ISBN Number: 978-93-342-9767-6 (Book) ISSN 2229-547X (online) 𑒀 विदेह ४१९ म अंक ०१ जून २०२५ (वर्ष १८ मास २१० अंक ४१९) [विदेह (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) www.videha.co.in ] विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। ऐ पोथीक सर्वाधिकार सुरक्षित अछि। कॉपीराइट (©) धारकक लिखित अनुमतिक बिना पोथीक कोनो अंशक छाया प्रति एवं रिकॉडिंग सहित इलेक्ट्रॉनिक अथवा यांत्रिक, कोनो माध्यमसँ, अथवा ज्ञानक संग्रहण वा पुनर्प्रयोगक प्रणाली द्वारा कोनो रूपमे पुनरुत्पादन अथवा संचारन-प्रसारण नै कएल जा सकैत अछि। (c) २०००- २०२५. सर्वाधिकार सुरक्षित। भालसरिक गाछ जे सन २००० सँ याहूसिटीजपर छल http://www.geocities.com/.../bhalsarik_gachh.html , http://www.geocities.com/ggajendra आदि लिंकपर आ अखनो ५ जुलाइ २००४ क पोस्ट http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html केर रूपमे इन्टरनेटपर मैथिलीक प्राचीनतम उपस्थितक रूपमे विद्यमान अछि (किछु दिन लेल http://videha.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html लिंकपर, स्रोत wayback machine of https://web.archive.org/web/*/videha 258 capture(s) from 2004 to 2016- http://videha.com/ भालसरिक गाछ-प्रथम मैथिली ब्लॉग / मैथिली ब्लॉगक एग्रीगेटर)। ई मैथिलीक पहिल इंटरनेट पत्रिका थिक जकर नाम बादमे १ जनवरी २००८ सँ ’विदेह’ पड़लै। इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि, जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। (c)२०००- २०२५. विदेह: प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004). सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। Editor: Gajendra Thakur. In respect of materials e-published in Videha, the Editor, Videha holds the right to create the web archives/ theme-based web archives, right to translate/ transliterate those archives and create translated/ transliterated web-archives; and the right to e-publish/ print-publish all these archives. रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना/ संग्रह (संपूर्ण उत्तरदायित्व रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता मध्य) editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ पठा सकैत छथि, संगमे ओ अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो सेहो पठाबथि। एतऽ प्रकाशित रचना/ संग्रह सभक कॉपीराइट रचनाकार/ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि आ जतऽ रचनाकार/ संग्रहकर्त्ताक नाम नै अछि ततऽ ई संपादकाधीन अछि। सम्पादक: विदेह ई-प्रकाशित रचनाक वेब-आर्काइव/ थीम-आधारित वेब-आर्काइवक निर्माणक अधिकार, ऐ सभ आर्काइवक अनुवाद आ लिप्यंतरण आ तकरो वेब-आर्काइवक निर्माणक अधिकार; आ ऐ सभ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार रखैत छथि। ऐ सभ लेल कोनो रॉयल्टी/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै, से रॉयल्टी/ पारिश्रमिकक इच्छुक रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता विदेहसँ नै जुड़थु। विदेह ई पत्रिकाक मासमे दू टा अंक निकलैत अछि जे मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ www.videha.co.in पर ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। Videha eJournal (link www.videha.co.in) is a multidisciplinary online journal dedicated to the promotion and preservation of the Maithili language, literature and culture. It is a platform for scholars, researchers, writers and poets to publish their works and share their knowledge about Maithili language, literature, and culture. The journal is published online to promote and preserve Maithili language and culture. The journal publishes articles, research papers, book reviews, and poetry in Maithili and English languages. It also features translations of literary works from other languages into Maithili. It is a peer-reviewed journal, which means that articles and papers are reviewed by experts in the field before they are accepted for publication. Font/ Keyboard Source: https://fonts.google.com/ , https://github.com/virtualvinodh/aksharamukha-fonts , https://keyman.com/ These are print-on-demand books, send your queries to editorial.staff.videha@gmail.com. The eBooks of some of these are available for sale on Google Play [(c) Preeti Thakur, sales.videha@gmail.com], send your queries to sales.videha@gmail.com. The contents and documents e-published by Videha (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) are periodically being checked for accessibility issues. People with disabilities should not have difficulty accessing these contents/ documents. © Preeti Thakur (sales.videha@gmail.com) Cover designed by AUM GAJEDRA THAKUR Videha e-Journal: Issue No. 419 at www.videha.co.in समानान्तर परम्पराक विद्यापति- चित्र विदेह सम्मानसँ सम्मानित श्री पनकलाल मण्डल द्वारा मैथिली भाषा जगज्जननी सीतायाः भाषा आसीत्। हनुमन्तः उक्तवान- मानुषीमिह संस्कृताम्। अनुक्रम ऐ अंकमे अछि:- नारायणजी चौधरी विशेषांक १.१.अंक ४१९ पर टिप्पणी (पृष्ठ १-२) २.१.नारायणजी चौधरी विशेषांकक संदर्भमे (पृष्ठ ४-२९) २.२.एहिठाम प्रस्तुत अछि नारायणजी चौधरीजी केर संक्षिप्त परिचय (पृष्ठ ३०-३१) २.३.नारायणजी चौधरी एवं हुनक पोखरि बचाउ (तालाब बचाओ, Save ponds / Lakes Campaign) अभियान केर सहयोगी लोकनि (पृष्ठ ३२-३४) २.४.Randhir Jha- Water Rich Mithila then, Water Crisis in Mithila Now! (पृष्ठ ३५-४४) २.५.डॉ. शिव कुमार मिश्र-मिथिलाक धरोहरि अभियानी नारायण जी चौधरी (पृष्ठ ४५-५२) २.६.प्रणव झा- मिथिला मे पोखरिक अतिक्रमण आ "तालाब बचाओ अभियान" (पृष्ठ ५३-६४) २.७.हितनाथ झा-जलसंरक्षण आ नारायणजी चौधरी (पृष्ठ ६५-६९) २.८.डा.धनाकर ठाकुर-पोखरि बचाउ अभियानक मिथिला नायक-नारायण चौधरी (पृष्ठ ७०-७१) २.९.अजित कुमार झा-मिथिलाक सांस्कृतिक धरोहर केँ रक्षक: नारायण चौधरी (पृष्ठ ७२-७७) २.१०.डॉ. कैलाश कुमार मिश्र-नारायण चौधरी आ जलकर संरक्षण केर सामाजिक सरोकार (पृष्ठ ७८-८५) २.११.आशीष अनचिन्हार-पोखरिक वक्तव्य (पृष्ठ ८६-९४) २.१२.सन्दर्भ (पृष्ठ ९५-९७)
१.१.अंक ४१९ (नारायणजी चौधरी विशेषांक)पर टिप्पणी हितनाथ झा विदेहक हम दू वर्षसँ कने बेसिए समयसँ नियमित पाठक छी। पत्रिको नियमित निकलैत अछि। लीकसँ हटि क' सोचब आ अमलमे आनब कम कठिनाह काज नहि। जाहि दिस आन-आन सम्पादकक ध्यान नहि जाइत छनि, ओहि दिस हिनक ध्यान पड़िते टा छनि। अद्यावधि एहि पत्रिकाक करीब 35 विशेषांक निकलि चुकल अछि। ओ व्यक्तिपरक तँ अछिए, संस्थाक गतिविधिक विषयमे सेहो। आनो-आन विषयक अछि विशेषांक सभ। एक खास बात आओर छनि हिनक विशेषांकमे। साहित्यकारक विषयमे जँ ली तँ सभ जीबैत साहित्यकारक व्यक्तित्व आ कृतित्वक विषयमे रहैत अछि। अबडेरल साहित्यकार जनिक साहित्यमे महत्वपूर्ण अवदान छनि, ओहिपर केंद्रित अंक विश्वसनीयताक दृष्टिसँ सेहो महत्वपूर्ण रहैत अछि। हालक विशेषांकमे महत्वपूर्ण लेखक रबीन्द्रनाथ ठाकुर, रामलोचन ठाकुर, राजनन्दनलाल दास, केदारनाथ चौधरी, शरदिंदु चौधरी आदि जे आब एहि संसारमे सदेह नहि छथि, मुदा हुनक व्यक्तित्व आ कृतित्वक विषयमे साहित्य संसार पीढी-दर-पीढ़ी परिचित रहत। अंतर्राष्ट्रीय मैथिली परिषदक विशेषांकमे जतेक आलेख अछि, प्रलेखक रूपमे सभ दिन विद्यमान रहत। पर्यावरणविद नारायणजी चौधरीपर विशेषांक निकालि विदेह ई साबित केलक जे मात्र साहित्यकारे टा समाजक कल्याण नहि सोचैत अछि, पर्यावरणक रक्षा-सुरक्षा कोना हो, जीवन सहज कोना चलय, एहि हेतु जे कार्य करैत अछि, आन्दोलन करैत अछि, ओहेन व्यक्तित्वपर विशेषांक निकालल जाय से जल-पर्यावरण संरक्षणक लेल नारायणजी चौधरीक अमूल्य अवदान छनि, हुनकापर केन्द्रित विद्वान लोकनिसँ आलेख लिखबाय विशिष्ट अंक निकाललनिअछि, जाहिमे डा. कैलाश कुमार मिश्र , आशिष अनचिन्हार, डा. शिव कुमार मिश्र, प्रणव झा, डा. धनाकर ठाकुर, अजित कुमार झा आदिक अनुसंधानपूर्ण आ सूचनाप्रद आलेख छनि। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। नारायणजी चौधरी विशेषांक २.१.नारायणजी चौधरी विशेषांकक संदर्भमे २.२.एहिठाम प्रस्तुत अछि नारायणजी चौधरीजी केर संक्षिप्त परिचय २.३.नारायणजी चौधरी एवं हुनक पोखरि बचाउ (तालाब बचाओ, Save ponds / Lakes Campaign) अभियान केर सहयोगी लोकनि २.४.Randhir Jha- Water Rich Mithila then, Water Crisis in Mithila Now! २.५.डॉ. शिव कुमार मिश्र-मिथिलाक धरोहरि अभियानी नारायण जी चौधरी २.६.प्रणव झा- मिथिला मे पोखरिक अतिक्रमण आ "तालाब बचाओ अभियान" २.७.हितनाथ झा-जलसंरक्षण आ नारायणजी चौधरी २.८.डा.धनाकर ठाकुर-पोखरि बचाउ अभियानक मिथिला नायक-नारायण चौधरी २.९.अजित कुमार झा-मिथिलाक सांस्कृतिक धरोहर केँ रक्षक: नारायण चौधरी २.१०.डॉ. कैलाश कुमार मिश्र-नारायण चौधरी आ जलकर संरक्षण केर सामाजिक सरोकार २.११.आशीष अनचिन्हार-पोखरिक वक्तव्य २.१२.सन्दर्भ २.१.नारायणजी चौधरी विशेषांकक संदर्भमे 1 2008 सँ एखन धरि विदेह http://videha.co.in/ द्वारा जे विशेषांक सभ आएल अछि तकरा तीन चरणमे बाँटि सकैत छी। पहिल चरण 2008सँ जनवरी 2015 धरि जाहिमे विषय आधारित विशेषांक सभ प्रकाशित भेल आ मधुपजीपर सेहो विशेषांक प्रकाशित भेल। एकदम प्रारंभिक विशेषांक सभमे "विशेषांक" नाम नहि लीखल गेल छै मुदा ओहिमे ओहन रचनाक बेसी स्थान देल गेल छै सायास रूपें (क्रम-1 सँ 12 केर अधिकांश)। दोसर चरण भेल 2015 सँ लऽ कऽ एखन धरि जाहिमे मात्र जीवित लेखकपर विशेषांक प्रकाशित करबाक निर्णय लेल गेल आ इम्हर पछिला बर्ख एहिमे संस्था आ पत्र-पत्रिकापर विशेषांक प्रकाशित करबाक सेहो निर्णय लेल गेल क्रम- 13 एवं 14, 20 सँ 34)। तेसर चरण भेल पछिला सालमे विदेहक संपादक द्वारा "नित नवल सिरीज" प्रकाशित करबाक (एकर विवरण अलगसँ देल गेल अछि)। पाठक लेल विदेहक हरेक विशेषांक पाँच स्तर, पाँच स्वाद रखने अछि (पाँचम स्वाद सभसँ विरल अछि)- 1) पत्रिका विशेषांक केर स्वाद, 2) आलोचनात्मक पोथीक स्वाद, 3) शोध ग्रंथक स्वाद, 4) साहित्य अकादमी द्वारा प्रकाशित मोनोग्राफ केर स्वाद, 5) जँ विदेहक विशेषांकमे कोनो एहन रचनाकार चयनित होइत छथि जिनकर पति वा पत्नी सेहो रचनाकार छथिन तँ विदेह अपन विशेषांकमे दूनूकेँ मूल्यांकन करैत अछि। उदाहरण लेल विदेहक लक्ष्मण झा 'सागर' विशेषांक आ नरेन्द्र झा विशेषांक देखल जा सकैए। विदेह अपन अंक लेल सागरजी आ नरेन्द्र झाक चयन केने छल मुदा सागरजीक पत्नी शैल झा 'सागर' सेहो रचनाकार छथिन तँ लक्ष्मण जी बला विशेषांकमे शैलजीक रचनाकर्मपर सेहो विचार भेल आ तेनाहिते नरेन्द्र झाजीक पत्नी पन्ना झा कथाकार से नरेन्द्र झा विशेषांकमे पन्नाजीक रचनाकर्मपर सेहो विचार भेल। ई विचार वा घटना संपूर्ण मैथिली साहित्यमे नहि भेल छल हमरा जनैत, से मात्र विदेह द्वारा संभव भेल। जँ हम गलत होइ तऽ सूचित करी हम अपन ज्ञानकेँ सुधारि लेब। साहित्य अकादमीक कथित मोनोग्राफ तँ आइ धरि बहुतो लेखकपर प्रकाशित नहि भऽ सकल अछि। एहन परिस्थितिमे विदेह एकटा नव बाट बना कऽ मैथिली लगमे राखि देने अछि। पाठक चाहथि तँ एहि विशेषांक सभमेसँ आनो स्वाद ताकि सकै छथि। मैथिलीमे जे लोक सभ विश्वविद्यालयसँ जुड़ल छथि आ कि ओहनो लोक जे सभ प्रोफेसर सभहक संगतिमे छथि ताहिमे किछु लोकक मूँहे ईहो सुनबा लेल भेटल जे जिनका-जिनकापर विदेह विशेषांक प्रकाशित भऽ चुकल अछि ताहिमेसँ अधिकांशपर विश्वविद्यालय सभमे शोध हेबाक लेल पंजीयन भऽ रहल छै। हमरा लेल ई समाद बहुत पहिनेसँ सूनल मानू। वास्तविकता ई छै जे विदेह विशेषांकमे जते सूचना रहैत छै ततेमे ओही एक लेखकपर एकै समयमे कमसँ कम दस दृष्टिकोणसँ शोध भऽ सकैत छै। खएर मैथिलीमे विश्विद्यालयक शोध जेहन होइत छै, जेहन शोधार्थी सभ होइत छै ताहिमे हम सभ मानि बैसल छी जे विदेह विशेषांक एहिना सार्वजनिक होइत रहत आ शोधार्थी सभ बिना अनुमति, बिना क्रेडिट देने चोरा कऽ कथित शोध करैत रहता। जँ अहाँ अइ विशेषांक केर PDF पढ़ि रहल छी तँ कोनो शब्द वा पाँति अंडरलाइनमे वा बिना अंडरलाइनकेँ नीला वा कोनो रंगक (कारी रंग छोड़ि) देखाए तँ बुझि लिअ जे ओहिमे लिंक देल गेल छै रेफरेंस लेल आ तकरा क्लिक करबै तँ ओ लिंक खुजि जाएत। कोनो-कोनो फोटोमे सेहो लिंक देल गेल छै। पाठक एहि माध्यमसँ कम समयमे रेफरेंस सभहक अध्य्यन कऽ सकै छथि। मुदा प्रिंटमे प्रकाशित पोथीमे ई सुविधा नै रहत। अइ कारणसँ भऽ सकैए जे पाठककेँ एहि पोथीक किछु पाँति प्रचलित नै बुझेतनि। जाहि ठाम लिंक देल गेल छै ताहि ठामक पाँतिक किछु शब्दक बीच बेसी स्थान छूटल छै। ओकरा एक पाँति बना पढ़ी से आग्रह। हम चाहितहुँ तँ सभ लिंक वा चित्रकेँ एकठाम दऽ सकै छलहुँ मुदा हमर सोच अछि जे पाठककेँ एकै ठाम तर्क आ सबूत भेटनि। एकटा आर बात ई जरूरी नहि छै जे एक लेखक लेल हम एकैटा लिंक प्रयोग करी। ओहन लेखक जिनका बारेमे बहुत रास लिंक छै गूगलपर हुनकर नाम जखन एक बेरसँ बेसी अबैत अछि तँ हमर प्रयास रहैए जे हुनकर नाम सभमे अलग-अलग लिंक लगा दी। तँइ पाठक जखन एकै नामक बहुत रास लिंक देखथि तँ ई मानि लेथि जे हुनका लग रेफरेंसक भंडार पहुँचल छनि। विदेह द्वारा जीवैत लेखकपर विशेषांक शुरू कएल गेल छल 2015 सँ जे विभिन्न नामसँ होइत आब "विदेहक जीवित मैथिलकर्मी, संगीतकर्मी, साहित्यकार-सम्पादक आ रंगमंचकर्मी-रंगमंच-निर्देशकपर विशेषांक शृंखला" नामसँ जानल जाइत अछि। मैथिलकर्मीसँ हमर सभहक आशय जिनकर काज मिथिला-मैथिली-मैथिली लेल कोनो माध्यमसँ भेल हो। ओ संगठनकर्ता सेहो भऽ सकै छथि, आन भाषाक लेखक सेहो। तहिना संगीतकर्मी मने गीत-संगीतसँ जुड़ल लोक। निच्चा एहि सभ चरण केर विस्तृत सूचना क्रमबद्ध रूपें देल जाएत। विदेहक विशेषांक सभ लेल हम ओहनो लोक सभ लग आलेख लेल जाइत छी, हुनका सूचना दैत छी जे कि हमर (आशीष अनचिन्हार), विदेह या गजेन्द्र ठाकुरक धुर विरोधी छथि। दू-चारि लोक कहि सकै छथि जे हमरा सूचना नहि भेटल, तऽ हुनकासँ हमर आग्रह जे कमसँ कम ओ अपन ह्वाटसएप आ फेसबुक केर मैसेज बॅाक्स (इनबॅाक्स) देखथि। हमर एहि प्रयासक प्रतिफल विदेहक आन विशेषांक संगे एहूमे देखाइ पड़त से उम्मेद अछि। विदेहक नारायणजी चौधरी विशेषांक केर घोषणा 18 दिसंबर 2024 मे भेल छल। एहि घोषणाक फेसबुक लिंक देखू। नारायणजी चौधरी पर्यावरणविद् छथि, मिथिलामे पोखरि बचाउ (तालाब बचाओ, Save ponds / Lakes Campaign) अभियान केर अभियानी छथि। एहि विशेषांकसँ पहिने विदेह 35 टा विशेषांक प्रकाशित कऽ चुकल अछि आ एहिठाम आब हम कहि सकैत छी जे ई एकटा चुनौतीपूर्ण काज छै। अनेक संकट केर सामना करए पड़ैत अछि लेख एकट्ठा करएमे। मुदा संगहि ईहो हम कहब जे संकटसँ बेसी हमरा लग समर्थन अछि। हँ, ई मानएमे हमरा कोनो दिक्कत नहि जे जतेक लेख केर उम्मेद केने रहैत छी हम ततेक नै आबैए, जतेक लोक लिखबाक लेल गछैत छथि से सभ अंत- अंत धरि आबि चुप्प भऽ जाइत छथि। आ एकर कारणो छै, किनको ई लागै छनि जे आनपर लिखब से हम अपने रचना किए ने लीखि लेब, किनको लग पोथिए नै रहै छनि, जखन कि हम सभ यथासंभव पाठककेँ विकल्प रूपमे पोथीक पी.