ISBN 978-93-341-1933-6 (Book) ISSN 2229-547X (online) 𑒀 विदेह ४०१ म अंक ०१ सितम्बर २०२४ (वर्ष १७ मास २०१ अंक ४०१) [विदेह (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) www.videha.co.in ] विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। ऐ पोथीक सर्वाधिकार सुरक्षित अछि। कॉपीराइट (©) धारकक लिखित अनुमतिक बिना पोथीक कोनो अंशक छाया प्रति एवं रिकॉडिंग सहित इलेक्ट्रॉनिक अथवा यांत्रिक, कोनो माध्यमसँ, अथवा ज्ञानक संग्रहण वा पुनर्प्रयोगक प्रणाली द्वारा कोनो रूपमे पुनरुत्पादन अथवा संचारन-प्रसारण नै कएल जा सकैत अछि। (c) २०००- २०२४. सर्वाधिकार सुरक्षित। भालसरिक गाछ जे सन २००० सँ याहूसिटीजपर छल http://www.geocities.com/.../bhalsarik_gachh.html , http://www.geocities.com/ggajendra आदि लिंकपर आ अखनो ५ जुलाइ २००४ क पोस्ट http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html केर रूपमे इन्टरनेटपर मैथिलीक प्राचीनतम उपस्थितक रूपमे विद्यमान अछि (किछु दिन लेल http://videha.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html लिंकपर, स्रोत wayback machine of https://web.archive.org/web/*/videha 258 capture(s) from 2004 to 2016- http://videha.com/ भालसरिक गाछ-प्रथम मैथिली ब्लॉग / मैथिली ब्लॉगक एग्रीगेटर)। ई मैथिलीक पहिल इंटरनेट पत्रिका थिक जकर नाम बादमे १ जनवरी २००८ सँ ’विदेह’ पड़लै। इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि, जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। (c)२०००- २०२४. विदेह: प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004). सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। Editor: Gajendra Thakur. In respect of materials e-published in Videha, the Editor, Videha holds the right to create the web archives/ theme-based web archives, right to translate/ transliterate those archives and create translated/ transliterated web-archives; and the right to e-publish/ print-publish all these archives. रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना/ संग्रह (संपूर्ण उत्तरदायित्व रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता मध्य) editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ पठा सकैत छथि, संगमे ओ अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो सेहो पठाबथि। एतऽ प्रकाशित रचना/ संग्रह सभक कॉपीराइट रचनाकार/ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि आ जतऽ रचनाकार/ संग्रहकर्त्ताक नाम नै अछि ततऽ ई संपादकाधीन अछि। सम्पादक: विदेह ई-प्रकाशित रचनाक वेब-आर्काइव/ थीम-आधारित वेब-आर्काइवक निर्माणक अधिकार, ऐ सभ आर्काइवक अनुवाद आ लिप्यंतरण आ तकरो वेब-आर्काइवक निर्माणक अधिकार; आ ऐ सभ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार रखैत छथि। ऐ सभ लेल कोनो रॉयल्टी/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै, से रॉयल्टी/ पारिश्रमिकक इच्छुक रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता विदेहसँ नै जुड़थु। विदेह ई पत्रिकाक मासमे दू टा अंक निकलैत अछि जे मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ www.videha.co.in पर ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। Videha eJournal (link www.videha.co.in) is a multidisciplinary online journal dedicated to the promotion and preservation of the Maithili language, literature and culture. It is a platform for scholars, researchers, writers and poets to publish their works and share their knowledge about Maithili language, literature, and culture. The journal is published online to promote and preserve Maithili language and culture. The journal publishes articles, research papers, book reviews, and poetry in Maithili and English languages. It also features translations of literary works from other languages into Maithili. It is a peer-reviewed journal, which means that articles and papers are reviewed by experts in the field before they are accepted for publication. Font/ Keyboard Source: https://fonts.google.com/ , https://github.com/virtualvinodh/aksharamukha-fonts , https://keyman.com/ These are print-on-demand books, send your queries to editorial.staff.videha@gmail.com. The eBooks of some of these are available for sale on Google Play [(c) Preeti Thakur, sales.videha@gmail.com], send your queries to sales.videha@gmail.com. The contents and documents e-published by Videha (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) are periodically being checked for accessibility issues. People with disabilities should not have difficulty accessing these contents/ documents. © Preeti Thakur (sales.videha@gmail.com) Cover designed by AUM GAJENDRA THAKUR Videha e-Journal: Issue No. 401 at www.videha.co.in समानान्तर परम्पराक विद्यापति- चित्र विदेह सम्मानसँ सम्मानित श्री पनकलाल मण्डल द्वारा मैथिली भाषा जगज्जननी सीतायाः भाषा आसीत्। हनुमन्तः उक्तवान- मानुषीमिह संस्कृताम्। अनुक्रम ऐ अंकमे अछि:- १.१.गजेन्द्र ठाकुर- नूतन अंक सम्पादकीय (पृष्ठ १-१) १.२.अंक ४०० पर टिप्पणी (पृष्ठ २-२) गद्य २.१.श्याम प्रकाश झा- टेनिया-लफुआ (मैथिली कथा) (पृष्ठ ४-११) २.२.परमानन्द लाल कर्ण- मैथिली एक सिंहावलोकन (पृष्ठ १२-१८) २.३.आचार्य रामानंद मंडल- महाकवि विद्यापति आ महारानी लखिमा देवी: प्रेम प्रसंग! (पृष्ठ १९-२७) २.४.आशीष अनचिन्हार- अरविन्द ठाकुरः अन्हार एवं धाराक विरुद्ध (पृष्ठ २८-३०) २.५.संतोष कुमार राय 'बटोही'- मकान मालिक: किराया घर (एकटा संस्मरण) (पृष्ठ ३१-३३) २.६.संतोष कुमार राय 'बटोही'- उच्चैठ भगवती केँ दर्शन (यात्रा-वृत्तांत) (पृष्ठ ३४-३८) २.७.प्रणव झा- इंटर/बारहमा के बाद जीवविज्ञानक विद्यार्थी के करियर विकल्प (पृष्ठ ३९-६५) २.८.कुमार मनोज कश्यप- लघुकथा- ओहि पार (पृष्ठ ६६-६७) २.९.प्रदीप कुमार मंडल 'पवड़ा'- मैथिली फूलवारी थिक (पृष्ठ ६८-७४) २.१०.प्रमोद झा 'गोकुल'- नौक (पृष्ठ ७५-७७) २.११.मुन्ना जी- बीहनि कथाकें विवादक नै संवादक खगता छै (पृष्ठ ७८-८१) २.१२.रबीन्द्र नारायण मिश्र- सीमाक ओहि पार (धारावाहिक उपन्यास) (पृष्ठ ८२-९५) पद्य ३.१.प्रदीप कुमार मंडल 'पवड़ा'- गे मम्मी तों कियेक कानै छेंऽ? (पृष्ठ ९७-९८) ३.२.प्रमोद झा 'गोकुल'- तिरंगा (पृष्ठ ९९-१००) ३.३.प्रणव झा- २०४७ मे हमर सपना के भारत (पृष्ठ १०१-१०२) ३.४.राज किशोर मिश्र- श्मशानक फूल (पृष्ठ १०३-१०६)
१.०.गजेन्द्र ठाकुर- नूतन अंक सम्पादकीय दिनेश कुमार मिश्र, आइ.आइ.टी. खड़गपुरसँ सिविल इन्जीनियरिङ मे बी. टेक. १९६८मे आ स्ट्रक्चरल इन्जीनियरिङमे एम.टेक. १९७०मे। मिथिलाक बाढ़िक एक्स्पर्ट। मिथिलाक मोटा-मोटी सभ धारपर किताब प्रकाशित। उत्तर बिहार की व्यथा कथा (१९९०), कोसी- उम्र कैद से सजा-ए-मौत तक (१९९२) बंदिनी महानंदा (१९९४), बोया पेड़ बबूल का- बाढ़ नियंत्रण का रहस्य (२०००), बगावत पर मजबूर मिथिला की कमला नदी (२००४), भुतही नदी और तकनीकी झाड़- फूक (२००५), दुई पाटन के बीच में- कोसी नदी की कहानी (२००६) तथा बागमती की सद्गति (२०१०)। पूर्वपीठिका: दिनेश कुमार मिश्रक 'दुइ पाटन के बीच मे' कोसी नदीक ऐतिहासिक आत्मकथा थीक, ओ मिथिलाक आन धार सभक ऐतिहासिक आत्मकथा सेहो लिखने छथि जेना बन्दिनी महानन्दा, बागमती की सद्गति!, दुइ पाटन के बीच में.. (कोसी नदी की कहानी), न घाट न घर, बगावत पर मजबूर मिथिला की कमला नदी, भुतही नदी और तकनीकी झाड़-फूंक, The Kamla River and People On Collision Course, Bhutahi Balan- Story of a ghost river and engineering witchcraft, Refugees of the Kosi Embankments। दिनेश कुमार मिश्र मिथिलाक नै छथि मुदा मिथिलाक सभ धारक कथा ओ लिखने छथि, हम सभ हुनका प्रति कृतज्ञ छी आ हुनकर ऋणसँ मिथिलावासी कहियो उऋण नै भऽ सकता। दिनेश क़ुमार मिश्रक सभटा पोथी आब हुनकर अनुमतिसँ उपलब्ध अछि विदेह आर्काइवमे। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। १.२.अंक ४०० पर टिप्पणी श्रीनारायण झा, कोलकाता प्रिय सम्पादक महोदय, विदेहक अंक सभ समय स भेटैत रहैये। एतदर्थ धन्यवाद। मिथिलाक्षर मे विदेहक सम्पूर्ण पोथी पढ़वाक सुविधा लेल सेहो बहुत रास धन्यवाद।
अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। गद्य २.१.श्याम प्रकाश झा- टेनिया-लफुआ (मैथिली कथा) २.२.परमानन्द लाल कर्ण- मैथिली एक सिंहावलोकन २.३.आचार्य रामानंद मंडल- महाकवि विद्यापति आ महारानी लखिमा देवी: प्रेम प्रसंग! २.४.आशीष अनचिन्हार- अरविन्द ठाकुरः अन्हार एवं धाराक विरुद्ध २.५.संतोष कुमार राय 'बटोही'- मकान मालिक: किराया घर (एकटा संस्मरण) २.६.संतोष कुमार राय 'बटोही'- उच्चैठ भगवती केँ दर्शन (यात्रा-वृत्तांत) २.७.प्रणव झा- इंटर/बारहमा के बाद जीवविज्ञानक विद्यार्थी के करियर विकल्प २.८.कुमार मनोज कश्यप- लघुकथा- ओहि पार २.९.प्रदीप कुमार मंडल 'पवड़ा'- मैथिली फूलवारी थिक २.१०.प्रमोद झा 'गोकुल'- नौक २.११.मुन्ना जी- बीहनि कथाकें विवादक नै संवादक खगता छै २.१२.रबीन्द्र नारायण मिश्र- सीमाक ओहि पार (धारावाहिक उपन्यास) २.१.श्याम प्रकाश झा- टेनिया-लफुआ (मैथिली कथा) श्याम प्रकाश झा टेनिया-लफुआ (मैथिली कथा) वर्ष : उन्नैस सय छियासी गाम : कोसी आ नेपालक बगलबला इलाकाक कोनो गाम भूमिका : बीस वर्ष पूर्व, गामक दूटा दस-बारह वयसक छौड़ा चोरीक इल्जाममे मारि खाइसँ बँचैले गामसँ पहिने कहुना पटना पहुँचल आ फेर क्रमशः दिल्ली आ कलकत्ताक ट्रैन पकड़ि ओतहुसँ परा गेल छल। नाम छेलै टोनी आ लफ्फू। प्रवासक दौरान जतए टोनी दिल्लीमे पित्तीक संग रहिकऽ पंजाबी स्टाइलसँ माउस रान्हब सिखलक तँ लफ्फू अप्पन मामक संग बंगाली रसगुल्ला बनौनाइ आ मिठका दही पउड़ैक कला कलकत्तेमे सिखलक। कालान्तरमे जखन चोरीबला घटनाकेँ गौंआँ सभ बिसरि गेलै, दुनू दोस्त गाम आबिकऽ, नबका बाजारमे अगल-बगल माउस-भात आ मिठाईक पैघ दोकान खोलने छल जे कि वर्त्तमानमे पूरा इलाकामे प्रसिद्द अछि। टोनीसँ टोनिया आ टोनियासँ टेनिया कहिया भेलै से गप बुझब बड़ भारी गप छै मुदा ओही दरम्यान लफ्फू सेहो लफुआ कहाबए लागल छल। बाजार भरिमे कि पूरा परगन्नामे बसल आठ दस गाममे दुनू दोस्तक स्वादिष्ट खेनाइ आ मिठाईक खूब चर्चा रहए। एहि कथाक नायक ने तँ टेनिया अछि आ ने लफुआ, मुदा कथाक अन्त तक दुनू गोटाक विशेष भूमिका पाठकगणक समक्ष जरूर आबि जाएत। घटना क्रम- जाड़क भोर। जनवरी मास अप्पन अन्तिम यात्रापर छल आ कुहेस लागल भोर रहइ। गामक लोक सभ जाबे उठिकऽ चाह पिबताह, ताबे भोरे-भोर पूरा गाममे जेना हरबिर्रो मचि गेल। गप ई पसरल रहए जे स्वर्गवासी मास्टर साहेबक बेटी कोनो विजातीय छौड़ाक संगे उड़हरि गेलइ। आनन-फाननमे छोट-छिन भीड़ मास्टर साहेबक दरबज्जापर जमा भऽ गेल छल। भीड़क नेतृत्व बोल्गाबाबू करै छलाह। भीड़क मांग छेलै जे मास्टर साहेबक विधवा (बरहमपुर वाली) सभकेँ सामने आबि ई उड़ल गपक स्पष्टीकरण दथि आ बेटीकेँ प्रस्तुत करथि। बोल्गाबाबू गामक सभसँ मानल उचितवक्ता। गप गढ़ैमे, गप पीबैमे, गप सुनैमे, गप सुँघैमे, गप चिबबैमे आ गप बजैमे हुनकर परतर कियो नइ कऽ सकैत अछि। असली नाम राधाकान्त मिश्र छिऐन्ह मुदा ओ दाढ़ी बुल्गानिन स्टाइलमे रखै छैथ तेँ सभकियो धीरे-धीरे हुनका वोल्गाबाबू कहए लगलखिन। गाम भरिमे ओ ज्ञान बाँटब आ पनचैती करबक अलावा कोनो काज नइ करैत छथि। पूरा परगन्नामे हुनका समाजक आ देशक नियम-कानून बुझै आ ओहिपर चलैबला मनुक्ख मानल जाइत छल। गाममे उठल कोनो झगड़ा-झाँटीमे पनचैती करैले या तँ हुनका हकार दऽ कऽ बजाओल जाइत छैन्ह आ नहि तँ ओ स्वयं आबि घोंसिया जाइत छथि। घरक भीतर दरबज्जा खिड़की सभ बन्न केने बरहमपुरवाली दुखी मोन डर आ आशंका चलैत अप्पन मुड़ी गोंतने बैसल छलीह। हुनका जखने अपन बेटीक किरदानी पता चललैन तँ ओ अप्पन एक हरबाहाकेँ पहिने अपना नैहर दिस विदा कऽ देने छेलखिन, अपन छोट भाए अमरबाबूकेँ बजबैले। अमरबाबू खानदानी धनाढ्य छलाह जनिका सैंकड़ो बीघा खेती योग्य जमीन छैन्ह आ बादमे पटना दिल्लीसँ लऽ कऽ विदेश धरिमे मखानक कारोबार करए लगलाह जाहिमे नीक नाम कमेने छथि। गाड़ी-घोड़ाक कोनो कमी नहि छेलैन्ह आ अपने बुलेट मोटरसाइकिल चलौनाइ बड़ पसिन्न छलैन्ह। दस साल पहिनहि बहिनोईक, अर्थात् मास्टर साहेबक अकस्मात् निधन केर बाद, अमरबाबू अपन जेठ विधवा बहिन लेल संकटमोचन छला आ बड़की दायकेँ कोनो समादपर धरफड़ाएल गाम अबैत छलाह। हाल फ़िलहालमे ओ अपन मैट्रिक पास भगिनी लेल कोनो योग्य वरक ताकैक सिलसिलामे बहिनक सासुर बेसी आबैत-जाइत रहैत छलाह। दस बजैत-बजैत ने तँ भीड़ दरबज्जापरसँ टस-मस भेल आ ने बरहमपुरवाली बहरेली। बोल्गाबाबूक नेतृत्वमे भीड़क आरोप प्रत्यारोप, मास्टर साहेबक घरसँ भतवरीक प्रस्तावना, समाजक बदलैत स्वरुप, नबका जमानाक छौड़ा-छौड़ी सबहक उच्छृंखलता, बेटीक माथपर बापक साया नइ होइक दुष्प्रभाव, लड़कीक नाना गामक नीच आचरणक कथा पिहानी सभ गप-सप्पमे बेर-बेर चलि रहल छल। एक-आध गोट सज्जन बीच-बीचमे अपन डेरा जा कऽ अपन जरूरी काज सभकेँ सम्हारि पुन: आपस आबि गप-सप्पमे भाग लऽ लथि, गप-सप्प सुनए लगथि। बोल्गाबाबू तीन घन्टा धरि ठाढ़ रहलाह मुदा एक इंच हिलबो तक ने केलाह। समाजपर बड़का आफत जे आबि गेल रहए। हुनका सन आदमी, ओ जँ किछु नइ करताह तँ फेर के करताह? हैया लिअह। ग्यारह बजे अचानक अमरबाबू अपना भगिनीकेँ बुलेटपर बैसौने केतौसँ अनायास अवतरित भेलाह। संगमे एकटा दोसर मोटर साइकिलपर तीनटा चेला-चपाटी सेहो आएल छैन्ह। दरबज्जापर मोटर साइकिल लगा कऽ आ अपन भगिनीकेँ घरक भीतर पठा कऽ ओहो भीड़ दिस मुखातिब होइत बोल्गाबाबूकेँ नेता बुझैत बजलाह- "प्रणाम बोल्गाबाबू! की हाल चाल यौ? आइ अहाँ सभ एतेक गोटासँ हमर बहिनक दरबज्जापर किए एलौं?" बोल्गाबाबू थोड़ेक खिसियाइत बजलाह- "अमरबाबू। अहाँकेँ गाममे ई कुकर्म सभ होइत रहैत होएत। हमरा सभ लेल ई कलंक अछि जे मास्टर साहेब सन महात्मा आदमीक कुमारि बेटी एकटा छौड़ा संगे भागि जाय। छौड़ीकेँ बाहर बजबियौ आ पूछियौ जे केतए आ केकरा संगे गेल रहए?" अमरबाबू सेहो कनी तमसाइते बजलाह- "बोल्गाबाबू, अहाँ सम्मानित लोक छी आ बिना कोनो साक्ष्य के, बिना किछु बुझने, एहेन लांछन लगेनाइ अहाँकेँ शोभा नइ दैत अछि। हम अपना संगे अपन भगिनीकेँ काल्हि राति एकटा नीक कथा लेल मातृक लऽ कऽ गेल रही। आइ ओकरा लड़काक बाप मायकेँ देखेला-सुनेलाक बाद लऽ कऽ एलौं हेँ।" दरअसल अमरबाबू गाम दिस आबैत काल रास्ता भरि सोचैत-सोचैत, भगिनीकेँ गायब होइक व्याख्या लेल, एकटा नब कहानी गढ़ने छलाह। भीड़क संग अमरबाबूक कहानीपर कोनो विश्वास नइ छेलइ। मुदा बोल्गाबाबू छोड़ि केकरो एतेक साहसो नइ होइत रहै जे अमरबाबू जकाँ पैरुखबला लोकक बातकेँ काटि हुनकर विरोध करितन्हि। भीड़मे चारिटा तँ एहेन सज्जन छलाहे जे पहिने कोनो-ने-कोनो काजसँ अमरबाबूसँ कृपान्वित भेल छलाह। मुदा बोल्गाबाबू तँ बोल्गाबाबू छथि। बिना एक-एक टा चीज फरिछौने मानि केना लेताह? थोड़ेकाल धरि वाद-प्रतिवादक दौर अहिना चलैत रहल। बारह बजैत-बजैत अमरबाबू कनियेँ आवाज़ कड़ा केलैन्ह- "हे यौ बोल्गाबाबू! अहाँ ओहिना बिना मतलबक बातकेँ तीरै छी। अहाँकेँ कोनो काज नइ हएत मुदा हमरा अछि। अखन हमरा लागल अछि भूख। आइ हम नियारि कऽ आएल छेलौं जे बाज़ारपर टेनिया दोकानक माउस भात खाएब मुदा अहाँ एम्हर एहेन घाना पसारने छी जे पूरा मूड ख़राब भऽ गेल। एक तँ अहाँ कुतर्कमे लागल छी दोसर जे एतबो नइ बुझा रहल अछि जे सामनेबला भूखल- पियासल अछि, दूरसँ आएल अछि आ ओकर की हाल हेतइ।