VIDEHA — Issue 388 / अंक ३८८

Publication: VIDEHA · Issue: 388
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ISSN 2229-547X VIDEHA 𑒀 विदेह ३८८ म अंक १५ फरबरी २०२४ (वर्ष १७ मास १९४ अंक ३८८) [विदेह (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) www.videha.co.in ] विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। ऐ पोथी‍क सर्वाधि‍कार सुरक्षि‍त अछि‍। कॉपीराइट (©) धारकक लि‍खि‍त अनुमति‍क बि‍ना पोथीक कोनो अंशक छाया प्रति ‍एवं रि‍कॉडिंग सहि‍त इलेक्‍ट्रॉनि‍क अथवा यांत्रि‍क, कोनो माध्‍यमसँ, अथवा ज्ञानक संग्रहण वा पुनर्प्रयोगक प्रणाली द्वारा कोनो रूपमे पुनरुत्‍पादन अथवा संचारन-प्रसारण नै कएल जा सकैत अछि‍। (c) २०००- २०२४. सर्वाधिकार सुरक्षित। भालसरिक गाछ जे सन २००० सँ याहूसिटीजपर छल http://www.geocities.com/.../bhalsarik_gachh.html , http://www.geocities.com/ggajendra आदि लिंकपर आ अखनो ५ जुलाइ २००४ क पोस्ट http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html केर रूपमे इन्टरनेटपर मैथिलीक प्राचीनतम उपस्थितक रूपमे विद्यमान अछि (किछु दिन लेल http://videha.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html लिंकपर, स्रोत wayback machine of https://web.archive.org/web/*/videha 258 capture(s) from 2004 to 2016- http://videha.com/ भालसरिक गाछ-प्रथम मैथिली ब्लॉग / मैथिली ब्लॉगक एग्रीगेटर)। ई मैथिलीक पहिल इंटरनेट पत्रिका थिक जकर नाम बादमे १ जनवरी २००८ सँ ’विदेह’ पड़लै। इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि, जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। (c)२०००- २०२४. विदेह: प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004). सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। Editor: Gajendra Thakur. In respect of materials e-published in Videha, the Editor, Videha holds the right to create the web archives/ theme-based web archives, right to translate/ transliterate those archives and create translated/ transliterated web-archives; and the right to e-publish/ print-publish all these archives. रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना/ संग्रह (संपूर्ण उत्तरदायित्व रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता मध्य) editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ पठा सकैत छथि, संगमे ओ अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो सेहो पठाबथि। एतऽ प्रकाशित रचना/ संग्रह सभक कॉपीराइट रचनाकार/ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि आ जतऽ रचनाकार/ संग्रहकर्त्ताक नाम नै अछि ततऽ ई संपादकाधीन अछि। सम्पादक: विदेह ई-प्रकाशित रचनाक वेब-आर्काइव/ थीम-आधारित वेब-आर्काइवक निर्माणक अधिकार, ऐ सभ आर्काइवक अनुवाद आ लिप्यंतरण आ तकरो वेब-आर्काइवक निर्माणक अधिकार; आ ऐ सभ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार रखैत छथि। ऐ सभ लेल कोनो रॉयल्टी/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै, से रॉयल्टी/ पारिश्रमिकक इच्छुक रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता विदेहसँ नै जुड़थु। विदेह ई पत्रिकाक मासमे दू टा अंक निकलैत अछि जे मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ www.videha.co.in पर ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। Videha eJournal (link www.videha.co.in) is a multidisciplinary online journal dedicated to the promotion and preservation of the Maithili language, literature and culture. It is a platform for scholars, researchers, writers and poets to publish their works and share their knowledge about Maithili language, literature, and culture. The journal is published online to promote and preserve Maithili language and culture. The journal publishes articles, research papers, book reviews, and poetry in Maithili and English languages. It also features translations of literary works from other languages into Maithili. It is a peer-reviewed journal, which means that articles and papers are reviewed by experts in the field before they are accepted for publication. Font/ Keyboard Source: https://fonts.google.com/ , https://github.com/virtualvinodh/aksharamukha-fonts , https://keyman.com/ These are print-on-demand books, send your queries to editorial.staff.videha@gmail.com. The eBooks of some of these are available for sale on Google Play [(c) Preeti Thakur, sales.videha@gmail.com], send your queries to sales.videha@gmail.com. The contents and documents e-published by Videha (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) are periodically being checked for accessibility issues. People with disabilities should not have difficulty accessing these contents/ documents. © Preeti Thakur (sales.videha@gmail.com) Cover designed by AUM GAJENDRA THAKUR Videha e-Journal: Issue No. 388 at www.videha.co.in समानान्तर परम्पराक विद्यापति- चित्र विदेह सम्मानसँ सम्मानित श्री पनकलाल मण्डल द्वारा मैथिली भाषा जगज्जननी सीतायाः भाषा आसीत्। हनुमन्तः उक्तवान- मानुषीमिह संस्कृताम्। अक्खर खम्भा (आखर खाम्ह) तिहुअन खेत्तहि काञि तसु कित्तिवल्लि पसरेइ। अक्खर खम्भारम्भ जउ मञ्चो बन्धि न देइ॥ (कीर्तिलता प्रथमः पल्लवः पहिल दोहा।) माने आखर रूपी खाम्ह निर्माण कऽ ओइपर (गद्य-पद्य रूपी) मंच जँ नै बान्हल जाय तँ ऐ त्रिभुवनरूपी क्षेत्रमे ओकर कीर्तिरूपी लत्ती केना पसरत। शुक्ल यजुर्वेद (२६.२)-यथेमां वाचं कल्याणीमावदानि जनेभ्यः। ब्रह्मराजन्याभ्यां शूद्राय चार्याय च स्वाय चारणाय च।।हम सभ गोटेकें ई पवित्र वाणी (वेदवाणी) सुनाबी। ब्राह्मणकें, क्षत्रियकें, शूद्रकें आ आर्यकें; अपन लोककें आ अपरिचितकें सेहो (माने सभकें)। मुदा ऐ वेदवाक्यक विपरीत मनुस्मृति वेदवाणीक अध्ययन/ श्रवणकें समाजक किछु गोटे लेल निषेध करऽ चाहलक, मुदा स्मृति सेहो वेदवाक्यकें प्रमाण मानैत अछि (शब्द प्रमाण) तें तकर विरुद्ध देल ओकर निर्देश स्वयं अमान्य भऽ जाइत अछि। Do not judge each day by the harvest you reap but by the seeds that you plant. -Robert Louis Stevenson ------------------------------------- Videha: Maithili Literature Movement 𑒀 ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्ष ग्वंग शान्ति: 𑓇 𑒠𑓂𑒨𑒾: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑒢𑓂𑒞𑒩𑒱𑒏𑓂𑒭 𑓅 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱: अनुक्रम ऐ अंकमे अछि:- १.१.गजेन्द्र ठाकुर- नूतन अंक सम्पादकीय १.२.अंक ३८७ पर टिप्पणी २.गद्य २.१.परमानन्द लाल कर्ण-एकादशीक उद्भव २.२.निर्मला कर्ण- अग्निशिखा खेप ३६ २.३.लालदेव कामत-प्रमाण पत्र जारी होइ लेल/ उच्च शिक्षामे महिला प्रतिनिधित्व घटत / हमर मीठ बैना/ कविवर रामविलास साहु जीक पोथी/ नियति आ पुरूषार्थ : एक समग्र मूल्यांकन २.४.रबीन्द्र नारायण मिश्र- ठेहा परक मौलाएल गाछ (धारावाहिक) २.५.कुमार मनोज कश्यप-समालोचक २.६.संतोष कुमार राय 'बटोही'- संतोष कुमार राय 'बटोही' केर डायरी 'लव यू टू' ३.पद्य ३.१.डॉ. जियउर रहमान जाफरी- वसंत सखी ३.२.जगदानन्द झा 'मनु'- ३ टा गजल ३.३.राज किशोर मिश्र-सृजनशीलता 𑒀 ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्ष ग्वंग शान्तिः पृथ्वी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति वनस्पतय: शान्तिर्विश्वे देवा: शान्तिर्ब्रह्म 𑓇 𑒠𑓂𑒨𑒾: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑒢𑓂𑒞𑒩𑒱𑒏𑓂𑒭 𑓅 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑓁 𑒣𑒵𑒟𑓂𑒫𑒲 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑒰𑒣: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑒼𑒭𑒡𑒨: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱 𑒫𑒢𑒮𑓂𑒣𑒞𑒨: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑓂𑒫𑒱𑒬𑓂𑒫𑒹 𑒠𑒹𑒫𑒰: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑓂𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧 ब्रह्मणसँ प्रार्थना जे द्युलोकमे, अंतरिक्षमे, पृथ्वीपर, जलमे, औषधमे, वनस्पतिमे, विश्वमे, सभ देवतागणमे आ ब्रह्ममे शांति हुअय। ॐ-ब्रह्मण, द्यौ-सूर्य-तरेगण, अंतरिक्ष- पृथ्वी आ द्यूलोकक बीच, आप:-जल, विश्वेदेवा- सभ देवता, ब्रह्म- सर्जक। 𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧𑒝𑒮𑒿 𑒣𑓂𑒩𑒰𑒩𑓂𑒟𑒢𑒰 𑒖𑒹 𑒠𑓂𑒨𑒳𑒪𑒼𑒏𑒧𑒹, 𑒁𑓀𑒞𑒩𑒱𑒏𑓂𑒭𑒧𑒹, 𑒣𑒵𑒟𑓂𑒫𑒲𑒣𑒩, 𑒖𑒪𑒧𑒹, 𑒎𑒭𑒡𑒧𑒹, 𑒫𑒢𑒮𑓂𑒣𑒞𑒱𑒧𑒹, 𑒫𑒱𑒬𑓂𑒫𑒧𑒹, 𑒮𑒦 𑒠𑒹𑒫𑒞𑒰𑒑𑒝𑒧𑒹 𑒂 𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧𑒧𑒹 𑒬𑒰𑓀𑒞𑒱 𑒯𑒳𑒁𑒨। 𑓇-𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧𑒝, 𑒠𑓂𑒨𑒾-𑒮𑒴𑒩𑓂𑒨-𑒞𑒩𑒹𑒑𑒝, 𑒁𑓀𑒞𑒩𑒱𑒏𑓂𑒭- 𑒣𑒵𑒟𑓂𑒫𑒲 𑒂 𑒠𑓂𑒨𑒳𑒪𑒼𑒏𑒏 𑒥𑒲𑒔, 𑒂𑒣:-𑒖𑒪, 𑒫𑒱𑒬𑓂𑒫𑒹𑒠𑒹𑒫𑒰- 𑒮𑒦 𑒠𑒹𑒫𑒞𑒰, 𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧- 𑒮𑒩𑓂𑒖𑒏। 𑒀 ॐ, स॒हस्र॑शीर्षा॒ पुरु॑षः। स॒ह॒स्रा॒क्षः स॒हस्र॑पात्। 𑓇, 𑒮↓𑒯𑒮𑓂𑒩↑𑒬𑒲𑒩𑓂𑒭𑒰↓ 𑒣𑒳𑒩𑒳↑𑒭𑓁। 𑒮↓𑒯↓𑒮𑓂𑒩𑒰↓𑒏𑓂𑒭𑓁 𑒮↓𑒯𑒮𑓂𑒩↑𑒣𑒰𑒞𑓂। स भूमिं॑ ग्वंग वि॒श्वतो॑ वृ॒त्वा। अत्य॑तिष्ठद् दशाङ्गु॒लम्॥ 𑒮 𑒦𑒴𑒧𑒱𑓀↑𑓅 𑒫𑒱↓𑒬𑓂𑒫𑒞𑒼↑ 𑒫𑒵↓𑒞𑓂𑒫𑒰। 𑒁𑒞𑓂𑒨↑𑒞𑒱𑒭𑓂𑒚𑒠𑓂 𑒠𑒬𑒰𑒓𑓂𑒑𑒳↓𑒪𑒧𑓂॥ हजार माथ, हजार आँखि, हजार पएर संग विश्वकेँ आच्छादित केने अछि, दस आंगुरक गनतीक वशमे नै अछि ओ। प॒द्भ्याग्ँ॑ शू॒द्रो अ॑जायत॥ 𑒣↓𑒠𑓂𑒦𑓂𑒨𑒰𑒑𑓂𑒿↑ 𑒬𑒴↓𑒠𑓂𑒩𑒼 𑒁↑𑒖𑒰𑒨𑒞॥ पएरसँ शूद्रक उत्पत्ति भेल॥ प॒द्भ्यां भूमि॒र्दिशः॒ श्रोत्रा᳚त्। 𑒣↓𑒠𑓂𑒦𑓂𑒨𑒰𑓀 𑒦𑒴𑒧𑒱↓𑒩𑓂𑒠𑒱𑒬𑓁↓ 𑒬𑓂𑒩𑒼𑒞𑓂𑒩𑒰↑↑𑒞𑓂। मुदा पएरेसँ भूमियोक उत्पत्ति। ❀ (White Florette- innocence and purity) ☸ (Wheel of Dharma) ࿕(Swastik) 𑓅 (Gwang ग्वंग- two small circles connected by u and a dot placed over it, used in reference of Vedic texts) ꣼ (सिद्धिरस्तु, सिद्धम 𑒮𑒱𑒠𑓂𑒡𑒱𑒩𑒮𑓂𑒞𑒳, 𑒮𑒱𑒠𑓂𑒡𑒧 Devanagari Anji) ঀ (Bengali Anji, Siddham) 𑒀 (Tirhuta Anji, Ankush of Ganeshji, placed at the beginning of something) 𑒀

