ISSN 2229-547X VIDEHA 𑒀 विदेह ३७७ म अंक ०१ सितम्बर २०२३ (वर्ष १६ मास १८९ अंक ३७७) [विदेह (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) www.videha.co.in ] विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। ऐ पोथीक सर्वाधिकार सुरक्षित अछि। कॉपीराइट (©) धारकक लिखित अनुमतिक बिना पोथीक कोनो अंशक छाया प्रति एवं रिकॉडिंग सहित इलेक्ट्रॉनिक अथवा यांत्रिक, कोनो माध्यमसँ, अथवा ज्ञानक संग्रहण वा पुनर्प्रयोगक प्रणाली द्वारा कोनो रूपमे पुनरुत्पादन अथवा संचारन-प्रसारण नै कएल जा सकैत अछि। (c) २०००- २०२३. सर्वाधिकार सुरक्षित। भालसरिक गाछ जे सन २००० सँ याहूसिटीजपर छल http://www.geocities.com/.../bhalsarik_gachh.html , http://www.geocities.com/ggajendra आदि लिंकपर आ अखनो ५ जुलाइ २००४ क पोस्ट http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html केर रूपमे इन्टरनेटपर मैथिलीक प्राचीनतम उपस्थितक रूपमे विद्यमान अछि (किछु दिन लेल http://videha.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html लिंकपर, स्रोत wayback machine of https://web.archive.org/web/*/videha 258 capture(s) from 2004 to 2016- http://videha.com/ भालसरिक गाछ-प्रथम मैथिली ब्लॉग / मैथिली ब्लॉगक एग्रीगेटर)। ई मैथिलीक पहिल इंटरनेट पत्रिका थिक जकर नाम बादमे १ जनवरी २००८ सँ ’विदेह’ पड़लै। इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि, जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। (c)२०००- २०२३. विदेह: प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004). सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। Editor: Gajendra Thakur. In respect of materials e-published in Videha, the Editor, Videha holds the right to create the web archives/ theme-based web archives, right to translate/ transliterate those archives and create translated/ transliterated web-archives; and the right to e-publish/ print-publish all these archives. रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना/ संग्रह (संपूर्ण उत्तरदायित्व रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता मध्य) editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ पठा सकैत छथि, संगमे ओ अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो सेहो पठाबथि। एतऽ प्रकाशित रचना/ संग्रह सभक कॉपीराइट रचनाकार/ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि आ जतऽ रचनाकार/ संग्रहकर्त्ताक नाम नै अछि ततऽ ई संपादकाधीन अछि। सम्पादक: विदेह ई-प्रकाशित रचनाक वेब-आर्काइव/ थीम-आधारित वेब-आर्काइवक निर्माणक अधिकार, ऐ सभ आर्काइवक अनुवाद आ लिप्यंतरण आ तकरो वेब-आर्काइवक निर्माणक अधिकार; आ ऐ सभ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार रखैत छथि। ऐ सभ लेल कोनो रॉयल्टी/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै, से रॉयल्टी/ पारिश्रमिकक इच्छुक रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता विदेहसँ नै जुड़थु। विदेह ई पत्रिकाक मासमे दू टा अंक निकलैत अछि जे मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ www.videha.co.in पर ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। Videha eJournal (link www.videha.co.in) is a multidisciplinary online journal dedicated to the promotion and preservation of the Maithili language, literature and culture. It is a platform for scholars, researchers, writers and poets to publish their works and share their knowledge about Maithili language, literature, and culture. The journal is published online to promote and preserve Maithili language and culture. The journal publishes articles, research papers, book reviews, and poetry in Maithili and English languages. It also features translations of literary works from other languages into Maithili. It is a peer-reviewed journal, which means that articles and papers are reviewed by experts in the field before they are accepted for publication. Font/ Keyboard Source: https://fonts.google.com/ , https://github.com/virtualvinodh/aksharamukha-fonts , https://keyman.com/ These are print-on-demand books, send your queries to editorial.staff.videha@gmail.com. The eBooks of some of these are available for sale on Google Play [(c) Preeti Thakur, sales.videha@gmail.com], send your queries to sales.videha@gmail.com. The contents and documents e-published by Videha (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) are periodically being checked for accessibility issues. People with disabilities should not have difficulty accessing these contents/ documents. © Preeti Thakur (sales.videha@gmail.com) Videha e-Journal: Issue No. 377 at www.videha.co.in समानान्तर परम्पराक विद्यापति- चित्र विदेह सम्मानसँ सम्मानित श्री पनकलाल मण्डल द्वारा मैथिली भाषा जगज्जननी सीतायाः भाषा आसीत्। हनुमन्तः उक्तवान- मानुषीमिह संस्कृताम्। अक्खर खम्भा (आखर खाम्ह) तिहुअन खेत्तहि काञि तसु कित्तिवल्लि पसरेइ। अक्खर खम्भारम्भ जउ मञ्चो बन्धि न देइ॥ (कीर्तिलता प्रथमः पल्लवः पहिल दोहा।) माने आखर रूपी खाम्ह निर्माण कऽ ओइपर (गद्य-पद्य रूपी) मंच जँ नै बान्हल जाय तँ ऐ त्रिभुवनरूपी क्षेत्रमे ओकर कीर्तिरूपी लत्ती केना पसरत। शुक्ल यजुर्वेद (२६.२)-यथेमां वाचं कल्याणीमावदानि जनेभ्यः। ब्रह्मराजन्याभ्यां शूद्राय चार्याय च स्वाय चारणाय च।।हम सभ गोटेकें ई पवित्र वाणी (वेदवाणी) सुनाबी। ब्राह्मणकें, क्षत्रियकें, शूद्रकें आ आर्यकें; अपन लोककें आ अपरिचितकें सेहो (माने सभकें)। मुदा ऐ वेदवाक्यक विपरीत मनुस्मृति वेदवाणीक अध्ययन/ श्रवणकें समाजक किछु गोटे लेल निषेध करऽ चाहलक, मुदा स्मृति सेहो वेदवाक्यकें प्रमाण मानैत अछि (शब्द प्रमाण) तें तकर विरुद्ध देल ओकर निर्देश स्वयं अमान्य भऽ जाइत अछि। Do not judge each day by the harvest you reap but by the seeds that you plant. -Robert Louis Stevenson ------------------------------------- Videha: Maithili Literature Movement 𑒀 ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्ष ग्वंग शान्ति: 𑓇 𑒠𑓂𑒨𑒾: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑒢𑓂𑒞𑒩𑒱𑒏𑓂𑒭 𑓅 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱: अनुक्रम ऐ अंकमे अछि:- १.१.गजेन्द्र ठाकुर- नूतन अंक सम्पादकीय १.२.अंक ३७६ पर टिप्पणी २.गद्य खण्ड २.१.परमानन्द लाल कर्ण- गीता माहात्म्य (आगाँ) २.२.आचार्य रामानंद मंडल-मित्रता:समाने सोभते प्रीति (मित्रता पर विमर्श) २.३.लालदेव कामत-बदलैत गाम/ संस्कृतक विद्वान डॉ. रविन्द्र नारायण चौरसिया/ मैनेजर स्व०मखसुदन भंडारी/ अमर शहीद रामफल मंडल/ बहिर्मुखी कामैत कौम/ सुखल मन तरसल आँखि २.४.निर्मला कर्ण- अग्नि शिखा (खेप-२६) २.५.नन्द विलास राय-घसवहिनी २.६.कुमार मनोज कश्यप- लघुकथा- कुकर्म किंवा सुकर्म २.७.रबीन्द्र नारायण मिश्र-बदलि रहल अछि सभकिछु (उपन्यास)- धारावाहिक २.८.रबीन्द्र नारायण मिश्र- जय महाकाल ३.पद्य खण्ड ३.१.पवन मिश्र 'गोनौली'- ओ जमाना किछु आओर छल ३.२.आचार्य रामानंद मंडल- इ धरती छई/ हम मिथिला छी/ नायक छी हम ३.३.राज किशोर मिश्र-आफद ३.४.आशीष अनचिन्हार- २ टा गजल ३.५.कल्पना झा- राखी 𑒀 ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्ष ग्वंग शान्तिः पृथ्वी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति वनस्पतय: शान्तिर्विश्वे देवा: शान्तिर्ब्रह्म 𑓇 𑒠𑓂𑒨𑒾: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑒢𑓂𑒞𑒩𑒱𑒏𑓂𑒭 𑓅 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑓁 𑒣𑒵𑒟𑓂𑒫𑒲 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑒰𑒣: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑒼𑒭𑒡𑒨: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱 𑒫𑒢𑒮𑓂𑒣𑒞𑒨: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑓂𑒫𑒱𑒬𑓂𑒫𑒹 𑒠𑒹𑒫𑒰: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑓂𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧 ब्रह्मणसँ प्रार्थना जे द्युलोकमे, अंतरिक्षमे, पृथ्वीपर, जलमे, औषधमे, वनस्पतिमे, विश्वमे, सभ देवतागणमे आ ब्रह्ममे शांति हुअय। ॐ-ब्रह्मण, द्यौ-सूर्य-तरेगण, अंतरिक्ष- पृथ्वी आ द्यूलोकक बीच, आप:-जल, विश्वेदेवा- सभ देवता, ब्रह्म- सर्जक। 𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧𑒝𑒮𑒿 𑒣𑓂𑒩𑒰𑒩𑓂𑒟𑒢𑒰 𑒖𑒹 𑒠𑓂𑒨𑒳𑒪𑒼𑒏𑒧𑒹, 𑒁𑓀𑒞𑒩𑒱𑒏𑓂𑒭𑒧𑒹, 𑒣𑒵𑒟𑓂𑒫𑒲𑒣𑒩, 𑒖𑒪𑒧𑒹, 𑒎𑒭𑒡𑒧𑒹, 𑒫𑒢𑒮𑓂𑒣𑒞𑒱𑒧𑒹, 𑒫𑒱𑒬𑓂𑒫𑒧𑒹, 𑒮𑒦 𑒠𑒹𑒫𑒞𑒰𑒑𑒝𑒧𑒹 𑒂 𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧𑒧𑒹 𑒬𑒰𑓀𑒞𑒱 𑒯𑒳𑒁𑒨। 𑓇-𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧𑒝, 𑒠𑓂𑒨𑒾-𑒮𑒴𑒩𑓂𑒨-𑒞𑒩𑒹𑒑𑒝, 𑒁𑓀𑒞𑒩𑒱𑒏𑓂𑒭- 𑒣𑒵𑒟𑓂𑒫𑒲 𑒂 𑒠𑓂𑒨𑒳𑒪𑒼𑒏𑒏 𑒥𑒲𑒔, 𑒂𑒣:-𑒖𑒪, 𑒫𑒱𑒬𑓂𑒫𑒹𑒠𑒹𑒫𑒰- 𑒮𑒦 𑒠𑒹𑒫𑒞𑒰, 𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧- 𑒮𑒩𑓂𑒖𑒏। 𑒀 ॐ, स॒हस्र॑शीर्षा॒ पुरु॑षः। स॒ह॒स्रा॒क्षः स॒हस्र॑पात्। 𑓇, 𑒮↓𑒯𑒮𑓂𑒩↑𑒬𑒲𑒩𑓂𑒭𑒰↓ 𑒣𑒳𑒩𑒳↑𑒭𑓁। 𑒮↓𑒯↓𑒮𑓂𑒩𑒰↓𑒏𑓂𑒭𑓁 𑒮↓𑒯𑒮𑓂𑒩↑𑒣𑒰𑒞𑓂। स भूमिं॑ ग्वंग वि॒श्वतो॑ वृ॒त्वा। अत्य॑तिष्ठद् दशाङ्गु॒लम्॥ 𑒮 𑒦𑒴𑒧𑒱𑓀↑𑓅 𑒫𑒱↓𑒬𑓂𑒫𑒞𑒼↑ 𑒫𑒵↓𑒞𑓂𑒫𑒰। 𑒁𑒞𑓂𑒨↑𑒞𑒱𑒭𑓂𑒚𑒠𑓂 𑒠𑒬𑒰𑒓𑓂𑒑𑒳↓𑒪𑒧𑓂॥ हजार माथ, हजार आँखि, हजार पएर संग विश्वकेँ आच्छादित केने अछि, दस आंगुरक गनतीक वशमे नै अछि ओ। प॒द्भ्याग्ँ॑ शू॒द्रो अ॑जायत॥ 𑒣↓𑒠𑓂𑒦𑓂𑒨𑒰𑒑𑓂𑒿↑ 𑒬𑒴↓𑒠𑓂𑒩𑒼 𑒁↑𑒖𑒰𑒨𑒞॥ पएरसँ शूद्रक उत्पत्ति भेल॥ प॒द्भ्यां भूमि॒र्दिशः॒ श्रोत्रा᳚त्। 𑒣↓𑒠𑓂𑒦𑓂𑒨𑒰𑓀 𑒦𑒴𑒧𑒱↓𑒩𑓂𑒠𑒱𑒬𑓁↓ 𑒬𑓂𑒩𑒼𑒞𑓂𑒩𑒰↑↑𑒞𑓂। मुदा पएरेसँ भूमियोक उत्पत्ति। ❀ (White Florette- innocence and purity) ☸ (Wheel of Dharma) ࿕(Swastik) ꣼ (सिद्धिरस्तु, सिद्धम 𑒮𑒱𑒠𑓂𑒡𑒱𑒩𑒮𑓂𑒞𑒳, 𑒮𑒱𑒠𑓂𑒡𑒧 Devanagari Anji) 𑓅 (Gwang ग्वंग- two small circles connected by u and a dot placed over it, used in reference of Vedic texts) 𑒀 (Tirhuta Anji, Ankush of Ganeshji, placed at the beginning of something) 𑒀
१.१.गजेन्द्र ठाकुर- नूतन अंक सम्पादकीय १.२.अंक ३७६ पर टिप्पणी १.१.गजेन्द्र ठाकुर- नूतन अंक सम्पादकीय झोली पासवान लऽ कऽ आयल छथि अपन पहिल काव्य संग्रह ’अक्षय पात्र’। प्रजातंत्रक रीढ़ शिक्षाक दुर्गतिपर ओ चिन्तित छथि, जंगल बोन कटलासँ अमंगल देखि रहल छथि। मुदा ’कर्णेषु प्रिय’ मे ध्वनि तरंग द्वारा मानवता आ बन्धुत्व भाव भरल जेबासँ आह्लादित सेहो छथि। प्रकृतिपर ’आएल बादल’ पद्य सेहो लिखै छथि। दार्शनिक कविता मे ’रंग मंच’ पद्य बिम्बात्मक अछि। ’कामिनी’ शृंगार रस पर अछि, विद्यापति मोन पाड़ि दइ छथि जखन ओ कहै छथि- मेघमे बिजुरीक रेखा/ दिगदिगन्त धरि छिटकल। ’बीनल जाल’ मे ओ बहुजन समाजक शैतानक बनल जालमे फँसल रहबाक प्रति सजगताक अनुभव करबैत छथि। बाल कवितामे ’बौआ’ क चर्चामे हुनका कखनो ओ राम, कखनो कृष्ण, कखनो रहमान आ कखनो यीसू मसीह सन देखाइत छन्हि, बच्चा तँ भगवानक रूप होइते अछि। ’पसरल निरासा’ कोरोना महामारीपर अछि। ’उपदेशक’ मे सौंसे सह-सह करैत धर्म उपदेशक आ गली-गलीमे वैद्यक उपस्थितिक अछैत अधर्म आ जादूटोनाक बढ़ैत जेबापर ओ विचार करै छथि, अंग्रेजक बदला नेता सभ सह-सह करैत अछि मुदा जनताकें नेतृत्व विहीन पबै छथि। झोली पासवानक ’अक्षय पात्र’ एहन पात्र अछि जइमेसँ कतबो भोजन, पकमान, मर-मधुर निकालू ओ कहियो सधत नै। -Gajendra Thakur, editor, Videha (be part of Videha www.videha.co.in -send your WhatsApp no to +919560960721 so that it can be added to the Videha WhatsApp Broadcast List.) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। १.२.अंक ३७६ पर टिप्पणी प्रेमकान्त चौधरी, गुवाहाटी गजेंद्र बाबू नमस्कार अपने अदभुत काज करैत छी। भाषा साहित्य संस्कृति संस्कार के रक्षक छी। जय हो। आशीष अनचिन्हार अंक ३७६ मे लाल देव कामतजीक छोट-छोट टिप्पणी कारगर अछि। परमानंद लाभजीक गीता माहात्म्य तिरहुता लिपि लेल नीक पहल अछि। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.गद्य खण्ड २.१.परमानन्द लाल कर्ण- गीता माहात्म्य (आगाँ) २.२.आचार्य रामानंद मंडल-मित्रता:समाने सोभते प्रीति (मित्रता पर विमर्श) २.३.लालदेव कामत-बदलैत गाम/ संस्कृतक विद्वान डॉ. रविन्द्र नारायण चौरसिया/ मैनेजर स्व०मखसुदन भंडारी/ अमर शहीद रामफल मंडल/ बहिर्मुखी कामैत कौम/ सुखल मन तरसल आँखि २.४.निर्मला कर्ण- अग्नि शिखा (खेप-२६) २.५.नन्द विलास राय-घसवहिनी २.६.कुमार मनोज कश्यप- लघुकथा- कुकर्म किंवा सुकर्म २.७.रबीन्द्र नारायण मिश्र-बदलि रहल अछि सभकिछु (उपन्यास)- धारावाहिक २.८.रबीन्द्र नारायण मिश्र- जय महाकाल २.१.परमानन्द लाल कर्ण- गीता माहात्म्य (आगाँ) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.२.आचार्य रामानंद मंडल-मित्रता:समाने सोभते प्रीति (मित्रता पर विमर्श) आचार्य रामानंद मंडल- मित्रता:समाने सोभते प्रीति (मित्रता पर विमर्श) मित्रता:समाने सोभते प्रीति (मित्रता पर विमर्श) सभ से पहिले रामायणकालीन मित्रता पर। प्रथम कथा के अनुसार मित्र केवट।ओहो दास भाव मे रहैत हतन आ मित्र राम के गोर धो के परिवार सहित पिवैत हतन। कोनो मित्रता के समान भाव न अपना के हमेशा निच मानैत हतन। मित्र राम के प्रभू मानैत रहलन।राम क्षत्रिय त केवट शूद्र रहलन। मित्रता मे समान भाव के अभाव दिखैत हय। दोसर कथा ।प्रसंग हय राम आ सुग्रीव के मित्रता पर।अइ मित्रता मे सुग्रीव के बड़ भाई बालि मारल जाइ हय। मित्रता के बुनियाद दुश्मन बड भाई बालि के हत्या।जे मित्र राम करैत हतन।बाद मे राम के पत्नी के खोज मे मित्र सुग्रीव करैत हतन। मित्र सुग्रीव मित्र राम के प्रभु से संबोधित करैत हतन।आ दास भाव मे रहैत हतन।बालि के मृत्यु के बाद हुनकर पत्नी अर्थात भौजी तारा से बिआह करैत हतन आ किष्किन्धाराज के राजा बनैत हतन। मित्रता मे समान भाव के अभाव परिलक्षित होइ हय। महाभारतकालीन प्रथम कथा। सुदामा आ कृष्ण।मित्र ब्राह्मण सुदामा के मित्र यादव कृष्ण सिंहासन पर बैठावत हतन आ गोर धोएत हतन। कृष्ण के रानी सत्यभामा आ रूक्मिणी बेना हौंकैत हतन। दोसर कथा मित्रता के एकटा मिशाल हय अंगराज कर्ण आ सुयोद्धन के मित्रता।शुद्र कर्ण के वीरता से प्रभावित होके अंगराज्य के राजा बना देल जाइत हय।आ मित्रता के बलिबेदी पर कर्ण अप्पन प्राण न्यौछावर कर देले हतन। मित्रता मे समान भाव दिखाई पड़ैय हय। जौं वर्ण-व्यवस्था के अनुसार विमर्श कैल जाय त उच्च वर्ण के निम्न वर्ग गोर धोएत हतन।चाहे वो क्षत्रिय राम आ शुद्र केवट होय वा ब्राह्मण सुदामा आ यादव (शूद्र) कृष्ण। भगवान कृष्ण के सोल्हकन मानल जाइत हय। महाभारत के केगो प्रसंग में हुनकर जाति के लेके मजाक उड़ायल गेल हय।कर्ण (अपग्रेडेड क्षत्रिय) आ सुयोद्धन दूनू क्षत्रिय।गोर धोय के कोनो प्रसंग न हय। जौं भगवान आ भक्त के रूप मे विमर्श कैल जाय त भगवान राम आ भक्त केवट। भगवान राम बड़ आ भक्त केवट नीच दिखाई पड़ैय हय।भगवान कृष्ण आ भक्त सुदामा के रुप मे भगवान से बड़ा भक्त दिखाई पड़ैय हय। मित्र सुदामा मित्र कृष्ण के नजदीक नीच न दिखाई पडैय हय। कर्ण आ सुयोद्धन के बीच भगवान आ भक्त के कोई संबंध न हय । कोनो उच्च -नीच न हय।मित्रता के समान भाव दिखाई पड़ैय हय। निष्कर्षत: राम आ केवट, कृष्ण आ सुदामा। भगवान आ मानव के बीच मित्रता हय। परंतु कर्ण आ सुयोद्धन के बीच मानव -मानव के मित्रता हय। मित्रता मे समान भाव आवश्यक तत्व हय। समाने सोभते प्रीति। -आचार्य रामानंद मंडल सामाजिक चिंतक सह साहित्यकार सीतामढ़ी।