“ अमरबाबूक आवाज़क कड़कड़ता सुनि बोल्गाबाबू थोड़ेक सकदम भेलाह। भीड़मे सेहो समर्थन कम भेल जाइत छेलैन्ह। आब हुनका किछु फुरेबे ने करन्हि। मोने-मोन अपना संग आएल लोक सभपर तामस सेहो उठैत रहैन्ह जे बाँकी लोक सभ किए बौक भेल अछि। आ ईहो डर होइत छेलैन्ह जे अन्तमे कहीं सभटा दोख हुनकेपर ने चढ़ि जान्हि। अमरबाबू व्यापारी लोक छथि। सामनेबलाक स्थिति फट-दे बुझि जाइ छथिन। ओ दोसर रास्ता पकड़लैन्ह। आवाज़मे थोड़ेक मिठास आनैत घोषणा केलखिन- "हम जा रहल छी बाजारपर खाइ लेल। बोल्गाबाबू अहाँ एकटा काज करू। हमरा संगे बाजारपर भोजन करैले चलू। भोजन सेहो हेतै आ गप-सप्प सेहो हेतइ। आ जे ई बात स्वीकार नइ अछि तँ ठाढ़ रहू दरबज्जापर जाबे हम भोजन करि कऽ आबैत छी बाजारसँ।“ बोल्गाबाबू असमंजसमे पड़ि गेलाह। हुनकर मनःस्थिति बुझि अमरबाबू हाथ पकड़ि बोल्गाबाबूकेँ अपना बुलेटपर पाछाँमे बैसा कऽ अपन दूटा चमचा संगे बाजार दिस विदा भेलाह। माउस भातक लोभमे भीड़सँ चारि टा महानुभाव सेहो अपना घरासँ साइकिल लेने बाजार दिस विदा बढ़ि गेलथि। कनीकाल लेल सबहक स्मरणसँ छौड़ीक भगनाइ बला गप उतरि गेल छेलइ। टेनिया माउस-भात रान्हैमे उस्ताद छल। अमरबाबू ओकर रेगुलर ग्राहक छेलखिन, खुश होइपर पाँच टका ऊपरसँ दैत छेलखिन। ओ हुनका देखैत देरी, सभ गोटा लेल ठीकसँ टेबबुल-कुर्सी लगौलक, बढ़ियाँसँ साँठिकऽ थारीमे भात आ बड़का कटोरीमे माउसक वेवस्था केलक। माउसक गन्धसँ सभ गोटाक स्मरण शक्ति क्षीण भेल जाइत रहए। कनीकाल चुप्पीक संग खाइत खेनाइ खेलाक बाद, बोल्गाबाबू पुन: मुद्दापर आबि गेलाह। हुनकर बुद्धि अमरबाबूक व्याख्या मानैले एकदम्मे तैयार नइ छेलैन्ह। अमरबाबू घाम-पसीनाकेँ पोछैत, माउस भात खाइत, हुनकर सभ बातक जवाब दैत रहलखिन। खेनाइक बीचमे अचानक एकटा नव आगंतुक आबिकऽ अमरबाबूकेँ नमस्कार केलकनि आ ओ आगाँ बढ़ि गेलाह। बोल्गाबाबूकेँ जेना आँखि आ कान ठाढ़ भऽ गेलैन्ह। पुछलखिन- "अमरबाबू! अहाँ ऐ सज्जनकेँ केना चिन्हैत छिऐ? हमर एकटा जमीनक मुकदमा हिनका संगे चलि रहल अछि।“ अमरबाबूकेँ एकटा और मौका अपना दिस अबैत देखेलैन्ह। ओ मौकाकेँ लपकैत बजलाह- "तँ अहाँ हमरा कहियो तँ कहितौं। अहाँ अमरकेँ अप्पन लोक बुझबे नइ केलिऐ।“ आ बजैत-बजैत मुँह सेहो बना लेलैन्ह। फेर कनी रूकिकऽ बजलाह- "अहाँ चिन्ता जुनि करू। अहाँ अप्पन ई काज भेले टा बुझियौ। आब अहाँक ई मुद्दा जल्दिये फरिया जाएत।“ बोल्गाबाबूक मोन प्रसन्न भेलैन्ह। मुकदमा पाँच सालसँ बेसी टाइमसँ चलैत छेलैन्ह। अमरबाबूकेँ गप सुनलाक बाद अचानक मन हल्लुक लागए लगलैन्ह आ खेनाइमे सुआद आरो बढ़ि गेल छेलैन्ह। आब हुनका अमरबाबूक कहानीपर धीरे-धीरे बेसी विश्वास हुअ लागल छेलैन्ह। एक-एक कौरक बाद, हुनकर बहस आ बततिर्रीक क्षमता जेना क्षीण भेल जा रहल छेलैन्ह। बाँकी लोक तँ अहुना मुड़ी गोंतने खाइत रहथि। जीहपर ढनमनाइत माउसक सुआद, जीहक स्वर उत्पतिबला प्रकृतिकेँ गरदनिया देने जाइत रहए। अमरबाबूकेँ जिद्दपर टेनिया बोल्गाबाबूक बाटीमे एकबेर आर गरमा-गरम चुसता परसि देलकै। बाटीसँ लऽ कऽ चुसता चुसैत-चुसैत जे कनी-मनी सन्देह बोल्गाबाबूक मनमे रहि गेल छेलैन्ह, सेहो शनैः शनैः बिला गेल रहए। भरि इच्छा भोजन केलाक बाद जखन ढकार लैत सभकियो टेनियाक होटलसँ बहराइ गेलाह तँ अमरबाबू निश्चिन्त छलाह जे आब समस्या टलि गेल अछि मुदा ओ पक्का खेलाड़ी आदमी छथि। समस्याकेँ समूल नष्ट केनाय जरूरी बुझैत छथि। पानक दोकान दिस बढ़ैत सभ गोटाकेँ कहलखिन- "अहाँ सभ एना किए धड़फड़ाइ छी? टेनिया दोकानक माउस-भात खेलाक बाद जे लफुआ अहिठामक मिठका दही आ रसगुल्ला जँ नइ खेलक से की खेलक।“ मोन तँ सभकेँ होइते रहइ। उपरे-ऊपर हुनका सभकेँ कनी-मनी मना केलाक बाद, अमरबाबू जिद्द करिकऽ सभ गोटाकेँ लफुआक दोकान लऽ गेलाह आ भरि इच्छा दही-रसगुल्लाक भक्षण करबेलखिन। बोल्गाबाबूक संग गामक ई पाँच छह गोटाकेँ तँ आइ जेना भोज-भातक लॉटरी लागि गेल छेलैन्ह। मिष्ठान भक्षणक बाद बिना पानक पूर्ण केना मानल जाए? से फेर झुण्ड पानक दोकान दिस बढ़ि गेल। पान खाइत-खाइत एक स्वरमे सभ गोटा भोरक घटनाकेँ सन्दर्भमे अमरबाबूक व्याख्यानपर सहमति देखाबए लगलाह आ गामक जे लोक सभ ओतए नइ छलाह हुनका सभकेँ अहि उत्पन्न भ्रम लेल दोषारोपित करए लगलाह। एक सज्जन तँ उत्साहित होइत अमरबाबूक भगिनीकेँ बेस सुशील, बेस सुन्दर आ पढ़ाइमे चन्सगर धिया बतबैत ओकरा लेल दूटा नीक कथा सेहो बता देलखिन। साँझ होइत-होइत गाममे पसरल भोरक बात बाजारमे पसरल टेनिया दोकानक माउस आ लफुआ दोकानक दही-रसगुल्लाक सुआदमे डूमि कऽ पूर्ण रूपेँण बिला गेल रहए। अन्तमे जखन सभ गोटाक उदर सन्तुष्टि आ पान भक्षण केर बाद थै थै भऽ गेलाह, सभकेँ नमस्कार-पाती केलोपरान्त अमरबाबू अपना बहिन लेल एकटा सन्देश लिखि बोल्गाबाबूक हाथमे देलखिन आ मोटर साइकिल स्टार्ट कऽ अपना गाम दिस निश्चिन्त भऽ कऽ विदा भेलाह। गामक लोक पैदल आ साइकिलपर बसि अपना-अपना घर दिसक रस्ता पकड़लैन्ह। एम्हर टेनिया-लफुआकेँ ई नय बुझल छेलै जे ओकरा दुनूक कारण गामपर आइ एकटा बड़का फसाद होइत-होइत रूकि गेल रहए। -श्याम प्रकाश झा, शिक्षा : बी टेक कंप्यूटर इंजीनियरिंग। व्यवसाय : मैनेजिंग डायरेक्टर नेटस्पाय इंडिया प्राइवेट लिमिटेड क पद पर कार्यरत, पुणे। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.२.परमानन्द लाल कर्ण- मैथिली एक सिंहावलोकन अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.३.आचार्य रामानंद मंडल- महाकवि विद्यापति आ महारानी लखिमा देवी: प्रेम प्रसंग! आचार्य रामानंद मंडल महाकवि विद्यापति आ महारानी लखिमा देवी: प्रेम प्रसंग! महाकवि विद्यापति आ महारानी लखिमा देवी के प्रेम प्रसंग के बारे मे पं गोविंद झा अपन कृति विद्यापतिक आत्मकथा मे चर्चा कैले हतन आ जनकवि बैद्यनाथ मिश्र यात्री अपन कविता लखिमा मे। परंच इ कविता आलोचक -समालोक से उपेक्षित रहल हय।अइ कविता मे यात्री महाकवि विद्यापति आ महारानी लखिमा देवी के प्रेम के चित्रित कैले हतन। महारानी लखिमा देवी मिथिला के आइनवार वंशज राजा शिवसिह के पत्नी आ महाकवि विद्यापति दरबारी कवि रहलन। राजा शिवसिंह (१४१२ई-१४१६ई) बंगाल -जौनपुर सल्तनत के कर भुगतान न करे के कारण मुगल आक्रंता सामंत इब्राहिम शाह से युद्ध मे मारल गेलन। परंतु हुनकर लाश तक न मिलल।आकि युद्ध से भागके कहीं छूप गेलन। इतिहास मे एकर खुलासा न हय।कहल जाइ हय कि युद्ध के दखैत राजा शिवसिंह के राय से महाकवि विद्यापति सुरक्षा दृष्टि से महारानी लखिमा देवी के साथ राजबनौली (नेपाल) मे चल गेलन।महाराज के गायब होयला के बाद महारानी लखिमा देवी के सानिध्य मे मिथिला के शासन के बागडोर संभालैन।चित्रा कविता संग्रह मे संकलित जनकवि बैद्यनाथ मिश्र यात्री जी के कविता- लखिमा। कवि कोकिलक कल -काकलिक रसमंजरी लखिमा, अंहा छलि हैब अद्भुत सुन्दरी रुष्ट होइतहुं रुपसी कहि दैत कियो यदि अहां के विद्यापतिक कवि -प्रेयसी अहां अपने मौन रहितहुं कहनिहारक मुदा भ जी जइतैक सत्यानाश! मानित थिन ईह ! सुनित थिन शिवसिंह तअ घिचवा लितथिन जीह! दित थिन भकसी झोंझाय तुरंत क दित थिन कविक आवागमन सहसा बंदि अहूं अन्त:पुरक भीतर बारिकैं अन्न-पानि सुभग सुंदर कविक धरितहुं ध्यान बूढि बहिकिरनीक द्वारा कोनो लाथें आहांकें ओ पठबितथि संदेश (संगहि संग जुल्फीक दुइटा केश!) विपुल वासंती विभवकेर बीच विकसित भेली कोनो फूलक लेल लगबथुन ग क्यौं कतेको नागफेनिक बेढ मुदा तैं भ्रमर हैत निराश? मधु -महोत्सव ओकर चलतेइ एहिना सदिकाल! कहू की करथिन क्यौं भूपाल वा नभपाल अहां ओमहर हम एम्हर छी बीचमे व्यवधान राजमहलक अति विकट प्राकार सुरक्षित अन्त:पुरक संसार किंतु हम उठवैत छी कोखन कतहुं जं वेदना -विह्वल अपन ई आंखि अहींटाकें पावि सजनि ठाढि चारू दिस विस्मय विमोहित कंठसं बहराय जाइछ ईस! खिन्न भ अलसाई जनु धनि वारि जनु दिय अन्न किंवा पानि व्यर्थ अपनहि उपर कौंखन करि जनु अभिरोष विधि विडम्बित बात ई ,एहिमे ककर की दोष? नहि कठिन खेपनाइ कहुना चारि वा छौ मास देवि,सपनहुंमे करि जनु हमर अनविश्वास अहिंक मधुमय भावनासं पुष्ट भय प्रतिभा हमर रचना करत से काव्य जाहिसं होएताह प्रसन्न नरेश पुनि हमरो दुहुक मिलनाइ होएत सखि सहज संभाव्य ! अहांकें कवि पठवतितथि संवाद पावि आश्वासन अहां तत्काल अनशन छाड़ि होइतहुं कथंचित प्रकृतिस्थ! मनोरंजन हेतु हंसक मिथुन अंकित क देखबितए कोनो नौड़ी, कोनो नौड़ी आबि गाबिकैं सुनबैत ओही प्रियकविक निरुपम पदावलि जाहिंसं होइत अहांकेर कान दुनू निरतिशय परितृप्त! चित्त होइत तृप्त! घृणा होइतए महराजक ऊपर धिक धिक! स्वयं अपने एकसं बढि एक एहन निरूपम गुणसुंदरी शत -शत किशोरीकें विविध छल -छंदसं किंवा प्रतापक प्रवलतासं पकड़ि कए मंगवाय अन्न -जल भूषण -वसन श्रृंगार सामग्री ढेर लगाय सुरक्षित अन्त:पुरक एहि अरगड़ामे बनौने छथि कैकटा रनिवास बंदी शिविर सन डेरासभक क्रम -पात एककें दोसराक संग नहि रहइ जाहिसं मेल चक्रचालि चलैत छथि ताहि लेल कखन करथिन ककर आदर वा ककर सम्मान घटौथिन ककर कखन दिनमान अही चिंतामे सदए लागल रहए हमरासभक जीजान महराजक चरण सम्वाहन करैमै सफल होइछ एक मासक भितर जे दुई राति पुण्यभागा सुहासिनी अभिशप्त से देवांगना नहि थिक स्त्रीगणक जाति! अभागलि कै गोट होएत एहन जकरा छूबि छाबि कनेक देने छथिन पुनि अनठाय मने ओसभ गाछसं तोड़लाक उत्तर कने दकरल लतामक थुरड़ी जकां हो एम्हर -ओम्हर पड़ल पांडुर कोनो अगिमुत्तुक निर्मम निठुरताक प्रतीक! सुनई छी,राजा थिका नारायणक अवतार करवाक चाही हुनक जय -जयकार किंतु भगवान सेहो क्षीरसागर मध्य एहिना आड्गवाल रचि विचरैत छथि? इच्छानुसार करैत छथि अभिसार - आइ ककरो काल्हि ककरो इंदिराकें बाध्य भ की एहिना अनका बनाब अ पड़इ छनि ह्रदयेश? तुमैत एहिना तूर जाइत होएव अहां बहुतो दूर भावनाक अनन्त पथ दिस एकसरि चुपचाप तुमैतू अहिना तूर! विद्यापतिक कविताक हे चिरउत्स ,हे चिर निर्झरी! लखिमा,अहां छलि हैव अद्भुत सुंदरी! चित्रा -जनकवि बैधनाथ मिश्र यात्री पटना। जनवरी,१९४५. प्रस्तुत कविता मे जनकवि यात्री महाकवि विद्यापति के प्रेमाकुल -विरहाकुल प्रेमी के रूप मे आ महारानी लखिमा के राजकिला मे बंद प्रेयसी के रूप मे चित्रित कैलन हय। जनकवि यात्री इ कविता महाकवि विद्यापति आ महारानी लखिमा के आत्मिक प्रेम के दर्शैलैन हय वा कपोल कल्पित प्रेम के इ त शोध के विषय जान पड़ैय।आकि लेखकीय मैथुन हय जेना कि मैथिली साहित्य मे पायल जाइत हय। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.४.आशीष अनचिन्हार- अरविन्द ठाकुरः अन्हार एवं धाराक विरुद्ध आशीष अनचिन्हार अरविन्द ठाकुरः अन्हार एवं धाराक विरुद्ध ... अरविन्द ठाकुर धाराक विरुद्ध छथि। धाराक विरुद्ध माने विकासक धाराक विरुद्ध नहि, यथास्थिति, लोभ-लालच, नीचता आदिक जे धारा छै तकर विरुद्ध छथि। अनेक उदाहरण पाठक लग हेतनि हम सेहो एकटा दऽ रहल छी। मैथिली भाषामे जहिया-जखन कोनो खास चीजसँ चिह्नित पुरस्कारक घोषणा होइत छै। लेखक वर्ग ओही चीजपर लागि जाइत छथि। टटका उदाहरण अछि बाल साहित्य एवं अनुवाद साहित्य केर। जहियासँ अकादेमी एहि दू विधापर पुरस्कारक घोषणा केलकै। एहि दू विधामे अप्रत्याशित ढंगसँ लेखक वर्ग एलाह। पाठक एकरा नीक बात कहि सकै छथि मुदा नीक तखन मानल जेतै जखन कि ई दूनू (बाल एवं अनुवाद) अपन निज लेखक तैयार करत। वर्तमानमे हालति ई छै जे लेखक वर्ग जँ मूल पुरस्कारसँ अपनाकेँ चुकैत देखि लै छथि तँ ओ बाल साहित्य आ अनुवाद केर पोथी छपा लैत छथि। दोसर शब्दमे कही तऽ मूल पुरस्कारसँ चुकलाक बाद ओ बाल या अनुवाद पुरस्कारकेँ अपन अंतिम शरणस्थली मानि बैसैत छथि। मैथिलीमे बाल एवं अनुवाद पुरस्कार जतेक देल गेलैए तकर 90 प्रतिशत भाग एहने पुरस्कार प्राप्तकर्ता सभ छथि जे कि मूल रूपसँ ने बाल साहित्यकार रहल छथि आ ने अनुवादक। बहुत बड़का-बड़का लेखक एहिमे टुटल छथि। अधिकांश लेखक अपन मूल विधा, मूल प्रकृति छोड़ि एहि बाल एवं अनुवादमे लागल छथि जे नै मूल तऽ कहुना बाल या अनुवाद पुरस्कार भेटि जाए। जेना कि हम बहुत पहिनेसँ बहुत बेर कहैत एलहुँ अछि जे अरविन्द ठाकुर केर मूल विधा वा मूल प्रकृति आलोचना-समीक्षा छनि (आ शायद पहिल बेर हमहीं कहने छी)। अपन रचनाकालक पहिल भागमे ई कविता ओ कथा संग डटल रहलाह तऽ दोसर भागमे आन विधाक संग आलोचना एवं समीक्षामे एलाह (कथेतर गद्य केर नामसँ)। इएह अंतर अरविन्द ठाकुरकेँ आन लेखकसँ अलग करैत छनि। अरविन्द ठाकुर केर मूल प्रकृति बाल वा अनुवाद साहित्यक नहि छलनि तऽ ओ ओहिमे जबरदस्ती नहि एलाह। ई लौल नहि केलाह जे नै मूल तऽ कमसँ कम बाल वा कि अनुवाद पुरस्कार भेटि जाए। एकर उन्टा ओ आलोचना विधाकेँ पकड़लाह, ओहि विधाकेँ जकरा बहुतो लेखक पुरस्कारक चक्करमे छोड़ि दैत छथि, अनठा दैत छथि वा ओकर स्वरूप बदलि गदगदी आलोचना कऽ दैत छथि। जँ मैथिली साहित्य केर वर्तमान समयकेँ देखल जाए ताहिमे ई घटना बहुत साहसी घटना छै। आ निश्चित तौरपर अरविन्द ठाकुर अपन वास्तविक युवा लेखक सभ लेल आदर्श साबित हेताह। (हमर आबऽ बला पोथी 'अरविन्द ठाकुरः अन्हार एवं धाराक विरुद्ध' केर भूमिका केर अंश, ई पोथीक तात्कालिक नाम अछि। संशोधन सेहो भऽ सकैए।-आशीष अनचिन्हार) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.५.संतोष कुमार राय 'बटोही'- मकान मालिक: किराया घर (एकटा संस्मरण) संतोष कुमार राय 'बटोही' मकान मालिक: किराया घर (एकटा संस्मरण)
शिक्षक रूप मे जहिया सँ बहाल भेलहुँ अछि, तहिया सँ दूटा मकान मालिक सँ पाला पड़ल अछि। दरिभंगा मे रही तँ ओतऽ मकान मालिक राजपूत छलाह। इस्कूल सँ तीन मिनट केँ दूरी पर डेरा छल। इस्कूल केँ आओर शिक्षकगण अइ पक्ष मे नहि छलाह जे जाहि गाम मे इस्कूल रहए ओही गाम मे डेरा लिअ। परञ्च फटफटिया गाडी चलबैत हमरा नीक नहि लगैत छल। इस्कूल सँ दूर रहला सँ समय पकड़ै मे सेहो दिक्कत होयत छै।
नवटोल मे रहलाह सँ ई भेल जे ओए गामक भोज-भात मे नत भेंटअ लागल। जन्मदिन मनौल जायत छल, बियाह होयत छल कि कियो बैकुंठ धाम जायत छल सभ मे न्यौता भेटैत छल। भोज खाऽकऽ हम मने मोटगर भऽ गेल रही। हमर धियापुत सेहो भोज-भात खायत छल। कहियो ई महसूस नहि भेल जे आन गाम मे छी। बियाह आऔर मरण मे टाका लेनिहार हमरे नियुक्त करैत छलाह ग्रामीण। देर राति तक ओई काज मे हम फिरिशान होयत छलहुँ। कहियो हिसाब-किताब मे गड़बड़ी नहि भेलै।
मकान मालिक केँ हम चाचा कहैत छलियैन्ह। हमर धियापुता बाबा कहैत छलैन्ह। बेटा बिजली विभाग पटना मे सी ए छलैन्ह । रजनीश पावनि मे आओर अवकाश मे घर अबैत छलाह। एक-दूटा जन हमेशा खटैत छलैन्ह हुनका दलान पर। गाय पोसने छलाह। गाय केँ सेवा लेल बलहावाली आओर ओकर घरवाला नियुक्त छलाह। जर्सी गाय दूध बेसी दैत छलैक। दही दूध केर हुनका घर मे कोनहुँ कमी नहि छल। रजनीश लेल घी बना-बनाकऽ रखैत छलाह।
