विदेह ४२३ विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। [विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X Videha e-Journal (since 2000) at www.videha.co.in ] ऐ पोथीक सर्वाधिकार सुरक्षित अछि। कॉपीराइट (©) धारकक लिखित अनुमतिक बिना पोथीक कोनो अंशक छाया प्रति एवं रिकॉडिंग सहित इलेक्ट्रॉनिक अथवा यांत्रिक, कोनो माध्यमसँ, अथवा ज्ञानक संग्रहण वा पुनर्प्रयोगक प्रणाली द्वारा कोनो रूपमे पुनरुत्पादन अथवा संचारन-प्रसारण नै कएल जा सकैत अछि। (c) २०००- २०२५. सर्वाधिकार सुरक्षित। भालसरिक गाछ जे सन २००० सँ याहूसिटीजपर छल http://www.geocities.com/.../bhalsarik_gachh.html , http://www.geocities.com/ggajendra आदि लिंकपर आ अखनो ५ जुलाइ २००४ क पोस्ट http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html केर रूपमे इन्टरनेटपर मैथिलीक प्राचीनतम उपस्थितक रूपमे विद्यमान अछि (किछु दिन लेल http://videha.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html लिंकपर, स्रोत wayback machine of https://web.archive.org/web/*/videha 258 capture(s) from 2004 to 2016- http://videha.com/ भालसरिक गाछ-प्रथम मैथिली ब्लॉग / मैथिली ब्लॉगक एग्रीगेटर)। ई मैथिलीक पहिल इंटरनेट पत्रिका थिक जकर नाम बादमे १ जनवरी २००८ सँ ’विदेह’ पड़लै। इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि, जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। (c)२०००- २०२५. विदेह: प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA. सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। Editor: Gajendra Thakur. In respect of materials e-published in Videha, the Editor, Videha holds the right to create the web archives/ theme-based web archives, right to translate/ transliterate those archives and create translated/ transliterated web-archives; and the right to e-publish/ print-publish all these archives. रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना/ संग्रह (संपूर्ण उत्तरदायित्व रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता मध्य) editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ पठा सकैत छथि, संगमे ओ अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो सेहो पठाबथि। एतऽ प्रकाशित रचना/ संग्रह सभक कॉपीराइट रचनाकार/ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि आ जतऽ रचनाकार/ संग्रहकर्त्ताक नाम नै अछि ततऽ ई संपादकाधीन अछि। सम्पादक: विदेह ई-प्रकाशित रचनाक वेब-आर्काइव/ थीम-आधारित वेब-आर्काइवक निर्माणक अधिकार, ऐ सभ आर्काइवक अनुवाद आ लिप्यंतरण आ तकरो वेब-आर्काइवक निर्माणक अधिकार; आ ऐ सभ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार रखैत छथि। ऐ सभ लेल कोनो रॉयल्टी/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै, से रॉयल्टी/ पारिश्रमिकक इच्छुक रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता विदेहसँ नै जुड़थु। विदेह ई पत्रिकाक मासमे दू टा अंक निकलैत अछि जे मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ www.videha.co.in पर ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। Font/ Keyboard Source: https://fonts.google.com/ , https://github.com/virtualvinodh/aksharamukha-fonts , https://keyman.com/ These are print-on-demand books, send your queries to editorial.staff.videha@gmail.com. The eBooks of some of these are available for sale on Google Play [(c) Preeti Thakur, sales.videha@gmail.com], send your queries to sales.videha@gmail.com. The contents and documents e-published by Videha (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA are periodically being checked for accessibility issues. People with disabilities should not have difficulty accessing these contents/ documents. © Preeti Thakur (sales.videha@gmail.com) Cover design: AUM GAJENDRA THAKUR VIDEHA:423 समानान्तर परम्पराक विद्यापति- चित्र विदेह सम्मानसँ सम्मानित श्री पनकलाल मण्डल द्वारा। मैथिली भाषा जगज्जननी सीतायाः भाषा आसीत्। हनुमन्तः उक्तवान- मानुषीमिह संस्कृताम्। अनुक्रम [विदेह ४२३ म अंक ०१ अगस्त २०२५ (वर्ष १८ मास २१२ अंक ४२३)] १.विदेह अंक ४२३ पर पाठकक टिप्पणी (पृष्ठ १-३) गद्य २.१.मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-१२ (पृष्ठ ५-११) २.२.हितनाथ झा- मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान -४ (पृष्ठ १२-१७) २.३.डॉ. जियाउर रहमान जाफरी- दू टा लघुकथा- उपहार आ मैथिली (पृष्ठ १८-१९) २.४.प्रणव कुमार झा-बिहार मे यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (UHC): नियमन आ कार्यान्वयन (पृष्ठ २०-३१) २.५.डॉ वी एन झा- इसरो - स्पेसX के एक्सिओम-४ मिशन के तकनीकी विश्लेषण (पृष्ठ ३२-४३) २.६.परमानन्द लाल कर्ण-आत्मसम्मान (कथा) (पृष्ठ ४४-५७) २.७.लाल देव कामत- डॉ० महेंद्र जीके चारिम बानर ! (पृष्ठ ५८-६३) २.८.प्रमोद झा 'गोकुल'-प्रायश्चित (कथा) (पृष्ठ ६४-६८) पद्य ३.१.प्रणव कुमार झा- हमर प्राण भारत केर (पृष्ठ ७०-७२) ३.२.प्रमोद झा 'गोकुल'-मेघक ब्यथा (पृष्ठ ७३-७४) ३.३.जगदानन्द झा 'मनु'- बीसटा हाइकू (पृष्ठ ७५-७९) ३.४.राम शंकर झा "मैथिल"- स्मृति शेष (अहाँक चिट्ठी) (पृष्ठ ८०-८३) ३.५.कल्पना झा- चनरदिपा (पृष्ठ ८४-८५)
१.विदेह अंक ४२३ पर पाठकक टिप्पणी अंक ४२३ पर टिप्पणी प्रणव कुमार झा डॉ. वी. एन. झा द्वारा लिखित "इसरो-स्पेसX के एक्सिओम-४ मिशन पर तकनीकी विश्लेषण" शीर्षक लेख स्वागतयोग्य, बौद्धिक आ वैज्ञानिक दृष्टि सँ समृद्ध प्रयास अछि। एहि लेख में जतेक सूक्ष्मता सँ भारत तथा विश्वक समकालीन अंतरिक्ष गतिविधिकेँ विश्लेषण कएल गेल अछि, से पाठकक जिज्ञासा केँ चंद्रमा सँ छलांग मारि मंगल तक लऽ जाइत छैक।
ऐ प्रकार के लेख द्वारा लेखक वैज्ञानिक सोच केँ जनसामान्य धरि पहुँचेबाक दायित्व निभा रहल छथि। मैथिली पत्र-पत्रिका सभ मे एहन लेखक प्रकाशन एक नव परंपरा के आगा बढ़ा रहल अछि जतऽ साहित्य संग विज्ञानक संगम होइत रहय।
डॉ. वी. एन. झा पहिने सेहो विदेह पत्रिका मे अपन एकटा लेख सँ पाठकक ध्यान खींचने छलाह। ओ अपन लेखनी सँ पाठक केँ ई बुझा दैत छथि जे विज्ञान के लोकभाषा मे गूंथि कऽ परोसल जा सकैत अछि।
डॉ. झा अपन लेखनी केँ निरंतर गतिशील राखू खास कऽ अपन विषय स्पेस टेक्नोलॉजी आ मेडिकल साइंस सन तकनीकी विषय पर मैथिली मे लेखन करब भाषा आ चेतना दुनु के समृद्ध करय बला छैक।
परमानंद कर्ण लिखित कथा ‘आत्मसम्मान’ पढ़ि मन में कै टा पातर-पातर लहरि उठल — कखनहुं सवाल बनि क’ माथा ठोकलक, त’ कखनहुं उत्तर बनि क’। ई कथा समयक बदलैत रफ्तार, महंगाईक बढ़ैत बोझ आ संस्कारक सूखैत कुसुम के बीच, वृद्धजनक आत्मसम्मान पर पड़ैत चोट केँ सजीव ढंग सँ उजागर करैत अछि। साहित्य मे एहन कथा सभक निरंतरता ई संकेत दैत अछि जे समाजक गाछी मे बूढ़ भेल डारि सभ पर अब उपेक्षाक पछुआ बहे लगल अछि। जीवनशैलीक उथल-पुथल, आर्थिकीक अस्थिरता आ मूल्यक पतन – सब किछु मानवीय गरिमा के भँवर मे ढकेल रहल अछि। खास कऽ वृद्ध अवस्था मे आर्थिक स्वतंत्रता मात्र विकल्प नहि, वरन् आत्मगौरवक मूलाधार बनि गेल अछि। एहि विषय पर हम स्वयं "एनपीएस" शीर्षक सँ एक लघुकथा पूर्व मे लिखने रही (https://pranawjha.blogspot.com/2019/06/nps.html) । परमानंद कर्ण जीक कथा संगत रूप सँ ओहि चिंतन केँ आगाँ बढ़बैत अछि। ई कथा से बुझाइत अछि जे सम्मान मात्र स्नेह सँ नहि, स्वतंत्रता सँ बनैत अछि, नहि त बुजुर्गक जीवन, भीख माँगैत आत्मा जेकाँ कँपैत रहि जायत।
एकटा समय छलइक जखन चिट्ठी-पत्री के संवादात्मक आ भावनात्मक रूप से बड्ड महत्व छल। छोट रही त हिन्दी उर्दू मैथिली साहित्य-गीत-नाद मे एकर खूब बखान रहय। “पत्र अहाँ के लिखि रहल छी”, “प्रिय पराननाथ सादर प्रणाम” ‘डांरे पर घैला भसकि गेल”, “के पतिया लय जायत” आदि कतेक रास गीत....... तकनीकि जखन कि आब चिट्ठी के ओब्सिलिट क देलक तखन ऐ पर कविता-गीत-गजल लिखेनाई सेहो बंद भ गेल। ताहि बीच मे राम शंकर झा "मैथिल" के कविता स्मृति शेष (अहाँक चिट्ठी) ऐ विषय पर बड्ड दिन बाद एकटा कविता देखना गेल
अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। गद्य २.१.मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-१२ २.२.हितनाथ झा- मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान -४ २.३.डॉ. जियाउर रहमान जाफरी- दू टा लघुकथा- उपहार आ मैथिली २.४.प्रणव कुमार झा-बिहार मे यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (UHC): नियमन आ कार्यान्वयन २.५.डॉ वी एन झा- इसरो - स्पेसX के एक्सिओम-४ मिशन के तकनीकी विश्लेषण २.६.परमानन्द लाल कर्ण-आत्मसम्मान (कथा) २.७.लाल देव कामत- डॉ० महेंद्र जीके चारिम बानर ! २.८.प्रमोद झा 'गोकुल'-प्रायश्चित (कथा) २.१.मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-१२ कल्पना झा मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-१२ पूर्वजक प्रति उदासीन वर्तमान पीढ़ीक मारि झेलैत 'व्यास' जी
अपन भारतीय संस्कृति मे पूर्वज लोकनिक सम्मान करबाक, हुनकर सभक स्मरण-पूजन करबाक परम्परा जे अछि से तकर धार्मिक महत्व तँ अछिए, सामाजिक, सांस्कृतिक आ नैतिक दृष्टि सँ सेहो ई परम्परा बहुत महत्वपूर्ण अछि। ई परम्परा हमरा सभ केँ अपन जड़ि सँ जोड़ि क' राखैत अछि आ जीवन मे कृतज्ञताक पाठ पढ़बैत उत्तरदायित्वक बोध सेहो करबैत अछि। मुदा एमहर देखि रहल छी, वर्तमान पीढ़ी अपन पूर्वजक प्रति उदासीन भेल जा रहल अछि (विशेष रूप सँ साहित्यिक जगत मे)। किछु दिन पूर्व रमानाथ मिश्र 'मिहिर' जी केँ स्मरण करैत केदार कानन जी फेसबुक पर लिखने छलाह, से हमरा एखन मोन पड़ि रहल अछि। उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' जीक सन्दर्भ मे सेहो ई बात ओतबे लागू होइत अछि।
केदार कानन जीक कहब छनि, "ई केहन लगै छै जे कोनो रचनाकार अपना समय मे बेस लोकप्रिय रहल हो, साहित्य मे, साहित्यक प्रचार-प्रसार मे लागल रहल हो, मुदा ओहि रचनाकारक अवसानक बाद साहित्यिक समाज हुनका बिसरि जाइत अछि। कतेक संवेदना रहि जाइत अछि हमरा मे, हमर समाजक लोक मे। ओह !" से ठीके बुझाइत अछि जेना कृतज्ञता भाव, कृतज्ञता शब्द कतहु विलुप्त भेल जा रहल अछि एखनुक समय मे। एखनहि हाल-फिलहाल मे एकटा शोधार्थी हमर नानीगाम हरिपुर 'बख्शी टोल' मे नवनिर्मित मनसा देवी मन्दिर आ पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य निश्चलानन्द सरस्वतीक डीह देखबाक सौभाग्यक गप्प करैत/लिखैत किछु फोटो पोस्ट कएलनि। स्वाभाविके हम अपन नानीगामक फोटो सभ देखि बेस आह्लादित भेलहुँ। बीसो गोट फोटो "जूम" क' क' देखए लगलहुँ, आशा छलए कतहु हमरो नानाजीक डीह-डाबरक फोटो देखा जाए कहीं। मुदा आशा निराशा मे परिणत भेल।
अगिला दिन ओहि शोधार्थी सँ जिज्ञासा कएलियनि हम, 'व्यास' जीक डीह नहि देखा देलनि केओ गोटे। तखन शोधार्थी जे उतारा देलनि, से सुनि आहत भेलहुँ। ओ कहलनि, "ओह ! से ने हमरा बूझल छलए, जे एही गाम मे हुनकर डीह सेहो छनि आ ने केओ कहलनि हमरा। नै तँ हम अवश्य एक बेर जइतहुँ आ फोटो लइतहुँ।" जखन कि हाले-फिलहाल मे शोधार्थी 'व्यास' जीक लिखल विदेश-भ्रमण (यात्रा वृत्तांत) पढ़ि क' खतम कएने छलाह, से हमरा ओ स्वयं कहलनि। कतेक दुःखक बात अछि ई। हमसभ अपन पूर्वज केँ कतेक जल्दी बिसरि जाइत छी। एखन हम पुत्रद्वयक कर्मभूमि पुणे प्रवास पर छी। एहिठाम देखैत छी शहर मे असंख्य स्थान पर शिवाजीक मूर्ति स्थापित कएल अछि। शिवाजीए टा नहि, कतेको सन्त सभक नाम पर तँ भव्य मन्दिर बनल देखि रहल छी एहि ठाम। 'गजानन मन्दिर' मे एकटा सन्त, गजानन जीक फोटो आ चरण-पादुका पर माथा सटबैत देखि रहल छी लोक सभ केँ। जे सन्त कोनो महामारीक समय मे लोकक सेवा कएने छलाह, लोकक जान बचओने छलाह। हुनका नाम पर एकटा ट्रस्ट सेहो बनाओल गेल अछि, 'सन्त गजानन महाराज संस्थान'क नाम सँ। गजानन महाराज 1910 ई. मे समाधि लेने छलाह। माने 115 वर्ष बितलाक बादहु लोकक हृदय मे विराजमान छथिन हुनकर पूर्वज।
एही कलयुगेक बात अछि ने...सन्त गजानन जीक अवतरण आ अवसान। आ से मराठी समाज हुनका भगवानक रूप मे मन्दिर मे स्थापित क' स्मरण-वन्दन क' रहल अछि। तहिना एकटा भारतीय हिन्दू आध्यात्मिक गुरु छलाह स्वामी समर्थ, जे 1878 ई. मे समाधि लेने छलाह। हुनका नाम पर सेहो 'स्वामी समर्थ' मन्दिर बनल अछि। एकर अतिरिक्त आरो कइअक टा एहेन मन्दिर अछि महाराष्ट्र मे। शिवाजी महाराज, जे एक महान शासक, कुशल योद्धा आ दूरदर्शी नेता छलाह। संगहि वीरता, बुद्धि, न्यायप्रियता, धर्मपरायणता, आ राष्ट्रभक्ति कूटि कूटि क' भरल छलनि हुनका भीतर। 1680 ई. मे दिवंगत भ' चुकल छलाह शिवाजी आ एखन धरि, माने हुनकर मृत्युक 345 सालक उपरान्तहु मराठी समाज हुनका जिआ क' रखने छनि। जैँ मराठी समाज हुनका जिआ क' रखने छनि, जैँ अपन समाज एतेक मान देने छनि, तैँ अंग्रेजी, फ्रेंच, डच, पुर्तगाली, इतालवी लेखकक कलम सेहो चलल छनि हुनकर वीरतापूर्ण कारनामा आ हुनकर चतुर रणनीति पर।
मानलहुँ 'व्यास' जी कोनो योद्धा नहि छलाह, कोनो सन्त नहि छलाह मुदा आधुनिक मैथिली साहित्य मे एकटा महत्वपूर्ण योगदान रहलनि हुनकर। 2002 मे (मात्र तइस वर्ष पहिले) दिवंगत एहि महान लेखकक गामक नाम पर्यन्त नहि बूझल छनि मैथिली भाषा मे मिथिलाक लोक संस्कृति पर शोध कएनिहार विद्यार्थी केँ। ई अत्यधिक दुःखक बात भेल।
'व्यास' जीक संग बख्शी टोलक जानल-मानल विद्वान महामहोपाध्याय बाल मुकुन्द झा बख्शी जी सेहो तहिना विस्मृत भ' चुकल छथिन लोक केँ। जनिकर नाम पर "बख्शी टोल"क नामकरण भेल अछि। आ दुखक बात जे एहि तरहेँ उपेक्षित विद्वान/साहित्यकारक लिस्ट नमहर अछि। 'बख्शी'टोल मात्र नहि, अन्यान्य गामक असंख्य एहेन साहित्यकार छथि, जनिकर 'डीह' आब उजड़ल बियाबान सन भेल अछि। जे डीह कोनो साहित्यकारक जीवनकाल मे लोकक अबरजात सँ गुंजायमान रहैत छलए, ताहि ठाम आब टूटल मड़ैया पर्यन्त नहि, एहनो स्थिति अछि कोनो कोनो ठाम। आधुनिक मैथिली साहित्यक कथाकार 'ललित'क बसैठ चानपुराक डीहक चर्चा करी, कि मायानन्द मिश्र जीक बनैनिआँ गामक आ कि 'राजकमल'क बनगाँव महिषीक डीहक बात हुअए, सभ ठाम ओएह सुन्न-मसान परता पड़ल खंडहर। कतहु कोनो स्मारकनुमा किछु नहि, कोनो एकटा चेन्हास नहि, कि लोक चिन्हिओ सकए; ई अमुक साहित्यकारक डीह छनि।
जखन आचार्य सुरेन्द्रनाथ झा 'सुमन' सन बहुमुखी प्रतिभाक धनी लोक, साहित्य अकादमी विजेता आ "एम एल ए" "एम पी" रहि चुकल साहित्यकारक डीह (बल्लीपुर आ दरभंगा, दुनू ठामक) बेचि बिकिनि समाप्त क' देल गेल, तँ आब आर की कहल जाए। कतेक नाम गनाबी हम। आर्थिक युग छै, अपन पूर्वजक नामो-निशान मेटाए पाइ अर्जित क' लेब बेसी आवश्यक काज भ' गेल छैक लोक लेल। पूर्वजक व्यक्तित्व ओ कृतित्व के जिआए राखब थोड़बे आवश्यक छै। एहि उदासीनताक पाछाँक कारण आ निवारण पर विचार करब आवश्यक अछि। हमसभ अपन पूर्वज सँ बेसी अपना-आप केँ महत्वपूर्ण तँ ने बूझए लागल छी ? कोनो बेगरता नहि रहल आब अपन धरोहर साहित्यकार वा गीतकारक चर्चा करब, आ कि हुनका पढ़ब/सुनब। एहि तरहक एकटा हवा चलल सन देखि रहल छी मैथिली साहित्यिक जगत मे।
एमहर किछु दिन सँ गौर क' रहल छी, कालजयी गीत सभक रचयिता गीतकार प्रदीप जीक गीत सभ नहिए सन गाओल जा रहल अछि। आ नब-नब गीतकार अपना केँ बड़का भारी गीतकार सिद्ध करबा मे लागल छथि। स्वरचित गीत गएबाक चलन सेहो बढ़ल बुझाइत अछि। अपन पूर्वज सभक कएल काज सभ केँ जिआ क' राखब सेहो एकटा जिम्मेदारी छै वर्तमान पीढ़ीक, से बूझब जरूरी अछि। महान साहित्यकार सभ पर किछु काज कएल जाए, हुनकर कृति सभ पर गप्प हुअए, एहि दिस ध्यान नहि जा रहल छनि वर्तमान पीढ़ीक। ओ सभ स्वयं के महान साहित्यकारक समकक्ष बूझए लागल छथि। वर्तमान मे सक्रिय किछु साहित्यकारक एहेन सन रवैया देखाइत अछि। अहाँ अपन स्थान बना रहल छी, नीक बात ! मुदा ककरो प्रतिष्ठा केँ धूमिल क' हुनकर स्थान लेबाक प्रयास अनैतिक भेल ने !
