विदेह ४४४ विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। [विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X Videha e-Journal (since 2000) at www.videha.co.in ] ऐ पोथीक सर्वाधिकार सुरक्षित अछि। कॉपीराइट (©) धारकक लिखित अनुमतिक बिना पोथीक कोनो अंशक छाया प्रति एवं रिकॉडिंग सहित इलेक्ट्रॉनिक अथवा यांत्रिक, कोनो माध्यमसँ, अथवा ज्ञानक संग्रहण वा पुनर्प्रयोगक प्रणाली द्वारा कोनो रूपमे पुनरुत्पादन अथवा संचारन-प्रसारण नै कएल जा सकैत अछि। (c) २०००- २०२६. सर्वाधिकार सुरक्षित। भालसरिक गाछ जे सन २००० सँ याहूसिटीजपर छल http://www.geocities.com/.../bhalsarik_gachh.html , http://www.geocities.com/ggajendra आदि लिंकपर आ अखनो ५ जुलाइ २००४ क पोस्ट http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html केर रूपमे इन्टरनेटपर मैथिलीक प्राचीनतम उपस्थितक रूपमे विद्यमान अछि (किछु दिन लेल http://videha.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html लिंकपर, स्रोत wayback machine of https://web.archive.org/web/*/videha 258 capture(s) from 2004 to 2016- http://videha.com/ भालसरिक गाछ-प्रथम मैथिली ब्लॉग / मैथिली ब्लॉगक एग्रीगेटर)। ई मैथिलीक पहिल इंटरनेट पत्रिका थिक जकर नाम बादमे १ जनवरी २००८ सँ ’विदेह’ पड़लै। इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि, जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। Videha eJournal (link www.videha.co.in) is a multidisciplinary online journal dedicated to the promotion and preservation of the Maithili language, literature and culture. It is a platform for scholars, researchers and writers to publish their works and share their knowledge about Maithili language, literature, and culture. The journal is published online to promote and preserve Maithili language and culture. The journal publishes articles, research papers, book reviews, prose and verse in Maithili and English languages. It also features translations of literary works from other languages into Maithili and from Maithili into English. It is a peer-reviewed journal, which means that articles and papers are reviewed by experts in the field before they are accepted for publication. (c)२०००- २०२६. विदेह: प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA. सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। Editor: Gajendra Thakur. In respect of materials e-published in Videha, the Editor, Videha holds the right to create the web archives/ theme-based web archives, right to translate/ transliterate those archives and create translated/ transliterated web-archives; and the right to e-publish/ print-publish all these archives. रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना/ संग्रह (संपूर्ण उत्तरदायित्व रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता मध्य) editorial.staff.videha@zohomail.in केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ पठा सकैत छथि, संगमे ओ अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो सेहो पठाबथि। एतऽ प्रकाशित रचना/ संग्रह सभक कॉपीराइट रचनाकार/ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि आ जतऽ रचनाकार/ संग्रहकर्त्ताक नाम नै अछि ततऽ ई संपादकाधीन अछि। सम्पादक: विदेह ई-प्रकाशित रचनाक वेब-आर्काइव/ थीम-आधारित वेब-आर्काइवक निर्माणक अधिकार, ऐ सभ आर्काइवक अनुवाद आ लिप्यंतरण आ तकरो वेब-आर्काइवक निर्माणक अधिकार; आ ऐ सभ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार रखैत छथि। ऐ सभ लेल कोनो रॉयल्टी/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै, से रॉयल्टी/ पारिश्रमिकक इच्छुक रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता विदेहसँ नै जुड़थु। विदेह ई पत्रिकाक मासमे दू टा अंक निकलैत अछि जे मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ www.videha.co.in पर ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। Font/ Keyboard Source: https://fonts.google.com/ , https://github.com/virtualvinodh/aksharamukha-fonts , https://keyman.com/ These are print-on-demand books, send your queries to editorial.staff.videha@zohomail.in. The eBooks of some of these are available for sale on Google Play [(c) Preeti Thakur, sales.videha@gmail.com], send your queries to sales.videha@gmail.com. The contents and documents e-published by Videha (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA are periodically being checked for accessibility issues. People with disabilities should not have difficulty accessing these contents/ documents. © Preeti Thakur (sales.videha@gmail.com) Cover design: AUM GAJENDRA THAKUR VIDEHA:444 समानान्तर परम्पराक विद्यापति- चित्र विदेह सम्मानसँ सम्मानित श्री पनकलाल मण्डल द्वारा। for the writers, readers, and listeners of Mithilā, who have kept the lamp of Maithilī burning through a thousand years of storms ………………………….. "The Parallel is not the marginal but the truthful, in long delay." Mānuṣīm iha saṃskṛtām मैथिली भाषा जगज्जननी सीतायाः भाषा आसीत्। हनुमन्तः उक्तवान- मानुषीमिह संस्कृताम्। मिथिलाक ओइ लेखक, पाठक आ श्रोता लोकनि लेल, जे सहस्र वर्षक झंझावात मे सेहो मैथिलीक दीप प्रज्वलित रखने छथि। समानांतर कात-करोट मे हएब नै अछि, वरन् ई अछि असल सत्य, जे अपन समय लेलक अछि। अनुक्रम विदेह अंक ४४४ [१५ जून २०२६] वर्ष १९ मास २२२ ISSN 2229-547X ऐ अंकमे अछि:- १.१.गजेन्द्र ठाकुर- नूतन अंक सम्पादकीय (पृष्ठ २-११) १.२.अंक ४४३ पर टिप्पणी (पृष्ठ १२-१२) गद्य Prose २.१. हितनाथ झा-मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान-२३ (पृष्ठ १४-२१) २.२. कल्पना झा- मैथिली साहित्यमे श्रीकान्त ठाकुर 'विद्यालंकार'एवं हुनक परिवारक योगदान-४ (पृष्ठ २२-२५) २.३. सुरेन्द्र लाभ- तीन गोट कनिका नाटक [तारीख पर तारीख/ फ्री सलाह/ पहिचान] (पृष्ठ २६-३०) २.४. लाल देव कामत- डॉ०( श्रीमती) लालपरी देवी : एक विदुषी (पृष्ठ ३१-३३) २.५. प्रमोद झा 'गोकुल'- डोलबैत रहू (लघु कथा) (पृष्ठ ३४-३५) २.६. लाल देव कामत- स्वस्थ आयु लेल योग (पृष्ठ ३६-३७) २.७. आचार्य रामानंद मंडल- धनाकर ठाकुर संवाद [सन्दर्भ -मिथिला राज्य आ महाकवि विद्यापति] (पृष्ठ ३८-४९) २.८. राजदेव मंडल- प्रतीक्षाक पीड़ा (पृष्ठ ५०-५२) २.९. लाल देव कामत- हमर छात्र राजनीतिक: एक क्षण (पृष्ठ ५३-५५) २.१०. प्रीति कुमारी- राम श्रेष्ठ दिवाना: एक व्यक्तित्व (पृष्ठ ५६-५९) २.११. संतोष कुमार राय 'बटोही'- धारावाहिक डायरी 'लव यू टू' (पृष्ठ ६०-६२) २.१२. प्रीति कुमारी- डॉ (प्रो.) विजयेन्द्र झा : एक व्यक्तित्व (पृष्ठ ६३-६४) २.१३. मिथिलाक नाच पाटी- समानान्तर नाच-नाट्य परम्परा (पृष्ठ ६५-८२) २.१४. गजेन्द्र ठाकुर- गोहि सभक बीच जल समाधि (मैथिलीक आइ धरिक सभसँ पैघ उपन्यास)- मैथिली कादम्बरीक अंश (पृष्ठ ८३-८७) २.१५. गजेन्द्र ठाकुर-आनन्दमे मत्त करैबला प्रहसन [पल्लव नरेश श्री महेन्द्रविक्रम वर्मा प्रथम केर मूल संस्कृत- मत्तविलास प्रहसनम् केर मैथिली अनुवाद- गजेन्द्र ठाकुर] (पृष्ठ ८८-१०३) २.१६. गजेन्द्र ठाकुर- मैथिली नाट्यमंच/ नाटक लेल एकटा समीक्षा सिद्धान्त (भाग-४) सन्दर्भ- कुणाल-कृत बिदापत (पृष्ठ १०४-११२) पद्य Poetry ३.१. तेलुगु काव्य: काठक घोड़ा [मूल तेलुगु'कोय्या गुर्रम'] मूल तेलुगु: नग्नमुनि (मानेपल्लि हृषीकेशवराव) मैथिली अनुवाद: मानेश्वर मनुज [खण्ड ६] (पृष्ठ ११४-११७) ३.२. अशोक कुमार ठाकुर-पीड़ा आ मेहनति/ दू कौड़ीक शिक्षक (पृष्ठ ११८-१२०) ३.३. जगदानन्द झा "मनु"- २ टा गजल (पृष्ठ १२१-१२२) ३.४. प्रणव कुमार झा- रैंक १५७: गोदी मीडिया (पृष्ठ १२३-१२४) ३.५. राम शंकर झा "मैथिल"- धीपल (पृष्ठ १२५-१२७) ३.६. आचार्य रामानंद मंडल- महाकवि कालिदास/ कवि आदि विद्यापति नाई/ आदिकवि सरहपा (पृष्ठ १२८-५२) APPENDIX: METHODOLOGICAL NOTE The Nepal Bikram Samvat years cited have been converted to approximate CE years using the standard offset of BS minus 56–57 years. Web sources consulted include the Videha digital archive (videha.co.in). All URLs were last accessed April 2026. This research was prepared using primary texts, and standard academic resources. All quoted material is from the cited sources. For the most current scholarship, consult the Videha Parallel History series at www.videha.co.in/gajenthakur.htm. ………………………………………………. A PARALLEL HISTORY OF MAITHILI LITERATURE: INTRODUCTION DALIT LITERARY CRITICISM: TELUGU, GUJARATI, AND ODIA DALIT LITERATURE IN MAITHILI TRANSLATION GANGESA UPADHYAYA: LIFE, LOGIC, AND LEGACY IN THE NAVYA-NYAYA TRADITION [NAVYA-NYAYA’S HIERARCHICAL USE OF LIMITORS IS COMPATIBLE WITH MODERN ARTIFICIAL INTELLIGENCE AND NATURAL LANGUAGE PROCESSING (NLP)] MITHILA & MAITHILI: CRITICAL ANALYSIS OF INSTITUTIONS THE MAITHILI GHAZAL VIDEHA (ISSUE 1-350) SADEHA SERIES (1-37) VIDEHA ISSUES 351-438 VIDEHA MAITHILI PARALLEL DRAMA THEATRE VIDEHA PARALLEL AUDIO VIDEO ARCHIVE VIDEHA PARALLEL CHILDREN'S LITERATURE Abdur Razzak, Abha Jha, Abhilash Thakur, Achhe Lal Shastri, Ajit Kumar Jha, Amit Mishra, Amod Kumar Jha, Amrendra Yadav, Anamika Raj, Anand Kumar Jha, Anil Mallik, Anjani Kumar Verma, Anmol Jha, Arvind Thakur, Ashish Anchinhar, Ashok (kathakar Ashok), Ashraf Rain, Dr. Bacheshwar Jha, Badri Nath Roy 'Amatya', Pt. Bal Govind 'Arya', Bechan Thakur, Pandit Bhavnath Jha, Bibhuti Anand, Bijayendra Jha, Binay Bhushan, Bindeshwar Thakur, Chandan Kumar Jha, Dinesh Kumar Mishra, Durganand Mandal, Gajendra Thakur, Ghanashyam Ghanero, Gopalji Jha 'Gopesh', Gyanvardhan Kanth, Harimohan Jha, Hitendra Gupta, Hitnath Jha, Hriday Narayan Jha, Ilarani Singh, Jagdanand Jha 'Manu', Jagdish Chandra Thakur 'Anil', Jagdish Prasad Mandal, Jhauli Paswan, Jitendra Kumar Jha 'Jeetu', Dr. Kailash Kumar Mishra, Kalikant Jha 'Buch', Kalpana Jha, Kalpana Jha, Bokaro, Kalpana Jha, Delhi, Kalpana Jha, Patna, Kameshwar Choudhary, Kameshwar Jha 'Kamal', Dr. Kamini Kamayini, Kamla Chaudhary, Kapileshwar Raut, Kedar Nath Chaudhary, Dr. Kirtinath Jha, Dr. Kishan Karigar, Krishna Kumar Kashyap, Kumar Manoj Kashyap, Kumar Pawan, Kundan Kumar Karn, Kusum Thakur, Lal Dev Kamat, Lalita Jha, Lallan Prasad Thakur, Laxman Jha 'Sagar', Mala Jha, Manmohan Jha, Meena Jha, Mithilesh Kumar Jha, Munnaji, Munnaji, Munni Kamat, Nabo Narayan Mishra, Nagendra Kumar, Nand Kumar Mishra 'Nand', Nand Vilas Roy, Nanda Vilas Ray, Narayan Yadav, Narayanji Chaudhary, Narendra Jha, Navendu Kumar Jha, Neerja Renu, OM Prakash Jha, Panna Jha, Phanishwar Nath Renu, Prabhat Rai Bhatt, Pradeep Bihari, Pradeep Pushpa, Pranav Jha, Prayas Premi Maithil, Preeti Thakur, Premlata Mishra 'Prem', Premshankar Singh, Rabindra Narayan Mishra, Rajdeo Mandal, Rajeev Ranjan Mishra, Rajnandan Lal Das, Ram Bharos Kapari 'Bhramar', Ram Chandra Roy, Ram Sogarth Yadav, Ram Vilas Sahu, Acharya Ramanand Mandal, Prof. Dr. Ramawatar Yadav, Ramdeo Prasad Mandal 'Jharudar', Ramesh, Ramesh Narayan, Rameshwar Prasad Mandal, Pandit Ramji Chaudhary, Ramji Prasad Mandal, Acharya Ramlochan Sharan, Ramlochan Thakur, Ravi Mishra Bhardwaj, Ravibhushan Pathak, Ravindra Nath Thakur, S.C. Suman, Sandeep Kumar Safi, Sanju Das, Santosh Kumar Mishra, Santosh Kumar Roy 'Batohi', Satyanand Pathak, Shail Jha 'Sagar', Dr. Shambhu Kumar Singh, Shanti Lakshmi Chaudhary, Shardindu Chaudhary, Shashi Bala, Shashidhar Kumar 'Videh', Shiv Kumar Jha 'Tillu', Dr. Shiv Kumar Prasad, Shivshankar Singh Thakur, Shivshankar Sriniwas, Dr. Shubh Kumar Barnwal, Shyam Darihare, Siyaram Jha 'Saras', Srijan Shekhar 'Ajneya', Subhash Chandra Yadav, Subhash Kumar Kamat, Subodh Jha, Subodh Kumar Thakur, Sujit Kumar Jha, Sushil, Sweta Jha Chaudhary, Taranand Viyogi, Prof. Udaya Narayana Singh Nachiketa, Umesh Mandal, Umesh Paswan, Veena Thakur, Vibha Rani, Vibhuti Anand, Vijaynath Jha, Vineet Utpal, Yoganand Jha, Prof. Dr. Yogendra P. Yadava, Yogendra Pathak Viyogi A Parallel History of Mithila & Maithili Literature, Original Poem in Maithili, Translated into English, Children's Literature Theory, Children's Picture-Story Literature, Contemporary Mithila Artists, Contemporary Mithila Artists, Dalit and Subaltern Literature, Dalit Literary Criticism, Dalit Literary Criticism — Gujarati Dalit Literature in Maithili Translation, Dalit Literary Criticism — Odia Dalit Literature in Maithili Translation, Dalit Literary Criticism — Telugu Dalit Literature in Maithili Translation, Digital Maithili Children's Literature, Digital Maithili Literature, The Epistemology of Parallelism — Videha Sadeha Series and the Maithili Digital Renaissance, Gangeśa Upādhyāya / Navya-Nyāya, Gangesa Upadhyaya — Life, Logic, and Legacy in the Navya-Nyaya Tradition, Institution Critical Analysis, Language Transmission, Laprek vs Bīhani Kathā, Maithili Bīhani Kathā — The Seed Story Tradition in Maithili Literature, The Maithili Ghazal — History, Theory, Revival, and the Anchinhar Era, Maithili Micronarrative, Mithila & Maithili — Critical Analysis of Institutions, Awards and Recognition Frameworks, Mithila & Maithili Institution Critical Analysis, Parallel Literature Movement, Seed Story Tradition, Tirhuta / Mithilakshar, Videha 351–438 Critic, Videha Children Literature Expanded, Videha Children Literature Expanded — Parallel Children Literature in Maithili, Videha eJournal, Videha Issues 1–350, Videha Issues 351–438, Videha Issues 351–438 — Epistemological and Canonical Transformations, The Videha Maithili Parallel Drama Theatre, Videha Maithili Parallel Drama Theatre, The Videha Maithili Parallel Drama Theatre — Critical Historiography and Epistemological Analysis, The Videha Parallel Audio Video Archive, Videha Parallel Audio Video Archive, The Videha Parallel Audio Video Archive — Digital Remediation and Subaltern Historiography, Videha Parallel Audio Video Critic, Videha Parallel Children Literature, Videha Parallel Drama Critic, Videha Parallel History Framework, Videha Sadeha 1–37 / Issues 1–350 Critic, Videha Sadeha, Videha Sadeha Series 1–37, Vidyapati, the Primal Poet of Maithili (Pre-Jyotirishvara), Women’s Writing, Young Readers in Maithili … AND MORE TO COME IN TOME 5. I. A PARALLEL HISTORY OF MITHILA & MAITHILI LITERATURE [TOME 1-4; VOLUMES 1-100] BY GAJENDRA THAKUR [Parallel History Series ISBN Number: 978-93-5812-486-6] GOOGLE PLAY BOOK [TOME 1-4; VOLUMES 1-100] https://play.google.com/store/books/details?id=uvjREQAAQBAJ AMAZON KINDLE [TOME 1-4; VOLUMES 1-100] https://www.amazon.in/dp/B0GX2XRKM7 POTHI HARDBACK POTHI TOME 1 [VOLUMES 01-25] https://store.pothi.com/book/gajendra-thakur-parallel-history-mithila-maithili-literature/ POTHI TOME 2 [VOLUMES 26-50] https://store.pothi.com/book/gajendra-thakur-parallel-history-mithila-maithili-tome-2/ POTHI TOME 3 [VOLUMES 51-75] https://store.pothi.com/book/gajendra-thakur-parallel-history-mithila-maithili-literature-volume-1-100-tome-3-volume-51-75-b/ POTHI TOME 4 [VOLUMES 76-100] https://store.pothi.com/book/gajendra-thakur-parallel-history-mithila-maithili-literature-volume-1-100-tome-4-volume-76-100-/ II. DECODING THE PANJI OF MITHILA: Surprising Insights from India and Nepal’s Oldest Social Network [ISBN: 978-93-5915-894-5] Decoding the Panji of Mithila Volume I-VI POTHI HARDBACKS Decoding the Panji of Mithila : Surprising Insights from India and Nepal's Oldest Social Network [Volume I] https://store.pothi.com/book/gajendra-thakur-decoding-panji-mithila/ Decoding the Panji of Mithila Volume II: Genealogical Mapping, Mūla, Dūṣaṇ, and the Videha Panji Search System [Based on Prachin Panji] https://store.pothi.com/book/gajendra-thakur-decoding-panji-mithila-volume-ii/ Decoding the Panji of Mithila Volume III: A Complete Index-wise Decoding of Genome Mapping Volume I - Khand 2 Based on Uptip Panji https://store.pothi.com/book/gajendra-thakur-decoding-panji-mithila-volume-iii/ Decoding the Panji of Mithila Volume IV: Based on the Nagram Panji https://store.pothi.com/book/gajendra-thakur-decoding-panji-mithila-volume-iv/ Decoding the Panji of Mithila Volume V: Based on Volume II Panji: Genealogical Mapping of Mithila, 450 AD-2009 AD https://store.pothi.com/book/gajendra-thakur-decoding-panji-mithila-volume-v/ Decoding the Panji of Mithila Volume VI: Based on Dushan Panji https://store.pothi.com/book/gajendra-thakur-decoding-panji-mithila-0/ Decoding the Panji of Mithila Volume I-VI KINDKE EDITIONS Decoding the Panji of Mithila : Surprising Insights from India and Nepal's Oldest Social Network https://www.amazon.in/dp/B0H463RVT8 Decoding the Panji of Mithila Volume II: Genealogical Mapping, Mūla, Dūṣaṇ, and the Videha Panji Search System https://www.amazon.in/dp/B0H6NPRTYB Decoding the Panji of Mithila Volume III: A Complete Index-wise Decoding of Genome Mapping Volume I - Khand 2 Based on Uptip Panji https://www.amazon.in/dp/B0H6R4BBFB Decoding the Panji of Mithila Volume IV: Based on the Nagram Panji https://www.amazon.in/dp/B0H6R6VSBF Decoding the Panji of Mithila Volume V: Based on Volume II Panji: Genealogical Mapping of Mithila, 450 AD-2009 AD https://www.amazon.in/dp/B0H6R4BBFD Decoding the Panji of Mithila Volume VI: Based on Dushan Panji https://www.amazon.in/dp/B0H6R2YCFP III. गद्य पद्य भारती खण्ड १ आ २ (विदेह सदेह २८ & विदेह सदेह ३७) [विभिन्न भाषासँ अनूदित गद्य आ पद्य रचना (खण्ड-१) & (खण्ड-२) (विदेह www.videha.co.in/ पेटार अंक १-३५० सँ)] [खण्ड १ ISBN No: 978-93-341-0402-8; खण्ड २ ISBN No: 978-93-5890-150-4] १ विदेह सदेह २८ GADYA PADYA BHARTI 1 विभिन्न भाषासँ अनूदित गद्य आ पद्य रचना (खण्ड-१) (विदेह www.videha.co.in/ पेटार अंक १-३५० सँ) https://store.pothi.com/book/editor-gajendra-thakur-gadya-padya-bharti-1/ २ विदेह सदेह ३७ GADYA PADYA BHARTI 2 विभिन्न भाषासँ अनूदित गद्य आ पद्य रचना (खण्ड-२) (विदेह www.videha.co.in/ पेटार अंक १-३५० सँ) https://store.pothi.com/book/translator-gajendra-thakur-gadya-padya-bharti-2/ विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका WWW.VIDEHA.CO.IN VIDEHA 23 LANGUAGE TRANSLITERATOR https://www.videha.co.in/new_page_101.htm विदेह लिपि परिवर्तक IPA · IAST · Tirhuta · Braille https://www.videha.co.in/script-converter.html विदेह आ सदेह सम्पूर्ण इंडेक्स https://www.videha.co.in/script-converter.html विदेह पेटार VIDEHA ARCHIVE https://www.videha.co.in/archive.htm विदेह मैथिली थेसॉरस — मैथिली-अंग्रेजी / अंग्रेजी-मैथिली शब्दकोश https://www.videha.co.in/maithili-thesaurus.html विदेह मैथिली ↔ अंग्रेजी अनुवादक · Videha Maithili ↔ English Translator https://www.videha.co.in/maithili-translator.html विदेह पञ्जी प्रबन्ध — मैथिल ब्राह्मण वंशावली इंडेक्स https://www.videha.co.in/panji-mool-index.html विदेह गद्य https://www.videha.co.in/prose.htm विदेह पद्य https://www.videha.co.in/verse.htm विदेह स्त्री कोना https://www.videha.co.in/femcorner.htm A PARALLEL HISTORY OF MITHILA & MAITHILI LITERATURE https://www.videha.co.in/gajenthakur.htm विदेह मिथिला रत्न https://www.videha.co.in/ratna.htm विदेह मिथिलाक खोज https://www.videha.co.in/discovery.htm विदेह सूचना संपर्क अन्वेषण https://www.videha.co.in/investigation.htm विदेह पुरान अंक https://www.videha.co.in/videha.htm विदेह पोथी https://www.videha.co.in/pothi.htm विदेह दृश्य-श्रव्य नाट्य उत्सव https://www.videha.co.in/Audio_Video.htm विदेह शिशु, बाल आ किशोर उत्सव https://www.videha.co.in/kids.htm विदेह ई-लर्निङ्ग/ विदेह ई-लर्निङ्ग क्विज https://www.videha.co.in/videha-elearning.htm [विदेह ई-लर्निङ्ग क्विज UPSC / BPSC / UGC-NET / NTA हेतु मैथिली भाषा, साहित्य आ मिथिला इतिहास पर निःशुल्क प्रश्नोत्तरी — क्विज खोलबा लेल कार्ड पर क्लिक करू। शब्दकोश मिथिलाक इतिहास साहित्यक इतिहास UPSC / UGC-NET समानान्तर इतिहास मिथिला पञ्जी मैथिली गजल वेब पत्रकारिता विदेह चित्रकला · कला · संगीत विदेह दृश्य-श्रव्य विदेह विशेषांक/ सम्मान विदेह प्रश्नोत्तरी विदेह नाट्य उत्सव विदेह शिशु उत्सव विदेह स्त्री कोना] Videha Converters- Thesaurus, Panji, Script Converters, Transliterators, Translators, eLearning Quizzes, Maithili Language Search and other Technical Tools https://www.videha.co.in/videha-converters.htm विदेह आ सदेह दुनू https://archive.org/details/VidehaAndSadeha Videha Github: https://github.com/videha-ejournal/ TWITTER/ X https://x.com/videha FACEBOOK https://www.facebook.com/groups/videha/ Videha Googlegroups https://groups.google.com/g/videha गजेन्द्र ठाकुर 1
१.१.गजेन्द्र ठाकुर- नूतन अंक सम्पादकीय १.२.अंक ४४३ पर टिप्पणी १.१.गजेन्द्र ठाकुर- नूतन अंक सम्पादकीय विदेह: सदेह: ६ मैथिली लघुकथा (विदेह अंक ५१-१००) समग्र साहित्यिक समीक्षा: सभटा साहित्यकार भारतीय रस-ध्वनि-वक्रोक्ति-औचित्य । पाश्चात्य आलोचना । गंगेशक नव्य-न्याय । विदेह समानान्तर इतिहास ढाँचा सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। आइएसबीएन: 978-93-80538-64-8 । आइएसएसएन: 2229-547X भूमिका: सदेह ६ क स्वरूप विदेह: सदेह: ६ मैथिली लघुकथाक एक समग्र संकलन थिक। ३९ साहित्यकारक योगदान। दू अनूदित कथा: कोंकणी (वसंत भगवंत सावंत) + हिन्दी (असगर वजाहत)। सदेह ५ (विहनि कथा = तीव्र लघुकथा) सँ आगू बढ़ल - लघुकथामे बेसी विस्तार भेटैत अछि। गजेन्द्र ठाकुरक भूमिका: स्त्रीवाद, उत्तर-अर्वाचीनतावाद, अस्तित्ववाद, मार्क्सवाद, फ्रायड/नव-फ्रायड सबकेँ मैथिली लघुकथा समीक्षामे समन्वित करबाक कार्यक्रम। १. गजेन्द्र ठाकुर रचना: (क) गद्य साहित्य मध्य लघुकथाक स्थान आ लघुकथाक समीक्षाशास्त्र (ख) दिल्ली समीक्षाशास्त्र: ठाकुरक सैद्धान्तिक निबन्ध मैथिली लघुकथा केर विशिष्ट समीक्षात्मक ढाँचा स्थापित करैत अछि। प्रवासी मैथिली लेखक सभक चुनौती लेल एक अलग समीक्षात्मक ढाँचा चाही - ई केन्द्रीय तर्क। 'दिल्ली' कथा: करुण + व्यंग्य। ध्वनि: 'दिल्ली' = सत्ता, विस्थापन, आकांक्षा - मैथिली प्रवासी केर मानसिक परिदृश्य। बूर्द्यू: महानगरीय क्षेत्र बनाम मिथिला परिधि। नव्य-न्याय: 'देश-काल-अवच्छिन्न' - दिल्ली केर रूपमे रूपान्तरणकारी स्थान-समय। २. मीना झा रचना: ब्रेस्ट कैंसर। दरभंगा; एम.ए. प्रथम श्रेणी (१९८०) रस-ध्वनि: करुण + वीर। 'ब्रेस्ट कैंसर' - वर्जित चिकित्सीय विषय केर नामकरण। ध्वनि: स्तन क्यान्सर स्त्रीत्व केर प्रतीक - मातृत्व पर आक्रमण। गजेन्द्र ठाकुर लिखै छथि: 'कोनो महिले एहेन कथा लिखि सकैत छलीह।' स्त्रीवादी शरीर-सिद्धान्त: सुसन सोन्टाग 'बिमारी केर रूपक केर रूपमे' - क्यान्सर केर रूपमे पितृसत्ता रूपक। विदेह केर सम्पादकीय स्वतन्त्रता: वर्जित विषय प्रकाशित। ३. रोशन जनकपुरी रचना: अग्निपुष्पक गुच्छासब। जनकपुर, नेपाल रस-ध्वनि: रौद्र + वीर। 'अग्निपुष्पक गुच्छासब' - 'अग्निपुष्प' (आगि-फूल) = सुन्दरतामे क्रान्तिकारी आगि। 'गुच्छा' = सामूहिक प्रतिरोध। वक्रोक्ति: फूल + आगि = सुन्दरता + रोष एक संग। फानन: वञ्चित लोक सभक क्रान्तिकारी आगि। नेपाल मधेश आन्दोलन सन्दर्भ। ४. महाप्रकाश रचना: संभावना। जन्म: १९४६, बनगाँव, सहरसा । वरिष्ठ कवि-कथाकार। रस-ध्वनि: शान्त + वीर। 'संभावना' = सम्भावना जे अखनो अस्तित्वमे नहि अछि। ग्राम्शी केर 'इच्छा केर आशावाद': सेहो जखन पता छै कि प्रणाली कठिन अछि, तखनो सम्भावना देखनाइ। वञ्चित सभक जीवनमे 'संभावना' खोजनाइ राजनैतिक कार्य थिक। ५. वसंत भगवंत सावंत रचना: (कोंकणी कथा) मृत्युकेँ टारब। कोंकणी → मैथिली अनुवाद रस-ध्वनि + अनुवाद-सिद्धान्त: करुण + वीर। 'टारब' (टारब) ध्वनि: मृत्यु विरुद्ध मानव सक्रियता। बेन्यामिन केर 'परवर्ती जीवन': कोंकणी तटीय कहानी → मैथिली स्थलरुद्ध पाठक - ई भाषिक सीमा-उल्लङ्घन। विदेह: दू हाशियाकृत भाषा (कोंकणी + मैथिली) दुनू संविधानमे सूचीबद्ध मुदा हिन्दी-प्रभुत्व मुख्यधारामे हाशियाकृत - विदेह दुनू हाशिया केँ जोड़ैत अछि। ६. बीनू भाइ रचना: उत्ताप। मैथिली प्रवासी रस-ध्वनि: शान्त + अद्भुत। 'उत्ताप'। गजेन्द्र ठाकुर: 'बीनू भाइ विश्लेषण केर मास्टर।' नव्य-न्याय: 'परिणामवाद' - पदार्थ रूपान्तरित होइत अछि, गायब नहि। ७. शम्भु कुमार सिंह रचना: भाए-बहिनक यथा कथा। जन्म: १८.०४.१९६५, लहुआर, सहरसा। रस-ध्वनि: वात्सल्य + करुण। 'यथा' (वास्तविक/साँच) = सत्य-दावा शैली-सूचक केर रूपमे। अम्बेडकर: पितृसत्तात्मक परिवार केर भीतर बहिन केर स्थायी रूपसँ अधीनस्थ स्थिति। 'यथा कथा' - सत्य-दावा राजनैतिक कथन केर रूपमे। ८. दुर्गानन्द मंडल रचना: लाल भौजी। दलित कथाकार रस-ध्वनि: शृंगार + करुण। 'लाल' + 'भौजी'= रङ्ग + रक्त-सम्बन्ध। अम्बेडकर + स्त्रीवादी: दलित महिला दोहरा रूपसँ बाध्य - जाति + बहू-स्थिति। ९. वीरेन्द्र कुमार यादव रचना: हमर समाज । ओबीसी स्वर रस-ध्वनि: रौद्र + वीर। 'हमर' = स्वामित्वात्मक दावा - समाज हमर सेहो अछि। ग्राम्शी + अम्बेडकर: ओबीसी/दलित बहिष्कार 'समाज' केर परिभाषासँ। 'हमर समाज' मे 'हम' नहि - ई विरोधाभास कथाक केन्द्र थिक। १०. उमेश मंडल रचना: अमैआ भार (पृ. ५२-५५) । जन्म: ३१.१२.१९८०, बेरमा, मधुबनी । रस-ध्वनि: शान्त + करुण। 'अमैआ टाका पठा देलनि = मैथिली मुहावरा: आम्र वृक्ष = उत्पादक व्यक्ति । वक्रोक्ति: फर-लदल वृक्ष झुकि जाइत अछि - उत्पादकता केर रूपमे असुरक्षा। ठाकुर केर वृक्ष-बिम्बकल्पना: सामाजिक शोषण लेल पारिस्थितिकीय रूपक। ११. नन्द विलास राय रचना: बाबाधाम / ऐना। जन्म: 02.01.1957, भपटियाही, मधुबनी रस-ध्वनि: 'बाबाधाम' - भक्ति + शान्त। बैद्यनाथ धाम तीर्थयात्रा। 'ऐना' (दर्पण) - शान्त + अद्भुत। लाकान केर दर्पण-चरण: आत्म-पहिचान + आत्म-विस्थापन। दुनू कथामे अन्ततः आत्म-सामना। १२. सुजीत कुमार झा रचना: एकटा अधिकार रस-ध्वनि: वीर + करुण। 'एकटा' (मात्र एक) अधिकार माँगनाइ - अल्पतम माँग = विध्वंसकारी टिप्पणी। अम्बेडकर: 'मूलभूत अधिकार' संरचनात्मक रूपसँ अस्वीकृत - 'एकटा अधिकार' केर माँग एहि अस्वीकार केर अभियोग थिक। १३. सन्तोष कुमार मिश्र रचना: मुसीबत रस-ध्वनि: करुण + हास्य। 'मुसीबत' (उर्दू: मुसीबत) = मैथिली-उर्दू साङ्केतिक-परिवर्तन। बाख्तिन केर 'दैनिक जीवन': सामान्य मुसीबत केर रूपमे योग्य साहित्यिक विषय। १४. कामिनी कामायनी रचना: टुटल तारा। नारी कथाकार रस-ध्वनि: करुण + शान्त। 'टुटल तारा'= आकांक्षा सभ बुझल। स्पिवाक: महिलाक 'तारा' (आकांक्षा) पितृसत्ता द्वारा संरचनात्मक रूपसँ 'टुटल' । १५. राज नाथ मिश्र रचना: मस्ती रस-ध्वनि: हास्य + शृंगार। 'मस्ती' = स्वतन्त्रता/उन्मुक्तता। बाख्तिन उत्सवी-लोकधर्मी: 'मस्ती' केर क्षण - सामाजिक पदानुक्रम निलम्बित। १६. असगर वजाहत रचना: (हिन्दी कथा) हम हिन्दू छी। प्रसिद्ध हिन्दी कथाकार रस-ध्वनि + अनुवाद-सिद्धान्त: रौद्र + करुण + हास्य। 'हम हिन्दू छी' - साम्प्रदायिक दंगा सभमे हिन्दू अस्मिता केर हताश घोषणा = जीवित रहबाक प्रवृत्ति। फानन: निर्मित साम्प्रदायिक विभाजन केर उजागर। विदेह: हिन्दी + मैथिली सह-अस्तित्व - धर्मनिरपेक्ष, बहुलवादी सम्पादकीय दृष्टि। १७. अतुलेश्वर रचना: बसात रस-ध्वनि: शान्त + करुण। 'बसात' = निवास/मूल्य। 'बसात' केर द्वैत: स्थान + मूल्य। तोहर बसात की अछि? = मैथिली-हिन्दी मुहावरा। निवास केर स्थान मानवीय मूल्य केर निर्धारक केर रूपमे। १८. योगेन्द्र पाठक 'वियोगी' रचना: देववाणी रस-ध्वनि: भक्ति + शान्त + व्यंग्य। 'देववाणी' = दैवी वाणी - संस्कृत केर 'देवभाषा' केर दावा केर प्रश्न। बूर्द्यू: 'दैवी' भाषिक स्थिति = समाजशास्त्रीय रूपसँ निर्मित प्राधिकार। १९. कुमार मनोज कश्यप रचना: नोरक दू ठोप। जन्म: १९६९, सलेमपुर, मधुबनी रस-ध्वनि: करुण रस। 'नोरक दू ठोप' - पीड़ा केर यथार्थता। ध्वनि: दू ठोप बाढ़ि सँ बेसी शक्तिशाली। चेखव केर अल्पोक्ति: नियन्त्रित भावना > अभिव्यक्त भावना। २०. सतीश चन्द्र झा रचना: हमहूँ कह बुझिलैए रस-ध्वनि: शान्त + हास्य। 'हमहूँ' (हम सेहो) = समावेशी विलम्बित बोध। पहिचान केर विलम्बित 'आहा' क्षण। २१. डॉ. कैलाश कुमार मिश्र रचना: प्रकृति सुन्दरि आ चूहर मिस्त्री / चन्दा। जन्म: ८.०२.१९६७ रस-ध्वनि: 'कृति सुन्दरि'+ 'चूहर मिस्त्री' = वर्ग-सौन्दर्य विरोधाभास। बूर्द्यू केर 'विभेद': उच्च-संस्कृति सुन्दरता बनाम श्रमिक-वर्ग व्यापार। 'चन्दा' - शृंगार + करुण। चन्दा-नामक महिला केर चन्द्रमा केर चक्र- उज्ज्वल/अन्धकार। २२. सत्यनारायण झा रचना: रिटायरमेंट / पलट रस-ध्वनि: 'रिटायरमेंट' (सेवानिवृत्ति) - शान्त + करुण। सेवानिवृत्ति पश्चात् रिक्तता। 'पलट' (फिर्ती/उलटफेर) - शान्त + अद्भुत। हाइडेगर: सेवानिवृत्ति = परिमितता केर सामना। 'पलट' = हाइडेगरियन 'मोड़' प्रामाणिक सत्ता। २३. बचेश्वर झा रचना: संगति रस-ध्वनि: शृंगार + शान्त। सम्बन्ध रूपक। नव्य-न्याय: 'सम्बन्ध' - दू स्वर सञ्जन सामञ्जस्य पैदा करैत अछि - पूर्ण सम्बन्ध प्रतिमान। २४. कपिलेश्वर राउत रचना: थरथरी / तरकारी खेती / सलाह। रस-ध्वनि: 'थरथरी'- रौद्र + करुण। दलित शरीर केर भय प्रतिक्रिया। अम्बेडकर: जाति समाज शाब्दिक शारीरिक भय पैदा करैत अछि। 'तरकारी खेती' - आर्थिक आत्मनिर्भरता - अम्बेडकरी विकल्प। 'सलाह' - हास्य - सामाजिक नियन्त्रण केर रूपमे। २५. मनोज कुमार मंडल रचना: घासवाली रस-ध्वनि: करुण + वीर। 'घासवाली' (घास काटैत महिला) = आधारभूत अदृश्य श्रम। मार्क्स + स्त्रीवादी: प्रजननात्मक श्रम अगणित। 'घास' = अत्यन्त साधारण पौधा, मुदा आवश्यक। २६. अनमोल झा रचना: अबकी बेर फतंग / गामक बताह। जन्म: १९७०, नरुआर, मधुबनी रस-ध्वनि: 'अबकी बेर फतंग' (पतङ्ग) - वीर + हास्य। 'अबकी बेर' = पुनरावर्ती प्रयास। 'गामक बताह' (गाम केर बताह/पागल) - हास्य + करुण। फूको: 'पागलपन' केर रूपमे प्रतिरोध - पागल सत्य देखैत अछि जे समाज देखैत नहि अछि। २७. शिव कुमार झा 'टिल्लू' रचना: लेबर पेन / कब्जियत दूर भगाउ। जन्म: ११.१२.१९७३ रस-ध्वनि: 'लेबर पेन' (प्रसव पीड़ा/श्रम पीड़ा) - करुण + वीर। श्रम (प्रसव) + श्रम (मजदूर केर काम) = दोहरा अर्थ। स्त्रीवादी: महिलाक श्रम (प्रसव) अदृश्य/अवमूल्यन। 'कब्जियत दूर भगाउ' - व्यंग्य। २८. प्रभात राय भट्ट रचना: रोटी रोजीक खोजी । नेपाल, महोत्तरी जिला रस-ध्वनि: करुण + वीर। नेपाल मधेश केर भूमिहीन मजदूर भोला केर कहानी। 'खोजी' (खोज) - जीविका लेल खोज। मार्क्स + नेपाल मधेश सन्दर्भ: जीविका सङ्घर्ष। गजेन्द्र ठाकुर: 'प्रभात राय भट्ट नव परिवेशमे बेसी दर्दसँ कहैत छथि।' २९. शम्भुनाथ झा 'वत्स' रचना: अतीतक घटना / सपना / कोसीक प्रलयंकारी बाढ़िमे भसल एकटा लड़कीक सत्यकथा रस-ध्वनि: 'कोसीक प्रलयंकारी बाढ़िमे...' - ई सबसँ नाम शीर्षक। करुण + रौद्र। 'सत्यकथा' = साक्ष्य। कोसी बाढ़ि २००८ केर विशिष्ट त्रासदी केर संरक्षण। बेन्यामिन: अतीत केर उद्धार। ३०. किशन कारीगर रचना: दाम-दिगर रस-ध्वनि: हास्य + व्यंग्य। 'दाम' + 'दिगर'= तुलना-खरीदारी केर रूपमे नैतिक रूपक। सभ चीज केर एक दाम + अन्यत्र अन्य दाम होइत अछि। ३१. पंकज कुमार प्रियदर्शी रचना: जीवनक अनमोल क्षण। जन्म: ०३.०२.१९८५ रस-ध्वनि: शान्त + शृंगार। 'अनमोल' (अनमोल) = खरीदल नहि जा सकैत। वर्ड्सवर्थ केर 'समय केर धब्बा' - क्षण जे एक जीवन केँ परिभाषित करैत अछि। ३२. नवीन ठाकुर रचना: मिथिला उवाच। जन्म: १५.०५.१९८४, लोहना, मधुबनी रस-ध्वनि: वीर + शान्त। 'उवाच' (संस्कृत: कहलक) - मिथिला व्यक्तित्वरूप + सक्रियता प्रदान। विदेह समानान्तर इतिहास ढाँचाक श्रद्धा: मिथिला अपन लेल बजैत अछि, पटना/दिल्ली केर माध्यमसँ नहि छानल। ३३. ओम प्रकाश झा रचना: सफल अधिकारी / डीहक जमीन / बुढ़िया मैयाँ / लोकतंत्रक माने रस-ध्वनि: हास्य+व्यंग्य / करुण+वीर / वात्सल्य+करुण / व्यंग्य+रौद्र। ग्राम्शी केर लोकतन्त्र समीक्षा: 'लोकतंत्रक माने' = वास्तवमे राज्य पर के नियन्त्रण करैत अछि? चारि कथा: संस्थागत + भूमि + पारिवारिक + राजनैतिक स्पेक्ट्रम। ३४. अमित मिश्र रचना: प्रेम नै जहर छै रस-ध्वनि: रौद्र + करुण। 'प्रेम नै जहर' जे प्रेम जेना देखाइत अछि से विखाह अछि। सुसन ग्रिफिन: प्रेम-केर-रूपमे-नियन्त्रण केर स्त्रीवादी विश्लेषण। घरेलू हिंसा उप-पाठ। ३५. राजदेव मंडल रचना: इलेक्शनक भूत रस-ध्वनि: हास्य + रौद्र। 'इलेक्शनक भूत' = चुनाव केर रूपमे भूत-प्रेत। चुनाव केर अनुष्ठानिक, भूत-जकाँ गुण। ग्राम्शी: चुनाव केर रूपमे वर्चस्ववादी अनुष्ठान। ३६. गजेन्द्र ठाकुर रचना: दिल्ली। विदेह सम्पादक रस-ध्वनि: करुण + व्यंग्य। 'दिल्ली' = सत्ता केन्द्र केर रूपमे विस्थापित करैत स्थान। बूर्द्यू: दिल्ली केर रूपमे भारत केर प्रतीकात्मक पूँजी आ एहि केर भीतर मैथिलीकेर हाशियाकृत स्थिति। सम्पादक-केर-रूपमे-लेखक: अपन परियोजनामे सृजनात्मक सहभागिता। ३७. जगदीश प्रसाद मंडल रचना: सूदि भरना / पड़ाइन / न्याय चाही / कर्ज। जन्म: ५ जुलाई १९४७ । परिचय: कथा संग्रह: 'गामक जिनगी', 'अग्नि सरोजनी'। रस-ध्वनि चारि कथा: 'सूदि भरना' - करुण+रौद्र। सूदखोरी/ब्याज-व्यवस्था केर विध्वंसकारी समीक्षा। 'पड़ाइन' - करुण। पलायन। 'न्याय चाही' - रौद्र+वीर। कहियो प्राप्त नहि। 'कर्ज' (ऋण) - करुण। ऋण-बन्धन। मार्क्स / अम्बेडकर दलित ग्रामीण मानचित्रण: मार्क्स केर आदिम संचय + अम्बेडकर: सूदखोरी = प्राथमिक दलित शोषण शैली। 'सूदि भरना' + 'कर्ज' = आर्थिक हिंसा केर दू टा चेहरा। 'न्याय चाही' - दलित न्याय केर माँग स्थायी रूपसँ विलम्बित। मंडल केर ४ कथा = समग्र दलित ग्रामीण सामाजिक मानचित्र: आर्थिक + सामाजिक + कानूनी + मनोवैज्ञानिक। नव्य-न्याय: गंगेशक 'न्याय': एहिठाम न्याय = कानूनी/सामाजिक न्याय। तार्किक दावा: 'ई स्थिति अन्यायपूर्ण अछि' - ई एक ज्ञान-मीमांसीय दृढ़ोक्ति जे प्रमाण माँगैत अछि। ३८. आशीष अनचिन्हार रचना: काटल कथा। रस-ध्वनि: अद्भुत + रौद्र। 'काटल कथा' आत्म-कथा। कोनो सेन्सर्ड कहानी केर कहानी लिखनाइ। फूको: सेन्सरशिप = विमर्शमे सत्ता केर हस्तक्षेप। विदेह: सेन्सरशिप- मुक्त स्थान केर महत्व अभिव्यक्त। ३९. विनीत उत्पल रचना: बेसिक इन्स्टिंक्ट। विदेह अनुवाद विभाग सम्पादक रस-ध्वनि: शृंगार + अद्भुत। 'बेसिक इन्स्टिंक्ट' - अङ्ग्रेजी शीर्षक मैथिलीमे! हलिउड चलचित्र पुनर्सन्दर्भित। फ्रायड केर 'प्रवृत्ति': मूल प्रवृत्ति = फ्रायडियन 'इद्'। पाश्चात्य चलचित्र + मैथिली साहित्य = सांस्कृतिक संकरता। ४०. कुमार भास्कर रचना: लछमिनीया । संकलनक अन्तिम रचना रस-ध्वनि: वात्सल्य + करुण। 'लछमिनीया' देवी केर साधारण महिला नाम। ध्वनि: समृद्धि देवी (लक्ष्मी) आ ओकर नाम पर रखल गरीब महिलाक बीचक अन्तर। लोक-स्त्रीवादी: साधारण महिलाकेँ देवी केर नाम देबाइ = आकांक्षा बनाम वास्तविकता केर अन्तर। उपसंहार: सदेह ६ क समग्र महत्व सदेह ६ मैथिली लघुकथा - ४० लेखक (३९ + गजेन्द्र ठाकुर) केर योगदान सँ मैथिली लघुकथाक एक सम्पूर्ण परिदृश्य। विशेष: मीना झाक वर्जित चिकित्सीय विषय; असगर वजाहत (हिन्दी) साम्प्रदायिक हिंसा; वसंत भगवंत सावंत (कोंकणी) अन्तर-भाषिक; विनीत उत्पलक अङ्ग्रेजी शीर्षक; जगदीश प्रसाद मंडलक ४ समग्र दलित ग्रामीण कथा। चारि ढाँचा केर संश्लेषण: रस सिद्धान्त लघुकथामे विशिष्ट रस। पाश्चात्य सिद्धान्त (फ्रायड, फूको, ग्राम्शी, फानन, बूर्द्यू, स्पिवाक, बाख्तिन, मार्क्स) एक-एक कथाक सामाजिक प्रक्रिया उजागर करैत अछि। नव्य-न्याय कथाक ज्ञान-मीमांसीय दावा सभक परीक्षण करैत अछि। विदेह समानान्तर इतिहास ढाँचा: दलित, महिला, नेपाल, कोंकणी, हिन्दी, पागल, प्रवासी सब एक लोकतान्त्रिक मान्य-परम्परागत स्थान। -Gajendra Thakur, editor, Videha [be part of Videha www.videha.co.in JOIN VIDEHA WHATSAPP CHANNEL JOIN VIDEHA ARATTAI CHANNEL ] -गजेन्द्र ठाकुर, सम्पादक विदेह, whatsapp/ Arattai no +919560960721 HTTP://VIDEHA.CO.IN/ ISSN 2229-547X VIDEHA अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ। १.२.अंक ४४३ पर टिप्पणी विदेह ४४२ म अंक पर पाठकीय मन्तव्य प्रणव कुमार झा आदरणीय सम्पादक मंडल, अंक 443 में राम शंकर झा मैथिल के कविता डबरा नीक लागल। एकर विषयवस्तु आ प्रस्तुति सजगता, पर्यावरण संतुलन आ संस्कृति से जुड़ल अछि। यद्यपि वर्तमान में शेष बचल डबरा पोखैर नदी आदि पर इन ऑर्गेनिक केमिकल द्वारा विशाक्त हेबाक अलग खतरा सेहो छैक। डॉ. योगानन्द झाके लेख अभिनव पद्यविधा : इतिहास-काव्य इनफार्मेटिव छैक। आचार्य रामानंद मंडल के लघु व्यंग वर्तमान चोर संत कबीर उचित व्यंग लागल, ख़ास क वर्तमान के राम मंदिर चंदा चोरी प्रकरण के सन्दर्भ में। प्रीति कुमारी के विषय नीक छैन मुदा ऐ तरहक विषय पर लिखबाक़ लेल गहन अध्ययन क के लिखती त बेहतर लेख लिखल जा सकय छैक। रामकृष्ण परार्थी के कथा के विषयवस्तु ठीक छैक मुदा हमर एकटा अनुभव ई रहल अछि जे जमाना बदलि रहल छल मुदा ई बदलाव आब किछु समय से रिवर्स भ रहल छैक। ग्रामीण परिवेश के नै कहब मुदा महानगरीय परिवेश में नव क्लास डिसक्रिमिनशन देखय लेल अक्सर भेटय छैक जेकर मूल में पुरान जातीय व्यवस्था से बेसी पैसा आ पावर बेस छैक। हाल फिलहाल में एकटा दिल्ली पुलिस कर्मी द्वारा दू टा लड़का के बिहारी हेबाक लेल गोली मारबाक़ घटना होय या गुडगाँव के घटना जै में एकटा गरीब यादव जी के अपन मैनेजर से क्लास डिसक्रिमिनशन के कारण एहन प्रतरना भेटल जे ओ आत्महत्या लेल मजबूर भेल। ऐ तरहक क्लास डिसक्रिमिनशन के हम सेहो फेस केने छी। विदेह के वर्तमान अंक खूब रास लेख कथा कविता आदि से भरल रहल जै में विषयके विविधता सेहो खूब देखल। संगहि विदेह नव नव टूल से सेहो लैश भ रहल अछि जेकरा लेल विदेह टीम के बधाई। -प्रणव कुमार, अनुभाग अधिकारी, राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड, नई दिल्ली अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ। गद्य Prose २.१. हितनाथ झा-मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान-२३ २.२. कल्पना झा- मैथिली साहित्यमे श्रीकान्त ठाकुर 'विद्यालंकार'एवं हुनक परिवारक योगदान-४ २.३. सुरेन्द्र लाभ- तीन गोट कनिका नाटक [तारीख पर तारीख/ फ्री सलाह/ पहिचान] २.४. लाल देव कामत- डॉ०( श्रीमती) लालपरी देवी : एक विदुषी २.५. प्रमोद झा 'गोकुल'- डोलबैत रहू (लघु कथा) २.६. लाल देव कामत- स्वस्थ आयु लेल योग २.७. आचार्य रामानंद मंडल- धनाकर ठाकुर संवाद [सन्दर्भ -मिथिला राज्य आ महाकवि विद्यापति] २.८. राजदेव मंडल- प्रतीक्षाक पीड़ा २.९. लाल देव कामत- हमर छात्र राजनीतिक: एक क्षण २.१०. प्रीति कुमारी- राम श्रेष्ठ दिवाना: एक व्यक्तित्व २.११. संतोष कुमार राय 'बटोही'- धारावाहिक डायरी 'लव यू टू' २.१२. प्रीति कुमारी- डॉ (प्रो.) विजयेन्द्र झा : एक व्यक्तित्व २.१३. मिथिलाक नाच पाटी- समानान्तर नाच-नाट्य परम्परा २.१४. गजेन्द्र ठाकुर- गोहि सभक बीच जल समाधि (मैथिलीक आइ धरिक सभसँ पैघ उपन्यास)- मैथिली कादम्बरीक अंश २.१५. गजेन्द्र ठाकुर-आनन्दमे मत्त करैबला प्रहसन [पल्लव नरेश श्री महेन्द्रविक्रम वर्मा प्रथम केर मूल संस्कृत- मत्तविलास प्रहसनम् केर मैथिली अनुवाद- गजेन्द्र ठाकुर] २.१६. गजेन्द्र ठाकुर- मैथिली नाट्यमंच/ नाटक लेल एकटा समीक्षा सिद्धान्त (भाग-४) सन्दर्भ- कुणाल-कृत बिदापत २.१. हितनाथ झा-मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान-२३ हितनाथ झा (मैथिलीमे ग्रामगाथा विधाकेँ नव जीवन देनिहार, पाठकीय विधाक अगुआ। संपर्क-9430743070) वियोगिनी श्यामसुन्दर झा क्वैलख भागलपुर जिलान्तर्गत सुपौल वो मधेपुरा सबडिवीजनक अन्दर दूइ ग्राम भद्रपूर वो रुद्रपूर नामे विख्यात अछि। दूनू ग्राम पच्चीस वर्षपूर्व अतिशय गुणवान छल, एहूसँ बेसी एहि दुनू ग्रामपर लक्ष्मीक पूर्णरूपेण कृपा छल। प्राकृतिक सुन्दरता कूट-कूट क भरल छल।परन्तु ई सभ रहलहु सन्ता विद्यारूपी बीज अंकुरित भेले टा छल।पूर्ण रूपेण विकसित नहि भेल छल।उक्त दुनू ग्राम अपना-अपना अंशमे उपर्य्युपरि छल। एहि दूनू ग्रामक जनसमूह प्राचीन सभ्यताक अनुयायी छलाह। पाश्चात्य देशक वा नवीन युगक आवोहवा नहि लागल छल।परन्तु युवक समुदाय काँ उत्कट अभिलाषा भेल जे नवीन युगमे प्रवेश कय पाश्चात्य देशक गुण ग्रहण करी ओ अवगुण काँ त्यागि दी। परन्तु वयोवृद्ध लोकनिक घोर विरोधसँ युवक लोकनि एहि कार्य्यमे सफलीभूत नहि भय सकलाह। युवक मण्डली संध्या काल ग्रामक बाहर एक पोखरिक घाटपर बैसल सब अपना-अपना हृदयमे एहि गूढ़ समस्या काँ विचारैत छलाह। अकस्मात ओहि निर्जन स्थानमे युवक मण्डलीकेँ संबोधन करैत आकाशवाणी भेल, युवक लोकनि साकांक्ष भेलाह - " युवक लोकनि ! धैर्य धयने रहू आ दस वर्षक मध्य एहि दूनू ग्राममे एक विशेष लीला हेतैक तखन अहाँ लोकनि काँ उठवाक अवसर होयत।वो वयोवृद्ध लोकनिक मूड़ी खसत।" उक्त भद्रपूर ग्राम प्रायः दू सै घरक वस्ती जाहिमे सत्तरि अस्सी घर मैथिल ब्राह्मणक।और शेष निम्न वर्णक। ओहि मैथिल मण्डलीमे पंजीबद्ध लोक नहि किछु वंशक लोक शेष जयवार ब्राह्मण, ओही जयवार ब्राह्मणक मध्य चन्द्रमणि झा नामक लक्ष्मीक दुलरुआ छलाह परन्तु " कारी अक्षर महीस बराबरि" एहि कहावतकेँ चरितार्थ करैत छलाह। गाममे हिनक पूर्ण धाक छल।छोटका सँ बड़का धरि सभ हिनका शासन सँ शासित छल।कारण दू सेर वा दू टाकाक वास्ते हिनकहि दरबाजापर जाय पड़ैत छलैक।तैं हेतु ककरो मूड़ी उठा क ' बजबाक सामर्थ्य नही। दू चारि व्यक्ति एहनो छलाह जनिका हिनक प्रयोजन नहि। परन्तु जनसमूहक बीच की कय सकैछ ? एहि ग्राममे पूर्वसँ परिपाटी छल जे कन्यादनमे कन्या जावत पूर्ण वयस्का अर्थात सोलह-सत्रह वर्षक नहि होथि तावत कन्यादान नहि करी।"अष्ट वर्षात भवेत गौरी" एहि मनु वाक्यक पूर्ण विरोधी छलाह।वो वरक गुण एतवै टा देखैत छलाह, कमसँ कम वर देखैत सुन्दर होथि। अवस्था पन्द्रह-सोलह रहनि।विद्याक प्रयोजन नहि। परन्तु बखारी धरि दरबज्जापर रहबे करनि। जाति-पाँजिमे श्रेष्ठ होनि वा समानो क्षति नहि। परन्तु एहू सव सँ बेसी ध्यान दैत जाइत छलाह वर यदि वहु विवाह कयने रहथि त सर्वोत्तम नहि त दू विवाह अवश्य रहनि कारण एकर एतवै छल जे वर विवाह कय अपन घर जाथि। वो दाइ काँ राखि भनसीया वा खबासिनीक कार्य्य करबियनि। धन्य ! धन्य मैथिल समाज। एहन स्थितिमे मिथिला देश वा मैथिल जाति रसातल जाथि त कोन आश्चर्य ! (2) चन्द्रमणि बाबूक परिवार बृहत नहि। केवल एक स्त्री, एक बालक, एक कन्या। दुनू भाइ बहीन देखैत परम् सुन्दर बालकक नाम हीरामणि वो कन्याक नाम सावित्री।चन्द्रमणि बाबू बालककेँ हीरा कहि सम्बोधित करैत छलाह। हुनक स्त्री बेटी काँ दुलारसँ सविता कहि सम्बोधित करैत छलीह।टोल पडोसक स्त्री सविता कहि सोर करैत छलथिन्ह। फाल्गुन मास इजोरिया राति आकाशमे मेघक दरश नहि।मन्द-मन्द समीर बहि रहल छल।चन्द्रमा अपन अपूर्व शीतल जल सँ एहि भूमंडल काँ आलोकित कय रहल छलाह।ऋतुराजक आगमन देखि ग्रामवृक्ष अपन जीर्ण-शीर्ण कलेवर काँ बदलि अपन-अपन सखा सभ काँ नव पल्लव ओ फूल फलसँ सुसज्जित कय ऋतुराजक स्वागतार्थ उपस्थित भेल छलाह, भ्रमर अपन प्रेमिकाक संग गान वाद्य लय अपना स्वामी काँ रिझावय लगलाह।कोइली अपन सखी सभ काँ एहि तरहेँ नाचैत गाबैत आनन्द मजा लुटैत देखि इहो कुहकय लगलीह। ई अपूर्व दृश्य देखि सुरराज वा सुरराज सभाक अप्सरा लज्जित भय मूड़ी गोड़ि लेल।ई सुन्दर राति टोलक सब लोक चन्द्रमणि बाबूक दालान पर अकड़ि कय बैसल छल। एहि सभामे नाना प्रकारक गप भय रहल छल। क्यो गाँधी युगक आलोचना कय रहल छलाह तँ क्यो ब्रिटिश सरकारक गुणानुवाद कय रहल छलाह, क्यो पतित पावन भुत नाथ काँ नचारी गावि रिझा रहल छलाह तँ क्यो फागु गाबि कामिनीक हृदयमे कामरूपी वाण मारि रहल छलाह।कहबाक तात्पर्य जे सभ एहि फागुन मासक बहार लूटि रहल छलाह। संसारक प्राणी मात्र आनन्द कय रहल छल केवल दुखी छलीह सविता। कारण सविता बाल्यावस्थाक क्रीड़ाकेँ तिलाञ्जलि दय युवावस्थामे पदार्पण कयने छलीह। परन्तु विवाह नहि भेलासँ अतिखिन्न भय गेल छलीह, परन्तु हिनका माय-बाप काँ एकर एकोरत्ती धंधा-फिकीर नहि। एहन आनन्दक समयमे चन्द्रमणिबाबूक खवासिनी अपन कर्कश स्वरसँ सभा के भंग करैत सोर कयलक- " बाबू ठाँव भय गेल।" चन्द्रमणिबाबू- की थिकौ ? खबासिनी- बाबू ठाँव भय गेल ! चन्द्र:- बेश, बुझल कनेक जल दय जो, लघुशंका करब। खबासिनी काँ अयबामे विलम्ब देखि चन्द्रमणिबाबू सोर कयल- " मंगली माय जल दय जो" । प्रत्युत्तरमे " अबैत छी" कहि मंगली माय लोटामे जल लय चन्द्रमणि बाबू काँ देलकैन। चन्द्रमणि बाबू काँ भोजन करबा लय जाइत देखि जे केओ चन्द्रमणिबाबूक दालानपर बैसल छलाह सब अपना-अपना घरक रास्ता लेल।एम्हर चन्द्रमणि बाबू पैर-हाथ काँ जलसँ प्रच्छालन कय पीढ़ी पर बैसलाह।सविताक माय थारी लय चिन्तित मते आगूमे राखि देल। चन्द्रमणिबाबू भोजन प्रारम्भ कयल। प्रथमहि ग्रासमे कहि उठलथिन्ह-राम! राम ! एहिना भानस करैत छी।छी: ! दालिमे एकदम नोनहि नोन तकरहु जितलक हरदि। ताहूसँ चिकन भेल तरकारी। सबटा आलू केँ डाहि देलियैक। ई शब्दक बौछारसँ सविताक माइक हृदय काँपि गेल। डेराइत-डेराइत बजलीह - भानस करबाक काल राधाक माय आयल छलीह।हुनके आदर-सत्कार करबामे विलम्ब भेल तेँ सभ वस्तु दूरि भय गेल। चन्द- के आयल छलीह ? स.माय- राधाक माय। चन्द्र- कत' आयल छलीह ? स.मा.- औती कत', टहल बुल, अपना इष्ट-अपेक्षित लोकक खोज पुछारी करs। अहाँ पुरुष लोकनि काँ टहलबामे कौखन कोन क्षति नहि। परन्तु स्त्रीगण यदि अपना इष्ट अपेक्षितक आँगन कुशालादि बुझs लेल गेल कि लगले कतय गेलीह कतय अयलीह, यैह प्रश्न उठैछ । चन्द- तैं नहि कहल। हमरा भेल जे कोनो कार्य्य सँ आयल छलीह। स.मा : कहैत छलीह जे एहि बेर शुद्ध छैक। सविताक विवाह करा दियौक। आब विवाह करबै योग्य भय गेल। परंतु सविताक बापकेँ एकोरत्ती धन्धा-फिकीर नहि छैन्हि। शुद्ध बितल जाइत छैक।"सविताक विवाह जखन हयत तखनि बुझब जे भेल।" ई बात सविताक माय अपना दिससँ जोड़ि कय बजलीह। चन्द्र:- अहाँ लोकनिकेँ विवाह इत्यादि बाड़ी महक गेन्हारी साग बुझि पड़ैछ। साँझ खन गेलौं साग खोटि लेल लोहियामे द' देलियैक तरकारी तैयार भय गेल। ई कन्यादान थिकैक। एहिमे वर ताकय ओ विचारय पड़ैछ। बैसाखमे सभा हेतैक। कतहु हेबे करतैक। स. मा. :- घर कथा भय जाइत तँ नीक छल । चन्द्र- घर कथा कोना हो। पञ्जीकार गाम गेल छथि। घटक सेहो एखन गाम नहि छथि। बिन घरक पञ्जीकारक विचारसँ कार्य्य पाँचमे-छठम ठाम सम्बन्ध हयबाक सम्भावना। चैत धरि ओ लोकनि अयताह , बैसाखमे कतहु हैबे करतैक। स. मा. :- देखब, सविता केँ जाहिसँ घर वर नीक होइन से कय देबनि, एकेटा बेटी छथि दू चारि टा रहितथि तँ कियैक ने। चन्द्र:- हम की कय सकै छी । स.मा. सैह देखब अहूँ चम्पाक बाप जकाँ तेहन वर नहि आनब।विवाह कय जे जाथि से फेर घुरि कय नहि आबथि। देखियौक चम्पाक वर विवाह की जे गेलाह से अद्यपर्यन्त नहि अयलाह। द्विरागमनक कोन कथा कोनो खोजो-पुछारी नहि कयल। चम्पाक भाउज चम्पा पर सतत हुकुम फरमबैत छथिन्ह। हुनक लक्षण केहन जेना हुनक बाप द्विरागमनमे खबासिनी देने रहथिन्ह। बेचारी चम्पा बहुआसीनक आज्ञाकारिणी जे हुनका मूँह सँ खसल से तुरत मौजूद। धन्य चम्पा धन्य ।! चन्द्र :- चम्पा की करती । स्वामी विवाह कय जे गेल थिन्ह से घुरि कय अयबो नहि कयलथिन्ह। तखन वो बेचारी की करय । कोनहु तरहे मानापमान उठाय व्यंग्य वाक्यक बौछार सुनि सहि एहि पापी पेट काँ भरैछ। बहुत स्त्रीगण अपना माय बाप तथा स्वामियोक तिरस्कार कय मुसलमानक बहकौला सँ वेश्या वा मुसलमानिनी बनि नारकीय जीवन बितबैछ। ताहिसँ सर्वोत्तम यैह थीक अपना भाइ-भाउजक कथा मानि जीवन यापन करैछ। स. मा. - सैह देखब अहूँ ।ओ...ह..और न...हि...