-आचार्य रामानंद मंडल सामाजिक चिंतक सीतामढ़ी,सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक, माता-चन्द्र देवी, पिता-स्व०राजेश्वर मंडल, पत्नी-प्रमिला देवी, जन्म तिथि-०१ जनवरी १९६० योग्यता- एम-एससी (रसायन शास्त्र), एम ए (हिन्दी)। रूचि- साहित्यिक, मैथिली-हिन्दी कविता -कहानी लेखन आ आलेख। प्रकाशित पोथी - मैथिली कविता संग्रह भासा के न बांटियो। २०२२ प्रकाशित रचना - सझिया कविता संग्रह पोथी - जनक नंदिनी जानकी आ शौर्य गान। २०२२ पत्रिका -मिथिला समाज, घर -बाहर आ अपूर्वा (मैसाम)। अखबार -दैनिक मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश। सामाजिक-सामाजिक चिंतन, दायित्व- पूर्व जिला प्रतिनिधि, प्राथमिक शिक्षक संघ, डुमरा, सीतामढ़ी। स्थायी पत्ता- ग्राम-पिपरा विशनपुर थाना-परिहार जिला-सीतामढी। वर्तमान पता-पिपरा सदन,मुरलियाचक वार्ड-04 सीतामढ़ी पोस्ट-चकमहिला जिला-सीतामढी राज्य-बिहार पिन-843302 मो नं-9973641075 ईमेल-ramanandmandal001@gmail.com ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.३.लालदेव कामत-बदलैत गाम/ संस्कृतक विद्वान डॉ. रविन्द्र नारायण चौरसिया/ मैनेजर स्व०मखसुदन भंडारी/ अमर शहीद रामफल मंडल/ बहिर्मुखी कामैत कौम/ सुखल मन तरसल आँखि लालदेव कामत-बदलैत गाम/ संस्कृतक विद्वान डॉ. रविन्द्र नारायण चौरसिया/ मैनेजर स्व०मखसुदन भंडारी/ अमर शहीद रामफल मंडल/ बहिर्मुखी कामैत कौम/ सुखल मन तरसल आँखि १ बदलैत गाम कालीदास विद्यापति साइंस काॅलेज, उच्चेठ - बेनीपट्टी (मधुबनी) केर प्रधानाचार्य डाॅ० शुभ कुमार वर्णवाल रचित ६१ गोट मैथिली काव्यके संग्रह " बदलैत गाम " पढबाक सुअवसर भेटल। एहि १४३ पृष्ठ 'क २०२२ ई० मेँ पल्लवी प्रकाशनक पोथीक दाम तीन सय टाका अछि। सद्यप्रकाशित एहि मैथिली भाषा मेँ पोथी क' आवरण पृष्ठ पर ग्रामीण क्षेत्रक परिवेश आकर्षक देखाईछ। पोथीक पछिला कॅभर पर कविवर महोदय के सचित्र छवि - व्यक्तित्वक परिचय छन्दमे देल गेल छैक। श्रीमान वर्णवाल जी सन् २००७ सँ मैथिली कविता रचवाक दिस उन्मुनेलाह,ताहि सँ पूर्व ओ हिन्दी भाषा क्षेत्रमे काज करैत धरि हिन्दी कविता संग्रह " शुभ कल्प " पोथी निकालि चुकल छलाह। ओना वर्णवाल जी भूगोल विषयके प्राध्यापक रहल छथि। तेँ हिनक नव कविता मे भूगोलीय - खगोलीय छँटा देखबाक जतन करी। सद्यह हिनका कविता मे छन्द,अलंकार, रस तँ छन्हि मुदा तुकबंदी सबठाम नहिं मिलैत छैक। तैयो पहिल मातृभाषामे पोथी ' बदलैत गाम ' एक अभिनव प्रयोगक दस्तावेज थीक। गाम समाजमे जे परिदृश्य अखनो बाँचल अछि आओर पैछमी सभ्यता सँ सम्पृक्त नहिं भेल अछि से निशन लोकाचार मादे कविता गढ़िकय कविवर महोदय साहित्य क्षेत्र मे पैघौत पौलनि अछि। बदलैत गाम 'क रचनाकार डॉ ० वर्णवाल जीक संदर्भ मे अपना शुभाशंसामे कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति श्री शशि नाथ झा लिखने छथि - "मैथिली कविता संग्रह मे डाॅ० शुभ कुमार वर्णवाल क' स्वरचित विविध भाव'क कविता संग्रहीत अछि । विशेष कय गाम घरक माँटि पानिक सौरभ सँ ई मह- मह कए रहल अछि।" किछु कविता के ओ विशेष रूप सँ सराहलनि अछि,यथा-: राष्टभावना, अतिथि सत्कार, मिथिला,गंगा, पर्यावरण,करोना,सुनामी, दाही, रौदी , भूकम्प, आतंकवाद। मधुबनी सँ प्रो० जेपी. सिंह जी अपन शुभोद्गार मेँ कहैत छथि- " डाॅ० शुभ कुमार वर्णवाल जीक कविता मे ज्वलंत समस्या स्वयं रूप ल' लैत छैक। भूगोलविद् डाॅ० वर्णवाल जी सँ समाजक भूगोल दुर नहिँ भय सकैछ। समस्याक ध्वन्यात्मक आ गीतात्मक अभिव्यक्ति हिनक कविताक विशेषता अछि। आधुनिक सभ्यता ग्राम संस्कृति केँ निगलैक प्रयास करैत छैक। एखनो संवेदनशील व्यक्ति गामकेँ नहिं बिसरि सकैत अछि।" खेत'क ई एकपेड़िया पीपड़क छाँव ! भैया बिसरि गेलहुँ अप्पन ई गाँव !! अपन शुभोक्तिमे प्रो०(डॉ०) टुनटुन झा 'अचल ' सेवानिवृत्त विश्वविद्यालय प्रचार्य एवं विभागाध्यक्ष स्नातकोत्तर भुगोल विभाग लनामिविवि० दरभंगा सह पूर्व अध्यक्ष , बिहार - झारखण्ड भूगोल परिषद - पटना लिखैत छथि -: ' बदलैत गाम ' काव्य संग्रह मे अधिकांश कविता गेय अछि। वस्तुत: कविता जखन संगीत केर चाशनीमे लपेट देल जाइत अछि त' अति माधुर्यक संग लोकप्रिय बनि जाइछ । हम हृदय सँ आशिर्वाद दैत अभिव्यक्त क' रहल छी जे डाॅ० ' शुभ' माँ मैथिलीक' सेवा मे निरन्तर अपन लेखनी चलबैत रहथि ताकि वर्तमान आ भविष्यक पीढ़ी लाभान्वित होइत रहए। चरैवेति.......चरैवेति.... ! कविक ' पावन मिथिला धाम ' वाचन करैत अपने पाठक देख सकब जे एहि धराधाम पर अतितमे जनक, याज्ञवल्क्य, भारती - मण्डन , उदयन, विद्यापति, शिव रूप उगना, अयाची , राष्ट्रकवि दिनकर, जगजननी सीया, दीना-भदरी, लोरिक दुलरा, राजा सलहेसक गौरवगाथा सँ भरल अछि। कवि पाँति ऐ तरहेँ रचलनि अछि। यथा- ............. पग-पग पोखरि ताल- तलैया नामी माछ - बखान सुन्नरि वाला सुन्नरि शाला पान भरल मुख आम । परम प्रिय .............!! अपना देशमे ७०प्रतिशत कृषि काजमे संलग्न कृषक आ खेतिहर मजदूरक अबदशा पर चिंता करैत कविजी ' पीड़ा - दर्द किसानक मुख' कविता 'क रचना कयलनि। एहिमे किसानक प्रमुख समस्या आ तकर समाधान धरि रेखांकित क' सरकारके कठघरामे ठाढ़ करैत छथि।एहिक पाँति द्रष्टव्य -: ............... खेती देशक रीढ़ कहाबैछ अछि किसान देशक कंगाल; ऋण सँ दबल आत्महत्या करैछ घर - गृहस्थिक हाल - बेहाल। .................. कवि जी ' वाढ़ि - सुखारक नैहर मिथिला ' कवितामे समाजक आह्वान करैत कहैत छथिन; सब मीलि करियौ निदान यौ। एहिमे पाँति देलनि अछि - ................ खेती-बाड़ी सब पिछड़लए हाल- बेहाल किसान यौ; ढ़ोकबा - ढुनका,बुचनी- लुटनी भुखले सुतल मचान यौ। वाढ़ि ............................l कवि जी ' नशा मुक्त अभियान यौ' कवितामे बिहार केँ नशा मुक्त करयमे सबके आह्वान करैत चिन्ता कयलनि अछि। एतुका नवतुरिया धरि भाँग , गांजा,खैनी - बिड़ी, सिगरेट ,गुटका ,तारी - दारू, अन्य मादक द्रव्य उपयोग करैत रूग्न भ' जाईछ। निशावाज सोभावक कारणेँ नीक लोक अपन रस्ता पेरा प्रतिष्ठा कोना बचाएत,कियाक तँ शराबी अबैत जाइत पथिकके देख चन्द तरहक उटपटांग करैछ। आब देखाबटीमे नियमत: नशा मुक्त छैई। पाँति-: ...,.............. पैघ - पैघ जे होईछ बेमारी नशा मात्र केर सेवन सँ प्राण पखेरू उमेर सँ पहिने फुर्र उड़ि जायत जीवन सँ ! देश हमर गांधी - गौतम केर दिव्य महाबीर ज्ञान यौ! दुर गरीबी ...............l हम आब हिनक दोसर रसगर कविता पोथी " रूसल प्रकृति " पढयके ताकमे छी! २ संस्कृतक विद्वान डॉ. रविन्द्र नारायण चौरसिया संस्कृतक विद्वान डॉ. रविन्द्र नारायण चौरसिया केर पोथी ल. ना. मिथिला विश्वविद्यालयक लोक सूचना अधिकारी रूपमे बिहार सरकार आ अनेक गैरसरकारी संस्थानसँ सम्मानित डॉ. रविन्द्र नारायण चौरसियाजीक जन्म 2 जनवरी 1970 इस्वी श्री सूर्य नारायण चौरसियाजी आ श्रीमती कपुरी देवीजीक घर भेलेन सी. एम. कॉलेज दरभंगाक संस्कृत विभागाध्यक्ष आ एन. एस. एस. तथा रेड रिबन क्लब मिथिला विश्वविद्यालयक कार्यक्रम समन्वयक छैथ। हिनक दर्जनसँ बेसी शोध आलेख प्रकाशित भेल छैन। ई अखिल भारतीय प्राच्य विद्या सम्मेलन आ अ.भा. दर्शन परिषदक संगहि इण्डियन सोसाइटी फॉर गाँधियन स्टडीज केर आजीवन सदस्य छैथ। हिनक श्लोक प्रकाशन लक्ष्मीसागर-दरभंगासँ 2011 इस्वीमे पहिल हिन्दी पोथी 'पञ्चकन्या' प्रकाशित भेल अछि। जे अपन शासु श्वसुर परमादरणीय कल्याणीजी आ बालेश्वर चौरसियाजी समर्पण कएने छैथ। 128 पृष्ठक अड़ ग्रन्थक दाम 250 टाका निर्धारित रखने छइ । महिलाकेँ आदरणीया आ पूजनीय कहल गेल हेन । स्त्रीकें पुरुषक सहायिका सेहो कहल जाइ छ । प्रस्तुत कृति नारी विमर्श एवम् महिला सशक्तिकरणक अइ युगमे पञ्चकन्याक प्राचीन चरित्रक आधुनिक प्रासंगिकताक बोध करदेत अछि। आर्षकाव्य रामायण तथा महाभारतमे भारतीय वांग्मय केर विचारणीय अवधारणा थिक । कन्या कमणीया होइल से के ल5 जा सकेछ? एहेन चिन्ता निठाहे माए बाबूक मनमे रहे छइ । कन्या कमणीया भवति क्व इयं नेतव्येति कन्या वैदिकमे दुहिता शब्द देल गेल। श्रुतिमे ब्रह्मांडकें पञ्चमण्डल युक्त कहल गेल । जेना-स्वयं भुमण्डल, सोममण्डल, आदित्य मण्डल, चन्द्रमण्डल आ पृथ्वीमण्डल । सोमेनादित्या वलिनां शब्द, स्पर्श, रूप, रस आ गन्ध ई पञ्चतन मात्रा छी। शब्दसँ आकाशक सम्बन्ध, स्पर्शसँ वायु, रूप अग्निसँ युक्त, रस-जलसँ आ गन्ध - पृथ्वीसँ सम्बद्ध छ । हिन्दू धर्मग्रन्थ रामायण आ महाभारतमे पञ्चनारीक चरित्र विश्लेषण जे कएल गेल अछि से आध्यात्मिकता आ मनोवैज्ञानिकता केर आधारपर भेल छन् । आधुनिक भाव बोध आ चिन्तन पद्धतिक आभा एकर आन्तरिक आओर वाह्य चरित्रक पल्लवन परम प्रेक्षणीय होएत। रामायण सूर्यक भवति महाकाव्य अइ लेल कहल जाइ छै; किएक तें अइ सूर्यवंशी श्रीराम केर गाथा वर्णित छैन । नारीक तीन पात्र अहिल्या, तारा आ मंदोदरी रामायणकालिन बिकीह महाभारतकें अग्निक कहल गेले; किएक तँ एकर नायिका कृष्णाद्रोपदी अग्नि संभूता चैथ अर्के तए अस्ति काव्य कहल गेल हेन । सद्य प्रकाशित अड् 'पञ्चकन्या' पोथीमे द्वयपात्र कुन्ती आ द्रोपदी महाभारत कालीन थिकीह । साधना - इच्छा, ज्ञान तथा क्रियाक रूपमे प्रात:स्मरणीया अहिल्या, तारा, मन्दोदरी, कुन्ती आ द्रौपदीसन पञ्चकन्याक पञ्चनारि सेहो कहि सके छी; कारण पाँचों विवाहिता छैथ। उपरोक्त पाँचो कन्या मर्यादापुरुषोत्तम प्रभू श्रीराम आ श्रीकृष्ण चन्द भगवानक असीम कृपा भेटमैन! दैवि अहल्या, द्रौपदि, तारा, कुन्ती, मन्दोदरि धन्या.! प्रभू की परम अनुग्रह भाजन पावन ये पाँचो कन्या !! अइ आदर्श पाँचोक महिमा मण्डित नाममात्र उच्चारण वा स्मरण केलास महापापक दोषमुक्त होइत अछि। उपरोक्त पाँचो देवीकें परपुरुष कलंकित करैमे अपन वासनाक आणि आ बिनु इच्छाक फरेबपूर्वक स्त्रीत्व नष्ट करबाक धृष्टताक कारणें बलात् भोगी महिला जानल जाइत अछि। तँए हिनका सभकेँ मन पवित्र रहने, कर्म अपवित्र नहि मानल गेल छैन । सदा आदर्श नारी रूपें समाजेक गिनती होई, ताइले अत्यन्त सुचिता छथिन । कायर पुरुषक भुक्तभोगीक सन्तान वंश पंचकन्याक नाम जपैत प्रभाति गबैत अछि।
३ मैनेजर स्व०मखसुदन भंडारी
मैनेजर स्व०मखसुदन भंडारी जीक पुण्य स्मरण सिपौल जिलाक मरौना (बेलही)प्रखंड अन्तर्गत एकटा प्रसिद्ध गाम अछि:-गम्हरिया।ओही गामक स्व०संजीत भंडारी आ सोनियां देवीक घर "बौआ" केर जन्म भेल रहय ।६०शालक उमेरमे अपना कुलहरिया पंचायत सँ सरपंच पदक पूर्व उम्मीदवार (१९७८)ताहि सँ पहिले जतरा लोकनाच पार्टीक मैनेजर दिवंगत मकसुदन भण्डारीजी परोपट्टाक चर्चित मान्यपंच रहथि।हमरा गामक बहुतों पुरान बुजूर्ग यथा-रामजी बाबा मुखियाजी,बच्चन कामति,लखन मास्टरजी,बिकनी कामत आदिसँ बेनी घुलल-मिलल रहथि।सुनकर संबंधी सम्परकीय लोक फुलपरास,बिहार विधान सभा के विभिन्न मतदातागाम जेना कि सूरियाही,परसा-नवरौली ,मुसहरनियां,अलोला,हटनी शहरबा सरौती,देबनाथपट्टी,मैनहीं,किरतपुर ,झुटकी बथनाहा२आदिगाममे छलनि।जंतर ओ बेर-बेर जाकय अपन टीमक संग राजनीतिक जागरण करैत रहलाह।हुनका गरबाके स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय अनन्तलाल बाबु सँ प्रेरणा आ पैघ वार्तालाप भेल रहनि।तकरे निष्कर्ष निकालवाक लेल १९५२सँ जीवनक आखरि समयधरि केवट कौमसँ माननीय विधायक बनेबाक सत्तर परियास करैत रहलाह। भूतपूर्व मंत्री हरिप्र०साह हुनका सँ किसन पुरक्षेत्र(निर्मली)मेँ सेहो बहुतो बेर सामाजिक राजनीतिक मदैत लैत रहनि।मैनेजर साहेव मरौनाक अंचल सह प्रखंड कार्यालय के बेलहीमे खुट्टा गाईर विरोधी ओरसियलके दशगोटेमे चूरकीपकैर मारैत आखिरी दमधरि सरकारी कार्यालय कायम करेबामे समर्थ भेलाह।तत्काल ओ आफिस निरमलीक दछिनवारी जुट गोदाम में चलैत रहलैक।गाम-गाममे पोखरिक उराही मकान आ माछ पालन अपना इलाकाक ईनरबा मौआही ,पररी,लाल पुत्र, ललमनियां आदि गाममे केलाह।एहि रचनात्मक काजमे हुनक पितीयौतकका दफेदार साहैव बढ़ संग पुरनि।ओ शोशलिस्ट आन्दोलनकारी छद्मरुपे रहैत राम धरक्का सिंघनाच मेरियाक ठाढ सेहो केयने रहथि।मुंशी प्रेमचंद जीके अनेकों कथापर आधारित हुनक नाच खूब जमै,तेँआलापुर,पचही जबदी,नारेदीगर परगाना सहित नेपाल अधिराज्य'क जोगबोनी बिराटनगर केर लगपास कतेको जगह ऐतिहासिक नाच भाव-भंगिमाओं संग करैत यश बटोरलनि।जिनके एहि क्रममे कियोट जातिक पात्रता लगावैत हुनका लोकनिमे सैहो प्रेरणा भरैत रहला।.....आ फुलपरास क्षेत्र के निरुत्साह पछुआयल कैवर्त कहियाधरि एम एल ए०पदकेँ शुसोभीत करतैक, ताहि लेल नीक तरहेँ सघन जन सम्पर्क कैईलाह। तीर्थराज घुमंतु यात्रा'क यायावर मामूश्री केँ स्मृतिशेष ,विशेष नमन। _लाल देव कामत
