ISBN Number: 978-93-341-4504-5 (Book) ISSN 2229-547X (online) 𑒀 विदेह ४०४ म अंक १५ अक्टूबर २०२४ (वर्ष १७ मास २०२ अंक ४०४) [विदेह (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) www.videha.co.in ] विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। ऐ पोथीक सर्वाधिकार सुरक्षित अछि। कॉपीराइट (©) धारकक लिखित अनुमतिक बिना पोथीक कोनो अंशक छाया प्रति एवं रिकॉडिंग सहित इलेक्ट्रॉनिक अथवा यांत्रिक, कोनो माध्यमसँ, अथवा ज्ञानक संग्रहण वा पुनर्प्रयोगक प्रणाली द्वारा कोनो रूपमे पुनरुत्पादन अथवा संचारन-प्रसारण नै कएल जा सकैत अछि। (c) २०००- २०२४. सर्वाधिकार सुरक्षित। भालसरिक गाछ जे सन २००० सँ याहूसिटीजपर छल http://www.geocities.com/.../bhalsarik_gachh.html , http://www.geocities.com/ggajendra आदि लिंकपर आ अखनो ५ जुलाइ २००४ क पोस्ट http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html केर रूपमे इन्टरनेटपर मैथिलीक प्राचीनतम उपस्थितक रूपमे विद्यमान अछि (किछु दिन लेल http://videha.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html लिंकपर, स्रोत wayback machine of https://web.archive.org/web/*/videha 258 capture(s) from 2004 to 2016- http://videha.com/ भालसरिक गाछ-प्रथम मैथिली ब्लॉग / मैथिली ब्लॉगक एग्रीगेटर)। ई मैथिलीक पहिल इंटरनेट पत्रिका थिक जकर नाम बादमे १ जनवरी २००८ सँ ’विदेह’ पड़लै। इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि, जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। (c)२०००- २०२४. विदेह: प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004). सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। Editor: Gajendra Thakur. In respect of materials e-published in Videha, the Editor, Videha holds the right to create the web archives/ theme-based web archives, right to translate/ transliterate those archives and create translated/ transliterated web-archives; and the right to e-publish/ print-publish all these archives. रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना/ संग्रह (संपूर्ण उत्तरदायित्व रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता मध्य) editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ पठा सकैत छथि, संगमे ओ अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो सेहो पठाबथि। एतऽ प्रकाशित रचना/ संग्रह सभक कॉपीराइट रचनाकार/ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि आ जतऽ रचनाकार/ संग्रहकर्त्ताक नाम नै अछि ततऽ ई संपादकाधीन अछि। सम्पादक: विदेह ई-प्रकाशित रचनाक वेब-आर्काइव/ थीम-आधारित वेब-आर्काइवक निर्माणक अधिकार, ऐ सभ आर्काइवक अनुवाद आ लिप्यंतरण आ तकरो वेब-आर्काइवक निर्माणक अधिकार; आ ऐ सभ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार रखैत छथि। ऐ सभ लेल कोनो रॉयल्टी/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै, से रॉयल्टी/ पारिश्रमिकक इच्छुक रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता विदेहसँ नै जुड़थु। विदेह ई पत्रिकाक मासमे दू टा अंक निकलैत अछि जे मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ www.videha.co.in पर ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। Videha eJournal (link www.videha.co.in) is a multidisciplinary online journal dedicated to the promotion and preservation of the Maithili language, literature and culture. It is a platform for scholars, researchers, writers and poets to publish their works and share their knowledge about Maithili language, literature, and culture. The journal is published online to promote and preserve Maithili language and culture. The journal publishes articles, research papers, book reviews, and poetry in Maithili and English languages. It also features translations of literary works from other languages into Maithili. It is a peer-reviewed journal, which means that articles and papers are reviewed by experts in the field before they are accepted for publication. Font/ Keyboard Source: https://fonts.google.com/ , https://github.com/virtualvinodh/aksharamukha-fonts , https://keyman.com/ These are print-on-demand books, send your queries to editorial.staff.videha@gmail.com. The eBooks of some of these are available for sale on Google Play [(c) Preeti Thakur, sales.videha@gmail.com], send your queries to sales.videha@gmail.com. The contents and documents e-published by Videha (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) are periodically being checked for accessibility issues. People with disabilities should not have difficulty accessing these contents/ documents. © Preeti Thakur (sales.videha@gmail.com) Cover designed by AUM GAJENDRA THAKUR Videha e-Journal: Issue No. 404 at www.videha.co.in समानान्तर परम्पराक विद्यापति- चित्र विदेह सम्मानसँ सम्मानित श्री पनकलाल मण्डल द्वारा मैथिली भाषा जगज्जननी सीतायाः भाषा आसीत्। हनुमन्तः उक्तवान- मानुषीमिह संस्कृताम्। अनुक्रम ऐ अंकमे अछि:- १.१.गजेन्द्र ठाकुर- नूतन अंक सम्पादकीय (पृष्ठ १-७) १.२.अंक ४०३ पर टिप्पणी (पृष्ठ ८-८) गद्य २.१.परमानन्द लाल कर्ण-आर्थिक टिप्स (पृष्ठ १०-१७) २.२.आचार्य रामानंद मंडल-अभिलाषा आ विवाद/ उत्तर बिहार अर्थात मिथिला राज्य: पुनर्गठन (पृष्ठ १८-२२) २.३.कुमार मनोज कश्यप- लघुकथा-जलफाँफी (पृष्ठ २३-२४) २.४.प्रदीप कुमार मंडल "पबड़ा"- कुटमैती (पृष्ठ २५-३१) २.५.प्रणव झा-पप्पू पेंटर (पृष्ठ ३२-४३) २.६.महाकान्त प्रसाद- भालरि/ फालतू (पृष्ठ ४४-४४) पद्य ३.१.प्रमोद झा 'गोकुल'-देशक चौकीदार (पृष्ठ ४६-४७) ३.२.आचार्य रामानंद मंडल- कोशी कमला के बाढ़ (पृष्ठ ४८-४९) ३.३.राज किशोर मिश्र-ऑनलाइन सेवा कम्पनीक सेवक (पृष्ठ ५०-५३) ३.४.कैलाश कुमार मिश्र- इजोतक अन्हार घर (अनूदित) (पृष्ठ ५४-५७)
१.०.गजेन्द्र ठाकुर- नूतन अंक सम्पादकीय १ अन्तर्जाल भेल साइबर स्पेस। मुदा खतरा ओत्तौ अछि, वाइरस, स्पैम, मालवेयर, स्पाइवेयर, ट्रोजन हॉर्स आ वॉर्मक खतरा। वाइरस अछि रक्तबीजी, अपने ई एकसँ दोसर प्रोग्राम बहार करैए, ओना ईहो अपने अछि प्रोग्राम। सिस्टम, स्टील्थ, फाइल आ पोलीमॉर्फिक वाइरस एकर प्रकार भेल। वॉर्म सेहो वाइरस सन प्रोग्राम अछि जे नेटवर्कसँ पसरैए। ट्रोजन हॉर्स बड़े कलामी, लागत जे करत ईर घाटक काज मुदा कऽ देत वीर घाटक काज।