उन्नीसम शताब्दीक यूरोपीय दर्शनमे कीर्केगार्द आ नीत्शे दुनू विशाल तन्त्रक विरुद्ध व्यक्तिक जीवन, चुनाव, मूल्य आ आत्मसम्बन्धक प्रश्‍न तीक्ष्ण करैत छथि, यद्यपि दुनूक दिशा बहुत भिन्न अछि। कीर्केगार्द व्यक्ति, चिन्ता, निर्णय, आस्था आ अस्तित्वगत जिम्मेवारीपर बल दैत छथि; नीत्शे मूल्यसभक उत्पत्ति, नैतिकताक वंशावली, शक्ति, आत्मनिर्माण आ सांस्कृतिक क्षयक प्रश्‍न उठबैत छथि। 33.1 व्यक्ति बनाम तन्त्र जँ दार्शनिक तन्त्र सम्पूर्ण इतिहासक व्याख्या करय, मुदा वास्तविक व्यक्ति कष्ट, भय, प्रेम, मृत्यु आ चुनावक क्षणमे अकेले पड़ि जाए, ते दर्शन अधूरा अछि। कीर्केगार्दक मूल आग्रह एतय अछि--“व्यक्ति? केवल विशाल अवधारणाक उदाहरण नहि। अस्तित्व जीवित निर्णयक क्षेत्र अछि। सत्यक किछु रूप एहन होइत अछि जकर अर्थ व्यक्ति कोना जीबैत अछि ताहिसँ set अछि। 33.2 चिन्ता आ चुनाव चिन्ता केवल मानसिक रोगक तकनीकी अर्थ नहि; कीर्केगार्दीय सन्दर्भमे ई सम्भावनाक चक्कर-जकाँ अछि। मनुष्य अनेक सम्भावनासामने स्वतंत्र अछि, आ स्वतंत्रता जिम्मेवारी लबैत अछि। चुनाव नहि करब सेहो चुनाव बनि सकैत अछि। समानान्तर दर्शन एहि अन्तर्दृष्टिकें स्वीकारत अछि, मुदा सामाजिक सीमा जोड़ैत अछि सभ व्यक्तिक सम्भावना समान नहि। गरीब, जाति-पीड़ित, विस्थापित अथवा हिंसा-पीड़ित व्यक्तिक चुनावक्षेत्र संरचनात्मक रुपसँ सीमित भऽ सकैत अछि। 33.3 आस्था आ छलाँग कीर्केगार्द आस्थाकेँ मात्र बौद्धिक निष्कर्ष नहि arta छथि। धार्मिक अस्तित्वमे जोखिम, समर्पण आ व्यक्तिगत निर्णय अछि। मुदा सार्वजनिक दर्शनक दु्टिसँ एतय सीमा आवश्यक अछि: व्यक्तिगत आस्था व्यक्ति लेल अस्तित्वगत अर्थ रखि सकैत अछि, परन्तु सार्वजनिक कानून अथवा दोसर व्यक्तिपर बाध्यकारी नियम बनाबय लेल अतिरिक्त साझा कारण चाही। 33.4 नीत्शे आ मूल्यक वंशावली नीत्शे पूछैत छथि--जे मूल्य आज “स्वाभाविक” बुझाइत अछि, ओ कतयसँ आएल? “नीक”, 'बेजाय”, “पाप”, “दोष”, “त्याग”, “विनम्रता? जकाँ शब्दक इतिहास की? वंशावली मूल्यक नैतिक दाबीक पाछाँ शक्ति, संघर्ष, स्मृति आ संस्थागत निर्माण खोजैत अछि। समानान्तर दर्शन लेल ई पद्धति अत्यन्त उपयोगी अछि, विशेषतः जाति, लिंग, भाषा आ सामाजिक सम्मानक इतिहास जाँचबाक लेल। 