ISSN 2229-547X VIDEHA 𑒀 विदेह ३८५ म अंक ०१ जनवरी २०२४ (वर्ष १७ मास १९३ अंक ३८५) [विदेह (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) www.videha.co.in ] विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। ऐ पोथीक सर्वाधिकार सुरक्षित अछि। कॉपीराइट (©) धारकक लिखित अनुमतिक बिना पोथीक कोनो अंशक छाया प्रति एवं रिकॉडिंग सहित इलेक्ट्रॉनिक अथवा यांत्रिक, कोनो माध्यमसँ, अथवा ज्ञानक संग्रहण वा पुनर्प्रयोगक प्रणाली द्वारा कोनो रूपमे पुनरुत्पादन अथवा संचारन-प्रसारण नै कएल जा सकैत अछि। (c) २०००- २०२४. सर्वाधिकार सुरक्षित। भालसरिक गाछ जे सन २००० सँ याहूसिटीजपर छल http://www.geocities.com/.../bhalsarik_gachh.html , http://www.geocities.com/ggajendra आदि लिंकपर आ अखनो ५ जुलाइ २००४ क पोस्ट http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html केर रूपमे इन्टरनेटपर मैथिलीक प्राचीनतम उपस्थितक रूपमे विद्यमान अछि (किछु दिन लेल http://videha.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html लिंकपर, स्रोत wayback machine of https://web.archive.org/web/*/videha 258 capture(s) from 2004 to 2016- http://videha.com/ भालसरिक गाछ-प्रथम मैथिली ब्लॉग / मैथिली ब्लॉगक एग्रीगेटर)। ई मैथिलीक पहिल इंटरनेट पत्रिका थिक जकर नाम बादमे १ जनवरी २००८ सँ ’विदेह’ पड़लै। इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि, जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। (c)२०००- २०२४. विदेह: प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004). सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। Editor: Gajendra Thakur. In respect of materials e-published in Videha, the Editor, Videha holds the right to create the web archives/ theme-based web archives, right to translate/ transliterate those archives and create translated/ transliterated web-archives; and the right to e-publish/ print-publish all these archives. रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना/ संग्रह (संपूर्ण उत्तरदायित्व रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता मध्य) editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ पठा सकैत छथि, संगमे ओ अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो सेहो पठाबथि। एतऽ प्रकाशित रचना/ संग्रह सभक कॉपीराइट रचनाकार/ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि आ जतऽ रचनाकार/ संग्रहकर्त्ताक नाम नै अछि ततऽ ई संपादकाधीन अछि। सम्पादक: विदेह ई-प्रकाशित रचनाक वेब-आर्काइव/ थीम-आधारित वेब-आर्काइवक निर्माणक अधिकार, ऐ सभ आर्काइवक अनुवाद आ लिप्यंतरण आ तकरो वेब-आर्काइवक निर्माणक अधिकार; आ ऐ सभ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार रखैत छथि। ऐ सभ लेल कोनो रॉयल्टी/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै, से रॉयल्टी/ पारिश्रमिकक इच्छुक रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता विदेहसँ नै जुड़थु। विदेह ई पत्रिकाक मासमे दू टा अंक निकलैत अछि जे मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ www.videha.co.in पर ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। Videha eJournal (link www.videha.co.in) is a multidisciplinary online journal dedicated to the promotion and preservation of the Maithili language, literature and culture. It is a platform for scholars, researchers, writers and poets to publish their works and share their knowledge about Maithili language, literature, and culture. The journal is published online to promote and preserve Maithili language and culture. The journal publishes articles, research papers, book reviews, and poetry in Maithili and English languages. It also features translations of literary works from other languages into Maithili. It is a peer-reviewed journal, which means that articles and papers are reviewed by experts in the field before they are accepted for publication. Font/ Keyboard Source: https://fonts.google.com/ , https://github.com/virtualvinodh/aksharamukha-fonts , https://keyman.com/ These are print-on-demand books, send your queries to editorial.staff.videha@gmail.com. The eBooks of some of these are available for sale on Google Play [(c) Preeti Thakur, sales.videha@gmail.com], send your queries to sales.videha@gmail.com. The contents and documents e-published by Videha (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) are periodically being checked for accessibility issues. People with disabilities should not have difficulty accessing these contents/ documents. © Preeti Thakur (sales.videha@gmail.com) Cover designed by AUM GAJENDRA THAKUR Videha e-Journal: Issue No. 385 at www.videha.co.in समानान्तर परम्पराक विद्यापति- चित्र विदेह सम्मानसँ सम्मानित श्री पनकलाल मण्डल द्वारा मैथिली भाषा जगज्जननी सीतायाः भाषा आसीत्। हनुमन्तः उक्तवान- मानुषीमिह संस्कृताम्। अक्खर खम्भा (आखर खाम्ह) तिहुअन खेत्तहि काञि तसु कित्तिवल्लि पसरेइ। अक्खर खम्भारम्भ जउ मञ्चो बन्धि न देइ॥ (कीर्तिलता प्रथमः पल्लवः पहिल दोहा।) माने आखर रूपी खाम्ह निर्माण कऽ ओइपर (गद्य-पद्य रूपी) मंच जँ नै बान्हल जाय तँ ऐ त्रिभुवनरूपी क्षेत्रमे ओकर कीर्तिरूपी लत्ती केना पसरत। शुक्ल यजुर्वेद (२६.२)-यथेमां वाचं कल्याणीमावदानि जनेभ्यः। ब्रह्मराजन्याभ्यां शूद्राय चार्याय च स्वाय चारणाय च।।हम सभ गोटेकें ई पवित्र वाणी (वेदवाणी) सुनाबी। ब्राह्मणकें, क्षत्रियकें, शूद्रकें आ आर्यकें; अपन लोककें आ अपरिचितकें सेहो (माने सभकें)। मुदा ऐ वेदवाक्यक विपरीत मनुस्मृति वेदवाणीक अध्ययन/ श्रवणकें समाजक किछु गोटे लेल निषेध करऽ चाहलक, मुदा स्मृति सेहो वेदवाक्यकें प्रमाण मानैत अछि (शब्द प्रमाण) तें तकर विरुद्ध देल ओकर निर्देश स्वयं अमान्य भऽ जाइत अछि। Do not judge each day by the harvest you reap but by the seeds that you plant. -Robert Louis Stevenson ------------------------------------- Videha: Maithili Literature Movement 𑒀 ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्ष ग्वंग शान्ति: 𑓇 𑒠𑓂𑒨𑒾: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑒢𑓂𑒞𑒩𑒱𑒏𑓂𑒭 𑓅 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱: अनुक्रम ऐ अंकमे अछि:- १.१.गजेन्द्र ठाकुर- नूतन अंक सम्पादकीय (पृ. २-२३) १.२.अंक ३८२-३८४ पर टिप्पणी (पृ. २४-२४) २.गद्य २.१.सुमन मिश्र- लघुकथा- परीक्षित (पृ. २६-३३) २.२.परमानन्द लाल कर्ण-एकादशीक उद्भव (पृ. ३४-३७) २.३.निर्मला कर्ण- अग्निशिखा खेप ३३ (पृ. ३८-४३) २.४.रबीन्द्र नारायण मिश्र- वृंदावनक कुंज गलीमे! (पृ. ४४-६०) २.५.संतोष कुमार राय 'बटोही'- डायरी 'लव यू टू' (आगाँ) (पृ. ६१-६४) २.६.कल्पना झा- सते (पृ. ६५-६५) २.७.रबीन्द्र नारायण मिश्र- ठेहा परक मौलाएल गाछ (धारावाहिक) (पृ. ६६-८७) २.८.कुन्दन कर्ण- बीहनि कथा- घबाह (पृ. ८८-८८) ३.पद्य ३.१.राजकिशोर मिश्र- मोह (पृ. ९०-९३) ३.२.आचार्य रामानन्द मण्डल-राम !/ अहा!आह!/ बीतल बर्ष/ नववर्ष/ मंदिर (पृ. ९४-१०४) ३.३.जगदानन्द झा 'मनु'- ४ टा गजल (पृ. १०५-१०९) 𑒀 ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्ष ग्वंग शान्तिः पृथ्वी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति वनस्पतय: शान्तिर्विश्वे देवा: शान्तिर्ब्रह्म 𑓇 𑒠𑓂𑒨𑒾: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑒢𑓂𑒞𑒩𑒱𑒏𑓂𑒭 𑓅 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑓁 𑒣𑒵𑒟𑓂𑒫𑒲 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑒰𑒣: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑒼𑒭𑒡𑒨: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱 𑒫𑒢𑒮𑓂𑒣𑒞𑒨: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑓂𑒫𑒱𑒬𑓂𑒫𑒹 𑒠𑒹𑒫𑒰: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑓂𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧 ब्रह्मणसँ प्रार्थना जे द्युलोकमे, अंतरिक्षमे, पृथ्वीपर, जलमे, औषधमे, वनस्पतिमे, विश्वमे, सभ देवतागणमे आ ब्रह्ममे शांति हुअय। ॐ-ब्रह्मण, द्यौ-सूर्य-तरेगण, अंतरिक्ष- पृथ्वी आ द्यूलोकक बीच, आप:-जल, विश्वेदेवा- सभ देवता, ब्रह्म- सर्जक। 𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧𑒝𑒮𑒿 𑒣𑓂𑒩𑒰𑒩𑓂𑒟𑒢𑒰 𑒖𑒹 𑒠𑓂𑒨𑒳𑒪𑒼𑒏𑒧𑒹, 𑒁𑓀𑒞𑒩𑒱𑒏𑓂𑒭𑒧𑒹, 𑒣𑒵𑒟𑓂𑒫𑒲𑒣𑒩, 𑒖𑒪𑒧𑒹, 𑒎𑒭𑒡𑒧𑒹, 𑒫𑒢𑒮𑓂𑒣𑒞𑒱𑒧𑒹, 𑒫𑒱𑒬𑓂𑒫𑒧𑒹, 𑒮𑒦 𑒠𑒹𑒫𑒞𑒰𑒑𑒝𑒧𑒹 𑒂 𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧𑒧𑒹 𑒬𑒰𑓀𑒞𑒱 𑒯𑒳𑒁𑒨। 𑓇-𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧𑒝, 𑒠𑓂𑒨𑒾-𑒮𑒴𑒩𑓂𑒨-𑒞𑒩𑒹𑒑𑒝, 𑒁𑓀𑒞𑒩𑒱𑒏𑓂𑒭- 𑒣𑒵𑒟𑓂𑒫𑒲 𑒂 𑒠𑓂𑒨𑒳𑒪𑒼𑒏𑒏 𑒥𑒲𑒔, 𑒂𑒣:-𑒖𑒪, 𑒫𑒱𑒬𑓂𑒫𑒹𑒠𑒹𑒫𑒰- 𑒮𑒦 𑒠𑒹𑒫𑒞𑒰, 𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧- 𑒮𑒩𑓂𑒖𑒏। 𑒀 ॐ, स॒हस्र॑शीर्षा॒ पुरु॑षः। स॒ह॒स्रा॒क्षः स॒हस्र॑पात्। 𑓇, 𑒮↓𑒯𑒮𑓂𑒩↑𑒬𑒲𑒩𑓂𑒭𑒰↓ 𑒣𑒳𑒩𑒳↑𑒭𑓁। 𑒮↓𑒯↓𑒮𑓂𑒩𑒰↓𑒏𑓂𑒭𑓁 𑒮↓𑒯𑒮𑓂𑒩↑𑒣𑒰𑒞𑓂। स भूमिं॑ ग्वंग वि॒श्वतो॑ वृ॒त्वा। अत्य॑तिष्ठद् दशाङ्गु॒लम्॥ 𑒮 𑒦𑒴𑒧𑒱𑓀↑𑓅 𑒫𑒱↓𑒬𑓂𑒫𑒞𑒼↑ 𑒫𑒵↓𑒞𑓂𑒫𑒰। 𑒁𑒞𑓂𑒨↑𑒞𑒱𑒭𑓂𑒚𑒠𑓂 𑒠𑒬𑒰𑒓𑓂𑒑𑒳↓𑒪𑒧𑓂॥ हजार माथ, हजार आँखि, हजार पएर संग विश्वकेँ आच्छादित केने अछि, दस आंगुरक गनतीक वशमे नै अछि ओ। प॒द्भ्याग्ँ॑ शू॒द्रो अ॑जायत॥ 𑒣↓𑒠𑓂𑒦𑓂𑒨𑒰𑒑𑓂𑒿↑ 𑒬𑒴↓𑒠𑓂𑒩𑒼 𑒁↑𑒖𑒰𑒨𑒞॥ पएरसँ शूद्रक उत्पत्ति भेल॥ प॒द्भ्यां भूमि॒र्दिशः॒ श्रोत्रा᳚त्। 𑒣↓𑒠𑓂𑒦𑓂𑒨𑒰𑓀 𑒦𑒴𑒧𑒱↓𑒩𑓂𑒠𑒱𑒬𑓁↓ 𑒬𑓂𑒩𑒼𑒞𑓂𑒩𑒰↑↑𑒞𑓂। मुदा पएरेसँ भूमियोक उत्पत्ति। ❀ (White Florette- innocence and purity) ☸ (Wheel of Dharma) ࿕(Swastik) 𑓅 (Gwang ग्वंग- two small circles connected by u and a dot placed over it, used in reference of Vedic texts) ꣼ (सिद्धिरस्तु, सिद्धम 𑒮𑒱𑒠𑓂𑒡𑒱𑒩𑒮𑓂𑒞𑒳, 𑒮𑒱𑒠𑓂𑒡𑒧 Devanagari Anji) ঀ (Bengali Anji, Siddham) 𑒀 (Tirhuta Anji, Ankush of Ganeshji, placed at the beginning of something) 𑒀
१.१.गजेन्द्र ठाकुर- नूतन अंक सम्पादकीय १.२.अंक ३८२-३८४ पर टिप्पणी १.१.गजेन्द्र ठाकुर- नूतन अंक सम्पादकीय मैथिली लेल समीक्षाशास्त्रक सिद्धांत- कला आ साहित्य लेल कोनो सैद्धांतिक प्रयोजन हेबाक चाही? साहित्यक विभिन्न विधा जेना पद्य, प्रबन्ध, निबन्ध, समालोचना, कथा-गल्प, उपन्यास, पत्रात्मक साहित्य, यात्रा-संस्मरण, रिपोर्ताज, नाटक आ एकांकी मनोरंजनक लेल सुनल-सुनाओल-पढ़ल जाइत अछि वा मंचित कएल जाइत अछि। ई उद्देश्यपूर्ण भऽ सकैत अछि वा ऐमे निरुद्देश्यता-एबसर्डिटी सेहो रहि सकै छै- कारण जिनगीक उत्थल-धक्कामे निरुद्देश्यपूर्ण साहित्य सेहो मनोरंजन प्रदान करैत अछि। प्राचीन कालमे कला, साहित्य आ संगीत एक खाढ़ीसँ दोसर खाढ़ी मध्य हस्तांतरित होइत छल। पदपाठ, क्रमपाठ, जटा पाठ, शिखापाठ, घनपाठ आदि स्मृतिक वैज्ञानिक पद्धति छल। घर, वेदी आ आन कलाकृतिक बनेबाक विधिक यजुर्वेदमे वर्णन छल जे भाष्य सभमे आर विस्तृत भेल आ पुरातत्वक प्राचीनतम आधार सिद्ध भेल। संगीतक पद्धति सामवेदकेँ विशिष्ट बनेलक। ऐ तरहेँ साहित्य, कला आ संगीतकेँ बान्हबाक प्रयत्न भेल, जइसँ ई विधा दोसरो गोटे द्वारा ओही तरहेँ अनुकृत भऽ सकए। आ ऐ क्रममे कला, साहित्य आ संगीतक समीक्षा वा ओकर गुणक विश्लेषण प्रारम्भ भेल। कला, साहित्य आ संगीतक समाज लेल कोन प्रयोजन, एकर नैतिक मानदण्ड की हुअए, ऐ दिस सेहो प्राच्य आ पाश्चात्य विचारक अपन विचार राखलन्हि। प्लेटो कहै छथि जे कोनो कला नीक नै भऽ सकैए किएक तँ ई सभटा असत्य आ अवास्तविक अछि। मुदा कला, संगीत आ साहित्य कखनो काल स्वान्तः सुखाय सेहो होइत अछि, एकरा पढ़ला, सुनला, देखला आ अनुभव केलासँ प्रसन्नता होइत छै, मानसिक शान्ति भेटै छै, तँ कखनो काल ई उद्वेलित सेहो करैत छै। एरिस्टोटल मुदा कहै छथि जे कलाकार ज्ञानसँ युक्त होइ छथि आ विश्वकेँ बुझबामे सहयोग करै छथि। जगतक सौन्दर्यीकृत प्रस्तुति अछि कला। फ्रायड सभ मनुक्खकेँ रहस्यमयी मानैत छथि। ओ साहित्यिक कृतिकेँ साहित्यकारक विश्लेषण लेल चुनैत छथि तँ नव फ्रायडवादी जैविकक बदला सांस्कृतिक तत्वक प्रधानतापर जोर दैत देखबामे अबैत छथि। नव-समीक्षावाद कृतिक विस्तृत विवरणपर आधारित अछि। उत्तर आधुनिक, अस्तित्ववादी, मानवतावादी, ई सभ विचारधारा दर्शनशास्त्रक विचारधारा थिक। पहिने दर्शनमे विज्ञान, इतिहास, समाज-राजनीति, अर्थशास्त्र, कला-विज्ञान आ भाषा सम्मिलित रहैत छल। मुदा जेना-जेना विज्ञान आ कलाक शाखा सभ विशिष्टता प्राप्त करैत गेल, विशेष कऽ विज्ञान, तँ दर्शनमे गणित आ विज्ञान मैथेमेटिकल लॉजिक धरि सीमित रहि गेल। दार्शनिक आगमन आ निगमनक अध्ययन प्रणाली, विश्लेषणात्मक प्रणाली दिस बढ़ल। मार्क्स, जे दुनियाँ भरिक गरीबक लेल एकटा दैवीय हस्तक्षेपक समान छलाह, द्वन्द्वात्मक प्रणालीकेँ अपन व्याख्याक आधार बनेलन्हि। आइ-काल्हिक डिसकसन वा द्वन्द्व, जइमे पक्ष-विपक्ष, दुनू सम्मिलित अछि, दर्शनक (विशेष कऽ षडदर्शनक)- माधवाचार्यक सर्वदर्शन संग्रह-द्रष्टव्य- खण्डन-मण्डन प्रणालीमे पहिनहिसँ विद्यमान छल। से इतिहासक अन्तक घोषणा केनिहार फ्रांसिस फुकियामा -जे कम्युनिस्ट शासनक समाप्तिपर ई घोषणा कएने छलाह- किछु दिन पहिने ऐसँ पलटि गेलाह। कम्यूनिज्मक समाप्तिक बाद लागल जे इतिहास, जे दूटा विचारधाराक संघर्ष अछि, एकटा विचारधाराक खतम भेलाक बाद समाप्त भऽ गेल। फ्रांसिस फुकियामा घोषित कएलन्हि जे विचारधाराक आपसी झगड़ासँ सृजित इतिहासक ई समाप्ति अछि आ आब मानवक हितक विचारधारा मात्र आगाँ बढ़त। मुदा किछु दिन पहिनहि ओ कहलन्हि जे समाजक भीतर आ राष्ट्रीयताक मध्य एखनो बहुत रास भिन्न विचारधारा बाँचल अछि। जर्मनीक देवाल खसलापर हुनक मान्यता रहन्हि जे द्वन्द्व आधारित इतिहासमे कम्यूनिज्म खतम भेलाक बाद इतिहासक अन्त भऽ गेल अछि कारण दुनियाँ यूनीपोलर भऽ गेल अछि मुदा आब ओ मानै छथि जे वंचितक अस्तित्व सभ ठाम छै आ ओकर सभ्यता आ इतिहास द्वन्द्व उत्पन्न करै छै, आ तेँ इतिहास जारी रहत। उत्तर-आधुनिकतावाद सेहो अपन प्रारम्भिक उत्साहक बाद ठमकि गेल अछि। अस्तित्ववाद, मानवतावाद, प्रगतिवाद, रोमेन्टिसिज्म, समाजशास्त्रीय विश्लेषण, ई सभ संश्लेषणात्मक समीक्षा प्रणालीमे सम्मिलित भऽ अपन अस्तित्व बचेने अछि। साइको-एनेलिसिस वैज्ञानिकतापर आधारित रहबाक कारण द्वन्द्वात्मक प्रणाली जेकाँ अपन अस्तित्व बचेने रहत। उत्तर आधुनिकतावादी दृष्टिकोण अछि विज्ञानक ज्ञानक सम्पूर्णतापर टीका, सत्य-असत्य, अपन-अपन दृष्टिकोणसँ तकर वर्णन, आत्म-केन्द्रित हास्यपूर्ण आ नीक-खराबक भावनाक रहि-रहि खतम हएब, सत्य कखन असत्य भऽ जाएत तकर कोनो ठेकान नै, सतही चिन्तन, आशावादिता तँ नहिए अछि मुदा निराशावादिता सेहो नै, जे अछि तँ से अछि बतहपनी, कोनो चीज एक तरहेँ नै कएक तरहेँ सोचल जा सकैत अछि। दृष्टिकोण, कारण, नियन्त्रण आ योजनाक उत्तर परिणामपर विश्वास नै, वरन संयोगक उत्तर परिणामपर बेशी विश्वास, गणतांत्रिक आ नारीवादी दृष्टिकोण आ लाल झंडा आदिक विचारधाराक