VIDEHA — Issue 408 / अंक ४०८

Publication: VIDEHA · Issue: 408
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ISBN Number: 978-93-341-7759-6 (Book) ISSN 2229-547X (online) 𑒀 विदेह ४०८ म अंक १५ दिसम्बर २०२४ (वर्ष १७ मास २०४ अंक ४०८) मिथिला विकास परिषद् विशेषांक [विदेह (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) www.videha.co.in ] विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। ऐ पोथी‍क सर्वाधि‍कार सुरक्षि‍त अछि‍। कॉपीराइट (©) धारकक लि‍खि‍त अनुमति‍क बि‍ना पोथीक कोनो अंशक छाया प्रति ‍एवं रि‍कॉडिंग सहि‍त इलेक्‍ट्रॉनि‍क अथवा यांत्रि‍क, कोनो माध्‍यमसँ, अथवा ज्ञानक संग्रहण वा पुनर्प्रयोगक प्रणाली द्वारा कोनो रूपमे पुनरुत्‍पादन अथवा संचारन-प्रसारण नै कएल जा सकैत अछि‍। (c) २०००- २०२४. सर्वाधिकार सुरक्षित। भालसरिक गाछ जे सन २००० सँ याहूसिटीजपर छल http://www.geocities.com/.../bhalsarik_gachh.html , http://www.geocities.com/ggajendra आदि लिंकपर आ अखनो ५ जुलाइ २००४ क पोस्ट http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html केर रूपमे इन्टरनेटपर मैथिलीक प्राचीनतम उपस्थितक रूपमे विद्यमान अछि (किछु दिन लेल http://videha.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html लिंकपर, स्रोत wayback machine of https://web.archive.org/web/*/videha 258 capture(s) from 2004 to 2016- http://videha.com/ भालसरिक गाछ-प्रथम मैथिली ब्लॉग / मैथिली ब्लॉगक एग्रीगेटर)। ई मैथिलीक पहिल इंटरनेट पत्रिका थिक जकर नाम बादमे १ जनवरी २००८ सँ ’विदेह’ पड़लै। इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि, जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। (c)२०००- २०२४. विदेह: प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004). सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। Editor: Gajendra Thakur. In respect of materials e-published in Videha, the Editor, Videha holds the right to create the web archives/ theme-based web archives, right to translate/ transliterate those archives and create translated/ transliterated web-archives; and the right to e-publish/ print-publish all these archives. रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना/ संग्रह (संपूर्ण उत्तरदायित्व रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता मध्य) editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ पठा सकैत छथि, संगमे ओ अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो सेहो पठाबथि। एतऽ प्रकाशित रचना/ संग्रह सभक कॉपीराइट रचनाकार/ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि आ जतऽ रचनाकार/ संग्रहकर्त्ताक नाम नै अछि ततऽ ई संपादकाधीन अछि। सम्पादक: विदेह ई-प्रकाशित रचनाक वेब-आर्काइव/ थीम-आधारित वेब-आर्काइवक निर्माणक अधिकार, ऐ सभ आर्काइवक अनुवाद आ लिप्यंतरण आ तकरो वेब-आर्काइवक निर्माणक अधिकार; आ ऐ सभ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार रखैत छथि। ऐ सभ लेल कोनो रॉयल्टी/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै, से रॉयल्टी/ पारिश्रमिकक इच्छुक रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता विदेहसँ नै जुड़थु। विदेह ई पत्रिकाक मासमे दू टा अंक निकलैत अछि जे मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ www.videha.co.in पर ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। Videha eJournal (link www.videha.co.in) is a multidisciplinary online journal dedicated to the promotion and preservation of the Maithili language, literature and culture. It is a platform for scholars, researchers, writers and poets to publish their works and share their knowledge about Maithili language, literature, and culture. The journal is published online to promote and preserve Maithili language and culture. The journal publishes articles, research papers, book reviews, and poetry in Maithili and English languages. It also features translations of literary works from other languages into Maithili. It is a peer-reviewed journal, which means that articles and papers are reviewed by experts in the field before they are accepted for publication. Font/ Keyboard Source: https://fonts.google.com/ , https://github.com/virtualvinodh/aksharamukha-fonts , https://keyman.com/ These are print-on-demand books, send your queries to editorial.staff.videha@gmail.com. The eBooks of some of these are available for sale on Google Play [(c) Preeti Thakur, sales.videha@gmail.com], send your queries to sales.videha@gmail.com. The contents and documents e-published by Videha (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) are periodically being checked for accessibility issues. People with disabilities should not have difficulty accessing these contents/ documents. © Preeti Thakur (sales.videha@gmail.com) Cover designed by AUM GAJENDRA THAKUR Videha e-Journal: Issue No. 408 at www.videha.co.in समानान्तर परम्पराक विद्यापति- चित्र विदेह सम्मानसँ सम्मानित श्री पनकलाल मण्डल द्वारा मैथिली भाषा जगज्जननी सीतायाः भाषा आसीत्। हनुमन्तः उक्तवान- मानुषीमिह संस्कृताम्। अनुक्रम मिथिला विकास परिषद् विशेषांक ४०८ म अंक ऐ अंकमे अछि:- १.१. अंक ४०८ पर टिप्पणी (पृष्ठ २-४) २.१.प्रस्तुत मिथिला विकास परिषद् विशेषांकक संदर्भमे (पृष्ठ ५-४३) २.२.मिथिला विकास परिषद् केर संक्षिप्त परिचय (पृष्ठ ४४-५०) २.३.मिथिला विकास परिषद्क किछु काज (पृष्ठ ५१-६१) २.४.अजय कुमार झा तिरहुतिया- मिथिला विकास परिषद: किछु सहेजल संस्मरण (पृष्ठ ६२-७६) २.५.लक्ष्मण झा सागर- मिथिला विकास परिषद, कोलकाता: हमरा दृष्टिये (पृष्ठ ७७-८२) २.६.डा. धनाकर ठाकुर- मिथिला विकास परिषद, कोलकातासँ हमर परिचिति (पृष्ठ ८३-८६) २.७.नबोनारायण मिश्र- मिथिला विकास परिषद्, कोलकाताः जेना हम देखल (पृष्ठ ८७-९३) २.८.आशीष अनचिन्हार-मिथिला विकास परिषद्, कोलकाता (हमरा नजरिमे) (पृष्ठ ९४-१००)

मिथिला विकास परिषद् विशेषांक ४०८ म अंक १.१. अंक ४०८ पर टिप्पणी २.१.प्रस्तुत मिथिला विकास परिषद् विशेषांकक संदर्भमे २.२.मिथिला विकास परिषद् केर संक्षिप्त परिचय २.३.मिथिला विकास परिषद्क किछु काज २.४.अजय कुमार झा तिरहुतिया- मिथिला विकास परिषद: किछु सहेजल संस्मरण २.५.लक्ष्मण झा सागर- मिथिला विकास परिषद, कोलकाता: हमरा दृष्टिये २.६.डा. धनाकर ठाकुर- मिथिला विकास परिषद, कोलकातासँ हमर परिचिति २.७.नबोनारायण मिश्र- मिथिला विकास परिषद्, कोलकाताः जेना हम देखल २.८.आशीष अनचिन्हार-मिथिला विकास परिषद्, कोलकाता (हमरा नजरिमे) १.१. अंक ४०८ पर टिप्पणी संगठित भ के नै रहनाई मैथिल समाजक एकटा अवगुण बला पुरान पहचान रहल अछि। प्रो. हरिमोहन झा अपन खिस्सा "ब्रह्मा के शाप" के माध्यम से ऐ अवगुण पर चोटगर कटाक्ष केने छैथ त ओत्तई तीर्थयात्रा नामक कथा पात्र के माध्यम से भगवान जगन्नाथ से निवेदन करय छथिन जे भगवान हमर देश के लोक सब में एकता होय ओ सभ संगठित भ के रहैथ यैह अहाँ से विनती करय छी। यैह अवगुण एकटा पैघ कारण रहल अछि जे तेजस्वी मैथिल समाज देश दुनिया के पटल पर कदाचित ओ स्थान नै बना सकल जे आन आन समाज आई बनउने अछि। तथापि मिथिला मैथिली के नाम पर संगठन विभिन्न स्थान आ काल में बनैत आ चलैत रहल अछि। ओना त कोनो संगठन के कुछ गुण अवगुण रहिते छैक। एहन में कोनो मैथिल संगठन के बहुत प्रभावी आ क्रन्तिकारी इतिहास होय ई ताकब या ऐ कसौटी पर कसब ओत्ते युक्तिसंगत नै हेतैय। यद्यपि हमर मानब अछि जे साईत ई संगठन सभ समय के संग पहिने सँ बेसी कारगर भ रहल अछि आ आशा कैल जा सकय अछि जे ऐ संगठन सबहक माध्यम सँ मैथिल समाज बेसी सशक्त आ संगठित बनत। कोनो पत्रिका के माध्यम से संगठन के इतिहास, कार्य आ कार्यप्रणाली आदि पर चर्चा, आलोचना, समलोचना आदि निश्चिते संस्था के परिचय विस्तार दैत छैक संगे एकर इतिहास आ वर्त्तमान के अभिलेखित क भविष्य क लेल संदर्भित क मैथिल समाज के संगठनक भविष्य के बाट सेहो देखा सकय अछि। मिथिला विकास परिषद कलकत्ता विशेषांक के हम एहि रूप में देखय छी। विदेह ऐ से पहिनेहो किछु संगठन पर विशेषांक निकालने अछि जै में एमएसयू विशेषांक सेहो छल। मिथिला मैथिली बढ़ईत रहय सैह कामना। संगे नरेन्द्र झा विशेषांक के मोन पारैत एकटा विचार मोन मे आयल जे अंग्रेजी वर्ष 2025 में विदेह के एकटा विशेषांक "वर्तमान में मिथिला में उद्योग, व्यापार आ रोजगार" पर सेहो निकालबाक विषय में सोचबाक चाही। जय जानकी। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.१.