स्पाइवेयर अछि जासूस जे व्यक्ति बा संगठनक जासूसी करैए। मालवेयर अछि ऐ सभकक माने वाइरस, वॉर्म, स्पाइवेयर आ ट्रोजन हॉर्सक सम्मिलन जे नेटवर्कक कम्प्यूटरकेँ नुकसान पहुँचाबैए। कोनो फेक चीजकेँ किनबाक-बेसाहबाक लेल अज्ञात लोककेँ पठाओल बेहिसाब ई-पत्र भेल स्पैम। एण्टी वायरस ऐ सभपर लगाम लगबैए। फायरवाल हैकर बा क्रैकर सभकेँ अहाँक कंप्यूटर बा नेटवर्कक पर आक्रमण बा अधिकारकेँ रोकबालेल किलाक देबार अछि। आ अन्तमे हमर एथिकल हैकर, जे अछि हैकर बा क्रैकर सभक बाप, जे अहाँक भलाइ लेल अहाँक एण्टीवायरस आ फायरबालकेँ तोड़बाक प्रयास करैए, आ जँ से भऽ गेलै तँ एण्टीवायरस आ फायरबालकेँ आर मजगोता करैए नीक प्रोग्रामिंगसँ आ तखन फेर अटैक करैए। बुझियौ मॉकड्रिल करैए। २ एकटा अपन छवि बनाउ, जकरासँ नीक लोक प्रेम करैए आ जे योग्य अछि कर्मठ अछि। मुदा जेना जेना अहाँ आगाँ बढ़ब, समय बीतत हमरा सभमेसँ बहुतक अपन मोनक छवि दूषित हेबऽ लागै छन्हि आ से होइए ओइ गप सभपर ध्यान देलासँ जे दोसर हमरा विषयमे की सोचैए बा बाजैए। मुदा ओ अपन छद्म ज्ञान बा कहियो काल नीको ज्ञान बा कहू जानकारी तँ दऽ सकै छथि मुदा की ओ हमर अपन छवि बा योग्यता हमरा दऽ सकै छथि, नै वरन् ओ बेशीकाल तकर उनटा करै छथि। माता-पिता आ शिक्षक सेहो कखनो काल अनायास ऐमे सम्मिलित भऽ जाइ छथि। संगी-साथी, सर-समाज आ सम्बन्धी सेहो। ओ कम बा बेशी सुन्दर अछि, ओकर गणित ओइ बच्चासँ नीक-अधला छै, ओइ तेज बा बुड़बककेँ दोस्त बनाउ बा नै बनाउ, ओकरे दुआरे हम सभ जितलौं बा हारलौं। हुनकर क्रियाकलाप आ बोल ई सभ करैए, मुदा से तखने हएत ने जखन अहाँ तइपर कान-बात देबै। सफलता जे वास्तवमे सफलता होइ, बिनु कम्प्रोमाइजबला सफलता, तइसँ अहाँक आत्मविश्वास आगाँ बढ़त। असफलता लोककेँ हतोत्साहित तखने करत जखन ओ वास्तवमे असफलता होइ। जेक्स डेरीडाक विखण्डनवाद कतेक साहित्यकेँ नीचाँसँ ऊपर लऽ गेल आ कतेक केँ ऊपरसँ नीचाँ। तँ चोरि कऽ कय रचनात्मक साहित्य लिखब आ तइपर मिशेल फोकोक डिसीप्लीनरी इंस्टीट्यूशन सभसँ पुरस्कार लेब मूल्य लेब सफलता भेल आकि सफलता? आ सुभाष चन्द्र यादव सन सुशील सन जिनगी भरि अड़नाइ आ तकर मूल्य चुकेनाइ भेल सफलता आकि असफलता? तँ अपन आत्मविश्वास बनेने रहू, अनुशासन अडिग राखू। योग्यतामे सभदिन वृद्धि करैत रहू, जे एक दिन एहेन बीतय जे अहाँक योग्यतामे कोनो वृद्धि नै भेल तँ बुझू ओ दिन बर्बाद भऽ गेल। आ स्थितप्रज्ञ बनू, आत्मविश्वास राखू। आ जँ अहाँमे ई सभ गुण अछि तँ अहाँ समानान्तर धाराक लोक छी, अहाँक स्वागत अछि। ३ भोरे सकाले उठू, घरक काज सेहो करू, ऐसँ अहाँ जबाबदेह आ आत्मनिर्भर भऽ सकब। समस्या एलापर सहायता मांगैसँ लाज नै करू आ दोसराक समस्यामे दोसराकेँ सेहो सहायता करू। शक्तिशाली दुश्मनक सोझाँ ठाढ़ भेनाइ कठिन अछि, ऐ लेल चाही साहस, नीक-अधलाक फरिच्छ दृष्टि आ सत्य, आ अन्यायक खिलाफ कखनो हथियार नै राखू। चिचियेलासँ कियो नै सुनत, कऽ कय देखाउ, कन्नारोहट आ उपरागा-उपरागीसँ किछु नै हएत, कऽ कय देखाउ, जे भाषण दै छी से करबो करू। अन्तर्जालपर सेहो बहुत रास खरा छै, ने फेक न्यू बनाउ नहिये पसारू, अन्तर्जालक अपराधी सभसँ बचू। अपनासँ कमजोर आ छोटकेँ डराउ नै, ओकरा प्रतारित नै करू, जे कियो अहाँ संग ई करैए तकर खिलाफ शिकाइत करू। जयपुर-फुट (नकली पएर), कम धुँआ बला चुल्हा सन समानान्तर साहित्य सेहो अन्वेषण, निष्काम कर्म आ बिनु पाइ/ पुरस्कारक लालचक कएल जा रहल अछि ज इसँ हम सभ नीक समाज बनाबी आगाँ बढ़ाबी। सभमे किछु ईलम होइ छै, जेना पिपही बजेबाक ईलम। जँ विश्वास नै हुअय तँ ओइमे फूकि कऽ देखियौ। ओइलेल कएक बर्खक प्रशिक्षणक आवश्यकता होइ छै। तहिना लोक नृत्य, नाचमे सेहो छै आ लकड़ी आ माटि सम्बन्धी ईलम सेहो छै। ओइ कलाक सम्मान करू। ओही विकासक स्वागत करू जइसँ पर्यावरण नष्ट नै होइत अछि, जतेक गाछ काटै छी तइसँ दस गुणा गाछ रोपू। असगर काज करैमे डर लागैए, छोटोसँ छोटो काज? मुदा से सभ काल नै भेटत, सभ काल ने संगे भेटत ने समर्थने। भूत केँ बिसरि जाउ, ई नीक हुअय तखनो, बा अधला हुअय तखनो। किछु संगी साथी आ संगठन अहाँकेँ दुखी करै छथि, तामस उठबै छथि, हतोत्साहित करै छथि, हुनका बिदा करबाक समय आबि गेल। नीक दिन अखनो आबैबल अछि, अधला समय कहियाधरि चलत। अधला समयमे सीखल शिक्षा दूरगामी होइत अछि जइसँ हम अपन गलती नै दोहराबी। काजक बीच विराम दऽ चिन्तन करब सेहो आवश्यक, गाम, सर-कुटुम, दोस-महीम ओइठाम एनाइ-गेनाइ सेहो आवश्यक। बिहारिक बाद पनिसोखा देखबा लेल तैयार रहू। सभ दिन हएत जादू। आ से हएत जखन अहाँ सभ दिन कोनो ने कोनो एक्को गोटेक सहायता करी। सदा अपन विचारकेँ लिखि कऽ जमा करैत रहू। जलखै बिनु नागा केने करू, सात-आठ घण्टा सूतू, भोजन एहेन करू जे शरीर लेल स्वास्थ्यकारी हुअय। मोन तैयो उचटऽ लागय तँ ध्यान लगाउ, चित्र बनाउ, पढ़ू, संगीसँ गप करू, घूमू फिरू, संगीतपर नाचू। जीवन अमूल्य अछि, एकर सभ क्षणक प्रति सम्मान राखू। बिनु शिकाइतक मेहनति करू आ से तखन तँ आरो करू जखन ऐसँ असफलता प्राप्त हुअय। देखल सपना माने लक्ष्य दिस सभ दिन एक डेग, आ ओ जँ मनोरंजक लागय तँ बुझू जे अहाँ समानान्तर धाराक लोक छी, अहाँक स्वागत अछि। ४ कठहँसी, आँखि धरि नै गेल, तामसकेँ नुकेबा लेल, ई खुशी नै देखेलक, ई हास्यकणिका सुनलाक बादक हास्य हँसी नै छल, ई दोसराकेँ संगी बनाबैबला ओकरा विश्वास दिआबैबला जे ओ हमरा लेल खतरा नै अछि से हँसी नै छल। वृद्ध आ बेमारक सहायता करबाक चाही, युद्ध आ प्राकृतिक आपदासँ प्रभावित लोक आ देशक मदति करबाक चाही, ई कहियो निरर्थक नै हएत। अहाँक सोझाँ स्पष्ट लक्ष्य हेबाक चाही, परिश्रम आ लगनसँ ओ प्राप्त सेहो हएत। अन्यायी आ कष्ट पहुँचेनिहारक प्रति बजनाइ सीखू, मानवताक प्रति निष्काम भावसँ सेवा केनिहारक प्रति कृतज्ञ हौ। दिव्यांग लोकक प्रति हमरा सभकेँ ध्यान राखबाक चाही, हुनका प्रति संवेदनशील रहबाक चाही। दिव्यांक लोक दिव्यांगताक अलाबे सेहो बहुत रास गुणसँ विभूषित छथि, हमरा से देखबाक चाही, आ हुनका अपन अधिकार भेटनि तइमे संग देबाक चाही। विश्व स्वास्थ्य संगठनक अनुसार विश्वमे पन्द्रह प्रतिशत लोक दिव्यांग छथि। भारतमे पहिल बेर २००१ मे दिव्यांग लोकक गणना भेल जे मात्र २.१ प्रतिशत अछि, ई प्रतिशत विश्वास योग्य नै अछि। सहकर्मी, संगी साथी सन बनबाक द्वाब अहाँपर सदिखन रहत, मुदा अहाँ ओइ दवाबमे नै आउ। अपन व्यक्तित्व विकसित करू। हँसी-ठट्ठा लेल अपन जान गमेनाइ नीक गप नै। खेतमे रसायनिक पदार्थ वातावरणकेँ दूषित करैत अछि। जैविक पदार्थक उपजा बिनु रसायनिक पदार्थक होइत अछि, ई बेशी स्वस्थ्यकारी आ चहटगर होइत अछि। जिनकामे आत्म-सम्मानक भाव कम छन्हि ओ नीक अनुभव करै लेल दोसराक मान्यताक आवश्यकता पड़ैत अछि। फेसबुकपर पोस्ट कऽ कय लाइक गानैबला लेल ई गप अछि। कतेक घटना घटित भेल अछि जइमे सेल्फी लै काल व्यक्ति खधाइमे खसि पड़लथि, छातसँ खसि पड़लथि आ मृत्यु भऽ गेलन्हि। हँ मुदा सेल्फी केर प्रयोग अहाँ नीक उद्देश्य जेना बेटी संग सेल्फी आदिक रूपमे कऽ सकै छी। समयक महत्व बुझू, फालतू सभा समिति, खास कऽ प्रतिक्रियावादी समिति-संस्था अहाँक बहुत समय खराप कऽ सकैत अछि। कखनो नियत समयसँ नै पहुँचि सकी तँ दुख व्यक्त केनाइ नै बिसरू। पाइ हमरा सभकेँ प्रकृतिसँ दूर कऽ देने अछि। कनाडाक मूल इण्डियन अबेनाकी कबीला जे हुनका सभ लेल आरक्षित रिजर्व ओडानाकमे रहैए पर्यावरणक लेल कतेक सुन्दर सुन्दर लोकोक्ति बनेने अछि ’तखन जखन आखिरी गाछ कटि जायत, आ सभ धारमे माहुर दऽ देल जायत, तखन जखन गोट-गोट माँछ अहाँ मारि देब, तखने अहाँ बूझि सकब जे अहाँ पाइ नै खा सकै छी।’ सामान्य जीवन जीबू जइसँ पर्यावरणकेँ नुकसान नै होइ, प्रकृतिसँ जुड़ि कऽ रहू। एक दोसरासँ मिलि जुलि कऽ रहू, मनुक्खे टा नै, माल-जाल, चिड़ै चुनमुनी, सभसँ, प्रकृतिसँ धारसँ। आ से जँ अछि तँ बुझू जे अहाँ समानान्तर धाराक लोक छी, अहाँक स्वागत अछि। ५ कियो सम्पूर्ण नै होइए मुदा नीक बनबाक प्रयास तँ कैये सकै छी। हमरा सभकेँ सत्यवादी, इमानदार आ दयालु बनल रहबाक प्रयास करबाक चाही। ई संसार रहबा योग्य एकटा नीक स्थान बनल रहय तकर प्रयास सभकेँ करबाक चाही। हमरा सभकेँ खूब पढ़बाक चाही, नव नव चीज सिखैत रहबाक चाही। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। १.२.