VIDEHA — Issue 425 / अंक ४२५

Publication: VIDEHA · Issue: 425
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विदेह ४२५ विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। [विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X Videha e-Journal (since 2000) at www.videha.co.in ] ऐ पोथी‍क सर्वाधि‍कार सुरक्षि‍त अछि‍। कॉपीराइट (©) धारकक लि‍खि‍त अनुमति‍क बि‍ना पोथीक कोनो अंशक छाया प्रति एवं रि‍कॉडिंग सहि‍त इलेक्‍ट्रॉनि‍क अथवा यांत्रि‍क, कोनो माध्‍यमसँ, अथवा ज्ञानक संग्रहण वा पुनर्प्रयोगक प्रणाली द्वारा कोनो रूपमे पुनरुत्‍पादन अथवा संचारन-प्रसारण नै कएल जा सकैत अछि‍। (c) २०००- २०२५. सर्वाधिकार सुरक्षित। भालसरिक गाछ जे सन २००० सँ याहूसिटीजपर छल http://www.geocities.com/.../bhalsarik_gachh.html , http://www.geocities.com/ggajendra आदि लिंकपर आ अखनो ५ जुलाइ २००४ क पोस्ट http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html केर रूपमे इन्टरनेटपर मैथिलीक प्राचीनतम उपस्थितक रूपमे विद्यमान अछि (किछु दिन लेल http://videha.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html लिंकपर, स्रोत wayback machine of https://web.archive.org/web/*/videha 258 capture(s) from 2004 to 2016- http://videha.com/ भालसरिक गाछ-प्रथम मैथिली ब्लॉग / मैथिली ब्लॉगक एग्रीगेटर)। ई मैथिलीक पहिल इंटरनेट पत्रिका थिक जकर नाम बादमे १ जनवरी २००८ सँ ’विदेह’ पड़लै। इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि, जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। (c)२०००- २०२५. विदेह: प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA. सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। Editor: Gajendra Thakur. In respect of materials e-published in Videha, the Editor, Videha holds the right to create the web archives/ theme-based web archives, right to translate/ transliterate those archives and create translated/ transliterated web-archives; and the right to e-publish/ print-publish all these archives. रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना/ संग्रह (संपूर्ण उत्तरदायित्व रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता मध्य) editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ पठा सकैत छथि, संगमे ओ अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो सेहो पठाबथि। एतऽ प्रकाशित रचना/ संग्रह सभक कॉपीराइट रचनाकार/ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि आ जतऽ रचनाकार/ संग्रहकर्त्ताक नाम नै अछि ततऽ ई संपादकाधीन अछि। सम्पादक: विदेह ई-प्रकाशित रचनाक वेब-आर्काइव/ थीम-आधारित वेब-आर्काइवक निर्माणक अधिकार, ऐ सभ आर्काइवक अनुवाद आ लिप्यंतरण आ तकरो वेब-आर्काइवक निर्माणक अधिकार; आ ऐ सभ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार रखैत छथि। ऐ सभ लेल कोनो रॉयल्टी/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै, से रॉयल्टी/ पारिश्रमिकक इच्छुक रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता विदेहसँ नै जुड़थु। विदेह ई पत्रिकाक मासमे दू टा अंक निकलैत अछि जे मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ www.videha.co.in पर ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। Font/ Keyboard Source: https://fonts.google.com/ , https://github.com/virtualvinodh/aksharamukha-fonts , https://keyman.com/ These are print-on-demand books, send your queries to editorial.staff.videha@gmail.com. The eBooks of some of these are available for sale on Google Play [(c) Preeti Thakur, sales.videha@gmail.com], send your queries to sales.videha@gmail.com. The contents and documents e-published by Videha (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA are periodically being checked for accessibility issues. People with disabilities should not have difficulty accessing these contents/ documents. © Preeti Thakur (sales.videha@gmail.com) Cover design: AUM GAJENDRA THAKUR VIDEHA:425 समानान्तर परम्पराक विद्यापति- चित्र विदेह सम्मानसँ सम्मानित श्री पनकलाल मण्डल द्वारा। मैथिली भाषा जगज्जननी सीतायाः भाषा आसीत्। हनुमन्तः उक्तवान- मानुषीमिह संस्कृताम्। अनुक्रम [विदेह ४२५ म अंक ०१ सितम्बर २०२५ (वर्ष १८ मास २१३ अंक ४२५)] गद्य २.१.मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-१३ (पृष्ठ २-१४) २.२.हितनाथ झा- मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान-५ (पृष्ठ १५-२४) २.३.कुमार मनोज कश्यप- लघुकथा- साँझक भोर (पृष्ठ २५-२६) २.४.संदीप तोमर- ४ टा बीहनि कथा (पृष्ठ २७-२८) २.५.डा. आभा झा- कवयित्रीक आँजुरसॅं खसैत विचारक बिन्दु (पृष्ठ २९-३४) २.६.प्रमोद झा 'गोकुल'- हिजड़ा (पृष्ठ ३५-३७) २.७.संतोष कुमार राय 'बटोही'- 'लव यू टू'[धारावाहिक डायरी] (पृष्ठ ३८-४०) २.८.प्रणव कुमार झा- भारत मे क्रिटिकल केयर कार्यबल: एनबीईएमएस के भूमिका आ भविष्य (पृष्ठ ४१-४९) पद्य ३.१.राम शंकर झा"मैथिल"- हृदय विधन अछि/ बियैन : (स्मृति शेष) (पृष्ठ ५१-६०) ३.२.जगदानन्द झा मनु - बीसटा हाइकू (पृष्ठ ६१-६५) ३.३.प्रणव कुमार झा- जगत आकार छथि मोहन (पृष्ठ ६६-६७) ३.४.संतोष कुमार राय 'बटोही'- मीठगर कनिया (पृष्ठ ६८-६९) ३.५.प्रमोद झा 'गोकुल'- जेना पाकल धान (पृष्ठ ७०-७१)

गद्य २.१.मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-१३ २.२.हितनाथ झा- मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान-५ २.३.कुमार मनोज कश्यप- लघुकथा- साँझक भोर २.४.संदीप तोमर- ४ टा बीहनि कथा २.५.डा. आभा झा- कवयित्रीक आँजुरसॅं खसैत विचारक बिन्दु २.६.प्रमोद झा 'गोकुल'- हिजड़ा २.७.संतोष कुमार राय 'बटोही'- 'लव यू टू'[धारावाहिक डायरी] २.८.प्रणव कुमार झा- भारत मे क्रिटिकल केयर कार्यबल: एनबीईएमएस के भूमिका आ भविष्य २.१.मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-१३ कल्पना झा मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-13'

व्यास' जीक असंभावित विदेश-यात्रा

"पुरुषस्य भाग्यम् दैवो न जानाति...." 'व्यास' जी यात्रा-वृत्तान्त लिखैत "विदेश-यात्रा" पोथीक शुरुआत संस्कृतक एही श्लोकांश सँ कएलनि अछि। से ठीके ! एकटा दरिद्र ब्राह्मणक बच्चा, जकरा बाल्यावस्था मे दुनू साँझ सुसिद्ध अन्न भेटब पर्यन्त निश्चित नहि छलैक आ ने पढ़बा-लिखबाक कोनो सुनिश्चित योजना। सर-समाजक सहयोग सँ जेना-तेना विद्यार्जन कएनिहार बालक, कहियो विदेश-यात्रा पर जा सकत, से किएक आ कोना सोचितथि केओ; गौँआ-घरुआ आ कि बालकक माएओ-बाप। कोन आधार पर एहि तरहक आस लगबैत केओ। मुदा ओहि बालक पर सरस्वतीक तेहेन असीम कृपा छलनि जे बहुत किछु असंभावित होइत गेलनि जीवन मे। ताहि दिन मिथिलाक गोटैके विद्यार्थी फर्स्ट डिवीजन सँ पास करैत छलए, से कएलनि। तदुपरान्त इंजीनियरिंग कॉलेज मे पढ़ब, सभदिन नीक अंक सँ उत्तीर्ण होइत रहब, संगहि थर्ड इयर मे पढ़ैत काल, ओहि अल्प बएस मे बिनु कोनो नेआर-भास कएनहि मातृभाषा मैथिलीक भंडार केँ अपन एकटा अनमोल रचना "सन्यासी" (काव्य) सँ समृद्ध करब आ फाइनल इयर मे पढ़िते काल, ट्रेनिंगे के दौरान एक गोट अंग्रेज ऑफिसर 'ह्विप साहेब'क एहि तरहेँ प्रभावित भ' जाएब, मेधावी छात्र उपेन्द्र नाथक कुशाग्र बुद्धि सँ; जे बिनु कोनो आवेदन पत्रक सीधे सरकारी विभाग मे नियुक्त क' लेब, ई सभ किछु असंभाविते तँ भेलनि 'व्यास' जीक जीवन मे !

अपन भाग्यरेख कखनोकाल अपनहु अचम्भित करैत होएतनि 'व्यास' जी केँ। से स्पष्ट होइत अछि हुनकर अपनहि कहल बात सँ, जे ओ "विदेश-भ्रमण" पोथीक पहिले पन्ना पर लिखने छथि। हुनकहि शब्द मे देखल जाए -- "यात्राक विषय मे सभ किछु ठीक भ' गेल छल। विदा होएबा सँ चारि दिन पहिने माए केँ कहलिऐक -- जहिआ हमर जन्म भेल, के कहैत... ककरा मोन मे कनेको सम्भावना भेल होएतैक जे हम अमेरिका जाएब। 40-42 वर्ष पहिने गामक लोक जे ट्रेनो पर कम्मे काल चढ़ल छलाह, जिनका भूगोल विषयक नामे टा सुनबा मे आएल छलनि; अमेरिका देश कि महादेश कहि कए पृथ्वी पर कोनो भू-भाग छैक सेहो ओहि पार -- से मानए लेल केओ तैआर नहि। एखनो, पृथ्वीक दोसर भाग मे - जे हमरा लोकनिक पएरक नीचाँ अछि - लोक रहि सकैछ, बहुतो गोटा केँ बोधगम्य नहि होइत छनि। खेदक विषय अवश्य, दू-अढ़ाए हजार वर्ष पहिने एहि देशक लोक सुदूर समुद्र मे जाए व्यापार ओ धर्म-प्रचार कएलनि - आ जखन समस्त संसार एतेक तीव्र गति सँ आगाँ बढ़ल, तखन हमसभ एतेक पछुआएल रही ! परतन्त्रता लोक केँ एहिना बहुतो अंश मे पंगु बना दैत छैक।"

'व्यास'जीक जीवन-यात्राक अवलोकन करैत-लिखैत, हमरा तँ जानिए क', हमर अनुमान अछि जे आब तँ हमर लिखल पढ़निहार केँ सेहो पढ़ैत काल निश्चिते बेर-बेर मोन मे अओतनि "भावी प्रबल होइछ" आ "जकर जेहेन प्रारब्ध"....। ई हुनकर प्रारब्धे छलनि जे बाल्यावस्था मे दरिद्रताक मारि सँ त्रस्त बालक उपेन्द्र आगाँ जा क' 'व्यास' जी बनि अमर भ' गेलाह। जीवन मे भरपूर नाम, यश, सुख-समृद्धि, सभ किछु प्राप्त कएलन ओ।

'व्यास' जीक विदेश-यात्राक चर्चा करबाक नेआर कएलहुँ तँ स्वाभाविके मामा सभ सँ एहि संदर्भ मे गप्प क' सामग्री कलेक्ट करबाक प्रयास कएल हम। तँ से गप्पक क्रम मे पता लागल जे 'व्यास' जी "विदेश-भ्रमण" नामक एहि पोथी मे अपन सम्पूर्ण विदेश-यात्राक संस्मरण नहि समेटि सकल छथि। हुनकर इच्छा छलनि एकर दोसर भाग लिखबाक। मुदा से इच्छा अपूर्णे रहि गेलनि।

असल मे विदेश-यात्रा सँ घुरैत काल यूरोपक बहुत देश आ शहरक भ्रमण करबाक सेहो अवसर भेटल छलनि हुनका। आ यूरोप ट्रिप बहुतो लोकक सपना रहैत छैक। यूरोपक ग्रामीण इलाका हुअए, आ कि ऐतिहासिक स्थल सभ, प्राकृतिक दृश्यक संग सांस्कृतिक-आकर्षण सेहो कारण रहैत छैक, लोकक 'यूरोप-ट्रिप' पर जएबाक पाछाँ। ओहिठाम जाए रेल यात्राक आनन्द लैत मनोरम प्राकृतिक दृश्यक आनन्द उठाएब आबक धिया-पूताक सपना रहैत छैक। जे स्थान सभ 'व्यास' जी बिनु कोनो सपने केँ घूमि अएलाह। आश्चर्यजक बात जे 'व्यास' जीक छओ संतान मे सँ ककरो एखन धरि विदेश-यात्राक अवसर नहि भेटि सकल छनि जीवन मे। हँऽ... नाति-नातिन, पोता-पोती सभ केँ अवसर भेटलनि अछि।

21 सितम्बर 1958 सँ 21 अप्रैल 1959 पूरे सात मासक छलनि 'व्यास' जीक ई विदेश-यात्रा। हुनका ई अवसर लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभागक कार्यपालक अभियन्ता रुप मे कार्य करैत काल भेटल छलनि। छओ मास लेल विशेष प्रशिक्षणक हेतु अमेरिका पठाओल गेल छलनि विभागक सौजन्य सँ। हिनका संग बारह गोटे आरो छलथिन, माने तेरह गोटाक दल छलनि। जाहि मे सँ बारह गोटे केँ सोझे अमेरिका जेबाक छलनि आ एक गोटे केँ लंडन होइत दू-तीन दिनक बाद अमेरिका पहुँचबाक छलनि। नओ गोट डॉक्टर आ चारि गोट इंजीनियरक ई दल छलनि, जाहि मे एकटा इंजीनियर 'व्यास' जी छलाह।

