ISBN Number: 978-93-342-1286-0 (Book) ISSN 2229-547X (online) 𑒀 विदेह ४११ म अंक ०१ फरबरी २०२५ (वर्ष १८ मास २०६ अंक ४११) [विदेह (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) www.videha.co.in ] विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। ऐ पोथीक सर्वाधिकार सुरक्षित अछि। कॉपीराइट (©) धारकक लिखित अनुमतिक बिना पोथीक कोनो अंशक छाया प्रति एवं रिकॉडिंग सहित इलेक्ट्रॉनिक अथवा यांत्रिक, कोनो माध्यमसँ, अथवा ज्ञानक संग्रहण वा पुनर्प्रयोगक प्रणाली द्वारा कोनो रूपमे पुनरुत्पादन अथवा संचारन-प्रसारण नै कएल जा सकैत अछि। (c) २०००- २०२५. सर्वाधिकार सुरक्षित। भालसरिक गाछ जे सन २००० सँ याहूसिटीजपर छल http://www.geocities.com/.../bhalsarik_gachh.html , http://www.geocities.com/ggajendra आदि लिंकपर आ अखनो ५ जुलाइ २००४ क पोस्ट http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html केर रूपमे इन्टरनेटपर मैथिलीक प्राचीनतम उपस्थितक रूपमे विद्यमान अछि (किछु दिन लेल http://videha.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html लिंकपर, स्रोत wayback machine of https://web.archive.org/web/*/videha 258 capture(s) from 2004 to 2016- http://videha.com/ भालसरिक गाछ-प्रथम मैथिली ब्लॉग / मैथिली ब्लॉगक एग्रीगेटर)। ई मैथिलीक पहिल इंटरनेट पत्रिका थिक जकर नाम बादमे १ जनवरी २००८ सँ ’विदेह’ पड़लै। इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि, जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। (c)२०००- २०२५. विदेह: प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004). सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। Editor: Gajendra Thakur. In respect of materials e-published in Videha, the Editor, Videha holds the right to create the web archives/ theme-based web archives, right to translate/ transliterate those archives and create translated/ transliterated web-archives; and the right to e-publish/ print-publish all these archives. रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना/ संग्रह (संपूर्ण उत्तरदायित्व रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता मध्य) editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ पठा सकैत छथि, संगमे ओ अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो सेहो पठाबथि। एतऽ प्रकाशित रचना/ संग्रह सभक कॉपीराइट रचनाकार/ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि आ जतऽ रचनाकार/ संग्रहकर्त्ताक नाम नै अछि ततऽ ई संपादकाधीन अछि। सम्पादक: विदेह ई-प्रकाशित रचनाक वेब-आर्काइव/ थीम-आधारित वेब-आर्काइवक निर्माणक अधिकार, ऐ सभ आर्काइवक अनुवाद आ लिप्यंतरण आ तकरो वेब-आर्काइवक निर्माणक अधिकार; आ ऐ सभ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार रखैत छथि। ऐ सभ लेल कोनो रॉयल्टी/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै, से रॉयल्टी/ पारिश्रमिकक इच्छुक रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता विदेहसँ नै जुड़थु। विदेह ई पत्रिकाक मासमे दू टा अंक निकलैत अछि जे मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ www.videha.co.in पर ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। Videha eJournal (link www.videha.co.in) is a multidisciplinary online journal dedicated to the promotion and preservation of the Maithili language, literature and culture. It is a platform for scholars, researchers, writers and poets to publish their works and share their knowledge about Maithili language, literature, and culture. The journal is published online to promote and preserve Maithili language and culture. The journal publishes articles, research papers, book reviews, and poetry in Maithili and English languages. It also features translations of literary works from other languages into Maithili. It is a peer-reviewed journal, which means that articles and papers are reviewed by experts in the field before they are accepted for publication. Font/ Keyboard Source: https://fonts.google.com/ , https://github.com/virtualvinodh/aksharamukha-fonts , https://keyman.com/ These are print-on-demand books, send your queries to editorial.staff.videha@gmail.com. The eBooks of some of these are available for sale on Google Play [(c) Preeti Thakur, sales.videha@gmail.com], send your queries to sales.videha@gmail.com. The contents and documents e-published by Videha (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) are periodically being checked for accessibility issues. People with disabilities should not have difficulty accessing these contents/ documents. © Preeti Thakur (sales.videha@gmail.com) Cover designed by AUM GAJENDRA THAKUR Videha e-Journal: Issue No. 411 at www.videha.co.in समानान्तर परम्पराक विद्यापति- चित्र विदेह सम्मानसँ सम्मानित श्री पनकलाल मण्डल द्वारा मैथिली भाषा जगज्जननी सीतायाः भाषा आसीत्। हनुमन्तः उक्तवान- मानुषीमिह संस्कृताम्। अनुक्रम ऐ अंकमे अछि:- १.अंक ४१० पर टिप्पणी (पृष्ठ १-२) गद्य २.१.कल्पना झा-मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-३ (पृष्ठ ४-१३) २.२.प्रमोद झा 'गोकुल'-मोहभंग (पृष्ठ १४-१६) २.३.परमानन्द लाल कर्ण-तीर्थक्षेत्रक माहात्म्य (पृष्ठ १७-२३) २.४.लाल देव कामत-कोय बोलतै रे ! (पृष्ठ २४-२७) २.५.कुमार मनोज कश्यप- लघुकथा- पारस (पृष्ठ २८-२९) २.६.आचार्य रामानंद मंडल-मैथिली मानकीकरण/ महाकुंभ (पृष्ठ ३०-३४) २.७.प्रणव कुमार झा- टी.यू. 142 विमान आ आईएनएस कुरसुरा पनडुब्बी के झलक (यात्रा संस्मरण) (पृष्ठ ३५-५३) पद्य ३.१.प्रणव कुमार झा-लोकतंत्रक रंगमंच (पृष्ठ ५५-५६) ३.२.राज किशोर मिश्र-हम नव स्वर छी (पृष्ठ ५७-६०) ३.३.प्रमोद झा 'गोकुल'-कान्ह चखौतथि कब कब ओल (पृष्ठ ६१-६२) ३.४.जगदानन्द झा 'मनु'-२० टा हाइकू (पृष्ठ ६३-६९) ३.५.राम शंकर झा "मैथिल"- कोल्हूक बरद (पृष्ठ ७०-७२)
विदेह ४११ म अंक ०१ फरबरी २०२५ (वर्ष १८ मास २०६ अंक ४११) || 71 72 || विदेह (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) www.videha.co.in १.अंक ४१० पर टिप्पणी प्रणव कुमार झा वैज्ञानिक वा वास्तविकताक दृष्टिकोण सं देखल जाय त अनंत ब्रह्मांड वा आकास मे विचरित तारा सभक सापेक्ष चंद्रमाक की बिसात ! मुदा मनुषक सापेक्ष नील गगन मे अनगिनत तारा के बीच चमकैत पूर्णिमाक चाँद आदि काल सं लोक के चकित, चमत्कृत आ आकर्षित करईत रहल अछि। दुनियाँक सभटा भाषा मे चंद्रमा पर नै जानि कतेक कविता लिखल गेल होयत, तथापि प्रकृति के ई सुंदरताक प्रति मनुषक आकर्षण मे कोनो कमी नहि भेल आ नित नव नव रचना होइते रहय अछि। विदेह ४१० म अंक मे राज किशोर मिश्रक कविता ’पुर्णिमा’ के एहि क्रम मे देखल जा सकय अछि। कवितक माध्यम से पूर्णिमा के सुंदरता संग अमावस से पूनम आ पूनम से अमावस तक के यात्रा के वर्णन आ ओकरा मनुष्य जीवन से जोड़बाक प्रयास कयल गेल अछि। प्रमोद झा 'गोकुल' के खिस्सा ’जय गोड़ैया बाबा !’ सुदूर गामक सीमांत किसान सबहक मन-मस्तिष्क के मध्य व्याप्त ग्राम देवता सभक आस्था आ पैसाक भेलू के इंगित करय अछि। कल्पना झाक ’उपेंद्र नाथ झा व्यास’ सीरीज सही जा रहल अछि। कुमार मनोज कश्यप के लघुकथा ’यथावत’ अति गरीब कूड़ा बिननिहार समाज के यथावत स्थिति पर प्रकाश दैत अछि, मुदा पढ़लाक बाद हमर दृष्टि ओहि से आर आगा जा क देखय अछि जे ई समाज के बच्चा सभ नशाखोरी आ अपराध के दलदल मे सेहो बहुत गहिर तक धंसल रहय अछि। अपन राजनीति आ सरकार के ई सब पर ध्यान देबाक फुर्सत बहुत कम रहय अछि ! -अनुभाग अधिकारी राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड, नई दिल्ली अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। गद्य २.१.कल्पना झा-मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-३ २.२.प्रमोद झा 'गोकुल'-मोहभंग २.३.परमानन्द लाल कर्ण-तीर्थक्षेत्रक माहात्म्य २.४.लाल देव कामत-कोय बोलतै रे ! २.५.कुमार मनोज कश्यप- लघुकथा- पारस २.६.आचार्य रामानंद मंडल-मैथिली मानकीकरण/ महाकुंभ २.७.प्रणव कुमार झा- टी.यू. 142 विमान आ आईएनएस कुरसुरा पनडुब्बी के झलक (यात्रा संस्मरण) २.१.कल्पना झा-मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-३ कल्पना झा मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-३ मैथिली साहित्य मे व्यास जीक पदार्पणक बाट खोलैत 'ओ' विदाइ गीत राजमाता साहिबा सँ नियमित प्रतिमास पाँच रु.