समस्या फूकोक पुरातत्त्व कथन, विमर्शात्मक गठन, अभिलेख आ ज्ञान-रचनाक नियम वर्णित करैत अछि; मुदा एक ज्ञान-व्यवस्था सँ दोसर व्यवस्था दिस परिवर्तन किएक भेल, एहि प्रश्नक कारणात्मक उत्तर सीमित रहैत अछि। वंशावली (genealogy) एहि सीमा पर अगिला कदम अछि। वंशावली इतिहासक ‘शुद्ध मूल’ खोजैत नहि। ई मानैत अछि जे वर्तमान संस्था, नैतिकता, दण्ड-पद्धति, यौन-वर्गीकरण, सामान्यता वा ज्ञान-श्रेणीक उत्पत्ति बहुधा आकस्मिक संघर्ष, प्रशासनिक प्रयोग, शरीरगत तकनीक, स्थानीय निर्णय, युद्ध, सुधार, विफलता आ पुनर्संयोजन सँ भेल। वंशावलीक प्रेरणा नीत्शेक ‘नैतिकताक वंशावली’ सँ जुड़ल अछि। फूको विशेषतः ‘उद्गम’क एकल, पवित्र, आत्मसमान मूल खोजबाक इतिहासलेखनक विरोध करैत छथि; ओकर बदला वंशक्रम/उत्पत्ति-रेखा (descent) आ उद्भव (emergence)—वंशक्रम/उत्पत्ति-रेखा आ उद्भव/संघर्ष-बिन्दु—जाँचैत छथि। एहि पद्धतिमे शरीर विशेष महत्त्व पबैत अछि। अनुशासन, दण्ड, चिकित्सा, शिक्षा, सैन्य अभ्यास, काम, यौनता आ स्वास्थ्य जकाँ संस्था शरीरकेँ मापैत, प्रशिक्षित करैत, वर्गीकृत करैत आ उपयोगी बनबैत अछि। इतिहास केवल विचारक इतिहास नहि, शरीरपर लिखल अभ्यासक इतिहास सेहो अछि। मुदा वंशावली (genealogy) क उपयोग सेहो जोखिमपूर्ण अछि। कोनो प्रथाक अशुद्ध/हिंसक इतिहास देखाबय मात्रसँ ओकर वर्तमान सत्यता वा नैतिक वैधता स्वतः खण्डित नहि होइत—अन्यथा आनुवंशिक दोष (genetic fallacy) होयत। एहि अध्यायक समस्या ई अछि—फूकोक वंशावली उद्गम-शिकार/मूल-खोज (origin-hunting) सँ कोना अलग? वंशक्रम (descent), उद्भव (emergence), आकस्मिकता (contingency), संघर्ष (struggle), शरीर (body), सत्ता (power) आ ‘वर्तमानक इतिहास (history of the present)’ क अर्थ की? आ समानान्तर इतिहास-दृष्टि एहि पद्धतिसँ की ग्रहण करैत अछि, की सीमा लगबैत अछि? मूल प्रतिपादन वंशावलीक मूल प्रतिपादन ई अछि जे वर्तमान संस्था/अवधारणाकेँ अपरिहार्य, प्राकृतिक वा एकरेखीय प्रगतिक परिणाम मानब गलत हो सकैत अछि। ओकर इतिहास बहुधा आकस्मिक मोड़, संघर्ष, सत्ता-संबंध आ उपयोगक परिवर्तन सँ बनल होइत अछि। वंशक्रम/उत्पत्ति-रेखा (descent) कोनो शुद्ध वंश नहि, बल्कि अवधारणा/अभ्यासमे मिलल-जुलल, असंगत आ अप्रत्याशित स्रोतसभ खोजैत अछि। उद्भव (emergence) ओ संघर्ष-बिन्दु जाँचैत अछि जतऽ शक्ति-संबंधक अस्थायी विन्यास सँ नूतन प्रथा वा श्रेणी उभरैत अछि। वंशावली ‘वर्तमानक इतिहास’ (history of the present) लिखैत अछि—वर्तमान प्रश्नसँ प्रेरित भऽ अतीतकेँ एहन रूपमे जाँचैत अछि जे वर्तमान व्यवस्था प्राकृतिक/अनिवार्य न देखाइ, ओकर ऐतिहासिक बनावट स्पष्ट हो। समानान्तर दर्शन एहि आकस्मिकता-सचेत (contingency-aware) इतिहासकेँ स्वीकारैत अछि, मुदा स्पष्ट करैत अछि: ऐतिहासिक आकस्मिकता = वर्तमान असत्यता नहि; सत्ता-संबंध = तथ्यक मनमानापन नहि; उत्पत्ति-इतिहास = नैतिक निष्कर्षक सम्पूर्ण प्रमाण नहि। प्रमुख तर्क पहिल