VIDEHA — Issue 379 / अंक ३७९

Publication: VIDEHA · Issue: 379
Open original PDF at Internet Archive

ISSN 2229-547X VIDEHA 𑒀 विदेह ३७९ म अंक ०१ अक्टूबर २०२३ (वर्ष १६ मास १९० अंक ३७९) [विदेह (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) www.videha.co.in ] विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। ऐ पोथी‍क सर्वाधि‍कार सुरक्षि‍त अछि‍। कॉपीराइट (©) धारकक लि‍खि‍त अनुमति‍क बि‍ना पोथीक कोनो अंशक छाया प्रति ‍एवं रि‍कॉडिंग सहि‍त इलेक्‍ट्रॉनि‍क अथवा यांत्रि‍क, कोनो माध्‍यमसँ, अथवा ज्ञानक संग्रहण वा पुनर्प्रयोगक प्रणाली द्वारा कोनो रूपमे पुनरुत्‍पादन अथवा संचारन-प्रसारण नै कएल जा सकैत अछि‍। (c) २०००- २०२३. सर्वाधिकार सुरक्षित। भालसरिक गाछ जे सन २००० सँ याहूसिटीजपर छल http://www.geocities.com/.../bhalsarik_gachh.html , http://www.geocities.com/ggajendra आदि लिंकपर आ अखनो ५ जुलाइ २००४ क पोस्ट http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html केर रूपमे इन्टरनेटपर मैथिलीक प्राचीनतम उपस्थितक रूपमे विद्यमान अछि (किछु दिन लेल http://videha.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html लिंकपर, स्रोत wayback machine of https://web.archive.org/web/*/videha 258 capture(s) from 2004 to 2016- http://videha.com/ भालसरिक गाछ-प्रथम मैथिली ब्लॉग / मैथिली ब्लॉगक एग्रीगेटर)। ई मैथिलीक पहिल इंटरनेट पत्रिका थिक जकर नाम बादमे १ जनवरी २००८ सँ ’विदेह’ पड़लै। इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि, जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। (c)२०००- २०२३. विदेह: प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004). सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। Editor: Gajendra Thakur. In respect of materials e-published in Videha, the Editor, Videha holds the right to create the web archives/ theme-based web archives, right to translate/ transliterate those archives and create translated/ transliterated web-archives; and the right to e-publish/ print-publish all these archives. रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना/ संग्रह (संपूर्ण उत्तरदायित्व रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता मध्य) editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ पठा सकैत छथि, संगमे ओ अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो सेहो पठाबथि। एतऽ प्रकाशित रचना/ संग्रह सभक कॉपीराइट रचनाकार/ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि आ जतऽ रचनाकार/ संग्रहकर्त्ताक नाम नै अछि ततऽ ई संपादकाधीन अछि। सम्पादक: विदेह ई-प्रकाशित रचनाक वेब-आर्काइव/ थीम-आधारित वेब-आर्काइवक निर्माणक अधिकार, ऐ सभ आर्काइवक अनुवाद आ लिप्यंतरण आ तकरो वेब-आर्काइवक निर्माणक अधिकार; आ ऐ सभ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार रखैत छथि। ऐ सभ लेल कोनो रॉयल्टी/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै, से रॉयल्टी/ पारिश्रमिकक इच्छुक रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता विदेहसँ नै जुड़थु। विदेह ई पत्रिकाक मासमे दू टा अंक निकलैत अछि जे मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ www.videha.co.in पर ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। Videha eJournal (link www.videha.co.in) is a multidisciplinary online journal dedicated to the promotion and preservation of the Maithili language, literature and culture. It is a platform for scholars, researchers, writers and poets to publish their works and share their knowledge about Maithili language, literature, and culture. The journal is published online to promote and preserve Maithili language and culture. The journal publishes articles, research papers, book reviews, and poetry in Maithili and English languages. It also features translations of literary works from other languages into Maithili. It is a peer-reviewed journal, which means that articles and papers are reviewed by experts in the field before they are accepted for publication. Font/ Keyboard Source: https://fonts.google.com/ , https://github.com/virtualvinodh/aksharamukha-fonts , https://keyman.com/ These are print-on-demand books, send your queries to editorial.staff.videha@gmail.com. The eBooks of some of these are available for sale on Google Play [(c) Preeti Thakur, sales.videha@gmail.com], send your queries to sales.videha@gmail.com. The contents and documents e-published by Videha (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) are periodically being checked for accessibility issues. People with disabilities should not have difficulty accessing these contents/ documents. © Preeti Thakur (sales.videha@gmail.com) Videha e-Journal: Issue No. 379 at www.videha.co.in समानान्तर परम्पराक विद्यापति- चित्र विदेह सम्मानसँ सम्मानित श्री पनकलाल मण्डल द्वारा मैथिली भाषा जगज्जननी सीतायाः भाषा आसीत्। हनुमन्तः उक्तवान- मानुषीमिह संस्कृताम्। अक्खर खम्भा (आखर खाम्ह) तिहुअन खेत्तहि काञि तसु कित्तिवल्लि पसरेइ। अक्खर खम्भारम्भ जउ मञ्चो बन्धि न देइ॥ (कीर्तिलता प्रथमः पल्लवः पहिल दोहा।) माने आखर रूपी खाम्ह निर्माण कऽ ओइपर (गद्य-पद्य रूपी) मंच जँ नै बान्हल जाय तँ ऐ त्रिभुवनरूपी क्षेत्रमे ओकर कीर्तिरूपी लत्ती केना पसरत। शुक्ल यजुर्वेद (२६.२)-यथेमां वाचं कल्याणीमावदानि जनेभ्यः। ब्रह्मराजन्याभ्यां शूद्राय चार्याय च स्वाय चारणाय च।।हम सभ गोटेकें ई पवित्र वाणी (वेदवाणी) सुनाबी। ब्राह्मणकें, क्षत्रियकें, शूद्रकें आ आर्यकें; अपन लोककें आ अपरिचितकें सेहो (माने सभकें)। मुदा ऐ वेदवाक्यक विपरीत मनुस्मृति वेदवाणीक अध्ययन/ श्रवणकें समाजक किछु गोटे लेल निषेध करऽ चाहलक, मुदा स्मृति सेहो वेदवाक्यकें प्रमाण मानैत अछि (शब्द प्रमाण) तें तकर विरुद्ध देल ओकर निर्देश स्वयं अमान्य भऽ जाइत अछि। Do not judge each day by the harvest you reap but by the seeds that you plant. -Robert Louis Stevenson ------------------------------------- Videha: Maithili Literature Movement 𑒀 ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्ष ग्वंग शान्ति: 𑓇 𑒠𑓂𑒨𑒾: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑒢𑓂𑒞𑒩𑒱𑒏𑓂𑒭 𑓅 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱: अनुक्रम ऐ अंकमे अछि:- १.१.गजेन्द्र ठाकुर- नूतन अंक सम्पादकीय (पृ. २-८) १.२.अंक ३७८ पर टिप्पणी (पृ. ९-९) २.गद्य खण्ड २.१.परमानन्द लाल कर्ण- गीता माहात्म्य (आगाँ) (पृ. ११-१५) २.२.आचार्य रामानंद मंडल-डी एल एड बनाम बी एड (पृ. १६-१७) २.३.लालदेव कामत-गढ़चिरौलीक स्मरण/ स्वनाम धन्य शिरोमणी/ साहित्य रत्न अनुप लाल मंडल/ पुस्तक चर्चा- दूध बेचनी/ ठेहा परक मौलायल गाछ (पृ. १८-३०) २.४.निर्मला कर्ण- अग्नि शिखा (खेप-२८) (पृ. ३१-३५) २.५.नन्द विलास राय-छुछुनैर (पृ. ३६-४२) ‍२.६.कुमार मनोज कश्यप- लघुकथा- सादृश्यता (पृ. ४३-४३) २.७.रबीन्द्र नारायण मिश्र-ठेहा परक मौलाएल गाछ (उपन्यास)- धारावाहिक (पृ. ४४-५९) २.८.किशन कारीगर-पुरूस्कारी गुर्गा पुरूस्कार बँटा डकैत (हास्य कटाक्ष) (पृ. ६०-६२) २.९.संतोष कुमार राय 'बटोही'- एकटा संस्मरण- काकी : गुणती देवी (पृ. ६३-६५) ३.पद्य खण्ड ३.१.पवन मिश्र 'गोनौली'-संस्कारक चूकल (पृ. ६७-६९) ३.२.राज किशोर मिश्र-अनुभव (पृ. ७०-७४) ३.३.कामेश्वर चौधरी- आह्वान/ प्रार्थना (पृ. ७५-७७) ३.४.रामानन्द मण्डल- हो बाबा गांधी!/ लाल बहादुर शास्त्री!/ हो काका जेपी (पृ. ७८-८१) ३.५.प्रमोद झा 'गोकुल'- श्रीमैथिली चरण मे (पृ. ८२-८३) 𑒀 ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्ष ग्वंग शान्तिः पृथ्वी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति वनस्पतय: शान्तिर्विश्वे देवा: शान्तिर्ब्रह्म 𑓇 𑒠𑓂𑒨𑒾: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑒢𑓂𑒞𑒩𑒱𑒏𑓂𑒭 𑓅 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑓁 𑒣𑒵𑒟𑓂𑒫𑒲 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑒰𑒣: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑒼𑒭𑒡𑒨: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱 𑒫𑒢𑒮𑓂𑒣𑒞𑒨: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑓂𑒫𑒱𑒬𑓂𑒫𑒹 𑒠𑒹𑒫𑒰: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑓂𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧 ब्रह्मणसँ प्रार्थना जे द्युलोकमे, अंतरिक्षमे, पृथ्वीपर, जलमे, औषधमे, वनस्पतिमे, विश्वमे, सभ देवतागणमे आ ब्रह्ममे शांति हुअय। ॐ-ब्रह्मण, द्यौ-सूर्य-तरेगण, अंतरिक्ष- पृथ्वी आ द्यूलोकक बीच, आप:-जल, विश्वेदेवा- सभ देवता, ब्रह्म- सर्जक। 𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧𑒝𑒮𑒿 𑒣𑓂𑒩𑒰𑒩𑓂𑒟𑒢𑒰 𑒖𑒹 𑒠𑓂𑒨𑒳𑒪𑒼𑒏𑒧𑒹, 𑒁𑓀𑒞𑒩𑒱𑒏𑓂𑒭𑒧𑒹, 𑒣𑒵𑒟𑓂𑒫𑒲𑒣𑒩, 𑒖𑒪𑒧𑒹, 𑒎𑒭𑒡𑒧𑒹, 𑒫𑒢𑒮𑓂𑒣𑒞𑒱𑒧𑒹, 𑒫𑒱𑒬𑓂𑒫𑒧𑒹, 𑒮𑒦 𑒠𑒹𑒫𑒞𑒰𑒑𑒝𑒧𑒹 𑒂 𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧𑒧𑒹 𑒬𑒰𑓀𑒞𑒱 𑒯𑒳𑒁𑒨। 𑓇-𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧𑒝, 𑒠𑓂𑒨𑒾-𑒮𑒴𑒩𑓂𑒨-𑒞𑒩𑒹𑒑𑒝, 𑒁𑓀𑒞𑒩𑒱𑒏𑓂𑒭- 𑒣𑒵𑒟𑓂𑒫𑒲 𑒂 𑒠𑓂𑒨𑒳𑒪𑒼𑒏𑒏 𑒥𑒲𑒔, 𑒂𑒣:-𑒖𑒪, 𑒫𑒱𑒬𑓂𑒫𑒹𑒠𑒹𑒫𑒰- 𑒮𑒦 𑒠𑒹𑒫𑒞𑒰, 𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧- 𑒮𑒩𑓂𑒖𑒏। 𑒀 ॐ, स॒हस्र॑शीर्षा॒ पुरु॑षः। स॒ह॒स्रा॒क्षः स॒हस्र॑पात्। 𑓇, 𑒮↓𑒯𑒮𑓂𑒩↑𑒬𑒲𑒩𑓂𑒭𑒰↓ 𑒣𑒳𑒩𑒳↑𑒭𑓁। 𑒮↓𑒯↓𑒮𑓂𑒩𑒰↓𑒏𑓂𑒭𑓁 𑒮↓𑒯𑒮𑓂𑒩↑𑒣𑒰𑒞𑓂। स भूमिं॑ ग्वंग वि॒श्वतो॑ वृ॒त्वा। अत्य॑तिष्ठद् दशाङ्गु॒लम्॥ 𑒮 𑒦𑒴𑒧𑒱𑓀↑𑓅 𑒫𑒱↓𑒬𑓂𑒫𑒞𑒼↑ 𑒫𑒵↓𑒞𑓂𑒫𑒰। 𑒁𑒞𑓂𑒨↑𑒞𑒱𑒭𑓂𑒚𑒠𑓂 𑒠𑒬𑒰𑒓𑓂𑒑𑒳↓𑒪𑒧𑓂॥ हजार माथ, हजार आँखि, हजार पएर संग विश्वकेँ आच्छादित केने अछि, दस आंगुरक गनतीक वशमे नै अछि ओ। प॒द्भ्याग्ँ॑ शू॒द्रो अ॑जायत॥ 𑒣↓𑒠𑓂𑒦𑓂𑒨𑒰𑒑𑓂𑒿↑ 𑒬𑒴↓𑒠𑓂𑒩𑒼 𑒁↑𑒖𑒰𑒨𑒞॥ पएरसँ शूद्रक उत्पत्ति भेल॥ प॒द्भ्यां भूमि॒र्दिशः॒ श्रोत्रा᳚त्। 𑒣↓𑒠𑓂𑒦𑓂𑒨𑒰𑓀 𑒦𑒴𑒧𑒱↓𑒩𑓂𑒠𑒱𑒬𑓁↓ 𑒬𑓂𑒩𑒼𑒞𑓂𑒩𑒰↑↑𑒞𑓂। मुदा पएरेसँ भूमियोक उत्पत्ति। ❀ (White Florette- innocence and purity) ☸ (Wheel of Dharma) ࿕(Swastik) ꣼ (सिद्धिरस्तु, सिद्धम 𑒮𑒱𑒠𑓂𑒡𑒱𑒩𑒮𑓂𑒞𑒳, 𑒮𑒱𑒠𑓂𑒡𑒧 Devanagari Anji) 𑓅 (Gwang ग्वंग- two small circles connected by u and a dot placed over it, used in reference of Vedic texts) 𑒀 (Tirhuta Anji, Ankush of Ganeshji, placed at the beginning of something) 𑒀

