विज्ञान तथ्यसभक सूची मात्र नहि। विज्ञान प्रश्‍न, परिकल्पना, अवलोकन, मापन, प्रयोग, गणना, मॉडल, सिद्धान्त, आलोचना, पुनरुत्पादन आ संस्थागत जाँचक जटिल प्रक्रिया अछि। वैज्ञानिक ज्ञान बदलैत अछि, मुदा परिवर्तन मनमानापन सिद्ध नहि करेत अछि। वास्तवमे संशोधनक क्षमता विज्ञानक शक्ति अछि। 37.1 विज्ञानक विशेषता की? दार्शनिक प्रश्‍न अछि--विज्ञानकें गैर-विज्ञानसँ अलग करयवला कसौटी की? केवल प्रयोग? खगोलविज्ञानक बहुत निष्कर्ष प्रत्यक्ष नियंत्रित प्रयोग बिना बनेत अछि। केवल गणित? जीवविज्ञानक अनेक क्षेत्र गणितीय होइतहुँ अवलोकन-प्रधान अछि। कार्ल पॉप्पर खण्डनीयतापर बल देलनि-वैज्ञानिक दाबी एहन हो जे सम्भावित प्रमाण ओकरा गलत सिद्ध HS सकय। मुदा वास्तविक विज्ञानक इतिहास देखबैत अछि जे एकल असफल अवलोकनपर सिद्धान्त तुरन्त त्यागल नहि जाइत; उपकरण, सहायक परिकल्पना, आँकड़ा आ विधि सेहो जाँचल जाइत अछि। 37.2 कून आ वैज्ञानिक प्रतिमान थॉमस कून विज्ञानक इतिहासमे “सामान्य विज्ञान”, संकट आ प्रतिमान-परिवर्तनक चर्चा करैत छथि। एहि विचारकें “विज्ञान केवल फैशन अछि” कहि देब गलत। प्रतिमान सामाजिक आ अवधारणात्मक ढाँचा दैत अछि, मुदा नूतन सिद्धान्तक स्वीकृति केवल शक्ति-संघर्ष नहि; समस्या-समाधान, भविष्यवाणी, व्याख्यात्मक क्षमता, आँकड़ा आ अनुसंधानक फलदायिता महत्त्वपूर्ण रहैत अछि। 37.3 वैज्ञानिक यथार्थवाद आ उपकरणवाद जखन विज्ञान इलेक्ट्रॉन, जीन, क्वार्क, वक्रित अवकाश-काल वा आनअप्रत्यक्ष वस्तुक चर्चा करैत अछि, प्रश्‍न उठैत अछि--ई वस्तु वास्तवमे अछि, कि सिद्धान्त केवल सफल गणनात्मक उपकरण? वैज्ञानिक यथार्थवाद कहैत अछि सफल सिद्धान्त प्रायः जगतक वास्तविक संरचनाक किछु पक्ष पकड़ैत अछि। उपकरणवादी दृष्टि सावधान करैत अछि जे भविष्यवाणी-सफलता स्वतः पूर्ण तत्त्वमीमांसीय सत्य सिद्ध नहि करैत। समानान्तर दर्शन एहि विवादमे अचूकता नहि, प्रमाणानुसार स्तरित विश्वास स्वीकारैत अछि। 37.4 अवलोकन आ सिद्धान्त “हम केवल तथ्य देखैत छी” वाक्य सरल अछि। वैज्ञानिक अवलोकन उपकरण, मापन-विधि, अवधारणा आ पृष्ठभूमि सिद्धान्तसँ जुल होइत अछि। मुदा एहि बातसँ ई निष्कर्ष नहि निकलैत अछि जे तथ्य मनमाना बनि जाइत अछि। अलग दल समान उपकरण, पुनरावृत्ति, सार्वजनिक आँकड़ा आ आलोचनात्मक पद्धतिसँ एक- दोसराक दाबी जाँचि सकैत अछि। 37.5 कारणता, आगमन आ अनिश्चितता विज्ञान केवल सहसम्बन्ध नहि, कारणात्मक व्याख्या खोजैत अछि। नियंत्रित प्रयोग, प्राकृतिक प्रयोग, सांख्यिकीय मॉडल, यान्त्रिक व्याख्या आ विविध विधिसँ कारणता जाँचल जाइत अछि। ह्यूमक आगमन- समस्या याद दिलबैत अछि जे अतीतसँँ भविष्यक निष्कर्ष दार्शनिक Soe सहज नहि। आधुनिक विज्ञान अनिश्चितताकें छिपबैत नहि; सम्भाव्यता, विश्वास-अन्तराल, त्रुटि, पुनरावृत्ति आ स्वतंत्र सत्यापन द्वारा ओकरा व्यवस्थित करैत अछि। 