एहि यात्रा केँ लेखक स्वयं 'असंभावित' कहने छथि अपन पोथी "विदेश-यात्रा" मे। कारण हुनकर नाम लिस्ट मे नहि पठाओल गेल छलनि। मुदा एकरा 'भावी'ए कहल जाएत जे दिल्ली स्थित एकटा विशिष्ट पदाधिकारी "हौपकिन्स" साहेबक कहला पर विभागक मुख्य अभियन्ता केँ 'व्यास' जीक नाम पठाबए पड़लनि। "हौपकिन्स" साहेब प्रतिभावान युवा इंजीनियर उपेन्द्र नाथक किछु कार्य गया क्षेत्र मे देखने छलाह, गप्प-शप्प सेहो कएने छलाह ओहि होनहार इंजीनियर सँ। निश्चिते प्रभावित भेल होएताह 'व्यास' जी सँ। आ तैँ हिनकर नाम प्रस्तावित कएने होएताह।

'व्यास' जीक व्यक्तित्वे तेहेन छलनि, जे एक बेर भेंटघाँट-गप्प-शप्प क' लइतनि हुनका सँ, तँ फेर आजीवन हुनका मोन रहबे टा करितनि हुनकर ओ अद्भुत आभायुक्त मुखमंडल, हुनकर आत्मीयतापूर्ण / विद्वतापूर्ण गप्प करबाक कौशल। हुनकर व्यक्तित्व मे किछु तँ एहेन छलनि, सम्मोहन शक्ति सन, जे लोक प्रभावित होएबा सँ बचि नहि सकैत छल। किछु तेहेन सन बात ! कुशाग्र बुद्धि बहुतो लोक रहैत छथि, विद्वानोक कमी नहि एहि संसार मे, अपन मिथिले मे असंख्य विद्वान भरल छथि मुदा अपन बात-व्यववहार सँ सामने बला केँ पहिले भेंट मे अप्पन बना लेबाक गुण कही कि कला, से विरले ककरो भीतर होइत छैक आ से गुण, से कला भरपूर मात्रा मे विद्यमान छलनि 'व्यास' जीक भीतर। आ तैँ प्रायः "हौपकिन्स" साहेबक नजरि मे, मोन मे छलथिन इंजीनियर उपेन्द्र नाथ। आ एहि तरहेँ 'व्यास' जीक नाम ओहि टीम मे जोड़ल गेलनि जे विशेष प्रशिक्षण हेतु विदेश-यात्रा पर जाए बला छलए।

ई गप्प अछि 1958क। ताहि दिन विदेश जाएब बहुत बड़का बात होइत छलैक। आ सेहो विभागक खर्चा पर, विशेष प्रशिक्षण लेल, किछु चयनित लोक मे नाम आएब, वास्तव मे बहुत विशेष बात छलनि। 'व्यास' जीक लेल तँ जानिए क', संगहि परिवारक, गामक आ समाजक लोक लेल सेहो ई गौरवक बात छलनि। ओहि समय मे विदेश-यात्रा, एक तँ कम्मे लोक करैत छलाह आ जेहो कएलनि से ततेक लिखल नहि गेल छलए विदेश-यात्रा पर तेहेन किछु। साहित्यक गप्प क' रहल छी हम। मैथिली साहित्य मे, पोथी रूप मे यात्रा वृत्तान्त ताहि दिन बहुत कम प्रकाशित होइत छलए, जखन 'व्यास' जी विदेश-यात्रा सँ घुरलाह 21 सितम्बर 1959 मे। से विदेशे मे सोचने छलाह 'व्यास' जी, जे देश जाएब तँ पाँच-छओ मास मे "विदेश-भ्रमण" नाम सँ पुस्तक लिखब। मुदा देश आबि ओझरा गेलाह अपन पारिवारिक जिम्मेदारी आ कर्म-क्षेत्रक जिम्मेदारी सभ मे आ छओ मास मे मात्र दू टा लेख लिखल भेलनि। जे "वैदेही"के दू अंक मे प्रकाशित भेल छलनि।

'व्यास' जी विदेश यात्रा पर गेल छलाह सन् 1958 मे आ "विदेश-भ्रमण" पोथी प्रकाशित भेलनि सन् 1978 मे। माने बीस साल लागि गेलनि ओहि इच्छाक क्रियान्वयन मे, जे विदेश-प्रवासे काल सोचने छलाह ओ। ततेक तरहक जिम्मेदारी छलनि, जे साहित्य लेल समय निकालब कठिन रहैत छलनि। तथापि माँ मैथिलीक चरण मे यथासाध्य समय-समय पर निस्सन, सुन्दर-सुन्दर पुष्प चढ़बैत रहलाह 'व्यास' जी, से विशेष बात। इच्छा तँ बहुत किछु छलनि माँ मैथिलीक लेल करबाक, बहुत काज अपूर्ण रहि गेलनि से अफसोचक बात !

हँऽ तँ कहैत जे रही....ताहि दिन यात्रा-वृत्तान्त पोथी रूप मे कम प्रकाशित होइत छलए। कहियो कोनो पत्रिका मे धारावाहिक रूप मे किछु अंक मे प्रकाशित भ' जाइत छलए, सएह टा। उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' जीक लिखल किछु यात्रा-वृत्तान्त सेहो "विदेश-भ्रमण" शीर्षक सँ "वैदेही" पत्रिका मे प्रकाशित भेल छलनि। स्व. रमानाथ बाबूक विशेष अनुरोध छलनि जे प्रवासक विषय मे किछु लिखथि 'व्यास' जी। तँ से रमानाथ बाबूक बातक मान राखैत किछु यात्रा-वृत्तान्त लिखि 'व्यास' जी, कृष्णकान्त जी केँ पठा देल करथिन। जे बेरा-बेरी "वैदेही"क किछु अंक मे प्रकाशित होइत रहलनि।

सात मासक एहि प्रवासक वृत्तान्त, पत्रिकाक किछु अंक मे समटल नहि जा सकैत छल, से अनुमान छलनि 'व्यास' जी केँ। जा धरि 'व्यास' जीक पोथी "विदेश-भ्रमण" निर्माणाधीन छलनि ता धरि मैथिली साहित्य मे दू टा विदेश-यात्रा आधारित पोथी अपन उपस्थिति दर्ज करौलक। पहिल डॉ. सुभद्र झाक "प्रवास जीवन" आ दोसर जगदीश चन्द्र झाक "सात समुद्र पार" नामक पोथी। तेसर यात्रा वृत्तान्त पोथी प्रायः व्यास' जीक "विदेश-भ्रमण" अछि। मुदा जेना कि पहिनहु कहल अछि, जे सातो मासक सम्पूर्ण वृत्तान्त समेटि नहि सकल छलाह एहि पोथी मे लेखक। दोसर किस्त मे ओ यूरोपक विभिन्न दर्शनीय स्थल/नगर/देश, फ्रांस, जर्मनी, बर्लिन, रोम, ग्रीस, जेनेवा, इजिप्ट, कैरो आ अफ्रीका मे घूमल/देखल महत्वपूर्ण स्थान सभक चर्चा करितथि, से नेआर छलनि।

"विदेश-भ्रमण" पोथी पढ़ैत एकटा विशेषता ई देखाएल जे एहि पोथी मे लेखक जाहि-जाहि ठाम गेलाह, चाहे ओ यात्राक क्रम मे एकटा पड़ाव रूप मे कोनो स्थान पर थोड़बे काल लेल किएक ने रुकलाह (कोनो एयरपोर्ट पर), ओहि सभ स्थानक भौगोलिक विवरणक संग ओतुक्का इतिहासक चर्चा सेहो कएलनि अछि। कोन बात, कोन बस्तु लेल ओ स्थान विशिष्ट कहबैछ, किएक महत्वपूर्ण अछि ओ स्थान, से सभ बातक चर्चा दूखलहुँ। उदाहरण स्वरुप सीरियाक राजधानी डमास्कस (दमिश्क)क भौगोलिक-ऐतिहासिक विवरण सेहो देखल पोथी मे, जतए दस घंटाक उड़ानक बाद वायुयान मात्र 45 मिनट लेल रुकल छलनि।

तहिना यात्राक क्रम मे देखल/घूमल दर्शनीय स्थल सभक विस्तृत विवरण भेटल पोथी "विदेश-भ्रमण"मे। ओहि दर्शनीय स्थलक निर्माण प्रक्रिया, निर्माण मे कतेक समय लागल, ककरा द्वारा कोन इस्वी मे बनाओल गेल, कतेक लागत लागल, माने ओकर सम्पूर्ण इतिहासक खाका खींचल अछि। एहि बात सँ स्पष्ट होइत अछि जे कतेक मेहनति कएने छथि पोथी लिखबा मे लेखक। माने कतेक समय आ दिमाग खपाओल गेल अछि से स्पष्ट दृष्टिगोचर होएत। ताहिदिन ने इंटरनेट छलए ने गूगल, तखन सभटा जनतब कलेक्ट करब आ ओकरा साहित्यिक रूप दैत पाठकक सोझाँ परसब सहज नहि छल हेतनि 'व्यास''जी लेल।

जाहि तरहेँ विदेश-भ्रमण पोथी मे अमेरिकाक दर्शनीय स्थल मे सँ सभ सँ बेसी प्रसिद्ध आ महत्वपूर्ण "स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी"क विवरण दैत, ओकर मैन्युफैक्चरिंग डिटेल्स देलनि अछि, से हमरा तँ चकित कएलक। लोहक फ्रेम पर तामक चदरा केँ मढ़ल गेल छैक, से सभ किछु एतेक गौर सँ निरेखि क' देखब/बूझब आ फेर तकरा लिखित रूप मे सहेजि क' राखब, प्रशंसनीय अछि।

विदेश-भ्रमणक क्रम मे 'व्यास' जी, जे किछु-कत्तहु नब बात, नब बस्तु देखलनि/सुनलनि, ताहि सभ बात सँ अपन पाठक केँ अवगत करएबाक हुनकर आन्तरिक इच्छा देखा पड़ल कइअक बेर। अहूँ सभ देखू कनि --"आइ बूझल समस्त अमेरिका मे 'डाउन टाउन'क अर्थ - कोनो शहरक मुख्य बाजार क्षेत्र किए ? मैनहैटन द्वीप उत्तर सँ दक्षिण दिशि ढालु - तीनि भाग मे बँटल, 'अप टाउन', 'मिडटाउन', 'डाउन टाउन'..। दक्षिणी भाग 'डाउन टाउन' मे सर्वाधिक वाणिज्य, व्यापार, क्रय-विक्रय केन्द्र; चर्च, सिनेमा, थिएटर अवस्थित। सभ प्रकारे व्यस्त, चहल-पहल भरल...। अधिक संभव न्यूयॉर्कक 'डाउन टाउन'क आधार पर आब ओ शब्द योग-रूढ़ि भए समस्त अमेरिका मे प्रचलित भए गेल अछि।"

'व्यास' जीक एकटा बड़का विशेषता छलनि जे हुनका अनकर अधलाह पक्ष देखबाक अभ्यास कम छलनि। माने विदेश गेलाह, तँ ओहिठामक लोक सँ, समाज सँ की सीखल जा सकैत अछि; की ग्राह्य अछि, ताहि पर फोकस रहैत छलनि। ना कि खिधांस करबा पर। हुनका संगे गेल लोक सभ चर्चा करथिन, एना देखलियै; ओना देखलियै...छौँड़ी-छौँड़ा एना करै छै...। एहेन क्षुद्र बात पर ध्यान देब 'व्यास' जीक स्वभाव नहि रहलनि, वा कहि सकैत छी हुनकर शान के खिलाफ छलनि ई।

हुनकर ध्यान गेलनि जे अमेरिकन सभ कोना यूरोपक विभिन्न देश (जे पूर्व मे आ ओहू समय अपना मे लड़ितो छलाह) सँ आबि एतए एकताक सूत्र मे बन्हि गेलाह, कोना फ्रेन्च, ब्रिटिश, जर्मन, डच, इतालवी, आदि; सभ केओ अमेरिकन भए अंग्रेज साम्राज्यक विरुद्ध लड़लाह। स्वतन्त्र भेलाह आ स्वतंत्रताक बादो सम्बध्दता क्रमहि दृढ़ भेल गेलनि, बढ़ैत गेलनि।

एहि तरहक दृष्टिकोण रखनिहार लोक जखन लेखनी धरैत छथि तँ ओ जे लिखताह से जिम्मेदारीपूर्वक लिखताह। बहुत कम्मे बएस मे 'व्यास' जीक भीतर एहि तरहक परिपक्वता आबि गेल छलनि। ई बात बूझब अत्यन्त आवश्यक अछि जे लेखन-कार्य हँसी-खेल नहि छैक। लेखनी नैतिक आ सामाजिक दायित्व दैत छैक लिखनिहार केँ। ओहि दायित्वक निर्वहन लेल लेखक केँ बहुत श्रम करए पड़ैत छैक। श्रमसाध्य कार्य छैक लेखन। से 'व्यास' जी एहि दायित्वक निर्वहन निष्ठापूर्वक कएलनि। आजीवन। जखन कि आब बेसी लोक सौखे लिखब शुरु क' दैत अछि। लेखक बनबाक लौल जे ने कराबए।

एकटा अजगुत बात भेलनि एहि विदेश-यात्रा मे, महाराज कामेश्वर सिंह सेहो ओही विमान मे सवार छलथिन, जाहि सँ 'व्यास' जी जा रहल छलाह। कामेश्वर सिंह 'व्यास' जी सँ किछु सीनियर छलाह। चूँकि ओ बहुत बेर लम्बा दूरी बला हवाइ यात्रा पहिनहु कएने छलाह, तँ 'व्यास' जी केँ कंफर्टेबल फील करएबाक प्रयास कएलथिन। हवाइ यात्रा संबंधी किछु जनतब सभ सेहो देलथिन। अद्भुत संयोग छलनि ई....! जाहि राजघरानाक राजमाता 'व्यास' जी पर दयाभाव राखैत हुनका पढ़बालेल छात्रवृत्तिक व्यवस्था करबौने छलथिन, ओही राजघरानाक राजकुमारक संग बराबरी मे बैसि क' विदेश-यात्रा क' रहल छलाह 'व्यास' जी। एहने मे कहल जाइत छै....समय समय के बात छै....

