VIDEHA — Issue 376 / अंक ३७६

Publication: VIDEHA · Issue: 376
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ISSN 2229-547X VIDEHA 𑒀 विदेह ३७६ म अंक १५ अगस्त २०२३ (वर्ष १६ मास १८८ अंक ३७६) [विदेह (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) www.videha.co.in ] विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। ऐ पोथी‍क सर्वाधि‍कार सुरक्षि‍त अछि‍। कॉपीराइट (©) धारकक लि‍खि‍त अनुमति‍क बि‍ना पोथीक कोनो अंशक छाया प्रति ‍एवं रि‍कॉडिंग सहि‍त इलेक्‍ट्रॉनि‍क अथवा यांत्रि‍क, कोनो माध्‍यमसँ, अथवा ज्ञानक संग्रहण वा पुनर्प्रयोगक प्रणाली द्वारा कोनो रूपमे पुनरुत्‍पादन अथवा संचारन-प्रसारण नै कएल जा सकैत अछि‍। (c) २०००- २०२३. सर्वाधिकार सुरक्षित। भालसरिक गाछ जे सन २००० सँ याहूसिटीजपर छल http://www.geocities.com/.../bhalsarik_gachh.html , http://www.geocities.com/ggajendra आदि लिंकपर आ अखनो ५ जुलाइ २००४ क पोस्ट http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html केर रूपमे इन्टरनेटपर मैथिलीक प्राचीनतम उपस्थितक रूपमे विद्यमान अछि (किछु दिन लेल http://videha.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html लिंकपर, स्रोत wayback machine of https://web.archive.org/web/*/videha 258 capture(s) from 2004 to 2016- http://videha.com/ भालसरिक गाछ-प्रथम मैथिली ब्लॉग / मैथिली ब्लॉगक एग्रीगेटर)। ई मैथिलीक पहिल इंटरनेट पत्रिका थिक जकर नाम बादमे १ जनवरी २००८ सँ ’विदेह’ पड़लै। इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि, जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। (c)२०००- २०२३. विदेह: प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004). सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। Editor: Gajendra Thakur. In respect of materials e-published in Videha, the Editor, Videha holds the right to create the web archives/ theme-based web archives, right to translate/ transliterate those archives and create translated/ transliterated web-archives; and the right to e-publish/ print-publish all these archives. रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना/ संग्रह (संपूर्ण उत्तरदायित्व रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता मध्य) editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ पठा सकैत छथि, संगमे ओ अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो सेहो पठाबथि। एतऽ प्रकाशित रचना/ संग्रह सभक कॉपीराइट रचनाकार/ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि आ जतऽ रचनाकार/ संग्रहकर्त्ताक नाम नै अछि ततऽ ई संपादकाधीन अछि। सम्पादक: विदेह ई-प्रकाशित रचनाक वेब-आर्काइव/ थीम-आधारित वेब-आर्काइवक निर्माणक अधिकार, ऐ सभ आर्काइवक अनुवाद आ लिप्यंतरण आ तकरो वेब-आर्काइवक निर्माणक अधिकार; आ ऐ सभ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार रखैत छथि। ऐ सभ लेल कोनो रॉयल्टी/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै, से रॉयल्टी/ पारिश्रमिकक इच्छुक रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता विदेहसँ नै जुड़थु। विदेह ई पत्रिकाक मासमे दू टा अंक निकलैत अछि जे मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ www.videha.co.in पर ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। Videha eJournal (link www.videha.co.in) is a multidisciplinary online journal dedicated to the promotion and preservation of the Maithili language, literature and culture. It is a platform for scholars, researchers, writers and poets to publish their works and share their knowledge about Maithili language, literature, and culture. The journal is published online to promote and preserve Maithili language and culture. The journal publishes articles, research papers, book reviews, and poetry in Maithili and English languages. It also features translations of literary works from other languages into Maithili. It is a peer-reviewed journal, which means that articles and papers are reviewed by experts in the field before they are accepted for publication. Font/ Keyboard Source: https://fonts.google.com/ , https://github.com/virtualvinodh/aksharamukha-fonts , https://keyman.com/ These are print-on-demand books, send your queries to editorial.staff.videha@gmail.com. The eBooks of some of these are available for sale on Google Play [(c) Preeti Thakur, sales.videha@gmail.com], send your queries to sales.videha@gmail.com. The contents and documents e-published by Videha (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) are periodically being checked for accessibility issues. People with disabilities should not have difficulty accessing these contents/ documents. © Preeti Thakur (sales.videha@gmail.com) Videha e-Journal: Issue No. 376 at www.videha.co.in समानान्तर परम्पराक विद्यापति- चित्र विदेह सम्मानसँ सम्मानित श्री पनकलाल मण्डल द्वारा मैथिली भाषा जगज्जननी सीतायाः भाषा आसीत्। हनुमन्तः उक्तवान- मानुषीमिह संस्कृताम्। अक्खर खम्भा (आखर खाम्ह) तिहुअन खेत्तहि काञि तसु कित्तिवल्लि पसरेइ। अक्खर खम्भारम्भ जउ मञ्चो बन्धि न देइ॥ (कीर्तिलता प्रथमः पल्लवः पहिल दोहा।) माने आखर रूपी खाम्ह निर्माण कऽ ओइपर (गद्य-पद्य रूपी) मंच जँ नै बान्हल जाय तँ ऐ त्रिभुवनरूपी क्षेत्रमे ओकर कीर्तिरूपी लत्ती केना पसरत। शुक्ल यजुर्वेद (२६.२)-यथेमां वाचं कल्याणीमावदानि जनेभ्यः। ब्रह्मराजन्याभ्यां शूद्राय चार्याय च स्वाय चारणाय च।।हम सभ गोटेकें ई पवित्र वाणी (वेदवाणी) सुनाबी। ब्राह्मणकें, क्षत्रियकें, शूद्रकें आ आर्यकें; अपन लोककें आ अपरिचितकें सेहो (माने सभकें)। मुदा ऐ वेदवाक्यक विपरीत मनुस्मृति वेदवाणीक अध्ययन/ श्रवणकें समाजक किछु गोटे लेल निषेध करऽ चाहलक, मुदा स्मृति सेहो वेदवाक्यकें प्रमाण मानैत अछि (शब्द प्रमाण) तें तकर विरुद्ध देल ओकर निर्देश स्वयं अमान्य भऽ जाइत अछि। Do not judge each day by the harvest you reap but by the seeds that you plant. -Robert Louis Stevenson ------------------------------------- Videha: Maithili Literature Movement 𑒀 ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्ष ग्वंग शान्ति: 𑓇 𑒠𑓂𑒨𑒾: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑒢𑓂𑒞𑒩𑒱𑒏𑓂𑒭 𑓅 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱: अनुक्रम ऐ अंकमे अछि:- १.१.गजेन्द्र ठाकुर- नूतन अंक सम्पादकीय (पृ. २-१५) १.२.अंक ३७५ पर टिप्पणी (पृ. १६-१६) २.गद्य खण्ड २.१.परमानन्द लाल कर्ण- गीता माहात्म्य (आगाँ) (पृ. १८-२९) २.२.आचार्य रामानंद मंडल- हाल मियां/ जयंत (कौआ)के कथा (पृ. ३०-३६) २.३.लालदेव कामत-साहित्य अकादमी परेखलनि - पेन ड्राइवमे पृथ्वी केँ/ मखानाक गुण बुझू/ मिथिला मेँ माछ, रोजगारके सर्वसुलभ साधन भय सकैत अछि/ पानक बड़ेब/ औषधीय गुण मौधमे/ रंगपुरमे जगूक परियास : एक विश्लेषण (पृ. ३७-५७) २.४.लालदेव कामत-आर्थिक विपन्नता/ मुंस'क दान (पृ. ५८-६०) २.५.निर्मला कर्ण- अग्नि शिखा (खेप-२५) (पृ. ६१-६७) २.६.नन्द विलास राय-मास्क (पृ. ६८-६९) ‍२.७.जगदीश प्रसाद मण्डल-घरदेखी (पृ. ७०-७८) २.८.रबीन्द्र नारायण मिश्र-बदलि रहल अछि सभकिछु (उपन्यास)- धारावाहिक (पृ. ७९-९९) ३.पद्य खण्ड ३.१.बद्रीनाथ राय-तीन टा गीत (पृ. १०१-१०५) ३.२.प्रमोद झा 'गोकुल'-छूटल ठाम हेरायल गाम (पृ. १०६-१०७) ३.३.राज किशोर मिश्र-सांस्कृतिक क्षरण (पृ. १०८-११०) 𑒀 ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्ष ग्वंग शान्तिः पृथ्वी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति वनस्पतय: शान्तिर्विश्वे देवा: शान्तिर्ब्रह्म 𑓇 𑒠𑓂𑒨𑒾: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑒢𑓂𑒞𑒩𑒱𑒏𑓂𑒭 𑓅 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑓁 𑒣𑒵𑒟𑓂𑒫𑒲 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑒰𑒣: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑒼𑒭𑒡𑒨: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱 𑒫𑒢𑒮𑓂𑒣𑒞𑒨: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑓂𑒫𑒱𑒬𑓂𑒫𑒹 𑒠𑒹𑒫𑒰: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑓂𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧 ब्रह्मणसँ प्रार्थना जे द्युलोकमे, अंतरिक्षमे, पृथ्वीपर, जलमे, औषधमे, वनस्पतिमे, विश्वमे, सभ देवतागणमे आ ब्रह्ममे शांति हुअय। ॐ-ब्रह्मण, द्यौ-सूर्य-तरेगण, अंतरिक्ष- पृथ्वी आ द्यूलोकक बीच, आप:-जल, विश्वेदेवा- सभ देवता, ब्रह्म- सर्जक। 𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧𑒝𑒮𑒿 𑒣𑓂𑒩𑒰𑒩𑓂𑒟𑒢𑒰 𑒖𑒹 𑒠𑓂𑒨𑒳𑒪𑒼𑒏𑒧𑒹, 𑒁𑓀𑒞𑒩𑒱𑒏𑓂𑒭𑒧𑒹, 𑒣𑒵𑒟𑓂𑒫𑒲𑒣𑒩, 𑒖𑒪𑒧𑒹, 𑒎𑒭𑒡𑒧𑒹, 𑒫𑒢𑒮𑓂𑒣𑒞𑒱𑒧𑒹, 𑒫𑒱𑒬𑓂𑒫𑒧𑒹, 𑒮𑒦 𑒠𑒹𑒫𑒞𑒰𑒑𑒝𑒧𑒹 𑒂 𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧𑒧𑒹 𑒬𑒰𑓀𑒞𑒱 𑒯𑒳𑒁𑒨। 𑓇-𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧𑒝, 𑒠𑓂𑒨𑒾-𑒮𑒴𑒩𑓂𑒨-𑒞𑒩𑒹𑒑𑒝, 𑒁𑓀𑒞𑒩𑒱𑒏𑓂𑒭- 𑒣𑒵𑒟𑓂𑒫𑒲 𑒂 𑒠𑓂𑒨𑒳𑒪𑒼𑒏𑒏 𑒥𑒲𑒔, 𑒂𑒣:-𑒖𑒪, 𑒫𑒱𑒬𑓂𑒫𑒹𑒠𑒹𑒫𑒰- 𑒮𑒦 𑒠𑒹𑒫𑒞𑒰, 𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧- 𑒮𑒩𑓂𑒖𑒏। 𑒀 ॐ, स॒हस्र॑शीर्षा॒ पुरु॑षः। स॒ह॒स्रा॒क्षः स॒हस्र॑पात्। 𑓇, 𑒮↓𑒯𑒮𑓂𑒩↑𑒬𑒲𑒩𑓂𑒭𑒰↓ 𑒣𑒳𑒩𑒳↑𑒭𑓁। 𑒮↓𑒯↓𑒮𑓂𑒩𑒰↓𑒏𑓂𑒭𑓁 𑒮↓𑒯𑒮𑓂𑒩↑𑒣𑒰𑒞𑓂। स भूमिं॑ ग्वंग वि॒श्वतो॑ वृ॒त्वा। अत्य॑तिष्ठद् दशाङ्गु॒लम्॥ 𑒮 𑒦𑒴𑒧𑒱𑓀↑𑓅 𑒫𑒱↓𑒬𑓂𑒫𑒞𑒼↑ 𑒫𑒵↓𑒞𑓂𑒫𑒰। 𑒁𑒞𑓂𑒨↑𑒞𑒱𑒭𑓂𑒚𑒠𑓂 𑒠𑒬𑒰𑒓𑓂𑒑𑒳↓𑒪𑒧𑓂॥ हजार माथ, हजार आँखि, हजार पएर संग विश्वकेँ आच्छादित केने अछि, दस आंगुरक गनतीक वशमे नै अछि ओ। प॒द्भ्याग्ँ॑ शू॒द्रो अ॑जायत॥ 𑒣↓𑒠𑓂𑒦𑓂𑒨𑒰𑒑𑓂𑒿↑ 𑒬𑒴↓𑒠𑓂𑒩𑒼 𑒁↑𑒖𑒰𑒨𑒞॥ पएरसँ शूद्रक उत्पत्ति भेल॥ प॒द्भ्यां भूमि॒र्दिशः॒ श्रोत्रा᳚त्। 𑒣↓𑒠𑓂𑒦𑓂𑒨𑒰𑓀 𑒦𑒴𑒧𑒱↓𑒩𑓂𑒠𑒱𑒬𑓁↓ 𑒬𑓂𑒩𑒼𑒞𑓂𑒩𑒰↑↑𑒞𑓂। मुदा पएरेसँ भूमियोक उत्पत्ति। ❀ (White Florette- innocence and purity) ☸ (Wheel of Dharma) ࿕(Swastik) ꣼ (सिद्धिरस्तु, सिद्धम 𑒮𑒱𑒠𑓂𑒡𑒱𑒩𑒮𑓂𑒞𑒳, 𑒮𑒱𑒠𑓂𑒡𑒧 Devanagari Anji) 𑓅 (Gwang ग्वंग- two small circles connected by u and a dot placed over it, used in reference of Vedic texts) 𑒀 (Tirhuta Anji, Ankush of Ganeshji, placed at the beginning of something) 𑒀