१.१.गजेन्द्र ठाकुर- नूतन अंक सम्पादकीय १.२.अंक ३७८ पर टिप्पणी १.१.गजेन्द्र ठाकुर- नूतन अंक सम्पादकीय शिशु, बाल आ किशोर साहित्य आ ओकर समीक्षाशास्त्र बाल साहित्यमे मोटा मोटी एक बर्खसँ कम उमेरक बच्चासँ लऽ कऽ अट्ठारह बर्खक किशोर धरिक उपयोगक साहित्य सम्मिलित अछि। मानसिक रूपसँ आस्ते-आस्ते सीखएबला बच्चा लेल ई वर्गीकरण कने दोसर तरहेँ हएत, जेना जे सामान्य छह बर्खक बच्चा लेल बाल साहित्य मानल जाइए से हुनका लोकनि लेल दस बर्खक आयुमे प्रयुक्त भऽ सकैए। सरस्वती नदी, जल-प्रलय, मनु आ महामत्स्यक कथा, गिल्गमेश कथा काव्य, प्राणवंतक देश गिल्गमेशक खोज, सृष्टिकथा आ देवतंत्रक विकास ई सभ ऋगवेद आ अवेस्ता आदिक सन्दर्भमे प्रारम्भिक बाल साहित्य मानल जा सकैए। अरा-युक्त रथक वर्णन वेदमे भेटैत अछि। नहिये तँ ई पश्चिम एशियामे छल आ नहिये यूरोपमे। भारतीय देवनाम, शिल्प, कथा, अश्वविद्या, संगीत, भाषिक तत्व आ चिंतनक संग ई उद्घाटित होमए लागल पश्चिम एशिया, मिश्र आ यूनानमे। दोसर सहस्राब्दी ई.पूर्व अरायुक्त्त रथ, भारतीय देवनाम, भारतक धार, ऋगवैदिक तत्वचिंतन, अश्वविद्या, शिल्प-तकनीकी आ पुरातन् कथा भारतसँ पच्छिम एशिया, क्रीट-यूनान दिशि जाए लागल। कालक्रमसँ मिश्र, सुमेर-बेबीलोन आदि सभ्यता आ मित्तनी आ हित्ती सभ्यतासँ बहुत पहिनहिये ऋगवेदक अधिकांश मंडलक रचना भऽ गेल छल। वैदिक संस्कृतक प्राचीनतम ग्रन्थ ऋगवेदसँ पहिने सेहो भाषा अस्तित्वमे रहल हएत। कतेक मौखिक साहित्य जेना गाथा, नाराशंसी, दैवत कथा आ आख्यान सभ ओइ भाषामे रचल गेल हएत। एहने गाथा सभक गायकक लेल “गाथिन”, “गातुविद्” आ “गाथपति” ऋगवेदमे प्रयुक्त भेल। प्रख्यात कथा इतिहास पुराणसँ लेल जाइत अछि आ उत्पाद्य कल्पित होइत अछि। वैदिक आख्यान, जातक कथा, ऐशप फेबल्स, पंचतंत्र आ हितोपदेश आ संग-संग चलैत रहल लोकगाथा सभ। सभ ठाम अभिजात्य वर्गक कथाक संग लोकगाथा रहिते अछि। सलहेसक कथाक विवरण लिअ, क्षेत्रीय परिधि पार करिते सलहेस राजासँ चोर बनि जाइत छथि आ चोरसँ राजा। तहिना चूहड़मल क्षेत्रीय परिधि पार करिते जतए सलहेस राजा बनैत छथि ओतए चोर बनि जाइत छथि, आ जतए सलहेस चोर कहल जाइत छथि ओतुक्का राजा/ शक्तिशालीक रूपेँ जानल जाइत छथि। कथा-गाथा सँ बढ़ि आगू जाइ तँ आधुनिक कथा-गल्पक इतिहास उन्नैसम शताब्दीक अन्तमे भेल। एकरा लघुकथा, कथा आ गल्पक रूप मानल गेल। रवीन्द्रनाथ ठाकुरसँ शुरु भेल ई यात्रा भारतक एक कोनसँ दोसर कोन धरि सुधारवाद रूपी आन्दोलनक परिणामस्वरूप आगाँ बढ़ल। जे हम वैदिक आख्यानक गप करी तँ ओ राष्ट्रक संग प्रेमकेँ सोझाँ अनैत अछि। आ समाजक संग मिलि कए रहनाइ सिखबैत अछि। जातक कथा लोक-भाषाक प्रसारक संग बौद्ध-धर्म प्रसारक इच्छा सेहो रखैत अछि, ऐमे जे चिड़ै आ मालजालक माध्यमसँ कथा कहल गेल अछि से पंचतंत्र आ हितोपदेशसँ बहुत पहिने बालसाहित्यक अवधारणा प्रस्तुत करैत अछि। जेना विष्णु शर्मा पंचतंत्रक कथा कहैत-कहैत स्त्री आ शूद्रक पाछाँ अकारण क्रूर भऽ जाइ छथि सएह हाल राम चरित मानसक अछि। ऐसप ग्रीसक दास रहथि आ अपन मालिकक बच्चाकेँ कथा सुनबैत रहथि जे ऐसप्स फेबल्स रूपमे जगतख्यात भेल, अंगूर नै भेटलापर लोमड़ी कहैए जे ई अंगूर बड्ड अम्मत हेतै, ई सभ खिस्सा अमर भऽ चुकल अछि। मुस्लिम जगतक कथा जेना रूमीक “मसनवी” फारसी साहित्यक विशिष्ट ग्रन्थ अछि जे ज्ञानक महत्व आ राज्यक उन्नतिक शिक्षा दैत अछि। कथा पढ़ि सभ प्रबुद्ध नै हेताह तँ स्वस्थ मनोरंजन तँ प्राप्त कऽ सकताह। आ जे एकोटा व्यक्ति कथा पढ़ि ओइ दिशामे सोचत तँ कथाक सार्थकता सिद्ध हएत। आ जकरा लेल रचित अछि ई कथा जँ ओ नै पढ़ताह तँ ओकर ओइ परिस्थितिमे हस्तक्षेप करबामे सक्षम व्यक्ति तँ पढ़ताह। आ जे समाज बदलत तँ सामाजिक मूल्य सनातन रहत? प्रगतिशील कथामे अनुभवक पुनर्निर्माण करब, परिवर्तनशील समाजक लेल, जइसँ प्राकृतिक आ सामाजिक यथार्थक बीच समायोजन हुअए। आकि ऐ परिवर्तनशील समएकेँ स्थायित्व देबा लेल परम्पराक स्थायी आ मूल तत्वपर आधारित कथाक आवश्यकता अछि? व्यक्ति-हित आ समाज-हितमे द्वैध अछि आ दुनू परस्पर विरोधी अछि। ऐमे संयोजन आवश्यक, विश्व दृष्टि आवश्यक। कथा मात्र विचारक उत्पत्ति नै अछि जे रोशनाइसँ कागचपर जेना-तेना उतारि देलिऐ। ई सामाजिक-ऐतिहासिक दशासँ निर्दिशित होइत अछि। तँ कथा अनुभवकेँ पुनर्रचित कऽ गढ़ल जएत आ व्यक्तिगत चेतना तखने सामाजिक आ सामूहिक चेतना बनि आओत। शोषककेँ अपन प्रवृत्तिपर अंकुश लगबए पड़तन्हि तँ शोषितकेँ एकर विरोध मुखर रूपमे करए पड़तन्हि। कथा क्रमबद्ध हुअए आ सुग्राह्य हुअए तखने ई उद्देश्य प्राप्त करत, बुद्धिपरक नै व्यवहारपरक बनत। वैदिक साहित्यक आख्यानक उदारता संवादकेँ जन्म दैत छल जे पौराणिक साहित्यक रुढ़िवादिता खतम कऽ देलक। ई सूर्य अरब-खरब आन सूर्यमेसँ एकटा मध्यम कोटिक तरेगण- मेडिओकर स्टार- अछि। ओइ मेडिओकर स्टारक एकटा ग्रह पृथ्वी आ ओकर एकटा नगर-गाममे रहनिहार हम सभ अपन माथपर हाथ राखि चिन्तित छी जे हमर समस्यासँ पैघ ककर समस्या? हमर कथाक समक्ष ई वैज्ञानिक आ दार्शनिक तथ्य चुनौतीक रूपमे आएल अछि। संवादक पुनर्स्थापना लेल कथाकारमे विश्वास होएबाक चाही- तर्क-परक विश्वास आ अनुभवपरक विश्वास। आत्मप्रशंसा आ परस्पर प्रशंसाक परम्परा जइमे दोसराक निन्दा सेहो सम्मिलित अछि, उत्कृष्ट बाल साहित्यक निर्माणमे बाधक अछि। सरकारपर आलम्बन, प्राथमिकताक अज्ञान- जकर कारणसँ महान बनबा/ बनेबा लेल लेखक-समीक्षक जान अरोपने छथि, आ ओइ स्थितिमे जखन भाषा मरि रहल अछि। कार्ययोजनाक स्पष्ट अभाव अछि आ जेना-तेना किछु मैथिली लेल कऽ देबा लेल सभ व्यग्र छथि, कऽ रहल छथि। स्वयं मैथिली नै बाजि बाल-बच्चाकेँ मैथिलीसँ दूर रखबाक अभियान चलल अछि आ ऐमे मीडिया, कार्टून चैनल आ शिक्षा-प्रणालीक संग एक्के खाढ़ीमे भेल अत्यधिक प्रवास अपन योगदान देलक अछि। मैथिलीक कार्यकर्ता लोकनिक कएक ध्रुवमे बँटल रहबाक कारण समर्थनपरक लॉबिइंग कर्ताक अभाव अछि। क बदला अपन/ अप्पन लोकक की लाभ, ऐ लेल लोक बेशी चिन्तित छथि। मैथिली छात्रक संख्याक अभावक कारण उत्पाद उत्तम रहला उत्तर सेहो विक्रय कौशलक अभाव बढ़ि जाइए। मैथिलीमे उत्तम उत्पादक अभाव तँ अछिए, विक्रयकौशलक सेहो अभाव अछि। मैथिलीक सन्दर्भमे बाल साहित्य आ ओकर समीक्षाशास्त्र बाल साहित्य लेखकसँ अनुरोध जे ङ आ ञ क प्रयोग करथि जइ‍सँ बच्चाकेँ सुविधा हएत। नै बाल साहित्यमे लिखल जा सकैए। भाङ लिखल जएबाक चाही, भांग नै। फेर छनि‍, कहलनि केँ बच्चा क्रमसँ छनी, कहलनी पढ़ैए, वर्कशापमे एहन देखल गेल; से छन्हि, कहलन्हि आदिक प्रयोग करू। मैथिली बाल साहित्यक लेखनमे संयुक्ताक्षर, आ ङ क प्रयोग भाषाक विशिष्टता काएम रखबामे सहायक हएत। तहिना सरल शब्द मुदा खाँटी मैथिली शब्द जेना अकादारुण आदिक प्रयोग करू। बाल साहित्यमे गद्य आ पद्य दुनू महत्वपूर्ण अछि जँ कही तँ पद्य कने बेसि‍ये। गद्यमे कथामे विषयक समावेश जेना विज्ञान, समाज विज्ञान आदि देलासँ मनोरंजन आ शिक्षाक मध्य तालमेल भऽ सकत। मैथिलीमे बालकथा कएक राति धरि चलैत अछि तँ पैघ लोकक कथा मिनटमे सेहो खतम भऽ जाइत अछि। मैथिलीमे चित्र-शृंखला, चित्रकथा, विज्ञान, समाज विज्ञान, आध्यात्म, भौतिक, रसायन, जीव, स्वास्थ्य आदिक पोथीक अभाव अछि। संध्या विद्यालय आ चित्रकला-संगीतक माध्यमसँ शिक्षा नै देल जा रहल अछि। दूरस्थ शिक्षाक माध्यमसँ/ अन्तर्जालक माध्यमसँ मैथिलीक पढ़ाइक अत्यधिक आवश्यकता अछि। सङे मैथिली लेल सभक हृदएमे अग्नि छन्हि, से ओ परस्पर एक दोसराक विरोधी किए ने होथु। लोकक बीचमे ऐ भाषाक आरोह, अवरोह आ भाषिक वैशिष्ट्यकेँ लऽ कऽ आदर अछि आ ऐ मे मैथिली नै बजनिहार भाषाविद् सम्मिलित छथि। आध्यात्मिक आ सांस्कृतिक महत्वक कारण सेहो मैथिली महत्वपूर्ण अछि। ऐ भाषामे एकटा आन्तरिक शक्ति छै। बहुत रास संस्था, जइमे किछु जातिवादी आ सांप्रदायिक संस्था सेहो सम्मिलित अछि, एकर विकास लेल तत्पर अछि। ऐ भाषाक जननिहार भारत आ नेपाल दू देशमे तँ रहिते छथि आब आन-आन देश-प्रदेशमे सेहो पसरल छथि। शंकराचार्यक विषयमे कहल गेल जे ओ अपन कमंडलमे धार भरि लेलन्हि। भेल ई जे बाढ़िमे बीचेमे पहाड़ रहलाक कारण एक दिस बाढ़ि अबैत छल आ एक दिस दाही। बीचक गुफाकेँ शंकर अपन शिष्यक सहयोगसँ तोड़ि जखन कमण्डल लेने बहरओलाह तँ लोक देखलक जे दोसर कात पानि आबि रहल अछि। सभ शंकराचार्यक स्तुति कएलन्हि जे अहाँ अपन कमंडलमे धार आनि हमरा सभकेँ दाही सँ आ दोसर कातक लोककेँ बाढ़िसँ मुक्त्त कराओल। अहाँ कमण्डलमे पानि आ धार अनलौं! बादमे अवसरवादी लोकनि एकरा चमत्कारसँ जोड़ि देलक। आशा अछि जे मैथिली बाल साहित्य लेखक सेहो अपन लेखमे उगनाक कथाक तर्क आ श्रद्धासँ विवेचना करता। गोनू झाक गाम भरौड़ाक राजकुमार "बहुरा गोढ़िन नटुआ दयाल" लोककथाक मल्लाह कथानायक राजकुमार दुलरा दयाल, भरौड़ामे एखनो हिनकर गहबर छन्हि। मैथिली बाल साहित्य लेखक गोनूसँ आगू ईहो देखथु। ट्रेजेडीमे कथानक संग चरित्र-चित्रण, पद-रचना, विचार तत्व, दृश्य विधान आ गीत रहैत अछि। बाल साहित्यमे ट्रेजेडी नै हुअए, ओइ विचारकेँ हमर समर्थन नै अछि, समाजक निम्न वर्ग वा अस्पृश्य वर्गक लोकदेवता सेहो कोना अस्पृश्य भऽ गेला से बच्चाकेँ बुझबैए पड़त। मुदा बुझबैक ढङ एहेन हेबाक चाही जे बच्चा अपन धरोहरकेँ चीन्हि सकए, ओकर आदर कऽ सकए। मिथिलाक लोककथामे जाति-पाइत नै होइ छै, साम्प्रदायिकता नै होइ छै। गोनू झाक समएमे मुस्लिम मिथिलामे आएले नै रहथि तखन मुस्लिम तहसीलदारक अत्याचारक कथा गोनू झाक खिस्सामे किए घोसियाएल जा रहल अछि। कंप्युटर आ सूचना क्रान्ति जइमे कोनो तंत्रांशक निर्माता ओकर निर्माण कए ओकरा विश्वव्यापी अन्तर्जालपर राखि दैत छथि आ ओ तंत्रांश अपन निर्मातासँ स्वतंत्र अपन काज करैत रहैत अछि, किछु ओहनो कार्य जे एकर निर्माता ओकरा लेल निर्मित नै कएने छथि। आ किछु हस्तक्षेप-तंत्रांश जेना वायरस, एकरा मार्गसँ हटाबैत अछि, विध्वंसक बनबैत अछि तँ ऐ वायरसक एंटी वायरस सेहो एकटा तंत्रांश अछि, जे ओकरा ठीक करैत अछि आ जँ ओकरो सँ ई ठीक नै होइत अछि तखन कम्प्युटरक बैकप लए ओकरा फॉर्मेट कए देल जाइत अछि- क्लीन स्लेट ! बाल साहित्य सेहो एहने तंत्रांश अछि जे बाल मनपर अंकित भऽ जाइत अछि, मुदा एतऽ फॉर्मेट करबाक विकल्प नै छै। तेँ बाल साहित्यक निर्माणमे सतर्की आवश्यक अछि, सावधानी आवश्यक अछि। उमेरक हिसाबसँ बाल साहित्यक वर्गीकरण आ ओकर समीक्षा हेबाक चाही। शिशु (०-५ बर्ख), बाल (५-१२ बर्ख) आ किशोर (१२-१८ बर्ख) उमेर मध्य बाल साहित्यक वर्गीकरण कऽ एकर समीक्षा समीचीन हएत। चित्रकथा पाँच बर्खसँ छोट बच्चा लेल रचल साहित्य होइत अछि, ई स्कूल जाइसँ पहिने अभिभावक द्वारा पढ़ाओल जाइत अछि। अभिभावक बच्चाकेँ कथा पढ़ि कऽ सुनाबै छथि आ बच्चा चित्रक माध्यमसँ ओकर अनुभव करैए। बच्चाक तीव्र मानसिक विकास एकर परिणामस्वरूप होइत अछि। जखन बच्चा स्कूल जाए लगैए आ वर्णमाला सीखि लैए तखन ओ ई पोथी सभ अपने पढ़ऽ लगैए आ एकर संग आन आन पाठ्यपुस्तक आ चित्रित पोथी सभ पढ़ऽ लगैए। सात बर्खक बाद ओ छोट-छोट अध्यायबला पोथी आ नौ-दस बर्खसँ पैघ-पैघ अध्याय बला पोथी पढ़ऽ लगैए। बारह बर्खक बाद बाल उपन्यास आदिक अध्ययन बच्चा सभ शुरू कऽ दैए। बाल साहित्यमे पारम्परिक लोककथा, इतिहास-महाकाव्यक कथा आदि सुनाओल जाइत अछि। साहसिक आ प्रेरणादायक जीवनी आ नीति-प्रेरक कथा सेहो बाल साहित्यक अन्तर्गत अबैए। परीकथा, जादू, गीत आदिक माध्यमसँ सार्थक बाल साहित्यक निर्माण होइए। तेँ बाल साहित्यक समीक्षामे बाल साहित्यक प्रकारपर सेहो ध्यान देबए पड़त। की बाल साहित्य अन्ध्विश्वासकेँ बढ़ावा तँ नै दऽ रहल अछि? की बाल साहित्य अपन धरोहरकेँ चिन्हबामे बच्चाकेँ सहयोग दऽ रहल अछि? की बच्चामे मानव मूल्यक ज्ञान ऐ साहित्यकेँ पढ़बासँ एतै? की जातिवादी आ वैचारिक कट्टरताक विरुद्ध बच्चाकेँ प्रशिक्षित करबाक उद्देश्यमे बाल साहित्य सफल भऽ रहल अछि? वैचारिक तराजू पसङाह तँ नै भऽ रहल अछि, बच्चाक स्वस्थ मनोरंजनमे कोनो कट्टरता तँ सायास-अनायास नै घुसि गेल अछि? सरल शब्दावली, सरल भाषा आ सरल विचार बाल साहित्यक उत्कृष्टताक लेल कसौटी बनत। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। १.२.अंक ३७८ पर टिप्पणी लक्ष्मण झा ’सागर’ नीक अंक, बधाइ। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.गद्य खण्ड २.१.परमानन्द लाल कर्ण- गीता माहात्म्य (आगाँ) २.२.आचार्य रामानंद मंडल-डी एल एड बनाम बी एड २.३.लालदेव कामत-गढ़चिरौलीक स्मरण/ स्वनाम धन्य शिरोमणी/ साहित्य रत्न अनुप लाल मंडल/ पुस्तक चर्चा- दूध बेचनी/ ठेहा परक मौलायल गाछ २.४.निर्मला कर्ण- अग्नि शिखा (खेप-२८) २.५.नन्द विलास राय-छुछुनैर ‍२.६.कुमार मनोज कश्यप- लघुकथा- सादृश्यता २.७.रबीन्द्र नारायण मिश्र-ठेहा परक मौलाएल गाछ (उपन्यास)- धारावाहिक २.८.किशन कारीगर-पुरूस्कारी गुर्गा पुरूस्कार बँटा डकैत (हास्य कटाक्ष) २.९.संतोष कुमार राय 'बटोही'- एकटा संस्मरण- काकी : गुणती देवी २.१.परमानन्द लाल कर्ण- गीता माहात्म्य (आगाँ) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.२.आचार्य रामानंद मंडल-डी एल एड बनाम बी एड आचार्य रामानंद मंडल-डी एल एड बनाम बी एड डी एल एड बनाम बी एड

सर्वोच्च न्यायालय के एकटा फैसला के अनुसार वर्ग १ से ५ वा लेवल -१ में बी एड योग्यताधारी के बहाली न होतै बल्कि डी एल एड योग्यताधारी के बहाली होतै। अर्थात प्राथमिक विद्यालय मे शिक्षक केवल डीएलएड योग्यताधारी के होतैय। परंतु प्रारंभिक विद्यालय जैइमे वर्ग -१ से ८ तक पढाई होइ छैय वोइमे वर्ग १से५ लेवल -१ तक डीएलएड योग्यताधारी के बहाली आ ६स ८ लेवल -२तक बीएड योग्यताधारी के बहाली होतैय।

ज्यादातर सर्वशिक्षा अभियान के पहिले के मध्य विद्यालय मे बीए आ बीएससी के पद तक न सृजित हय आ अभियान के बाद बाला सृजित मध्य विद्यालय मे स्नातक शिक्षक न हय।त वर्ग -६ से ८तक मे कोन शिक्षक पढैतैय।डीएल एड योग्यताधारी त अनुपयुक्त होतैय। परंतु व्यवहार मे वर्ग-६से ८ वा लेवल -२ मे डीएलएड योग्यताधारी शिक्षक पढा रहल हय।

दोसर बात डीएलएड योग्यताधारी के प्रोमोशन स्नातक प्रशिक्षित पद पर केना प्रोमोशन होतैय। जौं प्रवेश पद पर अनुपयुक्त हय। जौं होतैय त गुणात्मक शिक्षक आ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा केना प्राप्त होतैय। -आचार्य रामानंद मंडल सामाजिक चिंतक सह साहित्यकार सीतामढ़ी।

-आचार्य रामानंद मंडल सामाजिक चिंतक सीतामढ़ी,सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक, माता-चन्द्र देवी, पिता-स्व०राजेश्वर मंडल, पत्नी-प्रमिला देवी, जन्म तिथि-०१ जनवरी १९६० योग्यता- एम-एससी (रसायन शास्त्र), एम ए (हिन्दी)। रूचि- साहित्यिक, मैथिली-हिन्दी कविता -कहानी लेखन आ आलेख। प्रकाशित पोथी - मैथिली कविता संग्रह भासा के न बांटियो। २०२२ प्रकाशित रचना - सझिया कविता संग्रह पोथी - जनक नंदिनी जानकी आ शौर्य गान। २०२२ पत्रिका -मिथिला समाज, घर -बाहर आ अपूर्वा (मैसाम)। अखबार -दैनिक मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश। सामाजिक-सामाजिक चिंतन, दायित्व- पूर्व जिला प्रतिनिधि, प्राथमिक शिक्षक संघ, डुमरा, सीतामढ़ी। स्थायी पत्ता- ग्राम-पिपरा विशनपुर थाना-परिहार जिला-सीतामढी। वर्तमान पता-पिपरा सदन,मुरलियाचक वार्ड-04 सीतामढ़ी पोस्ट-चकमहिला जिला-सीतामढी राज्य-बिहार पिन-843302 मो नं-9973641075 ईमेल-ramanandmandal001@gmail.com ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.३.लालदेव कामत-गढ़चिरौलीक स्मरण/ स्वनाम धन्य शिरोमणी/ साहित्य रत्न अनुप लाल मंडल/ पुस्तक चर्चा- दूध बेचनी/ ठेहा परक मौलायल गाछ लालदेव कामत-गढ़चिरौलीक स्मरण/ स्वनाम धन्य शिरोमणी/ साहित्य रत्न अनुप लाल मंडल/ पुस्तक चर्चा- दूध बेचनी/ ठेहा परक मौलायल गाछ १ गढ़चिरौलीक स्मरण ९०क दशकमे हम बिनोवा आश्रम स्कूल क' सहायक प्रकल्प अधिकारी छलहुँ।ओही समय एन सी आर डी -नागपुर केर सेक्रेटरी डा०राम काले जी जनौने रहथि, जतय आदिवासी लोकसंख्याँ २०बर्ष पूर्व जनगणना मेँ विरल रहय;आ ओहीठाम शिक्षाक अलख जगेबाक लेल राज्यसभा सदस्य शुश्री निर्मला देशपांडे जी बीड़ा उठौलिह अछि।से अहीं बिहारी सिधेशर राम ,सुभाष गुप्ता आ नारायण श्रमिक केर क्षेत्र पर्यवेक्षण धरि करय सँ आवासीय आश्रमशाला क' काज आगू बढ़त।ओहिठाम प्रकाश भाई आ दिनेश मंडल क'बाद अर्जून भाई काज दैखैत छैक, जे शिक्षक सोमनकर केर संग नक्सली वारदात सँ सहमि गेलैक य।ओतय बिहारक विजय आर्य नक्सली केर सर्वेश्रवा छथि।से ठिके बढ़ वेशी ओही दुर्गम इलाकामे घटना होइत रहैक।गत शुक्रवार केँ पुलिश 'क सी० ६०कमांडोक संग मुठभेड़मे१३नक्शली मारल गेल,जे गढ़चिरौली जिलाक पुलिस उप महानिरीक्षक केर हवालेसँ मीडिया मेँ ई ' खबर आयल।एटापल्लिक कोटमी लग जंगलमेँ एक बैसक लेल नक्सलाईट जमा भेल रहैक।आलापल्ली तोंदेल ,अहेरी तलवाड़ा,गेदा हेडरी आ बिनागुण्डामे हम डेढशाल रहि गुजर काटने छी।बढ़ मोन पड़त य.....!अहिंसक रचनात्मक समाज केर कामकाज सेहो हमरा जीवनमे निर्भिकता आनलक। महाराष्ट्र राज्य केर विदर्भ इलाकामे चन्द्रपुर जिला सँ १६ अगस्त १९८२ केँ फुटे ८०किमी०दुर गढ़चिरौली जिला बनलै। नागपुर शहर सँ १८० किमी० दुरी पड़ैत छैक। वन, पहाड़ आ नदीक बहुतायत दुर्गम क्षेत्र मेँ हाथीक झुंड तबाही मचबैत रहैत छैक।एतुका साक्षरता दर ६०प्रतिशतके लगधक आ २ लोकसभा आ ३ विधानसभा क्षेत्रमे १४,४१२ वर्ग किमी क्षेत्रफल छैक। १२२ गाम नदी - नाला सँ प्रभावित रहैत जाहिमे ६ गाम उपर पहाड़ी पर बसल छैक,जे चारूभर सँ जलाशय सँ मानसुन अयलापर घेरा जाईछ। तेँ बिणागुंडा ,तुरेमार्का , दमनमार्का , कोवाकोडी, पेरिमलवट्टी ,फोडेबारा,सन गामक आदिवासी लोक आ सरकारी स्टाफ छ: मासक रशदपानि पहिले सँ जुमेने रहैत य। ई एरिया प्राकृतिक मनोरम छँटा समेटने अपने आपमे अनोखा अछि। वुर्गी आ सुरजागढ पहार छत्तीसगढ़ आ तेलंगाना राज्य सँ सीमा मिलैत मराठीक संग आनो कतेको भाषा भाषीक' गंगायमुनी संस्कृति संजोगने छैक।