अंक ४०३ पर टिप्पणी प्रणव कुमार झा ट्रांसजेंडर वा हिजड़ा वा किन्नर के विषय मे हमहू अक्सर सोचय छी, जखन रेड लाइट पर आ कि ट्रेन आदि मे मांगईत देखय छी । एकाध बेर किछ लिखबाक इच्छा भेल। मुदा नै लिखल। साइत अहि दुआरे जे हमरा अपनो ऐ समुदाय से सामंजस्य आ संवाद नै रहय अछि। मुदा मोन मे रहय अछि जे विभिन्न पेशा आ रोजगार द्वारा ऐ समुदाय के लोक के सेहो समाज के मुख्य धारा मे जोड़ल। जाय। सुप्रीम कोर्ट के 2014 के निर्णय एहि के बाट मे एकटा प्रयास छल हेतय। मुन्ना जी ऐ विषय पर लिखबाक प्रयास केला तै लेल बधाई। हुनक लेख से इहो सूचना पर प्रकाश पड़ल जे अंग्रेजक जमाना मे ऐ समुदाय के चोर-उचक्का के श्रेणी मे राखल गेल छल। आ इहो जे ट्रांसजेंडर समुदाय के लोक सभ के भोटर लिस्ट मे जोड़बाक काज सेहो यसस्वी मुख्य चुनाव आयुक्त टी एन शेषन के छैन। सादर -प्रणव कुमार झा, अनुभाग अधिकारी, राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड, नई दिल्ली, दूरभाष (कार्यालय): 011-45493034 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। गद्य २.१.परमानन्द लाल कर्ण-आर्थिक टिप्स २.२.आचार्य रामानंद मंडल-अभिलाषा आ विवाद/ उत्तर बिहार अर्थात मिथिला राज्य: पुनर्गठन २.३.कुमार मनोज कश्यप- लघुकथा-जलफाँफी २.४.प्रदीप कुमार मंडल "पबड़ा"- कुटमैती २.५.प्रणव झा-पप्पू पेंटर २.६.महाकान्त प्रसाद- भालरि/ फालतू २.१.परमानन्द लाल कर्ण-आर्थिक टिप्स आर्थिक टिप्स अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.२.आचार्य रामानंद मंडल-अभिलाषा आ विवाद/ उत्तर बिहार अर्थात मिथिला राज्य: पुनर्गठन आचार्य रामानंद मंडल अभिलाषा आ विवाद/ उत्तर बिहार अर्थात मिथिला राज्य: पुनर्गठन १ अभिलाषा आ विवाद युवा लेखिका अभिलाषा (झा) के मैथिली साहित्य महासभा द्वारा मैथिली युवा सम्मान -२०२४ विवादित रहल। विवाद के कारण इ रहल कि अभिलाषा बज्जिका भाषी हतन आ एकर घोषणा वो कोनो मैथिली मंच पर कैले रहलन। सम्मान समारोह से पहिले साहित्यकार सह संपादक उज्जवल कुमार झा एगो फेसबुक पोस्ट मे कहैत हतन कि हुनक मातृभाषा मैथिली छनि जकरा विद्वान लोकनि पश्चिमी मैथिली कहैत छथि। परंतु वो जो हुनक पह पोथी में लिखल अभिलाषी के दृष्टांत दैत छतन जे वो बिल्कुल उलट हय - मैथिली हमर वास्तविक रूप मे सेहो मांक भाषा अछि। हमरा मांक संग ।मानक मैथिली।मे बतिअयाबा मे सतत बोध होइत रहैत अछि जै हम अपन परंपरा संग बतिया रहलि छी आ ओ हमरा उर्जा दैत रहैत अछि। मुदा हमर।परिवेशक। जे भाषा अछि से।गिरल। अछि आ जकरा आइ काल्हि। बज्जिका। कहल जाइत छै। इंहा मानक मैथिली आ गिरल भाषा बज्जिका वा पश्चिमी मैथिली विचारणीय हय। ओ छौंड़ी पोथी में लेखिका लिखैत हतन हमर अपन जे भाषा अछि मैथिली तकर एक विशिष्ठ । बोली। अछि। अइ मे लेखिका पश्चिमी मैथिली के मैथिली के शैली न कह के बोली कहैत हतन। पश्चिमी मैथिली क्षेत्र सीतामढ़ी के बेटी होइतो लेखिका के मातृभाषा मानक मैथिली हय न कि पश्चिमी मैथिली। पश्चिमी मैथिली हुनकर परिवेशक।गिरल। बोली हय। आश्चर्य इ कि अभिलाषा ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के मैथिली विकास आ सम्बर्द्धन कोर कमेटी मे सदस्य मनोनीत कैल गेल हय। हुनकर साहित्य पश्चिमी मैथिली शैली के कोटि मे न अबैत हय। अंततः मैसाम द्वारा मैथिली युवा सम्मान -२०२४ से सम्मानित कैल गेलन। २ उत्तर बिहार अर्थात मिथिला राज्य : पुनर्गठन बिहार विधानसभा के चुनाव आबि नजदीक हय।इ चुनाव २०२५ मे होयत।परंच हमर मिथिला राज्य निर्माण के काज अधर में हय।सभसे पहिला काज हय मिथिला राज्य के सीमांकन। कुछ विचारक प्राकृत मिथिला राज्य हय जे आबि समयानुकूल न हय। पाया तोड़ो आंदोलन राष्ट्र विरोधी कृत्य हय।एकरा संवैधानिक निदान के लेल सुगौली संधि पर पुनर्विचार करे के होतैय। परंतु नेपाल अइसन काहे चाहत आ केन्द्रीय सरकार नेपाल आ भारत विवाद काहे पैदा करत। कुछ विचारक उत्तर बंगाल आ झारखंड के कुछ भाग मिला के मिथिला राज्य चाहैत हय।इहो समयानुकूल न हय। राज्य पुनर्गठन के अधिकार केन्द्रीय सरकार मे निहित हय परंच राज्य पुनर्गठन हेतु राज्य सरकार से पारित प्रस्ताव आवश्यक हय।त बंगाल आ बिहार अइसन काज काहे करत।आ अइ दिशा में मिथिला राज्य निर्माणी काज करे में असमर्थ हय। मिथिला राज्य निर्माण के सामयिक विचार इ हय कि मिथिला राज्य निर्माण के उत्तर बिहार अर्थात मिथिला राज्य सीमांकन आ राज्य सरकार द्वारा मिथिला राज्य के प्रस्ताव देवे के लेल उपयुक्त हय। कारण राज्य सरकार प्रशासनिक रूप से बिहार के उत्तर बिहार आ दक्षिण बिहार में बांट देले हय। उत्तर बिहार आ दक्षिण बिहार ग्रामीण बैंक आ विद्युत आपूर्ति प्राधिकरण। केन्द्रीय सरकार सेहो दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय गया के निर्माण क देले हय।इ आधार उत्तर बिहार अर्थात मिथिला राज्य के मांग के मजबूत क रहल हय। मिथिला राज्य निर्माण के लेल एगो काज योजना पर विचार अपेक्षित हय। १.वर्तमान राजनीतिक दल के उत्तर बिहार स्थित राजनीतिक नेता अपना चुनाव घोषणा पत्र में उत्तर बिहार अर्थात मिथिला राज्य निर्माण के घोषणा हेतु दृढ़ संकल्पित होय।जे राजनीतिक दल के घोषणा पत्र में मिथिला राज्य निर्माण के घोषणा न होय वोकरा चुनाव प्रत्याशी के समर्थन न कैल जाय। २.मिथिला राजनीतिक दल मिथिला राज्य निर्माण के घोषणा करें वाला दल से गठबंधन के चुनाव लड़े। ३. वर्तमान उत्तर बिहार अर्थात मिथिला राज्य के विधान मंडल सदस्य विधान मंडल मे उतर बिहार अर्थात मिथिला राज्य के प्रस्ताव पारित कराए अन्यथा हुनकर बिरोध कैल जाय। हुनका चुनाव में कदापि समर्थन न कैल जाय।४.उत्तर बिहार अर्थात मिथिला राज्य स्तरीय कार्यकारिणी, जिला स्तरीय कार्यकारिणी आ प्रखंड स्तरीय कार्यकारिणी के गठन कैल जाय। कार्यकारिणी में सभ वर्ग के प्रतिनिधित्व देल जाए। उत्तर बिहार अर्थात मिथिला राज्य निर्माण के लेल सहज मार्ग मिलत आ उत्तर बिहार अर्थात मिथिला राज्य के सपना पूरा होयत। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.३.कुमार मनोज कश्यप- लघुकथा-जलफाँफी कुमार मनोज कश्यप लघुकथा-जलफाँफी दवाई दोकान पर साँझ-पहर के भीड़ तs ओहू दिन सामान्ये जकाँ छलैक; मुदा किछु खास छलैक तs ओहि पाँच-छः साल के नेना के दवाई-दोकानदार तक अपन बात पहुँचेबाक प्रयास जाहि मे ओ बेर-बेर निष्फल भs रहल छलैक। ओ कतबो छड़पबाक प्रयास करैत छल मुदा दोकानक काउण्टर तक नहिं पहुँच पबैत छल। आ तैं दोकानदारक ध्यान अपना दिस आकृष्ट करबा मे बारम्बार असफल भs रहल छल। सभ गहिंकी 'पहिले हम' के प्रयास मे छल। ओकरा दिस के ध्यान देओ। मुदा एक जन के ध्यान तखन गेलै ओकरा दिस जखन ओहि नेना के छड़पबाक प्रयास मे ओकर हाथक बैग खसैत-खसैत बचलै। ओ खौंझा गेल - "हे की छियौ ? कियै एना बानर जकाँ छड़पै छैं ? संच-मंच ठाढ़ रहबैं से नहिं होई छौ ?" - "हमरा अचरज कीनय आयल छी " - संयत स्वर मे बाजि ओ नेना अपन मुट्ठी खोली देने रहै जाहि मे किछु सिक्का छलै। - "अचरज ???!!!!!" सभक मुँह सs एक्के बेर यैह शब्द बहरेलै। - " हँ। यैह कहलकै डाक्टर..जे हमर भैया के अचरजे बचा सकैत छै। तैं हम अपन चुकियाक सभ टा पाई लs कs अचरज लई लै एलहुँ हैं। जल्दी सs अचरज दs दिय हमरा...... भैया के खुएबै तs ओ नीके भs जेतै! माय-बाबू सभ बड़ कनैत छै।" क्षणे मे पूरा दोकान मे मरघट सन सुन्न पसरि गेल छलै। मुँह सभक अवाक रहितो आँखिक कोर छल-छला गेल रहै । -कुमार मनोज कश्यपम् सम्प्रति: भारत सरकारक उप-सचिव, संपर्क: सी-11, टावर-4, टाइप-5, किदवई नगर पूर्व (दिल्ली हाट के सामने), नई दिल्ली-110023; # 9810811850; ईमेल: writetokmanoj@gmail.com अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.