B. R. Ambedkar — Constituent Assembly Speeches; Writings and Speeches. Elinor Ostrom — Governing the Commons. Amartya Sen — The Idea of Justice. अध्याय ७१ - धर्मक विवेकपूर्ण बहुलता समानान्तर धर्म-दर्शन नास्तिकताकें नैतिक शून्यता नहि मानेत अछि, आ आस्थाकें अन्धविश्वासक पर्याय सेहो नहि। विवेकपूर्ण बहुलताक अर्थ अछि--भिन्न धार्मिक आ गैर-धार्मिक जीवन-दृष्टि समान नागरिक गरिमा संग सहअस्तित्व करथि, मुदा सार्वजनिक बाध्यता लेल साझा औचित्यक कसौटी लागू हो। 69.1 तीन स्वतंत्रता धार्मिक स्वतंत्रताक कमसँ कम तीन अंग अछि: अपन आस्था मानबाक अधिकार; आस्था बदलबाक अधिकार; कोनो आस्था नहि मानबाक अधिकार। एहि तीनमे सँ एक हटला पर धार्मिक स्वतंत्रता अधूरी रहत। 69.2 तीन क्षेत्र विवेकपूर्ण बहुलता धार्मिक जीवनकें तीन क्षेत्रमे देखैत अछि। पहिल, निजी अन्तःकरण--एतय स्वतंत्रता अधिकतम। दोसर, स्वैच्छिक धार्मिक समुदाय--एतय स्वतंत्रता संग सदस्यक अधिकार आ बाहर निकलबाक अवसर आवश्यक। तेसर, राज्यक कानून--एतय समान नागरिकता सर्वोपरि। 69.3 सार्वजनिक कारण व्यक्ति कहि सकैत अछि--“हमर धर्म एहि कर्मके निषिद्ध मानैत अछि”, आ अपन जीवन तदनुसार चला सकैत अछि। मुदा सभ नागरिकपर दण्डात्मक कानून थोपबाक लेल एतबे पर्याप्त नहि। सार्वजनिक कानूनक कारण एहन हो जे भिन्न आस्था वा अनास्था रखयवला नागरिक सेहो ओकर तर्क बुझि आ जाँचि सकथि। 69.4 धर्मक सामाजिक योगदान धर्म अर्थ, समुदाय, करुणा, सेवा, अनुशासन, कला, स्मृति आ आशा दे सकैत अछि। विवेकपूर्ण बहुलता एहि योगदानकें नकारैत नहि। मुदा धार्मिक संस्था सेहो सत्ता, सम्पत्ति, लिंग, जाति वा अनुशासनक अन्याय उत्पन्न कऽ सकैत अछि। सम्मान आलोचनासँ मुक्ति नहि। 69.5 धर्मनिरपेक्षता राज्यक तटस्थता धर्मविरोध नहि। तटस्थताक अर्थ सभ धर्म आ अनास्थाक समान नागरिक स्वतंत्रता, बिना कोनो एक आध्यात्मिक aac राजकीय विशेषाधिकार। राज्य धर्मक रक्षा करय-_अर्थात्‌ स्वतंत्रता आ सुरक्षा; कोनो धर्मक प्रभुत्व नहि। 69.6 संवाद आ सत्य-दाबी बहुलता कहैत नहि जे सभ धार्मिक दाबी समान STS सत्य। परस्पर विरोधी तत्त्वमीमांसीय दाबी एकहि अर्थमे सभ सत्य नहि भऽ सकैत। बहुलताक राजनीतिक अर्थ सत्य-दाबी छोड़ब नहि; असहमति बीच हिंसा, दमन वा असमान नागरिकता अस्वीकारब अछि। 69.7 पूर्वपक्षः बहुलता सत्यक प्रश्न टारैत अछि उत्तरपक्षः सत्य-विमर्श आ नागरिक अधिकार अलग स्तर अछि हम धार्मिक सत्यपर असहमत रहि सकैत छी, तर्क करि सकैत छी, अपन विश्वास बदलि सकैत छी। मुदा नागरिक अधिकारक आधार कोन धर्म सत्य अछि एहि निर्णयपर निर्भर नहि zea एहि विभाजनसँँ सत्य- विमर्श जीवित रहैत अछि आ राजनीतिक दमन सीमित होइत अछि। 69.13 धर्मक आलोचनाक अधिकार धार्मिक विचार, ग्रन्थ आ संस्था सार्वजनिक आलोचना योग्य। श्रद्धा आलोचना रोकबाक अधिकार नहि दैत। मुदा वयक्तिक अपमान, सामूहिक दोषारोपण आ हिंसक धमकी विचार-आलोचना नहि। भेद विषय, भाषा, लक्ष्य आ शक्ति अनुसार जाँचल जाए। तीक्ष्ण व्यंग्य अपमानजनक लगि सकैत, तथापि कानूनक सीमा प्रत्यक्ष हानि पर हो। धार्मिक समुदाय उत्तर लेख, बहस आ शांतिपूर्ण विरोध करि सकैत। असहमतिक उत्तर हिंसा नहि। राज्य समान सुरक्षा दे। 69.14 अन्तर्धार्मिक विवाह विवाह व्यक्तिक जीवन-निर्णय, परिवारिक सम्बन्ध आ धार्मिक समुदायक निरन्तरता सँ St अछि। वयस्कक स्वतंत्र सहमति केन्द्रमे रहय। समुदायिक अप्रसन्नता कानूनी निषेधक पर्याप्त कारण नहि। दबाव, छल वा हिंसा आरोपक निष्पक्ष जाँच हो; केवल भिन्न धर्म कारण संदेह नहि। जोड़ीक सुरक्षा आ गोपनीयता आवश्यक। बालकक पालन, अनुष्ठान आ उत्तराधिकार Faas तय हो। राज्य एक धर्मक नियम थोपि नहि, समान नागरिक कानूनक सुरक्षा दे। 