२ स्वनाम धन्य शिरोमणी प्रो० जगदीश नारायण चौधरी जीक जन्म मधुबनी जिलाक विक्रमशेर गाममे 10अक्टूबर 1928 ई० मे भेल छलनि। ई हिन्दी साहित्य आ संस्कृत - अंग्रेजी आओर मैथिलीक पैघ विद्वान छलाह । जे० एन० काॅलेज- मधुबनीक प्राचार्य रहथि ।संगहि अध्यात्मिक प्रवृतिक बैष्णव छलाह ।भोजन सँ पूर्व बहुतदेर धरि पूजा आ ध्यान करथि । सन् 1953 मेँ हिन्दी विषय सँ केवट जातिक पहिल एम० ए० भेलाह । हिनक जाहि परिवेश मे जनम भेल ताहिकाल सँ अद्यतन एहि समाजक विधार्थी जौ' द्वितीय श्रेणी सँ उत्तीर्ण होयत छैक तँ बूझू जे सम्पन्न अभिजात वर्गक विधार्थीक प्रथमश्रेणीक समान होईछ । से हिनको 1947 में मैट्रिक 51% सँ डिप०इन०एड० 1959 ई० 52% धरि सेकेन्ड डिविजन होइत रहलैक। आई ए० 1949 मे 51% बी०ए० आनर्स हिन्दी 1951 मे 56% अंक सब शिक्षा पटना विश्वविद्यालयक अधिन भेल रहैक। 1942 ई० केर भारत छोड़ो आन्दोलन मे सक्रिय भूमिका निभेलनि वर्षोवर्ष भूमिगत, स्वतन्त्रता सेनानी सम्मान पेंशन धारि भेलाह। 1946 से 52 धरि खजौली थाना कांग्रेस कमिटीक सदस्य रहलाह। 1947 में पण्डौल सत्याग्रह मे गिरफ्तार भेलासन्ता मांग पूर्ण भेलापर स्वाधिनता पर रिहा भेलाह। कांग्रेस आजादी प्राप्ति लेल गठित भेल रहय तेँ 1952 मे एहिसँ इस्तीफा दैत पीएसपी केर सदस्यता ग्रहण कयल। 1953 सँ 17-06-1959 किसान उवि बथनाहा (ससुराइर ग्राम) में प्रधानाध्यापक आ 1959 में जगदीश नन्दन काॅलेजक हिंदी व्यख्याताक कार्य भार ग्रहण केलनि। 1971 में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी सँ झंझारपुर, मधुबनी पूर्वी क्षेत्र सँ संसद केर चुनाव में 32 हजार सँबेसी वोट आनलनि। 1972 मे दरभंगा जिला संयुक्त समाजवादी पार्टी क' जिलाध्यक्ष निर्वाचित भेलाह जे मधुबनी जिला बनलापर कायम रहलाह। 1975 में मीसाकेर तहत भूमिगत भए प्रशिक्षक केर काज नव कार्यकर्त्ताक मार्गदर्शक रहलाह। 1977 में जनता पार्टी सँ झंझारपुर विधानसभा क्षेत्र सँ चुनाव डाॅ जगरनाथ मिश्र तत्कालीन मुख्यमंत्री विरूद्ध लड़लाह आ 25 हजार के लगधक मत प्राप्त केलिन। व्यापक धांधली सँ चुनाव मेँ पराजक भेलैक। 1978 में जनता पार्टीक राज्य कार्यकारिणी डेलीगेट भेलाह जे जनता दल बनैत काल धरि सक्रिय कार्यपालक भूमिका निर्वहन मे लागल रहलाह। एहि साल वो ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालयक सीनेट सदस्य निर्वाचित सेहो भेलाह। 14 नवंबर 1980 के रीडर (उपाचार्य पद पर) मे प्रोन्नति भेलाह। 1 फरवरी 1985 केँ प्रिंसिपल (प्रोफेसर) केर पद पर प्रोन्नति पावलिथ ताहि सँ पूर्व 1 जनवरी 1984 सँ प्रधानाचार्य के रूप में कार्यरत रहथि। समाजिक असमानता आ आन कुरितिक खिलाफ हरदम सम्यक प्रयास अपना जनैत करैत छलाह। अपना गाम मे 1953 में मध्य विद्यालय स्थापना केलनि। बथनाहा मे हाईस्कूल खोलेबाक मुख्य भूमिका आ संचालन करैत रहलाह। जेएनकॉलेजक अतिरिक्त 10 साल बाद 1969 मे दोनबारीहाट (खुटौना) मे महाविद्यालय स्थापना संचालन में प्रमुख दायित्व निभेलथि। 1974 सँ राज्य सरकार द्वारा अधिग्रहण होयबा तक मुक्तेश्वर जनता उच्च विद्यालयक सचिव पद पर संचालन करैत रहलाह। क्रिमिलेयर परिवार मेँ कतोह झगड़ा बजरलैक तँ खूनी संघर्ष के फरियेवा में समय दैत शांति व्यवस्था स्थापित करना में सेहो यशकृर्ति बढलनि। झंझारपुर (बिहार) सँ 2000 में राजद के विधायक प्रो. चौधरी जी 90 के दशक में कांग्रेस पार्टी सँ झंझारपुर लोकसभा क्षेत्रक चुनाव लड़ि भारत में कांग्रेसक हारय वाला उम्मीदवार में सबसँ बेबी वोट पावियो दोसर खेप टिकट सँ वंचित रहि गेलाह। तकर बाद जार्ज फर्नांडिस केँ कहब पर समता पार्टी सँ पुनः लोकसभा झंझारपुर क्षेत्र सँ चुनाव लड़ि अढ़ाई लाखक लगधक निर्णायक वोट बटोरलनि। 2005 में समता पार्टीक टिकट लौटाबैत एहिपाँतिक लेखक प्रो जगदीश बाबू लेल एहि क्षेत्र सँ हटि गेल। चौधरी जीके जीवन पर्यन्त अधिक पिछड़ल तनका अपन अभिभावक मानैत रहलैक। ओना समाजिक आकर्षण हुनका प्रति सब वर्गक रहैक। कॉलेजक कोनो साहित्य विषयक लिजर घंटी के ओ डे बथि छात्रगण केँ थथमारथि। ताहि विद्वता लेल छात्रगणक नजैर में श्रेष्ठता मेधा ग्रहण केने रहथि। एहन यशस्वी व्यक्तित्वक स्वर्गीय बुन्नीलाल कामति जीक चतुर्थ सुपुत्रक एहि धरा धाम सँ रूग्नावस्था में 3 जनवरी 2015 के सदाके लेल परलोक सिधारब अनचोकेमे सिरहा देलनि। विनम्र श्रद्धांजलि संग हुनका नामे शत्-शत् नमन। ( 1991 में श्रेध्य जगदीश बाबू हमरा सन अदना आदमीक बुलावा पर सहजे आबि जिला स्तरीय नेहरू युवा केंद्र वाॅलीवाल खेलकेर टुर्नामेंटक उद्घाटन कयने रहथि से हुनक महानता चिरस्मरणीय रहत )

३ साहित्य रत्न अनुप लाल मंडल

कटिहार जिलाक मौजा समेली,टोला चकला मौलानगरमे एक किसान श्री लम्बू मरड़ जीक ओहिठाम दि०११/१०/१८९६ई०केँ " पाथर पर दुईब जनमल" के शोर भेलैक।ओहिदिन शिशुरुपेँ अनुप लाल बाबूक जन्म भेल छलनि। ताहि सँ पहिले हिनक बहिणक जन्म भेल रहैक, जे मरि चुकल छलैक । बाल अवस्थामे बपखौका भ'गेलाह। हिनक पालन पोषण बाबा केलथिन आ काका उधो मंडल अपने सँगामक पाठशाला मेँ शिक्षा-दीक्षा शुरू केलनि। १९०७ई०मे निम्न प्राथमिक परीक्षा पासकय उच्च प्राथमिक विद्यालय, खैरामे दाखिला लैत १९१०मेँ अपर प्राइमरी परीक्षा पास कयलन्हि। करीब १७सालक उमेरमे अपना गामक प्राथमिक विद्यालय मेँ सहायक शिक्षक'क नोकरी करय लगलाह। ओहि साल राजकीय गुरु ट्रेनिंग स्कूल,सब्दलपुर ,पूर्णिया सँ विकर्षक प्रशिक्षण मेँ नाम लिखेलनि आ १९१४मेँ परीक्षोतीर्ण भेलाह। आब वो उच्च प्राथमिक विद्यालय लक्ष्मीपूर काठगोला (कटिहार) मेँ प्रधान शिक्षक'क रूपमे नियुक्त कयल गेलाह।तकरवाद १९१७मेँ शिक्षक प्रशिक्षण विद्यालय फारबिसगंजमे हिन्दी शिक्षक क'पद पर योगदान केलनि अहिबीच ओ भागलपूर ट्रेनिंग स्कूल सँसेहो ट्रेन्ड भेलाह। पड़ोसी गाम मलहरियाक मध्य विद्यालयमे हिन्दी पंडित पदपर नियुक्ति भेला सँ लोकमानस बीच पंडितजी नव नाम सँ आहलादित होईत रहलाह। नोकरी छोरि बनारसमे कालिन कताई बुनाई क' अल्प प्रशिक्षण लैत एकटा स्कूलक स्थापना मलहरियामे करैत करघा उद्योग सँ लोकक आर्थिक उन्नति करय लगलाह, परंच अर्थाभावमे फेर अपना हिन्दी शिक्षक रुपमे नोकरी करय बेली इंग्लिश हायस्कूल बाढ़ (पटना) जाय पड़लैन। इयह विद्यालय क' परिबर्तित नाम अनुग्रह नारायण सिंह उच्च विद्यालय भ'गेलैक अछि। सन्१९२४ मेँ एहि मास्टरीके छोड़ि अनुप लाल मंडलजी की के घोष एकेडमी,पटनामे २५टाका मासिक पर हिन्दी शिक्षक रुपे नियुक्त भेलाह। एतय चारि सालधरि सेवा देलथि। सन् १९२५ आ २६मेँ पटना सीटी जिला स्कूल सँवार्षिक आ पूरक परीक्षा देलनि, परंच सफल नहिँ भेलाह। १९२६मेँ हिंदी साहित्य सम्मेलन सँ माध्यमा (विशारद) परीक्षा प्रथम श्रेणीमे उत्तीर्ण भेलाह। ताहि समय १९२८सँ अनुप बाबू साहित्य रत्न नामसँ प्रसिध्दि पावलथि। महानन्द उच्च विद्यालय नरही चाँदी-आरामे तीसटका मासपर हिन्दी शिक्षक पदपर कार्यरत भेलाह। १९२९ मे अमरचंद भैरोदन सेठिया विद्यालय बिकानेरमे साठिटका मासिक दरमाहा पर शिक्षक भेलाह, ओहिठाम संध्याकालीन काॅलेजक व्याख्याता पदपर १९३०ई० धरि कार्यरत रहलाह। हिनके जीवन बहुतों संघर्षके अपनामेसमेटने छैक। पैघ-पैघ पुरस्कार समय पर भेटल छैन। बरारीमे युगान्तर साहित्य मंदिर पुस्तक प्रकाशन एवं बिक्री संस्था क'स्थापना कयलन्हि , १९३२मे फेर सरदाना स्थानान्तरण करैत भागलपुरमे जमलाह । व्यसायिक काजमे अधुरे रहलाह आ मोन खिन्न भेलासन्ता पछाति दोकान बोन करय पड़लैन। सन् १९४०मेँ गांधी जीके व्यक्तिगत आग्रह पर सत्याग्रहमे गेलाह आ १९४२क'भारत छोड़ो आंदोलनमे सक्रिय रुपसँ भाग लेलाह। सन् १९५०ई०मे हिनकर बिहार राष्ट्रभाषा परिषद-पटनाके प्रकाशन अधिकारी पद पर नियुक्ति भेलनि। ओही कौन्शीलके निदेशकगण आचार्य शिवपूजन सहाय, महादेवी वर्मा, डा०हजारी प्र०द्विवेदीसन नामी साहित्यकार'क सानिध्य भेटलैन । हुनकर लेखन आ अध्ययन काज क्रमिक चलैते रहलैक। १९२६ ई०म जातीय पत्रिका "कैवर्त कौमुदी"केर दू साल प्रकाशन कयलन्हि। हुनक पहिल उपन्यास थीक 'निर्वासिता 'सन्१९२७ ई० । हिन्दीमे "मीमांसा" १९३०मेँ उपन्यास बहरायल जाहि पर १९३९मेँ किशोर साहू 'बहुरानी' फिल्मक निर्माण काज कयल। स्व०रामवृक्ष वेनीपुरी क' शव्दमे "अनुपजी डेढ़ दर्जन साहित्यिक कृति गढि रचना संसारमे चारि चान लगेलनि । विश्व विख्यात रेणुजी हुनका सँ प्रेरणा लैत रहलाह आ अपन 'मैला आँचल' उपन्यासक पाण्डुलिपि पहिलखेप पटनामे हिनके देखेलनि आ आशीर्वाद प्राप्त कयलन्हि। अनुप जीके ओ सनबाप कहैत रहथि। २१सितम्बर १९८२केँ सदा लेल ओ अनन्त यात्री भ' ब्रह्मलिन तँ भेलाह, परंच अपना समाजमे ओबीसी० सौंदर्य साहित्य विमर्श लेल वृहद् आयाम द' गेलाह। भारतीय समाजमे ओबीसी साहित्यक सशक्त रचनाकार भेलाहकवीर, जे धार्मिक पाखंडवादक पर्दाफाश करैत श्रमक महत्वके स्थापित केलनि। श्रमशीलजन केँ सबसँ उपर रखैत परजीवी जन्तु सभक लेल व्यगंवाण छोड़लैन। ओना तँ ओबीसी साहित्यक चार्वाक, बुध्द सँ आरंभ मानल गेल हन। मध्यकालमे धन्ना भगत , दादू दयाल आ दरिया साहेब धरि ओबीसी लेल लेखन केने छथि। ओबीसी साहित्य विमर्श मेँ अनुप बाबूक योगदानके बिसारब किनको सँ नहिँ हेतैन, कियाक तँ ओ सब विधामे साहित्यकार रूपेँ प्रतिष्ठित छलाह। हुनक रचनाधर्मिता केँ आगू बढेवामे २१वीँ सदीक दोसर दशकक ओबीसी रचनाकार छथि -: डा० राजेंद्र प्रसाद सिंह, डा०ललन प्र०सिंह,डा०हरिना० सिंह , हरे राम सिंह आदि। ओबीसी समीक्षक हरि ना०ठाकुर केँ जखन लाल बुझ्झकर घनेरो कहनिहार भेट सकैत य तँ हम तकरा नजैरमे कतेक दुरधरि निमाहल जायब? अ०भा०कैवर्त कल्याण समिति-कोलकाता अनुप बाबू नामपर पूर्णिया विश्वविद्यालय 'क नामकरण होय, ताहि लेल प्रस्तावधरि कयने य। शत् शत् नमन।

४ पुस्तक चर्चा- दूध बेचनी लेखकिय सरोकार सँ जुड़ल जानल पहचानल नाम स्नातक श्री रामबिलास साहू मातृभाषा मैथिली लेल अहर्निश सेवक छथि ,दूधबेचनी कथा संग्रह ल केँ अयलाह अछि।एहि पोथीक आवरण पृष्टसज्जा मनमोहक अछि ,जहिपर प्रकाशन लोगो जगह छेकने छैक ।पछिला गत्ता पर किमत 150 टाका सहित कथाकार सचित्र फोटो अपरिचय छापल छैक । 112 पृष्टक एहि पोथिक केँ ISBN प्राप्त भेल छैक ।दाम 200 टाका ।एक दर्जन खीसा में क्रम 9 पर मूल टाईटल , दुध बेचनी ,कथा सजावल गेलैक अछि ।एहिसँ पूर्व हिनक अंकुर कथा संग्रह पूर्व में प्रकाशित भ चुकल छन्हि ।अंशुमान कथा संग्रह अप्रकाशित कृति सेहो निकलय बाला अछि ।ओना हिनकर 2013 मेँ पद संग्रह रथक चक्का उलैट चलय बाट 2017 में कोशीक कछेर कव्य संग्रह सेहो विभिन्न प्रकाशन सँ निकल छैक 26 मई 2018 केँ दिल्लीः सँ साहित्यकार गजेन्द्र ठाकुरजी एहि ,,दुधबेचनी,, पोथीपर अपन समीक्षात्मक तथ्य परोशनय छैथि ,तयो एहि पोथीकेँ न्याय दिएबाक उदेशसँ वृह्द चर्चाकरव नैतिकबोध कराबैछ । जहिसँ पाठक वर्ग कं कथापरसँगक रोचकता सहजे भेटय। मिथिलांचलमे स्थापित कथाकारक लीकसँँ हटि कए ‌बढ़ निमन कथा हिनकर होइछ तकर एकटा अंशतः चर्चा करैत छी। चलितर आ पवितर केर नाकढेकल बहिन रिताक वियाह जाहि वर सँ सस्ते मे निमरजना भ जाईछ से योग्यजोरीक नहीं चुनाव केनै केतेक विपती मेँ रीता परैत छैक ,तकर वानगी पाठक केँ देखवा मे अबैत छैक। पारिबारिक ह्रास आ स्वयं मात्री प्रधानता के देखेवामे रीताक चरित चित्रण जीवन्तता पूर्वक कयल गेल अछि जे पाठक कँ अद्योपरान्त कथा सँ बान्हने रहैत अछि। जखन वृद्धा अवस्था में रीताक दूनू जौवां बेटा शहरी जीवन अपनाबैत रुग्न परिस्थितियोमे हुनक तकतिहान करय सँ बिमुख होय छैक तँ मायक सजल हृदय विदिर्ण भ सामाजिक आशके वाट ताकैत छैक । अपने गाय महीस आ जगह जमीन केंद्र दशनामामे दैत दस समाजे सँ आगू अपने जीवन निर्वाह होयवके वाट खोललीह । सामाजिक लोकके लगहैर गाए महींस सं दुध आपूर्ति करेगा अबि रहल छलील, तेँ हुनक चर्चित नाम दुधबेचनी पड़ि गेलैक । ओना बियाहक बोदध सँ श्वसुर हीरालाल दुनू प्राणीक मुइला पर आ मतिछीनू पथिक असमयिक निधन केर बाद 1954मेँ ओही नारेदीगर प्रान्तर में कोशी नदिक भिषण बाढि सँ सबुटा ठाठबाठ झहैर गेल रहैक, गहना आ गया दामी बौस्त बेचकए अबला मसोमात रीता दुनू बौआ केँ दरभंगा राखि पढेबा में सामर्थ भेलीह। कथाक नब सन्देश के जे नईका पीढी गमैया जीवनसँ पलायनवादी भ नगर पर भार बनेने आधुनिक कहबैत अछि, एहि पोथीक गामक गाछी ,कमतिया हवेली ,घुमि गाम चलू ,वीपैत ,झंझाइटिक जैर शिनुरया आमक गाछ ,जरैन ,जेहन पाठने पढ़ल पुता अपने सिर विषय कोलहुक सुचा करूटेल गोदानक गाय घुमि घर आयल आशीर्वाद आ ई केकर दोख शीर्षक मेँ ग्राम्य जिबनक रोचकता सँ भरल छैक, जे पाठक वीनू पढ़ने नय रहत।