डी.एफ फाइल सेहो देबाक लेल तैयार रहैत छी। कियो विदेहक समावेशी रूपसँ दुखी छथि, तँ किनको मित्रकेँ विदेहसँ दिक्कत छनि तँइ ओ नहि देता। एकरो हम संकटे बुझै छियै जे सभ फेसबुकपर लंबा-लंबा लेख वा कमेंट टाइप कऽ लै छथि सेहो सभ विदेह लेल हाथसँ लिखल पठाबैत छथि। जे सभ कहियो काल फेसबुकपर टाइप कऽ लीखै छथि तिनकर आलेख हम सभ टाइप करिते छी। खएर पहिने कहलहुँ जे संकटसँ बेसी समर्थन अछि तँइ आइ पहिलसँ लऽ कऽ 36म (संस्था सहित) विशेषांक धरि पहुँचलहुँ हम। आन विशेषांक लेल इएह बात मानू। 2008 सँ लऽ कऽ 2024 क एखन धरि 36 टा विशेषांक प्रकाशित भेल मने बर्खमे दू टासँ कनी बेसी। निश्चिते समर्थन बेसी भेटल हमरा। जखन कि विदेहक ई छत्तीसो विशेषांक केर अलावे आन अंक हरेक पंद्रह दिनपर (मासमे दू बेर) लगातार प्रकाशित भइए रहल अछि। एकर अतिरिक्त ईहो बात संतोषदायक अछि जे विदेहक हरेक व्यक्तिपरक विशेषांक अभिनंदनग्रंथ हेबासँ बाँचि गेल अछि। मुख्यधारा जकाँ विदेहकेँ अभिनंदनग्रंथ नहि चाही। अभिनंदनग्रंथ अहू दुआरे नै चाही जे ओहिसँ लेखक वा जिनकापर निकालल गेल छनि तिनकामे सुधारक गुंजाइश खत्म भऽ जाइत छै। तँइ विदेहक विशेषांकमे आलोचना-प्रसंशा सभ भेटत। पहिने विदेहक सभ अंक नागरी, तिरहुता आ ब्रेल लिपिमे प्रकाशित होइत छल। एकर अतिरिक्त विदेहक किछु अंक कैथी, नेवाड़ी, आइ.पी.ए. लिपि, रंजना (नेवारी केर एक आर रूप), ब्राह्मी, खरोष्ठी, उर्दू, तिब्बती एवं तिब्बती-उमे लिपिमे सेहो छपल अछि। कुल मिला कऽ देखी तँ विदेह बारह लिपि अपना लेल रखने अछि। 2 पाठक जखन एहि विशेषांककेँ पढ़ताह तँ हुनका वर्तनी ओ मानकताक अभाव लगतनि। विदेह मूलतः शब्दमे विभक्ति सटा कऽ लिखैत अछि संगहि मैथिली मानक भाषा आ मैथिली भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम लेल “भाषापाक” नामक अपन दिशानिर्देश सेहो रखने अछि मुदा ओहिमे छपए बला लेखक लेल स्वतंत्रता छै जे ओ कोन रूपमे लिखै छथि, माने जे विदेह शुरुएसँ हरेक वर्तनी बला लेखककेँ स्वीकार करैत एलैए। तँइ मानकता अभाव स्वाभाविक। विदेह सभ वर्तनी आ स्वरूपक सम्मान करैत अछि। तथापि वर्तनीक गलती जे थिक से सोझे-सोझ हमर सभहक गलती थिक जे हम सभ संशोधन नै कऽ सकलहुँ। मैथिलीमे किछुए एहन पत्रिका अछि जकर वर्तनी एकरंगक रहैत अछि आ ई हुनक खूबी छनि मुदा जखन ओहो सभ कोनो विशेषांक निकालै छथि तखन वर्तनी तँ ठीक रहैत छनि मुदा सामग्री अधिकांशतः बसिये रहैत छनि। ऐतिहासिकताक दृष्टिसँ कोनो पुरान सामग्रीक उपयोग वर्जित नै छै। हमहूँ सभ करैत छियै, मुदा सोचियौ जे 72-80 पन्नाक कोनो प्रिंट पत्रिका होइत छै ताहिमे लगभग आधा सामग्री साभार रहैत छनि, तेसर भागमे लेखक केर किछु रचना रहैत छनि आ चारिम भागमे किछु नव सामग्री रहैत छनि। हमरा लोकनि नव सामग्रीपर बेसी जोर दैत छियै। एकर मतलब ई नहि जे वर्तनीमे गलती होइत रहै। हमर कहबाक मतलब ई जे संपादक-संयोजककेँ कोनो ने कोनो स्तरपर समझौता करहे पड़ैत छै से चाहे वर्तनीक हो कि, मुद्राक हो कि विचारधारक हो कि सामग्रीक हो। हमरा लोकनि वर्तनीक स्तरपर समझौता कऽ रहल छी मुदा कारण सहित। प्रिंट पत्रिका एक बेर प्रकाशित भऽ गेलाक बाद दोबारा नै भऽ सकैए (भऽ तँ सकैए मुदा फेर पाइ लागि जेतै) तँइ ओकर वर्तनी यथाशक्ति सही रहैत छै। इंटरनेटपर सुविधा छै जे बीचमे (इंटरनेटसँ प्रिंट हेबाक अवधि) ओकरा सही कऽ सकैत छी मुदा सामग्रिए बसिया रहत तँ सही वर्तनी रहितो नव अध्याय नै खुजि सकत तँइ हमरा लोकनि वर्तनी बला मुद्दापर समझौता केलहुँ। हमरा लोकनि कएलनि, कयलनि ओ केलनि तीनू शुद्ध मानैत छी, एतेक शुद्ध मानैत छी एकै रचनामे तीनू रूप भेटि जाएत। आन शब्दक लेल एहने बूझू। उम्मेद अछि जे पाठक विदेहक आने विशेषांक जकाँ एकरा पढ़ताह आ पढ़ि एकर नीक-बेजाएपर अपन सुझाव देताह। विदेहक हरेक अंक विदेह वेबसाइटपर भेटत आ एकर अलावे गूगल बुक्स Google Books आ आर्कइभ.कॅम archive.org पर सेहो भेटत। तँइ स्वाभाविक रूपसँ विशेषांक सेहो तीनू प्लेटफार्मपर भेटत। मुदा तीनू प्लेटफार्मपर अंक सभकेँ अलग ढंगसँ सजाएल गेल छै जकरा हम पाठक लग राखि रहल छी। पाठक निच्चा बला पैराग्राफपर ध्यान देताह तऽ हुनका कम्मे समयमे नीक रिजल्ट भेटतनि। विदेहक अपन साइट आ आर्कइभ.कॅम archive.org पर विदेहक हरेक अंक क्रमबद्ध तरीकासँ भेटत। आर्कइभ.कॅम archive.org पर विदेहक हरेक अंक पढ़बाक लेल पाठक Gajendra Thakur सर्च करथि आ https://archive.org/details/@videha_editorial_staff पर जाथि जाहिठाम क्रमबद्ध तरीकासँ सभ भेटतनि। संगे ईहो लिंक सहायक हेतनि https://archive.org/details/videha_pdf_202305 मुदा गूगल बुक्स Google Books पर विदेहक अंक सभकेँ सर्च करबाक हिसाबसँ राखल गेल अछि। माने जे पाठक गूगल बुक्स Google Books पर जँ कोनो शब्दकेँ वा लेखककेँ वा किताबक नामकेँ वा आन कोनो की वर्डसँ तकताह आ जँ ओ शब्द, लेखक, किताब वा ओ सर्च वर्ड विदेहमे प्रकाशित भेल छै तऽ पाठक लग विदेहक ओ सभ अंक देखाबऽ लगतै जाहिमे पाठक द्वारा शब्द, लेखक, किताब वा ओ सर्च वर्ड देल गेल छै। एकर माने ई भेल जे विदेहमे प्रकाशित हरेक शब्द, लेखक, किताब वा ओ सर्च वर्ड पाठकक मुट्ठीमे आबि गेल आ अन्य माध्यमक अपेक्षा बेसी दिन धरि पाठक केर पहुँचमे रहत। आ संगहि जँ ओ शब्द, लेखक, किताब वा ओ सर्च वर्ड विदेहसँ इतर आन कोनो पोथीमे छै तँ ओहो पाठकक सामने आबि जेतनि माने पाठक लेल दुन्ना फायदा। पाठक गूगल बुक्स Google Books पर विदेहक Videha eLearning पर जा कऽ विदेहक अंक पढ़ि सकै छथि ओत्तहि संपादक गजेन्द्र ठाकुर Gajendra Thakur पर क्लिक कऽ बहुत रास पोथी पढ़ि सकै छथि। तहिना पाठक जा कऽ गजेन्द्र ठाकुर Gajendra Thakur सर्च करथि हुनका विदेहक अंक सहित ओ सभ पोथी भेटि जेतनि जे विदेहपर देल गेल छै। एकर माने ई भेल जे मात्र विदेहक अंके नै आनो-आनो पोथी सभ भविष्यमे बाँचल रहि जेतै। संगहि विशेषांक सभहक प्रिंट रूप किनबाक लेल ओकर पोथी रूपक लिंक पोथी.कॅम Pothi.com पर देल गेल छै। पाठक पोथी.कॅम Pothi.com पर जा कऽ गजेन्द्र ठाकुर Gajendra Thakur सर्च करथि हुनका विदेहक विशेषांक सहित बहुत रास पोथी भेटि जेतनि किनबाक लेल। पाठक देवनागरीमे गजेन्द्र ठाकुर आ रोमन केर Gajendra Thakur दूनू सर्च करथि से हमर आग्रह रहत। कारण देवनागरी आ रोमन दूनूमे संपादक अपन एकाउंट बनेने छथि आ अपन सुविधासँ दूनू एकाउंटसँ विदेहक अंक आ पोथी अपलोड केने छथि। एहिठाम हम पहिने विदेहक लिंक देब आ ठीक ताही संगे एहि विशेषांकक पोथी.कॅम Pothi.com केर प्रिंट आॉन डिमांड बला लिंक देने छी जाहि ठाम पाठक एकरा आॉनलाइन कीनि सकै छथि। विदेहक द्वारा जीवैत लेखक ओ संस्थाक विशेषांक शृखंलामे प्रकाशित भेल संगहि आन विशेषांक सभहक लिस्ट एना अछि (एहिठाम जे अंकक लिस्ट देल गेल अछि ताहि अंकपर क्लिक करबै तँ ओ अंक खुजि जाएत)। 1) हाइकू विशेषांक 12 म अंक, 15 जून 2008 2) गजल विशेषांक 21 म अंक, 1 नवम्बर 2008 3) विहनि कथा विशेषांक 67 म अंक, 1 अक्टूबर 2010 4) बाल साहित्य विशेषांक 70 म अंक, 15 नवम्बर 2010 5) नाटक विशेषांक 72 म अंक 15 दिसम्बर 2010 6) समीक्षा विशेषांक 7) नारी विशेषांक 77म अंक 01 मार्च 2011 8) अनुवाद विशेषांक (गद्य-पद्य भारती) 97म अंक 9) बाल गजल विशेषांक विदेहक अंक 111 म अंक, 1 अगस्त 2012 10) भक्ति गजल विशेषांक 126 म अंक, 15 मार्च 2013 11) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक 142 म, अंक 15 नवम्बर 2013 12) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक 169 म अंक 1 जनवरी 2015 13) अरविन्द ठाकुर विशेषांक 01 नवम्बर 2015 अंक 189, विदेहक अरविन्द ठाकुर विशेषांक केर पोथी रूप "स्वतंत्रचेता- अरविन्द ठाकुर: व्यक्तित्व-कृतित्व" केर नामसँ प्रकाशित भेल। 14) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक 01 दिसम्बर 2015 अंक 191, पोथी.कॅम pothi.com 15) विदेह सम्मान विशेषाक- 200म, भाग-1, 15 अप्रैल 2016 16) विदेह सम्मान विशेषाक- 205म, भाग-2, 1 जुलाई 2016 17) मैथिली सी.डी./ अल्बम गीत संगीत विशेषांक- 217 म अंक 01 जनवरी 2017 18) मैथिली वेब पत्रकारिता विशेषांक-313म अंक 1 जनवरी 2021 19) मैथिली बीहनि कथा विशेषांक-2, 317 म अंक 1 मार्च 2021 20) रामलोचन ठाकुर विशेषांक 01 अप्रैल 2021 अंक 319, पोथी.कॅम pothi.com 21) राजनन्दन लाल दास विशेषांक 01 नवम्बर 2021 अंक 333, पोथी.कॅम pothi.com 22) रवीन्द्र नाथ ठाकुर विशेषांक 15 जून 2022 अंक 348, पोथी.कॅम pothi.com 23) केदारनाथ चौधरी विशेषांक 15 अगस्त 2022 अंक 352, पोथी.कॅम pothi.com 24) प्रेमलता मिश्र 'प्रेम' विशेषांक 01 नवम्बर 2022 अंक 357, पोथी.कॅम pothi.com 25) शरदिन्दु चौधरी विशेषांक 15 नवम्बर 2022 अंक 358, पोथी.कॅम pothi.com 26) “कला-विमर्श विशेषांक (सन्दर्भ- संजू दास, कृष्ण कुमार कश्यप, शशिबाला, एस.सी.सुमन आ श्वेता झा चौधरी)” 15 अप्रैल 2023 अंक 368, पोथी.कॅम pothi.com 27) अशोक विशेषांक 1 मइ 2023 अंक 369, पोथी.कॅम pothi.com 28) रामभरोस कापड़ि 'भ्रमर' विशेषांक 15 मइ 2023 अंक 370, पोथी.कॅम pothi.com 29) मिथिला स्टूडेंट यूनियन (MSU) विशेषांक 1 जून 2023 अंक 371, पोथी.कॅम pothi.com 30) लक्ष्मण झा सागर विशेषांक (15 नवम्बर 2023 अंक 382), पोथी.कॅम pothi.com 31) नरेन्द्र झा विशेषांक (1 जून 2024 अंक 395), पोथी.कॅम pothi.com 32) भाषाविद् रामावतार यादव विशेषांक 1 जून 2024 अंक 395, पोथी.कॅम pothi.com 33) अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली परिषद् विशेषांक 15 अगस्त 2024 अंक 400, पोथी.कॅम pothi.com 34) हितनाथ झा विशेषांक 1 नवम्बर 2024 अंक 405, पोथी.कॅम pothi.com 35) मिथिला विकास परिषद् विशेषांक 15 दिसंबर 2024 अंक 408, पोथी.कॅम pothi.com एहि लिस्टमे 1, 2, 4, 5, 6, 7, 8, 15 एवं 16 विदेहक स्वतः संख्याक हिसाब बला विशेषांक अछि। ओतहि 2 आ 19 क्रम संख्याक विशेषांक मुन्नाजीक संयोजनमे प्रकाशित भेल अछि। शेष सभ बाँचल विशेषांकक संयोजन आशीष अनचिन्हार द्वारा भेल अछि। 2015 मे विदेहक संपादक लग आशीष अनचिन्हार द्वारा जीवित लेखकपर विशेषांक निकालबाक प्रस्ताव राखल गेल आ संपादकक सहमतिक बाद ई एखन धरि एकटा नमहर रस्ता बना चुकल अछि। पुनः 2022 मे आशीषे अनचिन्हार द्वारा विदेह लग संस्थाक ऊपर विशेषांक प्रकाशित करबाक प्रस्ताव राखल गेल आ संपादकक सहमतिसँ एखन धरि 3 संस्थापर अंक निकलि चुकल अछि। विदेहक नवाचार अतबे नहि अछि, एक बेर फेर 2023 मे आशीष अनचिन्हार द्वारा विदेह लग दू टा विचार राखल गेल 1) लेखक-प्रकाशकसँ इतर आन जे लोक पोथी-पत्रिका केर बिक्री कऽ अपन जीवय-यापनक संग मैथिली पोथीक प्रचारमे सहायक छथि तिनको ऊपर विशेषांक प्रकाशित, एवं 2) मैथिलीक कोनो पत्रिकाक उपर विदेह विशेषांक प्रकाशित हो। एहू दूनू कैटेगरी लेल संपादकक सहमति अछि आ निकट भविष्यमे विदेहक माध्यमे पाठक लग नीक विशेषांक पहुँचत। दिसंबर 2024 मे एक बेर फेर आशीष अनचिन्हारक नवाचार सामने आएल जाहि अंतर्गत विदेहक संपादकक सहमतिक बाद "विदेह लिटरेचर फेस्टीभल” केर घोषणा भेल। एहि फेस्टीभलक विस्तृत विवरण अही लेखमे निच्चा भेटत। आशीष अनचिन्हारक नवाचार अतबे नहि अछि,एहि क्रममे "स्व-निंदा विशेषांक" सेहो अछि जाहि लेल पहिल नाम अशीषे अनचिन्हारक राखल गेल अछि। ई पूरा मैथिली साहित्य लेल एकटा नव प्रयोग हएत। संभवतः पूरा विश्वक साहित्य लेल ई नव प्रयोग हएत। ई सिरीज लेखकक इच्छापर प्रकाशित हएत माने जे लेखक चाहै छथि जे हुनका अपन दुर्गुणक बारेमे हुनक समाज, हुनक पाठक की विचार राखै छनि से ओ लीखि सकैत छथि। एहि सिरीजमे कोनो प्रकारक प्रशंसात्मक आलेख नहि रहत। जँ कदाचित् आबियो गेल तऽ ओहि आलेखकेँ हटा देल जाएत। एहि सिरीजक मूल उद्येश्य ई अछि जे लेखक अपन दुर्गुणकेँ चीन्हि सकथि आ ओकरा हटा सकथि। एकर विस्तृत विवरण फेसबुक पोस्टक फोटो निच्चा देल गेल अछि। आशीष अनचिन्हार द्वारा संपादित पोथी 'प्रीति कारण सेतु बान्हल' जे कि मिथिला ओ मैथिलीक संवर्धनमे गजेन्द्र ठाकुर एवं प्रीति ठाकुरक योगदानक आलोचनात्मक ग्रंथ अछि ताहिमे संकलित शिवशंकर श्रीनिवास जीक एक शोध आलेख मैथिली पत्रिकामे व्यक्तिपरक विशेषांकक इतिहास अछि आ ओहि इतिहासमे विदेह विशेषांक कोन ठाम अछि तकर मूल्याकंन भेटत संगहि ओही आलेखमे श्रीनिवास जीक मोताबिक जीवितेमे अपन मूल्याकंन पढ़ि लेब कोनो लेखक लेल कोनो सम्मानसँ बेसी महत्वपूर्ण अछि। मैथिलीक बहुत रास पाठक विदेहक जीवित लेखक विशेषांककेँ मूल्यवान मानै छथि ('प्रीति कारण सेतु बान्हल’ मे कीर्तिनाथ झा, कल्पना झा, प्रणव कुमार झा, धनाकर ठाकुर आदिक आलेख), ओतहि किछु पाठक विदेह विशेषांककेँ साहित्य अकादमी पुरस्कारसँ बेसी महत्वपूर्ण मानै छथि ('प्रीति कारण सेतु बान्हल’ मे लक्ष्मण झा 'सागर'जीक आलेख) यद्पि विदेह साहित्य अकादमी पुरस्कारक आलोचना करैत अछि मुदा अकादमी द्वारा पुरस्कार छोड़ि जे प्रकाशन एवं आन काज छै तकर प्रसंशा सहो करैत अछि। तथापि जँ किछुओ पाठक विदेह विशेषांककेँ कोनो सम्मान-पुरस्कार वा कि साहित्य अकादमी पुरस्कारसँ बेसी महत्वपूर्ण मानै छथि तँ ई विदेह लेल निश्चिते प्रेरणादायी बात छै। 3 विदेहक जीवित विशेषांक शृंखलामे किनकर चयन हो ताहि लेल मोटा-मोटी निच्चाक किछु बिंदुक पालन कएल जाइत अछि- 1) लगभग पाँच-छह मास पहिनेसँ विदेह अपन पाठककेँ सुझाव देबा लेल लेल सूचना दैत अछि। 2) आएल सुझावमेसँ विदेह मात्र जीवित लेखककेँ चयन करैत अछि। संस्था सेहो वर्तामनमे जीवंत हेबाक चाही। 3) सभ जीवित मैथिलकर्मी, संगीतकर्मी, साहित्यकार-सम्पादक आ रंगमंचकर्मी-रंगमंच-निर्देशकक बीचमे हुनकर लेखन/ काज एवं आचरणक साम्यता देखल जाइत अछि। जाहि लेखकक लेखन/ काज ओ आचरणमे बेसी साम्यता (कम फाँक) भेटैए तेहन छह टा नाम चयनित होइत अछि। 4) छह नाम एलापर ई तुलना कएल जाइत छै जे ई छहो मैथिलकर्मी, संगीतकर्मी, साहित्यकार-सम्पादक आ रंगमंचकर्मी-रंगमंच-निर्देशक अथवा संस्थाकेँ रचना लिखबाक वा समाजिक काज केलाक एवजमे समाजसँ की भेटलनि। 5) जिनका सभसँ कम भेटल बुझाइत अछि ताहि तीन मैथिलकर्मी, संगीतकर्मी, साहित्यकार-सम्पादक आ रंगमंचकर्मी-रंगमंच-निर्देशक,-संस्थाकेँ अगिला चरण लेल राखि लैत छी। 