मैथिली साहित्य मे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' जीक एकटा विशिष्ट स्थान रहल छनि, जे स्थान आन "केओ" तँ नहिए, हुनक अपन सन्ततिओ नहि ल' सकतनि कहियो। 'व्यास' जीक लेखनीक जे स्तर छलनि, तकर झलक हमरा नहि देखाइत अछि मामा सभक लेखनी मे। हँऽ...अपन-अपन स्तर पर सभ निकेँ लिखि रहल छथि, ताहि मे संशय नहि। अपन महान पिताक प्रति हुनक सन्ततिक ई जिम्मेदारी बनैत छनि, 'व्यास' जीक डीह पर कम-सँ-कम एकटा नेमप्लेट, एकटा प्रतीकात्मक किछु कंस्ट्रक्शन करबाए हुनकर स्मृति के जिआ क' राखथि। जाहि सँ जे केओ मनसा-देवी मन्दिर जाइथ, से क्षण भरि लेल 'व्यास' जीक डीह पर सेहो रुकथि, हुनका स्मरण करथि। एहि सन्दर्भ मे हम गप्प क' रहल छी मामा सभ सँ । सकारात्मक परिणाम आओत से विश्वास अछि। संपादकीय सूचना-एहि सिरीजक पुरान क्रम एहि लिंकपर जा कऽ पढ़ि सकैत छी- मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-1 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-2 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-3 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-4 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-5 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-6 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-7 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-8 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-9 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-१० मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-११ अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.२.हितनाथ झा- मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान -४ हितनाथ झा मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान -४ युवक संघ, उमापति पुस्तकालय आ हस्तलिखित मासिक 'प्रभात' युवक संघ आ उमापति पुस्तकालय बीसम शताब्दीक पूर्वार्धमे कोइलखक सांस्कृतिक-साहित्यिक -सामाजिक आ चिकित्सकीय समृद्धिक प्रतीक रूपमे बहुत वर्ष धरि जीवन्त रहल। युवक संघक स्थापना 14 अक्टूबर 1932 केँ भेलैक। एकर पहिल सभापति भेलाह प.उमानाथ झा(इंजीनियर साहेब) तथा मंत्री प. सुशील कुमार झा(पुबारि टोलक प.काशीनाथ झाक जेठ पुत्र)। एकर मुख्य उद्देश्य छलैक - समाजकेँ गतिशील बनायब तथा व्यापक सोच दिस अग्रसर करब, गामक साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधिमे आनो गामकेँ जोड़ब, उमापति पुस्तकालयक गठन (करीब चारि वर्षसँ कोइलखदेवी नामक पुस्तकालय कोइलखमे श्रीयुत हेडमास्टरक अनुकम्पासँ स्थानीय चन्द्रानंद फ्री मिडिल स्कूलमे राखल अछि। स्कूलक कार्यवाही होयबाक कारण पुस्तकालयक कार्य संचालनमे पूर्ण बाधा होइत छैक। एहन स्थितिमे एक सुन्दर घर पुस्तकालयक निर्माण करैक निमित्त कटिबद्ध भ' गेल अछि।) तथा हस्तलिखित मासिक पत्रिका 'प्रभात'क प्रकाशन करब। 'प्रभात' युवक संघ द्वारा संचालित आ प्रकाशित होइत छल। एकर पहिल अंक जनवरी 1933 मे बहरायल आ अन्तिम उपलब्ध अंक थिक दिसम्बर 1934क। ताहिमे पत्रिका बन्द होयबाक घोषणा नहि छैक। तेँ सम्भव थिक जे आगुओ बहरायल हो। एकर सम्पादक छलाह प. तारानाथ झा । प्रभात बहुभाषिक सचित्र पत्रिका छल। मुख्यांश मैथिलीमे रहैत छल आ संस्कृत, हिन्दी तथा अंग्रेजीक रचना सेहो रहैत छल। उपलब्ध 18 अंकमे कुल मिलाकs 46 कविता,13 कथा, 84 निबन्ध तथा सम्पादकीय, पत्र, चुटुक्का आदि 72 अछि।समाचार सेहो देल जाइत छलैक। पृष्ठ संख्या निश्चित नहि छलैक, न्यूनतम 55 आ अधिकतम 87 पृष्ठ भेटैत अछि। हस्तलिखित पत्रिकाक सम्बन्धमे निष्कर्षतः डा.कांचीनाथ झा 'किरण' क कहब छनि- ' एहि पत्र सभक अंक यदि एकत्रित कयल जाइत तँ विषय-वस्तुक दृष्टिएँ मिथिला मोद आदिक अपेक्षा अधिक उपयोगी सिद्ध होइत। कतेको युवक साहित्यकारक हृदयमे अहुरिया कटैत भाषा-सांस्कृतिक प्रेमक पता समाजकेँ लगैत। (सन्दर्भ: कोइलख, पृष्ठ-141)' प्रभातक प्रकाशन युवक संघ द्वारा निर्धारित नीतिक अनुसार होइत छल। प्रभातक नियमावली प्रत्येक अंकक पहिल पृष्ठपर रहैत छल -: नियमावली:- 01.प्रभात प्रत्येक अंग्रेजी मासक पहिली तारीख कs प्रकाशित होयत। 02.प्रभातमे धार्मिक,सामाजिक,ऐतिहासिक, वैज्ञानिक, आयुवेर्दिक लेखक अतिरिक्त अन्यान्य भाषाक अनेक ग्रन्थक अनुवाद रहत। 03. लेखक लेख प्रत्येक भाषामे दय सकै छथि।(यदि मैथिलीमे लेख देथि तँ सर्वोत्तम) 04. मासक 25 तारीखक अभ्यन्तर लेख अयला पर, आगामी पहिली तारीखमे प्रकाशित कयल जायत। 25 तारीखक बादः लेख अयलापर यदि समावेश नहि भs सकत तs आगामी मासक बाद प्रकाशित कयल जायत। 05. लेखककेँ लेख लिखबाक हेतु कागज युवक संघक तरफसँ देल जयतन्हि, अतः जिनका लेख लिखबाक होइन्ह, सम्पादक 'प्रभात'क ओहिठामसँ कागज मंगबा लेथि। 06. लेखक,लेख अपनहुँ कागज मे लिखि प्रेषित कय सकै छथि। यदि प्रभातक कागजसँ लेखकक कागजमे भेद रहतैक तs प्रभातक कागजमे नकल कय प्रकाशित कयल जायत। 07. यावत पुस्तकालयक घरक अभाव छैक ताबत प्रत्येक परिचित व्यक्ति केवल छ घण्टाक हेतु सम्पादकक ओहिठाम रजिस्टर मे हस्ताक्षर कय प्रभात अपना ओहिठाम पढ़बाक हेतु लs जा सकै छथि। 08. जिनका डाक द्वारा लेख प्रेषित करबाक होइन्ह, सम्पादक 'प्रभात' कोइलख, डाकघर-रामपट्टी, जिला- दरभंगाक पतासँ प्रेषित करथि।वैरंग पत्र नहि लेल जयतन्हि। 09. एहि विषयमे विशेष पुछबाक जिनका प्रयोजन होइन्ह, सम्पादककेँ पूछि लेथि। प्रभातमे प्रकाशित प्रत्येक अंकक उक्त नियमावलीक प्रसंग मैथिलीक प्रसिद्ध आलोचक मोहन भारद्वाजक कथन एहि प्रकारक अछि :-' उक्त नियमावली सैद्धान्तिक आ व्यावहारिक दुनू दृष्टिएँ महत्वपूर्ण अछि। किन्तु, महत्व कोनो नीति आ नियमक नहि होइत छैक। महत्वपूर्ण होइत अछि ओकर अनुपालन। प्रभात प्रत्येक मासक पहिल तारीखकेँ प्रकाशित भs जाइत छल।रचनाकार तथा पाठकसँ सम्बद्ध नियममे व्यतिक्रम नहि हो ताहि लेल सम्पादक सतर्क रहैत छलाह, जे सम्पादकीय टिप्पणी सभसँ स्पष्ट अछि। सम्पादकक एहि श्रम आ तत्परताक पाछाँ हुनक भाषा-संस्कृति-प्रेमक दृढ़ता काज कs रहल छल। मुद्रणक युगमे हस्तलिखित पत्रिका चलयबाक एक मात्र कारण छल अर्थाभाव। छपयबाक बात तँ दूर रहओ, पाठकीय सुविधाक हेतु एकर दू-तीन प्रति लिखयबाक विचारो हुनका मान्य नहि छलनि। प्रभातक एक प्रति प्रस्तुत करबामे युवक-संघकेँ 10-11 टाका खर्च पड़ैत छलैक, तेँ एकर एकसँ अधिक प्रति निकालब सम्भव नहि छल। उल्लेखनीय थिक जे युवक-संघक अथवा प्रभातक सम्पादकक ई सीमा सिद्धान्तक कारणे बेसी छल। कोइलख आ ओकर परिसरमे एहन लोक रहथि जे एहि प्रकारक कार्यक आर्थिक भार वहन कs सकैत छलाह। मुदा, संस्था आ सम्पादक व्यक्तिगत उपकारक विरोधी रहथि। विचारक इएह दृढ़ता प्रभातकेँ मैथिली पत्र-पत्रिकाक इतिहासमे महत्वपूर्ण बनबैत अछि। ई बात कतोक स्तरपर दृष्टिगत होइत अछि।पत्रिकाक नामकरणेकेँ लेल जाय। प्रभातसँ पहिने मैथिलीक सात टा मुद्रित पत्रिका बहरा चुकल छल- मैथिल हित साधन, मिथिला मोद, मिथिला मिहिर, मैथिल-प्रभा, प्रभाकर, श्री मैथिली तथा मिथिला। एहि सभ पत्रिकाक नामकरण मिथिला-मैथिलीक संग भेल अछि। प्रभात पहिल पत्रिका थिक जकर नामकरण एहि मानसिकतासँ हटिकेँ कयल गेल। एहिसँ दृष्टिकोणक व्यापकता परिलक्षित होइत अछि। मिथिला आ मैथिली प्रभातोक प्रतिपाद्य विषय छलैक, मुदा ओ ओहि सीमा-रेखासँ बाहरो देखबाक इच्छुक छल। मिथिला-मैथिलीक स्थिति आ समस्यासँ सम्बद्ध रहितहुँ ओकरा व्यापक परिवेशमे देखबाक एकरा आग्रह छलैक। दृष्टिकोणक व्यापकता आ विचारक प्रगतिमुखता दोसरो स्तरपर प्रकट होइत अछि। कुशेश्वर कुमर आ भोलालाल दासक संयुक्त सम्पादनमे प्रकाशित मिथिला (1929 ई.)अपन प्रगतिशीलताक लेल प्रसिद्ध अछि, किन्तु प्रभात ओहिसँ आगाँक पत्रिका थिक।मिथिलाक प्रतिज्ञा-वाक्यक अनुसार कुमर पुरातन-नीति-निरत छलाह आ दास छलाह नवीन समाजी। 'दुनू दुनूकेँ राखथि सभ दिन राजी'- इएह पत्रिकाक अभीष्ट छल। प्राचीन मान्यता आ पाश्चात्य शिक्षासँ उत्पन्न नवीन विचारधाराक संगम -स्थल रूपमे एकर प्रशंसा भने कयल जाय, मुदा एतेक धरि स्पष्ट अछि जे पत्रिकाक दृष्टि समन्वयवादी छल। प्रभात एहन दुविधाग्रस्त मनोवृत्तिक नहि छल।' (सन्दर्भ :- एकल पाठ : मोहन भारद्वाज।) संपादकीय सूचना-एहि सिरीजक पुरान क्रम एहि लिंकपर जा कऽ पढ़ि सकैत छी- मैथिली साहित्यमे तारानाथ झाक एवं हुनक परिवारक योगदान-1 मैथिली साहित्यमे तारानाथ झाक एवं हुनक परिवारक योगदान-2 मैथिली साहित्यमे तारानाथ झाक एवं हुनक परिवारक योगदान-3 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.३.डॉ. जियाउर रहमान जाफरी- दू टा लघुकथा- उपहार आ मैथिली डॉ. जियाउर रहमान जाफरी दू टा लघुकथा- उपहार आ मैथिली १
उपहार ओ बहुत धार्मिक व्यक्ति छलाह । शिक्षा विभाग मे हुनकर नौकरी छलन्हि... हमर एकटा काज लंबित छल. हम हुनका दस हजार रुपैया भरल लिफाफ द' क' कहलियनि.. ई हमर उपहार अछि... ओ कहलनि.... घूस रहैत त' कहियो नहि लेने रहितहुँ... हँ, उपहार लेब हर धर्म मे जायज अछि...... २ मैथिली
वीआईपी इवेंट छल.. बड़का-बड़का उद्योगपति, मंत्री, ठेकेदार, डाक्टर, प्रसिद्ध अभिनेता... सब आबि गेल छलाह... सब कियो अंग्रेजी मे गप्प क' रहल छलाह, मुदा एकटा पंडित जी सब सँ मैथिली बाजि रहल छलाह... हम कहलियनि पंडित जी, ई एतेक सुन्दर आ पैघ आयोजन अछि.. पैघ लोकक समूह अछि... एतय सब कियो अंग्रेजी बाजि रहल छथि, आ अहाँ क्षेत्रीय भाषा मैथिली बजैत छी???? पंडित जी बजलाह - ई हमर मातृभाषा अछि... बस एहि लेल जे ओ महिला बहुत सुन्दर छथि.... ओ हमर माँ नहि भ' सकैत छथि... हुनकर अकाट्य उत्तर सुनि हम चुप भ� गेलहुँ । ....................................... डॉ. जियाउर रहमान जाफरी, द्वारा -इफ्तेखर कबरी, शरीफ कालोनी, बड़ी दरगाह, पर नवादा, जिला - नवादा, बिहार 805112; मोबाइल 6205254255 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.४.प्रणव कुमार झा-बिहार मे यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (UHC): नियमन आ कार्यान्वयन प्रणव कुमार झा बिहार मे यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (UHC): नियमन आ कार्यान्वयन यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (UHC) के अर्थ अछि - सभ नागरिक के स्वास्थ्य सेवासभ सुलभ होय, चाहे ओ गरीब होय वा धनीक, ग्रामीण होय वा शहरी। एकरा प्राप्त करबाक लेल सरकार आ समाज के संग-संग नियामकीय व्यवस्था (regulatory provisions) के सेहो मजबूत बनेबाक आवश्यकता अछि। विशेष रूप सऽ, ग्रामीण भारत, जतय स्वास्थ्य सेवा सभ लोक तक पहुंचनाई अखनों सीमित अछि। ओतय ई नियामकीय व्यवस्था आरो बेसी महत्व रखैत अछि। भारत के संविधान मे स्वास्थ्य के मूल अधिकार के रूप में स्पष्ट रूप सऽ नहि राखल गेल अछि, मुदा अनुच्छेद 21 (जीवन के अधिकार) आ नीति निदेशक तत्व (Directive Principles) में ई बात कहलक गेल अछि जे राज्य के दायित्व अछि जे नागरिक सभ के उत्तम स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराओल जाय। स्वाइत संविधान मे स्वास्थ्य सेवा के समवर्ती सूची मे राखल गेल अछि, अर्थात एकरा पूर्ति के ज़िम्मेदारी केंद्र आ राज्य सरकार दुनु पर देल गेल अछि। यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (UHC) के पूर्ति लेल विभिन्न राज्य आ केंद्र सरकार समय समय पर नाना तरहक कानून, नीति आ नियामक निकाय बनौलक अछि आ अपना अपना हिसाब से कार्यान्वित कऽ रहल अछि। बिहारमे यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (UHC) प्राप्त करबाक लेल केवल सरकारी वादा आ नीतिगत घोषणा पर्याप्त नहि; एकर लेल एकटा यथार्थवादी, समयबद्ध, आ जवाबदेह दृष्टिकोण आवश्यक अछि। स्वास्थ्य सेवा वितरणक क्षेत्रमे चुनौतीसभ, जेना कि बुनियादी ढांचाक कमी, स्वास्थ्य कार्यबलक अभाव, उच्च निजी खर्च, डेटा गोपनीयताक जोखिम, आ जनजागरूकताक कमी के समाधान करबाक लेल दृढ़ कार्यकारी आ राजनैतिक इच्छाशक्ति के आवश्यकता अछि। एकरा लेल आवश्यक अछि जे बिहार के जनता आ राजनैतिक पार्टी सबहक मध्य ई एकटा गंभीर राजनैतिक मुद्दा बनय। बिहारक जनसंख्या लगभग 13 करोड़ अछि, जाहिमे लगभग 80-90% ग्रामीण क्षेत्रमे निवास करैत अछि। बिहारक स्वास्थ्य संकेतक, जेना कि शिशु मृत्यु दर (IMR: 38 प्रति 1000 जीवित जन्म) आ मातृ मृत्यु दर (MMR), राष्ट्रीय औसत सँ नीचा अछि, जे स्वास्थ्य प्रणालीक कमजोरी दर्शावैत अछि। @IndiaToday क X पोस्ट (23 जुलाई 2025) क अनुसार, बिहारमे प्रति 2,148 व्यक्ति पर केवल एकटा चिकित्सक उपलब्ध अछि, जे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) क सिफारिश (1:1000) सँ बहुत कम अछि। 