हम हुनकर दलान मे सपरिवार रहति छलहुँ। चारू दिसा सँ दीवार सँ घेरल छल। दलान केँ सोझा मे धातरीम , लताम, आम, फूल, नींबू आओर लीची केर गाछ छल। बगल सँ सड़क जायत छल। सड़क केँ पश्चिम मे पोखरि छल। ई राजपूत केर मुहल्ला छलैक।
दलान केँ दक्खिन मे दू सै मीटर दूरी पर पैक्स भवन छै। इस्कूल जेबाक दूटा रस्ता छल। एकटा - वार्ड सदस्य लालजी केँ घर केँ बगल धरि आओर दोसर- सीताराम डीलर केँ जनवितरण केन्द्र सँ होयत निशिहारा वाला सड़क दिस।
दलान मे ग्रिल लागल छल। दीवार मे सेहो मजबूत गेट लागल छलैक। अंगना आओर दलान केँ बीच सेहो गेट छलैन्ह। अंगना मे बाथरूम छलैन्ह। बाथरूम नीक कहल जा सकैए। अंगना केँ पछैत उत्तर मे मालअ घर छेलैन्ह। मालअ घरक पछैत उत्तर मे राजपूतक कुलदेवी केँ मंदिर बनल छेलैह।
अरविंद कुँवर जी बारह बीघा जमीन केर मालिक छथि। गाछी कलम ढेर छन्हि। आम गाछ फरैत छलैन्ह। चारि कट्ठा मे मकई लगौने छथि। तीन कट्टा मे जनेर आओर गाय लेल घास उपजा रहल छथि।बाकी मे रबी आओर खरीफ फसल उपजाबैत छथि। सचेष्ट खेतिहर छथि अरविंद कुँवर जी। सीताराम डीलर सँ सरकारी अनाज सेहो उठाबैत छथि। खेती बड़ मोन सँ करैत छथि। बड़ मेहनतिया छथि वो।
हम किराया लेटे सँ देने हेबैन्ह, परञ्च कुनो शिकायत नहि । एकटा दिल्ली केँ तेखंड मे मकान मालिक छलाह जे विहनसरे सुतले मे दरबाजा खटखटाबैत छलाह किराया लेल। दरिभंगा केँ मदारपुर मे छात्रावास केँ मालिक सिद्धेश्वर साहु किराया लेल कहियो फिरिशान नहि केलक। आओर कोनहु आन चीज लेल सेहो फिरिशान नहि केलक। शकूरपुर , दिल्ली मे भैरवा जी मकान मालिक सेहो कहियो टाकाक लेल फिरिशान नहि केलक। आब हम सपरिवार दुल्लीपट्टी , जयनगर मे रहैत छी । मकान मालिक तँ छथि , परञ्च हुनकर कनिया अबनी-बटगबनी बाजैत छथि। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.६.संतोष कुमार राय 'बटोही'- उच्चैठ भगवती केँ दर्शन (यात्रा-वृत्तांत) संतोष कुमार राय 'बटोही'
उच्चैठ भगवती केँ दर्शन (यात्रा-वृत्तांत)
आठ बजे छोटकी बस मे बैस गेल रही हम सपरिवार। दुल्लीपट्टी केँ हनुमान मंदिर सँ बस आगा बढ़ि रहल छेलैक। सावन केँ मास छियैय। जयनगर कमला मे जल भरि कऽ काँवरिया सभ कपिलेश्वर बाबा केँ चढ़ाबै लेल सड़क केँ बायाँ भाग चलि रहल छै। काँवरिया संग डीजे वाला गाड़ी सेहो चलि रहल छै। सड़क केँ किनारे दुनू तरफ पंडाल बनल छै। हम जै बस मे रहिका केँ ओर जा रहल छी तँ देख रहल छी - सड़क केँ दुनू ओर गामे-गामे पोखरि, नदी, नहर चापाकल वगैरह-वगैरह सँ पाईप सड़क पर आयल छै। काँवरिया केँ नहाय केर लेल। जखन काँवरिया सभ चलैत-चलैत गरमा जायत छथि आओर पाएर पाकऽ लगैत छन्हि , तँ ओ पाईप केर पानि मे नहा लैत छथि। देख रहल छियैय कियो -कियो पंडाल लगा कऽ प्लास्टिक केँ गिलास मे रसना घोरि-घोरि कें काँवरिया सभ केँ पिला रहल छथि। कियो पुरी-तरकारी आओर खीर/ सवई खिला रहल छथि।
लोहा पीपर सँ पहिने बडका पंडाल मे सावन मास मे शिव भक्ति सँ सानल गीत बैज रहल छै - ' चल रे काँवरिया शिव केँ धाम ।"
कलुआही सँ आगा पंडाल मे शिव भक्ति सँ सानल प्रोग्राम भ रहल छै। गवैय्या सभ आयल छै। एकटा गावै वाली लडकी सेहो स्टेज पर दिखाई देलक। एकटा पंडाल मे भांग केँ पिसाइत देखलियै। भक्त सभ गाँजा पिब कऽ मस्ती मे चलि रहल छथि। नाचैत- झूमैत बारह बरख सँ पच्चीस बरख केर लड़का -लड़की बेसी देखा रहल अछि।
हमरा लग हमर दुनू बेटी बैसल छेलीह। अयांश अपन मायक कोरा मे बैसल छलैक। रूणा गाड़ीए मे सँ काँवरिया सभक वीडियो बना रहल छलीह। आजुक मौसम किछु नीक छै। जाय बेर मे मेघ लागल छलैक। रौदा नहि छलैक। कलुआही मे बस लगभग बीस मिनट रोकि देलकै। हम फिरिशान भ गेलहुँ।
"बोलबम का नारा है, बाबा एक सहारा है।" ई कहैत काँवरिया सभ आगा बढि रहल छथि। गेरूआ आओर पीयर वस्त्र पहिरने छथि ओ सभ। माथा पर शिव केर नामक पट्टी पहिरने छथि काँवरिया सभ।
दुल्लीपट्टी सँ आगा सड़क केँ दुनू ओर सभ मंदिर पर डीजे बाजि रहल छै। मैथिली, भोजपुरी आओर हिन्दी मे शिव भक्ति केर गीत बाजि रहल छै । मंदिर केँ सजौल गेल छै। काँवरिया सभ पंडाल मे आओर मंदिर मे थाकि गेला पर सुस्ताइत छथि।
गरीबी, बेरोजगारी, मँहगाई बढ़लाक बाद बाबा केँ दरबार मे काँवरियाक संख्या बरखे-बरखे बढ़ि रहल छै। पंद्रह सँ तीस बरख केँ लोकनि बाबा भोलेनाथ केँ दरबार मे काँवर लऽकऽ बेसी जा रहल छै। हम सपरिवार रहिका आयलाक बाद बस सँ उतैर गेलहुँ अछि। बेनीपट्टी बाला बस लगले छल। पहिने अयांश आओर रुणा बस मे चढल तत्पश्चात् अक्षरा, अपराजिता आओर हम चढलहुँ अछि। बस बेनीपट्टी दिस दौड़ रहल छै। ई अरेर थाना छियैय । ई धगजरी छियैय। बस बेनीपट्टी थाना सँ पहिनहि उतारि देलक।
सडक पार करैत छलहुँ कि आटो वाला हाक दैत छलैक -" बसैठा....बसैठा ....।" हम कहलियै -"नहि...हम उच्चैठ भगवती केँ दर्शन करवाक लेल जायब ।" आटो वाला कहलक -" बैसल जाउ । हम जेबै दुर्गा मंदिर ।" हम सपरिवार बैस गेलहुँ आटो मे। एक सवारी पर बीस टाका लेलक। धियापुता फ्री मे। रहिका सँ बेनीपट्टी केँ एक सवारी पर चालीस रुपया बस वाला लेलक। दुल्लीपट्टी सँ रहिका केँ सैठ रुपया बस वाला लेलक।
हम सपरिवार उच्चैठ भगवती केर गेट लग उतैर गेलहुँ। दुनू तरफ दोकान छै। अँचरी, डाली, नारियल, फूल, अगरबत्ती, फूलक माला, प्लास्टिक लोटा जल चढाबै लेल भेट रहल छै। मिठाई, पतरका चिउरा, चीनी केँ मकैय्या लरू , वगैरह बिकायत छै। नाश्ता पानि केँ दोकान सेहो छै। हम आओर रुणा गेटे लग माँ भगवती केर चढाबै लेल डलिया, अंचरी, फूल, फूलक माला, सिन्दूर, नारियल, अक्षत, अगरबत्ती आओर लोटा ललेलहुँ अछि। पोखरि मे लोटा मे जल भरि कऽ ऊपर अबिते छलहुँ कि एकटा बारह-तेरह बरखक छौड़ा लग आबि कऽ कहलक -"भगवती केर गेट बन्न भऽ जेतैन्ह जल्दी चलू। " हम बुझि गेलियै ई कोनो पंडा केर बेटा छियैय।
आगा बढलहुँ तँ पैंतीस-चालीस बरखक पंडा भेट गेल । ओ कहलक -" नारियल फोड़ि लिअ ।" हम हँ मे माथा हिलौलहुँ । उ छोटका पंडा कहअ लागल चलू हम पूजा करा दति छी। हम कहलियै -" तोरा सँ पूजा नहि करायब, हमरा अपने पूजा मंत्र अबैत अछि।
रुणा केँ कहलियै -" अहाँ जाकअ माँ भगवती केँ चढ़ा दियौन्ह डलिया मेहेक सभ किछु। " ओ मंदिर मे प्रवेश केलीह । प्रवेश लेल गेट छोट छै। ओ अंदर गेलीह। हम अपन धियापुता दुआरे बाहरे छलहुँ। रुणा नहि निकललीह तँ हम हाक देलियै -" ओ बाहर निकललीह। हम देखललीयै जे डलिया बिल्कुल खाली छै । पुछलियै -" नारियल केर परसादी की भेल।" ओ कहलीह -" ओ पंडा छौरा सौंसे नारियल ध' रखलक ।" तीनू धियापुता केँ एक दोसर केँ हाथ मे हाथ पकडा केँ हम दुनू परानि फेर मंदिर मे प्रवेश केलहुँ। मंदिर मे देखलियै जे पंडा छौरा केँ माय सेहो दक्षिणा सभ सँ मांगि रहल छै।
पंडा छौरा कहैत छै - " आजु चारिटा सौंसे वाला नारियल भेल। " ताबत देखलियै एकटा जनानी ओकरा सँ नारियल मांगि रहल छै। हमहुँ कहलियै -" हमर नारियल की केलही। ला हमर नारियल। " ओ नहि दैत छल । हम गेरमेलहु तँ निकालि केँ देलक। हम आओर रुणा नारियल लऽकऽ बाहर निकललहुँ। सभ मंदिर मे जल आओर फूल वगैरह चढेलहुँ। पंडा सभ दक्षिणा केँ नाम पर टाका लेल फिरिशान करैत छै। मंदिर पर ओ सभ कब्जा केने छथि। पीढी दर पीढी मंदिर केँ ओ सभ आस्था केर नाम पर दोकान बनौने अछि। घर परिवार ओही सँ ओकरा सभ केँ चलैत छै।अकूत संपति केँ ओ मालिक बनि जायत अछि। हम अहाँ ठगा रहल छी आस्था केर नाम पर।
देखलियै एकटा फोटोग्राफर घुमि रहल छेलैक। ओ हमरा लग आबि कऽ फोटो खींचेवाक आग्रह करअ लगलाह। हम सपरिवार एकटा फोटो क्लिक करवा लेलहुँ। आब जलपान दोकान दिस गेलहुँ । एकटा जलपान गृह मे बैस गेलहुं सभ कियो । घर सँ लायल जलपान खाऽ कऽ पैंतीस टाकाक दुटा प्लेट हम सभ चबा गेलहुँ। पाँच टा छोटका पूरी एकटा प्लेट मे छल।
आब मनिहारा दोकान दिस घुमैत किछु किछु हम सभ किनलहुँ अछि। हम सपरिवार गेट दिस आबि गेलहुँ अछि। गेट पर एकटा भीखमंगा आओर मालिन मे झगड़ा भऽ रहल छलैक। मालिन भीखमंगा केँ केश नोचि लेलकै आओर थापर मारलकै। भीखमंगा बिखनिया- बिखनिया गारि दऽ रहल छलैक मालिन केँ ।
हम सपरिवार आटो पकड़ि कऽ दुल्लीपट्टी केर दिस विदा भेलहुँ। रहिका मे आयलहुँ तँ देखलियै प्रचंड रौद उगि गेल छै। काँवरिया सभ कपिलेश्वर बाबा केँ जल चढाबै लेल जा रहल छै। काँवरिया सभ केँ रौद लागि रहल छै। पाएर पाकि रहल छै तबो आगा बढि रहल छै। हम सभ डेरा पर आबि गेलहुँ अछि। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.७.प्रणव झा- इंटर/बारहमा के बाद जीवविज्ञानक विद्यार्थी के करियर विकल्प प्रणव झा इंटर/बारहमा के बाद जीवविज्ञानक विद्यार्थी के करियर विकल्प दसवीं पास कएला क बाद जखन विद्यार्थी एगारहम वा इंटर प्रथम वर्ष कक्षा में प्रवेश लैत अछि, त ओ अपन-अपन च्वाइस आ दसवीं में प्राप्त अंक केर अनुसार कोर्सक चुनाव करैत छथि। जीवविज्ञान विषय अपने किएक चुनलहुँ अछि? एहि प्रश्न केर उत्तर में बहुतो विद्यार्थी कें सुनल हेबई कि "डॉक्टर बन' चाहैत छी"। मुदा, एहि करियर के लेल अत्यधिक फोकस, सही मार्गदर्शन, उच्चतम स्तर केर प्रतिस्पर्धा, न्यूनतम सफलता दर, आ पर्याप्त धन केर आवश्यकता होइत अछि। एहन में, बहुतो विद्यार्थी बिना सटीक योजना केर एहि रेस में दौड़ि जाय छथि। जेकर परिणाम होइत छैक जे अधिकांश विद्यार्थी रेस मे बड्ड पाछा छूटि जाय छैथ आ एमहर आमहर बौख जाय छैथ। बहुतो के सम्हरईत सम्हरईत बड्ड अबेर भऽ जाय छैक आ ओ विद्यार्थी जीवन मे अपन परिश्रम आ प्रतिभा के अनुकूल करियर प्राप्त करऽ मे अक्सरहाँ असफल या आंशिक सफल भऽ पबय छैक। ताहि लेल ई आवशकाय अछि जे जखन विद्यार्थी दसमा पास केला उत्तर आगु के पढ़ाई जीव विज्ञान विषय के संग करय के नियारय छैथ, त परिश्रम आ लगन के संग अध्ययन के संगहि विद्यार्थी आ शुभचिंतक के हुनक बौद्धिक आ आर्थिक क्षमता, परिवेश, तैयारी, एरिया ऑफ इन्टरेस्ट आदि के ईमानदारी से समीक्षा करैत करियर के अन्य विकल्प केर खोज सेहो गंभीरता से करबा के चाहिए आ प्लान बी राखबा के चाहिए जै से विद्यार्थी के समय आ मनोबल बेसी खराप नै होय आ विद्यार्थी अपन क्षमता आ प्रतिभा अनुसार अपन करियर यात्रा के लेल समय पर सही मार्ग के चुनाव कऽ सकय। वर्तमान समय मे एमबीबीएस के अलावे भी जीव विज्ञान के विद्यार्थी लेल करियर के बहुत रास अन्य विकल्प छैक, जेकर सही समय पर चुनाव, फोकस्ड अध्ययन, सही संस्था के चुनाव आदि से विद्यार्थी अपन पेशेवर जीवन मे निक करियर बना सकय अछि। अस्तु, एहि विषय पर जीव विज्ञान के विद्यार्थी के लेल किछु करियर विकल्प पर चर्चा करऽ चाहब। एमबीबीएस (MBBS) एमबीबीएस शुरू सँ एक सदाबहार पाठ्यक्रम रहल अछि। जकर मांग हरदम रहल, हरदम रहत। कहे के मतलब जे 100% रोजगार के गारंटी बला कोर्स। एहि समय भारत में एमबीबीएस केर एक लाख नौ हजार से किछु बेसी सीट अछि। एहि में आधा से बेसी सीट प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में अछि, जकर फीस प्रतिवर्ष 10 लाख सँ 50 लाख तक होइत अछि। सरकारी कॉलेज के बात करी त एखन 386 टा सरकारी कॉलेज देश भरि मे अछि जै मे कुल 55905 सीट उपलब्ध छैक। मुदा ऐ मे से केन्द्रीय पूल, राज्य कोटा (डोमिसाइल), विभिन्न वर्ग के आरक्षित कोटा आदि के लफड़ा आदि के कारण अलग अलग राज्य आ वर्ग के विद्यार्थी के लेल उपलब्ध सीट के संख्या ऐ आंकड़ा से बड्ड कम रहय छैक आ अलग अलग रहय छैक। अधिकांश राज्य सरकार के सीट के 85% तक ओहि राज्य के विद्यार्थी लेल सुरक्षित रहय छैक। बिहार मे एखन 13 टा मेडिकल कॉलेज मे एमबीबीएस के कुल मात्र 1615 सीट उपलब्ध छैक। त आँकड़ा से ई स्पष्ट देखल जा सकय अछि जे सगर देश के मुक़ाबला मे बिहार मे सरकारी सीट अखनहु कतेक कम छै। स्वाइत बिहारक एकटा सामान्य वर्ग केर छात्र के लेल सरकारी सीट मे बड्ड बेसी प्रतिस्पर्धा छैक। जखन की बेसी काल सेवा सब मे आजुक लोक प्राइवेट सेवा के सरकारी के ऊपर वरीयता दैत छैथ, सरकारी इसकुल (जानि बुझि के चरमरायल व्यवस्था के कारण) के ऊपर प्राइभेट इसकुल के वरीयता दैत छैथ, तथापि सरकारी मेडिकल कॉलेज लेल एतेक मारामारी के पाछा जे कारण छै से प्राइभेट के मुक़ाबला मे बड्ड कम फीस आ मोटामोटी प्राइवेट मेडिकल कॉलेज के मुक़ाबला मे एखनहु बेसी निक गुणवत्ता (बेसी विद्वान फ़ैकल्टी आ ट्रेनिंग मे निक केस लोड उपलब्ध होबाक कारण )। एखनो किछु सरकारी कॉलेज मे मेडिकल के पढ़ाई बीसो हजार से कम के फीस मे संभव छैक। वर्तमान मे सरकारी आ प्राइवेट कॉलेज में प्रवेश लेल NEET-UG परीक्षा होइत अछि। यद्यपि प्रवेश केर प्रक्रिया अलग अलग छैक, केन्द्रीय कौंसेलिंग जे एमसीसी कराबय छैक, राज्य के मेडिकल काउंसेलिंग आ प्राइवेट मेडिकल कॉलेज सबहक अंत मे फ्री राउंड काउंसेलिंग आदि। एकटा सामान्य छात्र के जत्त सरकारी सीट लेबऽ लेल क्वालिफाइड 720 में सँ 600-650 अंक लाब जरूरी अछि, ओहि ठाम प्राइवेट मेडिकल कॉलेज मे न्यूनतम अंक प्राप्त कऽ के क्वालिफ़ाई केने सेहो प्रवेश भेट जाय छैक मुदा ओकरा लेल अत्यधिक पाई के जोगार राख़ऽ परय छै। यद्यपि निक प्राइभेट मेडिकल कॉलेज मे प्रवेश लेल सेहो 400 से ऊपर अंक लेनाई आवश्यक छैक। नीट मे क्वालिफ़ाई करबाक लेल अंक सिस्टम नै अपितु पर्सेंटाइल सिस्टम छैक। ऐ सिस्टम मे छात्र के वास्तविक स्कोर के स्थान पर ओकर सबहक तुलनात्मक अध्ययन होइत छैक। अर्थात मानि लेल जाय जे 2 लाख विद्यार्थी मे अहाँ केर स्कोरिंग डेढ़ लाख विद्यार्थी से कम अछि, त 50 पर्सेंटाइल के मानक के अनुसार अहाँ क्वालिफाइ नै भेलहु मुदा एही परीक्षा मे दू लाख आर नॉन-सिरियस विद्यार्थी बैस जाय त आहाँ वैह परीक्षा मे ओहि अंक पर क्वालिफ़ाय भऽ जेबय। किएकि वर्तमान मे करीब 15 लाख विद्यार्थी ऐ परीक्षा मे बैसई छै, त करीब साढ़े सात लाख ऐ एक लाख दस हजार सीट लेल क्वालिफाय करय छय.... आ एहन मे ई अक्सर होय छय से एक लाख के अंदर आबऽ बला बच्चा सब के एडमिशन नई होय (पाई के अभाव मे) आ साढ़े सात लाख रैंक बला के एडमिशन भेंट जाय छय। अतः विद्यार्थी आ गार्जियन सभ के ई सब बात के ध्यान मे राकबाक चाहिए। एमबीबीएस में प्रवेश प्रक्रिया 1. नीट (NEET) परीक्षा भारत में एमबीबीएस पाठ्यक्रम में प्रवेश लेल नीट (NEET - National Eligibility cum Entrance Test) परीक्षा पास करब अनिवार्य अछि। ई एक अखिल भारतीय स्तरक परीक्षा अछि जे नैशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित होइत अछि। 2. पात्रता मानदंड शैक्षणिक योग्यता: बारहवीं में जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान, आ भौतिक विज्ञान में न्यूनतम 50% अंक (एससी/एसटी/ओबीसी लेल 40% अंक)। आयु: परीक्षा के समय न्यूनतम आयु 17 वर्ष होबाक चाही। 3. परीक्षा क' पैटर्न नीट परीक्षा एक पेन-पेपर आधारित परीक्षा होइत अछि जे 3 घंटा 20 मिनटक होइत अछि। एहि परीक्षा में निम्नलिखित विषय सभ सँ प्रश्न पूछल जाइत अछि: भौतिक विज्ञान: 45 प्रश्न रसायन विज्ञान: 45 प्रश्न जीव विज्ञान (बॉटनी आ जूलॉजी): 90 प्रश्न कुल प्रश्न: 180 प्रश्न प्रत्येक सही उत्तर लेल 4 अंक द'ल जाइत अछि आ प्रत्येक गलत उत्तर लेल 1 अंक कटब'ल जाइत अछि। 4. कट-ऑफ स्कोर नीट परीक्षा में कट-ऑफ स्कोर हर साल बदलैत रहैत अछि। सामान्य वर्ग लेल 50 पर्सेंटाइल आ आरक्षित वर्ग लेल 40 पर्सेंटाइल होइत अछि। मुदा जेना कि उपर कहल गेल कट ऑफ स्कोर एडमिशन के कोनो गारंटी नै छैक, ओहि लेल बड्ड निक रैंक अथवा चिक्कन पाई भेनाई आवश्यक अछि। 