6) एहि तीन चयनित जीबित मैथिलकर्मी, संगीतकर्मी, साहित्यकार-सम्पादक आ रंगमंचकर्मी-रंगमंच-निर्देशकक वा संस्थाक रचना, काज, हुनक उद्येश्य आदिक बीचमे परस्पर तुलना कएल जाइत अछि आ, 7) अंतिम रूपसँ विदेह द्वारा नाम चुनि सालक अंतमे घोषणा कएल जाइत अछि आ नियत समयपर ई विशेषांक निकालबाक प्रयास करैत छी। एकर मतलब ई भेल जे पाठककेँ सुझाव देबाक सूचना हरेक बर्खक अप्रैल-मइ धरिमे चलि जाइत छनि। प्रश्न उठि सकैए जे कि उपरक नियम एहन छै जाहिमे अंतिम रूपसँ सभ सुयोग्य जीवित लेखक केर चयन समयपर भ़ऽ जेतनि? तऽ एकर उत्तर छै- नै। विदेहक अपन सीमा छै आ विदेहक पाठक लग सेहो अपन सीमा छनि। मुदा अही सीमाक संगे हमरा सभकेँ अपन यथासाध्य श्रेष्ठ देबाक छै आ मैथिली लेल एकटा एहन रस्ता बना देबाक छै जाहिसँ आबए बला 500-600 बर्खक साहित्य विदेहक लीकसँ प्रेरणा पाबए। अही विचारक संग विदेह ओहन जीवित लेखकपर अपन धेआन सेहो केंद्रित कऽ रहल अछि जे कि सुयोग्य छथि मुदा जिनकापर विदेहक विशेषांक कोनो कारणवश नहि प्रकाशित भऽ सकल। एकर नाम भेल विदेहक "नित नवल सिरीज"। एहि नव विचारक मुख्य बिंदु एना अछि- 1) विदेहक संपादक गजेन्द्र ठाकुर एकटा कोनो जीवित लेखक वा कलाकारपर एकाग्र आलोचना करता मने ओहि लेखक केर उपलब्ध सभ साहित्यपर। एहि पोथीक भाषा मैथिली अथवा अंग्रेजी कोनो एक भाषामे रहत। एहि पोथीक पहिल रूप ई-बुक केर रूपमे आएत आ प्रयास रहत जे एकर प्रिंट सेहो आबए जे कि परिस्थितिपर निर्भर करतै। 2) लेखक वा कलाकार केर चुनाव संपादक अपन रुचि वा विदेह टीमक रुचि केर हिसाबें करता। 3) एहिमे ओहने लेखक वा कलाकार केर चयन संभव हएत जिनकर उपलब्ध हरेक पोथीक PDF रूपमे विदेहक माध्यमसँ सार्वजनिक भेल छनि। कलाकार लेल यूट्यूब एवं आन साइट सेहो मान्य हेतै। 4) एहि परियोजनाक लेल चयनित लेखक वा कलाकारपर काज संपादक केर समय केर अनुसारे हेतै। तँइ एकर समय सीमा कहब संभव नहि। नित नवल सिरीजमे एखन धरि प्रकाशित पोथीक सूची एना अछि (पहिनेक विशेषांक सभमे ई क्रम नहि छल, एहिठाम संशोधित आ पूर्ण सूची अछि)- 1. Rajdeo Mandal- Maithili Writer (2022) 2. JAGDISH PRASAD MANDAL- Maithili Writer (2023) 3) नित नवल सुभाष चन्द्र यादव (2023)(ई प्रिंट आॉन डिमांड रूपमे सेहो अछि) https://store.pothi.com/book/गजेन्द्र-ठाकुर-नित-नवल-सुभाष-चन्द्र-यादव/ 4) नित नवल सुशील (2023, संशोधित 2024) एकर अतिरिक्त विदेहक वर्तमान अंक सभमे धारावाहिक रूपें "नित नवल दिनेश मिश्र" सेहो प्रकाशित भऽ रहल अछि जकर पोथी रूप जल्दिये आएत। एहिठाम ईहो स्पष्ट कऽ दी जे विदेह विशेषांक वा नित नवल सिरीज केर चयन लेखकक शुरूसँ लऽ चयन हेबाक समय धरिक आकलन अछि। मानि लिअ विदेह विशेषांक वा नित नवल सिरीजमे चयनित भेलाक बाद, विशेषांक वा पोथी प्रकाशित भऽ गेलक बाद जँ चयनित लेखकमे नैतिक स्तरपर कोनो विचलन अबैत छनि तँ आन लोकक संगे विदेहो हुनकर विरोध करत। फेरो स्पष्ट कऽ दी जे हमरा लोकनि मात्र नैतिक स्तर केर बात केलहुँ अछि, विचारधारा वा आन कोनो स्तरक नहि। विदेह लेल उत्तर-दक्षिण, पूरब-पश्चिम, आकाश-पाताल सभ विचारधारा अपने छै बशर्ते कि ओ मिथिला, मैथिली आ मैथिलक हितमे हो। आब बात करी विदेह लिटरेचर फेस्टीभल केर। विदेह अपन आन कार्यक्रम संगे "विदेह लिटरेचर फेस्टीभल" केर शुरुआत कऽ रहल अछि। एकर परिभाषा हम ई रखने छी जे एक बर्खमे एक लेखक द्वारा एक विधामे जे रचना विदेहमे प्रकाशित हएत तकरा हम सभ पोथीक रूपमे दऽ ओहि संबंधित लेखक लग ओकर लिंक पठा देबनि। जँ लेखकक सहमति रहतनि तऽ एकै पोथीमे विभिन्न विधाकेँ सेहो समेटल जा सकैए। एहिमे भाग लेबाक निम्नलिखित प्रक्रिया रहत-
1) विदेहक बर्खमे कुल 24 अंक प्रकाशित होइत छै सामान्यतः हरेक मासक 1 आ 15 तारीखकेँ। ई फेस्टीभल हरेक बर्ख 1 जनवरीसँ लऽ कऽ 15 दिसम्बर बला अंकमे प्रकाशित रचनापर लागू हएत। रचना टाइप कएल रहबाक चाही। रचना पठेबाक लेल मेल अछि- editorial.staff.videha@gmail.com विदेह ऑनलाइन पत्रिका छै (मैथिलीक पहिल) तँइ लेखकीय प्रति मात्र PDF रूपमे देल जाइत छै।
2) विदेह लेल रचना दू भागमे अछि, गद्य एवं पद्य। गद्य एवं पद्य केर सभ विधा लेल ई मान्य अछि (मुदा छंदमुक्त कविता लेल संपादक अपन विवेकक प्रयोग करताह जे ई रचना पोथी लेल उपयुक्त हेतै वा कि नहि, एहन नहि जे छंदमुक्तमे नीक रचना नहि भऽ सकैए मुदा मैथिलीमे छंदमुक्तकेँ गलत मतलब निकालि कविता विधाकेँ सत्यानाश कऽ देल गेलै) विदेहक कुल 24 अंकमे जँ कोनो रचनाकारक गद्य (जेना आलेख, आलोचना, समीक्षा, कथा, कथेतर गद्य, यात्रा,संस्मरण आदि) केर 15-20 टा रचना हेबाक चाही। बीहनि कथा एवं लघुकथा कमसँ कम 200 हेबाक चाही। उपन्यास, नाटक आदि जँ 24 अंकमे पूरा भऽ गेल अथवा जाहि अंकमे पूरा भऽ जेतै तकर बाद ओहिपर काज शुरू कऽ देल जेतै। छंदोबद्ध पद्य वा गजल 100 टा हेबाक चाही। छोट-छोट छंदोबद्ध रचना जेना दोहा, सवैया आदि लेल कमसँ कम 500 रचना हेबाक चाही। छंदोबद्ध पद्य एवं गजलक निच्चा ओकर विधान एवं नाम सेहो देनाइ अनिवार्य रहत। छंदोबद्ध पद्य वा गजल पूर्णतः मानक हेबाक चाही, वर्तनी सही हेबाक चाही, अन्यथा 100 संख्या भेलाक बादो विदेह ओहिपर विचार नै करत। लेख लेल सेहो एहने बात मानि कऽ चलू। गोल-मटोल भाषा बला समीक्षा-आलोचना मान्य नहि हएत। तहिना जाहि संस्मरणमे आनसँ बेसी अपनापर लीखल गेल हो सेहो मान्य नहि हएत।
3) जेना उपन्यास वा नाटक धारावाहिक रूपमे प्रकाशित होइए तेनाहिते कोनो एक विषयपर आलेख, आलोचना सेहो धारावाहिक रूपमे मान्य हएत। लेखक अपना हिसाबें विषय केर चयन कऽ सकैत छथि। मुदा एहि बर्ख हम मात्र उदाहरण लेल एकटा विषय एक रचनाकार लेल प्रस्तावित कऽ रहल छी जाहिसँ आरो स्पष्ट हएत। जेना कि एहि बेर लेल हम विषय बनेलहुँ "मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान" आ एहि लेल हम Kalpana Jha कल्पना झाजीकेँ नामित कऽ रहल छियनि। आब कल्पना जी सुविधानुसार एहि विषयपर जेना-जेना खंड लिखैत चलि जेतीह आ विदेहमे प्रकाशित होइत रहत आ अंतमे पोथीक रूपमे आबि जाएत।
4) जनवरी 2026 आ तकर बाद हरेक सालक जनवरीमे ओहन लेखक सभकेँ सूचना देल जेतनि जे एहि क्राइटेरियाकेँ पूरा केलाह, आ हुनकासँ ओहि रचना सभहक संशोधित रूप माँगल जेतनि। जे लेखक जाहि समयमे संशोधित रूप देताह तकरा ओहि समयक हिसाबें आ हुनकर लिखित सहमतिक संग ओहि रचना सभकेँ समेटि ओकरा पोथी रूप देल जाएत, ओकरा ISBN सेहो देल जाएत आ ओकर लिंक संबंधित लेखककेँ दऽ देल जेतनि। लिंक देलाक बाद लेखक-पाठक अपन मूल्य लगा ओकरा कीनि सकै छथि। विदेह क्रय-विक्रय केर काज नहि करैत अछि तँइ एहिसँ संबंधित कोनो समस्या लेल विदेह उत्तरदायी नहि हएत। हँ, स्वविवेकक उपयोग करैत विदेह टीम लेखकक समस्याक समाधान करबाक लेल प्रयास कऽ सकै छथि।
5) एहि योजनाक अंतर्गत आएल पोथीमे विदेहक नाम, लोगो, ओकर उद्येश्य, आन सूचना सहित ईहो लिखल रहत जे ई पोथी "विदेह लिटरेचर फेस्टीभल बर्ख...." योजना द्वारा चुनल गेल अछि।
6) रचना विदेह लेल अप्रकाशित हो माने ओकर प्रकाशन आन कतहुँ नै भेल हो। जँ पोथी रूपमे एलाक बाद पता चलल जे ओहि केर रचना आन ठाम छपल छै तऽ ओकर लिंक नष्ट कऽ देल जेतै।
7) रचनाक गुणवत्ता एवं ओकर मौलिकता लेल लेखक अपने उत्तरदायी हेता। मौलिकता संबंधी कोनो विवाद भेलापर ओहि पोथीक लिंक नष्ट कऽ देल जाएत आ ओहि लेखकक रचनाकेँ पुनः विदेहमे नै छापल जाएत।
8) विदेह दिससँ कोनो प्रकारक वित्तीय सहायता लेखककेँ नै भेटतनि कारण, विदेह किनकोसँ लैतो नै छै। विदेह मात्र रचनाकेँ समेटि, ओकर डिजाइन आ ISBN लेल प्रयास करत।
9) एहिमे साझी संकलन आदि मान्य नै हएत।
10) विदेहमे प्रकाशित रचना लेल जे नियम पहिनेसँ अछि से यथावत रहत आ एहि फेस्टीभेलक रचनापर सेहो लागू हएत। पाठक-लेखक चाहथि तऽ विदेहपर जा कऽ पूरा ब्यौरा देखि सकै छथि। नोट- विदेह लिटरेचर फेस्टीभल केर घोषणाक मात्र किछुए दिन बाद 1 जनवरी 2025 सँ "मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान" केर आलेख शुरू भऽ गेल। पाठक एहि लेल विदेहक 1 जनवरी 2025, अंक 409 पढ़ि सकै छथि। बादमे "मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान" केर घोषणा सेहो भेल जकरा लिखबा लेल हितनाथ झाजीसँ अनुरोध कएल गेल। 4 ऊपर भेल जे काज हम सभ कऽ सकलहुँ तकर विवरण मुदा किछु एहनो घोषणा छै जे कि हम सभ नै कऽ सकलहुँ जेना 2016 मे हम सभ परमेश्वर कापड़ि, कमला चौधरी आ वीरेन्द्र मल्लिक विशेषांक केर घोषणा कइयो कऽ नहि प्रकाशित कऽ सकलहुँ। पाठक एहि घोषणाकेँ एहि लिंकपर देखि सकै छथि- सूचना बादमे विदेहक "वीरेन्द्र मल्लिक विशेषांक" (जे कि प्रकाशित नै भऽ सकल) लेल वीरेन्द्र मल्लिक जीक साक्षात्कार जे नबोनारायण मिश्रजी से विदेहक 337म अंकमे प्रकाशित भेल पाठक एकरा एहि लिंकपर पढ़ि सकै छथि- 1 जनवरी 2022 अंक 337 2017 मे विदेह "नेपालक वर्तमान मैथिली साहित्य" विषयक विशेषांक निकालबाक नेयार केने छल जे एखन धरि पूरा नहि भऽ सकल अछि। तेनाहिते विदेहक "साहित्यिक भ्रष्टाचार विशेषांक" हमरा लोकनि एखन धरि नै प्रकाशित कऽ सकलहुँ अछि। एकर घोषणा हम 2019 मे केने रही। एहि घोषणाक फेसबुक लिंक देखू। हमरा लोकनि पं. गोविन्द झाजीपर कोनो काज नहि कऽ सकलहुँ से दुख आजीवन रहत। एहन नहि छै जे हमरा लोकनि प्रयास नहि केलहुँ मुदा कोनो ठामसँ उत्साह नहि भेटल। 10 अक्टूबर 2020 फेसबुकपर हम सभसँ आग्रहो केने रहियनि मुदा...। एहि घोषणाक फेसबुक लिंक देखू। परिशिष्ट-1 परिशिष्ट-2 परिशिष्ट-3 विदेह अपन कोनो अंकमे "साहित्यिक भ्रष्टाचार विशेषांक" निकालत (लिंक कमेंटमे) ताहि लेल अपने सभसँ निम्नलिखित विषयपर आलेख आदि चाही। 1.साहित्य, कला एवं सरकारी अकादमीः- (क) पुरस्कारक राजनीति (ख) सरकारी अकादेमीमे पैसबाक गैर-लोकतांत्रिक विधान (ग) सत्तागुट आ अकादमी केर काजक तौर-तरीका घ) सरकारी सत्ताक छद्म विरोधमे उपजल तात्कालिक समानांतर सत्ताक कार्यपद्धति (1985सँ एखन धरि) ङ) अकादेमी पुरस्कारमे पाइ फैक्टरः मिथक वा यथार्थ 2.व्यक्तिगत साहित्य संस्थान आ पुरस्कारक राजनीति 3.प्रकाशन जगतमे पसरल भ्रष्टाचार आ लेखक 4. मैथिलीक छद्म लेखक संगठन आ ओकर पदाधिकारी सभहँक आचरण 5.मैथिली विभागमे पसरल साहित्यिक भ्रष्टाचारक विविध रूपः- (क) पाठ्यक्रम (ख) अध्ययन-अध्यापन (ग) नियुक्ति 6. साहित्यिक पत्रकारिता, रिव्यू, मंच, माला, माइक आ लोकार्पणक खेल-तमाशा 7.लेखक सभहँक जन्म-मरण शताब्दी केर चुनाव, कैलेंडरवाद आ तकरा पाछूक राजनीति 8.दलित एवं लेखिका सभहँक संगे भेद-भाव आ ओकर शोषणक विविध तरीका उपरक विषयक अतिरिक्त जँ कियो साहित्यिक भ्रष्टाचारक कोनो नव विषयपर लिखए चाहथि तँ ओकरो स्वागत रहत। परिशिष्ट-4 नोट- विदेह विशेषांक जाहि खंडमे अहाँ सभ ई सूचना पढ़ि रहल छी तकर नाम छै "प्रस्तुत विशेषांकक संदर्भमे" मुदा हरेक विशेषांकक एहि खंडमे किछु ने किछु भिन्नता भेटत जकर कारण अछि जे भूतकालमे जे-जे हम सभ काज केने छी तकरा सभकेँ फेसबुक वा आन लिंककेँ ताकब समयसाध्य काज छै तँइ हमर आग्रह रहतनि पाठक वर्गसँ जे नवीनतम आ संशोधित सूचना लेल ओ जाहि समयमे तकता ताहि समयक अंतिम विदेह विशेषांकक ई खंड देखथि (ई विशेषांक कोनो कैटेगरीक भऽ सकैए)। उदाहरण लेल मानू जे कोनो पाठक फरवरी 2025 मे विदेह विशेषांकक कोनो पुरान ई खंड पढ़लथि आ हुनका ओहिमे कोनो गलती बुझना गेलनि तऽ ओकर संशोधित रूप पढ़बाक लेल विदेहक मिथिला विकास परिषद् विशेषांकमे आएल एहि खंडकेँ पढ़थि। हुनकर समस्याक समाधान भऽ जेतनि। संगहि एहि विशेषांकमे जँ किछु छूटत से से हम सभ भविष्यमे आबऽ बला विशेषांकमे संशोधित कऽ परसबै। इएह क्रम छै आ लगैए जे लगभग एक-दू बर्खमे हम एहि पन्नाक अंतिम स्वरूप पाबि लेब। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.२.एहिठाम प्रस्तुत अछि नारायणजी चौधरीजी केर संक्षिप्त परिचय चित्र-1 नाम: नारायणजी चौधरी जन्म तिथि: 30/8/1959 गाम: इसहपुर, पंडौल (मधुबनी) शिक्षा: B. Com (Hons) वृत्ति: सामाजिक काज माता: पंचमुखी देवी पिता: स्व. पंडित वैद्यनाथ चौधरी पितामह: स्व. जीवछ चौधरी पितामही: स्व. सीता देवी प्रपितामह: स्व. भवी चौधरी प्रपितामही: स्व. भवानी चौधरी पत्नी: कलिता चौधरी प्रथम पत्नी: स्व. इन्दु चौधरी संतान: आयु चौधरी, राहुल चौधरी एवं आशु चौधरी भाइ: रमणजी चौधरी, गोपालजी चौधरी, कन्हैया चौधरी अनुभव: 1) 1984-1990 केर बीच मध्यप्रदेशक झाबुआ एवं बस्तर जिलामे आदिवासी समाजक संग ओकर विकास लेल काज, अनुभव: 2) 1991 केर बाद बिहारमे मिथिला ग्राम विकास परिषदक निर्माण, निबंधन एवं ओकरा संगे सामाजिक काज। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.३.नारायणजी चौधरी एवं हुनक पोखरि बचाउ (तालाब बचाओ, Save ponds / Lakes Campaign) अभियान केर सहयोगी लोकनि नारायणजी चौधरी एवं हुनक पोखरि बचाउ (तालाब बचाओ, Save ponds / Lakes Campaign) अभियान केर सहयोगी लोकनि (ई लिस्ट विदेहक अपन छान-बीनपर आधारित अछि। बहुत संभव जे किछु नाम छूटि गेल हएत। जँ किनको लग छूटल नाम हो तँ सूचित करी)- जमीनपर (Grass roots) काज केनिहार सहयोगी- 1) स्व. राज कुमार सिंह 2) स्व. दुर्गा नंद मंडल 3) स्व. राजीव 4) स्व. कामेश्वर कामति 5) स्व. विजय कुमार 6) इंदिरा कुमारी 7) नाजिया प्रवीण 8) मो. तशीम 9) अजित कुमार मिश्र 10) राकेश कुमार गुप्ता 11) कन्हैया जी 12) मनोज अभिषेक 13) लालेश्वर सिंह (2008 केर बाढ़िमे कुसहा बान्ह टुटलापर लालेश्वर जीक टीम द्वारा दस हजारसँ बेसी लोककेँ बाढ़िसँ निकालल गेल रहै) 14) सत्यनारायण भाइ 15) कमलेश झा, 16) जीवछ चौधरी 17) प्रकाश बंधु 18) विकास शर्मा, 19) जयंत कुमार, 20) भाग्य नारायण, 21) आभूषण पाठक