ISSN 2229-547X VIDEHA 𑒀 विदेह ३८८ म अंक १५ फरबरी २०२४ (वर्ष १७ मास १९४ अंक ३८८) [विदेह (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) www.videha.co.in ] विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। ऐ पोथी‍क सर्वाधि‍कार सुरक्षि‍त अछि‍। कॉपीराइट (©) धारकक लि‍खि‍त अनुमति‍क बि‍ना पोथीक कोनो अंशक छाया प्रति ‍एवं रि‍कॉडिंग सहि‍त इलेक्‍ट्रॉनि‍क अथवा यांत्रि‍क, कोनो माध्‍यमसँ, अथवा ज्ञानक संग्रहण वा पुनर्प्रयोगक प्रणाली द्वारा कोनो रूपमे पुनरुत्‍पादन अथवा संचारन-प्रसारण नै कएल जा सकैत अछि‍। (c) २०००- २०२४. सर्वाधिकार सुरक्षित। भालसरिक गाछ जे सन २००० सँ याहूसिटीजपर छल http://www.geocities.com/.../bhalsarik_gachh.html , http://www.geocities.com/ggajendra आदि लिंकपर आ अखनो ५ जुलाइ २००४ क पोस्ट http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html केर रूपमे इन्टरनेटपर मैथिलीक प्राचीनतम उपस्थितक रूपमे विद्यमान अछि (किछु दिन लेल http://videha.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html लिंकपर, स्रोत wayback machine of https://web.archive.org/web/*/videha 258 capture(s) from 2004 to 2016- http://videha.com/ भालसरिक गाछ-प्रथम मैथिली ब्लॉग / मैथिली ब्लॉगक एग्रीगेटर)। ई मैथिलीक पहिल इंटरनेट पत्रिका थिक जकर नाम बादमे १ जनवरी २००८ सँ ’विदेह’ पड़लै। इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि, जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। (c)२०००- २०२४. विदेह: प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004). सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। Editor: Gajendra Thakur. In respect of materials e-published in Videha, the Editor, Videha holds the right to create the web archives/ theme-based web archives, right to translate/ transliterate those archives and create translated/ transliterated web-archives; and the right to e-publish/ print-publish all these archives. रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना/ संग्रह (संपूर्ण उत्तरदायित्व रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता मध्य) editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ पठा सकैत छथि, संगमे ओ अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो सेहो पठाबथि। एतऽ प्रकाशित रचना/ संग्रह सभक कॉपीराइट रचनाकार/ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि आ जतऽ रचनाकार/ संग्रहकर्त्ताक नाम नै अछि ततऽ ई संपादकाधीन अछि। सम्पादक: विदेह ई-प्रकाशित रचनाक वेब-आर्काइव/ थीम-आधारित वेब-आर्काइवक निर्माणक अधिकार, ऐ सभ आर्काइवक अनुवाद आ लिप्यंतरण आ तकरो वेब-आर्काइवक निर्माणक अधिकार; आ ऐ सभ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार रखैत छथि। ऐ सभ लेल कोनो रॉयल्टी/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै, से रॉयल्टी/ पारिश्रमिकक इच्छुक रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता विदेहसँ नै जुड़थु। विदेह ई पत्रिकाक मासमे दू टा अंक निकलैत अछि जे मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ www.videha.co.in पर ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। Videha eJournal (link www.videha.co.in) is a multidisciplinary online journal dedicated to the promotion and preservation of the Maithili language, literature and culture. It is a platform for scholars, researchers, writers and poets to publish their works and share their knowledge about Maithili language, literature, and culture. The journal is published online to promote and preserve Maithili language and culture. The journal publishes articles, research papers, book reviews, and poetry in Maithili and English languages. It also features translations of literary works from other languages into Maithili. It is a peer-reviewed journal, which means that articles and papers are reviewed by experts in the field before they are accepted for publication. Font/ Keyboard Source: https://fonts.google.com/ , https://github.com/virtualvinodh/aksharamukha-fonts , https://keyman.com/ These are print-on-demand books, send your queries to editorial.staff.videha@gmail.com. The eBooks of some of these are available for sale on Google Play [(c) Preeti Thakur, sales.videha@gmail.com], send your queries to sales.videha@gmail.com. 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People with disabilities should not have difficulty accessing these contents/ documents. © Preeti Thakur (sales.videha@gmail.com) Cover designed by AUM GAJENDRA THAKUR Videha e-Journal: Issue No. 388 at www.videha.co.in समानान्तर परम्पराक विद्यापति- चित्र विदेह सम्मानसँ सम्मानित श्री पनकलाल मण्डल द्वारा मैथिली भाषा जगज्जननी सीतायाः भाषा आसीत्। हनुमन्तः उक्तवान- मानुषीमिह संस्कृताम्। अक्खर खम्भा (आखर खाम्ह) तिहुअन खेत्तहि काञि तसु कित्तिवल्लि पसरेइ। अक्खर खम्भारम्भ जउ मञ्चो बन्धि न देइ॥ (कीर्तिलता प्रथमः पल्लवः पहिल दोहा।) माने आखर रूपी खाम्ह निर्माण कऽ ओइपर (गद्य-पद्य रूपी) मंच जँ नै बान्हल जाय तँ ऐ त्रिभुवनरूपी क्षेत्रमे ओकर कीर्तिरूपी लत्ती केना पसरत। शुक्ल यजुर्वेद (२६.२)-यथेमां वाचं कल्याणीमावदानि जनेभ्यः। ब्रह्मराजन्याभ्यां शूद्राय चार्याय च स्वाय चारणाय च।।हम सभ गोटेकें ई पवित्र वाणी (वेदवाणी) सुनाबी। ब्राह्मणकें, क्षत्रियकें, शूद्रकें आ आर्यकें; अपन लोककें आ अपरिचितकें सेहो (माने सभकें)। मुदा ऐ वेदवाक्यक विपरीत मनुस्मृति वेदवाणीक अध्ययन/ श्रवणकें समाजक किछु गोटे लेल निषेध करऽ चाहलक, मुदा स्मृति सेहो वेदवाक्यकें प्रमाण मानैत अछि (शब्द प्रमाण) तें तकर विरुद्ध देल ओकर निर्देश स्वयं अमान्य भऽ जाइत अछि। Do not judge each day by the harvest you reap but by the seeds that you plant. -Robert Louis Stevenson ------------------------------------- Videha: Maithili Literature Movement 𑒀 ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्ष ग्वंग शान्ति: 𑓇 𑒠𑓂𑒨𑒾: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑒢𑓂𑒞𑒩𑒱𑒏𑓂𑒭 𑓅 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱: अनुक्रम ऐ अंकमे अछि:- १.१.गजेन्द्र ठाकुर- नूतन अंक सम्पादकीय (पृ. २-५) १.२.अंक ३८७ पर टिप्पणी (पृ. ६-८) २.गद्य २.१.परमानन्द लाल कर्ण-एकादशीक उद्भव (पृ. १०-१३) २.२.निर्मला कर्ण- अग्निशिखा खेप ३६ (पृ. १४-२१) २.३.लालदेव कामत-प्रमाण पत्र जारी होइ लेल/ उच्च शिक्षामे महिला प्रतिनिधित्व घटत / हमर मीठ बैना/ कविवर रामविलास साहु जीक पोथी/ नियति आ पुरूषार्थ : एक समग्र मूल्यांकन (पृ. २२-४६) २.४.रबीन्द्र नारायण मिश्र- ठेहा परक मौलाएल गाछ (धारावाहिक) (पृ. ४७-६६) २.५.कुमार मनोज कश्यप-समालोचक (पृ. ६७-६८) २.६.संतोष कुमार राय 'बटोही'- संतोष कुमार राय 'बटोही' केर डायरी 'लव यू टू' (पृ. ६९-७१) ३.पद्य ३.१.डॉ. जियउर रहमान जाफरी- वसंत सखी (पृ. ७३-७४) ३.२.जगदानन्द झा 'मनु'- ३ टा गजल (पृ. ७५-७८) ३.३.राज किशोर मिश्र-सृजनशीलता (पृ. ७९-८३) 𑒀 ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्ष ग्वंग शान्तिः पृथ्वी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति वनस्पतय: शान्तिर्विश्वे देवा: शान्तिर्ब्रह्म 𑓇 𑒠𑓂𑒨𑒾: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑒢𑓂𑒞𑒩𑒱𑒏𑓂𑒭 𑓅 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑓁 𑒣𑒵𑒟𑓂𑒫𑒲 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑒰𑒣: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑒼𑒭𑒡𑒨: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱 𑒫𑒢𑒮𑓂𑒣𑒞𑒨: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑓂𑒫𑒱𑒬𑓂𑒫𑒹 𑒠𑒹𑒫𑒰: 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑓂𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧 ब्रह्मणसँ प्रार्थना जे द्युलोकमे, अंतरिक्षमे, पृथ्वीपर, जलमे, औषधमे, वनस्पतिमे, विश्वमे, सभ देवतागणमे आ ब्रह्ममे शांति हुअय। ॐ-ब्रह्मण, द्यौ-सूर्य-तरेगण, अंतरिक्ष- पृथ्वी आ द्यूलोकक बीच, आप:-जल, विश्वेदेवा- सभ देवता, ब्रह्म- सर्जक। 𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧𑒝𑒮𑒿 𑒣𑓂𑒩𑒰𑒩𑓂𑒟𑒢𑒰 𑒖𑒹 𑒠𑓂𑒨𑒳𑒪𑒼𑒏𑒧𑒹, 𑒁𑓀𑒞𑒩𑒱𑒏𑓂𑒭𑒧𑒹, 𑒣𑒵𑒟𑓂𑒫𑒲𑒣𑒩, 𑒖𑒪𑒧𑒹, 𑒎𑒭𑒡𑒧𑒹, 𑒫𑒢𑒮𑓂𑒣𑒞𑒱𑒧𑒹, 𑒫𑒱𑒬𑓂𑒫𑒧𑒹, 𑒮𑒦 𑒠𑒹𑒫𑒞𑒰𑒑𑒝𑒧𑒹 𑒂 𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧𑒧𑒹 𑒬𑒰𑓀𑒞𑒱 𑒯𑒳𑒁𑒨। 𑓇-𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧𑒝, 𑒠𑓂𑒨𑒾-𑒮𑒴𑒩𑓂𑒨-𑒞𑒩𑒹𑒑𑒝, 𑒁𑓀𑒞𑒩𑒱𑒏𑓂𑒭- 𑒣𑒵𑒟𑓂𑒫𑒲 𑒂 𑒠𑓂𑒨𑒳𑒪𑒼𑒏𑒏 𑒥𑒲𑒔, 𑒂𑒣:-𑒖𑒪, 𑒫𑒱𑒬𑓂𑒫𑒹𑒠𑒹𑒫𑒰- 𑒮𑒦 𑒠𑒹𑒫𑒞𑒰, 𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧- 𑒮𑒩𑓂𑒖𑒏। 𑒀 ॐ, स॒हस्र॑शीर्षा॒ पुरु॑षः। स॒ह॒स्रा॒क्षः स॒हस्र॑पात्। 𑓇, 𑒮↓𑒯𑒮𑓂𑒩↑𑒬𑒲𑒩𑓂𑒭𑒰↓ 𑒣𑒳𑒩𑒳↑𑒭𑓁। 𑒮↓𑒯↓𑒮𑓂𑒩𑒰↓𑒏𑓂𑒭𑓁 𑒮↓𑒯𑒮𑓂𑒩↑𑒣𑒰𑒞𑓂। स भूमिं॑ ग्वंग वि॒श्वतो॑ वृ॒त्वा। अत्य॑तिष्ठद् दशाङ्गु॒लम्॥ 𑒮 𑒦𑒴𑒧𑒱𑓀↑𑓅 𑒫𑒱↓𑒬𑓂𑒫𑒞𑒼↑ 𑒫𑒵↓𑒞𑓂𑒫𑒰। 𑒁𑒞𑓂𑒨↑𑒞𑒱𑒭𑓂𑒚𑒠𑓂 𑒠𑒬𑒰𑒓𑓂𑒑𑒳↓𑒪𑒧𑓂॥ हजार माथ, हजार आँखि, हजार पएर संग विश्वकेँ आच्छादित केने अछि, दस आंगुरक गनतीक वशमे नै अछि ओ। प॒द्भ्याग्ँ॑ शू॒द्रो अ॑जायत॥ 𑒣↓𑒠𑓂𑒦𑓂𑒨𑒰𑒑𑓂𑒿↑ 𑒬𑒴↓𑒠𑓂𑒩𑒼 𑒁↑𑒖𑒰𑒨𑒞॥ पएरसँ शूद्रक उत्पत्ति भेल॥ प॒द्भ्यां भूमि॒र्दिशः॒ श्रोत्रा᳚त्। 𑒣↓𑒠𑓂𑒦𑓂𑒨𑒰𑓀 𑒦𑒴𑒧𑒱↓𑒩𑓂𑒠𑒱𑒬𑓁↓ 𑒬𑓂𑒩𑒼𑒞𑓂𑒩𑒰↑↑𑒞𑓂। मुदा पएरेसँ भूमियोक उत्पत्ति। ❀ (White Florette- innocence and purity) ☸ (Wheel of Dharma) ࿕(Swastik) 𑓅 (Gwang ग्वंग- two small circles connected by u and a dot placed over it, used in reference of Vedic texts) ꣼ (सिद्धिरस्तु, सिद्धम 𑒮𑒱𑒠𑓂𑒡𑒱𑒩𑒮𑓂𑒞𑒳, 𑒮𑒱𑒠𑓂𑒡𑒧 Devanagari Anji) ঀ (Bengali Anji, Siddham) 𑒀 (Tirhuta Anji, Ankush of Ganeshji, placed at the beginning of something) 𑒀

१.१.गजेन्द्र ठाकुर- नूतन अंक सम्पादकीय १.२.अंक ३८७ पर टिप्पणी १.१.गजेन्द्र ठाकुर- नूतन अंक सम्पादकीय "जे सुनबैए खिस्सा से राज करैए ऐ संसारपर"- होपी अमेरिकी कबीलाक लोकोक्ति। मैथिली स्टोरी साइंस (मैथिला कथाशास्त्र) मिशेल फोको (Foucault)क "अनुशासन संस्था" बा मनोवैज्ञानिक बार्टन आ ह्वाइटहेडक "गैसलाइटिंग" दुनूक लक्ष्य एक्के छै। मिशेल फोकोक "अनुशासन संस्था" अछि, सोझाँबलाकेँ अनुशासनमे आनू आ तइ लेल सभकेँ आपसेमे लड़ाउ, किछुकेँ पुरस्कृत करू आ जे अनुशासनमे नै अबैए तकरा आस्ते-आस्ते माहुर दियौ। गैसलाइटिंगमे सोझाँबला केँ विश्वास दिआओल जाइत अछि जे अहाँ जे यथास्थितिक विरोध कऽ रहल छी से कोनो विरोध नै, ई तँ सभ कऽ रहल अछि, अहाँ तँ विरोधक नामपर विरोध कऽ रहल छी आ से अपन कमी नुकेबा लेल। ऐमे समाजमे वर्तमान आधारभूत कमीक सहायता सेहो लेल जाइत अछि, आ आस्ते-आस्ते टारगेट बताह भऽ जाइत अछि बा पलायन कऽ जाइत अछि। राइटर्स-ब्लॉक सामान्य राइटर्स ब्लॉक नै छल, ई छल "गैसलाइटिंग"। मुदा एकर प्रतिकारमे अबैत अछि स्टोरी साइंस, कोन कथा सुनेलासँ लोक आ समाजपर की असर पड़त, ई ओइ आधारपर पूर्व-विश्लेषण करैत अछि। से समानान्तर धारा माहुरकेँ माहुरसँ काटबाक निर्णय लेलक। ओ मूलधाराक साहित्यकार सभ जे मानकीकरणक नामपर भाषाकेँ मरोड़ै छला, ओ स्टोरी साइंसक संग गैसलाइटिंगक आधारपर काज कऽ रहल छला। हुनकर उद्देश्य छल वर्तनीक भिन्नताकेँ अशुद्धताक नाम देब। रामदेव झा घरदेखियाकेँ लक्षित कऽ ई सभ लिखलन्हि जे, जे लिखब से बाजब असमियो मे असफल भेल से मैथिलीयोमे हएत। आ स्टोरी साइंस सेहो सएह कहैए, जे कथा सुनायत से करत राज, आ जे जत्ते कथा सुनाओत से तत्ते आगाँ बढ़त। आ असगर बृहस्पतियो झूठ। मुदा ऐबेर दोसर चरणमे सुभाष चन्द्र यादव असगर नै रहथि। आ समानान्तर धारा कथा सुना रहल अछि १५ सालसँ आ मूलधारा सुनि रहल अछि। जखन कि मिशेल फोकोक सभटा डिसीप्लिनरी इंस्टीट्यूशन "अनुशासन संस्था" जेना साहित्य अकादेमी, मैथिली अकादमी, मैथिली भोजपुरी अकादमी, आ साहित्य अकादेमी द्वारा मान्यता प्राप्त कथित लिटेरेरी असोसियेशन सभ मूल धारा लग छै। मुदा मिशेल फोकोक सभटा डिसीप्लिनरी इंस्टीट्यूशन आ मूलधाराक गैसलाइटिंगक टेक्निक, गार्जियन बनबाक ऑफरक टेक्निक स्टोरी साइंस द्वारा खतम कऽ देल गेल छै। स्टोरी साइंस तारानन्द वियोगीक शब्दावली (१) जेना थोकक हिसाबें मैथिलीमे उपन्यास बहराइत अछि, (२) मेहतरक भाषा आ (३) कूड़ा-कड़कटक पहाड़ ठाढ़ करबाक साजिश आ रमानन्द झा "रमण"क शब्दावली (१) "हाट-बजारक भाषा" (डॉ. प्रमोद कुमारक ‘कनकिरबा’ क आमुखमे)केँ उघार केलक। ई सभ हतोत्साहित करबा लेल उपयुक्त गैस-लाइटिंग केर टेक्निक अछि जकरा समानान्तर धारा द्वारा स्टोरी साइंसक मदतिसँ खतम कऽ देल गेल अछि। तँ ई उदाहरण सिद्ध करैए जे मूल धारामे सभ जातिक लोक अछि आ समानान्तर धारामे सेहो। स्टोरी साइंसक मदतिसँ ब्राह्मणवादक संग गएर-ब्राह्मणक नव-ब्राह्मणवादकेँ सेहो चिन्हित कएल गेल अछि। आ सएह कारण छै जे मैथिली कथा सुनेबाक आयोजन ‘सगर राति दीप जरय’केँ साहित्य अकादेमी द्वारा गीड़ि लेबाक प्रयत्न भेल आ से विफल भऽ गेलापर रमानन्द झा ‘रमण’ सहित मूल धाराक आन लोक अपन मानसिक सन्तुलन बना कऽ नै राखि सकला। रमानन्द झा ‘रमण’ तँ सभटा सीमाक अतिक्रमण करैत एकटा ब्राह्मणवादी संस्थाक पत्रिकामे बिनु नाम लेने हमरा आ उमेश मण्डलकेँ अवाच कथा सेहो कहलन्हि आ तकर उपहार स्वरूप साहित्य अकादेमी दिल्लीक ओइ संस्थाकेँ कथित लिटेरेरी एसोसियेशनक रूपमे मान्यता देलक। ई घटना स्टोरी-साइंसक प्रभावकेँ दर्शित करैत अछि। मुदा अशोक गत दस सालसँ ‘सगर राति दीप जरय’ केर आयोजन समानान्तर धाराक लेखक सभ द्वारा कएल जेबासँ आह्लादित छथि आ कहै छथि- ‘एकर प्रारम्भिक उद्देश्य रहै गाम-गाम गोष्ठी करबाक, से आबे जा कऽ भऽ रहल छै।‘ यएह गप हमर गाममे भेल ८२ म सगर राति दीप जरय [कथा बौद्ध सिद्ध मेहथपा (बाल साहित्य केन्द्रित) मेंहथ]मे शिवशंकर श्रीनिवास सेहो बाजल छला- ‘जखन हम सभ ‘सगर राति दीप जरय’ शुरू केने छलौं तखन एकर उद्देश्य छल जे ई गामे-गाम हुअय, मुदा ई तँ पटना-चेन्नै घुमऽ लागल।‘ आ ओम्हर रामभरोस कापड़ि ‘भ्रमर’ आ परमेश्वर कापड़ि सेहो पायापार नेपाल मे अड़ल छला। भारतक सरकारी संस्थाक संकलनमे हुनकर सभक रचना बाहरी (नेपालक) हेबाक कारण नै देल गेलनि मुदा ओही नेपालक दोसर लेखक, जे स्टेटस-को केर सङ छला, केर कथा देल गेलै । -Gajendra Thakur, editor, Videha (be part of Videha www.videha.co.in -send your WhatsApp no to +919560960721 so that it can be added to the Videha WhatsApp Broadcast List.) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। १.२.अंक ३८७ पर टिप्पणी सौरभ पाण्डेय [सार्थक बतकुच्चन (पोथी परिचय) [आशीष अनचिन्हार] पर] हम्मर मोन टा मुग्ध भ गेल, आशीष अनचिन्हारजी। अहाँ 'बात प बात बतकूचनक' भोजपुरी आलेखक परिचय प्रस्तुत केने छी। तक्कर माने पढ़बाक प्रयास भेल अछि। साहित्यकार समाजमे एहेन प्रयास आयकाल कत भ रहल अछि? दुर्लभे बुझियौ। अहाँ सत्य कहलहुँ, जे समाज भोजपुरिया हुऐ, अथवा मैथिली, भाषा छोड़ जमीनी तथ्य आ लोकक विचार मे कोनो बेसी भेद नै अछि। 'बात प बात बतकूचन' हमर भोजपुरी भाषा में प्रथम कृति अछि। अहाँक अनुमोदन आ प्रोत्साहन हमरा लेल कोनो उच्च पुरस्कार सँ लहान नै। हम हृदयतल सँ धन्यवाद ज्ञापित कर रहल छी। आ, मैथिली समाज मे हमर पुस्तकक परिचय करबाक लेल आभार पठा रहल छी। परिचय में एकटा सुधार करबाक लेल हम निवेदन क रहल छी। हमरा संपादन में दूसर संग्रह केर नाम 'गीत-प्रसंग' अछि। 'परों को खोलते हुए -2' के प्रकाशन नहि भेल। कल्पना झा, पटना नीक अंक अछि। स्तरीय आलेख सभ। नीक गजल,भजन,कविता सभ। एहि अंक मे सभ सँ विशेष अछि,धनाकर ठाकुर जीक लेख "विषाणु:विष वा नव-जीवनक निर्माण"क पुनर्प्रकाशन। ई एकटा नब सराहनीय ओ प्रशंसनीय काज सोझाँ आएल अछि विदेह टीमक। ओतेक पुरान आलेख,सेहो तीन रूप मे उपलब्ध करओल गेल अछि पाठक लेल। मूल मैथिली,लेखक द्वारा कएल गेल अंग्रेजी अनुवाद आ पत्रिका मे छपल पन्ना सेहो। ज्ञानवर्धक आलेख लिखलनि अछि धनाकर ठाकुरजी। पचास साल पहिलुक लिखल आलेख पुनः असंख्य पाठक धरि पहुँचल। एहि तरहक प्रयास आगाँ सेहो होएत,से अपेक्षा। आशीष अनचिन्हार जी द्वारा एकटा भोजपुरी पोथीक परिचय मैथिली भाषा मे देब नीक लागल। आ ताहू सँ नीक लागल मैथिल आ भोजपुरिया लोक मे व्यावहारिक समानताक चर्चा संग पोथी परिचय देब। "सार्थक बतकुच्चन" वास्तव मे नीक पोथी परिचय अछि। [प्रीति कारण सेतु बान्हल: सम्पादक- आशीष अनचिन्हार- विदेह पेटार] बहुत नीक संकलन। नीक संपादन। जबरदस्त तरीका सँ बिगुल बजा देल गेल अछि - "मेंहथ गाम,कृपानंद ठाकुर क आँगन मे बैसि एखन धरि अहाँ सभ जे पढ़लहु से मात्र प्रस्तावना छल। आब एहि ठाम सँ डेग उठा रहल छथि दंपति रचनाकार 22म शताब्दीक मैथिली साहित्यिक कोबर लेल जे पूर्णतया सजि कऽ तैयार छनि खास हिनके लेल। इएह कोबर घर साक्षी बनत नव-नव योजना-परियोजनाक। इएह कोबर घर साक्षी बनत भाषा-साहित्य केर सिनेहक। इएह कोबर घर साक्षी बनत वचन केर, चुपचाप वचन निमाहि देबाक। इएह कोबर घर साक्षी बनत ओहि नेंओं केर जाहि पर ठाढ़ हएत 32म-35म शताब्दीक मैथिली............." प्रतीक्षा रहत,एहि कोबर घर सँ केहन नव नव योजना परियोजना बहराइत अछि,तकर प्रतीक्षा लेखकीय प्रति समाप्त केलक। भीमनाथ झा [प्रीति कारण सेतु बान्हल: सम्पादक- आशीष अनचिन्हार- विदेह पेटार] अनेकश: धन्यवाद एहन सुन्दर लेखकीय प्रति उपहार लेल। ग्रन्थक अनुरूपे शाही पैकेट। रसे-रसे पढ़बाक आनन्द लेब। शुभकामना। विहंगम दृष्टिएँ देखल अछि। हुनक व्यक्तित्व-कृतित्वक प्रसार आ अहाँक संयोजन-सम्पादनकलाक विस्तार सहजहिँ झलकि जाइत अछि। एहि महत्वपूर्ण काज लेल भूरि-भूरि धन्यवाद। रबीन्द्र नारायण मिश्र किताब बहुत नीक छपल अछि।फोंट बहुत आकर्षक आ पैघ रहलासं पढ़बामे बहुत सुविधाजनक अछि। लेखकीय प्रति पठेबाक हेतु पुनः धन्यवाद। धनाकर ठाकुर नीक काज करैत रहू। लक्ष्मण झा सागर बहुत नीक अंक भेल अछि।बहुत सुन्दर। [प्रीति कारण सेतु बान्हल: सम्पादक- आशीष अनचिन्हार- विदेह पेटार] विद्यापतिक पांती पर पोथीक नामकरण अतिशय शोभनीय आ आकर्षक अछि। चिर प्रतिक्षित पोथीके लेखकीय प्रति उनटाबयमे आइ दिन भरि लागि गेल।पुरा पढ़बामे साल भरि त जरूर लागत।अपना 71 बर्खक जिनगीमे एहेन गतगर पोथी किनको पर लिखल एहिसं पहिने हमरा नै अभरल अछि।एहि पोथीक रचनाक संकलन आ सम्पादनमे आशीस अनचिन्हार जीक मेहनति आ भुमिका सराहनीय अछि।हुनका प्रति बहुत बहुत आभार! अहाँक सपत्नीकें हार्दिक बधाइ! शुभकामना!! अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.गद्य २.१.परमानन्द लाल कर्ण-एकादशीक उद्भव २.२.निर्मला कर्ण- अग्निशिखा खेप ३६ २.३.लालदेव कामत-प्रमाण पत्र जारी होइ लेल/ उच्च शिक्षामे महिला प्रतिनिधित्व घटत / हमर मीठ बैना/ कविवर रामविलास साहु जीक पोथी/ नियति आ पुरूषार्थ : एक समग्र मूल्यांकन २.४.रबीन्द्र नारायण मिश्र- ठेहा परक मौलाएल गाछ (धारावाहिक) २.५.कुमार मनोज कश्यप-समालोचक २.६.संतोष कुमार राय 'बटोही'- संतोष कुमार राय 'बटोही' केर डायरी 'लव यू टू' २.१.परमानन्द लाल कर्ण-एकादशीक उद्भव ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.२.निर्मला कर्ण- अग्निशिखा खेप ३६ निर्मला कर्ण (१९६०- ), शिक्षा - एम. ए., नैहर- खराजपुर, दरभङ्गा, सासुर- गोढ़ियारी (बलहा), वर्त्तमान निवास- राँची, झारखण्ड। झारखंड सरकार महिला एवं बाल विकास सामाजिक सुरक्षा विभागमे बाल विकास परियोजना पदाधिकारी पदसँ सेवानिवृत्ति उपरान्त स्वतंत्र लेखन। (अग्नि शिखा मूल हिन्दी- स्वर्गीय जितेन्द्र कुमार कर्ण, मैथिली अनुवाद- निर्मला कर्ण) अग्निशिखा खेप -३६