आ एहेन समय मे अज्ञानतावश ककरो मोन मे अहंकारो आबि सकैत छलैक, ई सोचि जे आइ हमहूँ अहाँक 'क्लास'क लोक भ' गेल छी। कारण 'व्यास' जी सन ज्ञानी पुरुष सभ थोड़बे होइत अछि। 'व्यास' जीक ज्ञान-विवेकक तँ बाते अलग छलए। ओ आजीवन कृतज्ञ रहलाह हरेक ओहेन लोकक प्रति, जे हुनका कहियो कोनो तरहक सहयोग कएलथिन जीवन मे। आर्थिके सहयोग टा सहयोग नहि होइत छैक ने ! ककरो मानसिक सम्बल देब, ककरो संग शारीरिक रुपेँ ठाढ़ रहब, संग रहब, ककरो उत्साहवर्धन करब, बहुत बड़का सहयोग होइत छैक। धीरेन्द्रनाथ लाहाक पीठ ठोकब आ कहब - "और पढ़ो ! और पढ़ो !!" आजीवन स्मरण रहलनि 'व्यास' जी केँ। तहिना खर्रख मे स्व. बलभद्र बाबू आ दयाबाबू सँ भेटल अपार स्नेह, सहयोग, सम्बल आ आत्मीयता, कहियो नहि बिसरलाह 'व्यास' जी। जखन ओ विद्यार्थी छलाह तखन खर्रख जाइत-आबैत रहैत छलाह। खर्रख सँ हुनकर परिवारक दूरस्थ सम्बन्ध रहनि। तहिना फेर साहित्यिक यात्रा आरम्भ कएलनि तँ अनेक लोक गुरु-तुल्य भेटलथिन।कर्मस्थल पर अनेकों सहयोगी भेटलथिन। एहि विदेश-यात्राक दौरान सेहो कतेको लोकक सहयोग/संग भेटलनि, जकर सभक नाम/चर्चा "विदेश-यात्रा" पोथी मे भेटल। मनुक्खक अतिरिक्त देवता-पितर, मातृभूमि, मातृभाषा मैथिली, सभ किछु लेल हुनका हृदय मे कृतज्ञता भाव छलनि।

संपादकीय सूचना-एहि सिरीजक पुरान क्रम एहि लिंकपर जा कऽ पढ़ि सकैत छी- मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-1 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-2 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-3 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-4 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-5 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-6 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-7 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-8 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-9 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-10 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-11 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-12 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.२.हितनाथ झा- मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान-५ हितनाथ झा मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान-५

पं.तारानाथ झाक सम्पादकीय दृष्टि

'नवतुरिये आबौ आगाँ' महाकवि वैद्यनाथ मिश्र 'यात्री'जीक कविता कोन इस्वीक छनि, हमरा नहि बूझल अछि, किन्तु यात्रीजीक जे ई पाँती छनि,तकर शतप्रतिशत अमल कोइलख गाममे युवक संघ(1932)क स्थापनासँ भेल छल से कहि सकैत छी।(युवक संघक स्थापनासँ पाँच वर्ष पूर्वहि 1928मे कोइलखमे पुस्तकालय खुजल छल जे चन्द्रानंद फ्री मिड्ल इंग्लिश स्कूलक भवनमे चलैत छल।)। कोइलखमे प्रख्यात विद्वान लोकनिक रहितो, भ' सकैछ, हुनका लोकनिक मार्गदर्शनमे नवतुरिये आगाँ आयल आ 'प्रभात' मासिक पत्रिका चलायब आरम्भ कयलक। प्रभातक पहिल अंक जनवरी 1933मे बहरायल आ अंतिम उपलब्ध अंक अछि दिसम्बर1934 ई.। प्रत्येक महिनामे एक जनवरी क' निकलि जाइत छल, ई बुझना जाइत अछि, कारण जनवरी 1934मे विनाशकारी भूकम्प अयलाक बादो फरबरी 1934क अंक ससमय निकलल ,ई पाठकीय प्रतिक्रियासँ ज्ञात होइत अछि। चौबीस अंकक जानकारी तँ अछि, किन्तु एकर बाद छपलैक कि बन्द भ'गेलैक, एहि तरहक जानकारी नहि अछि। दिसम्बर 1934क अंकमे बन्द होयबाक सूचना सेहो नहि छैक, तेँ निश्चित इहो नहि कहि सकैत छी जे बन्दे भ' गेल हेतैक। संपादक सेहो गाम छोड़ि बनारस गेलाह सेहो बहुत बाद 1947मे करीब। बीचक सेहो छह अंक दीवार चट क' गेलैक,तेँ अठारह अंकक उपलब्धताक आधारपर एहि पत्रिकाक कोनो तरहक धारणा बनायल जा सकैत अछि। एहि पत्रिकामे नवतुरिये रचनाकारक रचना छपैत छल, इहो एहि पत्रिकाक विशेषता कहल जा सकैछ, जे आइसँ एक्कानबे वर्ष पूर्व कोइलख गामसँ प्रभात पत्रिकाक माध्यमसँ समाजमे नवतुरियाकेँ आगाँ अयबाक आह्वान कयने छल , जे उपलब्ध अंकक अनुसार, प्रकाशित,आलेख,निबन्ध, कथा,कविता आ अन्य प्रकाशित समाचारसँ ज्ञात होइत अछि। तेँ पूर्वमे जे कहल ' नवतुरिये आबौ आगाँ'क शतप्रतिशत कोइलखक तत्कालीन युवकक उत्साह आ कार्यसँ मिथिलाक गाम मध्य कोइलखक महत्त्व सर्वविदित अछि। प्रभातक अग्रलेख आ अन्य साहित्यिक/साहित्येतर रचना/समाचार एकर साक्षी अछि। प्रसिद्ध आलोचक मोहन भारद्वाज 'प्रभात'क एहि सोचक विषयमे लिखने छथि - " प्रभात तत्कालीन मिथिलाक सामाजिक-साहित्यिक दस्तावेज थिक।उल्लेखनीय अछि जे 1933-34ई.मैथिली पत्रिकाक इतिहासमे संक्रमण काल छल। 1927 ई.मे 'मिथिला मोद' बन्द भs गेल छल। कुशेश्वर कुमर तथा भोलालाल दासक सम्पादकत्वमे 1929 ई.सँ 'मिथिला' प्रकाशित होमय लागल, मुदा ओहो शीघ्रे बन्द भs गेल। एकमात्र पत्रिका ' मिथिला मिहिर' प्रकाशित भs रहल छल, किन्तु ओहिमे युवातूरक रचनाकारकेँ स्थान भेटब कठिन छलैक। एहने समयमे प्रभातक पदार्पण भेल जे अपन बात लोकधरि पहुँचयबाक युवा मैथिलक व्यग्रताक शमने नहि कयलक, समाज आ साहित्यकेँ विकासक बाट सेहो देखौलक। " जखन विस्तारसँ प्रभातक रचना आ युवा रचनाकारक विषयमे सम्पादकक दृष्टिक अवलोकन करब, तखन आर स्पष्टतासँ दृष्टिगोचर होयत। एहिठाम हम युवक संघक प्रसंग जे प्रभातमे प्रकाशित अछि, ओहि निबन्धमेसँ दू टा निबन्ध प्रस्तुत क' रहल छी ,जाहिमे एक प्रभातक सम्पादक तारानाथ झाक अछि आ दोसर जयदेव मिश्रक जे ओहि समय कलकत्ता विश्वविद्यालयक छात्र छलाह जे बादमे पटना विश्वविद्यालयक मैथिलीक प्रोफेसर आ शिक्षा निदेशक बिहार सरकार भेलाह । मैथिलीक प्रसिद्ध विद्वान प्रो. मिश्र चेतना समिति,पटनाक सचिव ओ अध्यक्ष पदपर सेहो आसीन भेल छलाह।

युवक संघ ***** श्री तारानाथ झा

कोइलख मिथिलामे एक प्राचीन गाम थीक। एहि गाममे अनेक धुरन्धर विद्वान लोकनि भय गेलाह अछि ।ओ लोकनि जनताक उपकारार्थ अनेक संस्था स्थापित कयलन्हि । परन्तु शोकक साथ लिखक पड़ै अछि जे पूर्वक झण्डा सम्प्रति एको टा कायम नहिं अछि । प्रथम कारण क्रमशः लोग स्वार्थी होम लगलाह । स्वार्थी मनुष्य परोपकार कहाँ सँ क ' सकैत अछि । बिना परपोकारी भेने कोनो संस्था चलब असंभव । द्वितीय कारण - परस्पर वैमनस्य थीक ।वैमनस्य भेने उपकारक बदला अनुपकारे करब सभक ध्येय रहैत छैक । तेहना स्थितिमे कोनो संस्था कोना चलि सकै अछि । तृतीय कारण - आलस्य थीक । की आलसी वुते कोनो कार्य भय सकै छैक ? कदापि नहिं । अतः सभ संस्था क्रमहि मेटिया -मेट भय गेल । सभसँ पश्चात मैथिल शिशु कल्याण कारिणी समिति नामक संस्था स्वर्गवासी लक्ष्मीनाथ झाक यत्नसँ भेल छल। जकरो आइ नाम निशान तक नहिं अछि । यैह सभ कोइलखक ह्रासताक एक मात्र कारण अछि । जे कोइलख समस्त भारत वर्षमे विख्यात छल तथा समस्त मिथिलाक आदर्श छल , तकर गणना आइ कतहु नहिं होइ अछि । ई परम् खेदक विषय थीक । जखन एहि विषय सभक चर्चा कतहु होमय लगैत छैक तखन हमरा लोकनिक सिर झुकवैक टा पड़ै अछि । कारण जे जे गाम ओहि जवानामे तिलमात्रो गण्य नहिं छल ताहि ताहि गाममे नया नया संस्था स्थापित भय देशक शिरोमणि भय रहल अछि । ई बहुत उत्तम बात थीक । एहि हेतु ककरो दुख नहीं करक चाही ।प्रत्युत जहाँ तक भ' सकै ओकर सहायता करक चाही । तथा ओकरे आदर्श मानि कार्य करक चाही । अपना-अपना घरक ,समाजक ,गामक एवं देशक उन्नति तथा अवनति युवकवृन्दक ऊपर निर्भर अछि । यावत तक युवक लोकनि अपना-अपना पैरपर ठाढ़ नहिं होयताह ,तावत तक उन्नति कहाँ ! यैह सभ बात विचारि ,कोइलख निवासी श्री उमानाथ झाक असीम उत्साह तथा उद्योगसँ स्वगाम मध्ये गत अक्टूबर महीनाक १४ मितिक युवक संघ नामक संस्थाक निर्माण भेल । जाहिमे सभ जातिक युवकक स्थान रहलहुँ सन्ता केवल चालीस-एकतालीस युवक नाम लिखलन्हि । जे लोकनि सभ तरहें संस्था के सहायता करबाक वचन देलथिन । बहुत खेदक विषय थीक जे एक त एतेक पैघ गाममे अत्यल्प सदस्यक संख्या ,दोसर नामो लिखा ,प्रतिज्ञावद्ध भैयो क' कार्य करबाक हेतु उद्यत नहिं होइ छथि ।कार्य करब तँ दूर रहै , युवक संघक बैठकोमे उपस्थित होयब आपत्तिये बुझै छथि । एहि सभ विषयमे कतिपय महोदय वृन्दकेँ अनेक प्रकारक शंका उपस्थित भय जयबाक कारण स्पष्ट रूपे लिखि देब उचित बुझै छी। हम लगातार ५ बैठकमे उपस्थित भेलहुँ अछि ।दस -बारह सदस्य सँ ऊपर कहियो नहिं उपस्थित देखल अछि ।जे सदस्य के प्रथम बैठक में देखल ,प्रायः तिनके 2 अतिररिक्तो बैठकमे देखैत अयलहुँ अछि और यैह सदस्य गण सम्प्रति युवक संघक कार्य कय रहलाह अछि । युवक संघक की कर्तव्य छन्हि ,ई प्रायः बहुत व्यक्ति नहिं जनैत हेताह ।अतः सूचित कय देव उचित बुझैत छी । प्रथम - ' लोक सेवा ' द्वितीय - ' युवक संगठन ' लोक सेवाक अंतर्गत निम्नलिखित विषय अछि । क - आपत्ति कालमे लोकक सहायता ख -औखद द्वारा दीनक सहायता ग - पुस्तकालयक प्रबंध घ- अपढ़ केँ सुपढ़ बनायब और युवक संगठनक सहायतार्थ समय समय पर (क) संगीत (ख) खेल (ग) निबन्ध प्रतिद्वंद्विता (घ) वक्तृताक आयोजन कयल जायत।