5. काउंसलिंग प्रक्रिया नीट परीक्षा में प्राप्त अंकक आधार पर काउंसलिंग प्रक्रिया होइत अछि, जइमें अहाँ विभिन्न मेडिकल कॉलेज में सीट प्राप्त करऽक लेल आवेदन करैत छी। काउंसलिंग प्रक्रिया निम्नलिखित चरण सभ में होइत अछि: पंजीकरण: नीट काउंसलिंग लेल ऑनलाइन पंजीकरण करु। चॉइस फिलिंग: अहाँक पसंदक कॉलेज आ कोर्स केर चयन करु। । सीट आवंटन: नीट रैंक आ उपलब्ध सीटक आधार पर सीट आवंटन होइत अछि। दस्तावेज सत्यापन: सीट आवंटनक बाद आवश्यक दस्तावेजक सत्यापन करु। प्रवेश: सत्यापनक बाद कॉलेज में प्रवेश लेल शुल्क जमा करु। एमबीबीएस करबाक बाट मे दिक्कत : 1. उच्च प्रतिस्पर्धा एमबीबीएस में प्रवेश लेल अत्यधिक प्रतिस्पर्धा होइत अछि। लाखों छात्र नीट परीक्षा में भाग लैत अछि, मुदा सीमित सीटक कारण बहुतो छात्रक प्रवेश नहि भ' पाबैत अछि। 2. उच्च शुल्क प्राइवेट मेडिकल कॉलेजक फीस बड्ड बेसी होइत अछि, जे सभ परिवार लेल वहन करब संभव नहि होइत अछि। सरकारी कॉलेज में सीट बड्ड कम होइत अछि, जइमें प्रवेश लेल बड्ड उच्च स्कोर चाही। 3. लंबा समय एमबीबीएस पाठ्यक्रम पूरा करऽ आ एकटा स्थापित विशेषज्ञ चिकित्सक बनबाक लेल लगभग 8-10 वर्ष लगि जाइत अछि, जइमें 5.5 वर्षक एमबीबीएस पाठ्यक्रम आ 3 वर्षक पीजी (DNB/MD/MS/PG-Diploma) कोर्स शामिल अछि। 4. मानसिक आ शारीरिक दबाव एमबीबीएस के दौरान आ चिकित्सक बनबाक क्रम में अहाँक मानसिक आ शारीरिक दबाव सँ गुजरऽ पड़ैत अछि। लंबा अध्ययन समय, इंटर्नशिपक दौरान राति राति भर जागब, आ मरीजक जिम्मेदारी सँ जुड़ल दबाव अहाँक मानसिक आ शारीरिक स्वास्थ्य पर असर क सकैत अछि। समाधान 1. उचित तैयारी आ मार्गदर्शन नीट परीक्षा लेल उचित तैयारी आ मार्गदर्शन बड्ड महत्वपूर्ण अछि। अहाँ नीट परीक्षा लेल कोचिंग संस्थान सँ सहायता ल' सकैत छी आ नियमित रूप सँ मॉक टेस्ट द' सकैत छी। 2. विकल्पक योजना बनाबऽ एमबीबीएस क' अतिरिक्त अन्य चिकित्सा आ बायोलॉजी सँ संबंधित पाठ्यक्रमक विकल्प राख' बड्ड महत्वपूर्ण अछि। अहाँ बीडीएस, बीएएमएस, बीएचएमएस, बीपीटी, बीवीएससी आदि पाठ्यक्रम सभ क' सेहो विचार करू। 3. आर्थिक योजना बनैबऽ एमबीबीएस पाठ्यक्रम लेल आर्थिक योजना बनेनाइ अति महत्वपूर्ण अछि। ऐ मे गार्जियन केर भूमिका बड्ड महत्वपूर्ण भऽ जाय अछि। शिक्षा लोन के विकल्प केर विचार करू, कमाई अनुसार शुरुए से ऐ के लेल बचत विकल्प पर घंभीरता से काज आ सरकारी छात्रवृत्ति(यदि एलीजीबल छी त) लेल के जुगाड़ पर ध्यान देबऽ के दरकार राहत । विदेश सँ एमबीबीएस कतेको देश में एमबीबीएस पाठ्यक्रम में प्रवेश भारत सँ सस्ता आ सरल अछि। रूस, जॉर्जिया, नेपाल, बांग्लादेश, फिलीपींस, यूक्रेन, आदि प्रमुख देश अछि। मुदा, भारत में प्रैक्टिस करऽ लेल FMGE टेस्ट पास करऽ पड़ैत अछि, जकर सफलता दर 8% से 24% केर आसपास रहय अछि। विदेश में एमबीबीएस करब भारतीय विद्यार्थी सभक लेल एक आकर्षक विकल्प भऽ सकैत अछि, विशेष रूप सँ जखन भारत में मेडिकल कॉलेज सभ में प्रवेश लेल कठिन प्रतिस्पर्धा आ उच्च शुल्कक सामना करऽ पड़ैत अछि। विदेश में एमबीबीएस करबाक विकल्प विभिन्न कारण सँ उपयुक्त भऽ सकैत अछि, जइमें आसान प्रवेश प्रक्रिया, कम फीस, आ उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा शामिल अछि। ऐंठ हम विदेशी एमबीबीएस कार्यक्रम आ ओकरा सँ जुड़ल प्रक्रिया के विस्तार सँ देखब। विदेश में एमबीबीएस करबाक लाभ 1. प्रवेश प्रक्रिया आसान: भारतक तुलना में विदेश में एमबीबीएस में प्रवेश पेनाय अपेक्षाकृत आसान होइत अछि। ऐ के लेल नीट (NEET) क्वालिफाई करऽ आवश्यक अछि, मुदा कट-ऑफ अंक कम होइत अछि, जेना कि उपर व्याख्या कैल गेल अछि। 2. कम फीस: भारत में प्राइवेट मेडिकल कॉलेजक तुलना में बहुतो विदेशी विश्वविद्यालय में फीस कम होइत अछि। 3. उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा: बहुतो विदेशी विश्वविद्यालय में विश्वस्तरीय सुविधाएं आ शिक्षण मानक होइत अछि, जे छात्र केँ उत्कृष्ट चिकित्सा शिक्षा प्रदान करैत अछि। मुदा प्रवेश से पहिने ई सभ सुनिश्चित कऽ लेबा के चाहिए । 4. अंतरराष्ट्रीय अनुभव: विदेश में पढ़ाई करऽ सँ छात्र केँ एकटा नव संस्कृति आ भाषा केँ अनुभव होइत अछि, जे विद्यार्थी के बेसी आत्मनिर्भर आ आत्मविश्वासी बनबैत अछि। विदेश में एमबीबीएस करबाक प्रक्रिया 1. सही देश आ विश्वविद्यालय के चयन विदेश में एमबीबीएस करऽ लेल सही देश आ विश्वविद्यालय के चयन करब महत्वपूर्ण अछि। किछु लोकप्रिय देश जेठाँ भारतीय छात्र एमबीबीएस करऽ जाइत अछि, में शामिल अछि: रूस: सेंट पीटर्सबर्ग स्टेट यूनिवर्सिटी, कजान फेडरल यूनिवर्सिटी चीन: चाइना मेडिकल यूनिवर्सिटी, झेजियांग यूनिवर्सिटी यूक्रेन: बोगोमोलेट्स नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी, कीव मेडिकल यूनिवर्सिटी जॉर्जिया: त्बिलिसी स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी, बटुमी शोटा रूस्तावेली स्टेट यूनिवर्सिटी बंगलादेश: ढाका मेडिकल कॉलेज, राजशाही मेडिकल कॉलेज नेपाल : त्रिभुवन विश्वविद्यालय, काठमाण्डू विश्वविद्यालय, मणिपाल, बी पी कोइराला मेडिकल कॉलेज, नेपालगंज मेडिकल कॉलेज आदि सही कॉलेज चुनबा मे एफ़एमजीई मे भूकाल के प्रदर्शन एकटा घटक भऽ सकाय अछि। ऐ आंकड़ा के देखऽ आ रिसर्च करऽ लेल राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड के वेबसाइट पर ई लिंक देखू : https://natboard.edu.in/stats 2. प्रवेश लेल पात्रता मानदंड विदेशी विश्वविद्यालय में प्रवेश लेल सामान्य पात्रता मानदंड निम्नलिखित भऽ सकैत अछि: शैक्षणिक योग्यता: बारहवीं में जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान, आ भौतिक विज्ञान में न्यूनतम 50% अंक। NEET परीक्षा: भारत सँ विदेश में एमबीबीएस कर' लेल NEET परीक्षा पास करब अनिवार्य अछि। आयु: प्रवेशक समय न्यूनतम आयु 17 वर्ष होबाक चाही। 3. आवेदन प्रक्रिया आवेदन पत्र: चयनित विश्वविद्यालयक वेबसाइट पर जा कऽ आवेदन पत्र भरू। आवश्यक दस्तावेज: पासपोर्ट, शैक्षणिक प्रमाणपत्र, NEET स्कोर कार्ड, जन्म प्रमाणपत्र, चिकित्सा प्रमाणपत्र, आ पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ। आवेदन शुल्क: विश्वविद्यालयक नियमक अनुसार आवेदन शुल्क केर भुगतान करू। दस्तावेज सत्यापन: सभ आवश्यक दस्तावेजक सत्यापन कराऊ। 4. प्रवेश पत्र प्राप्ति सभ दस्तावेज आ शुल्क जमा करबाक बाद, विश्वविद्यालय प्रवेश पत्र जारी करैत अछि। प्रवेश पत्र मिलबाक बाद, अहाँ केँ वीजा आवेदन प्रक्रिया शुरू कर' पड़त। 5. वीजा प्रक्रिया वीजा आवेदन: संबंधित देशक दूतावास या वाणिज्य दूतावास में छात्र वीजा लेल आवेदन करू। आवश्यक दस्तावेज: प्रवेश पत्र, पासपोर्ट, शैक्षणिक प्रमाणपत्र, वीजा आवेदन पत्र, आ वीजा शुल्क। वीजा साक्षात्कार: किछु मामलामें वीजा साक्षात्कार हो सकैत अछि। 6. यात्रा आ आवास टिकट बुकिंग: वीजा मिलबाक बाद, अहाँ अपन यात्रा क' टिकट बुक करू। आवास: विश्वविद्यालय या निजी आवास क' प्रबंध करू। 7. विदेश में पढ़ाई शुरू करब ऑरिएंटेशन: विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित ऑरिएंटेशन प्रोग्राम में भाग लिय। शिक्षण सत्र: नियमित कक्षाओं आ प्रयोगशालाओं में भाग लय' शुरू करू। ऐ सभ प्रक्रिया के लेल एकटा निक एजेंट केर हेल्प लेल जा सकय अछि। मुदा एहु मे सावधानी रखबाक दरकार अछि। किए त बहुतो एजेंट सभ फर्जीवाड़ा सेहो करय छैक। भारत में प्रैक्टिस करबाक लेल FMGE (Foreign Medical Graduate Examination) विदेश सँ एमबीबीएस करबाक बाद, भारत में चिकित्सा प्रैक्टिस करबाक लेल FMGE (Foreign Medical Graduate Examination) पास करब अनिवार्य अछि। एकरा बादे अहाँ केँ राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) या राज्य मेडिकल काउंसिल द्वारा पंजीकरण प्राप्त होइत अछि। FMGEक पास दर लगभग 8-24% होइत अछि, जे परीक्षा क' कठिनाई क' दर्शबैत अछि। FMGE के लेल तैयारी पाठ्यक्रम: भारतीय चिकित्सा पाठ्यक्रमक अनुसार तैयारी करू। परीक्षा पैटर्न: परीक्षा में 300 बहुविकल्पीय प्रश्न होइत अछि, जे दू भाग में विभाजित होइत अछि। परीक्षा मे पास होमय लेल कम से कम 150 अंक प्राप्त केनाइ अनिवार्य छैक। संकाय: चिकित्सा के मानक टेक्ट बुक जेना हेरिसन आदि के सघन अध्ययन करू। नीक कोचिंग संस्थान सँ मार्गदर्शन प्राप्त करू। एत्त ई क्लियर केनाय आवश्यक अछि जे बहुत रास एजेंट आ कोचिंग सेंटर बला सब एफ़एमजीई के नाम पर विद्यार्थी आ गार्जियन सभ के ठकइ छैक, बर्गलाबय छय, दू नंबर तरीका से पास करबाक प्रलोभन देत.... परीक्षा मे घपला के बात करत ... आदि आदि... ई सब बात के अनसुना क दी आ सिलेबस के अनुसार तैयारी करी.....बेहतर कि कोर्स के दौराने ई तैयारी शुरू कऽ दी... किएकि ई तैयारी नीट-पीजी मे भी काज देत। संस्थागत रूप से ई परीक्षा कड़ाई से पूर्ण पवित्रता के संग स्वतंत्र आ निष्पक्ष रूप से लेल जाय छैक जै मे भारत के एमबीबीएस एक्जिट परीक्षा के सिलेबस अनुसार प्रश्न आबय छैक। किछ असामाजिक तत्व (अफसोस कि जै मे क्वालिफाइड डॉक्टर सभ सेहो शामिल छैक) ऐ मे धांधली, इंपर्शोनेशन, कदाचार के खूब प्रयास करय छैक, जेकरा मे से बहुतो के संस्थान द्वारा देर-सवेर पकड़िए लेल जाय छैक, जेकरा बाद चोर एजेंसी सभ के किछ होय नै होय विद्यार्थी के करियर चौपट भऽ जाय छैक, ताहि लेल दू नंबरी मार्ग से बचि क रहि, आ सही से तैयारी केला पर परीक्षा मे सफलता भेटबे करत। एफ़एमजीई परीक्षा के विषय मे विस्तृत जानकारी एनबीईएमएस के वेबसाइट पर ऐ पेज पर प्राप्त कैल जा सकय अछि : https://natboard.edu.in/viewnbeexam?exam=fmge विदेश में एमबीबीएस करबाक सीमा 1. संस्कृति आ भाषा में अंतर: विदेश में अध्ययन करबाक क्रम में भाषा आ संस्कृति केर अंतर सँ सामंजस्य बैठाबऽ कठिन होइत अछि। नयका परिवेश आ भाषाक समाझऽ में समय लगैत अछि, जै सँ शुरुवाति समय में कठिनाई होइत अछि। 2. एफएमजीई परीक्षा: विदेश सँ एमबीबीएस कऽ कऽ भारत में प्रैक्टिस करबाक लेल FMGE परीक्षा पास करब अनिवार्य अछि। एकर पास दर बहुत कम होइत अछि, जकरा कारण सँ बहुतो विद्यार्थी के कठिनाई होइत अछि। 3. लागत: जखनकि किछु देश में एमबीबीएस फीस कम होइत अछि, ओतहि कुल मिलाक खर्च (रहब, भोजन, यात्रा, आ अन्य खर्च) बहुत रास होइत अछि। इ खर्च बहुत विद्यार्थी आ परिवारक लेल भार होइत अछि। 4. स्वास्थ्य सेवा सिस्टमक अंतर: कई एक बेर विदेशक मेडिकल शिक्षा आ स्वास्थ्य सेवा प्रणाली भारतीय प्रणाली सँ भिन्न होइत अछि। एकरा कारण भारतीय संदर्भ में चिकित्सकीय प्रैक्टिस के दौरान कठिनाई भऽ सकैत अछि, एफ़एमजीई परीक्षा के तैयारी मे भी कठिनाई भऽ सकय अछि। 5. परिवार सँ दूरी: विदेश में अध्ययन करबाक कारण परिवार आ मित्र सँ दूरी होइत अछि, जे मानसिक आ भावनात्मक चुनौती ठाढ़ करैत अछि। 3. बीएएमएस (BAMS), बीएचएमएस (BHMS), बीयूएमएस (BUMS) वर्तमान भारतीय परिप्रेक्ष्य में बीएएमएस, बीएचएमएस, आ बीयूएमएस केर महत्त्व जकरा डॉक्टर बनबाक इच्छा अछि आ जँ एमबीबीएस में सफलता नहि भेटैत अछि, त ओ बीएएमएस (बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी), बीएचएमएस (बैचलर ऑफ होम्योपैथिक मेडिसिन एंड सर्जरी), आ बीयूएमएस (बैचलर ऑफ यूनानी मेडिसिन एंड सर्जरी) सन वैकल्पिक पाठ्यक्रम केर चयन कऽ सकैत छथि। आयुर्वेद, होम्योपैथी, आ यूनानी चिकित्सा प्रणाली भारतक प्राचीन चिकित्सा पद्धति अछि जे हालहि में अत्यधिक लोकप्रियता प्राप्त केलक अछि। नीट आधारित एडमिशन आ कटऑफ एहि पाठ्यक्रम में प्रवेश लेल नीट (NEET) परीक्षा में अपेक्षाकृत कम अंक पर सेहो एडमिशन भेटैत अछि। जँ छात्रक नीट स्कोर एमबीबीएस लेल पर्याप्त नहि अछि, त ओ एहि वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति केर पाठ्यक्रम लेल प्रवेश ल सकैत छथि। आयुर्वेद केर बढ़ैत प्रचलन (BAMS) आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रणाली केर मांग काफी बढ़ल अछि, विशेष रूप सँ आधुनिक समाज में। बीएएमएस केर बाद छात्र आयुर्वेदिक चिकित्सक केर रूप में प्रैक्टिस कऽ सकैत छथि, आ कतेको राज्य में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त(ब्रिज कोर्स) कऽ के छात्र मॉडर्न मेडिसिन सेहो प्रैक्टिस करऽ में सक्षम होइत छथि। वर्तमान में, आयुर्वेदिक औषधि आ उपचारक प्रति जनमानस में भरोसा आ आकर्षण बढ़ल अछि, जे बीएएमएस केर लोकप्रियता मे वृद्धि कऽ रहल अछि। होम्योपैथिक आ यूनानी चिकित्सा केर विकल्प (BHMS, BUMS) होम्योपैथी आ यूनानी चिकित्सा पद्धति केर प्रति सेहो विश्वास बढ़ि रहल अछि। बीएचएमएस केर बाद होम्योपैथिक चिकित्सक केर रूप में प्रैक्टिस क सकैत छी, आ बीयूएमएस केर बाद यूनानी चिकित्सक केर रूप में कार्य क सकैत छी। भारतक ग्रामीण आ शहरी क्षेत्र में एहि चिकित्सकीय पद्धति केर प्रति विश्वास आ उपयोगिता बढ़ल अछि। सीमा आ चुनौति हालाँकि, एहि पाठ्यक्रम केर बाद आयुर्वेदिक, होम्योपैथिक, आ यूनानी डॉक्टरक मान्यता भेटैत अछि, मुदा एकर भविष्य केर संभावनाएँ आ चुनौती सेहो अछि। आधुनिक चिकित्सा प्रणालीक तुलना में आयुर्वेद, होम्योपैथी, आ यूनानी चिकित्सा के किछु हद तक कम वैज्ञानिक प्रमाण आ सीमित अनुसंधानक आधार पर चिकित्सक केर कम रुझान भेटैत अछि। एहि सँ इ सलाह देल जाइत अछि जे एहि क्षेत्र में सफलता लेल उच्च अध्ययन आ विशेषज्ञता प्राप्त करऽ के प्रयास करबाक चाही। 4. बीडीएस (BDS) डेंटल साइंस में करियर केर विकल्प बीडीएस (बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी) एकटा उत्कृष्ट विकल्प अछि, खास कऽ ओ छात्र लेल जे डेंटिस्ट (दाँतक डॉक्टर) बन' चाहैत छथि। प्रवेश प्रक्रिया आ कटऑफ बीडीएस में प्रवेश लेल सेहो नीट (NEET) केर माध्यम सँ परीक्षा देल जाइत अछि। एहि पाठ्यक्रम में एडमिशन लेल किछु कम अंक पर सेहो प्रवेश भेट सकैत अछि, खास कऽ जे छात्र एमबीबीएस केर कटऑफ में नहि आबैत छथि। करियर विकल्प आ संभावनाएँ बीडीएस केर बाद, अप्पन डेंटल क्लिनिक खोलल जा सकैत अछि, या कतेको सरकारी आ निजी अस्पताल में डेंटल सर्जन केर रूप में कार्य क' सकैत छी। बीडीएस केर बाद छात्र एमडीएस (मास्टर ऑफ डेंटल सर्जरी) केर पाठ्यक्रम सेहो कऽ सकैत छथि, जे एहि क्षेत्र में विशेषज्ञता प्रदान करैत अछि आ बेहतर करियर विकल्प खोलेत अछि। सीमा आ चुनौति यद्यपि, बीडीएस के बाद जॉब केर अवसर किछु सीमित होइत अछि, आ एकर आरंभिक सैलरी सेहो कतेको बार अपेक्षाकृत कम होइत अछि। विशेष रूप सँ जँ परिवार में पहिनहि सँ स्थापित क्लिनिक नहि अछि, त नव क्लिनिक स्थापित करऽ में समय आ पूंजीक आवश्यकता होइत अछि। तथापि, जँ अपन क्लिनिक सफलतापूर्वक स्थापित क लेल जाइत अछि त एहि क्षेत्र में कमाई आ प्रतिष्ठा दूनू बढ़बाक संभावना अछि। 