तर्क—वंशावली उद्गम/मूल (origin) क खोजक विरोध करैत अछि जखन उद्गमकेँ शुद्ध सार, स्थायी पहचान अथवा इतिहासक पूर्वनिर्धारित बीज मानल जाए। वास्तविक आरम्भ बहुधा असमान, संघर्षपूर्ण आ अपवित्र होइत अछि। दोसर तर्क—वंशक्रम/उत्पत्ति-रेखा (descent) मिश्रित उत्तराधिकार जाँचैत अछि। कोनो संस्था एक विचारक योजना मात्र नहि; कानून, चिकित्सा, सेना, अर्थव्यवस्था, धर्म, प्रशासन, तकनीक आ लोक-अभ्यासक अनेक धारा मिलि सकैत अछि। तेसर तर्क—उद्भव (emergence) शक्ति-संबंधक संघर्ष-बिन्दु अछि। नूतन श्रेणी वा संस्था जखन उभरैत अछि, ओकरा एकल लेखक/कारणमे समेटल नहि जाए; प्रतिस्पर्धी शक्तियाँ (competing forces), स्थानीय प्रथाएँ (local practices) आ संस्थागत अवसर (institutional opportunities) जाँचल जाए। चारिम तर्क—आकस्मिकता (contingency)क अर्थ कारणहीनता नहि। घटना कारण रखैत अछि, मुदा ई कारणसभ एहन संयोजन बनबैत जे अपरिहार्य नहि छल; छोट मोड़, विफल नीति वा स्थानीय प्रयोग अन्य दिशा सम्भव बनबैत। पाँचम तर्क—वंशावली ‘इतिहासक वर्तमान उपयोग’ स्वीकारैत अछि। शोधक वर्तमान समस्या—जेल, यौनता, मानसिक रोग, निगरानी (surveillance), शिक्षा—सँ प्रश्न उठबैत अछि; मुदा स्रोतकेँ वर्तमान निष्कर्षक अनुसार मोड़ब नैतिक रूपेँ अस्वीकार्य। छठम तर्क—शरीर इतिहासक दस्तावेज बनैत अछि। देह-भंगिमा (posture), समय-सारिणी (timetable), अभ्यास (drill), आहार (diet), दण्ड (punishment), चिकित्सकीय परीक्षण (medical examination), यौनता-नियमन (sexuality regulation) आ कार्य-दिनचर्या (work routine) द्वारा सत्ता शरीरक क्षमता/आदत बदलि सकैत अछि। सातम तर्क—अनुशासन दमन मात्र नहि; ओ ‘अनुशासित/आज्ञाकारी शरीर (docile bodies)’—प्रशिक्षित, मापयोग्य, उपयोगी आ नियंत्रित शरीर—उत्पन्न करि सकैत अछि। एहि उत्पादक पक्ष सँ आधुनिक सत्ता कानून/दण्डसँ अधिक सूक्ष्म बुझाइत अछि। आठम तर्क—वंशावली विचारधाराक सरल पर्दाफाश नहि। फूकोक प्रश्न ‘असल हित ककर लुकल अछि?’ मात्र नहि; ओ प्रथा (practice), संस्था (institution), ज्ञान (knowledge) आ सत्ता (power) क जटिल परस्परता खोजैत अछि। नवम तर्क—वंशावली वर्तमान श्रेणीक प्राकृतिकता पर प्रश्न उठबैत अछि। ‘अपराधी (criminal)’, ‘सामान्य (normal)’, ‘विचलित (deviant)’, ‘यौन पहिचान (sexual identity)’, ‘जोखिम-समूह (risk group)’ जकाँ श्रेणी ऐतिहासिक रूपेँ बदलि सकैत अछि। दसम तर्क—मुदा सामाजिक रूपेँ निर्मित श्रेणी वास्तविक परिणाम पैदा करैत अछि। सामाजिक रूपेँ निर्मित श्रेणी (constructed category) ‘केवल कल्पना’ नहि; कानून, संस्था, कलंक (stigma), अधिकार, सेवा आ आत्म-पहिचान पर असर डालि सकैत अछि। एगारहम तर्क—वंशावली प्रगति-कथाकेँ संशय सँ देखैत अछि। सुधार वास्तविक लाभ दे सकैत अछि; साथे नूतन नियन्त्रण तकनीक सेहो उत्पन्न करि सकैत अछि। दण्डक मानवीकरण = केवल स्वतंत्रता, एहन सरल निष्कर्ष नहि। पूर्वपक्ष पूर्वपक्षक पहिल रूप कहैत अछि जे