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प्राचीन यूनानी दर्शन पाश्चात्य दर्शनक इतिहासमे केन्द्रीय स्थान रखैत अछि, मुदा ओकरा “मानव विचारक
एकमात्र आरम्भ’ मानब ऐतिहासिक रूपसँ अनुचित अछि। भारत, चीन, मिस्र, मेसोपोटामिया आ अन्य
सभ्यतामे सेहो प्रकृति, व्यवस्था, नैतिकता, मृत्यु, राज्य आ ज्ञान सम्बन्धी गम्भीर विचार-परम्परा विकसित
भेल। यूनानी दर्शनक विशिष्टता ओकर प्रश्न, ग्रन्थ-परम्परा आ तर्क-विकासमे खोजबाक चाही, विश्वक अन्य
UAT ch गौण कऽ नहि।
25.1 मिथकसँ तर्कः सरल कथा सँ बचू
बहुत पाठ्यपुस्तक यूनानी दर्शनक आरम्भकें “मिथक सँ तर्क'क सीधा संक्रमण कहैत अछि। एहि कथनमे
आंशिक सत्य अछि--प्रकृतिक घटनाक कारणक अधिक व्यवस्थित, गैर-वंशावलीय व्याख्या विकसित भेल।
मुदा मिथकीय आ तर्कपूर्ण सोच पूर्णतः अलग कालखंड नहि। यूनानी दर्शनमे देवता, आत्मा, ब्रह्माण्डीय
व्यवस्था आ तर्क अनेक रूपमे साथ-साथ रहैत अछि।
तँ दर्शनक Watch “अन्धविश्वास समाप्त, तर्क आरम्भ” जकाँ विजय-कथा बनायब उचित नहि। बेहतर प्रश्न
अछि--कखन, कोना आ कोन प्रसंगमे तर्कक सार्वजनिक मानदण्ड विकसित भेल?
25.2 आयोनियाई प्रकृति-प्रशन
मिलेटससँ सम्बद्ध प्रारम्भिक विचारकसभ प्रकृतिक मूल तत्त्व अथवा सिद्धान्तक प्रश्न उठबैत छथि। थेलीससँ
जल, अनाक्सिमेनेससँ वायु, अनाक्सिमान्दरक अपैरोन-जकाँ धारणासभ जुड़ल अछि। ऐतिहासिक स्रोत
सीमित आ परवर्ती लेखकसभ पर निर्भर छथि, तेँ एहि विचारसभक पुनर्निर्माण सावधानीसँ करबाक चाही।
दार्शनिक महत्त्व उत्तरक “वैज्ञानिक सहीपन'मे नहि। जल वा वायु आधुनिक विज्ञानक मूल पदार्थ नहि; महत्त्व
ई जे विविध घटनाक पाछाँ एक व्यवस्थित व्याख्यात्मक आधार खोजबाक प्रवृत्ति विकसित भेल।
25.3 परिवर्तन आ स्थायित्व
हेराक्लाइटस परिवर्तन, संघर्ष आ प्रक्रियाक Herd कारण प्रसिद्ध छथि; परमेनिदेस परिवर्तनक बोध आ
अस्तित्वक तार्किक स्थिरताक बीच तीक्ष्ण तनाव प्रस्तुत करैत छथि। एहि विरोधके "एक कहलक सभ बदलैत
अछि, दोसर कहलक किछु नहि बदलैत” धरि सीमित करब बहुत सरल होयत।
मूल दार्शनिक प्रश्न आजो जीवित अछि--वास्तविकता मूलतः वस्तु अछि की प्रक्रिया? पहचान परिवर्तनक
बीच कोना टिकैत अछि? "एकहि नदी'क अर्थ की जँ जल निरन्तर बदलैत अछि?
