिली अकादमी, पटना लल्लन प्रसाद ठाकुर 1951-1995 जन्म ५ फरबरी १९५१ मुंगेर मे श्रीमती सुभद्रा देवी आ श्री हीरानंद ठाकुरक द्वितीय बालक । हिनक ग्राम- समौल,जिला-मधुबनी। सिविल इंजीनियर, टाटा स्टीलमे चाकरी। प्रकाश झाक फ़िल्म "कथा माधोपुर की" मे मुख्य भुमिका। नाटककार आ मंच अभिनेता। हुनक लिखल किछु प्रसिद्ध मैथिली नाटक छन्हि :बडका साहेब,मिस्टर निलो काका, लोंगिया मिरचाई,बकलेल आदि वा अंत। डॉ. कमलानन्द झा लोकनाथ मिश्र डॉ. रवीन्द्र कुमार चौधरी 1966- जन्म:5 मार्च 1966 ई. गनपतगंज, सुपौल। मैथिलीक प्राध्यापक। रक्षामंत्रीक पदक आ बिहार आ झारखण्ड सरकार द्वारा पुरस्कृत। झारखण्डक मैथिली आन्दोलनमे अग्रणी। अशोक अविचल जन्म- ५ जनवरी १९६७, गाम- रहुआ संग्राम, जिला मधुबनी। मैथिली प्राध्यापक। रचना: एक बनू नेक बनू (लघु नाटक), मैथिली भाषा: सर्वेक्षण आ विश्लेषण, हमरा देशक भागमे (मैथिलीक प्रथम असंगत नाटक), सम्पादन: झारखण्डक सनेश, कचोट (नौ अंक), झारखण्ड वाणी (हिन्दी साप्ताहिक), सम्मान: अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलनमे सम्मान (२०००), परमहंस लक्ष्मीनाथ गोस्वामी समिति सम्मान (२००८) डॉ. श्रीपति सिंह १९४४- "उमंग-तरंग" कविता-संग्रह प्रकाशित। डॉ. उमाकान्त मैथिली व्यंग्य-आलेखक पोथी "अपन बात" प्रकाशित। सुशील 1942- अस्मिता (लघुकथा संग्रह), भामती (नाटक) प्रकाशित। श्रीदेव मूल नाम- वागेश्वर झा। कथा-सँग्रह "हिलकोर", नाटक "लोहक कङना", गीत-प्रबन्ध "पुलोमा" प्रकाशित। सुकांत सोम 1950- जन्म दरभंगा जिलाक तरौनी गाममे 1950 ई. मे भेलन्हि । बी. ए. पास कए ई पटनाक दैनिक �जनशक्ति�क सहायक सम्पादक छलाह । फेर नव भारत टाइम्स, पटनामे।बाल्यवस्थासँ अपन पैतृक (पिता यात्नीजी) गुण कविता करबाक तथा कथा लिखबामे सेहो यश अर्जन कएलन्हि अछि । वर्त्तमान राजनीति सामाजिक विषयसँ सम्बद्ध व्यंग्यात्मक, सरल भाषामे लिखल नव कविता हिनक विशेषता छन्हि । गामघरक परिवेश तदनुकूल शब्द एवं बिम्ब रचनामे क्रमहि सिद्ध छथि । डॉ. देवकांत मिश्र 1952- पिता कविचूड्क्षामणि पं. काशीकांत मिश्र "मधुप", "बेनीपुर अनुमण्डलमे मैथिली" पोथी प्रकाशित। डॉ. नित्यानन्द लाल दास पिता स्वर्गीय सूर्यनारायण दास। फारबिसगंज कॉलेज, फारबिसगंज सँ अंग्रेजी विभागाध्यक्ष पदसँ १९९८ मे अवकाशप्राप्त। डॉ. सुरेन्द्र झा "सुमन"क संयोजकत्वक कार्यकालमे "मैथिली परामर्शदातृ समिति" (साहित्य अकादेमी, दिल्ली)क सदस्य। मैथिली पत्रिका सभ जेना बटुक, प्रयाग; मिथिला मिहिर, पटना; स्वदेश, दरभंगा; पहुँच, पटना आ परती पलार, अररियामे रचना प्रकाशित। १९६७ ई. सँ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मे सक्रिय। प्रांतीय प्रतिनिधि २००४ धरि जिला सरसंघचालक। जे.पी.आन्दोलनमे लोकतंत्र सेनानी। डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलामक अंग्रेजी पोथी "इग्नाइटेड माइण्ड्स"क मैथिलीमे "प्रज्वलित प्रज्ञा" नामसँ अनुवाद। साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार २०१०- डॉ. नित्यानन्द लाल दास- (इग्नाइटेड माइण्ड्स- डॉ.ए.पी.जे. कलाम, अंग्रेजी) लेल। राजनाथ मिश्र 1950- "अ बर्ड्स आइ व्यू ऑन मिथिला" प्रकाशित। पशुपतिनाथ झा, महोत्तरी, नेपाल 1954- हिनक लेखन विवरणात्मक होइत अछि आ सम्बद्ध विषयमे नीकजकॉ जानकारी दैत अछि । विभिन्न पत्र-पत्रिकामे हिनक लेख-रचना बरोबरि देखबामे अबैत रहैछ ।रा.रा.ब. कैम्पस, जनकपुरधाममे मैथिली विषयक प्राध्यापनमे संलग्न श्री झा मैथिलीसम्बन्धी सग्ङठनात्मक गतिविधिसँ सेहो जुड़ल छथि । मैथिली भाषाक लोपोन्मुख अवस्थामे रहल अपन लिपि तिरहुतामे विशेषज्ञता रखनिहार श्री झा एकर संरक्षण-सम्बर्द्धनक दिशामे सेहो क्रियाशील छथि ।प्रध्यापक झा मैथिली महाकाव्यमे रस निरूपण विषयपर विद्यावारिधि कएने छथि आ शिक्षा तथा कानून विषयमे सेहो स्नातक छथि । महोत्तरी जिलाक एकरहिया रहनिहार श्री झाक जन्म ४ दिसम्बर १९५४ कऽ भेलछनि ।चेन्नैमे मिथिला रत्नसँ सम्मानित। अनिलचन्द्र ठाकुर 1954-2009 जन्म 13 सितम्बर 1954 ई.केँ कटिहार जिलाक समेली गाममे भेलन्हि। 1982 ई.मे हिन्दी साहित्यमे स्नातकोत्तर केलाक बाद नवम्बर '93 सँ नवम्बर '94 धरि "सुबह" हस्तलिखित पत्रिकाक सम्पादन-प्रकाशन कएलन्हि आ कोशी क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकमे अधिकारी रहथि। मैथिली, अंगिका, हिन्दी आ अंग्रेजीमे समानरूपेँ लेखन। मृत्युक पूर्व ब्रेन ट्यूमरसँ बीमार चलि रहल छलाह। प्रकाशित कृति: आब मानि जाउ(मैथिली उपन्यास)- पहिने भारती-मंडन पत्रिकामे प्रकाशित भेल, फेर मैलोरंग द्वारा पुस्तकाकार प्रकाशित भेल।; कच( अंगिकाक पहिल खण्ड काव्य,1975); एक और राम (हिन्दी नाटक,1981); एक घर सड़क पर (हिन्दी उपन्यास, 1982); द पपेट्स (अंग्रेजी उपन्यास, 1990); अनत कहाँ सुख पावै (हिन्दी कहानी संग्रह,2007)। आब मानि जाउ (मैथिली उपन्यास) - एहि उपन्यासमे एक एहन युवतीक संघर्ष-गाथा अंकित अछि जे अपन लगनसँ जीवन बदलैत अछि। असंख्य गामक ई कथा कुलीनताक अधःपतनक कथा, संस्कारविहीनताक उद्घाटन आ भविष्यक पीढ़ीकेँ बचएबाक चेतौनी छी। बृषेश चन्द्र लाल जन्म 29 मार्च 1955 ई. केँ भेलन्हि। पिताः स्व. उदितनारायण लाल,माताः श्रीमती भुवनेश्वरी देव। हिनकर छठिहारक नाम विश्वेश्वर छन्हि। मूलतः राजनीतिककर्मी । नेपालमे लोकतन्त्रलेल निरन्तर संघर्षक क्रममे १७ बेर गिरफ्तार । लगभग ८ वर्ष जेल ।सम्प्रति तराई�मधेश लोकतान्त्रिक पार्टीक राष्ट�ीय उपाध्यक्ष । मैथिलीमे किछु कथा विभिन्न पत्रपत्रिकामे प्रकाशित । आन्दोलन कविता संग्रह आ बी.पीं कोइरालाक प्रसिद्ध लघु उपन्यास मोदिआइनक मैथिली रुपान्तरण तथा नेपालीमे संघीय शासनतिर नामक पुस्तक प्रकाशित । ओ विश्वेश्वर प्रसाद कोइरालाक प्रतिबद्ध राजनीति अनुयायी आ नेपालक प्रजातांत्रिक आन्दोलनक सक्रिय योद्धा छथि। नेपाली राजनीतिपर बरोबरि लिखैत रहैत छथि। नारायणजी 1956- जन्म: घोघरडीहा (मधुबनी)। मैथिली भाषा-साहित्यमे एम. ए., पी-एच. डी. कामेश्वर लता संस्कृत विद्यालय, घोघरडीहामे अध्यापन । प्रकाशित कृति: �घरि घुरि रहल छी� (काव्य-संग्रह)। डॉ. श्री श्रीशंकर झा 1952- जगदीपनारायण "दीपक" राजदेव मंडल शिक्षा- एम.