१.१.गजेन्द्र ठाकुर- नूतन अंक सम्पादकीय १.२.अंक ३७५ पर टिप्पणी १.१.गजेन्द्र ठाकुर- नूतन अंक सम्पादकीय "विदेहक जीवित लेखक-सम्पादक, आन्दोलनी, सार्वजनिक जीवन जीनिहार, कला-संगीत-रंगमंचकर्मी आ रंगमंच-निर्देशक पर विशेषांक शृंखला" (print-on-demand) नित नवल सुभाष चन्द्र यादव विदेह अरविन्द ठाकुर विशेषांक विदेह जगदीश चन्द्र ठाकुर 'अनिल' विशेषांक विदेह रामलोचन ठाकुर विशेषांक विदेह राजनन्दन लाल दास विशेषांक विदेह रवीन्द्र नाथ ठाकुर विशेषांक विदेह केदार नाथ चौधरी विशेषांक विदेह प्रेमलता मिश्र प्रेम विशेषांक विदेह शरदिन्दु चौधरी विशेषांक विदेह रचनाकार अशोक विशेषांक विदेह राम भरोस कापड़ि 'भ्रमर' विशेषांक मिथिला स्टूडेण्ट यूनियन (एम.एस.यू.) विशेषांक कला-विमर्श विशेषांक (सन्दर्भ- संजू दास, कृष्ण कुमार कश्यप, शशिबाला, एस.सी.सुमन आ श्वेता झा चौधरी) Type: Print Book Genre: Reference Language: Maithili Price: ₹349 + shipping ISBN: 9789359679884 Publisher: A Videha eJournal Imprint Number of Pages: 302 Dimensions: 5"x8" Interior Pages: B&W Binding: Hard Cover (Case Binding) Availability: In Stock (Print on Demand) Preview at; https://publish.pothi.com/preview/?sku=SKU21330 Purchase at; विदेह रामलोचन ठाकुर विशेषांक | Pothi.com https://store.pothi.com/book/gajendra-thakur-editor-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B9-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%9A%E0%A4%A8-%E0%A4%A0%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%B0-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%87%E0%A4%B7%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%95/ अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। १.२.अंक ३७५ पर टिप्पणी लक्ष्मण झा 'सागर' बहुत अभिनव आ ललितगर अंक। बहुत बहुत बधाइ! आंतरिक अभ्यर्थना!! नित नवल सुशील एहि अंकक महत्वपूर्ण रचना अछि।सुशीलक संग बर अन्याय भेल छनि। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.गद्य खण्ड २.१.परमानन्द लाल कर्ण- गीता माहात्म्य (आगाँ) २.२.आचार्य रामानंद मंडल- हाल मियां/ जयंत (कौआ)के कथा २.३.लालदेव कामत-साहित्य अकादमी परेखलनि - पेन ड्राइवमे पृथ्वी केँ/ मखानाक गुण बुझू/ मिथिला मेँ माछ, रोजगारके सर्वसुलभ साधन भय सकैत अछि/ पानक बड़ेब/ औषधीय गुण मौधमे/ रंगपुरमे जगूक परियास : एक विश्लेषण २.४.लालदेव कामत-आर्थिक विपन्नता/ मुंस'क दान २.५.निर्मला कर्ण- अग्नि शिखा (खेप-२५) २.६.नन्द विलास राय-मास्क ‍२.७.जगदीश प्रसाद मण्डल-घरदेखी २.८.रबीन्द्र नारायण मिश्र-बदलि रहल अछि सभकिछु (उपन्यास)- धारावाहिक २.१.परमानन्द लाल कर्ण- गीता माहात्म्य (आगाँ) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.२.आचार्य रामानंद मंडल- हाल मियां/ जयंत (कौआ)के कथा आचार्य रामानंद मंडल- हाल मियां/ जयंत (कौआ)के कथा १ हाल मियां मधुवन गांव मे तलेवर राय आ भोला मियां निक किसान रहलन।दूंनू दस -दस बिघा के जोतनिया। दूनू गोरे के ट्रैक्टर।दूनू गोरे के दोस्तीयो रहे। तलेवर राय के दूगो बेटा फुलेश्वर आ पुनेश्वर रहय त भोला मियां के एगो बेटी सलिमा आ एगो बेटा अमजद रहय। सलिमा आ फुलेश्वर गांव के इस्कूल मे पढै। चूंकि दूनू के बाप के दोस्ती रहय।एकर प्रभाव भेल कि दूनू में खूब अपनापन रहे।दूनू पढे मेयो तेज रहय। दूनू आठवां पास कैलक त इस्कूल अपग्रेड होके+२माने कि उच्चतर माध्यमिक भे गेल।क्लास बढैत गेल,उमर बढैत गेल त अपनापनो प्यार मे बदलैत गेल। दूनू इंटर पास क गेल।दूनू सुरसर डिग्री कालेज मे एडमिशन लेलक।आब त दूनू के प्यार परवान चढे लागल।दूनू बीए पास क गेल।सलिमा आबि घरे पर रहे लागल। फूलेश्वर प्रतियोगिता परीक्षा पास क के राजस्व अधिकारी बन गेल। फूलेश्वर आ सलिमा के बराबर मोबाइल पर बातो होइत रहय। एकटा दिन सलिमा कौल कैलक।हेलो। फूलेश्वर मोबाइल उठैलक आ बोलल -हेलो।सलिमा। सलिमा -फूलेश्वर।कि हाल चाल हय। फूलेश्वर -आइ कालि बड बीजी छी। सलिमा-केहन बीजी। फूलेश्वर -आइ कालि जातीय जनगणना में बीजी छी। हर रोज सांझ ६से७बजे के बीच डीएम साहब के संग विडियो कॉन्फ्रेंसिंग होइ हय।आ ओइमे दिनभर के रिपोर्ट देबे के होइ हय। सलिमा -त खाली बीजीए रहै छा कि हमहूं याद अबैय छियो कि न! फूलेश्वर -हं।सलिमा।जौ काज से फूर्सत मिलय।त तू याद अबैय छा। सलिमा -हम त राति दिन तोरे प्यार मे डुबल रहय छी। फूलेश्वर -सलिमा।याद त करा लेकिन प्यार न करा। सलिमा -काहे। फूलेश्वर -आबि तोहर निकाह होतो।अपना शौहर (पति)के प्यार करिहा। सलिमा -हम त अपन शौहर तोरा के मानै छियो।आ तोहरे शौहर बनिबौ। फूलेश्वर -इ केना होतैय। सलिमा -इ बड आसान हय आ बड़ा कठिनो। फूलेश्वर -केना। सलिमा -हम्मर धर्म इस्लाम अपना लेवा त बड आसान।जौ न मानबा त कठिन। फूलेश्वर -हम्मर परिवार त न मानतौ। सलिमा -परंतु हमर परिवार त आसानी से मान लेतौ जौं तू इस्लाम धर्म अपना लेवा।न मानबा त कठिन हो जतौ। फूलेश्वर -सलिमा।हम तोरा प्रेम में इस्लाम धर्म अपना लेब।सुनले-पढले त छी जे बहुत लोग इस्लाम धर्म के लरकी से मुहब्बत आ बिआह के लेल इस्लाम धर्म अपना लेलक।मुगलकाल मे त जमींदार आ छोट छोट राजा महाराजा आ शासन मे उच्च पद पाबे के लेल इस्लाम धर्म अपना लेल कै।सुफी फकीर के शिक्षा सेयो इस्लाम धर्म अपना लेल के। अपने जिला के परसौनी के राजा मुसलमान हय जे पहिले हिंदू रहय।एगो मुसलमाननी लरकी के प्यार मे इस्लाम धर्म अपना के मुसलमान बन गेलेय। सलिमा -एते कथा हम न जनय छियै।ऐते जनय छियै की कोनो इसलाम धर्म के अपनैतै त वोकर बिआह मुसलमान लरकी से हो सकैय हय। फूलेश्वर -त हम तोरा से बिआह करे लेल इस्लाम धर्म अपनाबे के लेल तैयार छी। सलिमा -त सात दिन के छुट्टी लेके घर आबा। सलिमा -सब बात अप्पन अम्मा आ अब्बा के बतैलक। अम्मा -अब्बा राजी भे गेल। अम्मा -अब्बा बोलल कि अपना धर्म मे त इ आम बात हय। लेकिन हम अप्पन दोस्त तलेवर के जरूर बताएब।इ न कि  हम दगा देलियन हय।हम अपना धर्म के रीति रिवाज के बतैबै। हम्मर दोस्त के धर्म मे दोसर धर्म के लरकी से बिआह कठिन हय। आइ भोला मियां अप्पन दोस्त तलेवर राय के इंहा गेलन। तलेवर राय -आउ दोस बैठू।कि बात हय। भोला मियां - हम्मर बेटी सलिमा आ अंहा के बेटा फूलेश्वर एक दोसरा के प्रेम करैत हय आ दूनू बिआह करय चाहय हय। सलिमा हमरा सभ बात बतैलक हय। हम्मर परिवार त राजी हय। हमरा सभ मे त केवल दूध बारल जाइ  हय।दोसर धर्म के लरकी आ लरका हम्मर धर्म इस्लाम अपना लेतेय त विआह मे कोनो अड़चन न हय। अंहा के त धर्म मे दिक्कत हय। अंहा  हम्मर दोस छी। अंहा के सभ बात के जानकारी देनाइ  हम्मर फर्ज हय। तलेवर राय -हम कि कहु दोस।हम त आवाक छी।आबि फूलेश्वर पदाधिकारी हय। कानून के जानकार हय। हमहूं बूझैय छी कि कोई व्यक्ति कोई धर्म अपना सकैय हय।हमहू कोनो विवाद न करैय चाही छी।जे बात से बतंगर हो जाय। भोला मियां -त चलैय छी।बिआह के सर्वजान करै के हय। फूलेश्वर सात दिन के छुट्टी लेके सलिमा के घर आ गेल। आइ भोला मियां अपना घर पर मिलाद के आयोजन कैलक।मोलवी साहब फूलेश्वर के कलमा पढैलक। फूलेश्वर के नाम फूलचन मियां राखल गेल।एगो मियां -बीबी जे सलिमा के फूफा -फूफी रहय। फूलचन मियां के अब्बा -अम्मी बनके गवाह बन लन आ सलिमा के अब्बा -अम्मी गवाह बनलन। सलिमा आ फूलचन मियां एक दोसर के कबूल कैलन। फूलचन  मियां के मुसलमान हज्जाम सुन्नत कैलक। गांव के सभ लोग फूलेश्वर के हाल मियां फूलचन कहय लागल। २ जयंत (कौआ)के कथा (बाल्मीकि रामायण आ संत तुलसीदास रचित रामचरितमानस मे मतभिन्नता!) बाल्मीकि रामायण के सुंदरकांड मे अशोक वाटिका स्थित सीता हनुमान जी से कौआ वाला घटना बतैले रहथिन -पहचान स्वरुप जे भगवान राम के विश्वास हो जाय कि हनुमान आ सीता से भेट भेल रहय। इदं श्रेष्ठमभिज्ञानं ब्रूयआस्त्वं तु मम प्रियं। शैलस्य चित्रकूटस्य पाले पूर्वोत्तरे पदे ।।१२।। स तत्र पुनरेवाथ वायस: समुपागमत्। तत: सुप्तप्रबुद्धां मां रआघवआंगत् समुत्थिताम् वायस: सहसआगम्य विददार स्तनान्तरे।।२२।। पुनः पउनरथओत्पयं विददार स मां भृशम्। तत: समुत्थितो रामो मुक्तै: शोणितबिन्दुभि:।।२३। स मां दृष्टवां महाबाहुर्वितुन्नां स्तशयोस्तदा। आशीविष इव क्रुद्ध: श्वसन वाक्यमभाषत।।२४।। केन ते नागनासोरु विक्षतं वै स्वानान्तरम्। क: क्रीड़ति सरोषेण पंचवक्त्रैण भोगिना।।२५।। वीक्षमाणस्ततस्वं वै वायसं समवैक्षत। नखै: सरुधिरैस्तीक्ष्णैर्मामेवाभिमुखं स्थितम्।।२६।। रामचरितमानस के अरण्य काण्ड के प्रथम चौपाई में जयंत(कौआ)की कथा हय। एक बार चुनि कुसुम सुहाए।निज कर भूषण राम बनाए। सीतहि पहिराए प्रभु सादर। बैठे फटिक सिला पर सुंदर। सुरपति सुत धरि बायस बेषा।सठ चाहत रघुपति बल देखा। जिमि पिपीलिका सागर थाहा।महा मंदमति पावन चाहा। सीता चरन चोंच हति भागा।मूंढ मंदमति कारन कागा। चला रुधिर रघुनायक जाना।सींक धनुष सायक संधाना। अइ प्रकार बाल्मीकि रामायण आ संत तुलसीदास कृत श्रीरामचरितमानस में जयंत (कौआ) के कथा मे मतभिन्नता हय। -आचार्य रामानंद मंडल सामाजिक चिंतक सीतामढ़ी,सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक, माता-चन्द्र देवी, पिता-स्व०राजेश्वर मंडल, पत्नी-प्रमिला देवी, जन्म तिथि-०१ जनवरी १९६० योग्यता- एम-एससी (रसायन शास्त्र), एम ए (हिन्दी)। रूचि- साहित्यिक, मैथिली-हिन्दी कविता -कहानी लेखन आ आलेख। प्रकाशित पोथी - मैथिली कविता संग्रह भासा के न बांटियो। २०२२ प्रकाशित रचना - सझिया कविता संग्रह पोथी - जनक नंदिनी जानकी आ शौर्य गान। २०२२ पत्रिका -मिथिला समाज, घर -बाहर आ अपूर्वा (मैसाम)। अखबार -दैनिक मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश। सामाजिक-सामाजिक चिंतन, दायित्व- पूर्व जिला प्रतिनिधि, प्राथमिक शिक्षक संघ, डुमरा, सीतामढ़ी। स्थायी पत्ता- ग्राम-पिपरा विशनपुर थाना-परिहार जिला-सीतामढी। वर्तमान पता-पिपरा सदन,मुरलियाचक वार्ड-04 सीतामढ़ी पोस्ट-चकमहिला जिला-सीतामढी राज्य-बिहार पिन-843302 मो नं-9973641075 ईमेल-ramanandmandal001@gmail.com ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.३.लालदेव कामत-साहित्य अकादमी परेखलनि - पेन ड्राइवमे पृथ्वी केँ/ मखानाक गुण बुझू/ मिथिला मेँ माछ, रोजगारके सर्वसुलभ साधन भय सकैत अछि/ पानक बड़ेब/ औषधीय गुण मौधमे/ रंगपुरमे जगूक परियास: एक विश्लेषण लालदेव कामत-साहित्य अकादमी परेखलनि - पेन ड्राइवमे पृथ्वी केँ/ मखानाक गुण बुझू/ मिथिला मेँ माछ, रोजगारके सर्वसुलभ साधन भय सकैत अछि/ पानक बड़ेब/ औषधीय गुण मौधमे/ रंगपुरमे जगूक परियास : एक विश्लेषण १ साहित्य अकादमी परेखलनि - पेन ड्राइवमे पृथ्वी केँ २०२२ लेल साहित्य अकादमी दिल्ली केर मैथिली मूल पुरस्कार मैथिलीकर्मी अजित आजाद (मिथिला) जीके हुनक मैथिली कविता संग्रह पोथी " पेन - ड्राईवमे पृथ्वी" केँ देल जेबाक घोषणा भेल। एहि जनतव सँ युवा वर्ग बीच आ साहित्य सेवी जन बीच चौतरफा स्वागत भेल अछि। बिहार सँ आजाद उर्फ पप्पूजी केर सँगहि दोसर पुरस्कृत हिन्दी कविता संग्रह ' तुमरी के शव्द' केर कवि व प्रसिद्ध समाज वैज्ञानिक बद्री नारायण (भोजपुर) केँ साहित्य अकादमी सचिव श्री निवास राव द्वारा घोषित भेलासन्ता २३ भारतीय भाषाके लेखकगणक प्रशंसक बीच खुशी क' वातावरण बनलैक। १ जनवरी २०१६ सँ ३१ दिसम्बर २०२० धरिक पहिलखेप प्रकाशित पुस्तक पर विचार कयल गेलैक। एहि पुरस्कार मेँ ताम्रफलक, शाँल आ एकलाख टाका विशेष राशि समारोह मेँ देल जाईछ। आरो कविता संग्रहमे बोडो- रश्मि चौधरी, मणिपुरी- कोइजम शांतिबाला, ओड़िया गायत्रीबाला पांडा,संस्कृत- जनार्दन पांडेय'मणि' , संताली- कजरी सोरेनकेँ माध्यम कयल गेलैक अछि। कहानी संग्रह मेँ असमिया- मनोज कुमार गोस्वामी आ पंजाबीमे सुखजीत केँ सम्मान भेटलनि अछि। उपन्यास विधामे अदहा दर्जन लोक सम्मान पेयलथि यथा_ अंग्रेजी- अनुराधा राँय,कोकणी- माया अनिल खरंगटे,मराठी- प्रवीण दशरथ बांदेकर,तमिल- एम राजेंद्रन, तेलुगू- मधुरांतकम नरेंद्र,उर्दू- अनीस अशफाक। समालोचना क्षेत्रमे कश्मिरीके फारूक प्याज, मलयालम- एम थाँमस मैथ्यू,आत्मकथा लेल गुजराती में गुलाम मोहम्मद शेख आ लेख संग्रह लेल कन्नड़मे - मुडनाकुडु चिन्नास्वामी , साहित्य इतिहास मेँ सिंधी सँ कन्हैयालाल लेखवाणी आओर नाटक विधामे क्रमश: डोगरी- वीणा गुप्ता ,नेपालीमे - केबी नेपाली, आ राजस्थानी'क कमल रंगा केँ अवार्ड भेटब सुनिश्चित भेल रहय से समय सँ भेटल हन्। सन् २०१८ मेँ नवारम्भ सँ प्रकाशित २५६ पृष्टक किताबक दाम २०० टाका निर्धारित करैत अपन काव्य संग्रह मेँ १८५ गोट कविता केँ अजीत जी पाठक समक्ष अनने रहथि। २००६ सँ पूर्व हिनक एकोगोट पोथी नँय छपल रहनि। आब तँ आजाद जीके अपन पोथीक संख्याँ ३० टा सँ बेशिये छैक। कविता विधा मेँ हम गप्प करय चाहैत छी, ओहिमे चर्चित पोथी सात गोट छपल छैन जे हुनक अपन नवारम्भ केर इतर आनो ठाँव सँ छपल छैक। हिनका कविताक पात्रमे एहि पाँतिक लेखक सेहो समान्य पाठकके अभरत। मैथिली परामर्शदात्री समिति क' संयोजक डाँ० अशोक झा अविचल आ तीन सदस्यीय निर्णायक मंडल डॉ देवकांत झा,शेफालिका वर्मा आ मंत्रेश्वर झा १३ टामे ऐ पोथीके सर्वसम्मति सँ चयन केलनि। हिनक समकालीन मैथिली कवितामे देशज शव्दक माध्यम सँ विनु छुबल विषय केँ शिल्पक विविधता संग व्यक्त विचार प्रतिरोध आ प्रेम मूलतः रहलनि अछि। आम जन केर सरोकार सँ प्रमुख भुमिका रूपे देखाइ छथि। पुरस्कार पाबै बालामे ई बेशीतर घुमक्कर आ मंचीय उपस्थिति लेल देशक कोना - कोना छान मारैत देखाइत अयलाह,जे सबसँ अलग पहिचान भेलनि। सगर रात्रि दीप जरय "कथा गोष्टीक" आयोजन अपन गाम - हटनी सँ ल'केँ राज्यक राजधानी धरि अतितमे कयने छथि। कतेको साहित्यिक मंच आ नाट्य मंच पर अपन बेढप छाप छोरि दर्शक आ श्रोताक हृदयमे जगहधरि बनेने छैथ। आब तँ प्रकाशन आ मैथिली फिलिममे सेहो पकठोस जकाँ जमल छथि। मैथिली भाषा पत्रिका - नवारम्भ,बाल- बन्धु, मिथिला सृजन ,सखी- बहिनपा 'क सम्पादन करैत आबि रहलाह अछि। बहुतो राश पुरस्कार अपना नामे अजीत मिश्र जी अर्जीत कयने छथि,ताहीमे ई साहित्य अकादमी पुरस्कारोक ठप्पा लगने आरो परिष्कार भ' गेलाह हन्। हिनक कविताक अनुवाद हिन्दी, अंग्रेजी,उर्दू,बंगला आ नेपालीमे भेल छन्हि। आरम्भिक दौरमे हिनक कवीता "एशिया-मैत्री आ समता प्रेस सर्विस मेँ हम सम्पादकक हैसियत सँ छापने रहियैक। आब आर्थिक सुदृढ़ीकरण लेल एक खानगी कम्पनीमे निदेशक पद पर चाकरी करैत समय खेपैत छथि। हिनक पेन-ड्रावमे पृथ्वी पोथीक पहिल कवीताक 'शिर्षक' बेबी किछु नहि केर पाँति देखल जाय-: नहि,एतेक प्रशंसा नहि नहिं,एतेक निन्दो नहि नहिं,एतेक भुख नहिं नहिं , एतेक तृप्तियो नहिं ..........

दोसर पाँति द्रष्टव्य अछि, आखिरि पन्नाक कवीता "शिर्षक" छोड़िए जायब सँ! थोड़ेंक बरसात थोड़बा सुगन्धि फाँटमे पड़त हमरा

थोड़ेक रोग थोड़बा-थोड़ भोग सेहो पड़त संख्या ......... एहि तरहेँ कम पाँतिक आ दू पन्नियाँ कविता सँ भरल पैघ कवीताक पैघौत तत्कालीन परिवेशमे अपन पराकाष्ठा देखबैत रहत। आजाद भाय उर्फ पप्पुजीके विशेष मंगल कामना रहत। ओ शिघ्र दादा साहब फाल्के पुरस्कार सँ अलंकृत होथि से मन लागल हैए। २ मखानाक गुण बुझू स्वर्गहुमे दुर्लभ कहल गेल अछि,जे मिथिला मेँ ढाकीक ढाकी भेटैछ-मखान । मखानमे उसना-अरबा फुटायब महाग मुशकिल। पान,माछ आ मौधक वाद मखानेक चर्चा मिथिलांचल मेँ पबैत होयब। ई एतुका विशेष पहचान छी। एहिक सेवन सँ अनेको फैदा होईछ। मछुआरा समुदाय एहिक उत्पादनमे लागल रहैत छैथि।पोखैर आ डबरामे तैयार बिया बाउग कयल जाइछ।मखाना पौधके सेहो स्थानांतरित कय रोपल जाइछ।मखाना संग सिंगहार फलक अनुवर्ती खेती क'सकैत छी।जलमे गाछ बढैत फुल कमल सन आ ओहिमे ५ दिनक वाद सं फल नम्हर होइत जाइछ। एक फरमे १५-२० टाधरि बीया होईछ। एहि पाकल करिया बियाके खायल जाइछ आ आगिमे भुजि मटरदाना सन बीया पर काठक मरिया सँ चोट दैत लाबा बनाओल जाइछ। पोखरिमे जुआयल फल जे काँट सँ भरल रहैछ,सितम्बर-अक्टूबर मासमे पानिसँ समेटके बाहर कयल जाइछ। गहींर पैखरि सँ पानिमे डुबकुनियाँ दैत नीचा खरड़ल जाइछ। दम साधिके लगधक २ मीनट पर पुन: ओहिक्रम केँ दोहराबैत कठिनता सँ जमा कयल जाइछ। मखानक जैड़कंदमे सीर होइछ। पुरनी पातसन पैघ पता जाहिमे तरकाभाग आ डांटतकमे कांट रहैछ। मार्च माह में प्लाँटिंग कयला वाद जुलाई-अगस्त धरि एक एकड़ रकबामे लगधक १० क्विंटल बीया भेटैछ। जाहि सँ लगधक सात क्विंटल मखानलावा तैयार होइछ। पौने दूसय टाका किलो बिकैछ, मोल ल'केँ दक्ष महिला श्रमिक (मलाहीन - गोंढी) पौने पांच सय टाका किलो मखान बैचैत छैक। भाव दुर्गा पूजा आ कोजगरा पाबैनमे कम बेसी होइत रहैछ। मखान १०किलोक बोरा मेँ राखि बजार पठाउल जाई छैक।जहिना धराधाममे ४००० लगधक जीव जन्तु अछि,तहिना जलचर रुपे तीनगुण अधिक जीव जन्तु रहैछ। किछु विषैला साँप आ दोसरो प्रजाति जल मजदूर लेल संकट उत्पन्न करैत छैक। ताहि सँ सूरक्षा रखैत सावधानी बरतबाक होयत छैक। शहनी-निषाद लेल सरकारी पोखैर सैरात देल जाइछ। नीजी पोखरिया हसामी सँ सेहो बर्गादार रुपेँ लीज पर लैत वा मनखप पर मखानक खेती करैत पाउल गेल अछि। मखाना सघन रुपे मैवीकछुआ,नवानी,ठाढी,दीप गोधनपुर ,सुखेत, उसराइर, झंझारपुर मछहटृ।,मनीगाछी मदबनी आ दरिभंगामे उत्पादन होइछ। महिला सशक्तीकरण एहि दिशामे भ'रहल अछि। सखी बिहार संस्थाके सुमन सिंह जी एहिक प्रसंस्करण मेँ आगू बढिकय मिशाल बनलैक अछि। मखानक खीर बढ प्रसिद्ध छैक। मखान मिनरल आ न्यचट्रियंस सँ भरल छैक। एहिमे आयुर्वेदिक औषधिय गुण छैक। प्रोटीन १०प्रतिशत, कार्बोहाइड्रेट ७५ प्रतिशत केर अतिरिक्त आयरन,फास्पोरस आ केरोटीन सेहो छैक। एहिमे वशा नाममात्र रहने हाईव्लड प्रेशर आ मधुमेहक' मरीज लेल अमृत समान अछ। मखान चिकस सँ हलूवा आ बीया भुजिकय परशौतिके तागत लेल देल जाइछ। जोड़लगक दर्द आ एगजीमा वला हौहैटमे मखानक पता पीसके लगौला सँ लाभ होईछ। मखान आर्गेनिक हर्बल कहाबय लगल अछि। एन्टीअक्सीडेंट गुण सँ भरल मखान सँ जीर्ण, अतिसार,ल्यूकोरिया शुक्रानुक कमी,डांरक दर्द नियंत्रण मेँ असरदार रहैछ।एहिमे विटामिन बी सेहो रहैछ। संतनगर डिहबार स्थानक बड़की पोखैरमे घनगर मखानक पात पर सौरा-बुआरी माछक सुकठी स्वत: देखबामे आयल ,जे छटपटाइत जल समाधि नहिँ ल'सकल रहय। मखान बनाबय मेँ लागल लोक किछ आन उत्पादक जेकाँ मिलाबट नहिँ करैत अछि। माछ अलग आ मखान अलगे रखैत य । तेँ पुरस्कारक भागी अछि। एहि विषय पर सहचिन्तन होयव आवश्यक छैक। दिल्ली मेँ सुपर बजारमे फोंकगर मखान जे भेटत से बिहार सँ निर्यात कयल जाइछ। पूजा लेल खुदरामे हटनीहाट पर १०० टाकामे २०० ग्राम मखान किडीफेंटल भेटैछ। मखानक उत्पाद आब हवा जहात सँ विदेश निर्यात कयल जाईछ। सिपौल सहरसा जिला मेँ एहि खेती मेँ उत्साह सँ युवा पीढ़ी लागल अछि। ३ मिथिला मेँ माछ, रोजगारके सर्वसुलभ साधन भय सकैत अछि