५ ठेहा परक मौलायल गाछ सद्यप्रकाशित एहि मैथिली साहित्य पोथी " ठेहा परक मौलायल गाछ" सामाजिक उपन्यास 'क लेखक रविन्द्र नारायण मिश्र स्वयं प्रकाशक छथि,जे नोएडा सँ १५२ पृष्टक पहिल संस्करण २०२३ मेँ निकाललाह अछि। ई पोथी ओ अपन जीवन यात्रा'क सहभागिनी श्रीमती आशा मिश्रके स्नेहार्पित कयलनि,जाहिके ISBN ९७८९३ ५९१३६५६१ भेटल छन्हि। एहि उपन्यास'क दाम चारिसय टाका छैक। सब मानव के पाँछा एकटा खिस्सा जुटल रहैत छैक। से उपन्यासकार स्वयं ऐ पोथीमे एक नायक छथि। ई मुख्यतः दू परिवारक सुखान्त कथा शूरू करैत दूनू परिवार सँ एक-एक गोट लोक द्वारा दू लोकक हत्या करबाक अलग - अलग घटना देखेलाह अछि। से दुखान्त परिदृश्य केँ वाद प्रस्तुत रचना मेँ सौहार्द निश्तुकी रुप सँ होयबाक ताना-बाना बुनलनि। इयह आन उपन्यासकार सँ हिनक पृथक वा कहू बेढप - बेछप लेखन शैली भेल छन्हि। पाठक पढ़ैतकाल देखत जे कथानक केँ उपन्यासकार श्री रविन्द्र नारायण मिश्रजी आरो आगू घीचकेँ स्नेह मिलन आ वृध्दजन लेल स्वयं सहायता संस्था गठन आ तकर सुव्यवस्थित संचालन देखौने छथि,जे पाठकके चित् केँ शांति प्रदान करैछ। उपन्यासक सौदर्य बोध एहन छैक जे दू भारतीय सुखी परिवार दिल्लीमे एक पड़ोसीक नाते रहैत ,सहमेलू भ' गेल छैक। उपन्यासक नायक अभिजात वर्ग सँ छथि तँ भाषा - वार्तानुसारे पड़ोसीके अधिक पिछड़ल तबका रुपेँ चिन्ह सकैत छी। दूनू परिवार एक दोसराक प्रति सहज निष्ठा सँ समर्पित बुझाइछ । मिथिलाक गाम सँ पलायन कय शहरमे रहनिहार परिवारक बृहद स्थितिक विश्लेषण ऐ कथामे भेटैछ। बिदेश मेँ वृध्दजन बेटा सबके जपालसन बुझाइछ । ताहिक तुलनात्मक अध्ययन लेल एहि उपन्यास ॑ ठेहा परक मौलायल गाछ ॑॑॑ मे अध्येता केँ खूब तथ्य भेटि सकैत छैक । ई उपन्यास समाजमे वृध्दजन प्रति जे अदऔ सँ श्रधाभाव आ मानप्रतिष्ठा कायम रहैक आ ताहिमे कमि जे दसलोकिमे आब भेलैक अछि, तकर जीयैत-जागैत उदाहरण थीक सुशील एवं हुनक पड़ोसी । समाजमे प्रायः ई देखल जाइछ जे जे जतेक सम्हरल अछि ओ अपन बेटा बेटीकँ योग्य बनेबाक जुगतमे लागल रहैछ । आ पढ़ि लिखके पराकाष्ठा पर पहूँचल बेटा सँ जहन वृध्दा अवस्था मे एक हाथ सेवा नहिं भ पबैत छैक तँ बढ़ मोनमे दु:ख पहूँचैत छै। स्त्री पात्र रमा सन मायके ममता हरसमैत पुत्र ई० मुरली एवं श्याम इंजिनियर लेल टाँगल रहैत छन्हि । वन्स्बत चार्टड.एकाउटेन .शालनीक जे प्रल्यक्ष मदैत आ स्वच्छ विचार रखैत समय-समय पर माय बाबू जीक खोज-पुछारि करैत छथि । मुरलीके जन्म समय रमाक हालत नाज़ुक रहनि । डाक्टरे भगवान रहथि,से तत्काल अपने पाकेट सँ टाका कौन्टर पर दैत शल्यक्रिया धरि कयलनि । सालभरि बादे श्यामक जन्म समय सेहो रमाके खुब परेशानी भेलनि,शिशुक जन्म सँ दू मास पूर्वहि सँ होस्पिटल मेँ भर्ती मुदा पति महोदय 'क परिवार नियोजनक विचारक गप्प टालल गेलैक। पाँच साल वाद बेटी जन्म समान्य तरहेँ भेलैक। होस्पिटल मे जच्चा-बच्चा दूनू सुरक्षित रहल। बच्चाक पालन पोषण मे मातृत्व अवकाश केर अतिरिक्त समय चाही छल ,से दिल्लीक नोकड़ी छोरबाक धरि निर्णय नहिँ कय पाबथि। अध्ययन लेल असैर पर लम्बा छुट्टी लेने रहय , ताहिमे वेतन तँ नहिये होयतैक। ओना श्वसुर पंडित जी सँ अपेक्षित स्नेह सहयोग प्राप्त होइत रहने अपनों सरकारी स्कूल'क शिक्षक मद्दके वेतन पुष्कर रूपेँ नियमित भेटैत रहने कथुक कमी नहीं खटकलै सुशील बाबूकेँ। आजुक परिवेश मे देखल जाए लागल जे आई ए, बीए मे जे कालेजक खर्चा विद्यार्थी उपर होय तै ,तै सँ बेशी खर्चा आब अन्दर मैट्रिक मे कन्वेन्ट - कोचिंग सेंटर ' के छैक। मुदा बालबच्चा केँ उच्च शिक्षा दियेबामे दूनू प्राणी कोनू कोर - कसर नहि रखलनि। शालिनी पढैत - लिखैत समय नोकड़ी पकैर लेने रहैक। ओकर सहपाठी केरल के रहैछ। ओतुका सामाजिक प्रथा अछि , बेटे सासुरमे जा बसैत छैक। से ब्राह्मणी माय आ क्रिश्चियन बाबुक संतान प्रेम वियाहमे सालिनिक संग मुम्बई मे रहैछ। ओ एक बेटी'क जन्म दैछ,जकर नाँऊ राखल गेलैक - नम्रता। शालिनी हिन्दू आ ओकर पति क्रिश्चन धरि बनले रहलै। वियाह तँ दिल्लीमे आबि केने रहय,से शालिनीक सासु-श्वसुरके सहमति नै रहैक। मुरली आ श्याम अमेरिका मे पैकेज पाबि इंजीनियरिंग काजमे ओतय कए नागरिक बनिके रहि जाईछ। मुरली तँ पुरूख डेविड संग १० साल सँ संग रहैत जीवन गुदश करैत छल। मुदा श्यामकेँ एक प्रेमिका धोखा देने रहैक,आब ओ भाय लग सँ लन्दन चलि गेल आ फोन सेहो सबसँ कमे करय, माय बाबु सँ तँ बहुत कमे करैत रहैक। अपनों बुढ़ा दूनू दम्पति सेवा निवृत्ति पाबि दिल्लीये म तीन कमराक फ्लैटमे रहैत य। आब स्वास्थ्य ठीक नै रहैत छैक। एहनमे कोनू संतान लगमे नै रहने मात्रे पड़ोसी दूनू प्राणी सदैत मदैत मँ नि:स्वार्थ भाव सँ रहनि। ओकरो बेटा पूतौह बंगलौरक अपन मकानमे रहैत छै। बेटा तँ अधिक काल बौराएले रहैछ। एकदिन हृदयरोग सँ रमा अचेत भ' गेलापर होस्पिटल मे लऽ जा कऽ भरती कराओल गेलीह। बेटाक प्रति जे माय बाबूक अनुराग उमरल से दूनू बेकैत अमेरिका जाए ले विदा भेल। शालिनीक फोन एलै ओकरा झबरी कुकुर मौरनिंग वाककाल डेरा सँ बहराईत हबकि लेने छलै,से अस्पताल जाकय ढोंढीलग आठ सुइया भोकबय पड़लैन। सफाई अड्डा जाए सं पूर्व बड़का बेटाक फौन धांसिन अबै छैन- टिकट वीज़ा पासपोर्ट आ आवश्यक परिचय कार्ड सब ओरिया केँ सैंत लेब! हबाई अड्डा पहुंच गेल तखन धियान एलैन जे जरूरी कागतक झोली तँ डेरेमे छुटि गेल रहनि । जहाज छुटबाक हलतलवी समय रहै,ता पड़ोसी अपन कार सँ भेंट करते जुमैत ओ बिसरलहा कागतक झोरी दैत जहाज पकड़बाले अरियाइत देलकैन। हवाई जहादे सँ सीएटल शहर अद्भुत सुन्नर लागैत छैन। बेटा फोन पर कहलकैन अहाँ सबके डेबिड कार सं गेट पर सं डेरा आनि देते आ हम किछ दिनकर वाद बाहर सँ डेरा पर आयब। ता कथुक दिक्कत ओ नहिं हुअय देत। ओतय बेटा सबसँ भेंटघांट ने होगन,जेठका बेटा तीन दिन कम समय ले भेटैत छैन। पुनः दिल्ली अयबा सं पूर्व प्रवासी भारतीय सब सँ पार्कमे परिचय पात्र होई छैन। सौहार्द पूर्ण रूप सँ विदाई सेहो पबैत अपने टिकट सँ अयलाह। वादमे विमान सँ विदाइक उपहार सब सेहो एलै। थाकल ठेहियाल रहने सुति गेलइ से पड़ोसी,जेठबेटा आ सालनीक काल पर भोरभने वार्ता करैत घर केँ झारपोछ मेँ लगे जाई छथि। एकटा अनचिन्हार नं० सँ फोन एलेन जे फर्जी इन्श्योरेंस कम्प० केर फर्जी फोन वार्ता आ तकर व्हाइटसप खोइल मैसेज अनुसारे लिंक छुबिते १०लाख टाका हुनका खाता सँ दोसरक एकान्उटमे ट्रांसफर भेलान्तर बैंकक मैसेज अयलापर अचेत खसलाह। पुनः एकटा समाद अबैत छैक आठ लाख टाका फेर खर्च भेल अछि । अपने रमाके संग कय जामे बैंक जाइ ता छह लाख फेर निकासी कय उड़ा लेलक कियो । जांच क्रममे फोटो सँ थाह चलल हुनक अपने छोट बेटा आ ओकर प्रेमिका ई साइबरक्राइम केने रहय। भारतीय समाज में प्रायः ५०% एहन परिवार अछि जिनक संबंधी मे हत्या वा दुर्घटना सँ अकाल मौत आ युवा पीढ़ी अन्तर जातीय वियाह केने छैक । नजैर उठाकय देखू तँ मातृक,सासुर, बहीनक सासुर,दीदीक सासुर, समधियाना,सरहौइजक नैहर,मौसिक सासुर ,साइढ़क सासुर आ मित्रगण के कुटुंब परिवार ऐ सँ आब स्मपृक्त नहि अछि। ताहि ५०% लोकक स्वानुभुति केँ एहि उपन्यास सँ सरोकार छैक। खबर बला समयमे बचल ५०% परिवार सेहो एहन व्यथा सँ अक्रान्त रहत,ई समयके प्रवाह थीक।ऐ चलैनमे आब ठहराउ नहि छै, सतत् ऐ बावत दुनिया एक खुजली किताबसन देखा पड़त। ताहि मर्मके पकैड़ रविन्द्र बाबू उपन्यास विधामे ऐ कथा केँ दीर्घ रुप दैत पाठक बीच परोसलनि आ आगाह करैत चौचंख रहबआक लेल उर्जान्वित प्रेरणा 'क प्रसार कयलाह अछि। पाठक केँ आगूक कथामे आन्हर भेल वृध्द केँ दृष्टिसन साधन होईछ जीवन संध्या संस्था। किछु शव्दके पाठक ऐ तरहेँ सुधारिके पढथि -: पृष्ठ सं० १८ मे सएक जगह होएत सयह, ५३ मेँ सद्वाबना लग - सद्भावना, ५४ म नेने - नैने, ८५-उठओलिअनि- उठौलियनि, ९४- अहाँज-अहाँक जे, १२५- ओकरा सभ- ओकरा सँ, पड़ओसई- पड़ोसिन, १२७- पत्निकं- पत्निक' ,१५९- अवाई - आयब, यओज्ञतआक- योगताक १५३- दओवआर- दोसराकए, १५८- करेंट - करए। ऐ तरहक मुद्रण त्रुटि सुधारि द्वितीय संस्करण मेँ परिमार्जित होयव निहायत जरूरी छै।

अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.४.निला कर्ण- अग्नि शिखा (खेप-२८) निर्मला कर्ण (१९६०- ), शिक्षा - एम. ए., नैहर- खराजपुर, दरभङ्गा, सासुर- गोढ़ियारी (बलहा), वर्त्तमान निवास- राँची, झारखण्ड। झारखंड सरकार महिला एवं बाल विकास सामाजिक सुरक्षा विभागमे बाल विकास परियोजना पदाधिकारी पदसँ सेवानिवृत्ति उपरान्त स्वतंत्र लेखन। अग्नि शिखा (भाग- २८) (मूल हिन्दी- स्वर्गीय जितेन्द्र कुमार कर्ण, मैथिली अनुवाद- निर्मला कर्ण) कथा अखन धरि: समयक पखेरू अपन पाँखि पसारि उड़ैत रहल।दिन राति अन्हार आ इजोत,साफ उज्जर दिन आ सघन कारीराति!ई दुनू रंग समयक पखेरू के मात्र दू टा पँख छल!ई दुनू रंग अबैत-जाइत रहल,समय बदलैत रहल,कखनो काल इजोत आ कखनो अन्हार मे!रानी उर्वशी आ राजा पुरूरवाक जीवन एहि दुनू रंग सँs वंचित नहि छल! ई दुनू रंग अलग-अलग रूप मे आबैत-जाइत रहल हुनका सबहक जीवन में!कखनो दिन,कखनो राति,कखनो अन्हार आ कखनो इजोत,समयक पखेरू पाँखि पसारि उड़ैत रहल। एकर संग हुनकर दाम्पत्य-प्रेम एक दोसर के लेल दिन प्रतिदिन बढ़ैत रहल । हुनका लोकनिक दाम्पत्य प्रेमक प्रथम पुष्प हुनका लोकनिक पारिवारिक वृक्ष मे पुष्पित भेल । राजाक प्रसन्नताक पारावार नहि रहल। राजाक जीवन में प्रसन्नताक सरिता बहैत रहल,ओ सुख-सरिता मे डुबकी मारैत रहलाह।धीरे-धीरे जेना-जेना समय बढ़ैत गेल,हुनका लोकनिक पारिवारिक उपवन में सेहो पुष्प बढ़ैत गेल - श्रुतयु, संन्ययु, रथ, विजय, एवं जय हुनक पारिवारिक उपवन के पुष्पक नाम राखल गेल । सभ राजकुमार धीरे-धीरे बढ़य लगलाह।हुनका सबहक बाल-सुलभ किलकारी सs राज-प्रासाद गुंजायमान होबय लागल।मुदा ने राजा आ ने उर्वशी के ध्यान अपन संतान पर रहनि। राजकुमार सबहक पालन-पोषण में माता-पिताक ध्यान कनेको नहि छलनि। राजकुमारक सबहक पालन-पोषण एवं देखभाल राजमहलक राज-कर्मचारी करैत छल।एहि बच्चा सबहक माता-पिता,धाय,मित्र सबहक कर्तव्य निर्वहन करैत छल राज-कर्मचारी गण । माता-पिता बच्चा सभ सs ध्यान भटका कए प्रेम-पीयूष पीबा मे पूर्ण रूप सँs डूबल छलथि। एहि कार्य हेतु मुख्य स्थान छल उपवन एवं कानन के शांतिपूर्ण वातावरण। ओ सायत-संजोग कहियो राजमहल में रहथि, सदिखन हुनक मधुमासक भ्रमण चलैत रहैत छलनि । राज्य संचालन एवं प्रशासन के कार्य प्रधान आमात्य कs रहल छलथि । राजाक अनुपस्थिति में वैह अप्रत्यक्ष रूप सs प्रशासनिक सत्ता के प्रयोग कs रहल छलाह। आब राजाक प्रेमक चर्चा दिन-राति लोक मे होमय लागल छल। एहन-दाम्पत्य प्रेम ने ओहि समयक समाज मे कहियो देखल गेल छल आ ने पूर्व कालक कुनो कथा में सुनल गेल छल। सब कियो राजाक भाग्य के प्रशंसा करैथि। कारण स्वर्ग के अप्सरा हुनक पत्नी छलथि आ हुनक प्रेमकथा सन प्रेम कुनो दंपति के मध्य नहि सुनल गेल आने देखल गेल छल। परन्तु किछु लोक सभ राजाक आलोचना सेहो करैत छल, किएक तs शासन-प्रशासन दिस ध्यान नहि देल जाइत छल राजा के द्वारा,मुदा ओहन आलोचक केर संख्या मात्र आँगुर पर गनल जा सकैत छल। आब जँs कोनो उत्सव वा पावनि होइत छल तs दुनू गोटे उनमुक्त भाव सँs खुलि क' ओहि मे भाग लैत छलाह। दुनू गोटे मीलि कs सबहक संग नाचैत छलाह। प्रत्येक समारोह के अवसर पर राज्य मे एकटा विशाल आयोजन होइत छल,जाहि मे सब प्रजाजन के सहभागिता रहैत छल। पैघ-छोटे,ऊंच-नीच के कनेको भेदभाव नहि होइत छल। राजा के एहि विशाल हृदयता के सराहना सब केओ करैत छल। घमंड हुनका छूबई सs डेराइत छल। उदारता हुनक मुख्य गुण छल। एक दिन पुरुरवा उर्वशी के कहलखिन - "प्रिय,हम अपन सौभाग्यक स्वयं प्रशंसा करैत रहैत छी। हमरा सन भाग्यवान के होयत! अहाँ सन अद्वितीय सौन्दर्यवती रमणी के संगति भेटनाई परम सौभाग्यशाली होयवाक लक्षण अछि।" उर्वशी बजलीह "अहाँ ई बात कोना एतेक विश्वासपूर्वक कहैत छी प्रियतम,जे हम दुनियाँक सबसँs सुन्दर स्त्री छी"? हँसैत राजा पुरूरवा बजलाह - "हम ई बात नीक जकाँ जनैत छी प्रियतमे,जे अहाँ दुनियाँक सबसँ सुन्दर नारी छी। मुदा हमरा नहि बुझल अछि जे अहाँ सन सौन्दर्यक देवी स्वयं हमर कोन गुणक कारणेँ स्वर्ग सँs पलायन कय हमरा लग आबि गेल छथि। हमर प्रेम प्राप्त करs ओ दौड़ैत-दौड़ैत पृथ्वी पर आबि गेलीह,आ स्वर्ग केँ बिसरि पृथ्वीक निवासी बनि गेलीह।" मुस्कुराइत उर्वशी राजा सँs कहलथि - "अहाँ फेर सँs हमरा सs हँसी करs लगलहुँ प्रियतम। हम स्वयं अपना केँ कोनो साधारण महिला सँ नीचाँक स्तरक मानैत छी। कारण पृथ्वीक कोनो स्त्री स्वर्गक अप्सरा नहि बनs चाहती । जँ अहाँ के विश्वास नहि होइत अछि हमर बात पर तखन पूछू कोनो स्त्री के जे धरती पर रहैत छथि,आ देखब ओ कहियो स्वर्ग के अप्सरा बनय के इच्छा नहि करतीह ।अप्सरा के पद सम्मान के पद नै छै प्रिय!आदर के पद छै किनको गृहिणी बनब। गृहिणी पद! जे हमरा अहाँक माध्यमे भेटल! ताहि पर हम एकटा चक्रवर्ती सम्राटक गृहणी छी।हमरा सँ बेसी भाग्यशाली कोन महिला भ' सकैत अछि?" "हमरा अहाँक पद सँs नहि अहाँ सँs,अहाँक सौंदर्य सँs प्रेम अछि उर्वशी। अहाँक सौन्दर्य हमरा बहुत नीक लगैत अछि। अहाँ केँ उत्पत्ति स्वयं महर्षि नर-नारायण द्वारा कएल गेल अछि। ब्रह्मा सेहो अहाँ सन सौन्दर्यक सृजन नहि क' सकलाह।"- राजा उर्वशी केँ नेत्र में प्रेमपूर्वक गहराई सँs तकैत बजलाह। गंभीरताक भाव अपन स्वर में अनैत उर्वशी बजलीह - "हम एक बेर देवर्षी नारद सँs अपन उत्पत्ति के कथा सुनने छलहुँ । जँ अहाँ केँ सेहो हमर उत्पत्तिक कथा बुझल अछि तs कृपया हमरा कहू। हम देखब जे अपना दुनूक जानकारी एक समान अछि वा भिन्न। हमरा जतेक बूझल अछि हमर उत्पत्तिक कथा ओहि में कतेक सत्य अछि, अथवा किछु अंतर अछि से बुझना जायत।" "अहाँक एहि संसार मे उत्पत्तिक कथा हम पौलस्त्य नामक ऋषि सँs सुनने रही। सच पूछू तs हम ओहि क्षण सँ अहाँ पर मोहित भs गेल छलहुँ, मुदा अहाँक अलभ्यता सँs अवगत छलहुँ,ताहि लेल हमरा द्वारा अहाँ के प्राप्त नहीं करवाक सोचि हमर हृदय में पीड़ा उठल। आहाँक संसर्ग प्राप्त करवा हेतु हमर हृदय में प्रेम के लहरि उठल,मुदा तखनहि हम ओकरा अपन हृदयक कोनो गहींर गुफा मे नुका देने रही । ताहि लेल हम पौलस्त्य ऋषि केर ओ कथन सेहो बिसरि गेलहुँ जे ओ अहाँक रूपक संबंध मे देने छलाह |" "कहू प्रिय हमर उत्पत्ति के विषय मे अहाँ की जनैत छी" उर्वशी मासूम बालिका सन जिद्द करs लगलथि। " ई सभ बात बिसरि जाऊ,आउ हमर हृदय सँs लागि कs एक बेर हमर धड़कन के आत्मसात कs लिय,जाहि सँs हमर अहाँक हृदय के धड़कन एक साथ मिलकs वीणा के तार सन झंकृत भय जाए। अन्यथा एहेन नहि होय कि हमर हृदय के धड़कन विरह सँs व्याकुल भय रुकि जाए।" राजा पुरूरवा एहि विषय सँs बचबाक लेल गप्पक दिशा बदलबाक प्रयास केलथि । "देखू, हम कहने छलहुँ जे हमरा सँ एहि तरहें मरबा-जीवाक गप्प नहि करू। दूर जाउ,हम अहाँक लग नहि आएब" - उर्वशी तमसाई के अभिनय करैत बजलीह । "अहाँ कोना नहि आयेब" ई कहैत राजा पुरूरवा हुनकर हाथ पकड़ि अपना दिस खींचबाक प्रयास केलथि,मुदा उर्वशी हुनकर हाथ झटकि मुँह दोसर दिस घुमा क' बजलीह - "एना नहि,पहिने वचन दिय जे हमर उत्पत्ति के विषय में अहाँ के जे किछु बुझल अछि से कहब।" "भला अहाँक कोनो इच्छा होय,आ हम ओकरा पूरा नहि करब! की ई संभव अछि? हम वचन देने छी जे अहाँक सभ इच्छा पूरा करब,तखन अहाँक ई इच्छा कोना नहि पूरा करब!" ई कहि राजा उछाल मारि क' उर्वशी के अपन अंक मे खींच लेलथि,फेर ओकरा पीन पयोधर पर अपन प्रेम चिन्ह अंकित करय लगलाह। प्रेम-वर्षा के मध्य ओ उर्वशी के उत्पत्ति कथा हुनका सुनाबs लगलाह, आ उर्वशी राजाक मुँख सँs बहराईत शब्द के जाल में ओझराइत रहलीह। क्रमशः अपन मंतव्य editorial.ऽtaff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.५.नन्द विलास राय-छुछुनैर नन्द विलास राय छुछुनैर

