VIDEHA — Issue 403 / अंक ४०३

Publication: VIDEHA · Issue: 403
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ISBN Number: 978-93-341-3377-6 (Book) ISSN 2229-547X (online) 𑒀 विदेह ४०३ म अंक ०१ अक्टूबर २०२४ (वर्ष १७ मास २०२ अंक ४०३) [विदेह (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) www.videha.co.in ] विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। ऐ पोथी‍क सर्वाधि‍कार सुरक्षि‍त अछि‍। कॉपीराइट (©) धारकक लि‍खि‍त अनुमति‍क बि‍ना पोथीक कोनो अंशक छाया प्रति ‍एवं रि‍कॉडिंग सहि‍त इलेक्‍ट्रॉनि‍क अथवा यांत्रि‍क, कोनो माध्‍यमसँ, अथवा ज्ञानक संग्रहण वा पुनर्प्रयोगक प्रणाली द्वारा कोनो रूपमे पुनरुत्‍पादन अथवा संचारन-प्रसारण नै कएल जा सकैत अछि‍। (c) २०००- २०२४. सर्वाधिकार सुरक्षित। भालसरिक गाछ जे सन २००० सँ याहूसिटीजपर छल http://www.geocities.com/.../bhalsarik_gachh.html , http://www.geocities.com/ggajendra आदि लिंकपर आ अखनो ५ जुलाइ २००४ क पोस्ट http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html केर रूपमे इन्टरनेटपर मैथिलीक प्राचीनतम उपस्थितक रूपमे विद्यमान अछि (किछु दिन लेल http://videha.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html लिंकपर, स्रोत wayback machine of https://web.archive.org/web/*/videha 258 capture(s) from 2004 to 2016- http://videha.com/ भालसरिक गाछ-प्रथम मैथिली ब्लॉग / मैथिली ब्लॉगक एग्रीगेटर)। ई मैथिलीक पहिल इंटरनेट पत्रिका थिक जकर नाम बादमे १ जनवरी २००८ सँ ’विदेह’ पड़लै। इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि, जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। (c)२०००- २०२४. विदेह: प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004). सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। Editor: Gajendra Thakur. In respect of materials e-published in Videha, the Editor, Videha holds the right to create the web archives/ theme-based web archives, right to translate/ transliterate those archives and create translated/ transliterated web-archives; and the right to e-publish/ print-publish all these archives. रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना/ संग्रह (संपूर्ण उत्तरदायित्व रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता मध्य) editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ पठा सकैत छथि, संगमे ओ अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो सेहो पठाबथि। एतऽ प्रकाशित रचना/ संग्रह सभक कॉपीराइट रचनाकार/ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि आ जतऽ रचनाकार/ संग्रहकर्त्ताक नाम नै अछि ततऽ ई संपादकाधीन अछि। सम्पादक: विदेह ई-प्रकाशित रचनाक वेब-आर्काइव/ थीम-आधारित वेब-आर्काइवक निर्माणक अधिकार, ऐ सभ आर्काइवक अनुवाद आ लिप्यंतरण आ तकरो वेब-आर्काइवक निर्माणक अधिकार; आ ऐ सभ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार रखैत छथि। ऐ सभ लेल कोनो रॉयल्टी/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै, से रॉयल्टी/ पारिश्रमिकक इच्छुक रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता विदेहसँ नै जुड़थु। विदेह ई पत्रिकाक मासमे दू टा अंक निकलैत अछि जे मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ www.videha.co.in पर ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। Videha eJournal (link www.videha.co.in) is a multidisciplinary online journal dedicated to the promotion and preservation of the Maithili language, literature and culture. It is a platform for scholars, researchers, writers and poets to publish their works and share their knowledge about Maithili language, literature, and culture. The journal is published online to promote and preserve Maithili language and culture. The journal publishes articles, research papers, book reviews, and poetry in Maithili and English languages. It also features translations of literary works from other languages into Maithili. It is a peer-reviewed journal, which means that articles and papers are reviewed by experts in the field before they are accepted for publication. Font/ Keyboard Source: https://fonts.google.com/ , https://github.com/virtualvinodh/aksharamukha-fonts , https://keyman.com/ These are print-on-demand books, send your queries to editorial.staff.videha@gmail.com. The eBooks of some of these are available for sale on Google Play [(c) Preeti Thakur, sales.videha@gmail.com], send your queries to sales.videha@gmail.com. The contents and documents e-published by Videha (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) are periodically being checked for accessibility issues. People with disabilities should not have difficulty accessing these contents/ documents. © Preeti Thakur (sales.videha@gmail.com) Cover designed by AUM GAJENDRA THAKUR Videha e-Journal: Issue No. 403 at www.videha.co.in समानान्तर परम्पराक विद्यापति- चित्र विदेह सम्मानसँ सम्मानित श्री पनकलाल मण्डल द्वारा मैथिली भाषा जगज्जननी सीतायाः भाषा आसीत्। हनुमन्तः उक्तवान- मानुषीमिह संस्कृताम्। अनुक्रम ऐ अंकमे अछि:- १.१.गजेन्द्र ठाकुर- नूतन अंक सम्पादकीय (पृष्ठ १-१३) १.२.अंक ४०२ पर टिप्पणी (पृष्ठ १४-१४) गद्य २.१.परमानन्द लाल कर्ण-पुरुषोत्तम मासक एकादशीक माहात्य (पृष्ठ १६-२५) २.२.आचार्य रामानंद मंडल-मिथिला-मैथिली:असमंजस स्थिति (पृष्ठ २६-२८) २.३.मुन्ना जी-बीचला लोक (कथा) (पृष्ठ २९-३८) २.४.संतोष कुमार राय 'बटोही'-घरक चौकैठ (कथा) (पृष्ठ ३९-४१) २.५.संतोष कुमार राय 'बटोही'-पार्वती केर शपथ (धारावाहिक नाटक) (पृष्ठ ४२-४५) २.६.प्रणव झा-डिप्लोमा इन फार्मेसी एग्जिट एग्जामिनेशन नियमन, २०२२ (पृष्ठ ४६-५०) पद्य ३.१.प्रमोद झा 'गोकुल'-किए भेलह तों मनुज? (पृष्ठ ५२-५३) ३.२.प्रणव झा-अम्मल (पृष्ठ ५४-५५) ३.३.राज किशोर मिश्र-अन्हार सँ इजोत (पृष्ठ ५६-५९) ३.४.संतोष कुमार राय 'बटोही'-उर्मिलाक विद्रोह (धारावाहिक खण्ड-काव्य) (पृष्ठ ६०-६२)

विदेह ४०३ म अंक ०१ अक्टूबर २०२४ (वर्ष १७ मास २०२ अंक ४०३) || 61 62 || विदेह (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) www.videha.co.in १.०.गजेन्द्र ठाकुर- नूतन अंक सम्पादकीय १ मिथिलामे बाढ़िक प्रकोप आइ काल्हि खूब अछि मुदा तकर अछैत साहित्य अकादेमीक मैथिली प्रभागक कागची कार्यक्रम सभ चलिये रहल अछि। लोक सभक समस्यासँ साहित्य अकादेमीक मैथिली प्रभागकेँ कोनो सरोकारे नै छै, कोठली आ दफ्तरेमे अन्तर्राष्ट्रीय स्तरक गोष्ठी सभ भऽ जाइ छै, अभिलेखने तँ करबाक छै, मुदा तै किरदानीक अभिलेखन एतऽ कएल जा रहल अछि। २.१ समानान्तर धाराक लोककेँ सतर्क रहबाक आवश्यकता अछि। मैथिली साहित्यमे ब्राह्मणवादी प्रवृत्ति अछि बा नै, ऐपर इण्डिया हैबीटेट सेण्टरक भारतीय भाषा महोत्सव मे १२ साल पहिने हमर उत्तर अन्य प्रतिभागी माने नचिकेता, देवशंकर नवीन आ विभा रानीसँ भिन्न छल। हमर उत्तर छल जे जँ आकाशवाणी दरभंगाक गप करी तँ उत्तर हँ अछि मुदा सप्तरी आदिक एफ.एम.क गप करी तँ उत्तर नै अछि; जँ एन.बी.टी., सी.आइ.आइ.एल., साहित्य अकादेमीक मैथिली प्रकाशन/ काज देखब तँ उत्तर हँ अछि मुदा विदेहक गद्य-पद्य-अनुवाद आदिक संकलन देखब (विदेह सदेह १-३६, ऐ मे विदेह सदेह २८ अनूदित साहित्यक संकलन अछि- पी.डी.एफ.देखू विदेह पेटारमे http://www.videha.co.in/videha.htm पर) तँ उत्तर नै अछि। जँ घर बाहर, भारती-मण्डन, अंतिका, मिथिला दर्शन आदिकेँ देखब तँ उत्तर हँ अछि आ विदेहकेँ देखब तँ उत्तर नै अछि। ई विदेहमे अभिलेखित सेहो भेल। आ आइयो हमर उत्तर सएह अछि, माने मधुबनी-दरभंगा बनाम सहरसा-सुपौल-कोसी मुख्य धाराक ब्लैकमेलर सभक किरदानी छिऐ। अरविन्द ठाकुर जी केँ आ मारिते रास आनो लोककेँ बहुत रास लोकपर आ बहुत रास बात पर आस्था छलन्हि, किछुपर ताधरि (हुनकापर विदेह विशेषांक निकलबा काल धरि) आस टुटलो छलन्हि, किछुपर आगाँ जा कऽ टुटलन्हि जकर एकटा साधारण विवरण आगाँ देल जा रहल अछि। किछु साहित्यकार साहित्य अकादेमीक एक चण्डाल चौकरी द्वारा सम्मानित भेल, किछु दोसर द्वारा, किछु दुनू द्वारा; आ पुनः सिद्ध भेल जे ओ लोकनि जे मधुबनी-दरभंगा बनाम सहरसा-सुपौल-कोसी करै छला से मुख्य धाराक ब्लैकमेलिंग टेक्निक मात्र अछि। सम्पादकीय आ लेखकीय प्रतिबद्धता रखबा लेल समानान्तर धाराक लोककेँ सतत सतर्क रहबाक आवश्यकता अछि। अरविन्द ठाकुर जी दुनू ग्रुप द्वारा बारल छथि से सहरसा-सुपौल-कोसी करैबलाक मुँहपर समधानल चमेटा अछि, किछु गोटे रेट बढ़बैले छद्म करै छथि मुदा किछु लोक बिकाऊ नै होइ छथि। २.२ संपादकक दायित्वबोधः संदर्भ अंतिका, गौरीनाथ एवं अरविन्द ठाकुर फेसबुक वर्तमानक साहित्य पत्रिका अछि। ओना इंटरनेटक आन माध्यम सहित फेसबुकपर मैथिली साहित्यकेँ पसारबाक श्रेय विदेहे केर छै। फेसबुकपर बहुत रास बात होइत रहैत छै। ताजा-ताजी समाचार ई जे अंतिका पत्रिकामे छपल अनुवाद सभक संग्रह अंतिके पत्रिकाक संपादक गौरीनाथ (पहिने अनलकांत नामसँ रहथि) बहरिया बसातक नामसँ पोथी प्रकाशित भेल। एहि पोथीक पोस्टपर अरविन्द ठाकुरजी अपना द्वारा कएल आ अंतिकामे प्रकाशित अनुवाद नै हेबाक वा ओकर चर्च नै हेबाक बात उठेलाह। अरविन्दजीकेँ उत्तर दैत संपादक गौरीनाथ नकारि देलाह जे अंतिकामे अरविन्दजीक अनुवाद प्रकाशित भेल छनि। आ ताहिपर अरविन्द जी फेसबुकपर अंतिकामे प्रकाशित अनुवाद भेल रचनाक फोटो सहित एक टिप्पणी देलाह। ओहि टिप्पणीमे विदेहक चर्च सेहो छल। विदेहक अरविन्द ठाकुर विशेषांक 01 नवम्बर 2015 अंक 189 मे प्रकाशित भेल रहए। एहिमे हुनकासँ किछु प्रश्नो पूछल गेल रहनि जाहिमेसँ एकटा अंतिका पत्रिकाक ऊपर छल। ओहि समयमे जे हुनक उत्तर छलनि से उक्त विशेषांकमे छपल। विदेह अपन पाठक लेल अरविन्दजीक ई टिप्पणीकेँ फेसबुकसँ लऽ कऽ एहि अंकमे दऽ रहल अछि जाहिसँ भविष्यमे पाठक लग सभ तथ्य सामने रहै। ओना पाठक जनिते हेता जे ओही विशेषांकमे अरविन्दजीसँ "मैथिली साहित्यिक राजनीतिमे सरहसा-सुपौल पीठ"पर सेहो प्रश्न भेल रहनि। अरविन्दजी ओहि समयमे एक तरहसँ एहि प्रश्नेकेँ खारिज केने रहथि। जे साहित्य केर सजग पाठक छथि से विदेह द्वारा पूछल गेल प्रश्नक महत्व 2024 मे बूझि सकै छथि। अरविन्दजी चाहथि तऽ एक बेर फेर एहि प्रश्न सभक उत्तर दऽ सकै छथि। विदेहक अरविन्द ठाकुर विशेषांक केर पोथी रूप "स्वतंत्रचेता- अरविन्द ठाकुर: व्यक्तित्व-कृतित्व" केर नामसँ 2020 मे प्रकाशित भेल। तऽ आउ पढ़ी अरविन्दजीक ई टटका टिप्पणी जे अंतिका पत्रिकाक संपादकक ऊपर अछि। एहि टिप्पणीकेँ देबाक एकटा लाभ ईहो जे भविष्यमे कोनो लोक एकटा संपादकक की आ केहन दायित्वबोध होइत छै से जानि सकताह। पाठक तारतम्यता लेल विदेहक उक्त विशेषांक सेहो पढ़थि- गौरीनाथ Gouri Nath  उर्फ अनलकांत जी, संपादक, अंतिका महोदय, अहां झूठ बाजि रहल छी अथवा सांच कें झांपि रहल छी अथवा दुनू क्रिया एके संग कए अपन अपराध कें मेटाबै लेल बात कें गोलिआए रहल छी।अहांक प्रत्युत्तर सं एकटा संपादकक रूप मे अहांक क्षमता आ जिम्मेदारी पर संदेहक प्रश्नचिंह त ठाढ़ होइते अछि, व्यक्ति रूप मे सेहो अहांक अविश्वसनीयता प्रकट होइत अछि। 'अंतिका' मे हमरा द्वारा अनुदित कथासभ सं संबंधित हमर सूचना  पर अहांक अज्ञानजनित प्रत्युत्तर निराशाजनक अछि।प्रथमदृष्टया ओकरा सरसरी नजर सं देखि,अहां कें अपन स्नेहाधीन मानि, हम दू पंक्ति लिखि हंसि कए टारि देलहुँ।किन्तु तेकर बाद सूतल-बैसल प्रत्येक क्षण मे अहांक पंक्ति -- "हमरा स्मरण मे अहांक अनुदित कथा एखनो नहि आ ई हमर स्मरण केर सीमा भ' सकैत अछि।" -- बेर-बेर घुरिआइत रहल, हमरा बेधैत-मथैत रहल, हमरा बेचैन कए देलक।हम सदा-आनंदी लोग छी, तखनो बेधलक।छी त मनुष्ये।अपमान आ विश्वासघात सहब कठिन होइ छै।मन मे ई चिंता सेहो अभरल जे जे कोय ओहि टिप्पणी-प्रतिटिप्पणी कें देखने हेता,तिनका मन मे ई भाव आएल हेतनि जे अरविन्द ठाकुर अपन नाम नै रहलाक चलते व्यथित छथि अथवा आनक नामसभक उल्लेख देखि डाह सं जरि रहल छथि।हम स्वयं कें एहन क्षुद्रता सं मुक्त मानै छी,तें लोकक भ्रम तोड़बा लेल ई पोस्ट करब आवश्यक बुझाएल। ई अहांक स्मरणक सीमा नै, अपन स्मरण कें यत्नपूर्वक सीमा मे राखबाक चतुरता अछि।अलग बात जे कोय समुद्र अथवा पहाड़ कें अपन स्मरणक सीमा सं बाहर कए दिअए त तहि सं समूद्र अथवा पहाड़क अस्तित्व पर कोनोटा कनिओटा संकट आसन्न नै होइ छै।हं,संबद्ध स्मरणकर्ताक स्मरण-शक्ति आ ओकर मानसक उपचारक बेगरता दिस संकेत अवश्य करै छै। अन्यथा ई केना संभव भेलै जे 'मानुस' कथा-संग्रहक जे कथाकार 'बकलमखुद' मे -- ".....अरविन्द ठाकुर जैसे कुछ गिने-चुने से ही आत्मीय और करीबी होने का लाभ मिला....."-- लिखैत अछि,से 'अंतिका'क संपादकक रूप मे अरविन्द ठाकुरक प्रकाशित-प्रमाणित रचनात्मक योगदान कें अपन आत्ममुग्धता मे 'स्मरणक सीमा' सं बाहर कए दिअए? 'अंतिका' आ 'गौरीनाथ' लेल हमर स्नेह आ सतत पैरोकारी मैथिली मे हमरा खलनायक बनैने रहल,तखनो हमर आस्था नै डगमगाएल।(#विदेह द्वारा 2015 मे लेल हमर साक्षात्कारक एकटा अंश द्रष्टव्य) आस्था डगमगाएल त 'अंतिका' आ 'गौरीनाथ'हिक करतब सं।दुर्भाग्य ! अहि मामला कें बढ़ाएब ईहो कारण सं आवश्यक बुझाएल जे अहांक जिम्मेदारी-विहीन उत्तर मात्र हमरा सं संबद्ध नै,अंतिका कें रचनात्मक योगदान देनिहार संपूर्ण रचनाकार समाजक अपमान, अवहेलना आ उपेक्षा सं जुड़ल अछि।किए त प्रकारान्तर सं अहां ई सेहो कहि रहल छिऐ जे 'लिस्ट' सं बारल ओ 'दर्जन सं बेसी नाम', ओहि लोकनिक तुलना मे जिनकरसभक नाम अहांक 'लिस्ट' मे छै, हेय आ दोयम दर्जाक छथि। अहां अपन निजी रचना मे की लिखै छी, से अहांक मर्जी। किन्तु लेखकलोकनिक योगदानहि पर अस्तित्व ग्रहण करनिहार पत्रिकाक कोनो संपादक द्वारा लेखकक योगदान कें नकारब, अवमूल्यित करब (आ से ओकर जीवित रहितहि) अथवा 'स्मरणक सीमा' सं बाहर कए देब जेतबे अक्षम्य आ अनैतिक छै, तेतबे निन्दनीय आ अस्वीकार्य सेहो। आ हं! सत्ता मात्र व्यक्ति, प्रतिष्ठान,गिरोह अथवा शासने टाक नै होइ छै, अवसरपरस्ती आ व्यावसायिकताक सेहो होइ छै आ अहांक प्रत्युत्तर देखलाक बाद हमरा आब शंका नै रहल जे "पत्थर तले दबी दूब उर्फ प्रवासी परिन्दे का हौसला" अजुका तारीख मे अहिसभ मे सं कोनो ने कोनो सत्ताक 'प्रतिबंध' मे हुअए, ने हुअए,  ओकर दबाव मे अवश्य छै। प्रमाणक रूप मे अंतिका मे छपल हमरा द्वारा अनुदित चारि टा कथाक प्रथम पृष्ठक फोटोसभ संलग्न अछि।हमर फाइलक अनुसार एक अथवा दू टा और अनूदित कथा अंतिका मे छपल हेबाक चाही।एकरासभक दर्शन करू आ अपन स्मरण कें नीक सं डांट-डपट करिऔ,लज्जित करिऔ जे ओ अहां कें एना सार्वजनिक मंच पर धोखा किए दए रहल ए। Shri Dharam Raman Singh Raman Kumar Singh  ,संयुक्त संपादक, अंतिका अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। १.२.अंक ४०२ पर टिप्पणी रबीन्द्र नारायण मिश्र एहि बेरक विदेहक संपादकीय पढ़लहुं।अपनेक कथन स्पष्ट,अद्भुत आ प्रशंसनीय अछि।

अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। गद्य २.१.परमानन्द लाल कर्ण-पुरुषोत्तम मासक एकादशीक माहात्य २.२.आचार्य रामानंद मंडल-मिथिला-मैथिली:असमंजस स्थिति २.३.मुन्ना जी-बीचला लोक (कथा) २.४.संतोष कुमार राय 'बटोही'-घरक चौकैठ (कथा) २.५.संतोष कुमार राय 'बटोही'-पार्वती केर शपथ (धारावाहिक नाटक) २.६.प्रणव झा-डिप्लोमा इन फार्मेसी एग्जिट एग्जामिनेशन नियमन, २०२२ २.१.परमानन्द लाल कर्ण-पुरुषोत्तम मासक एकादशीक माहात्य अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.२.आचार्य रामानंद मंडल-मिथिला-मैथिली:असमंजस स्थिति आचार्य रामानंद मंडल मिथिला-मैथिली: असमंजस स्थिति पहिले मिथिला। मिथिला राज्य निर्माणी असमंजस मे हय। कोनो प्राकृतिक मिथिला राज्य निर्माण के विचार मे हय।वो भारतीय आ नेपाली मिथिला के बात करैत हतन।अइ के लेल अतीत मे डा लक्ष्मण झा आ अन्य पाया तोड़ो आंदोलन कैलन।त कोई जेना अंतरराष्ट्रीय मैथिली परिषद के संरक्षक डा धनाकर ठाकुर उत्तर बंगाल आ झारखंड के कुछ भाग मिला के मिथिला राज्य निर्माण के विचार रखैत हतन।परंच दुनु विचार सामयिक न हय। भारत आ नेपाल स्थित मिथिला के एक्कीरण के लेल सुगौली संधि के रद्द करे के होतैय जे अंग्रेज़ आ नेपाल सरकार के बीच भेल हय।इ एगो अंतरराष्ट्रीय मामला हय।अइ पर नेपाल कहियो सहमत न होयत आ एगो नया विवाद खड़ा हो जायत। दोसर बंगाल के उत्तर भाग आ झारखंड के कुछ भाग, दो राज्य के मामला बनत।वो राज्य कैला सहमत होयत। राज्य पुनर्गठन के मामला केंद्राधीन होइ छैय परंच प्रस्ताव के राज्य विधान मंडल से पारित होनाइ आवश्यक होइ छैय। एकटा स्थिति इ होइ छैय कि राज्य मे राष्ट्रपति शासन होइ।अइ स्थिति मे संसद राज्य पुनर्गठन विधेयक के पारित कर सकैय छै।परंच राष्ट्रपति शासन लागू करनाइ टेढ़ी खीर हय। अइ स्थिति मे उतर बिहार के मिथिला राज्य निर्माण के मांग उचित होयत। कारण कि वर्तमान बिहार सरकार प्रशासनिक रूप से बिहार के उत्तर बिहार आ दक्षिण बिहार मे बांट देलय हय। यथा -उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक आ दक्षिण बिहार ग्रामीण बैंक। उत्तर बिहार विद्युत प्राधिकरण आ दक्षिण बिहार विद्युत प्राधिकरण। केन्द्रीय सरकार दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय गया के निर्माण कैले हय।अइ स्थिति में केंद्र सरकार आ बिहार सरकार से जायज मांग कैल जा सकैय हय। उत्तर बिहार के सासंद आ विधान मंडल सदस्य सरकार पर दबाव बना सकैय हय।अइ प्रकार उत्तर बिहार के मिथिला राज्य बना के मिथिला राज्य के सपना पूरा भ सकैय हय। आबि मैथिली। प्राकृतिक मैथिली खंड खंड मे बंटल हय। जेना केन्द्रीय वा मानक मैथिली, पच्छमी मैथिली वा बज्जिका दच्छिणी मैथिली वा अंगिका। कोनो साहित्यकार पच्छमी मैथिली के गिरल मैथिली वा बोली कहैत हतन त कोनो दच्छिणी मैथिली के छिका छिकी कहि के अपमानित करैत हतन। सरकार बज्जिका आ अंगिका के अलग-अलग करे पर तुलल हय त मानक मैथिली साहित्यकार भंगिआयल हय।सभ कालिदास के चेला बनल हतन।पाग -दुपट्टा के खेल खेलैत छतन। हुनका मैथिली के विकास आ संवर्द्धन से कोनो मतलब न हय।वो अभियो मैथिली महासभा के पारित प्रस्ताव के मिथिला के कानून बुझैत हतन। आबि हमरा सभ के समेकित मैथिली बनाबे के पड़त। मैथिली के भिन्न-भिन्न रूप केन्द्रीय मैथिली, पच्छमी मैथिली आ दच्छिणी मैथिली के मान साहित्य में स्थान देबे के पड़त। असमंजस से उबरू। आउ मिथिला -मैथिली के विकास आ सम्बर्द्धन के लेल मिलजुल कर डेग बढ़ाउ। जय मिथिला!जय मैथिली! अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.३.मुन्ना जी-बीचला लोक (कथा) मुन्ना जी बीचला लोक (कथा)

वाह!आइ त' जतरा सुफांटि निकलल! तीन दिन सं बौआ-टौआ कें खाली हाथ घर घुरि जाइ! लगैए आइ परोपट्टाक मए सब चिलका जन्म देनाइ बन्न क' देलकैए! अपन अन्न पानि खा कते दिन निमहब? पहिने जाहि गली, मोहल्ला मे पएर दी घोघतनिया बाली सब सेहो कहि दिए-"फल्लां गाम बाली के बेटा भेलैए! "जाउ ने धनगर आ समंगर दुनू छै! खोंइछा, झोरा-झपटा सब भरि देत! धिया पुता सेहो पछोड़ लागि सुना दिए -" ओकरा घर मे बेटा एलैए, चलू ओकरे दुरा पर जमघट जमतै! "यै मइयां आब जनी जाति के चिलका नै होइ छै? धौर हेतै किए नै, ऐ तोर मे सबटा छौंड़ीए भफएल छलै!

बेटा सुनिते,हिजड़बा-हिजड़नीक झुण्ड ढोल, हरमुनिया ल' ढ़ूकि जाइ ओही अंगना! रहै त' सबटा हिजड़नीये साया, साड़ी आ ब्लौज पहिरने! कियो कियो सलवार समीज मे आ ओढ़नी ओढ़ने! ओही मे सं कियो कियो जिन्स, टीशर्ट पहिरने, बाबरी छंटेने हिजड़बा भ' जए! आ बांकी सबटा जनी जातिक भेष मे छाती बढ़ेने ऐन मेन मौगीए बुझू! सांच मे त' इ सब ने स्त्री ने पुरूष, बीचला लोक, भगवानक डांग देल! मुदा समाज मे रहै बसै लए कपड़ा लत्ता आ बोल सं पानिगर! देहगर आ दुधगर सेहो! पएरक घुंघरू सं लोकक मोन हरिया दान, धान आ पाइ ल' घर घुरए !

मिथिला मे बेटाक जन्म पर लोकक मोन हर्षित केनाइ पमरियाक काज छल! इ इस्लाम धर्म माननिहार ' पमार' जातिक एकटा वर्ग पेशाक रूप मे अपना लेने छल! इ सब झुण्ड बना गामे गामे पता करैत रहैत छल -' कोन घर बेटा जन्म लेलक! "एकरो रेवाज मे आने पौराणिक रेवाज सन कान्या बारल रहै छलै! कोनो घर कान्या जन्मक खबरि पाबि ओ घर बागि चलए. जखन की एकर पुरूष झुण्ड मोन बहटारै लए किछु सदस्य कें घघरी पहिरा स्त्री वेश मे नचबैए माने राज नर्तकी सं लोक नर्तकी धरि, पेशा मे सेहो स्त्री के नचएब समाज कें बेसी पसिन्न.मिथिला मे लौण्डा नाचक प्रथा नै रहलैए.कबुला पाती मे छठिक घाट पर आंचर पर नटुआ नचएब होइ कि विवाह दान छकरबाजी नाच करतै पुरूष आ स्वांंग स्त्रीक.आ ताहि समाज मे बेटी जन्म पर ओकरा मनहुस बुझत.गर्भहि जांच लग सं ओकर प्रताड़ना सं समाज एकभगाह सन भेल जाइछ.एक दिस बेटी जन्म पर बान्ह आ दोसर दिस जीवनक संपूर्णता आ कि मोन बहटारबाक प्रमुख साधन बेटीये, स्त्री.यांत्रिक विकासें परम्पराक होइत पतन सं सामाजिक सरोकार सेहो भारल सन. आकि लोक विकासक गति नव नव रूचि मे परिवर्तित भ' रहल. हिजड़ा नाच सेहो तहि रूचिक संकेत थिक.आ आब हिजड़ा समाज सेहो तेजी सं विकसित भ' रहल.

हय... हय तूं सब आङन मे कत' घूसल अबै छें?

बाबा ,तमसाइ किए छी? की भेल अहां कें धीरज धरू ने.हम सब कोनो मुजरा बाली नै जे मोन आ देहक मनोरंजन क' ढ़ेका,जेबी ढ़ील क' घर घुरा देब.

हय तों त' बताह जकां गप्प करै छें, हमरा की लालबत्ती बला बस्तीक गांहकि बुझै छें जे एना लोढ़िएने जाइ छें?

नै यौ बाबा, हम सब अहांक सनक देखि कें चौल करै छलौं.हम सब कि कोनो कोठा बाली छी जे इमान, देह, धरम सब बेचि क' पेट भरब. हम सब अहीं सब सन माय बापक, इश्वरक डांग सं डेंगएल चिलका थिक. से इश्वरक गलती की हमर सबहक कर्तव्य दोष, नै जानि.एकहि कोखिक कियो सोझ कियो टेढ़ के त' परिवार, समाज राखिए लै छै. मुदा ओही कोखिक बीचला लोक माने नै बेटी ने बेटा के लोक मोन मारि बहटारि दैए.आ तहन हम सब मए बाप, सर समाजक निंहुछल एकटा नव समाजक अंग होइ छी.आ ओही तिरस्कृत समाजक हंसी ठठ्ठा मे समिलात भ' जीवन गुदस्त करैत रहै छी.

छी त' हमहुँ सब मनुक्खे, सकलि सुरति , देह गात सं अहीं सन एकरंगाहे. मुदा प्रकृति प्रदत्त जे सृजनधर्मिता तकरा सं वंचित.समाजक लेल अशपृश्य त' नै मुदा कुड़कुट सन. सेहो अयोग्यता त' प्रकृतियेक देल. कोनो बलात् व्यवहृत वस्तु जात त' नै ने हम सब. तहन बाबा एना हिज्जो किए ?

ऐ हिजड़ा जातिक एत' कोन खगता ?.हमरा घर त' पोती आयल, पोता नै ने! तहन कथीक हंसी खुशी. जो तों सब आन दुआरि,आन टोल, गाम. ताकुत कर गे नवजात बेटा आ घरन्दार घर. तों किन्नरवा सब हमरा बखसि दे,नेहोरा करै छीयौ. तों सब नाच गान कर तोहर सएह काज ने! जो धन संपति अरज पेट पोस!