मिथिलामें पान-माछ, मौध-मखान केर महिमामंडित चर्चा परस्पर होइते रहैछ। माछ तँ दशावतारमें सँ एक छैक, तेँ वैष्णबजन साकठकेर अपेक्षा माछसँ दुरे रहैत अछि। हिन्दू समाज छुतका (अशौच) पड़ला पर माछ बारने रहैछ। 2001 ई में हम माछ पालन केर नव विषय बूझय लेल महाराष्ट्रक रत्नागिरी जिलान्तर्गत आरेगाँव (डापोली) गेल छलहूँ। खाड़ाजल आ मीठगर जलमे माछक अलग-अलग प्रजातिक निकसँ पालन पोषण कयल जाइत छैक। प्राउन टाईगर पर हम आनदिन कहियो गप्प करब। एखन हम अपना माँटिपानि पर एक पोखरिमे छह तरहक माछक थर पोसि सकैत छी, ताहि सम्वन्ध में वृहद रूपे चर्च करैत छी। मिश्रीत माछ पालन तकनीकमे रौह, भाकुर (कतला), नैनी( मृगल) देशीक संग-संग विदेशी कार्प यथा-: सिल्वर, ग्रास आ कौमन एकेसंग पोसल जाइत अछि। भारतीय मेजरकार्प केर स्पाॅन्ज बा छबरा बच्चा जकर पालन मात्रे तीन तरहक जेना रोह भाकुर आ नैनी टाक परमारागत रुपे होयत अबैत रहय, से आब ओहिक संग-संग तीनू तरहक विदेशी कार्प सेहो हुअय लगल अछि। छ: तरहक पोसल गेल माछक रहन-सहन आ खानपीन अलग-अलग परतमे होईछ। एक दोसराक भक्षण तत्व सदा सर्वदा पृथके रहैछ। माछक जीरा खसाबै सँ पूर्व पोखरि वा जलाशय सँ जलीय पौधा जेनाकि कुमहि, केचली, मलकोका, कमल पुरनीपात (भैंट) आ करमी लती-मखान आ सिंगरहार, लीली छानिके निकालि साफ राखक होयत। हाईद्रीला, दुईब, नाजा, लैम्ना आ बर्सिम घास सँ विदेशी कार्प अपन चारा चरौर करैत य। पुरक अहारमे पहिलखेप एक एकड़ जल क्षेत्र लेल पशु गोबर 800 क्विंटल तकरबाद मासेमास 4 क्विंटल दैत रहबाक छैक। यूरीया 10 किलो, सिंगल सुपर फास्फेट 8 किलो आ पोटाश 2 किलो दैत रहबाक होयत। पहिने जैविक खाद्य तकर 15 दिन वाद रसायनिक उर्वरक देलासंता जौ जल हरियर कचोर भऽ जाय तँ खाद देब' रोकि देना चाही। पोखरि सुखल होय तँ जोत करेलाक बाद भरकलचून आ सरिसो, मुमफली-मौहक खैर गोबरक कम्पोष्ट खाद देलाक बाद पानि बर्साक वा पम्पसिट मशीन सँ भरल जाय। नम्हर जलग्रहण क्षेत्र जे सुखय नहिँ, ताहि भरल पोखरिमे 1000 किग्रा प्रति एकड़ खैर देल जाय। आ पहिले सँ विद्यमान अवांक्षित माछ यथा टेंगरा-पोठी, चन्ना-चेलबा गरई, सौरा बुआरी, सिंधी-मांगुर, कांटी जालसँ निकालि लीअ, अहरामे सेहो हिस्सा पाउत आ जीराकेँ सेहो भक्षण करत। जल जौं कनियौ क्षारीय होअय तँ 100 किग्रा प्रति एकड़ दर सँ मिजहायल चुन जलमे छिटल जायबाक चाही। एक अंगुरीक आकार (4 सँ 6 इंची) केर जीरा 2000 प्रति एकड़ एहि अनुपातमे संचय कयल जाय-: 300 नग 300 भाकुर, नैनी, सिल्वरकार्प आ ग्रासकार्प देल जाय संगहि 400 नंग 400 रेहू आ काॅमन कार्प पालन कयल जाय। माछक एहिसँ नीक बृद्धि आ रोग सँ बचाउ स्वत: भऽ जायत। झटदय बढ़य लेल पूरक अहरामे सरिसबक खैर, चाउरक गुड़ा भोर-साँझ देल जाय। डेढ़ किलो पहिले माससँ शुरु करबतँ साल लगैत-लगैत पौन दस किलोधरि बढ़िबैत आबि जाऊ। दुइब घास मकईके पतासी आ हाईड्रीला देबाक अछि। पूरक चारामे मेंथी भुइज कए दोखैर ली ओहि मेँ 1 प्रतिशत एग्रीमीन फेंट कए माछके परोसू तँ बढ़ बरहत। सालभरिमे 1 किग्रा फरी भ’ जायत तँ शिकरमाही क’ निकालि सकैत छी। बजार भाव माछक देखकए बा लग्नमे आढ़त अयला पर प्रति एकड़ 1000 सँ 1500 किग्रा उत्पादीत माछ बेच सकैत छी। किछु शिक्षित बेरोजगार युवक हमरा संगे सिंहेश्वर स्थान (मधेपुरा) पशुमेलामे माछ पालनक विशेष जानकारी लेलनि। हमतँ छोट तलाब सेहो बनेलहूँ, जाहिमे एहि प्रजातिक माछक बढ़बार कम भेल, तेँ बादमे थाई मांगुर आ अमेरिकन कबई पालनक काज बेराबेरी सेहो 1990 केर दशकमे केने छलहूँ। नामगर बेशी ,चौड़गर कम बाला पैघ पोखरिमे एहि तरहक माँछ पालन कय आर्थिक बढ़ोतरी कए सकैत छी। एहि संदर्भ 45- जिप घोघरडीहा दक्षिण क्षेत्रक सदस्य आ जिला उत्पादन समितिक सदस्य श्रीमती मंजू देवी सँ भेंट करैत कारोबारी लेल सरकारी ऋण मुहैया कोन तरहे भ’ रहल छैक, से जनबाक चेष्टा केलहूँ। घोघरडीहा प्रखंड आत्मा कमिटिक अध्यक्ष श्री राजेन्द्र कुमार जी सँ सेहो माछ पालनक दिश बेरोजगारक प्रशिक्षण संवंधमें सम्पर्क स्थापित कयल। आब जौं माछ पौसब केर शोख अछि तँ बड़का टबमे सेहो पोसनाय केर विधि विकसित भेल हन। एहि बाबत जिला मत्स्य, मुख्य पदा आ कार्यपालक पदाधिकारी मदैत करताह। मनरेगा सँ नीजी भूमीमें पोखरिक निर्माण करब एहि समयमे सार्थक डेग बढ़ायब होयत। मत्स्य पालन लेल बिहार सरकार'क अति पिछड़ा तबका केँ 90% ऋणमे अनुदानक घोषणा भेलनि अछि। ४ पानक बड़ेब

एकटा गीतकार खा कए मगहिया पान यौ पाहुन हम्मर, जान किए लड़ छी। जान किये लइ छी, प्राण किए लइ छी... संगीत सुनि मिथिलामे पानक चलनसारि आ महौत तेकर नियमित उपयोगक मोन सहजे पड़े अछि। से ललिचगर पान सर्वत्र चौक चौड़ाहाक पसलपर सभ तरहक भेटि जाइ छइ । परञ्च एहनो सौखगर पानखेनिहारक कमि नहि जे पानक भरल दोकानमे अपना हिस्सक केर मीठग़र पत्ता पान नहि भेंटने औनाइत-पड़ाइत अछि । पानक महिमा अति प्राचीनकालसँ शास्त्र- पुराणमे सेहो भेटैत अछि। अइ लेल एकर उद्भव आ उत्पादनपर विचार करब परम आवश्यक बुझाय पड़ल। तँए मुहँक लाली 'पान' आओर तेकर जैविक खेती केना भऽ रहल छै से सन्तनगर, तमुरिया आ मटरस आदि मधुबनी जिलाक गाममे ब्रेब देखए परिभ्रमण केलौं।

वैज्ञानिक दृष्टिकोणसँ पान एकटा वनस्पति थीक। ई आठ वर्षीय सदाबहार लत्तीदार एकलिंग श्रेणिक बेल (लती) छी। पान भारतीय इतिहास आ परम्परासँ बड़ लगीच जुटल छइ । एकर उद्भव स्थल मलाया द्विप थीक । पानकें संस्कृतमे ताम्बूल, तेलगूमे पक्कू, तमील आ मलयालमने बेटिलाइ एवं गुजरातीने नानुस्खेल कहल जाइ छइ । हरियर पानक पत्ताके सेवाद्वारा उजर बनाएल जाइ छै, तेकरा बहुत पाकल वा सफेदपान कहल जाइ छ। बनारसमे पानक सेवा बड़ श्रमसँ कएल जाइ छइ । मगह केर एकटा पानक नश्लके केतेको मासधरि बड़ जतनसँ ओरियाके पकाउल जाइ छै, जकरा मगही पान कहल जाइ छइ । ओ अत्यन्त मूल्यवान आ सुस्वादू कहल गेल हेन । एकर पाँच प्रमुख प्रजातिक नाम थिक बंगला, मगही, साँची, देशावरी, कपुरी आ मिठापता । डांटकी लागल छुट्टापान पूजागे देव पितरक चड़ौल जाइ छ। गृह गोसाईके विशेष अनुष्ठानमे डबल आ ट्रिपल मुड़ीबला पानक काज पड़े छे से 5 गुणा बेसीदाममे बड़ कठिनाइसँ भेटै छइ खाएर (कथा) चुन सुपारीक योगसँ बिरा लगाउल, पानखिल्ली मुँहक सुन्दरता-सुगन्धि आ शुद्धिक संगे श्रृंगार बढ़बै छइ । पान चिबाकऽ खाएल जाइ छै, जइमे सोहनगर जर्दा ( तमाकूल ) अनेक तरहक मशाला, लौंग-इलाइची, भुजल नारिकेल आ मीठाक लेल रसना-हीरामोती सौंप अवश्य देल जाइ छइ । चेन्नइ दिसन बिनु कत्थो पान खेबाक प्रचलन बढ़ल छइ । ओना मिथिलामे सेहो पान जोड़ा खिली कल्लामे दबेलाक बाद ऊपरसँ मिझाएल चून डांटने लगा कए चटैत देखेमे अबैछ । भोजनोपरान्त पानक बीड़ा वा खिल्ली तथा गछपानक छोट खिलि शोभाकारी मानल गेल ऐ। तम्बाकू (जर्दा) केर संग नियमित पान खाइत खाइत लोक प्रायः एकर व्यसनि भऽ जाइ छै, जे अभ्यास बिनु दाँत खराब केने आ रोग एवं दुर्गन्धक कारणें छोड़त नहि ।

ओना पानमे औषधीयगुण सेहो प्रचुर मात्रामे रहै छइ । कड़गर मोलाइम छोट पैघ रुखगर आ सागपातसन पानक सुआद कटु कषाय तिक्त आओर मधुर होइछ । पानमे रसायनिक गुण पाउल जाइ छइ । अइमे वाष्पशील तेलक अतिरिक्त अमीनो अम्ल, कार्बोहाइड्रेट आ किछु विटामिन प्रचुर मात्रामे रहे छह पान औषधीय गुणक बखान तँ चरक संहितामे खूब भेल अछि। देहाती क्षेत्रमे पानक पत्तासँ घाघौस फॉकर केर उपचारमे पुल्टिसक रूपें साल जाइ छड़ हितोपदेश के अनुसारे बलगम कफ हटेबाक लेल मुखसुद्धि, अपच, सांश रोगक निदान होइछ। ५ औषधीय गुण मौधमे

शुध्द शहद मधुमाछी सँ प्राप्त होइत अछि। मिठास सँ भरल मौध द्रव्य रहितो एहिके लिटर मापक सँ पृथक किलोग्राममे वजन कएल जाइ छइ । मधुमक्खी पालक 150 सँ 500 टाका दर पर मौध बेचैत अछि। मौध सेवन एक व्यस्क लोकके 30 सँ 50 ग्राम, बच्चा लेल 10 से 15 ग्राम आ वृद्धजन लेल 20 से 30 ग्राम अनुशंसा कएल गेल अछ । लोब्लड प्रेशरमे तुलसीपातक एक चमछ रशमे दू चम्मछ मौध फेंटकय सेवन करबाक होएत। हाईव्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) के मरीज 4 से 6 जवां देशी लसुन छोइलका हटाके मौध दू चम्मछ के संग भोरकय नीतरोज जलखै खायसँ पहिले सेवन करैत रहबाक चाही, एहिसँ हृदय गति व्यवस्थित रहैछ। डायबिटीज़ (मधुमेह) मे त्रिफला चूर्ण मात्रा 300 ग्राम, सुखल धातृ, केशर 200 ग्राम, 100 ग्राम हर्रे कुइटके मिहीं करैत मिला लिअ, एक चम्मच चूर्णमे दू चम्मच मौध फेंटकय जलखै केलाक अदहा घन्टा वाद खाऊ। एहिसँ पेटक रोग कम होइत किडनी क्षति नँय होएत। मोटापा कम करैयमे योगाक अतिरिक्त कोनो वासनमे 4 गिलास इनहोर जलके (शुशुम गर्म पानि) कऽ लिअ, ओइमे दू चम्मछ मौध आ कागजी नेबोक रस 20 बूंद नीक सँ मिलाबैत भोरमे रसे रसे पीयल जाए, बचल इनहोर के कने सरेलाक बाद ईक्षानुसारे सब सेवन करी । एहिसँ शरीरक कैलोश्टोलक मात्रा घटत, संगहि उच्च रक्तचाप सेहो घटैत अछि। मोटर (देहगर-दशगर) होयबा लेल एक गीलास दुधमे एक पैघ छोहारा क' टुकरी-टुकरी कएल औंट लिअ, हलुक ठंडा भेलासन्ता दू चम्मछ मौध फेंटकय रातिमे सुतय सँ अदहा घन्टा पहिले पीयल जाइ। एहिसँ रक्त अल्पता दुर होइछ । मौधमाच्छी पोसब केर तात्पर्य-: विधिवत ढंग सँ मौधमाछीके काठक बक्सामे पोसल जाइछ,एहिक आदैत केँ समझैत-बुझैत एकरा आवश्यकता केँ समयानुसार पुरा करैत हुअय ,कम कष्ट पहुँचाबैत वेसी सँ बेशी लाभ प्राप्तिके आधुनिक व्यवसायिक मौधमाछी पालन कहल जाइछ। आधुनिक व्यवसायिक मौधमाछी पोसब एकटा लाभप्रद व्यवसाय छी। बहुत तरहक मौधमाछीमे मुख्यत: निम्न प्रकार सँ मौध भेटैछ।(१)एपिस फ्लोरिया-:ई जंगली मौधमाछी होइछ,जे पोसल नहिँ जाइछ। ई एकल छत्ता बनाकय स्वत:जंगली जेकाँ साफ तरहेँ रहैत अछि,ऐ केँ अन्हार नापसिन छैक। ई निकहा मौध दैत छैक। मानव सभ्यता प्रगैतिहासिक कालमे जहिया आगिक अविष्कार नहिँ देखने होथि,तहिया सँ ओ अमृत मौधके चिन्हैत एहिक उपभोग करैत आयल छैक। एहिक उपयोग कय वलिस्ट व रोगमुक्त रहथि। ई मौधमाछी पोसब संभव नहिं भ' सकलैक,कियाक तँ ई पालतु नय छी।छोटसन एकल छत्ता बनबैत ओहिमे १००-५००ग्राम निठुर शुध्द मौध दैत छैक। एहिक खोता नहिँ तोड़बाक चाही,किनको घर टुटैत छैक तँ बढ दुःख होइछ से एकरो होइछ। ई विभिन्न फुलपर बैसकय रस चुसैत फसिलक पैदावार बढ़ेबामे कृषक केर हित कीट छी। औषधि रुपमे ई उन्नत प्रभेद अछि। (२)एपिस डोरसटा-:आ भौड़ा मौधमाछी उँचगर जगहमे एक गाछ पर ५-१० सँ बेशी छता लगबैत छैक। ईहो उपर मौध आ निचला खोइमे अंडा बच्चा राखैत अछि। ई बड़का अकारक जंगली मौधमाछी पौसल नहिँ जा सकैछ। एक छतामे ५-१० किग्रा०मौध भेटैत छैक। ई खिहारिके पानिमे डुबिके बिन्हैत छैक। कदाचित खोता जगायल वा चरचाँचर राहमे अकस्मात मौधमाछी घेरय तँ दूनू हाथ सँ मुँह चेहरा झांपैत पटगरे परि रहु आ दम साधिके कनेक काल शांस रोकबाक चेष्टा कयलापर ओ सब आपस घुमि जाइछ। करोरी लोक दिनमे भजियबैत अन्हार भेलासन्ता नीचा प्लाष्टी बिछबैत बाँसमे लुका लगाकय धधरा देखबैत कमल ओढि नर्सरिया लगाकय मौध जुबताए केँ निकालैत छैक। निचा खसल मौधक दुरुपयोग सेहो रोकल जाइय। मोट भाग निचा सँ अंडा बच्चा आ सटले उपरका पातर भागमे मौध रखै य। (३) एपिस सेरेना इंडिका-: ई भारतीय मौधमाछी अन्हारमे रहैछ। ७० केर दशकमे खादी बोर्ड एहिक पालन लेल जद्दोजहद कयल।एक बक्सा सँ साल में ५ किग्रा०शहद प्राप्ति होइत रहैक।८० के दशक धरि रुग्न ,अंडा-लार्वा सुखैत खत्म भऽ गैलैक। (४) एपिस मेलीफेरा-:ई ईटालियन/. योरोपियन पोसुआ प्रजाति मौधमाछी सहज रुपेँ पालन कयल जाइछ। १९२० ई०मेँ भेल योरोपीयन इटालियन जे ६० के दशकमे एतय भारतीय मौसम विज्ञान मोताबिक आरम्भ भेलैक।३ किमी०परिधिमे ई श्रमिक मौधमाछी किसानक जजातके लाभ पहुँचाबैत छैक। अपना बक्सामे रहैत अधिक मौध उत्पादन करैत अछि। एक सँ अधिक छता ८ फ्रेम एक बक्सामे मौधमाछी पोसल जाईछ। एक बक्सा सँ२०किग्रा०मौध ठोसवजन प्राप्त होइछ। ५ बाक्स सँ शुरह करैत सालभरिमे १५ बक्सा धरिबृध्दि हेबाक संभवत: १५ क्वि०मौध स्टाक कयल जा सकैछ। अपन व्राण्डेड औरगेनीक मौध बिक्री १५०/-आ कोम्बशहद २५०/-तथा प्रसंस्करणहनी ५००/-टाका किलो दवाइ लेल किनैत छैक।मोम सँ सेहो आमदनी मधुमक्खी पालन केनहार किसान लैत छथि। चारि तरहक आय आरो प्राप्त होइछ,जकर प्रशिक्षण राजगीर मेँ इडो-जर्मन तकनीक अपनबैत देल गेल। अलग सँ फेर पाठ देब। जनतब रहला सँ पंचायत स्तरीय प्रशिक्षण लेबा मेँ अभिरुचि सर्वाधिक रुपै बढ़त। किसान जागरूक होथि। मानव हितैषी कीटके मुख्य भोजन मौधमाछी किसानक फसिल पैदावार 3किमी0परिधिमे बढ़ेबाक लेल मदैतगार सिध्द भेल छैक। पालतू मौधमाछी अपन बसेरा लग सँ दहोदिश उड़ि पराग आ मौध एकत्र करय लेल सब जजात आ फल-फूल गाछ पर पहुँचैत अछि। अपवाद मेँ आमक मोजर पर ओ नँय जाइत छैक।तकर कारण ओतय पहिले सँ ओकर वैरीन बिडनी भोमरा आ मधुआ कीट अड्डा जमौने रहैत छैक। मौधमाछी केँ मनपसिन्न भोजन हरेक मासमे अलग-अलग उपलव्ध रहैछ। केरा आ केरवी फुल सालोभरि कोसा लटकल रहला सँ प्रर्याप्त रुप सँ भोजन भेटैत छैक। जनवरी माह मेँ-: सरिसब फुल , खेसारी फूल, चिकना फुल,तरकारिक फूल आ आनो तरहक मौसमीफुल सँ रस लैत य। फ़रवरी-: आन फसिलके अतिरिक्त सहजन मुनगा मकई बरसीम सँ प्राप्त होईछ। मार्च मास-: लिचीमोज्जर ,जम,धात्रिंग,सीमर,जवाईन,मंगरैल सूर्यमुखी आ नेबो। अप्रील- : खेरही(मुंग), तील जंगली घास इत्यादि सँ। मई -: कठजमुनी,तार,जनेर आदि। जून -: घुरमी ज्वार उपरोक्त।१५जूनक बाद अखार,साउन भादो मासमे कठिनाई रहैछ,तेँ चाराउर लेल चिनीक घोल(चासनी)दैत तीन मास विशेष देखभाल करैय पड़ैत छैक।ठंडी मौसममे सुर्यक रोशनी में बक्सा बाहर राखल जाइछ।शेष समय मेँ बाक्सा उपर चाही वा छप्पर द'केँ सुरक्षित कयल जाइछ।आसिन मासमे मौधमाछीक विकास होइत,मौधक आमदनी शुरू होइछ।चारामे चीरचिरि,बैरक मोजर सँ भोजनक स्रोत खुब प्रचुर मात्रा मेँ रहैछ।अलग -अलग तरहक फलक स्वादमे गैहिकी मौध किनय चाहैछ।एकटा नामी बनियाँ सँ मौध किनकय तकर जाँच लेवोटरीमे ट्रायल कयल गेल तँ ओहिमे शुद्ध शहद नहिँ पाउल गेल .......। मिलावट सँ सावधान रहबाक चाही। मौधमाछी पालन में प्रयुक्त उपकरण-: एक सर्वेक्षण अनुसारे पृथ्वी सँ जौं मौधमाछी उपैट जाए तँ मनुखक उम्र सिरिफ चारि साल बचल रहत।मानव शिशुकेँ सर्वप्रथम मौध आ बकरीक दुध चटायल जाइछ। ऐ औषधीय गुण बाला मधुमक्खी'क आधुनिक व्यवसायिक पालनमके निमित्त ई उपकरण ओरियेने रहबाक होयत-: १-मधुमाछी बक्सा २-मौधमाछी परीवार-८फ्रेम मौधमाछी। ३-नकाव-मुँह लग जालीदार टोपी सहित। ४-हाइभटूल-बक्सा ओजार ५-मौध निष्कासन यन्त्र । ६-२२नं०तार ७-आधार छत्ता ८-कोमल ब्रूश ९-छत्ता छिलन छुरी-चक्कू १०- मच्छरदानी।११-मौधक छत्ता राखबाक ट्रे १२- मौन संग्रह बालटीन(स्टील वा निशा) ताम , एल्यूमीनियम आ लोहखंडी वर्तनमे प्रतिक्रिया होइछ। १३- अतिरिक्त उपकरण-: क-पराग संग्रह यन्त्र-पोलेन ट्रेप ख-परपोलीस संग्रह फूड ग्रेड जारी ग-रायल जेली संग्रह यन्त्र घ-मौधमाछी डंकविष निष्कासन यन्त्र च-चीनीघोल ३माहधरि खुयेबाक बासन। छ-मौध खुदरामे बेचबाक सब साइजक डिब्बा।आरो किछ ओजारक काज पैड़ सकैछ। १००ग्राम मौधमे ५०हजार परगकन रहैछ।मौध सँ दुगुना भाव परागक छैक,एहि सँ आयु बढेबामे सहायक होइछ। मोम दैत उपर सँ मुइन दइ छ। 21 दिन धरि मुनलहा छत्तामे सँ बच्चा बहराइत अछि। 2280 सें.ग्रे. तापमान पर एकर जीवन चक्र चले छइ । छत्तामे तीन तरहक बच्चा जनमै छइ । नर मझोला साइजक होइछ जे तीन दिन अंडाकालमे रहि 14 दिन अगिला समय लार्वा कहबैत अछि। 6सप्ताह सँ तीन मास धरि ओ बैसके जीवन खेपैत अछि । श्रमिक अधिक संख्यामे रहेछ जे जनमकालसँ 3 दिनधरि अंडाकालमे रहेछ आ 7 सँ 14 दिन धरि प्युपाकाल मे रहेछ । रानीक पांखि छोट होइछ ओ सभसँ नम्हर देखाइछ । इहो 3 दिन अंडाकालमे आ 3 सँ 5 दिन धरि लार्वा तथा 8 सँ 16 दिन धरि प्यूपा बनल रहेछ। रानीक अधिकतम उमेर 2 सालसँ 4 साल होइछ । नर मात्रे भोजन करैत आ रानीकें गर्ववती बनबैत अपने खत्म भऽ जाइछ । रस प्राग जो रानी बचपनमे का लेत तँ बाँझ भऽ जाएत। रानी अजस्त्र अंडा दैत कहियो सुतैतनय छ । रानीमे विशेष तरहक गन्ध रहेछ, तँ नर सभ आक्रमण कय रानीके मारि दइ छ । रानी तैयार करैक लेल ओकर विशेष पिंजरा सँ सुरक्षा कएल जाइत अछि। रानी तैयार करनाई निहायत जरूरी रहेछ । एक रानी सँ दोसर रानीक गन्ध वंशानुक्रम आधार पर पृथक होइत अछि। जवान रानी पर 5-10 नर विहार करबाक उद्देश्य सँ टुटि पड़ैछ, परंच अकाश बियाह एके नर सँ होइछ आ रानीके अंडा देवा योग्य बना स्वंय ओ टुटिके गीरैत मरि जाइछ ।

