Full chapter text
दार्शनिक इतिहासमे “मनुष्य” शब्द अनेक बेर व्यवहारमे You अनुभवक पर्याय बनि गेल। स्त्रीक देह, श्रम,
प्रजनन, सम्पत्ति, शिक्षा आ सार्वजनिक उपस्थितिपर नियन्त्रणकेँ दार्शनिक प्रश्न मानब आवश्यक अछि।
स्त्रीवादी दर्शनक एकरूप मत नहि; उदार, समाजवादी, उग्र, उत्तर-औपनिवेशिक, दलित, अन्तरविभागीय आ
अन्य अनेक धारासभ भिन्न प्रश्न उठबैत अछि।
45.1 निजी आ सार्वजनिकक सीमा
परम्परागत राजनीतिक दर्शन राज्य आ बाजारपर केन्द्रित रहैत परिवारकें “निजी” क्षेत्र मानि कऽ छोड़ि देलक।
मुदा परिवारमे सम्पत्ति, देखभाल, हिंसा, विवाह, प्रजनन, शिक्षा आ अवसरक वितरण होइत अछि। Gf घरक
भीतरक सत्ता राजनीतिक दर्शनसँ बाहर नहि।
45.2 देह आ स्वायत्तता
व्यक्ति अपन देह सम्बन्धी निर्णयमे कतेक स्वतंत्र? विवाह, गर्भधारण, स्वास्थ्य, वस्त्र, गतिशीलता, यौनिक
सहमति--ई सभ स्वायत्तता आ सामाजिक मानदण्डक संघर्षक क्षेत्र अछि। स्वायत्तता केवल विकल्प घोषित
करब नहि; दबाव, निर्भरता, हिंसा आ सामाजिक दण्डक अनुपस्थिति सेहो चाही।
45.3 अवैतनिक देखभालक श्रम
घरक देखभाल, बच्चा पालन, वृद्ध सेवा, भोजन, सफाई--ई श्रम अर्थव्यवस्थाक आधार अछि, मुदा अनेक बेर
आर्थिक आँकड़ामे अदृश्य रहैत AS जँ एक समूहक समय व्यवस्थित रूपसँ अवैतनिक देखभालमे लगैत
अछि, ओकर शिक्षा, रोजगार, विश्राम आ राजनीतिक भागीदारी प्रभावित होइत अछि।
45.4 समान अवसर आ संस्थागत बाधा
कानूनी समानता बादो कार्यस्थल, शिक्षा, उत्तराधिकार, नेतृत्व आ सार्वजनिक सुरक्षा मे बाधा रहि सकैत अछि।
“एक समान नियम” तखन पर्याप्त नहि जँ संस्था ऐतिहासिक Sua पुरुष जीवन-पद्धतिक आधारपर बनल
हो।
45.5 अन्तरविभागीयता
स्त्री एकरूप सामाजिक वर्ग नहि। जाति, वर्ग, धर्म, भाषा, क्षेत्र, विकलांगता आ अन्य पहचान लिंग-अनुभव
बदलैत अछि। तेँ कोनो एक स्त्री-अनुभवकें सार्वभौम घोषित करब उचित नहि। समानान्तर दर्शनक बहुदृष्टरिगत
पद्धति एतय विशेष उपयोगी अछि--अनुभव भिन्न, मुदा गरिमाक कसौटी साझा।
45.6 प्रतिनिधित्व आ ज्ञान
स्त्रीक अनुपस्थितिमे बनल सिद्धान्त किछु अनुभव अदृश्य छोड़ि सकैत अछि। एहि कारण प्रतिनिधित्व केवल
राजनीतिक सीटक प्रश्न नहि; ज्ञानक प्रश्न Gell ककर अनुभव “सामान्य मनुष्य”क अनुभव मानल गेल, ई
दर्शनक आत्मसमीक्षाक विषय अछि।
पूर्वपक्षः समान अधिकार देल गेल, तेँ लिंग-न्याय प्राप्त
उत्तरपक्षः समान अधिकार आवश्यक उपलब्धि अछि, मुदा घरेलू श्रम, हिंसा, सामाजिक अपेक्षा, संसाधन,
सुरक्षा आ प्रतिनिधित्वक असमानता रहला सँ वास्तविक समानता अधूरी रहि सकैत अछि।
45.12 सार्वजनिक-निजी विभाजनक आलोचना