४.प्रदीप कुमार मंडल "पबड़ा"- कुटमैती प्रदीप कुमार मंडल "पबड़ा" कुटमैती पूस महिनाक वो दिन, सुरूज एक सप्ताहक बाद नभ में देखाओल । लोक-बेद, माल-जाल, चिड़ै-चुनमुन्नी सब रौदक आनंद लैत छल । राधा अपना बाबा आने पिता के पिता संग तिलासंक्रातिक चुड़ा-मुरही लऽ कऽ अपना दीदी आने पिताक बहिन के ओहिठामक जाइत छलीह । सुमन मैट्रिकक छात्र छल । मार्च में ओकर परीक्षा छल । वो खटिया पर बैठ सड़क कात में पढैत छल । राधा के बाबा सुमन के पढ़ैत देख, किछु देर रूकि, मोने मोन सोंचऽ लागल । ओह ! कतेक संस्कारी छौरा छै । देखै में तऽ कोनो गरीबहे के बेटा लगै छै । वो पोती के कहऽ लागल । देखही ! तों पढ़बीही एना । देखी केते मोन लगा कऽ परहै छै । राधा सुमन के देख मोनेमोन सोंचऽ लगलीह । ओह ! कतेक सुनर छै इ लड़का । श्याम वरन, चौरगर छाती, कसल देह राधा मोनेमोन सुमन पर मुग्ध भऽ गेलीह । राधा के बाबा सुमन के लग जा कऽ पुछऽ लागल- बौआ, तों केकर बेटा छोहो ? सुमन चेहा कऽ ओकरा दून्नू दिशि ताकलक । पहिले राधा के बाबा के देखलक, ताहि के बाद राधा आ सुमन के नजरि मिलल । जखन दून्नू के नजरि मिलल तऽ कनी देर दून्नू एक दोसरा के देखते रहि गेल । वास्तव में दून्नू महाक सुंदर छल । राधा गौर वर्ण के छलीह, ओकर मुखमंडल चान सन चमकैत छल । कजरारी नैन, ठाढ़ नाक आ पातर-पातर ठोर मानू सरग सऽ अप्सरा धरती पर उतरल छल । तेहने सुंदर सुमन छल । चमकति नजरि, चाकर मांघ, मुखमंडल सऽ सुर्यक आभा चमकि रहल छल । तखन दून्नू एक दोसरा के कियेक नहि देखत ? ओहि नैन मिलाप रुपी तंद्रा के राधा के बाबा तोड़ैत बाजलाह - बौआ तोरे कहै छियौ । केकर बेटा छोहो ? सुमन राधा के नजरि सऽ नजरि हटा बाजल- जी, श्री रतीचन मड़र के । राधा के बाबा - ओ..! तऽ तों रतीचन के बेटा छिही । सुमन - जी । राधा के बाबा - केऽ भाई छिही ? सुमन - दू भांई । राधा के बाबा - तों छोट छिही की नम्हर ? सुमन - जी, छोट । राधा के बाबा - बड़ भाई की करै छौ ? सुमन - ओनर्स । राधा के बाबा - आ तों..? सुमन - हमें मैट्रिक में छियै । अहि बेरि परीक्षा देबै । राधा के बाबा - मैट्रिक में छिही । एनाही मोन लगा कऽ पऽढ़ । हे देखै छिही, तोहर माय-बाप बोईन दुख कऽ कऽऽ तोरा सबके पढ़बै छौ । सुमन - जी । बुढ़बा अतेक बाजि ओ आगु बढ़ऽ लागल । सुमन के ओहि बुढ़बा के गप्प नीक नहि लागै छल । वो चाहैत छल जे इ बुढ़बा कखन एतऽ सऽ चलि जाइ । बुढ़बा आगु आगु आ राधा पाछु पाछु सुमन के लिहारति गंतव्य दिशि चलि गेलाह । ओकरा दून्नू के गेलाक बाद सुमन पढ़ाई छोड़ि सोंचऽ लागल, इ लड़की कतऽ के छियै ? केक्कर बेटी छियै ? इ बुढ़बा ओक्कर के छियै ? सुमन के दिमाग में घुरि फिरि रधे आबऽ लागल । वो पढ़नांई छोड़ि टहलऽ लेल निकलि गेल । किछु दिनक बाद सुमन साईकिल सऽ राधा के गांवक बाध केरऽ सड़क सऽ अपना बड़की बहिन ओहिठाम जाइत छल । राधा अपना खेत में साग तोड़ै छलीह । चूंकि राधा के खेत सड़के कात में छल । वो सुमन के दुरे सऽ आबैत देखि सड़क पर आबि गेलीह । सुमन नजदीक आओल तऽ राधा के देखि ओकर साईकिल अपने-आप रुकि गेल । सुमन के रुकिते राधा बजलीह - कतऽ जाई छियै ? सुमन - दाय ओहिठाम । राधा ताहि के बाद चुप भऽ गेलीह । सुमन किछु देर रुकि आगु बढ़ऽ लागल । पुनः राधा बजलीह - जाई छियै ? सुमन - कि, कोनो काम ? राधा - अहां केहन मरद छियै ? सुमन - किये, कि भेल ? राधा - कि भेल्लै ? प्यार भेल्लै । राधा तुनकि कऽ बजलीह । सुमन इ गप्प सुनि मोनेमोन हर्षित भऽ बाजल - सांचे । राधा - सांचे नहि तऽ झुठ्ठे । सुमन - हमहूं अहां सऽ बहुते प्यार करै छी । राधा - चुपू । प्यार करै छियै । मरद कहूं एते डेरेलै ? सुमन सकपकाए लागल । वो कोना नहि सकपकाएत ? एकगोट गरीब लड़का, लड़की सऽ परेम के गप्प करैत अछि । (परेम, पिरीत, सिनेह, नेह इ सब बिहारक भाषा मैथिली, मगही आ भोजपुरी केरऽ नीज शब्द थिक । प्यार, मोहब्बत हिंदी, उर्दू के शब्द थिक ।) कोनो लड़का-लड़की के परेम मिथिला में प्रतिबंधित अछि । तखन गरीब, मजदूरक धिया-पुत्ता तऽ डेरैबे करत । परंतु हिम्मत कऽ सुमन बाजल - नहि, डेराई कहां छियै । हमहूं अहां सऽ प्यार करै छी । आई लव यू । राधा - सांच में...? सुमन - सांच कहै छी । राधा - आब काइल मिलब । कहि कऽ शरमाईत भागि गेली । सुमनो अप्पन साईकिल बढ़ा लेलक । आब सुमन आ राधा रोज मिलऽ लागल । रंग बिरंगी गप्प गपिआए लागल । अहि बीच दून्नू एक दोसर के नांओ जानऽ लागल । एक दिन सुमन आ राधा ओहि बाध में बड़क गाछ में सटि कऽ ठार भेल छल । सुमन राधा सऽ बाजल - राधा..! राधा - ऊं...! सुमन - एक गप्प कहौं ? राधा - आब तऽ हम तऽन आ मोन सऽ अहांके छी । आबहु डरै छियै ? सुमन - कि हमर प्यार बालुक ढ़ेरी तऽ नहि छियै ? राधा इ गप्प सुनि चेहा उठलीह । वो सुमन सऽ बजलीह - अहां की बाजै छियै ? सुमन - सांचे कहै छी । राधा - हम नहि बुझलौं । सुमन - हम गरीब के बेटा, अहां मातबर के बेटी । की गरीब आ मातबर में कुटमैती भऽ सकै छै ? राधा - किये नहि हेतै ? हमर माय-बाऊ नहि तैयार हेतै, तऽ अपना आर भागि कऽ कतौ चलि जइबई। चिंता किये करै छियै ? सुमन - राधा ! भागि तऽ जइबई, मुदा रहबै कतऽ ? ठीक छै, सब दुख उठा कऽ हम अपना ओहिठाम लऽ जाएब । लेकिन कि हमरा ओहिठाम अहां रहि पइबई ? राधा - मर्र..! कियेक नहि रहबै ? सुमन - अहां हमर प्यार छियै । हम अहां के धोखा नहि दऽ सकै छी । हमरा ओहिठाम अहां के घासों छिलऽ पड़त । माल के गोबरो करसी करऽ पड़त । आ दोसर के खेत में बोईनो करऽ पड़त । राधा हम अहांके कहिओ चिक्कन नोंआं नहि दऽ पाएब । गहना गुड़िया केकरा कहै छै । नोंआं फाटि जाएत तऽ पिऔन साटि कऽ पेन्हऽ पड़त । राधा - हमरा सब मंजूर छै । मुदा हम अहां बिना नहि रहि सकै छी । हमरा भाग में इ्एहे लिखल छै तऽ हमहीं ने भोगबै सुमन - नहि राधा । ई हमरा सऽ नहि हेएत । हमरा बिसरि जाऊ । राधा - अहां पगला गेलियै की ? राधा के इ वचन सुनि सुमन के आंखि सऽ नोरक धार बहऽ लागल । वो अप्पन गरीबी पर पछताए लागल । सुमन के कानैत देखि राधा बजलीह - सुमन, अहां एना किये कानै छियै ? की अहांके राधा पर विश्वास नहि यऽ ? सुमन - हमरा राधा पर खुब विश्वास छै । मुदा किसुन मजबूर छै । राधा के चाहत किसुन थिक, आ किसुन के चाहत राधा । कि राधा आ किसुन एक भऽ पाओल । नहि ! बेचारी राधा किसुन के इंतजार में जीवन गुजारि देलीह । मुदा किसुन कहि कऽ तऽ गेल, मुदा बहुरल नहि । किसुन के नहि बहुरनाहि, ओकर मजबुरी छल । सुमन बाजल- राधा, अहां हमरा बिसरि जाऊ । हम अहां के जोगरक नहि छी । पुनः आंखि सऽ लोर झहराबऽ लागल । राधा - सुमन, नहि कानू । सब ठीक भऽ जेतै । चुप भऽ जाऊ । अपना हाथ सऽ राधा सुमन के आंखिक लोर पोछैत बाजलीह- सुर्य उगनाई बन्न कऽ देतय, चान अपन इजोर देनाई बन्न कऽ देतय । मुदा हम अहां के नहि छोड़ि सकै छी । वो शैर बाजलीह - अहीं हमर दिन, अहीं राति छियै । अहां छी दीपक, हम बाति छियै ।। सुमन चुप भऽ आंखिक लोर पोछैत बाजल - राधा, इ सब कहै में आसान छै, करै में बड़ कठिन । हम अहांके फेर कहै छी । घर पर जा कऽ अहां बढ़िया सऽ सोचबै । चलू बहुते देर भऽ गेलै । सुमन साईकिल ओर बढ़ल आ राधा राय-गोट के अढ़ में नुका अपना खेत दिशि चलि गेलीह । राति में राधा बिस्तर पर गेलीह । मुदा ओकरा आंखि सऽ नीन्न कोश भरि दूर छल । ओकरा रहि रहि सुमन के बात यादि आबैत छल । राधा हमरा ओहिठाम अहां के घासों छिलऽ पड़त, दोसर के खेत में बोईनो करऽ पड़त । नहि ! नहि !! हम एहन काम नहि करबै । हमरा बाप के कथ्थी के कम्मी छै ? हमरा बाप के खेती जऽन बऽन करै छै, आ हम जइबई दोसर के खेत में बोईन करऽ । नहि हम एहन काम नहि करबै । पुनः सुतबाक प्रयास । नीन्न कोश भरि दुर । सुमन हमरा सऽ प्यार करै छै, सच्चा प्यार । हम अहि प्यार के केन्ना ठोकरैबै ? पुनः शांत, आंखि सऽ नीन दूर । पुनः माथ में सुमन के गप्प उभरनाहि । नहि, बाप रे ! हम एहन काम नहि करबै । वो ठीक्के कहलकै, हमर प्यार बालुक ढ़ेरी छियै । केनियें हावा में उड़ि जेतै । पुनः शांत, पुनः भावना में बहनाहि । माय बाऊ खेत बेच कऽ मोटगर दहेज इ्एह लेऽ ने गनै छै, जे ओकरा बेटी के कहियो दुख नहि हेतै । माय बाऊ वर के खानदान देखै छै । ओकर चालि चलाबा देखै छै । ओकरा ओहिठाम अपना बेटी के सुख खोजि, तब बियाहै छै । नहि ! हम ओहि गरीब संग नहि भागब । ओहो तऽ खोलिये कऽ कहलकै जे हमरा भुलि जाऊ । सोंचैत सोंचैत नहि जानि राधा के आंखि के नीनियां रानी कखन चुमऽ लागल । वो राधा के आंखिके चुमैत चुमैत नहि जानि कखन सुता देलक । इ गप्प राधो के नहि मालूम । भोर भेल, राधा उठलीह । अंगना में ओकर बाबा आबि बाजल - गरीबहा बेटा कहीं पढ़लकै हन । गरीबहा झुठ्ठे के सपना देखै छै । राधा टोकैत बजलीह- कि भेलऽ बाबा ? आरे ओहि गांओ के रतीचनमा बेटा पढ़नांई छोड़ि कऽ परदेश कमाई लेऽ भागि गेलै । राधा मोने मोन सोचलीह । चल बढ़िया भेलै । हमर पाछु छुटल । पुनः ओकरा माथ में सुमन के कहब यादि आबऽ लागल । राधा हम गरीब छियै । मातबर आ गरीब में कुटमैती नहि होय छै । हां...! वो ठीक्के कहलकै, मातबर आ गरीब में कहूं कुटमैती भेलै । अगर भइयो जाइ छै, तऽ की वो टिकै छै । नहि ! वो बढ़िया कयलकै । बियाह के बाद कुछों हेबतै, ओहि सऽ पहिलिये वो हमरा सऽ दूर भऽ गेलै । भगवान वो जतऽ रहै, ओकरा खुश रखियोहो । -प्रदीप कुमार मंडल "पबड़ा"; 9771245676 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.५.प्रणव झा-पप्पू पेंटर प्रणव झा पप्पू पेंटर विजय दिल्ली मे एकटा सरकारी महकमा मे पिछला 15 वर्ष से काज करई छलाह। अखन धरि के कमाई से जे पाई जमा केने छलाह तै से एबरी नियारने छलाह जे गाम पर एकटा सुन्नर घर बनाबी। योजना अनुसार विजय एक महिना के छुट्टी लऽ कऽ गाम एलाह आ घर ठानि लेने छलाह। ओना त विजय ईएमआई पर शहर मे सेहो एकटा फ्लैट लऽ नेने छैथ मुदा एकटा पैघ आ सुसज्जित घरक कामना गाम पर पूरा करई चाहय छलाह। गाम पर साढ़े तीन कट्ठा के पैतृक घराड़ी छल जै मे पुरना मकान छल। गाम मे खपड़ैल के ई अंतिम निसानी मे से एक छल जे आब खसि पड़ल छल। ओकरे स्थान पर आब नया मकान बनाओल जा रहल अछि। आधुनिक वास्तुकला, डिजाइन आ साज-सज्जा संगे। विजय के बरबसे याद आबि गेल छल जे नेनपन मे मैंयाँ हुनका अलिया-झलिया पर झुलबऽ काल फकड़ा पढय छलखिन... अलिया गे, झलिया गे, गोला बड़द खेत खाय छौ गे.....पुरान घर खसे... नव घर उठे। ओ सोचय लागल छलाह जे ठीके त कहय छै, पुरान घर के एकदिन खसबाक रहिते छैक आ ओकरे ऊपर नव घरक सृजन होइत छैक। प्लास्टर भेला के बाद जखन इंटीरियर, आ रंगाई-ढोराई के बात एलई त लोक सभ कै टा नाम सूझेलक जै मे से एकटा ’पप्पू हीरा इंटीरियर एंड सेनीटरी’ सेहो छल जे कै टा लोक सूझेने छल। दलसिंह सराय बजार मे नामी छल। विजय आन-आन दोकान पर मोल-मोलई करैत ’पप्पू हीरा इंटीरियर एंड सेनीटरी’ के दोकान पर सेहो पहुंचला। सूर्यक चकमक प्रकाश दोकानक रंगीन काचसँ फूटि रहल छल। दोकानक बाहरी हिस्सा चमचम करैत आधुनिक डिजाइनसँ सजल छल। शीशासँ ओझरा रहल रौदक किरन आँखिकेँ सम्मोहक लागि रहल छल। विजय अंदर प्रवेश केलाह। दोकानक भीतरक सजावट आकर्षक आ सुसज्जित छल। देवाल पर रंग-बिरंगा आ विभिन्न डिजाइन के टाइल्सक नमूना लगाओल छल। ओहि टाइल्सक चमक आ रंगक संगम देख विजय प्रभावित आ ख़रीदारी लेल सकारात्मक भेल छलाह । दोकानक बीचमे एकटा सजल-सजाओल काउंटर छल, जकरा पर विभित्र प्रकारक सैंपल्स राखल छल। काउंटरक पाछाँ, शेल्फमे सिंक, शावर हेड, बाथटब आ अन्य प्रसाधन आ सेनीटरी सामग्री ढंग से सजा के राखल छल। काउंटर के ऊपर दहीन कोन मे बनल पाथरक एकटा छोट सन पूजाघर मे लक्ष्मी-गणेशक मुर्ति स्थापित छल। लक्ष्मीजीक मुर्ति स्वर्णिम आ आभायुक्त छल, संगहि गणेशजीक मुर्ति श्वेत आ सोम्य लागि रहल छल। धूपक सुगंध पूरा दोकानमे पसैर रहल छल। धूपक सुगंध आ दीपक मधुर प्रकाश वातावरण के पवित्र बना रहल छल आ दोकानक शोभा बढा रहल छल। काउंटर पर बैसल दोकानदार कहलक, "आउ सरकार बैसु। की सेवा करी से हुकुम करियौ।" विजय बजलाह - हमरा अपन मकान लेल टाइल्स चाही, फ्रंट देवाल लेल, फर्श लेल, भानसघर लेल, बाथरूम-पैख़ाना लेल अलग अलग, आधुनिक डिजाइन आ रंग मे। संगही यदि अहांक दाम आ सामाग्री रुचिगर लागल त सेनीटरी आइटम सभ सेहो लेबाक अछि। दोकानदार अपन अनुभवक झलक देखबईत कहलक, "देखू बाबू, हमरा लग टाइल्सक अनेक प्रकार अछि। जइमें सिरेमिक, पोर्सलीन, विनायल, आ मोजेक टाइल्स आदि अछि। हरेक टाइल्सक अपन-अपन विशेषता अछि। जेना सिरेमिक टाइल्स मजबूत आ टिकाऊ होइत अछि, आ पोर्सलीन टाइल्स शोभाक दृष्टिकोणसँ उत्तम होइत अछि....इत्यादि.....इत्यादि। एही प्रकारे टाइल्स सभ के खासियत बताबईत ओ हेल्पर के संगे देवाल पर नाना प्रकार केर टाइल्स के पैटर्न लगा क विजय के देखाबऽ लागल। " विजय ओय मे से किछ सैंपल फाइनल करबाक लेल सेलेक्क्ट कऽ नेने छलह। ता दोकानदार अपन मार्केटिंग अनुभव के देखबैत कहलक "हमरा लग नै खाली टाइल्स, अपितु सिंक, बाथटब, शावर हेड, आ अउरो बहुत रास प्रसाधन आ सेनीटरी के सामग्री आधुनिक डिजाइन मे भेंट जैत।” विजय पुछलक - "पेंट्सक समान आ विकल्प सभ सेहो अछि अहाँक लग की?" दोकानदार मुस्कुराइत उत्तर देलक - "हँ बाबू, हमरा लग सभ प्रकारक पेंट्स अछि। जेना कि, एक्रिलिक पेंट्स, ऑयल बेस्ड पेंट्स, एम्मल पेंट्स, आ वाटर बेस्ड पेंट्स। अलग-अलग रंग आ शेड्स मे उपलब्ध अछि। आ हमरा लग प्राइमर, पुट्टी, आ विभित्र प्रकारक फिनिशर आदि पेंटिंग मे जे भी सामाग्री के आवश्यकता होइत छैक सभटा निक क्वालिटी मे आ उचित मूल्य पर उपलब्ध अछि। अहाँकेँ जत्ते सुन्नर आ टिकाऊ पेंटिंग चाही, ओकर लेल हमरा लग सब सामग्री अछि। संगहि ऐ सभ कार्य लेल निक प्रशिक्षित आ अनुभवी कारीगर सेहो अछि। अहाँ चाही त काजक ठेका सेहो दऽ सकय छी।" एहि बीच ग्राहक के साकारात्मक हावभाव के अनुभव करैत अनुभवी दोकानदार विजय के लेल चाह मँगवा नेने छल। विजय, चायक सिप लेइत, पूछलक - अहाँक सामग्री सभ मे से किछ हमरा पसिन पड़ल आ हमरा लगय य जे हमर आवश्यकता के अनुसार अछि, ताहि दुआरे लेल जा सकय अछि। मुदा ई बताउ, अहाँक सेवा कत्तेक उत्तम अछि? दोकानदार मुस्कियाइत बजलाह - "हमरा लेल ग्राहकक संतुष्टि सभसँ पैग गप अछि। हमरा लग प्रशिक्षित आ कुशल तकनीशियन अछि, जकरा टाइल्स, वालपेपर लगेबाक निक अनुभव छैक। आ कखनो कोनो समस्या भेल, त हम तत्क्षण समाधान करबाक लेल उपलब्ध रहय छी। अहाँ ऐ विषय मे चौहद्दी मे ककरो से पूछि सकय छी। पेंटिंगक लेल सेहो हमरा लग कुशल कारीगर छथि, जे घरक साज-सज्जा केँ सुंदर बनबैत छथि। हमरा स्वयं ऐ काज मे 20 वर्ष से बेसी के अनुभव अछि।" ओतऽ दोकान बला हिनकर आवश्यकता, चाहत, अपन अनुभव, प्रस्ताव आदि पर विमर्श करैत बात जखन दाम पर एलई, त दोकानबला कहलक जे ओना त हम अपन सामाग्री सब पर ग्राहक केर हिसाब से 5-10% तक के छूट दैत छिएक मुदा अहाँ लेल 15% के फ्लैट डिस्काउंट कऽ देब। बाँकि सर्विस यदि अहाँ लै छी त सर्विस के लेल ओना अहाँ जे दाम द दी से हमरा स्वीकार, हम अपना दिस स अपन फिक्स रेट के 50% डिस्काउंट अहाँ के दै छी। ई सुनि विजय अकचकाइत पूछलाह -हमरा पर एत्तेक उदारता किएक यौ? -सर लगई य अहाँ हमरा चिनहलहु नै! हम पप्पू पेंटर, 7-8 वर्ष पहिने दिल्ली मे अहाँ से भेंट होइत छल - दोकानबला उत्तर मे बाजल छल। विजय