69.15 समान सम्मान आ सत्यक असमानता लोक समान सम्मानक अधिकारी, मतसभ समान सत्यक नहि। ई भेद बहुलताक केन्द्र अछि। गलत मत रखनिहार व्यक्ति नागरिक दर्जा नहि गमबैत। मतक मूल्यांकन प्रमाण, संगति आ नैतिक परिणामसँ हो। व्यक्तिक सुरक्षा अचल, विचारक आलोचना खुलल। संवादमे ‘sel गलत छी? कहब सम्भव, “A अहाँक अधिकार कम” नहि। सत्य-खोज आ लोकतान्त्रिक समानता एतय संयुक्त होइत अछि। 69.16 पूर्वपक्षः सार्वजनिक कारण स्वयं बहुमतक भाषा साझा कारण कहला पर प्रमुख धर्म वा धर्मनिरपेक्ष अभिजन अपन भाषा “सार्वजनिक” घोषित करि सकैत अछि। अल्पमतक अवधारणा अनुवादमे क्षीण होइत अछि। df सार्वजनिक कारण एक स्थिर शब्दकोश नहि, परस्पर अनुवादक प्रक्रिया। धार्मिक कारण प्रस्तुत हो, संगहि अधिकार आ साझा अनुभवक सम्बन्ध स्पष्ट हो। कुन कारण स्वीकार्य से सत्ता एकतरफा तय नहि करय। खुलल बहस, न्यायिक कसौटी आ समान बोलबाक अवसर सार्वजनिकता बनबैत अछि। 69.8 विवेकपूर्ण बहुलताक आधार स्वतंत्र समाजमे ईमानदार लोक अन्तिम धार्मिक प्रश्‍नपर असहमत रहत, कारण प्रमाण, अनुभव आ व्याख्या जटिल छथि। बहुलता केवल अज्ञानक अस्थायी दोष नहि हो सकैत। एहि तथ्यसँ सत्यक प्रश्‍न समाप्त नहि। प्रत्येक परम्परा कारण दे, आत्मालोचना करय, मुदा राज्य समान नागरिकता बनौने रखय। बल सहमति उत्पन्न नहि करैत। 69.9 धर्म बदलबाक स्वतंत्रता धर्म स्वीकारबाक स्वतंत्रता तखन पूर्ण जखन धर्म बदलय वा छोड़यक स्वतंत्रता सेहो हो। परिवार वा समुदायिक बहिष्कार औपचारिक अधिकारकें निष्प्रभावी करि सकैत अछि। बल, छल आ अनुचित प्रलोभन रोकल जाए, मुदा स्वैच्छिक परिवर्तनकेँ मात्र अप्रियता कारण अपराध नहि बनाओल जाए। व्यक्तिक इच्छा स्वतंत्र आ सूचित अछि की नहि से निष्पक्ष प्रक्रिया जाँचय। 69.10 नास्तिक आ संशयवादीक समानता धर्मबहुलतामे केवल अनेक धर्म नहि, धर्म नहि माननिहार नागरिक सेहो शामिल। नैतिकता धार्मिक पहिचानक अनिवार्य परिणाम नहि; आस्तिक आ नास्तिक दुनू न्यायी वा अन्यायी भऽ सकैत छथि। सार्वजनिक पद, शपथ, शिक्षा वा सेवा कोनो विश्वासक परीक्षा नहि बने। धार्मिक भाषा लेल स्थान रहय, संगहि गैरधार्मिक सार्वजनिक कारणक समान सम्मान। 69.11 संवादमे रुपान्तरण संवादक लक्ष्य केवल अपन मत प्रचार नहि। प्रतिपक्षक WAS अपन व्याख्या बदलि सकय--एहन वास्तविक खुलापन चाही। समझब सहमत होयब नहि। शक्ति-असमानता संवाद farsa अछि। सुरक्षित स्थान, समान समय, अनुवाद आ स्पष्ट विषय आवश्यक। Ulead अपन मानवता सिद्ध करबाक भार नहि देल जाए। 69.12 साझा नैतिक कार्य धर्मसभ सिद्धान्तमे असहमत रहितो भूख, हिंसा, शिक्षा वा पर्यावरणपर सहकार्य कऽ सकैत छथि। साझा कार्य विश्वास निर्माण करैत अछि। सहकार्यक नामपर मतभेद छिपाओल नहि जाए, न सेवा धर्म-स्वीकारक शर्त बनय। लाभार्थीक गरिमा आ स्वतंत्रता प्राथमिक हो। अध्याय-निष्कर्ष धर्मक विवेकपूर्ण बहुलता तीन सूत्र जोडत अछि-अन्तःकरणक स्वतंत्रता, सार्वजनिक कारण, आ समान नागरिकता। ई Ach निजी कोठरीमे बन्द नहि Hea; ओकर सामाजिक जीवन स्वीकारैत अछि, मुदा राजकीय प्रभुत्वक सीमा स्पष्ट करेत अछि। अध्याय-ग्रन्थसूचौ John Locke — A Letter Concerning Toleration. John Rawls — Political Liberalism. Mahatma Gandhi — Hind Swaraj; चयनित धर्म-विषयक लेख. B. R. Ambedkar — The Buddha and His Dhamma.