संगे प्रतीकक रूपमे हास-परिहास। भूमंडलीकरणक कारणसँ मुख्यधारसँ अलग भेल कतेक समुदायक आ नारीक प्रश्नकेँ उत्तर-आधुनिकता सोझाँ अनलक। विचारधारा आ सार्वभौमिक लक्ष्यक विरोध कएलक मुदा कोनो उत्तर नै दऽ सकल। तहिना उत्तर आधुनिकतावादी विचारक जैक्स देरीदा भाषाकेँ विखण्डित कऽ ई सिद्ध कएलन्हि जे विखण्डित भाग ढेर रास विभिन्न आधारपर आश्रित अछि आ बिना ओकरा बुझने भाषाक अर्थ हम नै लगा सकैत छी। प्रत्यक्षवादक विश्लेषणात्मक दर्शन वस्तुक नै, भाषिक कथन आ अवधारणाक विश्लेषण करैत अछि। विश्लेषणात्मक अथवा तार्किक प्रत्यक्षवाद आ अस्तित्ववादक जन्म विज्ञानक प्रति प्रतिक्रियाक रूपमे भेल। ऐसँ विज्ञानक द्विअर्थी विचारकेँ स्पष्ट कएल गेल। प्रघटनाशास्त्रमे चेतनाक प्रदत्तक प्रदत्त रूपमे अध्ययन होइत अछि। अनुभूति विशिष्ट मानसिक क्रियाक तथ्यक निरीक्षण अछि। वस्तुकेँ निरपेक्ष आ विशुद्ध रूपमे देखबाक ई माध्यम अछि। अस्तित्ववादमे मनुष्ये मात्र मनुष्य अछि। ओ जे किछु निर्माण करैत अछि ओइसँ पृथक ओ किछु नै अछि; सार्त्र कहै छथि जे मनुख स्वतंत्र हेबा लेल अभिशप्त अछि। हेगेलक डायलेक्टिक्स द्वारा विश्लेषण आ संश्लेषणक अंतहीन अंतस्संबंध द्वारा प्रक्रियाक गुण निर्णय आ अस्तित्व निर्णय करबापर जोर देलन्हि। मूल तत्व जतेक गहींर हएत ओतेक स्वरूपसँ दूर रहत आ वास्तविकतासँ लग। क्वान्टम सिद्धान्त आ अनसरटेन्टी प्रिन्सिपल सेहो आधुनिक चिन्तनकेँ प्रभावित कएने अछि। देखाइ पड़एबला वास्तविकता सँ दूर भीतरक आ बाहरक प्रक्रिया सभ शक्ति-ऊर्जाक छोट तत्वक आदान-प्रदानसँ सम्भव होइत अछि। अनिश्चितताक सिद्धान्त द्वारा स्थिति आ स्वरूप अन्दाजसँ निश्चित करए पड़ैत अछि। तीनसँ बेशी डाइमेन्सनक विश्वक परिकल्पना आ स्टीफन हॉकिन्सक -अ ब्रिफ हिस्ट्री ऑफ टाइम- सोझे-सोझी भगवानक अस्तित्वकेँ खतम कऽ रहल अछि कारण ऐसँ भगवानक मृत्युक अवधारणा सेहो सोझाँ आएल अछि। जे शुरू भेल अछि से खतम हएत भलहि ओकर आयु बेशी हुअए। जेना वर्चुअल रिअलिटी वास्तविकताकेँ कृत्रिम रूपेँ सोझाँ आनि चेतनाकेँ ओकरा संग एकाकार करैत अछि तहिना बिना तीनसँ बेशी बीमक परिकल्पनाक हम प्रकाशक गतिसँ जँ सिन्धुघाटी सभ्यतासँ चली तँ तइयो ब्रह्माण्डक पार आइ धरि नै पहुँचि सकब। साहित्यक समक्ष ई सभ वैज्ञानिक आ दार्शनिक तथ्य चुनौतीक रूपमे आएल अछि। होलिस्टिक आकि सम्पूर्णताक समन्वय करए पड़त ! ई दर्शन दार्शनिक सँ वास्तविक तखने बनत। पोस्टस्ट्रक्चरल मेथोडोलोजी भाषाक अर्थ, शब्द, तकर अर्थ, व्याकरणक निअम सँ नै वरन् अर्थ निर्माण प्रक्रियासँ लगबैत अछि। सभ तरहक व्यक्ति, समूह लेल ई विभिन्न अर्थ धारण करैत अछि। भाषा आ विश्वमे कोनो अन्तिम सम्बन्ध नै होइत अछि। शब्द आ ओकर पाठ केर अन्तिम अर्थ वा कोनो विशिष्ट अर्थ नै होइत अछि। आधुनिक आ उत्तर आधुनिक तर्क, वास्तविकता, सम्वाद आ विचारक आदान-प्रदानसँ आधुनिकताक जन्म भेल। नव-वामपंथी आन्दोलन फ्रांसमे आएल आ सर्वनाशवाद आ अराजकतावादी आन्दोलन सन विचारधारा सेहो आएल। ई सभ आधुनिक विचार प्रक्रिया प्रणाली, ओकर आस्था-अवधारणासँ बहार भेल अविश्वासपर आधारित छल। पाठमे नुकाएल अर्थक स्थान-काल संदर्भक परिप्रेक्ष्यमे व्याख्या शुरू भेल आ भाषाकेँ खेलक माध्यम बनाओल गेल- लैंगुएज गेम आ ऐ सभ सत्ताक आ वैधता आ ओकर स्तरीकरणक आलोचनाक रूपमे आएल पोस्टमॉडर्निज्म। कंप्युटर आ सूचना क्रान्ति जइमे कोनो तंत्रांशक निर्माता ओकर निर्माण कए ओकरा विश्वव्यापी अन्तर्जालपर राखि दैत छथि आ ओ तंत्रांश अपन निर्मातासँ स्वतंत्र अपन काज करैत रहैत अछि, किछु ओहनो कार्य जे एकर निर्माता ओकरा लेल निर्मित नै कएने छथि। आ किछु हस्तक्षेप-तंत्रांश जेना वायरस, एकरा मार्गसँ हटाबैत अछि, विध्वंसक बनबैत अछि, तँ ऐ वायरसक एंटी वायरस सेहो एकटा तंत्रांश अछि, जे ओकरा ठीक करैत अछि आ जे ओकरो सँ ठीक नै होइत अछि तखन कम्प्युटरक बैकप लऽ ओकरा फॉर्मेट कऽ देल जाइत अछि- क्लीन स्लेट! पूँजीवादक जनम भेल औद्योगिक क्रान्तिसँ आ आब पोस्ट इन्डस्ट्रियल समाजमे उत्पादनक बदला सूचना आ संचारक महत्व बढ़ि गेल अछि, संगणकक भूमिका समाजमे बढ़ि गेल अछि। मोबाइल, क्रेडिट-कार्ड आ सभ एहन वस्तु चिप्स आधारित अछि। डी कन्सट्रक्शन आ री कन्सट्रक्शन विचार रचना प्रक्रियाक पुनर्गठनकेँ देखबैत अछि जे उत्तर औद्योगिक कालमे चेतनाक निर्माणक नव रूपमे भऽ रहल अछि। इतिहास तँ नै मुदा परम्परागत इतिहासक अन्त भऽ गेल अछि। राज्य, वर्ग, राष्ट्र, दल, समाज, परिवार, नैतिकता, विवाह सभ फेरसँ परिभाषित कएल जा रहल अछि। मारते रास परिवर्तनक परिणामसँ विखंडित भऽ सन्दर्भहीन भऽ गेल अछि कतेक संस्था। इन्फॉरमेशन सोसाइटी किंवा सूचना-आधारित-समाज एकटा ओहेन समाज अछि जइमे सूचनाक निर्माण, वितरण, प्रसार, उपयोग, एकीकरण आ संशोधन एकटा महत्त्वपूर्ण आर्थिक, राजनीतिक आ सांस्कृतिक क्रिया होइत अछि। आ ऐ समाजक भाग हेबामे समर्थ लोक अंकीय वा डिजिटल नागरिक कहल जाइ छथि। ऐ उत्तर औद्योगिक समाजमे सूचना-प्रौद्योगिकी उत्पादन, अर्थव्यवस्था आ समाजकेँ निर्धारित करैत अछि। उत्तर-आधुनिक समाज, उत्तर औद्योगिक समाज आदि संकल्पना सँ ई निकट अछि। अर्थशास्त्री फ्रिट्ज मैचलप एकर संकल्पना देने छलाह। हुनकर ज्ञान-उद्योगक धारणा शिक्षा, शोध आ विकास, मीडिआ, सूचना प्रौद्योगिकी आ सूचना सेवाक पाँचटा अंगपर आधारित छल। प्रौद्योगिकी आ सूचनाक समाजपर भेल प्रभाव एतए दर्शित होइत अछि। अंकीय वा डिजिटल विभाजन एकटा ज्ञानक विभाजन, सामाजिक विभाजन आ आर्थिक विभाजन देखबैत अछि आ बिना भेदभावक एकटा सूचना समाजक निर्माणक आवश्यकता देखाबैत अछि, जइसँ सूचना प्रौद्योगिकीपर विकासशील देशक सार्वभौम अधिकार रहए। मानवाधिकार आ सूचना प्रौद्योगिकीक मध्य व्यक्तिक एकान्तक अधिकार सेहो सम्मिलित अछि। विद्वान, मानवाधिकार कार्यकर्ता आ आन सभ व्यक्तिक अभिव्यक्तिक स्वतंत्रता, सूचनाक अधिकार, एकान्त, भेदभाव, स्त्री-समानता, प्रज्ञात्मक संपत्ति, राजनीतिक भागीदारी आ संगठनक मेलक संदर्भमे ऐ गपपर चरचा शुरू भेल अछि जे सूचना आ जनसंचार प्रौद्योगिकी आधारित सूचना समाजमे मानवाधिकारकेँ बल भेटत आकि ओकर हानि हएत। ऑनलाइन पत्राचारक गोपनीयताक अधिकार, अन्तर्जालक सामग्रीक सांस्कृतिक आ भाषायी विविधता आ मीडिया शिक्षा, सूचना समाजक तकनीकी अओजार ओकर अधिकार आ स्वतंत्रतासँ लाभान्वित होइत अछि आ समाजक समग्र विकास, अधिकार आ स्वतंत्रताक सार्वभौमता, अधिकारक आपसी मतभिन्नता, स्वतंत्रता आ मूल्य निरूपणमे सहभागी होइत अछि। ऐसँ सूचना, ज्ञान आ संस्कृतिमे ई सरल पइठक वातावरण बनैत अछि आ ई उपयोगकर्ताकेँ वैश्विक सूचना समाजक अभिनेताक रूपमे परिणत करैत अछि। कारण ई उपयोगकर्ताकेँ पहिनेसँ बेशी अभिव्यक्तिक स्वतंत्रता आ नव सामग्री आ नव सामाजिक अन्तर्जाल-तंत्र निर्माण करबाक सामर्थ्य दैत अछि। ऐसँ एकटा नव विधि, आर्थिक आ सामाजिक मॉडेलक आवश्यकता सेहो अनूभूत कएल जा रहल अछि जइमे साझी कर्तव्य, ज्ञान आ मेल आधार बनत। बच्चाक हित एकटा आर चिन्ता अछि जे पैघक हितसँ सर्वदा ऊपर रखबाक चाही। आधुनिक समाजक आर्थिक, सामाजिक आ सांस्कृतिक धनक एकत्र करबाक प्रवृत्ति सूचना समाजमे बढ़ल अछि आ प्रौद्योगिकी एकटा आधारभूत बेरोजगारी अनलक अछि। गरीबी, मजदूरक अधिकार आ कल्याणकारी राज्यक संकल्पना लाभ-हानिक आगाँ कतौ पाछाँ छूटल जा रहल अछि। आब मात्र किछुए अभिनेता चाही। प्रकाशक लोकनि सेहो मात्र किछु बेशी बिकएबला पोथीक लेखकक प्रचार करै छथि। यएह स्थिति रंगमंच, पेंटिंग, सिनेमा आ आन-आन क्षेत्रमे सेहो दृष्टिगोचर भऽ रहल अछि। मुदा सूचना सर्वदा लाभकारी नै होइत अछि। ई मात्र कला, ग्रंथ धरि सीमित नै अछि वरन सट्टा बाजार आ प्रायोजित सर्वेक्षण रपट सेहो ऐमे सम्मिलित अछि। समए आ स्थानक बीचक दूरीकेँ ई कम करैत अछि आ दुनूक बीचमे एकटा सन्तुलन बनबैत अछि। मानवक गरिमा मानवक जन्म आधारित सामाजिक स्थानसँ हटि कऽ मानवक गरिमाक सर्वभौमिकताक अधिकारपर बल दैत अछि। मुक्ति आ स्त्री-मुक्ति आन्दोलन ऐ दिशाक प्रयास अछि। दुनू विश्वयुद्ध आ फासिज्मक चुनौतीक बाद १० दिसम्बर १९४८ केँ संयुक्त राष्ट्र संघक महासभा द्वारा मानवाधिकारक सार्वभौम घोषणाक उद्घोषणा कएल गेल आ एकरा अंगीकार कएल गेल। ई घोषणा राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक आ धार्मिक भेदभाव रहित एकटा सामान्य मानदण्ड प्रस्तुत करैत अछि जे सभ जन-समाज आ सभ राष्ट्र लेल अछि। सूचनाक स्वतंत्र उपयोग सीमित अछि, लोकक एकान्त खतम भऽ रहल अछि। बिल गेट्ससँ जखन हुनकर भारत यात्राक क्रममे पूछल गेल छलन्हि जे माइक्रोसॉफ्टक एक्स-बॉक्स भारतमे पाइरेसीक डरसँ देरीसँ उतारल गेल तँ ओ कहने रहथि जे माइक्रोसॉफ्ट कहियो कोनो उत्पाद पाइरेसीक डरसँ देरीसँ नै आनलक। स्पैम आ पाइरेसीक डर खतम हेबाक चाही। सूचना समाज वएह समाज छी जकर बीचमे हम सभ आइ-काल्हि रहि रहल छी। लोकतंत्र आ मानवाधिकारक सम्मान सूचना-समाज आ उत्तर सूचना-समाजमे होइत रहत। अभिव्यक्तिक स्वतंत्रता, एकान्तक अधिकार, सूचना साझी करबाक अधिकार आ सूचना धरि पहुँचक अधिकार, जे सूचनाक संचारसँ सम्बन्धित अछि, ई सभ राज्य द्वारा आ सूचना-समाजक बाजारवादी झुकावक कारण खतराक अनुभूतिसँ त्रस्त अछि। अन्तर्जाल लोकक मीडिआ अछि आ एकटा एहन प्रणाली अछि जे लोकक बीच सम्वाद स्थापित करैत अछि। ऐसँ संचार-माध्यमक मठाधीश लोकनिक गढ़ टुटैत अछि। अन्तर्जालमे सामान्य रूपसँ कोनो सम्पादक नै होइत छथि। एतए लोक विषयक आ सामग्रीक निर्माण कऽ स्वयं ओकर संचार करै छथि। ऐसँ कतेक रास सामाजिक सम्वादक प्रारम्भ होइत अछि मुदा कतेक रास समाज-विरोधी सामग्री सेहो अबैत अछि। तँ की ओइपर प्रतिबन्ध हेबाक चाही। मुदा जँ सॉफ्टवेयरक माध्यमसँ मशीनकेँ सामग्रीपर प्रतिबन्ध लगेबाक अधिकार देब तखन ई अभिव्यक्तिक स्वतंत्रतापर पैघ आघात हएत। भारतमे बौद्धिक सम्पदाक अधिकार लेखकक मृत्युक ६० बरख बादो प्रकाशन आ वितरणक अधिकार ओकर उत्तराधिकारीकेँ दैत अछि। अन्तर्जालमे सेहो पाइरेसीकेँ प्रतिबन्धित करए पड़त आ लेखकक मृत्युक ६० बरख बाद धरि लेखकक अधिकार ओकर सामग्रीपर सैद्धांतिके नै प्रायोगिक रूपसँ रहए, से व्यवस्था करए पड़त। मुदा पेटेन्टक बेशी प्रयोग विकाशसील देशक सूचना अभिगमनमे बाधक हएत आ प्रौद्योगिकीक विकासमे सेहो बाधा पहुँचाओत। कॉपीराइटसँ सांस्कृतिक विकास मुदा हएत, जेना संगीत, फिल्म, चित्र-शृंखला(कॉमिक्स) आ चित्रकथाक विकास। डिजिटल वातावरणमे प्रतिकृतिक बिना अहाँ अन्तर्जालपर सेहो सामग्री नै देखि सकब, से ऑफ-लाइन कॉपीराइट आ ऑनलाइन कॉपीराइट दुनूमे थोड़बेक अन्तर अछि। ऑनलाइन कॉपीराइट प्रतिकृतिकेँ सेहो प्रतिबन्धित करैत अछि आ प्रतिकृति कएल सामग्रीकेँ दोसर वस्तुमे जोड़ब वा संशोधित करब सेहो बड्ड सरल अछि। से नाम आ चित्र बिना ओकर निर्माताक अनुमतिक नै प्रयोग हुअए, दोसराक व्यक्तिगत वार्तालाप-चैटिंग-मे हस्तक्षेप नै हुअए आ दोसराक विरुद्ध कोनो एहन बयानबाजी नै हुअए जइसँ कोनो व्यक्तिक विरुद्ध गलत धारणा बनए। तहिना नौकरी-प्रदाता द्वारा कोनो प्रकारक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण अपन कर्मचारीक नियन्त्रण लेल लगबैत अछि तँ से अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संघक दिशा-निर्देशक अनुरूप हेबाक चाही। ई-पत्रमे अनपेक्षित सन्देश आ चिकित्सकीय रिपोर्टक अनपेक्षित संग्रह आ उपयोग सेहो मानवाधिकारक हनन अछि। अन्तर्जालक उपयोग मुदा सीमित अछि कारण बहुत रास सामग्री आ तंत्रांश मंगनीमे उपलब्ध नै अछि आ महग अछि, डिजिटल विभाजन शिक्षाक स्तरकेँ आर बेशी देखार करैत अछि। शारीरिक श्रमक बदलामे मानसिक श्रमक एतए बेशी उपयोग होइत अछि, से ई आशा रहए जे स्त्री-असमानता सूचना-समाजमे घटत मुदा सर्वेक्षण देखबैत अछि जे महिलाक पइठ सूचना प्रौद्योगिकीमे कम छन्हि। इलेक्ट्रॉनिक लाइब्रेरी आ ब्रेल-इनेबल कएल/ ध्वनि-इनेबल कएल कम्प्यूटर स्क्रीन/ इलेक्ट्रॉनिक लाइब्रेरी विकलांग आ अन्ध विकलांग लेल घर पर रहि ई-वाणिज्य करबामे सहायता देत। मुदा ऐ क्षेत्रमे कएल शोध आ ओकर परिणाम महग रहबाक कारणसँ ओतेक लाभ नै दऽ सकल अछि। बाल, वृद्ध, विकलांग, स्त्री, कामगार, प्रवासी-कामगार आ दोसर सामाजिक रूपसँ अब्बल वर्ग सूचना समाजमे सेहो अपनाकेँ अब्बल अनुभव करैत छथि, मुदा जँ-जँ हिनका लोकनिक पइठ सूचना प्रौद्योगिकीमे बढ़त तँ तँ सूचना-समाजमे असमानता घटत। नीक साहित्य/ कला त्वरित उपस्थापनक आधारपर नै बनत वरन ओइमे तीक्ष्णतासँ उपस्थापित मानव-मूल्य, सामाजिक समरसताक तत्व आ समानता-न्याय आधारित सामाजिक मान्यताक सिद्धान्त आधार बनत। समाज ओइ आधारपर कोना आगू बढ़ए से संदेश तीक्ष्णतासँ आबैए वा नै से देखए पड़त। पाठकक मनसि बन्धनसँ मुक्त होइत अछि वा नै, ओइमे दोसराक नेतृत्व करबाक क्षमता आ आत्मबल अबै छै वा नै, ओकर चारित्रिक निर्माणक आ श्रमक प्रति सम्मानक प्रति सन्देह दूर होइ छै वा नै- ई सभटा तथ्य लघुकथाक मानदंड बनत। कात-करोटमे रहनिहार तेहन काज कऽ जाथि जे सुविधासम्पन्न बुते नै सम्भव अछि, आ से कात-करोटमे रहनिहारक आत्मबल बढ़लेसँ सम्भव हएत। हीन भावनासँ ग्रस्त साहित्य कल्याणकारी कोना भऽ सकत? बदलैत सामाजिक-आर्थिक-राजनैतिक-धार्मिक समीकरणक परिप्रेक्ष्यमे एकभग्गू प्रस्तुतिक रेखांकन, कथाकार-कविक व्यक्तिगत जिनगीक अदृढ़ता, चाहे ओ वादक प्रति हुअए वा जाति-धर्मक प्रति, साहित्यमे देखार भइए जाइ छै। शोषक द्वारा शोषितपर कएल उपकार वा अपराधबोधक अन्तर्गत लिखल जाएबला कथामे जे पैघत्वक (जे हीन भावनाक एकटा रूप अछि) भावना होइ छै, तकरा चिन्हित कएल जाए। मेडियोक्रिटीकेँ चिन्हित करू। तकिया कलाम आ चालू ब्रेकिंग न्यूज आधुनिकताक नामपर, युगक प्रमेयकेँ माटि देबाक विचार ऐमे नै भेटत। आधुनिकीकरण, लोकतंत्रीकरण, राष्ट्र-राज्य संकल्पक कार्यान्वयन, प्रशासनिक-वैधानिक विकास, जन सहभागितामे वृद्धि, स्थायित्व आ क्रमबद्ध परिवर्तनक क्षमता, सत्ताक गतिशीलता, उद्योगीकरण; स्वतंत्रता प्राप्तिक बाद नवीन राज्यक राजनैतिक-सामाजिक-आर्थिक-सांस्कृतिक समस्या-परिवर्तन आ एकीकरणक प्रक्रिया कखनो काल परस्पर विरोधी होइत अछि। सामुदायिकताक विकास, मनोवैज्ञानिक आ शैक्षिक प्रक्रियापर ध्यान देब सेहो आवश्यक। आदिवासी जेना सतार, गिदरमारा (बंजारा) आदि विविधता, प्रकृतिसँ लग, प्रकृति-पूजा, सरलता, निश्छलता, कृतज्ञता आ विकासक स्तरकेँ प्रतिबिम्बित करैत अछि। व्यक्तिक प्रतिष्ठा स्थान-जाति आधारित होइत अछि। किछु प्रतिष्ठा आ विशेषाधिकार प्राप्त जाति अछि तँ किछुसँ तिरस्कार कएल जाइ छै आ हुनकर जीवन कठिन अछि। ऋगवेदमे महिला अपाला, घोषा, श्रद्धा, शची, सार्पराज्ञी, यमी, वैवस्वती, देव जामय, इन्द्राणी, शश्वती, रोमशा, गोधा, उर्वशी, सूर्या, अदिति, नदी, लोपामुद्रा, विश्ववारा, वाक् जुहू, सरमा आ यमी ऐ २१ टा ऋषिकाक वर्णन अछि। महिला आ बाल-विकासमे महिलाकेँ अधिकार दिआबए लेल शिक्षा-प्रणालीकेँ सक्रिय करबापर आ पाठ्यक्रममे महिला अध्ययनपर जोर देबापर ध्यान देमए पड़त। महिलाक व्यावसायिक आ तकनीकी शिक्षामे प्रतिशत बढ़ाओल जाए। स्त्री-स्वातंत्र्यवाद, महिला आन्दोलन ऐ दिशामे प्रभाव उत्पन्न केलक अछि। धर्मनिरपेक्ष- राजनैतिक संस्था संपूर्ण समुदायक आर्थिक आ सामाजिक हितपर आधारित, धर्म-नस्ल-पंथ भेद रहित सामाजिक मूल्यकेँ बढ़ाबैमे सहायक हएत। विकास आर्थिकसँ पहिने जे शैक्षिक हुअए तँ जनसामान्य ओइ विकासमे साझी भऽ सकैए। ऐसँ सर्जन क्षमता बढ़ैत अछि आ लोकमे