बाबा, हम सब किन्नर नै, हिजड़ा छी, हिजड़ा. मुदा किन्नर जातिक गुण सेहो अंगेजने छी, पेट पोस' लेल. किन्नर त' सृष्टिक आदिये काल सं छल, वनवासीक रूप मे. जाहि मे नर नारी दुनू फराक छल. जे स्वर्ग लोक मे नर्तक नर्तकी ( नचनिया) रूप मे उपस्थित रहै छल. रामायण- महाभारत सब काल मे नचनिया निमित्त रहल. मुदा हिजड़ा प्रकृतिए सतएल एहेन जीवात्मा ऐछ जे ने नर छल आ ने नारी.कालान्तर मे लेखक सब किन्नर आ हिजड़ा के ओहिना मिझ्झर क' देलक जेना सबटा वनस्पति घी भेल डालडा आ सबटा वाशिंग पाउडर सर्फ कहए लागल.पौराणिक ग्रन्थ ज्योतिष शास्त्र फरिछौने ऐछ जे "- कोनो स्त्री मे चन्द्रमा, मंगल आ सूर्यक लग्ने गर्भधारण होइछ.शारीरिक संबंध मे वीर्यक अधिकाधिक उपस्थिति सं बेटा, रक्तक अधिकाधिक सं बेटी आ दुनूक समान उपस्थिति सं नपुंसक वा हिजड़ा चिलका जन्म लैछ.ओना विज्ञान तकरा नै मानैए.विज्ञानक अनुसार गर्भधारणक विकासक क्रम अवरुद्ध भेला सं मिलावटी जननांग (intersex) के संभावना बनैछ.एकर कारण मे संबंधक अनियमितता, दवाइ सेवनक उनटा प्रभाव, क्रोमोजोम मे एक्स- वाइक जग्गह एकाकी उपस्थिति आदि होइछ. बाबा, एकटा बात गिरह बान्हि लियय जे जन्मक समय सब बच्चा हिजड़ा नै रहैछ.सिरखारी सं सब पुरूषे सन रहैछ, मुदा अविकसीत जननांग रहैछ, टेस्टोरेनक अभाव सं छाती त' विकसीत होइछ मुदा अविकसीत लिंग उपस्थित रहैछ. करीब अस्सी प्रतिशत एहेन चिलका सर्जरीक पछाति कोनो एक रुप पबैछ. किछु सफल ऑपरेशन सं पूर्णत: पुरूष वा पूर्णत; स्त्री काय मे सेहो नवजीवन पौलक.

हय ,सुन ! हम कोनो स्कूलक कक्षा मे नै बैसल छी. तों तहन सं इतिहास, भूगोल, विज्ञान पढ़ेने जा रहलें. तोहर सबहक इश्वरक डांग सं समाजिक आ मानसिक स्थिति दारूण छौ से बुझै छी. मुदा आब की अंग्रेजी शासकक सत्ता थोड़े छै जे तोरा सबकें उभयलिंगी दर्जा आ अधिकार छीनि कें नक्सली की अपराधीक श्रेणी मे द' देने छलै. तोहर एतेक भाषण सं जिज्ञासा भेल जे तों नाच गान मे मगन रहै बाली इ विशिष्ट ज्ञानी कोना भेलें? बाबा! हम पूरे हाइ स्कूल पढ़ने छी, आ अपन हंजेड़क मेट छी.अपन आ समूह सदस्यक अधिकार आ ज्ञान प्राप्तिक वास्ते स्कूल, कॉलेज, कचहरी आ मंत्रालयक चक्कर कटैत रहै छी....! समाचार चैनलक पैनल सदस्य छी!

बाबाक जिज्ञासा शान्ति पछाति ओकर खून मे नव उर्जा प्रवाहित भेलै,आंशिक चमक बढ़िया गेलै.हलसैत बाजि उठल-" हं बाबा हं, अहूं के जेना हमर सबहक जिनगीक दुख दर्दक खिस्सा बुझले ऐछ! आब कहू जे हम सब सबहक सुख- दुख मे सहयोगीये , मुदा शायद अंग्रेजबा सब रहै उनटा खोपड़ीक . जहन अवसान अबै छै तहन अहंकार बढ़ै छै आ बुद्धि घटै छै. तें ने 1871 मे इ सब एकभगाह कानून पास क' हमरा सब कें अपराधिक जनजाति " जरायम "के श्रेणी मे द' देने छल. बुझू ओ सब हमर सोन चिड़ै सन भारत के कामधेनु गए बुझि दुहि दुहि खए, से भेल मालिक.जहन की हम सब मांगि चांगि खाइ. फेरो हंसाब' खेलाब' जाइ से भेलौं ओकरा नजरि मे अपराधी. धनि कहू सुभाष, खुदीराम आ गांधी बाबा ....सब कें जे ओइ कलमुहां सब सं देश के आजादी दियौलनि.तहन 1951 मे अपन सरकार हमरा सब कें से हो ' जरायम ' सं आजाद करा समाज मे रहि नाच- गान क' पेट भरि जीवाक अवसर देलक.

समाजक ओलवा दोलवा सं कहियो हम सब खिन्न नै होइ छी. जे समाज अपन संगतुरिया के नै बखसैए से हमर सबहक कोना हएत? हम सब त' प्रकृतिए बारल सन. बाबा एकटा बात ध्यान राखब, बरू हम सब बारले सही मुदा असमाजिक नै. देहक भूख बरू नै जगौ मुदा पेटक भूख त' लगबे करै छै. ताहि लए त' नाच गाने क' हम सब अहां सबहक नजरि मे रहै छी. अहींक समाज जकां हमरो समाज मे जहन संख्या वृद्धि होइत गेलै तहन कते लोक बधइये मांगितै? सुनने हेबै जे खगता आविष्कारक जननी होइछ.त' हमहूं सब गुरूक आदेशे बस, ट्रेन, रेडलाइट पर थपड़ी पारि अर्थक जुटान मे जुटि जाइ छी.

आम समाज सं बरू बारले मुदा हमर कतिएल बेरएल लोकक सेहो एकटा संगठित समाज त' ऐछिए. समाज की? इएह ने जे एक फरीकक,एक जीव वर्गक सामुदायिक जिनगी जीवाक समूह.त' हमहूं सब की एकरवा थोड़े रहै छी. जेना अहांक समाज जाति, धर्म, वर्ग मे बांटल मुखिया, सरपंच, माञिन्जन शासन त'र निमहैए तहिना हमहूं सब अपन देवीक समूह मे बांट बखरा भ' सामूहिक जिनगी जीवै छी यै ने यौ.हमर समूह चारि वर्ग मे संगठित ऐछ! सब वर्गक अपन अपन देवी छथिन. पहिल बुचरा,ऐ वर्ग मे कने पिताह, पुरूषाह आ उग्र सदस्यक प्रवेश रहैछ.इ देवी सेहो काली माय जकां उग्र त' ओ ऐ समूहक शांति भंग नै होम' देथिन, इएह लोक मान्यता छैक. दोसर नीलिमा, इ संयमित, संतुलित जीवन जीयय वाली देवीक समूह ऐछ.!ऐ मे स्त्रैण सदस्य सबहक प्रवेश देल जाइछ. जे राब दुआब नै, अपना कें दाबि राख' वाली सदस्य होइथ.तेसर समूह जाहि देवीक होइछ ओ कहबैछ मनसा, जाहि मे एहेन सदस्य कें राखल जाइछ जे जीवन सं अगुताइथ नै, अपन जीवन मे किछु नव करबाक आतुर होइथ.आ चारिम समूह होइछ हंसा देवीक.ऐ मे हुनकर प्रवेश होइछ जे सदस्य उडांत होइथ. जिनकर पोन, मोन आ जीह एक ठाम टिक कें नै रहि पाबए.एक समूहक सदस्य कें दोसर समूहक सदस्य सं कोनो राग द्वेष नै रहैछ.मुदा जे जाहि समूह वर्गक सदस्य तकर नियमक बन्हन मे बान्धल सन बुझू.अहीं सबहक पंचायतक मुखिया जकां हमरो समूहक प्रमुख नायक कहबैछ.सब समूहक नायक मिलि जुलि एकटा गुरूक चयन करैछ.हमर समाजक कियो सदस्य प्रतिभाशाली, बलशाली, मेधावी कि उजड्ड हो, गुरूक अपमान नै करैछ.हम सब खोपड़ी खपा कि थोपड़ी बजा जे धन अर्जित करै छियै ने बाबा ओ सबटा गुरूक चरण मे अर्पित क' दै छियै. से करियौ किए ने, उएह हमर सबहक पालक आ उएह अभिभावक.

ऐ फाल्गुन शुक्लपक्ष मे वार्षिकोत्सव ऐछ, ऐ अवसर पर सब समूहक सदस्य एक निर्धारित जगह पर उपस्थित होइछ.सब अपन लहंगा- चुनरी, जेवर सं सुसज्जित, सजि धजि , दुल्हिन बनि आयल ऐछ. गुरूक आदेशानुसार इ पर्व विवाह अनुष्ठानक पर्व थिक.ऐ दिन सबहक सामुहिक विवाहक स्वांग रचाओल जाइछ.सबहक एकहिटा वर होइत छथि ' अरवण'. गाम, शहर सं बहरी जग्गह, सुनसान सन, अरवण देवताक प्रतिमा लगाओल गेल ऐछ! शमियाना मे लाइट आ डी. जे सं चकमक आ गनगन करैत दृश्य! सब हिजड़ा गण पतियानी बना, धुप दीप जरा ' अरवण' देवताक अराधना मे बैसि गेल. नायक द्वारा पूजन, हवनक संग सबहक सिनूरदानक रेवाज पूर्ण भेल.आब सब नाच गान करैत हर्षोल्लास मे रमि गेल ऐछ! इ त्योहार सांझ सं भोर धरिक होइछ. भोरूकवा मे गुरूक आज्ञा होइते ' अरवण' देवताक मूर्ति तोड़ि फोड़ि नष्ट क' देल जाइछ. तहि संग सब वधुगण अपन अपन चुड़ी फोइर,सेनुर मेटा, मंगल सूत्र तोड़ि वैधव्य धारण क' लैछ.रंग विरंगा साड़ी, ब्लाउजक जग्गह उजरा साड़ीक परिधान मे आबि जाइछ. मुदा विलापक प्रथा नै छै. कींवदन्ति ऐछ जे- महाभारत काल मे हिजड़ा गण वनवासी छल. ओइ ठाम एकरा सब कें राक्षसक उत्पात भेलै.जकरा सं संघर्ष क' अर्जुन पुत्र ' अरवण' आजाद करौलनि. तें इ सब रक्षक बुझि अपन पति स्वीकार क' लेलक.मुदा अरवण,युद्धभूमि मे लड़ैत ओही दिन मृत्यु गति के प्राप्ति क' लेलनि.ओइ दिन सं इ, एकदिना पावनि मनेवाक रेवाज आइ धरि निरन्तरता बनौने ऐछ!

आइ सबहक जुटान एकठाम भेल ऐछ, पूरा चुप्पी मुदा मोन अशान्त सन! शान्तिक मृत्यु सं सब मोने मोन खुश भेल ऐछ,जए दहि एकरा त' मोक्ष हेतै.गै बिन्दा,ओना थोड़े पैट हेतौ चप्पल, जुत्ता ला ने.आ सब मिलि लहाश कें चप्पल, जुत्ता सं पीटैत कहैए- जो... जो गै फेर एम्हर नै अबिहें, जनमिहें त' मनुक्ख भ' कें! गै किरणिया तों किए नोर बहबै छें,पोछ! नै त' इ फेरो एम्हरे घुरि औतौ.पुन: शान्ति पसरि गेल ऐछ!अधरतिये मे लहाश कें खेत मे आनल गेल. हिन्दु धर्म मानितो लहास जरएब असगुन बुझल जाइछ. कियो बहरी बला लोकक दर्शन सं एकरा मोक्ष नै भेटतै तें चुपचाप खाधि मे द' झांपि चल. मना जे अगिला जन्म मे मनुक्ख होउ, नर- नारी किछो मुदा बीचला लोक नै. आइ चारू भर खुशीक च'प उनार गप्प पसरल छै.सब हिजड़ाक करेजा सुप सन भेल बुझू.ओना निर्णय समाजक हो कि न्यायालयक सार्थके बुझू.इ निश्तुकि बुझू जे सब निर्णय सब पर लागू नै होइछ.आ कि एना कहू जे सब बात सं सब लाभान्वित नहि होइछ. मुदा तै सं कि आइ 15 अप्रैल 14 हमर सबहक जीवनक इतिहास स्वर्णक्षार सं लिखल सन! किए त' अझुके दिन सर्वोच्च न्यायालय हमरा सब कें पिछड़ी जातिक श्रेणीक बराबर आरक्षणक घोषणा कएलक! आब पढ़ल लिखल कें नोकरी मे जग्गह सुनिश्चित सन. ओना पहिनहियो सं हमर लोक सब शिक्षक, प्रोफेसर, पार्षद आदि त' भेले छै.मुदा आब अधिकार संग हेतै.हं अधिकारक बात पर मोन पड़ैए वर्ष-94. जहिया हम सब टी.एन. शेषण कें नाचि गाबि मोन बहटारने रही.उएह त' पहिल बेर हमरा सब कें विधिवत मताधिकार प्रयोगक अधिकार दियौलनि.ओइ सं पहिने हमरा सब कें मतदानक ने कोनो अधिकार छल आ ने कोनो सरोकार.आब.. आब हमहूं सब सरकार भ' सकै छी आ हमरो सबहक सरकार बनि सकैए जेना एखनहु धरि अहां सबहक ऐछ! बाबा ओंघाइ छीयै की? ढ़ोल, हरमुनिया आ हाथ माइक नेने साड़ी ,समीज बालीक हंजेड़ अनचोके बुचकुन कक्काक आंगन में ढ़ूकि गेल।

कनिञां घोघ तनैत,बुच्ची सम्हारैत,नुकबैत कोठरी ध' लेलनि।काकी छाती पिटैत-रौ दैब रौ दैब पोता- पोता रटलौं त' एलीह भगवती। तै पर सं हिजड़ाक झुण्ड।।

क्षणहि मे सगरो टोल दलमलित!स्त्री गणक हेंज अंगना सं दुरा धरि सोहरि गेल छल।पमरियाक जग्ग्ह हिजड़ा देखि उत्सुकता दुन्ना।फरमाइस क' के गीत सुनै गेल। नाच-गानक बीच कक्का काकी के एक हजार थम्हबैत लियय किछु कपड़ा लत्ता जोड़ि विदा करू। यै मां इ लौथ एक हजार आओर मिला द' देथुन।

गै मए गै मए,जेना बेटा जनमल होइ! मां,बेटा- बेटी नै,मए हेबाक सुख हर्षित केलक!