25.4 संख्या, रुप आ व्यवस्था
पाइथागोरससँ सम्बद्ध परम्परा संख्या, अनुपात, संगीत आ ब्रह्माण्डीय व्यवस्थाक सम्बन्धक प्रश्न उठबैत अछि।
ऐतिहासिक पाइथागोरस आ परवर्ती पाइथागोरियन परम्पराकै अलग करब कठिन अछि, तेँ निश्चित दाबी सँ
TIT आवश्यक।
दार्शनिक दृष्टिसँ महत्त्वपूर्ण प्रश्न अछि--गणितीय संरचना जगतक खोज अछि की मनुष्यक निर्मित भाषा?
प्रकृति किएक गणितीय वर्णन स्वीकार करैत अछि? ई प्रशन विज्ञान-दर्शन धरि चलैत अछि।
25.5 परमाणुवाद आ बहुलता
लेउकिप्पस आ डेमोक्रिटससँ Gag प्राचीन परमाणुवाद परिवर्तनशील दृश्य जगतकें अविभाज्य कण आ रिक्त
स्थानक आधारपर बुझबाक प्रयास Hed अछि। आधुनिक परमाणु-विज्ञानसँ एहि सिद्धान्तके सीधा जोड़ब
अनैतिहासिक होयत। समान शब्द “परमाणु” ऐतिहासिक समरूपता सिद्ध नहि करैत।
मुदा दार्शनिक प्रश्न समान रुपें महत्त्वपूर्ण अछि--जटिलता सरल घटकसँ कोना बनैत अछि? गुण मूल घटकमे
अछि की संयोजनसँ उत्पन्न? रिक्त स्थान वास्तविक अछि की नहि?
25.6 सोफिस्ट आ सार्वजनिक तर्क
यूनानी नगर-राज्यक सार्वजनिक जीवनमे वक्तृत्व, नागरिकता आ न्याय सम्बन्धी प्रश्नक महत्त्व बढ़ल।
सोफिस्टसभकें केवल छलपूर्ण वक्ता मानब प्लेटो-प्रभावित सरलीकरण हो सकैत अछि। ओ भाषा, मानक,
प्रकृति-परम्परा, कानून आ सापेक्षताक प्रश्न उठबैत छथि।
एहि पृष्ठभूमिमे सुकरातक प्रश्न-पद्धति अधिक स्पष्ट होइत अछि। दर्शन केवल ब्रह्माण्डक मूल तत्व नहि, नीक
जीवन की?” “न्याय की?? “ज्ञान आ सद्रुणक सम्बन्ध की?” TTT प्रश्न दिस बढ़त अछि।
25.7 यूनान आ विश्व-दर्शन
समानान्तर दर्शन यूनानी परम्पराकें न कम Het अछि, न एकाधिकार दैत अछि। प्लेटो, अरस्तू, स्तोइक,
एपिक्यूरियन, संशयवादी--ई सभ विश्व-दर्शनक महत्त्वपूर्ण वार्ताकार छथि। मुदा ‘दर्शन यूनानमे जन्मल, बाँकी
सभ धर्म वा मिथक’ जकाँ कथन ज्ञानक औपनिवेशिक श्रेणीकरणकें पुनरुत्पादित HS सकैत अछि।
विश्व-दर्शनक उचित पद्धति समान प्रमाण-कसौटी, ऐतिहासिक प्रसंग आ परम्परागत स्वतन्त्रताक सम्मान
माँगैत अछि। भारतक न्यायकें यूनानी तर्कक “प्रतिलिपि” नहि, यूनानी aches न्यायसँ “पूर्व? होयबाक कारण
रेष्ठ नहि--दुनू अपन इतिहासमे समझल जाए।
पूर्वपक्षः यूनानी दर्शनकें केन्द्रसँ हटेला पर पाश्चात्य दर्शनक इतिहास अस्पष्ट होयत
उत्तर ई नहि जे यूनानी केन्द्रत्व नकारल जाए। पाश्चात्य दार्शनिक परम्पराक विकासमे यूनान निश्चय केन्द्रीय
अछि। आपत्ति केवल तखन अछि जखन “पाश्चात्य इतिहासक केन्द्र” H “मानव दर्शनक एकमात्र केन्द्र? बना
देल जाए।
25.8 प्रकृतिक कारण खोजबाक परिवर्तन
आरम्भिक यूनानी चिन्तकसभक महत्त्व “पहिल वैज्ञानिक'क सरल उपाधिमे नहि, बल्कि प्रकृतिक घटनाक
व्याख्यामे नियमित कारण, मूल तत्त्व आ परिवर्तनक सिद्धान्त खोजबाक प्रयत्नमे अछि। जल, अपरिमित, वायु,
संख्या, परिवर्तन वा अपरिवर्तन--भिन्न प्रस्ताव एकहि प्रश्नक अनेक उत्तर छथि: विविध जगतक आधार की,
आ परिवर्तनक बीच निरन्तरता कोना सम्भव?