5. बीपीटी (BPT) फिजियोथेरेपी केर क्षेत्र में उभरैत करियर बीपीटी (बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी) आजुक बदलैत जीवनशैली में एकटा उभरैत करियर विकल्प अछि। प्रवेश प्रक्रिया आ करियर मार्ग बीपीटी केर चारि वर्षक कोर्स पूरा करऽ के बाद, छात्र कतेको ओर्थोपेडिक अस्पताल, स्पोर्ट्स मेडिकल सेंटर, या पुनर्वास केंद्र में कार्य कऽ सकैत छथि। फिजियोथेरेपिस्ट केर मांग बढैत जा रहल अछि, खास कऽ कंधा, घुटना, पीठक दर्द, आ ट्रॉमा रिहैबिलिटेशन में, संगहि न्यूरल रोग, पक्षाघात, पारकिनसन आदि रोगी के बीच सेहो। संगहि खेल-कूद आदि के प्रतियोगिता बढ़वा के कारण स्पोर्ट्स के क्षेत्र मे सेहो फिजियोथेरेपिस्ट के मांग मे तेजी आबि रहल अछि। एमपीटी केर बाद अवसर बीपीटी केर बाद छात्र एमपीटी (मास्टर ऑफ फिजियोथेरेपी) केर पाठ्यक्रम सेहो पूरा कऽ के विशेषज्ञता प्राप्त कऽ सकैत छथि। ई विशेषज्ञता छात्रक करियर के आओर उन्नति प्रदान करैत अछि आ विशेषज्ञ फिजियोथेरेपिस्ट केर रूप में कार्य करबाक अवसर प्रदान करैत अछि। सीमा आ चुनौति फिजियोथेरेपी केर क्षेत्र में सफलता प्राप्त करऽ लेल व्यक्तिगत प्रयास आ निरंतर सीखबाक प्रवृत्ति जरूरी अछि। एकर अलावा, एमबीबीएस जेकाँ ई क्षेत्र समाज में समान प्रतिष्ठा नहि पाबैत अछि, शुरुआती सैलरी या कमाई बड्ड कम सेहो भऽ सकाय अछि, मुदा लगातार सिखबाक आ मेहनत करबाक प्रवृत्ति से आगाँ निक करियर बनि सकाय अछि किए त निक फिजियोथेरेपिस्ट केर मांग आ उपयोगिता बदलैत समय में निरंतर बढ़ि रहल अछि। 6. बीवीएससी (BVSc) वेटनरी साइंस में करियर केर संभावना बीवीएससी (बैचलर ऑफ वेटनरी साइंस) एकटा शानदार विकल्प अछि, खास कऽ ओ छात्र लेल जे पशुपालन आ मालजाल केर देखभाल में रुचि रखैत छथि। प्रवेश प्रक्रिया आ करियर मार्ग बीवीएससी कोर्स मे प्रवेश के लेल 12वी के अंक अथवा नीट-यूजी स्कोर अथवा संस्था के प्रवेश परीक्षा के आधार पर होय छैक। बीवीएससी केर कोर्स पूरा करऽ के बाद, वेटनरी डॉक्टर केर रूप में सरकारी आ निजी अस्पताल, पशु चिकित्सा केंद्र, या अपन वेटनरी क्लिनिक खोलऽ के काज कऽ सकैत छी। बढ़ैत मांग आ अवसर भारत में पशुपालन आ डेयरी उद्योग केर विकास सँ वेटनरी डॉक्टरक मांग सेहो बढ़ल अछि। ग्रामीण क्षेत्र में पालतू पशु केर देखभाल आ चिकित्सा सेवा केर जरूरत निरंतर बढ़ि रहल अछि। एहि क्षेत्र में कएल गेल सेवा समाज आ आर्थिक दृष्टिकोण सँ महत्त्वपूर्ण अछि। संगहि शहरी क्षेत्र मे सेहो कुकुर-बिलाई आदि पोसबाक चलन बढ़ल जै से शहरी क्षेत्र मे सेहो वेटनरी डॉक्टर केर माँग बढि रहल छैक। सीमा आ चुनौति यद्यपि, कतेको छात्र वेटनरी डॉक्टर बनऽ में रुचि नहि देखबैत छथि, खास कऽ समाज में वेटनरी डॉक्टरक प्रति बनल किछु टैबू केर कारण। तथापि, जँ ई क्षेत्रक प्रति सही रुचि आ समर्पण अछि, त' ई एकटा सफल आ सम्मानजनक करियर साबित भऽ सकैत अछि। 7. बीएएसएलपी (BASLP) ऑडियोलॉजी आ स्पीच पैथोलॉजी केर बढ़ैत करियर बीएएसएलपी (बैचलर ऑफ ऑडियोलॉजी एंड स्पीच लैंग्वेज पैथोलॉजी) केर कोर्स एहि क्षेत्र में उभरैत करियर केर प्रतीक अछि। प्रवेश प्रक्रिया आ करियर विकल्प बीएएसएलपी केर पाठ्यक्रम पूरा करऽ के बाद, छात्र ऑडियोलॉजिस्ट आ स्पीच पैथोलॉजिस्ट केर रूप में कार्य कऽ सकैत छथि। एहि क्षेत्र में विशेषज्ञता प्राप्त कऽ के छात्र अस्पताल, चिकित्सा केंद्र, आ शैक्षणिक संस्थान में कार्य कऽ सकैत छथि। बेरोजगारी केर कम संभावना एहि क्षेत्र में विशेषज्ञ केर कमी अछि, जेकरा कारण बेरोजगारी केर संभावना बड्ड कम अछि। छात्र एहि पाठ्यक्रम केर बाद एमएएसएलपी (मास्टर ऑफ ऑडियोलॉजी एंड स्पीच लैंग्वेज पैथोलॉजी) आ डॉक्टोरल कोर्स कऽ के आओर विशेषज्ञता प्राप्त कऽ सकैत छथि। सीमा आ चुनौति हालाँकि, एहि क्षेत्र में कार्य कर' लेल विशेष धैर्य आ सटीकता केर आवश्यकता होइत अछि, विशेष क' बच्चा आ वृद्ध लोकनिक इलाज में। एकरा अतिरिक्त, एहि क्षेत्र में विकास आ अनुसंधान केर अभाव सेहो किछु हद तक सीमित अवसर पैदा करैत अछि। ऑडियोलॉजी आ स्पीच पैथोलॉजी के विषय मे हमर अन्य आलेख ऐ लिंक पर पढ़ल जा सकय अछि 8. बीएससी नर्सिंग एवं बीएससी इन एलाइड मेडिकल साइंस नर्सिंग आ एलाइड मेडिकल साइंस में करियर केर संभावना बीएससी नर्सिंग आ एलाइड मेडिकल साइंस केर कोर्स बदलैत स्वास्थ्य सेवाक संरचना में एकटा सशक्त करियर विकल्प केर रूप में उभरि रहल अछि। प्रवेश प्रक्रिया आ करियर विकल्प बीएससी नर्सिंग केर पाठ्यक्रम पूरा कर' क' बाद, छात्र अस्पताल, नर्सिंग होम, आ अन्य चिकित्सा संस्थान में नर्स केर रूप में कार्य क' सकैत छथि। मेडिकल टेक्नोलॉजी केर विविधता एलाइड मेडिकल साइंस में बीएससी/एमएससी केर पाठ्यक्रम रेडियोग्राफी, कार्डियोग्राफी, मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी, एनेस्थेसियोलॉजी, आ ऑपरेशन थियेटर टेक्नोलॉजी जेकाँ विशेषज्ञता प्रदान करैत अछि। ई कोर्स पूरा कऽ के छात्र अस्पताल आ चिकित्सा केंद्र में तकनीकी विशेषज्ञ केर रूप में कार्य कऽ सकैत छथि। बढ़ैत मांग आ भविष्यक संभावना नर्सिंग आ एलाइड मेडिकल साइंस केर क्षेत्र में भारतक बढ़ल जनसंख्या आ स्वास्थ्य सेवा केर आवश्यकता सँ एहि क्षेत्र में विशेष मांग उत्पन्न भेल अछि। जँ छात्र एहि क्षेत्र में विशेषज्ञता आ अनुभव प्राप्त करैत छथि, त ओ एहि क्षेत्र में एकटा सफल आ स्थायी करियर बना सकैत छथि। सीमाएँ आ चुनौतियाँ यद्यपि, नर्सिंग केर क्षेत्र में कार्य समय आ शारीरिक-मानसिक चुनौतीपूर्ण होइत अछि। एकर अलावा, एलाइड मेडिकल साइंस केर क्षेत्र में करियर के शुरुआती में अपेक्षाकृत कम सैलरी होइत अछि, मुदा समयक संग संग विशेषज्ञता आ अनुभव सँ ई समस्या दूर भऽ सकैत अछि। जीवविज्ञान विद्यार्थी केर लेल अन्य पाठ्यक्रम 1. बीफार्मा (B.Pharma) पाठ्यक्रम अवधि: 4 वर्ष प्रवेश परीक्षा: अलग-अलग संस्थान केर अलग-अलग प्रवेश परीक्षा। कैरियर विकल्प: फार्मासिस्ट, फार्मास्युटिकल उद्योग में अनुसंधान एवं विकास, दवा विनिर्माण, गुणवत्ता नियंत्रण, ड्रग इंस्पेक्टर, मेडिकल अंडरराइटर। प्रमुख संस्थान: एम्स दिल्ली, बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU), जामिया हमदर्द, दिल्ली। 2. बैचलर ऑफ नेचुरोपैथी एंड योगा (BNYS) पाठ्यक्रम अवधि: 5.5 वर्ष (4.5 वर्ष पढ़ाई + 1 वर्ष इंटर्नशिप) प्रवेश परीक्षा: NEET, अन्य संबंधित प्रवेश परीक्षा। कैरियर विकल्प: नेचुरोपैथिक डॉक्टर, योग प्रशिक्षक, सरकारी आ निजी अस्पताल, वेलनेस सेंटर, स्पा आ रिसॉर्ट। प्रमुख संस्थान: राजीव गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज, कर्नाटक, स्वामी विवेकानंद योग अनुसंधान संस्थान, बैंगलोर। 3. बीएससी/बीटेक इन बायोटेक्नोलॉजी पाठ्यक्रम अवधि: 3-4 वर्ष प्रवेश परीक्षा: JEE Main, संस्थागत प्रवेश परीक्षा। कैरियर विकल्प: बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च, बायोफार्मास्युटिकल कंपनियां, कृषि बायोटेक्नोलॉजी, जीनोमिक्स, प्रोटिओमिक्स, औद्योगिक जैव प्रौद्योगिकी। प्रमुख संस्थान: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), दिल्ली विश्वविद्यालय, जेएनयू, बायोटेक्नोलॉजी विभाग (DBT)। 4. बायोइन्फोर्मेटिक्स पाठ्यक्रम अवधि: 3-4 वर्ष प्रवेश परीक्षा: संस्थागत प्रवेश परीक्षा। कैरियर विकल्प: बायोइन्फोर्मेटिक्स वैज्ञानिक, डेटा विश्लेषक, बायोइन्फोर्मेटिक्स सॉफ्टवेयर डेवलपर, शोधकर्ता। प्रमुख संस्थान: जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU), दिल्ली विश्वविद्यालय, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT)। 5. बायोस्टैटिस्टिक्स पाठ्यक्रम अवधि: 3-4 वर्ष प्रवेश परीक्षा: संस्थागत प्रवेश परीक्षा। कैरियर विकल्प: बायोस्टैटिस्टिशियन, डेटा विश्लेषक, अनुसंधान वैज्ञानिक, फार्मास्युटिकल कंपनियों में विश्लेषक। प्रमुख संस्थान: भारतीय सांख्यिकी संस्थान (ISI), दिल्ली विश्वविद्यालय, पुणे विश्वविद्यालय। 6. माइक्रोबायोलॉजी पाठ्यक्रम अवधि: 3-4 वर्ष प्रवेश परीक्षा: संस्थागत प्रवेश परीक्षा। कैरियर विकल्प: माइक्रोबायोलॉजिस्ट, अनुसंधान वैज्ञानिक, फार्मास्युटिकल आ बायोटेक्नोलॉजी कंपनी, खाद्य आ पेय उद्योग, पर्यावरण एजेंसी प्रमुख संस्थान: दिल्ली विश्वविद्यालय, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU), बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU)। 7. बायोकेमिस्ट्री पाठ्यक्रम अवधि: 3-4 वर्ष प्रवेश परीक्षा: संस्थागत प्रवेश परीक्षा। कैरियर विकल्प: बायोकैमिस्ट, अनुसंधान वैज्ञानिक, फार्मास्युटिकल आ बायोटेक्नोलॉजी कंपनी, पर्यावरण एजेंसी, खाद्य आ पेय उद्योग। प्रमुख संस्थान: दिल्ली विश्वविद्यालय, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU), बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU)। 8. लाइफ साइंस पाठ्यक्रम अवधि: 3-4 वर्ष प्रवेश परीक्षा: संस्थागत प्रवेश परीक्षा। कैरियर विकल्प: लाइफ साइंटिस्ट, रिसर्च असिस्टेंट, फार्मास्युटिकल आ बायोटेक्नोलॉजी कंपनियां, शिक्षण। प्रमुख संस्थान: दिल्ली विश्वविद्यालय, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU), टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR)। 9. बीटेक इन एग्रीकल्चर पाठ्यक्रम अवधि: 4 वर्ष प्रवेश परीक्षा: JEE Main, ICAR AIEEA। कैरियर विकल्प: कृषि इंजीनियर, कृषि वैज्ञानिक, खाद्य सुरक्षा अधिकारी, अनुसंधान वैज्ञानिक, कृषि उद्योग में प्रबंधन। प्रमुख संस्थान: भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU), तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय (TNAU)। 10. डेयरी टेक्नोलॉजी पाठ्यक्रम अवधि: 4 वर्ष प्रवेश परीक्षा: ICAR AIEEA, संस्थागत प्रवेश परीक्षा। कैरियर विकल्प: डेयरी टेक्नोलॉजिस्ट, डेयरी प्लांट मैनेजर, गुणवत्ता नियंत्रण अधिकारी, डेयरी उद्योग में अनुसंधान आ विकास। प्रमुख संस्थान: राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (NDRI), कर्नाटक डेयरी साइंस कॉलेज, गुजरात कृषि विश्वविद्यालय। 11. फूड टेक्नोलॉजी पाठ्यक्रम अवधि: 4 वर्ष प्रवेश परीक्षा: JEE Main, ICAR AIEEA। कैरियर विकल्प: फूड टेक्नोलॉजिस्ट, गुणवत्ता नियंत्रण अधिकारी, अनुसंधान वैज्ञानिक, खाद्य उद्योग में प्रबंधन। प्रमुख संस्थान: भारतीय खाद्य प्रसंस्करण प्रौद्योगिकी संस्थान (IIFPT), नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फूड टेक्नोलॉजी एंटरप्रेन्योरशिप एंड मैनेजमेंट (NIFTEM), दिल्ली विश्वविद्यालय। 12. बीपीएड (B.P.Ed) पाठ्यक्रम अवधि: 2-4 वर्ष (डिप्लोमा आ डिग्री कोर्स) प्रवेश परीक्षा: संस्थागत प्रवेश परीक्षा। कैरियर विकल्प: शारीरिक शिक्षा शिक्षक, स्पोर्ट्स कोच, फिटनेस ट्रेनर, स्पोर्ट्स एडमिनिस्ट्रेशन। प्रमुख संस्थान: लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान (LNIPE), इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स साइंसेज (IGIPESS), दिल्ली। करियर विकल्प कोना चुनी? 1. अपन पहचान करू: पहिल आ महत्वपूर्ण कदम अछि अपन शक्ति आ कमजोरी के पहिचान कऽ लेब। ई बुझबाक कोसिस करू जे अहाँ केर रुचि कथि मे अछि, अहाँक एटीट्यूड (स्वभाव) आ टेम्परामेंट (मिजाज) केहन अछि, आ अहाँ कतेक प्रतिस्पर्धा (कंपटीशन) करबाक क्षमता रखैत छी। ई आत्ममूल्यांकन अहाँक करियर विकल्प चुनबा में मदद करत। 2. उपलब्ध विकल्पक विचार करू: अपन पहचानक बाद, उपलब्ध करियर विकल्प पर विचार करू। बुझू जे कोन-कोन क्षेत्र में अहाँक रुचि, योग्यता आ ताकत के उपयोग भऽ सकैत अछि। विकल्पक बहुत छैक जेना कि ऊपर वर्णन कैल गेल छैक, तेँ सोचि-समझ कऽ विश्लेषण करब जरूरी अछि। 3. रिसोर्सेज के ध्यान राखू: करियर विकल्प चुनऽ सँ पहिने, अहाँक रिसोर्सेज (संसाधन) के ध्यान में रखबाक आवश्यकता अछि। एकरा में अध्ययनक सुविधा, गाइडेंस, समय आ धनक स्थिति प्रमुख अछि। जँ अहाँक लग पढ़ाई के लेल पर्याप्त समय, उचित गाइडेंस आ आर्थिक संसाधन अछि, त ई विकल्प अहाँक लेल सही अछि। अन्यथा, एहेन विकल्प चुनबाक प्रयास करू जे अहाँक वर्तमान स्थिति के संग-संग भविष्यक योजनाक अनुकूल होइ। - प्रणव कुमार झा [राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड, नई दिल्ली 10.08.2024] अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.८.कुमार मनोज कश्यप- लघुकथा- ओहि पार कुमार मनोज कश्यप लघुकथा- ओहि पार शहर मे टाउनशिप बसि रहल छलै। देखादेखी ओहो एकटा प्लॉट बुक करा लेलक एम्हर-ओम्हर सs जोगाड़ कs कs। सोचलक कहुना ने कहुना दूईयो कोठलीक मकान बना लेत तs मकान किराया बचतै। आ ओहि बचत सs धीरे-धीरे आगू घर सेहो बनि जेतै। घर बनबै के ओ नियार आ जोगाड़-व्योंत करिते छल कि अकस्मात् सुदूर शहर मे ट्रांसफर के आदेश भेटलै। अपना भरि जतेक जे किछु कs सकैत छल से केलक; मुदा ट्रांसफर रूकि नहिं सकलै। दूरस्थ हेबाक परिवार के संगे लs जेबाक अतिरिक्त कोनो द्वारा छलै नहिं! आ तैं घर बनेबाक योजना पर तत्काल विराम लगाबय पड़लै। सोचलक जे परती भूमि मे ताबत किछु गाछे लगा दियै जाहि सs जमीनो सुरक्षित रहै आ दू पाई के सम्पत्तियो ठाढ़ भs जाय। ओ कॉलोनी आब नीक जकाँ बसि कि गेलै; शहरक पॉश कॉलोनी मे गिनती छै! एम्हर एकरो सेवानिवृति के समय लगिचा गेल छै तैं आब घर बनेबाक सुर-सार करय लागल ...... भागा-दौड़ी कs कs घरक नक्शा पास करेलक, ठीकेदार संग तय-तशफिया कs कs अगाऊ तक दs देलकै। मुदा बखेड़ा ठाढ़ भेलै गाछ काटs काल ...... पुलिस जूमि गेलै जे हरियर जिबैत गाछ आहाँ नहिं काटबा सकैत छी। ओ कतबो पुलिस संगे बहस केलक मुदा कोनो फायदा नहिं। आब दुइये टा रस्ता छलै - कोर्ट सs गाछ कटबाक आदेश करबाबs वा जमीन यथास्थिति रहs दै। दुनू विकल्प -भई गति साँप छुछुन्नरि केरी- सन! माथ पकड़ि ओ ओतहि बैसि गेल। किछु फुरा नहिं रहल छलै। आई भोरे लोक जागल तs ओतs ने कोनो गाछ; ने कोनो गाछक डारि-पात बाँचल। सभ अचंभित; एक दोसरा सs पूछारि करैत जे राता-राती ई सभ की आ कोना भs गेलै?!! ओ बाहर गामक हरिजन बस्ती मे घर-घर घुमि रहल छल ..... एकरा बाद थानो पर तs जेबाक छै! -कुमार मनोज कश्यप, सम्प्रति: भारत सरकारक उप-सचिव, संपर्क: सी-11, टावर-4, टाइप-5, किदवई नगर पूर्व (दिल्ली हाट के सामने), नई दिल्ली-110023, # 9810811850, ईमेल : writetokmanoj@gmail.com अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.९.प्रदीप कुमार मंडल 'पवड़ा'- मैथिली फूलवारी थिक प्रदीप कुमार मंडल 'पवड़ा' मैथिली फूलवारी थिक