ई प्रायः सभके विदिते होयत जे करीब ४ वर्षसँ कोइलखदेवी नामक पुस्तकालय कोइलखमे अछि । जे एखन श्रीयुत हेडमास्टरक अनुकम्पा सँ स्थानीय चन्द्रानंद फ्री मिडिल स्कूलमे राखल अछि ।स्कूलक कार्यवाही होयबाक कारण पुस्तकालयक कार्य संचालनमे पूर्ण वाधा होइत छैक । एहन स्थितिमे एक सुन्दर घर पुस्तकालयक निर्माण करैक निमित्त कटिबद्ध भ गेल अछि । आइयो काल्हिमे पृथ्वीपर एहन एहन धार्मिक तथा परोपकारी मनुष्य छथि जे असकरो एहन एहन कार्यक हेतु मकान बना सकैत छथि । परञ्च संघ ओकर मत नहिं कयलक ।कारण जे जे कार्य समूहक योगसँ होइ छैक से चिरस्थायी रहैत छैक ,अतः गाम 2 सँ द्रव्य संग्रह कय कार्य क्रमशः भय रहल अछि।एहि कार्यमे शारीरिक परिश्रमक पूर्ण आवश्यकता छैक ।और समूहक योगसँ ई कार्य सुलभ रूपे भ सकै छै । जेना संघमे ४0-४१ सदस्यक सम्प्रति नाम लिखल छन्हि ।यदि प्रत्येक सदस्य एहि हेतु अपन अपन चारियो दिनक समय लगावथि त आसानीसँ ई कार्य सम्पन्न भ सकै अछि ।अन्यथा पाँच -सात व्यक्ति अपन अपन समय मासों दिन लागौताह तथापि कार्य सम्पन्न होयब सर्वथा असंभव।एहिमे एको दिन तक कार्य कर वालाक संख्या दस-बारह सँ बेसी नहिं अछि। ई लोकनि करीब ४0 गाम पर्यटन कय चुकलाह अछि । और वरावरि क रहलाह अछि । तकरे फलस्वरूप ईंटा ई सभ पाथल जा रहल अछि । आब ई कार्य बन्द होम वला नहिं अछि ।परञ्च वलिहारी थिकैन्ह ओहि पचीस- तीस सदस्य के जे लोकनि एहि दिश कंडेरियो नजरि सँ नहिं तकलन्हि अछि ।एहि विषय पर बेशी लिखब व्यर्थ बुझै छी ।आशा करै छी जे भविष्यसँ अपने सदस्य वृन्द एहि दिश अवश्य ध्यान देबैक । तैखन समस्त गामक तथा देशक उन्नति भय सकैत अछि ।अन्यथा नहिं । एहि विषयपर श्रीयुत मन्त्री जी महोदय विस्तृत रूपे अपने लोकनि केँ सूचित कय सकै छथि ।यदि अपने लोकनिकेँ बेशी बुझबाक प्रयोजन हो त मंत्रीजीकेँ प्रार्थना करियैन्ह । सदस्यक हैसियत सँ हमरा जेतवा ज्ञान छल अपने लोकनिकेँ सूचित कयलहुँ अछि । ********* - तारानाथ झा सम्पादक प्रभात (सन्दर्भ : प्रभात : वर्ष-01अंक-04,अप्रैल 1933)

युवक संघसँ अपील जयदेव मिश्र (लेखक ओहि समय कलकत्ता विश्वविद्यालयक छात्र रहथि।)

गत जुलाइ मासक " मिथिलाक उन्नति कोना हयत " ई शीर्षकक लेख देखि हमरहु इच्छा भेल जे एहि विषय पर अपन किछु विचार पाठकक सम्मुख उपस्थित करी परन्तु कोनो लेख लिखबाक पूर्व पाठकक रुचि बूझि लेब परमावश्यक ताहूमे एहना अवस्थामे जखन हमरालोकनिक संस्थाक एहन अवस्था अछि जे किछुओ विरोधीलोकक ठाढ़ भय गेलासँ धीयापुताक धूरामाटिक खेल जकाँ एकरहु उसरि जयबामे विलम्ब नहिँ होयतैक । यद्यपि नवयुवक द्वारा स्थापित संस्थाक एहन हीनावस्था युवक पक्षमे बड़े लज्जाक विषय थीक तथापि हमरालोकनिक वर्तमान सामाजिक स्थितिमे एकर प्रतिकार सर्वथा असंभव । युवक-मंडलीक एक साधारण सदस्य रहलहुँ सन्ता अधिक काल गामसँ बाहर रहबाक कारणे संघ-सम्बन्धी कार्यमे हेरफेर करबाक सलाह देव अनुचित थीक परन्तु ई कहब अनुचित नहिँ जे युवक--संघकेँ युवकोचित कार्य्य करबामे युवकीययुक्त साहस एवं त्याग देखयबाक चाही । ई कहब अनावश्यक जे हमरालोकनिक समाजक सम्प्रति बड़े दयनीय दशा भय गेल अछि । ई समाज एखन साहित्य विहीन , संगठनविहीन अर्थात ताहि द्वारा प्राणविहीन भय परम् अधोगतिमे पड़ल अछि ।जे समाज एक समयमे सम्पूर्ण भारतवर्षक गौरब छल ,ओकर एहन हीनावस्था संसारक आठम आश्चर्यजनक वस्तु थीक । मिथिलाक साम्प्रतिक हीनावस्थाक सुधारक हेतु सभसँ आवश्यक थीक जे एकरा भाषाक उन्नति हो तकरा विना किछु हयब असंभव। हमरालोकनिक पक्षमे ई केहन लज्जाक विषय थीक जे हमरालोकनि मैथिलक टीकाके उठाय हिन्दीवालाक टीका धारण कय अपनाकेँ गौरवान्वित मानैत छी।बंगाल प्रभृत प्रान्तमे जतय बी0ए0 और एम0ए0 क्लासमे अन्य भाषाकेँ छोड़ि मातृभाषाक माध्यमे सभ विषयक पठन-पाठन विद्यार्थीसभक सुविधार्थ प्रारम्भ कयल गेल अछि ओतहि हमरालोकनिक देशमे उच्च कक्षाक कथा कोन छोटको-छोटको कक्षामे मातृभाषाकेँ छोड़ि हिन्दी भाषाक द्वारा शिक्षा देल जाइत अछि ।एहि विषयमे एतबे कहब पर्य्याप्त जे मैथिलेतर कोनो जाति मातृभाषाक एहि अपमानकेँ कदापि सह्य नहिँ करैत । जाहि भाषाक कुसुम-सुरभिसँ भारत बर्षक अत्युन्नत बंगला साहित्य सुवासित भेल ताहि भाषाक ओकरा जन्मस्थानोमे एतेक अनादर ई मैथिलक हेतु बड़े लज्जाक विषय थीक। मैथिलक हेतु ओ बड़े गौरवक दिन होयत जखन मैथिल सन्तान- ज्योतिरीश्वर, विद्यापति , गोविन्द दास प्रभृति महानुभाव लोकनिक रचनाक आदर करब सीखत । जाहि समयमे हिन्दी तथा बंगलाक भाषाक स्पन्दनों नहिँ भेल छलैक ताहि समयमे मैथिलीमे एहन-2 ग्रन्थरत्नक निर्माण भेल जकरा लय संसारक कोनो साहित्य अपनाकेँ धनीक बुझि सकैछ । एकर उदाहरणस्वरूप वर्णरत्नाकर सदृश ग्रन्थ वर्तमान अछि । लेखकेँ बेशी नहिँ बढ़ाय केवल एक बात कहि एकरा समाप्त करब । हमरा कॉलेजक एक प्रोफेसरक मैथिली- प्रेमक विषयमे सुनि इच्छा भेल जे हुनका क्लासमे जाय किछु सुनी । हमरा विषयमे ई बूझि जे ई मैथिल थिकाह ओ मिथिलाक प्राचीन इतिहासक व्याख्या करैत विद्यार्थी लोकनिकेँ कहलथीन्ह जे मिथिलाक उपकारक हेतु बंगाल ओकरा कतय सभ दिन ऋणी रहत । ई बूझि हमरालोकनिकेँ बड़े दुःख होइछ जे बंगला भाषाक आदर्शस्वरूप मिथिलाभाषाक एहन अधोगति भय गेल छैक जे मैथिलो लोकनि आब हिन्दीयेकेँ अपना लेलन्हि अछि । विद्यापतिक भाषाक एहन अधोगति बड़े दुर्भाग्यक विषय थीक ।" ओ विद्यार्थी लोकनिकेँ एक मीटिंग कय मिथिलाक विषयमे हमरासभकेँ वार्तालाप करयक हेतु कहथिन्ह। विद्यार्थीसभमे ककरा गर्ज छैक जे ओतेक कष्ट उठाबय परन्तु जे बुझनिहार बंगाली अछि ओ मिथिला तथा ओकर भाषाकेँ बड़े आदरक दृष्टिसँ देखैत अछि । मिथिलाक प्राचीन गौरवगाथा सुनि जहिना छाती फूलि उठैछ ,तहिना एकर भाषाक वर्तमान अवस्थाक चर्चा सुनलासँ इच्छा होइछ जे कतहु मूँह नुकाली - फेर ओकरा बाहर नहिँ करी । मैथिलीक प्रति पक्षपात अपनेलोकनिमेसँ कतोक व्यक्तिकेँ नाराज कय देलक अछि । से हमर दुर्भाग्य थीक । मैथिली भाषा कोनो खास व्यक्तिक सम्पत्ति नहिँ -ओ तँ सम्पूर्ण मिथिलाक प्राणस्वरूप थीक तैं यदि ओ चले जायत तँ फेरि बचते की । अपना घर बैसल जतेक मनमौजी पोलाब खाइत रही परन्तु साहित्यविहीन जातिक जे अपमान अन्यत्र होइत छैक से कियो अपमानिते व्यक्ति बुझि सकैत अछि । हम प्रश्न करैत छी जे युवक-संघक हेतु मातृभाषाक उद्गार करबासँ बढ़ि कय की आन कोनो पुण्य कार्य भेटि सकैत अछि ? इत्यलम ।। ---लेखक :- जयदेव मिश्र (सन्दर्भ : प्रभात,वर्ष -01, अंक- 10 अक्टूबर 1933) संपादकीय सूचना-एहि सिरीजक पुरान क्रम एहि लिंकपर जा कऽ पढ़ि सकैत छी- मैथिली साहित्यमे तारानाथ झाक एवं हुनक परिवारक योगदान-1 मैथिली साहित्यमे तारानाथ झाक एवं हुनक परिवारक योगदान-2 मैथिली साहित्यमे तारानाथ झाक एवं हुनक परिवारक योगदान-3 मैथिली साहित्यमे तारानाथ झाक एवं हुनक परिवारक योगदान-4 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.३.कुमार मनोज कश्यप- लघुकथा- साँझक भोर कुमार मनोज कश्यप लघुकथा- साँझक भोर घर मे आब अन्नक एकोटा दाना नहिं बाँचल छलै। पैंचो-उधार की आब केकरो केयो दैत छै? एकरा देबो करतै तs कोन आश पर? कतबो दँत-खिष्टी केलकै, पैरो-दाढ़ी पकड़लकै तैयो बनिया एको कनमा उधार दै लै तैयार नहिं भेलै। बेटा तs पूछ-अछारी कि फोनो-फान बन्न कs देने छै। तैयो आशक मारल पछिले महिना तs सूदि पर पाई लs कs बेटा-पुतोहू लsग गेल छलै। ओहू ठाम सs निराशे हाथ लगलै ...... ओकरो सभक अपने दुःखनामा! शरीर मे बुत्ता आब छै ने जे कोनो मेहनतो-मजूरी कs सकत। जखन जवान-जुहान के काज नै भेटै छै तखन एकरा सभके के पुछतै? तखन आब कोन उपाय? प्राण तs एतेक जल्दी निकलियो नहिं जाईत छै! ओ उठल आ अलगनी पर सs कुर्ता उतारि ओकरा सुलटा कs पहिरय लागल। 'मर्र! कहाँ बिदा भs गेलै एक्के बेर?' कनियाँ अकचकाईत पुछलकै । 'देखै छियै कोनो जोगार। खाली पानि सs पेटक भुख कते दिन मानतै?' भहरल स्वर मे बजैत ओ घर सs बहरा गेल। केयो समाद देलकै - बुधना के चौक पर सड़क पार करैत एकटा कार बला ठोकर मारि देलकै। लोक उठा-पुठा कs हॉस्पिटल लs गेलैयै। कनियाँ हाकरोस करैत, छाती पिटैत, खसैत-पड़ैत कहुना हॉस्पिटल पहुँचलै । भोर मे जा कs ओकरा होश एलै। आँखिक सामने कनियाँ के देख कs स्फुट स्वर मे मुँह सs बहरेलै -'ओ गाड़ी बला किछु देबो केलकौ कि ओहिना पड़ा गेलै???' -कुमार मनोज कश्यप, सम्प्रति: भारत सरकार के उप-सचिव, संपर्क: सी-11, टावर-4, टाइप-5, किदवई नगर पूर्व (दिल्ली हाट के सामने), नई दिल्ली-110023 , # 9810811850 , ईमेल: writetokmanoj@gmail.com अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.४.संदीप तोमर- ४ टा बीहनि कथा संदीप तोमर ४ टा बीहनि कथा [स लघुकथा सम्मान -2025 सं सम्मानित संदीप तोमर जीक बीहनि कथा]

1- कद्रदान ------------- " देखियौ! इ पत्रिका हमरा छपलक अछि।"- पत्रिका देखबैत प्रेमिका बाजल " इएह त' अनसोहांत छै।सब संपादक अहांकें छापि रहलाह ।" काश! ओ अहांक रचनाकें छपितथि।- प्रेमी मुस्कियाइत कहि गेलाह। 2- खबरदार ----------- दबंग, ओकरा घर सं घिसिया अनलक।ओकर सांस भाथी जकां चलि रहल छलै।दोसर दबंग ओकर कालर पकड़ि कहलक- दबंगक मोहल्ला मे रहि तों मजहबक गीत गबै छें।तोरा मृत्युक डर नै छौ ? ओ दुब्बर गातक लोक दुन्ना शक्ति सं बाजि उठल-" अहां हमरा जान सं मारि दियय।मुदा खबरदार जे हमर मजहबक खिलाफ एको शब्द बजलौं।"