एहि प्रस्तावसभकें आधुनिक रसायन वा भौतिकीक अधूरा रूप मानब कालभ्रम होयत। ओकर प्रमाण,
अवधारणा आ उद्देश्य अलग Gell दार्शनिक मूल्य ई जे परम्परागत कथा बाहरी अधिकारसँ नहि, तर्कसंगत
प्रतिपादन आ प्रतिवादसँ जाँचल जाए। मुदा मिथकीय भाषा एकदम समाप्त भेल--एहन सीधा इतिहास सेहो
सही नहि; तर्क आ कथा दीर्घ समय धरि सहअस्तित्वमे रहल।
25.9 परिवर्तन आ स्थायित्वक विवाद
हेराक्लाइटस परिवर्तनक व्यापकता आ विरोधी तनावपर बल दैत छथि, जखनकि पार्मेनिदेस सत्य अस्तित्वकेँ
अजन्मा, अविनाशी आ अपरिवर्तनशील मानबाक तर्क प्रस्तुत करैत छथि। Sih “सभ बदलैत अछि? बनाम
"किछु नहि बदलैत’क नारा धारि सीमित करब अपर्याप्त अछि। मूल समस्या ई जे अनुभव परिवर्तन देखबैत
अछि, मुदा तर्क स्थिर पहिचान बिना कथन सम्भव कोना मानत?
परवर्ती यूनानी दर्शन एहि तनावक उत्तर पदार्थ, रूप, परमाणु, कारण आ सम्भाव्यता-जकाँ अवधारणासँ खोजैत
अछि। समानान्तर दर्शन एहि विवादकें भारतीय सत्कार्यवाद, क्षणिकवाद वा द्रव्य-गुण चर्चासँ तुलना करैत
समय समानता संग भिन्नता स्पष्ट रखैत अछि। साझा प्रश्न विश्वदर्शनक संवाद सम्भव करैत अछि; शब्द वा
निष्कर्षक ऐतिहासिक अभिन्नता सिद्ध नहि करैत।
25.10 सोफिस्ट आ सार्वजनिक तर्क
सोफिस्टसभकें केवल छलपूर्ण वकता कहि देब प्लेटोपर निर्भर एकपक्षीय चित्र होयत। ओ भाषा, शिक्षा,
नागरिक सफलता, कानूनक परम्परागत स्वरुप आ दुष्टिकोणक शक्ति सम्बन्धी प्रश्न उठबैत छलाह। नगर-
राज्यक सार्वजनिक जीवनमे बोलबाक कला वास्तविक राजनीतिक साधन छल; d वक्तृत्वक अध्ययन
लोकतान्त्रिक भागीदारी आ सत्ता दुनूसँ जुड़ल छल।
समस्या तखन उठैत अछि जखन प्रभाव सत्यक स्थान AS लैत अछि। कुशल भाषण कमजोर कारणकें
शक्तिशाली देखाबि सकैत अछि। मुदा प्रभावहीन सत्य सार्वजनिक जीवनमे अप्रभावी सेहो रहि सकैत अछि।
समानान्तर पद्धति वक्तृत्वे न पूर्ण दोष मानैत, न सत्यक माप; ओ कारणक गुणवत्ता, प्रमाण, श्रोताक
स्वतंत्रता आ भाषिक रणनीति अलग जाँचेत अछि।
25.11 नोमोस आ फ्यूसिस
यूनानी बहसमे प्रकृति आ मानवीय प्रथा अथवा कानूनक भेद महत्त्वपूर्ण बनल। जे व्यवस्था एक नगरमे न्याय