1,258 अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (APHC) मे सँ करीब 800 मे चिकित्सक नहि अछि, आ राज्य मे साढ़े पाँच हजार से बेसी चिकित्सकक पद रिक्त अछि। ई आँकड़ा सरकारक दावाक खोखलापन उजागर करैत अछि। वास्तव मे बुनियादी ढांचा आ मानव संसाधनक अभाव बिहार मे स्वास्थ्य सेवाक आ यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज के प्राप्त करबा मे एकटा बड़का बाधा अछि। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) केँ बिहारमे स्वास्थ्य सेवाक डिजिटलीकरणक लेल एकटा क्रांतिकारी कदमक रूपमे प्रस्तुत कएल जाइत अछि। एकर तहत आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता (ABHA) बनायल जा रहल अछि, जे नागरिकसभ केँ एकटा डिजिटल स्वास्थ्य पहचान प्रदान करैत अछि। 2024 तक बिहारमे लाखों ABHA खाता बनायल गेल अछि, मुदा एकर प्रभावकारिता पर सवाल उठैत अछि। ग्रामीण क्षेत्रमे इंटरनेट कनेक्टिविटी आ डिजिटल साक्षरताक कमी ABDM क सफलताकेँ सीमित करैत अछि। @UdayBhanuIYC क X पोस्टमे बिहारक सरकारी अस्पतालसभक खराब स्थिति पर प्रकाश देल गेल अछि, जे डिजिटल पहलक बावजूद बुनियादी सुविधाक अभाव दर्शावैत अछि। ABDM क प्रचार सरकारी उपलब्धिक रूपमे कएल जाइत अछि, मुदा ग्रामीण रोगी केँ विशेषज्ञ चिकित्सक तक पहुँचक लेल टेलीमेडिसिन केंद्रसभक अपर्याप्त बुनियादी ढांचा एकटा बड़का बाधा अछि। टेलीमेडिसिन बिहारमे स्वास्थ्य सेवाक पहुँचमे असमानता कम करबाक लेल एकटा महत्वपूर्ण उपकरणक रूपमे देखल जा रहल अछि। 2024 मे जारी टेलीमेडिसिन दिशानिर्देश ग्रामीण क्षेत्रमे स्वास्थ्य सेवाक वितरणक लेल कानूनी ढांचा प्रदान करैत अछि। पटना मेडिकल कॉलेज आ अस्पताल (PMCH) मे टेलीमेडिसिन केंद्र स्थापित कएल गेल अछि, मुदा एकर उपयोग अखन सीमित अछि। ग्रामीण क्षेत्रमे बिजलीक अनियमित आपूर्ति, डिजिटल साक्षारता के कमी आदि टेलीमेडिसिनक प्रभावकेँ कमजोर करैत अछि। ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रसभमे उपकरण आ दवाईक कमी एकटा बड़का मुद्दा अछि, जे टेलीमेडिसिनक लाभ केँ सीमित करैत अछि। टेलीमेडिसिनक प्रचार एकटा आधुनिक समाधानक रूपमे कएल जाइत अछि, मुदा एकरा लागू करबा मे बुनियादी ढांचाक कमी एकटा गंभीर मुद्दा अछि। बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BMSICL): वादा बनाम हकीकत BMSICL स्वास्थ्य सेवाक वितरणमे दवाई, उपकरण, आ बुनियादी ढांचाक उपलब्धता सुनिश्चित करबाक दावा करैत अछि। 2024 मे दवाई आ उपकरणक आपूर्ति बढ़ाओल गेल अछि, मुदा ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रसभमे दवाईक कमी आ उपकरणक अपर्याप्त रखरखाव अखनों एकटा समस्या अछि। कै ठाम मोबाइल मेडिकल यूनिटक शुरुआतक उल्लेख सेहो भऽ रहल अछि, जे गाम तक स्वास्थ्य सेवा पहुँचयबाक लक्ष्य राखैत अछि। मुदा, ई यूनिटसभक प्रभाव सीमित अछि, कियाकि प्रशिक्षित कर्मचारीक कमी आ नियमित मॉनिटरिंगक अभाव एकर प्रभावकेँ कम करैत अछि। BMSICL क प्रयास सराहनीय अछि, मुदा एकर कार्यान्वयनमे पारदर्शिता आ जवाबदेहीक कमी एकटा गंभीर मुद्दा अछि। नियामक प्रावधान: कागजी उपलब्धि कि वास्तविक प्रभाव? : डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 (DPDP एक्ट) DPDP एक्ट स्वास्थ्य डेटाक गोपनीयता आ सुरक्षाक लेल एकटा महत्वपूर्ण कदम अछि। ई रोगी डेटाक संग्रहण, भंडारण, आ साझेदारीक लेल सहमति ढांचा प्रदान करैत अछि। मुदा, बिहारमे डिजिटल साक्षरताक कमी आ डेटा उल्लंघनक जोखिम एकर लागूकरणकेँ चुनौतीपूर्ण बनावैत अछि। ग्रामीण रोगी, जे डिजिटल स्वास्थ्य सेवासभक उपयोग करैत अछि, अक्सर अपन डेटाक गोपनीयताक विषय मे अनजान रहैत अछि। DPDP एक्टक कागजी प्रावधान मजबूत अछि, मुदा एकर जमीनी लागू करबा मे कमी एकटा बड़का सवाल उठावैत अछि। क्लिनिकल एस्टाब्लिशमेंट एक्ट, 2010 : ई एक्ट स्वास्थ्य सुविधासभक पंजीकरण आ नियमनक लेल लागू अछि, मुदा बिहारमे एकर कार्यान्वयन कमजोर अछि। डिजिटल स्टेट रजिस्टरक निर्माणक बावजूद, बहुत रास निजी क्लिनिक आ डायग्नोस्टिक सेंटर बिना उचित पंजीकरणक संचालित होइत अछि। ई स्वास्थ्य सेवाक गुणवत्ता आ जवाबदेही पर सवाल उठावैत अछि आ अक्सर एहन सेंटर सभ द्वारा अनुचित इलाज आ अनुचित फीस वसूली कैल जाय अछि। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) : NHM बिहारमे स्वास्थ्य सेवाक सुधारक लेल एकटा प्रमुख पहल अछि, मुदा वर्तमान मे एकर प्रभाव सीमित अछि। जननी बाल सुरक्षा योजना (JBSY) क तहत संस्थागत प्रसवक दर बढ़ल अछि, मुदा ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रसभमे स्वच्छता, दवाई, आ प्रशिक्षित कर्मचारीक कमी एकर प्रभावकेँ कम करैत अछि। NHM क कोषक उपयोगमे पारदर्शिता आ जवाबदेहीक कमी एकटा गंभीर मुद्दा अछि, जे सरकारी दावासभक खोखलापन उजागर करैत अछि। केस स्टडी 1: अनन्या कार्यक्रम: अनन्या कार्यक्रम, जे 2010 मे बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन आ बिहार सरकारक सहयोग सँ शुरू भेल, मातृ आ शिशु स्वास्थ्यमे सुधार आनलक अछि। ई बिहारक आठ जिला मे लागू कएल गेल आ 10 मिलियन सँ बेसी माता आ शिशुसभ तक पहुँचल। मुदा कार्यक्रमक समाप्तिक बाद एकर दीर्घकालिक प्रभाव सीमित रहल। ग्रामीण क्षेत्रमे स्वास्थ्य कार्यकर्तासभक प्रशिक्षण आ प्रेरणा बनाय राखबमे कमी एकटा बड़का कमजोरी रहल। केस स्टडी 2: परिवार फ्रेंडली हॉस्पिटल इनिशिएटिव SWASTH कार्यक्रमक तहत दरभंगा मेडिकल कॉलेज आ अस्पतालमे रोगी देखभालक गुणवत्ता सुधारबाक प्रयास कएल गेल, मुदा कर्मचारी कमी आ बुनियादी ढांचाक अभाव एकर प्रभावकेँ कम करैत अछि। केस स्टडी 3: टेली-ECG पहल: 2024 मे स्टेट हेल्थ सोसाइटी, बिहार (SHSB) द्वारा शुरू टेली-ECG पहल हृदय रोगक निदानक लेल एकटा सकारात्मक कदम अछि। मुदा, ग्रामीण क्षेत्रमे उपकरणक रखरखाव आ प्रशिक्षित कर्मचारीक कमी एकर प्रभावकेँ सीमित करैत अछि। ई-टेंडर प्रक्रिया (NIT: 22/SHSB/Tele-ECG/2024-25) मे पारदर्शिता आ समयबद्ध रुपे लागू करय के अभाव सेहो एकटा चिंता अछि। बिहारमे ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रसभमे बुनियादी सुविधा जेना कि बेड, स्वच्छ प्रसव कक्ष, पेयजल, आ नियमित बिजलीक कमी एकटा गंभीर समस्या अछि। @UdayBhanuIYC क X पोस्ट (2025) मे उल्लेख कएल गेल अछि जे सरकारी अस्पतालसभमे लापरवाही आ सुविधाक कमी रोगी देखभालक गुणवत्ताकेँ प्रभावित करैत अछि। ई कमी केँ दूर करबाक लेल सरकारकेँ निम्नलिखित कदम उठायबाक चाही: समयबद्ध योजनाक निर्माण: ग्रामीण क्षेत्रमे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) आ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) क उन्नयनक लेल एकटा पंचवर्षीय रोडमैप बनायल जाय, जाहिमे प्रत्येक जिला मे कम सँ कम 50% PHC केँ 2027 तक पूर्ण सुसज्जित आ कार्यरत बनेबाक लक्ष्य होय। उदाहरण स्वरूप, दरभंगा जिला मे वर्तमान मे केवल 30% PHC मे पर्याप्त बेड आ उपकरण उपलब्ध अछि, जे एकटा गंभीर कमी अछि। पारदर्शी कोष उपयोग: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) आ बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BMSICL) क तहत कोषक उपयोगमे पारदर्शिता सुनिश्चित करबाक लेल एकटा ऑनलाइन डैशबोर्ड बनायल जाय, जे प्रत्येक जिला मे कोष आवंटन, व्यय, आ परिणामक रियल-टाइम जानकारी दै। ई कदम भ्रष्टाचारक आरोपसभकेँ कम करत आ जनताक विश्वास बढ़ाओत। हालक समाचार (@IndiaToday, 23 जुलाई 2025) मे NHM कोषक दुरुपयोगक उल्लेख अछि, जे जवाबदेहीक कमी दर्शावैत अछि। सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP): ग्रामीण क्षेत्रमे अस्पताल आ डायग्नोस्टिक सेंटरक निर्माणक लेल PPP मॉडलक उपयोग कएल जाय, मुदा एकर निगरानीक लेल एकटा स्वतंत्र नियामक निकाय स्थापित कएल जाय जे गुणवत्ता आ लागत नियंत्रण सुनिश्चित करय। उदाहरण स्वरूप, पूर्णिया जिला मे PPP मॉडलक तहत बनल डायग्नोस्टिक सेंटरक लागत अधिक रहल, जे गरीब रोगीसभक लेल असुविधाजनक अछि। चुनावी संदर्भ: आगामी विधानसभा चुनाव मे� राजनीतिक पार्टि सभ ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधाक उन्नयनकेँ अपन घोषणापत्रमे शामिल करय एकरा लेल राज्य के जनता सभ के अपन राजनैतिक विमर्श द्वारा प्रेशर बनेबाक चाहिए । Congress, RJD आ जनसुराज आदि विपक्षी दल ग्रामीण क्षेत्रमे स्वास्थ्य सुविधाक कमी केँ उजागर कऽ सकैत अछि, जबकि NDA (BJP आ JD(U)) अपन PPP पहलक प्रचार करय। मुदा, केवल घोषणा नहि, बल्कि जमीनी परिणाम पर ध्यान देब आवश्यक अछि। स्वास्थ्य कार्यबलक भर्ती: प्रक्रिया मे तेजी : बिहारमे स्वास्थ्य कार्यबलक कमी एकटा प्रमुख बाधा अछि। प्रति 10,000 व्यक्ति पर केवल 20 स्वास्थ्य कार्यकर्ता उपलब्ध अछि, जे राष्ट्रीय औसत सँ कम अछि। 5,750 चिकित्सकक पद रिक्त अछि, जे स्वास्थ्य सेवा वितरणकेँ प्रभावित करैत अछि। ई कमीकेँ दूर करबाक लेल निम्नलिखित उपाय आवश्यक अछि: तेज भर्ती प्रक्रिया: बिहार सरकारकेँ एकटा विशेष भर्ती अभियान शुरू करबाक चाही, जाहिमे 2026 तक कम सँ कम 50% रिक्त पद (लगभग 2,875 चिकित्सक आ 5,000 नर्स) भरल जाय। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) केँ स्वास्थ्य कर्मीक भर्तीक लेल विशेष फास्ट-ट्रैक प्रक्रिया शुरू करबाक चाही, जेना कि तमिलनाडु सरकार द्वारा कएल गेल अछि। ग्रामीण क्षेत्रमे प्रोत्साहन: ग्रामीण क्षेत्रमे सेवा करबाक लेल चिकित्सक आ नर्ससभ केँ वित्तीय प्रोत्साहन, जेना कि 20-30% अतिरिक्त वेतन, मुफ्त आवास, आ शैक्षिक अवसर, प्रदान कएल जाय। उदाहरण स्वरूप, उत्तराखंड मे ग्रामीण क्षेत्रमे सेवा करबाक लेल चिकित्सकसभ केँ विशेष भत्ता देल जाइत अछि, जे बिहारमे लागू कएल जा सकैत अछि। प्रशिक्षण आ क्षमता निर्माण: सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO), आशा (ASHA), आ सहायक नर्स मिडवाइफ (ANM) सभक प्रशिक्षण पर जोर देब आवश्यक अछि। अनन्या कार्यक्रमक तहत प्रशिक्षणक सफलता देखल गेल, मुदा एकर दीर्घकालिक प्रभावक लेल नियमित रिफ्रेशर कोर्स आ डिजिटल उपकरणक उपयोग आवश्यक अछि। चुनावी संदर्भ: स्वास्थ्य कार्यबलक कमी चुनाव मे एकटा प्रमुख मुद्दा बनबाक संभावना राखे अछि। विपक्षी दल सरकारी अस्पतालसभमे रिक्त पदकेँ उजागर कऽ सकैत अछि, जबकि NDA अपन भर्ती योजनाक प्रचार करय। मुदा, महत्वपूर्ण ई अछि जे आई मामला मे मतदाता जागरूक रहे, आ खाली घोषणा के बजाय जमीनी परिणामक मांग करैत रहय। डिजिटल स्वास्थ्यक विस्तार: बुनियादी ढांचा आ प्रशिक्षण पर जोर: टेलीमेडिसिन आ टेली-ECG सन डिजिटल स्वास्थ्य पहल बिहारमे स्वास्थ्य सेवाक पहुँच बढ़ायबाक लेल महत्वपूर्ण अछि, मुदा एकर लागू करबा मे बहुत रास दिक्कत अछि। ग्रामीण क्षेत्रमे इंटरनेट कनेक्टिविटी, बिजलीक अनियमित आपूर्ति, आ डिजिटल साक्षरताक कमी एकर प्रभावकेँ सीमित करैत अछि। बुनियादी ढांचाक सुधार: टेलीमेडिसिन केंद्रसभक लेल प्रत्येक PHC मे कम सँ कम 4G कनेक्टिविटी आ 24x7 बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कएल जाय। उदाहरण स्वरूप, सहरसा जिला मे केवल 20% PHC मे विश्वसनीय इंटरनेट उपलब्ध अछि, जे टेलीमेडिसिनक उपयोगकेँ सीमित करैत अछि। भारत सरकारक भारतनेट परियोजना सँ बिहारक ग्रामीण क्षेत्रमे ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी बढ़ायल जा सकैत अछि। प्रशिक्षण आ तकनीकी समर्थन: स्वास्थ्य कार्यकर्तासभ केँ टेलीमेडिसिन उपकरणक उपयोग आ रोगी डेटा प्रबंधनक लेल प्रशिक्षण देल जाय। टेली-ECG पहल, जे स्टेट हेल्थ सोसाइटी, बिहार (SHSB) द्वारा शुरू कएल गेल, मे प्रशिक्षित टेक्नीशियनक कमी एकटा बाधा