रजनी बाजलि- हय भौजी! वरुण मालिक अबै छथि। माथपर नुआँ ल लएह ने। ऐँह! अही छुछुनैरके लाज - धाक करब। आ एकरे देखकय माथपर नुआँ लेब - कुनौलीबाली बाजलि। अँय हइ भौजी, ओना कियैक बजै छहक। पहिले तँ वरूण मालिककेँ देखते मातर ऐ महल्लाक मौगीसब घोघ तानिकय कतवाहि भ' जाइ छलि। आब ऐहन कोन बात भ' गेलै हेन जे तों वरुण मालिककेँ देखकय माथपर नुआँ नइ लइ छहक। जखन रजनी आ ओकर भौजाई कुनौली वाली अपना मकानक बरंडापर बैसल छलि तखने बरूण सेठ अपना डेरा सँ दोकान जाइ छल। रजनी देखेलक जे बरूण मालिक अबै छैथ आ भौजी उघारे माथे बरंडापर बैसल अछि तँ भौजाइ सँ माथपर नुआँ लेमय लेल कहलकै । वरूण सेठ मुड़ी निचा केने अपना दोकान दिश चलि गेल। कुनौलीवाली लेल धनसन। कुनौलीबाली बजलीह हय रजनी बुच्ची तों साल भरिपर सासुर मधुबनी सँ नैहर झंझारपुर एलह हेन,तँए तोरा वरूण सेठक करतुत नहिं बुझल छह। जँ बरूण सेठक छुतहरपनी बुझबहक तँ थूक फेंक देबहक । रजनी बज़ली - एहेन कोन छुतहरपन्ना बाला काज वरूण मालिक केलक हेन जे तों एना बजै छहक। कनेक हमरो तँ सुनावह। कुनौलीबाली बाजलि- ठीक छै चलू कोठरी मे त बरूण सेठक छुतहरपनी कहैत छियह। ऐ ठाम बरंडापर कहवह आ जँ कोई सुनि लेत आ जा कय बरुण सेठ केँ कहि देत जे कुनौलीवाली अहाँ बारेमे अपना ननदि रजनीकेँ कहै छलि तँ अनेरे ओकरो (बरुण सेठकेँ) माँखि हेतै आ ओ हमरा सँ कानि राखत। रजनी बाजलि_ ठीक छै कोठरियेमे चलह। कोठरिक सड़क दिशक केबारे बन्न क' लेब तब त कियो नइ ने सुनि पाओत। कुनौलीवाली बाजलि हँ सएह करब। दूनू ननैद भौजाई कोठरीमे जा कोठरीक सड़क दिशिक केबार बन्न क लेलक। कुनौली वाली कहय लागलि- बरूण सेठक कनियाँ विराट नगर बाली कतेक सुन्नरि अछि से त देखने छहक। रजनी बाजलि कताक दिन देखने छी। बड़ सुन्नरि छै। आँखि केहेन नमहर-नमहर आ कारी-कारी छै। आ ठोर त समतोलाके फाड़ासन छैक। कुनौली वाली बाजलि-आ गरदैन केहन हंससन लगे छै। आ केश कतेक पैघ छै। डाँरसँ निच्चा झुलै छै। एहेन कनियाँक रहैत एकटा चौका-वर्तन करैबाली छौड़ीसँ वियाह कऽ लेलक। जखन कि विराटनगर बाली कनियाँ मे दू टा बेटा छै। एकटा बारह वर्खक आ दोसर दस वर्खक। रजनी बाजलि अँय हऽ भौजी एतेक सुन्नरि कनियाँक अछ़ैत बरूण मालिक चौका वर्तन करै बाली छौड़ीसँ कियैक वियाह केलक। तहूमे दू-दू टा बेटाक रहैत। कुनौली वाली बाजलि वियाह की ओना केलक ,डरे वियाह केलक। डरे वियाह केलक आखिर चौक-वर्तन करै बाली छौड़ीक वरूण मालिककेँ कथीक डर भेलै जे वियाह करए पड़लै ,रजनी कुनौली बालिसँ पुछलि। कुनौली वाली बाजलि -ओइ चौंका वर्तन करै बाली छौड़ीक नाओं जीबछी छी। एक दिन जीबछी बरूण सेठक मकानक आगाँ हाथमे एकटा शीशी लऽ कऽ जोर-जोर सँ बजैत रहए-सुनू यौ ऐ महल्लाक लोक सभ। सुनूं यौ झंझारपुर बाजारक लोकसब। बरूण मालिकक बच्चा हमरा पेटमे अछि। तँए बरूण मालिक हमरासँ वियाह कऽ लौ नहि ते ऐ शीशीमे जहर अछि। हम जहर पीव कऽ अपन प्राण दऽ देव। अहीं सब पंचैती करू हमरा दामनपर दाग लागि गेल। हम कलंकनी भऽ गेलौ। आब हमरासँ वियाह के करत। लोक कहत कुलटा छी। बजैत-बजैत जीवछी हबोढकार भऽ कऽ कानए लागलि। ओकर बात सुनि आ कानव देखि कऽ महल्लाक लोकसव ओकरा लग जमा भऽ गेल। पुरूषसँ बेसी जनिजातिक भीड़ लागि गेल। रूपाकेँ तँ चिन्हते छहक। हँ! हँ!! रूपाकेँ कयैक नहिं चिन्हब। पैछला बेर ओ वार्ड कमिश्नरमे ठाढो भेल रहए मुदा मात्र पच्चास टा भोंट भेल रहए, रजनी बाजलि। कुनौली वाली बाजलि- हँ!हँ!! वएह रूपा। ओ जीवछी लग जाकय ओकरासँ (जीबछीसँ) पुछलक अयँ गै जीबछी तों जे कहै छीही जे तोरा पेटमे बरूण मालिकक हैवल छौ तेकर की सबूत छौ। तैपर जीबछी बाजलि गै रूपा काकी जँ हमरा बातपर विश्वास नहि होइ छौ त जा कऽ बरूण मालिकसँ पुछही ग। पुरा मुहल्लाक के कहए जे पूरा इ बात जंगलक आगि जकाँ पसरि गेल। बरूण सेठ अपना सोना-चानीक दोकानपर रहए। कियो कहए गेलै ओ दौड़ल आएल। ओ जीबछीकेँ समझाबैक कोशिश केलक मुदा जीबछी एक्केटा बात बाजल अहीं कहू मालिक जे आब हमरासन कलंकनी सँ के वियाह करत। कियो नै करत। अहाँक पाप लऽ क‌ऽ हम केतय जाऊ। जँ अहाँ हमरासँ वियाह नहि करब त हम इ माहुर पी कऽ अपन प्राण दऽ देब। बरूण सेठक नीक वेवसाय अछि। दस-पनरह हजार प्रति दिनक कमाई छै। बरूण सेठ रूपा कऽ अलगमे जा कऽ कहलक रूपा भौजी अहाँ जीबछी केँ समझावियौ ओ जौं महिला डाॅक्टर लग लऽ जा कऽ गर्भपात करावए लेल राजि भऽ जाएत तँ एक लाख टाका देबै। आ पच्चीस हजार टका अहूँ के दऽ देब । आ आगिला वार्ड कमिश्नरमे आहाँके जीतावए लेल पूरा जोड़ लगा देब। अहाँक चुनावमे जे खर्च होएत, हम बहन करब। कोनो धरानी हमरा ऐ मुसीबतसँ निकालू। रुपा सोचलक - जँ जीबछी बात मानि जाएत तँ २५ हजार टाका टटका फायदा हएत आ नवम्वर मासमे नगर पंचायतक चुनाव हएत। अगस्त मास बितिये रहल अछि।बरूण मालिक पूरा जोर लगाकय वार्ड कमिश्नर मेँ जीताईए देता। अपना घर सँ ढौओ नै खर्च हैत। चुनाव होयमे जे ढौआ खर्च हेएत सेहो बरूणे मालिक गच्छलक हेन। जँ वार्ड कमिश्नरमे जीत जाएब तँ नगर पंचायतक मुख्य पार्षद लेल परियास करब। नहियों मुख्य पार्षद हयब मुदा मुख्य पार्षद लेल जे वोट देव तँ कम्मीमे दू - अढ़ाई लाख टकाक आमदनी तँ हेबे करत। मुदा ई जीबछी बात मानए तखन नै। रूपा जीबछी केँ अलगमे ल' जाकय बहुत राश समझौलके, मुदा जीबछी एक्केटा बात बजैत रहल - एक लाख बदला दसो लाख देत तैयो हम बच्चा नहिं खसाएब। जौं वरुण मालिक हमरा सँ वियाह नइ करत तँ हम माहूर पीब कऽ जान दऽ देब। ई बात सब होइते रहए तखने बरूण सेठक पत्नी विराटनगर बाली पहुँचली। ओकरा देखते जीबछी आर बड़का नाटक शुरू केलक। जीबछी विराटनगर बालीक पएर पर गिर पड़ल आ कनैत बाजलि-मलिकाइन यै मलिकाइन हमर निशाफ अहिं करू यै मलिकाइन। अहिं कहू जे आब हमरा सन कुलटासँ के वियाह करतै यै मलिकाइन । जँ मालिक हमरासँ वियाह नइ करत त हम जहर पीव कऽ अपन जान दऽ देब। विराटनगर बाली बजली जीबछी हम असगरि में अहाँ सँ गप्प करए चाहै छी। चलू हमरा डेरा चलू। कोनो डर वा चिन्ता फिकिर नहि करू। विराटनगर बाली जीबछीकेँ अप्पन अँगना लऽ गेली। ओ जीबछी सँ पुछली आब कहू जे अहाँक पेटमे सेठ जीक (बरूण सेठक) बच्चा केना अछि। जीबछी कहलकैन मलिकाइन अहाँ अपन आँखिक इलाज करावए नैहर विराटनगर गेल छेलौ। अहाँक गेला एक हफ्ता भेल रहए। एक दिन हम बर्तन-वासन माँजि कऽ घर विदा भेल रही त मालिक कहलक-जीबछी एक कप चाह बना दे। हम चाह बनवए लगलौ त मालिक बजला तो अपनो लऽ एक कप बना लिहे। हम तँ कहियो मालिक सोझामे चाह पीने नइ रही तँए कहालियै नइ मालिक हम चाह नहि पीव। अहाँ लेल बनाए दऽ छी। हम एक कप चाह बनाकऽ मालिककेँ दऽ एलियैन। चाह दऽ कऽ हम विदा भऽ गेलौ त मालिक कहलैन-रूक चाह पीवऽ दे तखन जइहै। तोरासँ किछ गप्प करबाक अछि। मालिक चाह पीवैत बेला वड़ नीक चाह वनेलएँ हेन। ऐ चाहपर तोरा किछ इनाम दैऽ केऽ मोन होइए। हम सोची हम त सब दिन मालिककेँ एहने चाह बनाकऽ दऽ छेलिये। आन दिन कहाँ कहियो मालिक बड़ाई केने छेलखिन आ बराइक संग इनामो -वक्शीशक गप्प करै छथिन। आखिर की बात छियैक। तावतमे मालिकक चाह सठि गेल छलै। से ओ (मालिक) जेबीमे सँ एक हजार टाका दइत बजला- ले ई तोहर इनाम भेलौ। हम सोची एक कप चाहक इनाम एक हजार टका । मुदा हमरा लोभ जागल। हम मालिकक हाथ सँ टका ल'क' विदा भ' गेलौं। मालिक हमरा फेर बजौलनि आ कहलैन- जीबछी नै जानि हमरा मोन केना नै केना करै य। माथो सेहो दुखाईत अछि। अनेक हमर माथ दाबि दे,तखन चल जैहन। हम की करितौं। मालिक ओछानि पर परि रहलाह आ हम माथ दबाबै लगलौं। एकाएक मालिक भरि पांजमे ल'के' हमरा चुमा लीअ लगलाह। हम कहलियैन -मर! मालिक ई की करै छीयै। कियो देखत तँ की कहत। तै पर मालीक बजला- कियो नँय देखत। गेट भीतर सँ बन्द अछि। गेट आ खिड़की सबमे पर्दा लागल अछि। हम कहलियैन नै मालीक नै। हमरा छोरि दियौ। मुदा मालिक नहिँ छोड़लनि ओ हमर ईज्जत लुटि लेलनि। हम कानय लगलौं तँ मालिक हमरा एकटा पाँच हजारक नोटक गड्डी देलनि आ कहलैन ककरो लग नै बजियहनि। तोरा हम मालोमाल कऽ देबौ। हमहुँ लोभमे फँसि गेलौं। अपन कपड़ा ठीक क' छ: हजार टका ल' घर आबि गेलहुँ। तै के वाद जब घर अहाँ एलौहु, बेर- बेर मालिक हमरा दैह सँ खेलथि। आई हम मालिकक बच्चाके माय बनय बाली छी। मलिकाईन अहीं कहु ऐमे हमर कोन दोष? तै पर विराटनगर वाली बजली दोख तँ अहूँ के अछि। तखन बेसी दोख सेठ जीके छैन। अच्छा अहाँ बैसू हम सेठ जीके बजबै छीयैन। विराटनगरवाली मलिकाईन फौन कऽ बरूण सेठके बजौलक। विराटनगर वाली तखन सेठ जी सँ पुछलकैन- जीबछी जे कहैए से बात सत छी की फुसी।बरूण सेठजी बाजल हँ जीबछी फुसी बजै छै। तै पर जीबछी बाजल जँ ई गप्प झुठ छीयै तखन फेर अहाँ रुपा काकि केँ किया हमरा लग पठेने रहियैक। रूपा दिया टाका मादे की सब कहने रहिऐ। विराटनगरबाली बाजल रुपा अहाँ केँ की सब कहने छली। जीबछी बाजल रुपा काकी बाजल छलै जे भेल से भ' गेल। कोनो महिला डाक्टर सँ अपन पेटक बच्चा गीरा ले। तोरा बरूण मालीक सँ एक लाख टका दिया दै छियौ। तैपर हम पुछलियै एक लाखक बदला दसों लाख टाका मालीक देतै तँ हमर ईज्जत वापस भ' जाएत!नै न? जौं मालिक हमरा सँ बियाह नै करतै तँ इयह जहर पीकय अपन जान द' देबै। तै पर विराटनगर बाली बजलै गै छुछनैरिया सेठ जी दोषी तँ अछिए तोहूं कम नै छेँ! लोभमे फँसल रहलेँ आ जखन पैर भारि भ' गेलौ तँ आब कहै छी जे मालीक वियाह नै करत त जहर पी लैब। जौ एतय सँ,जे मोन होई छौ से कर गै। जीबछी बरूण सेठक घर सँ निकैल सड़क पर आबि गेल आ बाजय लागल बरूण मालीकके हमरा सँ वियाह करै पड़तै, नै तँ हम जान द' देबै। ओम्हर विराटनगर बाली बजय जे जँ सेठ ऐ कुलछनी सँ वियाह करत तँ हम फाँसी लगाकय मरि जायब। आब तँ बरुण सेठ बड़का फाँसमे पड़ि गेल । ओ सोचय जँ जीबछी सँ बियाह करय छीयै तँ पत्नी फाँसी लगाकय आत्महत्या कय लेतई आ जँ जीबछी सँ बियाह नै करत छी तँ ओ जहर पीकय प्राण द' देते। हमरा पर केश मोकदमा चलतैक। के कहलक जीनगी भरि जेलक चकी पिसय पड़त। बरूण सेठक पैर एक कात नदी आ दोसर कात खाधि , आखीर जाएत तँ जाएत कतय! जीबछीक नाटक आरो तेज भ' गेलैक। पचासो आदमी जमा भ' गेल छलैक। वरूण सेठक जे हीत अपेक्षीत रहय ओ बरूण सेठ सँ कहय लागल सेठजी एकेटा उपाय अछि जीबछी सँ वियाह। तँ जीबछी सँ वियाह क' लिअ आ ऐ तमाशाक अन्त करू। जतेक काल धैर वियाह नै करब ततेक तमाशा बढ़त आ अहाँक बदनामी हएत। अहाँ घीनाएब। बरूण सेठक एकटा दोश अछि,नाओ छीयै ओम प्रकाश चनौरागंज घर छै। ओमप्रकाशक कनियाँ सँ विराटनगर बालीक' बढ़ प्रेम छै। बरूण सेठ फोन क' ओमप्रकाश आ हुनकर कनिया केँ अंगना मे बजौलक।सुनै छीयै अंजना झंझारपुर कांलेजमे प्रोफेसर अछि। अंजना आबिकय विराटनगर बाली क' बहुत बात समझौलक। बिराटनगरवाली एकटा शर्त पर बात मानलक जे जँ सेठ जीबछि सँ वीयाह करताह तँ (भारा क') दोसर घर मे राखय पड़तैक। हम ऐ घरमे ऐ कुलक्षणी केँ नँय रहय देबै। बरूण सेठ के भौतिक कोन कमी छैक।ओ बाजल हम जीबछी केँ दोसर घर मे राखब। भोला बाबाक मंदीरमे पन्द्रह बीश गोटयक समक्ष बरुण सेठ जीबछी संग वीयाह केलक। थोड़ेक दिन तँ एकटा किरायाक मकान मे जीबछीके रखलक। पछाति थाना सँ पुब जमीन किनके दू कोठरीक मकान बनाकय जीबछीके देलकैक। जहिया ऐ महल्ला क' जनिजाति बरूण सेठक करतूत बूझलक महिला सब ओकरा नाओ पर थुक फूखल। महल्लाक कियो मौगी बरुण सेठ सँ लाजधाक नै करय। रजनी बाजल काजे छुछुनैर बाला केलनि तँ कियो ईज्जत कोना करतैन। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ‍२.६.कुमार मनोज कश्यप- लघुकथा- सादृश्यता कुमार मनोज कश्यप लघुकथा- सादृश्यता " पापा! कॉलेज के फीस जमा करै के काल्हि आखिरी दिन छै....हम बिसरिये गेल रही!" " कते लागत?" " पंद्रह सय तीस रूपैया।"

हमर हाथ अनायास पॉकेट सs पर्स निकालि रूपैया गिनि कs ओकरा देबा मे लागि गेल। जूता तs फेर कहुना सिया कs काज जोग भईये जेतै .... एखन कॉलेजक फीस भरब अत्यावश्यक छै। यैह सोचैत-सोचैत आँखिक आगाँ साक्षात भs उठलाह बाबूजी आ मोन पड़ि उठल जे हमरा सभ भाई-बहिन के एतेक जोड़ देला के बादो ओ बाहर जाई-अबै लै दोसर खण्ड धोती कियैक नहिं कहियो राखि सकलाह! -कुमार मनोज कश्यप, सम्प्रति: भारत सरकारक उप-सचिव, संपर्क: सी-11, टावर-4, टाइप-5, किदवई नगर पूर्व (दिल्ली हाट के सामने), नई दिल्ली-110023, # 9810811850, ईमेल : writetokmanoj@gmail.com अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.७.रबीन्द्र नारायण मिश्र-ठेहा परक मौलाएल गाछ (उपन्यास)- धारावाहिक रबीन्द्र नारायण मिश्र ठेहा परक मौलाएल गाछ (उपन्यास)- धारावाहिक खण्ड १ सँ ५ ठेहा परक मौलाएल गाछ 1

पैतालीस साल पूर्व दरभंगा जिलाक छोटसन गाम लक्ष्मीपुरसँ नौकरी करबाक हेतु हम दिल्ली आएल रही । दिल्लीमे केओ परिचित नहि छल। दरभंगासँ बरौनी आबि कए दिल्लीक हेतु जयन्ती जनता एक्सप्रेस ट्रेन पकड़ने रही । दिल्ली अएलाक बाद किछु अकबक नहि फुराए । कतए जाइ,ककरा संपर्क करिऐक । कोनो जोगार नहि रहए । खाली सुनने रहिऐक जे दिल्लीमे सभक जोगार भए जाइत अछि । बस जेबाक देरी अछि । ओतए पहुँचलहुँ आ भाग्य खुजि जाएत । आब तँ ओ बातसभ सोचिए कए हँसी लागि जाइत अछि । दिल्ली अएलाक बाद हम कैकदिन बौआइत रहि गेल रही। तीन दिन धरि बिरला धर्मशालामे रहल रही । ओहिठामसँ निकलि गुरुद्वारा रकाबगंज पहुँचल रही । बहुत जोर भूख लागल छल । संयोगसँ ओतए भंडारा चलैत रहैक । भरिपेट हलुआ,पूरी खेलहुँ । हलुआ की रहए लगैक जेना सुच्चा घी छह-छह कए रहल अछि । जतेक खाउ । कैकदिनपर एहन नीक भरि पेट भोजन भेटल रहए । तकर बाद खोआसन दूधमे बनल चाह ,ओहो बड़का गिलासमे । पीबि कए मोन आनन्द भए गेल । भरि दूपहरिआ ओहिठाम गुरुवाणी सुनैत रहलहुँ । कतेक आनन्दमे रही से नहि कहि सकैत छी। भोजन केलाक बाद गुरुद्वाराक द्वारिक बाहर विश्राम करैत रही कि धोती,कुर्ता पहिरने ,ठोप केने अधबएसू पंडितजी भेटलाह । ओ बेर-बेर हमरा दिस ताकथि,किछु बाजथि नहि । मुदा बड़ीकाल धरि लगेपासमे घुमैत रहलाह । फेर हमही हुनका पुछलिअनि- -अहाँक घर कतए भेल? -मधुबनी जिलामे । -हमहूँ ओमहरके छी। -से तँ बगएसँ बुझा रहल अछि । तेँ हम ओते कालसँ एहीठाम घुरिआ रहल छी । -हमरो लागए जे अहाँ अपने लोक छी । -एहिठाम की कए रहल छी? -किछु नहि? गामसँ अएला तीनदिन भए गेल । तहिआसँ बौआ रहल छी । की करी किछु बुझा नहि रहल अछि। -अहाँ हमरा संगे चलू। हम बिना किछु सोचने हुनका संगे बिदा भए गेलहुँ । ओ संस्कृत संस्थान,दिल्लीमे आचार्य छलाह। हुनका संस्थानक परिसरेमे डेरा भेटल रहनि। हम दुनूगोटे ओतए पहुँचलहुँ । डेरापर पहुँचि हमरा तुरंत एक गिलास आमक सरबत पिओलथि । फेर अपनेसँ बना कए चाह पिऔलथि । हमसभ हुनकर डेराक ओसारापर राखल खाटपर बैसि गेलहुँ । ओ बड़ीकाल धरि गप्प-सप्प करैत रहि गेलाह । ओहीक्रममे पुछैत छथि- -अहाँ दिल्ली की करए अएलहुँ? -कोनो नौकरी भेटि जाइत तँ निचैन होइतहुँ । -कतेक पढ़ल छी? -उत्तरमध्यमा केने छी? -अहाँ किएक ने आगूक पढ़ाइ एहिठामसँ कए लैत छी? एतए रहबाक जोगार भए जाएत । छात्रावासमे निःशुल्क सभटा ओरिआन भए जाएत । -हमरा तँ काज चाही । गामपर हालति बहुत खराप अछि । ओ हमर बात सुनि कए गुम पड़ि गेलाह । फेर कहैत छथि- -अच्छा आइ आराम करू । देखैत छिऐक की कएल जा सकैत अछि। हम राति भरि ओतहि रहि गेलहुँ । भोरे हुनके संगे संस्थानमे सौंसे घुमलहुँ । बहुत नीक लागल । कैकटा विद्यार्थीसभकेँ आपसमे गप्प-सप्प करैत देखलिऐक । ओकरासभकेँ पढ़ैत-लिखैत देखि हमरो उत्सुकता भेल । -किएक ने आगू पढ़ाइ करी? मुदा हमर जोगार होएत कोना? हम अपन मोनक बात हुनका कहलिअनि । ओ कहैत छथि- -अहाँ एहिसभक चिंता नहि करू । हम आइ प्राचार्यसँ गप करबनि। हमरा लगैत अछि जे ओ सभटा जोगार कए देताह । हुनकर बात सही भेल । हमरा नामांकन ओहिठाम भए गेल । रहबाक,खेबा-पीबाक ओरिआन सेहो भए गेल । हम सालक-साल ओहिठाम पढ़ैत रहलहुँ । हमर परीक्षा परिणाम नीक सँ नीक होइत गेल। कालक्रमे हम कैक विषयमे पारंगत भए गेलहुँ । पढ़ाइ समाप्त होइतहि हमरा दिल्ली सरकारक इसकूलमे शिक्षकक नौकरी भेटि गेल। एहि तरहेँ किछुए सालमे हमर जीवन पटरीपर आबि गेल । सरकारी नौकरी भेल ,सरकारी डेरा सेहो भेटि गेल। कुलमिला कए हम दिल्लीमे आरामसँ रहए लगलहुँ ।

