मार्क्स आधुनिक दर्शनक केन्द्रमे श्रम, उत्पादन, सम्पत्ति, वर्ग आ भौतिक सामाजिक सम्बन्धक आनेत छथि। हुनक प्रश्‍न अछि--मनुष्य जे विचार करैत अछि, जे संस्था बनबैत अछि, जे नैतिक भाषा उपयोग करैत अछि, ओकर पाछाँ आर्थिक आ सामाजिक संरचना की भूमिका निभबैत अछि? दर्शन जँ केवल चेतनाक भीतर रहि जाए आ कारखाना, मजदूरी, भूमिसम्बन्ध, सम्पत्ति आ श्रम-विभाजनकें नहि देखय, तँ समाजक वास्तविक शक्ति-संरचना छूटि सकैत अछि। 32.1 ऐतिहासिक भौतिक दृष्टि मार्क्स इतिहासकें केवल महान विचार वा महान व्यक्तिक कथा नहि मानैत छथि। उत्पादनक साधन, WAH संगठन, सम्पत्ति सम्बन्ध आ वर्ग-संरचना समाजक रूपरेखा Wea अछि। एकर अर्थ ई नहि जे विचार निरर्थक अछि; बल्कि विचारक सामाजिक आधार पूछबाक आवश्यकता अछि। समानान्तर दर्शन एहि प्रश्नकें विस्तार दैत अछि--कोनो विचार ककर अनुभवसँ बनल, ककर हितकें सामान्य हितक रूपमे प्रस्तुत करैत अछि, आ ककर अनुभव ओकर बाहर रहि जाइत अछि? 32.2 विमुखता प्रारम्भिक मार्क्सक विमुखता-विमर्शमे श्रमिक अपन भ्रमक उत्पाद, श्रम-प्रक्रिया, अन्य मनुष्य आ अपन मानवीय सम्भावनासँ दूर भऽ सकैत अछि। ot श्रम केवल जीवित रहबाक मजबूरी बनि जाए आ श्रमिक अपन काजपर अर्थपूर्ण नियन्त्रण नहि रखय, तँ आर्थिक शोषण मात्र नहि, मानवीय आत्मसम्बन्ध सेहो विकृत होइत अछि। समानान्तर दर्शन एहि अन्तर्दृष्टिक आधुनिक विस्तार अस्थायी रोजगार, मंच-आधारित भ्रम, प्रवासी श्रम आ अवैतनिक देखभाल श्रम धरि करैत अछि। 32.3 वस्तु, मूल्य आ वस्तुपूजा Capital मे वस्तु केवल उपयोगी चीज नहि; बाजारमे ओकर विनिमय-मूल्य आ सामाजिक सम्बन्ध अछि। वस्तुपूजाक विश्लेषण देखबैत अछि जे मनुष्यसभक सामाजिक सम्बन्ध वस्तुसभक सम्बन्ध-जकाँ देखाइत लगैत अछि। मूल्य मानो वस्तुमे स्वभावतः बसल हो, जबकि ओकर पाछाँ श्रम, संस्था आ विनिमय-संरचना अछि। ई विश्लेषण आधुनिक उपभोक्तावाद, ब्राण्ड, डिजिटल मंच आ डेटा-आधारित अर्थव्यवस्थापर प्रश्‍न उठेबाक साधन दैत अछि। 32.4 वर्ग आ सत्ता मार्क्सक वर्ग-विश्लेषण आर्थिक शक्ति आ राजनीतिक सत्ता बीच सम्बन्ध बुझबाक लेल अत्यन्त महत्त्वपूर्ण अछि। जे समूह उत्पादन-साधनपर नियन्त्रण रखैत अछि, ओ केवल आर्थिक लाभ नहि, सामाजिक प्रभाव सेहो अर्जित करि सकैत अछि। मुदा समानान्तर दर्शन एतय एक आवश्यक विस्तार करेत अछि: मनुष्य केवल वर्ग नहि। जाति, लिंग, भाषा, धर्म, क्षेत्र, परिवार, शिक्षा, सांस्कृतिक पूँजी आ राज्यीय पहचान सेहो अवसर आ प्रभुत्व प्रभावित करेत अछि। वर्ग विश्लेषण आवश्यक अछि; पर्याप्त नहि। 