Full chapter text
कृत्रिम बुद्धि गणना, भाषा, चित्र, निर्णय-सहायता आ ज्ञान-संगठनक नूतन साधन अछि। मुदा मशीन द्वारा उत्तर
उत्पन्न भेला सँ नैतिक उत्तरदायित्व मशीनपर स्वतः नहि चलि जाइत अछि। मूल प्रश्न अछि--ककर डेटा?
ककर पूर्वग्रह? ककर लक्ष्य? गलती भेल तेँ उत्तरदायी के? मानवीय निर्णयक कोन क्षेत्र पूर्ण स्वचालनक योग्य
नहि? समानान्तर दर्शनक सिद्धान्त अछि--तकनीकी क्षमता नैतिक अनुमति नहि।
63.1 साधन, अभिकर्ता आ उत्तरदायित्व
कृत्रिम बुद्धि प्रणाली जटिल निर्णय उत्पन्न HS सकैत अछि, मुदा कानूनी, संस्थागत आ नैतिक उत्तरदायित्वक
संरचना मनुष्य आ संस्थासभ तय करैत अछि। 'एल्गोरिदम निर्णय लेलक” कहि कऽ संस्था अपन जिम्मेवारी
समाप्त नहि कऽ सकैत। कोन डेटा चुनल गेल, कोन लक्ष्य निर्धारित भेल, कोन जोखिम स्वीकारल गेल, कोन
मानव समीक्षा राखल गेल--ई सभ मानवीय निर्णय अछि।
63.2 डेटा तटस्थ नहि
प्रशिक्षण-डेटा समाजक इतिहाससँ अबैत अछि। जँ इतिहासमे भेदभाव अछि तँ डेटा ओकर छाप AS सकैत
अछि। मुदा 'डेटामे पूर्वग्रह अछि? कहि सभ सांख्यिकीय अन्तरकेँ अन्याय मानब सेहो सरलता अछि। प्रश्न
अछि--डेटा प्रतिनिधिक अछि? वर्गीकरण उचित अछि? लक्ष्य-चर नैतिक Sue वैध अछि? त्रुटि ककरा बेसी
नुकसान पहुँचबैत अछि? प्रणालीक परिणाम स्वतंत्र परीक्षणमे कतेक टिकैत अछि?
63.3 व्याख्येयता आ अपील
जतय कृत्रिम बुद्धिक निर्णय नौकरी, ऋण, शिक्षा, स्वास्थ्य, न्याय वा सार्वजनिक लाभ प्रभावित करेत अछि,
ओतय प्रभावित व्यक्तिके कारण बुझबाक, त्रुटि सुधारबाक आ मानवीय समीक्षा माँगबाक अवसर चाही।
“मॉडल एहन कहल” पर्याप्त सार्वजनिक कारण नहि। तकनीकी जटिलता जवाबदेहीक विकल्प नहि।
63.4 स्वचालनक सीमा
किछु कार्य नियमित गणना, वर्गीकरण वा खोजक लेल उपयुक्त हो सकैत अछि। मुदा जे निर्णय गरिमा,
सहमति, दण्ड, जीवन-मृत्यु, जटिल सामाजिक सन्दर्भ अथवा नेतिक विवेक माँगैत अछि, ओतय पूर्ण स्वचालन
विशेष सावधानी Arita अछि। दक्षता एक मूल्य अछि; न्याय, करुणा, पारदर्शिता आ अपील सेहो मूल्य छथि।
63.5 कृत्रिम बुद्धि आ ज्ञान
भाषिक प्रणाली प्रभावशाली उत्तर देत, मुदा प्रभावशाली भाषा सत्यताक प्रमाण नहि। ओ स्रोत गढ़ि सकैत
अछि, प्रसंग WAS HS सकैत अछि, अनिश्चित तथ्यकेँ निश्चित स्वरमे कहि सकैत अछि। तेँ ALS
सामग्रीकेँ स्रोत नहि, सहायक प्रस्ताव मानि स्वतंत्र प्रमाणसँ जाँचबाक आवश्यकता अछि--विशेषतः इतिहास,
कानून, चिकित्सा, विज्ञान आ सार्वजनिक नीति मे।
63.6 सृजनशीलता आ लेखकीय उत्तरदायित्व
कृत्रिम बुद्धि लेखन, चित्र, संगीत आ अनुवादमे सहयोग देत। मुदा लेखकीय उत्तरदायित्व समाप्त नहि। कृति
प्रकाशित करयवला व्यक्ति वा संस्था तथ्य, उद्धरण, अधिकार, सहमति आ परिणाम लेल जिम्मेदार रहत।