कानूनी एवं दस्तावेजीकरण (Legal and Documentation) केर सहयोगी- 1) स्व. अनिद्य बनर्जी (दस्तावेजीकरण,Documentation सहयोगी) 2) कमलेश कुमार मिश्र (सुप्रीम कोर्ट केर ओकील, Legal सहयोगी) बुद्धिजीवी (Intellectual) वर्गक सहयोगी 1) स्व. मानस बिहारी वर्मा 2) स्व. गणपति मिश्र 3) प्रो सैयद शमीम बारबी 4) डा. आर.बी खेतान 5) डा. शिव कुमार मिश्र 6) हृदय नारायण चौधरी 7) प्रो. विद्यानाथ झा 8) डा. शारदानंद चौधरी 9) प्रो. प्रेममोहन मिश्र 10) अवनीन्द्र कुमार झा, 11) डा. विनय कुमार मिश्र 12) डा. अशोक कुमार सिंह 13) डा. श्यामानंद झा अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.४.Randhir Jha- Water Rich Mithila then, Water Crisis in Mithila Now! Randhir Jha Water Rich Mithila then, Water Crisis in Mithila Now! The Mithila region, located in the northern part of Bihar (India) and parts of southeastern Nepal, is blessed with an abundance of water resources. Shaped by the fertile Gangetic plains and nourished by the Himalayan Rivers, Mithila is one of the richest hydrological zones in the Indian subcontinent. Despite challenges, the region’s water wealth holds the potential for sustainable development, agricultural prosperity, and cultural enrichment, provided people understand the challenges and work cohesively to overcome water depletion, which has grown substantially over the last couple of decades. Its low-lying plains and proximity to the Himalayan foothills characterize Mithila’s geography. This makes it a natural reservoir for numerous rivers, ponds, and groundwater reserves. Major rivers such as the Kosi, Bagmati, Kamla, Gandak, and Balan flow through Mithila, bringing with them vast quantities of water from the Himalayan glaciers. These rivers not only provide irrigation but also recharge groundwater and fill ponds and lakes that dot the landscape. Water Depletion in Mithila: A Growing Concern... Mithila’s traditional water management systems, especially the Ahar-Pyne network, once sustained irrigation and recharged groundwater. Today, many of these systems are either encroached upon, silted up, or abandoned due to urbanization and a lack of awareness. Ponds (locally known as pokhairs) that once stored rainwater and supported local ecosystems are disappearing. The entire Mithila region is full of these pokhars, and across cities and villages, people are now facing an existential crisis. The business of Land (property Dealers' lobby), with the support of political, administrative, and criminal elements, can fill this important part of natural water management that has existed for ages. These ponds are often filled in for the construction of housing/malls/ and other business purposes. We must know that these ponds played a crucial role for Mithila in many ways 1) It works as emergency irrigation in case of a low or insufficient monsoon, 2) It keeps ground groundwater level recharged and hence has lesser dependency on the government for water needs. 3) Agro Businesses like fish farming, Gorgon nuts (popularly known as Makhana) farming have been a traditional business source of the region for locals. Cities like Darbhanga, Madhubani, Saharsa, Samastipur, and Sitamadhi never had to face a drinking water crisis. They are now struggling to provide the same. From town to village, one can see dried-up hand pumps and people getting dependent on either government-provided tap water or bottled water bought from the market. This is disheartening to see how a rich water resource region has gotten into a mess in just 2-3 decades. The most unfortunate part is that local Maithils still do not take it as the biggest issue of the coming decades and for generations. Water Crisis in Madhubani, Mithila: A Silent Thirst in a Fertile Land: Although the entire Mithila region of Bihar, historically celebrated for its vibrant culture, Maithili language, and the legacy of Sita, is now grappling with an increasingly urgent issue: a severe water crisis. Among the districts in this region, Madhubani stands out as one of the worst-affected, facing critical water scarcity due to a combination of environmental neglect, poor infrastructure, and policy failures. Madhubani heavily depends on groundwater for drinking and irrigation. However, over-extraction of water through hand pumps and bore wells has led to a sharp fall in the groundwater table. Compounding this issue is arsenic contamination, especially in blocks like Jhanjharpur and Phulparas. Long-term exposure to arsenic can lead to serious health issues, including skin lesions, cancer, and organ failure. Despite receiving a fair amount of rainfall, water is rarely conserved effectively. Traditional ponds, ahars, and pynes (ancient water management systems) have been encroached upon or neglected. Modern infrastructure projects often ignore these indigenous systems, leading to runoff and waterlogging during monsoons, but acute scarcity in summer. While government initiatives like Jal Jeevan Mission aim to provide tap water to every household, implementation in remote areas of Madhubani has been slow and inconsistent. Corruption, lack of awareness, and weak maintenance often lead to non-functional schemes. There is also a gap between urban and rural water access, with villages frequently neglected. One of the major drawbacks of the Jal Jeevan mission is the approach and strategy, government herself is using ground water for distribution, it installs submersible everywhere which pumps water from not rechargeable layers, once water finishes the entire plan will go for a toss, overexploitation of non-rechargeable layer will have larger implications for future. We need civil society movements, leadership, and turning the water crisis creating new, preserving old Pokhar as a political issue to control the damage and avert the very evident forthcoming crisis, which will make the entire region thirsty and crying for water… Hope: We need civil society movements, leadership that creates a water crisis, creating new and preserving old Pokhar as a political issue in order to control the damage and avert the very evident forthcoming crisis, which will affect the entire region. Though people are largely not very aware of the forthcoming problem of the region but not all is that bad as well, we have many organizations, groups, and individuals who are working on the ground day and night, fighting for the cause of preservation of existing pokhars, ground water, and better river management. One such individual who has given his life for this cause is Sri Narayan Ji Chaudhary. His commitment to save the water heritage of Mithila started from Darbhanga, where he initiated a campaign called Talab Bachao Abhiyan. The clear motive of Narayanji’s campaign has been to raise awareness about the importance of saving ponds amongst people at large, work as a cohesive group to connect and get support from the system to save the ponds, and if need be, agitate as well for the better future of the next Maithil generations. Over the years, Choudhary led several sit-in protests (dharna), signature campaigns, poster exhibitions during popular festivals like Durga Puja and Chhath, protest marches, and organised meetings with students and party leaders to save ponds. The growing water crisis witnessed in recent years, including as recent as in 2018 and 2019, in Darbhanga and neighbouring districts, has compelled Choudhary to widen his campaign from saving ponds to saving and reviving “water bodies” (Jalashay Bachao Abhiyan), a new initiative kicked off this year. Choudhary’s focus now is to save water bodies (jalashay), including rivers and wetlands, locally known as chaur. He got the push in this direction from Manas Bihari Verma, a retired DRDO scientist and friend of former President A.P.J. Abdul Kalam, who has actively been supporting Choudhary from the start and encouraged him to engage with people to save all water bodies, a lifeline for survival. According to Narayan Ji Chaudhary, in the last two decades, illegal encroachers have filled ponds with waste, soil, and other material, killing the ponds. With the disappearance of ponds, their ability to harvest natural water during the monsoon will also be hit. “It is a difficult task to save a pond due to apathy of government and local administration,” said Choudhary about his fight to protect old ponds even as illegal encroachers get away easily. Organizations like Talab Bachao Abhiyan are gaining momentum, and awareness is now increasing rapidly. We need more like Mr Chaudhary and his organization to save at least the existing water bodies that we have inherited from the past. अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.५.डॉ. शिव कुमार मिश्र-मिथिलाक धरोहरि अभियानी नारायण जी चौधरी डॉ. शिव कुमार मिश्र, संपर्क-9122686586 मिथिलाक धरोहरि अभियानी नारायण जी चौधरी मिथिलामे पोखरि खुनायब बड़ पैघ सामाजिक ओ धार्मिक कृत्य मानल जाइत अछि। पोखरि खुनायब ओकर यज्ञ केनाइ ओ सामाजिक उपयोग लेल समर्पित करब उत्कृष्ट सामाजिक कार्य मानल जाइत रहल छैक। धार्मिक व्यवस्थाक अनुसारें कोनो वर्ण वा जातिक कोनो व्यक्ति स्त्री वा पुरुष पोखरि खुनबा सकैत छथि आओर यज्ञ क' समाजकें समर्पित क' सकैत छथि। ऋग्वेदक मरुत सुक्तमे कहल गेल छैक जे प्याससँ व्याकुल भ' गौतम वायु देवताक प्रार्थना कयलन्हि जाहिसँ वायुदेवता प्रसन्न भए गौतम आश्रमक दक्षिण बिड़रोसँ माटि खोधि कय पोखरि बना देलनि। कर्णाट कालमे ज्योतिरीश्वरक वर्णरत्नाकरमे सरोवर ओ पोखरिक वर्णनक संगहि ओकर जलजीवक चर्चा अछि तहिना वर्धमान उपाध्यायक तड़ागामृतलता ओ जलाशयादिवास्तु पद्धति नामक पोथीसभमे पोखरि खुनेबाक महत्ताक वर्णन भेटैछ। एहि तरहें पोखरि खुनेबाक ओ तकर उराही करबाक परम्पराक अनुपालन मिथिलामे अनवरत होइत रहल अछि। जल संचयन हेतु पोखरि खुनेनाइ पुण्य मानल जाइत रहल। बरसातमे पानि जमा होइत छल जकर उपयोग बादमे जीव जन्तुक रक्षाक लेल होइत रहल। अकालक समयमे पोखरिक पानि पर लोक आश्रित रहैत छलाह। मिथिलाक राजा ओ जमीनदार लोकनि जल संचयन लेल पैघ-पैघ पोखरि खुनबौलनि। कर्णाटकालीन राजाक राजधानी सिमरौनगढमे कतोक पैघ-पैघ पोखरि छैक जकर उराहीमे प्रायः प्रतिवर्ष विभिन्न देवी देवताक ताहि कालक मूर्ति सभ भेटैछ। तहिना मिथिलाक प्रत्येक गाम ओ नगरमे पैघ-पैघ पोखरि देखल जा सकैछ। एक दिस हमरा लोकनिक पुरखा पोखरि खुनाय पुण्यक काज कयलन्हि मुदा दोसर दिस पछिला किछु दशकसँ पोखरिकें भरि कय ओ अतिक्रमण कय पापक भागी लोक बनि रहल छथि। पोखरिक अतिक्रमणकारी सभ आपराधिक प्रवृत्तिक आचरण करैत छथि जाहिसँ समाजक लोक हुनक प्रतिरोध करबासँ परहेज़ करैत छथि। एहना स्थितिमे नारायणजी चौधरी सन पुण्यात्मा अपन पोखरि बचाउ (तालाब बचाओ) अभियान समितिक द्वारा पोखरिक रक्षा करबाक लेल अपन तन मन धन न्यौछावर कयने छथि। नारायणजी मधुबनी जिलाक पंडौल थानांतर्गत इसहपुर गामक रहनिहार छथि। महावैयाकरण पं. दीनबंधु झा एहि गामक छलाह। हुनक सुपुत्र पं. गोविन्द झा प्रसिद्ध भाषाविद ओ संस्कृतक प्रकाण्ड विद्वान छलाह। एहि गामक पुरातात्विक महत्व सेहो छैक। माटि खुनबाक क्रमे कतोक पुरावशेष सभ भेटैत रहैछ। किछु पुरावशेषके हम ओतयसँ उठाय मिथिला ललित संग्रहालय, सौराठमे राखि देल। एहि तरहें इसहपुर एक ऐतिहासिक ओ पुरातात्विक महत्वक गाम अछि। महाराजाधिराज लक्ष्मीश्वर सिंह संग्रहालय, दरभंगामे 2017मे हमर पदस्थापन भेल। मिथिलाक धरोहरिक संरक्षण ओ संवर्धन लेल हमर काज चलैत रहैत छल। धरोहरि संरक्षण लेल संसारमे सभसँ पैघ संस्था इंडियन नेशनल ट्रस्ट फार आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (इन्टैक)क दरभंगा चैप्टरक स्थापना 2016मे हमर प्रयाससँ भेल छल। इन्टैक द्वारा दरभंगा ओ मधुबनी जिलाक प्राकृतिक धरोहरिक सूचीकरण करबाओल गेल। मधुबनी जिलाक सूचीकरण पत्रकार सुनील कुमार मिश्र द्वारा कयल गेल जखन की डा सुशांत कुमार द्वारा दरभंगा जिलाक प्राकृतिक धरोहरिक सूचीकरण कयल गेल। ई काज हमरहि देख-रेखमे होइत छल। एहि बीच हमर दरभंगामे पदस्थापनक बाद नारायणजी चौधरीजीसँ संपर्क भेल। हिनक समर्पण ओ क्रियाकलापसँ हम बेसी प्रभावित भेलहुँ। हुनक काजमे हमहूँ शामिल भय गेलहुँ एवं यथासंभव सहयोग करय लगलहुँ। चौधरी जीक इच्छा भेलनि जे बाढ़िक समस्या पर परिचर्चा होइ जकर अध्यक्षता पद्मश्री मानस बिहारी वर्मा करथि। मैथिली साहित्य संस्थान, पटना पोखरि बचाउ अभियान एवं इंटैक दरभंगा चैप्टरक संयुक्त तत्वावधानमे 1 अगस्त 2019क' आदरणीय पद्मश्री मानस बिहारी वर्माजीक अध्यक्षतामे बैसार भेल। हम किछु आओर व्यक्तित्वकें आमंत्रित कय देल। नदी विशेषज्ञ आदरणीय दिनेश कुमार मिश्र, गजानन मिश्र (भारतीय प्रशासनिक सेवा), पत्रकार पुष्यमित्र, डा सुशांत कुमार, समाजसेवी उमेश राय, प्रोफेसर विद्यानाथ झा, प्रोफेसर जयानंद मिश्र प्रभृति कतोक विशेषज्ञ एहि बैसारमे सामिल भय अपन विचार रखलन्हि। नारायण जी द्वारा पोखरि ओ धार सभक दशा ओ दिशाक विषयमे विस्तारसँ प्रतिवेदन प्रस्तुत कयल गेल। कृष्ण कुमार कश्यप, मिथिलेश्वर झा, कमलेश झा, रत्नेश्वर सिंह, बदरे आलम, मोदनाथ मिश्र, राजेन्द्र सहनी समेत दरभंगाक कतोक बुद्धिजीवी सभ बैसारमे भाग लेलनि। बैसारक संचालन हम कयने छलहुँ। प्रिंट मीडिया ओ सोशल मीडिया पर ई समाचार बेस प्रसारित भेल। परिणाम भेल जे मिथिला ओ मैथिलीसँ संबंधित देशक कतोक संस्थान सभ सेहो एहि विषय पर चर्चा कयलन्हि। एक प्रकारें नारायणजीक प्रयाससँ कतोक संस्थान सभमे जागरूकता उत्पन्न भेल। सभठाम पोखरि, धार, पानि ,बाढि नियंत्रण, अतिक्रमण प्रभृतिक चर्चा होमय लागल। धरोहरि संरक्षणक क्रियाकलापसभमे नारायणजी द्वारा हमरा सहयोग भेटय लागल। हमर प्रयाससँ इंटैक द्वारा मिथिलाक पंजी ओ पांडुलिपिक संरक्षण 2021मे ओहि संग्रहालयमे कराओल गेल। पंजी ओ पांडुलिपिक संरक्षणक दिशामे प्रायः एहन पहिल प्रयास भेल छल (पांडुलिपिक संरक्षण माने जीर्ण-शीर्ण आ खराप भेल पांडुलिपिक रासायनिक उपचार द्वारा नवीनीकरण)। नारायणजी चौधरीकें एहि काजसँ बेस प्रसन्नता भेल रहनि। एक दिन हँसी केलनि जे ई काज सभ बतहपनी छैक। हुनक कहबाक तात्पर्य छलनि जे बिना जुनून अथवा बतहपनीकें धरोहरि संरक्षणक लेल एहन काज नहि भ' सकैछ। हुनको काज जे छनि से तेहने छनि। पोखरिक सुरक्षा ओ संरक्षण एकगोट दुरूह काज छैक। आपराधिक प्रवृत्तिक लोक पोखरि पर कब्जा कयने छैक। प्रशासन ओ असामाजिक तत्व द्वारा ओकरे सहयोग भेटैत छैक। ओकर दबंगईसँ समाजक नीक लोक भयभीत रहैत छथि। तेहन स्थितिमे जँ कियो अभियान चलबैत छथि तँ हुनकर जान-मालकें सदिखन खतरा रहैत छनि। नारायण जी चौधरी ओ हुनक सहयोगीलोकनि खतराकें परबाहि बिनु कयने सदिखन अपन अभियानमे रमल रहैत छथि। दरभंगाक प्राकृतिक धरोहरि दिग्घी ओ हराही पोखरि छैक। दरभंगा रेलवे स्टेशन द्वारा कतोक बर्खसँ एहिमे कचरा ओ दूषित पानि खसाओल जाइत छल। चौधरीजी एहिसँ आहत छलाह। कतोक बेर हमरा लोकनि एकर निदानक लेल विमर्श कयल। दिसम्बर 2021मे चंद्रधारी संग्रहालयक प्रभार हमरा भेटल। हम तुरंत रेलवेक वरिष्ठ अधिकारी सभकें पत्र लीखि कय आग्रह कयल जे रेलवेक दूषित पानिकें संग्रहालय परिसर ओ दिग्घी पोखरिमे खसेनाइ बंद कयल जाय। मीडियामे एहि समाचारकें बेस