ए.द्वय, एल एल बी.,पता- ग्राम-मुसहरनियाँ, रतनसारा (निर्मली, मधुबनी)। प्रकाशित कृति- अम्बरा-कविता-संग्रह, हमर टोल (उपन्यास), बसुंधरा(कविता संग्रह), जाल (पटकथा), लाज (एकांकी), जल भंवर (उपन्यास), त्रिवेणीक रंग (विहनि आ लघु कथा संग्रह), पंचैती (लघु पटकथा), वापसी। शिवप्रसाद यादव हीरेन्द्र कुमार झा 1958- जन्म 30 अगस्त 1958,गाम- कोइलख (मधुबनी), पिता श्री कामेन्द्र नाथ झा। ट्रांसफर्मर (मैथिली कथा संग्रह) प्रकाशित। मानेश्वर मनुज 1958- जन्म गम्हरिया (मानपौर, मधुबनी)मे, 1978सँ 1992 धरि नौसेनामे विभिन्न जहाजपर कार्यरत, फेर यात्री रेलमे। सम्बन्ध (कथा संग्रह) प्रकाशित। नबोनाथ झा महेन्द्र नारायण राम 1958- तारानन्द वियोगी 1966- महिषी, सहरसामे जन्म। पहिल पोथी अपन युद्धक साक्ष्य (गजल संग्रह) १९९१ मे प्रकाशित। अन्य पुस्तक हस्तक्षेप, प्रलय रहस्य(कविता-संग्रह), अतिक्रमण (कथा-संग्रह), शिलालेख (लघुकथा संग्रह), कर्मधारय। राजकमल चौधरीक कथाकृति एकटा चंपाकली एकटा विषधर संकलन-सपादन। साहित्य अकादेमी मैथिली बाल साहित्य पुरस्कार २०१०-तारानन्द वियोगीकेँ पोथी "ई भेटल तँ की भेटल" लेल। यात्री-चेतना पुरस्कार २०१० ई.- डॉ. तारानन्द वियोगी। भालचन्द्र झा ए.टी.डी., बी.ए., (अर्थशास्त्र), मुम्बईसँ थिएटर कलामे डिप्लोमा। मैथिलीक अतिरिक्त हिन्दी, मराठी, अग्रेजी आ गुजरातीमे निष्णात। १९७४ ई.सँ मराठी आ हिन्दी थिएटरमे निदेशक। महाराष्ट्र राज्य उपाधि १९८६ आ १९९९ मे। आइ.एन.टी. केर लेल नाटक �सीता� क निर्देशन। �वासुदेव संगति� आइ.एन.टी.क लोक कलाक शोध आ प्रदर्शनसँ जुड़ल छथि आ नाट्यशालासँ जुड़ल छथि विकलांग बाल लेल थिएटरसँ। निम्न टी.वी. मीडियामे रचनात्मक निदेशक रूपेँ कार्य।लेखन-बीछल बेरायल मराठी एकांकी(अनुवाद), सिंहावलोकन (मराठी साहित्यक १५० वर्ष), आकाश (जी.टी.वी.क धारावाहिकक ३० एपीसोड), जीवन सन्ध्या( मराठी साप्ताहिक, डी.डी, मुम्बई), धनाजी नाना चौधरी (मराठी), स्वयम्बर (मराठी), फिर नहीं कभी नहीं( हिन्दी), आहट (हिन्दी), यात्रा ( मराठी सीरयल), मयूरपन्ख ( मराठी बाल-धारावाहिक), हेल्थकेअर इन २०० ए.डी.) (डी.डी.)।२००९ मे- भालचन्द्र झा (बीछल बेरायल मराठी एकाँकी- सम्पादक सुधा जोशी आ रत्नाकर मतकरी, मराठी)लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार। मनमोहन झा कुमार शैलेन्द्र रमेश 1961- जन्म स्थान मेंहथ, मधुबनी, बिहार। चर्चित कथाकार ओ कवि । प्रकाशित कृति: समांग, समानांतर, दखल (कथा संग्रह), नागफेनी (गजल संग्रह), संगोर, समवेत स्वरक आगू, कोसी धारक सभ्यता, पाथर पर दूभि (काव्य संग्रह), प्रतिक्रिया (आलोचनात्मक निबंध)। मेघन प्रसाद 1961- प्रदीप बिहारी 1963- जन्म स्थान कन्हौली मल्लिक टोल, खजौली, मधुबनी, बिहार। चर्चित कथाकार, उपन्यासकार ओ रंगकर्मी । प्रकाशित कृति: गुमकी ओ बिहाड़ि, विसूवियस (उपन्यास), औतीह कमला जयतीह कमला, खण्ड-खण्ड जिनगी, सरोकार (कथा संग्रह)। २००७- प्रदीप बिहारी (सरोकार, कथा)मैथिली लेल साहित्य अकादमी पुरस्कार । चन्द्रमोहन झा पर्वा डॉ. सुरेन्द्र लाभ, नेपाल रोशन जनकपुरी, नेपाल डॉ. अरविन्द अक्कू 1957- फूलचन्द्र झा "प्रवीण" 1961- गाम तुमौल दरभंगा, आयल नवल प्रभात, पांगल गाछक छाहरि, हमरा मोनक खजन चिड़ैया, बसंतक बजनिञा (कविता संग्रह), भूत होइत भविष्य़ (कथा संग्रह)। देवशंकर नवीन 1962- ओ ना मा सी (गद्य-पद्य मिश्रित हिन्दी-मैथिलीक प्रारम्भिक सर्जना), चानन-काजर (मैथिली कविता संग्रह), आधुनिक (मैथिली) साहित्यक परिदृश्य, गीतिकाव्य के रूप में विद्यापति पदावली, राजकमल चौधरी का रचनाकर्म (आलोचना), जमाना बदल गया, सोना बाबू का यार, पहचान (हिन्दी कहानी), अभिधा (हिन्दी कविता-संग्रह), हाथी चलए बजार (कथा-संग्रह)। कुमार मनीष अरविन्द 1964- बदरी नारायण बर्मा राजेन्द्र किशोर, नेपाल श्याम सुन्दर शशि, नेपाल श्याम सुन्दर शशि, जनकपुरधाम, नेपाल। पेशा-पत्रकारिता। शिक्षा: त्रिभुवन विश्वविद्यालयसँ,एम.ए. मैथिली, प्रथम श्रेणीमे प्रथम स्थान। मैथिलीक प्रायः सभ विधामे रचनारत। बहुत रास रचना विभिन्न पत्र-पत्रिकामे प्रकाशित। हिन्दी, नेपाली आऽ अंग्रेजी भाषामे सेहो रचनारत आऽ बहुतरास रचना प्रकाशित। सम्प्रति- कान्तिपुर प्रवासक अरब ब्यूरोमे कार्यरत। हिमांशु चौधरी, नेपाल पिता : स्वर्गीय कामेश्र्वर चौधरी,माताः श्रीमती चन्द्रावती चौधरी,जन्मः वि स २०२०/६/५ लहान, सिरहा,शिक्षाः स्नातकोत्तर(नेपाली),पेशाः पत्रकारिता (सम्प्रति : राष्ट्रिय समाचार समिति ),कृति : की भार सांठू ? (मैथिली कविता संग्रह ),विगत दू दशकसं नेपाली आ मैथिली लेखन तथा अभियानमे निरन्तर क्रियाशील आ विभिन्न संघ संस्थासं आबद्ध । सत्यनारायण मेहता भुवनेश्वर पाथेय राजेन्द्र झा, धनुषा अशोक कुमार मेहता धर्मेन्द्र विह्वल, सिरहा, नेपाल 1967- रस्ता तकैत जिनगी, एक सृष्टि एक कविता, एक समयक बात, धुअनाएल आकृति सभ (मैथिली कविता संग्रह), भ्रमरका उत्कृष्ट नाटकहरु, गोनूझाका कथाहरु (मैथिलीसँ नेपाली अनुवाद), मैथिलीक कक्षा 1 सँ 5 आ बाल-साहित्य संदर्भक तीनटा पोथीक सह-लेखक। पत्रकारिताक मूल सिद्धांत (मैथिली, प्रेसमे), दलित रिपोर्टिंग मैनुअल (नेपाली, प्रेसमे)। धीरेन्द्र कुमार झा निमिष झा, नेपाल गौरीनाथ (अनलकान्त) "अन्तिका"क सम्पादन। आनन्द कुमार झा 1977- जन्म स्थान: मेंहथ, झंझारपुर; पिता स्व. अभयकांत झा, माता श्रीमती इन्द्रकाली देवी, प्रकाशन- "धधाइत नवकी कनियाँक लहास", "हठात् परिवर्तन", "बदलैत समाज", "टाकाक मोल", "कलह" (पाँचू मैथिली नाटक) प्रकाशित। विदेह सम्पादकक समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार २०११ युवा पुरस्कार- आनन्द कुमार झा (कलह, नाटक) वनदेवीपुत्र भवनाथ, नाटककार चन्द्रेश राम सेवक सिंह शहीद दुर्गानन्द झा, नेपाल उदयनाथ झा "अशोक" कपिलेश्वर राउत उलहन (विहनि - लघु कथा संग्रह) प्रकाशित। कपिलेश्वर साहू डॉ. शम्भु कुमार सिंह जन्म: 18 अप्रील 1965 सहरसा जिलाक महिषी प्रखंडक लहुआर गाममे। आरंभिक शिक्षा, गामहिसँ, आइ.ए., बी.ए. (मैथिली सम्मान) एम.