परम्परागत राजनीति Bch निजी आ राज्य-बाजारकें सार्वजनिक मानि सकैत अछि। मुदा घर भीतर श्रम-
वितरण, शिक्षा, सम्पत्ति आ हिंसा सार्वजनिक क्षमता बनबैत अछि। निजी कहि कानूनसँ बाहर राखलासँ
असमानता सुरक्षित हो सकैत अछि।
एहि आलोचनासँ राज्यक असीम प्रवेश उचित नहि। अन्तरंगता, प्रेम आ निजी निर्णयक क्षेत्र मूल्यवान अछि।
हस्तक्षेप स्पष्ट हानि, निर्भरता आ अधिकारक आधारपर न्यूनतम हो।
गोपनीयता पीड़ितक सुरक्षा हो सकैत, अपराधीक ढाल नहि। शिकायतक गोपनीय मार्ग आ निष्पक्ष जाँच एहि
gach संतुलित करैत अछि।
45.13 देहपर आत्मनिर्णय
देहपर निर्णय व्यक्तिक स्वायत्तताक केन्द्र अछि--चिकित्सा, प्रजनन, विवाह आ यौन सम्बन्धमे सहमति
आवश्यक। परिवार, समुदाय वा राज्यक हित व्यक्तिक देहके साधन मात्र नहि बना सकैत।
स्वायत्तता जानकारी आ सेवा बिना कागजी रहि सकैत अछि। सुरक्षित स्वास्थ्य-सेवा, गोपनीयता आ आर्थिक
पहुँच वास्तविक निर्णय-क्षमता बनबैत अछि।
जहाँ दोसर जीवन वा सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रभावित हो, विवाद जटिल होइत अछि। प्रमाण, हानिक अनुपात
आ न्यूनतम प्रतिबन्धक उपाय स्पष्ट कएल जाए; नैतिक असहमति अपमानमे नहि बदले।
45.14 भाषा भीतर लिंग
भाषा पेशा, अधिकार आ सामान्य मनुष्यक छवि लिंगगत बना सकैत अछि। जे पद केवल पुरुष रूपमे प्रतिष्ठित,
ओ बच्चाक सम्भावना आ सामाजिक अपेक्षापर प्रभाव दैत अछि।
मुदा व्याकरणिक लिंग आ सामाजिक भेदभाव एकहि वस्तु नहि। परिवर्तन भाषिक संरचना, जीवित उपयोग
आ वक्ताक सुविधा ध्यानमे राखि हो। जबरन कृत्रिमता जनस्वीकृति रोकि सकैत अछि।
समावेशी भाषा संरचनात्मक सुधारक पूरक अछि। पद बदलल जाए, संगहि भर्ती, सुरक्षा आ नेतृत्वक अवसर
सेहो।
45.15 पूर्वपक्ष: समान अधिकार भेटल, आब समस्या समाप्त
कानून समान घोषित भेला बाद कहल जाइत अछि जे शेष अन्तर निजी चुनावक परिणाम। औपचारिक
अधिकार ऐतिहासिक उपलब्धि अछि, मुदा उपयोगक लागत, हिंसाक भय, देखभालक भार आ पेशागत जाल
एखनहुँ विकल्प बदलि सकैत अछि।
सभ अन्तर भेदभावक प्रमाण नहि। पसंद, देह आ जीवन-योजना भिन्न हो सकैत अछि। प्रश्न ई जे पसंद कोन
अपेक्षा, दण्ड आ जानकारी भीतर बनल।
नीति परिणाम जबरन समान नहि करय; अनावश्यक बाधा हटाय, सुरक्षित विकल्प दे, आ अन्तरक कारण
नियमित जाँचय।
45.7 जैविक भेद आ सामाजिक अर्थ
देहगत भेद वास्तविक भऽ सकैत अछि, मुदा ओकरासँ सामाजिक भूमिका, बुद्धि, अधिकार वा भाग्य स्वतः
नहि निकलैत। समाज चुनैत अछि जे कोन भेद महत्त्वपूर्ण, कोना वर्गीकृत, आ ककरा संसाधन वा दण्डसँ
जोड़ल जाए।