क छात्रवृत्ति प्राप्त होमए लगलनि आ आगाँक शिक्षा-दीक्षा प्राप्त करबा दिशि अग्रसर होइत रहलाह उपेन्द्र नाथ। अपन गाम सँ राजनगर अएलाह। मिडिल सँ आगाँ राजनगर आबि ओत्तहि केर हाइस्कूलक होस्टल मे रहि पढ़लनि उपेन्द्र नाथ जी। स्कूलक संस्थापक धीरेन्द्रनाथ लाहा आ स्कूलक अन्य शिक्षकक सहयोग एवं आशीर्वाद सदति भेटैत रहलनि। मुदा अपन विपन्नता ... आर्थिक अभाव ... कखनो काल कऽ व्यग्र कऽ दैत छलनि बालक उपेन्द्र केँ, जे 'आब आगाँ हम कोना पढ़ब ? हमर संस्कृतक किताब, हमर भूगोलक नक्शा, हमर गणितक पोथी-हमर नैया पार कोना लागत ? आब की हेतैक ?' धीरेन्द्रनाथ लाहा पीठ ठोकथिन - और पढ़ो ! और पढ़ो !! मुदा आगाँ पढ़ब कोना से चिन्ता रहि-रहि कऽ परेशान करनि। जखन चारू दिस अन्हारे अन्हार पसरल नजरि आबए लागैत छैक, तखन जँ केओ भगवानक पठाओल दूत जकाँ आबि जाइत छैक आ आगाँक बाट प्रशस्त होइत जाइत छैक, एहन मे मनुक्खक भीतर कोनो अदृश्य शक्ति, माने देवता-पितर पर अपार श्रद्धाक भाव उमड़ब स्वाभाविक। आ जैँ कि 'व्यास'जी केँ एक बेर नहि, अनेक बेर साक्षात् दैवी कृपाक अनुभव भेल छलनि, तैँ देवता-पितर पर अविचल-अडिग आस्था रहलनि जीवनक अन्तिम साँस धरि। पूजा-पाठ करब, सन्ध्यावन्दन आ प्रातः गंगा-स्नान आदि ओ कहियो नहि छोड़लनि। एक बिचे जखन 'व्यास'जी पटना मे पढ़ैत छलाह तँ कतेको हुनकर आत्मीय मैथिलबन्धु जनउ जरा कऽ चाटि गेल रहथि। हिनका सेहो कहल गेलनि, मुदा 'व्यास'जी टस-सँ-मस नहि भेलाह। कारण हुनकर इंजीनियरिंग कॉलेज धरि पहुँचब, इंजीनियर बनब, सामान्य बात नहि छलए। बड्ड बेसी संघर्षपूर्ण रहलनि 'व्यास' जीक इंजीनियर बनबा धरिक समय। बिनु दैवी कृपाक संभव नहि छलनि ओतए धरि पहुँचब। जतए धरि पहुँचबाक ओ स्वयं सोचियो नहि सकैत छलाह, ततए धरि पहुँचब वास्तव मे दैवीए कृपा भेल ने ! खर्रख जाएब-आएब रहैत छलनि। खर्रख सँ 'व्यास' जीक परिवारक बड्ड दूरस्थ सम्बन्ध रहनि। मुदा खर्रख मे स्व. बलभद्र बाबू आ दयाबाबू सँ हिनका अतिशय स्नेह, सहयोग, सम्बल आ आत्मीयता भेटलनि। ओहि स्नेह, सहयोग, सम्बल, आत्मीयता केँ ओ आजीवन नहि बिसरलाह। हिनका लोकनिक चर्चा कहियोकाल धिया-पूताक सोझाँ करैत रहैत छलाह। मैट्रिक मे फर्स्ट डिवीजन भेला उत्तर स्वयं बलभद्र बाबू 'व्यास' जीक गार्जियन भऽ गेल रहथिन। मैट्रिकक रिजल्ट होइतहि बलभद्र बाबू घोषणा कएलनि - 'आब एहि बच्चाक देख-रेख हम स्वयं करब !' हुनकहि आदेश सँ 'व्यास' जी इंजीनियरिंग कालेज मे एडमिशन लेलनि। हुनकहि निर्णय छलनि ई। आ बहुत नीक, शत् प्रतिशत उचित निर्णय छलनि, से 'व्यास' जी स्वयं स्वीकार करैत छलाह। बलभद्र बाबूएक युक्ति सँ 'व्यास' जी केँ आइ.एस-सी. मे पढ़बा काल राजमाता सँ प्रतिमास १५/- छात्रवृत्ति भेटए लगलनि। एहि मे ९ रु. मेसचार्ज, सीटरेन्ट ३ रु. आ पुस्तकादि अन्य खर्च ३ रु. रहैत छलनि। आइ. एस-सी. मे कालेजक फीस माफ छलनि 'व्यास' जीक। पुनः जखन इंजीनियरिंग कालेज मे एडमिशन भेलनि तँ बलभद्र बाबूक असीम कृपा सँ 'व्यास' जी केँ राजमाता सँ २५/- रु. प्रतिमास छात्रवृत्ति भेटए लगलनि। एहि मे कालेजक फीस ८ रु., सीटरेन्ट ४ रु., मेसचार्ज ९ रु., पुस्तकादि अन्य खर्च ४ रु. भेटैत छलनि। एहि तरहेँ इंजीनियरिंग केर पढ़ाइ कएलनि 'व्यास' जी। आब गप्प करब 'व्यास' जीक साहित्यिक यात्राक। एक तरहेँ ओ जन्मजात कवि छलाह; रस-छन्द अलंकार मे डूबल आत्मा; तेहन सन। जे देखार भेलनि किशोर वय मे आबि। माने किछु-किछु लिखब शुरु कएलनि किशोरावस्था सँ। पहिले पहिल जे लिखलनि, से छलनि एकटा विदाइ-गीत। जे भरि राति जागि कऽ लिखने छलाह 'व्यास' जी। पंक्ति-पंक्ति अश्रु मे डूबल। एकर पाछाँ प्रसंग ई अछि, जे राजनगर हाइस्कूलक संस्थापक धीरेन्द्रनाथ लाहाक बदली भऽ गेल रहनि। समस्त राजनगर जनपद एहि समाचार सँ मर्माहत भऽ उठल छलए। परिसरक समस्त लोक, सभ शिक्षक-कर्मचारी-विद्यार्थी भावविह्मवल भऽ उठल छलाह। हुनक विदाइ-समारोहक भव्य आयोजन भेल रहैक। ओहि समयक एकटा प्रसिद्ध तर्ज रहैक -- "मसीहा बनके बीमारों को किस पर छोड़ जाते हो...." एहि तर्ज पर पं. श्री शुकदेव झा विदाइ गान लिखने रहथि, आ तकरा हुनक प्रिय शिष्य कोइलखक भवनाथ (पछाति डाक्टर) गाबि-गाबि रियाज करैत रहथि। 'व्यास' जी स्वयं धीरेन्द्र बाबूक वैदुष्य आ विशाल हृदय सँ बेस प्रभावित छलाह। हिनका मोन मे सेहो इच्छा जगलनि जे हमहूँ एकटा विदाइ-गान प्रस्तुत करी। भिड़ि गेलाह लिखबा मे। भरि रातिक अथक प्रयासक बाद एकटा मार्मिक विदाइ-गान तैयार भेलनि। जकर किछु पंक्ति एहि तरहेँ अछि -- "वीर वीर इन्द्रक करुणासँ सुख समीर संचार जतए नन्दन वन सन पुष्पावलिमे अछि क्रन्दन जंजाल कतए ?" अस्तु; उक्त विदाइ-गान लिखैत 'व्यास' जीक पदार्पण भेलनि मैथिली साहित्य मे। आ से हुनकर लेखनी निर्बाध चलैत रहलनि...अनवरत..जीवनक अन्तिम साँस धरि...। लेखनीक स्तर ततेक प्रभावशाली रहलनि, जे दु -दू बेर साहित्य अकादमी पुरस्कार दिऔलकनि। पुरस्कारक संग अमरत्व सेहो दिऔलकनि। मैथिली साहित्य मे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' सूर्य सन दैदिप्यमान छथि आ रहताह सभदिन, ई कहबाक बेगरता नहि। उपरोक्त विदाइ-गान भले ही 'व्यास' जीक लिखल पहिल पद्य रचना छलनि, मुदा कविता हुनकर नस-नस मे छलनि जन्महि सँ। बस ओहि गुण केँ बहरएबाक अवसर भेटबाक देरी छलनि। से पहिल अवसर भेटलनि राजनगर हाइस्कूलक संस्थापक धीरेन्द्रनाथ लाहाक विदाइ-समारोहक आयोजनक लाथेँ। 'व्यास' जीक भीतरक एहि जन्मजात कवि केँ बहरएबा मे हुनकर इतिहास विषय मे कम रुचि, सेहो सहायक रहलनि। इएह दोसर कारण, मूल रूप सँ माध्यम बनलनि एकटा कविक रूप मे उपेन्द्र नाथ केँ ख्याति दिअएबाक। सेहो स्कूलिए जीवन मे। असल मे 'व्यास' जी केँ गणित, हिन्दी, संस्कृत आ भूगोल पर अधिकार जकाँ रहनि। मुदा इतिहास मे बड्ड रुचि नहि लेथि। इतिहास बिसरि जाइथ। बाप के ? बेटा के ? इस्वी कोन ? क्षेत्र कतय ? नीति की ? कूटनीति की ? इतिहासक पोथी देखि क' हुनका आतंक पैसि जाइन। तखन ओ एकटा उपाय कएलनि। इतिहासक घटना सभ केँ छन्दोबद्ध रुप मे लिखब आरम्भ कएलनि। माने कहल जा सकैत अछि जे इतिहासक कोखिसँ 'व्यास' जीक कविताक जन्म भेल ! एहि तरहेँ धुरझार कविता लिखब शुरु छलनि स्कूलिए जीवन मे 'व्यास' जीक। मूल कविताक संग किछु अंग्रेजी कविताक अनुवाद सेहो स्कूलिए जीवन मे करए लागल छलाह। आ से कोनो एहन - ओहन कविक नहि, Keats आ Shelley सन उच्च कोटिक लिखनाहरक कविता सभक अनुवाद। जनिकर लिखल कविता बुझनाइ सेहो कठिन रहैत छैक बहुत लोक लेल। आश्चर्यजक गप्प जे, जेना कि ताहि दिन प्राइमरी स्कूल मे (पाँचवीं कक्षा धरि) अंग्रेजी नहि पढ़ाएल जाइत छलैक, तहिना 'व्यास' जी जखन छठमा क्लास मे गेलाह; तखन अंग्रेजी पढ़ब शुरु कएलनि। माने A B C D सिखलनि छठमा मे आबि कऽ। आ कोना एक्कहि-दू बरखक बाद अंग्रेजी कविताक मैथिली अनुवाद करब सेहो शुरु कऽ देने छलाह, से अजगुत बात ! किछु दैवी शक्ति छलनि जेना ! कोर्स के पढ़ाइक संग अन्यान्य गतिविधि सँ सेहो सभदिन, सभठाम, माने स्कूल-कॉलेज सभतरि अपन प्रतिभाक विशेष छाप छोड़लनि। इएह कारण छलए, जे 'व्यास' जीक कुशाग्र बुद्धि सँ हुनकर शिक्षक सभ बेस प्रभावित रहैत छलाह। व्यासजीक साहित्यिक यात्रा पर नजरि खिराएब, तँ ई स्वतः स्पष्ट भऽ जाएत, जे हुनक रचनात्मक जीवन मे निरन्तरता रहलनि। भले ही दू टा कथा-संग्रहक (विडम्बना १९५२ आ भजना-भजले १९८९ मे) प्रकाशन वर्ष मे गैप ३७ वर्षक छनि, मुदा साहित्य-सेवा मे अनवरत लागल रहलाह। कथाक अतिरिक्त उपन्यास, कविता, खण्ड-काव्य, यात्रा-साहित्य, संगहि अनुवाद-साहित्य केँ सेहो पुष्ट करैत रहलाह। जखन कि व्यासजीक रचनात्मक परिवेशमे कतेको उठा-पटक होइत रहलनि। बहुत तरहक परिवर्तन आएल, समाज मे, देश मे, दुनियाँ मे। सभ सँ पैघ परिवर्तन राजनीतिक क्षेत्र मे आएल, राजनीतिक दासत्व सँ मुक्ति भेल। संविधान सँ लोक केँ मौलिक अधिकार भेटलैक। शिक्षाक प्रचार-प्रसार भेल। सामाजिक-सांस्कृतिक केन्द्र मे परिवर्तन आएल। युग-युग सँ गामक निर्मल आ स्वच्छ वातावरण मे पोषित मानसिकता बला लोक सभ शहर दिस पड़ाएल। गामक गाम उजड़ैत गेल, शहर पसरैत गेल। मिथिला मे कारखानाक स्थापना भेल। कारखानाक धुआँ सँ, निर्मल वायु-आच्छादित आकाश धूम्रमय होमए लागल। लोकक जीवन-यापन, रहन-सहन मे परिवर्तन आएल। विकृति, छल-प्रपंच आ दाव-पेंच बढ़ल। परन्तु 'व्यास'जीक रचनात्मक दृष्टि, अपन परिवेशक भौतिक-अभौतिक परिवर्तनक प्रति असम्बद्ध रहल, अप्रभावित रहल। स्थान, काल आ पात्र मे यत्किंचित परिवर्तनक अछैतो, 'व्यास' जीक रचनात्मक मूल्य स्थापना आ तकर पल्लवन मे परिवर्तन नहि आएल। उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' जी जे-जतबा साहित्य-सृजन कएलनि, से आदर्शोन्मुख परिलक्षित होएत। मतलब समाज मे एकटा आदर्श स्थापित करबाक प्रयास रहलनि, से स्पष्ट देखा पड़त। 'व्यास' जीक कथाक पात्र, मातृभाषा मैथिलीक प्रति अटूट आस्था राखएबला भेटत, पिआजु-लहसुन नहि खाए, भारतीय संस्कृति का आचार-व्यवहार मे आस्था राखएबला भेटत, पांजिबला लोक सँ बेसी शुद्ध आचरण करैत देखा पड़त। संगहि जाति, धर्म, वर्ण, क्षेत्र आदिक आधार पर मनुष्य-मनुष्यक बीचक विभेद केँ मेटाए, मानवीय गुण केँ प्रतिस्थापित करैत पात्र सभ देखा पड़त। करुणा आ प्रेम, मानवीय गुण छैक, जाति आ धर्मक बान्ह मे नहि बान्हल रहैत छैक, तकरा स्थापित करैत देखा पड़त। तहिना ममता, सद्भावना-धर्म, जातिगत गुण नहि मनुष्यजनित गुण अछि, ई सभ स्पष्ट परिलक्षित होइत अछि 'व्यास' जी रचित कृति सभ मे। स्कूलिए जीवन मे, जखन 'व्यास' जी शुरुआत कएलनि कविता लिखब, तखनुक एकटा कविता अवलोकनार्थ प्रस्तुत कऽ रहल छी, जे आदरणीय हितनाथ झा जीक सौजन्य सँ प्राप्त भेल अछि -- जहिया उपेन्द्रनाथ झा 'व्यास' राजनगर हाइ स्कूल मे पढ़ैत रहथि, ओही समयक लिखल ई कविता अछि। मिथिला ◆●■■●◆ उपेन्द्रनाथ झा "व्यास" हिमिगिरि उत्तर दिशि मे राजित जनिक उच्चतम श्रृंगे । जगदम्बा पति ,पितु सिर बहयित दक्षिण दिशि छथि गङ्गे।। पूर्व दिशा अतितीव्र गामिनी नदी कौशिकी प्रवहित । गंडक पुनि पर्वत सँ निकसित पश्चिम बहयित जनहित ।।1।। मिथिल नाम महाराज नाम पर अछि तुअ नाम प्रसिद्धे। जनक आदि अमरोपन मुनिगण बहुत भेला अरु सिद्धे ।। जनक तनूजा लक्ष्मी आदिक छली देवि अवतारे। नाम जनिक स्मरण होइत मनु जाइत अछि भवपारे।।2।। किन्तु पूर्व शुभ युग सब बीतल आब न छथि ओ मिथिला। कर्म्म- धर्म्म - वंचित निज जनसँ भय गेली अछि शिथिला।। जतय मदन अरु कालिदास छल शंकर झा सन वीरे । ओतय मूर्ख महिषी चरवाही मे अछि पड़ल अधीरे ।।3।। मैथिल ! आबहुँ उठु एहि जगमे सब क्यो काज करै अछि। पूर्वोपार्जित यशक ध्यान कयला सँ लाज अबै अछि ।। दुर्दिन अपन देखि कय , आबहु पढ़ु निज वेद विचारू । देशक उन्नति करू सुचित भय , भाषा अपन प्रचारू ।।4।। एच. ई.स्कूल , राजनगर । "ओहि कालक मैथिली कविताक विषय-वस्तु मात्र देश-दशा आ मातृभाषा रहैत छलए। 'व्यास' जी ओहू आयु मे, माने छात्रावस्थो मे, मैथिली काव्यक केन्द्रीय धाराक संग छलाह। उक्त कविताक प्रतिपाद्य विषय यैह थिक। एतावता प्रमाणित होइत अछि जे 'व्यास' जी ओहू आयु मे , छात्रावस्थो मे, मैथिली काव्यक केन्द्रीय धाराक संग छलाह। दोसर बात, 'व्यास' जी अपन जाहि मानसिकताक लेल आइ जानल-मानल जाइत छथि ताहि सँ भिन्न हुनक ओहू दिनक विचार नहि छलनि। तात्पर्य ई जे 'व्यास' जी स्कूलिए जीवन मे 'व्यास' बनि गेल छलाह; आ से केवल उपनामे मे नहि, वैचारिकता मे सेहो।" 'व्यास' जीक लेल मोहन भारद्वाज जीक वक्तव्य ! संपादकीय सूचना-एहि सिरीजक पुरान क्रम एहि लिंकपर जा कऽ पढ़ि सकैत छी- मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-1 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-2 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.२.प्रमोद झा 'गोकुल'-मोहभंग प्रमोद झा 'गोकुल' मोहभंग