श्रमिक मौधमाछी सभ काज स्वंय बालपन सँ करैत अबैत अछि । जेनाकि 1-3 दिनक उमेरमे छताक सफाय करैत य 14-7 दिनबच्चा लावकि भोजन कराबै छइ । 8-16 दिन धरि तीन दिन तक बच्चाके रायलजली आ रानीके आजीवन रायल जेली खियाबै छइ । 17-20 दिनतक मोम पैदा करै छन् । पाकल मोधर्के सील करैत, नयका छता सेहो बनबय लगैत अछि। टुटल छता के दुरुस्त करै छइ । 21 म् दिन घर चिन्हय खातीर पहिले उड़ान करैत अछि। खोता (लकड़ी बक्सा) रसे-रसे चिन्ह लेलाक बाद लगक पराग रस एकत्र करयमे लागि जाइत अछि । जेना जेना ओकर आयु बढैत जाइछ, ओ 3 कि.मी. क्षेत्र चारूभर सँ पराग रस आनैत अछि। उमेरदराज श्रमिक मौधमाछी खोजी दल बनि सांकेतिक भाषामे सबके बतबैत छैक जे कतेक दुर, कोन दिशामे भोजन स्रोत उपलब्ध अछि । 10-16 दिनक अवस्थामे मोधमाडीके विष के स्राव होईछ, तेकर बाद स्रोत सुखि जाइछ। पोसुआ मौधमाछी सँ जे अनेक फायदा होईछ, तहीमे सभसँ वेसी मुल्यवान डंक विष थीक। एक बक्सा सँ साल भरिमे 3.6 ग्रा. भेटैछ जे स्वर्णभाव के समान बिकै छइ । ओना साधारणतः पालक मौध 150 आ कोम्ब शहद 250 सँ 500 टाका किग्रा. दर सँ उत्पादन संगहि मोम आ मोम मिठाय पबैत छैथ। इंडो जर्मन विधि आ उपकरण सँ किसानक हीत उन्नत हुअ जा रहल अछि । बिहार राज्य केर 38 जिलामे 5-5 टा प्रशिक्षण दाता तैयार भेल जे एहि बारेमे विस्तार सँ हर पंचायतमे जागरूकता बढ़ाएत। मौधक मिठास सभ परिवार क पहुँचाएब, रोगमुक्त बनाएब हमर अभिष्ट भविष्यमे रहत। ६ रंगपुरमे जगूक परियास : एक विश्लेषण मैथिली सँ हिन्दीमे सुप्रसिद्ध साहित्यकार गजेन्द्र ठाकुर जीक पोथी" जगदीश प्रसाद मंडल एक वायोग्राफी आ साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत मैथिली उपन्यास"पंगू" जाहिक रचनाकार जगदीश प्रसाद मंडल जीक पोथीके प्रकाशित करबामे आगू एलाह श्री रामेश्वर बाबू। हिनक पहिचान कवि -कथाकार रूपेँ भेल छन्हि। बसुआरी हाईस्कूल सँ सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक, अनुवादक ओ साहित्य सेवी श्री रामेश्वर प्रसाद मंडल विरचित 'बगवार' उपन्यासिक प्रवंध काव्यमे एक दुर्गम गाम ' रंगपुर ' केर विशेष चर्चा कयल गेल छैक। मिथिलांचल'क ग्रामीण जीवन बदलैत परिवेशक चित्रण अतिशय सुन्दर रुपेँ भेल अछि। अपन गामक प्रति जगूजी एक साधारण लोक रहैत कर्मशील छथि। वर्णित काव्यके मुख्य पात्र जगूक आरम्भिक जीवन भीतघरमे माय- बाबूक एकेदिन मृत्युसँ कष्टप्रद बुझाइछ तँ दू बेटाके एकेहि मरबा पर वियाह सँ प्रशन्नता भरल छै। ऐ मैथिली पोथीमे पहिल पाठ सँ अंतिम पाठधरि जगूक पारिवारिक हलातक' उतार - चढ़ाव केर जीवंत कथ्य परोसल गेल छै। जेठ बेटा आ फेर एक बेटी जन्मक बाद हुनकर पत्नीक पैर भआरईभएल रहय। रामेश्वर प्रसाद जी काव्यके पाँतिमे शव्द चयन देखल जाए-: रोशनी देलैन जौंआ बच्चा झूट नइ हम बजे छी सच्चा लोक कहलक ई की भेल? भगवान'क ई अजगूत खेल बाल- बच्चा चेष्टगर - छँटगर भेलासन्ता तकर नीक परवरिशक संग उत्तम शिक्षा दियाबैत अपने स्वंय चुरी कारखाना - गुलाठीमे कार्यरत रहैछ। तत्कालीन पिछरल समाजमे बालक शिक्षा तँ रहय मुदा बालिका शिक्षा'क घोर अभाव रहैक । यथा-: बेटाक लेल किताब कलम खरीदै छी बेटीक हाथमे किएक छिटा-खुरपी धरबै छी बेटा शिक्षा केँ दीप जरबै छी बेटी शिक्षा केँ किए दीप मुझबै छी? समय चक्र एहन घुमैत छै जे अपन सुपरवाइजरी नोकरी आ पुत्र वेदप्रकाश,देव आ निलेशक नौकरी धरि छुईट जाई छै। बेटी चंदाक वियाह शिक्षित वर सँ समय सँ कराओल जाई छै,मुदा धियापुता नहिं समय पर होई छैन। जीविका लेल माछ पालन जे करैत य , तँ गामेक लोक रातिकेँ चोरी कऽ लैत छै। पंच लोकनि महा घुसखोर छै, उचित निराकरण नहिं होई छैन। संगी रघु मंडल अपने लक्ष्मीपात्र रहैत हिनको धन अरजैक सलाह दैत रहनि। ओ संतान केँ अक्षरबोध नहिँ करेने ' बुढ़ारीमे बेटा पूतौह धरि वृद्धाश्रम मेँ पहुँचेने रहैन। ताहि प्रसंग मित्र दूनू प्राणी केँ जगू गाम आनैत य। पता इहो चलैत छैक कका फुसनी मरड़क बेटा निशेवाज भ' वेश्या सँ वियाह कऽ लेने छै। पत्थलतोर मेहनतके बले जगू तरकारी खेती फल - फलहरी सँ नीक अर्जन कयल। समाजमे अभावमंद लोकके सदैत मदैत पहुंचेवामे पाछु नहिँ रहैत , कनिकबेटामे लोटनके पढ़यमे सहयोग केने रहथि। से लोटन दारोगा बनि गेल छै आ चुरी कारखाना लग बोराक छली लगाबैत जगूक बेहोशी समय अकस्मात् आबि टेम्पूपर लाधैत होस्पिटल मेँ अपन रक्त दैत जियाबैत देखल गेलैक हन्। आरो मानवताक परिचय दैत कर्जा सेहो उतारि मन हलुक कऽ देतैन। अपने गाम आबि जहन ओ बेटा पूतौह सब सँ उपेक्षित होइत अछि, तँ हुबा करैत साग - सब्जी 'क बागबानी आ बानकि करैत सुदृढ़ होईत गेल छै। सतनाकेँ महाजन रंगलाल पाँच हजार टाका देलकैक मुदा तगेदा एक लाख टाकाके कयलापर पँचैतीमे जगूक कथनके कियो पँच मोजर नहिँ कएलक। सतनाके टाका दैत महाजनक चपेट सँ हटेलक। गाममे अपना नामे मध्य विद्यालय खोलैत साक्षरता बढेबामे आगू रहला। जगूक पत्नी रोशनी बेराम पड़ैत छथिन से अबतब स्थिति बनैत छै। बीडीओ बेटा नीलेश मात्रे पाँच लाख टाका ओरियाउन केलक शेष आठ लाख ले अपन मकान बन्हकि धरि राखि समुचित इलाज कराबैत छै। निराश परिस्थितिमे चुरी कारखाना सँ एक चिट्ठी अबैत छै, जाहि लेल कागत पत्तर तैयार कय दूनू दम्पति गुलाठी नगर पहुँच ,ओतय बढल पेंशन मद केर सोलह लाख टाका पाबैत अछि। गाम अयलापर विमुख भेल बेटा पूतौह सब सँ सौहार्द निश्तुकी होई छैन। मायक अन्दरुनी ममताके जगू जगाबैत देखेलाह अछि। गाममे अपना आ पत्नीके नामे होस्पिटल बनेलाह। बेटी ताहि होस्पिटल सँ स्वास्थ्य लाभ पाबि गर्भवती होई छथिन। बिहार क' प्रसिद्ध छैठ पाबैनिक आराधना समय घाटपर एक १८ वर्षीय मयटुअर- बपटुअर खटरी नामक छौरी अचेत भऽ खसि पड़ैत छै,दाँती लगैत छै। तकरा होस्पिटल आनल जाईछ,नीलेश रक्तदान दैत जीवनदान दैत छै।ओकरे सँ विवाह सेहो आदर्श पूर्वक होईछ। दूनू प्राणी सपरिवार विचार करैत एक धर्मशाला बनाय ओहिमे सदाव्रत बाँटैक काज शुरू कयल। दुरौसक प्रचार सुनि कतेको निर्धन, भिखारी,बाबाजीक आबाजाही हुअय लगलैक। एक एगारह बरखक छौड़ाके पाँतिमे ठाढ़ गरदैने पर लालमस्सा देखि चिन्ह् गेल से ओ रहय हिरबाक बेटा, जे नेना मेँ हेरा गेल छलैक। पछुआयल वंचित समाजक काव्य धारा केँ रसीकजन दाहातर्ज, श्रवण कुमार तर्ज आ राधेश्याम तर्ज पर गाबि शिक्षा जागरूकता कऽ सकैछ। रामेश्वर बाबू द्वारा मनो विश्लेषणात्मक द्वन्दके यथासंभव संयम विवेक ओ ओचित्यक प्रतिरक्षण कयल गेल हन्। ऐ तरहक सजगता हम गूलोमे सेहो सुभाष चन्द्र यादव जीक उपन्यासमे पेयलहुँ अछि। किसान जीवनक महागाथा रचबाक परम्परा उड़िया भाषाक कथाकार फकीर मोहन सेनापतिक " छमाड़ आठ गुंडे" (१८८७ ई०) सँ शूरू होईछ। प्रेम चंद के गोदान,ललितक पृथ्वीपुत्र आ यात्री जीक बलचनमा ओ पारो उपन्यासमे सेहो किसान - मजदूरक संघर्ष सामंती व्यवस्था केर विरूद्ध भेल अछि। एहि तरहेँ कहल जा सकैछ अपने परिवार समान सम्पूर्ण गाम- समाजकेँ एक परिवार मानैत जगू सफल बागवार (रखबार) बनि गेल छैथ। ऐ तरहक वास्तविक गाम सरौती,टिकापट्टी मेँ कयल गेल अवदानक सहेजें मोन पड़ि जाईछ। पल्लवी प्रकाशन निर्मली सँ सद्यप्रकाशित एहि मैथिली साहित्य पोथीक दाम ३५० टाका आ कुल पृष्ठ सँ.१०७ छैक,जे पाठकके पढैक प्रति विशेष अभिरुचि जगाबैत य। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.४.लालदेव कामत-आर्थिक विपन्नता/ मुंस'क दान लालदेव कामत- आर्थिक विपन्नता/ मुंस'क दान १ आर्थिक विपन्नता विश्व भरिक नजैर छई भारत पर। बेपारिक दृष्टिये प्रतिस्पर्धा मेँ आगू बढ़ि जेबाक धेह छै। भारतवासी पैघ लोकक नजैर छैन दलित - पिछरल समाज पर। भारत आ नेपाल बोडर केर जोगबनी बजारमे एकटा धार्मिक उजैहिसन नव पूजा पद्धति'क केने रहय। प्रचार सुनि अपन योगदान उपस्थिति सँ बनाबैत पछुआयल समाजक लोकके जूलूसमे सजि वट सावित्री व्रत पूजन महोत्सव देखै ले अपन काज सँ छुटिमारि ललमुंही सपरिवार अयलीह। आब वैश्य आ सवर्ण 'क देखौंश अति पिछड़लो समाजक लोक करैत य। नव परिधानमे पुरूष तँ कम्मे, वेसी स्त्रीवर्ग मेलामे चीज बौस्त बेसाहिके चढ़ाबैत आ खोंईछ सेहो भरैक अभिक्रममे लागल छलैक। जोगारमे साढ़े तीन सय टाका ललमुंही केँ एक रोजक मजुरी भेटैत छै। ओकर साँए हेड मिस्तरीमे नीत रोज साढ़े पाँचसय आ देओरके देहारी नवसिखुआ रहने पौने चारिसय टका कमबैत य। आई ऐ तरहेँ पच्चीस लाख टाका बोईन मारल गेल सबकियो केँ। एहेन - एहेन नव- पुरान बहुतो चलनसारि डेबैत पूर्वजक बतौल जुईत पर आधुनिको जुगमे कठिणता सँ जीवन जीयैत निठाहे पछुआयल रहै य। तैपर सँ पंडा पुजारी धाइम आबिके घर-घरमे डीह डायनक जादू -टोना सँ बँचबाक खगौट बुझाबैत जन्तर तबीजी नगदमे बेचि जाइछ। अनपढ़ आ कम साक्षर जनिजाइत अपना घरमे पढलो लिखल पुरूष सँ नुकाके टाका धरि बोहाबैत गरीबी खुदे आनैछ। तेँ आर्थिक विपन्नता पछारबे ने करत! २ मुंस'क दान एक परम गरीब रहैक- महिया। ओ सब दिन माँगि - चाँगिके खाई। भीखमंगनी करैत ओ जीवन निर्वाह करयमे लागल रहय। एकदिन भुखल - दुखल बिलास सेठक दोकान लग ठाढ़ भऽ हाथ पसालक। सेठजी अपन जेठ बेटाकेँ बेचि, तै टाका सँ वस्त्रक कारोबार बजारमे कएने रहथि। से मुंस हुनका वस्त्रालयमे रातिके उपद्रव मचाबैक। ओ मुसकारीमे जीबैत नरमुस बझेने छलाह। से बेपारमे घटा-नफाक गुनधुन करैत जूटक गजियामे मुंसकांरी उझैल धरि मुंसबाक गरदैने धेलनि। ताहि असैरमे महिया पाई भीखमे माँगबाक याचना कयल। बिलासजी निष्ठुर भऽ मुंसकेँ ओकरा दिश जुमाकय फेकैत कहलनि - लेह! लपकिकेँ मुंस धरि लेलक आर्त महिया आ ओतय सँ पराएल चलि देलक। बाटमे एकटा बिलारि पोसय बाला शखगर श्रीमंत लोक देखायल। ओ मुंसक किछ ढौआ दैत किन लेलक आ बिलौटाके ओगारि देलक। ताहि कैंचा सँ महिया अपन जठराग्नि शांत नँय कऽ खुदरा बेपार आरंभ केलक। ३० शालमे ओ सुदृढ़ होईत पैघ बेपारी बनि गेलैक। धन सम्पत्ति सँ एतेक ने सुव्यवस्थित भेलाह जे मिथिला देशक सबसँ धनिक लोकमे जानल पहचानल गेला। आब महिया जीके आत्मज्ञान रातुक निनियां उड़ा देने छलैक। से उदग्नितामे ओ पुजी कोन तरहेँ घुमाएत! लगधक १५ लाखमे २४ करेटक सोनाक मुंस कीनकेँ उपहार रूपेँ बिलास जीके भेंट कयलनि। विलास जीक शेष चारू बेटा एहन उदार हृदयके व्यक्ति केँ अचरज दृष्टिये एकटक निहांरैत रहि गेल। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.५.निर्मला कर्ण- अग्नि शिखा (खेप-२५) निर्मला कर्ण (१९६०- ), शिक्षा - एम. ए., नैहर- खराजपुर, दरभङ्गा, सासुर- गोढ़ियारी (बलहा), वर्त्तमान निवास- राँची, झारखण्ड। झारखंड सरकार महिला एवं बाल विकास सामाजिक सुरक्षा विभागमे बाल विकास परियोजना पदाधिकारी पदसँ सेवानिवृत्ति उपरान्त स्वतंत्र लेखन। अग्नि शिखा (भाग- २५) (मूल हिन्दी- स्वर्गीय जितेन्द्र कुमार कर्ण, मैथिली अनुवाद- निर्मला कर्ण) कथा अखन धरि: उर्वशी विवाह सँ पहिने दू टा शर्त राजा पुरूरवा के सोझाँ रखैत छथि,जकरा ओ राजा केँ आजीवन पालन करबाक प्रतिबद्धता दैत छथि,जाहि दिन राजा एकोटा शर्त केँ पूरा करबा मे असफल रहताह, उर्वशी ओही समय मे वापस स्वर्ग चलि जेतीह,राजा पुरूरवा स्वीकार करैत छथि दुनू शर्त !