32.5 विचारधारा विचारधाराक प्रश्‍न ई नहि जे “सभ विचार झूठ अछि'। प्रश्‍न ई जे कोन सामाजिक व्यवस्था अपन विशेष Tech सार्वभौम सत्यक रूपमे प्रस्तुत करैत अछि। जँ असमानता “प्राकृतिक”, गरीबी “व्यक्तिगत असफलता”, जन्माधारित विशेषाधिकार “परम्परा” आ श्रमक कम मूल्य 'बाजारक नियम” कहि कऽ स्वत:सिद्ध बनाओल जाए, तेँ दार्शनिक आलोचना आवश्यक अछि। मुदा प्रत्येक नैतिक आदर्शकें केवल वर्गहित कहि देब सेहो संकुचन होयत। 32.6 क्रान्ति आ सुधार मार्क्सवादी परम्परासभमे सामाजिक परिवर्तनक मार्गपर गम्भीर मतभेद रहल अछि। समानान्तर दर्शन कोनो एक ऐतिहासिक माॉडलकें अनिवार्य नहि मानैत अछि। ओकर कसौटी अछि--परिवर्तन मानव गरिमा, स्वतंत्रता, समानता आ लोकतान्त्रिक सहभागिता बढ़बैत अछि की नहि। शोषण हटेबाक नामपर नूतन निरंकुशता स्थापित भऽ जाए तँ लक्ष्य साधनकेँ पवित्र नहि करैत अछि। 32.7 मिथिला आ भारतीय सन्दर्भ भारतीय समाजमे भूमि, श्रम, जाति आ सामाजिक प्रतिष्ठा परस्पर जुड़ल रहल अछि। केवल वर्गक भाषा जातिक दीर्घ संस्थागत शक्ति बुझबाक लेल पर्याप्त नहि; केवल जातिक भाषा आर्थिक असमानता बुझबाक लेल पर्याप्त नहि। समानान्तर दर्शन बहु-अक्षीय विश्लेषण प्रस्तावित करेत अछि: जन्माधारित पदानुक्रम, सम्पत्ति, शिक्षा, भाषा, लिंग आ क्षेत्रीय अवसर एक-दोसराके मजबूत अथवा कमजोर करि सकैत अछि। 32.8 पूर्वपक्षः आर्थिक आधार सभक व्याख्या करैत अछि जँ उत्पादन-संरचना समाजक मूल आधार अछि, तँ धर्म, कानून, कला, नैतिकता आ राजनीति ओकर परिणाम मात्र मानल जा सकैत अछि। उत्तरपक्षः कारणता बहुस्तरीय अछि आर्थिक संरचना प्रभावशाली अछि, मुदा सामाजिक इतिहासमे परस्पर कारणता होइत अछि। धार्मिक संस्था सम्पत्ति-संरचना बदलि सकैत अछि; जाति श्रम-बाजार सीमित करि सकैत अछि; कानून सम्पत्ति-वितरण बदलि सकैत अछि; भाषा शिक्षा-अवसर प्रभावित करि सकैत अछि। समानान्तर दर्शन आर्थिक विश्लेषणकें विस्तृत करैत अछि, निरस्त नहि। 32.9 विमुख श्रम विमुखताक विश्लेषणमे श्रमिक अपन उत्पाद, श्रम-क्रिया, मानवीय सृजनशीलता आ दोसर मनुष्यसँ अलगाव अनुभव करैत अछि। श्रम जीवनक आत्मप्रकाश होयबाक बदला जीविका लेल बाहरी बाध्यता बनि सकैत अछि; बनाओल वस्तु पर श्रमिकक नियन्त्रण नहि रहैत। ई केवल उदासी नहि, उत्पादन-सम्बन्धक संरचनात्मक परिणाम अछि। सभ वेतनभोगी श्रम समान रूपसँ विमुख--एहन निष्कर्ष जल्दबाजी होयत। नियन्त्रण, अर्थ, सुरक्षा, सहयोग, कौशल आ उत्पादपर अधिकारक मात्रा अलग होइत अछि। विश्लेषण वास्तविक कार्यस्थल, अनुबंध आ निर्णय-सत्ता जाँचत। मनोवैज्ञानिक अनुभूति आ आर्थिक संरचना एक-दोसरक प्रमाण हो सकैत अछि, पर्याय नहि। 