एतबा कहैत कण्ठ अवरुद्ध भय गेलनि। नेत्रसँ अश्रु मन्दाकिनी बहि चलल। आगू नहि किछु बाजि सकलीह। चन्द्र - जेहन भाग्य विधाता दयने हयथिन्ह। हमर कोन साध्य ! एतबा कहि चन्द्रमणिबाबू मूँह-हाथ धोय पान-सुपारी जर्दा काँ गाल तर दाबि दलानपर जाय एहि बातक घोर चिन्ता करैत पड़ि रहलाह। (क्रमशः) (प्रभात : वर्ष-1, अंक-4, अप्रैल-1933) {क्वैलख(कोइलख)क श्यामसुंदर झाक 'वियोगिनी' धारावाहिक शृंखलामे पहिल अंश अप्रैल-1933क अंकमे प्रकाशित भेल छल, जाहिमे एक आ दू छल। तेसर लेल आगाँक अंक जे उपलब्ध अछि, मइ,जून 1933 ओहिमे नहि अछि, जुलाइ अंक अनुपलब्ध अछि, प्रायः ओही अंकमे प्रकाशित भेल हेतैक। अगस्त-1933 अंक उपलब्ध अछि, ओहिमे चारिम खण्ड अछि। तेँ सम्पूर्ण नहि अछि, किन्तु एहि रचनाक ऐतिहासिक महत्वकेँ देखैत आ पढ़लाक बाद सम्पूर्ण लागत, ओहि समयक सामाजिक स्थितिक वर्णन आँखिक सोझाँ स्पष्ट झलकि जायत। )} - हितनाथ झा (4) भारत वर्षक ऋतुमे तीन ऋतु प्रधान अछि जाहिमे ग्रीष्म ऋतु , ओ एक प्रधान ऋतु अछि।ग्रीष्म ऋतुक प्रधान मास बैसाख थिक।एक दिन उपरोक्त मासमे दिवाकर अपन उग्र ज्योति सँ एहि भूमंडल काँ दग्ध कय रहल छलाह।गर्मीक ज्वालासँ मनुष्य,पशुपक्षी कहबाक तात्पर्य जे प्राणी मात्र अपन-अपन विश्रामक स्थानमे विश्राम कय रहल छल।वृक्ष अपन उदारताक परिचय देबा लै दुपहरक समयमे थाकल पथिक काँ अपन शीतल छाया प्रदान कय रहल छल। डिस्ट्रिक्ट बोर्ड सड़कक काते-काते जे इनार छल ओ शीतल मधुर जल प्रदान कय रहल छल ताहूसँ जीतल दानी मारवाड़ी ओ धनी लोकनिक पनिशाला। धन्य हमर सनातन धर्म। तैं एतेक ओजस्वी प्रभावशाली उदार अछि। नवीन जतेक धर्म भेल सब एहि धर्ममे एक-एक धक्का लगौलक। वर्तमानहु समयमे एक धक्का लागल अछि तथापि ई सनातन धर्म अपन पूर्वक नम्रता काँ चरितार्थ करैत लातमुक्का सहैत ज्वलन्त यशस्वी पताका काँ फहराय रहल अछि। अमेरिका वा अन्य पाश्चात्य देशमे दान देव् वा दान लेव परम घृणित बुझल जाइछ।परन्तु हमरा देशमे एकर बड़ महत्व छैक। हमरा देश काँ उदार होयबाक यैह मुख्य कारण थीक। दान वस्तु धार्मिक दृष्टिसँ, सामाजिक दृष्टिसँ, राजनैतिक दृष्टिसँ उत्तम थिक। यैह कारण थिक जे हमरा देशमे प्रति दिन किछु ने किछु दान होइत अछि। उपरोक्त समयमे एक व्यक्ति खुटिया मिरजई, माथ पर कोढ़िलावाला पाग पहिरने कान्ध पर दोपटा नेने पैर मे ठीकरी पदत्रान पहिरने शिवहरक सड़क जे भागलपुर गेल छैक, ओहि सड़कपर खूब जल्दी-जल्दी पैर मारने चल जाइत छलाह। शुद्धक समय छल, तैं एतेक चालिमे हड़बड़ी छल। अकस्मात एक इनार लग बैसल पाँच-सात व्यक्ति काँ देखि आगन्तुक व्यक्ति काँ देखि आगंतुक व्यक्ति अटकि गेलाह वो बाजि उठलाह- के थिकहुँ ? आरे घटक। घटक देखितहि ठाढ़ भय नमस्कार । कुशल ? एकर प्रत्युत्तरमे आगन्तुक व्यक्ति नमस्कार पात कय पुछलथिन्ह- घटक ! चलब नहि ? घटक - जेबे करब, एतेक हड़बड़ी कियैक ? आगन्तुक - चारि दिन सभा भेना भय गेलैक। घटक - अपने सेहो सभे जायब। हमरा तँ भेल जे सुपौल कोनो रजिस्ट्री करबै लै जा रहल छी। आगन्तुक- की पुछै छी ? हमरा तँ एहि बेर सभा जयबाक नहि छल कारण जे एखन कन्यादान करबाक योग्य नहि अछि, 14 मे वर्ष थिकैक। हमरा इच्छा छल परुका साल कार्य करितौ। हमरा आँगनक हाल तँ बुझले अछि। टीक उजाड़ै पर तैयार।तखन की करू ? एही टीक बचैबा लय सभा जा रहल छी, यदि युगलत कथा हैत तँ करब नहि तँ छोड़ि देब कोनो हड़बड़ी नहि अछि। घटक- (मनहि मन) कन्याक चौदहम वर्ष और कहैत छथि कोनो हड़बड़ी नहि(वाह रे0रे कलियुग) प्रकाशमे बेस,जल पीबि लिअ, रातिमे सुपौल रहि प्रातक गाड़ी सँ सभा जायब सैह नीक कारण जे रातिक सहरसा स्टेशन पर उतरब। कत रहब ? बड़ तकलीफ हयत। आगन्तुक- वेश, चलू संगहि चलब। घटक- आदमी नहि अछि ? आ कि पाछूसँ अबैछ। आगन्तुक- हँ, अबैत अछि। मनचनमाकेँ नहि चिन्हैत थिकियैक! भारी कोढ़ियाठ अछि। टके डेग दैत अछि। चलैत कोना अछि जेना कोबरा महक वर। घटक- अहूँ कोढ़ियाठे आदमी ल'क' चलैत छी। सभामे पनिगर आदमीक प्रयोजन ह्वैत छैक। आकि ओहूठाम रोपनिये करैब। आगन्तुक- वेश आब' दियौक। पाठक पाठिका एहि आगन्तुकसँ परिचित छथि परन्तु नामकरण नहि भेलासँ अकचकयबाक सम्भावना।मनचनमा खबासकेँ अयला पर जे सात-आठ व्यक्ति वैसल छलाह से सव सुपौल स्टेशन दिस विदा भेलाह। ओहि इनार सँ स्टेशन प्रायः दू कोस छल। घटकक भेष-भूषा अपूर्वे छल।एक टा लटपटही पाग कान्ध पर फाटल दोपटा वो अंगपोछा। एक हाथमे फराठी सेहो झुमकी लागल वो एक हाथमे तम्बाकुक झोरी सेहो प्रायः अढ़ाइ तीन हाथ लम्बा डेढ़-दू हाथ चौड़ा अनुमानसँ प्रायः पाठक लोकनि काँ बुझि पड़ैत जे गोटेक छोटका मसनद के खोल रहय। एहू सभसँ अपूर्व छल नोसिदानी।प्रायः ओहिमे आध सेर छह कनमा नोसि अटैत छलैक। घटक नोसि लेबामे ई आइ. आर. (इंडियन रेलवे) कम्पनीक इंजिन काँ छकबैत छलाह। नाकक दुनू पूड़ामे एक बेरमे प्रायः आध पाव नोसि ठूसि दैत छलथिन्ह। पाठक वो पाठिका विचारक विषय थिक यदि हम वा हमर समाज वा हमर देश एहि तरहक निशाखोर हो, तखन हमरा देशक सन्तान धनहीन बुद्धिहीन लम्पट दुराचारी व्यभिचारी हो तँ कोन आश्चर्य ? वाह रे नशा । यदि अहाँक ताण्डव नृत्य और किछु दिन एहि मिथिलामे भेल तँ मिथिलाक नामो निशान नहि रहत। बलिहारी एहि नशाक । धन्य !धन्य !! ई नशा !!! ...... (प्रभात , वर्ष- 1, अंक-8, अगस्त1933) उपर्युक्त आलेखमे एकहि सङ्ग बालविवाहक प्रचलनक तत्कालीन समाजक कुप्रथाक बहुत जीवन्त आ भयावह वृतान्त अछि। नशा सेवनसँ सामाजिक दुर्व्यवस्था सेहो देखल जा सकैछ। एहि आलेखमे ई स्पष्ट कहल गेल अछि जे जँ ई स्थिति रहतैक तँ मिथिलाक एक दिन नामोनिशान तक नहि रहतैक। एहन आलेख सभ धारावाहिक रूपमे अनेक अछि, किन्तु सभ अंकक उपलब्धता नहि रहलाक कारण खण्डित अछि, तथापि जतेक सम्भव भ' सकत से पाठकक सोझाँ प्रस्तुत करैत रहब। संपादकीय सूचना-एहि सिरीजक पुरान क्रम एहि लिंकपर जा कऽ पढ़ि सकैत छी- मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान-1 मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान-2 मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान-3 मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान-4 मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान-5 मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान-6 मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान-7 मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान-8 मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान-9 मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान-10 मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान-11 मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान-12 मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान-13 मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान-14 मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान-15 मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान-16 मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान-17 मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान-18 मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान-19 मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान-20 मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान-21 मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान-22 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ। २.२. कल्पना झा- मैथिली साहित्यमे श्रीकान्त ठाकुर 'विद्यालंकार'एवं हुनक परिवारक योगदान-४ कल्पना झा मैथिली साहित्यमे श्रीकान्त ठाकुर 'विद्यालंकार'एवं हुनक परिवारक योगदान-४ कल्पना झा मैथिली साहित्यमे श्रीकान्त ठाकुर 'विद्यालंकार'एवं हुनक परिवारक योगदान-4 माँ मैथीलीक सुच्चा सेवक/उन्नायक 'विद्यालंकार' मातृभाषाक सुच्चा सेवक श्रीकान्त ठाकुर 'विद्यालंकार' मैथिली साहित्यक प्रति सेहो अत्यधिक अनुराग राखैत छलाह। नहि जानि किएक किछु लोक हुनका मात्र 'राष्ट्रभाषा हिन्दीक अनन्य पुजारी'क रूप मे स्थापित कऽ देबा लेल बिर्त भेल सन बुझा रहल छथि। ई सत्य अछि जे ओ हिन्दी मे देखनुक काज बेसी केलनि। कारण, ओ पत्रकारिता सँ जुड़ल छलाह। आ से पत्रकारिता ओ हिन्दी मे केलनि। बीस बरख, अक्टूबर 1948 सँ मइ 1968 धरि ओ हिन्दी दैनिक 'आर्यावर्त' सँ जुड़ल रहलाह। प्रधान सम्पादक रूप मे। हुनकर समय मे आर्यावर्त दैनिक पत्रक प्रतिष्ठा आ प्रसार दुनू मे अपार बढ़ोतरी भेल। सम्पादकीय परम्परा केँ आगाँ बढ़ौलनि। जहिना पत्रकारिता आ 'विद्यालंकार' पर्यायवाची शब्द सन बनि गेल छल, तहिना 'आर्यावर्त' मतलब 'विद्यालंकार' एहने सन स्थिति बनि गेल छलए। "आर्यावर्तक इतिहास श्रीकान्त ठाकुर 'विद्यालंकार'क जीवन-गाथाक इतिहास थिक" ई कहब छनि सुरेश्वर झाक। काज ओ केलनि हिन्दीए मे, माने पत्रकार रूप मे जतेक-जे केलनि से हिन्दीए मे केलनि आ जैं हिन्दी मे केलनि तैं ओ जे यदा-कदा मैथिली भाषा ओ साहित्य तथा मिथिलाक सांस्कृतिक उत्थानक लेल आर्यावर्तक माध्यम सँ मैथिली-भाषीक भावना केँ मुखरित करबाक प्रयास करैत रहलाह, से बेसी लोक धरि पहुँचल। मतलब बेसी लोक पर प्रभाव पड़लैक, ओहि बात सभक। कहबाक माने हिन्दीओ मे काज करैत ओ मैथिलीक उपकार करबाक प्रयास करैत रहलाह। यथासाध्य कएबो केलनि। मुदा मात्र 'माध्यम' हिन्दी पर नजरि गड़ौने, लोक हुनकर 'हिन्दीक अनन्य पुजारी' बला छवि मात्र स्वीकार्य मानथि, से अनुचित होएत। "मैथिली साहित्य मे श्रीकान्त ठाकुर 'विद्यालंकार' एवं हुनक परिवारक योगदान" पर लिखबाक क्रम मे कइअक गोटा सँ गप्प करैत हुनका विषय मे जानबाक प्रयास करैत रहलहुँ अछि। आ गप्पे गप्प मे 'विद्यालंकार'क व्यक्तित्वक ओहन पक्ष सभ सेहो उजागर होइत जा रहल अछि, जे कोनो पोथी मे पढ़ल नहि छलए हमरा। आदरणीय भीमनाथ झा सँ गप्प करैत 'विद्यालंकार'क मैथिली भाषाक प्रति प्रेम आ साहित्य-प्रेमक संग मैथिली साहित्यकार लोकनिक प्रति सम्मान-भाव सँ सेहो परिचित भेलहुँ। भीमनाथ झा एकटा संस्मरणात्मक प्रसंग बतौलनि, 'विद्यालंकार' जी हरेक साल अगहन मास मे, धनकटनी समय मे, बरु दसे दिन लेल, गाम (कोइलख) अबस्से आबैत छलाह। आ हरेक बेर गामक यात्रा मे, हुनक उपस्थिति मे कोइलखक संग आस-पड़ोसक गाम सँ सेहो नबतुरिया सहित सभ बएसक लेखक-कवि सभक जुटान करबाक उद्देश्य सँ कोनो कवि-गोष्ठीक आयोजन निश्चित रूप सँ होइत छल कोइलखक "उमापति पुस्तकालय" पर। जे पुस्तकालय कवि आ नाटककार उमापति उपाध्यायक नाम पर कोइलख गाम मे 14 अक्टूबर 1932 ई. मे स्थापित भेल छलए। आ ई पुस्तकालय अद्यतन जीवन्त अछि, एहन जनतब भेटि रहल अछि हमरा। एहि पुस्तकालय लेल 'विद्यालंकार'क सिनेहक बानगी देखबैत भीमनाथ झा बतौलनि जे जा धरि 'विद्यालंकार' आर्यावर्त सँ जुड़ल रहलाह, सभ दिन एक प्रति "आर्यावर्त" डाक सँ आबैत रहल उमापति पुस्तकालय मे। एक दिन बादे सही, मुदा लोक धरि नित्य प्रतिक अखबार पहुँचिए टा जाइक। अपन गाम, गामक लोक, गामक पुस्तकालय लेल एहन सिनेह, जागरुकता, गामक लोक पढ़थि, बढ़थि, ताहि लेल एहि तरहक साकांक्षता विरले देखबा-सुनबा लेल भेटत। हँ, तँ बात कऽ रहल छलहुँ, कोइलख मे हरेक साल आयोजित होमए बला कवि-गोष्ठीक। एक बेर गामक लोक केँ विचार भेलनि जे कवि 'चूड़ामणि' मधुप जी केँ कोइलखक उमापति पुस्तकालय पर बजाए सम्मानित कएल जाए। 'विद्यालंकार'क सहमति सँ आयोजन भेल। स्वागत सम्मानक संग कविता पाठ सेहो करैत गेलाह किछु नब-पुरान कवि लोकनि। कार्यक्रमक अध्यक्षता केलनि स्वयं 'विद्यालंकार' जी। एही कार्यक्रम मे हितनाथ झा पहिल बेर मंच पर कविता-पाठ कएने छलाह। जखन ओ पँचमे कक्षाक छात्र छलाह। ई प्रायः 1966क बात होएत। पं० काशीकान्त मिश्र 'मधुप' आ श्रीकान्त ठाकुर 'विद्यालंकार'क उपस्थिति मे कविता-पाठ करबाक ई संस्मरण स्वयं हितनाथ झा हमरा सुनौलनि अछि। एहि आयोजनक प्रात भेने बड़का-बड़का अक्षर मे ई 'हेडलाइन' "कोइलख मे हुआ मधुप जी का सम्मान" देखि गामक लोक कतेक गदगद भेल हेताह, से हुनकहि सभक मुहेँ सुनला पर बुझबा मे आओत। अपन गामक नाम, अपन मैथिलीक साहित्यकारक नाम, राष्ट्रीय दैनिक समाचार पत्र मे देखब वास्तव मे आह्लादकारी रहल हेतनि गौँआक लेल। उक्त प्रसंगक चर्चाक उपरान्त भरिसक स्पष्ट भऽ गेल होएत जे श्रीकान्त ठाकुर 'विद्यालंकार' हिन्दीक अनन्य पुजारी मात्र नहि, माँ मैथीलीक सुच्चा सेवक/उन्नायक सेहो छलाह। संपादकीय सूचना- एहि सिरीजक पुरान क्रम एहि लिंकपर जा कऽ पढ़ि सकैत छी- मैथिली साहित्यमे श्रीकान्त ठाकुर 'विद्यालंकार'एवं हुनक परिवारक योगदान-1 मैथिली साहित्यमे श्रीकान्त ठाकुर 'विद्यालंकार'एवं हुनक परिवारक योगदान-2 मैथिली साहित्यमे श्रीकान्त ठाकुर 'विद्यालंकार'एवं हुनक परिवारक योगदान-3 विद्यालंकारजीसँ पहिने विदेहपर व्यासजीक कृतित्वपर कल्पनाजी लीखि रहल छथि। पाठक व्यासजीपर प्रकाशित एखन धरिक सभ खंड निच्चा केर लिंकपर जा कऽ पढ़ि सकै छथि- मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-1 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-2 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-3 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-4 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-5 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-6 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-7 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-8 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-9 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-10 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-11 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-12 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-13 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-14 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-15 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-16 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-17 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-18 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-19 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-20 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-21 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-22 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-23 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-24 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-25 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ। २.३. सुरेन्द्र लाभ- तीन गोट कनिका नाटक [तारीख पर तारीख/ फ्री सलाह/ पहिचान] सुरेन्द्र लाभ तीन गोट कनिका नाटक [तारीख पर तारीख/ फ्री सलाह/ पहिचान] १. तारीख पर तारीख पात्र: १. जज साहेब २. वकील साहेब ३. रामू (गरीब मजदूर) ४. रामूक बेटी (१०–१२ वर्ष)
(स्थान - अदालत कक्ष) (जज कुर्सी पर, वकील फाइल पलटैत, रामू आ’ ओकर बेटी कोनामे ठाढ़) जज साहेब-अगिला केस….रामू बनाम ठाकुर… वकील साहेब- जज साहेब , किछु दस्तावेज अपूर्ण अछि, अगिला तारीख देल जाए। (रामू घबराएल स्वरमे आगू बढ़ैत अछि) रामू- हुजूर! पाँच बरिस भ' गेल… हर बेर- अगिला तारीख…हमर सब किछु बिका गेल… आब किछु नै बचल अछि? जज साहेब- (औपचारिक स्वर)प्रक्रिया अपन समय लैत छै… (रामूक बेटी धीरेसँ बाबूक हाथ पकड़ैत अछि) बेटी-बाबू… स्कूलमे सर पूछलनि ,न्याय की होइत अछि?आबआहाँ कहू हम की जवाब देबै? (पूरा कोर्ट सन्न) रामू- (कंठ भरैत)बेटी… न्याय… शायद… इंतजार के नाम छै… वकील साहेब- (बीचमे)भावुकतासँ काज नै चलैत छै! कानून सबूत मगैत छै रामू! रामू- सबूत?हमर फाटल हाथ…हमर गिरवी परल घर…आ’ हमर बेटी के मिझाएल आँखि ई,सबूत नै भेलै वकिल साहेब ? (जज किछु क्षण चुप) बेटी- (धीरे, मासूम स्वरमे)जज साहेब…जँ न्याय एतबा देरसँ अबैत अछि…त' की ओकरा न्याय कहबै ? (गंभीर सन्नाटा) (जज नजरि झुका लैत छथि) जज साहेब: (धीरेसँ )अगिला तारीख… (रामू कटु मुस्कान संग बेटी के हाथ पकड़ैत अछि) रामू-चल बेटी…एतय न्याय नै,तारीख भेटैत छै … (दुनू बाहर निकलैत अछि) (वकील फाइल बंद करैत अछि, जज खाली कुर्सी दिस तकैत छथि) वकील साहेब- (धीरे)हम की क’ सकैत छियैक जज साहेब ?हम त’ मात्र केस लडि सकै छी… जज साहेब- (और धीरे) हमसब केस केस खेलाइत रहब,मुदा शायद… जिनगी हारैत रहत वकील साहेब …। ( जज आ वकील दुनू न्यायके मूर्ति ( कारी पट्टी बान्हल महिला जकर हाथमे तराजु छै ) के एकटक देखैत रहि जाइत अछि) जज साहेब: (अन्तिम, तीख व्यंग्य)शायद… पट्टी एकर आँखि पर नै…हमर विवेक पर बान्हल अछि… (नाटक समाप्त) २. फ्री सलाह पात्र: १. डॉक्टर बाबू (झोला छाप): हाथ में स्टेथोस्कोप, आत्मविश्वास बहुत। २. मखन (रोगी): सीधा-सादा गामक आदमी। (छोटसन- क्लिनिक ,डॉक्टरबाबू कुर्सीपर अकड़िक' बैसल छथि, मखन पेट पकड़ने प्रवेश करैत अछि) मखन-डॉक्टर बाबू, पेटमे बहुत दर्द करैत अछि, किछु दवाइ दिय’। डॉक्टर बाबू- (गंभीर बनैत)हँ, देखैत छी... (बिना देखने) गैस, एसिडिटी, आ’ टेंशन’ तीनू रोग अछि! मखन-टेंशन? हमरा ककरो संगे झगड़ा नै अछि। तखन हमरा टेंशन कथी के हएत ? डॉक्टर बाबू- अरे! टेंशन बिना कारणो होइत अछि! ई आधुनिक बीमारी अछि! (स्टेथोस्कोप गर्दनिमे लगा क' जंचैत अछि । ) मखन - डाक्टर साहेब पहिने आला कानमे लगाउ ने । डॉक्टर बाबू- चुप रहू ! डाक्टर हम छी कि आहाँ ? कोन बिमारीमे आला कत’ लगएबै से हम बुझबै कि आहाँ ? मखन- से त’ अहीं बुझबै । डॉक्टर बाबू- ( आला स’ जचलाके बाद ,कागज पर दावाइ लिखैत )तीनटा दवाइ लिखि रहल छी,एकटा भोर , एकटा साँझ, आ एकटा जखन मोन होए ! मखन - जखन मोन होए के मतलव ? डॉक्टर बाबू - दर असल तेसर डोज हमर आम्दनी बढाब’ के लेल लिखने छी । मखन- (चकित)आहाँके आम्दानी बढाब’ के लेल हम दबाइ खाउ? डॉक्टर बाबू- हँ, दवाइ कम होएत त' रोग जल्दी ठीक भ' जाएत,फेर हमरा के पूछत?" (ओही समय मखनक फोन बजैत अछि) मखन- हेलो?... की? हमर भैंस ठीक भ' गेल? ...ओह! त' हमरा पेट दर्द त' ओही चिंतामे छल! (मखन राहत महसूस करैत अछि) मखन-डॉक्टर बाबू, आब त' दर्द खत्म भ' गेल। डॉक्टर बाबू- (जल्दी सँ)कोनो बात नै! ‘फील गुड फीस’ द’ दिय’,दवाई नहि, त' सलाह लेल! मखन- सलाह त' फ्री होइत अछि ने? डॉक्टर बाबू- (मुस्कियाइत, कुर्सी पर अकड़ि क')ई क्लिनिक अछि, यूट्यूब चैनल नै! (मखन अनमनाइत जेबसँ पैसा निकालैत अछि) मखन-लिय, डॉक्टर बाबू... दर्द त' अपने भागि गेल, मुदा फीस त' अहाँ नहि छोड़ब। डॉक्टर बाबू- (पैसा लैत, ठहाका मारैत)एहने रोगी सँ त' हमर क्लिनिक चलैत अछि, रोग अपने ठीक, आ फीस अपने फिक्स! मखन -(बाहर निकलैत-निकलैत बुदबुदाइत)लगैत अछि, बीमारीसँ बेसी खतरनाक त' ई इलाज अछि! (डॉक्टर नोट गनैत रहैत अछि, पाछू हल्का कॉमिक म्यूजिक) (नाटक समाप्त ) ३. पहिचान पात्र: १. बाबा (बुजुर्ग किसान) २. क्लर्क ३. बैंक मैनेजर ४. पोता (१२ वर्ष) (स्थान – बैंक काउंटर, भीड़भाड़ वाला माहौल) (लाइन लागल अछि। बाबा थाकल चेहरा संग फाइल पकड़ने ठाढ़ छथि। पोता संगमे चिंतित भावमे) क्लर्क- (तेज आवाजमे)अगिला! नाम बताउ! बाबा- (संकोचसँ)धनपत … लोन माफी लेल आवेदन देने रही बेटा…। (क्लर्क कम्प्यूटरपर टाइप करैत अछि) क्लर्क-हँ, आवेदन त' अछि… मुदा प्रोसेस लेल मोबाइल नंबर पर OTP जायत। ओ बताउ। बाबा-मोबाइल त' अछि… मुदा ई स्मार्ट वाला नै…ओहिमे बस कॉल होइत अछि…। क्लर्क- (लापरवाही सँ) तखन OTP केना आएत? बिना OTP काज नै होएत। बाबा - बेटा… कागज सब त' अछि… जमीन हमर नाम पर अछि…एतेक साल सँ टैक्स द’ रहल छी …। क्लर्क - हम कागज नै, सिस्टम देखैत छी। सिस्टम कहैत अछि जे भेरीफाइ, तखन भेरीफाइ होइत अछि । (पोता आगू बढ़ैत अछि) पोता - सर, हम नंबर दीय’ ? हमरा फोनमे OTP आबि जाएत…।हम हिनकर पोता छी । क्लर्क - नै! जकर नाम पर आवेदन अछि, ओकरे नंबर चाही। (बाबा चुप… हाथ कपैत छै । ) बाबा - पहिने गाममे परधान कहैत छल,ई धनपत छथि ,तखन सब मानि लैत छल…आब मशीन पूछैत अछि, तों के छें?…। (भीड़मे हलचल, किछु लोक मुस्कियाइत, किछु चुप) (मैनेजर बाहर अबैत छथि) मैनेजर - की भ' रहल अछि एत’ ? क्लर्क - सर, हिनका संगमे बडका मोबाइल नै छै । तखन OTPकोना जएतै ? तँए फाइल अटकल छै ।सिस्टम हिनकर पहिचान नै क’ रहल छै । मैनेजर - (औपचारिक, ठंढा स्वर)नियम सबके लेल एक्के होइत अछि। सिस्टम बिना काज नै होएत। बाबा: (धीरे, विनम्र स्वरमे)साहेब…हम जमीन जोतैत-जोतैत जिनगी काटि देलहुँ…एखनहु कागज हमरा नाम पर अछि…मुदा… ई केहन सिस्टम छै जे हमरा चिन्हैत नै अछि । (मैनेजर चुप,कोनो जवाब नै) (पोता बाबाक हाथ पकड़ैत अछि) पोता - (मासूम जिज्ञासासँ)बाबा…अहाँ के ई मशीन कियैक नै चिन्हैत अछि? अहाँ त' गामभरि के चिन्हैत छी…। (बाबाक आँखि नोरा जाइत अछि ।) बाबा - बौआ…ई मशीन चेहरा नै देखैत छै … नंबर देखैत छै…आ हमरा लग…शायद ओ नंबर नै अछि…। (क्षणभरि सन्नाटा) (बाबा धीरेसँ फाइल काउंटर पर राखि दैत छै ।) बाबा - चल, गाम चल बौआ ..ओत’ हम जमीनक मालिक छी…मुदा… सिस्टममे…अखनहु ‘कोनो आदमी’ नै छी…। (बाबा आ’ पोता बाहर चलि जाइत छै ।) (क्लर्क चुप, स्क्रीन देखबैत अछि…..verification Failed) (मैनेजर धीरेसँ स्क्रीन दिस देखैत, फेर बाबाक खाली जगह दिस) मैनेजर - (बहुत धीरे, आत्मचिंतनमे)हम पहिचान बनबैत छी…कि मेटबैत छी…? (स्क्रीनपर Retry चमकत रहैत अछि…) (नाटक समाप्त) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ। २.४. लाल देव कामत- डॉ०( श्रीमती) लालपरी देवी : एक विदुषी लाल देव कामत डॉ०( श्रीमती) लालपरी देवी : एक विदुषी सुपौल जिलाक पिपरा प्रखंड अंतर्गत बसुली गामक स्व०सुमरीत लाल प्रसाद जीके सुपुत्र प्रो०(डॉ०) राजाराम प्रसाद जीपूर्व उप कुलपति ,पटना विश्वविद्यालय पटना केर वियाह एक योग्य शिक्षिका लालपरी जीक संग भेलनि। श्रीमती लालपरी देवी जीक जन्म २३ - ७ - १९५१ ई० केँ कबिलपुर, लहेरियासराय जि०- दरिभंगामे भेल रहनि। लालपरी जी एक मध्य विद्यालयके अध्यापिका सँ महाविद्यालयके प्राध्यापिका कोना बनलीह, से हुनक पढायके लगनशीलता स्वतंत्ररूपेँ सहजहि कोना बढ़लनि ई हुनक मेधा थीकैन! पाठक बीच हिनका विषयमे संक्षिप्त जनतब देबाक चेष्टा करैत छी। सन् १९८२ मे स्नातक (मैथिली) प्रतिष्ठाक संग दरभंगा'क ललीत नारायण मिथिला विश्वविद्यालय सँ प्रथम स्थान प्राप्त कयलीह। स्नातकोत्तर मैथिली विषयमे सेहो प्रथम स्थान १९८४ ई०मे पौलीह। सन् १९८६ ई० मे हिन्दी विषय सँ स्नातकोत्तर सेहो कयलीह , द्वीतीय स्थान भेटल रहनि ल.ना.मि.वि.वि. सँ तथा ओतहि सँ १९९१ ई० मे पीएचडी. कयलन्हि। हिनक योगदान दि० ६ नव० १९९६ सँ ३१ मार्च ९८ धरि ललीत नारायण तिरहुत महाविद्यालय मुज्जफरपुरमे मैथिली प्राध्यापिका भेलीह। १ अप्रैल १९९८ ई०सँ रमेश झा महिला महाविद्यालय मैथिली विभागमे सेवारत वरीय प्राध्यापिका रूपमे खूब यश कमेलनि। हिनका संगीत विषयमे सेहो अभिरुचि छन्हि। सर्व नारायण सिंह राज कुमार सिंह महाविद्यालयके प्रधानाचार्य रहलीह संगहि अधिषद सदस्य सेहो बनलीह। लेखनके क्षेत्रमे हिनक खूब योगदान भेल छन्हि-: महिला ओ समाज सेवा, लोकोक्तिक स्वरूप विन्यास , धार्मिकता -व्यवहारिकता ओ पाखंड, मिथिला विभूति कपिल ,शोध प्रवन्ध - कविचन्द्रक मिथिला भाषा रामायणमे व्यवहृत लोकोक्तिक विवेचनात्मक अध्ययन। सन् १९८० केर दशक सँ सह सम्पादन - सुत्रधार (मैथिली पत्रिका)जून ०३ धरि। आकाशवाणी दरभंगा द्वारा समय - समय पर कथा ओ वार्ता परिचर्चा प्रसारित होइत रहलनि अछि। हिनक मौलिक रचनाक अदहा दर्जन पोथी प्रकाशित छन्हि -; साहित्य दर्शन (आलोचनात्मक निबंध संग्रह)-२०१५ ई०। पूर्वमे ऊपर रहनि-: नहिं.... किछु नहि.....! (कथा संग्रह -२००४ ई०), कविश्वरक रामायणके लोकोक्ति (आलोचना - २००९), कथा संग्रह - त्रयोदशी, कविता संग्रह- मंगलसूत्र आदि । डॉ० लालपरी देवी जीकेँ सेवानिवृत्त सँ पूर्वहि सँ अध्ययन, सृजन आ चिन्तनमे बढ़ गहिंरगर अभिरुचि रहलन्हि अछि। हिनका शिक्षण,मंथन आओर प्रशासनिक गतिविधिमे सतत् देखल गेलनि हेन। हिनक सहभागिता राष्ट्रीय, अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठीमे व्याख्यान देबाक संगहि कतिपय साहित्यिक गतिविधि विषय पर आयोजित सेमिनारमे भेल य। लालपरी जीके व्यक्तित्व मादे डॉ० ललितेश मिश्र जी - विश्व विद्यालय अध्यक्ष , स्नातकोत्तर अंग्रेजी विभाग, मधेपुरा उद्गार व्यक्त कयने छथि " डॉ० श्रीमती लालपरी देवी प्राधानाचार्यक रूपमे एम एच एम कालेज सोनवर्षा -सहरसामे पदास्थापित रहथि। गत शताब्दीक अस्सीएक दशक सँ ओ साहित्यकर्ममे सन्नद्ध रहलीह अछि। सम्पादन काज कयने छथि, हुनक ' नहिं...किछु नहि.….! कथा संग्रह २००४ ई० मे प्रकाशित भऽ बेस प्रशंसित भेल। मैथिल समाजक विस्मृत भेल जाइत ओ तत्काल प्रचलित लोकोक्ति अथबा कहबीक अत्यधिक श्रमसाध्य गवेषणापूर्ण अध्ययन उपस्थापित तँ करितहिं अछि,संगहि मैथिली साहित्यक समृद्ध लोकसाहित्य'क परिचय करबैत अछि। ओहि सँ मैथिली साहित्यक' उपकार तँ भेलहि अछि , डॉ० श्रीमती लालपरी देवीक अप्रतीम साहित्य साधना सेहो द्योतित भेल अछि।" हिनक साहित्यके सौन्दर्य पर आगू कहियो विमर्श करब। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ। २.५. प्रमोद झा 'गोकुल'- डोलबैत रहू (लघु कथा) प्रमोद झा 'गोकुल' डोलबैत रहू (लघु कथा)
भीषण गरमी पड़ि रहल छलै, आ तैपर से वसात ,मार्तण्डक टहटहौआ प्रखर रौदक संसर्ग मे आबि अपन शैत्य धर्म त्यागि देने छलै। पानि सेहो बिनु आगि पर चढ़ौनहिं खौलके इनहोर है रहल छलै। एमहर बसातक झरकी आ ओमहर गरम पानि,दुनू मिलिके जेना सबहक प्राण लेबा पर उतारू छलै। तखनहिं बड़का भाइ अखवार सँ हौंकैत पहुंचलाह।हमर स्याह भेल मूहँ देखिके बजलाह - सत्ते प्राण बाँचब आब कठिन छह ! - हँ भाइ! दिन राति गरमी सँ बाल बच्चाक संग मुरगी जकाँ छटपाटाइत रहै छी। - से ठीके कहै छह। तोहर भौजी के ते छाँट पर छाँट भए रहल छैन। कतेक कचका आमक सरवत पियौलौं तखन कतौ से दम धेलैन।लारू बातू ते ओहिना छथिहे। - हमरो घरक हाल एहने बुझू। -हौ एकटा बात कहियह! - हँ कहूने! - तों ते पढ़ल लिखल छह! नौकरी नै भेलाक कारण हमरे जकाँ महीस चरबै छह से अलग बात! - ओह,भाइ! चिकारी से बाहर आबि के कहू ने! - बेस, ते देखहक ते पेपर मे की निकललैए ? - ई कोनो कम्पनीक विज्ञापन छियै! - की छियै से ते कहह! - ऐ मे लिखल छै जे नीचे लिखे नम्बर पर दो सौ रुपये खटाखट भेजिए और फटाफट पूरे परिवार गर्मी से राहत पाइये! - ते कोन हर्जा? दुनू भांइ एखने औन लाइन पठा दहक।हैया लैह दू सौ रुपैया! - अहीं कहला पर भाइ! हमहूँ द' रहल छिऐ। - हँ हौ ! करह ने शुभस्य शीघ्रम। कम से कम राति से अहुँछिया ते नै काटत दुनू गोटेक परिवार। - लियह भ' गेल पाइ सेन्ड! कहैए दू घंटा मे पार्सल पहुँच जायत। दुनू भाँइ आतुर भै रहल छलाह गरमीक दवाइले। जँ जँ समय बीतल जा रहल छलै तँ तँ दुनू भांइक धरकन नव विवाहित वर जकाँ बढ़ल जा रहल छलैन, कि तखनहिं बसातक झोंका जकां मोटर साइकिल के रिरियबैत एकटा सूट बूटेड अपटूडेक व्यक्ति गाड़ी में ब्रेक मारैत उतरल आ अपन बैग सँ सजल धजल भारी भरकम पार्सल नाम पूछिके दुनू गोटेक हाथ मे धरा देलक आ जाही गति सँ आयल छल ताही गतियेँ फुर्र भै गेल। दुनू भांइ पार्सल खोललैन ते पहिने ओइमे सँ रंग विरंगक कूट आ कागज छिट्टा भरि निकललैन। निकलैत निकलैत अंत मे निकललैन तिलिया फुलिया कैल एकटा छोटकी ताड़क पंखा, तै पर खूब सुन्दर अक्षर मे लिखल छलै' हमेशा डुलाते रहें' । दुनू भांइ मथा हाथ धयके बैसि रहलाह आ एके स्वर मे खूब जोर से घौना करैत बजलाह - ठकहरबा ठैक लेलकौ रअउ!!! अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ। २.६. लाल देव कामत- स्वस्थ आयु लेल योग लाल देव कामत स्वस्थ आयु लेल योग
जहन हम अपन भीतर शांति आ संतुलन स्थापित करैत छी ,तँ हम अपना पर्यावरणके संग सेहो सामन्जस' दिस डेग बढ़ाबैत छी। योग सिद्ध करैत छैक जे इ मात्रे देहक लचकदार आ कसरत नहिं थीक, वरण इ एक समग्रतामे जीवनशैली छी। इ आंतरिक ठहराउ,सझिया जागृति आ पर्यावरण'क संग सामंजस स्थापित करबाक एकटा मार्गदर्शन करैत अछि। योगके से रस्ता नै मात्रे लोककेँ भीतर सँ सशक्त बनाबैछ ,वरण इ धरतीके पुनर्निर्माण आ संरक्षण'क लेल सेहो प्रेरणा प्रदान करैछ; जाहिसँ हम एकटा स्वस्थ आओर अस्थाए भविष्य दिश अग्रसर होईत जाई छी। वैश्विक परिदृश्य पर विचार करैत विगत वर्ख विशाखापट्टनम सँ भारतके प्रधानमंत्री जी राष्ट्रकेँ वर्चुअल रूप सँ सम्बोधित करैत कहने रहथि " आई दुनियां तनाउ, अशांति आ अस्थिरता'क चालिसँ चलि रहल अछि। अनेको क्षेत्रमे स्थिति आरो गम्भीर भऽ रहलैक हेन। एहन समयमे योगा हमरा शांति ओ संतुलनके रस्ता पर लऽ जाईत अछि। " ओ इहो उल्लेख कयलन्हि जे- जोग खाली व्यक्तिगते टा कल्याण लेल नहिँ ,परँच ई वैश्विक शांति आ सामूहिक जागरूकता केँ बढ़ाबैत य। ई एकटा एहन साधन छी ,जे हमरा सभकेँ अपना भीतर आ बाहर दूओ ठाम संतुलन बनाकय राखयके ममिलामे मार्गदर्शन धरि करैत छैक। विगत साल राजपथ नव डिल्लीमे पहिल अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस २५ मिनट धरिमे २१ योग आसन्न मुद्राक प्रदर्शन ऐतिहासिक भेल रहय। एहिमे पंतप्रधान श्री नरेन्द्र मोदी जीक सँग देशभरि सँ ३५९८५ लोक भाग लेलनि । आ ८४ देशके लोक एहि विशेष आयोजनमे भाग लेने रहथि। यथा -: रामदेव स्वामी ,सव्यासाके प्रमुख एच आर नागेन्द्र, श्रीमती हंसाजी जयदेव योगेन्द्र,स्वामी आत्माप्रिय नन्दा । मंच पर भारत सरकारके आयुष मन्त्रालयके मंत्री मा० श्रीपद नाईक ,मंन्त्रालय सचिव निलेजल सान्याल । विदेश मंत्री सुषमा स्वराज जी- संयुक्त राष्ट्रमे आयोजित समारोह केर अध्यक्षता कयने रहथिन,से अमेरिका'क प्रसिद्ध 'टाइम्स एक्वायर ' सँ वैश्विक दर्शकगण लेल सदैव न्यूज अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस पर सब साल शारीरिक आ मानसिक स्वास्थ्य केँ समर्पित एकटा वैश्विक उत्सव थीक । पुरान कालके भारतीय परम्पराकेँ विश्व पटल पर पैहचान दियाबय बाला इ दिन तनाउ मुक्त जीवन आ समग्र कल्याणक लेल सहज अछि। तनाउ सं मुक्ति -: प्राणायाम आ धियान मोनके शांत राखैछ, एकाग्रता बढ़ाबैछ। मजगूत मांशपेशि आ लचीलापन -: नियमित योगाभ्यास सूर्य-नमस्कार,तारासन्न उपयुक्त छैक। बेहतर श्वसन आ पाचन -: अनुलोम- विलोम आ कपालभाति एहन प्राणायाम सँ फेफराक क्षमता बढ़ैत पाचनतंत्र मजगूत होइछ। पछिला साल तँ 'एक पृथ्वी - एक स्वास्थ्यके लेल योग' कार्यक्रममे चजलशक्ति मंन्त्रालय आ राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के संयुक्त तत्वावधानमे यमुनाक सुरम्य तट पर अवस्थित बीएसएफ कायाकिंग कैम्पमे आयोजन दिव्य आ भव्य रहल छल। ऐ विषय पर नमामि गंगे पत्रिका अंक ४० म प्रमुखता सँ रपट छपलाहा पढबाक सौभाग्य मेटल रहय। एहू बेर अप्रैल -जून २०२६ ई० म ई विषय पाठक बीच विस्तार सँ आओत। योग अपनाबैत निरोगी काया बनौने रहनाई सब मानव मात्रके पहिल दिनचर्या होयबाक बेगरता अछि। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ। २.७. आचार्य रामानंद मंडल- धनाकर ठाकुर संवाद [सन्दर्भ -मिथिला राज्य आ महाकवि विद्यापति] आचार्य रामानंद मंडल आचार्य रामानंद मंडल -धनाकर ठाकुर संवाद [सन्दर्भ -मिथिला राज्य आ महाकवि विद्यापति]
आचार्य रामानंद मंडल -कि हय अंतरराष्ट्रीय मैथिली परिषद् के राष्ट्र कल्पना। धनाकर ठाकुर -जतेक दूर दूर तक पीपर पातक समान आदर ओ भारतवर्ष या भारत राष्ट्र। आचार्य रामानंद मंडल -एते घुमा के उत्तर न दिउ।साफ साफ कहु राष्ट्र के कल्पना बताउ। धनाकर ठाकुर -सीधा साधा उत्तर तिब्बत स जावा, कम्बोडिया तक ई एक राष्ट्र पश्चिममे मक्केश्वर महादेव जहिया ओ मानथि
आचार्य रामानंद मंडल -इ फरुआत बात सभ के मानत। इ समीचीन विचार न हय।कैला मिथिलावासी के गोल गोल घुमबैय छै।इ अदूरदर्शिता हय।एहन विचार सभ मिथिला मैथिली आंदोलन के असफलता के ओर ले जायत। इ सुलझल व्यक्तित्व के विचार न हय। जौं नायक उलझल हय।त असफलता निश्चित हय। धनाकर ठाकुर -अंतर्राष्ट्रीय मैथिली परिषदक बैसारमे मिथिला चारि धाम परिपथ पर विचार अंतर्राष्ट्रीय मैथिली परिषदक एकटा गूगल मीट बैसार लाला बहादुर शास्त्री मेमोरियल कॉलेज, जमशेदपुरक प्राचार्य डॉ. अशोक अविचलक अध्यक्षतामे सम्पन्न भेल। बैसारमे उत्तराखण्डक प्रसिद्ध चारि धाम यात्राक तर्ज पर मिथिलामे एकटा तीर्थ-परिपथ विकसित करबाक आवश्यकता पर विचार-विमर्श कएल गेल। बैसारकेँ सम्बोधित करैत डॉ. धनाकर ठाकुर वृहत्तर मिथिला (नेपाली मिथिला सहित) तथा भारतीय मिथिलाक लेल दूटा अलग-अलग तीर्थ-परिपथक प्रस्ताव रखलनि। वृहत्तर अंतर्राष्ट्रीय मिथिला चारि धाम परिपथ डॉ. ठाकुर निम्नलिखित चारि पवित्र स्थलक प्रस्ताव रखलनि— वराह क्षेत्र (पूर्व) वाल्मीकि आश्रम (पश्चिम) गजेन्द्र मुक्ति धाम, हरिहरक्षेत्र, गंडक नदीक तट पर (दक्षिण-पश्चिम) बैद्यनाथ धाम (दक्षिण-पूर्व) ओहि संग हुनका द्वारा आदि कुंभस्थली, सिमरिया घाटकेँ एहि परिपथक केंद्रीय आध्यात्मिक केन्द्रक रूपमे विकसित करबाक सुझाव सेहो देल गेल। भारतीय मिथिला चारि धाम परिपथ भारतीय मिथिलाक सीमा भितर एकटा छोट परिपथक लेल निम्नलिखित स्थलक प्रस्ताव देल गेल— पुनौराधाम (उत्तर) प्रह्लाद–नरसिंह अवतार स्थल, पूर्णिया (पूर्व) आदि कुंभस्थली, सिमरिया घाट (दक्षिण) गजेन्द्र मुक्ति धाम, सोनपुर (पश्चिम) उपस्थित सदस्यसभ एहि प्रस्तावक सराहना कयलनि आ परिषद् द्वारा एकरा पर आगाँ विचार करबाक निर्णय लेल गेल। बैसारमे पूनम झा (आसनसोल), डॉ. रतन कुमारी (घोघरडीहा) तथा मिथिलेश मण्डल (गुवाहाटी) उपस्थित छलाह। बैसारमे निर्णय लेल गेल जे 39म अंतर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन 17–18 अप्रैल 2027 केँ गुवाहाटीमे आयोजित कएल जाएत। श्री मिथिलेश मण्डलकेँ सम्मेलनक संयोजक नियुक्त कएल गेलनि। एहो घोषणा कएल गेल जे 38म अंतर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन 17–18 नवम्बर 2026 केँ सुपौलमे आयोजित होयत, जाहिक संयोजक प्राचार्य डॉ. आर. के. चौधरी हेताह। जारीकर्ता: अंतर्राष्ट्रीय मैथिली परिषद् आचार्य रामानंद मंडल -अंतरराष्ट्रीय मैथिली परिषद् गलत दिशा मे जा रहल हय। परिषद् के केवल जनगणना मे मैथिली, पश्चिमी आ दक्षिणी मैथिली के मैथिली मे समायोजन आ मिथिला राज्य निर्माण आंदोलन पर फोकस करय। फ़ालतू विचार प्रस्ताव से बचनाइ आवश्यक हय। धनाकर ठाकुर -राष्ट्र आओर राज्यमे अन्तर छै। राज्य और प्रान्तमा अन्तर छै। गलत अराष्ट्रवादी सिद्धांतसँ प्रान्त निर्माण नहि हैत। भारत ओ नेपालमे अलग अलग मिथिला प्रान्त निर्माण अन्तरराष्ट्रिय मैथिली परिषद् क अभिप्रेत। आचार्य रामानंद मंडल -राष्ट्र, देश,राज्य आ प्रांत के कि परिभाषा हय। भारतीय संविधान मे इसकी क्या अवधारणा हय। क्या भारत एकटा सांस्कृतिक राष्ट्र हय? कि अंहा अंतरराष्ट्रीय मैथिली परिषद् के सांस्कृतिक अभियानी हय वा राजनीतिक अभियानी? धनाकर ठाकुर -जकर पुण्यभूमि एक ओ मानवता लेल ओ भूभाग ओ समविचारी एक राष्ट्र। देश जे राजनीति शास्त्र क अनुसार राज्य जाहिमे एक भूभाग, आबादी, सरकार ओ सम्प्रभुता हो। प्रान्त उपरोक्त देश वा राज्य क प्रशासनिक एकाइ। भारतीय संविधानमे article 1 'India that is Bharat is a union of states' यानी भारत देश (राज्य) जे राज्य (प्रान्त) क संघ अछि। भारत महान भारतवर्षक एक सांस्कृतिक राष्ट्र अछि यद्यपि संविधान एकर संकेत ओहिमे राम, बुद्ध आदिक छपल फोटोसँ दैत अछि। हम महान् भारतीय राष्ट्रक एक सूक्ष्मतम अंग छी आओर एहिमे मिथिलाक यथायोग्य स्थान लेल कार्यरत चाहे जाहि संभव जनतांत्रिक विधासँ हो। आचार्य रामानंद मंडल -भारतीय संविधान आर्टिकल -१ मान्य शेष अमान्य। संवैधानिक जनतांत्रिक मिथिला राज्य के समर्थन परंच राष्ट्रवादी मिथिला से असहमत। समाजवादी मिथिला से सहमति। संविधान के प्रस्तावना के आधार पर आधारित विचार स्वागत योग्य। धनाकर ठाकुर -ककरहुँ सहमति असहमति ओकर अधिकार। नेपालमे जे काज से ओतक अनुसार। भारतमे संवैधानिक मिथिला राज्यक मांग अछि से ओतबहिके समर्थन करू। बांकी के कत की करत कर दियौ। राजनीतिक मिथिला देश क संविधान अनुसार, सांस्कृतिक मिथिला संस्कृतिक अनुसार जे दूनू कात एक। आचार्य रामानंद मंडल -मिथिला राज्य के लिए सहमति आवश्यक हय। न त भारत आ पाकिस्तान बनत। न त मिथिला न, मधेश बनत। नेपाल अलग देश हय।ओकर संवैधानिकता मे हस्तक्षेप अस्वीकार। धनाकर ठाकुर -अन्तरराष्ट्रिय परिषद् नेपाल मे ओतुक्का नक्सा पर काज करैत मिथिला राज्य मंगाए अछि जाहिमे भारतकभाग नहि धनाकर ठाकुर -संविधान क प्रस्तावना मूलरूपमे स्वीकार। राजकाज लेल त जे जखन रहतै सैह चलते । किन्तु एहिमे आपातकालमेजे जोडल गेल से आइने काल्हि बदलतै। आनहुँ ठाम बहुतेक बदलाव फेर बदलतै परन्तु जे बदलतै संवैधानिक प्रावधानसँ। आचार्य रामानंद मंडल -संविधान बदलतै देखल जतय।आइ कैला पागल बनल जाय। धनाकर ठाकुर -बदलतै, बहुत चीज बदलतै, हम अहाँ नहि रहब परन्तु बदलतै। मिथिला राज्य बनि क रहत आचार्य रामानंद मंडल -नेपालो में बन गेल।दीवार पर लिखल वोकरो देखूं। अपना मिथिला के बारे मे सोचूं। नेपाल मे बहुत नेता सब हय। अंतरराष्ट्रीय नेता न बनूं। एके साधे सब मिलय।सब साधे सब जा हस्तक्षेप सुरेन्द्र ठाकुर रामानन्द मंडल जी:--विद्यापति श्रृंगार/ सौन्दर्य आ भक्त कवि सेहो छलाह।ड०सुभद्र झा आ रूसी विद्वान ड० शेरे ग्रियानी सेहो विद्यापति कें भक्त कवि मानने छथि।एहि पर निरर्थक तर्क- वितर्क नै हेबाक चाही। धनाकर ठाकुर -पहिले महान भक्त, हमरा एक बड़ा कन्नड़ संघक प्रचारतक केशवकुंज, बंगलौरमे २००६ मे कहलाह, "आपके मिथिलामे अक कौन कवि थे जिनके यहाँ महादेव नौकरी करते थे? " एहन महानतम भक्त के? ओ त विष्णुक अवतार चलचित्र, कहलाह जीवकान्त मिश्र, सुन्दरी जे कहू महादेव विष्णुक अतिरिक्त ककरहुँ खवासा करताह कि? आचार्य रामानंद मंडल -ओ महाकवि विद्यापति विष्णु के अवतार हय।हद भे गेल।दंत कथा से आदमी भगवान बनाएल जा सकय हय। कमाल। महाकवि विद्यापति कोनो भगवान न हय जेकर भक्त बनल जाय।वो एकटा साहित्यकार के रूप मे आदरणीय छतन। धनाकर ठाकुर -केओ भगवान् मानता त अहाँ क की? ओ साहित्यिक उत्कृष्टताक चरम छलाह। आचार्य रामानंद मंडल -त बनाउ भगवान। कवि भगवान न होइ छैय। कि मिथिलावासी धनाकर ठाकुर के ब्रह्म बुझै। धनाकर ठाकुर -हर आदमी ब्रह्म छै। आचार्य रामानंद मंडल। जी परंच पूजा सब के न होइ छैय। अंहा के पीपर के गांछ तर पीरी बांह के बरहम बाबा जेका पूजल जायत। लोक देवता बन जायब। ठीके कहल गेल हय मनुष्य ईश्वर के निर्माता हय। Man is the creator of God .Dr Dhanakar Thakur is an extraordinary person in Mithila which creates many ditie as Mahakavi Vidyapati. धनाकर ठाकुर -मनुष्यक मन ईश्वर निर्माण करैत रहल अछि आचार्य रामानंद मंडल -जी। सहमत। विजयेन्द्र झा -मिथिलामे एहन अनेक नायक पुरुष भेलाह, जनिकामे अलौकिक प्रतिभा छलनि। आ', ओ लोकनि समाज द्वारा अदौसँ पूजित होइत आबि रहल छथि। हमसब सलहेश, गहिल,लोरिक, सोखा, वंडी, गैयाँ, देबानी बाबा (डिहबार बाबा) ब्रह्म बाबा आदिक पूजा करैत छी। साहेब रामदास, लक्ष्मीनाथ गोसाई, हरिकिंकर दास आदि संतलोकनिक स्थान देवतुल्य छनि। वेदव्यास, महर्षि वाल्मीकि कालिदास, महाकवि विद्यापति, चैतन्य महाप्रभु आदिमे अलौकिक प्रतिभा छलनि। उपर्युक्त महानायकलोकनि अपन विविध अलौकिक प्रतिभाक बदोलति समाजक कल्याण करैत रहलाह। समाजक पथ प्रदर्शक रहलाह।कहल जाइछ जे एहि महा नायकलोकनिमे ईश्वरीय गुण छलनि तेँ समाज हिनकालोकनिकेँ देवतुल्य मानि अदौसँ पूजैत छनि आ' पूजित रहताह। अनेक लोक एहन छथि जे राम-कृष्ण, इन्द्र, सूर्य, चन्द्रमा, पृथ्वी आदिकेँ सेहो देवता नहि मानैत छथि, तेँ कि समाज सेहो नहि मानत? मिथिला अपन परम्परा, संस्कृति, आस्था, विश्वासकेँ कहिओ ने छोडलक आ' ने छोडत। विद्यापतिक प्रसंग जँ उगनाक कथाकेँ जोडल जाए तँ ओ एकटा महान् संत आ' राधा-कृष्णक परम भक्त छलाह। आइओ हुनक जाहि पदकेँ मिथिलामे शृंगारिक बूझल जाइछ ओएह पदसब बंगाल, आसाम, उडीसा आदि परवर्ती प्रान्तसभमे भक्तिपदक रूपमे प्रसिद्ध अछि। बंगाल, आसाम आ' उडीसामे तँ विद्यापतिक पदकेँ रामायण, महाभारत, कुरान जेकाँ धार्मिक पद बूझि प्रत्येक लोकक घरमे पुजल जाइछ। नदियाक चैतन्य महाप्रभु विद्यापतिक ओही पदकेँ गबैत-गबैत भावविभोर भ' मूर्छित भ' जाइत छलाह। एहन महानायककेँ सामान्य लोकक कोटिमे राखब अज्ञानता नहि तँ आर की भ' सकैछ? निष्कर्षतः विद्यापति अलौकिक प्रतिभा सम्पन्न एकटा एहन महानायक छथि जनिका ल'ग स्वयं गंगा उपस्थित भेलीह। भगवान् शंकर चाकर बनलाह, स्वयं प्रकट भेलाह आ' तेँ ओ देवत्वकेँ प्राप्त कएलनि, पूज्य छथि, पूज्य रहताह। विद्यापतिकेँ सामान्य मनुक्ख कहब मात्र अज्ञानताक परिचायक थिक। कोनो विषयपर विमर्श हो, नीक बात। अपन तर्कनासँ अवगत कराबी ओहो नीक बात। मुदा, सदैव ई ध्यान राखक थिक जे ओहिमे समाजक धर्म, आस्था, विश्वास, परम्परा संस्कृति आदिपर आक्षेप नहि होअए। कारण इतिहास गवाह अछि जखन-जखन ककरहुँ धर्म, आस्था, विश्वास, संस्कृतिपर कुठाराघात करबाक प्रयास भेल, समाज ओकरा नहि बकसलक। तेँ विमर्श अपन ज्ञान आ' सीमामे रहिए केँ करब उचित आ' सार्थक। धन्यवाद! मनोज पाठक-*रोचक चर्चा चलि रहल अछि* डॉक्टर धनाकर ठाकुर जी आ आचार्य रामानंद मंडल जी दुनू विभूति रोचक तथ्य आ ठोस तर्क राखि एक सबल सम्प्रभु मिथिलाक लेल बिआ बाउग कऽ रहल छथि। एहि रोचक चर्चा मे किछु तथ्य दृष्टि हमहुँ राखय चाहब। प्रान्त, देश आ राष्ट्र परस्पर एक दोसरासँ फराक रहितो एक सूत्र मे आबद्ध रहि सकैत अछि। रहैत अछि। जेना धातरी वा संतोला केर एकटा पाकल फर वस्तुतः फर त एकहि टा अछि मुदा एकर परस्पर सब फांक फराक अस्तित्व रखैत अछि। उदाहरण लेल एक संतोला केर 12 वा आठ फांक एक छिलकामे आबद्ध। ओ छिलका हटि गेल तँ सब फांक स्वतंत्र अस्तित्व वला। ठीक तहिना एक राष्ट्र केर ऊपरी आवरण एक कवच ई कवच सांस्कृतिक रहि सकैत अछि, रहैत अछि। राजनीतिक नियंत्रण कवच रूप मे रहियो सकैत अछि नहियो रहैत अछि तइयो सांस्कृतिक कवच ओकरा एक वृहत्तर सूत्र आ कवचमे जोड़ि क, रखने रहैत अछि। हम जे तथ्य राखि रहल छी से अतीतमे सेहो सत्य छल, एखनो सत्य अछि आ भविष्यमे सेहो टिकल रहैवला तथ्य आ सत्य अछि। संस्कृति आ सांस्कृतिक राष्ट्रवाद एतहि मिथिलाक लेल मिथिलाक तीव्र विकास लेल एकटा उपयोगी आ टिकाऊ टूल अछि औजार अछि। संतोलाक वृहत्तर कवच संस्कृति रूप मे इस्लामक सब फराक फांक वला सुन्नी शिया आ आन पंथ वला राजनीतिक सत्ता वला देशक नागरिक के हज करबाक लेल मक्का मदीना पहुँचा दै छै। इसाईके वेटिकन सिटीक पक्ष विपक्ष वला छोट पैघ फांक सबके एक ठाम ल, अनैत छैक। तहिना मिथिलाक चारि धाम तीर्थ संकल्पना वृहत्तर मिथिलाक भौगोलिक परिचिति आ सीमांकनमे सहायक सिद्ध भ, सकैत अछि। सम्प्रति पूरा दुनियामे धर्म आ संस्कृति मजगूत भ, रहल अछि। अपन जड़ि सँ जुड़बाक भूख बढ़ि रहल छैक।
*उत्तर प्रदेश आ उत्तराखंड सरकार एकरा नीक जकाँ भजा रहल अछि*। उत्तर प्रदेश सरकार *अयोध्या मथुरा वृन्दावन काशी प्रयाग आदि स्थान पर एक पाइ खर्च क, पाँच स दस पाइ कमा रहल अछि।* से तथ्य आ आर्थिक आंकड़ा समय विशेष पर *सरकार द्वारा कयल खर्च आ ओहि तीर्थ पर ओहि अवधिमे कुल लोक सभक आवाजाही सँ प्राप्त राजस्व विगत किछु वर्ष मे साफ साफ देखा रहल अछि।* एहि पारक मिथिलाक चारि धाम लोक सभक आवाजाही लेल पैघ राजस्व जुटबैवला केन्द्र बनि सकैत अछि। एहि योजना पर ठोस काज होअय आ से मिथिलाक सब समांग समधानल रूपमे हम अहाँ करी से आह्वान। *पुनौराधाम सीताक जन्म स्थान* एहि लेल विगत दस बर्ख सँ बिना ढोल पिटने आ श्रेय लेबाक इरखा सँ दूर रहि अभियान चलल अछि। 2010 सँ चुपचाप बिना हल्ला कयने, कंठ फारने, ज्ञापन देने चिक्कन काज भेल अछि। आ जखन लोहा गरम छलैक तखन 2024मे अयोध्यासँ पुनौराधाम 26 दिवसीय पदयात्रा एकरा चुनावी एजेण्डा सेट कय देलकै। *परिणाम सोझा अछि*। *भारतक एक प्रधान मंत्री विवाह पञ्चमी समारोह मे गछि आयल छलाह सीता नेपालक बेटी छथि* आ *भारत देशेक एकटा गृह मंत्री अयोध्याक समान सीताक जन्म स्थान पुनौराधाम मे भव्य मन्दिर निर्माणक भूमि पूजन कयलनि अछि* ई उदाहरण मात्र एहि लेल जे मिथिलाक अतीत सांस्कृतिक मात्र नहि अछि ठोस आर्थिक अछि मिथिला एकटा नौलेज हब, चिकित्सा केन्द्र आ पैघ कारोबारी सेन्टर रहल अछि। से एक दू साल नहि सैकड़ो हजारो साल। बृहत्तर सांस्कृतिक मिथिला आ एहि पारक चारि धाम सेहो पैघ आर्थिक धुरीक इतिहास दोहरा सकैत अछि।
एहि पर काज आगू बढय। एतय ध्यातव्य जे मिथिला एकटा देश रहि चुकल अछि। एक मिथिला देश के भीतर कतेको स्वतंत्र सत्ता वला राजनीतिक इकाई रहि चुकल अछि। आ से तथ्य ऐतिहासिक सत्य अछि। मिथिलाक लगभग पांच हजार बर्खक इतिहास पर काज नहि भेल अछि। हेबाक चाही। अपन डीह डाबर आ खेत सबमे भसल इतिहासक खोज आवश्यक अछि। अइ पर सेहो काज होअय आचार्य रामानंद मंडल,-अयोध्या आ सीतामढ़ी के स्थानीय लोग सीता मे आस्था रखैत रो रहल हतन। मंदिर पुनर्निर्माण से कोनो दीक्कत न हय परंच आस्था के ओट मे अडाणी अम्बानी के किसान के जमीन सौप देल जाए आ पूंजीवाद के मजबूत कैल जाय।इ कंहा के न्याय हय। हां सीता महरानी के महल निर्माण से लाखों किसान आ स्थानीय लोग बेघर होने के कगार पर हय।लाल महल के निर्माण आम जनता के खून से होइ छैय।लाल किला आ दरभंगा किला एकर प्रमाण हय। राष्ट्रवादी हिटलर आ मुसोलिनी सेहो रहय।एकरा फासिस्टवाद सेहो कहल गेल हय। हमरा लगय मिथिला के विद्वान जनकवि यात्री न, बल्कि फासिस्टवादी विद्वान होयतन। महाकवि विद्यापति न भगवान छतन आ न लोकदेवता। बल्कि जनकवि महाकवि हतन। महर्षि बाल्मीकि, महर्षि कालिदास भगवान न छतन। भगवान राम को बाप दशरथ आ भगवान कृष्ण के बाप वसुदेव सेहो भगवान न छतन । महाकवि विद्यापति एकटा दरबारी कवि रहलन। वो महाकवि के सम्मान से सम्मानित रहय दिऊ। धनाकर ठाकुर,-बिल्कुल ठीक। १३२६ तक मिथिला देश छल,(सिवाए किछु मिथिला क नाकी अजातशत्रु क अत्याचार,अशोकक अत्याचार क समय छोड़ि,हमर विदेशमे ५७म कराल जनकक बाद विश्वक पहिल गणतंत्र, सीमा सिकुडै़त गोरखपुरसँ छपरा गेल घाघरा करनाली सँ गंडकी नारायणी सेहो सोनपुर गजग्राहस्थली गेल अछि। १३२६ सँ १७७० तक मुस्लिम शासक तथापि मिथिलाक स्वतंत्र अस्तित्व मानलक अंग्रेज१७७४मे बोर्ड आफ रेवेन्यू पटनाक भीतर सरकार तिरहुत रख सकती, राजा नरेन्द्र सिंह क समर्थन मे बादशाह शाह आलम द्वितीय अंग्रेजकेँ लिखलन्हि १८०० मे जे मिथिला सदैव स्वतंत्र रहल किन्तु अंग्रेज नहि मानलक, मगध बिहार एखनहु मिथिलासँ राशन लैत अछि वोट लैत अछि, आओर हमरहि तोड़क हथियार भाषाइ विखंडन, जातीय वैमनस्यसँ। हम रही नहि रही मिथिला बनि क रहत अगर रहल सदैव मिथिलाक संग। नो इफ एंड बट बट मिथिला स्टेट। मनोज पाठक -आचार्य जी आस्था व्यक्तिगत गुण छै। जाहि व्यक्तिक समूह जतेक विशाल ओ अपन ओतेक विशाल प्रतीक स्मृति स्थल बना लै छै आ ओ स्मृति स्थल प्रतीक स्थल ओतबे पैघ आर्थिक विकासक केन्द्र बनि क, स्थापित होइत छैक। एकरा किओ स्वीकार करय या नहि एहि सँ ने तथ्य बदलै छे ने सत्य। मजदूर किसान आ आकर्षक नारा भारत छोड़ि सब ठाम ढहि गेलै आ भारतो मे ढहि रहल छै। *अडाणी अंबानी टा भारतक सब प्रान्त मे सब गाममे लगभग सब जातिक लोक कारोबार मे उतरि रहल छै आ नीक पूंजी बना रहल छै।* आ से प्रवृत्ति पुरान वामपंथी सोवियत संघक सबस सबल देश रूसमे आ एकमात्र अधिनायक वादी वामपंथी चीन सहित सब देशमे स्थापित भ, गेल छैक। पूंजी पुरान भारतक नगर सेठ आ नव दुनियाक अदाणी अंबानी सहित रूसक पुतीन आ चीनक जिनपिंग के संग जुड़ल विशाल पूँजीपति वर्ग मे स्थापित तथ्य आ सामयिक सत्य अछि। रूसक पुतिन आ चीनक जिनपिंग अपन अपन धर्म के मजगूत क, रहल अछि आ नव सांस्कृतिक सत्य पुरान जड़ि सँ जुडि गढि रहल अछि। कने चीनी सिनेमा, साहित्य आ प्रदर्शनक सब माध्यम मे बढैत सांस्कृतिक अस्मिता पर नजरि द, क, देखबैक त, स्पष्ट भ, जायत। रहल अयोध्याक किसान मजदूर आ पुनौराधामक वर्तमान किसान मजदूर के माली हालत तँ अयोध्या आ लगपास क तीर्थ पर पछिला पचीस साल सँ काज क, रहल छी आ सीतामढ़ी पर 2007 सँ काज क, रहल छी। अयोध्या आ प्रयाग दुनू एकटा ढहैत ढनमनाइत सांस्कृतिक नगर छल जे आब उत्तर प्रदेशक अर्थ व्यवस्था मे मजगूत योगदान दै वला आर्थिक केन्द्र फेर सँ बनि रहल अछि। इयैह स्थिति सीतामढ़ीक हेतैक। हमर घर सीतामढ़ी नहि अछि मुदा सीता प्राकट्य स्थल एकटा पैघ तीर्थ बनि सकैत अछि ताहि पर स्थानीय लोक सभक एक सीमित चुनिन्दा लोक संग काज कयल आ परिणाम सोझा अछि। बाकी छोडू फुलहर राम सीता मिलन मंदिर बाग तडाग एकटा विराट तीर्थक संभावना रखैत अछि जतय अयोध्या सीतामढ़ी आ जनकपुर तीनू ठाम सँ लोक सभक आवाजाही बढतैक ।। बिहार सरकारक अइ संभावनाके स्वीकार कयलक आ 30 करोड देलक। तँ अहाँ वा किओ व्यक्तिगत आस्था जे राखी से राखू मुदा जे संभावित आर्थिक केन्द्र बनै के संभावना रखैवला स्थल अछि ओकर सांस्कृतिक विकास लेल संग आउ। अयोध्या मे या पुनौराधाम सीतामढ़ी मे या कतहु जे आइ विस्थापित होयत आ जँ अपनाके योग्य बनाओल ओकर आर्थिक विकास सुनिश्चित छैक। अयोध्याक चारू तरफ़ तीव्र आर्थिक विकास चलि रहल छै एहनामे अपन पूँजी बना लगा एकटा चारि फीट बाइ चारि फीट के ठीया मजदूरी सँ बेसी कमाई द, रहल छैक। कारोबार के अधलाह कहियो नहि कहलक मिथिला उत्तम खेती मद्धम बान अधम चाकरी तँ खेती वर्तमान मे उत्तम नहि रहल बनिज बनबाक समय छैक मिथिलाक लेल आ से कारोबार नौलेज हब के रूप मे होअय वा शुद्ध वस्तु सभक कारोबार कारोबार लेल आगू आउ। वामपंथ अपन प्रासंगिकता सब ठाम गमा लेलक। कारण वामपंथ सेहो नाम बदलि ओही पूंजीवाद चोगा ओढने छल। एहिस पूरा तरह उबरबाक आवश्यकत मिथिलाके छैक। आ सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिथिलाके विकास तेज करत भारतक आन प्रान्त सन नरेंद्र झा -विद्यापतिक सन्दर्भ मे जाहि तरहक टिप्पणी कयल गेल अछि ओ सर्वथा उचित नहि बूझि पड़ल, मुदा फेसबुक पर तऽ सभ किओ बिना पढ़ने विद्वान् होइत छथिन्ह, तैं कि कहल जाय! विद्यापति केँ श्रृंगारिक कहबा सँ जखन रमानाथ झाजी सनक आलोचक परहेज नहि कयलनि तखन कि कहल जाय! विद्यापतिक पदावलीक अर्थ गौरव करब ओतेक दालि -भात कौर नहि छैक, जेना कि सभ किओ परसैत रहैत छथिन्ह! लाखक लाख टाका आ दिन- राति पढ़ि कऽ आंखि फोरलाक उत्तरो जखन बहुत किछु जानक लिलसा रहिए जाइछ, तखन एखनुक्का समयक विद्वत समाजक लेल किछु कहब कठिन बूझि पड़ै'अछि!