आब आगू: आइ गंधर्व रीति के अनुसार राजा पुरूरवा आ उर्वशी के विवाह संस्कार सम्पन्न भs गेल छल,एहि विवाह के अवसर पर एकटा विशाल समारोह के आयोजन भs रहल छल। भूमंडल के सब राजा के आमंत्रित कयल गेल छल। एहि में कुल गुरु वशिष्ठ के महत्वपूर्ण भूमिका छलनि। किएक तs राजा पुरूरवा आ उर्वशी के विवाह संस्कार हुनके द्वारा सम्पन्न कराओल गेल छल,ताहि कारण सबसँs पहिने ओ वर-वधू केँ आशीर्वाद देने छलाह। तकर बाद प्रख्यात ऋषि लोकनि दंपति केँ आशीर्वाद देमय लगलाह। एकर पश्चात आमंत्रित राजा गण एवं गणमान्य अतिथि गण राजा पुरूरवा आ उर्वशी के विभिन्न उपहार दैत अपन शुभकामना व्यक्त केलनि । प्रजा जन में प्रसन्नताक लहर व्याप्त भेल छल। भला ओ सभ प्रसन्न किएक नहि होइतथि! स्वर्ग के श्रेष्ठ अप्सरा उर्वशी स्वेच्छा सँs राजा सs विवाह के आग्रह करय लेल पृथ्वी पर आबि गेलीह। भला एहि सुअवसर के राजा किएक नहि स्वीकार करितथि ! ओ किएक ठोकरबितथि उर्वशी के प्रणय निवेदन!राजा एकरा किएक नकारितथि ? ओनहुना सौंदर्यमयी अप्सरा के प्रणय निवेदन के ठोकर मारला सs राजा पाप के भागी बनितथि! ताहि कारण राजा हुनक प्रणय निवेदन स्वीकार केलथि।हुनकर जोड़ी दुनिया मे अद्वितीय अछि।ई समाचार कर्ण-स्रोत सँs भूमंडल पर चारू दिशा मे पसरि गेल। जे सभ सुनथि ओ पहिने आश्चर्यचकित भs जाथि फेर प्रसन्नता व्याप्त भs जान्हि हुनका सबहक मुखमण्डल पर। राजा पुरूरवा आ उर्वशी दुनूक जोड़ी दुनिया मे अद्वितीय अछि। आइ धरि कहियो एहन नहि भेल छल,जे अप्सरा स्वयं भूपति दिस आकर्षित भेल हेतीह। संभवतः भविष्य में कहियो फेर एहन संजोग पुनः नहि होयत - ई सबहक विचार छल!आइ पृथ्वीक सोझाँ झुकि स्वर्ग प्रणाम करैत अछि - ई प्रत्यक्षतः स्वर्ग पर पृथ्वीक विजयक प्रमाण छल। जतेक लोक ततेक तरहक बात सुनबा में अबैत छल । सबहक अपन-अपन बुद्धि अनुसार अपन-अपन विचार छल। मुदा एहि विवाह सँs प्रसन्न सभ केओ छालाह। की राज कर्मचारी,की प्रजा जन, ऋषि मुनि,विद्वत जन अथवा अन्य राजा गण सब क्यो अत्यंत प्रसन्न भय पुरूरवा आ उर्वशी दुनूक जोड़ी के दुनिया मे अद्वितीय कहि रहल छलथि । पुरूरवा केँ घमंड तs कनिको छूबियो नहि गेल छलनि।पहिने जकाँ छोट-पैघ सबहक प्रति सामान्य व्यवहार छलनि,स्वयं उठि कs अभ्यर्थना कs सबहक स्वागत केलथि ।एहि अवसर पर नव वस्त्र, सोना, चानी,रत्न आ हीरा आ अनेको बहुमूल्य रत्न अभ्यागत संग प्रजाजन के मध्य उपहार स्वरूप वितरित कएल गेल छल। ई सभ सामग्री बहुमूल्य रत्न, वस्त्र, अन्न उपहार मे बाँटल जाइत छल,कारण हुनका लोकनिक राज्य मे केओ निर्धन वर्ग के नहि छल जकरा दान देल जाइत। जे सब एकरा प्राप्त करैत छल,ओ एहि सभ वस्तु के राजाक प्रति प्रेमक कारणेँ उपहार मानैत,मात्र श्रद्धा सँs स्वीकार करैत छल। राजा के द्वारा ऋषि लोकनि केँ दान देल गेल,हुनक अपन गुरुकुल आ आश्रमक संचालन हेतु । सजल विवाह मण्डप एखनहुँ राजाक विवाह समारोहक भव्यता आ राज्यक समृद्धि गाथाक बखान कs रहल छल। ऐश्वर्य आ वैभवक यश पताका एखनहुँ बहुमूल्य रत्न हीरा आ सोनाक बनल अद्भुत विवाह मण्डप के रूप मे फड़फड़ाइत छल। वैभवशाली राज्य के राज कोष विशाल सागर समान छल,जाहि सँs एक लोटा जल निकालल जाए लखन भला ओहि सागर के जल में कोन कमी होयत? यैह कारण छल जे राज्यक कोष सँ कतेक धन-रत्न दान कयल गेल छल,तइयो समुद्रसँ निकालल गेल पानिक एक लोटा सन भरल रहल - ओ कोष ।राज्य उत्सवक भव्य आयोजनमे आम लोकक प्रवेश सेहो निश्चित छल । सब प्रजाजन सम्मिलित भेल छलथि एहि समारोह में । देश देशांतर के राजा-राजकुमार आ सामंतक अतिरिक्त राज्य के सामान्य जनता लोकनि अपन राजा के विवाह संस्कार के अवसर पर भरपूर मनोरंजन प्राप्त कयलन्हि । ई विवाहोत्सव पंद्रह दिन तक चलैत रहल। एकर पश्चात आमंत्रित लोक सब एक-एक कs विदा होमय लगलाह।पंद्रह दिन के बाद सब पाहुन चलि गेलाह। विदा काल में सब पाहुन के धन्यवाद दैत राजा पुरूरवा के तरफ सs विदाई देल गेल। सब कियो प्रसन्न छल,सम्राट पुरूरवा के प्रति ककरो कोनो दुर्भावना नहि छल, सब कियो सम्राट पुरूरवा आ उर्वशी के हृदय सs आशीर्वाद दs कs विदा भs गेल छलाह। आम जनता सs लs कs राज्य अतिथि तक सब राजा के देल गेल सम्मान स गदगद भs गेल छलाह ।

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सौभाग्य-शय्या!आ सेहो सम्राट पुरूरवा के! एकर सजावट के वर्णन करब कठिन काज अछि! विवाह भवन के निर्माण के संग-संग सौभाग्य कक्ष के निर्माण आ सजाबय के कर्तव्य-भार स्वयं विश्वकर्मा के द्वारा लेल गेल।कक्ष के निर्माण के काज ओ स्वयं अपनहि समक्ष पूरा करौलनि । अतः एहि मे कोनो तरहक त्रुटि रहबाक कोनो संभावना नहि छल।कक्ष के फर्श पर रंग-बिरंगक फूल एहन सजाओल गेल छल जेकर तुलना असंभव अछि। ओहि मे रति आ मदन केर विभिन्न मुद्रा में चित्रित कएल गेल छल।विशाल विस्तृत पर्यंक के अपना में एक आओर बेसी अद्वितीय विशिष्ट छल सौन्दर्य।एकर आधार आ सतह पर अलग-अलग मुद्रा मे कामदेव आ रति के सजीव चित्रण कएल गेल छल। लागैत छल जेना ओ विशेष सौभाग्य-कक्ष रति-पति कामदेव के छल। रति-कामदेव के चित्र ओहि संपूर्ण कक्ष में विभिन्न मुद्रा में चित्रित कएलगेल छल। कक्ष के देबाल पर पर्यंत विभिन्न मुद्रा में रति-कामदेव चित्रित छलाह। कक्ष के फर्श पर छल अद्वितीय पुष्प, बहुमूल्य रंग-बिरंगक मोती,माणिक आ कतेको रंग सs रंगल स्वर्ण जड़ल कालीन! ओहि कक्ष मे पुरूरवा आ उर्वशी के सौभाग्य-शय्या एतेक नीक जकाँ सुसज्जित आ एहेन बहुमूल्य छल जेकर सामान्य जन कल्पना तक नहि कs सकैत छल।एहेन सौभाग्य-कक्ष सम्भवत:इन्द्र केँ सेहो नहि भेटि सकल होयतन्हि । मुदा आब एखनि ओहि कक्ष मे कियो नहि छल।एतेक बहुमूल्य रूप सँs सजाओल कक्ष एखनो एकदम रिक्त छल।राजा पुरूरवा हृदय मे अनगिनत असंख्य स्वप्न लs कs ओहि कक्ष मे प्रवेश केलनि,मुदा शून्य सौभाग्य-शय्या केँ देखि ओ आश्चर्यचकित भs गेलाह,तीव्र गति सँs ओ दोसर कक्ष मे प्रवेश केलनि जे ओहि कक्ष सs संलग्ण छल । मुदा आश्चर्य!ओतहु उर्वशी नहि छलीह ! केहन सौभाग्य-रात्रि अछि!जाहि मे वधु अनुपस्थित छथि! राजा पुरूरवा सोचलथि!क्रोध मिश्रित आश्चर्यक रेखा हुनकर मुखमंडल पर स्पष्ट रूप सs परिलक्षित भs रहल छलनि ।दुःखी हृदय सs राजा लगहि मे राखल स्वर्ण आसन पर बैसि गेलाह।एकहि क्षण मे हुनक सभटा सुख-स्वप्न पर वज्रपात भs गेलनि।पर्यंक पर सँs एक-एकटा पुष्प उठा कs ओ हस्त कमल सँs रगड़य लगलाह। वह पुष्प सभ के मसलि मसलि कs नष्ट करय लगलाह। ओ अत्यंत खिन्न हृदय भs गेल छलाह। कियो एक जन छल जे राजाक एहि अवस्था सँs हर्षित भs रहल छल। ओ छलीह उर्वशी!मुदा राजा के एकर लेश मात्र ज्ञान नहि भेल छलनि। ओ उर्वशी के नहि पाईब एकदम असहज अत्यंत दु:खी भेल छलाह । हठात् मधुर हँसी वातावरण मे गुंजायमान भs गेल।अधीर भs कs राजाक मुँख सँs आवाज निकलल,जे वास्तव मे हुनक हृदयक आह्वान छलैन्ह - "हे उर्वशी प्रियतमे! अहाँ कत' छी! आहाँ हमरा समक्ष प्रगट होउ!आऊ!शीघ्रता करू ! आब हमर धैर्यक एतेक परीक्षण जूनि करू।" क्षण भरि मे झरना सँs बहैत जल श्रोत जकाँ इजोतक फव्वारा ओहि कक्ष मे झमकि गेल।ओहि प्रकाश सँs पूरा कक्ष प्रकाशित भs गेल।पुनः ओ तीव्र प्रकाश फर्श पर एकटा निश्चित घेरा मे सीमित भs गेल छल । क्षण भर में ओ तीव्र प्रकाश एक अद्भुत सौंदर्य मयी युवती के रूप में परिवर्तित भs गेल!ओह उर्वशी! उर्वशी के केहन अद्भुत रूप छलैक! ओना तs ओ स्वयं साक्षात् अद्भुत सौन्दर्यक देवी छलीह।ब्रह्मा सेहो हुनका बराबर सौन्दर्यक सृजन करबा मे असमर्थ छलाह । मुदा एखनि विवाह परिधान में सुसज्जित नव कनिया के रूप में उर्वशी के सौंदर्य के वर्णन अत्यंत कठिन छल ! रक्त वर्ण के जगमग करैत रेशमी कञ्चुकी धारण कएल,अनमोल सौंदर्य प्रसाधन सँs सुसज्जित आ अमूल्य आभूषण सँ अलंकृत उर्वशीक रूप लावन्य पुरूरवा के रोम-रोम केँ हर्ष सँ भरि देलक। विवाह परिधान में सुसज्जित उर्वशी के दिव्य सौंदर्य सँs प्रभावित विमुग्ध राजा के हृदय काम-संतप्त भs गेल।हुनकर संपूर्ण शरीर में एकगोट मधुर सन मद भरि गेलनि। ओ काम संतप्त भs गेलाह,मद भरल सिहरन सँ हुनक देहसंग आत्मा तक भरि गेल छलैनि । कामोंत्तेजना सँs हुनक अधर काँपि उठल,मुखमंडल पर पसीनाक मोती चमकि गेलनि । राजा मयपान कएल धुत्त आदमी जकाँ उन्मत्त भs गेलथि । काम क्रीड़ा के लेल ओ व्यग्र भs गेल छलाह। ओ उर्वशीक आँखि मे ध्यान सँ देखलथि । हिरणी सन चंचल पैघ झील सन आँखि सँs उर्वशी अपलक हुनके देखि रहल छलथि।बूझि पड़लन्हि जेना पैघ झील में पुरूरवाक संपूर्ण शरीर आत्मा सहित डूबि गेल छल। किछु क्षणक बाद उर्वशीक मधुर स्वर लहरी कक्ष में गूँजि उठल - "धैर्य राखू प्रिय। एतेक अधीर जूनि होउ "। "कियैक,अहाँ हमरा किएक यातना देबय चाहैत छी प्रिये ?" राजाक प्रेम-विह्वलता हुनक विचलित स्वर सँs स्पष्ट भs रहल छलनि । "प्रिय हम आ अहाँ दुनू गोटे अद्वितीय छी,एहि दुनियाँ मे अपन विवाह एकटा अद्भुत अद्वितीय विधि सँs सम्पन्न भेल,तखन एहना में अपन सौभाग्य-रात्रि मे अहाँक संग हमर मिलन सेहो अद्भुत,अनुपम हेबाक चाही" - उर्वशी खिलखिलाइत बजलीह । क्रमशः अपन मंतव्य editorial.ऽtaff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.६.नन्द विलास राय-मास्क नन्द विलास राय मास्क पूरा विश्व कोरोना बेमारीसँ अक्रान्त छल। लोक त्राहि कृष्ण, त्राहि कृष्ण कऽ रहल छला। कताक गोटा अपना गेटमे ताला लगा कऽ रखै छला। कियो किनको ओइठाम नहि जाए चाहै छला। जँ किनको ओइठाम कियो पाहुन-परक पहुँच जाइ छेलखिन तँ घरबैया ओइ पाहुनकेँ शंकाक नजैरसँ देखै छला। के कहलक ई पाहुन कोरोना वायरससँ ते ने संक्रमित अछि। दू गज का दूरी आ मास्क है जरूरीक नारा लगैत छल। सरकारक तरफसँ मैकिंग करौल जाइत छल जे बिना आवश्यकता घर से बाहर मत निकलिये। अगर निकलना जरूरी है तो मास्क लगाकर निकलिए और दू गज का दूरी बनाये रखिये। करोने कालमे हम एक दिन निर्मली जाइत रही। निर्मली बाजारसँ उत्तर-पश्चिम एकटा तीन मुहाँनी अछि जेकरा बेरियर चौक कहल जाइत अछि। आइसँ लगघक चालीस बरख पहिने ओइठाम बेरियर छल, कोनो भी गाड़ीकेँ ओतए रूकऽ पड़ै छेलइ, तँए बेरियर चौक नाओं पड़ि गेल। हम जखन बेरियर चौकपर पहुँचलौं तँ एकटा उन्नीस-बीस बर्खक लड़काकेँ सिपाही डंटासँ मारैत रहए। बगलमे एकटा कुर्सीपर दरोगा साहैब बैसल छला आ हुनका बगलमे माने दरोगा साहैबक बगलमे दूटा सिपाही सेहो बैसल छला। दरोगा साहैब बजला- "मारिये साले को और मारिये। अपना भी मरेगा और दूसरे को भी मारेगा।" हम हिम्मत करि कऽ दरोगा साहैब लग गेलौं आ हुनकासँ पुछलिऐन- "सर, ऐ लड़काकेँ सिपाही किएक मारै छै।" तैपर दरोगा साहैब बजला- "देखता नहीं है साला बिना मास्के का घूमता है। अपना भी मरेगा और दूसरे को भी मारेगा। इतना मैंकिंग करबाते हैं कि बिना मास्क पहने घर से मत निकलिये, दू गज का दूरी बनाये रखिये, मगर इन गदहों को अक्ले नहीं आता है।" जे दरोगा साहैब कहैत रहैथ मारिये, साले को और मारिये, ओ खुद मास्क नहि पहिरने रहैथ। आ बगलमे बैसल दुनू सिपाहीक मास्क मुँहमे नहि लगल छेलैन। दुनू सिपाहीकेँ मास्क हुनका सभकेँ दाढ़ीमे लागल छेलैन। हम दरोगा साहैबसँ कहलयैन- "सर, अपने तँ डबल लेयरबला मास्क पहिरने छिऐ, किने।" तैपर दरोगा साहैब हमरा निच्चासँ ऊपर धरि देखला आ जेबीसँ मास्क निकालि पहिर लेला।

अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ‍२.७.जगदीश प्रसाद मण्डल-घरदेखी जगदीश प्रसाद मण्डल घरदेखी पौने नअ बजे रातिमे रामपुरसँ गाम आबि कलपर हाथ-पएर धोइ कऽ लोटामे पानि भरि, कोठरीमे आबि ओछाइन दिस देखलौं कि उत्तिमलाल भाय मनमे नाचि उठला। मनक नाचकेँ मनेमे दाबि ओछाइन झाड़िकऽ बिछेलौं। मनसँ उत्तिमलाल भाय उतरला तँ नहि मुदा मनमे नाचब कम भऽ गेल छल। ऐठाम एकटा प्रश्न अछि, ओ अछि रामपुरक भैयारी, तीन कोस हटल गाम उत्तिमलाल भाइक छैन आ तहिना हुनकासँ हटल अपनो घर तँ अछिए, तैठाम भैयारीक सम्बन्ध केना भेल? ..ओना, मातृक वा कोनो आन सम्बन्धमे सेहो भैयारी होइते अछि, तइसँ भिन्न उत्तिमलाल भाइक संग अप्पन भैयारी अछि। नोकरीक जीवन रहने बहुत दिन धरि दुनू गोरे एकठाम रहबो कएल छी आ बेवहारिक जीवनमे एकरूपता सेहो अछिए जइसँ जीवनक अनेको मर्मस्थल दुनूक गोरेक एकरंगाहे अछि। हँ, ऐठाम समाज वा परिवारक बीच जे भैयारीक सम्बन्ध अछि ओ एकटा वंशगत अछि आ दोसर सम्बन्धगत अछि। ओहुना देखिते छी जे अपना सबहक बीच जेतेक सम्बन्ध अछि ओ सीढ़ीनुमा अछि, वंशगत भैयारीक सम्बन्धमे सेहो थोड़-बहुत माने उम्रक चलैत सीढ़ीनुमा अछिए, मुदा से समाजगत भैयारीमे नहि अछि। परिवारमे भैया-बौआक चलैन अछि, मुदा समाजमे ओ भाए-भैयारीक रूपमे बदैल जाइए, जे एकरूपताक रास्ता सेहो पकड़ैबिते अछि। खाएर जे अछि ओ जानैथ परिवार-समाजक लोक। अपना तँ अप्पन जिनगी अछि। अपना देहमे ओहन बिमारीए ने भऽ जाए जे सदिकाल मन व्याकुले बनल रहए। तइले अपने ने विचारबो करब आ तेकर निमरजनो करब। ओछाइन बीछा सिरमापर जहाँने मुड़ी देलौं कि उत्तिमलाल भाइक बेटी-बिआहक परेशानी धक-दे मनमे खसल। ओना, बिआहक सभ बेवस्था देखि मन मानि गेल अछि जे उत्तिमलाल भाय जीवनक अन्तिम बेड़ा नीक जकाँ पार कऽ रहला अछि। आजुक जे परिवेश बनि गेल अछि आ बनियोँ रहल अछि तइमे नहियेँ जाएब नीक, मुदा बाघा तँ ईहो अछिए जे जँ बिआहक काजकेँ वहिष्कार करब तखन बेटा-बेटीक बिआह केना हएत। आ जँ बिआह नइ हएत तँ परिवार बनि समाज ठाढ़ केना हएत? बेटी बिआहक सभ प्रक्रिया उत्तिमलाल भाय जीह खोलि कऽ केने छैथ। आन गामक आन जातिक बात नइ कहै छी जे जाबे बर दुआरि नइ लगता ताबे जँ कियो बरात दरबज्जापर एबो करता तँ हुनका बरियातीक मोजर नइ हेतैन, तँए चाह-पानक कोन गप जे कियो कुशलो-क्षेम पुछनिहार नइ होइ छैन। तइसँ विपरीत उत्तिमलाल भाय ऐठाम देखलयैन। बर-बरियाती रातिक दस बजेक बाद पहुँचता, मुदा खेनाइ-पीनाइ दस बजे दिनेसँ शुरू भऽ गेल छल। अप्पन समयक अँटावेश करैत सात बजे साँझमे उत्तिमलाल भाय ऐठाम पहुँच आँगन-सँ-दरबज्जा धरि घुमि-फिर कऽ सभ किछु देखि मन आश्वस्त भइये गेल जे उत्तिमलाल भाय सफल बेवस्था केने छैथ। सभ किछु देखि-सुनि उत्तिमलाल भायकेँ कहलयैन- "भाय, हम नइ रूकब। सभ किछु देखि-सुनि लेलौं, आब जेबाक आदेश दिअ।" अपने ई सोचि बाजल रही जे उत्तिमलाल भाय अप्पन काजमे तेजी अनता, जइसँ काज आगू मुहेँ ससरैत बढ़तैन। जहिना अपने बजलौं तहिना उत्तिमलाल भाय खाइ-पीबैक जगहपर हमरा पहुँचा कऽ कहि देलैन- "भोजन केलाबाद अहाँ चलि जाएब।" गाड़ी-सवारी बढ़ने, एते तँ भइये गेल अछि जे नमहरो राति छोट भऽ गेल अछि आ छोटो दिन नमहर भऽ गेल अछि, माने काज करैक समय बेसी भेने बढ़ि गेल अछि। बजलौं- "उत्तिम भाय, घरदेखी बाँकी रहल।" उत्तिमलाल भाय बजला- "बड़बढ़ियाँ।" सिनेमाक रील जकाँ अप्पन विचारक रील सेहो आगू मुहेँ बढ़ल। आगू बढ़िते उत्तिमलाल भाइक पाँच बर्खक परेशानी मोन पड़ि गेल। कहनिहारो आ बजनिहारो कहिते छैथ आ बजिते छैथ जे बेटा-बेटीक बिआह एक निश्चित सीमापर होइ। मुदा चाहलाक पछातियो कान्ही मिलबैमे, माने बर-कन्याक जोड़ मिलबैमे बर्खक-बरख गुजैर जाइए, तखन निश्चित सीमाक निश्चित सिमान केना रहत। खाएर जे रहए, ऐठाम उत्तिमलाल भाइक चर्च करै छी। आन गुण उत्तिमलाल भायमे जे होनु मुदा बेटा-बेटीकेँ पढ़बैक गुण हुनकामे सभ दिनेसँ अनका अपेक्षा बेसी छैन्हे। जइसँ तीनू बेटियो आ दुनू बेटोकेँ एक सीमा धरि पहुँचाइये चुकल छैथ। ऐठाम सीमाक माने एक खण्डक सीमा, ओना जैठाम माने जइ देशमे बेरोजगारीक बोझ रहत तैठाम पढ़ाइक डिग्रीक कोनो मोल नहियेँ रहैए, से अपनो ऐठाम अछिए। देखबे करै छी वैज्ञानिक बनैबला रेलबे स्टेशनमे टिकट काटै छैथ। जइसँ उत्तिमलाल भाय पाँचो सन्तानकेँ एक सिमानपर पहुँचेला पछातियो, काजक अभावमे नोकरी नइ भेने, परेशान छथिए। ओना, अपना नीक नोकरी रहने उत्तिमलाल भायकेँ नीक पेंशनक आशा छैन्हे, मुदा उपभोक्ता समय भेने सभ वस्तुक पूर्ति नहियेँ कऽ पाबि रहला अछि। अप्पन पहिल आ दोसर बेटीक बिआहमे तेना भऽ कऽ उत्तिमलाल भाय परेशान नइ भेला, तँए परेशानीक ओ गुण नहि भेटलैन जे तेसर बेटीक बिआहमे भेटलैन अछि। उत्तिमलाल भाइक अप्पन जेतेक सूत्र छेलैन, तइ सभ सूत्रक उपयोग अप्पन बेटीक बिआहमे केलाह, मुदा अनठिया साँपक काटल बीख जकाँ जे जनलाहा मंत्रसँ नइ उतरैए तहिना भइये गेल छेलैन। कहब जे अनठिया साँप आ जनलाहा मंत्र की भेल? अनठिया साँप भेल, नव-नव लेन-देनक चलैन आ सभ साँपक मंत्र अलग-अलग अछि, जइसँ एक मंत्र दोसर साँपक बीखकेँ नहि उताइर पबैए, तहिना समाजमे अनठिया साँपक प्रवेश भेइये गेल अछि जइसँ मनुक्खक कोनो पहचाने ने रहल अछि। सभरंगा खेल चलिये रहल अछि। केतौ कोनो गाम घेरल अछि जइसँ ओइ गाममे लोक अप्पन बेटा-बेटीक बिआह नहि करै छैथ, तँ दोसर दिस कूल-मूल सेहो अप्पन आड़ि बना घेरनहि अछि। मुदा मनुक्खो तँ मनुक्ख छी, जे अप्पन पूर्ण स्वतंत्रता उपयोग करैत जाति-क्षेत्रसँ लऽ कऽ कूल-मूलक आड़िकेँ तोड़ि वैवाहिक सम्बन्ध सेहो बनैबते छैथ। खाएर ई तँ भेल गाम-समाजक लीला, मुदा उत्तिमलाल भाइक लीला दोसर रंगक छैन, समाजक मध्यम वर्गमे, ऐठाम वर्ग आ स्तर दुनू अछि, उत्तिमलाल भाइक जन्म भेल छैन। समाजमे स्तरक एक चलैन धनोक अछि आ दोसर चलैन जातियोक अछि। जहिना धनीक, बहुत धनिक, तहूसँ बेसी धनिक आ तहूसँ बेसी धनिकक सीमा अछि, तहिना गरीबक बीच सेहो अछि। गरीब, बहुत गरीब, तहूसँ बेसी गरीब आ तहूसँ बेसी गरीब सेहो अछिए। तहिना शिक्षाक मदमे सेहो अछिए आ जातिक मदमे सेहो अछिए। समाजक मध्यम वर्गक परिवार ओहन अछिए जे धनक जेते खगता हेबा चाही, सेहो अछि आ जीवनक क्रमानुसार जे शिक्षाक स्तर हेबा चाही सेहो अछिए। जहिना धनक रूपमे उत्तिमलाल भाय छैथ तहिना शिक्षो आ जातियोक रूपमे छथिए। पनरह-बीस लाख रूपैआ बेटी बिआहमे खर्च करैक विचार केनहि छैथ, मुदा एहेन वर्गक परिवारमे शिक्षाकेँ पाछू पड़ने लड़का-लड़कीक जोड़मे भारी खाधि सेहो बनियेँ गेल अछि। ओना, अखन तक जे अपना समाजमे एहेन चलैन रहल अछि जे बेसियो पढ़ल-लिखल लड़काक बिआह साधारणो पढ़ल-लिखल वा नहियोँ पढ़ल-लिखल लड़कीक संग भइये रहल अछि। ओना, तहूमे विस्फोटक स्थिति बनने मंत्रवाहकेँ बीख उतारब कठिन भइये गेल छैन। जहियासँ उत्तिमलाल भाय नोकरीसँ सेवा निवृत्त भेला तहियासँ भेँट-घाँट हएब कमियेँ गेल अछि। समय छल जखन साँझ-भोर एकाध घन्टा एकठाम बैस अप्पन-अप्पन जीवनक संग देश-दुनियाँक गप-सप्प सेहो करै छेलौं, तैठाम मासक-मास भेँट नइ होइ छैथ। छअ मास पूर्व जे भेँट भेल छला आ ओइ दिन जे हुनक रूप देखलयैन तँ बिसवासे ने भेल जे उत्तिमलाले भाय छैथ। एक तँ ओहुना हुनकर शरीरक रंग पीरसियाम छैन्हे, मुदा तोहूमे बेटी बिआहक चिन्ताक रंग आरो कारी-झामर बना देने छेलैन। तैसंग सुखल मुँह रहने चेहरोक रूप आ मनो मलिन भइये गेल छेलैन। अन्तिम भेँट दिन, माने छअ मास पूर्व जे उत्तिमलाल भाय भेँट भेला आ पुछने रहिऐन- भाय, कन्यादानक की स्थिति अछि? तैपर, एक तँ सोगाएल-पीताएल मन उत्तिमलाल भाइक भइये गेल छेलैन, बाजल छला- अखन किछु ने.! मनक टुटान एहेन होइते अछि जे टुटिकऽ ओइ सीमापर लटैक जाइए जेतए ग्रीनबीच रेखा अवस्थित अछि। ओइठाम लोक ओहिना लटैक जाइए जहिना महाभारतक अनेको याद्धाकेँ अर्जुन जे गरदैन पकैड़ फेकलैन आ ओ जा कऽ जे लटकला। जेतएसँ ने केकरो निच्चाँ उतरल होइए आने ऊपर गेल होइए, तेहने सीमापर उत्तिमलाल भाइक मन, बुझि पड़ल जेना लसैक गेल छैन। तँए बिच्चेमे खरिआरिकऽ पुछलयैन- "भाय, एना जँ परिवारसँ मुँह मोड़ब तँ रहब केतए.?" जेहने अध्येता तेहने ध्याता उत्तिमलाल भाय सभ दिन रहला। दार्शनिक भावमे बजला- "जिज्ञासु भाय! की कहब, किछु कहने किछु ने बनैए..!" बजलौं- "से की भाय?" अलंकारिक शैलीमे उत्तिमलाल भाय बजला- "परिवारक राग छुटने लोककेँ विराग होइए आ विरागसँ जखन अनुराग होइए तखन ने अनुरागसँ दुनियाँक प्रति राग अबैए। तखन अहीं कहू जे जइ परिवारसँ वा आने वस्तुक रागसँ विराग होइए तँ ओकरा की करबै?" अपने तँ साधारण बी.ए. पास केने छी। तहूमे चुड़ा-दही-चिन्नी पढ़िकऽ, माने भेल साइक्लॉजी, लॉजिक आ मैथिली पढ़ल छी, तँए उत्तिमलाल भाइक विचारकेँ नहि पकैड़ मुँहछोहैन करैत बजलौं- "भाय, आब ने ओ देवी रहल आ ने ओ कराह, तँए छोड़ू ओइ सभकेँ। कन्यादानक की स्थिति अछि?" कारी घट-घटासँ बोझिल मेघमे एकाएक जहिना केतौ फाट एने सुर्जक प्रकाश प्रकाशित होइए तहिना उत्तिमलाल भाइक चेहरापर इजोत छिटकलैन। जइसँ कलियाएल फूलक कोढ़ी जकाँ एकाएक उत्तिमलाल भाइक मुँहक सुरखीक रंग उतरए लगलैन। बजला- "भाय, विचित्र बनरफाँसमे पड़ि गेल छी। रावणक दरबारमे जहिना हनुमानकेँ फाँस लगा आनल गेल रहैन तहिना लगैए अपनो संग भऽ गेल अछि.!" पुछलयैन- "से की भाय?" उत्तिमलाल भाय बजला- "अप्पन जे जातिक समाज अछि तइमे अपना गाममे तँ अपनेटा आ आन गाम बहुत एहेन अछि जइ गाममे हमरा बेटी एतेक पढ़ल-लिखल नहि अछि, तैठाम अहीं कहू जे हम्मर बेटी एक नम्बर भेल की नहि?" उत्तिमलाल भाइक दमगर विचार सुनि केना कहितिऐन जे अखन तक अहाँक रूआब कम नहि भेल अछि, बजलौं- "एकरा के काटत।" हम्मर विचार सुनि उत्तिमलाल भायकेँ जेना सह भेटलैन तहिना बजला- "एकठाम लड़काक भाँज लगिते, काजक विचारकेँ आगू बढ़ेलौं। देखिते छी जे डॉक्टर लड़काक मांग डॉक्टर लड़कीक परिवारमे केहेन भऽ रहल अछि। शिक्षक-किरानीक तँ विचार छोड़ू, वेचारेकेँ दरमहो कम छैन आ भनसियो सब दिन रोगाएले रहै छैन।" हमर विचारक प्रभावसँ आकि अप्पन मनक उत्साहसँ, से उत्तिमलाल भाय अपने जनता, मुदा मन्हुआएल मने बजला- "भाय, एकठाम लड़काक सूहकार भेटल। एकटा संगीक संग ओइठाम गेलौं।" कहि उत्तिमलाल भाय एकाएक ओहन चरिचकिया गाड़ी जकाँ जे पेट्रोल वा डीजल सठने रूकिकऽ ठमैक जाइए तहिना रूकि गेल। बजलौं- "भाय! अखन हमहूँ निचेने छी, तँए कोनो विचारकेँ राखू नहि।" हम्मर बात सुनिते हूबा करैत उत्तिमलाल भाय बजला- "भाय, समाज निरलज भऽ गेल अछि, एक दिस कन्याकेँ दान स्वरूप मानैए आ दोसर दिस कन्याकेँ मनुक्खक श्रेणीसँ निच्चाँ उतारि देने अछि.!" उत्तिमलाल भाइक विचार नीक जकॉं नइ बुझलौं, तँए पुछलयैन- "से केना भाय?" खिसियाएल बिलाड़ जकॉं धुर-खुर नोचैत उत्तिमलाल भाय बजला- "कहू जे जइ बेटीकेँ माता-पिता जन्मसँ जवान होइ तक पालि-पोसिकऽ दान करैए, तैठाम लोकक मन एतबो नइ मानैए जे कि भरि-भरि दिन नैतिकताक रट लगबैए। तेहेन लगौनिहारक नैतिकता केतए अछि।" बजलौं- "से की भाय?" उत्तिमलाल भाय बजला- "नैतिकताक सम्बन्धमे अखन एतबे कहब जे नैतिकता जीवनक अमूल्य रत्न छी। कहियो दोसर दिन आगूक चर्च करब जे नैतिकता की छी।" उत्तिमलाल भाइक विचार सुनि अपनो मन मानि गेल जे अखन कन्यादान सन विषयपर विचार कऽ रहलौं हेन, तखन दोसर विचारक भूमियो तँ नहियेँ अछि। बजलौं- "अखन छोड़ू दुनियॉंदारीक गप-सप्प, ठनका ठनकै छै तँ कियो अपना मथ्थापर हाथ दइए। गपकेँ आगू बढ़ाउ।" उत्तिमलाल भाय बजला- "जखन दुनू समांग बैस कऽ बेटी-बिआहक चर्च उठेलौं कि बरक बाप सुहरदे मुहेँ कहि देलैन, अहॉं ऐठाम कुटुमैती नइ करब। अपने तँ चुपे रहलौं मुदा संगी पुछि देलकैन, किए ने करब? तैपर ओ बजला, बेटी कारी छैन। मन तँ तेते गरमा गेल जे मुँहमे पाँच थापर लगाबी, मुदा चुप-चाप उठिकऽ विदा भऽ गेलौं।" नीनक आगमन भऽ गेल, तँए विचारक वातावरणमे नरमी आएल। ओना, समाधिक अवस्था तँ एकरा नइ कहबै जे चेतनताक पराकाष्ठा छी, मुदा एक मौसमसँ दोसर मौसमक बीच किछु-ने-किछु सुहावन वातावरण भइये जाइए, तइ अवस्थामे आबि गेल रही। एकाएक मनमे उठल, आइ उत्तिमलाल भाय गंगा लाभ भऽ रहला अछि। पॉंचम दिन हुनका ऐठाम जाएब। तैबीच ओ अप्पन सभ काज, माने बिआहक काज सम्हारि लेने रहता। अपनो तँ किछु दायित्व बनिते अछि किने जे आजुक जे बिआह-दानक परिवेश बनि गेल अछि तइ अनुकूल घर देखब सेहो अछि ने। अखन तकक जे परिवारक ढॉंचा अछि आ नव परिवेशमे जे ढॉंचा बनत, दुनूक बीच सामंजस हएब जरूरी अछिए। तैबीच तेसर बेर हाफी भऽ चुकल छल। चेतन क्रिया धीरे-धीरे शान्त होइत-होइत तेतेक निच्चॉं उतैर गेल जे कखन नीन आबि गेल से बुझबे ने केलाह। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.८.रबीन्द्र नारायण मिश्र-बदलि रहल अछि सभकिछु (उपन्यास)- धारावाहिक रबीन्द्र नारायण मिश्र बदलि रहल अछि सभकिछु (उपन्यास)- धारावाहिक खण्ड २१-२५ बदलि रहल अछि सभकिछु 21 संदीपक संगे बदमाससभ ओकर गाम सरिआ पहुँचल। शिखा ओही गामक छलि। नेनपनेमे ओकर माता-पिताक देहांत भए गेल रहैक । ओकर पालन-पोषण पितामह केलखिन। मुदा ओहो किछु सालक बाद एहि दुनिआकेँ छोड़ि गेलाह । ओहि समयमे शिखाक बएस एगारह वर्ष रहल होएत। ओ गामेक मिडिल इसकूलमे पढ़ि रहल छलि । तकरबाद शिखाक पालन-पोषण एकटा समस्या भए गेल। आखिर ओकर मामा अपना लग आनि लेलखिन । ओएह ओकर आगूक पढ़ाइक व्यवस्था केलनि । नेताजीक ओकर मामाक ओहिठाम आवागमन होइत रहैत छलनि । हुनकर ध्यान शिखापर पड़लनि। ओहि समयमे ओ बी.ए.पास कए चुकल छलि । आब ओकर मामाक इच्छा रहनि जे बिआह करबा दिऐक जाहिसँ ओ एहि जिम्मेबारीसँ मुक्त होथि । ताही दिशामे ओ प्रयास कए रहल छलाह । एक दिन नेताजीक हुनकासँ भेंट भेलनि । गप्प-सप्पक क्रममे ओ ओकर बिआहक चर्च केलनि । नेताजी कहलखिन- "अखन एकर बिआहक कोन धरफरी छैक । हम एकरा शक्तिपुरममे सरकारी नौकरी लगा देबैक । अहाँ एकरा लेने   शक्तिपुरम आउ। नौकरी भए गेलाक बाद दहेजो नहि लागत आ नीक ठाम बिआहो भए जेतैक ।" "बात तँ अहाँ बहुत नीक कहि रहल छी । मुदा शक्तिपुरममे हमसभ रहब कतए? संगमे शिखा सेहो रहति। ओतए तँ हमरा कोनो जोगार नहि अछि ।" "अहाँ तकर चिंता छोड़ि दिअ । हम सभटा ओरिआन करबा देब । बस अहाँ अपन कार्यक्रम दू दिन पहिने सूचित कए देब । "हमर कार्यक्रमक कोन छैक? जहिए कहब तहिए बिदा भए जाएब । हमहु तँ बैसल-बैसल बरबाद होइत रहैत छी । एही बहन्ने कनीक घुमिओ लेब ।" नेताजी बातपर विश्वास कए शिखा अपन मामाक संग हुनकर डेरापर शक्तिपुरम पहुँचलि । जे बात छैक नेताजी दोसरे दिन भेने शिखाकेँ एकटा इसकूलमे शिक्षिकाक काज दिआ देलखिन। डेराक व्यवस्था सेहो इसकूले परिसरमे भए गेलैक । ओहिठाम कैकटा महिला शिक्षकासभ पहिनेसँ रहैत छलि । तेँ शिखाकेँ ओतए जल्दीए मोन लागि गेलैक  । सभ किछु अनुकूल देखि ओकर मामा निश्चिंत मोनसँ अपन गाम लौटि गेलाह । किछुदिनक बाद जखन नेताजी गाममे ओकरा भेटलखिन तँ हुनकर बहुत स्वागत केलथि । दस आदमीक सामनेमे हुनकर गुणगान केलथि । गाम-घरमे देखाउस लागि गेल । कैकगोटे अपन बचिआसभकेँ नेताजीकेँ सहयोगसँ शक्तिपुरम पठा देलथि । सभ नेताजीक जयगान करैत वापस भेल रहथि । मुदा ओ सभ की जाने गेलथि जे नेताजीक असलिअत की अछि ? संदीप नेताजीक बहुत पुरान विश्वासपात्र छल । क्रमशः नेताजी ओकर दुरुपयोग बढ़बैत गेलाह । ओ ई बात नहि बूझए से बात नहि छैक । सभ किछु बुझैत छल । मुदा हुनकर चक्रव्यूहमे तेना कए ओझरा गेल छल जे ओहिसँ निकलब आब असंभव लगैत छलैक । नेताजीक लगपासमे जतेक उल्टा-पुल्टा काज होइत छल तकर भार ओकरे कपारपर दए देल गेल छल । किछु आओर गोटेसभ सेहो नेताजीक संगे एहिना ओझराएल छल । मुदा सभक कार्यक्षेत्र फराक-फराक छलैक । इसकूलक छात्रावासमे रहि रहल महिला लोकनिक देख-रेख जिम्मा संदीपेक छलैक । ई बात सभ ककरो किछु पता नहि छलैक । सभ किछु शांतिपुर्ण रूपसँ चलि रहल छल आ साइत चलिते रहैत । मुदा संजोग एहन भेलैक जे एक राति शिखा विद्रोह कए देलकैक? कतबो नेताजी बुझेलखिन मुदा ओ टस सँ मस नहि भेलैक । नेताजी बहुत तमसाएल रहथि। मुदा सामनेमे किछु नहि बजलथि। संदीपकेँ बजा कए कहलखिन- "एकरा छात्रावास पहुँचा दहक ।" संदीप शिखा संगे बिदा भेल । शिखाकेँ इएह मौका भेटलैक । ओ सभटा बात संदीपकेँ कहि देलकैक । संदीप लाखे डराएल छल,नेताजीक चक्रव्युहमे फँसल छल,मुदा कतहु-ने-कतहु ओकरामे मनुष्यता बाँचल छलैक । ओ शिखाक कष्ट देखि बहुत दुखी भए गेल छल । तकर बाद बिना विलंबकेँ शिखाक संगे भागल आ भागले चलि गेल । नेताजीक पठाओल बदमास सभ ओकर पछोड़ करैत रहल। आखिर संदीप पकड़ाइए गेल । संदीप ओकरासभक संगे अपन गाम पहुँचल । मुदा शिखा गाममे नहि छलैक । ओ गामसँ कखन आ कतए चलि गेलि से संदीपोकेँ नहि बूझल रहैक । आब तँ बदमाससभ ओकरापर सभटा तामस निकालए लागल । हल्ला सुनि कए गौंवासभ जमा भए गेल । चारूकात लोकक करमान लागि गेल । बदमाससभ अपनाकेँ घेराइत देखि इएह-ले,ओएह-ले भागल । 22 गाम पहुँचिओ कए शिखा बेचैन रहए । नेताजी आ ओकर संगीसभक अन्यायपूर्ण व्यवहारसँ ओकर सौंसे देहमे आगि लागि गेल रहैक । "हम आब ई सभ नहि सहब । अन्यायीसभकेँ दंड दिआ कए रहब । समाजक सामनेमे एकरसभक सही रूप आनि कए रहब।" वारंबार इएह संकल्प ओकर मोनमे उठैत रहल । ओ थाना गेलि । अपना भरि बहुत प्रयास केलक जे प्राथमिकी दर्ज कराबी । मुदा थानेदार टस सँ मस नहि भेलैक । ओ उनटे तरह-तरहक बातसभ बाजए लागल । शिखाक सामनेमे थानेदार कैकबेर मोंछपर हाथ फेरैत रहल । मुस्की दैत रहल । थानेदारकेँ ऊपरसँ शिखाक बारेमे गुप्त संदेश नेताजी पठबा देने रहथि। कारण हुनकर मोन तँ अदकल छलनिहे । दरोगाक चालि देखि ओकरापर शिखा ततेक जोरसँ हुरकलकैक जे थानेदारकेँ जेना लकबा मारि देलकैक। तकर बाद शिखा कुर्सीपरसँ ऊठैत अछि,आ थानासँ बिदा भए जाइत अछि । जाइत-जाइत बजैत जाइत अछि- "तूँसभ रावणक रूप छैं । सभक सही इलाज हेतौक। ओ समय आब लगीछ अछि ।" थानेदार जाबे होसमे अबितए, किछु करितए, ताबे तँ शिखा थानासँ निकलि गेल छलि । थानासँ बिदा भए शिखा सोझे टीसन पहुँचलि । ओतए विजयपुरमक ट्रेन लागल छल । जेना-तेना टिकटक जोगार केलक आ ट्रेनसँ विजयपुरम बिदा भए गेलि । राजधानी विजयपुरम जे इतिहासक कतेको परिवर्तनक गवाह रहल अछि,शिखाक जीवनक क्रान्तिक गबाह बनए जा रहल छल । केओ सोचिओ नहि सकल होएत जे शिखा एहन रूप धए लेति,सक्षात दुर्गा जकाँ राक्षसमंडलीक विनाशक हेतु कृतसंकल्प भए जाएत। दोसरदिन भेने ओ विजयपुरम टीसनक प्लेटफार्म नंबर आठपर पहुँचलि । ट्रेन ठाढ़ होइतहि यात्रीसभ अपन-अपन समानसभक संगे उतरि रहल छल। कुलीसभ यात्रीसभक समानकेँ उठा-उठा कए यात्रीसभक संगे आगू बढ़ि रहल छल । मुदा शिखा जस-के-तस ठाढ़ि छलि। ओकरा बुझेबे नहि करैक जे केमहर जाए? की करए? थोड़े काल ओहिना बैसल रहि गेलि । लगीचेमे चाहक दोकानसँ चाह कीनलक । चाह पीबि रहल छल की ओकरा महिला सहायता केन्द्रक फोन नंबरपर ध्यान गेलैक । ओ ओहि नंबरपर फोन करैत अछि । दोसर दिससँ तुरंत एकटा महिला बजैत अछि- "हम महिला सहायता केन्द्रसँ बाजि रहल छी ।" "हमर नाम शिखा अछि । हम अखनहि ट्रेनसँ विजयपुरम पहुँचलहुँ अछि । हम बहुत परेसानीमे छी । हमरा अहाँसभक मदति चाही।" "हमसभ अहाँक की मदति कए सकैत छी? की परेसानी अछि? अहाँ संगे के छथि? " "हम असगरि आएल छी । हमर परेसानी बहुत गंभीर अछि आ फोनपर हम सभटा बात नहि कहि सकैत छी । हमरा एहिठामक किछु जानकारी नहि अछि । तेँ ककरो हमरा मदतिक हेतु पठाउ ।" "अहाँ अखन कतए छी?" "हम विजयपुरम टीसनक प्लेटफार्म नंबर आठपर बैसल छी।" "ठीक छैक । अहाँ ओतहि रहू । हमसभ आबि रहल छी।" थोड़बे कालमे  तीन-चारिटा महिलासभ पुलिसक संगे शिखा लग प्लेटफार्म नंबर आठपर पहुँचि जाइत छथि । ओ सभ शिखाकेँ अपन परिचयपत्र देखबैत छथि । ओकरा संगे चलबाक आग्रह करैत छथि । शिखा हुनकालोकनिक संगे बिदा भए जाइत छथि । दस मिनटक बाद ओ सभ महिला सहायता केन्द्रक कार्यालय  पहुँचि जाइत छथि । ओ सभ शिखाकेँ प्रसन्न करबाक भरिसक प्रयास करैत छथि। हुनका जलखै करबैत छथि, चाह-पान करबैत छथि । बहुत दिनक बाद शिखाकेँ लागि रहल छलनि जे ओ मनुक्खक बीचमे आबि गेल छथि , सुखी छथि । शिखाकेँ आश्वस्त देखि महिला सहायता केन्द्रक स्वयंसेवकसभ बहुत खुस होइत छथि । ओ सभ शिखाकेँ अपन सिकाइत लिखितमे देबाक आग्रह करैत छथि जाहिसँ ओहिपर पुलिस कारबाइ कए सकत । शिखा हुनकरसभक बात मानि  अपन सिकाइत लिखैत छथि । ओ सभ शिखाक सिकाइत पढ़िए रहल छलीह की पुलिस आयुक्त गश्तीपर घुमैत-फिरैत ओतए पहुँचि जाइत छथि । शिखाकेँ देखि ओ  पुछैत छथि- "ई के छथि?" "ई आइए ट्रेनसँ विजयपुरम अएलीह अछि । हमरासभकेँ फोनसँ हिनकासँ गप्प भेल छल । तकरबाद टीसन पहुँचि हिनका एतए लेने अएलिअनि अछि ।" "ओ मुदा बातकी छैक? हिनकर परेसानी की छनि ?" महिला स्वयंसेवीसभ एकदोसर दिस देखए लगैत छथि ।  फेर शिखाक लिखल आवेदन पत्र हुनकर हाथमे राखि दैत छथि । पुलिस आयुक्त महोदय शिखाक आवेदन पढ़ए लगैत छथि । ओहि आवेदनमे शिखा लिखने छथि- "हमर माता-पिताक बहुतकमे बएसमे देहान्त भए गेल रहनि । तकर बाद हमर मामा हमर पालन-पोषण केलनि । हम मामागामेमे बहुत दिनधरि रहलहुँ । ओतहिसँ पढ़ाइ केलहुँ । ओतए देबन उर्फ नेताजीक आवागमन होइत छलनि । हुनकर हमर मामाक संग नीक संबंध रहनि । हम जखन छेटगर भेलहुँ तँ हमर मामा हमर बिआह करबाक प्रयासमे  लागि गेलथि । हुनकर कहबाक रहनि-"बिना बापक बेटी थिक । एहि हेतु एकर बिआह नीकसँ नीक ठाम करब हमर कर्तव्य थिक ।" ताहि हेतु दिन-राति एक केने रहथि । नेताजी लग सेहो ओ एहि बातक चर्च केलनि जे जँ कोनो नीक वरक जानकारी होनि तँ सूचित करथि । नेताजी हुनका नीकसँ बुझा देलकनि जे ओ हमरा नौकरी दिआ देत जाहिसँ आगू बहुत नीक रहत । बिआहमे तँ मदति हेबे करत । हमर मामा बहुत सोझ आदमी छलाह । फेर हुनकर नेताजीसँ बहुत नीक संबंध रहनि । हुनका पर बहुत विश्वास रहनि । ओ नेताजीक बातमे आबि कए तीनदिनक बाद हमरा लेने हुनकर शक्तिपुरम स्थित डेरापर पहुँचि गेलाह । जे बात छैक,नेताजी हमरा दोसरे दिन एकटा इसकूलमे नौकरी धरा देलक । हमर रहबाक हेतु ओही इसकूलक आवासमे ओरिआन कए देलक । सभ किछु अनुकूल देखि हमर मामा बहुत प्रसन्न भेलाह । नेताजीकेँ हार्दिक धन्यवाद देलनि आ हुनकर आज्ञा लए गाम वापस बिदा भए गेलाह । तकर बाद हम अपन काजमे लागि गेलहुँ । शुरुमे तँ बहुत नीक लागल । इसकूलमे कैकटा शिक्षिकासभसँ दोस्ती भए गेल । समय बहुत नीकसँ कटए लागल। ओहीसभमे सँ किछुगोटेक नेताजीक संग बहुत अंतरंग संबंध रहैक। ओ सभ हमरो नेताजीक बैसारमे लए जाए लागल । ओना शुरुमे तँ सभकिछु ठीक-ठाक बुझाइत रहल । मुदा बादमे नेताजी क्रमशः अपन असली रूप देखबए लागल । संजोगसँ एकदिन हमसभ बहुत राति धरि नेताजीक ओहिठाम अँटकि गेल रही । भेलैक ई जे फगुआक समय रहैक । नेताजीक ओहिठाम तरह-तरहक आयोजन रहैक । इसकूलसँ लगभग सभटा स्टाफ आएल रहैक । बाहरोसँ बहुत रास लोकसभ आएल रहैक । नारी निकेतनक सभ आश्रमवासी सेहो नोतल गेल रहथि । माने नेताजीक ओतेक अइल-फइल डेरा सेहो छोट पड़ि गेल रहैक । बगलक बंगला खाली रहैक । बहुत रास लोकसभ ओमहरो छलाह । ओही बंगलामे एकटा एकांत स्थान सेहो बनाओल गेल छल । रातिमे भोजनक समयमे हम अपन संगीसभक संगे जखन ओतए भोजनक हेतु पहुँचलहुँ तँ किछुगोटे हमरासभकेँ ओहि एकांत कक्ष दिस लेने चलि गेल । बाहरसँ तँ ओतए किछु गड़बड़ नहि बुझाइक। मुदा जँ जँ भीतर पैसैत गेलहुँ,तँ तँ ओहिठामक असली रूप बुझबामे आबए लागल । तखन तँ ओतएसँ भागबाक प्रयत्नमे लागि गेलहुँ । मुदा आओर ककरो कोनो प्रकारक चिंता नहि देखिऐक । हम अपन संगीसभकेँ कहबो केलिऐक- "हम एहिठामसँ जाए चाहैत छी ।" "से किएक? एहन नीक आयोजन छोड़ि कए डेरामे की करब? फेर हमहुसभ तँ छीहे ।" हमरा मोनमे खटका तँ भेल । मुदा ई नहि बुझाए जे हमर संगीसभ सेहो नेतेजीक दिससँ काज कए रहल अछि । मुदा असलियतमे बात सएह रहैक । दूपहर रातिमे जेना-तेना असगरि हम ओहिठामसँ भागल रही । तकरबाद कैक दिन धरि बकोर लागल रहि गेल । सौंसे देहमे दर्द होइत रहल । बुझेबे नहि करए जे आखिर भेल की? एना अचानक मोन किएक खराब भए गेल?" क्रमशः थोड़े दिनक बाद हमर मोन ठीक भए गेल । सभ बात बिसरा गेल । मुदा एकदिन अखबारक मुख्यपृष्ठपर नारी निकेतनक समाचार छपल देखाएल। ओकर शीर्षक छल- "नारी निकेतन गुंडागर्दीक अड्डा भए गेल अछि । ओहिठाम काल्हि पुलिस छापा मारलक । कैकटा महिलासभ गायब छलीह । पुलिस हुनकासभकेँ पछोड़ करैत-करैत शक्तिपुरमक महत्वपुर्ण स्थानसभसँ निकाललक । सौंसे सहरमे हरकंप मचि गेल अछि ।" पक्ष-प्रतिपक्षक समस्त नेतालोकनिमे हरकंप मचि गेल । सभ एहि घटनाकेँ शांत करबामे लागि गेलाह । ओहीक्रममे नेताजी संदीपकेँ हमरा आ किछु आओर महिलासभक पाछू लगा देलक । संदीपकेँ ई सभ नीक नहि लगैत रहैक । ओ एहिसभसँ दुखी रहए,बाहर होबए चाहए । मुदा नेताजीक चांगुरसँ निकलब एतेक आसान नहि रहैक । मुदा ओकरा हमर हालत देखि बहुत दुख रहैक आ एकदिन ओ हमरा  संग कए ओहिठामसँ भागल । तकर बातक बात तँ पुलिसक जानकारीमे अछिए । हम चाहैत छी जे दोषी व्यक्तिसभकेँ कानूनक मोताबिक दंड देल जाए आ निर्दोष महिला लोकनिकेँ ओकरासभक चांगुरसँ मुक्त कराओल जाए । निवेदक, शिखा 23 शिखाक सिकाइतपर पुलिस आयुक्त तुरंत संज्ञान लैत जीरो प्राथमिकी दर्ज करबा देलनि । साँझमे प्रेस सम्मेलनमे एहि मामिलासँ जुड़ल सभटा प्रसंगकेँ प्रकाशमे अनलनि । ततबे नहि,नारी निकेतनक स्थिति आ परिस्थितपर सीबीआइक जाँच बैसबाक आदेश सेहो सरकार दिससँ कएल गेल । कहबाक माने जे थोड़बे कालमे मामिला घनघना गेल । एकर साक्षात प्रभाव शक्तिपुरमक राजनीतिमे देखबामे आएल । कतहु-ने-कतहुसँ एकटा भीडिओ टेलीवीजनपर देखाओल जा रहल छल । ओहिमे राज्यप्रमुखक सामिल होइत स्पष्टतासँ साबित भए रहल छल । आब तँ हुनकर अपने लोकसभ हुनकर शत्रु भए गेल । पार्टीक आंतरिक बैसकमे हुनका जनहितमे आ पार्टीक भविष्यक हेतु तुरंत त्यागपत्र देबाक दबाब बनाओल गेल । संगहि इहो कहल गेल जे हुनका लोकनिक जानकारीमे एहूसँ बेसी बेपर्द भीडिओसभ आएल अछि जाहिमे राज्यप्रमुख स्वयं असमाजिक काजमे लागल देखाइत छथि । राज्यप्रमुखजी माथ पकड़ि लेलनि । ओ ठामहि उठलाह आ राजभवन जाए अपन त्यागपत्र दए देलनि । ओना एहिसभ घटनाक प्रभाव पड़बे करितैक,मुदा एतेक जल्दी,सेहो राज्यप्रमुखपर,से केओ साइते सोचने रहल होएत । मुदा भेल सएह । राज्यप्रमुखक इस्तिफाक समाचार सौंसे गनगना गेल । तकर बाद तँ जकरा जे मोन होइक से बाजए । "इस्तिफा देलासँ की हेतनि । जे पाप कएलाह अछि, ताहि आगू तँ ई किछु नहि अछि । हिनका तँ जहल जेबाक चाही ।" जतेक मुँह ततेक तरहक बात सुनबामे आबि रहल छलैक । मुदा नेताजीक खिलाफमे केओ एक शब्द नहि बजैक । मीडिआ तँ हुनकर आदर्श छवि प्रस्तुत करबामे जी-जानसँ लागि गेल छल । एना सन जेना ओ अगिला राज्यप्रमुख भइए गेलाह । भोरे भेने शक्तिपुरमक राजनीतिक परिदृश्य बदलि गेल छल । नेताजी राज्यप्रमुख बनताह ,से घोषणा टेलीवीजनपर वारंबार कएल जा रहल छल । ओ राजनीतिमे सुचिता अनताह,राज्यकेँ विकासक उत्कर्ष धरि पहुँचा कए रहताह,ककरो संग अन्याय नहि होबए देथिन,से वारंबार उद्घोषणा भए रहल छल। ततबे नहि,नारी सशक्तिकरण हेतु एकटा नवीन मंत्रालय  बनओताह जकर काज सोझे ओ स्वयं देखताह। नारी निकेतन कांडमे दोषी पाओल गेल ककरो नहि बकसताह,चाहे ओ कतबो पैघ आदमी ने होअए । राज्यकेँ बदलि कए रहताह । चाहे हुनकर जान रहनि की जानि । दिनभरि टेलीवीजनपर इएहसभ अबैत रहल। सौंसे माहौलमे नेताजीक छवि नीक करबाक प्रयास परिलक्षित भए रहल छल। हम,शक्तिनाथ आ संदीप अपन डेरासँ एहि समाचारसभकेँ देखि क्षुव्ध रही । देहमे जेना आगि लागि गेल होअए। मुदा करितहुँ की?  नेताजीक काट ताकब आसान काज नहि छल । हुनका संगे बहुमत छलनि आ लोकतंत्रमे बहुमतक कोनो काट नहि छैक । ओसभ जे चाहत सएह होएत। कानून ओकरे संग रहतैक । जरूरी पड़लापर ओ सभ कानूनकेँ बदलिओ देत जाहिसँ सभकिछु मनमाफिक भए सकत । ओमहर नेताजीक शपथग्रहण समारोह आयोजित भए रहल छल आ नारी निकेतनक सामनेमे जबरदस्त हंगामा पसरि गेल छल। जनक्रान्ति दलक कार्यकर्तासभपर दनादन लाठीक प्रहार पुलिस कए रहल छल। अश्रुगैस छोड़ल जा रहल छल । नेताजीक विरोध कए रहल प्रदर्शनकारीसभ जान लए भागि रहल छल । संदीपकेँ तँ प्रदर्शनकारीसभ अगुआ बनओने छल।  कतबो इसारा करिऐक जे मंत्रणा हेतु कोठरीमे आबए,ओ आबिए नहि पाबए। हंगामा बढ़िते जा रहल छल आ पुलिस सेहो पाछू नहि हटि रहल छल । लगैत छल जे किछु अनिष्ट भइए कए रहत । मामिला बिगड़ैत देखि पुलिस गोली चला देलक । कहि नहि कैक राउंड गोली चलल । कतेकोगोटे जमीनपर घायल पड़ल छल। लोकसभ जहाँ-तहाँ भागल । कैकगोटेकेँ पुलिस पछोड़ कए टांग-हाथ तोड़ि देलक । सायरन बजबैत रोगी वाहन आएल,फाएर ब्रिगेड आएल । पुलिस जमीनपर पसरल खूनकेँ साफ करबएमे लागि गेल । थोड़बे कालक बाद लगलैक जेना ओतए किछु भेले नहि होइक । देखिते-देखिते ओहिठाम नितांत एकांत पसरि गेल । ओही माहौलमे केओ बाजल- "शिखा हवाइ जहाजसँ शक्तिपुरम आबि रहल छथि ।" असलमे शक्तिपुरममे राजनीतिक घटनाक्रमसँ ओ उद्वेलित भए गेल छलि । जे असली दोषी छल से तँ राज्यप्रमुख बनि रहल छल । बेसक विजयपुरम जा कए ओ पुलिसमे प्राथमिकी दर्ज करबा सकलि मुदा परिणाम तँ उल्टे देखा रहल छलैक ।  जकरा जहलमे हेबाक चाहैक छलैक सएह राज्यप्रमुख बनए जा रहल छल। ई बात ओकरा बरदास नहि भए रहल छलैक । विजयपुरममे पुलिस ओकरा शक्तिपुरम जेबासँ मना करैत रहि गेल,मुदा ओ अड़ि गेलि आ शक्तिपुरम पहिल उपलव्ध हवाइ जहाजसँ पहुँचि गेलि । ई बात हमरा शक्तिनाथ सभसँ पहिने सूचित केलथि । 24 कहबी छैक जे एक तँ करैल ओहो नीमपर चढ़ल। सएह हाल नेताजीक रहनि। ओ तँ जन्मजात बदमास छलाहे। सभदिन लोककेँ ठकैत रहल,अपन स्वार्थ केना पूर्ति होएत ताहि ब्योंतमे लागल रहलाह। ककरो नीक होउक,बेजाए होउक हुनका कोनो मतलब नहि रहैत छलनि। मुदा लोकक सामनेमे तेना ने अभिनय करितथि जेना ओकर ओ सभसँ पैघ शुभचिंतक होइक । नेताजी शुरुएसँ एहि फिराकमे रहथि जे कहुना राज्यप्रमुखक कुर्सी हथिआ ली,तकर बाद देखल जेतैक । से मौका हुनका भेटिओ गेलनि । जनताक आक्रोशक समाचार सुनि ओ असगरमे ठहाका पाड़ि रहल छलाह। जेना जे किछु भए रहल अछि तकर हुनका कोनो परबाह नहि रहनि। "पैघ आदमीक ई सभ गहना छैक । थोड़े दिनक बात छैक, सभ पानिक बुलबुला जकाँ अपने खतम भए जाएत । ताबे चैनसँ दारू पिबल जेतैक । आओर किछु करबाक काज नहि ।" "नारी निकेतन कोनो आजुक अछि? एहन-एहन घटना तँ होइते रहलैक अछि । कहाँ कहिओ केओ विरोध केलक? किछु नवका छौंड़ासभ जनक्रान्ति दलक नामसँ समाजमे आगि लगाबए चाहैत अछि से हम होअए देबैक? कदापि नहि । आखिर हम राज्यप्रमुख छी कथीक लेल?" जखन ओकरा शिखाक शक्तिपुरम हवाइ अड्डापर पहुँचि जेबाक समाचार भेटलैक तँ ओ तुरंत पुलिसक आला अधिकारीसभकेँ ओकरा पाछू लगा देलाह। "कोनो हालतमे ओकरा हवाइ अड्डासँ बाहर नहि जाए देबाक छैक । ओ चाहए तँ विजयपुरम वापस चलि जाए, नहि तँ सोझे जहल जाए । राज्यमे आगि लगाबक स्वतंत्रता ओकरा नहि देल जा सकैत अछि ।" एहि आज्ञाक संगे पुलिस उच्च अधिकारीलोकनि हवाइ अड्डा पहुँचि गेल रहथि । हम,शक्तिनाथ आ संदीप सेहो हवाइ हड्ढापर शिखाक स्वागत करबाक हेतु पहुँचि गेल रही । हमरासभक संगे जनक्रान्ति दलक किछु कार्यकर्तासभ सेहो हवाइ अड्डाक बाहर झंडा लेने नारा लगा रहल छलाह- "शिखा जिंदाबाद । इनकिलाब, जिंदाबाद ।" किछुगोटे पताका  लेने छलाह-" अन्यायीसभक विनाश भए कए रहत ।" पुलिस रहि-रहि कए ओकरासभकेँ खिहाड़ि रहल छल। शिखाक हवाइ जहाज बड़ीकाल धरि आकाशमे घुमि रहल छल । ओकरा उतरबाक अनुमति नहि देल जा रहल छलैक। हवाइ जहाजमे बहुत सीमित मात्रामे इंधन बाँचल छल । हवाइ जहाजक चालक दल बहुत चिंतामे छल । ओ सभ वारंबार नियंत्रण कक्षकेँ संवाद पठा रहल छल । मुदा ओहोसभ की करितए? ऊपरसँ आज्ञा आएल छलैक। हवाइ जहाजक भीतर यात्रीसभ बेचैन छलाह । चालक दल बेर-बेर कहैक- "हमसभ जहाजकेँ उतारबाक आज्ञाक प्रतीक्षा कए रहल छी । चिंताक बात ई थिक जे हवाइ जहाजमे आब बहुत कम इंधन बाँचल अछि । देरी भेलापर किछु भए सकैत अछि।" यात्रीसभ बहुत परेसान भए गेल रहथि । शिखा तँ तामसे आगि भेल रहए । कखनो काल ओकरा अफसोचो होइक जे ओकरे कारणे आनो यात्रीसभक प्राणपर संकट आबि गेल छल । अंतमे चालक देल कंट्रोलरूमकेँ आपातकालीन सूचना देलकैक आ हवाइ जहाजकेँ उतारि देलक । कारण आओर देरी भेलासँ जहाजमे ऊपरेमे आगि लागि जाएत  । ककरो जान नहि बँचितैक । हवाइ जहाजकेँ उतरितहि ओकरा पुलसभ चारूकातसँ घेरि लेलक । ओकरसभक इच्छा इएह रहैक जे जँ शिखा हवाइ जहाजसँ उतरि कए बाहर निकलबाक प्रयास करैत अछि तँ ओतहिसँ जहलक रस्ता देखा देल जाएत । बाहर जनक्रान्तिदलक कार्यकर्त्तासभक हंगामा चलिए रहल छल । क्रमशः लोकक संख्यामे इजाफा भेल जा रहल छल । हम कतबो बुझेबाक प्रयास करिऐक,लोकसभ किछु सुनबे नहि करैक । किछु फुरेबे नहि करए जे आब की कएल जाए ? कहीं फेर अनिष्ट ने भए जाइक । हम आ शक्तिनाथ एही विषयसभपर मंत्रणा करैत रही । संदीप प्रदर्शनकारीसभकेँ सम्हारबामे लागल छल । एतबहिमे हवाइ जहाज घुसकल । घुसकैत-घुसकैत  मुख्य भवन धरि आबि गेल । ओहिठामसँ तँ पैरे बाहर आएल जा सकैत छल । शक्तिपुरम हवाइ अड्डा अछिए कतेकटा । मौका देखि शिखा हवाइ जहाजसँ उतरल आ एक-एक कए सभटा वस्त्र अपन देहसँ उतारए लागल । आब तँ गर्द पड़ि गेल । "हाँ, हाँ ई की कए रहल छी? "हौ लोकसभ! कहुना हिनका रोकह? ई तँ महा अनर्थ भए रहल अछि ।" लोकसभ शिखाकेँ बुझेबाक प्रयास करए । तरह-तरहक आश्वासन दिअए । मुदा शिखा सुनबाक हेतु तैयार नहि रहए । "की नाटक कए रहल छी? जखन शासनक सर्वोच्च शिखरपर असवार लोकसभ हमरा सन-सन कतेको महिलाकेँ नाङट करबाक हेतु दिन-राति लागल अछि तखन अहाँ सभक आश्वासनपर कतेक भरोसा कएल जा सकैत अछि?  " से कहि ओ हवाइपट्टीपर बैसि गेलि । हवाइ जहाजक आवागमन बाधित भए गेलैक । आकाशमे जहाजसभ चक्कर लगबैत रहल । मुदा उतरबाक अनुमति नहि भेटैक । चारूकात हाहाकार मचि गेल । हवाइ अड्डाक अधिकारीलोकनि परेसान छलाह । किछु फुरेबे नहि करनि जे की कएल जाए?सभ ओकरा बुझेबाक प्रयास कए रहल छल । मुदा ओ अड़ल छलि,अड़ल रहि गेलि । हमसभ एहि दृश्यकेँ देखैत रहि गेलहुँ । एहनो हेतैक से सपनहुमे नहि सोचने  रही। 25 बहुत मोसकिलसँ किछु महिला पुलिससभ शिखाकेँ हवाइपट्टीपरसँ उठओलक आ कतहु कात बाटे एकांत भवनमे लए गेलनि । शिखाक विद्रोहसँ सरकार हिलि गेल छल । नेताजी सभकाज छोड़ि एहि आगिकेँ मिझएबामे लागि गेलथि । मुदा शिखा अड़ल छलि । जाहिठामक सरकारेक  मुखिआ एहन होइक, लोककेँ जबरदस्ती नाङट करबाक हेतु दिन-राति एक केने होइक ताहिठाम ई नाटकसभ करबाक कोन प्रयोजन अछि? हमरा तंग नहि करू । जहिना छी,जे छी से रहए दिअ । नाटक छोड़ैत जाउ।" जखन शिखा अपन बातपर अड़ल रहि गेलि आ रहि-रहि कए खिड़की लग आबि जाए,ओहि कोठरीसँ भागि जेबाक प्रयास करए तखन महिला पुलिससभ चारूकातसँ घेरि लेलक आ ठामहि बैसल रहबाक हेतु मजबूर कए देलक । मुदा ओ तँ जेना सनकि गेल छलि । कैकटा महिला संगठनक अधिकारीलोकनिकेँ बजाओल गेल । शिखाकेँ तरह-तरहसँ बुझेबाक प्रयास भेल । केओ अपन प्रयासमे सफल नहि भेल । ताधरि बाहर हमसभ समर्थकक संगे अड़ल रही । बुझेबे नहि करए जे आखिर,भए की रहल अछि? शिखा बाहर किएक नहि आबि रहल अछि? हम आ शक्तिनाथ बाहर ठाढ़ छलहुँ । आपसमे किछु मंत्रणा कए रहल छलहुँ । ताबते पुलिसक किछु आला अधिकारी हमरासभ लग अबैत छथि । ओ सभ शिखाक विद्रोही स्वरुपसँ भयाक्रान्त छथि । ऊपरसँ बहुत दबाब पड़ि रहल छनि जे जल्दी एहि विवादकेँ खतम करू । अपना भरि ओ सभ प्रयास केबो केलाह। मुदा किछु नहि कए सकलाह । शिखा अडिग अछि । सभकेँ नाङट कए देबाक हेतु कटिवद्ध अछि । "अहींसभ हुनका बुझबिऔन । एना तँ समाज नहि चलि सकैत अछि । विरोधक ई तरीका तँ कानून सम्मत नहि अछि। हमरासभकेँ हारि कए किछु करहि पड़त ।" हम हुनका लोकनिकेँ की जबाब दितिअनि । तथापि,कहलिअनि- "जखन अहाँलोकनि सभटा उपाय कइए रहल छी आ एतेक शक्तिसंपन्न छी तखन हमरासभ लग की करए अएलहुँ अछि? हमसभ तँ बदनाम छीहे? मुदा एतबा नीकसँ बूझि लिअ जे नेताजीक पाप आब दबाओल नहि जा सकत । संपूर्ण समाज जागि गेल अछि। ओकर विनाश आब तय छैक ।" "अहाँसभ अपन राजनीति करैत रहब । मुदा एखन जे समस्या अछि तकर तँ किछु समाधान कए दिऔक।" "एकर समाधान हम की करबैक? हमरासभकेँ तँ नीकसँ बुझलो नहि अछि जे बात की भेलैक जाहि कारण ओ एतेक उग्र रूप धए लेलनि अछि ?" "कम सँ कम हुनका कहि सकैत छिअनि जे हवाइ अड्डासँ बाहर आबि जाथि। तकरबाद जे करबाक होनि से करिहथि?" "आ अहाँसभ चैनसँ पान-सुपारी खाइत रहब?" राति भरि मंत्रणाक चलैत रहल । शिखा अपन बातपर अड़ल छलि । दोसर दिन प्रतिनिधि सभाक सत्र प्रारंभ होइतैक । नेताजीक प्रयास रहैक जे ताहिसँ पहिने किछु समाधान भए जाइक। ताहि हेतु भरिसक प्रयास कएलो गेल । बड़का-बड़का हाकिमसभ लागल रहलाह ।  मुदा जखन शिखा टस सँ मस नहि भेलि तँ अधिकारीलोकनि हारि कए हमरासभ लग पहुँचलथि । हमहु की कए सकैत छलहुँ? जाबे शिखासँ गप्प नहि होइत ताबे ओकर मोनक बात कोना बुझितिऐक? आखिर अधिकारीलोकनि मोबाइलसँ हमरासभक गप्प शिखासँ करबओलनि । शिखा अपन बात किछु कहबाक बदला भोकासी पाड़ि कए कानए लागलि । हमरो ओकर स्थितिपर बहुत कष्ट भेल । शक्तिनाथ तँ उग्र भेल जा रहल छल । हम इसारासँ ओकरा रोकबाक प्रयास केलहुँ । ओमहर संदीपक हालत सेहो बहुत पस्त रहैक। प्रदर्शनकारीसभ लस्त पड़ि गेल छलाह । मामिला शांत हेबाक बदलामे गरमाइते जा रहल छल। "तखन कएल की जाए?" "शिखासँ आग्रह कएल जाए जे धैर्य राखए । ई कोनो व्यक्तिक समस्या नहि अछि। नेताजी सन-सन लोक समाजक कोढ़ अछि। ओ सभ बहुत जड़िआएल अछि । शासनमे प्रमुख स्थानपर बैसल अछि । तेहनमे तँ जँ हमसभ वुद्धिसँ काज नहि लेब तँ किछु नहि कए सकब । अस्तु, हमरासभकेँ शांतिपूर्वक विचारि कए काजकेँ आगू बढ़ेबाक होएत ।" ई बातसभ शिखा सुनलक । "मुदा हम एहि नेताजीक विनाश केने बिना अपन पूर्वरूपमे नहि आबि सकैत छी ।" "नहि आउ । मुदा समाजमे रहबाक हेतु ओकर नियमकेँ तँ मानहि पड़त । आखिर, हमरा लोकनिक आंदोलनो तँ समाजक बीचेमे आ समाजक कल्याणेक हेतु होएत ।" बहुत आग्रह केलापर ओ अपन निर्णयमे संशोधन करैत घोषणा केलक- "जाधरि एहि दुष्टसभक अंत नहि होएत हम आइसँ श्वेतवस्त्रा रहब।" हमरा लोकनिक प्रयाससँ पुलिसक आला अधिकारी लोकनिक जान मे जान अएलनि । एकटा महिला आगू बढ़ि कए ओकरा श्वेतवस्त्र देलकैक । ओ एकहिटा श्वेतवस्त्रकेँ ऊपरसँ नीचा धरि पहिरने हवाइ अड्डासँ बाहर भेलीह। देहमे आओर किछु नहि । मीडिआबलासभ सेहो एहि मौकाकेँ जाए देबए नहि चाहैत छल ।  तरातर हजारो फोटो खिंचा गेल । जकरा ककरो मोबाइल रहैक से चुकल नहि । पुलिसक सुरक्षामे ओ हमरासभक संगे जनक्रान्ति दलक मुख्यालय पहुँचि गेलीह । समर्थकलोकनि सेहो पाछू लागल ओतए आबि गेलथि । -रबीन्द्र नारायण मिश्र, पिताक नाम: स्वर्गीय सूर्य नारायण मिश्र, माताक नाम: स्वर्गीया दयाकाशी देवी, बएस: ६९ वर्ष, पैतृक ग्राम: अड़ेर डीह, मातृक: सिन्घिआ ड्योढ़ी, वृति: भारत सरकारक उप सचिव (सेवानिवृत्त), स्पेशल मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट, दिल्ली(सेवानिवृत्त), शिक्षा: चन्द्रधारी मिथिला महाविद्यालयसँ बी.एस-सी. भौतिक विज्ञानमे प्रतिष्ठा : दिल्ली विश्वविद्यालयसँ विधि स्नातक, प्रकाशित कृति: मैथिलीमे: प्रकाशन वर्षः२०१७ १.भोरसँ साँझ धरि (आत्म कथा),२. प्रसंगवश (निवंध), ३.स्वर्ग एतहि अछि (यात्रा प्रसंग); प्रकाशन वर्षः२०१८ ४. फसाद (कथा संग्रह) ५. नमस्तस्यै (उपन्यास) ६. विविध प्रसंग (निवंध) ७.महराज(उपन्यास) ८.लजकोटर(उपन्यास); प्रकाशन वर्षः२०१९ ९.सीमाक ओहि पार(उपन्यास)१०.समाधान(निवंध संग्रह) ११.मातृभूमि(उपन्यास) १२.स्वप्नलोक(उपन्यास); प्रकाशन वर्षः२०२० १३.शंखनाद(उपन्यास) १४.इएह थिक जीवन(संस्मरण)१५.ढहैत देबाल(उपन्यास); प्रकाशन वर्षः२०२१ १६.पाथेय(संस्मरण) १७.हम आबि रहल छी(उपन्यास) १८.प्रलयक परात(उपन्यास); प्रकाशन वर्षः२०२२ १९.बीति गेल समय(उपन्यास) २०.प्रतिबिम्ब(उपन्यास) २१.बदलि रहल अछि सभकिछु(उपन्यास) २२.राष्ट्र मंदिर(उपन्यास) २३.संयोग(कथा संग्रह) २४.नाचि रहल छलि वसुधा(उपन्यास) २५.दीप जरैत रहए (उपन्यास)। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.पद्य खण्ड ३.१.बद्रीनाथ राय-तीन टा गीत ३.२.प्रमोद झा 'गोकुल'-छूटल ठाम हेरायल गाम ३.३.राज किशोर मिश्र-सांस्कृतिक क्षरण ३.१.बद्रीनाथ राय-तीन टा गीत बद्रीनाथ राय तीन टा गीत १ गे बहिना वर हमर बड़ बुरिबक आऔर अनारी छै, मूर्खशिरोमणि कारी छै ना।.................. दूष्ट दहेजक हम छी मारल , यौवन जिबिते गेलै जारल। बुरिबक बात नञि बुझए, बापक आज्ञाकारी छै।। मूर्खशिरोमणि.... ......... एक त गोबर के छै चोत, हम छी लाजे लाहालोट। लाजक बात की कहियौ, नञि पुरूषे नञि नारी छै। । मूर्खशिरोमणि ... ......... . ... . यौवन छिन्न भेल निस्तेज, फाटए कोमल कोढ करेज। बुझए प्रणय निवेदन के नञि, पैघ बीमारी छै ।। मूर्खशिरोमणि..................... कहितो लाज लगइए भारी, अकिल के खोलए नञि अलमारी। बरही बिना ओजारक , वुद्धिक बन्द केबारी छै।। मूर्खशिरोमणि... ..... .. ............ करबै केकरा पर हम आश , बाहर पवन बहै उनचास। केकरा कहबै मनक बतिया, बड़ लाचारी छै।। मूर्खशिरोमणि ... ......... जहिना झरकल सन छै देह, हमरो जरलै सख सिनेह। विद्या पढने एक्कहि मात्र , मुदा भैंसबारी छै।। मूर्खशिरोमणि... ..... .......... शिक्षा पहला मे अछि फेल, हमरा चिन्हलक नञि बकलेल। नहिरा नीक लगइए, रहै जेना कुमारी छै।। मूर्खशिरोमणि...... ................. पौरूष रखने नञि जरलाहा , बथुआ साग सनक नरमाहा। यौवन धधकि रहल अछि, हमरा संङ लाचारी छै। मूर्खशिरोमणि ......................| २ गे बहिना वर हमर बड़ बुरिबक आऔर बकलेल छै, सासुर सेन्टर जेल छै ना देवर चारू काच कुमार,ससुरक साप सनक फुफकार। ननदी नाक कटाक' नङटिनीया सन भेल छै।। सासुर सेन्टर जेल छै ना... बर्तन मजिते देह खियाएल,साउसक बातो बेस पिजाएल। धनि ओ जुन्ना सन के ऐठलि आऔर विष वेल छै।। सासुर सेन्टर जेल .. .............. घर मे डर लगइए भारी,लागल नञि छै फटक केबारी। सबटा दूष्ट दहेजक कारण गड़बर भेल छै।। सासुर सेन्टर जेल छै ना... . . ....... ससुरक जेठ भाइ मुहझौसा, फूलल बेङ सनक अछि ढौसा। अगुआ आगि लगाक' सारा मे सूति गेल छै।। सासुर सेन्टर जेल ........ . ..............| मरए वरक बाप जे लोभी,ओ छथि देवक वेद विरोधी। स्रष्टा सृष्टी केलनि गड़बर आऔर बेमेल छै।। सासुर सेन्टर जेल छै ना... ............। ३ की कहियौ बहिना हम,ससुरा के हाल गे। साउस हमर सूर्पनखा,ससुर हमर काल गे। । गोतनी छै गोर मुदा, गौरवे छै आन्हर। ढेकरइए साढ सन, नह जेना नाहर ।। ननदी नटिनिया बड़ बजबै छै गाल गे। साउस हमर ..... ... देवर छै गोबर सन,कोयला सन काया। भैंसुर छै भैंसा सन निर्लज बेहाया।। कंठी पहिरी करै कौआ हलाल गे। साउस हमर .................. बाबू दहेज देलनि किनला अनारी। बुझए नञि बात बरद अवगुण छै भारी।। कोठी छै ढन ढन होय भूख हड़ताल गे। साउस हमर ..... .. ........ घर मे नञि चिक्कस,नञि कोठी मे चाउर छै। बारी मे ओल बहुत, उपजल खम्हाउर छै।। नोरे मे तरुआ तरै छी लाल लाल गे। साउस हमर ....... सरपंचो सासुर के,मौगा छै मुखिया। पेटु प्रमुख आओर डीलर छै दुखिया। । मेम्बर के पेट जेना,टंकी विशाल गे। साउस हमर ... .... .......... वर हमर बुरिबक सन, फर महकारी। भेलै विवाह देख,कोठा अटारी।। बिगरल व्यवहार हुनक,तेकरे मलाल गे। साउस हमर ............. ............ अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.२.प्रमोद झा 'गोकुल'-छूटल ठाम हेरायल गाम प्रमोद झा 'गोकुल' छूटल ठाम हेरायल गाम