जैविक तथ्य नकारब आ जैविक नियतिवाद--दुनू गलत। चिकित्सा वा स्वास्थ्यमे शरीर प्रासंगिक भऽ सकैत;
नागरिक अधिकारमे समान गरिमा नि्णयक। प्रसंग स्पष्ट राखब आवश्यक अछि।
45.8 देखभाल, निर्भरता आ नैतिकता
मनुष्य जीवनक अनेक चरणमे दोसरपर निर्भर रहैत अछि। स्वायत्त व्यक्तिक आदर्श जँ देखभालक श्रम अदृश्य
करय तँ अधूरा अछि। सम्बन्ध, उत्तरदायित्व आ संवेदनशीलता नेतिक जीवनक केन्द्रीय अंग छथि।
मुदा देखभालक नामपर स्त्रीक आत्मत्याग अनिवार्य करब अन्याय। उचित देखभाल देखभालकर्ता आ
प्राप्तकर्ता दुनूक गरिमा, विश्राम, संसाधन आ आवाज सुरक्षित करय। निर्भरता प्रभुत्वक अनुमति नहि।
45.9 सहमति आ शक्ति
सहमति केवल ‘er? शब्द नहि। जानकारी, दबावक अभाव, निर्णय-क्षमता, वास्तविक विकल्प आ कखनो
सहमति वापस लेबाक अधिकार आवश्यक। आर्थिक, पारिवारिक वा संस्थागत निर्भरता औपचारिक सहमतिक
अर्थ बदलि सकैत अछि।
प्रत्येक शक्ति-अन्तर सहमति असम्भव नहि बनबैत, मुदा अधिक सुरक्षा Ata अछि। नियम कमजोर पक्षक
प्रतिशोध-भय घटाबय, गोपनीय शिकायत आ निष्पक्ष जाँच दे। नैतिक सम्बन्ध निरन्तर संवादपर टिकैत अछि।
45.10 ज्ञानात्मक अन्याय
ककरो कथन ओकर लिंग वा सामाजिक पहचान कारण कम विश्वसनीय मानल जाए, तँ साक्ष्यगत अन्याय
होइत अछि। दोसर रूप तखन जे समुदायक अनुभव व्यक्त करबाक सार्वजनिक अवधारणा उपलब्ध नहि,
फलतः हानि नामहीन रहि जाइत अछि।
समाधान प्रत्येक कथन बिना जाँच मानि लेब नहि। पूर्वाग्रह-जागरुक सुनवाई, विविध प्रतिनिधित्व, सुरक्षित
भाषा आ स्वतंत्र प्रमाण जोड़ल जाए। विश्वसनीयताक कसौटी सभपर समान, मुदा ऐतिहासिक अविश्वासक
ढाँचा सेहो जाँचल जाए।
45.11 अन्तःसम्बद्ध असमानता
स्त्रीसभ एक समान समूह नहि। जाति, वर्ग, धर्म, भाषा, विकलांगता आ क्षेत्र लिंगगत अनुभव बदलैत अछि।
एक समूहक औसत सुधार भीतरक सर्वाधिक वंचित व्यक्तिक स्थिति छिपा सकैत अछि।
नीति विभाजनक सूची मात्र नहि बनाय। देखय जे संस्था अनेक पहचानकें संयुक्त रुपसँ कोना प्रभावित Het
अछि। प्रभावित समूहक सहभागिता आ विभाजित आँकड़ा आवश्यक, मुदा निजता आ कलंकक जोखिम सेहो
ध्यानमे रहय।
अध्याय-निष्कर्ष
लिंग-न्याय गरिमा, स्वायत्तता, श्रमक मान्यता, सुरक्षा, समान अवसर आ प्रतिनिधित्वक संयुक्त प्रश्न अछि।
समानान्तर दर्शन स्त्रीवादी विचारकेँ कोनो परिशिष्ट नहि, सामाजिक दर्शनक केन्द्रीय आत्मसमीक्षा मानैत अछि।
अध्याय-ग्रन्थसूचौ
Simone de Beauvoir — The Second Sex.
Susan Moller Okin — Justice, Gender, and the Family.
Martha C. Nussbaum — Women and Human Development.
bell hooks — Feminist Theory: From Margin to Center.