3- सपना """"""""" ओ सूतल छल ,ओकरा हम नै जगेलौं- दीवाना अछि कोनो प्रेयसीक यादमे सपना देखि रहल हएत। ओ जहन जागल तं कहलक- जं हमरा सूतल सं जगा दैतौं त' आइ ओ हमर दिल तोड़िकैं नै जाइत।

4- जवाबी मैल """""""""""""""'" आइ एकटा स्त्रीक मेल आयल।ताहिमै ओ अपन अर्धनग्न,नग्न फोटो पठौने छल। हम जवाबी मेल लिखलौं- हमर माए हमरा जन्म दैत मरि गैल।जं जीबैत रहैत त' हमरा अही ह्तन सं दूध पीयबैत।

[सब रचनाक मैथिली भाषांतरण- मुन्ना जी] अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.५.डा. आभा झा- कवयित्रीक आँजुरसॅं खसैत विचारक बिन्दु डा. आभा झा कवयित्रीक आँजुरसॅं खसैत विचारक बिन्दु पूनम झा सुधा विगत किछु वर्षसॅं कविता लिखि रहल छथि।हुनक पहिल पोथी चारि वर्ष पूर्व प्रकाशित भेल छलनि।दिल्लिए धरि नहि, अपितु दरभंगा- मधुबनीमे सेहो यत्र- तत्र मंच-मचान पर हुनक उपस्थिति देखल जाइत अछि।कोनहु महिलाक लेखन स्वयंमे एकटा पैघ काज होइत छैक,कारण ओकरा लेल घरक आ सामाजिक दायित्व निमाहब प्रथम कर्त्तव्य होइत छैक।ओहि दायित्वक संग ओ अपन विश्रामक समय कतरि पढ़बा ,गुनबा आ लिखबाक समय निकालैत अछि। महिला लेखनक संग एकटा आर पैघ चुनौती रहिते छैक जे ओकर लेखनक निरपेक्ष नहि अपितु सापेक्ष समीक्षा होइत छैक-स्त्रीलेखनक विषय-वस्तु, ट्रीटमेंट आ प्रस्तुति सभ ठाम प्रत्यक्षतः त� नहि,मुदा परोक्षत: जजमेंटल दृष्टि रहैत छैक।हमर कहबाक तात्पर्य ई नहि जे ई जजमेंटल दृष्टि पुरुषे टाक रहैत छनि,स्त्रियोक भ� सकैछ, कारण हमर सभक अपब्रिंगिगमे (पालन-पोषण, शिक्षा-दीक्षा वा संस्कारमे) सभतरि बड़ मेंही ढंगसॅं तुलनात्मकता गूहल रहैत अछि। अस्तु,एहि सभ विपरीत स्थितिक बादो आजुक समयमे बहुत रास महिला मजगूतीसॅं कलम पकड़लनि अछि,ई हर्षक विषय अछि। मात्र कलमे नहि पकड़लनि अछि, स्त्री जीवनक वास्तविकताक संग देश-विदेशमे घटि रहल घटनाक्रम पर गौरसॅं नजरि दैत ओहि सभकेॅं लेखनक वर्ण्य-विषय सेहो बनौलनि अछि।ओ एहिमे कतेक परिपक्वताक संग लिखि रहल छथि,कतेक नहि,ई फराक विषय अछि आ एहि पर विचार करबा लेल बहुत रास विद्वान् समीक्षक छथि । हॅं, एतबा धरि हम अवश्य कहय चाहब कि लेखनक गंभीरता वा अगंभीरता लैंगिक परिधिमे बन्हायल नहि अछि। जहिना बहुत रास लेखक नीक जकाॅं लेखकीय दायित्वक निर्वहण कए रहल छथि,तहिना लेखिकागण सेहो।आ जहिना बहुत रास लेखकक लेखन काॅंच छनि,ओ क्रमशः सिखबाक दिशामे बढ़ि रहल छथि तहिना लेखिकाक सेहो। हॅं,एहि क्रममे ई कहब सेहो आवश्यक जे जे केओ लेखक (स्त्री-पुरुष दुहू) महत्वाकांक्षा आ तात्कालिक प्रसिद्धिक बिहाड़िमे उधियाक� अपन क्षमता नहि बिसरलथि,हुनक लेखनक स्तर धीरे-धीरे मॅंजा रहल छनि आ जनिका लेल अपन सामर्थ्यक आकलनो धरि दुरूह छनि ओ अपन बनाओल छोट सनक घेरामे गोल गोल घुमैत समय आ कागदक दुरुपयोग कए रहल छथि। दिल्ली कार्यक्षेत्र अछि आ एम्हर पाॅंच-छौ बर्खसॅं मैथिली साहित्यिक कार्यक्रममे अयबा- जयबाक सुयोग भेटैत रहल अछि।ताहि क्रममे पूनम जीसॅं  भेंट- घाॅंट  होइत रहल अछि आ हुनक गीत सुनबाक अवसर सेहो भेटैत रहल अछि।सत्य पूछू त� हम हुनका पारम्परिक गीत लेखिकाक रूपमे जनैत- बुझैत रहलियनि आ हुनक प्रस्तुतिक राग- भास सेहो एहि अवधारणाकेॅं पुष्ट करैत रहल  अछि। मुदा ओएह पूनम झा जखन अपन तेसर पोथी �आंजुरमे अमृत� धरि अबै छथि त� बहुत रास एहन विषय उठबैत छथि जे एकटा जागरूक कविकेॅं उठयबाके चाही। हॅं अवश्य विषयोपस्थापनक संग ओकर समतुल्य अभिव्यक्तिक ऊपर काज करब सेहो जरूरी होइत छैक जाहिसॅं पाठकक तादात्म्य होइत चलै आ ओ अनायासे बाजि उठय-वाह! त� आउ एकटा सामान्य पाठक जकाॅं हमहूॅं एहि पोथी पर नजरि दैत छी आ तत्पश्चात् जे जतबा बुझबामे अबै अछि, संक्षेपमे सोझाॅं रखैत छी- पाठककेॅं आनन्दित करबाक संग एकटा कविक काज ओकरा प्रेरित करब सेहो होइत छैक।त� एहि क्रममे हुनक �अमृत संतान� नामक कविता देखल जा सकैछ - सागरक तटपर बैसल भरत पुत्र कहू कियैक कनैत छी कियैक नहि स्मरण अबैत अछि गीताक कृष्ण कर्म-योग महामंत्र कियैक बिसरि जाइत छी अहाँ हे सगर पुत्र भारतमे अहाँ आनि सकैत छी सुरसरि धार कऽ सकैत छी नव सृष्टि तैयार� एहि कवितामे आत्मविश्वास बढ़ैबाक आ प्रेरित करबाक सामर्थ्य छै। वर्तमान राजनीतिक कदाचारक बीच आशावादक संदेश दैत ई कविता मोन मोहैत  छै- मुदा फेर बनाओत ओ मधुक संग्रहालय आ ई अनवरत  चलैत  अयलैए आ चलैत रहत युग युग धरि मनुक्ख अपन घर भरत मधुमाछी फेर बनाओत सुंदर संग्रहालय परिस्थितिक विषमतासॅं हारि नहि मानबाक चाही, अपन कर्त्तव्य करबाक चाही,समाज लेल आवश्यक मधु संग्रहमे व्यस्त रहबाक चाही, निराशाक अन्हारकेॅं अपन पुरुषार्थसॅं दूर करबा लेल कटिबद्ध होयबाक चाही। यैह आशावाद हिनक �जागल हमर गाम� कवितामे  सेहो देखाइत अछि - जे बगुला लगौने अछि घात घोरबाक लेल जहर तकरा भगाएब अपन शहर हम बनाएब चानन सन शहर पोखरिमे फुलाएत कमल विश्वासक शीतल बहत बसात थिड़कत बसंतक पैर कियैक तँ जागि गेल अछि हमर गाम। पूनम जी दिल्लीमे रहैत छथि आ कानूनक कवचमे विकासक विकृत रूपक आम जनता पर पड़ैत दुष्प्रभावक साक्षी बनैत रहैत छथि।ओ अनधिकृत कालोनीमे रहनिहारक पीड़ा आ विवशता देखैत रहल छथि।ओएह व्यथा हिनक एहि कवितांशमे देखल जा सकैछ - नव निर्माणक दुन्दुभी बजाक� जखन लाल रंगक झंडी लगा देल जाइत छैक आम बाटपर तँ चौंकि जाइत छैक लोक नर-पिशाचक आगमनक लागय लगैत छैक आशंका जकर संकेत छैक दानवाकार बुलडोजर जे क्षणहिमे ध्वस्त कर दैत छैक गरीब-दुखियाक घर अपन रोलरसँ कऽ दैत छैक समतल एहि संग्रहक भूमिका लिखैत बहुचर्चित परिपक्व कवि मैथिल प्रशान्त एहि संग्रहमे भावनाक चरणोदकक निर्मल धार देखैत आ मैथिलीक निस्तुकी शब्दक प्रयोग देखैत पुलकित होइत छथि।वास्तवमे भाषाक मौलिकताक क्षरण आ बाहरी शब्दक अनावश्यक घुसपैठ एकटा चिन्ताजनक स्थिति छैक। गामघरक  माटि- पानिसॅं जुड़ल लोक भाषाई मौलिकताक रक्षा आ तकर बहुल व्यावहारिक प्रयोग सॅं एहि चिंताक समाधान करबा लेल प्रयत्नशील छथि,ई हर्षक गप।मुदा प्रवासक असरि त� पड़िए जाइत छैक आ तेॅं चिमटा, मनुहार,तंग गली,बेमौत,रौशन आदि सन शब्द अहू संग्रहमे अहाॅंकेॅं भेटत। एहि संग्रहमे बहुत रास कवितामे नशाखोरी, पर्यावरण प्रदूषण, दायित्वविहीन संतान,नौड़ी रूपमे उपेक्षित बचपन, टैलेंट हंटक उन्मादमे छिनाइत बचपन,परिस्थितिवश देह-व्यापार करैत बालिका आदि अनेक सामयिक विषय उठाओल गेल अछि जे कवयित्रीक जागृत सामाजिक चेतनाक प्रमाण अछि। अभिव्यक्तिमे कनेक आओर मेहनति केने संग्रह स्तरीय बनि सकैत छलै।दू चारि टा उदाहरण सोझाॅं रखैत छी- �मेल मिलाप� शीर्षक कवितामे विरोधाभासी वाक्य- �बस एतबे करू,दयाक पात्र बनू,दिवाक स्वप्न बनू� ? तहिना �अजेय योद्धा� शीर्षक कवितामे तीन बरखक शहीदक बेटाक मुंहसॅं निकलल ई शब्द अव्यावहारिक लगैत छै- हम हराए सकैत छी चाहे जे कारण होअए वीर सैनिकक संग हम प्रण लैत छी एहि आंखिक नोरक तहिना भेंटघांट कवितामे �अनाथालयमे पड़ल माय� शब्दक चयन पर मेहनति करबाक खगता छैक। हमरा जनैत एतय वृद्धाश्रम शब्दक प्रयोग समुचित होयत।एतय दस बरखक बाद भेंट लेल आयल बेटा लेल ममत्व आ दूर ठाढ़ि पुतहु लेल नरभक्षी शेरनीक उपमा कनेक असहज करैत छैक। तहिना एक ठाम हमरा �परख� शब्दक अर्थ नहि लागल - �दाम्पत्य-सूत्रमे बन्हलापर जखन परख लागि जाइत छैक दानवरूपी� अस्तु, एकटा पाठकक दृष्टि कतौ कतौ अटकै छै ई तकर किछु उदाहरण छल ।एहि संग्रहमे एकाओन टा कविता अछि,जाहिमे स्त्रीक अस्मिताक गपक संग सामाजिक सौहार्दक गप अछि,प्रेमक मधुर सरगमक संग वैचारिक विरोधक कोलाहल अछि,गाम- घरक नोस्टाल्जिया अछि त� भौतिक विकासक  जड़िमे विद्यमान प्रकृतिक आहि सेहो। हम एहि संग्रहमे समाविष्ट विषय सभक प्रशंसा करैत छी आ कवयित्रीक कलमक मजगूतीक कामना सेहो ।व्यक्तिगत रूपसॅं जॅं पूछी त� कवयित्रीक लेखनक विशिष्ट क्षेत्र प्रेम आ तद्विषयक गीत लेखन हमरा बेशी पसिन्न अछि। एहि संग्रह लेल बहुत बहुत बधाई। आभा झा 10.5.2025 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.६.प्रमोद झा 'गोकुल'- हिजड़ा प्रमोद झा 'गोकुल' हिजड़ा