ए. मैथिली (स्वर्णपदक प्राप्त) तिलका माँझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर, बिहार सँ। BET [बिहार पात्रता परीक्षा (NET क समतुल्य) व्याख्याता हेतु उत्तीर्ण, 1995] �मैथिली नाटकक सामाजिक विवर्त्तन� विषय पर पी-एच.डी. वर्ष 2008, तिलका माँ. भा.विश्वविद्यालय, भागलपुर, बिहार सँ। मैथिलीक कतोक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिका सभमे कविता, कथा, निबंध आदि समय-समय पर प्रकाशित। वर्तमानमे शैक्षिक सलाहकार (मैथिली) राष्ट्रीय अनुवाद मिशन, केन्द्रीय भारतीय भाषा संस्थान, मैसूर-6 मे कार्यरत। कृष्णचन्द्र यादव, नेपाल शिवकान्त ठाकुर शोभाकान्त झा उमाकान्त झा आ प्रियंका, मैथिली रंगमंच श्यामानन्द ठाकुर हरिकांत लाल दास, नेपाल शशिनाथ ठाकुर, नेपाल दुर्गानन्द मंडल संचयिका, कथा कुसुम (विहनि आ लघु कथा संग्रह), चक्षु प्रकाशित। शिव कुमार झा 1973- शिव कुमार झा ��टिल्लू��,पिताक नामः स्व. काली कान्त झा ��बूच��, माताक नामः स्व. चन्द्रकला देवी,जन्म तिथिः 11-12-1973,शिक्षाः स्नातक (प्रतिष्ठा),जन्म स्थानः मातृक- मालीपुर मोड़तर, जि. - बेगूसराय, मूलग्रामः ग्राम-पत्रालय - करियन, जिला - समस्तीपुर, पिन: 848101,संप्रतिः प्रबंधक, संग्रहण,जे. एम. ए. स्टोर्स लि.,मेन रोड, बिस्टुपुर जमशेदपुर - 831 001, अन्य गतिविधिः वर्ष 1996 सँ वर्ष 2002 धरि विद्यापति परिषद समस्तीपुरक सांस्कृतिक ,गतिवधि एवं मैथिलीक प्रचार-प्रसार हेतु डॉ. नरेश कुमार विकल आ श्री उदय नारायण चौधरी (राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक) क नेतृत्वमे संलग्न। प्रकाशित कृति: क्षणप्रभा-कविता-संग्रह, अंशु-समालोचना। राम विलास साहु मनक मैल, अंकुर- लघुकथा संग्रह, रथक चक्का उलटि चलै बाट (कविता/ टनका संग्रह), कर्म बिनु जग सुन्ना (दोसर कविता/ टनका संग्रह), स्कूलक खिचड़ी (विहनि/ लघु कथा संग्रह), दूधबेचनी (लघु कथा संग्रह) प्रकाशित। महाकान्त ठाकुर बचेश्वर झा, निर्मली "निबन्ध-निकुञ्ज" प्रकाशित। धीरेन्द्र कुमार, निर्मली चन्द्रशेखर कामति 1959- मैथिली कवि। शिक्षा- एम.ए. (राजनीतिशास्त्र), पिता- स्व. योगेन्द्र कामति, गाम-पोस्ट- करियन, भाया- इलमास नगर, थाना- रोसड़ा, जिला- समस्तीपुर, बिहार। संप्रतिप्रखण्ड सहकारिता प्रसार पदाधिकारी (बेनीपट्टी)। नन्द विलास राय "भरदुतिया", "छठिक डाला", "हमर चारूधाम" प्रकाशित। बिनय भूषण उजरा परवाक खोज (कविता संग्रह) सुधाकर झा, महोत्तरी , नेपाल सएसँ बेशी सड़क नाटकमे मंचन। सदरे आलम "गौहर" गाम-पुरसौलिया, भाया- जयनगर, जिला मधुबनी। डॉ. भुवन किशोर मिश्र "भुवनेश" मैथिली कथा संग्रह- गोबरछत्ता। दिनकर कुमार "पूर्वोत्तर मैथिल"क सम्पादन। डॉ. विनय विश्वबन्धु रामदेव प्रसाद मण्डल झारूदार मैथिलीक भिखारी ठाकुरक नामसँ प्रसिद्ध मैथिलीक पहिल जनकवि रामदेव प्रसाद मण्डल �झारूदार�। "हमरा बिनु जगत सूना छै" आ "गीताञ्जलि झाड़ू" प्रकाशित। उमेश पासवान "वर्णित रस" प्रकाशित। ओम प्रकाश झा घोघरडीहा (मधुबनी)। "कियो बूझि नै सकल हमरा" (गजल, रुबाइ आ कता संग्रह) प्रकाशित। जगदानन्द झा मनु नढ़िया भुकैए हमर घराड़ीपर (गजल संग्रह), तोहर कतेक रंग (विहनि कथा संग्रह), चोनहा- (बाल उपन्यास), व्यथा- (कविता-गीत संग्रह)। अच्छेलाल शास्त्री डॉ अमोल राय नन्द कुमार मिश्र नन्द डॉ. नन्द कुमार मिश्र शिव कुमार प्रसाद दिलीप कुमार झा डॉ ताराकान्त झा अमरकान्त, नेपाल मुरलीधर झा कबिलपुर, दरभंगा। बाल कथा संग्रह "पिलपिलहा गाछ" (2010) प्रकाशित। कमलधर दास "मैथिल कर्ण कायस्थक गोत्र, प्रवर, मूल आ वैवाहिक सम्बन्ध" पोथी प्रकाशित। श्रीकान्त मण्डल, मैथिली रंगमंच बेचन ठाकुर गाम: चनौरागंज, मधुबनी। प्रकाशित कृति: बेटीक अपमान आ छीनरदेवी (नाटक), बाप भेल पित्ती आ अधिकार (नाटक), बिसवासघात (नाटक), ऊँच-नीच (नाटक), भोँट (नाटक); एक दर्जनसँ बेशी नाटक प्रकाशनक प्रतीक्षामे। गंगा झा मैथिली रंगमंडल कोकिल मंच, कोलकाता। कोलकाता आ गाम पजुआरिडीह टोलमे मैथिली रंगमंच निर्देशन। नबोनारायण मिश्र 1955- पिता-श्री गोबिन्द मिश्र, माता- श्रीमति अढ़ूला देवी। गाम- कुशमौल,पो.नागदह-बलाइन, भाया-अरेड़हाट, जिला-मधुबनी। मैथिली रंगमंचसँ सम्बद्ध "कोकिल मंच" संस्थाक माध्यमसँ। कमलेश कुमार दास, रंगमंच कलाकार किशोर केशव, मैथिली रंगमंच कुमार गगन, मैथिली रंगमंच अशोक दत्त, जनकपुर मदन ठाकुर चर्चित रंगकर्मी, जनकपुरक चर्चित संस्था मिथिला नाट्यकला परिषदक संस्थापक । तीन दशकसँ बेसी समयसँ रंगक्षेत्रमे सक्रिय। करीब ३०�४० गोट मंचीय नाटकक सयो प्रस्तुति , २०�२५ गोट सड़क नाटकक हजारसँ बेसी प्रदर्शनमे अभिनय ।२० गोट टेली-सीरियल आ आधा दर्जन मैथिली फीचर फिल्ममे अभिनय । पुरस्कार: सप्तम अन्तर्राष्ट्रिय महोत्सवमे सर्वश्रेष्ठ अभिनेता २०४९ वि.स., क्षेत्रीय प्रतिभा पुरस्कार (नेपाल सरकार) २०६३ वि.स.। अभय कुमार यादव, मैथिली रंगमंच आशुतोष यादव अभिज्ञ कृष्ण कुमार कश्यप 1949- जन्म १५ सितम्बर १९४९ ई.। पिता- कवि-उपन्यासकार स्व. इन्द्रनारायण लाल "सँवलिया"। जनबरी १९६५ ई. मे नेना सभ लेल "नाइट स्कूल", १९८१ ई. मे "कला आधारित जीवन आ शिक्षण पद्धति"क प्रवर्तन आ तकर कार्यान्वयन लेल शिवा कश्यप आ शशिबालाक सहयोगसँ "भारती विकास संस्था"क स्थापना। रचना: शशिबालाक संग "मेघदूत" आ "गीत-गोविन्द"क मैथिली अनुवाद, माछ-भात, मिथिला चित्र-शिक्षा, भाग-१, मिथिला चित्र-कोर, भाग-३। ललित कुमुद बटोही झा, मिथिला चित्रकला प्रवीण कुमार ठाकुर जन्म तिथि -31 दिसम्बर 1977; जन्म स्थान -कन्हौली , सकरी , मधुबनी ; शिक्षा- सूर्य नारायण हाई स्कूल - नरपतिनगर , बी . एस . सी - मेमोरिअल कॉलेज - दरभंगा , डिप्लोमा इन फैशन डिजाईन (नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ फैशन डिजाईन - नयी दिल्ली ) , चित्रकला �आओर फैशन पूर्वानुमानमे विशेष योग्यता, निवास स्थान- दिल्ली , इंडिया; पिता- श्री सत्य नारायण ठाकुर , सकरी - कन्हौली� ; माता- श्रीमती मालती ठाकुर , सकरी - कन्हौली । वर्तमानमे अपन एक्सपोर्ट बिज़नस एस्थेट ) �क नामसँ शुरुआत , पूर्वमे प्रोडक्ट डेवेलोप्मेंट आओर मर्चंटक रूपमे कार्यरत। लाला पंडित, मिथिला मूर्तिकला राजेन्द्र पंडित, मिथिला मूर्तिकला गिरीश चन्द्र लाल नवेन्दु कुमार झा, पत्रकार चन्द्र किशोर लाल, पत्रकार, नेपाल उपेन्द्र भगत नागवंशी, नेपाल सड़क नाटक। रमेश रंजन, परवाहा, नेपाल 1966- परवाहा, नेपालमे जन्म । नेपालीय कथा-जगतक नवीन मुदा सम्मानित नाम । जनपक्षधर कथा-दृष्टि आ मोहक शिल्प । थोड़ लिखलनि, मुदा बेर-बेर चर्चित रहलाह । विनीत ठाकुर "बाँकी अछि हम्मर दूधक कर्ज" प्रकाशित। सुजीत कुमार झा, नेपाल जिद्दी (लघुकथा संग्रह), चिड़ै (लघुकथा-संग्रह), रिपोर्टर डायरी (रिपोर्ताज), गन्ध (लघु कथा संग्रह), खजुरीबाली (लघु कथा संग्रह), कोइली घूरि आउ (बाल लघु-विहनि कथा संग्रह), दूधमती- (सम्पादन- नेपाली आ मैथिलीमे)। सरोज खिलाड़ी नेपालक पहिल मैथिली रेडियो नाटक संचालक देवांशु वत्स जन्म- तुलापट्टी, सुपौल। मास कम्युनिकेशनमे एम.