प्रस्तुत मिथिला विकास परिषद् विशेषांकक संदर्भमे प्रस्तुत मिथिला विकास परिषद विशेषांकक संदर्भमे 1 2008 सँ एखन धरि विदेह http://videha.co.in/ द्वारा जे विशेषांक सभ आएल अछि तकरा तीन चरणमे बाँटि सकैत छी। पहिल चरण 2008सँ जनवरी 2015 धरि जाहिमे विषय आधारित विशेषांक सभ प्रकाशित भेल आ मधुपजीपर सेहो विशेषांक प्रकाशित भेल। एकदम प्रारंभिक विशेषांक सभमे "विशेषांक" नाम नहि लीखल गेल छै मुदा ओहिमे ओहन रचनाक बेसी स्थान देल गेल छै सायास रूपें (क्रम-1 सँ 12 केर अधिकांश)। दोसर चरण भेल 2015 सँ लऽ कऽ एखन धरि जाहिमे मात्र जीवित लेखकपर विशेषांक प्रकाशित करबाक निर्णय लेल गेल आ इम्हर पछिला बर्ख एहिमे संस्था आ पत्र-पत्रिकापर विशेषांक प्रकाशित करबाक सेहो निर्णय लेल गेल क्रम- 13 एवं 14, 20 सँ 34)। तेसर चरण भेल पछिला सालमे विदेहक संपादक द्वारा "नित नवल सिरीज" प्रकाशित करबाक (एकर विवरण अलगसँ देल गेल अछि)। पाठक लेल विदेहक हरेक विशेषांक पाँच स्तर, पाँच स्वाद रखने अछि - 1) पत्रिका विशेषांक केर स्वाद, 2) आलोचनात्मक पोथीक स्वाद, 3) शोध ग्रंथक स्वाद, 4) साहित्य अकादमी द्वारा प्रकाशित मोनोग्राफ केर स्वाद आ ई पाँचम स्वाद सभसँ विरल अछि 5) जँ विदेहक विशेषांकमे कोनो एहन रचनाकार चयनित होइत छथि जिनकर पति वा पत्नी सेहो रचनाकार छथिन तँ विदेह अपन विशेषांकमे दूनूकेँ मूल्यांकन करैत अछि। उदाहरण लेल विदेहक लक्ष्मण झा 'सागर' विशेषांक आ नरेन्द्र झा विशेषांक देखल जा सकैए। विदेह अपन अंक लेल सागरजी आ नरेन्द्र झाक चयन केने छल मुदा सागरजीक पत्नी शैल झा 'सागर' सेहो रचनाकार छथिन तँ लक्ष्मण जी बला विशेषांकमे शैलजीक रचनाकर्मपर सेहो विचार भेल आ तेनाहिते नरेन्द्र झाजीक पत्नी पन्ना झा कथाकार से नरेन्द्र झा विशेषांकमे पन्नाजीक रचनाकर्मपर सेहो विचार भेल। ई विचार वा घटना संपूर्ण मैथिली साहित्यमे नहि भेल छल हमरा जनैत, से मात्र विदेह द्वारा संभव भेल। जँ हम गलत होइ तऽ सूचित करी हम अपन ज्ञानकेँ सुधारि लेब। साहित्य अकादमीक कथित मोनोग्राफ तँ आइ धरि बहुतो लेखकपर प्रकाशित नहि भऽ सकल अछि। एहन परिस्थितिमे विदेह एकटा नव बाट बना कऽ मैथिली लगमे राखि देने अछि। पाठक चाहथि तँ एहि विशेषांक सभमेसँ आनो स्वाद ताकि सकै छथि। जँ अहाँ अइ विशेषांक केर PDF पढ़ि रहल छी तँ कोनो शब्द वा पाँति अंडरलाइनमे वा बिना अंडरलाइनकेँ नीला वा कोनो रंगक (कारी रंग छोड़ि) देखाए तँ बुझि लिअ जे ओहिमे लिंक देल गेल छै रेफरेंस लेल आ तकरा क्लिक करबै तँ ओ लिंक खुजि जाएत। कोनो-कोनो फोटोमे सेहो लिंक देल गेल छै। पाठक एहि माध्यमसँ कम समयमे रेफरेंस सभहक अध्य्यन कऽ सकै छथि। मुदा प्रिंटमे प्रकाशित पोथीमे ई सुविधा नै रहत। अइ कारणसँ भऽ सकैए जे पाठककेँ एहि पोथीक किछु पाँति प्रचलित नै बुझेतनि। जाहि ठाम लिंक देल गेल छै ताहि ठामक पाँतिक किछु शब्दक बीच बेसी स्थान छूटल छै। ओकरा एक पाँति बना पढ़ी से आग्रह। हम चाहितहुँ तँ सभ लिंक वा चित्रकेँ एकठाम दऽ सकै छलहुँ मुदा हमर सोच अछि जे पाठककेँ एकै ठाम तर्क आ सबूत भेटनि। एकटा आर बात ई जरूरी नहि छै जे एक लेखक लेल हम एकैटा लिंक प्रयोग करी। ओहन लेखक जिनका बारेमे बहुत रास लिंक छै गूगलपर हुनकर नाम जखन एक बेरसँ बेसी अबैत अछि तँ हमर प्रयास रहैए जे हुनकर नाम सभमे अलग-अलग लिंक लगा दी। तँइ पाठक जखन एकै नामक बहुत रास लिंक देखथि तँ ई मानि लेथि जे हुनका लग रेफरेंसक भंडार पहुँचल छनि। विदेह द्वारा जीवैत लेखकपर विशेषांक शुरू कएल गेल छल 2015 सँ जे विभिन्न नामसँ होइत आब "विदेहक जीवित मैथिलकर्मी, संगीतकर्मी, साहित्यकार-सम्पादक आ रंगमंचकर्मी-रंगमंच-निर्देशकपर विशेषांक शृंखला" नामसँ जानल जाइत अछि। मैथिलकर्मीसँ हमर सभहक आशय जिनकर काज मिथिला-मैथिली-मैथिली लेल कोनो माध्यमसँ भेल हो। ओ संगठनकर्ता सेहो भऽ सकै छथि, आन भाषाक लेखक सेहो। तहिना संगीतकर्मी मने गीत-संगीतसँ जुड़ल लोक। निच्चा एहि सभ चरण केर विस्तृत सूचना क्रमबद्ध रूपें देल जाएत। विदेहक विशेषांक सभ लेल हम ओहनो लोक सभ लग आलेख लेल जाइत छी, हुनका सूचना दैत छी जे कि हमर (आशीष अनचिन्हार), विदेह या गजेन्द्र ठाकुरक धुर विरोधी छथि। दू-चारि लोक कहि सकै छथि जे हमरा सूचना नहि भेटल, तऽ हुनकासँ हमर आग्रह जे कमसँ कम ओ अपन ह्वाटसएप आ फेसबुक केर मैसेज बॅाक्स (इनबॅाक्स) देखथि। हमर एहि प्रयासक प्रतिफल विदेहक आन विशेषांक संगे एहूमे देखाइ पड़त से उम्मेद अछि। विदेहक 'मिथिला विकास परिषद्" विशेषांक केर घोषणा हम जुलाई 2023 मे केने रही। एहि घोषणाक फेसबुक लिंक देखू। मुदा साल भरि बितलाक बादो एहि संस्थापर अपेक्षित आलेख नहि आबि सकल। कलकत्ते बला सभ जखन एहि संस्थापर नहि देलाह तऽ आनक कोन बात। जिनकासँ बात केलहुँ सभ कहलाह जे एहि संस्थाक अध्यक्ष अशोक झा तानाशाह छथि मुदा मजगर बात जे वएह लोक सभ एहि संस्थाक मंचपर जा-जा कऽ अपन चेहरा चमकाबैत छथि। खएर हमरा लोकनिक प्रयास इएह रहल जे कम्मो आलेखकेँ एना प्रस्तुत करी जाहिसँ पाठककेँ पूरा सूचना भेटनि। आब ई प्रयास केहन रहल से पाठकक हाथमे छनि। विदेह एहि संगे तीन टा संस्थापर विशेषांक प्रकाशित कऽ लेलक। एहि विशेषांक संगे एकटा आर बात भेल अछि। जे लोक कलकत्ताकेँ बुझबाक लेल जहिया कहियो प्रयास करताह तहिया हुनका विदेहक रामलोचन ठाकुर विशेषांक, राजनंदन लाल दास विशेषांक, लक्ष्मण झा 'सागर' विशेषांक एवं ई मिथिला विकास परिषद् विशेषांक अनियार्य रूपें सहायक हेतनि। एहि विशेषांकसँ पहिने विदेह 34 टा विशेषांक प्रकाशित कऽ चुकल अछि आ एहिठाम आब हम कहि सकैत छी जे ई एकटा चुनौतीपूर्ण काज छै। अनेक संकट केर सामना करए पड़ैत अछि लेख एकट्ठा करएमे। मुदा संगहि ईहो हम कहब जे संकटसँ बेसी हमरा लग समर्थन अछि। हँ, ई मानएमे हमरा कोनो दिक्कत नहि जे जतेक लेख केर उम्मेद केने रहैत छी हम ततेक नै आबैए, जतेक लोक लिखबाक लेल गछैत छथि से सभ अंत- अंत धरि आबि चुप्प भऽ जाइत छथि। आ एकर कारणो छै, किनको ई लागै छनि जे आनपर लिखब से हम अपने रचना किए ने लीखि लेब, किनको लग पोथिए नै रहै छनि, जखन कि हम सभ यथासंभव पाठककेँ विकल्प रूपमे पोथीक पी.डी.एफ फाइल सेहो देबाक लेल तैयार रहैत छी।  कियो विदेहक समावेशी रूपसँ दुखी छथि, तँ किनको मित्रकेँ विदेहसँ दिक्कत छनि तँइ ओ नहि देता। एकरो हम संकटे बुझै छियै जे सभ फेसबुकपर लंबा-लंबा लेख वा कमेंट टाइप कऽ लै छथि सेहो सभ विदेह लेल हाथसँ लिखल पठाबैत छथि। जे सभ कहियो काल फेसबुकपर टाइप कऽ लीखै छथि तिनकर आलेख हम सभ टाइप करिते छी। खएर पहिने कहलहुँ जे संकटसँ बेसी समर्थन अछि तँइ आइ पहिलसँ लऽ कऽ 35म (संस्था सहित) विशेषांक धरि पहुँचलहुँ हम। आन विशेषांक लेल इएह बात मानू। 2008 सँ लऽ कऽ 2024 क एखन धरि 35 टा विशेषांक प्रकाशित भेल मने बर्खमे दू टासँ कनी बेसी। निश्चिते समर्थन बेसी भेटल हमरा। जखन कि विदेहक ई पैंतीसो विशेषांक केर अलावे आन अंक हरेक पंद्रह दिनपर (मासमे दू बेर) लगातार प्रकाशित भइए रहल अछि। एकर अतिरिक्त ईहो बात संतोषदायक अछि जे विदेहक हरेक व्यक्तिपरक विशेषांक अभिनंदनग्रंथ हेबासँ बाँचि गेल अछि। मुख्यधारा जकाँ विदेहकेँ अभिनंदनग्रंथ नहि चाही। अभिनंदनग्रंथ अहू दुआरे नै चाही जे ओहिसँ लेखक वा जिनकापर निकालल गेल छनि तिनकामे सुधारक गुंजाइश खत्म भऽ जाइत छै। तँइ विदेहक विशेषांकमे आलोचना-प्रसंशा सभ भेटत। पहिने विदेहक सभ अंक नागरी, तिरहुता आ ब्रेल लिपिमे प्रकाशित होइत छल। एकर अतिरिक्त विदेहक किछु अंक कैथी, नेवाड़ी, आइ.पी.ए. लिपि, रंजना (नेवारी केर एक आर रूप), ब्राह्मी, खरोष्ठी, उर्दू, तिब्बती एवं तिब्बती-उमे लिपिमे सेहो छपल अछि। कुल मिला कऽ देखी तँ विदेह बारह लिपि अपना लेल रखने अछि। 2 पाठक जखन एहि विशेषांककेँ पढ़ताह तँ हुनका वर्तनी ओ मानकताक अभाव लगतनि। विदेह मूलतः शब्दमे विभक्ति सटा कऽ लिखैत अछि संगहि मैथिली मानक भाषा आ मैथिली भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम लेल भाषापाक नामक अपन दिशा-निर्देश सेहो रखने अछि मुदा ओहिमे छपए बला लेखक लेल स्वतंत्रता छै जे ओ कोन रूपमे लिखै छथि, माने जे विदेह शुरुएसँ हरेक वर्तनी बला लेखककेँ स्वीकार करैत एलैए। तँइ मानकता अभाव स्वाभाविक। विदेह सभ वर्तनी आ स्वरूपक सम्मान करैत अछि। तथापि वर्तनीक गलती जे थिक से सोझे-सोझ हमर सभहक गलती थिक जे हम सभ संशोधन नै कऽ सकलहुँ। मैथिलीमे किछुए एहन पत्रिका अछि जकर वर्तनी एकरंगक रहैत अछि आ ई हुनक खूबी छनि मुदा जखन ओहो सभ कोनो विशेषांक निकालै छथि तखन वर्तनी तँ ठीक रहैत छनि मुदा सामग्री अधिकांशतः बसिये रहैत छनि। ऐतिहासिकताक दृष्टिसँ कोनो पुरान सामग्रीक उपयोग वर्जित नै छै। हमहूँ सभ करैत छियै, मुदा सोचियौ जे 72-80 पन्नाक कोनो प्रिंट पत्रिका होइत छै ताहिमे लगभग आधा सामग्री साभार रहैत छनि, तेसर भागमे लेखक केर किछु रचना रहैत छनि आ चारिम भागमे किछु नव सामग्री रहैत छनि। हमरा लोकनि नव सामग्रीपर बेसी जोर दैत छियै। एकर मतलब ई नहि जे वर्तनीमे गलती होइत रहै। हमर कहबाक मतलब ई जे संपादक-संयोजककेँ कोनो ने कोनो स्तरपर समझौता करहे पड़ैत छै से चाहे वर्तनीक हो कि, मुद्राक हो कि विचारधारक हो कि सामग्रीक हो। हमरा लोकनि वर्तनीक स्तरपर समझौता कऽ रहल छी मुदा कारण सहित। प्रिंट पत्रिका एक बेर प्रकाशित भऽ गेलाक बाद दोबारा नै भऽ सकैए (भऽ तँ सकैए मुदा फेर पाइ लागि जेतै) तँइ ओकर वर्तनी यथाशक्ति सही रहैत छै। इंटरनेटपर सुविधा छै जे बीचमे (इंटरनेटसँ प्रिंट हेबाक अवधि) ओकरा सही कऽ सकैत छी मुदा सामग्रिए बसिया रहत तँ सही वर्तनी रहितो नव अध्याय नै खुजि सकत तँइ हमरा लोकनि वर्तनी बला मुद्दापर समझौता केलहुँ। हमरा लोकनि कएलनि, कयलनि ओ केलनि तीनू शुद्ध मानैत छी, एतेक शुद्ध मानैत छी एकै रचनामे तीनू रूप भेटि जाएत। आन शब्दक लेल एहने बूझू। उम्मेद अछि जे पाठक विदेहक आने विशेषांक जकाँ एकरा पढ़ताह आ पढ़ि एकर नीक-बेजाएपर अपन सुझाव देताह। विदेहक हरेक अंक विदेह वेबसाइटपर भेटत आ एकर अलावे गूगल बुक्स Google Books आ आर्कइभ.