आब तँ आंखि सँ आन्हर आ कान सँ बहिरे रहनाइ उचित बूझि पड़ैछ! लक्ष्मण झा सागर -कथा- कुंभ ग्रुपपर नीक कथा भ रहल अछि। अपन पुरखाके आब बात कथा टा कहब बांकी रहि गेल छल। सेहो कम नै सुनलनि अछि हमर आदि पुरूष लोकनि! एडमिन महोदय, हमर रक्तचाप बढ़ि रहल अछि। पराकास्था भ गेल अछि। जं ई बकबास बन्द नै करबायब त हम एहि ग्रुपसं विलुप्त हैब श्रेयस्कर बुझब। आचार्य रामानंद मंडल -आश्चर्य। महाकवि विद्यापति कि कोनो खास वर्ग के पुरखा मानल जाय कि जनकवि महाकवि विद्यापति। एकटा महान् कवि। जौं कोनो कवि के रचना प्रकाशित होइ जाय छै तो वो सार्वजनिक व्यक्तित्व हो जाइ छै।वोहुना हु महाकवि विद्यापति के लगभग ६०० वर्ष भे गेल हय।वो विश्व व्यक्तित्व छतन न कि भगवान। वर्तमान काल में सेहो लोक देवता के रूप में पूजित न छतन। क्रमशः……
-आचार्य रामानंद मंडल, सीतामढ़ी। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ। २.८. राजदेव मंडल- प्रतीक्षाक पीड़ा राजदेव मंडल प्रतीक्षाक पीड़ा
शहरक पछमी भाग मे एकटा छोटका बस स्टैण्ड । ओहिठाम सड़कक कात मे गाछतर कमली ठाढ़ अछि । बिनु सिंगारोक ओकर मुखक आभा लोक केँ आकृष्ट कऽ रहल अछि । यौवनक प्रथम स्पर्श सॅं अंग-अंग लावण्यता सॅं परिपूरित अछि । ललिआएल कपोल पर लटकल लट केँ ओ बारम्बार हटबैत अछि । ओकर ऑंखि जाएत-आबैत लोक पर नाचि रहल अछि । शाईत ओ चिन्हल-पहिचानल चेहरा केँ खोजि रहल अछि । जेकर चिर -परिचित मुख-चित्र ओकरा ऑंखि मे कतेको दिन सॅं रचल-बसल अछि । जनिक देहक रसगंध मे ओ कतेबेर सराबोर भेल हेतें , पता नै । जेकरा सॅं कियो पूर्ण अंतरंगता सॅं जुड़ल रहैत अछि । ऑंखि बन्न रहे वा कोनो कारणे नै सुझै तेकर बादो देहक सुगन्ध सॅं ओ हुनका चिन्ह जाएत अछि । मुदा चिन्हत से कामे अछि कहाँ? ओकरा तॅं छोड़ूं । ओकर परछाहींयो नहि देख रहल अछि । कमली मन में विचार करैत अछि - जइठाम कहने रहे । वैह तॅं ई जगह छी । ओहि जगह पर ठाढ छी । मुदा ओ कतौ कहाँ अछि । घर सॅं नुकाइत -छिपाइत तेजी सॅं निकललौं । हड़बड़ी केँ कारणे रस्ते में मोबाइलो कतौ गिर पड़ल । तीन घंटा सॅं एतनी दूर में घुरिया रहल छी । कोनो सॅं आबियो नै रहल अछि । प्रतीक्षा ! आस-निरासक बीच एकटा बाँझ प्रतीछा । जई में आसक डोर निरन्तर बढले जा रहल अछि , अन्तहीन गन्तव्य दिश ! कहिया तक , कखैन तक , पता नै । कमली सोचैत अछि - ओने अंगना-घर मे तॅं हड़कंप मचल हेतै । गामक लोक कहैत हेतै जे केकरो सॅंगे भागि गेलौ । माय-बाबू तॅं बुझिए गेल हेतै जे केकरा सॅं बेसी मेल-जोल छलै । केकरा सॅंगे भागल हेतै । अखैन कोन मुँह लए केँ घर आपस जाएब । केकरा कहबै , के पतिएतै , जे ई सुनतै सैह लतिएतै । एते विश्वास केलौं । सब किछो छोड़ि-छाड़ि माया मोह केॅं तोड़ि-ताड़ि चलि एलौं । मुदा हमरा सॅं अधलाह काज भए गेलैं । झूठा , बेदरदा केँ बात पर विश्वास केलौं । जतए कहलक ओतए आबि केँ अहुरिया मारि रहल छी । आब तॅं लगैत अछि - हमरा चारूभर खाइधे-खाधि अछि जई में नकार मुँह बौने हमरे दिस ताकि रहल अछि । अन्हार बढल जा रहल छै । हमरा गाम दिस जाएवाला आब एकोटा बसो नै छै । अनजान शहर में कते रहब ? कते जाएब तॅं जान बॅंचत । आई हमरा सॅंगे की हैत पता नै । छलिया , बेइमनमा हमरा सॅंगे धोखा केलक , विश्वासघात केलक । परेमक नाम पर नाटक करै छल । छने में एतेक परिवर्तन । छने में छनाक भेलौ दाय गे , हीरा गेलौ हेराय गे । जेना संभव आ असंभव में कोनो दूरी नै रहल अछि । बगल सॅं गुजरैत जुबक सभक भुखाएल ऑंखि ओकरा देह केँ निहारि रहल अछि । ओकर सौंसे देह डर सॅं झुर-झुरा उठैत अछि । कियो आपस में फुसराहैट करैत अछि तॅं कियो जाएत-जाएत हाथ आ ऑंखि सॅं इशारा करैत अछि-मुस्की मारैत । तखैने एकटा भारी स्वर ओकरा कान सॅं टकरैत अछि -" कते जाएब ? केकर परतीछा करै छी ? " आब कमली केँ ओहिठाम ठाढ़ रहनाए मोसकिल भए गेलै । चोरक मुँह बर जोड़ । ऐठाम सॅं ससरि जेनए ठीक । मुदा जाएत कते ? जखैन लोक समस्या सॅं घेरा जाएत अछि तॅं मनक अश्व तीव्र गति सॅं समाधानक अन्वेषण करै लगैत अछि । एहेन परिस्थिति मे नीक वा अधलाह समाधान तुरते मे परिलक्षित भए जाएत अछि । समस्याक सॅंगे समाधानों रहैत अछि । कमलीयोक समाधान भेटि गेलें । ओकरा मन मे उपजलै - आब एकेटा उपाए अछि । हमरा बहिनक सासुर तॅं ऐठाम सॅं नजदीके अछि । हमरा दुख केॅं वैह बुझबो करत । कोनो नीक उपाएयो लगा देत । बहिनेक घर पर चलि जाए छी । आगू में ससरैत बसक लग ओ तेजी सॅं पहुचैत अछि आ बस पर चढबाक प्रयास करै लगैत अछि । बसक भीतर सॅं कियो कहैत अछि - " हे यौ गिर पड़तै । मरि जेतै । कनी पकैड़ लियौ । " एकटा जुवक ओकर हाथ नै बाॅंहि पकैड़ बसक अन्दर घींच लैत अछि । ओकर ऑंखि मे कुटिल मुस्कान भरल अछि । कमली सबकिछो बुझि रहल अछि । मुदा अखनी बजबाक मौका नै छै । झमारि केॅं बाॅंहि छोड़बैत ओ डगमगाइत बसक सीट पर बैसैत अछि । बस तेजी सॅं आगू बढै लगैत अछि । आब जेना ओकर हीया फाटि रहल छै । एकबेर फेर कमलीक निराश मन में आसक किरिण चमकैत अछि । ' कहीं आबि तॅं नै गेलै । ' ओ बसक खिड़की सॅं पाछू दिस तकैत अछि । ' कहाँ कतौ छै ? ' जेना अन्तर में किछु दरैक रहल छै । ऑंखि में नोर आबि जाएत छै । घृणा सॅं मुँहमे थूक भरि जाएत छै । ओ थूक फेकलक । ' आक थू ' पता नै ओ थूक केकरा पर पड़ल । मुदा हवाक सॅंगे थूकक किछ अंश अपनो पर पड़ल । जेकरा ओ नोरक सॅंगे पोछि लैत अछि -चुपेचाप ।
- राजदेव मंडल, Mob:9199592920; Gmail mandalraj151960@ gmail.com अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ। २.९. लाल देव कामत- हमर छात्र राजनीतिक: एक क्षण लाल देव कामत हमर छात्र राजनीतिक : एक क्षण हम सन् १९८९ ई०मे चन्द्र मुखी भोला महाविद्यालय डेवढ् घोघरडीहामे बीए,पास कोर्समे पढ़ि रहल छलहुँ। एक दिन लिझर घंटीके समय काउमन रूम लग युवा साथी चुल्हाई कामत आ राम नारायण यादव एस एफ आई केर कालेज युनीट कायम करय लेल आयल रहथि। ओ लोकनि हमरा सदस्यता दिएबैत आरो विद्यार्थीगणकेँ उत्प्रेरित कयलन्हि। हमरा एक जिल्द नव सदस्य जोड़य लेल देने गेलथि। डी वाई एस एफ के काॅ० उमेश राय साथीक संग श्री कामत जी एक दिन फेर अयलाह आ सदस्यता ग्रहण कयल नैका मेम्बरके बीच नुक्कड़ सभा कय वामपंथी उर्जा सँ ओत -प्रोत केलनि। फेर एक दिन हटनी- अलोला युनीटके बैसारमे लाल झंडाके दिवाना कां भारत भूषण मंडल आ राजकुमार यादव ,लाल परीव नेत्रीक संग आबि अंचल कमिटी(कोसी) सँ आह्वान कयलन्हि पटनामे राज्य सम्मेलन देखय - सुनय निश्चित रूपेँ चलै चलू। नियारभास अनुसारे कामरेड रायबहादुर मंडल, रामप्रसाद मंडल, सुभक लाल ठाकुर ,कारी कामत ,सत्य नारायण कामत, फूदन मिश्र, मुन्शी मिश्र, फतनेश्वर मिश्र, मालीक झा , ठकाई साह , गेना लाल कामत , रामौतार कामत बिलेक्षण कामत , कृष्णनंदन सिंह ,हम आ तनुक राम , भुवनेश्वर मंडल(बेल्हा) जूलूसक बैनर साथ घोघरडीहा रेल टीशन पर जुमल रही। ट्रेन सँ हाजीपुर धरि संगहि यात्रा केयलहुँ। माकर्सवादि पार्टी केर दिश सँ बसके व्यवस्था भेल रहैक। हांई -हाँई केँ सबकेओ बसपर चढल, हमरा तनुक केँ छतपर चढैमे खतरा बुझाएल आ लटकलो नहिं भेल भीड़मे। दोसर बसमे बैच रहैत नहिं बैठय दिअ अन्तयके यात्रीसब। हम दूनु गोटे पैरे ओतय सँ पटना जयबा ले विदा भेलहुँ। राजेन्द्र बाबूक नाम पर गंगा नदी पर बड़का पुल रहय, से देखैत आनन्द पुर्वक गायघाट धरि आबि थाकि गेल छलौहुँ। आब हमरा दूनू गोटय केँ संगमे मात्रे दू - दू टाका मुरही खेलाक वाद बुर छल। से ओही टाका सँ आउटो भाड़ा चुकबैत गांधी मैदान आम सभा स्थल धरि हेहरू भ' एलहुँ ,तँ सब जिलाके अलगे - अलग बोर्ड लिखल भाजन कक्ष देखाएल। पूर्वोत्तर भाग मधुबनी जिलाके भोजनालय ताकि लेलहुँ हम-सब। ओतय सुभगजी आ कृष्ण नन्दन जी हमरा दूनू गोटेकेँ देखते शोर केलथि। आ कहलक हमहीं दूनू गोटय खायमे पछुआएल छी,तों दूनू गोटे कतय रहि गेलेँ ? कारी नेता , मजदूर नेता सतलरायेन तोरा सबकेँ ताकै ले कनौ गेल छौक! सभा दिश अयलहुँ तो देखै छी चारि चिंतग भऽ भारत भूषण जी सूतल फोंफ काटि रहलाह हेन। आरो चिन्हारे कामरेड लोकनि राज्य सचिव गंगेश शंकर विद्यार्थी -एकलौता विधायक केर सम्वोधन सुनि रहल अछि। मुख्य आकर्षण आखरी वक्ता केरल सँ आयल मुख्यमंत्री नम्बूदरीपाद' भाषण अंग्रेजी म आरंभ भेल ,तकर हिन्दी भाषान्तर पटना हाईकोर्ट केर पार्टी अधिवक्ता शुक्ला जी कऽ रहल छलाह । बोफोर्स घोटालक' आक्षेप वीपी सिंह वित्त मंत्री देशके युवा प्रधानमंत्री राजीव गांधी पर लगाबैत जे इस्तिफा दैत राष्ट्रीय मोर्चा बनोलनि, ताहि प्रसंग लोक सभाक चुनाव सन्निकट छैक से भ्रष्टाचार कर विरोधमे वक्तव्य चलिए रहल छलैक।ओहि मुख्य अतिथिक विषय में वृहत् जनतब लेल किछु पर्ची खोजैत रही हम। मुदा बिनु कैंचा केर ओतय एक फ़ोल्डरों - लघु पुस्तिका नहि हाथ आयल । हुनक जयन्ति पर स्मरण भ' उठलाह -: थूथापूझा नदी तट पर बसल एक एलामकुलम गाम जे पेरिन्थालमन्ना तालुका केर मल्लप्पुरम् जिलाक अन्तर्गत केरलाक' - परमेश्वरण नंबूदरीपाद पिता आ माय विष्णुदत अंतरजनम केर घर दि० १३ जून १९०९ ई० केँ मनकल शंकरन नंबूदरीपाद'क जन्म भेल छलनि। आरम्भिक शिक्षा पलघाट आ त्रिचुरमे भेल रहनि। हुनक वियाह आर्या अन्तरजनम सँ भेल रहनि। श्री नंबूदरीपाद जी मलयालम आओर अंग्रेजी भाषाके लव्धप्रतिष्ठित लेखक आ कांग्रेस पार्टीक नेता रहल छलाह। हुनक तीन प्रमुख पोथीमे मलयालम क्योश्चशन इन केरला,गांधी एण्ड हिन्दुज्म, द विसेन्ट क्योश्चन इन केरला छैक। सन् १९५७ मे साम्यवादी सरकारके मतपे़टीके माध्यम सं पहिल मुख्यमंत्री भेलाह। पुन: केरलके प्रभावशाली मुख्यमंत्री बनल छलाह। दि० १९ मार्च १९९८ इ० कें हुनक निधन पर लाल सलामके गगन भेदी नारा बन दिग-दिगंत गुंजायमान भ' उठल छल। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ। २.१०. प्रीति कुमारी- राम श्रेष्ठ दिवाना: एक व्यक्तित्व प्रीति कुमारी राम श्रेष्ठ दिवाना: एक व्यक्तित्व मधुबनी जिलाक पछिमक भूभाग पर एक प्रसिद्ध जीरौल गाम अछि,जे हरलाखी प्रखंडमे पड़ैत छैक। एहि गामक माय श्रीमती रामसखी देवी आ बाबू श्री तुलसी यादव जीके घर ४ जनवरी १९५७ ई० केँ राम श्रेष्ठ जीके जन्म भेल रहनि। बालपनमे हुनक काका श्री ज्ञानी यादव जी जे ,सीपीआई.के अंचल मंत्री रहथिन,हिनका गामेक पाठशालामे पढ़य लेल नाँउ लिखा देलकनि। सन् १९७५ ई०मे खिरहर हाईस्कूल सँ मैट्रिक पास कयलनि आ कालीदास विद्यापति विज्ञान महाविद्यालय - उच्चैठ सँ आगूक पढाय - लिखाय जारी रखलथि। हिन्दी आ मैथिली दू विषयमे स्नातकोत्तर कयने छथि। मैथिली भाषा मेँ हिनक पहिल रचना (कविता) हबड़ा, कलकत्ता सँ प्रकाशित दैनिक अखबारमे १९८० ई० मे छपल रहन्हि। मैथिली - हिंदी दूनूमे राम श्रेष्ठ दिवाना जी लिखैत छथि। हिन्दी साहित्य क्षेत्रमे हिनक अधिक रूचि बढ़लनि,से वैद्यनाथ मिश्र 'यात्री' जीके मार्गदर्शन सँ। स्व० यात्री जीकेँ नागार्जुन नामे हिन्दी साहित्य क्षेत्रमे नाम जगजियार भेल छन्हि, ओ श्रीदिवाना जीके जन्म सँ पहिले सँ साम्यवादी हिनक पिता सँ भेँटै ले जाईत रहैत छलथिन्ह। दिल्ली सँ मैथिलीमे "राजा सलहेस" शोध ग्रंथ २०१५ मे प्रकाशित भेल छन्हि। हिनक मुख्यत: हिन्दीमे एक दर्जन पोथी प्रकाशित भेल छन्हि,जाहिमे छह गोट ग़ज़ल संग्रह आ छ:टा कविता संग्रह दिल्ली सँ छपल छैक। पंजाबक श्री देवेन्द्र नाथ सत्यार्थी जी डेढ़ लाख लोक गीतक संकलन सम्पूर्ण भारतमे भ्रमण क' कयलनि,से ओ बिहारक मिथिला क्षेत्रमे लोकगाथा लेल हिनका ' राजा सलहेस ' उपर काज करबाक खगौट जनौने रहनि। राजा सलहेसके प्रेम संदेश अमर रहलैक अछि। दिवाना जीके पाण्डुलिपि नाटक विधामे बहुत प्रकाश्य कृति छन्हि। किछु नाटकक मंचन देशक सीमा सँ बाहरो होईत रहलन्हि अछि। जाहिमे कलाकार अद्भुत विद्रोह नेपालभरिमे देखेने छथि। पाँच दर्जन सँ अधिक नाट्य समारोहमे राम श्रेष्ठ जी स्वयं मुख्य अभिनय केर पात्रके किरदार निभौने छथि। पुणे सँ नेपाल धरि रंगकर्मी बनि अपन अभिनय कलाके प्रदर्शन कयने छथि। नामी-भीखारी ठाकुरके विदेशिया नाटकके अनेको बेर मंचन करैत स्वंय मुख्य पात्र बनल रहलाह। असमानता के विरुद्ध जगदेव प्रसाद जीके उपर जे कविता लिखलन्हि ,से बोधगया केन्द्रीय विश्व विद्यालयके एम ए. कोर्समे पढ़ौनी होईत छन्हि। ग्रामीण स्थानीय कलाकार'क संग तँ नाटकमे अभिनय करबे केयलाह ओ प्रसिद्ध इफ्टा० टीममे रहि कतेको जिलामे लोक नाटकक प्रस्तुति देने छथि। ओ 'महाकवि नागार्जुन ट्रस्ट' नामक संस्था गठन कय, ओहिक बैनर तर सेहो नाटकक मंचन करैत रहैत छथि। पाखंड, अंधविश्वास, भेदभाव आ असमानता केर विरोधमे राम श्रेष्ठ दिवाना जीके लेखनी चलैत रहल अछि आ लाल गुलाब हिन्दी मासिक पत्रिका ,ज्ञान विज्ञान संदेश, मित्र मंडल विचार आदिमे रचना छपल छन्हि। सम्पादित करने छथि :- लोकगीत संकलन पढ़ेँ, सामूहिक गाएँ ,आखर के चमके बिजुरिया,आखर से जुड़िला स्नेहिया आ आखर के बरसे बदरिया । एक विचारक अनुसारे ९०'/.लोक दलित साहित्य केर सौन्दर्य रूपमेँ लोक गाथा सलहेस मादे मानैत- जानैत छथि बिहारमे। मिथिलाके दूनू पारक लोक अर्थात भारत- नेपालमे लोकदेव रुपेँ हुनका मान्यता देने छथि। राजा सलहेस लोकगाथा भाव प्रधान छैक,से कहब एकदमे उचित छै। ओहि लोकगाथामे अनेकों तरहके भाव रहैत छै,जाहिमे सामाजिक -धार्मिक - आर्थिक आ लोक मनोरंजक भावक प्रधानता छै। आओर इयह लोक साहित्य वा अनार्य साहित्य'क अन्त:मर्म छी। चूंकि ई शुद्रक साहित्य थिकैक, जोन बोनिहार'क ,हरबाहाक,चरवाहाक, घसबाहिनिक, महिंसबारक - गैवारक, आ मेहनतकश लघु कृषकके दुःख दर्द ,उल्लास, वेदना, संवेदना आ ओकर संस्कृतिके लोक साहित्य छी। अही कारण सँ समय- समय पर हिन्दी जगतके साहित्यकार - कविगण केँ अपना दिश आकर्षित करैत रहल अछि। ऐ मादे दू स्थापित श्लाका पुरूष केर उक्ति केँ देखल जा सकैत छी -: हिन्दीक प्रख्यात कवि बाबा नागार्जुन ऐ लोक गाथा केर प्रसंगमे लिखने छथि "हिंदी प्रदेशक सम्पूर्ण काव्य जगत राजा सलहेसके ऋणी छथि,जाहि गाथामे साहित्यिक सब रस समाहित छैक।" ताहि विषयमे राहुल सांकृत्यायन लिखने छथि "राजा सलहेसक लोकगाथा सम्पूर्ण भारतीय साहित्यक शिरोमणी जीके,जाहिक चमकी कहियो नहिं मलीन होयत। समयके संग एहिक ख्याति बढ़िते जेतैक।" श्री राम श्रेष्ठ दिवाना जीके कालजयी रचनामे प्रमुख छै,यथा-: जरा याद करो कुर्बानी (१९८३), इंक्लाब जिन्दाबाद आओर दोस्त का खून - नाटक(१९८५),भीखमंगा का देश हिन्दुस्तान (१९८७), सृजन के परवाने (जीवनी १९९६ ई०), मिथिलांचल की कथाएं (२०००), भोजपुरी लोककथा (२०२२), २००३ मे तीन पुस्तक - शीत बसंत,राजा भोज और गंगू तेली ,दाल और पानी। आजादी खतरे में ,कलुआ डोम, फांसी पर गणतंत्र,ताजमहल मैंने भी बनाया ,आदमी कैसे दरिन्दा हो गया, प्रेम न हाट बिकाय, मैं बुद्ध हुँ, मुहब्बत जिन्दाबाद,नेह की बारीश, आदमी के भेष में आदमखोर को देखा है। क्रान्ति के बलिवेदी, तालीम जमाना ,भुख लगी है रोटी दो ' आदि सारगर्भित रचना केँ परेखय बाला संस्था /विभाग पुरस्कार धरि देने छैक। हिनकर धारदार रचना पर व्यापक विमर्श केर आवश्यकता छैक। बहुत कविता'क भाषान्तरण मैथिली, अंग्रेजी, बंगला ,मराठी,उर्दू, तेलगु आ पैनजाबीमे अनुवाद भेल छैक। वर्ष २०१८ मे 'फांसी पर गणतंत्र ' पोथी "नोवेल अवार्ड " लेल नामीत पैनलमे मिज्झहर भेल रहैक। श्री दिवाना जी २००८-११ भारत सरकार , हिन्दी सलाहकार समितिमे सदस्य रहल छलाह,आ उत्तर मध्य सांस्कृतिक केंद्र इलाहाबाद संस्कृति मंत्रालयमे सेहो भारत सरकारके पूर्व सदस्य रहल छथि। देशके दर्जनो पत्र - पत्रिकामे सैकड़ो रचना प्रकाशित देख बिहार राष्ट्रभाषा परिषद हिनका साहित्य सेवा सम्मान देने छन्हि। सन् २००५-०६ मे संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार वरिष्ठ फैलोशिप अवार्ड देने छैक। बिहार सरकार, राजभाषा विभाग द्वारा रामधारी सिंह दिनकर पुरस्कार २०२०-२१ मे प्रदान कयने छैक। धर्म सँ उपर मानवताक संदेश , शहीदे आजम भगतसिंहके जीवन पर आधारित नाटक 'इन्कलाव जिन्दाबाद ' मे देबाक चेष्टा कयलनि तँ भुखके विरुद्ध हिन्नू मुसलमान एकताक संदेश 'भुख लगी है रोटी दो'मे देबाक चेष्टा कयने छथि। लेखक सरकार सँ आ समाज सँ उपेक्षित दशा वाबत संवेदना ओ पीड़ाके वर्णन 'भीखमंगों की हिन्दूस्तान ' मे करबामे निपुण भेलाह अछि। ई मातृभाषामे पुनः पुनः सृजनके शेष काज करथि ,से लालसा राखैत छियन्हि। - प्रीति कुमारी, बी.ए., बीएड. अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ। २.११. संतोष कुमार राय 'बटोही'- धारावाहिक डायरी 'लव यू टू' संतोष कुमार राय 'बटोही' धारावाहिक डायरी 'लव यू टू'
फरवरी, 2019
किसान सम्मान निधि और सत्ताक खेल
दिसम्बर, 2018 मे केन्द्र सरकार किसान सम्मान निधि योजना केँ घोषणा केलाथि और मोदी सरकार केँ पहिल कार्यकाल केर अंतिम बजट मे एक फरवरी केँ संसद मे वित्त मंत्री पीयूष गोयल साहब ऐ योजना हेतु राशि केर बेवस्था केलाथि। ई योजना 2019 लोकसभा चुनाव सँ पहिने लागू कऽके चुनाव मे वोटर केँ साधवाक लेल परयास केल गेल जाहि मे ओ सफल भेलाथि । किसान केँ चारि महीना पर खाता मे राशि आबऽ लगलै। जिनका नहि खेत-पथार हुनको सभ केँ लाभ भेटऽ लगलै । कर्मचारी सभ सेहो फार्म पास कऽके मालामाल भेलैत । सत्ता मे फेर मोदी जी वापिस भेलाह । किसानक आंदोलन टाँय-टायँ-फीस भेल । पूरा देशक किसान हारि गेलाह । विपक्ष वोट चोरी केर आरोप लगाबैत रहल , परञ्च सत्ता पर सरकार केँ किछु फरक नहि पड़लैन्ह । किसान जे दिल्ली केँ सीमा पर आंदोलन करैत मरि गेलाह ओकर कुनो परवाह सरकार नहि केलाह । खेतीहर केँ जानि-बुझि कऽ शहीद होमऽ पड़लैन्ह । नीक वोट सँ जीत कऽ मोदीजी फेर देशक प्रधानमंत्री बनलाह । रेबड़ी बँटैत रहतै आओर देश मे सत्ता सुखक इंतजाम होयत रहतै । हुँआ-हुँआ केनिहार केर संख्या बढ़ि रहल छै । देश मे बकरी चरेनिहारक संख्या बढ़ि रहल छै । सोशल प्लेट फारम पर झूठक विश्वविद्यालयक संख्या सेहो बढ़ि रहल अछि । किसानक सरकार सँ जे मांग छल ओ पूरा नहि भेल । ई दुखद अछि जे 'जय किसान जय जय जवान आओर जय विज्ञान' केर नारा सभ मिथ्या साबित भऽ रहल अछि ।
फरवरी, 2020
करोना महामारी आओर देश
जनवरी, 2020 सँ करोना के रिपोर्ट आबअ लगलै। हम डीपीएस केँ हास्टल खाली कराकऽ सभ गार्जन के बुला कऽ सभ विद्यार्थी केँ आननफानन मे घर भेज देलियै आओर विद्यालय बंद कके हम सब सेहो घर आबि गेलहुँ अछि । कोन बेमारी छियैय ई 'करोना कुमारी' ! बुखार लगैत छै आओर बुखारे-बुखारे जीनगी केँ लील लैत छै । हमरा गाम मे दूटा लोक मरि गेलाह । बुधन कोलकाता सँ ऐल छलाह । हुनका बुखार लगैत छलैन्ह , परण्च करोना कुमारी छेलै वा कोनहु दोसर छोटका-मोटका बेमारी से नहि मालूम ? रस्ते सँ मधुबनी राँटी भेज देल गेलै । ओ एक सप्ताह केँ अंदर मुआ गेलाह । नेतीलाल बाबा गाम पर ठीके रहैत छलाह । बेटा-पुतोह दिल्ली मे अपन मकान बनौने छैन्ह। घुमअ-फिरअ लेल दिल्ली गेल छलाह। करोना हुनका पकड़ि लेलकैन्ह। ओ मरि गेलाह। पंजाबी बाग अशमशान मे हुनका मुखाग्नि अपन बेटा देलकैन्ह । डीएमसीएच मे एकटा मरीज केर वीडियो वायरल भेल छल । सुविधा के नाम पर हस्पताल मे किछु नहि केल गेल छेलै । दु-चारि दिनाक बाद खबर भेटल जे ओ मरीज मरि गेलाह । जे कियो इलाज हेतु अस्पताल जायत छल ओ जिन्दा कमे आपस होयत छल । निर्मल काका के इलाज घरे पर भेलैन्ह ओ बचि गेलाह । शिवानंद के इलाज घरे पर राजकपूर केलकिन्ह तँ ओ बचि गेलाह । करोना काल मे भारतक स्वास्थ्य बेवस्था केर पोल खुलि गेलै । देश मे स्वास्थ्य बेवस्था मे सभसँ बेसी भ्रष्टाचार भ रहल छै । अस्पताल मे सँ दवाई आओर मेडिकल इक्वीपमेन्ट , किट लापता भऽ जायत छै। स्टाफ आओर डाक्टर भगवान नहि रहि गेलाह अछि। सभटा टाका केर खेल मे लागल छथि। सरकारी खजाना मे लूटिस भऽ रहल छै। छोट-सँ-छोट दवा कखनो हस्पताल मे नहि भेटत । निजी क्लीनिक खोलिकऽ बसि गेल छथि डाक्टर। सरकारी हस्पताल सँ नदारद रहैत छथि । अपन ईमान बेचने जायत छथि। ई भारत केर स्वास्थ्य बेवस्था मे घुन लागल अछि । करोना महामारी देखा देलकै जे भारतक सरकार बौना छथि। आक्सीजन के लेल देश मे मरामारी मचल छल । आक्सीजन निर्माण हेतु प्लांट केर अभाव छल । करोना एहेन महामारी हम अपन जीनगी मे नहि देखने छलहुँ। ई बुखार बड़ खतरनाक छै । लाखो लोक केँ अपन आगोश मे लपेट लेलकै ।
सरकारी सिस्टम चरमरा गेलै । सभ कियो अपनाआप केँ निरैस देने छै । के कखन मरत से ठीक नहि छै । सभक जिनगी खुट्टा पर टाँगल छै । मोन हमरो मसुआयल अछि। बँचि गेलहुँ तऽ जरूर लिखब । अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ। २.१२. प्रीति कुमारी- डॉ (प्रो.) विजयेन्द्र झा : एक व्यक्तित्व प्रीति कुमारी डॉ (प्रो.) विजयेन्द्र झा : एक व्यक्तित्व मधुबनी जिलाक फुलपरास अनुमंडल अंतर्गत घोघरडीहा अंचलके प्रसिद्ध गाम बिरौलमे भारद्वाज गोत्रीय एकहरे मूलग्राम'क पं० दुर्गा नन्द झा पिता आ माय श्रीमती अन्नपूर्णा देवी जीक घर एक बालकक जन्म भेल रहनि ,जिनक नाँउ - विजयेन्द्र जी पड़लनि । अन्नपूर्णा देवी जीक नैहर चिकना ग्राम निवासी शिवकांत मिश्र पिता, जे दरिहरे मूल ग्रामक कारियप गोत्रीय आ माय सरिसबय राजेश्वर झाक' कन्या कमलमुखी सँ भेल छन्हि। एहि परिवारक पूर्वज शम्भू नाथ झा बाबा आ हुनक पत्नी बृन्दा देवी - बाबी ,जे हड़री ग्रामवासी पनिचोभय ब्रह्मौल मूलक बाबु झाक पुत्री रहथिन। हुनका शम्भू नाथ झा सँ जेष्ठ पुत्र शंकर झा सेहो रहनि। शंकर झा 'क पिताजी प्रयाग दत्त झाक वियाह अलपुरा गाममे भेल रहनि। प्रयाग दत झाके पिता रहथिन हितलाल झा पेसर नेना झा आ नेना झाक पिता वैद्य विद्यानाथ झा बढ़ पराक्रमी लोक रहथिन। अन्नपूर्णा देवी जीक तीन पुत्र आ एक पुत्री भेलथिन,यथा - त्रिलोक झा, डॉ० वीजयेन्द्र झा आ इन्द्र ना० झा,ओ जयन्ति काली । विजयेन्द्र जीक वियाह घोघरडीहा निवासी बत्स गोत्रीय श्रीनाथ मिश्र जीके कन्या श्रीमती बीणा देवी सँ भेलनि। श्रीमती वीणा झाकेँ दू गोट पुत्र आ एकटा पुत्री छन्हि,यथा-: कौशल कुमार ,जिनक धर्मपत्नी भेलीह श्रीमती सोनी देबी आ दीपक जी कुमारेवार छथि। पुत्री अंशु झाक विवाह श्री अर्पित झाजीक संग भेलनि,जाहिमे एक नातीन अहाना छैन; जे कनाडामे अद्यावधि रहैत छैन। अपने डॉक्टर विजयेन्द्र जी - चन्द्र मुखी भोला महाविद्यालय डेवढ् - घोघरडीहामे पढ़ि आगु बढलाह । आओर झंझारपुर , दरिभंगा ओ पटनामे टियूशन पढ़ाबैत स्वयं अध्ययन कठिनता सँ कयने रहथि। एखन बाबा साहेब डॉ० बी आर अम्बेडकर बिहार विश्व विद्यालय - मुज्जफरपुर केर एल एन टी कालेज मुज्जफरपुरमे मैथिली विभागाध्यक्ष छथि आ प्राधानाचार्य रहल छथि। ओ सम्पादक हैसियत सँ ' कोसा' शोध पत्रिका'क सात अंक धरि वार्षिक रूपेँ निकालैत आबि रहलाह अछि,एहिक आई एस बी एन - id,Ar २६३१० छैक। प्रतिभा प्रकाशन सँ हिनक २०२१ मे मैथिली व्याकरण आ रचना ६४६ पृष्ठके एवम् २०२२ ई०मे मैथिली भाषा विज्ञान लगधक १००० पृष्ठक आ २०२३ मे मैथिली सहायक इतिहास पोथी सेहो १००० पृष्ठ'क बहरायल छन्हि। ४८ शोध लेख केर पोथीक सम्पादन डॉ० इन्दुधर झा जीक संग मिलकय कयने छथि, ताहि पोथी'क नाम छी -: आधुनिक मैथिली साहित्य : समकालीन परिदृश्य २०२५ ई०। ओहि साल विद्यापति कृत कृर्तिगाथा सेहो सम्पादन कयलनि। सन् २०२६ मे सद्यप्रकाशित २११ पृष्ठके 'मैथिली निवंध वाटिका ' मौलिक छन्हि। साहित्य अकादमी सँ पुरस्कृत पी. केशव देव कृत मलयालम उपन्यास 'आयलका-१९६७ केर अनुदीत कृति 'पड़ोसिआ' ३१६ पृष्ठ केर वर्ष २०२३ मे साहित्य अकादमी सँ छपल छैक। वर्ष २०२० सँ नियमित बहराईत "कोसा" शोध पत्रिकामे हमरो एक आलेख ऐ शताब्दीक सय सँ अधिक रचनाकारमे सँ एक श्री लाल देब कामत जीक व्यक्तित्व पर रहत। - प्रीति कुमारी, बी.ए., बीएड. अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ। २.१३. मिथिलाक नाच पाटी- समानान्तर नाच-नाट्य परम्परा मिथिलाक नाच पाटी- समानान्तर नाच-नाट्य परम्परा [विदेह नाट्य उत्सवसँ साभार- संकलन उमेश मण्डल/ रामविलास साहु आ अन्य; देल उमेर ०१ जनवरी २०१३ केर अछि।] नाच पाटी- मिथिला नाट्यकला परिषद- पकड़िया कम्पनी- श्री राम लखन साहु पे. स्व. खुशीलाल साहु पता, गाम- पकड़िया, पोस्ट- रतनसारा, अनुमंडल- फुलपरास (मधुबनी) मैनेजर- श्री ठकाई यादव पे. स्व. फुसन यादव पता, गाम- मुसहरनियाँ, पोस्ट- रतनसारा, अनुमंडल- फुलपरास (मधुबनी)
नाच- (1) अल्हा रूदल (2) लछिया रानी (3) शीत वसंत (4) गुगली घटमा (5) राजा कुँवर वृजभान
अभिनय कर्त्ताक नाओं/पता-
श्री भाेगी लाल दास- स्व- भायलाल दास लछमिनियाँ (मधुबनी) श्री रामचन्द्र शर्मा- श्री जंगल शर्मा नेमुआ (मधुबनी) श्री नथुनी शर्मा- श्री वनमाली शर्मा नेमुआ (मधुबनी) श्री सुन्दर मुखिया- श्री नागेश्वर मुखिया हरियाही (सुपौल) श्री वासदेव सदाय- स्व. कुजाय सदाय सखुआ (िनर्मली) श्री नारायण सदाय- श्री गंगा सदाय बेलही (सुपौल) मो. जाहिद उर्फ राजा मो. डोमी नदाफ सुदै द्वारम (मधुबनी) श्री रंजीत राम श्री लखन राम खुटौना (मधुबनी)
वाद्य एवं वादक नाओं/पता-
आर्गन- श्री छेदी पंडित स्व. चन्द्र पंडित बरहारा (सुपौल) नाल- श्री परमेश्वर भारती स्व. जगरूप भारती मुसहरनियाँ (मधुबनी) काँरनेट- श्री चन्दर राम श्री जीतन राम लछमिनियाँ (मधुबनी) नङेरा- श्री लाल राम स्व. फुसन राम लछमिनियाँ (मधुबनी) ढोलक- श्री कलानंद राम स्व. खट्टर राम लछमिनियाँ (मधुबनी) ड्रमसेट- श्री भोलट दास श्री योगेन्द्र दास िनर्मली (सुपौल)
आन सहयोगी-
श्री याेगेन्द्र यादव श्री ठकाई यादव मुसहरनियाँ घुरन दास श्री भायलाल दास (ताॅति) लछमिनियाँ दिनेश राम श्री सीताराम राम लछमिनियाँ
नाच पाटी- श्री श्री 108 श्री भगवती नाचपार्टी- सिमराहा सप्तरी कम्पनी- श्री रामचन्द्र मण्डल पे. श्री वृजलाल मण्डल पता, गाम- सिमराहा, पोस्ट- बरसाइन, जिला- सप्तरी (नेपाल) मैनेजर- श्री राम सुन्दर राम पे. श्री सुवी राम पता, गाम- दउरी, पोस्ट- बरसाइन, जिला- सप्तरी (नेपाल)
नाच- (1) अल्हा रूदल (2) लछिया रानी
अभिनय कर्त्ताक नाओं/पता- श्री शैनी पासवान श्री दुखी पासवान खड़कपुर (बरसाइन) श्री लक्ष्मण राम श्री कैलू राम दउरी (बरसाइन) श्री बेचू राम श्री श्रीप्रसाद राम दउरी (बरसाइन) श्री सत्य नारायण राम- श्री नथुनी राम दउरी (बरसाइन) श्री देव नारायण यादव- श्री नथुनी यादव दउरी (बरसाइन) श्री परमेश्वर मण्डल- श्री तेजी मण्डल सिमराहा (बरसाइन) श्री रघु मण्डल- स्व. थारू मण्डल सिमराहा (बरसाइन) श्री चरित्तर मण्डल- स्व. कारी मण्डल सिमराहा (बरसाइन) श्री जोगी मण्डल- श्री बच्चाई मण्डल सिमराहा (बरसाइन) श्री बेचू राम श्री प्रसाद राम दउरी (सप्तरी)
वाद्य एवं वादक नाओं/पता-
काँरनेट- श्री देव नारायण राम स्व. नाथो राम दउरी (बरसाइन) काँरनेट- श्री दुखी राम स्व. कारी राम खड़कपुर (बरसाइन) ढोलक- श्री नशीवलाल राम श्री कैलू राम दउरी (बरसाइन) नङेरा- श्री राम प्रसाद राम श्री सुवी राम दउरी (बरसाइन) हारमोनियम- श्री चरित्तर मण्डल श्री कारी मण्डल दउरी (बरसाइन)
आन सहयोगी-
शिव नारायण दास श्री ठकाइ दास दउरी (बरसाइन)
कोसी नाट्य कला परिषद- सिमराहा-सुपौल कम्पनी- श्री गया प्रसाद मण्डल पे. श्री राम नारायण मण्डल पता, गाम- सिमराहा, पोस्ट- नौआबाखैर, भाया- थरबिटिया, जिला- सुपौल मैनेजर- श्री दया नन्द मण्डल पे. श्री राम लखन मण्डल पता, गाम- सिमराहा, पोस्ट- नौआबाखैर, भाया- थरबिटिया, जिला- सुपौल।
नाच- (1) अल्हा रूदल (2) सती लछिया
अभिनय कर्त्ताक नाओं/पता-
श्री अरूण कुमार मण्डल श्री नथु मण्डल सिमराहा (सुपौल) श्री रून्दी पासवान स्व. बहादुर पासवान परसा माधो (सुपौल) श्री राम प्रसाद शर्मा स्व. बिलट शर्मा परसाहा (सुपौल) श्री देवराज शर्मा स्व. तपेश्वर शर्मा सिमराहा (सुपौल) श्री चन्द्र नारायण मण्डल स्व. रघुनाथ मण्डल सिमराहा (सुपौल) श्री दुखी पासवान श्री बेचन पासवान परसा माधो (सुपौल) श्री विजय कुमार राय श्री राम स्वरूप राय सिमराहा (सुपौल) श्री बेचन शर्मा स्व. रामसुन्दर शर्मा परसाहा (सुपौल)
वाद्य एवं वादक नाओं/पता-
हारमोनियम- श्री सत्य नारायण मण्डल स्व. खुशीलाल मण्डल सिमराहा (सुपौल) ढोलक- श्री गणेश राम श्री विन्देश्वर राम एकडारा, थरविटिया (सुपौल) काँरनेट- श्री शिव नारायण सदा स्व. ............. एकडारा, थरविटिया (सुपौल) नङेरा-डिग्री- श्री गुनेश्वर राम श्री ............... परसाहा, नाैआ बाखैर (सुपौल) झाइल- श्री हरिनारायण पासवान स्व. नकछेदी पासवान सिमराहा (सुपौल) झाइल- श्री तेज नारायण मण्डल स्व. खुशीलाल मण्डल सिमराहा, नौआबाखैर (सुपौल) भड़िया- श्री लालदेव मण्डल श्री बच्चा मण्डल सिमराहा, नौआबाखैर (सुपौल) जोकर- श्री सीताराम राम .................. परसाहा, नाैआ बाखैर (सुपौल)
अन्य सहयोगी-
श्री सुभाष कुमार राय श्री कन्हैया लाल राय बौराहा, थरविटिया (सुपौल)
रामलीला नाट्य कला परिषद- रसुआर जिला-सुपौल कम्पनी- श्री झोटन मण्डल पे. स्व. नथुनी मण्डल पता, गाम- रसुआर, पोस्ट- मुंगराहा, भाया- िनर्मली, अनुमण्डल- िनर्मली, जिला- सुपौल (बिहार) मैनेजर- श्री त्रिलोक नाथ झा पे. स्व. रामेश्वर झा पता, गाम- रसुआर, पोस्ट- मुंगराहा, भाया- िनर्मली, अनुमण्डल- िनर्मली, जिला- सुपौल (बिहार)
नाच- (1) अल्हा रूदल (2) सती लछिया (3) राजा सलहेश (4) विद्यापति (5) धुलक फूल (6) सुल्ताना डाकू (7) राजा हरिषचन्द्र (8) कृष्ण लीला (9) रामायण
अभिनय कर्त्ताक नाओं/पता-
श्री रामू मण्डल स्व. गोपी मण्डल रसुआर (सुपौल) स्व. राज कुमार ठाकुर श्री रामजी ठाकुर रसुआर (सुपौल) श्री धनिक लाल मण्डल स्व. रामजी मण्डल रसुआर (सुपौल) श्री देव नारायण मण्डल स्व. बलदेव मण्डल रसुआर (सुपौल) स्व. भोला झा स्व. जयदेव झा रसुआर (सुपौल) स्व. जिलेब मण्डल स्व. नथुनी मण्डल रसुआर (सुपौल) श्री शैनी मण्डल स्व. लालजी मण्डल रसुआर (सुपौल) श्री सीताराम मण्डल स्व. रूपलाल मण्डल रसुआर (सुपौल)
वाद्य एवं वादक नाओं/पता-
हारमोनियम- श्री त्रिलोक नाथ झा पे. स्व. रामेश्वर झा रसुआर (सुपौल) ढोलक- स्व. रामगुलाम मण्डल स्व. संती मण्डल रसुआर (सुपौल) नङेरा-डिग्री- श्री झड़ीलाल राम स्व. हिया लाल राम रसुआर (सुपौल) झाइल- देवीलाल मण्डल स्व. खुशीलाल मण्डल रसुआर (सुपौल) झालड़ श्री किशोरी मण्डल स्व. नेवैत मण्डल रसुआर (सुपौल) डिग्री सदैबला- स्व. रामकिशुन मण्डल स्व. शक्ति मण्डल रसुआर (सुपौल) भड़िया- श्री नारायण मुखिया स्व............... रसुआर (सुपौल) जोकर- श्री सीताराम राम .................. परसाहा, नाैआ बाखैर (सुपौल) डान्सर- श्री छोटेलाल मण्डल श्री बुधु मण्डल रसुआर (सुपौल) जोकर- श्री रामअधिन मण्डल स्व. धनिक लाल मण्डल रसुआर (सुपौल)
इटहरी नाच कला परिषद- इटहरी जिला-सुपौल कम्पनी- श्री जगदीश साहु पे. स्व. गंगा प्रसाद साहु पता, गाम- इटहरी, पोस्ट- िनर्मली, भाया- िनर्मली, अनुमण्डल- िनर्मली, जिला- सुपौल (बिहार) मैनेजर- श्री रामविलास साहु पे. स्व. भोला साहु पता, गाम- इटहरी, पोस्ट- िनर्मली, भाया- िनर्मली, अनुमण्डल- िनर्मली, जिला- सुपौल (बिहार)
नाच- (1) कुमर वृजभान (2) राजा नल (3) राजा सलहेश (4) गुगली घटमा (5) शीत-वसंत
अभिनय कर्त्ताक नाओं/पता-
नायक- रामविलास साहु स्व. भोला साहु इटहरी (सुपौल) नारी पात्र- बैजू सदाय स्व. सोती सदाय इटहरी (सुपौल) नारी पात्र- अशोक सिंह श्री बलराम सिंह इटहरी (सुपौल) मुख्य खलनायक- दुखी मण्डल स्व. श्रीलाल मण्डल इटहरी (सुपौल) जोकर- विजय साहु स्व. केसो साहु इटहरी (सुपौल) नारी पात्र- रघुनाथ सदाय स्व. मोती सदाय इटहरी (सुपौल) अभिनय- सुकुमार मण्डल .................. मुसहरनियाँ-रतसारा (मधुबनी) अभिनय- रामअधिन मण्डल स्व. धनिकलाल मण्डल मुंगराहा (सुपौल) अभिनय- हरि नारायण मण्डल ..... छजना (मधुबनी) अभिनय- राम बहादुर मुखिया स्व. बच्चा मुखिया ननपट्टी फुलपरास (मधुबनी) अभिनय- श्री साधु दास स्व. .............. पिपराही-वनगामा (मधुबनी)
वाद्य एवं वादक नाओं/पता-
हारमोनियम- श्री जगदीश साहु स्व. गंगा प्रसाद साहु इटहरी (सुपौल) ढोलक- श्री जुगल साफी स्व. दाहुर साफी इटहरी (सुपौल) नङेरा-डिग्री- श्री रामकिसुन सदाय स्व. सोती सदाय इटहरी (सुपौल) झाइल- श्री सुकदेव साफी ..... इटहरी (सुपौल) झाइल- श्री रामेश्वर साहु स्व. मुकुन्द साहु इटहरी (सुपौल) डिग्री सदैबला- श्री रामकिशुन सदाय ................... इटहरी (सुपौल) भड़िया- झड़ी लाल सदाय श्री सरयुग सदाय इटहरी (सुपौल) ढोलकिया-2 रामाशीष यादव .............. ननपट्टी-फुलपरास (मधुबनी) हारमोनियम-2 श्री तनुकलाल मण्डल ................ हरियाही-िनर्मली (सुपौल)
आदर्श वाल-कला निकेतन- िनर्मली-पुनर्वास (जिला-सुपौल) कम्पनी- श्री राम शरण कामत पे. स्व. शिवधर कामत पता, गाम- सुरयाही, भाया- मुजियासी, अनुमण्डल- फुलपरास, जिला- मधुबनी (बिहार) मैनेजर- श्री अशोक सिंह पे. स्व. वलराम सिंह पता, गाम- इटहरी-पुरर्वास, पोस्ट- िनर्मली, भाया- िनर्मली, अनुमण्डल- िनर्मली, जिला- सुपौल (बिहार)
मंचन- (1) काँच ताग (2) आन्हर कानून (3) लोहा सिंह (4) माइक कलेजा (5) चुड़ी आ सिनूर
अभिनय कर्त्ताक नाओं/पता-
नायक- हेम नारायण साहु स्व. लक्ष्मी साहु इटहरी (सुपौल) नारी पात्र- राम विलास साफी स्व. शोभित लाल साफी इटहरी (सुपौल) नारी पात्र- अशोक सिंह श्री बलराम सिंह इटहरी (सुपौल) नारी पात्र- हरि नारायण साहु श्री मिश्री लाल साहु इटहरी (सुपौल) नारी पात्र हरि नारायण साहु श्री लक्ष्मी साहु इटहरी (सुपौल) अभिनय- राम सागर साफी श्री शोभित साफी इटहरी (सुपौल) अभिनय- सत्य नारायण साहु श्री लक्ष्मी साहु इटहरी (सुपौल) अभिनय- जगत नारायण साहु श्री लक्ष्मी साहु इटहरी (सुपौल) अभिनय- रोहित साहु श्री राम लखन साहु इटहरी (सुपौल) अभिनय- हीरा लाल साहु स्व. सुकदेव साहु इटहरी (सुपौल) अभिनय- जिरा लाल साहु स्व. सुकदेव साहु इटहरी (सुपौल) अभिनय- रामावतार यादव श्री नुजाइ यादव इटहरी (सुपौल) अभिनय- गंगा पासवान स्व. कुसुमलाल पासवान इटहरी (सुपौल) अभिनय- रामचन्द्र यादव स्व. सुखी यादव इटहरी (सुपौल) अभिनय- शत्रुध्न साहु स्व............. इटहरी (सुपौल) गायक- मदन प्रसाद साहु स्व. गंगा प्रसाद साहु इटहरी (सुपौल)
वाद्य एवं वादक नाओं/पता-
हारमोनियम- जगत नारायण साहु श्री लक्ष्मी साहु इटहरी (सुपौल) ठेकैता- राम विलास साफी स्व. शोभित लाल साफी इटहरी (सुपौल) ठेकैता- श्री शिबू साफी ................... इटहरी (सुपौल) झाइल- श्री राम नारायण साहु स्व. बच्चा लाल साहु लक्ष्मीपुर-धबही (मधुबनी) हारमोनियम-2 अशोक सिंह श्री बलराम सिंह इटहरी (सुपौल)
कला निकेतन नाचपाटी- लक्ष्मिनियाँ (जिला-मधुबनी) (1945-1965) कम्पनी- श्री झमेली साहु पे. स्व. मंगल साहु पता, गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, अनुमण्डल- फुलपरास, जिला- मधुबनी (बिहार) मैनेजर- स्व. महेश्वरी पाठक पे. स्व. कारी पाठक पता, गाम- मझोरा, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, अनुमण्डल- फुलपरास, जिला- मधुबनी (बिहार)
नाचक मंचन- (1) जंगली वादशाह (2) वंश-उजारन (3) विदेशिया (4) शीत-वशंत (5) लोड़िक मनियार (6) राजा नल
अभिनय कर्त्ताक नाओं/पता-
नारी पात्र- स्व. अचकी गोसाँइ .................... लक्ष्मिनियाँ (मधुबनी) नारी पात्र- स्व. बहुरी मण्डल स्व. सुनर मण्डल लक्ष्मिनियाँ (मधुबनी) पुरुष पात्र- श्री रामदास साफी स्व. सुवंश साफी लक्ष्मिनियाँ (मधुबनी) पुरुष पात्र- स्व. घौली साफी स्व. सुनर साफी लक्ष्मिनियाँ (मधुबनी) पुरुष पात्र स्व. वसुदेव ठाकुर(उर्फ बतहु ठाकुर) स्व. कैलू ठाकुर लक्ष्मिनियाँ (मधुबनी) जोकर- स्व. खट्टर मुखिया ..................... लक्ष्मिनियाँ (मधुबनी) अभिनय- स्व. दुखाय साहु ..................... लक्ष्मिनियाँ (मधुबनी) नारी पात्र- स्व. रतन मण्डल ..................... मझौरा (मधुबनी) अभिनय- स्व. बिलम साफी स्व. रूपा साफी लक्ष्मिनियाँ (मधुबनी)
वाद्य एवं वादक नाओं/पता-
हारमोनियम- स्व. तुलसी मण्डल .................... मझौरा (मधुबनी) ठेकैता- स्व. रघुनाथ ठाकुर .................... छजना (मधुबनी) नागार्ची- स्व. फुसन राम स्व. कंचन राम लक्ष्मिनियाँ (मधुबनी) झाइल करताल- स्व. बच्चा मण्डल स्व. पंची मण्डल लक्ष्मिनियाँ (मधुबनी) डिगरी सेद्दा- स्व. अशर्फी गोसाँइ .................... लक्ष्मिनियाँ (मधुबनी) भड़िया- स्व. अशर्फी गोसाँइ .................... लक्ष्मिनियाँ (मधुबनी)
अन्य सहयोगी-
स्व. नेबाजी साहु स्व. भैरव साहु लक्ष्मिनियाँ (मधुबनी)
(संकलन सहयोग- रामविलास साहु, लक्ष्मिनियाँ, मधुबनी)
आदर्श नाचपाटी- लक्ष्मिनियाँ (जिला-मधुबनी) (1968-1977) कम्पनी- स्व. गर्भू गोसाँइ पता, गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, अनुमण्डल- फुलपरास, जिला- मधुबनी (बिहार) मैनेजर- स्व. नेबाजी साहु पे. स्व. भैरव साहु पता, गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, अनुमण्डल- फुलपरास, जिला- मधुबनी (बिहार)
नाचक मंचन- (1) बापक हत्या (2) दमाद वध (3) निसााद वध (4) वंस-उजारन (5) गोपीचन (6) शंकर शोसिला (7) उतिम चन।
अभिनय कर्त्ताक नाओं/पता-
पुरुष पात्र- स्व. बहुरी मण्डल स्व. सुनर मण्डल लक्ष्मिनियाँ (मधुबनी) पुरुष पात्र- श्री राम अधिन दास स्व. जहुरी दास लक्ष्मिनियाँ (मधुबनी) पुरुष पात्र- स्व. झोली दास स्व. धुत्तर दास लक्ष्मिनियाँ (मधुबनी) नारी पात्र- श्री नथुनी दास स्व. सोनाइ दास लक्ष्मिनियाँ (मधुबनी) नारी पात्र स्व. रघुनी दास स्व. सुनर दास लक्ष्मिनियाँ (मधुबनी) अभिनय- श्री शिव नारायण मंडल ..................... लक्ष्मिनियाँ (मधुबनी) अभिनय- स्व. डुब्बी मुखिया ..................... लक्ष्मिनियाँ (मधुबनी)
वाद्य एवं वादक नाओं/पता-
हारमोनियम- स्व. बहुरी मण्डल स्व. सुनर मण्डल लक्ष्मिनियाँ (मधुबनी) ठेकैता- स्व. श्री लाल गोसाँइ स्व. बुधु गोसाँइ लक्ष्मिनियाँ (मधुबनी) नागार्ची- स्व. रामेश्वर राम स्व. नेबी राम मझौरा (मधुबनी) झाइल करताल- स्व. बच्चा मण्डल स्व. पंची मण्डल लक्ष्मिनियाँ (मधुबनी) डिगरी सेद्दा- स्व. चमकलाल गोसाँइ .................... लक्ष्मिनियाँ (मधुबनी) भड़िया- स्व. सुनर दास .................... लक्ष्मिनियाँ (मधुबनी)
(संकलन सहयोग- रामविलास साहु, लक्ष्मिनियाँ, मधुबनी)
लक्ष्मिनियाँ नाचपाटी- लक्ष्मिनियाँ (जिला-मधुबनी) (1970-1982) कम्पनी- श्री राजेन्द्र प्रसाद साहु पे. स्व. सुन्दर लाल साहु पता, गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, अनुमण्डल- फुलपरास, जिला- मधुबनी (बिहार) मैनेजर- स्व. बहुरी मण्डल पे. स्व. सुनर मण्डल पता, गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, अनुमण्डल- फुलपरास, जिला- मधुबनी (बिहार)
नाचक मंचन- (1) कुमर वृजभान (2) लछिया रानी (3) सुन्दर वनक सुन्दर फूल (4) अल्हा-रूदल (5) विजय सिंह (6) गुगली घटमा।
अभिनय कर्त्ताक नाओं/पता-
पुरुष पात्र- श्री सीताराम राम स्व. जंगल मोची लक्ष्मिनियाँ (मधुबनी) पुरुष पात्र- स्व. रसिक लाल गोसाँइ स्व. बुधु गोसाँइ लक्ष्मिनियाँ (मधुबनी) पुरुष पात्र- श्री गोसाँइ मुखिया स्व. डुब्बी मुखिया लक्ष्मिनियाँ (मधुबनी) नारी पात्र- श्री मलभोगी दास स्व. भायलाल दास लक्ष्मिनियाँ (मधुबनी) नारी पात्र श्री कल्लर राम स्व. खट्टर राम लक्ष्मिनियाँ (मधुबनी) अभिनय- श्री मूसन साहु स्व. अशर्फी साहु लक्ष्मिनियाँ (मधुबनी) नारी पात्र- श्री राम खेलावन राम स्व. फूसन राम लक्ष्मिनियाँ (मधुबनी)
वाद्य एवं वादक नाओं/पता-
हारमोनियम- श्री राम शरण साहु स्व. हिरो साहु लक्ष्मिनियाँ (मधुबनी) ठेकैता- स्व. लक्ष्मण राम स्व. जीतन राम लक्ष्मिनियाँ (मधुबनी) नागार्ची- स्व. फूसन राम स्व. कंचन राम लक्ष्मिनियाँ (मधुबनी) झाइल करताल- श्री शिव नारायण मण्डल (गामक भगिनमान) लक्ष्मिनियाँ (मधुबनी) डिगरी सेद्दा- कपिलेश्वर राम स्व. सगम राम करहरी, फूलपरास (मधुबनी) भड़िया- स्व. निरसन राम स्व. कंचन राम लक्ष्मिनियाँ (मधुबनी) काँरनेटिया- श्री चन्दर राम स्व. जीतन राम लक्ष्मिनियाँ (मधुबनी)
(संकलन सहयोग- रामविलास साहु, लक्ष्मिनियाँ, मधुबनी)
कला नाचपाटी- छजना (जिला-मधुबनी) (1945-1980) कम्पनी- श्री लालदेव मण्डल पे. स्व. चतुरी मण्डल पता, गाम- छजना, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, अनुमण्डल- फुलपरास, जिला- मधुबनी (बिहार) मैनेजर- श्री राम प्रसाद राम पे. स्व. गंगाय राम पता, गाम- छजना, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, अनुमण्डल- फुलपरास, जिला- मधुबनी (बिहार)
नाचक मंचन- (1) बिहुला शती (2) लछिया रानी (3) सुन्दर वनक सुन्दर फूल (4) पिता हत्या (5) दमाद वध (6) वंश-उजारन (7) कुमर वृजभान (8) विदेशिया (9) जंगली वादसाह (10) रास लिला।
अभिनय कर्त्ताक नाओं/पता-
नारी पात्र- श्री कारी मण्डल स्व. नंदी मण्डल छजना (मधुबनी) नारी पात्र- श्री हरि मण्डल स्व. नंदी मण्डल छजना (मधुबनी) पुरुष पात्र- श्री बच्ची लाल चौपाल स्व. दसाँइ चौपाल छजना (मधुबनी) नारी/पुरुष पात्र- श्री छुतहरू चौपाल स्व. सुनर खतबे छजना (मधुबनी) पुरुष पात्र स्व. नथुनी मण्डल स्व. रामफल मण्डल छजना (मधुबनी) अभिनय- श्री झोली चौपाल स्व. ननधर चौपाल छजना (मधुबनी) अभिनय- श्री छोटकनि चौपाल स्व. बौकू चौपाल छजना (मधुबनी) नारी/पुरुष पात्र- श्री रामजस राम स्व. उचित राम छजना (मधुबनी) नारी पात्र- श्री हरिहर राम स्व. दसाँइ राम छजना (मधुबनी) पुरुष पात्र- श्री रामकिसुन मुखिया स्व. सहदेव मुखिया छजना (मधुबनी) पुरुष पात्र श्री दुर्गा नंद ठाकुर स्व. नेंगर ठाकुर छजना (मधुबनी) अभिनय- श्री मटन चौपाल स्व. सेमु चौपाल छजना (मधुबनी) नृत- श्री शिव नारायण चौपाल श्री छोटकनि चौपाल छजना (मधुबनी)
वाद्य एवं वादक नाओं/पता-
हारमोनियम- श्री राम प्रसाद चौपाल स्व. बिहारी छजना (मधुबनी) ढोलकिया- श्री जनकधारी चाैपाल स्व. खुशीलाल चौपाल छजना (मधुबनी) नागार्ची- श्री छोटकनि राम स्व. सुनर राम छजना (मधुबनी) झाइल करताल- श्री नथुनी चौपाल स्व. मधुकर चौपाल छजना (मधुबनी) डिगरी सेद्दा- स्व. रोगहा चौपाल स्व. तेतर चौपाल छजना (मधुबनी) भड़िया- श्री सुनर चौपाल स्व. नथुनी चौपाल छजना (मधुबनी) काँरनेटिया- श्री राम प्रसाद राम स्व. मंगल राम लक्ष्मिनियाँ (मधुबनी)
अन्य सहयोगी- श्री बालेश्वर ठाकुर स्व. लखन ठाकुर छजना (मधुबनी) श्री रामविलास मुखिया स्व. बलदेव मुखिया छजना (मधुबनी) श्री बिसो मण्डल स्व. अजोधी मण्डल छजना (मधुबनी)
(संकलन सहयोग- रामविलास साहु, लक्ष्मिनियाँ, मधुबनी)
गिरधारी नाचपाटी- छजना (जिला-मधुबनी) (1956-2008) कम्पनी- स्व. गिरधारी साहु वर्त्तमान कम्पनी- जलेश्वर दास पे. स्व. खटर दास पता, गाम- छजना, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, अनुमण्डल- फुलपरास, जिला- मधुबनी (बिहार) मैनेजर- जलेश्वर दास पे. स्व. खटर दास पता, गाम- छजना, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, अनुमण्डल- फुलपरास, जिला- मधुबनी (बिहार)
नाचक मंचन- (1) बिहुला शती (2) गोपी चन्द (3) अल्हा-रूदल (4) गुगली घटमा (5) रूणा-झुणा (6) सामा-चकेबा (7) पिता हत्या (8) दमाद वध (9) कबिर लिला (10) कलयुग प्रेम (9अम एवं 10सम वर्त्तमानमे जारी)
अभिनय कर्त्ताक नाओं/पता-
नारी पात्र- श्री गोसाँइ मण्डल ................... धबौली, वनगामा (मधुबनी) नारी पात्र- श्री राजेश्वर यादव स्व. तनुक लाल यादव बेरयाही (मधुबनी) पुरुष पात्र- श्री हरिहर चौपाल स्व. मोहन चौपाल छजना (मधुबनी) नारी/पुरुष पात्र- श्री रघुनाथ चौपाल स्व. मुंगालाल चौपाल छजना (मधुबनी) पुरुष पात्र श्री कुसुमलाल चौपाल स्व. नथुनी चौपाल छजना (मधुबनी) अभिनय- श्री शिवजी चौपाल स्व. फुसियाही चौपाल छजना (मधुबनी) नृत- श्री राजेन्द्र चौपाल स्व. धीरज चौपाल बिक्रम शेर,अंधरामठ (मधुबनी) नारी/पुरुष पात्र- श्री नेहाली चौपाल स्व. जहुरी चौपाल छजना (मधुबनी) नारी पात्र- श्री संतलाल साहु स्व. दसाँइ साहु छजना (मधुबनी) अभिनय- श्री कपिलेश्वर राम स्व. नेबी राम मझौरा (मधुबनी) अभिनय स्व. राम प्रसाद चौपाल स्व. बिहारी चौपाल छजना (मधुबनी) अभिनय- श्री धर्मी मण्डल स्व. ................ रतन सारा (मधुबनी) अभिनय- श्री यशोलाल यादव .................... बेरियाही (मधुबनी)
वाद्य एवं वादक नाओं/पता-
हारमोनियम- स्व. ठीठर मण्डल स्व. ...... रतनसारा (मधुबनी) ढोलकिया- स्व. भुटाइ चाैपाल स्व. फेकन चौपाल छजना (मधुबनी) नागार्ची- स्व. रामेश्वर राम स्व. नेबी छजना (मधुबनी) झाइल करताल- श्री नथुनी चौपाल स्व. मधुकर चौपाल छजना (मधुबनी) डिगरी सेद्दा- स्व. रोगहु चौपाल स्व. तेतर चौपाल छजना (मधुबनी) भड़िया- स्व. नथुनी चौपाल स्व. चुमन चौपाल छजना (मधुबनी) काँरनेटिया- श्री जालेश्वर दास स्व. खट्टर चौपाल छजना (मधुबनी)
अन्य सहयोगी-
श्री गंगाय साहु स्व. दुखाय साहु छजना (मधुबनी) स्व. गोविन्द लाल साहु स्व. झगरू साहु छजना (मधुबनी) श्री लोदाय चौपाल स्व. गुणेश्वर चौपाल छजना (मधुबनी) श्री भुगती चौपाल स्व. बलदेव चौपाल छजना (मधुबनी)
(संकलन सहयोग- रामविलास साहु, लक्ष्मिनियाँ, मधुबनी)
मिथिलाक लोक संगीत/ लोक कला भगैत गबैया- (धर्मराज, ज्योतिश महराज, अंदू मालि, उदय साहु, हरिया डोम, बेनी, शती अवला, कारूबाबा इत्यादि भगैत निम्नलिखित ‘रसुआर-भगैत पार्टी’ 1980 ई.सँ गबै छथि।) श्री शम्भु प्रसाद मण्डल सुपुत्र स्व. लखन मण्डल भगैत गायन सह खजरी वादन उमेर- 42 साल 1980 ई.सँ भगैत गबै छथि। पता- गाम- बढियाघाट/रसुआर, पोस्ट- मुंगराहा, भाया- िनर्मली, जिला- सुपौल। श्री गंगाराम मण्डल सुपुत्र श्री अशर्फी मण्डल- झालि वादक उमेर- 40 1980 ई.सँ झालि बजबै छथि। पता- गाम- बढियाघाट/रसुआर, पोस्ट- मुंगराहा, भाया- िनर्मली, जिला- सुपौल। श्री जनक मण्डल सुपुत्र स्व. उचित मण्डल उमेर- 60 रमझालि/ कठझालि/ करताल वादक 1975 ई.सँ रमझालि बजबै छथि। पता- गाम- बढियाघाट/रसुआर, पोस्ट- मुंगराहा, भाया- िनर्मली, जिला- सुपौल। श्री रविन्द्र मण्डल सुपुत्र श्री खट्टर मण्डल उमेर- 32 नाल वादक पता- गाम- बढियाघाट/रसुआर, पोस्ट- मुंगराहा, भाया- िनर्मली, जिला- सुपौल। श्री परमेश्वर मण्डल सुपुत्र स्व. बिहारी मण्डल उमेर- 41 ग्रुमबाजा/ गुमगुिमयाँ 1980 ई.सँ गुमगुिमयाँ बजबै छथि। पता- गाम- बढियाघाट/रसुआर, पोस्ट- मुंगराहा, भाया- िनर्मली, जिला- सुपौल। श्री महेन्द्र प्रसाद मण्डल सुपुत्र स्व. छेदी मण्डल उमेर- 48 कठझालि वादक बचपनसँ गेबो करै छथि आ रमझालि/कठझालि बजेबो करै छथि। पता- गाम- रसुआर, पोस्ट- मुंगराहा, भाया- निर्मली, जिला- सुपौल। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ। २.१४. गजेन्द्र ठाकुर- गोहि सभक बीच जल समाधि (मैथिलीक आइ धरिक सभसँ पैघ उपन्यास)- मैथिली कादम्बरीक अंश गजेन्द्र ठाकुर मैथिलीक आइ धरिक सभसँ पैघ उपन्यास- न्याय दर्शन आ समकालीन अपराध-गाथा मैथिली कादम्बरी गोहि सभक बीच जलसमाधि गजेन्द्र ठाकुर समर्पण ओइ अनाम लोक सभकेँ, जिनकर नाम शिलापर नहि लिखायल, मुदा जिनकर स्वर पानि, पात आ कागचमे अखनो बहैत अछि। ओइ सूचनादाता सभकेँ, जिनकर चेहरा कतहु दर्ज नहि, मुदा जिनकर सत्य पाथरो काटि बहराइत अछि। जिनकर परिवार डेरायल रहल, जिनकर नोकरी आ जान दुनू गेल, जिनकर घर सुड्डाह भऽ गेल- तैयो जे बजला। तिनका सभकेँ समर्पित।
“सत्य एकटा बीज थीक- चाहे कतेको मोट पाथरक नीचाँ दबि जाय एक दिन फुटिते अछि।”- ऐ कादम्बरीक पात्रक डायरीसँ। "जे सत्य देखैत अछि आ चुप रहैत अछि, ओकर मृत्यु दुइ बेर होइत अछि- एक बेर देहक, एक बेर आत्माक।"- गढ़ नारिकेलक एकटा पुरान कहबी। "जे गाम अपन इतिहास बिसरि जाइत अछि, ओतुक्का नारिकेल गाछ फल देब बन्द कऽ दैत अछि।"- गढ़ नारिकेलक एकटा आर पुरान कहबी। नारिकेल गाछक बजनाइ, मृतक दर्शन, छाहक अनुपस्थिति- ई मिथिलाक लोक-चेतनाक काव्यात्मक रूपक थीक। (उपन्यास अंश)
जलसमाधि.. गोंहि.. बिज्जी.. गहुमन..
भूत होइए कारी, प्रेत उज्जर, राकश- लहाशक खोरनाठी जे गलतीसँ नै जड़ल, बच्चाकेँ गाड़ल जाइए आ ओ बनि जाइए लोथ। चन्ना गाछी। भूत आ प्रेतक बीच कबड्डी, राकश करैए इजोर आ लोथ अछि दर्शक। पीपरक गाछपर ब्रह्मा। पोखड़िमे पनिडुब्बी, बड़का केशबाली, अथाह पानिमे पएरमे ओझड़ा जाइए ओकर झोंटा, आ काहि काटि कऽ मरि जाइए लोक। भूत, प्रेत, राकश, लोथ मृत्युक बाद, अकालमृत्युक बाद कहू। तहिना पीपरक गाछक ब्रह्मा, आ पानिमे पनिडुब्बीक झोंटामे ओझरायल लोकक आत्मा। गढ़ नारिकेलमे बहुत रास अकाल मृत्यु भेल छै। भूत प्रेतकेँ पएर रोपल नै होइ छै पृथ्वीपर। पएर पाछू मुँहे होइ छै? सभटा झूठ। एन-मेन लोके सन होइ छै, खाली लागत जे उपरे-ऊपर चलि रहल छै। बूझि गेलौं- मून वाक सन। नै मून वाक तँ लागत जेना ससरिकेँ चलि रहल अछि, साँप जकाँ, ई तँ चलबो करैए एन-मेन लोक सन, खाली कने जमीनकेँ छोड़ैत ऊपर। हक्कल डाइन सभ सेहो, गाछपर चढ़ि छौंकी लऽ सवारी करैए, लऽ कऽ उड़ि जाइए। भोरमे ओत्तै छोड़ि चलि जाइए। ओकरा सभ लग बहुत रास आत्मा रहै छै। ओकरासँ खूब काज टहल करबैए, मुदा सुनै छिऐ जखन उमेर बढ़ै छै आ पाबर कम होइ छै तखन ओकरा सभकेँ खोराशि नै दऽ पाबैए तखन ओकरे खखोड़ि-खखोड़ि खाय लागै छै ई आत्मा सभ।
देखि रहल छी चारू कात पानि। बनि रहल अछि एशियाक सभसँ पैघ सड़क पुल। लोहा-छड़, बड़का-बड़का पाया, आ ओइपर चढ़ल जोन-मजदूर, माथपर टोकड़ी लेने। सीमेण्ट, गिट्टी चारू कात…
आ एक गोटेक पएर हुसै छै.. आ खसैत अछि चकरघिन्नी खाइत… गोंहि सभक बीच बनै छै जलसमाधि। फेर किछु दिनमे दोसर, फेर तेसर…. कइएक सय जोन-मजदूरक जलसमाधि.. चलैत रहलै सभटा खेल संगे-संग। किछुएकेँ मृत्युक रूपमे देखाओल गेलै, खाली तीसटा। आ बेसी गेलै जलसमाधिक खातामे, आ कएक दशक बाद हमहूँ ओही खातामे छी। कालक्रममे पएर हुसैत अछि, ओत्तै.. आ खसैत छी चकरघिन्नी खाइत… गोंहि सभक बीच बनैत अछि हमर जलसमाधि। गोंहि सभ चिबा गेल हड्डी पर्यन्त। से हम सभ गोटे समाधि प्राप्त केलौं।
बिज्जी पहरेदार छलै तँ गहुमन किछु नै बिगाड़ि सकलै। मुदा एतुक्का पहरेदार छलै मनुक्ख।
आ इनारमे फेकल ढेपाक अबाज जकाँ कने थम्हि कऽ आबि रहल छै अबाज, छपाक।
इनार छथि गंगा धार, आ ढेपा बनि खसि रहल अछि सभ योगी, जेना जलसमाधि लेबा लेल आयल हुअए दूर बोन, पहाड़ आ बाढ़िक बाद बचल रेतक खेतसँ।
जेना जलसमाधि लेबाक धरफड़ी होइ ओकरा सभमे। सन्न- सन्न कऽ रहल छै कान। चलै-चली गढ़ नारिकेलक लोक सभ लग। ओकरो सभक कान सन्न-सन्न कऽ रहल छै। बेरा-बेरी। एका-एकी। कहियो ककरो तँ कहियो ककरो। जेना कोनो आत्मा मुक्ति पाबि जायत सुनि कऽ ई खिस्सा। जेना गढ़ नारिकेलक लोक भऽ जायत हल्लुक सुना कऽ ई खिस्सा।
मुदा स्वर अस्पष्ट अछि।
जलसमाधि.. गोंहि.. बिज्जी… गहुमन…
ई जोड़ा बना कऽ कोन खिस्सा सुनऽ-कहऽ चाहैए।
बिज्जी आ गहुमन तँ भेल गामक खिस्सा… मुदा ई गंगाजी पर बनि रहल एशियाक सभसँ बड़का पुल? गढ़ नारिकेलसँ तँ ई बड्ड दूर अछि, कोनो नवका खिस्सा बुझा रहल अछि।
तँ ई आत्मा कतेक दिनुका खिस्सा सुनाओत? कतेक सय सालक। सय सालक तँ अवश्ये। आ तखन तँ ई सय सालसँ मुक्तिक आसमे अछि। आकि बेसिये दिनसँ।
कोन खिस्सा कहऽ-सुनऽ चाहैए ई आत्मा। जलसमाधि भेटि गेलै तँ मुक्त किए नै भेलौं।
बिज्जी जँ गहुमनसँ बचा लेलकै तँ तकर माने कोनो अदृश्य शक्ति संग देलकै। … मुदा वएह शक्ति ओकरा गोंहिक मध्य जलसमाधि कोना लेबऽ देलकै? आकि ई एकटा नै दूटा खिस्सा अछि, आकि ओहूसँ बेशी, कएकटा खिस्सा..