पूर्वकथा चित्रसेना आ राजा पुरूरवा के बातचीत सs गंधर्वराज विश्वावसु के उर्वशी के अपना संग स्वर्ग लs जेबाक बाट भेटलनि,ओ आब लक्ष्य के प्राप्ति लेल अपन विचार के क्रियान्वयन करय लगलाह। आब आगाँ "उर्वशी!उर्वशी!" - तेज आ भयभीत स्वर मे आवाज दैत राजा भीतरक कक्ष में प्रवेश केलथि । उर्वशी पर दृष्टि जाइतहि ओ जल्दी सँs आगू बढ़ि हुनका आलिंगन बद्ध कय लेलथि। हुनकर मुख पर आतंक के भाव देखि उर्वशी चकित भs गेलथि। राजा बहुत डेराएल देखा रहल छलाह।साँसक गति बहुत तेज छलनि। मुँह कारी स्याह भs रहल छलनि। हृदयक धड़कन सेहो बहुत तेज छल। "अहाँ के की भेल प्रियतम! एतेक डेराएल सन किएक देखा रहल छी!अहाँ एतेक किएक घबरा गेल छी!" राजाक आलिंगन सँs मुक्त भऽ उर्वशी राजाक मुँह दिस ध्यान सs देखैत पुछलथि । "प्रिये!उर्वशी! हमरा संग बहुत बरका धोखा भs गेल अछि। आइ हम एकटा बड्ड पैघ विश्वासघात करय जा रहल छलहुँ। बस एतबे बुझू जे भगवानक कृपा सँs ओ हमरा ओहि आपदा सँ बचा लेलथि !" राजा अपना संग घटित घटना के सम्पूर्ण विवरण देबा सs पहिने भगवान् के धन्यवाद कहलथि जिनकर कृपा सौं ओ निर्दोष बचल रहलथि । "किएक!की भेल! केहन विश्वासघात प्रियतम! केहन विश्वासघातक गप्प क’ रहल छी?" - उर्वशी आश्चर्यचकित भs कs पुछललथि । "अहाँ के बुझल अछि हम राजदरबार सँs बाहर चलि गेल छलहुँ?" -राजा घटनाक कथन करबासँ पहिने उर्वशीसँ प्रश्न पुछलथि। "हँ, हमरा एहि बातक जानकारी भेटि गेल छल! आओर ईहो ज्ञात भेल छल जे हम सूचना पठा कs अहाँ केँ मधुबन में आमंत्रित केने रही!मुदा ई बात एकदम असत्य छल! हम कोनो संवाद राजदरबार में नहि पठौने रही आहाँ के मधुबन मे भेंट करबाक हेतु! तखन ओ संवाददाता के छल!आ ओ संवाद के अहाँ के पठेलक!" -उर्वशी एखनो आश्चर्यचकित छलीह। "हमरा तs ओहि समय धरि ई बात नहि बुझल छल! हम सोचलहुँ जे संभवत:आइ अहाँ असगरे चलि गेल होयब। अहाँ केँ असगर मधुबन में भ्रमण रूचिकर नहि लागल होयत तखन अहाँ हमरा संवाद पठौने होयब मधुबन जयबा हेतु।मुदा तखनहुँ ई बात हमरा कनेक अस्वाभाविक लागल! मुदा जँs हम नहि जाइत छलहुँ,ओहि स्थिति में संभवतः अहाँ दु:खी भs जायब,ई बात सोचलहुँ । हम अहाँ के दुखी नहि करs चाहैत छलहुँ,ताहि लेल हम मधुबन गेलहुँ" - राजा उर्वशी केँ मधुबन जेबाक कारण कहलथि विस्तार सौं । "तखन की भेलै! ओतह के छल जे अहाँ के संवाद पठौने छल?" - उर्वशी उत्सुकता सs पुछलथि । आब राजा मधुबन पहुँचलाक बादक समस्त घटनाक्रम उर्वशी केँ विस्तार सs बतबय लगलाथि।ओ सब किछु,एक-एक शब्द,एक-एक घटना, अक्षरशः सब किछु कहि रहल छलाह। ओ एको टा बात शेष नहि रखलथि!किछु नहि नुकौने छलाथि। उर्वशी सब किछु सुनैत रहलीह,फेर गर्व सँ भरि पुरूरवा के आलिंगन में लय हुनक वक्ष स्थल सँs अपन मुखड़ा नुका लेलथि। ओ गर्व सs भरल छलथि अपन पति के उज्ज्वल चरित्र पर! ओह!पति केहन निर्दोष आ निश्छल प्रेमी छथि!उर्वशी सोचय लगलीह- एहन प्रेमीक वास्ते मात्र एक नहि एकसय जन्म निछाऒर कैल जा सकैत अछि, तखन स्वर्ग के बात कीअछि! एकर पश्चात् दुनू प्राणी प्रेमालाप मे लीन भs गेलथि ।बात एतहि समाप्त भs गेल छल ।ई घटना दुनू गोटेक मोन सँs लगभग विलुप्त भs गेल छल।एहि घटना के बाद पूरा सप्ताह धरि दुनू गोटे अपन अंतःपुर में रहलाथि,कतहु बाहर नहि निकललथि।दुनू गोटे कतहु बाहर जयबा सौं गबड़ाइत छलथि। दुनू गोटे के मोन में बसल अपन-अपन सोच हुनका डेरा रहल छलनि । राजा चित्रसेना सँs प्राप्त श्राप सs भयभीत छलथि,उर्वशी के हुनका लोकनिक बीच एकटा तेसर प्राणीक उपस्थिति असहनीय लागि रहल छलनि। ओ सदिखन अपन आसपास गंधर्वराजक उपस्थिति सँs भयभीत छलीह।ओ सोचि रहल छलीह जे सम्भवतः ई घटना गंधर्वराजक कोनो चालि थिक। ई सोचि उर्वशी आओर डेरा गेल छलीह,ताहि लेल ओ मात्र अन्त:पुर में रहबाक निर्णय लेलथि । दुनू गोटेक बाहर नहि जेबाक अपन-अपन कारण छलनि।दुनू गोटेक डर छलनि जे कहीं दुनू गोटे एक दोसरा सँ अलग नहि भs जाथि।मुदा दुनू गोटे एक दोसरा पर अपन डर नहि व्यक्त कs रहल छलथि, एक दोसराक सोझाँ में प्रसन्न रहवाक प्रयास में सदिखन रहैत छलथि। आखिर कतेक दिन धरि ओ सभ राजप्रसाद के अंतःपुर में बंद रहि सकैत छलथि! जौं-जौं समय व्यतीत भs रहल छल,राजा पुरूरवा एहि घटना केँ बिसरि रहल छलाह,आ हुनकर भय सेहो दूर भs रहल छलनि। धीरे-धीरे उर्वशी सेहो गंधर्वराजक उपस्थिति विस्मृत कs रहल छलीह। हुनका विश्वास भs गेल छलनि,गंधर्वराज हुनक भावना के बुझैत,हुनक स्थिति केँ देखि आ हुनक इच्छाक आदर करैत,वापस स्वर्ग चलि गेल होयताह आ हुनक वापसीक बाट केँ रोकि देने होयताह। यैह सभ सोचि आब धीरे-धीरे ओ अपन भय केँ विस्मृतिक गहन गुफा मे राखि रहल छलीह। आ आब ओ दुनू प्राणी सामान्य जीवन दिस पुनः आपस आबि रहल छलथि ।एहि तरहेँ लगभग एक मास आओर बीति गेल।