ए., हिन्दी, अंग्रेजी आ मैथिलीक विभिन्न पत्र-पत्र्रिकामे कथा, लघुकथा, विज्ञान-कथा, चित्र-कथा, कार्टून, चित्र-प्रहेलिका इत्यादिक प्रकाशन। विशेष: गुजरात राज्य शाला पाठ्य-पुस्तक मंडल द्वारा आठम कक्षाक लेल विज्ञान कथा �जंग� प्रकाशित (2004 ई.), नताशा: मैथिलीक पहिल-चित्र-श्रृंखला (कॉमिक्स) प्रकाशित। संतोष मिश्र, नेपाल पोसपुत (लघुकथा-संग्रह), उदास मोन (लघुकथा-संग्रह), एना-किए (कविता-संग्रह), अएना (संपादन- कविता-संग्रह)। सुनील कुमार मल्लिक, गायक, जनकपुर, नेपाल 1968- मैथिलीक गायक-सग्ङीतकारक रूपमे प्रसिद्ध छथि । मैथिली भाषाक गीतसभमे मौलिक तथा सार्थक सग्ङीतक सृजनमे हिनक सक्रियता प्रशंसनीय छनि । सुनीलक गायन तथा सग्ङीतमे कैसेट एलबमसभ सेहो बाहर भेल अछि ।लेखनदिस हिनक सक्रियता परिमाणात्मक रूपमे कम रहितहुँ गुणात्मक दृष्टिएँ हृदयस्पर्शी मानल जाइत अछि ।पेशासँ विज्ञान-शिक्षक छथि । धीरेन्द्र प्रेमर्षि, सिरहा, नेपाल 1967- वि.सं.२०२४ साल भादब १८ गते सिरहा जिलाक गोविन्दपुर-१, बस्तीपुर गाममे जन्म लेनिहार प्रेमर्षिक पूर्ण नाम धीरेन्द्र झा छियनि।कान्तिपुरसँ हेल्लो मिथिला कार्यक्रम प्रस्तुत कर्ता जोड़ी रूपा-धीरेन्द्रक धीरेन्द्रक अबाज गामक बच्चा-बच्चा चिन्हैत अछि। �पल्लव� मैथिली साहित्यिक पत्रिका आ �समाज� मैथिली सामाजिक पत्रिकाक सम्पादन। रबीन्द्र नारायण मिश्र पिताक नामःस्वर्गीय सूर्य नारायण मिश्र, माताक नामःस्वर्गीया दयाकाशी देवी, पैतृक ग्रामःअडेर डीह, मातृकःसिन्घिआ ड्योढी। वृतिःयोजना आयोगक उप सचिव, दिल्लीमे स्पेशल मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट। आब सेवा निवृत्त। शिक्षा: चन्द्रधारी मिथिला महाविद्यालयसँ बी.एस-सी. भौतिकी विज्ञानमे प्रतिष्ठा; दिल्ली विश्वविद्यालयसँ विधि स्नातक। प्रकाशित कृति : मैथिली:- १. �भोरसँ साँझ धरि� (आत्म कथा), २. �प्रसंगवश� (निवंध), ३. �स्वर्ग एतहि अछि� (यात्रा प्रसंग), ४. �फसाद� (कथा संग्रह) ५. `नमस्तस्यै� (उपन्यास) ६. विविध प्रसंग (निवंध ) ७.महराज (मैथिली उपन्यास) ,८.लजकोटर (मैथिली उपन्यास) ,९.सीमाक ओहि पार (मैथिली उपन्यास) १०.समाधान(निवंध संग्रह) ११.मातृभूमि(उपन्यास) १२.स्वप्नलोक(उपन्यास) १३.शंखनाद(उपन्यास)। कुमार भास्कर अमरेन्द्र यादव, नेपाल रघुनाथ मुखिया प्रदीप पुष्प संदीप कुमार साफी "बैशाखमे दलानपर" प्रकाशित। उमेश मंडल निश्तुकी- कविता संग्रह, मिथिलाक संस्कार गीत, विध-व्यवहार गीत आ गीतनाद (संकलन), "मिथिलाक वनस्पति स्लाइड शो मिथिलाक जीव-जन्तु स्लाइड शो मिथिलाक जिनगी स्लाइड शो", सगर राति दीप जरय- इतिहास, दुध-पानि फराक-फराक (कथा एवं पाण्डुलिपि जगदीश प्रसाद मण्डल)-(छाया एवं सम्पादन- उमेश मण्डल), हिन्दुस्तानी मुसलमान और हिन्दुस्तानियत - मूल हिन्दी लेख- गीतेश शर्मा, मैथिली अनुवाद- उमेश मण्डल। चन्द्रमणि स्व. हेमकान्त झा, गायक मुरलीधर, मैथिली फिल्म निर्देशक कुंज बिहारी, मैथिली गायक रामबाबू झा, गायक बि.पि.उदासी जितेन्द्र सहयोगी उदितनारायण फिल्म गायक प्रकाश झा, फिल्म निर्देशक कीर्ति आजाद क्रिकेट श्रीराम झा शतरंज अभिषेक झा गोल्फ अशोक कुमार 1981- साधारण काष्ठकारक परिवारमे समस्तीपुर जिलाक मोखियारपुर सखलानी गाममे जनमल अशोक कुमार कहियो स्कूल नहि गेलाह। दिनमे पचास टाका कमेनिहार दिल्लीक एकटा गोल्फ क्लबक एहि कैडीकेँ 1994 ई. मे चोरिक मिथ्यारोप लगा कए गोल्फ कोर्ससँ बाहर कए देल गेल। वैह कैडी दस सालक भीतर भारतक नम्बर एक गोल्फर बनि गेल। राजेश रंजन, मैथिली फेडोरा प्रोजेक्ट संजय झा सुल्तानगंज, भागलपुर। मोटोरोलाक सी.ई.ओ.। बिन्देश्वर पाठक बिनोद मिश्र डॉ. बिनोद मिश्र सम्प्रति आई आई टी रूडकी, उत्तराखंडमे अंग्रेजी पढ़बैत छथि आ हिनक रचनाb अंग्रेजी आ हिंदी मे प्रकाशित भेल छन्हि। अहि वर्ष हिनक कविता संग्रह Silent Steps and Other Poems प्रकाशित भेल छन्हि। एकर अतिरिक्त ई अंग्रेजीमे आलोचनाक क्षेत्रमे आठ टा पोथी संपादित केने छथि। हिनक पोथी Communication Skills for Engineers and Scientists बहुतो इंजीनियरिंग संस्थानमे पाठ्य पुस्तक रूपमे पढ़ाओल जाइत अछि। राजकमल झा, अंग्रेजी लेखक, पत्रकार हिनकर अंग्रेजी उपन्यास "द ब्लू बेडस्प्रेड" , "इफ यू आर अफरेड ऑफ हाइट्स" आ "फायरप्रूफ" प्रकाशित छन्हि। "द ब्लू बेडस्प्रेड" (१९९९)पर हुनका "कॉमनवेल्थ राइटर्स प्राइज फॉर बेस्ट फर्स्ट बुक- यूरेशिया" भेटल छन्हि। राजकमल झा श्री मुनीश्वर झा आ श्रीमती रंजना झाक पुत्र छथि, "आइ.आइ.टी.खड़गपुर"सँ बी.टेक.छथि, आ आइ काल्हि दिल्लीमे रहै छथि, जतए ओ "इण्डियन एक्सप्रेस" मे एडिटर छथि। मानस बिहारी वर्मा, वैज्ञानिक फणीश्वर नाथ 'रेणु' मिथिला रत्न 1921-1977 रामधारी सिंह 'दिनकर' मिथिला रत्न 1908-1974 रामवृक्ष बेनीपुरी 1899-1967 डॉ. हरिवंश तरुण 1927-2009 जन्म 21 जून 1927 ई.। गाम- चकसलेम, पो.