हिजड़बाक मुखिया आओर पांच सए लगा घुरबैतकहलक-"मइयां,हे इ आशीष। " बेटीये से ने बेटा,बेटी सम्हारू त' जग चलतै।"

-मुन्ना जीक साहित्यिक यात्रा कथा लेखनसं प्रारम्भ भेल छल. पहिल कथा "मनियाडर" झंझारपुरक कथा गोष्ठी (1993) मे पाठक संग। पहिल प्रकाशनार्थ कथा "स्वीकार" कर्णामृत (1994), दोसर प्रदीप बिहारीक संपादन मे सझिया संगोर "भरि राति भोर� मे (१९९७)। तकर अतिरिक्त विदेह, मिथिलांगन....मे. ओइ बीच बीहनि कथा विधा फरिछाब' मे लागल आब ओ पाटि धऽ लेलक तखन पुन: कथा दिस.... क्रमश: । अपन तेरहम आ हिजड़ा जीवन पर लिखल टटका कथा! अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.४.संतोष कुमार राय 'बटोही'-घरक चौकैठ (कथा) संतोष कुमार राय 'बटोही' घरक चौकैठ (कथा)

ई नीक कहल जा सकैए या खराब से तँ बादक गप छियैय, परञ्च जनानी केँ घरक दहलीज नांघक चाही ? ई एकटा प्रश्न अछि। हम अई प्रश्नक उत्तर खोजि रहल छी। गप ई छियै जे हमरा ससुराल सँ एकटा बारह-तेरह सालक बचिया जे हमरा सैर लगतीह मायक डर सँ घर सँ बाध दिस भगलीह। हुनकर माय हुनका पीछा सेहो छलीह। ओ भागैत भागैत नहर पार करैत छपराढी कुँआढ दिस आबि गेलीह। हुनकर माय देखलकिहिन जे ओ नहर पार क गेलीह तँ ओ ई भरोस पर पीछा करनै छोडि देलथिन्ह जे घर वापिस आबि जेतीह मनिषा। सांझ भ गेल छल। अनहार सेहो भ गेलै। मनिषा घर वापिस नहि भेलीह। ओ छपराढी मे कतौ भरि राति रैह गेलीह। रविवारक दिवस छेलैक। हम छुट्टी पर छलहुँ। सोमवार केँ इस्कूल गेलहुँ। हमरा किछु नहि जानकारी छल जे ओ छपराढी मे छथि। डेरा पर एलाह बाद रुणा कहलीह जे मनीषा केँ देखलियै । हम उत्तर देलियै नहि।

आब ओ सभटा खिस्सा कहअ लगलीह। सोमवार केँ हुनकर माय दुल्लीपट्टी, शीलानाथ, कुँआढ सेलीबेली, ट्रेनिंग चौक नरार, नरार कोठी चौक, महुआ आदि जगह मनीषा केँ खोजि लेलथिन्ह। मनीषा कतौ नज़र नहि पडलीह। छपराढी मे जत ओ राति मे रुकल छलीह। ओई घरक आदमी कहलकैन्ह ओकरा ट्रेनिंग चौक पर छोडि ऐलीयै। बस मे ओकरा बैठा देलियै। ओ कहलक जे कलुआही जायब। रुणा केँ माय बारंबार फोन करअ लगलीह जे मनीषा तोरा लग छौ। ओकरा बुझल छै जे जीजा छपराढी मे माहटर छथि। मंगलवार केँ हम सी एल मे छलहुँ । आब ई मामला जनानी ए तक नहि रहलै। मर्द केँ सेहो कहल गेलै। मुन्नीदेव सिंह आओर हुनकर भा ई सेहो अइ मामला मे शामिल भेलाह अछि। जयनगर थाना मे सिन्हा लिखौल गेल आओर सभ तरि खोजने शुरु भेल। बिरौल, खजौली, कलुआही , बरदेपुर, फेर सँ छपराढी, कुँआर, शिलानाथ, दुल्लीपट्टी, सेलीब्रेट, ट्रेनिंग चौक नरार, कोठी चौक नरार, महुआ, हरियाली, गोराई, जयनगर, लक्ष्मीनगर, राजनगर, मधुबनी। परञ्च मनीषा केँ कतौ खोजखबर नहि।

माय केँ आओर परिवारक लोकनि, अरोसिया परोसिया, समाज , गामक लोकनि केँ की हालत होयतै से तँ कहल नहि जा सकैए। लडकी की घर सँ निकलला केँ बाद कतेक सुरक्षित रहैत छै से तँ हम अहाँ जानते छी। ओही दिन सँ हमरा ठीक सँ निम्न नहि भेल । बुधवार केँ हम इस्कूल गेलहुँ विद्यार्थी सभ सँ पुछलियै, शिक्षक सभ केँ बीच मनीषा लक गप केलियै।परञ्च कतौ कुनो खबर नहि।

पता लागल जे घर सँ भागलाह सँ पहिने मनीषा जहर सेहो खाने छलीह। अस्पताल मे बड रुपया खर्चा भेलै ओकरा बचाबै मे। ओ बैच गेलीह। ओही सँ पहिने हुनकर बहिनक बियाहक कर्जा सभ हेबे करै। आब प्रश्न ई उठैत छै जे बारह तेरह बरखक बचाय माहुर क्या खेने रहै। ओ किया फिरिशान भेल रही। कोरहिया हॉल्ट पर कतेक लोकनि किनको टेंशन भेला पर ट्रेन सँ कटि केँ मरि जायत अछि। ई घटना कोरहिया मे होयत रहैत छै। ककरो कंठ दबा केँ मारि दैत छै, ककरो आगि लगा क मारि दैत छै। लफंगा छौरा सभ गुमती पर भांग गाजा, दारू पीबि क मोटर सा इकिल सँ स्टंट करैत रहैत छै। किछु छौरा छिना झपटा सेहो करैत अछि। देसी कटा सेहो रखैत अछि। नेपाल सँ दारु सप्लाई होयत छै। शिक्षा केँ स्तर निम्न छै। पारिवारिक बनावट ठीक नहि छै। छोरा छोटी वाला कांड होयते रहैत छै। किछु छौरा कतेक बेर जेल जाक आबि गेल अछि।

मनीषा दिमागी रूप सँ सही नहि कहल जा सकै ए किया तँ ओ यदि सही रहतीह तँ घरक दहलीज सँ बाहर नहि भगतीह। मायक डर सँ लोक घर सँ थोडे भागि जायत छै। रुचि गेल , मायक मारि-गारि आशीर्वाद होयत छै। जनानी लेल घर सँ बाहर सुरक्षा नहि छै। बाहर नोचि क खाय वाला सभ बैसल छै। ई तँ हुनकर माय बालक धर्म बुझियौ जे ओ मधुबनी सँ सही सलामत बरामद भ गेलीह। ट्रेनिंग चौक पर जै बस मे चढल रहै संयोग जे एकटा नीक जनानी भेंट भ गेलीह मनीषा केँ। बारह तेरह बरखक असगरे लडकी के देखि क जनानी बुझि गेलीह जे ओ घर सँ निकले गेल छै। ओ अपना संगे समस्तीपुर ओकरा नेने गेलीह। ओ तँ पटना जेबाक गप क रहल छलीह, परञ्च ओ जनानी बलजोरी ओकरा अपने संग ल गेलीह। फेर नीरा सँ मधुबनी नेने एलीट मनीषा केँ। घरक लोकक फिरिशान समझिए क॓ ओ मनीषा सँ घरक फोन नंबर लेलीह। ओ जनानी फोन पर मनीषा केँ माय केँ सभ गप कहलथिन्ह। मनीषा सँ सेहो गप करा देलथिन्ह। मनीषा घर आबि गेलीह।

-संतोष कुमार राय 'बटोही' , ग्राम - मंगरौना, पोस्ट - गोनौली, भाया - अंधराठाढ़ी, जिला - मधुबनी, बिहार-८४७४०१ मोबाईल नं॰ 6204644978; सम्प्रति - शिक्षक। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.५.संतोष कुमार राय 'बटोही'-पार्वती केर शपथ (धारावाहिक नाटक) संतोष कुमार राय 'बटोही'  पार्वती केर शपथ (धारावाहिक नाटक)

(नेपथ्य मे पार्वती , महादेव, नंदी, नारद, भक्त, भक्तिन, एकटा छोट बालक आओर बालिका, आओर समाज छथि। मंच सजाउल गेल छै। मंच केँ दृश्य कैलाश पर्वत माफिक छै।)

पहिल दृश्य

( महादेव आओर पार्वती अपन-अपन आसन पर बैसल छथि।नंदी केर प्रवेश।)

नन्दी : तीनू लोकक स्वामी महादेव आओर माता पार्वती केँ सेवक नन्दी केँ तरफ सँ साष्टांग प्रणाम ! (नंदी माटि मे छाती केँ बल सुति रहैत छथि आओर दुनू हाथ जोरि कऽ महादेव आओर माता पार्वती दिस बढ़ा दैत छथि। )

महादेव आओर पार्वती (एके संगे आशीर्वाद केँ मुद्रा मे हाथ बढ़ाबैत) : जुग-जुग जीवअ पुत नन्दी।

महादेव : देश-दुनिया केँ की हाल छै पुत्र नन्दी ?

नन्दी : पृथ्वी पर अपराध बढ़ि गेल अछि। जनानी केँ ऊपर जुल्म बेसी बढ़ि गेल अछि। बलात्कार घटना बढ़ि गेल अछि। गोली कांड बढ़ि गेल अछि। बात- बात मे नवयुवक सभ बंदूक-पिस्तौल निकालि लैत अछि। प्रेम प्रसंग मे हत्या बढ़ि गेल छै।

पार्वती : सोशल मीडिया दुआरे हत्या आओर आत्महत्या सेहो बेसी भऽ रहल अछि।

महादेव : हँ, देवी ! सोशल मीडिया केँ दुआरे अपराध बढ़ि गेल छै। बंगाल मे डाक्टर केँ संग घटना घटि गेलै। घोर अपराध !!!

( नारद केर प्रवेश) नारद : महादेव आओर माय पार्वती केर जय। स्वामी भूलोक मे अनर्थ भऽ रहल छै। जनानी केँ पाछा मर्द निधो कऽ पड़ल छै। माय पार्वती एकर निदान केल जाउ , नहि तँ अनर्थ भऽ जेतै।

पार्वती : हे नारद ! एकर निदान तँ महादेव करताह। जखन रावण, भस्मासुर, कंस, हिरण्याक्ष, हरणकशिपु वगैरह केँ महादेवजी, ब्रह्माजी, विष्णुजी मिलि कऽ नष्ट केलाथि ।

महादेव : देवी ! एकर निदान हेतै । धीरज राखु।

पार्वती : आब कतेक धीरज राखी महादेव ! जखन मर्द सभ नंग्टे घर सँ निकलतै तखन अहाँ किछु करबै ? जनानी केर दुर्दशा देखि कऽ हम कारुणिक भऽ रहल छी।

नारद : महादेव ! माय पार्वती केर गप्प सुनल जाउ ।

महादेव : पापी केँ पापकर्मक निदान हेतै। पापक घैला भरअ दियौ देवी ! बालिका केर हत्या कखनहु उचित नहि कहल जेतै।

नारद : महादेव देर भऽ रहल अछि। हम घुमि-घुमि कऽ देखि रहल छियैय बैजनाथ धामक नगरी देवघर अछि । आओर बिहार प्रदेश मे बाबा रहलाक बादो जनानी केँ लेल कोनहु सुरक्षा नहि छै।

पार्वती : महादेव इ गप्प ठीक नहि कहल जायत ।अहाँ धेयान नहि दैत छियैय। अगर आबो धेयान नहि देबै तँ हम खुदे ब्रह्माजी आओर देवी सरस्वती सँ ऐ विषय पर गप्प करअ लेल ब्रह्मलोक जायब ।

( पार्वती आसन पर सँ उठि कऽ ब्रह्मलोक विदा भेलीह । नारद जी सेहो विदा भेलाह। कैलाश पर्वत पर सिर्फ महादेव आओर नन्दी रैह गेलाह।)

नारद : जय माय पार्वती की।( इ कहैत नारद विदा भेलाह अपन बाबूजीक ब्रह्मलोक।)