-----**------***------ अमावस्याक घनघोर कारी अन्हार राति छल।पृथ्वी पर घोर अन्धकारक साम्राज्य पसरल छल। एहेन घोर अन्हार!जे अपन हाथ सेहो नहि देखाइत छल। एहि घनघोर कारी अन्हार राति में एक गोट रथ अन्हारक छाती बेधैत तीव्र गति सs आगू बढ़ि रहल छल। रात्रि के समय आ नीरव पथ के निस्तबद्धता! एहेन मुक्त परिवेशक आनन्द किछु आओर होइत अछि! एकर अतिरिक्त एक मास सs बेसी अवधि तक राजप्रासाद आ राजदरबारक बन्द वातावरण में रहलाक उपरान्त उर्वशी आ पुरूरवा दुनू गोटे सुगंधित,स्वच्छ,शीतल,उन्मुक्त बयार पाबय लेल अत्यंत व्यग्र छलथि । महल आ राजदरबार के बंद वातावरण में आब हुनका लोकनि के घुटन भs रहल छलनि ।वनक स्वच्छ,उन्मुक्त आ सुगन्धित हवाक स्मृति हुनका ओतय पहुँचबाक लेल व्यग्र क रहल छलैक। ताहि सौं आइ गंधमादन पर्वत पर अवस्थित कुमार वान घुमबाक कार्यक्रम बनौने छलथि ।आ आब ओ कुमार वन जयबा हेतु अग्रसर छलथि। हुनकर रथ आगू बढ़ि रहल छल,कतेको वन आ घाटी पार करैत।पीठ पर स्नेहिल थपकी दैत शीतल पवन के झोंका एकटा सुखद अनुभूति करा रहल छल।शीतल मंद हवाक झोंका हुनकर कपड़ा आ केश के स्पर्श कs रहल छल,जाहि कारण हुनक केश एवं वस्त्र पवन संग उन्मुक्त भय लहरा रहल छल। उर्वशी के घनगर,नम्हर कारी-कारी केश हवाक झोंकक कारणेँ उर्वशी के कपोल चुमैत एम्हर-ओम्हर चहुँदिश लहरा रहल छल। उर्वशी आ पुरूरवा दुनू रथ में एक दोसराक एतेक निकट बैसल छलथि जे जौं कियो कनेको दूरी सँs देखितथि ओ हुनका दुनू के निश्चित रूप सs आलिंगनबद्ध बूझि सकैत छलथि। ​ रथ मे उर्वशी ओ अपन बाँहि के हार बना राजाक ग्रीवा में पहिरौने छलथि आ हुनक माथ अपन प्रियतम पुरूरवा के घनगर आ कोमल केशसँ आच्छादित विस्तृत वक्षस्थल पर टिकौने छलथि।बाँहि के हार एखनहु पुरूरवाक गरदनिमे लेपटायल छल ।कखनो ओ माथ उठबैत मुस्कुराइत छलीह, कखनहुँ राजाक गालसँ अपन गाल सटा लैत छलीह,आ कखनहु काल पुनः राजाक छाती पर माथ राखि दैत छलीह। हुनक एहि कामोत्तेजक चेष्टा सँs राजा उन्मत्त भेल जाइत छलाह। मुदा उन्मत्त भेलाक बादो ओ अपना पर नियंत्रण पाबि लेने छलाह। अपन धैर्य बनौने रखवाक छनि हुनका कुमार बन जाए धरि! कुमारवन पहुँचला उपरांत ओ अपन धैर्य के परित्याग कs सकैत छथि!ओहि सँ पहिने नहि! ओहि सँ पहिने हुनका अपना पर नियंत्रण रखवाक छलनि! यैह कारण छल जे ओ अपना पर नियंत्रण रखने छलथि। ओ कखनो काल मुस्कुराइत प्रेम भरल दृष्टि सौं उर्वशी दिस तकैत रथ केँ तेज गति सँs कुमार वन दिस बढ़बैत जा रहल छल। अचक्के ओ अश्व के रश्मि खींचलथि,रथ रुकि गेल! गंतव्य पहुँचि गेल छल!अश्व सभके रथ सs अलग कए अलग-अलग गाछक जड़िमे बान्हि देलथि,फेर उर्वशीकेँ कोड़ मे लऽ कऽ बहुत कोमलता सौं रथ सs उठा पृथ्वी पर उतारि लेलथि।पुनः अपन प्रियतमा के एक कान्ह पर राखि दोसर हाथ सँ दुनू मेमना के रश्मि पकड़ि वन में आगू बढ़ि गेलाह। सम्पूर्ण वन में अन्हार के साम्राज्य पसरल छल। सुन्दर सरोवर लग बनल विशाल चबूतरा पर अपन प्रियतम केँ बैसा देलथि ओ,तखन किछु दूर में मेमना सभ के बान्हि देलथि। मेमना के बान्हि कऽ फेर आबि उर्वशी ओ बैसि गेलाह। आब ओ उर्वशीक जाँघ पर माथ राखि प्रेमक सागर मे डुबकी लगेबाक लेल तैयार भs गेल छलथि। हुनकर आँखि आकाश मे छिड़ियाएल चम चम चमकैत असंख्य तारा पर बेरि-बेरि जा रहल छलनि।उर्वशी हुनकर आलिंगन में आबद्ध भय हुनक छाती पर अपन हाथ सs धीरे-धीरे थपकी दैत सोहरा रहल छलथि।बहुत काल धरि दुनूक बीच मौन पसरल रहल। मुदा हुनका दुनू के मध्य आँखिक भाषा में मूक वार्तालाप चलैत रहल। तखन अचानक राजा चिहुँकि कs उठलथि। ओ बैसि गेलाह आ उर्वशीक चेहरा केँ अपन दुनू हाथक बीच मे लs कs हुनका सँ पुछलथि - . "कियेक प्रियतमे,अहाँ किछुबाजि किएक नहि रहल छी?" उर्वशी मुस्कुराइत पुरूरवा पर अपन तीक्ष्ण चितवन के मारक प्रहार केलथि ।पुरुरवा हुनकर भ्रू-भंगिमा पर कामोन्मत्त भय उर्वशी केँ अपन आलिंगन समेटि लेलथि ।ओ उर्वशी के शरीरक एक-एक अंग केँ चुम्बन लेबय लगलथि ।ओ ओ कामोत्तेजना सौं पूर्ण रूपेण उन्मत्त भय गेल छलथि।आब,मदहोश भेल राजा के हाथ अपन कोमलांगिनी प्रेमिका सहधर्मिणी के अंग-अंगक स्पर्श कय हुनका में कामोत्तेजना जगा रहल छलथि।हुनकर हाथ प्रेमिकाक सुन्दर देह के दुलाराबैत चुंबनक वर्षा करय लागल छलथि। उर्वशी सेहो पाछू नहि रहि गेल छलीह,प्रियतम के संग पाबि कामोत्तेजना हुनका पर सेहो हावी भs गेल छलनि। हुनकर साँसक गति सौं तीव्र तीव्रतर भेल जा रहल छल। पुरूरवा ध्यान सs देखलनि जे उर्वशीक आँखि मे एकटा मौन आमंत्रण छल। वैह भाव राजा पुरूरवाक आँखि मे सेहो उपस्थित छल। एक-एक कए वस्त्र दुनू के देह सs खसय लागल! किछु समय उपरान्त दुनू के शरीर पर वस्त्र के नाम पर किछु नहि शेष छल। दुनू गोटे काम क्रिया में एतेक डूबल छलथि जे आसपासक परिवेश पर ध्यान तक नहि देलथि! शांत वातावरण में मात्र हुनका दुनू के तीव्र साँस के प्रतिध्वनि आ कखनो काल सुरत जनित सिसकारी भरय के आवाज मात्र सुनल जाइत छलैक!आ फेर सब किछु शान्त भs गेल छलैक। आब माहौल पहिने सन शांत निस्तब्ध भs गेल छल। अखन सुई खसला पर ओकरो आवाज बहुत तीव्र गूँजैत सुनाइत।ओतए एतेक शान्ति पसरि गेल छल। सुरत जनित श्रान्ति सौं क्लान्त भय ओ दुनू एक दोसरा के आलिंगन में लय स्वप्निल संसार में विचरण कय रहल छलथि। अचक्के मेमना के तीव्र चीत्कार वातावरण में गूँजि उठल।कियो जबरदस्ती ओहि मेमना के उठा लेने छल।उर्वशी के सुन्दर सपना टूटि गेल छल,ओ चीत्कार कय उठलीह - "प्रियतम....प्रियतम....कियो हमर मेमना के भगौने नेने जा रहल अछि। ओकर रक्षा करू - ओकर रक्षा करू..." रक्षा करू प्रियतम..." राजा के सपना सेहो टूटि गेल छल। ओ डेरा गेलथि । ओ चकित भs कs जागि गेल छलथि । ओ अकबकायल बैसि गेलथि । उर्वशी उनका हकबकायल बैसल देख बजलीह - "राजा, हम सोचइत छलहुँ अहाँ एकटा बहादुर योद्धा थिकहुँ, तखन अहाँ किएक घबड़ा गेलहुँ!हमर मेमना केँ ओकरा सभ सँ बचाउ!ओहि दस्यु सभ सँs बचाउ!" जेना पुरूरवाक आँखि सँs नींद विलुप्त भs गेल होइन ! कान में मात्र एकटा आवाज गूँजि रहल छलनि "हमर मेमना के रक्षा करू.....हमर मेमना के रक्षा करू...." क्रमशः अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.३.लालदेव कामत-प्रमाण पत्र जारी होइ लेल/ उच्च शिक्षामे महिला प्रतिनिधित्व घटत / हमर मीठ बैना/ कविवर रामविलास साहु जीक पोथी/ नियति आ पुरूषार्थ : एक समग्र मूल्यांकन लालदेव कामत प्रमाण पत्र जारी होइ लेल/ उच्च शिक्षामे महिला प्रतिनिधित्व घटत / हमर मीठ बैना/ कविवर रामविलास साहु जीक पोथी/ नियति आ पुरूषार्थ : एक समग्र मूल्यांकन १ प्रमाण पत्र जारी होइ लेल आब ग्राम पंचायत, नगर पंचायत केर लोककेँ सरकार भवन आ प्रखंडके दफ्तर मेँ दौड़-धूप सँ अपसियाँत हेबाक परेशानी सँ बाँचैक सुलभ रस्ता वसुधा केन्द्र आ सैबरकैफे पर आसान भ' गेल छैक। इहो जनतब लोकक जागरूकता अभावे बेर - बेर कंकरों सँ पुछारि करय पड़ऐक,केओ बतौनिहार नहि भेटैक। तँ बुझबाक लेल एकहि व्यक्ति सँ आवश्यक कागजात तैयारी लेल बेर - बेर खोज पुछारि कयला सँ सेहो ओ अकक्ष भऽ लुलकारि लैन। तेँ जरूरियात जानकारी रहा चाही। यथा -: विवाह प्रमाण पत्र दस्तावेज :- ८. 1. आधार कार्ड (वर-वधू दुनूक) 2. स्कूल प्रमाण पत्र वा जन्म प्रमाण पत्र वा टीसी० 3. राशन कार्ड 4. 2-2 फोटो रंगिल (वर-वधू 'क अलग-अलग पासपोर्ट साइज केर फोटो) 5. 3 फोटो रंगिल क्वाटर साईज (2x3 वर्तमान कालके जाहिमे वर-वधू शामिल अछि) 6. दुनूक मुख्य निवास (वर-वधूमे सँ एक के पहिलुक निवास) 7. विवाह पत्रिका 8. दू गोट गवाह (वर-वधू सँ दिशसँ एक-एकटा) 9. पहचान पत्र शिक्षा हेतु आर्थिक सहायता योजना 25000/- रुपया तक (आईआईटी/डिप्लोमा कोर्स/सरकारी आईटीआई/आईआईएम/एएमएस/बी.टेक/नर्सिंग कोर्स मे प्रवेश हेतु) आवश्यक दस्तावेज : १. 1. ई- श्रम कार्ड 2. जाति प्रमाण पत्र 3. स्कूल प्रमाण पत्र 4. मजदूर केर आधार कार्ड 5. छात्रके आधार कार्ड 6. मजदूरके बैंक (अधिकोष) खाता 7. फोटो - 2 (छवि) 8. मोबाइल (चलभाष सँ०) नंबर विकलांगता पेंशन 1000/- रुपैया केवल पंजीकृत मजदूरके लेल। आवश्यक दस्तावेज : १. 1. श्रम कार्ड 2. जाति प्रमाण पत्र 3. विकलांगता(दिव्यांग) प्रमाण पत्र 4. आधार कार्ड 5. बैंक खाता 6. फोटो - फूल तस्वीर - 2. 7. मोबाइल नंबर परिवार पेंशन योजना आवश्यक दस्तावेज : १. 1. मृत्यु प्रमाण पत्र 2. श्रम कार्ड 3. जाति प्रमाण पत्र 4. आधार कार्ड (१२ डिजिट संख्या) 5. बैंक खाता (आई एफ सी कोड सहित) 6. मतदाता आईडी० कार्ड 7. मोबाइल नंबर प्रयोजन पति'क मृत्युके बाद 50% पेंशन प्राप्त करबाक लेल | प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना आवश्यक दस्तावेज : १. 1. पंजीकरण कार्ड। 2. डिलीवरी पर्ची। 3. बच्चा+माँ+आशा दीदीके फोटो 4. आधार कार्ड 5. बैंक खाता 6. मोबाइल नंबर। प्रयोजन गर्भवती महिलाके पौष्टिक भोजन'क लेल 6000/- टाका उपलब्ध कराबयके लेल। बच्चाके पहिल जन्म पर पंजीकरण फॉर्म भरय पड़त नोट: आशा कार्यकर्ता केर माध्यम सँ सएबइकआ लग आंगनबाड़ी केंद्र पर आवेदन करय पड़त। प्रधानमंत्री शादी शगुन योजना आवश्यक दस्तावेज : १. 1. स्नातक शिक्षण प्रमाण पत्र 2. अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र 3. आधार कार्ड 4. विवाह विवाह प्रमाण पत्र 5. मोबाइल नंबर। प्रयोजन मुस्लिम समुदायके स्नातक लड़की केँ आर्थिक सहायता क' रूप मेँ मात्र 51,000/- रुपया भेटत, जे उपहारमे देल जायत। प्रधानमंत्री निःशुल्क सिलाई मशीन योजना नोट:- एहि योजनाके अन्तर्गत बहुत गरीब महिला मजदूर, विधवा, विकलांग, परित्यक्त पति, गृहणी आदिकेँ अपन रोजी-रोटीके लेल मुफ्तमे सिलाई मशीन भेटत। सिलाई मिशील प्राप्त करबाक लेल आवश्यक दस्तावेज : १.1. आधार कार्ड। 2. आय प्रमाण पत्र 12000/- हजार रुपयेकणि। 3. यदि अक्षम अछि, प्रमाणपत्र। 4. यदि विधवा, तखन आश्रित प्रमाणपत्र। 5. फोटो - 2 6. मोबाइल नंबर। एल.पी.जी. गैस सिलेंडर दुर्घटना बीमा योजना (क) प्रत्येक गैस कनेक्शन पर 40 लाख सं 50 लाख रुपयाके बीमा राशिके कवर कैल जायत छैक। (ख) घरक सभ सदस्यक बीमा अछि। दुर्घटनाक स्थितिमे लाभ प्राप्त करबाक लेल। निम्नलिखित दस्तावेज : १. 1. एफआईआर केर प्रतिलिपि। 2. मृत्यु प्रमाण पत्र। 3. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के संग गैस कंपनी के आवेदन देबय पड़त। पेन कार्ड -: लिखित कागजात :- - नव पैन कार्ड :- 1. आधार कार्ड (जन्म तिथि पूर्ण होबाक चाही) 2. 2 फोटो - पैन कार्ड सुधार :- 1. आधार कार्ड (जन्म तिथि पूर्ण होबाक चाही) 2. पैन कार्ड 3. 2 फोटो परिवार लाभ योजना आवश्यक दस्तावेज : १. 1. राशन कार्ड आ सूची। 2. मृत्यु प्रमाण पत्र। 3. आश्रित प्रमाण पत्र। 4. आधार कार्ड/मतदाता कार्ड मृतक आश्रित केर आधार कार्ड 5. 6. आश्रित के निवास + जाति प्रमाण पत्र 7. बैंक खाता + आश्रित के फोटो - 3 8. मोबाइल नंबर। नोट-: 18 सँ 59 वर्षक उम्रक लेल। परिवारक मुखियाक मृत्युक बाद 20,000/- रुपैयाक आर्थिक सहायता देल जाइत अछि। ईडब्ल्यूएस आरक्षण दस्तावेज :- ८. 1. हलफनामा 2. घर 3. आधार कार्ड 4. पैन कार्ड (या माता-पिता आ स्वयं के हलफनामा) 5. राशन कार्ड 6. पहचान पत्र 7. जन आधार कार्ड 8. आय प्रमाण पत्र (जौं आईटीआर) 1.1. 9.1 फोटो 10. जाति प्रमाण वा मकान पट्टा प्रधानमंत्री निक्षय पोषण योजना आवश्यक दस्तावेज : १. 1. आधार कार्ड। 2. बैंक खाता। 3. दवाई पर्चेज आ नामांकन रजिस्टर शीट। 4. मोबाइल नंबर। प्रयोजन टी. बी.(यक्ष्मा) एहि योजना क तहत मरीज कए प्रति माह 500/- टका क सहायता राशि भेटत। एकरा लेल स्वास्थ्य केंद्र (डीएमसी) मे पंजीकरण अनिवार्य अछि। विवाह सहायता अनुदान योजना आवश्यक दस्तावेज : १. 1. श्रम कार्ड 2. जाति प्रमाण पत्र 3. वर-वधू के आधार कार्ड 4. वर-वधू के दू-दू टा फोटो 5. विवाहक कार्ड 6. पंचायत सेवक द्वारा विवाह प्रमाण पत्र 7. माता-पिता के आधार कार्ड प्रयोजन पंजीकृत मजदूर केर दू बेटीके विवाहके बाद 50,000/- रुपयाके दर सँ विवाह सहायता अनुदानके माध्यम सँ आर्थिक सहायता प्रदान करब। नकद पुरस्कार योजना आवश्यक दस्तावेज : १. 1. श्रम कार्ड 2. जाति प्रमाण पत्र 3. आधार कार्ड 4. बैंक खाता 5. बाल शैक्षणिक प्रमाणपत्र आ अंक पत्र 6. बच्चाक बैंक खाता 7. बच्चाक फोटो - 2 8. मजदूर + बच्चाके संयुक्त फोटो - 2 नोट:- एक वर्ष सदस्यता पूरा होने पर। (क) दशम आ बारहम मे इस्ट। क्लास पास केलाक बाद 80% स बेसी अंक प्राप्त करबा पर 25,000/- क टका देल जाएत। 70% स बेसी अंक प्राप्त करय लेल 15,000/- रुपया 60% अंक स ऊपर अंक प्राप्त करय लेल 10,000/- रुपया प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना मुफ्त गैस कनेक्शन के लिये दस्तावेज : १. 1. महिलाक राशन कार्ड 2. महिलाके आधार कार्ड 3. पति के आधार कार्ड 4. 18 साल सँ ऊपरके लोकके आधार कार्ड 5. महिला के 3 फोटो 6. महिलाक बैंक खाता 7. मोबाइल नंबर -: प्रयोजन :- बी.पी.एल.परिवारके मुफ्त गैस कनेक्शन प्रदान करब। सड़क दुर्घटना सहायता योजना दुर्घटना मे मृत्यु भेल व्यक्ति कें आश्रित कें सहायता कें अनुदान प्राप्त करय कें लेल आवश्यक दस्तावेज: 1. एफआईआर के प्रतिलिपि। 2. मेडिकल रिपोर्ट। 3. पोस्टमार्टम रिपोर्ट। 4. अनुमंडल अधिकारी के प्रतिवेदन। अनुदान-सहायता रु 4,00,000/- चार लाख रुपैया आपदा अनुग्रह आकस्मिक मृत्यु अनुदान योजना आपदाके प्रकार :- 1. मानवके कारण सामूहिक दुर्घटना 2. गरजब, 3. गर्मीक लहर, 4. असमय वर्षा 5. बेसी बरखा, 6. नाव दुर्घटना आवेदन मे आवश्यक दस्तावेज : १. अनुदान-सहायता राशि 5,00,000/- पांच लाख रुपया प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना-: नोट - सीमांत किसानक केँ जिनका 2 हेक्टेयर या कम सँ कम 10 दशमलव भूमि धरि केँ कृषि भूमि होनाय आवश्यक छै, ओकरा प्रति वर्ष 6000/- रुपया सीधा ओकर बैंक खातामे भेटतय, २००० टाका बढ़ोतरी होयबला छै। अनुदान प्राप्त करयके लेल आवश्यक दस्तावेज : 1.1.

1. आधार कार्ड।

2. बैंक खाता।

3. जमीनक प्राप्ति।

4. मोबाइल नंबर।

5. ऑनलाइन किसान पंजीकरण करब आवश्यक अछि। विकलांग पेंशन योजना

आवेदन पत्रमे शामिल कैल जेनाय वाला दस्तावेज:

1. आधार कार्ड

2. निवास प्रमाण पत्र

3. दिव्यांग व्यक्तिके सम्पूर्ण फोटो - 3

40% सँ ऊपर विकलांगता प्रमाण पत्र

5. बैंक खाता

6. मोबाइल नंबर विधवा पेंशन योजना

आवेदन पत्रमे शामिल कैल जेनाय वाला दस्तावेज:

1. आधार कार्ड

2. बैंक खाता

3. मृत्यु प्रमाण पत्र

4. निवास प्रमाण पत्र

5. मोबाइल नंबर

6. बी.पी.एल.कार्ड/ आय प्रमाणपत्र रु.60,000/-

-: नोट :- उम्र सीमा 60 साल सं बेसि होबाक चाही. वृद्धावस्था पेंशन योजना

आवेदन पत्र मे शामिल कैल जेनाय वाला दस्तावेज:

1. आधार कार्ड

2. पहचान पत्र

3. बैंक खाता

4. मोबाइल नंबर

5. बैंक सत्यापन

6. पासपोर्ट साइज के फोटोग्राफ 2

-: नोट :- उम्र सीमा 60 साल सँ बेसि होबाक चाही. ए.टी.एम. दुर्घटना बीमा योजना

आवश्यक दस्तावेज : १.

1. एफआईआर केर प्रतिलिपि।

2. अस्पतालक रिपोर्ट।

3. पुलिस पंचनामा।

4. ड्राइविंग लाइसेंस

5. एक महीनाके लेल खाता अपडेट करूं आ खाता स्टेटमेंटके फोटोकॉपी.

6. एक महीना के भीतर एटीएमके उपयोग जरूरी अछि। नया राशन कार्ड

नव आवेदन पत्रके साथ संलग्न कैल जेनाय वाला दस्तावेज:

1. पारिवारिक फोटो - 3

2. आवेदन पत्र, 1999।

3. सब लोकके लेल आधार कार्ड

4. महिलाके बैंक पासबुक

5. महिलाके हलफनामा

6. महिलाके निवास प्रमाण पत्र

7. मोबाइल नंबर

राशन कार्डमे नाम जोड़बाक लेल : फॉर्म 'बी'।

1. आधार कार्ड, 2019।

2. राशन कार्ड

3. यदि अहांके पास निवास प्रमाणपत्र छै त ओकरा संलग्न करूं/अगर नहि त छोड़ूं.

राशन कार्ड सँ नाम हटाबय लेल : फॉर्म 'बी'।

1. राशन कार्ड

2. आधार कार्ड प्रधानमन्त्री श्रमयोगी माँधन पेंशन योजना

आवेदन पत्रके साथ संलग्न कैल जेनाय वाला दस्तावेज: 1.1.

