इतिहास केवल जे घटल तकर सूची नहि। इतिहास स्रोत चयन अछि, अभिलेखक प्रश्‍न अछि, व्याख्या अछि, मौनक अध्ययन अछि। जे घटना घटल, ओकर सभ प्रमाण समान रूपसँ बचि नहि रहैत अछि। राजदरबारक दस्तावेज सुरक्षित रहि सकैत अछि, मुदा खेतिहर मजदूरक अनुभव नहि; पुरुषक वंशावली लिखल जा सकैत अछि, स्त्रीक श्रम मौखिक स्मृतिमे रहि सकैत अछि; विजेताक आदेश अभिलेखागारमे भेटि सकैत अछि, पराजित समुदायक पीड़ा गीत, कथा वा स्थानीय स्मृतिमे। तें इतिहासक दार्शनिक प्रश्‍न अछि--हम अतीतकें कोन प्रमाणसँ जानत छी, कोन आवाज अनुपस्थित अछि, आ अनुपस्थितिक अर्थ कोना निकालब? 61.1 घटना, स्रोत आ इतिहास घटना आ इतिहास एक वस्तु नहि। घटना अतीतमे घटैत अछि; इतिहास वर्तमानमे उपलब्ध प्रमाणक आधारपर ओकर पुननिर्माण अछि। ई पुननिर्माण मनमाना नहि हो सकैत, कारण दस्तावेज, तिथि, वस्तुपरक अवशेष, भाषिक साक्ष्य, भूगोल, जनसांख्यिकीय आँकड़ा आ स्वतंत्र स्रोत ओकर सीमा तय करेत अछि। मुदा एकहि प्रमाणसमूहसँ भिन्न प्रश्‍न पूछल जा सकैत अछि। राजस्व-अभिलेख आर्थिक संरचना देखबैत अछि; ओहि अभिलेखमे स्त्रीक घरेलू श्रम शायद नहि देखायत। सेना-अभिलेख युद्धक संख्या देत, मुदा विस्थापित परिवारक अनुभूति नहि। इतिहासक बहुस्तरता एतय सँ आरम्भ होइत अछि। 61.2 स्मृतिः प्रमाण, पहचान आ पुनर्निर्माण स्मृति इतिहासक शत्रु नहि, मुदा इतिहासक पर्याय सेहो नहि। व्यक्तिगत स्मृति चयनात्मक आ पुननिर्माणशील होइत अछि; सामूहिक स्मृति अनुष्ठान, स्मारक, लोककथा, विद्यालय, परिवार आ राजनीतिक भाषण द्वारा आकार पबैत अछि। तँ “लोक कहैत अछि” अपनेआप इतिहासक अन्तिम प्रमाण नहि। प्रश्‍न उठत--एहि स्मृतिक आयु कतेक? प्रसारण कोना भेल? भिन्न संस्करण अछि? स्वतंत्र स्रोत की कहैत अछि? तथापि मौखिक स्मृतिक उपेक्षा सेहो ज्ञानात्मक अन्याय बनि सकैत अछि। जे समुदाय लिखित अभिलेख कम छोड़लक, ओकर इतिहास केवल एहि कारण शून्य नहि। समानान्तर इतिहास-दृष्टि मौखिक इतिहासकें स्रोतक एक पृथक प्रकार मानैत अछि-ओकर बल, सीमा आ प्रसारण-प्रक्रिया स्पष्ट PS | 61.3 अभिलेखक मौन अभिलेखागार केवल बचल कागजक ढेर नहि; सत्ता, प्रशासन, सम्पत्ति आ साक्षरता इतिहासमे की सुरक्षित रहत तकर चयन प्रभावित करैत अछि। ककर जन्म नोंदायल? ककर जमीन नोंदायल? ककर अपराध लिखल? ककर श्रम “स्वाभाविक कर्तव्य” मानि अभिलेखबाह्य रहल? ई प्रश्न देखबैत अछि जे अनुपस्थिति स्वयं ऐतिहासिक समस्या भऽ सकैत अछि। मुदा मौनकें प्रमाण बना कऽ इच्छित कथा गढ़ब समानान्तर दर्शन स्वीकार नहि करेत अछि। “एतय अभिलेख नहि, f अवश्य एहन भेल” तर्क त्रुटिपूर्ण अछि। उचित तरीका अछि--मौन चिन्हू, सम्भावित कारण प्रस्तावित करू, वैकल्पिक स्रोत खोजू, आ अनिश्चितता स्पष्ट राखू। 61.4 आधिकारिक इतिहास आ प्रतिहistory आधिकारिक इतिहासक आलोचना आवश्यक भऽ सकैत अछि, मुदा प्रत्येक प्रतिह।