अछि। प्रत्येक जिला मे कम सँ कम 100 टेक्नीशियनक प्रशिक्षण 2026 तक पूरा कएल जाय। जागरूकता आ उपयोगिता: ग्रामीण रोगीसभक बीच टेलीमेडिसिनक लाभक जागरूकता बढ़ायबाक लेल स्थानीय भाषामे प्रचार सामग्री (जेना कि मैथिली, भोजपुरी) बनायल जाय। वित्तीय संरक्षण: AB-PMJAY आ नया स्वास्थ्य बीमा योजनाक विस्तार: बिहारमे स्वास्थ्य व्ययक 61% हिस्सा निजी खर्च सँ आवैत अछि, जे गरीब परिवारसभक वित्तीय संकट बढ़ावैत अछि। आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) आ जुलाई 2025 से शुरू बिहारक मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना वित्तीय संरक्षण प्रदान करैत अछि, मुदा एकर कवरेज आ जागरूकता सीमित अछि। कवरेज विस्तार: AB-PMJAY क तहत बिहारमे 1.5 करोड़ परिवारसभ तक पहुँचल गेल अछि, मुदा ग्रामीण क्षेत्रमे बेसी सँ बेसी परिवारसभकेँ शामिल करबाक लेल लगातार विशेष अभियान चलायल जाय। उदाहरण स्वरूप, खगड़िया जिला मे केवल 40% पात्र परिवार AB-PMJAY क तहत पंजीकृत अछि, जे जागरूकताक कमी दर्शावैत अछि। जागरूकता अभियान: AB-PMJAY आ CMJAY लाभक विषय मे ग्रामीण क्षेत्रमे जागरूकता बढ़ायबाक लेल आशा कार्यकर्ता, स्वयं सहायता समूह (SHG), आ स्थानीय पंचायतक उपयोग कएल जाय। मैथिली, भोजपुरी, मगही, आ अन्य स्थानीय भाषामे सूचनात्मक सामग्री बनायल जाय, जे सरल आ सांस्कृतिक रूप सँ संवेदनशील होय। निजी अस्पतालक नियमन: AB-PMJAY क तहत निजी अस्पतालसभमे रोगी सँ अनुचित शुल्क लेबाक शिकायत आम अछि। एकटा स्वतंत्र शिकायत निवारण प्रणाली स्थापित कएल जाय, जे रोगी अधिकारक रक्षा करय। उदाहरण स्वरूप, हाले मे पटना मे किछु निजी अस्पताल AB-PMJAY क तहत अतिरिक्त शुल्क लेबाक आरोपमे समाचारमे आयल अछि (@IndiaToday, 2025)। बिहारमे स्वास्थ्य सेवा वितरणक सुधारक लेल एकटा यथार्थवादी दृष्टिकोण अपनायब आवश्यक अछि, जे बुनियादी ढांचा, स्वास्थ्य कार्यबल, डिजिटल स्वास्थ्य, वित्तीय संरक्षण, आ जागरूकताक क्षेत्रमे जमीनी परिणाम आनय। सरकारी दावा सभ आ वास्तविकतामे बड़का अंतर अछि, जे पारदर्शिता, जवाबदेही, आ सामुदायिक सहभागिताक कमी सँ स्पष्ट होइत अछि। आगामी 2025 विधानसभा चुनाव मे स्वास्थ्य सेवाक मुद्दाके एकटा राजनीतिक मुद्दा बनेबाक चाही। स्थानीय भाषा, सांस्कृतिक संवेदनशीलता, आ डिजिटल मंचक उपयोग सँ जनजागरूकता बढ़ायल जा सकैत अछि, बशर्ते एकरा सभ के लागू करबा मे पारदर्शिता आ प्रभाविकता सुनिश्चित कएल जाय। बिहारमे UHC क लक्ष्य प्राप्त करब एकटा दीर्घकालिक चुनौती अछि, मुदा एकटा यथार्थवादी आ जवाबदेह दृष्टिकोण सँ ई संभव अछि। - प्रणव कुमार झा, राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड, नई दिल्ली अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.५.डॉ वी एन झा- इसरो - स्पेसX के एक्सिओम-४ मिशन के तकनीकी विश्लेषण डॉ वी एन झा इसरो - स्पेसX के एक्सिओम-४ मिशन के तकनीकी विश्लेषण
इसरो-अमरीकी अंतरिक्ष सहयोग
जून २०२३ म॑ पी एम मोदी केरऽ अमेरिका यात्रा के दौरान ई बात प॑ सहमति भेल छेलै कि इसरो-नासा G2G सहयोग के तौर प॑ २०२४-२५ म॑ अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आई एस एस) प॑ संयुक्त भारत-अमरीका मानव अंतरिक्ष मिशन करनाए छल । भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन आरू प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) के टूर पर नासा सेहो एक्सियम के माध्यम स॑ अपनऽ प्रक्षेपण के सुविधा दै छै जे स्पेसX केरऽ निजी मानव उड़ान प्रक्षेपण सेवा के साथ समन्वय करै छै । एकटा MoU पर हस्ताक्षर भेल छल जाहि मे नासा दूटा अंतरिक्ष यात्री कए पायलटिंग, मिशन सञ्चालन आ ह्यूमन-कंप्यूटर इंटरफेस (HIC) लेल प्रशिक्षित करत...ई सबटा ह्यूमन स्पेस मिशन क बहुत महत्वपूर्ण पहलू अछि। लोगऽ क॑ ई जानै में प्रसन्नता होतै कि स्पेसX क्रू-ड्रैगन पृथ्वी केरऽ कक्षा म॑ इंजेक्ट होय स॑ ल॑ क॑ डॉकिंग तक के सब कार्य पूरा तरह स॑ कम्प्यूटरीकृत छै । लेकिन, कंप्यूटर द्वारा गलती होए वाला आपातकालीन स्थिति म॑ सीमित नियंत्रण क॑ संभाल॑ लेली अंतरिक्ष यान पायलट (एस्ट्रोनॉट) हमेशा HIC लूप म॑ रही केन यान के नियंत्रण अपन हाथ में ल सके छथि I अगर भारत क॑ भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BSS) के भविष्य केरऽ आकांक्षा क॑ पूरा करना छै त॑ चालक दल के ई अनुभव अपार महत्व के होतै । भारत क॑ आई एस एस केरऽ यात्रा के खर्च वहन करै में ५४८ करोड़ रुपया ($६४ करोड़ ) लागल । स्पेसX के अंतरिक्षयान सँ आई एस एस (ISS ) पर जाए - आबए में हर सीट केरऽ सामान्य खर्च $55 Mn- $80 Mn तक छै । स्पेसX के राकेट प्रक्षेपण
प्रक्षेपण कार्यक्रम में प्रारंभिक हिचकी के बाद २९ मई स॑ ८ जून, १० जून, २० जून, पुनः २५ जून तलक स्थगित होय के बाद, क्रू ड्रैगन मॉड्यूल के साथ स्पेसX फाल्कन-९ रॉकेट आखिरकार २५ जून क॑ उड़ान भरलक I ई फाल्कन-९ राकेट 'क्रू ड्रैगन' क॑ धरती सँ ~२०० किमी के ऊंचाई प॑ ~22 मिनट म॑ अंतरिक्षयान के गति २७,५०० किमी प्रतिघंटा प्राप्त होवै के बाद 2nd स्टेज राकेट स॑ अलग कए क॑ पृथ्वी कक्षा म॑ स्थापित कए देलक । अगिला ~28 घंटा में एकर ऊंचाई बढ़ाए केँ ~400 Km कए गेल आ अंततः 26 जून 25 के ISS के संग डॉकिंग भेल I अपने सभु केँ ई जानि आश्चर्य होयत जे रूसी सोयुज लिफ्ट-ऑफ सं मात्र 5 घंटा 4 मिनट में ह्यूमन क्रू मॉड्यूल के अपन आईएसएस डॉकिंग पर ल जाइत अछि मुदा ओकर डॉकिंग पॉइंट में अंतर अछि I (read �Shortest Travel Time to ISS�, https://thecounterviews.in/articles/shortest-time-leo-orbit-iss-docking-russia-spacex-international-space-station/). एक्सियम-4 क॑ सभु सदस्य १८ दिनु तक ISS पर रहि केँ ओहि ठाम अलग अलग प्रयोग व परिक्षण करए में रत रहलाह । ISS के गुरुत्व-विहीन अवस्था में यात्री के लगभग प्रत्येक शारीरिक प्रणाली में बदलाव आवै छैक I उदाहरण-स्वरुप गुरुत्व-विहीन अवस्था में अवितहिं शारीरिक संतुलन राखै में मुश्किल होए छैक आ कतेक यात्री के ऊपर-नीचा के आभास ख़त्म भ जाइछ I किछु लोकनि केँ Space Motion Sickness के तहत उल्टी सेहो होए छैक I रक्त के पुनर्वितरण सँ चेहरा में सूजन आवि जाए छैक I चूँकि ओहि ठाम दिन राति हर ९० मिनट में होए छैक तँ धरती परक २४ घंटा के दिन राति वाला सर्केडियन प्रणाली बदलि जाए छैक I गुरुत्व-विहीन अवस्था में नीन ठीक सँ नहि आवैत छैक आ भूख सेहो कम लागै छैक I थकान बेशी लागै छै I बेशी दिन रहवा सँ हड्डी व मांशपेशी सेहो कमजोर भ जाए छैक, तकरा रोकए लें ट्रेडमिल पर फीता बान्हि केँ प्रतिदिन २ घंटा व्यायाम करनाए जरूरी छैक I कम शब्द में कहु तँ अंतरिक्ष में रहए में शरीर पर बहुतों दुष्प्रभाव पड़ै छै I भावी गगनयान एवं भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के प्रासंगिकता
बहुतो लोकनि में ई सवाल उठैलऽ जाय छै कि इसरो-नासा केरऽ ई संयुक्त मिशन क॑ गगन यान सँ पहिनें कियैक जोड़लऽ गेलै I एकर जवाब सरल छै I इसरो २०२१ म॑ मानव अंतरिक्ष उड़ान भेजै के अपनऽ २०१९ के घोषणा के दौरान जटिल तकनीकी पहलू के गणना करए में किछु गलती कएलक जेकरा अत्यावधि ठीक नै करलऽ गेलऽ I कोविड महामारी बाधा सँ औरो जटिलता उत्पन्न भ गेल । राकेट लॉन्च करए सँ पहिनें ओकर ह्यूमन रेटिंग आवश्यक छैक I साथ-साथ क्रू मॉडल में वायुमंडलीय नियंत्रण आओर जैविक समर्थन प्रणाली (EC&LSS) के अनेकों प्रणाली के प्रमाणीकरण अनिवार्य अछि । इसरो सँ शुरू-शुरू में किछु आओर गलती भेल I चालक दल क॑ समय स॑ पहिनहिं फ्रांस आरू रूस म॑ प्रशिक्षण लेली पठाओल गेल जेकरा बाद ओ सभु एक ह्यूमन रेटेड लॉन्च सिस्टम के कमी के कारण अत्यावधि बेकार बैसल छन्हि । एम्हर वास्तविक क्रू मॉड्यूल सिस्टम क॑ चुनाव करए म॑ किछु बदलाव कएल गेलै जेकरा लेली इसरो म॑ पुनः प्रशिक्षण के आवश्यकता पड़लै । वर्तमान आक्सीजन-४ मिशन सँ इसरो सिस्टम हार्डवेयर इंजीनियरिंग, HCI के साथ-साथ मिशन प्लानिंग के बारे म॑ किछु विशेष जानकारी भेटतन्हि । आपातकाल में दूरस्थ परिचालन (Remote Piloting) के बीच अंतरिक्ष यात्री सब क॑ कंप्यूटराइज्ड ऑटोमेशन के लूप म॑ आएब, एक कठिन मुद्दा छै जाहि में नासा-स्पेसX के अनुभव बहुत लाभप्रद होतै । परीक्षण आ प्रयोग करय कें उद्देश्य संभवतः भारतीय स्पेस स्टेशन के प्रयोग मॉड्यूल में परीक्षण बेंच विकसित करए में सहायक होतै I
इसरो के गगनयान मिशन ओना तँ बहुत सरल लागै छै जेकरा म॑ एल वी एम-३ राकेट अंतरिक्षयान (क्रू मॉड्यूल) क॑ ५१.५ डिग्री झुकाव प॑, ४०० किमी के ऊंचाई पर ३ दिन लेली अंतरिक्ष कक्ष (ऑर्बिट) म॑ इंजेक्ट करतै । ई एक जटिल फैसला अछि, कैन्हेंकि ISS भी ओहि ऊँचाई पर, ओहि पथ के आसपास होतै । एतय तक कि चीनी अंतरिक्ष स्टेशन सेहो 389 किमी के ऊँचाई पर बहुत नजदीक आबि सकै छै लेकिन कनि अलग झुकाव पर; हालाँकि एकर कम संभावना छै । जौं ई मिशन जानि बुझि क॑ ओही उद्देश्य स॑ इसरो द्वारा बनैलऽ गेल छै तँ ओकर अवश्य किछु उद्देश्य होतैक I चूँकि ई भारत पहिल गगनयान उड़ान थीक, एकरा कम ऊंचाई के कक्षा में किछु कम समय लेली, सरल उद्देश्य स॑ प्रक्षेपण करलऽ जाब॑ सकै छेलै । ओना ई कार्यकारी कमेटी के निर्णय अछि जेकरा लेखक गलत नहि ठहरा सकैत अछि । गगनयान क्रू मॉड्यूल स्पेसX क्रू ड्रैगन के वनिस्पत बहुत छोट यान अछि जइ मे शौचालय, एकांत स्थान, आराम/व्यायाम आ भोजन कें लेल अलग जगह नहि छै I गगनयान के तकनिकी बनावट स्पेसX जकाँ जटिल नहिं छैक तथा HCI व स्वचालन के व्यवस्था कम छैक I गगनयान में इसरो द्वारा रिमोट नियंत्रण बेशी अछि I जेना कि पीएम मोदी के ग्रुप कैप्टन शुभंशु शुक्ला के साथ बातचीत के देशव्यापी टेलीकास्ट स॑ स्पष्ट भेलै कि हुनकऽ उत्सुकता संबंधित प्रशिक्षण सँ छेलै कि लॉन्च, डॉकिंग, ISS म॑ प्रवास, प्रयोग करब आदि के अनुभव भविष्य म॑ भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रमऽ म॑ कोन तरह स॑ मदद करतै । ग्रुप कैप्टन शुक्ला केरऽ जवाब निर्विवाद छेलै कि ई सब भविष्य के भारतीय मानव अंतरिक्ष मिशन लेली महत्वपूर्ण साबित होतै । लेखक ओहि समय एक नेशनल टीवी चॅनेल पर विशेषज्ञ के रूप में उपस्थित रहथिन ओ प्रधान मंत्री के हर एक शब्द केँ नाप तौल करए के प्रयत्न करए छलाह I
किछु रिपोर्ट मे एक्सियम-4 मिशन के खर्च बहुत बेसी बताउल गेल अछि जे सही नहि अछि । ई बहुत अल्प राशि छै, जेकरा म॑ दू अंतरिक्षयान चालक दल, मुख्य आरू उपमुख्य (स्टैंडबाई) क्रमशः ग्रुप कैप्टन सुभांशु शुक्ला आरू ग्रुप कैप्टन प्रशांत नायर के प्रशिक्षण शामिल छेलै । याद रहए कि १९८३ के सोवियत संघ के मिशन म॑ सेहो दू चालक दल, Sqn Ldr राकेश शर्मा (मुख्य) आरू Wg Cdr रवीश मल्होत्रा (उपमुख्य) शामिल छेलै । लेकिन बहुत कम लोगऽ क॑ ई बात के जानकारी छै कि स्पेसX के क्रू-ड्रैगन आरू इसरो के गगनयान; दूनू प्रणाली के तकनीक लगभग बिल्कुल अलग छै । स्पेसX प्रणाली में प्रशिक्षण गगनयान में दक्षता सुनिश्चित नहि करैत अछि I मुदा दुनू प्रणाली के व्यापक तकनिकी अवधारणा लगभग एकै जकाँ होएतैक । याद रहए जे जखन चीन अपन पहिल ह्यूमन स्पेस फ्लाइट, अंतरिक्ष यात्री यांग लिवेई केँ 21 घंटा के पहिल उड़ान पर पठेलक रहए तँ हुनका ने अमेरिका में प्रशिक्षित कएल गेल छल आ ने रूस में I
भारत सरकार के नासा-स्पेसX के संग वर्ष २०२३ में अनुबंध करै वाला फैसला पर सवाल उठेनाए हमेशा आसान होएत मुदा ईमानदारी स॑ कहलऽ जाय त॑ ओ निर्णय भविष्य में भारतीय मानव अंतरिक्ष मिशन के आधारशिला सावित होतैक । ग्रुप कैप्टन सुभांशु शुक्ला स॑ ISS पर अवलोकनशील रहए के उम्मीद का जाएल छै कि भविष्य में BSS क॑ अत्यधिक कुशल आरू सुरुचिपूर्ण बनाबै लेली कोन तरह के डिजाइन अवधारणा अपनाओल जाए । हुनका आब अंतरिक्ष यान परिचालन केरऽ पेचीदगी के अनुभव होतै कि सुनीता विलियम्स आरू बुच विलमोर क॑ अंतरिक्ष सँ वापस आवै में एतैक लम्बा समय किए लागल ।
अंतरिक्ष में प्रयोग