गाड़ी हुलकल जारहल छलै आ नितीश अपन उपरका बर्थ पर हिचकोला खाइत आँखि मुनने सूतल छलाह ।तखने कोनो टीसन पर झटकाक सं गाड़ी रुकलै कि हुनक आँखि अकस्मात खुजि गेलैन ।एमहर ओमहर आँखि घुमाके देखलनि ते ककरो आबाजाही नै बुझेलैन ।मात्र दूटा किन्नर थपरी बजबतै भीतर प्रवेश केलकै से देखि ओ आरो गबदी मारि निचेष्ट जकाँ आँखि मूनि लेलैन। ओ दुनू किन्नर बोगी के दुन्नू कात सँ अपन चिरपरिचित अंदाज मे वसूली करय लागल ।सीटल साटल एकटा युवकक गाल के ऐँठैत ओ बाजलि-बड्ड सुन्नर लगै छेँ रे चिकना ! मोन ते होइये जे तोहर दुनू टमाटर सन गाल पर अपन ठोरक छाप छोड़ि दियौ !दही जेबी मे हाथ आ ला दस बीसगो रुपैया !ओ अपन हाथ बढ़बैत बाजलि ।युवक सेहो हरबरा के ओकर हाथ मे एकटा पचासक नोट थमा देलैन ।ढेर आशीर्वाद दैत ओ दोसर तेसर आ चारिम लग ऐहना अश्लील अंदाज मे बढ़ैत गेलि आ सब ओकर हाथ मे मुस्कियैत दस बीसक नोट थम्हबैत गेलै । ओ किन्नर नोट सब के बिलौजक अंदर ठुसैत मोहक अंदाज मे कने आर आगाँ बढ़लि तँ उपरका बर्थ पर गबदी मारने सूतल नितीश पर ओकर नजैर गेलै ।ओ सहैटके पहूँचलि ओकरा लग। पहिने हिला डोला के देखलक ते कोनो असैर नै ।अंततः ओ अपना पर उतैर गेल ।चारू भाग नजैर खिरौलक आ अपन बम्मा हाथ ओकर मार्मिक जगह पर त दैहना हाथे जोर से गाल ऐँठैत बाजलि-किछ देबो करबिहिन कि गबदीये मारने रहबेँ रे चिकना ?ओकर अभद्रता पर भरकैत नितीश खुब जोर सँ बजलाह- -भगै छेँ ऐठाँ से कि नै !!! -नै ���की क लेबेँ तोँ हमर ?पैहने हमर मामूली द दे! -नै देबौ !कहै छियौ चल जो नै ते ���कमा के नै खैल होइ छैन ! -हँ ते ठीक छै चल तोहीं राखि ले हमरा !झाड़ू पोछा से ल के खाना पीना तक सब काम क देबौ ,आ हे घरबाली से मोन उचाट भ जेतौ ते बिस्तरो के गरमा देबौ ! -बस्स���मूह नै लगा हमरा से ! हे ले हम एत्तै ऐगला टीसन पर उतैर जाइ छी !के मूह लगाबे तोरा सब से ? -कत्त?पैहने हम्मर द दे���एक हाथे गट्टा पकरि आ दोसर हाथे ओकर डाँर के अपना मे सटबैत बाजलिओ।ओकरा अपना से फराक करैत नितीश बजलाह- -हे ले दस रुपैया ����बेसर्मीक हद होइ छै !आखिर हिजरे छियें कि ने ! की कहलिही ���हिजड़ा����रे सुन ! जैह इस्सर तोरा आरू के बनौने छौ सैह हमरो आरू के बनौने छै ! फर्क एतबे जे प्रकृतिक देल सब वस्तु से तों आरू संपन छेँ आ हम आरू धूवा काया एक रं होइतो विपन! नर ने मादा ! हि��ज���ड़ा������समाज मे उपहास आ अपमानित भय गरलमय जीवन व्यतीत करैक लेल वाध्य! तों ठीके कहलेँ मुदा सुनिले-हमहूँ कागत कलम आ सिलेट पिन्सिल ल के गेल रहियै नाम लिखबैले इसकूल ।माहटर नै लिखलकै हमर नाम आ कहलकै"तों हिजड़ा छियें !ऐ माने आफद !!चल भाग यहाँ से !!!माइयो बाप नै राखि सकलै अपन घर मे ।एक दिन निकैल देलकै ओहो सब अपना घर से आ धकेल देलकै ऐ निर्लज पथ पर जीवन व्यतीत करैक लेल ।जँ सत पूछेँ तँ सबसे पैघ हिजड़ा तोँ आ तोहर समाज छौ!!बुझलीही�����एतबा कहैत ओकर आँखि भैर एलै आ कंठ अवरूध सेहो भ गेलै तेँ ऐ से आगाँ नै बाजि सकल ।गाड़ी मे बैसल सबहक दिस नोरैल आँखिये एक बेर देखलक आ फफकि फफकि कानय लागलि ।सब पसीन्जर अपन अपन मूड़ी खसा लेलक जेना वैह सब ऐ समाजक अपराधी हुए ।तखने गाड़ीक गति मन्द भय गेलैक।सैत कोनो टीसनआबि गेलै ।झटकाक सं गाड़ी रुकलै आ ओ भारी मोन सँ उतैर गेलि| -प्रमोद झा 'गोकुल', दीप,मधुवनी (विहार), फोन -9871779851 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.७.संतोष कुमार राय 'बटोही'- 'लव यू टू'[धारावाहिक डायरी] संतोष कुमार राय 'बटोही' 'लव यू टू'[धारावाहिक डायरी]

फरवरी, 2018

समदर्शी देल्ही पब्लिक स्कूल

मधेपुर सँ झंझारपुर आबि गेल छी। नवका इस्कूल छियैय। विद्यार्थी केँ दाखिला भऽ रहल छै। एस एन मिश्राजी डायरेक्टर भेलाह। दु सऐ विद्यार्थी भऽ गेल छन्हि तबो परयास मे मिश्राजी लागल छथि। जूही मैम, आभा मैम, अर्चना मैम आओर हम शिक्षक भेलहुँ अछि। हमरा टीचर-इन-चार्ज बनौल गेल अछि। ई आवासीय विद्यालय छियैय। तैं दुआरे अई विद्यालय मे 'फूल डे' आओर 'हाफ डे' होस्टल चलि रहल छै। पढ़ाई-लिखाई नीक चलि रहल छै तैं दुआरे विद्यार्थी केर दाखिला बढ़ि रहल छै। दाखिला शुल्क पैंसठ सऐ टाका राखल गेल छै। मधेपुर मे टीचर-इन-चार्ज रहल छलहुँ। तैं झंझारपुर मे सेहो टीचर-इन-चार्ज बनौल गेलहुँ। इस्कूल नीक सँ चलऽ लागल। दू सै विद्यार्थी पहिल बरख मे भऽ गेलै। बीस टा विद्यार्थी फूलडे हॉस्टल मे रहऽ लागल। आमदनी बढ़ि गेलै। हाफ डे मे सेहो विद्यार्थी रहैत छल। हॉस्टल मे खाना केर बेवस्था नीक छलै। झंझारपुर हाट सँ तरकारी आबैत छल। गुफ़रान, चंद्रकिशोर आओर बहुत राश विद्यार्थी पढ़वा मे नीक छल। विजय कुमार जी गार्ड छलाथि। काज करबा मे नीक छलाथि, परञ्च जाति-पाँति केर कट्टर समर्थक छलाथि। हमर मातहत रहैतो सोलकन्ह मानि कऽ हमर विरोध करऽ लगलाह। अंत मे हुनका इस्कूल सँ हटाबऽ पड़ल। पहिल बेर जाति-पाँति लऽकऽ किनको सँ मुठभेर भेल छल। ब्राह्मणवादी सोच सँ रगड़ा भेल। हम हुनका कहलियैन्ह जे कर्म प्रधान होएत छै। बाद मे निकाल लाक बादो हिनकर गुमान कम नहि भेलैन्ह।

झंझारपुर में 2018 सँ 2021 धरि रहलहुँ । एकटा अपन छवि बनल। जखन स्कूल मोहना वाला रोड मे चलि गेलै, तँ ओतऽ ब्राह्मण लॉबी केँ बीचि फँसि गेलहुँ। गप्प इ जेब किछु उफैंट विद्यार्थी सभ कक्षा मे पढ़ि सँ बेसी कूद-फाँद करैत छल। विषय हिन्दी आओर संस्कृत पढ़बै लेल भेटल छल। सस्कृत आओर हिन्दी मे केकरो रूचि नहि छेलन्हि। संस्कृत अनिवार्य नहि छेलै । हिन्दी मे ओ सभ बुझैत छल जे पास तँ भय्ये जायब। ताहि लऽकऽ ओ सभ क्लास मे हल्ला- हुच्च करैत छल। यानी डिस्टर्ब करैत छल। नवम आओर दशम क्लास मे ढीठ छौरा-छौरी सभ पढ़वाक लेल राजी नहि होयत छल। किछु टीचर विद्यार्थी केँ मार्फत डिस्टर्ब कराबैत छल जे कहुना हम स्कूल छोड़िकऽ भागि जाउ। ई समस्या हम डारेक्टर सर लग रखलियैन्ह, परञ्च हुनको रिस्पाउंस पॉजिटीव नहि देखि कऽ हम स्कूल छोड़वाक विचार केलहुँ । तनख्वाह तीन महीना सँ नहि देने छल। एक बेर तँ नहि तीन बेर मे टाका देलैथ। किछु हिसाब मे सेहो गड़बड़ी केलैथ। पिछलका टाका नहि देलैथ। संतोख कऽ लेलहुँ हम। प्राइवेट विद्यालय केर इएहा किरतानी होयत छै। विद्यार्थी कियाक क्लास मे डिस्टर्ब करैत छल उ मालूम भेल। बोर्ड परीक्षा मे हरेक विद्यार्थी सँ फॉर्म भरवाक समय पाँच हजार टाका परीक्षा मे सेंटर पर चोर नुकबा दरवाजा सँ कापी लिखवाक आओर बेसी नंबर लेवाक लेल जायत छलैक। ई गप्प विद्यार्थी केँ बुझल छलै, तैं ओ विद्यार्थी पढ़वा मे क्लास मे रूचि नहि लैत छल। हम तँ अवाक् छलहुँ ई गप्प बुझिकऽ । भारत मे कोन कोन इएह खेल होयत छै। सभ किछु मे खड्यंत्र. होयत छै।