४ अमर शहीद रामफल मंडल स्वाधिनता सेनानी केँ शत् शत् नमन! भारत छोड़ूं अण्डोलन केर जूवा क्रांतिकारी रहथि- अमर शहीद रामफल मंडल जी।हुनक जनम बिहार राज्य केर सीतामढ़ी जिला अन्तर्गत प्रसिद्ध बाजपट्टी थानाके मधुरापुर गाममे ६अगस्त १९२४ ई०केँ भेल छलन्हि।हुनक माय गरबी मंडल आ बाबूजी- गोखुल मंडल रहथिन।हुनक १६ सालक उमेरमे रुन्नीसैदपुर प्रखंडक गंगबारा गामक अमीन मंडल जीक बेटीक संग वियाह भेल रहनि।जाहि सँ हुनका एक पुत्र रत्न दि० १५/९/ १९४२केँ भायके सासुर नेपालक एक गाम लछमिनिया मेँ भेल छलनि,परंच ओ शिशु ७ मासक वाद रुग्न भ' काल कल्वित भ'गेलैक। ओहि समय मंडल जी जहलमे रहथि। ओ चारि भाय छलाह,यथा-: रामशरण,महंथ,आ अपने तहन मिसरी।सब भाय खेती करैत छलाह आ पशु पालन करैत खूब नीक सँ सम्पन्न होइत ,पशुक खरीद-बिक्री सेहो करथि। बाबूजी किरानाक दोकान करथि।मंडल जीके प्राथमिक शिक्षा परोसी गाम सँढबारामे भेल रहय। १४सालक उमेरमे मिडिल पास कयने छलाह।बालपन अवस्थामे अखराहा पर खलीफा सेहो बनल रहथि।लाठी भाँजैमे निपुन कला छलनि।अपना लाठिक मादे ओ सबकेँ इयह कहैत छलाह जे अंग्रेज केँ एहि लाठी सँ मारि भारत सँ भगाएब।लाठिये हमर बन्दुक थीक। ब्रिटिश शासन सँ उबिकय लोकसब हुकूमत केँ खिलाफ गामो-घरमे बोलचाल शुरू क' देने छलैक।हुनका गामक कचहरी पर प्रमुख आन्दोलनकरी लोकनि जेनाकि - विन्देश्वरी प्रसाद जीके नेतृत्व मेँ बैसार भेल रहैक।ओहीमे गामक नायक रूपेँ रामफल मंडल चयनित भेल रहथि।ओई गाममे गुप्त कार्यालय आजाद हिंद फौज क' रहैक।ताहि में लाठी चलौनाई,बंम बनौनाई आ गुरिल्ला युद्ध'क प्रशिक्षण देल जाइत छलैक।अजादिक आन्दोलनमे बिहार'क भूमिका अति महत्वपूर्ण रहल छैक।देवघर विद्रोह (१८५७)'दानापुर विद्रोह ((१८५७), बिरसा मुंडा-खुँटी(१९००), चम्पारण सत्याग्रह (१९१८-१९)आ करू वा मरू आन्दोलन (१९४२)तँ बिहार अग्रणी भूमिका निभेनय छैक। पहिले दि०१३/६/१८५७ई० रोहणी, देवघर- झारखण्ड मेँ तीन देशी सैनिक केँ विद्रोह कयला पर फाँसी घिचल गेलैक।तैखन बंगाल प्रोवंश केँ भीतर बिहार,आसाम,पछिम बंगाल आ उड़िसा रहैक। महात्मा गांधी जीके अगुवायमे अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी'क अधिवेशन सभापति अव्दुल कलाम आजाद द्वारा जे भेल रहैक,ताहि में एकटा प्रस्ताब छलै "अंग्रेज भारत छोड़।" एहि अगस्त क्रान्तिक धधरा पुरे देश में पसरलैक।भला कहूं तँ बिहार'क सीतामढ़ी कोना पाँछु रहैत? ९तारीख सँ १९धरि अगस्तक १९४२ केर समय बढ़ दुखदाई कहल जा सकैछ। अंग्रेजी सिपाही आबि बहु-बेटीक ईज्जत पर धावा करैत जाई।खादी भंडार,बाबा नरसिंह दास आओर रामनन्दन सिंह,मोहन सिंहक घर जरा देलक।पुपरीक दरोगा अर्जून सिंह उत्पादत मचाबय ले २४/८/ १९४२ केँ बाजपट्टी आबय बाला छलैक,से पता चैलते आन्दोलनकारी सब गुप्त बैठार बनगाम मेँ आयोजन केलथि।ओहिठाम रामफल मंडलके शपथ देल गेलनि दारोगा केँ सबक सिखेबा ले। एहि बातक तथ्य केँ मुखबीर कियो दरोगाके हँसेरीक तैयारी बाली बात बुझा देलकैक।से ओ कन्निकाटि पेरा बदलि लेलक।ता जुमि गेल एस डी ओ दीप नारायण सिंह,चपरासी दरवेशी सिंह आ पुलिस इन्स्पेक्टर राममूर्ति झा, हवलदार श्याम लाल सिंह।ऐहि मौका पर सबके बीच सीटी सुनिते फरसा सँ गरदैन काटय लागलाह रामफल मंडल जी।खूनक फव्बारा देखतहि जीप छोड़ि चालक आदित्य राम परायल आ जाकय हत्याक आरोप लगबैत मोकदमा दायर केलक। .....अमर शहीद स्वाधिनता सेनानी चालक केर व्यान पर रामफल मंडल,बाबा नरसिंह दास,कपिल देव सिंह आ हरिहर प्रसाद समेत ४००० लोकक खिलाफ हतियाक मोकदमा चलय लगलैक।रामफल मंडलके घरमे आगि लगाकय डाहि देलकै आ हुनकर खेती सेहो ज़ोति - उपटा देलकैक।तैपर सँ एलान केने रहैक जे कियो पकड़तै तकरा ५०००टाका इनाम भेटतैक।ताहि लालच सँ हलुमाननगर नेपाल भायके सासुर सँ गाम एलापर कानाफुसि हुअय लागलै।किछु हितेसर लोक कहलकनि फेरो ओतहि चलि जाकय रहू। इण्डिया मेँ अहां उपर खतरा अछि।ओ नहिं मानलनि आ बाजलाह-हौ औरो अंगरेजबा सबकेँ काटबैक.,....! हुनक मिता दफेदार शिवधारी कुंवर छलसँ नशा खुआ देलकै आ नीक -नीक गप्पमे ओझरेने रहलैक। रसे-रसे जहन अन्हार हुअय लगलैक तँ वेहोस हालतमे हाथ-गोड़ झीझीर कड़ी सँ बान्हि गिरफ्तारी केलकैक। तिरहुत कमिश्नरी केर मुज्जफरपूर जिला आब १९७२केर वाद सीतामढ़ी जिला जेहलमे कस्टडीमे राखल गेलाह। १५ जुलाई १९४३केँ कांग्रेस कमेटी-बिहार राज्य केर बैसकमे रामफल मंडल जी एवं आन दोसरोक संबंध मेँ एसडीओ०इन्सपेक्टर आ आनो पुलिसकर्मी गणके हत्याक आरोप पर विशेष चर्चा भेलैक।कमिटीक आग्रह पर महात्मा गांधीजी रामफल मंडल आ आन आरोपीके बचेबाक पक्षमे क्रान्तिकारिगणक मोकदमा लड़य बाला देशक जानल-मानल बंगालक ओकील सीआर दास आओर पीआर दास दूनु भायकेँ पठौलनि।रामफल मंडल सहित आन आरोपिक विरूद्ध ४७३/१९४२ केर तहत नालीश दायर भेल छलैक।ओकील महोदय अपना जनैत रामफल मंडलके खूब नीक सँ सुझाउ देलनि जे अदालतमे जज केर समक्ष अहाँ ई कहबैक जे हम हत्या किनकहु नँय कयल।३०००चारि हजार लोककमेँ सँ के मारलकै, से नँय जनैत छी। दिनांक १२अगस्त १९४३ ई०केँ भागलपुरमे जज सी आर सेनी केर कोर्टमे पहिले बहस भेलैक।जहन जज महोदय रामफल मंडल सँ पुछलखीन - की तों एसडीओ हरदीप नारायण सिंह केँ खुनी छेँ? तँ ओ गच्छलैन हँ हजूर! पहिले फरसा सँ हमही मारलौंह।आन लोक सभ हत्या करै सँ इनकार क' गेलाह।बहस के बाद ओकिल साहेव रामफल मंडल पर बिगरैत डांटलक आ बाजलाह अंतिम बहसमे जौं फुसि नँय बाजबह तँ तोँ बुझह! रामफल मंडल कहलाह -साहब !आब नै गड़बरेतैक। दोसरो दिन सयह;तेसर बहस के दौरान जज महोदय फेर पुछलकैन ! एसडीओ केर खून अहीं तँ नहिँ कयल! हँ हजूर!एस डी ओ कएँ पहिले फरसा हमही मारलौं हन्।एहि तरहेँ एकतारे तीनदिन धरि बहस चलैत रहलैक, परंच रामफल मरड़ अधिवक्ता केर लाख समझेला पर फुसि नँय बाजलाह।भरिसक ओ सरदार भगतसिंह 'क फांसिक समय देल गेल वाक् केँ आत्मसात कय लेने रहथि- "विचारक शान पर ईनकिलाबक धार तेजगर होईछ।" जज सीआर सेनी रामफल केँ सजा सुनौलक। फांसी दै सँ किछु मीनट पहिले जेलर पुछलकै- अपनेक अंतिम इच्छा की य? ओ उत्तर देलनि -हमर ईच्छा ईयह अछि जे -अंगरेज हमरा देश सँ सदा लेल बहरा जाए।आ भारत माता केँ गुलामिक जींजीर सँ सदा मुक्त क' सम्पूर्ण भारतवर्ष केँ स्वतंत्र कय देल करय।भादब मासके पहिल मलेमास दिन ऐतवार २३अगस्त १९४३केर मनहुस भोरकेँ भागलपुर सेन्ट्रल जेल मेँ १९शाल १७दिनक वयक्रममे ओई गोरनार औंठिया केश बाला भारत सपूत केँ फांसी परि गेलैनि।ओ हौंइसते -हौंइसते फांसिक फंदाके गरा लगबैत आ आजाद भारतके निर्माण मेँअपन नाम क'गेलाह।एहि महत्त्वपूर्ण जोगदान लेल भारतके नव पिढि हरसमेत मोन राखत। वंदेमातरम्-जयहिन्द!!भारत माता की-जै होय।।
५ बहिर्मुखी कामैत कौम देश आ दुनियांके एकता सन्मार्ग सार्वभौम सांस्कृतिक पहिचान दिएवा लेल सोल्कन केर कान्ह पर आई सबसँ बेसी नैतिक दायित्व छैक। सामाजिक जागरूकता आ राजनीतिक जागृति आधुनिक समयमे आवय ताहि लेल डॉक्टर राम मनोहर लोहियाजी कहने छथि-" आए दुर्भाग्य छैक जे शूद्र- अधिकशूद्र ओतेक निक जकाँ विषय प्रसंगके नहिं बुझि सकैछ ", व्यापक बहस नहि कय पबैत अछि, जतेक नीक तरहेँ अन्याय केर विरुद्ध लड़िभीड़ सकैत छैक। ब्राह्मणक कुवाणी मेँ बैकवर्डके रार-छोटका आदि एहि लेल देहाती क्षेत्रमे कहल जाइछ, ओ अपनामे मिलानसँ सम्मती पूर्वक जीवन निर्वाह करय सँ फराक रहैछ, भाई भाई के बीच एकटा अनरलेवा गाछ अत्ताक शरिफा गाछ खातिर सीमा विवादमे खून वहबैत अछि। टाट-फरक लगेवाकाल एक भाई दोसर भायक हत्या करैत अछि। पालतू पशुक गोबरसँ गोईटा-चीपरी पाथि सुखेवाकाल झंझैट करैत छैक। अमीन आ मान्य पंचसँ फैसला कयल जगह पर बाँस वल्ला अलोपीत करैत बाले बच्चें महिला मेहर शहीत झगर बजारैत छैक। बाड़ी झाड़ी 'क मुनगा नेबो आ फूल तोड़ लेल आफद बेसाहैत छैक । कलम गाछी में केरा खातिर बीजू आम खातीर विखैन गाड़ि फजहैत करैत मारि ठानैत छैक । बाधमें खेत पथारक आड़ि छँटनी कए बाधबोनक झगर गामपर ठानेत छैक । ककरो बेटा - बेटीक पढ़ाई नीक देख जरैत- प्रतिशोध करैत छैक । नीक खानपीन देख , नीक पहिरब देख जलनशील बनि जाईछ आदि। एहिसब दुर्गुण केर अन्त:कथाक रूपमेँ जन्म लैत छैक नीचा देखेवाक षढ़यन्त्र । जाहि कारणेँ पंच , सदस्य , पैक्सअध्यक्ष ,मुखिया , सरपंच , समिति , जिला पार्षद , बिधायक- सांसद , मंत्री आदि पदप्रतिष्ठा पर मजगूत समर्थनक जगह विपरीत काज होय सँ सामाजिक क्षति होइछ आब तँ मत के एवज दबल जुबाने बाजि उठैछ जे टाकापर भेटत, से सरिपहूँ स्वजातीय भानके तिलांजलि दैत, एकता केँ बिसरैत दोसरा समाजके अंतः कथा रूपमें जन्म लैत छैक नीचा देखेबाक षड्यंत्र । जाही कारणे पंच सदस्य मुखिया सरपंच पैक्स अध्यक्ष समिति जिला पार्षद विधायक सांसद मंत्री आदि पद प्रतिष्ठा पर मजबूत समर्थनक जगह विपरीत कार्य होयसं सामाजिक क्षति होइछ । आब तँ मत कै एवज दबल जुबाने बाजि उठैछ । जे टाका पर भेटत, से सरिपहूँ स्वजातीय भानके तिलांजलि दैत, एकता केँ बिसरैत दोसरा समाजके धनवान केँ वोट करैछ ,जे लोकतंत्रक हँसी उरावल जाइछ। अपना स्मिताक रक्षा लेल लड़ब छोरि ,दोहरा समाजवर्ण सँ मित्रता राखि तकरा सब तरहे शक्ति प्रदान करयमे हरदम लागल रहैछ। जातिक मान्यजनी सभा भोज तँ एखनो होइछ, परंच ओहि विचार धाराक तहत दर्जनों मुख्य पुरुष जे बेसिकए निर्णय करताह , ताहि लेल समयाभाव रहैछ ,सर्वत्र तेँ गीराबट होइत जा रहल छैक। एहि सँ उबरबाक लेल स्मृति केर खियाल राखैत नव ऊर्जा संचयन लेल जहन जातीय बैसार प्रगाना स्तर पर होइत अछि तँ ओहि प्रतिनिधिगणक मादे गामक समान्यलोकक एकटा दोसरे तरहक टिप्पणी सुनबामे आओत 'यौ बोटक बेगरता सामनेमे छैक-चुनावी वर्ष लागिचायल छैक, तेँ तैयारी हेतुअ किछु बुधियार लोक एहन सम्मेलन- गोष्ठी बजेने हेतैक।" तेँ जनसजगता लेल गामे-गाम अथबा पंचायत स्तर धरि कोनो संगठनक प्रसार-गठन होयब परम आवश्यक होयत, जाहिसँ समस्त समाजके ससमय विषय प्रवेश करा सकी, आब ओहो बुझय जे हमरा सँ संवादहिनताक स्थिती नहिं बनौने छथि। आ तकर एकटा पैघ सबलता सेहो आओत जाहिसँ सहयोग भेटत आ अधिवेशनकें संख्यावल केर बहुलता सेहो होयत। अन्यथा शहरी-लोकक सुलभ पहुँचसँ पटना-दिल्ली में तँ लोकक जमावड़ा भ' जायत परंच देहात कस्वा सँ लोक कमसंख्याँ में सम्मलित होयत। एहि सब नान्हिटा बात पर गौर करब परमआवश्यक। एहि तरहक जनसमस्या समाधान लेल खलीफा स्वर्गीय लखन कामत तबालचि (ग्रा+पो परसा) सदिखन चिन्तित रहैत छलाह । परम श्रध्ये ढ़ोलकिया पीसाजीके सादर शिर साष्टांग दण्डवत।
६ सुखल मन तरसल आँखि सुखल मन तरसल आँखि अइ मैथिली काव्य पोथीक नव कवयित्री मुन्नी कामत हमर परिचित नव युवती छथिन । हिनक जन्म परसा नवटोली गामकें श्रीमती लक्ष्मी देवी आ श्री दिलीप वर्माजीक घर 17 जुलाई 1989 इस्वीमे भेल छैन । निर्मली महाविद्यालयसँ धरि हिन्दी आर्नस ग्रेज्युएट छैथ। सूड़ियाही निवासी श्रीमान, अरूण कामत पिता रामविलास कामतसँ हिनक बिआह भेला सन्ता पति महोदयक संग साहिबाबाद-गजियाबाद (यू.पी.) मे रहैत अहर्निस साहित्य सेवा करै छथिन। हिनक पहिल कृति 2014 इस्वीमे प्रकाशित भेलैन, पछाइत तेकर दोसर संस्करण वर्ष 2017 इस्वीमे 126 पृष्ठक प्रकाशित भेलैन । दाम 151 टाका छइ । अइ सुखल मन तरसल आँखि 'काव्य' संग्रह मे दू अंकक सभसँ दू नमहर संख्याँ एतेक कविताक गूंथल माला रूपें मौलिक रचना धारावाहिकताक अजस्त्र स्रोत फरिच्छ भऽ देखाइत अछि । मुन्नीजीक दोसरो पोथी प्रतिष्ठित प्रकाशनसँ निकैल चुकल छैक आ मैथिलीक कतेको पत्र-पत्रिकामे हिनक रचना छपल सेहो अछि । मुन्नी कामत केर सन्दर्भमे उमेश मण्डल - पुनम मण्डल (चाचा-चाची) जीक प्रोत्साहन जड़ि रूपें जमल छै, से मुन्नीजी अइ सिनेहकँ 'अपन बात' मे कहने छैथ। डॉ. शिव कुमार प्रसाद पोथी समीक्षक सेहो आशीर्वचन रूपें अपन अभिमत प्रकट करैत मुन्नीक बारेमे कहला अछि- 'मुन्नी कामति' मात्र मिथिलांचले नहि वरन् समस्त भारतक बेटीक 'माउथ पीस' बनि अपन काव्य संग्रहक रूप देबाक प्रयास केलैन अछि । युग-युगसँ संचित आगिक व्यक्त करैमे कवयित्री कतेक वेदनासँ गुजरल हेती से शब्दमे व्यक्त करब असान नहि। हम कवयित्रीक वेदना नमन करे छी । हमहूँ तँ कोनो बेटीएक सन्तान छी । भाषाक गढ़न अट-पट होइतो अभिवंचित बेटीक भावकें समाजक ऐना रूप सोझा-सोझी करबामे सक्षम भेली अछि । अइ संग्रहमे पाठक जे मिथिलाक बेटीक दुखक अनेकानेक दृश्य कवियित्रीक मनक असंतोषे टा नहि; मिथिलाक बेटीक मनोदशाक छवि दृश्यमान भेल देखत । ललनाक प्रति समाज केर पुरुखक आँखिमे नचैत चण्डालक नुकाएल छबि उजागर करैत कवियित्री चैनसँ जीबैक पलखैत नहि दए रहल छइ । पाँति देखू - बेटी शीर्षक कवितासँ- बेटी अभिशाप नै वरदान अछि' तिलक बिहारि सँ बेटी ने बहाबू | ई छी घरक लक्ष्मी हमरा नै समान बनाबू । नै अछि बोझ... दहेजक आगि शीर्षकसँ सुनथुन सासु-माय हमहूँ छी किनको बेटी हमहूँ किनको दुलारी छी हमहूँ 9 महिना किनको कोखमे..... दर्दकटीस कवितासँ .... माइक सुन भेल आंचर haौ हराएल नुनुक बोल असगर छोड़ि बुढ़ बापकें बिछुरि गेल बेटा अनमोल । ... नोराएल आँखि शीर्षकसँ केना उजरल घर बसते केना एकर नोर सुख और केतेक दिन अहिना भोगत ई भोग । मुन्नी कामत केर पहिल कवितासँ शुरू भऽ जाइछ समाजकेर बीच असमानताक मनोदशा जेकर एक बानगी' समरपित होइत बेटी' शीर्षकमे द्रष्टव होइछ- जहिया एकर जन्म भेल तहिए डिबिया मिझा गेल, सभ कहलक कलंक एलौ छठिहारोसँ गीत हेरा गेल। जँ- जँ ई नमहर भेल... 31 बाँ क्रमपर पृष्ठ सं. 53 मे पाठककैं सुखल मन तरसल आँखि भेटत, जाहिमे पाँति अछि- एगो सहारा छल गरीबक मेल पियाउजक। ऊहो सुआद छिनाएल जाइए.... अखरा रोटी पर पेट जुन्ना आ मुँहमे अपनेसँ बज्जर खसाबी सन निशान मैथिली अभिव्यक्ति रूपें श्रीमती कामतजी करैत निछछ गरीबी दिश ध्यान आकृष्ट केली । हम कहि सकै छी नवसिखुआ आ हिन्दीमे कलम उठौनिहारि मुन्नी कामत आदरणीय कथाकार श्री जगदीश प्रसाद मण्डलजीक पोथी पढ़ि-पढ़ि मैथिलीक प्रति जागरूक भेली आ से मातृ भाषामे अपन रचनावलीक माध्यम अक्षय भण्डार भरैमे आगू एली । हिनक रोचक मौलिक उद्बोधन जहन छपैत अछि तँ पाठक आ उत्सुक लेखकीय प्रहरी सेहो समय निकालबाक फिराक मे रहैछ आ हुनका मोबाइलपर सेहो आशिष दैत प्रशंसा करैत रहल अछि । तइमे एकटा हमहू छी । कोनो भाषाक सुआद साहित्यकारमे भेद नहि तँए हिनक पोथी दर्जनो भाषा अनुवाद हुअए से भविष्यमे आश करै छी । आवरण पृष्ठपर लाइव सासु माय सन फोटो मूक वार्ता करैत बहुत किछु कहै छथिन। मिथिलाक गाम गाममे पंजीकृत पुस्तकालय अइ पोथीक मांग बढ़बैत तेसर संस्करण छापैले सरकारसँ अपेक्षा करत, सेहो विश्वास जगैत अछि। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.४.निर्मला कर्ण- अग्नि शिखा (खेप-२६) निर्मला कर्ण (१९६०- ), शिक्षा - एम. ए., नैहर- खराजपुर, दरभङ्गा, सासुर- गोढ़ियारी (बलहा), वर्त्तमान निवास- राँची, झारखण्ड। झारखंड सरकार महिला एवं बाल विकास सामाजिक सुरक्षा विभागमे बाल विकास परियोजना पदाधिकारी पदसँ सेवानिवृत्ति उपरान्त स्वतंत्र लेखन। अग्नि शिखा (भाग- २६) (मूल हिन्दी- स्वर्गीय जितेन्द्र कुमार कर्ण, मैथिली अनुवाद- निर्मला कर्ण) कथा अखन धरि: राजा पुरूरवा आ उर्वशीक विवाह बहुत धूमधाम सँs होइत छैक। सौभाग्य रात्रि मे भेंटके समय उर्वशी राजा के प्रथम मिलन के लेल विशेष तरीका अपनाबई के प्रस्ताव दैत छथिन |