(पर्दा गिर गेल आओर पहिल दृश्य केर अवसान) भेल।) -संतोष कुमार राय 'बटोही' , ग्राम - मंगरौना, पोस्ट - गोनौली, भाया - अंधराठाढ़ी, जिला - मधुबनी, बिहार-८४७४०१ मोबाईल नं॰ 6204644978; सम्प्रति - शिक्षक। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.६.प्रणव झा-डिप्लोमा इन फार्मेसी एग्जिट एग्जामिनेशन नियमन, २०२२ प्रणव झा डिप्लोमा इन फार्मेसी एग्जिट एग्जामिनेशन नियमन, २०२२ वर्तमान विश्व के परिप्रेक्ष्य मे देखल जाय त फार्मास्युटिकल्स एकटा विस्तृत आ बहुआयामी स्कोप बला कारोबार आ रोजगार के क्षेत्र छैक। नाना प्रकार के दवाई, टीका आदि के शोध, रिसर्च, मेनुफ़ेक्चरिंग, मार्केटिंग आ वितरण एकटा पैघ इकोसिस्टम छैक । एकर सबसे छोट इकाई छैक केमिस्ट & ड्रगीस्ट  अर्थात दवाई के दोनाक चलेनहार। अपना देश आ राज्यक नियमानुसार ई दवाई दोकान चलेनिहार सभ के न्यूनतम डी.फार्म अर्थात फार्मेसी मे डिप्लोमा के योग्यता राखनाई आनिवार्य छैक। मुदा बहुतो लोक बिना ऐ पात्रता के सेहो अनका डिग्री बऽले आ नै त ड्रग इंस्पेक्टर से सेटिंग कऽ के दवाई दोकान चला रहल छैथ। एकटा आन समस्या ऐ क्षेत्र मे जे पिछला दु-एक दशक मे बढ़ल अछि ओ अछि गोबरछत्ता जेकाँ फुजल फार्मा कॉलेज सब जै मे पढ़ाई लिखाई साढ़े बाईस भऽ रहल छैक। खाली पाई बऽले एडमिशन आ डिग्री बांटल जा रहल छैक। किएकि दवाई सुइया आ मेडिकल ईक्विपमेंट एकटा संवेदनशील वस्तु थीक आ एकर सोझा प्रभाव लोकक स्वास्थ्य आ शरीर पर पड़ई छैक ताहि दुआरे ई मामिला संवेदनशील छैक। मामिला के गंभीरता के ध्यान मे राखैत केंद्र सरकार फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के तत्वाधान मे एकटा नव कानून बनेलक अछि जकरा -डिप्लोमा इन फार्मेसी एग्जिट एग्जामिनेशन नियमन, 2022- नाम देल गेल छैक। डिप्लोमा इन फार्मेसी (D.Pharm) एकटा द्विवर्षीय पूर्णकालिक कोर्स छी, जे विद्यार्थी केँ अस्पताल, सामुदायिक फार्मेसी आ अन्य फार्मास्युटिकल क्षेत्र में काज करबाक लेल तैयार करैत अछि। ई कोर्स इंटर (बारहमा) विज्ञान विषय से पढ़ल विद्यार्थी कऽ सकय छैथ। एहि कोर्स के पूरा करबाक बाद, विद्यार्थी अपन करियर के नाना तरहक सार्वजनिक आ निजी क्षेत्र में विकसित कऽ सकैत छथि। सरकारी अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, शैक्षिक संस्थान, निजी अस्पताल, ड्रग स्टोर, फार्मास्युटिकल कंपनी आ रिसर्च एजेंसी में D.Pharm पास कयनिहार विद्यार्थी के लेल रोजगारक अवसर भेंट सकय अछि। सरकारी अस्पताल, सेना आ रक्षा सेवा में कै टा पद उपलब्ध अछि, जखन की निजी क्षेत्र में फार्मासिस्ट, प्रोडक्शन एक्जीक्यूटिव, एनालिटिकल केमिस्ट आ रिसर्च ऑफिसर केर पद पर काज कऽ सकैत अछि। डिप्लोमा इन फार्मेसी पास कयनिहार विद्यार्थी अपन अध्ययन के आगा बढ़ेबाक लेल B.Pharm आ ओकर बाद स्नातकोत्तर डिग्री के पढ़ाई कऽ सकैत छथि। फार्मास्युटिकल अध्ययनक संगहि कानून केर क्षेत्र में सेहो अपन करियर बनाबय के लेल विद्यार्थी विचार कऽ सकैत छथि। डिप्लोमा इन फार्मेसी एग्जिट एग्जामिनेशन नियमन, 2022: फार्मेसी एक्ट, 1948 (8 ऑफ 1948) केर धारा 10 आ 18 द्वारा प्रदत्त शक्तिक प्रयोग करैत, फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया, केंद्रीय सरकारक स्वीकृति सँ "डिप्लोमा इन फार्मेसी एग्जिट एग्जामिनेशन नियमन, 2022" लागू कएलक अछि। एहि नियमनक मुख्य उद्देश्य अछि जे डिप्लोमा इन फार्मेसी (D.Pharm) कोर्स पूरा कएने विद्यार्थी जे राज्य फार्मेसी काउंसिल में पंजीकरण लेल आवेदन करैत छथि, ओ सभ फार्मेसी शिक्षा आ व्यावहारिक प्रशिक्षणक संगहि अपन कर्तव्य आ जिम्मेदारिकेँ व्यावसायिकता सँ निभाबय  मे सक्षम होथि। डिप्लोमा इन फार्मेसी एग्जिट एग्जामिनेशन (DPEE) केर मुख्य उद्देश्य अछि जे पंजीकरण लेल आवेदन कयनिहार उम्मीदवारक फार्मेसी शिक्षा आ व्यावहारिक प्रशिक्षणक अनुपालनक पुष्टि करब। एहि एग्जामिनेशन सँ पास भेलाक बाद, विद्यार्थीकेँ औषधि वितरण आ अन्य फार्मेसी प्रैक्टिस केर कोर कंपेटेंसीक संगहि अनुशासन, सत्यनिष्ठा, निर्णयशक्ति, कौशल, ज्ञान आ सीखबाक उत्साह केँ पुनः पुष्टि कएल जाइत अछि जै से कि ओ अपन कर्तव्य आ जिम्मेदारीक निर्वाह व्यावसायिकता सँ कऽ सकथि। एहि नियमनक लागू होयबाक बाद, खाली ओहि उम्मीदवार केर पंजीकरण फरमासिस्ट के रूप मे कएल जाएत जिनका लग मान्यता प्राप्त डिप्लोमा इन फार्मेसी कोर्स आ एग्जिट एग्जामिनेशन में सफलता प्राप्त करबाक प्रमाण पत्र होयत। ई नियमन पहिने सँ पंजीकृत फार्मासिस्ट पर लागू नहि होयत। नियमक अनुसार, -डिप्लोमा इन फार्मेसी एग्जिट एग्जामिनेशन (DPEE) केर उद्देश्य अछि कि जे उम्मीदवार राज्य फार्मेसी काउंसिल में पंजीकरण लेल आवेदन करैत छथि, ओ सभ फार्मेसी शिक्षा आ व्यापक व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम मे न्यूनतम सैद्धान्तिक आ व्यवहारिक ज्ञान अर्जित कऽ लेबाक पुष्टि करथि जे डिप्लोमा इन फार्मेसी (D.Pharm) कोर्स में फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा धारा 12 तहत मान्यता प्राप्त संस्थान में शिक्षा प्राप्त कएल गेल होय। डिप्लोमा इन फार्मेसी एग्जिट एग्जामिनेशन पास करबाक बाद, उम्मीदवार केँ फार्मासिस्ट केर रूप में पंजीकरण लेल फार्मेसी एक्ट, 1948 केर धारा 32(2) केर शर्तक अनुसार पंजीकरण कएल जाएत। पंजीकरणक लेल आवेदन राज्य फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार के कैल जा सकय अछि, संगहि फार्मेसी एक्ट केर धारा 46(2)(g) अनुसार निर्धारित शुल्क आ दस्तावेज संलग्न करबाक दरकार रहत। फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया आ राज्य फार्मेसी काउंसिल सभकेँ लेल -डिप्लोमा इन फार्मेसी एग्जिट एग्जामिनेशन (DPEE)- केर संचालन, परिणाम प्रकाशित करबाक आ परिणामक प्रतिलिपि प्रदान करबाक जिम्मेदारी आयुर्विज्ञान राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड (NBEMS) के देल गेल अछि NBEMS केर भूमिका परीक्षा संचालन, परिणाम प्रकाशित करबाक आ परिणामक प्रतिलिपि फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया आ सभ राज्य फार्मेसी काउंसिल सभकेँ हस्तांतरित करबाक अछि। डिप्लोमा इन फार्मेसी एग्जिट एग्जामिनेशन (DPEE)- केर पहिल परीक्षा एनबीईएमएस द्वारा एहि साल अर्थात 2024 मे लेल जेबाक संभावना छैक जकरा लेल आवेदन के प्रक्रिया पूर्ण कैल गेल छैक। फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया समय-समय पर एग्जिट एग्जामिनेशन आ ओकर पाठ्यक्रमक योजना घोषित करत। उम्मीदवार एक वर्ष में दू बेर एग्जामिनेशन में शामिल भऽ सकैत छथि, या जेतेक बार परीक्षा होयबाक योजना घोषित कएल गेल होय। परीक्षा तीन पेपरक होयत, जकरा अंतर्गत फार्मास्युटिक्स, फार्माकोलॉजी, फार्माकोग्नोसी, फार्मास्युटिकल केमिस्ट्री, बायोकैमिस्ट्री, हॉस्पिटल आ क्लीनिकल फार्मेसी, फार्मास्युटिकल ज्यूरिस्प्रुडेंस आ ड्रग स्टोर मैनेजमेंट विषय शामिल होयत। परीक्षा केर भाषा अंगरेजी होयत आ प्रत्येक पेपरक अवधि तीन घंटाक होयत। उम्मीदवारक पास होय लेल प्रत्येक पेपर में 50% अंक प्राप्त करब अनिवार्य अछि। उत्तीर्ण हेबाक लेल एकहि प्रयास में तीनों पेपर पास करब जरूरी अछि, लेकिन परीक्षा में शामिल होबाक प्रयासक संख्या पर कोनो प्रतिबंध नहि अछि। सफल उम्मीदवार केँ पंजीकरण आ अभ्यासक पात्रता प्रमाणपत्र जारी कएल जाएत छैक, जे ऐ कानून के लागू भेलाक बाद राज्य फार्मेसी काउंसिल में पंजीकरण हेतु प्रस्तुत करब अनिवार्य छैक। लोक रोजगारक लेल चारि सौ बीसी से एमहर आमहर जोगार लगा के गलत तरीका से अलग अलग क्षेत्र मे घुसि जाय छईथ मुदा हुनका मे ओहि पेशा के लेल नै सक्षमता रहय छैक आ नै तन्मयता। एकर नोकसान जनता के भोगऽ परय छैक। जखन कि लोक मेहनत करय त सोझ रास्ता से सेहो लक्ष्य प्राप्त कैल जा सकय य। फार्मास्युटिकल डिस्ट्रिब्यूशन समुदाय स्वास्थ्य प्रणाली मे एकटा महत्वपूर्ण घटक छैक। ताहि लेल ई आवश्यक अछि जे ऐ तंत्र मे अक्षम लोक सब के घुसबा से रोकब। ई कानून एहि के धन मे राखि के आनल गेल अछि। परीक्षा के विषय मे विस्तृत जनतब फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के वेबसाइट https://www.pci.nic.in/ आ एनबीईएमएस के वेबसाइट https://natboard.edu.in/viewnbeexam?exam=dpee पर प्राप्त कैल जा सकय अछि। -प्रणव झा, राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड, नई दिल्ली अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। पद्य ३.१.प्रमोद झा 'गोकुल'-किए भेलह तों मनुज? ३.२.प्रणव झा-अम्मल ३.३.राज किशोर मिश्र-अन्हार सँ इजोत ३.४.संतोष कुमार राय 'बटोही'-उर्मिलाक विद्रोह (धारावाहिक खण्ड-काव्य) ३.१.प्रमोद झा 'गोकुल'-किए भेलह तों मनुज? प्रमोद झा 'गोकुल' किए भेलह तों मनुज?

जे चराबथि सासुरमे बकरी सैह कहाबथि परम बुधियार वैह कहाबथि कहबैका बड़का आरक पदबी भेल फकसियार । अवसर देखि सुतारथि गोटी सेखी बघारथि रहनि ठाढ़े चोटी परदोष निहारब हुनक बपौटी अप्पन धरि राखथि टुटले टोटी । मुहंँ मे राम बगल मे छूरी अँतड़ी घुरछल बहत्तैर हाथ माथ पाग कान्ह दुपट्टा ओकरे तिलक भाल पुर्णिमाक साथ । तोहर भाग मे घोर अमावस दिन दुपहरि अस्त सुरुज मस्त भय भोगह सबटा किएक भेलह तों मनुज ? -प्रमोद झा 'गोकुल', दीप,मधुवनी (विहार), फोन -9871779851 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.२.प्रणव झा-अम्मल प्रणव झा अम्मल जे खाय अछि गुटका भऽ जाय अछि गलचुटका। जे खाय अछि पान दै अछि सभ के ज्ञान। जे पीबय अछि चाय तरोताजा भऽ जाय। रोज पिबय जे दारू भऽ जाय अछि बीमारू। जे पीबय अछि पानि बनल रहय अछि जुआनि। पैघ के करय जे आदर पाबय नेहक चादर। जे पोथी पढय अछि ज्ञान ओकर बढ़य अछि। भोरे करय जे ध्यान होय ओकर कल्याण। जे मेहनत करय अछि आगा ओ बढ़य अछि। नेह बढाबय अछि जे नेहे पाबय अछि ओ। ताकय जे मंच माला बुझु दाल मे काला । चलु आब हम जाय छी घुरि-फिरि के आबय छी। -      प्रणव झा [राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड] अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.३.राज किशोर मिश्र-अन्हार सँ इजोत राज किशोर मिश्र अन्हार सँ इजोत नभ सँ ता कि रहल अछि उड़ुगण, अन्हा र-का जर सँ पो तल वसुधा , अवनि क देह पर चढ़ल को ना कऽ, जहर आसुरी ? ओ छलि दुद्धा ।

एकरे बेओँत मे बैसल अछि , ति मि र-षड्यंत्रक अपन जो गा ड़, उजरा मंत्रक स्वर ओझरा एल, खो ललक भरम अपन व्या पा र।

फोँ फ कटैत अछि ,मो नक सी धा , नि शा चर सा धि रहल नि ज ध्येय, घुरमी ला गल धवल-तंत्र केँ, छि पल जो ति को ना हो एत प्रमेय ?

खञ्ज-खो हड़ सन अछि इजो त, अछि प्रभा ही न, भऽ गेल अथबल, मो नक को न अधो गति ओक्कर? दुबकल, बैसल अछि ओ कलबल।

ई करि आ-तंत्रक को नो अनुष्ठा न् , जि नगी पर वि ध्नक चलल वा ण।

दि वा जेना अभि शप्त भेल हो अए, ध्वां त साँ झ मे रहैत अछि काँ च, अन्हा रक सबतरि सजल मञ्च, हेतै रा ति का पा लि क ति मि रि आ ना च ।

हो एत उजो र प्रति क्षा रत, सा मर्थ्य क फेर करत संधा न, दुनि आँ ओकर भरो से सूतल, करत नव दि नक अनुसंधा न।

एही अन्हा र मे गम्हरा एल , भी तरे-भी तर इजो त, ति मि र-जलधि मे फेरो सँ, उतरत को नो पो त ।

अन्हा रक सघन बो न मे, गमकत जो ति क चा नन , सरसि ज सूँघत अरुण-कि रि न, चमकत वसुधा -आनन।

इजो तक धवल शृङ्गा र सँ, क्षि ति जक सजत पुबरि आ मुह, संघर्षक सि नुरि आ अङ्गरा ग सँ, पो छल देखि , खग बा जत 'कूह'।

प्रका शक महा समुद्र मे, तमि स्त्रा क अस्थि -वि सर्जन, आएल ओ बेर, अरुणा भ सँ, सृष्टि -उदयक हो एत सर्जन।

नभ मे इजो तक कोँ ढ़ी फूटल, अन्हा रक का री का जर छूटल ।

पुनर्स्था पि त उद्यो त मे,

अन्हा र-प्रलय सँ उबरल धरणी , जि नगी क नवल दि वसक सृजन, ति मि रक भेल गो दा न-वैतरणी ।

करि आ-झुम्मड़ि खूब खेला एल,

का लक को नो तंत्र, समयक को नो मुह अछि चमकल, उत्था नक ई मंत्र ।

दि वसक उज्जर दप -दप आनन, पा ड़ल ओहि पर इजो तक चा नन।

पाँ खि खो लि नभ मे उड़ल अछि ,

बढ़ल दूर खगरा ज, सुनबैत व्यो म केँ ,भि नसर ई, तमि स्त्रा सँ भेटल स्वरा ज।

भो रक सौं दर्य-र्य पसा हनि मे, ला गल अछि खि लल प्रसून, ऊर्जा -पा ग मे बो ड़ल अछि , अछि मि ठगर का ल्हि सँ दून।

डूबि क' दि वा ऊगल अछि , अनुभवक ठेढ़ पर ठा ढ़ , दि वस जि अत जि नगी पूर्ण, बुझि तहुँ आओत अन्हा र। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.४.संतोष कुमार राय 'बटोही'-उर्मिलाक विद्रोह (धारावाहिक खण्ड-काव्य) संतोष कुमार राय 'बटोही' उर्मिलाक विद्रोह (धारावाहिक खण्ड-काव्य)

सखि ! के बुझत हमर बतिया  ! केना बीतैत अछि हमर रतिया । माथ मे की लिखलाथि बिधना ? की  अधरम  भेल कोन  दिना ?

         गौड़ी पुजलहुँ महादेव पुजलहुँ ।          ब्रहम पुजलहुँ शनिदेव पुजलहुँ।          सखि ! साजन भेल हमर परदेश ।          हमहुँ चलितहुँ वन पहिर साधुवेश।

नहि देखलाथि एक बेर फिरि ई आँखिक नोर । लखनक हिया भेल पाथर टुटल नेहियाक डोर । मधु मास बितल साउन बितल माघ भेल बड़ कठोर। दरद उठल हिया मे फाटि रहल अछि अंग पोर -पोर !

      सखि ! मरि रहल उर्मि संदेश पठाउ  लखन केँ ।        कतेक दिन आओर लगतन्हि वन मे बलम केँ ?       अगर पति धरम होयत छै तँ पत्नी - धरम नहि ?       भाय लेल केलाथि  हमरा लेल कोनहुँ करम नहि।

ई भवन,ई साज-सज्जा,ई तोशक, ई मखमल । लखन बिन हमरा लेल मिश्री-मेवा भेल गरल । सखि ! एकटा पोखरि खुनाउ लेब जलसमाधि । नहि रखवाक रहन्हि संगे तँ  कियाक केलाथि शादी ।

            सीता बहिन वन गेलीह  जेठ केर संग ।             हम की कऽ दतियैन्ह हुनकर कर्म भंग ?             एक बेरि तँ हमरो मौका दैतियै यौ निर्मोही।             उर्मिला केर चरण स्पर्श करैत अछि बटोही।

-संतोष कुमार राय 'बटोही' , ग्राम - मंगरौना, पोस्ट - गोनौली, भाया - अंधराठाढ़ी, जिला - मधुबनी, बिहार-८४७४०१ मोबाईल नं॰ 6204644978; सम्प्रति - शिक्षक। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ।

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एकर AIT सुनैत छथि ,ओ सब पाप सँ मुक्त Ys जायत छथि | युघिष्ठिर कें पूछला पर भगवान श्रीकृष्ण कहलनि - राजन ! पुरुषोत्तम मासक दोसर पक्षक एकादशी कामदा नाम a विख्यात अछि । जे केओ श्रद्धा भाव A कामदा एकादशी शुभ daw अनुष्ठान करैत छथि , ओ एहिं लोक आ परलोक मे. मनोवांछित फल पावैत छथिं | कामदा एकादशीक dd bs रातिं मे जागरण करैत अछि, ओ सव पाप सँ मुक्त Ys परम गति पावैत छथि | ue माहात्म्य कें पढला आ सुनला a Tes गोदनाक फल facta अछि | KKKEKKK

वताउ जाहिं Fay लोकनि सदिखन लागल रहैत छथि | लक्ष्मीजी कहलनि - ser देव | एकादशी व्रतक माहात्म्य PAC सँ सव दुःखक नाश होयत अछि ar quae प्राप्ति होयत अछि , तैं एहि व्रतक माहात्म्यक श्रवण pH चाही | जेना मास मे पुरुषोत्तम मास , पक्षी मे गरुड़ HT नदी मे गंगा श्रेष्ठ अछि तहिना तिथि मे द्वादशी तिथि उत्तम अछि | जौं दिन मे एकादशी आ द्वादशी होय आ राति मे त्रयोदशी Ys जाय आ त्रयोदशी मे पारण कएल जाय , det हुनका सए यज्ञक wa मिलैत अछि | जे केओ शुद्ध भाव संँ पुण्यमय एकादशीक dt eta Be , ओ पुनरावृत्ति सँ मुक्त Us वैकुंठधाम जायत छथि | भगवान श्रीकृष्ण कहलनि - ई कहिं देवी लक्ष्मी ओहि ब्राह्मण कें वर as अंतर्ध्यान us गेलीह | ब्राह्मण Gel धनवान Ys अपन पिताजीक घर चलिं गेलाह | जे केओ कमला एकादशीक dd करैत छथि आ एकादशी दिन