37.6 विज्ञान आ मूल्य विज्ञान बता सकैत अछि कोन नीति प्रदूषण घटाओत, कोन औषधि औसतन प्रभावी, कोन तकनीक जोखिम बढ़बैत अछि। मुदा “कतेक जोखिम न्यायसंगत?”, “ककर हित प्राथमिक?”, “ककरा बलिदान देब उचित?”--ई नैतिक प्रश्‍न केवल आँकड़ासँ समाप्त नहि होइत अछि। तथ्य मूल्यक निर्णयकें सूचित करैत अछि; मूल्य तथ्यकें रद्द नहि करेत अछि। 37.7 वैज्ञानिकतावाद आ विज्ञानविरोध एक अतिवाद कहैत अछि-_केवल विज्ञाने सभ अर्थपूर्ण प्रश्‍नक उत्तर दऽ सकैत अछि। दोसर कहैत अछि विज्ञान सेहो एक विचारधारा मात्र, ¢ कोनो विशेष ज्ञानात्मक अधिकार नहि। दुनू अनुचित। प्राकृतिक जगत, रोग, पदार्थ, जैविक प्रक्रिया, जलवायु आ तकनीकी प्रभावक प्रश्‍्नमे विज्ञानक सार्वजनिक, परीक्षणीय पद्धति अत्यन्त शक्तिशाली अछि। मुदा न्याय, सौन्दर्य, अधिकार, जीवनक अर्थ आ धार्मिक अनुभवक प्रश्‍न केवल प्रयोगशाला-मापनमे समाप्त नहि। पूर्वपक्षः विज्ञान बदलैत अछि, तँ आजक विज्ञानपर भरोसा किएक? उत्तरपक्षः बदलनाइ विफलताक नहि, सुधारक संकेत हो सकैत अछि। विश्वसनीयता अचूकतासँ नहि, पारदर्शी विधि, परीक्षण, स्वतंत्र समीक्षा आ संशोधनक क्षमतासँ बनैत अछि। 37.8 व्याख्या, पूर्वानुमान आ नियन्त्रण वैज्ञानिक सिद्धान्त केवल देखल घटना सारांशित नहि करैत; ओ कारण वा संरचना प्रस्तावित करैत, नूतन परिणामक पूर्वानुमान दैत आ कखनो हस्तक्षेप सम्भव बनबैत अछि। ई तीन कार्य एक नहि। कोनो नमूना सही पूर्वानुमान दऽ सकैत अछि मुदा कारण गलत बुझा सकैत; कोनो ऐतिहासिक विज्ञान सटीक नियन्त्रण बिना सबल व्याख्या दे सकैत अछि। विज्ञानक मूल्यांकन विषयानुसार होयत। ग्रहक गति, रोगक प्रसार, भूगर्भीय इतिहास आ सामाजिक व्यवहार एकहि प्रयोगशाला-विधिसँ नहि जाँचल जाए। विधिक बहुलता प्रमाण-अराजकता नहि; प्रत्येक क्षेत्रमे पारदर्शी मापन, प्रतिवाद आ त्रुटि-संशोधन आवश्यक रहत। 37.9 सिद्धान्त-निर्भर अवलोकन वैज्ञानिक जे देखैत छथि ओ उपकरण, प्रशिक्षण आ अवधारणासँ प्रभावित होइत अछि। दूरबीनक छवि, सूक्ष्मदर्शी नमूना वा आँकड़ा-पट्विका साधारण नयन-दर्शन नहि; संकेत पढ़बाक सिद्धान्त चाही। एहि कारण “निर्मल तथ्य'क धारणा सरल नहि। मुदा सिद्धान्त-निर्भरता तथ्यक मनमानापन नहि। अलग उपकरण, स्वतंत्र दल, अन्ध परीक्षण आ सफल पूर्वानुमान सिद्धान्तपर बाहरी दबाव बनबैत अछि। जगत हमर भाषा अनुसार सभ परिणाम नहि दैत। आलोचनात्मक यथार्थवाद मध्यस्थता आ वस्तुगत प्रतिरोध दुनू स्वीकारैत अछि। 