कॅम archive.org पर सेहो भेटत। तँइ स्वाभाविक रूपसँ विशेषांक सेहो तीनू प्लेटफार्मपर भेटत। मुदा तीनू प्लेटफार्मपर अंक सभकेँ अलग ढंगसँ सजाएल गेल छै जकरा हम पाठक लग राखि रहल छी। पाठक निच्चा बला पैराग्राफपर ध्यान देताह तऽ हुनका कम्मे समयमे नीक रिजल्ट भेटतनि। विदेहक अपन साइट आ आर्कइभ.कॅम archive.org पर विदेहक हरेक अंक क्रमबद्ध तरीकासँ भेटत मने पहिल अंक आ तकर निच्चा बाद बला अंक सभ। मुदा गूगल बुक्स Google Books पर विदेहक अंक सभकेँ सर्च करबाक हिसाबसँ राखल गेल अछि। माने जे पाठक गूगल बुक्स Google Books पर जँ कोनो शब्दकेँ वा लेखककेँ वा किताबक नामकेँ वा आन कोनो की वर्डसँ तकताह आ जँ ओ शब्द, लेखक, किताब वा ओ सर्च वर्ड विदेहमे प्रकाशित भेल छै तऽ पाठक लग विदेहक ओ सभ अंक देखाबऽ लगतै जाहिमे पाठक द्वारा शब्द, लेखक, किताब वा ओ सर्च वर्ड देल गेल छै। एकर माने ई भेल जे विदेहमे प्रकाशित हरेक शब्द, लेखक, किताब वा ओ सर्च वर्ड पाठकक मुट्ठीमे आबि गेल आ अन्य माध्यमक अपेक्षा बेसी दिन धरि पाठक केर पहुँचमे रहत। आ संगहि जँ ओ शब्द, लेखक, किताब वा ओ सर्च वर्ड विदेहसँ इतर आन कोनो पोथीमे छै तँ ओहो पाठकक सामने आबि जेतनि माने पाठक लेल दुन्ना फायदा। पाठक गूगल बुक्स Google Books पर विदेहक Videha eLearning  पर जा कऽ विदेहक अंक पढ़ि सकै छथि ओत्तहि संपादक गजेन्द्र ठाकुर Gajendra Thakur पर क्लिक कऽ बहुत रास पोथी पढ़ि सकै छथि। तहिना पाठक जा कऽ गजेन्द्र ठाकुर Gajendra Thakur सर्च करथि हुनका विदेहक अंक सहित ओ सभ पोथी भेटि जेतनि जे विदेहपर देल गेल छै। एकर माने ई भेल जे मात्र विदेहक अंके नै आनो-आनो पोथी सभ भविष्यमे बाँचल रहि जेतै। संगहि विशेषांक सभहक प्रिंट रूप किनबाक लेल ओकर पोथी रूपक लिंक पोथी.कॅम Pothi.com पर देल गेल छै। पाठक पोथी.कॅम Pothi.com पर जा कऽ गजेन्द्र ठाकुर Gajendra Thakur सर्च करथि हुनका विदेहक विशेषांक सहित बहुत रास पोथी भेटि जेतनि किनबाक लेल। पाठक देवनागरीमे गजेन्द्र ठाकुर आ रोमन केर Gajendra Thakur दूनू सर्च करथि से हमर आग्रह रहत। कारण देवनागरी आ रोमन दूनूमे संपादक अपन एकाउंट बनेने छथि आ अपन सुविधासँ दूनू एकाउंटसँ विदेहक अंक आ पोथी अपलोड केने छथि। एहिठाम हम पहिने विदेहक लिंक देब आ ठीक ताही संगे एहि विशेषांकक पोथी.कॅम Pothi.com केर प्रिंट आॉन डिमांड बला लिंक देने छी जाहि ठाम पाठक एकरा आॉनलाइन कीनि सकै छथि। विदेहक द्वारा जीवैत लेखक ओ संस्थाक विशेषांक शृखंलामे प्रकाशित भेल संगहि आन विशेषांक सभहक लिस्ट एना अछि (एहिठाम जे अंकक लिस्ट देल गेल अछि ताहि अंकपर क्लिक करबै तँ ओ अंक खुजि जाएत)। 1) हाइकू विशेषांक 12 म अंक, 15 जून 2008 2) गजल विशेषांक 21 म अंक, 1 नवम्बर 2008 3) विहनि कथा विशेषांक 67 म अंक, 1 अक्टूबर 2010 4) बाल साहित्य विशेषांक 70 म अंक, 15 नवम्बर 2010 5) नाटक विशेषांक 72 म अंक 15 दिसम्बर 2010 6) समीक्षा विशेषांक 7) नारी विशेषांक 77म अंक 01 मार्च 2011 8) अनुवाद विशेषांक (गद्य-पद्य भारती) 97म अंक 9) बाल गजल विशेषांक विदेहक अंक 111 म अंक, 1 अगस्त 2012 10) भक्ति गजल विशेषांक 126 म अंक, 15 मार्च 2013 11) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक 142 म, अंक 15 नवम्बर 2013 12) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक 169 म अंक 1 जनवरी 2015 13) अरविन्द ठाकुर विशेषांक 01 नवम्बर 2015 अंक 189, विदेहक अरविन्द ठाकुर विशेषांक केर पोथी रूप "स्वतंत्रचेता- अरविन्द ठाकुर: व्यक्तित्व-कृतित्व" केर नामसँ प्रकाशित भेल। 14) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक 01 दिसम्बर 2015 अंक 191, पोथी.कॅम pothi.com 15) विदेह सम्मान विशेषाक- 200म, भाग-1, 15 अप्रैल 2016 16) विदेह सम्मान विशेषाक- 205म, भाग-2, 1 जुलाई 2016 17) मैथिली सी.डी./ अल्बम गीत संगीत विशेषांक- 217 म अंक 01 जनवरी 2017 18) मैथिली वेब पत्रकारिता विशेषांक-313म अंक 1 जनवरी 2021 19) मैथिली बीहनि कथा विशेषांक-2, 317 म अंक 1 मार्च 2021 20) रामलोचन ठाकुर विशेषांक 01 अप्रैल 2021 अंक 319, पोथी.कॅम pothi.com 21) राजनन्दन लाल दास विशेषांक 01 नवम्बर 2021 अंक 333, पोथी.कॅम pothi.com 22) रवीन्द्र नाथ ठाकुर विशेषांक 15 जून 2022 अंक 348, पोथी.कॅम pothi.com 23) केदारनाथ चौधरी विशेषांक 15 अगस्त 2022 अंक 352, पोथी.कॅम pothi.com 24) प्रेमलता मिश्र 'प्रेम' विशेषांक 01 नवम्बर 2022 अंक 357, पोथी.कॅम pothi.com 25) शरदिन्दु चौधरी विशेषांक 15 नवम्बर 2022 अंक 358, पोथी.कॅम pothi.com 26) कला-विमर्श विशेषांक (सन्दर्भ- संजू दास, कृष्ण कुमार कश्यप, शशिबाला, एस.सी.सुमन आ श्वेता झा चौधरी) 15 अप्रैल 2023 अंक 368, पोथी.कॅम pothi.com 27) अशोक विशेषांक 1 मइ 2023 अंक 369, पोथी.कॅम pothi.com 28) रामभरोस कापड़ि 'भ्रमर' विशेषांक 15 मइ 2023 अंक 370, पोथी.कॅम pothi.com 29) मिथिला स्टूडेंट यूनियन (MSU) विशेषांक 1 जून 2023 अंक 371, पोथी.कॅम pothi.com 30) लक्ष्मण झा सागर विशेषांक (15 नवम्बर 2023 अंक 382), पोथी.कॅम pothi.com 31) नरेन्द्र झा विशेषांक (1 जून 2024 अंक 395), पोथी.कॅम pothi.com 32) भाषाविद् रामावतार यादव विशेषांक 1 जून 2024 अंक 395, पोथी.कॅम pothi.com 33) अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली परिषद् विशेषांक 15 अगस्त 2024 अंक 400, पोथी.कॅम pothi.com 34) हितनाथ झा विशेषांक 1 नवम्बर 2024 अंक 405, पोथी.कॅम pothi.com एहि लिस्टमे 1, 2, 4, 5, 6, 7, 8, 15 एवं 16 विदेहक स्वतः संख्याक हिसाब बला विशेषांक अछि। ओतहि 2 आ 19 क्रम संख्याक विशेषांक मुन्नाजीक संयोजनमे प्रकाशित भेल अछि। शेष सभ बाँचल विशेषांकक संयोजन आशीष अनचिन्हार द्वारा भेल अछि। 2015 मे विदेहक संपादक लग आशीष अनचिन्हार द्वारा जीवित लेखकपर विशेषांक निकालबाक प्रस्ताव राखल गेल आ संपादकक सहमतिक बाद ई एखन धरि एकटा नमहर रस्ता बना चुकल अछि। पुनः 2022 मे आशीषे अनचिन्हार द्वारा विदेह लग संस्थाक ऊपर विशेषांक प्रकाशित करबाक प्रस्ताव राखल गेल आ संपादकक सहमतिसँ एखन धरि दू संस्थापर अंक निकलि चुकल अछि। विदेहक नवाचार अतबे नहि अछि, एक बेर फेर 2023 मे आशीष अनचिन्हार द्वारा विदेह लग दू टा विचार राखल गेल 1) लेखक-प्रकाशकसँ इतर आन जे लोक पोथी-पत्रिका केर बिक्री कऽ अपन जीवय-यापनक संग मैथिली पोथीक प्रचारमे सहायक छथि तिनको ऊपर विशेषांक प्रकाशित, एवं 2) मैथिलीक कोनो पत्रिकाक उपर विदेह विशेषांक प्रकाशित हो। एहू दूनू कैटेगरी लेल संपादकक सहमति अछि आ निकट भविष्यमे विदेहक माध्यमे पाठक लग नीक विशेषांक पहुँचत। दिसंबर 2024 मे एक बेर फेर आशीष अनचिन्हारक नवाचार सामने आएल जाहि अंतर्गत विदेहक संपादकक सहमतिक बाद "विदेह लिटरेचर फेस्टीभल केर घोषणा भेल। एहि फेस्टीभलक विस्तृत विवरण अही लेखमे निच्चा भेटत। आशीष अनचिन्हार द्वारा संपादित पोथी 'प्रीति कारण सेतु बान्हल' जे कि मिथिला ओ मैथिलीक संवर्धनमे गजेन्द्र ठाकुर एवं प्रीति ठाकुरक योगदानक आलोचनात्मक ग्रंथ अछि ताहिमे संकलित शिवशंकर श्रीनिवास जीक एक शोध आलेख मैथिली पत्रिकामे व्यक्तिपरक विशेषांकक इतिहास अछि आ ओहि इतिहासमे विदेह विशेषांक कोन ठाम अछि तकर मूल्याकंन भेटत संगहि ओही आलेखमे श्रीनिवास जीक मोताबिक जीवितेमे अपन मूल्याकंन पढ़ि लेब कोनो लेखक लेल कोनो सम्मानसँ बेसी महत्वपूर्ण अछि। मैथिलीक बहुत रास पाठक विदेहक जीवित लेखक विशेषांककेँ मूल्यवान मानै छथि ('प्रीति कारण सेतु बान्हल मे कीर्तिनाथ झा, कल्पना झा, प्रणव कुमार झा, धनाकर ठाकुर आदिक आलेख), ओतहि किछु पाठक विदेह विशेषांककेँ साहित्य अकादमी पुरस्कारसँ बेसी महत्वपूर्ण मानै छथि ('प्रीति कारण सेतु बान्हल मे लक्ष्मण झा 'सागर'जीक आलेख) यद्पि विदेह साहित्य अकादमी पुरस्कारक आलोचना करैत अछि मुदा अकादमी द्वारा पुरस्कार छोड़ि जे प्रकाशन एवं आन काज छै तकर प्रसंशा सहो करैत अछि। तथापि जँ किछुओ पाठक विदेह विशेषांककेँ कोनो सम्मान-पुरस्कार वा कि साहित्य अकादमी पुरस्कारसँ बेसी महत्वपूर्ण मानै छथि तँ ई विदेह लेल निश्चिते प्रेरणादायी बात छै। 3 विदेहक जीवित विशेषांक शृंखलामे किनकर चयन हो ताहि लेल मोटा-मोटी निच्चाक किछु बिंदुक पालन कएल जाइत अछि- 1) लगभग पाँच-छह मास पहिनेसँ विदेह अपन पाठककेँ सुझाव देबा लेल लेल सूचना दैत अछि। 2) आएल सुझावमेसँ विदेह मात्र जीवित लेखककेँ चयन करैत अछि। संस्था सेहो वर्तामनमे जीवंत हेबाक चाही। 3) सभ जीवित मैथिलकर्मी, संगीतकर्मी, साहित्यकार-सम्पादक आ रंगमंचकर्मी-रंगमंच-निर्देशकक बीचमे हुनकर लेखन/ काज एवं आचरणक साम्यता देखल जाइत अछि। जाहि लेखकक लेखन/ काज ओ आचरणमे बेसी साम्यता (कम फाँक) भेटैए तेहन छह टा नाम चयनित होइत अछि। 4) छह नाम एलापर ई तुलना कएल जाइत छै जे ई छहो मैथिलकर्मी, संगीतकर्मी, साहित्यकार-सम्पादक आ रंगमंचकर्मी-रंगमंच-निर्देशक अथवा संस्थाकेँ रचना लिखबाक वा समाजिक काज केलाक एवजमे समाजसँ की भेटलनि। 5) जिनका सभसँ कम भेटल बुझाइत अछि ताहि तीन मैथिलकर्मी, संगीतकर्मी, साहित्यकार-सम्पादक आ रंगमंचकर्मी-रंगमंच-निर्देशक,-संस्थाकेँ अगिला चरण लेल राखि लैत छी। 