समानताक अर्थ सभ Ach एकरूप बना देब नहि। समानता मूलतः नैतिक दर्जाक समानता अछि--प्रत्येक मनुष्य समान मूल गरिमा, समान नागरिक सम्मान आ सार्वजनिक औचित्यक समान दावा रखैत अछि। आधुनिक राजनीतिक दर्शनमे समानता एतय सँ आगाँ एकटा कठिन प्रश्‍न उठबैत अछि: समानता कोन वस्तुमे? अधिकार? अवसर? संसाधन? क्षमता? सम्मान? राजनीतिक प्रभाव? एहि WH उत्तर बिना “समानता” केवल नारा बनि सकैत अछि। 41.1 समानता आ एकरूपताक भेद दू व्यक्तिक प्रतिभा, रुचि, देह, भाषा, पारिवारिक परिस्थिति आ जीवन-योजना भिन्न भऽ सकैत अछि। समानता एहि भिन्नताकें मिटाबय नहि चाहैत। एकर लक्ष्य ई हो जे भिन्नता अपमान, नागरिक हीनता वा जन्मगत अधीनताक आधार नहि बनय। समान व्यवहार कखनो न्यायपूर्ण होइत अछि, कखनो असमान परिस्थिति कारण अलग सहायता आवश्यक होइत अछि। अतः समानता “एके वस्तु सभकें” नहि, बल्कि उचित कारण बिना श्रेष्ठ-हीन दर्जाक निषेध अछि। 41.2 औपचारिक आ वास्तविक समानता कानून कहि सकैत अछि--सभ नागरिक समान छथि। ई आवश्यक उपलब्धि अछि, मुदा पर्याप्त नहि। यदि शिक्षा, स्वास्थ्य, भूमि, पूँजी, सामाजिक सम्पर्क आ सुरक्षित सार्वजनिक स्थानक पहुँच अत्यन्त असमान अछि, तखन समान अधिकारक उपयोग क्षमता सेहो असमान रहत। एहि कारण औपचारिक समानता आ वास्तविक अवसरक समानता अलग करब आवश्यक अछि। ऐतिहासिक असमानता केवल “आब सभ बराबर छी” कहलासँ समाप्त नहि होइत अछि। दौड़मे ककरो पीढ़ी- दर-पीढ़ी बाँधि HS राखल गेल हो आ बादमे रस्सी काटि क5 कहल जाए-_“आब सभ स्वतंत्र छी”--तऽ औपचारिक समानता वास्तविक न्याय नहि। 41.3 समान अवसर आ ओकर सीमा समान अवसरक आदर्श कहैत अछि जे पद, शिक्षा आ सार्वजनिक अवसर जन्मगत पहचानक आधारपर बन्द नहि रहय। मुदा प्रारम्भिक परिस्थिति बहुत असमान हो तँ केवल खुला प्रतियोगिता पर्याप्त नहि। पोषण, विद्यालय, भाषा, सामाजिक सुरक्षा, भेदभाव आ पारिवारिक संसाधन प्रतियोगिताक पूर्वशर्त बनैत अछि। तें अवसरक समानता संस्थागत पूर्वशर्त माँगैत अछि। 41.4 संसाधन, क्षमता आ गरिमा संसाधन बराबर बाँटलासँ परिणाम सदैव बराबर नहि होयत, कारण व्यक्तिक आवश्यकता भिन्न। वृद्ध, विकलांग, शिशु वा सामाजिक Sua वंचित व्यक्तिक स्वतंत्र जीवन लेल अतिरिक्त समर्थन चाही। क्षमता- दृष्टि एहि बातपर बल दैत अछि जे प्रश्‍न केवल “कतेक वस्तु भेटल” नहि, बल्कि “व्यक्ति वास्तवमे की करि आ बनि सकैत अछि” सेहो हो। समानान्तर दर्शन एहि दृष्टिकें गरिमा-सिद्धान्तसँ जोड़ेत अछि। 