1. श्रम कार्डके फोटोकॉपी।

2. आधार कार्ड

3. नामांकित व्यक्तिके आधार कार्ड

4. बैंक खाता

5. फोटो - 3

-: नोट :-

इ पेंशन योजना 18 साल सं 40 साल कें उम्र समूह कें लेल छै. 60 साल पूरा भेला पर सालाना 36000/- टका पेंशन भेटत। जनजागृति लेल सर्व सुलभ पाठक वर्ग पढ़ा अनको बताबथि,से आग्रह रहत।

२ उच्च शिक्षामे महिला प्रतिनिधित्व घटत हालहिमे मैथिली 'क वरेण्य साहित्यकार श्री नन्दविलास रायजी मोबाइल पर वार्ता करैत किछ चिन्तित देखेलाह। प्रसंगवश हुनक कहब भेलनि जे ४५% वर्गमे अनिवार्य उपस्थिति नहिं रहला पर नाम काटल जेतैक आ परीक्षा फार्म नहि भरय देल जेतैक। ऐ संबंधि शिक्षा विभागक चिठ्ठी सँ परेशानी बढ़लैक अछि। ग्रामीण क्षेत्रक ग़रीब वर्गक बेटी नियमित रूपेँ घर सँ कालेज धरि जायब- आरंभ करयमे गाड़ी- टेम्पूके किराया भुगतान करय सँ असमर्थ छैक। चिन्ता तँ हुनक निठाहे साँचक निकट छन्हि। मुदा मैट्रिक पास बालिका केँ १० हजार टाका आ इन्टर पास छात्राके २५ हजार टाका एवम् ग्रेजुएशन पास भेलासन्ता ५० हजार नगद राशि प्रोत्साहन लेल बिहार सरकार एक मुश्त बैंक द्वारा दैत छथिन ,से तँ आगुक पढ़ाई-लिखाई जारी रखबाक लेल ने। वालिका शिक्षा दर विगत एक दशकमे बालकके बन्सब्त खूब बेसी बढ़लैक अछि। देखल जाए तँ शिक्षक नियुक्तिमे सेहो पुरुष ४९% तँ स्त्री ५१% आंकड़ा शिक्षाक प्रति बढ़ैत दर केँ प्रदर्शित करैछ। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय - दरिभंगा केर कुलपति महोदय सब अंगीभूत कालेजमे जनजागृति करय लेल प्रधानाचार्य सभकेँ अनुदेश देने छथि। इयह कारण थीक जे गतदिन ललित नारायण कालेज झंझारपुर केर प्रो० नारायण झा जी शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारीक बैसार करैत विद्यार्थीगणके अभिभावक सँ आग्रह करैत जागरूकता कयलनि। से दोसरो कालेजमे एही तरहेँ आयोजन भेलैक अछि। देखल जाइत अछि नगर,शहर आ कस्वा केर महिला विद्यार्थी देहात क्षेत्रक महिला विद्यार्थी सभक अपेक्षा वेसी शिक्षण संस्थानमे अध्ययन लेल पहुँचैत छथि। देहाती दुर्गम क्षेत्रक छात्राकेँ यातायात सुविधाक अभाव आ स्वंय साइकिल - वाईक आदि चलाके नहि समय सँ महाविद्यालय केर वर्गमे पहुंचला पर हाजरी बही सँ नाम काटल जा रहलैक अछि। एहनमे ई परिकल्पना सतत् आबय बाला समयमे पछुएबाक संदेश छी। नारी सशक्तिकरणके दौड़मे बढ़ैत सब तरहेँ सब विभाग आ विधामे जे बढत केर गति छैक से कमतर होयबाक अंदेशा निर्मूलन नहि अछि। ओना तँ आंकड़ा कहैत छैक जे स्त्री शिक्षामे बढ़ उछाल हालक वर्षमे आयल अछि, यथा - बिहार क' १०९२ कालेजमे औसतन २०८८ विद्यार्थी नामांकित छैक। नामांकन के ई औसत राष्ट्रीय स्तर पर मात्रे ७०९ छैक। राज्यमे प्रति कालेज विद्यार्थी केर बढ़ैत संख्याँ सँ बुझाइछ जे राज्यमे कालेजके संख्याँ बढ़ कम भ' गेल छैक। से ऐ केँ बढ़ेबाक आवश्यकता छैक। पहिले ६०टा कालेज छलैक जे २०२१-२२ मेँ घटिके मात्रे ७ गोट रहलैक अछि। साकारात्मक बात ई भेलैक जे उच्च शिक्षा पाबै ले युवावर्गमे अधिक उत्साह छैक। जेण्डरवाईज नामांकन मेँ बिहार देशमे सातम स्थान पर छै। ए आई एस एच ई. के प्रतिवेदन अनुसारे बिहार क' शैक्षणिक सत्र २०२१-२२मेँ राज्यमे कुल १४.४७ लाख छात्र आ ११.७५ लाख छात्राक नामांकन भेल अछि। एहि तरहेँ १८ सँ २३ साल आयुवर्गके २६ लाख सँ वेशी छात्र नामांकन करेने अछि। भारतदेशमे सबसँ अधिक बिहारमे प्रति कालेज औसतन २०८८ विद्यार्थी केर भेलैक नामांकन। आब के०के० पाठक जीके करकरौला सँ अनिवार्य उपस्थिति ४५ प्रतिशत नहिं पुरलापर नाओं काटल जेतैक। निवंधन आ परीक्षामे उत्प्रेशीत हेबाक अवसर भेटबाक कोनू बातें नहिँ। तेँ परीक्षामे महिला विद्यार्थी क' छीजन होयब स्पष्ट झलैक रहल अछि। ई देखल जाईछ प्राथमिक कक्षाक'आ मध्य विद्यालय तथा उच्च विद्यालयमे छात्र -छात्राक छिजन नहिँ होईछ। उच्च माध्यमिक शिक्षा मेँ सेहो बालिका शिक्षाक सतत् सक्रिय भागीदारी होईछ। मुदा आगूक शिक्षण प्राप्तिमे त्रूटइ होमय लगैत छैक। आब देखल जाए २०२४-२५ बिहारक वजट आकार २७८७२५.७२ टाकाके वित्त मंत्री सम्राट चौधरी (उप मुख्यमंत्री) गत दिन जे पेश कयलनि,ताहि मेँ सबसँ अधिक राशि ५२.६ करोड़ टाका शिक्षा मद्दमे छैक। बिहार 'क बजट २०२३-२४ में नीतीश कुमार जीक एनडीए सरकार बम्फर भर्ती'क ऐलान करैत लोक सेवा परीक्षा क' तैयारी कय रहल महिला अभ्यर्थी कें तोहफा देलनि। रोज़गार आ महिला सशक्तिकरण पर राज्य सरकार विशेष ध्यान देलथि। शिक्षा मंत्री विजय चौधरी बिहार विधान मंडलके वेट सत्रक दोसर दिन मंगलवार के जे बात पेश केलनि विभागक वेतन-भत्ता लेल ६३९७करोड़ टाका आवंटन केलनि। जहनकि कुल राजस्व प्राप्ति २१२३२७ करोड़ टाका हेबाक अनुमान छैक। राज्य २६ प्रतिशत स्वयं संसाधन सँ आ ७४ प्रतिशत अर्थात् १५६११५ करोड़ टाका केन्द्रीय कर आ अनुदान सँ प्राप्ति करत। जे बात कहैत उठौने रही , स्त्री शिक्षा एहू कारणेँ कमजोर पड़ते छैक जे बेटीक माय पढाय प्रोत्साहन टाका सँ बेटी वियाह सँ पूर्व गहना सोना चानिक कीन- बेसाहि दैत छथि। इयह कारण एकटा ई जे बीचेमे पढाय छोड़ा गहन- जेबर सहित छात्रा अपन बोआय फ्रेंड संग वियाहक उद्देश्य सँ अनचोकेमे परा जाईछ। दहेज रूपी कोढ़ सँ फिरीसान किछ बेटाक माय सेहो अपने बेटीके गार्जन सँ नुकाकेँ प्रेमी संग सांठि दैत, जाहि किरणें पढाय - लिखाएमे छीजन होयब स्पष्ट अछि।

३ हमर मीठ बैना कवियत्री श्रीमती नूतन झा अपन छिरियाएल मैथिली काव्य केँ समेट एक पोथीक आकार दैत साहित्य केर पाठकके बीच अनलीह अछि। मैथिली भाषा मेँ हिनक ६६ गोट कविताक संग्रह ' हमर मीठ बैना ' नामक पहिल कविता नामे १२८ पृष्टक पहिल पोथी २०२२ ई० मेँ पल्लवी प्रकाशन निर्मली सँ छपौलनि अछि। एहिक दाम भालू १५१ टाका निर्धारित कयल गेल छैक। ओना तँ नूतन झा आब झारखंडके जमशेदपुरमे रहैत छथिन, मुदा ओ मुलवासी मधुबनी जिला अन्तर्गत मधेपुर प्रखंडक रहुआ-संग्राम केर प्रो० अशोक कुमार झा"अविचल" केँ धर्मपत्नी आ प्रसाद निबासी घनश्याम झाजीक बेटी थिकीह। हिनक जन्म ५ फरबरी १९७६ म भेल छन्हि। ई मैथिली प्रतिष्ठामे स्वर्ण पदकधारी रहैत एमबीए (जेएस ओयू) कयने छथि। हिनक आकाशवाणी जमशेदपुर सँ मैथिली गीत, कविता आदिक प्रसारण भेल छन्हि। संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के साहित्य अकादमी नवदिल्ली सँ आयोजित कार्यक्रममे काव्यपाठ बराहल गेल य। संगहि इहो जनतब दी जे कचोट, झारखण्ड 'क सनेस, संस्कृति, इस्पात भारती, मैथिल प्रवाहिका आदिमे स्तंभ लेखन आओर गीत, कविता,कथा आदि प्रकाशित भेल छैन जे किछु पाठककेँ अवश्य अभरल होयत। कहैत छलौंह हमर मीठ बैना " मुक्तक संग्रह" ल' कें नूतनजी नव कवियत्री लोकनिक बीच बेशक चर्चित भेलीह अछि। हिनक वोधगम्य भाव शिल्प सँ भरल शव्द आ विषयके चुनाव अद्भुत छैन। मैथिली साहित्य आ मैथिली भाषा दूनू दू चीज छी। मैथिली साहित्य आन्दोलन सँ जुरल बहुतों जन खिन्न भ' उठैत छथि,से मैथिली भाषा ओना कहैत रहलीह; जकर पढनिहार आ बजनिहारक संख्या घटैत अछि। कहय लेल मैथिल आ धियापुता सँ मैथिलीमे गप्पे नहि करता। तँ महिला सँ बेसी पुरूष अपना बच्चाकेँ टाटा- वाए बाईं सिखेबाक जुगतमे रहैत अछि। से समाज शास्त्रीय अध्ययन के एक पक्ष हिनक रचनामे आयल अछि। पुर्ण आत्मिक साधिकाक रूपेँ श्रधा पूर्वक हिनक अर्पण जे मातृभाषा मैथिली प्रति भेलनि से एक विशेष अनुरागक अनुभुति कराबैछ। तेँ पाठकगण सस्वर कोनू कविताक परायण करब तँ नूतन जीक हृदय सँ निकलल निशन्न मायक बेथा अकानि सकब। हमर मीठ बयना ' शिर्षक ' मेँ समादृत पाँतिक गरहैन परेखल जाए -: .........अहूँ तँ बुझे छी तखन ने बजै छी ई कोकिलके आशे किए नै पुरे छी जे बितलै ओ छोड़ियौ आबहु नाता जोड़ियों हे बहुते बिछड़लहुँ आबहु अंक धरियौ ।। 'मिथिला वर्णन गीत' मेँ पांति आयल अछि -: ... शंकर के धाम कुशेश्वर भेंटला शिव गेलौं सिंहेश्वर भारती मंडन के डीह घुमै छी मिथिला 'मे रहे छी... मिठगर नैहरके भाषा सासुर'के भास सुहासा देसिल वयना'मे लोरी गबै छी मिथिला 'मे रहे छी...... सलहेह लोरिक छथि हमरे वाचस्पति उदयन एम्हरे दीना भदरी'के कथा सुनें छी मिथिला 'मे रहे छी .... फटकी सँ बाबा एलखिन जा क‌ऽ कमला'मे नेहेलखिन हुनके संग जनक 'के नगर देखै छी मिथिला'मे रहे छी!! अपन मैथिली भाषा साहित्य लेल अगाध दिग्दर्शन कराबैत ; घर-घरमे जे मैथिली कुहैर रहलीह आ ई कहियो मरि जेतीह,तकर निशांस छोड़ैत " पहिने अप्पन भास बचबियौ" शिर्षकमे पाँति देलीह अछि -: मंच चढ़िते मैथिली आस्था घरमे हिन्दी'क बात एम्हर अबियौ जखन कहलियनि हँसि हँसि भगलथि दाइ झट द' अपन पिता सँ कहलथि सुनिये मम्मी की बोली फिर ठेंठी का भुत सवार है कैसे समझूँ इसकी बोली आब अहीं सब हमरा कहियो की दोषी छथि माय बापे जखन सिखाबै छथि हे ओके टाटा बाय कतबो करबै किछु नै हेतै साहित्यक लेल काज पहिने अप्पन भास बचबियौ बजैत करू नहिं लाज! एकटा दोसर कविता ' परान हमर मैथिली ' कवियत्री गबैत छथीन आ विमर्श केर विषय दैत चेतौनी सेहो देलीह हन। यथा, मिथिला भूमिक वयना मान हमर मैथिली गुनबै तँ बुझबै परान हमर मैथिली! गणना सहस्त्रे यथार्थ कोठीमे मुनै छी संवादक गप्प जतए परभाषा चुनै छी अपने घरमे भेली आन हमर मैथिली! ......,.. मिथिला वासी सँ अपील करैत अपन एक रचनामे नुतन झा उत्परेरीत करैत छथिन -: हमर भास कुसियार जकाँ छै पोरे - पोरे र'स भरल मुँह ठोरकेँ मीठ करै छै कण्ठ सँ जखने स्वर फूटल नहिं बजबै तँ कोना कऽ सिखबै कोइ्ली सन स्वर तान है..... ऐ तरहेँ खूब नीक आ उपरा- उपरी कविता सँ मैथिली 'क अक्षय भंडार केँ आरो भरलीह अछि -: कहियो सँ नहि छलथि मैथिली पण्डित आ पुरहितके भाषा तखन कहू कोना पुरबथि पण्डित देसिल वयना'के अभिलाषा लोकसाहित्यक भास मैथिली अदौ सँ लोकाचार बचेली शिष्ट साहित्य सँ दुर छलै जे ओकरा बात विचार सिखेली ......... ई पोथी संग्रहण लायक अछि। अवश्य बेसाहि पढ़ा आ मनन करी। हम कवियत्री श्रीमती नूतन जीक शव्द शैली 'क कायल रहि मंगल कामना करैत छीयैन।

४ कविवर रामविलास साहु जीक पोथी मैथिली भाषा मेँ रथक चक्का उलैट चलए बाट (२०१३), कोसीक कछेर (२०१७), गामक सुख (२०१८), मनक मैल (२०१८) पद्य संग्रह, नेत्रदान (२०२२) खण्डकाव्य आ कथा विधामे अंकुर (२०१६), दुधबेचनी (२०१८), आ अंशुमान प्रकाशित भेल छन्हि। सद्यप्रकाशित कृति हिन्दीमे खुला आसमां धरती की गोद में (२०२३) कविता संग्रह पर चर्चा करय सँ पहिले कविहृदय राम बिलास जीक विषयमे जानि ली। लेखक श्री साहुजीक जन्म १ जनवरी १९५७ केँ स्व० नशीब लाल साहु आ कैली देवीक घर भेल रहनि। हिनक दादा स्व० चुल्हाई साहु आ दादी स्व० दुखनी देवी धर्मपरायण यशस्वी लोकमे जानल जाए छलनि। निर्मली कालेज सँ स्नातक धरि पढ़ल लिखल रामबिलास बाबूक पत्नी रहथिन स्व० मंजूला देवी। हिनक १४ वर्षधरि सेवा अपन खोलल ज्ञान भारती पब्लिक स्कूल निर्मली केँ भेटलनि,जतय सँ अनेकों मेधावी विद्यार्थियों इंजीनियर आ डाक्टर बनलैक। साहित्य लेखन २००८ई० सँ करैत आबि रहलाह अछि। ई नरेंद्र सम्मान आ लेखकीय सम्मान तथा सृजनरत्न सम्मान पाबि चुकल छथि। हिनक प्रकाश्य कृति- आगिये आगि (कविता संग्रह) एहि शाल बहराएत से आश जगैत अछि। उमेरक हिसाबे आब कम लिखय लगलाह अछि, मुदा मातृभाषा सँ राजभाषा दिश जे उनमुनेलाह ताहूक परिश्रम हम बूझि सकैत छी। पल्लवी प्रकाशन निर्मली सँ आई एस बी एन प्राप्त 'खुला आसमां धरती की गोद में ' मेँ ८७ गोट कविता छैक जे ११५ पृष्ठ क' पोथीक आकार दैत , किमत २०० टाका रखलाह आ पर्यावरणीय आवरण आकर्षक तँ देखिये रहल छी। बहुमुखी प्रतिभा क' परिचय दैत जगतमे जे समस्या देखमे अबैत,ताहिक निदान कोना हुअय से कविता माध्यमे अहाँ पाठक बीच कविजी रखलाह हन। भारत कृषि प्रधान देश मे किसान एहन मेहनतकश इंसान छै,जेकर परिश्रम केर उचित आकलन कय मेहनताना आईधरि नहि भेटलैक अछि। आ ओकर द्रद बढ़ले रहतऐक,जाधरि कृषिकेँ उद्योग केर दर्जा नहि भेटतनि। अपना रचनामे कहैत छथिन -: "खुला आसमां धरती की गोद में चैंन की नींद कभी सोया नहीं करता रहा दिन - रात खेतों में काम भर पेट अन्न कभी खाया नहीं।" एहि तरहेँ विमर्श के लेल अपन आशुता शैलीमे गुमान, चुप्पी, सच्चा पुत्र, जागो मुसाफिर, ज्ञानदीप-१, मन का मैला, अन्धी सरकार, वतन की सेवा आदि शिर्षक मेँ रोचकता आ ओज पूर्वक काव्यके गहैत एहन नाह बनेला जे भव सागर बीच डुबत नहिं। तेँ पाठकगण सस्वर पढि आनन्द ली आ समाजक बीच प्रगतिवादी पथ पर अग्रसर होय,से सुमार्ग देखबामे कविजी समर्थ भेलाह अछि। आग्रह करनाई तँ बनैत य , जे मैथिली दिस सतत् सक्रिय होय!