प्रसारित कयल गेल। पत्रक प्रतिलिपि पोखरि बचाउ अभियान समितिकें आवश्यक कार्रवाई हेतु सेहो देल गेल। विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून 2022क' महाराजाधिराज लक्ष्मीश्वर सिंह संग्रहालय, दरभंगामे पोखरि बचाउ अभियानक संग संयुक्त तत्वावधानमे एकगोट कार्यक्रम आयोजित कयल गेल छल। जिला पदाधिकारी सहित कतोक गणमान्य नागरिक सभ उपस्थित भेलाह। चौधरी जी एवं कतोक बुद्धिजीवी सभ पोखरिक दशा ओ दिशाक विषयमे विस्तारसँ चर्चा कयलन्हि। जिला पदाधिकारीके दिग्घी पोखरिमे रेलवे द्वारा खसाओल जा रहल दूषित पानिकें देखा देल आ आग्रह कयल जे एकरा रोकल जाय। दिग्घी पोखरिक मोहार पर जे अतिक्रमण छैक सेहो देखलनि। हम कहलियनि जे ई अतिक्रमण समाजक शिक्षित लोक यथा -डाक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर, वकील, पत्रकार आदि द्वारा कयल जाइत अछि जकरा प्रशासनिक अधिकारी लोकनिक सहयोग भेटैत रहैछ। एहि बातकें ओ स्वीकार कयने छलाह। कामेश्वर नगर परिसरक पोखरिक सौन्दर्यीकरण विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा कयल गेल। पोखरिक अँगनइकें नष्ट कय देल गेल। नारायण जी ओकरा चुनौतीक लेल नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनलमे मामिला दर्ज कयलन्हि। ट्रिब्यूनलक आदेशसं पोखरिक अँगनइकें ठीक कयल गेल एवं कुलपतिकें दंडित कयल गेल। हराही, दिग्घी ओ गंगासागर पोखरिक दुर्दशाक निदानक लेल चौधरी जी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनलमे मामिला दर्ज कयलनि। ट्रिब्यूनलक आदेश भेलैक जे पोखरिमे पानि खसेनाइ तुरंत रोकल जाय। से भेलैक। संगहि एक करोड़ एकसठि लाख टकाक जुर्माना सेहो लगाओल गेल। एहन न्यायादेश प्रायः पहिल बेर भेल छैक जाहिमे पोखरिक रक्षाक लेल जुर्माना भेल छैक। नारायण जी चौधरीक प्रयासक बड़ पैघ उपलब्धि ई निर्णय छैक। मीडियामे एहि समाचारकें बेस प्रसारित कयल गेल। इन्टैक मुख्यालय द्वारा हमरा निदेशित कयल गेल जे नारायण जी चौधरी एवं हुनक पोखरि बचाउ अभियान समितिकें अभिनंदन कयल जाय। महाराजा लक्ष्मीश्वर सिंह मेमोरियल महाविद्यालय, दरभंगाक सभागारमे 14 अक्टूबर 2024क एक गोट भव्य कार्यक्रम आयोजित भेल। उक्त महाविद्यालय ओ इन्टैक दरभंगा चैप्टरक संयुक्त तत्वावधानमे पोखरि बचाउ अभियान समितिकें सम्मानित कयल गेल। समिति दिससँ नारायण जी चौधरी एवं हुनक सहयोगी मोहम्मद ताशिम नबावके पाग दोपटासँ सम्मानित कयल गेल। महाविद्यालयक प्रधानाचार्यक अध्यक्षतामे जल संरक्षणक वास्ते प्रयास कयनिहार बेगूसरायक शिव प्रकाश भारद्वाजके सेहो सम्मानित कयल गेल। इन्टैक दरभंगा चैप्टरक प्रोफेसर नवीन कुमार अग्रवाल अलावा प्रोफेसर विद्यानाथ झा, प्रोफेसर मुनीश्वर यादव, डा वैद्यनाथ चौधरी बैजू, प्रसिद्ध साहित्यकार प्रोफेसर भीमनाथ झा, डा वीणा ठाकुर, डा योगानंद झा, डा अवनींद्र कुमार झा, गणपति नाथ झा वैद्य, विवेकानंद झा, डा अयोध्या नाथ झा सहित शताधिक गणमान्यजन उपस्थित भेलाह। ई ओहन अवसर छल जतय दरभंगाक प्रमुख व्यक्तित्व सभ नारायण जी चौधरीकें सुनलनि एवं हुनक सम्मान समारोहक प्रत्यक्षदर्शी बनलाह। हुनक सहयोगी मोहम्मद ताशिम नबावक उद्गार ओ व्यथा कथा सुनि अत्यंत मर्माहत भेलहुँ जे कोना--कोना जान पर खेलि कय ओलोकनि पोखरिक रक्षा करैत छथि। नारायण जी चौधरी निडर ओ कर्मठताक संगहि संकोची स्वभावक व्यक्ति सेहो छथि। जखन हुनका सम्मानक चर्चा हम कयल त' कहलनि जे हमर संपूर्ण टीम काज करैत अछि। हमर वकील कमलेश कुमार मिश्र सदिखन सहयोग लेल ठाढ रहैत छथि तखन व्यक्तिगत रूपसँ हमरा सम्मान स्वीकार नहि। हम कहलियनि जे वकील साहबक संगहि संपूर्ण टीमक सदस्य सभकें आमंत्रित कयल जाय। आओर सभ सदस्य उपस्थित भेलाह तखन कार्यक्रम आयोजित भेल। वकील साहब दिल्लीसँ नहि आबि सकलाह त' मैथिली साहित्य संस्थान, पटना द्वारा मैथिली दिवसक सुअवसर पर 7 जनवरी 2025क प्रसिद्ध इतिहासकार प्रोफेसर रत्नेश्वर मिश्रक कर-कमलसँ हुनका सम्मानित कयल गेल। समाजक लेल काज केनिहार एहि टीमकें सम्मानित कय कोनो संस्थान स्वयंकें गौरवशाली बुझैत अछि। चौधरी जीक अनुसारें कोशी महासेतु निर्माणक समय विशेषज्ञ समितिक सदस्यक कहब छलनि जे ई सेतु ततेक छोट अछि जे भविष्यमे विनाशकारी साबित होयत। नारायण जी चौधरी एहि मामिलाकें उच्चतम न्यायालयमे रखलन्हि। कोर्ट कहलकनि जे उच्च न्यायालय जाउ। उच्च न्यायालयमे हिनक वकील साहब महासेतुक ठीकेदारसँ प्रभावित भेलाह आ मामिला कमजोर भय गेल (ई ओकील कियो दोसर छलाह)। चौधरी जी कहैत छथि जे ओहि मामिलाक असरि भेलैक जे कोशी पर दोसर पुल जे मधेपुरमे बनि रहल छैक से बेस नमहर बनि रहल छैक। पोखरि बचेबाक लेल चौधरी जी जागरुकता अभियान सदिखन चलबैत रहैत छथि। संगोष्ठी, सेमिनार, धरना, प्रदर्शन, फोटो प्रदर्शनी प्रभृतिक माध्यमसँ आम लोककें जागरूक करैत रहैत छथि। पद्मश्री मानस बिहारी वर्मा, डा गणपति मिश्र सन महान व्यक्तित्वक सहयोग भेटैत रहलनि। प्रोफेसर विद्यानाथ झा, मोदनाथ मिश्र, अजित कुमार मिश्र, गजानन मिश्र, डा अवनींद्र कुमार झा, सुशांत कुमार, मुरारी कुमार झा प्रभृति कतोक बुद्धिजीवी सभक सहयोग सेहो भेटैत रहैत छन्हि। जँ पोखरि खुनेनाइ पुण्यक काज छैक त' ओकरा भरि कय नष्ट केनाइ महापाप अवस्स हेतैक। जे पोखरिक रक्षा करैत छथि ओ हमरा नजरिमे पुण्यात्मा अवस्स छथि। धरोहरि संरक्षणक लेल नारायण जीक समर्पणसँ हम बेस प्रभावित छी आ एहन धरोहरिक सेनानीक प्रति अत्यधिक सम्मान अछि। ईश्वरसँ हुनक दीर्घायु ओ स्वस्थ जीवनक कामना करैत छी। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.६.प्रणव झा- मिथिला मे पोखरिक अतिक्रमण आ "तालाब बचाओ अभियान" प्रणव झा मिथिला मे पोखरिक अतिक्रमण आ "तालाब बचाओ अभियान" "पग-पग पोखरि, माछ-मखान" मिथिलाक पहिचान रहल अछि, जे गाम-गाम मे पोखरिक उपस्थिति आ ओहि सँ माछ आ मखानक उत्पादनक प्रचुरता देखबैत अछि। पोखरि एतुक्का जीवनक आधार रहल अछि- खेती-बाड़ी, माछ पालन, मखान उत्पादन, आ डेली केआवश्यकता जेना नहेनाइ, धोनाइ, आ माल-जाल लेल पानिक व्यवस्था एकर माध्यम सँ होइत रहल अछि। मुदा पिछला दू-अढ़ाइ दशक (2000-2025) मे ई पोखरि सभ तेजी सँ अतिक्रमणक शिकार भऽ गेल अछि। भू-माफिया सभ पोखरि सभ केँ भरबा कऽ ओहि पर मकान, दुकान, आ बिल्डिंग बनबैत जा रहल अछि। ई धंधा कमोवेश मिथिलाक सभ जिला मे फरि-फुला रहल अछि जकरा कारण मिथिलाक जल संपदा संकट मे पड़ल अछि। ऐ संकटक बीच श्री नारायण चौधरीजी क नेतृत्व मे "तालाब बचाओ अभियान" एकटा आशाक किरण बनल। ओ अपन अथक प्रयास सँ मिथिलाक (खास कऽ दरभंगा जिलाक) पोखरिक संरक्षणक लेल माफिया, प्रशासन, आ सामाजिक उदासीनता सँ लगातार लड़ैत आबि रहल छथि। ऐ आलेख द्वारा पोखरिक ऐतिहासिक महत्व, अतिक्रमणक कुप्रभाव, माफियाक भूमिका, चौधरीजीक संघर्ष आ उपलब्धि, आ संबंधित हालक खबर पर चर्चा करबाक प्रयास अछि। मिथिला मे पोखरि खाली पानि सँ भरल खाइध नहि अछि, बल्कि संस्कृति, अर्थव्यवस्था, आ सामाजिक जीवनक आधार रहल अछि। 1964क दरभंगा गजेटियरक मुताबिक, दरभंगा शहर मे 300 सँ बेसी पोखरि छल। उदाहरण लेल, गंगा सागर पोखरि, हराही पोखरि, आ दिग्घी पोखरि सन पोखरि ऐतिहासिक आ सामाजिक दृष्टि सँ महत्वपूर्ण रहल अछि। ई पोखरि सभ माछ पालन आ मखान उत्पादनक केंद्र छल। मखान, जे मिथिलाक विशेष उत्पाद अछि, एकर वार्षिक उत्पादन 2000क दशक मे लगभग 50,000 टन छल, जे मुख्य रूप सँ पोखरि सँ होइत छल (आब एकर उत्पादन खेत मे सेहो होबय लागल, मुदा ई दोसर विषय अछि)। मिथिला मे पोखरिक कात मे मेला, पूजा-पाठ, आ सामुदायिक आयोजन सभ प्राचीन समय से होइत आबैत रहल अछि, जे एकर सांस्कृतिक महत्व के इंगित करय अछि। 1989 मे प्रो. एस.एच. बज्मीक सर्वे मे दरभंगा मे 213 पोखरिक उल्लेख भेल, जे 25 साल मे 87 पोखरिक कमी देखबैत अछि। 2016 मे दरभंगा नगर निगमक आँकड़ा मे ई संख्या मात्र 84 रहल, जे एकर तेजी सँ लुप्त होएबाक सोझा संकेत दैत अछि। मधुबनी जिला मे 10,755 सरकारी आ निजी पोखरि छल, जाहि मे सँ क्योटी प्रखंडक तेलिया पोखरि, सिंहवाड़ाक होलिया पोखरि, आ मनीगाछीक दिग्घी पोखरि प्रसिद्ध छल। ई पोखरि जल संरक्षणक प्राकृतिक साधन छल, जे भूजलक स्तर के बना कऽ राखैत छल आ बरसातक पानि के संरक्षित करैत छल। उदाहरण लेल, गंगा सागर पोखरिक आसपासक गाम मे 1990क दशक तक हैंडपंप मे पानिक कहियो कमी नहि होय छल, मुदा एकर सिकुड़न सँ भूजल संकट शुरू भेल, जे हाल के साल मे अक्सर गर्मी के सीजन मे देखल जा रहल अछि। 2000क दशक मे मिथिला मे शहरीकरण आ जनसंख्या वृद्धिक लहर शुरू भेल। दरभंगा शहरक जनसंख्या जे 2001 मे 2.96 लाख छल, से 2011 मे बढ़ि कऽ 3.80 लाख भऽ गेल। ऐ तीव्र जनसंख्या वृद्धिक कारण जमीनक माँग बढ़ल, आ पोखरि पर भू-माफियाक नजर पड़ल। मन पोखरि (दरभंगा), नीम पोखरि (विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र), आ बाबा सागर दास पोखरि सन पोखरि पर माटि भरा कऽ अतिक्रमण शुरू भेल। उदाहरण लेल, मन पोखरि, जे कहियो 10 एकड़ मे पसरल छल, एकरा ऊपर धीरे-धीरे अतिक्रमण कऽ मकान बनेनाइ शुरू भेल आ 2008 तक एकर आकार घटि कऽ 6 एकड़ रहि गेल। 2005 मे दरभंगा मे भूजल स्तर नीचा जेबाक पहिल रिपोर्ट आयल, जेकरा चौधरीजी पोखरिक कमी सँ जोड़लखिन अछि। 2000-2010 के दशक मे लगभग 50 पोखरिक आंशिक अतिक्रमण भेल, जकरा भू-माफिया द्वारा पोखरिकेँ अतिक्रमण के नींवक रूप मे देखल जा सकय अछि। 2010-2020 के दशक पोखरि लेल सर्वाधिक विनाशकारी रहल। भू-माफिया संगठित रूप सँ पोखरि के निशाना बनौलक। 2013 मे चौधरीजीक सर्वे मुताबिक, दरभंगा जिला मे 9,113 पोखरि छल, मुदा 2020 तक ई संख्या 7,000 सँ नीचा चलि गेल। मोंगाबे (2020)क एकटा रिपोर्टक मुताबिक, मोइनी पोखरि (दरभंगा), डुमडुमा पोखरि (मधुबनी) माटी सँ भरल गेल। कोविड काल (2020-21) मे, जखन प्रशासन महामारी सँ जूझैत छल, माफिया 25 सँ बेसी पोखरिक अतिक्रमण कऽ लेलक। नीम पोखरिक उदाहरण लिय- 36 डिसमिल क्षेत्र राता-राती माटी सँ भरल गेल, आ ओहि पर खोपरी आ बांसक ढाठ बना देल गेल (डाउन टू अर्थ 2024)। मनीगाछी प्रखंड मे सूरयाही पोखरि (15 एकड़) आ जगरनाथ पोखरि (12 एकड़) पर मकान बनल। ऐतिहासिक दिग्घी पोखरि (20 एकड़) 2015 तक 8 एकड़ रहि गेल, आ हराही पोखरिक आधा हिस्सा माटी सँ पाटल गेल। 2020क बादो अतिक्रमण अनवरत जारी रहल अछि, मुदा किछु सकारात्मक कदम सेहो उठाओल जा रहल अछि। जनवरी 2024 मे ईटीवी भारतक खबरक मुताबिक, दरभंगा मे एकटा पोखरि (लाल पोखरि, 5 एकड़) रात मे माटि सँ भरल गेल। स्थानीय सुनील कुमारक बयान छल जे माफिया दिन-रात माटी भरि देलक, आ पुलिस चुप रहल। डीएम जांचक आदेश देलखिन, मुदा कार्रवाई नहि भेल। मखनाही मे 2023 मे एकटा पोखरि (10 डिसमिल)क अतिक्रमणक विरोध भेल, जकरा चौधरीजीक प्रभाव मानल गेल। फरवरी 2025 मे प्रभात खबरक रिपोर्टक मुताबिक, "तालाब बचाओ अभियान"क सदस्य के भू-माफिया सभ के तरफ से लगातार आक्रमण आ धमकी के सामना करऽ पड़ि रहल छैक। हुनका सभ के डीएम आ एसएसपी सँ मीलि कऽ माफियाक धमकी सँ सुरक्षा मंगय पड़लैन, जे देखबैत अछि जे अतिक्रमणक खिलाफ लड़ाइ कतेक कठिन छैक। श्री नारायण चौधरीजी आ "तालाब बचाओ अभियान" श्री नारायण चौधरीजी, जे मिथिला ग्राम विकास संस्थानक संचालक छथि, 2005 मे पोखरिक संरक्षणक मुहिम शुरू कएलखिन। एकर प्रेरणा हुनका ऑफिसक हैंडपंप के सुखबाक घटना सँ भेटल। ई घटना हुनका मिथिला मे भविष्य मे होबऽ बला जल संकट के प्रति आगाह केलक। एहि लाथे ओ राजस्थान गेलखिन, जतय जल पुरुष राजेंद्र सिंह सँ जल संरक्षणक तकनीक सिखलखिन, आ दरभंगा मे 24 टा पोखरि (जेना नीम पोखरि, मन पोखरि)क सर्वे कएलखिन। प्रशासन केँ मेमोरेंडम देलखिन, मुदा कोनो जवाब नहि भेटलनि। 2014 मे एहि संबंध मे चर्चा आ साकारात्मक योजना लेल ओ सक्रिय राजनीतिक दलक बैठक बजेलखिन। यद्यपि ई कतेक कारगर रहल ई नै कहल जा सकय अछि। आगा ओ मल्लाह एवं क्षेत्रक अन्य समुदाय सभ केँ अपन अभियान सँ जोड़लखिन। बेतागामी पोखरि (12 एकड़) बचबैत 2015 मे हुनक एकटा साथीक हत्या तक भऽ गेलै। ऐ तरहक प्रत्येक प्रयास के बाद हुनका सभ के लगातार माफियाक धमकी आ प्रशासनक उदासीनता भेटलैन। मुदा हुनक प्रयास जारी रहलएहि क्रम मे NGT मे 2016 मे केस दायर कए, संघर्ष के कानूनी लड़ाई के रूप मे लड़ब सेहो शुरू भेल। कोविड काल मे 25 पोखरिक अतिक्रमण भेल, मुदा चौधरीजी 2021 मे फेर सक्रिय भेलखिन। हमर माननाइ अछि जे श्री नारायण चौधरी जे "तालाब बचाओ अभियान" चला रहल छैथ, ओ मिथिला राज्य के भूगर्भिक, आर्थिक आ सामाजिक तीनों पक्ष के लेल एकटा महत्वपूर्ण अभियान छैक। ताहि लेल नै खाली ऐ प्रकार के अभियान के चर्चा भेनाइ आवश्यक अछि अपितु जागरूकता के संग अपना अपना स्तर पर या संगठनात्मक रूप सँ ऐ प्रकार के अभियान के समर्थन सेहो आवश्यक छै। संगठन के प्रयास के एखन धरि किछु अन्य जे उपलब्धि नजर मे आयल अछि : 1. मखनाही पोखरि: 2023 मे 10 डिसमिल पोखरिक अतिक्रमण रुकल। मखानाही मे पोखरि भरबाक प्रयास स्थानीय लोक द्वारा रोकल गेल। ई विरोध चौधरीजीक जागरूकता अभियानक परिणाम छल। सुप्रीम कोर्टक निर्देश के हवाला दैत स्थानीय लोक सभ माफिया के पाछू हटय लेल मजबूर क देलखिन्ह। 2. प्रशासनिक दबाव: NGTक दबाव सँ कैएक टा पोखरि सँ अतिक्रमण हटल। 3. एहि वर्ष जनवरी के खबर छै जे एनजीटी दरभंगा रेलवे स्टेशन पर हराही आ दिग्घी पोखरि के गंदा करय के लेल 1.61 के जुर्माना लागेलक आ आपण ड्रेनेज प्रोसेस मे आवश्यक सुधार करबाक आदेश देलक अछि। 4. जागरूकता: श्री नारायण जी के नेतृत्व मे 50 सँ बेसी गाम मे पोखरिक प्रासंगिकता आ ऐ के प्रति जागरूकता के प्रचार भेल। 5. सामुदायिक संगठन: बहुत रास गाम सभ मे तालाब रक्षा समिति बनओल जा रहल अछि। 6. संस्कृति संरक्षण: तालाब बचाओ अभियान के माध्यम से मिथिलाक धरोहरक प्रति जागरूकता सेहो बढ़ाओल जा रहल अछि। मिथिलाक पोखरि बचबाक लेल माफिया पर कठोर कार्रवाई, प्रशासनिक जागरूकता, आ सामुदायिक भागीदारी जरूरी अछि। चौधरीजीक अभियान प्रेरणा अछि, मुदा एकर लेल व्यापक समर्थन चाही। नारायणजी चौधरी कहैत छथि जे आब सरकार द्वारा पूरा राज्य मे पोखरि पर अतिक्रमण के पहचान कऽ अतिक्रमण मुक्त बनेबाक अभियान चलि रहल अछि। मुदा दुर्भाग्यवश दरभंगा शहर एहि मे पिछड़ल अछि। एखनहु प्रशासन पोखरि अतिक्रमण के शिकायत करय वाला के दोसर तरह सँ परेशान करैत अछि. ओकरा खिलाफ झूठ एफआईआर दर्ज करा लैत अछि। आइ धरि शहर मे कोनो व्यक्ति पर पोखरि अतिक्रमणक कोनो शिकायत दर्ज नहि भेल अछि। एहन नहि बुझाइत अछि जे हमर अभियानक कोनो असर जमीन पर पड़ि रहल अछि। लेकिन हुनकऽ अभियान केर असर ई छै कि स्थानीय लोक मे किछु चेतना भेलैक अछि। पोखरि भरैक कोशिशक विरोध कऽ रहलऽ छै। लोक के मध्य ई विचार पसरि रहल छैक जे पोखरि केकरो नाम रहितो सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार अहाँ ओकरा नहि भरि सकय छी कारण जे पोखरि भरला सँ सामूहिक परिवेशक नुकसान होयत छैक। अतिक्रमणक कुप्रभाव 1. भूजल संकट: पोखरि भूजल के पोषण (रिचार्ज) करैत अछि। एकर कमी सँ दरभंगा मे 2005 सँ हैंडपंप सूखनाइ शुरू भेल। डाउन टू अर्थ (2020)क मुताबिक, बिहार मे भूजल स्तर 10-15 फीट नीचा चलि गेल अछि, जेकर 60% कारण पोखरिक अतिक्रमण अछि। उदाहरण लेल, गंगा सागर पोखरिक आसपास 2010 तक हैंडपंप मे पानी छल, मुदा 2020 तक सबमर्सिबल पंपक आवश्यकता पड़य लागल। 