उत्तरदायित्वक बोध होइत अछि। विज्ञान आ प्रौद्योगिकीक कारण विकसित आ अविकसित (विकासशील) राष्ट्रक बीचक अंतरक कारण मानवीय समस्या, बीमारी, अज्ञानता, असुरक्षाक समाधान- आकांक्षा-आशा आ सुविधाक असीमित विस्तार आ आधारक बीच सामंजस्यमे वृद्धि भेल अछि। विधि-व्यवस्थाक निर्धन आ पिछड़ल वर्गकेँ न्याय दिअएबामे प्रयोग हेबाक चाही। नागरिक स्वतंत्रता, मानवक लोकतांत्रिक अधिकार, मानवक स्वतंत्र चिन्तन, क्षमतापूर्ण समाजक सृष्टि, प्रतिबन्ध आ दबाबसँ मुक्ति, ऐ सभ मूल्यक संग प्रेसक -शासक आ शासितक ई कड़ी- सामाजिक-आर्थिक-राजनैतिक जीवनमे महत्वपूर्ण भूमिका अछि। मुदा आब प्रभावशाली विज्ञापन एजेंसी जनमतकेँ प्रभावित कएनिहार सेहो सिद्ध भऽ रहल अछि। नव संस्थाक निर्माण वा वर्तमानमे सुधार, सामन्तवादी, जनजातीय, जातीय आ पंथगत निष्ठाक विरुद्ध, लोकतंत्र, उदारवाद, गणतंत्रवाद, संविधानवाद, समाजवाद, समतावाद, सांवैधानिक अधिकारक अस्तित्व, समएबद्ध जनप्रिय चुनाव, जन-संप्रभुता, संघीय शक्ति विभाजन, जनमतक महत्व, लोक-प्रशासनिक प्रक्रिया-अभिक्रम, दलीय हित-समूहीकरण, सर्वोच्च व्यवस्थापिका, उत्तरदायी कार्यपालिका आ स्वतंत्र न्यायपालिका अपन भूमिकाक निर्वहण कऽ रहल अछि। जल-थल-वायुक भौतिक रासायनिक जैविक गुणमे हानिकारक परिवर्तन कऽ प्रदूषण, प्रकृति असंतुलन उत्पन्न भऽ रहल अछि। मिकेल फोकौल्ट कहै छथि जे ज्ञान आ सत्य बनाओल जाइत अछि। डेलीयूज आ गुटारी कहै छथि जे हम सभ इच्छा ऐ द्वारे करै छी कारण हम सभ इच्छा मशीन छी। मिकाहिल बखतिन भाषाकेँ सामाजिक क्रियाक रूपमे लै छथि आ हुनकर कार्य उपन्यासपर अछि। रूसक रूपवादी साहित्यकेँ मात्र भाषाक विशिष्ट प्रयोग मानै छथि। जीन फ्रान्कोइस लियोटार्डक अनुसार सत्यक आ इतिहासक सत्यता मात्र आभासी अछि। बौड्रीलार्ड कहै छथि जे विज्ञापन आ दूरदर्शन सत्य आ आभासीक बीच भेद मेटा देने अछि। दुनू उत्तर आधुनिकताक मुख्य विचारक छथि। लाकानक विशेषता छन्हि जे ओ फ्रायडक पद्धतिक भाषिकी अनुप्रयोग केलन्हि अछि। ओ कहै छथि जे अचेतनताक संरचना भाषा सन छै। जखन बच्चा भाषा सीखैए तखन ओकरा एकटा चेन्ह लेल एकटा शब्द सिखाओल जाइत छै। इच्छा, त्रुटि आ आन ई तीनटा तथ्य लाकान नीक जकाँ राखै छथि। इच्छा, आवश्यकता आ माँगनाइ, दुनू अछि मुदा एकरा ऐ दू रूपमे विखंडित नै कएल जा सकैत अछि। आनक वर्णनमे त्रुटि आ रिक्तता अबैत अछि। विषय अर्थक क्षणिक प्रभाव अछि आ ई आन सन हएत जखन ई आभासी हएत आ त्रुटिक कारण बनत, जइसँ इच्छाक उदय हएत। उत्तर उपनिवेशवादक तीन विचारक छथि- होमी भाभा (फोकौल्ट आ लाकानसँ लग), गायत्री स्पीवाक (फोकौल्ट आ डेरीडासँ लग) आ एडवर्ड सईद (फोकौल्टसँ लग) जे उपनिवेशवादीक पूर्वक धूर्तताक, शिथिलता आदिक धारणाक लेल कएल गेल कार्य आ सिद्धांतीकरणक व्याख्या करै छथि। रेमण्ड विलियम्सक संस्कृतिक अध्ययन साहित्यक आर्थिक स्थितिसँ सम्बन्ध देखबैत अछि। नव इतिहासवाद इतिहासक शब्दशास्त्र आ शब्दशास्त्रक ऐतिहासिकताक तुलना करैत अछि। इलाइन शोआल्टर महिला लेखनक मानसिक, जैविक आ भाषायी विशेषताकेँ चिन्हित करै छथि। सिमोन डी. बेवोइर नारीक नारीक प्रति प्रतिबद्धतामे वर्ग आ जातिकेँ (जकर बादक नारीवादी सिद्धांत विरोध केलक) बाधक मानै छथि। वर्जीनिया वुल्फ नारी लेखक लेल आर्थिक स्वतंत्रता आ निजताकेँ आवश्यक मानै छथि, हिनकर विचारकेँ क्रान्तिकारी नै मानल गेल। मेरी वोल्स्टोनक्राफ्ट नारी शिक्षामे क्रान्ति आ औचित्यक शिक्षाकेँ सम्मिलित करबापर जोर देलनि। नव समीक्षा- इलिएट कवितामे भावनाक प्रधानताक विरोध कएलन्हि आ एकरा गएर वैयक्तिक बनेबाक आग्रह केलनि। समीक्षकक काज लोकक रुचिमे सुधार करब सेहो अछि। विमसैट आ वर्डस्ले कहलनि जे कविक उद्देश्य वा ऐतिहासिक अध्ययनपर समीक्षा आधारित नै रहत। ई पाठकपर पड़ल भावनात्मक प्रभावपर सेहो आधारित नै रहत, कारण से सापेक्ष अछि, ओ आधारित रहत वास्तविक शब्दशास्त्रपर। फिलिप सिडनीसँ अंग्रेजी समीक्षाक प्रारम्भ देखि सकै छी, ओ कविताकेँ सौन्दर्य, अर्थ आ मानवीय हितमे देखलन्हि। जॉन ड्राइडन प्राचीन साहित्यमे नैतिक प्रवचनपर आ एकर लाभहानिपर विचार केलनि। सैमुअल जॉनसन सेक्सपिअरक नाटकमे हास्य आ दुखद तत्वपर लिखलन्हि। रूसोक रोमांशवाद मनुक्खक नीक हेबापर शंका नै करैए (क्लासिकल समीक्षक शंका करै छथि मुदा नव-क्लैसिकल कहै छथि जे मानव स्वभावसँ दूषित अछि मुदा संस्था ओकरा नीक बना सकैए) मुदा संगे ई कहैए जे संस्था सभ दूषित अछि आ मात्र दूषित लोकक मदति करैए। रोमांशवाद कविताक व्यक्तिगत अनुभव हेबाक गप कहैए। आधुनिक स्थितिवाद (साहित्यक अवस्थितिपर कोनो प्रश्न चिन्ह नै) पर संरचनावाद प्रहार केलक आ तकरा बाद लेखक स्वयं लिखल टेकस्टक विश्लेषण करबाक अधिकार गमेलक। उत्तर संरचनावाद कहलक जे साहित्य ओइसँ आगाँक वस्तु अछि जे संरचनावाद बुझै अछि। उत्तर-संरचनावादक एकटा प्रकार अछि उत्तर आधुनिकता। उत्तर संरचनावाद कहलक जे साहित्यमे संरचना, संस्कृति आ सिद्धान्त मध्य कार्य करैत अछि जत्तऽ किछु भाव आ सोच वंचित अछि जे निरन्तरताक विरोध करैए। विखण्डनवाद आ उत्तर आधुनिकता उत्तर संरचनावादक बाद आएल। उत्तर उपनिवेशवाद उपनिवेशक नव रूपकेँ नै मानैए आ अव्यवस्थाक सिद्धांत जेना असफल उद्देश्यकेँ उचित परिणाम नै भेटबाक कारण मानैए। संरचनावाद दमित करैबला पाश्चात्य व्यवस्था आ समाजपर चोट करैए आ ऐ सँ मार्क्सवादकेँ बल भेटलै (अलथूजर)। आधुनिकतावादी-स्थितिवादी, नव समीक्षा, संरचनावाद आ उत्तर संरचनावादक बाद विखण्डनवाद आ उत्तर आधुनिकतावाद आएल जकरा विलम्बित पूँजीवाद कहल गेल (फ्रेडरिक जेनसन)। अठारहम शताब्दीमे आधुनिक माने छल जड़विहीन मुदा बीसम शताब्दीक प्रारम्भमे एकर अर्थ प्रगतिवादी भऽ गेल। १९७० ई. क बाद आधुनिक शब्द एकटा सिद्धांतक रूप लऽ लेलक से उत्तर-आधुनिक शब्द पारिभाषिक भेल जकर नजरिमे लौकिक महत्वपूर्ण नै रहल। आधुनिक काल धरिक सभ जीवन आ इतिहास अमहत्वपूर्ण भेल आ खतम भेल। ई सिद्धांत भेल इतिहासोत्तर, विकासोत्तर आ कारणोत्तर। सत्य आ आपसी जुड़ावक महत्व खतम भऽ गेल। जादुइ वास्तविकतावादमे वास्तविक स्थितिमे जादुइ वस्तुजात घोसिआओल जाइत अछि। स्पेनिश उपन्यासकार गैब्रिअल गार्सिया मार्क्विसक -वन हंड्रेड ईयर्स ऑफ सोलीच्यूड- आ सलमान रुस्डीक -मिडनाइट्स चिल्ड्रेन- ऐ तरहक उपन्यास अछि। रचनाकार ऐ तरहक प्रयोग कऽ वास्तविकताकेँ नीक जकाँ बुझबाक प्रयास करै छथि। जोसेफ कोनरेड उपन्यासकेँ इतिहास कहै छथि। जोसेफ कोनरेड पोलिश भाषी रहथि मुदा अंग्रेजीक प्रसिद्ध उपन्यासकार छथि, मुदा धाराप्रवाह अंग्रेजी नै बजैत रहथि। रोलेंड बार्थेज कहै छथि जे उपन्यास इतिहास सेहो छी आ उपन्यास इतिहासक विरोध सेहो करैए। रोलेंड बार्थेज फ्रांसक साहित्यिक सिद्धांकार रहथि आ हिनकर लेखनीक प्रभाव संरचनावादी, मार्क्सवादी आ उत्तर संरचनावादी साहित्यिक सिद्धांतपर पड़ल। उत्तर आधुनिक पाश्चात्य बुर्जुआ दृश्य-श्रव्य मीडियाक प्रयोक कऽ असमता, अन्याय आ वंचितक अवधारणाकेँ मात्र शब्द कहै छथि जे समता, प्राप्ति आ न्यायक लगक शब्द अछि। गरीबी जे पाश्चात्यमे समस्या नै अछि से आइ भारतमे पैघ समस्या अछि। उत्तर आधुनिकता नारीवादक आ मार्क्सवादक विरोधमे अछि आ एकर नारीवाद आ मार्क्सवाद विरोध केलक अछि। ऐतिहासिक विश्लेषणक पक्षमे मार्क्सवाद अछि आ ओइसँ ओ अपन सिद्धांत फेरसँ सशक्त केलक अछि, संरचनावाद-उत्तर-संरचनावाद आ उत्तर आधुनिकतावादक परिप्रेक्ष्यमे। मार्क्सवाद लौकिक पक्षपर जोर दैत अछि मुदा तेँ ई उपयोगितावाद आ चार्वक दर्शनक लग नै अछि, कारण उपयोगितावाद आ चार्वकवाद मात्र शारीरिक आवश्यकताकेँ ध्यानमे रखैत अछि। नारीवादी दृष्टिकोण सेहो उत्तर आधुनिकतावादक यथास्थितिवादक विरोध केलक अछि कारण यावत से खतम नै हएत ताधरि नारीक स्थितिमे सुधार नै आओत। देवता माने प्रतिपाद्य विषय नै कि गॉड (जेना ग्रिफिथ कहने छथि।) मन्त्रार्थमे महर्षि पतञ्जलिक वैज्ञानिक मन्तव्य -यच्छब्द आह तदस्माकं प्रमाणम्- माने जे शब्द आकि मंत्रक पद कहैत अछि सएह हमरा लेल प्रमाण अछि- एकर अर्थ बादमे वेदे प्रमाण अछि- गलत रूपेँ भेल। प्लेटो कहै छथि जे कोनो कला नीक नै भऽ सकैए किएक तँ ई सभटा असत्य आ अवास्तविक अछि। प्लेटोक ई विचार स्पार्टासँ एथेंसक सैन्य संगठनक न्यूनताकेँ देखैत देल विचारक रूपमे सेहो देखल जएबाक चाही, काव्य/ नाटकक ऐ रूपेँ विरोध केलन्हि जे सम्वादकेँ रटि कऽ बाजैसँ लोक एकटा कृत्रिम जीवन दिस आकर्षित हएत। अरिस्टोटल कविताकेँ मात्र अनुकृति नै मानै छथि, ओ ऐ मे दर्शन आ सार्वभौम सत्य सेहो देखै छथि। ओ नाटकक दुखान्तकेँ आ अनुकृतिकेँ निसास छोड़ैबला कहै छथि जे आनन्द, दया आ भयक बाद अबैत अछि। सम्वाद दू तरेहेँ भऽ सकैए, अभिभाषण आ गप द्वारा। गपमे दार्शनिक तत्व कम रहत। प्राचीन ग्रीसमे कविता भगवानक सनेस बूझल जाइत छल। एरिस्टोफिनीस नीक आ अधला ऐ दू तरहक कविता देखै छथि, तँ थियोफ्रेस्टस कठोर, उत्कृष्ट आ भव्य ऐ तीन तरहेँ कविताकेँ देखै छथि। कविता आ संगीत अभिन्न अछि। मुदा यूरोपक सिम्फोनी जइमे ढेर रास वादन एके संगे विभिन्न लयमे होइत अछि, सिद्धांतमे अन्तर अनलक। यएह सभ किछु नाटकक स्टेज लेल सेहो लागू भेल। डेरीडाक विखण्डन पद्धति ऊँच स्थान प्राप्त रचना/ लेखक केँ नीचाँ लऽ अनैत अछि आ निचुलकाकेँ ऊपर। रोलेण्ड बार्थेस लिखै छथि जे जखन कृति रचनाकारसँ पृथक भऽ जाइए आ ओकर विश्लेषण स्वतंत्र रूपेँ होमए लगै छै तखन कृति महत्वपूर्ण भऽ जाइए जकरा ओ रचनाकारक मृत होएब कहै छथि। उत्तर-संरचनावाद संरचनावादक सम्पूर्ण आ सुगठित हेबाक अवधारणाकेँ माटि देलक। सौसरक भाषा सिद्धान्त- बाजब/ लिखब, वास्तविक समएक साहित्य वा ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्यक शब्दशास्त्र, महत्वपूर्ण कोनो कृति वा मनुक्ख अछि/ महत्ता एकटा भाव अछि, वास्तविक समएमे भाषा वा एकर ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य; मुदा एकरा सेहो डेरीडाक विखण्डन सिद्धान्त उल्टा-पल्टा करए लागल। लिंग एकटा जैव वैज्ञानिक तथ्य अछि मुदा महिला/ पुरुषक सिद्धान्त सामाजिकताक प्रतिफल अछि। महिला सापेक्ष साहित्य कला पुरुष द्वारा निर्मित अछि आ पुरुखक नजरिसँ महिलाकेँ देखैत अछि। साहित्यक नारीवादी सिद्धान्त ऐ समस्याक तहमे जाइए। मिथिलाक सन्दर्भमे महिलाक स्थिति ओतेक खराप नै छै मुदा मैथिली साहित्यक एकभगाह प्रवृत्तिक कारण उच्च वर्गक नारीक खराप स्थिति साहित्यमे आएल। आधुनिकीकरण तथाकथित सामाजिक रूपसँ निचुलका जाति सभमे सेहो नारीक स्थितिमे अवनति अनलक अछि। दोसर एकटा आर गप अछि जे जाति आ धर्म नारीक अधिकारकेँ कएक हीसमे बाँटि देने अछि। नारीवादी दृष्टिकोण सेहो कहैए जे सभटा सिद्धांत पुरुष द्वारा बनाओल गेल, से ओ पूर्ण व्याख्या नै कऽ सकैए। सरल मानवतावाद सिद्धांतक विरुद्ध आएल। सरल मानवतावाद कहैए जे साहित्यक सिद्धान्तक बदलामे रचनाक की मानवीय दृष्टिकोण छै, ओइमे सार्थकता छै आकि नै से सामान्य बुद्धिसँ कएल जा सकैए। अपन बुद्धिक प्रयोग कऽ रचनाक गुणवत्ता अहाँ देखि सकै छी, कोनो साहित्यिक सिद्धान्तक आवश्यकता समीक्षा लेल नै छै। मुदा सरल मानवतावाद सेहो एकटा सिद्धांत बनि गेल। सार्थक साहित्यक निर्माण एकर अन्तर्गत भेल। पोथी समीक्षामे अत्यधिक आलोचनासँ बचबाक चाही। समीक्षककेँ अपन विद्वत्ता प्रदर्शन करबासँ बचबाक चाही। अत्यधिक आलोचनाक क्रममे लोक अपन विद्वता देखबऽ लगै छथि। आलोचनाक क्रममे संयम रखबाक चाही, खराप शब्दावलीक प्रयोग समीक्षकक खराप लालन-पालन देखबैत अछि। पोथीक बिना पढ़ने समीक्षा अनैतिक अछि। उदाहरणस्वरूप कर्मधारयमे धूमकेतुक विषयमे तारानन्द वियोगी लिखै छथि- मिथिलाक संस्कृतिमे युग-युगसँ प्रतिष्ठापित साम्प्रदायिक सौहार्दकेँ रेखांकित करैत हिनक कथा -नमाजे शुकराना- बहुत महत्वपूर्ण थिक। (कर्मधारय, पृ. १२७) (!) कथाक शीर्ष देखि कऽ ऐ तरहक समीक्षा भेल अछि कारण ऐ कथामे हाजी सैहेबक नमाजक समएमे पिंजराक सुग्गा -सीता...राम...।- बजैए आ सुग्गाक पिंजराकेँ हाजी सैहेब ताधरि महजिदक देबालपर पटकै छथि जाधरि सूगा मरि नै जाइए। सईदा कानऽ लगैए आ कथा खतम भऽ जाइए। आ ई कथा समीक्षकक मतमे साम्प्रदायिक सौहार्दकेँ रेखांकित करैए! काव्यक भारतीय विचार: मोक्षक लेल कलाक अवधारणा, जेना नटराजक मुद्रा देखू। सृजन आ नाश दुनूक लय देखा पड़त। स्थायी भावक गाढ़ भऽ सीझि कऽ रस बनब- आ ऐ सन कतेक रसक सीता आ राम अनुभव केलन्हि (देखू वाल्मीकि रामायण)। कृष्ण भारतीय कर्मवादक शिक्षक छथि तँ संगमे रसिक सेहो। कलाक स्वाद लेल रस सिद्धांतक आवश्यकता भेल आ भरत नाट्यशास्त्र लिखलन्हि। अभिनवगुप्त आनन्दवर्धनक ध्यन्यालोकपर भाष्य लिखलन्हि। भामह ६अम शताब्दी, दण्डी सातम शताब्दी आ रुद्रट ९अम शताब्दीमे एकरा आगाँ बढ़ेलन्हि। रस सिद्धान्त: भरत:- नाटकक प्रभावसँ रस उत्पत्ति होइत अछि। नाटक कथी लेल? नाटक रसक अभिनय लेल आ संगे रसक उत्पत्ति लेल सेहो। रस कोना बहराइए? रस बहराइए कारण (विभाव), परिणाम (अनुभाव) आ संग लागल आन वस्तु (व्यभिचारी)सँ। स्थायीभाव गाढ़ भऽ सीझि कऽ रस बनैए, जकर स्वाद हम लऽ सकै छी। भट्ट लोलट:- स्थायीभाव कारण-परिणाम द्वारा गाढ़ भऽ रस बनैत अछि। अभिनेता-अभिनेत्री अनुसन्धान द्वारा आ कल्पना द्वारा रसक अनुभव करैत छथि। लोलट कविकेँ आ संगमे श्रोता-दर्शककेँ महत्व नै दै छथि। शौनक:- शौनक रसानुभूति लेल दर्शकक प्रदर्शनमे पैसि कऽ रस लेब आवश्यक बुझै छथि, घोड़ाक चित्रकेँ घोड़ा सन बूझि रस लेबा सन। भट्टनायक कहै छथि जे रसक प्रभाव दर्शकपर होइत अछि। कविक भाषाकेँ ओ भिन्न मानैत छथि। रससँ श्रोता-दर्शकक आत्मा परमात्मासँ मेल करैए। रसक आनन्द अछि स्वरूपानन्द। आ ऐसँ होइत अछि आत्म-साक्षात्कार। रस सिद्धान्त श्रोता-दर्शक-पाठक पर आधारित अछि। ई श्रोता-दर्शक-पाठकपर जोर दैत अछि। ध्वनि सिद्धान्त: आनन्दवर्धन ध्वन्यालोकमे साहित्यक उद्देश्य अर्थकेँ परोक्ष रूपेँ बुझाएब वा अर्थ उत्पन्न करब कहैत छथि। ई सिद्धान्त दैत अछि परोक्ष अर्थक संरचना आ कार्य, रस माने सौन्दर्यक अनुभव आ अलंकारक सिद्धान्त। आनन्दवर्धन काव्यक आत्मा ध्वनिकेँ मानैत छथि। ध्वनि द्वारा अर्थ तँ परोक्ष रूपेँ अबैत अछि मुदा ओ अबैत अछि सुसंगठित रूपमे। आ ऐसँ अर्थ आ प्रतीक दूटा सिद्धान्त बहार होइत अछि। ऐसँ रसक प्रभाव उत्पन्न होइत अछि। ऐसँ रस उत्पन्न होइत अछि। न्याय आ मीमांसा ऐ सिद्धान्तक विरोध केलक, ई दुनू दर्शन कहैत अछि जे ध्वनिक अस्तित्व कतौ नै अछि, ई परिणाम अछि अनुमानक आ से पहिनहियेसँ लक्षणक अन्तर्गत अछि। आ से सभ शब्द द्वारा वर्णित होएब सम्भव नै अछि। स्फोट सिद्धांत: भर्तृहरीक वाक्यपदीय कहैत अछि जे शब्द आकि वाक्यक अर्थ स्फोट द्वारा संवाहित अछि। वर्ण स्फोटसँ वर्ण, पद स्फोटसँ शब्द आ वाक्य स्फोटसँ वाक्यक निर्माण होइत अछि। कोनो ज्ञान बिनु शब्दक सम्बन्धक सम्भव नै अछि। ई भारतीय दर्शनक ज्ञान सिद्धान्तक एकटा भाग बनि गेल। अर्थक संप्रेषण अक्षर, शब्द आ वाक्यक उत्पत्ति बिन सम्भव अछि। स्फोट अछि शब्दब्रह्म आ से अछि सृजनक मूल कारण। अक्षर, शब्द आ वाक्य संग-संग नै रहैए। बाजल शब्दक फराक अक्षर अपनामे शब्दक अर्थ नै अछि, शब्द पूर्ण हेबा धरि एकर उत्पत्ति आ विनाश होइत रहै छै। स्फोटमे अर्थक संप्रेषण होइत अछि मुदा तखनो स्फोटमे प्राप्ति समए वा संचारक कालमे अक्षर, शब्द वा वाक्यक अस्तित्व नै भेल रहै छै। शब्दक पूर्णता धरि एक अक्षर आर नीक जकाँ क्रमसँ अर्थपूर्ण होइए आ वाक्य पूर्ण हेबा धरि शब्द