५ नियति आ पुरूषार्थ : एक समग्र मूल्यांकन कथा गढ़ैनक रहस्य मादे जगदीश प्रसाद मंडल जीक पोथी नियति आ पुरूषार्थ पढलौंह अछि। श्री मंडल जीक सभटा कथा निठाहे पकठोस रहैत छन्हि। ई एकटा माजल कथाकार छथि। नियति आ पुरूषार्थ नामक ऐ १०२ पृष्टक मैथिली साहित्यिक पोथीमे दसगोट बालकथा संग्रहीत कयल गेल छैक। ओना तँ हिनक अनेकों कथा संग्रह प्रकाशित भेल अछि। हिनका कथा रचना केँ समयकाल अनुसारे दू भागमे बाँटिकय अध्ययन आ मुल्यांकन शोधार्थी कर सकैत छथि। पाठककेँ सुलभ हैत जे पुरस्कृत ' पंगू' उपन्यासके पहिले समयके कथा रचना भेल एक भाग आ दोसर भाग भेल "पंगू" प्रकाशनके वादक रचना। संभवतः वादक जे कथा रचना अछि तकर संख्या ३८० गोट छैक,जे १८ जून २०१८ सँ ३१ अक्टूबर २०२३ केर मध्य विभिन्न तिथिमे रचल गेल छैन। प्रस्तुत कथा संग्रह " बाल कथा" उल्लेखित कयल गेल छैक,जय पाठ्यक्रम अनुसारे पढ़ल जाए तँ एक औपन्यासीक सुआद भेटत। ओना ओना जाएब बीछ-बिछकय आगू पाछू शिर्षक पढलआ पर। कारण आरंभ सँ अन्तधरि मुन्नीलाल आओर धुन्नीराम पात्र सब कथामे चलन्त बुझाइछ। एक उपन्यास केँ कथा दर कथा रपेँ खंडित कय एकहि तरहक नायक पात्रकेँ उपस्थिति देखाओल गेलैक हन्। एक पाठके एक पराव मानिके पढ़ला'क वाद जिज्ञासा पनपैत छै जे अगिला बातक खिस्सा दोसर परावमे पढ़ी। आ से दोसर पाठमे पढ़ैत; तेसर पाठ पढबाक उत्कंठा होईछ। मंडलजी ई एकटा अभिनव प्रयोग केलनि य। पल्लवी प्रकाशन 'क प्रमुख डॉ ० उमेश मंडल जाहि मिथिलाक्षर आ मिथिला पेंटिंग सँ चिरौरी करैत स्वजन बीच चर्चित रहथि से अपन लोभ सवरण नहि कऽ आवरण पृष्ठ मिथिला चित्रकारी सँ सुसज्जित करैत देखेलाह अछि। आ ऐ बीच बहुतों पोथीक कभर पाठकके आकर्षित केलक अछि। सुख दुःख कथा आ दुख सुख कथामे मुन्नीलाल धुनीलाल नामक ९म् कक्षाक विद्यार्थी किशोर वय वर्गके एके गामक रहैछ। हायस्कूलक शिक्षक गोपाल बाबू सँ विशेष परिचय करैत १५ दिन पर भेंट करय डेरा पर अबैत छैक। गोपाल बाबू सहृदयता सँ अतिरिक्त समय आने छात्रके लेल अपना आवास पर सदैत दैत छथिन। ई दूनू छात्र एक सालक जेठाई छोटाइ छैक। मुन्नी लाल अस्थिर सोभावे गुरूदेव कें प्रणाम निवेदित करैत अपन शंकाक समाधान लेल प्रश्न करैत पुछैथ छै- सुख की- दुःख की? आ धरफराईते धुनीलाल सेहो अपन सबालक निदान हेतु पुइछ बैसैत छै- गुरु देव , प्रकृतिक त्रिगुणात्मक शक्ति की छियै ? उत्तर दैत शिक्षक गोपाल बाबू कहलकनि -" ओहिना अछि जहिना जीवन- मृत्यु अछि। " पुरुषार्थ पाठमे गुरूजी लग मुनीलाल- धुनीलाल बैसकय गोपाल बाबू सँ विज्ञान शिक्षक बिमल बाबूक चलि रहल वार्तालाप सुनैत छै। सालक अन्तिम लगने नेंगरा - लूल्हा सब उठि जाएत,ततेक ने फटकाक फूटब सँ अनघोल आ डीजे ओ सबारी गाड़ी चलनाई सँ वातावरण अन्हारमे बदलल सन छै। द्वापर जूगक महाभारतके रणभूमि क' पात्र सँ ल' केँ रामायणकालीन आ कवीर साहेबक पांति धरिक गप्प - सप्प चलैत छैक। गोपाल बाबू'क जीवटपनकेँ पुरूषार्थ कहैत छथिन। तँ कि कोनू सत्रीमे हुनका विशेष गुण सँ निष्णात पारंगत रहने कोनो उपयुक्त शव्द नहि भेटने ,ओहूक लेल " पुरूष" चलैनमे छैक। तेँ पुरूषे सँ पुरूषार्थ बनल कोना मानल जायत ! मुनीलाल-वाजश्रवा जेकां कठोपनिषद क' आत्माक रहस्य जानबाक सदृश्य सोल्होआना मगन रहैत अगिला दिन नव व्याख्यान सुनैक अभिलाषा रखैत अछि। बाल मनोविज्ञान १४ साल सँ नीचा उमेरक धियापुता मेँ आ किशोर सँ नवजुवा दिन बढ़ैत उमैरमे बहुत फरक रखैत छैक। तेँ कहब ई जगदीश बाबूक बाल कथा नहि मानव जाएत। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.४.रबीन्द्र नारायण मिश्र- ठेहा परक मौलाएल गाछ (धारावाहिक) रबीन्द्र नारायण मिश्र ठेहा परक मौलाएल गाछ (धारावाहिक) 41 होटलमे रात्रि विश्रामक बाद हमसभ भोरे फेरसँ मुरलीकेँ संपर्क केलहुँ । एहिबेर ओकर फोन लागि गेल । ओ पुछैत अछि- "कतएसँ बाजि रहल छी?" "हमसभ बेंगलुरु आएल छी। दिल्लीमे मोन उबिआ गेल छल। भेल जे थोड़बो दिनक हेतु कतहुसँ घुमि आबी। भेल जे तोरोसँ भेंट भए जाएत। तोहर कारखाना सेहो देखि लेब । पड़ोसीसँ सेहो भेंट भए जाएत।" "नीक केलहुँ। हमर कारखानाक काज तँ शुरु भए गेल मुदा परेसानी बहुत भए रहल अछि। "से की?" "सामानसभ बाहर पठाओल जा रहल छल। शत्रुसभ बहुत रास सामानसभ रेलवेयार्डसँ चोरा लेलक । बहुत रास सामानसभ रेलवे यार्डेमे राखल-राखल सड़ि रहल अछि ।" "से केना भेल? ई तँ रेलवेक गलती अछि। ओकरा सामानक सुरक्षा करबाक चाही।" "ओकरोसभक एहिमे हाथ लागि रहल अछि। पुलिस सेहो मदति नहि कए रहल अछि । ओही चक्करमे परेसान छी। कारखानाकेँ बरबाद करएपर लागल अछि।" "आब की होएत? मकानक बन्हक कोना छुटत?"- हमसभ मुरलीक बात सुनि कए चिंतामे पड़ि गेलहुँ । हमरसभक मुख्य चिंता तँ से छल। फोनेपर मुरली हमरासभक होटलक पता लेलक आ थोड़े कालक बाद अपने ओतए आबि गेल । ताबे हमसभ होटलसँ निकलबाक हेतु तैयार रही। मुरली अबैत अछि। हमसभ ओकर आग्रहपर ओकरा संगे बिदा भए जाइत छी। हमसभ मुरली संगे ओकर डेरापर पहुँचैत छी। तीन कोठरीक  बड़ीटा डेरा छैक ओकर। सौंसे सामानसभ यत्र-तत्र पसरल छल। कतहु किछु,कतहु किछु। रमा डेरापर पहुँचितहि ओकरा सुव्यवस्थित करबामे लागि जाइत छथि। हम ताबे स्नान-ध्यान करैत छी। मुरली ककरो-ककरो फोन कए रहल छल। हमरासभक हेतु सिंघारा आ जिलेबी मंगा कए रखने छल। स्नान-ध्यानक बाद हमसभ चाह-जलखै करैत छी। मुरली सेहो चाह पीबैत अछि। कनी-मनी सिंघारा सेहो खाइत अछि। मीठ नहि खाइत अछि सुगर बढ़ि गेल छैक। रक्तचाप सेहो बढ़ल रहैत छैक। से बातसभ पहिल बेर बूझि रहल छी। तकरसभक दबाइ खाइत अछि। एतेक परेसानीक अछैतो ओ कारखानाक काजसँ बाहर चलि जाइत अछि। जाइत-जाइत कहैत अछि- "अहाँसभ आराम करू। हमरा वापस अएबामे देरी भए सकैत अछि। अहाँसभ हड़बड़ाएब नहि।" हम की उत्तर दितिऐक । सहमतिमे मुरी हिला देलिऐक । मुरली अपन झोरा लेने बाहर भए जाइत अछि। हम अखबार पढ़ि रहल छी। रमा पूजा-पाठमे लागि जाइत छथि। मुरली जाइत-जाइत लगपासक दोकानसभक जनतब आ मोबाइल फोन संख्या सेहो देने गेल जाहिसँ जरूरी सामानसभ फोनेपर  कहि कए मगा सकैत छी। ओना मुरलीक डेरामे तत्काल सभटा चीज रहैक,मुदा अव्यवस्थित। थोड़ेकाल विश्राम केलाक बाद हम पड़ोसीकेँ फोन लगबैत छी। ओकरासभटा बात कहैत छिऐक । ओ एसगरे अपन घरमे पड़ल छल। पुतहु जहलमे बंद छैक। ओकरा आजन्म कारावासक दंड भेल छैक। बेटा घर छोड़ि कतहु चलि गेलैक। कतए गेलैक-कहाँ गेलैक कोनो अता-पता नहि छैक। फोनपर एतेक बात सुनि कए हमहूँसभ परेसान भए गेलहुँ । मोन भेल जे तुरंत ओकरासभ भेंट करी । "मुदा ओकर डेरा जाएब कोना? एहिठाम तँ केओ अछि नहि?" "एहिमे चिंताक कोन बात छैक? ताला लगा दिऔक आ चलू। दिनभरि एहिठाम रहिए कए की करब? केओ अछिओ नहि जे कतहु घुमाओ देत। तखन तँ घरमे मुनल पड़ल रहबासँ नीक जे पड़ोसी हाल-चाल लेबए चली। "ठीके कहलहुँ। एतहु तँ बैसले छी।" दुनू बेकती  पड़ोसीक डेरा हेतु टैक्सी करैत छी । पड़ोसीक घर बेसी फटकी नहि छल। हमरासभकेँ टैक्सीबाला ओकर घरक सामनेमे ठाढ़ कए देलक। हमसभ ओकरा भाड़ा दैत छी आ पड़ोसीक घर दिस बढ़ैत छी। ओकर घर सोसाइटीक भीतरमे द्वारिसँ सटले बामा कातमे प्रथम तलपर छल। द्वारिपर बैसल प्रहरी हमरा अपन गंतव्यक जानकारी लैत अछि आ सामनेक फ्लैट दिस इसारा करैत अछि। हम दुनू बेकती लगेमे फलक ठेलापरसँ दू किलो सेब कीनि लैत छी। ओकरा झोरामे रखैत छी आ पड़ोसीक फ्लैट दिस बढ़ैत छी। कनीके आगू गेलहुँ तँ ओकरा सामने सीढ़ीपरसँ हुलकैत देखैत छी। "आबह, आबह।"-ओतहिसँ पड़ोसी चिकरल। ओकर बगए देखि हम दुखी भए जाइत छी। देह कांट-कांट भए गेल छैक । माथपरहक केस उड़िआ रहल छैक। ओकरा देखलासँ लगैत अछि जेना कतेक दिनसँ दुखित होअए। हम सीढ़ीपर कनीके आगू बढ़ल रही कि पड़ोसी सामने प्रकट भए गेल। हमरा देखितहि ओ जोर-जोरसँ कानए लागल। ओकर परिस्थिति देखि रमा सेहो बहुत दुखी भए गेल रहथि । हमसभ सोचिए नहि पाबी जे आखिर ओकरा की कहिऐक? एहि बएसमे अपने लोक द्वारा एहन कष्ट देल जेतैक से के सोचि सकैत छल? दिल्लीसँ आएल छल जे अपन घर जा रहल छी। मुदा एतए अएलाक बाद तँ जेना ओकरसभ किछु बरबाद भए गेलैक। पत्नीक हत्या भए गेलैक। पुतहु आजन्म कारावास काटि रहल छैक। बेटा बौरा कए कतहु चलि गेलैक। ओकर कोनो अता-पता नहि छैक । ओ असगर जीबिए रहल अछि सएह बहुत। 42 कहबी छैक जे गुड़क मारि धोकरे जनैत अछि।  पड़ोसीक मनोदशा आन के बूझि सकैत छल? किछु कहि देब,बुझा -सुझा देब बहुत आसान होइत छैक। जखन अपनापर पड़ैत छैक तखन सभटा बुधिआरी धएले रहि जाइत छैक। पड़ोसी कतेक बुधिआर,सहनशील आ मिलनसार छल? हमरा लोकनिक हेतु तँ ओ ईश्वरक वरदाने छल। जखन कखनहु कोनो समस्या भेल ओ हमरा लग ठाढ़े रहैत छल।  देहसँ,टाकासँ ,विचारसँ ओ हमरासभक मदति करिते रहैत छल। एहन नीक लोक एतेक कष्टमे पड़ि गेल। एहिसँ आश्चर्य आ दुखक बात आर की भए सकैत छल? कहल जाइत अछि जे नीक केलापर नीक फल होइत छैक,मुदा एहिठाम तँ उनटे देखा रहल अछि। हमसभ अपना भरि पड़ोसीक दुख बाँटबाक प्रयास करैत छी। ओकरा लग घंटो बैसल रहि जाइत छी। ओकर मोन दोसर दिस घुमैक ताहि हेतु तरह-तरहक बात करबाक प्रयास करैत छी। मुदा ओ रहि-रहि कए ओतहि पहुँचि जाइत अछि । हम आखिर पुछिए देलिऐक- "आर तँ जे भेल से भेल मुदा तोहर बेटा किएक तोरा छोड़ि कए चलि जाइत रहल?" "की कहिअह? असलमे ओकरा मोनमे गड़ि गेल छैक जे ओकर पत्नीक जहल पहुँचाबएमे हमरे हाथ अछि। हमही ओकर खिलाफ गबाही देलिऐक। आब तूँही कहह जे हम सही बात कोना नहि कहितिऐक। फेर पुलिसकेँ तँ सीसीटीभीमे साक्षात साक्ष्य भेटि गेल रहैक।  ओकर ईहो कहब छैक जे हमसभ यदि एतए नहि अबितहुँ तँ ई फसादसभ नहि होइत। मुदा हमसभ अपन घर कोना नहि अबितहुँ? एतए नहि अबितहुँ तँ कतए जइतहुँ? ककरा लग जइतहुँ? अपन बनाओल घर अछि,अपन बेटा-पुतहु अछि ,ताहि ठाम कोना नहि अबितहुँ? मुदा ओ एही बातकेँ पकड़ि कए बैसि गेल। दुर्घटना कोनो नियारल होइत छैक? अकस्मात बहुत रास बातसभ होइत गेलैक जाहिपर ककरो वश नहि रहैक। अंतमे कहहि पड़त जे भावी प्रबल होइत अछि। हमरा पड़ोसी बात सुनि-सुनि बहुत कष्ट होइत छल। पता नहि ओ कतए खाइत अछि,कोना समय बितबैत अछि,एसगर एहि घरमे कना जीबि रहल अछि?हम ओकरा पुछबो केलिऐक- "आखिर तूँ एतए खाइत-पीबैत कोना छह?" "गुरुद्वारा चलि जाइत छी। ओतहि लंगरमे सामिल भए जाइत छी । ओएहसभ हमर जीवनक आधार अछि। यदि से नहि रहैत तँ कहि नहि कहिआ मरि गेल रहितहुँ।" "हमरा तँ मोन होइत अछि जे तूँ हमरेसभक संगे दिल्लीएमे रहह।" "से कोना संभव भए सकैत अछि? जिनगीक कोन ठेकान अछि? कतेक दिन जिअब,की की देखब,की-की भोगब?" "हमरो हालति कोनो ठीक नहि अछि। मकान बन्हक पड़ि गेल अछि। मुरली बहुत रास टाका से लए लेलनि, कारखाना खोललनि। आब ओहिमे घाटा लागि रहल छनि। कारबार बंद पड़ल छनि। हुनकर पहिले बेर बनल सामानसभकेँ प्रतिद्वंदीसभ बरबाद करबा देलकनि।" "ई तँ बहुत अनर्थ भेल। कम सँ कम मकान बचा कए राखबाक छलह।" "बहुत प्रयास केलिऐक। मुदा होइत अछि ओएह जे लिखल रहैत अछि।" "ओना हमर फ्लैट खालीए अछि। तूँसभ जखन चाहह एतए रहि सकैत छह।" "अखन ओ स्थिति नहि आएल अछि। अपना भरि प्रयासमे छी जे मकान बाँचि जाए। आगू भगवान मालिक।" हम,रमा आ पड़ोसी एहि तरहेँ एक-दोसरक कष्ट बाँटि रहल छलहुँ,एक-दोसरकेँ बौसि रहल छलहुँ कि अचानक घरक घंटी बाजल। जाबे पड़ोसी उठितए,केबार खोलितए ताहिसँ पहिनहि ओ व्यक्ति केबार लग पहुँचि गेल आ केबारपर जोरसँ लात मारलक । केबारक छिटकनी नीकसँ नहि लागल रहैक । ओ सड़कि कए नीचाँ खसि पड़लैक,केबार खुजि गेलैक। हमरासभक सामनेमे एकटा अधबएसू ,कारी,भुट्ट जबान ठाढ़ छल। ओकर माथक केस उड़िआ रहल छल । दाढ़ी बढ़ल छल । बामा हाथमे एकटा झोरा छल। ओहिमे किछु राखल छल,जेना किछु कागज-पत्तर होइक। हमरासभ के छी,नहि छी ताहि बातक बिना कोनो परिबाह केने ओ पड़ोसीपर चिकरल- "जल्दीसँ निकलि जाह एहिठामसँ । यदि जानक काज छह तँ भागह,नहि तँ आब बचबह नहि। ई सभ केओ काज नहि अएतह? जहिना हमरा बरबाद केलह अछि ,तहिना तोरो अखने स्वाहा कए देबह।"-से कहि ओ झोरामे हाथ देलक। पड़ोसी डरे थर- थर काँपि रहल छल। हम दुनू बेकती तँ अबाक छलहुँ। "ई के अछि? एना पड़ोसीपर किएक चिकरि रहल अछि?" "तूँसभ सेहो निकलह । जल्दी निकलह । हमरा एकरासँ ओलि चुकाबए दएह। देरी करबह तँ तोरोसभक अनेरे दुर्दशा होएत?" "मुदा तूँ छह के? एना किएक बाजि रहल छह?"-रमा साहस कए ओकरा पुछलखिन। "हम छी एकर अभागल बेटा। आरो किछु पुछबाक छह तँ पुछि लएह । मुदा एहिठामसँ जल्दी ससरि जाह। आइ हमरा एकरा संगे नओ-छओ करबाक अछि। आब बहुत भए गेल।" पड़ोसी तँ जेना मुरुत भए गेल छल। की बाजैत? की करैत? जखन बेटे एहन निकलि गेलैक तखन ओ कइए की सकैत छल? एकटा लोटा लेलक,झोरामे दू खंड धोती आ गमछा रखलक आ बिदा भए गेल। हमहूँसभ ओकरा पाछू-पाछू ओहि फ्लैटसँ बाहर भए गेलहुँ । ओ हमरासभकेँ निकलैत देखि जोरसँ ठहाका पाड़लक। बाजि उठल-" अपन-अपन जान लए कए भागैत जो । भाग, भाग ।" हमसभ बिना किछु उत्तर देने ओहि फ्लैटसँ बाहर भए गेलहुँ, आगू बढ़ि गेलहुँ । 