2.जलजमाव: पोखरि बरसातक पानीक निकासी आ संरक्षण दुनु करैत अछि। एकर अभाव सँ बरसात मे जलभराव के समस्या बढ़ल अछि, खास कऽ के शहरी आ कसबाई क्षेत्र मे। एकटा रिपोर्ट के मुताबिक मन पोखरिक सिकुड़न सँ करमगंज-रहमगंज मे 2022 मे 15 दिन धरि जलजमाव रहल। 3. जैव विविधता ह्रास: मिथिला क्षेत्र नाना प्रकारक माछक संरक्षण क्षेत्र रहल। विविध प्रकार के माछ जे मिथिलाक प्रकृतिक जलस्रोत सभ मे होइत छल से विलोपित भेल जा रहल अछि। डाउन टू अर्थ (2024)क मुताबिक, मिथिलाक 20% माछ प्रजाति लुप्त भऽ गेल अछि। 4. आर्थिक नुकसान: मल्लाह आ मखान उत्पादक समुदायक आजीविका छिनल जा रहल अछि। मोंगाबे (2020)क मुताबिक, दरभंगा मे 10,000 सँ बेसी मल्लाह मजदूरी करैत अछि, जे पोखरि आ जलाशय के सिकुड़न आ कंटैमिनेशन के कारण अपन पारंपरिक आजीविका से या त दूर भेल जा रहल छैथ या पलायन कऽ रहल छथि। 5. सांस्कृतिक क्षति: पोखरिक नाश सँ "पग-पग पोखरि"क कहावत इतिहास बनल जा रहल अछि। उदाहरण लेल, हराही पोखरि पर होबै वाला मेला 2015 सँ बंद भऽ गेल। भू-माफियाक खेल पोखरिक अतिक्रमणक मुख्य खलनायक अछि भू-माफिया सभ। एकर जे सेट कार्यप्रणाली अछि: - चिह्नांकन: कमजोर/गैरमजरूआ पोखरि, जे सरकारी निगरानी सँ बाहर हो, चिन्हित कएल जाइत अछि। - राता-राति भराई: माटी आ कचरा सँ राता-राति पोखरि भरल जाइत अछि।– फर्जी कागज: जमीन के निजी संपत्तिक रूप मे रजिस्ट्री बनाओल जाइत अछि। - निर्माण: मकान, दुकान बना कऽ बेचनाइ शुरू भऽ जाइत अछि। नीम पोखरिक मामला मे प्रशासनक मिलीभगतक आरोप लागल। शिकायत करय वला सुनील ठाकुर पर 2021 मे फर्जी FIR भेल। चौधरीजीक मुताबिक, ई "तीन सूत्री गठजोड़" अछि—कागज बनेनाइ, माटी भरेनाइ, आ विरोध के दबेनाइ। श्री नारायण चौधरीजीक अभियान मिथिला मे पोखरि संरक्षणक एकटा प्रमुख प्रयास अछि। अन्य लोक, समुदाय, आ संस्था सभ सेहो ई दिशा मे किछु कदम उठा रहल अछि। मधुबनी मे इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल स्किल चलबयबला पूर्व मेयर प्रत्याशी रणधीर झा सेहो मिथिला के जलाशय के संरक्षण के लेल स्थानीय मीडिया एवं सोशल मीडिया के माध्यम से जागरूकता के लेल अक्सर प्रयास करैत देखाइ दैत छथि। हाल फिलहालक मीडिया रिपोर्टिंग मे किछु अन्य जानकारी जे सामने अबैत अछि: बिहार सरकारक "जल-जीवन-हरियाली अभियान": बिहार सरकार 2019 मे "जल-जीवन-हरियाली अभियान" शुरू कएलक, जेकर लक्ष्य 33,000 पोखरिक जीर्णोद्धार आ जल संरक्षण छल। डाउन टू अर्थ (2020)क मुताबिक, मिथिला क्षेत्र मे सेहो ई योजना लागू भेल। उदाहरण लेल: •दरभंगा: 2023 तक150 पोखरिक खुदाई आ मरम्मति भेल, जेना हराही पोखरिक किछु हिस्सा। •मधुबनी: 2024 मे 80 पोखरिक संरक्षणक कार्य शुरू भेल, जेना क्योटीक तेलिया पोखरि। फरवरी 2025 मे सरकारक रिपोर्टक मुताबिक, दरभंगा मे 50 नव पोखरिक निर्माणक योजना स्वीकृत भेल। ई अभियान चौधरीजीक प्रयासक पूरक बनल अछि, मुदा माफियाक दबाव आ सरकारी सुस्तीक कारण एकर प्रभाव सीमित अछि। स्थानीय समुदायक प्रयास मिथिलाक गाम-टोला मे किछु समुदाय स्वयं पोखरि बचाबयक लेल आगे अबैत अछि: •मखनाही (दरभंगा): 2023 मे स्थानीय मल्लाह समुदाय माफियाक खिलाफ विरोध कएलक, जे चौधरीजीक प्रेरणा सँ संभव भेल। 10 डिसमिल पोखरि बचल। •बाजितपुर (मनीगाछी): 2024 मे गामवासी सुरयाही पोखरि (15 एकड़)क अतिक्रमण रोकलखिन, जखन माटि भरनाइ शुरू भेल छल। न्यूज़18 (जनवरी 2025)क मुताबिक, 50 लोकनि मिलिक' पुलिसक शिकायत कएलक। • सिंहवाड़ा: होलिया पोखरि(8 एकड़)क संरक्षण लेल 2025 मे गामक युवा समूह खुदाई शुरू कएलक, जे सरकारी सहायता सँ मुक्त छल। अन्य संस्था आ एनजीओ • मिथिला जल संरक्षण समिति: ई एकटा स्थानीय एनजीओ अछि, जे 2022 मे मधुबनी मे शुरू भेल। एकर लक्ष्य पोखरिक सर्वे आ जागरूकता अछि। 2025 तक एकरा द्वारा करीब 30 टा पोखरिक स्थिति पर रिपोर्ट तैयार कएल गेल आ प्रशासन केँ उचित कार्यवाई लेल सौंप देल गेल। • गंगा-कोसी जल संरक्षण मंच: दरभंगा आधारित ई संस्था नदी आ पोखरिक संरक्षण पर काम करैत अछि। 2024 मे ई गंगा सागर पोखरिक कचरा हटेबाक लेल अभियान चलौलक, जे लगभग 500 लोकक सहयोग सँ सफल भेल। • पर्यावरण संरक्षण संगठन: मधुबनी मे सक्रिय ई संगठन 2025 मे पोखरिक पुनर्जननक लेल स्थानीय स्कूलक छात्र सभक संग मीलि कऽ कार्य शुरू कएलक। उदाहरण लेल, तेलिया पोखरिक भिंडा पर वृक्षारोपण भेल। मिथिला मे पोखरि आ जलस्रोत बचाबयक लेल श्री नारायण चौधरीजीक "तालाब बचाओ अभियान" एकटा प्रमुख्य आधार बनल अछि अछि, जै मे बिहार सरकार, स्थानीय समुदाय, आ किछु एनजीओ आ व्यक्तिगत प्रयास द्वारा सेहो योगदान देल जा रहल अछि। हालक घटना सँ स्पष्ट अछि जे मिथिला मे जलाशय के बचेबाक लेल जागरूकता बढ़ल अछि, मुदा माफियाक दबाव आ प्रशासनिक सुस्तीक कारण चुनौती बहुत पैघ अछि। सबहक प्रयासक समन्वय सँ मिथिलाक "पग-पग पोखरि" पहिचान फेर सँ जीवित आ पुष्पित-पल्लवित कएल जा सकैत अछि। [संदर्भ: डाउन-टू-अर्थ,mongabay, प्रभात खबर एवं अन्य मीडिया रिपोर्ट] अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.७.हितनाथ झा-जलसंरक्षण आ नारायणजी चौधरी हितनाथ झा-संपर्क-09430743070 जलसंरक्षण आ नारायणजी चौधरी जल संरक्षणक महत्व आ सरकारक दायित्वक निर्वहनक एक उदाहरणसँ हम अपन आलेखकेँ प्रारम्भ करय चाहैत छी। जल संरक्षणक मुख्य साधनमे सँ एक छल पोखरि। प्रत्येक गाममे पोखरि अछि, विशालकाय एवं छोट सेहो। सरकारी एवं व्यक्तिगत दुनू। गाम-समाजक जल आपूर्ति आ जलवायुक सन्तुलन लेल कतेक आवश्यक छल, ई सर्वविदित अछि। मिथिलाक गाममे एहन बहुतो पोखरि अछि जे मिथिलाक गौरवमय इतिहासक साक्षात दर्शन करा रहल अछि। लोक कल्याणार्थ पोखरि खुनाओल जाइत छल, जाहिसँ साधारण व्यक्ति सेहो जल संकटसँ त्राण पाबि सकैत छल। पोखरिक यज्ञ होइत छल। पैघ-पैघ जमींदार अपन जमीनपर सेहो पोखरि खुनबैत छलाह। सरकार सेहो अपन दायित्व निमहबैत छल आ पोखरिक निर्माण करैत छल। समयक परिवर्तन होइत गेलैक, जल संकट बढ़ैत गेलैक, जंगल कटैत गेलैक, पर्यावरण दूषित होइत गेलैक, पोखरि भराइत रहलैक आ सरकार ई सभ देखितो आँखि मुनैत रहलैक, एतबे नहि सरकार पर्यावरण, जल-संकटसँ उबारबाक बदला संकट बढ़यबामे सहभागी बनैत रहलैक। एहने एक गामक दृष्टान्त नजरिपर आयल, जकरा हम अपने लोकनिक समक्ष प्रस्तुत करैत छी। मिथिलाक एक प्रसिद्ध गाम अछि कोइलख। कोइलखक पाण्डित्य परम्पराक प्रमुखतममेसँ एक अछि प. राजा झा, ज्यो. अपूछ झा एवं प.खुद्दी झाक परिवार। ई तीनू सहोदर भाइ छलाह। हुनकहि लोकनिक खुनाओल पोखरिक प्रसंग प्रो.डा.जयन्ती कान्त झाक चिन्ता सोशल मीडियापर पोस्ट कयने रहथि- "ई पोखरि प. खुद्दी झा एवं हुनक अग्रज ज्योतिर्विद प. अपूछ झाक पत्नी गुंजेश्वरी ओझाइन द्वारा निर्माण 1920-25 मे कराओल गेल छल। हालहिमे एहि पोखरिकेँ जल-जीवन-हरियालीक तहत पुनरुद्धार करबाक बदला भरबा कs एतs प्रशासनिक भवन बनयबाक लेल ग्रामीण स्तरक प्रशासनिक पदाधिकारी, अंचल, अनुमण्डल एवं जिला स्तरक पदाधिकारी आदि सक्रिय छथि। गामक एवं मिथिलाक लोक जनिक नामसँ आइयो गौरवान्वित अनुभव करैत छथि, हुनकहि कीर्तिकेँ ध्वस्त करबापर व्याकुल छथि आ हुनक नामो निशान मिटयबाक लेल छटपटा रहल छथि। एतs इहो कहब अप्रासंगिक नहि होयत जे एहि पोखरिमे यज्ञक प्रतीक चिह्न जाठि एवं किछु खतियानी जमीन ज्यो. अपूछ झाक नामसँ आइयो अछि।" उपर्युक्त कथन एक गामक मात्र एक पोखरिक अछि, जखन कि कोइलख गाममे छह सरकारी एवं पन्द्रहसँ बेसिए पोखरि अछि आ नीक स्थितिमे तँ कम्मे अछि। आनो गामक कमोवेश यैह स्थिति हेतैक। प्रो. जयंती कान्त झा ओही परिवारक अंश छथि, तेँ चिन्तित छथि, से भ' सकैछ, मुदा जाधरि जल संकट, पर्यावरण बचयबाक लेल स्वयंसेवक/पर्यावरणविद आगाँ नहि औताह, सरकारकेँ कर्तव्यक भान नहि करओताह, ता धरि एहने स्थितिसँ हमरालोकनिकेँ जूझय पड़त। 2000सँ पूर्व मिथिला क्षेत्रमे पानिक ओतेक समस्या नहि रहैक। नदी, पोखरि, इनार, डबरा खत्ता आदि पर्याप्त मात्रामे रहैक। जल भरल रहैत छलैक। माल-जाल लेल सेहो काज अबैत छलैक। विकसित शहरीकरण लेल आ विकासक डेग बढ़यबाक काल अपार्टमेंट, मॉल, बाजारक आवश्यकता आ एहि हेतु भू-माफिया सभ जलाशयक उपयोग सुलभ बुझलक, सरकार उदासीन रहल तेँ ओ लोकनि पोखरि आदि भरि पैघ-पैघ मकान बनाबय लागल, तेँ धीरे-धीरे जलस्तर नीचाँक मूहें ससरय लागल, इनार-पोखरि सुखाय लागल, नलक पानि सुखाय लागल, चापानलमे पानिक स्रोत कम होअए लागल, तखन एहिपर किछु लोककेँ ध्यान अयलनि, चिन्ता भेलनि आ एहि अभियानमे जे अग्रणी भ' जुड़लाह, हुनक नाम छनि श्री नारायणजी चौधरी। नारायणजी चौधरी कोना जुड़लाह, ओ कहैत छथि जे "जल संकटक कारण 2013-14सँ दरभंगामे टैंकर द्वारा आवासीय कॉलोनीमे पीबाक हेतु आपूर्ति करय लागल। ई देखि मन झकझोरि देलक। हुनका मन पड़लनि, जखन ओ 1982-83 मे ओ दिल्लीक मुनरिका इलाकामे एहिना पानिक आपूर्ति होइत देखने रहथि। ओही समय जल संरक्षण अभियानमे जुड़ि कोना पानिक संरक्षण हो, एहिपर कार्य करी। हिनक विषयमे हिनक कार्य कलापक चर्चा पहिने एहि क्षेत्रक दू वरिष्ठ विशेषज्ञक बातकेँ राखय चाहब- प्रो.डा.विद्यानाथ झा जे एम.एल.एस. एम.कॉलेज दरभंगाक प्रधानाचार्य (सेवानिवृत्त)क अध्ययनक क्रममे जिला गजेटियर 1964क अनुसार दरभंगामे 300 सयसँ अधिक पोखरि छल, जे बादमे मिल्लत कॉलेजक सहायक प्राध्यापक वनस्पति विभाग, एस. एच. वज्मीक शोधक अनुसार 1990मे 213 टा बचल रहलैक आ आब शहरी निकायक आधिकारिक आँकड़ाक अनुसार मात्र चौरासी पोखरि बचल अछि। डा. झा कहैत छथि जल निकायकेँ बचयबाक लेल आवाज उठयबाक श्रेय श्री नारायणजी चौधरीकेँ जाइत छनि। जल निकायपर शोध कार्य करयबला बिहार सरकारक पूर्व जल संसाधन विभागक अधिकारी आइ. ए.एस. श्री गजानन मिश्र कहैत छथि- "दिन-ब-दिन जल निकायक संख्या कम भ' रहल अछि, आ सरकारक दिससँ ओकर संरक्षण करबाक आ पुनर्जीवित करबाक कोनो गम्भीर प्रयास नहि कैल जा रहल अछि। एहि स्थितिमे श्री नारायणजी चौधरी लोकमे जागरूकता अनबामे सफल रहलाह अछि। हिनकहि अथक प्रयास/संघर्ष/आन्दोलनसँ दरभंगामे किछु पोखरिकेँ अतिक्रमणसँ बचाएल गेल अछि आ किछु पोखरिकेँ पुनर्जीवित सेहो कैल गेल अछि।" हिनक विषयमे आगाँ श्री मिश्र कहैत छथि- "स्थानीय लोकक बीच हिनका पोखरिक रक्षकक रूपमे जानल जाइत अछि आ यैह एहि मुद्दाकेँ सर्वोपरि मानि सार्वजनिक पटलपर रखलनि आ संघर्ष करबाक लेल प्रेरित कयलनि।" 'एकला चलो रे'क तर्जपर चलैत अपन लक्ष्य दिस बढ़लाह तँ हिनक सङ्ग अनेक पृष्ठिभूमिक लोक आबि गेलथिन जाहिमे वैज्ञानिक मानस बिहारी वर्माक सहयोग हुनक जीवनकाल तक रहलनि आ एखनहुँ सहयोग भेटि रहल छनि स्थानीय वैज्ञानिक, डाक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर आदिक जाहिसँ हिनक अभियानकेँ बल भेटैत रहतनि आ जल संरक्षणक क्षेत्रमे विशिष्ट काज होइत रहत। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.८.डा.धनाकर ठाकुर-पोखरि बचाउ अभियानक मिथिला नायक-नारायण चौधरी डा.धनाकर ठाकुर-संपर्क-9430141788 पोखरि बचाउ अभियानक मिथिला नायक-नारायण चौधरी नारायण चौधरी, मिथिलाक एक सामाजिक कार्यकर्ता छथि जे 15-20 साल सँ पोखर बचेबाक अभियान चला रहल छथि। हुनक चर्चा प्रेरणादायक अछि। 2002 क आसपास ओ देखलनि जे बहुत हैंड पम्प जल नहि दैत अछि आ ओकर कारण पता लगेलापर पता लगलनि जे पोखरि सभ सुखा रहल अछि। 1984 मे दरभंगाक नवनिर्वाचित सांसद विजय कुमार मिश्र संग हुकुमदेव नारायण यादवक संग पं. रामनन्दन मिश्र लग आशीर्वाद लेल गेलाह। ओ आन बातक अलावा कहलखिन दरभंगा मे तीन पोखरि हराही, गंगासागर ओ दिग्घीकें जोड़ि दी तऽ ई ईस्टक वेनिस बनि जाएत। कहियो दरभंगा मे 300 पोखरि छल आब 80 हैत सेहो सब अवक्रमित, सुखाएल। करीब पाँच प्रतिशत आर्द्र क्षेत्र रहक चाही से दिनानुदिन घटि रहल अछि जाहि लेल पोखरि बचेबाक आवश्यकता अछि। बढ़ैत आबादी आ दबंगई चलते पोखरि समाप्त भऽ रहल अछि। मिथिला हरेक गामक व्यथा-कथा अछि। पोखरिसँ 14 अप्रैल जूड़िशीतलमे का थाल-कादो फेकि केर खेलसँ पोखरि-इनारमे पानि बेसी ग्रहण करबाक क्षमता हेतै अतएव बाढ़िक पानि ओहिमे रुकि विभीषिका कम करत। युवा नारायण जी पोखरि बचेबाक बातक आवश्यकता बुझलाह आओर अहि कार्यमे लागल छथि। मिथिला माछ-मखान-पानक घर। जल पर आधारित जीवन। किछु सामाजिक माध्यमसँ पता लागल जे किछु दबंग स्थानीय लोक नारायण चौधरीक टीमकेँ प्रताड़ित करैत छथि। मुदा किछु प्रबुद्ध व्यक्ति हुनक समर्थनमे सेहो उतरलाह। जल पुरुष राजेंद्र सच्चरसँ राजस्थान जा कऽ नारायणजी भेंट केलाह जे हिनक उत्साहवर्धन केलाह। पोखरिसँ धारक संरक्षण दिस नारायणजी डेग बढ़ा चुकल छथि। उम्हर विक्रम यादव कमला नदी बचाउ अभियानक एहि प्रकारक कार्य कय रहल छथि। आजमगढ़सँ जमशेदपुरमे आबि कोसी बाढ़िसँ बचाव लेल आइ.आइ.टीयन दिनेश कुमार मिश्र 1984सँ अपन जीवन समर्पित केने छथि। पोखरि बचाउ, इनार बचाउ, धार बचाउ, नदी बचाउ, मैदान बचाउ, जंगल बचाउ आदि सब आंदोलन पर्यावरण संरक्षणक आंदोलन अछि जाहिमे काज केनिहारकें समाज ओ सरकारक सहयोग भेटक चाही। नारायण चौधरी जीकेँ हम बधाइ दैत छी जे ओ एक पुण्य कार्यमे मनोयोगसँ लागल छथि। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.९.