वंशावली निरन्तरता (continuity) आ संचयी अधिगम (cumulative learning) कम आँकैत अछि। विज्ञान, कानून, शिक्षा वा अधिकारक इतिहासमे वास्तविक प्रगति सेहो अछि; सभ किछु संघर्ष/आकस्मिकता नहि। दोसर पूर्वपक्ष आनुवंशिक दोषक अछि—किसी अवधारणाक संदिग्ध उत्पत्ति देखाबय सँ ओकर वर्तमान सत्य वा वैधता खण्डित नहि। तेसर पूर्वपक्ष कारणात्मक इतिहास (causal history) सँ अछि—वंशावली (genealogy) क भाषा सत्ता (power), संघर्ष (struggle), उद्भव (emergence) पर बल दैत अछि, मुदा आर्थिक, तकनीकी, पारिस्थितिक (ecological), जनसांख्यिक (demographic) कारणक स्पष्ट वजन कम दे सकैत अछि। चारिम पूर्वपक्ष सक्रियता (agency) सँ अछि—बहुस्तरीय सत्ता/प्रथा पर बल महान निर्णय, नेतृत्व, आविष्कार, नैतिक साहस आ व्यक्तिगत जिम्मेदारी कम आँकैत अछि। पाँचम पूर्वपक्ष तुलनात्मक इतिहाससँ अछि—भारतीय पंजी, वर्ण/जाति, धर्मशास्त्र, राजसत्ता, आश्रम वा शिक्षा-परम्परापर फूकोवादी वंशावली (Foucauldian genealogy) थोपब वर्तमानवादी पठन बनि सकैत अछि। उत्तरपक्ष पहिल पूर्वपक्षक उत्तर—वंशावली प्रगतिक तार्किक असम्भवता (logical impossibility) नहि मानैत; ओ प्रगति-दाबीकेँ प्रमाणित करबाक माँग करैत अछि। नूतन व्यवस्था किन परिणाममे बेहतर/खराब, मापू। दोसर पूर्वपक्षक उत्तर—समानान्तर पद्धति स्पष्ट आनुवंशिक-दोष परीक्षण (genetic fallacy check) जोड़ैत अछि: उत्पत्ति-इतिहास दाबीकेँ सन्दर्भ दैत अछि, सत्य/नैतिक वैधताक स्वतंत्र कसौटी अलग। तेसर पूर्वपक्षक उत्तर—सत्ता एक कारण मात्र हो सकैत अछि। जलवायु (climate), तकनीक (technology), अर्थव्यवस्था (economy), रोग (disease), जनसांख्यिकी (demography), पारिस्थितिकी (ecology), युद्ध (war) आ व्यक्तिगत सक्रियता (individual agency) क प्रमाण जहाँ अछि, समाविष्ट करू। चारिम पूर्वपक्षक उत्तर—agency खत्म नहि। व्यक्ति/समूह उपलब्ध संरचनाएँ (available structures) भीतर निर्णय लैत, प्रतिरोध (resistance) करैत, वैकल्पिक संस्था (alternative institution) बनबैत; genealogy एहि क्रियाकेँ सम्बन्धात्मक प्रसंग (relational context) मे रखैत अछि। पाँचम पूर्वपक्षक उत्तर—भारतीय सामग्री पहिने अपन स्रोत-कालक्रम (source chronology), शब्दावली (terminology), संस्था (institution) आ क्षेत्रीय विविधता (regional variation) सँ पढ़ल जाए; genealogy बादमे प्रश्न-औजार रूपमे, ऐतिहासिक समानता/पहचान (historical identity) नहि। भारतीय संवाद भारतीय इतिहासमे ‘शुद्ध प्राचीन मूल’ खोजक प्रवृत्ति अनेक आधुनिक विवादमे देखाइत अछि। वंशावली सावधानी सिखबैत अछि—किसी आधुनिक संस्था/पहिचानक प्राचीनता दाबी लेल वास्तविक स्रोत-श्रृंखला चाही, गौरव-कथा नहि। न्याय/नव्य-न्याय परम्पराक विकास सेहो एकल ‘संस्थापक सार’सँ नहि बुझल जाए; ग्रन्थ, प्रतिपक्ष, तकनीकी नवाचार, शिक्षण-परम्परा आ संस्थागत केन्द्रसभक इतिहास अलग जाँचबाक चाही। मीमांसा, धर्मशास्त्र वा