सगा संबंधी हुनका त्यागिं देलथिन | अपन नीच कर्मक कारण निर्वासिंत Ys Yat वन मे ale गेलाह | दैव योग सँ एक दिन ओ तीर्थराज प्रयाग पहुँचि गेलाह | भूखल रहला पर ओ त्रिवेणी मे नहाय सोनाय कें कोनो मुनिक आश्रम खोज$ लागलैधि। Gott खोजैति हरिमित्र मुनिक आश्रम देखलथिंन | पुरुषोत्तम मास मे fe ठाम ede cleft छलाह | हुनका आश्रम मे पापनाशक . कथावाचकक मुखारविंद सँ कमला एकादशीक महिमा सुनलधि , जे पुण्यमयी ,भोग आ मोक्ष प्रदात्री अछि | जयशर्मा सेहो fate विधान सँ कमला एकादशीक कथा सुनि मुनिक आश्रम मे सव लोकनिकक संग ad केलनिं | अधरतिया मे भगवती लक्ष्मी हुुका लग आवि कहलनिं - TAT! कमला एकादशी Ade प्रभाव सँ हम अहाँ पर खुश st आ देवाधिदेव श्री हरिक आज्ञा Gen वैकुंठ धाम संँ एलहूँ अछि अहाँ वर ATT | ब्राह्मण कहलनि - हे माता लक्ष्मी ! जौं अहाँ हमरा पर खुश छी , तहन कोनो एहन व्रत कथा

पुरुषोत्तम मास में कोन seth भोजन उत्तम होयत अछि ? भगवान श्री विष्णु कहलनि - राजन ! अधिक मास Ve पर जे एकादशी होयत अछि , at कमला नाम संँ विख्यात अछि । ओ तिथि मे उत्तम तिथि अछि । एहि aap प्रभाव से लक्ष्मी अनुकूल ead छथिन । ओहि दिन ga मुहूर्त मे उठि . भगवान पुरुषोत्तमक स्मरण आ विधि विधान सँ नहाय सोनाय क$ adt लोकनि ga af | घर पर जप केला सँ एक गुना , नदीक कछेर पर g गुना , गौशाला पर सए गुना अनिहोत्र पर एक हज़ार गुना ,शिवक क्षेत्र पर, तीर्थ स्थल पर आ तुलसी लग एक लाख गुना व भगवान विष्णु लग sd गुना फल मेंटेत अछि | अवंतिपुर मे शिव शर्मा नाम सँ एकटा श्रेष्ठ IMA Yd छलाह , हुनका Waa बालक छलेंन, ओहि AA जे wai छोट छलैधि ओ पापाचारी Ys गेलधि , तैं हुनकर बाबूजी आ

(पाठक Jah सलाह पर उक्त कथाक देवनागरी लिंप्यांतरण प्रस्तुत अछि ) पुरुषोत्तम मासक एकादशीक माहात्म्य (Ta पुराण उत्तर खंड ) युधिष्ठिर कहलनि - भगवन ! आव हम श्री विष्णुजीक ब्रत मे उत्तम व्रत, जे सव पाप कें नष्ट क$ दैत अछि, व्रती लोकनिं कें मनोवांछित फल दैत अछि , से Ws चाहैत छी । जनार्दन |! पुरुषोत्तम AR एकादशीक कथा कह्ठ जे ओकर की फल अछि आ कोन देवताक पूजन कएल जायत अछि ? प्रभो ! कोन दानक की पुण्य ead अछि ? लोकनि कें की कर$ चाही ? तखन कोना. स्नान कएल जायत अछि ? कोन मंत्रक जप कएल जायत अछि ? पुरुषोत्तम !

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लग छाती हेतए, छातीमे दम हेतए तेकरे सन्तति (रचना) दीर्घायु हेतए। साहित्य सहितक भाव अछिं। एहिं सहितसँ रहित कोनों स्वार्थ वा नकार भाव सुपात्रक अहित ata अछि आ तैं ई कतहु बनओ, अस्वीकार्य अछि । साहित्यक पावन क्षेत्र कोनों अपावन विचार या क्रियाक कोनो स्थान नहि हएबाक चाही । 'अंतिका ' आब मृतप्राय पत्रिका अछि मुदा ओकर हरेक अंकमे अधिकांशत: सहरसाबला लेखक thet अछि। ई कतेक उचित ? ई प्रश्न हमरा कनेक विरोधाभाषी ata अछि। जख़नि अंक बहराए रहल छै त ई मृतप्राय केना Ver? ई अवश्य जे ई नियमित नहि रहि सकल अछि। तखनि मैथिलीमे एहन अभागल कोनों पहिल पत्रिका a नहि अछि अंतिका । रहल बात एढिमे अधिकांशत: सहरसाबला लेखकक छपब त हम एकरा एहिं दृष्टिसँ नहि देखि पाबि रहल छी । हम सुपौलक छी आ अंतिकामे हमरहु रचना Bia रहल अछि आ मधुबनी अहु- दरभंगा आ अन्य ठामक लेखकसभक रचना हम एहिमें देखैत-पढ़ैत रहल छी। गौरीनाथ पहिनेक तुलनामे बहुत बदललाह अछि--व्यक्ति, साहित्यकार आ सम्पादकक रूपमे, जे समय-काल, परिस्थिति आ माहौलक प्रभावमे स्वाभाविक अछि किन्तु हुनक संघर्ष, क्षमता, योग्यता आदिकेँ नकारब कठिन अछि। अपन अनेक सीमाक बादो गौरीनाथ/अनलकान्त मठ-मठाधीशक प्रति विद्रोह आ आक्रोशक PAS AT राखने रहल छथि आ अपन लेखन आ अंतिकाक माध्यमसँ ओ एकरा निरन्तर प्रकट करैत रहल छथि। ई विद्रोह आ आक्रोशक स्वर अलग-अलग लोकक लेल प्रिय- अप्रिय भए सकैत अछि किन्तु एकरा नहि सकारब कठिन अछि। क्षेपकमे एकटा गप कहबाक मन होइए । से ई जे सुपौल-सहरसा आ दरभंगा- मधुबनीमे प्रकृतिगत अंतर अछि । एकटा कोशी नदीक उद्याम तेवरक क्रीडक्षेत्र आ Sen कमलाक लचगर खेलौरक क्षेत्र अछि। कोशी संघर्ष आ पुरुषार्थ सिखबैत अछि त कमला कोमल सुविधाक पाठ दैत ale संभव अछि जे अनलकान्त/गौरीनाथकें कोशीक लेखन बेसी धरगर आ समकालीन garda होइनि। बहुत दिनधरि मैथिलीमे दलित लेखक केर प्रवेश नै छल। एकरा अहाँ कोन रूपमे देखे fot? एखनुक केहन अवस्था छै? साहित्यकें-दलित-लेखन, स्त्री-लेखन आदिक aa alee देखब हमरा कनेक कक. अरविन्द ठाकरजीक साश्ात्कार -- io

= नदी किनारेवाला भुतहा पीपल की तरह झंझावात सहते खड़ा रहा। लोग अपने- | अपने ढंग से आरोप और लॉछन लगाते सदमे पहुँचाते रहे । ं बहरहाल, जैसे भी, मैं साहित्य में आ गया था और वह भी दिल-दिमाग से _ होल-टाइमर बनकर। यह दीगर बात कि सहरसा-सुपौल के बड़े साहित्यिक- _ समुदाय में महाप्रकाश, रामचैतन्य धीरज, अरविन्द ठाकुर जैसे कुछ गिने-चुने से ही _ पत्थर तले दबी दूब उर्फ... :: 39 आत्मीय और करीबी होने का लाभ मिला, लेकिन देश के बड़े परिदृश्य से लगाव बढ़ने लगा था। कमलेश्वर, कुलानन्द मिश्र, कर्मेन्दु शिशिर जैसे अग्रजों ने आरम्भिक दौर में मुझे सँवारने और मार्गदर्शन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभायी है। एक तरह से उन्होंने मुझे चलना सिखाया ।... चलते-चलते एम.ए. में कुछ समय के लिए दरभंगा भी गया। वहाँ की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि कई समान सोच के युवा साथी मिले। एक नया परिवार मिला, जहाँ सब एक-दूसरे के अन्तरंग थे। खूब लड़ते-झगड़ते थे। पहले शिखा फिर सयय-सन्दर्भ यहीं प्रकाश में आया । कमांडर थे उस परिवार के मुखिया गजलकार नरेन्द्र। साथी सारंग कुमार, संजीव Sel आदि। फाकामस्ती में भी तोपमुकाबिल थे हम! पर अफसोस कि छोटी जगह और बड़ी समस्या थी !... धीरे-धीरे पलायन शुरू हुआ। सबसे अन्त में नरेन्द्रजी पटना गये हैं । बाकी साथी दिल्‍ली on गये हैं क्रमश: | कुछ और डाल से ऐसे चिड़िये आये--कवि रमण कुमार सिंह, कथाकार Hac मेरा जो यह सहरसा-दरभंगा होते दिल्‍ली तक का सफर है, आम निम्नमध्यवर्गीय युवाओं जैसा ही है। अन्तर है तो यही कि वहाँ से चलते वक्‍त मेरी जेब में पैसे डालनेवाला या हौसलाअफजाई करनेवाला गाँव के सिवान ae कोई नहीं मिला।

Fl कथा वू ले माई अनुवाद : अरविंद ठाकुर था इ सभ fag मॉप-अप ऑपरेशन लाई सकपक मे पड़ल छलि। अपन धर्मपुत्र कद केँ देखि अयबाक अनुमति ओ एखन लेनहि a ee ad Sacl a haa? छलि कि ग्राम जन मिलिशियाक ओकर सभ / हि ee जकारा अमरीकी साथी एहि बात केँ जानि गेल छल। ओ सभ fh (sy eee ree Set teers ओकरा are दिस a aR क ' बैस गेल छलै, bal |} ne रे cen a कला उत्तर पर ae मारिते रास प्रश्न पूछय लागल छलै आ उपहार ( As हर; (से eee मे थी सम एना कथन छत ay a लादि देने wai प्राय: ay गोटे थे orc की ) / भोरे-भोर बुलडोजर आ अमरीकी सशस्त्र बेदराक लेल किछु ने किछु ta’ चाहैत Be | Vy Um | © (hes सैनिक सभ उतारल गेल छल, लगपासक एक Te अपन हिस्साक डिब्बाबला दूध 4 eb SN aie सभ ग्रामीण सभ के हेलीकोप्टर मे दूसिक देलकै, ''बेदरा के wax बेसी बेगरता होइ pil’ ्रौ बी 0 आनठाम ल' जायल गेल छल। मकान, खेत छै, हमरा लेल तँँ मोटके अनाज aye)" f Ll “चद आ बाड़ी सभ केँ मटियामेट क' देल गेल केओ जरलहा रॉकेट सँ उतारल पैराशूटक SS Far छल। प्रतिरोध करयबला सभ के गोली से कपड़ा देलके, ‘shea खराब होबय जा डे RE भूजि 2a गेल छल। wad, ई ओकरा ae da उपयोगी हेतै।'' Ay : किंतु तखनो मारिते रास लोक सभ ओकरा ae बुझाइत छलै जे अपन साथी गामक उत्तर दिस भागय मे सफल भ' गेल। सभक प्रश्नक ओ की उत्तर दिअय। ओ मात्र अपन ware oe बहिराय, ने खेत में बैन हाइ नदी लग एकत्र भ' ओ सभ जेना- मुसुकायलि । अपन अकबकी के नुकाबय aa काज करय, ने फसिल He छलै। दिनुका ar नदी पार करय लागल, किछु नाह मे, ओ हाँइ-हाँड उपहार मे प्राप्त वस्तु aye बखत युद्धक पृष्ठ भाग दिसक we यात्राक fee बहैत कूड़ाक ढेरीक उपर बैसिक' आ समेटि aie’ झोरा मे राखय लागल | फेर. बहुत पहिने सँ लाई एहि खतराक सही अंदाज किछु हेलिक' । ule निष्क्रमण के रोकबाक oh ऑटोमैटिक (राइफल) सम्हारलक, अपन. लगाक' राखने छलि। किंतु ओकर करेजा मे लेल अमरीकी सभ ने मात्र सैन्य टुकड़ीए संगी ay सँ विदा लेलक, हाँइ सँ संचार- उठयबला मातृजन्य भावना ओहि संँ बेसी तैनात कयलक, सातम बेड़ाक हवाइ जहाज खाधि मे कूदल on ओहि गाम दिस चलि. प्रबल छलै। अपन धर्मपुत्र ओकरा बड़ A आ मैकनमारा रेखाक संग ae तोपखाना ¥ पड़ल जतय ओकर धर्मपुत्र के राखल गेल पड़ै। ओकरा बचयबाक लेल ई feet set काज मे भिड़ाए देलक। अकस्मात छलै। जोखिम मे डालि देने छलि। कोनो sens मशीनगन सभ चले' लागल, साँय-साँय गोली sien समक्ष पसरल ग्रामीण अंचल : वर्षक युवती जेकर एखन धरि कोनो टा ब्वाय- _ बरस' लागल आ बम फूट' लागल | शरणार्थी वास्तव मे ga मसान भ' गेल छलै। प्रांतीय. फ्रेंडो नईँ बनल छलै, से अपन शील पर - सभ आगिक धधरा आ बमक बौछार सँ घेरा सीमाक विभाजन रेखा सँ उत्तर दिसका जमीन. नियंत्रण रखैत सभक सोझाँ बेदरा केँ स्तन गेल, बहुत गोटे तँ ओहि क्षण कालक is बी-52 बमवर्षक सभक अनधुन बमवर्षाक . सँ लगाए लैत छलि । की तखन ओकरा अपना मे समाय गेल। चलतबे एक टा विशाल चालनि मे बदलि. के बेदराक माय मानबाक अधिकार नईँ छलै ? लाई, जे उत्तरी तट पर ड्यूटी पर तैनात गेल छलै। आब ने डगर रहै, ने गाम रहै ओकर हथियारबंद साथी सभ Bel छलि, तत्क्षण सभ के Sastre | अमरीकी आ ने हरियरी। एकपेरिया आ झाड़-झखाड़ एहिना मान दैत रहै। जहिया कहियो ओ सभ अपना सभक लोक केँ मारने जाय रहल सेहो निपत्ता रहै। चारूदिस कीपाकार खदहा. . ओकरा सँ भेट क' के आबय, सभ दिस Goofs)" ओ जोर सँ चिकरलि, aa ay में पड़ल माटि जरिक' धूरा-गर्दा भ' were तोर लागि जाइ आ प्रत्येक Sue चलह, ओकरा सभ के बचाबी।' गेल रहै आ खून जकाँ लाल देखाइ दैत रहै। लोक केँ ओकरा ई बतब' पड़े कि ओकर ‘fire डिश 2a गले है; शरणार्थी एतय-ओतय धुआँक बादल देखाइ दै, जे बेटा कोना किलकारी मारै छै, तोतराबै छै आ सभ केँ पाछाँ लाबह : अपन चौकी पर zen बम-विस्फोट आ आगिलग्गीक सूचक. कोना ठुमकि-ठुमकिक' बुलै छै। एक बेर तैनात ! डी नात रहह, गोली बरसाबह | रहय। जखन ओकरा सँ बोलाए गेलै जे ओ एनमेन मशीनगन आ विमाननाशक x कतहु केओ मनुख नईँ tad छलै। ओकरे सन देखा दै छै, ते ओकर साथी सभ * उघार छोड़ि देल गेलै जे गा बहुत पहिनहि जीवनक ay wa भुँडलोट केँ देर तक Saar करबाक अवसरि भेट गेलै, गोली ओकरे पर बरसे रस भा लीवास पा भ' गेल छलै। आब लोक दुश्मनक जहाज.“ अचरज छै, तोंही ओकरा जनमेने छहक ? te, जाहि सँ oo ae a Ne रत मय वश न IR लए के 44 | zie, जून-दिसंबर, 2072 एप