अजित कुमार झा-मिथिलाक सांस्कृतिक धरोहर केँ रक्षक: नारायण चौधरी अजित कुमार झा- संपर्क-9472834926 मिथिलाक सांस्कृतिक धरोहर केँ रक्षक: नारायण चौधरी जौँ सत्य कही त' विदेह विशेषांक केर कड़ी मे नारायण जी चौधरी केर नाम पढ़ि आश्चर्य भेल छल। हम हिनका साहित्यकार बूझि खोजबीन क' रहल छलहुँ मुदा हिनकर कोनो पोथीक विषय मे कोनो जानकारी प्राप्त नहि भ' सकल। अपन सीमित साहित्यिक ज्ञान सँ जखन हिनका विषय मे किछु नहि ज्ञात भेल तखन अपन संकोच त्यागि एकदिन आशीष जी सँ हिनका विषय मे जानकारी लेबाक प्रयास कयलहुँ त' हमरा बड्ड लाज भेल। हम सब अपन समाजक असली हीरो सँ परिचित नहि छी से निस्संदेह लाजक गप्प भेल। ई कोनो कवि, लेखक, कथाकार, गीतकार, नाटककार अथवा राजनेता व अभिनेता नहि छथि तैँ ई जे केओ छथि से अपन समाज लेल एक तरहें अनचिन्हारे छथि। अपन समाज मे ई एकमात्र अनचिन्हार नहि छथि। एहन अनेको हेताह जे मानव कल्याण हेतु निरंतर लागल हेताह मुदा हमरा सब लेल धन्न सन। मनसा, वाचा, कर्मणा विगत एक दशक सँ ई जाहि अभियान सँ जुड़ल छथि से सर्वथा सराहनीय कार्य अछि। अपन समाजक एहन हीरो सबहक जानकारी हमरा सब केँ रहबाक चाही आ जौँ से नहि अछि त' कहबा मे कोनो संकोच नहि जे हमरा सब लेल ई लज्जाक विषय थिक। साधुवाद देबनि विदेहक टीम केँ जे अपन सबहक समाजक एहन नायक केँ अपन समाज सँ परिचित करबाबय केर सार्थक प्रयास कयलनि अछि। जाहि सम्मान एवं प्रोत्साहन केँ ई वास्तविक हकदार छथि से दियाबय केर बीड़ा विदेहक टीम उठौलनि अछि आ हिनकर अभियान हमरा सब लेल प्रेरणादायी सिद्ध होएत। नारायण जी चौधरी सँ न' त' भेट अछि आ न' त' हिनका विषय मे विशेष जानकारी अछि हमरा। मुदा जतबे अछि ततबे सही। पहिने ई प्रवासी जीवन जीबि रहल छलथि आ माइक्रो फाइनेंस केर कार्य मे लागल छलथि। प्रवास खत्म कय जखन ई अपन गाम घर घुरि अयलाह, तत्पश्चात् अपन मिथिला मे हिनका जे अनुभव भेलनि तकर ई कहियो कल्पना धरि नहि केने छलथि। जे मिथिला पग पग पोखरि माछ मखान लेल प्रसिद्ध अछि ओत्तहि सँ पोखरि सब राता-राती गायब भ' जा रहल छल। जत्तह आम जनता कुम्भ कर्ण जँका निसभेर सूतल रहैत छथि ओहिठाम राता राती पोखरि गायब भेनाइ कोनो आश्चर्यक गप्प त' नहिए? सुनि क' आश्चर्य भ' रहल होएत मुदा एखन केर समय मे ई काज बड्ड आसान अछि। शहर केँ के कहय गाम घर मे सेहो जमीनी जल स्तर भयावह रूप सँ खसय लागल अछि आ जौँ ई क्रम अहिना चलैत रहल त' पग-पग पोखरि माछ मखान वाला मिथिलाक टैग लाइन सेहो विलुप्त भ' जायत। ई कोनो साधारण गप्प नहि अछि, ई त' हमर सबहक सांस्कृतिक विरासत पर कुठाराघात अछि। जखन पोखरिए नहि रहत तखन माछ कहाँ सँ आ मखान कहाँ सँ? ओ दिन दूर नहि जखन कि अपन सबहक आबय वाला पीढ़ी केँ "पग पग पोखरि माछ मखान" निस्संदेह फूसि गप्प बुझेतनि। जल बिनु कि जीवन केर कल्पना कैल जा सकैत अछि? कथमपि नहि। दोसर ग्रह पर जल केर खोज हेतु लगातार वैज्ञानिक सब प्रयासरत छथि। जल बिनु सब सुन्न। प्रकृति हमरा सब केँ जे अनमोल उपहार सब देने अछि से सब एक दोसर सँ जुड़ल अछि। जल नहि त' वृक्ष नहि आ वृक्ष नहि त' ऑक्सीजन नहि। सब एक दोसर केर संपोषक अछि। ग्लोबल वार्मिंग मुह बौने ठाढ़ अछि आ हमरा सब केँ अपन आबय वाला पीढ़ी लेल किंचित मात्र चिन्ता नहि अछि। सदी केर सब सँ पैघ त्रासदी कोरोना केँ कि सहजे बिसरल जा सकैत अछि? ऑक्सीजन केर अभाव मे नित्य नहि जानि कतेको लोग तड़पि तड़पि क' प्राण त्यागलनि। पैसा अछैत लोग केँ जान बचेनाइ संभव नहि भ' रहल छल। प्रकृति केर निरन्तर दोहन भ' रहल अछि। जलाशय सब विलुप्त भेल जा रहल अछि आ आधुनिकीकरण केर अंध दौड़ अथवा भेड़ चाल मे वृक्ष सब भारी मात्रा मे काटल जा रहल अछि। परिणामस्वरूप प्रकृति केर संतुलन वीभत्स रूप सँ बिगड़ल जा रहल अछि आ यदा कदा प्रकृति अपन रौद्र रूप सेहो देखाबय लेल विवश भ' जाइत अछि। वैज्ञानिक सबहक मानब छनि जे प्रकृतिक असंतुलन, आपदाक हेतु जिम्मेदार अछि। बाढ़ि पानि केर प्रचुरता वाला मिथिला एखन मरुस्थल केर रूप लेने जा रहल अछि। नदी आब नाला केर रूप लेने जा रहल अछि आ सुखायल पोखरि पर तेजी सँ अतिक्रमण भ' रहल अछि। छठि सन महान पाबनि आब बेसी लोग छते पर अथवा दरवज्जा पर छोट छीन टंकी बना क' सम्पन्न क' लैत छथि। कुमरम केँ विधि करबाक लेल लोग पोखरि पर जाइत त' अछि मुदा डोल मे पानि ल' जा क' कहुना विधि पुराओन करय लेल विवश अछि। पछिला साल यज्ञोपवित संस्कार मे भाग लेबाक हेतु गाम गेल छलहुँ तखन एहन दृश्य देखबाक अवसर भेटल। पोखरि मे दरारि फाटल देखि छगुन्ता ल' लेने छल। प्रकृति केर संसाधनक एकटा सीमा होइत छैक तैँ एकर संरक्षण बड्ड जरुरी। हम सब अहि लेल साकांक्ष नहि छी से चिन्ताक विषय अछि। एहन मे नारायण जी चौधरी केर मिथिला आगमन आ एहन एकटा महान अभियान हेतु समर्पण केर भावना हर्षक विषय थिक। मोन सँ समर्पित भ' जखन केओ आगा बढ़ैत छथि तखन समय केँ साथ किछु उत्साही संगी सेहो भेटि जाइत छनि। नारायण जी केँ अहि नेक काज हेतु सेहो किछु उत्साही आ समर्पित साथी सबहक साथ भेटलनि आ मोन प्राण सँ मिथिला केर तालाब (पोखरि अथवा जलाशय) बचाओ अभियान मे जुटि गेलाह। वैज्ञानिक डा० मानस बिहारी वर्मा, प्रो० विद्या नाथ झा, डा० गणपति मिश्र, तसिम नवाब समेत अन्य अनेको व्यक्ति केर साथ एवं सहयोग हिनका भेटय लगलनि। फेर त' जोश के साथ ई अपन अभियान मे रमि गेलाह। असामाजिक तत्व केर धमकी सँ डेराय वाला व्यक्ति कहियो अपन लक्ष्य नहि प्राप्त क' सकैत अछि। परिस्थिति जतेक विकट होइत गेल हिनकर जोश सेहो ओही अनुपात मे बढ़ैत चलि गेल आ अपन समाज केँ जागरुक करबाक हेतु दृढ़ संकल्पित होइत चलि गेलाह। अपना मिथिला मे एहन संकल्पित व्यक्ति केँ आम नागरिक बताहे बुझैत छनि मुदा ताहि बातक परवाह हिनका नहि छनि। जौँ परवाह करैत रहितथि त' मार्ग सँ भटकि गेल रहितथि। नारायण जी केर अहि अभियान क मुख्य उद्देश्य भूमाफिया द्वारा पोखरि केँ अतिक्रमण सँ रक्षा, प्रदूषण सँ बचाव, विलुप्त होइत पोखरि केर जीर्णोद्धार, पोखरि केँ साफ सफाई, जल संचयन, पोखरि एवं जलाशय केर सौन्दर्यीकरण, ओकर विकास एवं अपन मिथिलाक विरासत केर संरक्षण केर प्रति आम जन केँ जागरुक केनाइ छनि। दरभंगाक हराही, दिग्घी एवं गंगा सागर पोखरि जे कि लगभग 600 सँ 700 वर्ष पुरान मिथिलाक धरोहर अछि तकरा अतिक्रमण एवं प्रदूषण सँ मुक्त कराबय लेल नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल मे जनहित याचिका दायर केने छलथि। निरीक्षणक उपरांत रेलवे द्वारा गन्दा पानि पोखरि मे बहाबय पर 1 करोड़ 61 लाख रुपैयाक जुर्माना सेहो लागल छलै। हराही, दिग्घी एवं गंगा सागर पोखरि केँ एकीकरण एवं सौंदर्यीकरण हेतु मुख्य मंत्री द्वारा 75 करोड़ रुपैयाक घोषणा भेल अछि। एहन मे साकांक्ष रहनाइ बड्ड जरूरी छैक अथवा सरकारी ठिकेदारी मे फंड केर कोना बंदर बाँट होइत छैक से जग जाहिर अछि। मिथिला वासी मे जागरुकता एवं एकजुटता रहतै तखने अपन सबहक सांस्कृतिक विरासत केर संरक्षण संभव होएत। नारायण जी अपन उद्देश्यक प्राप्ति हेतु सजग छथि। सूतल मिथिला वासी केँ जगाबय मे लागल छथि। निरंतर नीँक व्यक्ति हिनका सँ जुड़ि रहल छनि। हिनकर नीँक स्वास्थ्य हेतु कामना करैत छी आ संगहि उम्मीद केँ जगौने छी। मात्र दरभंगेटा मे नहि मिथिलांचलक समस्त गामक लोग जौँ अपन गामक पोखरि केँ जगा लेताह, ओकर जीर्णोद्धार क' लेताह, अतिक्रमण व प्रदूषण मुक्त क' लेताह त' निस्संदेह अपन सबहक गामक खेत खरिहान लहलहा उठत। जल, जीवन, हरियाली केर सपना सेहो साकार भ' उठत आ मिथिला मे पग पग पोखरि माछ मखान वाला उक्ति कहियो किनको फूसि गप्प नहि बुझेतनि। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.१०.डॉ. कैलाश कुमार मिश्र- नारायण चौधरी आ जलकर संरक्षण केर सामाजिक सरोकार डॉ. कैलाश कुमार मिश्र- संपर्क-8076208498 नारायण चौधरी आ जलकर संरक्षण केर सामाजिक सरोकार नारायणजी चौधरी पर लिखब केर अर्थ भेल सामाजिक संदर्भ सँ सरोकार आ एक वचन सँ बहु-वचन केर यात्रा केर सहयात्री बनब। ताहिं जखन विदेह लेल श्री नारायणजी चौधरी पर लिखबाक लेल कहल गेल तँ अथर्ववेदक पृथ्वी सूक्त केर एक मंत्र स्मरण अबैत अछि: "माता भूमि: पुत्रो अहं पृथिव्या" उपरोक्त श्लोक मनुष्य मात्रकेँ पृथ्वीक रक्षा आ देखरेख करक सनेस दैत छैक। ई श्लोक कने आरो व्यापक भऽ जाइत छैक कारण ई पर्यावरण संरक्षण केर मूल भावनाकेँ प्रोत्साहित करैत छैक। से केना? एना जे सभ जीव जंतु, चर-चराचर अंततः तँ वाश करैत आबि रहल अछि एहि पृथ्वी पर ने! प्रकृति आ मानवीय संस्कृति दुनू एक दोसर सँ सूई ताग जकाँ जुटल अछि। संस्कृति केर संरक्षण आ संवर्धन प्रकृति केर कोरामे होइत रहल छैक। सनातन संस्कृति तँ डेगे- डेगे प्रकृति सँ तारतम्य बैसबैत चलैत आबि रहल अछि। सनातन संस्कृति (स्पष्ट कँ दी जे धर्म सेहो संस्कृति केर एक सूक्ष्म स्वरुप अछि) काल, स्थान, आ जलवायु संग तारतम्य स्थापित करैत अछि । हमरा लोकनि जल, वायु, पृथ्वी, अग्नि, सूर्य, चंद्रमा, नाग, माछ, काछु, गाछ, वृक्ष सभमे देवताक भाव देखैत छी। सभक आराधना, पूजा, अर्चना करैत छी। सभक उपयोग टोटेम जकाँ करैत छी। मिथिलामे जिनका सभक गोत्र कश्यप छनि से सभ काछु नहि खाइत छथि। काश्यप गोत्री लोक काछूक संरक्षण करैत छथि। कतेक ठाम काछू अगर अभरि जाइत छनि तँ ओकरा पकरि ओकर पूजा अर्चना करैत छथि। स्त्रीगन काछुकेँ नव लाल वस्त्रक परिधान दैत छथि, सेनुर लगबैत छथि, प्रसाद प्रेषित करैत छथि, आ अंततः ओहि काछूकेँ कोनो सुरक्षित स्थान, विशेष रूप सँ पोखरि, इनार, नहरि, नदी आदिमे प्रवाहित करैत छथि। एहि प्रक्रिया अथवा अनुष्ठानकेँ मानवविज्ञानक दृष्टि सँ तीन तरहक अवधारणा स्पष्ट होइत अछि: क. रक्षा केर अवधारणा ख. परिहारक अथवा रोकक अवधारणा ग. उत्पादन अथवा प्रजनन केर अवधारणा एकरा कने स्पष्ट करब आवश्यक। देखू, जखन कियो कश्यप गोत्री कछुआकेँ देखैत छथि तँ अपन गोत्रक संकेत बुझैत ओकरा पकरि कि घर अनैत छथि। आब पूजा, पाठ, प्रसाद इत्यादिक भोग आ अंतमे सेनुर लगा एक सुरक्षित स्थान पर ओकरा राखि आबैत छथि। एहि प्रक्रियामे काछुक रक्षा, ओकर संरक्षण भऽ जाइत छैक। कियो कश्यप गोत्री काछु नहि मारत, ई नियम काछुक जनसंख्याकेँ छय होबासँ रोकैत छैक। आ जखन काछु सुरक्षित आ संरक्षित रहतैक तँ स्वाभाविक छैक जे काछुक प्रजनन बढ़तैक। ई भेल संस्कृति सँ प्रकृति केर अवयव केर रक्षा आ एक दोसरक हारमनी। जखन हम सभ इनारक पानि पिबैत रही (जे आब लॉस्ट मेमोरीक हिस्सा भँ चुकल अछि ) तँ इनारमे काछु देल जाइत छलैक। तकर प्रयोजन ई जे इनारक जलकेँ काछु साफ़ करैत रहतैक। विवाहमे कोहबर घरमे पेंटिंगमे काछुक आकृति उकेरल जाइत छैक, काछु केर खप्परमे तेल दऽ ओकर टेमी बारल जाइत छैक। तकर सभक प्रयोजन ई जे जेना काछु दीर्घायु होइत अछि तहिना बर-कनिया केर जोड़ी दीर्घायु रहत। बात व्यक्ति विशेष श्री नारायणजी चौधरी पर कऽ रहल छी ताहिं प्रकृति आ संस्कृति केर समन्वय पर चिंतन करब केर औचित्य कम अछि मुदा ई समन्वय हुनक पर्यावरण संरक्षण केर एप्लाइड फॉर्मेटकेँ बुझबाक लेल हमरा हिसाबे आवश्यक अछि ताहिं अतेक बात लिखल। आब बात करी श्री नारायणजी चौधरी महोदयकेँ नारायणजी चौधरी आ पोखरि (अथवा कित्रिम जलाशय) केर संरक्षण जेना हम बुझि सकल छी आब एक सिक्का केर दू टा पहलु थिक। लिखब, पढ़ब, पढ़ाएब, नेतागिरी करब एक बात भेल मुदा बिना कोनो राजनितिक, आर्थिक, आ पदक लोभकेँ पर्यावरण एक लघु स्वरुपकेँ पकड़ी ओहि लेल धरना, आंदोलन, पोस्टर, बैनर, जागरूकता इत्यादि उत्पन्न केनाइ बहुत पैघ त्यागक काज भेल। ई पैघ काजक संपादन बहुत दिन सँ दरभंगा आ अगल-बगल केर मिथिला क्षेत्र लेल पोखरि आ जलाशय केर संरक्षण लेल कँ रहल छथि श्री नारायणजी चौधरी। चौधरी जी निश्चित रुपे एहि प्रशंसा केर पात्र छथि। हमरा लगैत अछि विदेह सेहो एहन व्यक्तित्व पर विशेषांक निकालि बहुत पैघ काज कँ रहल अछि आ ई प्रमाणित भऽ रहल अछि जे साहित्य केर पत्रिका पर्यावरण, लोकाचार, विज्ञान आदि दिस सेहो साकांक्ष अछि। के छथि श्री नारायणजी चौधरी? हिनक नाम आब दरभंगा आ अगल-बगल केर क्षेत्र केर बच्चा जनैत अछि। आ ज नहि जनैत अछि तँ ई दुखक बात भेल। खैर कहल ई जाइत अछि जे करीब बारह-तेरह वर्ष पूर्व नारायण जी के अनुभव भेलनि जे पोखरि मिथिला केर लाइफलाइन रहल अछि मुदा आब नहुँ-नहुँ पोखरि ख़त्म भेल जा रहल अछि, सूखल जा रहल अछि अथवा लोक सभ अनेक कारणे पोखरिके खत्म कऽ ओहि जमीनके समतल बना ओकरा कब्ज़ा कऽ रहल छथि। दरभंगा शहरमे भू-माफिया आ प्रॉपर्टी डीलर सभ मेल-जोल सँ पोखरि केर जमीन पर घर बना बेच रहल अछि। लोक सभ अपन गंदगी, कचरा, इत्यादि पोखरिमे फेक रहल अछि। पोखरिमे लोक लघुशंका क' रहल अछि, सोच कऽ रहल अछि, पोखरि केर जल माछ, चिरई आदि लेल उपयुक्त नहि रहि गेल अछि, अनेक पोखरिमे प्रवासी चिरई आब नहि आबि रहल अछि। पोखरि पैघ हो वा छोट अपन स्वरुप लघु सँ लघुतर केने जा रहल अछि। बाहर सँ पोखरि वीभत्स भेल जा रहल अछि । पोखरि विभत्स आ कूड़ा केर गढ्ढा बनल जा रहल अछि। ऊपर सँ की शहर आ की गाम सभ ठाम पानि केर लेएर बहुत निचा जा रहल अछि। जतेक चापाकल सभ अछि या तँ सुखाएल जा रहल अछि अथवा लोक बेर-बेर ओकर लेवल नीचा लऽ जा रहल अछि। नारायणजी चौधरीके भेलनि जे एहि विषय पर तुरत काज करबाक दरकार अछि। फेर की ओ एक अभियान प्रारम्भ केलनि तालाब बचाओ अभियान (TBA)। प्रारम्भ तँ ई एक आवेगमे केलाह मुदा नहुँ-नहुँ हिनक आवेग एक जन-आन्दोलन केर आकार लेमय लागल। आई पोखरि केर संरक्षण द्वारे पर्यावरण संतुलन आ पर्यावरणमे सुधार हिनकर जीवन केर मूल मंत्र बनल छनि। जे जानकारी उपलब्ध अछि ताहि अनुसारे बाढ़ि प्रभावित क्षेत्रक जनताकेँ जनसभा आ घरे-घर संपर्क सँ एहि कार्यमे सहभागिता लेल मनेनाइ प्रारम्भ केलनि। अनेक धरना, हस्ताक्षर अभियान, दुर्गापूजा, छठि पाबनिक समय पोस्टर आ बैनर प्रदर्शनी, पोरेस्ट मार्च, मीटिंग आदिकेँ द्वारा जन-जनमे जागरूकता शुरू केलनि। अतबे नहि, अपन मिशनमे नारायणजी स्कूल कॉलेज केर विद्यार्थी, शिक्षक, राजनितिक दल केर कार्यकर्त्ता आ नेता सभकेँ सहभागी बनक हेतु उत्साहित केलनि। हिनक योजना सफल होमय लगलनि। सभक संग भेटनाय प्रारम्भ भेलनि। आर तँ आर वैज्ञानिक, कृषि वैज्ञानिक, पर्यावरणविद, DRDO केर शोधकर्ता, डॉक्टर, इंजिनियर, विश्वविद्यालय केर शिक्षक सभ कियो हिनक सहयात्री होमय लागलथिन। लोक आब हिनका सँ कोना जलाशय केर रक्षा करी ताहि लेल संपर्क करैत छथिन्ह। दुर्भाग्य केर बात ई छैक जे मिथिला क्षेत्र जे गामे-गामे पोखरि आ इनार लेल प्रसिद्ध छल ओतय सँ इनार तँ लपत्ता भऽ गेल पोखरि सेहो ख़त्म भेल जा रहल अछि। सरकार एहि दिसामे रत्तियो भरि गंभीर नहि अछि। ई दुखद विषय अछि। हमरा लगैत अछि पर्यावरण सामाजिक सरोकारक विषय अछि। सभ कियोक एकरा सँ सम्बंधित छथि। पोखरि अथवा जलाशय केर कोनो परम्परागत अथवा परकृतिक स्रोत प्रदूषित अथवा खत्म होइत छैक तँ पूरा समाज ओहि सँ प्रभावित होइत अछि। ताहि एकर संरक्षण हेतु आइ आवश्यकता एहि बातक अछि जे समाज केर सभ वर्ग, समुदाय केर लोकक सहभागिता निश्चित हो। नारायण जीक काज पर, हुनक जनसरोकार पर शोध होबाक चाही। पानि पंचायत पर घर-घर चर्चा होबाक चाही। बैद्यनाथ मिश्र यात्री मल्लाह समाज केर लोकके "वरुण के बेटे" कहि संबोधित करैत छथि। मल्लाह केर प्रमुख देवता कारिख महराज जल केर देवता छथि, जाठक देवता छथि। हमरा सभक जीवन पानिक लोकज्ञान सँ संरक्षित अछि। मिथिला केर लोक आ ओकर जलक प्रति जीवनक प्रारम्भ सँ सिनेह आ संरक्षण भाव केर फोकलोर पर काज करक जरुरत छैक। वाटर कोस्मोलोजी पर काज करब आवश्यक अछि। स्त्री-पुरुष बच्चा सभकेँ एहि जागरूकता केर आन्दोलन सँ जोड़ए पड़त। हमरा सभकेँ नारायणजी चौधरी सनहक लोककेँ अपन क्षेत्र गौरव बना कऽ राखऽ पड़त। हुनका ओहने सम्मान देम पडत जेहन सम्मान सुन्दर लाल बहुगुणा, या बचपन बचाओ आन्दोलन केर नेता श्री कैलाश सत्यार्थीकेँ भेटल छनि। हमरा सभकेँ चिपको आन्दोलन जकाँ नारायणजी चौधरी केर आन्दोलन के घरे-घर लऽ जएबाक दरकार अछि। सभ सँ अधिक जरुरत एहि बातकेँ अछि जे सत्रीगनक मध्य ई आन्दोलनक स्वरुप पकड़ि सकय। नारायणजी चौधरी केर व्यक्तित्व आ कृतित्व पर अधिक सँ अधिक चर्च हो। स्कूल, कॉलेज आ अन्य समान्य पब्लिक स्पेस पर हुनक चर्च हो। प्रवासी मैथिल हुनका दिल्ली आ अन्य नगर एवं विश्वक अन्य भाग लग लऽ जाथि, हिनकर सम्मान करथि, हिनक कार्यक चर्च हो। हिनक कार्यक मोनोग्राफ छपक चाही। हिनका जतेक जल्द हो हमरा लोकनि पर्यत्न करी जे पद्मश्री अथवा अन्य पुरस्कार भेटनि। हरेक जिला, अनुमंडल, प्रखंड, पंचायतमे जल प्रबंधन आ जल संरक्षण पर काज हो, ओकर सोशल एकाउंटिंग हो, सभ कियोक ओहिकेर सञ्चालनमे अपन सहभागिता निश्चित करथि। स्थानीय अख़बार, पत्रिका (ऑफलाइन आ ऑनलाइन) नियमित एहि विषय पर नूतन काज, प्रयोग पर लेख छापे। मधुबनी चित्रकला, मैथिली लोकगीत, डाक्यूमेंट्री फिल्म, मैथिली साहित्य, समाजशास्त्र, पारिस्थितिकी विज्ञान, भूगोल आदि पर एहि विषय पर काज हो। एक ठाम नहि सभ ठाम अगर गंभीर रहब, साकांक्ष रहब आ एकरा समस्त समाजक थाती बुझब तखने ई आंदोलन सफल रहत। समयाभाव केर कारण हम ई आलेख बहुत हड़बड़ीमे लिख रहल छी। कहियो नारायणजी चौधरी जी सँ हुनका संग किछु दिन रहि, हुनक काजक सहभागी बनि, हुनका संग सघन वार्तालापक पश्चात् एक विस्तृत आ प्रमाणिक आलेख हुनका पर शीघ्र लिखबाक चेष्टा करब। एखन एक बेर पुनः हुनक काजक प्रशंसा करैत लोक सभ सँ आग्रह जे हिनक अर्थात नारायणजी चौधरी केर स्वर, चिंतन आ जलाशय केर संरक्षण, संवर्धन एवं पर्यावरण संरक्षण केर स्वरकेँ एक वचन सँ बहुवचन दिस लऽ चली, सभक सरोकार बनाबी। तखन ओ अपना आपके सफल बुझताह आ मरैत पोखरि, जलकर आ समस्त जलाशय पुनः प्राणवान भऽ उठत। मिथिलाक भूमि फेरो हँसए लागत। प्रथ्वी केर समस्त अवयवमे सामंजस्य अथवा हारमनी स्थापित होयत। आ, तखन यजुर्वेदक पृथ्वी शांति मंत्र केर एक-एक शब्द शब्दब्रह्म बनत: "ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षं शान्तिः, पृथ्वी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः। वनस्पतयः शान्तिर्विश्वे देवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः, सर्वं शान्तिः, शान्तिरेव शान्तिः, सा मा शान्तिरेधि॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥" "आकाशमे शांति हो, अंतरिक्षमे शांति हो, पृथ्वीमे शांति हो, जलमे शांति हो, औषधिमे शांति हो, वनस्पतिमे शांति हो, सभ देवी-देवतामे शांति हो, ब्रह्ममे शांति हो, सभमे शांति हो, आ यैह शांति बनल रहक चाही।" अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.