राजधर्मक पाठीय विधानकेँ सामाजिक व्यवहारक पूर्ण प्रतिलिपि मानब गलत। वंशावली (genealogy) पाठ–प्रथा अन्तराल (text–practice gap), प्रवर्तन (enforcement), अपवाद (exception) आ स्थानीय विविधता (local variation) जाँचबाक प्रश्न दे सकैत अछि। बौद्ध संघ, जैन संघ, मठ, पाठशाला, दरबार, पाण्डुलिपि-केंद्र, औपनिवेशिक शिक्षा आ आधुनिक विश्वविद्यालय भारतीय ज्ञान-सत्ताक अलग ऐतिहासिक संस्थासभ छथि; एकहि वंशावली (genealogy) मे कृत्रिम रूपेँ नहि समेटू। कौटिल्यक अर्थशास्त्र प्रशासनिक ज्ञान, दण्ड, गणना आ जासूसीक प्राचीन भारतीय स्रोत अछि; ओकरा आधुनिक अनुशासनात्मक राज्य (disciplinary state) केर पूर्वरूप (precursor) कहब अनुचित। जाति सम्बन्धी आधुनिक श्रेणी/जनगणना/कानूनक इतिहास वंशावली (genealogy) लेल वैध प्रश्न अछि; मुदा शास्त्रीय वर्ण-विधान, स्थानीय जाति, औपनिवेशिक वर्गीकरण (classification) आ आधुनिक पहचानकेँ एकहि स्थिर व्यवस्था मानब अस्वीकार्य। भारतीय संवादक निष्कर्ष—वंशावली मूल-कथा तोड़बाक औजार अछि; भारतीय स्रोतक भीतर वास्तविक विविधता, संघर्ष, अनुवाद, संस्था आ कालगत परिवर्तनक प्रमाण खोजबाक प्रेरणा दैत अछि। मिथिलाक समानान्तर दृष्टि मिथिलाक सामाजिक/बौद्धिक इतिहासमे वंशावली विशेष उपयोगी अछि जखन कोनो आधुनिक श्रेणी अपन प्राचीन/अपरिवर्तनीय स्वरूपक दावा करैत अछि। दाबी केँ पंजी, शाखा-पुस्तक, भूमि-दस्तावेज, ग्रन्थ, पत्राचार, जनगणना, कानूनी/प्रशासनिक स्रोत आ मौखिक इतिहाससँ जाँचू। किसी सामाजिक उपश्रेणीक विशिष्ट रूपेँ उभरबाक प्रमाण बादक कालमे भेटय तऽ ओकरा पूर्वकालपर स्थिर उपजाति रूपमे आरोपित नहि करू। वंशावली (genealogy) एहि प्रकारक पश्चदृष्टिगत प्राकृतिककरण (retrospective naturalization) रोकैत अछि। मिथिला/मैथिली पहचान स्वयं एकरेखीय मूलक कथा नहि; भाषा, भूगोल, राज्य-सत्ता, तीर्थ, शिक्षा, पाण्डुलिपि, लोकपरम्परा, सीमा-पार नेपाल–भारत सम्बन्ध आ आधुनिक संस्थाक अनेक धारा जाँचबाक चाही। पंजी केवल वंशावली (genealogy) शब्दक शाब्दिक समतुल्य (literal equivalent) नहि। फूकोक वंशावली (genealogy) पंजी-वृत्तान्त नहि; ई सत्ता, संघर्ष, आकस्मिकता आ उद्भवक आलोचनात्मक इतिहास। शब्द-साम्य सँ पद्धति-समानता नहि। विद्वत् प्रतिष्ठा, दरबारी संरक्षण, मुद्रण, विश्वविद्यालय, अकादमी, पत्रिका आ डिजिटल मंच—कौन आवाज दृश्य (visible) बनैत अछि—एहि प्रश्नक ऐतिहासिक वंशावली (genealogy) लिखल जा सकैत अछि। लोकगीत, स्त्रीक श्रम-स्मृति, क्षेत्रीय बोली, निम्नसत्ता समुदाय, प्रवासी अनुभव आदि प्रतिस्मृति (counter-memory) दे सकैत अछि; मुदा ओकरो तिथि, स्रोत, प्रसंग, संस्करण आ संचरण (transmission) जाँचल जाए। समानान्तर इतिहास-दृष्टि चार निष्कर्ष-श्रेणी राखैत अछि—सबल रूपेँ समर्थित, सम्भाव्य, विवादित, अज्ञात। genealogy क आकर्षक कथा एहि श्रेणीकरण (grading) केँ प्रतिस्थापित नहि करय। आत्मसमीक्षा—समानान्तर दर्शन स्वयं अपन ‘मिथिला-पद्धति’ केर वंशावली (genealogy) भविष्यमे स्वीकारत: ई विचार कोन स्रोत, विवाद, डिजिटल परिस्थिति आ दार्शनिक संवादसँ बनल, ई प्रश्न वैध रहत। समकालीन प्रयोग कृत्रिम बुद्धि (AI) केर वंशावली (genealogy) लिखल जा सकैत अछि—सांख्यिकीय अधिगम (statistical learning), विशेषज्ञ-प्रणाली (expert systems), संगणकीय अवसंरचना (computing infrastructure), आँकड़ा-अर्थव्यवस्था (data economy), मानदण्ड-संस्कृति (benchmark culture), उद्यम पूँजी (venture capital), सैन्य शोध (military research), इंटरनेट मंच (internet platforms) आ श्रम-प्रथाएँ (labour practices) मिलि वर्तमान AI बनौलक। एकल ‘कृत्रिम-बुद्धि उद्गम (AI origin)’ कथा पर्याप्त नहि। एल्गोरिदमिक ऋण-अंक (credit score) केर वंशावली (genealogy) बैंकिंग विनियमन (banking regulation), सांख्यिकीय जोखिम (statistical risk), ऋण-ब्यूरो (credit bureau), डिजिटलीकरण (digitization) आ आँकड़ा-दलाली (data brokerage) सँ जुड़ि सकैत अछि। उत्पत्ति बुझब निष्पक्षता-विमर्श (fairness debate) स्पष्ट करैत अछि, मुदा अंक (score) क पूर्वानुमानात्मक वैधता (predictive validity) अलग जाँचल जाए। चिकित्सकीय निदानात्मक श्रेणी (diagnostic category) केर वंशावली (genealogy) वर्गीकरण-पुस्तिका (classification manuals), नैदानिक व्यवहार (clinical practice), रोगी-सक्रियता (patient activism), बीमा-कोडन (insurance coding) आ शोध-प्रमाण (research evidence) सँ बदलि सकैत अछि। श्रेणी-इतिहास (category history) = रोग-अयथार्थता (disease unreality) नहि। कानूनमे ‘किशोर (juvenile)’, ‘आतंकवादी (terrorist)’, ‘शरणार्थी (refugee)’, ‘अनुसूचित श्रेणी (scheduled category)’ जकाँ पदक वंशावली (genealogy) संस्था (institution), संघर्ष (conflict), विधान (legislation) आ न्यायालयीय व्याख्या (court interpretation) द्वारा बदलैत अछि। वर्तमान विधिक परिभाषा (legal definition) अलग अधिकृत प्रश्न (authoritative question) अछि। शिक्षामे मानकीकृत परीक्षा (standardized testing) केर वंशावली (genealogy) नौकरशाही (bureaucracy), जन-शिक्षा (mass education), मनोमिति (psychometrics), चयन (selection) आ उत्तरदायित्व (accountability) सँ जुड़ि सकैत अछि। इतिहास (history) आलोचना दैत अछि; वर्तमान वैधता (present validity), पूर्वाग्रह (bias) आ उपयोगिता (utility) अलग अनुभवजन्य परीक्षण (empirical test)। डिजिटल मंच-संयमन (platform moderation) क वंशावली (genealogy) समुदाय-मानक (community norms), विज्ञापन (advertising), विधिक दबाव (legal pressure), स्वचालन (automation), सुरक्षा-शोध (safety research) आ सार्वजनिक विवाद (public controversy) सँ विकसित होइत अछि। आजुक नियम (rule) प्राकृतिक नहि, ऐतिहासिक समझौता (historical settlement) अछि। इतिहासलेखनमे लोकप्रिय ‘प्राचीन उद्गम’ दावा (ancient origin