आब आगू: उर्वशीक बात पर राजा भ्रमित भs कs कहैत छथि - "से कोना होयत भला ? अहाँ कोन विशिष्ट अद्वितीय विधि सँs मिलन करबाक गप्प कs रहल छी,कम सँ कम किछु तs कहू, तखनहि हम अहाँक संग दs पाएब"। राजा अपन उत्कट अभिलाषा के त्यागि अपन शारीरिक मिलन के अभिलाषा पर नियंत्रण रखैत उत्कंठा पूर्वक पूछलथि। " कामकला मे कतेक विधि के प्रयोग होइत छैक, आ कोना - अहाँ केँ ई बात बुझल अछि"? उर्वशी राजाक परीक्षा लेवा हेतु पूर्ण रूपेण तत्पर भेल छलीह | "व्यावहारिक वा सैद्धांतिक,हम एहि सँ कोनो रूप मे पूर्ण रूपेण अनभिज्ञ छी। मात्र संख्याक जानकारी अछि। संभवतः ओहि में चौरासी टा आसन होइत अछि"। राजा सेहो परीक्षा मे सफलता प्राप्त करबाक निर्णय कएने छलाह | "जँ अहाँ कामकला में व्यावहारिक रूप सँs अनभिज्ञ छी तखन अहाँ एतेक अधीर किएक छलहुँ" उर्वशी पुछलथि। हँसैत पुरूरवा बजलाह - "अहाँ सेहो एहन विचित्र आश्चर्यजनक बात करैत छी प्रियतमें!ई सब तs बिनु सिखौनहि प्राणी स्वयं सीखि लैत अछि।" "मुदा हमरा साधारण अपरिपक्व तरीका सँs कोनो काज करब पसिन्न नहि लगैत अछि। सब किछु उत्कृष्टता सँ करब हमर विशिष्ट गुण अछि" - उर्वशी अपन पसंद कहय लगलीह। "तखन अहाँ हमरा स्वयं बता दिय सब किछु,हमर एतेक परीक्षा किएक लs रहल छी?" राजा उर्वशी के समक्ष अपन पराजय स्वीकार कs लेलथि । "हम अहाँ केँ एखनि वैह सभ तs बताब जा रहल छी। मुदा एहन सामान्य विधि सँsनहि,नृत्यक भाषा मे! की अहाँ केँ बुझल अछि जे स्वर्ग मे हम कामदेवक पत्नी रति सँs नृत्य शैली मे चौरासी मुद्राक औपचारिक शिक्षा ग्रहण लेने रही ! पहिने हम सोचैत छलहुँ जे ई शिक्षा व्यर्थ होयत,मुदा आब ई हमरा दुनू प्राणीक जीवन मे उपयोगी होयत" - उर्वशी राजा केँ अपन ज्ञानक स्रोत के सूचना देलनि। "तखन आब शीघ्र प्रारम्भ करू प्रिय। हम अहाँक सभटा भाव बुझि लेब" - राजा अपन व्यग्रता देखबैत बजलाह। "नहि, एना नहि महामहिम। की अहाँ बस बैसि क' देखब? ई काज मात्र अहाँ द्वारा पूर्ण होयत। तेँ हमरा सोझाँ आबि जाउ,आ हमर प्रत्येक गतिविधि के हमर प्रत्येक भाव-भंगिमा के अनुसरण करैत अहाँ सेहो हमर सहयोग करू" - उर्वशी हँसैत बाजि उठलीह। किछु क्षण पश्चात उर्वशी लयबद्ध नृत्य करय लगलीह आ हुनका देखैत,हुनकर अनुसरण करैत राजा पुरूरवा हुनकर सहयोग करैत स्वयं लयबद्ध गतिशील भय गेलाह। हुनकर प्रत्येक मुद्रा एवं भाव देखि कs गहनता सँs मनन कs कामकला के शिक्षण लेमय लगलाह। उर्वशीक भाव-भंगिमा के अनुसरण करैत ओ अपन शरीर सँs एक-एक वस्त्र उतारनाई प्रारंभ कs देलथि। उर्वशी स्वयं नृत्यक संग यैह कs रहल छलीह। राजा कुशलता पूर्वक हुनकर प्रत्येक भंगिमाक अनुसरण कs रहल छलाह। एकर पश्चात नृत्य शैली में एक दूसर के संग चुम्बन के आदान-प्रदान होमय लगलनि।नृत्य शैली मे स्वयं दुनू एक दोसराक अंग-प्रत्यङ्ग के चुम्बन लs रहल छलाह ।एकर पश्चात नृत्य शैली मे अर्ध निमीलित नेत्र सँs रति आमंत्रण प्रस्तुत कयल गेल छल।प्रत्येक मुद्रा मे दुनूक शरीर,शरीरक प्रत्येक अंग एक दोसरा सँ मीलि रहल छल।अधर के अधर सँs कखनहुँ स्पर्श होइत छल,कखनहुँ एक दूसर सँs आलिंगन बद्ध होइत छलथि,कखनहुँ एक टाँग उठबैत एक दूसर के पैर के स्पर्श करैत छलथि। कखनहुँ कदली दल सम जघन स्थल एक-दूसर सँs स्पर्शित होइत छल।कखनहुँ मुख्य अवयव में सेहो अद्भुत संयोग होइत छल।एकटा अद्भुत विहंगम दृश्य प्रस्तुत होइत छल।ओ सब एकटा अद्वितीय संभोग प्रक्रिया अपना रहल छलाह । क्षण-क्षण में ओ सब अपन मुद्रा बदलि रहल छलाह। कखनहुँ 11, फेर 33, फेर 36, 66, 63, 61, 24, 20, 01, 00 संख्या के आकृति में आकृत होइत एक दूसरे के शरीर में डूबि अपना के विस्मृत करय लगलाह।कखनहुँ त्रिभुज के केंद्र पर लंबवत् रेखा,कखनहुँ लंब के ऊपर त्रिभुज के केंद्र । गणित के केहन अद्वितीय विलक्षणता! मुदा से संपूर्ण लयबद्ध रूप सँs नृत्य के शैली में! एक क्षणक बाद हृदयक धड़कन के भाषा,आँखिक भाषा आ नृत्यक भाषाक बीच द्वंद्वयुद्ध भड़कि उठल,सभ भाषा मे एकहि कथा,एकहि चित्र,आ एकहि क्रियाक प्रदर्शन भs रहल छल - सूरत क्रीड़ा।ई क्रीड़ा बहुत काल धरि नृत्य शैली मे चलैत रहल, फेर सब भाषा एक संग मिलि गेल। धरा पर राखल शरीर स्वयं सरल रेखा मे परिणत भ गेल। पाजेबक सुमधुर रुनझुन स्वर अंगक गति केँ स्पष्ट कs रहल छल। दुनू प्राणी आनंदक चरम पर पहुँचि आह्लादित भs गेल छलाह । ओहि कक्ष मे राति भरि कतेको बेर एकहि शैली मे अनगिनत आसनक अभ्यास भेल छल,जखन राजा पुरूरवा द्वारा अन्य आसनक संबंध मे आग्रह कयल गेल तखन उर्वशी हँसैत बजलीह - "हे राजन्,आब ओ मुद्रा अन्य दिनक लेल सुरक्षित राखू" | **************** राजा पुरूरवा लेल दिवा अथवा रात्रि के दुनू अलग-अलग पक्ष मे कोनो अंतर नहि छल।राजा लेल दिवस के प्रकाश सेहो राति छल आ रातिक अंधकार हुनका उर्वशी के सौंदर्य सँs झिलमिलाईत प्रकाशित जकाँ बुझाइत छलनि।ओ अपन राज्य संचालन के समस्त भार महामात्य के सौंपि देने छलाह आ स्वयं के पूर्णतः विलग केने छलाह राज्य के कार्यभार सँs। ओ उर्वशीक सौन्दर्यक भोग मे अपना केँ सम्पूर्णत:समर्पित कयलनि।हुनका उर्वशीक संगति मे सदिखन रहबाक इच्छा होइत छलनि।ओ कखनहूँ दृष्टिगत होइतथि जलक्रीड़ा करैत काल,आ कखनहूँ उपवन में भ्रमण करइत काल!अन्यथा हुनक शयन कक्षक द्वार अहर्निशि बंद देखल जाइत छलनि। पुरूरवा के मुख मंडल पर सदिखन मुस्कान व्याप्त रहैत छल।ओ तs मात्र उर्वशी के संगत में मग्न छलाह। पुरूरवा राज्य संचालन सँs संपूर्ण रूप सs अपना के विलग कएने छलाह। महामात्य सुचारू रूप सs राज्य संचालन कs रहल छलाह। राज्य के बहुत रास महत्वपूर्ण कार्य योजना मात्र पुरूरवा के हस्ताक्षर सs लागू होइत छल।ओ कोनो काज के देखय अथवा बुझय में एक क्षण तक के समय बिताबय के व्यर्थ बुझैत छलाह। मुदा हुनकर राज्य- कर्मचारी,अमात्य, महामात्य के योग्यता एवं हुँनका सभ के राजा आ राज्य के प्रति निष्ठा मानल जायत,जे राज्य के प्रशासन सुचारू रूप सँs चलि रहल छल।ककरो कोनो दिक्कत नै छल।ककरो हृदय में राजा के प्रति असंतोष के भाव नै छल।ताहि कारण राज्य में कहियो किनको अवहेलना अथवा प्रताड़ना नहि भेलनि। प्रजा के साथ अन्याय होई के एकहु टा घटना राज्य में घटित नहि भेल। राजा के राज्य प्रशासन सँs विमुख भs जाय के उपरान्तहु किनको हृदय में राजा के प्रति असंतोष के भावना नहि भेल छल। तकर बाद राज्य प्रशासन सs ओ पूर्ण रूप सँs विलग भs गेलाह आ अपन समय उर्वशी संग मधुमियामिनी में व्यतीत करवा में निमग्न भs गेल छलाह। एहि भाँति राजा पुरूरवाक दिवा-रात्रि उर्वशीक संगति मे सुखपूर्वक व्यतीत भs रहल छल | चाहे ओ ग्रीष्म ऋतु के उमस भरल गर्मी हो अथवा वर्षा ऋतु के रिमझिम फुहार,या कि माघ महीना के शीत लहर,उर्वशी के सानिध्य में रहवा के कारण सभ ऋतु एक समान सुखदाई छल।सब मौसम जे आन किनको लेल कठिन बुझाईत होइन मुदा प्रत्येक ऋतु हुनका लोकनि केँ वसन्त जकाँ आनन्ददायक बुझाइत छलनि।हुनकर समस्त संसार उर्वशीक सौन्दर्य मे सीमित भेल छलनि।ने राजा पुरूरवाक केँ भरतमुनिक शाप मोन पड़लनि,आ ने उर्वशी के ।ओ बिसरि गेल छलीह कि हुनका स्वर्ग सs निष्कासित कs देल गेल अछि मात्र पाँच साल के वास्ते।ई अवधि पूरा केलाक पश्चास्त हुनका वापस स्वर्ग जेबा के होयतनि!भले ओ नहि जाय चाहैत छथि,मुदा इन्द्र हुनका पृथ्वी पर नहि रहय देताह। ओ हुनका साम-दाम-दंड-भेद कोनहु प्रकार सs प्रयत्न कs आपस मंगवा लेथिन स्वर्ग लोक में। क्रमशः अपन मंतव्य editorial.ऽtaff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.५.नन्द विलास राय-घसवहिनी नन्द विलास राय घसवहिनी छजना-मझौरा रानीगढ़ी परतीसँ पूब सड़कक कातमे एकटा बेस झमटगर कदमक गाछ अछि। बैशाख मासक भोरुका उखराहा। दिनक दस बजैत। टहटहौआ रौद। एकटा बीस-बाइस बर्खक घसवहिनी ओइ कदमक गाछ तर बैसल छेली। घसवहिनी बेस सुन्नरि छेली। गौर वर्ण, छड़हरा शरीर, गोल आ सुडौल मुँह, नमहर-नमहर आंठिया केश। कारी-कारी आ पैघ-पैघ दुनू आँखि। समतोलाक फाड़ासन ठोर। पूआ जकाँ फूलल-फूलल आ सेब सन लाल-लाल गाल। चारिटा कौलेजिया लड़का साइकिलसँ ओइ सड़कसँ जा रहल छल। जखन कदमक गाछसँ एक लग्गा पाछूए रहए तँ ओइमे सँ एकटा कौलेजिया लड़काक नजैर ओइ घसवहिनीपर पड़ल। कौलेजिया लड़का तँ कौलेजिये लड़का होइए। बेसी लफुआ आ उच्छृंखल। ओ लड़का जेकर नजैर घसवहिनीपर पड़ल रहए, बाजल- -रौ भाय, कनी अपनो सभ ऐ गाछतर जिरा ले। ताबेतमे दोसर, तेसर आ चारिमो लड़काक नजैर घसवहिनीपर पड़ल। दोसर लड़का बाजल- -हँ, हँ, बड़ रौद छै, कनी गाछतर ठंढा ले। चारू लड़का अपन-अपन साइकिल खड़ा केलक आ कदमक गाछतर आबि बैस गेल। तेसर लड़का घसवहिनी दिस तकैत बाजल- -मोस्ट ब्यूटीफूल गर्ल। तैपर घसवहिनी बजली- -नइ यौ विद्यार्थी द मोस्ट ब्यूटीफूल गर्ल। चारिम लड़का फुसफुसा कऽ बाजल- -भाग बहिं घसवहिनी बेस पढ़ल-लिखल बुझाइ छौ। चारू लड़का साइकिलपर चढ़ल आ विदा भऽ गेल। लड़का सभकेँ जाइत देखि घसवहिनी मुस्किया लगली।
अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.६.कुमार मनोज कश्यप- लघुकथा- कुकर्म किंवा सुकर्म कुमार मनोज कश्यप लघुकथा कुकर्म किंवा सुकर्म शहरी विकास मंत्री के शहीदक प्रतिमा के अनावरण के प्रोग्राम पक्का हेबाक विधिवत सूचना जिला प्रशासन के भेटिते प्रशासन मे चहलकदमी बढ़ि गेलै। विभिन्न काज जेना शहरक सफाई, रोड के दुरुस्त करब, प्रतिमा स्थल के साज-सज्जा, समारोहक व्यवस्था, मंत्रीजी के आगवानी, खान-पान आदिक व्यवस्था हेतु अलग-अलग निर्दिष्ट टीम बनाओल जा चुकल छलै। जिला कलेक्टर आजुक मीटिंग मे तहसीलदार सs ऊपर के सभ अधिकारी के एहि कार्यक्रम मे होमयवला खर्चक जिम्मा पदानुसार बाँटि देलनि। वर्माजी चूँकि भू-संपदा के डिप्टी कलेक्टर छलाह तैं हुनका टेंट आ मंच निर्माण पर होमयवला खर्च के जिम्मेदारी भेटलनि। वर्माजी मोने मोन आँगुर पर हिसाब जोड़य लगलाह -- नहिंयों किछु त डेढ़-दू लाख टाका सs कम के खर्च नहिं हेतै। एतेक टाका तs ओ एक बेर मे देखनेहों नहिं छथि! कतs सs जुटा पेता एतेक पैघ राशि? उद्विग्न भs उठला ओ। जाड़क दिन रहितो ओ पसेना सs तरबतर हुअ लगला। होश एलैन जखन शर्माजी कान्ह पर हाथ दैत कहलखिन - "वर्माजी मोन ठीक नहिं अछि की ? चलु; घर जा कs आराम करू।" वर्माजी हड़बड़ा कs उठला। यक्ष-प्रश्न जे हुनका समक्ष छल से टाका के एक हफता के भीतर ओरियाओन। सोचैत रहलाह - जखन कार्यक्रम सरकारी छै तs ओहि पर होमयवला खर्चो सरकारिये खजाना सs ने हेबाक चाही? केकरो बलि के छागर कियैक बनाओल जाईत छै? बहुत हिम्मत जुटा कs थरथराईत ओ कलेक्टर के चैम्बर मे गेलाह - "सॉरी सर! कहैत तs लाज भs रहल अछी; मुदा.........???" - "क्या......?" - "स .... र !! टेंट आ मंच के इंतजाम हम नहिं ......." - "क्या बकते हो वर्मा?" कलेक्टर साहेब तामसे उठि कs ठाढ़ भ गेलाह। - "जी सर! हम बच्चा के सप्पत खा कs कहैत छी। हमरा लग आन कोनो दुआरा नहिं। बेटा के कॉलेज मे एडमिशन के लेल दस हजार रूपया जोगाओल छल सैह लs कs आयल छी। एकरा राखि लेल जाओ सर !" कलेक्टर साहेब थुस्स सs अपन कुर्सी पर बैसि गेलाह। "वर्मा तुमने मेरी इज्जत मिट्टी मे मिलाने मे कोई कसर नहीं छोड़ी। हाउ विल आई सेव माय फेस नाऊ ??? अब समय भी नहीं बचा है। बुत की तरह खड़े-खड़े मेरा चेहरा क्या देख रहे हो ? गेट लॉस्ट !" वर्माजी कलेक्टर साहेब के चैम्बर सs धाड़ खसेने बहरा रहल छलाह। बाहर मे ऑफिसक अधिकारी-कर्मचारी वर्माजी के देखि कs मंद-मंद मुस्किया रहल छल - अब हिनकर गोपनीय रिपोर्ट खराब हेबा सs के रोकतनि ? -कुमार मनोज कश्यप, सम्प्रति: भारत सरकारक उप-सचिव; संपर्क: सी-11, टावर-4, टाइप-5, किदवई नगर पूर्व (दिल्ली हाट के सामने), नई दिल्ली-110023 # 9810811850; ईमेल : writetokmanoj@gmail.com अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.७.रबीन्द्र नारायण मिश्र-बदलि रहल अछि सभकिछु (उपन्यास)- धारावाहिक रबीन्द्र नारायण मिश्र बदलि रहल अछि सभकिछु (उपन्यास)- धारावाहिक खण्ड २६-३० बदलि रहल अछि सभकिछु 26 श्वेतवस्त्र धारण केने हाथमे तिरंगा झंडा लेने शिखा हवाइ अड्डासँ बाहर भेलि । काल्हि धरि जकरा केओ नहि जनैत छल से आइ सौंसे देशमे चर्चाक विषय बनि गेल छलि । सभ अखबारक मुख्यपृष्ठपर ओकरे फोटो छल,ओकरे बारेमे समाचार छल। प्रतिनिधि सभासँ सड़क धरि जेना तूफान आबि गेल छल । माननीय सदस्यलोकनि सरकारक इस्तिफाक हेतु अड़ि गेल रहथि। सरकार दिससँ कतबो कहल गेल जे नारी निकेतन प्रकरणक सीबीआइसँ जाँच कराओल जाएत,शिखाकेँ पूर्ण न्याय भेटत, कानून तोरनिहार केओ नहि बकसल जाएत चाहे ओ कतबो पैघ आदमी किएक ने होथि,मुदा लोककेँ एहिसभ बातपर कनीको विश्वास नहि भेलैक । जखन सरकारेक आदमी एहिसभ कुकांडमे सामिल छथि तखन हुनका खिलाफ कोनो जाँचसँ की निकलत? ई तँ जनताकेँ ठगब भेल । पहिने सरकार इस्तिफा दिअ ,तखनहि कोनो जाँच निष्पक्षतासँ संभव भए सकत। पहिलका राज्यप्रमुख तँ इस्तिफा देलाक बाद कतए चलि गेल से किछु पता नहि चलि सकलैक । लोकसभ कहैक जे सरकारे ओकरा कतहु नुका कए रखने अछि जाहिसँ सभकिछु शांत भेलाक बाद ओ सुरक्षित बाहर आबि सकत। मुदा ई सही नहि रहैक । ओ तँ स्वयं बहुत डरा गेल रहथि। सुनबामे इहो आएल जे रातिएमे किछु विश्वस्तक संगे केदारनाथ दिस चलि गेलाह । तकरबाद हुनकर किछु खबरि सरकारोकेँ नहि भेटि रहल छलैक । केओ-केओ इहो बजैक जे ओ सन्यास लए आब पहाड़ेमे आध्यात्मिक चिंतनमे समय बितओताह ओहिठामक माहौल बहुत गरमा गेल छल । ताहिपरसँ शिखाक प्रचंड उग्र रूप, जे देखितहि कैकगोटेकेँ सीटीपीटी गुम्म पड़ि गेल रहैक । शिखा जहिना बाहर आएलि,ओहिठाम प्रतीक्षारत लोकसभ एकस्वरसँ चिचिआ उठल- "इनकिलाब! जिंदाबाद!" आगू-आगू शिखा आ ओकर पाछू-पाछू लोकक हुजुम चलि रहल छल । हम,शक्तिनाथ आ संदीप जेना-तेना शिखाकेँ सम्हारने ओकरे संगे पाछू-पाछू चलि रहल छलहुँ । हमसभ जनक्रान्ति दलक मुख्यालयक बहुत लगीच पहुँचि गेल छलहुँ । साइत दस मिनटमे हमसभ ओतए पहुँचि जइतहुँ । ताबतेमे एकटा जबरदस्त विस्फोट भेल । चारूकात धुँआ-धुआँ पसरि गेल । लगातार पाँच मिनट धरि विस्फोट होइते रहल । पुलिस कतहु नहि देखा रहल छल । सड़कपर कतेको घायल लोकसभ यत्र-तत्र पड़ल छल । के ककरा देखैत? जे बाँचि गेल छल से बँचेबाक हेतु जहाँ-तहाँ भागि रहल छल । बँचबाक कोनो संभावना नहि लागि रहल छल । एक मिनटक लेल तँ हमरा लागि रहल छल जेना प्रलय आबि गेल । हम केना -ने-केना सड़कक दहिना भागक दोकानमे फेका गेल छलहुँ। लागल जेना कोनो अदृश्य शक्ति हमरा सड़कपरसँ उठा कए दोकानपर राखि देलक । मुदा शक्तिनाथ,संदीपक कोनो पता नहि छल । शिखाक सेहो कोनो पता नहि छल । ई समाचार बिजली जकाँ सौंसे पसरि गेल । प्रतिनिधि सभाक कार्यवाही स्थगित कए देल गेल । नेताजी गुप्त स्थानमे नुका गेलाह। ओहि दिन तँ सरकार नामक किछु होइत अछि से लगबे नहि करए। सभ एतबे कहैक जे एहिमे नेताजीक हाथ थिक । अपन कुर्सी बँचेबाक हेतु आ लोकक ध्यान कतहु आओर लए जेबाक हेतु ई विस्फोट कराओल गेल अछि । जतेक मुँह,ततेक तरहक बात चलि रहल छल । मुदा हंगामा सेहो रूकि नहि रहल छल । राति भरि सौंसे सहरमे बम फुटबाक अबाज होइत रहल,कतहु-कतहु गोली चलबाक अबाज सेहो होइत रहल । लगबे नहि करए जे ई ओएह सहर थिक । चारू कात अशांतिक साम्राज्य पसरि गेल छल। मुदा हमरा सामने तँ सभसँ पैघ समस्या छल जे शिखाक कोनो जानकारी नहि भेटि रहल छल । संदीप आ शक्तिनाथ सेहो नहि भेटि रहल छलाह । कहि नहि जीबितो छथि की नहि? ई प्रश्न भरि राति हमरा परेसान केने रहल । हम इएहसभ सोचैत अपन कोठरीमे असगर पड़ल छलहुँ की खटकेँ अबाज भेल । हम केबार खोलैत छी । देखैत छी जे शक्तिनाथ ठाढ़ अछि। सौंसे देहमे खून लागल रहैक । पैरसँ माथ धरि कैकटा पट्टी लागल छलैक । मुदा ओ होसमे छल । चलि सकैत छल । "तूँ?" "हँ ।" "कतए छलह?" "हम आ संदीप शिखाकेँ घेरने सड़कपर ठाढ़ रही । विस्फोटक बाद शिखाक टांगमे बड़ीजोरसँ खून बहए लागल रहैक। चारू कात अन्हार गुज्ज, किछु नहि देखा रहल छल । संजोगसँ एकटा पुलिसक जीप आएल । हमसभ ओहिमे बैसि अस्पताल पहुँचलहुँ । "मुदा शिखा अछि कतए? संदीपक की हाल छैक?" "शिखा अस्पतालेमे अछि । संदीप ओकरे लग अछि । ओकरो मामुली चोट लागल छैक । मुदा शिखाक देहसँ बहुत खून निकलि गेल छैक । बड़ीकाल धरि खून खसैत रहि गेलैक । डाक्टर बहुत देरीसँ पहुँचल । डाक्टरसभ किछु बता नहि रहल छैक । किछुटाकाक तुरंत काज छैक, किछु गोटेकेँ खून सेहो चढ़एबाक हेतु लए जाए पड़त । हम ताही हेतु भागल- भागल एहिठाम अएलहुँ अछि।" 27 नेताजी एहि घटनाक्रमसँ हिलि गेल रहथि । कुर्सी बाँचब असंभव लागि रहल छलनि । असलमे हालत एहन भए जाएत तकर अनुमान हुनको नहि रहनि । नेताजीक अंतरराष्ट्रीय तस्कर गिरोहसँ पुरान संबंध रहनि । असामाजिक तत्वसभ तँ हुनकर चुनाओक खर्चा कहिआसँ उठबैत रहल छल । इलाकाक नामी गुंडासभ सेहो समय-समयपर अपन सेवा हुनका दैते छलनि । मुदा ई सभ कोनो निःशुल्क तँ रहैक नहि। एक लगाउ,दस पाउक सिद्धान्तपर ओ सभ काज करैत छल । घटनाक निर्माता ओएह सभ रहैत छल । ओएहसभ उत्पातो करबैत छल आ अंतमे शांति स्थापनाक नामपर समाजमे आगू आबि कए नेताजीक छविकेँ चमकबैतो ओएह सभ छल । आम आदमी तँ पाकल आम छल,कखन गाछसँ खसि पड़त आ ओकरा केँ लोकि लेतैक,के ओकर उपभोग करत तकर कोनो ठेकान नहि रहैत छल । ओ सभ तँ मात्र मूकदर्शक छल । असली कर्त्ता-धर्ता तँ केओ आओर छल। कुलमिला कए एकटा दुष्चक्रमे जनता फँसि गेल छल आ ओहीमे फसले रहि जाइत छल । चुनाओ तँ एकटा नाटक छलैक । केओ जितउ,सभकेँ गुंडा,अबारा चाहबे करी नहि तँ पार्टी चलतैक कोना,सरकारी धनक दोहन होएत कोना?