2

पंडितजीकेँ एकमात्र संतान हुनकर पुत्री रमा छलखिन । ओ वनस्थली विद्यापीठमे पढ़ैत छलखिन । छुट्टीमे अपन पिताक डेरापर अबैत रहैत छलखिन । समय-समय हमरो हुनकासँ भेंट होइत रहल । जेहने स्वभाव नीक तेहने देखबामे पवित्र छलीह ओ । शिक्षा प्राप्त केलाक बाद ओ दिल्लीएमे सरकारी नौकरी करैत छलीह। हम ई बात बहुत बादमे बूझलिऐक जे हुनकर पूरा परिवारकेँ हम पसिंद रहिअनि । ओ सभ चाहथि जे हमर बिआह रमासँ भए जाए । मुदा ताहि हेतु ककरासँ गप कएल जाए,केना की कएल जाए से नहि बुझानि। सोझे हमरासँ किछु कहथि नहि । आखिर एकदिन पंडितजी दुनू बेकती हमर डेरापर पहुँचि गेलाह । हम थोड़बे काल पहिने इसकूलसँ लौटल रही । ओ सभ अपन मोनक बात कहलनि । हम कहलिअनि- -सही बात इएह थिक जे हमरो रमा बहुत पसिंद छथि । मुदा हमर माता-पिताक सहमति लेब तँ जरूरी अछि । ताहि हेतु अपने लोकनि प्रयास करू । हमरा दिससँ कोनो दिक्कति नहि होएत। तकरबाद ओ सभ हमर गाम चलि गेलाह । हमर माता-पिताक सहमतिसँ हमर बिआह रमासँ भए गेल । एहि तरहेँ दिल्लीएमे हमर गृहस्थी नीकसँ बसि गेल । बिआहक बहुत दिनक बाद धरि हमरा लोकनिकेँ धिआ-पुता नहि भेल । शुरुमे तँ किछुदिन हमसभ तरह-तरहक व्योंत कए अपनहि एकरा टारैत रहलहुँ । बादमे जखन इच्छा भेल जे बच्चा होअए तँ कैकसाल धरि किछु नहि भेल । कतेक कबुला-पाती भेल,पूजा-पाठ भेल। आखिर हमर पहिल संतान मुरलीक जन्म भेलनि। हमर सभक प्रसन्नताक अंत नहि छल । हमरा अखनहु मोन पड़ि रहल अछि जे छठिहारमे हमर सासु-ससुर कतेक उत्साहित रहथि । कतेकोगोटेकेँ नोत देल गेल रहए । हिजरासभ आबि कए की ताल केने रहए । जा धरि ओ सभ मुँहमांगा इनाम नहि लेलक ता धरि अड़ल रहल । एहि तरहेँ मुरलीक जन्मसँ हमर संपूर्ण परिवारमे आनंदक वातावरण पसरि गेल छल । साल भरिक बाद हमर दोसर संतान श्यामक जन्म भेल रहनि । तखनहु एहिना उत्सव मनाओल गेल रहए । श्यामक जन्मक पाँच सालक बाद जा कए शालिनीक जन्म भेल रहनि । हम तँ दू संतानक बाद परिवार नियोजनक समर्थनमे रही । मुदा रमाक इच्छा रहनि जे एकटा बेटी तँ हेबेक चाही। बेटी बिना घर सुन्न रहैत अछि । आखिर सेहो इच्छा पूर्ण भेल । हमसभ बहुत प्रसन्न रही । नित्य उठि-सुठि ईश्वरकेँ धन्यवाद दिअनि । तीनूबच्चाक पालन-पोषणमे हमरसभक समय बहुत व्यस्ततामे बितैत रहल । दुनूगोटेक नौकरी से करबाक रहए। बीच-बीचमे कैकबेर रमा नौकरी छोड़बाक विचारमे रहथि । मुदा जेना तेना समय कटैत रहल । बच्चासभक नीक शिक्षा हेतु तँ पर्याप्त टाका चाही । आब ओ पढ़ाइ तँ छलैक ने जे लोक मगनीएमे आइए, बीए, कए लिअए । आब तँ इसकूल पढ़ाइ कालेजोसँ महग भए गेल छैक । पब्लिक इसकूल चाहबे करी । सभ सुविधाक अछैत केओ अपन नेनाकेँ सरकारी इसकूलमे पढ़बए नहि चाहैत अछि । सएहसभ सोचि कए रमा नौकरी करैत रहि गेलीह । कालक्रमे तीनूबच्चा उच्च शिक्षा प्राप्त केलनि । मुरली आ श्याम प्रतिष्ठित कालेज सँ ईंजिनीयर बनि नौकरी हेतु अमेरिका चलि गेलाह । हम हुनकासभकेँ बहुत बुझेलिअनि जे अपनो देशमे आब नौकरीक कोनो कमी नहि अछि । जकर जेहन योग्यता छैक तकरा तेहन काज भेटि जाइत छैक । मुदा से के बुझैत अछि? ओ सभ दरमाहाक पैकेज आ सुविधा गनैत रहलाह। देश छोड़ि देलाह आ गेलाह से गेले रहि गेलाह । अपन भाषा,संस्कृति समाज सभकिछु दाओपर लगा देलाह। हमसभ की करितहुँ? दुनू बेकती हबाइ अड्डा धरि हुनकासभकेँ अरिआति देलिअनि । रमा रहि-रहि कए कानए लागथि । हम बहुत बुझबिअनि । मुदा संतानक हेतु माताक मोहक की कहल जाए? अपन भरि ओ बहुत सम्हारथि। तथापि आँखिसँ नोर टपकिते रहनि । रहि गेलहुँ हम दुनूगोटे आ शालिनी। ओहो चार्टर्ड एकाउन्टेन्ट भए गेलीह । हुनको विदेशे जेबाक इच्छा रहनि । मुदा माए अड़ि गेलखीन । -कम सँ कम तूँ तँ रहि जाह? हमरासभकेँ के देखत? शालिनी हमरासभक बात मानि गेलीह। हुनका मुम्बईमे नौकरी लागि गेलनि । ओतहि अपन पसिंदसँ बिआहो केलनि । एहि तरहेँ हमर परिवार एक हिसाबे पूर्ण सुभ्यस्त भए गेल । कोनो चीजक कोनो कमी नहि। जकरे देखू तकरे टाका बरसि रहल छलनि। सभकेँ अपन-अपन आलीशान मकान छलनि । नौकर-चाकर छलनि । रहि गेलहुँ हम दुनू बेकती । दिल्लीक तीन बेडरूमक फ्लैटक एकांतमे सड़ि रहल छलहुँ।

3

हमरा मोन पड़ैत अछि जे मुरलीक जन्मक समय रमा कोना मरिते-मरिते बचि गेल रहथि । एक हिसाबे ओ मरिए गेल रहथि । डाक्टर,सिस्टरसभ निराश भए गेल छल । ओकरासभक कहब रहैक जे बच्चा आ जच्चामे सँ केओ एकहिटा बाँचि सकत । हम शल्यचिकित्सा कक्षसँ बाहर हाकरोस करैत रही । हमरा लगमे टाका से बहुत कम छल । एकाएक डाक्टर कहलकैक जे तुरंत शल्यक्रिया करए पड़तनि । ताहि लेल आवश्यक ओरिआन करबाक छलैक । सिस्टर दबाइक सूची पकड़ा देलक । संगहि शल्यक्रियाक एक हजार शुल्क से जमा करबाक हेतु कहलक । आब की करी? एतेक टाका कतएसँ जोगार कएल जाइत? ओहि समयमे ओ डाक्टरे भगवान बनि कए ठाढ़ भए गेल छल । अपन जेबीसँ सभटा खर्चा कए देलक । सभटा काज रोकि कए रमाक शल्यक्रिया केलक । हम बच्चाक कानब सुनि कए कुदि गेल रही । शल्यचिकित्सा कक्षसँ दौड़लि सिस्टर आएल रहए- -अहाँकेँ बेटा भेलए । -रमाक की हाल छनि? -ओ एकदम ठीक छथि। -आ बच्चा? -ओहो ठीक अछि। जे हम सुनि रहल छलहुँ ताहिपर विश्वासे नहि भए रहल छल । जच्चा-बच्चा दुनूगोटे सकुशल छल । बाहरे डाक्टर! कमाल कए देलक। हम बहुत प्रसन्न रही । बेर-बेर ईश्वरकेँ धन्यवाद देलहुँ । दोस्तसभकेँ फोन कए सभटा सूचना देलहुँ। थोड़बे कालमे हमर दुनिआ बदलि गेल छल । हम एकटा पुत्रक पिता बनि गेल छलहुँ । हमर पत्नी सेहो बाँचि गेल छलीह । हमरा लेल एहिसँ नीक समाचार की भए सकैत छल । साल भरिक बादे हमर दोसर पुत्र श्यामक जन्म भेलनि । ओकर जन्म प्रकरण तँ आओर कष्टकारी छल । दू मास पहिनेसँ रमाकेँ अस्पतालमे भर्ती होमए पड़ल रहनि । डाक्टरसभक कहब जे रमाक पानिक कमी अछि जाहिसँ गर्भस्त शिशुकेँ बचब बहुत मोसकिल अछि । देहमे आक्सीजन कम भए जाइत छलनि । रक्तमे चीनी बढ़ि गेल छलनि । रक्तचापसे बढ़ल रहैत छलनि। कखनहु गर्भपात भए सकैत छलनि। ताहिसँ बचबाक हेतु रमाकेँ पूर्णविश्राममे राखल गेलनि। आब की कएल जाए? किछु फुरेबे नहि करए? कैक बेर डाक्टर तमसाइतो रहए-एतेक जल्दी दोसर संतानक कोन जरूरी छलैक। एहि स्थितिसँ बचबाक छल । मुदा आब कएले की जा सकैत छल?जे आगू भए सकैत छल से कएल जाइत । दूमास धरि दिन-राति अस्पतालक चक्कर लागल रहल । कहिओ किछु,कहिओ किछु । खर्चाक तँ चर्चे नहि होअए। जानक आगू टाकाक कोन महत्व छैक? सएह सोचि संतोष करी । जान बाँचि जेतनि तँ टाका तँ फेर कमा लेब ।आखिर बच्चाक जन्मक समय आएल । भोरेसँ डाक्टरसभ शल्यचिकित्सा कक्षमे लागि गेल छल । हम बाहर ठाढ़ रही । मोन धुक-धुक करैत रहए । आखिर बच्चाक कानबाक स्वर सुनाएल। रमा सेहो बाँचि गेल रहथि । एहिसँ नीक की भए सकैत छल । दू मास अस्पतालक खर्चाक जोगार करबामे हमरा सभगति भए गेल रहए । ऊपरसँ शल्यक्रियाक खर्च सेहो देबाक रहैक । एहि बेर ओ डाक्टर नहि छल। मुदा हमहूँ सतर्क रही। किछु टाकाक जेना-तेना जोगार केने रही । किछु कर्जो करए पड़ल छल। जेना-तेना काज निपटि गेल ।

4

पहिल संतानक जन्मक बाद जे रमा मातृत्व अवकाश लेलीह से दोसर संतानक जन्मक साल भरि बादो धरि चलैत रहल । एतेक दीर्घ छुट्टी दरमाहा संगे संभव नहि छल । परिणामतः सालभरिसँ बेसीए ओ बिना दरमाहाक अवकाशपर रहलीह । तकर बादो दुबिधामे रहथि जे की कएल जाए? कारण दुनू बच्चा बहुत छोट छल । हिनकेमे दिन भरि लटकल रहैत छल । ओकरासभकेँ घरमे छोड़ि कए काजपर जाएब संभव नहि बुझाइत छलनि? नौकरी छोड़िओ देब ठीक नहि लागनि। तखन की करथि? बीचक रस्ता निकालल गेल । थोड़े दिन हम छुट्टी कए ली तँ किछुदिन रमा छुट्टी लए लेथि । संयोग एहन भेलैक जे रमाकेँ दूसालक अध्ययन अवकाश भेट गेलनि। एहि तरहेँ कहुना कए बच्चासभक पालन-पोषण होइत रहल । भोरेसँ ओसभ हमरा दुनूगोटेकेँ व्यस्त कए दैत छल । छोट-छोट बातपर दुनूगोटे लड़ैत रहैत छल । एके खेलौना दुनूकेँ चाही। दुनूगोटे हमरे कोरामे रहत। हम काजपर जहाँ बिदा होइतहुँ कि दुनू भोकारि पारि कए कानए लागैत । जेना-तेनाक ओकरासभकेँ मनाओल जाइत । कखनहु दुनू बच्चामे बहुत मेल रहैत तँ कखनहु तेहन ने झगड़ा पसरि जाइत जे सम्हारब मोसकिल भए जाइत । आर जे होइ मुदा हमरा लोकनिक समय बहुत नीकसँ कटि जाए। बहुत मोन लागए । एक हिसाबे हमसभ स्वर्गक सुख पाबि रहल छलहुँ। बच्चासभमे भविष्यक स्वप्न देखैत रहैत छलहुँ । दूटा पुत्र रत्न पाबि कए हम धन्य रही । ईश्वरकेँ नित्य गोहराबी,हुनका हृदयसँ कृतज्ञता व्यक्त करी । दुनू बच्चा आ रमाक स्वास्थ्य ठीक रहनि,ओ सभ सुखी रहथि सएह हमर जीवनक लक्ष्य छल । ताहि हेतु दिन-राति परिश्रम करी। इसकूलक समयक बाद ट्यूशन सेहो करी । ताहि चक्करमे कतए-कतए ने चलि जाइ । दिल्लीक चांदनी चौकसँ गुड़गाँव धरि धापि दी । भोरे घरसँ बिदा होइ आ रातिमे कहिओ दस बजे,कहिओ एगारह बजे वापस आबी - थाकल ठेहिआएल । मुदा एके बेर बच्चासभक मुँह देखि ली ,रमाकेँ हँसैत देखि लिअनि तँ सभ थाकनि दूर भए जाए । कहबी छैक जे उम्मीदपर दुनिआ चलैत छैक । यदि से नहि रहैक तँ केओ जीबे नहि करत । दुनू बच्चा आ रमाकेँ देखि हमरा अतिशय उत्साह होइत छल आ हम भोरे उठि-सुठि एक बेर फेर संघर्षक हेतु कृतसंकल्प भए जाइत छलहुँ । दूटा संतानक बाद हम सोचने रही जे आब बस करी । परिवार नियोजनक जोगारमे रही । मुदा जखन कखनहु बात होइ रमा टरका देथि । हमरा बुझेबे नहि करए जे बात की अछि? किऐक ने ओ हमर समर्थन करैत छथि । एकदिन हम स्पष्टे पुछलिअनि- -हमरासभकेँ आब दूटा सोनसन संतान भइए गेल । ईश्वरक ई महान कृपा भेल । आब एकरसभक नीकसँ पालन-पोषण होइक तकर जोगार हेबाक चाही । आगू आब परिवार नहि बढ़ए तखनहि से संभव होएत । परिवारक आकार यदि सीमित नहि रहत तखन ओकरासभक नीक व्यवस्था कोना होएत? -से तँ ठीके। मुदा... -मुदा की? सोचैत रहिऐक जे एकटा बेटी नहि भेल। -बेटी जन्म लेत तँ ओकर बिआह-दान कतएसँ करबैक? -सभ भए जेतैक। बेटी लक्ष्मी होइत छैक । अपन जोगार कइए कए अबैत छैक। कतबो बुझेबाक प्रयास केलिअनि ओ नहि मानलथि । आखिर पाँचसालक बाद एकबेर फेर रमाकेँ संतान होनहारी भेलनि । हम पुछलिअनि- -यदि फेर बेटे भए गेल तखन। -एहि बेर लक्ष्मी आएत। -से केना जनैत छिऐक? -देखैत रहिऔक । हुनकर बात सही भेलनि । एहिबेर हमरासभक बेटीक जन्म भेलनि। ओहो बिना कोनो परेसानीकेँ । अस्पताल पहुँचलाक एकघंटाक भीतरे सामान्यरूपसँ बच्चाक जन्म भए गेलैक। एकदम स्वस्थ बच्चा ,बेस भरिगर । डाक्टरोसभ छगुन्तामे रहए । रमा तँ ओहीदिन साँझमे घर वापस आबि गेल रहथि । एहि तरहेँ हमसभ तीनटा संतानक माता-पिता भए गेलहुँ । एहि बातसँ हमसभ बहुत प्रसन्न रही । रमाक प्रसन्नताक तँ अंते नहि छल । हमर बेटी शालिनीक जन्म भेलनि तँ पहिने कनी-मनी चिंता भेल। आखिर बेटी अछि,नीकठाम बिआह केना हेतैक? कहि नहि केहन घर-वर भेटतैक? जेना बेटीक भाग्यमे बिआहक अतिरिक्त किछु भइए नहि सकैत छल। मुदा ओकर जन्मक बादेसँ हमरा दुनूगोटेक भाग्य बदलए लागल । दुनूगोटेकेँ नौकरीमे प्रोन्नति भए गेल। दरमाहामे पर्याप्त इजाफा भेल । हम आ रमा ई सोचिक चकित रहैत छलहुँ जे केना शालिनी अपन ओरिआन स्वतः केने चल जा रहल छलि। आब लागए जेना हम अनेरे बेटीक जन्मसँ डराइत छलहुँ । शालिनीक जन्मक बाद हमरालोकनिक आर्थिक स्थितिमे निरंतर विकास होइत रहल । बच्चासभ नाम नीक-नीक इसकूलसभमे लिखओलहुँ । अपना भरि पूरा प्रयास रहैत छल जे ओकरासभकेँ कोनो प्रकारक दिक्कति नहि होइक । ओहोसभ अपन-अपन इसकूलमे नीक करैत रहल । मुरली आ श्याम बहुत नीक अंकसँ मैट्रिकक परीक्षा सफल भेल । तकर बाद ओकरसभक नाम कलेजमे लिखाओल गेल । मुरली आ श्याम पहिले प्रयासमे इन्जीनियरिंगक प्रवेश परीक्षामे सफल रहल । ओकरसभक इन्जीनियरिंगक पढ़ाइमे हमरा कोनो दिक्कति नहि भेल । दुनूगोटेकेँ पर्याप्त छात्रवृत्ति भेटि जाइत छलैक । ओ सभ इन्जीनियरिंग कालेज सँ निकलल कि शालिनी कालेजमे नाम लिखओलक । ओहो अपन लाइनमे माहिर निकलल । समय कोना बीति गेल से पता नहि लागल । बच्चासभ अपन-अपन पैरपर ठाढ़ भए गेल । हमसभ अपनाकेँ बहुत भाग्यवान बूझी जे हमर संतानसभ एतेक सुयोग्य निकलल , जीवनमे नीकसँ स्थापित भए गेल । मुदा ई उत्साह बहुत दिन धरि बनल नहि रहि सकल। मुरली आ श्यामकेँ परिसरेसँ विदशमे उच्च पैकेजबाला नौकरी भेटि गेलैक। ओ सभ अपन-अपन गंतव्यपर सहर्ष चलि गेल । कनीको ई नहि सोचलक जे हमसभ असगरमे कोना जिअब,कोना समय बिताएब,बेर-कुबेर के संग देत? हमहूँसभ की करितहुँ? बच्चासभक प्रसन्नतामे अपन चिंतासभ बिसरि गेलहुँ । जाबे शालिनी पढ़ैत छलि,ताबे कम सँ कम ओ समय-समयपर अबैत जाइत रहलि । हमहूँसभ ओकर कालेज अबैत-जाइत रहैत छलहुँ । मुदा जखन ओकरो नौकरी लागि गेलैक आ तकर बाद ओकर प्रेम बिआहक प्रसंग प्रकाशमे आएल तखन तँ हमसभ किंकर्तव्यविमूढ़ भए गेलहुँ। मुदा कोनो विकल्प नहि देखि हमसभ ओकर इच्छाक सम्माने करब उचित बुझलहुँ । अनेरे फसाद केलोसँ किछु होमएबला नहि छल । ओसभ निर्णय कए लेने रहथि । हमरासभकेँ तँ मात्र तकर सम्मान करबाक हेतु सूचना देल गेल छल । हमसभ सएक केबो केलहुँ । हमसभ तँ शालिनीक बात मानि लेबाक हेतु तैयार भए गेलहुँ । मुदा वरक माता-पिता अड़ि गेल । आब की होएत? किछु फुरेबे नहि करए। एमहर ओ दुनूगोटे अपन निश्चयपर अडिग छल । मुदा इच्छा रहैक जे दुनूपक्ष सेहो ओकरसभक संगे ठाढ़ होअए आ बिआहमे सामिल होअए । ओकरसभ बिआह बहुतदिन धरि एही कारणसँ लटकल रहि गेल छल ।