33.5 वंशावलीक सीमा ककरो मूल्यक इतिहास सत्ता-संघर्षसँ जुड़ल भेटलासँ ओ मूल्य स्वतः झूठ नहि भऽ जाइत अछि। मानवाधिकारक इतिहास राजनीतिक Gave भरल अछि; ताहिसँ मानवाधिकार असत्य नहि। वैज्ञानिक dere इतिहास सत्ता-संरचनासँ जुड़ल; ताहिसँ विज्ञानक प्रत्येक निष्कर्ष गलत नहि। वंशावली दाबीकें पुनः परीक्षण लेल खोलैत अछि; सत्य-असत्यक अन्तिम निर्णय नहि दैत अछि। 33.6 “ईश्वर मरि tera दार्शनिक अर्थ नीत्शेक प्रसिद्ध कथनकें केवल धार्मिक नारा मानब संकुचन होयत। प्रश्‍न ई अछि--जँ पारम्परिक परम मूल्य- स्रोत आधुनिक समाजमे विश्वसनीयता TASS, तँ मूल्यक आधार की रहत? शून्यवादक संकट एतय उत्पन्न होइत अछि। समानान्तर दर्शन एहि प्रश्‍नक उत्तर गरिमा, तर्क, सहअस्तित्व, करुणा आ सार्वजनिक औचित्यक बहुस्रोत आधारमे खोजैत अछि। 33.7 शक्ति आ आत्मनिर्माण नीत्शेक शक्ति-विमर्श अनेक व्याख्या उत्पन्न करेत अछि। समानान्तर दर्शन “शक्ति'केँ केवल प्रभुत्व नहि, आत्म-अतिक्रमण, सृजनशीलता आ मूल्य-निर्माणक क्षमता रूपमे पढ़बाक सम्भावना स्वीकारैत अछि। मुदा ककरो अधिक शक्ति ओकरा दोसराक गरिमा उल्लंघनक नैतिक अधिकार नहि दैत अछि। 33.8 समानान्तर संवाद कीर्केगार्द स्मरण करबैत छथि जे व्यक्ति संस्थासँ विलीन नहि; नीत्शे स्मरण करबैत छथि जे मूल्य इतिहासहीन नहि। समानान्तर दर्शन दुनूक शिक्षा जोड़ेत अछि--व्यक्ति आ संरचना दुनू देखू; मूल्यक इतिहास पूछू, मुदा इतिहाससँ नैतिक निर्णय स्वतः नहि निकालू। 33.9 कीर्केगार्दक अस्तित्वगत चयन व्यक्ति केवल सार्वभौम सिद्धान्तक उदाहरण नहि; ओकरा Vet निर्णय लेब पड़ैत अछि जेकर पूर्ण वस्तुगत गारंटी नहि। कीर्केगार्दक लेखन सौन्दर्यपरक, नैतिक आ धार्मिक जीवन-दृष्टरिक तनाव देखबैत अछि। चयन केवल विकल्प चुनब नहि, अपन जीवनक रूप आ उत्तरदायित्व ग्रहण करब अछि। एहि बलसँ निजी सत्य मनमानापन नहि बनैत। तथ्यगत दाबी सार्वजनिक प्रमाण माँगैत अछि; अस्तित्वगत प्रतिबद्धता जीवनमे कतेक ईमानदारीसँ धारण कएल गेल से अलग प्रश्‍न अछि। "हमरा लेल सत्य” कहि इतिहास वा विज्ञानक तथ्य बदलल नहि जा सकैत। 33.10 निराशा आ आत्मसम्बन्ध निराशा केवल क्षणिक दु:ख नहि, आत्मक अपन सम्भावना आ आधारसँ विकृत सम्बन्ध हो सकैत अछि। मनुष्य जे अछि ओकरा स्वीकार नहि करय, अथवा जे बनि सकैत अछि तकर जिम्मेदारीसँ भागय--दुनू रूपमे आत्म- विभाजन उत्पन्न होइत अछि। एहि धार्मिक-अस्तित्वगत विश्लेषणकें आधुनिक मानसिक रोगक निदान मानब अनुचित। चिकित्सकीय स्थिति अनुभवजन्य मूल्यांकन माँगैत अछि। तथापि अर्थहीनता, आत्मछल आ चयनक भय वर्णन करबामे दार्शनिक भाषा सहायक भऽ सकैत अछि, जँ ओ उपचारक स्थान नहि लय। 