देह सिम्मरक फूल सन हल्लुक भऽ गेल अछि। देह अछिये कहाँ, आ दू-तीन टा खिस्सा मिज्झर भऽ गेल अछि, दू-तीनटा कालखण्ड आ भूखण्डक संग।
देखू की सुनै छी आ की सुनबै छी.. फरिछाइए खिस्सा कालखण्ड आ भूखण्डक संग, आकि रहैए मिज्झर अन्त धरि। [ऐ कादम्बरीक अंश] अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ। २.१५. गजेन्द्र ठाकुर-आनन्दमे मत्त करैबला प्रहसन [पल्लव नरेश श्री महेन्द्रविक्रम वर्मा प्रथम केर मूल संस्कृत- मत्तविलास प्रहसनम् केर मैथिली अनुवाद- गजेन्द्र ठाकुर] गजेन्द्र ठाकुर आनन्दमे मत्त करैबला प्रहसन [पल्लव नरेश श्री महेन्द्रविक्रम वर्मा प्रथम केर मूल संस्कृत- मत्तविलास प्रहसनम् केर मैथिली अनुवाद- गजेन्द्र ठाकुर] पात्र-परिचय सूत्रधार - रंगमञ्चक व्यवस्थापक आ नाट्य-निर्देशक अभिनेत्री - सूत्रधारक पहिल पत्नी, नाटकक आयोजनमे सहायक सत्यसोम (कापालिक) - एक कापालिक शैव साधु, कपालकेँ भिक्षापात्र रूपमे धारण करऽबला, विद्रोही आस्थाबला देवसोमा - सत्यसोमक संगिनी नागसेन - शाक्य सम्प्रदायक एक बौद्ध भिक्षु बभ्रुकल्प - एक अन्य शैव साधु, पाशुपत सम्प्रदायक अनुयायी उन्मत्त - एकटा बताह मनुक्ख प्रस्तावना (सूत्रधार प्रार्थनाक बाद प्रवेश करैत छथि) सूत्रधार: अहा! अपन दोसर पत्नी दुआरे तमसायल पहिल पत्नीकेँ प्रसन्न करबाक एकटा नीक उपाय भेटल। बड़ दिनक बाद राज-दरबारसँ नाटक प्रस्तुत करबाक आदेश आएल अछि। चलू, ओकरासँ पुछै छी। (नेपथ्यमे हुलकी दैत) सूत्रधार: यै, महारानी! एतऽ आउ। (पहिल पत्नी - जे अभिनेत्री छथि - प्रवेश करै छथि) अभिनेत्री: (तमसाइत) ई कोन गप भेल? ऐ बुढ़ारीमे अहाँ जवान-जुहान पी कऽ बताह भेल छौड़ा सभक सोझाँ प्रहसन करऽ चाहै छी? सूत्रधार: हँ, बात तँ सएह अछि। अभिनेत्री: तखन कोनो जवान अभिनेत्रीकेँ लऽ आउ जे ई मोन लगा कऽ करबो करत आ ओकरा मोनो लगतै। सूत्रधार: हम तँ ई अहींक सोझाँ करब! अभिनेत्री: ओ दोसरकी अहाँकेँ ई सिखा कऽ पठेने अछि? सूत्रधार: छोड़ू ओ गप। दुनू गोटे राज-दरबार जाएब तँ खुब्बे राजकीय सम्मान भेटत। अभिनेत्री: से बड़का-बड़का गप छोड़ब तँ अहींसँ हएत। सूत्रधार: हएत, मुदा अहाँ अपन अभिनयसँ दर्शकसभकेँ असीम आनन्दक सागरमे डुमा देब! अभिनेत्री: (प्रसन्न भऽ) माने आदरणीय महराजसँ अनुमति भेट गेल? सूत्रधार: हँ। अभिनेत्री: तखन एहन शुभ समाचार देबाक बदलामे हम अहाँकेँ की पुरस्कार दिअ? सूत्रधार: अहाँक प्रसन्नते हमर पुरस्कार भेल। आर की चाही? अभिनेत्री: तखन कोन नाटक प्रस्तुत करबाक विचार अछि? सूत्रधार: अहीं तँ कहलहुँ- 'आनन्दमे मत्त करैबला प्रहसन'। अभिनेत्री: (स्वगत) जे किछु हम कहै छी, से ओकर मोनसँ मिल जाइ छै, तऽ हमर तमसेनाइ सेहो ओकरा स्वाभाविक लगै छै। (प्रकट) ऐ नाटकसँ विजयी होइ बला लेखक के छथि? सूत्रधार: सुनू, प्रिये। ओ आन कियो नै अपन श्री महेन्द्रवर्मा छथि- राजोक राजा। जे काम, क्रोध, अहंकार आ इरखा ऐ सभ दुर्गुणकेँ जीतने छथि; जे सम-चित्त छथि आ साधारण लोकसभक बीच ओहिना मिज्झर भऽ जाइ छथि; सम्पैतमे कुबेर आ पराक्रममे इन्द्रकेँ मात करै छथि; अपन सहज व्यवहार आ सक्षम शासनसँ अपन राज्यक सुन्दर संचालन करै छथि - पल्लव वंशक मेरु पर्वत! श्री विष्णुसिंहक पुत्र। वएह महाराजाधिराज एहि नाटकक लेखक छथि। अभिनेत्री: तखन आर देरी किएक? हमरा सभकेँ एही अद्भुत नाटककेँ तुरत्ते प्रस्तुत करबाक चाही। सूत्रधार: क्षमा करब। हमर परम्परा अछि जे अपन पितामहक महिमाक स्तुति केलाक बादे अभिनय प्रारम्भ होइत अछि। (नेपथ्यसँ) - हे प्रिये, देवसोमा! सूत्रधार: लगैत अछि कि कपाल-पात्र लऽ कऽ घुमऽवला युवा कापालिक माति गेल अछि! (सूत्रधार आ अभिनेत्री प्रस्थान करैत छथि) (प्रस्तावनाक समाप्ति) मुख्य नाटक (युवा कापालिक सत्यसोम अपन संगिनीक संग प्रवेश करैत छथि) कापालिक: (मत्त अवस्थामे) हे देवसोमा! ई सत्य अछि जे कोनो मनुष्य अपन तपोबलसँ कोनो रूप धारण कऽ सकैत अछि। मुदा तूँ अपन व्रतसँ एकदम नव रूप धारण कऽ लेलहीँ! मुक्ताक कणजकाँ चमकैत मुख, सुन्दर भौंह, कोमल ठोढ़ तोहर सुन्दरता शब्दसँ वर्णित नै भऽ सकैए! देवसोमा: नाथ, अखन अहाँ हमरासँ एना बजैत छी जेना हम मातलि होइ। कापालिक: की कहलहीँ, प्रिये? देवसोमा: नाथ, सम्पूर्ण संसार लट्टूजकाँ घुमि रहल अछि! डर लागैत अछि जे खसि पड़ब। पकड़ि लिअ हमरा। कापालिक: ठीक अछि, प्रिये। (पकड़ऽ कऽ कोशिश करैत छथि, मुदा अपने खसि पड़ैत छथि) कापालिक: हे सोमदेवा, जखन हम तोहरा सम्हारऽ आगा बढ़लहुँ, तँ तूँ दूर किए भागि गेलहीँ? की हमरासँ रिसाएल छहीँ? देवसोमा: हँ, सोमदेवा रिसाएल अछि। चाहे माथ नमा कऽ विनती करी- नहि मानत। कापालिक: तूँ सोमदेवा छहीँ ने? (एक क्षण सोचैत छथि) कापालिक: नहि, नहि! तूँ देवसोमा छहीँ! देवसोमा: सब नाटक अछि। अहाँकेँ सोमदेवासँ बड्ड प्रेम अछि। तेँ हमर नामो नहि लेलहुँ। कापालिक: हे प्रियतमे! ओ बस जिह्वाक भूल भेल। असली अपराधी हमर नशा छी। देवसोमा: भगवानक कृपा जे अहाँ नहि छी। कापालिक: ई मद्यपानक आदति हमरा एत्ते कष्ट देलक अछि ने? एहि क्षणसँ हम मद्यपान छोड़ि देब। देवसोमा: नहि, नहि नाथ! हमरा खातिर अपन व्रत नहि तोड़ू आ तपस्याक फल नहि गमाउ! (ई कहि ओकर पयरमे खसैत छथि) कापालिक: (अपार हर्षसँ, उठा कऽ आलिंगन करैत) अद्भुत! अद्भुत! जय भगवान शिव! जय त्रिशूलधारी शिव जिनकर मद्यपान आ प्रेमिकाक सौन्दर्य-उपभोगसँ मोक्षक मार्ग प्रशस्त अछि! जय भगवान शिव! देवसोमा: नाथ, एना नहि कहू। श्रमण भिक्षुसभ मोक्षक मार्ग अलग बतबैत छथि। कापालिक: हे प्रिये, ओ सभ नास्तिक छथि। देवसोमा: रुकू! एना कहब सेहो पाप अछि। कापालिक: हँ, हँ, एहन पापी कार्य छोड़ू। ओ पतित सभ आरोपक योग्यो नहि अछि। ओ जीव अपन माथ मुड़ा कऽ संसार त्याग करैत छथि, मुदा खेनाइ कखन खाइ- तकरो निअम बनबैत छथि। तँ एहन नास्तिकसभक स्तुतिक प्रायश्चित्त रूपमे हम मधु पीब कऽ मुँह शुद्ध करब। देवसोमा: तखन चलू कोनो दोसर मधुशालामे। कापालिक: ठीक अछि प्रिये। (दूनू चलैत छथि) कापालिक: अहा! ई काञ्ची नगर कतेक महान अछि आ कतेक वैभवपूर्ण अछि! एकाम्बरेश्वर मन्दिरक सोनहुल शिखरक संग मिला कऽ मन्दिरसँ मृदंगमक मधुर तालक ध्वनि सुनाइ दैत अछि! पुष्प-विक्रेताक दोकान वसन्त मूर्तिमान जकाँ देखाइत अछि! युवती सभक पायलक मधुर रुनझुन कामदेवक स्मरण दिआबैत अछि। देवसोमा: नाथ, ई काञ्ची स्वर्गीय मधुरस जकाँ स्वादिष्ट अछि। कापालिक: प्रिये, देखू देखू! ई मधुशाला यज्ञशाला लगमे कतेक सुविधाजनक ढंगसँ अछि! ओ ऊँच ध्वजस्तम्भ देखू। ओ पवित्र अग्निस्थानक खाम्ह थिक। हमर पीअल मधु सोमरस थिक। पात्र पवित्र बरतन थिक। भुजल मौस-खाद्य यज्ञक आहुति थिक। मातल बड़बड़नाइ यजुर्वेदक मंत्र थिक। गीत सामवेदक स्तोत्र थिक। ई चमड़ाक झोरा यागक फलकेँ संरक्षित करऽवला झोड़ा थिक। तपस्या अग्नि थिक। मधुशालाक व्यापारी यज्ञ-आयोजक थिक। देवसोमा: हमर भिक्षापात्रमे जे आहुति भेटत, से भगवान शिवक यज्ञ-फलक हिस्सा थिक। कापालिक: अहा! मत्त भऽ नाचब कतेक आनन्ददायक अछि। ढोलक लयमे देह हिलब, मधुर कंठ, चंचल नेत्र, लयपर धोती आ उत्तरीय सम्हारब - कतेक अद्भुत! देवसोमा: अहा! नाथ तँ रसिक छथि। कापालिक: एहि दिव्य पेयकेँ पात्रमे ढ़ारू। वस्त्रक भव्यताक चिन्ता नहि। जिनकर हृदय मिलि गेल अछि, से एक भऽ जाइत छथि। युवक-युवती अपन संकोच त्यागि योद्धा बनि जाइत छथि। प्रेम अहाँ अमर रहू! शब्दक की आवश्यकता! ई झूठ अछि जे शिवजी अपन तेसर नेत्र खोलि मदनकेँ कामदेवकेँ जरा देलखिन मदन अपने पानिमे पघलि गेल आ ओइ आगि सँ हमसभ जरि रहल छी; देवसोमा: हएत। मुदा जे देवता सभक कल्याणक हेतु सब किछु करैत छथि, ओ संसारकेँ भस्म नहि करथिन। (दूनू अपन गालपर थप्पड़ मारि क्षमाक प्रार्थना करैत छथि) कापालिक: भवते भिक्षां देहि महाराज/महारानी! कृपा कऽ भिक्षा दिअ। (अदृश्य स्त्री-कंठ - पर्दाक पाछाँसँ) - नाथ, लिअ, ग्रहण करू। कापालिक: लैत छी... प्रिये, हमर कपाल-भिक्षापात्र कतए अछि? देवसोमा: हमहूँ नहि देखलहुँ। कापालिक: (किछु सोचि कऽ) अहा! पहिल मधुशालामे छोड़ि आएल होएब। चलू, देखि आबी। देवसोमा: नाथ! एत्ते आदरसँ देल जा रहल भिक्षाकेँ नहि लेब तँ पाप हएत। आब की करी? कापालिक: प्रिये, संकटकाल अछि, तेँ सींगमे ग्रहण कऽ लिअ। देवसोमा: ठीक अछि नाथ। (सींगमे भिक्षा ग्रहण करैत छथि) (दूनू किछु काल इधर-उधर खोजैत छथि) कापालिक: की?? एतए तँ नहि भेटैत अछि। (निराश भऽ) कापालिक: हे देवतागण!! अहाँ हमर भिक्षापात्र देखलहुँ? की कहलहुँ? नहि देखलहुँ? ... हम मरलहुँ! हमर आशा पूरा-पूरी टूटि गेल। कापालिकक रूपमे कोना जीअब? कतेक कठिन! (जमीनपर खसि माथ पटकैत छथि) कापालिक: भेल, सब परीक्षा थिक। "कापालिक" उपाधि नहि रहत तँ किछु गमाएब नहि। (उठि कऽ) देवसोमा: नाथ, अहाँक भिक्षापात्र के लेने हएत? कापालिक: प्रिये, ओहिमे भुजल मांस-खण्ड राखल छल। सम्भव अछि जे कोनो कुकुर वा बौद्ध भिक्षु उठा लेने हएत। देवसोमा: तखन आउ, पूरा काञ्ची नगर खोजैत छी। कापालिक: चलू प्रिये! (घूमि-फिरि कऽ वापस आबैत छथि) (एक बौद्ध भिक्षु नारियल-कटोरा लेने प्रवेश करैत अछि) भिक्षु: (छत्र धऽ कऽ) अहा! व्यापारी धनदासक उदारता कोनो दोसर दाताक चाहिसँ बेसी छनि। कतेक स्वादिष्ट भोजन! मुँहमे पानि आनऽवला, स्वादिष्ट माछक तरकारी आ अन्य व्यंजन। बड़ा तृप्तिकारक भोजन भेल। आब राजकीय आश्रमे जाएब। (स्वयंसँ बात करैत घुमैत अछि) भिक्षु: अहा! राजप्रासादमे रहनाइ, कोमल शय्यापर सुतनाइ, प्रातःकालक भोजन, सन्ध्याक स्वादिष्ट पेय, पाँचटा सुगन्धित ताम्बूल, सुन्दर वस्त्र आ अन्य सुविधा- सब किछु तँ बुद्धजी अनुमति देलखिन, मुदा मदिरा आ स्त्री किएक नहि? ओ बेकार बूढ़ी पोथी सभकेँ लिखऽवला सभ युवक सभसँ ईर्ष्या कऽ एहि दूनूकेँ पाठ्यक्रमसँ हटा देलकनि। कतए भेटत मूल ग्रन्थ जइमे ई दूनू छोड़ल नहि गेल अछि? जँ भेटैत, तँ बुद्धजीक पूर्ण शिक्षा सभकेँ देखा कऽ सभक उपकार कऽ सकैत छलहुँ, नहि? (चारूकात घुमैत रहैत अछि) देवसोमा: नाथ, ओइ केशरिया वस्त्रधारी मनुष्यकेँ देखू। एन्ने-ओन्ने चोर नेत्रसँ देखैत आ निरीह लोकसभमे लुकाइत ओ एतए आबि रहल अछि। कापालिक: सही कहलहीँ प्रिये। तकरा अतिरिक्त ओ अपना हाथमे किछु नुकौने अछि। देवसोमा: नाथ, ओकरा रोकि कऽ पूछक चाही। कापालिक: ठीक अछि हे प्रिये... हौ भिक्षु! रुक! भिक्षु: के हमरा एना बजबैत अछि? (पाछाँ देखैत अछि) ओह... ओहि एकाम्बरेश्वर मन्दिरक दुष्ट, बेकार कापालिक छी। ओकर दुष्ट कर्ममे नहि फँसब। (तेजीसँ आगाँ बढ़ैत अछि) कापालिक: प्रिये, हमर भिक्षापात्र भेटि गेल! देखू कोना हमरा देखिते दौगि गेल। ई प्रमाण अछि जे ओ चोर अछि। (तेजीसँ आगा बढ़ि रस्ता रोकैत छथि) कापालिक: अहा! आब कतए जाएब? भिक्षु: भाइ कापालिक! एना नहि करू, उचित नहि अछि। (स्वगत) अहा! भगिनी कतेक सुन्दर छथि! कापालिक: हौ! तुरन्त देखाबह। अपन वस्त्रमे की नुकौने छह? हमरा देखऽ परत। भिक्षु: हमरा लग की अछि? बस हमर भिक्षापात्र। कापालिक: सएह देखऽ चाहैत छी। भिक्षु: भाइ, एना उचित नहि। हमरा अपन भिक्षापात्र नुका कऽ राखऽ पड़ैत अछि। कापालिक: सही अछि। बुद्धजी तँ कहलखिन जे वस्त्र मुख्यतः वस्तु नुका कऽ राखबाक हेतु पहिरबाक चाही। भिक्षु: हँ, ई सत्य थिक। कापालिक: ओ सत्य थिक। हम सच्चा सत्य सुनऽ चाहैत छी। भिक्षु: बड़ भेल हँसी-मजाक। जाय दिअ हमरा। भिक्षाटनक समय भऽ गेल। (आगाँ बढ़ैत अछि) कापालिक: हौ धोखेबाज! कतए जा रहल छहीँ? हमर कपाल-भिक्षापात्र दऽ कऽ जो। (भिक्षुक वस्त्रक छोर पकड़ि खींचैत छथि) भिक्षु: बुद्धम् शरणम् गच्छामि! कापालिक: "चोरी-कलाक गुरु शरणम् गच्छामि" कहू! भिक्षु: पापक क्षमा हो! पापक क्षमा हो! कापालिक: नीक साधु किएक नहि क्षमा पाओत? देवसोमा: नाथ, अहाँ बड्ड थाकि गेलहुँ। गायब कपाल-भिक्षापात्र खोजब सहज नहि। तेँ एहि सींगेसँ मधुपान करू, किछु शक्ति लाउ, तकर बाद तर्क-वितर्क करब। कापालिक: ठीक अछि। (देवसोमा मदिरा दैत छथि) कापालिक: प्रिये, तूँ सेहो तृप्त हो। देवसोमा: ठीक अछि नाथ। (ओ सेहो पीबैत छथि) कापालिक: एहि मनुष्यसँ टक्कर भेल। कोनो बात नहि। बचल मदिरा एहि आदरणीय साधुकेँ सेहो दिअ। देवसोमा: नाथक आदेश। सरकार, कृपया ग्रहण करू। भिक्षु: (स्वगत) कतेक सहजे भाग्य मिलल! मुदा समस्या ई जे लोक देखि लेत। भिक्षु: (प्रकट) नहि धन्यवाद। हमरा मदिरा पीबाक अनुमति नहि अछि। (कहैत-कहैत अपन ठोढ़ जिह्वासँ भिजबैत छथि) देवसोमा: जाउ! एहन सुअवसर आर कतऽ भेटत? कापालिक: प्रिये, ऐ मनुष्यक बेलगाम बोली ओकर असली इच्छा उजागर कऽ रहल अछि। भिक्षु: की अहाँकेँ दया नहि आओत? कापालिक: जँ दया आएत तँ वासनासँ मुक्ति केना पाएब? भिक्षु: वासनासँ मुक्त भेलापर क्रोधसँ सेहो मुक्ति भेटत। कापालिक: जँ हमर वस्तु आपस करब तँ क्रोधसँ जरूर मुक्ति हएत। भिक्षु: कोन वस्तु? कापालिक: हमर कपाल-भिक्षापात्र। भिक्षु: कोन कपाल-भिक्षापात्र? कापालिक: बच्चा सन "कोन कपाल-भिक्षापात्र" पुछैत अछि! सम्भव अछि ई सत्यो हो? देवसोमा: मीठ-मीठ बात बजने काज नहि हेतनि। जबर्दस्ती छीनऽ परत। कापालिक: सही कहलहीँ प्रिये। (दूनू भिक्षापात्र छीनऽ कऽ कोशिश करैत छथि) भिक्षु: गन्दा कापालिक! तोहर नाश हो! (हाथसँ धकेलि कऽ कापालिककेँ लात मारैत छथि) कापालिक: आह! लात मारलक! देवसोमा: बेकाजक मनुक्ख, तोहर जान जेतौ। (भिक्षुकक केश पकड़ऽ लेल झपटैत छथि, मुदा केश नहि रहबाक कारणे संतुलन बिगड़ि खसि पड़ैत छथि) भिक्षु: (स्वगत) बुद्धजीक मुण्डन निअमक प्रशंसा करऽ परत। भिक्षु: (प्रकट) उठू भगिनी। (हाथ देखा कऽ उठबैत छथि) कापालिक: देखू, महानुभाव सभ! नागसेनकेँ देखू जे साधु आ भिक्षु कहबैत छथि मुदा हमर बालिका संगिनीक हाथ पकड़ने छथि! भिक्षु: भाइ, एना नहि कहू। जे संकटमे हो, ओकर सहायता करब हमर कर्त्तव्य थीक। कापालिक: की बुद्धजीक विधानमे सत्ये ई निअम अछि? भेल। पहिने हम खसलहुँ ने? से जाय दिअ। आब अहाँक माथाक भीतरक खोपड़ी हमर भिक्षापात्र बनत। (सभ मारिपीट शुरू करैत छथि) भिक्षु: अत्याचार! अत्याचार! कापालिक: देवतागण! स्वयं देखू - ई मनुष्य जे अपनाकेँ योगी कहैत अछि, हमर भिक्षापात्र चोरि कऽ कऽ उनटे चिकड़ि रहल अछि! भेल, हमहूँ चिकरब-भोकरब। ई अनीति अछि! अनीति अछि! (ओही समय एक पाशुपत साधु प्रवेश करैत अछि) बभ्रुकल्प (पाशुपत): सत्यसोम, एना किएक चिकड़ि रहल छी? कापालिक: हे बभ्रुकल्प, ई मनुष्य जे भिक्षु आ साधु कहबैत अछि, खाली हमर भिक्षापात्र चोरिये नै केलक, घुरबैयोसँ मना कऽ रहल अछि। बभ्रुकल्प: (स्वगत) देवतासभ ओ काज कऽ देलखिन जे हम करऽ चाहैत छलहुँ! एहि कापालिकक सहायतासँ अपन एहि शत्रुकेँ थकुचि देब। बभ्रुकल्प: (प्रकट) हे नागसेन! ओ जे कहि रहल छथि, से सत्य अछि? भिक्षु: सरकार, की अहाँ सेहो ओकर पक्ष लऽ रहल छी? जे नहि देल गेल हो से नहि लेब - ई हमर सिद्धान्त थीक; व्यर्थ बातसँ दूर रहब - ई हमर सिद्धान्त थीक; अपमानसँ दूर रहब - ई हमर सिद्धान्त थीक; असमयमे नहि खाएब - ई हमर सिद्धान्त थीक; बुद्धं धर्मं संघं शरणं गच्छामि। बभ्रुकल्प: सत्यसोम! ई ओकर सदाचार आ व्यवहार देखबैत अछि। एकर की उत्तर देब? कापालिक: व्यर्थ बातसँ दूर रहब - ई हमर सिद्धान्त थीक। बभ्रुकल्प: दूनू सही छी। एहि समस्याक समाधान कोना हएत? भिक्षु: बुद्धक अनुयायीकेँ मदिरा-पात्रकेँ छूबाक की खगता? बभ्रुकल्प: काल्पनिक तर्क आरोपक आधार नहि बनि सकत। कापालिक: जे सोझाँ दृश्यमान अछि, ओकर सामने कोनो तर्क ठहरि नहि सकत! बभ्रुकल्प: कोन दृश्य? देवसोमा: सरकार, ओतए देखू - ओ कपाल-भिक्षापात्र जे ओ अपन वस्त्रमे नुकौने अछि। बभ्रुकल्प: सुनलहुँ? भिक्षु: सरकार, ई कटोरा कोनो दोसरक नहि थिक। कापालिक: तखन देखाउ। भिक्षु: ठीक अछि। (देखबैत अछि) कापालिक: हे महेश्वर! कापालिकक अन्याय आ बौद्ध भिक्षुक सदाचार अपने देखू! भिक्षु: जे नहि देल गेल हो से नहि लेब - ई हमर सिद्धान्त थीक; भिक्षु: व्यर्थ बातसँ दूर रहब - ई हमर सिद्धान्त थीक; भिक्षु: अपमानसँ दूर रहब - ई हमर सिद्धान्त थीक; भिक्षु: असमयमे नहि खाएब - ई हमर सिद्धान्त थीक; भिक्षु: बुद्धम् धर्मम् संघम् - हमर शरण। (दूनू - भिक्षु आ कापालिक - डोलऽ लगैत छथि) भिक्षु: अहा! जेकरा लाज होबाक चाही, ओ नाचि रहल अछि! कापालिक: आ! के नाचि रहल अछि? (चारूकात देखैत छथि) निःसन्देह! से ओहि लेल जे हमर गायब भिक्षापात्र आब देखाइ पड़ि रहल अछि आ एहि मधुर वायुमे थकानक लता झूमि रहल अछि। ओ देखि कऽ तोरा भ्रम भऽ रहल छौ जे हम नाचि रहल छी! भिक्षु: सरकार, एकर रंग नहि देखलहुँ? किएक नहि बाजि रहल छी? कापालिक: देखबाक की अछि? हम देखि चुकल छी। कौआसँ सेहो कार अछि। भिक्षु: तखन मानैत छी जे ई हमर थिक। कापालिक: हँ, हँ! तोहर गिरगिट-स्वभाव मानि लैत छी! जेना लाल कमल सूर्यकिरणसँ श्वेत भऽ जाइत अछि! देवसोमा: हम मरलहुँ! हमर पुण्य भिक्षापात्र एहि मनुष्यक कारी वस्त्रसँ स्पर्श भऽ कारी भऽ गेल! आब की करब? (कानऽ लगैत छथि) कापालिक: चिन्ता नहि प्रिये। धोइ-सुखा लेब। जेना हमसभ अपन पापकेँ तपोबलसँ धोइ लैत छी, तहिना अपन भिक्षापात्र सेहो शुद्ध कऽ लेब। हे बभ्रुकल्प, की आगम-शास्त्रमे एना लिखल अछि ने? बभ्रुकल्प: हँ, आगम-शास्त्रक अनुसार सत्य थीक। भिक्षु: ठीक अछि, रंग हमरासँ भेल - मुदा आकार, साइज आ रूपक की? कापालिक: की तूँ महादेवीक वंशज छहीँ ने? भिक्षु: कतेक काल धरि अहाँसँ तर्क करैत रहब? लिअ, सरकार। कापालिक: नीक। बुद्ध एना महादानी बनि गेलाह। भिक्षु: जँ एना चलैत रहत, तँ हमर शरण कतए? कापालिक: बुद्धं धर्मं संघं - अवश्य। बभ्रुकल्प: हम ई समस्या सुलझा नहि सकैत छी। चलू न्यायालयमे। देवसोमा: नाथ, जँ ओतए जाएब तँ अपन कपाल-भिक्षापात्र जरूर गमाएब। बभ्रुकल्प: किएक कहैत छी? देवसोमा: ई मनुष्य जे सब सुविधासँ मठमे रहैत अछि, अपन संचित धनसँ सभ न्यायाधीशक मुँह बन्द कऽ देत। हमर सभक जे मात्र पहिरल वस्त्रे अपन सम्पत्ति अछि, ओ कोना न्यायालय जाएब? बभ्रुकल्प: एना नहि। जे ईमानदार हो, तकरा ओहि न्यायालयमे जरूर न्याय भेटत। जेना ओ भवनक स्तम्भ सभ ओकरा थामने अछि, तहिना न्यायाधीश सभ न्यायकेँ। कापालिक: ई बात पर्याप्त अछि। जे ईमानदार हो, तकरा भय नहि। भिक्षु: सरकार, रस्ता देखाउ। बभ्रुकल्प: अवश्य... (सभ प्रस्थान करैत छथि) (ओही समय एकटा बताह मनुक्ख प्रवेश करैत अछि) उन्मत्त (बताह): ओतए, ओतए अछि - ओ दुष्ट कुकुर। मुँहमे भुजल मांस खण्ड सहित कपाल-भिक्षापात्र दबओने भागि रहल अछि। अरे आलसी, कतए जाएब? आब खसा देलक आ हमरा दिस आबि रहल अछि। (चारूकात देखैत अछि) उन्मत्त: एहि पत्थरसँ ओकर दाँत तोड़ब। बेकार कुकुर, खोपड़ी खसा कऽ किएक भागि रहल छहीँ? हमरासँ पराक्रममे जीतऽ चाहैत छहीँ? हम... हम अवारा सूगरपर सवार भऽ आकाशमे उड़ब। सागरकेँ हथियार बना ऐरावत हाथीकेँ हरा देलहुँ। उन्मत्त: हौ मूर्ख, की कहलहीँ? ई सब झूठ थिक? तखन ई कुरूप बेंग हमर साक्षी थिक। की? तीनू लोकमे पराक्रमसँ प्रसिद्ध व्यक्तिकेँ साक्षीक की आवश्यकता? ठीक अछि, ई करब। ओहि कुकुरक छोड़ल मांस-खण्ड खाएब। (खाइत अछि। तखन सत्ते माति जाइत अछि) उन्मत्त: हमर अपने नोर हमरा मारि रहल अछि। (चारूकात देखैत, कानि कऽ) उन्मत्त: के मारि रहल अछि हमरा? (चारूकात देखैत) अरे बेकार लोक सभ! जेना घटोत्कच भीमक भातिज छी, तहिना हम ककरो भातिज छी। एहि मांस-खण्डक हेतु हमरा नहि सताउ। (चारूकात देखैत) उन्मत्त: हमर गुरु सुरानन्दी ओतए छथि। ओहिठाम जाएब। (दौड़ैत अछि) बभ्रुकल्प: हौ, सावधान! ओ बताह मनुक्ख एम्हरे आबि रहल अछि! उन्मत्त: ओही व्यक्ति लग जाएब। (लग आबि कऽ) उन्मत्त: सरकार, ई कपाल-भिक्षापात्र ग्रहण करू जे हम एक नीच जातिक उच्च-वर्गीय कुकुरसँ प्राप्त कएल। बभ्रुकल्प: (ध्यानसँ देखैत छथि) एकरा योग्य व्यक्तिकेँ दऽ दिअ। उन्मत्त: हे महात्मा, प्रसन्नतासँ ग्रहण करू। भिक्षु: ई आदरणीय पाशुपत एकर योग्य प्राप्तकर्ता छथि। (उन्मत्त कापालिकक सामने आबि कपाल-भिक्षापात्र राखैत अछि, तखन वामावर्त घूमि ओकर पयरपर खसैत अछि) उन्मत्त: हे प्रभु! सुख बढ़ओ! अनेको नमस्कार। कापालिक: ई तँ हमर कपाल-भिक्षापात्र थिक! देवसोमा: हँ! कापालिक: भगवानक कृपासँ हम फेरसँ कापालिक बनलहुँ। (ओकरा दिस बढ़ैत छथि) उन्मत्त: अरे आलसी! जो, माहुर खो! (खोपड़ी छीनि दौड़ि जाइत अछि) कापालिक: (पाछाँ दौगैत) यमराजक ई सेवक हमर प्राण लेने जा रहल अछि! दूनू हमरा बचाउ! दूनू: ठीक अछि। हम दूनू सहायता करब। (सभ भागैत छथि) कापालिक: हौ, रुक! उन्मत्त: किए रोकि रहल छी? कापालिक: हमर कपाल-भिक्षापात्र वापस कऽ कऽ जाउ। उन्मत्त: मूर्ख! देखाइ नहि पड़ैत छौ? ई सोनाक कटोरा थिक। कापालिक: एहन सोनाक कटोरा के बनओलक? उन्मत्त: एकरा सोनाक कटोरा कहलहुँ कारण ई ओ सोनारक साढ़ू बनओलक, जे सोनाक वस्त्र पहिरैत छथि। भिक्षु: की कहि रहल छहीँ? उन्मत्त: जे ई सोनाक कटोरा थिक। भिक्षु: की? ई पागल अछि! उन्मत्त: ई उपाधि तँ हम प्रायः सुनैत छी; लिअ। (कपाल-भिक्षापात्र कापालिककेँ दऽ दैत अछि) कापालिक: (भिक्षापात्र लैत) आब ओ ओहि देवारक पाछाँ गेल। जल्दी ओकरा पाछाँ जाउ! उन्मत्त: बड़ सम्मान भेटल। (पागल जल्दीमे जाइत अछि) भिक्षु: अहा! अद्भुत! हमर शत्रुपर आएल सुभाग्यसँ हम प्रसन्न छी। कापालिक: (भिक्षापात्र आलिंगन करैत) अपन सम्पूर्ण समय तपस्यामे लगाओल आ स्वयंकेँ महेश्वरकेँ समर्पित केलहुँ एहि पवित्र पात्रकेँ देखिते हमर हृदय शान्त भऽ हुनकर चरणमे पहुँचि गेल! देवसोमा: नाथ! सन्ध्याकालक चन्द्रमाजकाँ अहाँ हमरा आँखिमे बड्ड शीतल लागि रहल छी। बभ्रुकल्प: सौभाग्यवश जीत अहाँक भेल। कापालिक: ई सब सुभाग्य अहाँक थीक। बभ्रुकल्प: (स्वगत) जे निर्दोष हो, ओकरा किछु भय नहि। तेँ ई बौद्ध भिक्षु एहि व्याघ्रक मुखसँ बचि गेल। बभ्रुकल्प: (प्रकट) प्रातःकालक प्रार्थनामे मित्रक सुभाग्य स्मरण करब। (पाशुपत प्रस्थान करैत छथि) कापालिक: हे नागसेन, हमर भूलक हेतु क्षमा माँगैत छी। भिक्षु: कोनो बात नहि। अहाँकेँ प्रसन्न करै लेल हम की करी? कापालिक: जँ अहाँ हमरासँ प्रसन्न छी, तँ आर की माँगब? भिक्षु: विदा लिअ? कापालिक: बहुत नीक। फेर भेँट हएत। भिक्षु: ठीक अछि। (चलि पड़ैत छथि) कापालिक: हे प्रिये देवसोमा, हमहूँ चलू। (दूनू प्रस्थान करैत छथि) - एहि तरहे मत्तविलास प्रहसनम् केर समाप्ति होइत अछि। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ। २.१६. गजेन्द्र ठाकुर- मैथिली नाट्यमंच/ नाटक लेल एकटा समीक्षा सिद्धान्त (भाग-४) सन्दर्भ- कुणाल-कृत बिदापत गजेन्द्र ठाकुर मैथिली नाट्यमंच/ नाटक लेल एकटा समीक्षा सिद्धान्त (भाग-४) सन्दर्भ- कुणाल-कृत बिदापत कुणाल-कृत नाट्य-समीक्षा शृंखला · द्वितीय नाटक बिदापत [लोकनाट्य शिल्प-आधारित नाटिका] एक चतुर्भुज नाट्य-समीक्षा : भारतीय · पाश्चात्य · चीनी · इजरायली परिप्रेक्ष्यमे पहिल प्रदर्शन : ३० सितंबर २००२, विद्यापति भवन, पटना · प्रकाशन : अंतिका, जनवरी-मार्च २००३ १. परिचय आ कथा-स्थापत्य कुणालक द्वितीय नाटक ‘बिदापत’ (= विद्यापतिक लोकोच्चरित रूप) अपन शिल्प-वैविध्यमे संग्रहक सर्वाधिक परिष्कृत कृति थिक। ‘बिदापत नाच’ -मिथिला-बंगालक प्रसिद्ध लोक-रंगमंच-परम्पराक -शिल्पमे लिखल एहि नाटिकाक समय-सीमा नाटककार स्वयं स्पष्ट करैत छथि -ई.सं. १४००–१४५० । मुदा कुणालक महत्त्वाकांक्षा ऐ सँ बेसी अछि- ओ एक जीवनीपरक नाटक (biography-play) मात्र नहि लिखैत छथि, अपितु विद्यापतिक काव्यक रंगमंचीय भाष्य रचैत छथि। नाटकक स्थापत्य (architecture) तीन स्तर पर काज करैत अछि। बाहरी स्तर -सूत्रधार-नटीक संवाद-चौखट, विदूषक-सदृश विपटाक व्याघात (interruption), पूर्वरंगक शास्त्रीय प्रदर्शन। मध्य स्तर -कथा-वस्तुक अभिनय (विद्यापति, शिवसिंह, लखिमा, उगना, मंदाकिनी, कालिंदी, अमियकर आ दरबारी पात्र)। भीतरी स्तर - विद्यापतिक स्वयं पदक अंतर्गायन (embedded performance) जे कथाक भावात्मक धुरी थिक। एहि तीनू स्तरक अन्योन्य-क्रियामे नाटकक रंगमंचीय ऊर्जा उत्पन्न होइत अछि। कथाक पाँच मुख्य अक्ष -(१) विद्यापति आ शिवसिंहक मित्रता, (२) जौनपुर-सुलतानक न्यायालयमे विद्यापतिक काव्य-बल द्वारा शिवसिंहक मुक्ति, (३) उगना-महादेवक अन्तर्कथा, (४) लखिमाक षड्यंत्र-प्रतिरोध आ शिवसिंहक अन्तर्धान, (५) विद्यापतिक ३२-वर्षीय शोक आ काव्य-अमरत्वक उद्घोषणा। एहि पाँचू अक्षकेँ सूत्रधार-नटी-विपटाक त्रिभुज नाटकक बाहरी समापन (frame) दैत अछि। २. भारतीय नाट्य-सिद्धांत २.१ पूर्वरंग आ दशरूपक-परम्परा भरतमुनिक नाट्यशास्त्र (अनुमानित द्वितीय शती ई.पू.–द्वितीय शती ई.सं.) नाटकक आरम्भमे ‘पूर्वरंग’ (preliminary entertainment) अनिवार्य मानैत अछि - जाहिमे नांदी (auspicious verse), सूत्रधार-प्रवेश आ प्रस्तावना सम्मिलित होइत अछि। कुणाल एहि शास्त्रीय संरचनाकेँ ने मात्र अपनाबैत छथि, अपितु ओकर लोकनाट्य-रूपांतरण प्रस्तुत करैत छथि। देवी-वंदना, भैरवी-स्तुति, तखन सूत्रधारक प्रस्तावना -ई क्रम नाट्यशास्त्रक अनुगामी अछि। दशरूपकक दृष्टिसँ धनञ्जयक ‘दशरूपक’ (दशम शती) नाटकक दस विभेद करैत अछि। ‘बिदापत’ क शीर्षक-पृष्ठ एकरा ‘नाटिका’ कहैत अछि- जे दशरूपकक एक प्रकार थिक, हास्य-प्रधान, लघु, वियोगान्त, नायक-नायिका दुनूक व्यथा-भोग। ‘बिदापत’ एहि परिभाषामे आंशिक रूपे बैसैत अछि - वियोग आ दुखान्त मुदा हास्यक स्थानमे करुण। अभिनवगुप्त जखन दशरूपकमे ‘नाटिका’क व्याख्या करैत छथि, कहैत छथि जे एतय नायक ‘विलक्षण’ होएबाक चाही - विद्यापति यएह थिकाह। २.२ रस-निष्पत्ति : करुण, शृंगार आ शान्तक त्रिवेणी एहि नाटकक प्रधान रस ‘करुण’ थिक - शिवसिंहक अन्तर्धान, लखिमाक ३२-वर्षीय प्रतीक्षा, विद्यापतिक जीवनक अंतिम एकाकी स्थिति। भरत करुण-रसक ‘स्थायी भाव’ शोक मानैत छथि, आ एकर विभाव (उद्दीपन) अप्रियक स्मरण। किन्तु एहि नाटकमे करुणक तल अभिनवगुप्तक ‘शान्त-रस’ दिस घुरैत अछि -समाजीक समापन-गायन जे विद्यापति, शिवसिंह, लखिमा, विपटा सभकेँ ‘काव्य-पदमे अमर’ घोषित करैत अछि, ओ शान्त-रसक आत्मविश्राम थिक। अभिनवगुप्त (९५०–१०२० ई.सं.) अपन ‘अभिनवभारती’ (नाट्यशास्त्रक टीका) मे रस-सिद्धांतक व्याख्या करैत कहलनि जे रस ‘अभिव्यक्त’ होइत अछि, ‘उत्पन्न’ नहि -ओ दर्शकक चेतनामे पहिनहियेसँ विद्यमान छल, नाटक ओकरा जागृत करैत अछि। ‘बिदापत’मे विद्यापतिक वास्तविक पदक प्रयोग एहि ‘अभिव्यक्ति’केँ शक्तिशाली बना दैत अछि - दर्शकक सुप्त काव्य-स्मृति नाट्य-प्रदर्शनसँ जागि उठैत अछि। शृंगार-रस विद्यापतिक पदक माध्यमसँ - विशेषतः “नव वृन्दावन, नव-नव तरुगण, विहरइ नवल किशोर” आ “चाँद सार लए मुख घटना करू” - प्रवाहित होइत अछि। मुदा ई शृंगार लौकिक नहि, भक्ति-शृंगार थिक, जकर लक्ष्य राधा-कृष्ण-लीलाक माध्यमसँ सार्वभौम प्रेम थिक। एहि तरहे शृंगार आ भक्ति एकठाम विलीन भ’ जाइत अछि - ई संस्कृत अलंकारशास्त्रक ‘शृंगार-भक्ति-योग’ थिक। २.३ ध्वनि-सिद्धांत : ‘बिदापत’ शब्दमे तीन अर्थक संकुचन ‘बिदापत’ शब्दक ध्वनि-व्यंजना असाधारण थिक। आनन्दवर्धनक ध्वन्यालोकक परिप्रेक्ष्यमे एहि एक शब्दमे कमसँ-कम तीन अर्थ-स्तर संकुचित अछि -(क) विद्यापति (अभिधा/वाच्यार्थ), (ख) बिदापत नाच -लोकनाट्य-परम्पराक नाम (लक्षणा/लक्ष्यार्थ)- पूर्व ज्योतिरीश्वर बला विद्यापति ई.सं. १४००–१४५० सँ बहुत पाछाँ, (ग) ‘बिदा’+‘पत’ अर्थात ‘विदायक प्रभु’ वा ‘विदा लेएवाला’ (व्यंजना) -जे नाटकक करुण अंत (शिवसिंहक अन्तर्धान, काल-विदाइ) क सूचना दैत अछि। ई त्रि-स्तरीय ध्वनि नाटककारक भाषिक-चेतनाक प्रमाण थिक। नाम-वक्रोक्ति -“विद्यापति, विद्यापति!” बनाम “बिदापत तँ बिदापते छथ!” - एहि दुनूक टकराहटमे कुन्तकोक्त वक्रोक्ति थिक। सूत्रधार शास्त्रीय नाम पर आग्रह करैत रहैत छथि; विपटा लोकोच्चरित नाम पर अड़ल रहैत अछि। ई वाद-विवाद वास्तवमे ‘शास्त्र बनाम लोक’क सांस्कृतिक द्वन्द्वक एक हास्यात्मक रूपान्तरण थिक -आ दुनूमे एक्के व्यक्तित्व छथि। २.४ अन्तर्नाट्य (नाटकक भीतर नाटक) नाट्यशास्त्रमे ‘अन्तर्नाट्य’ (play-within-a-play) कोनो अलग विधा नहि, परंतु संस्कृत नाटकमे एकर उदाहरण अछि (जेना भासक नाटकमे स्वप्नदृश्य वा रत्नावलीमे अभिनय)। ‘बिदापत’मे दू टा अन्तर्नाट्य उपस्थित अछि। प्रथम -अमियकरक ‘स्वाँग’ (dramatic imitation), जाहिमे ओ विद्यापति आ सुलतानक भेटकेँ स्वयं नाट्य-रूप दैत छथि; मिष्ठान खाइत-खाइत ओ पात्र बदलैत जाइत छथि -ई अभिनयक एक देशज रूप थिक। द्वितीय -गौरा-महादेव-नटुआक अन्तर्दृश्य, जाहिमे शिवक निर्धनताक विषयमे गौराक विलाप अभिनीत होइत अछि -ई उगनाक महादेव-पहचान हेतु प्रस्तुति थिक। ३. पाश्चात्य नाट्य-सिद्धांत ३.१ जॉर्ज लुकाच : ऐतिहासिक नाटक आ विश्व-ऐतिहासिक व्यक्तित्व हंगरीक मार्क्सवादी आलोचक जॉर्ज लुकाच (Georg Lukács, १८८५–१९७१) अपन निबंधमे ऐतिहासिक नाटकक लेल एक मानदण्ड प्रस्तुत कएलनि - नायक एक ‘विश्व-ऐतिहासिक व्यक्तित्व’ (welthistorisches Individuum) होएबाक चाही, जे अपन युगक ऐतिहासिक अंतर्विरोधकेँ अपन शरीरमे जीबैत अछि। विद्यापति ठीक एहन व्यक्तित्व थिकाह - ओ एक दिस निर्भर राज्यमे जीबैत छथि (तिरहुतक जौनपुर-अधीनता), दोसर दिस काव्य-शक्तिमे विश्वास रखैत छथि जे राजनीतिसँ उत्कृष्ट अछि। हुनकर जीवन एहि अंतर्विरोधक मूर्त रूप थिक। मुदा कुणालक विद्यापति लुकाचक ‘विजयी नायक’ नहि - ओ एक ‘शोकाकुल साक्षी’ थिकाह। शिवसिंहक अन्तर्धान ओहि मैत्री-बन्धनक अंत थिक जे कविक जीवनकेँ अर्थपूर्ण बनेने छल। ३२ वर्षक प्रतीक्षाक बाद जे शान्त-भाव प्राप्त होइत अछि, ओ लुकाचक त्रासदी-नायकसँ भिन्न - ओ एक पूर्वीय, ध्यानमग्न नायकक त्रासदी थिक। ३.२ नारीवादी पाठ : लखिमाक नायिका पाश्चात्य नारीवादी नाट्य-आलोचना (केट मिलेट, एलेन मॉर्टन, शारोन फ्रेडमैन आदि) ओहि नाट्य-पाठक पुनर्पाठमे रुचि रखैत अछि जाहिमे ऐतिहासिक महापुरुषक छायामे स्त्री-पात्र गौण भ’ जाइत अछि। कुणाल एहि प्रवृत्तिकेँ सचेत रूपसँ उलटैत छथि। लखिमाक पात्र तीन कारणसँ नारीवादी दृष्टिसँ उल्लेखनीय अछि। प्रथम - ओ मंत्री-संरक्षण अस्वीकार करैत स्वयं षड्यंत्रक ‘पाठ’ करैत छथि -“..लोकनि महाराज-महारानी-महाकविक त्रिमूर्तिकेँ खण्डित करबाक सुअवसर बुझि रहल छथि।” द्वितीय - हुनकर प्रतीक्षा परम्परागत पतिव्रताक निष्क्रियता नहि, अपितु एक स्वेच्छापूर्ण दृढ़-संकल्प थिक। तृतीय - परम्परागत आख्यानमे लखिमा बहुधा सती-गाथाक केन्द्रमे छथि; कुणाल एहिसँ बाहर निकलि हुनकर जीवन-प्रतीक्षाकेँ केन्द्रमे रखैत छथि। ३.३ पियर नोरा : स्मृति-स्थल (Lieux de Mémoire) फ्रांसीसी इतिहासकार पियर नोरा (Pierre Nora, जन्म १९३१) अपन ‘लियो दे मेमोयर’ (Lieux de mémoire) ग्रन्थमे ‘स्मृति-स्थल’ (memory site) क सिद्धांत प्रस्तुत कएलनि - ओ स्थल, वस्तु वा पाठ जाहिमे सामूहिक ऐतिहासिक स्मृति संग्रहित आ क्रियाशील होइत अछि। विद्यापतिक पद एहि नाटकमे एक प्रमुख ‘स्मृति-स्थल’ थिक। जखन समाजी “नव वृन्दावन, नव-नव तरुगण, विहरइ नवल किशोर” गाबैत अछि, वा जखन लखिमाक स्मृतिमे शिवसिंहक पद “आरे-आरे भमरा, तोहे हित हमरा” उभरैत अछि -ओ क्षण एकहि संग इतिहासक स्मृति आ वर्तमानक जीवन-अनुभव थिक। नाट्य-प्रदर्शन एहि ६०० वर्षक दूरीकेँ ‘वर्तमान क्षण’ मे परिणत करैत अछि। एहि अर्थमे ‘बिदापत’ केवल विद्यापतिक नाटक नहि, मैथिली भाषा-समाजक सामूहिक स्मृतिक नाट्य-प्रस्तुति थिक। ३.४ ब्रेख्त आ आत्म-दूरी : विपटाक भूमिका प्रथम नाटकक भाँट-त्रयीक भूमिका ‘बिदापत’मे सूत्रधार-नटी-विपटाक त्रिभुज द्वारा निभाओल जाइत अछि। विपटाक ‘गड़ी आगाँ बढ़ाउ’क अनवरत आग्रह ब्रेख्तीय विरचन-प्रभावक एक सटीक देशज रूपान्तरण थिक - ओ दर्शककेँ कथामे पूर्णतः विलीन हुअएसँ रोकैत अछि, सदा मोन पाड़ैत रहैत अछि जे ई एक ‘निर्माण’ थिक। मुदा ब्रेख्तसँ एक महत्त्वपूर्ण भेद अछि - ब्रेख्त चाहैत छलाह जे विरचन-प्रभाव दर्शकक ‘आलोचनात्मक बुद्धि’ जगाबए। विपटाक व्याघात एहिसँ भिन्न - ओ बुद्धि नहि, उल्लास जगाबैत अछि। विपटा एक ‘लोक-विरचनकारी’ (folk-alienator) थिकाह जे कलाक अभिजन-गरिमाकेँ ‘गड़ी’ (बैलगाड़ी) आ ‘खिस्सा’ (कथा)क स्तर पर ल’ अनैत अछि। ई एक सौन्दर्यशास्त्रीय भेद थिक जे पाश्चात्य नाट्य-सिद्धांतसँ एहि नाटकक मौलिकता स्थापित करैत अछि। ४. चीनी नाट्य-सिद्धांत ४.१ साइजी-चियारेन: कवि-प्रतिभा आ प्रेम-कथाक परम्परा चीनी शास्त्रीय नाट्य-परम्पराक -विशेषतः मिंग-किंग कालीन कुनछू (Kunqu opera) क -एक प्रमुख नाट्य-ढाँचा ‘साइजी-चियारेन’ (brilliant scholar meets beautiful lady) थिक। एहिमे एक कवि-विद्वान आ एक सौंदर्यवती नायिकाक प्रेम-कथाक माध्यमसँ काव्य-शक्ति आ प्रेम-मूल्यक प्रतिष्ठा होइत अछि। ‘बिदापत’ एहि परम्पराक एक विस्थापित (displaced) संस्करण थिक। विद्यापति ‘साइजी’ छथि -तर्कशास्त्री नहि, काव्यशक्तिसम्पन्न; लखिमा ‘चियारेन’ नहि, अपितु एक स्वाभिमानी राजमहिषी। मुदा दुनूक सम्बन्धमे ओ गहींर विश्वास आ मैत्री-प्रेम अछि जे ‘साइजी-चियारेन’ परम्पराक मूल तत्त्व थिक। शिवसिंहक अन्तर्धान ऐ परम्पराकेँ एक त्रिकोणमे बदलि दैत अछि - दुनूक मिलनक केन्द्रमे एक तेसर उपस्थित छल जे अनुपस्थित भ’ गेलाह। ४.२ झी-यिन: परम-सम्वाद आ तकर अनुपस्थिति चीनी सांस्कृतिक परम्परामे ‘झी-यिन’ (one who truly hears/understands) एक गहन सम्बन्ध थिक - ओ व्यक्ति जे कलाकारक कलाकेँ ओकर सम्पूर्ण गहराईमे बुझैत अछि। प्रसिद्ध किंवदन्ती अछि जे वीणावादक ‘बो-या’ अपन एकमात्र ‘झी-यिन’ ‘झोंग-जिछी’ क मृत्युक बाद अपन वीणा तोड़ि देलनि -“जे सुनि सकैत छल से नहि रहल, वाद्य किएक बजाउ।” विद्यापति-शिवसिंहक सम्बन्ध ठीक एहि ‘झी-यिन’ आदर्शक अवतरण थिक। शिवसिंह विद्यापतिक कविताक परम-श्रोता, परम-रसिक आ परम-संरक्षक छलाह। हुनकर अन्तर्धानसँ विद्यापतिक काव्य-जीवन एक प्रकारे अनाथ भ’ जाइत अछि -“उगना रे मोर कतए गेलाह” -ई एहि ‘झी-यिन-वियोग’क विलाप थिक। बो-याक वीणा तोड़ल जेकाँ विद्यापतिक पदक स्वर शोक-गर्भित भ’ जाइत अछि। ४.३ झेजीशी आ बहु-स्तरीय प्रदर्शन चीनी लोक-रंगमंचमे ‘झेज़ीशी’ (excerpt-play) परम्परा प्रसिद्ध थिक -एक विस्तृत महाकाव्यात्मक नाट्य-चक्रसँ एक स्वतंत्र, आत्म-निहित अंश चुनि क’ खेलल जाइत अछि। एहि नाटकमे तीन टा ‘झेजीशी’ स्पष्टतः उपस्थित अछि -(क) अमियकरक स्वाँग (सुलतान-दरबार प्रसंग), (ख) गौरा-महादेव-नटुआक अन्तर्नाट्य (उगना-उद्घाटनक पूर्व-तैयारी), (ग) सूत्रधार-नटीक कृष्ण-राधा-रास (पूर्वरंग)। ई स्तरित प्रदर्शन (layered performance) एकहि रंगमंच पर अनेक कथा-भूमि एकहि संग सक्रिय रखैत अछि। चीनी नाट्य-सिद्धांत एहि बहुस्तरीयताकेँ (xìzhōngxì, play within play) कहैत अछि। भारतीय परम्परामे एकर अनुरूप ‘नाट्यमे अभिनय-प्रसंग’ थिक, मुदा चीनी अवधारणा एकर स्तर-विमर्शकेँ अधिक सटीकतासँ परिभाषित करैत अछि। ४.४ बेई-हुआन-ली-हे: चारिटा मौलिक नाट्य-दशा चीनी नाट्य-परम्परामे मानल जाइत अछि जे प्रत्येक उत्तम नाटकमे चारि मौलिक भावावस्था अवश्य उपस्थित होएबाक चाही -‘बेई’ (शोक), ‘हुआन’ (आनन्द), ‘ली’ (विछोह), ‘हे’ (पुनर्मिलन)। उत्कृष्ट नाटक एहि चारूकेँ एकहि आख्यान-प्रवाहमे रखैत अछि। ‘बिदापत’मे यएह चारू उपस्थित अछि -‘हुआन’ (ओइनीक विजय, उत्सव), ‘ली’ (शिवसिंहक अन्तर्धान), ‘बेई’ (विद्यापति आ लखिमाक ३२-वर्षीय शोक), ‘हे’ (काव्यमे पुनर्मिलन -एक आध्यात्मिक, अदृश्य पुनर्मिलन जाहिमे विद्यापति घोषणा करैत छथि जे शिवसिंह अपन पदमे अमर रहताह)। ई ‘हे’ लौकिक नहि, आत्मिक थिक - एहि अर्थमे ई चीनी आदर्शक अतिक्रमण करैत एक नव सम्भावना उद्घाटित करैत अछि। ५. इजरायली नाट्य-सिद्धांत ५.१ एस. आन्स्कीक ‘दिब्बूक’ : मृत प्रेमक रंगमंचीय उपस्थिति यहूदी-रूसी नाटककार एस. आन्स्की (S. Ansky, १८६३–१९२०) केर ‘दिब्बूक’ (The Dybbuk, ‘Between Two Worlds’ / ‘दू संसारक बीचमे’, १९२०) इब्रानी आ यिद्दिश रंगमंचक आधार-ग्रन्थ मानल जाइत अछि। एहिमे एक मृत प्रेमीक आत्मा अपन प्रेमिकाक शरीरमे प्रवेश क’ रंगमंचीय उपस्थिति बनाबैत अछि। प्रेम मृत्युसँ बलवान - यएह एकर मर्म थिक। ‘बिदापत’ मे शिवसिंह रंगमंच पर शारीरिक रूपसँ अन्तर्धान होइत छथि, मुदा लखिमाक स्मृतिमे हुनकर उपस्थिति एक ‘दिब्बूकीय’ (dybbuk-like) रंगमंचीय सत्ता बनि जाइत अछि - जखन शिवसिंहक पद “आरे-आरे भमरा, तोहे हित हमरा” गाबैत हुनकर छाया-रूप प्रकट होइत अछि, ओ क्षण ‘दिब्बूक’क रंगमंचीय तर्कसँ समरूप अछि। दुनू नाटकमे प्रेमक भावात्मक सत्य मृत्युक सीमाकेँ तोड़ैत अछि। ५.२ एली रोजिक : ‘काव्य-पद’क प्रतिमात्मक सत्ता एली रोजिक (Eli Rozik) अपन iconicity सिद्धांतमे कहलनि जे रंगमंचक प्रतिमा केवल अभिनेता-शरीरसँ नहि, ध्वनिसँ सेहो उत्पन्न होइत अछि। जखन विद्यापतिक पद समाजी द्वारा गाओल जाइत अछि, तखन ओ पद एक ‘ध्वनि-प्रतिमा’ (sound-icon) बनि जाइत अछि -ओ केवल संगीत नहि, विद्यापतिक समग्र जीवन-संसारक रंगमंचीय प्रतिरूप थिक। रोजिकक एक विशिष्ट बिन्दु एतय प्रासंगिक अछि - ओ ‘theatrical image’ आ ‘dramatic text’ क बीच अंतर करैत छथि। नाट्य-पाठ (कुणालक लिखित नाटिका) आ रंगमंचीय छवि (विद्यापतिक पद गाबैत अभिनेताक समग्र देह-स्वर-गति) दुनू स्वतंत्र सत्ता थिकाह। एहि नाटकमे ई दुनू सत्ता एक विशेष तनावमे अछि - कुणालक पाठ विद्यापतिक पदकेँ अपन भीतर समाबैत अछि, परंतु पद सदा पाठक नियंत्रण तोड़ि अपन स्वतंत्र काव्य-जीवन जीबैत रहैत अछि। ५.३ हबीमाक भाषा-राजनीतिसँ आगाँ : ‘काव्य-भाषाक पुनर्जन्म’ पूर्वक नाटकक समीक्षामे हम हबीमा (Habima Theatre) सँ भंगिमाक भाषा-राजनीतिक समानांतर देखलहुँ। ‘बिदापत’मे ई समानांतर एक अतिरिक्त स्तर ग्रहण करैत अछि - केवल भाषाक जीवन नहि, ‘काव्य-भाषा’क (poetic language) जीवन। हबीमाक परम्पराक निरन्तरता इजरायलमे हिब्रू काव्य-परम्पराकेँ रंगमंच पर जीवित रखबाक प्रयाससँ सेहो जुड़ल अछि। ‘बिदापत’क मंचन २००२ (पटना, विद्यापति भवन) विद्यापतिक पदकेँ रंगमंचीय माध्यमसँ पुनर्जीवित कएलक - ओहि पदकेँ जे बहुधा पुस्तकालयक वस्तु बनि रहल छल। एहि अर्थमे भंगिमाक यएह नाट्य-कर्म एक ‘काव्य-भाषाक रंगमंचीय पुनर्जन्म’ थिक, जे हिब्रू काव्यक इजरायली रंगमंचीय पुनर्जन्मक समानांतर चलैत अछि। ५.४ उपनिवेश-परोत्तर दृष्टि : कविताक राजनयिक शक्ति इजरायली रंगमंच-विद्वान अव्राहाम ओज (Avraham Oz) आ अन्यक उपनिवेश-परोत्तर नाट्य-चिन्तन (postcolonial theatre studies) मे ओहि नाट्य-प्रयोगक विशेष स्थान अछि जाहिमे ‘सांस्कृतिक शक्ति’ (cultural power) राजनीतिक वा सैन्य शक्तिकेँ परास्त करैत अछि। ‘बिदापत’क सुलतान-दरबार प्रसंग एहि दृष्टिसँ उत्कृष्ट अछि। जौनपुर-सुलतान राजनीतिक सत्ता थिकाह; विद्यापति सांस्कृतिक शक्ति। विद्यापति राजनयिक माध्यमसँ नहि, अपितु काव्य-प्रदर्शनक माध्यमसँ शिवसिंहकेँ मुक्त करबैत छथि -आन्हर रहैत स्नान-दृश्यक पद रचि क’। सुलतानक ‘जे माँगो’क उत्तरमे विद्यापति मित्रक मुक्ति माँगैत छथि, राजसिंहासन नहि। मंत्री टिप्पणी करैत अछि -“जैँ तिरहुतक राज माँगि लितथिन!”; विद्यापतिक उत्तर -“हमरा तँ सरिपहुँ राज भेटि गेल!” -यएह काव्यशक्तिक उपनिवेश-परोत्तर विजय-घोषणा थिक। ६. चतुर्भुज-संश्लेषण चारू परम्पराक दृष्टि एकठाम आनला पर ‘बिदापत’क केन्द्रीय प्रश्न स्पष्ट होइत अछि - ‘काव्य-शक्ति की थिक, आ ओ कोन-कोन रूपमे अपन अस्तित्व सिद्ध करैत अछि?’ प्रत्येक परम्परा एकर उत्तर भिन्न-भिन्न कोणसँ दैत अछि। भारतीय दृष्टि -काव्य-शक्ति = रस-निष्पत्ति। पद अभिव्यक्त करैत अछि विद्यमान रस। शान्त-रसक चरम अवस्थामे काव्य मृत्युंजयी बनैत अछि। पाश्चात्य दृष्टि -काव्य-शक्ति = स्मृति-स्थल (Nora) + विश्व-ऐतिहासिक व्यक्तित्वक (Lukács) अभिव्यक्ति + नारीवादी पुनर्पाठ (लखिमा-केन्द्रित)। चीनी दृष्टि -काव्य-शक्ति = झी-यिन (परम-सम्वाद)क कला। बेई-हुआन-ली-हेक आध्यात्मिक पुनर्मिलन। इजरायली दृष्टि -काव्य-शक्ति = ध्वनि-प्रतिमाक स्वतंत्र सत्ता (Rozik)। उपनिवेशी-सत्ताकेँ काव्यसँ परास्त करबाक सांस्कृतिक-राजनयिक विजय। चारू दृष्टिकोण एकटा साझी गप पर सहमत छथि - विद्यापतिक पद केवल साहित्यिक कलाकृति नहि, एक जीवित सांस्कृतिक-राजनीतिक शक्ति थिक। कुणाल एहि शक्तिकेँ रंगमंचक माध्यमसँ एक बेर फेर ‘जीवित’ करैत छथि। एहि अर्थमे ‘बिदापत’ केवल विद्यापतिक नाटक नहि - ई स्वयं मैथिली रंगमंचक अपन ‘अस्तित्व-घोषणा’ थिक। अगिला अंकमे : कुसमा-सलहेस [सैद्धांतिक विवेचन लेल देखू- मैथिली समीक्षाशास्त्र- गजेन्द्र ठाकुर] अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ। पद्य Poetry ३.१. तेलुगु काव्य: काठक घोड़ा [मूल तेलुगु'कोय्या गुर्रम'] मूल तेलुगु: नग्नमुनि (मानेपल्लि हृषीकेशवराव) मैथिली अनुवाद: मानेश्वर मनुज [खण्ड ६] ३.२. अशोक कुमार ठाकुर-पीड़ा आ मेहनति/ दू कौड़ीक शिक्षक ३.३. जगदानन्द झा "मनु"- २ टा गजल ३.४. प्रणव कुमार झा- रैंक १५७: गोदी मीडिया ३.५. राम शंकर झा "मैथिल"- धीपल ३.६. आचार्य रामानंद मंडल- महाकवि कालिदास/ कवि आदि विद्यापति नाई/ आदिकवि सरहपा ३.१. तेलुगु काव्य: काठक घोड़ा [मूल तेलुगु'कोय्या गुर्रम'] मूल तेलुगु: नग्नमुनि (मानेपल्लि हृषीकेशवराव) मैथिली अनुवाद: मानेश्वर मनुज [खण्ड ६] तेलुगु काव्य: काठक घोड़ा [मूल तेलुगु'कोय्या गुर्रम' केर लेखक छथि नग्नमुनि (मानेपल्लि हृषीकेशवराव)] मूल तेलुगु लेखक नग्नमुनि एक परिचय नाम: मानेपल्लि हृषीकेशवराव जन्म: 15 मई 1940 जन्म स्थान: शहर- तेनाली, जिला- गुंटूर (आंध्र प्रदेश) वृत्ति: चीफ ऑडिटर, आंध्र प्रदेश विधान सभा, तकर बाद डिप्टी सेक्रेटरी, ओतहि लिंक: पहिने साम्यवादी (कम्युनिस्ट), बादमे राष्ट्रवादी (नेशनलिस्ट) संस्था: अविभाज्यक जनतंत्र, 1990 आंदोलन: दिगम्बर कविता आन्दोलन 1965 लक्ष्य: नंगट, भूखल, दीन, दरिद्रक हित कृति: उदयिंचनि उदयलु (ओ उदय जे उदित नहि भेल) पूर्वा हवा जम्मि चेट्ट विशेष: 1977 ई. मे बहुचर्चित काव्य- 'कोय्या गुर्रम' (KOYA-GURRAM), जकर अर्थ अछि- 'काठक घोड़ा', भाव- 'नकली सरकार'। 19 नवम्बर 1977, शनि दिन बंगालक खाड़ीमे पचास-साठि फुट ऊँच लहड़ि उमड़ि कऽ कृष्णा जिलाक दिविसीमा क्षेत्रकेँ डुबा कऽ नष्ट कऽ देलक। हजारो लोक मारल गेलाह। ई घटना काव्यक वस्तु बनल। विषय आ परिस्थितिसँ उपजल ई काव्य हिन्दी कवि मुक्तिबोधक 'अंधेरे में' क बराबरीक अछि। मैथिली अनुवादक नाम: मानेश्वर मनुज जन्म: गाम- गम्हरिया (बेनीपट्टी) मधुबनी। जनवरी 1958 (प्रमाण पत्रक अनुसार)। वृत्ति: भारतीय नौसेनामे तकनीकी सहायक, तकर बाद भारतीय रेलक वाणिज्य विभाग सँ (रिटायर्ड)। कृति: 'सम्बन्ध', कथा संग्रह (मैथिली) 2007 'कि', कविता संग्रह (मैथिली) 2011 'परिवर्तन', कहानी संग्रह (हिन्दी) 2019 'बेघर', कविता संग्रह (हिन्दी) 2022 'तालाब', कहानी संग्रह (हिन्दी) 2024 अनुभव: विभिन्न भाषा सँ हिन्दी आ मैथिलीमे अनुवाद। हिन्दी आ मैथिलीक विभिन्न पत्र-पत्रिकामे लेख, कविता, कथा, कहानी इत्यादि प्रकाशित। अनुवादकक टिप्पणी: अनेक तेलुगुमित्र, स्वयं नग्नमुनि जी, हिन्दी तथा अंग्रेजी मे अनुदित पुस्तकक मदति सँ दीर्घ काल तक मंथन कयलाक बाद अनुवाद कयल गेल अछि। ई नग्नमुनिक प्रसिद्ध कविता अछि। नग्नमुनि सँ लगातार हमर पत्राचार होइत छल। ओ अंग्रेजी आ तेलुगुक विद्वान छलथि। हुनक किछु पत्र देसिल-बयना, हैदराबाद मे छपल अछि। -मानेश्वर मनुज सम्पादकीय टिप्पणी (खण्ड-६) ई पौराणिक कथा-प्रसंग मात्र नै छी, वर्तमान 'अधरतियाक समय' केर एगो दारुण नैदानिक रिपोर्ट छी। कवि सिद्धार्थक वैराग्य-यात्राकेँ कोनो आध्यात्मिक उपलब्धि नै मानैत आधुनिक मानव-चेतनाक दिवालियापनक दुखान्त प्रस्तावना मानैत छथि। दू प्रतीक-चिह्नक अंतर्विरोध- घोड़ा (कंथक) आ बोधिवृक्ष। घोड़ा, जे नागार्जुन पर्वत पर आइयो ठाढ़ अछि, संन्यासक बाह्य क्रियाक प्रतीक अछि-राज्य-त्याग, ममता-बंधन तोड़ब, बहरा जायब। बोधिवृक्ष ओइ संन्यासक आंतरिक फलक प्रतीक अछि-बोधि, ज्ञान, करुणा, आ मानव-दुःख पर विजय। 'अधरतियाक समय' मे हम सभ घोड़ाकेँ (त्यागक स्मारक) सुरक्षित रखबामे लागल छी, मुदा ओ बोधिवृक्ष (मानसिक चेतना) जे उखड़ि चुकल अछि तकर की? हम त्यागक नाटक करैत छी, मुदा त्यागक सार्थकता (आंतरिक जागृति) केर पोषण करबामे पूर्णतः असफल भेल छी। अश्रुसिक्त नयन सँ यजमानक घर वापस आबैवला स्वामीभक्त सेवकक प्रसंग कविताक सभसँ मार्मिक मोड़ छी। ई हमरा सबक संसारिक आसक्ति-पाशक दिस संकेत करैत अछि-जतेको संन्यासक बात करू, मूलतत्त्वमे हम सभ पुनः अपन 'यजमान' (लौकिक मोह-माया, स्वार्थ, आ ममता) केर शरणमे घुरैत छी। मुदा सबसँ दुखद बात ई जे-जखन हम वापस आबैत छी, तखन देखैत छी जे हमर आंतरिक आश्रम (बोधिवृक्ष)क नाश भऽ चुकल अछि। ई केवल बौद्ध-आदर्शक विलाप नै अछि; ई समकालीन 'देखावटी आध्यात्मिकता’ पर तीक्ष्ण व्यंग्य अछि। हम सभ पूर्वजक बाह्य रीति-वन-गमन, गृह-त्याग, वस्त्र-त्याग केर अनुकरण करबामे अपन करियर बना लेने छी, मुदा अंतर्यात्राक कठोर तपस्या केँ तिलांजलि देने छी। जखन बोधिवृक्ष मूलसँ उखाड़ल जाइत अछि, तखन घोड़ाक पाषाण-मूर्तिक संरक्षण केर कोनो सार्थकता रहैत अछि? स्मारक बाकी अछि, मुदा अर्थ समाप्त। एहि अर्थ-शून्यताक युगमे, ई कविता मानव-मन लेल एगो चेतावनीक घंटी समान अछि- पहिने अपन भीतरक बोधि-वृक्ष केँ सिंचित करू; नै तऽ नागार्जुनक घोड़ा मात्र एकर गवाह बनि रहत।- गजेन्द्र ठाकुर नग्नमुनिक तेलुगु काव्य 'काठक घोड़ा' (कोया गुर्रम) खण्ड-६ अधरतियाक समय अंतःपुर आ माय-बाबू केँ त्यागि कऽ घरवाली आ बेटाक ममताक बंधन तोड़ि कऽ राजपाट वा सौख वैभव छोड़ि कऽ निकलि पड़लथि सिद्धार्थ जखन वैरागी बनि तखन राज्यक सीमा तक पहुँचौलनि स्वामीभक्त छोड़ब अपना यजमान केँ फेर अश्रुसिक्त नयन सँ आपस आयल राज्य मे ओइ अश्रुसिक्त घोड़ाक प्रतिरूप एखनो ठाढ़ अछि नागार्जुन पर्वत पर! परंतु मनुजक मानसक बोधिवृक्ष उखड़ि चुकल अछि उजड़ि चुकल अछि। -मानेश्वर मनुज आदर्श नगर कॉलोनी गोशाला रोड मधुबनी पिन - 847211 मो. - 9920674861 / 7464077106 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ। ३.२. अशोक कुमार ठाकुर-पीड़ा आ मेहनति/ दू कौड़ीक शिक्षक अशोक कुमार ठाकुर पीड़ा आ मेहनति/ दू कौड़ीक शिक्षक १ पीड़ा आ मेहनति
सूरुज कतबो तपैत रहय, किसानक पसीना नहि सुखा सकय। धरती सँ ओकर नेह एहन गाढ़, जकरा केओ मौसम नहि झुका सकय।
हवा कतबो तेज बहैत रहय, अभागिनक नोर नहि सुखा सकय। हृदयक घाव जे गहिर होइत अछि, तकरा कालो कतए भुला सकय।
एक दाना उपजाबय मे बहैत अछि, एक दुःख नुकाबय मे बहैत अछि। पसीना हो वा नोर, दुनूक मोल, दुनियाक कोनो तराजू नहि बता सकय।
सूरुज हारि जाइत अछि मेहनतिक आगाँ, हवा हारि जाइत अछि पीड़ाक आगाँ। किसानक पसीना आ अभागिनक नोर, एकर मोल केओ नहि चुका सकय।
२
दू कौड़ीक शिक्षक
काल्हि धरि जे गुरु कहल जाइत छलाह, आइ दू कौड़ीक मानल जाइ छथि। जकरा हाथे ज्ञानक दीप जरल, ओहिकेँ लोक आब तुच्छ बुझाइ छथि।
जे अक्षरक पहचान करौलन्हि, जे जीवनक राह देखौलन्हि, ओही शिक्षक पर आब व्यंग्य होइत अच्छि, ओकर सम्मानो छीनि लेल जाइत अच्छि।
धन-दौलत सँ मान मापल जाइत अच्छि, ज्ञानक मूल्य बिसरायल जाइत अच्छि। लाख टका कमेनिहार महान कहल जाइत अच्छि, मुदा गुरुकेँ दू कौड़ीक बतायल जाइत अच्छि।
मोन राखू, जँ गुरु नहि रहितथि, तँ डॉक्टर, अफसर, नेता के बनितथि? सभ पद-पदवी गुरुहिक देल उपहार अच्छि, गुरुक अपमान समाजक हार अच्छि।
दू कौड़ी कहि जकरा ठुकरेब, ओही ज्ञानक जोति सँ जग चमकेब। शिक्षकक मान जतेक घटत जाएत, समाज ओतेक अन्हारमे डूबत जाएत।
-अशोक कुमार ठाकुर ग्राम - करमौली, जिला:-मधुबनी(बिहार), मोबाइल नंबर:-9576207983, जनसेवा:-एस.डी.आर.एफ. अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ। ३.३. जगदानन्द झा "मनु"- २ टा गजल जगदानन्द झा "मनु" २टा गजल १ प्रेममे हुनकर जहर चिखने जाइ छी सभ बुझैए हम निसा कयने जाइ छी मानतै के देख मुँहपर मुस्की हमर की करेजाकेँ अहाँ खुनने जाइ छी जे मयूरक पाँखि पेलौं उपहारमे प्राण बुझि संगे सगर धयने जाइ छी रोशनाई नै कलममे बड़ अछि कहक चीर छाती सोणितसँ लिखने जाइ छी जीवनक ठोकर कते लागल चारुदिश ‘मनु’ सुमरि सभ चोट ई सहने जाइ छी (बहरे जदीद, मात्राक्रम : 2122-2122-2212) २ ताड़ीमे कतए मद जे चाही जीबै लेल माहुरमे कुन जीवन चाही जे गीजै लेल बाँकी नहि ताड़ीएटा टूटल मोनक हेतु जीवनमे एकर बादो बड़ अछि पीबै लेल सिस्टममे फाटल अछि मेघसँ धरती धरि कोढ़ एतय कतयसँ दरजी ई सिस्टम सीबै लेल जीतब हारब सदिखन लगले अछि जीवन संग फेरसँ उठि कोशिश नमहर हेतै जीतै लेल मोनसँ करबै ‘मनु’ अप्पन जीवनकेँ तैआर कर्मक बीया सगरो बहुते अछि छीटै लेल (बहरे विदेह, मात्राक्रम : 2222-2222-222-21 सभ पाँतिमे) मोबाइल न० +91 9212-46-1006 -जगदानन्द झा ‘मनु’, मो० न० +९१ ९२१२-४६-१००६ अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ। ३.४. प्रणव कुमार झा- रैंक १५७: गोदी मीडिया प्रणव कुमार झा रैंक १५७: गोदी मीडिया
झूठक कालिख सँ लिखै जे खबर, ओकरा पत्रकार नै कहब, ज़हर सँ सींचै जे समाज के, ओकरा समाचार नै कहब। आँखि खोलि कऽ देखू अइ परदा कऽ पाछाँ कऽ खेल, कतय गेल सत्यक तेज, कतय गेल पत्रकारिता कऽ तेल?
