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धर्म आ राज्यक सम्बन्धक प्रश्न केवल “राज्य धार्मिक हो वा धर्मनिरपेक्ष?” एतेक सरल नहि। बहुधर्मी समाजमे
मूल समस्या ई अछि जे राज्यक वैधता सभ नागरिकक समान राजनीतिक दर्जापर टिकत की कोनो एक धार्मिक
सत्य-दाबीक विशेषाधिकारपर। समानान्तर दर्शन राज्यकेँ धर्मविरोधी बनबाक आदेश नहि दैत अछि; ओ
राज्यकेँ धर्मक आध्यात्मिक सत्यक निर्णायक बनबाक अधिकार नहि दैत अछि। राज्यक पहिल कर्तव्य
नागरिकक समान स्वतंत्रता, गरिमा आ विधिक सुरक्षा अछि।
56.1 धर्मक सत्य आ राज्यक अधिकार
कोनो धार्मिक समुदाय अपन शास्त्र, परम्परा, गुरु, पैगम्बर, तत्त्वमीमांसा वा अनुभूतिक आधारपर सत्य-दाबी
कऽ सकैत अछि। ई धार्मिक जीवनक स्वाभाविक भाग अछि। मुदा राज्यक दण्डशक्ति सभ नागरिकपर लागू
होइत अछि। तेँ “हमर धर्म ई कहैत अछि” व्यक्तिगत अथवा सामुदायिक कारण भऽ सकैत अछि, मुदा सभ
नागरिकपर बाध्यकारी कानूनक लेल अतिरिक्त सार्वजनिक औचित्य चाही। सार्वजनिक कारणक अर्थ धर्महीन
कारण नहि; अर्थ ई जे कारणक मूल्यांकन नागरिक अपन धार्मिक पहचान बदले बिना सेहो HS सकथि।
56.2 धर्मनिरपेक्षता: दूरी, समानता आ संरक्षण
धर्मनिरपेक्ष राज्यक अनेक ऐतिहासिक रूप अछि। किछु परम्परामे राज्य आ धार्मिक संस्था बीच कठोर
विभाजनपर जोर; किछुमे सिद्धान्तगत समान दूरी; किछुमे धार्मिक स्वतंत्रता रक्षार्थ राज्यक सीमित हस्तक्षेप।
समानान्तर दर्शन कोनो एक ऐतिहासिक नमूनाकें सार्वभौम नुस्खा नहि मानेत। ओकर कसौटी चारि अछि
कोनो नागरिकक नागरिक-अधिकार धर्मपर निर्भर नहि हो; धर्म बदलबाक वा नहि मानबाक स्वतंत्रता सुरक्षित
हो; धर्मक नामपर हिंसा वा नागरिक-अधिकार हननकें राज्य वैध नहि मानय; आ राज्य कोनो धर्मक प्रभुत्वक
उपकरण नहि बनय।
56.3 समान व्यवहार आ समान परिणाम
धर्मक प्रश्नमे “सभकें एके नियम” सदैव समानता नहि दैत। यदि कोनो नियम बहुसंख्यक परम्पराक दिनचर्याक
अनुसार बनल हो तँ औपचारिक तटस्थता अल्पसंख्यकपर असमान भार डालि सकैत अछि। तेँ न्यायपूर्ण
WI औपचारिक समानता आ वास्तविक प्रभाव दुनू देखय Usd! मुदा विशेष व्यवस्था स्वयं स्थायी
विशेषाधिकार न बनय; ओकर औचित्य गरिमा, स्वतंत्रता आ समान नागरिकता सँ सिद्ध हो।
56.4 धार्मिक संस्था आ आन्तरिक न्याय
राज्य धार्मिक विश्वासक अर्थनिर्णायक नहि, मुदा धार्मिक संस्था भीतर हिंसा, जबरदस्ती, सम्पत्ति-अपराध,
बाल-अधिकार हनन, जाति वा लिंग-आधारित नागरिक वंचना जकाँ प्रश्न उठलापर “ई आन्तरिक धार्मिक
मामला अछि” कहि पूर्णतः हटि नहि सकैत। धार्मिक स्वायत्तता महत्त्वपूर्ण अछि, मुदा व्यक्ति धार्मिक
समुदायक सदस्य होइतहुँ राज्यक नागरिक सेहो अछि। समानान्तर दर्शन समुदाय-अधिकार आ व्यक्तिगत
गरिमा बीच संतुलन खोजैत अछि।
56.5 बहुमत आ धार्मिक राष्ट्रवाद