41.5 सम्बन्धात्मक समानता समानता वितरणक प्रश्न मात्र नहि; सम्बन्धक प्रश्‍न सेहो अछि। यदि समाजमे कोनो समूह दोसरक चरण छूबय, अलग बर्तन उपयोग करय, सार्वजनिक स्थानसँ दूर रहय, वा निर्णयमे ओकर आवाज कम मूल्यवान मानल जाए, तखन आर्थिक संसाधन बढ़लाक बादो असमान नागरिक सम्बन्ध बचल रहि सकैत अछि। समानता एहि कारण “हम सभक मूल्य समान” क सार्वजनिक संस्कार सेहो अछि। पूर्वपक्षः प्राकृतिक भिन्नता कारण असमानता स्वाभाविक अछि उत्तरपक्षः प्राकृतिक भिन्नता सामाजिक अधीनताक स्वत: औचित्य नहि। शक्ति, बुद्धि, धन वा जन्मक अन्तर ककरो समान नैतिक दर्जा नष्ट नहि Hed | 41.11 भाग्य, परिश्रम आ नैतिक पात्रता व्यक्ति परिश्रम करेत अछि, मुदा प्रतिभा, परिवार, स्वास्थ्य, जन्मस्थान आ ऐतिहासिक अवसर ओकर चुन्नल नहि। सफलता मे प्रयत्नक भूमिका स्वीकारितो सम्पूर्ण फलकें शुद्ध नैतिक पात्रता मानब कठिन। असफलताकें चरित्र-दोष कहब सेहो अनुचित। एहि dha उपलब्धिक सम्मान समाप्त नहि। प्रश्‍न फलसँ उत्पन्न अधिकारक सीमा अछि। उत्कृष्ट कार्यक प्रोत्साहन रहि सकैत, संगहि ओ सामाजिक शर्तक ऋण स्वीकारि मूल अवसर लेल योगदान दे। न्याय ई तय करत जे कुन असमानता उपयोगी आ स्वैच्छिक, कुन मनमाना भाग्यक प्रभुत्व। भेद वास्तविक HHS, प्रोत्साहनक प्रभाव आ गरिमाक न्यूनतमपर जाँचल जाए। 41.12 क्षैतिज आ ऊर्ध्व समानता समान स्थितिवला लोकक समान व्यवहार क्षैतिज समानता; भिन्न आवश्यकता वा क्षमता अनुसार भिन्न सहायता ऊर्ध्व समानता। एकहि औषधि सभ रोगीकें देब औपचारिक समान, चिकित्सकीय रुपसँ अनुचित हो सकैत अछि। भिन्न व्यवहार भेदभाव बनत की न्याय--ई प्रासंगिक कारणपर निर्भर। श्रेणी वास्तविक उद्देश्यसँ सम्बन्धित, आवश्यक सीमा धरि आ समीक्षा योग्य हो। जन्मगत पूर्वाग्रहक भाषा "भिन्न आवश्यकता” बनि फेर नहि लौटय। पारदर्शी कसौटी विशेष महत्त्वपूर्ण अछि। लाभार्थी आ वंचित दुनू बुझि सकथि जे भेद किएक कएल गेल आ अपील कोना होयत। 41.13 प्रतिनिधित्वक परिणाम विविध प्रतिनिधित्व प्रतीकात्मक गरिमा दैत, नूतन अनुभव निर्णयमे arta आ संस्थाक वैधता बढ़बैत अछि। मुदा केवल संख्या बढ़ला पर एजेंडा, संसाधन आ बोलबाक अधिकार पुरान समूहक हाथमे रहि सकैत अछि। प्रतिनिधित्वक माप पदक संख्या संग निर्णयपर प्रभाव, टिकाउपन, पदोन्नति आ समुदाय दिस उत्तरदायित्व देखय। 'एक व्यक्ति आ गेल” कहि संरचना बदली गेल मानब जल्दबाजी। एक समूहक प्रतिनिधि सभ सदस्यक एकमत आवाज नहि। आन्तरिक बहुलता सुरक्षित रहय, मुदा एहि कारण ऐतिहासिक बहिष्कारक उपाय टारल नहि जाए। 41.14 पूर्वपक्ष: समानता उत्कृष्टता घटबैत अछि आपत्ति अछि जे समानतामूलक नीति मानक कमजोर करैत आ प्रयासक प्रेरणा घटबैत अछि। जँ परिणाम बराबर करबाक दबाव हो, तँ प्रतिभा आ नवोन्मेष बाधित भऽ सकैत। उत्तर ई जे समानताक सभ रुप परिणाम-समानता नहि। पोषण, शिक्षा आ भेदभावमुक्त अवसर बढ़ला पर अधिक प्रतिभा सामने अबैत अछि। मानक कार्यसँ प्रासंगिक रखल जाए, विशेषाधिकारसँ नहि। नीतिक वास्तविक प्रभाव जाँचल जाए। जँ उपाय लक्ष्य पूरा नहि करैत वा नूतन अन्याय बनबैत अछि तँ सुधार हो; मुदा अनुमानित Wah ऐतिहासिक बहिष्कार