हरियाणा के फरीदाबाद नगर सऽ सटल बरखल गांव के लग में प्रकृति के मनमोहक बनाबट के बीच, अरावली पहाड़ीक श्रृंखलाक कोरा में बसल बरखल झील एकगोट मानव निर्मित झील थिक । अहि झील के किछ्छैर में बैठि सुमन गांवक जीवन के यादि कऽ, अपना आंखि सऽ कमला-करेह जकां कखनों झरझर तऽ कखनों वेगवती लोर झहराबैत अछि । सुमन किछु दिन पहिले गांव सऽ पहिल बेरि कमाई लेए परदेश आओल अछि । से ओकरा एतऽ मोन नहि लागैत अछि । नगर में कंक्रीटक मकान बीच रहनाहि, कंक्रीटे निर्मित सड़क पर चलनाहि, ओकरा मोन के हरदम विचलित करैत अछि । ओतबहि नहि वो गांवक इसकूलक जीवन, महीस चराबैत काल चरवाहक संग टाइर गुल्ली(गुल्ली डंडा), गद्हा गुरकान, कबड्डी आदि खेल खेलाइत छल । आ कतऽ इ वर्क शॉप में बारह घंटा खटनाहि, ओकरा मोन के वापस गांव जेबाक लेल उद्वेलित करैत छल । से वो छुट्टी के दिन अहि ठाम प्रकृति के अप्पन मोनक दुख कहबाक लेल चलि आबैत अछि । से वो आइयो आओल आ अहि झील के किनार में बैठि, झीलक पानि के कानि कानि अप्पन मोनक गप्प कहैत अछि । ओम्हर सऽ अप्पन प्रिय सहेली गुंजा के संग राधा सेहो प्रकृति के अहि रमणीक स्थलक आनंद लेबऽ लेल आबैत अछि । एकाएक राधाक नजरि सुमन पर पड़ैत अछि । वो रुकि सुमन के लिहारऽ लागैत अछि । राधा के एकाएक रुकनाहि गुंजाके चकित कऽ देलक । वो राधा के नजरि के लक्ष्य कऽ कऽऽ देखऽ लागल जे राधा की देखैत अछि । वो देखैत अछि जे राधा के नजरि सुमन पर जा कऽ अटकल अछि । वो राधा के देह के डोलबैत कहैत अछि- ए राधा । ऊं...! क्या देख रही है ? वो देखो । क्या ? वह लड़का कितना सुंदर है ? हां तो..! ब्याहेगी उससे ? भक्क.....! तो फिर क्या देखना ? चल आगे चलते हैं । रुक न यार ! थोड़ा गौर से देखने दो । अरे लगता है वह लड़का रो रहा है । तो रोने दे । नहीं रे ! लगता है किसी मुसीबत में है । चल न चलकर देखती हूं । राधा गुंजा के डेन पकैड़ कऽ डेनियाबैत सुमन के लग जाइत अछि, आ ओतऽ ठाढ़ भऽ सुमन के देख गुंजा सऽ कहैत अछि- देख रो रहा है न । तो चुप करा दे न । राधा सुमन के कनहा पर हाथ राखैत अछि । सुमन अपना हाथ सऽ राधा के हाथ झटका सऽ हटा दैत अछि, आ अकचका कऽ ठाढ़ भऽ जाएत अछि आ आंखिक लोर पोछऽ लागैत अछि । सामने दू गोट अंजान लड़की के देखि थोड़े असहज महसूस करैत अछि । राधा पुछैत अछि- क्या हुआ ? कुछ नहीं । क्यों रो रहे हो ? गांव का याद आ गया । गांव का....? जी ! कहां के हो ? जी, बिहार के । बिहार के....? हां...! बिहार के किस जिले से हो ? जी, दरभंगा । राधा चौंक कऽ पुछैत अछि- दरभंगा के किस प्रखंड से हैं आप ? जी, बहेड़ी को जानते हैं आप ? मैं भी बिरौल की हूं । सुमन के चेहरा पर खुशी आबैत अछि । इ खुशी अहि लेल नहि आओल जे हुनका गांवक लग के लड़की हुनका संगे गप्प करैत अछि । खुशी अहि लेल आओल जे हुनका मातृभूमि के छी । वो खुशी मुद्रा में राधा सऽ पुछैत अछि- बिरौल में कतऽ घर भेल ? नेऊरी जानते हो ? जी, कोना नहि जानब ? ओतऽ कहियो हावीडीह के राजा हरबा के गढ़ रहै, आ वो अपना भाई बरबा के वो गढ़ देने छल । ओएह ने गढ़ नेऊरी ? अच्छा तो जनाव इतिहास भी जानते हैं ? महोदया ! हम अहां एकहि माटि-पानि परक छी, एकहि हवा सऽ सांस लऽ अतेक गो भेलौंह । दून्नू में पहिचानों भेल, तखनो अहां हिंदीये बाजै थिकीह । इ उचित नहि । अरे साहब ! आप बिहार में नहीं हरियाणा में हैं । हरियाणा में हिंदी बोलना पड़ेगा । कियेक ? यहां हिंदी हीं चलता है । नहि महोदया, एतऽ हिंदी नहि हरियाणावी चलैत अछि । हमरा हरियाणावी नहि आबैत अछि । आब भेल ने । एह दुर्भाग्य अछि बिहारी के । अपनों संग आन बनैत अछि । राधा जखन अप्पन शब्द सुनलक, तऽ बुझहू जे ओकरा बिजलीक करेंट लागि गेल । ओकरा हिया में प्रेम हिलोर मारऽ लागल । मुदा सुमन के मूंह सऽ निकलल अप्पन शब्द वो शब्द नहि छल, जे राधा बुझि लेलीह । वो अपना मोन के संयमित करैत बजलीह- गांव के भाषा बुरबक आदमी बाजैत अछि । महोदया ! पहिले अप्पन नांओ बताऊ । जी, राधा । बहुत प्यारा नांओ अछि । आ हिनकर ? गुंजा ! तपाक सऽ गुंजा बजलीह । बहुत नीक नांओ अछि । हां ! हमरो माई-बाऊ रखलकै छिहो, तऽ सुंदरो हेत्तै ने । अच्छा अंहू बिहारे के थिकीह ? हां ! अहि बेरि राधा बजलीह । कियेक तऽ सुमन के राधा के छोड़ि, कोनो आन सऽ गप्प करब, राधा के नीक नहि लागैत छल । से वो पुछलक जे हिंदी में की दोष अछि ? हिंदी में दोष नहि अछि । हिंदी, हिंदी पट्टी में एकटा संपर्क भाषा थिक । संपर्क भाषाक अर्थ होइत अछि जे, दू आन भाषा-भाषी के बीच ओहन भाषाक प्रयोग, जे दून्नू जानैत होइ । कियेक तऽ वो एक दोसर के भाषा नहि जानैत अछि । अतः काम काज निकालबाक हेतू संपर्क भाषाक प्रयोग केएल जाइत अछि । हिंदी तऽ राष्ट्रभाषा थिक ? गुंजा बजलीह । जी, नहि । हिंदी राष्ट्रभाषा नहि थिक । मुदा राष्ट्रक कामकाजी भाषा थिक । से कियेक ? जखन देश में आजादीक आंदोलन चलैत छल, तखन हिंदी पट्टी के लोक हिंदी के संपर्क भाषा बना कऽ आंदोलन संबंधी गप्प गपियाति छलाह । कियेक तऽ भारत अनेक भाषाक भाषी देश छी । उदाहरण में बिहारे के लियऽ । तखन बिहार में चारि भाषा बाजल जाइत छल । मैथिली, मगही, संथाली आ छपरहिया । आब इ चारो भाषा एक बिहार में बाजल जाइत छल । तहिना यू० पी०, मध्यप्रदेश, दिल्ली अर्थात जतेक दुर धरि मोगल राज कयलक, ओहि क्षेत्र के संपर्क भाषा हिंदी भेल । बिहारो में अंगिको बोललो जाई छै । गुंजा बजलीह । अंगिका कोनो भाषा नहि छिहो । जेकरो इ षड्यंत्रकारी अंगिका कहै छिहो वो मुल मैथिली छिहो । आब देखी लोहो- गंगा के उत्तर गंगा के दक्षिण लोहो लोहो, लिहो भेल्लै, होल्लै होल्लै, होलो सन सिनी छै छै छिक्कै छिक्कै छैक्का छिक्का छिक्की छिक्की छोहो छोहो, छिहो इ जे बोली में समानता छिहो, इ समानता संथाल सीमा रो मधुबनी धरि बोललो जाई छै । इ समानता बाला बोली मिथिला के बहुजनक बोली छिहो । जेकरो लोक ठेठ्ठी कहै छिहो । इ बोली मैथिली के सबसऽ प्रचलित बोली छिहो । हां ! तों सही बोलै छोहो । अहि भाषा के ठेठ्ठी कहलो जाइ छै । गुंजा बजलीह । ठेठ्ठी, ठुठ्ठा, ठूंठ्ठ के मतलब होइत अछि झकरल, मखरल सबसऽ पुरान । जे देखै में कुरुप लागै । जेना कोनो पुरान गाछ । जाहि केरऽ ठांढ़ि पात टुटि जाइत अछि । तखन वो गाछ देखै में कुरुप आ नाना प्रकारक व्याधि सऽ पिड़ित रहैत अछि । ओएह ठेठ्ठी कहाबैत अछि । मुदा मैथिली के इ बोली जेकरा लोक ठेठ्ठी कहैत अछि वो ठेठ्ठी नहि हरियर अछि । मुदा भाषा पर एकाधिकार पाबै लेल जे षड्यंत्र भेल, ओहि सऽ इ बेमार बुझाइत अछि । परिणाम दू-चारि लोक आ बिहार सरकार अहि के अंगिका बना देलक अछि । इ बताना छै जे मैथिली के कतेक बोली छै ? गुंजा बजलीह । कोनो भी भाषा के बहुतो बोली होइ छै । ओहि बोली केरो ओहि भाषाके उपभाषो कहलो जाइ छै । जेना- मैथिली के बोली- नेपाली, सोतिक बोली, सुरजापुरी, ठेठ्ठी । ठेठ्ठी दू प्रकार रो छै। जाहि के बीचोबीचो गंगो माय बोहै छै । अर्थात गंगिया माय के दछिणी बोली केरो उत्तर के लोक गंगपरिया आ दछिणो केरो लोक गंगपरिये कहै छिहो । अच्छा एक बात बताना छै । गुंजा बजलीह । की ? एतऽ कतऽ रहना छै । एस जी एम नगर । ओ...! हमहों सभ्हे ओतही रहै छिहो । आब अपने भाषा में बतियाना छै । अच्छा एक गप्प बताऊ ? राधा बजलीह । की ? एकहि गांव में सोलकन के सभ्ह जाति में बोली भिन्न-भिन्न कियेक अछि ? जेना- छै, हय, हति, होल्लै, भेल्लै, नहि बुझलौंह ? नहि । जाहि प्रकारे बगिया में रंग बिरंग के फूल होइत अछि, तहिना एकहि गांव में मैथिली के रंग बिरंग बोली अछि । हां ! मैथिली फूल नहि, ''फूलवारी थिकीह'' । -प्रदीप कुमार मंडल 'पवड़ा', बाऊजीक नांओ - श्री लक्ष्मण मंडल, मायक नांओ - श्रीमती मंगली देवी, गांव - पवड़ा (इनाई), डाकघर - अरगा, प्रखंड - बहेड़ी, जिला - दरभंगा, पिनकोड - 847105 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.१०.प्रमोद झा 'गोकुल'- नौक प्रमोद झा 'गोकुल' नौक
भोरमे सुरुजक ललका चक्का निकलै से पहिनै राजाक निन्न टूटि जाइ छलै,से आइ जखन दिनकरक ललकी किरिन खिरकी दने पू-झात खेलाय लगलै तखन जाके टुटलै।पजड़ाक दुनू कात नव बिवाहिता पत्नीके तकलक ते ओ निपत्ता । मोन खौंझा उठलै। कहूते इहो कविता हद्द छथि।अपने सङ हमरो उठा दितथि ते की होइतनि? चुप्पे चाप गिरथैन बनैले ससरि गेली। घर से बहराइत देरी औझका ब्रेकिंग न्यूज ते हमहीं बनब! तैसे हुनका की? धरफराके राजा देह पर से ओढ़ना हटाके चारू कात निहारलक ते देखैए टेबुल पर गिलासमे पानि आ कपमे छलियैल चाह अपन स्वभाव भफियैबोक छोड़ि चुकल अछि। आब की करत ओ? उत्तर भेटलै चाहके बेसिनमे फेकिके पानि ढकोसू! फेर मोन कहलकै से ते बड्ड बेस ।मुदा, भोरका चाह फेकनाइ कहुँ आजुक दिन खोचाह ने क'दिए ! आखिर करू की? सरायल चाह घोंटलो ते नै जायत!फेकबहक कथीले ? कनियाँके जा के कहूनगे जे यै कने गरमाके दिय! भीतरसे टोकार मारलकै -नै हौ बाबू! के बिढ़नीक खोताके खोचारय? भैया आ बाबू अङनेमे हेताह!मम्मीके ते नै कोनो डर मुदा भैया आ बाबू …??? एतबा सोचैत देरी मोन फकसे रहि गेलै।जे हेतै से हेतै।सामना ते करैयेके पड़तै।जँ आब कनियों विलम्ब केलौं ते आफद भ'जायत ।बाबू ते जे से भैया टाहि मारिये देताह।हुनको बाबूक सामने हमरा सतबै मे खूब मजा अबै छैन।तेँ दरबज्जा फोलि बाहर भैए जाइ सैह नीक। जैह ओ सोचने छल सैह भेलै।ओसारा सँ निच्चाँ उतरैत देरी भैया इसारा करैत बाबूसे कहलखीन -उठिते गेल अहाँक राजा बेटा बाबू! - वाह!वाह !! गुलबिया निन्न टूटि गेलह की? हद्द करै छह तहूँ ! कहहते ई बेर कहूंँ मनुखक उठै छियै? -सुतली राति तक परहैत लिखैत रहैत हेतै ,तेँ भोरमे मोन असकता गेल हेतै।प्रतियोगी परीक्षा पास केनाइ आइ कैल ऐ लोकक लेल कतेक कठिन भ' गेलैए से नै बुझहै छियै! भैया हमर बचाब मे बजलाह। - जँ से बात छै ते नै कोनो बात। मुदा, दिन मे ते कखनो पोथी उनटबैत नै देखै छियै? - अहाँ भैर दिन इस्कूल मे रहै छियै आ भैया आफीस मे,तखन कोना के देखब! मम्मी से पूछि लियौ जे हम भरियो दिन की सब करैत रहै छी!राजा नम्र होइत बाजल। -ओ ते तोरे पक्ष लेथून! गजोधर बाबू बजलाह। - तखन हम अपन सफाइ मे की कहू! - हौ बाबू! कहै सुनैक बात नै।ई आरक्षणक जवाना छियै।चालीस पचास बला बाजी मारि लैत छै आ अस्सी नब्बे बला मूहँ तैकते रहि जाइत आछि।तेँ मेहनत जमिके करह आ अपन सम्यक लक्ष्य पाबह! अन्यथा समय अछैते कोनो दोसर बाट धय लैह। -एना नै उत्साह भंग करियौ बाबू! लगनसील अहिना रहतै ते कतौ ने कतौ बाजी मारिये लेतै।जावत उमेर छै ताबत लागल रहय दियौ। बेसी चिंता जँ कपार पर लदबै त ने अइ पार रहत आ ने ओइ पार। -आन तरहक कथूक चिंता हम कहाँ दै छियै हौ! मात्र एतबे कहै छियै जे कोनो तरहे बेरा पार कर! समय केहन दुरकाल जा रहल छै से नै देखै छहक! सुविधा बला ते सरकारी नोकरीले लिल्लो लिल्लो भेल छै आ असुविधा बलाक लेल ते सगरो अन्हारे अन्हार। -हँ से ते ठीके कहै छियै।एखन ते अहाँ सोलहो कला ल' के छियै आ कतेक दिन समहारबै। मुदा मुदा एखन से सब सोचक नै छै।मेहनतक फल भगवान देथीन।जो रौ बौवा चाह पीबिके फ्रेस भ, जो! कनियाँ हाथमे कप लेने ठाढ़ि छथून। मूड़ी उठाके राजा केश झटकारलक आ बिदा भ' गेल भनसा घरक ओसारा पर चाह पिबैले। कनियाँक हाथसे चहक कप लैत उलहन भरल स्वरमे ओ बाजल -अपना सङे हमरो उठा दितौं से नै! जे सूतिके उठैत देरी एतेक रमैन आ महाभारत हमरा सूनय पड़ल। -से हम की करितौं ! रैतियो भैरते अहाँ पैढ़ते लिखते रहै छियै। भोरहरबमे जाके सूतल छलौं,तखन हम कोनाके उठा दितौं!दोसर बात जँ अहाँक निन्न हम तोड़ि दितौं ते हमहूँ तोरे समय पर बाहर निकैल पबितौं! ऐ पर राजा मुसकिया देलक। --प्रमोद झा 'गोकुल', दीप,मधुवनी (विहार), फोन -9871779851 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.११.मुन्ना जी- बीहनि कथाकें विवादक नै संवादक खगता छै मुन्ना जी बीहनि कथाकें विवादक नै संवादक खगता छै उस्सर भूमि आ बांझ स्त्री कें लोक उपेक्षित बूझैए।आ बांझ पुरूष ? पते नै।सांच त' छै जे ओ दुनू बेकसूर ऐछ।कसरि छै ओहोन लोकक दृष्टि आ ज्ञान मे जे ओकरा हीन दृष्टिएं देखैए। बेसी खन बस्तुक खोंट होइ सं बेसी दुसबाक प्रवृति दोषी होइछ।आ कखनो काल ओहोन विचार हीनक मगजक सुन्नपना सेहो।कखनो अहंकार त' कखनो स्वार्थ मे अन्हरएल। मैथिली साहित्यक अदौ सं अपन कोनो विधा नै रहै ।प्रयासो नै कएल गेल रहै।प्रारम्भ सं बीसम सदीक नवम दशक धरि आयात,नकल,उधार- पैंच सं काज चलैत रहलै।आइयो एकैसम सदी मे बीहनि कथाकें अतिरिक्त सब विधा नकल वा आयातित छै।भारतीय कथा साहित्यक विधाक आधार अंग्रेजी साहित्य छै।ओना ओहो बांग्ला साहित्य माध्यम सं मैथिली मे पैसल।अंग्रेजी कथा साहित्यक शुरुआत उपन्यास लेखन सं भेल ।कालान्तरे खगतावश शॉर्ट स्टोरी एलै।इएह भारतीय भाषा साहित्य मे कहानी ,गल्प,कथा नाम सं लिखाइत रहलै।इएह कथा फरिछा मैथिली मे स्वतंत्र विधाक रूपमे स्थापित भेलै।पांचम- छठम दशक मे हिन्दी मे कहानी सं आओर छोट रचनाक खगता बूझैलै।त' ओ सब मिनी कहानी पछाइत लघु कहानी लिखैत......लघुकथा पर स्थिर भ' सकल। मैथिली बलाकें अपन कोनो उहि नै।ओ ओकर नकल केनाइ शुरू कएलनि।नीक चीजक अनुकरण बेजए नै मुदा अंधानुकरण अनसोहांत ,ज्ञान हीन आ खतरनाक सन। मैथिलीक तत्कालीन स्वघोषित विद्वान रचनाकार सब नकल त' केलनि मुदा विधागत ओहो शार्ट स्टोरी रहल।यानी कथाक कायान्तरण आ नामान्तरण मात्र। बीसम सदीक अंतिम दशक मे विश्व कथा साहित्य पुन: हल चल मचौलक।आ आब खगतावश 150,100 आ 50 शब्दक कथा लिखवाक प्रयास भेलै ।मैथिली साहित्यक तत्कालीन युवा रचनाकार मैथिली मे सेहो एहेन रचना विधा कें खगता अकानलनि।1988 मे मोन मे आयल अवधारणा 1991 मे प्रस्फुटित आ 1995 मे सर्वसम्मति सं बीहनि कथा नामक नव मुदा मैथिलीक अपन स्वतंत्र विधाक सूत्रपात भैल।जकरा 20 शब्द सं 100 शब्दमे लिखबाक प्रावधान भैल।ऐ मे बीहनि कथाक कथा तत्व ( आरम्भ,आरोह आ चरम)क अनिवार्यता हो।इ कोनो निबंध, संस्मराणादि नै हो।एकर अंत निष्कर्ष सं नै हो।निष्कर्ष पाठक पर ।यानी open ended. 1995 मे जहन मैथिली मे बीहनि कथा विधाक पदार्पण भेलै तहन कथा विधा स्थापित भ' चुकल रहै।तहन मैथिली कथा साहित्य मे अंग्रेजी विधागत लघुकथा (short story) आ तकर आगू बीहनि कथा विधा (Seed Story)।ओइ बीच कोनो जग्गह बांचल नै रहै।ओना ओ देखाउंस वा नकल सं किछु छिटफुट रचना कथाक कायान्तरण आ नामान्तरण क' लघुकथा नामे आयल छलै। 1995 सं मैथिली मे बीहनि कथा लिखब प्रारम्भ भेल ।तहन तीन मास पर आयोजित कथा गोष्ठी मे बीहनि कथा पाठ होमय लागल।आ ओ क्रम जारी रहल।पछाति पत्र- पत्रिका मे बीहनि कथा पठाओल जाय त' संपादक सब नाम बदलि छपबाक कुत्सित प्रयास करथि।2003 मे जीवटता देखौलनि गाम- घर साप्ताहिकक संपादक श्री रामभरोस कापड़ि भ्रमर।ऐ मे श्री राजक " वात्सल्य " बीहनि कथाकें बीहनि कथा नाम सं प्रकाशित क' ।तकर पछातियो संपादक सब विधान्तरण क' छपबाक अनसोहांत काज करैत रहला। विदेह इ पाक्षिक संपादक- गजेन्द्र ठाकुर, अपन 62म अंक,अगस्त 2010मे मुन्ना जीक बीहनि कथा ' निपुतराहा ' छपलक।तखन लेखकक भीड़ मे चाल चुल शुरू भेलै।अक्तूबर 2010 अंक-68 विदेहक बीहनि कथा विशेषांक ( अतिथि संपादक - मुन्ना जी) बहराइते मैथिली साहित्य जगत मे भू चाल आबि गेल।तकर बाद ऐ पर खोद वेद शुरू भेल।आब ध्यान पड़लनि कथाक छेंट लघुकथा, ओइ सं शुरू भेल एकर तुलना। हुनका सबहक अबोधपन आ हास्यास्पद जे अंग्रेजीक Miniature परिवारक सदस्य बीहनि कथा ( seed story) आ कथा,लघुकथा, गल्प, कहानी।सब short story परिवारक सदस्य ।क संग तुलना किए ? तुलना त' एक परिवारक सदस्य वा समकक्ष मे होइत।बीहनि कथा सन सशक्त आ स्वतंत्र विधा कें अस्तित्व हीन आ मुंह दुब्बर सं तुलना।हास्यास्पद ।आब इ क्रम बढ़ैत रहलै। पटना सं प्रकाशित घर- बाहर ,अप्रैल- जुन-2012मे आयल आलेख- बीहनि कथा संसार ।आब यथावत चलैत रहल।ओकर पछाति सोशल मीडिया जहन सक्रिय भेलै तहन ऐ पर ओलवा दोलवा,उकटा पैंची।आ एकरा निरस्त करवाक फतवा संग समृद्ध भेल इ विधा।प्रति रोधक अग्नि रूप देखल गेल 5जनवरी 2019 कें मैथिली - भोजपुरी अकादमी, दिल्ली द्वारा आयोजित बीहनि कथा गोष्ठी पर।किछु गैर साहित्यकार अपन आकाक इशारा पर धरना- प्रदर्शन आ आत्मदाह पर उतरि गेलाह।हमरा सबकें हंसी लागय जे जं साहित्य सं कनिको सरोकार रहितनि त' एहेन विभत्स काज नहिए सोचितथि।ओना नौटंकी बला लोक त' नौटंकीये करत। एवं प्रकारैं बीहनि कथा सीढ़ी दर सीढ़ी बढ़ैत सब किछु फरिछा अन्हार सं इजोत मे आयल।एक पेड़िया सं उच्च पथ पर आबि मोकाम दिस बढ़ैत मैथिलीक एक मात्र अपन स्वतंत्र विधाक रूपमे स्थापित भेल।आब विवाद केनिहार सब थस लेलनि। विवादक समय ओरा गेलै।आब आवश्यक छैक रचनाकारक पाठकक बीच संवादक।जाहि सं ऐ विधाक सब कमी,कमजोरी रेखांकित क' आओर पुष्ट बनाओल जा सकय। एकर शुरूआत 11अगस्त 2024 कें OPC-6,WR Lane,निकट इंडिया गेट पर आयोजित विमर्श सह बीहनि कथा पाठ सं भेल ।