43 पड़ोसीक मनोदशाक वर्णन करब संभव नहि अछि। जीवन भरि जाहि संतानक हेतु संघर्ष केलक, सएह आइ काल बनि कए ठाढ़ भेल छैक। कारण जे होइक। सही गलतीक बात भए सकैत छैक। मुदा बात एहि हद धरि चलि जाए जतए बाप-बेटा एक-दोसरक शत्रु बनि जाए, निश्चय एकटा दुखद प्रसंग तँ अछिए । हम इएह सभ सोचैत रमा आ  पड़ोसीक संगे बाहर भेलहुँ । संयोगसँ तुरंते एकटा टैक्सी भेटि गेल । ओकरा मुरलीक डेरा धरि पहुँचा देबाक आग्रह केलिऐक । ओ तैयार भए गेल । हमसभ टेक्सीमे बैसि जाइत छी। टैक्सी अपन गंतव्य दिस बिदा भए जाइत अछि। हम पड़ोसीकेँ टोकैत छी। किछु कहबाक प्रयास करैत छी। मुदा ओ तँ जेना जीबैत लास बनि गेल छल। ओकर आँखिमे शून्यता भरल छलैक। ओ एकटक बाहर दिस देखिते जा रहल छल । किछु नहि बजैत छल,किछु नहि सुनैत छल। थोड़े कालक बाद टैक्सी गुरुद्वारा लग पहुँचल। ओ अचानक सक्रिय भए गेल। वाहन चालककेँ टैक्सी रोकबाक आग्रह केलक। जाबे हमसभ किछु कहितिऐक,ओ टैक्सीसँ उतरि गेल। हमहूँसभ ओकरा लागल उतरि गेलहुँ । हम पुछलिऐक- "एहिठाम किएक उतरि गेलह। अखन हमरासभक संगे चलह। तोरा विश्रामक जरुरी छह। थोड़बोकाल सुस्तेलाक बाद जेना जे विचार हेतह से करिअह।" "हम आब कतहु नहि जाएब। हम एही गुरुद्वारामे रहब। हमसभ ओकर जिदक आगू हारि गेलहुँ । पड़ोसीक संगे गुरुद्वारा गेलहुँ । ओहिठाम सभगोटे माथा टेकलहुँ। तकर बाद हमसभ प्रसाद लेलहुँ । थोड़े काल शबद कीर्तन सुनलहुँ । कीर्तन सुनि हमरसभक मोन कनी शांत भेल। पड़ोसीकेँ सेहो स्थिर देखलिऐक। पड़ोसी ओतहि बैसि गेल आ हमरासभकेँ इसारासँ कहि देलक जे आब ओ कतहु नहि जाएत। एतहि रहत। हमहूँसभ की करितहुँ? आखिर ओकरा ठामहि छोड़ि टैक्सीसँ मुरलीक डेरा बिदा भए गेलहुँ। हम आ रमा मुरलीक डेरा पहुँचि रहल छी। सीढ़ीएपर मुरली भेटि गेल। "हम तँ कखनसँ अहाँक फोन लगा रहल छी। मुदा ओहिमे निरंतर "फोन बंद अछि" क समाद आबि रहल अछि। हम फोन निकालैत छी। वस्तुतः फोन बंद अछि। ओकर बैट्री खतम भए गेल छैक। घर पहुँचितहि सभसँ पहिने ओकरा चार्जींगमे लगा दैत छी। मुरली हमरासभक भोजनक हेतु किछु अनने अछि। ओ झोरासँ दूटा पैकेट निकालि कए टेबुलपर रखैत अछि। "ई की अछि?" "खा कए देखिऔक ने? बहुत नीक लागत। एहिठामक ई प्रसिद्ध भोजन अछि।" हम तँ बहुत भूखाएल रही। तुरंत खेनाइ शुरु कए दैत छी। मुदा रमा ओकरा छुबितो नहि छथि। "कहि नहि की केना बनल होएत? हमरा ई  सभ नहि अरघत।" "मुदा भूखले कोना रहब?" "से किएक? किछु बना लेब ।" "जे विचार।" हम भरिपेट भोजन कए लेलहुँ । रमा भूखले रहि गेलथि,किछु नहि खेलथि । "मुरली तँ भोजन कइए कए आएल अछि। तखन हम असगर लेल की बनाउ?" "ने अहाँ पाकिटबाला भोजन करब, ने अपने बनाएब तखन जान कोना बाँचत?" रमा हारि कए ओहो ओहि डिब्बाकेँ खोलैत छथि। बहुत अछता-पछता कए ओहिमेसँ एक टुकड़ी मुँहमे रखैत छथि। "ई तँ बहुत स्वादिष्ट अछि। मुँहमे दैते देरी गलि गेल।" "तेँ ने कहलहुँ । ओहिना धारणा नहि बना लेबाक चाही।" हमसभ थाकल तँ रहबे करी । ओछाओनपर जाइते सुता गेल। हमसभ भोरे उठलहुँ तँ मुरली निकलि गेल छल। तकर बाद कैकदिन धरि ओ नहि आएल। ओकरो कारखानामे उरी-बिरी लागल छैक। पहिले खेपक सामानसभकेँ तेना ने फँसा देलकैक जे ओकर हाल-बेहाल छैक। अखन धरि किछु फएदा नहि भेलैक। खर्चे होइत रहलैक। संभवतः ओ लाजे छीह काटि रहल अछि। हमसभ मास दिनसँ फ्लैटपर पड़ल छी। मोसकिलसँ दू वा तीन बेर ओकरासँ भेंट भेल। ओ यदि कहिओ काल एतए अएबो कएल तँ बहुत देरीसँ । ओहन हालतिमे की गप्प होइत? हमसभ ओहि फ्लैटमे मुनल-मुनल तंग भए गेलहुँ । कहिओ काल शालिनीसँ गप्प भए जाइत छल। मुदा ओकरो स्वास्थ्य एमहर खराप भए गेल छैक । सहर-सहर कोरोना फैल गेल छैक। ओकर पूरा परिवार सेहो कोरोनाक चपेटमे आबि गेल छैक। ततबा समाचार शालिनी पछिला बेर फोनपर गप्पमे कहने रहए। बेंगलुरुमे सेहो कोनो नीक हाल नहि छैक। एहनमे हमसभ दिल्ली वापसो नहि भए सकैत छी। माहौल देखिते-देखिते एतेक खराप भए जाएत तकर केओ अनुमान नहि लगा सकैत छल। मुदा आब तँ जेना सौंसे दुनिआपर विनाशक पहड़ा भेल छैक । आब की करी? किछु फुरा नहि रहल अछि। एहनो हालतिमे मुरली कारखानाकेँ बचेबाक प्रयासमे लागल रहल। मुदा से संभव नहि भए पाबि रहल छैक। चारूकात लाकडाउन भए गेल छैक। जनसभ काज छोड़ि-छोड़ि अपन-अपन गाम वापस चलि गेलैक। एहि तरहेँ जे कनी-मनी बाँचल छलैक से कसरि कोरोना पूरा कए देलकैक। ओकर कारखाना निठ्ठाह बैसि गेलैक। बैंकक कर्जक भुगतान नहि भए सकलैक। हेबो कोना करितैक? बैक कर्जक वापसीक हेतु किछुदिन धरि मोहलति देलकैक। मुदा सूदोक भुगतान नहि भए पबैक। आखिर ओ सभ न्यायालयमे नालिस कए देलक। हमरसभक दिल्लीक फ्लैटकेँ सील कए देलक । आब यदि दिल्ली जेबो करब तखन रहब कतए? ई भारी समस्या आबि गेल अछि। हम बूझिऐक जे भविष्यपर खतरा भए सकैत अछि। अपन घर बचा कए राखबाक अछि। मुदा भाबी प्रबल होइत अछि। हमर सोचलाहासभ किछु नहि भेल । सभटा उनटा-पुनटा होइत चलि गेल। मुरलीओ की करितए? लाजे मुँह नुकओने रहए। डेरापर अएबो नहि करए। एहन हालतिमे हमसभ आब एहि ठामसँ कहिआ निकलब आ कतए जाएब से किछु नहि बूझा रहल अछि। जे भावी। 44 देखिते-देखिते चारूकातक माहौल कोरोनाक आक्रमणसँ भयाओन भए गेल छल। समय-साल एहन भए जाएत से के सोचि सकैत छल? हमसभ ओसोरापर बैसल इएहसभ आपसमे गप्प करैत रही । अचानक फोनक घंटी बाजल। "हम मुम्बईक सरकारी अस्पतालसँ बाजि रहल छी।" "हँ, हँ, बाजू।" "शालिनीक पितासँ गप्प करबाक छल।" "की बात?" "शालिनि, हुनकर पति आ बेटी सभ एही अस्पतालमे भर्ती छथि। हुनकासभकेँ कोरोना भए गेल छनि। शालिनी हमरा अहाँक फोन संख्या देने रहथि आ कहने रहथि जे जरूरी भेलापर अहाँसँ गप्प कएल जाए।" "ओकरसभक की समाचार छैक?" "समाचार कोनो नीक तँ नहिए कहल जा सकैत अछि?" "से की?" "शालिनी आ हुनकर पति भेंटिलेटरपर छथि। संक्रमण बहुत बढ़ि गेल छनि।" "ओह! नम्रताक की हाल छैक?" "ओ आब ठीक अछि। ओकरा साँझ धरि नहि तँ काल्हि अस्पतालसँ छुट्टी भेटि सकैत अछि? मुदा समस्या अछि जे ओ जाएत कतए?ओकर परिचर्या के करत? अस्पतालसँ छुटलाक बादो ओकरा मास दिन देखभालक प्रयोजन रहतैक।" फोन कटि जाइत अछि? हमसभकिछु नहि सोचि पाबि रहल छी। रमा ई समाचारसभ बूझि ठामहि टगि जाइत छथि। दाँतपर-दाँत बैसि गेल छनि। जल्दीसँ पानिक झोंका दैत छिअनि । थोड़े कालक बाद ओ आस्तेसँ आँखि खोलैत छथि। पुछैत छथि- "शालिनी कोना अछि? कोना छैक ओकर पति?नम्रताक की हाल अछि?" एतेक बाजि कए ओ फेर बेहोस भए जाइत छथि। हम सोचिए नहि पाबि रहल छी जे की करू?रमाक हालति देखि तँ आर परेसान छी। पहिने ई ठीक होथि तकर बादे किछु आर सोचल जाएत। स्थानीय डाक्टरसँ फोनपर विमर्श करैत छी। ओ किछु दबाइ लिखा दैत अछि। दबाइक दोकानकेँ फोन कए ओ दबाइसभ मंगबैत छी। रमाकेँ दबाइसभ खुआबैत छी। दबाइ खेलाक बाद ओ सुति जाइत छथि। तीन घंटाक बाद हुनकर निन टूटैत छनि। ओ तुरंत शालिनी आ ओकर हाल-चाल पुछैत छथि। एही बीचमे मुम्बईसँ फेर फोन आएल। शालिनीक पतिक देहावसान भए गेलनि। शालिनीक हालति सेहो नीक नहि छनि। लंग्स मात्र पैंतीस प्रतिशत बाँचल छनि। महग-महग सुइआ पड़ि रहल छनि। देखा चाही की होइत छनि? नम्रताकेँ काल्हि अस्पतालसँ छुट्टी भेटि जेतैक। मुदा ओ जाएत कतए? ई सभसँ पैघ समस्या अछि। हम ई बातसभ रमाकेँ नहि कहलिअनि। सोचलहुँ जे बेसी बातसभ बुझतीह तँ फेर ओएह स्थिति भए जेतनि। पहिने ई थेहगर भए जाथु। फेर किछु करब। मुदा मुम्बईमे परिस्थिति तेहन भए गेल छल जे बेसी विलंब नहि कएल जा सकैत छल। अस्तु,हम रमाकेँ बिना कहने मुम्बई जेबाक निर्णय करैत छी। मुदा जाएब कोना? ट्रेन,जहाजसभ बंद अछि। संयोगसँ एकटा टैक्सी भेटि जाइत अछि। काल्हि भोरे हम आ रमा ओहीसँ मुम्बई बिदा होएब । आगू जे गति लिखल होएत से होएत। रमा ओहि दिन विश्रामक बाद रातिभरि सुतले रहि गेलथि। संभवतः दबाइसभक असरि रहल होएत। भोरे अन्हरोखे जखन उठलथि तँ हमसभ बात हुनका कहलिअनि। ओहो जल्दीसँ तैयार होइत छथि। हमदुनू बेकती टैक्सीसँ मुम्बई बिदा होइत छी। बीच-बीचमे मुम्बई अस्पतालमे फोन लगाबक प्रयास करैत छी। मुदा फोन नहि लगैत अछि। मुम्बई पहुँचएमे दू दिन लागि जाइत अछि। ताबे पता नहि की हाल रहत? इएह चिंता अछि। दोसर दिन साँझमे हमसभ मुम्बई पहुँचि जाइत छी। टैक्सी हमरासभकेँ सोझे अस्पताल लेने चलि जाइत अछि । अस्पताल पहुँचितहि हमसभ शालिनीक अता-पता करैत छी। "ओ बाँचल अछि। ओकर हालतिमे लगातार सुधार भए रहल छैक।"- डाक्टर कहलक। "आ नम्रता?" "ओ आब ठीक अछि। ओकरा अखन अस्पतालेक अतिथिगृहमे राखल गेल अछि । आब अहाँसभ ओकरा जखन चाही अपना संगे लए जा सकैत छी।" "शालिनीक पतिक लासक की भेलनि?" "जखन लास लेबए केओ आगू नहि भेल सरकार ओकर अंतिम संस्कार करबा देलक।" हमसभ सुनिते जा रहल छलहुँ। किछु  बजबाक स्थितिमे नहि रही। बजबो की करतहुँ? नम्रतासँ भेंट करबाक उत्सुकता छल। शालिनीसँ तँ भेंट नहिए भए सकैत छल। रच्छ छल जे ओकर हालतिमे सुधार भए रहल छलैक। हमसभ अस्पतालक अतिथिगृह पहुँचैत छी। ओहिठाम नम्रताक कोठरी लग पहुँचैत छी। बाहरेसँ हमसभ ओकरा देखैत छी। ओहो हमरासभकेँ देखैत अछि। "अखन किछुदिन नम्रतासँ एहिना भेंट होएत। एक सप्ताहक बादे अहाँ हुनका लए जा सकैत छी।" "ताबे हमसभ कतए रहब?" "एतहु रहि सकैत छी। अतिथिगृहमे, अथवा घर जा सकी तँ अहाँक मरजी।" हम आ रमा बहुत थाकि गेल रही। नम्रताकेँ देखि मोनमे संतोष भेल। कम सँ कम ई तँ बाँचि गेल। हमसभ ओतहि अतिथिगृहमे फराक कोठरीमे रहि जाइत छी जाहिसँ नम्रतासँ संपर्क बनल रहत। शालिनीक हाल-चाल सेहो भेटैत रहत। 45 सात दिनक बाद शालिनीकेँ सेहो अस्पतालसँ छोड़ि देल गेलैक। शालिनी,नम्रता आ हम दुनू बेकती शालिनीक घरपर पहुँचैत छी। अखन धरि शालिनीकेँ नहि बूझल रहैक जे ओकर पति आब नहि रहलाह। दुनूगोटे संगे-संग दुखित भेल रहए। संगे अस्पताल गेल रहए। अस्पतालोमे लगे-पासमे रहए। मुदा वापसीमे ओ नहि छथिन। हमरासभकेँ एहि प्रश्नक उत्तर देबाक हेतु नियति अनने छल। एहन विकट स्थितिक सामना करए पड़त से नहि सोचने रही। शालिनी बेर-बेर हुनका बारेमे पुछि रहल अछि। हमरासभक मौनसँ ओ बूझि गेल जे मामिला गड़बड़ अछि। ओ चिचिआ उठैत अछि। "बाजैत किएक नहि छैं? ओ कतए छथिन? हुनकर की हाल छनि?" हमसभ की कहितिऐक? आखिर ओ जे बूझबाक छल से बूझि गेलि। तकरबाद जे दृश्य भेल से लिखब मोसकिल थिक । ओकरा रहि-रहि कए दाँती लागि रहल छल,जहाँ होस होइक कि ओ इएह प्रश्नसभ पुछए लगैत छल। आखिर हम ओकरा अस्पतालक कागज हाथमे पकड़ा देलिऐक। ओ ओकरा पढ़ैत अछि आ भोकारि पारि कए कानए लगैत अछि। नम्रता सेहो ओकरा संगे कानि रहल अछि। रमा आ हम तँ परेसान रहबे करी। लगपासक लोकसभ कोरोनाक डरसँ केओ लगमे नहि आएल। आखिर कनैत-कनैत ओ सभ थाकि गेलि। कखनहु ई हेबेक रहैक। हमसभ एहि स्थितिकेँ देखबाक हेतु विवश रही। शालिनी आ नम्रताकेँ आश्वस्त हेबामे समय लगलैक। आठ-दस दिनक बाद ओकर मोन कनी  स्थिर भेलैक। ओ नम्रताकेँ देखि कए संतोष केने रहए । अस्पतालसँ अबैत काल डाक्टर कहने रहैक जे मास दिनका बाद सभकिछु जाँच करबा लेब । अस्पतालसँ छुटलाक बाद नम्रताकेँ दस्तकब्ज भए गेल छैक। से ठीके नहि भए रहल छैक। शालिनीकेँ दम फुलैत रहैत छैक। दुनूगोटेकेँ हमसभ अस्पतालमे जाँचक हेतु लए जाइत छी। नम्रताकेँ किछु दबाइ देल जाइत छैक। एक सप्ताह धरि ओ दबाइ खाएत । तकरबाद जरूरी भेलापर फेरसँ डाक्टरसँ देखा लेत। शालिनीक सेहो पूरा जाँच होइत छैक। ओकरा हृदय संबंधी समस्या बुझा रहल छैक जे पहिने कहिओ नहि रहैक। ई एकटा नव समस्या ठाढ़ भए गेलैक। ओकर पति तँ चलिए गेलखिन,संगे अपने सेहो स्वस्थ नहि रहि सकलि। अपितु,हृदयसंबंधी बिमारी भए गेलैक। शालिनीक पतिक देहान्तक बाद हँसैत नहि देखलिऐक। ओ सदिखन अपन पतिक शोकमे नोर बहबैत रहैत अछि। एहनमे दबाइ की असरि करतैक ?  जखन मोने अस्वस्थ अछि तखन देहमे की फएदा हेतैक?शालिनी आ नम्रताक उचित उपचार चलैत रहल। नम्रता तँ शीघ्रे ठीक होइत गेल। मुदा शालिनीकेँ किछु-ने-किछु समस्या लागले रहैत छल। उकासी तँ दिन-राति होइते रहैत छलैक। एहन माहौलमे हमरासभकेँ के पुछैत अछि? जखन हमर धिआ-पुताक जीवन संकटमे पड़ल अछि तखन अपना बारेमे की सोचू?हमरासभक हालति सेहो कोनो ठीक नहि छल। बहुत दिनसँ डाक्टरसँ देखओने नहि रही। पुरने दबाइसभ चलि रहल अछि।  एमहर रमाकेँ ठेहुनमे दर्द बढ़ि गेल छनि। चलबामे मोसकिल होइत छनि। हमरा सदिखन धोआनि-ढेकार दैत रहैत अछि। मुदा कएल की जाए? जेना-तेना समय काटि रहल छी। कहुना ई सभ ठीक होअए तखन अपनासभपर ध्यान दी। बहुत रास समस्याक समाधान समय स्वयं करैत अछि।  समय द्वारा देल गेल घाव समये भरैत अछि।   एही आशामे हमसभ जीबि रहल छी। आशा करैत छी जे किछुदिनमे शालिनी सेहो सम्यक भए जाएत आ अपन जीवन संघर्षकेँ आगू चला सकत। मुम्बईमे हमरसभक एकमास केना बितल से हमहीसभ जनैत छी। आब मोन उबि रहल अछि। नम्रता ठीक भए गेल अछि । शालिनीक स्वास्थ्य ऊपर-नीचाँ होइत रहैत छैक । तथापि,ओ घरेसँ काज शुरु कए देलक अछि।  आब जखन एमहरसँ मोन कनी हल्लुक भेल तँ आर चिंतासभ असबार भेल जा रहल अछि। मुरलीक की हाल छैक? श्यामक जहल कहिआ खतम हेतैक? पड़ोसीक चिंता सेहो होइते रहैत अछि। ओएह तँ एकटा एहन आदमी छल जकरासँ मोनक गप्प करी। आब ओ अपने अस्तव्यस्त भए गेल अछि। आर तँ जे भेल से भेल,हमरसभक घरो बन्हक पड़ि गेल अछि आ आब ओकरा वापस हेबाक कोनो संभावना नहि लागि रहल अछि। मुरलीक कारखाना लगातार घाटामे चलि गेलनि। कर्मचारीसभ कोरोनाक समयेमे छोड़ि गेल। बैंकक कर्ज बढ़िते जा रहल छैक। हमरसभक मकानक तँ भगवाने मालिक छथि। एकदिन हम बैंक प्रबन्धककेँ फोनो केलिऐक । "हमरसभक मकान कोना छुटि सकैत अछि?" "बैंकक कर्जा सधत तखनहि ई संभव अछि।" "कतेक कर्जा छैक?" "दू करोड़ तँ मूर अछि। ऊपरसँ सूदिओ देबाक हेतैक।" हम प्रबन्धकक बात सुनि कए अबाक रहि गेलहुँ । रमाकेँ ई बातसभ नहि कहलिअनि। ओ तँ ओहिना परेसान रहैत छथि । स्वास्थ्य से संग नहि दए रहल छनि। दूपहरिआमे असगर बैसल रही कि पड़ोसीक फोन आएल । "कोना छह?" "की कहिअह? गुरुद्वारामे किछुदिन रहलहुँ। मुदा ओतए असालतन तँ नहि रहि सकैत छलहुँ । ओएहसभ सरकारी वृद्धाश्रमक पता देलक। ओहीठाम छी। मुदा एहिठाम तँ नर्कोसँ बेसी खराप हालति छैक।" "से किएक?" "की-की कहिअह? कतहु जइअह,सरकारी वृद्धाश्रममे नहि जइअह।" "से किएक?" "की कहियह? लगैत अछि कहिओ खून भए जाएब।" "राम, राम।" "अपन हाल कहह?" ओ एतबे पुछलक कि हम फोनेपर कानए लगलहुँ । हमरा फोनपर कनैत देखि रमा दौड़लीह। "की भेल? एना किएक कानि रहल छी? " पड़ोसी से हमर कानब सुनि कए परेसान भए गेल । हम आगू किछु नहि बाजि सकलहुँ । फोन राखि देलिऐक। रमा हमरा लग बैसल छलीह । किछु कहने बिना जेना बहुत किछु कहि रहल छलीह । अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.५.कुमार मनोज कश्यप-समालोचक कुमार मनोज कश्यप समालोचक - "ई कोन समीक्षक छथि जे आहाँक नवका कविता संग्रह के समीक्षा लिखि आहीं ओतs फेकि गेलाह?" - "आहाँ के कहाँ सs भेटल ई?!!!" - "झाड़ू लगबैत काल सोफा तsर सs!" - "लाऊ ...... लाऊ! एहि लै हम कखन सs औनाईत रही!" - "के लिखला है?  जे होथि मुदा लिखलनि बड्ड नीक! आहाँक लेखनी आ पोथी मे छपल एक-एक कविता के महान सिद्ध करबा मे अपन पूरा शक्ति लगा देलनि। मुदा; हम ई नहिं बुझलियै ......  ई कोनो पत्र-पत्रिका मे छपबा सs पहिने आहाँ लsग कोना पहुँचल?" - "छोड़ू ने ...... एखन फुर्ती सs जलखै दिय ...... ऑफिसक देरी भs रहल अछि।" -सम्प्रति: भारत सरकार के उप-सचिव, संपर्क: सी-11, टावर-4, टाइप-5, किदवई नगर पूर्व (दिल्ली हाट के सामने), नई दिल्ली-110023, # 9810811850 ईमेल: writetokmanoj@gmail.com अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.६.संतोष कुमार राय 'बटोही'- संतोष कुमार राय 'बटोही' केर डायरी 'लव यू टू' संतोष कुमार राय 'बटोही' संतोष कुमार राय 'बटोही' केर डायरी 'लव यू टू'