क्रमसँ अर्थपूर्ण होइए। सांख्य, न्याय, वैशेषिक, मीमांसा आ वेदान्त ई सभ दर्शन स्फोटकेँ नै मानैत अछि। ऐ सभ दर्शनक मानब अछि जे अक्षर आ ओकर ध्वनि अर्थकेँ नीक जेकाँ पूर्ण करैत अछि। फ्रांसक जैक्स डेरीडाक विखण्डन आ पसरबाक सिद्धान्त स्फोट सिद्धान्तक लग अछि। अलंकार सिद्धान्त: भामह अलंकारकेँ समासोक्ति कहै छथि जे आनन्दक कारण बनैए। दण्डी आ उद्भट सेहो अलंकारक सिद्धान्तकेँ आगाँ बढ़बै छथि। अलंकारक मूल रूपसँ दू प्रकार अछि, शब्द आ अर्थ आधारित आ आगाँ सादृश्य-विरोध, तर्कन्याय, लोकन्याय, काव्यन्याय आ गूढ़ार्थ प्रतीति आधारपर। मम्मट ६१ प्रकारक अलंकारकेँ ७ भागमे बाँटै छथि, उपमा माने उदाहरण, रूपक माने कहबी, अप्रस्तुत माने अप्रत्यक्ष प्रशंसा, दीपक माने विभाजित अलंकरण, व्यतिरेक माने असमानता प्रदर्शन, विरोध आ समुच्चय माने संगबे। औचित्य सिद्धान्त: क्षेमेन्द्र औचित्य-विचार-चर्चामे औचित्यकेँ साहित्यक मुख्य तत्व मानलन्हि। आ औचित्य कतऽ हेबाक चाही? ई हेबाक चाही पद, वाक्य, प्रबन्धक अर्थ, गुण, अलंकार, रस, कारक, क्रिया, लिंग, वचन, विशेषण, उपसर्ग, निपात माने फाजिल, काल, देश, कुल, व्रत, तत्व, सत्व माने आन्तरिक गुण, अभिप्राय, स्वभाव, सार-संग्रह, प्रतिभा, अवस्था, विचार, नाम आ आशीर्वादमे। कंपायमान अछि ई ब्रह्माण्ड आ ई अछि कंपन मात्र। कविता वाचनक बाद पसरैत अछि शान्ति, शान्ति सर्वत्र आ शान्ति पसरैत अछि मगजमे। अनुवाद समालोचना: सर्जनात्मक साहित्यमे नाटक सभसँ कठिन अछि, फेर कविता अछि आ तखन कथा, जँ अनुवादकक दृष्टिकोणसँ देखी तखन। नाटकमे नाटकक पृष्ठभूमि आ परोक्ष निहितार्थकेँ चिन्हित करए पड़त संगहि पात्र सभक मनोविज्ञान बूझए पड़त। कवितामे कविताक विधासँ ओकर गढ़निसँ अनुवादकक परिचित भेनाइ आवश्यक, जेना हाइकूक मैथिलीसँ अंग्रेजी अनुवाद करै बेरमे मैथिलीक वार्णिक ५/७/५ क मेल जँ अंग्रेजीक अल्फाबेटसँ करेबै तँ अहाँक अनूदित हाइकू हास्यास्पद भऽ जाएत कारण अंग्रेजीमे ५/७/५ सिलेबलक हाइकू होइ छै आ मैथिलीमे जेना वर्ण आ सिलेबलक समानता होइ छै से अंग्रेजीमे नै होइ छै। कविताक लय, बिम्बपर विचार करए पड़त संगहि कविता खण्डक कविताक मुख्य शरीरसँ मिलान करए पड़त। कथामे कथाकारक आ कथाक पात्रक संग कथाक क्रम, बैकफ्लैशक समय-कालक ज्ञान आ वातावरणक ज्ञान आवश्यक भऽ जाइत अछि। रामलोचन शरणक मैथिली रामचरित मानस अवधीसँ मैथिलीमे अनुवाद अछि मुदा दोहा, चौपाइ, सोरठा सभ शास्त्रीय रूपेँ अनूदित भेल अछि। सिद्धान्तक आवश्यकता की छै? -Gajendra Thakur, editor, Videha (be part of Videha www.videha.co.in -send your WhatsApp no to +919560960721 so that it can be added to the Videha WhatsApp Broadcast List.) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। १.२.अंक ३८२-३८४ पर टिप्पणी लक्ष्मण झा सागर विदेह हमरा राजा जनकोसं पैघ लोक बना देलक। अकबक किछु नै फुराइये जे कोना आभार व्यक्त करी विदेहक समस्त टीमकें आ विशेष रूपेँ अहाँक! लागि रहल अछि जे जीवनक किछु अर्थ निकलल अछि।बहुत बहुत सादर धन्यबाद!! अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.गद्य २.१.सुमन मिश्र- लघुकथा- परीक्षित २.२.परमानन्द लाल कर्ण-एकादशीक उद्भव २.३.निर्मला कर्ण- अग्निशिखा खेप ३३ २.४.रबीन्द्र नारायण मिश्र- वृंदावनक कुंज गलीमे! २.५.संतोष कुमार राय 'बटोही'- डायरी 'लव यू टू' (आगाँ) २.६.कल्पना झा- सते २.७.रबीन्द्र नारायण मिश्र- ठेहा परक मौलाएल गाछ (धारावाहिक) २.८.कुन्दन कर्ण- बीहनि कथा- घबाह २.१.सुमन मिश्र- लघुकथा- परीक्षित सुमन मिश्र लघुकथा- परीक्षित (प्रस्तुत अछि सुमन मिश्र जीक पहिल रचना लघुकथा- परीक्षित। ओ राँची (झारखण्ड) सँ छथि आ अखन इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc), बेंगलुरु मे सीनियर रिसर्च फेलो छथि। -सम्पादक) १ "भोज काल मे कुम्हर नहि रोपू !"- हमर माय कहलथि । कोना देबै परीक्षा, से नहि पता ! पहिने सोचने रही जे एहि बेर हम पास भ' जाएब मुदा दू मास विश्व कपक सभटा खेल देखि-देखि हमर टाइम मैनेजमेंट गड़बड़ा गेल । अखैन सोचैत छी जे नीदरलैण्ड आ बांग्लादेशक खेल सेहो देखब की आवश्यक छल? परिणाम नीक नहि होयत त' हमर कोना होयत घर मे स्वागत, से सोचि कए सभटा पढल बिसरि रहल छी। "आब निकलैत छी मम्मी, अहाँ चिन्ता नहि करू ! नीक जाएत परीक्षा"- हम माय कय चिन्ता-मुक्त करै लए कहलियैन, लेकिन बोली कनी कमजोर आ पातर निकलि गेल । माय ठीक बुझि गेलथि । "हम किए चिन्ता करब बौआ, अखैन त' अहाँ के चिन्ता होयत, दही माछ !" ओना त' माय हमरा ठिठियायत बिदा केलथि मुदा हुनका खिड़की सँ भगवतीक कोठली गंभीर भ' जाइत देखलियैन । आत्मग्लानि सँ अगिला बेर एहन गलती नहि करब से प्रण करैत हम परीक्षा केन्द्र पहुँचलहुँ । परीक्षा केन्द्र पर हमर मकानक गार्ड के देखि अचंभित भ' गेलहुँ। "परीक्षित, एमहर तोहर की काज ! ड्य़ूटी छौ ?" परीक्षित कद-काठी मे दुब्बर-पातर आ कुकुरपेट्टा मुदा देखै मे तेज छल। मम्मी बतौने रहथि जे ओकर बाबा विद्वान छलथि आ माध्यमिक विद्यालयक प्रधानाचार्य रहल छलाह मुदा पिताक असामयिक निधन तखने भ' गेलैन जखन ई मायक कोखि मे छल । बाबा महाभारतक अभिमन्यु-उत्तराक संतान जेकां नाम त' रखलखिन एकर परीक्षित, मुदा पारिवारिक आर्थिक स्थिति देखि हमरा हस्तिनापुरक सम्राटक नाम रखबाक काज अतिशयोक्ति लगैत छल । "सर, किछु नहि, एक बेर परीक्षा मे बैसबाक इच्छा छल ! अहाँ सेहो परीक्षा देबै ?"- परीक्षित बाजल । "खाली पाँच सय टा सीट अछि भरि देस मे, एहेन इच्छा कोना होइत छौ ? एही सभ पर खर्च क' दैत छही की सभटा पैसा? मम्मी के कहि के बन्द करबा देबौ सभटा बोनस, लैत रहि जेमे आब।" "ठीक कहैत छी, अगिला बेर नहि देबै, सर ।" परीक्षितक बोली आ आंखि खसैत देखि बल मे बल आयल की चलू एक गोट प्रतियोगी त' कम भेल । मोनेमोन सोचलहुँ जे कनी आर आगि लगा दैत छी । "दिन भरि मोटर-जनरेटर चलबैत परीक्षा पास हेमे, किछु सोचि-विचारि के स्वप्न देख !" एहि बेर परीक्षित किछु नहि बाजल त' लागल की कनी बेसी बाजि देलियै। "चल, ई ले पचास टाका, एना मुँह नहि लटका, किछु खा लिहें परीक्षाक बाद ।" ई गप्प क' हम परीक्षा कक्ष मे प्रवेश केलहुँ । संजोग सँ जे छोड़ने रही ताहि सँ बेस प्रश्न आबि गेलै । कनी काल एमहर-ओमहर देखलहुँ त' बुझायल जे हमर आगां मे बैसल परीक्षित किछु-किछु लिखने जा रहल अछि । हम अपन आँखि छोट क' पढबाक प्रयास केलहुँ मुदा निरीक्षक बाबू सेहो हमरा दिस आँखि छोट क' के ध्यान सँ देखैत छलाह । एक घण्टा अखनो परीक्षा बांचल छल, कनी काल माथा नीचा क' सुति रहलहुँ । आश्वस्त छलहुँ जे परीक्षित सँ त' बेसी नंबर अयबे करत ! २ "आब ई दिन सेहो आबि गेल जे गामक अपन पुरखा सभक अरजल जमीन ई बज्र भुसकौल बच्चा के निजी मेडिकल कॉलेज मे पढाइ हेतु उड़ा देबै ?" - हमर पिता माय के कहलखिन्ह। हमरा ई बात उचित नहि बुझायल । एहि बेर बेसी नंबर आयल छल । पछिला दुनू बेर त' प्राइवेट कॉलेजक योग्यता लेल न्यूनतम अंक सँ हम सय अंक पाछू रही । एहि बेर ओना हमर बीस टा तुक्का सही लागि गेल छल । तीन-तीन टा सोमवारी सँ शनिवारी तक हम सभटा कबुला क' लेने रही परीक्षा दिन जाइत-जाइत। किए की लगैत नहि छल जे पास होयब कोनो स्तिथि मे । आब पता नहि लगैत छल की कोन कबुलाक असरि भेलैक । सप्ताह भरि खाली फलहारी खा-खा के आब हमर धैर्य जवाब दिअ' लागल छल । "मम्मी, पापा हमरा बज्र भुसकौल कहैत छथि । आब पास त' केलहुँ ने !" "किए एना कहैत छियै बच्चा के ?" "किछु कहिओ नहि सकैत छियैन ?" "नहिं ! एक्केटा मांगल-चांगल बच्चा अछि, नीक लागत जे सभ मित्र लोकनि कहताह जे अहाँक बालक बकलेल छथि ?" "हम किन्नहुँ नै बेचब जमीन से बुझि लीअ' !" बस तकर बाद सँ एक सप्ताह धरि हमर माय-पिताजीक शीतयुद्धक नतीजा अन्ततः यैह भेलै की सात दिन धरि लगातार थारी मे परोड़क तरकारी परसल जाइत देखि पिताजी समर्पण क' देलाह । मेडिकल कॉलेज मे आब जे नामांकन निश्चित देखाइत छल त' हमरा एक बेर मोन भेल की कनी जा के परीक्षित के खौंझा दैत छी । मुदा मम्मी सँ पता लागल जे परीक्षाक बाद दोसर गार्ड आबि गेलै.. फेर नहिं भेट भेलै केकरो ओकरा सँ । "हमरा पते छल जे ओकर सभक कोनो ठेकान नहि, मुदा मम्मी अहाँके कोना पता की ओ परीक्षा देने रहय ?"- हम माय के पुछलियैन । "हमरा लग आयल रहय परीक्षित । हम कहने रहियै जे बौआक पुरान किताब सभ ल' जो बिनु पाइक । हमरा कहै छल की मेडिकलक किताब सभ आब नहि किनैत अछि कारण बहिनक दसमा बोर्डक पढाइ सेहो लगिचा गेलै । डाक्टर बनैक इच्छा छलै ओकरा लेकिन कोनो आमदनी नहिं..." "त फेर?" "हम कहलिए जे सात मासक टाइम छौ, बिना परीक्षा पास कयने कोन परीक्षित ! दू हजार टाका सेहो देलियै की परीक्षाक फार्म भरि लीहें । हमर बेटा सेहो दैत अछि । दुनू मे सँ एकटा बच्चा के भ' गेल त' आर की चाही ?" "मम्मी, गलती भ' गेल, हमरा लगैत अछि हमरे दुआरे चल गेल परीक्षित ! हम ओकरा बहुत किछु कहि देलियै एक्जाम दिन, हमरा नहि बूझल छल ई घटनाक्रम..." "...ओना मम्मी, ई बेटा त' डाक्टर बनि जाएत एहि बेर, लगैए !"- हम आत्मविश्वास सँ बजलहुँ । ३ से पाछां हमरा गलत लागल रहय । आब दस बरख भ' गेलै एहि बातक, मुदा हमर पिताजी अखनहुँ ओतबे क्रोधित रहथि । हमर नामांकन त' करबा देलथि जेना-तेना, मुदा भुसकौल त' हम ठीके छलहुँ । सभटा सेमेस्टर तीन-तीन विषय मे फेल होइत-होइत मोन अकच्छ भ' गेल । तकर बाद जखन मनुखक होइत सर्जरी साक्षात देखि हमर हाथ-पएर सुन्न हुअ' लागल त' बस बुझय मे आबि गेल की आब नहि सम्हरत । हम माय के फोन पर कहलियैन त' कहलथि- "पापा बहुत निराश छथि, कहैत छलथि जे सभटा जमीन बिका गेल, बच्चा सेहो नहि पढलक । एहि सँ नीक होइत जे हम नोकरी छोडि जुआ खलेतहुँ । अहाँ सँ गप्प नहि करताह, मुदा चिन्ता नहि करू बौआ हम छी ने !" ओकर बाद कालक्रमे हम एकटा कार्टूनिस्ट बनि गेलहुँ । छोटे सँ कार्टून बनायब हमरा बड पसिन्न छल मुदा गणित-जीवविज्ञान नहि लेब से माता-पिताक सोंझा बजबाक साहस नहि भेल छल तहिया । कार्टून लाइन मे केलहुँ त' खूब नीक, अवार्ड सभ भेटैत रहल । अन्दर सँ आब भुसकौल हेतु हीन भावना नहि बुझाइत छल मुदा पिताजी सँ फेर कखनो पहिने जेकां गप्प नहि भेल । आब दस बरखक बाद दिया-बाती पर घर अयलहुँ त' देखलहुँ जे मम्मी-पापा दुनूक मोन बड खराप छैन । पापा त' अखनहुँ गप्प नहि करैत छलथि, हम तैयो प्रयास केलहुँ- "पापा, कनी डाक्टर के देखा लिअ' न दुनू गोटे ?" "हूंह !, की भेल हमरा ? ओना तों की बतेमें..." पिताजी "अहाँ"क व्यवहार छोडि देने रहथि हमरा लेल दस साल सँ । हमर मोन मे तेकर टीस अखनो बुझाइत छल । कोनो बात नहिं, शरीर टूटल छलैन त' एहि बेर जेना-तेना मना लेलियैन । दुनू गोटा के ल' के हम जखन बिदा भेलहुँ त' पता लागल जे तीन किलोमीटर दूर एकटा नीक चिकित्सक डा. सहाय बैसैत छथि । ओमहर पहुँचि के बोर्ड देखि मोन विचलित भ' गेल- डा. परीक्षित सहाय, एम.बी.बी.एस. (AIIMS), एम.डी.! "डा. साहब, कनी दुनू गोटे के देखेबाक छल !"- हम अपन मोनक भाव के नुकबैत बजलहुँ । "अरे सर ! काकाजी-काकीमा, आउ बैसू ! रवि, कने तीन कप चाह ल' आनू तुरन्त । हमर परिवारक सदस्य छथि, हिनके सभक दुआरे हम किछु पढि सकलहुँ !"- डा. सहाय अपन सहायक के तुरन्त निर्देश देलखिन्ह । फल यैह भेलै की हमर माता-पिता बहुत गप्प केलखिन परीक्षित सँ। हमरा ई सिनेहक गरमी प्राप्त त' नहि भेल दस बरख मे मुदा एमहर कनी-कनी हाथ सेद लेलहुँ । आब कम सँ कम नीक इलाज त' होयत मम्मी-पापाक यैह सोचि के कहुना मोनक संतुलन बनएलहुँ । एकटा सम्राट जेकां प्रेम सँ तकैत छलखिन्ह परीक्षित के हमर माता-पिता ! अश्वत्थामा जेकां हमरा बहिष्कृत आ कलंकित महसूस भेल । जखन चेम्बर सँ निकल' लगलहुँ त' एक बेर परीक्षित के हाथ पकड़ि कहलियैन- "अहाँक बाबा अहाँक नामकरण खूब नीक कयने रहथि डा. साहब....!" -सुमन मिश्र, सीनियर रिसर्च फ़ेलो (आणविक जैवभौतिकी), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc), बेंगलुरु, संपर्क- 9100810651. E-mail- snmishra8320@gmail.com अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.२.परमानन्द लाल कर्ण-एकादशीक उद्भव अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.३.निर्मला कर्ण- अग्निशिखा खेप ३३ निर्मला कर्ण (१९६०- ), शिक्षा - एम. ए., नैहर- खराजपुर, दरभङ्गा, सासुर- गोढ़ियारी (बलहा), वर्त्तमान निवास- राँची, झारखण्ड। झारखंड सरकार महिला एवं बाल विकास सामाजिक सुरक्षा विभागमे बाल विकास परियोजना पदाधिकारी पदसँ सेवानिवृत्ति उपरान्त स्वतंत्र लेखन। (अग्नि शिखा मूल हिन्दी- स्वर्गीय जितेन्द्र कुमार कर्ण, मैथिली अनुवाद- निर्मला कर्ण) अग्निशिखा खेप -३३
पूर्वकथा
राक्षस राज केशी के बेटी चित्रसेना जे स्वयं राजा पुरूरवा सs प्रेम करैत छलीह आ हुनका सौं विवाह करवाक इच्छुक छलीह,राजा के संग उर्वशी के देखला के बाद क्रोधित भs जाइत छथि,ओ कोनो तरहें राजा पुरूरवा के प्राप्त करय चाहैत छथि।
आब आगाँ
गन्धर्व राजा विश्वावसु अदृश्य रूप सँs पुरूरवाक अंतःपुर में उपस्थित छलाह। ओ सर्वप्रथम पृथ्वीलोक केँ अपन लक्ष्य बनौने छलथि। एम्हर-ओम्हर स्थान-स्थान पर भटकला उपरान्त ओ आइ एतय पहुँचि गेल छलाह।ओ बहुत काल धरि राजप्रासाद के परिक्रमा करैत रहलाह। तदुपरांत महल के अनेको कक्ष में घूमि-घूमि कs संधान करैत विश्ववासु एहि कक्ष मे पहुँचि गेल छलाह।उर्वशी स्वर्ण निर्मित बहुमूल्य पर्यंक पर निद्रामग्न छलीह।हुनकर परिचारिका सभ ओहि कक्ष में बैसल दुनू मेमना सभक संग खेलाइत छलथि,संगहि ओ सभ आपस मे गप्प सेहो कs रहल छलथि ।राजा पुरुरवा संभवतः राज्यसभा मे उपस्थित भय शासन संबंधित कार्य में व्यस्त छलाह। "हे रौ मेमना! तहूँ एकटा चमत्कारे छह ! बिना खेने-पीने वायु पी कs कोना जीबैत छह ? ई स्वर्गक संसार के हाल विचित्र अछि! जतय लोक बिनु किछु खेने-पीने स्वस्थ रहैत अछि। असल में हुनका सभ के भोजनक आवश्यकता नहि छैक। ओ सभ वायु ओ सुगंधि के आहार रूप में ग्रहण कs स्वस्थ जीवन जीवि सकैत छथि ।" . एकटा परिचारिका के ई बात कहितहिं दूसर परिचारिका मेमना सभकेँ दुलार करैत बाजि उठल - "मुदा अपन महारानी जे स्वयं स्वर्ग लोक के निवासिनी अप्सरा छथि,ओs तs वायु पीबि कs नहि जीबैत छथि।अपन महारानी जी फल खाइत छथि।मुदा ओ अद्वितीय सेहो छथि।अपन शारीरिक संरचना सँ लs कs बात-व्यवहार धरि सेहो ओ छथि अद्वितीय"! "हँ सखी ई रहस्यक बात छैक! हुनका छह टा बेटा भेलनि!ओहो सभ एतेक नम्हर भs गेल छथि। तखनहु हुनकर सौन्दर्य में कनिको त्रुटि नहि आयल अछि! हुनकर कौमार्य सेहो अक्षुण्ण बुझाइत अछि। हुनका देखि कs कियो कुमारिका नवयौवना बुझत ।" एक अन्य परिचारिका -" हँ! हे सखी! तों सत्य कहलहक ! हुनकर शरीर के कमनीयता में कनेको त्रुटि नहि आयल अछि।हुनकर देहक सौन्दर्य नित्य प्रति बढ़ल बुझाइत अछि।जखन कि हमरा सभक धरतीक स्त्रीगण एके टा बच्चाक जन्मक बाद अपन सभटा सौंदर्य-लावण्य गमा लैत छथि,आ ओ बुढ़िया सन के देखाय लगैत छथि।मुदा अपन रानी एखनहुँ कोमलांगी,सुकुमारि आ अतीव सुन्नरि लगैत छथि।अपन रानी स्वर्गक अप्सरा छथि,लगैत अछि जे एहि लेल हुनकर यौवन अक्षुण्ण छनि"। परिचारिका सभ आपस में बहुत रास एहने विषय पर गप्प करैत रहलथि आ उर्वशी के मेमना के देखभाल के संग-संग ओकरा सब के संग खेलाइत मनोरंजन सेहो करैत रहलथि । बहुत कालक बाद उर्वशीक नींद समाप्त भेल आ आँखि फुजि गेलनि।