जाहि मे एकर विभिन्न पक्षक कमी कें सोझां राखि ओइ पर विचार भेल। सबसं प्रमुख विन्दु छल जे एकर तय मापदण्ड सं बाहर जा किछु रचनाकार स्टीकर बीहनि कथाक लगा दै छथिन।मापदण्डक पालन महत्वपूर्ण आ रचनाकारक पहिल कर्तव्य ।पर जोर देल गेल। आ आगुओ ऐ बात पर ध्यानाकर्षित करैत रहबाक खगता जानि साकांक्ष रहबा पर बल देल गेल।इ निश्तुकी मानू जे जखने कोनो काज दशगरदा हेतै त' ओहि काजकें छिड़िएब स्वाभाविक। आब जन जनक मगज आ ठोड़ पर बैसल ऐ विधाकें ओकर तय मापदण्ड पर नियंत्रित राखि आगू बढ़ैत जायब समवेत जिम्मेवारी ऐछ।सब मिलि संवादहीनताकें दूर क' संवाद स्थापित करैत एकटा श्रेष्ठ आ लोकप्रिय विधाक रूपमे सर्वोपरि स्थान पर ल' जाइ।आ वैश्विक स्तर पर मैथिली कथा विधाक बांझपनकें दूर क' उस्सर जमीन मे आयल हरियरीकें बनौने रही। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.१२.रबीन्द्र नारायण मिश्र- सीमाक ओहि पार (धारावाहिक उपन्यास) रबीन्द्र नारायण मिश्र सीमाक ओहि पार (धारावाहिक उपन्यास) हमर ससुर स्वर्गीय गणेश झा (पण्डौल डीहटोल)क स्मृतिमे, सादर ससिनेह समर्पित!-रबीन्द्र नारायण मिश्र -26- गया आबि तँ गेलहुँ मुदा एहिठाम पिंडदान मोसकिल बुझा रहल छल । हमरा देखितहि जकरे देखू घर बंद कए लैत छल । फल्गुमे तँ लोकक मिस पड़ि रहल छल । तरह-तरहक लोक आ ततबे तरहक पंडासभ पितरसभकेँ पिंडदान करेबामे व्यस्त छलाह। जखन कोनो पंडा हमरा लग ठाढ़ हेबाक हेतु तैयार नहि भेल तँ थाकि कए हम एसगरे प्रेतशिलापर चढ़ि गेलहुँ । औ बाबू! एहिठाम पैर धरितहि चारूकातसँ प्रेतसभ हमरा दिस दौड़ल । जेना कुकुरकेँ देखि कए दोसर कुकुर भुकए लगैत छल,सएह हाल हमर भए गेल। चारूकातसँ प्रेतसभ हमरा गोलिआ लेलक। गजब हाल छल । गयामे नित्य एतेक पिण्डदान होइत रहैत अछि तथापि प्रेतसभ एतहि रने-बने बौआ रहल अछि । भूतक पथार लागल अछि । पंडासभ जे एतेक मंत्र -तंत्र करैत रहैत छैक तकर कोनो फएदा नहि बुझा रहल अछि । सभ भूत तँ ठामहि पड़ल अछि । प्रेतशिलापर कनीके आगू बढ़ले रही कि एकटा बेस सुन्नर,गोर-नारि स्त्रीकेँ जोरसँ मुड़ी झारैत देखलहुँ । चारूकातसँ पंडा ओकरा घेरने मिरचाइक झोंका दए रहल छल । मंत्र पढ़ि रहल छल। तैओ ओ स्त्री काबूमे नहि आबि रहल छलैक । "बड़ जोरगर प्रेत पैसि गेल छैक ।"-पंडा बाजल । "किछु करिऔक, हमसभ बहुत परेसान छी ।"-ओहि स्त्रीक पति बाजल । "देखिए रहल छी जे मामिला कतेक कठिन अछि । अपना भरि प्रयास तँ कइए रहल छी। किछु अहूँ करिऔक ।" "जे कही, से करबाक हेतु हमसभ तैयार छी । मुदा एकरा प्रेतवाधासँ मुक्त कराउ।" पण्डासभ तरह-तरहसँ ओहि स्त्रीक भूत झाड़बाक व्योंतमे लागल छल । हम प्रेतशिलापर ऊपर चढ़ए लगलहुँ । कनीके आगू बढ़ल छलहुँ की सुग्गाक अबाज बुझाएल । सरदार पंडा बँचि गेलाह । संयोगसँ समयपर इलाज भए गेल । हम ओहीसभमे व्यस्त भए गेल रही ।-सुग्गा बाजल । " कतेक दिनपर एकटा नीक समाचार भेटल ।" "आब अहाँ आइ रूकि जाउ । काल्हि हम हुनके पठा देबनि । ओ अहाँक काज करा देताह ।" "ठीक छैक ।" हम सुग्गाक बात मानि वापस होइत रही कि ओहि स्त्रीकेँ एकटा पण्डाक संगे जाइत देखलहुँ । -27- दिनभरिक धमाचौकरीसँ हम बहुत थाकि गेल रही । पूर्वजकेँ मुक्ति करबाक जोगारमे कहीं हमही ने मुक्त भए जाइ। कनिको सक्क नहि लागि रहल छल । सौंसे गयामे हमर प्रचार भए गेल छल । केओ हमरा अपना ओहिठाम रहए देबाक हेतु तैयार नहि छल । हारि कए हम पाकड़िक गाछक शरणमे चलि गेलहुँ । " अहाँ अनेरे बौआ रहल छी । सोझे हमरा लग आबि जएल करू ।" "सोचने रही जे कोनो धर्मशालामे चलि जाइ मुदा सभ फटक बंद कए लैत अछि । सभकेँ हमरासँ डर होइत छैक ।" "हम अहाँकेँ परेसान देखि सुग्गाकेँ पठओने रही ।" "ओ तँ भेटल रहए । सरदार पंडाक हालचाल कहैत रहए।" "आओर किछु नहि कहलक?" "चर्चो नहि केलक ।" "सएह कहू?" "बात की रहैक?" " बात की रहतैक । सरदार पंडाकेँ दलालसभ तत मारि मारलक जे ओकर अंतिम हालति भए गेल। संयोग एहन भेलैक जे महाकाल ओहि समयमे आएल रहथि । हम हुनका गोहरेलहुँ जे एकर किछु करिऔक । हमर बात मानि ओ सरदार पण्डाक जान बँचा तँ देलखिन मुदा ईहो कहलाह जे ई बेसीदिन नहि चलत । बहुत तँ छ मासमे एकर छुट्टी भए जेतैक।" हम थाकल-ठेहिआएल पाकड़िक गाछ लग पहुँचलहुँ। ओ हमरा लेल चाह-पानक ओरिआन केने छलाह । "अहाँ ई सभ कोना केलिऐक?" "ताहिसँ अहाँक कोन मतलब? चाह पीबू आ आराम करू। काल्हि देखल जेतैक ।" सुग्गा अपन सासुर चलि गेल । रातिभरि हम आ पाकड़ि भाइ गप्प करैत रहि गेलहुँ । "सरदार पण्डा के छैक से बुझलहक?" "हम कोना बुझबैक?" "ई पूर्व जन्ममे श्याम छल । मरलाक बाद बहुत दिनधरि अंधलोकमे पड़ल रहल। ओहिठाम तिरपित भेटलखिन। ओएह जेना-ने-तेना एकरा पैरबी कए गया पठा देलखिन । मुदा चालि, प्रकृति बेमाए, ई तीनू संगे जाए । सएह एकरो संगे लागू होइत अछि। जेहने फँचाड़ि ई पहिने रहए, तेहने रहि गेल ।" " सुग्गा कहि रहल छल जे सरदार पण्डा ओकर सासुरक लोक छैक ।" से सुनि ओ हँसि कए कहैत छथि- "एखन थाकल छह । सुति जाह । काल्हि गप्प करब । -28- प्रातभेने हम फेर प्रेतशिला पहुँचलहुँ । ओतए पहुँचितहि कतहुसँ मधुर ध्वनि सुनाएल। किछु देखा नहि रहल छल । किछु बुझेबे नहि करए जे बात की थिक? खैर! आगू बढ़लहुँ । जँ-जँ प्रेतशिलापर आगू बढ़ैत गेलहुँ मधुर ध्वनि ततेक स्पष्ट होइत गेल । हमरा आगू-पाछू केओ कतहु नहि छलाह । मोनमे कनी-मनी डरो होइत छल कि सुग्गा देखाएल । हमरा जान-मे-जान आएल । "की बात छैक भाइ । परेसान लागि रहल छी ।" "औ! कखनसँ मधुर ध्वनिक अबाज सुनि रहल छी मुदा केओ देखा नहि रहल अछि। काल्हि तँ बहुत रास प्रेतसभ एहिठाम घुमि रहल छलाह । कहि नहि आइ ओ सभ कतए निपत्ता भए गेलाह?" "सभ अंधलोक चलि गेलैक अछि । ओहिठाम सभक उपस्थिति हेतैक तकरबादे कतहु जा सकैत अछि । ऊपर जैओ ने सभटा अपने बुझा जाएत ।" "कतेक ऊपर जइऔ । आब तँ डरो लागि रहल अछि।" "डर कथीक लागि रहल अछि?" "से हम अपनो नहि बुझि पाबि रहल छी तँ अहाँकेँ की जबाब देब ।" हमसभ गप्पमे लागले छलहुँ की पाकड़िक गाछ सहटल प्रेतशिलाक लगीचमे आबि गेलाह । पाकड़ि गाछकेँ देखि मोन हल्लुक भेल मुदा ई नहि बुझि सकलिऐक जे ई गाछ होइतहु एना केना चलि फिरि रहल अछि? " किछु सुनि रहल छी कि नहि?"-पाकड़िक गाछ बजलथि। हम जौँ -जौँ उपर जाइ मधुर ध्वनिक अबाज बढ़िते गेल। लागल जेना बहुत दूर केओ गाबि रहल अछि-" ओ जाने बाले हो सके तो लौट के आना... सुग्गा ओहि गीतकेँ सुनि कए भाव विभोर भए गेलथि । मुदा हमरा चिंता होइत छल जे एहन करुणस्वरमे एहन एकांत स्थानपर के गाबि रहल अछि? हमर मोनक बात ओ बुझि गेलाह । "अहाँ अपन काजपर ध्यान दिअ । आओर बातसभ साँझमे गप्प करब ।" "ई कहू जे हमरा ने देह अछि ने कोनो अंग, ताहि हालतिमे हम पिण्डदान कोना करबै?" "ई बात जे आब फुरा रहल अछि से पहिने किएक ने सोचलहुँ । अहाँ जे छी से कोनो आइए तँ नहि भेलहुँ अछि ।" "की बात छैक, आइ अहाँकेँ बहुत तामस भए रहल अछि?" "तामस की होएत कपार । सासुर गेलहुँ जे कनी चैनसँ रहब । तीर्थो कए लेब । मुदा ओहिठाम तँ दोसरे लफड़ा भेल अछि। दलालसभ सरदार पण्डाकेँ पिटि देलकै, तहिआसँ ओ रहि-रहि कए बड़बड़ाइत रहैत छथि । ककरा-ककरा ठीक करबै ।" "बात तँ सही कहैत छी । बेसी परेसानी कइओ कए की होइत छैक? जे हेबाक सएह होइत छैक ।" कनीक आगू बढ़लहुँ तँ काल्हि बला मौगीकेँ फेर ओहिना देखलिऐक । ओ सभ रातिभरि मंत्र-तंत्रमे लागल छल तैओ भूतक छाया ओकरापरसँ नहि हटल रहैक । हम आगू बढ़ैत गेलहुँ। सुग्गा पाकड़िक गाछक संगे हमरा मदति हेतु चलैत रहलाह । कहुना-कहुना कए हम प्रेतशिलाक शिखर धरि पहुँचि गेलहुँ । जेठक दुपहरिआ छलैक । टहाटही रौद छल । घामे-पसीने हम बेहाल रही । पाकड़िक गाछ अपन छाहरि चारूकात पसारि देलाह । सुग्गा सेहो गीत गाबए लागल-"पंछी जपए हरिनाम बिरिछ पर ।" "हमरा नहि रहल गेल । भबा कए हँसी लागि गेल ।" "की बात छैक भाइ! बहुत जोरसँ हँसि रहल छी ।" "ई पराती गाबक समय छैक?" "समयक हिसाब हमरा-अहाँपर थोड़े लागू होइत छैक?" "से किएक?" "जाबे हम अहाँ देहसँ बान्हल छलहुँ ताबे नेनासँ बूढ़ होइत रहलहुँ । सदिखन समयक प्रभावमे रहलहुँ । आब की होएत?" "ई तँ अहाँ विचित्र बात कहि रहल छी, सुग्गा भाइ! " "हमरा होइत छल जे अहाँकेँ अपन सीमा पता अछि।" "आइ तँ अहाँ रहस्यात्मक बातसभ कए रहल छी ।" "हदे भए गेल । हम तँ ओएह कहि रहल छी जे बस्तुतः हम-अहाँ छी । हमसभ समयक सीमाक ओहि पार छी । तेँ ने सौंसे गयामे केओ पिण्डदान करेबाक हेतु तैयार नहि भेल ।" सुग्गाक बात सुनि-सुनि हमर माथ जोर-जोरसँ टन कए लागल । हम ठामहि बैसि गेलहुँ। हमरा अपसिआँत देखि सुग्गा हमर लगीचमे आबि गेलाह । पाकड़िक गाछक पातसभ जोर-जोरसँ हिलए लागल । हम किछु नहि बुझि रहल छलहुँ । -29- रातिमे पाकड़िक गाछेपर रहि गेलहुँ । भोरे निन्न टुटल तँ सुग्गा पाकड़िक गाछपर बैसल हरिस्मरण कए रहल छलाह। चारूकातक माहौल हुनकर मधुर ध्वनिसँ मनोरम भए रहल छल । सूर्य भगवानक तेज भोर होइतहि प्रखर भए गेल छल । सुग्गाक भजन सुनि पाकड़िक गाछक पात-पात आनंदमे झुमि रहल छल । एहन नीक भोर सभदिन होअए । हुनकर भजन समाप्त भेलनि । ताबे केओ भफाइत चाह लए उपस्थित भेल । "चाह पिबि लिअ ।"-सुग्गा बजलाह । चाहक संगे गप्प-सप्प सेहो शुरु भेल । "हमरा नहि बूझल छल जे अहाँ एतेक नीक गबैआ छी।" "अहाँकेँ बुझले की अछि? " से कहि ओ भभा कए हँसि देलाह । हमरा लोकनिकेँ हँसी ठट्ठा करैत देखि पाकड़िक गाछ सेहो लाड़ि देलथि। "की बात छैक? आइ भोरे-भोर बहुत प्रसन्न लागि रहल छी। लगैत अछि सासुरमे बहुत मान-दान भेल अछि ।" "संयोगसँ हमर सारि आबि गेल रहथि । गप्प-सप्पमे समय नीकसँ कटि गेल ।" "आब खोललहुँ ने असली रहस्य । तैँ एतेक मधुर गीत निकलि रहल अछि । " "अहाँकेँ तँ बुझले अछि ।" ओ हँसि देलाह । फेर हमरा दिस इसारा करैत कहैत छथि- “अपन पिपही सम्हारू । हम एकरा कतेक दिन धरि धेने रहब?" से कहि ओ दिव्यशक्तिसँ पूर्ण पिपही हमरा हाथमे पकड़ा देलाह । हम आश्चर्यचकित रही जे ओ एतेकदिन धरि ओकरा केना रखने रहलाह । हमरा तँ बिसरा गेल छल जे हमर पिपही हुनके लगमे अछि । प्रेतशिलाक शिखरपर पिपहीमे गजबकेँ चमक लागि रहल छल । हमरा मोन भेल जे एकर कोड नम्बर पाँच दबा कए देखैत छी । एक-दू-तीन तँ कए बेर देखि चुकल छी । हम सएह करैत छी। से करितहि हमरा मुँहसँ निकलि गेल -"अद्भुत,आश्चर्य! चारूकात अनेकानेक ग्रह.नक्षत्र,तारा मंडल सभक शृंखला ओतए निकलैत देखा रहल छल । दिव्यलोक,अंधलोक सहित तमाम ग्रह नक्षत्रसभ ज्योतिर्मय भए रहल छल । लगैत छल जेना समस्त सृष्टि एकाकार भए गेल अछि । एहन अद्भुत दृश्यक कल्पना हमरा नहि छल मुदा से हम सद्यः देखि रहल छी । तिरपित,शरद,श्याम,मंजुषा,रागिनी,निशा, ज्योतिषीजी, विमला, प्रभु,सभ एक-एक कए प्रेतशिलापर उपस्थित भए गेलाह। आगू-आगू महाकाल चलि रहल छलाह। सभ मुक्तिक कामनासँ प्रेतशिलापर हाकरोस कए रहल छलाह। से देखि महाकाल जोरसँ हँसलथि। "ककरा-ककरा मुक्त करबह? " -से कहि ओ जोरसँ ठहाका देलाह । जाबे हम किछु बुझि सकितहुँ ओ निपत्ता भए गेलाह । हम बहुत परेसान भए गेलहुँ । पिपही कोड नंबर ९ दबा देलिऐक । तुरंत कतहुँ सँ अबाज आबए लागल - "ई अहाँक अंतिम प्रयास अछि । जँ फेर एना करब तँ ई पिपही स्वतः बंद भए जाएत।" "हमरा पिपही नियमसभ बिसरा गेल छल । आब एहन गलती नहि होएत । " लागल जेना एकाएक सभ किछु बिला गेल । हम पाकड़िक गाछ पर सुग्गा लग पहुँचि गेलहुँ । हमरा परेसान देखि पाकड़िक गाछ कहए लगलाह - "हमरा बुझाइत अछि अहाँ बुते पिण्डदान नहि पार लागत।" "हम अपनहुँ नहि बुझि पाबि रहल छी जे आब की करी, कोना करी? एतेक प्रयास कए प्रेतशिलाक शिखर धरि गेलहुँ । ओहिठाम तँ सौंसे सृष्टिए आगू आबि गेल । ककर- ककर पिण्डदान हम करब ।" " अनकर गप्प छोड़ू । पहिने अपन पिण्डदान तँ करबा लिअ । "-हुनकर बात सुनि हम गुम्म पड़ि गेलहुँ । "पण्डोसभ सएह कहि रहल छथि ।" "अच्छा जे हेतैक, से हेतेक । आब साँझ पड़ि रहल छैक। चाह-पान करू । आराम करू। काल्हि देखल जेतैक । ताबे गरम-गरम चाह आबि गेल । हम सभ चाह पिनाइ शुरु केलहुँ । एकाएक सुग्गा भभा कए हँसए लगलाह । "की भेल?" "की कहू? हमर सारि तँ पछोड़ धए लेने छल । बहुत मोसकिलसँ एहिठाम आबि सकलहुँ। "हम ई गप्प नहि बुझि पाबि रहल छी जे अहाँ सभ के छी? कखनो सुग्गा बनि जाइत छी। कखनो पाकड़िक गाछ भए जाइत छी । कखनो सासुर चलि जाइत छी । आखिर एकर रहस्य की छैक?" -हमर सभक छोड़ू । अहाँ अपने के छी से बुझल अछि? हाथ-पैर किछु छनि नहि आ चललाह अछि पिण्डदान करए?- सुग्गा चौल केलक । -30- साँझमे हम ,सुग्गा आ पाकड़िक गाछ गप्प-सप्प करैत रही। "अहाँ दुनू अपन रहस्य किछु खोलबै कि संगे लेने चलि जाएब?"-हम पुछलिऐक । "अच्छा सुनू । ई बात बहुत पुरान अछि । हमर नाम छल रूप राय । भैयारीमे हम जेठ रही । हमर सभक पिता मुकुंदपुर सहरमे मानल व्यापारी छलाह । सभ तरहेँ संपन्न रहथि। क्रमशः हम जबान भेलहुँ । हमर बिआह मुकुंदपुरक लगीचेमे एकटा बेस प्रतिष्ठित परिवारमे तय भेल । धूमधामसँ बिआह भए गेल । बरिआती बिआह करा कए वापस जाइत रहए । संगे कनिआ सेहो रहैक । मुकुंदपुरसँ कनीके फटकी सभ सुस्ता रहल छल । संयोगसँ एकटा महात्मा ओतए ध्यान करैत रहथि । बरिआती सभ किछु लफड़ा केलक । महात्माजीक ध्यान टूटि गेलनि । ओ बहुत क्रुद्ध भए गेलथि । क्रोधसँ हुनकर आँखि लाल-लाल भए रहल छल । ओ तामसे व्यग्र छलाह । हमसभ हुनका बहुत नेहोरा केलहुँ मुदा ओ शांत नहि भेलाह। आ तुरंत हमरा श्राप दए देलाह "तोरा लोकनिक दुष्टताक फल अवश्य भेटतौक ।"-महात्मा बजलाह । ओ कमण्डलसँ पानि निकालि कहैत छथि- "आइ दिनसँ तूँ ठामहि पाकड़िक गाछ भए जेबह । " ताबते कनिआ सामने आबि गेलि। -सरकार माफ कए दिऔक । धोखासँ गलती भए गेलेक। हमसभ अहाँकेँ नहि चिन्हि सकलहुँ । हमरा उपर दया करू । हम एतेकटा जिनगी कोना काटब?"- से कहि नवकनिआ जोर-सोरसँ कानए लगलीह । महात्माजीकेँ दया आबि गेलनि । "हमर श्राप तँ वापस नहि भए सकैत अछि। एकरा पाकड़ि गाछ बनए सँ आब केओ नहि बचा सकैत अछि । तूँ दिव्यलोकमे राजनर्तकी भए ओतहि सुख करबह । कालान्तरमे तोहरसभक फेर भेंट होएत ।" "हमरा सभसँ बहुत गलती भेल । हमर उद्धार कोना होएत?"-से कहि हम हुनकर पैर पर खसि पड़लहुँ। -तूँ इच्छाधारी भए जेबह, इच्छानुसार अपन देह बदलि लेबह। जतए चाहबह आबि जा सकैत छह। कालान्तरमे तोरे गामक एकटा बच्चा तोहरसभक उद्धार करत।"-से कहि ओ महात्मा लुप्त भए गेलाह । बरिआतीमे हाहाकार मचि गेल । ने ओतए बर छल ने कनिआ । बरक भाएक सेहो अता-पता नहि रहैक । देखिते-देखिते मुकुंदपुरमे एकटा पाकड़ि गाछक उदय भेल । तहिआसँ ओ गाछ गामक समस्त घटनाक जीवंत गबाह बनि अपन ऊद्धारक प्रतीक्षा कए रहल छल। ओकरा एहि बातक ध्यान नहि रहि गेल रहैक जे ओ बालक के अछि जे ओकर उद्धार करत । क्रमशः समय संगे रमि गेल । बात तँ विचित्र छलैके। पाकड़िक गाछ चलि-फिरि रहल छल। सुग्गामे सभटा चेतना छलैक । एहि हद धरि ओ बुझैत छल जे सासुर पहुँचितहि सभकेँ चिन्हि गेलैक । मुदा ओ तखन पकड़ा गेल जखन फेर सुग्गाक भेख धए सासुरसँ वापस होइत रहए । अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। पद्य ३.१.प्रदीप कुमार मंडल 'पवड़ा'- गे मम्मी तों कियेक कानै छेंऽ? ३.२.प्रमोद झा 'गोकुल'- तिरंगा ३.३.प्रणव झा- २०४७ मे हमर सपना के भारत ३.४.राज किशोर मिश्र- श्मशानक फूल ३.१.प्रदीप कुमार मंडल 'पवड़ा'- गे मम्मी तों कियेक कानै छेंऽ? प्रदीप कुमार मंडल 'पवड़ा' गे मम्मी तों कियेक कानै छेंऽ?