5

शालिनीक प्रेमी ओकर सहपाठी रहए । ओ मूलतः केरलक निबासी छल । ओकर पिता क्रिश्चन आ माए ब्राह्मण छलैक । ओना व्यवहारमे कोनो कमी नहि रहैक। पढ़ल-लिखल परिवार रहैक । आब ओ सभ मुम्बईएमे बसि गेल छल । ओतहु नीक आर्थिक स्थिति रहैक । अपन तीनकोठरीक फ्लैट रहैक । अखनहु धरि केरलमे अपन पैतृक गाममे संपत्ति रहबे करैक । मुदा आबाजाही कम भए गेलाक कारणसँ दिआद-वादसभ ओहिपर कुदृष्टि देने रहैक । ओ सभ चाहैक जे औने-पौने दाममे सभकिछु हरपि ली । गामक संपत्ति बचेबाक दृष्टिसँ ओ सभ अपन पुत्रक बिआह लगेपासमे ठीक केने रहए । मुदा बेटा विद्रोह कए देलकैक । ओ तँ पहिनहिसँ शालिनीक संगे बहुत आगू अड़ल रहए । दुनूगोटे चार्टड एकाउन्टेन्ट रहए । संगे-संगे पढ़ैत काल आपसमे प्रेम भए गेल रहैक। शालिनी सेहो ओकरा संगे बिआह करबाक हेतु अड़ि गेल रहए । -बरहुँ शंभु ने तँ रहहुँ कुमारी। आखिर ओहोसभ मानि गेलैक । आखिर ओकर विजय भेलैक। हमसभ हारि गेलहुँ। शालिनीक बिआह ओकर प्रेमीसँ दिल्लीएमे संपन्न भेल । ओकरसभक आपसी प्रेम असली छलैक जे समयक संग आर मजगूत होइत गेल। ने शालिनी क्रिश्चन बनल ने ओकर प्रेमी हिन्दू। जाति,धर्मसँ ऊपर छलैक ओकर प्रेम। दुनूगोटे मंदिर जाए,आ चर्चो जाए। दुनूगोटे सभ पावनि मनाबए। शालिनीक पतिकेँ कोनो परेसानी होइतैक तँ तकर निवारण हेतु ग्रह शांतिक हेतु ओ सभ ज्योतिषीजी लग जाइत । कहबाक माने जे धर्म आ आराधना ओकरासभक आत्माकेँ आर विकसित कए देने रहैक। ओसभ एकटा बढ़िआँ मनुक्ख बनि गेल रहए। एहि सभक अछैत शालिनी जखन कखनहु हमरा ओहिठाम अबैत तँ ओकर पति संगे आबएसँ बचैक । एकरा एक प्रकारक संकोच कहि सकैत छिऐक। मुदा ओ शालिनीकेँ कहिओ कोनो प्रकारक प्रतिबंधमे नहि रखलक। प्रेमक एकटा ज्वलंत उदाहारण छल शालिनी आ ओकर पति । शालिनीक बिआहक बाद हमरा बहुत उसास भेल । मुदा मनुक्खक स्वभाव होइत छैक जे ओ सदिखन किछु-ने-किछु लफड़ा बनओने रहैत अछि । तेँ बच्चासभक हेतु अनावश्यक चिंता हमसभ करैत रहि गेलहुँ । मोहवश अपनाकेँ झंझटिसभमे ओझरओने रहलहुँ । इएह हमरसभक दुखक कारण भए गेल । नहि तँ चिड़ै चुन-मुन जकाँ जखने ओ सभ फुर्र भेल,हमहूँसभ निचैन भए सकैत छलहुँ। अपना हिसाबे जीबि सकैत छलहुँ। मुदा से भेल नहि । ओ सभ ने हमरासभ लग आबि सकल ने हमसभ ओकरसभक मोहसँ अपना-आपकेँ मुक्त कए सकलहुँ । परिणामतः हमरसभक मानसिक दुख बढ़िते गेल । शालिनीक बिआह तँ भए गेल । मुदा हमर दुनू विदेशबासी पुत्र अखनहु बिआहक नामसँ कन्नी काटैत रहैत छल । ओ सभ लगमे रहबो नहि करए जे हम ओकरासभकेँ किछु कहितिऐक अथवा ओएहसभ किछु कहितए। कहिओ काल यदि फोन-फान भेबो कएल तँ आर-आर गप्प होइत, मुदा बिआहक चर्च ने ओसभ करए ने हमसभ से कए पाबी। हमहूँसभ नहि चाही जे बिआहक चर्च कए अनेरे माहौलकेँ खराप कएल जाए । थोड़बे कालमे फोन कटि जाएत। तकर बाद फेर ओ कतए हमसभ कतए? बीचमे हजारों माइलक दूरी आबि जाइत । ई तँ फोने अछि जे गप्पो भए जाइत अछि । फोनोक आबाजाही कालक्रमे क्रमश: कम होइत गेल । मुरली आ श्याम अपन-अपन दुनिआमे रमि गेल । हमसभ जीबि तँ, मरी तँ, ओकरासभक लेल धनसन । रहि-रहि कए कहितए जे विदेशमे एहि तरहक लफड़ा कोनो माता-पिता नहि करैत अछि । बच्चा जखने सिआन भेल,ओ पूर्णतः स्वतंत्र भए जाइत अछि । माता-पिताक कर्तव्यक इतिश्री भए जाइत अछि । अपना देशक संस्कृति आ सामाजिक परिस्थिति एहि बातकेँ स्वीकार नहि करैत अछि । जीवन पर्यन्त परिवारमे माता-पिताक संतानसँ भावुक संबंध बनल रहैत अछि । अखनहु संतानसँ ई अपेक्षा कएल जाइत अछि जे ओ वृद्ध माता-पिताक ध्यान राखत । एहिलेल कानूनो बनल अछि । मुदा कानून बनिए गेलासँ की होएत? अपने संतानक खिलाफ कोट-कचहरी केओ नहि जाए चाहैत अछि । बहुत अपवादस्वरुप मामिलासभ यदि होइतो अछि तँ ओ प्रभावकारी नहि भए पबैत अछि । कारण कानून सभकिछु तँ दए सकैत अछि मुदा सिनेह कतएसँ देत? सम्मानक भाव कानूनसँ नहिए भए सकैत अछि । तेँ वयोवृद्ध माता-पिता सभकिछु सहिओ कए संतानक खिलाफ कानूनक मदति नहि लेबए चाहैत छथि। शुरुमे मुरली आ श्याम अमेरिकेमे रहए । बादमे सुनलिऐक जे मुरली लंदन चलि गेल आ ओहीठाम एकटा स्थानीय महिला सहकर्मीसँ प्रेम भए गेल छैक। यद्यपि ओ सभ संगे रहि रहल अछि मुदा बिआह नहि केने अछि। करबो करत कि नहि तकर कोनो ठेकान नहि अछि । ओमहर एहि तरहक प्रथा आम बात भए गेल छैक । के बिआहक झञ्झटिमे पड़ए । भोग-विलासमे जीवन बिताएबे जखन मूल उद्द्येश्य भए जेतैक तखन आर की सोचल जा सकैत अछि ? काल्हि के देखलक अछि? एहन लोकसँ की उम्मीद कएल जा सकैत अछि? जे अपनहु भविष्यक बारेमे नहि सोचि पाबि रहल अछि से हमरासभक की रक्षा करत? हम ई बात बुझिएक आ रमाकेँ सेहो बुझेबाक प्रयास करिअनि । कहिअनि- -आब ओकरासभकेँ बिसरि जाउ । बिसरि जाउ जे ओ अपनेसभक बले एतेक पैघ भेल । एतेक पढ़लक-लिखलक । ओ तँ अपनसभक कर्तव्य छल, से हमसभ केलहुँ । मुदा तकर प्रतिदान भेटत, ओसभ हमरालोकनिक प्रतिए अपन किछु कर्तव्योक बोध राखत से संभव नहि अछि । युग बहुत बदलि गेल अछि । तेँ हमहूँसभ ओहि बातकेँ बुझिऐक ताहीमे समाधान संभव अछि। से सभ यदि कहितिअनि तँ रमा तमसा जइतथि- अहाँकेँ तँ सदिखन उनटे सोचाइत रहैत अछि । अपन रक्तचाप जाँच करबाउ। खैर !हम की करतहुँ? सुनि ली हुनकर बात । मुदा चिंता तँ होइते रहल। मुरली तँ जे से । मुदा श्यामक तँ किछु पते नहि लागए । ओ कोन हालतिमे अछि? की ओकर योजना अछि? पारिवारिक स्थिति की अछि? कोनो बातक जानकारी ओ हमरालोकनिकेँ नहि दिअए। यदि अपना दिससँ पुछिओ दितिऐक तँ कहितए- -हमर निजी मामिलामे अहाँसभ अनेरे टांग नहि अड़ाबी। बस बात खतम । हम कहिअनि रमाकेँ-आब बुझलिऐक ने। कहैत छलहुँ जे ओकरसभक चक्करमे नहि पड़ू । अपन इज्जति बचा कए राखू । मुदा नहि,तखन लिअ। भोगू कष्ट ।

-रबीन्द्र नारायण मिश्र, पिताक नाम: स्वर्गीय सूर्य नारायण मिश्र, माताक नाम: स्वर्गीया दयाकाशी देवी, बएस: ६९ वर्ष, पैतृक ग्राम: अड़ेर डीह, मातृक: सिन्घिआ ड्योढ़ी, वृति: भारत सरकारक उप सचिव (सेवानिवृत्त), स्पेशल मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट, दिल्ली(सेवानिवृत्त), शिक्षा: चन्द्रधारी मिथिला महाविद्यालयसँ बी.एस-सी. भौतिक विज्ञानमे प्रतिष्ठा : दिल्ली विश्वविद्यालयसँ विधि स्नातक, प्रकाशित कृति: मैथिलीमे: प्रकाशन वर्षः२०१७ १.भोरसँ साँझ धरि (आत्म कथा),२. प्रसंगवश (निवंध), ३.स्वर्ग एतहि अछि (यात्रा प्रसंग); प्रकाशन वर्षः२०१८ ४. फसाद (कथा संग्रह) ५. नमस्तस्यै (उपन्यास) ६. विविध प्रसंग (निवंध) ७.महराज(उपन्यास) ८.लजकोटर(उपन्यास); प्रकाशन वर्षः२०१९ ९.सीमाक ओहि पार(उपन्यास)१०.समाधान(निवंध संग्रह) ११.मातृभूमि(उपन्यास) १२.स्वप्नलोक(उपन्यास); प्रकाशन वर्षः२०२० १३.शंखनाद(उपन्यास) १४.इएह थिक जीवन(संस्मरण)१५.ढहैत देबाल(उपन्यास); प्रकाशन वर्षः२०२१ १६.पाथेय(संस्मरण) १७.हम आबि रहल छी(उपन्यास) १८.प्रलयक परात(उपन्यास); प्रकाशन वर्षः२०२२ १९.बीति गेल समय(उपन्यास) २०.प्रतिबिम्ब(उपन्यास) २१.बदलि रहल अछि सभकिछु(उपन्यास) २२.राष्ट्र मंदिर(उपन्यास) २३.संयोग(कथा संग्रह) २४.नाचि रहल छलि वसुधा(उपन्यास) २५.दीप जरैत रहए (उपन्यास)। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.८.किशन कारीगर-पुरूस्कारी गुर्गा पुरूस्कार बँटा डकैत (हास्य कटाक्ष) किशन कारीगर पुरूस्कारी गुर्गा पुरूस्कार बँटा डकैत (हास्य कटाक्ष)

बाबा बड़बड़ाइत रहै घिना गेल मिथिला मैथिली. इ मैथिल डकैत आ गुर्गा सब पुरूस्कारी खेल मे त चंबलो घाटी डकैत के कान काटि लेत की? एकरा सबके कोनो लाज धाख छै आ कोन झड़कलहा के पुरूस्कारी धूर्तै के लाज छै? किताब बिकाइ छै नैहे लोक पढ़लकै नैहे आ वरिष्ठ साहित्यकार हेबाक दाबिए चूर रहैए ई डकैत सब. मनमाना पर उतारू यै जे हमरा के की कए लेत? वास्तव मे मिथिला समाजक लोक सब सेहो चोरनुकबा यै त अई डकैत सबके मनमाना के रोकत? के मंगतै जवाब, केकरा माने मतलब छै?

हम बजली हौ बाबा भिंसरे भिंसरे की हो गेलहो? घर मे डकैती हो गेलौ? की कोइ भांग खुआए देलकहो जे बाबा तोंई एना बड़बड़ाए रहलौ? पुरस्कार त गेल जाइ हइ ओकरो कहूँ डकैति होलैइए? हमर गप सुन बाबा हां हां के हँसे लगले आ बोललकै हौ कारीगर तोरा सबटा यथार्थ बुझल छह आ यथार्थवादी लेखन माध्यमे लोक के पुरूस्कारी धूर्तै के देखार चिन्हाक कए दै छहक? आ अखैन अनठिया के हमरे स पुछै छह आ हमरे स सुनै चाहै छह? हम बोलली यौ बाबा हम कोनो चोर डकैत के गिरोह मे रहै छी की? हमरा पुरूस्कारी चोरी डकैती बारे मे कुछो ने बुझल है क? बलू अहीं साफ साफ कहू जे पुरूस्कारी डकैती की हइ?

बाबा बोललकै देखै नै छहक जे मैथिली साहित्यकार सब चोर डकैत जेंका अपन गिरोह बनेने अछि. जेहेन गिरोह तेहेन पुरूस्कार बँटा डकैत आ तेहने पुरूस्कारी गुर्गा सब. ई सब तेना हो हो करतह जे एकरे सब दुआरे मिथिला मैथिली बांचल होउ? आ एहि धूर्तै मे इ सब मिथिला मैथिली के अपन बपौती बुझि कब्जा जमौने रहल. कतेक नाम गनबिअह? साहित्य अकादमी, मैथिली भोजपुरी अकादमी, मिथिला मैथिली समिति, लेखक संघ, परिषद कतेको एहेन गिरोह आ तेक्कर गुर्गा सब मिली मैथिली पुरस्कारक डकैति मे लागल यै की? यथार्थ कहबहक त डकैत आ गुर्गा सब बतकुट्टबैल क अप्पन चलकपनी कुकृत्य के झँपै के फिराक मे रहतह. मैथिली पुरस्कार मे कोनो निष्पक्ष व्यवस्था कतौ नै भेटतह? जेहेन गिरोह आ जेहेन गुर्गा तेहने पुरस्कार बँटा डकैती. अहि दुआरे त मैथिली पुरस्कार सब महत्वहीन भ गेलै आ घिना के राखि दै जाइ गेलै. यथार्थ कहक त उनटे हमरे तोरे कुंठित कहि चलकपनी करतह. उ डकैत गुर्गा सब अपने कतेक कुंठित अछि जे निष्पक्ष व्यवस्था के बात पर कपरफोरी पर उतारू भऽ जेतह की?

हम बाबा स पुछली जे पुरूस्कार देलकै आ भेटलै त अइ मे पुरूस्कारी डकैत आ गुर्गा कैसने हो गेलै? बाबा हां हां के बोलै लगलै हौ कारीगर तहूँ सबटा हमरे मुँहे अइ पुरूस्कार बँटा डकैत सबहक देखार चिन्हार करेबह त हैइए लैह सुनहअ सबटा किरदानी. एकटा गप कहअ हमर तोहर यथार्थवादी बिचार मिलै छह आ अपना सब त कोनो गिरोहो मे नै रहै छि. तइयो हम तोरा बसहा बरद पुरूस्कार द दियअ आ तूं हमरा मिथिलांचल टुडे पत्रकारित पुरूस्कार बाँटि दैए त इ पुरस्कारी डकैति भेलै की नै? चिन्हा परिचे, सर कुटमारी, हिरोहबादी होहकारी, संयोजकीय जोगारी बले मैथिली पुरूस्कार लूट मचल छै आ उनटे अनका उपदेश जे झरकल मुँह झपनै नीक त अइ डकैत सबके अपन किरदानी किए नै देखै छै. एकरो सब लेल कहबी बनतै ने पुरूस्कारी डकैत के अपकरमी मुँह उघारे नीक. पुरस्कारी डकैत सब नैह तन निष्पक्ष व्यवस्था बेर हरहड़ी बज्जर खैस परै छैन्ह की? अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.९.संतोष कुमार राय 'बटोही'- एकटा संस्मरण- काकी : गुणती देवी संतोष कुमार राय 'बटोही'

एकटा संस्मरण - काकी : गुणती देवी

काकी केँ देह कारी भऽ गेलैन्ह। काकी गोर छलीह । आँखि लग कारी पपड़ी देखा रहल छन्हि। माथा मेहेक केश उड़ि गेलैन्ह अछि। दिल्ली मे एम्स सँ इलाज भऽ रहल छन्हि। दवाई खाति-खाति काकी केँ देह मे गर्मी बढ़ि गेल छैन्ह। काकी आब नहि जीबतीह मने। उमर सैठ पार केलकैन्हए । अखन आओर दिन जीब सकैत छलीह।

विनोद केँ जश देवाक चाही जे अतेक खर्चा भेलाक बादो माय केँ जियौने छथि। यमराज सँ लड़ि रहल छथि ओ। माए माए होएत छै। काकी पढ़ल-लिखल नहि छथि। विशुद्ध निरक्षर। गारि देबा मे ओ कोनहुँ डिग्री लेने छथिन्ह। पूरा कुल-खानदान केँ गारि दके उकैट दैत छथिन्ह। पुरनका जमाना मे सासु बड गैरखर होयत छलीह। छने मे पुतौह केर सातो पुरखा के उधैस दैत छलीह। उ जमाना किछु आओर छलै, परञ्च आब से नहि होयत छै। पुतौह आब अबैते मांतर गिरथैन भ जाएत छथि। सासु-ससुर केँ कोनहुँ मोजर नहि दैत छथिन्ह। कहबी छैने -' घरवाला थानेदार तँ डर काहे का' ,इ सही फिट भ रहल छै । जमाना बदल रहल छै। आब पुतौह लग कुंजी केर झाला डांर मे लटकैत रहैत छै। आब तँ एटीएम केँ जमाना आबि गेल छै।

काकी केर आँखि सँ नोर बहि रहल छन्हि। ओसारा पर बैसल हमरा दिस ताकि कँ कानि रहल छथिन्ह।हबो डकार भ के कानि रहल छथिन्ह। सभ बेटी केँ ब्याह भ गेलैन्ह। विनोद केँ दूटा संतान छै- एकटा लडका आओर एकटा लडकी। सुमन आओर ओमप्रकाश लेल काकी केँ बड चिंता छैन्ह। खास कऽ सुमन लेल, उ छह-पाँच किछु नहि बुझैत छै। पढै मे फिसड्डी छल। ककहाड़ा तक ओकरा पढल नहि भेलै। दसवीं मे फेल भऽ कऽ ओ दिल्ली चलि गेल । ओतऽ विनोद बेकरी वाला फैक्ट्री मे सुमन केँ काज धरा देलकै। ओमप्रकाश सेहो मधुबनी ओगरने-ओगरने दिल्ली चलि गेल। इंटर पास भऽ कऽ तेल-नून केर दोकान मे काज करैत अछि।

काकी केँ पानि चढ़ैत छैन्ह। देहक आगि निकलनै जरूरी छै। आब ओ किछु बरख जीब जाएत , तँ बुझियौ विनोद केँ किछु आराम भ जेतै। छोट बहिन केर ब्याह मे किछु बेसी फिरिशान भ गेल छल विनोद, परञंच सँभैर लेलाह अपना आप केँ। बड़ खर्च पड़ि गेलैन्ह। बेटी वाला अखनो धरि कतौ भऽ कऽ नहि छथि। उन- के- दुन खर्च करू आओर भरि जिनगी बेटी वाला उलाहना सुनू। इएह मिथिला केर नीक आचार-विचार छियैय।

काकी फेर दिल्ली चैल गेलीह। ओमप्रकाश हुनका लऽकऽ दिल्ली गेल। काकी कैह गेलीह - "आब हम नहि बांचब। अहाँ सभ फेर हमर मुँह नहि देखब।इ हमर आखिर मुलाकात अछि।"

काकी केर दशा देखि कऽ हमर आँखि नोर सँ डबडबा गेल। हम अवाक भऽ गेलहुँ । सात टा संतानक माए छथि काकी। आइ हुनका लेल कियो अपन नहि। कैंसर सँ बेसी बउआ केर चिंता हुनका मारने जा रहल छैन्ह। विनोद केँ भरि मोन गरिबैत छलीह, परञ्च हरदम आब विनोद केँ खोजैत रहैत छथिन्ह। इ मायक ममता छियैय। गारि दैत अघान नहि आओर सनेहक कतौक मोल नहि।

काकी सँ अइ बेर हम खूब बतिएलहौं। हुनकर आँखिक कोठरी मे सभहक लेल अगाध सिनेह छैन्ह।विनोद अनाथ भ जेताह मायक मुइला पर।

-संतोष कुमार राय 'बटोही', ग्राम - मंगरौना अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.पद्य खण्ड ३.१.पवन मिश्र 'गोनौली'-संस्कारक चूकल ३.२.राज किशोर मिश्र-अनुभव ३.३.कामेश्वर चौधरी- आह्वान/ प्रार्थना ३.४.रामानन्द मण्डल- हो बाबा गांधी!/ लाल बहादुर शास्त्री!/ हो काका जेपी ३.५.प्रमोद झा 'गोकुल'- श्रीमैथिली चरण मे ३.१.पवन मिश्र 'गोनौली'-संस्कारक चूकल पवन मिश्र 'गोनौली' संस्कारक चूकल

टीक छोड़लौ, टीका (चन्दन) छोड़लौ, छोड़लौ पूजापाठ | खानपानक परहेज छोड़लौ, आब नहि कोनो लाजधाक ||

धोती- कुर्ता छल जे पहचान हमर, माय -बापक आदर कर्तव्य प्रधान हमर ई सभ आब नै रहल, नै ककरो कियो सुनि रहल ||

संस्कार- संस्कृतिक परिभाषा बदलल, जे मानथि से छथि पिछड़ल | आधुनिकताक होड़ अछि सहजोड़ , अपन सभ निखिद, देखौसक धरथि पछोर ||

खानपान- वेशभूषा, रहन सहन - आचार विचार, सभ किछु अछि बदलि रहल | सामाजिक बंधन निष्क्रिय अछि, अन्तर्जातीय वियाह जोर पकरि रहल ||

अपन संस्कार आ संस्कृति सँ, हम भ' रहल छी दूर | आत्मचिंतन अतिआवश्यक, गहन चिंतन करू भरपूर ||

पश्चिमि देश मे, हमरा संस्कृतिक खुबजोड़ चलन भेल, वेदपाठ, गीतापाठ, उपनिषद पर सेहो खोज भेल | चमक दमक आ चालि चलन ओकर अपनाकय, अपन अपनहि पर आब बोझ भेल ||

एकादशी, चतुर्दशी आ एकसंझाक बदला, आयल, डाइटिंग- फास्टिंग, करवाचौथ आ तीज | विधि बेभार,ई सभ पछुआयलक निशानी, पावनितिहार सभ तेजलौ, छोड़लौ सामा- चकेवा गीत |

अपन पावनि, अपन रीति, अपनासँ करी सदिखन प्रीत, संस्कार अपन, राखी आदि- अनन्त | जे जन अपनहि जड़ि सँ कटता, ओ जीवन भरि कुहरता आ पछतेता, सुखद नै हुनकर अंत || - हाटगछिया, धारा, कोलकाता- 700105, 9433746295; सहायक शिक्षक, श्री उमापति विद्यामंदिर, पश्चिम बंगाल सरकार, कोलकाता| अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ ३.२.राज किशोर मिश्र-अनुभव राज किशोर मिश्र, रिटायर्ड चीफ जेनरल मैनेजर (ई), बी.एस.एन.एल.(मुख्यालय), दिल्ली,गाम- अरेर डीह, पो. अरेर हाट, मधुबनी अनुभव गरजि रहल , कतहु मनुक्खक , अजो ध, जो आएल अहंका र, कतहु ,देखबा मे आबि रहल अछि , बड़ -बड़ ,टो प -टहङ्का र।

सज्जन केॅं ,दुर्जन फाँ टि चढ़ा , बझअओलक कपटक जा ल मे, चि न्हि ने सकल ओ शि का री केॅं, तेँ , पहुॅंचि गेल ,ओहि हा ल मे।

अधि का र लेल कि ओ खेखनि रहल , अछि कि ओ बनल ,नि रंकुश, पा बि सम्पत्ति क अम्बा र, दुखी , आ,नि र्धन कि ओ, अछि बड़ खुश।

कठ वि वा द मे भि ड़ल अछि , पा कल पड़ो र, को नो पिं गल, ढों गी ककरो छूलि पर, अछि छी ट रहल, अछि नजल।

जि नक मो न अपने अशुद्ध छन्हि , ओ ,दए रहला अछि उपदेश, बदलि ने दैत अछि वस्त्र , आचरण , चा हे धऽ लि ए को नो भेष।

कुतर्क, टि टम्भा सँ नहि को नो , झूठ, सत्य भऽ, जा एत, कतबो कुदत पता ल ,मुदा ओ, नभ तऽ नहि छू पा एत।

दुः ख मे धैर्य धऽकऽरहैत छथि , समा धा न मे जे सदि खन ला गल, वि पत्ति फो ड़ि बा हर नि कलै छथि , ओ ,भऽ ने सकै छथि ,अभा गल।

तम -तरु पर भगजो गनी क इजो त, तम चा टि -चा टि ,मुह छैक को त।

मुदा ,ढी ठ बनल ओ अछि अड़ल, घनघो र तमा मे, मे तेँ ओ बरल। महा व्या ल गरल मद मे रभसल, सपनौ र भि ड़ल, तऽ फण घो कचल।

जरत ,कपट के का ठक हण्डा , टि कैत नहि छैक एकर हथकंडा ।

कि छु दि न धरि जो रगर रहत हा मस, अगि लगा ओन, हो इत अछि ता मस।

सौ म्यता कथमपि ने अछि कमजो री , ककर कतेक दि न चललैक बरजो री ?