ओ किछु काल धरि कक्ष में चारू दिस आश्चर्यचकित भय देखैत रहलथि, तदुपरांत ओ सभ परिचारिका केँ कोनो ने कोनो अलग काज बता ओहि कक्ष सँs बाहर पठा देलथि। उर्वशी अपन सभ परिचारिका केँ बाहर पठा देने छलीह,कारण हुनका बुझबा मे आबि गेल छलनि जे कक्ष में हुनकर स्वर्गलोकक कोनो प्रतिनिधि उपस्थित छथि। हुनकर नींद स्वर्गीय सुरभिक उपस्थिति सौं विचलित भय भंग भेल छलनि। ताहि सौं हुनका बुझल छलनि जे हुनकर स्वर्गलोकक कोनो प्राणी एतय अदृश्य रूप में उपस्थित छैक, ताहि लेल वातावरण मे एहन स्वर्गीय सुगंध पसरल अछि।ओ नहि चाहैत छलीह जे परिचारिका लोकनि ई बुझथि जे स्वर्ग सँ कियो आबि रानी उर्वशी सँ भेंट करैत छथि,अथवा अखनि भेंट करवा हेतु आयल रहथि। परिचारिका सबहक गेला उपरान्त उर्वशी उठि कs ओहि अदृश्य प्राणी केँ संबोधित केलथि - -अहाँ जे छी,हमरा सोझाँ उपस्थित होउ!आब कक्ष मे अदृश्य रूप में नहि रहू,कारण हमरा बुझबा में आबि गेल अछि जे अहाँ एतs छी। गंधर्वराज विश्वावसु शारीरिक रूप सँ प्रकट भेलाह, उर्वशी हुनका देखि आनन्द सँ पुलकित भय गेलथि - " तात अहाँ एतह! एहेन की बात भेल!अहाँ केँ एतs अयवाक कष्ट किएक उठाबय पड़ल?" "पुत्री,इन्द्र हमरा पठौने छथि जे अहाँ केँ स्वर्ग लs जायबा हेतु" - इन्द्रक आदेश गंधर्वराज सुना देलथि। "हम एतय अपन इच्छा सँs आयल छी,आ मात्र अपनहि इच्छा सँs जायब" - उर्वशी बजलीह । "मुदा इन्द्र के ई बात स्वीकार नहि होयतनि। अहाँ के पृथ्वी पर स्थायी रूप सँs निवास केनाई हुनका किन्नहुँ स्वीकार नहि होयतनि । अहाँ देवेन्द्रक अधीन छी,ताहि सौं हुनकर इच्छानुसार अहाँ केँ स्वर्ग जेनाई आवश्यक होयत" - गन्धर्व राजा विश्वावसु उर्वशी केँ बुझबैत कहलथि । "तात!की अहाँ के नीक लागत जे अहाँक धर्मपुत्री प्रेम में विरह के कष्ट भोगैत स्वर्ग मे रहय?" उर्वशी हुनका सँs प्रश्न पूछि देलथि। "पुत्री के प्रेमी सौं विलग केलाक बाद कोनो पिता सूखी नहि रहि सकैत अछि। हम अहाँ के अपन पुत्री मानने छी,तखन हम एहन कामना कोना करब! मुदा हम असहाय छी। पुत्री ! हमर हाथ इन्द्रक सोझाँ स्वर्ग के शासन व्यवस्थाक सूत्र में बान्हल अछि" - गन्धर्वराज उर्वशीक सोझाँ अपन असहाय अवस्था के व्यक्त कयलनि | "अहाँ स्वर्ग जाउ तात! अहाँ हमर एतवा सहायता करू। अहाँ अपन वाक्पटुताक कला के सदुपयोग करू आ हमरा तरफ सौं इन्द्र के विमुख करु । हमरा बुझल अछि जे अहाँ चाहब तs इन्द्र के मना सकैत छी। कोनो कारण देखा कs इन्द्र के मन हमरा तरफ सौं फेर सकैत छी। हमरा वचन दिअ,अहाँ हमर एतवा सहायता करब। हम प्रिय पति पुरूरवाक मृत्यु उपरान्त हुनका संगहि पृथ्वी सँ स्वर्ग जायब।" "ओह तs अहाँ चाहैत छी जे हम स्वर्ग जाइ आ इन्द्र सँs प्राप्त कठोर दण्डक सामना करी!" "हम...हम...की...की...की करब...तात! हमहूँ असहाय छी। हम पुरूरवा सँs कोनो छल नहि कs सकैत छी। तखन पुरूरवा बिन हमहूँ तs पानि सँs निकलल माछ सन पीड़ा में छटपटाईत रहब। नहि-नहि,हम से नहि कs सकब, हमारा लेल ई काज असंभव अछि।" उर्वशी आगत विपत्ति के सोचि व्यथित भय कानय लगलीह। गंधर्व राज ओतहि सँs चलि गेलाह,मुदा हृदय मे ओ कोनो एहन चालि सोचि रहल छलाह जाहि सौं उर्वशी के हृदय सँs भूलोक आ पुरूरवा के प्रति प्रेम समाप्त भ' जाय,आ ओ स्वर्ग जेबाक लेल तैयार भs जाइथ। ओ सोचैत रहलाह ... पृथ्वी सँs उर्वशी के विदाई एवं स्वर्ग में प्रवेश के विभिन्न उपाय के संबंध में आ ओहि पर विश्लेषण करैत रहलाह ।ओ दृढ़ता सs निर्णय लेने छलाह जे उर्वशी के संग लय जेबाक छनि हुनका । मुदा ओ ई सोचवा में असमर्थ छलाह जे कोना ई लक्ष्य पूरा भs सकत । कोनो दृश्यमान बाट नहि छल जाहि पर चलि ओ सफलता प्राप्त कs सकैत छलथि ।
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" मधुवन मे महरानी जी अपनेक प्रतीक्षा कs रहल छथि राजन्।" एकटा भृत्य राजदरबार में पहुँचि कए राजा पुरूरवा केँ सूचना देलक। ई सुनि राजा पुरूरवा व्यग्र भs गेलाह,कनि चिंता तक मोन में भs गेलनि । 'आइ उर्वशी के अचानक की भेलै जे ओ हमर राजदरबार सँs घुरबाक प्रतीक्षा केने बिन असमय मधुवन चलि गेलीह ?' प्रायः सभ दिन राजदरबार सँs राजा के घुरलाक बाद उर्वशी कतहु जेबाक योजना बनबैत छलीह आ एहि योजना में राजा पुरूरवा हर्षोल्लास सँ योगदान दैत छलथि। उर्वशी जतय जाय चाहैत छली दुनू गोटे एक संग जाइत छलथि,मुदा आइ हुनका संग की भेलनि जे ओ अनावश्यक राजदरबार के अनुशासन तोड़य लेल बाध्य भ' गेलीह।' सोचैत-सोचैत राजा पुरूरवा राजसिंहासन सँs उठलाह,फेर मंद-मंद डेग सँ बाहर निकललाह, रथ तैयार छल,ओहि मे बैसल पुरूरवा किछु सोचैत मधुबन दिस विदा भेलाह।
क्रमशः अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.४.रबीन्द्र नारायण मिश्र- वृंदावनक कुंज गलीमे! रबीन्द्र नारायण मिश्र वृंदावनक कुंज गलीमे! लगभग पन्द्रह साल पहिने हमसभ मथुरा-वृन्दावन गेल रही। तकर बाद कतेक समय बीति गेल। हम सेवानिवृत्त भए गेलहुँ। ग्रेटर नोएडामे अपन मकानमे बसि गेलहुँ । मुदा वृन्दावन जेबाक योग नहि बनल जखन कि ग्रेटर नोएडासँ वृंदावन मात्र १२६ किलोमीटर दूर अछि। एहि बीचमे कोरोना काल जेहन बीतल से कहबाक काज नहि। आखिर एमहर आबि कए घुमबाक कार्यक्रम बनल। सात सितम्बरक कृष्णाष्टमी छल। तेँ छओसँ आठ सितम्बर धरि छोड़ि नओ सितम्बर २०२३क आरक्षित टैक्सीसँ हमसभ भोरे सात बजे मथुरा-वृन्दावनक हेतु बिदा भेलहुँ । हमसभ तीनगोटे संगे रही-हम,हमर श्रीमतीजी आ हमर सारि पूनम । पूनम किछुदिन पूर्व हरिद्वारक जेबाक क्रममे आएल छथि। तेँ खास कए ई कार्यक्रम बनल। बहुत प्रयाससँ परिचितक माध्यमसँ एकटा टैक्सीक जोगार कएल गेल जे छओ हजारमे हमरासभकेँ पूरा यात्रा करओताह,मथुरा,वृन्दावन घुमेबो करताह आ वापस ग्रेटर नोएडा लेने अएताह । रातिमे हमसभ वृन्दावनेमे रहब। ताहि हेतु हम प्रभुपाद आश्रममे आनलाइन आरक्षण करओने रही। प्रभुपाद आश्रम इसकान वृन्दावनसँ जुड़ल अतिथिगृह अछि। ओना इसकान वृन्दावनसँ जुड़ल कैकटा अतिथिगृहसभ अछि। मुदा हमरा एहीमे आरक्षण भेटल, दोसर अतिथिगृहसभ भरि चुकल छल । अपना भरि बहुत ओरिआन कए हमसभ वृन्दावन-मथुराक यात्रापर बिदा भेल रही। बहुत उत्साहितो रही। मौसमसे बहुत नीक छल। अकासमे मेघ घुमि रहल छल। हबा सुखद छल। हमसभ जखन सात बजे भोरे टैक्सीमे बैसलहुँ आ टैक्सी पूर्णगतिसँ हाइवेपर आगू बढ़ल तँ आनन्दक वर्णन नहि कएल जा सकैत अछि। सड़कपर बहुत कम वाहन चलि रहल छलैक । वाहन चालक उत्साहमे बहुत जोरसँ स्थानीय भजन बजा तेज गतिसँ गाड़ी चलबए लगलाह । थोड़े काल तँ हमसभ बरदास केलहुँ ,मुदा बरदासोक सीमा होइत छैक। आखिर हमर श्रीमतीजी ओकरा टोकलखिन- "अबाज कनी कम करू ।" तथापि वाहन चालकपर कोनो खास असरि नहि पड़ल । बहुत कालक बाद ओ एहि बातपर ध्यान देलक। अबाज कनी कम भेल । हमसभ बहुत विश्रान्तिक अनुभव केलहुँ । रस्तामे डेढ़घंटा चललाक बाद एकटा ढाबापर टैक्सी रुकल। हमसभ चाह-पान केलहुँ । कनी काल सुस्तेलहुँ आ फेर बिदा भेलहुँ । तकर आधाघंटाक बाद हमसभ वृंदावनक सीमामे पहुँचि रहल छलहुँ । ओना हमर योजना छल जे आइ मथुराक जन्मभूमि आ ओहिठामक अन्यप्रमुख मंदिरसभक दर्शन केलाक बाद वृंदावनमे अपन होटलमे विश्राम करब आ साँझमे मौका भेटत तँ वृंदावनमे सेहो प्रमुख मंदिरसभमे दर्शन करब। मुदा वाहन चालक अपन मनमरजीक लोक छल। ओ टैक्सीकेँ प्रेममंदिर लगक टैक्सी स्टैंडमे ठाढ़ कए देलक आ इसारासँ कहलक- "सामनेमे प्रेम मंदिर अछि। अहाँसभ एतहि उतरि जाउ, कारण ओतए टैक्सी नहि जा सकत।" हमसभ की करितहुँ? टैक्सीसँ उतरि एकटा आटो केलहुँ जे हमरासभकेँ प्रेममंदिरक लगीच धरि लए जाइत। मुदा ओ तँ जिलेबी जकाँ घुमि रहल छल। आखिर हम ओकरा टोकलिऐक- "कतए जा रहल छह? प्रेम मंदिर तँ सामने देखा रहल छल।" "ओतहि जा रहल छी। ओकर दोसर द्वारिसँ मंदिर जाएब बेसी आसान थिक।" थोड़ेकाल घुमा कए ओ प्रेममंदिरक दोसर द्वारिसँ बहुत फटकीए आटो ठाढ़ कए देलक। आब आर आगू नहि जा सकत। हमसभ आटोसँ उतरि गेलहुँ । ओकरा डेढ़ सए रुपया देलिऐक। तकर बाद बहुत काल पैरे चलए पड़ल। आटो केलाक कोनो फएदा नहि बुझाएल। थोड़ेकाल पैरे चलबाक बाद हमसभ प्रेममंदिर पहुँचि गेल रही। प्रेममंदिरक निर्माण कृपालुजी महराज करओने छलाह। एगारहसाल धरि एकहजार मजदूर एकर निर्माणमे लागल रहल । एकर निर्माणमे अनुमानतः एकसए पचास करोड़ रुपया खर्च भेल छल। ई मंदिर परिसर चौवन एकड़मे पसरल अछि। मंदिरक आधारशिला कृपालुजी महराज द्वारा १४ जनबरी २००१क राखल गेल छल। एकर निर्माण कृपालुजी द्वारा बनाओल गेल जगद्गुरु कृपालु पृषत (जेकेपी) द्वारा कएल गेल छल। मंदिरक उद्घाटन समारोह कृपालुजी महराजक उपस्थितिमे १५सँ सत्तरह फरबरी २०१२क संपन्न भेल छल। एहि मंदिरक प्रथम तलपर राधागोबिंद आ दोसर तलपर श्रीसीताराम विराजित छथि। मंदिरक बाहरी देबालपर राधाकृष्णक लीलाकेँ शिल्पांकित कएल गेल अछि। मंदिरक भितरी देबालपर राधाकृष्ण आ कृपालुजी महराजक झाँकी बनाओल गेल अछि। संपूर्ण मंदिर परिसर भक्तिमय लगैत रहैत अछि। मंदिर परिसरमे राधाकृष्णक गोवर्धन पर्वतक सजीव झाँकी बनाओल गेल अछि। मंदिर साढ़पाँच बजे भोरे खुजि जाइत अछि आ बारह बजे धरि खुजल रहैत अछि। तकर बाद पाँचबजे साँझसँ साढ़े आठ बजे राति धरि खुजल रहैत अछि। एहि बीच हजारों भक्तलोकनि एतए दर्शनक हेतु अबैत जाइत रहैत छथि। प्रेममंदिरक ऊँचाइ एकसए पचीस फीट ऊँच,लम्बाइ एकसए नब्बे फीट आ चौड़ाइ एकसए अठ्ठाइस फीट अछि। करीब एकघंटा भरि हमसभ मंदिर परिसरमे रहलहुँ। ओहिठामक प्रमुख दर्शनीय निर्माणसभ देखलहुँ । मंदिरे परिसरमे घुमि हमसभ बहुत संतुष्ट छलहुँ । तकर बाद हमसभ बाहर निकललहुँ । वाहनचालककेँ फोन केलिऐक । ओ कहलक- "अहाँसभ बाँके बिहारी मंदिर चलू। हम ओतहि पहुँचि रहल छी। प्रेम मंदिरक रस्ता बंद छैक।" "जखन हमरासभकेँ पैरे सभठाम जेबाक होएत तखन तोरा रखबाक फएदा की अछि?" "हम की करू? सरकारी आदेश छैक। किछु नहि कएल जा सकैत अछि।" "किछु तँ प्रयास करहक। हमसभ तोरा अनने छी जे मदति करबह। मुदा तूँ तँ सोझे हाथ ठाढ़ कए देलह।" आइ शनिदिन छलैक। पता लागल जे आइ आ काल्हि वृंदावनमे स्थानीय प्रशासनक आदेशसँ टैक्सीकेँ भितर नहि जाए देल जाइत छैक। भितर किछु हद धरि आटो जाएत,तकर बाद पैरेटा जा सकैत छी। इएह बात वाहनचालक सेहो कहैत छल। मुदा ओकर बातपर हमरा विश्वास नहि होअए। भेल जे ओ बहन्ना बना रहल अछि। आखिर ओ हमरासभकेँ पगलाबाबा मंदिर जेबाक हेतु कहलक । ओहो ओहिठाम आबि रहल अछि। ओतहि भेटि जाएत। हमसभ पगलाबाबा मंदिर दिस बिदा भेलहुँ । बड़ीकाल पैरे चललाक बाद एकटा आटो भेटल। ओ हमरासभकेँ पगला बाबा मंदिरक सामने पहुँचा देलक। थोड़ेकलामे हमर वाहनचालक सेहो ओतहि पहुँचि गेल रहए। ओकरा ओतहि रहबाक हेतु कहलिऐक आ हमसभ पगलाबाबा मंदिरमे दर्शन हेतु प्रवेश केलहुँ। पगलाबाबाक बहुत रुचिकर खिस्सा अछि। कहल जाइत अछि जे ओ जज छलाह। हुनकर न्यायालयमे एकबेर एकटा महाजन कोनो गरीब ब्राह्मणक विरुद्ध मोकदमा केलकनि जे ओ ओ हुनकर कर्जा वापस नहि कए रहल छथि। जखन कि ओ महाजनकेँ सभटा कर्जा वापस कए चुकल रहथि तथापि ओ हुनका तंग कए रहल छनि आ कर्जा बाँकी कहि रहल छनि। असलमे भेल ई रहैक जे ओ गरीब ब्राह्मण महाजनक कर्जा किस्त-किसत वापस करैत रहैत छलाह। जखन अंतिम किस्त जमा करए गेलाह तखन ओ महाजन अदालती नोटिस पठा देलक जे अखन धरि ओ कर्जा वापस नहि केलक अछि आ ओकरापर कानूनी कारबाइ होएत। ओ गरीब ब्राह्मण न्यायालयमे जज साहेब लग गोहार लगओलक जे ओ तँ सभटा कर्जा वापस कए चुकल अछि। जज साहेब पुछलखीन- "अहाँ कोनो गबाह आनि सकै छी जे अहाँक बातकेँ समर्थन कए सकथि।" "किएक नहि। हमर गबाहीश्री बांके बिहारीजी देताह।" "हुनकर पता की छनि? "-जज साहेब पुछलखिन। "बांके बिहारी वल्द वासुदेव, बांके बिहारी मंदिर वृंदावन।" जज साहेब श्रीबांके बिहारीजीक नामसँ नोटिस निकालि देलखिन। ओ गरीब ब्राह्मण ओहि नोटिसकेँ श्रीबांके बिहारीजीक मूर्ति लग राखि देलक आ बाजल- "बांके बिहारी! अहाँकेँ गबाही देबाक हेतु कचहरीमे अएबाक अछि।" निश्चित तिथिपर एकटा बूढ़ आबि कए न्यायालयमे गबाही देलक आ ओहि ब्राह्मणक कथनक समर्थन केलक। जज साहेब महाजनक खाताक जाँच केलनि तँ ओहिमे सभटा विवरण देखलनि ,बस नामटा बदलि देल गेल छल। जज साहेब एहि बातसँ संतुष्ट भए महाजनक मोकदमाकेँ खारिज कए देलनि। तकर बाद जज साहेब ओहि ब्राह्मणसँ श्रीबांके बिहारीजीक पता पुछलखीन। "ओ तँ यत्र-तत्र-सर्वत्र छथि।" कहल जाइत अछि जे तकर बाद जज साहेब नौकरी छोड़ि कए श्रीबांके बिहारीजीकेँ ताकए लगलाह। अंतमे ओ वृंदावन आबि गेलाह आ ओतहि हुनकर मृत्यु भेलनि। तहिएसँ लोक हुनका पगला बाबक नामसँ जानि रहल छनि। हुनकर समाधिस्थल ओही मंदिर परिसरमे अछि। ओ मंदिर दसमंजिला अछि आ ओहिमे राधाकृष्णक भव्य मूर्ति स्थापित कएल गेल अछि। तकरे नीचाँमे पगला बाबाक मूर्ति सेहो अछि। पगला बाबाक मंदिरमे दर्शन कए बहुत प्रेरणा भेटल। मोनमे बहुत शांति भेल। तकर बाद हमसभ मंदिरक द्वारिसँ बाहर भए अपन-अपन जूता-चप्पल तकलहुँ आ वाहन चालककेँ फोन लगओलहुँ । ओ कनीके फटकी टाढ़ छल। मौसम से खराप छलैक। मेघ लागल छलैक आ बीच-बिचमे पानि टिपिर-टिपिर खसैत छलैक। रस्तासभकेँ घेर-बेर सेहो छलैहे। हम वाहन चालककेँ होटल चलबाक हेतु कहलिऐक। मुदा ओ श्रीबांके बिहारीजीक मंदिर लग जेबाक प्रयासमे लागि गेल। ताहि हेतु कहि नहि कोन-कोन रस्तासँ हमरा लोकनिकेँ घुमबैत रहल। लगभग आधाघंटा टैक्सीमे घुमैत रहलाक बाद हमसभ श्रीबांके बिहारीजी मंदिर लग पहुँचलहुँ । पानि सेहो भए रहल छलैक । पौने बारह बाजि रहल छलैक। हम वाहन चालककेँ पुछलिऐक- "मंदिर आब खुजल होएत कि नहि?" "ई मंदिर सदिखन खुजले रहैत अछि।" ओकर बातपर विश्वास कए हमसभ पैरे बिदा भेलहुँ । नालासभक गटरक दुर्गंधयुक्त पानि सौंसे रस्तापर बहि रहल छल। भिजैत-तितैत हमसभ ठेहुन भरि पानिमे आगू बढ़ैत गेलहुँ । कहि नहि कतेकटा ओ गली छल? पानि हेबाक कारण कोनो गति बाँचल नहि छल। हमसभ बहुत नीकसँ भिजि चुकल रही। एहनो हालतिमे आगू बढ़ैत गेल रही। एहि उम्मीदमे जे भगवानक दर्शन भए जाएत। मुदा जखन मंदिरक आगू पहुँचलहुँ तँ पता लागल जे ओ बंद भए गेल अछि। एहि बातसँ हमरासभकेँ बहुत निराशा भेल। अपना भरि पंडासभकेँ बहुत गोहरओलिऐक। मुदा ओहोसभ असमर्थ छल। हमरा सन-सन सैकड़ों लोक ओहिना वापस जा रहल छलाह। हारि कए हमहूँसभ भिजैत-तितैत वापस भए गेलहुँ । वाहन चालककेँ बहुत फझ्झति केलहुँ जे ओ गलत सूचना देलक जाहि कारणसँ हमसँ एतेक दिक्कतिमे पड़ि गेलहुँ । ओ की बजैत? सहनशील मुदा मूर्ख सन आदमी छल ओ। आब हमसभ करबे की करितहुँ? ओहने हालतिमे होटल हेतु बिदा भेलहुँ । वृंदावनमे ठहरबाक हेतु हम इसकानक प्रभुपाद आश्रममे दूटा कोठरी आरक्षित करबओने रही। इसकानक आन अतिथिगृहसभ भरि गेल रहैक। वृंदावनमे बेसीगोटेकेँ एहि अतिथिगृहक बारेमे जनतब नहि रहैक। मुदा हमसभ जेना-तेना ओहिठाम पहुँचि गेलहुँ । सभगोटे नीकसँ भिजि गेल रही। जल्दी सँ जल्दी कोठरीमे जाए चाही जाहिसँ अपन-अपन वस्त्र बदलि सकी आ कनी आश्वस्त होइ। ओहि अतिथिगृहक नाम बहुत आकर्षक छल,मुदा व्यवस्था ततबे झूस । स्वागतीकेँ अपन परिचय देलिऐक,कागज देखेलिएक । ओ एकटा आदमीकेँ संग कए देलाह। हमरासभकेँ खाली कोठरीसभ देखबए लगलाह। "भूतलपर कोनो कोठली खाली नहि अछि। प्रथम तलपर एकटा कोठरी खाली अछि। दोसर तलपर सेहो एकटा कोठरी खाली अछि।" "मुदा हमसभ तँ एकहिठाम दुनू कोठरी चाहब।" "तखन तेसर तलपर चलू। ओहिठाम दूटा कोठरी अगल-बगल खाली अछि।" हमसभ तेसरतलपर पहुँचलहुँ । ओहिमे दूटा कोठरी एकठाम भेटि गेल। मुदा कोठरीसभमे फोन नहि छल। स्वागतीसभ संपर्क करबाक हेतु स्वयं नीचाँ जाएब अनिवार्य। ओहि अतिथि गृहमे लिफ्ट नहि छल। पैरे तेसर तलसँ नीचाँ अएनाइ-गेनाइ होइत छल। चाहोक जोगार नहि छल। सभकिछु बाहरसँ मंगाउ अथवा बाहरे जा कए जलखै-चाह करू। हमसभ आब कइए की सकैत छलहुँ? अपन-अपन वस्त्र बदललहुँ। कनी काल सुस्तेलहुँ आ इसकान मंदिर हेतु बिदा भए गेलहुँ । ओहिठाम हमसभ भोजनो केलहुँ । इसकान मंदिरमे बहुत नीकसँ दर्शन भेल। देशी-विदेशी भक्त लोकनि भाव विभोर भए हरे कृष्ण! हरे कृष्ण!