जहाँ तक एक्सियम-4 मिशन द्वारा ISS पर कएल गेल प्रयोग व परीक्षण के बात छै, त॑ ई अंतरिक्ष में वैज्ञानिक प्रयोग करए के पद्धति स॑ परिचित होय के बात छै I एतैक कम समय के वैज्ञानिक प्रयोग में बड़ सफलता के मनसा नहिं राखय चाही । लेकिन बीएसएस पर भविष्य में वैज्ञानिक प्रयोग के लेलऽ सोच व प्रक्रिया सही दिशा भेटतैक । एक्सियम-४ के भारतीय अंतरिक्ष यात्री द्वारा करए वला प्रयोगक सूचि निम्नलिखित अछि :- सूक्ष्म शैवाल, साइनोबैक्टीरिया, सलाद कें अंकुरण आ खाद्य फसल कें बीज कें विकास आ उपज, खाद्य पूरक कें तहत मांसपेशी संवर्धन पर गुरुत्वाकर्षण-हीनता कें जैव-कृषि अनुसंधान...सब प्रयोग प्रतिष्ठित संस्थान कें द्वारा डिजाइन कैल गेल छल जे सराहनीय अछि I एकर फायदा भविष्य में हएत I औरो दू टा बेहद विशिष्ट मुदा दीर्घकालिक प्रयोग छलहनि I
एक्सिओम-४ अंतरिक्ष मिशन पर कएल गेल प्रयोग पर संचार माध्यम में भी अत्यधिक शोर-गुल बेकार छल । ई मानि केँ चलू जे उपरोक्त अनेकानेक प्रयोग पूर्व के अनेकों अंतरिक्ष मिशन म॑ अन्यान्य अंतरिक्ष स्टेशन पर कएल गेल होएत...चाहे वो सेल्यूट होए, मीर, स्पेस शटल या अन्य । तथापि अवधारणा, प्रायोगिक अनुकरण (सिमुलेशन), प्रायोगिक प्रक्रिया क॑ अपनाएब, आईएसएस म॑ नासा-स्पेसX के सहयोग सँ प्रयोग-मंच बनाएब तत्पश्चात गुरुत्वाकर्षण विहीन अवस्था में प्रयोग क केँ विस्तृत आँकड़ा एकत्रित करनाए; सब सीखै के प्रक्रिया के श्रृंखला छै जे भविष्य में बहुते उपयोगी होएत I भविष्य म॑ गुरुत्वाकर्षण-विहीन अवस्था में प्रयोगात्मक योजना बनाएब आरू निष्पादन करए में ई सब अनुभव मील के पत्थर सावित हएत । देश के रक्षा व्यवस्था में सेहो अंतरिक्ष तकनीक या BSS के अंतरिक्ष मंच के उपयोग अग्रणी श्रेणी के सेना सँ तालमेल राखै में उपयोगी सिद्ध हएत ।
अंतरिक्ष सँ वापसी
एक्सिओम-४ के अंतरिक्ष यात्री के वापसी में सेहो पूर्व-निर्धारित दिनांक सँ विलम्ब के सामना करएक पड़ल I अंतरिक्ष यात्रा के अनिश्चितता सँ हम सभु भली-भाँति परिचित छी I निकट भूतकाल में ही कल्पना चावला व बुक विल्मॉर के दू दिन के अंतरिक्ष यात्रा ९ मॉस सँ अधिक करए पड़ल छल जे अप्रत्याशित रहए I अंतरिक्ष सँ आवै के प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान अछि किन्तु जोखिम सँ परिपूर्ण I धरती या समुद्र में जे ठाम उतरैक जगह अछि ओहि ठाम के मौसम व वायुमंडल शांत रहनाए आवश्यक होए छैक तखनहिं ओ अंतरिक्ष यान के डी-ऑर्बिट भ सकैछ I याद रहए जे निचला अंतरिक्ष कक्षा में यान के गति लगभग २७,५०० किमी प्रति घंटा रहे छैक I एतैक तेज गति सँ यान के वायुमंडल में प्रवेश के समय एतैक तेज घर्षण होए छैक जे अंतरिक्षयान के चहुँओर तापमान २०००0 C तक भ जाए छैक जे कोनो यान केँ जराए में समर्थ अछि I एहि कारण अंतरिक्ष यान के बाहरी परत में कार्बन-कार्बन या सिरामिक टाइल्स लगाओल जाइछ I वायुमंडल में प्रवेश करएक पश्चात यान के गति तेजी सँ ह्रास होए छैक आ डेढ़-दुइ हजार किमी प्रति घंटा भ जाइछ I तत्पश्चात पहनें ड्रॉग, फेरु मुख्य पैराशूट खुलि केँ यान केँ विल्कुल धीमा क दै छैक जे जमीन पर या समुद्र में पूर्व निर्धारित स्थान पर उतरैक छैक I जौं पैराशूट ठीक सँ नहिं खुलल तँ यान में सवार यात्री केँ चोट आवि सकैछ I
ISS स॑ डिऑर्बिटिंग स॑ ल॑ क॑ समुद्र म॑ उतरैक तलक, जाहि में वायुमंडल में पुनः प्रवेश के दौरान ~2 मिनट के संचार-ब्लैकआउट सेहो अछि, ठीक ~16 मिनट लगै छै I वापसी करए के प्रक्रिया डॉकिंग पोर्ट स॑ डि-कपलिंग सँ शुरू होए छैक I स्पेसX क्रू ड्रैगन के वापसी के सभु चरण के दौरान अंतरिक्ष सँ समुद्र में उतरै तक हर क्षण ओहि पर पूर्ण दृष्टि राखै छैक I तत्पश्चात किछु मिनटऽ के भीतर यान चालक दल क॑ बचाबै लेली बहुत परिष्कृत बुनियादी ढाँचा विकसित करल॑ छै । लम्बा मिशन के बाद चालक दल के स्वस्थ लाभ लेल चरणबद्ध पुनर्वास प्रक्रिया सेहो होए छैक I सारांश
ग्रुप कैप्टन एस शुक्ला (मुख्य) आरू ग्रुप कैप्टन पी नायर (स्टैंडबाई) दोनों के अंतरिक्षयान-चालन में प्रशिक्षण व अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर जावै ओ रहए के अनुभव इसरो लें महत्वपूर्ण अछि I अंतरिक्ष में रही केँ गुरुत्व-विहीन बातावरण में प्रयोग करए सँ भविष्य के सब भारतीय अंतरिक्ष मिशन लेली बड़ उपयोगी हएत भले ही भारतीय अंतरिक्ष वाहन (LVM-3 राकेट) व क्रू मॉड्यूल स्पेसX स॑ बिल्कुल अलग किए नैं होवै । आईएसएस में रहि केँ प्रयोग करनाय भविष्य में बीएसएस कें प्रयोग मॉड्यूल व परीक्षण प्लेटफॉर्म बनावै मे महत्वपूर्ण सावित हएत I गगनयान मिशन स॑ पहल॑ विपरीत स्थिति के बाद इसरो आरू भारत सरकार सही पथ पर जा रहल अछि । भारत क॑ अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी आरू प्रयोगऽ के पूरा फायदा उठाबै लेली वर्तमान अंतरिक्षयान चालक दल केँ मिलल अनुभव के उपयोग बीएसएस अंतरिक्ष यान डिजाइन आरू HCI म॑ करबाक चाही । अंतरिक्ष यात्रा मे उपलब्ध सब प्रकार कें अवसरक पूर्ण उपयोग रक्षा सहित सभु सामूहिक क्षेत्र मे उपयोगी सिद्ध हएत I -ग्रुप कैप्टेन (डॉ) वी एन झा; MBBS AMD MD FeISAM; भूतपूर्व वायु सेना अधिकारी व प्रोफ़ेसर RGUHS बैंगलोर; वरिष्ठ एरोस्पेस वैज्ञानिक �F� व सह-निदेशक, DRDO. अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.६.परमानन्द लाल कर्ण-आत्मसम्मान (कथा) परमानन्द लाल कर्ण आत्मसम्मान भरि दिन काम करैत-करैत प्रमिला थकि गेल छलीह । थोड़ेक देर टी वी लग बैसि अपन पसंदीदा सीरियल देखs लगलीह । हुनकर पतिदेव रमेशजी ओहि ठाम अखबार पढ़ि रहल छलाह । ओ अखन टी वी देखनाई शुरू केने छलथि कि अचानक टी वी बंद भs गेल । प्रमिला चौंक गेलीह आ पतिदेव सँ कहलनि- सुनै छिये , देखियो टी वी किएक बंद भs गेलै । रमेश जी देखैत छथिन जे टी वीक रीमोट हुनक पुतोहुक हाथ मे अछि । ओ टी वी रीमोट सँ बंद कs देने छलीह ।ता धरि प्रमिलाक नजरि सेहो पुतोहुक हाथ दिस गेल । ओ समझि गेलखिन जे रीमोट सँ टी वी बंद भेल अछि । ओ पुतोहु सँ कहलनि - की भेल कनिया ? टी वी किएक बंद कs देलिएक ? तहन कड़क आवाज़ में ओ कहलनि - माँजी, भरि दिन अहाँ टी वी देखैत रहैत छी । अहाँक पता अछि जे बिजलीक बिल कतेक आयव जायत छै। तखन रमेश जी ई बात सुनि कहलखिन - कनिया कोन तरीका अछि जे सासुमाँ सँ एना बात करैत छी । ओ टी वी नहि देख सकैत छथिन की ? ई सुनि पुतोहु कहलखिन-बाबुजी ! अहाँ जानैत छी जे बिजलीक बिल कतेक आवि जायत छैक? अहाँ तs भरि दिन अखबार में लागल रहैत छी । अहाँक की मालूम ? हमरा तs सव किछु सोचवाक अछि । टी वीक रीमोट कालि साँझ मे मिलत । ई कही रीमोट लs के चलि गेलीह । ई सुनि प्रमिलाक आँखि सँ ढ़व-ढ़व नोर गिरs लागल । रमेशजी किछु कहs चाहैत छलखिन कि हाथक इशारा दs ओ हुनक मुँह बंद कs देलनि । आ अपने आँखि मुनि रमेशजी लग कुर्सी पर चुपचाप बैसि गेलीह । ओना तs बेटा- पुतोहु मे बदलाव कतेको दिन सँ रमेश जी महसुस करैत छलाह । बिना मतलव झगड़ा सव दिनक रूटीन बनि गेल छल , बेटा एक दुई बेर मकान हुनका नाम सँ करवाक लेल सेहो इशारा केने छलैन । रमेश जी सोचैत छलाह जे आई नहि काल्हि सव किछु तs हिनके हेतनि । किएक नहि हुनका नाम मकान कs देल जाय । रमेशजी सव दिन भिनसर मे टहलवाक लेल जायत छलाह, हम उमरक संग किछु देर बातचित कs घर पर आवैत छलाह । एक दिनक बात अछि , रमेशजी अपना संगी सँ कहलनि जे हम आव चाहैत छी जे मकान हम अपना बौआक नाम कs दी, से कोनो कातिवक पता अछि , जे नीक सँ पेपर बना देताह । एहि बात पर हुनकर एकटा संगी जिनकर नाम सुशील छल, ओ कहलखिन - किएक बौआक नाम मकान करs चाहैत छी । एहि पर रमेशजी कहलनि हमर आव कोन ठीक अछि, पाकल आम कखन खसव तकर कोनो ठिकाना नहि । हम मकान हुनका नाम कs देवेनि तs झंझट सँ ओ मुक्त भs जेताह । हुनका जे मर्जी हेतेन से करताह । ई सुनि सुशीलजी कहलनि - अहाँ एहन गलत काम नहि करु । किएक तs ककरो पर आइ काल्हि भरोसा नहि रखवाक चाही । हमरा राय सँ अहाँ एकटा वसीयत अपना धर्मपत्नीक नाम बना लीअ, तकर बाद वसीयत मे बौआक नाम दs दियौ । वसीयत मे स्पष्ट कs दीयौ जे अहाँ दुनु प्राणीक अछैत किनको मकान पर हक नहि होयत । अहाँ अपन आ धर्मपत्नीक बुढ़ापा खराब नहि करु । कम सँ कम दुई जुनक रोटी दुनु प्राणी के सुख सँ मिलत । रमेशजी हुनकर सलाह मानि ओहिना वसीयत बना देलखिन आ बेटा केर दs देलखिन । एकटा कापी अपना संग राखि लेलथि । बेटा बिना किछु पढ़ने वसीयत के बैंकक लौकर मे राखि देलखिन । सुशीलजी सँ बातचीत करैत ओ कहलनि जे अहाँक सलाह पर हम ओहिना वसीयत बना देलहुँ अछि आ बौआक दs देलियनि । सुशीलजी कहलनि - नीक केलहुँ । एक दिनक बात अछि रमेशजी कुर्सी पर बैसि किछु सोचि रहल छलाह । कखनहुँ अखबार पर नजरि जानि तs कखनहुँ बाहर । किछु सोचैत अपना पत्नी सँ कहलनि - अशोकक माय ! सुनै छीयै ? ओ कहलखिन - की बात ?ओ कहलनि- हमरा मन मे किछु विचार आवि रहल अछि कहु । हुनक पत्नी कहलनि - कहु कोन विचार आवैत अछि । एहि बात पर रमेशजी कहलनि - जाहि दिन सँ अशोकक जन्म भेल, तखन सँ लs के आई धरि हमसव अपन इच्छा के दबबैत एलहुँ अछि । हम सव केवल ओकरे बारे में सोचलहुँ अछि । आव तs ओ पैघ भs गेल अछि । अपना पाइर पर ठाढ़ अछि । अहुँ एहि उमर मे घरक सव काम करैत छी । कनिया भरि दिन बाहर घूमs आ आराम फरमावsक अलावा किछु नहि करैत छथिन । रिटायर भेलाक बादहु हम पूरा पेन्शनक पाई घरक खर्च मे लगा दैत छी । मुदा एहि सवहक बदला हमरा की मिलैत अछि । कनिया सेहो सवदिन टोना-मेनी करैत रहैत छथि । अशोक सेहो कनियाक गुलाम बनि रहैत अछि । हम सोचि रहलहुँ अछि जे आवहु कम सँ कम अपन जिनगी जीवु । प्रमिला कहलनि - अहाँक कहलवाक मतलव हम नहि बुझलहुँ । रमेशजी कहलनि - घर मे बैसल-बैसल मन नहि लागैत अछि । हमर इच्छा अछि जे कोनो तीर्थ स्थल सँ घूमि आवि ।ई बात सुनि हुनक धर्मपत्नी कहलखिन - इच्छा तs हमरो होयत अछि, मुदा अहाँ सँ नहि कहैत छी; किएक तs बौआ आ कनिया कतहु गुस्सा नहि करs लागथि । देखै नहि छियै, बिना कोनो कारण कनिया सव दिन टोना-मेनी करैत रहैत छथिन । कतहु ओ सुनि लेतीह तs ओ आगि बबुला नहि भs जेतीह । हमरा बचपन सँ तिरुमाला जयवाक इच्छा अछि, मुदा कोना जयतहुँ । बाबुजीक लग ओतेक पाई नहि छलनि जे ओ घूमा देताह । घरक खर्च वड्ड मुश्किल सँ चलैत छल । मुदा पाईक अभाव रहितहु हमरा पढ़ाई मे कोनो कमी नहि रखलथि । पढ़लाक बाद हमरा सरकारी नौकरी मिलल । अहाँक शादीक बाद अशोकक जन्म भेल । तकर बाद तs हम सव किछु ताख पर राखि हुनका मे लागि गेलहुँ । सोचैत छलहुँ जे हम जेना कष्ट मे रहलहुँ , हमर बच्चा एहन कष्ट मे अपन जीवन व्यतीत नहि करथि । सव दिन हम हिनका पर ध्यान केंद्रित केने छलहुँ ।कोना हुनका नीक नुआ आ नीक खाना दी , नीक सँ पढ़ावी एहि बारे मे सोचैत छलहुँ । बच्चा मे जाहि खिलौना पर ओ हाथ रखैत छलाह , हम हुनका जरूर खरीद दैत छलहुँ ।जखन ओ स्कूल जाय लगलाह तहन हुनका पढ़ाई मे जतेक पाईक आवश्यकता छल, हम पहिले व्यवस्था कs लैत छलहुँ । दोसर खर्च में कटौती कs हुनका लेल पाई राखि दैत छलहुँ । हम सोचैत छलहुँ जे जखन हुनका स्कूलक फिस आ कितावक आवश्यकता हेतेनि , तखन जौं पाई नहि रहत तहन हुनका पढ़ाई मे दिक्कत भs जेतनि । तैं सवसँ पहिले हुनका लेल पाई राखि दैत छलहुँ । जखन ओ जतेक पाई माँगैत छलाह , ओतेक हम हुनका दैत छलहुँ । एक आदमीक कमाई पर बच्चाक पढ़ाई, घरक खर्च , बुढ़ माय -बाबूजीक दवाई वीरो, सवहक व्यवस्था करैत छलहुँ से सव तs अहाँ जानवे करैत छी ।आई अशोक सव किछु नकारि देलक । कहैत छथि जे अहाँ हमरा की केलहुँ । सोचने छलहुँ जे जिम्मेवारी सँ मुक्त भs जायव तहन आराम सँ रहव, मुदा अखन हमर बेटा पुतोहु ततेक बंदिस लगा देने अछि जे मानु हम बेरी मे जकरल छी । एहि सँ नीक पहिले छलहुँ, जखन की बड्ड जिम्मेवारी छल । आई हम सव जिम्मेवारी सँ मुक्त भs गेलहुँ अछि, तैयो अहाँ भरि दिन चूल्हा चौका मे लागल रहैत छी आ पेन्शनक पाई सेहो हम अशोक के दs दैत छी । अशोक आ हुनक कनिया तैयो आँखि देखवैत रहैत छथि । प्रमिला कहलखिन - हम सव की कs सकै छी ? हमरा सव के जे लिखल होयत ओ तs भोगहि पड़त । आव एहिना समय गुजारs पड़त । एहि पर रमेशजी कहलखिन - नहि ,नहि । अहाँ एना किएक सोचि रहल छी । आव जे हम सोचव सएह करव । ई सुनैत प्रमिला कहलखिन - अहाँ की सोचि रहल छी ? रमेशजी कहलनि - बस अहाँ कनि इंतजार करु , देखु हम की करैत छी । पेन्शन मे सँ किछु पाई सव मास मे बचाक आव रमेश जी राखs लगलाह । जखन किछु पाई जमा भs गेल तहन ओ तिरुपतिक टिकट कटा कs लs आनलथि आ किछु पाई खर्चाक लेल संग मे सेहो लs आनलथि ।