खसि पड़ैत अछि ,चा र ओ, जकरा नहि छैक ,अपन खा म्ह, रुकत ने पएर ,जे नि ज बल पर, भने वि धा ता हो थुन्ह, वा म।

सुनहे पड़ैत छैक सभ केॅं, जे वि षय हो इछ जुगुला त, मुदा , सुनतै के डपो ड़शंख के ? बेमतलब के बा त।

कते दि न झाँ पत दि नमणि के, घा घस ,अका स मे पसरल ? झूठ बना दैक,सत्य के, अछि ने ओतेक ,झूठ मे बल ।

मि थ्या लां छन लगा ककरो पर, ककर भेलैक उतकि रना ? पअओलक ने पा प ,प्रति ष्ठा कहि ओ, कएलक सभ ,ओहि सँ, घि रना ।

बा ती क टेमी जरि कऽ दैत अछि , इजो त ,भी तर -बहा र, मुदा ,मो न के इरखा जरि कऽ , पसा रैछ दुखक अन्हा र।

डेगे -डेगे जॅं बढ़ैत रहब ,तऽ ना पि लेब धरती के, कनेक दौ ड़ि क' सूति रहब ,जा एब बा हरो परती के?

क्रि आ -वचन मे मेल जतए, 'साँ च मे ने को नो आँच', के पति आएत बगुला के जे 'हम नहि खा एब मा छ'?

कुंठा ओ द्वन्द्व मे डूबि कऽ , औना ए लगैत अछि मो न, नी क सो च सँ, ज्ञा न -चक्षु के, बा ट बुझऽ मे,आएत ने को न?

दूबटि आ छै, चौ बटि आ छै, चुनय पड़ैत छै, अपने बा ट, बुधि आरक छै अपन रस्ता , चुनैछ मा र्ग , मूर्खो -चपा ट।

नी क बा ट ओ नी क करनी , बनबैछ ,जि नगी क' सुचि त्र, दुष्टो भेटैत अछि रस्ता पर , आ, कि छु मो नो के मि त्र। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.३.कामेश्वर चौधरी- आह्वान/ प्रार्थना कामेश्वर चौधरी- आह्वान/ प्रार्थना १ आह्वान

उथि जाऊ अब भय गेल भोर अच्छी आस लगा चलना चकोर छथि कानि रहल मैथिली अपन पोछू हुनकर पसरैत्त नोर।

इतिहासक गरिमा आ विभूति नहीं व्यर्थ करु ई समय सूति,; लिखि जाऊ वाक् एहिपन्नामे रंगि जाए धरा हरियर कचोर।उठि जाऊ.... जे माए सिनेहक शक्ति देल छथि भेल बौक विक्षिप्त भेल; हम सुध हनकर लेबनिकहिया ओ मौन परलि भावें विभोर।। उठि जाऊ.... ओ देलनि पाँखि जे ऊरि सकी गगनक उड़ान साँ घूरि सकी; रातिक अनहारमें बारि दीप के करत आई कनियों इज़ोर उठि जाऊ.... २ प्रार्थना

हेकृष्ण! अहाँ वृन्दावनमे कहिया तक करब रहैत रमण युग बीति गेल हे अवध नृपति एक बेर करु मिथिलाक भ्रमण।

वृंदावन मे छुटली राधा मथुरा चलि गेल रही आधा मिथिला मे सीता सतत संग रहलीह , अहाँ भटकी वन वन।

पूतना बनि माए पियौल गरल कंसक सन मामक दंश सहल मिथिलाक प्रतिष्ठा विष्णु रूप कहिआ पड़तैक अहाँक चरण।

सोलह हज़ार गोपीक बीच बटलहुँ प्रेमक अहाँ मंत्र बीज़ सारिक सिनेह, सत्कार सासुकेर भेटि सकल जनकेक शरण।

छी बिसरि गेल कोहबरक गीत सीताक रूप जनकक पीरीत ब्रजगोपिकाक संग रेचल नृत्य आकण्ठ डूबी ब्रज कयल ब्रजन

विस्मरण कयल अहाँ अपन शब्द आ नुका गेलहुँ भूगोल मध्य द्वारिकाधीश तजि सिंहासन वसुधैव कुटुम्बक करू सृजन। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.४.रामानन्द मण्डल- हो बाबा गांधी!/ लाल बहादुर शास्त्री!/ हो काका जेपी आचार्य रामानंद मंडल- हो बाबा गांधी!/ लाल बहादुर शास्त्री!/ हो काका जेपी १. हो बाबा गांधी!

हो बाबा गांधी! कहियो तू राम रहा! आइ तू रावण भे गेला!१! हो बाबा गांधी! आइ गोडसे राम भे गेला! तू बाबा रावण हो गेला!२! हो बाबा गांधी! तू महानायक रहा! आइ तू खलनायक भे गेला!३! हो बाबा गांधी! आइ गांधी मूर्ति तोड़ल गेला! गोडसे मूर्ति लगायल गेला!४! हो बाबा गांधी! कहीं कहीं बाबा पूजल गेला! परंच तोहर बिचार तोडल गेला!५! हो बाबा गांधी! तोहर अहिंसा बेकार हो गेला! धरम हिंसा जायज हो गेला!६! हो बाबा गांधी! देशक हाल देखि के रूआंसा हो गेला! रामा राजनीति के खेला हो गेला! हो बाबा गांधी।

२. लाल बहादुर शास्त्री!

देश के लाल,लाल बहादुर शास्त्री। जय जवान जय किसान के नारा देलन। जीत लेलन पाकिस्तान। समझौता ले लेलक प्राण। गांधी के आदर्श पर चललन। न्योछावर क देलन जीवन। आइ जवान पर उठवैत प्रश्न चिन्ह? किसान करैत हैय आंदोलन। सरकार सधले हैय मौन। आंदोलन में मरैत हैय किसान। देश के लाल,लाल बहादुर शास्त्री। आइ लोग उठवैत हैय प्रश्न? लाल बहादुर आ गांधी में, कै हैय महान? जबाब दा लाल बहादुर,कै हैय महान? हम छी पहन ले गांधी टोपी। लोग के न बुझाई हैय, के हैय महान। रामा हम त शिष्य छी, गांधी महान्। देश के लाल, लाल बहादुर शास्त्री।

३. हो काका जेपी

हो काका जेपी। सभ तोहर अनुआयी। तोरा रहल बेची।

हो काका जेपी। आपतकाल के विरोधी। लएला नइका आजादी।

हो काका जेपी। इंदू के न विरोधी। रहा कुशासन विरोधी।

हो काका जेपी। खलय तोहर कमी। रहिता कुशासन विरोधी।

हो काका जेपी। करा भारत देखी। रामा पएदा करा एगो जेपी। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.५.प्रमोद झा 'गोकुल'- श्रीमैथिली चरण मे प्रमोद झा 'गोकुल' श्रीमैथिली चरण मे

चलू एम्स एम्स खेलाइ मुरही कचरी खूब खाइ ।। सूतल रहू ओढ़ि रजाइ ‌। भेले बियाह बूझू यौ भाइ! ।। राजक लेल जे तनलौं तान । सेहो लगैए भै गेल म्लान।। चुड़ा दहीमे ओठङल जान। पान मखानमे सटि गेल प्रान।। माछक मूड़ा लखि पलै पूरा। माथक पाग लटा गेल धूरा।। गुटबन्दी गोलैसी गुलछर्रा । काज हमर यैह रोजमर्रा ।। भाङ पीबि सुतलहुँ बहुते । आगांँ पाछाँ केलहुँ बहुते ।। भेटल की सब कहू सते। मर्दित मान आन छल जते।। उठू उठू जागू सब मैथिल। ने मोजर गुजर भेने शैथिल ।। जाति पाति पाटा पाटी छोड़ू। मिथिला हित अपनाके जोड़ू।। भेद भाव सब वलपूर्वक तोड़ू। श्रीमैथिली चरणमे मनके मोड़ू।। -प्रमोद झा 'गोकुल', दीप, मधुवनी (विहार), फोन -9871779851 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। विदेह ३७९ म अंक ०१ अक्टूबर २०२३ (वर्ष १६ मास १९० अंक ३७९)|| 21 20 || http://www.videha.co.in/ ISSN 2229-547X VIDEHA

{3 \ es Chey | oy

i f t i A: TT aya कर्ण (S30) oy osama |- f By कर्ण, hz- TOD Tele Raa. ayy | | Ray oS calla ORAS Ree | f \ रु aie of By ) H | SHOT यारोत्फा i H (नगर बस SITUS पर | 'छातिरुप ASST H ql ST aad aeatt- शोर्सजी one at season | | CSIs WAG AS. Ba | Sa मैठत एस ova | | TNS 2y Aa aR IV TE ठीस eT tia | | SSID BNE |S AN SADA TORT BAYEI ERY | wat ठाशी pat uo Hira aot sas ars Daw ‘| WH AQT छत INS Par aye a tho WST ANNE | | नम TOS - YB GS area ASAT SADA Ser aah | i fT eR [OAT TAA BANS AY HATE) WAS S ASAT | Bras oi aa INA SR लिख ras | Dye Teese | | SHIT oN स्मताक WH aS seq Bd Cay aaa a | | Ba | ठाशी कक कनित्का OF AT AAS छत | गव्कोच्ठनश्ू Tae | | BaP aor ser उायी ATS Aa eT. | | sso Savard ht किम vtasn Ses उाथी Soe | | Apes Rat oreo das ar cei अलनतों Ror | ‘| AWRY wt हीढ Dav गठालयकर THIS S TS Ba ) i

| उप्यन TET DAT STANT FAST SVs FAVES | | BANE IS SSIS ONGTA 2aNNs THR KNSS VT Se (| बढ़त BANS | NAS AST ON SANA KAA ASAT | | ७ Ray aS ATS WAT SS थी ST STARR | | @WsArASAR Hares atta फिलएछजैफीक | i Tag ars & apple aa bapa Ss | | BIW eh oa aS TST Tseng ore of aon tee | | mehr Gwe Pas wah जक बर्तन नहि | || D2 ARS af | ASI SNANAA CISS SaTea ways | (| काका PS एकता SET Of SOR EASY eT Sar | |) BY part ionerset gram Bs SATSARATS BAST? ‘| VF कोत WA BAST AFIS ONHY Het अन्त पति. | रत, प्यक्ति। TE SET AS कोन AOR OAS | | 35S ser aes BY? OAS os eT Pande | ‘| Bre पर दर Phy Sad - NST उस अत पिन AOS ONS | | 5 TPR USS Sol SAS BIG H or HE any Saath) | i St Serra जी seat - उहन wifis Braces | ‘| oy tar wen patos के जंग Tas Asan | | Tens UR हीय धार TE oe उक NY जननी प्रघा पिया | | ha YER dat तकतसि on EA F बीज संक्क TERA | | Taal | So ONAN es किए NS PO Ss | TANS AVE TAS सन रण WIS एछोड़ि एकस SS Hw | | GBI Ags TOA wa fra HRS यश Nae निकति |. | SAY Saas FoF धन्पड़ saa SF TPA BH ahh | | eae Re fore oat) aes war सितोजिक sas | | DITA चहतनि । ७ sor जीज़न Igo FAN उशीकाम्रणण | (| TA DEP TANS | NST TNA एस OSM सऊो AE |

Oe i i} मय भय Rr कर उपयी aay Tes ON AE AS | | FAAS CST AST HS AT yer SH Hemost aN | i PIAS WHF NR ON was BAT NP ASSIS | | FS उठि अजवाऊजक We IT ab TS DIA WANS WAST | | Seg ७ अकषना THETA एक सॉजिजिंडमिय oF DAA | | BRT यों खान SINS TINGRT ITS उन कक NTS | | one mah | H ql IH | i i i |

ही t i A: TT aya कर्ण (S30) oy osama |- i By कर्ण, आय एशाबय्रव, एन Raa. जिता - प्रर्डक्ा | Ray oS calla ORAS Ree | | \ तर aie Ba) i । TTS AAT i ! (ATA SH wx) i | उअज्वठय AM ) | Stara sy saath nah) stoma | | क Tew wos ais | ag sey worms | | TRIN SMT कक FS WETS ONS ATT | Of NSA HAST BA 0 dS Tae BS TBAT NS | | AR ७ सन्छिवनिक Nemes UT reg AS SNS | (| ठोंशी लय BEANE BY BN SON IW Sf (AY IS TANSR | | WAY eas DaQrnese ठाथी एके जाय वजन मेँ काहीय धाष् | | Ses तशताए | God Nae खन् हा थी Ne Tass oy | | tra oned ovo फ्मिति mins ST east लय arene | | RMA wires fy BW AS fara अब eT | | wat Yr ON उकरनों S460 OS Has SOT wT | ‘| asd ayy Pata mae in थकान कात ae sone | | DIT ENT IS ANA एस जन्य Sah arer Baa | | SR TRIS ast sist 5 जगय STS rary | धर i 'प्रिंतरोअक VOY VAI what sete aor | | watt ear ag मेँ उथी एक Rs es इवत TS | थिन es fT SY ESS TDD ofS Tew Samer |

| a a@amarest ovat saa sonata | | Paster aT Aes De afb HERA) HR AT SS | | 7रछता व ७ ठायी we St FT IBS Ss MA Sais | | START SUNITA ENT SY ct ATR iT सपऊा | | ASE DNS दिउ एक Ad WA Nd WAAR SRS! | | sorts साथी Sy IY ब्रज afi ows array sfryes | | Bee Ia Betas aT AW AT ara ‘| ofS TA VST TR कस प्यष्डि। i i SAAAS IOS INS WA NN BS AINS | | sees छ्रिकिटूसानश्तत Sissies of bor Torr onl | | हीय ठाथी ऊन ny cen Ba ITS रघाव्यर ७ जब HAS | ‘| amNY 7S स्यविं अँसाय एके प्याध्फर्य एस Bras सता ara wT | | Plas - TH WS WN, NSAINS HINT, MP | | SHYT TH OAD S43 ज्ञात जो Sa Aes PIs | | sprarst सठावपज oR Sat जँ की reas aie: BT | | tory Rear As As । Toy ae HST जिक | ‘| TITS 2 GON के wey ATS HSTAA MAS an Fa | | जता ANAT NET एके IAT | ही i q itis Saves Way we किए उठिना aa | (| CEST ATS oy& BARA DAT GUAT Sa Sassie | | PR Vs oe Wadia CSF Baan Tween aa | (| D3 छत SIS Ba कै fs aos (| TA WN OFLA 7a HTT BAIA -aeSs ge | mean छत १ की सकल छत est ene Tea | | mer of fori vt 6a ata रत ऊँ प्यार oar | | AS Za ISSN दे उन बात og WHE WS | | quae सिसोस सब aoe: aod जय त्ठ३ ert aenzeo (| YS कठतबिन Groner. Aad apresame OTe Ae | | PS जझजऊज्यडम ARS Spor कब३ GMS ISTE FH AN | say A ऊनका AS Pata | H i et Oe i

जि is

डा १. कर 0 ‘ 4 बे... AY y

42 | | http://www.videha.co.in/ ISSN 2229-547X VIDEHA | CAA ETA CANS TART STRAT TANS | | BANG | ७ SRS ONAN WANTS FSR TESS Se Fe | (| बढ़त WANE | NAS TRAST ON SADA SAT SANSA | | ७ Ray ae AR AAS [Srey डोथी Soe eae OE | BsAPRASAR Heise ठाथी aon Pensioner | | Pre age ait aaa छव lupmE yes | (| swith eh लगधातश्वूसीरु निकति रत oye F on ee | mehr & मन owes fa सछनपि जकब ब्रलन सहि | | 2 मकर 2h TST SNA DRS SAT BAS | | Pape eS Bray FART Hf SOR SAS era sie | | ay Deer one ast छा प्वालेकिक SASTRATS BING Te H | NR कॉत Wa BAST AHHH DIAN Foret Hen ae || (sa Ort) TE AIRY OAS TA PIO STAT | | संयक चल aes BY? OAS oS A Pose | | tr? i i Pry ata - peat | उस अर HAN ove onda | | के किए aged Wel SRS BION F छा BTR ag Saath | i Sf Jama जी aah - उहन ठयीक Bae | | opr tert बजा part omg SF tiv mare Neaaan | | rong oR Aa rs TRS of es Ne eo | | Tapp sie reat on maar मँ डीज संक्क Tey | | tanh des OVA शासक किए eS OTS | || TAANS क्रोध SAN मन एस AIS एछोड़ि vad (HSS a कक. | Brags Toa wa fra HRS er ee निकति | | ser otTaad Soff sare sare SN RAR | | ots He Roe एमतथि ee wr Ras shares | | wea saa । ७ अश्न Si T~Ro HAW उाशीकाज्रणण | | एस फति एसतोठ | NSIT एताकनि तप सना aN TTT. |

विदेह ३७९ म अंक ०१ अक्टूबर २०२३ (वर्ष १६ मास १९० अंक ३७९) | | 3 पर 4 : (| Whore en $3 Dat TH Taye ON AH AES aa | | FAAS set ASYT ay ot yer Se semos anframe | 4 PATS TT मेँ ANAS oy wars Wat FT iy SSS H | SS उठि अजलाजक Ho ot ath cS फलि NS | सहाय eT | | ee Cob TEE एके TRAIT og AAS | (| शिस SY TT SIONS DN GEN ANS Hot Fa TTS i | sve mah | i i i i It ) ——— किसान i i H i a 4 H Hy {i i H i it | |! i i q il | yi {i " i i q H i i i i i f i i i i i k i i tl 0 iil iH ij lH i i i i ij iW q q H q ii i i Ht lt q H i

व | | http://www.videha.co.in/ ISSN 2229-547X VIDEHA i ही i i AR: HTH art PF (5390) ब्रिज -म्लुण्परधुवागतत | | कर्ण, NETO Tate RNS. Bray eee | दर fiery म्राजाकाउय, ८१॥७. रन sea | | तक जग ABA ) H i शीज VT i OMage SH 4x5) H i WI ADT i i शी sara SY कठननि- आयर्जो । ठस Oars | | See ods ai पति ey aero (| TR छाया कब | Shor Wha OATS RTT | | oT wea ANSE ba eee Ne EES I BATS | | Ht onrotis याजिल्वसाबिक Us Ter STs | (| BY नये BEANS BY ANTES SUN INS TST बाय एतकसियँ | WAY es RRQ Ge ठाथी एके जाय -तजाय Harber | | wea tame | Gad ones at a terres oa | | tera ones aos ott mas Fa east लय wre |. | wR ares ya जाग aS mfr अब RTE | | wat cea anit usa Sag OS mas ST woe | लक oy निकनि mak ini seep ar afar | | कसण aed ats AVA एस Sq ahh aera | Aes TRS ast Ssrt किप्ठ AT NAS rea | H i PreahIs VS WaT what ahh oor | BAR lesa ag Fat Ss as TS PST [ys मिस SY HS TOS ofS Taw Saar te rT Sa CN ~ परी ri