क कीर्तन निरन्तर करैत छलाह। ओहिठाम भोजन केलाक बाद हमसभ अपन-अपन चप्पल-जूता ताकए लगलहुँ । असलमे मंदिरमे प्रवेश करैत काल जूता रखबाक एकटा स्थान देखाएल छल। ओतहि हमसभ अपन-अपन चप्पल-जूता राखि देलिऐक । मुदा वापसीमे ओ स्थान भेटबे नहि करए। मंदिर परिसरमे कैकटा एहन-एहन स्थान छल। ओहिसभठाम जा कए पुछबो करिऐक। मुदा अपनो लागए जे हमरसभक चप्पल-जूता कतहु आर राखल अछि। मंदिर परिसरक अनेक बेर चक्कर लगेलाक बाद अंततोगत्वा ओ स्थान भेटिए गेल जतए हमसभ अपन चप्पल-जूतासभ रखने रही। तकर बाद मोन बहुत हल्लुक लागल छल। इसकान मंदिरसँ निकलि हमसभ बाँकेबिहारी मंदिर दिस बिदा भेलहुँ । श्री हरिदास स्वामी उदास वैष्णव छलाह । हुनक भजन-कीर्तन सँ प्रसन्न भए श्रीबांके बिहारीजी निधिवन सँ प्रकट भेलाह । स्वामी जी श्रीबांके बिहारीजीक निधिवनमे बहुत दिन धरि सेवा करैत रहलाह । श्रीबाँके बिहारी मंदिरक निर्माण सन् १८६२ मे भेल। तकर बाद हुनका ओतय आनि कए स्थापित कयल गेलनि । श्रीबांके बिहारीजी मंदिरमे मात्र शरद पूर्णिमाक दिन वंशीधरन करैत छथि। श्रावण तृतियाक दिन मात्र ठाकुर जी झूला पर बैसैत छथि आ जन्माष्टमीक दिन मात्र हुनकर मंगला आरती होइत छनि। जिनकर दर्शन मात्र सौभाग्यशाली व्यक्तिकेँ होइत अछि आ चरण दर्शन मात्र अक्षय तृतीयाक दिन होइत अछि। कहल जाइत अछि जे श्रीबाँके बिहारीजी रास करबाक हेतु रातिमे निधिवन चलि जाइत छथि। तेँ हुनकर प्रातःकाल मंगला आरती नहि कएल जाइत छनि । इसकान मंदिर पहुँचबाक हेतु आ ओहिठामसँ आगूक यात्राक हेतु हमसभ आब आटोक उपयोग कए रहल छलहुँ । टैक्सीकेँ अतिथिनिवासेमे छोड़ि देलिऐक । कारण ओकरा भितरी मार्गपर कतहु लइए नहि जा सकैत छलहुँ । बांकेबिहारी मंदिर परिसर लग हमसभ आटोसँ उतरि पैरे बिदा भेलहुँ । कनीकाल चललाक बाद एकटा विचित्र घटना भेल। हमर सारिक कान्हपर ऊपरसँ एकटा वानर कुदि गेलनि। ओ विद्युत गतिसँ हुनकर नाकपरसँ चश्मा उठा लेलकनि आ ऊपर कुदि कए लगीचक घरक छतपर चढ़ि गेल। ओ एहि बातसँ बहुत परेसान भए गेलथि । ई घटना ततेक फुरतीसँ घटित भेल जे हम जाबे किछु बुझलिऐक ताबे तँ बानर चश्मा छिनि कए जा चुकल छल । थोड़बे कालमे एक-दूगोटे आएल। ओ कहलक- "हमसभ चश्मा वापस आनि देब। मुदा ताहि हेतु तीनसए रुपया लागत।" ओ मानि गेलखिन। ओ सभ वानरकेँ तरह-तरहक भोजन सामग्री फेकए लागल। वानर भोजन करएमे व्यस्त भए गेल आ चश्मा ओतहिसँ खसा देलक। रच्छ भेल जे चश्मा टुटल नहि। तकर बाद सौंसे लोकसभकेँ कहैत सुनिऐक- "अपन-अपन चश्मा आ झोरा बचा कए राखब। वानर पड़िकल अछि। लुटि लेत।" चश्मा भेटि गेलाक बाद हमसभ बहुत विश्रान्तिक अनुभव केलहुँ । ओहिठामसँ जूता-चप्पल रखबाक हेतु स्थान ताकि रहल छलहुँ कि हमर सारि पछुआ गेलथि। कतहु देखेबे नहि करथि। आब तँ हमसभ बहुत परेसान भए गेलहुँ । मोबाइलपर फोन केलिअनि। एकटा निजगुत स्थान बतओलिअनि । कनी कालक बाद ओ ओहिठाम देखेलीह। भेलैक ई जे ओ एकटा भिखमंगाकेँ किछुटाका देबए लगलखिन । ताबतेमे कैकटा भीखमंगा घेरि लेलकनि। सभ टाका मांगए लगलनि। आब हिनका तँ बहुत मोसकिल भए गेलनि। एकदम एसगरि पड़ि गेल रहथि । हमरसभक फोनक बाद ओ कहुना कए जान बचा कए ओहिठामसँ निकलि सकलीह। एहि तरहेँ थोड़बे कालमे हुनका संगे दूटा दुर्घटना भए गेलनि। तेँ ओ बहुत परेसान जकाँ बुझाथि। खैर ! जे हेबाक छलैक से भए गेलैक। हमसभ बांकेबिहारी मंदिर परिसर पहुँचि गेल रही। एकटा पंडासँ गप्प भेल । ओ पाँचसएसए रुपया लए हमरासभकेँ शीघ्र दर्शन करेबाक जोगार केलक। मंदिरमे भयाओन भीड़ छलैक। तथापि पंडितजीक सहयोगसँ हम तँ बहुत नीकसँ दर्शन कए सकलहुँ । मुदा ओ सभ बहुत प्रयासक बादो भगवानक दर्शन नीकसँ नहि सकलथि। जेना-तेना हमसभ मंदिरसँ वापस अएलहुँ । सभसँ पहिने अपन-अपन जूता-चप्पल तकलहुँ । पंडितजी कहथि जे लोकसभक नित्य हजारो चप्पल-जूता छुटि जाइत अछि, कारण ओहिठाम प्रवेश करबाक द्वारि आ मंदिरसँ निकलबाक द्वारि फराक-फराक अछि। जाहिठाम लोक सामान्यतः अपन जूता रखैत अछि वापसीमे ओहिबाटे बहराइत नहि अछि आ भुतला जाइत अछि। हड़बड़ीमे ओकरसभक जूता ओतहि रहि जाइत छैक जे मंदिर प्रशासन द्वारा फेकि देल जाइत अछि। वृंदावनमे बांकेबिहारी मंदिर बहुत प्रमुख मंदिर मानल जाइत अछि। एहिठाम दोसर प्रयासेमे सही,दर्शन केलाक बाद हमसभ बहुत संतुष्ट रही,सभटा परेसानी बिसरि गेल रही। श्रीबांके बिहारीजीक दर्शनक बाद हमसभ निश्चिन्त भावे अपन बासा दिस बिदा भए गेल रही। थोड़बे कालमे हमसभ प्रभुपाद आश्रम पहुँचि गेल रही । ओतए वाहनचालक हमरसभक स्वागत केलक । राति भरि ओहिठाम विश्रामक बाद दोसर दिन भोरेहमसभ ओहि ठामसँ मथुराक हेतु बिदा भेलहुँ । डेरामे चाहोक ओरिआन नहि छल। तेँ रस्तामे चाहक दोकान तकैत रहलहुँ । मुदा ओतेक भोरे बेसी दोकानसभ बंदे रहए। बहुत मोसकिलसँ एकठाम चाह बनैत देखाएल। ओही बीच वर्षासे शुरु भए गेल छल । तेहनेमे हमसभ टैक्सीएमे बैसल चाह पीलहुँ । तकर बादजे बिदा भेलहुँ तँ कृष्ण जन्मस्थाने लग पहुँचलहुँ । ओहिठाम अपन समानसभ टैक्सीएमे छोड़ि हमसभ जन्म मंदिर परिसर दिस बिदा भेलहुँ । अखनहु वर्षा भइए रहल छल। हमसभ भिजैत जन्मस्थान मंदिरक मुख्यद्वारिपर पहुँचलहुँ । मुदा हमरासभ लग छोट-छोट झोरा छल,मोबाइल फोन छल । ओकरा वापस टैक्सीमे राखए पड़ल । अन्यथा ओकरा लाकरमे राखि सकैत छलहुँ । एही उपक्रममे हमसभ बहुत नीकसँ भिजि गेलहुँ । ओहने हालतिमे हमसभ जन्मस्थान मंदिर परिसरमे प्रवेश केलहुँ । थोड़ेकालक बाद जखन बाहर होमए लगलहुँ तँ हुनका पुछलिअनि- "जन्मस्थान मंदिर कतए अछि?" "ओएह जे कनीकटा स्थान छल, जाहि बाटे हमसभ बहरेलहुँ अछि, सएह अछि जन्मस्थान !" "मोन बहुत दुखी भए गेल। भगवान कृष्णक जन्मस्थानक एहन गति भेल अछि?" आक्रान्तासभ कृष्ण भगवानक जन्मस्थानपर बनल मंदिरकेँ तोड़ि देलक । बादमे स्वतंत्रताक बाद भेल समझौताक अनुसार कनीकटा स्थान भेटल जाहिठाम दर्शन कए लोकसभ संतोष कए लैत छथि। कनीके फटकी बिरलाजी द्वारा बनाओल गेल राधाकृष्णक मंदिर अछि। हमसभ ओहिठाम राधाकृष्णक भव्य मूर्तिक दर्शन केलहुँ । तकर बाद बाहर निकललहुँ । वाहन चालक पार्किंगमे टैक्सी लगओने छल। हमरसभक मोबाइल सेहो ओहीमे राखल छल। ओकरा तकैत हम पार्किंगमे गेलहुँ । मुदा ओहिठाम टैक्सी नहि छल। आब तँ बहुत चिंतामे पड़ि गेलहुँ । एकरा केना ताकल जाएत? अछता-पछता कए आगू बढ़ि रहल छलहुँ कि वाहनचालक टैक्सीके एमहर-ओमहर घुमबैत देखाएल। असलमे देरी भए जेबाक कारणसँ ओहो परेसान भए गेल छल आ हमरासभकेँ ताकि रहल छल। हमसभ टैक्सीमे बैसलहुँ आ द्वारिकाधीश मंदिर दिस बिदा भेलहुँ । मंदिरसँ कनीके फटकी पुलिस रस्ता बंद केने छल। "आगू टैक्सी नहि जा सकत ।"- वाहन चालक बाजल। हम नीचाँ उतरि पुलिसबलाकेँ आग्रह केलिऐक,अपन परिचय देलिऐक। ओ मानि गेल । हमसभ टैक्सीलेने भितर चलि गेलहुँ । मंदिरसँ कनीके फटकी एकटा पंडाजी भेटलाह् । हुनकासँ बात ठीक भए गेल। टैक्सीक पार्किंगोक जोगार ओएह कए देलखीन । तकर बाद हमरासभके संगे बिदा भेलाह। रस्तामे फूल-प्रसाद आर किछु-किछु हमरासभकेँ कीनबा देलाह । हुनके सहयोगसँ हमसभ द्वारिकाधीश मंदिरमे बहुत जल्दीए नीकसँ दर्शन कए लेलहुँ। तकर बाद हमसभ पंडितजीक संगे विश्राम घाट पहुँचलहुँ । कहल जाइत अछि जे भगवान कृष्ण कंसकेँ मारलाक बाद एतहि विश्राम केलथि । जमुनाजीपर बनल ओ घाट बहुत प्रसिद्ध अछि। ओहिठाम पंडितजी हमरासभकेँ लेने गेलाह । घाटपर उपस्थित पंडासभ तरह-तरहसँ पूजा करेबाक हेतु व्यग्र छलाह । मूल उद्येश्य एतबे जे आगन्तुकलोकनिसँ अधिक सँ अधिक टाका टानि ली। जेना-तेना ओहिठाम पूजा केलाक बाद हमसभ टैक्सी लग वापस पहुँचलहुँ । पंडितजी तँ पहिने निकलि गेल रहथि। मुदा एकटा अपन आदमी हमरा संगे लगा देने रहथि जे टैक्सीक पार्किंग धरि हमरासभकेँ पहुँचा देलक। ओकरा गछल टाका देलिऐक आ हमसभ टैक्सीसँ वापस बिदा भेलहुँ । रस्तामे मथुराक प्रसिद्ध पेरा,पैठा कीनलहुँ । आब हमसभ वापस दिल्ली बिदा हेबाक उपक्रममे रही कि रस्तेमे बिरला मंदिर देखाएल मंदिर खुजले छल। हमसभ ओहिठाम सेहो दर्शन केलहुँ । बहुत नीकसँ दर्शन भेल । थोड़बे कालक बाद सेवादारसभ चिचिआ रहल छल- "जल्दी निकलैत जाउ । मंदिर बंद हेबाक समय भए गेल अछि।" हमसभ जल्दीए बाहर भए गेलहुँ । मंदिरक मुख्यद्वारि लग खाली स्थान छल। हमसभ बहुत भिजि गेल रही । भेल जे अपन-अपन वस्त्र बदलि ली। ताहि हेतु झोरासँ अपन-अपन दोसर वस्त्र निलालहुँ आ ओकरा पहिरबाक उपक्रममे छलहुँ कि प्रहरीसभ झगड़ा करए लागल। हमहूँ बहुत जोरसँ डाँटि देलिऐक - "तोरासभकेँ कनीको मनुष्यता नहि छह। देखि रहल छह जे हमसभ भिजल छी। संगमे स्त्रीगणसभ से छथि। वस्त्र बदलितहि हमसभ एहिठामसँ अपने चलि जाएब।" बहुत मोकसिलसँ हम आ हमर श्रीमतीजी तँ अपन-अपन वस्त्र बदलि सकलहुँ । संकोचवश हमर सारि ओहिना भिजले सारी पहिरने रहि गेलीह। घंटो एहि अवस्थामे रहबाक कारण ओ बादमे बहुत जोर दुखित भए गेलीह । दिल्ली पहुँचलाक बाद कैकदिन धरि हुनकर इलाज होइत रहलनि तखन जा कए ओ स्वस्थ भेलीह। मंदिरसभक बाहर बहुत मैलसभ रहैत अछि। मंदिरमे दर्शनकक व्यवस्था सेहो ठीक नहि अछि। शनि-रविक तँ सौंसे घराबंदी कए देल जाइत अछि जाहिसँ अहाँ अपन कार नहि लए जा सकैत छी। बहुत सुधारक प्रयोजन अछि। हमरा बुझेबे नहि करए जे अपन घरक एतेक शांति छोड़ि अनेरे वृंदावन-मथुरामे फसाद करए लोक किएक जाएत? ओहिठाम तँ मात्र हंगामा अछि,चारूकात लालची पंडासभक गीधदृष्टि जे कखन ककरासँ कतेक बेसी टाका झिटि ली। सभठाम पैसा फेकू तमासा देखू बला बात अछि। निश्चय ई स्थिति बहुत दुखद अछि। ई कोना पुण्य काज कहल जाएत? संबन्धित व्यक्तिसभकेँ एहिसभपर सोचबाक चाही जे हिन्दू धर्मक एहन प्रतिष्ठित धर्मस्थलक एहन दुर्गति किएक अछि?आशा करैत छी जे सरकार/धार्मिक संस्थानसभ एहिसभ दिशामे काज करत आ भविष्यमे जखन हमसभ फेर ओहिठाम जा सकब तखन बहुत उत्तम परिस्थिति देखबामे आओत । एहि तरहेँ हमरसभक दू दिनक वृंदावन यात्राक अंत भेल। हमसभ अपन घर वापस आबि कए बहुत आश्वस्त छलहुँ । वृंदावन-मथुराक एहि यात्रामे बहुत गंजन भेल छल। एक तँ मौसम बहुत खराप छल । हमसभ अनेक बेर भिजि गेलहुँ । दोसर वाहनचालक छल तँ सोझ मुदा ओकरा ओहिठामक कोनो जनतब नहि रहैक । ऊपरसँ ओ कैकबेर गलत जानकारी दैत रहल जाहिसँ हमरासभकेँ परेसानी बढ़ल । अगर ओ बाँके बिहारी मंदिरक बंद हेबाक समयक गलत जनतब नहि दैत तँ हमसभ जे अनेरे भिजैत ओहिठाम गेलहुँ आ वापस भेलहुँ ,ओहिसँ तँ बचि सकैत छलहुँ । इसकान मंदिरक प्रभुपादआश्रमक आवास सेहो ठीक नहि छल। चाहो नहो भेटैत छल ओहिठाम , आर सुविधाक तँ बाते कोन? एहिसभक अछैत हमसभ प्रसन्न रही जे मथुरा-वृंदावनक प्रमुख-प्रमुख मंदिरमे हमसभ दर्शन कए सकलहुँ । -रबीन्द्र नारायण मिश्र, Email:mishrarn@gmail.com , m-9968502767 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.५.संतोष कुमार राय 'बटोही'- डायरी 'लव यू टू' (आगाँ) संतोष कुमार राय 'बटोही' डायरी 'लव यू टू' (आगाँ)
04-02-2014
मनमोहन सिंह सरकार फेल भेल
मनमोहन सिंह सरकार फेल भऽ गेल । सभ किछु केर दाम बढ़ि गेल छै। पियौज केर दाम सैटका पार भऽ गेल छै। सभ किछु मँहग भ रहल छै। गरीब भूख मरि रहल अछि। पेट्रोल-डीजल केँ दाम बढ़ गेल छै। गुजरात केर मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी केँ बीजेपी देश केँ अगिला प्रधानमंत्री घोषित कऽ देलकै आओर चुनाव अभियान केर शुरुआत भऽ चुकलै।
जामिया मे एमफिल लेल हम फेर एंट्रेंस देलहुँ अछि, परञ्च इंटरव्यू मे सिनॉप्सिसक टॉपिक 'दलित साहित्य' सँ संबंधित लेलाक कारणे हमरा छाँटि देलाथि। इ देशक राजधानी केँ सेन्ट्रल यूनिवर्सिटी केर विभाग केर लोक केँ भेदभावपूर्ण रवैया छै।
हम टुटि गेलहुँ एक बेर फेर। लल्ली हमरा छोडि गेलीह , हम अंदर सँ टुटल रही, आब बाहरो सँ टुटि गेलहुँ ।
लल्ली केँ हम कोना विसरबै से कियो बताबथि तँ कृपा होएतै। हमर दिन दुर्दिन भऽ गेल। रातिक नीन्द हरा गेल। कवि रसखान केर पाँति याद आबि रहल अछि -
"प्रेम प्रेम सब कोउ कहै, कठिन प्रेम की फाँस। प्रान तरफि निकरै नाहिं, केवल चलत उसाँस ।।"
लल्ली केर जनम दिन आजु छियैय। ओ अपन जनम मना रहल होयतीह। हम आब निचोरल नीबू बनि गेल छी। हमरा आब के पूछत !
03-05-2014
जामिया सँ मोहभंग
जामिया केर एंट्रेंस क्लीयर भेलाक बाद इन्टरव्यू मे हमरा कम नंबर देल गेल । हम जामिया सँ बाहर भऽ गेलहुँ अछि । आब माय हमर फिरिशान रह रहलीह - हमरा ब्याहक लेल । हम पीएच-डी करबाक लेल फिरिशान छलहुँ , परञ्च जामिया हमरा साथ अन्याय केलक। हम अइ दिन केँ जिनगी भरि नहि भूलबै। आब हम जामिया मे एंट्रेस नहि देबै। इ सेन्ट्रल संस्थान मे अखन धरि किछु लोक छथि जे जाति-पाति मे विश्वास करैत छथि। बाबा साहब भीमराव अंबेडकर जी भरसक प्रयास केलाथि कि जाति-पाति खत्म भऽ जायत, परञ्च इ अखनो धरि जिन्न बनल अछि।
आब जामिया हम छोड़ि देलियै। आब हमर मोहभंग भऽ गेल अइ संस्थान सँ। एकटा सपना देखने रहियै अइ संस्थान मे। जिनगी केर गाड़ी पटरी पर लाबै मे अइ संस्थान केर बड़ पैघ हाथ छै। ओहिना फेर हमर जिनगी केर बेपटरी करबाक लेल इ संस्थान जिम्मेदार अछि। दलित आओर पिछड़ा समाज अखनो धरि पछुआयल अछि। से सभ कियो केँ स्वीकार करऽ पड़तैन्ह। अवसर नहि देबै तऽ विकसित भारतक सपना सच नहि होयत। विश्व मे भारत पिछड़ले रहत।
06-06-2014
त्रिखण्ड फेस वन
माय हमर संग रहैत छथि। ओ बउवा बनि गेल छथि। बुढ़ भेला पर सभ कियो बउवा बनि जायत अछि। माय सँ बढ़ि कऽ कोनहु चीज पैघ नहि होएत छै। लल्ली केँ ब्याह भेलाक बदो ओ हमरा नहि बिसरलीह। हम बेड पर पड़ल छी। किछु नहि फुरा रहल अछि। बेर-बेर ओ याद आबि रहल छथि। आजु स्कूल जाय केर मोन नहि भऽ रहल अछि। परञ्च छुट्टी लऽकऽ हम की करबै।
माय रूसी छलीह राति मे। चंद्रकला सँ माय केँ गप्प करा देलियै। आब ओ खुश छथि। माय लेल राति मे माय आदि देलियै। ओ खूब खेलीह। बलवीर सेहो आयल छल। ओ दूटा मुड़ा चबौलक। सिल्वर काँट माछक नाम छेलैह। त्रिखण्ड हमरा जिनगी केर लेल लक्की साबित भेल। जिनगी केर गाड़ी आगाँ बढ़ैत हम निजी स्कूल सँ जुड़ि गेलौंह। नून-रोटी केर जुगाड़ भऽ गेल।
लल्ली केर फोन आबि रहल अछि। त्रिखण्ड केँ चारि बाइ तीन केँ अइ रूम मे हम जिनगी गुजारि रहल छी। माय संग जिनगी केर आनंद किछु औरे छै। माय हमरा लेल जल्दी उठि जायत छथि। स्कूल जाय सँ पहिने हमर खाना रेडी भऽ जायत छै। दु बजे स्कूल केँ छुट्टी भऽ जायत छै। लल्ली केँ हमर क्रियाकलाप केर समय बुझल छै। ओ जरूर फोन करैत छथि रूम पर एलाक बाद। लव पर हमर नाम लिखौने छथि।
-संतोष कुमार राय 'बटोही', ग्राम- मंगरौना अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.६.कल्पना झा- सते कल्पना झा सते
बौआ रे सुनय छै, गाढि कखनो ने बाजी, किया गे माय ?, नीक संस्कार नय होय छै ई, ई कहलकै जे आ बाबु जे तोरा दै छथुन से, ओ त अहिना बजैय छथुन। ओ बकलेल आ हम बताहि। सते ...!