अपन स्मृति पर ज़ोर दैत किछ याद करऽ लगलाह। फेर हुनका याद आबि गेल छल ’पप्पू पेंटर’। जखन ओ दिल्ली के एकटा कालोनी मे किराया के घर पर रहय छलाह त पप्पू पेंटर से कखनों काल भेंट होई छल नौआ दोकान पर केश कटाबऽ काल। पेशा से पेंटिंग के काज करैत बाजय मे फंचाड़ि। बकर बकर फाल-डींग हाँकैत। एकबेर विजय के अपन किराया बला मकान के रंग-ढ़ोर आ मेंटेनेंस के काज करेबाक छल। पप्पू से पहचान छल त ओकरे काज देने छलखिन। जा धरि काज भेल छल, विजय के ओकर बकर-बकर झेलऽ पड़ल छल। मुदा काज ओ बड्ड चिक्कन केने छल। विजय चाहक सिप लैत कनि काल लेल अतीत मे चलि गेल छलाह। पप्पू काज करय के बीच मे सदिखन खुचुर खुचुर पाई मांगय। आई ई लेल त काइल्ह ओ लेल। किछ ने किछ धू लागले रहय। विजय ओकरा बूझबैत रहइथ मनी मेनेजमेंट के विषय मे -देखहक तों एत्तेक टाका के रोज कमाय छह। महिना मे 22 दिन काज भेटलऽ त महिना के बुझहक जे एत्तेक टाका होय छैक। जे दिहाड़ी कमाई छहक से ओहि दिन नै उड़ा दी। ओ गप्प दियइ जे ’एह! हम त पाई के पाई नै बुझय छी एना उड़बय छी त ओना उड़बय छी। बेटा के बड्डे मे उधार ल के एत्तेक भोज भात केने रही- धिया-पूता के नितदिन के एत्तेक टाका कुड़कुड़े नमकीन मे खर्च क दय छी’..... इत्यादि इत्यादि। विजय कहथिन जे धिया पूता के किताब कॉपी इसकुल बस्ता सभ मे कतेक खर्च करय छहक। त ओ मटियाबय जे जरूरत पर साल मे एकबेर कीनिए दैत छी। विजय कहथिन जे देखह तोरे लाभ लेल कहि रहल छी। हम सब छी महीनबारी दरमाहा बला लोक महिना के अंत मे टाका भेंटय अछि आ जतेक आमदनी अछि ओहि हिसाबे खर्चा के बजट बनाबय छी। जतबे कमाई अछि ओहि मे आपत्ति-विपत्ति आ पईघ काज लेल किछ पाई के प्रोविज़न क के चलय छी। तोरो कमाई बेजा नै छह। महिना मे यदि 20-25 दिन काज भेंटय हेतऽ त 15-20 हजार कमाई भए जायत हेतौक। जौं अपन कमाई आ खर्चा के सही से व्यवस्था राखबहक त उधार-पैंच से बचबह। आ आपत्ति-विपत्ति मे सेहो हौसला बनल रहतौक... आदि आदि। मुदा विजय के बात ओकरा लेल धन सन। ओ काज केलक आ गेल। कहियो काल एहिना विजय से रस्ता बिरस्ता भेंट भऽ जाय। बरष दू बरष बाद दुनियाँ मे कोरोना नामक महामारी पसरि गेल छल जे पूरा मानव जाति मे त्राहि-त्राहि मचा देने छल। अपन देश सेहो एकर चपेट मे आयल। तै पर से सरकार के गलत तरीका से एकरा हेंडल करब...ऐ के बहुत दुखद प्रभाव देश भरि के अलग अलग शहर मे काज करय बला प्रवासी मजदूर सभ पर पड़ल छल। एक बैगे राता राती लॉक डाउन लगा देल गेल छल। काज-धंधा, रेल-बस घोडा-गाड़ी सब बंद। दिहाड़ी मजदूर सभ पर ई फरमान आफैत बनि के खसल छल। दिहाड़ी पर परिवार पोसय बला सभ के किछुए दिन मे खेनाय पर आफैत होय लागल। पप्पू पेंटर के परिवार सेहो ऐ से अछूत नै रहल छल। भुखल पियासल काज से च्युत मज़दूरक हांजक हांज टोली सभ परिवहन के अभाव मे जहिना तहिना ट्रक-टेमपु-ठेला सायकल पैरे जेकरा जेना सूझल बिदा होबय लागल गामक दिस, जे जीब त कोदोहो खा के गाम मे रहि लेब। एहि बीच एहन भयानक रिवर्स पलायन देख किछ राज्य सरकार आ स्वयंसेवी संस्था सब सेहो किछ परिवहन के व्यवस्था चालू केलक, जत्त भयानक मारा-मारी के दृश्य। पप्पू पेंटर सेहो गाम भागि जेबाक भाँज लगबऽ लागल। मुदा जेबी मे एकटा टाका नै। तखन ओ विजय बाबू लग सहायता लेल पहुंचल छल। ओ अपन दयनिय स्थिति बतेने छल आ किछ आर्थिक मदद के गोहार लगेलक विजय लग। विजय त पहिने ओकरा लग निक-बेजाय के लेक्चर झारला। फेर अपनो कोविड के भयानक स्थिति से भविष्य के लऽ कऽ आशंकित छलाह। तथापि हजार टाका पप्पू के दऽ देलखिन। ओ विजय के पप्पू से अंतिम भेंट छल। 6-7 बरष के बाद आई पप्पू पेंटर से भेंट भऽ रहल छल। मुदा ओ पप्पू आ आजूक पप्पू के हुलिया मे बहुत परिवर्तन छल। कत्त ओ गुटका चिबाबइत सनटिटही सन गाल चुटकल बेतरतीब गंदा मे सानल कपड़ा पहिरने पप्पू पेंटर आ कत्त ई चिकनायल चेहरा, मुह मे पान दबौने, तिलक केने, स्त्री कैल अंगा-पेंट पहिरने पप्पू। स्वाइत विजय ओकरा नै चिन्ह पेने छलाह। ओ विस्मयित होइत बाजलाह- ’पप्पू हौ! अरे बाह! गाम आबि के त बड्ड निक प्रगति केलाह अछि। तोरा से कोरोना मे लास्ट भेंट भेल छल तकरा बाद हमरा कोनो जानकारी नै छल।’ पप्पू बाजल - कोरोना लॉकडाउन के समय हमरा घर वापस अएबा लेल मजबूर होएब पड़ल। खाय पर आफैत छल। ओ दिन हमरा लेल बड्ड भयावह छल। किछ सहायता अहूँ सऽ भेंटल आर कत्तौ कत्तौ से सहयोग मांगि हम आन आन मज़दूरक संगे गामक लेल बिदा भेल छलहु। दिल्लीक सड़क पर अनगिनत लोक अपन अपन घर पहुँचऽ लेल संघर्ष करैत छल। हमहु ओहि यात्री समूह में शामिल भऽ गेल रही। ओ यात्रा बहुत दर्दनाक छल। लोक लोक के संग ठाढ़ होइत, धक्का-मुक्की करैत, पियासल आ भूखल रहि, हम अपन गाम के लगिच पहुंचल रही। मुदा, सीमा पर हमरा सभकेँ रोकि लेल गेल। सरकारक आदेश छल जे सब मजदूरकेँ क्वारंटाइन में राखल जाए। क्वारंटाइन सेंटर में व्यवस्था बड्ड निक नै छल। हमरा सभकेँ एकटा छोट-छोट कोठरी में राखल गेल। खाना-पीना कहुना कऽ भेंटय छल। तखन बस समय पुरबाक इंतजार करैत छलहुँ। मन में एकटा डर सेहो लागल छल जे कहीं हमरो कोरोना नहि भऽ गेल होए। ओ दिन दहशत आ मजबूरी से भरल दिन छल - पप्पू के स्वर मर्माहत छल। अंततः क्वारंटाइनक अवधि खत्म भेल। हमरा घर जाए देल गेल। हमार हृदय में खुशी छल। मुदा, शरीर थाकल आ कमजोर छल। ई समय हमरा सबकेँ देह तोड़ि देलक मुदा मोन के मजबूत बनौलक। हम भविष्य में फेर सँ अपन पैर पर ठाढ़ होएब से आस बचल छल। ई यात्रा हमरा जिनगी भरि लेल याद रहत। पप्पू आगाँ बाजलाह - घर पहुँचला पर हमर स्थिति बहुत खराब छल। मुदा धीरे-धीरे हम गाम में अपन काज शुरू केलहुँ। शुरू में हम रंगाई-पुताई के काज करैत रही। मेहनत आ इमानदारी सँ काज क ऽ रहल छलहुँ। धीरे-धीरे लोक हमर काज के सराहना करऽ लगल। हमर काज के हुनर त अहाँ दिल्ली मे देखनेहे छलियई। मुदा समय आ पाई के हम निक से भैलू आ उपयोग नै बुझय छलियई। कोरोना के ई यात्रा हमरा समय आ पाई के भेलू बुझय लेल खूब समय देलक। क्वारंटाइनक अवधि मे ई सब विचार मोन मे खूब चलल। हम अहाँ सँ पैसाक आ समय के प्रबंधन के बहुत महत्वपूर्ण पाठ सिखलहुँ। हम अहाँक बात के मन में राखि कऽ धीरे-धीरे पैसा बचाबऽ लगलहुँ। हमर मोन मे विचार छल जे हम अपन एकटा स्थायी दुकान खोलि क काज करी। शुरू मे कनि दिक्कत त छल मुदा दिल्ली घूरि के जेबाक कहियो दोबारा मोन मे नै आयल। बाबा बिस्कर्मा के कृपा से धीरे धीरे काज बढ़े लगल। हमरा लग जे लड़का सभ छल, ओकरा सब के काज सिखाबऽ लगलहुँ। धीरे-धीरे हमर एकटा टीम बनि गेल, जकरा संग हमर काज आरो बढ़य लागल। पप्पू के चेहरा पर गर्वक भाव छल, जखन ओ अपन टीम आ काजक व्याख्या कऽ रहल छल। पप्पूजी आगाँ कहय लागल - ठीके कहय छलियई अहाँ विजय बाबू! जे मेहनत, लगन आ कर्मठता से कर्म करय छय, एकदिन भगवान ओकरा अवश्ये ताकय छथीन। भगवान हमरो एकटा एहने सन स्वर्णिम अवसर देलाह। हीरा बाबू, जे आर बी कॉलेजक प्रोफेसर छलाह, ओ रिटायर भेलाह आ अपन सेवाक पैसासँ एकटा सुंदर घर बनाबऽ चाहैत छलाह। ओ हमर काज देखलाह आ हमरा पर भरोसा करैत अपन घरक पूरा इंटीरियर के कांट्रैक्ट देलाह। हम सभ मिलि कऽ हुनकर घर के एना सजेलहुँ जे ओ हमरा सँ बहुत प्रभावित भेलाह। हुनक मोन मोताबिक आधुनिक साज सज्जा बला घर बनल जे हुनक गाम भरि आ आबईत जाइत पथिक सबहक प्रशंसा पाबय लागल। हीरा बाबू हमरा से बड्ड प्रसन्न भेलाह। विजय के पप्पूक आँखि में मेहनत आ लगनक फल पाबय के प्रसन्नता आ उत्साहक झलक साफ देखा रहल छल। पप्पू आगाँ बाजल - हीरा बाबू बड़ा ज्ञानी आ अनुभवी लोक छईथ आ तहिना आधुनिक सोच राखय छथि। लंबा सेवा के बाद रिटायर भेल