claim) जाँचबाक लेल वंशावली कार्यप्रवाह (genealogy workflow) उपयोगी—प्राचीनतम प्रमाण (earliest evidence), मध्यवर्ती संचरण (intermediate transmission), संस्थागत स्वीकृति (institutional adoption), शब्दावली-परिवर्तन (terminology shift), प्रतिप्रमाण (counter-evidence), वर्तमान उपयोग (current use)। अध्याय-निष्कर्ष फूकोक वंशावली इतिहास लिखबाक एहन पद्धति अछि जे शुद्ध उद्गम, एकरेखीय प्रगति आ वर्तमानक प्राकृतिकता पर प्रश्न उठबैत अछि। वंशक्रम/उत्पत्ति-रेखा मिश्रित स्रोत खोजैत अछि; उद्भव संघर्ष-सापेक्ष बिन्दु; आकस्मिकता (contingency) वर्तमानक अनिवार्यता तोड़ैत अछि; शरीर सत्ता-अभ्यासक ऐतिहासिक स्थल बनैत अछि। पुरातत्त्व कथन-नियम वर्णित करैत अछि; वंशावली शक्ति, शरीर, संस्था, संघर्ष आ परिवर्तनक कारणात्मक/व्यावहारिक आयाम जोड़ैत अछि। मुदा वंशावली (genealogy) वर्तमान सत्य वा नैतिक वैधता स्वतः तय नहि करैत। खराब उद्गम (origin) सँ वर्तमान दाबी स्वतः गलत नहि; गौरवशाली उद्गम (origin) सँ स्वतः सही नहि। समानान्तर इतिहास-दृष्टि वंशावली (genealogy) केँ प्रमाण-अनुशासन, वैकल्पिक कारण, कालक्रम, क्षेत्रीय विविधता (regional variation), स्रोत-श्रेणीकरण (source grading) आ आनुवंशिक-दोष परीक्षण (genetic-fallacy check) सँ सीमित करैत अछि। अध्यायक अन्तिम सूत्र—‘मूल-कथा नहि, प्रक्रिया खोजू; अपरिहार्यता नहि, आकस्मिकता जाँचू; सत्ता देखू, प्रमाण नहि छोड़ू; अतीत खोलू, वर्तमानक निर्णय अलग कसौटीपर करू।’ अध्याय-ग्रन्थसूची • मिशेल फूको — ‘नीत्शे, वंशावली, इतिहास’ (Nietzsche, Genealogy, History)। • मिशेल फूको — ‘अनुशासन आ दण्ड: कारागारक जन्म’ (Discipline and Punish: The Birth of the Prison)। • मिशेल फूको — ‘कामुकताक इतिहास, खण्ड 1: ज्ञानक इच्छा’ (The History of Sexuality, Volume 1: The Will to Knowledge)। • मिशेल फूको — ‘समाजक रक्षा आवश्यक’ (Society Must Be Defended), व्याख्यान। • मिशेल फूको — ‘सत्ता/ज्ञान’ (Power/Knowledge), चयनित साक्षात्कार आ लेख। • फ्रेडरिक नीत्शे — ‘नैतिकताक वंशावली पर’ (On the Genealogy of Morality)। • गैरी गटिंग — ‘मिशेल फूको: अति संक्षिप्त परिचय’ (Foucault: A Very Short Introduction)। • ह्यूबर्ट ड्रेफस आ पॉल राबिनो — ‘मिशेल फूको: संरचनावाद आ व्याख्याशास्त्रक पार’ (Michel Foucault: Beyond Structuralism and Hermeneutics)। • कोलिन कूपमैन — ‘फूकोक बाद वंशावली’ (Genealogy as Critique), समकालीन पद्धतिगत विमर्श लेल। • गौतम — न्यायसूत्र। • गङ्गेश उपाध्याय — तत्त्वचिन्तामणि। • कौटिल्य — अर्थशास्त्र। • शबरस्वामी — शबरभाष्य। • कुमारिल भट्ट — श्लोकवार्तिक। • दिङ्नाग — प्रमाणसमुच्चय। • धर्मकीर्ति — प्रमाणवार्तिक। • बी. के. मतिलाल — ‘तर्क, भाषा आ यथार्थ’ (Logic, Language and Reality)। • जोनार्डन गणेरी — ‘शास्त्रीय भारतमे दर्शन’ (Philosophy in Classical India)।