-मम्मी !! -हँ कह ने ! -कने हम जाइ छियौ ! -कत्त ? -निच्चाँ ! -से किए ? -एकरा ऐ बुकक काज छै ! किताब देखबैत बाजल । -त' द' दही,फेर ल' अनिहें ! -नै गै ! ई एकर फोटो कराके लेतै ! -बेस ते जो । मुदा जल्दिये चल अबिहें,राति त' अधिक भ' गेलैये रौ ! -बस ,आधा घंटा मे आबि रहल छियौ ! -झपसिन जो आ आ !!बापो ऐबते हेथुन ! तखने घरक घंटी घनघना उठलै.अबाम बाली धरफराके दरबज्जा खोललैन ते देखत छथि सौरभक पप्पाके एकटा भैरगर झोड़ा नेने ठाढ़।.सकपकैत बजलीह ओ -मर कखैन एलियै ? -पंद्रह मिनट सँ माइ-पूतक स्नेहिल वार्तालाप सुनि बेसुध भै गेल छलहुँ ,तेँ घंटी दबबै मे विलम्ब भेल. -ओ…आब बुझलियै .अहूँ के कनसोह लै के आदैत कहियो नै जायत ।हद्द छी अहूँ !चलू घर आउ !!! कड़ैक के बजलीह अबाम बाली -ऐ मे बिगरैक कोन बात भेलै ?जे अहाँ एना इनहोर भै रहल छी !दिनो मे त' ई काज भैसकैत छलै ! -किताबक फोटो लेतै एकर दोस…ओ एलैये लै ले एखन आ ई जैतै दिन मे !हुँह… ओ…ठीक !एक कप चाह आ पानि भेटत ? -हँ दै छी ! एही अंतराल मे सौरभ अपन दोसक संग बाहर होमय लागल कि पिता गम्भीर स्वर मे टोकलखिन -कतेक बजै छै ? -साढ़े आठ ! -नौ बजे तक आबि जैहेँ ! -ठीक छै ! तखने अबामबाली चाह आ पानि टेबुल पर रखैत बजलीह - -लिय पीबू आ मोन शान्त करू ! चुप्पे मूहेँ मोहनजी पानि पीबि चाहक चुस्की लेमय लगलाह परंतु धेयान धैर टिक टिक करैत घड़ीक सुइये पर छलैन्ह .जखन घड़ीक सुइ दस पर चल गेलै तखन पत्निक दिस प्रश्न सूचक दृष्टियें तकैत बजलाह -दस बाजि गेलै आ अहाँक दुलड़ुवाक कतौ पता नञि ! -हे हमर खून बेसी नै चूसू…जे घड़ी ने एलैये ! -फेर वैह बात !वच्चा अहाँक कत' जाइये आ की करैये से पता अछि? -हँ कोनो अपकर्म नै करैये !चुप रहू नै ते… -बेस ते अहूँ कान खोइल के सूनि लिय ! - की ? - यैह जे बेटा के जँ पुलिश थाना पर पकैर के ल' जैत त' हम छोड़बैले नै जेबै ! -हँ हमर बेटा चोरी आ डकैती करैये ने !जे पुलिश पकैर के ल' जेतै ! -टोला मुहल्ला मे चारिटा एहन छौंड़ा छै जे छौंड़ी सब के सीटी मारैत आँखि मुनि का बाइक चलवै छै,तै मे अहूँक बेटा अछि ! -अहाँ पागल ते नै भ' गेलौंएँ जे एहन भाखा भखै छी ! -एखन तक ते नै भेलौंएँ मुदा अहाँ सब क' देब ! -के अहाँक संग माथ भुकाबे ? एतवा कहि अबामबाली टीभी ऑन कय कोनो सिरियल देखय लगली.थोड़बे कालक बाद कॉल बेल बाजि उठलै क्रीं क्रीं क्रीं…दरबज्जा खोललैन ते देखै छथि झूमैत ठाढ़ बेटा के .अकबका गेली दृश्य देखि.अजीब तरहक गंध नाक में लगलैन ते अपरतीब होइत बजलीह -एहन दुर्गंध कत से अबै छै रौ ! आर कने सटिके गेली त' जी ओकवैत जोर सँ बाजय लगलीह-शराव पी के एलेँहेँ रौ !! सिगरेटोक गंध सेहो लगैये …ठीके कहै छलौं अहाँ यौ…पतिक दिस कातर दृष्टियें कनैत बजलीह -शान्त होउ! बूइझ गेलियै ने वास्तविक बात ! आब सुधैर जायत !जो भीतर कल बल सूत गे ! काल्हि तोहर खबैर लै छी . अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.३.परमानन्द लाल कर्ण-तीर्थक्षेत्रक माहात्म्य परमानन्द लाल कर्ण तीर्थक्षेत्रक माहात्म्य \ अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.४.लाल देव कामत-कोय बोलतै रे ! लाल देव कामत कोय बोलतै रे ! आई काल्हि शोसल मीडिया पर एक ट्रेंड खूब जोरगर रूपेँ सुनाए पड़ैत छैक। कोई बोलतै रे , से शव्द आ वाक्य जेना पूर्वी मिथिलाक' उच्चारण होईछ ,तेनाहि ध्वनि सुनि पड़ैत अछि। कियो बजताह की? एहिं शव्द केँ सुपौल , सहरसा, मधेपुरा,अररिया, खगड़िया आ कटिहार जिलाक आदि ठाम प्रयुक्त शब्द आ वाक्य केँ सोतियामी मैथिली सँ पृथक बूझल आ सुनल जाईछ- कोई बोलतै रे '। भाषायी आधार पर मैथिली बोलचाल भारत आ नेपाल दू देशके मिथिलांचल प्रक्षेत्रमे होईत अछि। मैथिली बहुत पुरान समृद्ध भाषा छी, तकरा ज्योतिरीश्वर आ विद्यापति'क रचना सँ प्रमाण रूपेँ जानल जाईछ। संस्कृत सँ अबहट आ जनमानस केर वाणी मैथिली भाषाकेँ बाजय लेल कोनू विशेष भांगठ नहिँ रहैछ। मुदा पुरातनकाले सँ सामाजिक मान्यतामे कहल गेल छैक जे कोसभरि पर पानि आ तीनकोस दुरी पर वाणीमे वदलाउ स्वत: रहैछ। से हम ठिके तीन कोस हटनी - नौआबाखर सँ अपन मातृक बालपनमे गमहरिया,पिसियौत भायके सासुर पड़री ,बहिनक सासुर केवटापटी - रसुआर आ पितियौत बहिन के सासुर जोबहा अरहा तथा बाबुक मातृक सुकमारपुर नारेदिगर प्रगाना पहिले खेप गेलहुँ तँ ओतुका वार्तालापमे अपनाकेँ असहजताक अभास भेल रहय। ओहि गाममे सबके सब यौ सम्बोधनक बदलामे जेष्ठ श्रेष्ठ लेल गौ! आ अपना सँ छोट वयस लेल रौ एवं छोट वालिका ; छौरी लेल गे शव्द क' उच्चारण कयल जाईत छल। से अपना सँ पैग स्री सम्बन्धमे यथा- माय,बहिण, दीदी,बड़की काकी - मामी , नानी ,मैयाँ लेल हे गे ! शव्द बाजल जाइ छलैक। किनको पैघ लोकके दुरस्थ सँ शोर पारय लेल हे हौऊ ! आ अपना सँ छोट वयक्रमके छौड़ाकेँ चिकैरके बजाओल गेनाई पर - हे रे हे ...! शव्द बाजल जाइ। तहिना चद्दरि(शाल) के लेल एकलाई शव्द आ कमीज शव्द लेल अंगा तथा ब्लौज 'क जगह आँगी कहल जाई। सारी केर जगह नुआँ आ धोतीके लेल ननकिलाठ कहैत सुनि अचरज हुअय। तकियाके लेल पर्यायवाची शब्द सीरमा (बार्ली) आ पनही लेल जूता तथा सटका लेल पेना बाजल जाईक। हांसु केँ कचिया, दबियाके पगारिया आ बसुला कहल जाए तँ बैसला केँ कोन ओजार शव्द दै से स्मरण नहिं अबैत अछि । एहिं तरहेँ बालमन पर नव शव्द ज्ञान हेबाक बुझबाक लाभ ओहि समयके यात्रा सं भेल छल। से एकहि गाममे सवर्ण तबकामे जे मैथिली सुसंस्कृत रूपेँ बाजल जाईछ ,ओहि गामक पिछरल आ अधिक पिछरल समाजमे ठेंठी मैथिली भाषा रूपेँ बाजल जाईछ। ताहि गामक दलित - महादलित समाजमे अपभ्रंश मैथिली बजैत सुनल गेल छैक। जहन की एतय तीन कोस बाला भौगोलिक दुरी नहिं न रहैछ,आ एके राजस्व गामक टोल भिन्न - भिन्न बसाबट रहैछ। मुदा ताहिके मैथिली भाषा नहिं मानि ; बोली-वाणी क्षेत्रीय बुझल जाईत छैक। एखन २ हजार लगधक लेखकमे आधा लोक जे शिक्षक संवर्ग सँ छथि,ओ शपथपत्र बनेबामे आ मानक तय करबाक फिराकमे राति -दिन लागल छथि। से कदाचित पाठक वर्ग लाखोंमे होयत जे हापिडिपी बनबै सँ अपनाकेँ फराक रखने अछि। मैथिली मानक मिथिलांचलमे रहनिहार बेसी आवादी'क मातृभाषा सँ हुअय। जे कियो तहन - तखनके जगह तब ' शव्द' बजैत आबि रहलैन हन् ,तेकर परोक्षरूप सँ वहिष्कार करैक ई अन्दरूनी महा षड्यंत्र रचल जा रहल अछि। तेँ मिथिला राज्य निर्माण केर माँग जाधरि एतुका सर्वहारा वर्ग नहिँ उठाओत ,ताधरि ई माँग कमजोर बनले रहत। जा धरि मैथिली बजनिहार क' बीच ई गहींरपन भेदभाव नहिं मिटत ,तँ जोर कतय सँ आओत? तेँ मैथिली मानक लेल सब बिन्दु पर सम्यक विचार,सब वर्गक हीतमे मुदा उठय। मैथिली केर जे क्षेत्रीयता भाषामे फरक छै, तकर समन्वय आवश्यक अछि। डॉ० अशोक झा अबिचल ऐ संदर्भ म विस्तृत आलेख कोसी संदेश त्रिमासिक पत्रिका म लिखने रहथि। डॉ० महेंद्र नारायण राम करैत छथि " लोक-संस्कृतिक मूलमे जे जन समूह रहैछ, जेनाकि दलित, शोषित पीड़ित एकरा पिछरलक संज्ञा सँ अविहित कयल जाइत अछि से असली मैथिली जीवी छै। मैथिली भाषा ओकरा लोकगाथामे , लोककथामे लोककला, लोकगीत लोकसंगीत,लोकशिल्प, लोकनाट्य, लोकनाच, लोकवाहा,पावैन तिहार,भावभगैत, गहबरगीत रहन- सहन, खाइन-पीअन आ पेनहब-ओरहबमे रचैत बसैत य। श्री जगदीश प्रसाद मंडल जीके उक्ति छैन-"सवर्ण समाज आब गाम देहातमे बढ़ कम रहैत छैथ। हुनक बाल बतरू सेहो मातृभाषा मैथिलीमे कमे परंच हिन्दी अंग्रेजी आ आन विदेशी भाषा केँ अपनौने जा रहल छैक। एक सरकारी जातीय सर्वेक्षण सँ थाह चलैत अछि- निशन्न मैथिली भाषाक प्रयोग कम साक्षर आ अनपढ़ गरीब गुरबा केर द्वारा होईछ । ओकरे कंठ सँ विशुद्ध मैथिली बहराईत अछि आ ओ ऐ मैथिली भाषा केँ जिआके अक्षण्णुन आईधरि रखने अछि। ई समाज मैथिली नाम पर सुविधा वंचित रहल, एकर हिस्सा बखरामे लुट मचेनहारके सब निठाहे देख लैत य। ई एक समाजशास्त्रीए ज्वलंत समस्या उत्पन्न कयल जा रहल छैक। .....से कोय बजतै रे! -लाल देव कामत मो० ७६३१३९०७६१ अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.५.कुमार मनोज कश्यप- लघुकथा- पारस कुमार मनोज कश्यप
लघुकथा- पारस सूर्यनाथ भोरे केबाड़ खोलि चौखटि सs जखने डेग बाहर देलनि तs देखलनि ओसारा पर कुक्कुर पड़ल। कतबो ‘’हट्ट- हट्ट’’ आ लाठी फटकारला के उपरांतों कुक्कुर नहिं उठल; तs बुझि गेला जे मुईल पड़ल अछि। भरि मोन जते जे गारि अबैत छलनि से कुक्कुर पोसनिहार के पढ़लनि। फेर सोमना के ताकs बिदा भेला तs ओहो गेल छल सुगर चड़बय। पहर दिन बितला के बाद सोमना बड़-बड़ाईत हाजिर भेल। गमछा सs मुरेठा बन्हलक फेर डाँड़ सs रस्सी खोलि कुक्कुर के पछिला दुनू पैर मे ससरफानी बान्हि घिसिया कs लs जाय लागल। 'हाँ .... हाँ! .... थम्ह .... थम्ह! रे अलबटहा! कि करै छैं ई? सुझै नै छौ कुक्कुर के मुँह सs शोणित बहै छै? सौँसे घर-द्वार घिनेलै रे अन्हरा! कते भारी छै ई रे? कोरा मे उठा लेबैं से नहिं होई छौ? हरामखोर नहिंतन! पाई लेता धरा कs आ काज करता बेगारी जकाँ!’’ - सूर्यनाथ अपन सभटा भड़ास सोमने पर निकालि लेबs चाहैत छलाह। - 'थम्हू! की बाजै छी आहाँ? उपकार मानियौ एकर; नहिं तs सड़ि कs गन्हाईत तs घर-द्वार सभ छोड़ि कs पड़ाय पड़ितै।' कनियाँ के बात सभ के थतमता देलक। ओ फेर सोमना के देखि कs बजलीह - 'आहाँ अपन काज करू, शोणित के हम निपि कs साफ कs देबै। आ हे! फूर्ति सs एकरा फेकि कs हाथ-मूँह धोने आऊ। ताबत हम चाह-जलखै के व्योंत कs कs रखैत छी।‘’ सोमना के बकझड़ लागि गेलै - साँच छै ई कि ओ ठाढ़े-ठाढ़ सपना रहल अछि ? -कुमार मनोज कश्यप सम्प्रति: भारत सरकारक उप-सचिव, संपर्क: सी-11, टावर-4, टाइप-5, किदवई नगर पूर्व (दिल्ली हाट के सामने), नई दिल्ली-110023 # 9810811850 ईमेल: writetokmanoj@gmail.com अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.६.