पार्टीफंड मजगुत हेतैक कोना? समस्या बहुत गहींर छलैक । कतेको लोक सुधारक प्रयास करैत-करैत एहि दुनिआकेँ छोड़ि गेलाह । मुदा समस्या जस-के-तस रहि गेल । नेताजी सन-सन लोकक वर्चस्व बनले रहलैक । असलमे नारी निकेतन कांडक जड़ि कतए-कतए पसरल छल तकर अनुमान लगाएब बहुत मोसकिल छल । केओ नहि चाहैत छल जे एहि घटनाक्रमसँ जुड़ल जानकारी बाहर आबए । तेँ विजयपुरम जा कए बेसक शिखा प्राथमिकी लिखबा देलक मुदा बात आगू नहि बढ़ि सकल । उल्टे ओकर शक्तिपुरम पहुँचतहि हवाइ अड्डेपर मुसीबत भए गेल । सभलोकक ध्यान ओमहर बँटि गेल। सभ अपन जान बँचबएमे लागि गेल । अपन संबंधीक इलाज करबामे लागि गेल । जिनकर संबंधी,इष्ट-मित्रक एहि घटनामे मृत्यु भए गेलनि से सभ हुनकर अंतिम संस्कारमे लागि गेलाह,श्राद्ध करए लगलाह । तकर बाद बम विस्फोटक जाँच शुरु भेल । नित्य किछुगोटेकेँ जाँचक हेतु बजाओल जाए। लोकसभ एहिसभसँ बहुत परेसान भए गेल । बहुत रास निर्दोष लोकसभक नाम ओहि मामिलामे दए देल गेलैक । एकरसभक मूल उद्येश्य असली दोषीसभकेँ बँचाएब छल । नेताजीक कुर्सी सलामत रहत तँ बँकिए लोक सभ बँचले रहत । तेँ तमाम असामाजिक तत्व,बड़का-बड़का ठीकेदार,व्यापारी सभ जी-जानसँ नेताजीकेँ बँचबएमे लागि गेल रहए । ओहीक्रममे शिखाकेँ शुरुएमे डरा देबाक हेतु बम बिस्फोट कराओल गेल रहैक । मुदा मामिला जरूरतिसँ बेसी बढ़ि गेलैक । बहुत रास लोक घायल भए गेल । कतेको निर्दोष लोक मारल गेल। मुदा शिखा ठामहि बँचि गेलि । घायल ओहो भेल रहए,मुदा जान बँचि गेलैक । संजोगसँ अस्पतालमे नीक डाक्टर पकड़ा गेलखिन । ओ दिन-राति एक लए देलनि । हुनके परिश्रमक परिणाम भेल जे पनरह दिनक भीतरे शिखा स्वस्थ भए अस्पतालसँ वापस भए गेलि। ओहिना श्वेतवस्त्रा, नेताजीक विनाशक हेतु कृत संकल्प । नारी निकेतन मामिलाक कोर्ट स्वयं संज्ञान लेलक । परिस्थितिकेँ देखैत कोर्ट एहि मामिलाक जाँच सीबीआइकेँ दए देलक । तकर बाद तँ सौंसे हरकंप मचि गेल । नारी निकेतनक कर्ता-धर्तासभ पकड़ल गेलाह । सभटा कागजातसभ जब्त कए लेल गेल । किछु स्थानीय लोकसभक साक्ष्यक आधारपर नारी निकेतन लगपासमे जमीनक नीचाँसँ कतेको मृत लोकसभक कंकाल भेटल । नारी निकेतनसँ कतेको युवतीसभ गायब छलि । ओकरासभकेँ जेना-तेना पता लगाओल गेल । अखबार,मीडिआ एहि समाचारसभसँ पाटल रहैत छल । एहिसभ घटनाक बाद नेताजीक कुर्सी जाएब निश्चित लागि रहल छल । ऊपरसँ शिखा श्वेतवस्त्राक नामसँ सौंसे परिचित भेल जा रहल छलि । हमसभ जनक्रान्तिदलक मुख्यालयमे भेल बैसारमे शिखाकेँ पार्टीक अध्यक्ष बनेबाक प्रस्ताव केलहुँ । मुदा ओ साफे मना कए देलक । "हमरा कोनो पद नहि चाही । कोनो सम्मान नहि चाही । बस न्याय चाही । न्याय हमरेटा नहि चाही, ओकरासभकेँ भेटबाक चाही जे सुरक्षाक नामपर नारी निकेतनमे रहबाक बाद घोर असुरक्षित भए गेल छलि, समाजक तथाकथित पैघ-पैघ लोकक वासनाक शिकार भए गेल छलि । से जँ नहि भेल तँ हम एहि हेतु प्राण उत्सर्ग कए देब । मुदा रूकब नहि, झुकब नहि । जीवन पर्यंत लड़ैत रहि जाएब । इएह हमर जीवनक एकमात्र उद्येश्य अछि ।" नारी निकेतन कांडक जाँच जेना-जेना आगू बढ़ए लागल,नेताजीक स्वास्थ्य तहिना गड़बड़ाइत गेलनि । डाक्टरसभ दिन-राति लागल रहए । मुदा बिमारीक किछु थाह लगबे नहि करैक। मुदा नित्य एकटा नव समस्या हुनका होइत गेलनि । नेताजीक स्वास्थ्यक समाचार आखिर बाहर आबिए गेल । लोकसभमे चर्चा होबए लागल "एकर पाप डिड़िआ रहल छैक ।" "कर्मक फल तँ भोगहि पड़ैत छैक ।" "एकर नाश हेबे करतैक । भगवान सभ देखैत छथिन । तरह तरहक बातसभ लोकसभ करए । नेताजीक असली बिमारी की रहनि से मुदा डाक्टर नहि बूझि सकल । एहिना अनुमानसँ इलाज करैत रहल । 28 शिखाक विद्रोही रूखि देखि संदीपक हृदयपर बहुत आघात लगलैक । कष्टमे हमहु सभ रही। मुदा समस्याक समाधानो कोनो आसान नहि छल,एकदिनमे तँ होबए बला बात नहिए रहैक। निठ्ठाह कए सड़ि गेल व्यवस्थाकेँ कानून सम्मत तरीकासँ बदलि देब आसान काज नहि छलैक । मुदा विकल्पो नहि छलैक । तेँ हम आ शक्तिनाथ राति-राति भरि जागि कए भविष्यक आंदोलनक प्रारुप बनबएमे लागल रही । मुदा संदीपकेँ बहुत अनमनस्यक देखिऐक। गप्प-सप्पमे ओ आब बेसी रूचि नहि लैत छल । एकदिन हम पुछबो केलिऐक- "की बात छैक? आइ-काल्हि तूँ बहुत गुम्म रहैत छह?" परंतु ओ किछु जबाब नहि देलक । आओर गंभीर भए गेल। हमहु बेसी नहि कहलिऐक । मोनमे होअए लागल जे की पता कहीं उल्टे भए जाइक । ओ कोनो नवालिग तँ अछि नहि। तेँ समयक प्रतीक्षा करबे उचित बुझाएल । ई बात हम नीकसँ बुझिऐक जे शिखाक संग भेल कुकांडक ओकर मनोदशापर बहुत प्रतिकूल प्रभाव पड़ल अछि । उमीद रहए जे कालक्रमे ओ स्वयं संतुलित समाधान दिस बढ़त । मुदा से भेल नहि । कैकबेर ओकरा हम शिखाक संगे एकांती करैत देखिऐक । हमरा चिंता होअए जे कहीं ई सभ कोनो गलत रस्ता ने पकड़ि लिअए । एकदिन रातिमे हम उठलहुँ तँ संदीप नहि रहए । ओकर ओछाओन खाली रहैक । बाहर रस्ता दिस देखलहुँ । सौंसे सुन्न छल। कतहु केओ नहि देखाइत छल । रहि-रहि कए एकटा कुकुरक भुकबाक अबाज जरूर सुनाइत छल । हमरा चिंता भेल । भेल जे शक्तिनाथकेँ उठाबी । मुदा ओ निचैन सुतल रहए। दिन भरि काज करैत-करैत बहुत थाकि गेल रहए । प्रात भेने फेर ओहिना काज करबाक छलैक । गामे-गाम जन-जागरण करबाक हेतु घुमबाक छैक । तेँ ओकरा किछु नहि कहलिऐक, सुतले छोड़ि देलिऐक । हम उठि बैसलहुँ । कखनहु बाहर कखनहु अंदर होइत रहलहुँ । मुदा संदीप कतहु नहि देखाएल । दूपहर रातिएमे संदीप अपन डेरासँ निकलल । ओकरा नेताजीक बहुत रास रहस्य बूझल रहैक । नेताजी एहिबातसँ बहुत चिंतित रहबो करथि। मुदा कोनो तरहें ओकरा काबूमे नहि कए सकल । संदीप हमरासभक संगे आबि गेल । नेताजीक घोर विरोधी भए गेल । दिन-राति जनक्रान्ति दलक कार्यक्रमकेँ आगू बढ़एबामे लागल रहल । मुदा शिखा कांडसँ ओकर दिशा बदलि गेलैक । ओ जल्दी सँ जल्दी नेताजीक विनाश चाहैत छल । ओही क्रममे ओ ओहि राति बिदा भेल रहए । ओकरा नीकसँ पता रहैक जे नेताजी राति कए सरकारी निवासमे नहि,अपितु थोड़बे फटकी एकटा ठीकेदारक मकानमे रहैत अछि । ओतए हुनकर रासलीलाक ओरिआन रहैत छनि। भोर होएबासँ पहिनहि ओ अपन सरकारी निवासपर लौटि जाइत छथि। ताही अनुमानक अनुसार ओ ठीकेदारक घर लग पहुँचल । ओहि घरक आगू-पाछू किछु नहि छलैक । ओतए कोनो सरकारी सुरक्षा व्यवस्था सेहो नहि रहैक। ओ मकानक पछिला गेटसँ घुसल । खिड़कीसँ भीतर देखलक । नेताजी महिलाक संगे पड़ल छलाह। ओहि कोठरीक बगल बला कोठरी लग गेल । कनीके प्रयाससँ ओकर छिटकिनी नीचाँ सड़कि गेलैक । ओ कोठरीमे पैसि जाइत अछि । जेबीमे सँ छुरी निकालैत अछि । दुनू कोठरीक बीच केबार खुजले रहैक। ओ सावधानीपूर्वक आगू बढ़ैत अछि । नेताजी फोंफ काटि रहल छलाह। हुनकर बगलमे सुतल महिला सेहो निन्नमे छलि । संदीप आगू बढ़ल । छुरीकेँ कसि कए पकड़लक । एकबेर फेर ध्यानसँ नेताजीकेँ देखलक आ जोरसँ छुरी हुनकर छातीमे घुसेबाक हेतु चला देलक। संजोग एहन भेलैक जे छुरी नेताजीक छातीमे नहि लागि हुनकर बामा हाथमे लगलनि। ओ चिचिआ उठलाह। हुनका एना चिचिआइत देखि बगलमे सुतलि ओ महिला उठि बैसलि । संदीप ओही छुरीसँ दोबारा नेताजीपर आक्रमण करबाक प्रयास केलक । ताबे ओ महिला सजग भए गेल छलि । ओकरा भरि पाँज पकड़ि लेलक । नेताजी सेहो उठि गेल छलाह। ओकरा धर दए चिन्हि गेलाह । ओहने हालतमे उठि संदीपक हाथसँ छुरी छिनि लेलक । मोबाइल उठओलक आ ककरो फोन कए देलक । औ बाबू! देखिते-देखिते चारिटा मुस्टंड ओतए हाजिर भए गेल । संदीप ठामहि पकड़ल गेल । संदीपक योजना असफल भए गेलैक । उल्टे आब ओ संकटमे फँसि गेल । प्रायः ओकरा ई नहि बूझल रहैक जे नेताजी बहुत घुटल आदमी अछि । बेसक ओ गुप्त स्थानमे आनंद मना रहल छल,मुदा संकटसँ निपटबाक अपन निजी सुरक्षाक ओरिआन तँ केनहि छलाह। आब तँ संदीप पकड़ाइए गेल छल । मुस्टंडसभ ओकरा बड्ड मारि मारलकैक । मोबाइल छिनि लेलकैक। जेबीमे जे कनी-मनी टाका रहैक सेहो छिनि लेलकैक । ओ अधमरु भए गेल छल । ओहने हालतमे मुस्टंडसभ ओकरा बीच रस्तापर फेकि घसकि गेलैक । 29 मुस्टंडेमेसँ केओ नेताजीक पत्नी महिमाकेँ फोन कए घटनाक सूचना देलकनि । ओ तँ अपने परेसान छलीह । रातिमे नेताजीकेँ गायब देखि चिंतामे रहथि । ओना ई कोनो नव बात नहि छल । नेताजी अहिना करिते रहैत छलाह। महिमा एहिबात सँ बहुत दुखी रहैत छलीह । कैकबेर मोन होनि जे नेताजीसँ संबंध विच्छेद कए ली । मुदा नेताजी घटी मानि लैत छलाह,फेरसँ एहन गलती नहि करबाक प्रतिज्ञा करैत छलाह। मुदा प्रात भेने फेर ढाकक तीन पात। ओ पुरने चालि पकड़ि लैत छलाह। नेताजीक राजनीतिक भविष्यकेँ ध्यानमे रखैत महिमा सेहो बातकेँ बेसी नहि बढ़बैत छलीह । मुदा ओहि दिन तँ बात स्वतः सार्वजनिक भए गेल छल । नेताजी घायल भए गेल रहथि। हुनका संगे सुतल महिला हुनका अस्पताल लए गेलनि। अस्पतालमे लोकक करमान लागि गेल छल। पुलिससभ पुछ-ताछ हेतु ओहि महिलाकेँ पकड़ि लेलकैक । पुलिसकेँ इसारा करैक । मुदा ओ सभ अपना हिसाबे जाँचमे लागल रहल । पुलिस ततेक दबाब देलकैक जे आखिर ओ महिला बाजिए देलकैक- "हम नारी निकेतनमे रहैत छलहुँ । एक राति किछु बदमाससभ हमर अपहरण कए लेलक । तकर बादसँ दोबारा ओतए नहि जा सकलहुँ । दिनमे कतहु, रातिमे कतहु पहुँचा देल जाइत छी । सालक-साल एहिना समय बीति रहल अछि। केओ देखनाहर नहि अछि ।" नारी निकेतन कांडक जाँच कए रहल सीबीआइ अस्पताल पहुँचि ओहि महिलाकेँ अपन कब्जामे लए आगूक पूछ-ताछ हेतु अपन कार्यालय लेने चलि गेल । नेताजीक बामा हाथमे लागल घावपर टाका लगा देल गेल । तकर बाद विशेष कक्षमे राखि देल गेल । संदीप सेहो अस्पताल आनल गेल । ओकर हालत बहुत खराब छलैक । यत्र-तत्र चोटक निसान छलैक । कैकठामसँ खून बहि रहल छलैक । होसो नहि छलैक। लोकसभ तँ कहैक जे ओकर बँचनाइ मोसकिल अछि । अस्पतालमे डाक्टरसभ किछु नहि बजैत छल । एक दिस नेताजी आ दोसर दिस ओकर शत्रु संदीप । एकहि अस्पतालक एकहि विभागमे । मुदा दुनूक सुबिधामे आकाश-पतालक अंतर छल । यद्यपि नेताजीक स्थिति ठीक छल,सभ डाक्टर ओकरेपर लागल रहैत छल । संदीपकेँ ओकर भाग्यपर छोड़ि देल गेल छलैक । सत्य बात तँ ई छलैक जे अस्पतालक डाक्टरसभ ओकरा एहि अस्पतालमे भर्ती नहि करए चाहैत छल । संजोगसँ हम आ शक्तिनाथ ओहिठाम पहुँच गेल रही। अस्पतालक चारूकात हमर पार्टीक कार्यकर्तासभक मेला लागि गेल छल । हमसभ अस्पतालक अधीक्षककेँ भेंट केलिऐक । तकर बादे संदीपक इलाज शुरु भए सकल । संदीप बँचि गेल । नेताजी सेहो बँचि गेलाह। मुदा एहि घटनासँ नेताजीक राजनीतिक भविष्य डमाडोल भए गेलनि। प्रतिनिधि सभामे भारी हंगामा भेल । नेताजीक खिलाफमे पक्ष-विपक्षसभ एकमत भए गेल । एहन आदमी राज्यप्रमुख नहि रहि सकैत अछि । "पहिने ई इस्तीफा दिअए तकर बादे आओर किछु ।" आखिर प्रतिनिधि सभा स्थगित भए गेल । नेताजी बहुत मोसकिलमे फँसि गेल छलाह । अपन खास-खास लोकसभसँ मंत्रणा केलथि। सभ एकमतसँ नेताजीक इस्तिफापर सहमत छल। आखिर नेताजी एकर समाधान तकलथि "ठीक छैक । अहाँ लोकनिक ई बात हम मानि लैत छी। मुदा अहूँसभ हमर एकटा बात मानि लिअ।" "बाजू की प्रस्ताव अछि?" "हमरा बदलामे हमर श्रीमतीजी राज्यप्रमुख बनतीह ।" "एहनो कहीं भेलैक अछि? ओ की जाने गेलथि राजनीति?" "केओ पेटसँ सिखने नहि अबैत अछि । आखिर ई महिला सशक्तीकरणक युग छैक । ताहि समयमे अहाँसभ एहन बात कोना कए सकैत छी?" "पार्टीक अंदर एक सँ एक अनुभवी लोक छथि, वरिष्ठो छथि, हुनकासभकेँ मौका देल जाए ।" "हमर बात मानि लिअ । नहि तँ सभक फाइल हमरा लग अछि । सभक गुप्त बातसभ बाहर आबि सकैत अछि । तखन जँ गड़बड़ होएत से अहाँलोकनि जानी ।" नेताजीक ओहिठामक भेल बैसारक जानकारी असामाजिक तत्वसभकेँ भेलैक। ओकरासभक हेतु ई स्वर्णकाल छल । सरकार बनाएब-खसाएब ओकरसभक साबिक धंधा छल। सभ अपन-अपन जासूस नेताजीक लगपासमे राखि देलक । ओकर एक-एक गतिविधिक जानकारी लेबए लागल । जखन ई बात तय भए गेलैक जे नेताजी आब राज्यप्रमुख नहिए रहताह,तखन ओसभ नेताजीपर सबार भए गेल । बेरा-बेरीसभ नेताजीकेँ घेरलक आ अपन-अपन हिसाब-किताब साफ करबाक दबाब बनबए लागल । "अहाँ सभ अनेरे चिंतामे छी । हम तखनहि हटब जखन महिमा राज्यप्रमुख बनतीह ।" "एहनो कहीं भेलैक अछि ।" "एहने हेतैक । हमसभकेँ ई बात साफ कए देलिऐक अछि। इहो कहि देलिऐक अछि जे जँ केओ गड़बड़ करत तँ तकर हाल हमरोसँ खराब भए जेतैक । सभक फाइल तैयार छैक । बस मीडिआमे जेबाक देरी अछि ।" "असामाजिक तत्वसभ मोंछपर हाथ देलक । बाजल- "जँ से होइक तँ हमसभ अहाँक संगे छी । हमरसभक हितक ध्यान राखल जेबाक चाही । बस एतबे । हमरासभकेँ एहिसँ कोनो मतलब नहि अछि जे राज्यप्रमुख अहाँ छी, की महिमा बनैत छथि, की केओ आओर ।" "तखन निश्चिंत भए अपन काजमे लागल रहू । किछु पार्टीफंडमे जमा कए दिऔक । कारण अखन खर्च बढ़ि गेल छैक। आगू हम देखि लेब । "एवमस्तु ।" -सभ एकस्वरसँ बाजि उठल । 30 ओमहर महिमाक शपथग्रहण समारोह भए रहल छल,नेतासभ सलाहकार बनबाक हेतु पाँतिसँ बैसल छलाह,इलाकाक असामाजिक तत्वसभ उत्सव मना रहल छलाह। सदर बजारक मिष्ठान्न भंडार जनताक हेतु खोलि देल गेल छल । जे जतेक मिठाइ खा सकए,जतेक अपना संगे लए जा सकए कोनो मनाही नहि,कोनो शुल्क नहि । सहरमे रसनचौकी बाजि रहल छल। नव राज्यप्रमुखक स्वागतमे सहर भरिमे तोरनद्वार बनाओल गेल छल । रंग-विरंगक फूलसभसँ सौंसे रस्ताकेँ पाटि देल गेल छल। जनतामे एहन संदेश देबाक प्रयास कएल जा रहल छल जे बितल बातकेँ बिसरि जाउ,आब सभकिछु नीके होएत । जनताक हेतु शासन दिन-राति काज करत । जरुरतिक सभ चीज सुलभ रहत। बिजली मुफ्त,भानसक हेतु गैस मुफ्त ,ततबे नहि गृहणीसभकेँ मासे-मास पाँच हजारक पेनसन सेहो देल जेतैक । ककरो किछु करबाक काज नहि । सभटा भार सरकार उठाओत । लोकसभ बस स्नान,ध्यान कए पलथा मारि कए बैसि जाएत आ जलखै,चाह,भोजन सभ किछुक ओरिआन मुफ्तमे सरकार करतैक। ततबे नहि,जे सभ दारू पिबैत छथि तिनका हेतु साँझमे दारू सेहो मुफ्त । जतेक पिबथु कोनो कमी नहि रहतनि। एहिसभक बदलामे जनतासँ अपेक्षा कएल जाएत जे ओ सभ नव सरकारक आँखि मूनि कए समर्थन करैत रहताह। सरकार विरोधी तत्वकेँ राष्ट्रद्रोही बूझताह । विपक्षक बातमे नहि अओताह आ जहिआ कहिओ भोट होइ,सरकारक पक्षमे मतदान करताह । सरकारी घोषणासँ जनता बहुत खुस रहए । मासे-मासे पानि-बिजलीक बिल नहि देबए पड़ैक । मासमे दूबेर किलोक-किलो मंगनीमे रासन भेटि जाइक । सभ अपन-अपन दरबाजापर तास खेलाए, भोजन करए आ साँझ पड़ितहि सुति रहए । लोकसभ आपसमे गप्प करैत रहैत छल - "भाइ! एहिसँ नीक सरकार नहि भए सकैत अछि? अनेरे लोकसभ नेताजीक फज्जति करैत छल । ओकरा खिलाफ तरह-तरहक आरोप-प्रत्यारोप लगा रहल छल ।" लोकसभ खुस छल । ओमहर नेताजीक समर्थनमे असामाजिक तत्वसभ दिन-राति एक केने छल। नेताजी आ हुनकर गिरोहक तमाम दुष्टताक अछैत शिखा अपन अभियानमे लागल रहलि । सरकार बदलि गेलैक। नव राज्यप्रमुख बनि गेलैक । जनताकेँ प्रलोभन दए मिला लेबाक सरकारी प्रयास चलैत रहलैक । मुदा शिखा अपन अभियानमे अड़ल छलि । एकदिन एहिना भोरे अपन समर्थकसभक संगे शिखा निकलल छलि की ठीक सामनेसँ एकटा ट्रक टक्कर मारि देलकैक । ओकर जीपक अगिला हिस्सा चुकरी-चुकरी भए गेल । कैकगोटे नीचाँ खसल । कैकगोटे घायल भेल । शिखाकेँ सेहो कैकठाम चोट लगलैक । कार्यकर्तासभ ओकरा उठा-पुठा कए सरकारी अस्पताल पहुँचओलक । बदमाससभक योजना शिखाकेँ दुर्घटनामे खतम कए देबाक रहैक । मुदा से सफल