-कल्पना झा, बोकारो अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.७.रबीन्द्र नारायण मिश्र- ठेहा परक मौलाएल गाछ (धारावाहिक) रबीन्द्र नारायण मिश्र ठेहा परक मौलाएल गाछ (धारावाहिक) 26 आइ छओ बजे भोरे हमरासभकेँ हबाइ जहाज पकड़बाक अछि। ताहि हेतु चारि बजे भोरेसँ उठि गेल छी। दुनूगोटे नहा-सोना कए पूजा-पाठ करैत छी। फेर रमा चाह बनबैत छथि। हमसभ चाह पीबैत छी। एतेक भोरे किछु खेबाक मोन नहि होइत अछि। तेँ जलखै बना कए राखि लेने छी जे हबाइ अड्डा पहुँचलाक बाद समय रहलापर उपयोग कएल जाएत । हमरसभक जेबाक कार्यक्रमक जनतब श्यामकेँ छैक। हमरा उम्मीद छल जे ओहो भोरे उठि जाएत,हमरासभक संगे हबाइ अड्डा धरि चलत। मुदा नीचाँ तँ कोनो अबाज नहि सुना रहल अछि। कोनो तरहक गतिविधिक संभावना नहि लगैत अछि। बुझेबे नहि करए जे बात की अछि? हमसभ आब तैयार छी। समय समाप्त अछि। जखन ओ ऊपर नहिए आएल तँ हमही नीचाँ जा कए देखलहुँ। मुदा एतए तँ बाहरी द्वारिएपर ताला लटकि रहल अछि। आब की कएल जाए? कहीं श्याम जानि-बूझि कए कतहु सहटि गेल की? मुदा से किएक करत? ओहो जखन हमसभ जाइए रहल छी? कहीं कोनो परेसानी तँ नहि भए गेलैक? जखन कोनो निजगुत जानकारी नहि भेटल तखन ओकरा फोन लगेबाक प्रयास केलहुँ । फोनक घंटी बजैक मुदा ओ उठा नहि रहल छल। टैक्सी से आबि गेल छल। आखिर हमसभ बिना विलंबकेँ बिदा भए गेलहुँ । मोनमे बहुत दुख रहए जे जाइतो काल श्यामसँ भेंट नहि भेल । आखिर हम दुनू बेकती टैक्सीसँ हबाइ अड्डा बिदा भेलहुँ । रस्तामे रमा रहि-रहि कए श्यामक चिंतामे कानए लागथि। "केहन नीक बच्चा छल ई आ केहन भए गेल। कहि नहि ककर नजरि लागि गेलैक? हम कहिऐक जे अपने देशमे रहै,आब एतहु नीक सँ नीक काज भेटि जाइत अछि। फेर बेसी टाका लइए कए की करब? जे अछि ओहीमे संतोषसँ जीबि ली। कोनो चीजक अंत नहि छैक। मुदा ओ हमर किछु नहि सुनलक। चलि जाइत रहल। मुदा की प्राप्त भेलैक?" "ई तँ हम-अहाँ ने सोचैत छी। मुदा ओ तँ जे अछि ओहीमे मगन अछि। आनन्दमे अछि। ओकरा हिसाबे हमहीसभ गलत छी। पुरान सोचक लोक छी। अनकर बात नहि बूझि रहल छी। एहनमे की उपाय अछि?" इएह जे ओ अपना हिसाबे जीबए आ हमसभ अपना हिसाबे । आर कोनो समाधान नहि फुराइत अछि। हमसभ गप्प-सप्प करिते रही कि हबाइ अड्डा आबि गेल । हमसभ टैक्सीसँ उतरैत छी। अपन सामानसभ ट्रालीमे रखैत छी। एतबहिमे पड़ोसीक फोन आएल। "की समाचार?" "आइ कोना मोन पड़ि गेलिअह?" "मोन तँ सदिखन रहैत छह। मुदा तूँसभ बेटा लगमे आनन्द मनबैत छलह। सोचलहुँ कि किएक तंग करी। एहन समय तँ बेरि-बेरि अबैत नहि छैक।" "आनन्दमे की रही कपार। कहुना कए समय कटलहुँ। आब वापस आबि रहल छी।" "एतेक जल्दी...? छओ मास तँ रहिए सकैत छलह।" "दिल्ली पहुँचलापर गप्प करब। अखन तँ हबाइ अड्डापर छी। सामानसभ ट्रालीमे धएल अछि। आब चेकइन हेतु बिदा होइतहुँ कि तोहर फोन आबि गेल।" "ओहो! तँ तूँसभ बिदा छह।" "हँ, हँ।" "हम तँ ओहि डेराकेँ छोड़ि देलहुँ ।" "से किएक?" "मकान मालिक बहुत परेसान करए लागल छल। फेर हमर श्रीमतीजीक बहुत दुखित रहए गेलीह । तकरबाद ओ फ्लैट जेना काटैत छल। आखिर ओकरा छोड़ि देलहुँ, दिल्ली सहर सेहो छोड़ि देलहुँ । कारण जतए कतहु जाइ पुरान-पुरान घटनासभक स्मृति पछोड़ करैत रहैत छल। चाहे चांदनी चौक होइक, लाल किला होइक अथवा लोधी गार्डेन होइक, कतहु हुनका बिना मोन नहि लगैत छल। अपितु, सदरिकाल पुरान-पुरान दृश्यसभ मोन पड़ि जाइत छल। तेँ हम सोचलहुँ जे मकानो छोड़ी आ ई सहरो छोड़ी, तखनहि जान बाँचत।" "आब कतए छह?" "बेंगलुरु स्थित अपन आवासमे।" "ओ तँ ढहि-ढनमना गेल छल ।" "सही कहलह । ओकरा नीकसँ मरम्मति करेलहुँ । आब चैनसँ रहैत छी।" "आब भेंट कोना होएत?" "पहिने आबह तँ...। इच्छा रहलापर दूरी कोनो समस्या नहि रहि जाइत छैक नहि तँ लगपासमे रहितहुँ लोक अपरिचित रहि जाइत अछि।" समय कम छल । तेँ हमसभ झटकारि कए आगू बढ़ैत छी। अपन समानसभ सेहो ट्रालीपर घिचने जा रहल छी। हबाइ अड्डाक मुख्यद्वारि लग पहुँचिते छी कि श्यामकेँ अस्तव्यस्त ठाढ़ देखैत छी। ओकर माथपर पट्टी बान्हल छल। हाथोमे कतहु-कतहु चोटक निसान छल। "ई की?"-हम माथक पट्टीदिस इसारा करैत छी। "रातिमे चोटिल भए गेलहुँ। अस्पताल जाए पड़ल । तेँ भोरे अहाँसभकेँ बिदा करबाक हेतु समयसँ नहि आबि सकलहुँ। अस्पतालसँ सोझे एतहि अएलहुँ अछि। उम्मीद तँ नहि रहए जे भेंट होएत। तथापि सोचलहुँ जे प्रयास करी।" श्यामक ई दुर्दशा देखि रमा बहुत चिंतित छथि। "मुदा ई सभ भेलैक केना?" "आब अखन की कहू? शुभ,शुभ कए बिदा होउ । ओतए पहुँचलापर गप्प करब।" "डेबड कतए अछि?" "ओ कतए रहत? ओएह तँ सभटा तमासा केलक अछि।" हमसभ श्यामक बात सुनि गुम छी। हबाइ जहाज छुटबाक समय लगीच अछि। तेँ ओकरासँ बिदा लैत छी। जल्दी-जल्दी कागज-पत्र जाँच करबैत छी आ आगू बढ़ि जाइत छी। आब हबाइ जहाज छुटैबला छल। हमरसभक नाम लेल जा रहल छल। हाँइ-हाँइ हमसभ ओतए पहुँचैत छी। अपन-अपन टिकट देखबैत छी आ हबाइ जहाज दिस मिनीबससँ बिदा होइत छी। अमेरिकाक सिएटल हबाइ अड्डापर सोझे दिल्ली जाएबला हबाइ जहाजमे दुनू बेकती बैसि गेल छी। थोड़बे कालमे जहाज भरि जाइत अछि। यात्रीलोकनिमे अपूर्व उत्साह बुझाइत अछि। ओहिमे बेसी गोटे तँ अपने देशक छथि। किछु विदेशी यात्रीसभ सेहो देखाइत छथि। संभवतः कोनो विशेष काजसँ जाइत हेताह। हमसभ सोचने रही जे एकबेर अमेरिकासँ हटब,हमरसभक परेसानी खतम भए जाएत । मुदा एतए तँ जाइतो-जाइतो चिंताक कारणसभ प्रकट होइत रहल। एक तँ पड़ोसीक चलि गेनाइ। हमरासभक लेल ई एकटा भारी क्षति छल। बेर-कुबेर हमसभ ओकरासँ मदति लेल पहुँचि जाइत छलहुँ । ओहो जेना तैयारे रहैत छल। आब की होएत? आब तँ ओहो चलि गेल । ओकर पत्नी तँ हीरा छलि,हीरा । लगबे नहि करितए जे हमसभ केओ आन छिऐक। आश्चर्यक बात छल जे दुनू बेकती एहन परोपकारी छल। आखिर ओहोसभ तँ एही दुनिआक लोक छल । पड़ोसीक तँ जे से ,मुदा श्यामक समस्याक तँ जेना अंते नहि छैक। कहाँसँ ओ डेबिडक चक्करमे पड़ि गेल जे सभ किछु सत्यानाश भए गेलैक। ने अपने सुखी अछि ने ककरो सुखी राखि सकैत अछि। एहिसभ बातसँ रमा बहुत मौलाएलि लागि रहल छलीह। हम हुनकर मोन बदलबाक भरिसक प्रयास करैत छी। बीचमे चाह-जलखै भेटनाइ शुरु भए गेल रहैक। हमहूँसभ अपन-अपन जलखैक पोटरी लए लैत छी। अपन सामनेक जगहमे रखैत छी। एहिसभमे व्यस्त भए गेलासँ रमाक मोन कनी हल्लुक होइत छनि। जलखै केलाक बाद ओ सुति जाइत छथि। हम ताबे अखबारक पन्ना उनटबैत छी। हमसभ सपनहुमे नहि सोचने रही जे श्याम एतेक दुर्दशामे जीबि रहल अछि। तथापि ओहिसँ निकलबाक हेतु कोनो प्रयास नहि करैत अछि,अथवा आब हालति ओकर वशमे नहि रहि गेल छैक। माए-बाप तँ जन्मे दैत अछि,मुदा भाग्य थोड़बे बदलि देत। जकरा हाथे जे हेबाक लिखल अछि से ओ करैत अछि। सोलह घंटाक लगातार हबाइयात्राक बाद हमसभ सकुशल दिल्ली हबाइ अड्डापर पहुँचि गेल रही। जान मे जान आएल । अपन देशक हबा लगिते जेना मोनमे स्फूर्ति आबि गेल। रमा सेहो प्रसन्न छलीह। 27 हमसभ दिल्ली हबाइ हड्डापर हबाइ जहाजसँ नीचाँ उतरि गेल रही। बेल्टपरसँ सामानसभ लए लेने रही। हमसभ अपन-अपन सामान लए बाहरक द्वारि दिस बढ़ैत छी। आब अपन डेरा जेबाक छल। ताहि हेतु ओलासँ टैक्सी आरक्षित करओलहुँ । हमरासभकेँ बहुत कम सामान रहए। ओकरा अपने शंगे अगिला सीटपर राखी देलिऐक। दिल्ली अबितहि लागल जेना अपन गाम आबि गेलहुँ । पुरान परिचित परिवेश,चिन्हल रोडसभ,जानल-पहिचानल लोक-वेदसभ । स्वाभाविक छैक जे एहन माहौलमे आबि गेलाक बाद कनी आराममे रहए। मुदा जखन डेरापर पहुँचलहुँ आ सामनेक पड़ोसीक फ्लैट खाली देखलिऐक तँ मोनमे घबड़ाहटि भेल। आब के मौकापर हमरासभक संगे निःस्वार्थभावसँ ठाढ़ होएत? बहुत मोसकिल अछि एहन लोक भेटब,ओहो दिल्लीमे? दिल्लीक हेतु बिदा होएबासँ पूर्वे हमरा पड़ोसीक फोन आबि चुकल छल। हम ओकर वर्तमान स्थितिसँ अवगत भए गेल रही। मुदा जखन एहि परिस्थितिसँ दिल्ली अएलाक बाद मुखापेक्षी भेलहुँ तखन मोन वस्तुतः उदास भए गेल। "आन आदमीपर कोन अधिकार अछि अहाँकेँ? अपन लोक तँ पुछिते नहि छैक। ओ तँ एकदम तेहल्ला लोक अछि। संयोगसँ भेटि गेल रहए। आब अपन काज पूरा केलक आ चलि गेल। इएह छैक संसार। अनका भरोसे जीवन तँ नहि चलि सकैत अछि ने। आखिर अपने पुरुषार्थ काज दैत छैक।"- से सभ सोचए लगलहुँ । सामनेक फ्लैटमे ताला लटकल छल। असलमे मकान मालिक बहुत फुकि कए ककरो मकान किरायापर दैत छलैक। तकर कारण रहैक जे एकबेर एकटा बहुत फसादी किरायेदार आबि गेलैक। जखन आएल रहए तखन तँ बहुत विनम्र बनल छल। संगमे पत्नी आ एकटा टेल्ह रहैक। बहुत खुसामद करए लागल छल। मकान मालिक ओकर हालति देखि द्रवित भए गेलाह। ओकरा रहबाक अनुमति दए देलखीन। कोनो एकरारनामा सेहो नहि बनओलनि। जे किराया कहलखिन से ओ मानि गेलनि मुदा अगाउ किछु नहि देलकनि। से जखन कहलखिन तँ भोकारि पारि कए कानए लागल । आब की करितथि? फ्लैटक कुंजी दए देलखीन। ओ तँ जेना धपाएले छल। धराधर अपन सामानसभ आनि लेलक आ ओही रातिसँ फ्लैटमे रहए लागल। तकर बाद तँ ओ तेहन दिनचर्या धेने रहए जे कखनहु भेंटे नहि होनि। हिनकासभकेँ उठबासँ पहिनहि अहल भोरे ओ निकलि जाए आ जखनसभ सुति रहल तखन दुपहर रातिमे घर वापस आबए,ओहो कहिओ,कहिओ । एहि तरहेँ दू मास समय बीति गेल। कथी लेल किराया देतनि,अगाउक तँ बाते जाए दिअ। एकदिन दस बजे रातिमे मकान मालिक धपाएल बैसल रहथि। जहाँ किरायेदार फ्लैट दिस बढ़ल कि धेलनि ओकर गट्टा। औ बाबू! तकर बाद जे ओ चिकरल से की कहू? १०० संख्यापर फोन घुमा देलक । दे -दनादन, दे-दनादन, पुलिस आबि गेल । हिनकेपर तरह-तरहक आरोप लगा देलकनि। पुलिसकेँ ई कतबो बुझबथिन ओ किछु सुनबाक हेतु तैयार नहि रहनि। आखिर दुनूगोटेकेँ लेने-देने पुलिस थाना चलि गेल। राति भरि दुनूगोटे थानाक हाजतिमे बंद रहलाह । प्रात भेने किछु बहुत मोसकिलसँ जान बचा कए घर वापस लौटलाह । कतबो किछु कहथिन ओ ने किराया दनि,ने मकान खाली करनि। एकदिन तँ तेहन बात कहलकनि जे सकपका गेलाह- "यदि बेसी तंग करब तँ छओ इंच छोट कए देब।" आब तँ मकान मालिक बहुत परेसान भए गेलाह । तखन की करितथि? पुलिसेकेँ किछु चढ़औआ देलखीन ,तखन ओसभ दूपहर रातिमे किरायेदारकेँ सुतलसँ उठओलक आ घरसँ बाहर कए देलक। ओकर सामानसभ बाहर रोडपर राखि देलक। मकान मालिककेँ जानमे-जान अएलनि। तकर बाद तँ किरायेदार केँ बहुत सावधानीसँ जाँच केलाक बादे ओ फ्लैट किरायापर देबए चाहथि। इएह कारण अछि जे हुनकर फ्लैट खाली छनि। किरायेदार अबैत छनि,मुदा टरका दैत छथिन। हम अपन फ्लैटक ताला खोलैत छी। रमा थाकि गेल छथि। ओ बाहरे सीढ़ीपर बैसि जाइत छथि । दूमासेक भीतरमे फ्लैटक ई स्थित भए गेल? हम मोने-मोन सोचलहुँ। सौंसे फ्लैटमे गरदा भरल अछि। जेबा काल हड़बड़ीमे सामानसभ जसकेँ तस रहि गेल छल। कथूसँ ओकरासभकेँ झाँपि देने रहितिऐक तँ ई गति नहि होइत। सोफासभपर ततेक माटि जमा भए गेल अछि जे ओकरा हटाएब ,साफ करब आ बैसए जोकर बनाएब बहुत कठिन काज अछि । टेलीविजन पर्यन्त ओहिना रहि गेल छल। ओ चलिते नहि अछि। लगपासमे कोनो आदमी तकबाक प्रयास केलहुँ । मुदा केओ तैयार नहि भेल। हम दुनू बेकती रस्ताक झमारल रही। रमाक हालति तँ आर खराप रहनि। केना की कएल जाए? किछु फुराए नहि रहल छल । हारि कएअपने लागि गेलहुँ । जेना-तेना फ्लैटकेँ रहए जोकर बना सकलहुँ । तखन रमाकेँ उठओलिअनि। ओ तँ निभेर सुति गेल रहथि। फ्लैटक भीतर अएलाक बाद ओ प्रसन्न रहथि। कहैत छथि- "जान बचि गेल। बड़का फसादमे फँसि गेल रही अपनेसभ।" "की करबैक? धिआ-पुताक ओतए तँ लोक जाइते अछि। मुदा एना हेतैक से के सोचि सकैत छल? हमसभ बहुत भूखल रही । रमा हाँइ-हाँइ किछु भोजनक ओरिआन करैत छथि। हमसभ भोजन केलाक बात सुति गेलहुँ से दोसर दिन भोरेमे जा कए निन टुटल । 28 प्रात भेने जखन मोबाइल फोन खोललहुँ तँ ओहिमे मिसकाल भरल छल। कमाल भए गेल। एतेक दिन जखन बाट तकैत रही जे केओ हाल-चाल लिअए तखन एकटा कौओ डाक नहि देलक। कथी लेल केओ फोनो करत?दिल्ली वापस अबितहि एतेक रास मिसकाल। विश्वासे नहि होइत छल। मुदा सत्य तँ ओएह छल । आश्चर्यचकित छलीह रमा। हमहूँ परेसान रही। बात की छैक? के एतेक फोन कए रहल अछि आ किएक?बेरा-बेरी ओहि फोन संख्यासभपर फोन लगबैत छी। "हम सुशील बाजि रहल छी, दिल्लीसँ।" "ओहो! तूँसभ दिल्ली आबि गेलह की? " "हँ, हँ, आबि गेलहुँ । काल्हिए दुपहरमे । तकरबादसँ फ्लैटक सफाइमे लागल रही। ओहिमे ततेक थाकि गेलहुँ जे सुता गेल। भोरे तोहर मिसकाल देखलहुँ।" "हमसभ तँ दिल्लीक डेरा छोड़ि देलहुँ । तकर बाद भेल जे आब बहुत भेलैक किरायेदारक जिनगी। अपन मकानमे बेंगलुरु चलि अएलहुँ । आबि तँ गेलहुँ, मुदा तहिएसँ हमर श्रीमतीजी अस्वस्थ छथि।" "की भेलनि?" "की कहू? आँतमे कैंसर भए गेलनि अछि। डाक्टरसभ तँ इसारा कए चुकल अछि। तथापि मोहवश लागल छी। ओना छोड़लो तँ नहि जा सकैत अछि।" सोचल जा सकैत अछि जे पड़ोसीक की हाल हेतैक। मुदा उपाय की? नियतिकेँ स्वीकार करबाक अतिरिक्त कोनो विकल्प नहि रहि जाइत अछि। "लगैत अछि चिंतामे पड़ि गेलह।" "चिंता होएब तँ स्वाभाविके थिक।" "जे किछु संभव अछि से कइए रहल छी। भए सकैत अछि जे इलाजक क्रममे दिल्लीओ आबी। यदि ओतए आएब तखन भेंट हेबे करत।" "अबस्स...।" दोसर मिसकाल श्यामक छल। "ओ किएक एतेक फोन केलक?"- मोनमे बहुत चिंता भेल। ह्वात्सपपर ओकरा फोन करैत छी। फोनक घंटी बड़ीकाल धरि बजिते रहि जाइत अछि। ओमहरसँ उत्तर नहि अबैत अछि। एहि बातसँ आर चिंता होइत अछि। मुदा कइए की सकैत छी? भावी प्रबल। एकटा बात तँ बूझि गेलिऐक जे श्याम हमरासभकेँ दुख छोड़ि कए आर किछु नहि दए सकैत अछि । जाबे ओतए रहलहुँ,परेसानीमे पड़ल रहलहुँ । आब जखन दिल्ली लौटि गेलहुँ अछि तखनहु ओ पछोड़ केने अछि।" तेसर मिसकाल छल मुम्बईसँ शालिनीक । अफसोच होअए लागल जे सभसँ पहिने ओकरे फोन किएक नहि केलहुँ? हम शालिनीकेँ फोन लगबैत छी। जेना ओ पहिनेसँ तैयार बैसल होअए। तुरंत फोन उठा लेलक। "गोर लगैत छी। रातिमे कैकबेर अहाँक फोन लगेबाक प्रयास केलहुँ मुदा कोनो उत्तर नहि भेटल।" हमसभ थाकि गेल रही। जल्दीए सुति रहलहुँ ।" "हमरो सएह अंदाज होइत रहए। आर की समाचार अछि?" "सामनेबाला पड़ोसी मकान छोड़ि देलक।" "से किएक? ओ तँ बहुत नीक लोक छल।" "किरायेदार छल, कहिओ ने कहिओ तँ ओकरा फ्लैट छोड़ैक रहैक। सुनैत छी, मकान मालिक संगे किछु बात लए कए बकझोँ भए गेलैक। तकर बाद ओ मकान खाली करबा लेलकैक।" "अहाँसभ तँ एकदम असगर पड़ि गेल छी।" "आब तँ जे स्थिति छैक तकर तँ सामना करहि पड़त। दोसर कोन उपाय?" "हमसभ दिल्ली आबहिबला छी। ओतहि गप्प करब। आब अहाँसभक समय असगर रहएबला नहि अछि। परिवारक सहयोग चाहबे करी।" "ई कोन नव बात भेल। समस्या तँ सभकेँ बूझल अछि, मुदा समाधान?" "समाधानो तँ हमहीं, अहाँ ने करबैक।" "बात तँ सही कहि रहल छह। आबह दिल्ली तखन गप्प करब।" हम एहि बातसँ प्रसन्न रही जे शालिनी दिल्ली आबि सकैत अछि। हमरा अखनहु ओकरासभसँ किछु उम्मीद बाँचल छल । हम अगिला मिसकाल दिस बढ़ि रहल छलहुँ कि रमा टाहि देलथि- "हद भए गेल। जखनसँ उठलहुँ अछि फोनसँ सटि गेल छी। चाह बनल सेरा रहल अछि । सभसँ पहिने चाह पीबू। तकर बाद सामानसभक सूची बनाउ। घर एकदम खाली अछि। फोन-फानसँ किछु होमएबला नहि अछि। अमेरिका जा कए देखिए अएलहुँ अछि जे की कोना छैक? अपन हाथ-पैर चलैत रहए सएह ईश्वरसँ प्रार्थना करू । यदि से नहि संभव होअए तखन एहि दुनिआसँ उठा लेथि,घिसरी नहि कटाबथि।" "अहाँ एतेक उदास नहि होउ। मानलहुँ जे परेसानी छैक, मुदा तेँ की? हमसभ हारि मानि लेब ताहिसँ की फएदा होएत?लोक अपनेटा लेल नहि जीबैत अछि । ओकरा समाजक सामने सेहो किछु कर्तव्य रहैत छैक " "बेसी दर्शन नहि झाड़ू। आउ, पहिने चाह पीबैत छी।" "ठीके कहलहुँ। हम ओतेक बुधिआर ने ने छी।" दुनूगोटे हँसि दैत छथि। "गजबक स्वाद अछि एहि चाहमे।" "केना ने रहत? भोरेसँ एकर ओरिआनमे लागल छलहुँ । फेर दिल्लीक चाह तँ नामी अछिए।" एक दिन बितल,दू दिन बितल,तीन दिन बितल मुदा शालिनी दिल्ली नहि आएलि,ने तकर बाद ओकर कोनो फोनो आएल । अमेरिकासँ श्यामक फोन नहि आएल । हमर भूतपूर्व पड़ोसी सेहो गुम पड़ि गेल । कहने रहए जे पत्नीक इलाजक कर्ममे दिल्ली आबि सकैत अछि,मुदा तकर बाद किछु खबरि नहि भेटल। ओहिदिन किछु आर मिसकालसभ आएल छल। कहि नहि के सभ छल। अपरिचित मोबाइल फोन संख्यामे फोनो करबामे डर होइत छल। आइ-काल्हि कोनो ठेकान नहि कखन के ठगि लेत । "केओ खास आदमी रहैत तँ फेर फोन कए सकैत छल । एहिसभ बातकेँ एतेक महत्व नहि दिऔक। काजमे लागि जाउ । खाली छी ने तेँ एतेक बातसभ सोचाइत रहैत अछि।" "बात तँ अहाँ लाखटकाक कए रहल छी। मुदा आब एहि बएसमे कोन काज भेटत?" "शांत मोनसँ सोचिऔक। बहुत किछु उत्तर भेटि जाएत । हमरसभक मोन जे अछि ने समुद्र अछि समुद्र । एहिमे की की भरल अछि तकर कोनो अंत नहि अछि।" हम रमाक मुंह देखैत रहि जाइत छी। 29 अमेरिकासँ वापस अएलाक बाद एक सप्ताह समय बीति गेल। एहि बीचमे हमर घरक व्यवस्था फेरसँ पटरीपर आबि गेल । हम दुनू बेकती आब कनी चैन भेलहुँ । भोर-साँझ टहलबाक हेतु लगीचेक पार्कमे चलि जाइत छी । रमाक संगे समय नीकसँ कटि जाइत अछि। हुनकर प्रेरणासँ हम आब जलखै,भोजन बनाएब सिखि रहल छी। चाह तँ पहिनेसँ बना लैत छी। हुनकर कहब सही छनि जे आदमीकेँ आत्मनिर्भर हेबाक चाही। मुँहतक्की नहि हेबाक चाही। यदि अनकर भरोसे रहब तँ दुखे-दुख । कैकदिन अपनेसँ जलखे बना लैत छी। क्रमशः भोजनो बनेबाक प्रयासमे लागल छी। आन दिन जकाँ आइओ भोरे हम उठलहुँ । रमा सेहो हमरे संगे उठि कए चाह बना रहल छलीह। अचानक हमर फोनक घंटी बाजल । फेर मिस कालबाला फोन संख्यासँ फोन छल। ई संख्या हमर फोनमे पहिनेसँ अछिओ नहि। तखन के अछि? किएक बेर-बेर फोन कए रहल अछि?