आचार्य रामानंद मंडल-मैथिली मानकीकरण/ महाकुंभ आचार्य रामानंद मंडल मैथिली मानकीकरण/ महाकुंभ १ मैथिली मानकीकरण आइ कालि एगो नव मैथिली शोध संस्थान जोर शोर से मैथिली के मानकीकरण पर भीरल हय। नेपाल के अंतरराष्ट्रीय मैथिली भाषाविद डॉ रामावतार यादव,वरीय आलोचक डा रमानंद झा रमण,वरीय साहित्यकार डा भीमनाथ झा आ अन्य के समूह द्वारा मैथिली के स्थिरीकरण के लेल मानकीकरण के आवश्यकता बतैलन।समुह द्वारा मैथिली के वर्तनी के स्थिरीकरण के दिशा मे काज कैल गेल।इहो बताएल गेल कारक के विभिक्त जोर के लिखल जाए। कारण कि आबि मैथिली विश्व भाषा बन गेल हय। परंतु समुह मैथिली के विभिन्न शैली यथा अंगिका, बज्जिका, खोरठा आ नागपुरी पर कोनो विचार न कैलन।समुह अतीत के विचार से प्रभावित हो अइ सभ के उपेक्षित कैलन जेना अतीत मे करैत रहलैन । मैथिली लोकभाषा के पाणणि के व्याकरण जेका संस्कृतनिष्ठ बनाके मैथिली के लोक से दूर कै देलन।अइ संदर्भ मे एगो घटना के स्मरण आवश्यक हय जे एकबार प्रसिद्ध साहित्यकार जगदीश प्रसाद मंडल के रचना के बर्तनी के बदल देल गेल रहय।परंच बाद मे इ विदेह पत्रिका वोइ रचना के हु बहु हु प्रकाशित कैलन।बाद मे जगदीश प्रसाद मंडल के उपन्यास पंगु पर साहित्य अकादमी पुरस्कार से पुरस्कृत कैल गेल। आब विचार के विषय इ हय कि केन्द्रीय मैथिली अर्थात मानक मैथिली जेकरा सोतीपुरा मैथिली कहल जाइ हय मे तत्सम शब्द के प्रयोग ज्यादा होइ हय जौं कि अंगिका -बज्जिका मे तद्भव आ देसी शब्द के प्रयोग होइ हय। वर्तनी मे जंहा मैथिली मे ण,ष,ऋ के प्रयोग कैल जाइ हय त इ बज्जिका मे ण,ष,ऋ के प्रयोग निषेध कैल गेल हय।ण के बदले न,ष के बदले स आ ऋ के बदले रि के प्रयोग कैल जाइ हय। तुलनात्मक अध्ययन कैला पर पायल जाइ हय कि एकरा उच्चारण से कोनो मतलब न हय बल्कि वर्तनी मे भिन्नता के द्योतक हय। एकटा गाम आ एकटा समाज के व्यक्ति के वर्तनी मे भिन्नता पायल जाइत हय। यथा - अतीत मे लोहना मधुबनी के विद्वान रमाकांत झा आ विद्वान कांचीनाथ झा किरण। वर्तमान मे वोही गाम के कथाकार अशोक आ शिवशंकर श्रीनिवास। मिथिला के विभिन्न क्षेत्र वर्तमान मे बज्जिकांचल आ अंगिकांचल हो आ अतीत के मिथिला आ तिरहुत क्षेत्र के मैथिली भाषा भिन्नता के बोली कह के खारिज करनाई अपने पैर पर अपने कुरहर चलनाइ साबित होयत। भिन्न-भिन्न क्षेत्र के शब्द आ वर्तनी के समेकित करनाई आवश्यक प्रतीत होइ हय। शब्द आ वर्तनी के पर्यायवाची बनाबे के आवश्यकता हय।परंच वर्तनी के नाम पर वर्तमान संपादक महाकवि विद्यापति के अवहट्ट रचना के शुद्ध मैथिली बनाबे पर भिरल हतन। २ महाकुंभ सनातन धर्म मे छह बर्ष पर अर्धकुंभ आ बारह बर्ष पर कुंभ के विधान हय। अर्धकुंभ छह बर्ष पर प्रयागराज आ हरिद्वार में लगय हय।उत्तर प्रदेश सरकार कुंभ के नाम महाकुंभ क देलन हतन। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज मे आइ काल महाकुंभ लागल हय। पौराणिक कथा के अनुसार समुद्र मंथन के उपरांत अमृत कलश प्राप्त भेल रहय। अमृत पान के लेके देव आ दानव मे पहिले हम त पहिले हम पान करब के लेल संघर्ष भे गेल।छीना झपटी में अमृत कलश से अमृत के बूंद चार स्थान पर गिर पड़ल। चार स्थान प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन आ नासिक हय। अमृत वितरण के लेल देव विष्णु मोहिनी रूप धारण क के अमृत वितरण कैलन। कुंभ स्नान मे नागा साधु के प्राथमिकता देल जाय हय।२०२५मे कुल छह शाही स्नान हय। पौष पूर्णिमा १३जनवरी २०२५के प्रथम शाही आ द्वितीय मकर संक्रांति १४ जनवरी २०२५ के स्नान संपन्न भे गेल हय। तृतीय मौनी अमावस्या २९ जनवरी २०२५, चतुर्थ वसंत पंचमी ०३ फरवरी २०२५ पंचम माघी पूर्णिमा १२ फरवरी २०२५ आ अंतिम शाही स्नान २६फरवरी २०२५के हय। वर्तमान महाकुंभ से आयल समाचार में सोशल मीडिया पर कुछ समाचार काफी बायरल हय।जैमे एगो माला बेचेबाली बंजारण लरकी मोनालिसा नाम से चर्चित हय। जेकर सुंदरता खास क के नीलगर आंख शोहरत बटोरले हय।वोकर सुंदरता के कारण वोकर ब्यापार सेहो प्रभावित भेल।वोकर कहना हय कि लोग हमर भिडियो बनबैय परंच माला न खरीदय हय।आब हमर भिडियो वोहे बनायत जे हमरा से कम से कम एगो माला खरीदत।आइ मोनालिसा महाकुंभ के मोहिनी बनल हय। दोसर आइआइटियन बाबा मुकेश सिंह खुब बायरल हय।वो अपन बुद्धिमत्ता से लोग बड प्रभावित क रहल हय।परंच कुछ उटपटांग बयान से हुनका संबंधित अखाड़ा से निष्कासित क देल गेल त दोसर अखाड़ा अपना लेलक।अपना पिता के बारे मे व्यक्त विचार सनातन परंपरा के विपरीत हय। तेसर नकली साधु के नाम पर लोग साधु से बदतमीजी कैल देखल जा रहल हय। चौथा अघोरी नागा लोग के काफी प्रभावित क रहल हय। पंचम माडल लरकी हर्षा नकली जटा के कारण विवादित रहल।वोकरा संबंधित अखाड़ा से निष्कासित कैल गेल। महाकुंभ में प्राकृतिक आपदा अगलगी चर्चा में रहल।दू गो सेक्टर में आग लग गेल। सैकड़ों टेंट काटेज आ कुटिया जल के राख भे गेल। आपदा प्रबंधन के तत्परता से कोनो जान के हताहत न भेल। एकटा महिला कहैत पायल गेल कि जे हम वस्त्र पहिनले छी वोकरा छोड़ के कुछियो न बांचल।हमर भगवान सेहो जर के राख भे गेल। सम्प्रति पंद्रह सौ लोग नागा साधु बनलन। एगो फिलमी हिरोइन ममता कुलकर्णी सेहो किन्नर महामंडलेश्वर बनलन। मौनी अमावस्या २९ ननवरी २०२५के भगदड़ मे प्राप्त सूचना के आधार पर १२ श्रद्धालु के मृत्यु भे गेल आ सैकड़ों घायल भे गेल। महाकुंभ लागल हय। -आचार्य रामानंद मंडल सीतामढ़ी। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.७.प्रणव कुमार झा- टी.यू. 142 विमान आ आईएनएस कुरसुरा पनडुब्बी के झलक (यात्रा संस्मरण) प्रणव कुमार झा टी.यू. 142 विमान आ आईएनएस कुरसुरा पनडुब्बी के झलक (यात्रा संस्मरण) समुद्रक सिहरन भरल लहर सभ आ अनन्त नीला आकाशक संगत विशाखपट्टनम शहर अपन विविधतासँ भरल आकर्षणक लेल प्रसिद्ध अछि। खास कऽ के औद्योगिक, व्यापारिक आ सामरिक महत्व के संगम अछि ई शहर। एहि शहर के रामकृष्ण समुद्र तट एकटा आकर्षक स्थल अछि जतय प्रातः काल आ संध्याकाल मे सागरक लहरि के देखैत, गिनैत वा ओकरा संगे खेलाइत समय बितेनाई मोन के किछ काल लेल एकटा सुकून आ सुखद अनुभूति दैत छैक। एना अनुभव होइत छैक जे सागर के लहर सब भगवान जगन्नाथ के मधुर पावन स्पर्श आ गंध के अपना संग समेटने लऽ आबि रहल होई। कतेको लोक आ पर्यटक नित प्रातः आ संध्याकाल एहि मनोरम हवाखोरी के आनंद लैत अछि। एहि बीच हमरो ई आनंद लेबाक अवसर भेटल छल। एहि क्रम मे सागर किनारे टहलैत बौखैत एकटा आकर्षण के केंद्र देखय मे आयल - टि.यू. 142 विमान संग्रहालय आ आईएनएस कुरसुरा पनडुब्बी संग्रहालय। इतिहास, विज्ञान आ वीरताक संगमक जीबैत-जागैत प्रमाण अछि ई संग्रहालय जे एहि सागर तट पर स्थित छैक। ई संग्रहालय मात्र एकटा ऐतिहासिक संरचना नहि, बल्कि आकाशीय आ पातालीय रणक्षेत्रमे भारतीय नौसेनाक अपराजेयता केँ दर्शाबयवला प्रतीक छी। स्वाइत जिज्ञासा भेल त पहुंचलहु हमहु ऐ संग्रहालय के देखबाक लेल। संग्रहालय मे, बहुत रास गार्जियन सभ, बच्चा, बुढ़ नौजवान सभ टोली बना बना कऽ संग्रहालय के अंदर पहुँच रहल छलाह आ ओकरा माध्यम से अपन सेना के वीरता, तकनीकी आ इतिहास के अनुभूति कऽ रहल छलाह। विशाखपट्टनमक गौरव: टि.यू. 142 संग्रहालयक गाथा विशाखपट्टनमक रामकृष्ण समुद्र तटक नजदीक, एकटा अद्वितीय संग्रहालयक रूपमे टि.यू. 142 विमानक संरचना स्थापित अछि। ई संग्रहालय मात्र एकटा ऐतिहासिक स्थल नहि, बल्कि भारतीय नौसेना आ ओकरा गौरवशाली गाथाक जीवन्त दस्तावेज छी। तीन दशक धरि भारतीय महासागरक चौकीदार आ पाकिस्तानी पनडुब्बी चालकक डरक प्रतीक रहल टि.यू. 142 आइ विश्रामक अवस्था मे अछि, मुदा ओकरा योगदानक गाथा अखनो चिरस्मरणीय अछि जे ऐ म्यूजियम के माध्यम स दर्शकक मोन मे जीवंत भ जाय छैक। 1988 मे भारतीय नौसेना द्वारा टि.यू. 142 केँ अपनायल गेल। एहि विमानक मूल उद्देश्य अमेरिकी पोलारिस पनडुब्बी-क लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइलक परिप्रेक्ष्य मे प्रतिरोध क्षमता बढ़बए छल। ई सोवियत यूनियनक उत्कृष्ट सामरिक डिज़ाइन छल। एहि गहन गतिक विमानक डिज़ाइन ओहि समयक शीतयुद्धक सामरिक चुनौती केँ ध्यानमे राखि कयल गेल छल। टि.यू. 142M, जे सोवियत डिजाइन ब्यूरो द्वारा निर्मित छल, अपन समयक एकटा अग्रणी प्लेटफॉर्म छल। शीतयुद्धक दौरान, ई विमान रूसी, यूक्रेनी आ भारतीय नौसेना लेल कार्यरत रहल। भारत लेल, ई विमान विशेष रूप सँ साझा कएल गेल छल, जे ओय समय मे सोवियतक भारतक संग विश्वासपूर्ण संबंधक संकेत अछि। रूसक प्रसिद्ध ट्यूपोलेव डिज़ाइन ब्यूरोक अद्वितीय कृति टि.यू. 142 के निर्माण 1968 ई. मे भेल छल। ई विमान समुद्री गश्ती आ लंबा दूरीक पनडुब्बी-रोधी अभियानमे उपयोग कैल गेल छल। भारतीय नौसेनाक सेवा मे ई अद्वितीय विमान 1988 सँ 2017 धरि रहल। 'एलोर्सक बहादुर' नाम सँ प्रसिद्ध, ई विमान अपन समयमे नौसेनाक रीढ़ मानल जाइत छल। एहि इंजन केँ विशेष रूप सँ समुद्री मिशन आ लंबा दूरीक गश्ती लेल डिजाइन कएल गेल अछि। रात्रिकालीन उड़ान आ ईंधन भरबाक सुविधा लेल विमानक नाक पर फ्लश लाइट आ ईंधन भरबाक प्रोब लगाओल गेल अछि। डिजाइन आ संरचना टि.यू. 142 विमानक डिज़ाइन मात्र एकटा युद्धक यंत्र नहि, बल्कि एकटा इंजीनियरिंग चमत्कार छी। आकार आ माप: विंगस्पैन: 51.1 मीटर। लंबाई: 49.5 मीटर। ऊँचाई: 12.12 मीटर। प्रोपेलर व्यास: 5.6 मीटर। इंजन: चारि कुज़नेत्सोव NK-12MV टर्बोप्रॉप, जे 14,795 HP शक्ति उत्पन्न करैत अछि। गति: 925 किमी/घंटा। सेवा सीमा: 13,000 किमी बिना ईंधन भरने। शक्ति आ क्षमता ई विमान अपन अत्याधुनिक सेंसर सभ, सोनार बुई आ मैग्नेटिक एनोमली डिटेक्टरक मददसँ पनडुब्बीक खोज आ नाश करबाक कार्य करैत छल। ऑपरेशन अवधि: 10.5 घंटा तक निरंतर निगरानी। आयुध: टॉरपीडो, बम आ डीप चार्ज। DK-12 गन सिस्टम, जे 23 मिमी AM-23 तोप सँ लैस अछि। टि.यू. 142 भारतीय नौसेना लेल मात्र एकटा युद्धक साधन नहि, बल्कि रणनीतिक महत्त्वक एकटा अचूक हथियार बनल। इतिहासक गौरवगाथा 1. समुद्री गश्ती आ पनडुब्बी शिकार: विमान कर्शुन-के खोज प्रणाली, एमएमएस-106 लादोगा मैग्नेटोमीटर, आ सक्रिय आ निष्क्रिय सोनार बुई सँ लैस छल। ई पनडुब्बीक हलचल केँ सटीकता सँ पकड़बाक क्षमता रखैत अछि। 