ओहि मास में पेन्शनक पाई बेटा- पुतोहु के नहि देलखिन । टिकट देखि प्रमिला चौंक गेलीह । ओ कहलनि - की अहाँ पेन्शनक पाई सव खर्च कs देलहुँ । एहि पर रमेशजी कहलनि - अहाँ चिंता नहि करु । हम बेटा पर थोड़े निर्भर छी ।हमर अपन पेन्शनक पाई अछि । प्रमिला कहलखिन - एहि मास मे कनियाक हाथ मे पाई नहि देवै तs घर मे षड़मंडल भs जायत । अच्छा ठीक अछि , जे हेतेक से बुझल जेतेक । किछु दिनक बाद हुनकर पुतोहु गुस्सा सँ लाल भs प्रमिला लग आवि कहलनि - माँ जी, अहाँ सवहक बीच की गुटर-गुँ चलैत अछि ? ई सुनि प्रमिला कहलनि - कनिया की भेल ? किएक एना बाजैत छी ? पुतोहु कहलनि - अच्छा ! अहाँ तs एना बाजि रहल छी जेना कि अहाँक किछु मालुम नहि अछि । एहि मास में बाबुजी पेन्शनक पाई अखन धरि नहि देलखिन अछि । घरक खर्च कोना चलत । हुनकर पेन्शन तs सव मासक पहिल तारीख के आवि जायत छैन । बाबुजी सँ कहियो बैंक सँ पेन्शन निकालि एथिन । एहि बात पर प्रमिला कहलनि - कनिया दरअसल मे एहि माह अहाँक बाबुजी आ हम एक संग बाहर घुमावाक लेल जा रहल छी, पेन्शनक पाई सँ ओ टिकट कटा लेने छथि।तैं एहि माह पाई नहि देलनि अछि । ई सुनि पुतोहु आगि बबूला भs गेलीह आ कहलनि - एहि उमर मे अहाँ सव के घूमवाक शौख अछि । अहाँ सव के शर्म नहि आवैत अछि । एहि उमर मे घर पर बैसि राम-राम करवाक चाही । अहाँ जानैत छी जे घर मे कतेक काम होयत अछि । आवs दिओ बेटा के तहन हुनका बता दैत छीयेन जे एहि उमर मे अहाँक माय-बाबुजी कतेक फालतु खर्च करैत छथि । बिना हमरा सव के पूछने अहाँ सव बाहर जायवाक लेल कोना सोचलहुँ ? पुतोहुक बात सुनि प्रमिला समझि गेलीह जे आइ घर में हो-हल्ला होयत । किएक तs सव पेन्शनक पाई बेटा-पुतोहु के दs दैत छलखिन आ अपना हिसाव सँ ओ सव खर्च करैत छलाह । साँझ मे अशोक घर एलाह तs पुतोहु सव किछु हुनका बता देलखिन । ई सुनैत अशोक आगि बाबुला भs गेलाह । गुस्सा सँ लाल भs बाहर आवि पिताजी सँ कहलनि - बाबुजी ! एहि माह पेन्शनक पाई किएक नहि देलहुँ अछि आ सुनि रहल छी जे अहाँ सव पाई खर्च कs देलहुँ अछि । हमरा सँ बिना पूछने अहाँ सव पाई खर्च कs देलहुँ । आव एहि मास मे घर कोना चलत ? एतेक फालतु खर्चा करवाक कोन आवश्यकता अछि ? बुढ़ापा मे आराम सँ घर पर रहु आ राम-राम करु । एहि उमर में घुमवाक शौख नीक नहि अछि । जौं घुमवाक शौख अछि तs बगल मे मंदिर अछि जाके घुमि आउ जौं अहाँ पेन्शनक पाई एना फालतु खर्चा कs देव तs ��. एतवे बात सुनैत रमेशजीक चेहरा गुस्सा सँ लाल भs गेल आ जोर सँ कहलनि - � बेटा ! आव बहुत भs गेल । अहाँ हमरा घुमनाई पर अंकुश नहि लगा सकैत छी, अहाँक ई फालतु बुझना जायत अछि । अहाँ सव पार्टी करवाक लेल जायत छी, हम कखनहु अहाँ केर मना केलहुँ अछि । कोनो छूटीक दिन नहि होयत अछि जे अहाँ सव बाहर पार्टी मे नहि जायत होयव । की ओ सव फालतु खर्च नहि छी ? आओर तs आओर घर मे बैसल कनि देर टीवी खोलि ली सेहो अहाँ सवके नीक नहि लागैत अछि । कनिया हमरा सवके टी वी देखनाई सेहो बंद कs देलनि अछि । जखन हुनकर मर्जी होयत तखनहि हम सव टी वी देखि सकैत छी । अरे ! हम बुढ़ अवश्य भs गेलहुँ अछि अखन मरल नहि छी । हमरो इच्छा होयत अछि किछु करवाक ? जौं हम किछु करी तs अहाँक खर्चा बढ़ि जायत अछि , मुदा अहाँ सव करी तs कोनो बात नहि । अहाँ सव छूटीक दिन बाहर घुमु पार्टी करु ताहि में कोनो खर्चा नहि होयत अछि । अहाँ अपना पर खर्चा करु ओ खर्चा नहि अछि , मुदा माय -बाबुजी पेन्शनक पाई एक मास खर्च कs देलनि ओ अहाँ सवके आँखि लागि गेल । अहाँ भुलि गेलहुँ जे पिछला मास अहाँ सव विदेश घुमावाक लेल गेल छलहुँ । हवाई जहाजक टिकट मुफ्त में छल की ? संगही संग विदेश मे रहनाई-खेनाई सव मुफ्त में छल की ? कोनो बरख एहन नहि होयत अछि जे अहाँ सव विदेश घुमवाक लेल नहि जाउत छी । हम कखनहु अहाँ सव के कहलहुँ अछि जे बौआ ई फालतु खर्च अछि ।सव साल अहाँ कोन ठाम घुमवाक लेल जायत छी, कतेक पाई खर्च होयत अछि आइ धरि अहाँ सँ पुछलहुँ अछि । एतेक दिन मे पहिल बेर इच्छा भेल जे तिरुमाला जाय भगवान तिरुपतीजीक दर्शन कs आवि , तहन अहाँ सवके एतेक तकलीफ भs गेल । अहाँ सव सँ एकहु टा पाई नहि मांगलहुँ अछि । हम अपन पेन्शनक पाई सँ घुमs चाहैत छी , एहि में अहाँक पेट में दर्द किएक होयत अछि ? अशोक कहलनि - बाबुजी हम विदेश घूमवाक लेल जायत छी , तहन अहाँ सँ एकहु टा पाई नहि मांगैत छी । हम अहाँक एकहु टा पाई विदेश मे खर्च नहि करैत छी । हम जे कमाई छी, ताहि पाई सँ विदेश घुमैत छी । रमेशजी कहलनि - बेटा ! हमहु तs वएह बात कहि रहल छी । अहाँ सँ एकहु बेर नहि कहलहुँ अछि जे अहाँ पाई दीअ, हम घुमवाक लेल जायत छी । ई बात सुनि अशोक कहलनि - ठीक अछि , बाबुजी जौं अहाँ घुमवाक प्लान बना लेलहुँ अछि तहन घूमि आवु, मुदा एहि बातक ध्यान राखव जे एहि घर मे रहव तहन खाना-पीनाक खर्चाक पाई दिअ पड़त । मुफ्त मे हम खाना नहि खिला सकैत छी । हमरा लग एतेक पाई नहि अछि जे अहाँ सवहक खान-पान पर हम खर्चा करी आ अहाँ घुमा फिरी करैत रही । ई कहि अशोक अपना कमरा में चलि गेलाह । तखनहि अशोकक कनिया घर सँ बाहर आवि कहलखिन - अहाँ सव कखनहु सोचैत छी जे अहाँक बेटा भरि दिन कतेक मिहनत करैत छथिन, तहन दू टा पाई घर आवैत अछि । हमसव किछु दिन विदेश घुमवाक लेल गेलहुँ तs अहाँ सवहक भौं चढ़ि गेल । अहाँ ई सव नहि सोचेत छी जे बच्चा सवहक भविष्य कोना बनत । बच्चा सवहक लेल किछु पाई वचावी से नहि तs घुमवा मे पाई खर्च करैत छी । एहि बुढ़ापा में घुमवाक कोन आवश्यकता अछि । चुपचाप घर पर रहु । ओनाहु एहि उमर मे घुमवाक लेल जायव , कतहु चक्कर सव आवि जायत , खसि पड़व तहन बड्ड दिक्कत होयत । एहि अवस्था मे शरीर कमजोर भs जायत छैक । घुमला पर पानि सेहो बदलि जायत छै । बीमार पड़क सम्भावना प्रबल भs जायत छै । तैं अहाँ सव घर पर रहु । बीमार पड़ि जायव तहन सेवा के करत ? हमरा सँ सेवा करनाई संभव नहि अछि । से सुनि लिअ । ई सुनि रमेशजी कहलखिन - कनिया घर मे रहि के अहाँक सासुजी की भरि दिन काम नहि करैत छथिन ? बाहर घुमवाक लेल जेथिन तहन बीमार पड़ि जेथिन । रमेशजीक बात सुनैत हिनकर पुतोहु मुँह फुला कs अपना कमरा मे चलि गेलीह । प्रमिला दुनुक बात सुनि स्तब्ध भs गेलीह । हुनका आँखि सँ ढ़व-ढ़व नोर गिरs लागल , हुनका समझि में नहि आवि रहल छलनि जे ई की भs रहल अछि । थोड़े देरक बाद प्रमिला रमेशजी लग आवि कहलनि - अशोकक पापा , सुनै छियै ? ओ कहलनि - हां कहु । की बात अछि ? प्रमिला कहलनि - हम एक बात कहु, हमर इच्छा होयत अछि जे हमसव अपन प्लान बदलि ली । नहि तs घर मे जे दुई जुनक रोटी मिलैत अछि , ताहु पर आफत आवि जायत । घर मे रहनाई दू भर भs जायत । उल्टा -पुल्टा बोली सुनि हमर जिनगी बेकार भs जायत । तखन रमेशजी कहलनि - अहाँ शांत रहु । हमरा जीता जिनगी अहाँ केर केओ किछु नहि कहि सकैत अछि । ई सव विदेश जायत छथि हम सव हुनका रोकैत छी की ? लाखो टका खर्च करैत हेताह से बड्ड बढ़िया आ एक मास मे पेन्शन नहि देलियनि तs घर मे षड़मंडल । आखिरकर ई अन्याय कतेक दिन सहव । कखनहु नहि कखनहु बाजs तs पड़वे करत । नहि तs जिनगी भरि समझौता करैत रहु । दोसर दिन प्रमिला भिनसरे चूल्हा-चौका कs नाश्ता बनाs कs सवके देलखिन , सव केओ नाश्ता कs रहल छल । तखन प्रमिलाक एहसास भेलनि जे बेटा-पुतोहुक गुस्सा शांत नहि भेल अछि । ओ सव नहि तs आन दिन जकाँ बात करैत छलाह आ नहि नजरि मिलवैत छलाह। रमेशजी सेहो समझि गेलाह जे घरक माहौल नीक नहि अछि । रमेशजी नाश्ता कs प्रमिला सँ कहलखिन - अशोकक माय ! अहुँ नाश्ता कs लिअ । बाहर जायवाक अछि, बाजार चलु ,किछु साड़ी खरीद दैत छी । कतेको बरख भs गेल अछि एकहु टा साड़ी नहि खरीदलहुँ अछि । घुमवाक लेल बाहर जायवाक अछि , पुरनके साड़ी पहिरव की ? रमेशजीक एतेक कहैत देर नहि कि हुनक बेटा पुतोहु दुनु भड़कि गेलथि आ जोर सँ कहलनि - बाबुजी ! अहाँक जे इच्छा अछि से करु । अहाँ सव तs हद पार कs देलहुँ अछि । आव हम अहाँ केर नहि राखि सकैत छी । अहाँ अपन व्यवस्था कs लिअ । अहाँ तs सव शर्म बेच देलहुँ अछि । अखन बुढ़ापा में घुमवाक लेल जायत छी । ई हमरा सँ वर्दाश्त नहि होयत । एहि बात पर रमेशजी कहलखिन - बौआ ई घर हम बनौने छी । एहि घर पर हमर अधिकार अछि । हम दोसर आशियाना किएक खोजव ? आओर तs आओर ई जमीन सेहो हमही खरीदने छी । पुश्तैनी जमीन नहि अछि ।एक एक पाईक हिसाव हमरा डायरी मे लिखल अछि । ई घर हमर छी, अहाँक नहि । अशोक तपाक सँ कहलनि - बाबुजी ! ई घर अहाँक नाम छल । आब नहि, अहाँ बिसरि गेलहुँ अछि जे ई घर हमरा नामे कs देने छी । कागज हम लोकर मे राखि देने छी । तें एहि मकान पर आव हमर अधिकार अछि नहि कि अहाँक । रमेशजी कहलनि - नहि बाउ ! अहाँ कागज लोकर मे रखने छी, मुदा कागजक एक कापी हमरा लग अछि । जखन बैंक खुलत तहन देख लेव , मुदा हमरा पास अखन मौजूद अछि । हमरा ठीक सँ यादि अछि हम लिखने छी जे जा धरि हम दुनु प्राणी जिअव ता धरि मकान पर किनको हक नहि रहत । हमरा दुनुक मरलाक बाद अहाँ किछु कs सकैत छी । आइ एना नहि लिखतहुँ तs अहाँ सव तुरतहि हमरासव के बेघर कs देतहुँ । एक बात कान खोलि केर सुनि लिअ हम आ अहाँक माय एहि समाज मे इज्जत कमेने छी । जौं अहाँ सव एना बेइज्जती करव तs हमरा बर्दाश्त नहि होयत । तैं आइ हम फैसला कs रहल छी जे अहाँ सव ऊपरवाला मंज़िल पर अपन सव सामान लs के चलि जाउ आ अपन गृहस्थी अलग बसाउ आओर हां मकानक भाड़ा ओना तs ₹१८००० टका अछि मुदा अहाँक ₹१२००० महीना दिअ पड़त । ई स्वीकार अछि तहन ठीक नहि तs दोसर मकान ढूँढ़ि लिअ । हम ऊपर वाला मकान किराया पर लगायव । एहि मास मे १४ टा दिन वांचल अछि । एहि मासक बाद घर खाली करु । एहि मासक पहिल तारीख सँ हम घर किराया पर लगायव ।सोचि लिअ फैसला अहाँक करवाक अछि । ई सुनि पुतोहु कहलनि - बाबुजी ! जौं हमरा सव के एहि घर सँ निकालि देव तहन एतेक पैघ घर मे अहाँ सव की करव ? बुढ़ापा मे अहाँ सवहक देखभाल के करत ? अंतिम समय मे आखिरकार हमहि सव काम आयव, दोसर नहि एताह । रमेशजी कहलखिन - कनिया ! अखन तs हमरा सवहक हाथ पाइर चलैत अछि तहन तs भूखहि मारs चाहैत छी । जखन हमरा सवहक हाथ पाइर काम नहि करत तहन हमरा सवहक अहाँ की गति करव , कोनो ठीक अछि ? जखन पाई खर्चा करव, तहन आराम सँ रहि सकैत छी । अहाँ सवहक कोनो आवश्यकता नहि अछि । एतेक पैघ घर अछि । एकटा नौकर राखि लेव । एकटा कमरा ओकरा दs देवै । ओ रहत ,खाना बनाओत, हमसव खा-पी लेव । ऊपर वाला मकान सँ जे किराया आओत ओ नौकर के दs देवै । पेन्शन सँ आराम सँ हमसव अपन जिनगी काटि लेव, अहाँ सव हमर चिंता नहि करु । रमेशजीक ई बात सुनि अशोक दूनु प्राणी दंग रहि गेलथि । हुनकर बात सुनी बेटा आ पुतोहुक पाइरक जमीन खिसकि गेलनि । हुनका यकीन नहि होयत छलनि जे माय- बाबुजी एना कs सकैत छथि । दोसर दिन रमेश आ प्रमिला दूनु आदमी तैयार भs घुमवाक लेल जायत छलाह , तखन बेटाक आवाज देलखिन - अशोक ! अशोक ! हाँ बाबुजी , ओ कहलनि । हमसव तिरुपति जा रहल छी । ओहि ठामक वाद भs सकैत अछि , कतहुँ आओर जाय । हमरा १० -१२ दिन लागत । अहाँ सव व्यवस्था कs लेव । एकटा किरायादार ठीक भs गेल अछि । ₹१८००० महीना पर तय भेल अछि । ताधरि अहाँ सव मकान खाली कs देव । ई कहि रमेशजी घर सँ विदा भs गेलाह । १० दिनक बाद रमेशजी दुनु प्राणी घुमि के एलाह । ओ देखैत छथिन जे बेटा आ पुतोहु दूनु हुनकर पाइर पकड़ि कानs लागल । अशोक कहलनि - बाबुजी ! हमरा बेघर नहि करु । अहाँक पेन्शनक पाईक हमरा कोनो आवश्यकता नहि अछि । अहाँ अपना हिसाव सँ खर्चा करु आ राखु । अहाँ जे कहव से हम मानव, मुदा हमरा बेघर नहि करु । अशोक अपना पत्नी सँ कहलनि जाउ ,माय- बाबुजीक लेल चाय बना के लेने आउ । दुनु बड्ड थाकल छथिन । अशोकक कनिया चाय बना कs आनलखिन । चाय पिबैत रमेशजी कहलनि - बौआ !जौं अहाँ समझि गेलहुँ अछि जे हम अहाँ सव पर बोझ नहि छी , तहन ठीक अछि । आराम सँ रहु , हम मकान भाड़ा पर नहि लगायव । सवआदमी एक संग आराम सँ रहs लगलाह । अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.७.लाल देव कामत- डॉ० महेंद्र जीके चारिम बानर ! लाल देव कामत डॉ० महेंद्र जीके चारिम बानर !