6) एहि तीन चयनित जीबित मैथिलकर्मी, संगीतकर्मी, साहित्यकार-सम्पादक आ रंगमंचकर्मी-रंगमंच-निर्देशकक वा संस्थाक रचना, काज, हुनक उद्येश्य आदिक बीचमे परस्पर तुलना कएल जाइत अछि आ, 7) अंतिम रूपसँ विदेह द्वारा नाम चुनि सालक अंतमे घोषणा कएल जाइत अछि आ नियत समयपर ई विशेषांक निकालबाक प्रयास करैत छी। एकर मतलब ई भेल जे पाठककेँ सुझाव देबाक सूचना हरेक बर्खक अप्रैल-मइ धरिमे चलि जाइत छनि। प्रश्न उठि सकैए जे कि उपरक नियम एहन छै जाहिमे अंतिम रूपसँ सभ सुयोग्य जीवित लेखक केर चयन समयपर भ़ऽ जेतनि? तऽ एकर उत्तर छै- नै। विदेहक अपन सीमा छै आ विदेहक पाठक लग सेहो अपन सीमा छनि। मुदा अही सीमाक संगे हमरा सभकेँ अपन यथासाध्य श्रेष्ठ देबाक छै आ मैथिली लेल एकटा एहन रस्ता बना देबाक छै जाहिसँ आबए बला 500-600 बर्खक साहित्य विदेहक लीकसँ प्रेरणा पाबए। अही विचारक संग विदेह ओहन जीवित लेखकपर अपन धेआन सेहो केंद्रित कऽ रहल अछि जे कि सुयोग्य छथि मुदा जिनकापर विदेहक विशेषांक कोनो कारणवश नहि प्रकाशित भऽ सकल। एकर नाम भेल विदेहक "नित नवल सिरीज"। एहि नव विचारक मुख्य बिंदु एना अछि- 1) विदेहक संपादक गजेन्द्र ठाकुर एकटा कोनो जीवित लेखक वा कलाकारपर एकाग्र आलोचना करता मने ओहि लेखक केर उपलब्ध सभ साहित्यपर। एहि पोथीक भाषा मैथिली अथवा अंग्रेजी कोनो एक भाषामे रहत। एहि पोथीक पहिल रूप ई-बुक केर रूपमे आएत आ प्रयास रहत जे एकर प्रिंट सेहो आबए जे कि परिस्थितिपर निर्भर करतै। 2) लेखक वा कलाकार केर चुनाव संपादक अपन रुचि वा विदेह टीमक रुचि केर हिसाबें करता। 3) एहिमे ओहने लेखक वा कलाकार केर चयन संभव हएत जिनकर उपलब्ध हरेक पोथीक PDF रूपमे विदेहक माध्यमसँ सार्वजनिक भेल छनि। कलाकार लेल यूट्यूब एवं आन साइट सेहो मान्य हेतै। 4) एहि परियोजनाक लेल चयनित लेखक वा कलाकारपर काज संपादक केर समय केर अनुसारे हेतै। तँइ एकर समय सीमा कहब संभव नहि। नित नवल सिरीजमे एखन धरि प्रकाशित पोथीक सूची एना अछि (पहिनेक विशेषांक सभमे ई क्रम नहि छल, एहिठाम संशोधित आ पूर्ण सूची अछि)- 1. Rajdeo Mandal- Maithili Writer (2022) 2. JAGDISH PRASAD MANDAL- Maithili Writer (2023) 3) नित नवल सुभाष चन्द्र यादव (2023)(ई प्रिंट आॉन डिमांड रूपमे सेहो अछि) https://store.pothi.com/book/गजेन्द्र-ठाकुर-नित-नवल-सुभाष-चन्द्र-यादव/ 4) नित नवल सुशील (2023, संशोधित 2024) एकर अतिरिक्त विदेहक वर्तमान अंक सभमे धारावाहिक रूपें "नित नवल दिनेश मिश्र" सेहो प्रकाशित भऽ रहल अछि जकर पोथी रूप जल्दिये आएत। एहिठाम ईहो स्पष्ट कऽ दी जे विदेह विशेषांक वा नित नवल सिरीज केर चयन लेखकक शुरूसँ लऽ चयन हेबाक समय धरिक आकलन अछि। मानि लिअ विदेह विशेषांक वा नित नवल सिरीजमे चयनित भेलाक बाद, विशेषांक वा पोथी प्रकाशित भऽ गेलक बाद जँ चयनित लेखकमे नैतिक स्तरपर कोनो विचलन अबैत छनि तँ आन लोकक संगे विदेहो हुनकर विरोध करत। फेरो स्पष्ट कऽ दी जे हमरा लोकनि मात्र नैतिक स्तर केर बात केलहुँ अछि, विचारधारा वा आन कोनो स्तरक नहि। विदेह लेल उत्तर-दक्षिण, पूरब-पश्चिम, आकाश-पाताल सभ विचारधारा अपने छै बशर्ते कि ओ मिथिला, मैथिली आ मैथिलक हितमे हो। आब बात करी विदेह लिटरेचर फेस्टीभल केर। विदेह अपन आन कार्यक्रम संगे "विदेह लिटरेचर फेस्टीभल" केर शुरुआत कऽ रहल अछि। एकर परिभाषा हम ई रखने छी जे एक बर्खमे एक लेखक द्वारा एक विधामे जे रचना विदेहमे प्रकाशित हएत तकरा हम सभ पोथीक रूपमे दऽ ओहि संबंधित लेखक लग ओकर लिंक पठा देबनि। जँ लेखकक सहमति रहतनि तऽ एकै पोथीमे विभिन्न विधाकेँ सेहो समेटल जा सकैए। एहिमे भाग लेबाक निम्नलिखित प्रक्रिया रहत-

1) विदेहक बर्खमे कुल 24 अंक प्रकाशित होइत छै सामान्यतः हरेक मासक 1 आ 15 तारीखकेँ। ई फेस्टीभल हरेक बर्ख 1 जनवरीसँ लऽ कऽ 15 दिसम्बर बला अंकमे प्रकाशित रचनापर लागू हएत। रचना टाइप कएल रहबाक चाही। रचना पठेबाक लेल मेल अछि- editorial.staff.videha@gmail.com विदेह ऑनलाइन पत्रिका छै (मैथिलीक पहिल) तँइ लेखकीय प्रति मात्र PDF रूपमे देल जाइत छै।

2) विदेह लेल रचना दू भागमे अछि, गद्य एवं पद्य। गद्य एवं पद्य केर सभ विधा लेल ई मान्य अछि (मुदा छंदमुक्त कविता लेल संपादक अपन विवेकक प्रयोग करताह जे ई रचना पोथी लेल उपयुक्त हेतै वा कि नहि, एहन नहि जे छंदमुक्तमे नीक रचना नहि भऽ सकैए मुदा मैथिलीमे छंदमुक्तकेँ गलत मतलब निकालि कविता विधाकेँ सत्यानाश कऽ देल गेलै) विदेहक कुल 24 अंकमे जँ कोनो रचनाकारक गद्य (जेना आलेख, आलोचना, समीक्षा, कथा, कथेतर गद्य, यात्रा,संस्मरण आदि) केर 15-20 टा रचना हेबाक चाही। बीहनि कथा एवं लघुकथा कमसँ कम 200 हेबाक चाही। उपन्यास, नाटक आदि जँ 24 अंकमे पूरा भऽ गेल अथवा जाहि अंकमे पूरा भऽ जेतै तकर बाद ओहिपर काज शुरू कऽ देल जेतै। छंदोबद्ध पद्य वा गजल 100 टा हेबाक चाही। छोट-छोट छंदोबद्ध रचना जेना दोहा, सवैया आदि लेल कमसँ कम 500 रचना हेबाक चाही। छंदोबद्ध पद्य एवं गजलक निच्चा ओकर विधान एवं नाम सेहो देनाइ अनिवार्य रहत। छंदोबद्ध पद्य वा गजल पूर्णतः मानक हेबाक चाही, वर्तनी सही हेबाक चाही, अन्यथा 100 संख्या भेलाक बादो विदेह ओहिपर विचार नै करत। लेख लेल सेहो एहने बात मानि कऽ चलू। गोल-मटोल भाषा बला समीक्षा-आलोचना मान्य नहि हएत। तहिना जाहि संस्मरणमे आनसँ बेसी अपनापर लीखल गेल हो सेहो मान्य नहि हएत।

3) जेना उपन्यास वा नाटक धारावाहिक रूपमे प्रकाशित होइए तेनाहिते कोनो एक विषयपर आलेख, आलोचना सेहो धारावाहिक रूपमे मान्य हएत। लेखक अपना हिसाबें विषय केर चयन कऽ सकैत छथि। मुदा एहि बर्ख हम मात्र उदाहरण लेल एकटा विषय एक रचनाकार लेल प्रस्तावित कऽ रहल छी जाहिसँ आरो स्पष्ट हएत। जेना कि एहि बेर लेल हम विषय बनेलहुँ "मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान" आ एहि लेल हम Kalpana Jha कल्पना झाजीकेँ नामित कऽ रहल छियनि। आब कल्पना जी सुविधानुसार एहि विषयपर जेना-जेना खंड लिखैत चलि जेतीह आ विदेहमे प्रकाशित होइत रहत आ अंतमे पोथीक रूपमे आबि जाएत।

4) जनवरी 2026 आ तकर बाद हरेक सालक जनवरीमे ओहन लेखक सभकेँ सूचना देल जेतनि जे एहि क्राइटेरियाकेँ पूरा केलाह, आ हुनकासँ ओहि रचना सभहक संशोधित रूप माँगल जेतनि। जे लेखक जाहि समयमे संशोधित रूप देताह तकरा ओहि समयक हिसाबें आ हुनकर लिखित सहमतिक संग ओहि रचना सभकेँ समेटि ओकरा पोथी रूप देल जाएत, ओकरा ISBN सेहो देल जाएत आ ओकर लिंक संबंधित लेखककेँ दऽ देल जेतनि। लिंक देलाक बाद लेखक-पाठक अपन मूल्य लगा ओकरा कीनि सकै छथि। विदेह क्रय-विक्रय केर काज नहि करैत अछि तँइ एहिसँ संबंधित कोनो समस्या लेल विदेह उत्तरदायी नहि हएत। हँ, स्वविवेकक उपयोग करैत विदेह टीम लेखकक समस्याक समाधान करबाक लेल प्रयास कऽ सकै छथि।

5) एहि योजनाक अंतर्गत आएल पोथीमे विदेहक नाम, लोगो, ओकर उद्येश्य, आन सूचना सहित ईहो लिखल रहत जे ई पोथी "विदेह लिटरेचर फेस्टीभल बर्ख...." योजना द्वारा चुनल गेल अछि।

6) रचना विदेह लेल अप्रकाशित हो माने ओकर प्रकाशन आन कतहुँ नै भेल हो। जँ पोथी रूपमे एलाक बाद पता चलल जे ओहि केर रचना आन ठाम छपल छै तऽ ओकर लिंक नष्ट कऽ देल जेतै।

7) रचनाक गुणवत्ता एवं ओकर मौलिकता लेल लेखक अपने उत्तरदायी हेता। मौलिकता संबंधी कोनो विवाद भेलापर ओहि पोथीक लिंक नष्ट कऽ देल जाएत आ ओहि लेखकक रचनाकेँ पुनः विदेहमे नै छापल जाएत।

8) विदेह दिससँ कोनो प्रकारक वित्तीय सहायता लेखककेँ नै भेटतनि कारण, विदेह किनकोसँ लैतो नै छै। विदेह मात्र रचनाकेँ समेटि, ओकर डिजाइन आ ISBN लेल प्रयास करत।

9) एहिमे साझी संकलन आदि मान्य नै हएत।

10) विदेहमे प्रकाशित रचना लेल जे नियम पहिनेसँ अछि से यथावत रहत आ एहि फेस्टीभेलक रचनापर सेहो लागू हएत। पाठक-लेखक चाहथि तऽ विदेहपर जा कऽ पूरा ब्यौरा देखि सकै छथि। 4 ऊपर भेल जे काज हम सभ कऽ सकलहुँ तकर विवरण मुदा किछु एहनो घोषणा छै जे कि हम सभ नै कऽ सकलहुँ जेना 2016 मे हम सभ परमेश्वर कापड़ि, कमला चौधरी आ वीरेन्द्र मल्लिक विशेषांक केर घोषणा कइयो कऽ नहि प्रकाशित कऽ सकलहुँ। पाठक एहि घोषणाकेँ एहि लिंकपर देखि सकै छथि- सूचना बादमे विदेहक "वीरेन्द्र मल्लिक विशेषांक" (जे कि प्रकाशित नै भऽ सकल) लेल वीरेन्द्र मल्लिक जीक साक्षात्कार जे नबोनारायण मिश्रजी से विदेहक 337म अंकमे प्रकाशित भेल पाठक एकरा एहि लिंकपर पढ़ि सकै छथि- 1 जनवरी 2022 अंक 337 2017 मे विदेह "नेपालक वर्तमान मैथिली साहित्य" विषयक विशेषांक निकालबाक नेयार केने छल जे एखन धरि पूरा नहि भऽ सकल अछि। तेनाहिते विदेहक "साहित्यिक भ्रष्टाचार विशेषांक" हमरा लोकनि एखन धरि नै प्रकाशित कऽ सकलहुँ अछि। एकर घोषणा हम 2019 मे केने रही। एहि घोषणाक फेसबुक लिंक देखू। हमरा लोकनि पं. गोविन्द झाजीपर कोनो काज नहि कऽ सकलहुँ से दुख आजीवन रहत। एहन नहि छै जे हमरा लोकनि प्रयास नहि केलहुँ मुदा कोनो ठामसँ उत्साह नहि भेटल। 10 अक्टूबर 2020 फेसबुकपर हम सभसँ आग्रहो केने रहियनि मुदा...। एहि घोषणाक फेसबुक लिंक देखू। परिशिष्ट-1 परिशिष्ट-2 परिशिष्ट-3 विदेह अपन कोनो अंकमे "साहित्यिक भ्रष्टाचार विशेषांक" निकालत (लिंक कमेंटमे) ताहि लेल अपने सभसँ निम्नलिखित विषयपर आलेख आदि चाही। 1.साहित्य, कला एवं सरकारी अकादमीः- (क) पुरस्कारक राजनीति (ख) सरकारी अकादेमीमे पैसबाक गैर-लोकतांत्रिक विधान (ग) सत्तागुट आ अकादमी केर काजक तौर-तरीका घ) सरकारी सत्ताक छद्म विरोधमे उपजल तात्कालिक समानांतर सत्ताक कार्यपद्धति (1985सँ एखन धरि) ङ) अकादेमी पुरस्कारमे पाइ फैक्टरः मिथक वा यथार्थ 2.