2. मिशनक अवधि: एक बेरक उड़ानमे 16 घंटा तक निरंतर गश्ती कएल जा सकैत अछि। 3. सक्रिय योगदान: कारगिल युद्ध आ विभिन्न समुद्री अभियानमे अपन महत्वपूर्ण भूमिका निर्वाह केलक। 4. ई विमान भारतीय महासागरक प्रहरी बनल, जे भारतीय तटीय सुरक्षा आ पनडुब्बी विरोधी ऑपरेशनक अभिन्न हिस्सा छल। 5. 2017 मे, ट्रोपेक्स अभ्यासक दौरान, एकटा टि.यू. 142 विमान 53 घंटाक उड़ान रिकॉर्ड कएलक। 6. एहि विमान केँ भारतमे ’अल्बाट्रॉस’ आ ’महासागरक प्रहरी’ कहल जाएत अछि। भारतक नौसेनामे टि.यू. 142 कए शामिल करब समुद्री सुरक्षा लेल क्रांतिकारी साबित भेल। ई विमान पनडुब्बीक खोज आ नष्ट करबाक लेल आवश्यक सोनार बुई सिस्टम आ उन्नत मैग्नेटिक एनॉमली डिटेक्टर सँ सज्जित छल। कारगिल युद्ध आ भारतीय महासागरक रणनीतिक मिशनमे एहि विमानक महत्त्वपूर्ण भूमिका रहल। आईएनएस विक्रमादित्यक सहकार्य सँ चलैत एहि विमानक अभियान भारतीय समुद्री सीमा केँ अजेय बना देने छल। 2017 मे जखन ई विमानक सेवा समाप्त भेल, तखन भारतीय नौसेनाक इतिहासमे एकटा स्वर्णिम अध्याय बंद भेल। संग्रहालयक निर्माण आ वर्तमान स्वरूप टि.यू. 142 केँ सेवा समाप्तिक बाद विशाखपट्टनमक समुद्री तट लग संग्रहालयमे परिवर्तित कएल गेल। 2017 मे ई संग्रहालय आम लोकक लेल उद्घाटित भेल। एतय ई विमान केँ एहन तरहेँ स्थापित कएल गेल अछि, जहि सँ आगंतुक सभ विमानक अंदर आ बाहर दुनूक अनुभव कऽ सकैत छथि। संग्रहालयक मुख्य आकर्षण सभ: 1. इंटरएक्टिव डिस्प्ले: संग्रहालयमे विमानक अंदर जँका संरचना राखल गेल अछि, जतय आगंतुक सभ केँ सोनार सिस्टम, रडार आ विमानक इंजिन संचालनक अनुभव होइत अछि। 2. विमानक अंदरक यात्रा: विमानक अंदरक हिस्सा देखबाक व्यवस्था अछि, जतय तकनीकी उपकरण सभ आ पाइलटक केबिनक साक्षात अनुभव होइत अछि। 3. थीम पार्क: संग्रहालय लग एकटा थीम पार्क सेहो अछि, जतय बाल-बच्चा सभ केँ विमानक मॉडलक संग ज्ञान प्राप्त करबाक अवसर भेटैत अछि। संग्रहालय मे घुमैत हमर नजर एकटा इंटरएक्टिव डिस्प्ले पर पड़ल जाहि मे भारतीय सेना द्वारा देल जाय बला विभिन्न चक्र आ मेडल के डिजाइन के खिस्सा जांबाक अवसर प्राप्त भेल सावित्रीबाई खानोलकर: पराक्रमक प्रतीकक सृजिता सावित्रीबाई खानोलकर (जन्म: ईव इवोन मडाय डे मारोस, 20 जुलाई 1913 -26 नवम्बर 1990) स्विस-भारतीय डिजाइनर छलीह, जे भारतीय सेनाक सर्वोच्च वीरता पुरस्कार परम वीर चक्रक डिजाइनर रूपमे प्रसिद्ध छथि। ई पुरस्कार युद्धक समयमे असाधारण पराक्रम देखेनिहार वीर सैनिक सभ केँ प्रदान कएल जाइत अछि। सावित्रीबाई खानोलकर अनेक महत्वपूर्ण वीरता पदकसभक डिजाइन सेहो कएलनि, जइसमे अशोक चक्र (AC), महावीर चक्र (MVC), कीर्ति चक्र (KC), वीर चक्र (VrC) आ शौर्य चक्र (SC) शामिल अछि। ओ 1947 केर जनरल सर्विस मेडलक डिजाइन सेहो कएलनि, जे 1965 धरि उपयोग कएल गेल। सावित्रीबाई एकटा कुशल चित्रकार आ कलाकार सेहो छलीह। सावित्रीबाई खानोलकरक जन्म ईव इवोन मडाय डे मारोस नामसँ न्यूशाटेल, स्विट्जरलैंडमे 20 जुलाई 1913 केँ भेल छल। 1932 मे ओ भारतीय सेना केर कैप्टन (बादमे मेजर जनरल) विक्रम रामजी खानोलकरसँ विवाह कएलनि। विवाहक बाद ओ सावित्रीबाई खानोलकर बनलीह, हिंदू धर्म अपनएलनि आ भारतीय नागरिकता प्राप्त कएलनि। भारतक स्वतंत्रताक बाद, भारतीय सेनाक एडजुटेंट जनरल मेजर जनरल हीरा लाल अटलक अनुरोधपर सावित्रीबाई केँ भारतक सर्वोच्च वीरता पुरस्कार परम वीर चक्रक डिजाइन करबाक जिम्मेदारी देल गेल। मेजर जनरल अतल केँ विश्वास छल जे भारतीय संस्कृति, संस्कृत आ वेदसभमे सावित्रीबाईक गहन ज्ञान एहि पुरस्कारक डिजाइनमे वास्तविक भारतीय भावना समाहित करत। परम वीर चक्रक डिजाइन भारतीय संस्कृति आ पराक्रमक प्रतीक छी। एहि चक्रक रूपमे चक्रवर्ती सम्राट अशोकक सिंहासनपर उकेरल चक्रक प्रतीकक उपयोग कएल गेल अछि। ई डिजाइन युद्धमे वीरताक अद्वितीय भावनाक प्रतिनिधित्व करैत अछि। सावित्रीबाईक बड़का बेटी कुमुदिनी शर्माक देवर मेजर सोमनाथ शर्मा (4 कुमाऊँ रेजिमेंट) भारत-पाकिस्तान युद्ध 1947क दौरान 3 नवम्बर 1947 केँ कश्मीरमे वीरगतिक प्राप्त कएलनि। हुनका मरणोपरांत पहिल परम वीर चक्र प्रदान कएल गेल। ई संयोग सावित्रीबाईक जीवनक वीरताक इतिहासमे एकटा अद्वितीय स्थान बनाबैत अछि। एहि संग्रहालयक यात्रा कए संपूर्ण रूपेँ ऐतिहासिक, तकनीकी आ सांस्कृतिक अनुभवक संग जोड़ल जा सकैत अछि। समय: संग्रहालय सप्ताहक सातो दिन 2 बजे दुपहर से 9 बजे राति धरि खुलल रहैत अछि। प्रवेश शुल्क: 100 रु० मे टीयू 142 आ आईएनएस कुरसुरा दुनु संग्रहालय के संयुक्त टिकट भेटय अछि। बच्चा लेल ई दर आधा भ जाय छैक। विशाखपट्टनमक रत्न: आई.एन.एस. कुरसुरा संग्रहालयक गाथा विशाखपट्टनमक समुद्र तटपर स्थित आई.एन.एस. कुरसुरा संग्रहालय सेहो एकटा आकर्षक स्थल छी, जतऽ आधुनिक सैन्य इतिहास, नौसेनाक गौरव आ समुद्री अभियानीक अद्भुत संगम देखल जा सकैत अछि। ई संग्रहालय भारतीय नौसेना आ पनडुब्बी अभियानीक महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज छी, जेकरा देखबाक संग अहाँक मनमे अद्भुत गर्व आ प्रेरणा उत्पन्न होइत अछि। आई.एन.एस. कुरसुरा (एसएसके 42) सोवियत संघक फॉक्सट्रॉट-क्लास डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बी छल। 18 दिसंबर 1969 केँ भारतीय नौसेनाक हिस्सा बनल ई पनडुब्बी 31 वर्षक सेवा प्रदान कएलक। भारतीय महासागरक प्रहरीक रूपमे ई पनडुब्बी कईटा प्रमुख अभियानमे हिस्सा लेलक, जइसँ भारतीय नौसेनाक सामरिक शक्ति आ रणनीतिक क्षमताक प्रदर्शन भेल। 1971 केर युद्ध आ सेवाक उपलब्धि कुरसुराक भारत-पाकिस्तान युद्ध 1971 मे अहम भूमिका रहल। एहि युद्धमे ई पनडुब्बी गुप्त गश्ती मिशनसभमे शामिल रहल, जे भारतीय नौसेनाक रणनीतिक सफलतामे योगदान देलक। बादमे ई विभिन्न नौसैनिक अभ्यासमे हिस्सा लेलनि, जइमे दोसर देशसभक संग सहकार्य सेहो कएल गेल। कुरसुरा अनेक अवसर पर अन्य देशसभक "गुडविल" भ्रमण सेहो कएलक। महत्वपूर्ण सेवा अवधि 1971 केँ भारत-पाक युद्ध: कुरसुरा पनडुब्बी युद्धक समय भारतीय तटीय क्षेत्रक सुरक्षा सुनिश्चित करबाक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभेलक। शांतिपूर्ण गश्ती: समुद्रक विभिन्न क्षेत्रमे निगरानी आ भारतीय समुद्री सीमा पर सुरक्षा प्रदान करबाक कार्य करैत रहल। 22 फरवरी 2001 केँ सेवा समाप्तिक बाद, एहि पनडुब्बी केँ विशाखपट्टनमक समुद्र तटक संग्रहालयमे बदलल गेल, जाहिसँ आम जनता एहि सैन्य गौरवक अनुभव कऽ सकए। कुरसुराक संरचना आ क्षमता लंबाई: 91.3 मीटर। चौड़ाई: 8 मीटर। ड्राफ्ट: 6 मीटर। विस्थापन: सतह पर: 1,950 टन। जलमग्न अवस्था मे: 2,475 टन। गति: सतह पर: 16 नॉट। जलमग्न अवस्था मे: 15 नॉट। पावर सिस्टम: डीजल-इलेक्ट्रिक इंजन, जइसँ सतह पर यात्रा करबाक संग-संग जलमग्न अवस्थामे शक्ति प्रदान होइत अछि। आयुध आ क्षमता टॉरपीडो ट्यूब: 10टा टॉरपीडो ट्यूब (छहटा अगिला आ चारि पिछला)। गहराई क्षमता: 250 मीटर धरि जलमग्न यात्रा। क्रू सदस्य: 77 सदस्यक क्षमता, जइमे अधिकारी आ नाविक दुनू शामिल छथि। संग्रहालयक वर्तमान रूप: ऐतिहासिक धरोहरक पुनरुद्धार डीकमीशनिंगक बाद, 9 अगस्त 2002 केँ आंध्र प्रदेशक मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू एहि पनडुब्बी केँ राष्ट्रक प्रति समर्पित कएलनि। 24 अगस्त 2002 केँ एहि केँ सार्वजनिक संग्रहालयक रूपमे विशाखापट्टनमक आर.के. बीच पर राखल गेल। ई अपन अंतिम यात्रा विशाखापट्टनम धरि पूरा कएलक आ ततबे समयसँ ई पर्यटकसभक लेल एक अद्वितीय आकर्षण बनि गेल। आई.एन.एस. कुरसुरा संग्रहालय केवल एकटा युद्धपोत नहि, बल्कि भारतीय नौसेनाक साहस, शौर्य आ समर्पणक जीवंत दस्तावेज छी। एहि संग्रहालयमे लोक अपनहि आँखिसँ पनडुब्बीक अंदरक जीवन आ संचालनक जटिलता केँ देख सकैत छथि। कुरसुरा दुनियाक ओहि पनडुब्बीसभमे सँ एक छी जे संग्रहालय बनलाक बादो अपन मूल रूपमे संरक्षित अछि। विशाखापट्टनमक "जरूर देखय योग्य" गन्तव्यक रूपमे ई प्रसिद्ध अछि। खास बात ई अछि जे डीकमीशन कएलाक बावजूद, कुरसुरा केँ भारतीय नौसेनाक "ड्रेसिंग शिप" सम्मान देल जाइत अछि, जे सामान्यतः सक्रिय जहाजसभकेँ देल जाइत अछि। प्रमुख आकर्षण 1. पनडुब्बीक आंतरिक भागक अनुभव: आगंतुक सभ के पनडुब्बीक संकुचित गलियारा, नियंत्रण कक्ष, सोनार प्रणाली आ टॉरपीडो कक्षक निरीक्षण सद्यह करबाक अवसर भेटय छैन। 2. डिजिटल प्रदर्शन आ सूचना केंद्र: संग्रहालयमे आधुनिक डिजिटल स्क्रीन आ मल्टीमीडिया प्रदर्शनक माध्यम सँ पनडुब्बीक इतिहास आ योगदान पर विस्तृत जानकारी प्रस्तुत कएल जाइत अछि। 3. नौसैनिक जीवनक झलक: संग्रहालयमे नौसैनिक क्रूक दैनिक जीवन, चुनौती आ संग्रामक अनुभवक झलक सेहो देखायल जाइत अछि। ई संग्रहालय मात्र एकटा ऐतिहासिक स्थल नहि, बल्कि भारतीय रक्षा प्रणालीक प्रति लोकक जागरूकता आ गर्वक भावना जगबैत अछि। यदि अहाँ विशाखपट्टनम जाएब, तऽ एहि संग्रहालयक यात्रा जरूर करू। [प्रणव कुमार झा, राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड, नई दिल्ली, जनवरी 2025] अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। पद्य ३.१.प्रणव कुमार झा-लोकतंत्रक रंगमंच ३.२.राज किशोर मिश्र-हम नव स्वर छी ३.३.प्रमोद झा 'गोकुल'-कान्ह चखौतथि कब कब ओल ३.४.जगदानन्द झा 'मनु'-२० टा हाइकू ३.५.राम शंकर झा "मैथिल"- कोल्हूक बरद ३.१.प्रणव कुमार झा-लोकतंत्रक रंगमंच प्रणव कुमार झा लोकतंत्रक रंगमंच लोकतंत्रक रंगमंच पर, खेल अजगुत होइत अछि, नेता लोकनि वादा करैत, जनता लहालोट होइत अछि। कखनो पार्टी गलबहिया करत, कखनो बैर विरोधक राग, जनता बीच भ्रमक जाल, केकरो पर करी कोना विश्वास? चुनावी रैली, भाषण भारी, आश्वासनक बौछारि, वोटक लेल सब किछु संभव, बाद में देत नकारि। भाषण मे नै रहल मिठास, सबहक बोल भेल कड़वा कि केलहु, कि करब बात नै, बस लड़बैत रहत सरबा। मीडिया मुद्दाक बात उठाओत नै, करत टीआरपीक खोज बिना बात के मुद्दा पर मुर्गा, लड़बईत रहत रोज । कोना समाज समृद्ध सुखी होय, किए करत विचार टीवी न्यूज मे जनता खोजय पापड़, घी, आचार । जनता भेल अछि साधन मात्र, वोटक गिनतीक खेल, सेवा शब्दक अर्थ विलुप्त भेल, पैसाक राजक मेल। चुनावक संग फूटल सपना, आशाक बुझाइत अछि अंत, लोकतंत्रक दीप जरबाक लेल, कतय अछि सत्यक पंथ? [प्रणव कुमार झा, राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड, नई दिल्ली] अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.