साधन बदलैत अछि; उत्तरदायित्वक प्रश्न रहैत अछि।
63.7 भाषा, असमानता आ Al
प्रमुख भाषासभक विशाल डिजिटल सामग्री मॉडलकें अधिक समर्थ बना सकैत अछि, जखन मैथिली-जकाँ
भाषासभ कम संसाधन कारण कमजोर प्रतिनिधित्व पबैत अछि। ई केवल तकनीकी समस्या नहि; भाषिक
न्यायक प्रश्न अछि। स्थानीय कॉर्पस निर्माण, खुला लाइसेंस, गुणवत्तापूर्ण सम्पादन, विविध लिपि समर्थन आ
समुदाय-भागीदारी आवश्यक अछि। मुदा डेटा-संग्रहमे गोपनीयता आ सहमति सेहो महत्त्वपूर्ण।
63.8 मनुष्यक गरिमा
एहि ग्रन्थक कसौटी स्पष्ट अछि-मनुष्यक गरिमा, गोपनीयता, स्वायत्तता आ उत्तरदायित्व तकनीकी दक्षतासँ
ऊपरक कसौटी रहत। एहन प्रणाली जे अत्यन्त प्रभावी हो मुदा व्यक्तिकें केवल आँकड़ा-बिन्दुमे घटा दे, ओकर
नैतिक समीक्षा आवश्यक अछि।
पूर्वपक्षः यदि Al मनुष्यसँ बेहतर निर्णय लैत अछि तँ मानव समीक्षा अनावश्यक किएक नहि?
उत्तरपक्षः बेहतर? कोन मापदण्डपर? औसत शुद्धता महत्त्वपूर्ण अछि, मुदा अधिकार, अपील, दुर्लभ
परिस्थिति, मूल्य-संघर्ष आ जिम्मेवारी अलग प्रश्न छथि। उच्च प्रदर्शन नैतिक वैधताक पूर्ण प्रमाण नहि।
63.14 स्वचालित वर्गीकरण आ अपील
प्रणाली व्यक्ति ch जोखिम, योग्यता वा प्राथमिकताक श्रेणीमे रखैत अछि। श्रेणी सम्भाव्यता होइतहुँ अधिकारी
ओकरा निश्चित सत्य मानि सकैत। गलत वर्गीकरण सेवा, ऋण वा स्वतंत्रतापर गम्भीर प्रभाव दैत अछि।
प्रभावित व्यक्ति जानथि जे स्वचालित साधन उपयोग भेल, मुख्य कारण की, डेटा सुधार कोना, आ मानव
अपील कतय। व्यापारिक गोपनीयता मूल न्यायिक कारण छिपेबाक पूर्ण आधार नहि।
अपीलक सफलता मापल जाए। केवल ईमेल-पता हो, मुदा निर्णय बदलयक अधिकार नहि, ते प्रक्रिया
प्रतीकात्मक।
63.15 मानवीय रूप देबाक भ्रम
प्रवाही भाषा वा चेहरा देखिकऽ उपयोगकर्ता प्रणालीमे समझ, इच्छा आ करुणा मानि सकैत अछि। व्यवहार
मानवीय-जकाँ होयब आ सचेत अनुभव होयब अलग दाबी। वर्तमान प्रदर्शनसँ अन्तःचेतना स्वतः सिद्ध नहि।
मानवीकरण भावनात्मक निर्भरता, निजी जानकारी साझा करब आ गलत विश्वास बढ़ा सकैत अछि। प्रणाली
अपन सीमा, गैर-मानवीय स्वरूप आ जोखिम स्पष्ट करय।
दार्शनिक Soe मशीन-चेतनाक सम्भावना खुलल प्रशन रहि सकैत, मुदा नीति वर्तमान प्रमाण आ वास्तविक
क्षमता पर बने, कल्पना पर नहि।
63.16 दक्षता आ अपमान
स्वचालन प्रतीक्षा घटा सकैत, मुदा शोक, स्वास्थ्य वा न्यायजकाँ प्रसंगमे मानवीय सुनवाईक अभाव
अपमानजनक हो सकैत अछि। सेवा केवल परिणाम नहि, व्यवहार सेहो।
सभ काममे मानव अनिवार्य रखब महँगा आ धीमा। उच्च प्रभाव, असामान्य स्थिति आ विवादक मामिलामे
सहज मानव मार्ग हो; सामान्य कार्य स्वचालित भऽ सकैत।
दक्षताक गणनामे त्रुटि सुधार, बहिष्कृत उपयोगकर्ता आ भरोसाक लागत जोड़ल जाए। समय बचत एकमात्र