नहि भेलैक । मुदा ओ सभ शिखाक पछोड़ केने अस्पताल धरि पहुँचि गेल । अस्पतालमे इलाज करा रहलि शिखाकेँ ओतहि साफ कए देबाक चेष्टामे लागल रहल । कोनो सिस्टरकेँ मिला लेने छल । ओ शिखाकेँ जहरक सुइआ घोपए जाइए रहल छल की एन मौकापर एकटा डाक्टर ओतए पहुँचि गेल । सुइआक डिब्बासँ ओ बूझि गेल जे बात की अछि । ओ सिस्टरकेँ धएले चमेटा कसि देलक । सिस्टरक हाथसँ सुइआ खसि पड़लैक । सिस्टर हतप्रभ छलि । जाबे किछु बूझितए,सम्हरितए ताबे डाक्टर फेर एक चमेटा लगा देलक । ताबे पाछूसँ चारिटा मुस्टंड दौड़ल । लगपासमे इलाज करा रहल रोगीसभक संबंधी सभ सेहो सहटि कए ओतए आबि गेल । शक्तिनाथ तमाकुल खेबाक हेतु ओसारापर गेल छल । हल्ला सुनि कए ओहो आबि गेल । पुलिससभ सेहो दौड़ल । कनीके कालमे लागल जेना ओतए बिहारि उठि गेल । बिहारिओ एहन जे शांत हेबाक नामे नहि लए रहल छल । एहनो माहौलमे मुस्टंडसभ प्रयास केलक जे सिस्टरकेँ घिचने बाहर चलि जाए । किछु मुस्टंड शिखाक लगीच पहुँचि गेल। ओ सभ प्रयास केलक जे शिखाक गला दबा दी । एतबहिमे दे-दनादन दे दनादन जनक्रान्तिदलक कार्यकर्तासभ ओतए पहुँचि गेल। ओतए पुलिससभ सेहो आबि गेल । मुदा करए किछु नहि । पुलिससभ मुरुत जकाँ तमासा देखैत रहि गेल । बात बढ़ैत देखि मुस्टंडसभ जान बँचा कए भागल । सिस्टर पकड़ल गेलि । शिखाकेँ रक्षार्थ जनक्रान्तिदलक कार्यकर्तासभ ओकरा चारूकातसँ घेरि लेलक । मीडिआबलासभकेँ सेहो ई समाचार पता लगलैक । देखिते-देखिते अस्पतालक दृश्य सौंसे देशमे टेलीँवीजनक माध्यमसँ प्रसारित होबए लागल । सभ एतबे पूछि रहल छल- "आखिर ई सभ केलक के?" "जरूर एहिमे नेताजीक षड़यंत्र अछि ।" "सएह कहू ओ एतेक नीचतापर उतरि जाएत से नहि बूझा रहल छल ।" एहि तरहक गप्प गामक-गाम होबए लागल । थोड़े कालक बाद शक्तिनाथ हमरा फोन केलक- "कतए छी?" "डेरेमे?" "जल्दी निकलू । हम ओतहि आबि रहल छी ।" "की भेलैक?" "आहि रे बा! अहाँकेँ सेहो नहि बूझल अछि? सौंसे दुनिआमे हल्ला भए गेल आछि।" "बात की छैक से कहह ने।" "शिखापर ट्रक चढ़ा देने रहैक । संजोगसँ ओकर जान बँचि गेलैक । मुदा?" "मुदा की?" "तकर बादो ओ सभ शिखाक अस्पताल धरि पछोड़ केने रहल, चाहलक जे ओतहि साफ करबा दी।" "से केना?" "एतेक बात फोनपर करब ठीक नहि । हम पहुँचिए रहल छी । संगे ओतए चलब । सभ बात अपने बूझि जेबैक ।" "ठीक छैक आबह ।" -रबीन्द्र नारायण मिश्र, पिताक नाम: स्वर्गीय सूर्य नारायण मिश्र, माताक नाम: स्वर्गीया दयाकाशी देवी, बएस: ६९ वर्ष, पैतृक ग्राम: अड़ेर डीह, मातृक: सिन्घिआ ड्योढ़ी, वृति: भारत सरकारक उप सचिव (सेवानिवृत्त), स्पेशल मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट, दिल्ली(सेवानिवृत्त), शिक्षा: चन्द्रधारी मिथिला महाविद्यालयसँ बी.एस-सी. भौतिक विज्ञानमे प्रतिष्ठा : दिल्ली विश्वविद्यालयसँ विधि स्नातक, प्रकाशित कृति: मैथिलीमे: प्रकाशन वर्षः२०१७ १.भोरसँ साँझ धरि (आत्म कथा),२. प्रसंगवश (निवंध), ३.स्वर्ग एतहि अछि (यात्रा प्रसंग); प्रकाशन वर्षः२०१८ ४. फसाद (कथा संग्रह) ५. नमस्तस्यै (उपन्यास) ६. विविध प्रसंग (निवंध) ७.महराज(उपन्यास) ८.लजकोटर(उपन्यास); प्रकाशन वर्षः२०१९ ९.सीमाक ओहि पार(उपन्यास)१०.समाधान(निवंध संग्रह) ११.मातृभूमि(उपन्यास) १२.स्वप्नलोक(उपन्यास); प्रकाशन वर्षः२०२० १३.शंखनाद(उपन्यास) १४.इएह थिक जीवन(संस्मरण)१५.ढहैत देबाल(उपन्यास); प्रकाशन वर्षः२०२१ १६.पाथेय(संस्मरण) १७.हम आबि रहल छी(उपन्यास) १८.प्रलयक परात(उपन्यास); प्रकाशन वर्षः२०२२ १९.बीति गेल समय(उपन्यास) २०.प्रतिबिम्ब(उपन्यास) २१.बदलि रहल अछि सभकिछु(उपन्यास) २२.राष्ट्र मंदिर(उपन्यास) २३.संयोग(कथा संग्रह) २४.नाचि रहल छलि वसुधा(उपन्यास) २५.दीप जरैत रहए (उपन्यास)। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.८.रबीन्द्र नारायण मिश्र- जय महाकाल रबीन्द्र नारायण मिश्र जय महाकाल कोरोनाक आक्रमणक बाद कैकसाल धरि हमरा लोकनि घरेमे बंद रहलहुँ । कोरोना कम भए गेलाक बादो ओकर भय बनल रहल । ओकरा मोनसँ हटबामे सेहो किछु समय लागल। पछिला साल बहुत सोच-बिचारक बाद हम दुनू बेकती प्रयागराज गेल रही। ओहिठामसँ चित्रकुट सेहो घुमल रही। प्रयागराजसँ सटले मेजा तहसीलमे एनटीपीसीक कारखानाक आवासीय परिसरमे सेहो हमसभ रहल रही। तकर बादसँ घरेपर छलहुँ। अस्तु,मोन बहुत दिनसँ कतहु घुमबाक हेतु व्यग्र छल। आखिर हमसभ महाकालेश्वर,ओमकारेश्वरक दर्शन करबाक मोन बनेलहुँ । ताहि हेतु इन्दौरमे रहबाक जोगार सरकारी होलीडे होममे भए गेल। रेलक टिकट सेहो कटि गेल। एतेकक बादो चिंता भए जाए जे जाइत-जाइत स्वास्थ्य अनुकूल रहि सकत कि नहि? आखिर ओ दिन आबिए गेल। हमसभ बाइस जुलाइक चारि बजे टैक्सीसँ नईदिल्ली टीसन बिदा भए गेलहुँ । ट्रेन छुटबाक समय पौने सात बजेसँ एकघंटा पहिने हम दुनू बेकती टीसन पहुँचि गेलहुँ । टीसनपर पहुँचलाक बाद एकटा कुली ठीक केलहुँ । टीसनपर यदि कुलीकेँ पता लागि जाइत छैक जे यात्री एसीफस्ट कोचसँ जेताह तँ ओकर दर दुगुन्ना तँ भइए जाइत छैक । तथापि दुसए टाकामे हमरसभक बात बनि गेल। आगू-आगू सामानसभक संग कुली आ तकर पाछू-पाछू हम दुनू बेकती बिदा भेलहुँ । अजमेरी द्वारि दिसक एस्कलेटरपर पहिने ओ आ तकरबाद हमसभ पैर रखलहुँ। देखिते-देखिते कुली कतएसँ कतए चलि गेल। हम आ श्रीमतीजी संगे रही। एस्कलेटरपर हुनकर पैर ठीकसँ नहि बैसि सकलनि। परिणाम भेल जे आधासँ ऊपर गेलाक बाद हुनकर पैर पिछड़ि गेलनि। हम अकचका गेलहुँ । ओ एस्कलेटरपर भसिआइत बुझेलीह। रच्छ भेल जे कहुना कए ओ ओकर रेलींगकेँ थामि लेलीह। यदि से नहि होइत तँ ओ पाछू भरे खसितथि आ पता नहि की होइत? साइत एकटा बड़का ग्रहसँ सस्तेमे छुटकारा भए गेल। हमसभ प्लेटफार्म नंबर आठपर पहुँचि गेलहुँ । ट्रेन प्लेटफार्मपर लागल छल । हमरा सामनेमे एसी वनक कोच संख्या एचवन छल। मुदा अखन ओहिमे पैसबाक अनुमति नहि छलैक। ओकर सफाइ चलि रहल छलैक। बाहर बहुत गर्मी छलैक। तेँ हम प्रयास केलहुँ जे जल्दीसँ ओहि डिब्बामे चलि जाइ। ताहि हेतु ओहिमे कार्यरत एकटा कर्मचारीकेँ आग्रह केलिऐक । ओ सहमति दए देलक। हमदुनू बेकती ट्रेनक ओहि डिब्बामे पैसि गेलहुँ आ अपनसीटपर चलिओ गेलहुँ । मुदा ताबते आरो यात्रीसभ सेहो ओहि डिब्बामे पैसि जेबाक दुराग्रह करए लागल। ओहिठाम कार्यरत कर्मचारीसभ से मना कए देलकैक। तकर बाद हल्ला शुरु भए गेल। -अहाँ हिनकासभकेँ तँ जाए देलिअनि। हमसभ किएक नहि जाएब? हमरो तँ टिकट अछि। आखिर एकटा कर्मचारी हमरा कहलक- -अहाँसभ बाहर चलि जाउ । दोसर यात्रीसभ परेसानी कए रहल अछि। जखन डिब्बा चलबाक हेतु तैयार भए जेतैक तखन फेर चलि आएब। -एहनो कतहु भेलेक अछि? हमसभ बूढ़ छी। बाहर दम फुलि रहल छल। तोरेसभक कहलाक बाद हमसभ एहिठाम अएलहुँ अछि। हमरासभकेँ टिकट अछि,एही डिब्बामे जेबाक अछि,तखन एतए बैसिओ गेल छी,फेर बाहर निकलबाक कोन बात भेलैक? मुदा ओ सभ अड़ि गेल। तखन हमहूँ धमकी देलिऐक। -बेस तँ हम रेलमंत्रीकेँ सिकाइत करैत छी। आखिर हमरालोकनि वरिष्ठ नागरिक छी। उचित टिकट लेने छी आ एही ट्रेनसँ एही डिब्बामे जेबोक अछि। तखन किएक उतरि जाउ? रेलमंत्रीक नाम सुनितहि ओसभ सकदम भए गेल। हमरासभक आगूक परदा घिचि देलक। हमहुँसभ निचेनसँ बैसि गेलहुँ । आखिर ट्रेनक डिब्बा खुजल। यात्रीसभ धराधर अपन-अपन सीटपर बैसि गेलाह। हमसभ तँ पहिनहिसँ बैसिए गेल रही। हमरा कोच संख्या एचवनमे शायिका संख्या सात आ नव रहए। दुनू निचुलके सीट छल। ऊपरक एकटा यात्री आबि गेल रहथि। दोसर यात्री मथुरासँ ट्रेन पकड़ताह,से बात टीटी बजलाह। नियत समय सात बाजि कए पन्द्रह मिनटपर ट्रेन खुजल। हमसभ बहुत प्रसन्न रही। ट्रेन थोड़बे कालमे अपन गतिसँ चलि रहल छल। टीटी अएलाह। हमरसभक नाम पुछलथि । बस एतबे। किछु आर नहि । थोड़े कालक बाद भोजनक आदेश देल गेल। एकटा यात्री तँ आनलाइन भोजनक आदेश देने रहथि। तेँ हुनकर भोजन मथुरामे ट्रेनमे आबि सकलनि। ताबे तँ हमसभ भोजन कए निश्चिन्त भए गेल रही। रेल भोजनालयसँ देल गेल हमर सभक भोजन बहुत साधारण छल। हमरा अफसोच होअए जे हमहूँ किएक ने आनलाइन भोजनक जोगार कए लेलहुँ? राति भरि चललाक बाद ट्रेन निश्चित समयसँ एक घंटा पहिने पौने छओ बजे इन्दौर पहुँचि गेल। पन्द्रह मिनटमे आटोसँ हमसभ केन्द्र सरकारक होलीडे होम पहुँचि गेलहुँ। ओहिठाम मुख्यद्वारिपर कार्यरत चौकीदार हमरासभकेँ भीतर आबए देलक। स्वागत कक्षमे केओ नहि छल। हम ओकरा पुछलिऐक- -एहिठाम केओ आदमी नहि अछि की? ओ उत्तर दैत अछि- -हम अहाँकेँ आदमी नहि बुझाइत छी की? ओकरा आब की कहितिऐक? हमरा चुप देखि ओ बाजल- -सात बजे मनेजर अएताह। अहाँ चाही तँ हुनका मोबाइलपर फोन कए दिअनु। -हुनकर मोबाइल नंबर आ नाम एकटा कागजपर लिखि कए स्वागत कक्षमे साटि देल गल छल। हम हुनका ओहि मोबाइल नंबरपर फोन केलिअनि । ओहो ओएह बात कहलाह- -सात बजे धरि अहाँसभ ओतहि बैसू। तकर बादे हम आबि सकब। ओना कोठरी साढ़ेदस बजेसँ पहिने नहि भेटि सकत। कारण ओ नओ बजे धरि खाली हेतैक आ तकर बाद ओकर सफाइ कएल जाएत। हम सामनेमे राखल सोफापर बैसि गेलहुँ । ताबतेमे एकटा आर परिवार पहुँचि गेलाह। ओहोसभ दिल्लीएसँ आबि रहल छलाह। थोड़ेकाल हुनकासभसँ गप्प-सप्प केलहुँ । नित्यकर्मसँ निवृत भेलहुँ। ताबतमे कैंटिन खुजि गेलैक। हमसभ भोरुका चाह दू-दू कपक पीलहुँ । चाह पीलाक बाद मोन कनीक आश्वस्त भेल। ताबे होलीडे होमक मनेजर आबि गेल रहथि। हुनकेसँ एकटा ट्रैभेल एजेंटक मोबाइल नंबर लेलहुँ। हम ओकरा फोन करैत छी- -हमरा लोकनिकेँ दस बजेक आसपास महाकालेश्वर, उज्जैन जेबाक अछि। टैक्सीक जोगार भए सकत की? -किएक ने। -कतेक टाका लगतैक? -एकतीस सए । ओहिमे गेनाइ, ओहिठाम प्रमुख स्थानसभ घुमनाइ आ वापस इन्दौर आएब सामिल अछि। हम कहलिऐक- -ठीक छैक। अहाँ टैक्सी बलाकेँ पठाउ। हमसभ एहि बातसँ बहुत प्रसन्न रही जे एतेक आसानीसँ टैक्सीक जोगार भए गेल। थोड़बे कालक बाद टैक्सी बलाक फोन आएल । ओ दस बजे पहुँचि जाएत । हम सभ सोचलहुँ जे उज्जैन पहुँचिए कए छिप्रा नदीमे स्नान करब। दस बाजहि बला छल कि मनेजर हमरासभकेँ कोठरी संख्या १०१मे पहुँचा देलाह। हमसभ अपन सामान ओतए राखि बाहर निकलले छलहुँ कि टैक्सी बला सेहो पहुँचि गेल। एकटा झोरामे धोती,कुरता,अंगपोछा,सारी आदि राखि हमसभ टैक्सीमे बैसि गेलहुँ । टैक्सी अपन गंतव्य दिस बिदा भेल। वाहनचालक बहुत मधुर स्वरमे गबैत हनुमान चालीसा बजा रहल छलाह। बाहर मौसम बहुत सुखद छल। मेघ लागल छल। कतहु कोनो परेसानी नहि छल। टैक्सी तीव्र गतिसँ अपन गंतव्य महाकालक दरबार दिस बढ़ि रहल छल । महाकाल मंदिर हमसभ बारह बजेक आसपास उज्जैन पहुँचि गेलहुँ। सभसँ पहिने छिप्रा नदीक घाटपर पहुँचलहुँ। चप्पल कारेमे राखि देने रहिऐक । कारसँ उतरि नदीक घाट धरि जेबामे बहुत कष्ट भेल कारण सौंसे पातर-पातर पाथरक टुकड़ीसभ पसरल छल जाहिपर पैर रखितहि गड़ैत छल । छिप्रा नदीक पानि तँ जुड़सीतलक कादोसँ बेसी मैल छल। ओहि पानिमे नहा कए की शुद्ध होएब? अपना मोने सोचलहुँ। तथापि हम दुनू बेकती बेरा बेरी पानिमे कहुना कए डुबकी लगओलहुँ । ओहिठाम आसपासमे बड़ी-बड़ीटा मरल माछसभ पड़ल छल जकर दुर्गन्धसँ ओतए रहब बहुत मोसकिल बुझाइत छल। संभवतः नदीमे बेसी पानि बढ़ि गेलापर माछसभ बाहर खसि पड़ल आ ओतहि मरि गेल। जल्दीसँ स्नान कए हमसभ कार लग पहुँचलहुँ । लगीचेमे महाकाल भैरवक मंदिर छल। हमसभ ओतए भैरवक दर्शन करबाक हेतु पाँतिमे लागि गेलहुँ। मुदा ओ पाँति की छल बुझू लोकसभ जिलेबी जकाँ घुमि रहल छल। पाँच सएसँ बेसीए लोक ओतए पाँतिमे लागल छलाह। बहुत नहू-नहू लोक आगू बढ़ैत छल। थोड़े-थोड़े कालपर सेहो बंद भए जाइत छल। हालति देखि हमरा तँ बहुत चिंता होइत छल। -कहि नहि कखन धरि दर्शन होएत?-हम हुनका बेर-बेर कहिअनि। -महाकालेश्वरक दर्शन सेहो करबाक अछि। पता नहि कोना की होएत? एनामे केना दर्शन होएत?-हम दुनू बेकती आपसमे गप्प करैत रही। मुदा आब कएले की जा सकैत छल? पाँतिक बीचसँ वापसो होएब संभव नहि छल। हमरा सभकें मैथिलीमे गप्प करैत सुनि सामनेमे भेटि गेलाह समस्तीपुरक मैथिल परिवार। ई थिक अपन भाषाक चमत्कार ! हुनकासँ गप्प कए मोन कनी हल्लुक तँ भेबे कएल । आब हमसभ मुख्यमंदिरपर आबि गेल रही। लगीचेमे मुर्दा धह- धह जरि रहल छल। सौंसे ओकर धुआं पसरि रहल छल। भक्त लोकनिक जयकारा सेहो चलिए रहल छल,,,। जय श्रीकाल भैरव,,,! संभवतः ई दृश्य मोनमे ज्ञान उत्पन्न कए सकैत छल। व्यर्थक लालसासँ मोनमे उचाट उत्पन्न कए सकैत छल। मुदा से होइत कहाँ अछि? लोक ओतहु भैरव बाबासँ अपन अनेक कामनाक प्राप्तिक हेतु प्रार्थना करैत रहैत अछि। लगभग दू घंटा पाँतिमे घुमैत रहि गेलाक बाद हमसभ भैरव मंदिरक गर्भगृह लग पहुँचलहुँ । मंदिरमे भैरवक आगूमे मोसकिलसँ एकमिनट समय भेटल। मोने-मोन हुनका प्रणाम कए आगू बढ़ि गेलहुँ । ताबे हमसभ बहुत थाकि गेल रही। वर्षासे जोर पकड़ि लेने छल। ओतए ठाढ़ प्रहरीकेँ हम मदति करबाक गोहार लगेलहुँ । हमरासभपर ओ दया केलक । ओ हमरासभकेँ पाछू बाटे निकालि देलक जाहिसँ वापसीमे फेरसँ पाँतिमे नहि लागए पड़ल। मुदा बाहर निकलितहि वर्षामे फँसि गेलहुँ । ओहिठामसँ जूता स्टैंड धरि जाएब पराभव भए गेल छल। कहुना कए भिजैत-तितैत हमसभ जूता स्टैंड पहुँचलहुँ । अपन-अपन जूता-चप्पल लेलहुँ । ओहिठामसँ भिजिते आगू बढ़ि वाहनचालककेँ ताकि रहल छलहुँ कि छत्ता लेने ओ देखाएल । मुदा ताबे तँ हमसभ नीकसँ भिजि गेल रही। ओही हालतिमे हमसभ टैक्सीमे बैसि महाकाल मंदिर दिस बढ़ि गेलहुँ । महाकालक नित्य भोरे ब्राह्मीमुहुर्तमे भस्म आरती कएल जाइत छनि। पहिने ऐहि लेल ओहिराति सभसँ पहिने जरल मुर्दाक भस्मक उपयोग होइत छल। मुदा आब गोइठासँ बनाओल गेल भस्मसँ भस्म आरती होइत अछि। एकरा देखबाक हेतु आननलाइन बुकिंग सेहो होइत अछि । मुदा साओन मासमे दर्शनार्थीक भीड़केँ देखैत ई सुविधा बंद कए देल गेल अछि। अस्तु, महाकालक दर्शनक हेतु हम शीघ्रदर्शनक आनलाइन टिकट कीनने रही। मंदिर परिसरमे द्वारि संख्या चारिसँ हमरासभकेँ एहि टिकटक संगे आगू जेबाक छल। हमसभ एही द्वारिसँ आगू बढ़ैत छी। कतहु कोनो परेसानी नहि,कोनो पाँति नहि । हमसभ धराधर मंदिरमे भीतर धरि प्रवेश कए गेलहुँ। बहुत नीकसँ महाकाल महादेवक दर्शन केलहुँ । तकर बाद मंदिरसँ बाहर अएलाक बाद हमसभ प्रसाद कीनबाक हेतु द्वारि संख्या एक लग बनल खिड़कीपर गेलहुँ । सए रुपयाक दरसँ यथेष्ट लड्डूक पैकेट कीनलहुँ । हमसभ तकर बाद अपन वाहनमे वापस जेबाक दिसामे बढ़लहुँ । एतेक आसानीसँ दर्शन भए जाएत से नहि सोचने रही। जहिना भैरव मंदिरमे भीड़ छल तहिना एहिठाम एकदम सपाट रस्ता। लगैत अछि महाकाल हमरालोकनिपर विशेष दया केलनि। संभवतः शीघ्रदर्शनक टिकट रहबाक कारण परेसानीसँ बचलहुँ । महाकालक दर्शनक बाद हमसभ बहुत संतुष्ट छलहुँ। आब आर कतहु जेबाक प्रयोजन नहि बुझा रहल छल । ओना वाहनचालक आर मंदिरसभक चर्च केलक । मुदा हमसभ आब कतहु नहि गलहुँ । सोझे वापसी यात्रा हेतु टैक्सीमे बैसि गेलहुँ । इन्दौर हमसभ अपन यात्राक मुख्यालय इन्दौर बनओने रही। कतहु जाउ,किछु करू घुरि कए वापस तँ घरे आएब। संयोगसँ एहि यात्रामे हमरा सरकारी होलीडे होममे जगह भेटि गेल छल जे सभ तरहेँ सुखद छल । ओतए सभ आवश्यक सुविधा छल। भोजन,जलखै,चाहक ओरिआन तँ छलहे। तेँ हमसभ वापस ओहिठाम आबि गेलाक बाद बहुत आराममे रहैत छलहुँ । जेना अपने घरमे होइ। आइ हमरा लोकनिक इन्दौरमे दोसर दिन छल। सोम दिन हेबाक कारण शिव मंदिरसभमे अथाह भीड़ हेबाक संभावना छल। तेँ हमसभ आइ आनठाम नहि जा कए स्थानीय भ्रमण करबाक निर्णय केलहुँ । भोरे जलखै चाहक बाद हमसभ ओही टैक्सीसँ नगर भ्रमण करए बिदा भेलहुँ । इन्दौर सहर पछिला कैकसालसँ सफाइक मामिलामे संपूर्ण देशमे प्रथम आबि रहल अछि। एहू साल सएह भेलैक । जखन इन्दौर सहरमे घुमि रहल छलहुँ तँ व्यवहारिक रूपसँ प्रत्यक्ष अनुभव भेल जे वस्तुतः ई सहर अतिशय स्वच्छ अछि । सदिखन सफाइ करबाक हेतु तत्पर कर्मचारीसभ। स्थानीय लोकोसभ ओहिना कान ठाढ़ केने । रोडपर तरकारीक दोकान बला सभ जाइत काल एक-एकटा खढ़ उठाबैत देखलहुँ । तकर बाद ओहि स्थानकेँ बाढ़निसँ साफ करैत देखलहुँ । ओ जखन दोकान बंद कए चलि तँ सड़क चिक्कन ,चमचम करैत छल,ओहिना जेना भोरमे रहल होएत। कतहु केओ सड़कपर अकर-बकर वस्तु नहि फेकैत। कोना ने औअलि आओत ई सहर?