डॉ० (प्रो०) महेंद्र जी कवि, कथाकार,गायक आ संगहि गीतकार छथि। मिथिला - मैथिलीक अनेकों मंच सँ सम्मानित भ' चुकल छथि। हिनका नामे अर्जित पुरस्कार केर एकटा श्रृंखला देखा पड़ैत अछि। शकुन्तला भुवनेश्वरी मैथिली संस्कृत - सम्वर्द्धन न्यास ,हैदराबाद सँ साहित्यिकी सम्मान -२०२१-२२ आ कृत्य नारायण मिश्र साहित्य सम्मान -२०२१ भेट चुकल छन्हि। सुपौल जिला मुख्यालय सँ सटले भेलाही गामक स्व० माता कामाख्या देवी आ पिता स्व० अभिराम झा'क घर हिनक जन्म छह जनवरी उन्नैस सौं सन् सैंतालीस ईस्वी केँ भेलनि। कोशी प्रान्तरके आभामे वयोवृद्ध महेंद्र जी गतिमान छथि। सहरसा पश्चिम परिसर पीजी सेन्टर मैथिली विभाग सँ २१ जनवरी २००९ कें सेवानिवृत व्यक्ति एकटा जीवन्तताक सँग मातृभाषा लेल अहर्निश सेवा कय श्लाघनीय काज कय रहलाह अछि। झा जीके मैथिली सेवी रूपेँ कतेको काज स्मरणीय अछि। प्रकाशनके क्षेत्रमे पाठक हिनक मैथिली पोथी - मेटायल पता पर अबैत चिठ्ठी ( कविता संग्रह -२०१६) पढि नेहाल भेल छथि। पाठान्तर (समीक्षात्मक निवंध- २०१९) , दिकपाल (संस्मरण २०१९-२२) , राजेश्वर झा ( मोनोग्राफ साहित्य अकादमी -दिल्ली २०१९) , शैलेन्द्र मोहन झा (मोनोग्राफ साहित्य अकादेमी दिल्ली-२०००), धात्री पात सन गाम(संस्मरण- २०२१) आओर पतरसेख (संस्मरण -२०२३) प्रकाशित कृति छन्हि। झा जी सम्पादन क्षेत्रमे सेहो कम समय नहिं देने छथि। ताहिक एक पैघ अन्तराल छैक। यथा-: राजकमल जयन्ति प्रसंग ( शतगंधा सहर्षा - १९७२), चांगुर (अनियमितकालीन पत्रिका - १९७३-७४) , संकल्प ( कविता संग्रह'क सह सम्पादन; जन सहयोग प्रेस सुपौल १९७५) , सहरसा - मैथिली फोल्डर (जन.९६ सँ दिस. ९६) , बहुआयामी किशुन जी-( संग सम्पादन -२०२१) सन अवदान कें केयो बिसरि नहिं सकैत छथि। आब अपन पैतृक गाम - भेलाही वार्ड नं०१९ म रहि अहर्निश समाज सेवा आ परोपकारमे लागल रहैत छथि। सामाजिक विद्रूपता आ निरंकुशताकेँ उघार करयमे कोनू कसमसाहट नहिं बरतै छथि। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी लग तीन गोट बानर अपने सभकेँ अनेकों ठाम अभरैत होयत। गांधी मार्ग आ गांधीज्म पर चलैत रहनिहार हुनक आत्मकथा अर्थात सत्यके प्रयोग अवश्य पढ़ने होयब। गांधी डायरीक' सेहो चित्रमे एक बानर अपने हाथे अपन आंखि झपने ' बुरा नहिं देखबाक संदेश दैत छैक तँ दोसर बानर अपन कान दूनू झाँपि बुराई नहिं सुनबाक अपील करैत छैक। ..... आ तेसर बानर अपन मुंह मुनि बुरा (खराप) शव्द नहिं बजबाक परिचयात्मक भुमिकामे देख पडै़छ। एहि तीनू छविके नीज आचरण मेँ उतारबाक संकल्प लेमय मूकभावे किल्लोल करैत छैक। मुदा गांधीवादी आदर्श आधुनिक समाजमे विनष्ट भऽ रहल संस्कृति आ सभ्यता दिश धेयान देबा लेल सतत् स्फूर्त आन्दोलन छी। ई स्वच्छ संदेश समकालीन मनुखक बीच उलटवासीमे बाँझि गेल छैक। आ एहनमे श्री महेन्द्र जीक कल्पनामे कविता'क संचार होईछ, जाहि सँ ओ "मेटायल पता पर अबैत चिठ्ठी" केर रचना करैत छथि। कविजीक सपनामे आबि उज्जर धप-धप एक चारिम बानर चकभौर दिअ लगैत अछि। गांधी जीक सिध्दांत तँ भाषणमे - कुटनीतिजक चपलतामे एतयधरि जे शहीदक शोणितके सुखबैत अपन निहित स्वार्थक परिकल्पना केँ साकार करयमे लपटैक परियास जे करैत छैक। ई चारिम बानर गमै छै जहन हमर कुकृत्य आ अनाचार कियो सुनबे - देखबे नहिं करत , बाजि कोना सकत! एकदम छुट्टा कोनू रोक-टोक नहिं जे मोनमे आउत सयह करब। पूज्य गांधी जीक सिध्दांतक फाईल कोनू अनबारीमे गर्दा तरे तोपाए गेलैक। समाज आ देशक व्यवस्था चरमराइत गेल । आब नियम -कायदा मानवता सँ समन्वय नहिं राखि दैनिक जीवनमे कमतर होइत गेलैक हेन। तेँ गाँधीजीक तीनू बानरके सचित्र दर्शनके तरंगकेँ विषेश दृष्टिये देखबाक लेल एक आरो बानरके निहायत आवश्यकता महेंद्र जी अपन सपनौतिमे देखलाह अछि। उज्जर - उज्जर परिधानमे ई बानर आजुक सफेदपोशके चिन्हैक अभिप्रेरणा जगाबैत छै। एतेक राश यशस्वी व्यक्तित्व ' क महेंद्र जीक बालपन केहन रहल हेतनि से जानबाक उत्कण्ठा शांत करय ले किछु चर्चा केँ आगू बढ़ाबैत छी। भागलपुर जिलाक १८७० ई० मे सुपौल सब-डिवीजन बनल रहय। वादमे सहर्षा जिलाके अन्तर्गत सब डिवीजन सँ आब सुपौल पूर्ण जिला २१वीं शदीमे बनि गेल छैक। ताहि सुपौल नगर पालिका के अंग बनि एकटा वार्ड भेलाही सेहो छी। मारबारी बोर्ड अपर प्राइमरी गामक स्कूल केर अंतिम बरखक छात्र महेंद्र जी कोसी पूर्वी बान्हक उदघाटन करैत भारतके महामहिम राष्ट्रपति - देशरत्न डॉ० राजेन्द्र बाबू केँ देखय गैर रहथि। ओही साल जून-जुलाई मेँ सम्पन्न भेल परीक्षा पास कयलाक वाद चकला निरमली मिडिल स्कूलमे हुनक नाउं लिखाएल गेलनि। ओ स्कूल हालहिमे प्राइमरी सँ स्तरोन्नत भऽ मध्यविद्यालय 'क दर्जा प्राप्त क' लेने छलैक। घर सँ पूब रेलवे लाइन टपिकय दररोज स्कूल गेनाई नान्हिटा वालक आओर बड़का नाला टपिकय फेर घर एनाईधरि गार्जियन भयभीत रहैथ। विराट पोखरिक पछबरिया मुहार पर बनल ई स्कूल रहैक ,वाट तँ भाकन आ भैंट सँ अकाबोन छलैक । पोखरि धरि जाफरी सँ घैरल रहा सँ डूमबाक डर नहिं रहैक। स्कूलक वर्गमे एक नोटीश पढिकय चटिया सबकेँ सुनाएल जाईक - कक्षा सँ बेर - बेर निरर्थक टीशन दिस नहिं जायब संगहि पोखरिमे नै धसब। महेंद्र गुअरटोलिक संगी लखन जाधव संगे स्कूल जाए- आबय, अग्रजभाय उपेन्द्रके संगी रहैन- नेबी कामति,बच्चा भैयाक संगी देवीलाल यादव आ नित्यानंद प्रसाद। स्कूलोमे आरो तीन सहपाठी सँ आपकता बढलनि, क्रमशः गजेन्द्र, महेंद्र प्रसाद सिंह आ टूना। सभकियो अपन - अपन जातीयता गुण - संस्कार सँ प्रतिनिधित्व करैत कला संस्कृतिमे एकरंग। आब सहरसा लोकसभा क्षेत्र विलुप्त भ' मधेपुरा आ सुपौल नामे दू गोट परिसिमन विद्यमान भेल अछि। सिपौल लोकसभा क्षेत्रके कटैया निर्मली नहिं, घोघरडीहा - निर्मली नहिं, संस्कृत निरमली नहिं, आ अर्राहा - निर्मली सेहो नहिं; एतय हम चकला निरमलीक प्रान्तर केर गप्प उठा रहल छी। नेना भुटका वयक्रममे सुपौल भेलाही सँ एक चटिया कोना पढ़य- लिखयमे अगूआइति रहलथि। ई मलहनी गोपाल प्रगाना'क मौजा खरैलक अन्तर्गत अछि चकला निर्मली। एतय मूल रूपेँ कीयोट धानुक जातिक निबास रहैक जे अपन अय्याशी जीबनके कारणेँ सोहा लेकर सब किछु। एतय आब सात पिढ़ि सँ ठाकुर पटृटीक बालेन्द्र सुपौलक, आनन्द मिशर सिपौल केवट टोल सँ आ हुलास सँ बहुजन चौधरीक पुरृव पुरूखाक परिबार बसल छैक । हुनक बाल संगी टुनमा जे मास्टर जीके पुत्र रहैन से गोर अदक बालक मुदा हाजरी बहीमे तिनकर नाम टिपल रहैन ब्रजकिशोर मिश्र ।ओ मिश्र जी मैथिली आनर्स करैत पटना विश्वविद्यालय सँ एम. ए . पीएचडी. भेलाह आ दुमकामे प्राध्यापक बनवास। आनों संगी सफलतापूर्वक संपन्न रहय। मात्रे सोहदर भाय उपेन्द्र जी एक्स कैन्डिडेट आ अपने नियमित हैसियत सँ संगे मैट्रिक परीक्षा देलनि आ एकदिन हाफपेन्ट पहिर टुटल चप्पल दुरूस्त करबय सुपौलक दुखा कक्का लग रहय।ताहिखन कनौ सँ फिप्पटी - फिफ्टी परसेंट केर नारा सँ अनघोल मचबैत ओतहि जुमैत छन्हि। खुशी जाहिर करबाक आशय ई रहैक जे ओ स्वंय फेल आ अनुज भाय पास भ' सुख- दुखक प्रतिशत एकाकार भेल छलैक। एहि तरहक बाल रोचक प्रसंग हुनक कोनू पत्रिकामे पढ़ने रही,जे ओ नेनपनमे रातुका मेलाक फ्री सिनेमा जन सम्पर्क विभागके देखकय असगरे घुमल, अपना दलान पर गोला कुकुर देखलोपर भूकल नहिं। आ भुखले महेंद्र सुमति रहला तँ भोरमे भायक छौंकी पड़ितहि नींन टुटैन। ममतामयी माय धरि आबि आंचर तर झाँपि निछोह मारि सँ बचा लैन। दिनांक १५ जून १९७० ई० केर पूर्वहि हिनके पिताक निधन भ' गेल छलनि। जनवरी १९७४ सँ बैलहटा सिपौलमे सप्ताहिक रूपेँ लगैक,ततय पहुँच मनोरंजन रूपेँ टहलैथ। सुपौल माँटि- पानि सँ जुटल महेंद्र जीके गामक सौंधी गमक चहुँदिश एहिना पसरैत रहय,से मंगल कामना रहत। -लाल देव कामत ,मो०७६३१३९०७६१ अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.८.प्रमोद झा 'गोकुल'-प्रायश्चित (कथा) प्रमोद झा 'गोकुल' प्रायश्चित (कथा)
रामू बच्चेसँ होनहार छल । छोटसे पैघ तक ओकर प्रसंशा करैत नै अघैत छलै । पढै लिखैमे सेहो जेहने चंसगर छल तेहने मिलनसार । तखन किएकने लोक प्रसंशा करौक ?इसकूलक मास्टरसे ल'के गामक लोक धरिक मूहमे एक्केटा बात रहै छलै जे ई छौंड़ा एकने एक दिन गामक नाम निश्चिते चमकौत । समय ससरैत गेलै ।आ समयक संग रामू सेहो किशोरसँ युवक भै गेल ।सङबे सभहक सङ किछु दुर्व्यसन सेहो करय लागल ।आरते नै किछु ,हँ तखन तमाकू-पानक आदी अवस्स भै गेल ।कखनो काल भाङक सेवन सेहो करय लागल । पैहनेते सङियें साथी सब खर्चा-बर्चा करै करै छलै, बादमे ओ सब हुथकारय लगलै -ई बंँहिं ! सब दिना कि हमहीं आरू खुवबैत रहबौ ? आब तहूँते खर्चा करहीन ! -करबैने भाइ !आइभैर तोंही करहीन ,काइलसे हमरे नामक माला रहतै ! -- हँते से जैनले !! काइलसे तीन महिना तलक तोरे नामक माला रहतौ ! अइमे कोनो न नू न च नै । -- बेस चलते कैलसे हमरे नामक माला रहतै,सैहने! किछु दिनते उधार आ पैंच पलट क'के काज चलौलक ,मुदा एना कतेक दिन ? कोनो अपनेते नै कमाइ छल । बापक पैरुख पर कतेक दिन फुटानी ? एक दिन दोकानदारसे ओ अचानक पूछि बैसल ।एखन तक कतेक पाइ भेलहहे हौ ? कहि दैत छी बाबू ! कापी उलटबैत दोकानदार बाजल-अहाँक हिसाब किताब हैया अछि बाबू ! देख लिय नीक नहैंत !!एखन तलक कुल टोटल भेल पाँच सय पचहत्तैर रुपैया पच्चीस पैसा !!! -एँ����एतेक हौ !!! अकचकैत रामू बाजल । --एना अचरज किए होइए बाबू ? कतेक दिनसे खाइ पियै जाइ छियै सेहो मोन अछि कि नै ?? --हँ हौ ,सेते बुझलियह !मुदा������ --मुदा तुदा किछु नहिं ।परसू तलक हमर कुल पाइ द'दियऽ नैते जेनेसे भै जायत ! आबते रामूक पयर तर सँ माटि ससरय लगलै । ओ कत'से आनत एतेक रास पाइ ?बाप -पित्तीके ते कहि नै सकैत अछि ।तखन कोन उपाय करत ? अच्छे जे हेतै से हेतै ,देखल जेतै । मूड़ी झटकारलक आ बिदा भेल अपन दलान दिस । भरि रस्ता गुनधुन करैत जा रहल छल ।कोनाके हम दोकानदारक पाइ सधेबै ? देबयते परबे करत ।हे भगवान! हम कोन पाप केलौं ऐ डकैतबा सबहक फेरमे परिके ! न न न्न���आइसे सप्पत खाइ छी जे फेर ई सब काज नै करब ।पढ़ाइयो लिखाइमे कमजोर भेल जाइ छी !आ घर परिवार ल'के सर समाजक आँखि तकसे खसल जारहल छी ।पुरना मान सम्मान हासिल करैक लेल सबसे नाता तोड़य पड़त । से हम तोड़ि लेब ।आइसे हमर केओ दोसमहीम नै । दुष्ट नहिंतन !एकाएकी दिमागमे केओ ठहकलै -रे ,से ते बुझलियौ जे तोरा सबसे परिचय भै गेलौ ! मुदा उधार के चुकौतै ? ओइले चाही पाई ! से ते कने सोच !! हँ से ते ठीके । आब हमरा नजैरमे एक्केटा उपाय अछि ! फेर दिमाग ठहकलै - से की ? यैह जे बाबूक जेबीमे रुपैयाक गड्डी आइ देखलियैनहेँ ! तँ की तोँ चोरि करबेँ ?