२.राज किशोर मिश्र-हम नव स्वर छी राज किशोर मिश्र हम नव स्वर छी नव जुग के हम स्वर छी, विज्ञानक बोल प्रखर छी। ढोँग-ढकोसला-बंधन सँ, छी नहि हम कनिको बान्हल , हम नहि ओ वाणी,जुग-जुग सँ जे आर्त भेल बस कानल । हम छी उन्मुक्त अकास सन , जकर नहि गाड़ल बुर्जा , हम छी अनंत व्योम के गुंजायमान ध्वनि-ऊर्जा । नूतन समयक अश्वरथक हम घर्घर , सुनि रहल हमरा,बीतल काल जर्जर । नव जुग के स्वागत मे हम छी उठल तान , जेना प्रतिपदा के बाद गगन मे उगल चान । आगू दिस बढ़ि रहल हम छी धाप-ध्वनि , चमकैत चारू कात जनु मनिआर-मणि । प्रीति-अनुरागक मधुमय बोल , विजय-हुलासक गर्दम-घोल । जे हारि क' फेर जीत गेल , हम तकर गीत , ध्येय-पथक हम शंखनाद, हम नव संगीत । हम प्रगतिक प्रस्थान लेल, गाओल गेल मंगल-गान , आ' दुर्वाक्षतक मंत्र संग , शुभ-शुभ होइत चुमान। नवजुगक सृजन लेल स्वस्तिवचन, हम जग कल्याणक नव प्रवचन। हम नव जागरणक नव ऋचा-स्वर , छी मंत्र ओ जे पढ़ल विज्ञान-अधर । फेक्टरीक कर्कश अबाज छी , झन-झन करैत पाकल धान , उन्मुक्त बोल नवतुरिआ के , हम स्वर नभभेदी मंगल-यान । अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.३.प्रमोद झा 'गोकुल'-कान्ह चखौतथि कब कब ओल प्रमोद झा 'गोकुल' कान्ह चखौतथि कब कब ओल जाति पाति नहिं पूछय कोइ। हरिके भजय से हरिके होइ।। सोल्हकन बाभन दलित भंगी। सबहक हिरदय राम बजरंगी।। सीमा रेखा सब नांघि चुकल अछि। दूरा दरबज्जा एकठार भेल अछि।। ऊँच नीच सब भेल निपत्ता। समता बाजय चढ़िके हत्ता।। खत्तामे गरल जे अभिशाप बनल छल। भारतक भाग्यके जे डसि रहल छल।। तकरा पुनि जीबंत की कय रहल छी? दुर्छी दुर्छी अहाँ सब ई की कय रहल छी ?? स्वार्थ चटोर भै जुनि बटेर लड़ाउ। बिसरल बात पुनि जुनि दोहराउ।। वसुधैब कुटुम्ब केर धुजा फहराउ। अपने घर अपने जुनि आगि लगाउ।। घर घर सीता करै छथि पुछारि। राम ठाढ़ छथि दुवारिये दुवारि ।। चुप रहु चुप रहु बाजू जुनि बेसी बड़ बोल। राधा सङ कान्ह चखौतथि कब कब ओल ।। - प्रमोद झा 'गोकुल', दीप, मधुवनी (विहार) फोन-9871779851 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.४.जगदानन्द झा 'मनु'-२० टा हाइकू जगदानन्द झा 'मनु' बीसटा हाइकु १ अमर कंठ अमृत स्वर अछि माय अहाँके २ पाइ रहितो भूखक दर्द पुछू कोनो बापसँ ३ मायक हाथ बापकेर संगति भाग्यवानकेँ ४ एखनो स्वाद पनिगर सागकेँ मोन परैए ५ भूखल पेटे खूब यादि अबैए चीनीक रोल ६ घमंड संगे गर्व अछि हमरा बाबूजीपर ७ बाबूक बात माँकेँ लात बूझलौं चालीस बाद ८ कहेलौं आब हुनकर प्रेममे हम बताह ९ दीप आ बाती सिनेहक खातीर संगे जरल १० नै पजारब प्रेमक आगि हम अहाँक बिना ११ हम सचेत मधुपान करब डंक रहित १२ मन फूलल कोहबर रांगल पिया अओता १३ मोनक तार अहुँकेँ पहुँचल मानु नै मानु १४ कियो हमर करेज छू लेलक बिन कहने १५ हृदय जोड़ि नहि सिखलौं हम तोड़ैकेँ कला १६ दर्द हमर दबि क रहि गेल बीच सभामे १७ प्रेम केनाइ आजुक समयमे जान देनाइ १८ हम बेजान बाट देख थकलौं अहाँ एलौं नै १९ प्रेमक रोग बताह बनेलक दुख सहलौं २० प्रेम करब प्रेम निबाहबमे अन्तर छैक - जगदानन्द झा 'मनु', मोबाइल नंबर ९२१२ ४६ १००६ अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.५.राम शंकर झा "मैथिल"- कोल्हूक बरद राम शंकर झा "मैथिल" कोल्हूक बरद
कोल्हूक कें बरद बनि घूमि रहल छि जिनगी कें पहिया घसा रहल छि..! कोल्हूक बरद बनि......! कतह जायब..? कोना जायब...? कियाक जायब.? कैय लाअ जायब सब देखा- देखी मे भागि रहल अछि पराअ रहल अछि कोल्हूक बरद बनि....! सब कें बुझल छैय सबकें देखल छैय सब कें रमल छैय सबकें गमल छैय किछु आंगा किछु बीच मे किछु पहिने किछु संजोगने किछु समाहरने नुकाबैत कोल्हूक कें बरद बनि....! एहि बारि ओहि बारि ई खेत उ खेत जोईत रहल छि जोतबा रहल छि एहि गाम ओहि गाम ई नगर उ नगर छिछिआ रहल छि बौआह रहल छि कियाअ कथिलाअ ककरालाअ..? ने हिनका बुझल ने हुनका बुझल सब एक दोसर कें दाबैत पिचैत कोल्हूक कें बरद बनि.....! मरदक मोंछ बनि ऐंठि रहल छि ग़ुमान लेल गामा पहलबान लेल खरीदा रहल किताअ पअर किताअ ठोकबा रहल छि कोठी पअर कोठी नहिं साँझ नहिं भोर नहिं भिंसर नहिं कलौउ नहिं बेरहट नहिं राति बताह भेल भकुआ रहल छि कोल्हूक कें बरद बनि....! एहि ठाम ओहि ठाम सुनि रहल छि आउ ठाम आउ ठाम सुनबा रहल छि सब घर-घरान गाबि रहल अछि सब सर -समांग गबबा रहल अछि मुदा कें सुनत किनका सुनत..? अपनहिं उल्लू सोझ करबाक लेल ओंघाल अपसिंआत ओझराल छि कोल्हूक कें बरद बनि....! ज्यों जिनगीक यथार्थ मर्म बुझि किछु दैत रहि किछु दियाबैत रहि हंसी-हंस बाजि हँसाबैत रहि हंसी-ठठाक बथान मचान धिया-पुता सङ्ग बनाबैत रहि मुदा जानि नहिं..... कोल्हूक कें बरद बनि घूमि रहल छि जिनगी कें पहिया घसा रहल छि...!!
-राम शंकर झा "मैथिल", उघरा, दरभंगा अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ।
Wa) o oe eae ne Me Seem ihc ig La Poa i =~ A सर » ~~ ie 7 fai aes SS “९ A Be ee ei. ris gas ; ees det a freee a
जि is
Waa a SEAS i Te bt सकने | : @ की ! Sees के आंतरिक cer chee फायर or 2 डा 9 A 2 ee otk | o@s09 ERG : ©) : |
F डर ‘ a जे at Dy 7 दि दि के KS, a जी) डे es
हे 3 _ Sel q हि प्री गज के sl Zs he =A |
— TU 42H ENGINE Design Bureat I ned by the Kuzlinetsov DEsight 7 a ean Dasa Pp enc te 5 ei oma 8 | NK2MP कि + TURBO PROP c=; i | VOINE “2 370KCS: <a = Sa 7INE = I5,000SHP “Nee PEED GROUND IDLE * ey a GHTIDLETOMAX POWER ©: ‘8300+ SORPM Es (PRESSOR अर AXIAL FLOW, 4 STAGE WITH IGY. (COMBUSTION CHAMBER ==: ANNULAR TYPE WITH I2 SNOUT HEADS TURBINE + AXIAL FLOW REACTION-5 STAGES NGINE STBD SIDE VIEW ENGINE STBD SIDE Vi EXHAUST + CONSTANT AREA TYPE ie z= TURBINE GAS TEMPERATURE + 5I5°C UPTO 6KM, 500° C ABOVE 6 KM se ३ ._ FUEL USED 2 ATKF-50 oc ee LUBRICANT USED + TURBONIC 32 je By qj OIL PRESSURE © 334 KG/CM GED =a) eur
हू can ™ ov. न 2 Sega विमान में गशती tart प्रयुक्त सामाग्री के नमूना संग विमान मे ge ge 22 एंमएम gC 8 oo कि. दे —— कि के Se i Px] | उठ की
AT SIS Fa निजक Vial कव'क छाठी | थठि मैं afar ISS A RIS aE at SOUT एम WANT एजएला PAG aS | AAT FT ANAS a एप खुनक A कवता मैं जीर्थ Ora एवाजायमान St शावन Be Away GS BT | Ha ATS GS OF जान माय FA HS 8A TG BY PIS A SHS WT GE OTIS ST | OCAMD AHAATS TA PA'S छाठी | fe GI जुथन शव TAO at Poss FEN कवता F alia Iss TA Fado ofS । ofS Spe Hote नाथ FH अकठी a af , जाठि IS TS. Sites Rant aS ।धठि प्य जान Saat Fras fia TTS aS | आनता एय जान A MES ST Saat HAIN शठि शिन GIS AAS at TSA AAT BAS VHT OT FR TAT Als | SATS जविठिऊा WI जैं छीर्थक Tear कव'क छाठी , जाठि Seq Foe ahs CHAS AM उत्नाघन BY एताकनि Yet जैं शअ Ga जन्न HT एप ASST AMAT BT | Riggers TT TAROT एप जान SAAT थक HA WT TSS FA Rito afS । AG at aay cH GOS GI, GaP, a4 at Aer मन्मिव aA, Fa TS AA Aes जत्रिठिजा एम aa BFA | UTAH at जुर्यशुरुक sp fs Sr जान कवता जैं जठज़ AION TSS wa fiw af । थठि जीर्थ Ol जान Pag ज्ञाता एलाकनि RA शव AB SaaS GTS डशि। Aare नाथ जे अकठी afta Gages aS | ऊीत्र एताक एप FORT एकव TG TAA OTS AAS | CAT AA H Gua wae नमी Te OH AAA GT OR rh पक Orel AANAS शित GIG af | ककरक Ione शव BIS ae । ot ae एताकनि एजव्िऊ श्रनायय GF जुथत a | cH ws fe ST AS OI AIST SATA Cs WS IG GI | SIS Hw एक AIS HF AM TTA FY एक मछआुकऊक GF CHA पक PIAS FST एमत CFF AEG | wrens 4 OT Ma धर्मफीर्श निज शमन कव'क छाठी, जाठि ठाय OT ड़य उन HA Ale | Oia GSA अकाशुष्डि wa of Sm जान SAO BT, 3 AAT जाऊ भीठी थवि afta Sa Tis SY | |G ठाय जैं कतान AS WA SIS ; थठि TI एम जान कवता मैं AACN TSS Fa Acs als शा ७ FABAUS GAG BFF | ceeeeeeeeee OTS UP AT SH OT
aan शक wa शिलेउ aS । उएशुकाऊ FAAS Gor जुशान श्रश्कवक MAT कव'क OI | Of Sry जान कवता जैं Farias शाशूदि ट्ठायऊ शष्डि था 'छिड़ De we AIT शठि शिव als | कशातएमाछन SY जन्न शान HT ATA aS | Gf ठाम जान Beat HF CISA Fa शान जैं WG we GAT aS | oe ठाग मैं कार्डिकयक शूथूमक OY निज oy कव'क छाठी , HG एताक एय as af | fs STH TA था POTS FST WS जान SIS छाठी | GUS H Ha MH Aa Ge GIS aS , UNE GG F AAG एय WA एहा | GOA NS TST ACTS TSS FF ore Ree afS था pH एलाक जायऊ Be | FHS SH Ha कठत OTT aS , wor मैं ofa जवजुरी Ah ats ae HT asa Aye St कठत Cra aE । oS जीर्थ एप जान कवता FH AAT TE EES lS | APARNA At TACT ब्ञाज OTer fs Gide fears शान way als । GH OI OI AI NeGA TIGA CHA AB | शूथूमक GS जैं Pt MT ऊीर्थ SIT GPA GI WS aS । ofS Sry सकशव नाम H_ asst GI जुशत ae, one Sm जान कवता FH Fey एशामावक Fa AT als | CTD जवजुरी at अकनाक विवुविशाऊ wT GAs छाठी | ७ठि ST GH वाठि Gray शा जान कवता H Ferme S शान मैं BAG पित जायऊ aS । जैशदि जैश GT Ot GSA एकें अरश्निपाय 7 अउियाय शक wa Aer als शा 3 IAT जाऊ AHS एकव VHT HY CS AS , AS CI HTT HEHE TA | Usd aM सेउजठज़ शा जाठज़ुक VIS Tat कव'क छाठी | fF TH जान Saat HW Wey एनापावक wa fete af । ef Sm मान a GoD कवता जैं megan cot va Aw aS | orgs Gast Sis Tar Sas छाठी | wis ठाय जान कद Td al rows ae [ऊन PIA HHA MA TS TY GAT afS था afta Tas wa cS a | CS CATS शा सिएफपिय TR Ror St a जान Seo BY , MASA ASAT] WA शाश AH ३ GS ae | ons Pos wa Fras qos शातन Sao Avad SY एम जान DIA A AEA AT CAG AS आ Ja TTS एय जुशान Aw af | उठि STs ae carey Pa FISTS डथि । eis SPT crt ee TA कवतां जैं NTTT we Rife ore GT | wren oF जीप्िय-निंशुट at foals oT PAIS जान कवता जैं जन्न शाश TS A GIS aS शा FATS OT FAN fics aff | ose am Pairs sens ORT SAU a Choris Fee