व्यक्तिगत साहित्य संस्थान आ पुरस्कारक राजनीति 3.प्रकाशन जगतमे पसरल भ्रष्टाचार आ लेखक 4. मैथिलीक छद्म लेखक संगठन आ ओकर पदाधिकारी सभहँक आचरण 5.मैथिली विभागमे पसरल साहित्यिक भ्रष्टाचारक विविध रूपः- (क) पाठ्यक्रम (ख) अध्ययन-अध्यापन (ग) नियुक्ति 6. साहित्यिक पत्रकारिता, रिव्यू, मंच, माला, माइक आ लोकार्पणक खेल-तमाशा 7.लेखक सभहँक जन्म-मरण शताब्दी केर चुनाव, कैलेंडरवाद आ तकरा पाछूक राजनीति 8.दलित एवं लेखिका सभहँक संगे भेद-भाव आ ओकर शोषणक विविध तरीका उपरक विषयक अतिरिक्त जँ कियो साहित्यिक भ्रष्टाचारक कोनो नव विषयपर लिखए चाहथि तँ ओकरो स्वागत रहत। परिशिष्ट-4 नोट- विदेह विशेषांक जाहि खंडमे अहाँ सभ ई सूचना पढ़ि रहल छी तकर नाम छै "प्रस्तुत विशेषांकक संदर्भमे" मुदा हरेक विशेषांकक एहि खंडमे किछु ने किछु भिन्नता भेटत जकर कारण अछि जे भूतकालमे जे-जे हम सभ काज केने छी तकरा सभकेँ फेसबुक वा आन लिंककेँ ताकब समयसाध्य काज छै तँइ हमर आग्रह रहतनि पाठक वर्गसँ जे नवीनतम आ संशोधित सूचना लेल ओ जाहि समयमे तकता ताहि समयक अंतिम विदेह विशेषांकक ई खंड देखथि (ई विशेषांक कोनो कैटेगरीक भऽ सकैए)। उदाहरण लेल मानू जे कोनो पाठक फरवरी 2025 मे विदेह विशेषांकक कोनो पुरान ई खंड पढ़लथि आ हुनका ओहिमे कोनो गलती बुझना गेलनि तऽ ओकर संशोधित रूप पढ़बाक लेल विदेहक मिथिला विकास परिषद् विशेषांकमे आएल एहि खंडकेँ पढ़थि। हुनकर समस्याक समाधान भऽ जेतनि। संगहि एहि विशेषांक (मिथिला विकास परिषद्)मे ज किछु छूटत से से हम सभ 2025 मे आबऽ बला विशेषांकमे संशोधित कऽ परसबै। इएह क्रम छै आ लगैए जे लगभग एक-दू बर्खमे हम एहि पन्नाक अंतिम स्वरूप पाबि लेब। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.२.मिथिला विकास परिषद् केर संक्षिप्त परिचय मिथिला विकास परिषद् केर संक्षिप्त परिचय एहिठाम प्रस्तुत अछि " मिथिला विकास परिषद्" केर संक्षिप्त परिचय। एहि परिचयक अधिकांश तथ्य सार्वजनिक अछि जकरा एहिठाम अपना अनुरूप प्रस्तुत केलहुँ अछि। एहि संस्थाकेँ "MVP केर नामसँ सेहो जानल जाइए। स्थापना- 1980 संस्थापक- अशोक झा अन्य संस्थापक सहयोगी सभ- प्रमोद कुमार ठाकुर, गोपीकांत झा 'मुन्ना', विनय प्रतिहस्त आदि। एहि संस्थाक अधिकांश सद्स्य सभ अही संस्थामे शुरूसँ अंत धरि बनल रहलाह। वृति- लाभरहित आ गैर राजनीतिक संगठन उद्येश्य- मिथिला-मैथिलीक सर्वांगीण विकास उपस्थिति- कोलकाता। मिथिला विकास परिषद्क एक अलग महिला मंच छै जकर नाम "मिथिला महिला मंच" छै आ एकर अध्यक्षा श्रीमती शैल झा छथिन। श्री अशोक झा एवं श्रीमती शैल झा दूनू पति-पत्नी छथिन। कलकत्तासँ जे पाठक भिज्ञ नहि छथि तिनका लेल ई सूचना देब परम जरूरी जे कलकत्तामे दू गोट शैल झा सक्रिय छथि पहिल लेखिका श्रीमती शैल झा 'सागर' जे कि श्री लक्ष्मण झा 'सागर'जीक पत्नी छथिन आ दोसर ई श्रीमती शैल झा छथिन। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.३.मिथिला विकास परिषद्क किछु काज मिथिला विकास परिषद्क किछु काज (राजनैतिक खंड)- -मिथिलांचल एक्स्प्रेस ट्रेनक लेल प्रयास एवं सफलता। - यात्री एक्प्रेस ट्रेन परिचालन लेल प्रयास एवं सफलता। -सियालदह जयनगर ट्रेन परिचालन लेल प्रयास एवं सफलता। -गंगासागर एक्स्प्रेस ट्रेन मे A. C बोगी लेल प्रयास एवं सफलता। -गंगासागर एक्स्प्रेस ट्रेनमे स्लीपर आ जेनरल बोगीक कुल चारि बोगी के काटि देबाक प्रतिवाद मे सियालदह स्टेशन पर धरना प्रदर्शन आ पनः बोगीकेँ जोड़ेबामे सफलता। -गंगासागर एक्स्प्रेस ट्रेनक प्रतिदिन परिचालन लेल प्रयास एवं सफलता। -गंगासार एक्स्प्रेस ट्रेनक समय परिवर्तन लेल प्रयास एवं सफलता। -मधुबनी स्टेशन पर स्वर्गीय ललित बाबू के शहीद वेदीक सौंदर्यीकरण, ललित बाबू के नाम पर समस्तीपुर रेलवे स्टेशन के ललित बाबू के नाम पर करवाक पहल। -कोलकाता -जयनगर के संग नई देलही स' जयनगर धरि वंदे भारत ट्रेन परिचालन हेतु पहल। -जयपुर सँ दरभंगा धरि ट्रेन परिचालन प्रारंभ लेल प्रयास एवं सफलता। -गौहाटी सँ जयनगर धरि सीधा ट्रेन परिचालनक पहल। -मधुबनी समेत अन्य स्टेशनक प्लेटफॉर्मक ऊँचाइ बढ़ेबाल लेल पहल। -रेल द्वारा मैथिली मे उद्घोषणा, कुली द्वारा रेल गाड़ी मे सीट बिक्रीक विरोध मे 48 घंटाक हावड़ा मे अनशन। -करोना काल मे गंगासागर ट्रेन समेत अन्य परिचालन हेतु आंदोलन और ट्रेन परिचालन लेल प्रयास एवं सफलता। -केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय अजीत सिंहक कार्यकाल सँ देशक विभिन्न शहर सँ दरभंगा धरिक वायु सेवा बहाल के लेल संघर्षरत। -केंद्रीय मंत्री डॉ हर्षवर्धन जीक कार्यकाल सँ दरभंगा AIMS के स्थापना लेल संघर्षरत। -दरभंगा AIIMS केर स्थापनाक माँग पर पटना मे धरना। -लोक सभा मे सांसद सुदीप बंदोपाध्याय सँ मैथिलीक अष्टम अनुसूचीक सन्दर्भ मे चर्चा महत्वपूर्ण डेग छल (सांसद सुदीप बंदोपाध्याय एवं मिथिला विकास परिषद्क अध्यक्ष अशोक झा एकै राजनीतिक दलक छथि)। -पुपरी स्टेशन FCI godown लग सड़क मार्गक सौंदर्यीकरण लेल पहल। -दरभंगा - जयनगर धरि सड़क संख्या NH 105 के विस्तारीकरण लेल पहल। (शिक्षा एवं समाजिक खंड) -विद्यापति विवेकानंद रिसर्च सेंटरक परिकल्पना। -कोलकाता विश्वविद्यालय आ पश्चिम बंगाल मे निरन्तर मैथिली पढ़ौनी लेल प्रतिबद्ध प्रयास। -कोलकाता आकाशवाणी आ दूरदर्शन सँ मैथिली कार्यक्रम लेल प्रयास । -गिरीश पार्क (ई सेंट्रल एवेन्यू रोडमे पार्कक नाम छै आ अही नामपर मेट्रो स्टेशन सेहो छै) मे महाकवि विद्यापतिक मूर्ति स्थापना। -तारासुंदरी पार्क (कलाकार स्ट्रीटक बगलमे)मे जनकवि-विख्यात उपन्यासकार यात्रीकमर्तिक स्थापना। -भूतनाथ मंदिर (निमतल्ला घाट, हुगली नदीक घाट)मे विद्यापतिक मूर्ति स्थापना संगहि भूतनाथ मंदिर पूर्व प्रधान पुजारी स्व. महिपाल ठाकुरक मूर्ति स्थापना (महिपालजी मैथिल छलाह)। -बाढि, रौदी, भूकंप मे कोलकाता सँ राहत सामग्री संग्रह कऽ जरूरतमंद लोकक बीच वितरण। -ब्लड डोनेशन कैंप, विभिन्न समय सामाजिक सरोकारक मे अवदान। -करोना काल मे लगभग प्रति सप्ताह खाद्य सामग्रीक संग करोना प्रतिरोधी मास्क वितरण। -यात्री जी के स्मृति मे पत्रकारिता सम्मानक आयोजन। -जानकी नवमी पर शोभायात्राक आयोजन। -मैट्रिक आ उच्च माध्यमिक विद्यालय मे उत्तीर्ण छात्र गणक सम्मान। (नाट्य खंड) -कोलकाता रंगमंच पर 1981 सँ आइ धरि 38 टा सँ बेसी नाट्य मंचन। -कोलकाता मैथिली नाटक के 50 वर्ष पर रंगना थीवेटर मे तीन दिवसीय नाट्य समारोह । -कोलकाताक अतिरिक्त सरिसव, पटना, जमशेदपुर, दिल्ली आ नेपाल आदि ठाम नाट्य मंचन मे अवदान । -अरिपन नाट्य प्रतियोगिता, पटना, मे कतिपय बेर भाग ल' क' पुरस्कार विजेता । (प्रकाशन खंड) -अनुवार्ता नामक पत्रिकाक प्रकाशन (संपादिका श्रीमती शैल झा) ई पत्रिका लगभग साढ़े पाँच बर्ख धरि प्रकाशित भेल। -जीरो पावर (हास्य संग्रह,लेखक-चंद्रनाथ मिश्र 'अमर') -हमरा मोनक खंजन चिड़ैया (काव्य संग्रह, लेखक- फूलचंद्र झा 'प्रवीण') -मिथिला माँगए खून (नाटक,लेखक- फूलचंद्र झा 'प्रवीण'। ई नाटक बादमे "आन्दोलन" नामसँ मिथिले विकास परिषद् द्वारा पुनर्प्रकाशित भेल) -कनफुसकी (रूपेश त्योंथ) -जीबैत लाश (नाटक, लेखक अशोक झा) -बिर्रो ((नाटक, लेखक अशोक झा) -कमौआ पूत ((नाटक, लेखक अशोक झा) -द्वन्द्व (नाटक, लेखक अशोक झा) -सुनगैत सपना (काव्य, अशोक झा) -इजोरिया अवश्य हेतै (काव्य, अशोक झा) (अन्य साहित्यिक खंड) -श्रीकांत मंडल आ ग्रियर्सन पर केन्द्रित संगोष्ठी। -आधुनिक मैथिली कविता दशा ओ दृष्टि पर केन्द्रित संगोष्ठी। -महेन्द्र आ हेमकांत आदिक स्मृति पर केन्द्रित मंचक परिकल्पना। -भोला लाल दास आ किरण जी, रमानाथ झा, सुभद्र झा, लक्ष्मण झा संगे कोलकाता मिथिला मैथिली मे महत्वपूर्ण अवदान देनिहार पर केन्द्रित मंचक परिकल्पना। -लोक संस्कृति पर केन्द्रित आयोजन। -साहित्य अकादमी आ मिथिला विकास परिषदक संयुक्त तत्वावधान मे कतिपय संगोष्ठी आयोजित। -अबेक बेर कवि गोष्ठी बहुभाषी, कवि गोष्ठी, विचार गोष्ठी आदिक संचालन। -ज्योतिरीश्वर सँ आठ दशक धरि पर चर्चा, साहित्यिक साहित्येतर अनेकक जन्मदिन आ पुण्य तिथि पर केन्द्रित रचनाकारक स्मरण। -यात्री आ राजकमल पर केन्द्रित आयोजन। -सीता देवी, महासुन्दरी देवी आदि पर मंचक परिकल्पना। -योगेन्द्र शुक्ल, बैकुंठ शुक्ल आदि अनेक स्वतंत्रता आ सामाजिक आंदोलन मे महत्वपूर्णक स्मरण। -गीतगाइन प्रतियोगिताक अनेक बेर आयोजन। -बी.पी मंडल, भोला पासवान शास्त्री, भोगेन्द्र झा, ललित बाबू, कर्पूरी ठाकुर, हरिनाथ मिश्र आदि स्मरण एवं केंद्रित कार्यक्रम। -महाकवि मधुप जीक स्मृति मे मैथिली गीत पर केन्द्रित संगोष्ठी। -बाबू साहेब चौधरीक जन्मशती पर केन्द्रित संगोष्ठी। -कोलकाता रंगकर्मी कँ सम्मान समारोह। -मिथिलेन्दु जीक स्मृति मे वाद-विवाद प्रतियोगिताक आयोजन। MVP केर आगामी परियोजना........ -बालासर रेल दुर्घटना मे मधुबनी जिलाक विभिन्न गाँव मे मृतक परिवार के संग भेंट क' सांत्वना आ सांकेतिक आर्थिक मदति। -पश्चिम बंगाल मैथिली अकादमी के स्थापना। -कोलकाता के बड़ाबाजार मे मिथिला भवन। -कोलकाता के कोनो राजमार्ग के नाम विद्यापति मार्ग के लेल प्रयास। -नव निर्मित मेट्रो स्टेशन के नाम विद्यापति / यात्री जी के नाम पर करेबाक प्रयास। -MVP के 40 वर्षक प्रगतिक इतिहास दस्तावेज के संग पोथी प्रकाशन। -मिथिला समाद पोर्टल TV के प्रारंभ। -धारावाहिक कार्यक्रम। -कोलकाता रंगमंचक कलाकार लोकनिक सम्मान। -मिथिला विकास परिषद पर केंद्रित वृतचित्र। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.४.अजय कुमार झा तिरहुतिया- मिथिला विकास परिषद: किछु सहेजल संस्मरण अजय कुमार झा तिरहुतिया (संपर्क-9123062401) मिथिला विकास परिषद: किछु सहेजल संस्मरण It would be necessary to quote, not the history writing, but what I understood from my natural experience and contemplation, what I saw and what spontaneously came to my mind, because I have participated in many programs of the Mithila Vikas Parishad as an eyewitness (इतिहास लिखब नहि, बल्कि अपन अनुभव आ चिंतन सँ जे बुझलहुँ, जे देखलहुँ आ जे किछु सहज रूप सँ मोन पड़ल से उद्धृत करब आवश्यक होयत कारण मिथिला विकास परिषदक कतेको कार्यक्रम मे प्रत्यक्षदर्शीक रूप मे भाग लेने छी)। समकालीन संस्था आ व्यक्तिक मूल्यांकन करब सहज कार्य नहि। निष्पक्ष रहब एक कठिन चुनौती होइत छै। अस्तु, लोक अही प्रकारक विवेचन सँ परहेज करैत अछि। कोनो संस्था सँ नहि जुड़ला वा कही सकै छी समस्त संस्था सँ समान सामीप्य वा दूरी बनेबाक कारण ई जोखिम किछु हद तक आसान होएत छै। समाज मे संस्थागत परिकल्पना अत्यंत प्राचीन जकर उद्देश्य समाजक विभिन्न समस्या के निदान होइत छै। मैथिली एक प्राचीन भाषा मात्र नहि, मैथिल समाज सेहो अति प्राचीन अछि। शासन आ समाजक विभिन्न स्वरूपक दर्शन प्राचीन साहित्य मे सर्वत्र विद्यमान। आधुनिक स्वरूप मे मैथिली समाज के संस्थागत स्वरूप आ तकर वाहक संस्था के रूप मे विभिन्न संस्थान मिथिले मे नहि वरन् मिथिलाक सीमा सँ इतर समस्त स्थान मे भेटत जहाँ मैथिल लोक जीवन-जीविका के क्रम मे प्रवासी के रूप मे स्थाई वा अस्थाई रूप स प्रवास करै छथि। एहि संदर्भ मे कोलकाताकेँ विशेष रूप सँ उल्लेख करब आवश्यक। जँ मिथिलाक बाहर मैथिली अस्मिताक खोज, सभ्यता आ संस्कृतिक तत्व, भाषा आ साहित्यक विकास स्थल के खोजल जाएत, त निःसंदेह कोलकाता के मिथिला संस्कृति के दोसर राजधानी मानल जाएत। विगत शताब्दीक आरंभ सँ कोलकाता मे मैथिली संस्था के विकास यात्रा निरंतर प्रवाहमान अछि। जकर उद्देश्य साहित्यिक आ सांस्कृतिक छल। बहुत रास संस्था मुदा स्वरूप लगभग समान। एहि संदर्भ मे अष्टयाम मंडली सँ पंजीकृत साहित्यक संस्था धरि जे periodically विभिन्न कार्य केलनि आ प्रवासी मैथिल के मेल-मिलाप केंद्र के रूप अपन प्रमुख योगदान देलनि। बहुत रास ठोस साहित्य कार्य सेहो भेल। कालजयी साहित्यक रचना आ प्रकाशन, कोलकाताक योगदान के मैथिली भाषा आ साहित्य मे अविस्मरणीय बना देलक। लेकिन सामाजिक जड़ताक प्रभाव या जीवन-जीविका के व्यस्तता कोनो नव सिद्धांत गढ़लक से बात नहि। किछु भाषा आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर सेहो भेल जाहि मे पूर्व मैथिली मनस्वी लोकनिक त्याग स्तुत्य। मुदा लगभग सब संस्था व्यक्तिवादी गरिमा सँ पोषित आ अल्पजीवी साबित भेल। अल्पजीवी सँ तात्पर्य उत्कर्ष काल सीमित। अही संदर्भ मे मिथिला विकास परिषद एक नव मानक प्रस्तुत केलक। व्यक्तिवाचक संदर्भ मे स्थापित ई संस्था 1980 के दशक मे स्थापित भेल आ अनवरत रूपे मैथिली आंदोलन मे सहयोगी रहल। संभवतः मिथिला-मैथिलीक चेतना सँ संबंधित मिथिला-मैथिलीक प्रथम संस्था जे कोलकाता मे भाषा-साहित्य आ सांस्कृतिक आंदोलन के राजनीतिक चेतना प्रदान केलक। एहि परिप्रेक्ष्य मे संस्थाक सर्वकालिक अध्यक्ष श्री अशोक झाक व्यक्तिगत राजनीतिक जीवन विशेष सहायक सिद्ध भेल। संस्थाक मूल्यांकन मे हुनका द्वारा कैल कार्य, कार्ययोजना के मुखर रूपे प्रस्तुति आ जनसमर्थन मुख्य होइ छै। मिथिला विकास परिषद, मैथिली बजनिहार समस्त लोक के मैथिल मानैत हुनक संस्था मे प्रवेश कराओल। एहि सँ संस्था के विकास संगहि व्यापक जनसमर्थन, व्यवस्था (राजनीतिक ओ सामाजिक दुनु) के लेल pressure Group (दबाव समूह) के रूप मे काज करै छै। परिषद द्वारा आयोजित कलश यात्रा जे ऊपरी तौर पर एक धार्मिक आयोजन लेकिन ई महाराष्ट्र मे लोकमान्य तिलक के गणपति उत्सवक समान कोलकाता के स्थानीय समाज ओ राजनीति मे महत्व राखै छै। आयोजन मे उमड़ल भीड़ प्रत्यक्ष वा परोक्ष रूप मे मैथिली उपस्थिति के एक राजनीतिक आधार प्रदान करै छै। संस्था के वार्षिक आयोजन अपन भव्यता नहि वरन् जन-उपस्थिति के कारण अद्वितीय। कोलकाता मे सांस्कृतिक प्रतीक प्रहरी गिरीश पार्क मे विद्यापति के प्रस्तर प्रतिमा, सियालदह फ्लाई ओवर के नामकरण विद्यापति सेतु आ एहि सँ सलंग्न विद्यापतिक प्रतिमा, तारा सुंदरी पार्क मे नागार्जुन के प्रस्तर प्रतिमा, भूतनाथ मंदिर के समीप मुख्य सड़क पर विद्यापति के प्रतिमाक अनावरण सामान्य उपलब्धि नहि। अनवरत मैथिली भाषा आ समाज के मिथिला सँ बाहर कोलकाता मे परिचिति प्रदान करै छै। राजनीतिक उठा-पटक के बीच किछु बात संस्था मे अवश्य छै जे अतीतक वामपंथी शासन आ वर्तमान तृणमूल सरकार के समय मे सहो मैथिलीक स्मारक स्थापित करा लैत अछि जकर श्रेय संस्था सँ अधिक अशोक जी के देनाए अनुचित नहि। "मिथिला विकास परिषद माने अशोक झा आ अशोक झा माने मिथिला विकास परिषद"- ई कोलकाता के गैर-मिथिला भाषी के मानब। मैथिली समाजक छोट-छोट समस्या के समय-समय पर मुखर रूप सँ परिषद द्वारा उठाओल गेल। कोलकाता सँ मिथिला जेबाक वास्ते ट्रेन सेवा लेल आंदोलन, पत्राचार, धरना सभमे परिषद अग्रणी रहल। केवल मिथिले विकास परिषद नहि, आनो संस्था सभ सेहो प्रयास केलक लेकिन समय के साथ आन-आन व्यक्ति वा संस्था शांत भ गेला लेकिन अशोक झा लगाम धेने रहला। संस्था के कार्यसूची मे ताबत धरि रखला जाबत सफल नहि भ गेल। ई बात संस्था के दोसर संस्था सँ फ़राक बना दैत छै। किछु लोक के कहब जे अशोक जी काजक Credit लेब जानै छथि। हम एहि के हुनक सबसँ पैघ गुण मानै छी, कारण Credit केर बहन्ने सही काजक प्रति तत्परता राखै छथि। एहि संदर्भ मे गंगासागर एक्सप्रेस, मिथिलांचल एक्सप्रेस, कोलकाता जयनगर एक्सप्रेस, हावड़ा रक्सौल एक्सप्रेस आदि अन्य-अन्य रेल परिचालन उल्लेखनीय अछि। अशोक झा स्वयं एक रंगकर्मी, नाट्य लेखक आ निर्देशक। साहित्य के आन-आन विद्या मे सेहो अपन उपस्थिति दर्ज करेने छथि। समय-समय पर संस्था द्वारा विभिन्न साहित्यिक गतिविधि के सफल आयोजन तकर प्रमाण। मैथिली भाषा आ साहित्य के भारत आ कोलकाता के आन भाषा और साहित्य के संग प्रतिस्थापित करबाक उद्देश्य सँ बहुभाषी साहित्य गोष्ठीक आयोजन सेहो संस्थाक सराहनीय प्रयास। पूर्व मे भारतीय भाषा परिषद आ मैथिली अकादमी द्वारा जोरदार आवाज मुखरित करब अशोक झाक विलक्षणता आ संस्थाक उपलब्धि मानल जा सकैछ। This does not mean that it is unique or cannot be done by anyone else, but what is seen in its natural form is praiseworthy and important in the context of the time. (एकर तात्पर्य ई नहि लेल जाए कि ओ विशिष्ट छथि, केकरो दोसर द्वारा ई नै कैल जा सकैत अछि, लेकिन जे अपन सहज स्वाभाविक रूप मे देखाइ दै छै, ओ समकालीन संदर्भ मे प्रशंसनीय आ महत्वपूर्ण अछि।) वर्तमान मे पश्चिम बंगाल हिंदी अकादमीक सदस्यक रूप मे मैथिलीक मुखर आवाज आ अकादमीक कार्यक्रम मे मैथिली भाषाक स्थान भेटब, अशोक जी के इच्छाशक्तिक कार्य रूप मे परिणति। व्यक्तिगत विरोध फराक मुदा, हम स्वयं संस्था के बहुत रास बात आ अशोक जी के कार्यशैली सँ वैचारिक रूपे पूर्ण सहमति नहि जता पाबै छी। मुदा एहि कारणे किनको योगदान के, श्रेय के, उपलब्धि के सकारात्मक आलोचना वा सराहना सँ वंचित करब कि बौद्धिक परिपक्वता मानल जा सकै छै? समग्र आ सतत विकास जे सामाजिक मानदंड पर सकारात्मक प्रतिबिंब प्रस्तुत करै, ओ ईर्ष्या द्वेष के परिधि स बाहर भ' जाएत अछि। निश्चित रूपे आन-आन संस्था के मिथिला विकास परिषद वा अशोक झा सँ द्वेष हेबाक चाही ताकि ओ अपन पैघ डरीर खीचि समाजक विकास यात्रा मे सहयोगी बनि सकता। लेकिन केवल विरोध लेल, हमरा ओ नीक नहि लागै छथि, हमर जश नहि होब देता अही कारणे कोनो व्यक्ति आ संस्था के एक दोसरा सँ सौतिनिया डाह राखी समाजक विकास यात्रा मे बाधक नहि हेबाक चाही। ई बात चाहे मिथिला विकास परिषद हो वा कोनो अन्य संस्था समान रूपे विचारणीय। समाज के विकास के जिम्मेदारी सबहक, संस्था एक समूह के रूप मे एकर अधिक प्रभावी निष्पादन क' सकता तै हुनका सँ अनुरोधो बेसी। मिथिला विकास परिषद 1983 सँ अशोक झाक नेतृत्व मे अपन कार्यक्षेत्र प्रवासी मैथिल धरि सीमित नहि राखैत एकरा राष्ट्रीय स्वरूप मे परिणत कैल। मैथिली भाषा के भारतीय संविधान के आठम अनुसूची मे पंजीकृत लेल दीर्घ आंदोलन संपूर्ण मिथिला आ मिथिला के बाहर आन-आन संस्था द्वारा कैल गेल लेकिन मिथिला विकास परिषदक आवाज सर्वाधिक मुखर आ योगदान सर्वोपरि रहल अछि। एहि संदर्भ मे संस्थाक अध्यक्ष अशोक जीक राजनीतिक सक्रियता विशेष सहयोगी साबित भेल। मिथिला के मास्को नाम सँ परिचित मधुबनी जिला क बरहा गाम के पर्याय कामरेड भोगेंद्र झा (भोगी भगवान) के भातिज आ आरंभिक काल मे बंगाल मे वामपंथी शासन रहितहुँ अशोक जी कांग्रेसी विचारधाराक पोषक। छात्र जीवन मे युवा कांग्रेस के प्रखर आवाज आ युवा वयस सँ कांग्रेस बाद मे तृणमूल कांग्रेस केलनि। सांसद सुदीप बंदोपाध्यायक सानिध्य के लाभ उठाबैत ओ अटल