स्टूडियो छल सूचनाक स्रोत, ओ माछक बजार भेल अछि, झूठ, धोखा, मक्कारी, शैतानी के सचार भेल अछि। मुद्दा जे छल प्रशासन, रोजी, रोटी, दवाई आ पढ़ाई, ओकरा कफन पहिरा, भऽ रहल अछि धर्मक लड़ाई।
एंकरकऽ गला सँ आई मनुष नै, नाग बाजय अछि, सत्ताक चरणचुंबन, नफरतक साज बाजय अछि। वैज्ञानिक चेतना मारि भूत-प्रेतक डिबेट करै अछि, अंधविश्वासक अन्हरिया, देश कें भेंट करै अछि।
तार्किक डिबेट नै, कुकुर झौं-झौं के दरबार सजाबै अछि, भ्रमित जनता कऽ हाथ में, घृणाक झंडा थमाबै अछि। ई मीडिया नै, ई तऽ समाजक रोग भयंकर अछि , सोच-विचारक शक्ति कें, कऽ रहल भस्म निरंतर अछि।
बर्बाद कऽ समाज कें, ई अपन महल बनाबै अछि, लोक सँ लोक कें लड़ा कऽ, ई दिवाली मनाबै अछि। जे देश कहैत छल कहियो वसुधैव कुटुम्बकमक मंत्र, नफरतक प्रयोगशाला बना देलक एकर षड्यंत्र।
सूचना कऽ नाम पर, विष-वमनक व्यापार करय अछि, अहिं कहु देशद्रोही सँ कम की ई व्यवहार करय अछि? सालो से ई भस्मासुर नाच, लोकक बुद्धि हरने अछि, सत्ताक चाटुकारिता में, देशक साख मारने अछि।
विश्वमंच पर भारतक कलम, लज्जित भऽ ठाढ़ अछि, मीडिया कऽ ई गोदीगिरि, आइ भ्रष्टाचार सँ गाढ़ अछि। जँ आबो नै चेतब तऽ ई बौद्धिक महामारी अहाँक बच्चा कऽ भविष्य खा जाएत ई बीमारी ।
जे टीवी अहाँक घर में, ओ सूचना नै भ्रम छैक आस्तीनक साँप से कनियो की कम छैक ! रिमोट उठाउ, ई नफरतक दुकान बंद करू, टहलु , खेलाऊ ताश, नीक किताब के धरू। -प्रणव कुमार झा, ग्राम-गोरापुर, जिला-बेगूसराय अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ। ३.५. राम शंकर झा "मैथिल"- धीपल राम शंकर झा "मैथिल" धीपळ
धीपळ मैंईट धधकळ बाट सट सट दागैत गोरक तरबा धधरा सँ बेसी ळहर मारैत छह छह लूंअक बहैत बसात घाम सँ भिजल देह ललाट धीपळ मैंईट धधकळ बाट.! हाँफैत बरअद सङ्ग हरवाह सगरों पापड़ सन खेत टटाएळ उखरैय सेर पसेरी सन चेपा रहि रहि हरवाह बाजे आउठाम मुँह मे लगळ जाबि सुखैथ कंठ धीपळ मैंईट धधकळ बाट..! रहि रहि पनपियाक जोहैत बाट कखनहुँ नजर गरैय खेत आरि कखनहुँ नजर गरैय अंशुमाली अचकें लागळ बरअद कैं फाड़ रहि रहि मारै टीस फाटळ बेमाअ टप टप टपकैय घामक नोर बीघा मे बाँचल एखनहुँ कठ्ठा धीपळ मैंईट धधकळ बाट..! ददाईर मे घुसळ हरक फार पैंना सँ अलगाबैत ढ़ेपाक भार भांघट पअर भांघट लागैय छठपटाईत तलमळाईत बहकै ळागळ घुरमी बैसअळ बरद गदह दैत हे रे हे आउ ठाम धीपळ मैंईट धधकळ बाट..! व्याकुल मन टूटल हरळदहा सिमान सँ चिकरैत भोकरैत नेहु नेहु आबि रहल मरनी माअ माथा पनपियाय हाथ मे डाबा छिलकैत पैईन उधियात आँचर डेगे डेग पाउछ ळागळ भिखना कन्हा पअर चौकी बनळ समाठ धीपळ मैंईट धधकळ बाट..! पैना देखबैत बाजल मुसाय बितल कलौउक बेर आब कि घोघ तअर सँ फुदकल मरनी सगरों गाआम छिछिएलहुँ उत्तरबाड़ी बाअद भेमहा गाछी कतह कतह नहिं बौउएलहुँ मुदा कियौ नहिं देलक चौउकी सबकें अपनहिं काज बेगरता धीपळ मैंईट धधकळ बाट..! खुलळ पनपियायक पोठरी मोटका रोटी सागक झोर हरियर मिर्चाय सङ्ग अचार मुसाय कें नजर बैसळ बरअद पहिंळे पनपियाय स्वयं करि जाबि लागळ बरअद कें कराबि चुबैत मुंह सँ लोर पालो चढ़ळ हकासळ पजंरसट्टा लागल बरअद नहिं सहळ भेल नहिं देखळ गेळ खेत सङ्ग जरल कपार मरल भूख धीपळ मैंईट धधकळ बाट..! एकहिं सुर पिलैथ भरि डोळ पईनि पनपियाय उझैळथि बरअद आगु धीपळ मैंईट धधकळ बाट..! -राम शंकर झा "मैथिल", उघरा, दरभंगा, मो-7970778787, Mail- jharam1977@gmail.com अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ। ३.६. आचार्य रामानंद मंडल- महाकवि कालिदास/ कवि आदि विद्यापति नाई/ आदिकवि सरहपा आचार्य रामानंद मंडल महाकवि कालिदास/ कवि आदि विद्यापति नाई/ आदिकवि सरहपा १. महाकवि कालिदास
मिथिला मे महाकवि पंडित कालिदास भेलन महान।
उच्चैठ दूर्गा स्थान मधुबनी भेलैन हुनक ठाम।
संस्कृत पाठशाला के रहलन मूर्ख अनुचर छात्रावास ।
काटि रहलन रहे बैठल गाछ के डाल।
देखिलन धूर्त पंडित विधोतमा से हारल पंडित।
छल से पानिग्रहन करैलन कालिदास के संग।
सुहागरात मे भेल परिचय मूर्ख कालिदास संग।
हमर संग मिलत जौं बनब विद्वत जन।
घुरि अयला पाठशाला करे लगला फेर अनुचारा।
आयल भादव सांझ चमकैत गरजैत बरसैत मेघ ।
आयल बाढि नद डूबल चांचर खेत खरिहान।
के बारैत दीप मैया के दूर्गा स्थान।
सभ कैलन विचार बारैत मूरख कालिदास दीप।
छोड़त चिह्र दीप पोतलैन दूर्गा मुख कारीख।
खुश दूर्गा देलन वरदान जेते पुस्तक छूवे आइ रात।
सभ जयतो कंठाग्र छूएत सरस्वती बसगेल कंठाग्र।
कालिदास कवि महान रचलन अभिज्ञान शाकुन्तलम मालविकाग्निमित्र।
आ रचलन मेघदूतम रचलन ऋतुसंहार कुमारसंभव रघुवंशम् ।
पैलन विद्योतमा पियार प्रसिद्ध भे गेलन संसार।
मिथिला मे कवि महान रामा महाकवि कालिदास महान।
२. कवि आदि विद्यापति नाई
कवि आदि विद्यापति नाई। रहलन मधुबनी विस्पी ठाई।१।
दसम शताब्दी काल आईं। मिथिला नाउं विद्यापति पाईं।२।
पिता महेशठाकुर घर आईं। कुल भूषण नाई कहलाई।३।
नित नव कविता बनाईं। नित विदापत नाच कराईं।४।
समाज में नवजागरन कराईं। जोतिश्वर वर्नरत्नाकर चर्चा करईं।५।
मिथिला मे विद्यापतिगीत गाईं। भेद न जान विद्यापति पाईं।६।
मैथिल चर्चा न करईं। बाभन विद्यापति के समझईं।७।
मिथिला मैथिली जागरन होंहईं। घर घर विद्यापति गाईं।८।
मिथिला धन धन होंहईं। रामा आदिविद्यापति चर्चा करईं ।९।
३. आदिकवि सरहपा
मैथिली के आदिकवि सरहपा। हो गेल मैथिली से गायब। अंगिका रखले हय जिंदा। अंगिका के आदिकवि सरहपा। मिटल न आदिकवि सरहपा।
सनातन -बौद्ध के संघर्ष में। सरहपा हो गेल गायब। मैथिली के अतीत। मिथिला से हो गेल गायब। मिथिला भे गेल अभागल ।
बौद्ध हो गेलय। लाइट आफ एशिया। सनातन रह गेल। संकुचित होके भारत। रामा मैथिली हो गेल घायल।
-आचार्य रामानंद मंडल, सामाजिक चिंतक सह साहित्यकार सीतामढ़ी। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ। विदेह ४४४|| 1 गजेन्द्र ठाकुर 1
गए हाल TOME I-IV / VOLUMES -00 | A Parallel History of | Mithila & Maithili Literature with Critical Appreciations of Representative Maithili Writers 2 Reg = by | | GAJENDRA THAKUR | editor, Videha eJournal VIDEHA + PARALLEL LITERARY MOVEMENT se + ISSN 2229-547X - est. 2000 - Delhi - MMXXVI
FROM THE SERIES The Videha Parallel Library a centuries of Maithili letters — from the Buddhist Charyapadas | of the eighth century to the digital insurgency of the twenty-first — | gathered under a single critical lens. Across one hundred volumes the | Videha Parallel Library has assembled the suppressed, the neglected, | the folk, the Dalit, the women’s, and the diasporic traditions of Maithili literature into a counter-archive to the official canon curated by the Sahitya Akademi. This volume brings that project to its threshold. Applying Bharata’s rasa-theory, Anandavardhana’s dhvani, Kuntaka's vakrokti, Gahgesa Upadhyaya’s Navya-Nyaya pramana system, Bakhtinian dialogism, Spivak’s subaltern historiography, and the Videha Parallel History Framework, it offers sustained critical appreciations of one hundred contemporary and historical Maithili writers — poets, novelists, dramatists, essayists, theorists, and translators — whose work constitutes the living parallel tradition. “The parallel is not the marginal but the truthful, in long delay.” WHAT THIS VOLUME CONTAINS, >> One hundred chapter-length critical appreciations, each paired with a portrait image »® A historical synthesis from 8th-century Charydpadas to contemporary digital publishing >> Indigenous theory (Navya-Nyaya, rasa, dhvani) alongside Western and postcolonial lenses >> Archival recovery of the Dooshan Panji records on Gafigesa Upadhyaya of Mithila pes ABOUT THE AUTHOR | GAJENDRA THAKUR — Maithili author, editor, and literary scholar — founder | of the Videha Parallel Literary Movement and founded the Videha eJournal in | | 2000 and has edited it without interruption since. He writes in Maithili, Hindi, ‘i and English, and has authored scholarly monographs on Gangesa Upadhyaya’s Navya-Nyaya and the parallel history of Mithila’s literary cultures. SON 978-93-5832-486-6 VIDEHA | | till | | | | | Fe AEE nee > हि, ISSN 2229-547X - videha.co.in
Mets eee ecoding the nit at है दर a Panji of Mithila oa Surprising Insights from India and Pp a | lal l Nepal's Oldest Social Network The Panji system of Mithila is a remarkable example of how communities preserved, recorded and td e transmitted social memory across generations. Spanning centuries, it functions as one of the world’s oldest social networks—long before the हू digital age. This book decodes the structure, gt. purpose and significance of Panji, bringing to light Surprising Insights from its value for understanding kinship, migration, India and Nepal's Oldest marriage alliances and societal organization in Ps Social Network India and Nepal. थी, au Bridging tradition with modern research, this work TDi ig कि हि. ae offers surprising insights for scholars of sociology, ea ii; Ni A ote ee - WON GA. anthropology and genomic genealogy. It opens new i= a rate ys a oe किए pathways for interdisciplinary studies, showing how Sy CxS wee ancient records can inform contemporary social Mh ¢ ere nl ae ~ science and genealogical mapping. ' tee. cet s\ \ Seca ES ५१६ सी Gajendra Thakur ye —— 5 ap we, ae: £ Hh | | धर है... ap 6) ee pig ऊ | डक gee. \ For the Research Students of ew if NX. रे Sociology, Anthropology and a, Dy Jy AX Genome/ Geneological Mappin Sn? oh an & ie BPS 9 ०9९9: = ee = oD ) A EN. LP EB ८ Vary फनी दी के 2 4 We aa q ISBN 978-93-595-894-5 www.videha.co.in Aas we 25 Zee FESS igi agi he AS rad ae ne eae Gajendra Thakur निधि lee Editor ISBN videha.co.in Videha Maithili eJournal
VIDEHA DECODING THE PANJI OF MITHILA VOLUME II Genealogical Mapping, Mula, Dusan, and the Videha Panji Search System Panji is Mithila’s grammar of memory. पज्जी मिथिलाक स्मृतिक व्याकरण अछि। Gajendra Thakur Editor Videha — First Maithili Fortnightly eJournal www.videha.co.in
== the Panji of Mithila Volume II Decoding the Panji of Mithila Volume II introduces Mithila’s Panji Prabandha as a layered archive of genealogy, marriage rules, mila, milagrama, gotra-pravara, maternal lines, scholarly titles, Diisan records, village memory, and historical persons. The book explains Panji as genealogical mapping, not modern DNA, and proposes the Videha Panji Search System as a responsible digital search aid. Important Ethical Note Panji records are historical and genealogical sources. They are not modern genetic proof, legal proof, or automatic marriage clearance. Diisan records must not be used to stigmatize living persons, families, villages, or communities. Scan to read पुढ़ खोलनाक लेल स्कैन करू काका see नाक A ey pest a a हि re a Videha — First Maithili Fortnightly eJournal www.videha.co.in
v CCD 0 TOTTNNS CTO sues eau ans ey DECODING THE Orla on ss seve abl a pata it PANJI OF MITI I LA A describes, (ontinuing the work hegun in Volumes Land Il, this Khand > Kaw (Gey ‘I Genome Mapping Volume I carries Mithia’s tradition 0 len Senne “A Panji is not read so much as back into the house that bore it." 2 दर शा डडड्ड of Genome Mapping gS On| |) a if a HE APONTE ना iol A q GAJENDRA THAKUR
we aia Gadi macture af famifies, names, and the lines (aw) i डॉड नि Based on the Nagram Panji ae [व iol 4 : GAJENDRA THAKUR
=. z mira sri ons The fifth volume turns to the Panji of Volume IL mapping Mithila’ DECODING T HE in, Te res ses ration th a रकम का — eth (oy. =) “A genealogy is a kind of clock — wind it back far enough and the ११९७ १,०१७ names start keeping their oan time.” a! Nay ° Y by ell oo ir a ave 7 il 4 i GAJENDRA THAKUR
ie का के के के का के के के के के obs gi] H = So जा ु oi Peas 7 — Wen Ve yrs! + 203 w/e ij NOH) 0 ER pee, ENN eh me SAY Pa! A} eta | A ONY 83] लि Hl gos | | €03 [4 He? | मिलान Ee" i i] *97 | ९! EP? id T Has | Hl eta fore eee Re ee et Hal 3) £83 /3 पिन Had He <i पल H 03 | Bre H i] ee‘ 2 eee कि Pe ee डिश H £93 EERE RT, ee Ge Eo? | Heat | ° a © cl लि +- VOLUME VI-+ j wi का < © | 4 lj — BASED ON DUSHAN PANJI— ‘eg ६५3: Ho? |i iret) Ie fl fe ae Ue El a $8 Hs bd 2 Se SSS चर! Ved] owImTIOODDOLOM Hemel 6. fl H £23! मिल भी ky AJENDRA THAKUR | ८. | eds | कि! 83 |! जा A KH Ay कि i} ef I aN ७३ : Ut Fett H EA H "36:20 8९ VIDEHA eJOURNAL / लि || || 2 CORN. DAY e | rere eS का का SSG. BE कर Ry
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E a eel ae et a a eo a EN OF la! yy ie DECODING THE RS SY | cE gay PANII १४ iy” Hi Sich न | STS <i H | 0? se — BASED ON DUSHAN PANJI — neaal Ke H Decoding the Panji of Mithila, Volume VI, based on Dushan Panji, ‘el Had is a detailed scholarly exploration of one of Mithila’s most ll bead H Heed difficult genealogical archives. This volume explains the logic of et fl easf Panji entries, mool and migration, maternal and daughter lines, Hei कि H caste and marriage records, named women, social vocabulary, : $33 Fi x, H and the ethical challenges of reading Dushan Panji today. i: x H Hal It combines close entry-by-entry decoding with historical taal । $3 interpretation, making a difficult source accessible without | ee H ey i losing its complexity. The book is intended for researchers, tel H 3) students, family historians, and all readers interested in Mithila, tl all LPS genealogy, caste, social history, and textual preservation. coal | €33 4) Gajendra Thakur is a researcher and writer associated with पा eH Videha and the study of Mithila’s literary, historical, and Hei 3} of E: a मिल <> | genealogical traditions. i 3 H मन I Maal eit, fa “lft i i (Deel fs | 2 © t H पक m hee i Re re || Hal H 3 i a Scan to visit www.videha.co.in oA | es TING हे न हि 4 Head aN VIDEHA eJOURNAL fade elo RS, eg LATS) | i के Ea a EERE ET a Oy H 89: के“ BiG Bo Ooo Sob GG SB ey SM]
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yy मैथिली साहित्यक सभसेँ पैय उपन्यास Gohi Sabhak Beech Jalsamadhi | गजेन्द्र ठाकुर " गोहि देह खाइत अछि, नाम नहि -- नाम ओकर दाँतमे अटकि जाइत अछि।" PT ie se ee के की पक ( at ga-gien | | [) डिजिटल अरेस्ट | ( <= धनक कारी धार | लेखक — गजेन्द्र ठाकुर मैथिली कावर्धरी « न्याय-दर्शन आ समकालीन अपराध-गाथा « विदेह प्रकाशन UU on ई-पत्रिका ae ® rw ae ae fade प्रकाशन * दिल्ली
विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् अंक ४४४ | १५ जून २०२६ | वर्ष १९ मास २२२ समानान्तर परम्पराक विद्यापति — श्री पपकलाल मण्डल (विदेह सम्मानसँ सम्मानित) मिधिलाक sits लेखक, पाठक आ श्रोता लोकनि लेल, जे aes वर्षक झंझावातमे सेहो मैथिलीक दीप प्रज्वलित रखने छथि। सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर is ISSN 2229-547X - WWW.VIDEHA.CO.IN 2 | प्न्ब..... पर
fade मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर।
[विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X Videha e-Journal (since 2000) at www.videha.co.in ] ऐ पोथीक सर्वाधिकार सुरक्षित अछि। कॉपीराइट (©) धारकक लिखित अनुमतिक बिना पोथीक कोनो अंशक छाया प्रति एवं रिकॉडिंग सहित इलेक्ट्रॉनिक अथवा यांत्रिक, कोनों माध्यमर्स, अथवा ज्ञानक संग्रहण वा पुनर्प्रयोगक प्रणाली द्वारा कोनो रूपमे पुनरुत्पादन अथवा संचारन-प्रसारण ने कएल जा ST अछि। (८) २०००- २०२६. सर्वाधिकार सुरक्षित। भालसरिक गाछ जे सन २००० सं याहूसिटीजपर छल http://www-geocities.com/.../bhalsarik_gachhhtml , http://www .geocities.com/ggajendra आदि ‘ferent aT a cs जुलाइ Rooe = पोस्ट http:/ /gajendrathakur blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh. html केर sat seater मैथिलीक प्राचीनतम उपस्थितक रूपमे विद्यमान अछि (ag दिन aa http://videha.com/2004/07/bhalsarik-gachh html 'लिंकपर, an wayback machine of hitps:/ /web.archive.org/web/*/videha 258 capture(s) from 2004 to 206- http://videha.com/ भालसरिक गाछ-प्रथम मैथिली ब्लॉग / मेथिली 'ब्लॉगक एग्रीगेटर)। ई मैथिलीक पहिल इंटरनेट पत्रिका िक जकर नाम बादमें १ जनवरी २००८ सें Paks" पड़ले। इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मेथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि, Shup://www-.videhacoin) पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवूत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक््ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक eat प्रयुक्त 4s रहल अछि। Videha eJournal (link www.videhaco.in) is a multidisciplinary online journal dedicated to the promotion and preservation of the Maithili language, literature and culture. It is a platform for scholars, researchers and writers to publish their works and share their knowledge about Maithili language, literature, and culture. The journal is published online to promote and preserve Maithili language and culture. The journal publishes articles, research papers, book reviews, prose and verse in Maithili and English languages. It also features translations of literary works from other languages into Maithili and from Maithili into English. It is a peer-reviewed journal, which means that articles and papers are reviewed by experts in the field before they are accepted for publication. (८)२०००- २०२६. विदेह: प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA. सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। Editor: Gajendra Thakur. In respect of materials e-published in Videha, the Editor, Videha holds the right to create the web archives/ theme-based web archives, right to translate/ transliterate those archives and create translated/ transliterated web-archives; and the right to e- publish/ print-publish all these archives. रचनाकार संग्रहकत्ता अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना/ संग्रह (संपूर्ण उत्तरदायित्व रचनाकार/ संग्रहकर्त्ता मध्य) editorial staff videha@zohomail in कें मेल staves रूपमें पठा सकेत छवि, संगमे ओ अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्केन कएल गेल फोटो सेहो पठाबयि। Ta प्रकाशित रचना/ संग्रह सभक कॉपीराइट रचनाकार / संग्रहकर्ताक लगमे छन्हि आ जत$ रचनाकार/ संग्रहकर््ताक नाम ने अछि aes ई संपादकाधीन अछि। सम्पादक: es ई-प्रकाशित 'रचनाक वेब-आकाइव/ वीम-आधारित वेद-आरकाइवक निर्माणक अधिकार, ऐ सभ आ्काइवक अनुवाद आ लिप्यंतरण आ तकरों वेब-आर्काइवक निर्माणक अधिकार; आ ऐ सभ आकॉइवक ई-प्रकाशन/ प्रिं-प्रकाशनक अधिकार रखेत oft ऐ सभ लेल ot teed) पारिश्रमिकक प्रावधान नै छे, से रॉयल्टी/ पारिश्रमिकक इच्छुक रचनाकार / संग्रहकर्त्ता विदेहसेँ ने जुड़यु। विदेह ई पत्रिकाक मासमे दू टा अंक निकलैत अछि जे मासक ०१ आ १५ तिथिकें wwwvidehacoin पर ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। Font/ Keyboard Source: hitps://fonts.googlecom/ , https://github.com/virtualvinodh/aksharamukha-fonts , heps://keyman.com/ These are print-on-demand books, send your queries to editorial staff.videha@zohomail in. The eBooks of some of these are available for sale on Google Play [(c) Preeti Thakur, sales videha@gmail.com], send your queries to sales.videha@gmail.com. The contents and documents e-published by Videha (since 2000) ISSN 2229-547X VIDEHA are periodically being checked for accessibility issues. People with disabilities should not have difficulty accessing these contents/ documents. © Preeti Thakur (sales.videha@gmail.com) Cover design: AUM GAJENDRA THAKUR VIDEHA:444 गे समानान्तर परम्पराक विद्यापति- चित्र विदेह sees सम्मानित श्री पनकलाल मण्डल द्वारा।
for the writers, readers, and listeners of Mithila, who have kept the lamp of Maithili burning through a thousand years of storms "The Parallel is not the marginal but the truthful, in long delay.” मैथिली भाषा जगज्जननी सीताया: भाषा आसीत्। हनुमन्त: उक्तवान- मानुषीमिह संस्कृतामू। मिथिलाक ओइ लेखक, पाठक आ श्रोता लोकनि लेल, Saga वर्षक झंझावात में Set मैथिलीक दीप प्रज्वलित रखने छथि। PARR कात-करोट मे हएब ने अछि, 'वरन् ई अछि असल सत्य, जे अपन समय लेलक अछि।
आनुक्रम विदेह अंक ४४४ [१५ जून २०२६] वर्ष १९ मास २२२ ISSN 2229-547X ऐ अंकमे अछि:- १.१.गजेन्दू ठाकुर- नूतन अंक सम्पादकीय (पृष्ठ २-११) १.२.अंक ४४३ पर टिप्पणी (पृष्ठ १२-१२) गद्य Prose २.१. हितनाथ झा-मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान-२३ (पृष्ठ १४-२१) २.२. कल्पना झा- मैथिली साहित्यमे श्रीकान्त ठाकुर 'विद्यालंकार'एवं हुनक परिवारक योगदान-४ (पृष्ठ श्२-२५) २.३. सुरेन्दू लाभ- तीन गोट कनिका नाटक [तारीख पर तारीख/ फ्री सलाह/ पहिचान] (पृष्ठ २६-३०) २.४. लाल देव कामत- डॉ०( श्रीमती) लालपरी देवी : एक विदुषी (पृष्ठ ३१-३३) २.५. प्रमोद झा 'गोकुल'- डोलबैत रहू (लघु कथा) (पृष्ठ ३४-३५)
२.६. लाल देव कामत- स्वस्थ आयु लेल योग (पृष्ठ ३६-३७) २.७. आचार्य रामानंद मंडल- धनाकर ठाकुर संवाद [सन्दर्भ -मिथिला राज्य आ महाकवि विद्यापति] (पृष्ठ ३८-४९) २.८. राजदेव मंडल- प्रती क्षाक पीड़ा (पृष्ठ ५०-५२) २.९. लाल देव कामत- हमर छात्र राजनीतिक: एक क्षण (पृष्ठ ५३-५५) २.१०. प्रीति कुमारी- राम श्रेष्ठ दिवाना: एक व्यक्तित्व (पृष्ठ ५६-५९) २.११. संतोष कुमार राय 'बटोही'- धारावाहिक डायरी 'लव यू टू' (पृष्ठ ६०-६२) २.१२. प्रीति कुमारी- डॉ (प्रो.) विजयेन्दू झा : एक व्यक्तित्व (पृष्ठ ६३-६४) २.१३. मिथिलाक नाच पाटी- समानान्तर नाच-नाट्य परम्परा (पृष्ठ ६५-८२) २.१४. गजेन्दू ठाकुर- गोहि सभक बीच जल समाधि (मैथिलीक आइ धरिक सभरसँ पैघ उपन्यास )- मैथिली कादम्बरीक अंश (पृष्ठ ८३-८७) २.१५. गजेन्दू ठाकुर-आनन्दमे मत्त करैबला प्रहसन [पत्लव नरेश श्री महेन्दूविक्रम वर्मा प्रथम che मूल संस्कृत- मत्तविलास प्रहसनम् केर मैथिली अनुवाद- गजेन्दू ठाकुर] (पृष्ठ ८८-१०३) २.१६. गजेन्दू ठाकुर- मैथिली नाट्यमंच/ नाटक लेल एकटा समीक्षा सिद्धान्त (भाग-४) सन्दर्भ- कुणाल- कृत बिदापत (पृष्ठ १०४-११२)
ug Poetry ३.१. तेलुगु काव्य: काठक घोड़ा [मूल तेलुगु"कोय्या गुर्रम'] मूल तेलुगु: नग्नमुनि (मानेपल्लि हृषीकेशवराव) मैथिली अनुवाद: मानेश्वर मनुज [खण्ड ६] (पृष्ठ ११४-११७) ३.२. अशोक कुमार ठाकुर-पीड़ा आ मेहनति/ दू कौड़ीक शिक्षक (पृष्ठ ११८-१२०) ३.३. जगदानन्द झा "मनु"- २ टा गजल (पृष्ठ ₹१२१-१२२) ३.४. प्रणव कुमार झा- रैंक १५७: गोदी मीडिया (पृष्ठ १२३-१२४) ३.५. राम शंकर झा "मैथिल"- धीपल (पृष्ठ 224-229) ३.६. आचार्य रामानंद मंडल- महाकवि कालिदास / कवि आदि विद्यापति नाई/ आदिकवि सरहपा (पृष्ठ श्२८-५२)
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FROM THE SERIES: The Videha Parallel Library | of the eighth ste tthe diptal| ia gerne of the twenty-first ins =F, gathered under a single critical = Across one hundred volumes the Videha Parallel Library has assembled the suppressed, the neglected, the folk, the Dalit, the women’s, and the diasporic traditions of Maithili literature into a counter-archive to the official canon curated by the Sahitya Akademi. This volume brings bar bhatt to its threshold. Applying Bharata's Heathens en eae Kuntaka's vakrokti, Gangesa cites 's Navya-! pramdéna system, Bakhtiniandialogism, Spivak’s tern historiography, and the Videha Parallel History Framework, it offers sustained critical appreciations of one hundred contemporary and historical Maithili writers — poets, novelists, मारता गम theorists, and translators — whose work constitutes the living tion. “The parallel is not the marginal but the truthful, in long delay.” WHAT THIS VOLUME CONTAINS »® One hundred chapter-length critical appreciations, each paired with a =A reac from 8th-century Charydpadas to contemporary - sel theory (Navya-Nyaya, rasa, dhvar/) alongside Western and » Archival recovery of the Dooshan Panji records on Gangesa Upadhyaya of Mithila © ABOUT THE AUTHOR ) GAJENDRA THAKUR — Maithili author, editor, and literary scholar — founder of the Videha Parallel Literary Movement and founded the Videha eJournal in 2000 and का, it रन here since, He writes in Maithilf, Hindi, Sanskrit, and English, authored scholarly hein aa Gangeia Upadhylya's Navya-Nydiya and the parallel history of Mithill’s: cultures. Tame 378-¥)-5472-400-8 VIDEHA parallel literary movement ISSN 2229-547X > videha.co.in 9 | | Bb > APPENDIX: METHODOLOGICAL NOTE The Nepal Bikram Samvat years cited have been converted to approximate CE years using the standard offset of BS minus 56- 57 years. Web sources consulted include the Videha digital archive (videha.co.in). All URLs were last accessed April 2026. This
research was prepared using primary texts, and standard academic resources. All quoted material is from the cited sources. For the most current scholarship, consult the Videha Parallel History series at www.videha.co.in/gajenthakur.hum. A PARALLEL HISTORY OF MAITHILI LITERATURE: INTRODUCTION DALIT LITERARY CRITICISM: TELUGU, GUJARATI, AND ODIA DALIT LITERATURE IN MAITHILI TRANSLATION GANGESA UPADHYAYA: LIFE, LOGIC, AND LEGACY IN THE NAVYA-NYAYA TRADITION [NAVYA-NYAYA'S HIERARCHICAL USE OF LIMITORS IS COMPATIBLE WITH MODERN ARTIFICIAL INTELLIGENCE AND NATURAL LANGUAGE PROCESSING (NLF)] MITHILA & MAITHILI: CRITICAL ANALYSIS OF INSTITUTIONS ‘THE MAITHILI GHAZAL VIDEHA (ISSUE i-350) SADEHA SERIES (i-37) VIDEHA ISSUES 35-438 VIDEHA MAITHILI PARALLEL DRAMA THEATRE \VIDEHA PARALLEL AUDIO VIDEO ARCHIVE \VIDEHA PARALLEL CHILDREN'S LITERATURE Abdur Razzak, Abha Jha, Abhilash Thakur, Achhe Lal Shastri, Ajit Kumar Jha, Amit Mishra, Amod Kumar Jha, Amrendra Yadav, Anamika Raj, Anand Kumar Jha, Anil Mallik, Anjani Kumar Verma, Anmol Jha, Arvind Thakur, Ashish Anchinbar, Ashok (kathakar Ashok), Ashraf Rain, Dr. Bacheshwar Jha, Badri Nath Roy ‘Amatya’, Pt. Bal Govind ‘Arya’, Bechan Thakur, Pandit Bhavnath Jha, Bibhuti Anand, Bijayendra Jha, Binay Bhushan, Bindeshwar Thakur, Chandan Kumar Jha, Dinesh Kumar Mishra, Durganand Mandal, Gajendra Thakur, Ghanashyam Ghanero, Gopalji Jha 'Gopesh’, Gyanvardhan Kanth, Harimohan Jha, Hitendra Gupta, Hitnath Jha, Hriday Narayan Jha, Ilarani Singh, Jagdanand Jha 'Manu’, Jagdish Chandra Thakur ‘Anil’, Jagdish Prasad Mandal, Jnauli Paswan, Jitendra Kumar Jha 'Jeetu’, Dr. Kailash Kumar Mishra, Kalikant Jha 'Buch’, Kalpana Jha, Kalpana Jha, Bokaro, Kalpana Jha, Delhi, Kalpana Jha, Patna, Kameshwar Choudhary, Kameshwar Jha 'Kamal’, Dr. Kamini Kamayini, Kamla Chaudhary, Kapileshwar Raut, Kedar Nath Chaudhary, Dr. Kirtinath Jha, Dr. Kishan Karigar, Krishna Kumar Kashyap, Kumar Manoj Kashyap, Kumar Pawan, Kundan Kumar Karn, Kusum Thakur, Lal Dev Kamat, Lalita Jha, Lallan Prasad Thakur, Laxman Jha ‘Sagar’, Mala Jha, Manmohan Jha, Meena Jha, Mithilesh Kumar Jha, Munnaji, Munnaji, Munni Kamat, Nabo Narayan Mishra, Nagendra Kumar, Nand Kumar Mishra ‘Nand’, Nand Vilas Roy, Nanda Vilas Ray, Narayan Yadav, Narayanji Chaudhary, Narendra Jha, Navendu Kumar Jha, Neerja Renu, OM Prakash Jha, Panna Jha, Phanishwar Nath Renu, Prabhat Rai Bhatt, Pradeep Bihari, Pradeep Pushpa, Pranav Jha, Prayas Premi Maithil, Preeti Thakur, Premlata Mishra ‘Prem’, Premshankar Singh, Rabindra Narayan Mishra, Rajdeo Mandal, Rajeev Ranjan Mishra, Rajnandan Lal Das, Ram Bharos Kapari 'Bhramar', Ram Chandra Roy, Ram Sogarth Yadav, Ram Vilas Sahu, Acharya Ramanand Mandal, Prof. Dr. Ramawatar Yadav, Ramdeo Prasad Mandal '‘Jharudar', Ramesh, Ramesh Narayan, Rameshwar Prasad Mandal, Pandit Ramji Chaudhary, Ramji Prasad Mandal, Acharya Ramlochan Sharan, Ramlochan Thakur, Ravi Mishra Bhardwaj, Ravibhushan Pathak Ravindra Nath Thakur, 5.0. Suman, Sandeep Kumar Safi, ‘Sanju Das, Santosh Kumar Mishra, Santosh Kumar Roy 'Batohi’, Satyanand Pathak, Shail Jha ‘Sagar’, Dr. Shambhu Kumar Singh, Shanti Lakshmi Chaudhary, Shardindu Chaudhary, Shashi Bala, Shashidhar Kumar ‘Videh’, Shiv Kumar Jha ‘Tillu’, Dr. Shiv Kumar Prasad, Shivshankar Singh Thakur, Shivshankar Sriniwas, Dr. Shubh Kumar Barnwal, Shyam Darihare, Siyaram Jha 'Saras', Srijan Shekhar ‘Ajneya’, Subhash Chandra Yadav, Subhash Kumar Kamat, Subodh Jha, Subodh Kumar Thakur, Sujit Kumar Jha, Sushil, Sweta Jha Chaudhary, Taranand Viyogi, Prof.Udaya Narayana Singh Nachiketa, Umesh Mandal, Umesh Paswan, Veena Thakur, Vibha Rani, Vibhuti Anand, Vijaynath Jha, Vineet Utpal, Yoganand Jha, Prof. Dr. Yogendra P, Yadava, Yogendra Pathak Viyogi A Parallel History of Mithila & Maithili Literature, Original Poem in Maithili, Translated into English, Children's Literature Theory, Children's Picture-Story Literature, Contemporary Mithila Artists, Contemporary Mithila Artists, Dalit and Subaltern Literature, Dalit Literary Criticism, Dalit Literary Criticism — Gujarati Dalit Literature in Maithili Translation, Dalit Literary Criticism — Odia Dalit Literature in Maithili Translation, Dalit Literary Criticism — Telugu Dalit Literature in Maithili Translation, Digital Maithili Children's Literature, Digital Maithili Literature, The Epistemology of Parallelism — Videha Sadeha Series and the Maithili Digital Renaissance, Gangesa Upadhyaya / Navya-Nyaya, Gangesa Upadhyaya — Life, Logic. and Legacy in the Navya-Nyaya Tradition, Institution Critical Analysis, Language Transmission, Laprek vs Bihani Katha, Maithili Bihani Katha — The Seed Story Tradition in Maithili Literature, The Maithili Ghazal — History, Theory, Revival, and the Anchinhar Era, Maithili Micronarrative, Mithila & Maithili — Critical Analysis of Institutions, Awards and Recognition Frameworks, Mithila & Maithili Institution Critical Analysis, Parallel Literature Movement Seed Story Tradition, Tirhuta / Mithilakshar, Videha 35i-438 Critic. Videha Children Literature Expanded, Videha Children Literature Expanded — Parallel Children Literature in Maithili, Videha eJournal, Videha Issues -350, Videha Issues 35-438, Videha Issues 35i-438 — Epistemological and Canonical Transformations, The Videha Maithili Parallel Drama ‘Theatre, Videha Maithili Parallel Drama Theatre, The Videha Maithili Parallel Drama Theatre — Critical Historiography and Epistemological Analysis, The Videha Parallel Audio Video Archive, Videha Parallel Audio Video Archive, The Videha Parallel Audio Video Archive — Digital Remediation and Subaltern Historiography, Videha Parallel Audio Video Critic, Videha Parallel Children Literature, Videha Parallel Drama Critic, Videha Parallel History Framework, Videha Sadeha i-37 / Issues -350 Critic, Videha Sadeha, Videha Sadeha Series -37, Vidyapati, the Primal Poet of Maithili (Pre-Jyotirishvara), Women's Writing, Young Readers in Maithili + AND MORE TO COME IN TOME 5. L A PARALLEL HISTORY OF MITHILA & MAITHILI LITERATURE [TOME i-4; VOLUMES 4- उ00] BY GAJENDRA THAKUR [Parallel History Series ISBN Number: 978-93-582-486-6] GOOGLE PLAY BOOK [TOME 4-4; VOLUMES -00] https:/ /play.google.com/store/books/ details?id=uvjREQAAQBAJ AMAZON KINDLE [TOME -4; VOLUMES 4-00] https:/ /www.amazon.in/dp/BOGX2XRKM7 POTHI HARDBACK POTHI TOME 4 [VOLUMES 02-25]
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Decoding the d h ae tee Decoding the Panji of Mithila ee Surprising Insights from India and a nN || Nepal's Oldest Social Network The Panji system of Mithila is a remarkable example of of how communities preserved, recorded and e oe transmitted social memory across generations Spanning centuries, it functions as one of the t world’s oldest social netwarks—lang before the digita! age, This book decades the structure 5 purpose and significance: of Panji, bringing to light Surprising Insights from its value for understanding Kinship, migration India and Nepal's Oldest marriage alliances and societal organization in rl Social Network India and Nepal ae chip ce, As मत Bridging tradition with madem research, this work it कर ae offers sanprsing मदर for scholars af sociology, 4) vis ane) a at. “ eo: anthropology and genomic genesiogy. It apens mew hse oe fet x . ee a दे ez pathways for interdisciplinary studies, showing how | pe, PN, yee है है फेर गम, पर a eR et, ४ सी Gajendra Thakur लॉ VE , ie —_— - om | ae hee! दि hi § Ay @ ab Ted fare Be कु Mg iy uf’ x For the Research Students of व हर ‘s Sociology, Anthropology and ‘* 2 हर iD & Genome/ Geneological Mapping ali d Bie Frise ar Et = कक HOI ROO WD डकार शाह का- 55-१4 5 भक्तों 2:69: Peeees id 3 kh 3 Wie): st iit BrP Gajendra Thakur Bare Seca ope NG LOS ees Bees Editor ISBN videha.co.in Videha Maithili eJournal
DECODING THE PANJI OF MITHILA: Surprising Insights from India and Nepal’s Oldest Social Network [ISBN: 978-93-595-894-5] VIDEHA DECODING THE | PANJI OF MITHILA | VOLUME II | Genealogical Mapping, Mila, Digan, and the Videha Panji Search System Panji is Mithila’s grammar of memory. Gajendra Thakur Editon Videha — First Ma oa tnightly efournal |
Decoding the Panji of Mithila Volume II Decoding the Panji of Mithila Volume II introduces Mithila’s Panji Prabandha as a layered archive of genealogy, marriage rules, mila, milagrama, gotra-pravara, maternal lines, scholarly titles, Digan records, village memory, and historical persons The book explains Panji as genealogical mapping, not modern DNA, and proposes the Videha Panji Search System as a | responsible digital search aid. Important Ethical Note Panji records are histovical and genealogical sources. They are not modern genetic proof, legal proof, of automatic marriage clearance Dusan records must not be used to stigmatize living persons, families, villages, or communities Scan to read ee f=) . [555] Vides — First Maithili Fortnightly efournal
ba = piers wagrteiot ic samen PANJL OF MITHILA रन i Vv VR, a Fabaceae DECODING THE पम्प PANJLOF MITHILA greunriroesiarirhyy dred एल प००४0$९ मई Yad ee प्मस्््द: मय ou AN Sena MAM gg SCAPENO RA TUAKTE
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Decoding the Panji of Mithila Volume I-VI KINDKE EDITIONS Decoding the Panji of Mithila - Surprising Insights from India and Nepal's Oldest Social Network hittps:/www.amazon in/dp BOHS63RVTS Decoding the Panji of Mithila Volume II: Genealogical Mapping, Mila, Disan, and the Videha Panji Search System ‘bttps:/www.amazon in/dp/BOHENPRTYB Decoding the Panji of Mithila Volume III: A Complete Index-wise Decoding of Genome Mapping Volume I -Khand 2 Based on Uptip Panji ‘https: ‘www.amazon in dp BOH6R4BBFB Decoding the Panji of Mithila Volume IV: Based on the Nagram Panji https: /www. amazon in/dp/BOH6R6VSBF Decoding the Panji of Mithila Volume V: Based on Volume II Panji: Genealogical Mapping of Mithila, 450 AD-2009 AD Decoding the Panji of Mithila Volume VI: Based on Dushan Panji hhttps://www.amazon.in/dp BOH6R2YCFP या. गद्य पद्य भारती खण्ड १ आ २ (विदेह सदेह २८ & विदेह सदेह ३७) [विभिन्न sare अनूदित गद्य आ wer रचना (खण्ड-१) & (खण्ड-२) (विदेह www-videha.co.in/ पेटार अंक १-३५० सेँ)] [खण्ड ¢ ISBN No: 978-93-347-0402-8; खण्ड २ ISBN No: 978-93-5890-50-4] 2 विदेह सदेह २८ GADYA PADYA BHARTI 2 विभिन्न भाषासँ अनूदित गद्य आ पद्य रचना (खण्ड-१) (विदेह www-videha.co.in/ पेटार अंक १-३५० सेँ) https: /store.pothi com /book/ ७त007-इुड|सा तर 3-फं057पए-इु3तेए-95तए5-00057ऐं-. 2 fate सदेह ३७ GADYA PADYA 55877 2 विभिन्न sare अनूदित गद्य आ पद्य रचना (खण्ड-२) (विंदेह www-.videha.co.in/ पेटार अंक १-३५० सं) hittps:/ /store pothi com /book, translator-gajendra-thakur-gadya-padya-bharti-2/ (tg AN CHIT भाशिक gt ATT दिदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका WWW.VIDEHA.CO.IN VIDEHA 23 LANGUAGE TRANSLITERATOR https: / /www.videha.co in/new page 00007. दिदेह लिपि परिवर्तक IPA - LAST - Tirhuta - Braille https: / /www-videha.co.in/script-converter html
'दिदेह आ सदेह सम्पूर्ण इंडेक्स https: / /www.videha.co.in/script-converter_html ae Ait sit garee- Videha Maithili «English Translator hirps://www-videha.co.in/maithili-translator-htm ‘agg पज्जी प्रबन्ध — मैथिल ब्राह्मण वंशावली इंडेक्स https: / | www-videha.co in/panji-mool-index html दिदेह गद्य hups:/ /www.videha.co.in/prose him दिदेह स्त्री कोना hutps:/ /www-videha.co.in/femcorner.htm APARALLEL HISTORY OF MITHILA & MAITHILI LITERATURE https:/ /www-videha.co.in/gajenthakur.htm दिदेह मिथिला रत्न 00005: / /www.videha.co.in/rama.htm fate hf ar herp: //wrww videha.co.in/ discovery hom दिदेह दृश्य-श्रव्य नात्य उत्सव https: / / www.videha.co.in/Audio Video.htm दिदेह शिशु, बाल आ किशोर उत्सव hups:/ /www videha.co.in/kids htm
'बिदेह ई-लर्निडग/ विदेह ई-लर्निंडग ल्विज hetps:/ /www.videha co in/videha-elearning htm [fate ई-लर्निडग क्विज UPSC / 8950 | UGC-NET / NTA हेतु मैथिली भाषा, ae or मिथिला इतिहास पर निःशुल्क प्रश्नोत्तरी — क्विज खोलबा लेल कार्ड पर क्लिक करु। शब्दकोश मिथिलाक इतिहास साहित्यक इतिहास UPSC / UGC- NET समानान्तर इतिहास मिथिला cot मैथिली गजल देव एत्रकारिता विदेह चित्रकला - कला - संगीत विदेह दुश्य-श्रव्य विदेह विशेषांक / सम्मान विदेह प्रश्नोत्तरी विदेह नाट्य उत्सव विदेह शिशु उत्सव दिदेह स्त्री कोना] Videha Converters- Thesaurus, Panji, Script Converters, Transliterators, Translators, eLearning Quizzes, Maithili Language Search and other Technical Tools https:// www.videha.co.in/videha-converters htm दिदेह आ सदेह दुनू https:/ /archive org/details/VidehaAndSadeha Videha Github: https:/ /github.com/videha-ejournal/ TWITTER, X https:/ /x.com/videha FACEBOOK hutps:/ /www facebook com/groups/videha/ = ;
१.१.गजेन्द्र ठाकुर- नूतन अंक सम्पादकीय १.२.अंक ४४३ पर टिप्पणी
विदेह eee] | 2 १.१.गजेन्द्र ठाकुर- नूतन अंक सम्पादकीय विदेह: सदेह: ६ मैथिली लघुकथा (विदेह अंक ५१-१००) समग्र साहित्यिक समीक्षा: सभटा साहित्यकार भारतीय रस-ध्वनि-वक्रोक्ति-औचित्य | पाश्चात्य आलोचना । गंगेशक नव्य-न्याय । fade समानान्तर इतिहास ढाँचा सम्पादक: WAY OTH! आइएसबीएन: 978-93-80538-64-8 | आइएसएसएन: 2229-547X भूमिका: सदेह ६ क स्वरूप विदेह: सदेह: ६ मैथिली लघुकथाक एक समग्र संकलन थिक। ३९ साहित्यकारक योगदान। दू अनूदित कथा: कोंकणी (वसंत भगवंत सावंत) + हिन्दी (असगर वजाहत)। सदेह ५ (विहनि कथा = तीव्र लघुकथा) S आगू बढ़ल - लघुकथामे बेसी विस्तार भेटैत अछि। गजेन्द्र ठाकुरक भूमिका: स्त्रीवाद, उत्तर-अवचीनतावाद, अस्तित्ववाद, मार्क्सवाद, फ्रायड/नव-फ्रायड Aaah मैथिली लघुकथा समी क्षामे समन्वित करबाक कार्यक्रम। १. गजेन्द्र ठाकुर रचना: (क) गद्य साहित्य मध्य लघुकथाक स्थान आ लघुकथाक समी क्षाशास्त्र (ख) दिल्ली समीक्षाशास्त्र: ठाकुरक सैद्धान्तिक Pras मैथिली लघुकथा ce विशिष्ट समी क्षात्मक ढाँचा स्थापित करैत अछि। प्रवासी मैथिली लेखक सभक चुनौती लेल एक अलग समीक्षात्मक ढाँचा चाही - ई केन्द्रीय तर्क। 'दिल्ली' कथा: करुण + व्यंग्य। ध्वनि: 'दिल्ली' = सत्ता, विस्थापन, आकांक्षा - मैथिली प्रवासी che मानसिक परिदृश्य। बूर्यू: महानगरीय क्षेत्र बनाम मिथिला परिधि। नव्य-न्याय: 'देश-काल-अवच्छिन्न' - दिल्ली he रूपमे रुपान्तरणकारी स्थान-समय। २. मीना झा रचना: ब्रेस्ट कैंसर। दरभंगा; एम.ए. प्रथम श्रेणी (१९८०) रस-ध्वनि: करुण + वीर। 'ब्रेस्ट कैंसर' - वर्जित चिकित्सीय विषय केर नामकरण। ध्वनि: स्तन FATE स्त्रीत्व केर प्रतीक - मातृत्व पर आक्रमण। गजेन्द्र ठाकुर लिखै छथि: 'कोनो
fate 8४४ | | 3 महिले एहेन कथा लिखि सकैत छलीह।' स्त्रीवादी शरीर-सिद्धान्त: सुसन सोन्टाग 'बिमारी He रूपक केर रूपमे' - क्यान्सर केर SA पितृसत्ता रूपक। विदेह केर सम्पादकीय स्वतन्त्रता: वर्जित विषय प्रकाशित। ३. रोशन जनकपुरी रचना: अग्निपुष्पक गुच्छासब। जनकपुर, नेपाल रस-ध्वनि: रौद्र + वीर। 'अम्निपुष्पक गुच्छासब' - 'अग्निपुष्प' (आगि-फूल) = सुन्दरतामे क्रान्तिकारी आगि। 'गुच्छा' = सामूहिक प्रतिरोध। वक्रोक्ति: फूल + आगि = सुन्दरता + रोष एक संग। फानन: वज्चित लोक सभक क्रान्तिकारी आगि। नेपाल मधेश आन्दोलन सन्दर्भ। ४. महाप्रकाश रचना: संभावना। जन्म: १९४६, TAG, सहरसा | वरिष्ठ कवि-कथाकार। रस-ध्वनि: ot + वीर। 'संभावना' = सम्भावना जे अखनो अस्तित्वमे नहि अछि। ग्राम्शी केर "इच्छा He आशावाद': Sel जखन पता छै कि प्रणाली कठिन अछि, तखनो सम्भावना देखनाइ। वज्चित सभक जीवनमे 'संभावना' खोजनाइ राजनैतिक कार्य थिक। ५. वसंत भगवंत सावंत रचना: (कोंकणी कथा) मृत्युकं टारब। कोंकणी -> मैथिली अनुवाद रस-ध्वनि + अनुवाद-सिद्धान्त: करुण + dizi 'टारब' (टारब) ध्वनि: मृत्यु विरुद्ध मानव सक्रियता। बेन्यामिन केर 'परवर्ती जीवन': कोंकणी तटीय कहानी — मैथिली स्थलरुद्ध पाठक - ई भाषिक सीमा-उल्लडूघन। विदेह: दू हाशियाकृत भाषा (कोंकणी + मैथिली ) दुनू संविधानमे सूचीबद्ध मुदा हिन्दी-प्रभुत्व मुख्यधारामे हाशियाकृत - विदेह दुनू हाशिया कँँ जोड़ैत अछि। ६. बीनू भाइ रचना: उत्ताप। मैथिली प्रवासी रस-ध्वनि: शान्त + ART! 'उत्ताप' | ग्ेन्द्र ठाकुर: 'बीनू भाड़ विश्लेषण केर मास्टर।' नव्य- न्याय: 'परिणामवाद' - पदार्थ रुपान्तरित होइत अछि, गायब नहि। ७. शम्भु कुमार सिंह
विदेह इ४४| | 4. रचना: भाए-बहिनक यथा कथा। जन्म: १८.०४.१९६५, लहुआर, सहरसा। रस-ध्वनि: वात्सल्य + करुण। 'यथा' (वास्तविक /साँच) = सत्य-दावा शैली-सूचक केर रूपमे। अम्बेडकर: पितृसत्तात्मक परिवार che भीतर बहिन केर स्थायी Soe अधीनस्थ स्थिति। 'यथा कथा' - सत्य-दावा राजनैतिक कथन केर रूपमे। ८. bre मंडल रचना: लाल भौजी। दलित कथाकार रस-ध्वनि: श्रृंगार + करुण। 'लाल' + 'भौजी'- Tae + रक्त-सम्बन्ध। अम्बेडकर + स्त्रीवादी: दलित महिला दोहरा रूपसँ बाध्य - जाति + बहू-स्थिति। ९. वीरेन्द्र कुमार यादव रचना: हमर समाज । ओबीसी स्वर रस-ध्वनि: रौद्र + वीर। 'हमर' = स्वामित्वात्मक दावा - समाज हमर Set अछि। ग्राम्शी + अम्बेडकर: ओबीसी /दलित बहिष्कार 'समाज' केर परिभाषासँ। 'हमर समाज' मे 'हम' नहि - इई विरोधाभास कथाक केन्द्र थिक। १०. उमेश मंडल रचना: अमैआ भार (पृ. ५२-५५) | जन्म: ३१.१२.१९८०, बेरमा, मधुबनी | रस-ध्वनि: MRT + करुण। 'अमैआ टाका पठा देलनि = मैथिली मुहावरा: HTH वृक्ष = उत्पादक व्यक्ति | वक्रोक्ति: फर-लदल वृक्ष झुकि जाइत अछि - उत्पादकता केर STA असुरक्षा। ठाकुर केर वृक्ष-बिम्बकल्पना: सामाजिक शोषण लेल पारिस्थितिकीय रूपक। १९१. arg विलास राय रचना: बाबाधाम / ऐना। जन्म: 02.0.957, भपटियाही, मधुबनी रस-ध्वनि: 'बाबाधाम' - भक्ति + शान्त। बैद्यनाथ धाम तीर्थयात्रा। 'ऐना' (दर्पण) - शान्त + अद्भुत। लाकान केर दर्पण-चरण: आत्म-पहिचान + आत्म-विस्थापन। SL कथामे अन्ततः आत्म-सामना। १२. सुजीत कुमार झा रचना: एकटा अधिकार
विदेह इ४४ | | 5 रस-ध्वनि: वीर + करुण। 'एकटा' (मात्र एक) अधिकार माँगनाइ - अल्पतम माँग = विध्वंसकारी टिप्पणी। अम्बेडकर: 'मूलभूत अधिकार' संरचनात्मक Soe अस्वीकृत - 'एकटा अधिकार' ae माँग एहि अस्वीकार केर अभियोग थिक। १३. सन्तोष कुमार मिश्र रचना: मुसीबत रस-ध्वनि: करुण + हास्य। 'मुसीबत' (उर्दू: मुसीबत) = मैथिली-उर्दू साडकेतिक-परिवर्तन। बाख्तिन केर 'दैनिक जीवन': सामान्य मुसीबत che रूपमे योग्य साहित्यिक विषय। १४. कामिनी कामायनी रचना: टुटल तारा। नारी कथाकार रस-ध्वनि: करुण + MAT! 'टुटल तारा आकांक्षा सभ बुझल। स्पिवाक: महिलाक 'तारा' (आकांक्षा) पितृसत्ता द्वारा संरचनात्मक STS 'टुटल' । १५. राज नाथ मिश्र रचना: मस्ती रस-ध्वनि: हास्य + श्रृंगार। 'मस्ती' = स्वतन्त्रता /उन्मुक्तता। बाख्तिन उत्सवी-लोकरर्मी: 'मस्ती' केर क्षण - सामाजिक पदानुक्रम निलम्बित। १६. असगर वजाहत रचना: (हिन्दी कथा) हम हिन्दू छी। प्रसिद्ध हिन्दी कथाकार रस-ध्वनि + अनुवाद-सिद्धान्त: रौद्र + करुण + हास्य। 'हम हिन्दू छी' - साम्प्रदायिक दंगा सभमे हिन्दू अस्मिता केर हताश घोषणा = जीवित रहबाक प्रवृत्ति। फानन: निर्मित साम्प्रदायिक विभाजन केर उजागर। विदेह: हिन्दी + मैथिली सह-अस्तित्व - धर्मनिरपेक्ष, बहुलवादी सम्पादकीय दृष्टि। १७. अतुलेश्वर रचना: बसात
विदेह इ४४ | | 6 रस-ध्वनि: शान्त + करुण। 'बसात' = निवास /मूल्य। 'बसात' केर Ba: स्थान + AT! तोहर बसात की अछि? = मैथिली-हिन्दी मुहावरा। निवास केर स्थान मानवीय मूल्य केर निर्धारक केर रूपमे। १८. ahs पाठक 'वियोगी' रचना: देववाणी रस-ध्वनि: भक्ति + शान्त + व्यंग्य। 'देववाणी' = दैवी वाणी - संस्कृत He 'देवभाषा' केर दावा केर प्रश्न। Sel: 'दैवी' भाषिक स्थिति = समाजशास्त्रीय रूपसँ निर्मित प्राधिकार। १९. कुमार मनोज कश्यप रचना: नोरक दू ठोप। जन्म: १९६९, सलेमपुर, मधुबनी रस-ध्वनि: करुण रस। 'नोरक दू ठोप' - पीड़ा केर यथार्थता। ध्वनि: दू ठोप बाढ़ि सँ बेसी शक्तिशाली। चेखव केर अल्पोक्ति: नियन्त्रित भावना > अभिव्यक्त भावना। २०. सतीश चन्द्र झा रचना: हमहूँ कह बुझिलैए रस-ध्वनि: शान्त + हास्य। 'हमहूँ' (हम सेहो) = समावेशी विलम्बित बोध। पहिचान केर विलम्बित 'आहा' क्षण। २१. डॉ. कैलाश कुमार मिश्र रचना: प्रकृति सुन्दरि आ चूहर मिस्त्री / TAT! जन्म: ८.०२.१९६७ रस-ध्वनि: 'कृति सुन्दरि'+ 'चूहर मिस्त्री' = वर्ग-सौन्दर्य विरोधाभास। बूर्घू che 'विभेद': उच्च-संस्कृति सुन्दरता बनाम श्रमिक-वर्ग व्यापार। 'चन्दा' - श्रृंगार + करुण। चन्दा-नामक महिला he चन्द्रमा che चक्र- उज्ज्वल / अन्धकार। २२. सत्यनारायण झा रचना: रिटायरमेंट / पलट रस-ध्वनि: 'रिटायरमेंट' (सेवानिवृत्ति) - wet + करुण। सेवानिवृत्ति पश्चात् रिक्तता। "Tere" (फिर्ती/उलटफेर) - MT + अद्भुत। हाइडेगर: सेवानिवृत्ति = परिमितता केर सामना। 'पलट' न हाइडेगरियन 'मोड़' प्रामाणिक सत्ता।
meets २३. THAT झा रचना: संगति रस-ध्वनि: PTS + शान्त। सम्बन्ध रुपक। नव्य-न्याय: 'सम्बन्ध' - दू स्वर सज्जन ASTRA पैदा करैत अछि - पूर्ण सम्बन्ध प्रतिमान। २४. कपिलेश्वर राउत रचना: TAT / तरकारी खेती / सलाह। रस-ध्वनि: 'थरथरी'- रौद्र + करुण। दलित शरीर केर भय प्रतिक्रिया। अम्बेडकर: जाति समाज शाब्दिक शारीरिक भय पैदा करैत अछि। 'तरकारी खेती' - आर्थिक आत्मनिर्भरता - अम्बेडकरी विकल्प। 'सलाह' - हास्य - सामाजिक नियन्त्रण केर रूपमे। २५. मनोज कुमार मंडल रचना: घासवाली रस-ध्वनि: करुण + वीर। 'घासवाली' (घास काटैत महिला) = आधारभूत अदृश्य श्रम। मार्क्स + स्त्रीवादी: प्रजननात्मक श्रम अगणित। 'घास' = अत्यन्त साधारण पौधा, मुदा आवश्यक। २६. अनमोल झा रचना: अबकी बेर फतंग / गामक बताह। जन्म: १९७०, TSAR, मधुबनी रस-ध्वनि: 'अबकी बेर फतंग' (Tats) - वीर + हास्य। 'अबकी बेर' = पुनरावर्ती प्रयास। 'गामक बताह' (गाम केर बताह/पागल) - हास्य + करुण। फूको: 'पागलपन' che ST प्रतिरोध - पागल सत्य देखैत अछि जे समाज देखैत नहि अछि। २७. शिव कुमार झा 'टिल्लू' रचना: लेबर पेन / कब्जियत दूर भगाउ। जन्म: ११.१२.१९७३
fate 8४४ | | 8 रस-ध्वनि: 'लेबर पेन' (प्रसव पीड़ा / श्रम पीड़ा) - करुण + वीर। श्रम (प्रसव) + श्रम (मजदूर केर काम) = दोहरा अर्थ। स्त्रीवादी: महिलाक श्रम (प्रसव) अदृश्य /अवमूल्यन। 'कब्जियत दूर भगाउ' - व्यंग्य। २८. प्रभात राय भट्ट रचना: रोटी रोजीक खोजी । नेपाल, महोत्तरी जिला रस-ध्वनि: करुण + वीर। नेपाल मधेश केर भूमिहीन मजदूर भोला केर कहानी। 'खोजी' (खोज) - जीविका लेल खोज। मार्क्स + नेपाल मधेश सन्दर्भ: जीविका seas गजेन्द्र ठाकुर: 'प्रभात राय भट्ट नव परिवेशमे बेसी aca Hed छथि।' २९. शम्भुनाथ झा 'वत्स' रचना: अतीतक घटना / सपना / कोसीक प्रलयंकारी बाढ़िम भसल एकटा लड़कीक सत्यकथा रस-ध्वनि: 'कोसीक प्रलयंकारी बाढ़िमे...' - ई सबसँ नाम शीर्षक। करुण + रौद्र। 'सत्यकथा' = साक्ष्य। कोसी बाढ़ि २००८ केर विशिष्ट त्रासदी केर संरक्षण। बेन्यामिन: अतीत केर TERI ३०. किशन कारीगर रचना: दाम-दिगर रस-ध्वनि: हास्य + व्यंग्य। 'दाम' + 'दिगर' = तुलना-खरीदारी She STA नैतिक रूपक। सभ चीज केर एक दाम + अन्यत्र अन्य दाम होइत अछि। ३१. पंकज कुमार प्रियदर्शी रचना: जीवनक अनमोल क्षण। जन्म: ०३.०२.१९८५ रस-ध्वनि: शान्त + श्रृंगार। 'अनमोल' (अनमोल) = खरीदल नहि जा सकैत। वर्ड्सवर्थ केर 'समय केर धब्बा' - क्षण जे एक जीवन & परिभाषित Hea अछि। ३२. नवीन ठाकुर रचना: मिथिला उवाच। जन्म: १५.०५.१९८४, लोहना, मधुबनी
fate 8४४ | | 9 रस-ध्वनि: वीर + शान्त। 'उवाच' (संस्कृत: कहलक) - मिथिला व्यक्तित्वरूप + सक्रियता प्रदान। विदेह SAMAR इतिहास ढाँचाक श्रद्धा: मिथिला अपन लेल बजैत अछि, पटना/दिल्ली केर माध्यमसँ नहि छानल। ३३. ओम प्रकाश झा रचना: सफल अधिकारी / डीहक जमीन / बुढ़िया मैयाँ / लोकतंत्रक माने रस-ध्वनि: हास्य+व्यंग्य / करुण+वीर / वात्सल्य+करुण / व्यंग्य+रौद्र। ग्राम्शी केर लोकतन्त्र समीक्षा: 'लोकतंत्रक माने' = वास्तवमे राज्य पर के नियन्त्रण करैत अछि? चारि कथा: संस्थागत + भूमि + पारिवारिक + राजनैतिक स्पेक्ट्रम । ३४. अमित मिश्र रचना: प्रेम नै जहर है रस-ध्वनि: रौद्र + करुण। 'प्रेम नै जहर' जे प्रेम जेना देखाइत अछि से विखाह अछि। सुसन ग्रिफिन: प्रेम-केर-रूपमे-नियन्त्रण केर स्त्रीवादी विश्लेषण। घरेलू हिंसा उप-पाठ। ३५. राजदेव मंडल रचना: इलेक्शनक भूत रस-ध्वनि: हास्य + रौद्र। 'इलेक्शनक भूत' = चुनाव केर STA भूत-प्रेत। चुनाव केर अनुष्ठानिक, भूत-जकाँ गुण। ग्राम्शी: चुनाव केर रूपमे वर्चस्ववादी अनुष्ठान। ३६. गजेन्द्र ठाकुर रचना: दिल्ली। विदेह सम्पादक रस-ध्वनि: करुण + व्यंग्य। 'दिल्ली' = सत्ता केन्द्र केर रूपमे विस्थापित करैत स्थान। SE: दिल्ली केर रूपमे भारत केर प्रतीकात्मक पूँजी आ एहि केर भीतर मैथिलीकेर हाशियाकृत स्थिति। सम्पादक-केर-रूपमे-लेखक: अपन परियोजनामे सृजनात्मक सहभागिता। ३७. जगदीश प्रसाद मंडल रचना: सूदि भरना / पड़ाइन / न्याय चाही / कर्ज। जन्म: ५ जुलाई १९४७ | परिचय: कथा संग्रह: 'गामक जिनगी', 'अग्नि सरोजनी' |
fate ४४४| | 0 रस-ध्वनि चारि कथा: 'सूदि भरना' - करुण+रौद्र। सूदखोरी /ब्याज-व्यवस्था केर विध्वंसकारी समीक्षा। 'पड़ाइन' - करुण। पलायन। "न्याय चाही' - रौद्र+वीर। कहियो प्राप्त नहि। 'कर्ज' (ऋण) - करुण। ऋण-बन्धन। मार्क्स / अम्बेडकर दलित ग्रामीण मानचित्रण: मार्क्स केर आदिम संचय + अम्बेडकर: सूदखोरी = प्राथमिक दलित शोषण शैली। 'सूदि भरना' + 'कर्ज' = आर्थिक हिंसा केर दू टा चेहरा। 'न्याय चाही' - दलित न्याय केर माँग स्थायी STS विलम्बित। मंडल He ४ कथा = समग्र दलित ग्रामीण सामाजिक मानचित्र: आर्थिक + सामाजिक + कानूनी + मनोवैज्ञानिक | नव्य-न्याय: गंगेशक 'न्याय': एहिठाम न्याय = कानूनी / सामाजिक न्याय। तार्किक दावा: ''ई स्थिति अन्यायपूर्ण अछि' - ई एक ज्ञान-मीमांसीय दृढ़ोक्ति जे प्रमाण माँगैत अछि। ३८. आशीष अनचिन्हार रचना: काटल कथा। रस-ध्वनि: अद्भुत + रौद्र। 'काटल HA! आत्म-कथा। कोनो सेन्सर्ड कहानी केर कहानी लिखनाइ। Hart: सेन्सरशिप = विमर्शमे सत्ता केर हस्तक्षेप। विदेह: सेन्सरशिप- मुक्त स्थान केर महत्व अभिव्यक्त। ३९. विनीत उत्पल रचना: बेसिक इन्स्टिंक्ट। विदेह अनुवाद विभाग सम्पादक रस-ध्वनि: श्रृंगार + अद्भुत। 'बेसिक इन्स्टिंक्ट' - अड्ग्रेजी शीर्षक मैथिलीमे! हलिउड चलचित्र पुनर्सन्दर्भित। फ्रायड केर 'प्रवृत्ति': मूल प्रवृत्ति > फ्रायडियन 'इद्' | पाश्चात्य चलचित्र + मैथिली साहित्य = सांस्कृतिक संकरता। ४०. कुमार भास्कर रचना: लछमिनीया । संकलनक अन्तिम रचना रस-ध्वनि: वात्सल्य + करुण। 'लछमिनीया' देवी केर साधारण महिला नाम। ध्वनि: समृद्धि देवी (लक्ष्मी) आ ओकर नाम पर रखल गरीब महिलाक बीचक अन्तर। लोक-स्त्रीवादी: साधारण महिलाकैँ देवी केर नाम देबाइ = आकांक्षा बनाम वास्तविकता केर अन्तर। उपसंहार: सदेह ६ क समग्र महत्व
fate eee | | 2 सदेह ६ मैथिली लघुकथा - ४० लेखक (३९ + गजेन्द्र ठाकुर) He योगदान S मैथिली लघुकथाक एक सम्पूर्ण परिदृश्य। विशेष: मीना झाक वर्जित चिकित्सीय विषय; असगर वजाहत (हिन्दी) साम्प्रदायिक हिंसा; वसंत भगवंत सावंत (कोंकणी) अन्तर-भाषिक; विनीत उत्पलक अड्ग्रेजी शीर्षक; जगदीश प्रसाद मंडलक ४ समग्र दलित ग्रामीण कथा। चारि ढाँचा केर संश्लेषण: रस सिद्धान्त लघुकथामे विशिष्ट रस। पाश्चात्य सिद्धान्त (फ्रायड, फूको, ग्राम्शी, फानन, बूर्यू, स्पिवाक, बाख्तिन, मार्क्स) एक-एक कथाक सामाजिक प्रक्रिया उजागर करैत अछि। नव्य-न्याय कथाक ज्ञान-मीमांसीय दावा सभक परीक्षण करैत अछि। विदेह GARR इतिहास ढाँचा: दलित, महिला, नेपाल, कोंकणी, हिन्दी, पागल, प्रवासी सब एक लोकतान्त्रिक मान्य-परम्परागत स्थान। -Gajendra Thakur, editor, Videha [be part of Videha www.videha.co.in JOIN VIDEHA WHATSAPP CHANNEL JOIN VIDEHA ARATTAI CHANNEL ] -गजेन्द्र ठाकुर, सम्पादक विदेह, whatsapp/ Arattai no +9956096072। HTTP://VIDEHA.CO.IN/ ISSN 2229-547X VIDEHA अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ।
faze ४४४] | 22 १.२.अंक ४४३ पर टिप्पणी fade ४४२ म अंक पर पाठकीय मन्तव्य प्रणव कुमार झा आदरणीय सम्पादक मंडल, अंक 443 में राम शंकर झा मैथिल के कविता डबरा नीक लागल। एकर विषयवस्तु आ प्रस्तुति सजगता, पर्यावरण संतुलन आ संस्कृति से जुड़ल अछि। यद्यपि वर्तमान में शेष बचल डबरा पोखैर नदी आदि पर इन अऑर्गेनिक केमिकल द्वारा विशाक्त हेबाक अलग खतरा सेहो छैक। डॉ. योगानन्द झाके लेख अभिनव पद्यविधा : इतिहास-काव्य इनफार्मेटिव छैक। आचार्य रामानंद मंडल के लघु व्यंग वर्तमान चोर संत कबीर उचित व्यंग लागल, ख़ास क वर्तमान के राम मंदिर चंदा चोरी प्रकरण के सन्दर्भ में। प्रीति कुमारी के विषय नीक Sa मुदा ऐ तरहक विषय पर लिखबाक़ लेल गहन अध्ययन क के लिखती त बेहतर लेख लिखल जा सकय छैक। रामकृष्ण परार्थी के कथा के विषयवस्तु ठीक SH मुदा हमर एकटा अनुभव ई रहल अछि जे जमाना बदलि tect छल Fal ई बदलाव आब किछु समय से रिवर्स भ रहल छैक। ग्रामीण परिवेश के नै कहब मुदा महानगरीय परिवेश में नव क्लास डिसक्रिमिनशन देखय लेल अक्सर भेटय छैक जेकर मूल में पुरान जातीय व्यवस्था से बेसी पैसा आ पावर बेस छैक। हाल फिलहाल में एकटा दिल्ली पुलिस कर्मी द्वारा दू टा लड़का के बिहारी हेबाक लेल गोली मारबाक़ घटना होय या गुडगाँव के घटना जै में एकटा गरीब यादव जी के अपन मैनेजर से क्लास डिसक्रिमिनशन के कारण एहन प्रतरना भेटल जे ओ आत्महत्या लेल मजबूर भेल। ऐ तरहक क्लास डिसक्रिमिनशन के हम सेहो फेस केने छी। face के वर्तमान अंक खूब रास लेख कथा कविता आदि से भरल रहल जै में विषयके विविधता सेहो खूब देखल। संगहि विदेह नव नव टूल से सेहो लैश भ रहल अछि जेकरा लेल विदेह टीम के बधाई। -प्रणव कुमार, अनुभाग अधिकारी, राष्ट्रीय परी क्षा बोर्ड, नई दिल्ली अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ।
faze ४४४] | 23 गद्य Prose २.१. हितनाथ झा-मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान-२३ २.२. कल्पना झा- मैथिली साहित्यमे श्रीकान्त ठाकुर 'विद्यालंकार Ud हुनक परिवारक योगदान-४ २.३. सुरेन्द्र लाभ- तीन गोट कनिका नाटक [तारीख पर तारीख/ फ्री सलाह/ पहिचान] २.४. लाल देव कामत- डॉ०( श्रीमती) लालपरी देवी : एक विदुषी २.५. प्रमोद झा 'गोकुल'- डोलबैत रहू (लघु कथा) २.६. लाल देव कामत- स्वस्थ आयु लेल योग २.७. आचार्य रामानंद मंडल- धनाकर ठाकुर संवाद [सन्दर्भ -मिथिला राज्य आ महाकवि विद्यापति] २.८. राजदेव मंडल- प्रती क्षाक पीड़ा २.९. लाल देव कामत- हमर छात्र राजनीतिक: एक क्षण २.१०. प्रीति कुमारी- राम श्रेष्ठ दिवाना: एक व्यक्तित्व २.११. संतोष कुमार राय 'बटोही'- धारावाहिक डायरी 'लव यू टू' २.१२. प्रीति कुमारी- डॉ (प्रो.) विजयेन्द्र झा : एक व्यक्तित्व २.१३. मिथिलाक नाच पाटी- समानान्तर नाच-नाट्य परम्परा २.१४. गजेन्द्र ठाकुर- गोहि सभक बीच जल समाधि (मैथिलीक airs धरिक Gus Ga उपन्यास )- मैथिली कादम्बरीक अंश २.१५. गजेन्द्र ठाकुर-आनन्दमे AT करैबला प्रहसन [पत्लव नरेश श्री महेन्द्रविक्रम वर्मा प्रथम केर मूल संस्कृत- मत्तविलास प्रहसनम् che मैथिली अनुवाद- गजेन्द्र ठाकुर] २.१६. गजेन्द्र ठाकुर- मैथिली नाट्यमंच/ नाटक लेल एकटा समीक्षा सिद्धान्त (भाग-४) सन्दर्भ- कुणाल-कृत बिदापत
faze ४४४ | | i4 २.१. हितनाथ झा-मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान-२३ \ कक अं हितनाथ झा (मैथिलीमे ग्रामगाधा विधाकँँ नव जीवन देनिहार, पाठकीय विधाक अगुआ। संपर्क-9430743070) वियोगिनी श्यामसुन्दर झा क्वैलख भागलपुर जिलान्तर्गत सुपौल वो मधेपुरा सबडिवीजनक अन्दर दूइ ग्राम भद्रपूर वो रुद्रपूर नामे विख्यात अछि। दूनू ग्राम पच्चीस वर्षपूर्व अतिशय गुणवान छल, एहूसँ बेसी एहि दुनू ग्रामपर लक्ष्मीक पूर्णरूपेण कृपा Sal प्राकृतिक सुन्दरता कूट-कूट क भरल छल।परन्तु ई सभ रहलहु Gal विद्यारूपी बीज अंकुरित भेले टा wer yor रुपेण विकसित नहि भेल छल।उक्त दुनू ग्राम अपना-अपना अंशमे उपर्य्युपरि Bel एहि दूनू ग्रामक जनसमूह प्राचीन सभ्यताक अनुयायी छलाह। पाश्चात्य देशक वा नवीन युगक आवोहवा नहि लागल Sere युवक समुदाय काँ उत्कट अभिलाषा भेल जे नवीन BTA प्रवेश कय पाश्चात्य देशक गुण ग्रहण करी ओ अवगुण काँ त्यागि दी। परन्तु वयोवृद्ध लोकनिक घोर विरोध युवक लोकनि एहि कार्य्यमे सफलीभूत ae भय सकलाह। युवक मण्डली संध्या काल ग्रामक बाहर एक पोखरिक घाटपर बैसल सब अपना-अपना हृदयमे एहि गूढ़ समस्या काँ विचारैत छलाह। अकस्मात ओहि निर्जन स्थानमे युवक मण्डलीकँँ संबोधन करैत आकाशवाणी भेल, युवक लोकनि साकांक्ष भेलाह
faze ४४४ | | 5 - ” युवक लोकनि | धैर्य धयने रहू आ दस ade मध्य एहि दूनू ग्राममे एक विशेष लीला हेतैक तखन Fel लोकनि काँ उठवाक अवसर होयत।वो वयोवृद्ध लोकनिक मूड़ी खसत।" उक्त भद्रपूर ग्राम प्राय: दू सै घरक वस्ती जाहिमे सत्तरि अस्सी घर मैथिल ब्राह्मणक।और शेष निम्न वर्णक। ओहि मैथिल मण्डलीमे पंजीबद्ध लोक नहि few वंशक लोक शेष जयवार ब्राह्मण, ओही जयवार ब्राह्मणक मध्य चन्द्रमणि झा नामक लक्ष्मीक दुलरुआ छलाह परन्तु " कारी अक्षर महीस aerate” एहि कहावतकें चरितार्थ करैत छलाह। गाममे हिनक पूर्ण धाक छल ।छोटका सँ बड़का धरि सभ हिनका शासन सँ शासित छल।कारण | सेर वा दू टाकाक वास्ते हिनकहि दरबाजापर जाय पड़ैत छलैक।तैं हेतु ककरो मूड़ी उठा क | बजबाक सामर्थ्य नही। दू चारि व्यक्ति एहनो छलाह जनिका हिनक प्रयोजन नहि। परन्तु जनसमूहक बीच की कय सकैछ ? एहि ग्राममे पूर्वसँ परिपाटी छल जे कन्यादनमे कन्या जावत पूर्ण वयस्का अर्थात सोलह-सत्रह वर्षक ate होथि तावत कन्यादान नहि करी। "अष्ट वर्षात भवेत गौरी" एहि मनु वाक्यक पूर्ण विरोधी छलाह।वो वरक गुण एतवै I देखैत छलाह, HHS कम वर देखैत सुन्दर होथि। अवस्था पन्द्रह-सोलह रहनि।विद्याक प्रयोजन नहि। परन्तु बखारी धरि दरबज्जापर रहबे करनि। जाति-पाँजिमे श्रेष्ठ होनि वा समानो क्षति नहि। परन्तु Ug सव सँ बेसी ध्यान दैत जाइत छलाह वर यदि ag विवाह कयने रहथि त सर्वोत्तम नहि त दू विवाह अवश्य रहनि कारण एकर एतवै छल जे वर विवाह कय अपन घर जाथि। वो दाइ of राखि भनसीया वा खबासिनीक कार्य्य करबियनि। धन्य ! धन्य मैथिल समाज। एहन स्थितिमे मिथिला देश वा मैथिल जाति रसातल जाथि त कोन आश्चर्य | (2) चन्द्रमणि बाबूक परिवार बृहत नहि। केवल एक स्त्री, एक बालक, एक HAM! दुनू भाइ बहीन देखैत परम् सुन्दर बालकक नाम हीरामणि वो कन्याक नाम सावित्री ।चन्द्रमणि बाबू बालककें हीरा कहि सम्बोधित करैत छलाह। हुनक स्त्री बेटी काँ दुलारसँ सविता कहि सम्बोधित Hea छलीह।टोल पडोसक स्त्री सविता कहि सोर करैत छलथिन्ह। फाल्गुन मास इजोरिया राति आकाशमे मेघक दरश AAS SAS समीर बहि रहल Ge चन्द्रमा अपन अपूर्व शीतल जल संँ एहि भूमंडल काँ आलोकित Ha रहल छलाह।ऋतुराजक आगमन देखि ग्रामवृक्ष अपन जीर्ण-शीर्ण कलेवर काँ बदलि अपन-अपन सखा सभ काँ नव Tecra ओ फूल Heres सुसज्जित कय ऋतुराजक स्वागतार्थ उपस्थित भेल Gels, WAL अपन प्रेमिकाक संग गान वाद्य लय अपना स्वामी af रिझावय लगलाह।कोइली अपन सखी सभ काँ एहि ae नाचैत गाबैत आनन्द मजा लुटैत
faze ४४४ | | i6 देखि इहो कुहकय लगलीह। ई अपूर्व दृश्य देखि सुरराज वा सुरराज सभाक अप्सरा लज्जित भय मूड़ी गोड़ि ces सुन्दर राति टोलक सब लोक चन्द्रमणि बाबूक दालान पर अकड़ि HA बैसल छल। एहि सभामे नाना प्रकारक गप भय रहल छल। क्यो गाँधी युगक आलोचना cha रहल छलाह F क्यो ब्रिटिश सरकारक गुणानुवाद HI रहल छलाह, क्यो पतित पावन Ya नाथ काँ नचारी गावि रिझा रहल छलाह तँ क्यो फागु गाबि कामिनीक हृदयमे कामरूपी वाण मारि रहल छलाह।कहबाक तात्पर्य जे सभ एहि फागुन मासक बहार लूटि रहल छलाह। संसारक प्राणी मात्र आनन्द कय रहल छल केवल दुखी छलीह सविता। कारण सविता बाल्यावस्थाक क्रीड़ाकँ तिलाज्जलि दय युवावस्थामे पदार्पण कयने छलीह। परन्तु विवाह नहि भेलासँ अतिखिन्न भय गेल छलीह, परन्तु हिनका माय-बाप काँ एकर एकोरत्ती धंधा-फिकीर नहि। एहन आनन्दक समयमे चन्द्रमणिबाबूक खवासिनी अपन कर्कश स्वरसँ सभा के भंग करैत सोर कयलक- " बाबू ठाँव भय Ae" चन्द्रमणिबाबू- की थिकौ ? खबासिनी- बाबू ठाँव भय गेल ! WE बेश, बुझल कनेक जल दय जो, लघुशंका करब। खबासिनी at अयबामे विलम्ब देखि चन्द्रमणिबाबू सोर कयल- " मंगली माय जल दय जो" । Wega" अबैत छी" कहि मंगली माय लोटामे जल लय चन्द्रमणि बाबू काँ देलकैन। चन्द्रमणि बाबू काँ भोजन करबा लय जाइत देखि जे केओ चन्द्रमणिबाबूक दालानपर बैसल छलाह सब अपना-अपना घरक रास्ता लेल।एम्हर चन्द्रमणि बाबू पैर-हाथ काँ जलसंँ प्रच्छालन कय पीढ़ी पर बैसलाह।सविताक माय थारी लय चिन्तित मते आगूमे राखि देल। चन्द्रमणिबाबू भोजन प्रारम्भ कयल। प्रथमहि ग्रासमे कहि उठलधिन्ह-राम! राम | एहिना भानस करैत छी।छी: | दालिमे एकदम नोनहि नोन तकरहु जितलक हरदि। ताहूसँँ चिकन भेल तरकारी। सबटा आलू केँ डाहि देलियैक। ई शब्दक बौछारसँ सविताक माइक हृदय काँपि गेल। डेराइत-डेराइत बजलीह - भानस करबाक काल राधाक माय आयल छलीह।हुनके आदर-सत्कार करबामे विलम्ब भेल of सभ वस्तु दूरि भय गेल। चन्द- के आयल छलीह ? स.माय- राधाक माय। चन्द्र- कत' आयल Seite ?