- पटोरी, जिला- समस्तीपुर। तीन दर्जन सँ बेशी हिन्दी पोथी जाहिमे काव्य-कथा-प्रबन्ध सम्मिलित अछि। हरिशंकर श्रीवास्तव "शलभ" 1934- स्व. जनार्दन प्रसाद झा 'द्विज' हिन्दीक साहित्यकार। रामेश्वर प्रेम हिन्दीक नाटककार। डॉ. नवल किशोर दास "नवल" मोहनानन्द झा 1955- रामाज्ञा शशिधर गणेश चंचल १९३०-२०११ डॉ. अमरेन्द्र गोरेलाल मनीषी कुन्दन अमिताभ शंभु अगेही जन्म ८ जनवरी १९४१, प्रकाशित कृति:ओझराएल डीह (कथा-काव्य) १९९८, सतंजा (कथा संग्रह)१९९९, तेसरी बेरिआ (कथा काव्य)२००३, बज्जिका छंद विभास २००७ पोद्दार रामावतार अरुण १९२३-१९९९ मजहर इमाम १९३०-२०१२ अरुण प्रकाश १९४८-२०१२ अंशुमन पाण्डेय तिरहुता यूनीकोडक आवेदनकर्ता। दिनेश कुमार मिश्र मिथिलाक बाढ़िक एक्स्पर्ट। मिथिलाक मोटा-मोटी सभ धारपर किताब प्रकाशित। उत्तर बिहार की व्यथा कथा (१९९०), कोसी- उम्र कैद से सजा-ए-मौत तक (१९९२) बंदिनी महानंदा (१९९४), बोया पेड़ बबूल का- बाढ़ नियंत्रण का रहस्य (२०००), बगावत पर मजबूर मिथिला की कमला नदी (२००४), भुतही नदी और तकनीकी झाड़- फूक (२००५), , दुई पाटन के बीच में- कोसी नदी की कहानी (२००६) तथा बागमती की सद्गति (२०१०)। ओमप्रकाश भारती १९६८- कोसी नदीक लोक सांस्कृतिक अध्ययन - नदियाँ गाती हैं, बिहार के पारम्परिक नाट्य आ मैथिलीक लोक नाट्य प्रकाशित वैदेही सीता याज्ञवल्क्य पत्नी मैत्रेयी याज्ञवल्क्यक दू टा पत्नी छलथिन्ह पहिल कात्यायनी आ दोसर मैत्रेयी। मैत्रेयी ब्रह्मवादिनी छलीह। कात्यायनीसँ हुनका तीनटा पुत्र छलन्हि- चन्द्रकान्ता, महामेघ आ विजय। मोतीदाइ मिथिलाक रजक (धोबि) जातिक लोकदेवता बिहुला चम्पानगरक बिहुला। गांगो देवी मिथिलाक मलाह जातिक लोकदेवता। गांगोदेवीक भगता अखनो मिथिलाक मलाह लोकनिमे प्रचलित अछि। रेशमा, कुसुमा, फुल्वा मोरंगक मोतीसायर विन्ध्यवासिनी देवी मैथिली लोकगीत 1920-2006 कामेश्वरी देवी 1922- मधुबनी जिलाक नवानी गामक। जन्म १९२२ ई. मे अपन मातृक नाहरमे भेलनि। पति पं मदनमोहन झा। बरौनीवासी प्रसिद्ध तान्त्रिक पण्डित केशव मिश्र हिनक पिता छलथिन। "मिथिला संस्कार गीत" पोथी। कुसुमलता कर्ण अणिमा सिंह 1924- समीक्षिका, अनुवादिका, सम्पादिका । प्रकाशन: मैथिली लोकगीत, वसवेश्वर (अनु.), शिशु खेल गीत आदि। लेडी ब्रेबोर्न कॉलेज, कलकत्तामे पूर्व प्राध्यापिका। लिली रे 1933- जन्म:२६ जनवरी, १९३३,पिता:भीमनाथ मिश्र,पति:डॉ. एच.एन्.रे, दुर्गागंज, मैथिलीक विशिष्ट कथाकार एवं उपन्यासकार । मरीचिका उपन्यासपर साहित्य अकादेमीक १९८२ ई. मे पुरस्कार । मैथिलीमे लगभग दू सय कथा आ पाँच टा उपन्यास प्रकाशित । विपुल बाल साहित्यक सृजन। अनेक भारतीय भाषामे कथाक अनुवाद-प्रकाशित। पहिल प्रबोध सम्मान 2004 सँ सम्मानित। चित्रलेखा देवी 1935- मोहिनी झा 1937- डॉ. सावित्री झा कविता देवी 1942- प्रमिला झा शान्ति सुमन 1942- जन्म 15 सितम्बर 1942, कासिमपुर, सहरसा, बिहार, प्रकाशित कृति, �ओ प्रतीक्षित, परछाई टूटती, सुलगते पसीने, पसीने के रिश्त, मौसम हुआ कबीर, समय चेतावनी नहीं देता, तप रेहे कचनार, भीतर-भीतर आग, मेघ इन्द्रनील (मैथिली गीत संग्रह), शोध प्रबंध: मध्यवर्गीय चेतना और हिन्दी का आधुनिक काव्य, उपन्यास: जल झुका हिरन। सम्मान: साहित्य सेवा सम्मान, कवि रत्न सम्मान, महादेवी वर्मा सम्मान। अध्यापन कार्य। प्रभावती झा 1945-1999 स्व. इलारानी सिंह 1945-1993 इलारानी सिंह: जन्म 1 जुलाई, 1945, निधन : 13 जून, 1993, पिता : प्रो. प्रबोध नारायण सिंह सम्पादिका : मिथिला दर्शन, विशेष अध्ययन : मैथिली, हिन्दी, बंगला, अंग्रेजी, भाषा विज्ञान एवं लोक साहित्य । प्रकाशित कृति : सलोमा (आस्कर वाइल्डक फ्रेंच नाटकक अनुवाद 1965), प्रेम एक कविता (1968) बंगला नाटकक अनुवाद, विषवृक्ष (1968) बंगला नाटकक अनुवाद, विन्दंती (1972), स्वरचित: मैथिली कविता संग्रह (1973), हिन्दी संग्रह। उषाकिरण खान 1945- जन्म:२४ अक्टूबर १९४५,कथा एवं उपन्यास लेखनमे प्रख्यात । मैथिली तथा हिन्दी दूनू भाषाक चर्चित लेखिका ।प्रकाशित कृति:अनुंत्तरित प्रश्न, दूर्वाक्षत, हसीना मंज़िल, भामती (उपन्यास) । २०१०-श्रीमति उषाकिरण खान (भामती, उपन्यास) लेल साहित्य अकादेमी पुरस्कार- मैथिली। नीरजा रेणु 1945- जन्म: ११ अक्टूबर १९४५,नाम: कामाख्या देवी,उपनाम:नीरजा रेणु,जन्म स्थान:नवटोल,सरिसबपाही ।शिक्षा: बी.ए. (आनर्स) एम.ए., पी-एच.डी.,गृहिणी ।प्रकाशित रचना : ओसकण (कविता मि.मि., १९६०) लेखन पर पारिवारिक, सांस्कृतिक परिवेशक प्रभाव । मैथिली कथा धारा साहित्य अकादेमी नई दिल्लीसँ स्वातन्त्र्योत्तर मैथिली कथाक पन्द्रह टा प्रतिनिधि कथाक सम्पादन ।सृजन धार पियासल कथा संग्रह,आगत क्षण ले कविता संग्रह,ऋतम्भरा कथा संग्रह,प्रतिच्छवि हिन्दी कथा संग्रह,१९६० सँ आइधरि सएसँ अधिक कथा, कविता, शोधनिबन्ध, ललितनिबन्ध,आदि अनेक पत्र-पत्रिका तथा अभिनन्दनग्रन्थमे प्रकाशित ।मैथिलीक अतिरिक्त किछु रचना हिन्दी तथा अंग्रेजीमे सेहो।२००३- नीरजा रेणु (ऋतम्भरा, कथा)लेल साहित्य अकादमी पुरस्कार। वीणा ठाकुर 1954- जन्म- भवानीपुर, पण्डौल (मधुबनी)। पिता श्री श्रीमोहन ठाकुर। प्रकाशित कृति: मैथिली रामकाव्यक परम्परा, इतिहास-दर्पण (समीक्षा), विद्यापतिक उत्स (समालोचना), भारती (उपन्यास) ज्ञानसुधा मिश्र भारतक उच्चतम न्यायालयक चारिम महिला न्यायाधीश आ पहिल मैथिलानी। जस्टिस मृदुला मिश्र वीणा कर्ण 1946- जन्म 3 नवम्बर 1946, गाम- पटोरी, पो.पंचगछिया, जिला- सहरसा। सदस्य, मैथिली साहित्य अकादेमी परामर्शदातृ समिति 1987-1993, सदस्य, भाषा परामर्शदातृ समिति (मैथिली), भारतीय ज्ञानपीठ। अवकाशप्राप्त विश्वविद्यालय आचार्य आ अध्यक्ष, मैथिली विभाग, पटना विश्वविद्यालय। प्रकाशित कृति- अर्गला, भावनाक अस्थिपंजर (मैथिली काव्य संग्रह), शंखनाद, तुभ्यमेव समर्पये, अनुबन्ध (हिन्दी काव्य संग्रह)। प्रकाश्य: सप्तपदी (मैथिली निबन्ध संग्रह), चारित्रिक पृष्ठभूमिमे मैथिलीक प्रसिद्ध उपन्यास, मैथिली-उपन्यासक कथा किछु कहैत अछि (मैथिली आलोचना); जिन्दगीनामा (हिन्दी काव्य संग्रह), क्रमशः (हिन्दी आलोचना)। शेफालिका वर्मा 1943- जन्म:९ अगस्त, १९४३,जन्म स्थान : बंगाली टोला, भागलपुर । शिक्षा:एम., पी-एच.डी. (पटना विश्वविद्यालय), ए. एन. कालेज, पटना मे हिन्दीक प्राध्यापिका पदसँ सेवानिवृत्त । नारी मनक ग्रन्थिकेँ खोलि:करुण रससँ भरल अधिकतर रचना। प्रकाशित रचना:झहरैत नोर, बिजुकैत ठोर; विप्रलब्धा (कविता संग्रह), स्मृति रेखा (संस्मरण संग्रह), एकटा आकाश (लघुकथा संग्रह), यायावरी (यात्रा-वृत्तान्त), भावाञ्जलि (काव्य-प्रगीत) , किस्त-किस्त जीवन (आत्मकथापर साहित्य अकादेमी पुरस्कार)। अर्थयुग (लघुकथा संग्रह)आखर-आखर प्रीत, नागफांस (उपन्यास)। २००४ ई.