32.10 वस्तु, मूल्य आ सामाजिक सम्बन्ध बाजारमे वस्तु मूल्यसहित स्वतंत्र चीज जकाँ देखाइत अछि, मुदा ओकर पाछाँ श्रम, संसाधन, स्वामित्व आ विनिमयक सामाजिक सम्बन्ध रहैत अछि। वस्तुपूजाक विश्लेषण एहि उलटावपर ध्यान दैत अछि-मनुष्यक सम्बन्ध वस्तुक सम्बन्ध जकाँ आ वस्तुक शक्ति प्राकृतिक जकाँ देखाइत अछि। मूल्यक विशिष्ट आर्थिक सिद्धान्तपर विवाद सम्भव अछि, तथापि दृश्य वस्तुक पाछाँ अदृश्य सम्बन्ध खोजबाक पद्धति उपयोगी अछि। सस्ता सामान ककर भ्रम, पर्यावरणीय लागत वा जोखिमपर निर्भर अछि? नैतिक आलोचना लेल आपूर्ति-श्रृंखला, मजदूरी आ स्वामित्वक प्रमाण चाही; केवल उपभोगक अपराधबोध पर्याप्त नहि। 32.11 विचारधारा आ सामान्य बुद्धि विचारधारा केवल झूठक सूची नहि। सामाजिक व्यवस्था अपन ऐतिहासिक स्वरूपे प्राकृतिक, अपरिहार्य वा सभक हितमे देखाबि सकैत अछि। जे धारणा प्रतिदिनक भाषा आ संस्थामे बसि जाइत, ओ स्पष्ट प्रचार बिना सेहो असमानता वैध ठहरा सकैत अछि। मुदा प्रत्येक असहमति “विचारधारा” कहि खारिज करब आत्मरक्षा अछि। आलोचक अपन स्थान, हित आ प्रमाण सेहो जाँचत। कोन दाबी तथ्यगत SUS गलत, कोन चयनात्मक, कोन मूल्याधारित, आ कोन संस्थागत लाभसँ पोषित--ई भेद बिना विचारधारा-विमर्श आरोप बनि जाइत अछि। 32.12 इतिहास बनबैत मनुष्य मनुष्य इतिहास बनबैत अछि, मुदा अपन चुन्नल शून्य परिस्थितिमे नहि। प्राप्त संस्था, संसाधन, वर्गसम्बन्ध, तकनीक आ राजनीतिक शक्ति विकल्पक सीमा बनबैत अछि। एहि कारण कठोर नियतिवाद आ पूर्ण इच्छास्वातंत्र्य दुनू अपर्याप्त छथि। राजनीतिक कार्य लेल ई द्वैत महत्त्वपूर्ण अछि। जँ सभ किछु संरचना तय करैत अछि तेँ उत्तरदायित्व आ परिवर्तन निरर्थक; of केवल इच्छा पर्याप्त तँ विफलता पीड़ितक दोष बनि जाइत। समानान्तर दर्शन संरचनात्मक बाधा, सामूहिक संगठन आ व्यक्तिक नेतिक निर्णय तीनूरके संयुक्त विश्लेषणमे रखैत अछि। 32.13 वर्गसँ परे, वर्गके नकारि नहि जाति, लिंग, भाषा वा धर्मक सत्ता वर्गमे पूर्णत: समा नहि जाइत; तथापि आर्थिक संसाधन एहि सभ सम्बन्धे प्रभावित करैत अछि। एकहि जाति वा लिंग भीतर सम्पत्तिक अन्तर अनुभव बदलैत अछि, जखनकि समान आयवला व्यक्तिसभ सामाजिक दर्जा आ हिंसाक जोखिममे भिन्न हो सकैत छथि। तँ विश्लेषण जोड़-घटाव नहि, अन्त:सम्बन्धक अध्ययन होयत। कोन संस्था आर्थिक आ सामाजिक पदानुक्रमके एक-दोसरसँ sled, कोन नीति एक असमानता घटाकऽ दोसर बढ़बैत, आ ककर आवाज संगठनमे प्रधान ई प्रश्‍न ठोस प्रमाण माँगैत अछि। वर्ग आवश्यक आयाम अछि, एकमात्र चाबी नहि।