सर सरोकार सब भेल तार तार गौवाँ घरुवा तक भेल अनचिन्हार संबन्धोमे नइं रहलै ओ प्रखर धार झक झक उघार घोंटि लाज विचार आठो याम अविराम जपय मंत्र सब हेरा फेरी। छूटलै गाम हेरयलै ठाम आम लताम झरबेरी ।। बहि रहलै सगरो उनटा बयार खेतोपथार भेलै अनचिनहार भाइ भाइ सङ करय तकरार स्वार्थक डंका बजय आर पार बेटा भातिज तैयार फोरैले कपार इरखा द्वेखक बाजार सजल छै सेर पसेरी। छूटलै ठाम हेरयलै गाम आम लताम झर बेरी।। दौड़ा दौड़ी झिझ्झुर कोना खेल कबड्डी बिलायल कोना अथरा बिथरा अटकन मटकन बनल किरकेटक मुहँ पोछना अतीतक द्वारि पर वर्तमानक जबर्दस्त पहरेदारी । छूटलै गाम हेरयलै ठाम आम लताम झरबेरी।। ग्रील बन्द घरक छै जोर लगन अपनेमे रहय सब मस्त मगन मतलबेमे चूड़ा दहीक ओठगन अतिथि अकच्छ गनथि तरेगन भैया भीतर बन्द अवाक बाहर भौजी करथि तक्काहेरी। छूटलै ठाम हेरयलै गाम आम लताम भरबेरी।। धियिपुता बपजेठ भेल मोबाइलक सङ सेट भेल कौवा सँ गेल बुधियार भेल असमये यौवन बहार भेल जे बूझल बत्तीसक बाद से ओकरा लेल एखने रसभरी। छूटलै ठाम हेरयलै गाम आम लताम झरबेरी।।