29-04-2016

दिल्ली टू मंगरौना

ब्याह केर दिन फिक्स भऽ चुकल छै। गाम पर तैयारी भऽ रहल छै। ज्ञानदीप पब्लिक इस्कूल सँ अनुमति लऽकऽ गाम ऐबाक टिकट कटेलहुँ हम। इस्कूल केँ मालिक दस हजार टाका गिफ्ट लेल देलाथि। मोन हरखित भेल जे गाम जायब ब्याह लेल। उनतीस तारीख सँ पहिने गाम आबि सकैत छलहुँ, परञ्च मुखिया चुनाव पंचायत मे छलैक। ओही मे किनको पक्ष मे वोटिंग केनै ठीक नहि बुझना गेल। ताहि दुआरे विचारलहुँ वोटिंग बादे गाम जाय।

तेरहम बरख मे गामक ई हमर चारिम यात्रा छल। माय हमरा संगे छेलीह। ब्याहक कपड़ाक खरीददारी चाँदनी चौक सँ केने छलहुँ। कॉस्मेटिक सामान केँ खरीदारी गोविन्दपूरी मार्केट सँ केने छलहुँ। कॉस्मेटिक सामानक लिस्ट रेणू मैम तैयार केने रहतीह। ब्याहक लेल कोट-पेंट आओर जूता सेहो गोविन्दपुरी मार्केट सँ खरीदलहुँ अछि। कॉस्मेटिक सामान सभटा ब्रांडेड कम्पनी केर छल।

02-05-2016

कोहवर घर

फुसक घर गिर गेल रहै। लोक कहैत छै ने -'घर पर खर नहि, कान पर बीड़ी ' इएहे हमर दशा छल। ब्याह सँ पहिने घर बनाबऽ पडल । मँझला भैय्या केँ कहलियै ,तँ ओ फुसक घर नहि बनौलाथि। ईँट, सिमेंट, बालू वगैरह-वगैरह लेल टाका लऽकऽ बड़ि मेहनत सँ घर बनौलाथि। दु मई केँ घर पर एलबेस्टर चढौल गेल। नहि घर मे खिडकी, नहि किबाड ! घर मे माटि सेहो नहि भरल गेलै। पुरनका घरक किबाड मँझला भैय्या सेट कऽ देलथिन्ह। दीवार मे भूर सेहो छेबे करै। ओही मे एकटा भनसा घर सेहो निकैल देल गेल छै साइड मे।वरण्डाह नहि छै अई घर मे। आब अहाँ बुझि सकैत छी केएन ई कोहबर घर अछि। सूअरक खोवहारी से कहल जा सकैए ।

गोसाँई कालीवंदी गोरैया हमरे घर मे छथि। ताईं अऐ घरक विशेष प्रयोजन छै। दोसरक घर सँ तार खींचि कऽ सीलिंग फैन लगौल गेल। ओ सीलिंग फैन मरियल जकाँ कुहैर कऽ चलि रहल अछि। हवा तँ नहिएटा लगैत छै देह मे। काँचे बाँसक झाझन देल गेल छै एस्बेस्टस के नीचा मे। ब्याहक बाद अपने सँ किछु दीवार केँ जोड़ि देलियै। भनसा घर मे फटकी नहि छै।

17-09-2016

मायक अंतिम साँस

ज्ञानदीप पब्लिक इस्कूल सँ रिजाइन मारि कऽ 21 सितंबर केँ गाम जेबाक लेल टिकट कटेलहुँ । सात सितंबर केँ रिजाइन देने छलहुँ । इस्कूल केँ डायरेक्टर कहलाथि जे इस्कूल कोना खोलल जायत छै आओर कोना चलौल जायत छै यानी मैनेजमेंट केर जानकारी लऽ लिय । हमहुँ बुझलियै ठीके कहैत छथि। हमहुँ हुनकर सभटा बही-खाता केँ उल्टा देलियैन्ह। इस्कूल खोलवाक गुण लेलौंह।

परञ्च 17 सितंबर हमर जिनगी केर सभ सँ खराब दिन छल। माय केँ बीपी बढ़ि गेलैन्ह। माय केँ बीपी वाला गोली सैध गेल छलैन्ह। ओ हमरा नहि कहलीह। हम बीपीक गोटी आनि केँ माय केँ देलियैन्ह। ओ गोटी काज नहि केलकैन्ह। डागडर लग ल' गेलियैन्ह। माय केँ साँस ऊपर-नीचा चल' लगलैन्ह। नर्स मुँह मे किछु लगौलकैन्ह। पेट खपनै बन्न भ' गेलैन्ह। आँखि तैक रहल छलथिन्ह। हमरा भेल माय ठीक भ' गेलीह। परञ्च मायक साँस रुकिए गेलैन्ह। ओ अखनो धरि आँखि सँ देख रहल छथिन्ह हमरा भेल। परञ्च मायक प्राण आँखिक मार्ग सँ निकैल गेलैन्ह। माय मरि गेलीह।

-संतोष कुमार राय 'बटोही', ग्राम-मंगरौना। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.पद्य ३.१.डॉ. जियउर रहमान जाफरी- वसंत सखी ३.२.जगदानन्द झा 'मनु'- ३ टा गजल ३.३.राज किशोर मिश्र-सृजनशीलता ३.१.डॉ. जियउर रहमान जाफरी- वसंत सखी डॉ. जियउर रहमान जाफरी वसंत सखी फूलक पात प्रसन्न अछि ओ भरि राति आबि गेल आ सुगंधक गप्प भेल यादक एकटा राति आ अहाँक प्रेमपूर्ण बात बसंत आबि गेल हमर मित्र सुरभित दिगंत अछि प्रेम आँखि मे जरैत अछि हजारो दीप जरि गेल अहाँक स्वागत मे...

हमरा अपन प्रियतम के याद अबैत अछि जब प्रियतम नहि शरद ऋतुक बाद केहन वसंत मित्र हम जलि रहल छी मुदा अहाँक सुख अनंत मित्र

- माफी, अस्थावां, नालंदा, बिहार-803107; 9934847941 अपन मंतव्य editorial.ऽtaff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.२.जगदानन्द झा 'मनु'- ३ टा गजल जगदानन्द झा 'मनु' ३ टा गजल १ नीक केहन आइ सगरो रीत भेलै प्रेम जकरा  देलियै ओ तीत भेलै जेब खाली साँझ हम बाजार गेलौं जे कियो ई बुझलकै भयभीत भेलै बोल सोहेतै किए ककरो गरीबक आब धनिकक गाइरो नव गीत भेलै जन्म भरि गिरगिट जकाँ जे रंग बदलै ओकरे सभके किए ई जीत भेलै भाइ भैयारीक मुँह चाटै कुकुर 'मनु' लाख सोशल मीडिया पर मीत भेलै (बहरे रमल, मात्रा क्रम 2122-2122-2122) २ हँसि क' तोरब मोन नहि हम सीखने छी नहि  करेजामे सभक घर छेकने छी हम तँ लूटेलौ जतय तन मन जनम भरि हाथ हुनकर बहुत माहुर चीखने छी आस छल अपनो समयमे  रंग होयत दूर रंगक  ओहि टोलसँ एखने छी कीनबाकेँ लेल शहरक वास दू धुर चास गामक तीन बीघा बेचने छी करु शिकाइत एहि दुनियाकेँ कते 'मनु' लैत मीतक  जान  सगरो  देखने छी (बहरे रमल, मात्राक्रम 2122-2122-2122) ३ टोपीमे लगै ई बुढ़ा  झक्कास छै बुढ़िया बिन अछैते मरै  नै आस छै     गामक आइ केहन असल रखबाड़ छै  एको धुर बचल ओकरा नै चास छै    शिक्षा केर घरमें बिकाइ ज्ञान छै आजुक राजनीतिक कतेक बिनास छै    पूजै लेल  कन्या तकै सब लोक छै बनबे लेल कनियाँ तकै अरदास छै   बाबू माय एने  बजट बिगड़ैत छै साढ़ू सारि 'मनु' बैंक खासम खास छै   मात्राक्रम : 2221-2212-2212 सभ पाँतिमे। तेसर शेरकेँ दोसर पाँतिमे दूटा अलग अलग लघुकेँ दिर्घ मानक छूट लेल गेल अछि। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.३.राज किशोर मिश्र-सृजनशीलता राज किशोर मिश्र सृजनशीलता

ब्रह्मां डक अनंत आकृति , वि स्ता र, कतहु ने गा ड़ल को नो बुर्जा , सृजनशी लता , हुनर वि धा ता क ! कतेको , कतेक सूर्य मे ऊर्जा ?

अद्भुत अछि ई सृष्टि -सृजन ! स्रष्टा के सर्जनधर्मि ता ! वर्णन नहि कऽ सकैत अछि , नहि शब्द को नो , नहि कवि ता ।

को ना चलत आका शगंगा ? कते-कते दूर पर को न-को न ता रा ? ने धक्कम-धुक्की ,ने मा रा -मा री , ने ला गल एक सय चौ आली स धा रा ।

ओहि वि रा ट,वि लक्षण सृजन केँ, शत्-शत् प्रणा म, सर्जना त्मक ऊर्जा सँ , अछि बनल सृष्टि केँ गा म।

बा ह रे शि ल्पका रक छैनी ! पा थर मे भरि देलक अछि जा न, आकृति -सि रा उर मे भा ओ छि टल, समुद्रक बा लु पर उगल प्रा ण।

शब्द मे कवि गण भा ओ भरैत छथि , तँ मो न मे उठि जा इत अछि उत्फा ल, हँसबैत अछि ओ, कनबैत अछि ओ , शब्द बनैत अछि कवच आ' ढा ल।

कुंडलि नी पर फड़ैत अछि ऊर्जा , जखन सूतल सँ जा गल, सुंदर सो चक सृजन-सा मर्थ्य केँ, जे बुझि ने सकल ,ओ अभा गल।

इजो तक रचना सा त्त्वि क ऊर्जा सँ, ओहि मे सूर्यक अंश, आलो कि त भूः , भुवः , स्वः , तम,तमस् तत्त्व वि ध्वंश।

ब्रह्मां ड मे गुरुत्वा कर्षण- रचना , संबंध-सृजन नवदम्पति -अङ्गना ।

वा दक-स्पर्श सँ वी णा -ता र, कएल सम्मो हक संगी त-सृजन, अनुरा ग-रसा यनक प्रति क्रि या , स्वर-नि साँ मे मा तल बहुवचन?

सि रजन-तरु पर लुधकल अछि , कला -संस्कृति क पुष्पि त सुमन, पुङकेसर पर पि री ति -परा ग, लए घुमि रहल अछि मधुप, भुवन।

कुम्हा रक चा क घूमि -घूमि , मा टि सँ बना देलक अछि बा सन, उच्छृंखल बटुकक स्वभा व मे , वि द्या लय लओलक अनुशा सन।

री ति ,रेबा ज , परम्परा , बनलैक नि यम-का नून , ई सभ मनुखेक अछि रचल, भेटैछ जा हि सँ सुकून।

प्रकृति केँ समा ना न्तर मे,

रचल मनुक्ख अपन संसा र, सुइ सँ ल' क' वा युया न धरि , सभ सुख-सुवि धा पर अधि का र।

सि रजन लेल नि त नव्य दृष्टि , क्रौँ चक क्रन्दन सँ महा का व्य,

रणक्षेत्र मे श्री मद् भा गवत् गी ता , वि ध्वंसक बी च सृष्टि संभा व्य।

कलि आ ना गक मस्तक पर, वा सुदेवक बाँ सुरी -वा दन, मर्त्य लो क मे अनर्गल नहि , जि नगी क सुखद सम्पा दन।

पतझा ड़क झरल बी आ सँ, अंकुरि त फेरो हेतैक मधुमा स, अन्हा रक पेट मे अछि इजो त , गि ड़ल मुदा क' सकल ने ना श।

मो न मे सुवि चा र आ' ह्रदयमे भरल पि री ति , आत्मा पर ने पा प को नो , बुद्धि परम् पुनी त।

सृजनशी लता तखन पनुघैत अछि , वरेण्य सुसो च तखन अरघैत अछि । अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। 82 || विदेह (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) www.videha.co.in विदेह ३८८ म अंक १५ फरबरी २०२४ (वर्ष १७ मास १९४ अंक ३८८)|| 81

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हज विशेषांक २०२४ नरेन्द्र झा एवं प्रा. रामावतार यादव पर विदेह www.videha.co.in विशेषांक २०२४ नरेन्द्र झा एवं प्रा. रामावतार यादव चयनित भेला २०२४ क विदेह विशेषांक लेल। जि भर नरेन्द्र झा पर विदेहक विशेषांक १ जून २०२४ आ प्रा. रामावतार यादव पर १५ जून २०२४ अंकमे धो लि SD प्रकाशित CCA) eee: | | लेखक-पाठक clad आग्रह जे नरेन्द्र झा एवं प्रा. रामावतार यादव जीक काजपर आलोचना, . | = 'समालोचना, समीक्षा आदि वर्ड फाइलमे editorial.staff.videha@gmail.com पर | — in 0p Se i eam पाबधि। लि कि & नरेन्द्र झाजीक अधिकांश पौथी २००८ सें विदेह www.videha.co.in पर उपलब्ध ofS! Wy face fastuign Roly % cf जद = = == = SG WWW. HES हैंए। Pe — Yn, facie ICTR 3928 re ae facre factais २०२8 .... प्र } AERA सा अन्न था. वामाब्रछाव AAA शव FACE www. videha.co.in FACT २०२8. AA YA सा IH शा. वामाब्रजाव AAA BUS एछता २०२8 क fA FACT CAL ATT सा शव FACES FACTS ५ OT २०२४ शा था. वामाब्रछाव TIAA शव 90 जून २०२४ कर्म geht =. 7 east a a एलथक-नाठक एलाकनिें AS OH THT सा IH था. वामाब्रठाव ATA जीक BIA AAT, HATA, i” RE» ater शनि aS काजतएय editorial. staff.videha@gmail.com शव शठाब्िणि। x AES साजीक अविकीने co २००० मैं बिएनठ www.videha.co.in शव Gorn अडि।

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