‘fate eee | | 7 स.मा.- औती कत', टहल बुल, अपना इष्ट-अपेक्षित लोकक खोज पुछारी aes | अहाँ पुरुष लोकनि ST टहलबामे कौखन कोन क्षति नहि। परन्तु स्त्रीगण यदि अपना Se अपेक्षितक आँगन कुशालादि Tas लेल गेल कि लगले कतय गेलीह कतय अयलीह, यैह प्रश्न उठैछ | we तैं नहि कहल। हमरा भेल जे कोनो कार्य्य सँ आयल छलीह। स.मा : कहैत छलीह जे एहि बेर शुद्ध छैक। सविताक विवाह करा दियौक। आब विवाह करबै योग्य भय गेल। परंतु सविताक बापकें एकोरत्ती धन्धा-फिकीर नहि छैन्हि। शुद्ध बितल जाइत छैक।"सविताक विवाह जखन हयत TSM बुझब जे Fer" ई बात सविताक माय अपना दिससंँ जोड़ि कय बजलीह। Wa अहाँ लोकनिकें विवाह इत्यादि बाड़ी महक गेन्हारी साग बुझि पड़ैछ। साँझ खन गेलौं साग खोटि लेल लोहियामे द' देलियैक तरकारी तैयार भय गेल। ई कन्यादान थिकैक। एहिमे वर ताकय ओ विचारय पड़ैछ। बैसाखमे सभा हेतैक। कतहु हेबे करतैक। स. मा. :- घर कथा भय जाइत तँ नीक छल | चन्द्र- घर कथा कोना हो। पञ्जीकार गाम गेल छथि। घटक सेहो एखन गाम नहि छथि। बिन घरक पञ्जीकारक fran कार्य्य पाँचमे-छठम ठाम सम्बन्ध हयबाक सम्भावना। चैत धरि ओ लोकनि अयताह , बैसाखमे Hag हैबे करतैक। स. मा. :- देखब, सविता H जाहिसँ घर वर नीक होइन से कय देबनि, एकेटा बेटी छथि दू AR टा रहितथि ct कियैक ने। चन्द्र:- हम की कय सकै छी | स.मा. Se देखब He चम्पाक बाप जकाँ तेहन वर नहि आनब।विवाह कय जे जाथि से फेर घुरि कय नहि आबथि। देखियौक चम्पाक वर विवाह की जे गेलाह से अद्यपर्यन्त नहि अयलाह। द्विरिगमनक कोन कथा कोनो खोजो-पुछारी नहि कयल। चम्पाक भाउज चम्पा पर सतत हुकुम फरमबैत छथिन्ह। हुनक लक्षण केहन जेना हुनक बाप द्विरिगमनमे खबासिनी देने रहथिन्ह। बेचारी चम्पा बहुआसीनक आज्ञाकारिणी जे हुनका मूँह सँ खसल से तुरत मौजूद। धन्य चम्पा धन्य I! चन्द्र :- चम्पा की करती | स्वामी विवाह कय जे गेल fore से घुरि कय अयबो नहि कयलथिन्ह। तखन वो बेचारी की करय | कोनहु तरहे मानापमान उठाय व्यंग्य वाक्यक बौछार सुनि सहि एहि पापी पेट काँ भरैछ। बहुत स्त्रीगण अपना माय बाप तथा स्वामियोक तिरस्कार कय मुसलमानक बहकौला सँ वेश्या
‘fate eee | | 8 वा मुसलमानिनी बनि नारकीय जीवन बितबैछ । ताहिसँ सर्वोत्तम यैह थीक अपना भाइ-भाउजक कथा मानि जीवन यापन करैछ। स. मा. - सैह देखब HE ।ओ...ह..और न...हि...एतबा कहैत कण्ठ अवरुद्ध भय गेलनि। Tas अश्रु मन्दाकिनी बहि चलल। आगू ate fore बाजि सकलीह। चन्द्र - जेहन भाग्य विधाता दयने eaters! हमर कोन साध्य ! Uda कहि चन्द्रमणिबाबू मूँह-हाथ धोय पान-सुपारी जर्दा काँ गाल तर दाबि दलानपर जाय एहि बातक घोर चिन्ता करैत पड़ि रहलाह। (क्रमशः) (प्रभात : a8-l, अंक-4, अप्रैल-933) ईक्वैलख(कोइलख)क श्यामसुंदर झाक 'वियोगिनी' धारावाहिक श्रृंखलामे पहिल अंश अप्रैल-933क अंकमे प्रकाशित भेल छल, जाहिमे एक आ दू छल। तेसर लेल आगाँक अंक जे उपलब्ध अछि, मइ,जून 933 ओहिमे नहि अछि, जुलाइ अंक अनुपलब्ध अछि, प्राय: ओही अंकमे प्रकाशित Ter हेतैक। अगस्त-[933 अंक उपलब्ध अछि, ओहिमे aA खण्ड अछि। Ff सम्पूर्ण नहि अछि, किन्तु एहि रचनाक ऐतिहासिक महत्वकें देखैत आ पढ़लाक बाद सम्पूर्ण लागत, ओहि समयक सामाजिक स्थितिक वर्णन आँखिक सोझाँ स्पष्ट झलकि जायत। )) - हितनाथ झा (4) भारत वर्षक ऋतुमे तीन ऋतु प्रधान अछि जाहिमे ग्रीष्म ऋतु , ओ एक प्रधान ऋतु अछि।ग्रीष्म ऋतुक प्रधान मास बैसाख थिक।एक दिन उपरोक्त मासमे दिवाकर अपन उग्र ज्योति सँ एहि भूमंडल काँ दग्ध कय रहल छलाह।गर्मीक ज्वालासंँ मनुष्य,पशुपक्षी कहबाक तात्पर्य जे प्राणी मात्र अपन-अपन विश्रामक स्थानमे विश्राम कय रहल Ser Fal अपन उदारताक परिचय देबा ot दुपहरक समयमे धाकल पथिक काँ अपन शीतल छाया प्रदान Ha रहल छल। डिस्ट्रिक्ट बोर्ड सड़कक काते-काते जे SAR छल ओ शीतल मधुर जल प्रदान कय रहल छल ताहूसँँ जीतल दानी मारवाड़ी ओ धनी लोकनिक पनिशाला। धन्य हमर सनातन धर्म। तैं एतेक ओजस्वी प्रभावशाली उदार अछि। नवीन जतेक धर्म भेल सब एहि धर्ममे एक-एक धक्का लगौलक। वर्तमानहु समयमे एक धक्का लागल अछि तथापि ई सनातन धर्म अपन पूर्वक नम्रता काँ चरितार्थ करैत MATH सहैत ज्वलन्त यशस्वी पताका काँ फहराय रहल अछि। अमेरिका वा अन्य पाश्चात्य देशमे दान देव् वा दान लेव परम घृणित बुझल जाइछ।परन्तु हमरा
fate ४४४| | 29 देशमे एकर बड़ महत्व छैक। हमरा देश काँ उदार होयबाक यैह मुख्य कारण थीक। दान वस्तु धार्मिक ged, सामाजिक gee, राजनैतिक दृष्टिसँ उत्तम थिक। यैह कारण थिक जे हमरा देशमे प्रति दिन किछु ने fag दान होइत अछि। उपरोक्त समयमे एक व्यक्ति खुटिया मिरजई, माथ पर कोढ़िलावाला पाग पहिरने कान्ध पर दोपटा नेने पैर मे ठीकरी पदत्रान पहिरने शिवहरक सड़क जे भागलपुर गेल छैक, ओहि सड़कपर खूब जल्दी-जल्दी पैर मारने चल जाइत छलाह। शुद्धक समय छल, तैं एतेक चालिमे हड़बड़ी छल। अकस्मात एक इनार लग बैसल पाँच-सात व्यक्ति काँ देखि आगन्तुक व्यक्ति काँ देखि आगंतुक व्यक्ति अटकि गेलाह वो बाजि उठलाह- के feng ? आरे घटक। घटक देखितहि ठाढ़ भय नमस्कार | कुशल ? एकर प्रत्युत्तरमे आगन्तुक व्यक्ति नमस्कार पात कय पुछलथिन्ह- घटक | चलब नहि ? घटक - जेबे करब, एतेक हड़बड़ी कियैक ? आगन्तुक - चारि दिन सभा भेना भय गेलैक। घटक - अपने Sat सभे जायब। हमरा तँ भेल जे सुपौल कोनो रजिस्ट्री Hee लै जा रहल छी। आगन्तुक- St TS छी ? हमरा तँ एहि बेर सभा जयबाक नहि छल कारण जे एखन HAM करबाक योग्य नहि अछि, 4 मे वर्ष थिकैक। हमरा इच्छा छल परुका साल कार्य करितौ। हमरा आँगनक हाल a बुझले अछि। टीक उजाड़ै पर तैयार।तखन की करू ? Vel टीक बचैबा लय सभा जा रहल SH, यदि युगलत कथा हैत a करब नहि तँ छोड़ि देब कोनो हड़बड़ी ale अछि। घटक- (मनहि मन) कन्याक चौदहम वर्ष और कहैत छथि कोनो हड़बड़ी नहि(वाह रे0रे कलियुग) प्रकाशमे बेस,जल पीबि लिअ, रातिमे सुपौल रहि प्रातक गाड़ी सँ सभा जायब Se नीक कारण जे रातिक सहरसा स्टेशन पर उतरब। कत रहब ? बड़ तकलीफ हयत। आगन्तुक- वेश, चलू संगहि चलब। घटक- आदमी नहि अछि ? आ कि पाछूसँ अबैछ। आगन्तुक- हैँ, अबैत अछि। मनचनमाकें ale farsa थिकियैक! भारी कोढ़ियाठ अछि। टके डेग दैत अछि। चलैत कोना अछि जेना कोबरा महक वर। घटक- अहूँ कोढ़ियाठे आदमी ल 'क' चलैत छी। सभामे पनिगर आदमीक प्रयोजन हैत छैक। आकि ओहूठाम रोपनिये करैब। आगन्तुक- वेश आब' दियौक।
faze ४४४| | 20 पाठक पाठिका एहि आगन्तुकसँ परिचित छथि परन्तु नामकरण नहि भेलासँ अकचकयबाक सम्भावना।मनचनमा खबासकेँ अयला पर जे सात-आठ व्यक्ति वैसल Sele से a सुपौल स्टेशन दिस विदा भेलाह। ओहि इनार सँ स्टेशन प्रायः दू कोस छल। घटकक भेष-भूषा अपूर्वे छल।एक eT 'लटपटही पाग कान्ध पर फाटल दोपटा वो अंगपोछा। एक हाथमे फराठी Sel झुमकी लागल वो एक Baa तम्बाकुक झोरी Set प्राय: अढ़ाइ तीन हाथ लम्बा डेढ़-दू हाथ चौड़ा अनुमानसंँ प्रायः पाठक लोकनि काँ बुझि पड़ैत जे गोटेक छोटका मसनद के खोल रहय। एहू aH अपूर्व छल नोसिदानी।प्राय: ओहिमे आध सेर छह कनमा नोसि अटैत छलैक। घटक नोसि लेबामे ई आइ. आर. (इंडियन रेलवे) कम्पनीक इंजिन काँ छकबैत छलाह। नाकक दुनू पूड़ामे एक बेरमे प्रायः आध पाव नोसि ठूसि दैत छलथिन्ह। पाठक वो पाठिका विचारक विषय थिक यदि हम वा हमर समाज वा हमर देश एहि तरहक निशाखोर हो, तखन हमरा देशक सन्तान धनहीन बुद्धिहीन लम्पट दुराचारी व्यभिचारी हो तँ कोन आश्चर्य ? वाह रे नशा | यदि अहाँक ताण्डव नृत्य और किछु दिन एहि मिथिलामे भेल तँ मिथिलाक नामो निशान नहि रहत। बलिहारी एहि नशाक । धन्य !धन्य !! ई नशा !!! ...... (प्रभात , वर्ष: , अंक-8, अगस्त933) उपर्युक्त आलेखमे एकहि TST बालविवाहक प्रचलनक तत्कालीन समाजक कुप्रथाक बहुत जीवन्त आ भयावह वृतान्त अछि। नशा Sars सामाजिक दुर्व्यवस्था Sel देखल जा AAS | एहि आलेखमे ई स्पष्ट कहल गेल अछि जे जँ ई स्थिति रहतैक तँ मिथिलाक एक दिन नामोनिशान तक नहि रहतैक। एहन आलेख सभ धारावाहिक रूपमे अनेक अछि, किन्तु सभ अंकक उपलब्धता Ale रहलाक कारण खण्डित अछि, तथापि जतेक सम्भव भ' सकत से पाठकक सोझाँ प्रस्तुत करैत रहब। संपादकीय सूचना-एहि सिरीजक पुरान क्रम एहि लिंकपर जा cas पढ़ि सकैत छी- मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान- मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान-2 मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान-3 मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान-4
विदेह eee | | 22 मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान-5 मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान-6 मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान-7 मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान-8 मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान-9 मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान-0 मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान-7. मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान-2 मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान-3 मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान-4 मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान-5 मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान-6 मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान-7 मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान-8 मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान-9 मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान-20 मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान-2 मैथिली साहित्यमे तारानाथ झा एवं हुनक परिवारक योगदान-22 अपन Hae editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ।
बिदेह ४४४ | | 22 २.२. कल्पना झा- मैथिली साहित्यमे श्रीकान्त ठाकुर 'विद्यालंकार'एवं हुनक परिवारक योगदान-४ कल्पनाझा मैथिली साहित्यमे sara ठाकुर 'विद्यालंकार 'एवं हुनक परिवारक योगदान-४ कल्पना झा मैथिली साहित्यमे श्रीकान्त ठाकुर 'विद्यालंकार'एवं हुनक परिवारक योगदान-4. माँ मैथीलीक सुच्चा सेवक /उन्नायक 'विद्यालंकार' मातृभाषाक सुच्चा सेवक श्रीकान्त ठाकुर 'विद्यालंकार' मैथिली साहित्यक प्रति सेहो अत्यधिक अनुराग राखैत छलाह। नहि जानि किएक किछु लोक हुनका मात्र 'राष्ट्रभाषा हिन्दीक अनन्य पुजारी 'क रूप मे स्थापित cs ear लेल बिर्त भेल सन बुझा रहल छथि। ई सत्य अछि जे ओ हिन्दी मे देखनुक काज बेसी केलनि। कारण, ओ पत्रकारिता सँ जुड़ल छलाह। आ से पत्रकारिता ओ हिन्दी मे केलनि। बीस WG, अक्टूबर 948 Hg 968 धरि ओ हिन्दी दैनिक 'आर्यावर्त' Fase रहलाह। प्रधान सम्पादक रूप मे। हुनकर समय मे आर्यावर्त दैनिक पत्रक प्रतिष्ठा आ प्रसार SLA अपार बढ़ोतरी भेल। सम्पादकीय परम्परा SH AMT बढ़ौलनि। जहिना पत्रकारिता आ 'विद्यालंकार' पर्यायवाची शब्द सन बनि
fate ४४४| | 23 गेल छल, तहिना 'आर्यावर्त' मतलब 'विद्यालंकार' एहने सन स्थिति बनि गेल छलए। "आर्यावर्तक इतिहास श्रीकान्त ठाकुर 'विद्यालंकार'क जीवन-गाथाक इतिहास थिक" ई कहब छनि सुरेश्वर झाक। काज ओ केलनि हिन्दीए मे, माने पत्रकार रूप मे जतेक-जे केलनि से हिन्दीए मे केलनि आ जैं हिन्दी मे केलनि तैं ओ जे यदा-कदा मैथिली भाषा ओ साहित्य तथा मिथिलाक सांस्कृतिक उत्थानक लेल आयर्विर्तक माध्यम सँ मैथिली-भाषीक भावना Sb मुखरित करबाक प्रयास करैत रहलाह, से बेसी लोक धरि पहुँचल। मतलब बेसी लोक पर प्रभाव पड़लैक, ओहि बात सभक। कहबाक माने हिन्दी ओ मे काज करैत ओ मैथिलीक उपकार करबाक प्रयास करैत रहलाह। यथासाध्य कएबो केलनि। मुदा मात्र 'माध्यम' हिन्दी पर नजरि गड़ौने, लोक हुनकर 'हिन्दीक अनन्य पुजारी' बला छवि मात्र स्वीकार्य मानथि, से अनुचित होएत। "मैथिली साहित्य मे श्रीकान्त ठाकुर 'विद्यालंकार' एवं हुनक परिवारक योगदान" पर लिखबाक क्रम मे कइअक गोटा सँ गप्प Hed हुनका विषय मे जानबाक प्रयास Hea रहलहूँ अछि। SAT TC गप्प मे 'विद्यालंकार'क व्यक्तित्वक ओहन पक्ष सभ सेहो उजागर होइत जा रहल अछि, जे कोनो पोथी मे पढ़ल नहि छलए हमरा। आदरणीय भीमनाथ झा सँ गप्प करैत 'विद्यालंकार'क मैथिली भाषाक प्रति प्रेम आ साहित्य-प्रेमक संग मैथिली साहित्यकार लोकनिक प्रति सम्मान-भाव सँ सेहो परिचित भेलहूँ। भीमनाथ झा एकटा संस्मरणात्मक प्रसंग बतौलनि, 'विद्यालंकार' जी हरेक साल अगहन मास मे, धनकटनी समय मे, Te दसे दिन लेल, गाम (कोइलख) AT आबैत छलाह। आ हरेक बेर गामक यात्रा मे, हुनक उपस्थिति मे कोइलखक संग आस-पड़ोसक गाम सँ Set नबतुरिया सहित सभ बएसक लेखक-कवि सभक जुटान करबाक उद्देश्य सँ कोनो कवि-गोष्ठीक आयोजन निश्चित रूप a होइत छल कोइलखक "उमापति पुस्तकालय" पर। जे पुस्तकालय कवि आ नाटककार उमापति उपाध्यायक नाम पर कोइलख गाम मे 4 अक्टूबर 932 ई. मे स्थापित भेल छलए। आ ई पुस्तकालय अद्यतन जीवन्त अछि, एहन जनतब भेटि रहल अछि हमरा। एहि पुस्तकालय लेल 'विद्यालंकार'क सिनेहक बानगी देखबैत भीमनाथ झा बतौलनि जे जा धरि 'विद्यालंकार' आयर्वर्त सँ जुड़ल रहलाह, सभ दिन एक प्रति "आयर्विर्त” डाक सँ आबैत रहल उमापति पुस्तकालय मे। एक दिन बादे सही, मुदा लोक धरि नित्य प्रतिक अखबार पहुँचिए टा जाइक। अपन गाम, गामक लोक, गामक पुस्तकालय लेल एहन सिनेह, जागरुकता, गामक लोक पढ़थि, बढ़थि, ताहि लेल एहि तरहक साकांक्षता विरले देखबा-सुनबा लेल Fed हैँ, ते बात HS रहल छलहूँ, कोइलख मे हरेक साल आयोजित होमए बला कवि-गोष्ठीक।
विदेह eee | | 24 एक बेर गामक लोक कें विचार भेलनि जे कवि 'चूड़ामणि' मधुप जी के कोइलखक उमापति पुस्तकालय पर बजाए सम्मानित कएल जाए। 'विद्यालंकार'क सहमति सँ आयोजन भेल। स्वागत सम्मानक संग कविता पाठ सेहो Hea गेलाह किछु नब-पुरान कवि लोकनि। कार्यक्रमक अध्यक्षता केलनि स्वयं 'विद्यालंकार' जी। एही कार्यक्रम मे हितनाथ झा पहिल बेर मंच पर कविता-पाठ कएने छलाह। TSA ओ पँचमे कक्षाक छात्र छलाह। ई प्राय: 966क बात होएत। पं० काशीकान्त मिश्र 'मधुप' आ श्रीकान्त ठाकुर 'विद्यालंकार'क उपस्थिति मे कविता-पाठ करबाक ई संस्मरण स्वयं हितनाथ झा हमरा सुनौलनि अछि। एहि आयोजनक प्रात भेने बड़का-बड़का अक्षर मे ई 'हेडलाइन' "कोइलख मे हुआ मधुप जी का सम्मान" देखि गामक लोक कतेक Tae भेल हेताह, से हुनकहि सभक मुहँ सुनला पर बुझबा मे आओत। अपन गामक नाम, अपन मैथिलीक साहित्यकारक नाम, राष्ट्रीय दैनिक समाचार पत्र मे देखब वास्तव मे आह्वादकारी रहल हेतनि गाँआक लेल। उक्त प्रसंगक चर्चाक उपरान्त भरिसक स्पष्ट HS गेल होएत जे श्रीकान्त ठाकुर 'विद्यालंकार' हिन्दीक अनन्य पुजारी मात्र नहि, माँ मैथीलीक सुच्चा सेवक /उन्नायक Fel छलाह। संपादकीय सूचना- एहि सिरीजक पुरान क्रम एहि लिंकपर जा ws पढ़ि सकैत छी- मैथिली साहित्यमे श्रीकान्त ठाकुर 'विद्यालंकार'एवं हुनक परिवारक योगदान-. मैथिली साहित्यमे श्रीकान्त ठाकुर 'विद्यालंकार'एवं हुनक परिवारक योगदान-2 मैथिली साहित्यमे श्रीकान्त ठाकुर 'विद्यालंकार'एवं हुनक परिवारक योगदान-3 विद्यालंकारजीसँ पहिने विदेहपर व्यासजीक कृतित्वपर कल्पनाजी लीखि रहल छथि। पाठक व्यासजीपर प्रकाशित एखन धरिक सभ खंड निच्चा केर लिंकपर जा ws पढ़ि सकै छथि- मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान- मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-2 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-3 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-4 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-5 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-6 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-7 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-8
विदेह eee | | 25 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-9 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान- 0 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान- मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-।2 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान- 3 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-4 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-5 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान- 6 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान- 7 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान- 8 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान- 9 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-20 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-2 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-22 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-23 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-24 मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-25 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ।
faze ४४४] | 26 २.३. सुरेन्द्र लाभ- तीन गोट कनिका नाटक [तारीख पर तारीख/ फ्री सलाह/ पहिचान] सुरेन्द्र लाभ तीन गोट कनिका नाटक [तारीख पर तारीख/ फ्री सलाह/ पहिचान] है, atta पर तारीख पात्र: १. जज साहेब २. वकील साहेब ३. रामू (गरीब मजदूर) ४. रामूक बेटी (१०-१२ वर्ष) (स्थान - अदालत कक्ष) (जज कुर्सी पर, वकील फाइल पलटैत, रामू आ* ओकर बेटी कोनामे ठाढ़) जज साहेब-अगिला केस....रामू बनाम ठाकुर... वकील साहेब- जज साहेब , किछु दस्तावेज अपूर्ण अछि, अगिला तारीख देल जाए। (रामू घबराएल SH आगू बढ़ैत अछि) WL हुजूर! पाँच बरिस भ' गेल... हर बेर- अगिला तारीख...हमर सब किछु बिका गेल... आब fag नै बचल अछि? जज साहेब- (औपचारिक स्वर)प्रक्रिया अपन समय लैत है... (रामूक बेटी धीरेसँ बाबूक हाथ पकड़ैत अछि) बेटी-बाबू... स्कूलमे सर पूछलनि ,न्याय की होइत अछि? आबआहाँ HE हम की जवाब देबै? (पूरा कोर्ट सनन) WE (HS भरैत)बेटी... न्याय... शायद... इंतजार के नाम है...
fate eee | | 27 वकील साहेब- (बीचमे)भावुकतासँ काज नै चलैत छै! कानून सबूत मगैत छै रामू! रामू- सबूत?हमर फाटल हाथ...हमर गिरवी परल घर...आ' हमर बेटी के मिझाएल आँखि ई,सबूत नै Vet वकिल साहेब ? (जज किछु क्षण चुप) बेटी- (धीरे, मासूम स्वरमे)जज साहेब...जँ न्याय एतबा देरसँ अबैत अछि...त' की ओकरा न्याय Het 7 (गंभीर aren) (जज नजरि झुका लैत छथि) जज साहेब: (धीरेसँ )अगिला तारीख... (रामू कटु मुस्कान संग बेटी के हाथ पकड़ैत अछि) रामू-चल बेटी...एतय न्याय नै,तारीख भेटैत है ... (दुनू बाहर निकलैत अछि) (वकील फाइल बंद करैत अछि, जज खाली कुर्सी दिस तकैत छथि) वकील साहेब- (धीरे)हम की ch’ सकैत छियैक जज साहेब ?हम a? मात्र केस लडि सकै छी... जज साहेब- (और धीरे) हमसब केस केस खेलाइत रहब,मुदा शायद... जिनगी हारैत रहत वकील साहेब ...। ( जज आ वकील दुनू न्यायके मूर्ति ( कारी पट्टी बान्हल महिला जकर हाथमे तराजु छै ) के एकटक देखैत रहि जाइत अछि) जज साहेब: (अन्तिम, तीख व्यंग्य)शायद... पट्टी एकर आँखि पर नै...हमर विवेक पर बान्हल अछि... (नाटक समाप्त) 2. फ्री सलाह पात्र: १. डॉक्टर बाबू (झोला छाप): हाथ में स्टेथोस्कोप, आत्मविश्वास बहुत। २. मखन (रोगी): सीधा-सादा गामक आदमी। (छोटसन- क्लिनिक ,डॉक्टरबाबू कुर्सीपर अकड़िक' बैसल छथि, मखन पेट पकड़ने प्रवेश करैत अछि) मखन-डॉक्टर बाबू, पेटमे बहुत दर्द करैत अछि, fey दवाइ दिय”। डॉक्टर बाबू- (गंभीर बनैत)हैँ, देखैत छी... (बिना देखने) गैस, एसिडिटी, ar टेंशन” तीनू रोग अछि!
fate eee | | 28 मखन-टेंशन? हमरा ककरो संगे झगड़ा नै अछि। तखन हमरा टेंशन Hell के हएत ? डॉक्टर बाबू- अरे! टेंशन बिना कारणों होइत अछि! ई आधुनिक बीमारी अछि! (स्टेथोस्कोप गर्दनिमे लगा क' जंचैत अछि । ) FSA - डाक्टर साहेब पहिने आला कानमे लगाउ ने । डॉक्टर बाबू- चुप रहू | डाक्टर हम छी कि आहाँ ? कोन बिमारीमे आला कत” लगएबै से हम बुझबै कि आहाँ ? मखन- से त” Hel बुझबै | डॉक्टर बाबू- ( आला A? जचलाके बाद ,कागज पर दावाइ लिखैत )तीनटा दवाइ लिखि रहल छी,एकटा भोर , एकटा साँझ, आ एकटा जखन A होए | मखन - जखन मोन होए के मतलव ? डॉक्टर बाबू - दर असल तेसर डोज हमर आम्दनी बढाब” के लेल लिखने छी | मखन- (चकित) आहाँके आम्दानी Tela’ के लेल हम दबाइ खाउ? डॉक्टर बाबू- हैँ, दवाइ कम होएत त' रोग जल्दी ठीक भ' जाएत,फेर हमरा के पूछत?" (ओही समय मखनक फोन बजैत अछि) मखन- हेलो?... की? हमर भैंस ठीक भ' गेल? ...ओह! त' हमरा पेट दर्द त' ओही चिंतामे छल! (मखन राहत महसूस करैत अछि) मखन-डॉक्टर बाबू, आब त' दर्द खत्म भ' गेल। डॉक्टर बाबू- (जल्दी सँ)कोनो बात नै! “फील गुड फीस” द* दिय”,दवाई नहि, त' सलाह लेल! मखन- सलाह त' फ्री होइत अछि ने? डॉक्टर बाबू- (मुस्कियाइत, कुर्सी पर अकड़ि क' )ई क्लिनिक अछि, यूट्यूब चैनल नै! (मखन अनमनाइत जेबसँ पैसा निकालैत अछि) मखन-लिय, डॉक्टर बाबू... दर्द त' अपने भागि गेल, मुदा फीस त' अहाँ नहि छोड़ब। डॉक्टर बाबू- (पैसा लैत, ठहाका मारैत)एहने रोगी सँ त' हमर क्लिनिक चलैत अछि, रोग अपने ठीक, आ फीस अपने फिक्स! मखन -(बाहर निकलैत-निकलैत बुद्बुदाइत)लगैत अछि, बीमारीसँ बेसी खतरनाक a ई इलाज अछि! (डॉक्टर नोट गनैत रहैत अछि, पाछू हल्का कॉमिक म्यूजिक) (नाटक समाप्त )
fate ४४४| | 29 3. पहिचान पात्र: १. बाबा (बुजुर्ग किसान) २. क्लर्क ३. बैंक मैनेजर ४. पोता (१२ वर्ष) (स्थान - बैंक काउंटर, भीड़भाड़ वाला माहौल) (लाइन लागल अछि। बाबा थाकल चेहरा संग फाइल पकड़ने ठाढ़ छथि। पोता संगमे चिंतित भावमे) क्लर्क- (तेज आवाजमे) अगिला! नाम बताउ! बाबा- (संकोचसँ)धनपत ... लोन माफी लेल आवेदन देने रही बेटा... (क्लर्क कम्प्यूटरपर टाइप करैत अछि) क्लर्क-हैँ, आवेदन त' अछि... मुदा प्रोसेस लेल मोबाइल नंबर पर OTP जायत। ओ बताउ। बाबा-मोबाइल त' अछि... मुदा ई स्मार्ट वाला नै...ओहिमे बस कॉल होइत अछि... क्लर्क- (लापरवाही सँ) तखन OTP केना आएत? बिना OTP काज नै होएत। बाबा - बेटा... कागज सब त' अछि... जमीन हमर नाम पर अछि...एतेक साल S टैक्स द* रहल छी क्लर्क - हम कागज नै, सिस्टम देखैत छी। सिस्टम कहैत अछि जे भेरीफाइ, तखन भेरीफाइ होइत अछि | (पोता आगू बढ़ैत अछि) पोता - सर, हम नंबर दीय” ? हमरा फोनमे OTP आबि जाएत...।हम हिनकर पोता छी । क्लर्क - नै! जकर नाम पर आवेदन अछि, ओकरे नंबर चाही। (बाबा चुप... हाथ कपैत छै । ) बाबा - पहिने गाममे परधान कहैत छल,ई धनपत छथि ,तखन सब मानि लैत छल...आब मशीन पूछैत अछि, तों के छें?...। (भीड़मे हलचल, feng लोक मुस्कियाइत, fers चुप) (मैनेजर बाहर अबैत छथि)
fate ४४४| | 30 मैनेजर - की भ' रहल अछि Ua’ ? क्लर्क - सर, हिनका संगमे बढडका मोबाइल AS | तखन OTPHMT जएतै ? GU फाइल अटकल छै सिस्टम हिनकर पहिचान नै क” रहल छै । मैनेजर - (औपचारिक, ठंढा स्वर)नियम सबके लेल Va होइत अछि। सिस्टम बिना काज नै होएत। बाबा: (धीरे, विनम्र स्वरमे)साहेब...हम जमीन जोतैत-जोतैत जिनगी काटि देलहूँ...एखनहु कागज हमरा नाम पर अछि...मुदा... ई केहन सिस्टम छै जे हमरा Perea नै अछि । (मैनेजर चुप,कोनो जवाब नै) (पोता बाबाक हाथ पकड़ैत अछि) Ghat - (मासूम जिज्ञासासँ)बाबा...अहाँ के ई मशीन कियैक नै fared अछि? अहाँ त' गामभरि के चिन्हैत छी...। (बाबाक आँखि नोरा जाइत अछि ।) बाबा - बौआ...ई मशीन चेहरा नै देखैत छै ... नंबर देखैत छै...आ हमरा लग...शायद ओ नंबर नै अछि... (क्षणभरि सन्नाटा) (बाबा धीरेसँ फाइल काउंटर पर राखि दैत छै ।) बाबा - चल, गाम चल बौआ ..ओत” हम जमीनक मालिक छी...मुदा... सिस्टममे...अखनहु “कोनो आदमी” नै छी...। (बाबा आ' पोता बाहर चलि जाइत छै ।) (क्लर्क चुप, स्क्रीन देखबैत afB.....verification Failed) (मैनेजर धीरेसँ स्क्रीन दिस देखैत, फेर बाबाक खाली जगह दिस) मैनेजर - (बहुत धीरे, आत्मचिंतनमे)हम पहिचान बनबैत छी...कि मेटबैत छी...? (स्क्रीनपर Retry चमकत रहैत अछि...) (नाटक समाप्त) अपन Hae editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ।
faze ४४४] | 32 २.४. लाल देव कामत- डॉ०( श्रीमती) लालपरी देवी : एक विदुषी a ही ca > Se Wy “4 =. ate e a4 YS 4 .. iN let देव कामत डॉ०( श्रीमती) लालपरी देवी : एक विदुषी सुपौल जिलाक पिपरा प्रखंड अंतर्गत बसुली गामक स्व०८सुमरीत लाल प्रसाद जीके सुपुत्र प्रो०(डॉ०) राजाराम प्रसाद जीपूर्व उप कुलपति ,पटना विश्वविद्यालय पटना केर वियाह एक योग्य शिक्षिका लालपरी जीक संग भेलनि। श्रीमती लालपरी देवी जीक जन्म २३ - ७ - १९५१ ई० H कबिलपुर,
fate ४४४| | 32 लहेरियासराय जि०- दरिभंगामे भेल रहनि। लालपरी जी एक मध्य विद्यालयके अध्यापिका सँ महाविद्यालयके प्राध्यापिका कोना बनलीह, से हुनक पढायके लगनशीलता स्वतंत्ररूपेँ सहजहि कोना बढ़लनि ई हुनक मेधा धीकैन! पाठक बीच हिनका विषयमे संक्षिप्त जनतब देबाक चेष्टा करैत छी। सन् १९८२ मे स्नातक (मैथिली ) प्रतिष्ठाक संग दरभंगा 'क ललीत नारायण मिथिला विश्वविद्यालय SF प्रथम स्थान प्राप्त कयलीह। स्नातकोत्तर मैथिली विषयमे सेहो प्रथम स्थान १९८४ ई०मे पौलीह। सन् १९८६ ई० मे हिन्दी विषय सँ स्नातकोत्तर सेहो कयलीह , द्वीतीय स्थान भेटल रहनि ल.ना.मि.वि.वि. सँ तथा arate सँ १९९१ ई० मे पीएचडी. कयलन्हि। हिनक योगदान दि० ६ नव० १९९६ सँ ३१ मार्च ९८ धरि ललीत नारायण तिरहुत महाविद्यालय मुज्जफरपुरमे मैथिली प्राध्यापिका भेलीह। १ अप्रैल १९९८ Foe रमेश झा महिला महाविद्यालय मैथिली विभागमे सेवारत वरीय प्राध्यापिका रूपमे खूब यश कमेलनि। हिनका संगीत विषयमे Sat अभिरुचि छन्हि। सर्व नारायण सिंह राज कुमार सिंह महाविद्यालयके प्रधानाचार्य रहलीह संगहि अधिषद सदस्य सेहो बनलीह। लेखनके क्षेत्रमे हिनक खूब योगदान भेल छन्हि-: महिला ओ समाज सेवा, लोकोक्तिक स्वरूप विन्यास , धार्मिकता -व्यवहारिकता sit पाखंड, मिथिला विभूति कपिल ,शोध ware - कविचन्द्रक मिथिला भाषा रामायणमे व्यवहत लोकोक्तिक विवेचनात्मक अध्ययन। सन् १९८० केर दशक सँ सह सम्पादन - सुत्रधार (मैथिली पत्रिका) जून ०३ धरि। आकाशवाणी दरभंगा द्वारा समय - समय पर कथा ओ वार्ता परिचर्चा प्रसारित होइत रहलनि अछि। हिनक मौलिक रचनाक अदहा दर्जन पोथी प्रकाशित छन्ति -; साहित्य दर्शन (आलोचनात्मक निबंध संग्रह)-२०१५ ol WIA ऊपर रहनि-: नहिं.... किछु नहि.....! (कथा संग्रह -2008 Zo), कविश्वरक रामायणके लोकोक्ति (आलोचना - २००९), कथा संग्रह - त्रयोदशी, कविता संग्रह- मंगलसूत्र आदि | Sto लालपरी देवी Sites सेवानिवृत्त सँ पूर्वहि सँ अध्ययन, सृजन आ चिन्तनमे बढ़ ae अभिरुचि रहलन्हि अछि। हिनका शिक्षण,मंधन आओर प्रशासनिक गतिविधिमे aad देखल गेलनि हेन। हिनक सहभागिता राष्ट्रीय, अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठीमे व्याख्यान देबाक संगहि कतिपय साहित्यिक गतिविधि विषय पर आयोजित सेमिनारमे भेल य। लालपरी जीके व्यक्तित्व मादे Sto ललितेश मिश्र जी - विश्व विद्यालय अध्यक्ष , स्नातकोत्तर अंग्रेजी विभाग, मधेपुरा TaN व्यक्त कयने छथि " Sho श्रीमती लालपरी देवी प्राधानाचार्यक रूपमे एम एच एम कालेज सोनवर्षा -सहरसामे पदास्थापित रहथि। गत शताब्दीक अस्सीएक दशक सँ ओ साहित्यकर्ममे Garg Vertes अछि। सम्पादन काज कयने छथि, हुनक ' नहिं...किछु नहि.....! कथा संग्रह २००४ Fo मे प्रकाशित भड बेस
faze ४४४] | 33 प्रशंसित भेल। मैथिल समाजक विस्मृत Fer जाइत ओ तत्काल प्रचलित लोकोक्ति अथबा कहबीक अत्यधिक श्रमसाध्य गवेषणापूर्ण अध्ययन उपस्थापित of करितहिं अछि,संगहि मैथिली साहित्यक समृद्ध लोकसाहित्य 'क परिचय करबैत अछि। ओहि सँ मैथिली साहित्यक' उपकार तँँ भेलहि अछि , Sho श्रीमती लालपरी देवीक अप्रतीम साहित्य साधना Seat द्योतित भेल अछि।" हिनक साहित्यके सौन्दर्य पर आगू कहियो विमर्श करब। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर Yor!
विदेह ४४४ | | 34 २.५. प्रमोद झा 'गोकुल'- डोलबैत रहू (लघु कथा) प्रमोद झा 'गोकुल' डोलबैत रहू (लघु कथा) भीषण गरमी पड़ि रहल छलै, आ तैपर से वसात ,मार्तण्डक टहटहौआ प्रखर रौदक संसर्ग मे आबि अपन शैत्य धर्म त्यागि देने छलै। पानि सेहो बिनु आगि पर चढ़ौनहिं खौलके इनहोर है रहल छलै। एमहर बसातक झरकी आ ओमहर गरम पानि,दुनू मिलिके जेना सबहक प्राण लेबा पर उतारू छलै। तखनहिं बड़का भाइ HAIR सँ हौंकैत पहुंचलाह।हमर eas Tet HE देखिके बजलाह - सत्ते प्राण बाँचब आब कठिन छह ! - हैँ भाइ! दिन राति गरमी सँ बाल बच्चाक संग मुरगी जकाँ छटपाटाइत रहै छी। - से ठीके कहै छह। तोहर भौजी के ते छाँट पर छाँट भए रहल छैन। कतेक कचका आमक सरवत पियौलौं तखन कतौ से दम धेलैन।लारू बातू ते ओहिना छथिहे। - हमरो घरक हाल एहने बुझू। -हौ एकटा बात कहियह! - हैँ कहने! - at ते पढ़ल लिखल छह! नौकरी नै भेलाक कारण हमरे जकाँ महीस चरबै छह से अलग बात! - ओह,भाइ! चिकारी से बाहर आबि के कहू ने! - बेस, ते देखहक ते पेपर मे की निकललैए ? - ई कोनो कम्पनीक विज्ञापन छियै! - की fea से ते कहह!
बिदेह ४४४| | 35 - ऐ मे लिखल छै जे नीचे लिखे नम्बर पर दो सौ रुपये खटाखट भेजिए और फटाफट पूरे परिवार गर्मी से राहत पाइये! - ते कोन हर्जा? दुनू भांड एखने औन लाइन Vor दहक।हैया लैह दू सौ रुपैया! - अहीं कहला पर भाइ! हमहूँ द' रहल छिऐ। - हैँ हौ ! करह ने शुभस्य शीघ्रम। कम से कम राति से अहुँछिया ते नै काटत दुनू गोटेक परिवार। - लियह भ' गेल पाइ SS! HET | घंटा मे पार्सल पहुँच जायत। Sluis आतुर भै tect छलाह गरमीक दवाइले। St जैं समय बीतल जा रहल Set tt दुनू भांइक धरकन नव विवाहित वर जकाँ बढ़ल जा रहल छलैन, कि तखनहिं बसातक झोंका जकां मोटर साइकिल के रिरियबैत एकटा सूट Fes अपटूडेक व्यक्ति गाड़ी में ब्रेक मारैत उतरल आ अपन बैग सँ सजल धजल भारी भरकम पार्सल नाम पूछिके दुनू गोटेक हाथ मे धरा देलक आ जाही गति सँ आयल छल Tel गतियेँ He भै गेल। दुनू भांड पार्सल खोललैन ते पहिने ओडइमे a रंग विरंगक Ge आ कागज छिट्टा भरि निकललैन। निकलैत निकलैत अंत मे निकललैन तिलिया फुलिया कैल एकटा छोटकी ताड़क पंखा, तै पर खूब सुन्दर अक्षर मे लिखल छलै' हमेशा डुलाते रहें' | SL भांड मथा हाथ धयके बैसि रहलाह आ एके स्वर मे खूब जोर से घौना Hed बजलाह - ठकहरबा ठैक लेलकौ VV!!! अपन Hae editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ।
fate ४४४| | 36 २.६. लाल देव कामत- स्वस्थ आयु लेल योग <x Se ' i. cm A $ % | - "y = ee लाल देव कामत स्वस्थ आयु लेल योग जहन हम अपन भीतर शांति आ संतुलन स्थापित Hea छी ,तँ हम अपना पर्यावरणके संग Set amare’ दिस डेग बढ़ाबैत छी। योग सिद्ध करैत छैक जे इ मात्रे देक लचकदार आ कसरत ALE थीक, वरण इ एक समग्रतामे जीवनशैली छी। इ आंतरिक ठहराउ,सझिया जागृति आ पर्यावरण'क संग सामंजस स्थापित करबाक एकटा मार्गदर्शन करैत अछि। योगके से LEAT नै मात्रे लोककें भीतर सँ सशक्त बनाबैछ ,वरण S धरतीके पुनर्निर्माण आ संरक्षण 'क लेल सेहो प्रेरणा प्रदान करैछ; जाहिसँ हम एकटा स्वस्थ आओर अस्थाए भविष्य दिश अग्रसर होईत जाई छी। वैश्विक परिदृश्य पर विचार करैत विगत वर्ख विशाखापट्रनम सँ भारतके प्रधानमंत्री जी राष्ट्रकें वर्चुअल रूप सँ सम्बोधित करैत कहने रहथि " आई दुनियां तनाउ, अशांति आ अस्थिरता'क चालिसँ ater रहल अछि। अनेको क्षेत्रमे स्थिति आरो गम्भीर भड रहलैक हेन। एहन समयमे योगा हमरा शांति ओ संतुलनके AT पर IS जाईत अछि। " ओ इहो उल्लेख कयलन्हि जे- जोग खाली व्यक्तिगते et कल्याण लेल AS ,परँच ई वैश्विक शांति AT सामूहिक जागरूकता कें बढ़ाबैत य। ई एकटा एहन साधन छी ,जे हमरा सभकें अपना भीतर आ बाहर
‘fate ४४४ | | 37 दूओ ठाम संतुलन बनाकय राखयके ममिलामे मार्गदर्शन धरि करैत छैक। विगत साल राजपथ नव डिल््लीमे पहिल अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस २५ मिनट धरिमे २१ योग आसन्न मुद्राक प्रदर्शन ऐतिहासिक Vet रहय। एहिमे पंतप्रधान श्री नरेन्द्र मोदी जीक सँग देशभरि सँ ३५९८५ लोक भाग लेलनि | आ ८४ देशके लोक एहि विशेष आयोजनमे भाग लेने रहथि। यथा -: रामदेव स्वामी ,सव्यासाके प्रमुख एच आर नागेन्द्र, श्रीमती हंसाजी जयदेव योगेन्द्र, स्वामी आत्माप्रिय नन्दा । मंच पर भारत सरकारके आयुष मन्त्रालयके मंत्री मा० श्रीपद नाईक ,मंन्त्रालय सचिव निलेजल सान्याल | विदेश मंत्री सुषमा स्वराज जी- संयुक्त राष्ट्रमे आयोजित समारोह केर अध्यक्षता कयने रहथिन,से अमेरिका 'क प्रसिद्ध "टाइम्स एक्वायर ' सँ वैश्विक दर्शकगण लेल सदैव न्यूज अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस पर सब साल शारीरिक आ मानसिक स्वास्थ्य ch समर्पित एकटा वैश्विक उत्सव थीक | पुरान कालके भारतीय परम्पराकैँ विश्व पटल पर पैहचान दियाबय बाला इ दिन तनाउ मुक्त जीवन आ समग्र कल्याणक लेल सहज अछि। तनाउ सं मुक्ति -: प्राणायाम आ घियान मोनके शांत राखैछ, एकाग्रता बढ़ाबैछ। मजगूत मांशपेशि आ 'लचीलापन -: नियमित योगाभ्यास सूर्य-नमस्कार,तारासनन उपयुक्त छैक। बेहतर श्वसन आ पाचन -: अनुलोम- विलोम आ कपालभाति एहन प्राणायाम S फेफराक क्षमता बढ़ैत पाचनतंत्र मजगूत होइछ। पढछिला साल तँँ 'एक पृथ्वी - एक स्वास्थ्यके लेल योग' कार्यक्रममे चजलशक्ति मंन्त्रालय आ राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के संयुक्त तत्वावधानमे यमुनाक सुरम्य तट पर अवस्थित बीएसएफ कायार्किंग कैम्पमे आयोजन दिव्य आ भव्य रहल छल। ऐ विषय पर नमामि गंगे पत्रिका अंक ४० म प्रमुखता सँ रपट छपलाहा पढबाक सौभाग्य मेटल रहय। UE बेर अप्रैल -जून २०२६ ई० म ई विषय पाठक बीच विस्तार सँ आओत। योग अपनाबैत निरोगी काया बनौने रहनाई सब मानव मात्रके पहिल दिनचर्या होयबाक बेगरता अछि। अपन Hae editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ।
विदेह ४४४] | 38 २.७. आचार्य रामानंद मंडल- धनाकर ठाकुर संवाद [सन्दर्भ -मिथिला राज्य आ महाकवि विद्यापति] आचार्य रामानंद मंडल आचार्य रामानंद मंडल -धनाकर ठाकुर संवाद [सन्दर्भ -मिथिला राज्य आ महाकवि विद्यापति] आचार्य रामानंद मंडल -कि हय अंतरराष्ट्रीय मैथिली परिषद् के राष्ट्र कल्पना। धनाकर ठाकुर -जतेक दूर दूर तक पीपर पातक समान आदर ओ भारतवर्ष या भारत राष्ट्र। आचार्य रामानंद मंडल -एते घुमा के उत्तर न दिउ।साफ साफ HE राष्ट्र के कल्पना बताउ। धनाकर ठाकुर -सीधा साधा उत्तर तिब्बत स जावा, कम्बोडिया तक ई एक राष्ट्र पश्चिममे मक्केश्वर महादेव जहिया ओ मानधि
fate ४४४| | 39 आचार्य रामानंद मंडल -इ फरुआत बात सभ के मानत। इ समीचीन विचार न हय।कैला मिथिलावासी के गोल गोल घुमबैय छै।इ अदूरदर्शिता हय।एहन विचार aH मिथिला मैथिली आंदोलन के असफलता के ओर ले जायत। इ सुलझल व्यक्तित्व के विचार न हय। जौं नायक उलझल हय।त असफलता निश्चित हय। धनाकर ठाकुर -अंतर्राष्ट्रीय मैथिली परिषदक बैसारमे मिथिला चारि धाम परिपथ पर विचार अंतर्राष्ट्रीय मैथिली परिषदक एकटा गूगल मीट बैसार लाला बहादुर शास्त्री मेमोरियल कॉलेज, जमशेदपुरक प्राचार्य डॉ. अशोक अविचलक अध्यक्षतामे सम्पन्न भेल। बैसारमे उत्तराखण्डक प्रसिद्ध चारि धाम यात्राक तर्ज पर मिथिलामे एकटा तीर्थ-परिपथ विकसित करबाक आवश्यकता पर विचार-विमर्श कएल गेल। Sac सम्बोधित करैत डॉ. धनाकर ठाकुर वृहत्तर मिथिला (नेपाली मिथिला सहित) तथा भारतीय मिथिलाक लेल ger अलग-अलग तीर्थ-परिपथक प्रस्ताव रखलनि। वृहत्तर अंतर्राष्ट्रीय मिथिला चारि धाम परिपथ डॉ. ठाकुर निम्नलिखित चारि पवित्र स्थलक प्रस्ताव रखलनि-- वराह क्षेत्र (पूर्व) वाल्मीकि आश्रम (पश्चिम) गजेन्द्र मुक्ति धाम, हरिहरक्षेत्र, गंडक नदीक तट पर (दक्षिण-पश्चिम) बैद्यनाथ धाम (दक्षिण-पूर्व) ओहि संग हुनका द्वारा आदि कुंभस्थली, सिमरिया घाटकँँ एहि परिपथक केंद्रीय आध्यात्मिक केन्द्रक रूपमे विकसित करबाक सुझाव सेहो देल गेल। भारतीय मिथिला चारि धाम परिपथ भारतीय मिधिलाक सीमा भितर एकटा Ble परिपथक लेल निम्नलिखित स्थलक प्रस्ताव देल गेल-- पुनौराधाम (उत्तर) प्रह्माद-नरसिंह अवतार स्थल, पूर्णिया (पूर्व) आदि कुंभस्थली, सिमरिया घाट (दक्षिण) गजेन्द्र मुक्ति धाम, सोनपुर (पश्चिम) उपस्थित सदस्यसभ एहि प्रस्तावक सराहना कयलनि आ परिषद् द्वारा एकरा पर आगाँ विचार करबाक निर्णय लेल गेल।
विदेह ४४४] | 40 बैसारमे पूनम झा (आसनसोल), डॉ. रतन कुमारी (घोघरडीहा) तथा मिथिलेश मण्डल (गुवाहाटी) उपस्थित छलाह। बैसारमे निर्णय लेल गेल जे 39म अंतर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन 7-I8 अप्रैल 2027 केँ गुवाहाटीमे आयोजित कएल जाएत। श्री मिथिलेश मण्डलकेँ सम्मेलनक संयोजक नियुक्त कएल गेलनि। Vel घोषणा कएल गेल जे 38म अंतर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन 7-8 नवम्बर 2026 केँ सुपौलमे आयोजित होयत, जाहिक संयोजक प्राचार्य डॉ. आर. के. चौधरी हेताह। जारीकर्ता: अंतर्राष्ट्रीय मैथिली परिषद् आचार्य रामानंद मंडल -अंतरराष्ट्रीय मैथिली परिषद् गलत दिशा मे जा रहल हय। परिषद् के केवल जनगणना मे मैथिली, पश्चिमी आ दक्षिणी मैथिली के मैथिली मे समायोजन आ मिथिला राज्य निर्माण आंदोलन पर फोकस करय। फ़ालतू विचार प्रस्ताव से बचनाइ आवश्यक हय। धनाकर ठाकुर -राष्ट्र आओर राज्यमे अन्तर छै। राज्य और WATT अन्तर छै। गलत अराष्ट्रवादी सिद्धांत Wed निर्माण ate हैत। भारत ओ नेपालमे अलग अलग मिथिला प्रान्त निर्माण अन्तरराष्ट्रिय मैथिली परिषद् क अभिप्रेत। आचार्य रामानंद मंडल -राष्ट्र, देश,राज्य आ प्रांत के कि परिभाषा हय। भारतीय संविधान मे इसकी क्या अवधारणा हय। क्या भारत एकटा सांस्कृतिक राष्ट्र हय? कि अंहा अंतरराष्ट्रीय मैथिली परिषद् के सांस्कृतिक अभियानी हय वा राजनीतिक अभियानी? धनाकर ठाकुर -जकर पुण्यभूमि एक ओ मानवता लेल ओ भूभाग ओ समविचारी एक राष्ट्र। देश जे राजनीति शास्त्र क अनुसार राज्य जाहिमे एक भूभाग, आबादी, सरकार ओ सम्प्रभुता हो। प्रान्त उपरोक्त देश वा राज्य क प्रशासनिक एकाइ। भारतीय संविधानमे article । India that is Bharat is a union of states’ यानी भारत देश (राज्य) जे राज्य (प्रान्त) क संघ अछि। भारत महान भारतवर्षक एक सांस्कृतिक राष्ट्र अछि यद्यपि संविधान एकर संकेत ओहिमे राम, बुद्ध आदिक छपल फोटोसँ दैत अछि। हम महान् भारतीय राष्ट्रक एक सूक्ष्मतम अंग St आओर एहिमे मिथिलाक यथायोग्य स्थान लेल
fate ४४४] | 4 कार्यरत चाहे जाहि संभव जनतांत्रिक विधासँ हो। आचार्य रामानंद मंडल -भारतीय संविधान आर्टिकल -१ मान्य शेष अमान्य। संवैधानिक जनतांत्रिक मिथिला राज्य के समर्थन परंच राष्ट्रवादी मिथिला से असहमत। समाजवादी मिथिला से सहमति। संविधान के प्रस्तावना के आधार पर आधारित विचार स्वागत योग्य। धनाकर ठाकुर -ककरहूँ सहमति असहमति ओकर अधिकार। नेपालमे जे काज से ओतक अनुसार। भारतमे संवैधानिक मिथिला राज्यक मांग अछि से ओतबहिके समर्थन करू। बांकी के कत की करत कर feat राजनीतिक मिथिला देश क संविधान अनुसार, सांस्कृतिक मिथिला संस्कृतिक अनुसार जे दूनू कात एक। आचार्य रामानंद मंडल -मिथिला राज्य के लिए सहमति आवश्यक हय। न त भारत आ पाकिस्तान बनत। न त मिथिला न, मधेश बनत। नेपाल अलग देश हय।ओकर संवैधानिकता मे हस्तक्षेप अस्वीकार। धनाकर ठाकुर -अन्तरराष्ट्रिय परिषद् नेपाल मे ओतुक्का नकसा पर काज करैत मिथिला राज्य मंगाए अछि जाहिमे भारतकभाग नहि धनाकर ठाकुर -संविधान क प्रस्तावना मूलरूपमे स्वीकार। राजकाज लेल त जे जखन रहतै Se चलते | किन्तु एहिमे आपातकालमेजे जोडल गेल से आइने cafes बदलतै। आनहूँ ठाम बहुतेक बदलाव फेर बदलतै परन्तु जे बदलतै संवैधानिक प्रावधानसंँ। आचार्य रामानंद मंडल -संविधान बदलतै देखल जतय।आइ कैला पागल TAT जाय। धनाकर ठाकुर -बदलतै, बहुत चीज बदलतै, हम Hel नहि रहब परन्तु बदलतै। मिथिला राज्य बनि क रहत आचार्य रामानंद मंडल -नेपालो में बन गेल।दीवार पर लिखल वोकरो Sz अपना मिथिला के बारे मे सोचूं। नेपाल मे बहुत नेता सब हय। अंतरराष्ट्रीय नेता न TF एके साधे सब मिलय।सब साधे सब जा हस्तक्षेप सुरेन्द्र ठाकुर रामानन्द मंडल जी:--विद्यापति श्रृंगार/ सौन्दर्य आ भक्त कवि Set छलाह।ड०सुभद्र झा आ रूसी विद्वान So शेरे ग्रियानी Set विद्यापति & भक्त कवि मानने छथि।एहि पर निरर्थक तर्क- वितर्क नै हेबाक चाही।
fate ४४४] | 42 धनाकर ठाकुर -पहिले महान भक्त, हमरा एक बड़ा कननड़ संघक प्रचारतक केशवकुंज, बंगलौरमे २००६ मे कहलाह, "आपके मिथिलामे अक कौन कवि थे जिनके यहाँ महादेव नौकरी करते थे? " एहन महानतम भक्त के? ओ त विष्णुक अवतार चलचित्र, कहलाह जीवकान्त मिश्र, Gra जे कहू महादेव विष्णुक अतिरिक्त ककरहूँ खवासा करताह कि? आचार्य रामानंद मंडल -ओ महाकवि विद्यापति विष्णु के अवतार ea lee भे गेल।दंत कथा से आदमी भगवान बनाएल जा सकय हय। कमाल। महाकवि विद्यापति कोनो भगवान न हय जेकर भक्त बनल जाय।वो एकटा साहित्यकार के रूप मे आदरणीय छतन। धनाकर ठाकुर -केओ भगवान् मानता त अहाँ क की? ओ साहित्यिक उत्कृष्ठताक चरम छलाह। आचार्य रामानंद मंडल -त TAS भगवान। कवि भगवान न होड़ छैय। कि मिथिलावासी धनाकर ठाकुर के ब्रह्म Tal धनाकर ठाकुर -हर आदमी ब्रह्म छै। आचार्य रामानंद मंडल। जी परंच पूजा सब के न होड़ छैय। अंहा के पीपर के गांछ तर पीरी बांह के बरहम बाबा जेका पूजल जायत। लोक देवता बन जायब। ठीके कहल गेल हय मनुष्य ईश्वर के निर्माता हय। Man is the creator of God .Dr Dhanakar Thakur is an extraordinary person in Mithila which creates many ditie as Mahakavi Vidyapati. धनाकर ठाकुर -मनुष्यक मन ईश्वर निर्माण करैत रहल अछि आचार्य रामानंद मंडल -जी। सहमत। विजयेन्द्र झा -मिथिलामे एहन अनेक नायक पुरुष भेलाह, जनिकामे अलौकिक प्रतिभा छलनि। आ', ओ लोकनि समाज द्वारा अदौसँ पूजित होइत आबि रहल छथि। हमसब सलहेश, गहिल,लोरिक, सोखा, वंडी, tat, देबानी बाबा (डिहबार बाबा) ब्रह्म बाबा आदिक पूजा करैत छी। साहेब रामदास, लक्ष्मीनाथ गोसाई, हरिकिंकर दास आदि संतलोकनिक स्थान देवतुल्य छनि। वेदव्यास, महर्षि वाल्मीकि कालिदास, महाकवि विद्यापति, चैतन्य महाप्रभु आदिमे अलौकिक प्रतिभा छलनि। उपर्युक्त
fate ४४४] | 43 महानायकलोकनि अपन विविध अलौकिक प्रतिभाक बदोलति समाजक कल्याण करैत रहलाह। समाजक पथ प्रदर्शक रहलाह।कहल जाइछ जे एहि महा नायकलोकनिमे ईश्वरीय गुण छलनि तेँ समाज हिनकालोकनिकेँ देवतुल्य मानि sate gota छनि आ' पूजित रहताह। अनेक लोक एहन छथि जे राम- कृष्ण, इन्द्र, सूर्य, चन्द्रमा, पृथ्वी आदिकेँ Sat देवता नहि मानैत छथि, a fee समाज Seat नहि मानत? मिथिला अपन परम्परा, संस्कृति, आस्था, विश्वासकँ कहिओ ने छोडलक आ' ने छोडत। विद्यापतिक प्रसंग St उगनाक Heals जोडल जाए तँ ओ एकटा महान् संत आ' राधा-कृष्णक परम भक्त छलाह। आइओ हुनक जाहि Tach मिथिलामे श्रृंगारिक बूझल जाइछ ओएह पदसब बंगाल, आसाम, उडीसा आदि परवर्ती प्रान्तसभमे भक्तिपदक रूपमे प्रसिद्ध अछि। बंगाल, आसाम आ' उडीसामे तँँ विद्यापतिक पदकेँ रामायण, महाभारत, कुरान जेकाँ धार्मिक पद बूझि प्रत्येक लोकक घरमे पुजल जाइछ। नदियाक चैतन्य महाप्रभु विद्यापतिक ओही wach गबैत-गबैत भावविभोर भ' मूर्छित भ' जाइत छलाह। एहन महानायकरकेँ सामान्य लोकक कोटिमे राखब अज्ञानता ale तँ आर की भ' सकैछ? निष्कर्षत: विद्यापति अलौकिक प्रतिभा सम्पन्न एकटा एहन महानायक छथि जनिका ल'ग स्वयं गंगा उपस्थित भेलीह। भगवान् शंकर चाकर बनलाह, स्वयं प्रकट भेलाह आ' of ओ देवत्वकें प्राप्त कएलनि, पूज्य छथि, पूज्य रहताह। विद्यापतिकेँ सामान्य मनुक्ख कहब मात्र अज्ञानताक परिचायक थिक। कोनो विषयपर विमर्श हो, नीक बात। अपन तर्कनासँ अवगत कराबी ओहो नीक बात। मुदा, सदैव ई ध्यान राखक थिक जे ओहिमे समाजक धर्म, आस्था, विश्वास, परम्परा संस्कृति आदिपर आक्षेप नहि होअए। कारण इतिहास गवाह अछि जखन-जखन ककरहूँ धर्म, आस्था, विश्वास, संस्कृतिपर कुठाराघात करबाक प्रयास भेल, समाज ओकरा नहि बकसलक। तैँ विमर्श अपन ज्ञान आ' सीमामे रहिए केँ करब उचित आ' सार्थक। धन्यवाद! मनोज पाठक-*रोचक चर्चा चलि रहल अछि* डॉक्टर धनाकर ठाकुर जी आ आचार्य रामानंद मंडल जी दुनू विभूति रोचक तथ्य आ ठोस तर्क राखि एक सबल सम्प्रभु मिथिलाक cet बिआ बाउग HS रहल छथि। ie रोचक चर्चा मे feng तथ्य gfe eng राखय चाहब। प्रान्त, देश आ राष्ट्र परस्पर एक दोसरासँ फराक रहितो एक सूत्र मे आबद्ध रहि सकैत अछि। रहैत
विदेह ४४४] | 44. अछि। जेना धातरी वा संतोला केर एकटा पाकल फर वस्तुत: फर त एकहि टा अछि मुदा एकर परस्पर सब फांक फराक अस्तित्व रखैत अछि। उदाहरण लेल एक संतोला केर 2 वा आठ फांक एक छिलकामे आबद्ध। ओ छिलका हटि गेल तँ सब फांक स्वतंत्र अस्तित्व वला। ठीक तहिना एक राष्ट्र केर ऊपरी आवरण एक कवच ई कवच सांस्कृतिक te सकैत अछि, रहैत अछि। राजनीतिक नियंत्रण कवच रूप मे रहियो सकैत अछि नहियो रहैत अछि तड़यो सांस्कृतिक कवच ओकरा एक वृहत्तर सूत्र आ कवचमे जोड़ि क, रखने रहैत अछि। हम जे तथ्य राखि रहल छी से अतीतमे सेहो सत्य छल, एखनो सत्य अछि आ भविष्यमे Set टिकल रहैवला तथ्य आ सत्य अछि। संस्कृति आ सांस्कृतिक राष्ट्रवाद vate मिधिलाक लेल मिधिलाक तीव्र विकास लेल एकटा उपयोगी आ टिकाऊ टूल अछि औजार अछि। संतोलाक वृहत्तर कवच संस्कृति रूप मे इस्लामक सब फराक फांक वला Fat शिया आ आन पंथ वला राजनीतिक सत्ता वला देशक नागरिक के हज करबाक लेल मक्का मदीना पहुँचा SSI इसाईके वेटिकन सिटीक पक्ष विपक्ष वला छोट पैघ फांक सबके एक OM ल, अनैत छैक। तहिना मिथिलाक चारि धाम तीर्थ संकल्पना Genk मिथिलाक भौगोलिक परिचिति आ सीमांकनमे सहायक सिद्ध भ, सकैत अछि। सम्प्रति पूरा दुनियामे धर्म आ संस्कृति मजगूत भ, रहल अछि। अपन जड़ि सँ जुड़बाक भूख बढ़ि रहल छैक।
fate ४४४| | 45 *उत्तर प्रदेश आ उत्तराखंड सरकार एकरा नीक जकाँ भजा रहल अछि | उत्तर प्रदेश सरकार *अयोध्या मथुरा वृन्दावन काशी प्रयाग आदि स्थान पर एक पाइ खर्च क, पाँच स दस पाइ कमा रहल afei* से तथ्य आ आर्थिक आंकड़ा समय विशेष पर *सरकार द्वारा कयल खर्च आ ओहि तीर्थ पर ओहि अवधिमे कुल लोक सभक आवाजाही सँ प्राप्त राजस्व विगत fag वर्ष मे साफ साफ देखा रहल अछि।* एहि पारक मिथिलाक चारि धाम लोक सभक आवाजाही लेल पैघ राजस्व जुटबैवला केन्द्र बनि सकैत अछि। एहि योजना पर ठोस काज होअय आ से मिधिलाक सब SAM समधानल रूपमे हम अहाँ करी से आह्वान। *पुनौराधाम सीताक जन्म स्थान * एहि लेल विगत दस बर्ख सँ बिना ढोल पिटने आ श्रेय लेबाक इरखा सँ दूर रहि अभियान चलल AS 200 सँ चुपचाप बिना हल्ला HAA, cho फारने, ज्ञापन देने चिक्कन काज भेल अछि। आ जखन लोहा गरम छलैक TSA 2024मे अयोध्यासँ पुनौराधाम 26 दिवसीय पदयात्रा एकरा चुनावी एजेण्डा सेट कय देलकै। *परिणाम सोझा अछि*। *भारतक एक प्रधान मंत्री विवाह woh समारोह मे गछि आयल छलाह सीता नेपालक बेटी छथि* आ *भारत देशेक एकटा गृह मंत्री अयोध्याक समान सीताक जन्म स्थान पुनौराधाम मे भव्य मन्दिर निर्माणक भूमि पूजन कयलनि अछि* ई उदाहरण मात्र एहि लेल जे मिथिलाक अतीत सांस्कृतिक मात्र नहि अछि ठोस आर्थिक अछि मिधिला एकटा नौलेज हब, चिकित्सा केन्द्र आ पैघ कारोबारी सेन्टर रहल अछि। से एक दू साल नहि सैकड़ो हजारो साल। बृहत्तर सांस्कृतिक मिथिला आ एहि पारक चारि धाम सेहो पैघ आर्थिक धुरीक इतिहास दोहरा सकैत अछि।
fate ४४४] | 46 एहि पर काज आगू बढय। एतय ध्यातव्य जे मिथिला एकटा देश रहि चुकल अछि। एक मिथिला देश के भीतर कतेको स्वतंत्र सत्ता वला राजनीतिक इकाई रहि चुकल अछि। आ से तथ्य ऐतिहासिक सत्य अछि। मिधिलाक लगभग पांच हजार बर्खक इतिहास पर काज नहि भेल अछि। हेबाक चाही। अपन Sle डाबर आ खेत सबमे भसल इतिहासक खोज आवश्यक APS | अड पर सेहो काज होअय आचार्य रामानंद मंडल,-अयोध्या आ सीतामढ़ी के स्थानीय लोग सीता मे आस्था रखैत रो रहल हतन। मंदिर पुनर्निर्माण से कोनो दीक्कत न हय परंच आस्था के ओट मे अडाणी अम्बानी के किसान के जमीन सौप देल जाए आ पूंजीवाद के मजबूत कैल STS कंहा के न्याय हय। हां सीता महरानी के महल निर्माण से लाखों किसान आ स्थानीय लोग बेघर होने के कगार पर हय।लाल महल के निर्माण आम जनता के खून से Sly छैय।लाल किला आ दरभंगा किला एकर प्रमाण हय। राष्ट्रवादी हिटलर AT मुसोलिनी Set रहय।एकरा फासिस्टवाद सेहो कहल गेल हय। हमरा लगय मिथिला के विद्वान जनकवि यात्री न, बल्कि फासिस्टवादी विद्वान होयतन। महाकवि विद्यापति न भगवान छतन आ न लोकदेवता। बल्कि जनकवि महाकवि हतन। महर्षि बाल््मीकि, महर्षि कालिदास भगवान न छतन। भगवान राम को बाप दशरथ आ भगवान कृष्ण के बाप वसुदेव सेहो भगवान न छतन । महाकवि विद्यापति एकटा दरबारी कवि रहलन। वो महाकवि के सम्मान से सम्मानित रहय दिऊ। धनाकर ठाकुर,-बिल्कुल ठीक। १३२६ तक मिथिला देश छल,(सिवाए fers मिथिला क नाकी अजातशत्रु क अत्याचार,अशोकक अत्याचार क समय छोड़ि,हमर विदेशमे ५७म कराल जनकक बाद विश्वक पहिल गणतंत्र, सीमा asa गोरखपुरसँ छपरा गेल घाघरा करनाली सँ गंडकी नारायणी सेहो सोनपुर गजग्राहस्थली गेल अछि। १३२६ सँ १७७० तक मुस्लिम शासक तथापि मिथिलाक स्वतंत्र अस्तित्व मानलक ROSA बोर्ड आफ रेवेन्यू पटनाक भीतर सरकार तिरहुत रख सकती, राजा नरेन्द्र सिंह क समर्थन मे बादशाह शाह आलम द्वितीय अंग्रेजकँ लिखलन्हि १८०० मे जे मिथिला सदैव स्वतंत्र रहल किन्तु अंग्रेज नहि मानलक, मगध बिहार एखनहु मिथिलासँ राशन लैत अछि वोट लैत
विदेह eee | | 47 अछि, आओर हमरहि तोड़क हथियार भाषाइ विखंडन, जातीय वैमनस्यसंँ। हम रही नहि रही मिथिला बनि क रहत अगर रहल सदैव मिथिलाक संग। नो इफ एंड बट बट मिथिला स्टेट। मनोज पाठक -आचार्य जी आस्था व्यक्तिगत गुण छै। जाहि व्यक्तिक समूह जतेक विशाल ओ अपन ओतेक विशाल प्रतीक स्मृति स्थल बना लै छै आ ओ स्मृति स्थल प्रतीक स्थल ओतबे पैघ आर्थिक विकासक केन्द्र बनि क, स्थापित होइत छैक। ued किओ स्वीकार करय या नहि एहि सँ ने तथ्य बदलै छे ने सत्य। मजदूर किसान आ आकर्षक नारा भारत छोड़ि सब ठाम ढहि गेलै आ भारतो मे ढहि रहल छै। *अडाणी अंबानी टा भारतक सब प्रान्त मे सब गाममे लगभग सब जातिक लोक कारोबार मे उतरि रहल छै आ नीक पूंजी बना रहल छै। * आ से प्रवृत्ति पुरान वामपंथी सोवियत संघक सबस सबल देश रूसमे आ एकमात्र अधिनायक वादी वामपंथी चीन सहित सब देशमे स्थापित भ, गेल छैक। पूंजी पुरान भारतक नगर सेठ आ नव दुनियाक अदाणी अंबानी सहित रुसक पुतीन आ चीनक जिनपिंग के संग जुड़ल विशाल पूँजीपति वर्ग मे स्थापित तथ्य आ सामयिक सत्य अछि। रूसक पुतिन आ चीनक जिनपिंग अपन अपन धर्म के मजगूत क, रहल अछि आ नव सांस्कृतिक सत्य पुरान जड़ि सँ जुडि गढि रहल अछि। कने चीनी सिनेमा, साहित्य आ प्रदर्शनक सब माध्यम मे बढ़ैत सांस्कृतिक अस्मिता पर नजरि द, क, देखबैक त, स्पष्ट भ, जायत। रहल अयोध्याक किसान मजदूर आ पुनौराधामक वर्तमान किसान मजदूर के माली हालत a अयोध्या आ लगपास क तीर्थ पर पछिला पचीस साल सँ काज क, रहल छी आ सीतामढ़ी पर 2007 सँ काज &, रहल छी। अयोध्या आ प्रयाग दुनू एकटा ढहैत ढनमनाइत सांस्कृतिक नगर छल जे आब उत्तर प्रदेशक अर्थ व्यवस्था मे मजगूत योगदान दै वला
विदेह ४४४ | | 48 आर्थिक केन्द्र फेर सँ बनि रहल अछि। इयैह स्थिति सीतामढ़ीक हेतैक। हमर घर सीतामढ़ी नहि अछि मुदा सीता Wines स्थल एकटा पैघ तीर्थ ats सकैत अछि ताहि पर स्थानीय लोक सभक एक सीमित चुनिन्दा लोक संग काज कयल आ परिणाम सोझा अछि। बाकी Big फुलहर राम सीता मिलन मंदिर बाग तडाग एकटा विराट तीर्थक संभावना रखैत अछि जतय अयोध्या सीतामढ़ी आ जनकपुर तीनू ठाम सँ लोक सभक आवाजाही बढतैक || बिहार सरकारक ag संभावनाके स्वीकार कयलक आ 30 करोड देलक। of अहाँ वा किओ व्यक्तिगत आस्था जे राखी से राखू मुदा जे संभावित आर्थिक केन्द्र बनै के संभावना रखैवला स्थल अछि ओकर सांस्कृतिक विकास लेल संग आउ। अयोध्या मे या पुनौराधाम सीतामढ़ी मे या कतहु जे आइ विस्थापित होयत आ St अपनाके योग्य बनाओल ओकर आर्थिक विकास सुनिश्चित Sal अयोध्याक चारू तरफ़ तीव्र आर्थिक विकास चलि रहल छै एहनामे अपन पूँजी बना लगा एकटा चारि फीट बाड़ चारि फीट के ठीया मजदूरी सँ बेसी कमाई द, रहल छैक। कारोबार के अधलाह कहियो नहि कहलक मिथिला उत्तम खेती ASA बान अधम चाकरी तँँ खेती वर्तमान मे उत्तम नहि रहल बनिज बनबाक समय छैक मिथिलाक लेल आ से कारोबार नौलेज हब के रूप मे होअय वा शुद्ध वस्तु सभक कारोबार कारोबार लेल आगू आउ। वामपंथ अपन प्रासंगिकता सब ठाम गमा लेलक। कारण वामपंथ सेहो नाम बदलि ओही पूंजीवाद चोगा ओढने छल। एहिस पूरा तरह उबरबाक आवश्यकत मिथिलाके छैक। आ सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिथिलाके विकास तेज करत भारतक आन प्रान्त सन नरेंद्र झा -विद्यापतिक सन्दर्भ मे जाहि तरहक टिप्पणी कयल गेल अछि ओ सर्वथा उचित नहि बूझि पड़ल, Fal फेसबुक पर as सभ किओ बिना पढ़ने विद्वान् होइत छथिन्ह, तैं कि कहल जाय! विद्यापति कैँ श्रृंगारिक कहबा सँ जखन रमानाथ झाजी सनक आलोचक परहेज नहि कयलनि तखन कि कहल जाय! विद्यापतिक पदावलीक अर्थ गौरव करब ओतेक दालि -भात कौर नहि छैक, जेना कि सभ किओ परसैत रहैत छथिन्ह! लाखक लाख टाका आ दिन- राति ule as आंखि फोरलाक उत्तरो जखन बहुत किछु जानक लिलसा रहिए जाइछ, तखन एखनुक्का समयक विद्वठत समाजक लेल feng कहब कठिन बूझि पड़ै 'अछि!