$07 स्वतः सत्य नहि। राज्यीय ग्रन्थ पक्षपाती भऽ सकैत अछि; विरोधी pamphlet सेहो। राजकीय अभिलेख शक्ति-संरचना देखबेत अछि; लोकगीत पीड़ा व्यक्‍त करैत अछि; पुरातत्त्व भौतिक प्रतिरोध दैत अछि; भाषाविज्ञान दीर्घकालिक परिवर्तन देखबैत अछि। मजबूत इतिहास एहि स्रोतसभक पारस्परिक परीक्षणसँ बनेत अछि। समानान्तर इतिहास-दृष्टि मुख्यधाराकें फेंकैत नहि; ओकर बगलमे छूटल प्रमाण रखैत अछि। एहि अर्थमे समानान्तरता प्रतिस्पर्धी कल्पना नहि--विस्तारित प्रमाणक्षेत्र अछि। 61.5 स्मृति आ नैतिकता किछु स्मृति केवल तथ्यक प्रश्न नहि, न्यायक प्रश्‍न सेहो होइत अछि। हिंसा, जातिगत अपमान, विस्थापन, युद्ध, दमन, भाषा-दमन--एहन घटनाक स्मरण पीड़ित समुदाय लेल गरिमा आ पहचानसँ als सकैत अछि। मुदा नैतिक महत्त्व तथ्य-परीक्षणक स्थान नहि लैत। पीड़ाक सम्मान करेतहुँ तिथि, संख्या, जिम्मेवारी आ कारणक दाबी जाँचल जायत। 61.6 मिथिला आ समानान्तर स्मृति मिथिलाक इतिहासमे राजकीय स्रोत, पञ्जी, शास्त्रीय ग्रन्थ, साहित्य, मौखिक परम्परा, स्त्रीगीत, नदी-स्मृति, प्रवासक कथा, स्थानीय देवस्थल आ आधुनिक अभिलेख अलग-अलग प्रकारक प्रमाण दैत अछि। एहि सभर्के एकहि स्तरपर राखब अनुचित; मुदा केवल संस्कृत ग्रन्थ वा राजकीय दस्तावेजके “इतिहास” मानि आन स्रोत हटायब सेहो अधूरापन। समानान्तर पद्धति स्रोतक श्रेणी स्पष्ट कऽ व्यापक इतिहासक निर्माण चाहैत अछि। पूर्वपक्षः स्मृति जोड़लासँ इतिहास व्यक्तिनिष्ठ नहि भऽ जाएत? उत्तरपक्षः स्मृति जोड़ब इतिहासकें मनमाना नहि बनबैत, जँ स्मृतिक स्रोत-स्वरूप, प्रसारण, विरोधी प्रमाण आ अनिश्चितता स्पष्ट राखल जाए। व्यक्तिनिष्ठ अनुभव ऐतिहासिक तथ्यक एक आयाम हो सकैत अछि; एकमात्र आयाम नहि। 61.12 इतिहासमे कारण घटना बाद घटना क्रमबद्ध करब कारण बतब नहि। कारण लेल प्रत्यक्ष निर्णय, दीर्घ संरचना, अवसर, विचार आ आकस्मिक घटना अलग जाँचल जाए। एक कारण पर्याप्त विरल। प्रतिविकल्प प्रश्‍न उपयोगी: जँ ई कारण नहि रहैत तँ परिणाम बदलैत की? इतिहासमे प्रयोग सम्भव नहि, मुदा तुलनात्मक प्रसंग आ समकालीन साक्ष्य सम्भावना जाँचि सकैत। अनिवार्यता-पश्चदृष्टि सँ बचल जाए। घटना भेलाक बाद ओ अपरिहार्य लगैत अछि; समकालीन विकल्प आ अनिश्चितता पुनर्निर्मित हो। 61.13 जीवनी आ महापुरुष-कथा जीवनी विचारक निर्णय, सम्बन्ध आ विकास समझबैत अछि, मुदा सम्पूर्ण इतिहास एक व्यक्तिक इच्छा मे घटा नहि सकैत। संस्था, अनुयायी, प्रतिपक्ष आ संसाधन उपलब्धि बनबैत अछि। प्रशंसात्मक जीवनी दोष छिपा सकैत, शत्रुतापूर्ण जीवनी उपलब्धि। निजी पत्र, प्रकाशित कृति आ बादक स्मृति अलग प्रमाणीय स्तर रखैत अछि। व्यक्तिक कथित उद्देश्य परिणामक पूर्ण अर्थ तय नहि करैत। विचारक सामाजिक प्रभाव लेखकक आशयसँ बाहर विकसित हो सकैत अछि। 