हम फोन उठा लैत छी। "सुनैत छी ने?" "हँ, हँ नीकसँ सुनैत छी। अहाँ के छी, आ बेर-बेर किएक फोन करैत छी?" "हम छी सरकारी इनस्योरेंस कंपनीक निदेशक। हम सरकारी कर्मचारी सभक बीमाक हिसाब रखैत छी। अहाँक नामे किछुटाका पड़ल अछि से निकालि किएक नहि लैत छी? यदि काल्हि धरि से नहि करब तँ अपनेक टाका रिजर्व बैंकमे चलि जाएत। तकर बाद ओ टाका वापस होएब असंभव भए जाएत । तेँ सोचलहुँ जे एक बेर फोन कए अहाँकेँ चेता दी।" "मुदा हमरा तँ सेवानिवृत्तिकालेक समय सभटा हिसाब-किताब भए गेल रहए। टाकासभ सेहो भेटि गेल रहए। तखन ई टाका कतएसँ आबि गेल?" "हद भए गेल । एक तँ अहाँक मदति करए चाहैत छी, ऊपरसँ अहाँ तरह-तरहक कैफियत पुछि रहल छी। जे ठीक बुझाए से करब। हमरा आरो काजसभ अछि।" -से बाजि ओ फोन काटि देलक। आब हमरा होअए लागल जे की पता ओ सही कहने होअए? यदि किछु टाका भेटि जाएत तँ एहि समयमे बहुत मदति भए जाएत। तखन की कएल जाए? रमाकेँ पुछैत छिअनि। ओ स्वयं हमरे लग आबि रहल छलीह। "तरकारीसभ घटि गेल अछि। आइ साँझ धरि आनि लेब ।“ "ठीक छैक ।" "एकटा बात बुझलिऐक?" "की?" तकर बाद हम हुनका सभटा वृतान्त सुना देलिअनि। "जखन ओ फोन केलक तँ ओकरेसँ ने सभटा जानकारी लितहुँ। हम एहिमे की कहि सकैत छी? - से कहि ओ चलि गेलीह। हम ओही फोन संख्यापर दोबारा फोन करैत छी। फोन लगैत अछि आ कटि जाइत अछि। ताबतेमे एकटा ह्वात्सप समाद अबैत अछि- "इनस्योरेंसक बाँकी टाकाक भुगतान हेतु निम्नलिखित लिंकपर क्लिक करू----" ओहि समादक नीचाँमे एकटा लिंक छलैक। हम ओहिपर क्लिक करैत छी। ओ क्लिक करितहि बड़ीकाल धरि घुमैत रहैत अछि आ अंतमे बंद भए जाइत अछि। हमहूँ थाकि गेल रही। मोबाइल फोन ठामहि छोड़ि स्नानगृह जाइत छी। स्नान-धयान केलाक बाद फेरसँ मोबाइल फोन उठबैत छी। ओहिमे एकटा एसएमएस आएल छल- "अहाँक बैक खातासँ दस लाख टाका कोनो दोसर बैंक खातामे पठाओल गेल अछि। कोनो गड़बड़ी बुझाए तँ बैंकक ब्रांचपर संपर्क करू।" मोबाइल फोनमे ई समाद देखितहि हमर माथ घुमि गेल। हम ठामहि खसलहुँ । रच्छा भेल जे नीचाँमे गद्दा धएल रहए । हम ओहीपर खसल रही। बेसी चोट नहि लागल । हमरा खसलासँ धम्मसँ अबाज भेल । अबाज सुनितहि रमा दौड़लीह- "की भेल? की भेल?" हम मोबाइल फोन दिस इसारा करैत छिअनि। मुदा ओ किछु बूझि नहि पाबि रहल छथि। मोबाइल फोनमे की लिखल अछि से हम कहि नहि पाबिअनि। रमा हमरा पानि आनि कए दैत छथि। हम पानि पीबैत छी। ओ हमर माथो हँसोथि दैत छथि। हमर मोन हल्लुक होइत अछि। हम हुनका मोबाइल फोनक समाद देखबैत छिअनि। की बात छैक से साफ-साफ किएक ने कहैत छी जे बेर-बेर मोबाइल-मोबाइल कए रहल छी? " "केओ दस लाख टाका बैंक खाता सँ निकालि लेलक?" "ऐँ?" "सही सुनलिऐक।" "मुदा ई भेलैक कोना?" "की कहि सकैत छी। एकटा लिंकपर क्लिक केलिऐक की दस लाख टाका स्वाहा भए गेल।" आब तँ ओ छाती पिटए लगलीह। हुनका सम्हारब मोसकिल भए गेल। हम तँ अपने आहत रही। की करी किछु बुझेबे नहि करए। फोन फेरसँ उठबैत छी। ओ एकदम सपाट भेल रहए। थोड़बे कालक बाद फेर एकटा समाद आएल- "अहाँक बैंक खातासँ आठ लाख टाका खर्च भेल अछि।" ई समाद तँ वज्र जकाँ लागल। हिम्मति नहि होअए जे रमाकेँ कहिअनि। लगैत अछि आइ हमरसभक बैंकक खाता साफ भए जाएत । हम साहस कए उठैत छी। रमाकेँ सेहो संग करैत छी आ बैंक बिदा होइत छी। हम घरसँ बिदा भए गेल रही। बैंक पहुँचएबला रही। एतबहिमे मोबाइल फोनपर फेर समाद आएल । "अहाँक बैंकक खातासँ छओ लाख टाका खर्च भेल अछि।" एहि तरहेँ एकहि दिनमे चौबिस लाख टाका हमर बैंकक खातासँ उड़ि गेल छल। हम हुनका ई सभ नहि कहलिअनि । होअए जे मोबाइल फोनकेँ फेकि दी। मुदा ताहिसँ की होएत? पता नहि आबो ईसभ रुकत की हमर खाता साफे कए मानत? 30 हम दुनू बेकती सोझे बैंक प्रबन्धकक कोठरीमे जाइत छी। ओ हमरासभकेँ परेसान देखि बूझि गेल जे किछु गड़बड़ भेल अछि । ओ पुछैत अछि- "की बात?" "हमरसभक एहि बैंकमे संयुक्त खाता अछि। ओहिमेसँ आइ एक घंटाक भीतरे चौबीस लाख टाका केओ उड़ा लेलक। "से कोना? "एकटा लिंक हमर मोबाइल फोनपर आएल छल। हम ओकरा दबा देलिऐक। तकर बाद तँ अपने टाका निकलति गेल। प्रबन्धक तुरंत एकटा किरानीकेँ बजबैत अछि । ओकरासभटा बात बुझा दैत छैक। संगे हमरसभक पासबुक आ अन्य जानकारी सेहो ओकरा दए दैत छैक। हमसभ ओहि किरानीक संगे प्रबन्धकक कोठरीसँ बाहर होइत छी। ओ किरानी तुरंत अपन कम्प्युटरपर जा कए किछु-किछु करैत अछि। कतहु-कतहु फोनो करैत अछि। तकर बाद हमरा कहैत अछि- "अहाँक चौदह लाख टाका हम बचा देलहुँ। ओ अखन बीचेमे पड़ल छल। मुदा शुरुक दस लाख टाका निकलि गेल अछि। ओ सभ ओकरा दोसर बैंक खातामे पहुँचाबएमे सफल भए गेल । तेँ अखन ओकरा हम किछु नहि कए सकलहुँ। आब ओकर जानकारी साइबर अपराध प्रकोष्ठकेँ देल गेलैक अछि । देखिऔक की भए सकैत अछि। असलमे अहाँकेँ सभसँ पहिने साइबर अपराधबला मोबाइल फोन संख्यापर फोन करबाक छल। यदि से करितहुँ तखन आर जल्दी कारबाइ संभव होइत आ अहाँक सभटा टाका बचि जाइत । मुदा आब दस लाख टाका तँ फँसिए गेल अछि। देखा चाही साइबर अपराध शाखा की कए पबैत अछि?" प्रबन्धकक बात सुनि कए किछु तँ उसास भेल जरूर । मुदा अखनहु दस लाख टाका फँसले अछि। कहि नहि की होएत? हराएल धन वापस भेटि जाएब बहुत भाग्येसँ संभव होइत अछि। इएहसभ सोचैत हमसभ बैंकसँ निकलबाक उपक्रम कए रहल छलहुँ कि प्रबन्धक अपन कोठरीमे बजओलक। हमरा कहैत अछि- "रच्छ भेल जे अहाँ बैंक आबि गेलहुँ। कम सँ कम चौदह लाख टाका अहाँक बाँचि गेल। यदि कनी आर पहिने आएल रहितहुँ, अथवा फोने कए दितहुँ तखन सभटा टाका बचि जाइत । अखनहु उम्मीद खतम नहि भेलए। अपराध शाखा काजपर लागि गेल अछि । हमरा फोन आएल छल। हमसभटा जानकारी ओकरासभकेँ देलिऐक अछि। ताबत अहाँसभ बेसी चिंता नहि करब। घर जा कए विश्राम करू। यदि जरुरी हेतैक तखन अहाँसभकेँ साइबर अपराध शाखापर बजा सकैत अछि, अथवा केओ अहींक घर जा कए जानकारी लए सकैत अछि।" प्रबन्धकक बातसँ हमसभ बहुत आश्वस्त भेलहुँ । बैंकसँ वापस घर आबि गेलहुँ । रमा तँ बहुत थाकि गेल रहथि। हमरो हालति कोनो नीक नहि छल। तेँ घर पहुँचि कए दुनूगोटे सुति रहलहुँ । हमसभ लगभग दूघंटा सुतले रहि गेलहुँ । अचानक फ्लैटक घंटी बजलासँ हमर निन टूटि गेल । हमरा संगे रमा सेहो उठि जाइत छथि। हम केबार खोलैत छी । दूटा पुलिसक आदमी द्वारिएपर ठाढ़ छल। "हमसभ साइबर अपराध शाखासँ आएल छी।" "आउ, आउ ।" ओ सभ अंदर अबैत छथि। "अहाँज दस लाख टाका बैंक खातासँ निकालि लेलक अछि ने?" "हँ, हँ, आइए भोरे ई घटना भेल।" "से सभ पता अछि।" "मुदा अहाँ चाहैत की छी?" "हमर टाका वापस आबि जाए । बस एतबे।" "आ एहन काज केनिहारकेँ दंड नहि भेटबाक चाही।" "अबस्स भेटबाक चाही।" -रमा बाजि उठलीह। "मुदा ताहि हेतु तँ अहाँसभकेँ संघर्ष करए पड़त । कोट-कचहरीक चक्कर लगबए पड़त।" "तखन अहींसभ कहू जे की कएल जाए?" पुलिससभ सोफापर बैसि जाइत अछि। हमहूँसभ सामने बैसल छी। ओसभ एकटा फाइल निकालैत अछि। ओहिमेसँ तरह-तरहक फोटो हमरा दुनू बेकतीकेँ देखबैत अछि। "एकरासभकेँ चिन्हैत छिऐक?" हम बेरा-बेरी सभटा फोटो उनटा जाइत छी। अंतिम फोटो लग जा कए रुकि जाइत छी। पुलिसक नजरि तँ हमरापर रहबे करैक। "की एकरा अहाँसभ जनैत छी?" "हँ" "के अछि?" "ई तँ हमर दोसर पुत्र मुरली अछि। ओकरा संगे महिलाके अछि से नहि कहि सकैत छी।" "ओ तँ मुरली कतए रहैत अछि?" "ओ तँ हमरा जानकारीक हिसाबे लंदनमे रहैत अछि। मुदा आब ओतइ अछि कि नहि से नहि कहि सकैत छी।" "ओ लंदनमे की कए रहल अछि?" "प्रतिष्ठित कालेजसँ इंजीनियर अछि। मुदा कए की रहल अछि किछु नहि कहि सकैत छी। कारण हमरोसभसँ बहुत कम संपर्क रखैत अछि।" "हमरासभकेँ जानकारी भेटल अछि जे ओ साइबर क्राइमक दुनिआसँ जुड़ल अछि। अहाँ संगे भेल धोखाधड़ीमे सहो ओकर हाथ हेबाक सबूत भेटल अछि। आब अहीँ कहू जे की कएल जाए? यदि जाँच आगू बढ़त तँ ओ पकड़ल जाएत आ जहलो जेबे करत। से अहाँकेँ नीक लागत?" "हमरा किछु समय दिअ। हम सोचि कए बताएब जे की कएल जाए।" "कोनो हरजा नहि् । जखन अहाँक निर्णय भए जाए तखन हमरासभकेँ सूचित कए देब। तत्काल हमसभ जाँचकेँ एतहि रोकि रहल छी।" "बेस, हम अपनेकेँ बादमे फोन कए देब।" अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.८.कुन्दन कर्ण- बीहनि कथा- घबाह कुन्दन कर्ण बीहनि कथा- घबाह
मिहिर अपन विवाह लेल सपरिवार कनिया देखय जा रहल छथिन, दरभंगा टावर पर कोनो होटल में। माय बुझबैत कहलखिन "पहिल लड़की देखय जा रहल छी हड़बड़ा नहि जायब, अतेक पैघ नौकरी अछि अहाँ के , पहिले लड़की के "हँ" करब जरूरी नहि छै, आब कोनो हमर सब वला जमाना छै , आब त ब'र अपनहि कनिया पसिन करैत छै। कनिया में त कोनो कमी नहि छलैक मुदा मिहिर सोचलैन्ह जे एकाध प्रयोग आओर कयल जाय तखन निर्णय लेब ताएँ ओ कन्यागत के परोक्षरूपेँ मना कय एलखिन। मिहिर के प्रथम प्रयोग छलैक मुदा कोमल संग ई सातम प्रयोग भय गेलैक। कोमल के कोमल हृदय घबाह भय गेलैक। कोमल पिताक संग दिल्ली आयल थिकीह साइकोलॉजिस्ट सँ डिप्रेशन के इलाज करेबाक लेल। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.पद्य ३.१.राजकिशोर मिश्र- मोह ३.२.आचार्य रामानन्द मण्डल-राम !/ अहा!आह!/ बीतल बर्ष/ नववर्ष/ मंदिर ३.३.जगदानन्द झा 'मनु'- ४ टा गजल ३.१.राजकिशोर मिश्र- मोह राजकिशोर मिश्र मोह
जगत् पसा रने अछि मा या , आ,मा या सँ उपजैत अछि मो ह, मो हक चकभा उरि देबैबा ला केँ, रहैत कहाॅं छन्हि ,को नो सो ह?
सम्पत्ति ,सम्बन्ध, जगत् सँ मो ह, तृष्णा ,लगा व, मुदा दुः ख सॅं द्रो ह।
दि वस जनमैछ , नि शां त मे, वि जय के बी आ हा रि मे, बंधन सँ मो क्षक अछि उद्भव, नुका एल शां ति बि हा रि मे।
दुः ख सँ सुख बहरा इत अछि , इएह तऽ जगतक मा या , मो ह के चा ङ्गुर बड़ जो रगर , कखनो ,अपने तऽ परा या ।
मो हक आकर्षण छैक बड़ भा री , बड़ मजगुत अछि , ओ बन्धन, बड्ड दुः ख दैछ मो ह, मो न के, अबैत अछि सुख-दु:ख , खन -खन।
जि नगी क अंति म क्षण धरि , जी बैत अछि मो ह ओ मा या , उचि त छै, रहए सी मा के भी तर, जा एत नहि ,जा धरि का या ।
मो हे तऽ,बनि कऽ मो हनी , छेकने रहैत अछि मो क्षक बा ट, पसरल मा या के रहैत छै, जि नगी के संग सटुआ- सा ट।
छो ड़ब , वर्जब अछि से संभव? इएह अछि री ति , बनअओने , ई भव।
मो ह के जला वर्त्त सँ, बनैत रहैत अछि चा न्हर, खसै छथि वएह ,ओहि खा धि मे, छथि जे ज्ञा न सँ आन्हर।
समय पर टुटए मो ह ,से नी क, बढ़ि ऑं , टुटि जा ए नी न सका ल, यथा र्थक ज्ञा न सँ युक्त रही , बुझब कठि न अछि ,का लक हा ल।
उदि त हो इत अछि ज्ञा न ,जखन, भऽ जा इत अछि मो ह- भंग , था कल -हा रल ओझरो ट सँ, आ मो न भ' जा इछ, बहुत चौ चङ।
मा टि क का या , मि थ्या मा या , अपन कथी ? आ', कथी परा या ?
मुदा ,मो ह-मा या सृष्टि क स्वभा व, जा धरि जि नगी , ई सभ रहत, नि ष्का म कर्म छैक श्रेष्ठ बा ट, कर्म-र्म प्रधा न हो इत अछि जगत्।
धो न्हि सन पसरल अछि मो ह, कि छु देखा इछ, आ कि छु अदृश्य, गी ता क ज्ञा न इजो त देखबैत अछि , श्री कृष्ण गुरु ,आ पा र्थ , शि ष्य। अपन मंतव्य editorial.ऽtaff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.२.आचार्य रामानन्द मण्डल-राम !/ अहा!आह!/ बीतल बर्ष/ नववर्ष/ मंदिर आचार्य रामानन्द मण्डल राम !/ अहा!आह!/ बीतल बर्ष/ नववर्ष/ मंदिर १. राम ! राम के छैय! राम करुणा छैय!हे राम! राम आक्रोश छैय।जय श्री राम! राम के छैय! राम सम्मान छैय!राम राम! राम अपमान छैय! राम !राम! राम के छैय! राम ब्रह्म छैय! राम परम ब्रह्म छैय! राम के छैय! राम सगुण छैय! तुलसी के राम! राम निर्णुण छैय? कबीर के राम! राम के छैय! राम अयोध्यावासी छैय! राम घट घट वासी छैय! राम के छैय! जानकी राम अपमानित छैय! राम जानकी पूजित छैय! राम के छैय! राम नाम सत्य छै! राम नाम सतनाम छै! राम के छैय! राम देव छैय! राम मानव छैय! राम के छैय! रामा अपने अपने राम छैय!! २ अहा!आह! . अहा!करै छी, त आह!भी करियौ। गरव करै छी, त शरमो करिऔ। काज नै चलत, कि पुरखा अछि कैलें। नीच बना कैं, उच्च नै बनियौ। अनपढ़ बना कैं, विदमान नै बनियौ। काज नै चलत, कि पुरखा अछि कैले। गरीब बना कै, धनिक नै बनियौ। अछोप बना कैं, पवितर नै बनियौ। काज न चलत, कि पुरखा अछि कैलें। गरब करै छी, त शरमो करियो। समान सभ लै छी, त पानी नै छिटियो। गलती करै छी, तो गलानी त मानियौ। गरब करै छी, त शरमो करियो। अहा! करै छी, त रामा़ आह! भी करियौ। ३. बीतल बर्ष कहै छी बर्ष त बीत गेलै। परंच हम बीत गेली हैय। वोहिना जेना फलां त मर गेलै। समसान घाट से आबै हैय। सोचू न बर्ष फेर आ गेलै। परंच बीतल समयनै आबैय हैय। सोचूं न फलां त मर गेलैय। अब हमर बारी आबैय हैय। सोचूं न घमंड में हम जियै। उम्र बीतल जा रहल हैय। सोचूं न सभ के पड़त जायै। राजा रंक बाभन सोलकन कैंय। सोचूं न सभ के पड़त जायै। रामा ज्ञानी अज्ञानी प्राणी कैंय। ४. नववर्ष नववर्ष मंगलमय होयत धनी आ पढल लिखल के। नववर्ष मंगलमय होयत कहिया गरीब आ अनपढ के। नववर्ष मंगलमय होयत कहिया कबाड़ चूने वाला के। नववर्ष मंगलमय होयत नेता, अफसर आ दलाल के। नववर्ष मंगलमय होयत कहिया किसान आ मजदूर के। नववर्ष मंगलमय होयत। मांस मदिरा पिये वाला के। नववर्ष मंगलमय होयत कहिया मूस खाये वाला के। नववर्ष मंगलमय होयत रामा जहिया जगायब अपना मन के। ५. मंदिर राम के मंदिर, समझ में आवैय। वो अवतार छैय। वो अप्रत्यक्ष छैय। कृष्ण के मंदिर, समझ में आवैय। वो अवतार छैय। वो अप्रत्यक्ष छैय। सूर्य के मन्दिर, समझ में नै आवैय। वो प्रकृति छैय। वो प्रत्यक्ष छैय। पृथ्वी के मंदिर। समझ में नै आवैय। वो प्रकृति छैय। वो प्रत्यक्ष छैय। ईश्वर के मंदिर। समझ में नै आवैय। वो निराकार छैय। वो सर्वत्र छैय। मंदिर त एगो जेल छैय। जैइ पर पुजारी के पहरा छैय। जैइ पर पुलिस के पहरा छैय। रामा जैइ पर भक्तन के पहरा छैय। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.३.जगदानन्द झा 'मनु'- ४ टा गजल जगदानन्द झा 'मनु' ४ टा गजल १ खड़ाम पैरमे नहि अकास मोनमे छल कुहास बहुत बाहर इजोत टोनमे छल टएरकेँ चलाबी गरीब तेँ बुझू नहि हमर अपन सगर धन अहाँक लोनमे छल किएक आनके दुख बुझत चलाक नेता हुनक सगर बुढ़ापा तँ सेफ जोनमे छल सिनेह शांति सबटा जगतसँ गेल हेरा अखनसँ नीक बेसी मनुष्य बोनमे छल पतंग पाछु भागैत मनुक हर्ख देखू पुतौह केर जेना बहिनसँ फोनमे छल (मात्राक्रम 121-2122-121-2122, सभ पाँतिमे) २ अहाँ सुनबै जँ नहि हम केकरा कहबै पिया जुलमी हमर दुख हम कते सहबै सखी बहिना अहाँके प्रेममे छूटल पिया हम आब कोना असगरे रहबै निहोड़ा आब करु हम कोन विधि सजना सगर उसरैग एही भक्त पर ढहबै विरहके आगिमे जरि मरि रहल छी हम अहाँ आइब करेजामे कखन गहबै रहत नेहक वचन नै यादि 'मनु' जा दिन जहर माहुर अछैते पानिमे बहबै (बहरे हजज, मात्रा क्रम 1222-1222-1222) ३ जँ हम मरि जाइ कनिको नै अहाँ कानब बितल जे संग ओ सगरो खुशी गानब करेजामे नुकोने छी कतेको दुख हमर सामर्थ जे मुँहपर हँसी आनब जहर पी दर्द के हम चिन्हलौ दुनियाँ नदीमे ठेल सिखने लोक अछि छानब द कर्जा मांगि देखू एक दिन ककरो सगर दुनियाँक माया छन्नमे जानब सिनेह प्रेम दोस्ती नाम मतलबकेँ कपट 'मनु' भेषमे सब एतए दानब (बहरे हजज, मात्राक्रम : 1222-1222-1222) ४ दर्द देखायब करेजाक मानब की काल्हि सपनोमे हँसी छोरि कानब की प्रेम पुरुषक छैक गोबर अहाँ कहलौं चीर देखायब करेजा तँ गानब की दोख सभमे नै कतउ एकमे हेते संग हमरा ओहिमे सभक सानब की आइ छै अन्हार सगरो अहाँ कहलौं आँखि मुनि लाइटसँ अन्हार आनब की कनिक हमरोपर भरोसा क कय देखू प्रेम ककरा छै कहै 'मनु'सँ जानब की (बहरे कलीब, मात्राक्रम : 2122-2122-1222) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। 108 || विदेह (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) www.videha.co.in विदेह ३८५ म अंक ०१ जनवरी २०२४ (वर्ष १७ मास १९३ अंक ३८५)|| 107
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हज विशेषांक २०२४ नरेन्द्र झा एवं प्रा. रामावतार यादव पर विदेह www.videha.co.in विशेषांक २०२४ नरेन्द्र झा एवं प्रा. रामावतार यादव चयनित भेला २०२४ क विदेह विशेषांक लेल। जि भर नरेन्द्र झा पर विदेहक विशेषांक १ जून २०२४ आ प्रा. रामावतार यादव पर १५ जून २०२४ अंकमे धो लि SD प्रकाशित CCA) eee: | | लेखक-पाठक clad आग्रह जे नरेन्द्र झा एवं प्रा. रामावतार यादव जीक काजपर आलोचना, . | = 'समालोचना, समीक्षा आदि वर्ड फाइलमे editorial.staff.videha@gmail.com पर | — in 0p Se i eam पाबधि। लि कि & नरेन्द्र झाजीक अधिकांश पौथी २००८ सें विदेह www.videha.co.in पर उपलब्ध ofS! Wy face fastuign Roly % cf जद = = == = SG WWW. HES हैंए। Pe — Yn, facie ICTR 3928 re ae facre factais २०२8 .... प्र } AERA सा अन्न था. वामाब्रछाव AAA शव FACE www. videha.co.in FACT २०२8. AA YA सा IH शा. वामाब्रजाव AAA BUS एछता २०२8 क fA FACT CAL ATT सा शव FACES FACTS ५ OT २०२४ शा था. वामाब्रछाव TIAA शव 90 जून २०२४ कर्म geht =. 7 east a a एलथक-नाठक एलाकनिें AS OH THT सा IH था. वामाब्रठाव ATA जीक BIA AAT, HATA, i” RE» ater शनि aS काजतएय editorial. staff.videha@gmail.com शव शठाब्िणि। x AES साजीक अविकीने co २००० मैं बिएनठ www.videha.co.in शव Gorn अडि।
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