‘faze ४४४ | | 49 आब तँँ आंखि सँ APR आ कान संँ बहिरे रहनाइ उचित Gat WSs! लक्ष्मण झा सागर -कथा- कुंभ ग्रुपपर नीक कथा भ रहल अछि। अपन पुरखाके आब बात कथा टा कहब बांकी रहि गेल छल। सेहो कम नै सुनलनि अछि हमर आदि पुरूष लोकनि! एडमिन महोदय, हमर रक्तचाप बढ़ि रहल अछि। पराकास्था भ गेल अछि। ot ई बकबास बन्द नै करबायब त हम एहि ग्रुपसं विलुप्त हैब श्रेयस्कर बुझब। आचार्य रामानंद मंडल -आश्चर्य। महाकवि विद्यापति कि कोनो खास वर्ग के पुरखा मानल जाय कि जनकवि महाकवि विद्यापति। एकटा महान् कवि। Git कोनो कवि के रचना प्रकाशित होइ जाय छै तो वो सार्वजनिक व्यक्तित्व हो जाइ छै।वोहुना हु महाकवि विद्यापति के लगभग ६०० वर्ष भे गेल हय।वो विश्व व्यक्तित्व छतन न कि भगवान। वर्तमान काल में सेहो लोक देवता के रूप में पूजित न छतन। PAM... -आचार्य रामानंद मंडल, सीतामढ़ी। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ।
fate ४४४| | 50 २.८. राजदेव मंडल- प्रती क्षाक पीड़ा श कि. i राजदेव मंडल प्रती क्षाक पीड़ा शहरक पछमी भाग मे एकटा छोटका बस स्टैण्ड । ओहिठाम सड़कक कात मे गाछतर कमली ठाढ़ अछि | बिनु सिंगारोक ओकर मुखक आभा लोक कँँ आकृष्ट क५ रहल अछि | यौवनक प्रथम स्पर्श सै अंग-अंग लावण्यता सैं परिपूरित अछि | ललिआएल कपोल पर लटकल लट केँ ओ बारम्बार हटबैत अछि | ओकर आँखि जाएत-आबैत लोक पर नाचि रहल अछि | शाईत ओ चिन्हल-पहिचानल चेहरा कैँ खोजि रहल अछि | जेकर चिर -परिचित मुख-चित्र ओकरा आँखि मे कतेको दिन सै रचल-बसल अछि | जनिक देहक रसगंध मे ओ कतेबेर सराबोर भेल हेतें , पता नै । जेकरा सैं feat पूर्ण अंतरंगता सैं जुड़ल रहैत अछि । आँखि बन रहे वा कोनो कारणे नै सुझै तेकर Tal देहक सुगन्ध S ओ हुनका चिन्ह जाएत अछि | मुदा ered से कामे अछि कहाँ? ओकरा तैँ BIE | ओकर परछाहींयो नहि देख रहल अछि । कमली मन में विचार करैत अछि - जइठाम कहने रहे | वैह SS जगह SH | ओहि जगह पर ठाढ छी |
fate ४४४| | 5 Fel st Het कहाँ अछि | घर सं नुकाइत -छिपाइत तेजी S निकललौं | हड़बड़ी के कारणे रस्ते में मोबाइलो कतौ गिर पड़ल | तीन घंटा S एतनी दूर में घुरिया रहल छी | कोनो सै आबियो नै रहल अछि | Weiter | आस-निरासक बीच एकटा बाँझ प्रतीछा | जई में आसक डोर निरन्तर बढले जा रहल अछि , अन्तहीन गन्तव्य fear | कहिया तक , कखैन तक , पता नै | कमली सोचैत अछि - ओने अंगना-घर मे तैँ हड़कंप मचल हेतै । गामक लोक कहैत हेतै जे केकरो सैंगे भागि गेलौ | माय-बाबू St बुझिए गेल Sa जे केकरा सं बेसी मेल-जोल Get | केकरा सैंगे भागल हेतै । अखैन कोन मुँह लए H घर आपस जाएब । केकरा ces , के पतिएतै , जे ई सुनतै Se लतिएतै | एते विश्वास केलौं | सब किछो छोड़ि-छाड़ि माया मोह Hos तोड़ि-ताड़ि चलि एलौं | मुदा हमरा सँ अधलाह काज भए गेलैं | झूठा , बेदरदा केँ बात पर विश्वास केलौं | TAT कहलक ओतए आबि केँ अहुरिया मारि रहल छी | आब हैँ लगैत अछि - हमरा चारूभर खाइधे-खाधि अछि जई में नकार मुँह बौने हमरे दिस ताकि रहल अछि | HER बढल जा रहल छै | हमरा गाम दिस जाएवाला आब एकोटा बसो नै है | अनजान शहर में कते रहब ? कते जाएब तैं जान Fae | आई हमरा सैंगे की हैत पता नै । छलिया , बेइमनमा हमरा सैंगे धोखा केलक , विश्वासघात केलक | परेमक नाम पर नाटक करै छल | BA में एतेक परिवर्तन | छने में छनाक भेलौ दाय गे , हीरा गेलौ हेराय गे । जेना संभव आ असंभव में कोनो दूरी नै रहल अछि । बगल सै गुजरैत जुबक सभक भुखाएल ऑँखि ओकरा देह & निहारि tact अछि | ओकर aa देह डर सै झुर-झुरा उठैत अछि | कियो आपस में फुसराहैट करैत अछि तैँ feat जाएत-जाएत हाथ आ ऑँखि सं इशारा करैत अछि-मुस्की मारैत | तखैने एकटा भारी स्वर ओकरा कान सैँ टकरैत अछि -" कते जाएब ? केकर परतीछा करै छी ? " आब कमली केँ ओहिठाम ठाढ़ रहनाए मोसकिल UT गेलै | चोरक मुँह बर जोड़ | ऐठाम S ससरि जेनए ठीक | मुदा जाएत कते ? जखैन लोक समस्या सैं घेरा जाएत अछि तैँ मनक aa तीव्र गति S समाधानक अन्वेषण करै लगैत अछि | एहेन परिस्थिति मे नीक वा अधलाह समाधान Ged मे परिलक्षित भए जाएत अछि | समस्याक at समाधानों tea अछि | कमलीयोक समाधान भेटि गेलें । ओकरा मन मे उपजलै - आब एकेटा उपाए अछि | हमरा बहिनक सासुर हैँ ऐठाम S नजदीके अछि | हमरा दुख के: te बुझबो करत | कोनो नीक उपाएयो लगा देत | बहिनेक घर पर चलि जाए छी । आगू में ससरैत बसक लग ओ तेजी सैं पहुचैत अछि आ बस पर चढबाक प्रयास करै लगैत अछि ।
बिदेह ४४४] | 52 बसक भीतर सै कियो कहैत अछि - " हे यौ गिर पड़तै । AR जेतै | कनी पकैड़ लियौ |" एकटा जुवक ओकर हाथ नै बाएं हि पकैड़ बसक अन्दर घींच लैत अछि । ओकर आँखि मे कुटिल मुस्कान भरल अछि | कमली सबकिछो afer tect अछि | मुदा अखनी बजबाक मौका नै छै । झमारि HSS बाएं: हि छोड़बैत ओ डगमगाइत बसक सीट पर बैसैत अछि | बस तेजी सैं आगू बढ़ै लगैत अछि | आब जेना ओकर हीया फाटि रहल छै । एकबेर फेर कमलीक निराश मन में आसक किरिण चमकैत अछि । ' कहीं आबि तैं नै गेलै । at बसक खिड़की Surg fea तकैत अछि । ' कहाँ कतौ छै ? ' जेना अन्तर में किछु दरैक रहल छै | Fifa में नोर आबि जाएत छै | घृणा सैं मुँहमे थूक भरि जाएत छै | ओ थूक फेकलक । ' आक थू ' पता नै ओ थूक केकरा पर पड़ल | मुदा हवाक सैंगे धूकक किछ अंश अपनो पर पड़ल | जेकरा ओ नोरक सैंगे पोछि लैत अछि -चुपेचाप । - राजदेव मंडल, Mob:999592920; Gmail mandalraji5960@ gmail.com अपन Hae editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ।
fate ४४४| | 53 २.९. लाल देव कामत- हमर छात्र राजनीतिक: एक क्षण <x aes Se i. cm डी : ' 2 | - "y लाल देव कामत हमर छात्र राजनीतिक : एक क्षण हम सन् १९८९ ई०मे चन्द्र मुखी भोला महाविद्यालय Sag घोघरडीहामे बीए,पास कोर्समे पढ़ि रहल छलहूँ। एक दिन लिझर घंटीके समय काउमन रूम लग युवा साथी चुल्हाई कामत आ राम नारायण यादव एस एफ आई केर कालेज युनीट कायम करय लेल आयल रहथि। ओ लोकनि हमरा सदस्यता दिएबैत आरो विद्यार्थीगणकैं: उत्पेरित कयलन्हि। हमरा एक reg नव सदस्य जोड़य लेल देने गेलथि। डी वाई एस एफ के Soo उमेश राय साथीक संग श्री कामत जी एक दिन the अयलाह आ सदस्यता ग्रहण कयल नैका मेम्बरके बीच नुक्कड़ सभा कय वामपंथी उर्जा सँ ओत -प्रोत केलनि। फेर एक दिन हटनी- अलोला युनीटके बैसारमे लाल झंडाके दिवाना कां भारत भूषण मंडल आ राजकुमार यादव ,लाल परीव नेत्रीक संग आबि अंचल कमिटी(कोसी) सँ आह्वान कयलन्हि पटनामे राज्य सम्मेलन देखय - सुनय निश्चित रूपँ चलै चलू। नियारभास अनुसारे कामरेड रायबहादुर मंडल, रामप्रसाद मंडल, सुभक लाल ठाकुर ,कारी कामत ,सत्य नारायण कामत, फूदन मिश्र, मुन्शी मिश्र, फतनेश्वर मिश्र, मालीक झा ५ ठकाई साह , TAT लाल कामत , रामौतार कामत बिलेक्षण कामत , कृष्णनंदन सिंह ,हम आ तनुक
विदेह ४४४ | | 54 राम , भुवनेश्वर मंडल(बेल्हा) जूलूसक बैनर साथ घोघरडीहा रेल टीशन पर जुमल रही। ट्रेन सँँ हाजीपुर धरि संगहि यात्रा केयलहूँ। माकर्सवादि पार्टी केर दिश सँ बसके व्यवस्था भेल रहैक। हांई -हाँई के सबकेओ बसपर चढल, हमरा तनुक केँ छतपर चढ़ैमे खतरा बुझाएल आ लटकलो नहिं भेल भीड़मे। दोसर बसमे बैच रहैत नहिं बैठय दिअ अन्तयके यात्रीसब। हम दूनु गोटे पैर ओतय सँ पटना जयबा ले विदा भेलहूँ। राजेन्द्र बाबूक नाम पर गंगा नदी पर बड़का पुल रहय, से देखैत आनन्द पुर्वक गायघाट धरि आबि थाकि गेल छलौहूँ। आब हमरा दूनू गोटय केँ संगमे मात्रे दू - दू टाका मुरही खेलाक वाद बुर छल। से ओही टाका सँ आउटो भाड़ा चुकबैत गांधी मैदान आम सभा स्थल धरि हेहरू भ' एलहूँ ,तँ सब जिलाके अलगे - अलग बोर्ड लिखल भाजन कक्ष देखाएल। पूर्वोत्तर भाग मधुबनी जिलाके भोजनालय ताकि लेलहूँ हम-सब। ओतय सुभगजी आ कृष्ण नन्दन जी हमरा दूनू Mesh देखते शोर केलथि। आ कहलक हमहीं दूनू गोटय खायमे पछुआएल Hat दूनू गोटे कतय रहि Het ? कारी नेता , मजदूर नेता सतलरायेन तोरा सबकें ताकै ले कनौ गेल छौक! सभा दिश अयलहूँ तो देखै छी चारि चिंतग Hs भारत भूषण जी सूतल फोंफ काटि रहलाह हेन। आरो Pee कामरेड लोकनि राज्य सचिव गंगेश शंकर विद्यार्थी -एकलौता विधायक che सम्वोधन सुनि रहल अछि। मुख्य आकर्षण आखरी वक्ता केरल सँ आयल मुख्यमंत्री नम्बूदरीपाद' भाषण अंग्रेजी म आरंभ भेल ,तकर हिन्दी भाषान्तर पटना हाईकोर्ट केर पार्टी अधिवक्ता शुक्ला जी Hs रहल छलाह | बोफोर्स घोटालक' आक्षेप वीपी सिंह वित्त मंत्री देशके युवा प्रधानमंत्री राजीव गांधी पर लगाबैत जे इस्तिफा दैत राष्ट्रीय मोर्चा बनोलनि, ताहि प्रसंग लोक सभाक चुनाव सन्निकट SH से भ्रष्टाचार कर विरोधमे वक्तव्य चलिए रहल छलैक।ओहि मुख्य अतिथिक विषय में वृहत् जनतब लेल किछु पर्ची खोजैत रही हम। मुदा बिनु कैंचा केर ओतय एक फ़ोल्डरों - लघु पुस्तिका नहि हाथ आयल | हुनक जयन्ति पर स्मरण भ' उठलाह -: थूथापूझा नदी तट पर बसल एक एलामकुलम गाम जे पेरिन्थालमनना तालुका केर मल्लप्पुरम् जिलाक अन्तर्गत केरलाक' - परमेश्वरण नंबूदरीपाद पिता आ माय fered अंतरजनम केर घर दि० १३ जून १९०९ go ch मनकल शंकरन नंबूदरीपाद'क जन्म भेल छलनि। आरम्भिक शिक्षा पलघाट आ त्रिचुरमे Ta रहनि। हुनक वियाह आर्या अन्तरजनम संँ भेल रहनि। श्री नंबूदरीपाद जी मलयालम आओर अंग्रेजी भाषाके लव्धप्रतिष्ठित लेखक आ कांग्रेस पार्टीक नेता रहल छलाह। हुनक तीन प्रमुख पोथीमे मलयालम क्यो श्वशन इन केरला,गांधी एण्ड हिन्दुज्म, द freee FRAT इन केरला छैक। सन् १९५७ मे साम्यवादी सरकारके मतप्रेटीके माध्यम सं पहिल मुख्यमंत्री
बिदेह ४४४| | 55 भेलाह। पुन: केरलके प्रभावशाली मुख्यमंत्री बनल छलाह। दि० १९ मार्च १९९८ So ch हुनक निधन पर लाल सलामके गगन भेदी नारा बन दिग-दिगंत गुंजायमान भ' उठल छल। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ।
विदेह ४४४ | | 56 २.१०. प्रीति कुमारी- राम श्रेष्ठ दिवाना: एक व्यक्तित्व श ं , ' जि प्रीति कुमारी ः राम श्रेष्ठ दिवाना: एक व्यक्तित्व मधुबनी जिलाक पछिमक भूभाग पर एक प्रसिद्ध जीरौल गाम अछि,जे हरलाखी प्रखंडमे Usa छैक।
fate eee | | 57 एहि गामक माय श्रीमती रामसखी देवी आ बाबू श्री तुलसी यादव जीके घर ४ जनवरी १९५७ Go H राम श्रेष्ठ जीके जन्म भेल रहनि। बालपनमे हुनक काका श्री ज्ञानी यादव जी जे ,सीपीआई.के अंचल मंत्री रहथिन,हिनका गामेक पाठशालामे पढ़य लेल नाँउ लिखा देलकनि। सन् १९७५ ई०मे खिरहर हाईस्कूल सँ मैट्रिक पास कयलनि आ कालीदास विद्यापति विज्ञान महाविद्यालय - Tato सँ आगूक पढाय - लिखाय जारी रखलथि। हिन्दी आ मैथिली दू विषयमे स्नातकोत्तर कयने छथि। मैथिली भाषा मेँ हिनक पहिल रचना (कविता) हबड़ा, कलकत्ता सँ प्रकाशित दैनिक अखबारमे १९८० ई० मे छपल रहन्हि। मैथिली - हिंदी दूनूमे राम श्रेष्ठ दिवाना जी लिखैत छथि। हिन्दी साहित्य क्षेत्र हिनक अधिक रूचि बढ़लनि,से वैद्यनाथ मिश्र 'यात्री' जीके मार्गदर्शन सँ। So यात्री जीकेँ नागार्जुन ATA हिन्दी साहित्य क्षेत्र नाम जगजियार भेल oe, ओ श्रीदिवाना जीके जन्म सँ पहिले सँ साम्यवादी हिनक पिता सँ He ले जाईत रहैत छलथिन्ह। दिल्ली सँ मैथिलीमे "राजा सलहेस" शोध ग्रंथ २०१५ मे प्रकाशित भेल छन्हि। हिनक मुख्यत: हिन्दीमे एक दर्जन पोथी प्रकाशित भेल छन्हि,जाहिमे छह गोट ग़ज़ल संग्रह ST Bal कविता संग्रह दिल्ली सँ छपल छैक। पंजाबक श्री देवेन्द्र नाथ सत्यार्थी जी डेढ़ लाख लोक गीतक संकलन सम्पूर्ण भारतमे भ्रमण क' कयलनि,से ओ बिहारक मिथिला क्षेत्र लोकगाथा लेल हिनका ' राजा सलहेस ' उपर काज करबाक खगौट जनौने रहनि। राजा सलहेसके प्रेम संदेश अमर रहलैक अछि। दिवाना जीके पाण्डुलिपि नाटक विधामे बहुत प्रकाश्य कृति छन्हि। किछु नाटकक मंचन देशक सीमा सँ बाहरो होईत रहलन्हि अछि। जाहिमे कलाकार अद्भुत विद्रोह नेपालभरिमे देखेने छथि। पाँच दर्जन सँ अधिक नाट्य समारोहमे राम श्रेष्ठ जी स्वयं मुख्य अभिनय केर पात्रके किरदार निभौने छथि। पुणे सँ नेपाल aft रंगकर्मी बनि अपन अभिनय कलाके प्रदर्शन कयने छथि। नामी-भीखारी ठाकुरके विदेशिया नाटकके अनेको बेर मंचन करैत स्वंय मुख्य पात्र बनल रहलाह। असमानता के विरुद्ध जगदेव प्रसाद जीके उपर जे कविता लिखलन्हि ,से बोधगया केन्द्रीय विश्व विद्यालयके एम ए. कोर्समे पढ़ौनी होईत छन्हि। ग्रामीण स्थानीय कलाकार'क संग तँ नाटकमे अभिनय करबे केयलाह ओ प्रसिद्ध इफ्टा० टीममे रहि कतेको जिलामे लोक नाटकक प्रस्तुति देने छथि। ओ 'महाकवि नागार्जुन Cee" नामक संस्था गठन कय, ओहिक बैनर तर Sel नाटकक मंचन करैत रहैत छथि। पाखंड, अंधविश्वास, भेदभाव आ असमानता केर विरोधमे राम श्रेष्ठ दिवाना जीके लेखनी चलैत रहल अछि आ लाल गुलाब हिन्दी मासिक पत्रिका ,ज्ञान विज्ञान संदेश, मित्र मंडल विचार आदिमे रचना छपल छन्हि। सम्पादित करने छथि :- लोकगीत संकलन पढ़ें, सामूहिक गाएँ ,आखर के चमके बिजुरिया,आखर से जुड़िला स्नेहिया आ आखर के बरसे बदरिया | एक विचारक अनुसारे ९०' / .लोक दलित साहित्य केर सौन्दर्य STA cite
fate ४४४| | 58 गाथा सलहेस मादे मानैत- जानैत छथि बिहारमे। मिथिलाके दूनू पारक लोक अर्थात भारत- नेपालमे लोकदेव रुपेँ हुनका मान्यता देने छथि। राजा सलहेस लोकगाथा भाव प्रधान छैक,से कहब एकदमे उचित छै। ओहि लोकगाथामे अनेकों तरहके भाव Ved छै,जाहिमे सामाजिक -धार्मिक - आर्थिक आ लोक मनोरंजक भावक प्रधानता छै। आओर इयह लोक साहित्य वा अनार्य साहित्य'क अन्त:मर्म छी। चूंकि ई Yow साहित्य थिकैक, जोन बोनिहार'क ,हरबाहाक,चरवाहाक, घसबाहिनिक, महिंसबारक - गैवारक, आ मेहनतकश लघु कृषकके दुःख दर्द Sees, वेदना, संवेदना आ ओकर संस्कृतिके लोक साहित्य छी। अही कारण सँ समय- समय पर हिन्दी जगतके साहित्यकार - कविगण cb अपना दिश आकर्षित करैत रहल अछि। ऐ मादे दू स्थापित शलाका पुरूष केर उक्ति केँ देखल जा सकैत छी -: हिन्दीक प्रख्यात कवि बाबा नागार्जुन ऐ लोक गाथा केर प्रसंगमे लिखने छथि "हिंदी प्रदेशक सम्पूर्ण काव्य जगत राजा सलहेसके ऋणी छथि,जाहि गाथामे साहित्यिक सब रस समाहित SHI" ताहि विषयमे राहुल सांकृत्यायन लिखने छथि "राजा सलहेसक लोकगाथा सम्पूर्ण भारतीय साहित्यक शिरोमणी जीके,जाहिक चमकी कहियो नहिं मलीन होयत। समयके संग एहिक ख्याति बढ़िते जेतैक।" श्री राम श्रेष्ठ दिवाना जीके कालजयी रचनामे प्रमुख छै,यथा-: जरा याद करो कुर्बानी (१९८३), इंक्लाब जिन्दाबाद आओर दोस्त का खून - नाटक(१९८५), भीखमंगा का देश हिन्दुस्तान (१९८७), सृजन के परवाने (जीवनी १९९६ ई०), मिथिलांचल की कथाएं (२०००), भोजपुरी लोककथा (२०२२), २००३ मे तीन पुस्तक - शीत बसंत,राजा भोज और गंगू तेली ,दाल और पानी। आजादी खतरे में ,कलुआ डोम, फांसी पर गणतंत्र,ताजमहल मैंने भी बनाया ,आदमी कैसे दरिन्दा हो गया, प्रेम न हाट बिकाय, मैं बुद्ध हूँ, मुहब्बत जिन्दाबाद,नेह की बारीश, आदमी के भेष में आदमखोर को देखा है। क्रान्ति के बलिवेदी, तालीम जमाना ,भुख लगी है रोटी दो ' आदि सारगर्भित रचना केँ परेखय बाला संस्था /विभाग पुरस्कार धरि देने छैक। हिनकर धारदार रचना पर व्यापक विमर्श केर आवश्यकता छैक। बहुत कविता 'क भाषान्तरण मैथिली, अंग्रेजी, बंगला ,मराठी,उर्दू, तेलगु आ पैनजाबीमे अनुवाद भेल Ba वर्ष २०१८ मे 'फांसी पर गणतंत्र ' weft "नोवेल अवार्ड " लेल नामीत पैनलमे मिज्झहर भेल रहैक। श्री दिवाना जी २००८-११ भारत सरकार , हिन्दी सलाहकार समितिमे सदस्य रहल छलाह,आ उत्तर मध्य सांस्कृतिक केंद्र इलाहाबाद संस्कृति मंत्रालयमे Set भारत सरकारके पूर्व सदस्य रहल छथि। देशके दर्जनों पत्र - पत्रिकामे सैकड़ो
fate ४४४| | 59 रचना प्रकाशित देख बिहार राष्ट्रभाषा परिषद हिनका साहित्य सेवा सम्मान देने BPS! सन् २००५-०६ मे संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार वरिष्ठ फैलोशिप अवार्ड देने छैक। बिहार सरकार, राजभाषा विभाग द्वारा रामधारी सिंह दिनकर पुरस्कार २०२०-२१ मे प्रदान कयने छैक। धर्म SF उपर मानवताक संदेश , शहीदे आजम भगतसिंहके जीवन पर आधारित नाटक 'इन्कलाव जिन्दाबाद ' मे देबाक चेष्टा कयलनि a भुखके विरुद्ध fe मुसलमान एकताक संदेश 'भुख लगी है रोटी दो 'मे देबाक चेष्टा कयने छथि। लेखक सरकार सँ आ समाज S उपेक्षित दशा वाबत संवेदना ओ पीड़ाके वर्णन 'भीखमंगों की हिन्दूस्तान ' मे करबामे निपुण भेलाह अछि। ई मातृभाषामे पुन: पुनः सृजनके शेष काज करथि ,से लालसा राखैत छियन्हि। - प्रीति कुमारी, बी.ए., बीएड. अपन Ade editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ।
fate ४४४] | 60 २.११. संतोष कुमार राय 'बटोही'- धारावाहिक डायरी 'लव यू टू' संतोष कुमार राय 'बटोही' धारावाहिक डायरी 'लव यू टू' फरवरी, 209 किसान सम्मान निधि और सत्ताक खेल दिसम्बर, 208 मे केन्द्र सरकार किसान सम्मान निधि योजना ch घोषणा केलाथि और मोदी सरकार & पहिल कार्यकाल ce अंतिम बजट मे एक फरवरी केँ संसद मे वित्त मंत्री पीयूष गोयल साहब ऐ योजना हेतु राशि केर बेवस्था केलाथि। ई योजना 209 लोकसभा चुनाव S पहिने लागू HS चुनाव मे वोटर कँँ साधवाक लेल परयास chet गेल जाहि मे ओ सफल Hera | किसान SH चारि महीना पर खाता मे राशि आब5 लगलै। जिनका नहि खेत-पथार हुनको सभ SH लाभ Fes लगलै | कर्मचारी सभ सेहो फार्म पास क$के मालामाल भेलैत | सत्ता मे फेर मोदी जी वापिस भेलाह | किसानक आंदोलन टाँय-टायँ-फीस भेल | पूरा देशक किसान हारि गेलाह | विपक्ष वोट चोरी केर आरोप लगाबैत रहल , UGS सत्ता पर सरकार & किछु फरक नहि Users | किसान जे दिल्ली कँँ सीमा पर आंदोलन करैत मरि गेलाह ओकर कुनो परवाह सरकार नहि केलाह | खेतीहर केँ जानि-बुझि as शहीद होम5 पड़लैन्ह । ate वोट सँ जीत as मोदीजी फेर देशक प्रधानमंत्री बनलाह | रेबड़ी बँटैत रहतै आओर देश मे सत्ता सुखक इंतजाम होयत रहतै | हुँआ-हूँआा केनिहार केर संख्या बढ़ि रहल छै | देश मे बकरी चरेनिहारक संख्या बढ़ि रहल छै | सोशल प्लेट फारम पर झूठक विश्वविद्यालयक संख्या Set बढ़ि रहल अछि |
‘faze ४४४ | 62 किसानक सरकार सँ जे मांग छल ओ पूरा ate भेल | ई दुखद अछि जे 'जय किसान जय जय जवान आओर जय विज्ञान' केर नारा सभ Pear साबित WS रहल अछि | फरवरी, 2020 करोना महामारी आओर देश जनवरी, 2020 सँ करोना के रिपोर्ट आबअ लगलै। हम डीपीएस ch हास्टल खाली Heres सभ गार्जन के बुला ws सभ विद्यार्थी के आननफानन मे घर भेज देलियै आओर विद्यालय बंद कके हम सब Set घर आबि गेलहूँ अछि | कोन बेमारी छियैय ई 'करोना कुमारी' | बुखार लगैत छै आओर बुखारे-बुखारे जीनगी केँ लील लैत छै | हमरा गाम मे दूटा लोक AR गेलाह | बुधन कोलकाता S ऐल छलाह | हुनका बुखार लगैत छलैन्ह , परण्च करोना कुमारी Set वा कोनहु दोसर छोटका-मोटका TA से नहि मालूम ? रस्ते सँ मधुबनी at भेज Set गेलै । ओ एक सप्ताह कें अंदर मुआ गेलाह | नेतीलाल बाबा गाम पर ठीके रहैत छलाह | बेटा-पुतोह दिल्ली मे अपन मकान बनौने Sel घुमअ-फिरअ लेल दिल्ली गेल छलाह। करोना हुनका पकड़ि लेलकैन्ह। ओ AR गेलाह। पंजाबी बाग अशमशान मे हुनका मुखाग्नि अपन बेटा देलकैन्ह | डीएमसीएच मे एकटा मरीज केर वीडियो वायरल भेल छल | सुविधा के नाम पर हस्पताल मे किछु नहि chet गेल Set | दु-चारि दिनाक बाद खबर भेटल जे ओ मरीज मरि गेलाह । जे कियो इलाज हेतु अस्पताल जायत छल ओ जिन्दा HA आपस होयत छल | निर्मल काका के इलाज घरे पर भेलैन्ह ओ बचि गेलाह | शिवानंद के इलाज घरे पर राजकपूर केलकिन्ह तँ ओ बचि गेलाह | करोना काल मे भारतक स्वास्थ्य बेवस्था केर पोल खुलि गेलै | देश मे स्वास्थ्य बेवस्था मे ae बेसी भ्रष्टाचार भ रहल छै | अस्पताल मे सँ दवाई आओर मेडिकल इक्वीपमेन्ट , किट लापता Hs जायत छै। स्टाफ आओर डाक्टर भगवान नहि रहि गेलाह अछि। सभटा टाका केर खेल मे लागल छथि। सरकारी खजाना मे लूटिस Ss रहल Bl छोट-सँ-छोट दवा कखनो हस्पताल मे नहि Fea | निजी क्लीनिक खोलिक$ बसि गेल छथि डाक्टर। सरकारी हस्पताल सँ नदारद रहैत छथि | अपन ईमान बेचने जायत छथि। ई भारत केर स्वास्थ्य बेवस्था मे घुन लागल अछि | करोना महामारी देखा देलकै जे भारतक सरकार बौना छथि। आक्सीजन के लेल देश मे मरामारी मचल छल । आक्सीजन निर्माण हेतु प्लांट केर अभाव छल | करोना एहेन महामारी हम अपन जीनगी मे नहि देखने छलहूँ। ई बुखार बड़ खतरनाक छै
‘fats ४४ | 62 | लाखो लोक H अपन आगोश मे लपेट लेलकै । सरकारी सिस्टम चरमरा गेलै | सभ कियो अपनाआप केँ निरैस देने छै । के कखन मरत से ठीक नहि छै । सभक जिनगी ger we टाँगल है | मोन हमरो मसुआयल अछि। बँचि गेलहूँ त५ जरूर लिखब | अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ।
‘aap ४४४ | 63 २.१२. प्रीति कुमारी- St (प्रो.) विजयेन्द्र झा : एक व्यक्तित्व rT \ i) प्रीति कुमारी डॉ (प्रो.) विजयेन्द्र झा : एक व्यक्तित्व डॉ. बिजयेंद्र झा | ie. मधुबनी जिलाक फुलपरास अनुमंडल अंतर्गत घोघरडीहा अंचलके प्रसिद्ध गाम बिरौलमे भारद्वाज गोत्रीय एकहरे मूलग्राम 'क Go दुर्गा ae झा पिता आ माय श्रीमती अन्नपूर्णा देवी जीक घर एक बालकक जन्म Ta रहनि ,जिनक ats - विजयेन्द्र जी पड़लनि | अन्नपूर्णा देवी जीक नैहर चिकना ग्राम निवासी शिवकांत मिश्र पिता, जे दरिहरे मूल ग्रामक कारियप गोत्रीय आ माय सरिसबय राजेश्वर झाक' कन्या
विदेह ४४४] | 64 कमलमुखी सँ भेल ore एहि परिवारक पूर्वज शम्भू नाथ झा बाबा आ हुनक पत्नी बृन्दा देवी - बाबी ,जे हड़री ग्रामवासी पनिचोभय ब्रह्लौल मूलक बाबु झाक पुत्री रहथिन। हुनका शम्भू नाथ झा संँ जेष्ठ पुत्र शंकर झा सेहो रहनि। शंकर झा 'क पिताजी प्रयाग दत्त झाक वियाह अलपुरा गाममे भेल रहनि। प्रयाग aa झाके पिता रहथिन हितलाल झा पेसर नेना झा आ नेना झाक पिता वैद्य विद्यानाथ झा बढ़ पराक्रमी लोक रहथिन। अन्नपूर्णा देवी जीक तीन पुत्र आ एक पुत्री भेलथिन,यथा - त्रिलोक झा, Sto वीजयेन्द्र झा आ इन्द्र ना० झा,ओ जयन्ति काली | विजयेन्द्र जीक वियाह घोघरडीहा निवासी aca गोत्रीय श्रीनाथ मिश्र जीके कन्या श्रीमती बीणा देवी सँ भेलनि। श्रीमती वीणा ere दू गोट पुत्र आ एकटा पुत्री छन्हि,यथा-: कौशल कुमार ,जिनक धर्मपत्नी भेलीह श्रीमती सोनी देबी आ दीपक जी कुमारेवार छथि। पुत्री अंशु झाक विवाह श्री अर्पित झाजीक संग भेलनि,जाहिमे एक नातीन अहाना छैन; जे कनाडामे अद्यावधि रहैत छैन। अपने डॉक्टर विजयेन्द्र जी - चन्द्र मुखी भोला महाविद्यालय Sag - घोघरडीहामे पढ़ि आगु बढलाह | आओर झंझारपुर , दरिभंगा ओ पटनामे टियूशन पढ़ाबैत स्वयं अध्ययन कठिनता सँ कयने रहथि। एखन बाबा साहेब Slo बी आर अम्बेडकर बिहार विश्व विद्यालय - मुज्जफरपुर केर एल एन टी कालेज मुज्जफरपुरमे मैथिली विभागाध्यक्ष छथि आ प्राधानाचार्य रहल छथि। ओ सम्पादक हैसियत सँ ' कोसा' शोध पत्रिका 'क सात अंक aft वार्षिक Se निकालैत आबि रहलाह अछि,एहिक आई एस बी एन - id Ar २६३१० छैक। प्रतिभा प्रकाशन S हिनक २०२१ मे मैथिली व्याकरण आ रचना ६४६ पृष्ठके एवम् २०२२ SoH मैथिली भाषा विज्ञान लगधक १००० YEH आ २०२३ मे मैथिली सहायक इतिहास पोथी Set १००० पृष्ठ 'क बहरायल छन्हि। ४८ शोध लेख केर पोथीक सम्पादन Sto इन्दुधर झा जीक संग मिलकय कयने छथि, ताहि पोथी 'क नाम छी -: आधुनिक मैथिली साहित्य : समकालीन परिदृश्य २०२५ ई०। ओहि साल विद्यापति कृत कृर्तिगाथा सेहो सम्पादन कयलनि। सन् २०२६ मे सद्यप्रकाशित २११ YEH 'मैथिली निवंध वाटिका ' मौलिक ore! साहित्य अकादमी सँ पुरस्कृत पी. केशव देव कृत मलयालम उपन्यास 'आयलका-१९६७ केर अनुदीत कृति 'पड़ोसिआ' ३१६ पृष्ठ केर वर्ष २०२३ मे साहित्य अकादमी सँ छपल छैक। वर्ष २०२० सँ नियमित बहराईत "कोसा" शोध पत्रिकामे हमरो एक आलेख ऐ शताब्दीक सय सँ अधिक रचनाकारमे सँ एक श्री लाल देब कामत जीक व्यक्तित्व पर रहत। - प्रीति कुमारी, बी.ए., बीएड. अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ।
fate ४४४| | 65 २.१३. मिथिलाक नाच पाटी- समानान्तर नाच-नाट्य परम्परा मिथिलाक नाच पाटी- समानान्तर नाच-नाट्य परम्परा [fete नाट्य उत्सवसँ साभार- संकलन उमेश मण्डल/ रामविलास साहु आ अन्य; देल TAL ०१ जनवरी २०१३ केर HPS] नाच पाटी- मिथिला नाट्यकला परिषद- पकड़िया कम्पनी- श्री राम लखन साहु पे. स्व. खुशीलाल साहु पता, गाम- पकड़िया, पोस्ट- रतनसारा, अनुमंडल- फुलपरास (मधुबनी ) मैनेजर- श्री ठकाई यादव पे. स्व. फुसन यादव पता, गाम- मुसहरनियाँ, पोस्ट- रतनसारा, अनुमंडल- फुलपरास (मधुबनी ) नाच- () Heel रूदल (2) लछ़िया रानी (3) शीत वसंत (4) गुगली घटमा (5) राजा Har वृजभान अभिनय ate नाओं /पता- श्री भाठेगी लाल दास- स्व- भायलाल दास लछमिनियाँ (मधुबनी) श्री रामचन्द्र शर्मा- श्री जंगल शर्मा नेमुआ (मधुबनी ) श्री नथुनी शर्मा- श्री वनमाली शर्मा नेमुआ (मधुबनी ) श्री सुन्दर मुखिया- श्री नागेश्वर मुखिया हरियाही (सुपौल) श्री वासदेव सदाय- स्व. कुजाय सदाय सखुआ (ठिनर्मली) श्री नारायण सदाय- श्री गंगा सदाय बेलही (सुपौल) मो. जाहिद उर्फ राजा मो. डोमी नदाफ ae द्वारम (मधुबनी ) श्री रंजीत राम श्री लखन राम खुटौना (मधुबनी ) वाद्य एवं वादक नाओं / पता- आर्गन- श्री छेदी पंडित स्व. चन्द्र पंडित बरहारा (सुपौल)
faze ४४४ | | 66 नाल- श्री परमेश्वर भारती स्व. जगरूप भारती मुसहरनियाँ (मधुबनी ) काँरनेट- श्री चन्दर राम श्री जीतन राम लछमिनियाँ (मधुबनी ) नडेरा- श्री लाल राम स्व. फुसन राम लछमिनियाँ (मधुबनी ) ढोलक- श्री कलानंद राम स्व. खट्टर राम लछमिनियाँ (मधुबनी ) ड्रमसेट- श्री भोलट दास श्री ates ara ठिनर्मली (सुपौल) आन सहयोगी- श्री airy area श्री ठकाई यादव मुसहरनियाँ घुरन दास श्री भायलाल दास (acta) लछमिनियाँ दिनेश राम श्री सीताराम राम लछमिनियाँ नाच पाटी- श्री श्री 08 श्री भगवती नाचपार्टी- सिमराहा सप्तरी कम्पनी- श्री रामचन्द्र मण्डल पे. श्री वृजलाल मण्डल पता, गाम- सिमराहा, पोस्ट- बरसाइन, जिला- सप्तरी (नेपाल) मैनेजर- श्री राम सुन्दर राम पे. श्री सुवी राम पता, गाम- दउरी, पोस्ट- बरसाइन, जिला- सप्तरी (नेपाल) नाच- () Heer रूदल (2) लछिया रानी अभिनय arte नाओं / पता- श्री शैनी पासवान श्री दुखी पासवान खड़कपुर (बरसाइन) श्री लक्ष्मण राम श्री कैलू राम दउरी (बरसाइन) श्री बेचू राम श्री श्रीप्रसाद राम दउरी (बरसाइन)
‘fats इ४४ | | 67 श्री सत्य नारायण राम- श्री नथुनी राम दउरी (बरसाइन) श्री देव नारायण यादव- श्री नथुनी यादव दउरी (बरसाइन) श्री परमेश्वर मण्डल- श्री तेजी मण्डल सिमराहा (बरसाइन) श्री रघु मण्डल- स्व. थारू मण्डल सिमराहा (बरसाइन) श्री चरित्तर मण्डल- स्व. कारी मण्डल सिमराहा (बरसाइन) श्री जोगी मण्डल- श्री बच्चाई मण्डल सिमराहा (बरसाइन) श्री बेचू राम श्री प्रसाद राम दउरी (सप्तरी) वाद्य एवं वादक नाओं /पता- कॉरनेट- श्री देव नारायण राम स्व. नाथो राम दउरी (बरसाइन) civic. श्री दुखी राम स्व. कारी राम खड़कपुर (बरसाइन) ढोलक- श्री नशीवलाल राम श्री कैलू राम दउरी (बरसाइन) नडेरा- श्री राम प्रसाद राम श्री सुवी राम दउरी (बरसाइन) हारमोनियम- श्री चरित्तर मण्डल श्री कारी मण्डल दउरी (बरसाइन) आन सहयोगी- शिव नारायण दास श्री ठकाइ दास दउरी (बरसाइन) कोसी नाट्य कला परिषद- सिमराहा-सुपौल कम्पनी- श्री गया प्रसाद मण्डल पे. श्री राम नारायण मण्डल पता, गाम- सिमराहा, पोस्ट- नौआबाखैर, भाया- धरबिटिया, जिला- सुपौल मैनेजर- श्री दया ae मण्डल पे. श्री राम लखन मण्डल
faze ४४४ | 68 पता, गाम- सिमराहा, पोस्ट- नौआबाखैर, भाया- थरबिटिया, जिला- सुपौल। नाच- () अल्हा रूदल (2) सती लछ़िया अभिनय arate नाओं/पता- श्री अरूण कुमार मण्डल श्री ay मण्डल सिमराहा (सुपौल) श्री Seah पासवान स्व. बहादुर पासवान परसा माधो (सुपौल) श्री राम प्रसाद शर्मा स्व. बिलट शर्मा परसाहा (सुपौल) श्री देवराज शर्मा स्व. तपेश्वर शर्मा सिमराहा (सुपौल) श्री चन्द्र नारायण मण्डल स्व. रघुनाथ मण्डल सिमराहा (सुपौल) श्री दुखी पासवान श्री बेचन पासवान परसा माधो (सुपौल) श्री विजय कुमार राय श्री राम स्वरूप राय सिमराहा (सुपौल) श्री बेचन शर्मा स्व. रामसुन्दर शर्मा परसाहा (सुपौल) वाद्य एवं वादक नाओं /पता- हारमोनियम- श्री सत्य नारायण मण्डल स्व. खुशीलाल मण्डल सिमराहा (सुपौल) ढोलक- श्री गणेश राम श्री विन्देश्वर राम एकडारा, धरविटिया (सुपौल) कॉरनेट- श्री शिव नारायण सदा स्व. ............. एकडारा, धरविटिया (सुपौल) नडेरा-डिग्री- श्री गुनेश्वर राम श्री ............... परसाहा, ATA बाखैर (सुपौल) झाइल- श्री हरिनारायण पासवान स्व. नकछेदी पासवान सिमराहा (सुपौल) झाइल- श्री तेज नारायण मण्डल स्व. खुशीलाल मण्डल सिमराहा, नौआबाखैर (सुपौल) भड़िया- श्री लालदेव मण्डल श्री बच्चा मण्डल सिमराहा, नौआबाखैर (सुपौल) जोकर- श्री सीताराम राम .................. परसाहा, नाएँआ बाखैर (सुपौल) अन्य सहयोगी-
faze ४४४| | 69 श्री सुभाष कुमार राय श्री कन्हैया लाल राय बौराहा, थरविटिया (सुपौल) रामलीला नाट्य कला परिषद- रसुआर जिला-सुपौल कम्पनी- श्री झोटन मण्डल पे. स्व. नथुनी मण्डल पता, गाम- रसुआर, पोस्ट- मुंगराहा, भाया- ठिनर्मली, अनुमण्डल- ठिनर्मली, जिला- सुपौल (बिहार) मैनेजर- श्री त्रिलोक नाथ झा पे. स्व. रामेश्वर झा पता, गाम- रसुआर, पोस्ट- मुंगराहा, भाया- ठिनर्मली, अनुमण्डल- ठिनर्मली, जिला- सुपौल (बिहार) नाच- () Heel रूदल (2) सती लछ़िया (3) राजा सलहेश (4) विद्यापति (5) धुलक फूल (6) Arar डाकू (7) राजा हरिषचन्द्र (8) कृष्ण लीला (9) रामायण अभिनय arte नाओं /पता- श्री रामू मण्डल स्व. गोपी मण्डल रसुआर (सुपौल) स्व. राज कुमार ठाकुर श्री रामजी ठाकुर रसुआर (सुपौल) श्री धनिक लाल मण्डल स्व. रामजी मण्डल रसुआर (सुपौल) श्री देव नारायण मण्डल स्व. बलदेव मण्डल रसुआर (सुपौल) स्व. भोला झा स्व. जयदेव झा रसुआर (सुपौल) स्व. जिलेब मण्डल स्व. नथुनी मण्डल रसुआर (सुपौल) श्री शैनी मण्डल स्व. लालजी मण्डल रसुआर (सुपौल) श्री सीताराम मण्डल स्व. रुपलाल मण्डल रसुआर (सुपौल) वाद्य एवं वादक नाओं /पता-
faze ४४४ | | 70 हारमोनियम- श्री त्रिलोक नाथ झा पे. स्व. रामेश्वर झा रसुआर (सुपौल) ढोलक- स्व. रामगुलाम मण्डल स्व. संती मण्डल रसुआर (सुपौल) नडेरा-डिग्री- श्री झड़ीलाल राम स्व. हिया लाल राम रसुआर (सुपौल) झाइल- देवीलाल मण्डल स्व. खुशीलाल मण्डल रसुआर (सुपौल) झालड़ श्री किशोरी मण्डल स्व. Ada मण्डल रसुआर (सुपौल) डिग्री सदैबला- स्व. रामकिशुन मण्डल स्व. शक्ति मण्डल रसुआर (सुपौल) भड़िया- श्री नारायण मुखिया स्व............... रसुआर (सुपौल) जोकर- श्री सीताराम राम .................. परसाहा, नाउँआ बाखैर (सुपौल) डान्सर- श्री छोटेलाल मण्डल श्री Gy मण्डल रसुआर (सुपौल) जोकर- श्री रामअधिन मण्डल स्व. धनिक लाल मण्डल रसुआर (सुपौल) इटहरी नाच कला परिषद- इटहरी जिला-सुपौल कम्पनी- श्री जगदीश साहु पे. स्व. गंगा प्रसाद साहु पता, गाम- इटहरी, पोस्ट- ठिनर्मली, भाया- टिनर्मली, अनुमण्डल- ठिनर्मली, जिला- सुपौल (बिहार) मैनेजर- श्री रामविलास साहु पे. स्व. भोला साहु पता, गाम- Seed, पोस्ट- ठिनर्मली, भाया- ठिनर्मली, अनुमण्डल- ठिनर्मली, जिला- सुपौल (बिहार) नाच- () कुमर वृजभान (2) राजा नल (3) राजा सलहेश (4) गुगली घटमा (5) शीत-वसंत अभिनय arte नाओं /पता- नायक- रामविलास साहु स्व. भोला साहु इटहरी (सुपौल) नारी पात्र- बैजू सदाय स्व. सोती सदाय इटहरी (सुपौल) नारी पात्र- अशोक Pace श्री बलराम सिह इटहरी (सुपौल)
बिदेह ४४४] | 72 मुख्य खलनायक- दुखी मण्डल स्व. श्रीलाल मण्डल इटहरी (सुपौल) जोकर- विजय साहु स्व. केसो साहु इटहरी (सुपौल) नारी पात्र- रघुनाथ सदाय स्व. मोती सदाय इटहरी (सुपौल) अभिनय- सुकुमार मण्डल .................. मुसहरनियाँ-रतसारा (मधुबनी) अभिनय- रामअधिन मण्डल स्व. धनिकलाल मण्डल मुंगराहा (सुपौल) अभिनय- हरि नारायण मण्डल ..... छजना (मधुबनी) अभिनय- राम बहादुर मुखिया स्व. बच्चा मुखिया ननपट्टी फुलपरास (मधुबनी) अभिनय- श्री साधु दास स्व. .............. पिपराही-वनगामा (मधुबनी ) वाद्य एवं वादक नाओं / पता- हारमोनियम- श्री जगदीश साहु स्व. गंगा प्रसाद साहु इटहरी (सुपौल) ढोलक- श्री जुगल साफी स्व. दाहुर साफी इटहरी (सुपौल) नडेरा-डिग्री- श्री रामकिसुन सदाय स्व. सोती सदाय इटहरी (सुपौल) झाइल- श्री सुकदेव साफी ..... इटहरी (सुपौल) झाइल- श्री रामेश्वर साहु स्व. मुकुन्द साहु इटहरी (सुपौल) डिग्री सदैबला- श्री रामकिशुन सदाय ................... इटहरी (सुपौल) भड़िया- झड़ी लाल सदाय श्री सरयुग सदाय इटहरी (सुपौल) ढोलकिया-2 रामाशीष यादव .............. ननपट्टी-फुलपरास (मधुबनी) हारमोनियम-2 श्री तनुकलाल मण्डल ................ हरियाही-निर्मली (सुपौल) आदर्श वाल-कला निकेतन- टिनर्मली-पुनर्वास (जिला-सुपौल) कम्पनी- श्री राम शरण कामत पे. स्व. शिवधर कामत पता, गाम- सुरयाही, भाया- मुजियासी, अनुमण्डल- फुलपरास, जिला- मधुबनी (बिहार)
बिदेह ४४४] | 72 मैनेजर- श्री अशोक oe पे. स्व. वलराम Hos पता, गाम- इटहरी-पुररवास, पोस्ट- ठिनर्मली, भाया- ठिनर्मली, अनुमण्डल- ठिनर्मली, जिला- सुपौल (बिहार) मंचन- () काँच ताग (2) आन्हर कानून (3) लोहा Ace (4) माइक कलेजा (5) चुड़ी आ सिनूर अभिनय arate नाओं /पता- नायक- BH नारायण साहु स्व. लक्ष्मी साहु इटहरी (सुपौल) नारी पात्र- राम विलास साफी स्व. शोभित लाल साफी इटहरी (सुपौल) नारी पात्र- अशोक सिह श्री बलराम सिह इटहरी (सुपौल) नारी पात्र- हरि नारायण साहु श्री मिश्री लाल साहु इटहरी (सुपौल) नारी पात्र हरि नारायण साहु श्री लक्ष्मी साहु इटहरी (सुपौल) अभिनय- राम सागर साफी श्री शोभित साफी इटहरी (सुपौल) अभिनय- सत्य नारायण ATE श्री लक्ष्मी साहु इटहरी (सुपौल) अभिनय- जगत नारायण साहु श्री लक्ष्मी साहु इटहरी (सुपौल) अभिनय- रोहित arg श्री राम लखन साहु इटहरी (सुपौल) अभिनय- हीरा लाल साहु स्व. सुकदेव साहु इटहरी (सुपौल) अभिनय- जिरा लाल साहु स्व. सुकदेव साहु इटहरी (सुपौल) अभिनय- रामावतार यादव श्री नुजाइ यादव इटहरी (सुपौल) अभिनय- गंगा पासवान स्व. कुसुमलाल पासवान इटहरी (सुपौल) अभिनय- रामचन्द्र यादव स्व. सुखी यादव इटहरी (सुपौल) अभिनय- शत्रुध्न ATE स्व. इटहरी (सुपौल) गायक- मदन प्रसाद साहु स्व. गंगा प्रसाद ATE इटहरी (सुपौल) वाद्य एवं वादक नाओं /पता-
बिदेह eee | | 73 हारमोनियम- जगत नारायण साहु श्री लक्ष्मी साहु इटहरी (सुपौल) ठेकैता- राम विलास साफी स्व. शोभित लाल साफी इटहरी (सुपौल) ठेकैता- श्री शिबू साफी ................... इटहरी (सुपौल) झाइल- श्री राम नारायण साहु स्व. बच्चा लाल साहु लक्ष्मीपुर-धबही (मधुबनी ) हारमोनियम-2 अशोक os श्री बलराम ce इटहरी (सुपौल) कला निकेतन नाचपाटी- लक्षिमनियाँ (जिला-मधुबनी ) (945-965) कम्पनी- श्री झमेली साहु पे. स्व. मंगल साहु पता, गाम- लक्षिमनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, अनुमण्डल- फुलपरास, जिला- मधुबनी (बिहार) मैनेजर- स्व. महेश्वरी पाठक पे. स्व. कारी पाठक पता, गाम- मझोरा, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, अनुमण्डल- फुलपरास, जिला- मधुबनी (बिहार) नाचक मंचन- () जंगली वादशाह (2) वंश-उजारन (3) विदेशिया (4) शीत-वशंत (5) लोड़िक मनियार (6) राजा नल अभिनय arte नाओं /पता- नारी पात्र- स्व. अचकी TAS .................... लक्षिमनियाँ (मधुबनी ) नारी पात्र- स्व. बहुरी मण्डल स्व. सुनर मण्डल लक्षिमनियाँ (मधुबनी) पुरुष पात्र- श्री रामदास साफी स्व. सुवंश साफी लक्षिमनियाँ (मधुबनी) पुरुष पात्र- स्व. घौली साफी स्व. सुनर साफी लक्षिमनियाँ (मधुबनी ) पुरुष पात्र स्व. वसुदेव ठाकुर(उर्फ बतहु ठाकुर) स्व. कैलू ठाकुर लक्षिमनियाँ (मधुबनी )
विदेह eee | | 74 जोकर- स्व. खट्टर मुखिया ..................... लक्षिमनियाँ (मधुबनी ) अभिनय- स्व. दुखाय साहु ..................... लक्षिमनियाँ (मधुबनी ) नारी पात्र- स्व. रतन मण्डल ..................... मझौरा (मधुबनी ) अभिनय- स्व. बिलम साफी स्व. रूपा साफी लक्षिमनियाँ (मधुबनी) वाद्य एवं वादक नाओं /पता- हारमोनियम- स्व. तुलसी मण्डल .................... मझौरा (मधुबनी ) ठेकैता- स्व. रघुनाथ ठाकुर .................... छजना (मधुबनी) नागार्ची- स्व. फुसन राम स्व. कंचन राम लक्षिमनियाँ (मधुबनी ) Age करताल- स्व. बच्चा मण्डल स्व. पंची मण्डल लक्षिमनियाँ (मधुबनी) डिगरी सेद्दा- स्व. अशर्फी AAAS .................... लक्षिमनियाँ (मधुबनी ) भड़िया- स्व. अशर्फी गोसाँड .................... लक्षिमनियाँ (मधुबनी ) अन्य सहयोगी- स्व. नेबाजी साहु स्व. भैरव साहु लक्षिमनियाँ (मधुबनी ) (संकलन सहयोग- रामविलास साहु, लक्षिमनियाँ, मधुबनी) आदर्श नाचपाटी- लक्षिमनियाँ (जिला-मधुबनी ) (968-977) कम्पनी- स्व. गर्भू गोसाँडइ पता, गाम- लक्षिमनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, अनुमण्डल- फुलपरास, जिला- मधुबनी (बिहार)
fate ४४४ | 75 मैनेजर- स्व. नेबाजी साहु पे. स्व. भैरव साहु पता, गाम- लक्षिमनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, अनुमण्डल- फुलपरास, जिला- मधुबनी (बिहार) नाचक मंचन- () बापक हत्या (2) दमाद वध (3) निसाद वध (4) वंस-उजारन (5) गोपीचन (6) शंकर शोसिला (7) उतिम चन। अभिनय arate नाओं /पता- पुरुष पात्र- स्व. बहुरी मण्डल स्व. सुनर मण्डल लक्षिमनियाँ (मधुबनी) पुरुष पात्र- श्री राम अधिन दास स्व. जहुरी दास लक्षिमनियाँ (मधुबनी) पुरुष पात्र- स्व. झोली दास स्व. धुत्तर दास लक्षिमनियाँ (मधुबनी ) नारी पात्र- श्री नधुनी दास स्व. सोनाइ दास लक्षिमनियाँ (मधुबनी ) नारी पात्र स्व. रघुनी दास स्व. सुनर दास लक्षिमनियाँ (मधुबनी ) अभिनय- श्री शिव नारायण मंडल ..................... लक्षिमनियाँ (मधुबनी ) अभिनय- स्व. डुब्बी मुखिया ..................... लक्षिमनियाँ (मधुबनी) वाद्य एवं वादक नाओं /पता- हारमोनियम- स्व. बहुरी मण्डल स्व. सुनर मण्डल लक्षिमनियाँ (मधुबनी ) ठेकैता- स्व. श्री लाल Was स्व. Fy गोसाँड लक्षिमनियाँ (मधुबनी ) नागार्ची- स्व. रामेश्वर राम स्व. नेबी राम मझौरा (मधुबनी ) झाइल करताल- स्व. बच्चा मण्डल स्व. पंची मण्डल लक्षिमनियाँ (मधुबनी ) डिगरी सेद्दा- स्व. चमकलाल गोसाइ .................... लक्षिमनियाँ (मधुबनी ) भड़िया- स्व. सुनर दास .................... लक्षिमनियाँ (मधुबनी ) (संकलन सहयोग- रामविलास साहु, लक्षिमनियाँ, मधुबनी)
fate ४४४| | 76 लक्षिमनियाँ नाचपाटी- लक्षिमनियाँ (जिला-मधुबनी ) (970-982) कम्पनी- श्री राजेन्द्र प्रसाद साहु पे. स्व. सुन्दर लाल साहु पता, गाम- लक्षिमनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, अनुमण्डल- फुलपरास, जिला- मधुबनी (बिहार) मैनेजर- स्व. बहुरी मण्डल पे. स्व. सुनर मण्डल पता, गाम- लक्षिमनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, अनुमण्डल- फुलपरास, जिला- मधुबनी (बिहार) नाचक मंचन- () कुमर वृजभान (2) लछ़िया रानी (3) सुन्दर वनक सुन्दर फूल (4) अल्हा-रूदल (5) विजय सिह (6) गुगली घटमा। अभिनय artes नाओं /पता- पुरुष पात्र- श्री सीताराम राम स्व. जंगल मोची लक्षिमनियाँ (मधुबनी ) पुरुष पात्र- स्व. रसिक लाल गोसाँइ स्व. बुधु गोसाँइ लक्षिमनियाँ (मधुबनी ) पुरुष पात्र- श्री ats मुखिया स्व. डुब्बी मुखिया लक्षिमनियाँ (मधुबनी ) नारी पात्र- श्री मलभोगी दास स्व. भायलाल दास लक्षिमनियाँ (मधुबनी ) नारी पात्र श्री कल्लर राम स्व. खट्टर राम लक्षिमनियाँ (मधुबनी ) अभिनय- श्री मूसन साहु स्व. अशर्फी साहु लक्षिमनियाँ (मधुबनी) नारी पात्र- श्री राम खेलावन राम स्व. फूसन राम लक्षिमनियाँ (मधुबनी ) वाद्य एवं वादक नाओं /पता-
बिदेह ४४४ | | 77 हारमोनियम- श्री राम शरण साहु स्व. हिरो साहु लक्षिमनियाँ (मधुबनी ) ठेकैता- स्व. लक्ष्मण राम स्व. जीतन राम लक्षिमनियाँ (मधुबनी ) नागार्ची- स्व. फूसन राम स्व. कंचन राम लक्षिमनियाँ (मधुबनी ) झाइल करताल- श्री शिव नारायण मण्डल (गामक भगिनमान) लक्षिमनियाँ (मधुबनी) ferret सेद्दा- कपिलेश्वर राम स्व. सगम राम करहरी, फूलपरास (मधुबनी) भड़िया- स्व. निरसन राम स्व. कंचन राम लक्षिमनियाँ (मधुबनी ) कॉरनेटिया- श्री चन्दर राम स्व. जीतन राम लक्षिमनियाँ (मधुबनी ) (संकलन सहयोग- रामविलास साहु, लक्षिमनियाँ, मधुबनी ) कला नाचपाटी- छजना (जिला-मधुबनी ) (945-980) कम्पनी- श्री लालदेव मण्डल पे. स्व. चतुरी मण्डल पता, गाम- छजना, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, अनुमण्डल- फुलपरास, जिला- मधुबनी (बिहार) मैनेजर- श्री राम प्रसाद राम पे. स्व. गंगाय राम पता, गाम- छजना, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, अनुमण्डल- फुलपरास, जिला- मधुबनी (बिहार) नाचक मंचन- () बिहुला शती (2) लछ़िया रानी (3) सुन्दर वनक सुन्दर फूल (4) पिता हत्या (5) दमाद वध (6) वंश-उजारन (7) कुमर वृजभान (8) विदेशिया (9) जंगली वादसाह (0) रास लिला। अभिनय arate नाओं/पता-
faze ४४४ | | 78 नारी पात्र- श्री कारी मण्डल स्व. नंदी मण्डल छजना (मधुबनी) नारी पात्र- श्री हरि मण्डल स्व. नंदी मण्डल छजना (मधुबनी ) पुरुष पात्र- श्री बच्ची लाल चौपाल स्व. cals चौपाल छजना (मधुबनी ) नारी /पुरुष पात्र- श्री छुतहरू चौपाल स्व. सुनर खतबे छजना (मधुबनी ) पुरुष पात्र स्व. नधुनी मण्डल स्व. रामफल मण्डल छजना (मधुबनी) अभिनय- श्री झोली चौपाल स्व. ननधर चौपाल छजना (मधुबनी) अभिनय- श्री छोटकनि चौपाल स्व. बौकू चौपाल छजना (मधुबनी) नारी / पुरुष पात्र- श्री रामजस राम स्व. उचित राम छजना (मधुबनी) नारी पात्र- श्री हरिहर राम स्व. दसाँइ राम छजना (मधुबनी ) पुरुष पात्र- श्री रामकिसुन मुखिया स्व. सहदेव मुखिया छजना (मधुबनी) पुरुष पात्र श्री दुर्गा नंद ठाकुर स्व. नेंगर ठाकुर छजना (मधुबनी) अभिनय- श्री मटन चौपाल स्व. सेमु चौपाल छजना (मधुबनी) नृत- श्री शिव नारायण चौपाल श्री छोटकनि चौपाल छजना (मधुबनी ) वाद्य एवं वादक नाओं / पता- हारमोनियम- श्री राम प्रसाद चौपाल स्व. बिहारी छजना (मधुबनी ) ढोलकिया- श्री जनकधारी चाएैपाल स्व. खुशीलाल चौपाल छजना (मधुबनी) नागार्ची- श्री छोटकनि राम स्व. सुनर राम छजना (मधुबनी) झाइल करताल- श्री नधुनी चौपाल स्व. मधुकर चौपाल छजना (मधुबनी) डिगरी Sar स्व. रोगहा चौपाल स्व. तेतर चौपाल छजना (मधुबनी) भड़िया- श्री सुनर चौपाल स्व. नथुनी चौपाल छजना (मधुबनी ) कॉरनेटिया- श्री राम प्रसाद राम स्व. मंगल राम लक्षिमनियाँ (मधुबनी ) अन्य सहयोगी- श्री बालेश्वर ठाकुर स्व. लखन ठाकुर छजना (मधुबनी) श्री रामविलास मुखिया स्व. बलदेव मुखिया छजना (मधुबनी)
fate ४४४| | 79 श्री बिसो मण्डल स्व. अजोधी मण्डल छजना (मधुबनी ) (संकलन सहयोग- रामविलास साहु, लक्षिमनियाँ, मधुबनी ) गिरधारी नाचपाटी- छजना (जिला-मधुबनी ) (956-2008) कम्पनी- स्व. गिरधारी arg वर्तमान कम्पनी- जलेश्वर दास पे. स्व. खटर दास पता, गाम- छजना, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, अनुमण्डल- फुलपरास, जिला- मधुबनी (बिहार) मैनेजर- जलेश्वर दास पे. स्व. खटर दास पता, गाम- छजना, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, अनुमण्डल- फुलपरास, जिला- मधुबनी (बिहार) नाचक मंचन- (L) बिहुला शती (2) गोपी aes (3) अल्हा-रूदल (4) गुगली घटमा (5) रूणा-झुणा (6) सामा-चकेबा (7) पिता हत्या (8) दमाद वध (9) कबिर लिला (0) कलयुग प्रेम (9अम एवं 0सम वर्त्तमानमे जारी) अभिनय arte नाओं /पता- नारी पात्र- श्री गोसाँड मण्डल ................... धबौली, वनगामा (मधुबनी ) नारी पात्र- श्री राजेश्वर यादव स्व. तनुक लाल यादव बेरयाही (मधुबनी ) पुरुष पात्र- श्री हरिहर चौपाल स्व. मोहन चौपाल छजना (मधुबनी) नारी / पुरुष पात्र- श्री रघुनाथ चौपाल स्व. मुंगालाल चौपाल छजना (मधुबनी ) पुरुष पात्र श्री कुसुमलाल चौपाल स्व. नथुनी चौपाल छजना (मधुबनी )
‘faze ४४४| | 80 अभिनय- श्री शिवजी चौपाल स्व. फुसियाही चौपाल छजना (मधुबनी) नृत- श्री राजेन्द्र चौपाल स्व. धीरज चौपाल बिक्रम शेर,अंधरामठ (मधुबनी ) नारी/पुरुष पात्र- श्री नेहाली चौपाल स्व. जहुरी चौपाल छजना (मधुबनी) नारी पात्र- श्री संतलाल साहु स्व. दसाँइ साहु छजना (मधुबनी) अभिनय- श्री कपिलेश्वर राम स्व. नेबी राम मझौरा (मधुबनी) अभिनय स्व. राम प्रसाद चौपाल स्व. बिहारी चौपाल छजना (मधुबनी) अभिनय- श्री धर्मी मण्डल स्व. ................ रतन सारा (मधुबनी ) अभिनय- श्री यशोलाल यादव .................... बेरियाही (मधुबनी ) वाद्य एवं वादक नाओं / पता- हारमोनियम- स्व. ठीठर मण्डल स्व. ...... रतनसारा (मधुबनी ) ढोलकिया- स्व. भुटाइ ACU स्व. फेकन चौपाल छजना (मधुबनी) नागार्ची- स्व. TH राम स्व. नेबी छजना (मधुबनी ) झाइल करताल- श्री नधुनी चौपाल स्व. मधुकर चौपाल छजना (मधुबनी ) डिगरी सेद्दा- स्व. रोगहु चौपाल स्व. तेतर चौपाल छजना (मधुबनी ) भड़िया- स्व. नथुनी चौपाल स्व. चुमन चौपाल छजना (मधुबनी) कॉरनेटिया- श्री जालेश्वर दास स्व. खट्टर चौपाल छजना (मधुबनी ) अन्य सहयोगी- श्री गंगाय साहु स्व. दुखाय साहु छजना (मधुबनी ) स्व. गोविन्द लाल साहु स्व. झगरू साहु छजना (मधुबनी) श्री लोदाय चौपाल स्व. गुणेश्वर चौपाल छजना (मधुबनी) श्री भुगती चौपाल स्व. बलदेव चौपाल छजना (मधुबनी )
fate ४४४] | 82 (संकलन सहयोग- रामविलास ae, लक्षिमनियाँ, मधुबनी ) मिथिलाक लोक संगीत/ लोक कला भगैत गबैया- (धर्मराज, ज्योतिश महराज, sg मालि , उदय साहु, हरिया डोम, बेनी, शती अवला, कारूबाबा इत्यादि भगैत निम्नलिखित “रसुआर-भगैत पार्टी 980 ई.सँ गबै छथि।) श्री शम्भु प्रसाद मण्डल सुपुत्र स्व. लखन मण्डल भगैत गायन सह खजरी वादन उमेर- 42 साल 980 ई.सँ भगैत गबै छथि। पता- गाम- बढियाघाट/रसुआर, पोस्ट- मुंगराहा, भाया- ठिनर्मली, जिला- सुपौल। श्री गंगाराम मण्डल सुपुत्र श्री अशर्फी मण्डल- झालि वादक उमेर- 40 980 ई.सँ झालि बजबै छथि। पता- गाम- बढ़ियाघाट/रसुआर, पोस्ट- मुंगराहा, भाया- ठिनर्मली, जिला- सुपौल। श्री जनक मण्डल सुपुत्र स्व. उचित मण्डल उमेर- 60 रमझालि/ कठझालि/ करताल वादक 975 ई.सँ रमझालि बजबै छथि। पता- गाम- बढ़ियाघाट/रसुआर, पोस्ट- मुंगराहा, भाया- 2िनर्मली, जिला- सुपौल। श्री रविन्द्र मण्डल सुपुत्र श्री खट्टर मण्डल
fate eee | | 82 उमेर- 32 नाल वादक पता- गाम- बढ़ियाघाट/रसुआर, पोस्ट- मुंगराहा, भाया- ठिनर्मली, जिला- सुपौल। श्री परमेश्वर मण्डल सुपुत्र स्व. बिहारी मण्डल उमेर- 44 गरुमबाजा/ गुमगुिमयाँ 980 ई.सँ गुमगुदिमयाँ बजबै छथि। पता- गाम- बढियाघाट/रसुआर, पोस्ट- मुंगराहा, भाया- ठिनर्मली, जिला- सुपौल। श्री महेन्द्र प्रसाद मण्डल सुपुत्र स्व. Sal मण्डल उमेर- 48 कठझालि वादक Tae गेबो करै छथि आ रमझालि/कठझालि बजेबो करै छथि। पता- गाम- रसुआर, पोस्ट- मुंगराहा, भाया- निर्मली, जिला- सुपौल। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ।
२.१४. गजेन्द्र ठाकुर- गोहि सभक बीच जल समाधि (मैथिलीक आइ धरिक SHS पैघ उपन्यास)- मैथिली कादम्बरीक अंश oo ~y गजेन्द्र ठाकुर we वैधिली साहित्यक mest Ga उपन्यास blade | Lidell Dec borer \ ah :
fate ४४४] | 84 मैथिलीक आइ afte awe te उपन्यास- न्याय दर्शन आ समकालीन अपराध-गाथा मौधिली कादस्बरी गोहि सभक बीच जलसमाधि गजेन्द्र गकुर समर्पण aig अनाम लोक सभकें, जिनकर नाम शिलापर नहि लिखायल, मुदा जिनकर स्वर पानि, पात आ कागचमे अखनो बहैत अछि। als सूचनादाता सभकें, जिनकर चेहरा कतहु दर्ज नहि, मुदा जिनकर सत्य पाथरो काटि बहराइत अछि। जिनकर परिवार डेरायल रहल, जिनकर नोकरी आ जान दुनू गेल, जिनकर घर सुड्टाह WS गेल- तैयो जे बजला। तिनका सभकें समर्पित। “सत्य एकटा बीज थीक- चाहे कतेको Ate पाथरक नीचाँ दबि जाय एक दिन फुटिते अछि।”- ऐ कादम्बरीक पात्रक डायरीसँ। "जे सत्य देखैत अछि आ चुप रहैत अछि, ओकर मृत्यु दुड़ बेर होइत अछि- एक बेर देहक, एक बेर आत्माक।"- गढ़ नारिकिलक एकटा पुरान कहबी। "जे गाम अपन इतिहास बिसरि जाइत अछि, ओतुकका नारिकेल गाछ फल देब बन्द क५ दैत अछि।"- गढ़ नारिकिलिक एकटा आर पुरान कहबी। नारिकेल गाछक TTS, मृतक दर्शन, छाहक अनुपस्थिति- F ATK लोक-चेतनाक काव्यात्पक रुपक ae] (उपन्यास अंश) जलसमाधि.. गोंहि.. बिज्जी.. गहुमन.. भूत होइए कारी, प्रेत उज्जर, राकश- लहाशक खोरनाठी जे गलतीसंँ नै जड़ल, बच्चाकें गाड़ल जाइए आ ओ बनि जाइए लोथ। TA गाछी। भूत आ प्रेतक बीच कबड्डी, राकश करैए इजोर आ लोथ अछि दर्शक।
बिदेह ४४४] | 85 पीपरक गाछपर ब्रह्मा। पोखड़िमे पनिडुब्बी, बड़का केशबाली, अथाह पानिमे पएरमे ओझड़ा जाइए ओकर झोंटा, आ काहि काटि ws मरि जाइए लोक। भूत, प्रेत, राकश, लोथ मृत्युक बाद, अकालमृत्युक बाद कहू। तहिना पीपरक गाछक ब्रह्मा, आ पानिमे पनिडुब्बीक झोंटामे ओझरायल लोकक आत्मा। गढ़ नारिकेलमे बहुत रास अकाल मृत्यु भेल छै। भूत प्रेतकें पएर रोपल नै हो छै पृथ्वीपर। पएर पाछू He Sls है? सभटा झूठ। एन-मेन लोके सन होइ छै, खाली लागत जे उपरे-ऊपर चलि रहल छै। बूझि गेलौं- मून वाक सन। नै मून वाक तँँ लागत जेना watt चलि रहल अछि, साँप जकाँ, ई तँ चलबो करैए एन-मेन लोक सन, खाली कने जमीनकें छोड़ैत ऊपर। हक्कल SSA सभ सेहो, गाछपर चढ़ि Bich AS सवारी करैए, aS HS BS जाइए। भोरमे ओत्तै SHS चलि जाइए। ओकरा सभ लग बहुत रास आत्मा रहै छै। ओकरासँ खूब काज टहल करबैए, मुदा सुनै छिऐ जखन उमेर बढ़े ठै आ पाबर कम होइ छै TSA ओकरा सभकें GA नै द५ पाबैए तखन ओकरे खखोड़ि-खखोड़ि ara लागै छै ई आत्मा सभ। देखि रहल छी चारू कात पानि। बनि रहल अछि एशियाक सभरसँ पैघ सड़क पुल। लोहा-छड़, बड़का-बड़का पाया, आ ओइपर चढ़ल जोन-मजदूर, माथपर टोकड़ी लेने। सीमेण्ट, गिट्टी चारू कात.... आ एक गोटेक पएर Ga है.. आ खसैत अछि चकरघिन्नी खाइत... गोंहि सभक बीच बनै है जलसमाधि। फेर किछु दिनमे दोसर, फेर तेसर.... कइएक सय जोन-मजदूरक जलसमाधि.. चलैत रहलै सभटा खेल संगे-संग। किछुएकें मृत्युक रूपमे देखाओल गेलै, खाली तीसटा। आ बेसी गेलै जलसमाधिक खातामे, आ कएक दशक बाद हमहूँ ओही खातामे छी। कालक्रममे पएर हुसैत अछि, ओत्तै..
विदेह ४४४ | 86 आ खसैत छी चकरघिननी aes... गोंहि सभक बीच बनैत अछि हमर जलसमाधि। गोंहि सभ चिबा गेल हड्डी पर्यन्त। से हम सभ गोटे समाधि प्राप्त केलौं। बिज्जी पहरेदार छलै तँ गहुमन fag नै fants सकलै। मुदा एतुक्का पहरेदार et मनुक्ख। आ इनारमे फेकल ढेपाक अबाज जकाँ कने थम्हि Hs आबि रहल छै अबाज, छपाक। इनार छथि गंगा धार, आ ढेपा बनि खसि रहल अछि सभ योगी, जेना जलसमाधि लेबा लेल आयल हुअए दूर बोन, पहाड़ आ बाढ़िक बाद बचल रेतक खेतसँ। जेना जलसमाधि लेबाक धरफड़ी होड़ ओकरा सभमे। Ga सनन क$ रहल छै कान। चलै-चली गढ़ नारिकिलक लोक सभ लग। ओकरो सभक कान सन्न- GAT HS रहल छै। बेरा-बेरी। एका-एकी। कहियो ककरो तँ कहियो ककरो। जेना कोनो आत्मा मुक्ति पाबि जायत सुनि as ई खिस्सा। जेना गढ़ नारिकिलक लोक US जायत हल््लुक सुना HS ई खिस्सा। मुदा स्वर अस्पष्ट अछि। जलसमाधि.. गोंहि.. बिज्जी... गहुमन... ई जोड़ा बना Hs कोन PART सुन5-कह$ चाहैए। बिज्जी आ गहुमन of भेल गामक खिस्सा...
‘fate eee | | 87 Fal ई गंगाजी पर बनि रहल एशियाक BAS बड़का पुल? गढ़ नारिकेलसँ dS IE दूर अछि, कोनो नवका खिस्सा बुझा रहल अछि। aS आत्मा कतेक दिनुका खिस्सा सुनाओत? कतेक सय सालक। सय सालक तँँ अवश्ये। आ तखन तँ ई सय सालसंँ मुक्तिक आसमे अछि। आकि बेसिये दिनसंँ। कोन खिस्सा कह5-सुन$ चाहैए ई आत्मा। जलसमाधि भेटि गेलै तँँ मुक्त किए नै भेलौं । बिज्जी of गहुमनसँ बचा लेलकै तँ तकर माने कोनो अदृश्य शक्ति संग देलकै। ... मुदा वएह शक्ति ओकरा गोंहिक मध्य जलसमाधि कोना TAS देलकै? आकि ई एकटा नै ger खिस्सा अछि, आकि ओटहूसँ बेशी, कएकटा खिस्सा... देह सिम्मरक फूल सन हल्लुक HS गेल अछि। देह अछिये कहाँ, आ दू-तीन टा fren मिज्झर 4s गेल अछि, दू-तीनटा कालखण्ड आ भूखण्डक संग। देखू की सुनै छी आ की सुनबै छी.. फरिछाइए खिस्सा कालखण्ड आ भूखण्डक संग, आकि रहैए मिज्झर अन्त धरि। [ऐ कादम्बरीक अंश] अपन Hae editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ।
विदेह ४४४ | 88 २.१५. गजेन्द्र ठाकुर-आनन्दमे मत्त करैबला प्रहसन [Terra नरेश श्री महेन्द्रविक्रम वर्मा प्रथम केर मूल संस्कृत- मत्तविलास प्रहसनम् केर मैथिली अनुवाद- गजेन्द्र ठाकुर] hi © Ver ~~ P miu gal Tay OTST आनन्दमे मत्त करैबला प्रहसन [पल्लव नरेश श्री महेन्द्रविक्रम वर्मा प्रथम che मूल संस्कृत- मत्तविलास प्रहसनम् केर यौधिली अनुवाद गजेन्द्र ठाकुर] पात्र-परिचय सूत्रधार - रंगमज्चक व्यवस्थापक आ नाट्य-निर्देशक अभिनेत्री - सूत्रधारक पहिल पत्नी, नाटकक आयोजनमे सहायक सत्यसोम (कापालिक) - एक कापालिक शैव साधु, कपालकेँ: भिक्षापात्र रूपमे धारण कर5बला, विद्रोही आस्थाबला देवसोमा - सत्यसोमक संगिनी नागसेन - शाक्य सम्प्रदायक एक बौद्ध भिक्षु बश्रुकल्प - एक अन्य शैव साधु, पाशुपत सम्प्रदायक अनुयायी SAT - एकटा बताह मनुक्ख प्रस्तावना (सुत्रकार प्राथनिक बाद प्रवेश करैत BY)
faze ४४४| | 89 सूत्रधार: Hel! अपन दोसर पत्नी दुआरे तमसायल पहिल पत्नीकैं प्रसन्न करबाक एकटा नीक उपाय भेटल। बड़ दिनक बाद राज-दरबारसँ नाटक प्रस्तुत करबाक आदेश आएल अछि। चलू, ओकरासँ पुछै छी। (Area हुलकी दैत) सूत्रधार: यै, महारानी! Tas आउ। (पहिल पत्नी - जे जधिनेत्री छथि - प्रवेश ae छथि) अभिनेत्री: (तमसाइत) ई कोन गप भेल? ऐ बुढ़ारीमे Hel जवान-जुहान पी Hs बताह भेल छौड़ा सभक सोझाँ प्रहसन कर Te छी? सूत्रधार: हैँ, बात तँ सएह अछि। अभिनेत्री: तखन कोनो जवान अभिनेत्रीकँ as आउ जे ई मोन लगा hs करबो करत आ ओकरा AAT लगतै। सूत्रधार: हम तँँ ई अहींक सोझाँ Hea! अभिनेत्री: ओ दोसरकी अहाँकें ई सिखा क$ पठेने अछि? सूत्रधार: छोड़ ओ गप। SL गोटे राज-दरबार जाएब Ff खुब्बे राजकीय सम्मान भेटत। अभिनेत्री: से बड़का-बड़का गप छोड़ब तँँ अहींसँ हएत। सूत्रधार: हएत, Fel अहाँ अपन अभिनयसँ दर्शकसभकँ असीम आनन्दक सागरमे डुमा देव! अभिनेत्री: (प्रसन्न 4S) माने आदरणीय महराजसँ अनुमति भेट गेल? सूत्रधार: Zi अभिनेत्री: तखन Vet शुभ समाचार देबाक बदलामे हम अहाँकें की पुरस्कार Fast? सूत्रधार: अहाँक प्रसननते हमर पुरस्कार भेल। आर की चाही? अभिनेत्री: तखन कोन नाटक प्रस्तुत करबाक विचार अछि? सूत्रधार: Hel तँ कहलहूँ- | ASA मत्त करैबला प्रहसन' | अभिनेत्री: (स्वगत) जे किछु हम कहै छी, से ओकर मोनसंँ मिल जाइ छै, as हमर तमसेनाइ Set ओकरा स्वाभाविक लगै छै। (प्रकट) ऐ नाटक्सँ विजयी होड़ बला लेखक के छथि? सूत्रधार: सुनू, प्रिये। ओ आन कियो नै अपन श्री महेन्द्रवर्मा छथि- राजोक राजा। जे काम, क्रोध, अहंकार आ इरखा ऐ सभ alors जीतने छथि; जे सम-चित्त छथि आ साधारण लोकसभक बीच
‘fats इ४४| | 90 ओहिना मिज्झर Us जाइ छथि; सम्पैतमे कुबेर आ पराक्रममे Seach Ala करै छथि; अपन सहज व्यवहार आ सक्षम शासनसँ अपन राज्यक सुन्दर संचालन He छथि - Terra वंशक मेरु पर्वत! श्री विष्णुसिंहक पुत्र। ave महाराजाधिराज एहि नाटकक लेखक छथि। अभिनेत्री: तखन आर देरी किएक? हमरा सभकें Vel अद्भुत Aes Tea प्रस्तुत करबाक चाही। सूत्रधार: क्षमा करब। हमर परम्परा अछि जे अपन पितामहक महिमाक स्तुति केलाक बादे अभिनय प्रारम्भ होइत अछि। (Frere) - हे प्रिये देवसोमा/ सूत्रधार: लगैत अछि कि कपाल-पात्र AS HS घुम5वला युवा कापालिक माति गेल अछि! (SAME आ अधिनेत्री प्रस्थान करैत BY) (प्रस्तावनाक समाप्ति) मुख्य नाटक (युवा कापालिक सत्यसोम अपन संगिनीक संग प्रवेश करैत BY) कापालिक: (मत्त अवस्थामे) हे देवसोमा! ई सत्य अछि जे कोनो मनुष्य अपन तपोबलसंँ कोनो रूप धारण HS सकैत अछि। मुदा तूँ अपन Aaa एकदम नव रूप धारण HS लेलहीं! FMP कणजकाँ चमकैत मुख सुन्दर ie, कोमल OIE तोहर सुन्दरता शब्द वर्णित नै भर सकैए/ देवसोमा: नाथ, अखन अहाँ हमरासँ एना बजैत छी GAT हम मातलि होइ। कापालिक: की कहलहीं, प्रिये?