61.14 पारिवारिक अभिलेखक उपयोग पत्र, वंशावली, भूमि-कागज, डायरी आ फोटो स्थानीय इतिहासक महत्त्वपूर्ण स्रोत। मुदा परिवार प्रतिष्ठा बचेबाक कारण चयन करि सकैत अछि। तिथि, लेखक आ स्वामित्व सत्यापित हो। निजी सामग्री प्रकाशित करैत गोपनीयता, जीवित व्यक्तिक सहमति आ संवेदनशील जानकारीक हानि जाँचल जाए। इतिहासक हित असीम अधिकार नहि। डिजिटल प्रतिलिपि मूल संरक्षणक विकल्प नहि। मेटाडेटा, क्रम आ भौतिक विशेषता दस्तावेजित हो। 61.15 पूर्वपक्षः इतिहास विजेताक कथा मात्र सत्ता अभिलेख आ पाठ्यक्रम नियंत्रित करेत अछि; तेँ इतिहासकें पूर्णतः विजेताक कथा कहल जाइत। ई चेतावनी उपयोगी, मुदा “मात्र? शब्द अनुसन्धानक सम्भावना नष्ट करेत अछि। विरोधी स्रोत, भौतिक अवशेष, प्रशासनिक असंगति आ लोकस्मृति आधिकारिक कथा ch चुनौती दऽ सकैत। इतिहासकार स्वयं संस्था भीतर रहितो पद्धतिगत पारदर्शिता बनाबि सकैत। वस्तुगतता पूर्ण सत्ता-मुक्तता नहि, स्रोत खोलब, आलोचना स्वीकारब आ निष्कर्ष संशोध्य रखब अछि। 61.7 Gide निकटता आ स्वतंत्रता घटनाक निकट स्रोत मूल्यवान, मुदा निकटता निष्पक्षता नहि। सहभागी अधिक जानि सकैत अछि, संगहि अपन भूमिका बचा सकैत। बादक स्रोत दूरीसँ व्यापक चित्र दे सकैत, मुदा स्मृति आ वर्तमान हितसँ प्रभावित होइत। स्रीतसभक परस्पर स्वतंत्रता जाँचल जाए। दस पुस्तक जँ एकहि अपुष्ट कथन दोहरबैत अछि तेँ दस प्रमाण नहि। उद्धरण-श्रंखला मूल बिन्दु धरि खोजल जाए। 61.8 अभिलेखक निर्माण अभिलेख स्वतः बाँचल अतीत नहि; कियो दस्तावेज बनौलक, संस्था चुनलक की सुरक्षित हो, आ बादक सम्पादक वर्गीकृत कएलक। जे लिखि नहि सकल वा जकर कागज नष्ट भेल, ओकर इतिहास कमजोर देखाइत अछि। अभिलेखक मौन कल्पनासँ भरल नहि जाए। मौनक सम्भावित कारण लिखल जाए, अन्य स्रोत खोजल जाए, आ निष्कर्षक विश्वास-स्तर स्पष्ट हो। अनुपस्थिति प्रश्‍न खोलैत अछि, मनचाहा उत्तर नहि। 61.9 मौखिक इतिहास आ सामूहिक स्मृति मौखिक इतिहास घटना संग अनुभूत अर्थ, भय आ समुदायिक पहिचान vasa अछि। स्मृति क्रम बदलि सकैत, प्रतीक जोड़ि सकैत, मुदा एहि कारण मूल्यहीन नहि। साक्षात्कारक प्रश्‍न, स्थान, सम्बन्ध आ रिकॉडिंगक शर्त उत्तर प्रभावित करैत अछि। अनेक साक्ष्य, दस्तावेज आ भौतिक VATE तुलना कएल जाए। भिन्नता छिपाओल नहि, विश्लेषित कएल जाए। 61.10 स्मारक आ सार्वजनिक विस्मरण स्मारक केवल अतीत बतबैत नहि; वर्तमान समाज तय करैत अछि ककरा आदर्श मानल जाए। सार्वजनिक नामकरण विजेता, शासक वा अभिजनकें केन्द्रित करि साधारण श्रम अदृश्य करि सकैत अछि। स्मारक हटायब, संदर्भ जोड़ब वा नूतन स्मारक बनायब--सभ विकल्पक लाभ-हानि अछि। निर्णय इतिहासकार, प्रभावित समुदाय आ नागरिक विचार-विमर्शसँ हो; हिंसक अतीतकें महिमामण्डित नहि, दस्तावेजित कएल जाए। 61.11 इतिहासक नैतिक भाषा इतिहासकार अत्याचारक वर्णन करैत समय पीड़ितक गरिमा राखय, मुदा नैतिक शब्दसँ पूर्ण बचब तटस्थता नहि। “हत्या के “घटना” Hed सत्ता-पक्षीय लघुकरण भऽ सकैत अछि। नैतिक निर्णय स्रोत-सम्मत आ अवधारणात्मक रुपसँ स्पष्ट हो। आजक पद अतीतपर लगबैत समय कालभ्रमक सीमा बताओल जाए। समझब औचित्य देब नहि। अध्याय-निष्कर्ष