-प्रमोद झा 'गोकुल', दीप,मधुबनी, (बिहार), फोन-9871779851 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.३.राज किशोर मिश्र-सांस्कृतिक क्षरण राज किशोर मिश्र, रिटायर्ड चीफ जेनरल मैनेजर (ई), बी.एस.एन.एल.(मुख्यालय), दिल्ली,गाम- अरेर डीह, पो. अरेर हाट, मधुबनी सांस्कृतिक क्षरण

'जँ, संस्का र केँ अपनहि तो ड़ब, ओकरा के दो सर बचा ओत? संस्कृति -जड़ि जॅं सूखत तऽ, दो सर के , जल सँ, जुडा़ ओत?

जतऽ जेबा क हो अए ,अवश्य जा उ, न्यूया र्क, पेरि स, लंडन, कतहु रही , मुदा बि सरी नहि , वि द्या पति , उदयन, मंडन।

बढ़ू, चढ़ू उन्नति क अका स, फहरा उ ओतहु भा रतक ध्वजा , रहए ति रंगा सभ सँ ऊपर, सभदेशक धुजा केँ ,ओ रा जा ।

जे नहि करथि अपन संस्कृति क', अपनहि मा न -दा न, एहेन लो क पा बथि ने कत्तहु , अपनो लेल, सम्मा न।

नि ज सुप्रथा , सुपरम्परा , पि आबैछ , अस्मि ता केँ पी यूष , हम सभ सजग रखबा र रहब, तऽ,दुसत ने तखन को नो मनहूस।

नी कक' देखा उसि तऽ नी क बा त, मुदा , खगतो बि नु,नुनहि ली पैँच,री न, अपना बऽल पर स्वा भि मा न, पो सी कि ए को नो बा त ही न?

नहि ऊघी , ह्रदयस्थ हो संस्का र, जकरहि आभा सँ, चमकए कपा र। बैसू, कतबो महग गा ड़ी मे , दुरा गमनक शो भा , महफा -कहा र।

वि देशी गी तक हो -हल्ला सँ, नहि भेटत ओ मो नक सुकून, लो कगी त, भा रती य संगी त, अछि जा हि मे ,मा धुर्य-रस- गुण।

चूड़ा -दही क को न अपरा ध? सो अदगर नहि की , पुडु़किआ, खजूर? पैकिं ग जँ बढ़ि आँ कए देल जा ए, तऽ,बर्गर बेका रे घमंड मे चूर।

अपन भेख, आ अपन भा खा , सुंदर कतेक,नि ज परम्परा ! भा रत के मा टि क जे सुगंधि , भेटत ने,ता कू सगर धरा ।

पेरि स मे हो न्हि बरक चुमा ओन , पहि रा कऽ दो पटा -पा ग, तऽ,खसत प्रति ष्ठा नहि ओहि सँ, ला गत ने कलंकक' दा ग।

अपन संस्कृति क करब जय तऽ, अपनो हो बा हर ,हो एत जय, खा म्ह ठी क जँ नहि रहतै तऽ, कथी पर घर, कहू टि कतै? अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। विदेह ३७६ म अंक १५ अगस्त २०२३ (वर्ष १६ मास १८८ अंक ३७६)|| 25 24 || http://www.videha.co.in/ ISSN 2229-547X VIDEHA

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