हलक मराठी कथा भीजल इजोत जल ड़ कुसुमावती देशपाण्डे अनुवाद : अरविन्द ठाकुर स्पिभलद पार पतरायल मेष बाहर में. कहियों एहिं विषय पर ध्यान केन्द्रित कक: कु Z अमहायतावस्था में लटकल सतभदरयों तारा- ae जखन कखनों ई eT - oa Sa क्र, सपूह जकरें हवाक तोर पर बहँँत भुदयों पर. पढ़ायल गेलै, दोसर तेसर कि चारिम हि व <-> canoe sewed एकदम निस्तव्ध ।चारि मास. क्रम से. अत्यन्त क्लान्त भाव से" वि ca दर से झहत बरखाक प्रवाह थाकि गेल छल, me पढ़ायल td) ster शिक्षक सेंभे gt * Ee ियत ढय ओोस्त के ओ sted ee तकर परवाहि नई कप छतें। ओही ee et q aia से जगा ओहिं बहब के dese ei ao ie 2 “24 करत बुझा; गाल ens कक्ामें एक दोहरा दैत छलि प्राय: Te “ge क्र ये SSS ESE रहद। लागय जगा. ओकरों सभ के ई ओहिना पढायल. है. es WS war आकिं जड़ठा-विशेषक . पोढ़ाक कयल पाप अवैत पीढ़ी संभक § रूप Ail sw आप के see क रहल छल ? fag दिन st ओऑ इतिहास << कम सेँ कम शॉलाक प्रकृति प्रेमों मोन. सम्बन्धी of जटिलतां से लड़ल न Sie चेत में नई. मुदा जखन oe के छलीह ओ ग्रीक सभक स्ट जो सड़कों लग ठाड़ि oe शुन्य में तकैत, vee सरस्वती 7 क्यों छलीह ने 7 Weekes से ओकर मस्तिष्क. कोना केओों ओकरां तुष्ट क' संकेत छल 7 ओ.. सभ अपन मुंडी उपर दिस फेकय, जेना वरखाक मे जुँजले/रक चटो खाली उलै. ase प्रसन होयबाक कोनों आभास नई देने छलीटं;. फुलेझडौक मजा लैत हीअय आ कखनों विनीत उ्लेफिथिकर करने आयतति उलि आखिड़कीं ने ओ ओकरा आण देतीह । आ एखन हुनके संग. भावें ag a! an ar लगैत उलि। की कादक बॉहिकलाकसस मे सन्डिआए गेल छेलि। . तातम्य बना पर शांताक मैकषणिक कॉर्ति निर्भर... करा सभ के किल्ुओं wees ? की कोो ओर रिला चंसे में अपन इतिहासक पढ़ौनी आ . गेल अखित कॉर्ति को कखनों site oA वस्तु ओकरा ससंभ-कें dew संकेत ate लदकों संघ डरा seeds प्र हे करा. धरिं ओकर वाट के छुलके ? इतिहॉसक पढ़ौनी....केहन बैरागों जीवें आंछि ओ सभ ? एक टा डेस्क प्रेस केविसर जवकाक जीतोद प्रकाप पर ओकर जीवन निर्भर उलें। ओहिं में ओकर gate किरिन शतक हरा पर छिडिन व SSS मुदा कशा में जाहि निराशा के ओ प्रगति पर ओकर जॉविकाक hehe oma ai ster मोन' गतिमान जले see श्ॉलिक तर दावि देने छलि, से. रहय। ओकर जीवन. उतिहासक फंदा से बाहर गतिमान भेलैं बरखाक जेटली में ओकर एसगर बैंसिताहि उमडल चलि Raa ऑकर जोवन 2: खिनतता से _ संगीत में विलीन भेले, ad, महीँस समक SESS SRG seers ele सांता ठटलि आ खिड़की लग ठाढ़ भ' गेलि। संग जीवंत Where अंग: एस सा che ने छलिफ जखर जो वि्ालद मे लि ते _ अलक्षित भेल ओकर विचारक शिस्थी बरखाक .. उदासौनतोक संग (है aa oh on उैंएिं में उक्तोण॑-मातर होयबाक was झिम्सी में मिझारय गेल । ओकर क्लान्ति बरखाक से एक रा उमीद aera? दे Oa) eae ter wee बढ़लें, क्लिक संग एकमएक भ ' गेलै-“बाहरीं संसार ae Satee A मततसठेषका सेल. आ भीतरी संसार पर निषट meta were hmaie aoe शुद्ध आश्विनी Secmrserenenhin मेलेलांत अपन दृ्टिंदर यरिजादेसकै।. नायर मे कर कस शुढ आन ASRS Me fees प्रति tes rate विश पसार। ओहि से फराक ae eee अलान ae हवा सें प्रारंभिक शरद | अलुधव नई कयलक आते एकर कदम पानि जमा भ” गेल sdtiegata sae, aan कतकन हवा a डर कर के े ओ कटेक प्रकस कवलक, ओ _ पोखार में खेलौड़ क' रहल काले कखनों ओ. asin fae 'उदासीक Sw: ¢ शब्द Se, 20I0-we, गा i.

2 कथा गुरदेव सिंह रूपाणा अनुवाद : अरविन्द ठाकुर डा Pa aimee | सी eben स्वर ch मदन te = , 3. eee कद eS. Yi SNS ROR UTSR ee WH OF % \ WBS ae wa ओकर मुँह eat पर टिक जाइ। '*... VAN ग्रिड ¢ pe -कखरों ओ माथ उपर उठा लिअय। कखनों.. (कि ye Yip : BA teva ओ छौंड़ो निकलल । छौंड़ी XA \\ | \ हि सम्टरतकदके।"ओ जलकर खोलिक'. रस को N A SAA "Srv... Oeste Ag > Wi छोट-सन खोपरों में एक टा. & RS 5 ERG All \ के scm देखा ction aes NGA SS ANN IN देखलक हें ओ एक य लहास sd माथ पर कर्क ten Gare आ ठारा। होठ रहैं जे जॉंडीक माय बड़ सु्तर हेते।. गप्प फूसि बुझेले। sates डिडिर खिचल उसे जाहिं.. ओकर सौंदरें ओकर घरवलाक yt waa चौंड़ी फेर कानय ard खें चात झा तारक रूर बिगड़ गेल उले। पेट . हेते। ओ स्वयं हे रसे- रस ककरों घर के अपन “Si सेहो बाजल करे छल, भगवान से अंतझंक लच्छा बाहर लटक आयल Kae लगते आ ककरो अपन घरबला। wea ते रुप कस एक BWM लगक माटि लतमर्दन कयल सन. ओकरा आओर संतान भ' जेतै आ के जानय बतिअयबाक लेल...लैह, भगवान ओकरा रहैं। रण जहराइत काल बेस छटपटायल eee के बिसरियो जाइ। मुदा जें ओ Sei बेटी wary देने छथि...अखन सं को Po We जयतिएक बुत की ने इोडिनटू मे सुसलमान बिल्सुक ““खुचेसा सभ काप के मारिक' फेक हें को हरज छल. 4 सगखेलेद फिस oe ae 3 माय के उठाक' ल' गेलै--आ एहिं बेदरा भगवानक रूपहोइत ahs Sas Wart दुर्गो ¥ aaa Va Sas छोड़ि गेलें...'” Sst बेदराक Gel मनुक्ख पाप कर' से डरैत संतान भेल छल तीनू आपरेशन से ।दू टा मर अदा सें पहिने fees तकर अनुमान. se मदन कें अपन मायक कहलं गप मेले । बिल्लूबचि गेल छल fae जन्मेक we ओ कजल s i sl कर काल डाक्टर कहि देने छलै जे जें दुर्गा फेर Soe मुँह अपन send मिलैत Sm ओ सम क' क' गेल खाक wise tert ot wage) 5 ie रहै। लखन उज्जर बुरका दिस तकैतठ ओकरा से कोन पुण्य भेल ?'' ओकरा मायक कहल मोनमे बेटीक लालसा बाकीए रहि न Eee tees ' 28 | piles, उब्दबर ewe, 2009 ST ATE, 2070 ——————

कद रु कथा AU हजार साल नम्हर राति रंजन सिंह अनुवाद : अरविन्द ठाकुर | | or सभ ओकर गप बड़ ध्यान से ara गप कें अधे छोड़िक' बुढ़बा एक टा ee सुनकारबइक 2 नव गप शुरू क' देलकै। ee mes बीच घोलटल ae: अलाय- wa हजार साल पहिलुका गप fat) बक्कछ गप छाँटे रहल छलै। ओहि गपसभ... wah राजा अधा दुनिया केँ जीत लेलक। मे कतहू कोनो मिलानी नं रहय। गप करैत- .. “फेर!” करैत ओ स्वयं बहकि जाय, जेना डगर चलैत फेर अइ खुशी में राजा बड़ी टा भोज aia अपन रस्ता सँ भोतियाक ' कोनो गलत देलकै। बुध पर चल' लागय। एक टा गप के अधे सी ही “फेर! फेर!" छोड़ि ओ कोनो दोसर गपक छिप्पी पकड़ि a ‘ फेर की! wate व्यंजन बनायल गेलै लिंअ' । एहिना राति बहुत धीरे-धीरे ससरैत जे राजाक शहरक सभ टा मकान में खेनाइ रहै। a साँपक कड़गर पहरा छलै। मुदा राजा ae बना-बनाक' राखल गेलै। ent ओ सभ गोटे टीशन दिस जायबला झॉंकियल रहै आ ओ अपन सेना ल'क 'चलि “फेर ue y eect बाजारक एक टा दोकानक बरंडा पर आबि YET भरें रहल छलै। बुढ़बा कहब शुरू केलकै। राति कटैक ऑघरा गेल छलै। ।कने कालक Wy एखन एतबे धरि पहुँचल रहै कि ay a पहिने राजा आ ओकर सर- बाद, जखन ओकरा सभ मे सेँ ge ches बुढ़बा केँ खोखीक दौरा पड़लै। जखन ओकर समांग सभ खेलकै। eds खखसैत कोनो राजाक गप शुरू दम सम्हरले ते बुढ़बा बहकि गेलै। ओ एक... “ठीक!” कैलक तँँ ओहि बरंडा पर ऑघरायल सभ 2 दोसरे गप चला देलकै। फेर राजाक हजारक हजार सैनिक आ Iz भरय लागल। साबिकक गप छै। एक टा arte चुनल नागरिक ay खेलकै। हे “€ फेर की भेलै, बाबा?" 'एक या एहन पेना लाठी बनेलक जकरा भीतर... “ठीक!” aad फेर की छलै। गप चलि. wih आदमी पैसि सकैत छल। एहि तरहें ओ 'एतेक रास लोक सभ केँ खाइत-खाइत | पेना मनुक्खे जकाँ बाजै wa, चलै-बुलै wa राति भ' गेलै। शक टा राजा छल। ओकरा सात गो. आ खाइत-पीबैत छल। "ठीक!" ay “ठीक! dm!" प्राय: सभ मिलि ..... आसभक बाद रतुकाबेर मे लाखक- बातो रानीक लेल राजा अलग-अलग हुँकारी भरलक। लाख गरीब-गुरबा आ भिखारि सभ भरि- बनबेलक । एक टा काठक, दौसर ईंट- फेर अकस्मात भेलै ई जे रिक्शा on भरि पेट खेलकै। शक, तेसर संगमरमरक, चारिम ताम्बाक, din सभक ton अनघोल करैत सड़क पर “rer फूसि! सरासरि फूसि!'' ओहिं ie, छठम सोनाक आ सातम में. सँ टप' लगलै। साइत टीशन पर कोनो पसिंजर ater पर ऑघरायल सभ गोरे तामसे ठाढ़ भ' | पार ed) गाड़ी रुकल छलै।तेँ बुढ़बो कनेकाल धम्हल। TA on ओड में सँँ एक गोटे बाजल, “eat शकदम ठीक! '”केओ हामी भरलकै। फेर ओ एक टा माछक कथा शुरू क' देलकै, Gea, तोरा फूसिक गप करैत लाज ae होइ मैक धन होइतो राजा वे कोनो सखा-. जे एतेक नम्हर छलै जे ओकर पीठ पर सौंसे छह? जैं हम सभ गोरे राति केँ भरि पेट खेने faa ओ बड़ दुखी छल। राजा. एगो शहर बसल छलै, जाहि पर नईँ जानि कते cent ते एखन सुखक निन्‍न ने सूतल रहितहूँ। केओसलाह देलके जे फलाँ जंगल. मकान बनल BS, कते रास खेत छलै। सागर. भरि राति तोहर ई बकथोधी के सुनतिअह ?'' SS आर नह गो फल लागल में जेम्हर ई माछ जाय ओम्हरे ई बसल- “estar किऐ खिसिआइ छह!” 8, See सात गो फल लागल ea nat के तोड़िक ' अपन बसायल शहर चलि जाय। 'बुढ़बा कते डरल स्वर मे बाजल, “THE TT al Sa ae Sagan dl सभ हूँ कारी सब जकाँ भूखल छी। जें हमरे निनन अबैत वा ई छले जे ओइ गाछ लग. भरलकै। न रहितय हूँ ई गप करैक लेल जागल feng! a Shera 'एहिना राति अत्यंत बा हमहूँ...तेँ सुति रहितहूँ ।' है आ सात गो देव सें paren रहल छलै। aE Shunde || | ध्यान a सुनि रहल छलै। फेर लै आ गाछक चौतरफा सात या. ओ सब बड़ ~ Har, अप्रैल-सितंबर, 2070/ 49 ———————

एए कह --- 8 SB ul. 87% हि 08:37 < Gouri Nath Q @ G& Gouri Nath Arvind Thakur 'अंतिका'क ARABI 25 अंकक इंडेक्स प्रकाश झा तैयार कयने छथि जे प्रकाशित अछि। ओहि इंडेक्स मे देखल आ अनुवाद केंद्रित पुस्तिका मुख्यतः: देखल-- ओहि मे अहाँक कोनो अनुवाद नहि अछि। अंत केर उपलब्ध छओ-सात अंक मे सेहो नहि अभरल। बीच के किछु अंक हमरो लग नहि। हमरा स्मरण मे अहाँक अनूदित कथा एखनो नहि आ ई हमर स्मरण केर सीमा भ' सकैत अछि। ई तँ एक बात भेल। दोसर बात, हमर उद्देश्य एक-एक नाम उल्लेख करब Ale Gell लिस्ट तैयार करब Ft लगभग एक दर्जन सँ बेसी नाम एहन भेटत जिनक चर्च नहि भेल हैत। एहि लेल दुखी होइवला हेतु जेना हमरा लग कोनो जबाव नहि हैत तहिना एकरा पाछू यदि Stet कोनो सत्ताक "प्रतिबंध" अनुभव ae छी, तँ ओहि पर हँसले टा जा सकैत अछ्ि। 3 Like Reply 6 जो Arvind Thakur Gouri Nath Comment as Arvind Thakur

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विदेह ४०३ म अंक ०१ अक्टूबर २०२४ (वर्ष १७ मास २०२ अंक ४०३) | | 7 veo: 8 Build 87% fl 08:37 € Gouri Nath Q€@ & Gouri Nath Arvind Thakur 'अंतिका'क आरम्भमिक 25 अंकक इंडेक्स प्रकाश झा तैयार कयने छथि जे प्रकाशित अछि। ओहि इंडेक्स मे देखल आ अनुवाद केंद्रित पुस्तिका मुख्यतः: देखल-- ओहि मे अहाँक कोनो अनुवाद नहि अछि। अंत che उपलब्ध छओ-सात अंक मे सेहो नहि अभरल। बीच के किछु अंक हमरो लग नहि। हमरा स्मरण मे अहाँक अनूदित कथा एखनो नहि आ ई हमर स्मरण केर सीमा भ' सकैत अछि। ई तँ एक बात भेल। दोसर बात, हमर उद्देश्य एक-एक नाम उल्लेख ara नहि छल। लिस्ट तैयार करब तँ लगभग एक दर्जन सँ बेसी नाम एहन भेटत जिनक चर्च नहि भेल हैत। एहि लेल दुखी होइवला हेतु जेना हमरा लग कोनो जबाव नहि हैत तहिना एकरा पाछू यदि अहाँ कोनो सत्ताक "प्रतिबंध" अनुभव He छी, तँ ओहि पर Saat टा जा सकैत अछि। 3 Like Reply ह ढक Arvind Thakur Gouri Nath Comment as Arvind Thakur