हमरा स्कूल छोड़लाक बाद आओर तीन-चारिटा मास्टर साहब सेहो विद्यालय त्यागि देलथिहिन । विद्यालय चरमरा गेलै । डायरेक्टर सँ ओ प्रिंसिपल भ गेलाह । स्कूल किनको हाथे बेच लेलाह । स्कूल हुनका हाथ सँ बेहाथ भऽ गेलै । जेहेन करनी तेहेन भरनी भेलैन्ह । हम जखन स्कूल केँ चलाबैत छलहुँ , तँ हुनका मोट टाका अबैत छलैन्ह । आब हुनका स्कूल सँ हाथ धोअऽ पड़लैन्ह । अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २.८.प्रणव कुमार झा- भारत मे क्रिटिकल केयर कार्यबल: एनबीईएमएस के भूमिका आ भविष्य प्रणव कुमार झा भारत मे क्रिटिकल केयर कार्यबल: एनबीईएमएस के भूमिका आ भविष्य भारत में हालफिलहाल  के वर्ष में गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) सुविधा आ क्रिटिकल केयर बेड के संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि भेल अछि। ई प्रक्रिया निरंतर चलि रहल अछि। उच्च गुणवत्ता वला गहन चिकित्सा, कुशल इंटेन्सिविस्ट, नर्स, आ सहायक कर्मचारी पर निर्भर करैत अछि। आब आईसीयू बेड के भौतिक विस्तारक संग क्रिटिकल केयर कार्यबल के तेजी से विकास सेहो महत्वपूर्ण बनि गेल अछि। भारत मे रोगी के बोझ के देखैत, नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन्स इन मेडिकल साइन्सेस (एनबीईएमएस) चिकित्सा के क्षेत्र में विशेषज्ञ प्रशिक्षण, जेना कि स्किल एन्हान्समेंट फेलोशिप (एफएनबी), के लेल सतत प्रयास कऽ रहल अछि। दुर्भाग्य संऽ आजुक सामय मे विश्व के सबसे बेसी प्रदूषित शहरक लिस्ट मे भारतक शहर सब टॉप पोजीशन पर लाइन से ठाढ़ भेल अछि, एत्त तक की उत्तर भारत के गाम सब सेहो वायु आ जल प्रदूषण के विषाक्तता से बांचल नहि रहल अछि। हद संऽ बेसी बढ़ल वायु आ जल प्रदूषण के कारण श्वसन संबंधी रोग भारत में प्रमुख स्वास्थ्य खतरा मे से एकटा बानि गेल अछि । ताहि लेल श्वसन चिकित्सा आ संबंधित विशेषज्ञता (जेना, तपेदिक आ छाती रोग) क्रिटिकल केयर प्रशिक्षण के लेल एकटा बृहद पूल बनबैत अछि। समूचा देश में दर्जनों मेडिकल कॉलेज श्वसन चिकित्सा में एमडी अथवा डिप्लोमा कार्यक्रम प्रदान करैत अछि, जे प्रत्येक साल सैकड़ों छाती रोग विशेषज्ञ पैदा करैत अछि (उदाहरण लेल, 2024 में �ट्यूबरकुलोसिस एंड चेस्ट डिजीज� में 710 पोस्ट-ग्रेजुएट सीट सूचीबद्ध छल)। अस्थमा, सीओपीडी, टीबी आ अन्य श्वसन रोग के उच्च प्रसार ई बात के प्रतिबिम्बित करैत अछि। श्वसन आ छाती चिकित्सा के बहुत रास स्नातकोत्तर विशेषज्ञ, संगहि एनेस्थेसियोलॉजी आ आंतरिक चिकित्सा के स्नातकोत्तर, प्रायः आईसीयू में काज करैत छथि अथवा क्रिटिकल केयर के क्षेत्र में आगू विशिष्ट प्रशिक्षण लैत छथि। मुदा हाल धरि, ई पूल के औपचारिक रूप से प्रशिक्षित इंटेन्सिविस्ट में परिवर्तित करबाक लेल कोनो समर्पित क्रिटिकल केयर सुपर-स्पेशलिटी पाइपलाइन नहि छल। एनबीईएमएस ई रिक्तता के भरबाक लेल कदम उठौने अछि। 1.46 अरब जनसंख्या लेल सुलभ, गुणवत्तापूर्ण क्रिटिकल केयर सुनिश्चित करबाक लेल आ की की जरूरत अछि एकरा लेल, विशेष रूप से बृहद कॉरपोरेट अस्पताल आ विशेषता केंद्र, के डीएनबी क्रिटिकल केयर के प्रशिक्षण स्थल के रूप में चिन्हित कय मान्यता प्रदान कैल जा रहल अछि। एनबीईएमएस भारत में क्रिटिकल केयर प्रशिक्षण के क्षेत्र में एकटा महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहल अछि। मेडिकल काउन्सिल ऑफ इंडिया (जे आब एनएमसी के रूप में जानल जाइत अछि) 2010-2012 में क्रिटिकल केयर मेडिसिन (सीसीएम) के एकटा अलग सुपर-स्पेशलिटी के रूप में मान्यता देने छल, मुदा सरकारी मेडिकल कॉलेज में डीएम क्रिटिकल केयर सीट के संख्या सीमित रहल। एनबीईएमएस डीआरएनबी (डोक्टोरेट ऑफ नेशनल बोर्ड) कार्यक्रम के माध्यम से क्रिटिकल केयर प्रशिक्षण के व्यापक स्तर पर विस्तार कऽ रहल अछि। वर्तमान में, लगभग 90% क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ प्रशिक्षण सीट एनबीईएमएस के अंतर्गत अछि, जखनकि पारंपरिक विश्वविद्यालय डीएम कार्यक्रम के तहत केवल एकटा छोट हिस्सा तैयार भऽ रहल अछि। ई स्पष्ट रूप से देखबा मे आबैत अछि कि एनबीईएमएस भारत में लगभग बहुतायत क्रिटिकल केयर प्रशिक्षण के नेतृत्व कऽ रहल अछि। विशेष रूप से, एनबीईएमएस के बहुत रास प्रशिक्षण कार्यक्रम निजी अस्पताल आ समर्पित क्रिटिकल केयर केंद्र में आधारित अछि। अन्य विशेषज्ञता जे प्रायः सरकारी मेडिकल कॉलेज में पढ़ायल जाइत अछि के उलट  क्रिटिकल केयर प्रशिक्षण में निजी क्षेत्र में तेजी से विस्तार भेल अछि। एनबीईएमएस निजी क्षेत्र के सक्षम आईसीयू के 3-वर्षीय डीएनबी क्रिटिकल केयर रेजिडेंसी चलाबै लेल मान्यता दऽ रहल अछि। डीआरएनबी क्रिटिकल केयर मेडिसिन के लेल पात्रता में जनरल मेडिसिन, पेडियाट्रिक्स, श्वसन चिकित्सा, एनेस्थेसिया, आ इमरजेंसी मेडिसिन में एमडी/डीएनबी शामिल अछि। वर्तमान में, 211 अस्पताल में 551 डीआरएनबी सीसीएम सीट एनबीईएमएस द्वारा मान्यता प्राप्त अछि। अगला कदम इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी में एफएनबी आ डीआरएनबी पल्मोनरी मेडिसिन के पाठ्यक्रम शुरू करब अछि। निजी क्रिटिकल केयर केंद्र के सहभागिता सऽ ट्रेनी के उच्च-तीव्रता बला आईसीयू, आधुनिक उपकरण, आ रोगी के उच्च केस लोड के अनुभव प्राप्त भऽ रहल अछि। कुल मिला कऽ कहल जा सकय अछि जे भारत में अखन 10 मे से 9 नव प्रशिक्षित इंटेन्सिविस्ट  एनबीईएमएस कार्यक्रम के उत्पाद अछि। ई भारत के विशेषज्ञ प्रशिक्षण के आवश्यकता के समाधान में एनबीईएमएस के महत्वपूर्ण योगदान के प्रमाण अछि। कोविड-19 महामारी भारत के लेल एकटा कठिन परीक्षा के समय छल, जे क्रिटिकल केयर संसाधन आ विशेषज्ञ जनशक्ति के तीव्र कमी के पोल खोलि सभके सामने आनलक। ई संकट आपदा मे अवसर के रूप मे सरकार, एनबीईएमएस, पेशेवर सोसाइटी, आ निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाता के बीच सहयोग के उत्प्रेरक बनल छल। एनबीईएमएस आ निजी अस्पताल एकटा रिकॉर्ड समय में विशेषज्ञ के प्रशिक्षण आ तैनाती के विस्तारक लेल संयुक्त रूप से काज कएलक। उदाहरण के लेल, बहुत रास निजी अस्पताल कोविड निदान लेल समर्पित क्रिटिकल केयर केंद्र के रूप में शामिल कएल गेल छल। ऐ अस्पताल में से बहुत रास पहिनेहे से एनबीईएमएस प्रशिक्षण कार्यक्रम के आयोजन करैत छल, जाहि सऽ वरिष्ठ रेजिडेंट आ हाल में योग्य डीएनबी इंटेन्सिविस्ट महामारी के पीक के दौरान अग्रिम पंक्ति के कार्यबल बनि काज केने छल। महामारी के दौरान किछू नवाचारपूर्ण स्टॉपगैप प्रशिक्षणक उपाय सेहो शुरू कएल गेल छल। औपचारिक रूप से प्रशिक्षित इंटेन्सिविस्ट के सीमित उपलब्धता के देखैत, किछू राज्य गैर-आईसीयू डॉक्टर के अपस्किलिंग शुरू कएने छल। उदाहरण के लेल, केरल में 300 से बेसी गैर-आईसीयू डॉक्टर आ 180 नर्स के संकट के दौरान आईसीयू में कर्मचारी के रूप में मदद करबाक लेल संक्षिप्त क्रिटिकल केयर प्रशिक्षण देल गेल छल। तहिना, स्वास्थ्य मंत्रालय आ एम्स ऑनलाइन क्रैश कोर्स शुरू कएलक, जे कोनो इच्छुक डॉक्टर के लेल आईसीयू प्रबंधन पर केंद्रित छल। ई प्रयास, यद्यपि पूर्ण विशेषज्ञ प्रशिक्षण के विकल्प नहि छल, तथापि क्षेत्र में इंटेन्सिविस्ट के अभाव में क्रिटिकल केयर के विस्तार के लेल महत्वपूर्ण छल। ई लचीला, स्तरीय प्रशिक्षण मॉडल भविष्य के आवश्यकता के लेल संस्थागत कएल जा सकैत अछि। निजी क्षेत्र के सहभागिता अन्य तरीका से अपरिहार्य साबित भेल। भारत में अधिकांश स्वास्थ्य सेवा (65%-75% से अधिक) निजी अस्पताल प्रदान करैत अछि, आ कोविड के पहिल लहर के समय अधिकांश मौजूदा आईसीयू बुनियादी ढांचा ओकरे लग छल। पहिल लहर में, किछु राज्य निजी अस्पताल के एकीकरण में संघर्ष कएलक, मुदा किछु अन्य राज्य ऐ मे सफल भेल। उदाहरण के लेल, ओडिशा राज्य निजी अस्पताल के साथ साझेदारी में 17 कोविड-समर्पित अस्पताल स्थापित कएलक, जे सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर आधारित छल। सरकार ई अस्पताल के भुगतान कएलक ताकि आईसीयू बेड कोनो बेगरता बाला रोगी के लेल उपलब्ध होय, चाहे फीस जे होय। ई पीपीपी मॉडल क्रिटिकल केयर क्षमता के तेजी से वृद्धि कएलक। कोविड-19 से मुख्य सबक ई अछि कि सभटा उपलब्ध संसाधन के ओप्टिमम उपयोग होय विशेष रूप से सार्वजनिक-निजी सहयोग के माध्यम संऽ। ई क्रिटिकल केयर सेवा के विस्तार के गति के बहुत तेज कऽ सकैत अछि। गुणवत्ता आ पहुँच सुनिश्चित करब में चुनौती निजी आ सार्वजनिक संस्थान के माध्यम से तेजी से विस्तार पर गुणवत्ता आ निगरानी के एकरूपता बनौने रखनाइ एकटा चुनौती अछि। जेना-जेना भारत एनबीईएमएस आ अन्य मार्ग से बेसी इंटेन्सिविस्ट पैदा करत, तहिना सुनिश्चित करब जरूरी अछि कि ई विशेषज्ञ सभ उच्च मानक के पूर्ण करैत छथि। गुणवत्ता आ सुलभ क्रिटिकल केयर पर निरंतर ध्यान देबाक आवश्यकता अछि। मान्यता आ निगरानी: एनबीईएमएस-मान्यता प्राप्त अस्पताल के विविध समूह में प्रशिक्षण गुणवत्ता के मानकीकरण लेल मजबूत निगरानी तंत्र के आवश्यकता अछि। एनबीईएमएस लऽग एकटा पाठ्यक्रम आ मान्यता मानदंड अछि, मुदा प्रत्येक प्रशिक्षण केंद्र के पर्याप्त केस एक्सपोजर, संकाय, आ सुविधा प्रदान करब सुनिश्चित करबाक लेल निरंतर निगरानी आवश्यक अछि। समान रूप से, देश भरि के आईसीयू (सार्वजनिक आ निजी अस्पताल दूनू में) सामान्य गुणवत्ता मानक आ ऑडिट के अधीन होएबाक चाही। प्रशिक्षण मानक:  दूरस्थ निजी अस्पताल में क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ प्रीमियर संस्थान में प्रशिक्षित विशेषज्ञ जकाँ सक्षम होबाक चाही। एनबीईएमएस द्वारा विकसित मानकीकृत पाठ्यक्रम आ परीक्षा प्रक्रिया मददगार अछि, मुदा एकरूप नैदानिक ​​एक्सपोजर के सेहो आवश्यकता अछि। उच्च-कौशल केंद्र में रोटेशन, सिमुलेशन-आधारित प्रशिक्षण, संकाय विकास कार्यक्रम आदि प्रशिक्षण के एकरूप आ गुणवत्तापूर्ण बनेबा मे मदद कऽ सकैत अछि। विश्वविद्यालय (एमडी/डीएम) कार्यक्रम आ एनबीईएमएस कार्यक्रम के बीच संरेखण सुनिश्चित करबाक चाही कि सभ स्नातकोत्तर विशेषज्ञ समान योग्यता मानक के पूर्ण करैथ। निरंतर चिकित्सा शिक्षा आ पुनर्प्रमााणन सेहो कौशल के अद्यतन रखबा में मदद कऽ सकैत अछि। निवेश: विशेषज्ञक संख्या आ आईसीयू क्षमता बढ़ाबै लेल अधिकाधिक निवेश के आवश्यकता अछि। नेशनल हेल्थ मिशन के लक्ष्य सुलभ, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा के पहुँच सुधारब अछि, आ ऐ में स्पष्ट रूप से क्रिटिकल केयर शामिल होबाक चाही। एकरा प्रोत्साहन भेटबा के चाहि जे बेसी मेडिकल कॉलेज डीएम क्रिटिकल केयर कार्यक्रम शुरू करै आ राज्य अस्पताल प्रशिक्षित इंटेन्सिविस्ट के नियुक्त करै। नर्सिंग आ संबद्ध स्वास्थ्य प्रशिक्षण में निवेश सेहो समान रूप से महत्वपूर्ण अछि, कियाकि आईसीयू देखभाल एकटा टीम प्रयास से ही संभव अछि। सेवा के वितरण: अखन तक, अधिकांश उन्नत क्रिटिकल केयर सुविधा (आ प्रशिक्षित विशेषज्ञ) शहरी केंद्र में केंद्रित अछि। शहरी-ग्रामीण अंतर के कम करब एकटा प्रमुख चुनौती अछि। एकरा लेल रचनात्मक समाधान, जेना कि विशेषज्ञ के उच्च-कौशल केंद्र में रोटेशन, टेली-आईसीयू नेटवर्क, आ मूल क्रिटिकल केयर प्रशिक्षण प्राप्त चिकित्सक द्वारा संचालित �स्टेप-डाउन� उच्च-निर्भरता इकाई के विकास, के आवश्यकता अछि। संयुक्त मान्यता कार्यक्रम:  एनबीईएमएस द्वारा 2023 में शुरू कएल गेल संयुक्त मान्यता कार्यक्रम के लग जिला स्तर पर प्रशिक्षित आ प्रशिक्षण के तहत विशेषज्ञ के उपलब्ध कराबै के बहुत संभावना अछि। ई चुनौती के समाधान लेल समन्वित नीति कार्रवाई के आवश्यकता अछि। प्रशिक्षण कार्यक्रम के तेजी से वृद्धि के साथ नियम के तालमेल राखब जरूरी अछि। भारत के क्रिटिकल केयर प्रशिक्षण कार्यक्रम, मुख्य रूप से एनबीईएमएस द्वारा संचालित, विशेषज्ञ चिकित्सा कार्यबल के निर्माण में उल्लेखनीय प्रगति कएल अछि। 1.46 अरब जनसंख्या के बढ़ैत आईसीयू सेवा के मांग के साथ, ई प्रयास नियमित रूप से उन्नत आ भारत के आवश्यकता के अनुरूप बनायल जा रहल अछि। 1.   निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी: निजी क्षेत्र के गतिशीलता आ क्षमता, जखन सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राथमिकता आ मानक द्वारा निर्देशित होय, तऽ क्रिटिकल केयर बुनियादी ढांचा आ मानव संसाधन में अंतर के कम करबा में मदद कऽ सकैत अछि। 2.  टेली-आईसीयू विस्तार: मेट्रो अस्पताल में टेली-आईसीयू हब छोट शहर के आईसीयू के सहयोग कऽ सकैत अछि। 3.  नर्सिंग प्रशिक्षण: नर्सिंग आ संबद्ध स्वास्थ्य प्रशिक्षण में निवेश बढ़ाबै के आवश्यकता अछि। योग्य विद्यार्थी सभ के सेहो करियर विकल्प के रूप मे ऐ क्षेत्र के अवसर के रूप मे देखबा के दरकार छैक। (विशेष जानकारी लेल पढु हमर ई लेख https://pranawjha.blogspot.com/2024/08/blog-post_14.html) 4.  जिला स्तर पर सुविधा: जिला अस्पताल में आईसीयू इकाई स्थापित करब आ रेफरल लिंकेज सुधारब जरूरी अछि। 5.  निरंतर निगरानी: मान्यता, संकाय योग्यता, आ परिणाम के आवधिक समीक्षा (जैसे, रोगी मृत्यु दर, आईसीयू में जटिलता दर) गुणवत्ता बनाए रखब में मदद कऽ सकैत अछि। एनबीईएमएस के नेतृत्व में भारत के क्रिटिकल केयर प्रशिक्षण कार्यक्रम एकटा मजबूत नींव प्रदान कऽ रहल अछि। गुणवत्ता आ मात्रा के संतुलन बना के राखब आ सुलभ, उच्च-गुणवत्ता क्रिटिकल केयर सुनिश्चित करबा लेल रणनीतिक समर्थन के आवश्यकता अछि। ई सुनिश्चित करत कि भारत के 1.46 अरब जनता लेल विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्र में, क्रिटिकल केयर सेवा तक पहुँच प्राप्त करब स्वस्थ भारत के निर्माण में एकटा महत्वपूर्ण कदम होयत। संदर्भ: 1.   NBEJMS, प्रो० मीनू बाजपेयी, वाइस-प्रेसिडेंट, एनबीईएमएस 2.  National Board of Examinations in Medical Sciences (NBEMS). �DrNB Critical Care Medicine Seats 2024.� उपलब्ध: [NBEMS Official Website]. 3.  Indian Society of Critical Care Medicine (ISCCM). �Guidelines for ICU Standards and Training.� उपलब्ध: [ISCCM Official Website]. 4.  Ministry of Health and Family Welfare, Government of India. �COVID-19 Response and Training Initiatives.� उपलब्ध: [MoHFW Official Website]. 5.  World Health Organization. �India�s Health Workforce: Challenges and Opportunities.� उपलब्ध: [WHO Official Website]. 6.  �Public-Private Partnerships in Healthcare: Lessons from COVID-19.� The Lancet, 2021. 7.  National Health Mission. �Framework for Affordable Healthcare.� उपलब्ध: [NHM Official Website]. -प्रणव कुमार झा, राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड, नई दिल्ली अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। पद्य ३.१.राम शंकर झा"मैथिल"- हृदय विधन अछि/ बियैन : (स्मृति शेष) ३.२.जगदानन्द झा मनु - बीसटा हाइकू ३.३.प्रणव कुमार झा- जगत आकार छथि मोहन ३.४.संतोष कुमार राय 'बटोही'- मीठगर कनिया ३.५.प्रमोद झा 'गोकुल'- जेना पाकल धान ३.१.राम शंकर झा"मैथिल"- हृदय विधन अछि/ बियैन : (स्मृति शेष) राम शंकर झा"मैथिल" हृदय विधन अछि/ बियैन : (स्मृति शेष) १ हृदय विधन अछि