मूल्य नहि।
63.17 पूर्वपक्षः अधिक सक्षम प्रणाली स्वयं उत्तरदायी होयत
जँ प्रणाली योजना, भाषा आ अनुकूलन करैत अछि, तँ ओकरा अभिकर्ता मानि दोष देबाक विचार उठैत अछि।
मुदा उत्तरदायित्व दण्ड-बोध, कारण बुझब, नियम मानब आ प्रतिकारक क्षमता माँगैत अछि।
कानूनी व्यक्तित्व तकनीकी नीति हो सकैत, नैतिक चेतना सिद्ध नहि। निर्माता, लागूकर्ता, मालिक आ
निर्णयकर्ताक जिम्मेदारी मशीनक नामपर गायब नहि हो।
भविष्यक क्षमता बदलला पर प्रश्न पुनः जाँचल जाए। एखन संस्थागत उत्तरदायित्व स्पष्ट करब अधिक
सुरक्षित।
63.9 निर्णय-सहायता आ निर्णय-अधिकार
कृत्रिम बुद्धि विकल्प छाँटि, नमूना देखाबि वा पूर्वानुमान दे सकैत अछि। मुदा सिफारिश ककर लक्ष्य, कोन डेटा
आ कोन त्रुटि-मूल्यपर बनल से मानवीय निर्णयकर्ता बुझथि। साधनक गति उत्तरदायित्व स्थानान्तरित नहि
करेत।
उच्च जोखिम क्षेत्रमे अन्तिम निर्णय अर्थपूर्ण मानवीय समीक्षा माँगैत अछि-केवल मुहर नहि। समीक्षकक
समय, अधिकार आ प्रणाली बदलबाक क्षमता हो।
63.10 पक्षपातक अनेक स्रोत
पक्षपात डेटा भीतरक पुरान भेदभाव, नमूना-अभाव, लक्ष्य-चयन, लेबल, मापन वा लागू करबाक प्रसंगसँ
उत्पन्न भऽ सकैत अछि। केवल "डेटा साफ” Hes पर्याप्त नहि।
समूह-अनुसार त्रुटि, प्रभावित अनुभव आ निर्णयक परिणाम जाँचल जाए। पूर्ण समानता कखनो अलग मापमे
परस्पर टकरा सकैत; नैतिक प्राथमिकता सार्वजनिक STs तय हो।
63.11 व्याख्येयता आ कारण
मॉडल कोन विशेषता कारण परिणाम देलक से बतब आवश्यक, विशेषत: ऋण, रोजगार वा स्वास्थ्य जकाँ
SAA सामान्य तकनीकी विवरण प्रभावित व्यक्तिक अपील लेल पर्याप्त नहि।
व्याख्या निर्णय-विशिष्ट, बुझब योग्य आ प्रतिवादयोग्य हो। पूर्वानुमानक सहसम्बन्धकें कारण मानि नीति बनब
जोखिमपूर्ण। व्याख्येयता सत्यताक गारंटी नहि, उत्तरदायित्वक शर्त अछि।
63.12 श्रम, सृजन आ श्रेय
कृत्रिम बुद्धि प्रणालीक पाछाँ डेटा-संग्रह, लेबलिंग, लेखन, चित्र आ संगणकीय श्रम अछि। “स्वचालित” शब्द
एहि मानवीय योगदानकें अदृश्य करि सकैत अछि।
सृजनात्मक उपयोगमे स्रोत-अधिकार, सहमति, श्रेय आ आजीविकाक प्रश्न उठैत अछि। नूतन रचना आ
अनुचित अनुकरणक सीमा विधि, तकनीक आ नैतिक संवादसँ स्पष्ट हो; केवल बाजारक शक्ति निर्णय नहि
करय।
63.13 मैथिली आ प्रतिनिधित्व
कम डिजिटल सामग्रीवला भाषामे प्रणालीक त्रुटि अधिक भऽ सकैत, आ मानक रूप बाहरक बोली अदृश्य हो
सकैत अछि। गलत अनुवाद प्रशासन वा स्वास्थ्यमे वास्तविक हानि दऽ सकैत अछि।
समुदाय-सम्मत डेटा, भाषाविद् समीक्षा, बोली-विविधता आ सार्वजनिक परीक्षण आवश्यक। भाषा-संग्रहक
सहमति आ लाभ-वितरण स्पष्ट हो। डिजिटल उपस्थितिक नामपर सांस्कृतिक सामग्री मुक्त संसाधन नहि।