११.आशीष अनचिन्हार-पोखरिक वक्तव्य आशीष अनचिन्हार-संपर्क-8876162759 पोखरिक वक्तव्य हम अपन लेखन केर एकदम शुरूआतमे इएह मानैत रही जे लेखक केर काज छै मात्र लिखनाइ आ ताही बलपर ओ अपन नाम आन क्षेत्रमे घुसिया सकैए। जेना कोनो लेखक अपन रचनामे नारी स्वतंत्रताक पक्षधर अछि, अथवा गरीबक बात करैए तँ क्रमशः नारीवाद आ गरीबक हितैषी अछि। मुदा जेना-जेना समय बीतैत रहल हमरा अनुभव होइत गेल जे लेखकक रचना ओ हुनक आचरणमे कोनो ताल-मेल नहि अछि। आ समयक संग हम ई मानब शुरू केलहुँ जे लेखक मात्र लीखि सकैए ओहिसँ आगू ओकर वश नहि छै। तँइ हम सदिखन ई मानैत छी जे आन-आन क्षेत्रमे लेखक लौलवश अपन नाम नहि घोसियाबथि। ओना जेना कि हम ऊपरमे स्वीकारलहुँ जे हम अपन शुरूआती समयमे सेहो नामे घुसियाबऽ बला पद्धतिमे रही तँ ओही समय (13-10-2005)मे हम एकटा कविता लिखने रही "पोखरिक वक्तव्य" आ मात्र इएह कविता लीखि हम अपनाकेँ पोखरिक हितैषी आ पर्यावरणविद् मानि बैसल रही। मुदा समयक संग ई भान भेल जे कागजपर कविता लीखब आ पोखरिक उद्धार करब दूनूमे अकास-पतालक अंतर छै। बादमे अपन-अपन क्षेत्रक असल नायक सभसँ हमरा परिचय भेल आ तकर बाद आरो घमंड टूटल जे लेखक मात्र कागजी होइत छै वास्तविक नहि। इम्हर आबि नारायणजी चौधरीजीक काजसँ परिचय भेल आ मोन पड़ि गेल हमर ओ पुरान कविता। मोन भेल जे एहि विशेषांकमे देबै तऽ नीक नहि हेतै मुदा मोने कहलक जे दऽ देने घाटा की हेतै? से हम ई कविता दऽ रहल छी। ओना जँ सच कही तऽ हमरा लग नारायणजीक बारेमे कहबाक लेल किछु नहि अछि तँइ ई काज कएल। संगहि ईहो लोभजे बहुत संभव कियो कहियो हमर इएह कविता पढ़ि हमरा पर्यावरणविद् मानि लेथि। खएर ई कविता हम 2 मइ 2022 केँ अपन फेसबुकपर सेहो देने रहियै आ चूँकि एहि विशेषांकमे पोखरिक बात भऽ रहल छै तँ माहौल देखि हमरा इएह सुविधा लागल जे ई कविता दऽ दी। तऽ पढ़ू ई कविता जकर मूल पाठे हम राखि रहल छी- अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.१२.सन्दर्भ नारायणजी चौधरी एवं हुनक पोखरि बचाउ (तालाब बचाओ, Save ponds / Lakes Campaign) अभियानसँ संबंधित किछु रेफरेंस एवं लिंक- 1) https://india.mongabay.com/2020/11/saving-darbhangas-wetlands-from-encroachment-and-apathy/ 2) https://india.mongabay.com/2020/11/saving-darbhangas-wetlands-from-encroachment-and-apathy/ 3) https://www.thehindu.com/news/national/other-states/ponds-in-distress/article4960246.ece 3) https://www.downtoearth.org.in/governance/pond-stolen-in-bihar-s-darbhanga-no-action-so-far-locals-allege-such-encroachments-rampant-93693 https://hindi.downtoearth.org.in/water/story-of-water-warrior-narayanji-choudhary-69192 4) https://timesofindia.indiatimes.com/city/patna/encroached-polluted-ponds-pose-health-hazard/articleshow/19906153.cms 5) https://www.hindustantimes.com/cities/patna-news/talab-bachao-abhiyan-in-bihar-expresses-concern-over-beautification-of-pond-on-lnmu-campus-101630640419527.html 6) https://www.downtoearth.org.in/water/nearly-3-years-since-campaign-only-5-public-ponds-free-of-encroachment-in-bihar-76044 7) https://www.hindustantimes.com/cities/patna-news/ngt-orders-restoration-of-three-historical-ponds-in-bihar-s-darbhanga-town-committee-constituted-to-address-observations-and-recommendations-made-in-inspection-report-101680775366055.html 8) https://www.newsclick.in/Bihar-Three-900-Year-Old-Ponds-Darbhanga-Get-New-Lifeline-NGT-Bans-Illegal-Construction 9) https://www.indiawaterportal.org/governance-and-policy/governance/protectors-lost-ponds-darbhanga 10) https://www.facebook.com/reel/577345418411402 11) https://deshajtimes.com/news/bihar/darbhanga/darbhanga-talab-bachao-abhiyan-sent-open-letter-to-vc-of-lanamivi/47781/ 12)https://www.facebook.com/story.php?story_fbid=618683420688354&id=100076401032280&_rdr 13) https://sandrp.in/2024/01/31/wwd-2024-both-wetlands-human-beings-remain-neglected/ 14) https://greentribunal.gov.in/sites/default/files/news_updates/1724231378.pdf 15) https://indianwetlands.in/wp-content/uploads/library/1734695442.pdf 16) https://hindi.downtoearth.org.in/water/severe-water-crisis-in-north-bihar-65162 17) https://www.jagran.com/bihar/darbhanga-social-worker-narayan-caudhary-is-trying-to-save-pond-15722572.html 18) https://deshajtimes.com/news/bihar/darbhanga/demand-from-cm-nitish-for-save-pond-campaign-in-darbhanga/144691/ 19) https://www.swasthbharat.in/days-will-be-long-for-three-ponds-of-darbhanga-grandeur-will-return/ 20) https://hindi.newslaundry.com/2019/05/02/begusarai-darbhanga-dying-lakes-ponds-general-elections-2019 21) https://www.indiawaterportal.org/governance-and-policy/governance/protectors-lost-ponds-darbhanga 22) https://www.jetir.org/papers/JETIR2203196.pdf 23) http://117.252.14.250:8080/jspui/bitstream/123456789/4116/1/%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0-8.2-%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0%20%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82%202019%20%E0%A4%880%20%E0%A4%95%E0%A4%BE%20%E0%A4%85%E0%A4%AD%E0%A5%82%E0%A4%A4%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5%20%E0%A4%9C%E0%A4%B2%20%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%9F%20%E0%A4%8F%E0%A4%95%20%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%B7%E0%A4%A3.pdf अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। विदेह ४१९ म अंक ०१ जून २०२५ (वर्ष १८ मास २१० अंक ४१९) नारायणजी चौधरी विशेषांक || 87 86 || विदेह (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) www.videha.co.in
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विदेहक परमेश्वर कापड़ि , कम... : < @ m.facebook.com < € विदेहक परमेश्वर कापड़ि , कमला चौधरी आ ... ay @. Ashish Anchinhar eee I5 June 2076 at 27:27- 2. विदेहक परमेश्वर कापड़ि , कमला चौधरी आ वीरेन्द्र मल्लिक विशेषांक केर घोषणा Star की सभ गोटा जनै छी जे विदेह 205 मे तीन टा विशेषांक तीन साहित्यकारपर प्रकाशित केलक जकर मापदंड छल सालमे दूटा विशेषांक जीवित साहित्यकारक उपर रहत VA एकटा 60-70 वा ओइसँ बेसी सालक साहित्यकार रहता Ff दोसर 40-50 सालक ( मैथिली साहित्यकार मने भारत आ नेपाल दूनूक)। ऐ क्रममे अरविन्द ठाकुर ओ जगदीश चंद्र ठाकुर "अनिल"जीपर विशेषांक निकलि चुकल अछि। आगूक विशेषांक किनकापर हुअए ag लेल एक मास पहिनेसँ पाठकक सुझाव माँगल गेल छल। पाठ कक सुझाव आएल आ ओइ सुझाव अंतर्गत विदेहक दू टा अगिला विशेषांक परमेश्वर कापड़ि आ वीरेन्द्र मल्लिकजीक उपर रहत संगे-संग भोटिंगमे cher न॑ पर आएल कमला चौधरीजीपर हमरा सभ सेहो निकालब | हमर सबहक प्रयास रहत जे ई सभ विशेषांक जनवरी ओ फरवरी 2077 मे प्रकाशित gary मुदा ई रचनाक उपलब्धतापर निर्भर करत। मने रचनाक उपलब्धताक feared aay ऊपर-निच्चा ys सकैए। सभ Mes आग्रह जे ओ अपन-अपन रचना (आलोचना, समीक्षा, समालोचना, संसमरण आदि) 3 दिसम्बर 06 धरि ggajendra@videha.com पर पठा दी। लि हा sar arg ae बा की v eee OAs 75. | AZ
ea o © Be WB ad 490) एक <— Ashish Anchinhar Q és Ashish Anchinhar o- Jan 27, 2079 + & विदेह अपन कोनो अउअंकम्ने "साहित्यिक wera विश्शोष्पांक" 'निकात्तत (fern SBASCA) ताहि Aa अपने Sas निम्नतिलिस्वित विष्पयपर उात्लेख sife चाही। fees गोटाकेँ एहि टुऔआरे टैग Hs Yer STS Hem हमर free नै SIA इनव्को oT Ss स्वूच्चना पहुँच्यनि wars Ss GUST (दरभंगा-पटना-स्हरसा) मठाधीशा Bat ont दिक्कत Sar क्षमाप्रार्थी ह्की-- ५ साहित्य, Hort एवं सरकारी उऊउमसकादम्वी:- (वक) पुरस्कारक्क राजनीति @ सरवकारी अऊउमकादेमीसम्वे पैसव्वयाक गैर-त्नोकतांत्रिक विधान (गा) सत्तारुट St उमकादमी Hz काजक तौर-तरीका ad) Seas Sates Sat विरोधम्वे Baste तात्कात्निक स्समानांतर सत्ताक कार्यपद्धधति ( 98 5सँँ veast eR) S) उमकादेमी पुरस्कारम्वे urs फैक्टर: म्विथिक वा यथार्थ 2. व्यक्त्तिगत साहित्य संस्थान SIT पुरस्कारक राजनीति 3.प्रकाश्शन जगतम्वे Gare WETaR St Aza 4. मैथ्वित्नीक Sat Seas संगठन BAT उोकर पदाधिकारी PAMESH SITAIoT 5.Afah faarrs पसरत्त साहित्यिक weraee fafaer wa:- (कक) Usaha @a) उऊउमध्ययन-उऊध्यापन 6. =r Giepfiteeet a - oe = = ee Write a comment...
3 Ashish Anchinhar nee ही i0.October 2020. 2 No insights to show 6 (9 प्रदीप पुष्प, Kundan Kumar Karna and 72 others 5@ia
SS € हर “WIE? = fame fadtapa CPustaa se : cnc \g : =m S fl se im x : — | प् > i AL Z . | @ * AS हू \ | \ =A ee = Voy 4 ree 7 3 हे | ९ Se S Si a Bees रे) E =I —rsa - me) (c)2000- २०२४। fade: प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X — (c)g000- २०२४। ATAS: AAT CHAVAT शाशिक खा-शखिका ISSN 2229-547X o |__| oi
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Ashish Anchinhar's post x Ashish Anchinhar vee I February -@ विदेहक "स्व-निंदा विशेषांक” ई पूरा मैथिली साहित्य लेल एकटा नव प्रयोग हएत। संझवतः पूरा विश्वक साहित्य लेल ई नव प्रयोग हएत। ई सिरीज लेखकक इच्छापर प्रकाशित हएत माने जे लेखक चाहै छथि जे हुनका अपन दुर्गुणक बारेमे हुनक समाज, हुनक पाठक की विचार Te छनि से ओ लीखि सकैत छथि। एहिं सिरीजमे Hat प्रकारक प्रशंसात्मक आलेख aie रहत। जैँ कदार्चित् आबियो गेल as HTS आलेखकें हटा देल जाएत। एहिं सिरीजक मूत्र उदयेश्य ई अछि जे लेखक अपन GT चीन्हि सकथि आ ओकरा हटा सकथि। आ एहिं सिरीज लेल जे पहिल नाम अछि ओ मेल "आशीष अनचिल्हार' माने हम अपने। हमरा बूझल अछि जे हमरा परोक्षमे बहुत लोक हमरा लेल बहुत रास निंदात्मक बात बाजै छथि मुदा आब समय आबि गेल अछि जे हाँ सम.ओकरा निधोख ats लीखि कर विदेहकें पठा सकैत छिये आ ओ ओहिना बिना कोनो काँट-छॉँटकें छपबो करतै। उम्मेद अछि जे विदेहक आन कार्यक्रम जकाँ ईहो सफल हएत आ भविष्यमे आनो लेखक "स्व-निंदा विशेषांक" लेल अपन नाम प्रस्तावित करता। उम्मेद अछि जे "आशीष अनचिन्हार" dot निंदात्मक आलेख अहाँ सभ लीखि ws जल्दिये पठाएब। विदेहक मेल अछि- editorial staftvideha@gmail.com Uig विशेषांक केर समय किछू आलेख एलाक बाद घोषित हएत। स्व-निंदाक शब्दकोशीय अर्थसँ बेसी एहिठाम तथ्यगत अर्थ ली से HEL Lakshman Jha Sagar Mukesh Anand water कुमार झा Kailash Kumar Mishra Siyaram Saras Pranaw Jha Mukund Mayank Bhairab Lal Das Kailash K Mishra Rajeev Ranjan Jha शैकर मचुपांश Prem Kant Choudhary Vidyanand Jha Roshan Jha Dilip Kumar Jha Anjay Chaudhary Nabo Narayan Mishra Hirendra Kumar Jha Arvind Thakur Kamal Mohan Chunnu Kedar Kanan Jeeban Mishra Akhila Nand Jha Raman संजीव मिथिलाकिड्कर Gangesh Gunjan
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Z विदेह ४१९ म अंक ०१ जून २०२५ (वर्ष १८ मास २१० अंक ४१९) मे नारायणजी चौधरी विशेषांक | FACE 89% TAB ०9 GA २०२७ (TA 9१ IT २७० AH Ff 897) WATTS CHa ACA ~Lothi . || |||| | जसुशानक: AGHA SPAM GH: TH ठाकुर
24 || विदह (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA (since 2004) www.videha.co.in देखू। परिशिष्ट- सचिदेहस्क परमेश्वर esrare , a... : <= @ ntacebookicom <= = oi Ashish Anchinhar oon 5 JUN® 2076 at 20:2 + ae aeer परमेश्वर ssrafS , sre eters? an fe afetren Prerates She wierorr Sar ait eer रौटा ort छी ot fae 2075 मे सीन |r सिशोष्वांस्क सीन ब्साहित्यस्कारप्पर Venere Bers पजन्कर Tass ewer स्तारतम Ger faarater Sita साह्त्सिन्कारन्क उप्पर ae उजछमे एन्कटा 60-70 aT ोछस मेसी सास्तव्क सालित्यकार रलता a ares 40-50 स्ात्नस्क ( Aferefl सालिस्थयार HA भारस जा Foret qaren) | दे ener? orefaee Srepe ot orriier ie orepe “orftersttas fretcies Prenfer qearer of उमायून्क ferries Pasearae gerg ae et gen rer afer CTeshen Gare Set fet et! OTSseheh सुछवाल <आपएस्त ar sits pti अतलर्गल faeeen दू ey sive सिशोषवास्क ceaye esrats srr Hisererctes उपर रलस संगरी-संग wie ahere से ce oirerer स्कम्नसता efterttottas erst err Set renter | were sere प्ास्पासत eer Sf erat लिशोष्वांस्क च्जलस्यरी oft प्फरन्वरी 2077 से घन्काश्शित gare Fl § caren जपस्तरूधलापर निर्भर eee) सने See उपत्तनूधतलाल्क rere’ ererg oecre-Pyeet ss erasq) ese शीटासँ srrere Gt sf) सपन-सपन Seat (arrethest, सम्ती का, erarerrerar, संस्म्रणा anf), 37 दिरसम्ब्वर 7076 a ggajendra@videha.com पर ast सी ।
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