मोनमे होअए जे आन-आन सहरमे ई गुण लोकमे किएक ने अबैत छनि? इन्दौर सहर भ्रमणक क्रममे हमसभ सभसँ पहिने खजराना गणेश मंदिर पहुँचलहुँ । ई मंदिर अहिल्याबाई होल्कर बनओने छलीह। मुख्य मंदिरमे गणेशजीक भव्य प्रतिमा स्थापित अछि। लगपासक छोट-छोट मंदिरमे आन-आन देवतासभक मूर्ति स्थापित छनि। कहल जाइत अछि जे एहिठाम लोकसभ जे किछु अभिलाषाक कामना करैत छथि से प्राप्त होइत छनि। मंदिरमे दर्शन केलाक बाद हमसभ थोड़ेकाल ओतहि बैसलहुँ । ओहिठामसँ हमसभ पहुँचलहुँ अन्नपूर्णा मंदिर । एहि मंदिरमे अन्नपूर्णाक मूर्ति स्थापित अछि। चारूकात अतिशय स्वच्छ परिसरक बीचमे चम-चम करैत अन्नपूर्णाक मंदिर देखैत बनैत छल । हमसभ बहुत नीकसँ दर्शन केलहुँ । लगैत छल जेना एकटा बहुत पवित्रस्थानमे पहुँचि गेल छी। सहरमे घुमैत-घुमैत हमसभ राजवाड़ा पहुँचलहुँ । राजवाड़ा महल मध्य प्रदेश राज्यक इन्दौर शहरमे अवस्थित एक राजमहल छी । ई महल लगभग 200 साल पहिने बनल छल । एहि महलक वास्तुकला फ्रेंच, मराठा आ मुगल शैलीक अनेक रूप आ वास्तुकला शैलीक मिश्रण अछि । सात मंजिला एहि भवन मे निचला तीन मंजिला संगमरमरक बनल छल । ऊपरका चारि मंजिला सागौनक लकड़ीक सहायतासँ बनल छल । राजबादा ९१८ फीट लंबा आ २३२ फीट चौड़ा एहि भवनक प्रवेश द्वार ६.७० मीटर ऊँच अछि, जकर संरचना हिन्दू शैलीक महल जकाँ अछि । राजवाड़ा अपन इतिहास मे तीन बेर जरि चुकल अछि आ 1984 मे अंतिम बेर लागल आगि मे एकरा भारी नुकसान पहुंचल छल। आइ मात्र बाहरी भाग अक्षुण्ण अछि। ओहि महलमे घुमलाक बाद बाहर आबि हमसभ किछु फोटो घिचलहुँ । कैकबेर ओहि विशाल महलकेँ देखैत रहलहुँ आ तकर बाद आगू बढ़ि गेलहुँ । इन्दौर गेलहुँ आ ओहिठामक छप्पन दोकानमे जा कए मनपसिंद हलझप्पी नहि केलहुँ तँ की केलहुँ? इन्दौरक पोहा जिलेबी,पानी पुरी,दही पुरी,खोपरा पट्टी,गोंदक लड्डु,कचौरी आ पान बहुत प्रसिद्ध अछि। पोहा जिलेबी तँ भोरे-भोर सहरमे सभठाम भेटि जाएत । हमसभ दुपहरिआमे छप्पन दोकान लग पहुँचलहुँ । एकपाँतिसँ दुनूकात छोट-छोट दोकानसभमे अनेक प्रकारक भोजन सामग्रीसभ उपलब्ध छल। हमसभ थोड़ बहुत खेलहुँ । तकर बाद आगू बढ़ि गेलहुँ। तकर बाद हमसभ पहाड़ीपर बनल जैनसभक प्रसिद्ध तीर्थस्थल गोमतगिरि गेलहुँ। ओतए चौबीसो तीर्थांकरकेँ समर्पित चौबीसटा संगमरमरक मंदिर अछि। गोमतेश्वरक एक्कैस फीट उँच मूर्ति सेहो आकर्षणक केन्द्र अछि। रविदिन कए ओहिठाम आगन्तुक लोकनिकेँ दालबाटी खेबाक अवसर भेटैत छनि। साँझमे ओहि पहाड़ीपरसँ सूर्यास्तक दृश्य बहुत मनोरम होइत अछि। परंतु,हमसभ ओ दृश्य नहि देखि सकलहुँ । अहिल्याबाई होल्कर इन्दौरक नामसँ जुड़ल छथि। ओ बहुत धार्मिक प्रबृतिक छलीह । ओ संपूर्ण भारतमे प्रसिद्ध मंदिरसभक जीर्णोद्धार करओलीह। नव मंदिर,धर्मशाला सभक स्थापना सेहो करओलीह। एहिमे काशीविश्वनाथ मंदिर,वाराणसी,सरयू घाटपर निर्मित राम मंदिर,बद्रीनाथ,द्वारकाधीस,केदारनाथ,ओंकारेश्वर,आ रामेश्वरममे मंदिर,धर्मशाला आदिक स्थापना करबओलथि। ओमकारेश्वर मंदिर सोमदिन इन्दौर भ्रमणक बाद मंगलदिन हमसभ भोरे ओमकारेश्वर महादेवक दर्शनक हेतु बिदा भेलहुँ । मंगल दिन रहबाक कारण हम दुनू बेकती उपासमे रही। तेँ की? मोनमे ततेक उत्साह छल जे उपासक कारण कनिको परेसानी नहि बुझाएल । रस्तामे हमसभ एकठाम चाह जरूर पीलहुँ । तकर बाद वाहनचालक चलबैत रहल अपन वाहन आ हमसभ लैत रहलहुँ ओहि सुंदर मौसममे पहाड़ी यात्राक आनन्द। आकासमे मेघ उमरि-घुमरि रहल छल । हबा से मंद-मंद बहि रहल छल। दुनू दिस पहाड़ी आ बीच-बीचमे बोल बम करैत कमरथुआसभ आगू बढ़ैत जा रहल छल। एहन सुखद यात्रा होएत तकरा हमर कनिको अनुमान नहि छल। अपितु,हमरा कनी-मनी डरो होइत रहए। पता नहि पहाड़ी सड़कपर वाहन कोना चलत,आदि,आदि । मुदा से सभ किछु नहि छल। लागि रहल छल जेना चारूकातसँ आनन्दक वर्षा भए रहल अछि। एहि तरहेँ लगातार दू घंटा वाहन चलैत रहलाक बाद पहुँचि गेल ओमकारेश्वर। सभसँ पहिने हमसभ नर्मदा नदीक घाटपर गेलहुँ । नदीमे कातेमे बेरा-बेरी स्नान केलहुँ । किछु फोटो सेहो खिचलहुँ। तकर बाद ओमकारेश्वर मंदिर दिस बिदा भेलहुँ । हमरासभकेँ शीघ्र दर्शन करबाक टिकट छल। तथापि मंदिरक द्वारिएपर एकटा पंडा प्रस्ताव देलाह- -हमरा संगे चलू । हम नीकसँ महादेवक गर्भगृहमे दर्शन करा देब। महादेवपर जलो ढरबा देब। -मुदा हमरासभक लगमे तँ शीघ्रदर्शनक टिकट अछि? -तेँ की? ओहिसँ अहाँ महादेवपर जल थोड़े ढारि सकब। हम तँ अहाँकेँ जलाभिषेक करा देब। गर्भगृहमे तुरंत पहुँचा देब। -हमरा कतेक भुगतान करए पड़त? -एगारह सए। -हम एतेक टाका नहि देब। ओहि पंडासँ बहुत मोसकिलसँ जान बचा कए हमसभ आगू बढ़लहुँ । थोड़बे फटकी गेल होएब कि एकटा युवक पंडा फेर ओहने प्रस्ताव लए उपस्थित भए गेलाह । हम हुनका कहलिअनि -पाँचसए टाका दए सकैत छी। एहिसँ बेसी किछु नहि। ओ तैयार भए गेलाह । तकर बाद ओ आगू-आगू आ हमसभ पाछू-पाछू जा रहल छलहुँ । हमर श्रीमतीजीक हाथमे शीघ्रदर्शन बला पर्ची छलनि। से देखि कए एकटा सेवादार ओहि युवक पंडाकेँ टोकलकैक- -हिनकासभकेँ तँ शीघ्र दर्शनक टिकट छनि। हाथसँ इसार दैत ओ आगू बाजल- -हिनकासभकेँ ओहि बाटे लए जाहुन। तकर बाद पंडा रस्ता बदललक। हमहूँसभ ओकर पाछू-पाछू चलैत रहलहुँ । बहुत संकीर्ण सीढ़ीनुमा रस्तामे लोक ठसल छल। मोसकिलसँ पाँच मीटर आगू मंदिरमे प्रवेश करबाक द्वारि छल। मुदा ओतए पहुँचबे पराभव लागि रहल छल। ऊपरसँ लोकसभ बजैक जे बारह बजेक बाद एक घंटाक हेतु मंदिर बंद भए जाएत । हमसभ एहि बातसँ आर चिंतित रही । मुदा से नहि भेल। थोड़बे कालक धक्कम-धुक्कीक बाद हमसभ ओंकारेश्वर मंदिरक द्वारिसँ भीतर पैसि गेलहुँ । पैसि तँ गेलहुँ,मुदा आगू-पाछू लोकसभ लगैत छल पिचि देत। दर्शनक तँ भगवाने मालिक । आखिर जेना-तेना ओ पंडा लोटामे जल लेने आगू-आगू आ हमसभ ओकर पाछू-पाछु महादेवक आगूमे पहुँचि गेलहुँ। बेरा-बेरी महादेवपर जल ढारलहुँ , प्रणाम केलहुँ आ आगू बढ़ि गेलहुँ। महादेवक दर्शन कए हमसभ बाहर भेले छलहुँ कि पंडा हमरा हमर हाथ पकड़ि कए किछु मंत्र पढ़ए लगलाह। जाबे हम किछु सतर्क होइतहुँ ताबे तँ ओ बहुत आगू बढ़ि गेल रहथि। हम पुछलिअनि- -ई की भए रहल अछि? -अन्नदान । कमसँ कम एगारह सएक दान । -फेर ओएह बात? हम तँ अहाँकेँ पाँच सए गछने छी। बस ओतबे देब। श्रीमतीजीक इसारा पाबि हम एक सए आर हुनका दए फारकत भेलहुँ । जानमे जान आएल। दुनूगोटे कनिक हटि कए सुस्तेलहुँ । किछु फोटो सेहो खिचल गेल। तकर बाद आगू बढ़ि गेलहुँ। अफसोच आ दुखक बात अछि जे एतेक पैघ धर्मस्थानमे एहन कुव्यवस्था किएक अछि?पंडासभ एना किएक करैत अछि जे दर्शानार्थीसभ हतप्रभ रहि जाइत छथि। संबंधित व्यवस्थापकलोकनिकेँ एहिपर ध्यान देबाक प्रयोजन अछि। ओमकारेश्वर महादेव एकादश ज्योतिरलिंगमे मानल जाइत छथि। कतए कतएसँ लोक हुनकर दर्शन करए हबैत छथि। लोकसभक श्रद्धामे कोनो कमी नहि अछि। सोमदिनक तँ ओहिठाम जाएब आ दर्शन करब बहुत मोसकिल काज अछि । मुदा जाहि स्तरक व्यवस्था हेबाक चाही से नहि बुझाएल। महाकालेश्वर मंदिरमे तँ एकर कैक गुणा बेसी नीक व्यवस्था देखबामे आएल। ई एकटा महज संयोग छल कि एहिना चलैत अछि से तँ नहि कहल जा सकैत अछि। हमसभ एहि बातसँ बहुत प्रसन्न रही जे दू दिनक भीतर दूटा प्रसिद्ध ज्योतिरलिंग महादेवक दर्शन भए सकल। कतेको सालसँ सोचैत छलहुँ,से सपना पूर्ण भेल। निश्चित रूपसँ ई महादेवक कृपेसँ संभव भेल । माहेश्वर ओंकारेश्वर महादेवक दर्शनक बाद हमसभ माहेश्वर बिदा भेलहुँ । अहिल्याबाइ होल्करक समयमे इन्दौरक शासन माहेश्वरसँ कएल गेल छल । हमसभ माहेश्वरमे अहिल्याबाइक महल आ लगपासमे बनल मंदिरसभ देखलहुँ । हुनकर महलकक भूतलपर ओसाराक ठीक सामने नर्मदा नदी छथि। कहल जाइत अछि जे अहिल्याबाई नित्य राज-काज शुरु करबासँ पहिने ओतए ठाढ़ भए नर्मदाक दर्शन करैत छलीह । तकर बादे ओ राजकाजमे हाथ लगाबथि। कनीके हटि कए अखंड दीप जरैत अछि। कहल जाइत अछि जे ओ एगारहटा दीप पाँच हजार साल सँ जरि रहल अछि। दीप जरि तँ रहल छल अबस्से मुदा पाँच हजार सालक बातक पुष्टि के करत? माण्डू(माण्डवगढ़) हमसभ महाकालक दर्शन कए लेने रही। ओंकारेश्वर महादेवक दर्शन सेहो कए लेने रही । लौटतीमे माहेश्वर सेहो भए आएल रही। इन्दौर सहरक प्रमुख-प्रमुख स्थान सेहो घुमि लेने रही। हमरासभ लग आबो किछु समय छल। वापसी रेल टिकट २८ जुलाइक छल। सत्ताइस जुलाइक हमसभ माण्डू जेबाक निर्णय केलहुँ । ओही टैक्सीबलासँ गप्प पक्का कए लेलहुँ । सत्ताइस जुलाइक भोरे साढ़े सात बजे हमसभ माण्डू बिदा भए गेलहुँ । माण्डु इन्दौरसँ सतानबे किलोमीटर फटकी अछि। ई सहर पहाड़ीपर अवस्थित अछि। पर्यटकलोकनि ओहिठामक वर्षाक आनन्द लेबाक हेतु बहुत उत्सुक रहैत छथि। माण्डू धार जिलाक वर्तमान मण्डव क्षेत्रमे एक प्राचीन सहर अछि । ई पश्चिमी मध्य प्रदेशक मालवा आ निमार क्षेत्रमे अवस्थित अछि । एकर चारू कात पाथरक देबाल अछि जाहि पर दरवाजा (गेटवे) बिंदीदार अछि । इन्दौरसँ माण्डुक रस्ता बहुत नीक अछि। बादमे किछु पहाड़ी रस्ता भेटल जतए टेक्सीकेँ कनी सावधानीसँ चलेबाक प्रयोजन रहैत अछि। लगभग साढ़ेदस बजे हमसभ माण्डु पहुँचि गेल रही। इन्दौरसँ बिना जलखै केने हमसभ बिदा भए गेल रही। तेँ माण्डु पहुँचि हमसभ सभसँ पहिने किछु जलखै केलहुँ । तकर बाद घुमए बिदा भेलहुँ । संयोगसँ एकटा बहुत नीक मार्गदर्शक(गाइड) भेटि गेलथि। एक हजार रुपयामे ओ सौंसे घुमा देताह ,से कहलथि। रानी रुपमती आ सुल्तान बाज बहादुरक दुखान्त प्रेमकथा सुल्तान बाज बहादुर माण्डू क अंतिम स्वतंत्र शासक छलाह | एकबेर जखन ओ सिकार करए निकलल रहथि तँ नर्मदा नदीक कातमे एकटा वालिकाकेँ अपन संगीसभक संगे खेलाइत देखलथि। ओ बहुत मधुर स्वरमे गाबि रहल छलि। बाज बहादुर स्वयं संगीतप्रेमी छलाह। ओ ओहि वालिकाक मधुर संगीतसँ ततेक प्रभावित भेलाह जे ओकरासँ बिआह करबाक प्रस्ताव दए देलनि। ओ वालिका एहि सर्तक संग बिआह करबाक हेतु तैयार भए गेलि जे ओ कोनो एहन महलमे रहतीह जतएसँ अपन प्रिय नदी नर्मदाक नित्य दर्शन कए सकथि। तकर बाद हुनकर बिआह सुल्तान बाज बहादुर संगे भेलनि। तकर बादे रेवाकुण्डक निर्माण भेल छल। रानी नित्य रानीरुपमती मंडपक नामसँ बादमे प्रख्यात पहाड़ीक चोटीपर बनल मूलतःसेनाक अवलोकन चौकीसँ बाज बहादुरक महल आ नर्मदा नदीक दर्शन करैत छलीह। हमसभ जखन रानीरूपमतीमंडप दिस जाइत रही तखनहु रेवाकुण्ड लग दूटा मुर्दा जरि रहल छल। अचानक वर्षा शुरु भए गेल। हमसभ थोड़ेकाल ओहीमे रहि गेलहुँ । वर्षा समाप्त भेलाक बाद हमसभ गाइडक संगे निचाँ उतरलहुँ। वर्षाक समयमे ओहिठामक मौसम बहुत सुखद भए गेल छल। आकास जेना धुआँ सँ भरि गेल होइक। कहल जाइत अछि जे कैकबेर खराप मौसममे रानी रूपमती नर्मदा दर्शन नहि कए पाबथि । माण्डुक मौसम बेसी काल तेहन रहैत छल जे धुंधक कारण रानी नर्मदा नदीक दर्शन नहि कए पाबथि। तकर विकल्पक रूपमे रेवाकुण्डेक दर्शनसँ ओहि संकल्पक पूर्ति करथि। रानी रुपमती आ सुल्तान बाज बहादुरक प्रेमकथा अकबरक माण्डुपर आक्रमणक कारण संकटमे पड़ि गेल। अकबर अधम खानकेँ माण्डू पर कब्जा करबाक लेल पठा देलनि | सुल्तान बाज बहादुर मुगल सेनाक मोकाबिला नहि कए सकलाह आ युद्धमे हारि गेलाह। अधम खान रानी रूपमतीकेँ कब्जा करए चाहलक । रानी एहि परिस्थितिकेँ बूझि आत्महत्या कए लेलनि। एहि तरहेँ सुल्तान बाज बहादुर आ रानी रूपमतीक प्रेमकथाक दुखद अंत भए गेल । हिन्दोला महल हिन्दोला महल या -स्विंगिंग पैलेस- ऐतिहासिक खंडहर माण्डू किलाक उत्तरी भागमे रॉयल एन्क्लेवक हिस्सा छैक । संभवतः ई 15वीं शताब्दीक अंतक छैक आ सुल्तान घियाथ शाह (1469-1500) क शासनकालमे एक दर्शक हॉलक रूपमे बनाओल गेल रहैक, जे अपन भोगवादी जीवनशैलीक लेल प्रसिद्ध छल । जहाज महल ई ऐतिहासिक स्थान ओहि युगक कारीगरक अकल्पनीय काज थिक । चारू कात पहाड़ी आ हरियर जंगलसँ घेरल. आश्चर्यजनक, अद्भुत दृश्य अछि। जहाज महल एना बनाओल गेल अछि जेना ओ पानिमे हेलि रहल होअए। ओकर दू दिसमे पोखरि अछि आ दू दिसमे कृतिम पोखरि बनाओल गेल अछि। एहि तरहें ई महल चारू दिससँ पानिसँ घेराएल रहैत अछि । दूटा झीलक बीचमे ठाढ़ भव्य, सदियो पुरान जाहाज महल बहुत गजब अछि। ऊपरसँ देखलापर लगैत अछि जेना ओ जलसँ चारूदिससँ घेराएल एकटा जहाज अछि। अपन परावर्तन पर बहैत माण्डू के जाहाज महल एहन जहाज जकाँ लगैत अछि जे चलए बला अछि। दू टा कृत्रिम झील मुंज पोखरि आ कपूर पोखरिक बीच बनल ई एक सए बीस मीटर नमगर -जहाज महल- एकटा सुरुचिपूर्ण दू मंजिला महल अछि । खुजल मंडप, पानि पर लटकल बालकनी आ खुजल छत के संग जहाज महल एकटा शाही सुख शिल्पकपाथरमे कल्पनाशील मनोरंजन अछि। जहाज महलक निर्माण अद्भुत अछि। रानीक स्नानगृहमे तरह-तरहक ओरिआनसभ कएल गेल छल । ई महल प्राचीन समयमे जल संरक्षणक हेतु कएल जा रहल प्रयासक एकटा अद्भुत उदाहरण अछि। ओहिठाम वर्षाक पानिकेँ जल संरक्षण द्वारा बचा कए राखल जाइत छल जाहिसँ ओहिठामक निबासीकेँ साल भरि पानिक दिक्कति नहि होनि । कहल जाइत अछि जे सुल्तान बाज बहादुर संगीतसभाक आयोजन ओहि भवनमे कराओल करथि। ओहि भवनक विशेषता अछि जे ओकर कोनो कोनमे यदि केओ किछु बाजत तँ ओ ध्वनि एकदम मौलिक रूपमे भवनक कोनो स्थानसँ सुनाइत अछि। हमसभ स्वयं एहि प्रयोगकेँ केलहुँ । हमरसभक गाइड एक कोनपर ठाढ़ भए गीत गओलथि आ हमसभ ओहि भवनक एकदम दोसर कोनटापर ठाढ़ भए ओकरा साफ-साफ सुनि सकलहुँ,सेहो एकदम स्पष्ट आ मधुर स्वर जेना कि माइक लागल होइक । कहि नहि ई ओरिआन केना कएल गेल छल? होशांग शाहक कब्र, गुंबददार संगमरमरक मकबरा, आओर विशाल जामी मस्जिद सेहो एहिठामक प्रमुख भवन अछि । माण्डुक इमलीक नामसँ जानल जाइत अफ्रीकन फलक स्थानीय नाम खोरासानी इमली छैक जाहि कारणसँ एकर जड़ि खोरासान (प्राचीन फारस)क प्राचीन भूमिमे छैक । कहल जाइत अछि जे एहि फलक बीज मिस्रक खलीफा न॑ १४वीं सदीमे माण्डू क सुल्तानकेँ उपहारमे देने छलाह । ओतए ठाम-ठाम एहि फलकेँ बिकाइत देखलिऐक । पर्यटकसभ उत्सुकतासँ एकरा कीनितो छलाह आ ओकर छोट-छोट डुकड़ी खाइतो छलाह। माण्डुमे प्रमुख-प्रमुख एतिहासिक स्थानसभ देखलाक बाद हमसभ इन्दौर वापस बिदा भेलहुँ । एहि बेर वाहनचालक नव रस्तासँ जा रहल छल जाहिमे पहाड़ नहि छलैक। सोझ-सपाट रस्तापर तीव्रगतिसँ टैक्सी अपन गंतव्य दिस बढ़ि रहल छल। सड़कक दुनूकात हरिअरी भरल छल। दुर-दूर धरि हरिअर कंचन बाध-बोन देखि ककर मोन हर्षित नहि होएत?