- डॉ. श्रीमती शेफालिका वर्मा, पटना;यात्री-चेतना पुरस्कार। नीता झा 1953- जन्म : २१-०१-१९५३,व्यवसाय:प्राध्यापिका । लेखन पर समाजक परम्परा तथा आधुनिकताक संस्कार सँ होइत विसंगतिक प्रभाव।प्रकाशित कृति : फरिच्छ, कथा संग्रह १९८४, कथानवनीत १९९०,सामाजिक असन्तोष ओ मैथिली साहित्य शोध समीक्षा । बिलाइ मौसी (बाल लघुकथा संग्रह)। आशा मिश्र 1950- जन्म:६-७-१९५० ई.,प्रकाशित कथा मे मैथिकीक संग हिन्दी मे सेहो । सभसँ पैघ विजय मैथिली कथा संग्रह । डॉ. सुनीति झा प्रेमलता मिश्र 'प्रेम' 1948- जन्मस्थान:रहिका,माता:श्रीमती वृन्दा देवी,पिता:पं. दीनानाथ झा,शिक्षा:एम.ए., बी.एड.,प्रसिद्ध अभिनेत्री दू सयसँ बेशी नाटकमे भाग लेलनि ।भंगिमा (नाट्यमंच) क भूतपूर्व उपाध्यक्षा, पत्रिकाक सम्पादन, कथालेखन आदिमे कुशल । �अरिपन� आदि अनेक संस्था द्वारा पुरस्कृत-सम्मानित। डॉ. इन्दिरा झा 1957 मेनका मल्लिक 1966- शारदा सिन्हा मैथिली लोकगीत 1953- लालपरी देवी शकुंतला चौधरी गोदावरी दत्ता, मिथिला चित्रकला उषा वर्मा 1948- कमला चौधरी 1953- कृति- मैथिलीक वेश-भूषा-प्रसाधन सम्बन्धी शब्दावली, प्रकाशनाधीन: बाटे बिलायल पानि (कथा संग्रह), पिया मधुमास (कविता संग्रह), आशापूर्णा देवीक बंगला लघु उपन्यास मन मंजूषाक मैथिली अनुवाद। मुजफ्फरपुरसँ प्रकाशित मैथिली साहित्यिक पत्रिका स्वातीक सम्पादन (१९८४-८५)। सीता देवी, मिथिला चित्रकला सरस्वती चौधरी, जनकपुर डॉ. अरुणा चौधरी विभा रानी 1959- मैथिली क 3 साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता लेखकक 4 गोट किताब "कन्यादान" (हरिमोहन झा), "राजा पोखरे में कितनी मछलियां" (प्रभास कुमार चाऊधरी), "बिल टेलर की डायरी" व "पटाक्षेप" (लिली रे) हिन्दीमे अनूदित छन्हि।2 गोट लोककथाक पुस्तक "मिथिला की लोक कथाएं" व "गोनू झा के किस्से"। मैथिली कथा संग्रह "खोहसँ निकसैत"। ज्योत्सना चन्द्रम 1963- जन्मतिथि: १५ दिसम्बर, १९६३,जन्मस्थान : मरूआरा, सिंधिया खुर्द, समस्तीपुर,पिता : श्री मार्कण्डेय प्रवासी,माता: श्रीमती सुशीला झा,अध्यापन ।सुपरिचित कवयित्री, कथाकार । प्रकाशित कृति: बोनसाई (कविता संग्रह), झिझिरकोना (कथासंग्रह)। सुस्मिता पाठक 1962- जन्म: सुपौल, बिहार । परिचिति कविता संग्रह प्रकाशित । कथावाचक, कथासंग्रह प्रकाशनाधीन । राजनीति शास्त्रमे एम.ए.। संगीत, पेंटिंगमे रुचि । मैथिलीक पोथी पत्रिका पर अनेक रेखाचित्र प्रकाशित । समकालीन जीवन, समय, आ तकर स्पंदनक कवयित्री । अनेक भाषामे रचनाक अनुवाद प्रकाशित। उर्मिला देवी, मिथिला चित्रकला यमुना देवी, मिथिला चित्रकला यशोदा देवी, मिथिला चित्रकला रमा झा, सम्पादक मिथिला दर्पण पन्ना झा अनुभूति (लघुकथा संग्रह)। सुधा कर्ण नूतन दास सम्पादिका, मिथिलांगन राधिका झा, अंग्रेजी लेखिका हुनकर अंग्रेजी उपन्यास "स्मेल" आ "लैन्टर्न्स ऑन देयर हॉर्न्स" आ अंग्रेजी लघु कथा संग्रह "द एलीफेन्ट एण्ड द मारुति" प्रकाशित अछि। उपन्यास "स्मेल" लेल हुनका "फ्रेन्च प्रिक्स गुएरलेन" पुरस्कार भेटल छन्हि आ ई पोथी सोलह भाषामे अनूदित भेल अछि। राधिका "एमहर्स्ट कॉलेज"सँ "एन्थ्रोपोलोजी" पढ़ने छथि आ "शिकागो विश्वविद्यालय"सँ राजनीति विज्ञानमे मास्टर्स डिग्री लेने छथि। ओ "हिन्दुस्तान टाइम्स" आ "बिजनेस वर्ल्ड"मे काज केने छथि आ संगमे "राजीव गांधी फाउन्डेशन, दिल्ली" मे सेहो, जतए ओ आतंकवादसँ पीड़ित बच्चा सभ लेल सम्पर्क कार्यक्रमक प्रारम्भ केने रहथि। आइ काल्हि ओ अपन पति आ बच्चीक संग टोक्योमे रहै छथि। स्वयंप्रभा झा 1970- रूपा धीरू 1973- रूपा धीरू- जन्मस्थान-मयनाकडेरी, सप्तरी, श्रीमती पूनम झा आ श्री अरूणकुमार झाक पुत्री।स्थायी पता- अञ्चल- सगरमाथा, जिल्ला- सिरहा। प्रथम प्रकाशित रचना-कोइली कानए, माटिसँ सिनेह (कविता),भगता बेङक देश-भ्रमण (कनक दीक्षितक पुस्तकक धीरेन्द्र प्रेमर्षिसँग मैथिलीमे सहअनुवाद,सङ्गीतसम्बन्धी कृति- राष्ट्रियगान, भोर, नेहक वएन, चेतना, प्रियतम हमर कमौआ (पहिल मैथिली सीडी), प्रेम भेल तरघुस्कीमे, सुरक्षित मातृत्व गीतमाला, सुखक सनेस। सम्पादन-पल्लव, मैथिली साहित्यिक मासिक पत्रिका, सम्पादन-सहयोग,हमर मैथिली पोथी (कक्षा १, २, ३, ४ आ ५ आ कक्षा 9-10 क ऐच्छिक मैथिली विषय पाठ्यपुस्तकक भाषा सम्पादन)। रंजना झा, विद्यापति संगीत गायिका रश्मि दत्त, गायिका, जनकपुर कामिनी कामायनी मुन्नी झा युवा रचनाकार कामिनी 1978- युवा कवियित्री रुक्साना सिद्दीकी कल्पना मिश्र, मैथिली रंगमंच ज्योति झा, , मैथिली रंगमंच किरण झा, मैथिली रंगमंच प्रियंका झा, मैथिली रंगमंच ऋतु कर्ण, मैथिली रंगमंच ज्योति वत्स, रंगमंच नेहा वर्मा, रंगमंच सविता अनुप्रिया मृदुला प्रधान अरुण मिश्र, महिला बॉक्सिंग राखी दास, मिथिला चित्रकला बनारसी पंडित,मिथिला चित्रकला, धनुषा, नेपाल देवकला देवी कर्ण,मिथिला चित्रकला, नेपाल मदनकला कर्ण,मिथिला चित्रकला, नेपाल महासुन्दरी देवी,मिथिला चित्रकला निर्जला झा, मिथिला चित्रकला, नेपाल फुलो साह, मिथिला चित्रकला, महोत्तरी, नेपाल रजनी पल्लवी संगीता कुमारी, मैथिली फेडोरा प्रोजेक्ट विन्देश्वरी दास गौरी सेन सीमा झा वाणी मिश्र, कवियित्री १९५३-१९९६ कोइलख, मधुबनी। जन्मस्थान तिलाठी, नेपाल। मौसमी बनर्जी, कवियित्री शैल झा शान्ति देवी शशिबाला पिता श्री उग्र नारायण लाल, पति श्री उमेश कुमार कण्ठ (बिसहथ)। शिवा कश्यप आ कृष्ण कुमार कश्यपक सहयोगसँ "भारती विकास संस्था"क स्थापना। रचना: कृष्ण कुमार कश्यपक संग "मेघदूत" आ "गीत-गोविन्द"क मैथिली अनुवाद, माछ-भात, मिथिला चित्र-शिक्षा, भाग-१, मिथिला चित्र-कोर, भाग-३। मुन्नी कामत सुखल मन तरसल आँखि (कविता संग्रह)। प्रेरणा झा मिथिला लोक कला अंशुमाला मैथिली लोकगीत। श्वेता झा चौधरी, चित्रकार गाम सरिसव-पाही, ललित कला आ गृहविज्ञानमे स्नातक। मिथिला चित्रकलामे सर्टिफिकेट कोर्स।कला प्रदर्शिनी: एक्स.एल.आर.आइ., जमशेदपुरक सांस्कृतिक कार्यक्रम, ग्राम-श्री मेला जमशेदपुर, कला मन्दिर जमशेदपुर ( एक्जीवीशन आ वर्कशॉप)।कला सम्बन्धी कार्य: एन.आइ.