ae iS बूँवाशषाण wrens va fico afS | of Sm areas Am CHAO at Poss HOT BQ थक वांजि Fear मैं ajay शक छत FAS aS | उएशुब्ाऊ Spare GY oracs छाठी | Gs ठाम जशुऊर्खि ए्ताकनिकक BS एप शा NSIT कशितक HS एप जान Ba Fo GIS AT SAT als, ७ afta on roa we सांयऊ aS । जन्न oT जैं श्रखि TOMS कांवग ७ STIS OT GTS BFF | CTD BP ABS PT एक ASS SIs Tat कव'क छाठी | fF SM जान कवता जैं श्रठेवीक TSS Fs Aw afS | ofS ory जैं Sar TE firm TA Sea's OT । Of Sty Gos नाम जैं sd aa TH ans, एज जन्न शाशक BR शुमाशनी aS । af Ah OT जान कवताक am Aan DIA FSIS YG BIA मैं NAIF BAT Wa शान HDS GE GS als an are cay शठि Raw aff ।शानिशाऊ चाय + are SF एप जान at ott कवाता 4 TENT WSS Ta शिव aS । wraps विवुविशाऊ APS Ta Sas छाठी | AA एम आथत aS एक WEEN aT सी A Sis OH Af oT A इताठ । HSS VE SY एप जान FAT aE are ७ Fa St OT जान FR एललक | UNF LT खा एक एज HS AS एजव [SAS मान SAS AS , ७ WA आग HG BE aay ifs nfs Go Sf | At St एप जान Saat जैं जठज CIMA wa AAG AS | AEN at af नाम मैं भू ठी aw GF Fara aS । OS OF जान कवता मैं PIATSS HHS एठायऊ aS । rer SF Se as or afire af | । उठि Sry qe OT जान at मलाएशा FAH TT कवता HT PIO Is FA AeAo aS | BESS a जान कवता A Fey CANS wa Ras aff | aN ऊीर्थ थठि CH ais oF are af | उठि ठाम विक्शण OW कद DAN ANAS FON Saat मैं ऊीर्थ TAS aa जन्न शान HATE Be GS ae RIT GE of जान कवता Ty करत AG we जायऊ af । cers aT जैं थक St SY जुशत AAS, एक ANA जुर्म चाय जैं ae af । oft Sry व्िधि-व्िधाव जैं जान Saat शव जठजु एशाभानक Fa Fico ais! जवजुऊी TH Or सीकज नाम जैं अकठी HS yea avs , जाठि Sts जान कवता जैं
TES श्रष्टि , af or catwae Hore WS ale | PSs Adis Ae WA GEIS aE ,3 Sarr Gey AS wo BA | OSs AM ANS चाम FH OMS Tat FITS OG , जाठि ठाय aes ऊंएशुड़िक Tass SIAN Aw जन्न HAY CH GH CHT BATS | GAS STH चएठता जैं जन्न शविजन एकें GTS BGS aS | ca कथिता Gd oT नूँवक्णर्यक शातय SAT थकाशुष्ठि wy TAA At शिंउतवक PST FAS AS, 3 as wey कथिता ANS FA HAT BA) एस जुर्म A AT RWS BO वाशि Gora शवाथग BY CAST शा निरवक RT SIS EI, AIST ACAMIS TSS Fa HAT als a8 जुर्म एताक GS BY | एशाउन्नन GF OI जान कवता F HEY एशाभावक wa ACIS AS । OU FTUASS TWA SI'S OF | AVUAS एप जान PAT जैं एताकनि genes Aw aS । oie ठाय जें GS gaa Iw fret orih}s Ot एप जान Ses छाठी | Af जैं जन्न AIS नाते we सायऊ afs ar ुँवक्कतताक एप जुशान Ais af | ors Cierra Aas शातन Sau चीउन्नच एप जाय पक छाठी । SE oT एनेघ घ्र्तछ UF जुशत aE, जाठि St CAT HMI AS मे एप GTS HAS BA GIS SI | Ge ठाय एमाजव SSF ore aS , जाठि Sra जान कवता जैं जन्न VY मूव A GAS as | जुर्नटलाधाशनथन नाथ जैं GS or शुनाथाय कद जिनकव asset HRS WA afS 3 stan शठि ona BFF | TARO ए्वाकब्रिशाऊ WISI Wat Saas छाठी | मात्रस-ऊीर्थक FAT OL SET एशत AAS OH HIT TT एय ATS Ste जैं Ao Has YT fe जत्वान्व एप PA OT BA | GIS CT एशाऊा लएशलाक उंशवात ७ NS ada ofa Gat | उशनठि 4 ot wT GY नाम मैं विशाऊ we OFA | AE GAT OF Ter Ha FTUOIH शातन PAS एज AIT ANAT AS, AAPA AT जन्न AT FADE GR GAS AS शा 3 AAS TY ASAT TA GTA Bf | wre OS aa fot थक CEPTS SI AMT नाम जैं विशाऊ asst ननि Feo aE | of ठाग HTS एज WS THAT शा निउवक GAC मैं itary SAA WIA AA FAIS AS F Aa Bt GSTS WHT FAW Bf OST
Feu wis OY gaa श्रष्टि . जाठि ठाम Tide शूर्निया तय जवजुऊी A एप जान कवतां Fey एशाभावक छत fico अड्डि are जांशाऊ Pa जन SN UR GRU a | एज प्क७ PHA GI एप खा पक AN Aan 4 जान कद TAT at PST HI AST FAT BAT WAST मज CGS CANS FT AIS aE | ७ BIT FA HI GHIA OTT FA HAS BAT | PUTT HTS. जीर्थक am ay प्कार्डि एप ony कव'क छाठी ents Sry शठित्त Sort aT ISA ऊभत्राव Pas HAAS जड़ा मैं शान ACI BATS | GAS STH जान SAAT F PICT WSS कत AAT aS था PAS GH Oa TIS AS | OTT Fort OY जाय पक छाठी at ofS ठाम जवजुूऊी WH OI SIAN GATS Varna कव'क oT | थठि SH जान Saat FH TSA शाश WU Ta GAG Bf शा झ्ानका Pia care fs BA । OMIT PHBAP TWAT PIS छाठी GMS SPT CA HH HIG BUA HPP BAGS BE | PHUA एप जवजुरी THs Ses oF थक गाज थवि निद्ञाज PTS छाठी । HHS घन जैं PIAS SIT FAT AE , HAHA जन्न शान Tae BA जांथऊ aS | उठि ठाय H HOS चाम जैं Bre GS जुशत शव जांथ | छाठी , जाठि ory GIA fag जमिथन ASTIN वट्ठेंऊ aS | एस एक७ fF OF TIA शव जान SAT aS .o GIN as wT कप्वैठ als | OST am शविशुनन्न नाथ जैं Sts एताक OF व्िशाऊ St जुशत शव STATS छाठी , GAS om ort जे अनियशाम आ अठिवाज शक wa fiw शष्टि । ors SI oat orem एक ANAS नाथ yaa शव जाय एक छाठी | GIS ठाय ARIAT US शव जान SI'S OT | OLAS मनन aI जा एक Rais DIA FAs GN Aan मैं Rar SF | ७ठि Sra ars GF एय जान Seat जें wore Tes vA fico afS | oes ray VoT ब्ञावाठ Sis याया SI'S छांठी , GUS ठाय GA AH Aas TA at HAT GATS | थठि SS जुशत शव Rat कवता 4 afar TEs wa fice af । उमजव GAA प्य CITA जुशन for Gras छाठी | fs Sm नएठता F TPT TSS Fa facie af | coco जुशत शव Tea जैं ASA ASS Va HA as | ager नाथ जैं ऊीर्थ Sa ors एस are af , जाठि Sry Wem जैं जन्न SIS HS रद GIS aS | कायटवाधन St तय areal HAAS AE
aS | Asche Gis afifin कद ऊीत्र ars oF rare HS नाम ST WAT शव TN SA'S छाठी । GT शाश APTS Sta aS | ofS Sor जान BY HAS HSS TAS AGT कवता मैं GAT OAH ATH Ta Ge GAG as | Ons , जन्नरक PA Gro sauarar Side war कव'क Og | GUS ठीय Cat जैं अनुत्पथ ISS TA Ace aS | एस HS BS Sry जान कद थकाशुष्ठि TY Pros ott SQu af ,७ Ag तलाक एप शुद्धिशिऊ Iw Bf | ७ठि ST ae HSA SS एनाजव OI जुथत एजएला AAS , जाठि ठाम जान A जतशान SAAT OTS THOS OF निंयवशव BA GAS ST | Foust नाम जैं ST एप ofa Ae छिड़,श्रणात्सा at वरजाश्वण वठिऊ एताकनि हूँवककपताक off GIT Ba SF ठाथ ASS SS जुशत Greer aS HPA WATT OT OAT SAS BAT | ७ठि Sp जान कवता मैं FAH छान जन निर्णत BS GTS AES | wna , aban -S oF जा एकें Rafie शाजऊ-शिततैठ cm Ran जैं ककक छाठी | थठि A ES श्वन्नश्नाचक wa GIS aE | ऊकव Am ऊीया aie Ts जुशान शव जायत्ञाक छाठी ,जाठि Sty जान Saat FH SATA भर्ज TAS ads BY at as नाथ रनाभावक FA cw aS | PR चाय मैं अकठी OF जुथत aS wa as एप शजिक ate ,डाठि Sra एगता मैं eT एनाभावक FF AAT aS | oss amr faa Sie sar Ses छाठि | थठि SPT जान SAAT मैं AGO TSS FA HIS aS शा एताकनि जन्न HAGE TR ATH HM MAT EFT | aria of owt नाथ मैं OS जुशत aS , एज Aare उछकक निद्ञाज जुशत AE । ot HE HAs जन शान SH मूव कव' ज्ञाता AHS | एज एक थठि HIF WM एम जान Fa TAU at Poa ott SIs शष्टि , AIST त्ञाजशथ WSS FA CHAS AS | WAST BAT Wa I De GA GS GI था 3 नव ofS NAS BA । ऊकव A TAT AT HY ae शाया B'S छाठी | APES कथन aS एज He fe Sry जौंस प्य fate विधान जैं afer TIT शूजन a Proszs Afie भाव cre छणिन , ७ मान aT Be GAS VE | थकव ज्ञान ANS नाथ SAS जुशत शव जाय OTT | OFS ठाम CFA शव TTS at CTS IES छत fete afS | AA St
ही किक रीर्थप्कथक WITT] (tga ate जुन्न AS) अधिशिव कठतनि - नावम सी ! मर्द्सि ara a OIA OFA UI, एजकवा जनता जैं जन्न शाथ Ta BY GAG AS, एज ATTY | चावण Gt कठतनि - clare शविशिव | ठियातयक 34 an dow TAT कव'क छाठी , OS ठाय Nee ज्जिशक ary als at Sta Gs एम व्िशाऊ af । ef Sr थक ais seq शव Tey UIs Fa fics al | Sead qos say Sedu Press oF आछ्यन Saat HH शाथक AAS wa RAS as । ७ विभुत्तियाऊ SE aS | ofS ठाीय mest ayers Aart SAS BAT | थठि GI oh Tet मैं अन्निपशाय at afSata IHS छत AIT AE | OHS A HAP शा जाशवक HT OT जान BIA जैं SY एशामावक wa TT एलाकनि PACTS CT ASNT THIS AE | एज HS AFT CATT. Oe GT or जान कद अकाशुष्ठि BA GH वाछि ककि TAT at निउवक OFT BAO AE, ७ छान जन SNA Ua GAS BY शा AIST WO TSS छत TIS EA | wrocya | eft ठाम मैं FAA नाम मैं SS Sat कव'क छाठी | FATT TOWN कवता HHO एशाभावक wa शिएवैउ ais | उकव aH GN निशा मैं ae Rafirs areas CAT SAS PITA निज TIT कव'क छांठी | ाठि STA SUAS BH So ya मृक्िभाषव MIS as | es SP SIA मत पय fare fez ufos एटायऊ afs | oe om Tea Gs Ram जूथत शष्ि । एज HG जाशव शा Pre The जैशय शव AST GT एप जान FR अकाशुष्टि 4 aoa at Prose ote Sas EY, ७ WN wH मैं CAMO BE ज्कणरताक GAS SY | Wass! TAS एताकनिकक कथन af एस ऊभन्नाव तैकुकर्सनुिवक aot कवता जैं भले Wo ISS कत AIS
8 || fae (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) www.videha.co.in अड्डि | Tacks Ais afifien sy Se एताक एप ब्िशाऊ ऊिणि aH SIF जुशत शव NTT कव'क छाठी । ७ जन शाश API Stina als | 3ठि Sry जान PRAT HSS कुक शूजा Sag मैं जनम OAS शाश Ta Ta GAG als | Ouse , जन्नठक PTH awsra Side gar a's or | जाठि ठाय rat PICS USS Fe HAS aS | CH HS GE STI जान कद थकाशुष्ठि BY roa ott sate als ७ Ag ars OF AfSfaw cerI Bf | Si ठाय qa एलाकनिकक एमाजव SS जुशत Creer aS , जाठि ठाय जान a GATT कवता a Tas ase OF शियवशव wa GIS Bf | तूँवकऊन नाम जैं जीर्थ एप aa Qe छिड़,धगाएया at aca वठिऊ एताकनि Feuer off साशऊ Bia Sf Sry प्वय्रकाक GS जुशत एजएला aE Wat CAST OKT GAA PAS BAA | 3ठि ठाग जान कवता मैं Fara छान जन Ayia रद खायऊ AE | ऊपबव , Foam -रीर्थ a जा प्कें नियभिऊ शाजऊ-नित्तैठ ay Ran मैं FHS OT | थठि FA ISS AAMAS Wa ftw शरष्टि । oa am ऊीगा AMS NS FIA शव GATS छाठी ,जाटि ठाम जान Saat H PATH ७ भर्ज प्य चठि areas BT ar as नाथ CIMT a ftw afS । भिविक॑ज नाम मैं aad AS जुथत aS एज Ss ars एम are afS ,डाठि Sry एशता जैं जल्जु CMAs Fa ftw af | उकव am aa Sis Tar कव'क छाठि | fF SPT जान कवता मैं ्ञाजएनय TSS Fa शिएवैउ aS at एताकनि wa शान HDG BR HIT HS caw SFI । कालेमीव of Rost नाथ जैं ST जुशत aS , एज Aa Os Rat जुथत AS । खो GAY जुशत Ha शान SH मूव PA व्वाता APS | एज HG FE GIF जुशत एस जान Sa Cadel at शिउवक ote Saw af, WAS ATG ISP FF AAS aS | MISS GAT FA शाश जैं AS DA TIS BIT आ ७ aay fe nate BY | UST aM AT HS Gas aT कव'क छाठी | AEs कथन af एस He of omy जौंस oH fae faa में afer TIF yer a Prozs Afie a crs fF , ७ मान aT BA HIS AE | oes am Ara नाय HSA Baa शव साय एकें छाठी । Of ST OT शव वाऊजूय at Woe THES wa Fw afS | Ta Gs