मानल जाइत अछि, दोसर नगरमे भिन्न भऽ सकैत अछि; एहि विविधतासँ प्रश्न उठैत अछि जे न्याय केवल
प्रचलन अछि की ओकर कोनो व्यापक आधार अछि। प्रथाक विविधता सापेक्षतावादक सम्भावना खोलैत अछि,
मुदा अन्यायक आलोचना लेल प्रथासँ परे कसौटीक आवश्यकता सेहो देखबैत अछि।
भारतीय धर्म, आचार आ लोकप्रथाक तुलनात्मक अध्ययनमे सेहो एहन प्रश्न उठैत अछि, मुदा “धर्म = नोमोस”
कहब गलत समतुल्यता होयत। दूनूक भाषिक इतिहास आ दार्शनिक क्षेत्र भिन्न अछि। तुलना प्रश्नक स्तरपर
उपयोगी अछिः प्रथा कतेक परिवर्तनशील, प्रकृतिक नामपर कोन सत्ता वैध ठहराओल जाइत, आ सार्वभौम
नैतिक दाबी कोना प्रमाणित होयत?
25.12 त्रासदी, भाग्य आ उत्तरदायित्व
यूनानी त्रासदी दार्शनिक ग्रन्थ नहि, तथापि ओ कर्म, अज्ञान, भाग्य, परिवार, राज्य आ उत्तरदायित्वक जटिल
अनुभव प्रस्तुत करैत अछि। पात्र कखनो पूर्ण जानकारी बिना निर्णय लैत अछि; सदिच्छा सेहो विनाशकारी
परिणाम दऽ सकैत अछि; दू नैतिक कर्तव्य परस्पर टकरा सकैत अछि। एतय अशुभ केवल खराब व्यक्तिक
इच्छा नहि, संरचना आ सीमित ज्ञानसँ सेहो उत्पन्न होइत अछि।
साहित्यिक साक्ष्य सिद्धान्तक प्रमाणक समान नहि, मुदा नैतिक कल्पनाकें विस्तृत करैत अछि। अमूर्त नियम
जे दरन्द्र छिपा दैत अछि, कथा ओकर मानवीय मूल्य देखबैत अछि। समानान्तर दर्शन त्रासदीक उपयोग उदाहरण
आ अनुभव-वर्णन रूपमे करेत अछि, ऐतिहासिक तथ्य वा सार्वभौम नियम रूपमे नहि।
अध्याय-निष्कर्ष
प्राचीन यूनानी दर्शनक शक्ति ओकर प्रश्नक बहुलतामे अछि-प्रकृतिक मूल, परिवर्तन, स्थायित्व, संख्या,
पदार्थ, भाषा, कानून, ज्ञान आ नीक जीवन। समानान्तर दर्शन एहि परम्पराके गम्भीरतासँ ग्रहण करेत अछि,
मुदा बहु-आरम्भक विश्व-दृष्टि राखैत अछि। दर्शनक इतिहास एकटा एकल मशालक यात्रा नहि; अनेक अग्निक
परस्पर प्रकाश अछि।
अध्याय-ग्रन्थसूचौ
Heraclitus — Fragmenta, उपलब्ध खण्ड।
Parmenides — On Nature, उपलब्ध खण्ड।
Plato — प्रारम्भिक संवाद; Republic.
Aristotle — Metaphysics; Physics.
Diogenes Laertius — Lives of Eminent Philosophers.
G. S. Kirk, J. E. Raven and M. Schofield — The Presocratic Philosophers.