बिहारी बाजपेयी के शासनकाल मे एहि मुद्दा के संसद मे उठौलनि आ कामरेड भोगेंद्र झा सेहो एकर प्रखर आवाज छला। अंततः मैथिली भारतीय संविधान के मान्यता प्राप्त भाषा के रूप मे मान्य भेल। एकर लाभ एक फराक विषय लेकिन संस्था एहि तिथि के प्रतिवर्ष अधिकार दिवस के रूप मे पालन करैत अछि। आन व्यक्ति वा संस्था के महत्व नकारल नहि जा सकै छै मुदा क्रेडिट लेबाक भीड़ मे मिथिला विकास परिषद के कतिऔल नहि जा सकैछ। What are his expectations from politics, how much he is accepted or rejected in his personal life, how relevant he is and to whom, these may be a different issue but as the carrying power of any institution, he is exemplary and his work in the interest of society has a positive background in the human definition. (राजनीति मे हुनक की अपेक्षा छनि, व्यक्तिगत जीवन मे कत कतेक स्वीकृत वा अस्वीकृत छथि, किनका लेल कतेक प्रासंगिक छथि, ई एकटा अलग मुद्दा भ सकैत अछि, मुदा कोनों संस्थाक चालक शक्तिक रूप मे ओ अनुकरणीय छथि आ हुनकर काज मानवीय परिभाषा मे समाज हित मे सकारात्मक पृष्ठभूमि लेने अछि)। आइ दरभंगा, मधुबनी, सीतामढ़ी सहित एक पैघ रेलवे नेटवर्कक परिधीय स्टेशन पर मैथिली मे सूचनाक प्रसारण हर्ष प्रदान करैछ, लेकिन ई यात्रा सहज नहि छल। धरना, प्रदर्शन सभ भेलै, अखिल भारतीय मैथिली आंदोलन मे मिथिला विकास परिषदक भूमिका अग्रिम श्रेणी मे छल। स्वयं अशोक जी अपन सहयोगीक संगे कोलकाता सँ मधुबनी, समस्तीपुर, दरभंगा, सीतामढ़ी सर्वत्र आंदोलनी भीड़क हिस्सा रहल छथि। विभिन्न शहर सँ मिथिलागामी ट्रेन मे साफ-सफाई, बुनियादी सुविधा, स्टेशन परिसर के विकास हेतु रेल मंत्रालय के बेर-बेर पत्र लिखलनि, प्रतिनिधि मंडल संगे विभिन्न कार्यालयी पदाधिकारी सँ मेल-जोल, ज्ञापन प्रेषित आदि बहुत रास प्रयास करैत रहला जे निश्चित रूपे समालोचनात्मक नजरि सँ देखबाक चाही ताकि हुनका प्रोत्साहन भेटतनि आ भविष्य मे मिथिला-मैथिली वास्ते नव ऊर्जाशक्ति सँ किछु आर मुखर भ समाजोत्थान के वाहक बनता। मिथिला विकास परिषदक नेतृत्व करैत अशोक जी मिथिला-मैथिली लेल किछु जिद्दी, सनकी तेवर अख्तियार सेहो करै छथि। मिथिलाक विभूतिक स्मरण के जेना ओ अवसर खोजि कार्यक्रम निर्धारित करै छथि। समकालीन के महत्व सेहो, सहयोगी के सेहो सम्मान लेकिन व्यक्तिगत अनुभव सँ लागल जे ओ सुच्चा स्वाभिमानी आ तै किनको धारे झा नहि मानै छथि। शायद जीवनक पैघ भाग बंगाल आ ओहो बड़ाबाजार के रवीद्रनाथ ठाकुर के जन्मस्थली जोड़ासांको सँ सटल तैं ओ हारे को हरिनाम के अनुयायी नहि बल्कि "जदी तोर डाक सुने केओ ना आसे तबे एकला चलो रे" के अनुगामी। वर्तमान मे महाराज दरभंगा कामेश्वर सिंह के प्रतिमा के अनावरण आ सौंदर्यीकरण ओहो कोलकाता के हृदयथली डलहौसी के लालदिघी मे राइटर्स बिल्डिंग के सामने, हुनक नव जिद्द। एहि क्रम मे ओ कार्यालय आ नेता, मंत्री स्तर पर जे प्रयास केलनि तकर चरम जे पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सँ सेहो एहि प्रसंग मे ओ पत्राचार, व्यक्तिगत मुलाकात, प्रतिनिधिमंडल द्वारा ज्ञापन आदि बहुत किछु क चुकला आ आगामी दिन मे सफलता अवश्य भेटनि से उम्मीद कैल जा सकैत अछि। व्यक्तिवाचक लेखन हेतु लेखकीय वस्तुनिष्ठता अपेक्षित, अन्यथा ओ चारण प्रवृतिक आ ऐतिहासिकता सँ दूर होमय लागैत छै। मिथिला विकास परिषदक कार्य सकारात्मक ऊर्जा संपन्न लेकिन निश्चित रूपे सहज मानव स्वभाव के अनुरूप नकारात्मक ऊर्जाक समावेशिता संभव। लेकिन कोनो व्यक्ति आ संस्था के मूल्यांकन केवल सकारात्मक बा नकारात्मक टिप्पणी के संग एकतरफा नहि कैल जा सकैछ। सकारात्मकता आ नकारात्मकता के दुनू पलड़ा पर राखि जँ विवेचना करी त संस्था एक सार्थक उपस्थिति दर्ज करेबा मे सक्षम। हमर व्यक्तिगत विचार जे- "वर्तमान मे व्यक्ति गरिमाक पतन संस्थाक चरित्र के सेहो अक्षुण्ण नहि राखि पाबै अछि संक्रमण के एहि काल मे अस्तित्व संरक्षण एक पैघ चुनौती लेकिन मिथिला विकास परिषद एहि विषम युगबोध के धरातल पर अपना के दोसरा सँ फराक करैछ जाहि मे कोनो द्विघा नहि। एहन कर्मठता, दीर्घजीवी, निरंतर प्रवाहमान संस्थाक सामाजिक कार्यक प्रति उत्कट जिजीविषा वर्तमान मे सहज नहि भेटत। निकट भविष्य मे अशोक जी आ मिथिला विकास परिषदक किछु नव संकल्प के रूप लैत देखबाक उत्कंठा के संगहि प्रतीक्षारत!" (At present, the decline of individual dignity cannot keep the character of the institutional intact. Survival preservation is a major challenge in this period of transition but Mithila Vikas Parishad distinguishes itself from others on the ground of this odd era. No doubt, such hardworking, long-lived, continuously flowing passion for social work will not be easily found in the present. Looking forward to seeing some new resolutions of the Ashokjee and Mihila Vikas Parishad take shape in future. अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.५.लक्ष्मण झा सागर- मिथिला विकास परिषद, कोलकाता: हमरा दृष्टिये लक्ष्मण झा 'सागर, संपर्क-9903879117 मिथिला विकास परिषद, कोलकाता: हमरा दृष्टिये हम 1983 ई. मे असम लेल कलकत्ता छोड़ल। ठीक ओही साल कलकत्तामे अशोक झाक एकटा संस्था खुजल। नाम पड़ल 'मिथिला विकास परिषद'। हमरा जखन पता चलल तखने हम कलकत्ताक बहुतो मैथिल समांग सभके कहने रहियनि जे ई संस्था कलकत्तासँ की विकास करत मिथिलाक? हमर बातक कसगर विरोध भेल छल। नव संस्था, नव जोश, नव स्फूर्ति आ नव संकल्प सहीमे शुरुआतमे किछु नीक काज सभ केलक। गिरीश पार्कमे पहिल विद्यापतिक मूर्तिक स्थापना केलक। तारासुंदरी पार्कमे यात्री (नागार्जुन)क प्रतिमा बैसौलक। मैथिली भाषाकेँ संविधानक अष्टम अनुसूचीमे शामिल करेबाक लेल बंगालक सांसद सुदीप बन्दोपाध्यायक माध्यमसँ उल्लेखनीय काज करौलक। सियालदहसँ जयनगर लेल गंगासागर एक्सप्रेस ट्रेन चलबौलक। मिथिलाक बाढ़ि पीड़ित लोक लेल राहत सामग्रीक वितरण करबौलक। गिरीश पार्कसँ भूतनाथ मंदिर धरि मैथिल समाजक स्त्रीगण सभ द्वारा कलश यात्राक आयोजन करौलक। मिथिला विभूति पर्वक आयोजनमे सांस्कृतिक कार्यक्रमक आयोजन करबैत रहैत अछि। मैथिलीक गीतगाइन प्रतियोगिताक आयोजन करौलक। टोकन पुरस्कार राशि विजयी उम्मीदवारक हाथमे नगद दैत रहल अछि। संस्थाक एक महिला प्रकोष्ठ बनल जकर सर्वेसर्वा अशोक झाक पत्नी शैल झा बनलीह। मैथिलीक पत्रिका दू तीन अंक निकालबाक बाद बन्द भय गेल। परिषद मैथिलीक नाट्य मंचन करैत रहल अछि। एतेक काज सभ भेल एहिमे परिषदक कोर कमिटीक सदस्य लोकनिक सहयोग भेटैत रहैत छल। ओ सभ छथि सर्वश्री विनय प्रतिहस्त, गोपीकान्त झा मुन्ना, रघुनाथ चौधरी, रूपा चौधरी, अंजय चौधरी, पवन ठाकुर, अरुण कुमार मिश्र, अशोक झा भोली, विनय भुषण ठाकुर, अमरनाथ भारती, आमोद झा, राजकुमार झा आदि। हम जखन 1997 ई. मे असमसँ पुन: कोलकाता आपस आयल सपरिवार तऽ अशोक झासँ सम्पर्क भेल। हम दुनू प्राणी अशोक झाक सभ कार्यक्रममे जाइत रही। कवि सम्मेलन सभमे भाग लैत रही। एहिसँ पहिने अशोक झा अपन अधलाह व्यवहारसँ कोलकाताक बहुलांश मैथिल समाजकें नाखुश कय चुकल छलाह। स्व. बाबूसाहेब चौधरीजीकेँ प्रेसमे मारय गेल छलाह। स्व. कालीकान्त झाकेँ राम मंदिर लग उठा कऽ पटकि देने छलाह। स्व. किशोरीकांत मिश्र जीकेँ अवाच्य कथा कहि देने छलाह। अपन संस्थाक अधिकांश सदस्य सभकेँ अपमानित करय लागल छलाह। स्व. रामलोचन ठाकुरजीकेँ जे ने से कहि देने छलाह। हमरा पर कोलकाताक मैथिल समाजक लोक आ मैथिली साहित्यकार लोकनिक दबाव छल जे हम अशोक झाक संग कियैक दैत छी। तेहनो सन स्थितिमे हम अशोक झाक संग दैत रहलहुँ। साहित्य अकादेमीक मूल पुरस्कारसँ पुरस्कृत श्री मंत्रेश्वर झाजीक सम्मानमे हमरे कहला पर अशोक झा नीक आयोजन केने छलाह। हमरे कहला पर अशोक झा स्व. सत्यानन्द पाठक जीक कोलकाता आगमन पर भव्य सम्मान सभाक आयोजन केने छलाह। अशोक झाक अही सभ काजक वशीभूत भय हम हुनकर साक्षात्कार लेल आ अपन पोथीमे छापल जाहि लेल हमरा अपन मित्र वर्गमे खिधांश भेल। हम जहन धीरे-धीरे ई बात अवलोकन कैल जे अशोक झाक ई संस्था हुनक जेबी संस्था छनि। एहि संस्थाकेँ ओ अपन राजनीतिक हित साधनक लेल सीढ़ी बनेने छथि। मैथिलीक कार्यक्रममे हिन्दी भाषी नेता सभक फौज जमा कय लैत छथि। मैथिली भाषासँ हुनका ने त कोनो स्नेह छनि आ ने कोनो समर्पण भाव। ओ एक नम्बरके नटकबाज लोक छथि। यदि ओ अपन मूँहक भाषाकेँ संयत आ शालीन रखने रहितथि त हुनका एतुक्का मैथिल समाज माथ पर रखितनि। ओ अपनाके एकोह्म द्वितीय नास्ति मानैत छथि। दोसरक केलहा काजके लेल अपन क्रेडिट लेबाक फेरमे रहैत छथि। ओ अपनाके आल इन वन मानैत छथि। हमरा समक्ष ओ एकटा मैथिलीक समारोहमे स्व. मार्कण्डेय प्रवासीजीक मैथिली कविता हम भेटब तिलकोरक लत्तीमे अपना नामे पढ़ि कऽ थोपड़ी पिटबाय लेलनि। अशोक झाक संग हम छोड़ि देल जखन देखल जे आब ओ मैथिलीक नाम पर कटहर-आमक भोज करैत छथि। मखानक खीरक भोजकेँ मैथिलीक नाम पर भोजपुरिया समाजक बीच लोकप्रिय बनबाक लेल ढोंग रचैत छथि। ककरो कखनो कोनो बात पर ओ अपमान कय सकैत छथि। हम आ अशोक चौधरीजी कोलकाताक सभ संस्थाक एकीकृत करबाक लेल एकटा अभियान चलेलहुँ। महानगरीय संस्थाक लोकसँ उपनगरीय संस्थाक लोक सभसँ बात कैल। मुदा, एको गोटे अशोक झाक संस्थाक संग मर्जर नै गछलनि। हमर मोबाइलमे अशोक झाक नाम पर ह्वाट्सप मैसेज भरल अछि। हम कोनो रिस्पौंस नै करैत छियनि। तैयो कोनो ने कोनो मैसेज पठबिते रहैत छथि। हमरा सेहो एकटा मंच पर अवाच्य कथा कहलनि। हमरा हार्दिक चोट पहुँचल। हम आजुक तारीखमे अशोक झा आ मिथिला विकास परिषदसँ कोनो तरहक सम्बन्ध नै रखने छी। आशीष अनचिन्हार जीक आग्रहकेँ हम टारि नै पाबि सकल रही। अन्तत: हमरा ई आलेख लिखय परल!! अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.