बहुमत धार्मिक पहचान राज्यक सांस्कृतिक जीवनपर प्रभाव रखि सकैत अछि; इतिहास, भाषा, पर्व, प्रतीक
सभ समाजक भाग अछि। मुदा बहुमत संख्या आध्यात्मिक सत्य वा राजनीतिक विशेषाधिकारक प्रमाण नहि।
जँ नागरिकताक सम्मान धार्मिक अनुरूपतापर निर्भर हो जाए तँ लोकतन्त्र बहुमतवादी प्रभुत्वमे बदलि सकैत
अछि।
पूर्वपक्षः धर्म सार्वजनिक नैतिकताक मुख्य स्रोत अछि; राज्य ओकर बिना मूल्यहीन भऽ जाएत।
उत्तरपक्षः धार्मिक नैतिक परम्परा सार्वजनिक जीवनके समृद्ध HS सकैत अछि, मुदा राज्यक वैधता एक धर्मक
प्रामाण्यपर नहि, सभ नागरिकक समान दर्जापर टिकबाक चाही। धार्मिक व्यक्ति सार्वजनिक कारण देबाक
सक्षम छथि; धर्मनिरपेक्ष राज्य धर्मविरोधी राज्य नहि।
56.11 धर्म-आधारित निजी कानून
समुदायिक निजी कानून पहचान आ स्वायत्तता बचा सकैत अछि, मुदा विवाह, उत्तराधिकार वा संरक्षकतामे
सदस्यक समान अधिकार प्रभावित कारि सकैत। राज्यक एकरूपता सेहो बहुमतक मानक थोपि सकैत अछि।
सुधारक कसौटी मूल अधिकार, स्वैच्छिकता, निकास आ प्रभावित सदस्यक आवाज हो। बाहरी हस्तक्षेप
राजनीतिक पक्षपातसँ मुक्त आ सभ समुदायपर समान नैतिक मानकवला हो।
वैकल्पिक नागरिक कानून वास्तविक SUS सुलभ हो, केवल कागजपर नहि। कमजोर सदस्यपर परिवारक
दबाव जाँचल जाए।
56.12 धार्मिक स्थल आ सार्वजनिक संसाधन
धार्मिक स्थल इतिहास, समुदाय आ पूजा लेल महत्त्वपूर्ण, मुदा भूमि, मार्ग, ध्वनि आ सुरक्षा सार्वजनिक
संसाधनसँ Usd अछि। नियम कोनो एक धर्मक सुविधा अनुसार नहि बनय।
पुरान उपयोग ऐतिहासिक दाबी दे सकैत, असीम विस्तारक अधिकार नहि। स्थानीय निवास, पर्यावरण आ
अल्पमतक पूजा समान सुनल जाए।
विवादमे अफवाह रोकि अभिलेख, मानचित्र आ वैधानिक प्रक्रिया अपनाओल जाए। पवित्र भावनाक तीव्रता
तथ्यक स्थान नहि लय।
56.13 राज्यक प्रतीकात्मक तटस्थता
राजकीय समारोह, भाषा आ प्रतीक कखनो बहुमत धर्मकें राष्ट्रक स्वाभाविक चेहरा बना दैत अछि। अल्पमत
कानूनी अधिकार पाबितो प्रतीकात्मक STS बाहरी महसूस HS सकैत अछि।
पूर्ण प्रतीक-विहीन राज्य सम्भव नहि। प्रश्न ई जे प्रतीक नागरिक-साझा मूल्य व्यक्त करेत अछि वा विशिष्ट
धार्मिक सदस्यता। बहु-परम्पराक समान अवसर आ गैरधार्मिक नागरिकक स्थान हो।
प्रतीकात्मक समावेशन संसाधन-असमानता छिपाबय नहि। नियुक्ति, सेवा आ सुरक्षा परिणामक मुख्य कसौटी
रहत।
56.14 पूर्वपक्षः राज्य धर्मसँ दूरी रखय, बस
कठोर दूरी पक्षपात घटबैत अछि; राज्य धर्मक सिद्धान्त वा संस्था सँ अलग रहय। मुदा जँ धार्मिक संस्था भीतर
स्पष्ट अधिकार-हानि हो, दूरी पीड़ितक परित्याग बनि सकैत अछि।
सिद्धान्तगत दूरी राज्यकें विश्वास तय करबा रोकैत, समान कानून लागू करबा नहि। हस्तक्षेप धर्मक सत्यपर
नहि, हिंसा, सम्पत्ति, श्रम वा नागरिक अधिकारपर आधारित हो।
समान कसौटी महत्त्वपूर्ण। बहुमतक संस्थापर नरमी आ अल्पमतपर कठोरता धर्मनिरपेक्षता नहि।