हृदय विधन अछि..!

हअम विशेष छलहूँ

आब शेषसो रहब

शेषसो रहब कि नहिं

हृदय विधन अछि

खण्ड खण्ड कए

मारि मूंगरि मारि

मारि डेंगेया मारि

गतर गतर छिटकाअ

अपने सब समांग

कोना कहू कोना बाजू

जखन अपने पूत कपूत

हृदय विधन.....!

हअम माअ छि

सब किछु सहि लेब

मुदा करेजा फटैया

कियौ बज्जिका लेल

कियौ सूरजपुरिया

कियौ अंगीका लेल

सब हअमरे संतान

हृदय विधन....!!

डांर मे मजगुत नहिं

हिमालय सँ गंगा धरि

लाखों वर्षक चमकैत

सबहक जन्मौटि सँ

मरला कें बादो हमरे

माअ सन मिठ सोहनगर

हअम सबहक मैथिली

हअम सबजाना मैथिली

ह्रदय विधन अछि....

कतेक भोकारि खिजी

हअमर नेना-भुटका

छोटका मंझिला बड़का

कें आँखिक सोझा मे

दहा रहल भसिया रहल

हे हअमर सोन सन

मैथिल पूत आब कतेक

हृदय विधन अछि...!

शेषसो रहब कि नहिं

ह्रदय विधन अछि..!! २ बियैन : (स्मृति शेष)

आब कि देख रहल छि

कथि देख रहल छि...!

कियाक ऐना देख रहल छि

अन्हा कें नहिं देख रहल छि

मुदा अन्हाक तिरछी नजर

हअम देख रहल छि

अन्हाक केशक जुट्टी मे

लटकल ककबा..

ओह! धरफड़ इहो ककबा

आब कि देख रहल छि

कथि देख...!

एखनो नजर गरेने छि

आब कि देख रहल छि

अन्हाक कनपटी मे सटल

तरेगन सन लौकैत टिकुली

हे भगवती आब कि करियै

आय हमहूँ बतिहि भेलहूँ

एखनहुँ हमरे दिस टकुर टुकुर

आब कि देख रहल छि

कथि देख....!

अन्हाक आँखिक काजर

अन्हाक अधर-ओष्ठ लागल

रे दैव!आय कि सँ की भअ गेलै

अन्हा फुंसी बाजि रहल छि

आ कि हअमरा सँ परिहास

हअम फुंसी बाजब मुदा

गबाह बनल अछि

अन्हाक सम्मुखिन्....

आब कि देख रहल छि

कथि देख....!

अन्हाक ह्रदय सँ सटल

घरनिपा नुरीक छिंट

हे भगवती...

गोसौनिक सिराआगु आ

घर निपैत अन्हाक पदचापक

हअमरा आभास बुझना गेल

जेना मोरनी प्रणय निवेदनक

स्वीकार करबाक वज्रधर

सङ्ग मुरलीधर कें नेने

हमहूँ बेसुध भए भेलहूँ नटवर

एहि मे हअमर कोण दोख

आब कि देख रहल छि

कथि देख...!

अन्हाक कानक बाली

आब कानक बालीकें

कि भेल..

बाली ऐना झूली रहल

जेना जेठक दुपहरिया

अन्हाक नेहु नेहु बियैन

बाउ बाउ किनकर बाली

किनकर बियैन

आँखि फुजि गेल

चेहा क उठि बैसलहुँ

सिरमा राखल बियैन

मुदा आब स्मृतिक बियैन

जें रहि रहि शीतलहरिक

आत्मबोध..

सोंझा सिरा आगुक मोर

कखनो निहारी सिरा आगु

कखनो निहारी बियैन

आब कि देख रहल छि

कथि देख...!

ई बियैन तअ वर गाछ लेल

वर गाछ हउँकब बियैन

बस आब स्मृति शेष

हुनकर बियैन

आब कि देख रहल छि

कथि देख रहल छि

बस आब तअ

स्मृति शेष..स्मृति शेष...!!

-राम शंकर झा"मैथिल", मोबाइल -7970778787 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.२.जगदानन्द झा मनु - बीसटा हाइकू जगदानन्द झा �मनु� बीसटा हाइकू १ अन्हार मेघ आश नेने आयल धान होयत २ खेतक आरि सिकुड़ल जाइए भूख नै बुझै ३ कऽल चलने इनार डुबि गेल मटिक तऽर ४ फाटल पैरे आरिपर चलली ढ़ाकी नेने के ५ आमक गोपी हरलक हमर छनमे मोन ६ यादि अबैए करीनक पटोनी धान खेतमे ७ कोदारि पारि बाबू केलनि खेती हमरे लेल ८ खूरपी ढ़ाकी ल क काकी चलली राज काजमे ९ खैनी चुना क ठोरमे नुकोलनि डाक्टर काका १० दुराक घूर आ दिल्लीक संसद बहस एक्के ११ साँप घुमै छै गामक घरे-घर लोक कतय १२ पढ़ुवा काका आरि छिलैत छथि कालू खेतक १३ हर बहब प्रदेश रहबसँ बेसी बढ़ियाँ १४ छोटकी काकी असगर घरमे बेटा प्रदेश १५ गामक लोक अपनत्व बुझै छै सिटीक पाइ १६ गाम हमर करेजमे बसल ई के बुझतै १७ एखनो धरि आम जामुन केरा गाममे मुफ्त १८ बाँसक बीट उपटल जाई छै गाम गाममे १८ बाटमे कादो की कादोमे बाट छै कते गामक २० गाम घुमलौं गोजगरा रातिमे मखान लेल -जगदानन्द झा �मनु�, मो० न० ९२१२ ४६ १००६ अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.३.प्रणव कुमार झा- जगत आकार छथि मोहन प्रणव कुमार झा जगत आकार छथि मोहन कखनो यशोदा मैया केर नयनक तारा छथि मोहन, वृन्दावन राधिका केर हृदय झंकार छथि मोहन। देलखिन गीता केर ज्ञान,प्रलय गाण्डीवधारी के, भवसागर पार लगेनिहार, तारणहार छथि मोहन।। नाचैत नागक फन पर, यमुनाक रखवार छथि मोहन, मधुबन ग्वाल-बाल सभक सखा सरकार छथि मोहन। गोवर्धन के उठौलनि जे, केलैन धारण कंगुरिया पर प्रेमक सुरलहरि में बंसीवट राधेश्याम छथि मोहन।। सुदामा केर चाउरक बदले गेलाह सब हारि जे मोहन, दुर्योधनक मेवा त्यागि खेलाह विदुरक साग जे मोहन । प्रेमक अर्थ सिखौलनि, प्रेम केर मान देलनि जग में, तुलसीकेँ, सत्यभामाक धनसँ बढि सम्मान देलनि मोहन।। कालक गति के स्वयं जे अपन आधार राखैत छैथ, अधर्मक नाश करबाक हेतु सुदर्शनचक्र धरय छैथ। रुक्मिणीक प्रिय मनोहर, राधाक प्राण-प्रेम छथि, युग-युग में अवतारी, चिर निराकार छथि मोहन।। कखनो कहेला रणछोड़, कखनो जगतक पालनहार, सदैव अधर्मक विरुद्ध, धर्मक तेजस्वी बनल ललकार। जतए प्रेम, ततए मोहन, जतए भक्ति, ओहिठाम ओ, कण-कण में समाएल, जगत आकार छथि मोहन।। � प्रणव कुमार झा, राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड, नई दिल्ली अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.४.संतोष कुमार राय 'बटोही'- मीठगर कनिया संतोष कुमार राय 'बटोही' मीठगर कनिया

काका कहलन्हि ब्याह कs ले हम कहलियन्हि नहि यौ , नहि कक्का पच्चीस भेलहुँ छब्बीस होयब खाए दिअ औखन घी, दारही आओर मट्ठा ओ कहलैन्ह - आब की रहबें काँचे कुमार चोर भेलौ आब तोहर बेवहार।

केलैं ई किरतानी, की घिसल छौ कपार मे फेसबुक, इंस्टाग्राम पर अनहार मे मोबाईल मे ई की चैट करैत छें भगजोगनी जकाँ लाइट करैत छें।

आब तूँ भेलें उड़नखटोला पापा केर छिही एकेटा लाडला जहन तूँ ककरो संग उड़ि जेबही ? माय केँ छोड़ि तूँ बौर जेबही ?

चिंता नहि कर, करबौ मीठगर कनिया सोचअ नहि पड़तौ, नीक हेतौ धनिया सुन्नर हेतीह , लंबगर-पौरगर हेतीह नयन खंजन , नाकक ठरगर हेतीह ।

कोयली सन बोली हेतैन्ह माथ मे कुमकुम रोली हेतैन्ह जुनि कर चिंता ब्याह कs ले सात जनम केर कसम लऽ ले कमैनी-खटैनी हेबे करतै ई समय बेर बेर नहि एतै। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३.५.प्रमोद झा 'गोकुल'- जेना पाकल धान प्रमोद झा 'गोकुल' जेना पाकल धान सिंह बाजल हाथी भागल पुर्वा लहकल मेघ पड़ायल । गगन धवल धरा हँसल वर्षा जनल शरद प्रवल । मधुरी लोहछल तीरा मीरा हँसल चमेली चमकल बेली आंखि मारल । अधर टुह टुह गुलाब उह उह अढ़ूल फुह फुह धथूर धुह धुह ! सिङरहार हँसल स्वर हहा गुंजल झर झर झहरल शरद धरा पुजल । अपराजिता जितल दुबकि कोने हसल गुमसुम गेना भल । कैल हेतै इहो प्रवल दिन छै इनल गिनल गुलाउदी तेँ मखरल हेबै हमहूँ प्रेम मतल । प्रकति प्रसन्न अगरा रहल पहिरि बहुरंगक परिधान माइक स्वागत मे चराचर नत भेल जेना पाकल धान ।। -प्रमोद झा 'गोकुल', दीप,मधुवनी (विहार), फोन -9871779851 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। 1 || विदेह ४२५ विदेह ४२५ || 1

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if fidcaoa Phy. : “ = rz a Se > डे है jay डे [Er i हि ५ \ Yah [No biog i SS बी... ni, NS Wy ee ONS TS wil | j ae | (८0२०००- २०२५, विदेह: प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X (८)३०००- 2028 RTS: ArT CAAT नादिक क-नजिका ISSN 2229-547X =