छलाह। खूब निक पाई भेंटल छल रिटायरमेंट पर। घर बनाइये लेलाह। हुनक सोच छल जे धिया-पूता मे पाई बांटब त तीरी-मिरी क देत। ताही दुआरे ओ शेष पाई के कोनो बीजनेश मे इन्वेस्ट करय चाहय छलाह, जै से एकटा बीजनेश सेहो ठाढ़ होय का किछ लोक के रोजगारो भेंटे। स्वाइत हीरा बाबू हमरा एकटा प्रस्ताव देलथिन। ओ हमरा दुकान के विस्तार करय लेल निवेश करबाक प्रस्ताव देलथिन। हमरा लेल ई प्रस्ताव स्वीकार करब एकटा नीक अवसर छल। ई साझेदारीक फलस्वरूप, ’पप्पू हीरा इंटीरियर आ सैनिटरी’ दोकानक स्थापना भेल- पप्पू गर्व सँ कहलाह। हमर दोकान आब दलसिंह सराय के श्रेष्ठ इंटीरियर आ सैनिटरी सेवाक लेल प्रसिद्ध अछि। आधुनिक डिजाइने सँ सजाओल घरक निर्माण में हमर टीम आ दुकानक नाम अग्रणी अछि। से त अपने पता लगेनहे हेबैक। हमर सफलता के सफर के नीव जै विचार से पड़ल तकर सूत्रधार हम अहिंक मानय छी, आ हीरा बाबू ओय नीव पर एकटा सुंदर भवन के विस्तार देलाह। हम विपत्ति के समय अहाँ द्वारा कैल गेल आर्थिक मदद के सेहो कोना क बिसरब ताही दुआरे अहाँ के सेवा मे 50% के छूट के प्रस्ताव देलहु अछि। विजय पप्पू के सफलता के प्रेरक कथा सुनि बहुत प्रभावित भेलाह, संगहि आई हुनका अपना पर सेहो गर्व भऽ रहल छल जे ऐ सक्सेस स्टोरी मे ओहो एकटा प्रभावी पात्र छईथ। मोने मोन अपना के शाबासी देबय लगलाह। संगहि इहो सोचय लगलाह जे करल धरल कहियो ने कहियो फलीभूत होइत छैक। तखन ने हमरा आई घरक इंटीरियर लेल एतेक सस्ता सौदा के प्रस्ताव भेंटल अछि। अस्तु। तकरा बाद विजय दोकानदार संगे समान आ सेवा सबहक लिस्ट फाइलन करय लागलाल। इति। - [प्रणव कुमार झा, राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड नई दिल्ली, दुर्गापूजा 2024] अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.६.महाकान्त प्रसाद- भालरि/ फालतू महाकान्त प्रसाद भालरि/ फालतू १ भालरि -मीत यौ, फरमान ककरा कहै छैक? -यौ मीत, हमरा नहि बुझल अछि। चलु गुरुजी सँ पूछै छी। -सर, फरमान ककरा कहै... । ई-शिक्षकोश पर काज करैत गुरुजी भालरि भ गेलाह। माथ पर पसेनाक बुन्न अभरि एलैक।
२ फालतू हम हुनकासँ जिगासवश पुछलियनि- 'अहाँ हमारा मादे की सोचै छी?' 'अहुँ कोनहु सोचबाक चीज छी'- ओ कहलनि। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। पद्य ३.१.प्रमोद झा 'गोकुल'-देशक चौकीदार ३.२.आचार्य रामानंद मंडल- कोशी कमला के बाढ़ ३.३.राज किशोर मिश्र-ऑनलाइन सेवा कम्पनीक सेवक ३.४.कैलाश कुमार मिश्र- इजोतक अन्हार घर (अनूदित) ३.१.प्रमोद झा 'गोकुल'-देशक चौकीदार प्रमोद झा 'गोकुल' देशक चौकीदार
हे रौ बजर खसुवा अड़ीबा डकहा ! भै जो तों खबरदार घर घर तोहर खबैर लैले सन्नद्ध छौ देशक चौकीदार। जाति जातिक आँकड़ा हिट कैके अब्बल जोरगर संख्या वल फिट कैके बनय चाहै छेँ तों वड़का हवलदार जनता हाथ अरपेना साधल मजा चखौतौ चौकीदार। खा पीबिके ढेकैर रहल छेँ बेटा बेटीक संग हेकैर रहल छेँ पानक खिल्ली कचैर रहल छेँ गरीवक माथ चढ़ि मखैर रहल छेँ तैपर से आंखि तड़ैर रहल छेँ रे भ्रष्टाचारक सरदार ! केओ भाङ गाजामे मस्त केओ जेलक दोहारि नपैमे व्यस्त मान मर्यादा राज्यक करैमे पस्त लड़ा चराके राज सुख पबैक अभ्यस्त खाधि अपनहिं खोधलह होइले अस्त अपराध शिरोमणि सरदार ! हत्या लूटक धमाल मचल जत डाकाक आकाक कमाल जत अपहरण फिरौतीक सत्कार जत वलात्कारक भरमार बेसुमार जत नहिं बनय देब हम अपन से विहार। घर घर तोहर खबैर लेले सन्नद्ध छौ देशक चौकीदार। -प्रमोद झा 'गोकुल', दीप,मधुवनी (विहार), फोन -9871779851 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.२.आचार्य रामानंद मंडल- कोशी कमला के बाढ़ आचार्य रामानंद मंडल कोशी कमला के बाढ़ हो बाबा भोले शंकर। जटा मे रोका भयंकर- हिमालय से निकलैत जलधार। मिथिला पड़ल बीच मंझधार। हो बाबा ऋषि अगस्त्य। तीन चुर मे पी जा। कोशी कमला के बाढ़। मिथिला पड़ल बीच मंझदार। हो बाबा भोले शंकर। पूजा होइ छौ भयंकर। जटा में रोका बाढ प्रलयंकर। मिथिला डूब जयतो समंदर। हो बाबा ऋषि अगस्त्य। पूजा लेइछा तु पितृपक्ष। पी जा बाढ जेका समंदर। मिथिला डुब जयतो समंदर। हो बाबा भोले शंकर। हो बाबा ऋषि अगस्त्य। मिथिला बचाबा बाढ समंदर। करे रामा प्रार्थना अगस्त्य शंकर। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.३.राज किशोर मिश्र-ऑनलाइन सेवा कम्पनीक सेवक राज किशोर मिश्र ऑनलाइन सेवा कम्पनीक सेवक का न सँ सटल मो बा इल ओकर, मो टरसा इकि ल-पैडल पर टा ङ, मो न मे लक्ष्यक ठाँ कतेको , समा न बँटैत अछि बनि समा ङ।
महा नगरक पूब मे कखनो , कखनो बस्ती को नो धता ल, खेलि रहल ओ झि झि र को ना , का जक पा छाँ बनल बेता ल।
स्नो -पा उडरक मो टरी को नो , को नो पैक कएल ,जओ-आटा , टूथ-पेस्ट, मसल्ला , केकक डि ब्बा , अगरबत्ती , पा दुका -बा टा ।
नो न -हरदि सँ एना -ककबा , दबा इ, जकरा धेने छै लकबा ।
नेना -भुटका लेल आइसक्री म, को नो गृहि णी क ऑर्डर हरि अर सी म।
अत्रि क आश्रम दि स शि ष्य को नो , कमण्डल मे भरने गंगो दक, कम्पनी कर्मचा री ,चा नन ,गङ्गौ ट, आ' पहुँचा रहल अछि मो दक।
मो न ओकर छै अपसि आँत, आबि ने जा इ सेवा -आदेश, मो हल्ला , सेक्टर, काॅ लो नी , रौ द किं वा ला गल कुहेस।
मो टरसा इकि लक पा छाँ मे, मे
ष्टएण्ड पर रा खल बड़का मो टा , झाँ उ -झाँ उ कऽ कुकूर उठलै , बढ़ल गली मे पो छि कऽ पो टा ।
जे आदेश हो इ कम्पनी के, परफ्यूम सँ लऽ कऽ रङ-रा ग, ही टर, टो स्टर, एअर- प्यूरी फा यर, पा रि जा त सँ लऽ कऽ पा ग।
अर्थ-तंत्रक कर्मयो गी , ती तल अछि ओ घा म सँ, समा न देलक, आब टा का चा ही , कम्पनी क नि र्दि ष्ट दा म सँ।
महा नगरक कंक्री ट-जंगल, दो गे -दो गे, प्रधा न बा ट, ओकर झो रा मे समा न देखि क', ला गत माॅ ल ,गा मक हा ट।
भो रे सँ ,जखन कौ आ डकल, आ' से आधा रा ति , बहि ते रहैत अछि का र्यकर्ता , कटि ते कर्म-जजा ति ।
बजा रक नूतन परम्परा सभ,
उपभो क्ता सबहक खगता अनंत,
टा का क बेओँत,खर्चक बेओँत, जि नगी छै महा नगरक जी वंत।
ककरो ची जक छैक बेगरता , ककरो भेटि गेल छै रो जगा र, जी वन-शैली बदलि रहल छै, पसरि रहल छै खूब बजा र।
ओकर घा म मे नव चा णक्यक, लि खल गेल अछि अर्थ-नी ति ,
नव प्रो डक्ट लेल लो कक तृष्णा , खूब बढ़ल अछि ओहि सँ प्री ति ।
खूब अरजू,जूखूब खरचू, इएह अछि नव्य उपभो क्ता वा द, पूर्वक संग्रह-मनो वृत्ति , अछि भेल जा रहल ओ अपवा द। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.४.कैलाश कुमार मिश्र- इजोतक अन्हार घर (अनूदित) कैलाश कुमार मिश्र इजोतक अन्हार घर (अनूदित)
हान कांग (दक्षिण कोरिया केर प्रथम साहित्यकार जिनका 2024 केर साहित्य केर नोबेल पुरस्कार भेटल छनि) मैथिली अनुवाद आ पाठ- डॉ कैलाश कुमार मिश्र
ओइ दिन उई-डोंग मे पाला खसलैक आ हमर देह, हमर आत्माक संगी खसैत नोरक टघार संग सिहरि उठल।
चलि जाऊ अहाँ।
अहाँ संकोच क' रहल छी? अहाँ केहन सपना देखि रहल छी, की मंडरा रहल अछि ? फूल जकां जगमगाइत दुमहला घर तकर नीचा हम सीखने छी वेदना, आ एखन धरि अछूत आनन्दक भूमि दिस निपट अमरूख जकां एक हाथ बढ़ा देने रही।
चलि जाऊ।
अहाँ केहन दिवास्वप्न देख रहल छी? अपन रस्ता धरु।
समृति केर एकटा स्ट्रीट लैंप पर बनैत देखि क' हम चलल रही। ओत' हम उपर आ लाइटशेड केर भीतर देखने रही एक अन्हार घर छलैक। इजोतक अन्हार घर
अकास निशा अन्हार छलैक आ ओहि अन्हार मे रहयबला चिरई चुनमुन अपन देहक भार के त्यागैत फुर्र स उड़ि गेल । कतेक बेर हमरा मर' पड़त जाहि स हमहु ओहिना फुर्र दनि उड़ि जाई? कियोक हमर हाथ नहि पकड़ि सकै ।
इ सपना कतेक पियरगर छैक? कुन स्मृति अतेक चकमक करैत छैक?