विदहे ४११ म अक ०१ फरबरी २०२५ (TH १८ मास २०६ अक 8११) | | 9 ae wis SY जूशत aS. जाठि orm Side शूर्नियां तय जवजुऊी A एप जान कवता जैं HEY एगाभावक Fa Fira afS शा ७ ate सिद्ध जय SN wR सांथऊ as । एज ws eras Gt एप सा एक AN Aa जैं जाय कक CAAT at POT HA AST SAS SIT AWAD WH CGA IMS FA AAS aS | ७ AT कत HS UHI ONT FR THD BAT | कमाव HTS ीर्थक am कप एकार्छि oF oT कव'क छाठी ,जाठि Sr aR Proce aR CISA ऊभज्राव Pas AS जड़ा जैं धान ACI BAS | ७ठि ठीम जान Saat FH PICT WSS कत AAG AE at PIS GH ONT IT AE | OTT worm AT जाय पक छाठी at of dy जवजुऊी ah एय OTA ऊनार्भनक Va कव'क छाठी | AE Se जान कवता FATS शान FU BA GAG Bf शा ast Pia care शिएवेउ A । ऊपभबव PRUAS VAM PID छाठी जाठि STH CHA मैं AIS AUT AMPDG BY HAG AS | PHBA एप WAFS Wis SeI HI थक गाज थवि Aa PIS छांठी | HHS घन मैं FIAT HIT SAG aS , WISI Wa AN TH Da GIS AS | si Sp H जऊऊ ATF Bre GF Faq शव जाय पक छाठी , जाठि ठाय SAA fag aire व्िवाजगान acéo aS । एस HG AS OY जुशत शव जान SIS aS 3 UIA Ags मर्वेच Saw afS | उकव am शविशतत्र नाम 4 Os एताक एम rare GS जुशत शव GATS छाठी , GIS ont ort जैं aia af अठिवाज ass va शिव अड्डि । ors ST oat Ger ce NASA नाम जैं जूथत शव जाय एक छाठी | Gf OTT मसावित्यघ IS शव जान SIS छाठी | Oryst HoT oI जा प्क Rafi DEN FAs GT Aan मैं निज्ञान SR | Of dry ears GS एम जान Saat जैं Vow ASS क्षत AAG afS | ops vay Vor ज्ञावाठ Ste sar SIS छांठी , GS SH Gray FAG ज्ञावाद TA Mat CHT SATS | FS GF waa शव Aare कवता जैं alan sas wa fica af | ons GA aT एजासरीर्थ जुशन for जायन्ञाक छाठी | 3ठि ठाम Aes F वाजजूय ISS छत fits afS | coche WIA शव ककता जैं AAS कक wa शिएवेउ als | oye an जे ऊीर्श Gr are एप aire afS , जाठि orm area जैं जन्न PINTS शूर्सि TQ GIS AS | SICH ऊीर्थ एप acest जें सेवीवक AE
20 || fae (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) www.videha.co.in Tee AE , थठि OH CATA जैएनठ TS AE | SASS ANI De ऊ३ GTS aE 3 Saw Gor As maT SI | OPA aM TANTS A FH CNS TT कव'क छाठी , OS ठाथ जन्नठक VAs कावगझऊ SIAN fs जन्न CISA एकें Vas एकएन SATE | ७ठि ठाम नएठता जैं जन्न HET एकें Gate RAGS aS | एज कनिता GF एय Foals शातन Sete अकाशष्ठि wR TA आं निऊवक YSN SAT aS , ७ अक Hey कथितां मानक TA WAT डणि । एक जुर्ण GI at RNS TY OT TAY Gora शवाथग TR TACT A निरुवक OT SIS ST , MIST Aas TEs vA AAT als शा ७ जुर्य HIS GIS SF | ONBAT GY एम जान कवता जैं HEY OMAN wa facto af | ऊमजव MASS WA कव'क छाठी | ATA एप जान कवता जैं एताकनि Foucers ftw afF | Gi ठाम मैं GF Ta Yeh किप्वेड srs Ot एप जान कव'क छाठी | थठि जैं जन्न IAS TA! GS as था Faas OF WIT fie afS | उमबव Chess anf Ree शातन Pao चीऊउन्नच प्प जाथ OT । SR ST CT aS GT जुथत aS, जाटि Ont OFT FTG AS 78 एप TSA aa BA GIS BT | Sf Sey एमाजव ST Oren aS , जाठि Sry जान कवता FH जन्न BEI मूव TY TAS AS | TMM नाम जैँ ऊीर्थ or gerry कद BAITS शअनुध्कवण AMARA WI AE ,3 HIT AS MCAT EFT । THT एताकब्रिशाऊ WSIS Wat Faas छाठी | TSS FA OT कठत OTA AB एज CHIC AT एम ज्ञाथक Stet HAO शक YT ofS Heart OH ऋषि CI BA । SE OT OTST तएशवाक Vay ७ AT age nf GAR | उथनठि जैं ot मात्रस GY नाग जैं raw we ora | af SY एप Fer a FaMBAS शातन SAS TH ATA ANAT aS , MAPA AAT जन्न MT HDS DY GAG AS शा G YRATS OT HSS Ty GIT Bf | was छीर्थ जें aa for थक एकाजक am ant नाम जैं as asst ahh Heo aS | GC ST HS एज HS TAT आं Proas GACY F sitars FAA WIS A FAQS Aly J a ठी IST एकें WIG कवाएनैऊ Bf SET
विदहे ४११ म अक ०१ फरबरी २०२५ (TH १८ मास २०६ अक 8११) | | 20 ae ces बँवाक्षण एलासयक va fictw af | oF ठाथ areas aH THAT शा HOTS HHT BY थक AS ककतां मैं afar ses छत AS afS | उएशुघाऊ FUT GF Gras छाठी | 3ठि ठाम TAA एताकनिकक BS एप शा TOIT SHAS GSA एम जान Sa ITH Gis WT SAT as, ७ aa शा RST VA OTIS aS । जन्न oT जें श्रखि COATS कावग ७ IANS एम GAS BFF | CAND BP HBP NT SH AAs जीर्थक war कव'क छाठी | of Sry जान कवता मैं USA ISS Fa AAS als | ७ठि dry मैं far SS निज ony So's छाठी | GS Sry ASST चाम FH asst aS AM आड़ि , TH wa शाशक BR शुमायनी aS । अठि A OT जान कवताक am खेतशालि SAAT THIS शूजन DIA जैं MITTS BAT HA शान जैं De GA GIS als शआ RAST शवय शठि Ate af ।शानिशाऊ नाम जैं are GF एप जान at oat कवाता जैं TET थक करत fio अडि | crys ब्िवुतिशाऊ ARIS wa Sas Or | WAT OT आंशत ae एज Very aT जी wa Sis sory of oH BAe । एक एक७ थठि SY प्य जान FAO afar ७ Ha जीर्थ एप जाय FR TAS | AN I एप GS TH HS AS OF Sas मान SAS AS , ७ HA act HIG BY Hay Pfs nfs Aw EI | TA GY of जान Saat FH Hey, CIN va शिएवेउ aS | थठन आ aT चाय मैं मू St ado SY जुशत aE । off OF जान कवता मैं जुर्वटनाकक AIS eras aS । prem Gt ऊीच as Oy शजिछ af | उठि Sry QT OT जान at सठात्या Fars STAT कवता जैं Pod Iss करत Ae aS । BSA एय जान कवता जैं Fey CIMAS wa fiw afs | a जीर्थ थठि CH एताक एम Are af | उठि ठाय RRO TWA कद CAN ज्ञापचक AON Saat HSS TAS BAT जन्न शान मैं De BA TIS ae ean GI एप जान कवता FH जय करत A उ३ GIS af । faces नाम जैं थक St GF जुशत aS, एक AN जुर्ग चाय जैं Bre aE । ofS Sry व्िधि-व्िधान जैं जान कवता शव HEY CHAS a FAS शडि। TPR चणि एय Sherer चाय Ht अकठी GF FAs aS , ofS ठाम जान Seat जैं
22 || fae (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) www.videha.co.in afin ase wa ite af | उतनुशाऊ Fouts Gar जुशान शंक्कवक Mat Sas छाठी | OR ठाथ जान कवता जैं Taracras शाशूठि cera als ar fog Be we may शठि AAS aS | कशातएमाछन GY जन्न शाश HA AAS aS । ७ठि ठाय जान कवता जे GIS Fa शाश HG रद GIS ae | GE om जैं कार्डिटकयक शूथूमक OS fist TIT कव'क छाठी , HS IS व्िशाऊ aS | उठि ठाय THA था POTS शूजन HT जान SI'S छाठी | GS FH Ha शाथ Ta GA GAG aE , UNE ७ GT 4 AAG CI A एहा | AoA मठि AST AON TSS FA creer Acie aS शा yw एलाक जायऊ SY | PHBH ATA Bea CA aS , FoR HAAS जदजुरी wh aS aa PR asa Jars CIT er OM aS । fe GF एम जान कवता जैं AAT नठि प्टायऊ AE | AAPA शा मलाए्या aH Creer aS Gils गठियाक शान एकतनि af | GH एस ONE AFI TEPA TONGA CFF AAS । शूथूमक ीर्थ Ft APA ora SS rat Tp SF WS a fs Sra yea नाम जे अकठी SF wea ae , one ठाय जान कवता Ft जज रशामावक Fa Ate afF | OTD जवजूऊी शा श्वकगाक APIS AT जायत्क छाठी | vfs oa GH वाठि धनव्ञाज शा जान कवता FH बुँवक्कठटाक शान HG fig जायऊ aS | woe a AY ot ae टकें afin वर अजियांज शक छत जि als MS AAT जाऊ AS HI GH BY CHS aS , थठि एम एकाएना HEHE TW | ऊकव aM सेउजठज़ A जाठजुक GIS Tat कव'क छाठी | aS प्य जान कवता Wey OMS wa fircto aS । sf Sr मान a Gra Saat जैं WAIT GON WI Aw as | orga ss Sits War Sas छाठी | weft om जान Fa Tia at लिउवक = कवता जैं जन्न MA TH BY GAG ae at afar wee a fics az । एल एक७ एकाथ शा सिर््रपिय TE ROMA SIT प्य जान SAT SY , WAST शदधिशुल्खनिउ wa MF TH TY सायऊ aS | ऊभनव feos we aut qUs शातय SAT Aoads SI एम जान PIA A EA AT एलायऊ AS a जुन्न CATH OF जुशान AAs aS | उठि ठाय ze Sap aid ब्िवाजघान डथि । ७ठि Sry Braye ST SIA जैं मास oe Rife BIS GT | PFS एप जप्निय-निशट शा तुँवक्रर्णक शातन PAG जान कवता मैं HAMA AK TA GAS aS at क्मुताक एम जुशान fies aff | अकव am नियणिऊ aes oar Sete a Chole नियमक
36 || विदहे (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) www.videha.co.in WHOM ENGINE Se 3 4 NEUE TENGINE PORT SIDE VIEW = ruRsorror A a लिप लए mio स्का वि sion uestace wren 000 MESON शा “ ANALFLOW- REACTION 3 STAGES Fimawisctsriiminerine + Sstcurrosiht sah 4R0VE6xu ES Rs ia = aPRIEAS SED हक a Gav For 42 विमान इंजन के ewe re — ballad SRS i न — | a | =a > WLS SO MEDAL —— wa BY a धर Ly fi की ह॥॥॥ . 4 2) US 4, भारतीय सेना के विभिन्न मेडल आ ओकर डिजाइनर के विवरण
विदहे ४११ म अक ०१ फरबरी २०२५ (वष १८ मास २०६ अक HR) | | 37 ‘ ‘yes a = i | है... का : ial ae कर: ४ A i LZ Za y A ee Oe ss
38 | | fae (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) www.videha.co.in > wa : ं « र न आन, । atc —— . F "farm =— i > Pig] — rao विभान के अंदर के दृश्य आ wifes टैंक जाहि से विमान के पूरा कु सेस ic ter के ऑक्सीज़न सप्लाई भेंट सकपय ठैक। - Ble 7: nel - — a3. 4 जे es ee ’ = >, * ’ * q Bon - | हे st - : > ii (डर है » आए ~ a . uw) | ee SS nis
विदहे ४११ म अक ०१ फरबरी २०२५ (TH १८ मास २०६ अक 8११) | | 39 ssl = iz [a VA oP नि etn i a, हर भर eee Noe PT Asset ७ a i Ps का दी जी EY हि जे नल नकद जार लग CS 58. ee S's 4 A | शी gree PS ate ig विमान सं मौरवशाली बे. Ba कि: eS i —— है कि =] 7: ~~ HUNG ge y 3 है ) A हक 4 । q 7 7 SG: etki = & I? exe Ay
40 | | faaé (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) www.videha.co.in eS | " eer a इ - वा "०० \ ¥ है | ) % . wa i" ) at? - है ; ‘ iN : > Veer है
विदहे ४११ म अक ०१ फरबरी २०२५ (वष १८ मास २०६ अक 8११) | | 47 मा 4 an ot » Be ai Faas ! a pee st oN ; = w * } va ty. Ay Zod oi | aA rN हू | wa . | बालन": SY कि fal दिखा - ‘ i