गे मम्मी तों कियेक कानै छेंऽ ? हम छी सुतल तोरे कोरा, दागक नोआं बनल तिरंगा देखही केहन भेल भाग्य मोरा ।
हम शहीद सरहद पर भेलौं घाहिल बनि गिरलौं हम धरा दस-दस के एकसरे मारलौं दुश्मन देह बरसेलौं अंगोरा ।
कर गौरव हमरा पर मैयो पुत कपुत नहि भेलौ तोरा, गे मम्मी तों कियेक कानै छेंऽ ? हम छी सुतल तोरे कोरा ।
बाऊक आंखि लोराएल लागै छै बहिन दुलारी हकड़ै ओसारा, केकरा बान्हबै हाथ हौ भैया ? राखी रेशम के डोरा ।
भाई सहोदर सेहो रोबय छै कहै भैया छोड़ि गेला, गे मम्मी तों कियेक कानै छेंऽ ? हम छी सुतल तोरे कोरा ।
हंसि रहल मोर प्राण पखेरू विहुंस रहल छौ अत्मा मोरा, खुशी सऽ माता देशक ऊपर प्राण निछाओर भेल मोरा ।
हम छी वीर भारत भूमि के हमरा सऽ नहि केयो बरका, गे मम्मी तों कियेक कानै छेंऽ ? हम छी सुतल तोरे कोरा ।
-प्रदीप कुमार मंडल 'पवड़ा', बाऊजीक नांओ - श्री लक्ष्मण मंडल, मायक नांओ - श्रीमती मंगली देवी, गांव - पवड़ा (इनाई), डाकघर - अरगा, प्रखंड - बहेड़ी, जिला - दरभंगा, पिनकोड - 847105 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.२.प्रमोद झा 'गोकुल'- तिरंगा प्रमोद झा 'गोकुल' तिरंगा
विजयी विश्व तिरंगा हम्मर युगयुगान्तर तक फहरायत। घर आङन नद नदी पहाड़ समुद्रोमे सगर्वित लहरायत ।। अर्व कोटि चालीस जनक प्रण ध्वजमे प्राण भारतक अनुखन। जे ढीठ डीठ देखौत पीठो पाछाँ हरब प्राण तहिखन तकर तत्क्षण।। ध्वजमे समाहित मातृभूमि हित उर्जित उर्मित उत्सर्जित गाथा । हरित भरित सुरभित भीत रहित जलधि तरंगित उच्छल यश माथा ।। गंगा यमुना सरस्वती सम शोभित भारत माताक हाथ हमर तिरंगा। चन्दन रोली फूल लै पूजब सतत वन्दे मातरम केर जय ध्वनि संगा।।
-प्रमोद झा 'गोकुल', दीप,मधुवनी (विहार), फोन -9871779851 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.३.प्रणव झा- २०४७ मे हमर सपना के भारत प्रणव झा २०४७ मे हमर सपना के भारत सपना के भारत केहन होय अनमन हमरे जेहन होय स्वच्छ, सुंदर आर खुशहाल भेंटये जत्त सबके नेह दुलार। कलकल नदी आ सुंदर वन सुंदर धरती आर गगन नीक नीक स्कूल, निम्मन घर भेटय खुशी जत्त दुनिया भैर । रंग रंग भोजन, कपड़ा लत्ता इस्कूल जाय सब धिया पुत्ता ज्ञान विवेक में सबपर भारी खेल कूद में रहब अगारी। ज्ञान विज्ञान केर बात जत्त होय शोध आ खोज दिन राति जत्त होय नै ककरो होय किनको भय सत्या, न्याय के होय सदिखन जय। दुनिया मे भेटय मान सम्मान हम्मर भारत देश महान । - प्रणव झा [राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड 13.08.2024] अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.४.राज किशोर मिश्र- श्मशानक फूल राज किशोर मिश्र श्मशानक फूल ओ तँ सुंदर फूल छै, हँसब, मुसुका एब ओकर स्वभा व, मसा न ओकर जन्म-स्था न ,मुदा अघो री सन नहि छै मनो भा व ?
चि ता क चि रि ङ बसा त लऽ , सुकुमा र पँखुड़ी पर धऽ सैँतल, नि शा भा ग रा ति मे धधकैत श्मशा न-अग्नि क धा ह ऐँठऐँल।
हँसमुख पुष्प अछि ,प्रत्यक्षदर्शी , नश्वर जी वक देहक अंत, जगतमो ह मे लो क सम्मो हि त , कपटी , धूर्त, ज्ञा नी , धनमंत।
देहक छा उर केँ एक्कहि रंग, भस्म भऽ गेल सभटा अलङ।
श्मशा न मे नि त्य जरैत अछि , अभि मा न ,कहि ओ धन-सेआख, सुंदर सुकुमा र ला वण्य रूप, कहि ओ हथकंडा , रुतबा , धा ख।
वि धि करी सन कठि आरी सभ, मृत देहक करथि औपचा रि कता , मो हक टुटैत जमल आवरण, अखरैत कि नको मृतक-रि क्तता ।
ओ कुसुम, हँसअओ कि मना बअओ शो क? कऽ की रहल अछि , अपेक्षा लो क?
नि त्य हो इत अछि एक्कहि बा त, जगतक अछि जे असल यथा र्थ , देखि रहल अछि श्मशा नक फूल, जि नगी क जे सद्यः फलि ता र्थ।
अचि आक छा उर आ चि रा इन गंध, ओ फूल आब भऽ गेल बैरा गी , सुख-दुः ख के सम भा ओ मो न मे, भुवन मे ककरो कि ओ नहि भा गी ।
ओही फूलक बन्धु-बा न्धव सभ, अछि जे सभ उगल को नो आन ठा म, मो हि नी -मा ला , को नो भा षण-मंच पर, को नो सभा गा र, को नो बा बा धा म।
श्मशा नक फूल भऽ कऽ , हँसब नहि ओ छो ड़लक, कहि ओ सुनैछ झौ हरि ,कहि ओ समदा ओन संग ढो लक।
ओ ने तां त्रि क, ओ ने अघो री , श्मशा न सँ ओकरा नहि को नो स्वा र्थ , बि हुँसैत फूल , भऽ गेल अछि ज्ञा नी , देखि -देखि मर्त्य लो कक यथा र्थ।
देखि रहल अछि , ओतय सत्य केँ ओहि ना घूमैत, लो कक मो न केँ पवि त्र हो इत , छै जकर अपैत।
उड़ि आइत मा या ,देह-छा उर संग, नि ठुर सत्य प्रत्यक्ष, ओत्तक फूल केँ को न दुवि धा ! खुजि गेल छै ज्ञा नक अक्ष ।
मसा न मे कुसुमि त ओ फूल ! सि खि लेलक अछि जि नगी क री ति , नि र्वि का र भऽ बि हुँसैत रहैछ, आ' ओत्तहु परसैत रहैत अछि प्री ति ।
ओ ,मृत्यु-घा ट पर ,जि नगी क फूल, हँसैत -बि हुँसैत आ' मि टबैत शूल।
कुसुमक नेत्र कतेक सुंदर छै ? बि हुँसल मुखक ला वण्य, मरघट मे उदा सी क प्रभा ओ त' ओकरा पर छैक नगण्य।
ओ तँ ओना अछि जगतसौं दर्यक प्रति नि धि , देखि रहल अछि जि नगी क अन्ति म परि धि ।
नि त मृत्यु देखैत मसा नक फूल, हँसैत अछि ,मुसुका इत अछि , जि जी वि षा छै तेहेन ओकरा मे, जि नगी लेल औना इत अछि । अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। विदेह ४०१ म अंक ०१ सितम्बर २०२४ (वर्ष १७ मास २०१ अंक ४०१) || 105 106 || विदेह (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) www.videha.co.in
ae 3 ee
जि is
Wa) o oe eae ne Me Seem ihc ig La Poa i =~ A सर » ~~ ie 7 fai aes SS “९ A Be ee ei. ris gas ; ees det a freee a
काकासाहेब का eo, प्रभाव vee ff 2 me = Ww रे 09-5- Ik
! om | ‘ie Cail था %
afe ware aT सीन शिशिता Are जशाशना , MANS a Ores Ba शव Afar Bag OT AAA DIS ASS , at शिशिताझवक fap any avs । २०४७ TH शिशिता AVES AAAS जुशाशनां wa THEA WAMAD WHT अन्नभ Aaa, Aft कर्न आ APA cies wre | APs FT Samy शिशिता BID FASTH AS | KKKKKK नाम - ATTA AA कर्न ,निजाक नाग - Yo ATI तात के ,याऊजाक नाम - Yo Gat ral , A - CHES, Cotto. facets, , feat - maw Piast -जाऊत्कांड़व, OMIAZS ad, Oa GS are ऊीउिशा Email - karnpni@gmail.com .mobile No. 76777956. WATS CATS ४. 4 eget are CHS SMS <A GI Sry fiPy - ठियवांउखि APF 958s 2.4 eae IP एगेशिती -Glo GAY Shere - शिशितां AISSTS ATA -SSAG 3. अशित UAT Aas sifSert -अशित UIST VETS, FATA - 9५% 29 8. CHAT जाठिट -जैशिशुर शविष्य -cssie Pre facam -सी AAT HA ABTN-SHAw eee: ७. CUM ACHAT IS AAT - AfSo AT BAAtA Req -SSUR BREKRKK
नाजाक Nit AACHIA जैं VOM | SPA AM io THIN CIA "TAR" OH ASA HAMAS WHY a WAM जजाशठि Bare ७ say शिशिता avers TT POOP AIA HA | God Wor शव APA one wa | waste जन्िधाव तय अत शिशिता ars aay ot mete 2 ores a शिथिताअवक Aer HHP Nit Orcer Paty , War Ale we शिशिता area Aa ar Ae शिशिताशवक voter QF Wa | 20 GA 9०४३ एप SIS ASV Starsiaay तय afer अनवीकवीदा cane aT wr wed HAMAD AW WAAAY BABI Glo Mata dP Bae | aftans wWorifs who Pua SS W इतशि। «=f afane ff aa va at Anas ५ fat A wal अथन aff 32 ST afaane doe va OF Ae | fe aan A af cr २९ fa २००३ MH Afet vale UNOP Wass wy saps w Aa Daa wa | AAT WPM आ WANG are Was CAC GMa CH तनाजव जुशान CHAPS |
mess aM ata जजोशठि vemos sors fie wae | उशन ass SN तय WCHL Dae Asif WAT TVA | जात 9३४७ OT afe Faia तय ACH BA WHA | OSS AIM SAAT 92७१ HSA ANAT तय ACHAT WA | Tears sora fe & am yee wd Gis fears Bes Me ar रुखिनाथ fie SPs GSS WIS Wales | af wa शटाजछाक after छत wm AfSat & जाटठिटिक VIS AST ssua TT Wifes अकोपनशी F faq , wat शिशिता वाजाक we नठि Fla जकत | PUVA वाजाक VSI A SCO WA AAA , we am ata oasis शिथिता ao जधर्स wf, wastes Aft fran , शिशिता was शन्शिन , शिशिता ताजा Aatet Ot, शिथिता mee शवि्षण FAT or HA SIN AA | apa was शिशिता aor we जशिजिक AMAT 9४४० एप Wa | GT Hig APY, Glo wel THA, Glo धनाकन SHIA , AAT Wr जजुशाशक Wry BAS | Gt GSN Vala fae & प्यशिता
HITS Asa AAT AAT BS aa | थार्मिक WMA , AA, कर्मकाठे,धर्मवाज , DI, APA , ans, sin, rar, जोठिट confess , आंशत्तन आपि जगह ANAS अशाशनक Aaa ay | जाटिं प्य fast ort ट्लाकनिकक WA orcer शिव | ya Wasa DT aa a तशेशितीक acs IAT शुद्याज Ae SA wa | fe we WAS Mt HATA OBIS CT HE AMAT CET CTT ay | afats fer wa थक WAS MAVHST NEMA WA | जायाजिक WAST Ta $450 Hl Wa UA WT Alfa vest wa , ve A way sae अधिकारी. waa ठविर्जिंट cma ARs aga शविश्रूठिऊ एशेशिती qaraet at PIAA WA छत, TH गलवाजाधथिवांजक WAS OF BUS | MS HAST शव WI CNCSSH AVIS BA | ow WAT 9299 एप WOH तय Ales शलाजजाक TATA MAT WI | OSA AM ०७ AAA 9०४४३ TH ATA Ws AAs Wa | s¢ GT 929७ एप कार्युकाविंगी wis wae sar wa alfe Bart SH Bags Ha GM छत | 2 HOW 9499 एप एशेशित yer काोर्यकोविनीक aaa qanea TIT | | NOUS BAMA WNT GPA 7A WRN बैन | गठावाजाधिवांज aes free
SIA आ छीन जैं Orel शिवेउ ale | त्ीवटय सेजाड़ी शनि aq fafer Day OT eq | SAIS एस शन्मवठण Aor aide ade wet ffs अकाथिकान wR CAT | आंख H He Ha Fae शठित्त aa sore, aA VASA, आ Aiea निश्नि CT PICT THU AE Bl | AACN Ao आते ago snas BAA एप Ava OAT TI CH BAR लॉशन AT शिशिता cr ठिवन्नजांक Fora We Tas Hat afe विनि or fey शवित्नऊँच wa | Saad OT एशेशिती ma FT AS | BO SN A Vas ARIA JF APA Pia alae YA AAT Get AT BAHT AG | wn wife cr शठदित्व WAS WAT कथ HW छत | ay safe ७ me, धर्म a जोडिक ym FOS AG ass siyafes , mfefes ar शोर्िक WAM जन्नठक WIWDAS wWaIpor यठज्ज Say Oa | fe WISTS Noga सिशिऊ za {oho Bare | WAT IT aN RAs ज्ञाखित्न शअत्नशिऊ BA Ge H आशाव AAS वठि HS | AE AT Ma LIP VIP AfSx wA oPa BA GH जांधावटना AAAIN TAN SPST जुशान Fert HR PPA A | यालावाजाधिवाज वात्यवव Pre जागाजिक
FAI याजों जन्न GAS Heicao Bare | लेऊनश TAIT, न्ुटनावनात्कोशिनिवण , VESTS आ AAMT HT OS GAS HH WAS ATH उंनृत्तीथिऊ Sa TAA AS | AGIA SAP AHHH PAA A mol oes AS TH Udi PN Al Wao BI | Wat ASTON WA TT OA | SAA A aA or TAS APTS Brat शव MGA | जाना ASIN नृष्धित्काण 4 at छाोवि जाग oT ATS Cra - शठित शर्त HET At, TAHT Gea at Aret , THT WAT Tat आ छोविय at Are | ABT OT BGA, CA want , wat aad , wre J INT आ AST OT त्लाजश्ववी AIT A | MAAS अनन 'शॉज fafer ale carpPar शिशिताझव J उिवन्नाजां Seq Go aie | Ars AS 3a afte fast WAM AN H GAA GT ale | निन्ि Ne RAN ASA एशेशिती विशिक त्िकाज ato fafa 4 TAY ate manera fifties Ges AST UTS TI ASIST TONS Sat fe विनिक srr afeafe BA TAA छत , OS CHAT विश्िक spore fe निनि शव नठि aos Ale aft ffs तिशिऊ asp oot
P प्वेथिवी-धक Preracansa Jou FAB AAA APH ATA आ wore Tare aim cnet or शिशिता वाजाक wart wa ais | wai ore a शिशिता aa a ars, aT a ASS Gos frst ठिंगातश आ मशिन मिले stot Ah afa शजवत TAT OT SS । ASIN आ आशात्पयिक corel त्य शिशिता asa fame नाग जैं Orcer Baas ATG | aA aie fame, SU आ ay GAM —&H श्रिशिता Baas Wt A OA | TS WHF GI कथा Aphis ae एज AA नाम जैं थक St Aen Bale OH AAT GIP WA ZO शव WITT AS KPA | cS fe 8a TH AAS NAG OA । शिशिक Gonfs BAS, JAAN, MA AW AY Ba | WAST Haat areat एताकनि.. जद Gos area | paws
fade ४०१ म अंक ०१ सितम्बर २०२४ (वर्ष १७ मास २०१ अंक ४०१) | | 3 PAIS As WA जनक Hers Bale | ore rat, JERI , NETS शा ATT Oe GS & ws चाम HF Guaiae Faq cra aS | SAT SAS ACHPS सिताटतथ जैं stot veto AS TH AAAS WT UT Aa BI । WAT THOT AIA TI OT | SAT A AST FF CDA APA UIST शव HBA | UIT ASS मुद्धिप्काग जैं ot छांि wrt एप aS cra - afta at meta Are, Tas Bea Af Arar , COAT WaT rar ar छोविग aT Arar | afer एस UAB aT, wot एप आजारी , wat oT AAT, NG oF SUA शा ATT CT COAAT ao avs | CARS sory शोज fA aS capa शिशिताऊव 7 formot कठत GTS AS | ate SGN et aio Set एप AME चाय मैं GAA GTS als | निनि aye fa are awa fais ब्िकाज yr विभि A याववनिं afS tea तिशिक ee AAT छावऊ Tl ASI TANS Bt Ae ffs For afeafe BA OA छत , 0 MATIN fs gore fe निचि ora Te ows aS Late विशिक ARIS ass oper
व | | विदेह (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) www.videha.co.in GINA at छीन जैं Cicer fits as | त्ीवल्ण *Aoret afa wa fafet bay एस Jeq | कॉतांजत एस शन्मवठ्ण Sort ate ado wet APS GET BROW | Aer A He na Aare fear धवि Fora, APT ,Wiwar, at AAA विनि OT PICT Cw ATE Bi | जऊ्वठ्य Fo aro ade sme BAIA एस AAA OMA OT टशाशी GQ AA WAT शिथितां एम उिवन्नजाक Etat We was Brat afe fa of fag शवित्नर्उय wa | SAT एप AT CRAIN FFT TAS | Jo SN A AST Fen Te AIA कदद तशवाठ WA AIT Seer ACT VA THA A | जांजां जाठिंद or शठित्त जैजूशउ TAN कथ जें BA | wor जैजूशऊि ७ wife, af ज्ञ जॉंऊिक wim Fas AG जाशासिक ,जीजूअउिक , जाठिटिक शा शार्भिक WAM जन्नठक WIS शाज्शिकऊा मठजज कथन OF | थठि ISS मठड़त्र _ लिशिऊ am ato Bae | जवछण IGT थलन A aaa ars EI GS मैं आशषाव ways Te जट्के । AS AY a8 CIS Cros शुदिशी we फुकत BI TH जाधावटना SAS PAY SPST HAT शुरूग BR PFT छत | Meters Tors he जामाजिक
fade ४०१ म अंक ०१ सितम्बर २०२४ (वर्ष १७ मास २०१ अंक ४०१) | | 5 HITS Gea WAT लाश एप. St aA | ais QAM , AA, SVS, Fy , TT, ज्ञाकवण , aa thin, pra, जाठिट worfes , a आपि Ts AAS ATA AAA व्कतनि | ofS एम एगेशिती Ot एतलाकनिकक WAIT Cicer शिवत | Wa WPT SI sa a Ads शप्याशक IAT AIT चठि Baa wea | fs tes जैजूशऊछ् at AT orbss or fHy आतकाने Cet TINT तांशेत | aise fret wa as HITS शाज़शिकऊा NOMA WA | जागाजिक WATT TH 9५9० wa रुकव ANT ए्येशित verre wa , sft a wee sate after war chic wa Anas asm शविश्रूठिऊ एपेशिती Fart ar काशजूश NA Ba, GH VMs WAS एम BAS | AS HAST शव GA CSS YS GA | 9७ AAA 9०४५ एप WONT OT AAs शलाजलाक TAT BAA WI | ऊकव AM ow AAT 9०४४३ एकँ ATT जजाक alae ws | ४9० G sda एम कार्युकादिगी wR we saq oa wie डाजनन TH Bags A OA BA | 2 Pro 950 a fia vestar Saas afer बुँताउत CAT | WSS WANTS जगय ASA FIT Sas asa | यहावाजाविवाज aera fies
व6 || विदेह (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) www.videha.co.in Hess 3H ate जजाशंजि मलावाजाधिवाज TORR fe wae | GA अकव FAS OF ACNE Saat Acie WAT CT | जांत 92३७ OF थटि Raat एप AGIST Baa GH | OPA AH SAAT 9४७१ तय GA AINA एप ACA एव | wena sors fie oH am vere IN Ras fewer Aw fie ar रखिनाथ Pre Stes as WIS CAS | af wa Tews शविनांथ छत ww Aft cz जाठिटिक VIS AE ४५७७ एप mer अकामगी जैं faa , war मिशिता वाजाक weir चठि Ala जकत | PUA SOT AHS A कएडएको AAT AAA, we a aR जांवऊीय Rat वाला जधघर्स ARS waaay AIT लविशण , HIT Aoss aR , शिशिता are Aster On, भिशिता जाठिट शविश्वम WU HH काय PA | aR waste शिशिता ara oe aos जुशाशनां 9५० एप रत | SI STS FRY, Vio IAN TIE, Glo APA SPT , AAT WT ANP Wry BAe | खो GION vale fre & व्यथिता
fade ४०१ म अंक ०१ सितम्बर २०२४ (वर्ष १७ मास २०१ अंक ४०१) | | 7 ares मी श्रवरजाव मैं Gra | CFA AM Io ATA WIT "AG" CH ASST INAH WT at जैजूशाक WAS Bare ७ aay Ma वाजाक GA SCOR AIH GAA | God Hor शव OTA CI A | जावऊीय Hay oT amet शिथिता aes AST a ahs 2 ome a गिशिताअवक शठाडा एकँ ater Orcer PA , aT नठि रद शिशिता वाजा वतन ar AS Aas शठाखों AS WA | 20 GA 9०४५३ OT वौछीक AST अत्णात्ठीवतियय oT afer astiada शविशणक 055 wa Wet जैज्शाशक AW WATT AT Glo API Set wie | affane जजांशंछि Clo Sy SIT Ar wife af aes fe wt UNO शा aan १ feat or wa! आअथन aff ३२ St oars Goes va CT aE | थठि ae OT afS ca २५ fipTta २००३ @ AS जाया एक जावऊक HRA शारठण शत्रश्ी oT TA कथन CIT | NA WAST Mt Werke ater Waist CHS CAAT CH CAAA HAUT CHF |