‘fate ४४४| | 92 देवसोमा: नाथ, सम्पूर्ण संसार लटूजकाँ घुमि रहल अछि! डर लागैत अछि जे खसि पड़ब। पकड़ि लिअ हमरा। कापालिक: ठीक अछि, fra (THES BS कोशिश करैत OLY, Fa अपने AS पड़ैत BY) कापालिक: हे सोमदेवा, जखन हम तोहरा सम्हार५ आगा बढ़लहूँ, of दूर किए भागि गेलहीँ? की हमरासँ रिसाएल छहीँ? देवसोमा: हैँ, सोमदेवा रिसाएल अछि। चाहे ara नमा ws विनती करी- नहि मानत। कापालिक: तूँ सोमदेवा छहीँ ने? (एक क्षण सोचैत BY) कापालिक: नहि, नहि! तूँ देवसोमा wet! देवसोमा: सब नाटक अछि। अहाँकें सोमदेवासँ aE प्रेम अछि। तेँ हमर नामो नहि लेलहूँ। कापालिक: हे प्रियतमे! ओ बस जिह्ाक भूल भेल। असली अपराधी हमर नशा छी। देवसोमा: भगवानक कृपा जे अहाँ नहि छी। कापालिक: ई मद्यपानक आदति हमरा एत्ते कष्ट देलक अछि ने? एहि क्षणसँ हम मद्यपान Bits देव। देवसोमा: नहि, नहि नाथ! हमरा खातिर अपन ब्रत नहि तोड़ आ तपस्याक फल नहि गमाउ! (Fae आकर TRA Ga BY) कापालिक: (अपार aa, उठा HS आलिंगन Hea) अद्भुत! TT! जय भगवान शिव/ जय त्रिशूलक्षरी शिव जिनकर ALITA जा प्रेमिकाक सौन्दर्य-उपधोगसँ मोक्षक मार्ग प्रशस्त HTB! जय भगवान शिव/ देवसोमा: नाथ, एना नहि कहू। श्रमण भिक्षुसभ मोक्षक मार्ग अलग बतबैत छथि। कापालिक: हे प्रिये, ओ सभ नास्तिक छथि।
बिदेह ४४४] | 92 देवसोमा: रुकू! एना कहब सेहो पाप अछि। कापालिक: हैं, हैं, एहन पापी कार्य छोड़। ओ पतित सभ आरोपक योग्यो नहि अछि। ओ जीव अपन ATE AST HS संसार त्याग करैत BA, मुदा खेनाइ कखन खाइ- तकरो निअम बनबैत छथि। तँ एहन नास्तिकसभक स्तुतिक प्रायश्चित्त रूपमे हम मधु पीब ws मुँह शुद्ध करब। देवसोमा: तखन चलू कोनो दोसर मधुशालामे। कापालिक: ठीक अछि प्रिये। (ZI चलैत BY) कापालिक: अहा! ई काज्वी नगर कतेक महान अछि आ कतेक वैभवपूर्ण अछि! एकाम्बरेश्वर मन्दिरक सोनहुल शिखरक संग मिला as मन्दिरसँ मृदंगमक मधुर तालक ध्वनि सुनाइ दैत अछि! पुष्प- विक्रेताक दोकान वसन्त मूर्तिमान जकाँ देखाइत अछि! युवती सभक पायलक मधुर रुनझुन कामदेवक स्मरण दिआबैत अछि। देवसोमा: नाथ, ई काज्ची स्वर्गीय मधुरस जकाँ स्वादिष्ट अछि। कापालिक: प्रिये, देखू देखू! ई मधुशाला यज्ञशाला लगमे कतेक सुविधाजनक ढंगसँ अछि! sit Ha ध्वजस्तम्भ देखू। ओ पवित्र अग्निस्थानक खाम्ह थिक। हमर पीअल मधु सोमरस थिक। पात्र पवित्र बरतन थिक। भुजल मौस-खाद्य यज्ञक आहुति थिक। मातल बड़बड़नाइ यजुर्वेदक मंत्र थिक। गीत सामवेदक स्तोत्र थिक। ई चमड़ाक झोरा यागक फलकें संरक्षित कर५वला झोड़ा थिक। तपस्या अग्नि थिक। मधुशालाक व्यापारी यज्न-आयोजक थिक। देवसोमा: हमर भिक्षापात्रमे जे आहुति भेटत, से भगवान शिवक यज्ञ-फलक हिस्सा थिक। कापालिक: अहा! मत्त HS नाचब कतेक आनन्ददायक अछि। ढोलक लयमे देह हिलब, मधुर कंठ, चंचल नेत्र, लयपर धोती आ उत्तरीय सम्हारब - कतेक अद्भुत! देवसोमा: अहा! नाथ तँ रसिक छथि। कापालिक: एहि दिव्य tac पात्रमे ढ़ारू। वस्त्रक भव्यताक चिन्ता नहि। जिनकर हृदय मिलि गेल अछि, से एक Hs जाइत छथि। युवक-युवती अपन संकोच त्यागि योद्धा बनि जाइत छथि। प्रेम अहाँ अमर रहू! शब्दक की आवश्यकता! ई झूठ अछि जे शिवजी अपन तेसर नेत्र खोलि मदनकेँ कामदेवकेँ जरा देलखिन
विदेह ४४४| | 93 सदन अपने OA TAT गेल FT HIS HTD सँ हमसभथ जारि रहल BT देवसोमा: हएत। मुदा जे देवता सभक Hears हेतु सब किछु करैत छथि, att Pars भस्म नहि करथिन। (ZL अपन MAR LOTS AR क्षमाक ATA करैत BLY) कापालिक: Had भिक्षां देहि महाराज / महारानी! कृपा क$ भिक्षा दिअ। (अदृश्य स्त्री-कंठ - Tele WETS) - नाथ लिज श्रहण FE! कापालिक: लैत छी... प्रिये, हमर कपाल-भिक्षापात्र कतए अछि? देवसोमा: हमहूँ नहि देखलहूँ। कापालिक: (fore सोचि Hs) अहा! पहिल मधुशालामे छोड़ि आएल होएब। चलू, देखि आबी। देवसोमा: नाथ! एत्ते आदरसँ देल जा रहल भिक्षाकेँ नहि लेब तँ पाप हएत। आब की करी? कापालिक: प्रिये, संकटकाल अछि, तैँ सींगमे ग्रहण ws लिअ। देवसोमा: ठीक अछि नाथ। (ara भिक्षा अ्रहण करैत छवि) (FL किछ काल इधर-उधर खोजैत BY) 'कापालिक: की?? एतए date भेटैत अछि। (निराश HS) कापालिक: हे देवतागण! ! अहाँ हमर भिक्षापात्र देखलहूँ? की Hace? नहि देखलहूँ? ... हम मरलहूँ! हमर आशा पूरा-पूरी टूटि गेल। कापालिकक रूपमे कोना जीअब? कतेक कठिन! (THT GA ATT पटकैत BPA) कापालिक: भेल, सब परीक्षा थिक। "कापालिक" उपाधि नहि रहत A किछु गमाएब नहि। (उठि Fs) देवसोमा: नाथ, अहाँक भिक्षापात्र के लेने हएत?
विदेह ४४४ | | 94 कापालिक: प्रिये, ओहिमे भुजल मांस-खण्ड राखल छल। सम्भव अछि जे कोनो कुकुर वा बौद्ध भिक्षु उठा लेने हएत। देवसोमा: तखन STS, पूरा काज्वी नगर खोजैत छी। कापालिक: चलू प्रिये! (PER ES वापस आबैत BY) (एक बौद्ध Prey TRTT-FAT लेने प्रवेश करैत अछि) भिक्षु: (GA AS HS) अहा! व्यापारी धनदासक उदारता कोनो दोसर दाताक चाहिसँ बेसी छनि। कतेक स्वादिष्ट भोजन! मुँहमे पानि आन&वला, स्वादिष्ट माछृक तरकारी आ अन्य व्यंजन। बड़ा तृप्तिकारक भोजन भेल। आब राजकीय आश्रमे जाएब। (TE बात करैत TAT जि) भिक्षु: अहा! राजप्रासादमे रहनाइ, कोमल शय्यापर सुतनाइ, प्रात:'कालक भोजन, सन्ध्याक स्वादिष्ट पेय, पाँचटा सुगन्धित ताम्बूल, सुन्दर वस्त्र आ अन्य सुविधा- सब किछु तँ बुद्धनी अनुमति देलखिन, Her मदिरा आ स्त्री किएक नहि? ओ बेकार बूढ़ी पोथी सभकेँ लिख5वला सभ युवक BAS Seat Hs एहि Sich पाठ्यक्रमसँ हटा देलकनि। कतए भेटत मूल ग्रन्थ जड़मे ई दूनू छोड़ल नहि गेल अछि? ot भेटैत, तँँ बुद्धजीक पूर्ण शिक्षा सभकें देखा क५ सभक उपकार HS सकैत Ge, नहि? (चारूकात घुमैत रहैत अछि) देवसोमा: नाथ, ओइ केशरिया वस्त्रधारी Aah देखू। एनने-ओन्ने चोर नेत्रसँ देखैत आ निरीह लोकसभमे लुकाइत ओ एतए आबि रहल अछि। कापालिक: सही कहलहीं प्रिये। तकरा अतिरिक्त ओ अपना हाथमे किछु नुकौने अछि। देवसोमा: नाथ, ओकरा रोकि ws पूछक चाही। कापालिक: ठीक अछि हे प्रिये... a भिक्षु! रुक! भिक्षु: के हमरा एना बजबैत अछि? (पाछाँ देखैत अछि) ओह... ओहि एकाम्बरेश्वर मन्दिरक दुष्ट, बेकार कापालिक छी। ओकर दुष्ट कर्ममे नहि फँसब। (FAT HTT TET अछि)
faze ४४४] | 95 कापालिक: प्रिये, हमर भिक्षापात्र भेटि गेल! देखू कोना हमरा देखिते दौगि गेल। ई प्रमाण अछि जे ओ चोर अछि। (FAF HPT बाढ़ि रस्ता रोकैत HY) कापालिक: अहा! आब कतए जाएब? भिक्षु: भाइ कापालिक! एना नहि करू, उचित नहि अछि। (SATA) अहा/ HPV कतेक सुन्दर छथि/ कापालिक: हौ! तुरन्त देखाबह। अपन वस्त्रमे की नुकौने छह? हमरा GAS परत। भिक्षु: हमरा लग की अछि? बस हमर भिक्षापात्र। कापालिक: AVE aS चाहैत छी। भिक्षु: भाइ, एना उचित नहि। हमरा अपन भिक्षापात्र नुका HS WSS पड़ैत अछि। कापालिक: सही अछि। बुद्धजी तँ कहलखिन जे वस्त्र मुख्यतः वस्तु नुका HS राखबाक हेतु पहिरबाक चाही। भिक्षु: हैँ, ई सत्य थिक। कापालिक: ओ सत्य थिक। हम सच्चा सत्य FAS चाहैत छी। भिक्षु: बड़ भेल हँसी-मजाक। जाय दिअ हमरा। भिक्षाटनक समय भड गेल। (APT बढ़ैत HB) कापालिक: St धोखेबाज! कतए जा रहल Gel? हमर कपाल-भिक्षापात्र द५ HS जो। (भिक्षुक वस्त्रक छोर पकड़ि ade oY) भिक्षु: बुद्धम् शरणम् गच्छामि! कापालिक: "चोरी-कलाक गुरु शरणम् गच्छामि" कहू! भिक्षु: पापक क्षमा हो! पापक क्षमा हो! कापालिक: नीक साधु किएक नहि क्षमा पाओत? देवसोमा: नाथ, अहाँ TE थाकि गेलहूँ। गायब कपाल-भिक्षापात्र खोजब सहज ate तैँ एहि सींगेसँ मधुपान करू, fag शक्ति लाउ, तकर बाद तर्क-वितर्क करब। कापालिक: ठीक अछि। (दिवसोमा hee दैत छथि) कापालिक: fra, तूँ सेहो तृप्त हो।
faze ४४४| | 96 देवसोमा: ठीक अछि नाथ। (a8 सेहो पीबैत छवि) कापालिक: एहि मनुष्यसँ टक्कर भेल। कोनो बात नहि। बचल मदिरा एहि आदरणीय साधुकें सेहो दिअ। देवसोमा: नाथक आदेश। सरकार, कृपया ग्रहण करू। भिक्षु: (स्वगत) कतेक Gest भाग्य मिलल! मुदा समस्या ई जे लोक देखि लेत। भिक्षु: (प्रकट) नहि धन्यवाद। हमरा मदिरा पीबाक अनुमति नहि अछि। (कहैत-कहैत अपन ore Frere Pravda BF) देवसोमा: जाउ! एहन सुअवसर आर HAS Vea? कापालिक: प्रिये, ऐ मनुष्यक बेलगाम बोली ओकर असली इच्छा उजागर HS रहल अछि। Pray: की states दया नहि आओत? कापालिक: Sf दया आएत of वासनासंँ मुक्ति केना पाएब? भिक्षु: वासनासंँ मुक्त भेलापर क्रोधसँ Set मुक्ति भेटत। कापालिक: GT हमर वस्तु आपस करब ot HLS जरूर मुक्ति हएत। भिक्षु: कोन वस्तु? कापालिक: हमर कपाल-भिक्षापात्र। भिक्षु: कोन कपाल-भिक्षापात्र? कापालिक: बच्चा सन "कोन कपाल-भिक्षापात्र" Ysa अछि! सम्भव अछि ई सत्यो हो? देवसोमा: मीठ-मीठ बात बजने काज नहि हेतनि। जबर्दस्ती छीन परत। कापालिक: सही कहलहीं प्रिये। (ZI शिक्षापात्र GAS FS कोशिश करैत BY) भिक्षु: गन्दा कापालिक! तोहर नाश हो! (हाथसँ धकेलि Hs कापालिकककें लात Area BA) कापालिक: आह! लात मारलक! देवसोमा: बेकाजक मनुक्ख, तोहर जान जेतौ। (शिक्षुकक केश THES लेल झपटैत HY, Fal केश He रहबाक कारणे संठुलन leas खसि पड़ैत ary) भिक्षु: (स्वगत) बुद्धनीक मुण्डन निअमक प्रशंसा कर5 परत।
faze ४४४ | | 97 भिक्षु: (प्रकट) उठू भगिनी। (हाथ देखा FS उठबैत BY) कापालिक: देखू, महानुभाव सभ! नागसेनकैं देखू जे साधु आ भिक्षु कहबैत छथि मुदा हमर बालिका संगिनीक हाथ पकड़ने छथि! भिक्षु: भाइ, एना नहि कहू। जे संकटमे हो, ओकर सहायता करब हमर कर्त्तव्य थीक। कापालिक: की gotta विधानमे aed ई निअम अछि? Aer पहिने हम खसलहूँ ने? से जाय दिअ। आब अहाँक माथाक भीतरक खोपड़ी हमर भिक्षापात्र बनत। (सभ सारिपीट शुरू करैत BY) भिक्षु: अत्याचार! अत्याचार! कापालिक: देवतागण! स्वयं देखू - ई मनुष्य जे अपनाकँ योगी कहैत अछि, हमर भिक्षापात्र चोरि Hs कड$ उनटे चिकड़ि रहल अछि! भेल, हमहूँ चिकरब-भोकरब। ई अनीति अछि! अनीति अछि! (HEF समय एक पाशुपत साधु प्रवेश करैत Ft) बश्रुकल्प (पाशुपत): सत्यसोम, एना किएक चिकड़ि रहल छी? कापालिक: हे बभ्रुकल्प, ई मनुष्य जे भिक्षु आ साधु कहबैत अछि, खाली हमर भिक्षापात्र चोरिये नै केलक, TRIAS AAT HS रहल अछि। बश्रुकल्प: (स्वगत) देवतासभ ओ HIT HS देलखिन जे हम INS चाहैत See! एहि कापालिकक सहायतासँ अपन एहि ach थकुचि Sa ayes: (प्रकट) हे नागसेन! ओ जे कहि रहल छथि, से सत्य अछि? भिक्षु: सरकार, की अहाँ सेहो ओकर पक्ष AS रहल छी? जे नहि देल गोल हो से ale लेब - इ हमर सिद्धान्त थीक; व्यर्थ are दूर रहब - ई हमर सिद्धान्त ae; अपमान दूर रहब - ई हमर GIA HE; असमयसे Ae खाएब - ई हमर सिद्धान्त थीक; FG कर्म संघ शरणं TTA
faze ४४४| | 98 बभ्रुकल्प: सत्यसोम! ई ओकर सदाचार आ व्यवहार देखबैत अछि। एकर की उत्तर देव? कापालिक: व्यर्थ aad दूर रहब - ई हमर सिद्धान्त थीक। बश्रुकल्प: दूनू सही छी। एहि समस्याक समाधान कोना हएत? Pray: बुद्धक अनुयायीकँ मदिरा-पात्रकें छूबाक की खगता? बश्रुकल्प: काल्पनिक तर्क आरोपक आधार नहि at सकत। कापालिक: जे सोझाँ दृश्यमान अछि, ओकर सामने कोनो तर्क ठहरि नहि सकत! बशभ्नुकल्प: कोन दृश्य? देवसोमा: सरकार, ओतए देखू - ओ कपाल-भिक्षापात्र जे ओ अपन वस्त्रमे नुकौने अछि। बश्रुकल्प: सुनलहूँ? भिक्षु: सरकार, ई कटोरा कोनो दोसरक नहि थिक। कापालिक: तखन देखाउ। भिक्षु: ठीक अछि। (दिखबैत sf) कापालिक: हे महेश्वर! कापालिकक अन्याय आ बौद्ध भिक्षुक सदाचार अपने देखू! Pray: जे नहि देल गेल हो से नहि लेब - ई हमर सिद्धान्त थीक; Pray: व्यर्थ बातसँ दूर रहब - ई हमर सिद्धान्त थीक; भिक्षु: अपमानसँ दूर रहब - ई हमर सिद्धान्त थीक; भिक्षु: असमयमे ate खाएब - ई हमर सिद्धान्त थीक; भिक्षु: बुद्धमू धर्मम् संघम् - हमर शरण। (aq - Prey sn कापालिक - डोलड लगैत BY) भिक्षु: अहा! जेकरा लाज होबाक चाही, ओ नाचि रहल अछि!
aap ४४४| | 99 कापालिक: आ! के नाचि रहल अछि? (चारूकात देखैत छथि) निःसन्देह! से ओहि cet जे हमर गायब भिक्षापात्र आब देखाइ पड़ि रहल अछि आ एहि मधुर वायुमे थकानक लता झूमि रहल अछि। ओ देखि BS तोरा भ्रम YS रहल छौ जे हम नाचि रहल छी! Pray: सरकार, एकर रंग नहि देखलहूँ? किएक नहि बाजि रहल छी? कापालिक: देखबाक की अछि? हम देखि चुकल छी। stares सेहो कार अछि। भिक्षु: तखन मानैत छी जे ई हमर थिक। कापालिक: हैं, हैं! तोहर गिरगिट-स्वभाव मानि लैत छी! SAT लाल कमल सूर्यकिरणसँ श्रेत भ5 जाइत अछि! देवसोमा: हम मरलहूँ! हमर पुण्य भिक्षापात्र एहि मनुष्यक कारी Teves स्पर्श Hs कारी Hs गेल! आब की करब? (ars लगैत BY) कापालिक: चिन्ता नहि प्रिये। धोइ-सुखा लेब। जेना हमसभ अपन पापकेँ तपोबलसंँ धोड़ लैत छी, तहिना अपन भिक्षापात्र Set शुद्ध HS लेब। हे बभ्रुकल्प, की आगम-शास्त्रमे एना लिखल अछि ने? बश्नुकल्प: हैँ, आगम-शास्त्रक अनुसार सत्य थीक। भिक्षु: ठीक अछि, रंग हमरासँ भेल - मुदा आकार, साइज आ रूपक की? कापालिक: की तूँ महादेवीक वंशज छहीँ ने? Pray: कतेक काल धरि अहाँसँ तर्क करैत रहब? लिअ, सरकार। कापालिक: नीक। बुद्ध एना महादानी बनि गेलाह। भिक्षु: ST एना चलैत रहत, तँ हमर शरण HAT? कापालिक: बुद्ध धर्म संघ॑ - अवश्य। बश्रुकल्प: हम ई समस्या सुलझा Ale सकैत छी। चलू न्यायालयमे। देवसोमा: नाथ, Sf ओतए जाएब तँ अपन कपाल-भिक्षापात्र जरूर गमाएब। ayers: किएक कहैत छी? देवसोमा: ई मनुष्य जे सब सुविधासँ मठमे रहैत अछि, अपन संचित धनसँ सभ न्यायाधीशक मुँह बन्द कड$ देत। हमर सभक जे मात्र पहिरल वस्त्रे अपन सम्पत्ति अछि, ओ कोना न्यायालय जाएब? ayers: एना नहि। जे ईमानदार हो, तकरा ओहि न्यायालयमे जरूर न्याय भेटत। GAT ओ भवनक स्तम्भ सभ ओकरा थामने अछि, तहिना न्यायाधीश सभ न्यायकूँ।
fats ४४४ | | 00 कापालिक: ई बात पर्याप्त अछि। जे ईमानदार हो, तकरा भय नहि। भिक्षु: सरकार, रस्ता देखाउ। बभ्ुकल्प: अवश्य... (FH प्रस्थान करैत BY) (MEF समय CH बताह AFT प्रवेश करैत HB) TART (बताह): ओतए, ओतए अछि - ओ दुष्ट कुकुर। मुँहमे भुजल मांस खण्ड सहित कपाल- भिक्षापात्र दबओने भागि रहल अछि। अरे आलसी, कतए जाएब? आब खसा देलक आ हमरा दिस आबि रहल अछि। (चारुूकात देखैत अछि) उन्मत्त: एहि पत्थरसँ ओकर दाँत तोड़ब। बेकार कुकुर, खोपड़ी खसा Hs किएक भागि रहल छहीँ? BARTS पराक्रममे जीत५ Ted Gel? हम... हम अवारा सूगरपर सवार US आकाशमे उड़ब। ATER हथियार बना ऐरावत हाथीकें हरा देलहूँ। उन्मत्त: हौ मूर्ख, की कहलहीँ? ई सब झूठ थिक? तखन ई कुरूप बेंग हमर साक्षी थिक। की? तीनू लोकमे पराक्रमसँ प्रसिद्ध व्यक्तिकें साक्षीक की आवश्यकता? ठीक अछि, ई करब। ओहि कुकुरक छोड़ल मांस-खण्ड खाएब। (खाइत HUB) तखन Ae Ae जाइत जि) FATA: हमर अपने नोर हमरा मारि रहल अछि। (चारूकात BGA, कानि FS) TART: के मारि रहल अछि हमरा? (चारूकात देखैत) अरे बेकार लोक सभ! जेना घटोत्कच भीमक भातिज छी, तहिना हम ककरो भातिज छी। एहि मांस-खण्डक हेतु हमरा नहि सताउ। (चारूकात देखैत) उन्मत्त: हमर गुरु सुरानन्दी ओतए छथि। ओहिठाम जाएब। (दौड़ैत अछि) ayers: हौ, सावधान! ओ बताह AAS एम्हरे आबि रहल अछि!
बिदेह ४४४ | | 02 उन्मत्त: ओही व्यक्ति लग जाएब। (लग आबि FS) उन्मत्त: सरकार, ई कपाल-भिक्षापात्र ग्रहण करू जे हम एक नीच जातिक उच्च-वर्गीय कुकुरसँ प्राप्त कएल। बश्रुकल्प: (ध्यानसँ देखैत छथि) एकरा योग्य व्यक्तिकेँ द५ दिअ। उन्मत्त: हे महात्मा, प्रसननतासंँ ग्रहण करू। भिक्षु: ई आदरणीय पाशुपत एकर योग्य प्राप्तकर्ता छथि। (FT कापालिकक सामने आबि कपाल-भिक्षापात्र राखैत HS, तखन वायावर्त LF कर TIT waa अछि) उन्मत्त: हे प्रभु! सुख बढ़ओ! अनेको नमस्कार। कापालिक: ई तँ हमर कपाल-भिक्षापात्र थिक! देवसोमा: हैं! कापालिक: भगवानक कृपासँ हम thes कापालिक बनलहूँ। (जोकरा दिस बढ़ैत BY) उन्मत्त: अरे आलसी! जो, माहुर खो! (खोपड़ी छीनि दौड़ि जाइत अछि) कापालिक: (पाछाँ दौगैत) यमराजक ई सेवक हमर प्राण लेने जा रहल अछि! दूनू हमरा बचाउ! दूनू: ठीक अछि। हम दूनू सहायता करब। (aH भागैत छथि) कापालिक: है, रुक! are: किए रोकि tect छी? कापालिक: हमर कपाल-भिक्षापात्र वापस FS HS GTS! art: मूर्ख! देखाइ नहि पड़ैत wl? ई सोनाक कटोरा थिक।
fate ४४४ | | 02 कापालिक: एहन सोनाक कटोरा के बनओलक? उन्मत्त: एकरा सोनाक FEN कहलहूँ कारण ई ओ सोनारक साढ़ बनओलक, जे सोनाक वस्त्र पहिरैत छथि। Pray: की कहि रहल wet? उन्मत्त: जे ई सोनाक कटोरा थिक। भिक्षु: की? ई पागल अछि! sara: ई उपाधि तँँ हम प्राय: सुनैत छी; लिअ। (कपाल-भिक्षापात्र कापालिककेँ SS दैत FHS) कापालिक: (भिक्षापात्र लैत) आब ओ ओहि देवारक पाछाँ गेल। जल्दी ओकरा पाछाँ जाउ! उन्मत्त: बड़ सम्मान भेटल। (पागल जल्दीसे जाइत अछि) भिक्षु: अहा! अद्भुत! हमर शत्रुपर आएल सुभाग्यसँ हम प्रसन्न छी। कापालिक: (भिक्षापात्र आलिंगन करैत) अपन सम्पूर्ण समय ATTA लगाओल आ PIA EMR समर्पित FG Ue Waar पात्रकेँ देखिते हमर हृदय शान्त TS हुनकर चरणसे YGF गेल/ देवसोमा: नाथ! सन्ध्याकालक चन्द्रमाजकाँ अहाँ हमरा आँखिमे बडड शीतल लागि रहल छी। बश्रुकल्प: सौभाग्यवश जीत अहाँक भेल। कापालिक: ई सब सुभाग्य अहाँक थीक। ayers: (स्वगत) जे निर्दोष हो, ओकरा fag भय नहि। fs बौद्ध भिक्षु एहि व्याघ्रक मुखसँ बचि गेल। बभ्नुकल्प: (प्रकट) प्रातःकालक प्रार्थनामे मित्रक सुभाग्य स्मरण करब।
बिदेह ४४४ | | 05 (पाशुफत प्रस्थान करैत BLY) कापालिक: हे नागसेन, हमर भूलक हेतु क्षमा माँगैत छी। भिक्षु: कोनो बात नहि। अहाँकें प्रसन्न करै लेल हम की करी? कापालिक: of अहाँ हमरासँ प्रसन्न छी, oF आर की माँगब? भिक्षु: विदा लिअ? कापालिक: बहुत नीक। फेर Fe हएत। भिक्षु: ठीक अछि। (चलि पड़ैत छथि) कापालिक: हे प्रिये देवसोमा, हमहूँ चलू। (FI प्रस्थान करैत HY) - एहि तरहे मत्तविलास प्रहसनम् केर समाप्ति होइत अछि। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ।
fate ४४४ | | 04 २.१६. गजेन्द्र ठाकुर- मैथिली नाट्यमंच/ नाटक लेल एकटा समीक्षा सिद्धान्त (भाग-४) सन्दर्भ- कुणाल-कृत बिदापत Tay OTST मैथिली नाट्यमंच/ नाटक लेल एकटा समीक्षा सिद्धान्त (भाग-४) सन्दर्भ- कुणाल-कृत बिदापत कुणाल-कृत MTA YIM * द्वितीय नाटक बिदापत /लिोकनाठ्य शिल्प-आधारित नाटिका) एक TTY aT नाव्य-यमीक्षा : भारतीय + पाश्चात्य * चीनी * इजरायली TACT पहिल प्रदर्शन : ३० सितंबर २००२, विद्यापति भवन, पटना + प्रकाशन : अंतिका, जनवरी-मार्च २००३ १. परिचय आ कथा-स्थापत्य कुणालक द्वितीय नाटक “बिदापत” (= विद्यापतिक लोकोच्चरित रूप) अपन शिल्प-वैविध्यमे संग्रहक सर्वाधिक परिष्कृत कृति थिक। *बिदापत नाच” -मिथिला-बंगालक प्रसिद्ध लोक-रंगमंच-परम्पराक - शिल्पमे लिखल एहि नाटिकाक समय-सीमा नाटककार स्वयं स्पष्ट करैत छथि -ई.सं. १४००-१४५० | मुदा कुणालक महत्त्वाकांक्षा tS बेसी अछि- ओ एक जीवनीपरक नाटक (biography-play) मात्र नहि लिखैत छथि, अपितु विद्यापतिक काव्यक रंगमंचीय भाष्य रचैत छथि। नाटकक स्थापत्य (architecture) तीन स्तर पर काज करैत अछि। बाहरी स्तर -सूत्रधार-नटीक संवाद-चौखट, विदूषक-सद्ृश विपटाक व्याघात (interruption), पूर्वरंगक शास्त्रीय प्रदर्शन। मध्य स्तर -कथा-वस्तुक अभिनय (विद्यापति, शिवसिंह, लखिमा, उगना, मंदाकिनी, कालिंदी, अमियकर आ दरबारी पात्र)। भीतरी स्तर - विद्यापतिक स्वयं पदक अंतर्गायन (embedded performance) जे कथाक भावात्मक धुरी थिक। एहि तीनू स्तरक अन्योन्य-क्रियामे नाटकक रंगमंचीय ऊर्जा उत्पन्न होइत अछि।
fate ४४४ | | 05 कथाक पाँच मुख्य अक्ष -(१) विद्यापति आ fatten मित्रता, (2) जौनपुर-सुलतानक न्यायालयमे विद्यापतिक काव्य-बल द्वारा शिव सिंहक मुक्ति, (३) उगना-महादेवक अन्तर्कथा, (४) लखिमाक षड्यंत्र-प्रतिरोध आ ates अन्तर्धान, (५) विद्यापतिक ३२-वर्षीय शोक आ काव्य-अमरत्वक उद्घोषणा। एहि पाँचू अक्षकेँ सूत्रधार-नटी-विपटाक त्रिभुज नाटकक बाहरी समापन (frame) दैत अछि। २. भारतीय नाट्य-सिद्धांत २.१ पूर्वरंग आ दशरूपक-परम्परा भरतमुनिक नाट्यशास्त्र (अनुमानित द्वितीय शती ई.पू.--द्वितीय शती ई.सं.) नाटकक आरम्भमे 'पूर्वरंग” (preliminary entertainment) अनिवार्य Ara अछि - जाहिमे नांदी (auspicious Verse), सूत्रधार-प्रवेश आ प्रस्तावना सम्मिलित Sled अछि। कुणाल एहि शास्त्रीय संरचनाकँ ने मात्र अपनाबैत छथि, अपितु ओकर लोकनाट्य-रुपांतरण प्रस्तुत करैत छथि। देवी-वंदना, भैरवी-स्तुति, 'तखन सूत्रधारक प्रस्तावना -ई क्रम नाट्यशास्त्रक अनुगामी अछि। दशरूपकक दृष्टिसँ धनज्जयक “दशरूपक” (दशम शती) नाटकक दस विभेद करैत अछि। “बिदापत” क शीर्षक-पृष्ठ एकरा ‘Acar’ कहैत अछि- जे दशरूपकक एक प्रकार थिक, हास्य-प्रधान, लघु, वियोगान्त, नायक-नायिका दुनूक व्यथा-भोग। “बिदापत” एहि परिभाषामे आंशिक St बैसैत अछि - वियोग आ दुखान्त मुदा हास्यक स्थानमे करुण। अभिनवगुप्त जखन दशरूपकमे “नाटिका”क व्याख्या करैत छथि, Hed छथि जे एतय नायक “विलक्षण” होएबाक चाही - विद्यापति यएह थिकाह। 2.2 रस-निष्यत्ति : करुण, श्रृंगार आ शान्तक त्रिवेणी Ufe नाटकक प्रधान रस “Hour थिक - fatten अन्तर्धान, लखिमाक ३२-वर्षीय प्रती क्षा, विद्यापतिक जीवनक अंतिम एकाकी Rafe भरत करुण-रसक “स्थायी भाव” शोक मानैत छथि, आ were विभाव (उद्दीपन) अप्रियक स्मरण। किन्तु एहि नाटकमे करुणक तल अभिनवगुप्तक “शान्त-रस” दिस घुरैत अछि -समाजीक समापन-गायन जे विद्यापति, शिवर्सिंह, लखिमा, विपटा सभकें “काव्य- पदमे अमर” घोषित करैत अछि, ओ शान्त-रसक आत्मविश्राम थिक। अभिनवगुप्त (९५०-१०२० ई.सं.) अपन “अभिनवभारती” (नाट्यशास्त्रक टीका) मे रस-सिद्धांतक व्याख्या करैत कहलनि जे रस “अभिव्यक्त” होइत अछि, “उत्पन्न” नहि -ओ दर्शकक चेतनामे पहिनहियेसँ विद्यमान छल, नाटक ओकरा जागृत करैत अछि। “बिदापत"मे विद्यापतिक वास्तविक पदक
बिदेह ४४४ | | 06 प्रयोग एहि “अभिव्यक्ति'केँ शक्तिशाली बना दैत अछि - दर्शकक सुप्त काव्य-स्मृति नाट्य-प्रदर्शनसँ जागि उठैत अछि। शृंगार-रस विद्यापतिक पदक माध्यमसँ - विशेषत: “नव वृन्दावन, नव-नव तरुगण, विहरइ नवल किशोर” आ “चाँद सार लए मुख घटना करू” - प्रवाहित होइत अछि। मुदा ई श्रृंगार लौकिक ale, भक्ति-धंगार थिक, जकर लक्ष्य राधा-कृष्ण-लीलाक माध्यमसंँ सार्वभौम प्रेम थिक। एहि तरहे श्रृंगार आ भक्ति एकठाम विलीन भ” जाइत अछि - ई संस्कृत अलंकारशास्त्रक “श्रृंगार-भक्ति-योग” थिक। २.३ ध्वनि-सिद्धांत : *बिदापत” शब्दमे तीन अर्थक संकुचन “बिदापत” शब्दक ध्वनि-व्यंजना असाधारण थिक। आनन्दवर्धनक ध्वन्यालोकक परिप्रेक्षयमे एहि एक शब्दमे कमसँ-कम तीन अर्थ-स्तर संकुचित अछि -(क) विद्यापति (अभिधा/वाच्यार्थ), (ख) बिदापत नाच -लोकनाट्य-परम्पराक नाम (लक्षणा/लक्ष्यार्थ)- पूर्व ज्योतिरी श्वर बला विद्यापति ई.सं. १४००- १४५० सँ बहुत पाछाँ, (ग) ‘fears ae? अर्थात “विदायक प्रभु” वा “विदा लेएवाला” (व्यंजना) -जे नाटकक HOU अंत (Rasen अन्तर्धान, काल-विदाइ) क सूचना दैत अछि। ई त्रि-स्तरीय ध्वनि नाटककारक भाषिक-चेतनाक प्रमाण थिक। नाम-वक्रोक्ति -“विद्यापति, विद्यापति!” बनाम “बिदापत तँँ बिदापते wer!” - एहि दुनूक टकराहटमे कुन्तकोक्त वक्रोक्ति थिक। सूत्रधार शास्त्रीय नाम पर आग्रह करैत रहैत छथि; विपटा लोकोच्चरित नाम पर अड़ल रहैत अछि। ई वाद-विवाद वास्तवमे “शास्त्र बनाम लोक”क सांस्कृतिक Ga एक हास्यात्मक रूपान्तरण थिक -आ दुनूमे एक्के व्यक्तित्व छथि। २.४ अन्तर्नाव्य (नाटकक भीतर नाटक) नाट्यशास्त्रमे “अन्तर्नाव्य” (play-within-a-play) कोनो अलग विधा नहि, परंतु संस्कृत नाटकमे एकर उदाहरण अछि (TAT भासक नाटकमे स्वप्नदृश्य वा रत्नावलीमे अभिनय) | “बिदापत”मे दू टा अन्तर्नाट्य उपस्थित अछि। प्रथम -अमियकरक ‘cai’ (dramatic imitation), जाहिमे ओ विद्यापति आ सुलतानक भेटकें स्वयं नाट्य-रूप दैत छथि; मिष्ठान खाइत-खाइत ओ पात्र बदलैत जाइत छथि -ई अभिनयक एक देशज रूप थिक। द्वितीय -गौरा-महादेव-नटुआक अन्तर्दश्य, जाहिमे शिवक निर्धनताक विषयमे गौराक विलाप अभिनीत होइत अछि -ई उगनाक महादेव-पहचान हेतु प्रस्तुति थिक। ३. पाश्चात्य नाट्य-सिद्धांत ३.१ जॉर्ज लुकाच : ऐतिहासिक नाटक आ विश्व-ऐतिहासिक व्यक्तित्व
fats ४४४ | | 07 हंगरीक मार्क्सवादी आलोचक जॉर्ज लुकाच (Georg Lukacs, १८८५-१९७१) अपन निबंधमे ऐतिहासिक नाटकक लेल एक मानदण्ड प्रस्तुत कएलनि - नायक एक “विश्व-ऐतिहासिक व्यक्तित्व” (welthistorisches Individuum) होएबाक चाही, जे अपन युगक ऐतिहासिक अंतर्विरोधकें अपन शरीरमे जीबैत अछि। विद्यापति ठीक एहन व्यक्तित्व थिकाह - ओ एक दिस निर्भर राज्यमे जीबैत छथि (तिरहुतक जौनपुर-अधीनता), दोसर दिस काव्य-शक्तिमे विश्वास रखैत छथि जे राजनीतिसँ उत्कृष्ट अछि। हुनकर जीवन एहि अंतर्विरोधक मूर्त रुप थिक। मुदा कुणालक विद्यापति लुकाचक “विजयी नायक” नहि - ओ एक “शोकाकुल साक्षी” थिकाह। शिवर्सिंहक अन्तर्धान ओहि मैत्री-बन्धनक अंत थिक जे कविक जीवनकें अर्थपूर्ण बनेने छल। ३२ वर्षक प्रती क्षाक बाद जे शान्त-भाव प्राप्त होइत अछि, ओ लुकाचक त्रासदी-नायकसँ भिन्न - ओ एक पूर्वीय, ध्यानमग्न नायकक त्रासदी थिक। ३.२ नारीवादी पाठ : लखिमाक नायिका पाश्चात्य नारीवादी नाट्य-आलोचना (केट मिलेट, एलेन Aiea, शारोन फ्रेडमैन आदि) ओहि नाट्य- पाठक पुनर्पाठमे रुचि रखैत अछि जाहिमे ऐतिहासिक महापुरुषक छायामे स्त्री-पात्र गौण भ” जाइत अछि। कुणाल एहि प्रवृत्तिकँ सचेत SoS उलटैत छथि। 'लखिमाक पात्र तीन कारणसंँ नारीवादी दृष्टिसँ उल्लेखनीय अछि। प्रथम - ओ मंत्री-संरक्षण अस्वीकार करैत स्वयं षड्यंत्रक “पाठ” करैत छथि -“..लोकनि महाराज-महारानी-महाकविक त्रिमूर्तिकें खण्डित करबाक GHA Fat रहल छथि।” द्वितीय - हुनकर प्रती क्षा परम्परागत पतिव्रताक निष्क्रियता नहि, अपितु एक स्वेच्छापूर्ण दृढ़-संकल्प थिक। तृतीय - परम्परागत आख्यानमे लखिमा बहुधा सती-गाथाक Seah ofa; कुणाल Ves बाहर निकलि हुनकर जीवन-प्रती क्षाकँ केन्द्रमे रखैत छथि। ३.३ पियर नोरा : स्मृति-स्थल (Lieux de Mémoire) फ्रांसीसी इतिहासकार पियर नोरा (Pierre Nora, जन्म १९३१) अपन ‘feral दे मेमोयर” (Lieux de mémoire) 724 *स्मृति-स्थल” (memory site) क सिद्धांत प्रस्तुत कएलनि - ओ स्थल, वस्तु वा पाठ जाहिमे सामूहिक ऐतिहासिक स्मृति संग्रहित आ क्रियाशील होइत अछि। विद्यापतिक पद एहि नाटकमे एक प्रमुख “स्मृति-स्थल” थिक। जखन समाजी “नव वृन्दावन, नव-नव 'तरुगण, विहरइ नवल किशोर” गाबैत अछि, वा जखन लखिमाक स्मृतिमे शिवरसिंहक पद “आरे-आरे भमरा, तोहे हित हमरा” उभरैत अछि -ओ क्षण एकहि संग इतिहासक स्मृति आ वर्तमानक जीवन- अनुभव थिक। नाट्य-प्रदर्शन एहि ६०० वर्षक दूरीकें “वर्तमान क्षण” मे परिणत करैत अछि। एहि अर्थमे
fate ४४४ | | 08 “बिदापत” केवल विद्यापतिक नाटक नहि, मैथिली भाषा-समाजक सामूहिक स्मृतिक नाट्य-प्रस्तुति थिक। ३.४ ब्रेखख आ आत्म-दूरी : विपटाक भूमिका प्रथम नाटकक भाँट-त्रयीक भूमिका “बिदापत'मे सूत्रधार-नटी-विपटाक त्रिभुज द्वारा निभाओल जाइत अछि। विपटाक ae ant aes अनवरत आग्रह ब्रेख्सीय विरचन-प्रभावक एक सटीक देशज रूपान्तरण थिक - ओ दर्शककें कथामे पूर्णत: facia हुअएसँ रोकैत अछि, सदा मोन पाड़ैत रहैत अछि जे ई एक “निर्माण” थिक। Fel Tare Ur महत्त्वपूर्ण भेद अछि - tan चाहैत छलाह जे विरचन-प्रभाव दर्शकक “आलोचनात्मक बुद्धि' जगाबए। विपटाक व्याघात ules भिन्न - ओ बुद्धि नहि, उल्लास जगाबैत अछि। विपटा एक “लोक-विरचनकारी” (folk-alienator) थिकाह जे कलाक अभिजन-गरिमाकेँ “AS? (बैलगाड़ी ) आ Sear (कथा)क स्तर पर a अनैत अछि। ई एक सौन्दर्यशास्त्रीय भेद थिक जे पाश्चात्य नाट्य- सिद्धांतसँ एहि नाटकक मौलिकता स्थापित करैत अछि। ४. चीनी नाट्य-सिद्धांत ४.१ साइजी-चियारेन: कवि-प्रतिभा आ प्रेम-कथाक परम्परा चीनी शास्त्रीय नाट्य-परम्पराक -विशेषत: मिंग-किंग कालीन कुनछू (Kunqu opera) क -एक प्रमुख नाट्य-ढाँचा *साइजी-चियारेन” (brilliant scholar meets beautiful lady) थिक। एहिमे एक कवि-विद्वान आ एक सौंदर्यवती नायिकाक प्रेम-कथाक माध्यमसँ काव्य-शक्ति आ प्रेम- मूल्यक प्रतिष्ठा होइत अछि। “बिदापत” एहि परम्पराक एक विस्थापित (displaced) संस्करण थिक। विद्यापति *साइजी” छथि - तर्कशास्त्री नहि, काव्यशक्तिसम्पनन; लखिमा “चियारेन” नहि, अपितु एक स्वाभिमानी राजमहिषी। मुदा दुनूक सम्बन्धमे ओ गहींर विश्वास आ मैत्री-प्रेम अछि जे “*साइजी-चियारेन” परम्पराक मूल तत्त्व थिक। शिवरसिंहक अन्तर्धान ऐ परम्पराकेँ एक त्रिकोणमे बदलि दैत अछि - दुनूक मिलनक केन्द्रमे एक तेसर उपस्थित छल जे अनुपस्थित भ” गेलाह। ४.२ झी-यिन: परम-सम्वाद आ तकर अनुपस्थिति चीनी सांस्कृतिक परम्परामे “झी-यिन* (one who truly hears/understands) एक गहन सम्बन्ध थिक - ओ व्यक्ति जे कलाकारक कलाकेँ ओकर सम्पूर्ण गहराईमे बुझैत अछि। प्रसिद्ध
fats ४४४ | | 09 किंवदन्ती अछि जे वीणावादक “बो-या' अपन एकमात्र 'झी-यिन” “झोंग-जिछी' क मृत्युक बाद अपन वीणा तोड़ि देलनि -“जे सुनि सकैत छल से ale रहल, वाद्य किएक बजाउ।” विद्यापति-शिवसिंहक सम्बन्ध ठीक एहि “झी-यिन” आदर्शक अवतरण थिक। शिवसिंह विद्यापतिक कविताक परम-श्रोता, परम-रसिक आ परम-संरक्षक छलाह। हुनकर अन्तर्धानसँ विद्यापतिक काव्य- जीवन एक प्रकारे अनाथ oP जाइत अछि -“उगना रे मोर कतए गेलाह” -ई एहि “झी-यिन-वियोग”क विलाप थिक। बो-याक वीणा तोड़ल जेकाँ विद्यापतिक पदक स्वर शोक-गर्भित wy जाइत अछि। ४.३ झेजीशी आ बहु-स्तरीय प्रदर्शन चीनी लोक-रंगमंचमे “झेज़ीशी* (excerpt-play) परम्परा प्रसिद्ध थिक -एक विस्तृत महाकाव्यात्मक नाट्य-चक्रसँ एक स्वतंत्र, आत्म-निहित अंश चुनि ch” खेलल जाइत अछि। एहि नाटकमे तीन ar “झेजीशी” स्पष्टत: उपस्थित अछि -(क) अमियकरक स्वाँग (सुलतान-दरबार प्रसंग), (ख) गौरा-महादेव-नटुआक अन्तर्नाट्य (उगना-उद्घाटनक पूर्व-तैयारी), (ग) सूत्रधार-नटीक कृष्ण-राधा- रास (gaa) | ई स्तरित प्रदर्शन (layered performance) एकहि रंगमंच पर अनेक कथा-भूमि एकहि संग सक्रिय रखैत अछि। चीनी नाट्य-सिद्धांत एहि बहुस्तरीयताकेँ (xizhongxi, play within play) कहैत अछि। भारतीय परम्परामे एकर अनुरूप “नाट्यमे अभिनय-प्रसंग” थिक, Far चीनी अवधारणा एकर स्तर-विमर्शकँ अधिक सटीकतासंँ परिभाषित करैत अछि। ४.४ बेई-हुआन-ली-हे: चारिटा मौलिक नाट्य-दशा चीनी नाट्य-परम्परामे मानल जाइत अछि जे प्रत्येक उत्तम नाटकमे चारि मौलिक भावावस्था अवश्य उपस्थित होएबाक चाही -“बेई” (शोक), “हुआन” (आनन्द), “ली” (विछोह), “हे” (पुनर्मिलन)। उत्कृष्ट नाटक एहि Wech एकहि आख्यान-प्रवाहमे रखैत अछि। “बिदापत”मे यएह चारू उपस्थित अछि -“हुआन' (ओइनीक विजय, उत्सव), “ली” (शिवरसिंहक अन्तर्धान), “बेई” (विद्यापति आ लखिमाक ३२-वर्षीय शोक), “हे” (काव्यमे पुनर्मिलन -एक आध्यात्मिक, अदृश्य पुनर्मिलन जाहिमे विद्यापति घोषणा करैत छथि जे शिवर्सिंह अपन पदमे अमर रहताह)। ई “हे” लौकिक ae, आत्मिक थिक - एहि अर्थमे ई चीनी आदर्शक अतिक्रमण करैत एक नव सम्भावना उद्घाटित करैत अछि। ५. इजरायली नाट्य-सिद्धांत ५.१ एस. आन्स्कीक “दिब्बूक” : मृत प्रेमक रंगमंचीय उपस्थिति
बिदेह ४४४ | | 20 यहूदी-रूसी नाटककार एस. आन्स्की (5. Ansky, १८६३-१९२०) केर “दिब्बूक” (The Dybbuk, ‘Between Two Worlds’ / *दू dare बीचमे”, १९२०) इब्रानी आ विद्विश रंगमंचक आधार- ग्रन्थ मानल जाइत अछि। एहिमे एक मृत प्रेमीक आत्मा अपन प्रेमिकाक शरीरमे प्रवेश क” रंगमंचीय उपस्थिति बनाबैत अछि। प्रेम मृत्युसँ बलवान - यएह एकर मर्म थिक। “बिदापत” मे शिवसिंह रंगमंच पर शारीरिक Soe अन्तर्धान होइत छथि, मुदा लखिमाक स्मृतिमे हुनकर उपस्थिति एक “दिब्बूकीय” (dybbuk-like) रंगमंचीय सत्ता बनि जाइत अछि - जखन शिवसिंहक पद “आरे-आरे भमरा, तोहे हित हमरा” गाबैत हुनकर छाया-रूप प्रकट होइत अछि, ओ क्षण “दिब्बूक”क रंगमंचीय ache समरूप अछि। दुनू नाटकमे प्रेमक भावात्मक सत्य मृत्युक सीमाकें तोड़ैत अछि। ५.२ एली रोजिक : “काव्य-पद”क प्रतिमात्मक सत्ता एली रोजिक (Eli Rozik) अपन iconicity सिद्धांतने कहलनि जे रंगमंचक प्रतिमा केवल अभिनेता-शरीरसँ नहि, ध्वनिसँ Sel उत्पन्न होइत अछि। जखन विद्यापतिक पद समाजी द्वारा गाओल जाइत अछि, तखन ओ पद एक “ध्वनि-प्रतिमा” (sound-icon) बनि जाइत अछि -ओ केवल संगीत नहि, विद्यापतिक समग्र जीवन-संसारक रंगमंचीय प्रतिरूप थिक। रोजिकक एक विशिष्ट बिन्दु एतय प्रासंगिक अछि - ओ ‘theatrical image’ आ ‘dramatic text’ क बीच अंतर करैत छथि। नाट्य-पाठ (कुणालक लिखित नाटिका) आ रंगमंचीय छवि (विद्यापतिक पद गाबैत अभिनेताक समग्र देह-स्वर-गति) दुनू स्वतंत्र सत्ता थिकाह। एहि नाटकमे ई दुनू सत्ता एक विशेष तनावमे अछि - कुणालक पाठ विद्यापतिक पदकेँ अपन भीतर समाबैत अछि, परंतु पद सदा पाठक नियंत्रण ae अपन स्वतंत्र काव्य-जीवन जीबैत रहैत अछि। ५.३ हबीमाक भाषा-राजनीतिसँ आगाँ : “काव्य-भाषाक पुनर्जन्म” पूर्वक नाटकक समीक्षामे हम हबीमा (Habima Theatre) सँ भंगिमाक भाषा-राजनीतिक समानांतर देखलहूँ। 'बिदापत मे ई समानांतर एक अतिरिक्त स्तर ग्रहण करैत अछि - केवल भाषाक जीवन नहि, “काव्य-भाषा”क (poetic language) जीवन। हबीमाक परम्पराक निरन्तरता इजरायलमे हिब्रू काव्य-परम्पराकेँ रंगमंच पर जीवित रखबाक प्रयाससँ Sat जुड़ल अछि। “बिदापत”क मंचन २००२ (पटना, विद्यापति भवन) विद्यापतिक पदकें रंगमंचीय माध्यम पुनर्जीवित कएलक - ओहि पदकें जे बहुधा पुस्तकालयक वस्तु बनि रहल छल। एहि अर्थमे भंगिमाक यएह नाट्य-
बिदेह ४४४ | | 222 कर्म एक “काव्य-भाषाक रंगमंचीय पुनर्जन्म* थिक, जे हिब्रू काव्यक इजरायली रंगमंचीय पुनर्जन्मक समानांतर चलैत अछि। ५.४ उपनिवेश-परोत्तर दृष्टि : कविताक राजनयिक शक्ति इजरायली रंगमंच-विद्वान अब्राहम ओज (Avraham Oz) आ अन्यक उपनिवेश-परोत्तर नाट्य- चिन्तन (postcolonial theatre studies) मे ओहि नाट्य-प्रयोगक विशेष स्थान अछि जाहिमे “सांस्कृतिक शक्ति” (cultural power) राजनीतिक वा सैन्य शक्तिकेँ परास्त करैत अछि। “बिदापत”क सुलतान-दरबार प्रसंग एहि GES उत्कृष्ट अछि। जौनपुर-सुलतान राजनीतिक सत्ता थिकाह; विद्यापति सांस्कृतिक शक्ति। विद्यापति राजनयिक माध्यमसँ ale, अपितु काव्य-प्रदर्शनक माध्यमसँ शिवसिंहकें मुक्त करबैत छथि -आन्हर रहैत स्नान-दृश्यक पद रचि | सुलतानक “जे माँगो”क उत्तरमे विद्यापति मित्रक मुक्ति माँगैत छथि, राजसिंहासन नहि। मंत्री टिप्पणी करैत अछि -“जैँ तिरहुतक राज माँगि लितथिन!”; विद्यापतिक उत्तर -*हमरा ff सरिपहुँ राज भेटि गेल!” -यएह काव्यशक्तिक उपनिवेश-परोत्तर विजय-घोषणा थिक। ६. चतुर्भुज-संध्लेषण चारू परम्पराक दृष्टि एकठाम आनला पर “बिदापत”क केन्द्रीय प्रश्न स्पष्ट होइत अछि - “काव्य-शक्ति की थिक, आ ओ कोन-कोन रूपमे अपन अस्तित्व सिद्ध करैत अछि? प्रत्येक परम्परा एकर उत्तर भिन्न-भिन्न कोणसँ दैत अछि। भारतीय दृष्टि -काव्य-शक्ति = रस-निष्पत्ति। पद अभिव्यक्त करैत अछि विद्यमान रस। शान्त-रसक चरम अवस्थामे काव्य मृत्युंजयी बनैत अछि। पाश्चात्य दृष्टि -काव्य-शक्ति = स्मृति-स्थल (Nora) + विश्व-ऐतिहासिक व्यक्तित्वक (Lukacs) अभिव्यक्ति + नारीवादी पुनर्पाठ (लखिमा-केन्द्रित)। चीनी दृष्टि -काव्य-शक्ति = झी-यिन (परम-सम्वाद)क कला। बेई-हुआन-ली-हेक आध्यात्मिक पुनर्मिलन। इजरायली दृष्टि -काव्य-शक्ति = ध्वनि-प्रतिमाक स्वतंत्र सत्ता (Rozik) | उपनिवेशी-सत्ताकेँ काव्यसँ परास्त करबाक सांस्कृतिक-राजनयिक विजय। चारू दृष्टिकोण एकटा साझी गप पर सहमत छथि - विद्यापतिक पद केवल साहित्यिक कलाकृति नहि, एक जीवित सांस्कृतिक-राजनीतिक शक्ति थिक। कुणाल एहि शक्तिकेँ रंगमंचक माध्यमसँ एक बेर
बिदेह ४४४ | | 222 फेर “जीवित” करैत छथि। एहि अर्थमे “बिदापत” केवल विद्यापतिक नाटक ate - ई स्वयं मैथिली रंगमंचक अपन “अस्तित्व-घोषणा” थिक। HH अंकमे : कुसमा-सलहेस [सैद्धांतिक विवेचन लेल देखू- मैथिली समी क्षाशास्त्र- गजेन्द्र ठाकुर] अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ।
बिदेह ४४४ | | 223 ug Poetry ३.१. तेलुगु काव्य: काठक घोड़ा [मूल तेलुगु'कोय्या गुर्रम' ] मूल तेलुगु: नग्नमुनि (मानेपल्लि हृषीकेशवराव) मैथिली अनुवाद: मानेश्वर मनुज [खण्ड ६] ३.२. अशोक कुमार ठाकुर-पीड़ा आ मेहनति/ दू कौड़ीक शिक्षक ३.३. जगदानन्द झा "मनु"- २ टा गजल ३.४. प्रणव कुमार झा- रैंक १५७: गोदी मीडिया ३.५. राम शंकर झा "मैथिल"- धीपल ३.६. आचार्य रामानंद मंडल- महाकवि कालिदास / कवि आदि विद्यापति नाई/ आदिकवि सरहपा
‘fae ४8४ | | 24 ३.१. तेलुगु काव्य: काठक घोड़ा [मूल तेलुगु 'कोय्या गुर्रम' | मूल तेलुगु: नग्नमुनि (मानेपल्लि हृषीकेशवराव) मैथिली अनुवाद: मानेश्वर मनुज [खण्ड ६] तेलुगु काव्य: काठक घोड़ा [मूल तेलुगु'कोय्या गुरम' ae लेखक छथि नग्नमुनि (मानेपल्लि हृषीकेशवराव) ] मूल तेलुगु लेखक नग्नमुनि एक परिचय नाम: मानेपल्लि हृषीकेशवराव जन्म: 5 मई 940 जन्म स्थान: शहर- तेनाली, जिला- गुंटूर (आंध्र प्रदेश) वृत्ति: चीफ ऑडिटर, आंध्र प्रदेश विधान सभा, तकर बाद डिप्टी सेक्रेटरी, ओतहि लिंक: पहिने साम्यवादी (कम्युनिस्ट), बादमे राष्ट्रवादी (नेशनलिस्ट) संस्था: अविभाज्यक जनतंत्र, 990 आंदोलन: दिगम्बर कविता आन्दोलन 965 लक्ष्य: नंगट, भूखल, दीन, दरिद्रक हित कृति: उदर्विचनि उदयलु (ओ उदय जे उदित नहि भेल) Yar ear
बिदेह ४४४ | | 225 जम्मि ig विशेष: 977 ई. मे बहुचर्चित काव्य- 'कोय्या yer (KOYA-GURRAM), जकर अर्थ अछि- 'काठक घोड़ा', भाव- 'नकली सरकार' | 9 नवम्बर 977, शनि दिन बंगालक खाड़ीमे पचास-साठि फुट Sa लहड़ि उमड़ि क५ कृष्णा जिलाक दिविसीमा क्षेत्रकँं डुबा HS AE HS देलक। हजारो लोक मारल गेलाह। ई घटना काव्यक वस्तु बनल। विषय आ परिस्थितिसँ उपजल ई काव्य हिन्दी कवि मुक्तिबोधक 'अंधेरे में' क बराबरीक अछि। मैथिली अनुवादक नाम: मानेश्वर मनुज जन्म: गाम- गम्हरिया (बेनीपट्टी) मधुबनी। जनवरी 958 (प्रमाण पत्रक अनुसार)। gfe: भारतीय नौसेनामे तकनीकी सहायक, तकर बाद भारतीय रेलक वाणिज्य विभाग संँ (रिटायर्ड)। कृति: "सम्बन्ध, कथा संग्रह (मैथिली) 2007 ‘fe’, कविता संग्रह (मैथिली) 204 "परिवर्तन, कहानी संग्रह (हिन्दी) 209 ‘ae’, कविता संग्रह (हिन्दी) 2022 'तालाब!, कहानी संग्रह (हिन्दी) 2024
बिदेह ४४४ | | 226 अनुभव: विभिन्न भाषा सँ हिन्दी आ मैथिलीमे अनुवाद। हिन्दी आ मैथिलीक विभिन्न पत्र-पत्रिकामे लेख, कविता, कथा, कहानी इत्यादि प्रकाशित। अनुवादकक टिप्पणी: अनेक तेलुगुमित्र, स्वयं नग्नमुनि जी, हिन्दी तथा अंग्रेजी मे अनुदित पुस्तकक मदति सँ दीर्घ काल तक मंथन कयलाक बाद अनुवाद कयल गेल अछि। ई नग्नमुनिक प्रसिद्ध कविता अछि। नग्नमुनि सँ लगातार हमर पत्राचार होइत छल। ओ अंग्रेजी आ तेलुगुक विद्वान छलथि। हुनक fag पत्र देसिल-बयना, हैदराबाद मे छपल अछि। -मानेश्वर मनुज सम्पादकीय टिप्पणी (खण्ड-६) ई पौराणिक कथा-प्रसंग मात्र नै छी, वर्तमान 'अधरतियाक समय' केर एगो दारुण नैदानिक रिपोर्ट छी। कवि सिद्धार्थक वैराग्य-यात्राकँ कोनो आध्यात्मिक उपलब्धि नै मानैत आधुनिक मानव-चेतनाक दिवालियापनक Gard प्रस्तावना मानैत छथि। दू प्रतीक-चिह्वक अंतर्विरोध- घोड़ा (era) SAT बोधिवृक्ष। घोड़ा, जे नागार्जुन पर्वत पर आइयो ठाढ़ अछि, संन्यासक बाह्य क्रियाक प्रतीक अछि-राज्य- त्याग, ममता-बंधन तोड़ब, बहरा जायब। बोधिवृक्ष ओड संन्यासक आंतरिक फलक प्रतीक अछि-बोधि, ज्ञान, करुणा, आ मानव-दुःख पर विजय। 'अधरतियाक समय' मे हम सभ घोड़ाकेँ (त्यागक स्मारक) सुरक्षित रखबामे लागल छी, मुदा ओ बोधिवृक्ष (मानसिक चेतना) जे उखड़ि चुकल अछि तकर की? हम त्यागक नाटक करैत छी, मुदा त्यागक सार्थकता (आंतरिक जागृति) केर पोषण करबामे पूर्णतः असफल भेल छी। अश्रुसिक्त नयन सँ यजमानक घर वापस आबैवला स्वामीभक्त सेवकक प्रसंग कविताक सभरसँ मार्मिक मोड़ छी। ई हमरा सबक संसारिक आसक्ति-पाशक दिस संकेत करैत अछि- जतेको संन्यासक बात करू, मूलतत्त्वमे हम सभ पुनः अपन 'यजमान' (लौकिक मोह-माया, स्वार्थ, आ ममता) केर शरणमे घुरैत छी। मुदा ATS दुखद बात ई जे-जखन हम वापस आबैत GH, तखन देखैत छी जे हमर आंतरिक आश्रम (बोधिवृक्ष)क नाश HS चुकल अछि। ई केवल बौद्ध-आदर्शक विलाप नै अछि; ई समकालीन 'देखावटी आध्यात्मिकता” पर तीक्ष्ण व्यंग्य अछि। हम सभ पूर्वजक बाह्य रीति-वन-गमन, गृह-त्याग, वस्त्र-त्याग केर अनुकरण करबामे अपन करियर बना लेने छी, मुदा अंतर्यात्राक कठोर तपस्या & तिलांजलि देने छी। जखन बोधिवृक्ष मूलसँ उखाड़ल जाइत अछि, तखन घोड़ाक पाषाण- मूर्तिक संरक्षण केर कोनो सार्थकता रहैत अछि? स्मारक बाकी अछि, मुदा अर्थ ATCT एहि अर्थ- शून्यताक युगमे, ई कविता मानव-मन लेल एगो चेतावनीक घंटी समान अछि- पहिने अपन भीतरक बोधि-वृक्ष & सिंचित करू; नै as नागार्जुनक घोड़ा मात्र एकर गवाह बनि रहत।- गजेन्द्र ठाकुर
बिदेह eee) | 27 नग्नमुनिक तेलुगु काव्य "alos घोड़ा' (कोया गुर्रम) खण्ड-६ अधरतियाक समय अंतःपुर आ माय-बाबू केँ त्यागि HS घरवाली आ बेटाक ममताक बंधन तोड़ि ws राजपाट वा सौख वैभव छोड़ि क5 निकलि पड़लथि सिद्धार्थ जखन वैरागी बनि 'तखन राज्यक सीमा तक पहुँचौलनि Tanned छोड़ब अपना यजमान कैँ फेर अश्रुसिक्त नयन सँ आपस आयल राज्य मे aig अश्रुसिक्त घोड़ाक प्रतिरूप 'एखनो ठाढ़ अछि नागार्जुन पर्वत पर! परंतु मनुजक मानसक बोधिवृक्ष उखड़ि चुकल अछि उजड़ि चुकल अछि। -सानेश्वर ATH आदर्श नगर कॉलोनी गोशाला रोड मधुबनी पिन - 8472 सो. - 99206 24867 / द्4640:2706 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ।
बिदेह ४४४ | | 228 ३.२. अशोक कुमार ठाकुर-पीड़ा आ मेहनति/ दू कौड़ीक शिक्षक अशोक कुमार ठाकुर पीड़ा आ मेहनति/ दू कौड़ीक शिक्षक g पीड़ा आ Agata सूरुज कतबो तपैत रहय, किसानक पसीना नहि सुखा सकय। धरती सँ ओकर नेह एहन गाढ़, जकरा केओ मौसम नहि झुका सकय। हवा कतबो तेज बहैत रहय, अभागिनक नोर नहि सुखा सकय। हृदयक घाव जे गहिर होइत अछि, 'तकरा कालो HAT भुला सकय। एक दाना उपजाबय मे बहैत अछि, एक दुःख नुकाबय मे बहैत अछि।
fats ४४४ | | 9 पसीना हो वा नोर, दुनूक मोल, दुनियाक कोनो तराजू नहि बता सकय। सूरुज हारि जाइत अछि मेहनतिक आगाँ, हवा हारि जाइत अछि पीड़ाक आगाँ। किसानक पसीना आ अभागिनक नोर, Were मोल केओ नहि चुका सकय। 2 दू कौड़ीक शिक्षक alice aft जे गुरु कहल जाइत छलाह, आइ दू कौड़ीक मानल जाइ छथि। जकरा हाथे ज्ञानक दीप जरल, ओहिकेँ लोक आब तुच्छ बुझाइ छथि। जे अक्षरक पहचान करौलन्हि, जे जीवनक राह tata, ओही शिक्षक पर आब व्यंग्य होइत अच्छि, ओकर सम्मानो छीनि लेल जाइत अच्छि। धन-दौलत सँ मान मापल जाइत अच्छि, ज्ञानक मूल्य बिसरायल जाइत अच्छि। लाख टका कमेनिहार महान कहल जाइत अच्छि, Fel गुरुकें दू कौड़ीक बतायल जाइत अच्छि।
बिदेह ४४४ | | 20 मोन राखू, of गुरु नहि रहितथि, a डॉक्टर, अफसर, नेता के बनितथि? सभ पद-पदवी गुरुहिक देल उपहार अच्छि, गुरुक अपमान समाजक हार अच्छि। दू कौड़ी कहि जकरा ठुकरेब, ओही ज्ञानक जोति सँ जग चमकेब। शिक्षकक मान जतेक घटत जाएत, समाज ओतेक अन्हारमे डूबत जाएत। -अशोक कुमार ठाकुर ग्राम - करमौली, जिला:-मधुबनी(बिहार), मोबाइल नंबर:-9576207983, जनसेवा:-एस.डी.आर.एफ. अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ।
बिदेह 8४ | | 22 ३.३. जगदानन्द झा "मनु"- २ टा गजल — Ugg © se जगदानन्द झा "मनु" श्टा गजल g DHA erat जहर चिखने जाइ छी सभ बुझैए हम निसा कयने जाइ छी मानतै के देख मुँहपर मुस्की हमर की करेजाकेँ Hel खुनने जाइ छी जे मयूरक पाँखि tet उपहारमे प्राण बुझि संगे सगर धयने जाइ छी रोशनाई नै कलममे बड़ अछि कहक चीर छाती सोणितसँ लिखने जाइ St जीवनक ठोकर कते लागल चारुदिश “मनु” सुमरि ay चोट ई सहने जाइ छी (बहरे जदीद, ATTA : 222-222-222) 2 ताड़ीमे कतए मद जे चाही जीबै लेल माहुरमे कुन जीवन चाही जे गीजै लेल
fate ४8४ | | 22 बाँकी नहि ताड़ीएटा टूटल मोनक हेतु जीवनमे एकर बादो बड़ अछि पीबै लेल सिस्टममे फाटल अछि tad धरती aft ate Uda Haas दरजी ई सिस्टम सीबै लेल जीतब हारब सदिखन लगले अछि जीवन संग treet af कोशिश नमहर हेतै जीतै लेल मोनसँ करबै “मनु” अप्पन जीवनकेँ तैआर कर्मक बीया सगरो बहुते अछि छीटै लेल (बहरे विदेह, मात्राक्रम : 2222-2222-222-2 aH पाँतिमे) मोबाइल Ao +9 922-46-006 -जगदानन्द झा “मनु”, Flo Fo +९१ ९२१२-४६-१००६ अपन Hae editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ।
fats ४४४ | | 23 ३.४. प्रणव कुमार झा- रैंक १५७: गोदी मीडिया हि कर री; " ‘4 प्रणव कुमार झा रैंक १५७: गोदी मीडिया झूठक कालिख सँ लिखै जे खबर, ओकरा पत्रकार नै कहब, ज़हर सँ सींचै जे समाज के, ओकरा समाचार नै कहब। आँखि खोलि Hs देखू AS परदा HS पाछाँ Hs खेल, कतय गेल सत्यक तेज, कतय गेल पत्रकारिता HS तेल? स्टूडियो छल सूचनाक स्रोत, ओ माछक बजार भेल अछि, झूठ, धोखा, Fea, शैतानी के सचार भेल अछि। मुद्दा जे छल प्रशासन, रोजी, रोटी, दवाई आ पढ़ाई, ओकरा कफन पहिरा, Hs tect अछि धर्मक लड़ाई। एंकरक5$ गला सँ आई मनुष नै, नाग बाजय अछि, सत्ताक चरणचुंबन, नफरतक साज बाजय अछि। वैज्ञानिक चेतना मारि भूत-प्रेतक डिबेट करै अछि, अंधविश्वासक अन्हरिया, देश कें भेंट करै अछि। तार्किक डिबेट नै, कुकुर झौं-झौं के दरबार सजाबै अछि, भ्रमित जनता HS हाथ में, घृणाक झंडा थमाबै अछि। ई मीडिया नै, Sas समाजक रोग भयंकर अछि ,
fate eee | | 24 सोच-विचारक शक्ति &, as रहल भस्म निरंतर अछि। बर्बाद ws समाज कें, ई अपन महल बनाबै अछि, लोक a लोक & लड़ा HS, ई दिवाली मनाबै अछि। जे देश Hed छल कहियो वसुधैव कुटुम्बकमक मंत्र, नफरतक प्रयोगशाला बना देलक एकर षडयंत्र। सूचना क$ नाम पर, विष-वमनक व्यापार करय अछि, अहिं कहु देशद्रोही सँ कम की ई व्यवहार करय अछि? सालो से ई भस्मासुर नाच, लोकक बुद्धि हरने अछि, सत्ताक चाटुकारिता में, देशक साख मारने अछि। विश्वमंच पर भारतक कलम, लज्जित Hs ठाढ़ अछि, मीडिया ws ई गोदीगिरि, आइ भ्रष्टाचार सँ गाढ़ अछि। जँ आबो नै चेतब as ई बौद्धिक महामारी अहाँक बच्चा ws भविष्य खा जाएत ई बीमारी | जे टीवी अहाँक घर में, ओ सूचना नै भ्रम छैक आस्तीनक साँप से कनियो की कम छैक | रिमोट उठाउ, ई नफरतक दुकान बंद करू, टहलु , खेलाऊ ताश, नीक किताब के धरू। -प्रणव कुमार झा; शाम-गोयपुदु जिला-बेशूसराय अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ।
fate ४४४ | | 25 ३.५. राम शंकर झा "मैथिल"- धीपल यू राम शंकर झा "मैथिल" eit eine Age aaa बाट सट सट दागैत गोरक तरबा धधरा सँ बेसी ठहर मारैत छह छह UAH बहैत बसात घाम सँ भिजल देह ललाट eine Age धधकठ्ठ बाट. ! हाँफैत बरअद TST हरवाह सगरों पापड़ सन खेत cers उखरैय सेर पसेरी सन चेपा रहि रहि हरवाह बाजे आउठाम मुँह मे लगठ जाबि सुखैथ कंठ eine Age धधकठ्ठ बाट..! रहि रहि पनपियाक जोहैत बाट कखनहूँ नजर गरैय खेत आरि कखनहूँ नजर गरैय अंशुमाली अचर्के ANS बरअद कैं फाड़ fe रहि मारै टीस Hew बेमाअ टप टप टपकैय घामक नोर बीघा मे बाँचल एखनहूँ कट्ठा
fate ४४४ | | 26 धीपठ Age acne बाट..! ददाईर मे YAS हरक फार पैंना सँ अलगाबैत ढ़ेपाक भार भांघट पअर भांघट लागैय छठपटाईत तलमठाईत बहकै BTS घुरमी SAAS बरद गदह दैत हे रे हे आउ OM eine Age धधकठ्ठ बाट..! व्याकुल मन टूटल हरव्ठदहा सिमान सँ चिकरैत भोकरैत Ae नेहु आबि रहल मरनी माअ माथा पनपियाय हाथ मे डाबा छिलकैत पैईन उधियात आँचर डेगे डेग पाउछ ore भिखना Gel पअर चौकी TAS समाठ eine Age ae बाट..! पैना देखबैत बाजल मुसाय बितल कलौउक बेर आब कि घोघ dare सँ फुदकल मरनी सगरों गाआम छिछिएलहूँ उत्तरबाड़ी बाअद भेमहा गाछी ade कतह नहिं बौउएलहूँ मुदा कियौ नहिं देलक चौउकी सबकें अपनहिं काज बेगरता धीपठ मैंईट धधकठ बाट..! खुल पनपियायक पोठरी मोटका रोटी सागक झोर
fate ४४४ | | 27 हरियर मिर्चाय wert अचार मुसाय कें नजर Fas बरअद पहिंढे पनपियाय स्वयं करि जाबि लागठ बरअद & कराबि चुबैत मुंह a ce पालो चढ़ठ BRITS पजंरसट्टा लागल बरअद नहिं सह भेल नहिं देख tw खेत AST जरल कपार मरल भूख धीपठ Age acne बाट..! एकहिं सुर पिलैथ भरि Sta पईनि पनपियाय उडैठधि बरअद आगु धीपठ Age धधकठ्ठ बाट..! -राम शंकर झा "मैथिल", उघरा, दरभंगा, मो-7970778787, Mail- पा का 977(8छ्ावां]. 00 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ।
fate ४४ | | 28 ३.६. आचार्य रामानंद मंडल- महाकवि कालिदास / कवि आदि विद्यापति नाई/ आदिकवि सरहपा आचार्य रामानंद मंडल महाकवि कालिदास/ कवि आदि विद्यापति नाई/ आदिकवि सरहपा a महाकवि कालिदास मिथिला मे महाकवि पंडित कालिदास भेलन महान। उच्चैठ दूर्गा स्थान मधुबनी भेलैन हुनक ठाम। संस्कृत पाठशाला के रहलन मूर्ख अनुचर छात्रावास | काटि रहलन रहे
fats ४४४ | | 29 बैठल गाछ के डाल। देखिलन धूर्त पंडित विधोतमा से हारल पंडित। छल से पानिग्रहन करैलन कालिदास के संग। सुहागरात मे भेल परिचय मूर्ख कालिदास संग। हमर संग मिलत जौं बनब विद्वत जन। घुरि अयला पाठशाला करे लगला फेर अनुचारा। आयल भादव सांझ चमकैत गरजैत बरसैत मेघ । आयल बाढि Ae डूबल चांचर खेत खरिहान। के बारैत दीप मैया के दूर्गा स्थान। सभ कैलन विचार
fats ४४४ | | 30 बारैत मूरख कालिदास दीप। छोड़त चिह् दीप पोतलैन दूर्गा मुख कारीख। खुश दूर्गा देलन वरदान जेते पुस्तक छूवे आइ रात। ay जयतो कंठाग्र छूएत सरस्वती बसगेल कंठाग्र। कालिदास कवि महान रचलन अभिज्ञान शाकुन्तलम मालविकाम्निमित्र। आ रचलन मेघदूतम रचलन ऋतुसंहार कुमारसंभव रघुवंशम् | पैलन विद्योतमा पियार प्रसिद्ध भे गेलन संसार। मिथिला मे कवि महान रामा महाकवि कालिदास महान। 2. कवि आदि विद्यापति नाई
fate ४४४ | | 232 कवि आदि विद्यापति नाई। रहलन मधुबनी विस्पी ठाई।१। दसम शताब्दी काल आईं। मिथिला ars विद्यापति पाईं।२। पिता महेशठाकुर घर आईं। कुल भूषण नाई कहलाई।३। नित नव कविता ere | fra विदापत नाच कराईं।४। समाज में नवजागरन कराईं। जोतिश्चर वर्नरत्नाकर चर्चा करईं।५। मिथिला मे विद्यापतिगीत गाईँ। भेद न जान विद्यापति पाईं।६। मैथिल चर्चा न ae बाभन विद्यापति के समझडं। ७ मिथिला मैथिली जागरन Fee घर घर विद्यापति गाईं।८। मिथिला धन धन होंहईं। रामा आदिविद्यापति चर्चा Hee ।९।
बिदेह ४४ | | 32 3. आदिकवि सरहपा मैथिली के आदिकवि सरहपा। हो गेल मैथिली से गायब। अंगिका रखले हय जिंदा। अंगिका के आदिकवि सरहपा। मिटल न आदिकवि सरहपा। सनातन -बौद्ध के संघर्ष में। सरहपा हो गेल गायब। मैथिली के अतीत। मिथिला से हो गेल गायब। मिथिला भे गेल अभागल | बौद्ध हो गेलय। लाइट आफ एशिया। सनातन रह गेल। संकुचित होके भारत। रामा मैथिली हो गेल घायल। -आचार्य रामानंद मंडल, सामाजिक चिंतक सह साहित्यकार सीतामढ़ी। अपन Hae editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ।
VIDEHA - ISSN 2229-547X face: प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका। सन् २००० सँ मैथिली भाषा, साहित्य आ संस्कृतिक संरक्षण आ संवर्धनमे समर्पित। एहिमे निबन्ध, शोध-पत्र, समीक्षा, कथा आ कविता प्रकाशित esa अछि, संगहि अन्य भाषासंँ मैथिलीमे आ मैथिलीसँ अन्य भाषामे अनूदित रचना सेहो। [m] [a | | a [| a || s 8 il | | (२०० । सर्वाधिकार सुराक्षित। दर = a@zohomd | | ee