56.6 धर्मनिरपेक्षताक अलग नमूना
धर्मनिरपेक्षता सर्वत्र एकहि संस्थागत रूप नहि। कखनो राज्य-धर्म पृथक्करण, कखनो सभ धर्मसँ समान दूरी,
कखनो अधिकार-सुरक्षा लेल सिद्धान्तगत हस्तक्षेपपर बल देल जाइत अछि। इतिहास आ सामाजिक संरचना
अनुसार नमूना बदलैत अछि।
नामक बदला परिणाम जाँचल जाए: नागरिकक धार्मिक स्वतंत्रता सुरक्षित अछि की नहि, राज्य पक्षपात करेत
अछि की नहि, आ संस्था भीतर कमजोर सदस्यक अधिकार बचैत अछि की नहि। औपचारिक दूरी वास्तविक
समानता सुनिश्चित नहि Hea |
56.7 धार्मिक स्वतंत्रताक सीमा
विश्वासक आन्तरिक स्वतंत्रता व्यापक अछि; बाहरी आचरण दोसरक अधिकार, स्वास्थ्य वा सार्वजनिक
व्यवस्था प्रभावित करि सकैत अछि। सीमा वास्तविक हानि, अनुपातिकता आ न्यूनतम प्रतिबन्धक आधारपर
हो। केवल बहुमतक असुविधा हानि नहि।
राज्य धार्मिक सिद्धान्तक सत्य तय नहि करय, मुदा कानून लागू करैत समय प्रथाक सामाजिक प्रभाव जाँचि
सकैत अछि। प्रतिबन्ध समान कसौटीपर, पारदर्शी कारणसहित आ अपीलयोग्य हो।
56.8 संस्था भीतर असहमति
धार्मिक संस्थाक स्वायत्तता सामूहिक स्वतंत्रताक अंग अछि। मुदा सदस्य, स्त्री, बालक वा निम्न पदक व्यक्ति
अधिकारहीन नहि। “आन्तरिक मामला” कहि हिंसा, सम्पत्ति-दुरुपयोग वा नागरिक भेदभाव छिपाओल नहि
जाए।
हस्तक्षेप सावधान हो, कारण बाहरी सत्ता धार्मिक अल्पमतकें अनुचित eae नियंत्रित करि सकैत अछि। स्पष्ट
हानि, समान कानून, स्वतंत्र जाँच आ समुदाय भीतरक सुधारक आवाजक सुरक्षा आवश्यक।
56.9 सार्वजनिक कारण
नागरिक अपन धार्मिक प्रेरणासँ नीति समर्थन कऽ सकैत छथि, मुदा बाध्यकारी कानून लेल एहन कारण सेहो
देथि जे भिन्न विश्वासवला नागरिक समझि आ जाँचि सकथि। सार्वजनिक कारण धार्मिक भाषा निषिद्ध करब
नहि, साझा औचित्य जोड़ब अछि।
सभ विवाद पूर्ण सहमति धारि नहि पहुँचत। प्रक्रिया निष्पक्ष, प्रमाण खुलल आ अधिकार सुरक्षित रहय। बहुमत
निर्णय सम्भव, मुदा अल्पमतक गरिमा आ पुनर्विचारक मार्ग बनल रहत।
56.10 प्रतीक, विद्यालय आ नागरिक समानता
विद्यालयमे धार्मिक प्रतीक वा शिक्षा सम्बन्धी विवाद पहचान, बालकक स्वतंत्रता, अभिभावकक अधिकार आ
राज्यक तटस्थता जोड़ैत अछि। एक सिद्धान्त सभ प्रसंग समाधान नहि करैत।
शिक्षा तुलनात्मक ज्ञान दे सकैत, धर्मोपदेश अलग विषय। बालके आलोचनात्मक सोच, अपन परम्परा बुझब
आ विकल्पक सम्मान सिखाओल जाए। नीति कोनो समुदायकें कलंकित नहि करय।
अध्याय-निष्कर्ष
धर्मक रक्षा राज्य करय--धार्मिक स्वतंत्रताक रक्षा द्वारा; कोनो धर्मक प्रभुत्व नहि। समानान्तर दर्शनक सूत्र
अछिः व्यक्तिगत आस्था स्वतंत्र, सामुदायिक धर्म सम्मानित, राज्यक विधि समान नागरिक गरिमासँ बन्धल।
अध्याय-ग्रन्थसूचौ
John Locke — A Letter Concerning Toleration.
John Rawls — Political Liberalism.
B. R. Ambedkar — States and Minorities; चयनित भाषण.