37.10 खण्डनीयता आ ओकर सीमा खण्डनीयताक सिद्धान्त अनुसार वैज्ञानिक दाबी एहन जोखिम लेत जे सम्भावित अवलोकन ओकरा गलत ठहरा सकय। ई सिद्धान्त विज्ञानकें हर परिणाम संग मेल खायवला दाबीसँ अलग करैत अछि। मुदा एकटा विफल पूर्वानुमान केवल मुख्य सिद्धान्त नहि, सहायक धारणा, उपकरण वा मापन-दोषपर निर्भर भऽ सकैत अछि। d वैज्ञानिक व्यवहार एक परीक्षणपर तुरन्त सिद्धान्त त्यागैत नहि। पुनर्परीक्षण, वैकल्पिक व्याख्या आ समग्र प्रमाण जाँचल जाइत अछि। लचीलापन उचित हो सकैत अछि; लगातार अपवाद जोड़ि सिद्धान्त बचायब अनुचित। सीमा केना तय होयत ई इतिहास आ समुदायिक निर्णयक विषय सेहो अछि। 37.11 प्रतिमान आ वैज्ञानिक परिवर्तन वैज्ञानिक समुदाय साझा उदाहरण, प्रश्‍न, उपकरण आ मानक भीतर काम करैत अछि। संकट कालमे पुरान प्रतिमानक क्षमता घटि सकैत आ नूतन प्रतिमान समस्या नव ढंगसँँ व्यवस्थित करैत अछि। परिवर्तन केवल नूतन तथ्य जोड़ब नहि, प्रासंगिक तथ्य देखबाक ढाँचा बदलब सेहो होयत। प्रतिमान-विमर्शसँ विज्ञान केवल राजनीति बनि जाइत--एहन निष्कर्ष गलत। प्रमाण, समस्या-समाधान, सटीकता आ फलदायिता वास्तविक भूमिका रखैत अछि, यद्यपि निर्णय पूर्ण यान्त्रिक नहि। इतिहास विज्ञानक मानवीय संस्था देखबैत अछि; एकर उपलब्धि नकारैत नहि। 37.12 अनिश्चितता सार्वजनिक Sus Hed वैज्ञानिक निष्कर्ष प्राय: सम्भाव्यता, त्रुटि-सीमा आ शर्तसहित अबैत अछि। सार्वजनिक संवादमे ई सीमा हटि जाए तँ निष्कर्ष अचूक आदेश जकाँ देखाइत; सीमा मात्र दोहराओल जाए तँ उपयोगी ज्ञान सेहो निष्प्रभावी होइत। उचित भाषा मुख्य निष्कर्ष, विश्वासक स्तर, प्रमुख अनिश्चितता आ निर्णयक परिणाम अलग बतबैत अछि। अनिश्चितता निष्क्रियताक कारण नहि। सम्भावित हानि गंभीर आ अपरिवर्तनीय हो तखन अपूर्ण ज्ञानक बीच सावधानी उचित भऽ सकैत अछि। निर्णय विज्ञान अकेले नहि करैत; मूल्य, लागत आ न्याय प्रवेश करैत अछि। मुदा तथ्यगत आधारक सही प्रस्तुति नैतिक निर्णयक पूर्वशर्त अछि। अध्याय-निष्कर्ष समानान्तर दर्शन विज्ञानकें न देवत्व दैत अछि, न अवमूल्यित करैत अछि। विज्ञान भौतिक जगत बुझबाक सर्वोत्तम सार्वजनिक पद्धतिसभमे एक अछि; नैतिक मूल्यक एकमात्र स्रोत नहि। अध्याय-ग्रन्थसूचौ Karl Popper — The Logic of Scientific Discovery. Thomas S. Kuhn — The Structure of Scientific Revolutions. Carl G. Hempel — Philosophy of Natural Science. Stanford Encyclopedia of Philosophy — “Scientific Method”; “Scientific Realism”.