६.डा. धनाकर ठाकुर- मिथिला विकास परिषद, कोलकातासँ हमर परिचिति डा. धनाकर ठाकुर-संपर्क-9430141788 मिथिला विकास परिषद, कोलकातासँ हमर परिचिति मिथिला विकास परिषद, कोलकाता यद्यपि अन्तरराष्ट्रिय मैथिली परिषदसँ सम्बद्ध संगठन नहि अछि। नहिए आइ धरि हमर सभक भेल 34 अन्तरराष्ट्रिय मैथिली सम्मेलनमे एकर कोनहुँ प्रतिनिधि भाग लेलन्हि अछि। हम जहिया कहियो एकर मुख्य कार्यकर्ता अशोक कुमार झाकें कहलियनि हमर मीटिंग भेल। ओना ई बात अलग जे कनही गाए केर भिन्नहि बथान जकाँ कोनहुँ आन कलकतिया मैथिली संगठनक कार्यकर्ता ओहिमे नहि अएलाह नहिए कहियो एकर कोनहुँ कार्यकर्ता दोसर ठाम भेल हमर मीटिंगमे गेलाह किन्तु मीटिंग दूनू ठाम सफल भेल। अशोकजी बरहा गाम, मधुबनी जिलाक कोलकतावासी तृणमूल कांग्रेसक नेता, तें भनहि हुनक कक्का पाँच बेरक सांसद भोजपुरी बोलीक आठम अनुसूचीमे स्थान लेल संसदमे प्रस्ताव 1970क आसपास अनने हो़थि, मैथिली लेल अशोक झा तृणमूल कांग्रेसक सुदीप्तो बन्द्योपाध्यायसँ प्रस्ताव करौलाह। कोलकाता मिथिला-मैथिलीक काज लेल काशी वा काबा या मक्का जकाँ अछि जतऽ हावी भौआरक मिथिलेन्दुजी 1937 ई. मे 'मिथिला छात्र संघ' बनौने छलाह। आइ ओकर तेसर पीढ़ीक युवक काजमे छथि किन्तु दोसर पीढ़ीक अशोक झा सन उर्जावान केओ नहि। ओ नाटक लेखक सेहो छ़थि आओर मंचनमे पात्र सेहो रहैत छ़थि। हिनक पत्नी सेहो सर्वविध सहायिका। बड़ा बाजार, कोलकातामे काज केनिहार अनेक मैथिल मिथिला विकास परिषदसँ घनिष्ठतासँ जुड़ल छथि। मिथिलाकर्मी केओ कोलकाता नहि जाए से संभव नहि। हम 1992 सँ 2024 धरि विविध प्रयोजनसँ प्राय: 34 बेर कोलकाता गेलहुँ जाहिमे 27 बेर मिथिला लेल संपर्क ओ बैसार वा कार्यक्रम भेल जाहिमे मिथिला विकास परिषद संग तीन बेर भेल- 16.12.2001- जाहिमे तारा चैनलकें द्वारा हमर साक्षात्कार सेहो कराओल गेल छल। 25.3.2002- मिथिला विकास परिषदक कार्यालयमे हमर सभा भेल। 1.8.2004- मिथिला राज्य अभियानक सभा राजस्थानी ब्राह्मण भवनमे कराओल गेल छल जाहिमे पं ताराकान्त झा मुख्य अतिथि छलाह। 31.8.2008क महाजाति सदनमे मैथिली दैनिक "मिथिला समाद" क उद्घाटनमे अशोक झा मिथिला विकास परिषदक द्वारा कएल गेल अनेकानेक काजक विवरण देने छलाह जे आन लेख सभमे आबि जाएत। एक काज आरो जे हमरा आकर्षित केने छल से दरभंगा जयनगर तक उच्च पथ आदिक निर्माण लेल धरना। मिथिला विकास परिषद एहिना मिथिला राज्य निर्माण ओ विकास लेल लागल रहए ताहि लेल हम शुभकामना दैत छी। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.७.नबोनारायण मिश्र- मिथिला विकास परिषद्, कोलकाताः जेना हम देखल नबोनारायण मिश्र- संपर्क-9330173348 मिथिला विकास परिषद्, कोलकाताः जेना हम देखल अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.८.आशीष अनचिन्हार-मिथिला विकास परिषद्, कोलकाता (हमरा नजरिमे) आशीष अनचिन्हार-संपर्क-8876162759 मिथिला विकास परिषद्, कोलकाता (हमरा नजरिमे) कलकत्ता मैथिलीक तीर्थस्थल छै ई बात सभ कहत मुदा "कलकत्ता मैथिली साहित्य, संस्था आदिक राजनीति केर तीर्थस्थल (वास्तवमे नर्कस्थल) अछि से के कहत? तऽ नाम मोन राखि लिअ "आशीष अनचिन्हार"। हम कहि रहल छी जे "कलकत्ता मैथिली साहित्य, संस्था आदिक राजनीति केर तीर्थस्थल (वास्तवमे नर्कस्थल) अछि"। हम बर्ख 2000 मे कलकत्ता आएल रही आ लगभग 2003 केर अंतसँ गतिविधि सभमे जुड़ि गेल रही। मुदा जुड़लाक बाद बहुत बात पता चलल, इतिहास आ महत्व पता चलल। इएह चीज हमरा लेल मिथिला विकास परिषद् सेहो अछि। माने जे हम जे किछु लिखलहुँ वा लिखब ताहिमे आधा अपन आँखिक देखल एवं आधा लोकक मूँहे सूनल तथ्य देने छी अथवा देब। वर्तमान समयमे सभ ई कहता जे अशोक झा, कि रमाकांत झा वा कि विवेकानंद झा वा कि आनो कोनो संस्थाक अध्यक्ष-सचिव खराप छथि। मुदा जँ पुरातन कलकत्तामे संस्थाक राजनीति देखबाक हो ताहि लेल "प्रो. हरिमोहन झा अभिनन्दन ग्रंथ" मे संकलित बाबू साहबे चौधरीजीक आलेख (पृष्ठ-87) देखल जा सकैए। जाहिमे ओहि समयक संस्थागत जोड़-तोड़ कोना छलै आ ओकर निपटारा लेल कोना हरिमोहन झा सन विद्वानकेँ अपन अमूल्य समय नष्ट करऽ पड़लनि। पाठक ओहि आलेख पढ़ि अनुमान कऽ सकैत छथि जे जँ हरिमोहन झा ओहि समयक सदुपयोग केने रहितथि (ओना ओहि समयक हिसाबें ओहो काज आवश्यके छलै) तऽ निश्चिते मैथिलीकेँ कोनो आर नीक रचना भेटल रहितै। वर्तमान समयमे कलकत्तामे मिथिला विकास परिषद्क अध्यक्ष अशोक झापर तानाशाह हेबाक, मैथिलकर्मीकेँ मारबाक आदि आरोप सभ लगाएल जाइत छनि। ई आरोप सभ सत्यो भऽ सकैए आ अफवाहो भऽ सकैए। मैथिलीक संदर्भमे कही तऽ कलकत्ताक गली-गलीमे एहन सत्य आ एहने अफवाह घुमैत भेटत। बहुत रास सत्य एवं अफवाहमेसँ एकटा ईहो छै जे मिथिला सांस्कृतिक परिषद्क अध्यक्ष स्व. किशोरीकांत मिश्र सेहो अपना समयमे अपन वरिष्ठ आ मैथिलीक प्रारंभिक समयमे शोध पत्रिका प्रकाशित केनिहार स्व. महेन्द्र झा (वा स्व. महेन्द्र नारायण झा)केँ अपमानित केने रहथिन आ जे महेन्द्र झा जाहि संस्थाक जन्मदिनसँ छलाह हुनकेसँ ओहि संस्थामे अलग-थलग छोड़ि देल गेल आ सुनैत छी जे अपन अंतिम समयमे महेन्द्र झाजी कालीघाटमे पूजा करबैत समय बितेलाह। हम जे लिखलहुँ जे अफवाहो भऽ सकैए आ सत्यो, ओहिना जेना रमाकांत झा वा कि विवेकानंद झा वा कि आनो कोनो संस्थाक अध्यक्ष-सचिव लेल सत्य आ अफवाह रहैत छनि। तेनाहिते अहाँ एकरो सत्य वा कि अफवाह मानि सकै छी जे मिथिला विकास परिषद्क काज नियमित होइत रहै छै आ खास कऽ एकर राजनैतिक संबंध कमसँ कम बहुत मुद्दा लेल सहायक भेलै। अहाँ नहियो मानि सकै छी कारण जखन हमर अपन व्यक्तिगत अनुभव अछि जे जखन कोल व्यक्तिक दोष निकालै छै तखन ओकर केलहो काज बिसरि जाइत छै। अशोक झापर बहुत रास आरोपमे ईहो एकटा आरोप छनि जे ओ जहिया आन संस्थाक कार्यक्रम होइ ठीक ताही दिन ओहो अपन कार्यक्रम राखि दै छलाह। जाहिसँ आन संस्थाक कार्यक्रममे भीड़ कम हो। कहल जाइत छै जे एहन काजक ओ जनक छथि। मुदा हम हरेक संस्थाक कार्यक्रममे गेल छी हमर अनुभव अछि जे हरेक संस्थाक कार्यक्रम हिसाबें ओकर आडियंस अलग-अलग छलै। आ अहाँ एकरा अशोक झाक चतुराइ कहियौ वा कि आन संस्थाक गरिमा जे अशोक झा अपन कार्यक्रम ओपन स्पेसमे करबैत छलाह आ आन संस्था भवन एवं हौलमे। ओपन स्पेस आ ताहूमे कलकत्ताक बड़ाबाजारमे। एहि क्षेत्रमे जँ एकै रोडपर दू-दू मिनटक दूरीपर कोनो कार्यक्रम कएल जाए तऽ हरेक कार्यक्रममे हजार लोक ओहिना ठाढ़ भेल भेटत। तँइ हम कि आन कोनो संस्थाक लोक ओहि भीड़केँ मिथिला विकास परिषद्क सफलतासँ जोड़ि कऽ देखैत छथि तँ ई मात्र नादानी भेल। हमर अनुभव ई रहल अछि जे एकै दिनमे दू वा बेसी कार्यक्रम भेलासँ हरेक कार्यक्रमक गुणवत्तामे सुधार भेलै। संस्था व्यक्तियेसँ बनैत छै तँइ हरेक संस्थामे वएह गुण-दोष भेटत जे गुण-दोष व्यक्तिमे भेटैत छै। आ से गुण-दोष मिथिला विकास परिषद्मे सेहो छै। कहल जाइत छै जे मिथिला विकास परिषद्केँ सभसँ बेसी क्षति अशोके झा पहुँचेने छथि मुदा हमर अनुभव अछि जे मिथिला विकास परिषदमे शार्ट टर्म लेल जुड़ए बला सदस्य सभ बेसी क्षति पहुँचेने छै। मिथिला विकास परिषद्क अध्यक्ष एक खास राजनैतिक दलसँ जुड़ल छथि तऽ बहुतो लोक के लागै छनि जे एहिठाम जुड़लासँ हमर कोनो स्वार्थ पुरि जाएत। संभव जे किछु लोकक स्वार्थ पुरितो हेतनि। मुदा जिनकर नहि पुरैत छनि से बाहर निकलि विषवमन करैत छथि आ संस्थाक मूल्य खसबैत छथि। हमर मानब अछि जे एहि संस्थाक अध्यक्ष अशोक झा एहन-एहन सदस्यकेँ चिन्हबामे असफल भेल छथि। बेर-बेर असफल भेल छथि। चूँकि नीक चीज, नीक बातकेँ बेर-बेर कहब उचित होइत छै। मुदा संसारमे होइत छै उन्टा, एहिठाम खरापे बात, खरापे चीज लोक बेर-बेर कहैत छै आ अही कारणसँ एहि दुनियाँमे नकारात्मकता भरल छै। तऽ एहन जे बात हम कहि रहल छी तकरा फेसबुक सहित हम अपन पोथीमे सेहो लिखने छी आ एहि ठाम फेर दऽ रहल छी। सार्वजनिक रूपे हमर साहित्यिक यात्रा मिथिला विकास परिषद् एवं साहित्य अकादमीक संयुक्त कार्यक्रममे भेल छल। पाठक लग ईहो तथ्य राखब उचित जे शुरूसँ एखन धरि हम मिथिलाक विकास परिषद् मात्र तीन वा चारि कार्यक्रममे भाग लेने छी। मंच छेकब हमर स्वभावमे नहि अछि। विदेहक ई विशेषांक मात्र शुरूआत अछि, भविष्य एहि संस्थाक आरो मूल्याकंन करत, नीक-बेजाए सभ बातपर नजरि राखत। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। विदेह ४०८ म अंक १५ दिसम्बर २०२४ (वर्ष १७ मास २०४ अंक ४०८) || 101 100 || विदेह (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) www.videha.co.in

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विदहे ४०८ म अक १५ दिसम्बर २०२४ (वष १७ मास २०४ अक 8०८) | | 47 कक. /.. if i Eo. Sy अ के. ee x Je 2 ~ a oe le Sa है! tye [3322 2 अगर लि. “कर स्‍ कु गे; (कि जि हि / Poa न डर ees ~ 4 : ’ थम , (ae A, wee Ps v4 oe ee al S 7 | V4 < न =~ .

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