जारी रखबाक कारण नहि बनाओल GATT | 41.6 औपचारिक आ वास्तविक समानता एकहि नियम सभपर लागू होयब औपचारिक समानता अछि। मुदा जँ आरम्भिक संसाधन, सामाजिक जोखिम आ पहुँच बहुत भिन्न हो, तँ समान नियम असमान परिणाम स्थिर करि सकैत अछि। सीढ़ी सभ लेल समान होइतहुँ चलबमे असमर्थ व्यक्तिक प्रवेश सुनिश्चित नहि Hea वास्तविक समानता परिणाम बिल्कुल समान करब नहि; अवसर उपयोग करबाक उचित क्षमता, बाधा हटेबा आ समान दर्जा सुनिश्चित करब अछि। अलग सहायता कखनो विशेषाधिकार नहि, समान पहुँचक साधन हो सकैत अछि। 41.7 समान अवसरक तीन स्तर पहिल स्तर खुलल प्रतिस्पर्धा: पद जन्मसँ बन्द नहि। दोसर स्तर तैयारीक उचित अवसर: शिक्षा, पोषण आ जानकारी उपलब्ध। तेसर स्तर चयनक नियम स्वयं प्रासंगिक योग्यता मापैत अछि की सामाजिक विशेषाधिकार? केवल आवेदन खुलल होयब समान अवसरक पूर्णता नहि। योग्यता इतिहासविहीन नहि। परीक्षा कोन भाषा, अनुभव आ प्रशिक्षण मानेत अछि से जाँचल जाए। तथापि मानक पूर्ण त्यागल नहि जाए; कार्यसँ प्रासंगिक, पारदर्शी आ सुधारयोग्य मानक बनाओल जाए। 41.8 सम्मानक समानता आय समान होइतहुँ सार्वजनिक अपमान, अस्पृश्यता वा निर्णयसँ बहिष्कार मनुष्यक समान दर्जा नष्ट करैत अछि। सम्बन्धात्मक समानता नागरिककें मालिक-आश्रित, उच्च-नीच वा दाता-याचक सम्बन्धसँ मुक्त करबाक प्रश्‍न अछि। कल्याणकारी सहायता जँ अपमानजनक प्रक्रिया सँ भेटय तँ भौतिक लाभ संग दर्जागत हानि होइत अछि। नीति केवल कतेक देलक नहि, कोना व्यवहार कएलक से सेहो जाँचल जाए। गरिमा वितरणक विधिक कसौटी अछि। 41.9 आरक्षण आ प्रतिकारक औचित्य प्रतिनिधित्व वा आरक्षणक औचित्य दया नहि, ऐतिहासिक बहिष्कार, वर्तमान बाधा आ संस्थागत वैधतासँ Use हो सकैत अछि। समान नियम जँ पुरान विशेषाधिकारक परिणाम ढोइत अछि, तँ लक्षित उपाय वास्तविक प्रतिस्पर्धा बनाबय। उपायक रचना प्रमाण माँगैत अछि: लाभ ककरा पहुँचि रहल, भीतरक वंचित समूह छुटि रहल की नहि, अवधि आ समीक्षा की, आ गुणवत्ता कोना सुरक्षित। आलोचना उपाय सुधारय, बहिष्कारक इतिहास नकारय नहि। 41.10 समानता आ पर्याप्तता किछु मत पूछैत अछि सभक बीच अन्तर घटेब महत्वपूर्ण, अथवा प्रत्येके सम्मानजनक न्यूनतम स्तर देब? पर्याप्तता भूख, स्वास्थ्य आ शिक्षा जकाँ मूल सीमा पर बल दैत अछि। मुदा अत्यधिक असमानता पर्याप्त न्यूनतम रहितो राजनीतिक प्रभुत्व उत्पन्न करि सकैत अछि। ते न्यूनतम सुरक्षा आ अन्तरक सीमा दुनू जाँचल जाए। कियो धनी अछि मात्रसँ अन्याय सिद्ध नहि, मुदा धन राजनीतिक आवाज, अवसर आ कानून खरीदय तखन समान नागरिकता संकटमे पड़ैत अछि। अध्याय-निष्कर्ष समानता एकरूपता नहि; समान नैतिक दर्जा, समान नागरिक सम्मान, उचित अवसर आ वास्तविक क्षमता सुनिश्चित करबाक सिद्धान्त अछि। समानान्तर दर्शनक सूत्र: जन्म नैतिक योग्यता नहि।