टी. जमशेदपुरमे कला प्रतियोगितामे निर्णायकक रूपमे सहभागिता, २००२-०७ धरि बसेरा, जमशेदपुरमे कला-शिक्षक (मिथिला चित्रकला), वूमेन कॉलेज पुस्तकालय आ हॉटेल बूलेवार्ड लेल वाल-पेंटिंग।प्रतिष्ठित स्पॉन्सर: कॉरपोरेट कम्युनिकेशन्स, टिस्को; टी.एस.आर.डी.एस, टिस्को; ए.आइ.ए.डी.ए., स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया, जमशेदपुर; विभिन्न व्यक्ति, हॉटेल, संगठन आ व्यक्तिगत कला संग्राहक। हॉबी: मिथिला चित्रकला, ललित कला, संगीत आ भानस-भात। श्वेता झा मिथिला चित्रकला, सम्प्रति सिंगापुरमे निवास। रानी झा मोती कर्ण मिथिला चित्रकला निक्की प्रियदर्शिनी प्रज्ञा झा डॉ. नलिनी चौधरी नीलम चौधरी, कथक नृत्यांगना इरा मल्लिक पिता स्व. शिवनन्दन मल्लिक, गाम- महिसारि, दरभंगा। पति श्री कमलेश कुमार, भरहुल्ली, दरभंगा। गुंजन कर्ण राँटी मधुबनी, सम्प्रति यू.के.मे रहै छथि। www.madhubaniarts.co.uk पर हुनकर कलाकृति देखि सकै छी। पूनम मंडल प्रियंका झाक संग मैथिली न्यूज पोर्टल "समदिया" www.esamaad.blogspot.com क संचालन । प्रियंका झा पूनम मंडलक संग मैथिली न्यूज पोर्टल "समदिया" www.esamaad.blogspot.com क संचालन । स्तुति नारायण डॉ. ललिता झा १९५१ जन्म पनिचोभ, दरभंगामे। "मैथिलीक भोजन सम्बन्धी शब्दावली" प्रकाशित"। आरती कुमारी १९६७- "मैथिली मुक्तक काव्यमे नारी" प्रकाशित। मीना झा ब्रेस्ट कैसरक समस्यापर विदेह मे मीना झा केर एकटा लघु कथा प्रकाशित भेल। ई मैथिलीक पहिल कथा छल जे ब्रेस्ट कैसर पर लिखल गेल। हिन्दीमे सेहो ताधरि एहि विषयपर कथा नहि लिखल गेल छल। अनुपमा प्रियदर्शिनी पति डॉ. रतन कर्ण, गाम- उजान (बड़कागाम), पो. लोहना रोड, जिला दरभंगा। सम्प्रति लोजियाना (संयुक्त राज्य अमेरिकामे), शिक्षा- एम.एस.सी. (जंतु विज्ञान), ल.ना. मिथिला वि.वि., दरभंगा; बी.एस.सी. बी.आर. अम्बेडकर वि.वि. मुजफ्फरपुरसँ, हॉबी, मिथिला चित्रकला, कमप्यूटराइज्ड चित्रकला, ललित कला। उपलब्धि: अखिल भारतीय कला आ दस्तकारी प्रतियोगिताक पुरस्कार 1995 मे; संस्कार भारती भाव नृत्य प्रतियोगिता 1989 मे सहभागी। आराधना मल्लिक मैथिली रंगमंच। शिखा मैथिली रंगमंच। प्रीति ठाकुर गाम- जगेली, भाया तारानगर, पूर्णियाँ। मैथिली बाल साहित्यमे "गोनू झा आ आन चित्र कथा २००८", "मैथिली चित्रकथा २००९" आ "मिथिलाक लोकदेवता २०१०", विद्यापतिक पुरुष परीक्षा (बाल साहित्य) २०१४ प्रकाशित। अनुपमा झा ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल, भारत। विनीता मल्लिक रेवती मिश्र अनामिका राज आभा झा प्रियंवदा तारा झा डॉ अपर्णा शान्ति लक्ष्मी चौधरी ग्राम गोविन्दपुर, जिला सुपौल निवासी आ राजेन्द्र मिश्र महाविद्यालय, सहरसा मे कार्यरत पुस्तकालयाध्यक्ष श्री श्यामानन्द झाक जेष्ठ सुपुत्री, आओर ग्राम महिषी (पुनर्वास आरापट्टी), जिला सहरसा निवासी आ दिल्ली स्कूल ऑफ इकानोमिक्स सँ जुड़ल अन्वेषक आ समाजशास्त्री श्री अक्षय कुमार चौधरीक अर्धांगिनी छथि। प्राणीशास्त्र सँ स्नातकोत्तर रहितो शिक्षाशास्त्रक स्नातक शिक्षार्थी आ एकटा समाजशास्त्री सँ सानिध्यक चलिते आम जीवनक सामाजिक बिषय-बौस्तु आ खास कऽ महिलाजन्य सामाजिक समस्या आ प्रघटनामे हिनक विशेष अभिरूचि स्वभाविक। अनुपम रैना डॉ चित्रलेखा डॉ कल्पना मणिकान्त मिश्र पिता डॉ शिव कुमार झा, गाम राटी, सासुर- गजहारा। मेडिकल शिक्षा जे. जे. हॉस्पीटल/ ग्रान्ट हॉस्पीटलसँ सम्पन्न कय स्त्री-रोग विशेषज्ञ। मुम्बइसँ १९८०-८२ मे प्रकाशित होइबला मैथिली पत्रिका "विदेह"क पति डॉ मणिकान्त मिश्र (निर्माता- मैथिली फिल्म- आउ पिया हमर नगरी) संग सम्पादन। (c)२०००- २०२३। विदेह: प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004). सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। Editor: Gajendra Thakur. 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(c) २०००-२०२३ सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। भालसरिक गाछ जे सन २००० सँ याहूसिटीजपर छल http://www.geocities.com/.../bhalsarik_gachh.htm, http://www.geocities.com/ggajendra आदि लिंकपर आ अखनो ५ जुलाइ २००४ क पोस्ट http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.htm (किछु दिन लेल http://videha.com/2004/07/bhalsarik-gachh.htm लिंकपर, स्रोत wayback machine of https://web.archive.org/web/*/videha 258 capture(s) from 2004 to 2016- http://videha.com/ भालसरिक गाछ-प्रथम मैथिली ब्लॉग / मैथिली ब्लॉगक एग्रीगेटर) केर रूपमे इन्टरनेटपर मैथिलीक प्राचीनतम उपस्थितक रूपमे विद्यमान अछि। ई मैथिलीक पहिल इंटरनेट पत्रिका थिक जकर नाम बादमे १ जनवरी २००८ सँ 'विदेह' पड़लै।इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब 'भालसरिक गाछ' जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA Page 307 of 307 विदेह ३७१ म अंक ०१ जून २०२३ (वर्ष १६ मास १८६ अंक ३७१)|
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a e © ea का ot te ary <_ Ashish Anchinhar Qa Swann = Jan 27,209 - a fade अपन कौनों ऊअंकसे "साहित्यिक श्रष्टाच्यार चिदेखॉकक" Preprere (लिंक कर्सेंटसे) लाहि Aer अपने eee निम्नलिस्थित चिषसपर आस्नेस्य orf साछी। Prey Mera एलिं gene टैग aps रहल््न SY जे त्लोकन्नि लसर लिस्ट नै why झनवको cor डी Seer ay स्थास ens Gere (eevee ere) srorefiar ear err) दिव्कल et श्साधघार्थी च्छी-- qenfger, aver yet सरवारी srepteeft: (@) Geepreen रास्तलीलि (स्व) Seer अअस्कादेसी से पैसब्याव्क गैद-त्नौकलॉनिक खिश्वाल Gd सत्लारुट जा अव्कादसी ae काजक सीर-तलरीका =) सरसकारी सत्ताक wer Ae Guster लाल्कास्निक समालालर सत्ताक स्कार्यपब्धलि (98 52h एय्बल uf) S) अव्कादेसी घुरस्कारसे urs फैक्टर: सिथक ar यथार्थ 2: व्यक्तिगाल साहित्य संस्थान ot पुरस्कारस्क राजनीति 3. प्रकाशन जगातसे पसरतन श्वछ्टाच्यार उमा Auer 4. सैच्थिल््लीक er लेस्थक संगरुन on आकर पदाधिकारी enter srreeor SARA Pema wager साहित्यिक '्रष्टाचारक Peer (लक) crescent Ga) अध्यसन-अध्यापन Write a comment.