पाला, माय केर आंगुरक पोर जकाँ हमर बिखरल भौंम के नोचैत जमल गाल के नोचैत कोरियबैत आ फेरो ओही स्थान के थपथपबैत ।
चलि जाउ, जल्दी जल्दी अपन रस्ता धरु ।
Pitch-Black House of Light कविता केर अंग्रेजी रूप Han Kang
That day in Ui-dong sleet fell and my body, companion to my soul shivered with each falling tear.
Get on your way.
Are you hesitating? What are you dreaming, hovering like that?
Two-storey houses lit like flowers, beneath them I learned agony and towards a land of joy as yet untouched foolishly reached out a hand.
Get on your way.
What are you dreaming? Keep walking.
Towards memories forming on a streetlamp, I walked. There I looked up and inside the lightshade was a pitch-black house. Pitch-black house of light
The sky was dark and in that darkness resident birds flew up casting off the weight of their bodies. How many times would I have to die to fly like that? Nobody could hold my hand.
What dream is so lovely? What memory shines so brightly?
Sleet, like the tips of mother’s fingers, raking through my dishevelled eyebrows striking frozen cheeks and again stroking that same spot, Hurry up and get on your way. अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। विदेह ४०४ म अंक १५ अक्टूबर २०२४ (वर्ष १७ मास २०२ अंक ४०४) || 57 56 || विदेह (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) www.videha.co.in
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50-30- 20 नियम 50% दैनिक खर्च व ऋण अदायगी 30% मनोरंजन , भ्रमण आदि 20% म्युचल फंड, बैंक सावधि जमा आकस्मिक नियम मासक खर्चक कम a कम तीन गुना आकस्मिक खर्च राखक चाही | जौं छः गुना अछि as GR 40% नियम ऋणक किस्त कखनहु 40% सँ at wa मास मे ऋणक अदायगी नहिं होमक चाही | aa ot अहाँक आय %50000 सव मास मे अछि , det ऋणक अदायगी सव मास मे ₹20000 सँ at नहिं होमक चाही | KKEKKKK
00 घटाव उम्रक नियम एहि नियम सँ अहाँ अपन uae विनियोग os सकैत Bt | 00R सँ अपन उम्र घटा Sosa वचत, ततेक प्रतिशत म्युचल फंड मे रखवाक चाही आ शेष बैंकक सावधि जमा मे राखक चाही | अपनेक sol तीस बरख va अछि तहन 400-30 =70% बचत धन कें Bat फंड मे Taare चाही आ 30% बैंक सावधि जमा मे रखवाक चाही | 50,5,3 नियम विनियोगक राशि. नीचा ea गेल नियम a रखनाई उचित अछि | 50% इक्यूटी व म्युचल फंड 5% बैंक सावधि जमा 3% बचत खाता मे रखनाई उचित होयत |
Ys जायत | जेना ब्याज दर 8% अछि तहन अपनेक धन 44 /8 = ५8 साल मे चौगुना Us जायत | . नियम 70 (महंगाई दर A धन भविष्य मे धनराशिंक समायोजन) 70 मे महंगाई दर सँ भाग देला पर जतेक भागफल होयत , ओतेक साल मे अपनेक राखल धन आधा Ys जायत | जेना महंगाई दर 6% अछि तहन 70/6 = 44 साल 4 मास मे अपनेक धनक मूल्य आजुक आधा Ys जायत | निकासी नियम 4% आर्थिक स्वतंत्रताक लेल नियम 4% लागू ead अछि । सेवानिवृत्तिक समय सालक खर्चक पच्चीस गुना होमक चाही | जेना सालक खर्च जौं तीन लाख अछि तहन सेवानिवृत्तिक समय ₹300000*25 = रें 7500000 होमक चाही | 50% मियादि जमा आ 50% इक्वटी मे रखवाक चाही | साल मे 4% निकासी करला पर साल मे तीन लाख रुपया निकलत |
( देवनागरी लिप्यांतरण ) आर्थिक टिप्स नियम 72 ( धनराशि दुगुना) 72 में ब्याज दर सें भाग देला. पर जतेक भागफल होयत , ओतेक साल मे अहॉक धन दुगुना Ys जायत | जेना ब्याज दर 8% अछि तहन अपनेक धन 72/8 - 9 साल मे दुगुना Ys जायत | नियम 444 ( धनराशि तिगुना ) 44 में ब्याज दर सें भाग देला पर जतेक भागफल होयत , ओतेक साल मे Hele धन तिगुना Ys जायत | जेना ब्याज दर 8% अछि तहन अपनेक धन 44 /8 = 4 साल 3 माह. मे तिगुना Ys जायत | नियम 44 ( धनराशि चौगुना ) 44 में ब्याज दर सें भाग देला पर ade भागफल होयत , ओतेक साल मे अहॉक धन चौगुना
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व | | विदेह (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) www.videha.co.in ( देवनागरी लिंप्यांतरण ) आर्थिक टिप्स नियम 72 ( धनराशि दुगुना) 72 में ब्याज दर सें भाग er पर जतेक भागफल Bad , ओतेक साल मे अहॉक घन दुगुना Ys जायत | जेना ब्याज दर 8% अछि तहन अपनेक घन 72/8 न 9 साल मे दुगुना भ$ जायत | नियम 44 ( धनराशि तिगुना ) 4 में ब्याज दर सेँ भाग ta पर जतेक भागफल होयत , ओतेक साल मे अहाँक धन तिगुना Ys जायत | जेना ब्याज दर 8% अछि तहन अपनेक धन 44 /8 = (4 साल 3 माह. मे तिगुना Hs जायत | नियम 44 ( धनराशि चौगुना ) 44 में ब्याज दर से भाग देला पर जतेक भागफल होयत , ओतेक साल मे अहॉक धन चौगुना
विदेह ४०४ म अंक १५ अक्टूबर २०२४ (वर्ष १७ मास २०२ अंक ४०४) | | 5 Ys जायत | ST ब्याज दर 8% अछि तहन अपनेक घन 44 /8 = 48 साल मे चौगुना Us जायत | ; नियम 70 (महंगाई दर A धन भविष्य मे धनराशिक समायोजन) 70 मे महंगाई दर सँ भाग देला पर जतेक मभागफल होयत , ओतेक साल मे अपनेक राखल धन आधा Ys जायत | SAT महंगाई दर 6% अछि Wet 70/6 = (4 साल 4 मास मे अपनेक धनक मूल्य आजुक आधा Ys जायत | निकासी नियम 4% आर्थिक स्वतंत्रताक लेल नियम 4% लागू होयत अछि । सेवानिवृत्तिक समय सालक ude पच्चीस गुना होमक चाही | जेना सालक खर्च जौं तीन लाख अछि तहन सेवानिवृत्तिक समय ₹300000*25 न रे 7500000 होमक चाही | 50% मियादि जमा आ 50% इक्वटी मे रखवाक चाही | साल मे 4% निकासी करला पर साल मे तीन लाख रुपया निकलत |
व6 || विदेह (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) www.videha.co.in 400 dela उम्रक नियम एहि नियम सँ अहाँ अपन uae विनियोग ws सकैत Bt । 008 से अपन उम्र घटा क$ जे वचत, ततेक प्रतिशत म्युचल फंड मे रखवाक चाही आ शेष dep सावधि जमा मे राखक चाही | अपनेक saat तीस ae मेल अछि तहन 400-30 =70% बचत धन कें म्युचल फंड मे रखवाक चाही आ 30% बैंक सावधि जमा मे warp चाही | 50,5,3 नियम विनियोगक राशि नीचा ea गेल नियम सँ रखनाई उचित अछि | 50% इक्यूटी व म्युचल फंड 5% बैंक सावधि जमा 3% बचत खाता मे रखनाई उचित होयत |