33.11 नीत्शे आ मूल्यक वंशावली मूल्य शाश्वत आ स्वयंस्पष्ट रूपमे उपस्थित नहि; ओ इतिहास, संघर्ष, शरीर, धर्म आ सामाजिक शक्ति भीतर बनैत अछि। वंशावली पूछैत अछि--कोन मूल्य कखन, ककर प्रतिक्रिया रूपमे, आ कोन प्रकारक जीवनके प्रोत्साहित करेत उत्पन्न भेल? ई इतिहास केवल उद्गम बतब नहि, वर्तमान Yeas दाबी कमजोर वा जटिल करब होयत। उद्गम बतलासँ सत्यता अपने-आप AT नहि होइत। कोनो मूल्य संघर्षसँ जन्मल होइतहुँ उचित भऽ सकैत ATS आनुवंशिक भ्रमसँ बचबाक लेल इतिहासक बाद स्वतंत्र नैतिक परीक्षा चाही। वंशावली प्रश्‍न खोलैत अछि; अन्तिम निर्णयक एकमात्र कसौटी नहि। 33.12 दृष्टिकोणवाद आ सत्य सभ ज्ञान कोनो दृष्टिसँ होइत अछि--एहि कथनक अर्थ सभ दृष्टि समान सत्य नहि। शरीर, भाषा, हित आ ऐतिहासिक स्थान ध्यानक क्षेत्र बदलैत अछि; अलग दृष्टि वस्तुक अलग पक्ष देखाबि सकैत अछि। मुदा वस्तु आ प्रतिवाद दृष्टिकोणपर सीमा लगबैत अछि। दृष्टिकोणक बहुलता अधिक कठोर परीक्षण माँगैत अछि: स्रोत स्वतंत्र अछि की नहि, दृष्टि कोन पक्ष अदृश्य करेत, आ विरोधी साक्ष्यसँ निष्कर्ष बदलैत अछि की नहि। सापेक्षतावाद प्रतिवाद समाप्त करैत; अनुशासित दृष्टरिकोणवाद प्रतिवाद बढ़बैत अछि। 33.13 शक्ति-इच्छाक सावधान पाठ शक्ति-इच्छाकें केवल राजनीतिक प्रभुत्व वा हिंसक बलक इच्छा मानब अत्यधिक संकुचित अछि। ई आत्म- अतिक्रमण, रूप-देनाइ, मूल्य-सृजन आ जीवनक सक्रिय व्याख्यासँ जुड़ल विविध प्रयोगमे अबैत अछि। नीत्शेक प्रकाशित कृति आ बादमे संकलित टिप्पणी बीच स्रोत-स्तर अलग राखब विशेष आवश्यक अछि। एहि अवधारणाक नामपर कमजोरक अधिकार नकारब वा उत्पीडन महिमामण्डित करब नैतिक रूपसँ अस्वीकार्य अछि। सृजनशील आत्म-अतिक्रमण दोसरक गरिमा नष्ट किए बिना सम्भव अछि की नहि समानान्तर दर्शन एहि कसौटीपर शक्ति-विमर्श जाँचैत अछि। अध्याय-निष्कर्ष अस्तित्वगत चुनाव आ मूल्यक वंशावली आधुनिक दर्शनक दू शक्तिशाली उपकरण अछि। समानान्तर दर्शन कीर्केगार्दसँ व्यक्तिगत जिम्मेवारी आ नीत्शेसँ मूल्य-समीक्षा ग्रहण करेत अछि, मुदा आस्था अथवा शक्ति ककरो सार्वजनिक नैतिक परीक्षणसँ ऊपर नहि राखैत अछि। वंशावली आलोचनाक आरम्भ अछि, निष्कर्ष नहि। अध्याय-ग्रन्थसूची Soren Kierkegaard — Fear and Trembling.