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* ब्ेश, तँँ सुनू । 7354 से फिरोजशाह grees के wits जस्बन व्वंगात्त सँँ faecit aR tect wer, ते कोसीक vere aga तेज रतन greet Sar sre कोसी के किनार पर पहुँचत्त, तँँ कोसीक otf पार से हाजी शम्सखद्दीन इत्नियास से सेना ुगल्लकी सेना सै सोकाव्यस्ता sare Aer उसस्तर-शस्त्र or कप लैयार we aS हाजी शम्सऊद्दीन were, जे छाजीपुर डा समस्तीपुर नगर व्वसौनें Teles | Forester चुगलक के सेना संभवत: कुरसेत्ता के उ्मास-पास कोसी के तेज ae Sa ae सोच्च से पड़ गेल after रफ्तार Sf aoe लुगल्तकी सेना केँ नदी पार ्करव्वाक fsa afr भ' रहत्न Se! staat: लुगत्तकी सेनापति तय sacs, जे नदीक किनारे- किनार उत्तर दिस eget जाय । जलय जा कप नदीक पा करने कस व्यूझि पड़, sie पानिक ere ret जायल । एक्ठि sien से फौज उतर दिस aga रहत्न ETT aaa ate sunt गेस्ताक व्वाद व्कोसी के पेट at शिकस्त geet कोसी उ्मोलक्ि पहाड़ a नीचाँ sate sf पानिक सैर के ora ufe ef कसत्त जा सकैए, जे पाँच-पाँच सय सनक ores ere Aare creat व्यक्ति रत्न wer । तुगात्तव्की सेनासति के जलय सदी पार ae करें Sram aaah, sity एक cnet से सैकड़ों टा हाथी केँ org ae’ देस्त Fer Aral aren लाइन से ages - व्वडकका रस्सा cee ket Fret, जे St seit पानि से भास् जायत, team के safer सँँ निकात्ति Ger जायत। ule तरहेँ फिरोजशार लुगत्नकव्क सेना कोसी पार कक गेल । हाजी शम्सखद्दीन सपनों से fe सोचने च्ल,जे तुगत्नकी सेना ra पार क' जायत | Shas हाजी शस्सठद्दीन BF पता लगलनै जे तुगत्तककी सेना HA पार ae? set उसक्छि, F sit St से पड़ा गेल । ले ae Sreftes से ज enc से wt’ seu waar aneaieears करे wer रखी जय पर ग |”
USA HA WS गप के AM बढ़बेत कहलखिन, ' फूल बाबू, कोसी नदीक बेसिन प्राचीन काल सँ मनुक्खक निवास लेल उपयुक्त स्थान रहल अछि। बारहम-तेरहम सदी मे भारत मे जखन कइक टा नदी सुखा गेल, तँ ओहि ठामक पशुचारक समाजक लोक एतय आबि कए बसलाह। तहिये सँ बढ़ैत जनसंख्या आ कोसी नदीक बदलैत प्रवाहक मध्य टकराहटि होमय लागल | नदीक अनियंत्रित धारा केँ लोक बाढ़ि बूझय लागल | पहिल बेर बारहम शताब्दी मे लक्ष्मणसेन द्वितीय कोसी ade पुबरिया किनार दिस ore बनौलनि | लक्ष्मणसेन द्वितीय बंगाल के सेन वंशक शासक छलाह, F778 सँ 7205 Heat धरि शासन कयनेँ छलाह। Ue बान्हक अवशेष sel एखनो भीमनगर सँ दू कोस पश्चिम मे देखि wha छी। एकटा पश्चिमी विद्वान फ्रांसिस बुकानन के अनुमान रहनि, जे ई are संभवत: कोनो किला के रक्षा हेतु बनाओल गेल होयत | मुदा बुकानन के मत SF Se, डब्लू. हंटर सहमत नहि भेलखिन। ओ साफ कहलखिन, जे कोसीक किनार पर are एहि दुआरे बनाओल गेल होयत, जे नदी पच्छिम दिस नहि ae’ लागय।' पढ़आ कका सँ मुँहजबानी wie रास ऐतिहासिक तथ्य सुनियो कए फूल बाबू सहमति मे मूड़ी नहि डोलेलखिन | जाहि सँ ओतय बैसल लोक सबहक उत्सुकता और बढ़ि गेलनि, जे गप मे एहेन कोन तथ्य Ue गेलै जे फूल बाबू संतुष्ट नहि भेलखिन ? लोक के बुझेलनि जे फूल बाबू शास्त्रार्थ के अखड़हा पर माटि फेकि teat छथिन। पढ़आ कका केँ आइ जोड़ीदार भेटि गेलनि! जलप्रांतर / 3l
कयने ome! We बान्हक अवशेष अहाँ एखनो भीमनगरसें दू कोस पश्चिममे देखि सकैत छी। एकटा पश्चिमी विद्वान फ्रासिस बुकाननके अनुमान रहनि, जे ई are सम्भवतः कोनो किलाकें रक्षा हेतु बनाओत गेत होयत। Hel बुकानन के Ace डब्त्यू. डन्त्यू. हंटर सहमत नहि Fae ओ साफ कहलनि जे कोसीक किनार पर are एहि दु - बनाओल गे होयत जे नदी पश्चिम दिस ae बहय लागय।” we तरहे बारह मे
गे पंकज पराशरक पहिल उपन्यास “जतप्रांतर' (20i7) शोधपरक _ sore अछि। मैथिलीमे शोधपरक उपन्यास लिखबाक परम्परा Ale रहल _अछि। एहि दुआरे ई उपन्यास रेखांकन योग्य अछि । पराशरजी ue _उपन्यासमे कोसी नदीक aren इतिहास-कथा लिखलनि अछि। उपन्यासक बैशिष्ट्य ई जे बारहम शताब्दीसँ ल' क' आधुनिक काल धरि कोसी पर बान्ह ah दुसाध्य प्रयत्न, प्रशासनिक उठा-पटक, राजनीतिक cata Mee विस्तृत व्योरा रोचक कथाक माध्यम कहलनि aS | ध्यान देबाक तल ई जे सभटा सूचना आ व्योरा अत्यन्त विश्वसनीय oft पड़ल अछि। का आ फूल बाबू सदृश्य पढ़ल-लिखल आ सचेत पात्रक माध्यम नुसन्धानकें रखलनि अछि। दलान पर बैसल लोकक जिज्ञासाकें कका कहैत छथिन, “पहिल बेर बारहम शताब्दीमे लक्ष्मणसेन fe पुबरिया किनार दिस are बनौलनि। लक्ष्मण सेन बुंशक शासक छलाह जे L78e 205 ई. धरि शासन
९.विदेह मिथिला रत्न (पृ. २२५-३०७)
46 | | http://www.videha.co.in/ ISSN 2229-547X VIDEHA परिशिष्ट- विदेहक परमेश्वर कापड़ि , कम... : <¢ & m.facebook.com < Ashish Anchinhar ae विदेहक परमेश्वर कापड़ि , कमला चौधरी on वीरेन्द्र मल्लिक विशेषांक केर घोषणा जेना की सभ गोटा जनै छी जे विदेह 2075 में तीन टा विशेषांक तीन साहित्यकारपर प्रकाशित केलक जकर मापदंड छल सालमे दूटा विशेषांक जीवित साहित्यकारक उपर tea जइमे एकटा 60-70 वा oitgd बेसी सालक साहित्यकार रहता J दोसर 40-50 सालक ( मैथिली साहित्यकार मने भारत आ नेपाल दूनूक)। ऐ क्रममे अरविन्द ठाकुर ओ जगदीश चंद्र ठाकुर “अनिल'जीपर विशेषांक निकलि चुकल अछि। आयूक विशेषांक किनकापर हु अए ag लेल एक मास पहिनेसेँ पाठकक सुझाव माँगल गेल छल। पाठकक सुझाव आएल आ ओइ सुझाव अंतर्गत विदेहक दू टा अगिला विशेषांक परमेश्वर कापड़ि आ वीरेन्द्र मल्लिकजीक उपर wea संगे-संग भोटिंगमे दोसर 4 पर आएल कमला चौधरीजीपर हमरा सभ सेहो निकालब | हमर सबहक प्रयास रहत जे ई सभ विशेषांक जनवरी of फरवरी 2077 मे प्रकाशित gory Wer ई रचनाक उपलब्धतापर निर्भर करत। मने रचनाक उपलब्धताक feared any ऊपर-निच्चा भ$ सकैए। सभ nied आग्रह जे ओ अपन-अपन रचना (आलोचना, समीक्षा, समालोचना, संसमरण आदि) 3 दिसम्बर 06 af ggajendra@videha.com पर पठा दी।
fade ३७१ म अंक ०१ जून २०२३ (वर्ष १६ मास १८६ अंक ३७१) | | 7 परिशिष्ट-2 a eo © कब aR «ना He एिल्टण <_ Ashish Anchinhar a & Ashish Anchinhar ss Jan 27, 2079 - a faeae srs eat sieht “enfeftes were fastaies” Prsrea (fetes कर्मेंटसे) ae Ge अपने eer निम्ललिस्थित farseraz sree आदि च्याही। fees गोटाकें एल qon® टैग Hs Wet BS) जे clei ere ल्निस्टसे नै ofa हनव्को err ्ड सूचना पहुँचनि रास ems दपस (दर भंगा-पटना-सहरसा) म्ठाशीशा Sr स्तरा। दिक्कत tet क्षम्ताप्ार्थी इकी-- enter, ser get azn! sresresht:— (5) Gezenreen रास्तनीति (a) सरब्कारी steps पैसब्वाव्क गौर-त्नोव्फलाॉज्िस्क विधान (रा) Sere on उकादमी केर कारक सौर-सरीव्का ') सरस्कारी सत्ताक war eters Sastre लात्ककाल्निक सम्नालांतर सत्ताव्क क्कार्यपद्धलि (4 985e¢ geet धर्टि) S) srenresf geen are फैक्टर: शिधक या यथार्थ 2. व्यक्तिगत साहित्य संस्थान St पुरस्वकारव्क रास्तनीति 3. प्रकाशन SPT Gee भ्रश्टाचार ST STE 4, Sfercfies ear Aeren संगठन sir Sitene पदाध्यकारी ste sirazor Ss. aie ams cave साहित्यिक aereares fafaer =o: (&) पाख्यब्कम (a) उध्ययन-उध्यापन A SOR ssc ore Aras cones Write a comment...
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