ऊपरसँ पानिसे टिपिर-टिपर खसि रहल छल। आब इन्दौर मात्र अड़तीस किलोमीटर बाँकी छल कि वाहनचालक गुगलनक्साक चक्करमे रस्ता बदलि लेलक । ओ दहिना दिस आगू बढ़ि गेल । तकर बाद तँ शुरु भेल गामे-गाम घुमैत पातर-पातर सड़कक यात्रा । रहि-रहि कए ग्रामीणसभसँ सही रस्ता पुछए पड़ैत छलैक। जतए कतहु चौबटिआ रहैक ताहिठाम तँ खास कए मोसकिल होइत छल। साइत हमरासभकेँ ओहि इलाकाक गामसभ देखब लिखल छल। से हमसभ नीकसँ देखलहुँ । मुदा परेसानो भेलहुँ । आखिर वाहनचालक आठ किलोमीटर एहि तरहेँ चललाक बाद फेरसँ फोरलेन सड़कपर वापस आबि सकल। हमसभ बहुत हल्लुक अनुभव कए रहल छलहुँ । टैक्सी फेरसँ अपन पुरना गति धए लेने छल। हमसभ एक बेर फेरसँ निश्चिन्त भावे यात्राक आनन्द लैत आगू बढ़ि रहल छलहुँ । एतबेमे एकटा नीकसन ढाबा देखाएल। हमसभ भुखल तँ रहबे करी। ओहिठाम नीकसँ भोजन केलहुँ । तकर बाद इन्दौर दूर नहि छल। मोसकिलसँ चालीस मिनटक बाद हमसभ अपन डेरापर पहुँचि गेलहुँ । इन्दौर आ आसपासक हमरासभक यात्रा सुखद बनबएमे वाहनचालकक बहुत योगदान छल। ओ एकटा समांग जकाँ सदिखन हमरासभक संगे लागल रहल । कतहु कोनो परेसानी नहि होमए देलक। स्नान करबासँ लए कए दर्शन करबा धरि ओ छाँह जकाँ हमरासभक संग दैत रहल। हमसभ अचानक ट्रैबेल एजेन्सीक माध्यमसँ ओकरा संपर्कमे आएल रही। मुदा पहिले दिन ओकर व्यवहारसँ हमसभ बहुत प्रभावित भेल रही् तकर बाद तँ शेष सभदिन ओकरेसँ सोझे संपर्क करी। ओ बहुत उचित किरायामे हमरा लोकनिकेँ सुरक्षित यात्रा करबैत रहल। ताहि हेतु ओ निश्चित रूपसँ धन्यवादक पात्र अछि। असलमे कतबो किछु बेकाल समय भए गेलैक अछि,मुदा अखनहु नीको लोक अछिए । तेँ ई दुनिआ चलि रहल अछि आ चलैत रहत। एकटा अज्ञात सहरमे एकदम अपरिचित ओहि वाहनचालकक व्यवहारसँ से अनुभव पक्का भेल । अठ्ठाइस जुलाइक भोरेसँ हमसभ वापसी यात्राक तैयारीमे लागि गेल रही। स्नान-ध्यानक बाद अतिथिगृहक सामने अवस्थित पिपलेश्वर महादेवकेँ प्रणाम कए हमसभ जलखै केलहुँ । तकर बाद थोड़ेक विश्राम सेहो भेलैक। समानसभ बाकसमे राखि लेल गेल । दूपहरिआमे भोजन केलाक बाद घंटा भरि फेरसँ विश्राम केलहुँ। तकर बाद अतिथि गृहक हिसाब-किताब कएल गेल। आवश्यक भूगतान केलहुँ आ हमसभ इन्दौर रेलवे टीसन दिस बिदा भए गेलहुँ । एक बेर फेर रस्ते-रस्ते इन्दौर सहरक सफाइसँ हमसभ मंत्रमुग्ध छलहुँ । जेना सौंसे सहर निश्चय कए लेने होथि जे सहरकेँ स्वच्छ राखबाक अछि। तखनहि ई संभवो भए रहल अछि। मात्र सरकारी प्रयाससँ ई संभव नहि भए सकैत छल। मोनमे ईहो होइत छल जे देशक आन-आन सहरसभ किएक ने एहिना स्वच्छतामे औअलि आबि सकैत अछि? किएक ने? मुदा ताहि हेतु सभगोटेकेँ इन्दौरबासीसभसँ प्रेरणा लेब जरूरी अछि। -रबीन्द्र नारायण मिश्र, पिताक नाम: स्वर्गीय सूर्य नारायण मिश्र, माताक नाम: स्वर्गीया दयाकाशी देवी, बएस: ६९ वर्ष, पैतृक ग्राम: अड़ेर डीह, मातृक: सिन्घिआ ड्योढ़ी, वृति: भारत सरकारक उप सचिव (सेवानिवृत्त), स्पेशल मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट, दिल्ली(सेवानिवृत्त), शिक्षा: चन्द्रधारी मिथिला महाविद्यालयसँ बी.एस-सी. भौतिक विज्ञानमे प्रतिष्ठा : दिल्ली विश्वविद्यालयसँ विधि स्नातक, प्रकाशित कृति: मैथिलीमे: प्रकाशन वर्षः२०१७ १.भोरसँ साँझ धरि (आत्म कथा),२. प्रसंगवश (निवंध), ३.स्वर्ग एतहि अछि (यात्रा प्रसंग); प्रकाशन वर्षः२०१८ ४. फसाद (कथा संग्रह) ५. नमस्तस्यै (उपन्यास) ६. विविध प्रसंग (निवंध) ७.महराज(उपन्यास) ८.लजकोटर(उपन्यास); प्रकाशन वर्षः२०१९ ९.सीमाक ओहि पार(उपन्यास)१०.समाधान(निवंध संग्रह) ११.मातृभूमि(उपन्यास) १२.स्वप्नलोक(उपन्यास); प्रकाशन वर्षः२०२० १३.शंखनाद(उपन्यास) १४.इएह थिक जीवन(संस्मरण)१५.ढहैत देबाल(उपन्यास); प्रकाशन वर्षः२०२१ १६.पाथेय(संस्मरण) १७.हम आबि रहल छी(उपन्यास) १८.प्रलयक परात(उपन्यास); प्रकाशन वर्षः२०२२ १९.बीति गेल समय(उपन्यास) २०.प्रतिबिम्ब(उपन्यास) २१.बदलि रहल अछि सभकिछु(उपन्यास) २२.राष्ट्र मंदिर(उपन्यास) २३.संयोग(कथा संग्रह) २४.नाचि रहल छलि वसुधा(उपन्यास) २५.दीप जरैत रहए (उपन्यास)। mishrarn@gmail.com; m-9968502767 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.पद्य खण्ड ३.१.पवन मिश्र 'गोनौली'- ओ जमाना किछु आओर छल ३.२.आचार्य रामानंद मंडल- इ धरती छई/ हम मिथिला छी/ नायक छी हम ३.३.राज किशोर मिश्र-आफद ३.४.आशीष अनचिन्हार- २ टा गजल ३.५.कल्पना झा- राखी ३.१.पवन मिश्र 'गोनौली'- ओ जमाना किछु आओर छल पवन मिश्र 'गोनौली' ओ जमाना किछु आओर छल
१.जखन टोल पड़ोसक पाहुन अप्पन होइत छल, हमरा पाहुनक तरकारीसँ दही तक हुनके घरसँ अबैत छल! ओ जमाना किछु आओर छल!! २. जखन टोलक या गामक बेटी नैहर अबै छल, तऽ पूरा टोल आनन्दित होइत छल, रौनक रहै छल! ओ जमाना किछु आओर छल!! ३.जखन गहूमक डाँटी आंगन- आंगनमे कटैत काल , आंगनमे किटी पाटी जकाँ लगै छल! ओ जमाना किछु और छल!! ४. जखन बेटीक वियाहमे वर बरियातिक लेल टेन्ट या होटल नहि लेल जाइत छल, पड़ोसिक दलान हुनक ओछाएन - बिछाएन लगाएल जाइ छल! ओ जमाना किछु आओर छल!! ५. जखन ककरा खरिहानमे ककर धान और ककर चरौड़ी- चिप्स सुखाइत छल ई कहनाइ मोसकिल छल, जखन डाकपीनकें अबैत देखि मनमे उत्सुकता आ चिठ्ठीक इंतजार रहै छल! ओ जमाना किछु आओर छल!! ६. जखन पाहुन परख अबैत छल घरमे पाबैन तिहार जकाँ लगै छल, जखन टोलक सब बच्चा साँझमे नुक्काचोरी खेलाइत छल! ओ जमाना किछु आओर छल!! ७. जखन बच्चाक जन्मदिन पर भगवानक पूजा होइत छल, स्त्रीगण बधैया गबैत छलीह आर बच्चा गलामे फूलक माला पहिरने अपनाकें शहंशाह मानैत छल! ओ जमाना किछु आओर छल!! ८. जखन दीदी- पीसा, मामा- मामी जाइत काल हाथमे बलजोरी पाइ पकरबैत छल आ चेतन सभ हुनका मना करैत छल, एहि लेन- देनक बहसमे एक दोसरकें सप्पत दैत छल! ओ जमाना किछु आओर छल!! ९. जखन कोनो शादी-वियाहमे इसकुलक चमकैत करिया जूता पहिरनाइ कोनो शानसँ कम नहि होइत छल, जखन छुट्टीमे हिल स्टेशन नहि नानीगाम गेनाइ पसंद कएल जाइ छल आ बरख भरिक लेल मधुर यादक पेटार भरि भरि कऽ अबैत छल ओ जमाना किछु आओर छल!! १०. जखन विद्यालयमे शिक्षक हमर गुण नहि हमर कमी गनबैत रहैत छलाह, जखन निमंत्रण स्वीकृतिक बास्ते एक फाँक सुपारी देल जाइत छल, बिना हाथ धोने घैल छुनाइ मना छल! ओ जमाना किछु आओर छल!! ११. जखन गरमीक साँझमे छत पर पानि छिटनाइ जरूरी होइत छल, जखन ठंडाक नरम रौदमे सुइटर बुनल जाइ छल आ बुनाइ पर नव-नव खिस्सा सुनाएल जाइ छल, जखन रातिमे नह कटनाइ मना छल मुनहाइर साँझमे बाढ़नि लगेनाइ खराप मानल जाइत छल! ओ जमाना किछु आओर छल!! १२.जखन बच्चाक आँखिमे काजर, माथ पर नजरिक टीका जरूरी छल, राति कऽ मैंयाॅ- नानी खिस्सा सुनबैत छल इतियौत- पितियौत सेहो सहोदर लगैत छल! ओ जमाना किछु आओर छल!! १३. डीजे नहि ढोलकक थाप सोहाओन छल, जखन गला सुरीला नहि हिया खोलि कऽ जटाजटीन गाएल जाइत छल, जखन वियाहमे एक - दू दिन नहि दस- बारह दिन धरि स्त्रीगण गीत गबै छली सालोभरि विधि-बेभार होइत रहै छल! ओ जमाना किछु आओर छल!! १४. जखन बिना एसीके रेलक सफरमे रोटी या पूड़ी आलू आर अचारक संग बेहद सुअदगर लगैत छल, जखन खटगर- मिठगर बैरक सुआदक आगू जंगली काँटक चुभन नीके लगै छल! ओ जमाना किछु आओर छल!! १५. जखन सब अप्पन लगै छल बिना घंटी बजेने बेधरक ककरो घरमे लोक ढूकि जाइ छल, जखन टाल- पुल्ली, चिक्का आओर आसपास खेलक संग दोस्ती केर पूल बान्हल जाइ छल! ओ जमाना किछु आओर छल!! १६. जखन लोक डाक्टर लग देखबै लेल कम जाइ छल, डाक्टर घर पर अबै छल,डाक्टर साहेबक बैग उठा कऽ हुनका बाहर छोड़ि एनाइ संस्कार आ संस्कृति मानल जाइ छल! ओ जमाना किछु आओर छल!! १७. जखन तेतैर और अमरा खटगर नहि मिठगर लगैत छल, जखन प्रत्येक पावनितिहार पर चिकनी माटिसँ घर छछारल , गोबरसँ आंगन निपल जाइ छल! ओ जमाना किछु आओर छल!! १८.जखन पैघ भाय- बहिनिक छोट भेल कपड़ा उपहारसँ कम नहि लगै छल जखन लू सँ भरल दुपहरियामे नेना सब खाली पएरे गाछिये गाछी भेल फिरै छल, जखन बर्फ बेचैए वालाक डमरू आ लालछड़ी बेचैए वालाक घंटी सुनि बेच ल' क' कतेको दूर दौड़ल जाइ छल! ओ जमाना किछु आओर छल!! १९. जखन मोबाइल नहि धर्मयुग, सरिता,साप्ताहिक हिन्दुस्तान, कादम्बिनी, इंडियाटुडेक संग हमर दिन कटै छल, जखन टीवी नहि प्रेमचंदक उपन्यास हमरा कहानी सुनबै छल, ओ जमाना किछु आओर छल!! २०. जखन मुल्तानी माटिसँ केशकें रेशमी बनाओल जाए छल जखन दस पाइ के चूरन आ गोली कमाल करैए छल, जखन पितरिया बर्तनमे दालि बनै छल, जखन ढेकीमें धान कुटाइत छल ऊखड़िमें चूड़ा कुटाई छल जाॅतमें गहूँम पिसाई छल, जखन चटनी लोड़ही- सिलौट पर पीसल जाइ छल आब नै ओ नगरी नै ओ ठांव छल! ओ जमाना किछु आओर छल, ओ जमाना सरिपहुँ किछु आओर छल!!
पवन मिश्र "गोनौली" १५-०३-२०२१
- हाटगछिया, धारा, कोलकाता- 700105, 9433746295; सहायक शिक्षक, श्री उमापति विद्यामंदिर, पश्चिम बंगाल सरकार, कोलकाता| अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.२.आचार्य रामानंद मंडल- इ धरती छई/ हम मिथिला छी/ नायक छी हम आचार्य रामानंद मंडल- इ धरती छई/ हम मिथिला छी/ नायक छी हम १ इ धरती छई । शान में छी। गुमान में छी। गुलामी कैं, गुणगान गवै छी। राजा महाराजा कैं, महिमा कै, बखान करै छी। हम कवि छी। राजा रानी कैं, नख शिख वर्णन, करै छी। कभी राधा कृष्ण, त कभी गौरी शंकर, बनबै छी। कभी बैष्णव, कभी शैव, त कभी शाक्त बनै छी। गाजा भांग मांस माछ कैं बखान करै छी। उच्च-नीच कैं, भाव रखै छी। मिथिला मैथिली, आ मैथिल कैं, राजनीति करै छी। हिंदी नै, कहके भारत कैं, कमजोर करै छी। मिथिला कैं, बहु संस्कृति कैं, नष्ट करै छी। इ धरती छै, जनक, बुद्ध आ, कबीर कैं ज्ञान के। इ धरती छै, सीता आ चनमा कैं, प्रेम कैं। इ धरती छै, शलहेस लोरिक, आ बंठा वीर चमार कैं। इ धरती छै, मांगैन, रेणु रामफल, आ दिनकर कैं। रामा इ धरती छै, सभ मैथिल के। २. हम मिथिला छी। कृषक जनक कैं मिथिला छी। हम बेटी सीता कैं मिथिला छी। हम मिथिला छी। बेटा शलहेस कैं मिथिला छी। हम वीर लोरिक कैं मिथिला छी। हम मिथिला छी। साहित्यकार रेणु कैं मिथिला छी। राष्ट्र कवि दिनकर कैं मिथिला छी। हम मिथिला छी। शहीद रामफल कैं मिथिला छी। हम शहीद जुब्बा कैं मिथिला छी। हम मैथिली छी। जन जन कैं बोली मैथिली छी। जन जन कैं भाषा मैथिली छी। हम मैथिली छी। मांगैन कैं गान मैथिली छी। पोथी कैं भाषा मैथिली छी। हम मैथिली छी। मैथिल कैं मायक भाषा मैथिली छी। मिथिला कैं मिठगर बोली मैथिली छी। हम मैथिली छी। संवैधानिक भाषा मैथिली छी। मिथिला मैथिल कैं भाषा मैथिली छी। हम मैथिल छी। मिथिला कैं रहनियार मैथिल छी। मिथिला में जनमल मैथिल छी। रामा हम सुच्चा मैथिल छी। ३ ।।नायक छी हम।। खलनायक नै, नायक छी हम। मूकक नायक छी हम। नेपथ्यक नायक छी हम। खलनायक नै, बंचित लोकैन, आवाज छी हम। कबीर छी हम, गलतकैं बिरोधी छी हम। खलनायक नै, बुद्ध छी हम। शलहेस, लोरिक,रेणु, रामफल के वंशज छी हम। मांगैन राग कैं, गायक छी हम। खलनायक नै, सीताक भाई छी हम। मिथिलाक खबरदार छी हम। मिथिलाक पहरेदार छी हम। खलनायक नै, नायक छी हम। सुतल मैथिल के, जगाबे वाला हम। सुच्चा मैथिल छी हम। खलनायक नै, रामा नायक छी हम। -आचार्य रामानंद मंडल सामाजिक चिंतक सह साहित्यकार सीतामढ़ी। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.३.राज किशोर मिश्र-आफद राज किशोर मिश्र, रिटायर्ड चीफ जेनरल मैनेजर (ई), बी.एस.एन.एल.(मुख्यालय), दिल्ली,गाम- अरेर डीह, पो. अरेर हाट, मधुबनी आफद ककरा लगतैक नी क कहू? नो तब को नो वि पत्ति , की नत बा ढ़ि , भूकम्प ,के? मा रल गेल जकर हेतैक मति ।
मुदा , चि न्हबै ने जनबै, बुझबै ने सुझबै, अकस्मा त् ,ठा ढ़ भऽ जा एत, आफद, दक्षि ण सँ ,वा म सँ, अका ससँ ,पता ल सँ, आएत ससरल, पाँ तर सॅं, भऽ नि सबद।
बा ट धऽ कऽ, का त दऽ कऽ, रा ति मे, कि परा त भऽ कऽ, मा टि दऽ कऽ, पा नि दऽ कऽ, भूख ,आ कि धन -घा नि दऽ कऽ,
घेर लेत आगि सँ भूचा ल, बि ड़रो बसा त सँ, कोँ ढ़ -करेज तो ड़ि देत, कमजो र करत बा त सँ।
नि रभ्रो अका स सँ ,हो इछ वज्रपा त, बैसल रहत सुख ,भऽ जा एत का त।
वि पत्ति , को ना देखैत अछि , जा ऽ कऽ ककरो दो आरि ? दूरहि सँ सुनि सकैत छी , पा रैत अछि पी ड़ि त भो का रि ।
पूर्वा भा स नहि रहला सँ, रहैछ जि नगी असा वधा न,
सम्हरू, जेना कऽ सम्हरब, जॅं अकस्मा त् आएत तुफा न।
सदि खन ,जि नगी सरल नहि , आ ने ,चलैछ ऋजु -बा ट, नहि जा नि , खुजि जा एत कखन, ज्वा ला मुखी क कपा ट।
भी रु बनला सँ समस्या , की पा ओत अपन नि दा न? जे शक्ति अछि , ओहि सँ लड़ब तऽ, तखने अछि कल्या ण।
आँखि मूनि लेब, भा गि जा एब, तऽ कि , मा नि जा एत ,आपदा ? कि छु तऽ हो इते अछि ,अक्खज , कि छु टलि ओ जा इछ ,यदा -कदा ।
धैर्य संग हम तऽ अड़ब, मो न, चट्टा न सदृश ,करब।
जगा एब ,सूतल पुरुषा र्थ के, उठा एब ,अभ्यंतर पा र्थ के।
प्रलय संग, हम बनब प्रलय, ओकरा सुना एब, ओकरे लय।
सी खि जा एब हमहूँ तां डव, जि नगी क समर मे, बनब पां डव।
वि पत्ति सँ हम नहि डरब, बन्हलहुँ फाँ ड़, हम तऽ लड़ब।
करअओ आपदा जतेक सङो ड़, लगा बऽ ओ सभ ,अपन जो र।
हम घा स -पा त, नहि चरि जा एत, टकरा एत तऽ, ओ मरि जा एत।
मन मे जि नगी क जो स अछि , यथा र्थक सेहो , हो स अछि ।
मा नस-नभ पर ,अछि चमकि रहल , उत्सा हक मा र्तण्ड, वि पत्ति क' केहनो धो न्हि , फा टत, भऽ जा एत , खण्ड -पखण्ड।
वि जय के ओ आगि जा गल रहय ,मो न मे ,सदि खन,
केहनो जमल अन्हा र आफदक, घमैत रहत ओ, खन -खन।
सभटा फेरा छैक मो नक, बुझि लि अ औ बा बू!बू जि नगी क जी त अछि अपना पर, बस!रहए मो न पर का बू।
आफद नहि हो इत अछि चि रंजी वी , ओकरा लि बा उ, नहि स्वयं लि बी ।
अन्हा रक बा द, ओहि भा ग मे, छैक पसरल खूब इजो त, जलधि क सेहो अओतैक ती र, भऽ दृढ़ चला उ तऽ पो त।
थम्हू तऽ कि छु का ल , अवश्य, अओतैक जि नगी क भो र,
आफद सँ लड़क जज्बा रहय, नहि कि , आँखि मे नो र।
दृढ़ नि श्चय लग था कि कऽ, हा रि जा इत अछि का ल,
आफद तऽ,को नो छो ट -छी न, छै की ओकर , मजा ल? अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.४.आशीष अनचिन्हार- २ टा गजल आशीष अनचिन्हार- २ टा गजल 1
मॅालक चस्का देने गेल लोटा थारी लेने गेल
हमरो हिस्सा हुनके नाम चुप्पे चुप रखबेने गेल
नहिये बँचतै टूटल नाह तैयो असगर खेने गेल
जत्ते बिछलक अपनेसँ सभ टा से छिड़ियेने गेल
अपना देशक अतबे हाल गरदनि बाँचल चेने गेल
सभ पाँतिमे 22-22-22-21 मात्राक्रम अछि।
2
अगर मगरमे जीवन बीतल गीजल कादो फेरो गीजल
पढ़ने रहियै जे अगर मगर जीवन भरि से बहुते लीखल
जिम्मा हिस्सा के झगड़ामे ई अगर मगर हमहूँ सीखल
असगर सुन्न पड़ल आँगनमे अपने रूसल अपने बौंसल
अलगे अनुभव हुनका छुबिते पलमे ठंडा पलमे धीपल
सभ पाँतिमे 22-22-22-22 मात्राक्रम अछि। दू टा अलग-अलग लघुकेँ दीर्घ मानल गेल अछि। ई बहरे मीर अछि। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.५.कल्पना झा- राखी कल्पना झा राखी
कल्पैत मोन छल, मुद्दा विवशता क आगू ठगबजज्जर भेल रही, बजार में सजल ओ रेशम क डोरि, हाथ क स्पर्श सं हंसि पड़ल, केकर पुछारि करु, इ डोरि भाई बहिन क दुरी के नापि सकबा में कम छल, आजु भास्कर क इजोत कते तिख छै, मोन बहिन क खाली आ भाई क कलाई शुन छै, माय क मोटरी गमकैत सनेश सब भुतियैल बड़ु अजगुत दिन अछि आयल विडियो काल पर सब स्नेह पठावल, विधना क रचल ई विधि जतो जे रही सब रही खुशी।
-कल्पना झा, बोकारो, बेरमो अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। विदेह ३७७ म अंक ०१ सितम्बर २०२३ (वर्ष १६ मास १८९ अंक ३७७)|| 107 108 || http://www.videha.co.in/ ISSN 2229-547X VIDEHA
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