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विदेह ४०३ म अंक ०१ अक्टूबर २०२४ (वर्ष १७ मास २०२ अंक ४०३) | | 7 eu कथा वू ले माई ‘ अनुवाद : अरविंद ठाकुर fay fry मॉप-अप ऑपरेशन लाई सकपक में पढ़ल छलि। अपन धर्मपुत्र a के देखि अपवाक अनुमति ओ एखन लैनहिं Nay’ ' CAGE his aba ‘fe कि ane जन मिलिशियाक औकर सभ y/ Ms कारबाीक बेर मे गत छल = a साथी एहिं बात के जानि गेल छल। ओ सभ a oop OS heal Sb alll dada sie चार दिस चार क' बेसन के... है 2 तह aia मारिते रास प्रश्न पूछय लागल Ge आ उपहार K हा सा este gael st ert rs बेदराक लेल किछ् ने किल्न ta’ चाहैत छलै। b as सभ उतारल गेल छल, लगपासक एक ne अपन हिस्साक front qu , वि... an सम कें हेलीकोटर मे टसिक tae, “Aca के एकर बेसी बेगरता Fe “ry आनठाम ल' जायल गेल छल। मकान, खेत कै, हमरा dad मोटके अनाज ate)" कि..." A आ are सध कैँ मटियामेट क' देल गेल केओ जरलहा रॉकेट सँँ उतारल पैराशूटक व es 'उल। प्रतिरोध करयबला सभ केँ गोली से कपड़ा देलकै, “मौसम खराब होबय जा 2 भूजि देल गेल छल। रहल 8, ई ओकरा aig लेल उपयोगी RA" my किंतु तखनों सारिते रास लोक सभ Sens बुझाइत छलै जे अपन साथी | गामक उत्तर दिस भागय में सफल भ' गेल। aye ws ओ की उत्तर दिअय। ओ मात्र अपन रहबास Sof बहिराय, ने खेत में बैन हाइ नदी लग एकत्र भ' ओ सभ जेना मुसुकायलि। अपन अकबकी केँ नुकाबय लेल. कान करय, ने फसिल कार छलैं। दिनुका. तैना नदी पार करय लागल, कि नाह मे, A हाँइ-हॉइ उपहार में प्राप्त aq au के बखत युद्धक पृष्ठ भाग दिसक एहिं aoe ey बहैत कूड़ाक ढेरीक उपर बैसिक' आ समेटि सरियाक ' a मे राखय लागल। फेर. बहुत पहिने a लाई एहिं खतराक सही अंदाज fang हेलिक' । एहि निष्क्रमण केँ रोकबाक Ah ऑटोमैटिक (राइफल) सम्हारलक, अपन. लगाक' राखने छलि। किंतु ओकर करेजा मे लेल अमरीकी सभ ने मात्र सैन्य ट्कड़ीए. संगी aw a विदा लेलक, हाँ d संचार- उठयबला मातृजन्य भावना ओहि सँँ बेसी तैनात कयलक, सातम बेड़ाक हवाइ जहाज खाधि में कूदल आ ओहि mm दिस चलि. प्रबल छलै। अपन धर्मपत्र ओकरा बड़ Hy आ मैंकनमारा रेखाक संग ठाढ़ तोपखाना ¥ vas जतय ओकर धर्मपुत्र केँ राखल गेल. पड़े ओकरा बचयबाक लेल ई अपन जिनगी. सेहो काज में Arey देलक। अकस्मात लि जोखिम मे डालि देने ऊलि। कोनो अठारह . मशीनगन सभ चल' लागल, साँय-साय गोली ओकरा समक्ष पसरल ग्रामीण अंचल चर्षक युवती जेकर एखन धरि कोनो टा ब्वाय- ae लागल आ बम फूट' लागल | शरणार्थी वास्तव में ga मसान भ' गेल छलै। प्रांतीय HS नई बनल छलै, से अपन शील पर - सभ आगिक धधरा आ बमक बौछार से घेरा सीपाक विभाजन रेखा से उत्तर दिसका जमीन... नियंत्रण रखैत सभक Stel बेदरा केँ स्तन. गेल, बहुत गोटे ते ओहि क्षण कालक गाल so बमवर्षक सभक अनधुन areca से लगाए लैत छलि। की तखन ओकरा अपना में समाय गेल। चलतबे एक टा विशाल चालनि में बदलि के बेदराक माय मानबाक अधिकार नहूँ छलै ? लाई, जे उत्तरी तट पर ड्यूटी पर तैनात गेल छलैं। आब ने डगर रहैं, ने गाम रहै ste हथियारबंद साथी ay सेहो छत, तत्कषण सभ के चेह औलक ante आ ने हरियगै। एकपेरिया आ झाड़-झखाड़॒ एहिना मान दैत रहै। जहिया कहियो at ay orem सभक लोक के मारने जाय रहल बल nets ec कस से भेट क' के आता wife से लोक से मारो जाम शहर सभ में पड़ल mie जरिक' धूरा-गर्दा भ' were तोर लागि जाइ आ प्रत्येक डेराक चलह, ओकरा सभ के बचाबी।'' fart आ खन जकों लाल देखाइ दैत रहै। लोक के ओकरा ई बतब पढ़ें कि tee atin आदेश देल गले, “'रागणार्धी 'एतय-ओतय ysis बादल tan दै, जे. बेटा कोना किलकारी माँ; कै, toot 8 आ सभ केँ oot are पन चौकी पर 'टटका बम-विस्फोट आ आगिलग्गीक सूचक FT ठुमकि-ठुमकिक' बुलै Bi एक बेर तैनात रहह, गोली “ — Et जखन stead बोलाए गेल जे ओ ert मशीनगन an समा कक अदा ¥ ang केओ मनुख atta ed) ओकरे सन देखा दे छै, ते ओकर साथी सभ ae 'छोड़ि देल my EY a Si बहुत vite जीवनक सभ रूप भुँइलोट केँ देर तक ogo करबाक अवसरि भेट गेलै, गोली ओकरे बरसे peor = भ' गेल छलै। आब लोक दुश्मनक जहाज. “or छै, तोंही ओकरा जनमेने छहक ? गेलै, जाहि एन दि बल आ हवाइ-विध्वंसक के मारि गिरयबाक ea तखन ते ओ तोहर काँख तर सेँ जनमल हेतह!"” an Ee chee-ave weft क' सके। कट सदर... .ददददददद« 46 | भौतिक, जुन-दिसंबर, 20:2

42 | | विदेह (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) www.videha.co.in

विदेह ४०३ म अंक ०१ अक्टूबर २०२४ (वर्ष १७ मास २०२ अंक ४०३) | | ।7 waa as Seay - वांजन ! अधिक NT aa शव OH GST Teo Ae, 8 कमना ant ot fare afe । ७ fete cl wen fof afe ।धठि qos Aur जैं वशमी aaa TRIO BRA । ef fa Aaa WHS OF US DA APSE aT शा तिथि तिधान 4 Vers CIA Ba Fot AA Fo Pafs | घव शव GH एकता HS WA, Wes PRI शव मू AA TAPHAT GT OT AT, अश्रिएटाल GI थक card WA, Pas asa एय , SY एप , AAT AT आ GAM A थक लाश BAT A wary fIH aot ANG AAT FA HSB AG | safes एप Reh am 4 adr cya er ao Ete , WAST Ato St ame SA Ge aH ww WAH WS BT ७ शाशाछाति Be एशतशि , OS WAST AIST at mot fe aver ay cas | अशन Ato कर्मक slat Aaifiro ua wad aN एम छवि wine | Harry as fae Stare at mats WAS | ZIT Aca शव ७

व8 || विदेह (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) www.videha.co.in feat व्य जान waft at amt saa APPT TAR Wait | aise caso cia wae apy एनथतशथिय | श्रेकव्वाउय WH ef oy SWOT AA BATS | MAS ATT OF MAMAS = SAAT SH Wasa 4 कयता QSPPUS yes was , TH Vn, wry आ cs शमाती als | wera ffs Rar H कपता GSrtS कथा UN SASS APPT OT जन AAS I Fo aan | अधवजिशा at ऊभत्री sagt AAT at aft seal - नँवकग ! Saat Garrat Jor Au HoT adi शव थूवे ही शा एन्नाथिएणन्न ही ठविक ater जैं ठप Besa जे ara ae | wet za sity | जुँवाक्षण SEAN - TS Not aw! wet aet SUT शव LAT, उठन HTT AT FS कथा Fos जाठि a ome ag ae af aT AT Ao BFF |

विदेह ४०३ म अंक ०१ अक्टूबर २०२४ (वर्ष १७ मास २०२ अंक ४०३) | | 9 met जी कठतनि - Fara ca ! ware FOP VST जनता मैं WA BAS APT COIS afé आ gers शाशुठि rere af , ws fe qos Werqas wat Sages vie | wrt जाज एप SPST TH , शशि OF शक आं AT एस or युआ AAS, उठिया SAT तय GAH FHA vor ae । cat fA एप्स थकांमती आ at GA at ase एप gam ऊ aa at खत्यानवी एप शावल BAT GT CCT ANST Wd Tae wa Act ale | एज Hs Ve जात 4 ama varies go sau off , ७ AWIANAGS HUG GA APSA GAS SF | DAA Aas Peay - वाजन ! ot Se wat men Gf Fare S&H AT we AGHA TE WME | RAT ONT AAA GQ WA Proms घव aft wane | एज ES PIT APPS Fo Pats BY at थकाननतीक fray APT WET WATS Bf ७ HA HAG UR GTS छुशि |

20 | | विदेह (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) www.videha.co.in afafarea एक श्रष्ठता शव AA aia कठतनि- Tey | ASNT WTS TS शक aaret sm a + fare ae । एज HS ARM जैं कांपनाक Bo Fos way aao Bt 3 af aes at aaa OF Tams wr mao Be | SMT ADRS Fo BQ aS a Oat SAT aE , ७ Wa शाश HW TG U2 aay af micas Eft | ofS WEE KS ASAT at जनता Wey CAS Fa RCTS Als | ANT - OTA A कर्ण STS AT yo ATIIT तात BT NP AT - जु० Var Tat, AT - COA, Colto- सिंत्वौत , जिता Ado ,जिशा -जाउत्काढ़व, CAR, ae, ot as ae ot खो. oF srol-karnpni@amail.com. wat +24 76777956.

विदेह ४०३ म अंक ०१ अक्टूबर २०२४ (वर्ष १७ मास २०२ अंक ४०३) | | 27 (पाठक Gap सलाह पर उक्त Bers देवनागरी लिंप्यांतरण प्रस्तुत अछि ) पुरुषोत्तम मासक एकादशीक माहात्म्य ( पद्म पुराण उत्तर खंड ) युधिष्ठिर कहलनि - भगवन ! आव हम श्री विष्णुजीक ब्रत मे उत्तम ad, जे सब पाप कें नष्ट कई दैत अछि, व्रती लोकनि कें मनोवांछित फल दैत अछि , से Ws चाहैत छी । जनार्दन ! पुरुषोत्तम AR एकादशीक कथा og जे ओकर की फल अछि आ कोन देवताक पूजन कएल जायत अछि ? प्रभो ! कोन दानक की पुण्य aaa अछि ? लोकनि कें की कर चाही ? तखन कोना. स्नान कएल जायत अछि ? कोन मंत्रक जप कएल जायत अछि ? पुरुषोत्तम !

22 || विदेह (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) www.videha.co.in पुरुषोत्तम मास में कोन अन्नक भोजन उत्तम होयत अछि ? भगवान श्री विष्णु कहलनि - राजन ! अधिक मास एला पर जे एकादशी होयत अछि , ओ कमला नाम a विख्यात अछि । ओ तिथि मे उत्तम तिथि अछि | एहिं ace प्रभाव सँ लक्ष्मी अनुकूल daa छथिन | ओहि दिन ब्रह्म मुहूर्त Foss भगवान पुरुषोत्तमक स्मरण आ विधि विधान सँ नहाय aes adt लोकनि ga करथि | घर पर जप केला सँ एक गुना , नदीक कछेर पर g गुना , गौशाला पर सए गुना ates पर एक हज़ार गुना ,शिवक क्षेत्र पर, तीर्थ स्थल पर आ तुलसी लग एक लाख गुना व भगवान विष्णु लग aad गुना फल मेंटेत अछि | अवंतिपुर मे शिव शर्मा नाम सँ एकटा श्रेष्ठ aM रहैत छलाह , FST पाँच eT बालक छलेंन, ओहि AA जे wad छोट छलैधि at पापाचारी Hs tote ,d gee बाबूजी आ

विदेह ४०३ म अंक ०१ अक्टूबर २०२४ (वर्ष १७ मास २०२ अंक ४०३) | | 23 am संबंधी हुनका त्यागि देलधथिन | अपन नीच कर्मक कारण निर्वासित Ys Qe वन मे चलि गेलाह | दैव योग सँ एक दिन at तीर्थराज प्रयाग पहुँचे गेलाह | भूखल रहला पर ओ त्रिवेणी मे नहाय सोनाय कें कोनो मुनिक आश्रम Gas लागलैधि। खोजैति खोजैति हरिमित्र मुनिक आश्रम देखलथिन | पुरुषोत्तम मास मे ओहि ठाम adel wet Bele | हुनका आश्रम मे पापनाशक . कथावाचकक मुखारविंद A कमला एकादशीक महिमा सुनलधि , जे पुण्यमयी ,भोग आ मोक्ष vert अछि | जयशर्मा Ser विधि विधान सँ कमला एकादशीक कथा सुनि मुनिक आश्रम मे सव लोकनिकक संग व्रत केलनि | अधरतिया मे भगवती लक्ष्मी grat लग आवि कहलनि - ब्रह्मण ! कमला एकादशी ade प्रभाव सँ हम Het पर खुश vt आ देवाधिदेव श्री हरिक sat सँ हम वैकुंठ धाम सँ एलहूँ अछि अहाँ वर माँगु। ब्राह्मण कहलनि - हे माता लक्ष्मी | जॉं अहाँ हमरा पर खुश छी , तहन कोनो Ved व्रत कथा

24 || विदेह (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) www.videha.co.in ams जाहि मे साधु लोकनि सदिखन लागल रहैत छथि | लक्ष्मीजी कहलनि - ब्रह्मण देव ! एकादशी व्रतक माहात्म्य सुनला सँ सव दुःखक नाश sad अछि आ पुण्यक प्राप्ति होयत अछि , तैं एहि Wap माहात्प्यक श्रवण कर'क चाही | जेना मास मे पुरुषोत्तम मास , पक्षी Aes आ नदी मे गंगा श्रेष्ठ अछि तहिना तिथि मे द्वादशी तिथि उत्तम अछि | ol दिन मे एकादशी आ द्वादशी होय आ राति मे त्रयोदशी Ys जाय आ त्रयोदशी मे पारण कएल जाय , तहन हुनका सए यज्ञक wa fica अछि । जे केओ शुद्ध wad पुण्यमय एकादशीक ad ata छथि , ओ पुनरावृत्ति सँ मुक्त ys वैकुंठधाम जायत छथि | भगवान श्रीकृष्ण कहलनि - ई कहिं देवी लक्ष्मी ओहि ब्राह्मण के वर as अंतर्ध्यान ys ‘ete | ब्राह्मण Sel धनवान Ys अपन पिताजीक घर चलि Vere | जे केओ कमला एकादशीक व्रत करैत छथि आ एकादशी दिन