फेर दिमाग टोकलकै । हँ तँ आर दोसर उपाइये की अछि ? बहूत पाप केलौं ,एकटा इहो सही !पापक दक्षिणा ते पापे होइछै ने ! फेर सोचिले !! दिमाग कहलकै । हँ सोचि लेलौं ! उधार चुकौलाक बाद बाबूकेँ सबटा सत सत कहि देबैन ।एतेक तागैत आबि गेलौते एखने किएकने सत्यक रास्ता पर आबि जाइछेँ ! फेर दिमाग टोकार मारलकै । नै , से हमरा बुते नै हैत ! बादमे जे हेतै से देखल जेतै ! एतबेमे रामू अपन दलान पर आबि गेल । दलान पर अबिते बाप टोकार देलखीन -भै गेलै टहलनाइ ! ओ किछु नै बाजल मूड़ी झुकौने सीधे घरमे ढुकल आ अपन मायके ताकय लागल ।मायके भानसमे व्यस्त देखि आस्वस्त भेल । आ एमहर ओमहर ताकि पिताक शयन कक्षमे प्रवेश कयलक । धरकैत हृदयसँ पिताक जेबमे हाथ देलकते बुझेलै मोटगर नोटक गड्डी छैक ।झट ओइमेसे बेगरता जोकरक टाका गनिके निकाललक आ चोट्टे विदा भै गेल चौक परहक दोकान पर । रामूक पिताके अनसोहाँत लगलैन ।एखनेते ई आयल छल ।फेर तखन कतय गेल ?कोन एहन बात छैक छैक से नै जानि ।पुन: किछु सोचि अपन कोठली गेलाह ।चारू दिस नजैर खिरौलैनते सब ठीकेठाक बुझेलैन । किछु सोचि खुट्टीमे टाङल कुरताक जेब सँ रुपैया निकालिके गनय लगलाह । सब बात बुझा गेलैन ।सीधे दौरान पर अंबिके बैसि रहलाह आ सोचय लगलाह अपन बेटाक भविष्य पर । रामू अपन उधार उतारि जखन दलान पर पहुंचल ते प्रथम साक्षात्कार अपन अपन पिता सँ भेलै ।पिताक आग्नेय दृष्टि देखि ओ सहमि गेल ,मुदा संकल्पमे जेँ दृढ़ता छलैक तेँ सहज भैके ठाढ़े रहल । पिता कड़क स्वरमे पुछलखिन -तुरत्ते आयल छलह तखन फेर कतय चल गेल छलहक ? रामू एमहर ओमहर झाँकय लागल ।ओकरा किछु फुरेबे नै करै जे आखिर ओ की बाजत ? साहस कय ओ धीरेसे फुसफुसाके बाजल - चौक परहक जलखैक दोकान पर गेल छलियैक ! -से किएक ? तोरा कि एत्त����� -से बात नै छैक ! पिताक बात कटैत बाजल । -त' की बात छैक ?सैह कने स्पष्ट बाजहने !! रामू फफकि फफकिके कानय लागल ।आ आदिसँ अंत तकक बात पिता सँ कहि सुनौलक । आब हमरा माफ कय दिय बाबू ! फेर एहन काज हम कहियो नै करब भटकि गेल छलौं । अहाँ लोकनिक स्नेह आ दुलारक हम गलत फायदा उठौलौं । आब फेर एहन गलती कहियो नै करब । हम जेहने रामू छलौं फेर तेहने बनिके देखा देब ।आब हमरा मा���फ कय दि���अ ।अपन नयनक नोरसे ओ अपन पिताक चरण पखारय लागल । पिता भरिपाँजके पकरि कहय लगलखीन - जुनि कानह ! तोरा अपन गलतीक एहसास भै गेलह ।यैहते असली प्रायश्चित थिकैक ।लागि जाह अपन पठन पाठनमे आ किछु बनिके देखा दैह ! हमर बुढ़ारीक मजबूत ठेङाते तोहीं थिकह !! चलह पहिने भोजन कयली दुनू बापूत ।भिनसुरका सुरुजक किरणक संग फेर हेतै प्रारम्भ नवका दिनक । -प्रमोद झा 'गोकुल', दीप,मधुवनी (विहार), फोन-9871779851 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। पद्य ३.१.प्रणव कुमार झा- हमर प्राण भारत केर ३.२.प्रमोद झा 'गोकुल'-मेघक ब्यथा ३.३.जगदानन्द झा 'मनु'- बीसटा हाइकू ३.४.राम शंकर झा "मैथिल"- स्मृति शेष (अहाँक चिट्ठी) ३.५.कल्पना झा- चनरदिपा ३.१.प्रणव कुमार झा- हमर प्राण भारत केर प्रणव कुमार झा हमर प्राण भारत केर हमर मोन समर्पित अछि, हमर देह समर्पित अछि हे हमर देशक माटि, अहाँ के नेह समर्पित अछि। लेलहु आकार अहिं से हम, अहिं मे अछि विलीन भेनाई सदा अहाँ वत्सला रहब यैह बस भाव अर्पित अछि । हमर कंठ में गूँजय, सदिखन वेदक वाणी होय, बढ़य विज्ञान, सृजन, संधान, अपन जय कहानी होय। नै होय अन्याय, नै डऽर कोनो, एत्त बस प्रेम टा बढ़इ, सभटा संतान भारत के तरेगन सन चमकइत रहय। मुकुट जैना सदिखन शीश पर गिरिराज विराजित छैथ चरण धोय धोय के सिंधुराज सागर खूब गरजैत छैथ। देलक आश्रय अहांक वन-नदी महान सभ्यता सभ के भारत भूमि अहाँक विविधता समूचा विश्व समेटने अछि। हमर शान अहिं से अछि, हमर मान अहिं से अछि, सदैव उन्मुक्त लहराबैत तिरंगा आन अहाँ से अछि। तपस्वी साधना सिंचित, सजाओल खेतखलिहान में, सदैव गूंजय सुमंगल गीत, सबहक घऽर आँगन मे। ली हम प्रण सत्यनिष्ठा केर, एकरा सदिखन राखबाक अछि भेटय बल उच्च नैतिकता केर हमरा ओ मूल्य पेबाक अछि। बता दी हम ई दुनिया के भूमि अछि, ई राम, गांधी केर देलक आदर्श उच्च एहन जेकरा दुनियाँ मानलक अछि। चलु मिलजुलि प्रतिज्ञा ली, बढ़ाबी मान भारत केर, नै कोनो शत्रु छूबि पाबय, राखब सम्मान भारत केर। अहाँ केर माटि के सोनहगर गंध, हम्मर प्राण में बसय, अहाँके वंदन, अहाँके अर्पण, हमर प्राण भारत केर! चलु ओय शौर्य के धारा में अपन रीत गढ़ई छी, चलु बलिदानी सबहक वीरता के गीत पढ़ई छी। ई माटि अछि परमवीर केर, ई अछि माँ भारती मजबूत, विविधता मे समेटने एकताके, धरा ई अछि बड्ड अजगुत! सप्पत लऽकऽ , सभके राष्ट्र के आगा बढ़ेबाक अछि, तपस्या, त्याग, संकल्प से भारत के सजेबाक अछि। बता दियौक जमाना के, वतन ई ओ पुरातन अछि, जतय युगयुग मे देवता आबि चरण पखारलथि अछि। -प्रणव कुमार झा, राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड, नई दिल्ली अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.२.प्रमोद झा 'गोकुल'-मेघक ब्यथा प्रमोद झा 'गोकुल' मेघक ब्यथा
गगनक आंगन खूब सजल छै रंग विरंगक मेघ जुटल छै उकटापैंचिक जोर चलल छै वाद बिवादक सोर प्रवल छै कारी खटखट भेख अटपट घन बिकट एक बाजल चट रहह करैत अहिना लटपट वर्षण हेतु हम चललौं झटपट धराक छाती फाटि रहल छनि तरु-लताक मुह मौलि रहल छनि प्राणी मात्रक प्राण विकल छनि तपनक ताप आर प्रखर छनि धरा-पुत्र छथि मित्र हमर हिनक आस हमरहि ऊपर जीव जन्तु जल थल नभचर हमहीं आधार आ जीवन स्वर बाजल घन दोसर तहिखन रे मूर्ख !रह चुप तों तत्क्षण कयले पहिने भू अवलोकन बूढ़ सन बजिहें बात तखन नद नदी पर बाँध आकाश चुमै छै पानि-्पथ पर अट्टालिका सजल छै जहतर पहतर पानि- पह घेरा रहल छै मनुजक माथा जेना घूमि गेल छै बात यथार्थ से बाजल तेसर भोगत भोग जे चलत कुपथ पर हम अडिग अपन कर्म पथ.पर जीव हित वर्षण मे सदैव तत्पर -प्रमोद झा 'गोकुल', दीप,मधुवनी (विहार), फोन-9871779851 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.३.जगदानन्द झा 'मनु'- बीसटा हाइकू जगदानन्द झा 'मनु' बीसटा हाइकू १ कर्मक खेल खेलाएत सभकेँ आँखि नै मुनू २ मास्टरजीक सगरो चार बहै बर्खाक राति ३ थाल कादोमे सय साल जीलहुँ आब की भेल ४ माटिक देह ई गलबे करते मोह कतेक ५ लकड़ी संगे बिन प्रिय संपत्ति देह जरतै ६ आँखिक पानि शहरमे सभक सुखा गेल छै ७ मोनक शांति कतय हराएल अर्थयुगमे ८ यादि अबैए नैहर केर सुख सुतली राति ९ हम गरीब मुदा मोन हमर अनमोल छै १० कोराक नेना जिद्द पर अरल रोटी चाहियै ११ हम मरब ई बिसरि गेलहुँ जीबइतमे १२ समय संगे नहि चलि सकलौं झूठक बिना १३ देशक काज जँ हमहूँ अबितौं बड़ भागसँ १४ आदिकालसँ धर्म-अधर्म युद्ध भ रहल छै १५ सटल रहे बुड़िबक बुझि कँ काबिल लोक १६ लाड़ैन लाड़ि सभकेँ सोधलनि मीठ बाजि कँ १७ खापरि धिपा चेन जरेलनि ओ संगे चलिते १८ माय-बाबूक मोजर नै कनिको कनियाँ आगू १९ घोघे तअरे डराबथि कनियाँ कलियुगमे २० जे नै भागमे ओहो कर्मे होयत क� क� तँ देखू अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.४.राम शंकर झा "मैथिल"- स्मृति शेष (अहाँक चिट्ठी) राम शंकर झा "मैथिल" स्मृति शेष (अहाँक चिट्ठी)
अन्हाँक नबका चिट्ठी कें आस मे अन्हाँक लिखल पुरना चिट्ठी छाती सटने धाय नेना जेना सीमान विहग पहरेदार भरि भरि राति चमकैय बिजुरी रहि रहि फाटैअ आँगी जानि नहिं अधिरतिय सँ रहि रहि फरिकेय आँखि मुदा नहिं भेटल अन्हाँक...! कतेको दिन सँ वाँची रहल अन्हाँक लिखल पुरना चिट्ठी...! कतेक दिन आ कि कतेक वरख पहर पअर पहर बित गेल मुदा नहिं भेटल अन्हाँक लिखल नबका चिट्ठी नबका चिट्ठी..! अन्हाँक सुकोमल हाथक चिट्ठी वसंतक भोरहरिया कोयलीक कुक अन्हाक लिखल आख़र आ पांति चकबा सन चकवीक दूधिया राति मुदा नहिं भेटल अन्हाँक ...! कतेक संजोग सँ कतेक जतन सँ मोटका पोथी कें बिचला पन्ना मे दबाक नुका कअ रखने रहि जेना कमलक पात तअर दाबल कुमुदिनी कुसुम भरि भरि राति निहारैत रहि आखर कें आगू आखर कें पाछू आँखिक नोर सँ भिजैत गलैत निढाएल अतृप्त हृदय कें जूरबैत अन्हाक लिखल पुरना चिट्ठी मुदा नहिं भेटल अन्हाँक ....! कखन भोर कखन भुरूकबा उगल कखन चूल्हा निपब कखन जलखैय नहिं कोनो सुधि नहिं कोनो बुद्धि तअब पअर जअरल अधकचु सोहारी हअम वांचैत रहि गेलहूँ अन्हाक चिठ्ठी कोनाक कहबैय किनका सँ कहियै दैवक दोख आ कि हमर कर्मक दोख मुदा नहिं भेटल अन्हाँक ....! चिट्ठी मे सटल गुल-मंजरी पुष्प-पत्ती जखन जखन बान्हि केश खोपा खोपा कें बीच चढ़ाओल गुल-मंजरी जेना बाबा बैजूक माथा चढ़ल शशि सखि बहिनपा कहैत कतेक पियरगर जाहि चिट्ठी मे सटल सुन्नर टिकुली करिया आखर बीच चमकेआ तरेगन जेना कस्तूरीक लेल अपसियांत हिरण मुदा नहिं भेटल अन्हाँक....! ज्यों दलान बाजल साईकिलक घंटी अझटे चेहाअ कें उठि जंगला सँ झाँखि असघनी उठा कोठी चढ़ी मारि हुल्की उतरवारि टोल सँ आएल डाक बाबु सोनदाय लाल काकी तेलिया मैंया हाथे हाथ भेटल सबकें हुलसगर चिठ्ठी मुदा हअमर दलान रहि गेल सुनसान आ रहि रहि ढ़हि रहल अमर गुमान हअमर हाथ एखनहुँ अन्हाँक लिखल पुरना चिट्ठी मुदा नहिं भेटल अन्हाँक....! आस लगाल टुकुर टुकुर निहारैत रहि गेल भाग्य आ कि हअमर कपरजरूआ दिन कतअ हराअ गेल हअमर चैन आ निन अधिरतिय सँ रहि रहि फरिकेय आँखि मुदा नहिं भेटल अन्हाँक नबका चिट्ठी...! मोहनी बनि सबकें चित हरलहुँ हे हअमर चितचोर मनोहर मैथिल मुदा नहिं भेटल अन्हाँक नबका चिट्ठी...! अन्हाँक नबका चिट्ठी..!! अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.५.कल्पना झा- चनरदिपा कल्पना झा चनरदिपा
गोल मोल तूं गप्प करय छै, बड़का जेठका क तूं कान कटय छै, टिटिभां तोहर बडु अजगुत छव, लिखल कपार में बर्बादी छव, बेसी नय आब कनिये दिन छव, बाप बुढ़ भेल रोग ग्रसित छव, मायक पपनी क नय नोर सुखाय छव, बापक जजात सब बिला रहल छव, दिन सुदिन ज्यों नय बुझबै, भिखमंगा बनी घर घर घुमबै, कारी झामैठ मूंह भेल छव, तहन मोबाइल पर रिल बनय छव, नव तुरिया छैं बात ने बुझै, थपरी पिट जग हंसाय छव, जीवन क कोनों मोल नय बुझैं, कोनो कर्मक तूं पूत ने भेल छैं।
-कल्पना झा, बेरमो, बोकारो अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। 1 || विदेह ४२३ विदेह ४२३ || 1
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